Incest Kamuk Alka - Page 14 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

अभी लिखा नहीं है भाई बाकि है बहुत और कुछ वर्क भी पेंडिंग है नेक्स्ट वीक मुझे यूरोप निकलना है
 
अपडेट-62 डार्क रूम का सेक्सरेट

अभी शाम इ कोई 4 बज रहे होंगे कामिनी और विशाल दोनों बीएड में नंगे एक दूसरे के आगोश में बेफिक्र सो रहे थे कमरे में चल रहे पंखे की ठंडक से दोनों के बदन के रोंगटे को खड़ा कर रहा था ऐसे में विशाल कामिनी से थोड़ा ज्यादा hi चिपक गया था… कामिनी के नरम गद्देदार गांड के एहसास से विशाल के लुंड में फिर से जान आने लगी थी और वो अब धीरे धीरे कमनी के दोनों कूल्हों के बिच जगह बनाते हुवे उस तंग भूरे छेद को ठोकर मरने लगा था…

कामिनी जिसकी अभी अभी विशाल ने छोड़ के हालत ख़राब कर दिया था ो लुंड के चुभन को गांड में पड़ते hi कसमसाने लगती है और उस चुभन को और ज्यादा महसूस करने के लिए अपनी गांड थोड़ा पीछे की और धकेल के विशाल से बिलकुल hi चिपक के अपनी गांड उसके लोडे से सत्ता देती है…

कामिनी की साँस ीक बार फिर से अपनी गति पकड़ रही थी उसकी चूचिया उसके धड़कनो के साथ ऊपर निचे होने लगती है… लेकिन लुंड की गर्माहट मनो अभी अभी चुद के उसकी फटी हुई उसकी छूट को राहत दे रही थी और वो खुद hi विशाल के लुंड को पकड़ के अपने छूट पे रखते हुवे उसपे अपनी गांड घुमा घुमा के आनद के सागर में गोते खाने लगती है….






विशाल भी अब धीरे से अपने हाथ को कामिनी के चुचिओ पे रख के मसलते हुवे उसके गार्डन को चूमने लग जाता है… कामिनी एक बार फिर से विशाल के बहो में पिघलने लगी थी.. इस तरह कामिनी का एक बार फिर से तैयार हो जाना इस ात का साबुत था की वो कितनी बड़ी छुडासी औरत है और उसकी छूट कितनी प्यासी है जो एक बार फिर से पने भतीजे के लुंड को निगलने के लिए तैयार थी..

विशाल की गरम सांसे कमीनी के गार्डन को टकरा रही थी और उसके गले पे हलकी हलकी पसीने की जो बुँदे चमकने लगती है उसकी महक में विशाल बेकाबू होने लगता है और उसके सांसो की गति तेज़ होने लग जाती है..

दोनों इस वक़्त दोनों के बिच किसी तरह की बातचीत नहीं हो रही थी उसके मुँह बंद थे क्युकी दोनों का लुंड और छूट बाते कर रहा था…

विशाल का लुंड कामिनी की छूट की गर्माहट से अपना पानी चोर्ने लग जाता है ये और साथ hi कामिनी की छूट भी अपना तरल पदार्थ बहाने लग जाती है जिसका मिलान कामिनी के छूट के द्वार पे होने लग जाता है…






पानी के गर्माहट को पते hi कामिनी अपनी टंगे उठा लेती है… और विशाल भी अब बेकाबू होते हुवे अपने कमर को आगे की और धकेलते हुवे एक धक्का लगता है जिस से की उसका लुंड कामिनी की गीली हो रही छूट में दनदनाता हुवा घुस जाता है….

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh

विशाल बिना कुछ बोले कामिनी के गार्डन को चुने लग जाता है और लुंड को होल होल आगे पीछे करना सुरु कर देता है…

कामिनी जो मस्ती के सागर में गोते खा रही थी वो बस आह्ह्हिये भरने के अलावा कुछ नहीं कर पति…

कामिनी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh धीरे कर दर्द हो रहा है….






विशाल कामिनी के छूट को अपने हाथो से सहलाते हुवे उसके गार्डन और गलो पे चुम्बन की बरसात कर देता है… थोड़ी देर ऐसे hi रुक कर वो कामिनी के आग को बढ़ने की कोशिस कर रहा था और जल्दी hi ामिनी भी अब अपनी गांड हिलाते हुवे उसके छूट को अंदर तक लेना सुरु कर देती है…

अचानक से कामिनी को कुछ याद आता है और वो विशाल के लुंड को अपने छूट से निकलते हुवे तेज़ सांसे लेने लग जाती है और उनपे काबू करते हुवे विशाल को देखने लग जाती है विशाल भी कामिनी के आँखों में सवालिया निगाहो से देखने लगता है जिसपे कामिनी कहती है…

कामिनी- रुक जा एक बार फोन कर के पूछ लूँ वो खा है.. और कामिनी अपनी बेटी नीमो को कॉल घुमा देती है.. उस साइड की आवाज़ तो विशाल नहीं सुन पता लेकिन कामिनी के द्वारा पूछे सवाल और जवाब से अंदाज़ा लगाया जा सकता था की उन्हें आने में अभी थोड़ा वक़्त है..

विशाल- क्या बोलै ??

कामिनी- मैं शॉपिंग हो गयी है कुछ छोटी खरीदारी बाकि है जिसके लिए अभी वो रेस्टोरेंट में कुछ खान ेके बाद निकलने वाले है यानि अगले 2 हरष में वो यहां आ जायेंगे..

विशाल- मतलब हमारे पास 2 घंटे है..

इस्पे कामिनी शर्माते हुवे नज़रे झुका लेती है जिसका मतलब हाँ था.. और वो उठ के कमरे से बहार जाने लग जाती है जिसपे विशाल उसे पकड़ते हुवे कहता है अब क्या हुआ

कामिनी- रुक जा कुछ खा लू भूक लगी है और वो कीतचन की तरफ चल देती है…

पर विशाल से सबर की उम्मीद करना hi बेकार है वो फ़ौरन कमीनी के पीछे ीचे नंगा hi किचन की तरफ चल देता है…. और किचन के दरवाजे पे hi कामिनी को पकड़ के पीछे से उसके छूट में अपना लुंड पेल देता है…






कामिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhh मम्माआआआ क्या कर रहा है रुक जा थोड़ा सब्र तो कर ले कही भागी नहीं जा रही मैं..

विशाल- तेरे इस मोती मोती गांड को देख के सब्र नहीं हो रहा बुआ और वो कामिनी के चूतड़ों को मसलने लग जाता है…

कामिनी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaa धीरे दबा मादरचोद मेरे से जयदा गोल तेरी माँ अलका के है कभी उसके भी दबा के देखा है…

Vishal-(uski तो मार भी ली)- अभी तो तेरा hi हाथ लगा है बुआ uuuuufffffffffff कितने मोठे चुत्तड़ है तेरे






और वो कामिनी के चूतड़ों को हाथो में भर के मसलते हुवे उसे चोदे जा रहा था कामिनी भी इसमें विशाल का भरपूर साथ दे रही थी..

सच hi कह रहा था विशाल कामिनी की चुत्तड़ कोई सदाहरण चुत्तड़ नहीं थे इसके पीछे पूरा घर दीवाना था और ीन्हो चूतड़ों के वो सभी को आधे में साड़ी बंद के दर्शन करवा के अपने जाल में बंधे रखती है और इस मोठे गद्देदार गांड को विशाल अपने हाथो में थामे हुवे अपनी बुआ के छूट में सटासट लुंड पेल रहा था जिसकी थपथपाहट पुरे किचन में गूंज रही थी..






विशाल अब कामिनी की एक तंग उठा के अपने कमर पे रख लेता है जिस से कामिनी की छूट पहले से ज्यादा खुल चुकी थी और विशाल को लुंड पेलने में आसानी होने लगती है..

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh मेरी कमर में पहले से दर्द है ऊपर से ये दरिंदा बहनचोद आराम से कर ले हरामी कुटिया की औलाद मादरचोद…

विशाल- तेरे इस मादक जिस्म को देख काबू नहीं रहा खुद पे मेरी चिनार बुआ..

कामिनी- क्या कहा मैं चीन हु सेल भड़वे

विशाल- हाँ तू चिनार है साली कुटिया रंदीछोड़ि और उसके चुचिओ को मुँह में भर के काटने लगता है…

कामिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh काट ता क्यों है निशान पद जायेगा तो तेरे फूफा को क्या जवाब दूंगी..

विशाल- बोल देना एक नया लुंड मिल गया है तेरी प्यास बुझाने के लिए …बोलेगी

कामिनी- हाँ बोल दूंगी मुझे विशाल ने ये किया है

विशाल- और तू विशाल की कौन हुई फिर

कामिनी- उसकी बुआ

विशाल- बुआ नहीं रैंड है तू बोल कौन है और फिर जोर से दन्त चुचिओ पे गदा देता है

कामिनी चुचिओ पे दन्त काटने से तिलमिला जाती है और चीख पड़ती है aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh हरामी के पिल्लै काट मत मादरचोद

विशाल- फिर बोल वो जो मैं सुन्ना चाहता हु

कामिनी- हाँ ठीक है तू रंडी की ुलद ै तेरी माँ चिनार है और इतना बोलके कामिनी हसने लग जाती है.. वो विशाल को भरपूर चेर रही थी और विशाल उसके हर जवाब पे करारा चोट उसकी छूट में दे के अपना बदला ले रहा था….

विशाल- रुक साली तुझे अभी मजे चखता हु और इतना कह के विशाल उसकी तंग को उठाते हुवे उसकी कमर से उठा उठा के अपने लुंड पे पटकने लग जाता है…






और साथ hi निचे से अपनी कमर उठा उहा के कामिनी को दमदार तरीके से छोड़ने लग जाता है… लुंड कामिनी के बच्चेदानी को फाड् देगा उसे ऐसा महसूस होने लग जाता है वो जोर जोर से चीखने लगती है और छटपटने लग जाती है…

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh माआआ मर गयी फैट गयी मेरी छूट मेरे बच्चेदानी तक तेरा लुंड हिलोरे मर रहा है धीरे कर हफसि की औलाद ऐसा लग रहा है मुँह से निकल आएगा तेरा ये हब्सी लुंड…

विशाल- जब तक तू खुद को मेरी रांड नहीं बोलेगी मैं ऐसे hi छोडूंगा फाड् दूंगा तेरी छूट सली कुटिया…

कामिनी- नहीं इस घर में अगर कोई रंडी है तो वो तेरी माँ है अलका सबसे बड़ी चिनार और सुनेगा uuuuuffffffffffffffffff हाय मैं खान फास गयी ाजजज uuuuuuuuffffffffffffffff अलका तेरे bête ने मेरी छूट का भोसड़ा बना दिया






विशाल कामिनी की तंग को पूरा खोल देता है और फैलते हुवे हवा में कर देता है लेकिन अपने धक्को की स्पीड काम नहीं करता वो ताबड़तोड़ कामिनी की छूट में अपना लुंड पेले जा रहा था और कामिनी की छूट जो विशाल के धक्को के सामने एक बार फिर से हथ्यार दाल देती है और उसके छूट का फवारा फुट पड़ता है वो निढाल हो के वही प्लेटफार्म पे गिर पड़ती है पर विशाल पीछे से जा के वापस लुंड उसके छूट में उतर देता है…





अभी अभी पानी बहाने से कामिनी की छूट में जो तरंगे दौड़ रही थी उसमे विशाल के इस तरह से एक झटके में लुंड उतर देने से उसे एक तेज बिजली का झटका अपने छूट में लगने लग जाता है जिसे वो बर्दाश्त नहीं कर पति और बहुत hi जोर से चीखने लग जाती है…





विशाल- धीरे चिल्ला बुआ वर्ण पुरे गाओं को पता चल जायेगा की तेरी छूट फैट गयी है…

कामिनी- हरामी रुक जा साँस तो लेने दे मेरे छूट में जलन हो रही है..

विहल- लगता है इस से पहले किसी मर्द से पला नहीं पड़ा है तभी आज तेरी छत फैट रही है…

कामिनी- तू मर्द नहीं जानवर है कुत्ते aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh इतना दर्द तो सुहागरात पे भी नहीं हुआ था…

विशाल- कोई बात नहीं असली सुहागरात तेरी आज हुई है फिर तो…

कामिनी- हाँ लगता तो यही है aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaa

और फिर कामिनी खुद hi अपनी गांड विशाल के लुंड की तरफ पीछे फेंक के अपने छूट चुदाई करवाने लग जाती है…






विशाल- वह बुआ तू तो बहुत जल्दी तैयार हो जाती है मजा आ रहा है आज तो बहुत तेरी छूट की गर्माहट बढ़ते जा रही है बहुत कुट्टी औरत है तू उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

कामिनी- जीतनेय देर से लुंड घिस रहा है गर्मी तो बढ़ेगी hi अब जल्दी जल्दी कर कोई आ न जाये साला तेरा जल्दी होता भी नहीं है…






Vishal-Kya करू बुआ तू है hi इतनी माखन uuuuuuufffffffffff. तेरी छूट की का पानी पि के मेरे लुंड में और भी जान आने लगा है….

कामिनी- तो छोड़ ले न aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh फाड् दे इसे ….. अभूत खुजली है तेरे बुआ की छूट में आज साडी खुजली मिटा दे छोड़ जोर जोर से aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh मादरचोद

पर विशाल अगले hi पल अपना लुंड कामिनी के छूट से निकल लेता है.. कामिनी जिसका मजा अभी दोगुना होने लगा था और वो इस मजे को लुटे हुवे गांड जोर जोर से विशाल के लुंड पे पटक के अपनी छूट छुड़वा रही थी उसका विशाल के इस तरह से लुंड निकलने से मजा किरकिरा होने लगता है.. वो बड़े चिड़चिड़े मन से विशाल की और देखते हुवे पूछती है अब क्या हुआ???? निकला क्यों???

विशाल- बुआ जरा मेरे लुंड पे बैठ तो सही तेरी उछलती चुचिओ को देख के बड़ा मजा आता है

विशाल के इस बात पे कामिनी के अधरों में मुस्कान आ जाता है और वो विशाल को वही फर्श पे लिटा के उसके लुंड पे बैठते हुवे उसके लुंड को अपने hi छूट में गायब कर लेती है..






छूट का अंदर जाते hi एक बार फिर से कामिनी के अंदर कामाग्नि भड़क उठती है और वो पुरे जोश में विशाल के लुंड पे कूदना सुरु कर देती है…

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh aaaaaaahhhhhhhhhhh माआआआ छोड़ सेल कुत्ते छोड़ अपनी बुआ uuuuuuuuufffffffffffffff ममममममआ कितना मजा आ रहा है कमल के लुंड से भी ज्यादा मजा है तेरे लुंड में uuuuuuuffffffffffff हाय मैं मर गयी

विशाल कामिनी के छूट में धक्के लगते हुवे चोदे जा रहा था कामिनी एक बार फिर से पूरा होने को थी और इस बार विशाल भी अपने मंजिल के करीब था..

विशाल- बुआ मेरा आने वाला है.. इस्पे कामिनी उसके लुंड से उतर जाती है और अपनी गांड उठा के टंगे फैलते हुवे अपनी छूट विशाल की आगे फैला देती है

कामिनी- मेरा भी होने वाला है अब पुरे ताक़त से धक्के लगा और निकल दे पानी अपना भी और मेरा भी






और विशाल पहले तो आराम से अपना लुंड कामिनी के छूट की गहराइयो में उतरता है

कामिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh fffffffffuuuuuuuuuuccccccckkkkkkkkkkk

उसके बाद अपने धक्को की स्पीड बढ़ाते हुवे कामिनी के छूट पे ताबड़तोड़ धक्के बरसाना सुरु कर देता है और अगले कुछ धक्को में दोनों एक साथ झाड़ जाते है..






विशाल अपने लुंड को कामिनी के मुँह के पास ले जाता है जिसे देख कामिनी भी अपना मुँह खोल देती है और विशाल का लुंड तेज़ पिचकारी मरते हुवे अपना सफ़ेद मलाई को कामिनी के मुँह में भरने लगता है और कामिनी भी किसी प्यासी कुटिया की तरह सारा मलाई चाट कर जाती है पर उसकी प्यास इस पानी को पि के जैसे और hi बढ़ गयी थी जिसके कारन वो विशाल के लुंड को अपने मुँह में भर लेती hai…aur उसका ेके क बून्द निचोड़ लेती है..





शाम को आते आते विशाल कामिनी की चल बिगड़ चुक्का था जिसे अलका नोटिस कर लेती है..

अलका- क्या बात है कामिनी तू ऐसे लंगड़ा के क्यों चल रही है…

कामिनी- अरे कपडे सूखने गयी थी तो सीढ़ियों से गिर गयी..

अलका ाचा पक्का सीढ़ियों पे hi गिरी थीं ा क्युकी ये चल तो कही गिरी है ऐसा बता रही है..

कामिनी- चुप कर चिनार तेरे दिमाग में हमेसा यही सब चलता रहता है और वो अलका कैग एंड पे छुट्टी काट लेती है…

इस तरह पारिवारिक नोकझोक में शाम गुज़र जाती है.. विशाल को अंदाज़ा था की जो हालत आज कमी की हुई है उस से वो चाट पे आज तो नहीं आ येगी िलिये वो बहार टहलने चला जाता है रात के डिनर के बाद ऋचा विशाल का इंतजार करने लगती है पर देर रात तक भी विशाल का उसके पास न आने से ऋचा की बेचैनी बढ़ने लग जाती है वो विशाल को ढूंढने उसके कमरे में जाती है पर वह कोई नहीं था रत के 12 से ज्यादा बज रहे थे पुरे घर में सन्नाटा था और ऋचा की आँखे विशाल को धुदंड रही थी पर विशाल … विशाल उधर किसी और को ढूडन रहा था… आज फिर अलका विशाल को नहीं मिल रही थी और वो ऐसे hi उसे इधर उधर धुंध रहा था की उसके कानो में एक आवाज़ आती है…

मम्मी आज फिर नहीं मिल रही है विशु???

आवाज़ सुन के विशाल उस तरफ देखने लगता है जिधर से आवाज़ आयी थी.. सामने कोई और नहीं बल्कि ऋचा थी…






सामने कोई और नहीं बल्कि ऋचा थी.. ऋचा को देख के विशाल के लुंड में ऐठन आ जाती है और ए भी क्यों न उस वक़्त कामाग्नि में जलती ऋचा जिस हालत में दिखी थी और जिस अदाओ के साथ विशाल के सामने कड़ी थी वो किसी के लुंड का पानी गिरा देने के लिए काफी था

सुबह से विशाल के लुंड की प्यास ने उसे इतनकामातुर कर दिया था की आज वो सईद साडी दीवारे तोड़ देने के ख्याल से hi तैयार हुई थी.. उसका पोषक साधारण न था… उसने काळा रंग की लिंगेरी यानि ब्रा पंतय का सेट और पैरो में स्टॉकिंग डेल हुवे थी और परिवार वालो से बचने के लिए ऊपर बालक गाउन पहन लिया था.. लेकिन जब उसकी नाज़ा विशाल पे पड़ती है तो वो अपने रॉब के सामने के फीते को खोल देती है जिस से उसके गोर जिस्म पे ये काली ब्रा पंतय मनो विशाल को उत्तेजित कर रही थी विशाल ऋचा को देख उसके हुश्न में खो hi जाता है..

ऋचा भी उसे हस्ते हुवे अपने बालो में फेरते हुवे देख रही थी और अपने जलते सुलगते जिस्म को विशाल के लिए परोस दिया था…

ऋचा- क्या हुआ विशु खान खो गया??

विशाल- कही नहीं दी

ऋचा- फिर तू आया क्यों नहीं मैं तेरा वेट कर रही थी कब से

विशाल- वो मैं माँ को धुंध रहा था पर विशाल रिच के इस रूप को देख उसकी धड़कने इतनी बढ़ गयी थी और लुंड में रक्तप्रवाह इतने तेज़ी से बहने लगती है की उसका पंत ताम्बी बन चुक्का था उसके आवाज़ में लड़खड़ाहट थी जिसपे ऋचा हस्ते हुवे बोलती है

ऋचा- सब जगह धुंध लिया?

विशाल- हाँ

ऋचा फिर भी नहीं मिली???

Vishal-nahi

ऋचा- मिलेगी भी कैसे ??? वो जहां होगी वहां का तुझे पता hi नहीं..

ऋचा की ये बाटे विशाल की धड़कने और ज्यादा बढ़ने लग जाती है

विशाल- कककक क्या मतलब??

ऋचाल विशाल के हाथ को पकड़ के डार्क रूम की तरफ ले जाने लगती है ये वही जगह है जहां कल विशाल ने अपने चाचा बुआ चीची और फूफा का असली रंग देखा था और उस जगह ऋचा के इस तरह ले जाने से विशाल का दिल बेकाबू होने लगता है उसके मन में हज़ारो ख्याल एक साथ आने लग जाते है उसका दिल बहुत जोरो से धड़कने लगता है जैसी धक् धक् ऋचा तक को सुनाई देने लगती है

ऋचा उसके हालत को देख के हस्ते हुवे कहती है अरे अपने धड़कनो पे काबू कर अगर इतने में ये हाल है आगे का नज़ारा देख के बेहोश न हो जाना

और फिर ऋचा उसी कमरे के पास आ जाती है जहां कल काम क्रीड़ा हो रहा था पर आज वह कोई नहीं था इस्पे विशाल की जान में जान आ जाती है

विशाल- यहां तो कोई नहीं है..

ऋचा- स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तू बस चुपचाप चल कुछ बोलना नहीं

फिर वह से जानवरो के कमरे से होते हुवे एक बेसमेंट जाता है जिसकी झाबर विशाल को न थी वो आज पहली बार घर के इस कोने में आया था..

बेसमेंट में जाते hi वहां चारो तरफ लाल रंग की लाइट से दीवारे भी लाल दिख रही थी पुरे बसंत में एसीए खासा अँधेरा था लाइट इतनी hi थी जिस से काम चल सके माहौल काफी कामुक और उत्तेजित कर देने वाला था विशाल क धड़कने एक बार फिर से गति पकड़ने लगती है

अब ऋचा वह बने ढेर सरे कमरों में से एक की तरफ बढ़ती है जहां सेक्स करने की साडी छज्जे मौजूद थी ये कोई आम कर्मा तो न था..






विशाल अपने ज़िन्दगी में पहली बार इस तरह का रूम देख रहा था अब तो वो फिल्मो में hi देखा था

विशाल- कोई भी तो नहीं है

ऋचा- ssssssshhhhhhhhhhhh

फिर वो दूसरे कमरे की तरफ बढ़ने लगती है वहां भी रूम डार्क hi था लेकिन वहां उसे वो मिल जाता है जिसकी उन्हें तलाश thi..kamre में एक औरत घोड़ी बानी हुई थी और पीछे से कमल उसक छूट में लुंड पेल रहा था/…. ये देख विशाल का फिर से गाला सूखने लगता है कौन है ये औरत फूफा के साथ






विशाल के सवालो को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा उस औरत ने अगले hi पल अपना सर उठा लिया था जिसे देख पता चल जाता है की कमरे के अंदर रागिनी थी जो बिलकुल नंगी हो अपने नन्दोई कमल के लिए घोड़ी बानी उस से चुदाई करवा रही थी…





shake to roll dice

इस्पे विशाल को चैन की साँस आती है की थानकगोड़ ये मेरी माँ अलका नहीं है.. मेरी माँ इस घर के ाकि औरतो की तरह रैंड नहीं है जो हर कसी से चुदाई करवा ले.. और विशाल ऋचा के मजे लेते हुवे बड़े धीमे से हस्ते हुवे बोलता है…

विशाल- ये मेरी नहीं आपकी मम्मी है…

इस्पे ऋचा उसके बातो पे ध्यान न दे के कमरे के अंदर उसकी निगाहे कुछ तलाश रही थी वो बुदबुदाते हुवे कहती है

ऋचा- ऐसे कैसे हो सकता है??? उन्हें भी यही होना चाइये…

वो कमरे के दूसरे कोने में देखती है जहां उसकी चीची रीमा नंगी लेती हुई थी उसकी हालत काफी बिगड़ी हुई थी महसूस हो रहा था की बहुत जोरदार चुदाई हुई है उसकी…






और उसके साथ hi वहां लेता अपना लुंड हिला रहा था उसका चाचा अरविन्द

विशाल फिर से बोलता है चलो दीदी यह मेरी माँ नहीं मिलने वाली आप गलत जगह आयी हो..

पर ऋचा का दिल मैंने को तैयार न था वो अब भी कमरे में अपनी नज़रे दौड़ा रही थी जहां उसे उसका बाप दिनेश सोफे पे बैठा अपने घर की औरतो के रणदीपाने को देखते हुवे लुंड हिला रहा था और बाप को लुंड हिलता देख उसके आँखों में चमक आ जाती है…






विशाल- चलो दीदी हम अपने कमरे में षाले है

ऋचा- sshhhhhhhhhhhhh रुक दो मिंट आवाज़ मत कर अब तुझे मजा आएगा…

विशाल- कैसा मज़ा सब हो चुक्का अब ये निकलने वाले है देखो चीची की हालत बिगड़….. …….

इस से पहले की विशाल अपनी बात कम्पलीट कर पता और चची की हालत बिगड़ी हुई है पूरा बोल पता कमरे का दरवाजा खुलता है…

सामने का नज़ारा विशाल के खून को बिलकुल ठंडा कर देता है उसका पेअर वही जैम गया था आंखे फैट गयी थी साँस मनो रुक गया हो और धड़कने इतनी तेज़ मनो कलेजा मुँह को आ जायेगा






सामने कोई और नहीं कामदेवी अलका थी इस सेक्स ग्रुप में आज की तीसरी महिला.. अलका का ये रूप विशाल ने आज पहली बार देखा था.. उसका पहनावा किसी प्रफेशनल कॉल गर्ल याय उन कहु किसी सस्ती रांड जैसी थी….

आगे क्या हुआ वो नेक्स्ट part में….
 
दोस्तों कैसा लगा आप सभी को अलका की ये एंट्री....

अलका का ये कामुकता से भरा रूप देख के विशाल के अलावा और किसी की ढकने बढ़ी न नहीं....?

मैं बस टिपिकल बॉलीवुड वाला क्लाइमेक्स देने की कोशिश कर रहा था

अपनी राइ जरूर देना जिस से की मुझे आगे सन क्रिएट करने में हेल्प मिले



 
अगर कामिनी बुआ के फुलझड़ी फूटते देख लिए हो तो उसकी बेटी निम्मो का धमाका सुरु करे







 
अपकमिंग सन फ्रॉम (अपडेट- 63 फिर वो कौन था.??)

कामिनी हस्ते हुवे टेबल पर पड़े टिश्यू पेपर लेती है और विशाल के सामने hi अपनी टंगे फैलाकर अपनी छूट साफ़ करने लगती है







कामिनी: तुमने तो अछि खासी मेरी छूट भर डाली...

--- मैंने तो खा hi था पहाड़ दूंगा आपकी.

कामिनी हिमत जूता कर उठी. रोबे को वैसे hi खुले रखती हुई अपनी नंगी बदन बिना किसी शर्म के दिखाकर अदाओ के साथ कमर पर हाथ रखती है...





कामिनी: तुमसे किसने कहा की मेरी ये छूट इतनी जल्दी पहात गयी?
 
अपडेट-63

अलका का इस तरह से कमरे में आना विशाल के लिए मनो उसपे बिजली गिरने से काम न था उसका पूरा शरीर थरथर कंपनी लगता है…

ऐसा नहीं है की उसने अलका को इस अवस्था में पहली बार देखा था.. वो अलका को ऐसी हालत में इस से पहले भी कई बार देख चुक्का था और यह तक की वो तो अलका को नंगी देखा और उसके जिस्म को भोगा भी है लेकिन अब तक अलका ने ये रूप सिर्फ उसके लिए hi लिया था लेकिन आज अलका का ये रूप उसके लिए नहीं बल्कि किसी पराये मर्द के लिए आज वो अपने कामुक जिस्म को उसी के फूफा और ताऊ को परोसने वाली थी… आज अलका उसी के घर केमर्दो का बिस्तर गरम करने के लिए किस गस्ती की तरह कमरे में प्रवेश कर चुकी थी… और यही चीज विशाल को हज़म नहीं हो रही थी…

दूसररी तरफ ऋचा विशाल की हालत देख सोच में पद जाती है की कही उसने विशाल को ला के है को गलती तो नहीं कर दी क्युकी विशाल की हालत सच में बिगड़ने लगी थी… लेकिन ये तो बस अलका की एंट्री थी जिसने विशाल की ये हालत कर दिया था अभी विशाल को अलका का वो रूप देखना बाकि था जिसे आम भसह में रंडी कहते है.. और उसे देखने के लिए हमे कमरे के अंदर जाना होगा तो अब अंदर के नज़ारा देखने के लिए हमे अंदर hi जाना होगा….

कमरे के अंदर

अलका के अंदर आते hi कमरे का तापमान बढ़ने लगा था… दिनेश जो अपनी बीवी को अपने जीजा से चुदाई करता देख तेज़ तेज़ लुंड हिला रहा था तो वही अरविन्द भी नंगा लेता अलका का वेट कर रहा होता है क्युकी उसकी बीवी रीमा की तो इनलोगो ने हालत बिगड़ दी थी और बी बरी थी आज रात की तीसरी अप्सरा अलका की पर अलका को निचोड़ना इतना आसान नहीं है.. उसके जिस्म की गर्मी तो इतनी है की वो इस घर के सरे मर्दो का लुंड निगल जाये और डकार भी न ले और खास कर इनदिनों जो आग उसकी छूट उगल रही है वो तो जवान bête के लुंड को भी अपने छूट में पिघला लेने में सक्षम है फिर यहां तो सरे अधेड़ उम्र के मर्द थे… लेकिन ये अधेड़ उम्र के मर्द भी किसी नौजवान से कहाँ काम है जिसका साबुत सामने बिस्तर पर अधमरी रीमा है…

अलका- ज्यादा इंतजार तो नहीं करवाया मैंने…??? और वो आते hi कुटिया की तरह षाले हुवे दिनेश की तरफ बढ़ती है और उसके लोडे को हाथो में थम के बड़े अदाओ से उसकी तरफ देखते हुवे कहती है..

अलका- जब मई हु तो हाथो को तकलीफ क्यों दे रहे हो जेठ जी..






और इतना कह के उसका लुंड मुट्ठी में पकड़ लेती है.. दिनेश भी अलका के कोमल हाथो का स्पर्श अपने सख्त हो रहे लोडे पे प् के मस्त हो उठता है उसके पूरा शरीर गंगना जाता है और वो अलका के होंटो को चूमने के लिए अपने होंठ उसके होंठो की और बढ़ा देता है.. लेकिन अलका अपने चेहरे को साइड कर लेती है जिस से दिनेश की गरम सांसे उसकी गार्डन से टकराने लग जाट है..

दिनेश- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh अलका बड़ी देर कर दी तूने

अलका- कोई बात नहीं जेठ जी अब आ गयी हु न अब देखो अपनी अलका का कमल

इधर उनका काम क्रीड़ा देख के विशाल का लुंड मनो फटने क ओहो रहा tha…wo पूरा सख्त हो चुक्का था और उसका आकर आज कुछ ज्यादा hi विकराल लग रहा था…






दूसरी ताराम अलका के इस रूप को देख के रकमल भी रागिनी को तेज़ तेज़ छोड़ने लग जाता है और जिसके हर धक्के से रागिनी की छूट से पांच पांच की आवाज़ पुरे कमरे में शोर मचने लगी थी…

रागिनी- आए गयी तू रंडी??? तेरे इसी रूप की वजह से पूरा गाओं लुंड खड़ा किये तेरे पीछे घूमता रहता है.. और तेरे न मिलने पे भुगतना हमे पड़ता है.. अब तू झेल इन संधो को मेरे छूट का तो बजा बजा दिया है इन हरमिओ ने

अलका रागिनी के इन बातो का कोई जवाब नहीं देती और वो दिनेश के लुंड को तेज़ तेज़ मसलने लगती है और उसके लुंड के खाल को ऊपर निचे करना शुरू कर देती है.. अलका के इन अदाओ की आगे दिनेश ज्यादा टिक नहीं पता और उसके लुंड से एक तेज़ पिचकारी छूट पड़ती है…

अलका- क्या हुआ जेठ जी आप तो इतने में hi ढीले पद गए हीहीही और हसने लगती है..

उधर रागिनी की छूटे क बार फिर से पैन ऐकोर देती है और वोट क लाश की तरह बीएड पे गिर जाती है इधर अरविन्द उठ के अलका को अपनी और खींचता है और उसके गार्डन को चूमने लगता है…

अरविन्द- क्या हुआ भाभी भैया का हो गया तो हम तो अभी बाकि है..

और उसका साथ देने कमल भी तुरंत बीएड से उतर के अलका की तरफ बढ़ने लगता है..






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काली लिंगेरी में अलका क अगोरा जिस्म इस माध्यम रौशनी के कमर्रे में ऐसे चमक रहा था मनो कोई चमकते चाँद को कपडे से ढकने की कोशिश कर रहा हो पर चढ़ की रौशनी की आगे उस कपडे की कोई औकात hi नहीं,,…

कमल आके अलका के ग ंद को अपने सख्त हाथो से मसलने लगता है. और अपने ठरक भरे आवाज़ में कहता है बड़ी देर कर दी अलका तुमने

अलका- कोई बात नहीं कमला बी तो आ गयी हु न अब अपनी साडी हसरते पूरी कर लेना..

अलका किसी बाज़ारू रंडी की तरह अपने hi घर के दो मर्दो के बिच अपने गोर जिस्म की नुमाईश कर रही थी और उसका देवर और नन्दोई उसके दोनों चूतड़ों को अपने हाथो में भर के मसल रहे थे..

कमरे के बहार विशाल ये सब देख के बेकाबू होने लगा था उसका पंत तम्बू बन चुक्का था जिसे देख ऋचा के मुँह से लार टपकने लगती है और वो धीरे से विशाल की तरफ बढ़ने लगती है..

विशाल अभी अपनी माँ के शो को देखने में बिजी था की उसे अपने सख्त हो चुके लुंड पे कुछ ठंडक कुछ नरम जैसा महसूस होने लगता है वो जब नज़रे निचे करता है तो देकखता है ऋचा उसके शॉर्ट्स को निचे कर के उसके लुंड पे अपनी जुबान फेर रही थी…






वो विशाल के लुंड को उसके जड़ से लेके उसके टोपे तक पे जुबान फेरते हुवे चाट रहे थी जिस से विशाल की आहे अपने आप बंद होने लग जाती है वो मस्ती के सागर में गोते खाने लगता है आज उसके दोनों हाथो में लड्डू था…

अंदर उसकी माँ अपने रंडी अवतार में थी जो उसने पहली बार देखा था और भर उसकी बहन उसकी रंडी बनने को तैयार थी..

विशाल से भी ज्यादा बर्दाश्त नहीं होता और वो खुद अपना लुंड ऋचा के मुँह में पेल देता है और धीरे धीरे छोड़ने लगता है..






ऋचा भी किसी प्यासी कुटिया की तरह विशाल के लुंड को पूरा ंगलने को तैयार थी और वो पुरे जान लगा के विशाल के लुंड को निगलने लग जाती है.. अंदर उसकी माँ अभी अपने देवर और नन्दोई से चुद के पष्ट हुई पड़ी है तो बहार उसकी बेटी अपने भाई से छोड़ने के लिए अपनी साडी कलाओ का प्रयोग करने में कोई कसार नहीं चोर्ने को तैयार थी…

उधर अंदर अलका दो मुस्टंडो के बिच फांसी अपने जिस्म पे हो रहे घर्षण से पिघलने लगती है उसका दूध जैसा गोरा जिस्म अपने वास्तविक रंग को चोर अब लाल गुलाबी होने लगा था.. और कमल जिसका लुंड बिलकुल सख्त था जिसने अभी अभी अपने बड़े सेल की बीवी को छोड़ के पष्ट कर दिया था और उसके छूट के पानी से साणे लुंड को अब अलका की गांड में घिसने लग जाता है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh आराम से कही भागी नहीं जा रही हु…

अरविंद- जब आप सामने हो तो खुद पे कण्ट्रोल खान रह पता है भाभी…

अलका- फिर तो तुम्हारा काम जल्दी करना पड़ेगा देवर जी और इतना कह वो अरविन्द को बिस्टेर पे धकेल देती है जिस से अरविन्द बीएड पे गिर जाता है और अलका बड़े अदाओ से उसके तरफ बढ़ती है और उसके लोडे पे बेथ के अपनी पीठ उसकी तरफ घुमा देती hai.aur अपनी ब्रा के हुक की तरफ इशारा करते हुवे कहती है..






अलका- इसे उतरोगे नहीं अरविन्द

अरविन्द अगले hi पल अलका के जिस्म पे लटके उसके ब्रा के हुक को खोल के आज़ाद करने लग जाता है और देखते hi देखते ब्रा को खोल के दूर कही कोने में फेंक देता है..

अलका का ये कामरूप कमरे में बैठी बाकि दोनों महिलाये देख रही थी और तभी रागिनी बोलती hai.jitna तडपायी है ये तुम लोगो को चूर्ण नहीं आज अचे से रगड़ इस चिनार को की इसकी आवाज़ पुरे गाओं में गूंजे बड़ी गर्मी है इस रंडी के बुर में भी…

उधर साथ में पड़ा कमल लुंड हीलते हुवे कहता है भाभी थोड़ा ख्याल हमारा भी कर लो क्या सारा ध्यान देवर पे hi डोज??

अलका- क्यों नहीं कमल जी और वो उसके तरफ उठते हुवे जाती है और अपनी चूतड़ों को मटकते हुवे गोल गोल घूमते हुवे अपनी पंतय जो बहुत पतली उसके भरी भरकम गांड के बिच के दरार में अटकी हुई थी उसे उतरने लग जाती है…






अलका के इस चिनार रूपी रूप को देख के दिनेश के लुंड ने भी ांडई लेना सुरु कर दिया था…

अरविन्द और कमल से अब और बर्दाश्त कर पाना मुश्किल होने लगा था और कमल जो पहले hi रागिनी के छूट को छोड़ के उसे निढाल कर दिया था लेकिन अभी उसके लुंड की प्यास नहीं बुझी थी कुल मिला करा दोनों मर्दो से अब और रुक पाना मुश्किल हो रहा था और फिर खेल को आगे बढ़ाते हुवे कमल अलका को लिटा के उसके छूट में लुंड पेल देता है…






और इस से पहले की उसकी चीख निकल पति अरविन्द अपना लुंड अलका के मुँह में पेल देता है जिसे अगले hi पल अलका पकड़ के चूसना सुरु कर देती है…

अब कमरे में अलका दोनों के बिच किसी रंडी की तरह चुदाई का आनंद ले रही थी तो वही रागिनी अपने कपडे पहन के बहार निकलने को तैयार थी पर दिनेश अभी भी अपनी छोटे भाई की बीवी को देख के लुंड मसल रहा था तो वही दूसरी तरफ कमरे के बहार ऋचा अपने भाई विशाल के लुंड पे अपने जुबान और दांतो से उसके खाल को कुरेद कुरेद के अपने छूट के लिए तैयार कर रही थी…






विशाल भी ऋचा के मुँह की गर्माहा से और उस से ज्यादा कमरे के अंदर जो गर्माहट उसी माँ के फैला दिया था उस से बेकाबू हुआ जा रहा था आज उसके हाथ में सच में कुछ भी नहीं था ो बस कमर हिला के अपना लुंड ऋचा के मुँह में पेलने की कोशिश कर रहा था पर आज उसकी कमर भी उसका साथ खान दे रहा था और इसका एक hi कारन था ो थी अलका और उसका ये नया रूप..

अगले hi पल जब विशाल वापस कमरे में देखता है तो पता है अलका अब कमल के गॉड में बैठ के उसके लुंड पे उछाल रही है और साथ hi वो अरविन्द से कुछ कह भी रही थी पर वो आवाज़ विशाल नहीं सुन पा रहा था…






कमल के लुंड पे उछलते हुवे जहां उसका चेहरा कमल की तरफ था तो वही उसका गोल गद्देदार गांड विशाल की तरफ था ये वही गांड थी थी जिसे विशाल ने फाड़ा था.. अचानक से विशाल के मन में सवाल आ जाता है जिस से उसके दिल की बेचैनी और बढ़ने लग जाती है..

अरविन्द और अलका के बिच कुछ बाटे हो रही थी जिसमे अलका मना करा रही थी और अरविन्द मनाने की कोशिश कर रह था और ये दृश्य विशाल को बेचैन करने लग जाती है आखिर अलका अब ऐसा क्या बचा था जिसके लिए मन कर रही थी कही वो आज एक साथ दो लुंड तो नहीं लेने वाला… omg ये सोचते hi विशाल की धड़कने बढ़ने लगती है अउ रस्क लुंड पिचकारी मरने लग जाता है…






फूलो से नाजुक ऋचा और उस से भी नाजुक उसके सुर्ख गुलाबी होंठो पे विशाल अपने लुंड के गरम गरम पैन ऐकोर देता है.. ये पानी इतना गरम था कही ऋचा के नाजुक होंठ न जला दे… बहुत कोमल जोट hi इसे अभी चुदाई का असली रूप देखा hi खान था इसे अभी ये देखा नहीं था की जब कोई मर्द एक औरत के जिस्म को निचोड़ता है तो औरत का जिस्म किसी फूल की पंखुडिओ की तरह रास चोर्ने लग जाती है…

विशाल के लुंड इतना ज्यादा प् ऐकोर रहा था की रिच अक पूरा मुँह भर जाता है और वो जब लुंड को अपने मुँह से बहार निकलती है तब भी विशाल का लुंड रह रह के पिचकारी मार रहा था जिसे देख ऋचा चौंक जाती है… इतना पानी उसके बर्फ का कभी नई निकला होगा जितना विशाल ने अभी एक बार में बहा दिया था और उसकी धार अभी भी रुकने का नाम नहीं ले रही थी..






ऋचा बड़े hi जोर से विशाल का लुंड हिलाते हुवे उसके लुंड से निकले गरम पानी को अपने चुचिओ पे गिरता देख और ज्यादा जोर से उसके लुंड को मसलने लागत जाती hhai…aur फिर उस गरम पानी को अपने hi छाती में किसी बॉडी लोशन की तरफ मलने लग जाती है…

उधर अलका ने कमरे के माहौल को उसके वास्तविक तापमान से कई गुना ज्यादा बढ़ा दिया था तभी तो अधमरी पड़ी रीमा भी अब अलका को देख के अपना छूट मसलने लग जाती है…






कमल- लगता है रीमा भाभी फिर से तैयार हो रही है अगले राउंड के लिए..

इस्पे रीमा कुछ नहीं कहती बस उसके अनकगो में एक खुमारी थी जिसमे उसकी छूट की प्यास साफ झलक रही थी पर उसके होंठ इस वक़्त अपने hi बेचैनियों में दातो टेल डाब के रह गया था…

अलका कलम के लुंड पे कूदते हुवे एक बार रीमा की तरफ देखती है और फिर धीरे से उसकी तरफ बढ़ने लग जाती है…

और फिर अलका रीमा के ऊपर आ के घोड़ी बन जाती है जिस से इस बार अरविन्द पीछे से अलका को छोड़ने लग जाता है और अलका रीमा को किश करना सुरु कर देती है…






अलका सच में वो औरत है जो मुर्दो में जान दाल दे और इसका प्रतयक्ष साबुत ये था की अधमरी पड़ी रीमा अब अपने छूट को रगड़ते हुवे अलका के होंठो को चूमने लगी थी अब अलका को दो मर्दो को निपटना था तो उसे रीमा को तैयार तो करना hi था वर्ण ये दोनों तो सुबह कर देते अलका को छोड़ने में और सईद यही चाल अलका ने सोच के रीमा को अगले राउंड के लिए तैयार करना सुरु कर दिए था..

Reema-aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अलका तेरी चुदाई देख के मेरे बुर में भी चीटिया रेंगने लगी है… uuuuuuuuuuuuufffffffffffffff

अलका- तो तड़प क्यों रही है रीमा ये देख जिधर भी नज़र घुमाएगी लुंड मसलते कोई न कोई मिल hi जायेगा ये देख कमल भी तुझे देख के अपने लुंड को खड़ा किये मसल रहा है….

कमल- हाँ रीमा भाभी ाचा हुआ आप फिर से तैयार हो गयी अब आपके छूट भी साथ में मरने मजा आ जायेगा…

रीमा- तो मार लो न नदवी जी आप hi के लिए तो हम सब नंगी लेती है अपनी टंगे खोले ….

अलका- हाँ नन्दोई जी पर उस से पहले इस छूट को आपके लिए तैयार करना होगा.. और इतना कह के अलका रीमा के ऊपर से हैट जाती है…

अलका के दिमाग में सईद कुछ और hi चल रहा था वो रीमा को थोड़ा और गरम करना छह रही थी जिस से वो जल्दी हथ्यार न डेल और इसी ख्याल से वो इस बार खुद टंगे फैला के लेट जाती है और रीमा को अपने चेहरे पे बिठा के उसके छूट को चाटने लग जाती है…






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अब अरविन्द अलका के छूट में लुंड घकाघाच पेल रहा था और अपनी बीवी रीमा के होंठो को चुम रहा था तो रीमा अपनी गांड हिला हिला के अलका के मुँह पे अपनी छूट घिष रही थी और उधर कमल भी तैयार था रीमा की छूट में एक बार फिर से घुसने के लिए..

काफी देर इस पपोसिशन में छूट चुसवाने के बाद रीमा अब पूरी तारा से तैयार थी वो खुद hi कमल की तरफ अपना चेहरा बढ़ा के उसके होंठो को चूमने लग जाती है कमल भी अब बीएड पे लेट जाता है और रीमा को अपने ऊपर लिटा लेता है…

मोके को देखते हुवे अलका अकामा के लुंड को अपने मुँह में भर के चूसने लग जाती है,,.. अब नज़ारा कुछ ऐसा था की कमल बीएड पे लेता हुआ था जिसके ऊपर रीमा थी और कमा के लुंड के पास अलका घोड़ी बानी उसके लुंड को चूस के रीमा के लिए तैयार कर रही थी तो वही रीमा का पति अरविन्द घोड़ी बानी अलका को पीछे से छोड़ रहा था…










काफी देर चूसने के बाद कमल का लुंड फिर से तैयार हो गया और इस बार अलका ने खुद से कमल के लुंड को पकड़ के रीमा के छूट पे रगड़ने लगती है…

रीमा- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh किता मजा आ रहा है इतना मजा तो चुदाई में भी नहीं आया था….

और फिर अलका धीरे से कमल का लुंड रीमा के छूट में रगड़ते रगड़ते घुसा देती है.. इसमें कमल को कोई बह म्हणत नहीं करना पड़ा सारा काम अलका ने कर दिया था और रीमा के गिरी छूट में कमल का लुंड एक hi झटके में उत्तर जाता है….

चुदाई का खेल अपने पुरे चरम पे आ गया था

अब दोनों मर्द अपने पुरे राफ्तेर से दो गदरायी घोडीओ की चुदाई करने लगे थे और इधर अलका और रीमा एक दूसरे को चूमते हुवे एक दूसरे का हौसला बढ़ा रही थी..






अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh फ़क अरविन्द तेज़ तेज़ करो थोड़ा डैम लगाओ..

रीमा- तुम्हरे आगे किसी का डैम खा निकलता है अलका तुम सच में रंडी को भी पीछे चोर दो इतने बड़ी चिनार हो…

कमल- aaaaaahhhhhhhhhhhhhhh रीमा तुम भी कोई काम नहीं हो बहन की लोदी मई तो कहता हु अरविन्द को छोड़ के मेरे साथ चल

रीमा- फिर तुम पुरे दिन पूरी रत मुझे नंगी रख सको इसलिए

कमल- और नहीं तो क्या कपडे क्यों डालने इतना कामुक बदन है तेरा बहनचोद रंडी

अरविन्द- अलका भाभी घोड़ी बनो मुझे तुम्हारी गांड देखते हुवे तुम्हारी छूट लेने में मजा आता है…






अलका इस्पे अरविन्द की तरफ देखते हुवे मुस्कुराती है और घोड़ी बन के अपनी गांड अरविन्द की तरफ कर देती है..

एक तरफ जहां रीमा अपनी टंगे फैलाये अपने नन्दोई का लुंड अपने छूट में अंदर बहार करवा रही थी तो वही अलका घोड़ी बन के पीछे से अपने देब्वर के लुंड को अपने छूट के गेहराइओ में सामने लग जाती है…

अरविन्द अगले hi पल बेकाबू होने लगता है और वो पुरे ताक़त लगा के अलका के ऊपर झटका लगा देता है जिस से अलका आगे की और गिर जाती है और उसकी गांड हवा में लेहरानी लगती है….






उधर कमल भी रीमा की टंगे उसके कमर से पकड़ के पूरा हवा में लहरा देता है और पुरे गति से रीमा के छूट में अपने लुंड अंदर बहार काना सुरु कर देता है..

रीमा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeeeeeeee मेरी कमर uuuuuuuuuuuuufffffffffffffffffff मेरे छूट में जलन होने लगी है फैट गयी आज मेरी बुर इन भनचोड़ो के बिच फास के मर गयी मैं

कमल- अभी खान फटी है रीमा डार्लिंग अभी तुझे पूरी रात छोड़ना है मेरे लुंड पे… च लैब उछलना सुरु कर मेरे लुंड पे मेरी रांड और इतना कह के कमल बीएड पे लेट जाता है… और रीमा को अपने लुंड पे बैठने का इशारा करता है.. पसीने में भीगी रीमा भी कमल के कमर के दोनों तरफ अपने पैरो को कर के उसके लुंड पे अपनी छूट रख के रगड़ने लग जाती है,,….






कमरे के अंदर चल रहे इस घमासान ने विशाल के लुंड को फिर से तैयार कर दिया था … ऋचा ने विशाल के शॉर्ट्स को उतर के तो उसे पहले hi नंगा कर दिया था और जो कपडे वो खुद पहन के आयी थी उसे उसने कब उतर दिया उसे खुद भी पता नहीं चला कुल मिला कर ये बात थी की इस तरफ दोनों भाई बहन भी पूर्ण रूप से नंगे थे…





विशाल का सख्त हो चुक्का लुंड ऋचा के दोनों चूतड़ों को भेदते हुवे उसके कामर्स बहा रही छूट पे ठोकर मरने लगा था और इस ठोकर से बेकाबू हो के ऋचा भी अपनी टंगे खोल लेती है… ऋचा जो की विशाल की आगे कड़ी हो के उसके लुंड का दबाव अपने गांड पे महसूस कर रही थी वोट क बार पलट के विशाल के तरफ देखती है.. और फिर दोनों की नज़रे आपस में मिलती है दोनों के आँखों में वासना कैद ओरे तैर रहे थे मनो आँखों hi आँखों में कुछ कह रहे हो पर आँखों की भसह को दोनों में कोई समझ पता उस से पहले hi दोनों के होंठ आपस में भीड़ जाते है और इस बार कोई नहीं रुकता और दोनों एक दूसरे के होंठो को चूमना सुरु कर डेट है …





ऋचा के होंठो को चूमते हुवे विशाल निचे से तेज झटके लगा रहा था तो वही ऋचा भी अपने गांड के दबाव को विशाल के कमा पे बढ़ने लग जाती है.. दोनों मिलान के लिए तैयार थे पर ये जगह और वक़्त सही नहीं था इसलिए विशाल ऋचा के छूट पे अपने लुंड को रगड़ तो रहा था पर अंदर डा नहीं रहा था वर्ण ऋचा की चीख से अंदर के लोगो कोप ता चल जाता की यह सर रीमा और अलका hi नहीं कोई और भी चुद रही थी…

अंदर का नज़ारा जब दुबारा देखते है तो पते है की अब अलका और रीमा दोनों hi अरविन्द और कमल के लुंड पे उछाल रही थी…






और अरविन्द और कमल दोनों बिस्टेर पे लेते हुवे दोनों अप्सराओ के हाथो की कठपुतली बने आनंद के सागर में गोते खा रहे the…ye दृश्य ेखा के साफ़ खा जा सकता है की यहां कमांड पूरी तरह से घर के औरतो के हाथो में था और अगर चुदाई में कमांड औरतो के हाथ में था…

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

रीमा भी जोर जोर से चिल्लाते हुवे कमल के ऊपर कूद रही थी उधर दिनेश भी अपना लुंड मसल रहा था इस्पे रीमा दिनेश को अपनी और आने का इशारा करती है..

रीमा के बदन के चढ़ी गर्मी उसे आज खुद पे काबू रख पाने में विफल हो रही थी,… दिनेश भी अपने झूले हुवे लुंड को ले के रीमा की तरफ बढ़ने लगता है…






अब रीमा जहां एक तरफ कमल के लुंड पे कूदते हुवे दिनेश के लुंड को सहलाते हुवे मुँह में भर के चूसने लग जाती है तो वही अलका भी दिनेश को पीछे से सहलाने लगती है.. दिनशा का लुंड भी फिर से खड़ा होने लगता है और फिर अगले hi पल रीमा के मुँह में दिनेश एक बार फिर से अपना पानी निकल देता है…

अरविन्द- मेरा होने वाला है भाई…

इस्पे अलका उसके ऊपर से उतर जाती है और उसका लुंड मुँह में भर के चूसने लगती है तो कमल भी रीमा को उतर के उसके छूट में अब बड़े बड़े शॉट्स लगाने लग जाता है






इधर चुदाई अपने आखरी दौर में था और देखते hi देखते और अगले hi पल पहले कमल रीमा के छूट में और फिर अरविन्द अलका के मुँह में अपना पानी उगल देता है… लुंड के पानी चोरते hi दोनों मर्द निढाल हो के बीएड पे hi गिर जाते है. और अलका जिसके मुँह में अरविन्द का पानी भरा हुआ था ो घुटनो के बल चाक इ आती है जैसे की कोई कुटिया हो और अपने मुँह में भरे अरविन्द के पानी को उसी के बीवी रीमा के मुँह में और फिर बाकि बचा हुआ रागिनी के मुँह में उड़ेलने लग जाती है…





रीमा तो बड़े प्यार से अपने पति का कामर्स पि जाती है पर रागिनी नखरे दिखते हुवे अलका को गली देते हुवे कहती है…

रागिनी- हैट रंडी तू hi पि और बी हो गया तो चलो बहुत रात हो गयी है कही कोई ढूँढना सुरु न कर दे…

अरविन्द- हाँ भाभी आप लोग चलो हम ेके क कर के निकलते है

तभी दिनेश और रागिनी भी अब कपडे पहनने लग जाते है अंदर के माहौल को देख बहार खड़े विशाल और ऋचा को भी समझ आ जाता है की वो बहार निकलने वाले है और वो दोनों जल्दी से कपडे दाल के अपने कमरे की तरफ भाग जाते है..

इधर ेके क कर के घर की साडी औरते और मर्द बहार निकल जाती है और सबस ईस्ट में निकलती है अलका…

अलका जब बहार निकलती है तो उसकी नज़र दरवाजे के पास गिरे उस सफ़ेद पानी पे पड़ती है जो अभी थोड़ी देर पहले hi किसी ने बहाया था… उसे देखते hi अलका को समझते ये देर नहीं लगता की वो क्या चीज है वो निचे झुक के उसे सफ़ेद गधे पानी को अपने उंगलिओ से उठती है और नाक के पास ले जा के सूंघने लगती है

ये महक बिलकुल जाना पहचाना था अलका के चेहरे का भाव बदलने लगता है और इस बात की पुष्टि के लिए की जो वो सोच रही है वही है या नहीं उस पानी से साणे ऊँगली को अपने मुँह में दाल के चूसने लगती है..






जुबान पे उस पानी के टास्ते के जाते hi अलका की पहले तो हवइया उड़द जाती है उसके मुँह से एक आवाज़ निकलती है

अलका- विशु?????

अलका के छूट की आग एक बार फिर से भड़क जाती है.. विशाल के लुंड का पानी उसके जुबान पे चढ़ते hi किसी नशीला पदार्थ की तरह उसके पुरे शरीर को झकझोर देता है वो वहां पड़े पुरे रास को अपने उंगलिओ से पोछते हुवे साफ कर देती है अउ एक एक बून्द चाट कर जाट है...

उसे ऐसा लगने लगा था जैसे ये पानी जमीन से नहीं बल्कि अपने बेटे विशाल के लुंड से निकल के पि रही है..






और वो अपने बेटे के लुंड से निकले पानी के एक बून्द को भी बर्बाद नहीं होने देना छह रही थी...

अब जहां एक हाथ अलका के मुँह में तो दूसरा खुद hi उसके छूट को टटोलना सुरु कर देती है और जिसके एहसास से hi उसकी पंतय गीली हो चुकी थी सारा रास देखते hi देखते अलका साफ़ कर चुकी थी और अब इस से पहले की कोई और उसे यह इस अवस्ता में देख ले और उस रात की तरह फिर से पकड़ के छोड़ दे उसे यहां से निकल जाना बेहतर लगा और वो तेज़ कदमो से लगभग भागते हुवे अपने कमरे की तरफ चल देती है..


अलका जीतनेय तेज कदमो से भागते हुवे डार्क रूम से घर की तरफ बढ़ती है घर के नज़दीक आते hi उसके कदम लड़खड़ने लग जाता है उसके जिस्म की आग शांत होते hi उसके दमाग में एक साथ कई सवालो ने हमला कर दिया..



विशु वहां कब आया???

उसने क्या क्या देखा होगा???

अब वो क्या सोचेगा मेरे बारे में??

मैं उसे क्या मु दिखाउंगी???

ऐसे जाने कितने सवाल उसके कदम को रोक दिए था जिसका जवाब उसके पास नहीं था और किसी माँ के लिए अपने bête को इन सवालो का जवाब दे पाना कोई ासना ऍम तो न था… लेकिन जैसे तासिए हिमत करके अलका अपने कमरे की तरफ बढ़ने लगती है वो मन में hi दुआ कर रही थी की उसे विशाल से न मिलना पड़े वो सोया रहे तो बेहतर है आगे क्या होगा नहीं पता पर इस वक़्त वो विशाल को फेस नहीं करना छह रही थी और इन्ही दुआओ के साथ वो कमरे में घुसती है तो देखती है विशाल दरवाए के दूसरे साइड मुँह कर के सोया हुआ है ये देख अलका के जान में जान आ जाती है और वो जल्दी से वाशरूम में जा के खुद को पहले साफ़ करती है और फिर धीरे से बिना शोर किये पहले विशाल के बालो में हाथ फेरते है फिर उसके सर को चूमते हुवे सो जाती है..

इधर विशाल भी सोया नहीं था बस जो हाल अलका का था वही विशाल का भी था वो आज की रात अलका से नज़रे नहीं मिला पा रहा था हलाकि उसने कोई चोरी नहीं कीथी लेकिन जाने क्यों उसके मन नहीं मान रहा था आज अलका को देखने के लिए इसलिए वो सोने का नाटक कर के चुपचाप लेता रहा..

अगली सुबह रोज की तरह सभी अपने अपने काम पे लग जाते है और कल की बची हुई खरीदारी के लिए घर की औरते एक बार फिर से मार्किट के लिए निकल पड़ती है और ऋचा अपने कॉलेज के लिए और आज एक बार फिर से विशाल एंड कामिनी घर पे अकेले थे..

विशाल जो कल रात से hi चुदाई का खेल देख के वासना की आग इ जल रहा था वो एक बार फिर से कामिनी को ढूंढने लगता है उसे पता था आज घर में कोई नहीं है इसलिए वो आज कामिनी को पुआ दिन रगड़ने की सोच के उसे तलाशने लगता है…

कामिनी को ढूंढते हुवे विशाल उसके कमरे में जाता है तो देखता है वो किसी से बात कर रही थी और साथ hi अपने छूट को अपने हाथो से मसल रही थी…









विशाल को इस तरह कमरे में देख कामिनी चौंक जाती है वो फोन को म्यूट पे कर के उस से पूछती है तुम यह क्या कर रहे हो एंड कनक कर के आना चाइये था पर विशाल कुछ नहीं कहता उसपे तो चुदाई की हमारी छायी थी वो कामिनी िश्रे में पूछती है क्या चाइये जिसपे विशाल उसके छूट की तरफ इशारा कर के बताता है की उसे क्या चाइये…

विशाल- किस से फोन पे बात करते हुवे अपने छूट को मसल रही हो बुआ???

कामिनी- शरमाते हुवे कहती है तेरे फूफा से hi करुँगी और किस से

उधर से फोन पे hello hello की आवाज़ आती है पर वो आवाज़ इतनी धीमी थी की सिर्फ कण लगाए कामिनी hi सुन पति है जिसके जवाब में वो बोलती है एक मं रुको कोई दरवाजे पे है…

कामिनी उसे बहार जाने को कहती है पर विशाल खान मैंने वाला था ो कामिनी के छूट पे अपना मुँह लगा देता है और उसे चेतना सुरु कर देता है…









एक तरफ कामिनी को विशाल का फूफा कमल फोन पे छोड़ रहा ता तो वही विशाल हकीकत में कामिनी के छूट को चूसने लगा था और फूफा के फोन पे होने के बावजूद बुआ के छूट के साथ कलवाद करने में विसाहल को कुछ ज्यादा hi मजा आने लगा था इसलिए वो रह रह के कामिनी के छूट को काटने लग जाता है…

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मममममममममअअअअअअअअ

कामिनी: कुछ नहीं बिलकुल नंगी बैठी हूँ.

कमल : अच्छा!

मैं: हाँ देखोगे?

कमल: हाहाहा, दिखावा! एक पिछ भेजेगी क्या?

कामिनी फ़ौरन विशाल को अपने से दूर करते हुवे बीएड से उठने लग जाती है और फ़ोन को कान और कंधे के बीच लगाकर अपनी खुली हुई रोबे को निचे खोल डालती है.

विशाल कामिनी का ये नंगा रूप अपनी आंखे फाड़ के देख रा थातो इधर कामिनी भी आज एक साथ दो दो मर्दो को ठंडा करने के लिए अपने गरम जिस्म की नुमाईश करने का पूरा मन बना छुई thi…kamini विशाल के सामने बिलकुल नंगी कड़ी हो कर फ़ोन में बोलती है : एक मिनट होल्ड करो.

हलाकि विशाल के लिए कामिनी का ये नंगा रूप नया नहीं था लेकिन अपने सामने किसी और के लिए बेशक उसका पति hi सही उसके लिए ऐसे नंगा देखना और सेल्फी लेना विशाल के लिए न्य था

कामिनी दीवार पे लगे आईने के सामने कड़ी हो के 2-3 नंगी फोटो निकलती है कही छूट मसलते हुवे तो कभी चुचिओ की पास में रगड़ते हुवे अउ रेज hi क्लीक कर के कमल को भेज देती है…









कामिनी अपनी फ़ोन निकली और सेल्फी लेकर कमल को भेज देती है.

फोटो भेजकर कामिनी वापस बीएड पे आ जाती है जहां विशाल पाहे से उसकी साडी हरकते देख रहा था ो बीएड पे चढ़ के घुटने के बल विशाल के नज़दीक आती है और उसके लुंड और जांघो को सहलाते हुवे बोलती है बोलती है: अपना वत्सप्प देखो,









उधर से जवाब में कुछ सुनने के बाद कामिनी भी जवाब में कहती है

कामिनी- ह्ह्ह्हह्म्ममम्मम्म्म्म बहुत ज्यादा

तभी कामिनी फोन को दुबारा म्यूट पे करती है और विशाल से कहती है अगर छोड़ना है तो कमल बन के छोड़ना होगा वर्ण कमल फोन काट नहीं रहा और उसे शक हो जायेगा…

इस्पे विशाल फ़ौरन कामिनी के चुचिओ को मसलते हुवे कहता है ठीक है कामिनी और उसे अपनी और खींच लेता है कामिनी भी झटके से उसके ऊपर गिर जाती है

और फिर विशाल किसी पागल कुत्ते की तरह कामिनी पे टूट पड़ता है विशाल इधर जैसे जैसे कामिनी को छोड़ रहा था ो कमल को वो सब बता रही थी जैसे मनो विशाल न हो के वो कमल से hi छुड़वा रही हूँ









विशाल ने उसे फोन कर होने तक बेहाल कर दिया और फिर एक लम्बी चुदाई के बाद कामिनी के छूट को अपने पानी से भर देता है कामिनी जो की फोन और वास्तविक दोनों चुदाई का मजा एक साथ ले रही थी और विशाल के दर्दनाक चुदाई से उसकी छूट मनो उसके अंदर का लाल मांस बहार निकल आया था और उसमे से निकल रहा था विशाल और कामिनी का मिला जुला रास … चुदाई के बाद कामिनी खुद को साफ़ करने के लिए उठती है और कामिनी हस्ते हुवे टेबल पर पड़े टिश्यू पेपर लेती है और विशाल के सामने hi अपनी टंगे फैलाकर अपनी छूट साफ़ करने लगती है..









कामिनी: तुमने तो अछि खासी मेरी छूट भर डाली...

विशाल- मैंने तो खा hi था पहाड़ दूंगा आपकी.

कामिनी हिमत जूता कर उठी. रोबे को वैसे hi खुले रखती हुई अपनी नंगी बदन बिना किसी शर्म के दिखाकर अदाओ के साथ कमर पर हाथ रखती है...










कामिनी: तुमसे किसने कहा की मेरी ये छूट इतनी जल्दी पहात गयी?

विशाल- को कामिनी की ये बात उसके मर्दानगी को चोट करने वाली लगती है और वो इस बात पे उठ के कामिनी को वापस से दबोच लेता है..

विशाल- अगर ऐसा है तो मेरी रांड आज तू जब तक हाथ जोड़ के रूण को नहीं बोलेगी तेरी इस छूट से अपना लुंड नहीं निकलूंगा…

और वापस से कामिनी को पकड़ के बीएड पे लिटा देता है और बी विशाल भी पुरे जोश में कामिनी को काटने नोचने लग जाता है

कामिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh निशान पद जायेगा क्या कर रहा है आराम से कर भड़वे

विशाल- बिना कुछ बोले कामिनी के होंठो को जोर से काट लेता है जिस से कामिनी के होठो से खून निकल आता है पर विशाल को इसका परवाह खा था ो तो कामिनी के इस घमंड को तोड़ने के इरादे से अब कामिनी के शरीर के साथ खेलवाड़ कर रहा था कामिनी को भी विशाल के हर हमले से शरीर में एक सनसनी उत्पन्न होने लगी थी उसे मज़ा नए कागा था और वो खुद अपनी टंगे खोल लेती है

अभी दोनों बुआ भतीजा पुरे जोश में थे की बहार बेल्ल बजने की आवाज से कामिनी विशाल को खुद से अलग कर लेती है और खुद वाशरूम में जा के विशाल को देखने का बोलती है विशाल भी कपडे पहन के बहार जाता है तो देखता है उसका फूफा कमल था जो उसे hi धुंध रहा था..

कमल- खान गायब है तू कब से धुदनः रहा हु फोन भी है उठा रहा फोन कहाँ है तेरा

कमल के इस बात पे विशाल फोन उठता है तो देखता है कमल के कोई 12 मिसकॉल थे जो वो पिछले एक घंटे से उसे कर रहा था..

विशाल- कुछ नहीं फूफा जी वो आंख लग गयी थी बताओ क्या काम था..

कमल- काम क्या पैसे मंगवाने थे टेंट वाले को देने के लिए तूने फोन उठाया नहीं तो अब मैं आ गया लेने

विशाल- तो क्या आप टेंट वाले के पास से आ रहे हो

कमल- और क्या..

विशाल- सॉरी फूफा जी मुझे मालूम नहीं था…



लेकिन विशाल का दिमाग एक बार फिर से चक्कर खाने लगता है (अगर कमल बहार टेंट वाले के था और पैसे लेने के लिए अभी घर आया है एंड वो पिछले 1 हर से विशाल को फोन कर रहा था तो कामिनी किस से चुद रही थी फोन पे इसका मतलब कामिनी एक साथ दो- दो लोगो को चुटिया बना रही थी जिसमे एक तो विशाल था पर दूसरा कौन था पता नहीं…)
 
अपडेट 64 ों थे वे गाइस

… इनकी चुचिअ uuuuuuffffffffffff इस उम्र में भी लड़कीओ से भी कातिल दिखती है और उसके बाद इनके पतली कमर के निचे ये गोल भरव्दार गांड खूब चुदाई करवाई है अलका चची




 
Update-64A (ये शाम मस्तानी मदहोश किये जाये)

शादी का दिन देखते देखते करीब आने लगा था इसलिए आज शाम को सभी औरते संगीत की प्रैक्टिस के लिए तयारी कर रही थी और दिन इसी में निकल जाता है… घर के मर्द शादी इ दूसरी तैयारिओं में लगे होते है तो उधर रिच भी जिस्म के गर्मी से मजबूर आज किसी भी हालत में अपना वो अधूरा काम पूरा कर लेना छह रही थी.. दिन पे दिन उसके छूट की आग बढ़ती hi जा रही थी और पिछले दिन विशाल के साथ वो किसिंग उसके पानी को पीना और अपने गीले छूट में विशाल के लुंड का स्पर्श ये सब ऋचा के अंदर के जल रहे चिंगारी को अब आग बना चुक्का था और इस से पाहे घर में बाकि के मेहमान भी आ जाये और फिर पता नहीं कब ये मौका मिले उस से पहले ऋचा विशाल का लुंड अपने छूट में निगल लेना चाहती थी और उसके लिए आज का दिन उसने चुना था और इन्ही सोच में डूबी अपने अंजाम को पुर करने के लिए ऋचा आज जल्दी कॉलेज से घर आ जाती है और एते hi विशाल को ढूंढते हुवे उसके कमरे में चली जाती है जहां अलका बेखबर नींद के आगोश में थी पूरा घर में सन्नाटा पसरा हुआ था सभी औरते अपने अपने कमरे में सोई हुई थी सिवाए उसकी माँ रागिनी के क्युकी रागिनी दिनेश के साथ पास के गाओं गयी हुई थी..

ऋचा के लिए इस से ाचा मौका और नहीं मिलने वाला था इसलिए वो विशाल को और ज्यादा व्याकुल हो के ढूंढने लगती है.. उधर जब ऋचा की नज़रे सोई हुई अलका पे जाती है तो उसकी नज़रे अलका के गोर भरव्दार जिस्म पे hi जैम जाती है…






वो थोड़ी देर के लिए सब भूल के अलका के कामुक बदन में खो जाती है.. उसके मन में ख्याल आने लगते है सच में अलका चीची है तो लाजवाब फिर क्यों न पूरा गाओं इनके पीछे लार टपकता फायर… इनकी चुचिअ uuuuuuffffffffffff इस उम्र में भी हम लड़कीओ से भी कातिल दिखती है और उसके बाद पतली कमर के निचे ये गोल भरव्दार गांड खूब चुदाई करवाई है अलका चची.. आज मैं भी तेरे bête का लुंड ले के रहूंगी चची देखना और जल्दी अपने ख्यालो से आ के वो विशाल को ढूंढने लग जाती है…

ऋचा के कमरे से गए अभी थोड़ा समय बिता hi होगा की एक परछाई अलका के कमरे में प्रवेश करती hai…par इस बार अंदर आता इंसान कोई औरत या लड़की नहीं बल्कि कोई मर्द था जो अलका को ऐसे सोता देख जिस से उसकी गांड दरवाजे के साइड थी उसे देख वो साया खुद पे काबू नहीं कर पता और अपना लुंड निकल के अलका कैग एंड को देखते हुवे हिलने लग जाता है..

साया- uuuufffffffffffffffff साली चिनार क्या गांड है इस रंडी के कसम से मन होता है इसे नंगा कर के ये खड़ा लुंड इसके गांड में पेल दू…






वो अपने लुंड को ऐसे hi हिलाते हुवे पहले कमरे के लाइट्स को ऑफ करता है और फिर धीरे कदमो से अलका की और बढ़ता है और बहुत hi आराम से वो बीएड पे चढ़ जाता है… ये सब काम उसने इतने चोर कदमो से किया था की नींद से बेखबर अलका को इनसब का भनक तक नहीं लग पता…

वो अलका कैग एंड को देखते हुवे लगातार अपने लुंड को हिलाये जा रहा था ो कामवासना में इतना जलने लगता है की वो अपना लुंड अलका कैग एंड के ऊपर सत्ता के उसे धीरे धीरे रग्न सुरु कर देता है…

अलका नींद में इतनी बेखबर थी की उसे इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था की उसके कमरे में कोई उसे छोड़ने के करीब है … और जब अलका के तरफ से कोई हरकत न पाकर वो अलका के ब्लाउज को थोड़ा साइड करता है जिस से अलका की चूचिया अगले hi पल बहार निकल आती है…






इस बार अलका का बदन थोड़ा हरकत करता है लेकिन अगले hi पल वो फिर से नींद के आगोश में चली जाती है… जिसका फायदा उठाते हुवे.. वो अलका के साड़ी को उतरने लग जाता है और साड़ी की गांठ खुलते hi अलका की साड़ी जो उसके तन को ढके हुवे थी वो अगले hi पल बिस्तर पे फ़ैल जाती है और अलका अब केवल पेटीकोट में थी और ब्लाउज तो था लेकि उसमे से उसकी चूचिया तो पहले hi उस सख्स ने निकल दिया था…

अब उस सख्स और अलका की फुल्ली हुई छूट के बिच बस एक पेटीकोट थी जिसे उसने बड़े hi सावधानी से उसकी डोरी खोलता है फिर धीरे से उसे निकलने की कोशिश करने लग जाता है…. और ऐसा करने से इस बार अलका की नींद खुल जाती है पर जाने आज ऐसा कौन सा नशा कर लिया था की अगले hi पल फिर से करवट ले के वो वापस से सो जाती है…

इस बार वो सख्स अब उठ के अलका के सिरहाने जाता है और अपना खड़ा लुंड अलका के चेहरे और उसकी नंगी चुचिओ को देख के हिलने लग जाता है…






ऐसा करने में उसे दर तो लग रहा था लेकिन उस से भी ज्यादा उसके वासना को सुच का अनुभव हो रहा था… लुंड को हिलने से उसका मन अभी नहीं भरता की वो अपने लुंड को अलका के होंठो पे रगड़ने लग जाता है…





अलका मुँह तो नहीं खोलती लेकिन लुंड के दबाव ने उसके होंठो के बिच अपना रास्ता खुद hi बनल एटा है और वो अलका के होंठो को खोलते हुवे अंदर प्रवेश कर जाता है… इतना सब करने से भी उसका मन नहीं भरता अब वो थोड़ा और आगे बढ़ने की ठान लेता है और वो थोड़ी देर अलका को अपने लुंड से ब्रश करवाने के बाद वापस से बीएड पे आता है और अलका कैग एंड पे हाथ फेरना सुरु कर देता है… कमोबेश में आ के वो आपका लोहे जैसा सख्त लुंड अलका के छूट पे भिड़ा देता है और उसका दबाव अलका के पंतय के ऊपर से hi उसके छूट पे बनाना लग जाता है…





छूट पे लुंड के ठोकर पड़ने से अलका कसमसा जाती है और उसकी आंख खुल जाती है और इस से पहले वो कुछ बोले या चिलए वो साया अलका को पलट देता है जिस से उसका चेहरा बीएड की तरफ और गांड उस सख्स की तरफ हो जाता है.. वो सख्स बिना समय गवाए अलका के पंतय को एक झटके में उतर देता है..





अलका को समझते देर नहीं लगता की हो न हो ये वही रात वाला सख्स है इसलिए इस बार वो किसी भी हालत में इसे ऐसे जाने नहीं दे सकती थी और इसी सोच से अलका पलटने की पूरी कोशिश करती है पर उसके मजबूत पकड़ की आगे अलका की एक नहीं चलती

अलका- कौन हो तुम चोरो मुझे और तुम अंदर कैसे आये??? चोरो वर्ण शोर मचा दूंगी..

Um(unwn मन)- शोर मचाओगी तो तुम hi बदनाम होगी थोड़ी देर रुक जा मेरा काम होते hi मैं चला जाऊंगा

अलका- नहीं पहले बताओ तुम कौन हो???

पर इस बार वो अलका के सवाल का कोई जवाब दिए बिना अपना खड़ा लुंड अलका के छूट में पेल देता है… अब वो भी समझ गया था की जल्दी से काम खत्म कर के निकलना होगा वर्ण उसके लिए रिस्क बढ़ सकता है इसलिए वो पुरे गति से अलका के छूट में लुंड पेलने लगता है…

अलका- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ममममममअअअअअ तुम मेरा रपे कर रहे हो समझे

ुम- चुप कर साली पूरी छूट गीली है तेरी और नखरे कर रही है…

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh मत करो प्लस

ुम- चुप हो जा साली वर्ण ये लुंड तेरी छूट से निकल के तेरे मटके जैसी गांड में दाल दूंगा

अलका- नहीं नहीं प्लस ऐसा न करना…

ुम- फिर शांति से मुझे अपना काम करने दे रैंड..

अलका को उसके मुँह से खुद के लिए रैंड सुन्ना बड़ा अजीब लगता है…. कोण है ये सख्स जो जबरदस्ती उसे छोड़ भी रहा है और गालिया भी दे रहा hai…par अलका को अब ये भी डार्ट है की कही कोई उसके कमरे में आ गया खास कर उसका बीटा विशाल तो वो क्या सोचेंगे की मैं ऐसा hi किसी का भी लुंड ले लेती हु जब की मैं तो इसे जानती भी नहीं…

अलका- देखो तुम जॉब hi हो जल्दी से कहत्म करो इस से पहले की कोई आ जाये..

ुम- फिर शांति से अपनी टंगे खोल के मेरे लुंड के मजे ले बहन की लोदी और उसके गांड पे एक छठा मार देता है..

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh सेल मरता क्यों है…? गांड में डैम है तो एक बार चेहरा दिखा

ुम- वो भी दिखा दूंगा और जिस दिन दिखाऊंगा तेरी गांड मरूंगा याद रखना..

अलका- पहले अपने गांड का डैम दिखा फिर मेरे गांड लेने की सोचना सेल हिजड़े…

इस्पे वो सख्स अपने लिए हिजड़ा वर्ड सुन के तिलमिला जाता है और वो ुम अलका के किसी बात पे ध्यान दिए बिना अपने काम को अंजाम देने में लगजाता है..

उसका हर झटका इतना जोरदार पड़ने लगा था की पूरा गद्दा ऊपर निचे होने लग जाता है जिस से अलका खुद बा खुद उछलते हुवे उसके लुंड पे ठोकरे मरने लगी थी…

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh धीरे प्लस दर्द हो रहा है..

इस बार उस सख्स ने बिना कुछ कहे अगले कुछ झटको में वो अपना गरम गधा माल अलका के छूट में उड़ेल देता है…






और इस से पहले की अलका पलट के उसे देख पाए वो तेज़ कदमो से उसके कमरे से निकल पड़ता है कमरे में अँधेरा होने के वजह से अलका सिर्फ उसे पीछे से hi देख पति है वो कोशिश तो करती है उसका हाथ पकड़ने को और उसके लिए अपना हाथ बढाती भी है पर उसके शरीर की फुर्ती ने अलका के हाथ पकड़ने से पहले वो वहां से निकल जाता है

लुंड के बहार आते hi ढेर सारा वीर्य अलका के छूट से बहने लगता है.. उसके पानी में एक बहुत तेज़ गंध थी जिसकी महक से अलका मदहोश होने लग जाती है वो पीछे हाथ बढ़ा के देखती है तो उसके दोनों चूतड़ों पे उसके लुंड का पानी फैला हुआ था और उसकी छूट से भी किसी नदी की धरा की तरह उसका पानी बहते हुवे उसके जांघो और जांघो से होते हुवे बिस्तर पर फैलने लगा था,,






अलका क अगोरा चिकना गांड उसके मरने और मसलने से लाल हो चुक्का था और उसके लुंड के पानी की गर्माहट जो उसके गांड के छेद पे भी फैल गयी थी उसे प् कर अलका की गांड की छेद अपने आप hi खुलने और बंद होने लग जाती है मनो उसके गांड में जान आ गयी हो और वो साँस ले रही हो…

अगले hi पल अलका अपना हाथ अपने छूट पे बढ़ाते हुवे उसके गरम गधे पानी को अपने उंगलिओ से कुरेद कुरेद के निकलने लग जाती है






उंगलिया उसके छूट में जाते hi अंदर से उसके छूट से सफ़ेद गधे पानी का रिसाव निकलना सुरु हो जाता है अलका आंख बंद किये इस पल में खो जाती है उसे ये भी ख्याल आ रहा था की वो इस वक़्त खा है उसे इस अवस्था में कोई देख सकता है वो तो उस चुदाई से निकलने अमृत को पिने के लिए तरस रही थी उसका गाला मनो सूखा जा रहा था जिसे अगर कोई गीला कर सकता था तो वो सिर्फ और सिर्फ ये गधा तरल पदार्थ..

अलका अपने तीनो उंगलिओ में उस सफ़ेद पानी को इकठा करते हुवे अपने मुँह में भर के चूसने लग जाती है…






अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh कितना स्वाद है इसके पानी में पता नहीं कौन है ये सख्स जो हर बार मुझे ऐसे छोड़ के चला जाता है जिसके लुंड का पानी मेरी प्यास बुझाने की जगह और बढ़ा जाता है… ऐसा तो सिर्फ मुझे तब महसूस होता है जब मैं विशाल से चुदती हूँ और विशाल के बाद अगर किसी के लुंड के पानी का स्वाद पसंद आया तो वो ये सख्स है…

यही कहते हुवे वो बार बार हाथ निचे ले जाती और वह से पानी इकठा कर के मुँह में अपनी उंगलिया भर के चूसना सुरु कर देती hai…chut से मुँह तक पानी ले जाने के दौरान कई बार वो पानी अलका के पेट पे भी गिर जाता है जिसे कामवासना में लिप्त हमारी रैंड अलका अपने पेट से पॉच के वापस मुँह में भर लेती है..






अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh मेरी प्यास बढ़ा गया ये बहन का लुंड जॉब hi था.. एक बार हिम्मत तो करे मैं ऐसे लुंड के निचे खुद टंगे खोल के लेट जाउंगी uuuuuuuuufffffffffff मुझे और छोड़ना है पर खान जाऊ इस वक़्त…

और इन्ही ख्यालो में अलका अपने छूट में ऊँगली करते हुवे वाशरूम में जा के खुद को साफ़ करती है और दुबारा से सोने की कोशिश करने लग जाती है…

अब चल ते है ऋचा की तरफ

ऋचा विशाल को ढूंढते हुवे अपने कमरे में आ जाती है और उसे वत्सप्प कर के पूछती है खान हो??

इस्पे विशाल का जवाब अगले hi पल आ जाता है

विशाल- कही नहीं दीदी पीछे बचो के साथ खेल रहा हु

ऋचा- कमरे में आ सकते हो?

विशाल- हाँ अभी आया

और विशाल ऋचा के कमरे की और चल देता है तो वही ऋचा भी विशाल का वेट कर रही होती है…

विशाल को अपने सामने देकते hi ऋचा के चेहरे पे समयले आ जाती है…






ऋचा- खान तहत ु मैं कब से तुम्हे धुंध रही हु..?

विशाल- क्यों?

ऋचा- मैं तेरे लिए कुछ लायी हु और ये कह के ऋचा उसे एक बॉक्स देती है

विशाल- ये क्या है?

ऋचा- खोल के देख

विशाल उसे खोलता है तो उसमे एक घडी होती है….

विशाल- इसकी क्या जरूरत थी मेरे पास तो ऑलरेडी है

ऋचा- अरे मुझे तुम्हे कुछ देना था पर समझ नहीं आया क्या दू तो यही ले आयी तुम्हे पसंद नहीं आया तो हम चाक इ बदल सकते है…

विशाल- पसंद तो आया दीदी पर देखो शामे तो शामे मैं पहन रखा हु

ऋचा- अरे हाँ सहित ये तो मेरी गलती hai…tu एक काम कर रेडी हो जा और हम चल के अभी बदल लेंगे

विशाल- अभी??

ऋचा- हाँ अभी जायेंगे तो शाम तक वापस आ पाएंगे..

विशाल- ठीक है चलो

फिर वो दोनों मार्किट के लिए निकल पड़ते है जहां मॉल में जा के ऋचा पहले घडी रेतुर्न करती है फिर वो दोनों वह शॉपिंग करने लग जाते है.. शॉपिंग होते होते अँधेरा हो जाता है और जब दोनों माल के बहार आते है तो देखते है की बहार काफी अँधेरा हो चुक्का था अउ रेज में ड्राइव करने से ऋचा बिलकुल मना कर देती है और वो विशाल को पास में hi अपने फ्रेंड के एक रिसोर्ट में चलने को कहती है… ऑफ सीजन होने के वजह से रिसोर्ट बिलकुल खली था कुछ कपल hi थे

विशाल- वाओ दीदी ये तो बहुत खूबसूरत है

ऋचा- है न मेरे फ्रंड का है हम लोग अक्सर यहां चिल करने आते है..

फिर वो दोनों अपने कमरे में चले जाते है अंदर आ के विशाल फिर से ऋचा की तरफ देखने लग जाता है..

ऋचा- कैसा लगा कर्मा???

विशाल- ये तो बिलकुल फिल्मो में दिखते है वैसा है दीदी

ऋचा- अभी तूने देखा hi खा है अभी तू पूरा कोट्टेगे देख लेगा तो तेरा जाने का मन नहीं होगा यहां से

विशाल- सच्ची///

ऋचा- हाँ चल तुझे पूल दिखती हूँ,,, तू नहायेगा????

विशाल- हाँ लेकिन कपडे??

इस्पे ऋचा सोशल के तरौसे को खींचते हुवे कहती है नंगा नाहा लेना ये देख मैं भी उतर देती हु और इतना कहते hi ऋचा अपने टॉप को ऊपर कर के अपने चुचिओ को आज़ाद कर देती है…






विशाल एक तुक ऋचा के चुचिओ को देखता रहता है उसे ये अचे से पता चल गया था की ऋचा छोड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है और अगर आज वो चुक्का तो ऐसा मौका नहीं मिलने वाला क्युकी आज यहां इनदोनो के अलावा कोई नहीं था…

विशाल- मैं तो चल दूंगा आप देख लो..

ऋचा- ः बेशरम तू रुक मैं कस्टम मंगवाती हूँ और ऋचा अपने कपडे ठीक करती है और स्विमिंग कस्टम लेने चली जाती है…

ऋचा को ऐसे जाते देख विशाल का लुंड तन के सलामी देने लगा था वैसे भी जब से आया है ऋचा उसके हाथ तो आ गयी लेकिन मुँह को नहीं आ रही थी हर बार कुछ न कुछ हो जाता था पर आज…. आज की रात हाथ से जाने देने वाला नहीं था और इस बात का फैसला विशाल ने भी कर लिया था…

ऋचा थोड़े hi देर में हाथ में दो पकट ले के आती है जिसमे दोनों का कस्टम होता है और वो एक विशाल को देती है एंड दूसरा खुद रह लेती है ..






ऋचा अगले hi पल अपने पुरे कपडे उतर के बिलकुल नंगी हो जाती है और अपने द्वारा लाये अपने कस्टम को पहनना सुरु कर देती है.. ऋचा ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ती जिसमे की वो अपने जिस्म की नुमाईश विशाल की आगे न करे वो बात बात पे विशाल की आगे नंगी हो जाती थी कोई और लड़का होता तो अब तक ऋचा को छोड़ चुक्का होता लेकिन विशाल …. विशाल ने ऐसी कोई जल्दबाज़ी नहीं की जो ऋचा को उसके तरफ और झुकता चला गया… ऋचा रेडी हो चुकी थी लेकिन विशाल अभी फोन पे बात कर रहा था सामने उसकी माँ अलका थी जिसे विशाल अभी के हाल बता रहा था,,,

ऋचा- ओहो विशु कितना टाइम लगेगा और????

विशाल- दीदी आप चलो मैं बस अभी कॉल खत्म कर के आया

ऋचा- ok तुम निचे आ जाओ मैं तुम्हारा वेट कर रही हु

विशाल- ठीक है आप चलो मैं आया..

और ऋचा निचे चली जाती है थोड़े देर बाद विशाल का कॉल भी फिनिश हो जाता है और वो भी पूल की तरफ चल देता है जहां ऋचा पहले से पूल के अंदर अपने गरम ताप्ती कामुक बदन को ठंडा कर रही थी…






कॉल ख़तम कर के विशाल जैसे hi निचे पूल के करीब आता है सामने उसकी नज़र उसके दूध से भी सफ़ेद बहन ऋचा पे पड़ती है जो इस वक़्त आधा पानी के अंदर और आधा बदन उसका पानी के बहार था उसका गिला बदन काम रौशनी में भी चमक रहा था मनो सफ़ेद ओस की बुँदे चमक रही हो...

ऋचा की स्विमिंग कस्टम भी कुछ ज्यादा भड़काऊ थी जिसमे उसकी चूचिया समां पाने में मसकत कर रही थी फिर समां नहीं पा रही थी देखा जाये तो उसके निप्पल के अलसा उसकी पूरी चुकी साफ़ झलक रही थी निचे से भी और ऊपर से भी... वो थी hi इतनी बड़ी की इस छोटे से ब्रा की ोकत नहीं की ऋचा की चुचिओ को क़ैद कर ले...

विशाल को निचे आते देख ऋचा उसे हाथ हिला के अपने साइड बुलाती है..

ऋचा- आ गया तू???? हो गयी बात? दन्त रही थी क्या चची??

विशाल- अरे नहीं दीदी माँ कभी नहीं डांटती है वॉक यह रही थी आराम से आना कोई जल्दी नहीं है..

ऋचा- वो तो कहेगी hi उन्हें थोड़ा एक्स्ट्रा टाइम जो मिल जायेगा और हसने लगती है..

विशाल- क्या दीदी आप भी वैसे आज एक्स्ट्रा टाइम तो बड़ी माँ को भी मिलेगा

ऋचा- रागिनी तो एक नंबर की रंडी है वो तुझसे भी चुद जाएगी अगर तूने तरय करा तो

विशाल- क्या कुछ भी बोलते हो आपकी माँ है

ऋचा- हाँ तो क्या जो सच है सो है और फिर वो पूल से पानी विशाल की तरफ मरने लगती है..

विशाल भी ऋचा के पानी का जवाब पानी मार के देने लग जाता है.. और ऐसा करने से ऋचा की ब्रा सरक के उसके कंधे से निचे गिरने लगती hai..jise वहां बैठे बाकि के लोग भी देखने लग जाते है..






ब्रा के स्ट्राप गिरने से ऋचा की गोल्ड चूचिया और उसपे चेरी जैसे निप्पल के दर्शन बाकि लोगो को भी होने लगा था और विशाल की नज़रे भी ऋचा के चुचिओ पे जैम जाती है ऋचा को विशाल के देखने से तो कोई दिक्क्त नहीं थी पर बाकि कोई देखे उसे पसंद नहीं था इसलिए वो जल्दी से अपने स्टारप ठीक करती है और एक दिवे लगा के निचे चली जाती है और विशाल को छुट्टी काट क ेके अंदर hi अंदर दूसरी तरफ भागने लगती है.. इस्पे विशाल भी उसका पीछे करते हुवे ऋचा के पीछे चल देता है…

ऋचा विशाल को अपने पीछे भागते हुवे पूल के उस तरफ ले आती है जहां इस वक़्त कोई नहीं था और रात होने के वजह से वहां अन्डेहरा ता जिस से वहां देख पाना काफी मुश्किल था..

ऋचा बहुत तेज़ी से लगभग भागते हुवे पूल के उस कोने में जाती है और रु जाती है.. उसकी सांसे बहुत तेज़ हो गयी थी उसकी चुचिओ मनो ब्रा में से कभी भी निकल जाने को बेताब है विशाल की नज़र एक बार फिर से उसके चुचिओ पे आ के रुक जाती है…

ऋचा इस बार विशाल के नज़रो को पकड़ते हुवे कहती है…

ऋचा- क्या झांक रहा है तब से ले देख ले अचे से…






और अपने ब्रा को निचे खिसकते हुवे अपनी चुचिओ को आज़ाद कर देती है और ब्रा को विशाल के मुँह पे फेंक देती है… ऋचा के आँखों में कामवासना साफ़ झलक रहा था वो अपने तरफ से हर कोशिश कर रही थी की विशाल पिघले और उसे दबोच ले और आज वो कोई कसार चूर्ण भी नहीं चाहती थी

विशाल एक तक ऋचा के चुचिओ में खो जाता है जिसपे ऋचा खिलखिला के हस्ते हुवे एक बार फिर से पानी के चीते उसके चेहरे पे मरते हुवे पानी में गोटा लगा लेती है विशाल के चेरे पे पानी के चिंता का जाना जैसे रुकता है वो देखता है तो ऋचा गायब हो चुकी थी वो अभी कुछ सोचता या समझता उसकी आंखे खुद बा खुद बंद होने लगती है उसे असीम सुच का आनंद मिलने लगता है






ऋचा विशाल के पंत को एक झटके में निचे सरका देती है और उसके सख्त हो रहे लुंड को मुँह में भर के चूसने लगती है…

विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh

ऋचा एक तक पानी के अंदर से विशाल को देख रही थी ार अपना मुँह आगे पीछे करते हुवे उसके लुंड को चूस रही थीईई आज ऋचा इस बार काफी उत्तेजित हो के लुंड को अंदर बहार कर रही थी मनो आज वो इस लुंड को पूरा निगल जाने के इरादे से आयी हो…






ऋचा को पानी के अंदर गए इतना समय तो हो hi गया था जीतनेय में किसी सामन्य इंसान को साँस लेने के लिए बहार आना पड़े और ऋचा भी बहार आने से पहले विशाल के लुंड को पुरे जड़ो जिहाद से चूस रही थी उसका डा जल्दी hi घुटने लगता है और वो अगले hi पल तेज़ झटके के साथ बहार निका आती है..

ालके रौशनी में रिच अक पानी से ऐसे निकलता और निकलने पे ढेर सारा पानी उसके सर से होते हुवे उसके कंधे चूचिया और छाती से होते हुवे सारा पानी वापस पूल में मिल जाता है ऋचा मनो किसी जलपरी की तरह पानी में चमक रही थी और अपने कारत्व दिखा रही थी…

दोनों की नज़रे एक बार फिर से मिलती है ऋचा तेज़ तेज़ हाफ रही थी और हस्ते हुवे विशाल की तरफ देख रही थी वो अपने दोनों भौंवे (एएब्रो) उठा के मनो विशाल से इशारे में पूछ रही हो कैसा लगा…

इतना हो जाने के बाद विशाल से भी रुक पाना अब मुश्किल था वो तेज़ी से बढ़ते हुवे ऋचा के और करीब जाता है और उसे कमर से पकड़ के उठा के अपने गॉड में बिठा लेता है…






और देखते hi देखते दोनों के गरम सुलगते होंठ आपस में मिल जाते है.. दोनों भाई बहन एक दूसरे के होंठो पे टूट पड़ते है मनो जन्मो से प्यासे हो ऋचा के नाजुक होंठो को विशाल इतने जोर से चुस्त है मनो उसके होंठ से ा बरस टपक पड़ेगा कुछ इस प्रकार लाल हो चला था

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh विशु आराम से मेरे भाई

विशाल- uuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmmmmmmm

और साथ hi वो पंतय के ऊपर से hi ऋचा के छूट को रगड़ रहा था पंतय पूल के पानी से ज्यादा गीली हो चुकी थी या ऋचा के छूट के पानी से ये बता पाना बहुत मुश्किल था…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ughhhhhffffffffffffffffff उतर दे इसे भी

और इतना कह के ऋचा पूल से जम्प कर के ऊपर की और जैसे उठती है विशाल उसके पंतय को निचे खींच के उतर देता है…






ऋचा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशु तूने तो मुझे खुलेआम नंगा कर दिया uuuuuuffffffffff और वो विशाल का लुंड हाथो में भर के मसलने लगती है…

विशाल- आप बहुत हॉट हो दीदी

ऋचा- कुत्ते अब भी दीदी बोल रहा है ऋचा बोल…

विशाल- हस्ते हुवे सॉरी मेरी जान और उसे फिर से किश करने लग जाता है…






ऋचा- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh विशु अउ रेज hi चुम मुझे खा जा मुझे अपनी बहन को आज…

विशाल ऋचा के चुचिओ को पकड़ के मसलते हुवे उसे लगातार चूमे जा रहा था जिसका ऋचा बराबर जवाब दे रही थी…






ऋचा को अब ये खेल पानी के बहार खेलना था जिसमे वो अपने शरीर के आग को अचे से बुझा सके इसलिए वो अगले hi पल पूल से निकल के सामने पड़े सोफे पे बैठ जाती है विशाल भी उसके पीछे पीछे पूल से निकल के ऋचा के करीब आ जाता है..





ऋचा उसे अपने क़रीब आता देख फिर से खिलखिलाने लग जाती है ऋचा अभी उतनी खिलाडी नहीं हुई थी वो तो बस अपने तन के आग के हाथो मजबूर हो के अपने भाई को अपना ये आग उगलता जिस्म परोसने पे मजबूर हो गयी थी…

ऋचा- तेरा तो पूरा खड़ा हो गया है..

विशाल- हाँ मजा भी तो उस से hi मिलेगा न

इस्पे ऋचा शरमाते हुवे उसके तरफ देख के नज़रे झुका के हाँ में इशारा करती है

विशाल अगले hi पल ऋचा का सर दबाते हुवे उसे निचे बिठाता है जिसका इशारा था ऋचा को लुंड चूसने के लिए कहना






ऋचा भी किसी अछि बहन की तरह विशाल का लुंड मुँह में भर के चूसने लगती है…

विशाल- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या मस्त चुस्ती हो आप fffffuuuuuuuucccccckkkkkkkkkkkkkkkkk

अपनी टैरिफ सुन के ऋचा और भी अचे से और सख्त मुँह से विशाल का लुंड चूसना सुरु कर देती है…

ऋचा- कितना मोटा और बड़ा है तेरा uuuuuuuuufffffffffffff मेरे मुँह में नहीं जा रहा है पूरा मुँह दुःख गया

विशाल- मैं बताता हु कैसे जायेगा और इतना कह के विशाल एक झटका मरता है और उसका गधे जैसा कला विकराल लुंड ऋचा के मुँह को फाड़ते हुवे अंदर को घुसना सुरु कर देता है..






ऋचा इस झटके को झेल नहीं पति और उसकी आंखे बहार निकल आती है वो जोर जोर से खस्ने लगती है पर लुंड मुँह में होने के वजह से उसकी आवाज़ उसके गले में डाब के रह गयी thi…richa लाल दबदबये आँखों से विशाल की तरफ देखती है मनो उसे इस झटके से अंदाज़ा लग जाता है आज उसके साथ क्या होने वाला है पर ये तो सुरुवात thi…aaj ऋचा का एक लड़की से औरत बनने की रात थी और उसे औरत कोई और नहीं बल्कि उसका भाई जो उसे 2 साल छोटा है वही बनाने वाला है…





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विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh ऐसे hi चूस साली कुटिया रंडी की औलाद और ऋचा को गली देते हुवे विशाल तेज़ तेज़ झटके ऋचा के मुँह में मरने लगता है…

विशाल के ऐसे बार बार गली देने से ऋचा एक बार को विशाल का लुंड उसके मुँह से निकलते हुवे उसकी तरफ देखती hai…aur बोलती है

रंडी की औलाद तो टब hi है विशु तेरी माँ से बड़ी रैंड इस पुरे देहरादून में कोई नहीं hai…jise मेरा बाप रोज छोड़ता hai…tu आज उसकी बेटी को छोड़ के अपना बदला पूरा कर ले तेरी माँ मेरे बाप की रंडी है तू मुझे अपनी रैंड बना ले और इतना कह के विशाल को धकेल के उस गद्दे पे लिटा देती है और उसके लुंड के साथ साथ उसके ाँद और उसके गांड के छेद को भी चाटने लग जाती है….






विशाल को इतना मजा तो कभी अलका ने भी नहीं दिया था ये अनोखा पल था उसके लिए वो अपनी दोनों पैरो को उठा के ऋचा से अपने बॉल्स चुसवा रहा था की तभी ऋचा उसके बॉल्स को मुँह से निकल के दुबारा कहती है..

ऋचा- बोल न मादरचोद शर्माता क्यों है बनाएगा न मुझे अपनी रंडी छोड़ेगा मुझे???

विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh हाँ मेरी रांड आज साडी रात तुझे छोड़ छोड़ के तेरे छूट का भोसड़ा बना दूंगा बहन की लोदी..

इस्पे ऋचा खुस होते हुवे जोर जोर से उसके लुंड को मसलने और चूसने लग जाती है…






ऋचा मनो विशाल के लुंड के लिए पूरा पागल हो चुकी थी वो उसे चोर्ने को तैयार hi नहीं थी वो मुँह में भर के उसे काट रही थी चूस रही थी कभी बुट्ठिओ से मसल रही थी लेकिन उसे मुँह से निकलने को राजी नहीं थी…

विशाल भी उसके बेक़ाबूपन को देखते हुवे उसके मुँह पे अपने लुंड का दबाव बढ़ने लगता है जिस से की उसका लुंड अगले hi पल पूरा उसके गले तक उतर जाता है…






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ऋचा- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ममममम कितना बड़ा है मेरी छतियो तक पहुंच के हिलोरे मरने लगा है uuuuuuuufffffffffffffffff मर गयी मैं गगगगगगगगगगुग्गगग

विशाल- इतने में मर गयी तू अभी तो तुझे इस्पे पूरी रात उछलना है

ऋचा- तो उछाल न इसी के लिए तो तुझे यहां लायी हु ताकि तसल्ली से छोड़ पाए तू अपनी बहन को…






विशाल- अब और नहीं रहा जाता मेरे से और इतना कह के वो ऋचा को पकड़ के अपनी तरफ खींचता है…. ऋचा भी उसके आँखों में आंखे डेल निडर हो के छोड़ने को तैयार थी और एक बार फिर से दोनों के होंठ आपस में भीड़ जाते है दोनों एक दूसरे को जैसे मनो आज खा जाने को तैयार थे विशाल का लुंड दमदार था तो ऋचा के अंदर की आग ये बता रही थी की वो विशाल की आगे घुटने नहीं टेकने वाली है खैर कौन किसपे हावी होता है ये अगले कुछ घंटो में पता चल hi जायेगा…

तो बे छॉंट.....
 
Update-64-B

उसी शाम रिसोर्ट से दूर घर में

सूरज ढल चुक्का था और शाम होते hi घर की लाइट्स और झालर जला दिए गए थे घर का माहौल पूरी तरह से शादी वाला लगने लगा था शाम के कोई 7-7:30 बजे होंगे, घर की औरते लेडीज संगीत शुरू करने की तयारी में जुट चुकी थी थी. सरे आस पड़ोस और रिश्तेदार घर में आ चुके थे. सभी औरतें एक से बढ़ क ीक बिजली गिराने वाले गेटउप में तैयार हो के आयी थी

उधर हमारी कामदेवी अलका भी आज अपने पुरे अवतार में आने को तैयार थी और जब बिजली गिराने की हो तो उसमे हमारी अलका के आस पास भी कोई नहीं होता.






अलका ने आज लाल रंग की घघरा चोली और साथ में उसका कला मंगलसूत्र और कमर में कमरबंद पहना था…

अलका की चोली इतनी छोटी थी जिसमे उसके मोठे मोती चुचिअ समां पाने में एक डैम से नाकामयाब थी जिसे बहुत मुश्किल से उसमे कास के समेटा गया हो और वो कभी भी फाड़ के बहार आने को तैयार ho…chuchio से नज़र हटाओ तो उसके गोर सपाट पेट के बीचोबीच जो गहरी खाईनुमा नाभि थी वो किसी को भी ललचाने के लिए काफी था उसने लेहना इतना निचे बंधा था की यदि उसके छूट में झांटे होती तो उसकी लाइन दिखने लग जाती अगर नज़र पीछे की और ले जाये तो उसके चूतड़ यानि उसके दोनों कूल्हे आज इतना बड़ा और लचकदार लग रा था मनो उसने अंदर पंतय न पहना हो सिद्ध घाघरा चढ़ा लिया हो…. चोली के छोटे होने से और घाघरा के कमर से भी निचे होने के वजह से उसकी कूल्हों की गहराई साफ़ देखि जा सकती थी…

उसके ऊपर उसकी लम्बी छोटी जो उसके कमर और बैकलेस चोली पे क्या खूब जांच रही थी,,, उसकी लम्बी काली छोटी कभी उसके दाहिने चुत्तड़ को तो कभी बाये चूतड़ों को थपेड़े मार रही थी यूँ कहे की उसके गांड को देख उसके छोटी से भी नहीं रहा गया बिना उसके चूतड़ों को हाथ लगाए….. आज अलका बहार निकलेगी तो मर्दो के खड़े खड़ा लुंड से पानी निकल देगी कुछ यूँ तैयार हो के शीश ेके सामने खुद को निहार रही थी….

अलका जैसे hi तैयार हो जाती है वो कामिनी के कमरे की तरफ बढ़ती है जहां रीमा और निम्मो अभी तैयार हो रही थी और उसके साथ में थी हारक ी सबसे छोटी बेटी सुरभि

सुरभि- वाओ चची आप तो बहुत सूंदर लग रही हो

अलका- थैंक यू बचे वैसे तू भी बड़ी प्यारी लग रही है…

फिर अलका कामिनी की तरफ देखती है अगर अलका आग है तो कामिनी पेट्रोल से काम नहीं है






पिले साड़ी इ कामिनी भी चलती फिरती आग थी उसपे उसका स्लीवलेस रेड ब्लाउज जो पीछे से बिलकुल खुला था..





उसका पीठ इतना चिकना था की तैयार होने के दौरान जो पसीना उसके बदन से निकल रहा था ो सरसरात हुआ सीधे उसके घाघरे के अंदर उसके दोनों कूल्हों से बानी घाटियों के बिच चला जाता था…

अलका – वह कामिनी तू तो आज सब को घायल कर देगी.

कामिनी शरमाते हुए बोली – चल पागल कुछ भी बोलती है आस पास बचे है ये भी नहीं देखती..

इस्पे अलका कामिनी के चूतड़ों पे छुट्टी काटते हुवे कहती है अरे तो सूंदर को सूंदर hi बोलूंगी न मेरी जान.

उसके बाद दोनों रीमा की तरफ चल देते है जहां रीमा और रागिनी पहले से उनका बहार हॉल में वेट कर रही थी..






रीमा





रागिनी

घर की साडी औरते एक से बढ़ क ीक लग रही थी कामिनी और अलका को सामने से आता देख रागिनी हलके गुस्से में कहती है इतना टाइम लगता है क्या सभी मेहमान आ गए है और घर के लोग hi गायब है और बोले भी क्यों न आखिर घर की बड़ी बहु है थोड़ा रॉब तो जमायेगी hi…

खैर यूँही नोक झोक करते हुवे सभी चाट पे पहुंच जाते है जहां घर का इकलौता मर्द राघव साडी तैयारियां देख रहा था और बाकि सभी दूर बैठक में बैठ के अपनी सभा लगाए बैठे थे…

राघव अलका को देख के उसके खूबसूरती में hi खो जाता है अलका उसके नज़रो को पहचानते हुवे पूछती है क्या हुआ क्या देख रहा है ऐसे?

राघवा- चची आप बहुत खूबसूरत और हॉट लग रहे हो…

इस्पे अलका हस्ते हुवे कहती है – ाचा जी आज सरे गाओं वालो को पता लग्न चाहये की शहर से राघव की चची आयी है.

निम्मो – सच्ची चची जी आज तोह सरे गाओं में आपके सामने कोई नहीं है.

अलका शरमाते हुए बोली – चल हट पगली धमाल तो तुम्हारे मशीन के टाइम आ रहा है.

इस्पे निम्मो शर्मा जाती है और कुछ नहीं बोल पति…

इधर सभी बिजी थे और अलका को विशाल नज़र नहीं आ रहा था इस्पे वो विशाल को कॉल करती है और ये वही टाइम था जब विशाल ऋचा के साथ रिसोर्ट में था

फोन पे बात होने के बाद जैसे hi अलका कोप ता चलता है की विशाल आज नहीं आने वाला वो ऋचा के साथ है वो उसे आराम से आने का कह के फोन रख देती है.. ऐसा पहले तो कभी हुआ नहीं था पर जाने क्यों आज विशाल को अपने से दूर देख अलका खुश थी उसे फ़िक्र नहीं थी विशाल की उसके चेहरे पे एक हलकी सी मुस्कान आती है और वो गार्डन हिलाते हुवे बाकि औरतो की तरफ चल देती है…

जैसे hi अलका बहार सब औरतो के बिच आती है तोह सब की नजरें अलका पर hi जैम जाती है. सरे मर्द तोह अलका के पहले से hi आशिक़ थे इधर औरतो में भी अलका को देख फुसफुसाहट सुरु होने लगी थी गाओं की औरतें अपनी ऑंखें फाड् फाड् कर अलका को देख कर कह रही थी, की ये इतनी खूबसूरत औरत भला खान से आ गयी है.

निचे बैठक पे बैठा अरविन्द और उसका दोस्त सुरेंदर दारू पे रहे थे, जैसे hi सुरेंद्र की नजर अलका पर पड़ती है वो दोनों आपस में में बाटे करने लग जाते है.

सुरेंदर – आये हाय देख भाई साली क्या मस्त रंडी लग रही है. भाई इस साली का कोई जुगाड़ कर अब मुझसे और इसकी ख़ूबसूरती नहीं देखि जाती. देख साली गस्ती कैसे गांड मटका मटका के चल रही है.

अरविन्द – सुरेंदर अभी अपनी गरमी बचा कर रख, जब इसकी छूट मरेगा तोह तू उस टाइम ठंडा हो जायेगा. इसलिए इस गरमी को बचा कर रख अभी.

सुरेंदर – भाई मैं क्या करूँ, साली के चुत्तर देखा जरा, चुत्तर देखते hi मेरा लुंड खड़ा हो जाता है.

अरविन्द – कोई नहीं यार आज तेरा भी जुगाड़ करवाता हूँ मैं, तू फ़िक्र न कर मेरे भाई आखिर तूने भी तो कितनी गलतिया जुगाड़ कराई है मेरे लिए यहां तक की अपनी बहन सोनी और बीवी निर्मला को भी तूने मेरे निचे ला दिया फिर मई तेरे लिए तो इतना कर hi सकता हु…

अलका की आंख बहार बैठे अरविन्द और सुरेंदर के साथ लड़ जाती है, और फिर अलका एक कामुक स्माइल देकर अपनी नज़रे निचे कर लेती है. फिर वो अपने दोनों चुत्तर अरविन्द और सुरेंदर के आगे जोर से मटकते हुए आगे चली जाती है. अलका की ये हरकत देख कर सुरेंदर अपना लुंड मसलते हुए बोलै.

सुरेंदर – भाई ये मस्त माल तोह थूकने के लिए एक डैम त्यार बैठी है. इसको देख कर तोह लगता है, ये लुंड लेने के लिए तड़प रहा है. मेरा मन तोह कर रहा है, अभी इसे घोड़ी बना कर इसकी गांड में अपना लुंड घुसा दूँ.

अरविन्द – अरे मेरे भाई इतना उतावलापन ठीक नहीं है जल्द बाज़ी में गड़बड़ हो जायेगा घर का मामला है थोड़ा सब्र कर. सबर का फाल मीठा होता है. इसका जुगाड़ तोह मैं आज रात को hi लगूंगा.

सुरेंदर – ठीक है भाई तू इसको छोड़ और मुझे तू कामिनी की छूट दिला.

अरविन्द – तू पहले अचे से सोच ले तुझे अलका चाइये या कामिनी.

इतने में निम्मो भी त्यार हो कर बहार आ जाती है. जब निम्मो बहार है तोह सब की नजरें उस पर होती है. वो भी अपनी माँ और चची की तरह एक डैम टोफोड़ बन के आयी थी

उसके मोठे और आगे से नोकीले बूब्स पतली सी कमीज में खड़े होते है. उसकी सेक्सी गांड बहोत अछि लग रही थी..

कुछ hi देर में लेडीज संगीत शुरू हो जाता है. और फिर सब अपने अपनी जगह ले लेते है. चाट पे दज चल रहा था.

दूसरे तरफ घर के मर्द अपनी अपनी जोड़ी बना के दारू पि रहे थे.

सुरेंदर – यार अरविन्द आज तोह शराब का नशा hi नहीं हो रहा है/

अरविन्द – भाई तुझे इस शराब से नशा कैसे होगा, तुझे तो छूट की बुखार चढ़ी है तेरा लुंड अब छूट मांग रहा है और उसके आगे तुझ बाकि सरे नशा फीका है

सुरेंदर – हाँ भाई आज लगता है, मस्त गश्ती का जुगाड़ करना hi पड़ेगा.

सरेंडर अब किसी बहाने से घर के अंदर जाने को सोच रहा था जहां वो अपना शिकार को दाना दाल सके ऐसे बैठे बैठे तो बात नहीं बनेगी इसलिए वो झटके से चकने की प्लेट गिरा देता है

अरविन्द- अबे यार सारा चकना फैला दिया अब दारू कैसे पिएंगे..

सरेंडर- ोये सॉरी भाई गलती से गिर गया तू रुक मैं ले के आता hu..aur वो बैठक को पर करते हुवे घर के आँगन में एंट्री करने लग जाता है

सरेंडर कामिनी को देख बोल पड़ता है

सरेंडर- नमस्ते कम्मो दीदी

कामिनी – नमस्ते सरेंडर भाई

सुरेंदर – वो जरा चकना गिर गया थोड़ा वापस से दाल देती तो ाचा होता

कामिनी – क्या सरेंडर भाई आप कोई बहार के हाउ ो किचन लगा हुआ है वह हलवाई से ले लो या खुद hi निकल लो जितना आपको चाइये.

सुरेंदर – कम्मो तू hi निकल के दे दे, कभी अपने इस भाई को भी दाना दाल दिया करो (ये सरेंडर ने दोषरे शब्दों में कहा था…..)

कामिनी – नहीं भाई अपनी बहन का धयान रखते है, या बहन अपने भाई का???

सुरेंदर – पर कम्मो तूने कभी इस गरीब को मौका hi नहीं दिया अपनी सेवा करने का.

कामिनी अपनी ऑंखें निचे कर के बोली – हैट पागल खिन का.

और ये कह कर कामिनी सुरेंदर के प्लेट में चिकन दाल देती है, और सुरेंदर वहां से चला जाता है.

पास कड़ी अलका सरेंडर के दोहरे अर्थ वाले बातो को अचे से समझ रही थी और वो कामिनी से पूछती है

अलका – दीदी ये बाँदा तोह मुझे कुछ ज्यादा hi तेज़ लगता है मुझे और आपको कम्मो कम्मो बोल रहा था जब की ये तो सिर्फ आपके भाई या कमल भाईसाहब hi आपको बोलते है.

कामिनी हस्ते हुवे बोलती है – अरे अलका यहाँ के तो सरे मर्द hi ऐसे hi है. और ये सुरेंदर तोह साला पैदाइसी हरामी है. गाओं की हर औरत और लड़की पर इसकी नजर रहती है.

अलका – फिर तो बच के रहना कम्मो दीदी कही आप पे भी इसने नज़र न जमा राखी हो और इतना कह अलका हसने लग जाती है

कामिनी – कुछ बस में हो तोह वो कुछ करे. साला सारा दिन तोह शराब पिता रहता है, ऊपर से अरविन्द का पक्का दोस्त है तो इसे आने जाने से भी कोई रोक टोक नहीं है ऊपर से दिनेश भाई के नज़रो में बड़ा शरीफ बना फिरता है तो उनका प्रोटेक्शन अलग से मिला है इस हरामखोर को.

इतने में एक औरत आती और वो कामिनी से बोलती है – चलो बेहेन जी संगीत शुरू करते है.

कामिनी अलका की तरफ देख के बोलती है– चल चोर वो सब चाक इ डांस करते है बेहेन चलते है

फिर अलका और कामिनी दोनों चाट पर दज सांग के ऊपर डांस शुरू करते है. अलका अपनी कमर हिला हिला कर जोर से ठुमके लगा रही थी. इतने उसे देखने वालो की भीड़ लग जाती है.

घर के सरे मर्द निचे बैठक से hi दोनों औरतो के डांस का लुत्फ़ उठा रहे थे

सुरेंदर बड़े धयान से कभी अलका को तो कभी कामिनी को देख रहा था, और सब से चोरी चुपके अपने पाजामे में अपना हाथ दाल कर अपना लुंड मसल रहा था. इतने में बाकि की ए रिश्तेदार दिनेश और कमल को खिंच कर नाचने के लिए ले कर जाते है, और उन सबके साथ अरविन्द और सुरेंदर भी साथ में घुस जाते है.






अब वहां काफी ज्यादा भीड़ हो जाती है. दज के आगे अलका पहले से hi अपनी गांड मटका मटका कर नाच रही थी. जब वो वहां सुरेंदर को देखती है, तोह उसके और ज्यादा जोश आ जाता है. सुरेंदर अरविन्द के पीछे नाच रहा था, और अलका अरविन्द के सामने नाच रही थी.

सरेंडर शराब और वासना के नशे में अलका कोई शेयर देने लग जाता है पर अलका उसपे कोई ध्यान नहीं देती बल्कि अपने गांड और चुचिओ को और ज्यादा मटकने लग जाती है इतने में अलका के पीछे राघव आ जाता है और वो अलका से चिपक के डांस करने लग जाता है….






राघव पीछे से भीड़ का फायदा उठाते हुवे अलका के बदन से छेड़छाड़ करना सुरु कर देता है लेकिन अलका के ठुमके आज मनो सरेंडर के लिए hi इशारा हो.. इतने में निम्मो और सुरभि भी अरविन्द और राघव के पास आ जाती है जिस से अलका अब सरेंडर के बिलकुल करीब आ जाती है

अलका अपने सेक्सी अदाओ को दिखते हुए, सुरेंदर के सामने अपनी गांड को हिलती है. फिर वो सुरेंदर की तरफ अपनी गांड कर देती है, फिर वो भीड़ का फयदा उठा कर जान भुज कर नाचते हुए पीछे जाती है. और अपने दोनों चुत्तर सुरेंदर के लुंड पर मरती है.






अलका के चुत्तर जैसे hi सुरेंदर के लुंड पर लगते है, तभी सुरेन्दर का लुंड खड़ा हो जाता है. सुरेंदर से अब और बर्दाश्त नहीं हो प् रहा था, और वो नाचते हुए अलका के एक डैम पास चला जाता है. और मौका देख कर अपना एक हाथ उसके नंगे कमर पे रख देताहै और पीछे से घाघरे के ऊपर से hi अलका के चुत्तड़ो को मसल देता है. डांस करते करते hi अलका की ऑंखें बंद हो जाती है.





दूसरी साइड अरविन्द अपनी बहन कामिनी के आगे पीछे नाच रहा था. अरविन्द मौका का फयदा उठा कर बार बार कामिनी के चुत्तर पर हाथ लगा रहा था. पर कामिनी डांस में इतनी मस्त थी, की उसे इस बात का पता तक नहीं चला.

उधर सुरेंदर अलका को नाचते हुए अपने हाथ उसके जिस्म पर फेर फेर कर उसे गरम कर देता है. फिर सुरेंदर अलका के कान में कुछ बोलता है.

सुरेंदर – भाभी यहाँ से नजरें बचा कर पीछे वाली कोठरी में आ जा, बाकि का डांस वहीं पर करेगें.






ये कह कर सुरेंदर वहां से चला जाता है. अलका अब पूरी गरम हो चुकी थी, उसकी छूट अब सिर्फ और सिर्फ लुंड मांग रही थी. वो इधर उधर देखती है, तोह सरे डांस करने में मस्त होते है. फिर अलका सब से नजरें बचा कर वहां से बहार आ जाती है.

अलका गेट से बहार जाने लगती है,. पूरी गली शादी वाले घर में आयी हुई थी. इसलिए सारा रास्ता एक डैम सुनसान हो रखा था.






कोठरी अलका के घर के दूसरे कोने में hi था जहां इस वक़्त किसी के भी हीओने की कोई सम्भावना नहीं थी. सुरेंदर अलका को देख कर काफी खुश हो जाता है, और उसे कोठरी के अंदर आने का इशारा करता है.

अलका दबे पैरो से कोठरी के अंदर चली जाती है. अलका के अंदर आते hi सुरेंदर अंदर से कुण्डी लगा देता है. और वो वहीं दिवार से अलका को लगा कर उसके होंठो को चूसने लग जाता है.






अलका शाम से hi पूरी गरम थी, इसलिए वो भी सुरेंदर का पूरा साथ दे रही थी. सुरेंदर अलका के होंठो को चूसते हुए, अलका की चुनी को खींच कर निचे जमीन पर गिरा देता है.

फिर सुरेंदर अलका के चुचिओ को मसलने लग जाता है और साथ hi बोलै.

सुरेंदर – भाभी आज तोह आप मेरे ऊपर दारू के नशे की तरह छड़ी हुई है. कसम से आज तोह मैं तेरी चीखें निकल दूंगा.

अलका अपने चुचिओ को मसलवटे हुए बोलती है – आआआआअह्हह्ह्ह्ह ऐसा मत करना सुरेंदर वर्ण बाकिओ को भी पता चल जायेगा अलका कोठरी में चुद रही है आह्हः.






सुरेंदर दोनों चुचिओ को जोर से मसल कर बोलै – भाभी तू वो नहीं है, जिसकी आराम से मरने में मजा है. तू तोह वो बाला है, जिसकी जितनी कस कर मरे उतना hi मजा आता है.

अलका – आह्हः aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh






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फिर सुरेंदर अपने हाथ अलका के बूब्स से हत्ता कर उसके दोनों चुत्तर पर लगा देता है. और उसके दोनों चुत्तर को जोर जोर से मसलने लग जाता है.

अलका – आठ आठ oooooooooouccccccccccccccchhhhhhh आराम से

सुरेंदर – क्या आराम से बेहेन छोड़, साली डांस करते हुए तोह बड़ी जोर जोर से हिला रही थी मेरे और अब क्या हुआ. भाभी सच में तेरी ये मोती गांड बड़ी मस्त है. जब तू मुझे दिखा कर अपनी गांड हिला हिला कर नाच रही थी. कसम से एक अजीब सा नशा हो रहा था मेरे ऊपर. मैं उस टाइम अपने ऊपर कैसे कण्ट्रोल कर रहा था, ये सिर्फ मुझे पता है. आज तोह मैं तेरी चूस चूस कर मरूंगा.

ये सुन कर अलका और ज्यादा गरम हो जाती है. और फिर अलका सुरेंदर को कस कर अपनी बाँहों में भर के बोलती है.






अलका – Aahhhhhhhhhhhh हाँ सरेंडर आज अपनी भाभी की अचे से और कस कर छोड़ ले फिर मौका मिले न मिले…

सुरेंदर अपने दोनों हाथ अलका के दोनों चत्तारो के बिच की लेकर में ले जा कर बोलै – आज तोह तुझे नहीं छोड़ता मैं भाभी. तेरी आज की रात रगीन कर दूंगा मैं. तेरे ये मटकते हुए चत्तारो के बिना अब मुझसे और नहीं रहा जाता. आज सुबह से hi तेरे मोठे मोठे चत्तारो ने मुझे अपना दीवाना बनाया हुआ है.






अलका – अब तोह तेरे हाथ में मेरे दोनों चुत्तर है, करले जो भी तेरा इनके साथ करने का दिल हो रहा हो

फिर सुरेंदर अलका को सीधा अपने बिस्तर पे ले जाता है. वहां वो अलका की चोली का को उतर देता है. फिर सुरेंदर थोड़ा निचे हो कर अलका के दोनों चुचिओ को अपने हाथ में ले कर चूसने लग जाता है. सरेंडर के गीली जुबान अलका के चुचिओ पे पड़ते hi अलका मदहोश होने लग जाती है उसे मजा आने लगता है और मस्ती इ उसकी आंखे बंद होने लग जाती है उसके मुँह से आठ आठ की आवाजें आने लगती है.

सुरेंदर अलका के चुचिओ को चूसते हुवे अलका के निपल्स को अपने दांतो से काट देता है. तभी अलका दर्द से तड़प उठती है और सीसकरते हुवे बोलती है..

अलका – अह्ह्ह आठ आये आराम से बहनचोद निशान पद जायेगा .






पर सुरेंदर अलका की एक नहीं सुनता और बार बारे अलका के निपल्स को अपने दांतो से कट्टा रहता है. जिससे अलका और भी पागल हो जाती है. अलका की छूट से निचे बुरी तरह से पानी निकलने लग जाता है. उसकी पंतय पूरी गीली हो जाती है…

फिर सुरेंदर अलका के चुचिओ को चूसते हुए hi अपने हाथ निचे ले कर जाता है. और अपने दोनों हाथ निचे ले जा कर अलका का घाघरा और पंतय एक साथ वो निचे खींच के उतर देता है.






अलका के मुँह से आठ निकलती है, और वो सुरेंदर से लिपट जाती है. सुरेंदर का लुंड पूरा खड़ा हो जाता है. सुरेंदर अपने दोनों हाथ अलका के चत्तारो पर रखता है, और जोर से उसे ऊपर उठा कर बीएड पर सीधा लम्बा लेता देता है.

फिर सुरेंदर बीएड के किनारे खड़ा हो कर अलका के दोनों टंगे ऊपर उठा कर अपने कंधे पर रख लेता है.

फिर वो अपना लम्बा मोटा लुंड बहार निकल देता है. अलका अलका का इतना लम्बा लुंड देख कर हैरान रह जाती है. फिर सुरेंदर अलका की छूट पर अपना लुंड मसलने लग जाता है.










और धीरे धीरे ढाका मर कर अपना थोड़ा सा लुंड अलका की छूट में दाल देता है.

सरेंडर और अलका वासना के आग में पूरी तरह झुलस रहे थे और दोनों एक दूसरे में समां जाने को बिलकुल तैयार थे की तभी बहार गेट पे कोई जोर जोर से कुण्डी बजने लगता hai…alka का पूरा मूड किरकिरा ह जाता है और वो कोठरी के अंदर से hi भागते हुवे सीडीओ वाले के रस्ते अपने घर में घुस जाती है…

इधर सरेंडर बड़े बेमन से गली देते हुवे गेट खोलने जाता है

सरेंडर- पता नहीं किसकी माँ चूड़ी थी अछि खासी गस्ती हाथ से निकल गयी बहनचोद और ऐसे hi गली बकते हुवे जब वो गेट खोलता है तो सामने कोई और नहीं बल्कि कामिनी थी और उसके साथ सार्विन्द था…

कामिनी- सरेंडर भाई आपने मुझे बुलाया था???

सरेंडर जो अभी गुस्से में आग बबूला हुआ बैठा था सामने कामिनी को देख के ठंडा होने लग जाता है.. कोई बात नहीं अलका न सही कामिनी hi सही और वो कामिनी का हाथ पकड़ के अंदर खींच लेता है और अरविन्द उसे वहां चोर के घर की तरफ चल देता है…

तो बे छॉंट....
 
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