Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 31 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 250

मेनका जी ....... ये क्या किया मुझे पूरा गन्दा कर दिया तुमने

सूर्य ..........आपने हे तो बहार निकला न मई तो आपकी मटकी भरने वाला था

मेनका जी ....... आवर अगर उस से मैं प्रेग्नेंट हो जाती तो क्या

सूर्य ....... आपने वो रास्ता पहले हे बंद कर रहा है बुआ सा

मैं जनता हूँ प्रीति के समय जो प्रॉब्लम हुई थी उस से आपकी फूफा जी ने नसबंदी करवा दी थी ताकि फिर से कोई बचा न हो आवर न आपको फिर से वो सब सहना पड़े अब जाइये आवर फ्रेश हो जाएये

मेनका जी ...... आवर तुम तुम्हारा क्या

सूर्य ............ मैं अपने रूम में फ्रेश हो जाऊंगा उम्म्म्महा

सूर्य अपने कपडे पहन वह से निचे अपने रूम की आवर निकल जाता है ..............

अब आगे ............

सूर्य साम को सक्तिपुर हवेली जा कर वह गायत्री जी आवर गीता जी से मिल का अजय से हाल चल जान. कर अभी हवेली लौटा हे था की उसके पापा भी उसके पीछे पीछे हवेली पहहचे थे

सूर्य ...... Hello पापा कैसे है आप

सूर्य शिव से गले लग कर मिलता है जिस से उन्हें भी ख़ुशी होती है

शिव ...... ी ऍम फाइन बीटा एंड यू

सूर्य ....... अच्छा हूँ पापा आवर काम कैसा चल रहा है अपना

शिव ....... ये तो मुझे तुमसे पूछना चाइये बीटा की काम कैसा चल रहा है

सूर्य ...... एक डैम बढ़िया पापा उम्मीद से पहले हे काम पूरा हो जायेगा

शिव ....... अच्छी बात है बीटा ये तो जल्दी हे मैं अपना बिज़नेस भी दिल्ली हे सिफत कर लूंगा कल u.s.a जा रहा हूँ तुम्हारे हॉस्पिटल को देखने

सूर्य ....... कुछ प्रॉब्लम हुई है क्या पापा

शिव ....... नहीं बीटा सब अच्छा चल रहा है कुछ आवर काम भी था जिसके लिया वह जाना पद रहा है तो सोचा हॉस्पिटल का काम भी एक बार देख लेता हूँ

सूर्य ........ Ok पापा जैसा आप ठीक संजो

शिव ........ आवर है बीटा दिल्ली जाने से पहले मुझसे मिल कर जाना

सूर्य ....... वो पापा मुझे आवर स्वीटी को किसी जरुरी काम से रात में हे परीलोक निकलना होगा सायद कुछ टाइम भी लग सकता है

शिव ....... Ok फिर डिनर के बाद बात करता हूँ या फिर तुम चले जाना जब भी एक दो दिन में तुम्हे टाइम मिले u.s.a

सूर्य ....... मेरा जाना जरुरी है क्या पापा

शिव ......... है बीटा वो दरशल तुम्हारे 10 बर्थडे पे मैंने तुम्हारी माँ को बिना बताये कुछ इन्वेस्टमेंट की थी कुछ कंपनी में तब तो उनकी मार्किट वेलु काम थी पैर अभी हाल फ़िलहाल में बहुत अच्छी पोजीशन पे है मैं तो भूल भी चूका था की मैंने इन्वेस्ट किया ऐसा कुछ भी वो तो आज किसी क्लाइंट ने कॉल कर शेयर खरीदने की बात की तब जा कर मुझे पता चला

सूर्य ....... ये तो बहुत अच्छी बात है पापा तो आपने क्या सोचा है शेयर सेल्ल करने है या कुछ आवर

शिव ........ अभी कुछ सोचा नहीं है बीटा वह जा कर शेरे देखता हूँ उसके बाद हे कुछ फैसला करूंगा

सूर्य ....... आपने जहा जहा इन्वेस्ट किया है उसकी जानकारी देना मुझे मैं देखता हूँ की शेरे बेचने चाइये या नहीं आप जा कर फ्रेश हो जाइये मैं जरा बाउजी को देखता हूँ

सूर्य वह से अपने दादा जी की रूम को आवर भाड़ जाता है थोड़ा अँधेरा हो चूका था इस लिया दादा जी इस वक़्त अपने रूम में हे थे

जैसे हे सूर्य रूम की तरफ बढ़ा किसी ने बड़ी तेजी से सूर्य को अंदर की आवर खींच लिया

सूर्य कुछ बोलता उस से पहले हे किसी ने अपने तपते हुए होंठ सूर्य के होंटो से जोड़ दिए

सूर्य मेर्री जी का चेहरा देख बिना किसी विरोध के उनके होंटो का राश पिने लगता है

मेर्री जी सूर्य का हाथ थम अपनी इलास्टिक वाली लेगी में अपनी पेंटी में दाल देती है

सूर्य जैसे हे अपने हाथ से मेर्री जी की क्लीन सेव योनि को टटोलते हुए फुल्ले हुए होंटो के बिच अपनी बड़ी वाली ऊँगली डालता है कच से किसी तरल में भीगते हुए बिना किसी अवरोध के सूर्य की ऊँगली मेर्री जी के कामराश से भीगी उनकी गरम नरम लचीली उमेश भरी गुफा में प्रवेश कर जाती है

सूर्य दूसरे हाथ से मेर्री जी मसल खुली को मसलते हुए उनके होंटो का राषपन करते हुए ऊँगली से हे मेर्री जी को चुदाई करने लगता है खड़े खड़े कुछ हे देर में मेर्री जी हफ्ते हुए सूर्य के होंटो से अलग हो सूर्य की हथेली को दबाते हुए झड़ने लगती है सूर्य की हथेली पूरी तरह से मेर्री जी के योनि राष से भीग चुकी थी

मेर्री जी .......... देखो तुम्हारी वजह से क्या हालत हो गयी है मेरी

सूर्य ....... अब आपको सदी कर लेनी चाइये ममी जी कब तक ऊँगली से खुद को संत करेंगी

मेरी जी सूर्य की पेण्ट के ऊपर से हे सूर्य का अर्श उत्तेजित मुसल थम कर दबा देती है

सूर्य ........ क्या करती हो ममी जी अभी ये जाग गया तो आपको हे भरी पड़ें वाला है है समाजी आप

मेर्री जी ........ मुझे कुछ नहीं पता तुम क्या करते हो या क्या नहीं मुझे आज रात ये चाइये

सूर्य ....... नाईट में तो मैं परीलोक जा रहा हूँ स्वीटी के साथ

मेर्री जी ........फिर मेरा क्या होगा

सूर्य .....एक काम करना आप दीनार के कुछ देर बाद छठ वाले रूम में चली आना जाने से पहले आपकी गर्मी भी निकल दूंगा उम्म्म्मः ठीक है

मेर्री जी ....... उम्म्म्मः ok मैं पहुंचने जाउंगी

सूर्य ....... आवर है अब आपको सदी कर लेनी चाइये मैं ये इस लिया नहीं कह रहा हम की आपसे मन भर गया है या पीछा छुड़ाना चाहता हूँ बल्कि इस लिया की एक पड़ाव पे इंसान को इस रिश्ते में बंद जाना चाइये बाकि जो आपकी इच्छा होगी वही होगा कोई आपको फाॅर्स नहीं करेगा जब तक आपकी इच्छा न हो

मेर्री जी ....... ठीक है पैर याद है न सदी के बाद भी तुम मुझसे प्यार करते रहोगे

सूर्य ...... ुम्मम्हा बिलकुल ये भी कोई कहने की बात है अभी आपकी इसका भी तो मज़ा लेना है हाहाहा

मेर्री जी ....... Ok मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है पैर सदी के बाद वैसे मुझे भी यहाँ तरय करना है

रेखा जी ...... तुम दोनों उदार क्या कर रहे हो डिनर नहीं करना क्या

सूर्य ...... कुछ नहीं बड़ी मम्मी मेर्री जी से कुछ जरुरी बात कर रहा था

रेखा जी ...... जो भी जरुरी बात करनी है वो बाद में कर लेना चलो डिनर करो आ कर सब वेट कर रहे है

सूर्य रेखा जी मेर्री जी तीनो हवेली के भीतर चल देते है

मेर्री जी अपने रूम में जा कर अपनी योनि को साफ़ करती है आवर दूसरी पेंटी पहन कर आती है

वही सूर्य हाथ मुँह दो कर सबके साथ डिनर करने लगता है

सभी बाटे करते हुए डिनर फिनिश करते है

शिव ....... बीटा जरा रूम में आना कुछ बात करनी है

सूर्य ....... आप चलिए पापा मैं आता हूँ कुछ देर में

शिव के जाने के बाद शालिनी जी सूर्य को देखती है

सूर्य ...... वो पापा को कुछ बात करनी थी माँ u.s.a वाले प्रोजेक्ट आवर किसी आवर बारे में

शालिनी जी ....... हम्म्म रात को कब जाने वाले हो तुम लोग परीलोक

सूर्य ....... करीब 11 बजे माँ कुछ काम था क्या

शालिनी जी ...... नहीं कुछ काम नहीं था स्वीटी बीटा तुम कपडे चेंज कर मेरे रूम में आना

किरण ...... जी माँ

रेखा जी ....... वैसे बीटा वह जा क्यों रहे हो साम को हे तो वह से लौटे थे

सूर्य ...... वो बड़ी मम्मी गुरुदेव ने आने का आदेश दिया है मुझे आवर स्वीटी को जरुरी कार्य है तो जाना पड़ेगा

विजय जी ...... वापिस कब आओगे बीटा

सूर्य ......सायद कल सुबह या फिर कुछ टाइम भी लग सकता है फूफा सा

विजय जी .... .... ठीक है बीटा आवर है अपना आवर स्वीटी का ख्याल रखना बीटा मेरा डिनर हो गया है वैसे तुम्हारी बुआ सा को क्या हुआ है जो डिनर पे भी नहीं आई बहार

शालिनी जी आवर किरण की नजर सूर्य पे जा तिकी

सूर्य ....... वो उनको फीवर आया है फुगा जी सुबह तक ठीक हो जाएँगी

विजय जी ....... उसने दवा ली की नहीं चलो मैं हे देखता हूँ

सूर्य ....... जी फूफा जी मेरा भी हो गया

सूर्य जल्दी से शालिनी जी आवर किरण की नजरो से पीछा चढ़ा अपने पापा के रूम में चला जाता है

सूर्य शिव से जानकारी ले कुछ टाइम लेपटॉप पे उन 3 कम्पनीज की जानकारी निकलने लगता है

करीब 15 ,20 मिनट्स सूर्य अपने पापा के साथ लेपटॉप पे दिखते हुए उनसे बात करता

शिव ....... ठीक है बेताब तुम जाओ बाकि मैं देख लूंगा

सूर्य ...... Ok पापा गुड नाईट

शिव ........गुड नाईट बीटा जा कर आराम करो

सूर्य अपने रूम की आवर निकल जाता है जहा किरण ड्रेस चेंगे कर शालिनी जी के पास हे जाने वाली थी

किरण ....... आप आ गए कुंवर जी वो मैं

सूर्य किरण को उठा साथ ले बीएड पे लेट जाता है आवर उसकी निघ्त्य कूल्हों से उठा माध्यम आकर के कूल्हों को मसलने लगता है

किरण ........ ये आप क्या कर रहे है मुझे माँ के पास जाना है आप मेर्री जी के पास जाइये

सूर्य ........ जनता हूँ बस कुछ देर ऐसे हे मेरा पास रहो बस

किरण सूर्य की आँखों में देखते हुए खुद से हे सूर्य के होंटो से अपने कोमल होंठ जोड़ देती है

कुछ देर दोनों एक दूसरे के मुखराश चूसने के बाद अलग होते है

किरण को अपनी योनि आवर नाभि पे सूर्य का काम दंड अकड़ता हुआ मेमसुश होता है

किरण ...... इसको थोड़ा कण्ट्रोल में रखा कीजिये बुआ सा की हालत ख़राब करने के बाद भी इसे चैन नहीं आया क्या

सूर्य ........ इसमें मेरी कोई गलती नहीं बुआ ने हे पहल की थी तो मैं क्या करता

किरण ........ उम्म्म्मः अब मैं चलती हम मेर्री जी ऊपर पहुंचने गई है थोड़ा जल्दी करना हमें परीलोक भी जाना है

सूर्य ......ह्म्म्मम्म ok मैं चलता हूँ जाते जाते सूर्य किरण के घोष उभारो को सायला देता और
बहार की आवर निकल गया

किरण ....... ये कभी नहीं सुधरने वाले पैर इनका इस तरह इन्हें सालाना अच्छा भी लगता है अब फिर से पेंटी बदलनी होगी मुझे

सूर्य जब छठ पे पहुंचा तो उसे मेर्री जी कही नजर नहीं आई तो वह सीधा रूम की आवर भाड़ गया

रूम में पंहुचा तो मेर्री जी शार्ट निघ्त्य में कड़ी खुली खिड़की से बहार देख रही ठु सूर्य अपना ट्राउजर आवर t-shirts निकल चुके से मेर्री जी के पीछे पहुंचा

मेर्री जी ...... आ गए तुम सूर्य

सूर्य मेर्री जी को पीछे स्व हे अपनी बहो में जकड लेता है






सूर्य ........ उम्मम्मम नीस परफ्यूम ममी जी अब आप इतना याद करोगी तो आना तो पड़ेगा हे न

सूर्य बात करते करते मेर्री जी की गर्दन पे चुम्बन करते हुए उनकी 36 की गोश्त से भरपूर चूचियों को थम उन्हें सहलाने लगता है

मेर्री जी ............ उम्म्म्मः पीछे कुछ चूब रहा है

मेर्री जी अपना हाथ बढ़ा सूर्य का लैंड अंडरवियर के ऊपर से हे पकड़ कूल्हों की लकीर पे फिरने लगती है






सूर्य मेर्री जी को अपनी तरफ पलट उनकी निघ्त्य उनके गले निकल उन्हें नंगी कर किश करने लगता है

सूर्य ........ उम्मम्मम ज्यादा टाइम नहीं है हमारे पास

मेर्री जी ....... कभी तो प्यार से टाइम निकल कर वक़्त गुजरा करो

सूर्य मेर्री जी को लिए पास में पड़े सोफे पे आ लेता मेर्री जी सूर्य की अंडरवियर निकल सूर्य के टैंगो के बिच बेथुने लगती है तो सूर्य अपने ऊपर खींच कर 69 पोजीशन पे ले आता है

सूर्य ...... इस से एक साथ जल्दी हे दोनों त्यार हो जायेंगे

मेर्री जी ..... हम्म्म

मेर्री जी सूर्य के चेहरे के दोनों तरफ अपने फेयर फैला अपनी हलके बालो वाली फुल्ली हुए छूट सूर्य के बिलकुल नाक के पास कर देती है आवर खुद सूर्य के लैंड को मुँह ले आइसक्रीम के जैसे चूसने लगती है

मेर्री जी की योनि गंध सूर्य के नाक से होते हुए सांसो में भर सूर्य को उत्तेजित करने लगती है






सूर्य मेर्री जी के खुल्हो को विपरीत दिशा में अपने हाथो से फैलता हुआ मेर्री जी की गरम गुलाबी छूट पे अपनी जइब फिरते हुए फुल्ले हुए लिप्स को अपने होंटो में कैद कर चाटने चूसने लगता है

मर्री जी की योनि से निकल रहे हलकी हलकी कामराश की नमकीन बुँदे सूर्य बड़े मज़े से चूसने के साथ हे मेर्री जी के गुदाद्वार में अपनी एक ऊँगली से हल्का हल्का खुरचने लगता है इस से मेर्री जी को कितना आनंद मिल रहा था उसका अंदाजा तो वही लगा सकती थी पैर उसका असर मेर्री जी की छूट के फादफाते होंठ सूर्य को आवर उक्षा रहे थे

कुछ हे पालो में मेर्री की छूट से वो हल्का सफ़ेद तरल बहता हुआ सूर्य के चेहरे पे कुछ बुँदे टपका देता है

सूर्य मेर्री जी को अपने ऊपर से हटा उन्हें वही सोफे से उठा बीएड पे लिटा देता आवर खुद उनकी जांघों के बिच बेथ अपने मीठे तगड़े लैंड को मेर्री जी की कामराश से भीगी छूट पे मेर्री जी के थूक से लिसड़ा लैंड टिका अंदर पुस करता है






मेर्री जी ....... उम्म्म्मह्ह्ह्ह आराम से ये बहुत हैवी है मेरे लिया उम्म्म्मः हर बार मेर्री पुसी को चिर डालता है

सूर्य. ........... आपने सोचा है ममी जी क्या होगा जब आप मन जी से संतुष्ट नहीं हो पाओगी या उन्हें आप पे संदेह होगा तो

मेर्री जी ....... नहीं उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नहीं चलना चाइये सूर्य ओह्ह्ह्हह्ह मार डाला हर बार मैं हे बेवकूफ बन जाती हूँ

सूर्य मेर्री जी को किश करते हुए उनकी बड़ी बड़ी चूचियों के अकड़े हुए पिंकिश निप्पल्स को उमेठने लगता हाउ जिस से उन्हें दर्द में कुछ आराम मिलने लगता है

जैसे जैसे छूट की पकड़ लैंड पे से काम होने लगती है सूर्य डेरी डेरी मेर्री जी की चुदाई सुरु कर देता है






सूर्य ........ उम्म्म्मः ममी जी आप बहुत गरम हो वाकई में अभी कुछ देर पहले हे आपने खुद को डिस्चार्ज किया था फिर से इतनी जल्दी गरम हो गई

मेर्री जी ...... उम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तोडा तेज सूर्य अह्हह्ह्ह्ह तभी तो कहती हूँ कभी अच्छे से टाइम निकल कर मेरी साडी गर्मी निकल दो तुम्हारे मां जी से ये गर्मी नहीं निकलने वाली उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह फास्टर सूर्य फास्टर ी ऍम किंग नेक्स्ट टाइम

सूर्य मेर्री जी के पेअर को गुमा कर खुद मेर्री जी के बैक साइड में आ उनकी हिलती हुई मोती चूचियों को थम पूरी तेजी से सखे मरने लगता है






मेर्री जी ....... उफ्फ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह एसससस एससससस सूर्य फ़क में हार्ड प्लेसेस ओह्ह्ह्हह्ह गॉड ी ऍम किंग बेबी उम्मम्मम अहहहहजहह फ़क में लिखे बीच

मेर्री जी की पता नहीं की वो इस वक़्त क्या बोल रही है चरम सुख के नशे में मेर्री जी ने अनजाने में हे सूर्य को हवा दे दी थी

मेर्री जी की छूट से बहते कामराश सूर्य के लैंड से होते हुए उसके अंडकोष को भुट्टा हुए दोनों की जंगो के बिच आ पंहुचा

सूर्य कुछ पल मेर्री जी को अपने स्खलित होने का मज़ा लेने दिया जैसे हे मेर्री जी की सांसे संत हुए सूर्य ने उसे तरह लेते लेते मेरी जी को अपने ऊपर ले लेता है

मेर्री जी. ..... मेर्री जी अह्ह्ह्हह तुमने तो मुझे द्र हे दिया सूर्य

सूर्य ....... अब आपकी बारी त्यार हो जाइये






मेर्री जी के कमर को दोनों हाथो से थम सूर्य अपनी कमर उचकते हुए लैंड को मेर्री जी की छूट में अंदर बहार करने लगता है

मर्री जी भी खुद से अपने कूल्हों को सूर्य के नाभि पे जोर जोर से उछाल ते हुए सूर्य के लैंड को पूरी गहराई से अंदर बहार करने लगती है

इसमें मेर्री जी को हलकी तकलीफ भी हो रही थी जब जब सूर्य का मोटा सूपड़ा उनकी बच्चेदानी के मुँह पे अपने होने का अहसास करवाता

पर जल्दी हे ये दर्द मज़े में बदल गया जब सूर्य का टोपा मेर्री जी की गर भाष्य के भीतर परवेश करता तो मेर्री जी को जो आनंद प्राप्त होता वो अकल्पनीय था जैसे वो बदलो में शेयर कर रही हो किसी हवा के जोंखे की तरह






इस बार सूर्य के लैंड पे मेर्री जी की छूट की पकड़ काफी मजबूत थी सूर्य को भी अपने लैंड को अंदर बहार करने में जोर आजमाइशी करनी पद रही थी कारन था मेर्री जी के गर्भाशय की सूर्य के सूपड़ा पे मजबूत पकड़ होना मेर्री जी अचानक से बुरी तरह कपङे लगी आवर डैम से सूर्य के सीने पसर जाती है सूर्य को ऐसे लगा जैसे गरम फेल किसी ने उसके लिंग मुंड पे गिरा दिया हो अपनी लिंग पे इतना आदिक तरल मह्सुश कर सूर्य मेर्री जी की योनि आवर अपने लिंग को चेक करता है तो वह काफी आदिक मात्रा में मेर्री जी की योनि से निकला कामराश था

अभी भी रह रह कर सूर्य के लिंग मुंड पे मेर्री जी की बच्चेदानी अपनी पकड़ बना रही थी तो कभी ढीला छोड़ रही थी

सूर्य कुछ देर ुशी तरह लेता रहा ताकि मेर्री जी अपने चरम का पूरा मज़ा ले सके सूर्य अपने लिंग की उभरती नाशी आवर सुफेदे में आ रहे फुलाव को मेर्री जी की छूट में भी मह्सुश कर प् रहा था

कुछ देर बाद सूर्य मेर्री जी को अपनी बगल में वतर्ते हुए उन्हें घोड़ी बना देता है मेर्री जी कुछ बोलती उस से पहले हे सूर्य उनके हे कामराश से भीगा हुआ लिंग पूरा एक हे बार में मेर्री जी के गुफा में थोक देता है

मेर्री जी जैसे अभी भी किसी मज़े में कोई हुई थी जो सूर्य के इस तरह के पर्वत से वास्तविकता में लौटी

मेर्री जी ........ मुझे क्या हुआ था सूर्य

सूर्य .........उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह कुछ नहीं काफी समय से आपने सेक्स नहीं किया था तो आज एक साथ आप मल्टिपल डिस्चार्ज हो गयी थी जिस कारन आप कही आवर हे पहुंचने गयी थी मैंने भीबापको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समजा पैर जब आप काफी देर बाद भी उस मज़े से बहार नहीं निकलो तो मुझे ऐसा करना पड़ा






अगले 10 मिनट्स सूर्य ने मेर्री जी पे कोई रहम नहीं किया इस बिच एक बार फिर से मेर्री जी डिस्चार्ज हुई पैर इस बार जैसे कुछ हे बुँदे उस अमृत की टपकी थी

मेर्री जी ....... अह्हह्ह्ह्ह डेरी सूर्य मेर्री कमर

सूर्य ....... अह्हह्ह्ह्ह बस कुछ मिनट्स ममी जी मैं भी डिस्चार्ज हो रहा हूँ

मेर्री जी ...... उम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अंदर नहीं सूर्य अभी सेफ टाइम नहीं है मेरा उम्मम्मम बहार हे निकल न

सूर्य मेर्री जी की बात सुन कुछ हे सखे मरने के बाद मेर्री जी की छूट से कामराश से भीगा लैंड निकल कर बीएड से निचे उतर जाता है

मेर्री जी बीएड से निचे उतर सूर्य को मुठ मरते हुए उसके लैंड को मुँह में भर चूसने लगती है

एक मिनट्स बाद हे सूर्य ने एक के बाद एक पिचकारी मेर्री जी के मुँह में छोड़ने लगता है

मेर्री जी कुछ स्पर्म तो सूर्य का निगल जाती है फिर भी बहुत सा वीर्य साइड से निकल निचे गिरने लगता है






आखरी बून्द तक मेर्री जी सूर्य के लैंड से चूस कर खली कर देती है

सूर्य वही बीएड पे फज़र लम्भी कभी सांसे लेने लगता है

मेर्री जी अपने होंटो पे लगे वीर्य को अपनी ऊँगली ये पे ले कर चूस लेते है

सूर्य ....... अब मुझे जाना होगा ममी जी आप यही नहाने के बाद रेस्ट करना आवर है इसकी थोड़ी सिकाई कर लेना नहीं तो सुबह चल नहीं पाओगी आप अभी आपको यहाँ ज्यादा दर्द नहीं है पैर हाला हल्का सूजन आना सुरु हो चूका है मैं निचे फ्रेश हो कर निकल रहा हूँ

मेर्री जी ......... सूर्य वापिस आने के बाद बाउजी से बात कर लेना

सूर्य ........ किस बारे में ममी जी

मेर्री जी ....... मैंने तुम्हारी बात पे सोचा तो मुझे भी लगा की मुझे सदी कर लेनी चाइये वैसे भी अभी तुम्हारी कुछ दिन बाद सदी है उसके बाद मैं सदी करुँगी पैर अपना प्रॉमिस याद रखना

सूर्य ...... Ok मैं आ कर आपसे बात करूँगा तब तक आप अच्छे से सोच लीजिये

मेर्री जी ........ है ये भी ठीक है

सूर्य मेर्री जी के माथे को चुम उनकी दोनों चूचियों को प्यार कर निचे चला जाता है आवर नहाने के बाद कपडे बदल शालिनी जी के रूम में जहा स्वीटी थी

सूर्य ......... स्वीटी जाओ जा कर रेडी हो जाओ हमें निकलना है

किरण ....... Ok मैं अभी आती हूँ कुंवर जी

सूर्य ........ माँ हम लोग सुबह तक लौट आएंगे सायद

शालिनी जी गेट लॉक कर सूर्य को किश करने लगती है

शालिनी जी ....... मुझे तुम्हारे लौटने का इन्तजार रहेगा सूर्य जल्दी आना

सूर्य ....... Ok माँ मैं जल्दी हे आ जाऊंगा आप सबका ख्याल रखना आवर है कल पापा u.s.a जा रहे है तो आप भी हो आइये उन्हें भी अच्छा लगेगा आवर आपको भी मन मत करना

शालिनी जी ......... क्या तुम सच में चाहते हो की मैं ऐसा कृ


सूर्य ....... जनता हूँ आप क्या कहना चाहती है पैर माँ वो आपके पति है उनका भी हक़ है मैं ये नहीं कहता की मैं आपसे प्यार नहीं करता पैर पापा वो भी आपसे बहुत प्यार करते है आप समाज रही है न

शालिनी जी ........ ठीक है तुम कहते हो तो मैं उनके साथ पुरे मन से जाउंगी ख़ुशी ख़ुशी पैर तुम्हे बुरा नहीं लगेगा

सूर्य ......... माँ अगर ये कहूं की नहीं तो जूठी होगा पैर उनका हक़ आपके प्यार पे मुझसे ज्यादा है है माँ मंटा हूँ की वो अब पहले की तरह अपना प्यार जाहिर नहीं करते पैर पहले वह हम तीन हे लोग थे पैर यहाँ पूरा परिवार है ऐसे में उनके अभी पहले से आदिक जीजाक आ चुकी है पहले जहा मर्ज़ी वो आप पे हक़ जताते थे जो आपको भी पसन् था पैर अब ऐसा मुमकिन नहीं फिर यहाँ के बिज़नेस के चलते वो ज्यादा बिजी रहने लगे है

शालिनी जी ....... ठीक है ठीक है समाज गयी तुम आराम से हो कर आओ सूर्य

शालिनी जी जा कर गेट खोल देती है कुछ हे देर बाद किरण भी आ जाती है

किरण ........ Ok माँ हम चलते है आप अपना ख्याल रखना इनका मैं रख लुंगी वह यहाँ आप रख लेना हेहेहे

शालिनी जी ........ तू बहुत शैतान होती जा रही है स्वीटी वह आओ फिर बताती हूँ तुम्हे तो मैं

सूर्य किरण शालिनी जी से गले मिल परीलोक के लिया निकल गए

परीलोक ...........

संध्याकाळ को जब सूर्य गुरुदेव से आवर देवसफ्फी नियों से भें कर के गया था उसके कुछ देर बाद हे नियों भी गुरुदेव से आज्ञा ले ड्रैगन लोक लौट जाते है

गुरुदेव नियों के जाने के बाद से हे ध्यान में लीं हो जाते है जो अभी तक भी ध्यान में हे लीं थे जैसे नहे रात्रि होने का आभाष तक न हुआ हो

सूर्य किरण सीधा सूर्यगढ़ से यही गुरुदेव के समक्ष पहहचे थे दोनों परबु को परनाम कर ध्यान में बे थे गुरुदेव को में परनाम कर एक आवर आसान लगा लेते है

कुछ देर बाद गुरुदेव ध्यान से बहार निकलते है

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य पुत्री किरण आ गए आप लोग

सूर्य ........ जी गुरुदेव हमें विलम्भ तो नहीं हुआ न गुरुदेव आने में

गुरुदेव .......नहीं पुत्र हम भी तुम्हारे जाने के बाद से हे ध्यान में थे अभी तुम्हारे सामने हे ध्यान से बहार निकले है पुत्र सूर्य पुत्री किरण हमारे समीप आओ पुत्री

किरण वह से उठ कर गुरुदेव के सामने जा बैठी

गुरुदेव किरण के हाथ को थम उसकी नबज चेक करते है कुछ देर बाद ख़ुशी से उनका चेहरा खिल उठा

सूर्य ........क्या हुआ गुरुदेव सब ठीक तो है न

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य सब मंगल हे मंगल है जिस ऊर्जा का आभाष तुम आवर पुत्री किरण कर रहे थे वो दरशल तुम दोनों के आने वाले पुत्र की ऊर्जा है पुत्र सूर्य पुत्री किरण गर्हब से है वो माँ बनने वाली है आवर तुम पिता बनने वाले हो पुत्र

सूर्य ........ क्या सच में गुरुदेव

सूर्य आगे बढ़ ख़ुशी से किरण को गौड़ में उठा कर जैसे नाचने हे लगता है

गुरुदेव .......... पुत्र पिता अभी बने नहीं हो बनने वाले हो अभी परहम मास्स हे चल रहा है पुत्री किरण का

सूर्य ........... मैं बता नहीं सकता गुरुदेव मैं कितना खुश हूँ थैंक यू स्वीटी तुमने ये ख़ुशी के पल दिए ख़ुशी का उस अनमोल खजाने से मेरी झोली खुशियों से भर दी

किरण ........ कुंवर जी ये हम सब के लिया बहुत बड़ी ख़ुशी है है माँ को पता चलेगा तो वो कितनी खुश होंगी

गुरुदेव ......... अभी किसी को भी बताना उचित नहीं पुत्री समय यात्रा पूर्ण कर लौट आओ फिर इस विषय में सभी को बताना उचित रहेगा

सूर्य ........ जी गुरुदेव जैसा आप कहे

गुरुदेव ....... पुत्र अपना वो लॉकेट देना जो देवी पर करती ने तुम्हे दिया था

सूर्य अपना लॉकेट गले से निकल गुरुदेव को दे देता है

गुरुदेव दोनों हाथो के मध्य लॉकेट को रख कोई मंत्र दोहराते है जिस से उस लॉकेट से ऊर्जा निकलने लगती है

गुरुदेव लॉकेट को वही जमीं पे रख पीछे हैट जाते है






गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य पुत्री किरण आगे बढ़ो आवर इस दिव्या लॉकेट को एक साथ स्पर्श करो

सूर्य किरण गुरुदेव का आदेश मन वैसा हे करते है तो दोनों के हठी पे किसी तरह का पार्द अशी यन्त्र बनने लगता है






गुरुदेव ........ जो कोई भी इस लॉकेट के माध्यम से भूतकाल या भविष्य काल में जायेगा ये प्रदर्शित यन्त्र उसे पंहुचा देगा इस के बिना कोई भी इस लॉकेट के माध्यम से समय यात्रा नहीं कर सकता पुत्र हमेशा के लिया तुम दोनों इस से जुड़ चुके हो पुत्र किन्तु इसका मतलब ये नहीं की तुम जब चाहो समय यात्रा कर समाया चक्र को प्रभावित करो

सूर्य ........ जी गुरुदेव हम कभी भी इसका अनुचित प्रयोग नहीं करेंगे गुरुदेव बिमा आपकी इच्छा या आज्ञा के हम इसका प्रयोग नहीं करेंगे हम वचन देते है आपको

गुरुदेव ......उचित है पुत्र अब तुम अपने लॉकेट को आदेश दो की समय यात्रा प्रणाली सुरु करे

सूर्य ....... जी गुरुदेव

सूर्य लॉकेट को आदेश देता है तो उसमे से एक तेज निईली राग की रौशनी निकलती है आवर वह जमीं पे समय यन्त्र चक्र बनने लगता है






कुछ हे देर में समय यन्त्र पूर्ण हो जाता है आवर लॉकेट सूर्य के गले में आ जाता है

कुछ हे देर में समय यन्त्र चक्र बहुत तेजी से चमक ने लगता है






सूर्य........ गुरुदेव ये क्या हो रहा है

गुरुदेव ......... पुत्र समय यन्त्र चक्र अपनी अंतिम चरण में है
बस कुछ पल की प्रतीक्षा है फिर समय द्वार खुल जायेगा

ोउ जैसा गुरुदेव ने कहा कुछ हे समय बाद समय यन्त्र चक्र से एक ऊर्जा निकल मंदिर के दिवार से तक रति है तो वह पे समय द्वार उत्पन्न हो गया






गुरुदेव ........ पुत्र तुम्हे ये लॉकेट भूतकाल में स्वयं को देना है आवर जो घटना घाट चुकी है उसे बदलने की चेष्टा न करना किन्तु इतना स्वयं को समजा देना की आगे ऐसा नरसंघार न हो इसके लिया ये दिव्या लॉकेट उसका मार्गदर्शन करेगा कर्म अनुसार दंड देने में खुलेआम कत्ले आम कर केवल भय भयापत होता है अगर उन्हें सुंदररना है तो पृथ्वीलोक के दंड वीरान अनुसार दंड दो सर्वप्रथम दंडविधान की कमियों को उसकी खामियों को दूर करो वह के सासको ( शासन करने वाले नेता ) को सुवर्ण होगा तभी प्रजा में सुधर आएगा अब जाने का समय हो चूका है पुत्र

सूर्य किरण .......जी गुरुदेव

सूर्य किरण का हाथ थम आगे बढ़ा बीटा की समाया यन्त्र से ेल सेंड वाच सूर्य के हाथ में आ जाती है






गुरुदेव ......... पुत्र ये समय यन्त्र जो तुम्हारे हाथ में है इसमें जो रेट है उतना हे समय तुम वह रह सकते हो इस से आदिक तुमने वह एक पल भी वयतीत किया तो उसका प्रभाव समय चक्र पे आदिक होगा

सूर्य ........... जी गुरुदेव परनाम

किरण .......... परनाम गुरुदेव

गुरुदेव .......... सफल मनोरथ भाव पुत्र सूर्य पुत्री किरण ईश्वर तुम दोनों के मंतव्य को पूर्ण करे

सूर्य आवर किरण दोनों एक दूसरे का हाथ थम समय द्वार में प्रवेश कर जाते है

उनके जाने के कुछ 3,4 मिनट्स बाद हे समय द्वार बंद हो जाता है आवर समय यन्त्र भी की ऊर्जा भी समय यन्त्र घेरे के मध्य भाग में केंद्रित हो जाती है

गुरुदेव ........ समय द्वार बंद हो चूका है अर्थात पुत्र सूर्य पुत्री किरण भूतकाल में पहुंच चुके है ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............................
 
अपडेट 251

सूर्य ........... जी गुरुदेव परनाम

किरण .......... परनाम गुरुदेव

गुरुदेव .......... सफल मनोरथ भाव पुत्र सूर्य पुत्री किरण ईश्वर तुम दोनों के मंतव्य को पूर्ण करे

सूर्य आवर किरण दोनों एक दूसरे का हाथ थम समय द्वार में प्रवेश कर जाते है

उनके जाने के कुछ 3,4 मिनट्स बाद हे समय द्वार बंद हो जाता है आवर समय यन्त्र भी की ऊर्जा भी समय यन्त्र घेरे के मध्य भाग में केंद्रित हो जाती है

गुरुदेव ........ समय द्वार बंद हो चूका है अर्थात पुत्र सूर्य पुत्री किरण भूतकाल में पहुंच चुके है ...............

अब आगे ...........

दिल्ली ........ ( पास्ट अपडेट 239 ) ........

सूर्य अभी सोफी राधिका जी सुनिधि के साथ खाना खाने के बाद अपने रूम में आ कर कपडे बदल बीएड पे आँखे बंद कर लेता था

कुछ देर बाद उसे नींद आ जाती है अभी सूर्य को सोये कुछ हे मिनट्स हुए थे की सुनिधि भी ढाबे पांव रूम लॉक कर सूर्य की बगल में आ लेती

बीएड पे हुए हलचल और अपने हाथ आवर सीने पे भर मह्सुश कर सूर्य एक पल के लिया आँखे खोल सुनिधि को देखता है आवर मुस्कुराते हुए फिर से आँखे बंद कर लेता है





सूर्य द्वारा अपना सर सहलाने पे सुनिदि सूर्य के सीने लगे कब नींद की वादियों में डूबती चली गई

सूर्य भी फिर से नींद में चला गया अभी सूर्य को सोये हुए कुछ हे देर हुए थे की रूम के भीतर एकाएक जैसे सब कुछ रुक सा गया हो

तभी रूम में अचानक से दिवार से नीली सफ़ेद रौशनी निकलने लगती है





जो कुछ ऐसे थी कुछ हे देर में वह एक ब्लू रौशनी से बड़ा हॉल ( छेद ) बन जाता है

तभी उसमे से फ्यूचर सूर्य और किरण एक दूसरे का हाथ थामे बहार निकलते है

( यहाँ फ्यूचर सूर्य को f.surya आवर वर्तमान सूर्य को v.surya लिखूंगा ताकि दोनों में कन्फूसिओं न हो )

किरण .......... ये तो हमारा रूम है दिल्ली वाला

सूर्य की नजर तो सीधे बीएड पे अर्की थी जहा इस वक़्त वही सोया हुआ था सुनिदि को बहो में भरे

किरण ....... तो आने इसे भी लपेट लिया

F.surya ........ मैंने कुछ नहीं किया स्वीटी ये सुनिदि हे मेरे सोने के बाद आई थी उस टाइम मैं थका हुआ था इस लिया कुछ कहा नहीं

किरण ....... आपको बाद में देखती हूँ अभी जिस काम के लिया यहाँ आये वो तो पूरा करे सेंड वाच सुरु हो चुकी है ये समय इतने हे समय के लिया रुकेगा उसके बाद हमारा यहाँ रहने स समय चक्र पे प्रभाव पड़ेगा

F.surya सेंड वाच को देखता है जिस से सेंड (मिटटी ) एक भाग से दूसरे भाग में जनि सुरु हो चुकी थी

F.surya आगे भाड़ v.surya को उठता है

v.surya जैसे हे अपनी आँखे खोलता है सामने खुद के हे अक्ष को देख सपना समाज कर फिर से आँखे बंद कर लेता है

f.surya ...... अबे गधे उठ मैं सपना नहीं हूँ चल खड़ा हो जल्दी टाइम नहीं है

f.surya के कमजोर कर उठाने पे v.surya सुनिदि को साइड में लेता उठ बीटा किरण को देखते हे उसका चेहरा कुछ पीला पढ़ने लगा था भले हे किरण ने पूरी फ्रीडम दी थी पे आँखों के सामने किसी आवर लड़की के साथ सोच कर किरण का भी पारा थोड़ा चढ़ा हुआ नजर आ रहा था

v.surya ........ ये जरूर कोई सपना है

f.surya ......... अबे ये कोई सपना नहीं है मैं फ्यूचर से आया हूँ स्वीटी के साथ उठ जल्दी हमारे पास ज्यादा टाइम नहीं है

किरण ....... कुंवर जी हमारे पास ज्यादा टाइम नहीं है अगर हम ज्यादा टाइम यहाँ रुके तो फ्यूचर बदलना सुरु हो जायेगा

v.surya ....... क्या सच में तुम फ्यूचर से आये हो पैर कैसे न मेरे पास ऐसे कोई सकती है न स्वीटी तुम्हारे पास फिर ये कैसे संभव हुआ आवर आप दोनों को फ्यूचर से यहाँ भूतकाल में क्यों आना पड़ा

f.surya ......... तुम्हारी वजह से ी मैं मेरी तुम्हारी वजह से आना पड़ा हमारे असुर अंश दंड नायक निर्भयासुर के कारन फ्यूचर से मुझे भूतकाल में आना पड़ा उसने जो नरसंघार मचा रखा है उसे रोकना होगा

v.surya ........ तुम्हारा कहने का मतलब है की सभी मुजरिमो को उनके किये पापो का दंड न दे कर उन्हें उनकी मर्ज़ी की करने दूँ

f.surya ....... क्या मैं सच में इतना बेवकूफ हूँ स्वीटी अबे गधे मैंने ये नहीं कहा की उन्हें दंड न दो उनके किये पापो का पैर जो तुम खुलेआम लाइव टीवी पे उनकी गर्दन ुधा रागे हो वो सब रोकना होगा उन्हें मौत की सजा दे कर तुम उन्हें एक तरह से मुक्ति दे रहे हो जो पर करती के नियमो के विरुद्ध है

किरण .......... कुंवर जी आप उन्हें दंड दीजिये पैर जिनकी मृत्यु का समय पूर्ण नहीं हुआ है उन्हें समय से पहले मृत्युदंड दे कर एक तरह से आप उनके पापो से उनके दंड से मुक्त कर रहे है जो उचित नहीं उन्हें जिन्दा रहते हुए अपने किये पापो का दंड भोगा होगा

v.surya ....... पैर ये मैं कैसे तय करूंगा की किसी मृत्यु मिलनी चाइये आवर किसी जिन्दा रख उसके पापो की सजा देने है आवर किस अनुपात में कोनसी सजा

f.surya ........ इसके लिया हे तो फ्यूचर से हम आये है

किरण ...... कुंवर जी जल्दी कीजिये हमारे पास 2 मिनट्स से ज्यादा समय नहीं है फ्यूचर में लौटने के लिया

सूर्य ......... तुमने जो इंसानी में अपना भय ब्यापत किया है उसे ख़तम करना होगा आवर उसके लिया तुम जो मुंबई में करने वाले हो उसे रोकना होगा गुंडई के स्थान पे पोलिटिकल लीडर के पीछे लगो उन्हें सुधारो सिस्टम में सुधर होगा तो बाकि सभी अपने आप सुधरने लगेंगे

v.surya ........ ये इतना आसान नहीं है तुम भी जानते हो यहाँ हर तरफ घुस खोरी लूट मार है

f.surya ....... है मैं जनता हूँ पैर बून्द बून्द से सागर बनता है ुशी तरह तुम्हे एक एक कर सिस्टम में लगी दीमक को साफ करना होगा

v.surya ........ ठीक है पैर कैसे

F.surya सूर्य अपने गले में पौने वो दिव्या लॉकेट निकलता है

f.surya ....... ये दिव्या लॉकेट इसमें तुम्हारी सहायता करेगा किसने क्या सजा देनी है आवर किसी मृत्यु ये उसमे तुम्हारा मार्गदर्शन करेगा ये माता प्रकर्ति का उपहार स्वरुप दिया दिव्या लॉकेट है इसे पहन लो इसे खुद से कभी भी अलग मत करना समाज गए

v.surya ....... पैर ये आपको मिला कैसे

F.surya ......... तुम्हारे द्वारा किये पर करती के नियमो के उलंगन के बाद मिले दंड के साथ ये उपहार माता पर करती ने भेंट स्वरुप दिया था ताकि फिर से कोई नियम भांग न कर सकू आवर दंड न भोगा पड़े इसे पन्नो आवर खुद भी मह्सुश करो जो मैंने उन 24 हर में भोगा है तभी तुम्हे समाज आएगा

किरण ...... कुंवर जी समय समाप्त हो चूका है

दीवार पे बने समय द्वार की ऊर्जा अचानक से सेंड वाच का समय पूर्ण होते हे बढ़ने लगती है

v.surya ........ क्या इस से मैं भी समय में जा सकता हूँ

f.surya ........ गुरुदेव को मैंने वचन दिया अथार्त तुमने की कभी भी िद्या अनुचित प्रयोग नहीं करोगे वचन भाग किया तो सब कुछ खो डोज

किरण सूर्य का हाथ थामे समय द्वार की आवर भाड़ गई

f.surya ....... अपना ठरकी पैन काम कर सेल मुझसे संभाला नहीं जाता है

v.surya ........ भाई फ्यूचर तुम हो कांड तुम करोगे आवर सलाह मुझे डोज

फिर से समय सामान्य रूप से सुरु होने पे किरण f.surya को लिए हुए तेजी से द्वार की आवर भाड़ जाती है

किरण ....... समय सामान्य हो चूका है हमें जल्दी से ामय द्वार में प्रवेश करना होगा

किरण f.surya को लिया समय द्वार में प्रवेश कर जाती है आवर समय द्वार बंद हो जाता है

ीदार जैसे हे v.surya ने लॉकेट को माथे से लगा कर गले में दर्जन किया उसे एक झटका लगता है आवर उसे वो सब पीड़ा मह्सुश होने लगती है जो f.surya को देवी प्रकर्ति ने दी थी प्रकर्ति के नियम का उलंगन करने पे साथ हे लॉकेट से निकलो ऊर्जा v.surya को घेर लेती है कुछ देर पुरे कमरे में हरी ऊर्जा विद्मान रहती है डेरी डेरी जब ऊर्जा काम हुई तो सूर्य की आँखे भी खुल चुकी थी

v.surya ........... क्या क्या झेलना है f.surya ने ाचा हुआ मुझे दंड भोगने से पहले हे बचा लिया उसने ( V.surya लॉकेट को चुम कर ) तो आज से सभी को तुम्हारे हिसाब से हे दंड दूंगा अब तो हम एक है संभल लेना

v.surya की बात से एक बार लॉकेट ग्रीन ऊर्जा से चमकता है आवर फिर नार्मल हो जाता है जैसे की वो उसकी बात से पूरी तरह से सहमत हो चूका हो

v.surya फिर से सुनिधि के पास लेट जाता है आवर उसे अपने सीने पे लेते हुए हलके से उसके होंठ चुम लेता है

v.surya ....... तुम्हारी खवाहिश भी एक दिन जरूर पूरी होगी बस इन्तजार करना कुछ वक़्त

v.surya आँखे बंद कर लेट जाता है लॉकेट से एक रेड ऊर्जा किरण निकल v.surya के मस्तिष्क में सम्माहित हो जाती है

परीलोक ........... ( वर्तमान समय )

परीलोक मंदिर समय यन्त्र चक्र के सुरु होते हे गुरुदेव उत्सुकता से दीवार की आवर देखते है जहा पहले समय द्वार बना

किन्तु जल्दी हे उनकी उत्सुकता चिंता में बदल जाती है

जब समय यन्त्र चक्र से निकली ऊर्जा दीगर से तराने के बाद भी वह समय द्वार न बन पाने से

गुरुदेव........ अवश्य समय चक्र प्रभावित हुआ है अवश्य समय यात्रा में चूक हुई है पुत्र सूर्य से

तभी दिवार पे समय द्वार उत्पन्न होता है पैर साथ हे जैसे समय बहुत आदिक गति से चलने लगता है

गुरुदेव ....... जिसका भय था वही हुआ

कुछ पल बाद समय द्वार से किरण आवर सूर्य बहार निकलते है उनके बहार निकलते हे सूर्य के गले में वो लॉकेट फिर से आ जाता है आवर समय द्वार बंद हो जाता है आवर उसकी ऊर्जा समय यन्त्र चक्र में चली जाती है

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य ये तुमने क्या किया पुत्र हमने तुम्हे सचेत किया था की निर्धारित समय से पूर्व तुम्हे लौटना होगा किन्तु तुमने

सूर्य ...... मुझे क्षमा कर दीजिये गुरुदेव बस एक पल की मुझसे चूक हो गई

गुरुदेव ....... पुत्र तुम्हारे उस एक पल को समय चक्र ने एक दिवश में परिवर्तित कर दिया

सूर्य .......मुझे क्षमा करे गुरुदेव

गुरीदेव ....... पुत्र मेरे क्षमा करने से क्या होगा क्या इस एक दिवश में जो परिवर्तन हुआ है उसे बदला जा सकता है नहीं पुत्र अब जो घटना घाट चुकी है उसे नहीं बदल सकते हम तुमने समय चक्र को प्रभावित किया है आवर उसका दंड किसी न किसी को भोगा हे होगा फिर चाहे तुम्हे या तुमसे जुड़े किसी अन्य को

सूर्य कुछ समझता उस से पहले हे उसकी आँखों में अचानक से आंसू भने लगते है आवर उसका दिल जोरो से धड़कने लगता है अचानक से सूर्य को गबराय देख गुरुदेव बोलने से खुद को रोक नहीं पेज

गुरुदेव ....... क्या हुआ पुत्र तुम अचानक से व्यथित क्यों हो उठे

सूर्य ...... पता नहीं गुरुदेव मेरा मन बहुत घबरा रहा है जैसे कुछ ानिस्ट घटना घाटी हो

सूर्य आँखे बंद कर अपने परिवार को देखता दिल्ली फिर सूर्यगढ़ सूरजगढ़

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य तुम्हारे पिता पुत्र शिव

सूर्य गुरुदेव की बात सुन शालिनी जी आवर शिव को देखता है तो उसे शिव एक हॉस्पिटल के I.C.U में बीएड पे लेते हुए नजर आता है जहा डॉक्टर्स उनका इलाज कर रहे थे आवर शालिनी जी चिंता में I.C.U के बहार तहलका रही थी

सूर्य फ़ौरन अपनी आँखे खोल देता

सूर्य ....... पापा हॉस्पिटल में है मुझे उनके पास जाना होगा गुरुदेव

गुरुदेव ........ रुको पुत्र मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ आवर ज्ञात रहे पुत्र तुम्हे जो प्रकर्ति द्वारा दंड मिला था वो सभी के मस्तिष्क में से विस्मरणा ( भूल ) हो चूका है केवल पुत्री शालिनी किरण आउट तुम्हे ज्ञात हमारे साथ साथ अन्य किसी को नहीं

सूर्य ....... गुरुदेव इस विषय पे बाद में चर्चा करते है

गुरुदेव सूर्य किरण तीनो वह से गायब हो सीधा u.s.a पहुंचते है हॉस्पिटल में

u.s.a ..........

शिव आवर शालिनी जी की अभी अभी फ्लाइट लेंड हुए थी

शिव अपना सामान लिया शालिनी जी को साथ लिया गेट no. 2 से बहार निकला हे था

शालिनी जी ........ मैं सामान देखती हूँ आप कोई तेज़ी बुक कर लीजिये

शिव ......... उसकी जरुरत नहीं है मैंने पहले हे कार बुक कर ली थी चलो बहार मिल जाएगी

शिव शालिनी जी को साथ लिया बहार निकल आता है जहा एक व्यक्ति शिव ठाकुर के नाम का ब्रॉड लिया खड़ा था

शिव ....... Hi ी ऍम शिव ठाकुर

आदमी ....... Hello सर ी ऍम मैक नीस तो मीट यू सर थिस इस योर कार एंड के

शिव ...... थैंक यू मर. मैक

शिव 50 डोलोरेस निकल कर मैक को देता है जो ख़ुशी ख़ुशी ले कर वह से निकल जाता है

शिव शालिनी जी कार में बेथ घर की आवर निकल जाते है

कुछ पौंड घंटे बाद शिव कार घर के बहार में गेट पे रोकता है

शालिनी जी कार से उतर पास वाले घर जा कर वह से घर की कीस लेती है आवर गेट खोल कार अंदर करती है

शिव ....... वह भाई क्या बात है बीटा बहु हनीमून के लिया आये था या यहाँ बागवानी करने के लिया देखो तो लोने को कितना खूबसूरत लग रहा है इस खूबसूरती को देख कर तो मेरा भी मूड बन रहा की फिर से हनीमून मनाया जाये क्या कहती हो शालू डार्लिंग सूर्य के लिया एक बहन पैदा की जाये

शालिनी जी ...... आप भी कुछ भी सोचते रहते है इस उम्र में ऐसे ख्याल बूढ़े हो गए है आप

शिव ...... जिस तरह बन्दर कभी गुलाटी मरना नहीं भूलता

वैसे हे मर्द आवर घोडा कभी बूढ़ा नहीं होता इस मामले में

शिव आवर शालिनी जी अच्छे से 10 ,15 मिनट्स बगीचे में उन रंग तिरंगे खूबदार फुल्लो के बिच टहलते है इन खूबसूर पुष्पों की खुसबू लेते हे टहलती शालिनी जी को देख शिव के मन में उमंगें उठने लगी

शिव ...... मैं सामान ले कर आता हूँ तुम घर का लॉक खोलो शालू

शालिनी जी ...... जी ठीक है

शिव कार में से सामान ले शालिनी के पास आ जाता है जो लॉक खोल रही थी

जैसे हे शालिनी जज लॉक खोल अंदर आती है शिव दूर लॉक कर सामान वही कबोध शालिनी जी को भाव में भर के उठा लेता है आवर अपने रूम की आवर भाड़ जाता है

शालिनी जी ...... क्या कर रहे है आप पहले फ्रेश हो जाइये फिर मार्किट से सामान लाना है रात में जो करना है कीजिये आपको कोई रोक थोड़े रहा है

शिव ....... उम्म्म्मः रात में तो तुम्हारे साथ हनीमून मनाऊंगा हे पैर अभी नहीं रुक सकता आज साथ में हे नहाते है

शिव शालिनी जी को खड़ा कर उनकी साड़ी उनके बदन से अलग कर देता है आवर खुद भी अपने कपडे फटा फैट उतर कर शालिनी को ब्लाउज पेटीकोट में हे उठा कर बाथरूम में ले जाता है

आधे घंटे दोनों ने खूब मस्ती की जिसमे शिव ने अच्छे से एक राउंड शालिनी जी के साथ सम्भोग किया अच्छे से नहाने के बाद शिव त्यार हो कर शालिनी जी द्वारा दी लिस्ट ले कर सामान लेन चला गए वैसे तो लगभग पूरा सामान था बस कुछ सामान जो आउट ऑफ देते हो चूका था वही लाना था

शालिनी जी भी काफी खुश थी शिव के साथ काफी समय बाद ऐसे मस्ती करने से जो अक्सर पहले उनके बिच इस घर में हुआ करती थी

जब सूर्य शिव शालिनी जी इन्हें तीनो का घर संसार ये घर हुआ करता था

शालिनी जी सूर्यगढ़ फ़ोन मिला कर उनके यहाँ सकुसल पहुंचने की खबर दे देती है

फ़ोन पे बात करते करते शालिनी जी फिर वही सूर्य द्वारा लगेए लोने में उन खूबसूरत फुल्लो के बिच उन्हें बीहड़ सुकून मिल रहा था जैसे सूर्य ने ये शालिनी जी के लिया हे खाश टूर पे लगाए हो

शालिनी जी ....... क्या सूर्य जनता था की मुझे पुल्लो के साथ समय बिताना अच्छा लगता है या फिर ये उसने स्वीटी के लिया किया था

अब तक तो सायद वो भी आ चूका होगा वापिस

शालिनी जी सूर्य को सम्पर्क करती है पैर सामने से सम्पर्क नहीं हो पता फिर दूसरी बार किरण से सम्पर्क करने की तरय करती है

पैर वह भी कोई फायदा नहीं हुआ

शालिनी जी ........ लगता है अभी तक दोनों आये नहीं है पैर उसने तो कहा था की सुबह तक लौट आएगा अभी तो संध्या होने को आई कही कुछ

शिव ....... अरे शालू तुम यहाँ अकेली किस से बाते कर रही हो तुम्हे आराम करना चाइये इतना लम्बा सफर तय कर के आये है

शालिनी जी ...... जी किसी से भी नहीं बस सूर्य के बारे में सोच रही थी जी और मुझे थकन नहीं है वो मुझे यहाँ ाचा लग रहा था तो यही आ गई

शिव ...... अरे भाई यहाँ हमें याद करने के स्थान पे हमारे बेटे को याद किया जा रहा है अब उसकी इतनी प्रेमिका है होगा किसी प्रेमिका के साथ पैर हमारी तो एकलौती हमारे सामने है पैर किसी आवर के खयालो में खोई हुए

शालिनी जी ....... क्यों आपको जलन हो रही है क्या शिव

शिव ....... अपने हे खून से कैसे जलन शालू वो बीटा है हमारा हमारे प्यार की निसानी उस से जलन कैसे कर सकता हूँ फिर जितना तुम उस से प्यार करती हो उस से कही ज्यादा वो तुम्हे प्यार करता है तुम दोनों के बिच मैं कैसे आ सकता हूँ

शालिनी जी ....... आप यही बैठिये मैं आपके लिया आवर अपने लिया कॉफ़ी बना कर लती हूँ

शिव ....... ठीक है मैं भी तो देखु ऐसा क्या है इस जगह में

शालिनी जी ....... यहाँ की खूबसूरती देखनी है तो आँखे बंद कर संत मन से देखिये इसे मह्सुश कीजिये आपको अच्छा लगेगा

शालिनी जज भीतर की ौरभद जाती है शिव शालिनी जी की बात मान अपने जूते उतर कर उस नरम घास पे कुछ देर टहलने के बाद वही चढ़ पे बेथ जाता है आवर शालिनी जी के कहे अनुसार आँखे बंद कर कुछ मह्सुश करने की कोशिश करता है

कुछ देर तो शिव को कुछ भी आभाष नहीं होता पैर डेरी डेरी जैसे शिव अपना ध्यान केंद्रित कर रहा था वैसे वैसे उन पुष्पों की खुसबू शिव को अत्यंत हे आत्मिक सुख का अनुभव करा रही थी

आँखे बंद किये बे थे शिव के चेहरे पे सफर की जो बची कुछ थकन दिखाई दे रही थी वो पल पार्टी पल चेहरे से गायब हो रही थी

ीदार शालिनी जी अपने लिया आवर शिव के लिया कॉफ़ी ले कर आ जाती है शिव को ध्यान की मुद्रा मेआँखे बंद कर मुस्कुराता देख शालिनी जी के होंटो की मुस्कान भी गहरी हो जाती है

शालिनी जी ....... अब ज्यादा ध्यान लगाया तो आपकी कॉफ़ी ठंडी हो जाएगी शिव

शिव अपनी आँखे खोल शालिनी जी को मुस्कुरा कर देखता है आवर बैठे बैठे हे उनसे कॉफ़ी का मग ले लेता है

शिव ...... यहाँ बैठो शालू मेरे पास तुमने सही कहा था शालू हर इंसान का अपना एक अलग नजरिया होता है किसी भी खूबसूरत चीज़ को देखने का उसे मह्सुश करने का बिना आँखों के भी खूबसूरती को देखा आवर मह्सुश किया जा सकता है ये मैंने आज मह्सुश किया है

शालिनी जी ........ ये तो अच्छी बात है की आपको मेरा आईडिया पसंद आया आवर आपने उसे तरय किया जिसका अच्छा रिजल्ट भी देखने को मिला हेहेहे

शिव ........ क्यों न आज की रात हम केंडल नाईट डिनर करे कही बहार किसी अच्छे से होटल में

शालिनी जी ........... ठीक है शिव मुझे भी काफी वक़्त हो गया बहार ऐसे डिनर किये तो आज आपकी हर खवाहिश पूरी कर लीजिये

शिव ...... Ok मैं होटल कॉल कर डिनर टेबल बुक करता हूँ

शालिनी जी ...... होटल नहीं किसी ओपन एयर रेस्टोरेंट में चलते है खुली हवा में आप आवर मैं एक साथ

शिव ...... जो हुकुम ठकुराइन जी आपकी फरमाइश सर आँखों पे आप जा कर अच्छे से त्यार हो जाइये

शालिनी जी ...... ठीक है आप भी जल्दी आ जाइये 7 बजने को है

शिव ...... अभी आया आवर है आज तुम न साड़ी नहीं पहनोगी प्लेसेस चाहो तो पहले की तरह जीन्स टॉप पहन सकती हो या सूट सलवार पैर साड़ी नहीं

शालिनी जी ...... अभी पहले की तरह मेरा सरीर नहीं रहा है आवर न कोई नया यहाँ आ कर ख़रीदा है हमने

शिव ....... तुम्हारी अलमारी में आज भी तुम्हारी पुराने सूट सलवार जीन्स आदि रखे है मुझे यकीं है वो तुम्हे एक डैम फिट होंगे वैसे भी तुम आज भी पहले की तरह हे लगती हो तुमने हे कहा था की आज मेरी हर खवाहिश पूरी होगी अब मुकर नहीं सकती शालू तुम

शालिनी जी ....... आप तो किसी बचे की तरह ज़िद करने लगे है शिव

शिव ....... तुम्हे जो समझना है समझो

शालिनी जी ...... ठीक है पैर जीन्स नहीं कोई सलवार कुर्ती अच्छी लगी तो ठीक नहीं तो साड़ी हे पहनुंगी

शिव .......ok पैर पहले तुम कोशिश करोगी अगर बात नहीं बानी तो साड़ी

शिव शालिनी जी दोनों अलग अलग रूम में नहाने चल दिए

शालिनी जी जल्दी हे त्यार हो अपनी अलमारी से एक सूट निकलती है जो अभी भी बिलकुल नया था जैसे अभी बॉक्स में से निकला हो

शालिनी जी ...... ये अच्छा है पैर थोड़ा टाइट लग रहा है

यहाँ पे शालिनी जी अपनी इच्छा सकती का प्रयोग कर अपने पेट आवर कूल्हों को थोड़ा काम कर सूट पहन कर सिम्पली टूर पे त्यार होती है

शिव ...... शालू आवर कितना टाइम लगेगा

शालिनी जी ....... बस 5 मिनट्स आवर वेट कीजिये

शिव ...... Ok बाबा जल्दी करो

कुछ देर बाद शालिनी जी त्यार हो अपना गेंद बेग ले रूम का दूर खिलती है तो शिव का मुँह खुला का खुला रह जाता है





शिव तो शालिनी जी की खूबसूरती में मूरत सा बन गया था

शालिनी जी की ठोस उभरी हुई चुचाया सुईठे से कुछ आदिक हे उभर कर नजर आ रही थी

शालिनी जी ....... कहा खो गए आप शिव

शिव ......... वाओ शालू यू लुकिंग सो यंग

ऐसा लग रहा जैसे की 10 ,15 साल पहले की शालू मेरी आँखों के सामने आ कड़ी हो बहार डिनर करना कैंसिल

शालिनी जी .......आपको मजाक सूज रहा है है यहाँ सूट मुझे टाइट लग रहा देखो मेरा सीना पे कितना टाइट लग रहा सूट वैसे आप भी करदी हैंडसम लग रागे है बस थोड़ा ये जो आपका पेट बहार निकल रहा इसको काम कीजिये

शिव ........ क्या सच में मैं हैंडसम लग रहा

शालू ...... है शिव सच में बस पेट थड़ा काम कर लो आवर बालो पे कलर बाकि सब ठीक है अब जाइये कार निकालिये वर्ण कैंसिल

शिव ...... तुम घर को लॉक कर आओ मैं कार निकलता हूँ

शिव जल्दी से बहार निकल जाता है तेज कदमो के साथ जैसे शालिनी कही जाने का इरादा न बदल दे

शालिनी जी ....... तुम आज भी वही हो शिव पैर मैं बदल रही हूँ खुद को बदलने से रोक नहीं प् रही हूँ अपने हे बेटे से प्यार कर बेटी हो सके तो मुझे माफ कर देना शिव मैंने तुम्हे देखा दिया है पैर काबुल भी नहीं कर सकती तुम्हारे सामने पैर आज से जब आपके साथ होउंगी तो केवल आपकी आवर उसके साथ में उसकी बन के

अपनी आँखों में आये 2 बून्द आंसू अपने हेंकी से साफ़ कर घर को लॉक कर शालिनी जी शिव के बगल वाली अगली सहित पे आ बैठी

शिव कार को आगे बढ़ा देता है एक बार कार को रोक कर बहरी गेट लॉक कर शालिनी जी को लिया अपने मंजिल की आवर भाड़ गया

शिव की नजरे बार बार रस्ते से बैठक कर शालिनी जी के तराशे हुए जिसम उभरे हुए सीने आवर गुलाबी होंठ पे अटक रही थी

शालिनी जी ...... शिव आपका ध्यान किसर है सामने देखिये वर्ण किसी से टकरा जायेंगे

शिव ..... है है सामने हे देख रहा हूँ

जैसे बन्दर गुलाटी मरने से बाज़ नहीं आता वैसे हे शिव शालिनी जी के कहने के बाद भी कनखियों से शालिनी जी को देखने से खुद को रोक नहीं प् रहा था

20,25 मिनट्स की ड्राइव के बाद शिव कार एक रेस्टोरेंट की पार्किंग में लगा देता है खुद पहले बहार निकल कर खुद हे शालिनी जी की आवर स दूर खोल कर उन्हें हाथ दे कर बहुत हे शालीनता से प्यार से कार से बहार निकलता है कार को लॉक कर शिव शालिनी जी को लिए रेस्टोरेंट की आवर भाड़ जाता है

शिव काउंटर पे जा कर अपने नाम से बुक डिनर टेबल के बारे में पता करता है एक वेटर के साथ एक तरफ निकल जाते है जिस तरफ ओपन एयर रेस्टोरेंट था

शिव के इसारे पे एक वेटर वह आता है शिव कुछ लिख कर उसे देता है पीपर पे

वेटर पीपर पढ़ कर सर है में जुखा कर वह से चला जाता है

कुछ देर बाद वेटर एक वाइन की बोतल ले कर आता है आवर दोनों को सुर्वे कर चला जाता है

शालिनी जी ..... शिव इसकी क्या जरुरत है तुम जानते हो न मैंने बहुत टाइम से इसे छुआ तक नहीं है

शिव ....... है जनता हूँ तभी तो मंगवाया है अब मन मत करना साल में एक आड़ बार तो चलता है प्लेसेस शालू

शालिनी जी ........ ठीक है पैर आवर नहीं बस यही एक पेग आपके साथ बस

शिव ....... नहीं ये एक बोतल

शालिनी जी ...... नहीं शिव मैंने ये सब चढ़ दिया है पहले की बात आवर थी जो कभी कबर आपके साथ

शिव ....... ठीक है

कुछ देर दोनों वाइन का मज़ा लेते है उसके बाद वेटर दोनों का खाने का आर्डर ले कर चला जाता है

कुछ देर बाद दोनों का डिनर सूर्य हो जाता है

आधे जानते दोनों बाईट हे पालो को फिर से याद कर डिनर करते है आवर बिल पेय कर दोनों पार्किंग की आवर निकल जाते है

शालिनी जी ....... क्या हम कुछ देर ऐसे हे पैदल गम आये शिव

शिव ...... Ok मुझे भी अच्छा लगेगा तुम्हारे साथ इस तरह गुमना

दोनों पैदल हे घूमते घूमते काफी टाइम लगा देते है

शालिनी जी ...... अब हमें चलना चाइये शिव

शिव ....... ये लो के तुम घर चलो मैं कुछ देर में आता हूँ शालू

शालिनी जी ...... अब आप कहा चले

शिव ....... तुम चलो तो सही मैं तुम्हारे पीछे पीछे हे आया बस

शालिनी जी ........ ठीक है पैर ज्यादा टाइम न लगाना साढ़े 11 से ऊपर हो चूका है टाइम

शिव ........ बस 20 मिनट्स मैं तुम्हारे पीछे पीछे हे आता हूँ

शालिनी जी शिव से कार की ले कर रेस्टोरेंट पार्किंग से कार ले कर घर की तरफ निकल जाती है

ीदार शिव वह से एक मॉल में जा पहुँचता है आवर कुछ ड्रेस परचेस करने लगता कुछ सूट सलवार जीन्स कुछ हॉट एंड सेक्सी निघ्त्य सेट जैसे बहुत कुछ सोच रखा हो शिव ने

शिव सभी का पेमेंट कर मॉल से बहार निकलता है

शिव ........ 12 बजने वाले है जल्दी चलना होगा कही शालू का मूड न बिगड़ जाये आज तो फिर से हनीमून मनाऊंगा मेरी शालू के साथ

तभी शिव के पास एक टेक्सी आती है शिव एड्रेस बता कर तेज़ी में बेथ जाता है

शिव ...... भाई जरा तेज चलाओगे इस पते पे 15 मिनट्स में पहुंचा दिया तो डबल पेय करूंगा

ड्राइवर भी लालच में आ तेज़ी दौड़ा देता है

अभी मुश्किल से 2 हे मिनट्स हुए थे चौराहे को क्रॉस करते हुए अचानक से एक बचा रोड पे आ जाता है जिसने बचने के चाकर में टेक्सी का नियंत्रण चुत जाता है आवर दूसरी तरफ से आ रही कार सीधा टेक्सी से टकरा जाती है

टेक्सी दो पलटी खाने के बाद ट्रैफिक पोल्ल से जा टकराती है

शिव आवर टेक्सी ड्राइवर दोनों को काफी छोटू आती है दूसरी कार कोई लेडी ड्राइव कर रही थी उसे भी काफी छोटू आती है गनीमत थी की उसकी कार का एयर बहे समय से खुलने पे ज्यादा गहरी छोटी नहीं लगी

कुछ हे देर में पुलिस आवर एम्बुलेंस दोनों वह आ पहुंची आवर ड्राइवर आवर शिव को हॉस्पिटल के लिया रवाना कर देती है

ीदार अचानक से शालिनी जी का शिव को ले कर के दिल जबरन लगता है

शालिनी जी ........ ये अचानक से मेरा दिल क्यों किसी उन्होने की ले कर घबरा रहा है आवर ये शिव भी अभी नहीं आये

शालिनी जी अपने पारी की सकती का प्रयोग कर शिव को देखती है जो की इस वक़्त एम्बुलेंस से लिटाया हुआ था

शालिनी जी फ़ौरन वह से गायब हो पहले हे हॉस्पिटल जा पहुँचती है कुछ हे देर में शिव आवर उस ड्राइवर को ले कर एम्बुलेंस वह पहुँचती है दोनों को इमरजेंसी में एडमिट किया जाता है

शालिनी जी I.C.U के बहार चिंता में गबराये हुए टहल रही थी

तभी वह गुरुदेव सूर्य किरण तीनो पहुंचते है

सूर्य को देखते हे शालिनी जी का सबर टूट जाता है

सूर्य सीधा अपनी माँ को गले से लगा लेता है

शालिनी जी ...... देख न बीटा तुम्हारे पापा की क्या हालत हो गयी है

सूर्य ........ माँ उन्हें कुछ नहीं होगा आप संत हो जाइये प्लेसेस

गुरुदेव ...... पुत्री शालिनी संत हो जाओ पुत्र शिव का कुछ भी अनिष्ट नहीं होगा पुत्री

गुरुदेव जो की बाकि सभी के लिया अदृश्य रूप में हे थे केवल सूर्य किरण शालिनी जी हे देख प् रही थी गुरुदेव को

गुरुदेव वह से अदृश्य हे I.c.u में चल देते है जहा डॉक्टर शिव का इलाज कर रहे थे

गुरुदेव शिव के माथे पे हाथ रख उन्हें ठीक करने की कोशिश करते है पैर जैसे उनकी सकती शिव पे कोई काम हे नहीं कर रही थी

गुरुदेव ........ ये कैसे हो सकता है हमारी सीढिया पुत्र शिव को स्वस्थ करने में नाकाम क्यों साबित हो रही है

गुरुदेव एक बार फिर से कोशिश करते है पैर कोई लाभ नहीं हुई

गुरुदेव निराश हो कर बहार आ जाते है

गुरुदेव ....... पुत्री शालिनी हमें क्षमा करना हमारी कोई भी सकती पुत्र शिव पे कार्य नहीं कर रही है

सूर्य ........ ये कैसे संभव है गुरुदेव.

गुरुदेव ....... हमें ज्ञात नहीं पुत्र की ऐसा क्यों हो रहा है पुत्र शिव पे हमारी सकती निस्किरया क्यों हो रही है

सूर्य ........... गुरुदेव क्या मैं.......

गुरुदेव ......... पर्यटन कर सकते हो पुत्र सूर्य

सूर्य एक आवर जा कर वह से अदृश्य हो जाता है आवर I.c.u ... में पहुँचता है जैसे हे सूर्य जुख कर अपने पिता के माथे को चिंता है सूर्य कालॉकेट शिव के चेहरे से छू जाता है जिस से एक ग्रीन ऊर्जा निकल शिव में समाहित होने लगती है

शिव की अंदरूनी छोटे उस ऊर्जा से ठीक होने लगती है

सूर्य को ये देख कर बहुत ख़ुशी होती है आवर वह वह से बहार निकल जाता है

सूर्य ....... माँ पापा अब ठीक है गुरुदेव पापा को इस लॉकेट ने ठीक कर दिया है बस बहरी छोटे है कुछ बाकि सब ठीक है

गुरुदेव ....... पैर ये कैसे हो सकता पुत्र आवर तुम्हे ये अचानक से पुत्र सूर्य सम्भालो खुद को

अच्चानक से सूर्य लड़खड़ा जाता है उसके सरीर पे जगह जगह चोट के नीसाण उभर आते है

गुरुदेव ......... पुत्री किरण तुम यही रुको पुत्री शालिनी के साथ हम पुत्र सूर्य को परीलोक ले जा रहे है

किरण ....... जी गुरुदेव

गुरुदेव सूर्य को ुशी अवस्था में अपने साथ परीलोक ले कर निकल जाते है

शालिनी जी की एक चिंता ख़तम हुई तो दूसरी सुरु हो चुकी थी ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........................
 
अपडेट. 252

सूर्य ....... माँ पापा अब ठीक है गुरुदेव पापा को इस लॉकेट ने ठीक कर दिया है बस बहरी छोटे है कुछ बाकि सब ठीक है

गुरुदेव ....... पैर ये कैसे हो सकता पुत्र आवर तुम्हे ये अचानक से पुत्र सूर्य सम्भालो खुद को

अच्चानक से सूर्य लड़खड़ा जाता है उसके सरीर पे जगह जगह चोट के नीसाण उभर आते है

गुरुदेव ......... पुत्री किरण तुम यही रुको पुत्री शालिनी के साथ हम पुत्र सूर्य को परीलोक ले जा रहे है

किरण ....... जी गुरुदेव

गुरुदेव सूर्य को ुशी अवस्था में अपने साथ परीलोक ले कर निकल जाते है

शालिनी जी की एक चिंता ख़तम हुई तो दूसरी सुरु हो चुकी थी ...............

अब आगे ...........

सुक्रलोक ......... सुबह सुबह असुरगुरु शुक्र सनान आदि से निवृत्ति हो परबु ma****v की पूजा आदि पूर्ण कर अपने असुर गुरुकुल पहुंचने थे

जहा पहले से हे कुछ असुर आवर दानव बल शिष्यों ( असुर बालक ) उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे वह असुरगुरु शुक्र से आसुरी मायावी विधयो का ज्ञान ग्रहण करने के लिया असुरगुरु की प्रतीक्षा में थे

असुरगुरु शुक्र के आते हे सभी असुर बल शिष्य उनके चरण वंदन कर अपने अपने नियमित स्थान पे विराजते है

असुरुरु शुक्र उन्हें आसुरी मायावी विद्याओ का अध्यन करवाने लगते साथ हे उन्हें उन विधयो का प्रयोग करने का बिज़ मंत्र भी अध्यन करवा रहे थे

तभी वह असुरगुरु शुक्र कपरमुख शिष्य उनके समक्ष आता है

p.shishya ...... परनाम गुरुदेव शुक्र

गुरु शुक्र ....... कहो पुत्र

p.shishya ........गुरुदेव आपसे भेंट करने हेतु भूतकाल असुरगुरु व्योमासुर पधारे है वो आपसे भेंट करने के इच्छुक है

गुरु शुक्र ....... उन्हें जल पान कराओ पुत्र हम कुछ समय पश्चात उनसे भेंट करेंगे

P.shishya ....... जी गुरुदेव

प्रमुख शिष्य असुरगुरु शुक्र को परनाम कर वह से व्योमासुर जी के पास लौट जाते है

p.shishya. ...... गुरुदेव ने आपको कुछ समय प्रतीक्षा करने को कहा है वो बल असुर शिष्यों की आज की शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात हे आपसे भेंट करेंगे

व्योमासुर जी ........ उचित है जैसा गुरुदेव का आदेश हम उनकी प्रतीक्षा करेंगे

p.shishya ........ हम आपके लिया जल पान की व्यवस्था करते है

व्योमासुर जी ..... जल पान की आव्सय्कता नहीं है गुरु भरता

p.shishya ....... जी हमें आज्ञा दे

व्योमासुर जी ....जी अवश्य

प शिष्य व्योमासुर जी को असुरगुरु का सन्देश दे कर उनसे आज्ञा ले कर वह से लौट जाते है

िस्दार व्योमासुर जी असुरगुरु की प्रतीक्षा करते रहे कुछ 1 हर के बाद असुरगुरु शुक्र उनके समक्ष आये

व्योमासुर जी ....... परनाम गुरुदेव शुक्र

गुरु शुक्र ....... कहो पुत्र व्योमासुर किस सन्दर्भ में आना हुआ

व्योमासुर जी ...... जी गुरुदेव वो आपने पुत्री मानसी आवर पुत्र सूर्य से भेंट करने की इच्छा व्यक्त की थी हम ुशी विषय से यहाँ आये है

गुरु शुक्र ....... क्या सन्देश है आपके जमता सूर्य शिव ठाकुर का हमारे लिया

व्योमासुर जी ....... क्षमा करे गुरुदेव किन्तु हम अपने जमता का किसी प्रकार का कोई सन्देश नहीं ले कर आये है हमने आपकी ीचा पुत्र सूर्य के समक्ष प्रकार की थी

असुरगुरु शुक्र ....... हमें हे प्रतीक्षा करवा रहे तुम्हारी पुत्री आवर जमता

व्योमासुर जी ...... क्षमा करे गुरुदेव किन्तु पुत्र सूर्य ने इस विषय पे अपने गुरुदेव से चर्चा करने का आग्रह किया है अपने गुरुदेव की आज्ञा के पश्चात हे पुत्र सूर्य आपसे भेंट करने आ सकता है किन्तु अभी तक हमें उसकी आवर से कोई भी सन्देश प्राप्त नहीं हुआ है

असुरगुरु शुक्र ....... उचित है पुत्र व्योमासुर किसी भी उत्तम शिष्य के लिया गुरु आज्ञा सर्वोपरि होती है पुत्र सूर्य में ये उत्तम गन है जो हमारे असुर शिष्यों में बहुत काम पाया जाता है किसी भी व्यक्ति विशेष में .सयम .चेतना . गुरु आज्ञा सर्वोपरि हो तो ये एक उत्तम शिष्य के गन होते है

असुरगुरु शुक्र बोलते बोलते अचानक से रुक जाते आवर जैसे वो किसी व्यक्ति विशेष को याद कर खोने लगते है जैसे किसी अपने या किसी खाश व्यक्ति विशेष को याद कर रहे हो

कुछ देर व्योमासुर असुरगुरु शुक्र को इस तरह खोया हुआ देखते रहे

व्योमासुर ....... गुरुदेव आप किस विषय पे इतना गहन चिंतन कर रहे है

असुरगुरु शुक्र वर्तक में लौट आते है व्योमासुर जी की बात सुन

असुरगुरु शुक्र ........... किसी अपने की यादों ने कुछ पल हमें सम्मानित कर दिया था पुत्र व्योमासुर जिसमे हमने ये तीनो गन देखे थे

व्योमासुर जी ....... कोण था वो गुरुदेव आवर कहा है वो गुरुदेव जिनके विषय में आप इस तरह सोच रहे है

असुगुरु शुक्र ....... पुत्र निर्भयासुर

व्योमासुर जी .......निर्भयासुर इनके विषय में तो हमने कभी कुछ नहीं सुना गुरुदेव वो अभी किस लोक में है

असुरगुरु शुक्र ....... नहीं पुत्र व्योमासुर पुत्र निर्भयासुर जीवित नहीं है आज अगर वो जीवित होता तो असुरलोक के असुर सिंघासन पे वही विराजमान होता आवर असुरलोक अपनी समृद्धि की उचाईयो पे होता ये सब जाने दो तुम्हारे यहाँ आने का मंतव्य क्या था पुत्र व्योमासुर

व्योमासुर जी .......... गुरुदेव जब हमने पुत्र सूर्य से भेंट की आपका सन्देश देने के लिया तब हमें बड़ी हे विचित्र ऊर्जा का आभाष हुआ पुत्र सूर्य से जो की पहले हमने कभी भी मह्सुश नहीं किया था उसके हे विषय में आपसे चर्चा करने यहाँ आना पड़ा गुरुदेव

असुरगुरु शुक्र ....... इसमें विचित्र क्या है पुत्र व्योमासुर जैसा की तुमने हमें बताया की पुत्र सूर्य दिव्या अंश है ऐसे में उसकी कोई भी सकती या ऊर्जा हो सकती जो पहले कभी जागृत नहीं हुई हो इसमें विचित्र क्या है पुत्र व्योमासुर

व्योमासुर जी ........ गुरुदेव आपका शिष्य हूँ आपसे वर्षों शिक्षा प्राप्त की है मैंने क्या आपको लगता है इस तरह किसी भी ऊर्जा सकती को पहचानने में मुझसे भूल हो सकती है

अब असुरगुरु शुक्र भी व्योमासुर के बदलते हाव भाव पढ़ने लगते है

असुरगुरु शुक्र ........ यथार्थ ऐसा क्या विचित्र था पुत्र सूर्य की उस ऊर्जा में

व्योमासुर जी ....... पुत्र सूर्य एक दिव्या अंश है किन्तु जो ऊर्जा मैंने मह्सुश की वो किसी महासुर योद्धा की ऊर्जा सामान थी गुरुदेव पुत्र सूर्य में असुर ऊर्जा होना मुझे चिंतित कर गया गुरुदेव ऐसा कैसे संभव है गुरुदेव

असुरगुरु शुक्र भी व्योमासुर जी की बात सुन सोच विचार करने लगते है

असुरगुरु शुक्र .......... पुत्र सूर्य का जनम किस नक्षत्र गाढ़ा में हुआ था

पुत्र व्योमासुर

व्योमासुर जी ....... सिंह लगन रोहिणी नक्षत्र में गुरुदेव

असुरगुरु शुक्र ........ तुमने पुत्र सूर्य की जनम कुंडली का अध्यन किया है न पुत्र व्योमासुर

व्योमासुर जी ...... जी गुरुदेव पुत्री मानसी के विवाह से पूर्व मैंने पुत्र सूर्य आवर पुत्री मानसी की कुंडली का अध्यन किया था गुरुदेव

व्योमासुर जी मानसी वह सूर्य की कुंडली असुरगुरु के समक्ष हे हवा में निर्माण करते है

सूर्य की कुंडली के गाढ़ा नक्षत्र का अध्यन कर असुरगुरु शुक्र हवा में एक आवर जनम कुंडली का निर्माण करते है

व्योमासुर जी ....... ये कैसे संभव है गुरुदेव दो अलग अलग कुंडलियों में इतनी समानता कैसे संभव है गुरुदेव आवर ये दूसरी कुंडली किसी असुर्योधा की प्रतीत होती है गुरुदेव किन्तु दूसरी कुंडली जातक अल्पायु है कोण है किसकी है ये विशेष कुंडली गुरुदेव

असुरगुरु शुक्र ......... हमारे श्रेष्ठ शिष्य पुत्र निर्भयासुर की ..............

परीलोक ...........

गुरुदेव सूर्य को घायल अवस्था में लिए हुए परीलोक वैद्यराज के पास पहुंचे क्यों की वो जान चुके थे सूर्य पे किसी भी ऊर्जा सकती का प्रभाव असर नहीं होगा चिकित्सा पद्धति से हे सूर्य को ठीक किया जा सकता है

गुरुदेव को आवर सूर्य को इस स्वस्थ में देखते हे वैद्यराज आवर उनके शतक शिष्यों ने सूर्य को संभल कर वही िस्थित उपचार स्थल पे आराम से लिटा देते है

वैद्यराज ........ गुरुदेव इनकी ऐसी अवस्था कैसे हो गई जबकि ये तो

गुरुदेव ......वैद्यराज हम नहीं जानते आप सिंगर हे पुत्र सूर्य का उपचार आरम्भ कीजिये इस्पे हमारी किसी भी ऊर्जा का प्रभाव नहीं हो रहा है अब केवल आपका उपचार हे पुत्र सूर्य के स्वस्थ्य में सुधर ला सकता है.

वैद्यराज ....... जी गुरुदेव हम अभी इनका उपचार आरम्भ करते है

गुरीदेव ....... वैद्यराज आप इनका उपचार आरम्भ कीजिये हम सिगरा हे लौट कर आते है

सूर्य जो लगभग मूर्छित स्वस्थ में था उसके सरीर पे जगह जगह चोट के जखम बने हुए थे जहा जहा शिव को चोट लगी थी

वैद्यराज आवर उनके दोनों शिष्य सूर्य के वस्त्र उतर उसके जख्मो को साफ कर उसका उपचार आरम्भ करने लगते है

गुरुदेव वह से निकल सीधा मंदिर पहुंचने स्वयं के वर्स्त्रो पे लगे सूर्य के रकत के नीसाण देख गुरुदेव सरोवर की आवर भाड़ जाते है

जहा सनान आदि कर सावच वस्त्र बदल गुरुदेव पुनः मंदिर पहुंचते है

गुरुदेव .......... आज से पूर्व कभी ऐसा नहीं हुआ की हमारी ऊर्जा सकती निष्फल रही हो अपने कार्य में पहले पुत्र शिव पे निस्किरया रही फिर पुत्र सूर्य पे हमें ज्ञात करना होगा की इसके पीछे का रहश्य क्या है क्यों हम पुत्र शिव आवर सूर्य की सहायता नहीं कर पाए

गुरुदेव परबु चरणों से बिबूती ले अपने मैस्टिक्स पे लगा वही ध्यान में बेथ जाते है

किन्तु आज उनका ध्यान भी बार बार भांग हो रहा था

गुरुदेव ...... हे परबु सवयंभु हम अपना ध्यान भटकने से क्यों नहीं रोक प् रहे बार बार हमारे िस्मरति पटल ( मस्तिष्क ) पे वही दृश्य क्यों उभर रहा है जिसमे पुत्र शिव के साथ ये दुर्घटना गठित हुई कही ये ये संकेत तो नहीं इस दुर्घटना से जुड़ा

गुरुदेव स्वयं को संत कर फिर से ध्यान लगते कुछ कठिनायों के बाद वो पूर्ण रूप से ध्यान में लीं हो जाते है

कुछ समय पश्चात गुरुदेव के मस्तिक्ष से एक ऊर्जा सकती बहार निकलती है

जो परबु मंदिर से निकल परीलोक के सीमा से बहार निकल बड़ी तेजी से पृथ्वीलोक की आवर भाड़ जाती है

गुरुदेव ....... ये हम इस स्थान पे कैसे पहुंचने गए हम तो परबु मंदिर में ध्यान मगन थे

दरशल गुरुदेव u.s.a में ुशी स्थान पे पारदर्शी रूप में पहुंचने जहा कुछ समय पूर्व शिव का एक्सीडेंट हुआ था

जैसे गुरुदेव का सरीर परीलोक में हो आवर आत्मा इस समय पृथ्वीलोक में

तभी गुरुदेव के सामने हे समय विपरीत दिशा में चलने लगता है आवर उनकी आँखों के सामने सभी कार्स लोग उलटी दिशा में चलने लगते

शिव जिस टेक्सी में था जिसमे उसका एक्सीडेंट हुआ वो एक बार फिर से पलटी कहते हुए ठीक हो जाती है आवर बैक में पीछे की आवर निकल जाती है जैसे पूरी घटना गुरुदेव के सामने बैक फॉरवर्ड कर दी हो

गुरीदेव तेज़ी से तेज़ी के पीछे जाते जय कुछ देर बाद टेक्सी शिव को मॉल के सामने उतर बीदर से आई उदार हे निकलने लगी तो गुरुदेव शिव को वही छोड़ उस टेक्सी का पीछा करते है

कुछ पीछे जाने के बाद टेक्सी एक स्थान पे रुक जाती है आवर गायब हो जाती है जैसे उसका यहाँ आने से पूर्व कोई अस्तित्व हे नहीं था

तभी सब सामान्य हो जाता है आवर तभी वह गुरुदेव के समक्ष दिव्या सुसज्जित अस्वारथ प्रकट होता है जो देखते हे देखते टेक्सी में बदल जाता है

गुरुदेव इस समय टेक्सी के बिलकुल सामने खड़े उस ड्राइवर को देख रहे थे अपनी विस्मय भरी दृस्टि से गुरुदेव को एक विचित्र अनुभूति हो रही थी अपने समक्ष उस ड्राइवर को देख कर अद्भुत ऊर्जा सकती का भंडार मह्सुश हुआ उस ड्राइवर से

गुरुदेव ........ ये दिव्या आभा विभूति कोण है

जैसे हे टेक्सी स्टार्ट हुई गुरुदेव ने अपनी सकती से उसे रोकने की कोशिश की पैर कोई लाभ नहीं हुआ

उलटा टेक्सी ड्राइवर जैसे गुरुदेव को देख कर मुस्कुरा रहा हो

टेक्सी ड्राइवर ..... समय को कोई नहीं रोक सकता वत्स प्रयाश करना निरर्थक है

टेक्सी गुरुदेव के मध्य से होते हुए आगे भाड़ गयी फिर वही घटना करम आरम्भ हुआ

टेक्सी का मॉल के समीप शिव के सामने रुकना शिव का उसमे बैठना आवर वही जल्दी चलने के लिया टेक्सी ड्राइवर को दुबले पेमेंट की पेशकश करना

गुरीदेव ...... ये घटना करम फिर से दोहराया जा रहा है

हम छह कर भी उसे नहीं रोक प् रहे है

तभी एक आवर से एक छोटे बचे को रोड पे ठीक टेक्सी के सामने अचानक से प्रकट होते डेक गुरुदेव आगे भाड़ उसे हटाने की कोशिश करते है किन्तु तब तक टेक्सी उन बैलेंस को कर टकरा चुकी थी

वो छोटा सा बचा गुरुदेव के चेहरे को देख मुस्कुराते हुए अगले हे पल गायब हो गया

गुरुदेव कुछ समाज पते उस से पहले हे वो बड़ी तेजी से पृथ्वीलोक से बहार निकल अपने सरीर की आवर भाड़ गए कुछ हे पल में गुरुदेव अपनी आँखे खोल देते है

गुरुदेव ........ ये सब क्या था हम ध्यान में होते हुए वह क्यों पहुंचने आवर वो घटना करम फिर से आरम्भ क्यों हुआ आवर उन दिव्या विभूति आभा स्वरुप वहां चालक के वचन ......समय को कोई नहीं रोक सकता वत्स प्रकाश करना निरर्थक है ...... अथार्त वो अस्व सुसज्जित दिव्या रथ आवर वो दिव्या आभा लिया वहां चालक ....समय चक्र ... अथार्त ये इस रहश्य के पीछे सवयं समय चक्र थे जिनको सूर्य की समय यात्रा ने प्रभावित किया था अथार्त पुत्र शिव के साथ जो घटना घाटी उसमे पुत्र शिव केवल माध्यम थे अपितु मुख्या दंड पुत्र सूर्य को.... ये सब समय चक्र की लैला थी पुत्र शिव के माध्यम से सूर्य को दंड मिलना वो समय चक्र नहीं चाहते की उनके दंड के मध्य मैं या कोई आवर हस्तक्षेप करे इशू कारन वश मेरी कोई भी ऊर्जा पुत्र शिव आवर पुत्र सूर्य पे कार्य नहीं कर रही थी

गुरुदेव ......... हे परबु आपको कोटि कोटि नमन जो आपने इस रहश्य को उजागर किया परबु

गुरुदेव परबु को परनाम कर वैद्यराज के आवर भाड़ गए जहा सूर्य का उपचार अभी अभी पूर्ण किया था वैद्यराज ने किन्तु उनकी जड़ी बूटियों का उनकी ओसधियो का कोई भी प्रभाव सूर्य पे नहीं हो रहा था

वैद्यराज ........ इतना समय हो चूका है ॉडी का प्रयोग किये किन्तु हमारी कोई भी सोढ़ी इनके स्वस्थ्य में सुधर नहीं कर प् रही है

गुरुदेव ...... आवर सायद आपकी कोई भी ॉडी पुत्र सूर्य पे असर भी नहीं करेगी वैद्यराज

वैद्यराज ........ये आप क्या कह रहे है गुरुदेव

गुरुदेव ....... हमने हे तुम्हे चिक्त्शक पद्धति का ज्ञान दिया है वैद्यराज हम जानते है आप अपने कार्य के पार्टी निस्त्वां है आवर पुत्र सूर्य के उपचार में अपना सम्पूर्ण ॉडी ज्ञान भी प्रयोग कर चुके हो किन्तु उसका कोई लाभ नहीं होगा पुत्र सूर्य पे

वैद्यराज .......गुरुदेव हम सवयं समाज नहीं प् रहे है जिन ओसधियो से मुर्दे सव में भी जीवन भर देने वाली ोस्दिया यूवराज सूर्य पे निस्किरया क्यों हो रही है

गुरुदेव ........ अपने कर्मो का फाल आवर दंड सभी को भोगना पड़ता है वैद्यराज पुत्र सूर्य भी अपने करम फाल को भोग रहा इसमें हम उसकी कोई सहायता नहीं कर सकते

तभी वह किरण अप्पेअर होती है

किरण .....परनाम गुरुदेव अब कुंवर जी कैसे है

गुरुदेव ......... पुत्री किरण तुम्हे पुत्र शिव के पास होना चाइये था

किरण ....... गुरुदेव वो अब पूर्ण रूप से स्वस्थ है जैसे किसी ने उनकी सम्पूर्ण पीड़ा को गठन कर लिया हो उनके जखम भी ठीक हो चुके है मैंने उन्हें घर भेज दिया है माँ के साथ आवर उनके स्थान पे उनके क्लोन को हॉस्पिटल चढ़ दिया है ताकि किसी को कोई संदेह न हो गुरुदेव

गुरुदेव .....पुत्री किरण पुत्र सूर्य के स्वस्थ्य सुधर में अभी समय लगेगा उसपे कोई भो ॉडी कार्य नहीं कर रही है आवर न उसकी कोई सकती इसमें कार्य कर सकती है

किरण .....किन्तु क्यों गुरुदेव ऐसा उन्हें क्या हुआ है कही फिर से पहले की तरह

गुरुदेव .....नहीं पुत्री ऐसा नहीं है हमें पुत्र सूर्य को मंदिर ले कर चलना होगा पुत्री

किरण .....जी गुरुदेव

गुरुदेव सूर्य किरण को अपने साथ ले मंदिर आ पहुंचे वह से सूर्य को गुरुदेव मंदिर में बने सरकार में जल में लिटा देते है

किरण ......गुरुदेव ये आप

गुरुदेव ....... पुत्री यही एक मार्ग है जिस से पुत्र सूर्य की पीड़ा कुछ काम हो सकती है

जब तक पूर्ण रूप से ठीक न हो जाये पुत्र सूर्य को यही रखना होगा तुम चलो मेरे साथ पुत्री

किरण का मन तो नहीं था फिर भी गुरुदेव की आज्ञा वो ताल नहीं सकती थी इस लिया गुरुदेव के पीछे पीछे किरण भी वापिस मंदिर लौट गयी

किरण ......गुरुदेव कुंवर जी के साथ ये जो कुछ भी हो रहा है कही समय चक्र का प्रभाव तो नहीं है

गुरुदेव .......तुमने उचित कहा पुत्री पुत्र सूर्य के साथ जो हो रहा है वो समय चक्र का प्रभाव है पुत्र शिव केवल एक माध्यम था समय चक्र की लैला ला असल में दंड तो पुत्र सूर्य को मिलना था जिसका माध्यम पुत्र शिव बना इशू कारन पुत्र सही आवर पुत्र सूर्य पे हमारी कोई भी ऊर्जा सकती कार्य नहीं कर रही थी

किरण ...... कही वो पहले की तरह तो नहीं

गुरुदेव ....... नहीं पुत्री हमारा पूर्ण विश्वाश है परबु पे की पुत्र सूर्य सूर्यौदय तक समय चक्र के दंड से मुक्त हो जायेगा समय चक्र को प्रभावित किया है तो दंड भी भोगना हे होगा

किरण ......क्या हम उनकी कोई सहायता नहीं कर सकते गुरुदेव

गुरुदेव ......नहीं पुत्री हम पुत्र सूर्य की कोई सहायता नहीं कर सकते है

उदार सूर्य के आसपास के जल में डेरी डेरी कुछ परिवर्तन होने लगता है जिस से सूर्य के सरीर के घाब भरने लगते है

आवर सूर्य जल की गजरे में जाने लगता है अभी भी सूर्य की आँखे बंद थी जैसे जल की टलती में सूर्य पहुंचा उसका सरीर ध्यान मुद्रा में पहुंच जाता है जैसे सूर्य जल समाधी ले ध्यान लीं हो गया हो

जैसे जैसे समय बिट रहा था वैसे वैसे सूर्य के स्वस्थ्य में सुधर आ रहा था

ीदार गुरुदेव और किरण ने पूरी रात्रि जागते हुए निकल दी

गुरुदेव ......... पुत्री तुम्हे कुछ समय विश्राम करना चाइये सूर्यौदय होने वाला है

किरण ...... जी नहीं गुरुदेव मुझे विश्राम की आव्सय्कता नहीं है पुर न इस इस्थिति में मैं विश्राम कर पाऊँगी गुरुदेव

गुरुदेव ...... तुम्हारे मन की वयथा से मैं भली भाटी परिचित हूँ पुत्री किन्तु सरीर को आराम देना भी अवसायक है पुत्री

किरण ...... मुझे क्षमा करे गुरुदेव किन्तु इस इस्थिति में उनसे दूर जाने का मन नहीं है उन्हें अकेला छोड़ कर

गुरुदेव ...... उचित है पुत्री सूर्यौदय होने वाला है पुत्री सनान आदि कर परबु का ध्यान करो मैं भी परबु पूजा के लिया सनान आदि कर लेता हूँ

किरण .....जी गुरुदेव जैसा आप उचित समजे

गुरुदेव किरण को वही छोड़ पीछे की आवर चल दिए जहा सूर्य को को जल में लिटाया हुआ था

गुरुदेव ...... ये पुत्र सूर्य कहा गया उसे तो यही जल में हमने लिटाया था पैर इस अवस्था में तो वो कही जा नहीं सकता

तभी संत जल के भीतर कुछ हलचल होने से गुरुदेव का ध्यान उस आवर जाता है

कुछ पल बाद सूर्य जल से बहार निकलता है जिसके सरीर पे केवल सफ़ेद अंग वस्त्र था जो उसकी कमर से ले कर जंगो तक लिप्त हुआ था

सूर्य ...... परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ....... कल्याण हो पुत्र सूर्य तुम स्वस्थ हो गए पुत्र

सूर्य ......जी गुरुदेव उन्होंने अपने दंड चक्र से मुझे मुक्त किया

गुरुदेव ......अथार्त तुम जानते थे की ये सब क्यों हो रहा है

सूर्य ......जी गुरुदेव मुझे इस लॉकेट के माध्यम से ज्ञात हुआ की मुझे ये दंड क्यों आवर किस वजह से प्राप्त हुआ है

गुरुदेव ...... हम इस विषय पे बाद में चर्चा करेंगे पुत्र मेरी पूजा का समय हो चका है पुत्री किरण तुम्हारा मंदिर में इन्तजार कर रही है उसने पूरी रात्रि एक पल के लिया भी विश्राम नहीं किया है तुम उसे ले कर सूर्य महल जाओ आवर विश्राम करो हम अपने कार्य पूर्ण कर वही तुमसे भेंट करते है

सूर्य ...... जी गुरुदेव परनाम

गुरुदेव ...... यशश्वी भाव पुत्र

सूर्य गुरुदेव को परनाम कर मंदिर की आवर भाड़ गया जहा किरण को सूर्य की ऊर्जा का आभाष होते हे वो दिउड्ते हुए ुशी के सामने आ कड़ी हुई

किरण का भीगा हुआ चेहरा देख सूर्य का खिला हुआ चेहरा भी मुरझाने लगता है

सूर्य .....स्वीटी

किरण ....... मर गई स्वीटी मुझे इस तरह सताने में आपको मज़ा आता है क्या कुंवर जी मैं हे जानती हूँ पिछले 3 दिनों में मेरी क्या हालत हुई है

सूर्य किरण को अपने सीने से लगा उसके आँखों को चुम लेता है आवर उन मोती जैसे अश्रुओ को पि जाता है

सूर्य ....... मुझे माफ कर दो स्वीटी ये सब मेरी हे भूल के कारन हुआ है जिसकी सजा मेरे साथ साथ तुम्हे भी भोगी पद रही है

सूर्य बात करते करते किरण को लिया अपने सूर्य महल के कक्ष में आ पहुंचा

किरण ...... हर बार आप ऐसा कुछ न कुछ कर देते है जिसके करम मुझे आपको तकलीफ में देखना पड़ता है मेरे दिल का हाल आप नहीं समाज सकते जब आपको दर्द तकलीफ में देखती हूँ तो मुझे कितनी तकलीफ होती है

सूर्य ....... अच्छा बाबा देखो कान पकड़ता हूँ फिर से कभी कोई गलती नहीं करूंगा आवर तुम रात भर जाग क्यों रही थी अब तुम्हे केवल अकेली खुद का हे ख्याल नहीं रखना है हमारे बचे का भी ख्याल तुम्हे रखना है तुम परेशान होगी तो उसे भी तकलीफ होगी न

किरण ....... फिर ऐसा काम हे क्यों करते हो आप की मुझे परेशान होना पड़े

सूर्य किरण को बीएड पे लिटा उसकी बगल में लेते हुए उसके चेहरे को निहारते हुए

सूर्य ....... स्वीटी हमें जो इतनी बड़ी बड़ी सकतिया प्राप्त है उनका दायित्व भी बहुत बड़ा है सामान्य इंसान से भी जब ऐसी भूल होती है तो उसे भी दान मिलता है किन्तु वो सामान्य मनुष्य होता है तो दंड भी सामान्य रूप में मिलता है किन्तु हम दिव्या सकती सम्पन है हमारी छोटी से छोटी चूक का दंड भी बड़ा मिलता है मेरा तुम्हारा एक अंश मनुष्य अंश भी है जहा कभी कभी जज्बात भावनाये हम पे हावी हो जाती है आवर हम से भूलवश चूक हो जाती है जिसका परिणाम ऐसा हे होता है

किरण ...... जब इतना सब जानते है आप तो फिर ये सब क्यों करते हो आप

सूर्य ...... सच तो ये है की ये दंड मैंने जानबुज कर लिया था स्वीटी

किरण ....... क्या क्या कहा आपने जानबुज कर लिया था

पैर ऐसा करने से पहले एक बार भी आपने नहीं सोचा की मुझे क्या जीतेगी जब आपको उस हल में देखूंगी

सूर्य ........ मेरा ऐसा करने के पीछे एक थी आवर वो वजह है ये दिव्या लॉकेट

किरण .....मतलब

सूर्य .......मतलब ये की देवी नियति के दो सहायक है एक है माँ पर करती आवर दूसरे है समय चक्र जिनका का कोई वास्तविक रूप नहीं माँ प्रकर्ति से भेंट स्वरुप मुझे ये दिव्या लॉकेट मिला जिसके प्रयोग से मैं किसी भी जिव को हील कर सकता हूँ आवर अपनी ऊर्जा रिकवरी कर सकता हूँ साथ हे साथ एक निर्धारित समय में हे समय यात्रा कर सकता हूँ

किरण ....... क्या ये दिव्या लॉकेट किसी को भी हील कर सकता है फिर आपको इसने हील क्यों नहीं किया

सूर्य ....... क्युकी जो दंड मुझे प्राप्त हुआ था वो समय चक्र यथार्थ काल चक्र से प्राप्त हुआ था एक तरह से देवी प्रकर्ति आवर काल चक्र को परैत सज्चय देवी नियति से हे है ऐसे मैं सवयं के दिया दंड से सवयं मुझे कैसे मुक्त कर सकता था

किरण ....... इसका मतलब आप पहले से जानते थे सब कुछ

सूर्य ......सब कुछ नहीं पैर बहुत कुछ या पापा वाले इंसीडेंट का मुझे ज्ञान नहीं था पैर मैंने एक पल की भी समय यात्रा में बदलाव किया तो मुझे दंड मिलना तय है ये मैं पहले से जनता था इस लिया मैंने जान बुज कर समय चक्र को उस एक पल से प्रभावित किया ताकि वो मुझे दण्डित करे

किरण ...... आवर इन सब की वजह जान सकती हूँ मैं

सूर्य ...... है तुम्हारा पूर्ण हक़ है जानने का

सूर्य ...... इस दंड के माध्यम से मेरी काल चक्र से भेंट हुई उनके दिव्या दुर्लभ दर्शन प्राप्त हुए ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........................
 
hello दोस्तों 22 ,23 जून को सायद हे मैं कोई अपडेट दे पाउँगा

इसके आगे भी कुछ समय अपडेट अपने समय से कुछ आगे पीछे हो सकते है या किसी दिन अपडेट न भी आये

पहले से इस लिया सूचित कर रहा हूँ ताकि किसी भाई को ये न लगे की बिना बताये गायब हो गया कुछ समय फ़ोन से दुरी रखनी होगी आवर समय भी काम मिलेगा इस लिया अभी से सूचित कर रहा हूँ

थैंक यू ........
 
अपडेट 253

किरण ....... इसका मतलब आप पहले से जानते थे सब कुछ

सूर्य ......सब कुछ नहीं पैर बहुत कुछ या पापा वाले इंसीडेंट का मुझे ज्ञान नहीं था पैर मैंने एक पल की भी समय यात्रा में बदलाव किया तो मुझे दंड मिलना तय है ये मैं पहले से जनता था इस लिया मैंने जान बुज कर समय चक्र को उस एक पल से प्रभावित किया ताकि वो मुझे दण्डित करे

किरण ...... आवर इन सब की वजह जान सकती हूँ मैं

सूर्य ...... है तुम्हारा पूर्ण हक़ है जानने का

सूर्य ...... इस दंड के माध्यम से मेरी काल चक्र से भेंट हुई उनके दिव्या दुर्लभ दर्शन प्राप्त हुए ..............

अब आगे .........

परीलोक ....... गुरुदेव अपनी नित्य करम पूर्ण कर सूर्य महल पहुंचे जहा उनके साथ रानी पारी पारिजात रिद्धि विधि गायत्री भी थी

सूर्य महल में प्रवेश करते हे सूर्य को गुरुदेव वह रानी पारी रिद्धि विधि गायत्री पारिजात के विषय में ज्ञात हो जाता है

सूर्य किरण को ठीक से सुला कर महल के मुख्या हॉल में आ पहुंचते है

सूर्य ...... परनाम गुरुदेव परनाम रानी माँ

रानी पारी ....... पुत्री किरण कहा है पुत्र सूर्य

सूर्य ......जी रानी माँ वो विश्राम कर रही है अभी

रानी पारी ........ पुत्री किरण गर्भ से है आवर तुमने हमें इस विषय में कुछ बताया हे नहीं पुत्र सूर्य ये उचित नहीं है पुत्र

सूर्य गुरुदेव की आवर देखता है जो मंद मंद मुस्कुरा रहे थे

सूर्य ...... रानी माँ मुझे क्षमा करे किन्तु बाबा ने हे कहा था की कुछ समय बाद सभी को बताना के लिया

सूर्य अपने गुरुदेव को हे फशा चूका था आवर गुरुदेव भी बाबा सनद सुन काफी खुश भी थे आवर साथ हे चकित भी

खुश इस लिया की सूर्य ने उन्हें बाबा यानि की पिता का स्थान दिया चैट इस लिया की सूर्य ने बाबा कहने के साथ हे उन्हें फशा भी दिया रानी पारी के सामने

गुरुदेव ........ पुत्र ये तुम हमें किस संकट में दाल रहे हो

रिद्धि ......पिताश्री आपको पहले से पता था आवर आपने हमें हत्या तक नहीं

पारिजात ....है गुरुदेव ये कितने हर्ष की बात है की स्वीटी माँ बनने वाली है

( गुरुदेव ...... उत्तम अति उत्तम यहाँ बाबा बोल कर हमें हे इन सभी के बिच फशा दिया पुत्र सूर्य तुमने अपनी आवर आते हुए तीर को हमारी आवर दिशा देती दे उत्तम अति उत्तम )

सूर्य ....... क्षमा करे रानी माँ वो हमने इस विषय में किसी को भी नहीं बताया अभी तक आवर मैं चाहता था की सर्वपार्ट्म इस विषय में दादा जी नाना जी को ज्ञात हो उन्होंने मेरा बचपन तो नहीं देखा अब उनकी यही इच्छा है की वो अपने पद पोते पद नाती के साथ वो बचपन जिए इस लिया अभी तक किसी को भी इस ख़ुशी की खबर नहीं

रानी पारी ........ उचित है पुत्र उनका कहना भी तुम्हारे जनम के समय परिस्थिति उचित नहीं थी इस लिया तुम उनके बिच जनम नहीं ले पात्र जिनसे उनकी इच्छाया अधूरी हे रह गई अभी वो तुम्हारे पुत्र के साथ अपना समय वयतीत कर अपनी इच्छाओ को पूर्ण करना चाहते है इसमें कुछ भी अनुचित नहीं

रिद्धि ..... इसका मतलब हम सब मस्सी बनने वाली है

परतविलोक पे यही सम्बन्ध से बड़ी बहन का पुत्र पुत्री सम्बोधित करते है न अपनी माँ की बहनो को

सूर्य ( सूर्य ...... अब ये तो वही जाने मस्सी कहेगा या माँ ) .... है आपको तो परतविलोक के सम्बन्दो के विषय में पूर्ण ज्ञान है हे रिद्धि जी

पारिजात ......हम स्वीटी से मिल कर आते है

गुरुदेव ....... आप भी जाइये रानी पारी आप भी तो पृथ्वीलोक के नियमानुसार नानी बनने वाली है

हम पुत्र सूर्य से किसी जरुरी विषय पे चर्चा करना चाहते है

रानी पारी ....... जी गुरुदेव

रानी पारी रिद्धि पारिजात गायत्री विधि पाछो स्वीटी के कक्ष की आवर भाड़ गई

वही सूर्य गुरुदेव के साथ उद्यान की आवर भाड़ गया

गुरुदेव ........ आसान ग्रहण करो पुत्र

सूर्य ......जी गुरुदेव

सूर्य गुरुदेव के सामने िस्थित आसान ग्रहण करता है

गुरुदेव ........ पुत्र ऐसा कुछ है जिसके विषय में हमारा जानना जरुरी है या तुम कुछ बिताना चाहते हो

सूर्य ....... जी गुरुदेव हम पहले भी बिताना चाहते थे किन्तु परिस्थितियों के चलते मैं आपको बता नहीं पाया उसके लिया मुझे क्षमा कर दीजिये गुरुदेव

गुरुदेव ......... वचन आवर क्षमादान तभी व्यक्ति को देना उचित हो जब वचन आवर करम के विषय में क्षमादान देने वाले को पूर्ण ज्ञान हो क्षमादान मिलेगी या दंड हम पुरे विषय को जानने के बाद हे तय करेंगे पुत्र सूर्य

सूर्य ......जी गुरुदेव समय चक्र का दंड हमने सवयं चुना यथार्थ हमने जानबुज कर काल चक्र को प्रभावित कर स्वयं के भाग्य में उनके द्वारा दण्डित होना लिखा गुरुदेव

गुरुदेव ......हम्म्म आवर इसका कोई विशेष कारन पुत्र सूर्य

सूर्य ........जी गुरुदेव काल चक्र से भेंट करना विशेष कारन था गुरुदेव माता प्रकर्ति द्वारा भेंट स्वरुप दिए इस उपहार नुमा लॉकेट से हमें कुछ ज्ञात हुआ जिसके लिया काल चक्र से भेंट करना अनिवार्य था गुरुदेव हम आपकी आज्ञा लेते उस से पूर्व हे ये घटना करम आरम्भ हो चूका था ऐसे परिस्थिति में मैं आपके संज्ञान इस विषय को ला न सका

गुरुदेव. ....... क्या तुम पूर्व से जानते थे की पुत्र शिव के साथ ये घटना घटित होगी

सूर्य ......जी नहीं गुरुदेव हम इस विषय में पूर्णतया अनभिज्ञ थे गुरुदेव हमें ये तो ज्ञात था की काल चक्र को प्रभावित करने पे हमें दण्डित होना होगा किन्तु दंड हमें इस रूप में मिलेगा हमने कभी सोचा भी नहीं था

गुरुदेव ......... पुत्र हमें दंड केवल स्वयं को हमें हानि पहुंचने पैर या पीड़ा मिलने से हे नहीं मिलता कभी कभी किसी अपने को पीड़ा में देखना सबसे बड़ा दंड होता है आवर तुम्हारे साथ भी वही हुआ काल चक्र ने तुम्हारे दंड का माध्यम पुत्र शिव को बनाया जिस से तुम्हे तकलीफ हो तुम्हे उस पीड़ा का आभाष हो आवर तुम खुद को विवश पाओ किन्तु यहाँ तुम्हारी सहायता की माँ प्रकर्ति के आशीर्वाद ने जो पुत्र शिव की पीड़ा हर तुम्हे सौंप दी यही काल चक्र का दंड था आवर उनसे भेंट करने के उद्देश्य से तुमने काल चक्र को प्रभावित किया ये भी काल चक्र से छुपा नहीं हो सकता तभी उन्होंने पुत्र शिव को दंड से मुक्त होने दिया

सूर्य .....जी गुरुदेव उन्हें पूर्व से इस विषय में ज्ञान था

गुरुदेव ........ क्या तुम्हे उनके दुर्लभ दर्शन प्राप्त हुए

सूर्य ......जी गुरुदेव किन्तु उनका वास्तविक रूप के दर्शन नहीं हुए

गुरुदेव ........ जो निराकार है जिनका कोई आकर नहीं उनके दर्शन फिर किसी आकर में कैसे हो सकते है पुत्र

सूर्य ...... जी गुरुदेव जब आपने मुझे पवित्र सरोवर जल में लिटाने के पश्चात पुनः मंदिर लौट जाने के बाद डेरी डेरी मेरी साडी पीड़ा आस्था हे समाप्त हो गयी आवर मैं पवित्र जल की गहराई में जाने लगा स्वयं को शुन्य की इस्थिति में कब मैं ध्यान मुद्रा में पहुंचा मुझे ज्ञात नहीं जब पूर्ण चेतना में लौटा तो खुद को भारमंद के किसी कोने में िस्थित पाया

जहा चारो और दिव्या आभा लिया अपनी रौशनी से जगमगाते हुए सितारे अनेको आकाश गंगाओ में होते परिवर्तन को स्वयं अपनी आँखों से देख रहा था

तभी जैसे मैं किसी अदृश्य ऊर्जा पाश में बाँदा एक आवर खींचने लगा न जाने कब तक कितने खातीं मार्ग किनते हे घने अंडकार से भरे भारमंद के एक चूर से दूसरे चूर में पहुंचा जहा इतना त्वरा प्रकाश जैसे एक साथ हजारो सूर्य उदय हो उठे हो उस प्रकाश के समक्ष मेरे नेत्र तक खुल नहीं प् रहे थे

पूर्ण प्रयाश के बाद भी मैं अपनी समस्त ऊर्जा के प्रयोग के पश्चात भी उस दिव्या प्रकाश का सामना नहीं कर प् रहा था अंत में मैंने श्रद्धा से अपने हाथ जोड़ सीस जुखा उस दिव्या प्रकाश को परनाम कर विनती की तब जा कर वो दिव्या प्रकाश शीतल होने लगा गुरुदेव

गुरुदेव ........ वो दिव्या प्रकाश काल चक्र की दिव्या आभा थी पुत्र सूर्य जिनके समक्ष सभी को नतमस्तक होना पड़ता है

सूर्य ....... जी गुरुदेव मुझे इस बारे में बाद में ज्ञान हुआ वो दिव्या प्रकाश उनकी वो ऊर्जा थी जो पुरे भारमंद को उनकी इच्छा अनुसार गतिमान रखती है

डेरी डेरी प्रकाश काम होने लगा






अभी भी मैं पूर्ण रूप से उन्हें देखने में अक्षम था

डेरी डेरी वो दिव्या प्रकाश काम होता गया आवर मेरे समक्ष वो दिव्या आभा निरंकार रूप प्रकट हुआ






सूर्य .......जिनके दर्शन मात्रा से मेरे मन में उपजे कोतुहल को परम सुख की प्राप्ति हुए मेरा शीश उनके समक्ष स्वयं हे भक्ति भाव से जुखता चला गया

काल चक्र ....... वत्स हमारे दर्शन की अभिलाषा में तुमने स्वयं के भाग्य में हमारा दंड विधान को आमंत्रित कर लिया है हम में देवी प्रकर्ति की तरह ममता का समावेश नहीं है जो हम दंड भी दे आवर क्षमादान भी

सूर्य .......... समस्त भारमंद की गति को अपने ादिन अपने नियंत्रण में रखने वाले देव काल देव आपसे इस भारमंद में कुछ भी नहीं चूका न भूतकाल न वर्तमान आवर नहीं हे भविष्य जिनकी इच्छा मात्रा से भारमंद को गति प्रदान होती है उनसे भला कबि कोई सत्य चुप सका है क्या परबु मुझे आपका दंड मिलना चाइये या आपका सनेह रूपी आशीर्वाद ये आपकी इच्छा पे है परबु

कालदेव ( काल चक्र ) ........ वत्स तुम बिना किसी उद्देश्य बिना किसी इच्छा के केवल हमारे दर्शन की अभिलाषा लिया


हमारे समय चक्र को प्रभावित किया अपितु वत्स तुम्हे ज्ञात भी नहीं की ये हमारी हे इच्छा थी की तुम हमारे समक्ष हो देवी प्रकर्ति से तुम्हे जो उपहार आशीर्वाद स्वरुप प्राप्त हुआ वो अपूर्ण है वत्स जिसके उपयोग से तुम निर्धारित ावडी में हे समय यात्रा पूर्ण कर सकते जिसका प्रयोग तुम कर चुके हो वत्स अब इस उपहार से तुम तभी समय यात्रा कर सकते हो जब हमारी ऊर्जा का समावेश इस दिव्या उपहार में हो किन्तु केवल एक हे समय के लिया तुम हमारी ऊर्जा का प्रयोग समय यात्रा में कर सकते

सूर्य ....... प्रभु जैसे आपकी इच्छा अगर यही आपकी इच्छा है तो मुझे विश्वाश है की मुझे भविष्य में एक बार से आदिक समय यात्रा करनी भी नहीं होगी आवर जो भविष्य में समय यात्रा करनी होगी उसमे भी आपकी इच्छा अवश्य निहित होगी परबु क्यों की आपकी इच्छा के बिना तो ये संभव नहीं

कालदेव ....... उचित कहा वत्स भविष्य में तुम्हे एक बार उचित समय आने पे फिर से समय यात्रा करनी होगी उसके पश्चात ये दिव्या उपहार देवी प्रकर्ति के पास अपने जीवित स्थान पे लौट जायेगा

सूर्य .....जज परबु जैसे आपकी आज्ञा

कालदेव ........ उचित समय आने पे एक बार पुनः भेंट होगी पुत्र सूर्य अपने करम पथ पे सदैव अडिग रहना देवी नियति सदैव तुम्हारा कल्याण करे वत्स

काल देव से एक ऊर्जा अंश निकल उस दिव्या लॉकेट में समाहित हो जाता है

आवर सब कुछ सूर्य की आँखों से ओझल होने लगता है

कुछ पल बाद सूर्य खुद को जल समाधी में पता है

सूर्य ......ये कही मेरा कोई स्वपन तो नहीं था

लॉकेट ......ये कोई स्वपन नहीं थी तुम्हारी भेंट काल चक्र से हुए है वो पूर्ण सत्य है

गुरुदेव ......हम्म्म्म अथार्त काल चक्र के आशीर्वाद फलसवरूप तुम समय चक्र को बिना प्रभावित किये एक बार फिर उचित समय आने पे समय यात्रा करोगे

पुत्र सूर्य

सूर्य ......जी गुरुदेव कब आवर क्यों इसके विषय में काल देव हे कोई संकेत देंगे भविष्य में एक बार पुनः उनके दिव्या दर्शन होंगे गुरुदेव.

गुरुदेव ...... पुत्र तुम बहुत भाग्यशाली हो जो उन दिव्या विभूति के दर्शन प्राप्त हुए

सूर्य. ..... दर्शन तो आपको भी प्राप्त हुए गुरुदेव फिर चाहे वो किसी अन्य रूप में हे क्यों न हो मैंने भी वो दृश्य देखा गुरुदेव जो आपने देखा पृथ्वीलोक पे

गुरुदेव ......किन्तु तुम कैसे जानते हो पुत्र सूर्य

सूर्य ...... ये दिव्या लॉकेट है न गुरुदेव कालदेव से केवल उनके आशीर्वाद के रूप में कुछ आवर भी प्राप्त हुआ है गुरुदेव घाटी हुए घटना का सत्य ज्ञात करने की सकती प्राप्त है किन्तु उसमे किसी तरह के बदलाव करने की क्षमता नहीं

गुरुदेव ........ किसी भी घटनाक्रम में बदलाव करना उचित नहीं पुत्र जब तक सयम नियति न चाहे

सूर्य ......जी गुरुदेव.

गुरुदेव .......पुत्र सूर्य अब तुम्हे सुक्रलोक की यात्रा के विषय में सोचना चाइये पुत्री किरण भी तुम्हारे साथ हे इस यॉर्क का भाग होगी पुत्री मानसी के साथ

सूर्य ......स्वीटी किस लिया गुरुदेव

गुरुदेव ....... ये तुम्हे तभी ज्ञात होगा जब तुम्हारी असुरगुरु शुक्र से भेंट होगी पुत्र किन्तु असुरगुरु शुक्र से सचेत अवश्य रहना बूढी आवर चातुर्य के धनि है वो

सूर्य ......जी गुरुदेव

गुरुदेव ........ अब तुम कुछ समय अपने परिवार के साथ समय वयतीत करो पुत्र उसके बात हम सन्देश देंगे तब यात्रा आरम्भ कर देने

सूर्य ......जी गुरुदेव आपके आदेश की प्रतीक्षा रहेगी परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्र

अंदर रानी पारी किरण को आवर उसके होने वाले बचे को ढेरो आशीर्वाद आवर प्यार दे पारी महल लौट गयी थी

बाकि लड़कियों ने किरण को घेर रखा था आवर साथ हे हाशि ठिठोली कर रही थी

U.s.a .........

शिव की जब सुबह आँखे खुली तो खुद को अपने रूम अपने हे बीएड पे लेता हुआ पाया खुद को एक डैम स्वस्थ देख शिव को यकीं नहीं हुआ की जो कुछ भी रात को हुआ वो सच था या सपना

शालिनी जी ....... आप उठ गए शिव

शिव ........ मैं यहाँ कैसे शालू मुझे तो हॉस्पिटल में होना चाइये था मेरा वो एक्सीडेंट होना क्या वो सपना था

शालिनी जी ...... जी नहीं वो कोई सपना नहीं था वो एक्सीडेंट सच में हुआ था आपके साथ

आवर आपको हॉस्पिटल में एडमिट भी किया गया था

शिव ........पैर मेरी बॉडी पे तो कही कोई चौथ का नीसाण तक नहीं है

शालिनी जी ....... आपके हिस्से का सरे जखम दर्द तकलीफ हमारे बेटे ने ले लिया

शिव ....... क्या मतलब सूर्य यहाँ आया था क्या

शालिनी जी ....हम्म्म

शिव .......उसने अपनी सक्तियो का गलत इस्तेमाल किया आवर तुमने उसे रोका तक नहीं शालिनी तुम्हे पता भी है मुझे कितनी चौथ लगी थी मैं पूरी तरह ठीक हम इसका मतलब वो सब मेरे बेटे सूर्य ने सहा तुम उसे ऐसा कैसे करने दे सकती हो शालिनी

शालिनी .......मैं कैसे रोक पति उसे मुझे तो खुद रात में सब होने के बाद पता चला था जबकि गुरुदेव खुद वह मौजूद थे उन्होंने सूर्य को नहीं रोका तो मैं कैसे रोक सकती थी अगर सूर्य कुछ भी गलत करता तो गुरुदेव उसे वही रोक देते

शिव ....... माँ बाप अपने बचो को अपने हिस्शे की खुशियां देते है आवर मैंने अपने बेटे की अपने हिस्शे का दर्द तकलीफ दे दी

शालिनी जी ........... आप उदाश न हो शिव हमारा बीटा सूर्य बिलकुल ठीक है आवर वो आपसे मिलने आएगा भी अब आप कॉफ़ी लीजिये वर्ण ठंडी हो जाएगी तो मुझे आवर बनानी पड़ेगी मैं आपका नास्ता लगाती हूँ

शिव ...... नहीं मुझे भूख नहीं है शालू मैं घर पे बात करता हूँ

शालिनी जी ......सूर्य स्वीटी घर पे नहीं परीलोक में है अभी

शिव ....... ठीक है तुमने घर पे किसी को बताया तो नहीं इस बारे में

शालिनी जी ..... जी नहीं गुरुदेव ने इसके लिया मन किया था

शिव ........ ये अच्छा किया वर्ण सभी परेशान हो जाते मैं बहार बगीचे में हु शालू

शालिनी जी .....जी ठीक है

शिव अपनी कॉफ़ी ले कर बहार बगीचे की आवर निकल जाता है उसका मन काफी असंत हो चूका था जब शिव को पता चला की उसके हिस्शे का दर्द उसके बेटे को सहना पड़ा

शिव पानी का नल चालू कर फुल्लो में पानी देते हुए भी यही सब सोच रहा था

कफ्फू देर तक खुद में खोते रहने के बाद शिव के फ़ोन की रिंग से उसका ध्यान वास्तविकता में लौटा

कॉल किसी प्राइवेट no. से था जिसके चलते शिव ने कॉल उठाया

कुछ देर बात करने के बाद शिव कॉल क्यूट कर देते है आवर भीतर की आवर निकल जाता है

शिव ....... शालू मैं काम से बहार जा रहा हूँ थोड़ा बहुत टाइम लग सकता है मुझे

शालिनी जी .......क्या हुआ शिव आप अचानक से बहार जा रहे है

शिव ......वो क्लाइंट का कॉल था तुम्हे बताया था न वो शेयर के बारे में वो ुशी सिलसिले में बात करना चाहता है तो अभी उसके हे घर जा रहा हूँ

शालिनी जी ........ नास्ता तो करते जाइये शिव

शिव .......कोई बात नहीं नहीं शालू वैसे भी भूख नहीं है मैं त्यार हो कर निकलता हूँ अरे याद आया कार तो डेमेज हो चुकी है पूरी

शालिनी जी ...... गेराज में से दूसरी ले जाइये सुबह सुबह वयोम आया था

शिव ........ सायद उसे सूर्य ने हे भेजा होगा कितना ख्याल रखता है मेरा बीटा आवर मैंने

शालिनी जी ....... क्या आपके इस तरह बार बार खुद को शर्मिंदा करने से सब बदल जायेगा जिस तरह माँ बाप का फ़राज़ होता है ुशी तरह बेटे बेटी का भी हमारे बेटे ने अपना वही फ़र्ज़ निभाया अब जाइये आवर त्यार हो जाइये

कुछ देर बाद शिव त्यार हो कर गेराज से नई कार ले क्लिंट से मिलने निकल जाते है

ीदार पीछे से शालिनी जी सूर्य से सम्पर्क कर उसे आवर किरण को u.s.a बुला लेती है

सूर्य ....... गुड मॉर्निंग माँ

सूर्य तो ख़ुशी ख़ुशी शालिनी जी के गले मिलने आगे बढ़ा पैर गाल पे झन्नाटेदार चांटा पार्टी हे साडी ख़ुशी एक पल में हे हवा हो गयी

किरण खुद सदमे में थी की शालिनी जी ने ऐसा क्यों किया

सूर्य ....... सॉरी माँ

शालिनी जी ...... सॉरी के बचे तुम कुछ भी करने से पहले जरा भी नहीं सोचते न

सूर्य ....... सॉरी न माँ मैंने वो जान बुज कर नहीं किया था सच में मुझे तो खुद बाद में आभाष हुआ के ये सब इसका किया धरा है माँ आवर फिर पापा को इस तरह तकलीफ में देखना अच्छा लगता

शालिनी जी ........ तू हर बार ऐसा क्यों करता है सूर्य जिस से हमें तकलीफ हो रात तुम्हारे जाने के बाद स्वीटी की क्या हालत थी ये तुम नहीं मैं जानती हूँ

सूर्य आगे भाड़ शालिनी जी के गुस्से में तमतमाए चेहरे से वो आंसुओ के मोती साफ़ कर उन्हें गले से लगा लेता है

किरण की आवर देखता है जिसकी भी आँखे नाम थे सूर्य किरण को अपनी आवर खींच कर एक तरफ से उसे भी सीने से लगा लेता है

सूर्य ........ माँ बड़ी जोरो की भूख लगी है आवर ये पापा कहा है

शालिनी जी ...... तुम बैठो मैं अभी तुम दोनों का नास्ता बनती हूँ तुम्हारे पापा बहार गए है किसी से मिलने

किरण ........ माँ आप रहने दीजिये मैं बनती हूँ आप इनके साथ बैठिये आवर अच्छे से इनकी खबर लीजिये इन्होने वो सब जानबुज कर किया था

शालिनी जी ........क्या ये सच है सूर्य तुमने वो सब जानबुज कर किया था

सूर्य ...... नहीं माँ ये स्वीटी आपको गुस्सा दिला रही ताकि आप मेरी पिटाई करो ये तो कर नहीं सकती न तो आपको हे भड़का रही है

ककीरण .......क्यों मैं क्यों नहीं कर सकती आपकी पिटाई

सूर्य ........तुम अपने पति की पिटाई करोगी स्वीटी

शालिनी जी ....... अगर गलती करेगा तो वो क्यों नहीं करेगी पिटाई तुम्हारी बेटी ये गलती करे तो लगा दिया करो 2 चार मैं तुम्हारे साथ हूँ

सूर्य ....... वह क्या जमाना आ गया है माँ बहु से मिल कर बेटे की हे ढुलाई का आईडिया दे रही है

शालिनी जी ...... अब ज्यादा नौटंकी न कर जरूर इन सब के पीछे तुम्हारा हे हाथ है

है न स्वीटी

किरण .......जी माँ पर पापा वाला इंडेंट चढ़ कर सब इनका हे किया धरा है

सूर्य ....... किसी ने सच हे कहा है इन बीबियो के पेट में कुछ नहीं पचता

शालिनी जी ......क्या कहा तुमने

सूर्य ...... सॉरी सॉरी वो गलती से निकल गया माँ

शालिनी जी सूर्य का कान पकड़ लेती है

शालिनी जी ........फिर से ऐसा कहेगा

सूर्य ........ सॉरी माँ आप मेरा कान छोड़िये फिर मैं आपको एक खुसखबरी दूंगा

शालिनी जी ......नहीं ऐसे हे बता की कैसी खुसखबरी है फिर मैं दिसिडे करुँगी की खूसबखबरी है की नहीं

सूर्य ....... अपना कान ीदार कीजिये

शालिनी जी किरण की आवर देखती है जो मुस्कुरा कर किचन की आवर चली जाती है

शालिनी जी ....... ले चढ़ दिया तेरे कान चल अब बोल क्या खुसखबरी है

सूर्य ........ आप न बहुत जल्द दादी बनने वाली है

शालिनी जी .......ये तो मुझे भी पता है जुली प्रेग्नेंट है

सूर्य ...... अरे माँ आप फिर से दादी बनने वाली है

शालिनी जी ......अरे है मैं भूल गई राधिका भो तो प्रेग्नेंट है वह भी तुम्हे ने जंधे घड़े है न

सूर्य ....... ठीक नहीं समझना तो मत संजो

शालिनी जी ......क्या मतलब इनके अलावा भी कोई आवर है क्या

सूर्य ......अरे माँ स्वीटी प्रेग्नेंट है

शालिनी जी ....... क्या कहा स्वीटी माँ बनने वाली है बेवकूफ घड़े पहले नहीं बता सकते थे क्या

सूर्य ....... ये क्या बात हुई माँ एक तो इतनी बड़ी ख़ुशी की खबर दी आवर मुझे हे बेवकूफ गधा न जाने क्या क्या कह रही है आप

शालिनी जी सूर्य का चेहरा थम वही होलो में हे उसके होंटो को चूमने लगती है

ीदार किरण तीनो का नास्ता ले कर बहार आती तो सामने सूर्य आवर शालिनी जी का चुम्बन चलते देख फिर से किचन में चल देती है

किरण .......माँ नास्ता त्यार है

किरण की आवाज सुन शालिनी जी फ़ौरन सूर्य से अलग हो जाती है

शालिनी जी ........ अभी के लिया इतना हे बाकि रात में जो तुम्हारा दिल करे

सूर्य को रात का खुला निमंत्रण शालिनी जी की आवर से मिल चूका था

सूर्य ........हम सैम को घर जा रहे है माँ जल्दी हे मुझे स्वीटी आवर मानसी के साथ यात्रा पे निकलना होगा

शालिनी जी ...... वो सब बाद में मुझे स्वीटी से मिलने दे

शालिनी जी फ़ौरन किरण के पास किचन में पहुँचती

शालिनी जी किरण के चेहरे को थम कर बड़े प्यार से निहारती है

शालिनी जी ....... स्वीटी क्या मैं सच में दादी बनने वाली हूँ

किरण शरमाते हुए हम में दो बार सर हिला देती है

शालिनी जी .....शाबाश मेरी बची तुमने तो मुझे आज खुशियों का खजाना हे दे दिया

शालिनी जी प्यार से किरण पुरे चेहरे को चुम लेती है

शालिनी जी ........ कितना टाइम हो गया स्वीटी

किरण ...... वो वो माँ पहला हे महीना है

शालिनी जी .......कोई बात नहीं आज से तुम्हारे खान पान की पूरी जिम्मेदारी मेरी

सूर्य ....... माँ अभी दादी बानी नहीं हो बनने वाली हो अभी से इतना ख्याल ररखोगी तो वो गोलू मोलू पैदा होगा सब गोलू गोलू बोल कर चिड़ाएंगे उसे

शालिनी जी ...... उसे बोलो मोली नहीं हेल्दी बोलते है समजा चल तू बेथ मैं तुम्हारे लिया दूसरा नास्ता बनती हूँ

सूर्य .......हाहाहा अभी से खातिरदारी सुरु हो गई

किरण .......माँ अभी बहुत टाइम है अभी से

शालिनी जी ....... नहीं बेटी भले हे पैदा होने में टाइम है पैर हेल्थ का ख्याल अब्बी से रखना होगा तुम्हे

सूर्य .......माँ मुझे नास्ता दीजिये मुझे किसी से मिल कर आना है

शालिनी जी एक प्लेट में सूर्य का नास्ता लगा देती है

आवर किरण को अपने हाथो से नास्ता करवाने लगती है

सूर्य नास्ता कर किरण आवर शालिनी जी को घर पे छोड़ गेराज से कार ले कर निकल गया

करीब आधे घंटे बाद कार एक बंगलो के सामने रुकी

सिक्योरिटी गार्ड ....... किस से मिलना है कोण है आप

सूर्य ...... मुझे मिस एलीना कपूर से मिलना है उनसे कहो की इंडिया से उनका फ्रेंड सूर्य ठाकुर आया है

सिक्योरिटी गार्ड इंटरकॉम से कॉल कर अंदर खबर देता है है कुछ देर बात कर गेट खोल सूर्य को अंदर जाने का इशारा करता है

सूर्य अभी पोर्च में कार कड़ी करता हे है की इतने में कोई उसकी कार का दूर खोलता है

सूर्य जैसे हे बहार निकलता है उसके सामने एलीना कड़ी मुस्कुरा रही थी

एलीना ........ क्या बात है मर .ठाकुर आप आवर हमारे घर पे

सूर्य. .......क्यों अपनी दोस्त से मिलने नहीं आ सकता क्या

एलीना ...... हेहेहे बिलकुल आ सकते हो सूर्य चलिए अंदर चलते है आपको मेरे माँ डैड से मिलवाती हूँ

सूर्य .......जी जरूर वैसे आप सुबह सुबह कृषि तजा खिले गुलाब के जैसे महक रही है राज़ क्या है

एलीना ....... ऐसा क्यों नहीं है मर ..आप सदी सुधा है लाइन मरना आपको सोभा नहीं देता हेहेहे

सूर्य ....... क्या पता अभी भी चांस हो

सूर्य का हाथ थामे आगे आगे चल रही एलीना के पेअर एक डैम से रुक जाते है आवर वो पलट कर सूर्य को जिस तरह देखती है सूर्य की हवा खुश्क होने लगती है

एलीना ....... एक बार सोच लीजिये लाइन मरने से पहले फिर पीछे न खतना मर.

सूर्य ...... बीबी से जुटे थोड़ी हे खाने है यार

एलीना .......बहुत बड़े वाले फटु हो यार तुम तो हेहेहे

( सूर्य .....अब तुम्हे क्या बताऊं पहले से हे फटी पति है इतनी बीबियो के चाकर में )

एलीना ......मीट माय स्वीट माँ जेनिलिया कपूर एंड that's माय डैड अमन कपूर

सूर्य ....... Hello अंकल hello आंटी

एलीना ......... माँ डैड मीट माय नई फ्रेंड एंड नई बॉस mr.surya ठाकुर

सूर्य ...सूर्य शिव ठाकुर

एलीना ...... यस मर .सूर्य शिव ठाकुर

अमन ......hi बीटा खड़े क्यों हो बीटा बैठो

सूर्य ........जी अंकल

जेनिलिया ........ बीटा टिया लोगे या कॉफ़ी

सूर्य ......जी आंटी कॉफ़ी वैसे आप हिंदी बहुत अच्छा बोल लेती है आंटी जी

जेनिलिया ....... तुम्हारे अंकल से सदी करने के बाद सीखी थी बीटा आवर तुम भी इंडियन हो तो हिंदी में बात करना ठीक लगा

सूर्य ....... वैसे तो इंडियन हूँ आंटी जी लेकिन उतना हे अमेरिकन भी मेरा जनम यही अमेरिका में हे हुआ था अभी 2 साल से इंडिया सिफत हो गए

एलीना ....... ये लो तुम्हारी कॉफ़ी सूर्य

सूर्य .......थैंक्स एलीना वैसे आंटी जी आप को देख कर लगता नहीं की आप एलीना की माँ हो जबकि आप काफी यंग है सॉरी अंकल बूत आपकी आगे आंटी जी से काफी बड़ी लगती है

अमन ........ हाहाहा बीटा जी हम इंडियन खाने पिने के कुछ ज्यादा हे सकीं होते है आवर तुम्हारी आंटी भी मुझसे 7,8 इयर्स छोटी है वैसे सदी के बाद मर्दो का हल ऐसा हे होता है मर्द बूढ़े आवर बिबिया जवान हाहाहाहा

सूर्य ......हाहाहा आपने सच कहा उन्सेल आप काफी हसमुख संभव के है ऐसे हे रहना अंकल वैसे आप इंडिया में कहा से हो अंकल

अमन ........... पुणे से हूँ बीटा पैर काफी लम्बे समय से यही हूँ आवर तुम कहा से हो बीटा

सूर्य. ......जी जैसलमेर सूर्यगढ़ से अंकल मेरी ट्रेनिंग पुणे आर्मी बेस से हे हुई है अंकल अब पहले से काफी डव्लपमेंट हो चूका है वह कभी आना हुआ तो हमारी आवर भी जरूर आइयेगा

अमन ....... जरूर बीटा जी वैसे तुम्हे देख कर मुझे भी ऐसा हे लगा था जैसे कोई आर्मी में हो तुमसे मिल कर अच्छा लगा बीटा मेरा ऑफिस जाने का वक़्त हो चला है

सूर्य ......आंटी जी अंकल अगर आप कुछ देर आवर रुके तो मुझे आपसे जरुरी बात करनी है दरशल मैं आपसे हे मिलने आया था पैर जब नेट पे आपके बारे में पता किया तो पता चला की आप एलीना के डैड है इस लिया सीधा घर हे चला आया

अमन ...... है बीटा कहो क्या बात है

एलीना .......इसका मतलब तुम मुझसे मिलने नहीं आये

जेनिलिया .......एलीना बीटा ऐसे बचो के तरह बिहेव न करो तुम बोलो बीटा

सूर्य ........ अंकल आप प्रॉपर्टी डीलिंग का बिज़नेस करते है ुशी सिलसिले में आपसे बात करनी थी मुझे कुछ बिग हाउस खरीदने है जहा मैं विरदा आसाराम आवर अनाथ आश्रम खोलना चाहता हूँ पैर दोनों प्रॉपर्टी मुझे एक हे जगह चाइये वो भी सहर के अंदर जहा हॉस्पिटल स्कूल माल्स ऐसी सुविधाएं हो

अमन ....... बीटा तुम्हारी सोच आवर काम दोनों हे अच्छे है इस लिया मैं तुम्हारा काम जरूर करूंगा आवर इसमें मुझे कोई कमीशन भी नहीं चाइये पैर जिस तरह की तुम्हारी डिमांड है बजट बहुत ज्यादा हो जायेगा इसमें

सूर्य ........ उसकी टेंशन नहीं है अंकल बस जो कहा ुशी हिसाब से काम हो तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है

एलीना ........ अगर तुम ओल्ड आगे होम आवर ओर्फनेज होम के लिया अलग अलग जगह देखते हो तो इसमें तुम्हारा पैसा काम खरच होगा

सूर्य ...... है पैर जो मैं सोच रहा हूँ वो फिर संभव नहीं अगर अनाथ आसाराम आवर वर्धा आसाराम एक जगह होंगे तो उसमे दोनों का फायदा है बड़े बुजुर्गो को बचो का साथ मिलेगा जो हर वक़्त उनके चेहरे पे मुस्कान भिखेर रहेंगे आवर वही उन अनाथ बचो को उन बुजुर्गो के रूप में माता पिता का प्यार मिलता रहेगा दोनों को मिला कर एक सयुंक्त बड़ा परिवार बन जायेगा इस से बेहतर क्या हो सकता है की अनाथ होती हुए उन्हें इतना बड़ा परिवार मिल जायेगा आवर बुजुर्गो को बुढ़ापे की लाठी जहा अकेलापन बचो के वजह से उन्हें अपने अंत समय बिलकुल नहीं खलेगा

जेनिलिया ......... ब्रिलियंट आईडिया सूर्य पहले मेरा भी यही सुझाव था पैर तुम्हारी बातो ने तुम्हारी सोच ने एक बेहतर विकल्प निकला

अमन ......बिलकुल सही बीटा तुम्हारी इस सोच से फैसले से दो पीडियो को जोड़ कर एक सयुंक्त परिवार बना दिया जहा उन अनाथ बचो को बुजुर्गो के रूप में परिवार मिल जायेगा वही अनाथ बचो को उन बुजुर्गो के रूप में माता पिता बहुत बढ़िया बीटा

सूर्य ........ तो फिर जल्द से जल्दी पता कीजिये अंकल

ामम .......एक घंटे में मैं तुम्हे खबर करता हूँ बीटा बाकि सब बाद में पहले तुम्हारा काम करूँगा

सूर्य .......... एलीना हॉस्पिटल का काम कहा तक पहुंचा

एलीना ....... अभी बहुत काम बाकि है सूर्य हॉस्पिटल त्यार होने में

सूर्य ......... इस तरह काम नहीं चलेगा काम स्लो चल रहा है तो कांटेक्ट कैंसिल कर किसी आवर को दे दो आवर कोई लगल प्रॉब्लम है तो मुझे बताओ नेक्स्ट मंथ तक हॉस्पिटल का काम पूरा होना चाइये

एलीना ........ पैर सूर्य काम में कोई रुकावट नहीं है आवर न हे काम डेरी चल रहा है पैर वक़्त तो लगेगा हे

सूर्य ....... तुम त्यार हो जाओ हमने जिसे कांटेक्ट दिया है उस से मिलना है

एलीना .......कांटेक्ट आपके डैड ने दिया है सूर्य

सूर्य ....... तो क्या हुआ फ्री में नहीं कर रहे है ऑलमोस्ट पूरी बिल्डिंग की रूप रेखा पहले से त्यार खरीदी थी फिर भी इतना समय लग रहा नई बिल्डिंग में तो न जाने कितना टाइम लगते

अमन .......मेरे ख्याल से एक बार काम देख को बीटा तुम्हारे डैड ने कॉन्ट्रैक्ट दिया है तो वो उनके भरोशे के हे लोग होंगे

एलीना ......मैं अभी त्यार हो कर आती हूँ

सूर्य ......ok

तभी घर जे बहार कार रुकने की आवाज होती है

एलीना ....... माँ आपके नबाब साहब आ गए पार्टी करके सूर्य ये मेरा छोटा भाई है रॉकी जो अभी आता हे होगा

जेनिलिया .........एलीना तुम जाओ

एलीना भीतर अपने रूम की आवर भाड़ जाती है तभी बहार से हलकी लडख़ड़ात के साथ एक 22,23 साल का लड़का इंटर करता है दिखने में अच्छा खासा था पैर उसकी लाल आँखे बता रही थी की किसी तरह का नशा किया है

रॉकी ....... गुड मॉर्निंग माँ डैड

जेनिलिया ........ आ गए तुम रात भर गम फिर कर

अमन .......तुमने आज फिर नशा किया है

रॉकी

रॉकी........ सॉरी डैड दोस्तों ने पीला दी

सूर्य .........hello रॉकी

रॉकी .......hi आप कोण पहले कभी देखा नहीं

एलीना ....... ये मेरा फ्रेंड है सूर्य कभी घर भी रहा करो टाइम पे चले सूर्य

सूर्य .......ok चलो bye अंकल आंटी जी फिर मिलेंगे

सूर्य एलीना को ले बहार निकल जाता है

सूर्य ......कार तुम ड्राइव करो एलीना

एलीना .......ok वैसे भी तुम्हे कहा पता होगा साइड का

एलीना सूर्य कार में बेथ घर से निकल गए

सूर्य ......एक बात पुछु एलीना वैसे तो ये तुम्हारा पारिवारिक मामला है

एलीना. ....... क्या बात सूर्य कोई सीरियस बात है क्या

सूर्य .......रॉकी कब से ड्रग्स ले रहा है

एलीना .......तुम्हे गलत फहमी हुई है वो ड्रग्स नहीं लेता बस ड्रिंक्स करता है

सूर्य ........ घर जाने के बाद उसके रूम की तलाशी लेना तुम्हे वह जरूर ड्रग्स मिलेगा आवर सायद काफी समय ले रहा है

एलीना .......तुम्हे कैसे पता ये सब

सूर्य .......उसकी लाल आँखे देख कर आवर बाजु पे बने इंजेक्शन के नीसाण जो सिरिंग द्वारा ड्रग्स लेने पे बनते है बाकि तुम भी मेडिकल स्टडी कर रही हो

कुछ देर बाद सूर्य आवर एलीना दोनों साइड पे पहुंच चुके थे ..................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ........................
 
अपडेट 254

सूर्य ......एक बात पुछु एलीना वैसे तो ये तुम्हारा पारिवारिक मामला है

एलीना. ....... क्या बात सूर्य कोई सीरियस बात है क्या

सूर्य .......रॉकी कब से ड्रग्स ले रहा है

एलीना .......तुम्हे गलत फहमी हुई है वो ड्रग्स नहीं लेता बस ड्रिंक्स करता है

सूर्य ........ घर जाने के बाद उसके रूम की तलाशी लेना तुम्हे वह जरूर ड्रग्स मिलेगा आवर सायद काफी समय ले रहा है

एलीना .......तुम्हे कैसे पता ये सब

सूर्य .......उसकी लाल आँखे देख कर आवर बाजु पे बने इंजेक्शन के नीसाण जो सिरिंग द्वारा ड्रग्स लेने पे बनते है बाकि तुम भी मेडिकल स्टडी कर रही हो

कुछ देर बाद सूर्य आवर एलीना दोनों साइड पे पहुंच चुके थे ..................

अब आगे ..........

असुरलोक असुर महल ........ पिछले कुछ समय से असुरमहल में कुछ ज्यादा हे गतिविधिया हो रही थी

नीलसूर द्वारा असुरमहल का त्याग करने से असुरमहल में कुछ दिवश असंती का माहौल बना रहा जिसका प्रभाव सभी पे हुआ भी

नीलसूर के असुरमहल का त्याग करने के पश्चात नीलादुर की पत्नी भी असुरमहल का त्याग कर चुकी थी वो अपने पिता के पास लौट चुकी थी अब असुर महल में नरकासुर द्वारिका वातापी अग्निमुखासुर उसकी पत्नी भयासुर वह उसकी पत्नी वज्रासुर इस समय असुर महल से बहार था

असुरलोक में इस समय रात्रि पहर चल रहा था

द्वारिका अपने कक्ष में विश्राम कर रही थी

तभी द्वारिका के कक्ष की दिवार से नरकासुर बहार निकलता है ये एक मायावी कक्ष का द्वार था जिसका निर्माण द्वारिका ने बहुत पूर्व किया था वो अपनी तमसिक किर्याएँ यही पे तो एकांत में पूर्ण करती थी

नरकासुर को देख द्वारिका के चेहरे पे कुटिल मुस्कान उभर आती है

अपने जिसम पे वाटरो के नाम पे जो एबीएन वस्त्र थे उसका भो द्वारिका नरकासुर के समक्ष त्याग कर देती है

द्वारिका ....... स्वामी इतनी सिगरा भोग आये उन दानवी कन्याओं को

नरकासुर की मुस्कान हे बता रही थी की जो द्वारिका ने कहा अभी अभी वही कार्य करके नरकासुर लौटा है

नरलासुर निर्वस्त्र सारिका के बगल में आ लेता आवर द्वारिका के बड़े बड़े वक्षो के साथ क्रीड़ा ( खेल ) करने लगता है

नरकासुर ........ तुमने हमारे लिया इतनी कोमलांगी कौमार्य से पारी पूर्ण दानवी कन्याओ का पारबन्द जो किया था उन कोमलांगी अक्षत कन्याओ का कौमार्य भोग कर हम तृप्त हुए आवर अतिप्रशन भी

द्वारिका ......प्रतीत होता है आप तृप्त हुए है पैर आपका ये सम्भोग अस्त्र नहीं इसे कुछ आदिक हे भ गई वो कोमलांगी कन्या की कुंवारी योनि अत्यधिक पसंद आई है लगता है

द्वारिका नरकासुर के ार्ड उत्तेजित विशाल लिंग को थम बड़े बड़े बालो वाली पुल्ली हुई अपनी गीली योनि द्वार पे जिश्ने लगती है

द्वारिका .......स्वामी हमारे गुप्तचरों को अभी तक उस बालक का पता नहीं चल पाया है कहा होगा किस लोक में होगा हम आपको ले कर चिंतित है स्वामी

नरकासुर ........ हम स्वयं चिंतित है द्वारिका हमारे जितने भी गुप्तचर जिस किसी लोक में उस बालक की खोज में निकले या तो वो रहश्यमयी तरीके से मृत्यु को प्राप्त हो चुके है आवर जो अभी पुनः उस बालक की खोज में जिनलोक नागलोक गए वो इन दोनों लोको में प्रवेश नहीं कर प् रहे है हम सवयं प्रयाश कर चुके किन्तु हमें सफल नहीं हुए कुसी प्राचीन ऊर्जा से सम्पन सुरक्षा कवच से दोनों हे लॉक सुरक्षित है

द्वारिका ........ कही इसमें भी देवो की चाल तो नहीं स्वामी एक वही तो है हम असुरु के घोर सत्रु

द्वारिका दवारा अपने कामदण्ड को अपनी गीली योनि पे निरंतर रगड़ ने से नरकासुर भी उत्तेजित होने लगता है

नरकासुर ....... देव साध्व हमारे साथ चाल हे करते आये है उस बालक को मुझसे चुपके के पीछे उनका स्वार्थ हो सकता है

द्वारिका ........ आपने व्योमासुर के विषय में क्या सोचा स्वामी उसने बिना आपसे किसी तरह के विचार विमर्श किये बिना हे असुरगुरु का त्याग कर दिया

नरकासुर ........ तुम्हारी इच्छा भी तो यही थी न द्वारिका की गुरुदेव असुरगुरु पढ़ का त्याग कर दे या हम स्वयं उन्हें उस पढ़ से पद्विमुख्त कर दे

द्वारिका ....... है स्वामी हमारी ये इच्छा अवश्य थी किन्तु उनका इस तरह बिना किसी कारन के असुरगुरु के पढ़ का त्याग करना हमें किसी बहुत बड़े षड़यंत्र के संकेत दे रहे है

द्वारिका का सरीर भले हे अपने कामाग्नि अपनी हवश में जल उठा था किन्तु उसका मस्तिष्क अभी भी कुटिलता से उतनी तेजी से कार्य कर रहा था

नरकासुर द्वारिका की जंघा उठा अपना विशाल लिंग एक हे जटके में जिस तरह डालता है आवर द्वारिका के मुश् से कमुख मिसफिट सिसकारी निकलती है ुशी से अंदाजा लगाया जा सकता है की द्वारिका इस कला में कितनी माहिर है जिसने नरकासुर के विशाल मोटो लिंग को एक हे बार में जड़ तक अपने भीतर सम्मानित कर लिया आवर उफ़ तक नहीं की

नरकासुर ........ पढ़ विमुक्ति का अधिकार केवल असुरगुरु शुक्र के पास है द्वारिका उन्होंने गुरुदेव को पद्विमुक्ति के साथ साथ असुरलोक से निष्कासित भी कर दिया फिर भी तुम कह रही हो की ये किसी तरह का षड़यंत्र है

द्वारिका ......उम्म्म्म अह्ह्ह्ह स्वामी वो अब गुरु नहीं रहे उन्हें गुरुदेव कहना बंद कीजिये वो अब केवल एक सामान्य असुर है व्योमासुर असुरलोक के उसे निष्कासित किया है किन्तु उसके शिष्य आवर सहयोगी अभी भी असुरलोक में है जो उसे पल पल की खबर अवश्य किसी न किसी माध्यम से पहुंचते होंगे

नरकासुर ......... तुम क्या चाहती हो द्वारिका हमसे

द्वारिका ........ हम आपको सचेत करना चाहते है स्वामी किसी भी असुर पे स्वयं से आदिक विश्वाश न करे आवर सदैव सचेत रहे

नरकासुर ........ तुमने हमें क्या मुर्ख समजा है द्वारिका जब असुरगुरु शुक्र का सन्देश हमें प्राप्त हुआ हमने ुशी समय से अपने गुप्तचर लगा दिए है शुक्र लोक में

द्वारिका ......सुक्रलोक में क्यों स्वामी

नरकासुर ........ व्योमासुर असुरलोक में आ नहीं सकता क्यों की उसे निष्कासित किया गुरु शुक्र ने ऐसे में उनका शुक्र लोक में अवश्य आना जाना रहेगा उनकी योजना जानना है तो हमें उस पे नजर रखनी होगी

द्वारिका ...... अभी वो किस लोक में है स्वामी

नरकासुर ......पृथ्वीलोक में उन्होंने वही रहने के लिया स्थान चिंतित किया है जब तक असुर लोक निष्कासित आदि पूर्ण नहीं होती वो पृथ्वीलोक पे हे रहेंगे

ीदार कोई साया द्वारिका आवर नरकासुर की काम क्रीड़ा के साथ साथ इनकी आपसी बाते भी सुन रहा था

जैसे हे नरकासुर द्वारिका की योनि में अपना वीर्यदान कर उसके बगल में लेटता है वह साया बिना किसी की नजर में आये वह से निकल जाता है

पृथ्वीलोक .........

किरण .......माँ सब थी हो चुकी है न

शालिनी जी ....... है बेटी सब थी हो चुकी है बस ये सूर्य न जाने अभी तक कहा रह गया बोलै था जल्दी लौट आऊंगा

शिव ........ उसे कुछ जरुरी काम रहा होगा शालू अभी आता हे होगा

किरण ....... पापा आप भी चलिए न हमारे साथ

शिव ....... नहीं बीटा स्वीटी अभी यहाँ कुछ जरुरी काम है उसे पूरा करने के बाद मैं भी जल्दी हे लौट आऊंगा

शालिनी जी ......... आप टाइम से खाना पीना शिव

शिव ........ तुम चिंता नहीं करो शालू मैं अपना ख्याल रखूँगा आवर 2,3 दिन में लौट आऊंगा वैसे घर पे कॉल कर के बताया तो नहीं न अभी किसी को

शालिनी जी ....... ऐसे ख़ुशी की खबर इस तरह फ़ोन पे थोड़े हे बताई जाती है सभी के सामने हे बताई जाये तो ख़ुशी दुबले हो जाती है शिव

शिव ....... ठीक है पापा आवर बाउजी बहुत खुश होंगे

शालिनी जी ....क्यों बाकि सब खुश नहीं होंगे क्या

शिव ......अरे नहीं मेरा मतलब है उन्हें कब से इस पल का इन्तजार था वो सबसे ज्यादा खुश होंगे जब उन्हें पता चलेगा की उनका पोता आने वाला है वाकई बीटा स्वीटी तुमने हम सब को बहुत बड़ी ख़ुशी दी है

बहार कार की आवाज सुन के शालिनी जी के कान खड़े हो गए

शालिनी जी ......... लगता है सूर्य आ गया है

शिव ....... तुम सब जाओ मैं 2,3 दिन में पूरा काम फिनिश कर के आता हूँ

शालिनी जी ........ इतना टाइम कहा लगा दिया तुमने सूर्य

सूर्य ......सॉरी माँ सॉरी डैड वो अमन अंकल के साथ अनाथाश्रम आवर वृद्धा आसाराम की जरुरी फॉर्मेलिटी पूरी करने में कुछ टाइम लग गया था

शिव ........ चलो अच्छा है ये काम हो गया अब हॉस्पिटल का भी जल्द हे पूरा हो जायेगा

सूर्य ......है पापा दोनों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चूका है अब दोनों का लगली काम भी बाकि सब अमन अंकल देख लेंगे

शिव....... है मेरी बात हुई थी उनसे भी बहुत अच्छे इंसान है वैसे दोनों संस्थाओ की केयर टेकर किसे चुना है तुमने

सूर्य ....... फ़िलहाल तो जेनिलिया आंटी को हे केयर टेकर बनाया है पैर वो अकेले हेंडल नहीं कर पाएंगी उनकी ड्यूटी जो होती है इस लिया उनकी एक फ्रेंड्स है जो समाज सेविका है उन्होंने दूसरा उनको सुग्गेस्ट किया है तो फ़िलहाल साडी जिम्मेदारी मैंने उन्हें हे सौंप दी है हॉस्पिटल त्यार होने के बाद एलीना के साथ वो खुद भी अपनी नौकरी चढ़ हमारे हॉस्पिटल को हे ज्वाइन करेंगी मैंने कुछ आवर डॉक्टर्स के लिया भी बोल दिया है उन्हें

शिव ......बीटा एक साथ इतना सब तुम हेंडल तो कर पाओगे न

सूर्य. .....जी पापा आप चिंता न करे माँ के नाम को ख़राब नहीं करूंगा आप त्यार नहीं हुए

शिव ...... नहीं बीटा तुम लोग चलो मैं यहाँ का काम पूरा करके आता हूँ 1 ,2 दिन में

सूर्य ...... Ok पापा वैसे माँ हमें अब निकलना चाइये

शालिनी जी ......हम त्यार है बीटा

किरण .......माँ मुझे दिल्ली चढ़ रुकना है मैं कल सुबह आ जाउंगी बाकि सब के साथ

सूर्य .....ये भी ठीक रहेगा पैर नाना जी को कॉल कर देना की वो सुबह पुरे परिवार के साथ आ जाये

किरण ....... वो आप जानो क्यों पापा

शिव ....बिलकुल सही अब अपने ससुराल वालो की जिम्मेदारी तुम्हारी है बीटा न की मेरी गुड़िया की

सूर्य ......पापा वो आपका भी ससुराल है

शिव ......बीटा मुझे तो मौका मिला हे नहीं आवर जब मिला तो बेटे ने बाज़ी मार ली हाहाहा

शालिनी जी ........ शिव अपना ख्याल रखना हम चलते है टाइम से खाना खा कीजियेगा

शव ......ठीक है ठकुराइन जी आपके आदेश को भला हम कैसे ताल सकते है

सूर्य किरण शालिनी जी तीनो शिव से गले मिल इंडिया के लिया निकल गए

ीदार शिव इन सब के जाते हे कार ले कर निकल जाता है

सूर्य किरण को दिल्ली छोड़ बाकि सभी के साथ कुछ टाइम बिता कर शालिनी जी को ले कर सूर्यगढ़ आ पहुंचा

सूर्य को यहाँ आते आते करीब 8 बज चुके थे

दादा जी ...... आ गया मेरा शेर बीटा

सूर्य ......क्या बात है दादी जी आज दादा जज बड़े चहक रहे है कही बुढ़ापे में दूसरी दादी जी के तलाश तो पूरी नहीं हो गयी इनकी

वैसे भी पिछले जनम में इनकी कुंडली में दादी जी थी

दादी जी ....... इन्हें जो करना है करने दे अब बुढ़ापे में कोण इन्हें पसंद करेगा

सूर्य ......सुन रहे है दादा जी दादी जी क्या कह रही है आपके बारे में हाहाहा

दादा जी ...... रहने दे बीटा अभी भी ये पहलवानी जिसम बूढ़ा नहीं हुआ है अभी अपनी मुचो पे तव दे कर मैदान में उतर जॉन. तो अच्छे अच्छे पहलवानो को दल छठा दूँ मैं

सूर्य ........ देख लीजिये दादा जी कही इस उम्र में हड़िया चटक गई तो फिर जुड़ना मुश्किल होगा क्यों दादी जी

दादी जी .....सही कहा बीटा तुमने वैसे बीटा अभी कुछ देर पहले सूरजगढ़ से फ़ोन आया था वो कह रहे थे की तुमने सबको कल सुबह बुलाया है

सूर्य ......जी दादी जी वो कुछ जरुरी बात करनी थी तो सोचा सबके सामने हे एक साथ हे कहना ठीक रहेगा

दादा जी .......क्या हुआ बीटा सब ठीक तो है न अगर बताना चाहो तो

सूर्य .......जी दादा जी सब ठीक है कल सुबह तक का इन्तजार कीजिये आप

मेनका जी ....... बाउजी चलिए डिनर कर लीजिये माँ सा आप भी आवर तुम चलो चल कर डिनर करो

सूर्य ...... जो हुकुम ठकुराइन जी हाहाहा

मेनका जी ....... रुक तू तुझे मैं अभी बताती हूँ अपने फूफा जी की नक़ल करता है देखा माँ सा ये आपका लाडला

दादी जी ......क्या हुआ बेटी वो मजाक कर रहा है अब एकलौती बुआ से नहीं करेगा तो किस से करेगा वैसे भी तुम हे कहती हो लाडला बीटा है मेरा आवर अभी उसकी हे शिकायत कर रही हो

मेनका जी ....... फिर आप बिच में न आना माँ बेटे के

दादा जी ....... लाडो कोई बिच में नहीं आएगा तुम दोनों के

आज वर्षों बाद अपने पिता के मुँह से अपने बचपन का नाम सुन मेनका जी जहा पहले गुस्सा होती थी वही आज इस नाम को सुन कर काफी खुश थी

मेनका जी ....... आपकी आज भी याद है ये नाम बाउजी

दादा जी .......क्यों नहीं होगा लाडो महेंद्र ने निकला था न तुम्हारा ये नाम लाड से जब तू उसके लाडू चीन कर खा जाती थी आवर वो लाडू की जगह लाडो लाडो चिलता तेरे पीछे यही उस पुराणी हवेली के आँगन में भागता था पैर तू कभी उसके हाथ नहीं आती थी

दादा जी अपनी थाली से निवाला बना कर मेनका जी को जब प्यार से खिलते है तो उनकी आँखों से ख़ुशी के आंसू टपक जाते है

मेनका जी ....... आप हे तो थे जो मुझे माँ सा की दन्त आवर पिटाई से बचते थे जब मेंदु ( महेंद्र ) इनसे मेरी शिकायत करता था

दादा जी ...... आवर तेरी माँ सा शिव को गौड़ में लिया तुझे पूरी हवेली में ढूंढ़ती फिरती थी हाहाहा सच में क्या दिन थे वो क्यों ठकुराइन जी

दादी जी ...... आज अपनी मेनका को देखती हूँ जी तो लगता नहीं की ये मेरी वही लाडू चोर लाडो है जो दिन भर शैतानी करके चुप जाती थी सदी के बाद सब बदल गया वो मेरी नटकट बची कब इतनी समझदार इतनी बड़ी हो गयी पता हे नहीं चला चल उदार आ मरूंगी नहीं क्या सिर्फ अपने बाउजी के साथ हे खायेगी मेरे साथ नहीं

मेनका जी दादा जी के पास से उठ कर दादी के साथ बेथ उनके हाथ से खाना खाने लगती है

दादा जी .......वक़्त मुठी में बंद रेट की तरह कब हाथो से निकल जाता है पता हे नहीं चलता ठकुराइन कब बड़े हुए कब सदी लायक हुइमे जैसे कल की हे बात हो

रेखा जी .....दीदी आप खाना .....

रेखा जी मेनका को दादी जी के साथ खता देख बिना कुछ बोले लौट जाती है आवर कुछ देर बाद एक थल में कुछ सब जिया आवर चपाती रख जाती है

ीदार बहार महेंद्र जी सूर्य रेखा जी मेर्री जी शालिनी जी के साथ खाना खा कर कुछ देर अपने रूम में चला जाता है

सूर्य को अकेला देख मेर्री जी भी उसके रूम में जा पहुँचती है ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................
 
माफ़ी चाहता हूँ दोस्तों तभियात काफी करब होने के कारन बड़े हॉस्पिटल में एडमिट हुआ हूँ कुछ समय के लिया कोई अपडेट नहु आएगा स्फोरम से दूर रहूँगा तो ापुड़ाते तभी पोस्ट कर पाउँगा जब पूरी तरह से ठीक हो जाऊंगा Story Collector The Immortal भाई कच्चे वक़्त के लिया स्टोरी को क्लोज कर दीजिये वापिस आने पे फिर से स्टार्ट करूंगा
 
hello दोस्तों उम्मीद है की आप सब कुशल मंगल होंगे .

माफी चाहता हूँ इस तरह अचानक से बिच में हे स्टोरी को क्लोज करवाना पड़ा सब कुछ अचानक से हुआ की ज्यादा कुछ ठीक से क्लियर भी नहीं कर पाया .

अभी पहले से बेहतर हूँ पैर अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाया हूँ 4.5 राज में फिर से स्टोरी स्टार्ट हो जाएगी फ़िलहाल कुछ टाइम स्टोरी थोड़ी स्लो रहेगी हफ्ते में 3,4 अपडेट हे दे पाउँगा दल्ली अपडेट अभी नहीं दे पाउँगा जैसे जैसे ठीक होऊंगा वैसे वैसे अपडेट पहले की तरह देना सुरु करूँगा

3,4 रोज बाद इस लिया ताकि एक बार मैं भी स्टोरी पे फिर से नजर मार लेता हूँ ताकि गलतियां काम हो आवर कोई किरदार मिस न जाये

थैंक यू एवरीवन. ..........🙏🙏🙏

कल्याणसूर्य .........
 
...फॅमिली इन्द्रो .....

शिव ठाकुर फॅमिली....( सूर्यगढ़ )

1 ......परताप ठाकुर दादा जी

2 ......जानवी ठाकुर दादी जी

3 ......मेनका ठाकुर. बुआ जी

4 ......विजय ठाकुर फूफा जी

5........पायल ठाकुर दीदी

6. ......प्रीती ठाकुर दीदी

7 ......महेंद्र ठाकुर. बड़े पापा

8 .......रेखा ठाकुर बड़ी मम्मी

9 .....कोमल ठाकुर.

10 ........शिव ठाकुर. पापा जी

11 .......शालिनी राणा ठाकुर मम्मी जी

12 ......सूर्य ठाकुर (काल . निर्भयासुर .निर्भया )

13 ........किरण सूर्य ठाकुर (s.wife

14 ..... मानसी सूर्य ठाकुर ( s.wife

15 ....... राधा ठाकुर छोटी बुआ जी.

16 ....... मेर्री जी रुस्सियन सीक्रेट क्ष अफसर

17........ अलीना ( प्रिय ) मेर्री सिस्टर एंड सीक्रेट क्ष अफसर

मेनका बुआ फॅमिली

1 ..... विजय सिंह फूफा जी

2 ...... मेनका सिंह बुआ जी

3 ...... पायल सिंह

4 ....प्रीति सिंह

शालिनी फॅमिली ( सूरजगढ़)

1 ....विक्रम सींग राणा नाना जी

2 .....रूपा देवी. नानी जी

3 ....जोरावर सिंह राणा मां जी

4 .....प्रिय सिंह राणा ममी जी

आगे 36 ईयर

5 .....सपना राणा

6 .......संजय राणा मां जी

7 ......सन्ति राणा ममी जी

8........ किरण राणा ठाकुर

9 .....विजय राणा आर्मी अफसर

सक्तिपुर ठाकुर फॅमिली

1.... दुर्जन सिंह ठाकुर ( डेड )

2 ......गीता ठाकुर ( दुर्जन वाइफ )

3...... विक्रम सिंह ठाकुर ( डेड . दुर्जन सोन )

4..... गायत्री ठाकुर ( गीता ठाकुर डॉटर )

5 ....दुष्यंत ठाकुर ( डेड )

6..... रुक्मणि ठाकुर ( दुष्यंत वाइफ )

7...... अजय ठाकुर

8 ......... विधि ठाकुर

9 .....राणा ठाकुर ( गीता ठाकुर का सेवक )

सूर्यकांत सर फॅमिली .......

1 ..... सूर्यकांत सिंह अंकल आर्मी अफसर 2 ........

3 ..... परभा आंटी जी ( सूर्यकांत सर वाइफ ...नाम याद नहीं है दोस्तों )

4...... रोहन सिंह आर्मी अफसर

5 ....... राधिका सिंह ( रोहन वाइफ )

6 ......दीप्ती सिंह पुलिस अफसर

सोहेल फॅमिली ( सूर्य फ्रेंड)

1....... कासिम खान

2...... फातिमा खान

3...... सानिया खान

4 ......सोहेल खान

5 ......सोफिया खान

( सुरभि सुनिधि माया ( सुनिधि सिस्टर ) एलीना जेनी )

परीलोक ........

1 ...... परीलोक महारानी रानी पारी

2 ....... परीलोक राजकुमारी पारिजात ( परिधि )

3 ...... परीलोक राजगुरु ( सूर्य गुरुदेव )

4....... रिद्धि पारी ( गुरुदेव पुत्री )

5 ......सकती परीलोक गुरुदेव शिष्य

नागलोक ( कोमल पूर्वजन्म फॅमिली )

1 .....नागराज महावीर ( वीर वासुकि वंश )

2 ..... नागरानी पूर्वी

3 .....नागलोक यूवराज इंद्रजीत

4 .....नागलोक राजकुमारी कोमलांगी ( कोमल )

5 ....तलाक वंश नागरानी

जिनलोक राजपरिवार

1....... J.king जिनलोक सम्राट

2 ......जिनलोक राजकुमारी जिनिशा ( जिनि )

3 ..... जिन वयोम

प्रेतलोक .......

1 ......प्रेतराज

2 ......जीनत प्रेतलोक राजकुमारी

द्रगोंलोक ......

1 ...... देवसफ्फी नोयों

2 ......किंग

3 ..... क्वीन

4 ......डेवलिन ( जूलिया फादर )

5 ...... जूलिया ( जुली )

सुक्रलोक ......

1 ...... असुरगुरु शुक्राचार्य

2 ...... असुरगुरु व्योमासुर ( मानसी फादर ) ( बहुत पूर्व असुरलोक असुरगुरु )

3 ...... अस्वसुर ( असुरगुरु शिष्य मानसी का गुरुभाई )

असुरलोक .........

1 .....नरकासुर असुरलोक असुरराज

2 ......वातापी असुरलोक महारानी

3..... अग्निमुखासुर ( नरकासुर पुत्र

4 ....नीलसूर ( """")

5.... भयासुर

6 ...... वनगासुर

7 ........ कंटकासुर

8 .....वातापी

9 ...विसुद्धि

10 ......नगीना

11...... विकटासुर

12 ...... नागसूर

1..... महामहिम

2 ...... दृश्टिका

कोई किरदार अगर भूल वश रह गया है तो आगे की स्टोरी में मेंशन कर दूंगा

फिर से इंट्रो इस लिया दिया ताकि सभी की किरदार अच्छे से याद रहे .......
 
शुक्रिया आप सभी के प्रेम आवर सनेह के लिया दोस्तों उम्मीद है आप सभी का सहयोग पूर्व की तरह हे मुझे मिलता रहेगा आवर हम सभी का साथ पहले से भी सुदृढ़ बनेगा

जल्दी हे अपडेट दूंगा दोस्तों ज्यादा वेट नहीं करूँगा आप सब को तबियत पहले से बेहतर है पैर अभी भी बीएड रेस्ट पे हूँ तो बैठने उठने की मनाई है ऊपर से गर्मी की वजह से एक हे स्थान पे 24 हर लेते रहने में थोड़ी ज्यादा हे परेशानी भी है
 
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