अपडेट 242
मानसी की पेंटी से अपने लैंड पे लगे वीर्य को साफ कर मानसी की योनि से बहार निकला वीर्य भी साफ कर सूर्य पानी पि कर मानसी की बगल में लेट जहा है
मानसी सूर्य के जिसम से एक बार फिर से लिपट जाती है पैर अब सुकून से चिपके हुए वो बस सूर्य को मह्सुश कर रही थी सरीर की गर्मी जो निकल गयी थी
सूर्य मानसी के सोने के बाद शालिनी जी के पास काने वाला था पैर जब सूर्य शालिनी के साथ अपने पापा को सोया हुआ देखा तो उसने जाना कैंसिल कर मानसी को बहो में भर कर सो गया .................
अब आगे ............
सुक्रलोक ......... असुरगुरु को यहाँ आये हुए काफी समय हो चूका था किन्तु अभी तक प्रथम असुरगुरु शुक्र से उनकी भेंट नहीं हुई थी
कारन था असुरगुरु शुक्र का तप में लीं होना
( यहाँ असुरगुरु शुक्र को असुरगुरु आवर असुरगुरु व्योमासुर को उनके नाम से लिखूंगा )
व्योमासुर ......... पता नहीं गुरुदेव का तप कब पूर्ण होगा आवर मैं उनसे कब भेंट कर पाउँगा बिच बिच पता नहीं वो डस्ट नरकासुर अब न जाने किस षड़यंत्र को पूर्ण करने में लगा होगा
तभी असुरगुरु का परम शिष्य वह आ व्योमासुर को असुरगुरु के तप से बहार आने की सुचना देता है और उन्हें असुरगुरु ने याद किया है ये सन्देश भी देता है
व्योमासुर ....... उचित है हम अतिसिगरा उनके सम्मुख होंगे
व्योमासुर वह से असुरगुरु जहा मौजूद थे उस आवर बड़ी तेजी से भाड़ गया वर्षों बाद व्योमासुर अपने गुरु से भेंट करने वाले थे उनके मन में ख़ुशी आवर संशय दोनों थे
असुरगुरु ....... आप पुत्र व्योमासुर हम तुम्हारे आने की हे प्रतीक्षा कर रहे थे
व्योमासुर ......परनाम गुरुदेव
असुरगुरु ............ कल्याण हो पुत्र व्योमासुर
असुरगुरु के इस अरे पे व्योमासुर असुरगुरु के सम्मुख जमीं पे आसान लगा कर बेथ जाते है
असुरगुरु ....... अपनी पुत्री मानसी के विवाह की ढेरो शुभकामनाये पुत्र व्योमासुर किन्तु एक मानव से असुर कन्या का विवाह
व्योमासुर की असुरगुरु की बात सुन अपना शीश जुखा लेता है जैसे उनके आशीर्वाद में भी उनके लिया कोई तंज छुपा हो
व्योमासुर ....... हमें क्षमा करे गुरुदेव किन्तु हम आपको सत्य से अवगत नहीं करवा सकते हम
वचनवाद है
असुरगुरु ....... क्षमा मांगने की आव्सय्कता नहीं है तुम हमारे परम शिष्यों में से एक हो जिन्होंने सदैव हमारे पढ़ का मान बढ़ाया है पुत्र हमें कुछ कुछ आभाष है अवयश्य वो बालक असाधारण है हम स्वयं उसकी वास्तविकता ज्ञात नहीं कर प् रहे है किन्तु वो दिव्या अंश किसी न किसी रूप में परबु सवयंभु से जुड़ा है
व्योमासुर ........ गुरुदेव हमें आपके मार्गदर्शन की आव्सय्कता है ाँ पड़ी है हम अपने पढ़ का मान नहीं रख प् रहे है अगर पढ़ के पार्टी अपना दायित्व निभाते है तो अपना दिया वचन भांग कर अपने तप से अर्जित तपोबल नस्ट कर देंगे
असुरगुरु ....... ये तो तुम्हे उस समय सोचना चाइये था पुत्र जब तुमने बिना विचार के वचन दिया था अब अपने हे वचन को भांग कर स्वयं को कलंकित करना चाहते हो वैसे हे असुरजती अपने दुष्कर्मो से स्वयं को कॉनकित करते आ रही है
व्योमासुर ........ हमारे वचन भांग होने से आप हे बचा सकते है गुरुदेव हमें आपकी मार्गदर्शन की आव्सय्कता है गुरुदेव
असुरगुरु ........ उचित है इसका केवल एक हे मार्ग है पुत्र जो तुम्हे ज्ञात है
व्योमासुर ....... मैं असुरगुरु पढ़ त्यागने को सज हूँ गुरुदेव आप ये दायित्व किसी आवर को सौंप दीजिये अगर हम इस पढ़ पे बने रहे तो किसी एक के साथ अन्याय कर देंगे
असुगुरु ....... यही उचित मार्ग है पुत्र कर्त्तव्य या वचन दोनों में से किसी एक के साथ हे नहाय कर सकते हो हम असुरगुरु शुक्र तुम्हे असुरगुरु पढ़ विमुख करते है किन्तु साथ तुम्हे दण्डित भी होना होगा पुत्र तुमने अपने पढ़ उसकी गरिमा को दुर्मिळ किया है
व्योमासुर ...... मुझे आपका दिया हर दंड स्वीकार है गुरुदेव बस एक विनती है आपसे
असुगुरु ...... कहो क्या विनती करना चाहते हो तुम
व्योमासुर ....... पुत्री वातापी को किसी भी तरह का कोई कास्ट न हो ये दायित्व आपके श्री चरणों में गुरुदेव
असुरगुरु ........ उचित है पुत्री वातापी को कोई कास्ट नहीं होगा उसका दायित्व हम लेते है तुम्हारा दंड है तुम 11 वर्ष तक असुरलोक से निष्कासित रहोगे
व्योमासुर ......... मुझे आपका दंड सहर्ष स्वीकार है गुरुदेव
असुरगुरु ........ हम उस दिव्या अंश रूपी बालक से भेंट करना चाहते है पुत्र व्योमासुर किन्तु हम श्रापित है इस लिया पृथ्वीलोक जा नहीं सकते हमारी भेंट का माध्यम तुम्हे हे बनना होगा पुत्र
व्योमासुर असुरगुरु की बात सुन कुछ विचार करने लगता है
असुरगुरु ......चिंतित होने की आव्सय्कता नहीं है पुत्र व्योमासुर आवर न इतने घंटा से विचार करने की
हमसे उसे कोई खतरा नहीं होगा पुत्र किन्तु हमने जो भविष्ये के दृश्ये देखे वो बहुत हे चिंताजनक है
व्योमासुर ........ गुरुदेव जो आपने देखा क्या उसे बदला नहीं जा सकता
गुरुदेव ....... नहीं पुत्र हम सब अपनी नियति से बन्दे है हम केवल अपना करम कर सकते है बाकि सब नियति की इच्छा नियति के विरुद्ध तो वो स्वयंभू भी नहीं जा सकते
व्योमासुर ........ मेरे लिया कोई और आज्ञा गुरुदेव
असुगुरु ....... नहीं पुत्र अब तुम पृथ्वीलोक लौट सकते हो आवर तुम्हारी पुत्री मानसी वह उसके वर को सुक्रलोक लेन की थी करो ज्ञात नहीं क्यों पैर हमारे हृद्या में उस बालक से भेंट करने की तीव्र इच्छा उत्पन्न हो रही है
व्योमासुर ....... जी गुरुदेव जैसे आपकी आज्ञा .आज्ञा दीजिये परनाम गुरुदेव
असुरगुरु ...... यशश्वी भाव पुत्र
व्योमासुर के जाने के बाद असुरगुरु एक बक्शा नुमा बॉक्स खोलते है उसमे से एक कुंडली जैसा पत्र निकलते है आवर बड़े गौर से उसे देखने लगते है
असुरगुरु ...... हमें जिस विचार को ले कर चिंता थी वही होने वाला है असुरलोक की कुंडली में शैतान का प्रभाव भिवष्य में और आदिक प्रबल होने वाला है हे परबु अब आप हे कोई मार्ग दिखाए
असुरगुरु एक और ुशी बॉक्स में से एक आवर कुंडली निकलते है
उसका ध्यान से अध्यन करने के बाद उनकी चिंता आवर आदिक भाड़ जाती है आवर वो कुंडली उनके हाथ से चुत कर गिर जाती है
असुरगुरु की आँखों में अचानक से नमी उभरने लगती है
वो उस कुंडली को उठा कर दोनों को फिर से उस बॉक्स में रख देते है
आवर कोई मंत्री उच्चारण करने लगते कुछ देर बाद वह हवा में एक बड़ा सा बॉक्स प्रकार होता है
असुरगुरु उसे निचे रख कर खोलते है तो उसमे सोर्ड , ढल , कवच , तीर कमान , आदि मौजूद थे असुरगुरु बड़े हे सनेह पुराण उन सस्त्रो पे अपने हाथ फिरते हुए अपनी आँखे बंद कर जैसे कुछ मह्सुश करने लगते है
असुरगुरु ....... हमने बहुत इन्तजार किया है पुत्र तुम्हारा हमें हमारे परबु पे विश्वाश था की एक दिन तुम अवश्य आओगे पुत्र ...........
पृथ्वीलोक ........
सूर्य सुबह सभी के साथ ध्यान पूर्ण कर जब घर लौटा तो वो बहुत खुश था
सूर्य ने आज किरण के साथ जुड़ उस ऊर्जा पुंज के विषय में जानने की कोशिश की किन्तु उसे ज्यादा सफलता नहीं मिली फिर भी उसका अंतर्मन बहुत परशान था जैसे उसने कुछ न प् कर भी बहुत कुछ प् लिया हो
दादा जी ......क्या बात है आज मेरा शेर काफी खुश लग रहा है बात क्या है बेटे
सूर्य ....... पता नहीं बाउजी पैर आज सच में मुझे अजीब से ख़ुशी हो रही है कारन क्या है ये तो मैं भी ठीक से समाज नहीं प् रहा हूँ
दादा जी ....... ये क्या बात हुई बीटा इतनी सक्तियो के बात भी तुम ये कह रहे हो की तुम्हे पता नहीं की इस ख़ुशी का कारन क्या है
सूर्य ........ बाउजी सक्तियो से मैं किसी की रक्षा कर सकता हूँ या किसी का अंत पैर जो समाज से परे हो उसका क्या कर सकता हूँ
दादा जी ........अगर समाज नहीं आ रहा है तो अपने गुरुदेव से सहायता लोट बीटा क्या पता वो तुम्हारे इस ख़ुशी के कारन का पता कर सके
सूर्य ...... आपने सही कहा बाउजी कल गुरुदेव आ रहे तभी उनसे इस विषय पे बात करता हूँ
दादा जी ...... आवर एक बात बेटे
सूर्य .....जी दादा जी कहिये
दादा जी ....... बीटा हम लोग पूजा के बाद वापिस लौट आएंगे दिल्ली से वह केवल तुम बचे हे रहोगे जब तक घर बन नहीं जाता पूरी तरह से
सूर्य ......ये क्या बात हुई बाउजी
दादा जी ......... बीटा समजा करो इतने लोग उस एक छोटे से घर में नहीं आ सकते आवर फिर वह से यहाँ आना भी ठीक नहीं कब कोई आ जाये जिसके सामने तुम सब का भेद खुल सकता है अपना घर बन जायेगा तब चलेंगे सब वह
सूर्य ...... ठीक है बाउजी पैर मैं आपकी बात तब तक हे मानुगा जब तक घर बन नहीं जाता मैं जनता हूँ आपको उस हवेली से बहुत लगाव है
दादा जी ....... बीटा हवेली भले बदल गयी पैर इस जगह से मेरा बचपन जवानी आवर बुढ़ापा जुड़ा हुआ है लगाव तो होगा हे
सूर्य ....... ठीक है बाउजी इस बारे में फिर कभी सोचेंगे मैं फ्रेश हो कर आता हूँ
सूर्य फ्रेश हो सभी के साथ नास्ता कर कोमल को त्यार होने का बोल अपनी बाइक जो काफी समय से उसने उसे में नहीं ली थी उसकी साफ सफाई करता है
कुछ देर बाद कोमल त्यार हो कर बहार आती है
कोमल ....... चले हम
कोमल चुस्त jean's आवर शार्ट टाइप टॉप में बाला की खूबसूरत लग रही थी
सूर्य ....... है है किसी को कुछ चाइये तो नहीं पूछ लेना सब से
कोमल ......मैंने पूछ लिया जिसको जो चाइये वो वह दिल्ली में ले लेंगी जो अभी जरुरी है वो मैं ले लुंगी आप चलिए
सूर्य बाइक पे बेथ उसे स्टार्ट करता है तो कोमल दोनों तरफ पेअर कर सूर्य के पीछे चिपक कर बेथ जाती है जिस से सूर्य की पीठ पे कोमल की वो दो मांश के भरे कोमल गोले सूर्य पीठ से चिपके सूर्य को अलग हे आनंद दे रहे
सूर्य बाइक आगे बढ़ा देता है जैसे हे कोमल सूर्य सूर्यगढ़ से बहार निकले कोमल अपने दोनों हाथ सूर्य कमर में काश लेती है
एक तो वो स्पोर्ट बाइक जिसकी पीछे की सहित वैसे हे ऊपर रहती है ऊपर से कोमल केस तरह से चिपकने से कोमल के दोनों उभर बुरी तरह से सूर्य कज पीठ की सिकाई करने लगते है
सूर्य सक्तिपुर से बाईपास ले सीधा सिटी 1 की तरफ बाइक दौड़ा देता है
सूर्य ........ थोड़ा आराम से बैठो कोमल पीठ पे कुछ नरम नरम चुंबन हो रही
कोमल ......क्या हुआ मैं तो आराम से बैठी हूँ
सूर्य ........ तुम तो आराम से बैठी हो पैर तुम्हारे जो उभर है वो मेरी परेशानी का कारन बन रहे है
कोमल ....... ये आपकी परेशानी है न की मेरी
सूर्य बाइक को एक साइड में लगा देता है सूर्य ....... निचे उतरो कोमल
कोमल को लगा सूर्य गुस्सा हो गया है कोमल उदाश मन से निचे उतर जाती है
सूर्य निचे उतर उठा कर बाइक पे कोमल को बैठा देता है.

कोमल ....... सॉरी मुझे माफ कर दीजिये
सूर्य .....हाहाहा तुम्हारा चेहरा क्यों उतर गया कोमल अब बाइक तुम चलोगी आवर मैं मज़े लूंगा पीछे बेथ कर
सूर्य कोमल के पीछे बेथ जाता है
कोमल ...... आप गुस्सा नहीं है न आवर मुझे बाइक नहीं चलनी आती है
सूर्य ....... मैं क्यों गुस्सा होऊंगा आवर बाइक चलना बहुत आसान है
सूर्य कोमल को बेसिक तरीका समजा देता है
डेरी डेरी कोमल बाइक को आगे बढ़ा देती है अब सूर्य के हाथ कोमल की नंगी कमर से होते हुए कोमल के कोमल पथ पे थे
बाइक को सूर्य अपने मंद से कण्ट्रोल कर रहा था जबकि कोमल को लग रहा था की बाइक चलना उसके लिया बाये हाथ का काम है हो भी सकता है पैर पहली हे बार में इतना आसान नहीं होता
सूर्य ......कहा था न बहुत आसान है बस मंद को भटक ने मत देना
सूर्य डेरी डेरी अपनी हाथ की उँगलियाँ कोमल के टॉप में हलकी गुदा देता है आवर अपनी उँगलियाँ वह फिरना सुरु कर देता है जहा से कोमल के सीने का निचे की तरफ से उठान सुरु होता है
कोमल .....अपने हाथ हटाइये न वह से हमें परेशानी हो रही है
सूर्य ....... ये तुम्हारी परेशानी है न की मेरी तुम जानो आवर तुम्हारी परेशानी मुझे क्या मुझे तो मज़ा आ रहा है
कोमल छह कर भी बाइक से हाथ हटा नहीं सकती थी आवर सूर्य ऐसे रुकने वाला था नहीं
सूर्य कोमल की गर्दन से बाल साइड कर कोमल की गर्दन पे घूमने लगता है
कोमल की गर्दन पे हलके हलके जो रोये थे वो खड़े होने लगते है
साथ हे कोमल के सरीर में जुरजूरी से उत्पन्न होने लगती है
हिमत कर सूर्य ने जैसे हे कोमल के ब्रा के अंदर हाथ दाल उन रूही के गोले को थमा तो कोमल का साबरा जबाब दे गया इतनी देर से खुद को रोके कोमल का सरीर आकडने लगा मस्ती मस्ती में कोमल चरम पे पहुंची आवर अपनी पेंटी गीली कर बैठी
सूर्य कोमल को उठा खुद बाइक ड्राइव करने लगा आवर कोमल को अपनी जगह पीछे बैठा दिया
कोमल ........ पता है आपने क्या किया
सूर्य .......... पता है मुझे क्या अच्छा नहीं लगा क्या
कोमल ....... अगर बाइक गिर जाती तो छोटू लग जाती पैर आपको क्या आपको तो मज़ा आ रहा था
सूर्य ....... मज़ा तो आपको भी आ रहा था तभी तो बाइक की सीट गीली कर दी हाहाहा
कोमल नारंगी दिखते हुए सूर्य की पीठ पे हलके से हाथ जमा देती है पैर चेहरे पे सरम आवर पहाड़ी से मुस्कान थी
सूर्य थोड़ा सा मैजिक का प्रयोग करते हुए कोमल के निचेस्का गीलापन ठीक कर देता है
दोनी सिटी 1 में इंटर करने हे वाले थे इस लिया दोनों ने मस्ती बंद कर गफ बर्फ की तरह बेतबे मॉल की तरफ भाड़ गए
सूर्य अपने बड़े पापा से मिल उन्होंने जिस काम के लिया बुलाया वो फिनिश करने लगता है वही कोमल उस लड़की के साथ कुछ शॉपिंग करने लगती है जिसकी सेल्लेरी सूर्य ने खुश हो कर बधाई थी
करीब 1: 30 जानते बाद सूर्य महेंद्र जी की केबिन से बहार निकला
कोमल की शॉपिंग अभी भी चालू हे थी
करीब 20 मिनट्स बाद कोमल ढेर सरे बैग्स के साथ सूर्य को अपनी आवर आते दिखाई दी
सूर्य ...... इतना टाइम लगा दिया शॉपिंग में आवर इतना क्या लिया है
कोमल ..... ज्यादा कुछ नहीं सभी की कुछ जरुरी जरुरत का सामान है बस
सूर्य ....... चलो अच्छा है दिल्ली में ज्यादा जेब खली नहीं होगी
कोमल .....किसने कहा आपसे ऐसा
सूर्य ......ठीक है समाज गया अब जाओ आवर बड़े पापा को दे आओ बाइक से तो कुछ भी जाने वाला है नहीं
कोमल सारा सामान अपने पापा को दे कर जब लौट रही थी तभी उसकी नजर किसी पे पड़ती है
जिसे देख कोमल उसकी तरफ भाड़ गयी
सूर्य .....अब ये कोमल कहा चली उस तरफ
कोमल ...... Hi आप यहाँ पे कैसे
लड़की कोमल की आवाज सुन उस की तरफ पलटी तो उसने फ़ौरन कोमल को पहचान लिया
( ये कोई आवर नहीं नंदिता थी अजय के उस दोस्त पंकज की बड़ी बहन )
नंदिता ......कोमल जी आप यहाँ पे कैसे
कोमल .......ये मॉल हमारा हे है पैर आप
नंदिता ......कॉलेज ओपन होने वाले है कुछ शॉपिंग करने आयी थी माँ के साथ वो देखो माँ उदार हे आ रही है
कोमल .....नमस्ते मधु आंटी
मधु .....नमस्ते कोमल बेटी
सूर्य ....... नमस्ते आंटी जी कोमल हमें घर चलना चाइये
कोमल ..... है चलते है इनसे मिलो ये है मेरी फ्रेंड नंदिता आवर ये उनकी माँ आवर नंदिता यही है वो जिनके बारे में आप पूछ रही थी
नंदिता .....तो आप है सूर्य ठाकुर जी
सूर्य ....... जी आप सूर्य कह सकती है पैर आप मेरे बारे में कोमल से क्यों पूछ रही थी
मधु ....... बीटा मैं अपने बेटी की गलती के लिया माफी मांगती हूँ
सूर्य ......मुझे नहीं पता आंटी आप किस लिया कोनसी गलती की माफ़ी मांग रही है जो कुछ भी हुआ उसे भूल जाये बस जो कुछ हुआ वो दुबारा न हो ( सूर्य ने यहाँ जूठी कहा था ताकि उन आंटी को शर्मिंदा न होना पड़े ) जिस से आपको किसी क्र सामने शर्मिंदा होना पड़े कोमल हमें चलना चाइये चलता हूँ आंटी जी नंदिता जी
सूर्य कोमल को लिया बहार निकल गया
नंदिता .....इनको देख कर तो नहीं लगता की ये उतने खतरनाक है या उन्हें कुछ पता भी होगा मम्मी
मधु ....... नहीं बेटी तुम गलत हो तुमने वो नहीं देखा जो मैंने देखा सूर्य को सब पता है बस वो नहीं चाहता था की मैं उस से माफ़ी मांगू या उसके सामने अपने बेटे की गलती के लिया शर्मिंदा होऊं
नंदिता ......ये आप कैसे कह सकती है मम्मी जबकि उन्होंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा
मधु ...... "आँखे " आँखे इंसान का आइना ( मिरर ) होती है बेटी जब मैंने माफ़ी मांगी तब उसकी आँखों में जो प्यार था वो एक माँ की नजरो से नहीं चुप सका बेटी वही प्यार जो शालिनी बहन की आँखों में मैंने उस दिन देखा था जब जब उनके इस बेटे का जीकर हुआ था
नंदिता .......पता नहीं आप क्या बोल रही है मम्मी चलिए हमारी शॉपिंग अभी भी बाकि है
कोमल ....... आपको क्या हुआ था वह जो अचानक से जूथ बोल दिया
सूर्य ......मुझे उनका माफ़ी मांगना अच्छा नहीं लग रहा था किसी आवर के कर्मो की सजा वो क्यों बुगते वो एक अच्छी औरत है बस अपने नालायक बेटे से कुछ ज्यादा हे प्यार करती है एक माँ को मैं भला कैसे शर्मिंदा होने देता इस लिया मैं जूथ बोलै ताकि उनके सम्मान को कोई टेश न पहुंचने
सूर्य कोमल बात करते करते घर पहुंचने गए
सूर्य सभी की सुबह 6 ऍम की दिल्ली की टिकट कन्फर्म करवा ली आवर ये खबर सूरजगढ़ भी दे दी थी कल सभी की ाब्याश आवर ध्यान आदि से चिठ्ठी थी
रात को डिनर के वक़्त सूर्य ने सभी को कल सुबह के बता दिया था
सूर्य डिनर के वक़्त शालिनी जी को अपनी आवर बार बार देखते देख उनके साथ हे रात में सोने का फैसला किया
सूर्य मानसी के साथ एक प्यार भरा संगम कर मानसी को बता कर निचे चला गया
अलीना ......क्या हुवा नींद नहीं आ रही क्या
दरशल अलीना अभी कोमल के रूम से निकल अपने रूम की तरफ हे जा रही थी तो सूर्य को निचे आता देख उसने बात छेद दी
सूर्य .....नहीं वो बस आज माँ के पास सोने का मन था तो उन्ही के पास जा रहा हूँ
अलीना ....... क्या मैं भी चल सकती हूँ मम्मी के पास सोने
सूर्य ........ इसमें पूछने वाली कोनसी बात है चलो उन्हें भी अच्छा लगेगा
अलीना ......ok मैं कपडे बदल कर अभी आई
सूर्य वह से शालिनी जी की रूम की आवर भाड़ गया
शालिनी जी लेते लेते कोई बुक पद रही थी
सूर्य ......मुझे लगा आप सो गई होंगी माँ
शालिनी जी ......नहीं बीटा बस ऐसे हे कोई पुराणी बुक पद रही थी प्रिय भी आ रही है न यहाँ सोने के लिया
सूर्य ...... है उसने इच्छा जाहिर की तो
शालिनी जी .......कोई बात नहीं वो भी मेरी बेटी है उसका भी हक़ बनता है आओ इस तरफ लेट जाओ
सूर्य अपने t-shirts उतर शालिनी जी के बगल में लेट जाता है
कुछ देर बाद अलीना (प्रिय ) भी नाईट ड्रेस पहने वह आ गई
शालिनी जी ......प्रिय बेटी दूर लॉक कर देना बेटी
अलीना .....जी मम्मी जी सॉरी वो मेरा भी मन......
शालिनी जी ...... अगर दुबारा फिर से कभी सॉरी कहा न तो कान खींच खींच कर लम्बे कर दूंगी एक बेटी को अपनी माँ के पास सोने के लिया भी इतना सोचना पड़ता है क्या चल आ उदार मेरी बची
अलीना शालिनी की बगल में लेट गई एक तरफ सूर्य आवर एक तरफ अलीना
अलीना ...... आगे से ध्यान रखूंगी मम्मी
शालिनी जी ......... देखो बेटी प्रिय तुम सभी मेरी लिया एक हो जैसी कोमल या स्वीटी वैसी हे बाकि सब मेनका दीदी रेखा दीदी या मैं जब भी जिस किसी के साथ वक़्त बीनने का मन हो या तुम्हारी कोई स्पेशल डिमांड हो तो बे जीजाक कह दिया करो बेटी ये परिवार ये घर जितना सूर्य कोमल का है उतना हे तुम्हारा भी मेरी बची
अलीना ........ सुन रहे है न आप मर .जितना आपका हक़ मम्मी पे है उतना हे मेरा भी है
सूर्य ...... मैंने कब कुछ कहा मुझे क्यों बिच में फशा रही हो अलीना
अलीना ........... मम्मी आपको पता है जब हम रूस गए थे तब इन्होने बहुत हुकुम चलाया था मुज पे
सूर्य ......नहीं माँ मैंने ऐसा कुछ नहीं किया अब प्लान के हिसाब से न चले तो किसी को कुछ भी हो सकता है बस मैंने इसे आवर मेर्री जी को खतरे से दूर रखने के लिया ऐसा किया था
अलीना ......देखा मानते हो न
शालिनी जी ......अब तुम दोनों ये नौटंकी बंद करो आवर बेटी जहा बात किसी अपने की जान पे खतरे की हो तो वह हमें हर पहलु पे सोच विचार कर हे निर्णय लेना चाइये निर्णय से याद आया तुम्हारा क्या निर्णय है बेटी तुमने तो पहले हे पढाई पूरी कर ली थी
सूर्य ....... इनको अब अपनी ड्यूटी ज्वाइन करनी होगी माँ दिल्ली पहुंच कर सूर्यकांत सर ने कुछ आवर भी सोचा इनके बारे में क्यों की इनकी जो स्किल्स है उसका उसे किसी आवर जगह ज्यादा होता है
अलीना ........मतलब क्या है आपका
सूर्य ...... अभी कन्फर्म नहीं हुआ है जल्दी हे पता लग जायेगा
शालिनी जी ......तुम दोनों सोने आये हो या अपनी मिलिट्री मेटिंग करने दोनों चुप चाप केम्प बंद करो आवर लेट जाओ
सूर्य ....... ुम्मम्हा गुड नाईट माँ.
शालिनी जी. ..... गुड नाईट बीटा
सूर्य अलीना के गाल खींच उसे भी गुड नाईट बोल अपनी तरफ का लेम्प बंद कर देता है
अलीना एक बार सूर्य को घर कर देखती है आवर वो भी अपनी साइड का केम्प बंद कर शालिनी जी की आवर खिसक कर करवट के बल लेट शालिनी जी का हाथ अपने पेट पे रखे लेट जाती है .............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..............