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- Dec 5, 2013
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अपडेट- 57 नयी सुबह
अब तक आपने पढ़ा की कैसे अपने जेठ के जिद की आगे झुक जाती है जिसका खामियाज़ा किसी अनजान से चुद के उसे चुकाना पड़ता hai..alka बेशक उस दिन रात में अपने कमरे में आ कर सो गयी थी लेकिन उसका दिमाग जग रहा था सुबह होते hi उसके दिमाग में रात का पूरा सन फ्लैशबैक होने लगता है रत को हवस और खुमारी में गांड उछाल उछाल के चुदाई तो करवा रही थी लेकिन उसे अब ये बात परेशां करने लगी थी आखिर वो सख्स था कौन???
इस से पहले की हम ऋचा और विशाल की तरफ जाये उस से पहले यहां एक बार अलका के कमरे का हाल देख लेना सही रहेगा....
सुबह जब अलका जागती है तो विशाल कमरे में नहीं था.. कमरे में सिर्फ अलका थी और कुछ था तो उसके मन में चल रहे ढेर सरे सवाल जिसकी सिकन उसके चेहरे पर साफ़ दिख रही थी लेकिन उस से भी ज्यादा कुछ और चीज था जो उस सवाल को भी धुंधला कर दे रहा था ो था रात में अलका चिकनी गिल्ली छूट में में भुट्टे ने जो अपनी खुरदरी दानो के साथ तेज़ घर्षण मचते हुवे जो जगह बनायीं थी उसका एहसास अलका को अब भी हो रहा था उसके ऊपर उस अजनबी सख्स का लुंड जो अलका के छूट को कुरेद कर रख दिया था aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh कैसा अजीब लुंड था उस इंसान का अभी तक छूट में महसूस हो रहा है काश एक बार पता चल जाये मैं खुद जेक उसके लुंड पे बैठ जाऊ hayyyyyyyyyyyyyyyyyeeeeee मेरी छूट फिर से कुलबुलाने लगी uuuuuuufffffffffff इतना कहते hi अलका कमरे को लॉक करती है और ेके क कर के अपने सरे कपडे उतर के पूरी नंगी हो जाती है…
अभी रात की hi तो बात है जिसमे उसे दो लुंड और एक भुट्टा मिला था लेकिन उसकी आग है जो जितनी चुदाई हो उतनी hi बहादक्ति है…

अलका एक बार फिर से अपने छूट और उसके आग के नशे में बहकने लगती है उसका मन सुबह सुबह hi चुदाई करने का होने लगता है लेकिन ऐसे में यह उसे कौन छोड़ेगा क्यूंकि अलका के हिसाब से तो उसका बीटा विशाल तो कही और गांड मरवा रहा है
अलका- ह्ह्ह्हह्हह्हआआयीयईएएए मुझे पता होता की सुबह मेरी छूट उस बट को इतना मिस करेगी तो में उसे उठा hi लती.. उसके हरे क डेन ने मेरे छूट को ऐसा रगड़ा है जैसा मजा किसी लुंड को ले के भी नहीं मिला….

और ऐसे hi बड़बड़ाती हुई अलका अपने छूट को मसलने रगड़ने लगती है… पर उसके वासना और उसके जलते छूट की आग उसपे इतनी हावी हो गयी थी की वो कब अपने छूट को रगड़ते मसलते हुवे अपनी एक के बाद एक करते हुवे तीन उंगलियों को अपने नाजुक छूट में दाल के अंदर बहार करने लगती है..

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh शांत हो जा निगोड़ी तेरे इन्ही चिनार हरकतों के वजह से बीटा भांजा जेठ सब छोड़ चुक्का है और तो और कल पता नहीं कौन मादरचोद मेरी छूट में पताका फोड़ दिया जिसकी जलन अभ तक मेरे छूट में हो रही है… पर य्ये जलन भी कितनी मजेदार है… haaaaaaaaaaaayyyyyyyyyeeeeeeeeeeee विशु तू खान माँ छुड़वाने चला गया बहनचोद यह तेरे सोये हुवे में कोई तेरी माँ छोड़ गया और बी तू सुबह फिर से गायब हो गया उउउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़
आज अलका को उसकी उंगलिया भी संतुष्ट नहीं कर पा रही थी कुछ ऐसी आग लगी थी उसके छूट में या सच कहु तो उस सख्स ने लगा दिया था… अलका मजबूरन कमरे में अपनी निगाह दौड़ने लगती है कुछ न मिलने पर वो सरे ड्रावर चेक करने लगती है कुछ धुंध रही थी वो पर क्या ये पता नहीं फिर वो अपना एक बैग खोलती है और उसमे कुछ ऐसा था जिसे देख के वो शांत हो जाती है मनो कोई खजान मिल गया हो…
वो कुछ और नहीं बल्कि एक डिलडो था जो अलका इमरजेंसी में अपने आप को शांत करने के लिए रखती थी
वो उस डिलडो को फ़ौरन मुँह में भर के गिला करने लगती है

लेकिन आज अलका के छूट के साथ लगता है उसके मुँह की प्यास भी बढ़ गयी थी और बढे भी क्यों न रोज एक नया लुंड और उसके पानी के स्वाद चखने की लत जो लग गयी थी इस चिनार को.. वो डिलडो को चूसते चूसते उसे वही बने टेबल पे खड़ा करती है और और दुबारा से चूसने लगता है चूसते चूसते उसकी हवस इतनी हावी हो गयी थी की वो पूरा डिलडो निगल जाती है

जब डिलडो उसे मुँह से निकलता है तब उसके साइज को देख के पता चलता है ये कोई साधारण डिलडो तो नहीं था ये अलका के गले को चोरो ये तो इतना बड़ा था की पूरा लेने पे उसके चटीओ में बह रहे दूध को भी मैथ दिया होगा… आज अलका के पे किसी का दबाव नहीं था जैसे हर रोज विशाल जबरदस्ती पूरा लुंड पेल के उसके डैम घुटने तक लुंड को मुँह में दबाये रखता था लेकिन आज अलका की हवस की आग इतनी थी की वो खुद hi इस नकली लुंड क पूरा निगल के तब तक अंदर hi रखती है जब तक इसकी सांसे तेज़ खांसी में नहीं बदल जाती…..
लुंड के बहार आते hi उसके मुँह से ढेर सारा लार और आँखों से आंसू एक साथ बहने लगते है पर इस रंडी के चेहरे पे दर्द से ज्यादा खुसी वाली मुस्कान थी मनो कह रही हो एक बार aur…aur फिर एक बार फिर से उस नकली लुंड को अलका अपने मुँह में घुसा लेती है…

ये लुंड दुबारा से उसके गले में अपनी जगह बनाते हुवे वापस से उसकी चटीओ पे दस्तक देने लगता है अलका भी अपने गले के उस भाग की अपने मुठी में पकड़ के मसलने लगती है जहां उसे लुंड महसूस हो रहा था.. अलका इस वक़्त लुंड के िये इतना पागल हो गयी थी की इस वक़्त कोई न भी कहता तो भी सईद उसके लुंड पे बैठ के भरपूर चुदवाती फिर चाहे अंजाम जो भी होता…
काफी देर से लुंड को गले में अंदर बहार करने से अलका की प्यास गले से होते हुवे छूट में उतर गयी थी जिसे वो वही पड़े कुर्सी पे बैठ के अपने छूट पे उस लुंड को रगड़ने लगती है….

Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या दिन आ गए है बहार सभी मुझे छोड़ने के सपने देख रहे है और मैं यहां इस नकली लुंड से अपनी प्यास बुझा रही हु ….. ffffffffffffuuuuuuuuuccccccccckkkkkkkkkk फ़क में कोई मुझे छोड़ो आ के मैं मन नहीं करुँगी मुझे रंडी की तरह रगड़ रगड़ के छोड़ो भोसड़ा बना दो इस छूट का फाड़ दो… आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दिनेश मादरचोद ये सब तेरी वजह से हुआ है अब देख तेरी बीवी को भी ऐसे hi दुसरो के लोदो से छुडवाउंगी वर्ण मेरा नाम भी अलका नहीं और सुरुवात करेगा मेरा बीटा विशाल ………. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhh fuuuuuccccccccccckkkkkkkkk
छूट पे रगड़े से भी अलका का छूट खान शांत होने का नाम ले रहा था उसने फिर दुबारा से उस लुंड को वही टेबल पे खड़ा किया और अपनी छूट उसपे दबाते हुवे बैठने लग जाती है….

ये नकली लुंड hi सही पर इतना बड़ा और मोटा था की किसी साधारण औरत के बस की बात नहीं इसे अपनी छूट में उतरना अलका जो वासना के नशे में बिलकुल पागल ह चुकी थी अपने चूतड़ों को फैलते हुवे अपनी छूट उस के अंदर उस लुंड को पूरा निगल जाती है… लुंड के घुसते hi उसके मुँह से चीख निकल पड़ती है जिसे वो जल्दी से अपने हाथ से दबा लेती है…
Aaaaaaaaaaaaajjjhhhhhhhhhhhhhhhhhh फ़क आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह और फिर जोर जोर से कूदते हुवे अपनी चुदाई खुद करा सुरु कर डटी है…. आआह्ह्ह्ह जेठ जी देखो आपके लगाए आग को शांत करने के लिए मुझे कैसे नकली लुंड पे कूदना पद रहा है …….. ाप्प भी ऐसे hi छोड़ना मुझे बिलकुल चिर देना मेरे छूट को……. छोड़ोगे न जेठ जी अपनी अलका को जब तक हु छोड़ छोड़ के फाड़ देना मेरे इस निगोड़ी छूट को,….. हवस और वासना में अंधी औरत को नहीं पता वो क्या के बड़बड़ा रही थी… काफी देर से इस तरह से टेबल पे कूदते कूदते उसके टैंगो में दर्द होने लगा था इसलिए वो उसे उठा के वापस बीएड पे जाती है….
और इस बार अलका उसे अपनी गांड में डालने लगती है….

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ जब से विशाल ने मेरी गांड मरी है इसमें भी खुजली बढ़ गयी है एक दिन समय निकल के अचे से गांड मरवाउंगी उस से अअअअअजज्जजज के लिए इस नकली लुंड से hi काम चलना होगा…….
नहीं नहीं अब उस भड़वे विशाल को हाथ भी नहीं लगाने दूंगी आज जब मुझे जरुआत है पता नहीं खा अपनी माँ छुड़वा रहा hai….ab ये नकली लुंड hi मेरा सहारा है… और मुझे कौनसा चढ़ने वाले लोदो की कमी है आने दो उस मादरचोद को उसकी खबर लेती हूँ छोड़ना तो चोरो हाथ भी नहीं लगाने दूंगी बहुत है अलका को छोड़ने वाले इस गाओं…..….

उउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ hhhhayyyyyeeeeeeeeeee पर जो मजा मेरा बीटा देता है वो कोई और खा दे पता है…. साला इसी का फायदा उठा रहा है वो रंडी की olad…..alka नशे में कुछ भी बक रही थी .. अभी उसके गांड के खुरचन से उसे शांति मिली भी नहीं थी की एक बार फिर से उसके छूट इ हलचल होने लगती है.. अलका फिर से बडबडी है…..
ऊऊफफफफफफफ क्या करू मैं इसका एक छेद को शांत करो तो दूसरा भड़क जाता है और फिर इतना कहते hi डिलडो जो की एक वाइब्रेटर भी था उसे प्लग कर के अपनी छूट पे वापस चलने लगती है…. अलका अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी इसलिए वो वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देती है और हूत के कोने कोने में ग्राइंडिंग करने लग जाती है

आह्ह्ह्ह कैसा घर है जहां एक औरत लुंड के लिए तड़प रही है और सरे मर्द पता नहीं खान अपनी माँ छुड़वा रहे है… ये नहीं की आ कर इस रंडी की चुदाई करे और अपना गुलाम बना ले….
और फिर देखते hi देखते अलका ाकि छूट पानी चोर्ने लगती hai….aur अलका फौरन अपने हाथ को छूट पे ले जाती है और उस से निकल रहे उसके काम रास को उंगलिओ में समेत के अपने मुँह में दाल लेती है…

Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh कितना सुकून देता है इस पानी का टास्ते लेकिन विशाल के लुंड के पानी के टास्ते की आगे सब का पानी फीका है.. पर वो रात वाले बन्दे का पानी भी बहुत स्वादिष्ट था काश एक बार और चखने को मिल जाये पहले पता होता की उसका पानी इतना स्वादिष्ट होगा तो उसे जमीं पे नहीं बल्कि मुँह में निकलने को कहती खैर कोई नहीं अगली बार मुँह में hi निकलवाउंगी…

हाय अलका ये क्या बोल रही है क्या फिर से उस से छुड़वाने का तो नहीं सोच रही है… रुक जा रंडी अपने कदम यही रोक ले पता नहीं कौन था जो छोड़ गया और तू उसपर गुस्सा होने की जगह फिर से उसके लुंड के लिए लार टपकने लगी है…..
छूट से रास बहा देने के बाद अलका तेज तेज हफ्ते हुवे सुस्ताने लगती है और वैसे hi नंगी गांड के सहारे बीएड पे बैठ के अपने सांसो के काबू होने तक छूट को शांत करने लगती है...


पर सवाल ये है की ये छूट और उसकी आग शांत होगी या ये बस आने वाले तूफान से पहले की शांति मात्रा है...
अब तक आपने पढ़ा की कैसे अपने जेठ के जिद की आगे झुक जाती है जिसका खामियाज़ा किसी अनजान से चुद के उसे चुकाना पड़ता hai..alka बेशक उस दिन रात में अपने कमरे में आ कर सो गयी थी लेकिन उसका दिमाग जग रहा था सुबह होते hi उसके दिमाग में रात का पूरा सन फ्लैशबैक होने लगता है रत को हवस और खुमारी में गांड उछाल उछाल के चुदाई तो करवा रही थी लेकिन उसे अब ये बात परेशां करने लगी थी आखिर वो सख्स था कौन???
इस से पहले की हम ऋचा और विशाल की तरफ जाये उस से पहले यहां एक बार अलका के कमरे का हाल देख लेना सही रहेगा....
सुबह जब अलका जागती है तो विशाल कमरे में नहीं था.. कमरे में सिर्फ अलका थी और कुछ था तो उसके मन में चल रहे ढेर सरे सवाल जिसकी सिकन उसके चेहरे पर साफ़ दिख रही थी लेकिन उस से भी ज्यादा कुछ और चीज था जो उस सवाल को भी धुंधला कर दे रहा था ो था रात में अलका चिकनी गिल्ली छूट में में भुट्टे ने जो अपनी खुरदरी दानो के साथ तेज़ घर्षण मचते हुवे जो जगह बनायीं थी उसका एहसास अलका को अब भी हो रहा था उसके ऊपर उस अजनबी सख्स का लुंड जो अलका के छूट को कुरेद कर रख दिया था aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh कैसा अजीब लुंड था उस इंसान का अभी तक छूट में महसूस हो रहा है काश एक बार पता चल जाये मैं खुद जेक उसके लुंड पे बैठ जाऊ hayyyyyyyyyyyyyyyyyeeeeee मेरी छूट फिर से कुलबुलाने लगी uuuuuuufffffffffff इतना कहते hi अलका कमरे को लॉक करती है और ेके क कर के अपने सरे कपडे उतर के पूरी नंगी हो जाती है…
अभी रात की hi तो बात है जिसमे उसे दो लुंड और एक भुट्टा मिला था लेकिन उसकी आग है जो जितनी चुदाई हो उतनी hi बहादक्ति है…

अलका एक बार फिर से अपने छूट और उसके आग के नशे में बहकने लगती है उसका मन सुबह सुबह hi चुदाई करने का होने लगता है लेकिन ऐसे में यह उसे कौन छोड़ेगा क्यूंकि अलका के हिसाब से तो उसका बीटा विशाल तो कही और गांड मरवा रहा है
अलका- ह्ह्ह्हह्हह्हआआयीयईएएए मुझे पता होता की सुबह मेरी छूट उस बट को इतना मिस करेगी तो में उसे उठा hi लती.. उसके हरे क डेन ने मेरे छूट को ऐसा रगड़ा है जैसा मजा किसी लुंड को ले के भी नहीं मिला….

और ऐसे hi बड़बड़ाती हुई अलका अपने छूट को मसलने रगड़ने लगती है… पर उसके वासना और उसके जलते छूट की आग उसपे इतनी हावी हो गयी थी की वो कब अपने छूट को रगड़ते मसलते हुवे अपनी एक के बाद एक करते हुवे तीन उंगलियों को अपने नाजुक छूट में दाल के अंदर बहार करने लगती है..

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh शांत हो जा निगोड़ी तेरे इन्ही चिनार हरकतों के वजह से बीटा भांजा जेठ सब छोड़ चुक्का है और तो और कल पता नहीं कौन मादरचोद मेरी छूट में पताका फोड़ दिया जिसकी जलन अभ तक मेरे छूट में हो रही है… पर य्ये जलन भी कितनी मजेदार है… haaaaaaaaaaaayyyyyyyyyeeeeeeeeeeee विशु तू खान माँ छुड़वाने चला गया बहनचोद यह तेरे सोये हुवे में कोई तेरी माँ छोड़ गया और बी तू सुबह फिर से गायब हो गया उउउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़
आज अलका को उसकी उंगलिया भी संतुष्ट नहीं कर पा रही थी कुछ ऐसी आग लगी थी उसके छूट में या सच कहु तो उस सख्स ने लगा दिया था… अलका मजबूरन कमरे में अपनी निगाह दौड़ने लगती है कुछ न मिलने पर वो सरे ड्रावर चेक करने लगती है कुछ धुंध रही थी वो पर क्या ये पता नहीं फिर वो अपना एक बैग खोलती है और उसमे कुछ ऐसा था जिसे देख के वो शांत हो जाती है मनो कोई खजान मिल गया हो…
वो कुछ और नहीं बल्कि एक डिलडो था जो अलका इमरजेंसी में अपने आप को शांत करने के लिए रखती थी
वो उस डिलडो को फ़ौरन मुँह में भर के गिला करने लगती है

लेकिन आज अलका के छूट के साथ लगता है उसके मुँह की प्यास भी बढ़ गयी थी और बढे भी क्यों न रोज एक नया लुंड और उसके पानी के स्वाद चखने की लत जो लग गयी थी इस चिनार को.. वो डिलडो को चूसते चूसते उसे वही बने टेबल पे खड़ा करती है और और दुबारा से चूसने लगता है चूसते चूसते उसकी हवस इतनी हावी हो गयी थी की वो पूरा डिलडो निगल जाती है

जब डिलडो उसे मुँह से निकलता है तब उसके साइज को देख के पता चलता है ये कोई साधारण डिलडो तो नहीं था ये अलका के गले को चोरो ये तो इतना बड़ा था की पूरा लेने पे उसके चटीओ में बह रहे दूध को भी मैथ दिया होगा… आज अलका के पे किसी का दबाव नहीं था जैसे हर रोज विशाल जबरदस्ती पूरा लुंड पेल के उसके डैम घुटने तक लुंड को मुँह में दबाये रखता था लेकिन आज अलका की हवस की आग इतनी थी की वो खुद hi इस नकली लुंड क पूरा निगल के तब तक अंदर hi रखती है जब तक इसकी सांसे तेज़ खांसी में नहीं बदल जाती…..
लुंड के बहार आते hi उसके मुँह से ढेर सारा लार और आँखों से आंसू एक साथ बहने लगते है पर इस रंडी के चेहरे पे दर्द से ज्यादा खुसी वाली मुस्कान थी मनो कह रही हो एक बार aur…aur फिर एक बार फिर से उस नकली लुंड को अलका अपने मुँह में घुसा लेती है…

ये लुंड दुबारा से उसके गले में अपनी जगह बनाते हुवे वापस से उसकी चटीओ पे दस्तक देने लगता है अलका भी अपने गले के उस भाग की अपने मुठी में पकड़ के मसलने लगती है जहां उसे लुंड महसूस हो रहा था.. अलका इस वक़्त लुंड के िये इतना पागल हो गयी थी की इस वक़्त कोई न भी कहता तो भी सईद उसके लुंड पे बैठ के भरपूर चुदवाती फिर चाहे अंजाम जो भी होता…
काफी देर से लुंड को गले में अंदर बहार करने से अलका की प्यास गले से होते हुवे छूट में उतर गयी थी जिसे वो वही पड़े कुर्सी पे बैठ के अपने छूट पे उस लुंड को रगड़ने लगती है….

Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या दिन आ गए है बहार सभी मुझे छोड़ने के सपने देख रहे है और मैं यहां इस नकली लुंड से अपनी प्यास बुझा रही हु ….. ffffffffffffuuuuuuuuuccccccccckkkkkkkkkk फ़क में कोई मुझे छोड़ो आ के मैं मन नहीं करुँगी मुझे रंडी की तरह रगड़ रगड़ के छोड़ो भोसड़ा बना दो इस छूट का फाड़ दो… आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दिनेश मादरचोद ये सब तेरी वजह से हुआ है अब देख तेरी बीवी को भी ऐसे hi दुसरो के लोदो से छुडवाउंगी वर्ण मेरा नाम भी अलका नहीं और सुरुवात करेगा मेरा बीटा विशाल ………. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhh fuuuuuccccccccccckkkkkkkkk
छूट पे रगड़े से भी अलका का छूट खान शांत होने का नाम ले रहा था उसने फिर दुबारा से उस लुंड को वही टेबल पे खड़ा किया और अपनी छूट उसपे दबाते हुवे बैठने लग जाती है….

ये नकली लुंड hi सही पर इतना बड़ा और मोटा था की किसी साधारण औरत के बस की बात नहीं इसे अपनी छूट में उतरना अलका जो वासना के नशे में बिलकुल पागल ह चुकी थी अपने चूतड़ों को फैलते हुवे अपनी छूट उस के अंदर उस लुंड को पूरा निगल जाती है… लुंड के घुसते hi उसके मुँह से चीख निकल पड़ती है जिसे वो जल्दी से अपने हाथ से दबा लेती है…
Aaaaaaaaaaaaajjjhhhhhhhhhhhhhhhhhh फ़क आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह और फिर जोर जोर से कूदते हुवे अपनी चुदाई खुद करा सुरु कर डटी है…. आआह्ह्ह्ह जेठ जी देखो आपके लगाए आग को शांत करने के लिए मुझे कैसे नकली लुंड पे कूदना पद रहा है …….. ाप्प भी ऐसे hi छोड़ना मुझे बिलकुल चिर देना मेरे छूट को……. छोड़ोगे न जेठ जी अपनी अलका को जब तक हु छोड़ छोड़ के फाड़ देना मेरे इस निगोड़ी छूट को,….. हवस और वासना में अंधी औरत को नहीं पता वो क्या के बड़बड़ा रही थी… काफी देर से इस तरह से टेबल पे कूदते कूदते उसके टैंगो में दर्द होने लगा था इसलिए वो उसे उठा के वापस बीएड पे जाती है….
और इस बार अलका उसे अपनी गांड में डालने लगती है….

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ जब से विशाल ने मेरी गांड मरी है इसमें भी खुजली बढ़ गयी है एक दिन समय निकल के अचे से गांड मरवाउंगी उस से अअअअअजज्जजज के लिए इस नकली लुंड से hi काम चलना होगा…….
नहीं नहीं अब उस भड़वे विशाल को हाथ भी नहीं लगाने दूंगी आज जब मुझे जरुआत है पता नहीं खा अपनी माँ छुड़वा रहा hai….ab ये नकली लुंड hi मेरा सहारा है… और मुझे कौनसा चढ़ने वाले लोदो की कमी है आने दो उस मादरचोद को उसकी खबर लेती हूँ छोड़ना तो चोरो हाथ भी नहीं लगाने दूंगी बहुत है अलका को छोड़ने वाले इस गाओं…..….

उउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ hhhhayyyyyeeeeeeeeeee पर जो मजा मेरा बीटा देता है वो कोई और खा दे पता है…. साला इसी का फायदा उठा रहा है वो रंडी की olad…..alka नशे में कुछ भी बक रही थी .. अभी उसके गांड के खुरचन से उसे शांति मिली भी नहीं थी की एक बार फिर से उसके छूट इ हलचल होने लगती है.. अलका फिर से बडबडी है…..
ऊऊफफफफफफफ क्या करू मैं इसका एक छेद को शांत करो तो दूसरा भड़क जाता है और फिर इतना कहते hi डिलडो जो की एक वाइब्रेटर भी था उसे प्लग कर के अपनी छूट पे वापस चलने लगती है…. अलका अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी इसलिए वो वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देती है और हूत के कोने कोने में ग्राइंडिंग करने लग जाती है

आह्ह्ह्ह कैसा घर है जहां एक औरत लुंड के लिए तड़प रही है और सरे मर्द पता नहीं खान अपनी माँ छुड़वा रहे है… ये नहीं की आ कर इस रंडी की चुदाई करे और अपना गुलाम बना ले….
और फिर देखते hi देखते अलका ाकि छूट पानी चोर्ने लगती hai….aur अलका फौरन अपने हाथ को छूट पे ले जाती है और उस से निकल रहे उसके काम रास को उंगलिओ में समेत के अपने मुँह में दाल लेती है…

Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh कितना सुकून देता है इस पानी का टास्ते लेकिन विशाल के लुंड के पानी के टास्ते की आगे सब का पानी फीका है.. पर वो रात वाले बन्दे का पानी भी बहुत स्वादिष्ट था काश एक बार और चखने को मिल जाये पहले पता होता की उसका पानी इतना स्वादिष्ट होगा तो उसे जमीं पे नहीं बल्कि मुँह में निकलने को कहती खैर कोई नहीं अगली बार मुँह में hi निकलवाउंगी…

हाय अलका ये क्या बोल रही है क्या फिर से उस से छुड़वाने का तो नहीं सोच रही है… रुक जा रंडी अपने कदम यही रोक ले पता नहीं कौन था जो छोड़ गया और तू उसपर गुस्सा होने की जगह फिर से उसके लुंड के लिए लार टपकने लगी है…..
छूट से रास बहा देने के बाद अलका तेज तेज हफ्ते हुवे सुस्ताने लगती है और वैसे hi नंगी गांड के सहारे बीएड पे बैठ के अपने सांसो के काबू होने तक छूट को शांत करने लगती है...


पर सवाल ये है की ये छूट और उसकी आग शांत होगी या ये बस आने वाले तूफान से पहले की शांति मात्रा है...























































































































