Incest Kamuk Alka - Page 13 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

अपडेट- 57 नयी सुबह

अब तक आपने पढ़ा की कैसे अपने जेठ के जिद की आगे झुक जाती है जिसका खामियाज़ा किसी अनजान से चुद के उसे चुकाना पड़ता hai..alka बेशक उस दिन रात में अपने कमरे में आ कर सो गयी थी लेकिन उसका दिमाग जग रहा था सुबह होते hi उसके दिमाग में रात का पूरा सन फ्लैशबैक होने लगता है रत को हवस और खुमारी में गांड उछाल उछाल के चुदाई तो करवा रही थी लेकिन उसे अब ये बात परेशां करने लगी थी आखिर वो सख्स था कौन???

इस से पहले की हम ऋचा और विशाल की तरफ जाये उस से पहले यहां एक बार अलका के कमरे का हाल देख लेना सही रहेगा....

सुबह जब अलका जागती है तो विशाल कमरे में नहीं था.. कमरे में सिर्फ अलका थी और कुछ था तो उसके मन में चल रहे ढेर सरे सवाल जिसकी सिकन उसके चेहरे पर साफ़ दिख रही थी लेकिन उस से भी ज्यादा कुछ और चीज था जो उस सवाल को भी धुंधला कर दे रहा था ो था रात में अलका चिकनी गिल्ली छूट में में भुट्टे ने जो अपनी खुरदरी दानो के साथ तेज़ घर्षण मचते हुवे जो जगह बनायीं थी उसका एहसास अलका को अब भी हो रहा था उसके ऊपर उस अजनबी सख्स का लुंड जो अलका के छूट को कुरेद कर रख दिया था aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh कैसा अजीब लुंड था उस इंसान का अभी तक छूट में महसूस हो रहा है काश एक बार पता चल जाये मैं खुद जेक उसके लुंड पे बैठ जाऊ hayyyyyyyyyyyyyyyyyeeeeee मेरी छूट फिर से कुलबुलाने लगी uuuuuuufffffffffff इतना कहते hi अलका कमरे को लॉक करती है और ेके क कर के अपने सरे कपडे उतर के पूरी नंगी हो जाती है…

अभी रात की hi तो बात है जिसमे उसे दो लुंड और एक भुट्टा मिला था लेकिन उसकी आग है जो जितनी चुदाई हो उतनी hi बहादक्ति है…






अलका एक बार फिर से अपने छूट और उसके आग के नशे में बहकने लगती है उसका मन सुबह सुबह hi चुदाई करने का होने लगता है लेकिन ऐसे में यह उसे कौन छोड़ेगा क्यूंकि अलका के हिसाब से तो उसका बीटा विशाल तो कही और गांड मरवा रहा है

अलका- ह्ह्ह्हह्हह्हआआयीयईएएए मुझे पता होता की सुबह मेरी छूट उस बट को इतना मिस करेगी तो में उसे उठा hi लती.. उसके हरे क डेन ने मेरे छूट को ऐसा रगड़ा है जैसा मजा किसी लुंड को ले के भी नहीं मिला….






और ऐसे hi बड़बड़ाती हुई अलका अपने छूट को मसलने रगड़ने लगती है… पर उसके वासना और उसके जलते छूट की आग उसपे इतनी हावी हो गयी थी की वो कब अपने छूट को रगड़ते मसलते हुवे अपनी एक के बाद एक करते हुवे तीन उंगलियों को अपने नाजुक छूट में दाल के अंदर बहार करने लगती है..





अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh शांत हो जा निगोड़ी तेरे इन्ही चिनार हरकतों के वजह से बीटा भांजा जेठ सब छोड़ चुक्का है और तो और कल पता नहीं कौन मादरचोद मेरी छूट में पताका फोड़ दिया जिसकी जलन अभ तक मेरे छूट में हो रही है… पर य्ये जलन भी कितनी मजेदार है… haaaaaaaaaaaayyyyyyyyyeeeeeeeeeeee विशु तू खान माँ छुड़वाने चला गया बहनचोद यह तेरे सोये हुवे में कोई तेरी माँ छोड़ गया और बी तू सुबह फिर से गायब हो गया उउउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

आज अलका को उसकी उंगलिया भी संतुष्ट नहीं कर पा रही थी कुछ ऐसी आग लगी थी उसके छूट में या सच कहु तो उस सख्स ने लगा दिया था… अलका मजबूरन कमरे में अपनी निगाह दौड़ने लगती है कुछ न मिलने पर वो सरे ड्रावर चेक करने लगती है कुछ धुंध रही थी वो पर क्या ये पता नहीं फिर वो अपना एक बैग खोलती है और उसमे कुछ ऐसा था जिसे देख के वो शांत हो जाती है मनो कोई खजान मिल गया हो…

वो कुछ और नहीं बल्कि एक डिलडो था जो अलका इमरजेंसी में अपने आप को शांत करने के लिए रखती थी

वो उस डिलडो को फ़ौरन मुँह में भर के गिला करने लगती है






लेकिन आज अलका के छूट के साथ लगता है उसके मुँह की प्यास भी बढ़ गयी थी और बढे भी क्यों न रोज एक नया लुंड और उसके पानी के स्वाद चखने की लत जो लग गयी थी इस चिनार को.. वो डिलडो को चूसते चूसते उसे वही बने टेबल पे खड़ा करती है और और दुबारा से चूसने लगता है चूसते चूसते उसकी हवस इतनी हावी हो गयी थी की वो पूरा डिलडो निगल जाती है





जब डिलडो उसे मुँह से निकलता है तब उसके साइज को देख के पता चलता है ये कोई साधारण डिलडो तो नहीं था ये अलका के गले को चोरो ये तो इतना बड़ा था की पूरा लेने पे उसके चटीओ में बह रहे दूध को भी मैथ दिया होगा… आज अलका के पे किसी का दबाव नहीं था जैसे हर रोज विशाल जबरदस्ती पूरा लुंड पेल के उसके डैम घुटने तक लुंड को मुँह में दबाये रखता था लेकिन आज अलका की हवस की आग इतनी थी की वो खुद hi इस नकली लुंड क पूरा निगल के तब तक अंदर hi रखती है जब तक इसकी सांसे तेज़ खांसी में नहीं बदल जाती…..

लुंड के बहार आते hi उसके मुँह से ढेर सारा लार और आँखों से आंसू एक साथ बहने लगते है पर इस रंडी के चेहरे पे दर्द से ज्यादा खुसी वाली मुस्कान थी मनो कह रही हो एक बार aur…aur फिर एक बार फिर से उस नकली लुंड को अलका अपने मुँह में घुसा लेती है…






ये लुंड दुबारा से उसके गले में अपनी जगह बनाते हुवे वापस से उसकी चटीओ पे दस्तक देने लगता है अलका भी अपने गले के उस भाग की अपने मुठी में पकड़ के मसलने लगती है जहां उसे लुंड महसूस हो रहा था.. अलका इस वक़्त लुंड के िये इतना पागल हो गयी थी की इस वक़्त कोई न भी कहता तो भी सईद उसके लुंड पे बैठ के भरपूर चुदवाती फिर चाहे अंजाम जो भी होता…

काफी देर से लुंड को गले में अंदर बहार करने से अलका की प्यास गले से होते हुवे छूट में उतर गयी थी जिसे वो वही पड़े कुर्सी पे बैठ के अपने छूट पे उस लुंड को रगड़ने लगती है….






Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या दिन आ गए है बहार सभी मुझे छोड़ने के सपने देख रहे है और मैं यहां इस नकली लुंड से अपनी प्यास बुझा रही हु ….. ffffffffffffuuuuuuuuuccccccccckkkkkkkkkk फ़क में कोई मुझे छोड़ो आ के मैं मन नहीं करुँगी मुझे रंडी की तरह रगड़ रगड़ के छोड़ो भोसड़ा बना दो इस छूट का फाड़ दो… आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दिनेश मादरचोद ये सब तेरी वजह से हुआ है अब देख तेरी बीवी को भी ऐसे hi दुसरो के लोदो से छुडवाउंगी वर्ण मेरा नाम भी अलका नहीं और सुरुवात करेगा मेरा बीटा विशाल ………. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhh fuuuuuccccccccccckkkkkkkkk

छूट पे रगड़े से भी अलका का छूट खान शांत होने का नाम ले रहा था उसने फिर दुबारा से उस लुंड को वही टेबल पे खड़ा किया और अपनी छूट उसपे दबाते हुवे बैठने लग जाती है….






ये नकली लुंड hi सही पर इतना बड़ा और मोटा था की किसी साधारण औरत के बस की बात नहीं इसे अपनी छूट में उतरना अलका जो वासना के नशे में बिलकुल पागल ह चुकी थी अपने चूतड़ों को फैलते हुवे अपनी छूट उस के अंदर उस लुंड को पूरा निगल जाती है… लुंड के घुसते hi उसके मुँह से चीख निकल पड़ती है जिसे वो जल्दी से अपने हाथ से दबा लेती है…

Aaaaaaaaaaaaajjjhhhhhhhhhhhhhhhhhh फ़क आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह और फिर जोर जोर से कूदते हुवे अपनी चुदाई खुद करा सुरु कर डटी है…. आआह्ह्ह्ह जेठ जी देखो आपके लगाए आग को शांत करने के लिए मुझे कैसे नकली लुंड पे कूदना पद रहा है …….. ाप्प भी ऐसे hi छोड़ना मुझे बिलकुल चिर देना मेरे छूट को……. छोड़ोगे न जेठ जी अपनी अलका को जब तक हु छोड़ छोड़ के फाड़ देना मेरे इस निगोड़ी छूट को,….. हवस और वासना में अंधी औरत को नहीं पता वो क्या के बड़बड़ा रही थी… काफी देर से इस तरह से टेबल पे कूदते कूदते उसके टैंगो में दर्द होने लगा था इसलिए वो उसे उठा के वापस बीएड पे जाती है….

और इस बार अलका उसे अपनी गांड में डालने लगती है….






उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ जब से विशाल ने मेरी गांड मरी है इसमें भी खुजली बढ़ गयी है एक दिन समय निकल के अचे से गांड मरवाउंगी उस से अअअअअजज्जजज के लिए इस नकली लुंड से hi काम चलना होगा…….

नहीं नहीं अब उस भड़वे विशाल को हाथ भी नहीं लगाने दूंगी आज जब मुझे जरुआत है पता नहीं खा अपनी माँ छुड़वा रहा hai….ab ये नकली लुंड hi मेरा सहारा है… और मुझे कौनसा चढ़ने वाले लोदो की कमी है आने दो उस मादरचोद को उसकी खबर लेती हूँ छोड़ना तो चोरो हाथ भी नहीं लगाने दूंगी बहुत है अलका को छोड़ने वाले इस गाओं…..….






उउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ hhhhayyyyyeeeeeeeeeee पर जो मजा मेरा बीटा देता है वो कोई और खा दे पता है…. साला इसी का फायदा उठा रहा है वो रंडी की olad…..alka नशे में कुछ भी बक रही थी .. अभी उसके गांड के खुरचन से उसे शांति मिली भी नहीं थी की एक बार फिर से उसके छूट इ हलचल होने लगती है.. अलका फिर से बडबडी है…..

ऊऊफफफफफफफ क्या करू मैं इसका एक छेद को शांत करो तो दूसरा भड़क जाता है और फिर इतना कहते hi डिलडो जो की एक वाइब्रेटर भी था उसे प्लग कर के अपनी छूट पे वापस चलने लगती है…. अलका अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी इसलिए वो वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देती है और हूत के कोने कोने में ग्राइंडिंग करने लग जाती है






आह्ह्ह्ह कैसा घर है जहां एक औरत लुंड के लिए तड़प रही है और सरे मर्द पता नहीं खान अपनी माँ छुड़वा रहे है… ये नहीं की आ कर इस रंडी की चुदाई करे और अपना गुलाम बना ले….

और फिर देखते hi देखते अलका ाकि छूट पानी चोर्ने लगती hai….aur अलका फौरन अपने हाथ को छूट पे ले जाती है और उस से निकल रहे उसके काम रास को उंगलिओ में समेत के अपने मुँह में दाल लेती है…






Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh कितना सुकून देता है इस पानी का टास्ते लेकिन विशाल के लुंड के पानी के टास्ते की आगे सब का पानी फीका है.. पर वो रात वाले बन्दे का पानी भी बहुत स्वादिष्ट था काश एक बार और चखने को मिल जाये पहले पता होता की उसका पानी इतना स्वादिष्ट होगा तो उसे जमीं पे नहीं बल्कि मुँह में निकलने को कहती खैर कोई नहीं अगली बार मुँह में hi निकलवाउंगी…





हाय अलका ये क्या बोल रही है क्या फिर से उस से छुड़वाने का तो नहीं सोच रही है… रुक जा रंडी अपने कदम यही रोक ले पता नहीं कौन था जो छोड़ गया और तू उसपर गुस्सा होने की जगह फिर से उसके लुंड के लिए लार टपकने लगी है…..

छूट से रास बहा देने के बाद अलका तेज तेज हफ्ते हुवे सुस्ताने लगती है और वैसे hi नंगी गांड के सहारे बीएड पे बैठ के अपने सांसो के काबू होने तक छूट को शांत करने लगती है...








पर सवाल ये है की ये छूट और उसकी आग शांत होगी या ये बस आने वाले तूफान से पहले की शांति मात्रा है...
 
अपडेट-58 ऋचा का वर्कआउट

अब तक आप ने पढ़ा की कैसे अलका रात को अपने जेठ दिनेश के लुंड को चूस के सहनत करती है जिसका फायदा उठा के कोई अनजान सख्स उसे छोड़ देता है और उस चुदाई से अलका की प्यास बुझने की जगह और बढ़ जाती है जिसका नतीजा ये हुआ की उसे सुबह सुबह एक नकली रबर के लुंड से खुद को शांत करना पड़ा… लेकिन अगर आप को अलका के जिस्म की गर्मी बेचैन कर रही है तो अभी आपको अपने धड़कनो पे काबू करने की जरुरत है क्यूंकि यही इस घर में अभी बहुत सरे खेल होने वाले है और अगर आप अलका के जिस्म की गर्मी से पागल होने लगे है तो ऋचा से मिलना तो बाकि hi है जो कही दूर खुले आसमान में अपने भाई को अपने नंगे जिस्म का दर्शन करवा के उकसा रही है और उसका इरादा विशाल को तब तक उकसाने का है जब तक विशाल उसे छोड़ न दे…..


तो अब हम अलका को यही थड़ा आराम देते है और चलते है ऋचा और विशाल की तरफ…

पार्क से निकलने के बाद दोनों भाई बहन में कोई भी बातचीत नहीं होती दोनों hi शर्मिंदा थे लेकिन जिस राह पे वो चल पड़े थे उसमे शर्मिंदगी जैसी कोई चीज नहीं होती अगर छूट में लुंड चाइये तो बशराम बनना hi पड़ता है फिर क्या भाई और क्या बाप पर इस बात को समझने में अभी दोनों को समय लगने वाला tha….ghar पहुंच के ऋचा नाश्ता करती है और जल्दी से रेडी हो के कॉलेज के लिए निकल पड़ती है…

इधर घर में नाश्ते के टेबल पर सभी नाश्ता जरूर कर रहे थे लेकिन अलका की नज़रे अब भी उस सख्स को तलाश रही थी जिसने रात को उसके छूट में अपना लुंड डाला था बेशक अलका ने उसे देखा नहीं था लेकिन उसका लुंड जरूर लिया था और चुदाई के दौरान जो बदन को चुने से चूमने से या उस सख्स के हाथो के पकड़ को देखते हुवे अंदाज़ा लगाया जा सकता था उसमे एक hi सख्स फिट बैठ रहा था लेकिन ये कैसे हो सकता है नहीं नहीं ये मेरा भरम भी तो हो सकता hai…..lekin जॉब hi हो वो है तो घर का hi जोई sadashya….aur इसी कश्मकश में अलका का आज मन खाने में भी नहीं लग रहा था ो जल्दी hi टेबल से उठ के अपने नन्द के साथ शादी की प्लानिंग करने लग जाती है…

अगर कॉलेज में चले तो आज इस हुस्न की पारी ऋचा का मन कॉलेज में बिलकुल भी नहीं लग रहा था उसकी सहेली प्रिय उसे बार बार टोकती भी है पर वो उसे हर बार अनसुना कर देती है…








ये है प्रिय ऋचा की सहेली खूबसूरती में ये बी किसी से काम नहीं और एक नंबर की चूड़ाकड.. कभी समय आने पे इसके भी चर्चे होंगे अभी के लिए इतना जान ले की ऋचा की सहेली प्रिय है…

आज ऋचा ब्लैक टशरत पहनी थी जिसमे उसकी चुचिअ बड़े hi मुश्कि से क़ैद थी मनो उसमे उनका डैम घुट रहा हो…






यही वजह है जिस के कारन पूरा कॉलेज पूरा सहारा उसके पीछे लार टपकता है और उसकी माँ चिढ़ती है… ऋचा का मन आज पढाई में बिलकुल भी नहीं लग रहा था उसे बस घर जाना था और वो काम जो उसने आधे में चोर दिया है उसे जल्दी से जल्दी पूरा करना tha…lekin अगर वो अभी घर जाती तो उसकी माँ रागिनी उसे किसी काम में लगा देगी और वो रागिनी नहीं चाहती थी इसलिए जैसे तैसे वो दिन कटती है और साथ hi ये प्लान भी बनती है की कैसे विशाल के और करीब जाया जाये जिस से वो खुद लुंड उसकी छूट में दाल के उसकी चुदाई कर दे…

खैर जैसे बहुत hi मुश्किल से ऋचा बचे खुचे टाइम को काट रही hi और इधर विशाल का भी यही हाल था जो बार बार रिच अक hi इंतजार कर रहा tha…alka से भी और इंतजार कर पाना मुश्किल हो रहा था इसलिए आज वो समय से पहले hi घर के लिए निकल पड़ती है…

घर आ के वो सबसे पहले विशाल का hi पूछती है और फिर अपने कमरे में चेंज करने चली जाती है…






अभी उसने पंत उतरा hi था की विशाल उसके कमरे में पहुंच जाता है..

विशाल- दीदी तुम ओह्ह सूर्य सूर्य मैं थोड़ी देर बाद आता hun…(wo ऋचा कैग एंड के दर्शन हो जाते है अनजाने में hi जिसे देखते hi इस गांड के दीवाने विशाल के मुँह में फिर से पानी आने लगता है)






वैसे तो ऋचा को गुस्सा होना चाइये था पर वो गुस्सा होने की जगह मुस्कुरा पड़ती है और खुद से अपने चूतड़ों को पंजो में कास के बोल पड़ती है ऊऊओह्ह्ह्हह विशाल ये तेरे लिए hi तो है बुद्धू….

ऋचा को हमेशा विशाल एक डरपोक और सिद्ध सा लड़का लगता ै क्यूंकि उसके हिसाब से अब तक सरे चल वही चल रही थी जिसे विशाल जैसा गधा लड़का नहीं समझ पा रहा था यही अगर विशाल की जगह कोई और लड़का होता और ऋचा जैसी लड़की उसे इतने हिंट देती तो वो कब का ऋचा की टंगे उठा के तो कभी घोड़ी बना के उसे छोड़ चुक्का होता… और यही डार्ट है की कही विशाल डार्क इ मरे दुबारा आने से डरे नहीं इसलिए देर होने से पहले वो खुद सिर्फ पंतय में hi विशाल के कमरे की तरफ उसके पीछे पीछे भाग पड़ती है






विशाल जा के अपने कमरे में बैठा होता है की तभी वहां ऋचा आ जाती है…. और इस से पहले की कोई और ा जाये ऋचा दूर को बंद कर देती है…

ऋचा को ऐसे हालत में देख विशाल का गाला सूखने लगता है वो कभी उसकी उन्नत चुचिओ को तो कभी गोर चिकने काळा जांघो को घूरे जा रहा था ऋचा की पंतय भी इतनी कोटि और टाइट थी की उसकी छूट की दोनों धारिया उभर के बहार को निकली हुई थी मनो विशाल से कह रही हो आप और चूसे मुझे…

ऋचा- तुझे तमीज़ नहीं है लड़की के कमरे में नोक कर के जाये

विशाल- सॉरी दीदी आगे से ख्याल रखूँगा

ऋचा- सॉरी के बचे और जब अंदर आ hi गया था तो भाग क्यों आया बुद्धू चगे hi तो कर रही थी दो मिंट रुक नहीं सकता था मैं बाथरूम में चली जाती या तेरे सामने भी कर सकती हूँ छोटा भाई है तू मेरा

विशाल- ok दीदी आगे से ख्याल रखूँगा

ऋचा- क्या नोक का या वही रुक के मुझे चेंज करते देखने का…

उसकी इस बात पे विषला है देता है और कहता है दोनों

ऋचा- बहुत चालक बन रहे हो//// ाचा सुन आज मेरी फ्रेंड नहीं आ पायेगी तो तुम मेरे साथ गयम चलना मुझे सपोर्ट देने के लिए अगर फ्री है तो..

विशाल- हाँ हाँ क्यों नहीं यहां भला मेरा काम hi क्या है??? वैसे भी सुबह से बोर हो रहा हु…

ऋचा- हाँ इस घर में है भी तो बोर इंसान सिवाए मेरे हहहहए ाचा एक काम और करना जब तक तू यह है जब भी बोर हो मेरे पास आ जाया करना हम गप्पे मरेंगे गेम खेलेंगे या जो तुझे ाचा लगे… आखिर तेरा ख्याल मुझे hi तो रखना है…

विशाल- जी दीदी (विशाल इतना भोला बना हुआ था जैसे उसे कुछ आता hi नहीं पर ऋचा को क्या पता वो कितना बड़ा मादरचोद है)

ऋचा- ाचा अभी मैं जाती हूँ वर्ण रागिनी चिल्लाने लगेगी तू मुझे शाम को मिलना मेरे कमरे पे hi रहूंगी फिर हम साथ में चैलेंज

विशाल- ok दीदी

अब ऋचा वापस अपने कमरे में आ की आगे की प्लानिंग करने लगती है और समय गुजरने का वेट bhi…waise तो आज दोनों का hi समय नहीं काट रहा था फिर भी देखते hi देखते शाम के 6 बजे गए और विशाल ऋचा के कमरे में एंटर करता है…






ऋचा जैसे hi दरवाजे के खुलने की आवाज़ सुनती है वो देखती है सामने कोई और नहीं बल्कि विशाल है और जब विशाल ऋचा के कमरे के अंदर आता है तो देखता है ऋचा इस वक़्त एक ब्लैक टैंक टॉप और काली पंतय पहने बीएड पे कुछ कर रही थी…. काळा पंतय और टॉप में उसका गोरा बदन अलग hi चमक रहा था विशाल की नज़रे उस से हटती hi नहीं की ऋचा टपक से पकह पड़ती है…

ऋचा- ऐसे क्या देखा रहा है???

विशाल- कुछ नहीं दीदी एक बात पुछु अगर आप ब्यूरेन ा मनो

ऋचा- हाँ पूछ बुरा क्यों मानूंगी तू तो मेरा प्यारा भाई है…

विशाल- आप हमेशा ऐसे hi रहते हो ब्रा पंतय में

विशाल ने इतने मासूमियत से पूछा था की ऋचा की हसी छूट जाती hai…aur वो हस्ते हुवे कहती है

ऋचा- नहीं ये सिर्फ तुझे दिखने के लिए पहनती हूँ कही तू बोर नाह ो जाये हहहह कहे तो इसे भी उतर दू?? और इतना कहते हुवे ऋचा अपनी ब्रा को खिसका देती है जिस से की उसके मोठे मोठे बूब्स तुरंत बहार को उछलने लग जाते है….






विशाल- (उतर दे बहनचोद वर्ण एक दिन मैं तो उतर hi दूंगा) नहीं नहीं मेरा वो मतलब नहीं था.. चले गयम…..?

ऋचा- हाँ रुक में गयम वाले ऑउटफिट तो पहन lu…Itna कह के ऋचा कप्बोर्ड से अपने कपडे निकल के बाथरूम की तरफ जाने लगती है की जाने उसे क्या सूझता है ार वो वही रुक जाती है और बिना एक सेक् लगाए वो विशाल के सामने hi बिलकुल नंगी कड़ी हो जाती है….






ऋचा विशाल के लुंड को तड़पने का एक भी मौका नहीं चोरटी है विशाल के सामने नंगा हो के चाहती तो कपडे बदल लेती चुपचाप लेकिन इसके रणदीपाने को तो देखो वो विशाल को आवाज़ लगते हुवे पूछती है कौन से ड्रेस पह्नु विशु… ऋचा को इस बात की बिलकुल भी खबर नहीं थी की वॉक इस आग को हवा दे रही है… ये वो आग है जो अलका जैसी औरत को रुला देता है जिसने सारिका की वो हल किया था की वो कई दिन तक चल नहीं पायी थी फिर ऋचा तो उनसब की आगे अभी अभूत बची थी अभी अभी जवानी में कदम hi रख रही है…

विशाल- दीदी आप यही सुरु हो गए…..??? बाथरूम में भी चेंज कर सकते थे…

ऋचा- ओहो बुद्धू बाथरूम में लाइट खराब है तू जल्दी से बता वाइट पह्नु की ब्लाक…

विशाल- वाइट पहन लो सही रहेगा..

ऋचा- ok






और फिर ऋचा बड़े आराम से अपने जिस्म की नुमाईस करते हुवे कपडे पहन लेती है और पूछती है कैसी लग रही हूँ

विशाल- एक डैम हॉट एंड

ऋचा- एंड??

विशाल- जाने दो दीदी

ऋचा- नहीं पहले बोल एंड क्या??

विशाल- हॉट एंड सेक्सी

ऋचा- नालायक अपनी दीदी को सेक्सी बोलता है गधे… रुक चीची को बताती हंट ु कैसे कैसे वर्ड्स उसे करता है मेरे लिए…

विशाल- अरे नहीं दीदी सॉरी सॉरी आगे से नहीं करूँगा

इस्पे ऋचा हसने लगती है और कहती है अरे बुद्धू मज़ाक कर रही थी इतना दर क्यों जाता है… अब चल जल्दी वर्ण रागिनी के बक बक सुरु हो जायेंगे

फिर दोनों कमरे से बहार निकल पड़ते है गयम के लिए अभी दोनों कमरे से निकले hi थे की विशल ऋचा से रुकने को कहता है ये कह कर की उसका मोबाइल ऋचा के कमरे में hi छूट गया है//…

ऋचा- ok जल्दी ले आ मैं रूकती हूँ

विशाल भाग के कमरे में जाता है पर मोबाइल लेने नहीं बल्कि बाथरूम का लाइट चक करने जो की बिलकुल सही था यानि ऋचा झूट बोली थी…. इस्पे विशाल के चेहरे पे एक कुटिल मुस्कान आ जाता है और वो भी अपना एक देव चलने की सोच के अपनी चड्डी उतर के वही ऋचा के बाथरूम में रख देता hai…apne मक़सद को अंजाम देने के बाद इधर वो वापस ऋचा के पास चला जाता है और दोनों गयम के लिए निकल पड़ते है…..

कहानी में आगे बढ़ने से पहले यहां मैं आपको एक बार इस घर के नक्से के बारे में थोड़ा बता दू…


ये घर बहुत बड़ा है कामिनी की शादी के बाद वो ससुराल न जा के hi रह गयी थी और अपने भाई अरविन्द अशोक और दिनेश के साथ उसने भी यही घर बना के रहने लगी थी क्युकी उसका बड़ा भाई दिनेश अपनी इकलौती बहन कामिनी को अपने से दूर नहीं जाने देना चाहता था…

तो ये घर इतना बड़ा है की यहां साडी जरूरते घर के अंदर hi है स्विमिंग पूल गयम हर लमऱे में बाथ टब और भी बहुत सी चीजे मैं जरूरत के हिसाब से बताता जाऊंगा अभी के लिए ये जानना जरुरी है की जिस गयम में ये जा रहे है वो इनका अपना पर्सनल है जहां ऋचा अपनी सहेलिओ के साथ और राघव अपने दोस्तों के सतह गयम करते है और जब ऋचा जाती है तब राघव नहीं जाता यानि दोनों का टाइम बनता हुआ है….


तो ए.बी.ए. वापस आगे चलते है कहानी पे…..

गयम पहुंच के ऋचा अपने अगले देव की तयारी करने लगती है वॉक ओने में पड़े स्विस बॉल को उठा के लती है और उसपे पेट के बल लेट जाती है जिस से की उसकी गारी बड़ी और भरी भरकम गांड विशाल की तरफ हो जाती है








विशाल के मूह में पानी आने लगता है uuuuuuffffffffffff क्या गांड है और पंत के ऊपर से hi लुंड मसलने लगता है और देखते hi देखते फिर लुंड उसका बहार आ जाता है जिसे वो मसलना अब भी जारी रखता है… इधर ऋचा अगर अपने गांड और छूट या बूब्स दिखने का मौका नहीं चोरटी तो विशाल भी जब चांस मिले लुंड के दर्शन करा देता था जिस से ऋचा की प्यास भी बढ़ जाती है….

काफी देर तक अपनी गांड दिखने के बाद ऋचा मुद के सामने की तरफ होती है और उसकी नज़रे विशाल के लुंड पे जाती है जहां उसे दीखता है की विशाल का लुंड उसके गांड को देख देख के तन गया है.. पर ऋचा यहां खान रुकने वाली थी… इस जगह में उसके और विशाल के सिवा कोई नहीं था और इस पल का पूरा फायदा उठा लेना चाहती थी…

अब अगले स्टेप में ऋचा बॉल के ऊपर लेट ेके अपनी दोनों टंगे फैला के स्ट्रेचिंग करने लग जाती है…






ऋचा- आआआअह्हह्ह्ह्हह देख रहा है विशु कितनी म्हणत करनी पड़ती है मेन्टेन रखने के लिए और रागिनी सारा दिन चिक चिक करते रहती है हीहीह

विशाल- हाँ दीदी सही खा तुमने

ऋचा विशाल के सामने hi अपनी दोनों टंगे पूरा खोल के हवा में उठा देती है जिस से उसकी छूट की लाइन्स जो पंतय पे बन रही थी वो विशाल के लिए साफ दिखने लगा था…

ऋचा- ऐसे क्या देख रहा है तेरे लिए hi है

विशाल- क्या मतलब दीदी

ऋचा- अरे बड़ुहु ऐसे क्या देखा रहा है मतलब आ के हेल्प कर मेरी स्ट्रेचिंग में देख नहीं रहा है आज कोई नहीं आया है…

इस्पे विशाल उठने लगता है की तभी ऋचा बोल पड़ती है रुक जब बुलाऊ तब आना अभी नहीं.

विशाल- जी दीदी ठीक है जब लगे बता देना

ऐसे hi थोड़ी टंगे खोल के अपनी जांघो के बिच उस लकीर को दिखने के बाद जिस लकीर का पूरा देहरादून दीवाना था ऋचा विशाल पे छीलते हुवे कहती है विशाल के बच्चे….

इधर विशाल जो भूल गया था की वो ऋचा के सामने है या जान बुझ कर मासूम बन के अपने लुंड को मसल रहा था ये तो वही जाने.. एक डैम से हड़बड़ाए हुवे कहता है..

विशाल- जी दीदी दूँ सपोर्ट??

ऋचा और नहीं तो किस लिए आया है जल्दी आ और मेरे पैरो को फैला दे…






विशाल अगले hi पल ऋचा के कहे अनुसार उसके पेअर फ़ैलाने लगता है और देखते hi देखते रीचे के हर बार और और सुनते hi और ज्यादा फैला देता hai….vishal जो ऋचा के सर के जस्ट पीछे hi खड़ा था ऐसे में ऋचा क एक बहुत तेज़ गंध उसके नको में जाती है जब वो हल्का सा सर गंध की तरफ घुटी है तो देखती है की विशाल का लुंड उसके पंत से बहार लटका हुआ था और ये लुंड बहुत बड़ा था उसके पापा और उसके बॉयफ्रेंड से भी हलाकि उसने अपने पापा दिनेश का लुंड कभी लिया तो नहीं है अभी तक लेकिन ऐसे कई मोके आये है जहां उसने दिनेश के लुंड का दरसाहन किया था पर वो मौका क्यात है उसपे बात फिर कभी करेंगे….





ऋचा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh की कराह के साथ विशाल के लोडे की तरफ देखती….

विशाल- क्या हुआ दीदी काम करू ज्यादा हो गया???

ऋचा- नही रे तू लगा रह ाचा लग रहा है…

थोड़ी देर स्ट्रेचिंग के बाद ऋचा कहती है…

ये बहुत हो गया अब दंड पेलते है (हलाकि वो जनरलली स्क्वाट बोलती है पर आज अनहि)






मैं इन डंबल्स के साथ उठक बैठक करती हंट ु पीछे से सपोर्ट देना ok और इतना कह के ऋचा विषा से बिलकुल चिपक के यानि उसके लुंड से उसका गांड रगड़ कहने लगता है और ऋचा स्क्वाट लगाने लगती है…

ऋचा- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह विशु बहुत मजा आ रहा है तेरे साथ गयम करने में तू मेरे ट्रेनर से भी मस्त है ऐसे hi सपोर्ट देता रह और थोड़ा सात जा मेरे पीछे क्यों जा रहा है और इतना कह इ ऋचा उसके लुंड से और ज्यादा चिपक जाती है… उसके हर उठक बैठक से विशाल के लुंड का भी उठक बैठक होने लगा था,…..

उसके बाद ऋचा फिर से पोज़ बनाते हुवे विशाल का सपोर्ट मांगती है..






इस बार ऋचा घुटने के बल बैठ के अपनी गांड हवा में उठा लेती है और हाथो को पूरा खोलते हुवे सामने की तरफ फैला देती है और पीछे से विशाल उसके पीठ को सिद्ध रखने में उसकी हेल्प करता है.. ये सरे पोज़ आज ऋचा ने वैसे hi चुन चंक इ कर रही थी जिसमे हर बार विशाल को उसके पीछे आना पद रहा था और उसके गांड को विशाल के लुंड का चुभन महसूस हो सके…





विशाल भी अब बार बार ारीचा कैग एंड और छूट से निकल रहे भाप से उसका लुंड अकड़ने लगा था हुए चड्डी तो उसने पहले hi उतर दी थी उसे बस पंड को साइड करात है और उसका लुंड बहार निकल जाता और उसने वही किया भी उसने अपने पंत से लुंड निकल के ऋचा के पंत के ऊपर से hi उसके गांड में ठूसने लग जाता है… लुंड इतना विकराल था की ऋचा की कोमल छेद उसके लिए बहुत छोटी थी….

अब यहां गयम का माहौल काफी गरम होने लगा था एक्सरसाइज तो काफी पीछे छूट चुक्का था यहां बस जिस्म की घिसाई काल रही थी जिसकी गर्माहट से ऋचा की छूट रिसने लगी थी….

ऋचा- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh विशु….

विशाल- हाँ दीदी

ऋचा- कुछ हो रहा है

विशाल- अपने लुंड का दबाव बढ़ाते हुवे… क्या दीदी..

ऋचा- लगता है मेरे पंत में चीटिया घुस गयी है

विशाल- चीटिया पंत में नहीं तेरे छूट में रेंग रही है….

ऋचा- कुछ खा तूने??

विशाल- जी मैंने खा की मैं देख लू अगर आपको सही लगे…

ऋचा- हाँ हाँ क्यों नहीं देख न ….

और फिर विशाल को मौका मिला जाता है उसके छूट और गांड के साथ कहने का.. और वो पंत के ऊपर से hi ऋचा के छूट को मसलने लगता है…






Vishal-Yhan रेंग रही है दीदी???

ऋचा- ahaaaaaaaaaahhhhhhhhh हाँ वही पर अब साइड में भी खुजली होने लगी hai…aur इतना कह की बी ऋचा भी अपनी पीछे की तरफ ज्यादा निकल लेती है और तब तक अपने गांड को पीछे धकेलती जाती है जब ताकि उस कैग एंड पे विशाल के लुंड की चुभन न मिल गयी हो….

गांड पे विशाल के लुंड क चुभन लगते hi ऋचा अपनी गांड उसके लुंड पे मलने लगती है..






Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh विशु कुछ कर न ये चीटिया बहुत रेंग रही है लगता है गलत पंत पहन लिया मैंने तेरे कहने पे..

वीशाल लगातार लुंड मसलते हुवे उसके गांड के चारो तरफ हाथ फेरते हुवे उसके चुत्तड़ो को मसलने लग जाता है….

विशाल- क्या अब भी चीटिया काट रही है दीदी…

ऋचा- हाँ बहुत जोर जोर से..

इतने देर से लगातार लुंड और छूट के साथ हो रहे खेलवाड़ से रिच अक छूट अपना पानी चोर्ने लगती है जिसका एहसास विशाल को अपने लुंड पे होता है…

विशाल- फिर विशाल वो करता है जिसकी उम्मीद दोनों को नहीं थी विशाल फ़ौरन ऋचा के छूट पे अपना मुँह लगा देता है और पंत के ऊपर से hi उसके छूट को चूसने लगता है….






ऋचा की तो मनो सांसे hi अटक जाती है वो एहि तो चाहती थी पर इतनी जल्दी नहीं नहीं इतना जल्दी नहीं पर छूट में जो करोडो चीटिया रेंगने लगी थी उसका क्या उसे कैसे बर्दाश्त करे और फिर न चाहते हुवे भी ऋचा अपनी गांड और छूट विशाल के मुँह पे रगड़ने लगती है… विशाल भी जीभ और फिर पूरा मुँह खोल के उसके छूट को जैसे कहें लग जाता है और उसके छूट से बह रहे काम रास जो की उसके कपडे में लगा हुआ था उसे कपडा सहित चूसने लग जाता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा है विशु

विशाल- चीटिया मार रहा हु दीदी थोड़ा सब्र करो






ऋचा- ये गलत है मत कर चोर हैट जा… हलाकि वो खुद हैट सकती थी क्युकी वो विशाल के मुँह पे बैठी थी पर ये सब बस मुँह से कह रहे थी उसकी छूट तो कुछ और hi बोल रही थी….

विशाल- अभी ऋचा की बात को ाणसुस्ना करते हुवे लगातार उसके छूट को कहते में लगा हुआ था की ऋचा हैट जाती है उसके चेहरे से और तेज़ सांसे लेने लगती है उसकी सांसो की गति से पूरा गयम गूंज रहा था…

विशाल और ऋचा की नज़रे एक बार फिर से टकराती है ऋचा के आँखों में कामवासना को साफ़ देखा जा सकता था उसकी आंखे उसका चेहरा बता रही थी उसे कितना मजा आ रहा था पर जाने क्यों हैट गयी इस्पे विशाल पूछ पड़ता है






विशाल- क्या हुआ दीदी चीटिया निकल गयी??

ऋचा- वासना बहरी नज़रो से विशाल की तरफ देखते हुवे तेज़ तेज़ सांसे लेती है और उसकी गार्डन न में हिलने लगती है….

विशाल- निकल दू या आज के लिए काफी है???

ऋचा को समझ नहीं आता वो हाँ बोले या न बोले वो असमंजस में थी उसका जिस्म एक मर्द मांग रहा था जिसके लिए वो जब से विशाल को देखि है तब से दाना दाल रही है मगर अब रिश्ते किध और उसके कदम रोक रही थी… सोचने में और करने जमीं आसमान का अंतर होता है ये बात दिव्या से बेहतर अभी कोई नहीं समझ सकता था… और ये बेचारी अभी अपने दुविधा में खोयी हुई hi थी की जाने कब उस से उसका गार्डन हाँ कर्व्वा देता है यानि उसे चीटिया मारवणी थी..






फिर क्या था ग्रीन सिग्नल मिलते hi विशाल ऋचा के कमर से पकड़ इ उसे घूमता है और उसके पंत को एक झटके में फाड् के उसके गोरी चमड़ी में छुपी उसके भूरे छेद पे अपनी जुबान फेरने लग जाता है…





ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh विशु क्या कर रहा है भाई चोर दे बहन हूँ मैं तेरी कोई देख लेगा मत कर

ऋचा के शब्द बहले hi न में थे लेकिन वो अपन तंग उठा के विशाल को अपने छूट को चूसने का खुला निमंत्रण दे रही थी और विशाल भी अपने काम को अचे से करने में लगा हुआ था…

विशाल- तुम्हारी चीटिया मार रहा हु दीदी वर्ण बहुत तंग करेगी ये तुम्हे….

ऋचा- मत कर भाई गलत हो जायेगा…






विशाल- बस दीदी थोड़ी देर और फिर तेरी चीटिया तुझे तंग नहीं करेगी और विशाल ऋचा को पीठ के बल लिटा के उसके टैंगो को अपनी गार्डन पे रख लेता है और उसके छूट को किसी पिल्लै की ीतरह चपड़ चपड़ चाटने लगता है…

ऋचा- uuuuuuuuuuuuuufffffffffffff ये सब क्या कर रहा है तू रुक जा न मन जा प्लस… मेरी सुसु निकलने वाली hai…hat जा अब

पर विशाल कोप ता था ये कौनसी सुसु निकलने वाली है इसलिए वो नहीं हत्ता बल्कि और जोर जोर से छूट को चूसने लगता है….






ऋचा- aaaaahhhhhhhhhh मम्माआ मर गयी uuuuuuuuuuuuufffffffffffffff और बी रिच अक भी खुद पे काबू नहीं रह पता और वो तेज तेज साँस लेते हुवे अपने सर को दये बाये पटकने लगती है साथ hi अब तक जो विशाल को हटने का कह रही थी अब उसका सर अपने छूट पे दबाने लगती है

ऋचा- Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह mmmmmyyyyyyyyyy gggggggggooooooooooooddddddddddddddd ffffffffffukkkkkkkkkkkkkkkk






विशाल जो लगातार ऋचा के छूट को चाट रहा था आखिर कर ऋचा अपने छूट का पानी विशाल के मुँह पे hi बहा देती है…

ऋचा- कह रही थी हैट देख अब निकल गयी न सुसु

विशाल- ये सुसु नहीं है दीदी

ऋचा- फिर क्या है

विशाल- मेरे म्हणत कैफ अल का जूस समझ लो

इस पे ऋचा शर्मा जाती है और उसे पागल बोल के साइड हटने लगती है चल हैट अब बहुत देर हो गयी उधर रागिनी ने भी चिल्लाना सुरु कर दिया होगा.. और अब जाऊ कैसे तूने मेरी पंत फाड् दी….






विशाल- सॉरी दीदी आपके चीटियों का सुन के हड़बड़ी में हो गया…

ऋचा- ाचा जी हड़बड़ी हाँ.. बहुत स्मार्ट समझते हो खुद को…

विशाल- आप एक काम करो ये मेरा जैकट कमर में बांध लो और घर जा के जल्दी से चेंज कर लेना

ऋचा- हाँ ये सही आईडिया है और इसके अलावा कोई रास्ता बी नहीं है मेरे पास

और इस तरह ऋचा अपने छूट के आग को शांत करवा के घर की तरफ चल देती है…..

गयम से निकलने पे दोनों देखते है की चारो तरफ अँधेरा चने लगा था घर की लाइट्स जल गयी थी विशाल एक किले की जीत की ख़ुशी में था पर साथ hi किसी बात से मायुश भी और उसका कारन था की उसके लुंड ने पानी नहीं निकला था पर देखना ये है की आज भी वो मुठ मार के hi रात कटेगा या कोई छूट नसीब होगी उसे.. वैसे अभी घर जा के वो वापस चाट की तरफ जाने का प्लान बना रहा था ताकि वो जो सख्स भी है यानि उसके बुआ का आशिक़ उसे पकड़ सके....

इधर ऋचा के चेहरे पे संतुष्टि और हुइलट दोनों का मिलाजुला भाव था पर अब जिस रस्ते पे वो निकल पड़े ते वहां से वापसी नहीं फिर देखना ये है की ऋचा अपने क़दम रोकेगी या उसे और आगे बहा के ले जाएगी....

अभी के लिए इतना hi स्टे तूने गाइस
 
ाचा आज मेरा आप सभी से एक सवाल है तो आप सभी मुझे ये भी जरूर बताना की

अलका






सारिका और







ऋचा







इन तीनो के लिए जो पोर्न स्टार मैंने पिक किया है क्या वो इनके चर्स्टर के हिसाब से फिट बैठते है??? और आप सभी का इनमे से मोस्ट फव कौन है....????
 
इतना उतावलापन ठीक नहीं है जेठ जी काम से काम अंदर तो चल लो या यही खुले में नंगा करोगे अपने भाई की बीवी को....



 
अपडेट-59

गयम से आते hi ऋचा सब से बचते बचते तेज़ी से भागते हुवे अपने कमरे में चली जाती है जब की विशाल की नज़रे उसकी बुआ कामिनी को धुदनः रही थी पर जहां एक तरफ हॉल में परिवार क साडी औरते थी वही उसकी बुआ उनके बिच मौजूद नहीं थी विशाल का जासूसी दिमाग फ़ौरन काम करना शुरू कर देता है और वो बिना समय गवाए चाट के तरफ तेज़ी से मगर दबे पाऊँ भागने लगता है अभी वो चाट से सीढ़ियों की तरफ बढ़ा hi था की उसक बुआ हड़बड़ात में तेज़ तेज़ कदमी से निचे आते हुवे मिल जाती है.. कामिनी की सांसे चढ़ी हुई थी उसके चुके हर साँस इ साथ ऊपर निचे हो रहा था औरउसके ब्लाउज के बटन भी बस बिच वाले hi बंद थे बाकि ऊपर और निचे दोनों तरफ के खुले थे जिस से उसकी चुसो की झांकी निकली हुई थी… उसे देखते विशाल समझ गया की उसने देरी कर दी और कामिनी विशाल को देखते पूछती है..

कामिनी- इधर खान जा रहा है चल भीतर खाना खाने कर समय हो रहा है…

विशाल (तू खा की ा तो गयी है अपना निवाला)- कही नहीं बुआ बस एक कॉल कर के आता हु आप चलो…

कामिनी जो अस्त व्यस्त थी वहां ज्यादा देर रूकती तो उसी की चोरी पकड़ी जाती इसलिए वो भागते हुवे सीढ़ियों के पास बने वषोरं में चली जाती है जहां घर के अंदर जाने से पहले वो खुद को साफ़ और कपडे सही कर सके….

विशाल भी जल्दी जल्दी सीढ़ियों पे चढ़ने लगा क्युकी कामिनी आ गयी थी पर हो सकता है वो सख्स अभी भी चाट पे हो और इस वक़्त जॉब hi चाट पे होगा कामिनी का चाकर पक्का उसी के साथ होगा और यही सोच के विशाल चाट की तरफ दौड़ पड़ता है… और कोने कोने में उसकी तलाश करने लग जाता है लेकिन एक बार फिर उसे निराशा hi हाथ लगती है वह कोई भी नहीं था…

विशाल भरी मन से वापस लौटने लगता है पर तभी उसका पेअर फिसल जाता है और वो गिरते गिरते बचता है जब वो टोर्च के लाइट से निचे देखता है की क्या है तो जो पता है उस से उसका शक यकीं में बदल जाता है….

वहां कुछ गधा और चिपचिपा तरल पदार्थ गिरा हुआ था विशाल झुक के उसे देखता है और फिर उसे उंगलियों से उठता है तो पता है की वो कुछ और नहीं बल्कि किसी के लुंड का पानी और थूक का मिश्रण है…






ये पानी अभी अभी का निकला हुआ था अब विशाल को इस बात की तसल्ली हो गयी की जॉब hi सख्स है वो बुआ को छोड़ता है और लुंड भी चुसवाते है यानि बुआ भी बहुत छुडासी है अगर थोड़ा ध्यान दिया जाये तो इसकी छूट जल्दी और आसानी से मिल सकती है…

पर अभी भी ये कन्फर्म करना जरुरी था की वो उसके फूफा है एक ी और इसके लिए उसे निचे जा कर hi पता चल पता और फिर वो भागते हुवे निचे जाता है और जहां सभी लोग एक साथ बैठ के टाई पास कर रहे थे वही जा के विशाल अपनी बुआ कामिनी से पूछता है…

विशाल- बुआ फूफा कहाँ है….?

इस्पे कामिनी जवाब देते हुवे कहती है.

कामिनी- वो सहर गए है कुछ काम से अपने दोस्त सरेंडर के साथ क्यों कोई काम था?? मुझे बता दे

विशाल- नहीं बुआ वो फूफा के बारे में पड़ोस क ीक अंकल पूछ रहे थे इसलिए

कामिनी- कौन था वो??

विशाल- नहीं मैं जनता नहीं और नाम भी पूछना भूल गया..

कामिनी चल कोई बात नहीं बैठ जा सब के साथ मैं खाना लगा देती हूँ..

विशाल- जी बुआ…

अब विशाल को ये कन्फर्म हो गया था की वो सख्स जॉब hi था फूफा तो नहीं थे इसका मतलब कोई और था अउ रो नाह ो वो सख्स घर का hi था क्युकी जिस साइड के चाट पे वो थे वहां से किसी और घर का चाट नहीं जाता बल्कि खुला मैदा है और उसके बाद एक बड़ी सी बॉउंड्री जो इसी के घर में बंद होती है तो इधर से किसी का आना और जाना तो इम्पॉसिबल है …. अब विशाल का टारगेट कामिनी बुआ थी जिसके पीछे वो पद जाने की सोचता है और प्लानिंग करने लगता है…

खाना खाने के बाद सभी मर्द चौपाल पे जा के टाइम पास करने लगते है तो वही औरते संगीत की तयारी कर रही थी… इतने में कामिनी बुआ किचन का काम समेत रही थी विशाल मौका देखते हुवे किचन में पानी के बहाने जाता है और इधर उधर की बाटे करते हुवे अपना पहला निशाना चलने की सोचता है और कहता है..

विशाल- बुआ आपके फोरहेड और बालो पे कुछ सफ़ेद सफ़ेद लगा है चिप चिप सा….

इतना सुनते hi उसके बालो पे लगे उस पदार्थ से ज्यादा सफ़ेद कामिनी का चेहरा हो जाता है और वो घबराते हुवे बोलती है

कामिनी- क क क्या लगा है और हाथ फेरते हुवे साफ़ करने की कोशिश करने लगती है..

कामिनी का चेहरे का एक्सप्रेशन देख के विशाल का बाकि का बचा शक भी दू रो जाता है और वो उस वक़्त के लिए वहां से चुप चाप चला जाता है…

कमरे में आ के विशाल फ़ौरन अपने कपडे निकल के बलंकत में घुस जाता है जब से वो गाओं आया है उसे छूट नसीब नहीं हुई है खान वो जब मन होता अलका को छोड़ लेता था और अभी छूट के दर्शन भी दुर्लभ हॉग ए है…. गयम में भी उसने ऋचा को तो हल्का कर दिया था पर उसका भरी पैन विशाल के लुंड पे स्वर हो गया था उसके बाद कामिनी के मुँह से निकला उस अनजान सख्स के लुंड का पानी… इतना कुछ इस चुड़क्कड़ लड़के से कैसे झेला जाये????

विशाल अपने ब्लैकट में घुस के अपना लुंड सहलाने लगता hai…ki तभी कमरे में ऋचा घुस जाती है….

और बड़े नज़ाकत से विशाल की तरफ अपना हाथ आगे करते हुवे पूछती है…






ऋचा- ये तेरी चड्डी मेरे बाथरूम में क्या कर रही है विशु???

ये वही चड्डी है जो गयम जाते वक़्त विशाल ने ऋचा इ बाथरूम में निकला था और ऐसा नहीं था की उसे पता नहीं था की ये चड्डी ऋचा देख लेगी पर उसने सईद जान बुझ कर छोरा था ताकि ऋचा उसके लुंड के पानी से साणे चड्डी को देखे …

विशाल- सॉरी दीदी वो मैं जब वाशरूम गया था तो गलती से इसी में सुसु हो गयी थी थोड़ी सी तो उतर दिया एंड हम गयम के लिए लेट हो रहे थे तो मैं वही चोर दिया…

ऋचा- ाचा ाचा ठीक है इसे तुम्हारे बाथरूम में रख देती हूँ साफ़ कर lena..aur तुम अभी क्या कर रहे हो?? बोर हो रहे हो तो मेरे कमरे में चल सकते हम टाइम पास के लिए कोई गेम खेल लेंगे मुझे भी नींद नहीं आ रही है…

विशाल भी ज्यादा से जयादा समय ऋचा के साथ hi बिताना छह रहा था इसलिए वो ok बोल के ऋचा के साथ hi चल देता है…

कमरे में पहुंच के दोनों इधर उधर की बाटे करने लगते है पर विशाल के अलावा बेचैनी ऋचा को भी हो रही थी यहां जवानी की तड़प में अकेले विशाल hi नहीं बल्कि ऋचा भी तड़प रही थी पर एक लड़की वो भी जो रिश्ते में बहन लगती हाउ ो भला कैसे कह दे की भाई मेरी चुदाई कर दो…

ऋचा- विशु मेरा एक काम कर देगा प्लस

विशाल- हाँ दीदी बोलो न

लगता है मेरे बैक की मुस्कले खींच गयी है थोड़ा मस्सगे कर देगा वो मैं रागिनी को बोलती पर वो तो सब के साथ काम और शादी कीतैयारी में बिजी है..

विशाल- अरे क्यों नहीं लाओ मैं कर देता हूँ

ऋचा- थैंक यू विशु तू मेरा सबसे ाचा भाई है…






और फिर ऋचा पेट के बल लेट जाती है एंड विशाल भी ललचायी नज़रो से पहले रिका की गांड देखता है फिर उसके पीठ पे हाथ फेरते हुवे उसके एक और कंधो की मालिश करने लग जाता है…

विशाल जो की ऋचा के गांड से बिलकुल सात के बैठा था वो बार बार अपने लुंड का दबाव ऋचा कैग एंड पे बनाते हुवे आगे की और झुकता और उसके कमर और पीठ की मस्सगे कर रहा था… विशाल के हर छुवन से ऋचा और ज्यादा पिघलने लगती है उसका दर्द अब उसके पीठ से होते हुवे उसकी दोनों जांघो के बिच के संकरे रस्ते में पहुंच चुक्का था और वो भी गांड हिट हिलाते विशाल के लुंड ा दबाव एप दोनों चूतड़ों के बिच लेने लगती hai…richa के बढ़ते उत्सुकता और प्यास को देखते हुवे विशाल इस बार एक कदम पीछे ले लेता है जिस से की अब तक जो चभन ऋचा को अपने गांड पे महसूस हो रही थी वो होनी बंद हो जाती है… जिस से बौखला कर ऋचा खुद hi अपना गड उठा के पीछे की और धकेल देती है…






विशाल ऋचा के अंदर जल रहे आग को अचे से महसूस कर रहा था पर वो इसे और ज्यादा जलने की सोच रहा था जिसके वजह से वो अपने साइड से कोई कदम उठाने की जगह ऋचा को hi ितं मजबूर कर देना चाहता था की रिच खुद अपनी टंगे उठा के बोले की अब छोड़ दे मुझे फाड् दे मेरी छूट अपने लुंड से….

ऋचा की छूट के आग में जलते हुवे अपनी गांड विशाल की तरफ धकेल देती ै मनो उसने विशाल को निमंत्रण दिया हो अपने गांड का विशाल बी अपने दोनों पंजो से ऋचा के चूतड़ों से होते हुवे उसके पीठ और कंधो को मसलते हुए वापस से अपने हाथ उसके चूतड़ों में रख जोर से मसल देता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

विशौ- क्या हुआ दीदी ज्यादा जोर से हो गया ???? धीरे कृ??/

ऋचा की सांसे उखड़ने लगी थी उसके आवाज़ में एक भारीपन आने लगा था ो बड़े कराहते हुवे दर भरे लहजे से कहती है नहीं ाचा लग रहा है ऐसे hi दबा थोड़ा जोर से…

ये दर्द में भी ऋचा को मजा आ रहा था और इसी मजा को बढ़ाते हुवे विशाल अपना कमर धकेल क ीक झटका ऋचा कैग एंड पे मार देता है…. हलाकि दोनों के लुंड और छूट के बिच कपडा आ जा रहा था लेकिन इनदोनो की धधक रहे आग इन कपडे को भी जला दे कुछ ऐसी तपिश थी…

ऋचा के शॉर्ट्स भी मनो किसी पंतय जितनी hi बड़ी थी जिसका होना न होना एक hi बराबर था इधर विशाल भी जस्ट शार्ट में था क्युकी चड्डी तो वो कब का उतर फेंका था ऐसे में दोनों छूट और लुंड की गर्माहट आसानी से महसूस कर पा रहे थे… विशाल के धक्के से ऋचा के मुँह से एक बार फिर कामुक स्वर फुट पड़ती है..

ऋचा- aaaaaauuuuuuuuuuuucccccccccchhhhhhhhhhhhhh और वो हल्का सा आगे को गिर जाती है जिसका फायदा उठाते हुवे विशाल अपने पंत को सरका के अपना लुंड बहार निकल लेता है /…

ऋचा एक बार फिर से उठ कड़ी होती है और वापस से उसी पोजीशन में अपने गांड को पीछे विशाल के लिए धकेल देती है और इस बार लुंड बहार होने से ऋचा को उसकी गर्माहट और सख्तीपान पहले से ज्यादा महसूस होती है






ऋचा के दोनों बड़े बड़े कूल्हों के बिच विशाल का लुंड बिलकुल ऐसे फिट हो जाता है मनो वो उसी के लिए और उसी के नाप का बना हो… इस बार लुंड का छुवन ऋचा को अपने चूतड़ों पर भी होता है.. ऋचा की सांसे अब पहले से ज्यादा गरम होने लगी थी उसका आप अब खुद पे खोने hi लगा था अगर ऐसे में विशाल उसकी पॉन्टीनुमा शॉर्ट्स उतर के अपना लुंड उसके छूट में दाल भी देता तो ऋचा उसे रोकती नहीं बल्कि खुद गांड खोल के उसके लुंड का स्वागत करती…

Richa(kyu तड़पा रहा है विशु मुझसे ये आग बर्दाश्त नहीं होती अब)- हाँ ऐसे hi दबा बहुत ाचा लग रहा है…

और अब ऋचा खुद अपनी गांड को तेज़ तेज़ धकेल के विशाल के लुंड पे घुमा रही थी…






विशाल भी उसकी बढ़ते गर्मी को देखते हुवे उसके चूतड़ों को अपने दोनों हाथो में भर के मसलने लगता है…

ऋचा को अब कोई सुध बुध न थी वो बस अपने छूट के लावा को बहा देना छह रही थी वैसे अभी कुछ घंटे पहले hi वो विशाल के मुँह पे झड़ी भी थी लेकिन अब जो पानी उसकी छूट बहाने लगी थी उसपे उसका कण्ट्रोल न था






ऋचा विशाल को अपनी गांड से एक धक्का मरती है जिस से की विशाल बीएड पे गिर जाता है और ऋचा खुद उसके लुंड पे बैठ के अपनी गांड आगे पीछे करते हुवे अपनी आग को शांत करने में लग जाती है…. इस वक़्त ऋचा का मुँह दरवाजे की तरफ और पीठ विशाल की तरफ थी जिसके वजह से वो खुल के अपनी गांड हिला पा रही थी जो की सईद विशाल की तरफ नज़रे होने से न कर पति…

ऋचा बिलकुल बेकाबू होने लगती है और जहां अब तक वो सिर्फ अपनी गांड विशाल के लुंड पे घिसते हुवे महसूस करते आ रही थी वो इस बार एक कदम आगे बढ़ के उसके लुंड को अपने हाथो में थम लेती है और खुद hi उसके सख्त हो चुके लुंड अपने गांड पे सेट करते हुवे आगे पीछे रगड़ने लग जाती है है और साथ hi अपनी गांड को उसके लुंड पे पटकने भी लग जाती है..






ये पहली बार था जब ऋचा ने विशाल के लुंड को हाथ लगाया था और हाथ क्या लगाया उसे पकड़ के अपने छूट और गांड को ठंडा करने के लिए उसे अपने छूट के मुहँ ेपे मॉल रही थी..

अपने लुंड पे ऋचा के कोमल मुलायम हाथो का स्पर्श पा के विशाल भी गैंग ान हो जाता है और वो कमर उठा के खुद ऋचा के हाथ में झटके लगाने लग जाता haii.is वक़्त कमरे में बिलकुल शांति थी दोनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था बस तेज़ चलती सांसो की आवाज़ और दो जवान जिस्म के धधकते आगे से पूरा कर्मा गरमा हो चुक्का था जो अब तब तक ठंडा नहीं होगा जब तक दोनों की पानी न निकल जाए…

विशाल- uuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh

ऋचा- oooooooooohhhhhhhhhh

ऋचा को विशाल के पत्थर जैसे सख्त हो चुके लुंड का ये चुभन इतना जलने लगता है की वो इस बार आहिस्ते से अपनी पंतय को खिसका देती है जिस से की उसकी गोरी चिकनी गांड अब पंतय से आज़ाद हो चूका था..






अब विशाल का फुफकारता हुआ लुंड की सिद्ध hi ऋचा के भाप फेक रहे छूट से जा मिलता है और दोनों hi के मुँह से घुटी घुटी आवाज़ में aaaaaaaaaaah फुट पड़ती है वासना के नशे में अंधी हो के ऋचा इस बार एक कदम आगे बढ़ जाती है और अपने गांड हिलने के साथ साथ उसके लुंड को भी मसलने लग जाती है…

ऋचा के बढ़ते बेक़ाबूपन ने उसे अंत में पंतय भी उतर फेकने पे मजबूर कर देता है और व आउट के पहले अपनी ब्रा और फिर पंतय उतर के कही दूर कोने में फेंक देती है और एक बार फिर से विशाल के लुंड को हाथ में थामे उसपे बैठ जाती है और उसे फिर से अपने छूट पे घिसना सुरु कर देती है…






ऋचा की छूट उसके पानी से लबालब हो गयी थी इधर विशाल का भी लुंड अकड़ने लगा था दोनों के पानी का मिलान हो गया था लेकिन असली मिलान अभी बाकि था और जिस तरह का मंजर इस कमरे में आज चाय हुआ है लगता है वो दिन दूर नहीं जब ऋचा खुद से विशाल के लुंड को निगल जाएगी..

इधर न तो विशाल अपनी तरफ से कोई पहल कर रहा था और न hi रिहा को कुछ भी करने से रोक रहा था वो चुप रह के बस ऋचा की भक्ति कदमो को और बहकने में मदद कर रहा था कुकी उसे पता था की ऋचा के ये लड़खड़ाते कदम जल्दी hi ऋचा को उसके लुंड पे गिरा देगा ..

और फिर देखते hi देखते ऋचा की छूट एक बार फिर से सैलाब बहा देती है और वो विशाल के लुंड पे hi झड़ने लग जाती है…






उसके छूट से बैठे पानी से विशाल के लुंड के साथ उसका पूरा कमर भी भीग चुक्का था ऋचा तेज़ तेज़ हांफ रही थी और विशाल जिसका अभी भी नहीं हुआ था ो वैसे hi ऋचा के गोल बड़ी गांड और पीठ को निहारे जा रहा था…

ऋचा जो दीवार की तरफ मुँह कर के हांफ रही थी वो अब भी घुटनो के बल घोड़ी बानी थी जिस से उसकी गांड विशाल के तरफ हवा में लहरा रहा था… विशाल जिसे दो दिनों से छूट नसीब नहीं हुई थी याय उन कहे नसीब हुई पर डालना नसीब नहीं हुआ था वो उत्सुकता से ऋचा के नंगे गांड पे हाथ फेर देता है…






इधर छूट के पानी बह जाने से ऋचा अब वास्तविकता में आ चुकी थी और वो इस तरह विशाल का उसके गांड को टटोलने से शर्मा जाती है और भागते हुवे वाशरूम में घुस जाती है… बाथरूम इ आ के ऋचा की सांसे बहुत तेज़ चलने लगती है

वो टूटी फूटी सांसो में बड़बड़ने लगती है हे भगवान ये क्या कर दिया मैंने??? इतना आगे कैसे निकल सकती हूँ कही विशाल ने किसी को कुछ बता दिया तो रागिनी तो मेरी जान hi ले लेगी … ऋचा इन्ही सब ख्यालो में फांसी हुई खुद को शांत करने लगती है… इधर विशाल को भी पूरी उम्मीद थी की आज रात जरूर उसे छूट मिलेगी और वो कपडे डालने की जगह नंगा hi ऋचा के आने का वेट करने लगता है….


विशु अभी अंदर कमरे लेता रिच अक वेट कर hi रहा था की वाशरूम के अंदर से ऋचा की आवाज़ आती है विशु कपडे पहन ले प्लस मुझे शर्म आ रही है

विशाल ऋचा के इस बात से आयुष सा हो जाता है और ok बोल के कपडे पहनने लगता है

ऋचा- आ जाऊ बहार?

विशाल- हाँ आ जाओ या आप उनकंफर्टबले जो तो मैं अपने रूम में चला जाता हूँ…

ऋचा- नहीं नहीं रुक जाना नहीं मैं आती हूँ और फिर ऋचा वापस कमरे में दाखिल होती है…

ऋचा शरमाते हुवे बीएड के करीब आ जाती है और विशाल से नज़रे चुराने लगती है अब तक यही ऋचा जो अपने जिस्म की नुमाईस से बिलकुल भी नहीं कटरा रही थी अब वही लड़की ठंडा हो जाए पे अपने भाई से नजरे नहीं मिला पा रही थी…. छूट की आग औरत को क्या से क्या बना देती है…

ऋचा अब माहौल को लाइट करने के लिए इधर उधर की बाते करने लगती है…. पर विशाल का मन अब इन बातो में नहीं लग रहा था ो सोचता है इस से कमरे में चाक इ वहां अपने लुंड की आग शांत कर सकता है अगर अलका हुई तो उसके छूट में और न हुई तो हिला के.. और फिर वो ऋचा को गढ़ नाईट बोल के यहां से निकल जाता है… विशाल का इस तरह से जाना ऋचा को भी कुछ ठीक नहीं लगता… उसे लगता है उसका भाई उस से नाराज़ हो गया वो रोकना तो चाहती है पर विशाल उसके कुछ कहने से पहले कमरे से निकल जाता है…

जब वो ऋचा के कमरे से बहार निकलता है तब तक ठीक थक देर हो गयी थी और घर के बाकि सद्श्य भी अपने कमरों में जाने लगे थे विशाल भी वापस अपने रूम में जाता है जहां उसे अलका नहीं दिखती इस्पे वो अलका को ढूंढने बहार आता है पर अलका उसे कही भी नहीं दिखती.. फिर उसने अलका को कॉल करना सही समझा लेकिन उसका फोन कमरे में चार्ज पे लगा था… लुंड की बेचैनी उसे सोने नहीं दे रही थी और छूट होते हुवे भी उसके हाथ नहीं आ रहा था..

और आखिर में विशाल के हाथ मायुशि hi लगती है और आज एक बार फिर से हिला के सोने के अलावा उसके पास कोई रास्ता नहीं था और मायुश हो के वो जाने लगता है की तभी उसे सीढ़ियों वले कमरे के पास कोई आहत सुनाई देती है जिसे देखने वो उस तरफ बढ़ने लगता है…


आगे बढ़ने से पहले मैं एक बार ये सीधी वाले जगह के बारे में विस्तार से बता दू जिस से की आगे आप उस जगह को ीागिने कर पाओ.. ये सीधी वाला रूम घर के बलकुल साइड में एक्स्ट्रा part है जहां दो बड़े बड़े कमरे जिसमे एक में एक्स्ट्रा सामान पड़ा है दूसरे में जानवरो का खाना रखा होता है उसके बाद एक बड़ा सा स्पेस है और वहां उसे पार करने के बाद वो जगह जहां जानवर बंधे जाते है.... उसके बाद खुला घास का मैदान और और फिर दूर में घर की मैं बॉउंड्री और ये वही वाला छत है जहां बुआ किसी का लुंड चूस के थुकि थी...

ये वही जगह है जहां पिछली रात अलका की चुदाई हुई थी पर इस बात से विशाल अनजान थोड़ा आगे बढ़ता है की किसी के सिसकने की आवाज उसके कानो में सुनाई देती है… इस आवाज़ से विशाल अछि तरह वकीफ था क्युकी ऐसी आवाज़ उसने अपनी माँ मासी और अभी अभी ऋचा से सुन के आ रहा tha…isliye वो बहोत सावधानी से दबे पाऊँ आगे बढ़ने लगता है.. अंदर जाने का जो दरवाजा था वो बंद होने के वजह से विशाल फिर से मायुश होने लगता है और अंदर झाकने का कोई होल या रास्ता ढूंढ़ने लगता है…

तभी उसे खिड़की के पास से हलकी रौशनी आते दिखती है विशाल फ़ौरन वहां जाता है और अंदर झाकने की कोशिश करने लग जाता है… अंदर का नज़ारा किसी के भी सोये लुंड को पठार कर देने वाला था…

अंदर में कोई और नहीं बल्कि उसकी चीची रीमा थी जो बीएड के सहारे घोड़ी बानी हुई थी और उसकी बड़ी छोड़ी गांड में के पीछे खड़ा कमल यानि विशाल का फूफा उसके छूट में सतसत अपना लुंड पेल रहा था.






पर उसका गाला तब सूखा जब वही कुर्सी पे बैठा अरविन्द यानि उसका चाचा दीखता है जिसके लुंड पे उसकी कामिनी बुआ कूद रही थी





विशाल का सर चकराने लगता हैउसे समझ नहीं आता ये क्या चल रहा है... इसका मतलब वो अकेला नहीं जो फॅमिली में चुदाई कर रहा है ये उसके खून में hi है घर की ोर्टो को छोड़ना???? तो क्या बुआ चाट पे अरविन्द चाचा के साथ थी या और भी कोई है जो उन्हें छोड़ता है... अब विशाल की नज़रे उसकी माँ को ढूंढ़ने लगती है कही मम्मी भी तो किसी के साथ नहीं है इस वजह से वो घर में नहीं दिख रही और अगर है भी तो किसके साथ?? विशाल का पूरा सर चकराने लगता है वो मुठ मर के वही अपने लुंड को शांत करता है और इस से पहले कोई कोई और देख ले वो थोड़ा रकोर्ड करता है और अपने कमरे की तरफ जाने लगता है....

विशाल अपने मन में चल रहे उथल पुथल के साथ वापस अपने रूम में जाने लगता है की उसे रस्ते में अलका मिल जाती है.... अलका पहले तो उसे देख के थोड़ा घबरा जाती है पर अगले hi पल नार्मल होते हुवे पूछती है...


अलका- ओहो विशु तूने तो डा hi दिया था... खान घूम रहा है इतनी रात गए सोया क्यों नै???

विशाल- वो माँ मैं आप hi को धुंध रहा था.... खान थी आप???

अलका- खान क्या यही निम्मो (नम्रता जिसकी शादी है) के कमरे में थी वो अपने सगाई की फोटो दिखा रही थी फिर इधर उदर की बाटे करने लगी... अब थोड़े दिनों की मेहमान है बेचारी तो उसके साथ टाइम तो बिताना चाइये न...


विशाल- हाँ माँ सही खा आपने (विशाल मन में सोचता है मेरी माँ कितनी अछि है जहां मेरी चची और बुआ जाने किस किस से चुदती है ये घर के बच्चो को टाइम दे रही है )और वो फिर अलका के गले लग जाता है.... और गले लगते हुवे कहता है पर माँ अपने बेटे का भी तो ख्याल करो जब से हम यहां आये है आपने मुझे प्यार नहीं किया...

अलका- आज नहीं विशु आज दीदी इ भी बहुत काम कराया साफ़ सफाई करा के थका दिया... अभी के लिए सजा बेटे मैं सुबह या कल तुझे अचे से प्यार दूंगी...

अब यहां ध्यान देने वाली बात ये है की जो आपका कभी लुंड लेने का मौका नहीं चोरटी खास कर अगर वो विशाल का हो वो आज उसे थकावट का बहाना बना के मना कर देती है....

तो क्या ये थकावट सच में उस काम से हुई है जो उसके तै ने कराया है या उसके इस थकावट की वजह कुछ और है...

खैर विशाल भी अपना पानी अभी ाभ्ही बहा के आया था और उसे सुबह वाक पे भी जाने का सोच के उसने जिद करने से जयादा सही सोना समझा और दोनों माँ बेटे कमरे में सोने चले जाते है...

आगे की कहानी अगले भाग में
 
अपडेट-60, एक नयी सुरुवात

विशाल भी अपना पानी अभी ाभ्ही बहा के आया था उसपे सुबह वाक पे भी जाने का सोच के उसने जिद करने से जयादा सही सोना समझा और दोनों माँ बेटे कमरे में जा के सोने चले जाते है...

ए.बी.ए. आगे…

कमरे में आ के विशाल सोने की कोशिह तो बहुत करता है पर उसे नींद नहीं आती है और ए भी तो कैसे आज एक दिन में कितना कुछ हो गया उसके साथ.. पहले वल्क पे फिर गयम में उसके बाद उसके बुआ के मुँह से उगला हुआ गधा और गरम पानी फिर से रिच अक उसके लुंड पे अपने छूट का लावा उगलना और इतना सब से अभी उबरा भी नहीं ता की डार्क रूम में बुआ चाचा फुका और चीची का ग्रुप सेक्स देख लिया… उसकी बेचैनी बढ़ने लगी थी… लुंड का तनाव काम hi नहीं हो रहा था उसकी माँ अलका जो फ़िलहाल के लिए इकलौती छूट थी जिसे वो छोड़ सकता था वो तो कब का विशाल को गांड दिखा के सो चुकी थी… वो सोचता है क्यों न ऋचा के साथ थोड़ा आगे बढ़ा जाये वैसे भी आज उसने विशाल का लुंड पकड़ के छूट पे रगड़ा था… बस उसे झड़ने न दिया जाये तो बेबसी में वो खुद उसके लुंड पे बैठ के कूदने लग जाएगी… वो इन्ही ख्यालो में एक बार को सोचता है ऋचा के कमरे में जाने को पर क्या इतनी रात जाना ठीक रहेगा??? लेकिन जो काम मैं करने की सोच रहा हु उसके लिए तो यही समय ठीक है वर्ण दिन के उजाले में खा से मक़सद को अंजाम दे पाउँगा… विशाल हर तरह से खुद को तैयार करने लगता है…

इधर ऋचा भी विशाल के जाने पे मायुश हो जाती hai…aur अपने कमरे पे उदास हुवे सोचने लगती है कही उसने कुछ गलत तो नहीं कर दिया कही विशाल उस से बात करना न बंद कर दे… वो बेचारी अभी अपने जद्दोजेहद में फांसी थी की उसकी छूट की चीटिया फिर से कुलबुलाने लग जाती है.. वो फ़ौरन अपने कपडे उतर के नंगी हो जाती है और अपने छूट को अपने मुठी में भर के उसे निचोड़ने मसलने लगती है,…










ओह्ह्ह्हह्ह विशु ये किसी आग लगा के चला गया है तू प्लस वापस आजा देख तेरी बहन की छूट कैसे कुलबुला रही है oooooohhhhhhhhhhh माँ ऋचा अपनी छूट में ऊँगली डालते हुवे सुबह से लेकर अभी तक हुवे एक एक हादसे को सोच कर तेज़ तेज़ ऊँगली करने लगती हैके दिमाग में… किस तरह सुबह उसके नंगी गांड में उसके भाई विशाल का लुंड चुभ रहा था और फिर गयम में जब विशाल उसकी छूट चूस चूस के उसक सारा पानी जाता है और अभी इस कमरे में जहां ऋचा खुद उसके लुंड को पकड़ के अपने गांड एंड छूट पे रगड़ते हुवे कैसे झड़ी thi…uski कल्पनाये उसे और ज्यादा कामुक करने लगती है की जब उसका मोटा लुंड जायेगा तब उसकी छूट की क्या हालत होगी uuuuuuuuuuuufffffffffffffffffff oooooooooooooo फ्फ्फफ्फ्फ्फफ्फूऊउउउउक्क्कक्कक्ककककक और ऐसे hi छूट मसलते हुवे एक बार फिर से झाड़ जाती है….

लेकिन जो आग उसके अंदर धधक रही थी उसे सिर्फ विशाल का लुंड बुझा सकता था कोई ऊँगली या डिलडो नै… वो सोचती है सुबह होते hi विशाल को श्री बोल देगी… और सोने की कोशिश करने लगती है लेकिन जो हाल विशाल का था वही रिच अक भी आखिर कर ऋचा अपने मोबाइल से विशाल को मश्ग करती है

ऋचा- सो गया विशु???

विशाल मोबाइल पे ऋचा के मश्ग को देख अपने किस्मत पे नाज करने लग जाता है… क्यूंकि जिस काम के पहल के लिए वो हिमत जूता रहा था यानि ऋचा के कमरे में जाने का उसमे उसकी आधी हेल्प तो ऋचा ने hi कर दी thi..vishal भी समय न गवाते हुवे ऋचा को रिप्लाई देता है

विशाल- नहीं नींद नहीं आ यही है..

Richa-to मेरे कमरे में आजा हम कोई मूवी देख लेंगे…

विशाल- आपको सोना नहीं है कल कोलगे नहीं जाओगे क्या??

ऋचा- अरे वो देख लेंगे तू आजा

विशाल- ok अभी आया…

विशाल अगले hi पल अपने शॉर्ट्स चढ़ता है और ऋचा के कमरे में दाखिल हो जाता है.. ऋचा उसे देखते hi गले लगा लेती है…

ऋचा- ओह्ह्ह विशु मुझे लगा तू मेरे से गुस्सा हो के चला गया… सॉरी अगर मैंने कुछ गलत किया तो उसके लिए

विशाल- अरे नहीं दीदी मुझे लगा माँ ढूंढ रही होगी और आपको भी सोना होगा इसलिए मैं गया था पर वहां माँ भी नहीं थी और मुझे नींद भी नहीं आयी…

ऋचा- वो होती भी कैसे…

विशाल- क्या मतलब??

ऋचा के इस बात पे विशाल थोड़ा सोच में पद जाता है की आखिर उसका मतलब क्यात है ये कहने का?? पर ऋचा बात को घूमते हुवे उसे कमरे पे रखे सोफे पे बिठा के उसके साथ वही बगल में चिपक के बैठ जाती है…

ऋचा- कुछ नहीं चल मूवी देखते है बता कौन सी देखेगा…

विशाल- पहले बताओ आपके कहने का मतलब क्यात है…

ऋचा- अरे कुछ नहीं मेरा मतलब वो बाकि औरतो के साथ होगी न शादी डिस्कशन में.. अब बोल भी या मैं अपने पसंद की लागू फिर वही देखना पड़ेगा तुझे…

विशल- आप अपनी पसंद की hi लगा दो

ऋचा- ok फिर नेटफ्लिक्स पे कुछ ढूंढते है…

पर काफी सर्च के बाद भी उसे कुछ समझ नहीं आता फिर उसे टाइटैनिक मूवी दिखती है और फिर ऋचा टाइटैनिक प्ले कर देती है…

ऋचा- तू यही बैठ मैं खाने को कुछ ले आती हूँ…

विशाल- मैं भी चालू??

ऋचा- अरे नहीं तू बैठ रागिनी देखेगी तो बेकार में चिल्लायेगी की अपने चक्क्र में तुझे जगा राखी हूँ इसलिए तू यही रह और आवाज़ मत करना वर्ण एक और सख्स है औरतो के पल्लू में घुसा रहने वाला राघव वो कभी भी कही भी टपक जाता है उस से बचके…

ऋचा के इस तंज पे उस वक़्त विशाल ज्यादा ध्यान नहीं देता और उसके बातो पे है देता है…

ऋचा किचन में जाती है और थोड़ी देर में स्नैक्स एंड कोल्ड्रिंक ले के अपने रूम में आ जाती है..

मूवी स्टार्ट हो जाती है और अपने गति से चल रही होती है की तभी

मूवी में चल रहे कामुक दृश्य एक बार फिर से ऋचा के बदन में आग लगाने लगती है… वो अपने दोनों पैरो के पंजो को आपस में रगड़ना सुरु कर देती है और वैसा hi हाल इधर विशाल का भी था चड्डी न होने के वजह से उसका लुंड पंत के अंदर अकड़ने लगा था और जब उसके तने हुवे लुंड पे ऋचा की नज़र जाती है तो उसका गाला सूखने लगता है वोट क बार फिर से विशाल के लुंड को महसूस करना छह रही थी इस बार अचे से अपने मुथियो में भर के भीचना छह रहे थी पर ये सब वो करे तो करे कैसे.. काफी सोच विषर के बाद वो बड़ी भरी ौज़ में कहती है..

ऋचा- विशु

विशाल ऋचा के पुकारने पे उसकी तरफ देखता है तो पता hai..uske बदन की गर्माहट से उसका कोमल गोरा गाल बिलकुल गुलाबी होने लगा था मनो खून उतर आया हो उसके गले में उसकी आँखे बहुत कुछ बयां कर रही थी बस कोई सही पढ़ने वाला चाइये था..

विशाल- हाँ दीदी बोलो

ऋचा- मैं तेरे गॉड में सर रख लू??? तू बुरा तो नहीं मानेगा??

विषा- अरे बुरा क्यों मानूंगा आओ रखो और विशाल इतने कहते hi अपने जांघ ऋचा की तरफ कर देता है और ऐसा करते hi उसका पंत तम्बू के आकर बनल एटा है जिसे वो छुपते छुपाते एडजस्ट करने लगता है पर ऋचा की नज़र तो कब से उसपे पड़ी हुई थी फिर उस से कैसे बचा पता वो…

अगले पल ऋचा विशाल के गॉड में सर रख के मूवी देखने लग जाती है… फिल्म अब देखते hi देखते अपने चरम पे आने लगती है जहां पहले कार में जब जांच रोज को छोड़ता है और फिर वो पेंटिंग वाली सन… ऋचा जो पहले से hi कम्प्यसि हुई पड़ी थी अउ रेज सन को देख विशाल का लुंड जो की पहले से खड़ा था पंत के अंदर अंगड़ाई लेते हुवे ऋचा के गलो पर दस्तक देने लग जाता है जिसका एहसास ऋचा को भी होने लगता है..

ऋचा उस खड़े हो चुके लुंड को ज्यादा महसूस करने के लिए अपना सर ज्यादा अंदर को कर लेती है जिस से विशाल का लुंड पंत के कोने से हो के निकलते हुवे ऋचा के मुँह के करीब उसके होठो तक पहुंच जाता है.. लुंड के इतने पास होने से उसकी स्मेल ऋचा के नाक में सामने लगती है जिस से की ऋचा अब और भी ज्यादा बेकाबू हो रही थी…

ऋचा की गर्मी उसपे एक बार फिर से हावी होने लगती है और वो अपने होंठो को विशाल के पत्थर जैसे सख्त हो चुके लुंड पे रगड़ने लगती है.. विशाल जो इस बार आगे बढ़ने की सोच से hi ीचा के कमरे में आया था ो मोके की नज़ाकत को देखते हुवे अपने लुंड को पुर्रा बहार निकल देता है जिस से की ऋचा को लुंड की चुभन और गर्माहट का अच् से पता चले… ऋचा भी होंठो को रगड़ते हुवे मुँह खोल लेती है और विशाल उसकी हालत को देखते हुवे अपना लोड उसके मुँह में पेल देता है….

ऋचा जो की एक कमसिन लड़की अभी अभी जवानी के देहलीज़ पे पेअर रखा hi था विशाल के इस विकराल लुंड को अपने छोटे से मुँह में लेने के लिए अपना छोटा सा मुँह पूरा खोल लेती है जिसमे बड़े मुश्किल से उसका लुंड समां पाया था…






अब ऋचा बिना विशाल के लुंड को चुवे और पकडे अपने मुँह में गैप से ले के अपना गार्डन आगे पीछे करते हुवे उसका लुंड चूसने लगती hai….vishal भी अपने लुंड को ऋचा के मुँह में बैठे बैठे hi धकेलने लग जाता है.. इस बिच दोनों के बिच कोई भी बात चित नहीं हो रही थी बस दोनों hi अपने मक़सद को अंजाम देने में लगे हुवे थे….

विशाल एक कदम आगे बढ़ते हुवे ऋचा के ड्रेस को उसके गोर छतियो से खिसकते हुवे उसकी चुचिओ को आज़ाद कर देता है जिसमे ऋचा उसे एक बार भी रोकने की कोशिश नहीं करती और फिर विशाल उसके गोल उन्नत चुचिओ को अपने मुट्ठी में बाहर के मसलने लग जाता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh vishuuuuuuuuuuuuuu

ऋचा की चुचिअ इतनी सख्त और बड़ी थी जो की उसने गयम और योग कर के अपने शरीर को ये आकर दिया था वो चुचिअ विशाल के पुरे हाथ में समां नहीं पा रही थी उसके गहरे लाल रंग के नीपल्ले विशाल के हाथ लगाने से अब बिलकुल तन के खड़े हो चुके थे और उसके हथलईओ में चुभने लगता है…

विशाल के ऐसे hi लगातार चुचिओ के मसलने से ऋचा की सांसे तेज़ चलने लगती है और जिसका असर विशाल को अपने लोडे पे बढ़ रहे दबाव से पता चलता है.. ऋचा अब पुरे जोश में विशाल का लुंड चूसने लग जाती है…

विशाल जिस से की अब और बर्दाश्त कर पाना मुश्कल होने लगा था वो अब बेकाबू होते हुवे ऋचा के गले को पकड़ता है और उसके मुँह में लुंड पेल देता है और धक्को की स्पीड बढ़ा देता है…






ऋचा विशाल के इस बदले तेवर को देख अपना मुँह पहले से ज्यादा खोल लेती है और उसकी आँखों की तरफ देखते हुवे अपने मुँह में लुंड पलवाने लगती है //…

विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh dddddddddddiiiiiiiiiiiiiiii

ऋचा- गगगगगगगगगगगगग ूऊगुगगगगग कितना बड़ा है तेरा ऊऊफफफफफफ मेरा पूरा मुँह भर गया तेरे लुंड से

ऋचा पहली बार खुले सह्ब्दों में लुंड का प्रयोग किया था जिसे सुन विशाल भी मस्त होने लग जाता है…

ऋचा को विशाल के लुंड का स्वाद इतना ाचा लगने लगता है की वो भी अपने मुँह से लुंड को निकल के विशाल को वही सोफे पे धक्का मर के लिटा देती है और खुद उसके ऊपर आ के उसके लुंड को मुँह में भरते हुवे उसे चूसना स्टार्ट कर देती है…






ऋचा अब पूरी गति से लुंड को मुठी में भर के मसल रही थी साथ के साथ चूस भी रही थी विशाल भी आंखे बंद किये एक नए मुँह की गर्माहट अपने लुंड पे महसूस कर रहा था… अब्ब तक दोनों एक दूसरे के जिसमे को बिना हाथ लगाए छेद रहे थे या बिना नज़रे मिलाये एक दूसरे की जिस्म की गर्माहट बढ़ा रहे थे लेकिन इस बार दोनों की आंखे आपस में टकरा जाती है और इन आँखों में शर्म पछतावा नहीं बल्कि हवस और वासना की डोरे तैर रही थी…

ऋचा मनो विशाल का लुंड चूसते छसुते इतना कामुक हो गयी थी मनो वो उसके लुंड को पूरा निगल hi जाएगी मनो उसे खा जाना चाहती हो और इसी प्रयास में वोट क कदम और आगे बढ़ाते हुवे विशाल के लुंड को को चूसते हुवे अब उसके टट्टे को मुँह में भर के चूसने लग जाती है….






वो उसके टैटू को मुँह में भर कैद ए.बी.ए. लेती है और मुँह में दबाये हुवे खींचने लगती है… विशाल को इस से दर्द तो हुआ लेकिन उस से ज्यादा मजा आ रहा था ऐसे टट्टे तो कबि अलका या सारिका ने भी नहीं चूसे थे uufffffffffffffffff

विशाल मस्ती के सागर में गोते लगा रहा था ो आंखे बंद किये बस ऋचा के मुँह के गर्माहट में अपने पिघलते लुंड के एहसास में खोया हुआ था…

विशाल- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ऐसे hi चुसो बहुत ाचा लग रहा है






अब ऋचा विशाल को वही सोफे पे बिठा के खुद घुटने के बल आ जाती है और उसके लुंड को मुँह में भर भर के चूसना जारी रखती है… विशाल अब अपनी जानवर को जो दबाये रखा था उसपर से कण्ट्रोल खोने लगा था ो किसी भी वक़्त रिच अक वो हाल कर सकता था जो बाकिओ के साथ करता आया है…

ऋचा- कैसा लग रहा है विशु??? मज़ा आ रहा है???

विशाल- बहुत ाचा लग रहा है दीदी और करो…

ऋचा- फिर धक्के लगा मेरे मुँह में जितना अंदर तक जायेगा उतना और मजा आएगा तुझे…

ये कह के ऋचा ने खुद विशाल को उसके मुँह को छोड़ने का न्योता दे दिया था…

विशाल- मेरा कण्ट्रोल खोने लग जायेगा दीदी..

ऋचा- कोई बात नहीं मैं शी लुंगी लगा dhakke…ye कह के ऋचा विशाल को उसके मुँह छोड़ने का लाइसेंस दे देती है…

उसके बाद विशाल खड़ा हो के रिच अक सर पकड़ता है ुर अपना लुंड ऋचा के मुँह में पेल देता है..






ऋचा- गगगगगगगगगगगगगगगग uuuuuuuuuuuugggggggggggg

पर विशाल अब भी अपनी असली औकात में नहीं आता बल्कि आराम आराम से ऋचा के मि को छोड़ रहा था और ऋचा की ख्वाईस साइड आज कुछ और hi थी वो अपने भाई की मासूमियत पे उसके तरफ देखते हुवे एक बार फिर से बोलती है..






ऋचा- थोड़ा तेज़ धक्के लगा सकता है विशु???? थोड़ा और अंदर दाल…. ये अभी और अंदर जायेगा…

विशाल जो की बड़े आराम से जाना छह रहा था ो ऋचा के उतावलेपन को देखते हुवे अपने ढको की स्पीड को तेज़ कर के ऋचा के मुँह को छोड़ने लगा tha…ab तक जो विशाल ऋचा को बड़े आराम से छोड़ रहा था अब उसे पुरे जोश में उसके मुँह में उतर जाता है.. इस बार लुंड पूरा जड़ तक रिच के मुँह में थुश देता है …






इस तेज़ और करारा धक्के के साथ ऋचा को विशाल के लुंड का असली औकात का पता चल जाता है… लुंड सिद्ध ऋचा के गले में के अंदर तक उतर गया था उसका पूरा मुँह विशाल के लुंड से भर गया था.. उसकी सांसे अटक गयी थी लेकिन विशाल लुंड निकलने की जगह अपना एक पेअर सोफे पे जमाते हुवे ऋचा के मुँह को जोर जोर से छोड़ने लग जाता है.. टीवी पे चल रही मूवी कभी की खत्म हो चुकी थी अब यह कोई और फिल्म चल रहा था जिसमे नायक नायिका प्रेमी नहीं भाई बहन थे और चुदाई के लिए मरे जा रहे थे…

काफी देर इसी तरह से मुँह की चुदाई करने के बाद विशाल ऋचा को बीएड पे ले जाता है और उसे लिटा देता है साथ hi उसका गार्डन बीएड के किनारे पे लटका देता है और ऋचा के कुछ समझने या सम्भलने से पहले अपना लुंड वापस से उसके मुँह में दाल के मुँह को एक बार फिर छोड़ने लग जाता है…






लुंड मुँह में होने के बावजूद विशाल की नज़रे ऋचा की गोल खरबूजे की आकर वाली चुचिओ पे चला जाता है जिसपे लगा चेर्रीनुमा निप्पल तन के बिलकुल लाल हो चुक्का था मनो अगर उसमे से अब उसका रास टपक आएगा और ऋचा की ये उन्नत चूचिया खुद बा खुद विशाल के हाथ को अपनी तरफ आकर्षित कर लेती है जिसे विशाल अपनी मुठ्यो में भींच लेता है और उसके चुचिओ को चुटकिओ से असाल्ट हुवे खींचने लगता है..

इस तरह से तने हुवे निप्पल के चुने मात्रा से जहां ऋचा के पूरा शरीर सिहरने लगा था यकीन उसके बावजूद इतनी बेरहमी से मसलते हुवे खींचने की वजह से उसके मुँह से चीख और आँखों में आंसू तैरने लगते है… चीख जो मुँह में लुंड होने की वजह से अंदर hi डाब के रह जाती है पर आंसू वो आँखों चालक पड़ता है.. लेकिन विशाल को इनसब से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता बल्कि वो और धक्के जोर जोर से लगाने लगा था और चुचिओ को मसलने लगा था….

ऋचा- uuuuuuuuuuuuuhhhhhhhuuhhuhhuhuuhhhhuuuhhu दोनों बहुत hi जोरो से लेंड पेले में लगे थे और ये तक भूल गए थे की सुबह हो गयी है..

उन्हें इस बात का आभास तब होता है जब रागिनी ऋचा को जगाने आती है क्युकी आज उन्हें शॉपिंग के लिए मार्किट जाना था और क्युकी पहाड़ो पे लेट नाईट ड्राइविंग सेफ नै होती इसलिए उन्हें शाम को जल्दी आने के लिए सुबह भी जल्दी hi निकलना पड़ता है और यही सोच कर घर की औरते तयारी में लगी हुई थी जिसके चहल पहल की आवाज़ कमरे में आ रही थी

रागिनी ऋचा के दरवाजे को नॉक करते हुवे पूछती है की वो जगी या अभी भी सो रही है. इस्पे ऋचा और विशाल दोनों की गांड फैट जाती है पर ऋचा मामले को संभालते हुवे विशाल को चुप रहने का इशारा करती है…






रागिनी के सवालो का जवाब दे के ऋचा एक बार फिर से अपने अधूरे काम को अंजाम देने में लग जाती है..

ऋचा- कितना टाइम लगता है तुझे विशु सुबह हो गयी और तेरा निकला hi नहीं अब सभी आने लगेंगे जल्दी कर वर्ण तुझे ऐसे hi जाना पद जायेगा…

इस्पे मोके की नज़ाकत देखते हुवे विशाल ऋचा से कहता है तज तेज़ करूँगा तो जल्दी हो जायेगा..

ऋचा- तो कर ले जैसे मर्जी अब

विशाल इतना सुनते hi एक बार फिर से ऋचा के मुँह में लुंड को पुरे गति से पेलने लग जाता है






ऋचा को विशाल के तेज़ तेज़ का मतलब खान पता था और जब उसने हाँ कर hi दी फिर तो विशाल को अपने पे आना hi था और बी ऋचा उसे रोक पाए उसके लिए देर हो चुकी थी वो ऋचा के गले को बीएड से लटका के पुरे गति से लुंड अंदर बहार कर रहा था… उसका हर झटका ऋचा को इतना दर्द देने लगा था मनो उसका गार्डन न बीएड से उतर जाये… ये ऋचा थी अलका थोड़े न जो विशाल के हैवानियत को झेल जाये…

विशाल का लुंड ऋचा के मुँह में ऐसा घर कर गया था की अब उसमे ऋचा के जीभ के लिए भी जगह नहीं बचती और उसकी कोमल गुलाबी जीभ विशाल के हर झटके के साथ बहार निकल जाती है..






काफी लम्बे और धुँवाधार चुदाई के बाद विशाल अपने चरम पे आने लगता है और वो ऋचा कोई शेयर से बताता है की उसका होने वाला hai….jiska ऋचा आँखों hi ाकन्हो से निकल देने का इशारा करती है…

विशाल का लुंड पानी चोर्ने hi वाला था की वो लुंड उसके मुँह से खींच लेता है पर ऋचा फेस दूर हटाने की जगह लुंड से सत्ता की अपने मुँह को खोल के जीभ निकल लेती है और देखते hi देखते विशाल का पानी ऋचा के जीभ पे बरस पड़ता है जिसे ऋचा बड़े hi इत्मीनान से पिने लगती है…






पानी निकल जाने के बाद दोनों एक दूसरे को हफ्ते हुवे देखने लगते है पर इस बार इनको नज़रो में कोई पछतावा नहीं था बल्कि एक नए रिश्ते की सुरुवात के लिए हामी थी.. इस बार विशाल का हो गया था पर ऋचा की नज़रे अब भी प्यासी थी समय होता तो जरूर वो विशाल के से अपने छूट की आग बुझवा लेती पर बहार कड़ी उसकी माँ रागिनी अब चिल्लाने लग जाती है जिसका जवाब देते हुवे ऋचा विशाल को उसके जाने के थोड़ी देर बाद जाने का कह के बाथरूम इ जा के तैयार होने लगती है और फिर अर्ली मॉर्निंग सभी मार्किट के लिए निकल पड़ते है…
 
अपडेट 61- होम अलोन विथ कामिनी बुआ



 
अपडेट-61 (होम अलोन विथ कामिनी बुआ)

घर की सभी औरते शॉपिंग के लिए मार्किट के लिए निकल चुकी थी और मर्द कुछ शादी के काम में तो कुछ खेतो में आग गए the…ghar में पूरा सन्नाटा पसरा हुआ था… विशाल भी अब ऋचा के कमरे से निकल के अपने कमरे में चला जाता है और फ्रेश हो के किचन में कुछ खाने को ढूंढने लगता है जहां उसकी मुलाक़ात उसकी बुआ कामिनी से होती है…





कामिनी किचन में कुछ पका रही थी विशाल की नज़र कामिनी पे पड़ते hi उसे कामिनी का वो अवतार याद आने लगता है जब वो रीमा के पति अरविन्द के लुंड पे कुक रही थी और उसी रात किसी का लुंड चूस के चाट पे उसका पानी उगल के आयी थी…

ऋचा ने बेशक उसके लुंड का पानी चूस के निकल दिया था लेकिन उसके लुंड की असली प्यास तो गीली छूट में जा के hi बुझने वाली थी और कामिनी को देखते hi विशाल का लुंड फिर से अंगड़ाई लेने लग जाता है..

विशाल के किटचे में आने की आहत से कामिनी एक बार उसकी तरफ देखती है और फिर विशाल से पूछती है

कामिनी- आ गया विशु..

विशाल- हाँ बुआ

कामिनी- नाश्ता लगा देती हु कर ले फिर मैं नहाने चली जाउंगी..

विशाल- ठीक है बुआ लगा दो..

और फिर कामिनी विशाल को नाश्ता दे के अपने कमरे में नहाने चली जाती है… विशाल जनता था की घर पे कोई नहीं है और इस से ाचा मौका नहीं मिलेगा कामिनी क करीब जाने का

विशाल जब से यह आया है वो लगातार कामिनी की हरकते देख रहा था उसे अचे से समझ आ गए था की कामिनी एक बहुत hi प्यासी औरत है और आज सही मौका है कामिनी के करीब जाने का इसलिए कामिनी के नहाने जाते hi वो चाट पे जा के उसके बाथरूम का वाल्व बंद कर देता ै जिस से अगले hi पल उसके बाथरूम में पानी आना बंद हो जाता है कामिनी जो इस वक़्त कपडे धोने के लिए बाथरूम में घुसी थी वो विशाल को आवाज़ लगाती है..

विशाल- जी बुआ बुलाया..

कामिनी- हाँ देखना पानी नहीं आ रहा है टंकी में पानी तो है जा के चेक कर आ

विशाल- ok बुआ और थोड़ी देर टाइम पास करने के बाद आ के कहता है पानी है फिर वो अपने बाथरूम में चक करने के बहाने से जाता है और कहता है मेरे बाथरूम में तो आ रहा है आप चाहो तो वो उसे कर लो..

कामिनी इस वक़्त अधनंगी हालत में थी यानि सिर्फ साड़ी लप्पेट के विशाल के कमरे की तरफ चल देती है…






कामिनी की साड़ी उसके दोनों कूल्हों के बिच बने दरार को छुपा पाने की नाकाम कोशिशे कर रहा था लेकिन फिर भी उसकी सरे से वो गहरी घाटी चुप नहीं पा रही थी उसके ऊपर न तो उसने ब्लाउज पहना था न पेटीकोट… वो उसी हालत में विशाल के पीछे पीछे उसके कमरे की और चल देती है उसके हाथ में थोड़े कपडे भी थे जिसे वो धोने के लिए गीला कर चुकी थी यकीन अचानक पानी बंद हो जाने से उसमे सर्फ लगा हुआ था और अगर न धोती तो सईद उसमे डिटर्जेंट का दाग रह जाता इसी सोच से वो उन कपड़ो को भी अपने साथ hi ले लेती है…





गीले सफ़ेद साड़ी में कामिनी कैग एंड किसी जेली की तरह थल थल कर रही थी और उसके बिच वो दरार था जिसमे सामने के सपने आज विशाल देख रहा था.. उसकी गोरी जंघे गीले सफ़ेद साड़ी में और भी ज्यादा कामुक लग रही थी..

विशाल- बुआ कपडे मशीन में दाल दो न हाथ से क्यों धो रहे हो..

कामिनी- साडी चीजे अभी hi खराब होनी थी मशीन भी नहीं चल था विशु इसे हाथ से hi धोना पड़ेगा..

विशाल- ओह्ह तो बुआ मैं आपकी हेल्प कर देता हु

कामिनी- तू क्या मेरी हेल्प करेगा

विशाल- क्यों नहीं मैं मुम्मा की भी तो हेल्प करता hi हूँ वैसे भी यहां करने को कुछ तो है नहीं फिर आपके साथ टाइम भी पास हो जायेगा,,,

विशाल के जिद की आगे आखिरकार कामिनी हेंक यह देती है और फिर दोनों एक साथ बाथरूम में घुस जाते है…

विशाल को अपनी प्लानिंग पूरी होते दिख रही थी जिस से वो मन hi मन खुश होने लग जाता hai..vishal अभी ज्यादा से जयादा समय कामिनी के साथ बिताना चाहता था इसलिए वो कपड़े चेंज कर के आने का कह के अपने कमरे में जाता है और पंत चंगे करने के बहाने अपनी चड्डी भी निकल देता है और बदल में एक शार्ट दाल लेता है जिस से उसके तने हुए लुंड का दर्शन कामिनी को हो सके… कपडे बदल के वो जल्दी से वापस से बाथरूम में आता है और पास रखे टूल पे बैठ जाता है..

कामिनी अब तक विशाल के इरादों से बिलकुल hi अनजान थी और वो अपने कपड़ो को धोना शुरू कर देती है.. कामिनी जिन कपड़ो में ब्रश मार के साफ का रही थी विशाल उसे बाल्टी में अचे से डुबो के साफ़ करने के लिए उठता है और बाथरूम के तप की जगह शावर चला देता है ऐसा वो जान बुझ कर करता है जिस से उसकी बुआ जो साड़ी लप्पेट के अपने चुचिओ को छुपाये बैठी है उनके वो दर्शन कर सके…

कामिनी- अरे ये क्या कर रहा है पूरा भीगा देगा क्या पहले कपडे तो धो लेने दे गधे..

विशाल- सॉरी बुआ गलती से शावर चल गया मैं अभी बंद कर देता हु पर तब तक कामिनी का बदन गिला हो चुक्का था उसकी साड़ी से उसके चुचिओ की झलक आने लगी थी…






पानी में भीगने से कामिनी के ऊपर जो सफ़ेद साड़ी थी वो बस नाम के लिए रह गया था उसका पूरा बदन और उसके ेके क कटाव को बिलकुल अचे तरीके से विशाल देख पा रहा था.. इस वक़्त कामिनी किसी मोहिनी से काम नहीं लग रही थी और उसे इस अवस्था में देख के विशाल का लुंड पंत के अंदर अंगड़ाई लेना शुरू कर देता है…

कामिनी को ऐसी हालत में देख विशाल की धड़कने बढ़ने लगी थी… और कपडे धोते हुवे जब कामिनी की नज़र एक बार को आईने पे पड़ती है तो उसका मुँह खुला का खुला रहा जाता है.. वो देख पा रही थी उसकी भीगी हुई साड़ी उसके बदन को धक् पाने में नाकाम थी वो बिलकुल नंगी अपने भतीजे की आगे बेसुध हो के खपड़े धो रही थी वही जरा सी नज़र निचे जाती है तो उसे दीखता है की उसकी छूट भी दिखने लगी है…






वो खुद को इस हालत में देख के शर्माने लग जाती है…

इधर कपड़ो को धोने में विशाल के पंत एंड थस्र्ट भी गिला हो गया था और चड्डी न होने के कारन उस के ऊपर कामिनी को लगातार इस अवस्था में देखने से उसके लुंड में जो कसावट आने लगी थी उसे पंत के ऊपर से साफ़ देखा जा सकता था और वही होता भी है उसका लुंड कामिनी के नज़रो में आ जाता है.. और जब वो विशाल के आधे सख्त लुंड को देखती है तो शरीर गीला होने के साथ साथ उसका गाला सूखने लग जाता है… विशाल का लुंड बहुत hi बड़ा दिख रहा था जीतनेय भी लुंड उसने लिए थे उनमे सबसे बड़ा हो सकता था पर इसका वो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती थी कन्फर्म नहीं बता सकती थी जब तक वो पुरे तरह से नंगा और सख्त होता न देख ले.. अब कामिनी जैसी छुडासी औरत जो घर के किसी मर्द का लुंड लेने से नहीं चुकती वो भला ऐसे लुंड को देखने का मौका कैसे चोर सकती थी… उसके ऊपर आज घर में कोई नहीं था तो उसके ख्याल से सईद किस्मत उसपे मेहरबान थी….

और विशाल के लुंड को घूरते हुवे कामिनी अपने hi ख्यालो में खो जाती है और अनायास hi उसका हाथ अपने चुचिओ पे चल जाता है और दूसरा हाथ सेक् हूत मसल देती है और उसके मुँह से सीत्कारी फुट पड़ती है..






कामिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh

विशाल- क्या हुआ बुआ लग गयी क्या???

कामिनी- काश लग जय ीक बार

विशाल- क्या मतलब बुआ मैं समझा नहीं

कामिनी- कुछ नहीं और ये धुले हुवे कपडे जमीं पे नहीं दूसरी बाल्टी में डालते है..

विशाल- ओह सॉरी बुआ मैं अब बाल्टी में डालूंगा और धोते हुवे विशाल के हाथ में कामिनी की पंतय आ जाती है.. जिसे विशाल कामिनी को दिखते हुवे पूछता है






विशाल- वाओ बुआ ये आपकी है??

विशाल के इस सवाल पे कामिनी शर्मा जाती है और वो फ़ौरन विशाल के हाथ से वो पंतय चीन लेती hai..aur उसे डांटते हुवे कहती है

कामिनी- बेवकूफ िंचीजो को हाथ नहीं लगते और हाँ मेरी hi है

ये कह के वो शर्माने लग जाती है लेकिन जब कामिनी विशाल के हाथ स ेपंती छीनने के लिए उठती है तो जो साड़ी उसने बड़े मुश्किल से समेटा था वो हल्का खसक जाती है जिस से उसकी चुचिअ पूरा बहार को आ जाती है…






कामिनी का भीगा कामुक बदन और नंगी चुचिओ को देखते hi विशाल के तनबदन में आग लगने लग जाती है उसका दिल करता है अभी कामिनी को पकड़ के छोड़ दे वैसे भी ये औरत जब अपने भाई से छुड़वा सकती है तो उसके bête से क्यों नहीं ..

विशाल अपने इन्ही ख्यालो में खोया था की कामिनी उसे टोकते हुवे उसके ख्यालो से जगती है

कामिनी- किन ख्यालो में खो जाता है बार बार ??? ध्यान खान है तेरा??

Vishal-kahi नहीं बुआ मैं तो कपड़ो को निचोड़ रहा tha(aise hi एक दिन तुझे भी निचोड़ूंगा)

कमी- ठीक है अब जो कपडे धूल गए है उसे जा के चाट पे रख दे मैं फैला दूंगी.. तू मत फैलाना

विशाल- ठीक है बुआ मैं रख आता हूँ..

विशाल के जाते hi कमनी की नज़र एक बार फिर से शीशे की तरफ जाती है तो वो देखती है की वो बिलकुल नंगी हुई पड़ी है वो मन में सोचने लग जाती hai(acha तो ये वजह था उसके ख्याल में खोने का… वैसे उसके लुंड में दम तो लगता है..) उसके लोडे को देख के तो मुझे भी कुछकुछ होने लगा है और इन्ही ख्यालो में वोट क बार फिर से छूट मसलने लग जाती है….

विशाल अब कपडे रख के वापस बाथरूम की तरफ आ जाता है,,,, आज वो कामिनी से एक पल के लिए भी दूर नहीं रहना चाहता था क्या जाने ऐसा मौका कब हाथ लगे इसलिए जो करना था आज hi करना था…

विशाल- बुआ रख आया कपडे अब क्या करू ये कहते हुवे वो जैसे अंदर घुसता है अंदर का नज़ारा काफी गरम कर देने वाला था.. कामिनी फर्श पे बैठ के अपने छूट से पेशाब की धार बहा रही थी…

कामिनी विशाल की आवाज़ सुनते hi दरवाजे की तरफ देखती है जहां उसकी नज़र विशाल पे पड़ती है जो उसे मुत्ते हुवे देख रहा था.. कामिनी इस वक़्त विशाल को देखते हुवे अपने छूट से निकल रहे पेशाब की धार को बहाने में लगी हुई थी… छूट से बाह रहे पेशाब को तो वो रक नहीं सकती थी इसलिए उसके चेहरे पे एक चमक और हसी आ जाती है…






कामिनी- सॉरी bête वो बहुत जोर से लगी थी तो और रोक नहीं पायी

विशाल- कोई बात नहीं बुआ सुसु तो सभी करते है… वैसे मुझे भी काफी देर से आयी है..

कामिनी- तो कर ले न मैं मुँह घुमा लेती हूँ

विशाल- आपको कोई प्रोब नहीं होगी

कामिनी- अरे अभी तो तूने खान ा सभी करते है तो कर ले

Vishal-thik है बुआ और इतना कह के वो अपना लुंड निकल के मूतने लग जाता है पेशाब की तेज गरगराहट सुन के कामिनी के छूट में सहने बजने लगती है और वो कनखियों से विशाल के लुंड को देखने की कोशिश करती है जो पहले से काफी हद तक ठीक से देख पा रही थी..

विशाल के लोडे को देख कामिनी के मुँह में पानी आने लग जाता है उसका मन होता है उसे मुँह में भर के चूस ले पर वो ऐसा कर नहीं सकती थी.. देखते hi देखते विशाल का पेशाब हो जाता है और वो लुंड को झाड़ के वह से साइड हैट जाता है…

कामिनी- च लैब जा और मुझे नाहा लेने दे फिर दोपहर का खाना भी बनाना है..

विशाल- जी बुआ और इतना कह के वो वहां से निकल जाता है लेकिन जाते जाते वो कामिनी के मन में अपने लुंड के लिए एक आग लगा जाता है..

कामिनी शावर के निचे कड़ी हो जाती है और शावर चला के अपने गरम ह रहे बदन पे उसके ठंडे बूंदो से जल रहे आग को बुझाने की कोशिश में लग जाती है…






लेकिन ये बुँदे खान कामिनी जैसी औरत के आग को शांत कर पाने में सक्षम है खासकर के जब उसके आँखों की आगे एक जवान और मोटा गरम लोढ़ा मौजूद हो… कामिनी ऐसे hi अपने छूट को मलते हुवे तो कभी अपने चुचिओ को दबा दबा के अपने आप को शांत करने की कोषसिंह करती है और फिर थोड़ी देर बाद नाहा के वो बाथरूम से बहार आती है…

उसके बाद वो विशाल को कपडे डालने का कह के चाट पे चली जाती है.. जहां विशाल भी उसके पीछे पीछे छत्त पे चला जाता है…

विशाल की नज़रे जब कामिनी पर पड़ती है तो वो देखता है कामिनी एक नील रैंड की साड़ी पहनी है और सर पे अभी भी एक सफ़ेद टॉवल लप्पेट रखा है






उसका बदन अब भी गीला था उसके लातो से पानी की बुँदे उसके गाल और गार्डन से होते हुवे कुछ उसके पीठ की तरफ तो कुछ उसके सामने बानी गहरी घातिओ में प्रवेश कर जाता है.. फिर विशाल की नज़रे जब थोड़ी और निचे जाती है तो देखता है की पानी की बुँदे सिर्फ उसके चटीओ पे hi नहीं बल्कि उसके निचे बानी गहरी जल कुंड में भी कुछ बुँदे चामल रही है..





विशाल मन hi मन कामिनी को छोड़ने की तरकीब सोचने लग जाता है की और वो भागते हुवे निचे जाता है फिर जल्दी hi ऊपर आ जाता है… अपने बुआ के हुस्न में खोया विशाल कामिनी को अपने ाल में फ़साने की तरकीब धुंध hi रहा था की उसे चाट पिउ ो सफ़ेद नीसाण दिख जाते है जिसमे कामिनी का एक बड़ा योगदान था..

विशाल- बुआ ये पुरे चाट पे सफ़ेद सफ़ेद दाग कैसा है??

विशाल के इस सवाल पे और फिर उस दाग को देख के कामिनी सकपका जाती है जो विशाल उसे दिखा रहा था,,

कामिनी- मुझे कैसे पता होगा किसी चिड़िया ने पॉटी सुसु करा होगा टब hi क्या दाग धब्बे चेक कर रहा है…

विशाल- कुछ नहीं बुआ ऐसा hi सफ़ेद दाग उस दिन आपके बालो में भी थान ा तो इसलिए मन में सवाल आ गया..

विशाल के इस बात ने कामिनी का मनो पूरा खून hi सूखा दिया हो वो बात को घूमते हुवे और विशाल के सालो से बचते हुवे तेज़ कदमी से निचे जाने लगती है और विशाल भी उसे जाता हुआ देख रहा था और साथ hi अपने लुंड को भी मसल रहा था…

कामिनी अभी 2-4 सीढिया hi उत्तरी होगी की एक तेज़ चिल्लाने की आवाज़ आती है विशाल उसके पीछे जाता है वो देखता है की कामिनी जमीं पे गिरी पड़ी है और कराह रही है…

विशाल- क्या हुआ बुआ कैसे गिर गयी..

कामिनी- अरे पता नहीं देतेरगेट का पानी यह कैसे गिरा हुआ है मैं उसी में फिसल के गिर गयी और तू सवालही करेगा या उठाएगा मुह्हे

विशाल- ओह्ह्ह सॉरी बुआ और विशाल कामिनी क सहारा दे के उठाने लग जाता है …कामिनी भी विशाल का सहारा ले के उठने की कोशिश करने लगती है की तभी उसके कमर में तेज़ दर्द होता है और वो वापस से गिर पड़त है जिस से उसकी मखमली चुचिअ विशाल के पंजो में क़ैद हो जाती है…

कामिनी को कमरा के दर्द के साथ चुचिओ प अपने भतीजे के पंजे के एहसास मात्रा से शरीर में झुझहुरि सामने लग जाती है…

कामिनी- आआह्ह्ह्ह विशु मेरे कमर में मोचा ा गयी है उफ्फ्फ मैं क्या करू..

विशाल का हाथ इस वक़्तक कामिनी के मखमली कमर और उसके उन्नत गोल मुलायम चुचिओ पर थी आज पहली बार कामिनी विशाल के इतने करीब गया था की उसके बदन की खुसबू से विशाल को माधोसी चने लगती है और उसके हाथो का दबाव खुद बा खुद कामिनी के हुचिओ और कमर से निचे और चूतड़ों के ऊपर बढ़ने लग जाती है…

कामिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh विशु मुझे नहीं लगता मैं चल पाऊँगी…

अपने भतीजे का सहारा ले के चल रही कामिनी के बदन में उत्तेजना की लहार दौड़ने लग जाती, उसकी आंखे खुद बा खुद बंद होने लगी थी और सांसे बढ़ जाती है तेज़ सांसो के होने से उसकी चुचिओ पुरे गति से ऊपर निचे हो रही थी मनो उसके चोली का हुक अभी टूट के बिखर जायेगा और उसकी चुचिअ ब्लाउज से निकल के विशाल के हाथो में समां जाएगी…

कामिनी का बदन पुरे तरीके से विशाल से चिपका हुआ था उसके चूतड़ों का कटाव विशाल के जांघो और उसके आधे तने हुवे लुंड से बार बार घर्षण मचा रही थी और हर घर्षण कामिनी की और विशाल दोनों के अंदर के चिंगारी को हवा देने का काम करने लगती है… विशाल के इस तरह चिपक के सहारा

कामिनी अब अपने भतीजे विशाल का सहारा ले के कदम आगे बढ़ने लगती है और इस तरह बार बार अपने चूतड़ों पे विशाल के लुंड से पद रहे ठोकरों से कामिनी के मन में उसे और ज्यादा महसूस करने की जिज्ञासा होने लगती है वैसे तो उसे दर्द हो रहा था पर उसके बावजूद उसे कमर का दर्द अब अपने छूट में महसूस होने लग जाता है और वो जान बूझकर एक बार फिर से गिरने का बहाना बनते हुवे विशाल की आगे अपने चूतड़ भिड़ा देती है और सहारा पकड़ने के चक्क्र में उसका हाथ उसके लुंड को पकड़ लेता है…

कामिनी के इस तरह गिरने से याय उन कहे की उसके लुंड को पकड़ के गिरने से विशाल का पंत भी निचे सरक जाता है और उसका फुंकारता हुआ मोटा लम्बा तगड़ा लुंड कामिनी के हाथो में समां जाता है.. उसकी साड़ी भी अब खुल के वही फर्श पे बिखर चुकी थी और वो इस वक़्त मात्रा पेटीकोट और ब्लाउज में थी…

कामिनी का तो मनो विशाल का लुंड हाथ में आते hi गाला सुच जाता है.. इतना मोटा और तगड़ा लुंड और गरम भी कितना है uuuuuuuuuuuuufffffffffffff कामिनी के मुँह से सीत्कारी फुट पड़ती है वो मन hi मन इसे चूसने का ख्याल बना चुकी थी…

इधर विशाल भी मोके के नज़ाकत को देखते हुवे कामिनी के चकुचिओ को कास के मसल देता है

कमी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh विशु

विशाल- बुआ आराम से

कामिनी- मुझे नहीं लगता मैं चल पाऊँगी

विशाल- मैं आपको उठा लेता हु बुआ

कामिनी- उठा पायेगा मुझे

विशाल- हाँ क्यों नहीं ये देखो और इतना कह के विशाल कमनी के छूटो को अपने मुट्ठी में भरते हुवे अपने गॉड में उठा लेता है और उसे उसके कमरे की तरफ ले जाने लगता जय

कामिनी की ने इस वक़्त विशाल के चेहरे पे hi थम सी गयी थी

कामिनी- कितना मजबूत है ये मुझे तो ऐसे उठा लिया जैसे कोई कठपुतली हूँ मैं और उसके ऊपर इसका लुंड uuffffffffffff लगता है भगवान ने ाँ मेहरबान हो के hi मुझे घर में ये अकेला मौका दिया है…

कामिनी अपने इन्ही ख्यालो में खोयी थी की तब तक विशाल उसे उसके कमरे में ला के उसके बीएड पे लिटा देता है…

विशाल अभी मन में सोच hi रहा था की अब और आगे कैसे बढ़ा जाये की कामिनी उसे टोकते हुवे कहती है विशु एक काम और कर दे bête..

विशाल- हाँ बुआ बोलो न

कामिनी- वो पास वाले ड्रावर से बाम ला दे मैं कमर इ मॉल लुंगी

विशाल- जी बुआ लता हु और विशाल बाम ढूंढने लगता है पर उसे बाम नहीं मिलती इस्पे कामिनी कहती है कामिनी- ओह्ह लगता है ख़तम हो गया होगा तू एक काम कर किचन से तेल ले आ उस से मालिश कर लेती हूँ, शादी का घर है ऐसे में ये दर्द नहीं पाल सकती…

विशाल किचन से तेल ले के आता है और कामिनी को पकड़ते हुवे बोलता है बुआ आप पीछे कैसे लगाओगे आपका हाथ जायेगा hi नहीं आप कहो तो मैं लगा दू

कामिनी- तू लगा पायेगा

विशाल हाँ क्यों नहीं

कामिनी ठीक है फिर लगा दे और कामिनी पेट के बल अपनी गोल उठी गांड को विशाल की तरफ घूमते हुवे लेट जाती है….






विशाल पहले तो कपडे के ऊपर से hi कामिनी के कमर को दबाने लग जाता है और वो उसके पेअर उसके जांघो को भी दबा रहा tha..fir वो कामिनी के पेटीकोट को ुतःते हुवे उसके जांघो तक कर देता है जिस से उसकी गोरी केले के तने जैसी जंघे कमरे के हलके रौशनी में कुछ ज्यादा hi कामुक लग रही थी





विशाल अब कामिनी की कासी हुई मगर मुलायम जांघो पे गरम तेल डालने लग जाता है जिसके एहसास मात्रा से कामिनी की छूट में करंट दौड़ने लग जाती है और उसके मुँह से आह्ह्ह्ह निकल पड़ती है…

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh

विशाल- क्या हुआ बुआ ज्यादा गरम तो नहीं

कामिनी- नहीं रे ये तो अचे लगने पे निकलती है..

विशाल- ाचा ये बात है.. तो मई अब मालिश करू

कामिनी- हाँ कर

कामिनी अपने भतीजे के हाथो के दबाव को अपने जांघो पे महसूस कर के मस्त हुवे जा रही थी उसके शरीर में वासना का तूफान उमड़े लगा था और वो बस यही सोचने लग जाती है की इसे और आगे कैसे बाध्य जाये और कुछ यही ख्याल उधर विशाल के भी थे.. कामिनी अभी अपने ख्यालो में खोयी थी की उसे अपने जांघो और चूतड़ों के बिच विशाल के मसलने से जो तेज़ दबाव का एहसास होता है उस से वो गड गड हो जाती है वो अपने मुठी में तकिये को भिचने लग जाती है और दांतो से होंठो को दबाने लग जाती है….

अब विशाल उसके कमर पेट ेल गिरता है और उसपे अपने हाथो का दबाव बड़हन इलाज जाता है…






कामिनी की एक तरफ चिकनी जंघे बिलकुल नंगी थी तो वही चूतड़ों के ऊपर का हिस्सा कमर तक भी बिलकुल नंगा था उसका गोरा चिकना और मुलायम बदन विशाल को उत्तेजित करने लग जाता है उसका लुंड तन के बार बार कामिनी के जांघो को टच हो रहा था जिसका एहसास कामिनी को भी होने लगा था,,,,

विशाल का मन थोड़ा आगे बढ़ने का ो रहा था पर उसकी हिम्मत नहीं हो रहीथी की वो आगे badhe…par जब कामिनी जैसी भड़काऊ औरत की आग एक बार भड़क जाये तो फिर ज्यादा कुछ करना नहीं पड़ता है और यह भी वैसा hi कुछ होता है

कामिनी अपने पेटीकोट को अपने कमर तक चढ़ लेती है जिस से उसकी गांड बिलकुल खुले में विशाल को दिख रही थी कामिनी ने इस वक़्त एक पतली सी पंतय दाल रखा था जो उसके चूतड़ों के हिसाब से बहुत छोटी थी…






कामिनी- इधर भी जरा जोर जोर से हाथ चला बहुत ाचा लग रहा है … आरसे बाद कोई ऐसी मालिश कर रहा है…

विशाल- आरसे बाद मतलब पहले कोण करता था बुआ

Kamini-tere फूफा hi करेंगे न और कौन मेरी पेटीकोट उठाएगा गधे

कामिनी खुलम खुला पेटीकोट उठाने की बात कर देती है और ये बात सईद वो जान बुझ कर विशाल को उकसाने के लिए hi करती है…

विशाल- बुआ एक बात कहु अगर ब्यूरेन ा मनो

कामिनी- हाँ बोल न क्यों बुरा मानूंगी

विशाल- ये ब्लाउज उतर डोज तो अचे से पीठ की भी मालिश कर दूंगा क्युकी तेल लग रही है…

कामिनी- अव्हा इतनी सी बात रुक और इतना कह के वो अपना ब्लाउज उतरने लग जाती है…

ले ब्लाउज उतर दिया और ब्रा दिक्क्त करे तो उसके स्ट्रिप भी तू खोल लेना और बी अचे से मस्सगे जकर दे मेरी.. ट्रे हाथ में तो जादू है विशु…

और फिर विशाल कामिनी के पीठ पे तेल लगा के उसकी मालिश काने लगता है पर बार बार ब्रा की स्टॉप हाथ म लग रही थी जिसका एहसास कामिनी को भी हो रहा था और वो इस रुकावट से चिढ भी रही थी..

कामिनी- खा थान ा तुझे ब्रा दककत करे तो खोल लेना

विशाल- हाँ बुआ कर तो रही है

कइनी- तो खोल दे न सोच क्या रहा है

और इस तरह परमिशन मिलते hi विशाल कामिनी की ब्रा के हुक खोलने लग जाता है…






और कामिनी भी वशाल का साथ देते हुवे ब्रा को अपने जिसमे से अलग कर देती hai..ab कामिनी का पीठ पूरी तरह से नंगा था और विशाल उसपे तेल्ल एगेट हुवे मालिश कतरने लग जाता है…

विशाल का लुंड जो पुरे औकात में आ चुक्का था ो बार बार कामिनी के जांघो को खरोच रहा था और उसके ऊपर पीठ पे विशाल के मजबूत पंजो की मालिश कामिनी पूरी तरह से मदहोश होने लग थी उसकी पंतय का वो भाग जहां छूट का मुख्यद्वार होता है वो गीली हो जाती है… कामुकता पे स्वर कामिनी अब खुद अपनी गांड और जंघे विशाल के लुंड पेग हिज रही थी और विशाल भी लगातार अपने दबाव बढ़ए जा रहा था…

कामिनी- विशु ऐसे दूर से नहीं तू मेरे कमर के ऊपर बैठ के मेरे पीठ की मालिश कर तब तुझे उसने होगी ..

विशाल- जी बुआ.. और कामिनी की तरफ से हरी झंडी मिलते hi विशाल कामिनी के चूतड़ों के बीच अपना लुंड फसा के बैठ जाता है जिसके चुभन से कामिनी के छूट से पानी की धृ फुट पड़ती है और ये धृ बता रही थी की कामिनी कितनी बड़ी रंडी है कितनी बड़ी कुड़सी औरत है..

इस तरह से बैठने से कामिनी की भरी भरकम गांड ठीक विशाल के पंत में बने तम्बू को महसूस होने लगा था और कामिनी को विशाल के तगड़े लुंड की चुभन अपनी गांड पे होने से कामिनी पिघलने लगती है विशाल देखते hi देखते कामिनी के बदन को अपने आगोश में भर लेता है

ये एहसास दोनों के लिए hi बहुत उत्तेजित कर ेने वाला था कामिनी की सांसो की राफ्तेर अब गति पकड़ चुकी थी तो वही विषा को अपने लुंड के सुपडे पे कामिनी कैग एंड और छूट से निकल रहे भाप महसूस होने से वो थोड़ा और दबाव उसके गांड पे आना देता है जिस से विशाल का लुंड कामिनी गांड के तंग छेद को ठोकर मर देता है और एक बार फर से कमनी के मुँह से हलकी चीख निकल पड़ती ै…

विशाल अब धीरे से कामिनी की पंतय भी खिसका के उतरने लग जाता है… पर मदहोशी में गोटा लगा रहे कामिनी को इस बात का एहसास तो हो रहा था की वो अब नंगी होने अला है लेकिन वो इस ाजे में खोयी थी की मनो वो खुद अब नंगी होना छह रही हो ये कपडे उसके बदन को चुभने लगा था कामिनी खुद hi अपनी कमर उठा लेती है जो विशाल के लिए एक खुला इशारा था की वो अपनी बुआ की पंतय निकल सकता है..






कामिनी की छूट पैन ऐकोर रही थी पर साथ hi उसका गाला सूखने लग जाता है..

कामिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh विशु

विशाल- ाचा लग रहा है न बुआ??

कामिनी- बहुत ाचा लग रहा है अब तो मैं रोज तेरे से मसाज करवाउंगी..

और फिर विशाल कामिनी के चूतड़ों को मसलना सुरु कर देता है और कामिनी आआअह्ह्ह्हह के चीख से विशाल का समर्थन दे रही थी..






कामिनी विशाल के हर वॉर की आगे ढेर हुवे जा रही थी वो अब बिलकुल कामपिपासु हो चली थी वो अपनी छूट को बीएड पे जोर जोर से मसल रही थी मनो अब वो झड़ना छह रही हो की तभी उसे वो एहसास मिलता है जिस से उसका पूरा शरीर झनझना जाता है और मुँह खुला का खुला रह जाता है…





विशाल कामिनी के चूतड़ों को मलते मलते अपना अंगूठा उसकी गांड में दाल देता है..

अंगूठे का गांड में घुसते hi कामिनी का मुँह से एक जोर की चीख निकल पड़ती है उसे विशाल से इतना आगे बढ़ने की उम्मीद न थी वो भी इतनी जल्दी और विशाल की ये हरकत कामिनी को ये बताने के लिए काफी था की बीटा बाप से कई गुना आगे है…

Kamini—aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है ये तू…

विशाल- मस्सगे बुआ आपको ाचा नहीं लगा???

कामिनी- ये कैसी मालिश है bête…

कामिनी की हथ्यार डालती हुई आवाज़ विशाल को ये सन्देश दे रही थी की कामिनी अब उसे आगे बढ़ने से नहीं रोकने वाली और फिर उसके तेज़ उखड़ती सांसे ये बया कर रही थी की अब उसका जिस्म उसके काबू में नहीं है और इसी का फायदा उठाते हुवे विशाल कामिनी की दोनों साइड से जङ्घो के बिच हाथ डालते हुवे उसके छूट के पास ले जाता है और उसे सहलाते हुवे कामिनी को पलट के अपनी तरफ उसका मुँह घुमा देता है…






कामिनी की आँखों में अब एक चमक थी जो उसके दर्द पे हावी हो चला था वो आँखों hi ाकन्हो में विशाल से आगे बढ़ने का कह रही थी विशाल भी अगले hi पल ढेर सारा तेल कामिनी के पेट छाती और उसके चुचिओ पे फैला देता hai….aur उसके गार्डन को पकड़ के अपने दूसरे हाथ से उसके छूट को मसलते हुवे उसमे अपनी दो उंगलिया पेल देता है…





कामिनी का पूरा शरीर तिलमिला जाता है वो अपनी गांड उठा उठा के अपने जिस्म में उठ रहे तरंग को दबाने की कोशिश कर रही थी लेकिन विशाल अपने हाथो की स्पीड बहुत तेज़ कर देता है और कामिनी उतनी hi तेज़ी से अपने कमर को उठा उठा के विशाल की उंगलिया अपने छूट में सामने लग जाती hai…aur कामवासना में जल रही कामिनी का हाथ अगले hi पल विशाल के तने हुवे लुंड पे चला जाता है..





अब विशाल जितनी स्पीड से कामिनी की छूट को अपने उंगलिओ से अंदर बहार कर रहा था इधर कामिनी भी तेज़ तेज़ मुठी में जकड के विशाल का लुंड हिला रही थी…

कमरे में दोनों बुआ भतीज की सांसो की गूंज गूंजने लग जाती है

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh विशु ये क्या कर दिया तूने uuuufffffffffff जोर जोर से कर मेरे चुसो की भी मलिश कर दे bête..

विशाल कामिनी की बात सुन कामिनी की चुचिओ की तरफ बढ़ता है और तेल में सनी कामिनी की चुचिओ को मुट्ठी में बाहर लेता है..






सर के पास आ जाने से जहां विशाल कामिनी की चुचिओ का मर्दन काने ागता है तो वही उसका लोड अब कामिनी के हनथो के बिलकुल करीब उसके होंठो पे रगड़ खाने लग जाता है जिसके ठोकर को कामिनी ज्यादा अवॉयड नहीं कर पति और अपना मुँह खल के अपने जीभ विशाल के लुंड पे फेरने लग जाती है,,, लुंड पे बुआ के जीभ के छुवन से विशाल के लुंड में भी करंट दौड़ने लग जता है और वो अगले hi पल एक झटका मार के अपना लुंड कामिनी मके मुँह में पेल देता है…





अब विशाल कामिनी की दोनों चुचिओ को मसलते हुवे उसके मुँह में अपना लुंड धीरे धीरे अंदर बहार कर रहा था… और कामिनी भी अब मुँह खोल के विशाल का लुंड किसी लोल्ली पॉप की तरह चूस रही thi…aise hi लुंड चूसते हुवे वो विशाल के आँखों में देखती है और आँखों hi आँखों में कुछ कह रही हो

कामिनी की आँखों में अब विशाल के लिए कोई निर्देश था जिसका मतलब विशाल समझ रहा था पर वो उसे अनसुना कर देता है इस्पे कामिनी hi आगे बढ़ते हुवे कहती ै…

कामिनी- इस से पहले की कोई आ जाये जॉब hi करना है कर ले मैं नहीं रोकूंगी आज लेकिन अगर आज चूक गया तो फिर मैं तेरे हाथ नहीं आने वाली..

कामिनी के इस तरह खुल्लम खुल्ला कहें से विशाल को अब आज़ादी मिल गयी थी और वो अब और ज्यादा समय नष्ट करना ठीक नहीं समझता इसलिए वो कामिनी की छूट की तरफ जाता है और उसके कमर में हाथ दाल उसे बीएड के किनारे खींच लेता है






वासना की आग में जल रही कामिनी भी अपनी गांड विशाल की तरफ खिसकते हुवे बीएड के कोने पे ले जाती है और अपनी छूट विशाल को सरेंडर कर देती है.. विशाल भी उसकी टंगे उठाते हुवे अपना लुंड और उसकी छूट जो पहले से hi तक से लबालब भरा हुआ था ो कामिनी के छूट में उतर देता hai..abhi आधे से थोड़ा ज्यादा लुंड hi कामिनी के छूट में गया था की कामिनी ी चीख फुट पड़ती है

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh कितना बड़ा है तेरा….






विशाल- बड़े से तो मजा है बुआ जो अछि तरह से तेरी छूट खोल dga…aur इतनेमे तेरा ये हल है अभी तो आधा hi गया है बुआ

कामिनी- हाँ तो खोल दे न कोई भी नहीं है तुझे रोकने वाला

विशाल- ऐसा है तो फिर ये ले बुआ और इतना कह के विशाल अपना लुंड खींच क ीक बार दुबारा से जोरदार झटका मरता है की पूरा लुंड उसके छूट के दीवारों को खोलते हुवे वहां था जा पहुँचता है जहां तक आज तक कोई भी नहीं जा पाया था..






कामिनी की एक जोरदार चीख गूंज उठती है और उस गूंज का शोर घर के किस कोने तक गया था ये तो पता नहीं लेकिन पूरा कर्मा कौंधने लगा था…

कामिनी के छूट के जैसे परखचे उदा दिए हो उसका सहरीर अकड़ जाता है और इस एक hi झटके ने उसके छूट के उस द्वार को खोल दिया था झा से फवारा बेहटा है और कमी की छूट का भी फवारा बहने लगता है और फिर कामिनी वही धाम से गिर जाती है लेकिन विशाल के लिए तो ये बस सुरुवात है वो कामिनी को वही लेता के अपना लुंड उसके छूट में तेज़ी से अंदर बहार पेलने लगता है..






अब विशाल कामिनी क ीक जांघ को मोड़ के बीएड पे टिका देता हैए और दूसरे को बीएड पे लिटाये कामिनी की छूट छोड़ने लग जाता है.. कामिनी जो अभी अभी hi झड़ी थी वो बेसुध हो के विशाल के लुंड की गर्माहट अपने छूट में भर रही थी.. कामिनी का छूट पूरा भर जाता है उसके छत की दीवारे फ़ैल गयी थी और उसे ऐसा लग रहा था ाजिसे कोई मोटा बांस उसके छूट में पेल दया गया हो…

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh फाड् दी तूने मेरी छूट कितना बड़ा है रे तेरा uuuuuuuuffffffffffffffffff पर बहुत मजेदार है रुक मैं इस्पे कूदूंगी तू निचे लेट जा और इतना कह के कामिनी विशाल को लिटा देती है और खुद उठ बैठती है..






विशाल को कामिनी का ये रूम बड़ा hi मनमोहक और कंक लगता है उसकी नज़र जब कामिनी के होंठो पे जाती है तो उस से बर्दाश्त नहीं होता और वो कामिनी के गले में हाथ दाल के अपनी और झुकता है और उसके होंठो को चूमने लगता है… इधर कमी का हाथ भी अब विशाल के लोहे के सामान सख्त हो चुके लुंड पे चलने लगता है और वो इसे मुरे जोश में मुठियाने लगती है…

कामिनी- ये बहु बड़ा है रे इतना बड़ा कैसे छुपा के रख पता है तू और गरम भी ufffffffffffff मेरी छूट में इसकी गर्माहट अभी तक लग रही है.. अब जल्दी से छोड़ ले अपनी बुआ को कही आधे में कोई आ गया तो मई प्यासी hi रह जाउंगी इस लुंड के लिए और इतना कह के कामिनी कामिनी विशाल के लुंड पे बैठ जाती है






और बैठते hi अपनी गांड का दबाव उसके लुंड पे ाहिष्ते ाहिष्ते बनाना लगती है और फिर देखते hi देखते विशाल का लुंड कामिनी के छूट में अपना गर बनाते हुवे उसके गहराइयो में खोने लग जाता हाईल ुण्ड अभी भी पूरा नहीं समां पाया था पर कामिनी को उसकी बनावट अपने छूट में महसूस होने लगी थी.. उसकी छूट इतने में hi भर गयी थी…

कामिनी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh और कैसे लू इसे कितना मादा है मेरी छूट भर गयी है…

तभी विशाल अपना देव षाले हुवे कहता है

विशाल- इतना बड़ा पहले कभी नहीं लिया है बुआ??

विशाल के इस बात से कामिनी के चेहरे क रेड उतरने लगता है और वो लड़खड़ते आवाज़ में कहती है

कामिनी- क्या मतलब पहले इतना बड़ा नहीं लिया ?? मैं क्या सब की आगे अपनी तंग खोले फिरती हु

विशाल- अरे मेरे मतलब फूफा का भी तो बड़ा होगा

कामिनी नहीं इतना nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मादरचोद बता तो देता

कामिनी अभी अपनी बात पूरा करती उस से पहले विशाल उसे कंधो से दबाते हुवे एप लुंड पे बिठा देता है और साथ hi निचे से एक करारा प्रहार करता है जिस से पूरा लुंड कामिनी के नाभि तक जा ाहुचता है जिसका आकर कामिनी को अपने पेट पे बहार से hi दिख रहा था…






कामिनी की आँखों से आंसुओ की धरा फुट पड़ती है और वशाल अब उसकी परवाह किये बिना कामिनी के ऊपर पिछले दो दिन का हवस उतरने लगता झाई

कामिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मर गयी बहार निकल ले bête मैं नहीं ले पाऊँगी तेरे गधे जैसे लुंड को निकल ले प्लस

पर विशाल अब पीछे मुड़ने वालो में से खा था ो अब कामिनी की छूट का बजा बजाना सुरु कर दिया था…

कामिनी जो विशाल के हमले से निढाल हो के उसपे hi गिर चुकी थी अब उसके छूट में आराम महसूस होने लगती है और वो दुबारा से विशाल के लुंड पे धीरे धीरे कूदना सुरु कर देती है..






कामिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh विशाल छोड़ अब थोड़ा तेज़ ढके मर bête उउउउउफफ्फ मैं फिर से आने वाली हुन्न….

विशाल के लुंड ने कामिनी के छूट में हड़कंप मचा दिया था और उसे भूचाल में कामिनी एक बार फिर से अपना लावा उगलने को तैयार थी..

और वो अब पुरे जोश में तेज़ तेज़ अपने भाई के bête के लुंड पे अपनी गांड पटकने लगती है..






विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh बुआ कितनी गरम छूट है तेरी uuuuuffffffffffffff अउ टाइट भी

कामिनी- कुछ मत बोल बस तेज़ तेज़ धक्के लगा मेरा होने वाला है ऊऊफफफफफफफफफ फाड् दी तूने मेरी छूट पहली hi बार में कैसा निर्दयी है तू

विशाल- uuuuuuuffffffffffff बुआ तेरी चुचिअ कितनी मोती है इन्हे पिने का दिल हो रहा है..

कामिनी- तेरी माँ अक नहीं पिता ककया

विशाल- माँ अक hi तो पिया तभी तो तेरी छूट के बजा बज गया पहली hi बार है

कामिनी- हाँ तेरी माँ है भी तो टॉप की रैंड तो उसका दूध भी टॉप का hi होगा तेरी ताक़त देख के पता चल रहा ै…

अपनी माँ के लिए कामिनी के मुँह से रैंड सुन के विहल को गुस्सा आ जाता है और वोट क बार फिर से कामिनी के छूट में तेज़ झटके मरना सुरु कर देता है..






कामिनी- विशाल के इस तरह हवसी होने से चिल्लाने लगती है वो दर्द से बिलबिलाने लगती है

कामिनी- क्या हुआ कुत्ते की औलाद आराम से छोड़ मादरचोद जानवर क्यों बन गया कुटिया के पिल्लै

विशाल- कुटिया का पिल्ला हु न बुआ तो अब तुझे देख कैसे छोड़ता है ये पिल्ला और वो पुरे ताक़त से कामिनी को छोड़ने लग जाता है जिस से कामिनी की दर्द की साडी सीमाएं टूट चुकी थी उसकी कामुक सिसकारियां दर्द भरी चीखो में बदल चुकी थी






विशाल हर झटके के साथ उसके गांड पे थ्प्दो की झड़ी लगा दिया था.. कामिनी की छूट जो पिछले एक घंटे में 2-3 बार पानी बहा चुकी थी उसके छूट में विशाल का लुंड इतना मानता कर रहा था की उसकी छूटे क बार फिर से तैयार हो गयी थी और कामिनी चीखते हुवे झाड़ जाती है





कामिनी की छूट इस बार उसके रास के साथ पेशाब की धार बह फुट पड़ती है और वो विशाल के लुंड से उठ जाती है और तेज़ी से झड़ते हुवे विशाल के पेट पे याय उन कहे की उसके लुंड पे मूतना सुरु कर देती है

कामिनी की सांसे अब उसी के काबू में नहीं था ो बिलकुल hi पष्ट हो छूटे थी और बेजान मूर्ति की तरह बीएड पे गिर पड़ती है लेकिन विशाल का प्रोग अभी फिनिश नहीं हुआ था ो कामिनी की टैंगो को हाथो में पकड़ता है और अपनी और खींच के हवा में उठा देता है जिस से टैंगो के साथ उसकी गांड भी हवा में उठ जाट है..

कामिनी के शरीर में अब कोई जान नहीं बचा था इसलिए वो विशाल के हाथो की कठपुतली बन चुकी थी और विशाल का इस तरह उसके टैंगो के उठाने से वोट क बार फिर से सेहम जाती है.. उसके छूट की और उसकी दोनों की वो हालत नहीं बची थी की विशाल को और झेल सके…






अभी विशाल ने लुंड उतरा hi था की कामिनी बिलख पड़ती है…

कामिनी- और नहीं झेल पाऊँगी तुझे uuuffffffffffffff मर गयी मैं … ाफ्लि बार में hi मेरी छूट फाड़ दी तूने aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh और नहीं तू मुँह छोड़ ले मेरी छूट छोड़ दे aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मर गयी में






विशाल- बस बुआ मेरा भी होने hi वाला है लेकिन उस से पहले मई तेरी वो हाल करूँगा की अब से तुझे हर किसी का लुंड छोटा लगेगा

कामिनी- मैं कोई रंडी नहीं हु जो हर किसी का लुंगी

विशाल- मैं फूफ की कह रहा हु बुआ ….. अभूत रसदार छूट है तेरी देख मेरा मन hi नहीं भर रहा है और उसके ऊपर तेरी ये चुचिअ uuuuuuuuuffffffffffff इसे तो पि जाने को जी कर रहा ै

कामिनी- तो पि जा सब तेरा है आज से खा जा पि जा निचोड़ दाल अपनी बुआ को uuuuuuuuufffffffffffff






विशाल- बुआ मेरा होने वाला है,….

कामिनी- बहार निकलना अंदर नहीं चूर्ण कंडोम नहीं लगाया है tune….idhr लगातार झड़ने से और उसके बावजूद कामिनी के छूट में विशाल के लुंड के अंदर बहार होने से कामिनी की छूट से अब झाग निकलने लगता है…






विशाल- बुआ तेरी छूट से तो झाड़ निकल रहा है..

कामिनी जितना तूने एक hi बार में मैथ दिया है झाग नहीं तो क्या निकलेगा uuufffffffffffffff

विशाल- क्या करू बुआ तेरी छूट है hi इतनी कासी हुई की मेरे पुरे लुंड में झनझनहत होने लगा hai…aisa लग रहा है किसी तंग दीवार गली में घुस गया हो…

Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh बुआ मेरा हो गया अउ रेज hi चीखते गुर्राते हुवे विशाल कामिनी के चुचिओ पे अपने लुंड का पानी बहा देता है जिसकी तेज़ धार कामिनी के होंठो तक चली जाती है..






कामिनी को लुंड का पानी पिने का उतना कोई खास सुख नहीं था जितना की अलका को लेकिन विशाल के पानी की महक और उसके होंठो पे टपकी बुँदे वो चाट जाती है और वो उसे इतना नशीला लगता है की देखते देखते वो अपने पुरे चुचिओ को चाट चाट के साफ़ तो करती है साथ hi विशाल के लुंड को एक बार फिर से मुँह में भर के चूसने लग जाती है….





कामिनी के छूट से लुंड निकलने के बाद विशाल साइड में गिर जाता है और कामिनी अपने हाथ से अपने छूट का जायजा लेने के लिए छूट को टटोलती है तो देखती है उसके छूट का भोसड़ा बन गया था…





और वो इतना खुल गया है की उस से रह रह के पैन आईरिस रहा था विशाल उसके तरफ हस्ते हुवे देखता है और कहता मज़ा आया बुआ..

कामिनी- मादरचोद बुआ के बुर का बजा नहीं सहने बजा दिया तूने ufffffffffffff और पूछ रहा है मज़ा आया की नहीं.....? ऊऊफफफफफ ऐसे कोई छोड़ता है क्या…

विशाल- मई तो ऐसे hi छोड़ता हुआ बुआ…


इस धुँवाधार चुदाई से थक के कामिनी नंगे बीएड पे पड़े पड़े सो जाती है और विशाल भी कामिनी से चिपक के सोने लगता है और दोनों की आंख लग गयी थी लेकिन इनकी नींद तब खुलती है जब शाम का वक़्त हो जाता है और मार्किट से घर से गयी औरतो के आने का वक़्त हो चला था
 
अपडेट 62 ( डार्क रूम का सीक्रेट)

पर उन्हें भी तो यही होना चाइये था....

आखिर ऐसा कैसे हो सकता है....???






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