Incest Kamuk Alka - Page 15 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

अपडेट 64स (दीदी नहीं ऋचा रंडी बोल)

जहां एक तरफ शाम होते hi घर की साडी गदरायी घोड़िया अपनी जवानी को छलकते हुवे आस पड़ोस के लोगो और रिश्तेदारों का पायजामे में तम्बू बना रही थी तो वही उनमे से एक की बेटी ऋचा आज औरत बनने के लिए लालायित थी/…. पूल का ठंडा पानी भी अब इनदोनो के सुलगते जिसमे से भाप बनने के उड़ने लगा था और आज ये दोनों एक दूसरे में समां जाने के लिए पूरी तरह से तैयार थे… जहां विशाल का विकराल लुंड घर की गदर्यी ोर्टो की चीखे निकल चुक्का था आज उसी लुंड को निगलने के लिए उसकी बहन पूरी तरह से तैयार थी उसके अंदर इस लुंड को देख के गाला तो सुच रहा था लेकिन उसके गले का सारा पानी मनो उसके छूट में उतर आया हो जो लगातार अपना कामर्स बहाये जा रही थी…





विशाल का लुंड तन के बिलकुल किसी रोड की तरह ऋचा के छूट को सलामी दे रहा था तो वही अपने भाई विशाल के लुंड की प्यासी ऋचा उसे देख के अपनी दोनों टंगे खोल के हवा में लहरा देती है और अपने छूट को मसलने लग जाती है…

विशाल- बहुत गीली हो रही है तेरी छूट मेरी रांड

ऋचा- है नाब दाल न क्यों तड़पा रहा है ….

विशाल को ऋचा का ऐसे तड़पता देख बहुत मजा आ रहा था ो ऋचा की टंगे फैला के अपना गरमा गरम सरिये की तरह तने हुवे लुंड को उसके छूट के मुहाने पे रख के घिसने लगता है…






ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कितना गरम है रे तेरा लोढ़ा uuuuuuuuffffffffff आराम से डालना मेरी छूट तो आज फटने वाली है

विशाल- साली कुटिया चुदाई भी चाइये और दर भी लग रहा है

ऋचा- दर तो लगेगा hi न कितना बड़ा और मोटा है तेरा इतना बड़ा तो पुरे घर में किसी का नहीं

विशाल- लगातार अपने लुंड को ऋचा के छूट पे रगड़ते हुवे उसकी प्यास को बढ़ा रहा था और लुंड अंदर डालने की जगह उस से बाटे कर रहा था लगता है आपने सभी का देख रखा है…

ऋचा सिसकते हुवे- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh जो नज़ारा तूने देखा है उसके बाद भी तुझे कोई शक है क्या iiiiiiiiiiiiiiiiisssssssssssssssssssssssssss

विशाल- शक तो नहीं है पर मुझे लगता है इस घर के और भी राज़ है और आप उन्हें जानते हो..

ऋचा- haaaaaaaayyyyyyyyyeeeeeeeeeeee बाटे बनाना बंद कर और छोड़ मुझे मेरी छूट में चीटिया रेंग रही है uuuuuuuuuufffffffffffffffffffffffff

और वो खुद अपने हाथ से विशाल के लुंड को पकड़ के अपने छूट में धकेलने लग जाती है…






विशाल का लुंड आज ऋचा के कलाइयों से भी मोटा लग रहा था पता नहीं ये फूल सी नाजुक लड़की इस बेरहम लुंड क कैसे झेल पायेगी…

ऋचा- क्या गांडमस्ती कर रहा है दाल न मादरचोद रंडी की औलाद…

वासना में जल रही ऋचा को ऐसे तड़पता देख और उसके के मुँह से ऐसे गली सुन को विशाल को बड़ा आनंद मिल रहा था…

विशाल- मैं रंडी की औलाद फिर तू कौन है साली कुटिया तेरी माँ तो सबसे बड़ी वाली रैंड है…

ऋचा- तो मुझे भी अपनी रांड बना ले और छोड़ अपनी बहन को जैसे मेरा बाप हर दिन तेरी माँ को छोड़ता है खेतो में ले जा के…

ऋचा ने एक और राज़ उगल दिया था जिसे सुन विशाल का खून एक बार फिर अपनी राफ्तेर पकड़ लेता है और वो ऋचा के बातो से गुस्सा होते हुवे वो ऋचा के दोनों पैरो को पूरा ऊपर उठाते हुवे एक करारा झटका ऋचा की छूट में दे मरता है…






ऋचा की छूट किसी कागज की तरह चर्चारते हुवे फैट जाती है उसकी चीख पुरे पूल वाले एरिया में गूंज जाती है अब तक जो पानी उसके छूट से बह रहा था ो उसके आँखों में तैरने लग जाता है…

Richa-aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaderrrrrrrrrrrrrrrrrrrrcccccccccccccchooooooooooooooooooddddddddd nnnnnnnnnnnnnneeeeeeeeeeeeeee mmmmmmmmmeeeeeeeerrrrrrrrrriiiiiiiiii ccccccchhhhhhhhhhhhuuuuuutttttttttttt pppppppppphhhhhhhhhhaaaaaaaadddddddddddd daaaaaaaaaaaaaaalllllllllllaaaaaaaaaaaaaaaaaa

ऋचा को इस दर्द का अंदजा सईद बिलकुल भी न था वो रोने लग जाती है और विशाल को रुकने का कहती है विशाल भी ऋचा के दर्द का अंदाज़ा लगते हुवे रुक जाता है और ऋचा को हस्ते हुवे कहता है

विशाल- चीख मत साली वर्ण पुरे रिसोर्ट कोप ता लग जायेगा तू यह चुदाई करवा रही है…

ऋचा- मा cchoooooooooodddddddd दी तूने एक hi झटके में बहनचोद धीरे से डालता ऐसे में तो मर hi डालेगा हाईमज़ादे

विशाल- ऐसे कैसे अभी तो आधा भी नहीं गया है अउ अभी से मरने लगी??? तुझे तो रैंड बनना है न आज तुझे मैं पहले औरत और फिर अपनी रखैल बनाऊंगा

आधे लुंड जाने का सुन ेके ऋचा की तो गांड hi पहात जाती है वो चोकते हुवे निचे हाथ लगते हुवे पूछती है

ऋचा- क्या अभी आधा hi गया है…?

विशाल- निचे हाथ लगा के देख ले

इस्पे ऋचा निचे हाथ ले जा के विशाल के लुंड को टटोलती है तो पति है की सच में अभी लुंड का टोपा और उसका थोड़ा part hi अंदर था और च खासा लुंड उसके छूट के बहार hi था…






ऋचा- omg विशु तू तो मेरी जान निकल लेगा मेरे पेट इ अभी से दर्द होने लगा है तेरे एक hi झटके ssssseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee oooouuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa maderchoddddddddddddddddd माआआआआररररररररर dddddddaaaaaaaalllllllllllllllll\

इस से पहले ऋचा अपनी बात पूरी कर पाती विशाल एक दूसरा झटका उसके छूट में दे मरता है…






उड़ान ऋचा के मुँह को अपने होंठो से दबा देता है और उसकी चीख उसके गले में hi घूंट के रह जाती है…

ऋचा- uuuuuuuuuuuggggggggggggguhhhhhhhhhhhhhhhhhhhugggggggghhhhhhhhhhhhhh

विशाल एक बार फिर से थोड़ी देर के लिए रुक जाता है और ऋचा के नार्मल होने का इंतजार करने लग जाता है…

उधर ऋचा के आँखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहा था विशाल ने सच में पहले दो झटको में hi उसे चाँद तारा दिखा दिया था वो बेहोशी के कगार तक पहुंच गयी थी लेकिन विशाल लगातार उसे चूमते छत्ते हुवे नार्मल करने की कोशिश कर रहा था और एक लम्बे अंतराल तक यूँही चूमते चूसते हुवे ऋचा का दर्द थोड़ा काम होने लग जाता है जिसका इशारा वो अपनी गांड उठा के दे रही थी…






ऋचा का इशारा पते hi विशाल धीरे धीरे अपना लुंड अंदर बहार करना शुरू कर देता है और ऋचा भी बराबर विशाल के लुंड को अंदर लिए जा रही थी… उसकी चीख अब सीत्कारी और मॉनिंग में बदल चुक्का था और वो विशल को देखते हुवे अपनी को मसल रही थी और उसका लुंड अपने छूट के अंदर बहार करवा रही थी

ऋचा - aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh mammmmmmmmmmaaaaaaaaaa ये कही मेरे मुँह से न निकल aayyyeeeeeeeeeeeeeee इंसान का है या गधे का सेल कुत्ते

ऋचा की ऐसी बात पे विशाल हसने लगता है और अगले hi पल ऋचा को उठा के अपनी गॉड में भर लेता है और उसे जोर जोर से अपने लुंड पे पटकने लगता है…






ऋचा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmaaaaaaaaaaa कैसे कैसे छोड़ रहा है ये बहनचोद मैं इसे छोटू समझती थी ये तो मादरचोद खिलाडी निकला

ऋचा- खान से सीखा विशु ऐसे सेक्स करना uuuuuuuuuuuufffffffffffffffffffffffff मेरे पुरे पेट को मैथ रहा है तेरा ये अजगर उतर दे भाई मई नहीं ले पाऊँगी ऐसे ….

पर विशाल को तो तड़पने में मजा आता है ऋचा जितना उतरने को कहती ये उतना जोर से उछाल के इसे अपने लुंड पे पटक रहा था… हर जम्प के साथ ऋचा के छूट का कचूमर बन रहा था

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh मादरचोद सनटैन क्यों नहीं उतर मुझे मेरे कमर में दर्द होने लगा hai….sale कुटिया के पिल्लै…..

विशाल- मैं तो ऐसे hi छोडूंगा क्युकी मैं धक्के नहीं लगूंगा अब…

ऋचा- ठीक है भाई तू लेट जा मैं कूदूंगी तेरे इस अजगर पी बी उतर मुझे इस बिच ऋचा विशाल को बहुत गन्दी गन्दी गालिया देती है खासकर अलका के नाम जोड़ के…

ऋचा के इतना कहने के बाद भी विशाल उसे उतरने की जगह और तेज तेज छोड़ने लगता hai..aur अंत में ऋचा के छूट में एक करा झटका ऐसा लगता है की ऋचा छूट का बांध टूट पड़ता है और वो लगभग रट हुवे चीखती है…






ऋचा- ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह mmmmmaaaaaaaaaa मैं gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ……… उतर दे न रंडी के बचे अब क्या जान लेगा मेरी ह्ह्ह्हह्हआआयययययययीईईई किस मादरचोद के चंगुल में फास गयी मैं…

ऋचा के छूट से ढेर सारा पानी वो पानी जो उसे कई दिनों से परेशां कर रखा था ो बहने लगता है और उसे जिस बांध ने अब तक रोक रखा था उसे विशाल ने अपने लुंड के लगातरा प्रहार से तोड़ देता है…

ऋचा- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह hhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaa मई मर जाउंगी आज इस मादरचोद को मेरी रुलाई भी नहीं सुनाई दे रही है… विशाल उतर दे वर्ण आज के बाद हाथ भी नहीं लगाने दूंगी कुत्ते

विशाल कुछ और देर इसी तरह छोड़ने के बाद ऋचा को उतर देता है और उसके गांड पे एक छठा लगते हुवे चल मेरी रांड अब तेरी बरी है…

ऋचा- uuuuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffff अब जा के छूट खली खली सा लग रहा है सेल छूट का भी डैम घोट दे तू वैसा इंसान है bhnchod…aur ऋचा अपनी छूट को मसलते हुवे देखने लग जाती है जिसे विशाल ने फाड् दिया था…

वो विशाल की तरफ अपनी गांड कर के अपनी छूट को फैलते हुवे दिखती है और बोलती है..






ऋचा- देख बहनचोद कितनी टाइट छूट थी एक hi बार में पूरा खोल दिया तूने uuuuuuuufffffffffffff और उसपे उंगलिया फेरने लगती है जिस से उसकी छूट से एक पतली सी धार फुट पड़ती है और वो विशाल के ऊपर hi मूतने लगती है…

ऋचा की छूट सच में सूज गयी थी वो बिलकुल लाल गुलाबी हो गयी थी उसके होंठ खुल चुके थे पर खेल अभी बाकि था क्युकी मैदान में दूसरा खिलाडी अभी भी टिका हुआ था…

विशाल- uuuuuuuuuffffffffffffffff कितनी लाल छूट है तेरी चाट जाने को दिल हो रहा है..

ऋचा- लाल है नहीं लाल तूने कर दिया है अपने अजगर से पेल के

विशाल- पर अभी प्लेन तो बाकि है मेरी जान चल आजा तुझे सवारी करवौ अब..

ऋचा दरी सेहमी वापस से विशाल के लुंड पे बैठने लग जाती है…






ऋचा विशाल के लुंड पे बैठ के अपनी गांड जोर जोर से हिला रही थी पर लुंड अंदर लेने के बजाये अपनी छूट को दुबारा उसके लुंड के लिए तैयार कर रही थी उसका पीठ और गांड विशाल के तरफ था जबकि उसकी चुचिअ सामने के तरफ थी और इस अवस्था में ऋचा लगातार विशाल के लुंड पे अपनी छूट रगड़ रही thi…uska इस तरह से छूट रगड़ने से विशाल का लुंड और उतावला होने लगता है एक बार फिर से ऋचा के लाल सूजी हुई छूट में समां जाने के लिए… और विशाल इस बार ऋचा को कमर से पकड़ के अपना लुंड उसके छूट पे टिकता है और एक झटका निचे से लगा के अपना लुंड उसके छूट में फिर से घुसेड़ देता है…





झटका बड़ा करारा था लुंड सिद्ध ऋचा के बच्चेदानी को टटोल रहा था और अभी अभी उसके छूट ने जो रास बहाया था उसके वजह से उसकी पहले से hi काफी सेंसिटिव हो रही थी उसपे ऐसा बेजोड़ धक्का पड़ते hi ऋचा के छूट से तेज़ पेशाब की एक धार फुट पड़ती है….





ऋचा एक बार फिर से चीख पड़ती है उसके पेशाब की धार कई फ़ीट दूर तक जा के गिर रही थी… सही मायने में आज ऋचा को चुदाई का मतलब पता चल रहा था जहां वो विशाल क ीक धक्के को भी नहीं झेल पा रही थी उसके पुरे शरीर में कम्पन आ गयी थी अब उसकी चीख में भी लड़खड़ाहट आने लगी थी और विशाल वो लेते लेते ऋचा के छूट से बह रहे धार पे अपने लुंड से एक के बाद एक वॉर कर के थप थापा रहा था…





ऋचा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh mmmmmmaaaaaaaaaaaaa मर गयी मैं अब और नहीं झेल पाऊँगी मैं तेरा ये अजगर मुझे बख्स दे मेरी छूट झनझनाने लगी है hhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyeeeeeeeeeeeee ये अलका रंडी का बीटा भी अपनी माँ एप hi गया है बहनचोद… और ऋचा अपने कांपते पैरो से उठने की कोशिश करने लगती है की विशाल उसे वापस से पकड़ लेता है और अपना लुंड फिर से उसके छूट में पेल देता है…





विशाल- भगति खान है साली तेरा हुआ है मेरा नहीं बहन की लोदी तुझे hi रंडी बनना था न फिर ा बीआरओ क्यों रही है आज तुझे छोड़ रहा हु कल तेरी माँ को छोडूंगा साली कुटिया..

ऋचा- हाँ छोड़ लेना वही तुझे झेल पायेगी मई तो मर गयी uffffffffff और ये कैसे पकड़ रखा है मेरी कमर तोड़ दी तूने सेल कुत्त्तीये

विशाल ऋचा के दोनों जांघो और घुटने के बिष से हाथ ले जा के उसके कंधे के पीछे से फसा के पकड़ा रखा था जिस से वो खुद को छुड़ा पाने में लचर थी एक तो वो पहले से बेजान हो चुकी थी ऊपर से विशाल के ये अत्याचार उसे झेल पाने में ऋचा की साडी हड्डिया अकड़ने लगी थी…

अब विशाल उसे उठा के वह पड़े बेंच पे घोड़ी बना के लेता देता है..






और पीछे से सटासट उसके छूट में झटके लगाने लग जाता है.. काफी देर से विशाल भी उत्तेजित हो रहा था और अगले कुछ झटके उसके आखरी होने वाले थे पर ऋचा बिलकुल बेसुध हुवे बेंच को पकड़ के यूँही अपनी गांड उठा के अपनी छूट विशाल को परोस देती है.. उसे अपना कोई सुध बुध न था विशाल के धक्को से अब उसकी आंखे पलटने लगी थी और अगर इसी तरह उसकी चुदाई थोड़ी देर और हुई तो वो पक्का बेहोश होने वाली है…

ऋचा- मरे आवाज़ में बक्श दे मेरे छूट में अब कुछ भी पता नहीं चल रहा है ये बिलकुल सुंनंन हो गयी है ऐकोर दे मुझे मई मर जाउंगी … काम से काम थोड़ा पानी पीला दे aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmaaaaaaaa tttttteeeeerrrrrrrrrriiiiiiiiii beeeeerrrrrttttttttttttiiiiiiiiiiiiii aaajjjjjjjjjjjjj रंडी बन गयी खुले आसमान में अपने भाई के लुंड से चुद रही है uuuuuuuufffffffffffffffffffff

विशाल- बस मेरी कुटिया मेरा भी होने hi वाला है…

ऋचा- अंदर नहीं विशु तूने कंडोम नहीं पहना है मैं प्रेग्नेंट हो जाउंगी बहार निकलना प्लस..

पर विशाल उसके छूट को अपने पानी से भर देता है






ऋचा- aaaaaaaaaaaaahhhhhh कितना गरम है uuuuuuuuufffffffffffffffff मन किया था फिर भी अंदर hi भर दिया तूने सेल हरामी..

विशाल ऋचा की हालत देख के हसने लगता है और अपने लुंड के बाकि बचे पनि को ऋचा के मुँह पे गिराने लगता है….






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विशाल- ये ले कुटिया तेरे आज शाम का इनाम बहुत प्यास लग रही थी न तुझे अब पीजा इसे

ऋचा अपने चेहरे पे फैले विशाल के पानी को अपने हाथो से पोछते हुवे सब चाट जाती है और वही जमीं पे गिर के तेज तेज हाफने लगती है….


तो बे छॉंट....
 
अपडेट 64डी (अननोन मन रेवाले)

कामिनी के घर

पिछले भाग में हमने देखा की कैसे अलका जो दोपहर से hi उस अनजान सख्स के अधूरी चुदाई के वजह से लुंड के तलाश में प्यासी फिर रही थी वो डांस के बहाने सरेंडर को पहले अपने जाल में फसती है और फिर उस से छोड़ने के लिए कोठरी में जाती है लेकिन वहां कामिनी की ा जाने से उसका काम पूरा नहीं हो पता और उसे वैसे hi नंगा अपने कपड़ो को समेटते हुवे वहां से भागना पड़ता hai…is वक़्त अलका की हालत किसी गस्ती से ज्यादा नहीं थी उसे लुंड की प्यास कुछ इस क़दर हो रही थी की वो उस सख्स के सामने भी खुद को परोसने से नहीं रूकती जिसे वो अभी अचे से जानती तक नहीं….

उधर भले hi सरेंडर अलका को नहीं छोड़ पता लेकिन कामिनी की ा जाने से उसका आज रात का काम तो हो hi जाता है और वो कामिनी को पूरी रात दबा के छोड़ता है जिसका साबुत था की जब वो आयी तब उसकी चल बदली हुई थी उसके केशो में कुछ चिपचिपा सा लगा हुआ था उसके सिंदूर उसके चेहरे पे फ़ैल चुक्का था…






उसके चुचिओ के बिच बानी गहरी घातिओ में पसीने की बुँदे चमक रही थी और सायद वो सफ़ेद तरल पदार्थ भी जिसे कामिनी ने चूसते हुवे अपने छाती पे बहाया होगा..

शाम को जो कामिनी किसी भी मर्द के लुंड को खड़ा कर दे वो सौंदर्य ले के चल रही थी वही कामिनी अभी बिलकुल मरे हालत में घर को आयी थी जैसे कोई गश्ती को एक साथ कई लोगो ने नोचा हो……






सरेंडर ने कामिनी के ब्लाउज को उतरने के बजाए खींच के फाड़ दिया था और ब्रा को उसने जाने खा फेका इसकी सुध बुश उस वक़्त खान किसी को भी होगी और इसी वजह से कामिनी के तन पे जो ब्लाउज था वो उसके तन पे था लकिन उसके बदन को धक् पाने में बिलकुल भी कामयाब नहीं था एक तो पहले से उसकी चुचिअ इतनी बड़ी थी जो मुश्किल से ब्रा और ब्लाउज में समां पति है उसके ऊपर कामिनी को टाइट कपडे पहनने के आदत थी अब से में ब्लाउज के सरे बटन टूट जाने से आगे से उसकी चुचिअ ब्लाउज के बहार hi लटक रही थी खैर जैसे तैसे कामिनी घर के पीछे वाले रस्ते अपने कमरे में आ जाती है और इस से पहले कोई उसे इस हालत में देख ले वो खुद को साफ़ करने के लिए फ़ौरन बाथरूम में चली जाती है

संगीत ख़तम हो चुक्का था और सभी पडोसी अपने अपने घर जा चुके थे उनमे से कुछ रिश्तेदार और कुछ दूसरे गाओं के लोग थे जो आज यही कामिनी के घर hi रुकने वाले थे. घर के लोग सभी मेहमानो के रुकने का इंतजाम कर रहे थे लेकिन ज्यादा लोगो के होने से पूरा हॉल भर चुक्का था और सारा कर्मा भी राघव अपना कर्मा अपने चाचा और ताऊ को दे देता है जिस वजह से उसके पास आज सोन ेके लिए कोई जगह नहीं बचा था जिस वजह से अब राघव को खान सुलाया जाये इस बात किस चर्चा हो रही thi…Ispe राघव अपने पापा कमल को टोकते हुवे कहता है..

राघव- पापा विशाल तो आज आने वाला नहीं है मैं ममी के साथ सो जाऊ क्या?

इस्पे कमल उसे टोकते हुवे कहता है पागल है ममी के साथ क्यों.. पर कोई बचा बोले तो औरत कैसे मना कर सकती है और इसी वजह से अलका उसे अपने साथ सोने का कह देती है..

Alka-kya हुआ भाई साहिब जैसे विशु है वैसे राघव है रात भर की तो बात है सुबह कोई इंतजाम कर लेंगे..

कमल- ठीक है भाभी आप कहती हो तो आज राघव के साथ एडजस्ट कर लो कल का कुछ देखते है.

अलका और राघव दोनों सभी को अलविदा कह के अपने कमरे में चले आते है… घर के मर्द भी आज कुछ ह शराब पि चूक थे तो वो भी जल्दी से अपने बिस्टेर को पकड़ लेते है..

अलका ने दयाभाव में कह तो दिया की राघव उसके साथ सो जाये लेकिन उसे अब इस बात का ख्याल आया की वो तो रात में कपडे उतर के सोती है उसके ऊपर आज जो जो हल उसके साथ हुआ है ऐसे में तो कपडा का उसके शरीर पे एक धागा भी आज उस से बर्दाश्त नहीं होगा…

बीएड पे जाने से पहले अलका को नहाने की आदत है इसलिए वो राघव को सोने का कह के नहाने चली जाती है…

अलका के जिस्म में जो आग भड़क रही थी उसे कोई शावर नहीं बुझा सकता था इसलिए वो बाथटब भर्ती है और उसमे अपने नंगे शरीर को डूबा देती है…






पानी के ठंडक अलका के कामुक शरीर पे पड़ते hi उसके मुँह से एक सिसकारी निकल पड़ती है…

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ये क्या हो रहा है पूरा गाओं छोड़ना चाहता है और एक लुंड नसीब नहीं ऊपर से विशाल भी आज ऋचा के साथ रुक गया वो होता तो मेरी गर्मी निकल देता,,, पर उसे रुकने को भी तो मैंने hi कहा tha…par मुझे क्या पता आज बार बार कलपद हो जायेगा मेरे साथ uuuuuuuuffffffffffffffffffff ये मेरे छूट की आग किसी दिन सच में मुझे रंडी न बना दे…

अलका यूँही बुदबुदाती हुई अपने शरीर पे अपने हाथो से पानी उड़ेल रही थी याय उन कहो अपने अंदर जल रहे आग को बुझाने की कोशिश कर रही थी…






पर अलका के अंदर की आग आज उस से बगावत करने पे उतर आया था जो किसी भी सूरत में शांत होने का नाम hi नहीं ले रहा ता अक भी अब अपने हाथ अपने छूट पे ले जाती है और उसे मसलने लगती है…

उधर कमरे में बैठा राघव भी अब धीरेसे बाथरूम के दरवाजे पे आ गया था और अलका को ऐसे नहाते देख अपना लुंड पंत कके बहार निकल के उसे मसल रहा था…






आखिर अलका जैसी कामुक ममी जब नहाने का कह के बाथरूम में जाये तो कोई बीटा भला कैसे खुद को उसे देखने से रोक पायेगा और कब tak…kafi देर अपने तन को भिगोने के बाद अलका बाथ टब से बहार निकलती है और बाथरूम से निकलने से पहल शावर लेती है.. राघव को जैसे hi एहसास होता है अलका निकलने वाली है वो फ़ौरन जा के अपने बीएड पे लेट जाता है..

नहा लेने के बाद अलका बाथरूम से सिर्फ टॉवल लप्पेट के hi बहार निकल आती है और बिस्टेर पे पड़े अपने ब्रा और पंतय को देखती है जिसे बगल में राघव सोया हुआ था…






वो वही टेबल पे बैठ के पहले अपने बाल सूखती है और फिर अपने ब्रा और पंतय को उठाने के लिए बिस्टेर की तरफ बढ़ती है.. अभी उसने एक कदम बढ़ाया hi था की उसकी नज़रे राघव के शार्ट में बने तम्बू पे जा के अटक जाती है… तम्बू एक अचे खासे आकर का था यानि जिसे वो बचा समझ रही थी वो अब एक मजबूत लुंड का मालिक बन चुक्का था…





इतने मुश्किल से तो अलका ने खुद को समझाया था और अभी अचे से उसके छूट में भड़क रही आग शांत भी नहीं हुई थी की राघव का लुंड को देख उसका जी एक बार फिर से ललचाने लगता है…

अलका फ़ौरन अपने कपडे पहनती है और बिस्तरं में घुस जाती है.. वो ऐसे hi पड़े पड़े सो hi रही थी की राघव करवट बदलता है और अलका से बिलकुल चिपक जाता है..






अलका के शरीर में एक तेज़ झटका लगता है क्युकी राघव का तन तनता हुआ लुंड सिद्ध अलका के दोनों चूतड़ों के बिच बने फांक में समां जाता hai…aur अलका के मुँह से एक हलकी सी सिसक फुट पड़ती है…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh

अलका एक बार फिर से बेकाबू होने लगती है उसे राघव के लुंड का चुभन बहुत ाचा लग रहा था एक बार को सईद उसके मन में आया भी हो की कोई नहीं तो राघव hi सही लेकिन अपने से इतने छोटे लड़के के साथ वो भी घर का बीटा और अलका एक बार फिर से अपने कदम पीछे हटा लेती है…

अलका से ये रात कटनी मुश्किल होने लगती है इसलिए वो अपना फोन उठती है और पहले अरविन्द को वत्सप्प करती है पर अरविन्द के तरफ से कोई रिप्लाई या बलुएटिक नहीं आता तो वो कमल को मैसेज करती है..






उधर राघव दबे आंख अलका की साडी हरकते देख रहा था..

अलका को ज्यादा वेट नहीं करना पड़ता और अगले hi पल उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है क्युकी कमल के साइड से रिप्लाई आ जाता है…

अलका कमल को अपना हाल बताते हुव उसे वही कोठी (डार्क रूम) में आने का इशारा करती है..

कमल जो पहले hi पि के तल्लीत है वो इस हालत में नहीं था की अलका को छोड़ सके लेकिन अलका जैसी कामदेवी के बुलावे को तो मुर्दा भी मन कर सकता फिर कमल ने तो कुछ पेग hi लगाए थे और फिर दोनों कोठी के लिए निकल पड़ते है…

कोठी में पहुंचते hi अलका कमल पे किसी पागल कुटिया की तरह टूट पड़ती है… उसकी ये तड़प बता रही थी की उसे लुंड की कितनी प्यास लगी है…






अलका अपनी एक तंग उठा के कमल के कमर पे टिका देती है और अपनी छूट उसके लुंड पे रगड़ना सुरु कर देती है..

कमल भी अलका का बराबर साथ दे रहा था..

कमल- क्या बात है भाबी बहुत प्यासी लग रही हो

अलका- हाँ कमल आग लगी हुई है मेरे इस छूट जल्दी से अपना लुंड दाल दो और छोड़ो मुझे uuuuuuuuffffffffff इतना कह के अलका अपना मुँह घुमा के दीवार की तरफ कर लेती है और गांड उठा के कमल की तरफ..

कमल भी बिना वक़्त गवाए अलका के छूट में अपना लुंड पेल देता है…






दोपहर से तड़प रही अलका की छूट को आखिरकार लुंड मिल hi गया था अलका अब पुरे ताक़त से अपनी गांड कमल के लुंड पे धकेल रही thi…aur कमल भी बिना रुके अलका के छूट में अपना लुंड पेले जा रहा tha…lekin जो आग अलका के छूट में लगी थी उसे बुझा पाना कमा के बस की बात भी नहीं थी.. कमल अगले कुछ झटको में hi अलका के छूट में ढेर हो जाता है जिसकी एक वजह ये भी थी की वो नशे में था…

कमल- मेरे हो गया भाबी

अलका- क्या कमल अभी तो मजा आने लगा था और तुम्हारा इतनी जल्दी हो गया…

कमल- सॉरी भाभी कल अचे से छोडूंगा आपको

अलका- बड़ा आये कल छोड़ने वाले अभी आग लगी है और ये कल छोड़ेंगे और झुंझलाते हुवे अपना रॉब मांगने लगती है जिसे कमल पकड़ के अपने लुंड का पानी पॉच रहा था.. पर कमल अलका के रॉब नहीं देता बल्कि उसे फेंक देता है जिस वजह से अलका को सिर्फ ब्रा पंतय और काळा रंग की स्टॉकिंग में hi कोठी से अपने रूम तक जाना था ो भी तब जब घर में इतने मेहमान भरे हो… इस से अलका और ज्यादा तिलमिलाते हुवे वहां से निकल पड़ती है…

अभी अलका ने दूर खोला hi था की सामने उसे राघव दीखता है…






lowercase character in keyboard

अलका राघव को देख के शॉक हो जाती है उसे समझ नहीं आता की वो क्या बोले क्युकी अंदर वो उसी के बाप से अपनी छूट छुड़वा रही थी… और अब भी वो बहार सिर्फ स्टॉकिंग और ब्रा पंतय में थी बाकि कुछ भी नहीं पहना था उसने…

राघव सीढ़ियों के निचे खड़ा हो के अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था

अलका- राघव तुम सोये नहीं और यहां क्या कर रहे हो..

राघव- वाओ ममी आप तो काफी बोल्ड हो ऐसे hi घर में घूम रहे हो…

विशाल के इस टोन पे अलका शर्मा जाती है पर वो क्या बोले की अंदर उसके बाप ने hi उसका रोबे चीन के रख लिया है जिस वजह से उसे ऐसे बहार निकलना पड़ा…

अलका कुछ नहीं बोल पति उसे ये डार्ट है की राघव ने उसे देख लिए इसलिए वो जैसे hi वहां से निकलने को जोति है राघव उसके हाथ को पकड़ के उसे रोक लेता है… और उसके जांघो को सहलाते हुवे उसकी तरफ देख रहा था..






अलका पहले तो थोड़ा कसमस्ती है लेकिन वो विरोध नहीं कर पति बल्कि हलके मुस्कान के साथ राघव को देखने लगती है…

राघव जांघ और स्टॉकिंग से होते हुवे अगले पल अपना हाथ अलका के छूट के ऊपर रख देता है छूट से उसी के बाप का कामर्स बह रहा था…

राघव- ममी ये तो पूरी गीली है.. लगता है अंदर का प्रोग पूरा नहीं हो पाया..

राघव के इतना कहते hi अलका का सारा खून सुच जाता है..

अलका- क्या मतलब कैसा प्रो गौर चल यहां से कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा..

राघव अलका के किसी बात का जवाब दिए बिना उसकी पंतय खींच के उतर देता है.. और इस से पहले की वो कुछ बोलती या सम्भल पति उसकी ब्रा भी खींच के उतर देता है..






अलका इस वक़्त भरे आंगन में पूर्णरूप से नंगी थी…

अलका- राघव ये क्या कर रहा है चल वापस कर

राघव- एक शर्त पर आपको मेरी बात माननी होगी

अलका- कैसी बात????

राघव- वो मैं बताता रहूँगा

अलका- ये कैसा ब्लैकमेल है.

राघव- मन लो या ऐसे hi आओ अंदर

अलका के पास कोई चारा नहीं था वो राघव के बात को मान लेती है और उस से अपनी ब्रा पंतय देने को कहती है… राघव भी बिना देर किये उसकी एक क्लिप रिकॉर्ड करता है जिसमे अलका नंगी थी और वो राघव को प्रॉमिस कर रही थी…

अलका- ले इतना प्रोफ काफी है न अब दे दे जल्दी से कोई देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी…

राघव उसकी लिंगेरी उसे देता है और अपने कमरे की तरफ चल देता है… अलका भी तेज़ कदमो से भागते हुवे अपने रूम की तरफ दौड़ पड़ती है..






अलका के ऐसे दौड़ने से उसकी दोनों चुचिओ और उसके चूतड़ों की लचक देख राघव हहास रहा था..

अलका- ये क्या किया तूने बहार???

राघव- मैंने क्या किया कुछ भी नहीं और वो अलका को हुग कर लेता है..

और उसके दोनों चुचिओ को मसलते हुवे उसमे मुँह लगा के उन्हें चूमने लग जाता है..






अलका जो पहले से hi अपने कामवासना में जल रही थी और आज उसी के वजह से राघव उसके साथ ये कर पा रहा था… वो राघव को रोकने की कोशिश करने लग जाती है लेकिन राघव बिना सुने उसकी ब्रा उतर देता है…

अलका- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या कर रहा है ममी हूँ तेरी थोड़ा शर्म कर ले और मुझे नींद आ रही है सोने दे..

राघव- बस थोड़ी देर ममी..

अलका- नहीं बिलकुल भी नहीं मुझे नींद आ रही है बहुत तेज़ और इतना कह के अलका बीएड की तरफ बढ़ जाती है..

राघव भी पीछे पीछे अलका से चिपक के लेट जाता hai.aur उसके पंतय में हाथ दाल के उसके छूट के दानो को छेड़ने लग जाता है..






अलका- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह राघव क्या कर रहा है तू जबरदस्ती कर रहा है मेरे साथ चोर मुझे…

राघव का एक मन तो होता है उसे गालिया दे और बताये की वो रैंड अभी उसके बाप से चुद रही थी तब कुछ नहीं और अभी भोली भली घरेलु औरत का ढोंग कर रही hai..par वो कुछ बोले बिना अलका के छूट को लगातार कुरेद रहा था क्युकी उसे पता था की अलका वसन की आग में जल रही है और वो ज्यादा देर तक विरोध नहीं कर पायेगी….






राघव अलका के गार्डन को चूमते हुवे उसके छूट के दानो को लगातार कुरेद रहा था.. अलका जो काफी देर से विरोध कर रही थी वो भी अब धीरे धीरे ठंडा पद जाती है और राघव के किस ा जवाब अपनी जुबान को उसके मुँह में दाल के देने लग जाती है…

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh आराम से bête

राघव अलका के तरफ से हथ्यार डालता देख खुश हो जाता है और उसे लगातार चूमे जा रहा था अलका भी अब अपना पंतय खुद hi उतर के फ़ेंक देती है और अपने छूट को मसलने लगती है.. आखिर कब तक बर्दाश्त कर पति और रोक पति खुद ko..aur इसके साथ hi अलका राघव के शॉर्ट्स को भी उतर देती hai..aur उसके लुंड को अपने मुठी में भर लेती है..





राघव का लुंड हाथ में आते hi अलका को कुछ महसूस होता है उसके आँखों में एक चमक आ जाती hai...ye लुंड जाना पहचाना सा था हाँ अलका सोच में पद जाती है की कही ये वही लुंड है जो उसे पिछले दो बार से छोड़ के जा रहा था… क्युकी राघव के लुंड की एक खास बात थी जो घर के बाकि मर्दो की नहीं थी और वो ये था की राघव का लुंड टेढ़ा tha….aur अलका को जो छोड़ रहा था उसका लुंड भी टेढ़ा था…

अलका की धड़कने एक डैम से बढ़ने लगती है उसके छूट की तरह एक बार फिर से चीड़ जाती है और वो पहले से भी ज्यादा बेकाबू होने लगती है जिसका असर उसके चेहरे पे साफ़ साफ़ दिख रहा था..






पर अलका अभी इस बात पे कन्फर्म नहीं थी उसे बस एक शक हो रहा था और इसलिए वो इसे देखने के लिए राघव को खुद से अलग करती है..





और राघव के लुंड को अपने दोनों हाथो से पकड़ के उसे हिलने लगती है या यूँ कहो उसका आकर नाप रही थी.... राघव लगातार अलका के हाथो से लुंड मसलने से बेचैन होने लगता है और उठ के बैठ जाता है...

राघव- ममी अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा है...


इस्पे आपका उसके लुंड को हिलाते हुवे कहती है ..

अलका- जो भी करना है कर पर अंदर नहीं डालने दूंगी..

राघव- ठीक है ममी जब तक आप न कहो पर मुँह में तो लोगे na..(hath तो लगाने दे रंडी फिर तू खुद लुंड दलवायेगी अपने छूट से)






और इतना कह के राघव अलका के निप्पल को मसल देता है..

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh iiiiiiiisssssssssssshhhhhhhhhhh पियेगा

राघव- हाँ...

इस्पे अलका खुद hi अपने दोनों चुचिओ को अपने हाथोंसे मसलते हुवे कहती है...

अलका- नहीं मिलेगा और हसने लग जाती है..






राघव अलका के इस रूप को देख के पागल हुआ जा रहा था वो अलका को जवाब देते हुवे कहता है ठीक है अपना मत पिलाओ पर मेरा पि सकते हो मुझे कोई ऐतराज नहीं और अपना लुंड अलका को दिखते हुवे हिलने लगता है..





अलका भी फ़ौरन पेट के बल रेंगते हुवे आती है और राघव के लुंड को मुट्ठी में भर लेती है..

अलका- बड़ा सख्त है

राघव- और तगड़ा भी. है…

अलका- मैं कैसे मान लू

राघव- ले के देख लो…. और अलका के मुँह पे अपना लुंड रगड़ने लगता है..






अलका भी अगले hi पल अपना मुँह खोल के राघव के टेढ़े कड़क लुंड को अपने मुँह में भर लेट है.. मुँह में जाते hi अलका को ये पूरा कन्फर्म हो जाता है की वो राघव hi है जो उसे छोड़ रहा था क्युकी अलका इस लुंड को पहले भी चूस चुकी थी और इसका गंध और आकर उसके मुँह और नाक को अचे से याद था..

जैसे hi अलका को ये पता लगता है की वो ुम कोई और नहीं राघव hi है अलका के मुँह की स्पीड बढ़ जाती है उसके छूट में एक साथ कई लाख चीटिया रेंगे लग जाती है.. ये वही लुंड तो था जजिसके लिए शाम से वो तड़प रही थी.. इसी के पानी ने तो उसकी प्यासा बढ़ा दी थी और आज ये लुंड खुद चलके अलका के मुँह में समां गया है..






अब अलका का रंग बिलकुल बदल गया था वो राघव (रघु) के लुंड को बड़े hi प्यार से मुँह में भर के तो कभीअपनी जुबान से चाट चाट के उसे अपने छूट के लिए तैयार करने लग जाती है…





अलका रघु के लुंड के साथ उसके ाँद को भी चाटने लग जाती है..

रघु- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ममी कितना मजा आ रहा है छतो ऐसे hi uuuuuuuffffffffffff

अलका भी रघु को और ज्यादा उत्तेजित करने के लिए उसके पुरे बॉल को मुँह में भर के चूसने लगती है जैसे कोई लोल्लयपोप

रघु को अलका के इस तरह से लुंड और एंड चूसने से बहुत मजा आने लगा था लेकिन उसके अंदर की कामवासना भी बहादक रही थी और इस वजह से वो पहले अलका के बालो को अपनी मुट्ठी में भरता है और फिर एक झटके के साथ अपना लुंड उसके मुँह में पेल देता है…






अभी अलका को असली मुँह चुदाई का मजा मिलना सुरु हो जाता है…. और सुरेंदर ने सही hi कहा था अलका जैसी गस्ती धीरे धीरे आराम से नहीं बल्कि जोर से और रगड़ के छोड़ने वाली चीज है…

रघु भी अब अलका के मुँह को तेज़ी से छोड़ने लग जाता hai..par अलका जैसी घोड़ी के मुँह भी किसी के छूट से भरी है और वही हाल यह रघु का भी होता है वो जोर जोर से झटके तो मरता है पर अगले hi पल अलका के मुँह में झड़ने लगता है..






अलका जो की पहले से hi उसके पानी के लिए प्यासी थी इस तरह अलका के मुहे पे रघु के लुंड का गरम पानी गिरते hi अलका के चेहरे पे चमक आ जाती है और वो सारा पानी उसका एक एक बून्द पिने लग जाती है…





रघु के लुंड का गधा माल अलका अपने मुँह में इकठा कर लेती है और रघु को जीभ निकल के दिखती है जैसे मनो कह रही हो देख ये तेरा माखन मैं खा रही हु और फिर अलका उस गधे मखना को एक घुट में निगल जाती है....

अलका- कैसा लगा अपनी ममी के मुँह में अपना पानी गिरा के ..

रघु- बहुत मज़ा आया ममी एक बार वह भी गिराने देती तो और मज़ा आ जाता...

अलका- नाम लिया नहीं जाता और वहां पानी गिरायेगा...

रघु इस्पे तुरंत बोल पड़ता है आपकी छूट में ममी ...

अलका- ीीीिस्स्सह्ह्ह्हह्ह अपनी ममी को छोड़ने की सोच रहा है ..?

रघु- हाँ क्यों नहीं जब ममी इतनी हॉट है तो उसकी छूट कितनी गरम होगी और इतना कह के रघु अलका के छूट पे मुँह लगा देता है....





अलका की छूट जो जाने कब से एक मरदाना टच के लिए बेकरार थी रघु के इस तरह अचानक हुवे हमले से और भी ज्यादा पनियाने लगती hai....jis से अलका तड़पते हुवे अपने दोनों हाथो से बेडशीट को मुट्ठी में भर लेती है और कांपते आवाज़ में बोलती है .

अलका- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह वह मत जा कमीने मेरा खुद से कण्ट्रोल छूट जायेगा बस कर दे अब सजा

रघु- वाओ ममी बहुत स्वाद है आपके छूट के पानी का मई तो सारा पि जाउगा... और फिर राघव लगातार अलका के छूट को चाट और चूसने है...

अलका के छूट अब और संयम नहीं रख पति और रघु के मुँह में hi अपना पानी चोर्ने लगती है...

रघु भी अब अलका को किश करते हुवे उसके छूट को अपने हाथो से मसलने लग जाता है और अलका की छूट से रास की धार बहने लगती है जैसे संतरे को निचोड़ने से उसमे से रास फुट पड़ता है आपका के छूट से भी रास की वही धार फुट फुट के बह रही थी....





अलका अपनी दोनों टंगे पूरा खोल लेती है और उसकी आंखे अपने आप hi बंद होने लग जाती है उसके चेहरे के इस भाव से साफ़ पता रहा था की आपका को इस ओर्गास्म की कितनी जरुरत थी....

अलका को इतनी आत्मा संतुष्टि मिलती जिसके लिए वो कई घंटो से तड़प रही थी की वो एक डैम से उठ के रघु के गले लग जाती है जैसे उसकी कोई प्रेमिका हो और रघु भी आपका को अपनी बहो में भर के उसे चूमना सुरु कर देता है...









अलका जैसी कामदेवी जिसे उसका बाप भी बस में नहीं कर पाया वो गदरायी बेलगाम घोड़ी रघु के बहो में नंगी लिपटी उसके होंठो से अपने होंठो को भिड़ाये उसे चुम रही थी....

कमरे में दोनों की तेज़ भागते हुवे सांसो की गूंज गूंजने लगी थी अलका के चेहरे पे एक संतुष्टि थी लेकिन क्या एक ओर्गास्म उसके छूट के गर्मी को निकलने के लिए काफी था....? ये तो वक़्त hi बता सकता है... आज की रात कुछ ज्यादा hi लम्बी और रोमांचक होने वाली है.. आज की सुबह इतनी जल्दी नहीं होने वाली ...


रात अभी बाकि है.....
 
Update-64E (ममी और भांजे का मिलान)

रघु के डरा किये गे ीक के बाद एक हमले से अलका की छूट से रास की धार बहने लगती है जैसे संतरे को निचोड़ने से उसमे से रास फुट पड़ता है अलका के छूट से भी रास की वही धार फुट फुट के बह रही थी...

कामदेवी अलका रघु के बहो में नंगी लिपटी उसके होंठो से अपने होंठो को भिड़ाये उसे चुम रही थी.

अब आगे……..

काफी देर एक के बहो में ऐसे hi लिपटे रहने के बाद अलका रघु से अलग होती है और अपने कामर्स में भीगे छूट को एक बार से दुबारा साफ़ करने के लिए बाथरूम की तरफ बढ़ चलती है…

और बाथरूम के दरवाजे को खोलने से पहले एक बार वापस से मुद के रघु की तरफ देखती है इस वक़्त उसकी आंखे कुछ और hi बयान कर रही थी उसकी आग अब बुझने के जगह सईद और ज्यादा भड़क चुक्का था कटुकी जिस साये को वो धुंध रही थी अभी वही साया उसे अपने लुंड का पानी तो पिलाया hi मगर साथ hi आज बिना चोदे उसके छूट का रास भी निचोड़ लिया था और वो साया कोई और नहीं उसके नन्द का बीटा रघु था ये बात उसे और भी ज्यादा रोमांचित कर रही थी… इस लिए वो अंदर जाने से पहले बड़े अदाओ से पलट के रघु को देखती है और उसके हाथ अपने आप पहले उसके नंगे गदराये चुत्तड़ो को सहलाता है फिर उसकी चुचिओ और उसके निप्पल को मरोड़ने लग जाता है..






इतना कर के अलका बाथरूम के अंदर घुस जाती है लेकिन दरवाजा वो अब भी नहीं लगाती और लगाए भी क्यों ??? छुपाने को अब बचा hi क्यात है….

अलका का ये कामुक रूप रघु वही बैठे बैठे देख रहा था जिस से उसका लुंड फिर से ठुंकी लेने लगता है…

रघु- uuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffff कितनी गरम है अलका ममी आज रात तो इसे छोड़ के hi रहूँगा साली रंडी कैसे मुझे दिखा दिखा के अपनी गांड और चुचिओ को मॉल रही है uuuuuuuffffffffff…

उधर अलका को गए थोड़ी देर भी नहीं हुआ होगा की रघु उठ के बाथरूम के अंदर चला जाता hai..jise देख अलका हड़बड़ाने का नाटक करते हुवे पूछने लगती है..

अलका- तू यह क्या करने आया है तुझे पता है न मैं अंदर हु..

रघु- हाँ लेकिन मैं तो आपको देखने आया था और आपने दूर भी नहीं लगाया…..

इस्पे अलका अपने बदन से लिपटे तोलिये को एक hi झटके में हटा देती है और उसे दिखते हुवे बोलती है…

अलका- क्या देखने आया था सबकुछ तो देख लिया और कर भी लिया जो करने के लिए आज तू यहां रुका है






अलका के नंगे चुचिओ को देख राघव का मुँह खुला का खुला रह जाता है

रघु- वाओ ममी किते बड़े और सख्त है uuuuuuuuuuuffffffffffffffff

अलका- चल देख लिया न अब जा यहां से मुझे शावर लेना है..

रघु भी अपना लुंड मसलते हुवे कहता है..

रघु- ले लो मैं खान रोक रहा hu…main बस आपके करीब hi रहना चाहता हूँ

अलका- तू यहां रहेगा तो मैं नहाउंगी कैसे और तेरा ये लुंड अभी तक बैठा नहीं…. इतना कह के अलका रघु के लुंड एक बार फिर से अपने कोमल हाथो में भर के दबा देती है..






राहु- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ममी

अलका- ये तो फिर से इतना ज्यादा सख्त हो गया…. तू जा अब यह से मैं नहा लू जल्दी से..

रघु- ऐसे कैसे जाऊ ममी आप नहाओ न मैं आपको देख के hi हल्का हो जाऊंगा..

अलका- ऐसा नहीं होता है बीटा समझा कर रात बहुत हो चुकी अब जा तेरे इन हरकतों से मई फिर से बहक जाउंगी

रघु- तो बहक जाओ न ममी… और इतना कह के रघु अपने होंठ अलका के होंठो से मिला देता है…






अलका भले hi रघु को बार बार जाने को कह रही थी लेकिन उसके हाथ में अभी भी रघु का लुंड था जिसे वो मुट्ठी में भर के आहे पीछे करते हुवे मसल रही थी….

रघु के इस तरह उसके होंठो से अपने होंठ मिलाने पर अलका भी रघु के किश का जवाब उसके जुबान को चूसते हुवे देने लगती है… और थोड़ी देर चले इस किश के बाद अलका रघु को धकेल के बाथरूम से भगा देती है और अंदर से दूर लोक कर देती है..

रघु अब बेमन से आ के बिस्टेर पे लेट जाता है और मन hi मन कहता है साली वहां से भगा दिया तो क्या आएगी तो यही न आज रात तेरे छूट में अपना लुंड गाड़ के hi रहूँगा… और बीएड पी ा के वोट क बार फिर से अपने लुंड को समझने लगता है

रघु- थोड़ा सब्र कर ले आज ये रंडी तुझे मिल के रहेगी साली नखरे कर रही है लेकिन कब तक करेगी कुटिया…

उधर रघु को बहार भेज अलका बाथरूम में अपने जिस्म पे शावर चला के उसे ठंडा करने की कोशिश करने लग जाती... रघु एक बार फिर से उसके रह रह के धधक रहे छूट की आग को भड़का के चला गया था जिसे दांत करने के लिए अलका शावर स्प्रे को अपने छूट से लगा के उसपे पूरा परेसुरे मरने लग जाती है उसका अपने सांसो पे काबू खोने लगता है अउ बेकाबू होते हुवे वो सोचने लग जाती है..






अलका- साला आज तो ये मुझे छोड़ने के इरादे से hi यह आया है और लगता है छोड़ के hi रहेगा,, एक तो मेरी प्यासी छूट ऊपर ये इसका बार बार मेरे जिस्म से खेलना आखिर कब तक खुद को रोक पाऊँगी उसके ऊपर ये रात न मैं कही जा सकती हूँ न इसे निकल सकती हूँ….

फिर दूसरा ख्याल उसके मन में तुरंत आने लगता है लेकिन अलका कितना सख्त लुंड है इसका इतनी जल्दी टाइट भी हो गया… uuuuuuuuuufffffffffff… इसी किट ु तलाश में थी और आज जब सामने है तो नखरे क्यों कर रही??? लेले उसका लुंड और शांत कर ले अपनी छूट की आग ज्यादा सोच मत वैसे भी वो तुझे पहले भी 2 बार छोड़ चुक्का है,,, और अगर आज तूने इसका लुंड ले लिया तो फिर इसे गुमनाम बन के तुझे छोड़ना नहीं पड़ेगा और टब hi जब दिल करे मौका पा कर इस से अपनी छूट की आग मिटा सकती है….

इन्ही कश्मकश में अलका अंदर अपने को साफ़ भी कर रही थी और आगे की योजना भी बना रही थी की आगे बधु या नहीं???? और बधु तो कैसे???

उधर रघु से भी और इंतजार नहीं हो पा रहा था ो तक ताकि लगाए अपने लुंड को मसलते हुवे दरवाजे की तरफ hi देख रहा था और जल्दी hi उसके इंतजार की सीमा भी समाप्त हो जाती है और बाथरूम का दरवाजा खुलता है जिसमे से कामदेवी अलका अपने काम बन को चलने वाले रूप पे प्रकट होती है..






रत के वक़्त कमरे की इस हलकी रौशनी में भी अलका का बदन किसी हेरे के सामान चमक रहा था… उसने स्टॉकिंग और काली लिंगरी पहनी थी और अलका के इस रूप के आगे तो स्वयं कामदेव भी अपना आप खो दे फिर आज न जाने रघु का क्या hi होगा ये तो वही जाने..

अलका बड़े अदाओ से कैटवाक करते हुवे रघु की तरफ बढ़ती है रघु अलका को ऐसा देख फिर से उत्तेजित होने लगता है …






अलका एक बड़े hi असाधारण मगर कामुक अंदाज़ से रघु के लुंड को घूरते हुवे कहती है

अलका- ये अभी तक खड़ा है..

जिसपे रघु अपने लुंड को हाथो से छोड़ देता है और उसका लुंड खुद बा खुद ऊपर निचे होना शुरू हो जाता है…

रघु देखो आपको देख के कैसे सलामी दे रहा है…






इस्पे अलका हसने लगती hai..oho मुझे सलामी क्या बात है वैसे अब सो जाओ बहुत रात हो गयी है (हलाकि उसका खुद छोड़ने का मन था लेकिन एक ममी कैसे कह दे की आ छोड़ मुझे इसलिए ना चाहते हुवे भी वो सोने का कहना पड़ता है) अलका भले hi सोने का कह रही थी लेकिन उसे पता था की उसका ये रूप रघु को सोने तो नहीं देने वाला और वो खुद hi कुछ न कुछ जरूर करेगा तब अलका उसे नहीं रोकेगी

रघु- ऐसे में कैसे सोउ ममी..

अलका- जैसे रोज सोता है और इतना कह के बीएड में उसके बगल में hi लेट जाती है…

नींद दोनों की आँखों से कोसो दूर थी एक को लुंड की प्यास थी तो दूसरे को छूट की एंड दोनों सामने है लेकिन सुरु करे तो कैसे इस बात पे सारा खेल अटका हुआ था….

अलका जब थोड़ी देर बाद भी रघु के तरफ से कोई हरकत नहीं देखती है तो एक बार को वो बीएड के दूसरे कोने में नज़र फेरती है तो पति है की रघु उसे hi घर रहा था और अपना लुंड हिला रहा था

अलका- ऐसे क्या देख रहा है..

रघु- देख रहा ह उममी आप कितनी हॉट हो और आपका ये बदन कितना चिकना है

अलका जिसके छूट में पहले hi आग लगी थी वो रघु को अपने कामुक बदन को ऐसे घूरता देख और उसपे उसके ऐसे शब्दों के बाण से और ज्यादा तड़प उठती है उसकी आग अब उसके छूट को जलने लगी थी पर रघु था की कुछ कर नहीं रहा था जिस से विवस हो के अलका का हाथ खुद बा खुद उसके छूट के ऊपर चला जाता है…






अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh कैसी बाटे करता है तू ???? अलका आंखे बंद किये अपनी छूट को मसल रही थी… तुझे नींद नहीं आएगी आज लगता है और न hi तू मुझे सोने देगा…

रघु- बगल में इतनी सेक्सी औरत हो तो नींद कैसे आएगी ममी??? मैं क्या मेरे लुंड को भी नींद नहीं आएगी आज तो देखो कैसे सख्त हो के आपको hi घर रहा है…






पर ये बात रघु को कहने की जरुरत नहीं थी अलका तो कब से उसके और उसके लुंड की बेचैनी को देख पा रही थी और उसे बेचैन करने में सबसे बड़ा हाथ भी तो अलका का hi था….

अलका- sssssssshhhhhhhhhhhhhhh किसी बाते करता है शर्म नहीं आती क्या

रघु- मेरे सामने अपनी नंगी छूट रगड़ रही हो और शर्म की बात कर रहे हो बड़ी कुट्टी है टी उममी…

रघु ने पहली बार अलका को गली दिया था लेकिन सिर्फ कुट्टी hi खा था और सच hi तो बोल रहा था ो अलका कुट्टी नहीं तो फिर क्या है अपने भांजे के सामने नंगी छूट मसल के शराफत का ढोंग जो कर रही थी..

अलका को रघु की या गली का बुरा नहीं लगता उल्टा वो उसके गली का जवाब पलट के गली से hi देती है….

अलका- क्या बोलै मैं कुट्टी हूँ…??? अगर मैं कुट्टी हु तो तू कुत्ता है….

रघु- फिर वॉक अरे जो कुत्ता कुट्टी के साथ करता है…

अलका रघु के ऐसी बातो पे है देती है…

अलका- हैट पागल कुछ भी बोलता है… जितना दिखा रही हु उतने में खुश रह अभी बचा है तू…

रघु- बचा नहीं हु तुम मौका दो तुम्हारे बचे करवा दूंगा..

अलका- ाचा बड़ा आया मर्द बचे करवाने वाला..

रघु- ममी जब पंतय उतर hi दिया है और छूट दिखा रही हो तो अपनी चुचिअ भी निकल लो न उसे क्यों अंदर फसा रखा है…

अलका- क्यों निकल लू

रघु- देखने के लिए

अलका पहले तो नखरे करती है लेकिन अंदर से नंगा तो होने का मन उसका भी हो रहा था इसलिए वो रघु के बातो को मानते हुवे कहती है

अलका- चल टब hi क्या याद करेगा आज तेरी ये विश भी पूरी कियेदेति हु ले देख ले अपनी ममी की चुचिअ






इतना कह के अलका अपनी एक चुकी को बहार निकल लेती है….

जिसपे रघु कहता है- दूसरा बह निकालो न

अलका- निकलती हु बाबा तुझे सब्र नहीं है ले देख ले अब खुश….

रघु- अभी खान मेरी कुटिया ममी

अलका- फिर अब क्या बचा है कुत्ते अपनी ममी को अपना लुंड दिखा के उस से उसकी छूट मसलवा रहा है उसकी चूचिया उसके ब्रा में से निकलवा दिया अब क्या करना रह गया??

अलका मनो रघु से उसकी फंतासी पूछ रही हो जो वो बताएगा अलका उसे पूरा कर देगी.. और अलका के इन्ही सवालों के जवाब में रघु बोल पड़ता है..

रघु- और जो कहूंगा करोगे आप??

अलका- बोल के देख करने लायक हुआ तो जरूर कर देगी तेरी ये कुटिया ममी….

अलका इस बार खुद से hi खुद को कुटिया बोली थी ये साबुत था इस बात का की अलका बहकने लगी है और बी ज्यादा जोर नहीं लगाना पड़ेगा उसके छूट में अपना लुंड घुसन के लिए…. रघु- सबसे पहले तो तेरी इन चुचिओ को मसलने का दिल हो रहा है बहुत ललचा रही है ये मुझे…

अलका- अपने छूट को और जोर से भीचते हुवे aaaaaaaaahhhhhhhhhhh तो मसल ले न तेरे लिए hi तो निकला है ये तेरी कुटिया ममी ने…

अलका का ये कामुक भरा स्वर और बार बार खुद के लिए कुटिया शब्द सुन के रघु भी उत्तेजित होने लगता है और रघु को भी अब अपना प्लान क्म्यब होता दिखने लगा था और वो अब एक कदम आगे बढ़ाते हुवे अलका के चुचिओ को अपने हाथो में भर लेता है






अलका तेज़ तेज़ अपने छूट पे अपना हाथ फिरने लगती है और उसके मुँह से एक aaaaaaaaaaahhhhhhh फुट पड़ती है

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh थोड़ा जोर से मसल न जब मसल hi रहा है….

अलका के इस तरह खुला निमंतरण पे रघु भी अब खान रुकने वाला था ो उठ के अलका के चुचिओ को भीचते हुवे उसके निप्पल को मुँह में भर के पहले तो खींचता है फिर उसे किसी दसहरी आम की तरह चूसने लग जाता है….






अलका का निप्पल जो पहले hi तन के किसी कांटे के सामान बन चुक्का था उसपे रघु का ऐसे दन्त गड़ना और काटना उस से बिलकुल बर्दाश्त नहीं हो पता और वो धीरे से चीख उठती है..

अलका- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhh उसे एक असीम आनंद की अनुभूति हो रही थी इस दर्द से जयादा उसे इस दर्द का मजा मिल रहा था…. उसका हाथ अपने छूट से हटके एक एक रघु के लुंड पे चला जाता है….

थोड़ी देर चुचिओ को चुसवाने के बाद अलका रघु को वापस से बीएड पे धकेल देती है..

अलका- चल हैट जरा सैक हूत क्या दिया तू तो चूसने लग गया …

रघु- क्या करू ममी देख के रहा नहीं गया,,, वैसे आपको रजाई के अंदर से छूट मसलने में दिकत हो रही होगी उसे हटा क्यों नहीं देते…

अलका- तुझे बड़ा आया मेरे दिक्कत का ख्याल ये बोल न मेरी छूट नहीं दिख रही अचे से तुझे और तेरे इस खड़े लुंड को…

अलका अब खुले खुले शब्दों का प्रयोग कर रही थी.. थोड़ी देर पहले जो कंपन उसके आवाज़ में आ रही थी वो जा चुक्का था अब जॉब अच् गया था वो बस प्यास और लुंड की भूक….

रघु- ऐसा hi समझो हटाओ न प्लस..

अलका फिर से रघु की बातो में आते हुवे एक झटके में रजाई से अपने आप को आज़ाद कर देती है और अपनी मसलते हुवे छूट को दिखते हुवे बोल पड़ती है ले देख ले अपनी ममी के छूट को अचे से….






अब अलका रजाई को हटाने के बाद अपने एक पेअर को मोड़ लेती है जिस से की उसकी गोरी और अँधेरे में भी चमकती हुई चिकनी जंघे और उस से सत्ता वो द्वार जिसमे समां जाने को रघु बेकरार हुआ बैठा था वो साफ़ साफ़ दिखने लगा था….

रघु लुंड को मसलते हुवे बोलता है uuuuuuuuuuuufffffffffffff ममी कितनी गरम है तू….

अलका- तू कितना बेशरम है देख क्या क्या करवा रहा है मेरे से और खुद भी कर रहा है uuuuuuffffffffff

इस्पे रघु वापस से अलका के चुचिओ को पकड़ के मसलने लगता है और बोलता है…






रघु- अभी खान कुछ किया है ममी

चुचिओ के साथ हो रहे खेलवाड़ से अलका पूरी बेचैन होने लगती है वो इतना बेकाबू हो जाती है की उसकी आंखे बंद होने लगती है और वो एक हाथ से चादर को भींच लेती है तो दूसरे से अपनी छूट को जोर जोर से मसलते हुवे अपनी गांड उठा उठा के अपने छूट से हो रही बेचैनी अपने भांजे को दिखा रही थी….

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh रघु क्या कर रहा है मैं पागल हुवे जा रही हु चोर दे वर्ण मेरा सब्र ख़तम हो गया तो गलत हो जायेगा

रघु- कुछ गलत नहीं होगा ममी और अभी तो कुछ हुआ भी नहीं है…

अलका- क्यों अब और क्या रह गया है ममी के bête नंगी हो के तेरे खड़े लुंड के सामने छूट मसल रही हु तू मेरे चुचिओ को कभी पि रहा है कभी मसल और काट रहा है और भी कुछ रह गया तो बोल.. haaaaaaaayyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeeee uuuuuuuuffffffffffff

रघु- अभी तो बहुत कुछ रह रहा है ममी काश के तू एक बार मिल जाये…

अलका छूट ममसलते हुवे- ाचा मिल गयी तो क्या करेगा???

पर रघु कुछ नहीं बोलता बस अलका के चुचिओ को मसल रहा था..

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh बोलना अब चुप क्यों हो gaya…fat गयी क्या???

रघु- फटेगी क्यों मुझे तो फडनी है...

अलका- छूट मसलते हुवे बोलती है aaaaaaaaaahhhhhhhh क्या फाड़ेगा bête बोल

रघु- तेरी छूट कुटिया साली….

इतना कह के रघु अब अलका के चुचिओ को चोर के उसके छूट की तरफ हाथ बढ़ता है पर जैसे hi उसका हाथ अलका के चुचिओ से हत्ता है अलका की आंख खुल जाती है और वो देखती है की रघु अपना हाथ अलका के छूट की तरफ बढ़ा रहा है जिस से अलका उसके हाथ को पकड़ लेती है….

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh यहां नहीं bête इसे मत चुना बाकि जो मन कर ले






रघु- देखने दो न ममी क्यों तड़पा रहे हो..

अलका- इतना सब कुछ तो देख चुक्का अब इतना hi काफी है तेरे लिए

रघु- प्लस ममी एक बार देखने दो…

इस्पे अलका अपने हाथो से अपने छूट के दोनों होंठो को खोल देती है… उसका इस तरह छूट के खोलने से उसका लाल गुलाबी छूट जिसमे भरा हुआ पानी उसके छूट को और ज्यादा चमका रहा था वो रघु के बिलकुल सामने था…






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रघु- uuuuuuuuuufffffffffffff ममी कितनी गुलाबी है तेरी छूट…

अलका- कुत्ते अब ममी क्यों बोल रहा है ममी नहीं कुटिया बोल आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या क्या करवा रहा है मुझसे ये कुत्ता हरामी …

रघु- हाँ मेरी कुटिया कितनी गीली हो रही तेरी छूट… uuffffffffff पूरा रास से भरा है जी कर रहा है पि जाऊ सारा का सर रास तेरे छूट का…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhh और क्या जी कर रहा है तेरा bête वो भी बोल दे आज

रघु- पहले एक बार चुने तो दो…

अलका रघु की आँखों में देखते हुवे बोलती है- तू बिना चुवे नहीं मानेगा??? दरसल अलका तो खुद चाहती थी की रघु उसके छूट को मसलने आखिर कब तक वो अपने हाथ को तकलीफ देती…

रघु भी अलका के प्यासी नज़रो को पहचानते हुवे बोलता है- नहीं….

इस्पे अलका अपनी छूट रघु की तरफ घुमा के उसे परोसते हुवे कहती है ले छू ले अपनी कुटिया के छूट को लेकिन इस से ज्यादा की उम्मीद मत करना..






रघु मन में (उम्मीद क्या मैं तो सब करूँगा और यह ताका ले hi आया हु तो तुझे छोड़ के hi मानूंगा आज)

अपने छूट पे रघु का हाथ पड़ते hi अलका के मुँह से अपने आप सिसकारी निकलने लगती है.. रघु ने सिर्फ उसके छूट को नहीं चुवा था बलि उसकी उंगलिया अलका के छूट की एक एक तर को छेद रहा था…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh mmmmaaaaaaaaaaaaaa

रघु अपने बिच वाले ऊँगली से अलका के छूट को मसलने लगता है जबकि उसकी बाकि उंगलिया अलका के छूट के होंठो को छेद रहा था…

रघु- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh ममी कितनी गरम छूट है आपकी

अलका- इतने देर से उकसा रहा है गरम तो होगी hi न..

रघु- बहुत पैन ऐकोर रही है ममी आपकी छूट…

अलका- क्यों पानी देख के तेरा गाला सूखने लगा है क्या

रघु- हाँ ममी पि जाऊ तेरे छूट का रास…

अलका- अब तू मानेगा भी खा पिजा अपने ममी के छूट का ras….nahi रोकेगी तेरी ममी तुझे मेरे बचे…

अलका का इशारा मिलते hi रघु फ़ौरन अलका के छूट की तरफ बढ़ जाता है और अलका भी उसे आता देख अपने दोनों घुटनो को मोड़ के अपनी छूट उसके लिए खोल देती है….

अलका का ये उतावलापन और अपनी मंजिल को नजदीक आता देख रघु के अंदर एक मुस्कान और जीत का भाव आता है और वो बिना समय गवाए अलका के छूट पे अपने होंठ रख के उसके कामर्स को चूसने लग जाता है…






रघु- sssssrssrrsrrrrrrpppppppppppp ssssuuuuuuuuuuppppppppppp

अलका- aaaaaaaahhhhhhhhhhhh आखिर तू अपनी ममी के छूट को चूसने hi लगा bête uuuuuuuuuuuffffffffffffffffff बहुत ाचा लग रहा है ऐसे hi चूस खुस कर दे अपनी ममी को….

अलका के इस बात पे रघु अलका के छूट से मुँह हटते हुवे अलका से पूछता है..

रघु- ममी कभी तुम कहती हो ममी नहीं कुटिया बोल कभी कहती हो ममी को खुश कर दे मैं तुम्हे क्या बोलू फिर….

अलका को इस वक़्त अपने छूट से रघु का मुँह हटाना बिलकुल पसन् नहीं आया इसलिए वो रघु के सर को अपने छूट पे दबाते हुवे मोअन करते हुवे कहती है…

अलका- जो मन करे बोल bête अपनी ममी को जोट एरा दिल हाउ ो बोल बस छूट से मुँह मत हटा ऐसे hi छत्ता रह…

रघु फिर से मुँह हटा क ीक बार दुबारा बोल पड़ता hai..jo मन करे वो??

अलका- हाँ भाई बोलै तो अब चूस न क्यों तड़पा रहा है अपनी कुटिया ममी को…

रघु- रंडी ममी भी???

रघु के इस सवाल पे अलका की बंद आंखे खुल जाती है… हलाकि ये कोई पहली बार उसे किसी ने रंडी नहीं बुलाया था हर कोई उसे छोड़ते हुवे रंडी चिनार गस्ती hi बुलाते है और अलका को भी गालिया सुन के छोड़ना पसन् है पर रघु के बढ़ते हिम्मत उसके बंद आंखे खोल देती है..

अलका- रंडी वो होती है जो उसे छोड़ता है और तूने कब छोड़ा मुझे…

रघु- जब छोड़ लू तो बुला सकता हु..

अलका- पहले मेरी छूट चाट फिर देखती हु तू उसके लायक है की नहीं और बाटे बनाएगा तो ये भी नहीं मिलेगी…

इस्पे रघु दुबारा से अलका के छूट पे मुँह भिड़ा के उसे चूसने लग जाता है….






अलका भी अब अपने दोनों पेअर पूरी तरह से हॉल के हवा में लहरा देती है जिस से उसकी छूट और भी ज्यादा खुल गयी थी….

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi जोर जोर से जुबान चल uuuuuuuuuufffffffffffff…

रघु- बहुत गर्मी है ममी तेरे छूट में uuuuuuuuuuffffff जैसे आग उगल रही हो….

अलका- तुझे hi तो ये आग चाइये थी न अब क्या हुआ अभी से दर लगने लगा…

रघु बिना कुछ बोले काफी देर तक छूट छत्ता रहता है अलका अब कभी भी अपने छूट से लावा बहा सकती थी और रघु के दिमाग में भी आता है की अगर अलका का हो गया और उसने उसे फिर हाथ लगाने न दिया तो वो रात भर मुठ hi मरता रह जायेगा इसलिए वोट क बार फिर से अलका के छूट से मुँह हटा देता है…

ओर्गास्म के इतने करीब आ के रघु का ऐसे मुँह हटाना अलका को बिलकुल भी ाचा नहीं लगता और वो झुंझलाते हुवे रघु से बोलती है

अलका- अब क्या हुआ बहनचोद क्यों बार बार हैट रहा है…

रघु- ममी मेरे लुंड में बहुत अकड़न होने लगी है…

अलका- ऊऊफफफफफफफ तो क्या मैंने पहले hi बोलै अंदर डालने नहीं दूंगी..

रघु- ठीक है अंदर मत डालने दो पर मई आपके इस गरम भट्टी जैसे छूट के ऊपर ऊपर तो रगड़ सकता हम एरा भी निकल जायेगा और आपका भी..

अलका को बस किसी भी हाल में ओर्गास्म पाना चाहती थी और उसे पता था की ऊपर से रगड़ना तो बहन है अगर वोट क बार अपना लुंड उसके छूट से सत्ता दिया तो वो खुद उसका लुंड पकड़ के अपने छूट में भर लेगी फिर भी नाटक करते हुवे अलका बोलती है..

अलका- ठीक है जो करना है कर बस याद रहे अंदर नहीं डालना..

रघु- तू बस देखती जा मेरी कुटिया,,,,

और इतना कह के रघु अलका के गरम ताप्ती भातिनुमा छूट के ऊपर अपना लुंड ले आता है






शाम से लुंड के लिए तरसती अलका के छूट पे रघु के लुंड के स्पर्श मात्रा से अलका के पूरा जिसम सिहर उठता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuffffffffffffff बस ऐसे hi रगड़ा अंदर न जाये ध्यान से…..

रघु पुरे इत्मीनान से अपना लुंड अलका के छूट के दोनों होंठो के बिच फसा के ऊपर निचे करते हुवे रगड़ रहा था… इस तरह लुंड के रगड़ने से अलका को जितना ाचा लग रहा था उस से ज्यादा उसकी आग भड़क रही थी लेकिन फिर भी वो अपने आप पे काबू रखने की पूरी कोशिश कर रही थी…

अलका की आंखे बंद होने लगतीहै उसके दोनों पेअर मुड़े हुवे थे जिस से छूट पूरी खुली हुई थी वो अपने दोनों हाथ से अपने दोनों तने हुवे निप्पल को जोर से मरोड़ रही थी और आहे भर रही थी…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh रघु bête ये कैसी आग लगा दी तूने uuuuuuuuufffffffffff

की तभी अलका के बंद आँखों का फायदा उठाते हुवे रघु अपने लुंड का टोपा अंदर पेल देता है…

लुंड के अंडे परवश करते hi अलका की आंखे खुल जाती है…

अलका- मना किया थान ा अंदर डालने से तूने क्यों डाला फिर..

रघु- सॉरी ममी अपनी छूट इतना ज्यादा पैन ऐकोर रही है की ये खुद hi अंदर समां गया…. मई आगे से ख्याल rakhunga…keh के इस से पहले अलका कोई बहन बनती रघु वापस से छूट पे लुंड घिसने लगता है और अलका की आंख दोबारा से बंद होने लग जाती है…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ऐसे hi बहुत ाचा लग रहा है bête hayyyyyyyyyeeeeeeeeee

अलका के इस तरह मोअन करते रहने और बंद आँखों का फायदा उठाते हुवेर रघु एक बार फिर से अपना लुंड का टोपा अलका के छूट में घुसा देता है…






अलका इतना ज्यादा गरम हो गयी थी की इस बार वो रघु को नहीं रोकती बल्कि आंखे बंद किये मोअन करते हुवे कहती है..

अलका- तू बहुत तेज़ है रघु…… है मेरी छूट कितनी गीली कर दी तूने uuuuuuuuuffffffffffff… अब इस से ज्यादा अंदर मत डालना प्लस इतने में अपना काम चला ले bête…

रघु (बहन की लोदी अब चला hi गया फिर क्यों ड्रामे कर रही है, छोड़ने का मन भी है और नखरे भी पुरे करने चिनार को)

रघु- uuuuuuuuuuuffffffffff ममी कितनी गीली और आग उगल रही है तेरी ये छूट….

अलका अब अपनी दोनों टंगे अपने सर तक उठा लेती है उसकी छूट के अंदर बहार होता उसके लुंड के साथ अलका के गांड का छेद तक रघु को दिखने लग जाता है…






अलका- ऐसे hi धीरे धीरे धक्के मर uuuuuuuuuuuuffffffffffffff आखिर में तूने लुंड घुसा hi दिया मेरे छूट में uuuuuuuuufffffffffffff

रघु अब अलका के दोनों चुचिओ को मसलते हुवे उसके ऊपर झुक के उसे किश करता है और कहता है अभी खान घुसाया है…

अलका- तो बाकि क्यों बचा रखा है घुसा दे और छोड़ अपनी ममी को… रंडी बुलाना था न मुझे तो छोड़ और बना ले अपनी रंडी देखु कितना डैम है तेरे में..

आखिर में अलका के सब्र का बांध टूट जाता है और वो अपने असली रूप में आ चुकी थी…

रघु भी अलका के बदलते रूप को देख खुश हो जाता है और अपने आधे बचे हुवे लुंड को अलका के छूट में पेल देता है…






लुंड के अंदर जाते hi अलका के सुर बदलने लगते है अलका के छूट में एक तेज़ जलन होने लगती है जो दर्द के साथ एक अनोखा मज़ा दे रहा था और वो दर और मज़ा का मिलाजुला सुख उसे आज तक किसी के भी लुंड से नहीं मिला था विशाल के लुंड से भी नहीं…

अलका के इस दर्द रूपी मज़ा का कारन था रघु का अनोखा लुंड… रघु का लुंड बाकिओ के मुकाबले टेढ़ा था जिस वजह से जहां बाकि सभी के लुंड सिर्फ अलका के छूट के आकर को बदलते हुवे अंदर बहार होता है तो वही रघु का लुंड टेढ़ा होने के वजह से वो अलका के छूट के अंदर के मांसपेशियों को जैसे कुरेद रहा था…

रघु जब भी अपना लुंड बहार खींचता था तो उसे छूट में भयंकर जलन होने लगती थी जैसे उसका लुंड अपने टोपे में अलका के छूट के अंदर के माँसपेशिओ को भी अपने साथ खींच के निकल के बहार ला रहा ho….aur यही वजह था रघु के छूट के साधारण से धक्के ने भी अलका जैसी रैंड को हिला के रख दिया था वर्ण अलका तो इस से भयंकर और विकराल लुंड निगल के बैठी है…

अलका- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मममममअअअअअअ मेरी छूट जल रही है तेरे इस टेढ़े लुंड से ufffffffffffff

रघु- सीधे लुंड तो बहुत खायी है तूने मेरी रैंड अब टेढ़े लुंड का भी स्वाद लेले मेरी रंडी ममी….

रघु के लुंड के खुरचन की आगे अलका अगले hi पल ढेर हो जाती है और उसके छूट से उसका काम रास बहने लग जाता है…






अलका- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह mmmmmmmmaaaaaaaaaa पुरे छूट को चील रहा है तेरा ये लुंड आआआअह्हह्ह्ह्हह मैं गयी मैं गयी….

अलका के छूट का लावा बैठे hi रघु अपना लुंड बहार निकल लेता है..

अलका- uuuuuuuuuuuufffffffffffffff साँस लेने दे तूने मेरी छूट को नोच डला अपने इस टेढ़े लुंड से hhhhhaaaayyyyyyeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee…

रघु- क्यों मेरी रैंड इतनी जल्दी हो गया तेरा…? मजा आया??

अलका सांसो पे कण्ट्रोल करते हुवे रघु को धकेल के बीएड पे गिरा देती है और उसके लुंड को मुठी में भर के कहती है..

अलका- अभी खान अभी तो पूरी रात लुंगी तेरा ये लुंड अपनी छूट में uuuuuuuuuffffffffffffffffffff अभी भी कितना सख्त hai…aur अलका रघु के लुंड को ंथी में भर के उसे देखते हुवे कहती है इसने तो मेरी आग और ज्यादा भड़का दी है..






इतना कह के अलका रघु के लुंड को मुँह में भर के चूसने लग जाती है..

रघु- आआआअह्ह्ह्हह चुसो ममी इसमें आपके hi छूट का पानी है टास्ते करो अपने छूट का रास…

अलका- हाँ तेरे इस चमच के आकर के लुंड ने ाचा खासा पानी बहार खींच निकल है uuuuuuuuhhhhhhhhhhhh

अलका जहां एक तरफ रघु के लुंड को मुठिया रही थी तो वही उसके बॉल्स को मुँह में भर के चाटने और चूसने लग जाती है..






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अलका के अंदर आग पहले hi इतनी है की वो खुद के पेअर संभाल नहीं पति उसके ऊपर आज दिन भर जो उसके साथ बार बार कलपद हुआ था उसने उसके आग को और भड़का दिया था और देखने की बात ये है की जिसने अलका के आग को भड़काया था आखिर में शांत भी वही कर रहा है…

रघु- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मायआ सही में पूरा घर तेरे पीछे दीवाना है ममी तू रंडी को भी पीछे चोर देने वाली गस्ती है…

अलका- और तेरी माँ वो गस्ती नहीं है उसकी चुदाई नहीं देखि है तूने???

राघव- देखि है ममी सब की देखि है… माँ को तो छोड़ने का भी मन होता है पर साली की लू कैसे उसकी गांड देख के मेरा मन होता है पटक के उसमे अपना लोढ़ा पेल दू और इतना कह के अपना लुंड अलका के मुँह में पेल देता है

अलका खासते हुवे- ाहाहाःहाहा अरे आराम से कुत्ते मेरा मुँह है तेरी माँ अक गांड nahi…waise मैं तेरी मदद कर दूंगी तो मुझे क्या मिलेगा??

रघु- सच में ममी फिर तो मैं आपका गुलाम बन जाउगा..

अलका- गुलाम तो तू वैसे भी बन जायेगा छूट के लिए पर मैं कुछ और बोलूंगी

रघु- क्या

अलका- वो फिर कभी सोच के बताउंगी पहले टब ता मंटा है ये बात

रघु- हाँ मेरी रांड अब कैसे बोलू…

इस्पे अलका हस्ते हुवे रघु के कमर के दोनों तरफ अपने पेअर कर के उसका लुंड अपने छूट पे सत्ता के रगड़ते हुवे बैठने लगती hai…aur देखते hi देखते रघु का लुंड अलका के छूट में गायब हो जाता है..






Alka-aaaaaaahhhhhhhhh अभी तू कुछ मत बोल अपने इस हुक जैसे लुंड से बुलवा और जोर जोर से छोड़ अपनी ममी को की मैं तेरा गुलाम बन जाऊ…

रघु- ऐसी बात है तो ये ले मेरी साली कुटी मादरचोद रंडी…






रघु के हर धक्के के साथ अलका और ज्यादा बेचैन होने लगती है और वो और जोर लगा के उसके लुंड पे कूदने लग जाती है…

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhh हययययययीीीे ऐसे hi छोड़ मादरचोद फाड् दे मेरी छूट कब से तड़प रही है तेरे बाप में तो डैम hi नहीं बचा है उउउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

रघु- तो bête के पास आ जाया करा कुटिया वो तुझे तसल्ली करा देगा..

अलका- हाँ करदे तसल्ली तेरा लुंड मेरे छूट को चील रही है तू नोच दाल uuuuuuuuuufffffffffffffff हाय कामिनी तेरा बीटा तुझे छोड़ने के सपने देख रहा है और छोड़ मुझे रहा है uuuuuuuuuuuffffffffffffffff

रघु- विशाल भी तुझे छोड़ने के सपने देखता होगा न ममी..

विशाल का नाम सुनते hi अलका के छूट में एक तेज़ सुरसुरी दौड़ जाती hai…jab से वो गाओं आयी है विशाल को मौका नहीं मिला है उसे पेलने का बाकि पूरा परिवार छोड़ रहा है यहां तक की आज एक गैर मर्द से चुड़ते चुड़ते बची और एक आखरी मर्द जॉब च था ो भी आज इसमें छूट में अपना लुंड घुसा के अलका को अपने लुंड पे उछाल रहा है…

अलका- hhhhhhhaaayyyyyyyyyyyeeeeeeeeeee मैं कैसे बताऊ उसके सपने ka……tu विशाल को चोर उसकी माँ को छोड़…

रघु- hhhhhhhhhaaaaaaaaahhhhhhhhhh……. हाँ ममी वैसे ाचा hi हुआ विशाल नहीं है और उसकी रैंड माँ मेरे से चुद रही है…. वर्ण ऐसा मौका खान मिलता ???? देख विशाल तेरी माँ कितनी बड़ी रंडी है अभी पापा से चुद के उसकी गर्मी गयी नहीं की अब उनके bête के लुंड पे कूड़ा मारा रही है तेरी लुंडखोर माआ

अलका- हाँ मई हूँ लुंड खोर तेरी माँ भी है ऊऊफफफफफफफफफ गस्ती की औलाद है तू ….

रघु चल मेरी रैंड अब कुटिया बन जा तेरी पीछे से लूंगा बहनचोद….

अलका भी रघु के लुंड से उतर के फ़ौरन कुटिया बन जाती है और अपना गांड रघु को परोसते हुवे बोलती है..

अलका- ाआजजजजजज्जजाआआआ देख अपनी ममी की गांड किसी लगी…

रघु- कसम से ममी एक बार गांड मिल जाये मजा hi आ जाये कितनी सेक्सी गांड है तेरी उउउउउउफफ्फ्फफ्फ्फ़

अलका- गांड का सोचना बंद कर और छूट में दाल अपना ये हुक…

रघु कुटिया बानी अलका के टैंगो को थोड़ा और फैलता है जिससे उसकी गांड की चौड़ाई और ज्यादा बढ़ के दिखने लगती है और फिर रघु पहले उसके गांड पे थपड लगता है और फिर अपना लुंड पीछे से अलका के छूट में पेल देता है….






अलका- sssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhh हर बार न्य एहसास देता है तेरा ये लोढ़ा uuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff और अलका अपनी गांड खुद hi रघु के पीछे पीछे उसे लुंड पे पटकने लग जाती है….

रघु- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ममी मादरचोद गज़ब की औरत है तू किसी दिन तुझे पहाड़ी वाले झरने के निचे ले जा के छोडूंगा…

अलका- aaahhhhhhhhhhh ये खान है

रघु- है एक सुनसान जंगल वहां ज्यादा कोई नहीं आता

अलका- और कोई आ गया तो

रघु- तो वो भी तुझे छोड़ लेगा मेरी रैंड तू तो है hi लुंडखोर कुटिया

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh तू अपनी ममी को जंगल ले जा के दूसरे से छुड़वाएगा

रघु- दूसरे से क्यों साथ मिल के थ्रीसम कर्नेगे

अलका- तू मुझे ऐसे छोड़ेगा तो विशाल तेरी माँ को नहीं छोड़ेगा क्या??? कभी ये सोचा है?

रघु- छोड़ने दो पापा वाइफ स्वैप करते है हम माये कर लेंगे और च hi तो होगा वो मेरी माँ को मैं उसकी माँ को छोड़ेंगे

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh कैसी कैसी फंतासी है तेरी uuuuuuuuuuuufffffffffff

रघु- ममी अब ये बाकि का बचा कपड़ा भी उतर दो न …ये बात रघु ने अलका के टैंक टॉप के लिए कही थी जिसे अलका ने अभी तक पहना था हलाकि उसके होने न होने का कोई फायदा नहीं था कुकी उसकी चुचिअ तो बहार hi लटक रही थी…

अलका- क्यों इतना नंगा देख लिया काफी नहीं है जो और नंगा देखना छह रहा है..

रघु- सिर्फ देखना नहीं छह रहा बल्कि नंगा कर के छोड़ना छह रहा हु पूरा नंगा मादरचोद और रघु बेकाबू होते हुवे अलका के पीठ को दांतो से काट लेता है..

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh काट क्यों रहा है रुक उतरती हु और फिर अलका अपने जिस्म पे बचे ाहृ कपडे को भी उतरने लग जाती है…






अलका- ले देख ले हो गयी पूरी नंगी सर से पाऊँ तक तेरे लिए चाट अचे से जहां जहां चेतना है चूस ले पूरा अपनी ममी को

अलका को ऐसे नंगा देख रघु उसके यौवन में खोने लग जाता है उसके धक्को की स्पीड थोड़ी काम हो गयी थी पर वो लगातार अलका को चाट रहा था उसके पीठ पे तो कभी उसके गोल भरव्दार चुत्तड़ो पे दन्त काटने लग जाता है…

रघु बिलकुल बेकाबू सा हो गया था जैसे किसी भिकारी को खजाना और प्यासे को झरना मिलने से हो जाते है…

रघु के काम होते धक्को से अलका पीछे पलट के उसकी तरफ देखती है और पूछती है






अलका- क्या हुआ थक गया क्या???

रघु- तेरे इस कामुक जिस्म को छोड़ के कोई थक सकता है क्या मेरी कुटिया

अलका- फिर धक्का लगन ा रुक क्यों गया छोड़ तेज़ तेज़

अलका की बात पे रघु एक बार फिर से स्पीड बढ़ा के छोड़ना सुरु कर देता है..

अलका- aaaaaaaaaaahhhh हाँ ऐसे hi तेज़ तेज़ छोड़ ुफ्फुफूफू uuuuffffffffff मेरा फिर से होने वाला है..

रघु- मेरा भी होने hi वाला है ममी

अलका रुक फिर पोजीशन बदलते है मेरे कमर में दर्द होने लगा है… और इतना कह के अलका वापस से बीएड पे पीठ के बल लेट जाती है और अपनी दोनों टंगे हवा में कर के अपनी छूट रघु को दिखते हुवे हसने लगती है..

अलका- देख ले इसी के लिए तू यहां सोने आया था न ले लिया जिसके लिए आया था छोड़ लिया अपनी ममी को…

रघु- अभी चुदाई पूरी खा हुई है ममी अभी तो तुझे अपना पानी पिलाना hai…aur रघु एक बार फिर से अलका के छूट पे अपना लूणदा सताने लगता है…

अलका- रुक पहले इसकी थोड़ी मालिश कर दू और इतना कह के अलका अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकलती है और रघु के लुंड पे लगा के उसका मस्सगे करना सुरु कर देती है…






वो बार बार रघु के लुंड के छेद को अपने उंगलिओ से सहलाते हुवे उसमे अपना नाखुक घुसाने लगती है…

रघु अलका के ऐसी सेवा से पूरा पागल होने लगता है- रघु आआआआअह्हह्ह्ह्ह साली रैंड क्या कर रही है






अलका- क्यों ाचा नहीं लग रहा है…? इस से ज्यादा खलबली तेरा ये लुंड मेरे छूट में मचता है…

रघु- aaaaaaaaaaahhhhh तो तू उसका बदला ले रही है कुटियाआ साली चिनार और एक छठा उसके चुचिओ पे मार देता है…

अलका- एक hi रत में ममी से कुटिया रंडी और बी चिनार बना दिया मुझे तूने uuuuuuufffffffffffffff

रघु- क्यों तू चिनार नहीं है…

अलका- पता नहीं अब दाल और छोड़ जोर जोर se…itna कह के अलका एक बार फिर से अपने पेअर को पूरा हवा में उठा लेती है..






रघु भी अलका के छूट पे लुंड रख के एक करारा झटका लगता है जिस से अलका की चीख के साथ जीभ भी बहार आ जाती है

अलका –aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh फैट गयी मेरी छूट उउउउउउउउउफ्फ्फ

रघु- फटी तो बहुत पहले से साली मैंने थोड़े न फड़ी है..

अलका- तो आज फाड् दे कर ले न अपने मन की मैंने रोका नहीं तुझे छोड़ अपनी ममी को तेज़ तेज़ झटको के साथ दिखा अपना dam..uuuuuuuuuuuuffffffffffffffff

रघु भी पुरे जोश में अलका के छूट पे एक से बढ़ क ीक जोरदार धक्के लगाने लग जाता है…






अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaa हाँ ऐसे hi छोड़ जोर जोर से बना ले मुझे अपनी रैंड चिंरा जो मन करे बस ऐसे hi छोड़ता रह रुकना नहीं फाड् मेरी छूट uuuuuuuuuuuuffffffffffffffff

रघु- मैं भी बस आने hi वाला हूँ मेरी चिनार ममी

अलका- हाँ तो आजा मेरे bête अपने चिनार ममी कोप ेल ऐसे hi ये समझ की मैं कामिनी हूँ छोड़ अपनी माँ कामिनी को..

रघु- कामिनी की तो गांड मरूंगा टब hi अपनी गांड देगी न

अलका- हाँ दूंगी गांड छूट सब तेरा आज झरने के निचे छोड़ या चाट पे ले जा के मैं नहीं रोकूंगी तुझे… ऊऊफफफफफ

अलका खुद तो झाड़ गयी थी उसने अपने बातो से रघु को इतना उत्तेजित कर देती है की रघु का लुंड भी अपना काबू चोर्ने लगता है

रघु- ममी मेरा होने वाला है..

अलका- आआह्ह्ह्ह अंदर नहीं bête इधर मेरे मुँह में निकल दे भर दे मेरे मुँह को मुझे तेरा मलाई पीना है…

रघु फ़ौरन अपना लुंड अलका के छूट से निकल के अलका के मुँह की तरफ बढ़ा देता है.. जिस से देखते hi देखते एक पिचकारी सिद्ध अलका के मुँह में छुट्टी है…






और ऐसे hi एक के बाद एक पिचकारी मरते हुवे रघु का लुंड अपने पानी से अलका के मुँह को भरना सुरु कर देता है…

अलका भी अपनी जुबान पे रघु के मरे मुठ को इकट्ठा करने लग जाती है और जैसे hi उसका लुंड पिचकारी मरना बंद करता है अलका पहले तो अपनी जुबान बहार निकल के रघु को उसी के लुंड के पानी का दर्शन कराती है फिर जुबान को वापस से मुँह में दाल के सारा पानी जातक जाती है…

रघु अलका का ये चिनार रूपी हरकत देख के है रहा था अलका भी उसे देख के आंख मार देती है और फिर रघु अब साइड हटने को होता है की अलका उसे वापस पकड़ लेती है

अलका- रुक खान जा रहा है?

रघु- क्यों क्या हुआ..

अलका रघु के लुंड को पकड़ती है और उसके मुहाने पे लगे उसके आखरी बून्द को भी अपने होंठो में दबा के चूस लेती है…

अलका- इतने म्हणत से निकला है वास्ते थोड़े न होने दूंगी एक एक बून्द निचोड़ के पि जाउंगी मैं…

पानी की कुछ बुँदे अलका के आँखों के निचे उसकी छाती और गार्डन पर और कुछ बुँदे उसके होंठो पर भी फ़ैल गयी थी जिसे वो अपना जीभ फिर कर चाट जाती है...






रघु- तू सच में चिनार है ममी

अलका- चिनार न होती तो तुझे छोड़ने को मिलती क्या??? फिर ऐसे hi लुंड पकड़ के मुठ मरता रहता…

रघु- कह तो तू सही रही है ममी

अलका- हाँ और जब तक मैं हु रोज तेरे लुंड का पानी पियूँगी..

रघु- पर कल तो विशाल आ जायेगा फिर क्या करेंगे??

अलका- उसका भी कोई जुगाड़ लगा लेंगे वर्ण तेरे पास माँ स्वैप का प्लान तो है hi तू मुझे छोड़ना वो तेरी माँ को…

अलका के इस बात से रघु के तन बदन में आग लग जाती है और वो दुबारा अलका के ऊपर झुक के उसे चूमने लगता है…






अलका भी बिना रोके अपनी टंगे उठा के रघु के कमर को जकड लेती है और उसके किश का जवाब अपने होंठो को चुसवाते हुवे देने लगती है..

रघु- इसका मतलब तू रेडी है मेरी रैंड माँ स्वैप के लिए

अलका- मैंने कब खा मैं रेडी हु वो तो तेरा प्लान है ये खा मैंने..

रघु- साली एक नंबर की रंडी है तू…

अलका- चल हैट मुझे साफ करने जाना है तेरे इरादे ने नहीं लग रहे तेरा लुंड फिर से हरकत करने लगा है और मेरे छूट का सब्र भी टूट गया तो फिर से तेरे लुंड को निगल लुंगी

रघु- बहुत आग है ममी तेरे में….

अलका जैसे hi उठत हैरागहु उसे फिर से पकड़ लेता है और अपने से चिपका के बोलता चोरो न ममी ऐसे hi सोते है सुबह नाहा लेना

अलका- तेरा फिर से छोड़ने का इरादा तो नहीं बन रहा है…?

रघु- नहीं पर बन भी गया तो साफ किया बराबर हो जायेगा न इसलिए चलो ऐसे hi सोते है और अलका को अपने बहो में भर के सोने लग जाता है…






उस रत सूरज निकलने तक अलका रघु से दो बार और चुदती है और फिर दोनों वैसे hi सो जाते है एक दूसरे के जिस्म के पानी से तरबतर होए के….

और इसी के साथ घर में तो सुबह हो चुक्का था पर उधर दूर कॉटेज में अभी सूरज निकलना बाकि था है रत के अँधेरे में कुछ खेल पुरे होने बाकि थे जिसे हम अगले part में देखंगे…
 




थस ओने इस फॉर माय साइलेंट रीडर्स😂😂 एंड जो कमेंट किये बिना सर लिखे कर के चुपचाप निकल जाते है फॉर ठोस आल्सो :respekt::respekt::respekt:

Mr happy
 
पिछली रात में हुवे ममी भांजे के इस घमसान चुदाई में अलका ने रघु से बहुत कुछ खा था जिनकी एक दो झलकियां मई निचे से रहा हु आप अपना ओपिनियन देना की क्या ऐसा है की नहीं....?



1)Alka-aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaa हाँ ऐसे hi छोड़ जोर जोर से बना ले मुझे अपनी रैंड चिंरा जो मन करे बस ऐसे hi छोड़ता रह रुकना नहीं फाड् मेरी छूट uuuuuuuuuuuuffffffffffffffff

2)

अलका- हाँ दूंगी गांड छूट सब तेरा आज झरने के निचे छोड़ या चाट पे ले जा के मैं नहीं रोकूंगी तुझे… ऊऊफफफफफ

3.) अलका- हाँ और जब तक मैं हु रोज तेरे लुंड का पानी पियूँगी.



क्या लगता है दोस्तों अलका ने सिर्फ चुदाई के नशे में और भावना में बह के बोलै है या रघु धीरे धीरे विशाल की जगह लेने लगा है...?
 
अपडेट- 65 (हवस के नज़रो का अगला शिकार)

सुबह हो चुकी थी और उधर ऋचा और विशाल भी जल्दी hi घर वापस आ जाते है.. ऋचा की हुई रात भर की चुदाई ने उसकी चाल बदल दी थी जिसे कोई भी चुदकड़ औरत देख के साफ़ बता सकती थी की इसे रात बाहर बहुत जैम के छोड़ा है जिसने भी छोड़ा है लेकिन ऋचा की किस्मत अछि थी हर बार की तरह इस बार भी उसे रस्ते भर में कोई नहीं मिलता विशाल की दर्दनाक चुदाई ने उसे पूरा थका दिया था और वो सिद्ध अपने कमरे में सोने चली जाती है….

पर कहते है न जैसी माँ वैसा बीटा अगर अलका एक नंबर की रांड चूड़ाकड थी तो उसका बीटा भी बहुत बड़ा छूट का ासिक था रिसोर्ट में रिच अक बार बार कहना किट ु माँ यानि रागिनी को पता के छोड़ दे फिर मुझे किसी बात का दर नहीं रहेगा वो विशाल के मन में घर कर गया था और वो अब इसी प्लान में लग जाता है की रगिनी को कैसे निचे लिया जाये…

पर सागिनी भी को शरीफ थोड़े न थी वो इन सब रंडियो की सरदारनी थी जिसे बस मौका और नया लुंड मिले तो वोट क झटके में निगल जाये बिना सोचे की वो किसका लुंड है तभी तो उसने अपने hi खेत में काम करने वाले बिरजू से भी अपनी छूट को कई बार ठंडा करवाया है पर खैर उस टॉपिक पे फिर कभी अभी हम विशाल के तरफ षाले है..

सुबह के कोई 10-11 बज रहे होंगे घर के मर्द अपने काम में निकल गए थे और जो थे वो बैठक में ताश खेलते हुवे अपना टाइम पास कर रहे थे… की तभी रागिनी के जोर जोर से चिल्लाने की आवाज़ आती है…

रागिनी- ऋचा खा रह गयी जरा सुन तो….

ये आवाज़ रागिनी के बाथरूम से आ रही थी जहां वो ऋचा को बुला रही थी.. रागिनी बेशक पुरे घर का ख्याल रख लेती थी लेकिन ऋचा जब छोटी थी तब से अब तक उसे नहाने के बाद टॉवल ऋचा hi देती आ रही थी और बी ये उन्दोनो के दिनचर्या बन गयी हो जैसे…

पर आज ऋचा अपने भाई लुंड के पानी से भरे छूट के नशे में नींद की आगोश में जा चुकी थी उसे रागिनी की आवाज़ की भनक तक नहीं सुनाई दे रहा tha…ispe रागिनी हमेशा की तरह झुंझलाते हुवे ऋचा को गालिया दे के बुलाने लग जाती है

रागिनी- अरे करमजली खान रह गयी मेरी आवाज़ भी नहीं सुनाई दे रहा है क्या ???? हाँ या न कुछ बोल तो ले…..

तभी वही पास में मंडरा रहा विशाल को रागिनी की आवाज़ सुनाई दे जाती है वो ऋचा के कमरे में जा के उसे बताता है की उसकी बड़ी माँ रागिनी उसे बुला रही है पर नींद के नशे में ऋचा उसे ाणसुस्ना कर देती है लेकिन जब विशाल बार बार उसे हिला के जगाने की कोशिश करता है तो ऋचा नींद में hi जवाब देते हुवे कहती है…

ऋचा- अरे कुछ नहीं नहाने गयी है टॉवल मांग रही होगी… विशु तू माँ को आज टॉवल दे दे मेरे से उठा नहीं जा रहा है भाई

विशाल के मन में एक खुसी की लहार दौड़ जाती है वो सोचने लगता है साला इतनी जल्दी कुछ और मांगता तो सईद न मिलता पर ये तो अभी सोचा नहीं की उधर से बुलावा आ गया और फि विशाल जल्दी से रागिनी के कमरे की तरफ चल देता है…

अंदर बाथरूम में रागिनी बिलकुल नंगी अपने गीले बदन को छुपाये बाथरूम के अंदर से आवाज़ दे रही thi..shadi और डांस के फंक्शन होने के वजह से शाम को hi उसने वैक्स करवाया था और वैक्स सिर्फ हाथ पेअर में hi नहीं बल्कि अपने ुंडेरर्मः छूट और यहां तक की अपने गोल रसदार चूतड़ों पे भी करवाया था… उसका कन्धा से ले के पेअर एक डैम चिकना जैसे माखन की तरह चमक रहा हो..

विशाल अंदर जैसे जाता है देखता है रागिनी बाथरूम के अंदर है और बहार की तरफ झांक रही है इस उम्मीद से की उसकी बेटी आ के उसे टॉवल देगी पर बेटी ने तो उसके लिए नया लुंड भेजा था अब ये इन दोनों के ऊपर था की कौन पहले किसको निगलता है क्युकी एक के पास अजगर था तो दूसरे के पास गहरी खाई और अजगर एंड बिल्क ा तो पुराण रिश्ता है…

रागिनी विशाल को देखते hi शॉक हो जाती है..

रागिनी- तू यहां क्या कर रही है??? और वो कामचोर ऋचा खान मर गयी?

विशाल- बड़ी माँ दीदी रात भर सो नहीं पायी थी तो अभी उसकी आंख लग गयी आप काफी देर से चिल्ला रहे थे तो मैं देखने आ गया… बताओ मैं कुछ कर सकता हु…

रागिनी- अब वो आएगी नहीं तो तुझे hi करना होगा एक काम कर ालमिरह से मेरे टॉवल निकल के मुझे दे दे…

विशाल- क्यों आप टॉवल ले के अंदर नहीं जाती??

रागिनी- अरे ऋचा hi रोज देती है आदत हो गयी है उसी से लेने की अब वो सो गयी तो मैं ऐसे कैसे बहार औ?

विशाल बात को और कुरेदते हुवे कहता है- फिर आप अंदर कैसे हो बिना कपड़ो के?? और ये सोच के hi विशाल का लुंड उसके पंत में हरकत करने लग जाता है.. जिसके हलचल को रागिनी अपने कनखीओं से देख लेती है…

औरत जब चुदकड़ हो तो वोट क hi नज़र से मर्द के अंग में हो रहे हर हरकत को पहचान लेती है वो चेहरे को देखते हुवे भी मर्द के लुंड का हाल पहचान लेती है और रागिनी तो इसकी पुराणी खिलाडी है….

विशाल के मुँह से बिना कपड़ो के सुन के रागिनी को थोड़ा अजीब तो लगता है लेकिन साथ hi उसके छूट के नसों में गुदगुदी कर जाता है…

रागिनी- ओहो तू कितना सवाल करता है पहले टॉवल दे दे फिर पूछते रहना अपने सवाल

विशाल- ओह्ह सॉरी बड़ी माँ मैं भूल hi गया

इस्पे रागिनी हस्ते हुवे मन में सोचती है ( सोच के hi भूल गया देख लेगा तो क्या होगा तेरा विशु.)

विशाल अगले hi पल टॉवल निकलने के लिए ालमिरह खोलता है जहां रागिनी क ीक से बढ़ क ीक सरियाँ और ुंडेरवेअर्स थे विशाल उनमे से एक चड्डी निकल के सूंघने लग जाता है..






विशाल को अपना पंतय सूंघता देख रागिनी को भी अजीब सनसनी होने लगती है लेकिन वो फिर भी अंदर से आवाज़ लगते हुवे एक बार फिर से बोलती है मिला क्या??? जल्दी दे कितना टाइम लगता है?

विशाल हड़बड़ाते हुवे रागिनी को जवाब देता है- हाँ बड़ी माँ अभी लाया….

इस हड़बड़ाहट में और रागिनी को टॉवल देने में विशाल के हाथो से पंतय वही गिर जाती है जिसपे वो ध्यान दिए बिना रागिनी को टॉवल देने के लिए बाथरूम की तरफ बढ़ जाता है जहां रागिनी अपने आधे गीले बदल को बहार निकले उसे hi देख रही थी… अब वो उसे देख रही थी या अपना आधा गिला बदन उसे दिखा रही थी इसका जवाब तो रागिनी के पास hi हो सकता है.. हाँ लेकिन उसके इस अवस्था ने विशाल को उसकी एक चुकी के दर्शन जरू करवा दिए थे










और विशाल के लुंड का नींद ऋचा के नींद जितना मजबूत नहीं था उसके लुंड को जागने के लिए इतना दृश्य hi काफी था…

उसके लुंड ने करवट लेना सुरु कर दिया था और रागिनी भी अपने मोठे चिकने और गीले जांघो को बहार निकल के अपने भतीजे विशाल को अचे से दर्शन करवा रही थी जिस से उसके एक साइड की कमर से टपकती पानी की बुँदे अपना रास्ता बनाते हुवे उसके कुछ बुँदे जांघो से होत्ते हुवे निचे गिर रही थी तो कुछ बुँदे उसके चुटकी तरफ बहने लगी थी हलाकि की विशाल को रागिनी के छूट के तो दर्शन नहीं हुवे थे पर ये अनदेखा तोहफा देखने से ज्यादा असरदार था….

विशाल फ़ौरन तेज़ कदमो से रागिनी की तरफ बढ़ता है जिस से उसका तना लुंड झूलता हुआ रागिनी की साफ़ दिख रहा tha….vishal जल्दबाजी में खुद hi गेट पूरा खोल के घुस जाता है जहां रागिनी बिलकुल नंगी उसी का वेट कर रही थी लेकिन अंदर आने का नहीं उस से टॉवल लेने का और इस तारा अंदर घुसने से वो हडबडते हुवे विशाल को रोकने लगती है..

रागिनी- अरे अरे अंदर खान बहार से भी दे सकता है..

विशाल रागिनी की आवाज़ सुनते hi उसकी तरफ देखता है तो पता है की जल्दी जल्दी में वो अंदर घुस गया था जिस से विशाल रागिनी को सॉरी बोलते हुवे टॉवल उसकी तरफ बढ़ा देता देता है…






रागिनी एक अधेड़ उम्र की जट्टी जिसका हरे क अंग इस उम्र में और भी ज्यादा कामुक हो चला था ऐसे गीले होने पे विशाल के ऊपर जैसे बिजलिया गिरा रही हो विशाल एक पल को रागिनी के हुस्न में खो hi जाता है लेकिन आगे hi पल होश में आते हुवे अपना सर दूसरी तरफ घुमा लेता है और टॉवल रागिनी के तरफ बढ़ा देता है…

विशाल- सॉरी बड़ी माँ जल्दी जल्दी में गलती से…

विशाल के भोले पैन को देख रागिनी मुस्कुराने लगती है और उसके हाथो से टॉवल लेते हुवे उसे कहती है-

रागिनी- अरे क्या हो गया क्यों दर रहा है तेरी बड़ी माँ hi तो हँ ो जाता है कभी कभही चल हैट अब मुझे बहार आने दे और इतना कह के रागिनी टॉवल लप्पेट के बहार आने लग जाती है…

रागिनी अपने गीले बदन को पोछते हुवे विशाल को hi देख रही थी जो रह रह के तिरछी नज़रो से रागिनी के नंगे जिस्म को देखने की कोशिश कर रहा था जिसके रागिनी थोड़ा मज़ा लेते हुवे विशाल से कहती है…

रागिनी- ाचा सुन यहां खड़ा hi है तो जरा ालमिरह के दरवर से मेरे ब्रा पंतय भी निकल के दे दे…

रागनी अपने मुँह से ब्रा पंतय बोल के विशाल के तेज होती धड़कनो पे एक और वॉर कर देती है उसे मजा भी भरपूर आ रहा था आखिर ये उसका फव गेम जोट है अपने जिस्म दिखा के लोगो को ललचाना और खास कर जब देख के तरसने वाला अपने hi परिवास से ह ओहो वो भी bête के उम्र का तो मज़ा दोगुना हो hi जाता है…

विशाल- मैं बड़ी माँ???

रागिनी- हाँ तू… और कोई है क्या यहां?

इस्पे विशाल हस्ते हुवे नहीं बोलता है और जल्दी जल्दी में उसे कुछ कपडे ला के बीएड पे उसके सामने रख देता है और फिर फ़ौरन पलट जाता है…






विशाल की यही खास बात थी जिस से लोग उसके तरफ आकर्षित हो जाते थे वो चुदाई के वक़्त औरतो को इतना जलील करता है जैसे रंडी या सस्ती गस्ती हो तो वही वो बाद में इज़त भी उतनी hi देता है की लोग खुद उसके बारे में ाचा सोचने लग जाते है और यही हाल इधर रागिनी का भी था कोई और होता तो सईद रागिनी के हुस्न को आँखों से पि रहा होता लेकिन विशाल रागिनी के दिए काम को कर देने के बाद फ़ौरन अपनी नज़रे घुमा लेता था.. रागिनी भी अब बेफिक्र होते हुवे अपने शरीर से टोलिया हटा के पूरी तरह नंगी हो के अपने बदन को पॉच रही थी उसने फिर से विशाल की चिकोटी लेते हुवे खा

रागिनी- अरे उधर खान देख के बाटे कर रहा है मैं तो इधर हु..

विशाल- हाँ बड़ी माँ पता है और अगर हो गया हो तो मैं जाऊ…?

इस्पे रागिनी उसके भोले पैन पे हस्ते हुवे जाने को कह देती है पर ये विशाल का भोला पैन नहीं मछली को डलने वाला चारा था यही चारा दाल के उसने अपनी माँ बहन को छोड़ा था अब शिकार में रागिनी फसने वाली थी…

रागिनी नहा धो के पूजा कर के आज किचन में खाना बनाने आ गयी थी वो खान ेके लिए कुछ बना रही थी…






रागिनी ने एक पिंक कलर की साड़ी और मैचिंग ब्लाउज पहना था.. ब्लाउज पीछे से बस एक डोरी से बंधी थी बाकि उसका पूरा पीठ नंगा hi था.. रसोई घर में हो रहे गर्मी से रागिनी के जुड़े से टपक रहे पहिने की बून्द उसके चिकने पीठ से होते हुवे उसके दोनों कूल्हों के बिच की घाटियों में खोने लगा था मनो किसी नदी की धरा को समुद्र में मिलने की कोई जल्दी ho…aura आगे से भी उसके चुचिओ के गहरी में समता पसीना उसके आगे की दोनों घाटियों को और ज्यादा चमकाने लगा था,…

विशाल एक बार फिर से पानी पिने के बहाने कीतचन में आता है जहां रागिनी का ये सौंदर्य देख उसमे डूबने लग जाता है… वो इस बार रागिनी को पीछे से जा के गले लागलेता है और अपने खड़े लुंड का दबाव उसके गांड के दरारों के बिच बढ़ते हुवे बड़े पैर से कहता है

बड़ी- माँ तुम कितनी सूंदर लग रही है..

विशाल के लुंड के दबाव अपने दरारों पे पड़ने से रागिनी को एक न्य एहसास होता है उसका मुँह खुल जाता है लेकिन वो आवाज़ अपने गले में hi दबा लेती है,…






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रागिनी- चल हैट यहां से काम करने दे .. आज दिखा है तुझे की तेरी बड़ी माँ सूंदर है और हसने लगती है..

विशाल भी बिना कदम पीछे किये रागिनी को अपने लुंड का एहसास करते हुवे कहता है नहीं तो ऐसा तो नहीं है तुम कितनी अछि हो हमारे लिए खाना बनाते हो इतना ाचा ाचा…

विशाल रागिनी के टैरिफ के बहाने उसे ये एहसास भी करवा रहा था की उसके पास रागिनी के लिए एक मजबूत तोहफा है जो सईद बाकिओ के मुकाबले रागिनी को ज्यादा संतुष्ट कर सकता है..

रागिनी- ाचा चोर वर्ण खाना जल जायेगा..

विशाल- ठीक है पहले एक बात बताओ फिर छोड़ूंगा..

रागिनी- पूछ क्या पूछना है

विशाल- आप हमेशा साड़ी hi पहनते हो और कुक नहीं पहनते क्या

रागिनी- और कुछ मतलब ? पहनती तो हूँ तेरे तय कभी किसी चीज के लिए नहीं रोकते…

विशाल- ाचा इतने दिन हुवे आये मैंने तो नहीं देखा कभी कुछ और पहने

रागिनी- ाचा मतलब अब तुझे दिखने के लिए पहनना होगा

विशाल रागिनी के गीले गार्डन पे अपने गरम सांसो को चोरते हुवे लगातार अपने लुंड का दबाव बादहए जा रहा था जिस से रागिनी भी कसमसाने लगी थी…

विशाल- हाँ बड़ी माँ मुझे भी देखना है आपको अलग लग ऑउटफिट में..

रागिनी- ाचा ठीक है कभी पहनूंगी तो दिखा दूंगी

विशाल- कभी क्यों आज क्यों नै अभी थोड़े दिन में सभी बिजी हो जायेंगे और हम दिल्ली चले जायेंगे आज मौका है प्लस आज दिखा दो

विशाल के इस जिद को पहले तो रागिनी मन कर्त है लेकिन विशाल के लगातार बढ़ रहे दबाव से बेबस हो के वो अपने घुटने तक देती है और कहती है ठीक है तू मेरे कमरे में जा के बैठ मैं आती हूँ..

रागिनी के मान जाने से विशाल खुसी के मरे उसके गलो को चुम लेता hai..aur इस तरह विशाल के द्वारा गलो को चूमने से रागिनी की सांसे भी बढ़ जाती है जिसे वो अपनी गार्डन उठाने लगती है और और इस सुराही नुमा गार्डन के उठते hi विशाल भी बेकाबू होते उसके उसके गार्डन से टपक रही पसीने की एक बून्द को अपने होंठो से पिटे हुवे रागिनी के गार्डन को चुम लेता है.. और इस से पहले रागिनी कुछ रिएक्शन दे पति विशाल तेज़ कदमो से भागते हुवे रागिनी के कमरे की तरफ दौड़ पड़ता है और जाते जाते बोल जाता है..






विशाल- थैंक यू बड़ी माँ तुम वर्ल्ड की बेस्ट बड़ी माँ हो..

अब कोई बचा इतना प्यार दिखाए तो माँ उसपे नाराज़ कैसे हो सकती है रागिनी भी विशाल के इन हरकतों पे है देती है और अपनी छूट को साड़ी के ऊपर से hi मसलते हुवे बड़बड़ाती है..

रागिनी- uuuuuuuuuuufffffffffff कितना मोटा केला था और तगड़ा भी जैसे मेरी साड़ी फाड़ के मेरे गांड इ घुस जायेगा… काश पंत के बहार से देख पति पर कोई नहीं देखती हु सच में डैम है या बस उतावलपान था …

इधर विशाल रागिनी के कमरे में बैठा उसका इंतजार कर रहा था की तभी रागिनी थोड़ी देर बीतने पे कमरेमे आ जाती है..

रागिनी- है नाब बोल क्या दखना है…

विशाल जो आपका दिल करे ..

इस्पे रागिनी विशाल को कुछ कपडे निकल के देती है और कहती है देख ले यही है…

विशाल- ऐसे क्या देख ले कपडे नहीं कपड़ो में आपको देखना है…

रागिनी एक बार फिर से सोशल के बातो पे हसे लगती है .. अब क्या तेरे सामने बदलू मैं???

विशाल- आप उधर बदल लो न मैं नहीं देखूंगा और जब हो जाये तब बता देना//…

रागिनी काफी देर सोचने के बाद कहती है ठीक है मैं पीछे hi बदल रही हु पलटना नहीं वर्ण दखने को नहीं मिलेगा…

विशाल- थी है बड़ी माँ प्रॉमिस

और रागिनी उनमे से दो तीन कपडे निकल के पीछे की तरफ चल देती है जिधर विशाल का पीठ था…

रागिनी एक पिली टशरत और येलो स्कर्ट को पहन लेती है और विशाल को दिखते हुवे कहती है ले देख ले






रागिनी ने टशरत जितना छोटा पहना था उसकी उतने hi स्कर्ट लौ थी जहां से उसके छूट की धारिया देखि जा सकती थी या वो जगह जहां से जहां कल से पहले तक तो रागिनी की झांटे हुवा करती थी लेकिन कल उसे वैक्स करवा लेने के बाद अब उस जगह पे सिर्फ वो छोटी छोटी छेद नज़र आ रही hai…uske ऊपर रागिनी की गहरी गोल नाभि और चर्बीदार पेट

विशाल रागिनी के ीे रूप में खो hi जाता है…

विशाल- वाओ बाबी माँ तुम तो एक डैम पताका लग रही हो

रागिनी- हैट बदमाश बड़ी माँ को पताका बोलता है..

विशाल- सॉरी बड़ी माँ वो फिल्मो में ऐसे hi टैरिफ करते है न तो वही वर्ड आ गया..

इस्पे रागिनी हसने लगती है और आगे पीछे घूम के उसे अपने मटकते चुत्तड़ो के भी दर्शन करा देती है..

रागिनी- च लैब ये दूसरा वाला दिखा देती हु फिर और भी काम है मुझे इसके बाद को जिद नहीं करना..

विशाल- ठीक है बड़ी माँ और विशाल एक बार फिर से रागिनी के बोलने से पहले पलट जाता है जिसे देख के रागिनिका दिल उसपे एक बार को फिसल जाता है…

थोड़ी hi देर में रागिनी विशाल को पलटने को कहती है.. इस बार उसने एक शार्ट एंड एक क्रॉप टॉप पहना था..

उसकी गोरी चिकनी और मोती मोती गुली हुई जंघे देख विशाल का मन उसे पकड़ के मसलने को होता है लेकि विशाल इस खेल का एक बहुत शातिर खिलाडी है उसको अचे से पता है जल्दबाजी करने से काम और नाम दोनों बिगड़ सकता है इसलिए वो कोई जल्दबाजी नहीं दिखता लेकिन कुछ चाप तो चूर्ण hi था जिस से काम को आगे खींचा जा सके ..

रागिनी एक बार फिर से उसे आगे और पीछे दोनों साइड से अपने कामुक रूप के दरसघं करा रही थी शॉर्ट्स इतने टाइट थे की उसकी गांड में बिलकुल धस गया था मनो ुस्कने शॉर्ट्स पहना hi नाह हो बल्कि ये उसके चुत्तड़ hi हो…






विशाल- बड़ी माँ तुम बहुत हॉट हो सच में

रागिनी- हीहीह एचजी अब हॉट हो गयी और उसके करीब आ के बैठ जाती है..

विशाल- हाँ बड़ी माँ साड़ी में तुम माँ लगती है बूत इसमें तो मेरी कॉलेज फ्रेंड लग रही हो

रागिनी- ाचा अब ये बुढ़िया तेरी कॉलेज फ्रेंड लग रही है इतनी छोटी हो गयी इन कहते कपड़ो में

विशाल- हाँ बड़ी माँ रम सच में बहुत हॉट हो और इतना कह के वो रागिनी के चुचिओ के तरफ मुँह आगे बढ़ा के किश कर लेता है..

रागिनी- अरे अरे ये काया कर रहा है गधे

विशाल- बड़ी माँ इस्पे लिखा है न लेटस किश

विशाल के इस बात पे रागिनी जोर से है देती है… ाचा हुआ लेटस किश hi लिखा है कुछ और नहीं वर्ण तू तो अपनी बड़ी के साथ वो करना सुरु कर देता..

विशाल- और क्या बड़ी माँ?

रागिनी- चल चल रहने दे जैसे तुझे पता hi नहीं…

विशाल- पर बड़ी माँ ये तो शार्ट ड्रेस है कुछ और हॉट तोए नहीं है ोनेपीएस टाइप

रागिनी- है वो भी है पर उसके लिए मेकअप करना पड़ता और उतना टाइम खान है अभी सारा का पड़ा है वो तुझे फिर कभी दिखा दूंगी…

विशाल अपना मुँह लटकते हुवे- क्या बड़ी माँ वही तो देखना था और वही नहीं दिखाए

विशाल का ऐसे लटकता मुँह देख के रागिनी कहती है ये ले फोन इसमें कुछ फोटोज होंगे अलग अलग ड्रेस में जॉब hi है मेरे पास तू देख ले तब तक मैं चेंज कर लू

विशाल खुश हो के रागिनी के हाथो से फोन ले क ीक एक कर के साडी फोटोज देखने लग जाता है… रागिनी भावनाओ में बह के अपना मोब विशाल क दे तो दिया था पर उसे पता नहीं था या सईद भूल गयी थी की उसके फोन में कई गहरे राज भी है या उसने जान बुझ कर दिया ये तो वही जाने..

विशाल ेके क कर के फोटो देखने लग जाता है की तभी कुछ फोटोज ऐसी आती है जिसे देख विशाल की आंखे फैट जाती है उसमे एक था रागिनी का सेल्फी जिसमे वो बिलकुल नंगी छूट फैलाये बैठी थी..






विशाल- वाओ बड़ी माँ मैंने तो जितना सोचा तुम उस से कही ज्यादा हॉट होए क डैम जहर

रागिनी- हहह क्या क्या बोलता है हॉट पताका जहर..

फिर विशाल को एक और फोटो मिलता है…






unique list alphabetically sorted

इसमें उसके हाथो में ग्रे पंतय होती है और वो अपनी सेल्फी ले रही थी..

विशाल- वाओ बड़ी माँ ग्रे कलर तो बहुत सूत करता है आप पे

रागिनी- ग्रे में कौन सी ड्रेस देख ली तूने मुझे तो यद् नहीं… अभी आप चंगे कर के आओ तो देख लेना आप hi का फोन है.








एक और सेल्फी जिसमे उसके बड़े रसदार चुचिओ को दबा के उसने फोटो लिया था…

विशाल- वाओ

रागिनी- की दिख गया तुझे तब से वाओ वाओ कर रहा है रुक मैं आती हु फिर मुझे व् दिखाना अपना ये वाओ वाओ

अभी इनसब से उबरा भी नहींथा बेचारा की उसके आगे 2,3 वीडियो आ जाती है…






पहले वीडियो में रागिनी किसी के लुंड के ऊपर जोर जोर से कूद रही थी और पीछे खड़ा उसका पति दिनेश अपना लुंड मसलते हुवे वीडियो बना रहा था… तो वही दूसरे वीडियो में

रागिनी को बीएड पे लेता के उसका चाचा अरविन्द उसे छोड़ रहा था और कोई दूसरा बाँदा वीडियो बना रहा था जिसके ऊँगली को रागिनी मुँह में भर के चूस रही थी…






ये सारा सन देख के विशाल का लुंड फटने को होने लगता है…

विशाल को समझ आ गया था की रागिनी को सईद पता नहीं वो किन फोटो के लिए टैरिफ कर रहा है और इस से पहले वो आ के मोबाइल चीन ले वो साडी फोटोज एंड वीडियो अपने फोन में ट्रांसफर कर लेता है और ट्रांसफर कर लेने के बाद पूछता है..

विशाल- बड़ी माँ इनमे से कुछ पिक्स मई ले लू प्लस

रागिनी- हाँ ले ले जो तुझे अछि लगे इसमें पूछने का क्या है बीटा है तू मेरा…

इसके बाद का भाग अगले part में….

क्या लगता है तीसरा शिकार कितना दूर है???

रागिनी विशाल को फसा रही है या विशाल रागिनी को???
 
गाइस अलका ऑस्ट्रेलिया अपने बेटे आदि के पास पहुंच गयी है अब वहां जा के वो क्या गुल्ल खिलाती है उसके लिए इस कहै को पढ़ें सुरु कर दो...

कामुक अलका 2 (अलका की बढ़ती वासना)

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अडुल्टेरी - कामुक अलका 2 (अलका की बढ़ती वासना)

hello गाइस ये कहानी कामुक अलका का hi एक्सटेंशन part है जिसमे अलका अब एंड से ऑस्ट्रेलिया मेलबोर्न केन नार्थ क्लीदे (नक) अपने बेटे के पास आ गयी है कुछ काम से भी और अपने बेटे से मिलने के लिए भी.. सो कहानी के इस भाग में हम अलका के सेक्स एडवेंचर देखेंगे विदेश की धरती pe...aur समय के...

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किसी रात घर के किसी कोने में

sssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है???? कोई देख लेगा चोर बहुत ज़िद्दी होता जा रहा है तू






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अपडेट-67

विशाल मुझे गांड मारवणी है मेरी गांड मरेगा....

विशाल- सच में...?

..... हाँ बहुत खुजली हो रही मेरे गांड में इसकी खुजली मिटा दे....

कौन है जो खुद विशाल को अपनी गांड ऑफर कर रही है....

टुमारो एवंग बे रेडी गाइस
 
आज शाम....

अपडेट-66 (बड़ी माँ के गुलाब जामुन)

मुझे भी गुलाब जामुन खाना है बड़ी माँ

रागिनी- uuuuuuuuufffffffffffffffff बस कर बेटे ये पाप है.....




 
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