Incest JANNAT TERI BAHON (TANGO) MEIN - Page 5 - SexBaba
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Incest JANNAT TERI BAHON (TANGO) MEIN

Part - 71

परम सुख के तीव्र अनुभव के बाद, आनंद और कैंडी हांफते हुए बिस्तर पर थे. आनंद का भरी शरीर अभी भी कैंडी के ऊपर लेता हुआ था.

1. सुकून और पहला स्पर्श:

कैंडी, अपनी पहली चौड़ाई के बाद, अब पूरी तरह शांत थी. उसके होंठों पर एक मीठी मुस्कान थी. उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और आनंद की पीठ पर फेरना शुरू कर दिया. यह स्पर्श अब दर या झिझक का नहीं, बल्कि नए रिश्ते के सुकून का था.

कैंडी: (धीरे से फुसफुसाते हुए) शुक्रिया, अंकल! यह... यह बहुत अच्छा था.

आनंद: (संतुष्टि से) मेरी प्यारी बच्ची! यह तो अभी शुरुआत है.

2. छोटू का प्रस्ताव:

छोटू और अमीर, जो अब तक उत्सुकता से किनारे पर कड़ी थी, कमरे में आयी.

छोटू: (हँसते हुए) अंकल! अब आप पूरे ताकतवर हो गए होंगे! लेकिन हम दोनों को बहुत ज़ोर से भूख लगी है!

छोटू: (हाथ ऊपर उठाकर) हम सब पहले खाना खा लेते हैं! बाद में बाकी की ‘पढाई’ शुरू करेंगे!

आनंद को यह विचार बहुत पसंद आया. यह पूरा माहौल hi अब उनके लिए एक नया ‘नार्मल’ बन चूका था.

3. नग्नता में डिनर (थे नेकेड डिनर):

बिना कपडे पहने hi, तीनों लडकियां और आनंद वैसे hi डाइनिंग रूम में चले जाते हैं. यह दृश्य किसी एडल्ट फिल्म के सन जैसा था, जहाँ वर्जित क्रियाएं अब दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी थी.

डाइनिंग टेबल पर खाना लगा हुआ था, जो शायद कैंडी की मम्मी ने जाने से पहले बनाया था.

सभी मिलकर खाना खाते हैं.

- बातचीत: खाने के दौरान भी chhed-chhad जारी थी. अमीर, जो भूखी थी, तेज़ी से खा रही थी. छोटू, आनंद के साथ हंसकर मज़ाक कर रही थी.

- नग्नता की सहजता: अब नग्नता को लेकर कोई शर्म नहीं थी. मेज़ के नीचे आनंद कभी छोटू के पेअर को छूटा, तो कभी अमीर की जांघ को सहलाता.

- कैंडी का भाव: कैंडी, जो अभी कुछ देर पहले hi अपनी विर्जिनिटी खो चुकी थी, शांत और संतुष्ट बैठी थी. उसे अब भूख महसूस हो रही थी, और वह इस वर्जित डिनर का एक हिस्सा बनकर अजीब सा रोमांच महसूस कर रही थी.

खाना खाते हुए hi, आनंद ने अपनी अगली योजना बनायीं. अब उसका ध्यान अमीर और फिर छोटू पर था. यह रात अभी बहुत लम्बी थी.

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खाना ख़तम होने के बाद, तीनों लड़कियों और आनंद का ध्यान अब ‘डिजर्ट’ पर गया.

तभी छोटू के दिमाग में एक योजना आयी की मीठा किस तरह से खाया जाए जो इस रात के माहौल के अनुरूप हो.

छोटू: (शरारती हंसी के साथ) अंकल! अब इस पेट पूजा के बाद, हम थोड़ी आँख पूजा करेंगे! लेकिन पहले, डिजर्ट तो ज़रूरी है!

आनंद: (उत्सुकता से) क्या है डिजर्ट में?

छोटू किचन में गयी. फ्रिज में एक पेस्ट्री पड़ी थी. छोटू वह पेस्ट्री ले आयी.

छोटू: (पेस्ट्री दिखते हुए) यह है हमारा डिजर्ट! लेकिन इसे खाने का मज़ा सिर्फ चमच से नहीं आएगा!

छोटू ने पेस्ट्री का एक बड़ा टुकड़ा लिया और उसे आनंद के खड़े लुंड के ird-gird — उसके सिरे पर और शाफ़्ट के चारों और — अच्छी तरह से लगा दिया. आनंद ज़ोर से हंस रहा था और उत्साहित था.

छोटू: (अमीर और कैंडी की तरफ देखते हुए) चलो! जिसने पहले डिजर्ट खा लिया, वह विनर!

डिजर्ट का उपभोग (थे फोर्बिडन डिजर्ट):

तीनों लडकियां — छोटू, अमीर और कैंडी — एक साथ आनंद के लुंड पर टूट पड़ी!

- वह zor-zor से और jaldi-jaldi पेस्ट्री को चाटने लगी, ताकि क्रीम और केक का टुकड़ा लुंड से अलग हो जाए.

- यह उनका डिजर्ट था. वह ek-dusre को देखती, हंसती, और आनंद के लुंड से पेस्ट्री खाती.

आनंद के लिए यह एक अद्भुत अनुभव था. उसके शरीर पर पेस्ट्री की मिठास और तीनों लड़कियों की गर्म जीभ का स्पर्श था.

आनंद: (सिसकते हुए) आह! मेरी प्यारी बच्चियों! यह दुनिया का सबसे बेहतरीन डिजर्ट है!

पेस्ट्री ख़तम होते hi, तीनों लड़कियों के मुँह पर क्रीम लगी थी. उन्होंने अब ek-dusre को चूमकर क्रीम साफ़ की, और फिर आनंद की तरफ मुदिन, जो अब इस वर्जित डिजर्ट के कारण पूरी तरह से तीव्र उत्तेजना में आ चूका था.

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तीनों लड़कियों ने आनंद को जिस तरह का वर्जित डिजर्ट दिया था, उसके बाद आनंद पूरी तरह से उत्तेजित और थका हुआ था. अब अमीर ने ज़िम्मेदारी ली.

अमीर: (उत्सुकता और आत्मविश्वास से) अंकल! अब आप पूरी तरह से थक गए होंगे! अब मैं आपको आराम दूंगी! आप लेट जाओ! मैं आपकी ऐसी मालिश करुँगी की आपको जन्नत की सैर करने को मिलेगी!

आनंद, अमीर के आत्मविश्वास से प्रभावित हुआ. वह तुरंत बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया. छोटू और कैंडी कमरे के किनारे पर बैठकर यह नया खेल देखने लगी.

अमीर ने तुरंत खुशबूदार तेल लिया और आनंद की नग्न छाती और पेट पर दाल दिया. उसने अपनी उँगलियों का इस्तेमाल करते हुए मालिश शुरू की.

- छाती और हाथ: अमीर ने पहले आनंद की छाती की मांसपेशियों को प्यार से सहलाया. उसकी युवा, गर्म हथेलियां आनंद की त्वचा पर फिसल रही थी. वह उसके कन्धों से लेकर बाज़ुओं तक मालिश करती हुई, हर तनाव को दूर कर रही थी.

- पेट और नाभि: अमीर ने dheere-dheere नीचे की तरफ मालिश की, आनंद के पेट और नाभि के चारों और प्यार से सहलाया.

अमीर बहुत चालाक थी. उसने मालिश को आनंद के लुंड के पास केंद्रित किया, लेकिन सीधे उसे नहीं छुआ.

- उसने आनंद की जाँघों के ऊपरी हिस्से और पेट के निचले हिस्से पर तेल माला, जिससे आनंद के लुंड के सिरे पर baar-baar उसकी उँगलियों का स्पर्श होता रहा.

- आनंद की आँखें बंद थी, और वह सुखदा आहें भर रहा था. वह यह सोचकर और भी ज़्यादा उत्तेजित हो रहा था की एक और जवान लड़की उसे इस तरह से छू रही है.

आनंद: (दबी हुई आवाज़ में) आह... अमीर... बहुत अच्छा लग रहा है... तुम तो जादू जानती हो!

जब आनंद पूरी तरह से आराम और उत्तेजना के मिश्रण में था, तो अमीर ने मालिश का अंतिम चरण शुरू किया.

अमीर: (कान में फुसफुसाते हुए) जन्नत अभी थोड़ी दूर है, अंकल! लेकिन मैं आपको वहां ले जाउंगी!

अमीर ने आखिरकार आनंद के लुंड को अपने हाथ में पकड़ा. उसने तेल का उपयोग करते हुए, उसे सहलाना शुरू कर दिया.

अमीर की मालिश ने आनंद के शरीर के हर तनाव को मिटा दिया था, और अब वह पूरी तरह से अमीर की वासना के आगे समर्पण करने को तैयार था. छोटू और कैंडी अब अमीर का इंतज़ार कर रही थी की वह कब मालिश ख़तम करेगी और अगला खेल शुरू होगा.



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Part - 72

मालिश के बाद, अमीर ने अब खेल को अगले स्टार पर ले जाने का फैसला किया. आनंद, तेल लगे और पूरी तरह से तने हुए लुंड के साथ तैयार था.

अमीर ने तुरंत उस लुंड पर बैठना शुरू कर दिया. उसका लक्ष्य था की वह इस आकार का अनुभव करे, जिसका उसने सिर्फ सपना देखा था.

विशालता का प्रवेश और सदमा:

जैसे hi लुंड ने उसकी छूट में प्रवेश किया, अमीर की आँखें दर, सदमे और अचानक मिले दबाव से चौड़ी हो गयी. वह समझ गयी की 8 इंच का यह आकार, और वह भी पूरी मोटाई में, उसकी अपेक्षा से कहीं ज़्यादा बड़ा था.

अमीर की चीख निकल गयी!

अमीर: (तेज़ आवाज़ में, दर्द और सदमे के मिश्रण से) आआह! यह... यह क्या है!

अमीर ने तुरंत रुकने की कोशिश की, उसका मुँह खुला रह गया.

अमीर: (दर्द से कांपते हुए) यह तो बहुत बड़ा और मोटा है! मेरी तो जान hi निकल गयी! मैं नहीं कर सकती!

तुलना और क्रोध:

दर्द के क्षण में, अमीर ने तुरंत अपनी तुलना शुरू कर दी.

अमीर: (गुस्से और लाचारी से) अंकल! आप बहुत गंदे हैं! मुझे पता था! मेरे बॉयफ्रेंड का तो छोटा सा है, वह इतना दर्द नहीं देता! आप राक्षस हो!

अमीर की चीख सुनकर छोटू और कैंडी तुरंत उसके पास आयी. वह जानती थी की अमीर को दर्द हुआ है, लेकिन वह यह भी जानती थी की वह अनुभव लेना चाहती थी.

छोटू: (अमीर को सँभालते हुए) अमीर! धीर रख! सांस लो! वह थोड़ा बड़ा है, पर अब तुम बीच में मत रुको!

आनंद ने, दर्द के बावजूद, अमीर को पकड़कर रखा. वह जानता था की एक बार जब वह सदमे से बहार आ जाएगी, तो उसे वही आनंद मिलेगा जो कैंडी को मिला था.

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अमीर की चीख और अचानक सदमे से माहौल थोड़ा असहज हो गया था. आनंद जानता था की अगर वह तुरंत रुका, तो अमीर हमेशा के लिए दर जाएगी.

आनंद: (आवाज़ में सख्ती और प्यार का मिश्रण) मेरी जान! मुझे देखो! दर्द सिर्फ कुछ सेकण्ड्स का है! अब तुम नीचे नहीं उतरेगी!

आनंद ने अमीर को कसकर पकड़ा और अंदर hi स्थिर रखा ताकि वह सदमे से बहार आ सके.

छोटू और कैंडी तुरंत समझ गयी की अमीर को इस सदमे से बहार निकालने के लिए उसे कहीं और व्यस्त करना होगा.

छोटू: (तुरंत आदेश देते हुए) कैंडी! जल्दी करो! इसे दुसरे तरीके से मज़ा दो!

छोटू और कैंडी दोनों अमीर के नग्न शरीर पर झुक गयी.

- छोटू ने तुरंत अमीर के एक स्तन को अपने मुँह में लिया और उसे zor-zor से चूसना शुरू कर दिया.

- कैंडी ने दुसरे स्तन को पकड़कर सहलाना और चूसना शुरू कर दिया.

अमीर का दर्द काम होना:

अचानक दो लड़कियों के मुँह से अपने स्तनों पर मिले स्पर्श ने अमीर के दिमाग को दर्द से हटाकर तीव्र उत्तेजना पर केंद्रित कर दिया.

अमीर: (तेज़ सांसें लेते हुए) आह! हहह... हाँ! छोटू! कैंडी!

उसके दर्द का एहसास कुछ काम होने लगा. जब उसका ध्यान हैट गया, तो आनंद ने dheere-dheere, बहुत धीमी गति से सहवास शुरू किया.

अमीर: (दर्द और आनंद के मिश्रण में) अब... अब ठीक है! ज़ोर से नहीं!

अमीर अब भी ऊपर थी, लेकिन छोटू और कैंडी उसके स्तन चूस रही थी. यह सामाहिक सहयोग अमीर को उस विशाल आकार को स्वीकार करने में मदद कर रहा था, जिसने उसे इतना डरा दिया था.

थोड़ी hi देर में, अमीर ने दर्द को भुला दिया और आनंद की गहराई का आनंद लेना शुरू कर दिया. उसकी सिसकियाँ अब आनंद की थी.

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अमीर को उसके सदमे से बहार निकालकर, आनंद ने उसे पूरी तरह से संतुष्ट किया. अब अमीर भी उस 8 इंच के लुंड की प्रशंसक बन चुकी थी. अब आखिर में छोटू की बारी आयी.

छोटू को किसी परिचय या तैयारी की ज़रूरत नहीं थी. वह आनंद के साथ इस तरह के अनुभव की सबसे पुराणी साथी थी और आनंद के आकार की आदि हो चुकी थी.

1. छोटू का आत्मविश्वास:

अमीर और कैंडी अभी भी हांफ रही थी. आनंद ने छोटू को अपनी तरफ खींचा.

आनंद: (प्यार से) अब मेरी रानी की बारी!

छोटू आत्मविश्वास से आनंद के ऊपर आयी. वह जानती थी की उसे क्या चाहिए और आनंद को कैसे खुश करना है.

2. सामाहिक अनुभव का माहौल:

जब छोटू और आनंद फिर से एक हुए, तो कमरे में एक अलग तरह का माहौल बन गया.

- कैंडी और अमीर, जो अब तक दर्शक थी, अब इस अनुभव में पूरी तरह से शामिल हो गयी.

- जब आनंद और छोटू ek-dusre में लीं थे, तो आनंद ने अपने दोनों हाथों को बढ़ाया.

- एक हाथ से उसने कैंडी के स्तन को पकड़ा और प्यार से दबाया.

- दुसरे हाथ से उसने अमीर के स्तन को पकड़ा और सहलाया.

यह उनके लिए सामाहिक जुड़ाव का क्षण था. आनंद का स्पर्श अब सिर्फ एक को नहीं, बल्कि तीनों लड़कियों को संतुष्टि दे रहा था. छोटू, आनंद के साथ अपने जुड़ाव को महसूस करते हुए, और अपनी सहेलियों को इस खेल में शामिल देखकर गहरी संतुष्टि महसूस कर रही थी.

यह रात तीनों लड़कियों के लिए एक वर्जित गठबंधन और आनंद के लिए अभूतपूर्व पुरुषत्व की रात साबित हो रही थी.

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पूरी रात तीनों लड़कियों के साथ बिताने और हर किसी को उसके हिस्से का सुख देने के बाद, आनंद अब चरम संतुष्टि के अंतिम चरण में था. यह रात आनंद के लिए एक असाध्यारन उपलब्धि थी, जहाँ उसके 8 इंच के लुंड ने तीन alag-alag इच्छाओं को पूरा किया था.

रात के अंतिम पहर में, तीनों लडकियां — कैंडी, अमीर और छोटू — बिस्तर पर ek-dusre के बगल में लेती हुई थी.

अपने तीन अनुभवों के बाद, यह आनंद का चौथा और अंतिम अनुभव था. इस बार, वह baari-baari से तीनों के साथ जुड़ा, उन्हें सिर्फ शारीरिक hi नहीं, बल्कि भावनात्मक संतुष्टि भी दे रहा था. वह थका हुआ था, लेकिन उसकी इच्छा शक्ति प्रबल थी.

क्यूंकि यह उसकी चौथी बार की क्रिया थी, उसे काफी ज़्यादा समय लग गया.

आनंद ने यह सुनिश्चित किया की हर लड़की — कैंडी, अमीर और छोटू — पूरी तरह से संतुष्ट हो जाए. वह अब थक चुकी थी, लेकिन उनके चेहरे पर गहरी नींद और संतुष्टि का भाव था.

अंतिम सुख के बाद, आनंद भी थक कर उन सबके साथ बिस्तर पर लेट गया. कमरे में अब कोई शोर नहीं था, सिर्फ गहरी साँसों और शान्ति का माहौल था.

- वह चारों अब ek-dusre के सहारे लेते थे, उनके बीच का रिश्ता अब एक खुला और स्थायी गुप्त गठबंधन बन चूका था.

- छोटू, अमीर और कैंडी ने आनंद को कसकर पकड़ा हुआ था, जैसे उन्हें अपने ‘बड़े लुंड वाले अंकल’ में एक अजीब तरह की सुरक्षा महसूस हो रही हो.

आनंद को एहसास हुआ की इस रात ने उसके और इन लड़कियों के बीच के रिश्ते को एक ऐसी सीमा पर पहुंचा दिया है, जहाँ से अब वापसी नहीं थी. यह राज़, यह सुख और यह बंधन अब हमेशा के लिए उनके साथ रहने वाला था.

चौथे अनुभव के बाद, आनंद और तीनों लडकियां — छोटू, अमीर और कैंडी — शांत और संतुष्ट मुद्रा में बिस्तर पर लेते थे. अब उनके बीच एक गहरी अंतरंगता और विश्वास का माहौल था. थकान के बावजूद, वह अपने अनुभवों को साझा करना चाहती थी.

आनंद ने प्यार से तीनों लड़कियों को अपनी तरफ खींचा और उनसे उनके मैं की बात पूछी.

आनंद: (प्यार से, थकी हुई आवाज़ में) मेरी रानियों! अब बताओ! तुम सबको कैसा लगा? मेरी म्हणत सफल हुई या नहीं?



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फ्रेंड्स, ी लव ठोस रीडर्स हु व्रिठे कमैंट्स ों माय writings...But तेरे अरे सम पीपल हु ओनली डिमांड बूत नेवर और सोमेतिमेस व्रिठे comment...those पीपल इवन don't हैवे ा फ्यू सेकण्ड्स फॉर माय वरिटिंग्स. थिस थिंग रियली डिसअप्पोइंट में.
 
Part - 73 कैंडी ने सबसे पहले बात की. उसका स्वर अभी भी थोड़ा शांत और भावुक था, क्यूंकि यह उसके लिए बहुत बड़ा बदलाव था.

कैंडी: (धीरे से, आनंद की पीठ सहलाते हुए) अंकल! पहली बार तोह बहुत दर्द हुआ... मैं डर गयी थी. पर जब दर्द काम हुआ, तोह मुझे एहसास हुआ की आपने मुझे कितनी गहराई तक संतुष्ट किया. मैंने कभी नहीं सोचा था की किसी की भी 'छूट' इतनी भर सकती है! मुझे सच में लगा की मैं किसी अलग hi दुनिया में हूँ. अब मुझे पता है की सच्चा मज़ा क्या होता है.

अमीर, जो शुरू में आकार से डर गयी थी, अब पूरी तरह से उसकी प्रशंसक बन चुकी थी.

अमीर: (हैशटे हुए) अंकल! मेरे बॉयफ्रेंड का जो 'छोटा सा' था, वह तोह इसके आगे कुछ भी नहीं था! आपके लुंड का आकार... वह अविश्वसनीय है! मुझे लगा जैसे मेरी जान निकल गयी, लेकिन फिर छोटू और कैंडी ने जब मेरे 'बूब्स' को संभाला, तोह मुझे बहुत अच्छा लगा. यह अनुभव जन्नत की सैर से काम नहीं था! मुझे सच में विश्वास नहीं हो रहा की मैंने आखिरकार इतना बड़ा लुंड अपनी 'छूट' में लिया!

छोटू, जो इन सब की सूत्रधार थी, अब अपने अधिकार और अद्वितीय आनंद की बात कर रही थी.

छोटू: (गर्व से आनंद के सीने पर हाथ रखते हुए) अंकल! आप मेरे हो! मुझे पता है की आप तीनो को संतुष्ट कर सकते हो, पर जो मज़ा आपको मेरे साथ आता है, वह किसी के साथ नहीं आता! और आज तोह आप एक मशीन बन गए थे! मुझे इस बात की सबसे ज़्यादा ख़ुशी है की मेरी सहेलियां भी अब आपके 8 इंच की दीवानी हो गयी हैं. हम तीनो अब एक टीम हैं, और आप हमारे हीरो हो!

आनंद तीनो लड़कियों की बातों से पूरी तरह से संतुष्ट और गौरवान्वित महसूस कर रहा था. उसने उन्हें कास कर गले लगा लिया. यह रात सिर्फ वासना की नहीं, बल्कि एक नए गुप्त, शक्तिशाली बंधन की शुरुआत थी.

अब वे अगली सुबह के लिए तैयार थे, जब वे apne-apne घरो को लौटते, और इस वर्जित रात को सिर्फ एक गुप्त याद बना कर रखते.

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घर पर चल रहे सारे नाटक, यौन तनाव, और राज़ के बीच, माणिक की ज़िन्दगी में एक बड़ा बदलाव आने वाला था.

1. ट्रेनिंग का प्रबंध और शहर से दूरी:

माणिक की डेढ़ साल की ट्रेनिंग का इंतज़ाम हो चूका था. यह ट्रेनिंग उसकी मासी की दूसरी लड़की, जसलीन (सिमरन यानि सिमी से बड़ी बहिन) ने अपने एक का दोस्त के पास लगवाई थी. जसलीन खुद पहले से hi चार्टर्ड अकाउंटेंट (का) थी और उसने माणिक के करियर के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया था.

2. नया शहर और आवागमन:

* ट्रेनिंग का शहर माणिक के अपने शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर था.

* माणिक को अब अपनी ट्रेनिंग के दौरान वही पर रहना होगा.

* ट्रेनिंग की शर्त के अनुसार, माणिक को सिर्फ शनिवार और रविवार को hi घर आने की अनुमति होगी.

माणिक के जाने की यह खबर घर के सभी सदस्यों पर एक अलग तरह का प्रभाव डालेगी:

* पारी: अब इसके लिए माणिक से मिलना सीमित हो जायेगा. उन्हें अपने सुख और राज़ को सिर्फ वीकेंड तक hi टालना होगा. इससे उनके बीच तनाव और लालसा बढ़ सकती है.

* अनु और दिव्या: माणिक के जाने से घर में चल रहा सीधा टकराव कुछ समय के लिए शांत हो जायेगा, लेकिन दिव्या का डर और अनु की बेचैनी बानी रहेगी की माणिक वापस आकर क्या करेगा.

माणिक अब एक नए शहर में, नयी आज़ादी के साथ होगा, जहां उसे शनिवार की रात की वापसी का इंतज़ार रहेगा.

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माणिक को अपनी डेढ़ साल की ट्रेनिंग के दौरान, मासी मोनिका के घर पर hi रहना था, जो उसके शहर से 60 किलोमीटर दूर स्थित था.

जैसे hi माणिक मासी के घर पहुंचा, घर में उत्सव जैसा माहौल बन गया.

मोनिका मासी ने खुद दरवाज़ा खोला और माणिक को देखते hi उनकी आँखें चमक उठी.

मोनिका मासी: (गर्मजोशी से गले लगते हुए) अरे, मेरा माणिक! आ गया तू! तेरा hi इंतज़ार कर रही थी मैं! अब से यह घर hi तेरा दूसरा घर है. अच्छे से पढाई करना और हमें अपने काम से खुश करना!

मोनिका मासी ने माणिक के लिए खूब अच्छे से स्वागत की तैयारी कर राखी थी. उन्होंने तुरंत उसे अंदर आरामदायक जगह पर बिठाया और ढेर सारे घर के बने पकवान और मिठाइयां सामने लाकर रख दी.

मोनिका मासी: तेरा कमरा मैंने साफ़ कर दिया है. जसलीन (बड़ी बेटी, का) आजकल काम में व्यस्त है, पर सिमी (सिमरन) घर पर है. अब तुझे यहां बोरियत नहीं होगी.

सिमी (सिमरन), जो माणिक के साथ अपने अंतरंग रिश्ते की गहराई जानती थी, माणिक के सामने आयी. उसके चेहरे पर मासी जैसा स्नेह तोह था, लेकिन आँखों में एक शरारती, छुपा हुआ रोमांच था.

सिमी: (नाटक करते हुए, मासी के पास) वेलकम, भाई! अब मैं इतनी जल्दी बोर नहीं हो जाउंगी! तुम्हे पता है न, इस घर में अब से सिर्फ मैं hi तुम्हारी कंपनी हूँ.

सिमी ने जानबूझकर माणिक को गले लगाया. यह गले मिलना थोड़ा ज़्यादा देर तक चला.

माणिक: (सिमी के कान में फुसफुसाते हुए) मुझे पता है की यह कंपनी कितनी 'ख़ास' होगी!

माणिक की इस बात पर सिमी की छिपी हुई हंसी छूट गयी.

सिमी: (वापस माणिक के कान में, दबी हुई आवाज़ में) अब तुम्हे हर रात याद दिलाऊंगी की तुम मेरे बहनचोद भाई हो!

मोनिका मासी ने माणिक को वहाँ रहने में पूरी मदद का आश्वासन दिया. माणिक अब मासी के घर में था, लेकिन उसका असली ध्यान सिमी की हर रात की 'कंपनी' पर था.

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मोनिका मासी, माणिक के स्वागत की तैयारियों में व्यस्त थी. वह रसोई में थी, शायद उसके लिए चाय या कुछ और नाश्ता बनाने में लगी थी. यही वह एकांत का क्षण था जिस का इंतज़ार सिमी कर रही थी.

सिमी तुरंत माणिक के पास आयी, जो लिविंग रूम में बैठा था.

सिमी: (दबी हुई आवाज़ में) मासी अभी रसोई में हैं. यहां आओ.

सिमी ने माणिक का हाथ पकड़ा और उसे कोने की तरफ खींच लिया, जहां से रसोई सीधे दिखाई नहीं दे रही थी.

चुम्बन का आरम्भ: माणिक ने बिना किसी देरी के, सिमी को अपनी बाहों में कास कर पकड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. यह चुम्बन सिर्फ प्यार का नहीं, बल्कि वासना और बेसब्री का था.

* गहराई: वे ek-dusre को तीव्रता से चूमने लगे, मनो वे अपने पिछले रात के सारे वर्जित अनुभव एक hi पल में दोहराना चाहते हों.

* जीभ का प्रवेश: माणिक ने चुम्बन की गहराई बधाई और अपनी जीभ सिमी के मुँह में फेर दी. सिमी ने तुरंत इस आक्रमण का स्वागत किया.

सिमी की प्रतिक्रिया: माणिक की जीभ का स्पर्श मिलते hi, सिमी का पूरा शरीर अचानक झुनझुनी से काँप उठा. उसके शरीर में एक तीव्र विद्युत् प्रवाह सा दौड़ा.

सिमी: (चुम्बन के बीच में, दबी हुई आह के साथ) हहहहह...

माणिक जानता था की इस साधारण से स्पर्श ने भी सिमी के शरीर पर कितना असर किया है. सिमी की उत्तेजना इतनी तीव्र थी की वह नीचे तक हिल गयी.

जैसे hi उन्हें मासी के क़दमों की आहात सुनाई दी, वे तुरंत अलग हो गए. वे दोनों हांफ रहे थे और उनके चेहरे पर एक गहरा रोमांच था. अब यह तय हो चूका था की यह डेढ़ साल की ट्रेनिंग दोनों के लिए राज़ और वर्जित सुख से भरी होने वाली है.
 
यार सॉरी फ्रेंड्स ुक में घूम रहा हूँ कौसिन्स के SATH..APNI कौसिन्स और भाभी के मुम्मे और गांड देखने में बड़ा मज़ा आ रहा HAI...WAISE एक कजिन ने मुझे पूछा भी माणिक भाई कहीं इन्सेस्ट फीलिंग तो नहीं आ गयी आपमें. मैं मुकर गया के NAHI...YAAR रियलिटी में नहीं मान सकते हम न
 
Part - 74

शाम को, Jasleen—jo माणिक की मासी की बड़ी बेटी और एक पेशेवर का (सर्टिफाइड अकाउंटेंट) thi—apne काम से घर लौटी. जसलीन का व्यक्तित्व अपनी छोटी बेहेन सिमी से बिलकुल विपरीत था; वह गंभीर, सख्त और career-oriented थी.

जैसे hi जसलीन कमरे में आयी, माणिक को उसकी सख्त प्रकृति का तुरंत अंदाज़ा हो गया. वह जानता था की जसलीन के साथ कोई भी मज़ाक या शरारत काम नहीं करेगी.


  • माणिक: (थोड़ा संकोच के साथ) नमस्ते, दीदी.
  • जसलीन: (सीधे और औपचारिक स्वर में, दूर से hi अभिवादन स्वीकार करते हुए) नमस्ते, माणिक. उम्मीद है, तुम ठीक होंगे.
उसने माणिक से दूर से hi मुलाक़ात की, कोई गर्मजोशी या गले मिलना नहीं था.

जसलीन ने तुरंत अपने काम की बात शुरू कर दी.


  • जसलीन: सुनो, मैंने तुम्हारी ट्रेनिंग के लिए का अमित गोयल से बात कर ली है. वह इस एरिया के काफी maane-huye का हैं.
  • जसलीन: (गंभीरता से) उनके पास बहुत सारे क्लाइंट्स हैं, जिनमे bade-bade बिज़नेस भी शामिल हैं. तुम्हें उनके अंडर achha-khaasa तजु रबा मिलेगा. यह मत सोचना की यह डेढ़ साल सिर्फ कागज़ भरने का काम है. तुम्हें सब कुछ गंभीरता से सीखना होगा.
माणिक को समझ आ गया की जसलीन किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी. उसका पूरा ध्यान ट्रेनिंग की सफलता पर था. सिमी और मोनिका मासी के स्नेह के बीच, जसलीन की यह सख्त उपस्थिति माणिक को ज़मीन से जोड़े रखने के लिए ज़रूरी थी.

माणिक के घर से जाने के बाद, शाम को जब दिव्या कॉलेज से वापस आयी, तो घर का माहौल बदला हुआ था.

दिव्या ने देखा की पारी अकेली और उदास बैठी है. पारी, जो हमेशा माणिक के साथ चिपकी रहती थी या किसी न किसी शरारत में व्यस्त रहती थी, उसे इस तरह शांत देखकर दिव्या को तुरंत अजीब लगा.


  • दिव्या: (पारी को छेड़ते हुए) अरे! आज अकेली बैठी है? तेरा माणिक भाई कहाँ है? आज तो शांत बैठी है तू!
  • पारी: (जलती हुई नज़रों से दिव्या को देखती है) वह तुम्हारा भी भाई है!
पारी के इस तीखे और अप्रत्याशित जवाब से दिव्या को झटका लगा.

दिव्या (मन hi मन): इसे क्या हुआ? यह इतनी सख्त क्यों हो रही है?

दिव्या को बड़ा अजीब सा लगा और उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा. वह तुरंत भागकर माणिक के कमरे की ओरे गयी. उसका शक था की माणिक शायद छिपकर कोई शरारत कर रहा होगा या फिर उस पर नज़र रख रहा होगा. लेकिन, माणिक वहां भी नहीं था. कमरा खाली था.

इतने में पारी भी पीछे से आ जाती है. वह जानती थी की माणिक के जाने से दिव्या को थोड़ी राहत मिलेगी, इसलिए उसने यह खबर रूखे स्वर में दी.


  • पारी: (रूखे स्वर में) तुम्हारी मनोकामना पूरी हो गयी. अब भाई हमें डेढ़ साल तक नज़र नहीं आएगा. वह अपनी मोनिका मासी के यहां गया है, जहां उसकी ट्रेनिंग है.
दिव्या यह सुनकर हैरान रह जाती है!

"क्या! माणिक चला गया? और उसे किसी ने बताया भी नहीं?"

माणिक का अचानक जाना और परिवार के किसी सदस्य (अनु या आनंद) द्वारा उसे इस बारे में न बताना, दिव्या के लिए एक और गहरा झटका था. उसे लगा की वह परिवार के अंदरूनी मामलों से भी बाहर हो चुकी है. अब माणिक के खतरे से तो छुटकारा मिला, लेकिन अपमान और अलगाव का भाव उसे अंदर तक खा रहा चल रहा था.

दिव्या के जाने के बाद, अनु भी किचन से निकलकर हॉल में आयी. माणिक के अचानक चले जाने से उसे भी अजीब सा खालीपन महसूस हो रहा تھا (था). हालाँकि माणिक ने उसे अपमानित किया था, फिर भी उसके होने की एक chahal-pahal थी.


  • अनु: (आँखों में हलकी उदासी लिए) हाँ, बीटा. माणिक के जाने से तो सच में घर soona-soona हो गया है. Subah-shaam उसका झगड़ा, उसकी शैतानियां... सब शांत हो गया.
अनु ने यह बात उदास होकर कही, लेकिन उसके मन में एक विरोधाभास tha—raahat का भी और खालीपन का भी. अनु की इस बात पर पारी का गुस्सा फूट पड़ा. उसे लगा की अनु और दिव्या दोनों माणिक के जाने से खुश हैं.

  • पारी: (तड़पते हुए, आवाज़ में दर्द) आपको तो ख़ुशी होनी चाहिए, दीदी! आप और दिव्या दीदी तो यही चाहती थीं न की वह दूर चला जाए! अब घर सूना नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण हो गया होगा!
  • अनु: (छोङकर) अरे, पारी! तुम ऐसे क्यों बोल रही हो? हाँ, उसने कुछ गलतियां कीं, पर है तो हमारा भाई hi.
  • पारी: (तल्खी से) नहीं! आप लोग नहीं समझतें! वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त था! अब में किसके साथ बैठूंगी? किसके साथ हंसूंगी? आप दोनों को तो बस मर्यादा याद रहती है!
पारी के मुंह से निकली यह बात अनु को चुभ गयी, क्यूंकि उसे लगा की पारी उसे ताना मार रही है की वह माणिक की 'शैतानी' में शामिल नहीं होती थी.

  • अनु: (थोड़ी नाराज़ होकर) पारी! यह कैसी बातें कर रही हो? में तुम्हारी बड़ी बेहेन हूँ! और तुम जानती हो की वह यहां kya-kya कर रहा था!
  • पारी: (आंसू आँखों में भरकर) वह जो कर रहा था, वह आप लोगों को बुरा लगता था. मुझे नहीं लगता था! आप लोग बस दूर से शिकायत करती थीं. और अब जब वह चला गया है, तो आप सब खुश हैं!
अनु ने पारी को शांत करने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रही. वह जान गयी की माणिक का जाना पारी के लिए सचमुच एक बड़ा झटका है और अब यह खालीपन घर के माहौल को और ज़्यादा भारी बना देगा.

पारी का दर्द और गुस्सा देखकर अनु का दिल पिघल गया. उसने तुरंत अपनी नाराज़गी और निराशा को किनारे रखा. उसे एहसास हुआ की माणिक के जाने का सदमा पारी के लिए सबसे ज़्यादा गहरा है.

अनु ने बिना कुछ कहे, पारी को कसकर गले लगा लिया.


  • अनु: (बहुत प्यार से, पारी की पीठ सहलाते हुए) मेरी प्यारी बेहेन! शांत हो जाओ! में समझती हूँ.
  • अनु: (आवाज़ में सच्चा स्नेह) में सच कह रही हूँ, वह हम सबका भाई है, और मुझे भी उससे उतना hi प्यार है जितना तुम्हें! में तुम्हारी भावनाओं को समझती हूँ. मुझे भी उसकी कमी महसूस हो रही है, पर में बस इतनी चाहती थी की वह यहां सही तरीके से रहे.
अनु ने पारी को दिलासा दिया:

"हमेशा झगड़ने वाला hi सबसे ज़्यादा याद आता है! तुम जानती हो की वह अब डेढ़ साल के लिए एक नए सफर पर गया है. यह उसकी भलाई के लिए है. वह shanivar-ravivar (Saturday-Sunday) को तो आएगा hi न! हम तब तक उसका इंतज़ार करेंगे."



अनु ने पारी को अपनी बाहों में सहारा दिया, और थोड़ी hi देर में पारी का गुस्सा आंसुओं में बह गया. उसे लगा की काम से काम उसकी बेहेन अनु तो उसके दुःख को समझती है. दोनों बहनें कुछ देर तक ek-doosre को गले लगाए रहीं, और घर का सूनापन कुछ पलों के लिए काम हो गया.
 
Part -23



माणिक, जो अभी भी पारी की बातों से हुई शर्मिंदगी और गुस्से में था, उसने पलटकर पारी को देखा, जो अब मेज़ पर बैठी फलों की टोकरी से एक सेब उठा रही थी. उसके दिमाग में पारी की शैतानी आवाज़ गूँज रही थी: "Ajeeb-ajeeb सी आवाज़ें आ रही थी!"

इस खिंचाव भरे पल में, शायद शर्मिंदगी से ध्यान हटाने के लिए या बस एक पल के लिए अपनी असहजता भूलने के लिए, माणिक की आँखें भटक गयी. उसका ध्यान पारी की आवाज़ और शरारत से हटकर, अनजाने में, उसकी शारीरिक बनावट पर चल गया. पारी ने आज एक साधारण, पर हलकी फिटिंग वाली T-shirt पहनी थी, और जब वह सेब उठाने के लिए थोड़ी झुकी, तो उसकी T-shirt के ऊपरी हिस्से पर माणिक की नज़र टिक गयी.

यह एक सेकंड का भी अंश था, लेकिन माणिक ने तुरंत महसूस किया की उसकी नज़र कहाँ चली गयी है. उसके दिमाग ने तुरंत अलार्म बजाय. वह उसका भाई है! यह कितना अनुचित और अजीब है! वह तुरंत अपनी नज़र हटाना चाहता था, लेकिन जैसे वह किसी चुम्बक से खींच गया हो, उसकी आँखें एक पल के लिए वहीँ ठिठक गयी.

पारी, जो सेब को अपनी उँगलियों पर घुमा रही थी, उसने तुरंत महसूस किया की उसके भाई की निगाहें उस पर हैं, और वह भी किसी सामान्य अंदाज़ में नहीं. उसने पलटकर देखा. माणिक की आँखें जल्दी से ऊपर की और, उसकी आँखों में देखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उस थोड़े से समय में, पारी ने सब नोटिस कर लिया था.

पारी की शरारती मुस्कान पल भर में गायब हो गयी.

पारी: (शांत और गंभीर आवाज़ में, जिसकी माणिक को उम्मीद नहीं थी) क्या हुआ, भाई? क्या देख रहे हो?

माणिक जैसे नींद से जाएगा. उसका चेहरा जो पहले शर्म से लाल था, अब पकडे जाने के कारण सफ़ेद पद गया.

माणिक: (झटके से नज़रें हटाते हुए, आवाज़ लड़खड़ाती हुई) K-kuchh नहीं! मैं... मैं तो बस देख रहा था की तूने वह घडी पहनी है या नहीं, जो पापा ने दी थी. हाँ! वह!

पारी ने अपनी T-shirt को सहजता से एक हाथ से थोड़ा ठीक किया, भले hi वह पहले से hi ठीक थी. उसकी आँखें अभी भी माणिक पर थी, जो हवा में कहीं देख रहा था.

पारी: (ठंडी, लेकिन समझदार आवाज़ में) मेरी घडी तो मेरे हाथ में है, माणिक. और... तुम्हें पता है, मेरा 'कमरा' मेरे भाई के लिए एक मज़ाक का विषय हो सकता है, लेकिन मेरा 'शरीर' नहीं.

माणिक को लगा जैसे किसी ने उसे थप्पड़ मारा हो. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ.

माणिक: (लगभग फुसफुसाते हुए) सॉरी, पारी. मेरा मतलब... मैं बस... मैं बहुत शर्मिंदा हूँ. मैं... मैं जा रहा हूँ.

माणिक बिना किसी और बात का इंतज़ार किये, तेज़ी से कमरे से बाहर निकल गया.

पारी वहीँ कड़ी रही, उसके हाथ में सेब अभी भी था. उसके चेहरे पर अब कोई शैतानी नहीं थी, बल्कि एक गहरी सोच थी. वह जानती थी की वह भाई है, और यह बस एक पल की गलती हो सकती है, पर इस घटना ने उन दोनों के बीच एक अनकहा, असहज पल छोड़ दिया था.

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अनु दीदी और मल्लिका, एक बड़े और शानदार डेस्टिनेशन वेडिंग को व्यवस्थित (ओर्गनइजे) करने में व्यस्त थी. अनु, इवेंट की हेड होने के नाते, गेस्ट लिस्ट और सिटींग अर्रंगेमेन्ट्स को अंतिम रूप दे रही थी, जबकि मल्लिका वेंडर्स से समन्वय (कोआर्डिनेशन) कर रही थी.

शादी दुल्हन के परिवार की थी, और वे दोनों मुख्या हॉल में मंडप की सजावट का निरिक्षण कर रही थी. अनु ने एक पेशेवर (प्रोफेशनल) लेकिन आकर्षक फॉर्मल सूट पहना था, जो उसकी कार्यक्षमता को दर्शाता था.

तभी, दुल्हन का छोटा भाई, विक्रांत, जो अपनी महंगी घडी और अहंकार के लिए जाना जाता था, अपने कुछ दोस्तों के साथ वहाँ आया. वह आते hi अनु के करीब रुक गया.

विक्रांत: (मुस्कुराते हुए, लेकिन उसकी आँखों में घमंड और अवहेलना थी) एक्सक्यूज़ में, मिस इवेंट प्लानर! क्या आप मुझे बता सकती हैं की मेरी बुआ की मेज़ कहाँ है?

अनु ने तुरंत अपनी पेशेवर मुस्कान ोधी और विनम्रता से जवाब दिया.

अनु: जी, बिलकुल. सर, आपकी बुआ की मेज़ बिलकुल सामने, फूलों की सजावट के पास है. मैं अभी किसी को भेजती हूँ जो उन्हें...

इससे पहले की अनु अपनी बात पूरी करती, विक्रांत ने अनु को ऊपर से नीचे तक घूरा और जानबूझकर ज़ोर से, ताकि उसके दोस्त भी सुनें, गलत टिपण्णी कर दी.

विक्रांत: (हँसते हुए) अच्छा! वैसे... मैं यह देखकर हैरान हूँ की aaj-kal इवेंट प्लानर्स कितने 'ग्लैमरस' होते हैं. आप प्लानिंग से ज़्यादा ध्यान... खुद की 'प्रेजेंटेशन' पर देती हैं, लगता है. क्या बात है, इवेंट मिल जाए, इसलिए ऐसे कपडे पहनने पड़ते हैं, या यह... साइड बिज़नेस है?

यह सुनकर अनु का चेहरा पीला पद गया. वह पेशेवर थी, और इस तरह की अभद्रता (रुदेनेस्स) और अपमान के लिए वह तैयार नहीं थी. उसके होंठ खुले, लेकिन अपमान के झटके से, उसकी आवाज़ नहीं निकली. वह बस कड़ी रह गयी, असहजता से अपनी ड्रेस को देख रही थी.

लेकिन तभी, मल्लिका आग बबूला होकर उनके पास पहुंची. उसने सब कुछ सुन लिया था.

मल्लिका: (आवाज़ बिजली की तरह तेज़ और तीखी) ऐ! बद्तमीज़! अपनी गन्दी जुबां बंद रखो!

विक्रांत और उसके दोस्त चौंक गए.

मल्लिका: (सीधे विक्रांत की आँखों में देखते हुए) तुम कौन होते हो, किसी महिला को जज करने वाले? यह एक पेशेवर इवेंट प्लानर है, जो तुम्हारे परिवार के सबसे ज़रूरी इवेंट को संभाल रही है. तुम्हें शर्म आणि चाहिए की तुम अपनी बहिन की शादी में इस तरह की घटिया बातें बोल रहे हो! इन्हें काम मिला है क्यूंकि ये काबिल हैं, तुम्हारी तरह पैदाइश के डैम पर नहीं! तुम्हारे कपडे और तुम्हारी घडी... तुम्हारी क्लास दिखाती होगी, लेकिन तुम्हारी यह घटिया सोच... तुम्हारी औकात दिखाती है!

विक्रांत एकदम सन्न रह गया. उसकी उम्मीद थी की अनु चुपचाप अपमान सेह लेगी.

विक्रांत: (हकलाते हुए) तुम... तुम कौन हो? मेरे से इस तरह बात करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?

मल्लिका: मैं इसकी पार्टनर हूँ, और तुम्हारी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करने वाली. अगर तुमने एक और शब्द बोलै, तो मैं अभी तुम्हारे पापा को बुलाकर बताती हूँ की उनका बीटा शादी से पहले hi मेहमानों के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है!

यह ड्रामा देखकर, वहाँ तेज़ी से दुल्हन के पिता, मिस्टर गोयल, पहुंचे. उन्होंने स्थिति को तुरंत भांप लिया.

मिस्टर गोयल: (गुस्से में) विक्रांत! क्या चल रहा है यहां?

विक्रांत ने तुरंत चुप्पी साध ली.

मिस्टर गोयल: (विक्रांत को झिडकते हुए) तूने क्या कहा इन्हें? मैं तुम्हें कितनी बार समझा चूका हूँ की सबसे तहज़ीब से बात किया करो! खासकर उन लोगों से, जो हमारे लिए काम कर रहे हैं! माफ़ी मांगो अभी!

विक्रांत मुँह फुलाकर खड़ा रहा, लेकिन दर के मारे उसने हलके से कहा, "सॉरी."

अनु, जो अब तक खामोश थी, उसने कदम आगे बढ़ाया. वह जानती थी की यह उनका क्लाइंट है, और वह इस बात को यहीं ख़त्म करना चाहती थी.

अनु: (धीमे, लेकिन दृढ स्वर में) मिस्टर गोयल, प्लीज, शांत हो जाइये. मल्लिका, तुम भी शांत हो जाओ. कोई बात नहीं. हम सब बहुत तनाव में हैं. विक्रांत जी, मैं उम्मीद करती हूँ की आप आगे से पेशेवर लोगों का सम्मान करेंगे. मिस्टर गोयल, प्लीज आप अपने काम पर ध्यान दीजिये. हम डेकोरेशन देख लेते हैं.

अनु ने जानबूझकर बात को ताल दिया, क्यूंकि वह नहीं चाहती थी की इवेंट से पहले कोई बड़ा बखेड़ा खड़ा हो. मल्लिका, हालांकि अभी भी गुस्से में थी, पर अनु के शांत व्यवहार को देखकर वह चुप हो गयी. दोनों वहाँ से हैट गयी, लेकिन मल्लिका का रौद्र रूप देखकर अनु के दिल में उसके लिए सम्मान और बढ़ गया था.



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Part -24आनंद और अनीता एक शानदार विला में थे, जहां उन्होंने साथ में एक हफ्ता बिताने की योजना बनायीं थी. आज उनका पांचवा दिन था. वे दोनों बरामदे में राखी एक छोटी मेज पर बैठकर दोपहर का भोजन कर रहे थे. मेज पर ताज़ी सलाद, कुछ ग्रिल्ड फिश और वाइन राखी थी. चारों और धुप की हलकी गर्माहट थी और हवा में एक सुकून भरा ठहराव था, लेकिन उनके बीच की केमिस्ट्री उस शान्ति के विपरीत थी.



आनंद का मुख्या लक्ष्य इस रिश्ते में शारीरिक संतुष्टि पाना था, जबकि अनीता के मन में आनंद से एक बच्चे की चाहत थी, हालांकि यह बात वह अभी सीधे तौर पर ज़ाहिर नहीं कर रही थी.

भोजन करते समय भी उनके बीच की अंतरंगता (इंटिमेसी) काम नहीं हुई थी. आनंद, एक हाथ से अपना फोर्क पकडे, आराम से खाना खा रहा था, लेकिन उसका दूसरा हाथ मेज के नीचे अनीता की जांघ पर टिका था. वह dhire-dhire, शरारत भरे अंदाज़ में, अनीता के अंगों से खेल रहा था. कभी प्यार से सहलाता, तो कभी हलके से दबाकर छेड़ता.

अनीता भी इस स्पर्श का आनंद ले रही थी. वह अपनी आँखें बंद करती, गहरी साँसें लेती, और फिर आनंद की तरफ देखकर एक मीठी सी मुस्कान देती. दोनों की आँखों में ek-doosre के प्रति गहरी चाहत और संतुष्टि थी. इस रिश्ते में जो भी उनका मकसद था, वे दोनों इस पल में बेहद खुश थे.

अनीता ने धीरे से वाइन का घूंट लिया, फिर अपनी नज़रें आनंद की आँखों में डाली.

अनीता: (हलकी शरारत और गुदगुदी भरी आवाज़ में) सुनो आनंद.

आनंद: (मुस्कुराते हुए, मेज के नीचे हाथ रोक कर) हाँ, मेरी जान? बोलो. कुछ और चाहिए खाने में? या यहां...?

आनंद ने हाथ से हल्का इशारा किया और आँख मारी.

अनीता: (खिलखिलाकर हँसते हुए) अरे! नहीं! मैं बस यह सोच रही थी... हम कितने 'व्यस्त' रहे हैं इन पांच दिनों में.

आनंद: (गहरी हंसी दबाते हुए) व्यस्त? यह तो ुन्देरस्टटमेंट (काम आंकना) है, मेरी स्वीटहार्ट! हम तो युद्ध स्टार पर काम कर रहे हैं.

अनीता: (बात को आगे बढ़ाते हुए) वही तो! पता है क्या? मैं सुबह जब वाशरूम में गयी थी, तो मैंने देखा...

अनीता ने अपनी हंसी को रोकने की कोशिश की, पर उसकी आँखें चमक उठी.

अनीता: हमने... हमने इन पांच दिनों में बीस बार सेक्स किया हैं!

यह सुन कर आनंद का फोर्क प्लेट पर girte-girte बचा.

आनंद: (आँखें चौड़ी करते हुए) क्या?! बीस बार? मतलब... बीस शॉट्स?!

अनीता: (ज़ोर से हँसते हुए) हाँ! बीस! और यह सुन कर... मुझे खुद पर और तुम पर... बहुत गर्व महसूस हो रहा है! अब मुझे समझ नहीं आ रहा की मैं भी कितना सेह गयी न इन पांच दिनों में!

आनंद भी दहाड़ मारकर हंसने लगा. उसकी हंसी पूरे बरामदे में गूँज उठी. यह संख्या उसे ज़रा भी आश्चर्यचकित नहीं कर रही थी, बल्कि दोनों के बीच की अद्भुत केमिस्ट्री को ज़ाहिर कर रही थी.

आनंद: (हँसते हुए, अपनी आँखें पोंछते हुए) अनीता, तुम कमाल हो! मुझे लगता है की यह रिकॉर्ड है! और ज़्यादा सोचने की ज़रुरत नहीं है! मैं अभी पूरा एक्टिव हूँ और बाकी दो दिन भी हमें पूरी शिद्दत से जीने हैं! हमारा लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है!

अनीता ने एक और खिलखिलाहट के साथ अपनी वाइन का गिलास उठाया.

अनीता: (आनंद की तरफ गिलास बढ़ाते हुए) तो फिर, उस जोश और बाकी दो दिनों के लिए चियर्स!

दोनों ने apne-apne गिलास टकराये. इस मज़ाक में, इस hisaab-kitaab में, उनके बीच एक गहरी समझ और संतुष्टि का एहसास था. वे दोनों जानते थे की उनका अगला कदम क्या होगा, शायद लंच के बाद.

दोपहर के भोजन के ठीक बीस मिनट बाद, भोजन की संतुष्टि और पिछली hansi-mazaak की गर्मी ने उनकी निष्क्रियता को तोड़ दिया. बरामदे में हलकी धुप और शान्ति थी, लेकिन उस मेज के पास, जहां उन्होंने abhi-abhi खाना खाया था, जल्द hi माहौल बदल गया.

आनंद और अनीता, लंच करते समय भी नग्न थे, केवल मेज का किनारा hi उनकी अंतरंगता को बाकी दुनिया से छुपा रहा था. अब जब वे उठे, तो उनके बीच का आकर्षण और भी स्पष्ट हो गया.

आनंद ने पलटें मेज पर hi छोड़ दिया और घूमकर अनीता के पास आया. अनीता अभी भी अपनी सीट पर बैठी थी. आनंद ने झुककर अपने दोनों हाथ अनीता के कन्धों पर रखे और dhire-dhire उन्हें सहलाने लगा. उसका स्पर्श कोमल था, लेकिन उसमें एक गहरी तृष्णा थी.

आनंद: (धीमी, कानाफूसी भरी आवाज़ में) Hisaab-kitaab तो हो गया... अब 'बाकी' के काम पर ध्यान देना चाहिए, नहीं?

अनीता ने जवाब नहीं दिया, लेकिन उसकी आँखें बंद हो गयी, उसके चेहरे पर एक गहरी, शांत मुस्कान थी. आनंद ने अपनी उंगलियां उसके कंठ से नीचे उसकी छाती तक लाइ, और उसके उभरे हुए, संवेदनशील अंगों को हलके से सहलाने लगा. यह स्पर्श एक सिग्नल था, और अनीता ने उसे तुरंत समझा.

आनंद का हाथ अब उसके शरीर पर घूम रहा tha—kabhi उसकी कमर पर, कभी उसकी चिकनी पीठ par—har स्पर्श से उसकी वासना बढ़ती जा रही थी.

अनीता ने अपनी आँखें खोली. उसने आनंद को अपनी और खींच लिया और अपने हाथ से उसके लैंड को पकड़ लिया. वह पहले से hi कामेच्छा से सख्त हो चूका था. अनीता ने उसे थाम लिया, और अपने हाथों से उसे सहलाने लगी, oopar-neeche करते हुए उसमें और उत्तेजना भर दी.

आनंद की साँसें तेज़ हो गयी. उसने अनीता को उठाकर अपने गॉड में बिठाया, इस तरह की उसका मुख उसके सामने था, और उसके अंग अब बिलकुल करीब थे.

आनंद: (भारी आवाज़ में) तुम... तुम जानती हो की मुझे और इंतज़ार करना पसंद नहीं है...

अनीता ने उसकी बात को अनसुना कर दिया. उसका ध्यान सिर्फ उस पल पर था. उसने अपने होंठ आनंद के होंठों से जोड़े और उन्हें एक गहरे, जोशीले चुम्बन में खींच लिया. उनके शरीर ek-doosre के नग्न ताप को महसूस कर रहे थे.

एक तीव्र प्यास दोनों को खींच रही थी. बिना एक शब्द कहे, उन्होंने खुद को बरामदे की गर्मी और विला की गोपनीयता के हवाले कर दिया. वह जगह, जहां उन्होंने abhi-abhi भोजन किया था, अब उनके प्रेम के खेल का अखाडा बन गयी.

वासना का यह खेल एक बार फिर पूरी शिद्दत से शुरू हो गया था, जहां न तो कोई रूकावट थी और न hi कोई शर्म. सिर्फ दो नग्न शरीर थे, जो ek-doosre की चाहत को पूरा करने में लगे थे, और पांच दिनों में बीस शॉट्स को याद करना, इस बात का सबूत था की यह खेल रुकने वाला नहीं था.





माणिक बाजार से घर की तरफ लौट रहा था, उसके दिमाग में एक hi योजना चल रही थी. उसने सोचा था की अनु दीदी अपने काम से बाहर होंगी, दिव्या और पारी भी शायद अपनी कॉलेज की गतिविधियों में व्यस्त होंगी. यह घर में नीरू बुआ के साथ अकेले रहने का सही मौका था.

कल रात बुआ ने उसे संकेत दिया tha—lagbhag वादा hi किया tha—ki वे दोनों अगले दिन ज़रूर अंतरंग होंगे. माणिक, जो पिछले कुछ समय से बुआ की तरफ आकर्षित था, इस सोच से hi उत्साहित था. उसके मन में बुआ के साथ बिठाये जाने वाले पलों की तस्वीरें घूम रही थी.

वह तेज़ से घर में घुसा. हॉल पार करके जब वह बुआ के कमरे की तरफ बढ़ा, तो दरवाज़ा खुला था. उसने अंदर झाँका. बुआ कमरे में थी, लेकिन उन्हें देखकर माणिक के चेहरे की ख़ुशी एकदम से फीकी पद गयी.

नीरू बुआ पैकिंग कर रही थी.

उनके कपडे, ज़रूरी सामान और दवाइयां एक सूटकेस में राखी जा रही थी. यह देखकर माणिक को अपने पैरों टेल ज़मीन खिसकती हुई महसूस हुई.

माणिक तेज़ से बुआ के पास पहुंचा. उसने बिना कुछ soche-samjhe, पीछे से बुआ को अपनी बाहों में भर लिया. उसका एक हाथ बुआ के पेट पर था, और दूसरा हाथ आगे लाकर उसने बुआ के उभरे हुए अंगों को ज़ोर से थाम लिया.

माणिक: (आवाज़ में शिकायत, चाहत और निराशा का मिश्रण) आग लगाकर कहाँ जा रही हो, बुआ? यह सब क्या है? और... और छूट नहीं डौगी?

नीरू बुआ ज़ोर से चौंक गयी. माणिक की अचानक की गयी हरकत से वह घबरा गयी, लेकिन फिर उन्होंने अपनी स्थिति को समझा. उन्होंने धीरे से माणिक के हाथों को हटाया और पीछे मुड़ी.

उनका चेहरा बिलकुल बेबसी और घबराहट से भरा हुआ था. उनकी आँखें भी थोड़ी नाम थी, जिससे माणिक की निराशा और बढ़ गयी.

नीरू बुआ: (आँखों में आंसू भरते हुए, लगभग फुसफुसाते हुए) बीटा माणिक... यह सब मैं ख़ुशी से नहीं कर रही हूँ.

वह पल भर के लिए रुकी और माणिक के चेहरे को अपने दोनों हाथों से सहलाया.

नीरू बुआ: (निराशा से भरा हुआ मुँह बनाकर) तुम्हारे फूफा जी का abhi-abhi फ़ोन आया था. वह बहुत घबराये हुए थे... मेरे ससुर जी... मतलब, फूफा जी के पिताजी को हार्ट अटैक आया है. उनकी हालत बहुत नाज़ुक है. उन्होंने कहा है की मैं अगली ट्रैन से hi वापस आ जाऊं. मेरे लिए रुकना मुमकिन नहीं है, माणिक.

यह सुन कर माणिक के शरीर में जैसे जान hi नहीं रही. उसके सारे अरमान, साड़ी योजनाएं, और कल रात का वह वादा पल भर में choor-choor हो गए. बुआ की बात बिलकुल गंभीर और वास्तविक थी. वह जानते हुए भी ज़िद नहीं कर सकता था.

माणिक ने बुआ का हाथ पकड़ा, जो अब सूटकेस का ज़िप बंद कर रहा था.

माणिक: (धीमे, टूटा हुआ स्वर) पर... बुआ... कल रात...?

नीरू बुआ: (प्यार से, लेकिन मजबूरी से) मुझे माफ़ कर दो, बीटा. मैं क्या कर सकती हूँ? यह मेरी मर्ज़ी नहीं है. हालात hi ऐसे बन गए हैं. तुम जानते हो, मेरा वहां होना कितना ज़रूरी है.

माणिक अपना सा मुँह लेकर बुआ के पास hi खड़ा रह गया. उस पल में वह न तो गुस्सा कर सकता था, न ज़िद, और न hi अपनी निराशा ज़ाहिर कर सकता था. वह बस बुआ को बेबसी से सूटकेस बंद करते हुए देखता रहा, और उसके मन में यही बात गूँज रही थी की उनका वादा, उनकी चाहत, सब अधूरी रह गयी.





हालातों की मजबूरी थी, इसलिए माणिक को hi नीरू बुआ को स्टेशन छोड़ने जाना पड़ा. पूरे रास्ते माणिक चुप रहा, उसके मन में उस रात के अधूरे वाडे का दर्द था. बुआ ने भी उसे शांत करने की कोशिश की, पर माणिक की मायूसी साफ़ झलक रही थी.

माणिक ने बुआ को ट्रैन में बिठाया, उनका सामान रखा, और खिड़की के पास खड़ा रहा जब तक ट्रैन dhire-dhire प्लेटफार्म से दूर नहीं चली गयी. जब ट्रैन आँखों से ओझल हो गयी, तो माणिक एक गहरी सांस लेकर वापस मुदा. उसकी साड़ी उम्मीदें और उत्तेजना अब शून्य हो चुकी थी.

वह इस निराशा से बाहर निकलने के लिए, सीधे अपने बचपन के दोस्त, ध्रुव राठी के घर की तरफ चल पड़ा. उसे लगा की ध्रुव के साथ थोड़ा समय बिताने से उसका मन बेहाल जाएगा.

जब माणिक ध्रुव के घर पहुंचा, तो ध्रुव उसे देखकर खुश हुआ, लेकिन वहां एक और व्यक्ति मौजूद thi—Dhruv की बड़ी बहिन, जाज. जाज भी वहीँ बैठी थी, अपने फ़ोन में कुछ देख रही थी. माणिक के मन में तुरंत एक और विचार कौंधा. जाज से उसके रिश्ते थोड़े खुले थे और उसने पहले भी माणिक की इच्छा पूरी की थी. यह उसके लिए बुआ की निराशा को भुलाने का एक तरीका हो सकता था.

ध्रुव किसी काम से किचन में चल गया, और माणिक ने इस मौके का फायदा उठाया. वह जाज के पास गया और धीमी आवाज़ में, बड़ी उम्मीद से बोलै:

माणिक: (थोड़ा सहमे हुए, लेकिन सीधे मुद्दे पर आते हुए) जाज... यार, मेरी किस्मत आज बहुत ख़राब है. बुआ अचानक चली गयी... बहुत मूड ऑफ है. क्या तुम... क्या तुम थोड़ी देर के लिए मेरे साथ चल सकती हो? मेरा मतलब है... क्या तुम मुझे... थोड़ी छूट दे सकती हो?

माणिक की आवाज़ में साफ़ निराशा और गहरी चाहत थी.

जाज ने अपना फ़ोन नीचे रखा और माणिक की तरफ देखा. माणिक को देखते hi वह उसकी मनोदशा समझ गयी. उसने एक गहरी, सहानुभूति भरी सांस ली.

जाज: (बड़ी बेचारा सा मुँह बनाकर) ओहो, माणिक! मुझे पता है तुम्हारा मूड क्यों ख़राब है, और मैं तुम्हारी हेल्प करना चाहती थी, सच में!

जाज ने अपना हाथ माणिक के हाथ पर रखा, फिर धीमी और उदास आवाज़ में बोली:

जाज: पर यार... मेरी भी किस्मत आज ख़राब है. तुम्हें पता है, मुझे पीरियड्स आ गए हैं आज सुबह hi.

जाज ने निराशा से सर हिलाया. माणिक को लगा जैसे आसमान से ज़मीन पर गिर गया हो. एक के बाद एक दो निराशाएं! उसकी साड़ी उत्तेजना, साड़ी चाहत... सब ठन्डे पद गए.

माणिक: (उदासी से सर झुकाकर) ो... ओह. ठीक है. कोई बात नहीं, जाज.

उसने जाज का हाथ छोड़ा और ध्रुव के किचन से आने का इंतज़ार नहीं किया. उसने जाज से सिर्फ इतना कहा की वह बाद में मिलेगा, और बिना कुछ khaaye-piye, उदास सा होकर ध्रुव के घर से निकल आया.



माणिक सीधे घर आया. दरवाज़ा बंद करते hi उसे लगा की आज का दिन उसके लिए किसी परीक्षा से काम नहीं tha—ek परीक्षा जहां वह बुरी तरह से असफल हुआ था. उसके दिमाग में सिर्फ एक hi बात थी, आज उसे किसी भी हाल में शारीरिक संतुष्टि नहीं मिल पाएगी.
 
Part -25



माणिक उदास और निराश होकर घर पहुंचा. घर में एक अजीब सी शान्ति थी. जैसे hi उसने दरवाज़ा बंद किया, उसकी नज़र हॉल में बैठी पारी पर पड़ी. दिव्या और अनु दीदी शायद अभी भी बाहर थी, क्यूंकि पारी घर में अकेली थी.

पारी आराम से सोफे पर बैठी थी, कोई किताब पढ़ रही थी या शायद अपने फ़ोन में व्यस्त थी. उसने dheeli-dhaali T-shirt और शॉर्ट्स पहने हुए थे.

माणिक, नीरू बुआ और जाज से मिली दोहरी निराशा के कारण पहले से hi गहरे तनाव में था और उसकी वासना चरम पर थी. इस मानसिक स्थिति में, उसे अपनी निराशा को कहीं न कहीं केंद्रित करना था.

हाल के दिनों में, माणिक की आँखें अक्सर अपनी बहिन के उभरे हुए अंगों पर चली जाती थी, भले hi यह कितना भी अनुचित क्यों न हो. आज भी, उसकी हताशा ने उसे अपनी नज़रें हटाने नहीं दी. वह दरवाज़े के पास hi खड़ा रहा और पारी को एकटक देखने लगा.

माणिक की मानसिक उलझनें और शारीरिक ज़रूरतों ने अब एक भयंकर मोड़ ले लिया. अपनी निराशा को शांत करने के लिए, उसने तुरंत कल्पना (इमेजिन) करना शुरू कर दिया. उसकी आँखों के सामने, शांत बैठी पारी की जगह, एक दूसरा दृश्य चलने लगा. वह कल्पना करने लगा की वह पारी को उसी सोफे पर अपनी गॉड में बिठाकर उसे ज़ोरदार ढंग से सहवास कर रहा है.

इस तीव्र और वर्जित कल्पना में डूबकर, माणिक अनजाने में अपना हाथ अपनी पंत के ज़िप के पास ले गया. न तो वह खुद को रोक पाया और न hi उसे अपने aas-paas की सुध रही. वह कल्पना के ज़ोर में इतना बाह गया की उसका हाथ उसके लैंड पर चला गया. उसने धीरे से, फिर ज़ोर से, उसे सहलाना शुरू कर diya—vah यह कल्पना कर रहा था की वह वास्तविक में अपनी बहिन को छोड़ रहा है.

पारी ने अपनी किताब से नज़र हटाई. पहले तो उसने सोचा की भाई बस उदास है, पर जब उसने देखा की माणिक एकटक उसे वासनात्मक नज़रों से घूर रहा hai—uske चेहरे पर वासना और निराशा का अजीब मिश्रण tha—to वह असहज हो गयी.

लेकिन जब उसने देखा की उसका भाई, जो दरवाज़े पर खड़ा है, अपने हाथ से अपनी पंत के अंदर कुछ मसल रहा है, तब पारी का खून खौल उठा. उसे साफ़ दिखाई दे रहा था की माणिक की आँखें, जो उसे घूर रही थी, और उसका हाथ, जो उसकी पंत के अंदर हरकत कर रहा था, दोनों में सीधा सम्बन्ध था.

गुस्से, घबराहट और घिना (डिस्गस्ट) के मारे पारी अपनी सीट से उछाल पड़ी.

पारी: (एकदम से ज़ोरदार और क्रोधित आवाज़ में) भाई! यह क्या कर रहे हो?!

माणिक पर जैसे ठंडा पानी पद गया. आवाज़ की तीव्रता और पारी का चेहरा देखकर वह एकदम से रुक गया. कल्पना का पर्दा पहात गया, और वह वापस भयंकर वास्तविकता में आ गया. उसने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया.

माणिक का चेहरा शर्म और aatm-ghrina (self-loathing) से भर गया. उसे अपनी हरकत पर ग्लानि (शेम एंड रएमोर्से) हुई. उसकी आँखें नीचे झुक गयी, और वह पारी से आँखें नहीं मिला सका.

माणिक: (हकलाते हुए, आवाज़ गले में फँसी हुई) मैं... मैं...

पारी अपनी जगह पर कड़ी कांप रही थी. यह पहली बार नहीं था की माणिक ने उसे अजीब नज़रों से देखा हो, लेकिन यह पहली बार था जब उसने इतनी खुली और घिनौनी हरकत की थी.

पारी: (अपनी आवाज़ को नियंत्रित करते हुए, पर आँखों में आंसू थे) निकलो यहां से! अभी!

माणिक बिना कुछ कहे, बिना किसी सफाई के, चुपचाप वहां से उलटे पाँव अपने कमरे की तरफ भाग गया, उसका सर शर्म से झुका हुआ था. हॉल में पारी अकेली रह गयी, उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था, और उसके मन में अपने भाई की इस घिनौनी हरकत की याद बस गयी थी.

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माणिक के भाग जाने के कुछ hi मिनट बाद, घर का मुख्या दरवाज़ा खुला और दिव्या और अनु दीदी भी बाहर से आ गयी. दोनों अपनी बातचीत में व्यस्त थी, पर उन्होंने हॉल में बैठी पारी को देखा.

पारी अब सोफे पर नहीं, बल्कि डाइनिंग एरिया में बैठी थी. उसके सामने चाय का कप रखा था, जिसे वह zor-zor से फूँक मारकर पी रही थी. उसके चेहरे पर अभी भी पिछली घटना का गुस्सा और सदमा साफ़ दिख रहा था.

अनु दीदी: (बैग रखते हुए) अरे, पारी! तुम यहां बैठी हो? और इतनी गुस्से में क्यों लग रही हो? क्या हुआ?

पारी ने तुरंत खुद को संभाला. वह जानती थी की वह माणिक की हरकत को अभी किसी को नहीं बता सकती, खासकर अनु दीदी को, क्यूंकि इससे घर में एक बड़ा बखेड़ा खड़ा हो जाता.

पारी: (चाय का घूंट लेते हुए, बात टालते हुए) कुछ नहीं, दीदी. बस कॉलेज में एक बेवक़ूफ़ लड़के से किसी प्रोजेक्ट पर बहस हो गयी थी. मूड ख़राब हो गया.

अनु दीदी: (प्यार से) अरे, इतना दिल पर नहीं लेते chhoti-chhoti बातों को. रिलैक्स करो.

अनु ने चारों तरफ देखा.

अनु दीदी: अच्छा, माणिक भाई कहाँ हैं? उन्हें चाय नहीं दी? इतनी गर्मी में कौन पढता है?

पारी: (झट से) हाँ, हाँ. वह अपने रूम में है, शायद पढ़ रहा है.

पारी की आवाज़ में एक अजीब सी रूखापन था, जिसे अनु ने नोटिस नहीं किया.

अनु दीदी ने बिना और कुछ पूछे, किचन में जाकर एक कप में चाय डाली और दरवाज़े पर हलकी दस्तक देकर माणिक के कमरे में चली गयी.

माणिक के कमरे में हल्का अँधेरा था. अनु ने देखा की माणिक बिस्तर पर चादर ओढ़कर लेता हुआ है.

दरअसल, पारी के पास से भागने के बाद, माणिक की हताशा और उत्तेजना चरम पर थी. उसने शर्मिंदगी के बावजूद, अपनी ज़रुरत को शांत करने के लिए कपडे निकाले और तुरंत मुठ मारी (मस्टरबेटेड). इस शारीरिक क्रिया के तुरंत बाद आयी गहरी थकावट के कारण उसे गहरी नींद आ गयी थी और वह ऐसे hi नंगा लेता हुआ था.

अनु दीदी ने प्यार से उसे आवाज़ दी.

अनु दीदी: माणिक भाई! उठो! चाय पी लो.

माणिक छौंकर उठा. वह हड़बड़ी में उठा, लेकिन नींद में भी उसे याद था की वह नंगा है. इसलिए उसने उठते hi जल्दी से अपने शरीर पर चादर को कसकर लपेट लिया, जिससे वह पूरा ढाका रहे.

अनु दीदी: (हँसते हुए) अरे! यह क्या तरीका है उठने का? तुम्हें कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा! थोड़ा कुछ पहनकर सोया करो. यह लो, चाय पी लो. तुम्हारा मूड ख़राब लग रहा था.

माणिक, अभी भी चादर में लिप्त हुआ, कांपते हाथों से चाय का कप पकड़ लेता है. उसका ध्यान चाय पर नहीं था.

उसके दिमाग में अभी भी aatm-glaani का बोझ था. थोड़ी देर पहले hi, इसी कमरे में उसने अपनी बहिन को कल्पना में छोड़ा था, और अब उसी बहिन की बड़ी दीदी उसके सामने चाय लेकर कड़ी थी. उस वर्जित कल्पना और अपनी नग्नता की शर्म ने मिलकर उसे अंदर से खोखला कर दिया था.

माणिक ने चाय का कप तो पकड़ा, पर उसकी आँखें नीचे थी. वह अनु दीदी से नज़रें नहीं मिला प् रहा था. वह जानता था की उसने कितनी बड़ी सीमा पार की थी, और वह ग्लानि उसके चेहरे पर एक गहरी उदासी बनकर छ गयी थी.



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**Part - 26**

अगली सुबह, पारी ने jaan-bujhkar स्कूल न जाने का फैसला किया. उसके मैं में रात भर की बेचैनी थी, जो कल माणिक की हरकत से पैदा हुई थी. वह जानती थी की इस बात को अंदाजा नहीं किया जा सकता. वह समझ गयी थी की माणिक शायद अपनी पढाई में इतना व्यस्त रहा है की उसने अपनी स्वाभाविक ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर दिया, और अब उसकी कामोत्तेजना (सेक्सुअल फ़्रस्ट्रेशन) किसी गलत दिशा में भटक रही है.

पारी ने सुबह का नाश्ता ख़तम किया और इंतज़ार किया की घर के बाकी लोग निकल जाएँ. जब अनु दीदी और दिव्या अपने काम के लिए निकल गयी, तो पारी ने माणिक के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया.

माणिक अभी भी कल की शर्म और आत्मग्लानि में था. उसने दरवाज़ा खोला. पारी को सामने देखकर वह फिर से असहज हो गया, खासकर जब उसने देखा की पारी अपने स्कूल की यूनिफार्म में नहीं थी.

माणिक: (झुंझलाहट और शर्मिंदगी से) तुम स्कूल नहीं गयी? क्या है? मुझे पढ़ना है.

पारी: (शांत और गंभीर स्वर में) नहीं गयी. और तुम्हे अब थोड़ी देर के लिए पढ़ना बंद करना होगा. मुझे तुमसे कुछ बहुत ज़रूरी बात करनी है. अंदर चलें?

माणिक को पारी का यह शांत, पर दृढ रवैया हैरान कर गया. वह चुपचाप कमरे में घुस गया और बैठ गया. पारी ने दरवाज़ा बंद किया और उसके सामने आकर बैठ गयी.

पारी: (सीधे माणिक की आँखों में देखते हुए) कल जो कुछ हुआ... उसके बारे में बात करनी है. और इसे टालने की कोशिश मत करना.

माणिक की आँखें शर्म से झुक गयी.

माणिक: मुझे पता है, पारी. मैं... मैं माफ़ी मांगता हूँ. मैं नहीं जानता क्या हुआ था. मेरा मूड खराब था...

पारी: (बात काट ते हुए) माफ़ी से कुछ नहीं होगा, भाई. तुम मेरे भाई हो. पर मैं तुम्हारी परेशानी समझती हूँ. देखो... तुम्हे हमेशा से पढाई की धुन सवार रही है. तुमने कभी दूसरी चीज़ों पर ध्यान नहीं दिया. सच कहूँ... तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड क्यों नहीं बानी?

माणिक एकदम चौंक गया. उसे उम्मीद नहीं थी की पारी इतनी सीढ़ी बात करेगी.

माणिक: क्या...? यह तुम क्या कह रही हो?

पारी: मैं सच कह रही हूँ. मुझे पता है की तुम बहुत पढ़ते हो, पर तुम अब बड़े हो गए हो, माणिक. और जब तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई शारीरिक और भावनात्मक पार्टनर नहीं होता, तो यह चीज़ें दिमाग पर हावी होने लगती हैं. यही वजह है की तुम्हे अब यह कामोत्तेजना हो रही है, और वह कल गलत दिशा में चली गयी.

माणिक पूरी तरह से शांत हो गया. पारी की बात में उसे सच्चाई लग रही थी, पर स्वीकार करना मुश्किल था.

पारी: तुम्हे अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए एक सही साथी की ज़रुरत है. तुम अकेले नहीं रह सकते. अगर तुम इतने व्यस्त हो की किसी से मिल नहीं सकते, तो ठीक है. पर... (वह थोड़ा हिचकिचाई) ...पर तुम डेटिंग अप्प्स आज़मा सकते हो. या किसी को दोस्त बनाओ, जो तुम्हारी दुनिया से बाहर की हो. यह बहुत ज़रूरी है. यह तुम्हारी मानसिक शांति और... तुम्हारे सम्मान के लिए ज़रूरी है.

माणिक ने धीरे से सर उठाया. उसकी आँखें थोड़ी खुली थी.

माणिक: तुम... तुम मुझे गर्लफ्रेंड बनाने की सलाह दे रही हो?

पारी: (मुस्कुराते हुए, लेकिन दृढ़ता से) मैं तुम्हे सही रास्ता दिखा रही हूँ, भाई. कल तुम जो कर रहे थे, वह न तो तुम्हारे लिए ाचा है और न hi मेरे लिए. मुझे तुमसे घिन आ रही थी... पर मुझे तुम पर दया भी आ रही थी. तुम्हे अपने लिए एक पार्टनर चाहिए, जहां तुम अपनी साड़ी ऊर्जा लगा सको, और तुम्हारा ध्यान सही जगह पर रहे. तुम्हे अब सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि दुनिया देखनी है.

पारी ने माणिक का हाथ पकड़ा.

पारी: माणिक, मैं तुम्हे प्यार करती हूँ, और मैं चाहती हूँ की तुम खुश रहो. पर ख़ुशी के लिए सिर्फ अच्छी नौकरी और पढाई नहीं चाहिए होती. तुम्हे अपनी ज़िन्दगी में प्यार और शारीरिक संतुष्टि की भी ज़रुरत है. जाओ, किसी को ढूंढो.

माणिक कुछ देर तक चुपचाप पारी की तरफ देखता रहा. उसकी शर्मिंदगी dheere-dheere एक नयी समझ में बदल रही थी. पारी के खुलेपन ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया था.

माणिक: (बहुत धीमी आवाज़ में) शायद... शायद तुम सही कह रही हो, पारी.

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माणिक ने पारी की बात पर गंभीर रूप से विचार किया. उसे अपनी पिछली दो निराशाएं (नीरू बुआ का अचानक जाना और जाज का पीरियड्स में होना) याद आयी, जिन्होंने उसकी वासना को गलत दिशा में भटका दिया था. उसने महसूस किया की पारी ने जो कहा, वह सिर्फ बहिन की सलाह नहीं, बल्कि एक ज़रूरी हकीकत थी.

माणिक: (गहरी सांस लेते हुए) तुम सही कह रही हो, पारी. पिछले कुछ दिनों से मैं अंदर से बहुत अशांत (रेस्टलेस) महसूस कर रहा हूँ. बुआ अचानक चली गयी, फिर... (वह जाज का ज़िक्र ताल गया) ...और मुझे कहीं से भी संतुष्टि नहीं मिली. इसलिए शायद मेरा दिमाग भटक गया. मैं जानता हूँ की कल मैंने जो किया वह बहुत बुरा था, और मैं तुम्हे फिर कभी ऐसी शर्मिंदगी नहीं दूंगा.

पारी: (मुस्कुराते हुए, रहत महसूस करते हुए) बस यही सुन्ना चाहती थी मैं. तो अब प्लान क्या है? सिर्फ किताबें? या कुछ और भी?

माणिक: (थोड़ा मुस्कुराते हुए, पर अभी भी झिझक थी) मुझे नहीं पता की लड़कियों से बात कैसे करते हैं... तुम तो जानती हो, मेरे दोस्त भी ज़्यादा नहीं हैं.

पारी: (ख़ुशी से माणिक की पीठ थपथपाते हुए) टेंशन क्यों ले रहे हो? तुम्हारी छोटी बहिन किसलिए है?

पारी तुरंत उठी, अपना फ़ोन उठाया, और एक पॉपुलर डेटिंग अप्प का नाम लिया.

पारी: देखो, यह अप्प बहुत सही है. तुम पहले एक अच्छी प्रोफाइल बनाओ. ऐसी तस्वीर लगाओ जिसमें तुम पढ़ नहीं रहे हो, बल्कि जी रहे हो! और अपने बारे में लिखो... की तुम्हे साइंस और टेक्नोलॉजी पसंद है, पर तुम अपनी ज़िन्दगी में एक मज़ेदार पार्टनर चाहते हो.

माणिक को यह सब सुनकर अजीब लग रहा था, पर वह जानता था की यह ज़रूरी है.

माणिक: डेटिंग अप्प? क्या यह सही रहेगा? मैं... मैं किसी को धोखा तो नहीं दे रहा हूँ?

पारी: (आँखें घूमते हुए) भाई! तुम 21वि सदी में जी रहे हो! और धोखा कैसा? तुम seedhe-seedhe बता रहे हो की तुम कौन हो. बस अपना बायो थोड़ा अट्रैक्टिव बनाना. मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ.

पारी ने माणिक का फ़ोन लिया और तुरंत उसके लिए एक प्रोफाइल बनाना शुरू कर दिया.

पारी: सुनो, मैं यहाँ लिखती हूँ: "गंभीर (सीरियस) दिखने वाला लड़का, जो रात को स्टरगाजिंग (स्टरगाजिंग) करता है और दिन में अपनी बहिन के मज़ाक से परेशां रहता है. दिमाग आइंस्टीन जैसा है, पर दिल ढूंढ रहा है जो उसे थोड़ा रोमांटिक बना सके." कैसा रहेगा?

माणिक यह सुनकर हंस पड़ा. यह पहली बार था की कल की घटना के बाद वह खुलकर हंसा था.

माणिक: (हस्ते हुए) तुम पागल हो, पारी! पर... ठीक है. जैसा तुम्हे सही लगे.

पारी ने माणिक को कुछ सुझाव दिए की उसे किस तरह की लड़कियों से बात करनी चाहिए, और उसे समझाया की यह सब एक प्रक्रिया है. यह बातचीत सिर्फ गर्लफ्रेंड बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके bhai-behan के रिश्ते को भी एक नए, खुले और ज़्यादा ईमानदार स्टार पर ले आयी.

पारी: (गंभीर होते हुए) देखो भाई, मैं तुम्हे प्यार करती हूँ. और मैं तुम्हारी secret-keeping बहिन नहीं बनना चाहती. अगर तुम्हे कोई परेशानी हो, तो मुझसे बात करना. पर, जो मैंने कल देखा, वह दोबारा नहीं होना चाहिए. ठीक है?

माणिक: (प्यार से पारी के सर पर हाथ फेरते हुए) वादा करता हूँ. धन्यवाद, छोटी बहिन. तुमने आज मेरी आँखें खोल दी.

माणिक ने उस दिन से hi अपनी प्रोफाइल पर काम करना शुरू कर दिया, अपने लिए एक स्वस्थ और सही रास्ते की तलाश में.
 
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