Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 32 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट 255

दादा जी .......वक़्त मुठी में बंद रेट की तरह कब हाथो से निकल जाता है पता हे नहीं चलता ठकुराइन कब बड़े हुए कब सदी लायक हुइमे जैसे कल की हे बात हो

रेखा जी .....दीदी आप खाना .....

रेखा जी मेनका को दादी जी के साथ खता देख बिना कुछ बोले लौट जाती है आवर कुछ देर बाद एक थल में कुछ सब जिया आवर चपाती रख जाती है

ीदार बहार महेंद्र जी सूर्य रेखा जी मेर्री जी शालिनी जी के साथ खाना खा कर कुछ देर अपने रूम में चला जाता है

सूर्य को अकेला देख मेर्री जी भी उसके रूम में जा पहुँचती है .......

अब आगे ........

सूर्य अभी अभी बाथरूम से फ्रेश हो कर बहार निकला हे था की उसकी नजर सामने बीएड पे बैठी मेर्री जी पे पड़ी जो सूर्य के निर्वस्त्र चोदे सीने पे जा अटकती है

सूर्य ....... ममी जी ऐसे क्या देख रही है आप जैसे आज से पहले मुझे ऐसे नंगा देखा हे नहीं हो आपने

मेर्री जी बीएड से उठ कर साढ़े हुए कदमो से सूर्य के बिलकुल सामने आ खड़ी होती है आवर बिना कुछ बोले सूर्य के चोदे सीने पे गीले बालो से गिरती पानी की बूंदो को अपने कोमल मदभरे होंटो से पिने लगती है

मेर्री जी ........ तुम पहले से काफी हैंडसम हो गए हो सूर्य या ये मेरा कोई भ्रम है

सूर्य ....... हाहाहा वैसे आप भी पहले से खूबसूरत आवर मजबूत हो गयी है

सूर्य मेर्री जी को पकड़ वह से गायब हो सीधा छठ वाले रूम में जा पहुंचा

मेर्री जी सूर्य को किश करते हुए सूर्य के बदन पे बाँदा आखरी वस्त्र टॉवल सूर्य की कमर से हटा कर बीएड पे सूर्य को देखा दे सूर्य के सीने पे आने मखमली उभर टिकते हुए उसकी आँखों में देखने लगती है

सूर्य मेर्री जी की आँखों में अपने लिया बेशुमार प्यार पुर चाहत देखता है जिसके चलते उसे खुद हे मेर्री जी की नजरो से नजर हटानी पड़ती है

मेर्री जी ........ तुम्हे नजरे चुराने की जरुरत नहीं है सूर्य मैं जानती हूँ तुम क्या सोच रहे हो पैर मैं इतने में भी खुश हूँ की मुझे तुमसे प्यार पुर परिवार दोनों हे मिले मुझे आवर कुछ नहीं चाइये बस जब कभी कुक्ड को कमजोर आवर अकेला समझने लागु तो तुम हमेशा मेरे साथ खड़े रहे पुर मुझे कुछ नहीं चाइये

सूर्य ........ मैं कुछ देने वाला कोण होता हूँ रही बात प्यार आवर परिवार की तो वो आपने खुद अर्जित किया है आवर आप खुदको कभी भी अकेला आवर कमजोर समझने की भूल मत करना मुझसे कहा ठीक है पर दादी जी आवर माँ के सामने फिर कभी ऐसा न बोलना उन्हें बहुत टेश पहुंचेगी आपकी इन बातो से

सूर्य डेरी डेरी इस हलके गंभीर हो चुके माहौल को बदलते हुए मेर्री जी के खिले हुए महकते अंगो को एक एक कर

be-parda करने लगता है

सूर्य पौने एक घंटे तक मेर्री जी के साथ प्यार भरा मिलान कर मेर्री जी के एक एक अंग को संतुष्ट कर चूका था

मेर्री जी ........ उम्मम्मम्हा थैंक यू सूर्य एंड ी लव यू ुम्मम्हा

सूर्य ......ी लव यू तू ममी जी अब आप यहाँ आराम करना चाहे तो यहाँ आराम करलो नहीं तो कुछ टाइम बाद निचे चली जाना

मेर्री जी ....... क्या मेरे साथ शावर लेना पसंद करोगे सूर्य

सूर्य एक बार मेर्री जी के पसीने से भीगे जिसम को निहारता है जिसपे सूर्य आवर मेर्री जी के प्रेम मिलान के चीन अंकित थे आवर आगे भाड़ बीएड पे बैठी मेर्री जी को गॉड में उठा ुशी रूम में बने बाथरूम की आवर भाड़ जाता है .

कुक्सह देर बाद सूर्य किरण से मिल सीधा शालिनी जी के रूम में पहुँचता है .

जहा शालिनी जी लेम्प की हलकी रौशनी में खूबसूरत निघ्त्य में अदलती स्थिति में बीएड से तक लगाए कोई बुक पढ़ रही थी

शालिनी जी एक बार नजर उठा कर सूर्य को देखती है .

आवर अपने हाथ में पकड़ी बूब्स का पेट मूड कर बंद करते हुए साइड टेबिल पे रख देती है .

सूर्य रूम का दूर लॉक करते हुए शालिनी जी के पास पहुते हे अपने t-shirts निकल शालिनी जी के बगल में लेट जाता है

जैसे हे सूर्य शालिनी जी के बगल में जा कर लेता शालिनी जी के चेहरे पे चमक उभर आती है आवर वो थड़ा सूर्य के पास खिसकते हुए करवट के बल सूर्य से चिपक जाती है

सूर्य शालिनी जी के प्यारे से चेहरे को कुछ पल निहारने के बाद उनके लरजते होंठो पे प्यार से अपने होंठ रख उन्हें चूमने लगता है

एक प्रेम भरे चुम्बन के बाद शालिनी जी अपने सांसो को नियंत्रित करते हुए सूर्य के सीने पे किसी मखमली चादर के जैसे लिपट जाती है

सूर्य ...... माँ कल मां जी नाना जी आ रहे है न

शालिनी जी ....... हम्म्म आवर अभी तुम्हारी माँ नहीं है यहाँ तुम्हारी शालू है

शालिनी जी की बात सुन सूर्य उन्हें पलट देता है आवर खुद उनके ऊपर आ जाता है

सूर्य ......... ुम्मम्हा तो मेरे पास इस वक़्त मेरी शालू है फिर आपको कल एक काम आवर करना होगा कल जब नाना जी मां जी आये तो आप उनसे मेर्री जी आवर विजय मां जी के रिश्ते की बात भी करना ताकि उनका विवाह भी जल्दी हो जाये आवर दूसरी बात मुझे मानसी स्वीटी आवर जो लिया के साथ कुछ वक़्त के लिया बहार जाना होगा

शालिनी जी ....... सदी की बात मैं कर लुंगी पैर तुम चारो कहा जा रहे हो आवर तुमने पहले क्यों नहीं बताया मुझे

सूर्य ....... मुझे पहले स्वीटी आवर मनु के साथ असुरगुरु शुक्राचार्य से भेंट करने सुक्रलोक जाना होगा उसके बाद ड्रैगन लोक जाना होगा शालू स्वीटी को ड्रैगन लोक का राजसिंहासन संभालना होगा जब तक जुली इस के लिया पूरी तरह से त्यार नहीं हो जाती तब तक स्वीटी को हे वह की क्वीन बन सब संभालना होगा

दोनों बात सुन शालिनी जी के चेहरे पे कुछ चिंता के भाव उभर आये

शालिनी जी ....... क्या गुरुदेव को पता है सुक्रलोक के विषय में

सूर्य ....... आपकी चिंता समाज रहा की आपको किस बात का दर सत्ता रहा है पैर मैं वह किसी युद्ध के लिया नहीं जा रहा हूँ बल्कि उनके निवेदन पे उनसे भेंट करने जा रहा हूँ फिर मेरे साथ बाबा व्योमासुर जी भी तो जा रहे है

शालिनी जी ........ फिर भी मेरा मन घबरा रहा है सूर्य कही कुछ गलत हुआ तो

सूर्य ........ उम्म्म्मः आप घबरा बहुत जल्दी जाती ऐसा कुछ नहीं होगा फिर भी कुछ ऐसा वैसे हुआ तो निर्भयासुर का तांडव सुक्रलोक पे कहर बन कर टूटेगा भले हे असुरगुरु शुक्र के समुख निर्भयासुर कमजोर है पैर इतना भी नहीं की ऐसा कुछ करने की वो सोचे भी आप सब चिंता भूल जाइये

निर्भयासुर का याद आते हे शालिनी जी का मन कुछ हद तक संत हो जाता है

सूर्य शालिनी जी के सीने से निघ्त्य हुक खोल उन अद्भुत ुनात बड़े बड़े विलक्षण उभर को उस रेशमी ब्रा नुमा वस्त्र से अनावृत कर अपने होंठ में शालिनी जी के गुलाबी निप्पल्स को कैद कर चूसने लगता है

आवर दूसरे हाथ से दूसरे बूब्स को अपने मरदाना हठी में पकड़ कर सहलाने लगता है

डेरी डेरी जहा पहले शालिनी जी के चेहरे पे हलकी हलकी चिंता की लकीरे थी वो गायब हो जाती है

सूर्य शालिनी जी के दोनों बूब्स को चूसने लगता है जैसे आज भी उन्हें वो मधुर दुगड़ भरा हो जिसे पिने को सूर्य लालायित हो

डेरी डेरी शालिनी जी के सरीर में एक नयी ऊर्जा का संचार होने लगता जो रह रह कर उनके कंदवार पे दस्तक दे रहा था

शालिनी जी खुद से हे सूर्य का शार्ट निकल कर उसे सूर्य के घुटनो से निचे कर देती है

सूर्य शालिनी के जिसम से उनके पुरे कपडे गायब कर शालिनी जी के पेट को चूमते हुए नाभि में अपनी जुबान दाल चाटने लगता है

शालिनी जी ........उम्मम्माह्ह सूर्य मुझे गुदगुदी हो रही है

सूर्य दशहरा शालिनी जी की नाभि को चाटने आवर चूमने से शालिनी जी के पेट में कसाव आने लगता है साथ हे रह रह कर उनका सरीर भी इस क्रिया से कम्पन करने लगता है

जैसे हे सूर्य के नाक में किसी जनि पहचानी गंध ( खुसबू ) का अनुभव होता है वो डेरी से खिसकता हुआ शालिनी जी के कंदवार पे उभरी उन ोंश की बूंदो को देख खुद को रोक नहीं पाया आवर अपने तपते होंठ उस द्वार से पे टिका देता है आवर उन अमृत सामान कमरष की बूंदो का सेवन करने लगता है





शालिनी जी ......... उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह सूर्य आवर तेज चुसो मैं करने वाली हूँ

शालिनी जी सूर्य के सर को अपने खिले हुए कमल पे दबाते हुए अपने भीतर संगृहीत कमरष का बांड खोल देती है





सूर्य बिना किसी हिचक के शालिनी जी के अमृत कुंड से छलका अमृत अपने गले से से निचे उतर लेता है

कुछ पल शालिनी जी करके कहती रही उन्हें देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उन्होंने मिलो का सफर दौड़ कर पूरा किया हो

शालिनी जी कुछ मिनट्स बाद जब नार्मल हुई तो सूर्य उनकी बगल में लेता हुआ उनके अद्भुत उभारो को सहला रहा था आवर उनके चेहरे को बड़े प्यार से निहार रहा था

शालिनी जी अपने खुले बालो को बांड कर सूर्य के होंठो पे एक छोटा सा किश कर बीएड पे बेथ जाती है

सूर्य बीएड से उतर शालिनी जी के सामने खड़ा हो जाता है

शालिनी जी सूर्य के जुलते हुए अंग को थम उस उभरे हुए लाल गुलाबी सुपडे पे किश कर अपने मुँह में सूर्य के लैंड अंदर बहार करने लगती है

सूर्य शालिनी जी के सर को थम हलकी हलकी कमर हिलाते हुए बिना शालिनी जी को तकलीफ पहुचाये अपना लैंड को शालिनी के मुँह में आगे पीछे करने लगा





शालिनी जी सूर्य के लैंड का 3,से 4 इंच तक का भाग बड़ी आसानी से चूस प् रही थी थी

हलाकि सूर्य के सूपड़ा पे हलके हलके शालिनी जी के दांतो के रगड़ भी लग रही थी जिस से सूर्य का लिंगमुण्ड आवर आदिक मात्रा में फूलने लगता है

कुछ देर बाद सूर्य शालिनी जी के मुँह से अपना लैंड निकल कर बीएड पे लेट जाता है

शालिनी जी सूर्य को देखती है पैर उसे कुछ समाज नहीं आता

सूर्य शालिनी जी को किसी नाजुक सी लड़की के जैसे उठा कर गुमा देता है

सूर्य शालिनी जी दोनों एक दूसरे के विपरीत चेहरा किये हुए थे

सूर्य शालिनी जी की कमर पकड़ कर अपना सर एक बार फिर से शालिनी जी की राश भाटी छूट पे अपना मुँह टिका देता है

शालिनी जी को समाज आते हे उनके चेहरे पे बड़ी सी मुस्कान थी एक बार फिर से सूर्य के लैंड को बड़ी हे मादक अड्डा से शालिनी जी चूसने लगती है जैसे वो सूर्य ोा लैंड न हो कर शालिनी जी की मनपसं आइस क्रीम हो





सूर्य शालिनी जी के गुड्डाद्धार को सह लेट हुए शालिनी जी की योनि की होंठो को हल्का हल्का अपने दांतो से कुरेदने लगता है जिस से शालिनी जी की कंझावला आवर आदिक बदलने लगती है

जैसे जैसे सूर्य अपनी मनमर्जी कर रहा था वैसे वैसे शालिनी जी का सबर जबाब दे रहा था

जैसे हे सूर्य को आभाष हुआ की अब शालिनी जी किसी भी वक़्त अपने चरम सुख को प्राप्त कर सकती है

सूर्य शालिनी जी को पलट देता है

शालिनी जी को अपने चरम पे पहुंचने से पहले सूर्य का इस तरह दौरे में छोड़ना उन्हें पसंद नहीं आया पैर जैसे हे सूर्य ने उन्हें पलट कर बीएड पे डोगग्य स्टाइल में उनके गोल गोल नितम्बों पे हलकी हलकी चपेट लगाई

शालिनी जी के चेहरे पे जहा गुस्सा था वही अब एक गहरी मुस्कान थी

सूर्य दोनों कूल्हों को चुम कर शालिनी जी के काम सवार पे अपना दहकता हुआ लिंग मुंड लगा देता है

शालिनी जी ........ उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह अब आवर नहीं रुका जाता सूर्य उम्म्म्म जल्दी से अपनी शालू को अपने प्रेम वर्षा से तृप्ति कर दो

सूर्य बिना किसी परवाह के शालिनी जी के संकरी गुफा में अपने बेलगाम घोड़े को खुला चढ़ देता है अपनी मनमर्जिया करने को





शालिनी जी के चेहरे पे कुछ पल के लिया पीड़ा उभारो पैर जल्दी हे सम्भलते हुए

अपनी गरम योनि को सहलाते हुए उस पीड़ा से बहार निकल सूर्य के साथ सवरग में गोते लगाने लगी

सूर्य ......... उफ्फ्फ्फ़ शालू तुम्हारी गर्मी कुछ ज्यादा हे भाड़ गई है

शालिनी जी ........ जिसे इस गर्मी का ख्याल रखना चाइये वही अब ध्यान नहीं देगा तो ऐसा तो होगा हे

सूर्य ..... उमंमाहहह बहुत जल्द आपकी साडी शिकायते दूर कर दूंगा शालू बस कुछ वक़्त दो मुझे आपकी हर हिच्छा पूरी होगी

ीदार शालिनी जी सूर्य के लम्बे पथरो ज्यादा देर सहन नहीं कर पायी आवर अपने चरम का आनद लेते हुए आँखे मुंड ली





सूर्य शालिनी को झड़े देख अपनी गति कुछ काम कर देता है

पैर माध्यम गति से अभी भी शालिनी जी की चुदाई में लगा हुआ था

कुछ देर बाद फिर से शालिनी जी सूर्य का साथ देने लगी

सूर्य भी पूरी सीडट से शालिनी जी को तृप्ति करने में लगा हुआ था कुछ देर बाद फिर से शालिनी जी झाड़ गई

सूर्य शालिनी जी को सीधा लुटाते हुआ आना लैंड शालिनी जी के कमरष से पूरी तरह भीगी योनि में भिड़ा देता है





शालिनी जी ....... अह्हह्ह्ह्ह दीदी सच कहती है तुम सच मच के अरबी घोड़े हो अह्हह्ह्ह्ह आवर जोर से

सूर्य ........ मैं कोई अरबी घोडा नहीं हूँ शालू वैसे बड़ी मम्मी ऐसे नहीं बोल सकती

शालिनी जी ....... उम्म्म्म है रेखा दीदी सायद मुझसे भी ज्यादा तुम्हे प्यार करती सभी करते है पैर रेखा दीदी का प्यार पवित्र है उन्हें न तुम में परीलोक का राजा सिकता है न सूर्य शिव ठाकुर उन्हें बस अपना बीटा नजर आता है वो तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचती ये सब तो मेनका दीदी ने कहा था

सूर्य ........ उम्म्म अह्हह्ह्ह्ह शालू मैं आने वाला हूँ अह्हह्ह्ह्ह

सूर्य के तेजी हर पल के साथ आवर ज्यादा तेज हो रही थी अगले एक मिनट्स में शालिनी जी ने अपना सबसे तीव्र चरम सुख प्राप्त किया उसके अगले हे पल सूर्य अपने पूरी कोशिश के बाद भी खुद को झड़ने से नहीं रोक पाया

शालिनी की योनि को ओवर फ्लो करते हुए बाकि बचा राश शालिनी के पेट पे गिरा दिया

शालिनी जी ......उम्मम्मम्हा मुझे ये टेस्ट करना है जैसे तुमने मेरा किया

सूर्य मुस्कुरा कर अपनी ऊँगली पे वीर्य ले शालिनी जी को आना वीर्य टेस्ट कराया है





कोई 10 मिनट्स रेस्ट कर सूर्य आवर शालिनी जी दोनों कहा कर एक दूसरे की बहो में लेते थे

शालिनी जी ........ सूर्य रेखा दीदी तुमसे सच में बहुत प्रेम करती है एक बेटे के रूप में भले हे तुम एक बार मेरी किसी बात को नजर अंदाज कर देना पैर रेखा दीदी का मान सम्मान तुम हमेशा एक अच्छे बेटे की तरह करना

सूर्य ...... आ चिंता न करे माँ मेरे लिया सभी एक बराबर है जैसे आप है माँ सा है वैसे हे बड़ी मम्मी मेनका बुआ आवर दोनों मालिया है बस आप से थोड़ा ज्यादा प्यार करता हूँ हाहाहा

शालिनी जी ........ हैट बदमाश अभी भी सरीर दुःख रहा है तुम्हारे इस प्यार से

शालिनी जी की बात सुन कर सूर्य के चेहरे पे एक नॉटी स्माइल आ जाती है

सूर्य ........ आपने हे तो परमिशन दी थे शालू डार्लिंग अब आपका कहा तो मैं ताल नहीं सकता हाहाहा

आवर डेरी से शालिनी जी की योनि को सहला देता है

आवर एक निप्पल्स को मुँह में भर कर चुस्त हुआ आँखे बंद कर लेता है

जल्दी हे सूर्य कब निप्पल्स चुस्त हुआ नींद के आगोश में चला जाता है उसे भी पता नहीं चला

वही शालिनी जी काफी देर तक सोचती रही फिर उनकी भी आँख लग जाती है

सुबह जब शालिनी जी की आँख अपनी योनि इ कुछ गीलेपन की वजह से खुली जहा सूर्य अपना सर गुसाई लगा हुआ था पौने घंटे में सूर्य ने शालिनी जी एक हर हाईड को अपने प्यार से एक नयी ऊर्जा में भर दिया

शालिनी जी की जब घडी पे नजर पड़ी तो 05:30 ऍम से ऊपर टाइम हो चूका था

सूर्य एक बार फिर से लेट गया आवर शालिनी जी अपने ब्रा पेंटी निघ्त्य लिया बाथरूम की आवर भाड़ गयी

उनकी चल कुछ बदली हुई थी शालिनी जी 6 बजे के करीब त्यार हो कर सूर्य को सोया हुआ चढ़ उसपे पतली से चादर दाल कर रूम को खोल बहार निकल गई पैर जाते हुए गेट फिर से बंद कर गई ताकि सूर्य की नींद डिस्टर्ब न हो

आज कोई भी लड़की ध्यान या योध अभ्यास के लिया भी नहीं गयी थी

दादी जी ....... क्या हुआ शालिनी बेटी तुम्हे

शालिनी जी ......कुछ नहीं माँ सा मैं तो बिलकुल ठीक हूँ

किचन की आवर जाते हुए सबसे पहले शालिनी जी पे नजर माँ सा की पड़ी तो उन्हें शालिनी जी की चाल में कुछ बदलाव नजर आया

दादी जी ......पैर तुम इस तरह क्यों चल रही हो बेटी

शालिनी जी .......माँ सा वो सूर्य रात में मेरे पास हे सोया था काफी रात तक बाते करते रहा तो सुबह नींद पूरी नहीं हुई आवर बाथरूम में नहाते वक़्त बेखयाली में नाश खिंच गई थी मेरी आवर कुछ नहीं माँ सा

दादी जी ...... बेटी फिर आराम करना चाइये था तुम्हे जाओ जा कर रेस्ट करो किचन रेखा आवर मेनका संभल लेंगी मैं डॉक्टर को बुलवाती हम

शालिनी जी ........ माँ सा मुझे दर्द नहीं है आप चिंता न करो डॉक्टर की जरुरत नहीं है मुझे

( अब आपको तो नहीं बता सकती न की रात आवर सुबह आपके पोते ने पूरा सरीर हिला कर रख दिया मेरा ) वैसे भी मुझे आपसे जरुरी बात करनी है माँ सा

दादी जी ...... बोलो शालिनी बेटी क्या बात है

शालिनी जी ....... माँ सा वो मेर्री विजय भाई से प्यार करती है अब आपको हे पापा से इनके रिश्ते की बात करनी होगी मेर्री से सूर्य बात कर चूका है विजय भी त्यार है बस आपको इनका तीस्ता पका करना होगा आवर आपको हे सब देखना होगा विजय भाई के माता पिता नहीं है तो उदार से पापा हे सब देखेंगे

दादी जी ....... ये तो बहुत ख़ुशी की बात है बेटी विजय अच्छा लड़का है आवर जब दोनों एक दूसरे को इतना पसंद करते है तो मैं आज हे इनके रिश्ते की बात करती हूँ आवर जल्दी हे सदी फिक्स करती हूँ मेर्री भी इस परिवार का हिस्सा है आवर मेरी बेटी भी मैं तुम्हारे बाउजी से बात करती हम इस बारे में ते सूर्य अभी भी सो रहा है क्या

शालिनी जी .....जी माँ सा वो भी लेट तक जगा हुआ था आवर उसे कुछ दिन के लिया काम से बहार भी जाना होगा तो वो फ़िलहाल जयादा से ज्यादा घर पे हे रहना चाहता है

दादी जी ........ ये तो अच्छी हाट है बेटी आवर उसकी सदी भी नजदीक है फिर परीलोक भो जाना होगा सभी को तुम आराम करो मैं तुम्हारे बाउजी आवर महेंद्र से बात करती हूँ

शालिनी जी ........ जी माँ सा जैसा आप ठीक समजे

दादी जी बहार लोने की तरफ चल देती है जहा दादा जी आवर महेंद्र जी कुछ बाते कर रहे थे

ीदार किरण भी त्यार हो कर निचे आ गयी शालिनी जी उसे कुछ काम समजा कर रूम की आवर निकल गई

आवर किरण वह से मुस्कुराते हुए गायब हो जाती है .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................

अपडेट उम्मीद से थोड़ा छोड़ा है थोड़ा एडजस्ट कर लीजियेगा

जल्दी हे पहले की तरह अपडेट आने लगेंगे अभी एक मंथ से ऊपर का गेप है थोड़ा समय लगेगा पहले की तरह रेगुलर होने में आवर स्टोरी को समझने में बस आना साथ बनाये रखो थैंक यू एवरीवन .............. 🌹🌹🌹🙏🙏🙏
 
अपडेट 256

शालिनी जी .....जी माँ सा वो भी लेट तक जगा हुआ था आवर उसे कुछ दिन के लिया काम से बहार भी जाना होगा तो वो फ़िलहाल जयादा से ज्यादा घर पे हे रहना चाहता है

दादी जी ........ ये तो अच्छी हाट है बेटी आवर उसकी सदी भी नजदीक है फिर परीलोक भो जाना होगा सभी को तुम आराम करो मैं तुम्हारे बाउजी आवर महेंद्र से बात करती हूँ

शालिनी जी ........ जी माँ सा जैसा आप ठीक समजे

दादी जी बहार लोने की तरफ चल देती है जहा दादा जी आवर महेंद्र जी कुछ बाते कर रहे थे

ीदार किरण भी त्यार हो कर निचे आ गयी शालिनी जी उसे कुछ काम समजा कर रूम की आवर निकल गई

आवर किरण वह से मुस्कुराते हुए गायब हो जाती है .............

अब आगे ...........

सूर्यगढ़ ........ अभी सूर्य नास्ता करने बैठा हे था की तभी एक के बाद एक 3,

कार्स सूर्यगढ़ हवेली में लाइन से अंदर आती है

शालिनी जी ....... बीटा लगता है तुम्हारे नाना जी नानी जी आ गए है

सूर्य फ़ौरन नास्ते से उठ जाता है आवर अपनी माँ को साथ लिया बहार की आवर निकल जाता है

बहार सच में सूरजगढ़ से शालिनी जी का परिवार हे आया था

पहली कार से सूर्य के नाना जी नानी जी आवर छोटे मां जी बहार निकलते है

दूसरी कार से जोरावर जी प्रिय जी आवर सन्ति जी बहार निकलती है लास्ट कार में जोरावर जी की सिक्योरिटी थी

शालिनी जी सूर्य आगे भाड़ अपने माता पिता नाना जी नानी जी के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेता है आवर गले लग कर मिलता है

सूर्य ........ कैसे है नाना जी नानी जी

दादा जी ......... देख नहीं रहे हो बीटा तेरा ये नाना बुढ़ापे को मात दे कर फिर से जवान हो रहा है हाहाहाहा

दादा जी की बात सुन सब हसने लगते है उन्हें पता था यहाँ इनके दोनों हे रिश्ते हंसी मजाक के है दोस्ती भी आवर सम्बन्ध भी

जोरावर जी .......... कैसे हो बीटा सूर्य अपनी मामियो से नहीं मिलोगे क्या या फिर अब अपनी सास से सरम आ रही है

सूर्य ....... हाहाहा मां जी भले हे अब रिस्ता बदल गया है पैर दोनों हे रिश्ते में इनका बीटा हूँ मुझे किस बाद की सरम क्यों बड़ी मम्मी ( प्रिय जी ) सही कहा न मैंने

प्रिय जी आगे भाड़ खुद हे सूर्य का माथा चुम उसे सीने से लगा लेती है सूर्य जोरावर जी को आँख मरते हुए प्रिय जी का गाल चुम लेता है

जोरावर जी ........ सुधर जा बदमाश मेरी एक हे बीबी है मेरा क्या होगा

जोरावर जी की बात सुन सूर्य के साथ साथ बाकि सब की भी हंसी चुत जाती है वही प्रिय जी सरम से दोहरी हो जाती है

सूर्य सन्ति जी आवर प्रिय जी को साथ ले अंदर की आवर भाड़ जाता है नानी जी दादी जी दादा जी जोरावर जी संजय जी महेंद्र जी कुछ देर वही बहार लोने में बेथ आपस में बात करने लगते है

सूर्य के अंदर पहुंचते हे किरण भी सभी लड़कियों को ले कर हवेली पहुंच जाती है

अपनी दोनों मम्मी को देख किरण दौड़ते हुए प्रिय जी से गले जा लगती है

शालिनी जी .......स्वीटी ये क्या है संभल कर चलना चाइये न तुम्हे स्वीटी

किरण ........ सॉरी माँ आगे से ध्यान रखूंगी आवर आप कैसे है बड़ी मम्मी आप लोग अभी आये हो न

ीदार सपना भी सन्ति जी से उतने हे सनेह से गले लग कर मुलती है जैसे सन्ति जी ने हे सपना को जनम दिया हो इनका प्रेम भी बड़ा हे निराला था

सूर्य सोफिया को वह देख एक पल के लिया चौंक गया

उसे उम्मीद नहीं थी की सोफिया यहाँ हो सकती है

सोफिया आगे भाड़ शालिनी जी के पेअर चुने के लिया जुख़ी तो शालिनी जी ने उसे बिच में हे रोक कर गले से लगा लिया

शालिनी जी ......... कैसे हो सोफिया बेटी आने में तकलीफ तो नहीं हुई

सोफिया ......हम अच्छे है आंटी जी आवर हमें कोई तकलीफ नहीं हुई यहाँ आने में

किचन से रेखा जी मेर्री जी आवर मेनका जी भी अपना काम फिनिश कर बहार निकल आई आवर सभी से बड़े हे सनेह से मिलती है

रेखा जी .......बीटा सूर्य जा कर अपने दादा जी नाना जी को नास्ते के लिया बुला लाओ सब त्यार है

आवर है यहाँ दूसरी डिनर टेबिल भी लगा दो

सूर्य कुछ करता उस से पहले हे कोमल अपनी जादू से हॉल में छोटा डिनर टेबिल गायब कर वह बड़ा सा डिनर टेबिल लगा देती है जो काफी खूबसूरत आवर आरामदायक था

रेखा जी ....... कोमल ये सब क्या है बेटी अपनी सक्तियो का गलत इस्तेमाल करना गलत है न

शालिनी जी ........ दीदी जाने दीजिये बच्चे है कभी कभी मजाक मस्ती में कर जाते है ऐसा कुछ कोमल बीटा ऐसे अपनी सक्तियो का दुरूपयोग नहीं करना चाइये जब तक हम खुद से वो कार्य कर नहीं सके तब तक

कोमल .........सॉरी मम्मी आगे से ध्यान रखूंगी

सूर्य कोमल का हाथ पकड़ अपने साथ बहार की आवर निकल जाता है

शालिनी जी ...... रेखा दीदी कोमल की सकितिया भाड़ रही है ऐसे में उसका मन चंचल हो जाता है वो खुद को रोक नहीं पति उसे कुछ वक़्त दीजिये वो आपका खून है कुछ गलत नहीं करेगा

रेखा जी ........ पता नहीं शालू कभी कभी उसकी नादानी से दर भी लगता है आवर गुस्सा भी हो जाती हूँ जबकि मैं ऐसा नहीं करना चाहती हूँ

मेनका जी ....... कोई बात नहीं भाई हमें इन सब की आदत नहीं तो ऐसा लग्न गलत नहीं है पैर बच्चों का मन दुखी करना गलत होगा

ीदार सूर्य सभी को अंदर भेज कर कोमल को लिया जोरावर जी के साथ दूसरी तरफ कुछ बात करने लगता है

कोमल जहा कुछ पल पहले रेखा जी की दन्त से थोड़ी उदाश थी वही ऐसे सूर्य द्वारा अपना हाथ थामे देख इसकी साड़ी ुदशी गायब हो उसके चेहरे पे दुनिया भर की ख़ुशी थी

जोरावर जी ....... अगर ऐसे बात है तो मैं अभी बात करता हूँ विजय से

जोरावर जी अपने फ़ोन से विजय को कॉल लगते

विजय ......hello भाई सा कैसे है आप

जोरावर जी ...... मैं अच्छा हूँ विजय तुम कैसे हो

विजय .....जी भाई सा मैं भी अच्छा हूँ आज सुबह सुबह कैसे कॉल किया कुछ काम था क्या मेरे लायक

जोरावर जी ....... हाहाहा मुझे तुम्हारी कम्प्लेन मिली है ुशी की पूछताछ करने के लिया कॉल किया है

विजय जोरावर जी की बात सुन थोड़ा दर जाता है आवर हड़बड़ाते हुए बोलता है

विजय ...... मेरी कम्प्लेन भाई सा मैंने कुछ नहीं किया भाई वो गलती से उसे चूत आ गई थी वो बस फ्रेंडली मैच था

(विजय को लगा कल अपने साथी के साथ फाइट मैच में विजय द्वारा चौथ पहुचाये जाने की किसी ने कम्प्लेन कर दी है आवर उसकी खबर उसके बड़े भाई को हायर अफसर से कम्प्लेन के रूप में मिली होगी )

विजय की बात सुन कोमल सूर्य के साथ जोरावर जी भी हसने लगे

जोरावर जी ...... अरे मेरे भाई घबरा क्यों रहा है दरशल कम्प्लेन कुछ आवर है हमारे भांजे ने तुम्हारे खिलाफ कम्प्लेन दर्ज करवाई है की तुमने उसकी दोस्त की कुछ बहुत हे कीमती चीज़ चुराई है अब बोलो तुम्हे क्या सजा मिलनी चाइये

सूर्य ....... मां जी क्यों छोटे मां जी की हालत पतली करने में लगे हो वैसे भी सदी के बाद िनिनकी हालत पतली हे रहेगी

जोरावर जी .......सही कहा भांजे आर्मी में खुला सांड था पैर अब लगाम लगाने वाली आ गयी है इस्पे भी

विजय ......क्या मतलब भाई सा आपने तो सच में मुझे डरा हे दिया था

जोरावर जी ........ देख विजय अब तक तो मैं मजाक कर रहा था पैर अब नहीं जो पुछु सच बताना आगे चल कर कुछ गलत हुआ तो पापा के साथ साथ मेरा भी सर जुख जायेगा

जोरावर जी की बात सुन विजय की धड़कन अचानक से भाड़ जाती है

सूर्य जोरावर जी से फ़ोन ले कर विजय से बात करता है

सूर्य ......... Hello मां जी मैं सूर्य बोल रहा हूँ

विजय ......है सूर्य बोलो आवर ये भाई सा क्या बोल रहे है

सूर्य ......वो सब आप छोड़िये दरशल बात ये है की मेर्री जी

विजय .......क्या हुआ मेर्री जी को सूर्य मैं अभी सूर्यगढ़ आ रहा हूँ

सूर्य ......अरे पूरी बात सुन लीजिये आवर साम तक आ जाना वो दरशल मेर्री जी ने सदी के लिया है बोल दिया उसके बारे में मां जी आपसे पूछ रहे थे की आप दोनों सच में एक दूसरे से प्यार करते है आवर सदी करना चाहते या फिर एक केवल आकर्षण है

विजय .....क्या सच में मेर्री जी त्यार है मुझसे सदी के लिया

जोरावर जी ...... है तभी तो तुम्हे कॉल किया है ताकि कल को कोई गलत फहमी न हो क्या तुम मेर्री से सच में प्रेम करते हो आवर सदी करना चाहते हो विजय कल को कुछ भी गलत हुआ तो बात दोनों खंडन पे आएगी क्युकी बाउजी आवर माँ सा ने मेर्री को अपनी बेटी का दर्जा दिया इस लिया सोच समाज कर जबाब देना आवर दूसरी बात मेर्री आगे भी अपनी जॉब पे रहेगी आवर सूर्य के साथ मिशन पे भी

विजय ....... भाई सा माता पिता तो बहुत पहले हे दुनिया से जा चुके है उनका स्थान माँ सा आवर बाउजी ने लिया है उनकी इजात पे कोई बात आये उस से पहले मैं मरना पदम् करूँगा रही बात मेर्री जी की तो ये सच की मैं उनसे प्रेम करता हूँ आवर सदी भी करना चाहता हूँ वो अपनी जॉब कंटिन्यू रखे मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है इसमें अगर आपको लगे की मैं मेर्री जी के लायक नहीं हूँ तो आप रिश्ते के लिया इंकार कर दीजियेगा आप माँ सा बाउजी जो भी फैसला करेंगे मुझे उस से कोई आपत्ति नहीं होगी

जोरावर जी ........ ठीक है मेरे भाई जल्दी से चुटी ले कर साम को घर आ जाना अब सदी के बाद हे ड्यूटी ज्वाइन करना

विजय .......जी भाई सा

जोरावर जी कॉल कट कर सूर्य कोमल को अपने साथ लिया भीतर चल देता है जहा सभी इसी बात पे चर्चा कर रहे थे

जोरावर जी कुछ देर उनकी बात सुनते है फिर विजय से हुए बात उन्हें बताते है

नाना जी ........ जब दोनों बच्चे एक दूसरे को पसंद करते है तो फिर हमें बच्चों की ख़ुशी का मान रख दोनों को एक करने में ज्यादा वक़्त नहीं लगाना चाइये

दादा जी ....... बिलकुल सही मैं कल हे गुरुदेव से इस बारे में चर्चा करता हूँ आवर दानो की सदी का मुहूर्त तय करवाता हूँ मेरी बेटी की डॉली यही से उठेगी आवर दम दाम से सदी होगी महेंद्र आज से हे सभी काम जल्द से जल्द ख़तम करो आवर शिव को सन्देश भेजो की जल्द से जल्द लौट आये बच्चों वह से कुछ मंगवाना है तो शिव को कॉल कर देना अब मुँह मीठा कराओ ठकुराइन

मेनका जी किचन से मिठाई ला कर सभी का मुँह मीठा करवाती है

लड़किया तो मेर्री जी को पूरी तरह से घेर लेती है

शालिनी जी ........ बाउजी एक आवर खुसखबरी है हम सब के लिया

ये बात सुनते हे सूर्य वह से उठने लगा आवर किरण के भी कान खड़े हो गए थे वो भी फ़ौरन रेखा जी के पीछे जा कर चुफ जाती है

दादा जी ....... आवर कोनसी खुसखबरी है शालू बेटी

शालिनी जी ........ माँ सा आप दादी बनने वाली है

दादी जी ....... क्या मतलब बेटी मैं तो पहले से हे दादी हूँ इन सबकी

शालिनी जी ....... हाहाहा माँ सा आप परदादी बनने वाली है स्वीटी माँ बनने वाली है

दादी जी ......क्या तुम सच कह रही हो बेटी

शालिनी जी .......जी माँ सा स्वीटी प्रेग्नेंट है माँ सा मुझे भी कल हे पता चला तभी तो सबको बुलाया है ताकि सभी को एक साथ पता चले आवर साथ हे मेर्री आवर विजय का रिस्ता भी तय हो जाया

रेखा जी पीछे पलट कर किरण को देखती है जो उनके पीछे छुपी हुई थी

रेखा जी ........ क्या ये सच है स्वीटी बीटा

किरण कुछ बोल हे नहीं प् रही थी बस सरम से घडी जा रही थी

रेखा जी को न जाने क्या हुआ की किरण का चेहरा अपने हाथो में थम वो उसके पुरे चेहरे को चूमने लगती है रेखा जी की आँखों से तप तप कर खुदी के आंसू किरण के चेहरे पे गिर रहे थे आवर उनकी हालत कुछ ठीक नहीं लग रही थी सायद ख़ुशी कुछ ज्यादा हे थी

सूर्य जल्दी से उठा आवर फ़ौरन रेखा जी को संभालता है

सूर्य ..... क्या हुआ बड़ी मम्मी आप इस तरह से रो क्यों रही है

रेखा जी सूर्य को गले से लगा लेती है साथ हे किरण को भी

रेखा जी ........ आज मैं बहुत खुश हूँ बीटा तुमने हम सब को बहुत बड़ी ख़ुशी दी है ये किसी दुःख के आंसू नहीं है ये तो ख़ुशी के आंसू बीटा

शालिनी जी ......... दीदी आपकी हालत मैं जानती हूँ आप हम सब से कही ज्यादा प्यार सूर्य से करती है आपके सीने में जो अरमान है अब आप पुरे करने आपको कोई नहीं रोकने वाला आवर जुली बीटा यहाँ आना

जूलिया चुप चाप शालिनी जी के पास आ कर कड़ी हो जाती है

शालिनी जी .......... माँ सा जूलिया भी प्रेग्नेंट है वो भी माँ बनने वाली है

ये एक आवर दमका था सबके लिया पैर खुशियों से भरपूर पैर साथ हे कुछ उल्जन भी

दादी जी ....... क्या .... पैर जुली बेटी की तो अभी सदी हुई नहीं है

शालिनी जी ...... जी माँ सा इसी लिया गुरुदेव ने जूलिया को गर्भ बंदन में बंद रखा है सूर्य से सदी के बाद हे वो इस गर्भ बंदन से मुक्त होगी

दादा जी ........ महेंद्र हमारी कुलदेवी मंदिर जाओ आवर पंडित जी से पूजा की बात करो साथ सूर्यगढ़ सूरजगढ़ आवर सक्तिपुर में मुंडी करवा दो पूजा के बाद भोजन वस्त्र दान के साथ साथ 101 गरीब कन्याओ के विवाह का पूरा दायित्व हम उठाएंगे

महेंद्र जी ......जी पापा मैं अभी जाता हूँ

सूर्य .......रुकिए बड़े पापा

महेंद्र जी ......क्या हुआ सूर्य

सूर्य ....... बाउजी अभी ये सब संभव नहीं है आप कुछ दिन बाद ये पूजा रख लीजिये मुझे स्वीटी मानसी जूलिया को कुछ समय के लिया यात्रा पे निकलना होगा

दादा जी ...... कैसे यात्रा बेटे

सूर्य ....... बाउजी कल मुझे स्वीटी आवर मानसी को सुक्रलोक जाना होगा असुरगुरु शुक्राचार्य से भेंट करने उसके बाद ड्रैगन लोक भी जाना होगा जहा जूलिया भी साथ होगी दोनों यात्रा आवशयक है ड्रैगन लोक में कुछ गड़बड़ चल रही है आवर सुक्रलोक से असुरगुरु शुक्राचार्य का निमंतरण आया है तो उनका भी अनादर नहीं कर सकता वो एक सिद्ध ऋषि है उनका अंदर नहीं कर सकता

दादा जी ...... पैर शुक्राचार्य तो असुरो के गुरु है बीटा कही तुम्हे कुछ ....

सूर्य ...... नहीं बाउजी आपकी चिंता जायद नहीं है क्यों की उन्होंने खुद मिलने के लिया आमंत्रित किया है आवर अगर ऐसा वैसा कुछ हुआ तो इस काबिल तो हूँ की सब संभल सकू आप चिंता न करो

दादी जी ......फिर भी बीटा चिंता तो होगी हे न

सूर्य ......... मैं समाज सकता हूँ माँ सा आप सबकी चिटा पैर मैं इतना भी कमजोर नहीं हूँ माँ सा

रेखा जी ....... बच्ची चलो नास्ता करो बाकि बाते बाद में कर लेना

एक एक कर सभी डिनर टेबिल पे जा कर बेथ जाते है

प्रिय जी रेखा जी शालिनी जी सन्ति जी सभी के थल में खाना लगाने लगती है

सूर्य ....... बड़ी मम्मी आप भी बैठिये आवर भरपेट दोनों को खिलाये ये मेरी तो सुनती नहीं आवर खाने पे ध्यान भी नहीं देती

रेखा जी को तो बस कहने भर के देरी थी आवर वो जूलिया आवर किरण के बिच आ बैठी आवर दोनों को अपने हाथो से खिलने लगती

किरण गुस्से से सूर्य की आवर देख रही थी जो अपनी नानी के हाथ से खाना खा रहा था

किसी ने सच हे कहा है मूल से प्यारा ब्याज होता है

जल्द हे किरण आवर जूलिया की हालत ख़राब होने लगी क्यों की रेखा जी के हाथ को रोकने की हिमत दोनों हे नहीं कर रही थी हर निवाले में उनका प्यार जो था पैर हर इंसान की एक लिमिट होती है खाने की

किरण की हालत देख सूर्य अपना खाना फिनिश कर उठा आवर रेखा जी के सामने रखे भोजन के थल से निवाला बना कर रेखा जी को खिलने लगा

पैर रेखा जी ने वो निवाला सूर्य को खिला दिया

सूर्य ....उम्म्म अब तुम दोनों उठो कितना खाओगी तुम दोनों मेरी मम्मी के हाथ दुखने लगे

ये इशारा था किरण आवर जूलिया के लिया की तुम लोग निकलो इन्हें मैं संभालता हूँ

किरण के उठते हे सूर्य वह बेथ गया आवर रेखा जी को अपने हाथो से खिलने लगा

प्रिय जी ...... जमाई सा यहाँ हम भी है जिन्होंने नास्ता नहीं किया है

सूर्य बाकि सबको देखता है जो लगभग नास्ता कर चुके थे

सूर्य ........ जमाई कहोगी तो मैं नहीं खिलने वाला मम्मी सोच लीजिये

सूर्य शालिनी जी सन्ति जी प्रिय जी आवर रेखा जी के लिया चेयर लगता है आवर उन्हें बैठा देता है फिर एक साफ़ थल में ढेर सारा खाना निकल कर

अपने हाथ से निवाला बना कर सन्ति जी की तरफ किया सपना बिच में सूर्य द्वारा सन्ति जी के लिया बनाया निवाला खा कर ऊपर दौड़ जाती है

सूर्य ........ सपना की बची भूख़ड कही की अभी भी पेट नहीं भरा क्या

सपना सीढ़ियों से पलट कर सूर्य को जइब निकल कर दिखती है

सपना ...... जीजा श्री साली हूँ आपकी इतना तो हक़ बनता है मेरा

सूर्य ....... तुम्हे तो बाद में देकता हूँ सपना की बची

जोरावर जी .........हाहाहा भांजे संभल कर कही बाद में सबने मिल कर तुम्हे हे देख लिया तो क्या करोगे तुम एकेले हो मुझे तो अभी से तुम्हारे गाढ़ा नक्षत्र की दिशा बदलती नजर आ रही है

सूर्य ....... देखिये ममी जी ये मां जी क्या बोल रहे है आप तो मेरे साथ है न

प्रिय जी ....... तुम इनकी चिंता न करो बीटा हम मिल कर इन सब को संभल लेंगे कोई आंक उठा कर तो देखे मेरे बेटे को

सूर्य ........ ये हुई न बात मां जी आज तो आपकी खटिया बहार हे लगेगी हाहाहा

जोरावर जी ........ यार मैंने क्या किया है मुझे क्यों फसवा रहे हो

इन सबका ऐसे हे हाशि ख़ुशी नास्ता चलता रहा वही सूर्यगढ़ से काफी दूर व्योमासुर जी के आसाराम में कुछ आवर हे चल रहा था

असवासुर ....... गुरुदेव आप बहन मानसी आवर जीजा श्री सूर्य के साथ सुक्रलोक जा तो रहे है पैर मुझे भय है की कही उनकी वास्तविकता के विषय में नरकासुर न जान जाये

गुरुदेव ........ हमें भी इशू बात को ले कर चिंता हो रही है पुत्र अस्व नरकासुर अवश्य सुक्रलोक में अपने गुप्तचर सक्रिय कर चूका होगा जब हमने उस से बिना किसी विचार विमर्श के असुरगुरु के पढ़ का त्याग किया है तो अवश्य कुछ न कुछ षड़यंत्र बन रहा होगा हमारे खिलाफ

असवासुर ........ क्या ये यात्रा कुछ समय के लिया स्थगित नहीं की जा सकती गुरुदेव

व्योमासुर ...... नहीं पुत्र असुरगुरु शुक्राचार्य को आवर आदिक प्रतीक्षा करवाना उचित नहीं है पुत्र सूर्य के लिया तुम तो उनके क्रोध से परिचित हो हे हलाकि पुत्र सूर्य उनका सामना करने सक्षम है किन्तु अगर पुत्र सूर्य पे जरा भी संकट आया तो पुत्री किरण के क्रोध स्वरुप से गुरुदेव को केवल सूर्य आवर प्रभु हे सुरक्षित रख सकते है

असवासुर .......... कोई अश्रु ऊर्जा आसाराम में प्रवेश कर गई है गुरुदेव

गुरुदेव ......संत रहो पुत्र ये असुर ऊर्जा पुत्री वातापी की है

कुछ पल बाद वातापी व्योमासुर आवर अस्वसुर के समक्ष थी

वातापी ......परनाम पिता श्री

व्योमासुर ........कल्याण हो पुत्री

असवासुर ....... परनाम देवी वातापी

वातापी ......परनाम असवासुर जी

गुरुदेव ........ आओ पुत्री वातापी इस तरह अचानक से यहाँ अवश्य कोई महत्वपूर्ण घटना घाटी है

वातापी. ...... अभी घाटी नहीं है पिता श्री किन्तु आप सचेत नहीं रहे तो बहुत कुछ विनाशकारी घटित हो सकता है

गुरुदेव ....... तुम स्वयं यहाँ आई हो तो अवश्य कुछ बहुत महत्वपूर्ण होगा पुत्री

वातापी ...... पिता श्री नरकासुर आपके आवर जमता सूर्य के विरुद्ध बहुत बड़ा षड़यंत्र रच रहा है

असवासुर .......कैसा षड़यंत्र देवी

वातापी ....... मुझे ज्ञात है पिता श्री आप आवर बहन मानसी जमता सूर्य के साथ असुरगुरु शुक्राचार्य से भेंट करने सुक्रलोक जा रहे है किन्तु नरकासुर ने वह पहले से हे सुक्रलोक में अपने गुप्तचर आवर एक असुरसेना भेज चुके है उन्हें जमता सूर्य के विषय में ज्ञात नहीं है किन्तु जो गुप्तचर आवर असुर सेना सुक्रलोक पहुंची है उनकी मनसा आपके वध की है

असवासुर ....... क्या गुरुदेव का वध उस मुर्ख नरकासुर का इतना दशांश की वो गुरुदेव के विरुद्ध ऐसा साध यन्त्र एच रहा है

ीदार व्योमासुर वातापी की बात सुन चिंतित हो उठे

आवर किसी गहन विचार में दुब गए

कुछ देर बाद भी जब उन्होंने कुछ नहीं कहा तो असवासुर आवर मून न रह सका

असवासुर .......गुरुदेव आप किस विचार में खोये है

असवासुर की क्रेडिट आवाज सुन असुरगुरु अपने विचारों से बहार आये

असुरगुरु ....... पुत्र अस्व अभी तुम सुक्रलोक जाओ आवर उनकी गतिविधियों पे नजर रखो पुत्र सूर्य के साथ मानसी आवर पुत्री किरण भी आ रही है सुक्रलोक गुरुदेव को इसकी सुचना दो आवर उन्हें सचेत रहने को कहो

असवासुर ......गुरुदेव हम उनपे नजर रख सकते है किन्तु गुरु शुक्र को ये सन्देश देने की गुस्ताखी नहीं कर सकते हमें क्षमा करे

व्योमासुर जी असवासुर के मन की स्थित समाज कर पास हे रखे कलम से ताड पत्र पे कुछ लिखने लगे

कुछ देर बाद वो ताड पत्र पे लिखने के बाद उसपे अपना हाथ फिर देते है जिस से सब कुछ लिखा हुआ गायब हो जाता है आवर वो ताड पत्र असवासुर को सौंप कर उसे जाने का इशारा करता है

असवासुर असुरगुरु को परनाम कर वह से सुक्रलोक के लिया निकल जाता है

वातापी ...... पिता श्री कुछ आवर भी असुरलोक महल में गणित कार्य हो रहे है जिनके विषय में आपको जानना चाइये

व्योमासुर ...... ऐसा क्या गणित कार्य हो रहा है पुत्री

वातापी ...... पिता श्री द्वारिका अक्षत दानवी कन्याओ का अपहरण कर उन सभी को नरकासुर के हराम में पहुंचा रही है आगे तो आप समाज हे सकते है

व्योमासुर ........ वो मुर्ख द्वारिका इतनी निचे कैसे गिर सकती है अपने हे कुल की कन्याओ के साथ इस तरह का कुकरतिया कैसे कर सकती है वो खुद भी तो दानव खुल से है

वातापी ...... आपके असुरलोक त्यागने के पश्चात बहुत कुछ बदल गया है असुरलोक में पिता श्री अगर ऐसे हे चलता रहा तो एक विवश असुरलोक का विनाश स्वयं असुर हे कर देंगे

व्योमासुर ........... असुरगुरु पढ़ अब किसे दिया गया है

वातापी ....... चन्दसुर को पिता श्री

व्योमासुर ....... क्या उस कपटी को ये गुरुदेव ने क्या किया लगता है असुरलोक का विनाश निकट है पुत्री तुम एक कार्य करो अपने दोनों पुत्रो को सुक्रलोक गुरुकुल भेज दो आवर स्वयं भी वह चली जाओ पुत्री तुम अब असुरलोक में सुरक्षित नहीं हो

वातापी .......हम असुरलोक असुरमहल का त्याग नहीं कर सकते पिता श्री अगर ऐसा हुआ तो आपको असुरलोक में चल रहे सडयंत्रो के विषय में कोण सुचना देगा

व्योमासुर ........ नहीं पुत्री हमें तुम्हारी सुरक्षा अतिपिर्य है रही बात असुरलोक में हो रहे सडयंत्रो के जानकारी की तो उसके लिया हम कोई अन्य मार्ग निकल लेंगे किन्तु तुम अब अपने दोनों पुत्रो के साथ सुक्रलोक जाओगी कल हे

वातापी ........किन्तु पिता श्री

व्योमासुर ......... नहीं पुत्री वातापी इस विषय पे हम कुछ नहीं सुनेगे अब

वातापी .......जी पिता श्री जैसा आपका आदेश हम आपकी आज्ञा का पालन करेंगे

व्योमासुर ..........पुत्री अब तुम लौट जाना चाइये ज्यादा समय असुरलोक से गायब रहना तुम्हे संदेह में दाल देगा

वातापी .....जी पिता श्री परनाम आज्ञा दीजिये

व्योमासुर ........कल्याण हो पुत्री ईश्वर सदैव तुमपे अपनी कृपा बनाये रखे अब तुम जाओ पुत्री

वातापी असुरगुरु व्योमासुर को परनाम कर किसी काली परछाई के जैसे वह से पल भर में गायब हो गई ..................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............................
 
अपडेट. 257

व्योमासुर ......... नहीं पुत्री वातापी इस विषय पे हम कुछ नहीं सुनेगे अब

वातापी .......जी पिता श्री जैसा आपका आदेश हम आपकी आज्ञा का पालन करेंगे

व्योमासुर ..........पुत्री अब तुम लौट जाना चाइये ज्यादा समय असुरलोक से गायब रहना तुम्हे संदेह में दाल देगा

वातापी .....जी पिता श्री परनाम आज्ञा दीजिये

व्योमासुर ........कल्याण हो पुत्री ईश्वर सदैव तुमपे अपनी कृपा बनाये रखे अब तुम जाओ पुत्री

वातापी असुरगुरु व्योमासुर को परनाम कर किसी काली परछाई के जैसे वह से पल भर में गायब हो गई ..................

अब आगे .........

परीलोक ......... पारी महल में इस समय गुरुदेव वैद्यराज रानी पारी पारिजात के साथ साथ प्रेतराज j.king जिनिशा जीनत रिद्धि सकती वयोम के साथ तीनो लोक ( परीलोक जिनलोक प्रेतलोक ) के सेनापति भी मौजूद थे

जो किसी बहुत हे गंभीर आवर महत्व पूर्ण विषय पे गंभीर चर्चा कर रहे थे

प्रेतराज ........ गुरुदेव क्षमा करे किन्तु हमें संदेह है की पुत्र सूर्य का सुक्रलोक जाना उचित नहीं फिर भी आप उसे सुक्रलोक जाने की अनुमति दे रहे है

j.king ........ गुरुदेव हम भी इस बात से सहमत है की प्रेतराज जो कह रहे है वो पूर्णतया सत्य है शुक्राचार्य असुर हितेषी है अगर उन्होंने वह पुत्र सूर्य पुत्री किरण मानसी के साथ किसी तरह का चाल किया तो हम कुछ भी करने में समर्थ नहीं है

गुरुदेव ....... हम आप सभी की मनो इस्थिति से अवगत है राजन किन्तु एक सत्य ये भी है की पुत्र सूर्य स्वयं अपनी इच्छा से सुक्रलोक नहीं जा रहा है

रानी पारी ....... आपका तात्पर्य क्या है गुरुदेव पुत्र सूर्य की सुक्रलोक जाने की इच्छा नहीं है तो फिर पुत्र सूर्य को उसकी इच्छा के विरुद्ध कोण विवश कर सकता है उसे सुक्रलोक जाने के लिया

गुरुदेव ........ सांत रानी पारी सांत पुत्र सूर्य को कोई विवश नहीं कर रहा है आवर न कोई उसे विवश कर सकता है ये परबु की इच्छा है उन्ही की इच्छा से पुत्र सूर्य सुक्रलोक यात्रा पे निकल रहा है आवर स्वयं असुरगुरु शुक्राचार्य पुत्र सूर्य पुत्री किरण वह पुत्री मानसी को सुक्रलोक आमंत्रित कर रहे है ऐसे में पुत्र सूर्य के साथ कुछ भी अनुचित नहीं होगा ये असुरगुरु शुक्राचार्य स्वयं निर्धारित करेंगे

रानी पारी ........ गुरुदेव आपका कटान उचित है किन्तु फिर भी हृद्या इन तथ्यों को स्वीकार नहीं कर रहा है असुर अपनी डस्ट परवर्ती का कभी भी परिचय दे सकते है

गुरुदेव ........ हम जानते है रानी पारी पुत्र सूर्य का आपके हृद्या में क्या स्थान है किन्तु एक सत्य ये भी है की पुत्र सूर्य के साथ पुत्री किरण भी इस यात्रा पे सुक्रलोक जा रही है जो पुत्र सूर्य की सकती है

पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण के मिलान से जो दिव्यता पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण को प्राप्त हुई है उस दिव्या ऊर्जा सकती का विनाशकारी सवरूप की कल्पना भी हम नहीं कर सकते है इस लिया आप सभी को अपने चित को सांत पुत्र सूर्य को ले कर जो कोई भी संदेह आपकी मन मस्तिष्क में है उन सभी से स्वयं को मुक्त कर पुत्र सूर्य को आशीर्वाद प्रदान करे

जीनत ....... गुरुदेव क्या हम उनकी सुरक्षा के लिया सेना नहीं भेज सकते इस यात्रा में

गुरुदेव ......... हाहाहा पुत्री जीनत हम जानते है आप पुत्र सूर्य की सुरक्षा को ले कर अभी भी चिंतित हो पुत्री तुम्हारी चिंता व्यर्थ है पुत्र सूर्य जिनकी सुरक्षा में है उनकी सुरक्षा को उनकी इच्छा के विरुद्ध सवयं देव भी नहीं भेद सकते पुत्र सकती

सकती ......जी गुरुदेव आज्ञा करे

गुरुदेव ....... पुत्र सकती पुत्र सूर्य को हमारा सन्देश पहुंचा दो हम सूर्यौदय के साथ हे सूर्यगढ़ में उस से भेंट करेंगे

सकती ........ जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

सकती गुरुदेव को दो कुंडली सौंपते हुए सभी से आज्ञा ले परीलोक से सूर्यगढ़ के लिया निकल गए

गुरुदेव .......... पुत्र वयोम तुम्हे पुत्री मानसी के बाबा व्योमासुर जी से भेंट कर कल सुबह सुक्रलोक जाने की तयारी कर के लिया कहना है

वयोम ......जी गुरुदेव मैं अभी उन्हें सन्देश दे देता हूँ मेरे लिया कोई आवर आदेश गुरुदेव

गुरुदेव ....... अभी के लिया नहीं पुत्र अभी तुम जा सकते हो

वयोम ......जी गुरुदेव आज्ञा दे परनाम गुरुदेव

वयोम गुरुदेव रानी पारी j.king प्रेतराज आदि को परनाम कर वह से गायब हो गया

गुरुदेव ......... रानी पारी j.king प्रेतराज आप सभी हमारी बात ध्यान से सुनिए

तीनो है में सर हिला कर गुरुदेव को देखने लगते है

गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य ने जिनलोक आवर नागलोक की सुरक्षा के लिया अपने वहां को नियुक्त किया हुआ है किन्तु जब वो सुक्रलोक की यात्रा पे होगा तो तीनो के वहां उनके ड्रैगन उनके साथ होंगे ऐसे में जिनलोक आवर नागलोक की सुरक्षा को खतरा हो सकता है ऐसे में प्रेतराज आपको नागलोक की सुरक्षा का दायित्व संभालना होगा न कोई असुर न कोई नाग इस ावादी में नागलोक में प्रवेश करेगा न कोई बहार निकलेगा इस जब तक पुत्र सूर्य फिर से अपने वहां को नियुक्त न करे तब तक नागलोक की सम्पूर्ण सुरक्षा का दायित्व आप पे है प्रेतराज

प्रेतराज .......जी गुरुदेव आपकी आदेश का पालन होगा गुरुदेव आप निश्चित रहे

गुरुदेव ....... रानी पारी आपको पुत्र सूर्य के लौटने तक जिनलोक की सुरकश का दायित्व निभाना होगा साथ हे पृथ्वीलोक पे भी अपनी दृस्टि बनाया रखनी होगी खाश कर सूर्य के संपर्क में जो व्यक्ति हो उनपे हम पितृ सूर्य के लौटने तक ध्यान में रहेंगे हमारे ध्यान में कोई भीगहन न आये कोई भी सामान्य हो उसका समाधान आप मिल कर कर सकते है पुत्री रिद्धि तुम्हे पृथ्वीलोक सूर्यगढ़ जाना होगा कुछ समय के लिया वयोम को सक्तिपुर आवर सकती को सूरजगढ़

रिद्धि ....... जी पिता श्री जैसी आपकी आज्ञा

पारिजात ...... गुरुदेव क्या हम भी जा सकते है वह

गुरुदेव .....हाहाहा ठीक है पुत्री किन्तु कुछ समय के लिया

पारिजात ......जी गुरुदेव

कुछ देर आवर सामान्य चर्चा के बाद गुरुदेव रानी महल से सीधा मंदिर की आवर निकल गए

सूर्यगढ़ ........

सुबह सूर्य अपनी नियत समय से उठा आवर सभी को ले कर जंगल पहुंचा सभी अपना ध्यान पूर्ण कर योध अभ्यास करने लगते है कुछ देर बाद सूर्य अपना अभ्यास पूर्ण कर दिव्या पुस्तक से बहार निकलता है

शालिनी जी ...... क्या हुआ तुम इतनी जल्दी अभ्यास कर बहार कैसे आ गए

सूर्य ....... आज आपने इतनी जल्दी ध्यान पूर्ण कर लिया

शालिनी जी ........ नहीं वो ध्यान करते हुए कुछ समस्या हो रही है बार बार ध्यान भांग हो रहा है मेरा

सूर्य ........ आपने अभी तक सामान्य रूप में मूलाधार चक्र हे जागृत किया है न

शालिनी जी ......... है अभी तक मैंने एक हे कुण्डलिनी चक्र जागृत किया है सवादीस्थान चक्र के बहुत नजदीक हूँ किन्तु उसे जागृत नहीं कर प् रही हूँ पारी रूप में बहुत सरल है

सूर्य ...... हाहाहा माँ आपका वो रूप इंसानी रूप से बहुत भीं है उस रूप में जनम से विशेष ऊर्जा होती है ऐसे में कुण्डलिनी चक्र जागृत करने में कोई परेशानी नहीं होती इशू लिया जब किसी इंसान का सामना पारी से हो जो की अपनी सम्पूर्ण कुण्डलिनी चक्र जागृत कर चूका हो तब उसका सामना किसी भी पारी को करने में बहुत परेशानी होती है चलिए मैं आपकी सहायता करता हूँ इसमें

शालिनी जी ....... ठीक है सूर्य

सूर्य आवर शालिनी जी दोनों हे एक दूसरे के सामने ध्यान मुद्रा में बेथ ध्यान लगाने लगते है

डेरी डेरी सूर्य पुर शालिनी जी के सरीर से अद्भुत ऊर्जा निकलने लगती है

जहा कुछ हे पल में सूर्य के 7 चक्र जागृत हो गए वही शालिनी जी के केवल एक पूर्ण चक्र जागृत हुआ था आवर दूसरा चक्र जागृत होने के बहुत निकट था

सूर्य अपनी ऊर्जा को नियंत्रित कर शालिनी जी के मस्तिष्क से जुड़ने की कोशिश करता है तो उसे एक झटका लगता है जैसे कोई अदृश्य सकती सूर्य को शालिनी जी के मस्तिष्क से जुड़ने से रोक रही हो

( सूर्य ........ ये कैसे हो सकता है मेरी ऊर्जा पवित्र ऊर्जा है आवर इतनी आदिक फिर मेरी ऊर्जा माँ के मस्तिष्क में प्रवेश क्यों नहीं कर प् रही है मुझे फिर से एकाग्र चित हो कर प्रयाश करना चाइये )

सूर्य एक बार फिर से अपनी ऊर्जा को पूर्ण नियंत्रण के साथ शालिनी जी के मस्तिष्क में प्रवेश करने की कोशिश करता है किन्तु इस बार शालिनी जी के मस्तिष्क से एक ऊर्जा निकल सूर्य के मस्तिष्क से टकराती है

जिस से सूर्य को तेज जनता लगता है जैसे किसी ने उसपे विद्युत् प्रहार किया हो

सूर्य की फ़ौरन आँखे खुल जाती है आवर वह अविस्वाश से शालिनी जी को देखने लगता है जिनकी आँखे अभी भी बंद हे

थी

आवर उनके सर से अभी भी ऊर्जा निकल कर उनके सर पे चारो तरफ गम रही थी

( सूर्य ........ माँ का मस्तिष्क किसी खाश ऊर्जा सकती से बना सुरक्षा कवच से सुरक्षित है किन्तु किस लिया आवर ये ऊर्जा किसकी है आवर क्यों माँ को इस ऊर्जा सकती से सुरक्षित रखा गया है )

तभी बाकि लड़कियों की आवाज सूर्य के कानो में पादरी है तो वो अपनी सोच से बहार आता है

शालिनी जी भी सूर्य के चेहरे पे बदलते भाव देख प् रही थी

शालिनी जी ......क्या हुआ बीटा सूर्य

सूर्य ....... कुछ नहीं माँ अब हमें चलना चाइये गुरुदेव भी पहुंचने वाले है हवेली पे

( शालिनी जी ...... सूर्य को अच्चानक से क्या हुआ जो ये इस तरह खोया हुआ था जैसे कोई बात इस हे परेशान कर रही हो कही इसने मेरे दिमाग को तो नहीं पढ़ लिया है

... ये बात दिमाग में आते हे शालिनी जी भी थोड़ी चींटी हो गयी थी ....)

किरण ....... माँ हमें अभी कुछ देर में सुक्रलोक जाना होगा तो आज का नास्ता आपके हाथो से हे करुँगी मैं हेहेहे

शालिनी जी ...... ठीक है मेरी बच्ची आज का नास्ता सबके लिया मैं हे त्यार करुँगी पैर अगर दीदी ने पहले हे त्यार कर लिया होगा तो

किरण ....... कोई बात नहीं माँ मेरे हिशे का कुंवर जी कर लेंगे आप मेरे लिया आवर बना लेना हेहेहे

सूर्य ......... मैं इतना भी भूख़ड नहीं हूँ है थोड़ा ज्यादा खता हूँ पैर इतना भी ज्यादा नहीं

कोमल ......... है है सबको पता है कितना कहते हो आप

पायल हलके से कोमल के सर पे चपेट लगते हुए उसे आँखे दिखती है

पायल ....... गलत बात ऐसा नहीं बोलते कोमल आवर खाने को ले कर तो बिलकुल भी नहीं

सूर्य ....... थैंक यू पायल दीदी

सूर्य के मुँह से अपने लिया दीदी सुन कर पायल के तेवर बदलने लगे

पायल ......... ये भूख़ड हे नहीं महाभुकड़ है आवर फिर से दीदी बोलै तो टंगे तोड़ दूंगी बड़ा आया दीदी बोलने वाला

सूर्य ......... सब एक हो कर मासूम को घेर रही है ठीक है घर चलिए आपकी खबर तो बुआ लेगी बड़ी आई मेरी टंगे तोड़ने वाली देखता हूँ आज आपको बुआ से कोण बचता है

पायल ......... सॉरी सॉरी मैं तो मजाक कर रही थी देख अब तो मैं कान पकड़ती हूँ मम्मी से कुछ मत कहना वर्ण वो सच में मेरी पिटाई कर देगी आवर उनके गुस्से के सामने कोई कुछ कहेगा भी नहीं

शालिनी जी ......... सूर्य बहुत मजाक हुआ चल सॉरी बोल पायल को

सूर्य ........ सॉरी पायल मैं भी मजाक कर रहा था आप तो मेरी पारी है

राधा ........ अच्छा ये पारी है तो वो सामने से जो आ रही वो कोण है

सबकी नजर सामने पड़ी तो पारिजात रिद्धि दोनों हवेली से कुछ दुरी पे इनके हे सामने आ रही थी

रिद्धि .पारिजात दोनों शालिनी जी के पेअर छू कर उनसे गले लग कर मुलती है

रिद्धि ....... आपने राधा की बात का जबाब नहीं दिया

सूर्य .....वो वो आप सब हे परियो से काम थोड़ी है आप दोनों यहाँ

पारिजात ........ क्या हम अपने ससुराल नहीं आ सकते विवाह से पहले

शालिनी जी ........ ससुराल बाद में पहले ये घर है जहा मेरी बछिया कभी भी आ सकती है इसके लिया किसी से उनको इजाजत लेने की जरुरत नहीं

( सूर्य ....... आज हर बात उलटी पद रही है चुप रहने में हे भलाई है )

सभी अंदर हवेली में आ चुके थे गुरुदेव महेंद्र दादा जी दादी जी के साथ बेथ कर कुछ बात कर रहे थे

सूर्य आगे भाड़ गुरुदेव को परनाम कर उनके चरण स्परर्श कर आशीर्वाद लेता है

शालिनी जी के साथ साथ बाकि सभी भी गुरुदेव से आशीर्वाद लेती है

पारिजात सूर्य को इशारा कर अंदर चली जाती है जिसने गुरुदेव भी देख लेते है आवर वो मंद हे मंद मुस्कुराने लगते है

गुरुदेव ........ जाओ पुत्र सूर्य जा कर स्वच्छ हो जाओ हम कुछ समय पश्चात निकलना है

सूर्य गर्दन निचे जुखाये हुए .जी गुरुदेव .बोल कर वह से हवेली के भीतर चल दिया

दादा जी ......... गुरुदेव आपने दोनों बचो की कुंडली देख ली होगी अब आप हे कोई उचित सुबह मुहूर्त निकल दीजिये ताकि दोनों बचो की जल्दी हे सदी हो जाये

गुरुदेव ...... हमने कुंडली तो देख ली किन्तु एक समस्या है

दादा जी .....कैसे समस्या गुरुदेव

गुरुदेव ....... हम जानते है आपने पुत्री मेर्री को अपनी पुत्री का मान आवर स्थान दिया आवर इसकी हम सराहना करते है किन्तु आप या आपके परिवार में से कोई भी पुत्री मेर्री का कन्यादान नहीं कर सकते है

महेंद्र जी ....... ऐसा क्यों गुरुदेव

गुरुदेव ........ पुत्र महेंद्र इसके पीछे अवश्य कोई कारन रहा होगा तभी तो हम ऐसा कह रहे है

दादा जी ....... फिर मेर्री बेटी का कन्यादान कोण करेगा गुरुदेव आवर मेरी इच्छा थी की मेर्री बेटी की दम दाम से सदी हो इस हवेली से मेर्री बेटी की डॉली उठे

गुरुदेव .......हमने ये तो नहीं कहा की आपकी इच्छा पूरी नहीं हो सकती हमने केवल कन्यादान की विधि आपके परिवार से नहीं हो सकती इसके लिया मन किया है न की पुत्री मेरी के विवाह को दम दाम से आयोजित करने से मन किया है

दादा जी ...... मैं कुछ समजा नहीं गुरुदेव

गुरुदेव .......पुत्री मेर्री के विवाह को ले कर आपके मन में जो भी इच्छा है आप पूरी कर सकते है बस माता पिता की भूमिका आपके परिवार से कोई नहीं निभा सकता है

महेंद्र ...... फिर मेर्री का कन्यादान आवर जो माता पिता के बाकि रस्मे है वो कॉम करेगा गुरुदेव

गुरुदेव ....... उसकी चिंता आप न करो सवयं वो वयक्ति आपके सामने आ जायेगा उचित समय पे

पुत्र सूर्य के विवाह के कुछ विवश पश्चात हे पुत्री मेर्री के विवाह की सुबह थिति है आप तयारी आराम कर दीजिये

दादा जी ...... जी गुरुदेव

ीदार अंदर जैसे हे सूर्य अपने कक्षा में पहुंचा कोई उसके सीने से आ लिप्त

सूर्य ने भी बड़े हे सनेह पूर्वक उस ख़ूबसूरती की मलिका को आने आगोश में भर लिया

कुछ देर दोनों एक दूसरे को बड़े हे प्यार से एक दूसरे के बहो में महसूस किया आवर अलग हो कर एक दूसरे को देखने लगे

सूर्य ....... मेरी पारी के प्यारे से मासूम से चेहरे पे ये ुदशी के बदल क्यों है

परिधि ....... आप सुक्रलोक जा रहे है

सूर्य ...... हम्म्म तो इस खूबसूरत से चेहरे पे उदासी के काळा बादल इस लिया छाए हुए है

परिधि ........ हमें आपकी बहुत चिंता है हम पहले भी आपको ......

परिधि आगे कुछ बोलती उस से पहले हे सूर्य अपने होंठो से परिधि के होंठ बंद कर चूका था

कुछ देर दोनों एक दूसरे को किस करते है डेरी डेरी परिधि की धड़कन सामान्य हो गए जो सूर्य को लेकर चिंतित होने के कारन कुछ बढ़ी हुई थी अब वो सामान्य हो रही थी

सूर्य ....... चिंता की कोई बात नहीं है परिधि इस लिया अपने मन से सभी चिंता बहार निकल दो

परिधि ........ हमें अभी भी दर है कही आपकी वास्तविकता सबके सामने आ गई तो

सूर्य ...... फिर भी डरने की जरुरत नहीं है पारी एक न एक दिन तो ये होना हे है

कुछ सोच कर सूर्य अपनी आँखे बंद कर परिधि के सर से अपना सर लगा देता है एक ऊर्जा सूर्य के मस्तिष्क से निकल परिधि के सर में जाती है

कुछ देर बाद सूर्य अपना सर हटा लेता है

परिधि .......ठीक है मैं रिद्धि दीदी को यहाँ भेजती हूँ वो भी आपसे मिलने को वयाकुल है एकांत में

सूर्य ....... ठीक है फिर मैं आज रिद्धि के हाथो हे सनान करता हूँ तुम तो मेरे साथ सनान करोगी नहीं

परिधि शरमाते हुए सूर्य को देखती है आवर उसके गाल को चुम कर गेट की आवर भाड़ जाती है फिर गेट पे रुक कर एक बार पीछे पलट कर सूर्य से बोलती है

परिधि ........ हम विवाह के पश्चात आपकी हर इच्छा पूरी करेंगे कुंवर जी फ़िलहाल ये कार्य आप दीदी के साथ कीजिये हेहेहे

पारिजात के जाते हे रिद्धि सूर्य के रूम में पहुँचती है सूर्य अब तक अपनी t-shirts आवर ट्रैकिंग पेन निकल चूका था आवर अंडरवियर के ऊपर टॉवल बंद चूका था

तभी गेट बंद होने की आवाज होती है आवर सूर्य की नहर रिद्धि पारी से जा टकराती है

रिद्धि भी सूर्य को अपने सामने इस हालत में देख वही जड़वत हो गयी

सूर्य ........ क्या हुआ रिद्धि ऐसे क्यों देख रही हो

रिद्धि ....... वो वो आप.... आप इस हल में

सूर्य ...... हाहाहा अरे बाबा आप घबरा क्यों रही है ये मेरा कक्षा है आवर मैं सनान करने जा रहा था इस लिया कपडे निकले थे आवर तभी आप भीतर आ गयी

रिद्धि ..... हम बाद में आपसे मिलते है

सूर्य ...... उसकी कोई जरुरत नहीं रिद्धि आप निश्चित रहो मैं अपनी मर्यादित सीमा जनता हूँ

रूढ़ि को सूर्य की बात सुन कर थोड़ी रेष पहुँचती

रिद्धि ....... आप ऐसा क्यों सोचते है हमारा यव तन मन यता तक की हम अपनी आत्मा भी आपको सौंप चुके है जब सब आपका हे है तो फिर हम आपको मरदातीत सीमा में कैसे बांस सकते है

सूर्य ....... मुझे माफ कर दीजिये रिद्धि मुझे इस्थिति को समझने में भूल हुई मुझे लगा की कही आप ये तो नहीं सोचने लगी की मैं ऐसे स्वस्थ में अपनी मर्यादा पर कर जाऊंगा इस लिया मुझे ऐसा कहना पड़ा की मैं अपनी मर्यादा जनता हूँ

रिद्धि ....... आप माफी न मांगिये आप सनान कर आ जाइये हम आपकी प्रतीक्षा करते है यही

सूर्य ...... जी बिलकुल आप मेरे वस्त्र निकल दीजिये

रिद्धि ........ जी

सूर्य बाथरूम में चला गया नहाने को आवर कुछ देर बाद बहार निकला कमर में टॉवल लपेटे हुए

चोदे सीने पे अभी भी जगह जगह पानी की बुँदे चमक रही थी

रिद्धि ने अलमारी से दूसरा टॉवल निकल कर सूर्य के सर आवर सीने को पोंछा आवर बीएड पे रखे वस्त्र एक एक कर सूर्य की आवर बढ़ा दिए

सूर्य ....... ये तो मेरे वस्त्र नहीं है रिद्धि

रिद्धि ....... वो वो हमने आपके लिया खुद से परीलोक में ये वस्त्र त्यार किये थे आपको पसंद नहीं आये क्या

सूर्य .....ये तो पहन ने के बाद हे बता पाएंगे

सूर्य एक एक कर पूरा सेट पहनता है जो वाकई में बेहद खूबसूरत आवर आरामदायक थे

मिर्रो में खुद को देख कर सूर्य के चेहरे पे भी मुस्कान गहरी हो जाती है क्यों की वो कपडे सूर्य पे बहुत हे खूबसूरत लग रहे थे जैसे कोई देव पुरुष डर्टी पे आ गया हो

सूर्य ....... आप की पसंद बहुत खूबसूरत है रिद्धि ये हमें बेहद पसंद आये सक्रियक आपके इस बेहद खूबसूरत तोहफे के लिया उम्म्म्मः

सूर्य रिद्धि के गाल पे एक छोटा सा किश करता है जिस से रिद्धि का चेहरा आसाराम से किसी तहा खिले गुलाब सा हो जाता है

सूर्य ...... क्या ये तोहफा केवल हमारे लिया हे है

रिद्धि ...... नहीं हमारी सभी बहनो के लिया

सूर्य .....हमारी भने

रिद्धि ...... माफ कीजिये हमारी नहीं मेरी बहनो के लिया

सूर्य ....... हाहाहा वही मैं सोचु

रिद्धि ........ ये परीलोक का खाश इत्र है ये भी आपके लिया

सूर्य ...... जब आपने इतनी म्हणत से हमारे लिया चुना है तो आप हे लगा दीजिये

रिद्धि इत्र की सीसी से गुलाबी पंख निकल कर सूर्य पे वो इत्र उस पंख से छिड़कने लगती है

सूर्य भी मस्ती करते हुए वो पंख रिद्धि से ले कर इत्र में डुबो कर रिद्धि के दोनों वालो पे रगड़ देता है

तभी बहार से दूर पे तक तक करके नोक होती है

अलीना ......... जल्दी निचे आ जाइये नास्ते पे सब इन्तजार कर रहे है

सूर्य .......तुम चलो मैं अभी आता हूँ

सूर्य इत्र की सीसी बंद कर अपनी अलमारी मेर रखता है आवर रिद्धि का हाथ पकड़ उसे अपनी आवर कीचता है रिद्धि भी बिना कुछ कहे सूर्य के सीने से लग जाती है

कुछ पल बाद सूर्य रिद्धि के तुड़ी को अपने हाथ से ऊपर कर रिद्धि की आँखों में देखते हुए रिद्धि के कांपते होंटो को अपने होंठो में भर उनने भरे राश का पान करने लगता है

3 से 4 मिनट्स चले हे माध्यम किस के बाद रिद्धि का हाथ थामे सूर्य अपने रूम से बहार निकल जाता है

रिद्धि अभी भी शर्मा रही थी वही सूर्य का हाथ थामे सीढ़ियों से निचे उतरता देख सभी की नजरे इन दोनों पे हे आ तिकी थी

सूर्य देव लोक के राजकुमार जैसा लग रहा था वही रिद्धि तो पहले से be-intha खूबसूरत थी हे ऊपर से आसाराम से रिद्धि के गालो की गुलाबी रंगत आवर भी खूबसूरत बना रही थी

गुरुदेव भी रिद्धि के गालो की लाली देख समाज गए की रिद्धि उनकी बेटी कितनी खुश है ऐसे उनके जीवन में बहुत काम अवसर आये थे जब वो रिद्धि को ऐसे खुश देखा हो हमेशा सांत आवर समय रहने वाली रिद्धि आज किसी नववधू के जैसे शर्मा रही थी

रेखा जी आगे बढ़ अपनी आँखे से काजल निकल सूर्य के कान के पीछे टिका करती है

ऐसा हे कुछ शालिनी जी ने रिद्धि के साथ किया

रिद्धि ......माँ वो

शालिनी जी ...... आज मेरी बच्ची बहुत पायरी लग रही है क्यों माँ सा

दादी जी ....... बिलकुल सही कहा शालू बेटी तुमने ाक रिद्धि बेटी बहुत प्यारी लग रही किसी को नजर न लगे मेरी बच्ची की काजल का टिका कर के अच्छा किया तुमने बेटी

तभी सीढ़ियों से किरण कोमल मानसी भी एक जैसे गैस्ट्रो में निचे उतरती है

मेनका जी ....... क्या बात है आज कोई ब्यूटी कॉम्पिटिओं है क्या जो साडी परिया हवेली में उतर आई है

कुछ देर बाद सभी नास्ता कर लेते है गुरुदेव सूर्य किरण मानसी के साथ सभी से मिल कर आज्ञा लेते है आवर वह से गायब हो व्योमासुर जी के पास पहुंचते

गुरुदेव सूर्य किरण मानसी को देख व्योमासुर जी बहुत खुश होते है

व्योमासुर जी ....... आप सभी का स्वागत है

आइये आवर आसान ग्रहण कीजिये

व्योमासुर जी चारो को अपनी कुटिया ले आते है आवर जमीं पे नीची चटाई पे उन्हें बेथुने को कहते है

सूर्य आगे बढ़ व्योमासुर के पेअर छूटा है मानसी आवर किरण भी सूर्य के साथ व्योमासुर जी के पेअर स्पर्श करती है

व्योमासुर .....सदा सौभाग्यवती भाव पुत्री आयुष्मान भाव पुत्र

किरण ...... आप कैसे है बाबा आप पार्थिव लोक पे होने के बाद भी हमसे मिलने नहीं आये कभी भी

मानसी ....... है बाबा दीदी उचित कह रही है अब तो आप हमसे मिलने आ सकते थे न

किरण मानसी की बात सुन व्योमासुर गुरुदेव की आवर देखने लगे

गुरुदेव ...... पुत्र सूर्य तुम हे जबाब दो इनके परशान का

सूर्य ......जी गुरुदेव .बाबा दर्शक इस लिया नहीं आये ताकि इनके जरिये कोई हम तक न पहुंच जाये ये हमारी वास्तविकता आवर सुरक्षा को ले कर चिंतित है इस लिया हे छह कर भी हमसे मिलने नहीं आये इच्छा तो इनकी भी बहुत है

व्योमासुर जी ...... है पुत्री यही सत्य है मैं नहीं चाहता की तुम लोगो की वास्तविकता सबके समक्ष आये या तुम लोगो पे मेरी वजह से कोई खतरा आये इस लिया मैं पृथ्वीलोक पे होने के बाद भी तुम लोगो से दूर था

तभो एक शिष्या कुटिया के द्वार पे से भीतर आने की आज्ञा मांगता है

व्योमासुर जी ....... अंदर आ जाओ पुत्र

शिष्य अंदर आता है आवर व्योमासुर के सामने कुछ मीठी के गिलाश करता है जिनमे कुछ हरा हरा तरल भरा हुआ था

व्योमासुर जी वो गिलाश सूर्य मानसी किरण आवर गुरुदेव की आवर बढ़ाते है

गुरुदेव .......व्योमासुर जी मुझे इसकी आव्सय्कता नहीं है मैं सुक्रलोक की यात्रा पे नहीं हूँ पुत्र सूर्य पेय को ग्रहण करो

सूर्य किरण मानसी बिना किसी हिचक के अपने अपने गिलाश खली कर देते है

गुरुदेव व्योमासुर जी से वो गिलाश ले कर किरण को सौंप देते है किरण की इच्छा नहीं थी फिर भी वो ले कर उस तरल को पि लेती है

क्युकी उस तरल का स्वाद बकबका आवर कुछ कड़वा था

व्योमासुर जी ......पुत्र सूर्य इस पेय से आप सब को सुक्रलोक के वातावरण का कोई प्रभाव तुम पे नहीं होगा हर लोक का वातावरण अलग अलग होता जिसका असर किसी न किसी रूप में सरीर पे होता है फिर चाहे वो अच्छा या बुरा इस लिए ये आवशयक था

सूर्य ....... जी बाबा हम समाज गए

गुरुदेव ...... पुत्र सूर्य पुत्री किरण मानसी अपने अपने ड्रैगन को अपने भीतर सम्माहित कर लो सुक्रलोक जाने का समय हो चूका है

सूर्य ......पैर गुरुदेव नागलोक जिनलोक की सुरक्षा

गुरुदेव ...... वो हमने पहले हे रानी पारी आवर प्रेतराज को सौंप दी है तुम चिंतित न हो

आवर है पुत्र अपने अंश दण्डनायक्ष निर्भयासुर को भी अपनी भीतर सम्माहित कर लो

व्योमासुर जी ........ क्या कहा आपने दंडनायक निर्भयासुर

व्योमासुर जी की आवाज में गब्रहत आवर अनचाहा दर था जिसने सुन गुरुदेव के चेहरे पे एक मंद मुस्कान फ़ैल गई

गुरुदेव ....... पुत्री मानसी आवर पुत्र सूर्य के मिलान से परैत सवरूप है दंडनायक निर्भयासुर क्यों की आपकी पुत्री मूल अंश से असुर है आवर पुत्र सूर्य दिव्या पुरुष जिसका मूल अंश मानव है दोनों की ऊर्जा से बना है दंड नायक निर्भयासुर जिसके दंड विद्वान से कोई नहीं बच सकता

( व्योमासुर जी ........ कही ये निर्भयासुर असुरगुरु शुक्राचार्य ने बताया वही तो नहीं पैर ये नाम सुन कर मुझे भय क्यों लग रहा है जैसे कोई मेरे भीतर तक मेरी आत्मा तक को देख रहा है )

कुछ हे पल में तीन ऊर्जा पुंज ( ब्लैक वाइट गोल्ड ) सूर्य किरण मानसी में समाहित हो गए आवर अगले हे पल निर्भयासुर भी बिना किसी के दृस्टि में आये सूर्य के प्रवेश कर जाता है

गुरुदेव ...... अब हमें लौटना होगा आप सब भी सुक्रलोक की यात्रा आरभ करे

गुरुदेव के वह से अंतर्ध्यान होते हे व्योमासुर जी ने अपनी सक्तियो से एक द्वार का निर्माण किया जो बेहद डरावना था जिसपे अनेको असुर आकृति थी साथ विचित्र भटक जीवो की आकृतिया भी बानी हुई थी व्योमासुर जी तीनो को अपने साथ लिया उस द्वार में प्रवेश कर गया उनके भीतर प्रवेश करते हे वो द्वार गायब हो गया जैसे ऐसे कुछ वह पहले कुछ था हे नहीं सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो चूका था ......................

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अपडेट 258

कुछ हे पल में तीन ऊर्जा पुंज ( ब्लैक वाइट गोल्ड ) सूर्य किरण मानसी में समाहित हो गए आवर अगले हे पल निर्भयासुर भी बिना किसी के दृस्टि में आये सूर्य के प्रवेश कर जाता है

गुरुदेव ...... अब हमें लौटना होगा आप सब भी सुक्रलोक की यात्रा आरभ करे

गुरुदेव के वह से अंतर्ध्यान होते हे व्योमासुर जी ने अपनी सक्तियो से एक द्वार का निर्माण किया जो बेहद डरावना था जिसपे अनेको असुर आकृति थी साथ विचित्र भटक जीवो की आकृतिया भी बानी हुई थी व्योमासुर जी तीनो को अपने साथ लिया उस द्वार में प्रवेश कर गया उनके भीतर प्रवेश करते हे वो द्वार गायब हो गया जैसे ऐसे कुछ वह पहले कुछ था हे नहीं सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो चूका था ................

अब आगे ...........

सुक्रलोक ....... सुक्रलोक में आज सूर्यौदय से पहले हे असुरगुरु शुक्र के आश्रम को पुष्पों से सुसज्जित किया जाना आरम्भ हो चूका था

चारो तरफ आश्रम में आज चहल पहल कुछ ज्यादा हे हो रही थी असुरगुरु शुक्र खुद आसाराम के मध्य में बने यज्ञ स्थल पे किसी विशिष्ट पूजा की तयारी अपनी देख रेखाओं में सुचारु रूप से करवा रहे थे वो काफी उत्साहित नजर आ रहे थे

गुरुसुकृ वही िस्थित मुख्या सेविका को कुछ निर्देश देते है

सेविका उनकी बात बड़े हे ध्यान से सुन कर उन्हें हाथ जोड़ कर आश्रम के पास से बहती नाड़ी की आवर एक टोकरी ले कर चल देती कुछ देर बाद जब वो वापिस लूटी तो सेविका के हाथ में जो टोकरी थी वो रंग बिरंगे कमल पुष्पों से भरी हुई थी

सेविका ...... गुरुदेव आपकी इच्छा अनुसार आव्सय्कता अनुसार पुष्प आपके समक्ष है

गुरुसुकृ ...... उत्तम पुत्री तुमने उचित मात्रा में उत्तम कमल पुष्प एकत्रित कर लिया इनके हमारे विश्राम कक्षा में सुरक्षित रख दो किन्तु ज्ञात रहे पुत्री इन्हें किसी प्रकार की हानि न हो ये विशेष कार्य के लिया है

सेविका ......जी गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा

सेविका उन पुष्पों को ले कर गुरुसुकृ के विश्राम कक्षा की आवर भाड़ जाती है

तभी अचानक से सुक्रलोक के मौसम में बदलाव होने लगता है जैसे किसी भयानक तूफ़ान के आने के पूर्व की आहात हो

गुरुसुकृ ......... ये अचानक से हमारे लोक में प्रकर्ति का कैसा तांडव आरम्भ हो गया ऐसा आज से पूर्व तो कभी नहीं हुआ

ऐसा तो तभी संभव है जब कोई हमारी इच्छा के विरुद्ध सुक्रलोक के सीमे में प्रवेश करने की कोशिश करे

उदार सुक्रलोक के बहार अंतरिक्ष में बहुत तेज रोशिनी होने लगती जो डेरी डेरी किसी द्वार का रूप लेने लगती है

कुछ पल की प्रतीक्षा के बाद वो रौशनी गायब हो जाती है आवर उसके स्थान पे 4 आकृतिया नजर आने लगती है

ये कोई आवर नहीं व्योमासुर जी सूर्य किरण मानसी थे

व्योमासुर जी ....... पुत्र सूर्य यही सुक्रलोक की अंतिम सीमा है एक कदम पे सुक्रलोक की सिम्स में हम सब प्रवेश कर जायेंगे

सूर्य ...... जी बाबा हम भी देख प् रहे है हमने जैसा सुक्रलोक के विषय में सोचा था ये उस से खूबसूरत प्रतीत हो रहा है

व्योमासुर जी ....... हाहाहा पुत्र किसी के बहरी आवरण को देख कर किसी के विषय में सोच बनाना उचित नहीं पुत्र

आवशयक नहीं जैसे बहार से हो वैसे हे वो अंदर से हो गुरुदेव शुक्राचार्य को प्रकर्ति से बहुत प्रेम है खाश कर जड़ी बूटियों से इस लिया ये खूबसूरती के मामले में पृथ्वीलोक से ज्यादा भीं नहीं है कुछ तथ्यों को चढ़ कर अब हमें आगे भढना चाइये पुत्र

सूर्य ..... जी बाबा पैर उस से पहले कुछ जरुरी कार्य पूरा कर लेता हूँ

सूर्य वही ध्यान मुद्रा में बेथ कुछ मंत्रो का उच्चारण करता है

देखते हे देखते सूर्य की 7 इंद्रीशा जागृत हो जाती है आवर सूर्य के सरीर से 7 रंग बिरंगी रौशनी निकलती है आवर एक स्थान पे एकत्रित होने लगती है

व्योमासुर जी आवर मानसी को तो कुछ समाज नहीं आया पैर किरण सूर्य के सामने एकत्रित होती ऊर्जा सकती को देख मुस्कुराने से खुद को रोक नहीं पति मन हे मन कुछ सोचने लगती है

सूर्य अपने आँखे खोल ध्यान से बहार निकलता है आवर अपने सामने स्थित सतरंगी ऊर्जा पुंज को सुक्रलोक की आवर दिशा देता है

कुछ हे पालो में वो सतरंगी ऊर्जा जैसे गायब हो जाती है

सूर्य मानसी की आवर देख उसके सर पे हाथ रख देता है एक अदृश्र्या पारदर्शी ऊर्जा मानसी को पूरी तरह से कवर कर लेती है

सूर्य किरण को देखता है तो किरण अपनी पलके किसी रहश्यमयी मुस्कान के साथ जपका देती है

किरण .......... कुनवाज जी अब हमें आगे भढना चाइये

व्योमासुर जी कुछ पूछना चाहते थे पैर किरण की आगे भढने की बात सुन अपनी बात अपने मन में हे दबा लेते है

व्योमासुर जी ....... है पुत्री हमें अब आगे भढना चाइये गुरु शुक्राचार्य हमारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे

सूर्य ........ जी बाबा अब हमें उन्हें पुर प्रतीक्षा नहीं करवानी चाइये उन्हें इसी के साथ मानसी आवर सूर्य का वाइट आवर ब्लैक ड्रैगन ऊर्जा रूप में सूर्य आवर मानसी से बहार निकलते है

व्योमासुर जी ........ क्या हम आगे का सफर इन पे तय करेंगे

सूर्य ......... जी बाबा सुक्रलोक की भव्यता आवर प्रकर्ति को करीब से देखने का इनसे बेहतर क्या हो सकता है

व्योमासुर जी ........ पैर से तुम सभी की वास्तविकता सभी के समक्ष आ सकती है पुत्र

सूर्य ....... आप चिंता न क्रिया बाबा आप मानसी के साथ उसके ड्रैगन पे सवार हो जाइये बाकि सब मैं देख लूंगा

सूर्य किरण को लिए अपने ड्रैगन पे सवार हो जाता है

व्योमासुर जी आवर मानसी भी अपने ड्रैगन पे सवार हो सुक्रलोक में प्रवेश कर जाते है

सूर्य आवर मानसी वह तक स्पष्ट आवर साफ साफ देखने में समक्ष थे जहा तक उनके ड्रैगन्स की दृस्टि पहुंचने रही थे छोटी से छोटी वास्तु पेड़ पौधे उनकी दृष्टि से बच नहीं प् रहे थे

वही गुरु शुक्र को भी इनके आगमन का के विषय में ज्ञात हो चूका था इनकी दिव्या ऊर्जा सकती से

( यहाँ जो असुरगुरु सनद का प्रयोग होगा वो असुरगुरु शुक्राचार्य के लिया होगा न की व्योमासुर जी के लिया )

असुरगुरु को जिनकी प्रतीक्षा थी वो सभी सुक्रलोक पहुंचने चुके थे उनके चेहरे पे मुस्कान थी पैर साथ हे साथ कुछ चिंता की उभरी हुई रेखा भी उनके तेजमयी मुख मंडल पे उभर आयी थे क्यों की सब उनकी आसा के विपरीत जो हो रहा था उन्हें केवल 3 वयक्तियो का आने का अंदेशा था किन्तु यहाँ व्योमासुर जी के अलावा 3 ऊर्जा सकती का आभाष उनकी चिंता को बढ़ा रही थी

( असुरगुरु ....... हमें अंदेशा था की व्योमासुर के साथ उसकी पुत्री आवर जमता हे होंगे किन्तु ये तीसरी दिव्या विनाशकारी परचंड ऊर्जा किसकी है जो इनके साथ हमारे आश्रम की आवर भाड़ रही है )

अभी असुरगुरु अपने विचारों में खोये हुए थे की उनका प्रमुख शिष्य उन्हें वास्तविकता का ज्ञान करवा उन्हें वास्तविकता में लता है

p.shishya ........ गुरुदेव ..गुरुदेव

असुरगुरु ...... है पुत्र सभी तयारी पूर्ण हो गयी

P.shishya ........ जी गुरुदेव सभी तयारी पूर्ण हो गई जैसा आपका आदेश था

तभी एक भयानक आवाज पुरे सुक्रलोक में गूंज उठी ुशी के साथ असुरगुरु शुक्र आवर उनके शिष्यों की दृष्टि दूर आकाश में पड़ती है जहा विशालकाय ड्रैगन्स नजर आते है जो बड़ी हे तेज़ी से शुक्राचार्य के आश्रम की आवर भाड़ रहे थे

p.shishya ........ गुरुदेव ये जिव तो हमारे हे आश्रम की आवर भाड़ रहे बहुत हे तेज़ी से

असुरगुरु ........ भयभीत होने की आव्सय्कता नहीं पुत्र जिनकी हम प्रतीक्षा इतने समय से कर रहे ये वही है

ये सब तयारी उनके हे आगमन में हमने की है पुत्र उनके साथ किसी भी तरह की अभदरता नहीं होने चाइये

प. शिष्य ...... जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

( p.shishya ...... ऐसा कोण लोग है ये जिनके लिया गुरुदेव ने ये सब तयारी की स्वयं अपनी देख रेख में आवर उनकी प्रतीक्षा इस तरह से ादिर हो कर कर रहे है जैसे कोई बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति विशेष है आज मैंने गुरुदेव को इतनी अदिर्ता से किसी की प्रतीक्षा करते हुए आज से पहले तो कभी नहीं देखा था )

कुछ हे देर में दोनों ड्रैगन पे बे थे हुए लोग भी नजर आने लगते है

पैर असुरगुरु की नजरे तो वाइट ड्रैगन पे बैठे सूर्य आवर किरण से अलग हे नहीं हो रही थे

कुछ पल बाद आश्रम की हलकी लाल भूमि पे सूर्य आवर मानसी के ड्रैगन्स उतारते है

सूर्य किरण का हाथ पकड़ आराम से ड्रैगन्स से निचे उतर आता है व्योमासुर आवर मानसी भी निचे उतर जाते है

सूर्य के इसारे से दोनों ड्रैगन एक बार अपनी गर्दन जुखा कर फिर से आकाश की आवर छलांग लगा देते है

व्योमासुर जी तीनो के लिया आश्रम के मुख्य द्वार पे आ खड़े होते है

तभी असुरगुरु शुक्र अपने शिष्य आवर सेविकाओं के साथ द्वार पे आ पहुंचते है

व्योमासुर जी ........ पुत्र सूर्य ये है असुरो के शिरोमणि प्रथम असुरगुरु शुक्राचार्य प्रभु परम भक्त आवर उनके अनुयायी शिष्य

सूर्य आगे भाड़ असुरगुरु शुक्र के चरण स्पर्श करता है

पैर असुरगुरु अपने कदम पीछे कीच लेते है

इस्पे सूर्य ने कोई आपत्ति नहीं की बस हलकी सी मुस्कान एक पल को उभरी आवर फिर गायब हो गयी

जैसे सूर्य पहले से हे कुछ कुछ इस इस्थिति का अंदाजा लगा चूका था

सूर्य .......... महर्षि असुरगुरु शुक्राचार्य को मेरा सात सात नमन .परनाम गुरुदेव

असुरगुरु ......... आयुष्मान भाव पुत्र सुक्रलोक में तुम्हारा स्वागत है पुत्र

सूर्य ......... धन्यवाद् गुरुदेव ये मेरी पार्टम अर्धांगिनी किरण है आवर ये द्वितीय अर्धांगिनी मंशी है गुरुदेव

किरण मानसी अपने हाथ जोड़ असुरगुरु को परनाम करती है

असुरगुरु ....... सौभाग्यवती भाव पुत्रियों आप सभी का सुक्रलोक में स्वागत है

असुरगुरु के इसारे पे एक साध्वी के जैसे वस्त्र दर्जन किये युवती एक थल ले कर उनके समक्ष आती है

सबसे पहले सूर्य को तिलक करती है फिर किरण आवर मानसी को

सूर्य किरण मानसी तीनो हाथ जोड़ उनका धन्यवाद करते है

असुरगुरु ......... पुत्र ये मेरी पुत्री देवयानी है

सूर्य ....... परनाम देवी देवयानी आपसे भेंट कर हमें ख़ुशी हुई

देवयानी ........ हमें भी आप सभी से भेंट कर पर्शान्ता हुई आप सभी का स्वागत है आश्रम में

असुरगुरु के इसारे पे चारो असुरगुरु के पीछे पीछे उन्कीओंके आश्रम में बानी कुटिया में प्रवेश करते है जहा जमीं पे कुछ आसान लगे हुए थे दोनों तरफ आवर बिच में एक आवर आसान था जो इन सब से विशेष था

असुरगुरु के साथ सूर्य किरण मानसी देवयानी व्योमासुर के अलावा कोई भीतर नहीं आया था p.shishya वही कुटिया के मुख्या द्वार पे खड़ा था ताकि इन्हें इनकी चर्चा में कोई भीगहन न पहुंचा पाए

असुरगुरु शुक्र का इशारा बिच में लगे आसान की आवर था जो सायद उन्होंने विशेष सूर्य के लिया हे रखा था पैर सूर्य वह न बेथ कर साइड में लगे आसान पे बेथ गया जो क़तर में दोनों तरह 3 ,3 के करम में लगे हुए थे

सूर्य 3 की क़तर में बने बिच के आसान पे बैठा तो ागल बगल में किरण आवर मानसी दोनों सूर्य के बराबर बेथ गयी

दूसरी तरफ देवयानी आवर वयोमसु जी

असुरगुरु ....... पुत्र ये विशेष आसान तुम्हारे लिया हे था

सूर्य एक बार व्योमासुर जी को देखता है जो हलके हलके मुस्कुरा रहे थे

सूर्य ....... हम क्षमा चाहते है गुरुदेव गुरु का स्थान इस्वर से भी पैर होता है इस विशेष स्थान को ग्रहण करने की कसमता अगर यहाँ किसी में है तो वो है केवल आप गुरुदेव

आपके समक्ष इस आसान को ग्रहण करना यथार्थ आपको अपमानित करना होगा ऐसा पाप मैं स्वपन में भी नहीं कर सकता मेहमान को भी मेजबान का सम्मान करना चाइये गुरुदेव फिर ऐसे अभद्रता का कोई प्रायश्चित नहीं गुरुदेव इस लिया आपसे निवेदन है की इस आसान को ग्रहण कर इसका मन बढ़ाये

असुरगुरु ........... उचित है पुत्र अवश्य तुम्हारे गुरु ने तुम्हे उत्तम शिक्षा दी है

सूर्य ........ उचित कहा गुरुदेव आपने किन्तु आज आपकी सरन में है गुरुदेव जिन्हे स्वयं प्रभु से दिव्या ज्ञान की प्राप्ति हुई है

इस बिच देवयानी की दृस्टि सूर्य पे जमी हुई थी असुरगुरु आवर व्योमासुर जी भी इस बात से भली भाटी परिचित थे

असुरगुरु ......पुत्री देवयानी हम देख रहे है आप पुत्र सूर्य को किसी विशेष दृस्टि से देख रही है

देवयानी ......क्षमा करे पिता श्री किन्तु हम कुछ जानना चाहते है किन्तु हमें समाज नहीं आ रहा की आरम्भ कैसे करे

असुरगुरु. ........ हाहाहा पुत्री देवयानी हम आपके मन की िस्थित को समाज रहे है पहली बार जब हमें ज्ञात हुआ तब हम में तुम्हारी तरह उलझ गए थे

देवयानी .....अथार्त पिता श्री

गुरुदेव ........ पुत्री तुम पुत्र सूर्य आवर पुत्री मानसी के सम्बन्ध के विषय में जानना चाहती हो न

देवयानी है में अपना सर हिला देती है

असुरगुरु ....... जब हमें ज्ञात हुआ की पुत्र व्योमासुर ने अपनी पुत्री मानसी का विवाह किसी मनुष्य से किया तो हम भी उलझन में थे पुत्री किन्तु जब हमें पुत्र सूर्य की वास्तविकता का ज्ञान हुआ तो हमारा मन संत हुआ पुत्र सूर्य हम जानते है तुमने अपनी दिव्या ऊर्जा को बांड रखा है ताकि कोई तुम्हारी वास्तविकता न जान पाए

सूर्य ....... आपसे क्या छुपा है गुरुदेव फिर तो आप ये भी अवश्य जानते है की इसके पीछे अवश्य कोई कारन होगा

असुरगुरु ........ है पुत्र हम ये भी जानते है आवर निश्चित रहो पुत्र तुम्हारी वास्तविकता हम तक हे रहेंगे

किरण जो काफी देर से चुप चाप सब सुन रही थी उसने सूर्य को देखा आवर कुछ इसरा किया

सूर्य ने भी है में सर हिला दिया

किरण ...... बिच में बोलने के लिया क्षमा चाहती हूँ गुरुदेव

किन्तु ऐसा करना आवशयक था भले हे आपने आश्वासन दिया है किन्तु एक सत्य ये भी है की एक वक़्त बाद आपके हे शिष्य आपके आज्ञा या आपके आदेश की अवहेलना करने लगते है ऐसे में कुंवर जी को ऐसा मार्ग अपनाना पड़ा वो यहाँ भी नहीं आते किन्तु आपने आमंत्रित किया था आवर कुंवर जी किसी भी गुरु या ऋषि के निवेदन को अस्वीकार कर उनका निराधार नहीं करना चाहते है

असुरगुरु ........ उचित कहा पुत्री आपने हमारे सबसे बड़ी बिडम्बना तो यही है की हमारे शिष्य अपने सकती के माध में चूर हो कर हमारी हे आज्ञा की अवहेलना कर देते है जिसके चलते हमें हे गुरु होने के चलते सरमसर होना पड़ता है

किन्तु गुरु के दायित्व से विमुख भी नहीं हो सकते है

इसी के साथ हे असुरगुरु अपने हाथ में एक ऊर्जा पर्वत करते है जो डेरी डेरी पूरी कुटिया में फ़ैल जाती है व्योमासुर जी आवर मानसी थोड़ा चिंतित हो जाते पैर जल्दी हे सब सामान्य देख कर संत हो जाते है

असुरगुरु ....... पुत्र सूर्य अब तुम स्वयं को बंदन मुख्त कर सकते हो

सूर्य ......जी गुरुदेव जैसे आपकी इच्छा

इसी के साथ सूर्य अपनी ऊर्जा के बंदन खोल देता है

सूर्य की ऊर्जा सकती की प्रचंडता देख असुरगुरु शुक्र के माथे पे चिंता की लकीर उभरने लगती है वही देवयानी जैसे सदमे में पहुंचने गयी हो

असुरगुरु ......इतनी ... इतनी विनाशकारी परचंड ऊर्जा

सूर्य ....... यही कारन था गुरुदेव की मुझे स्वयं की ऊर्जा को बंदन में रखना पड़ा

ीदार जैसे हे किरण ने अपनी ऊर्जा को मुक्त किया असुरगुरु शुक्र अपने आसान से खड़े हो गए

सुक्रलोक में हलकी हलकी कम्पन की िस्थित उत्पन्न होने

सूर्य असुरगुरु को खड़ा देख खड़ा होने लगा तो ासरगुरु ने उन्हें रोक दिया

असुरगुरु ....... पुत्र सूर्य क्या तुम सिंह लगन रोहिणी नक्षत्र में जन्मे हो

सूर्य ......जी गुरुदेव

गुरुदेव .......... क्या क्या हम पुत्री मानसी संग मिलान में प्राप्त आसुरी अंश को देख सकते है

तभी सूर्य को अपने भीतर निर्भयासुर की क्रोध भरी आवाज सुनाई दी

( निर्भयासुर ........ इनके निवेदन को अस विकार कर दो मैं इनके समक्ष नहीं आना चाहता

सूर्य ....... ये तुम कैसे बात कर रहे हो निर्भयासुर भूलो मत वो असुरगुरु होने के साथ साथ एक ऋषि भी है क्या तुम अपने क्रोध में ये भी भूल गए

निर्भयासुर ....... मुझे माफ करना भाई पैर इन्हें देख मैं अपने क्रोध पे से नियंत्रण खो रहा हूँ

सूर्य ......... संत हो जाओ निर्भयासुर क्रोध से जो बिट चूका है वो बदला नहीं जा सकता है तुम्हारे दोषी असुरगुरु उतने नहीं जितना की नरकासुर है आवर तुम खुद हो

निर्भयासुर ......... पैर इन्हें उसे दण्डित.

सूर्य ...... इस बारे जो भी है बाद में बात होगी )

असुरगुरु ........ क्या हुआ पुत्र

सूर्य ......कुछ नहीं गुरुदेव पता नहीं क्यों पैर वो आपसे थोड़ा क्रेडिट है

असुरगुरु ........ हमसे क्रोधित किन्तु क्यों पुत्र जबकि हम तो उसे जानते तक नहीं

सूर्य अपनी आँखे बंद करता है कुछ हे देर में सूर्य से ऊर्जा निकल कर वही आकर्ति रूप दर्जन करने लगती है

जैसे जैसे आकर्ति बन रही थी वैसे वैसे असुरगुरु शुक्र की आँखे नाम हो रहे थी

जैसे पूरी आकर्ति बानी असुरगुरु धड़ाम कर निचे आने आसान पे आ गेरे

देवयानी जल्दी से उठा कर अपने पिता को संभालती है

असुरगुरु की आँख से निरंतर आंसू बाहर रहे थे उनके होंठ कपकपा रहे थे

सूर्य आवर किरण के अलावा कोई भी असुरगुरु की इस्थिति नहीं समाज प् रहे थे की आखिर इन्हें क्या हुआ है

असुरगुरु ..... ..... पु पुत्र निररररभया पुत्र निर्भयासुर

निर्भयासुर पीछे पलट कर असुरगुरु की आवर देखता है जिसकी आँखों में भी आंसू थे पैर आंको में साथ हे जैसे जवाला दादाक रही थी

निर्भयासुर .......... निर्भयासुर नहीं असुरगुरु दंडनायक निर्भयासुर हूँ मैं

निर्भयासुर की क्रोध भरी आवाज सभी के सरीर में भय भर रही थी केवल किरण आवर सूर्य हे सामान्य थे मानसी ने सूर्य का हाथ हे थम लिया था ऐसा रूप उसने भी आज हे देखा था पहली बार

असुरगुरु ......... पुत्र निर्भयासुर

निर्भयासुर ......... मैं आपको क्षमा नहीं करूँगा गुरुदेव ....

परीलोक ..........

गुरुदेव सूर्य किरण मानसी व्योमासुर से विदा ले सीधा परीलोक पहुंचे पारिजात आवर रिद्धि आज सूर्यगढ़ हे रुकने का फैसला करती है

वैसे भी रिद्धि जब तक सूर्य नहीं आता यही रुकने वाली थी

गुरुदेव सीधा परिमहल पहुंचने जहा रानी पारी उन्हें का इन्तजार कर रही थी j.king पुर प्रेतराज के साथ

प्रेतराज j.king रानी पारी गुरुदेव को परनाम करती है

गुरुदेव ......... प्रेतराज नागलोक की सुरक्षा कहा तक पूर्ण हुई है

प्रेतराज .......गुरुदेव पुरे नागलोक को सुरक्षित कर दिया गया है खाश कर नःलोक वासुकि वंश महल आवर तक्षक वंश महल को

गुरुदेव ........ आवर जिनलोक की सुरक्षा कहा तक पूर्ण हुई

j.king हाथ कोसते हुए गुरुदेव से कहते है

j.king ....... गुरुदेव जिनलोक पूर्ण रूप से सुरक्षित है परीलोक के सेना आवर जिनलोक के सेना ने पुरे जिनलोक को अदृश्र्या सुरक्षा घेरे में रखा है

गुरुदेव ........ उचित है j.king रानी पारी पुत्री रिद्धि के पास कुछ योद्धा परियो को भेज दीजिये आव्सय्कता तो नहीं है फिर भी परिस्थिति पे पूर्ण नियंत्रण हो तो चूक होने की संभव नए काम हो जाती है

रानी पारी ....... जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश j.king पुत्री जिनिशा को परीलोक भेज दीजिये उसे भी अच्छा लगेगा यहाँ

j.king ....... जी रानी पारी गुरुदेव कोई आवर आज्ञा

गुरुदेव ........ नहीं राजन अब हम मंदिर जा रहे है परबु चरणों में ध्यान में पीने होने परिशतियो के विपरीत कुछ भी घटना घटती है तो आप तीनो मिल कर सामना कर सकते है हमारे ध्यान में विज्ञानं न आने पाए

तीनो हे है में सर हिला कर गुरुदेव को परनाम करते है

गुरुदेव भी पारी महल से निकल सीधा मंदिर पहुंचते है आवर प्रभु चरणों में ध्यान आसान लगा कर ध्यान करने लगते है

कुछ हे देर बाद गुरुदेव गहन ध्यान मुद्रा में पहुंचने चुके थे तभी प्रभु प्रतिमा से एक तेज रौशनी निकल कर सीधा गुरुदेव के मस्तिष्क से तक रति है

गुरुदेव ध्यान मुद्रा में अवश्य परीलोक में थे किन्तु वास्तविकता में वह उनका सरीर हे था

उनकी आत्मा तो किसी अन्य स्थान अन्य लोक को यात्रा पे निकल चुकी थी ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........................

अपडेट पोस्ट कर दिया है दोस्तों बारिश के चलते लाइट की प्रॉब्लम हो रही है तो फ़िलहाल फ़ोन भी चार्ज नहीं है ऐसे में इस से ज्यादा लिखा तो सायद पोस्ट भी नहीं कर पाउँगा उस से पहले हे फ़ोन ऑफ हो जायेगा ......
 
अपडेट 259

गुरुदेव भी पारी महल से निकल सीधा मंदिर पहुंचते है आवर प्रभु चरणों में ध्यान आसान लगा कर ध्यान करने लगते है

कुछ हे देर बाद गुरुदेव गहन ध्यान मुद्रा में पहुंचने चुके थे तभी प्रभु प्रतिमा से एक तेज रौशनी निकल कर सीधा गुरुदेव के मस्तिष्क से तक रति है

गुरुदेव ध्यान मुद्रा में अवश्य परीलोक में थे किन्तु वास्तविकता में वह उनका सरीर हे था

उनकी आत्मा तो किसी अन्य स्थान अन्य लोक को यात्रा पे निकल चुकी थी .............

अब आगे ...........

सूर्यगढ़ ....... सूर्य किरण मानसी के जाने के बाद भी लड़किया अभी भी सूर्यगढ़ में हे रुकी हुई थी

वो लोग अभी वापिस दिल्ली नहीं गए थे इसलिए अभी भी एक रूम में उनका गॉसिप चल हे रहा था

कोमल राधा अलीना पायल प्रीती सोफिया के साथ साथ पारिजात भी यहाँ मौजूद थी जूलिया इन सब से अलग शालिनी जी आवर रेखा के साथ शालिनी जी के रूम शालिनी जी के गॉड में लेती इन दोनों की बाते सुन रही थी

बिच बिच में अपना सवाल जबाब भी कर रही थी

रेखा जी ........ जुली बेटी तुम कब अपने लोक जा रही हो

जुली ...... बड़ी मम्मी मेरा वह जाने का बिलकुल भी मन नहीं है प्लेसेस मुझे वह नहीं जाना

जुली की बात सुन के शालिनी जी के चेहरे पे बहुत हे प्यारी मुस्कान उभर आई आवर रेखा जी भी जोर जोर से हसने लगी

रेखा जी .......... जिसके लिया यहाँ रुक रही हो वो भी तो वह साथ होंगे

जुली ........ बड़ी मम्मी मुझे पता है पैर मुझे आप सब के पास रहना है बड़ी मम्मी .मम्मी ( शालिनी ) आप भी चलिए न हमारे साथ में

रेखा जी ....... बेटी मेरा जाना तो मुश्किल है पैर अपनी मम्मी शालिनी को तुम लोग लेके जाओ न साथ में

शालिनी जी ...... नहीं दीदी मैं भी नहीं जा सकती आपको तो पता हे है घर में दो दो सादिया है मन की सूर्य की परीलोक में होगी तो सब तयारिया वह की रानी पारी जी देख लेंगी पैर यहाँ की सब तयारिया तो हमें हे करनी होगी न दीदी

जुली ........ क्या मैं उनकी सदी में नहीं रहूंगी मम्मी

रेखा जी ...... हेहेहे कैसे लड़की है ये भी अपने हे होने वाले पति की सदी को ले कर कितनी खुश हो रही है

शालिनी जी ........ हेहेहे पता नहीं दीदी आपके लादले ने कोनसा जादू किया है इन सब बच्चियों पे

जुली ...... मम्मी कोई जादू नहीं किया है उन्होंने हम पे वो बहुत प्यारे है बस कुछ कुछ न समाज भी वो क्या कहते है .है नाड़े के थोड़े कच्चे है .किरण दीदी ऐसा की कुछ कहती है कभी कभी उनके लिए

जुली को पता नहीं था की उसने क्या बोल दिया पैर जैसे हे जुली की बात पूरी हुई शालिनी जी आवर रेखा जी के हसने की आवाज से पूरा रूम गूंज उठा वो तो रूम साउंड प्रूफ था तो बहार आवाज नहीं आ रही थी

जुली कभी शालिनी जी को तो कभी रेखा जी को देख रही थी की इन्हें अचानक से क्या हुआ

जुली ......क्या हुआ मम्मी आप दोनों ऐसे हंस क्यों रहे है हमने कुछ गलत कहा क्या

रेखा जी ...... नहीं मेरी बच्ची तुमने कुछ गलत नहीं कहा वो सच में लंगोट का थोड़ा कच्चा है अभी भी

जुली ...... लंगोट वो क्या होता है बड़ी मम्मी

शालिनी जी ....... अब समझाए दीदी इसको मैं जरा बाथरूम हो कर आती हूँ

रेखा जी ........ इसके सामने मुझे फशा कर निकल रही हो शालिनी

शालिनी जी ....... जुली बेटी अब जरा आराम करलो या अपनी बहनो के पास जाओ परिधि भी आई हुई है कल वो भी चली जाएगी

जुली ...... जी मम्मी

जूलिया रेखा जी के गाल को चुम कर रूम से निकल जाती है

शालिनी जी कुछ देर बाद बाथरूम से एक ढीला सा गाउन पहन कर बहार आती है आवर रूम को लॉक कर रेखा जी के बगल में लेट जाती है

रेखा जी ...... शालू तुम्हे पता है न सूर्य के सम्बन्ध मेर्री आवर मेनका के साथ किस हद तक है

शालिनी जी ....... जी दीदी मैं जानती हूँ आवर ये भी की आपको मुझसे पहले हे इन सम्बन्ध के बारे में भी पता है जब आपने किसी को नहीं रोका तो मैं कैसे रोक सकती हूँ दीदी

रेखा जी ....... मैं नहीं रोक सकती पैर तुम तो रोक सकती हो न शालू मुझे दर है की कही माँ सा बाउजी या किसी आवर को पता चला तो क्या होगा

शालिनी जी ....... दीदी आप मेरे लिया कहने को मेरी बड़ी बहन नहीं है मैं दिल से आपको दीदी मानती हूँ इस लिया आपसे कुछ नहीं छुपाउंगी सूर्य के बारे में जो भी पता है वो सब बताउंगी पैर आपको भी मेरी पूरी बात सुन्नी होगी फिर आप हे फैसला करना सूर्य जितना मेरा बीटा उस से ज्यादा उसपे आपका हक़ है

रेखा जी ......... मतलब तुम बहुत कुछ जानती हो सूर्य के बारे में

शालिनी जी कोई जबाब न दे कर बस पलके हे जपका देती है

शालिनी जी ......... दीदी आपको तो पता है जब मैं पहली बार सूर्य आवर कोमल को अपने साथ ले कर अपने पिनार गई थी तब वह पूजा में क्या हुआ था आवर किस तरह वह माँ सा की बझा से बात बिगड़ गई थी आवर सूर्य बिना कुछ बताये वह से यहाँ आ गया था पैदल हे दूप में आवर वो बीमार पद गया था

रेखा जी .......वो सब मैं जानती हूँ शालू तुम मुझे वो सब क्यों बता रही हो मेरी बहन

शालिनी जी ....... दीदी पूरी बात तो सुन लीजिये आप

रेखा जी ....हम्म्म

शालिनी जी ....... उस दिन पूजा में जो घटना घाटी वो सूर्य के लिया केवल एक एक्सीडेंट था पैर कोमल ने उसे दूसरे नजरिये से देखा आवर सब से उस वाक्य को छुपा भी लिया उस वक़्त तक सूर्य इन सब से दूर था पैर फिर जब सूर्य साध्वी जी यानि के रिद्धि के साथ किसी सफर पे निकला था वो कही आवर नहीं परीलोक हे गया था रिद्धि के साथ जहा गुरुदेव एक सरवन प्रतिमा में बदल चुके थे समय रहते सूर्य वह नहीं पहुँचता तो गुरुदेव कभी भी उस सरवन प्रतिमा से अपने रूप में नहीं आ पते उस दौरान सूर्य को उसके पिछले जनम की यादें मिली वो सभी को पहचान गया था पैर सब से छुपा कर रखा फिर अचानक से सूर्य आवर मेर्री को 2,3 रोज के लिया किसी मिशन पे दिल्ली गए वही मेरी की इच्छा से सूर्य आवर मेर्री के बिच सम्बन्ध बने फिर परीलोक में मेनका को अपने पिछले जनम की यादें मिली तो मेनका खुद से सूर्य के सामने अपना पूरा न सम्बन्ध फिर से जोड़ लिया

रेखा जी ......... है मुझे भी मेनका दीदी के बारे में वही पता चला था

शालिनी जी ....... दीदी दोनों के सम्बन्ध दुसरो की नजरो में गलत जरूर है पैर जहा मेर्री सूर्य से प्यार कर जेठी वही मेनका दीदी अपने पुराने सम्बन्ध आवर विजय से संतुष्ट न हो पाने के कारन सूर्य से सम्बन्ध बनाये पैर एक सच ये भी है की मेनका दीदी भी सूर्य से बहुत प्यार करती है बेटे के रूप में भी आवर एक लवर के रूप में भी अब ऐसे में मैं उन्हें कैसे रोक सकती हूँ दीदी

रेखा जी ....... क्या कोई आवर भी ऐसे सम्बंद है जिसका तुम्हे पता हो शालू

शालिनी जी ..... जी दीदी 2 कुंवारी आवर एक सदिसुधा लड़किया है पैर मैं उनके नाम नहीं बता सकती दीदी

रेखा जी ......हेहेहे सायद एक राधिका है रोहन की बीबी बाकि नाम मुझे भी नहीं जानना वैसे ये सोफिया तुम्हे सूर्य के लिया पसंद है न मुझे भी बहुत पसंद है पैर सायद ये मुकीम नहीं

शालिनी जी ...... हेहेहे दीदी आपके लादले के प्यार में पागल है वो प्यारी सी बच्ची आवर आपका लाडला भी उस प्यारी से बच्ची से प्यार करता है तो देर सावेर आपकी ये इच्छा भी पूरी हो जाएगी हेहेहे

रेखा जी ...... ये कही पे रुकेगा भी या नहीं

शालिनी ...... अब ये तो वही जाने दीदी पैर आपको एक बात आवर बता देती हूँ राधिका बेटी को आपके लादले ने प्रेग्नेंट कर दिया है तो उदार से भी दादी बनने को त्यार हो जाओ

रेखा जी ........ क्या वह भी ठाकुर खंडन की फसल ुघा दी उसने आने दे उसे मैं खबर लेती हूँ उसकी कहा कहा हल जोत रहा है पता नहीं हेहेहे

शालिनी जी ....... संभल कर दीदी हेहेहे कही आपकी जमीं न जोत दे वो

रेखा जी ....... नाड़े की इतनी भी कच्ची नहीं हूँ मैं तू मेरा मजाक ुधा रही है न अपना देख अभी भी जवान लड़किया तेरे सामने टिकती नहीं है

रेखा जी थोड़े जोर से शालिनी जी के गाउन के ऊपर से हे वो ठोस उभर दबा देती है

शालिनी जी को इसकी उम्मीद बिलकुल नहीं थी

शालिनी जी ...... अह्ह्ह्हह क्या करती हो दीदी

रेखा जी ...... मेरा तो जो होगा देखा जायेगा कही तू उसके हाथे चढ़ गई तो तेरे जवानी जरूर निखार देगा मेरा बीटा

( शालिनी जी ...... अब आपको क्या बताऊ दीदी ये जवानी का निखार उसकी बदौलत हे तो निखार पाया है )

दिल्ली ........

अभी साम के कोई 5 सादे 5 का टाइम हुआ था सूर्यकांत जी अभी अभी एयरपोर्ट से सीधा घर हे आये थे

पिछले 3 दिन से वो किसी जरुरी मीटिंग के लिया आर्मी चीफ के साथ आउट ऑफ कंट्री थे आज हे घर लौटे थे

जैसे हे घर में एंटर किया सामने उनकी पत्नी आवर संदन समधी बैठे हुए थे

सूर्यकांत जी ........ क्या बात है भाई आज बड़े बड़े लोग पधारे हुए है हमारे गरीबखाने में

राधिका डैड मर .गोविन्द

राधिका माँ मरस. मधु

गोविन्द जी ........ भाई आप ठहरे आर्मी वाले हाँ ठहर मामूली लोग अब हाजिर तो लगनी हे पादरी है ऊपर से लड़की वाले भी है हाहाहाहा

सूर्यकांत जी ....... आवर कैसी है संदन जी आप तो आवर भी खूबसूरत होती जा रही है आवर ये मेरा भाई जैसे इसका आपने खाना पीना हे बंद कर रखा है

गोविन्द जी ....... देख रही है भाबी जी आपके सामने हे ये मेरा दोस्त मेरी बीबी पे लाइन मार रहा है एकलौती बीबी है मेरी

तभी राधिका किचन से ठन्डे पानी की बोतल लिया बहार आती है आवर एक गिलाश में पानी दाल कर सूर्यकांत जी को देती है

सूर्यकांत जी ......थैंक्स बीटा राधिका ...देख भाई गोविन्द बात ऐसी है मैं ठहरा फौजी आदमी इस लिया सीधा बोलता हूँ मुझे पता होता की मेरी संदन कभी बूढी नहीं होगी तो भाई राधिका बिटिया का हाथ मांगने आया तब संदन का हाथ भी लगे हाथ मांग हे लेता अपने लिया क्यों संदन जी हाहाहाहा

mrs.madhu ........ क्या भाई साहब आप भी बचो के सामने कुछ भी बोलते है

गोविन्द जी ..... भाई साहब फिर तो बड़ी गलती करदी आपने अच्छा होता लगे हाथ मधु को भी मांग लेते मेरा खाना पीना तो बंद नहीं होता

मरस .मधु ...... आप भी न वापिस चलिए फर बताती हूँ मैं आपको

आंटी जी ...... अरे मधु तुम नहीं जानती क्या इन दोनों को ऐसा रूप इनका एक दूसरे के सामने हे आता है राधिका बेटी जरा अपने पापा के लिया कॉफ़ी बना देना

राधिका जी ..... माँ अभी ले कर आती हूँ

तभी एक आवर आवाज राधिका को सुनाई देती है

आवाज .....राधिका मेरे लिया भी एक कॉफ़ी बना देना

राधिका .....जी दीदी आप फ्रेश हो जाये तब तक

जी है दर्शक दीप्ती अभी अभी घर में इंटर हे हुई थी की उसने अपने पापा के लिया कॉफ़ी बनते देख अपना आर्डर भी सुना दिया

दीप्ती ..... नमस्ते अंकल नमस्ते आंटी जी

mrs.madhu ....... नमस्ते दीप्ती बीटा आज तुम्हारी ड्यूटी जल्दी ख़तम हो गई क्या

दीप्ती मधु जी से गले मिलते हुए

दीप्ती ..... नहीं आंटी जी वो आप लोगो के आने के बारे में पता चला तो जल्दी हे आ गयी वैसे भी अब पहले जितना काम जो नहीं रहता पुलिस वालो के पास मैं अभी कपडे बदल कर आती हूँ

कुछ हे देर में दीप्ती अपनी पुलिस की वर्दी चेंज कर एक बहुत हे खूबसूरत पंजाबी सलवार सुईठे में निचे आती है ीदार राधिका भी कॉफ़ी ले कर किचन से बहार निकल सूर्यकांत जी को कॉफ़ी देती है उसने अपने साथ साथ सब के लिया कॉफ़ी बना ली थी

सभी अपनी अपनी कॉफ़ी की चुस्किया लेने लगते है

दीप्ती ....... फिर तो आज आप लोगो की स्पेशल पार्टी चलेगी रात भर क्यों पापा

सूर्यकांत जी ..... हाहाहा है बीटा आज तो पार्टी बनती है अपने समधी के साथ साथ संदन भी तो ज्वाइन करेगी

अभी ये लोग बात कर हे रहे थे की अचानक से आंटी जी की नजर राधिका पे पादरी है जिसके चेहरे के भाव पल पल बदल रहे थे अचानक से उठा कर वो बाथरूम की आवर भागी

आंटी जी ......राधिका बेटी क्या हुआ तुम्हे

कहते हुए वो भी तेजी से राधिका के पीछे पीछे बाथरूम में पहुंच गई जहा राधिका वोमिटिंग कर रही थी

मधु आवर दीप्ती भी वही पहुंच गई थी

आंटी जी ...... दीप्ती अपनी गाड़ी निकालो जल्दी राधिका को हॉस्पिटल्स ले कर चलना होगा अभी

दीप्ती ......जी माँ

राधिका ...हुनहु हुनहु माँ मैं ठीक हूँ बस थोड़ा सर गम रहा है आवर कुछ अजीब सा लग रहा है

सूर्यकांत जी ...... सब ठीक तो है न या डॉक्टर को कॉल कृ

दीप्ती .....पापा राधिका को हॉस्पिटल ले कर जाना होगा

सूर्यकांत जी ...... मैं कार निकलता हूँ बेटी

जल्दी हे राधिका के मन करने के बाद भी 2 कार में सब आर्मी हॉस्पिटल पहुंचे जहा कुछ देर जाँच करने के बाद एक लेडी डॉक्टर राधिका को लिया बहार निकलती है

सूर्यकांत जी ......... Dr.sandhya राधिका बेटी ठीक तो है न कोई जबरन की बात तो नहीं है न

dr.sandhya ...... Don't वोर्री सर राधिका को कुछ नहीं हुआ है आप सबके लिया एक बहुत बदु खुसखबरी है सर आप दादा बनने वाले है शी इस ओने मंथ प्रेग्नेंट

सूर्यकांत जी ...... क्या मैं दादा बनने वाला हूँ आप सच कह रही है न डॉ .

डॉ. संध्या .....जी सर आप दादा बनने वाले है राधिका जी प्रेग्नेंट है वोमिटिंग सर चकराना के पीछे यही वजह थी

सूर्यकांत जी आवर उनकी वाइफ दोनों की आँखे नाम थी ानुसो से पैर ये ख़ुशी के आंसू थे जिस घडी का उन्हें बे- सबरी से इन्तजार था आखिर उसकी सुरुहत हो चुकी थी उनके घर भी एक नन्हे मुने मेहमान ने आने की दस्तक दे दी थी सभी के चेहरे ख़ुशी से दमक रहे थे

मधु जी ..... मैं आज बहुत खुश हूँ मेरी बच्ची तुमने हम सब को वो ख़ुशी दी है जिसका हम न जाने कब से इन्तजार कर रहे थे मेरा नाती आने वाला है मैं आज बहुत खुश हूँ

आंटी जी ....... बिलकुल सही कहा मधु आपने जब जब किसी छोटे बच्चे को देखती थी तो बागवान से बस यही पराठा करती थी की वो मेरे घर कब ऐसा अवसर आएगा आज उसकी सुरुहत हो गयी है

दीप्ती ......... अब तो मैं जल्दी हे बुआ बानगी राधिका तुम्हारी मन्नत पूरी हो गई हमने जो माँगा था वो माँ ने हमें सौंप दिया

( राधिका ये दीदी क्या कह रही है इनका क्या मतलब है इन्हें तो पहले से पता है सब ओह सहित तो ये मतलब था दीदी क्या )

मधु ....क्या हुआ बेटी कहा खो गई कोई प्रॉब्लम है क्या

राधिका ...... नहीं माँ कोई प्रॉब्लम नहीं आपको तो पता हे है हम सब कब से इस ख़ुशी का इन्तजार कर रहे थे मैंने आपको कुछ बताना है मम्मी जी

आंटी जी ..... है बीटा बोलो क्या बात है मेरी बच्ची की हर खवाहिश पूरी करुँगी मैं

राधिका .....दीदी आप हे बता दीजिये न मम्मी जी को

दीप्ती ....ठीक है ...दरअशल माँ हम जब सूर्यगढ़ गए थे तब हमने वह उनके कुलदेवी मंदिर में ये मानत मांगी थी की राधिका प्रेग्नेंट हो गयी तो हम सबसे पहले वह जा कर पूजा आदि कर माथा टेकेंगे आवर उन्हें हे कुलदेवी मन कर उनकी हर वर्ष की पूजा में शामिल होंगे आवर पुरे मन से सारधा भाव से उनकी पूजा करेंगे ( ये सच भी है दीप्ती आवर राधिका ने ऐसे मानत मांगी थी पैर मंदिर में नहीं मांगी गयी थी ये मानत )

सूर्यकांत जी ...... कोई बात नहीं बेटी हम सब जल्दी हे वह जायेंगे आवर जैसे तुम लोगो ने मानत मांगी वैसा हे करेंगे बीटा मैं आज हे ठाकुर जी से बात कर उन्हें बताता हूँ आवर जल्दी हम सब वह चलेंगे पैर बेटी रोहन नहीं आ पायेगा इस पूजा में

दीप्ती ....कोई बात नहीं पापा रोहन जब बेबी हो जायेगा तब की पूजा में साथ चलेगा

गोविन्द जी ..... है ये भी सही बात है बीटा मैं अपने सभी मीटिंग पोस्टपोन कर देता हूँ आप भी अपने जरुरी काम ख़तम कर लीजिये तब तक फिर चलते है आज की पार्टी मेरी तरफ से मेरे नवशे के लिया हाहाहा

सूर्यकांत जी ...... कंजूसी नहीं चलेगी गोविन्द आज डिनर पार्टी मेरी होगी जल्दी हे बिग पार्टी करेंगे

आंटी जी ..... अभी किसी को ज्यादा कुछ करने की जरुरत नहीं है न ज्यादा लोगो को बताने की मैं नहीं चाहती मेरी बच्ची पे कोई गलत नजर पड़े चलिए सब घर चलते है आप लोग बहार से हे खाना ले आये हम दीप्ती के साथ घर चलते है

सूर्यकांत जी ..... है ठीक है हम जल्दी हे घर आते है

फिर सूर्यगढ़ भी बात करनी है इस बारे में क्यों की वह किस तरह से इस अवसर पे पूजा होती है हमें तो कुछ भी पता नहीं है

आंटी जी ..... सही कहा आपने अब हम चलते है आप लोग जल्दी हे आ जाइये

राधिका दीप्ती मधु जी आंटी जी राधिका की कार से घर की आवर निकल गए पुर दूसरी कार से सूर्यकांत जी आवर गोविन्द जी मार्किट की आवर चल दिए

दीप्ती जैसे हे अपनी सभी को ले कर घर पहुँचती है

सूर्य वाले घर के बहार सानिया आवर माया कड़ी थी जो सायद अभी अभी यहाँ आई थी पैर घर को लॉक देख वापिस जाने के तयारी में हे थी

दीप्ती .......तुम दोनों बहार क्यों कड़ी हो

दीप्ती दोनों को बहार देख कर पूछती है

माया ......दीदी वो हम सब से मिलने आये थे पैर यहाँ कोई है हे नहीं

राधिका ....... वो सब जरुरी काम से सूर्यगढ़ गए है सायद तुम्हे पता नहीं था

दीप्ती ....चलो कोई बात नहीं अंदर आ जाओ दोनों आज दोनों यही रुक जाना

माया .....जी दीदी

माया सानिया का हाथ पकड़ दीप्ती राधिका के साथ अंदर चल देती है

माया तो पहले से हे एक फॅमिली मेंबर्स जैसे थी पैर सानिया भी यहाँ काफी बार आने से आवर राधिका दीप्ती से उसकी भी दोस्ती काफी अच्छी हो गयी थी ऐसे में उसे भी किसी तरह की कोई हिचक नहीं थी रात में यहाँ रुकने की

सक्तिपुर ..........

रुक्मणि जी दूसरी मंजिल की बालकनी से पीछे की तरफ एक नौजवान युवक को देख रही थी

कुछ समय से रुक्मणि जी का मनो यही रूटीन बन चूका हो हर दिन ठीक इशू वक़्त वो कुछ समय यहाँ रोज हे बिताने लगी थी

रुक्मणि जी अपलक उस नौजवान युवक को निहार रही थी जो मिटटी पसीने से भीगे अपने वस्त्र उतर कर पास में बने जानवरो के पानी पिने की होड़ के पास बानी बड़ी से टंकी से पानी चालू कर के बाल्टी भरने लगता है

साथ हे अपने मैले कपडे उतर कर अंडरवियर पे अपनी कमर में पतला सा टोलिया बंद कर अपने मैले वस्त्र दोने लगता है

कुछ देर में आने वस्त्र दोने के बाद उन्हें अच्छे से साफ़ पानी से निकल उन्हें निचोड़ कर पास में बंदी राशि पे सूखने के बाद ुशी सिला ( पत्थर ) पे बेथ कर नहाने लगता है

केवल रुक्मणि जी हे नहीं थी वह जो उस युवक को गौर से देख रही थी

बल्कि पास बने रूम से एक 30 ,32 साल की सांवले रंग की तीखे नयन नक्श की भरे पुरे गदराये सरीर की महिला भी कमरे के खिड़की से अपपक इस युवक को देख रही जिसका एक हाथ अपनी कठोर उठान लिया 36 की बड़ी चची पे वही दूसरा हाथ अपने लहंगे को सामने से उठाये हलके बालो से भरी हलकी गहरी सांवली रंग की छूट के मोठे मोठे होंटो को भी सहला रही थी

तभी रुक्मणि जी के पास एक आवर महिला पहुँचती है जो उनसे कुछ उम्र में बड़ी लग रही थी

महिला ...... कब तक उसे यहाँ कड़ी कड़ी निहारती रहोगी रुक्मणी अगर तुम्हारा दिल इतना हे उसे सीने से लगाने का कर रहा है तो हवेली में बुला कर अपनी इच्छा पूरी कर सकती हो मैंने तुम्हे उस से मिलने से तो नहीं रोका टोका है

रुक्मणि जी ...... नहीं दीदी ( जी है ये महिला कोई पुर नहीं गीता ठाकुर थी जो रुक्मणि जी के पास कड़ी उनसे बोल रही थी ) जब तक आपको पूरी तसली न हो की अजय अब पूरी तरह से सुधर गया है मैं उस से नहीं मिल सकती

( जिस युवक को अब तक निहार रही थी वो रुक्मणि जी का बीटा अजय ठाकुर था जिसजे रुक्मणि जी ममता वश निहार रही थी )

गीता जी ...... अच्छी बात है मेरी बहन इस हे इस हाल में देख कर दुःख तो मुझे भी बहुत होता है दिल मेरा भी रोटा है जब इस हे ऐसी हालत में देखती हूँ पैर जो कुछ भी हम कर रहे है वो सब इसके अच्छे भविष्य के लिया भी जरुरी है यही सोच कर सीने पे पत्थर रख कर खुद को भी करने से रोकती हूँ काश हम दुश्मनी में इतने अंधे न हुए होते तो सायद हमारे बचो का भविष्य भी अच्छा होता ठोकर लगते हे संभल गए वो भी अच्छा हुआ पैर सायद कुछ ज्यादा हे देर हो गयी सँभालने में

रुक्मणि जी ........ सब हमारी हे गलती है दीदी हम अपने हे घमंड में अपने हे बच्चों में न जाने कर दूर हो गए

आवर वो सब गलत रस्ते गलत सांगत के दलदल में गुस्ते चले गए हमें खबर तक नहीं हुई या फिर हमने देख कर भी जानबुज कर अनदेखा कर दिया था

गीता जी ...... ... जो बिट गया उसे फिर से लौटाया नहीं जा सकता है रुक्मणि पैर जो है उसे तो संजोह कर रख सकते है न इतना तो अभी भी हमारे हाथ में है न

रुक्मणि जी ...... जी दीदी

गीता जी ...... देखो वो कहा कर अंदर जा रहा है जाओ आवर उसे आज हमारे साथ खाना खाने पे बुला लो उसे भी अच्छा लगेगा पुर हमें भी

रुक्मणि जी .........क्या ये ठीक रहेगा दीदी

गीता जी ....... रुक्मणि बीटा है हमारा वो किसी घेर को नहीं बुला रहे है उसका भी हक़ है आवर हमारा भी

रुक्मणि जी ...... जी दीदी मैं अभी बुला कर लती हूँ उसे

गीता जी ....... ठीक है मैं खाना लगाती हूँ आवर विधि आवर गायत्री को भी बता देती हूँ की वो भी खाना खाने निचे आ जाये आवर अजय से प्यार से पेश आये अब वो बदल रहा है तो पहले की तरह उसके साथ पेश न आये

रुक्मणि जी ...... जी दीदी मैं अभी जाती हूँ

रुक्मणि जी के जाते हे गीता जी विधि आवर गायत्री को खाने का बोल कर आवर उन्हें अजय का खाने पे आने का आवर प्यार से उस से बात करने बोल कर निचे चली गयी

विधि .......दीदी ये बड़ी मम्मी को आज अचानक क्या हुआ

गायत्री ........ देख विधि हम दोनों हे जानते है की विक्रम अब जिन्दा नहीं है मुझे उन्होंने बता दिया था पहले हे तो सायद माँ को भो पता हो इस बारे में ऐसे में वो अपने बेटे के लिया जो चाहत रखती है अब वो चाहत अजय के लिया बदल गयी है ऐसे में हमें ऐसा कुछ भी नहीं करना जिस से माँ आवर चची का दिल दुखे ऊपर से अजय भी अब पहले से काफी सुधर गया है तो हमें भी उस से प्यार से पेश आना चाइये ताकि उसे अहसास हो की आज तक उसने क्या खोया है अपने गलतियों से

विधि ....जी दीदी आपने सही कहा जब वो इतनी म्हणत कर खुद को बदल रहे है तो हमें भी उनका मनोबल बढ़ाना चाइये न की पीछे जो हुआ उसे याद दिला कर या ऐसी कोई बात करके उनके मनोबल को गिरना चाइये

गायत्री ......... क्या बात है मेरी गुड़िया रानी तो बड़ी समझदार हो गई जो इतनी जल्दी समाज भी गयी

लगता है उनका कुछ ज्यादा हे असर हुआ है

विधि ...... हेहेहे दीदी असर तो आप पे भी हुआ है पैर वो कही आवर हे नजर आ रहा है

गायत्री ....... चुप कर बे- सरम ऐसा वैसा कुछ नहीं है जो तू सोच रही है अब आगे बढ़ेगी तो सरीर भी भरेगा हे उन्होंने तो आज तक मेरे सीने को चूहा तक नहीं है

विधि ...... हेहेहे दीदी मैंने तो नहीं कहा की आपके बूब्स का साइज इनक्रीस हो रहा है या आपकी हिप्स का ब्रेस्ट तप मेरे भी इनक्रीस हो रहे पैर मुझे न आपका फिगर एक डैम परफेक्ट लगता है 34,28 ,34 अभी से है तो उन्होंने म्हणत करनी सुरु की तो पका बड़ी माँ को भी आप पीछे छोड़ देंगी हेहेहे

गायत्री ........ चुप चाप निचे चल अब माँ आवाज दे रही है

विधि आवर गायत्री दोनों हे सीने पे दुपटा कर अपने रूम से निकली आवर नोचे खाने की टेबिल पे आ कर अपने चेयर पे बेथ गई

कुछ पल बाद हे रुक्मणि अजय को लिया हवेली के भीतर आई अजय की नजरे आज भी जुख़ी हुई थी

गीता ठाकुर आगे बढ़ अजय को गले से लगती है

अजय को ऐसी उम्मीद तो कटाई नहीं थी इस लिया जैसे हे गीता जी के सीने से लगा इतने दिन अपने परिवार से दूर रहने का दुःख उसकी आँखों में उमड़ पड़ा आवर बिना किसी आवाज के वो रोने लगा

गीता जी भी अजय की इस्थिति समाज रही थी हाल तो उनका आवर रुक्मणि जी का भी वैसा हे था पैर उन्हें खुद को कठोर रखना भी जरुरी थी

गीता जी ........ देख रुक्मणि दिन भर शैतानी करने वाला आज कैसे छोटे बचे की तरह रो रहा है अब रोना बंद कर चल चल कर साथ में खाना कहते है

अजय अपने आंसू पांच कर गीता जी के पेअर पकड़ लेता है

अजय .......... ठकुराइन मुझे माफ कर दीजिये मैंने बहुत से गलतियां की है

अजय को गीता ठाकुर ने हे कहा था की वो बड़ी माँ न कह कर ठकुराइन कहे जब तक वो उन्हें बड़ी माँ कहने का हक़ प्राप्त न कर ले पैर जा आज अजय ने ठकुराइन कहा तो गीता ठाकुर के सीने में वो 'ठकुराइन' सबद किसी जहर बुंगे खंजर सा दिल में उतर गया

गीता जी ...... तुम मुझे बड़ी माँ कह सकते हो अजय तुमने जो म्हणत खुद पे की है ये समल लो ये ुशी का इनाम है बस मुझे निराश मत करना बीटा

विधि गायत्री आगे बढ़ अजय का हाथ पकड़ लेती है

विधि ....... कैसे है भैया आप

गायत्री ....... छोटी पहले अजय को खाना खाने दे उसके बाद ढेरो बात कर लेना वो कही भाग नहीं रहा है

विधि ........ हूँ आपसे तो बाद में बात करुँगी चलिए भैया आज हम साथ में कहते है

अजय विधि आवर गायत्री को इस तरह अपने आने पे खुश देख वो भी खुश हो गया था पैर उसकी जीनत नहीं हो रही थी की वो विधि या गायत्री के साथ बे थे बिना गीता या रुक्मणि के अनुमति के

गीता जी....... जाओ अपनी बहनो की बात मनो अब तो हमारी भी नहीं चलती इनके सामने

विधि अजय गायत्री तीनो के लिया खाना लगाने के बाद रुक्मणि जी ने गीता जी का भी खाना लगा दिया

आअज इतने दिनों बाद घर का खाना वो भी अपने परिवार के बिच कहते हुए अजय अपने पुराने दिनों को याद करने लगता है जिस से उसे अपने एक एक गलती या यौन कहे एक ेल कड़वी यादें उसके जहाँ में फिर से उभर आई जब अपनी हे बहनो पे गुस्सा हो जाता था या भोजन का अनादर कर अपने आवारा दोस्तों के साथ निकल जाता था

गगीता जी .....अजय जो बिट गया उसे बुला दो बीटा बस आगे ऐसा फिर न हो इस बात का हमेशा ख्याल रखना अभी तुमने सुरुहत की है मंजिल बहुत दूर है मुझे उम्मीद है तुम हमें न उम्मीद नहीं करोगे बीटा ये हवेली दान डॉलर नाम सोहरत सब अंत समय में यही रह जाता है इंसान के साथ अंत समय में कुछ जाता है तो उसके द्वारा किये अच्छे करम आवर लोगो की दवा

तुम्हारे बाप दादाओ ने हमेशा गलत रह चुनी उन्हें केवल धन दौलत दर गामान्ध हे कमाया किसी का भला नागि किया आज हवेली तो है पैर उनका नाम नहीं आवर जो लोग उनका नाम लेते है वो भी पीठ पीछे घिरा से नफरत से उनके उनकी भी गलती नहीं है क्यों की उनके करम हे घिरना लायक थे

अजय ...... जी बड़ी माँ मैं अब समाज चूका हूँ की क्यों लोग बड़े दादा जी ठाकुर परताप सिंह जी की इतनी िज़ात करते है उनका मान सम्मान करते है क्यों की ेओ सभी के सुख दुःख में उनके साथ खड़े रहते है दिन दुखियो की हर संभव मदद करते है

जो आज तक हम कभी नहीं कर पाए कोई हमारे द्वार पे आता नहीं आवर भूले से कोई आ भी जाता तो हम अपने अहंकार आवर घमंड में उसके दुःख को दूर करने के बजाय उल्टा उस दुखी इंसान को आवर दुःख देते ताकि हमारा दर सब में बना रहे पापा दादा जी ताऊजी ने यही तो किया अपने घमंड में चूर अपने हे लोगो का नाश किया जबकि उन्हें एक पिता की तरह अपने लोगो का ख्याल रखना चाइये

जहा बड़े दादा जी का परिवार आने लोगो का रक्षक बना वही हमारे बड़े अपने हे लोगो के भक्षक बने मैं ये गलती नहीं करूँगा बड़ी माँ

गीता जी अपनी थाली से एक निवाला बना कर अजय को खिला देती है

किसी को यकीं नहीं था की अजय इस तरह की सोच भी अपना सकता है कभी जो लड़का अपने ठाकुर होने के घमंड में किसी के भी परिवार को उजड़ने में एक पल नहीं लगता था आज वो इतना बदल गया था

रुक्मणि जी की आँखों में भी ख़ुशी के आंसू थे दिल तो उनका भी बहुत कुछ कहने का आवर करने का था पैर उन्हें ये भी था की ज्यादा प्यार से कही फिर अपनी रह न बातक जाये अजय इस लिया अभी भी दिल पे पत्थर रख दिल की बाटे दिल में हे राखी

सभी ने भोजन के बाद कुछ देर अजय से बात की फिर अजय सबको गुड नाईट बोल हवेली से बहार निकल गया अपने रूम की आवर जो नोकरो के साथ हे बना हुआ था

विधि आवर गायत्री भी अपने रूम चली गई जो की काफी टाइम से दोनों ने एक हे कर लिया था

यहाँ निचे गीता जी आवर रुक्मणि जी की आपसी चर्चा काफी लेट तक चली फिर रात 11 के आस पास वो भी अपने अपने रूम में सोने के लिया चल दी एक नयी उम्मीद के साथ नए सूर्यौदय के साथ नए दिन की सुरुहत करने के लिया ...................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............................
 
अपडेट. 260

रुक्मणि जी की आँखों में भी ख़ुशी के आंसू थे दिल तो उनका भी बहुत कुछ कहने का आवर करने का था पैर उन्हें ये भी था की ज्यादा प्यार से कही फिर अपनी रह न बातक जाये अजय इस लिया अभी भी दिल पे पत्थर रख दिल की बाटे दिल में हे राखी

सभी ने भोजन के बाद कुछ देर अजय से बात की फिर अजय सबको गुड नाईट बोल हवेली से बहार निकल गया अपने रूम की आवर जो नोकरो के साथ हे बना हुआ था

विधि आवर गायत्री भी अपने रूम चली गई जो की काफी टाइम से दोनों ने एक हे कर लिया था

यहाँ निचे गीता जी आवर रुक्मणि जी की आपसी चर्चा काफी लेट तक चली फिर रात 11 के आस पास वो भी अपने अपने रूम में सोने के लिया चल दी एक नयी उम्मीद के साथ नए सूर्यौदय के साथ नए दिन की सुरुहत करने के लिया ...................

अब आगे ............

सुक्रलोक .............. कल का दिन सुक्रलोक शुक्राचार्य के लिया बहुत से उतर चढ़ाव ले कर आया था

एक दिन पूर्व ............

असुरगुरु ......... पुत्र निर्भयासुर हम तुम्हारे दोषी है तुम हमें जो चाहे दंड दे सकते हो हमारे दवारा किये अन्याय के लिया किन्तु हमारी भी विवश ता थी जो सत्य जानते हुए भी हम तुम्हे नये नहीं दे पाए

निर्भयासुर ......... मैं कोण होता हूँ जो असुरो के शिरोमणि असुरगुरु शुक्राचार्य को दंड दे सकू मैं भले हे पूर्व जनम में असुर था आपका शिष्य रहा हूँ अभी भी मेरी आत्मा का अंश असुर हूँ किन्तु स्वामी से जुड़ कर इतना तो समाज गया हूँ की जो कुछ भी हुआ उसमे ईश्वर की यही इच्छा थी इसी तरह से मुझे इस असुर योनि से मुक्ति प्राप्त हो सकती है

मेरा ये जीवन स्वामी से है आवर इन hi से मेरा अस्तित्व है इनकी सेवा आवर इनकी आज्ञा हे मेरा करम इस लिया ऐसी भूल भी अपने मन मस्तिक्ष में न लाये की मैं आपका शिष्य निर्भयासुर हूँ जिनका आदेश कभी मेरे लिया ईश्वर तुल्य हुआ करता था है आज भी आप मेरे गुरु है क्यों की आज भी मुझे आपकी शिक्षा िस्मरण है आवर मैं आज भी उनका प्रयोग करता हूँ स्वामी के आज्ञा अनुसार इस लिया मैं आप पे जो मेरा क्रोध है उसका त्याग करता हूँ

( सूर्य ....... क्या सच में निर्भयासुर ने जो कहा वो सच है या ये मेरा कोई भरम है क्या सच में निर्भयासुर इस तरह के विचार रखता है आवर उसके मन में मेरे लिया इतना मान सम्मान है )

असुरगुरु ......... मुझे तुम्हारा ये दंड भी स्वीकार है पुत्र निर्भयासुर क्यों की सब सत्य जानने के पश्चात भी मैं तुम्हारे हत्यारे नरकासुर को दण्डित नहीं कर पाया था

ये मेरी हे विवस्ता थी पुत्र जो मैं सब जानने के पश्चात भी मून रहा आवर नरकासुर को असुरराज पढ़ पे आसीन होते देखता रहा मैं अपने असुरगुरु पढ़ से बाँदा हुआ था पुत्र उस समय केवल तुम आवर नरकासुर हे ऐसे असुर थे जो असुरलोक के असुरपध को ग्रहण करने योग्य थे किन्तु नरकासुर ने तुम्हारा चाल वश अंत कर मेरे समक्ष कोई अन्य विकल्प नहीं रखा अगर उस समय मैं नरकासुर को दण्डित करता तो सम्पूर्ण असुरलोक का अस्तित्व हे संकट में आ जाता सब कुछ जानते हुए भी मुझे अपने क्रोध को संत करना पड़ा आवर जब कोई अन्य असुर असुरराज पद को ग्रहण करने योग्य हुआ तब तक नरकासुर ने परबु के रूद्र रूप को प्रश्न कर उनसे वरदान प्राप्त कर चूका था जिसके चलते हम छह कर भी उसको दण्डित नहीं कर पेज हमें उचित समय की प्रतीक्षा है जब परबु के रूद्र रूप के अंश का जनम होगा

असुरगुरु की बात सुन व्योमासुर जी किरण मानसी निर्भयासुर चारो की दृस्टि सूर्य पे जा अटकी पैर सूर्य के इसारे के बाद चारो सामान्य हो गए

सूर्य ......... क्या तब आपको आपत्ति नहीं होगी क्या गुरुदेव बात तो तब भी वही होगी या तो आपको को नरकासुर के साथ मिल कर प्रभु अंश से योध करना होगा या फिर नरकासुर का त्याग करना होगा दोनों इस्थिति में आपके समक्ष कठिन परिस्थितिया होगी ऐसे में आप किसका चुनाव करेंगे करम का या धरम का

कुछ देर तो असुरगुरु भी सोच में पद गए सभी की दृस्टि अपनी आवर देख उन्होंने जबाब देना हे उचित समजा

असुरगुरु ......... पुत्र सूर्य तुम्हारा कथन उचित है भविष्य में इन परिशतियो का सामना हमें करना हे होगा परबु अंश से योध करना अथार्त परबु के समक्ष योध की चुनौती देना आवर अगर नरकासुर का त्याग किया तो सम्पूर्ण असुर वंश के साथ अन्याय होगा साथ हे मेरे असुरगुरु पढ़ पे एक अमित कलां लग्न तय है की असुरगुरु होते हुए मैंने असुरो का विकत परिस्थिति में त्याग कर दिया

देवयानी ........ पिता श्री ये तो आपके समक्ष बहुत हे बड़ी चुनौती है किसी भी मार्ग का चयन करने पे आपके समक्ष कोई न कोई चुनौती रहेगी हे

व्योमासुर जी ........ देवी देवयानी उचित कह रही है गुरुदेव आप किसी भी मार्ग का चयन करो पैर किसी न किसी चुनौती का आपको सामना करना हे होगा गुरुदेव

आवर मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ गुरुदेव मैं इस भावी योध में किसी भी पक्ष से योध भूमि में नहीं उतरूंगा मेरी शिष्य अपनी इच्छा से किसी भी पक्ष में योध करे मैं उन्हें विवश नहीं करूँगा

असुरगुरु ........ अथार्त उस दिव्या ऊर्जा सकती के वास्तविक परिचय से अवगत हो तुम पुत्र व्योमासुर

व्योमासुर जी ........ जी गुरुदेव किन्तु मैं वचन वध हूँ आपको उस दिव्या ऊर्जा की वास्तविकता नहीं बता सकता इसके लिया मुझे क्षमा करे

देवयानी ........ पिता श्री पूजा का सुबह मुहूर्त आरम्भ होने वाला है

असुरगुरु ....... उचित कहा पुत्री तुमने आप सभी सात्विक जल पैन ग्रहण करे हमें पूजा अनुष्ठान पूर्ण कर आपसे भेंट करते है पुत्री देवयानी पुत्रियों का ध्यान रखना

देवयानी ......जी पिता श्री

किरण ......गुरुदेव क्या हम आपके लोक का भ्रमण कर सकते है देवी देवयानी के साथ

असुरगुरु ........... अवश्य पुत्री पुत्री देवयानी सभी को अपने लोक का भ्रमण कराओ साथ इन सभी का ख्याल भी रखना ये हमारे मेहमान है इन्हें किंचित भी परेशानी न हो

देवयानी ......जी पिता श्री आप हमारे साथ चलिए

व्योमासुर जी ......... पुत्र तुम भी जाओ सुक्रलोक का भर्मण करो हम यही कुछ वक़्त रुकना चाहते उसके पश्चात हम पृथ्वीलोक लौट जायेंगे

सूर्य ......जी बाबा जैसी आपकी इच्छा

सूर्य किरण मानसी देवयानी चारो आसाराम से बहार निकल गए

देवयानी ...... आप सब किसी तरह से भ्रमण करना चाहते है हमारे लोक में

सूर्य ...... जैसी आपकी इच्छा देवी देवयानी जी

देवयानी कुछ मंत्र उच्चारण करती है तभी उनके समक्ष 7 सफ़ेद ास्वो ( घोड़ो ) से सुसज्जित रथ आ जाता है 1 सबसे आगे होता आवर पीछे की क़तर में 3 ,3 घोड़े लगे हुए थे

सूर्य ........ देवी देवयानी क्या ये वही दिव्या रथ है जो कभी पटल नरेश महाराज बलि के पास हुआ करता था

देवयानी के खूबसूरत चेहरे पे एक दिलकश मुस्कान उभर आई

देवयानी ....... क्या आप इसके विषय में जानते है हमें नहीं लगा था आपको इस विषय में कुछ भी ज्ञान होगा ये तो हजारो वर्षों से पटल नरेश के पास था

सूर्य ....... चलिए पहले स्थान ग्रहण करते है इस विषय में हम भ्रमण करते हुए बात करेंगे देवी

सूर्य किरण मानसी को रथ पे भेठाने के बाद देवयानी की पुर हाथ बढ़ा कर उन्हें रथ में सवार होने में सहायता करता है जैसे देवयानी सूर्य के हाथ को स्पर्श करती है उन्हें अजीब सी संसाहट मह्सुश होती है जिसके चलते जहा सूर्य दवारा उनकी सहायता करने पे मुस्कान थी वही एक पल के स्पर्श मात्रा से देवयानी के चेहरे पे अनेको भाव आ गए किन्तु जल्दी हे संभल कर वो रथ में सवार हो गई

रथ जितना बहार से देखने में छोटा प्रतीत हो रहा था उतना हे अंदर से कही ज्यादा बड़ा आवर खूबसूरत था

मानसी ........ क्या हुआ देवी देवयानी आप कुछ घरे विचार में खोटी हुई है

हम सुक्रलोक के विषय में कुछ ज्यादा नहीं जानते कराया हमें यहाँ के बारे में बताइये

किरण ....... बिलकुल सही कहा मानसी तुमने हम तो ज्यादा कुछ जानते नहीं इस बारे में

देवयानी के इसरा देने पे एक मायावी सारथि ( रथ चालक ) सारथि के स्थान पे प्रकार होता है आवर रथ को धीमी गति से आगे बढ़ा देता है

देवयानी सभी को सुक्रलोक की विशेषताएं बताते हुआ आगे नगर की आवर भाड़ रहे थे वही सूर्य किसी गहन विचार में खोया हुआ था

सूर्य ......... आप सभी सुक्रलोक के खूबसूरत मनोरम दृश्यों का आनंद लीजिये मैं कुछ समय के लिया ध्यान में जा रहा हूँ

किरण मानसी ..........जी कुंवर जी

सूर्य उन लोगो से कुछ दुरी पे आसान लगा कर ध्यान में लीं हो जाता है किन्तु उस से पूर्व एक सुरक्षा घेरा अपने चारो आवर बना लेता है जिस से सूर्य की वास्तविक ऊर्जा का किसी को भी ज्ञान न हो पाए फिर चाहे कोई कितनी भी कोशिश करे

ीदार सूर्य ध्यान में जैसे हे अपनी कुण्डलिनी चक्र जागृत करता है सूर्य को गुरुदेव की आवाज अपने मस्तिष्क में सुनाई देती है

सूर्य ....... परनाम गुरुदेव आप आवर वो भी सुक्रलोक में

गुरुदेव ......... कल्याण हो पुत्र सूर्य चिंतित न हो पुत्र हम सुक्रलोक में नहीं है हम अभी भी परीलोक में हे है हम परबु की इच्छा से अपनी आत्मिक ज्ञान से शुक्र लोक में गठित हो रही घटनाओ पे नजर बनाये हुए है

सूर्य ....... जी गुरुदेव मुझे भी कुछ कुछ आभाष हुआ था की ऐसा हे कुछ होगा

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य अब तक का सुक्रलोक का सफर बहुत अच्छा रहा पुत्र तुमने अपनी आवर पुत्री किरण की वास्तविक ऊर्जा सकती को छुपा कर रखा है किन्तु असुरगुरु शुक्राचार्य को तुम दोनों पे संदेह हो चूका है की तुम दोनों ने अपनी वास्तविक ऊर्जा को अपनी वास्तविकता को छुपाये रखा है

सूर्य ....... मैं जनता हूँ गुरुदेव असुरगुरु शुक्राचार्य जैसे तीव्र बूढी ऋषि से हम अपनी वास्तविकता ज्यादा समय तक नहीं छुपा सकते है इसी कारन मुझे निर्भयासुर को उनके समक्ष इतनी जल्दी प्रस्तुत करना पड़ा ताकि कुछ समय उन्हें भरम में रख सकू की मेरी वास्तविक ऊर्जा क्या है आवर उसका मूल स्थार्थ ( आदर .केंद्र ) क्या है

गुरुदेव ........ किन्तु ये ज्यादा समय तक नहीं चलेगा पुत्र इस लिया सावधान रहना आवर देवी देवयानी से दुरी बनाये रखना क्यों की देवी देवयानी आने पिता की तरह चातुर्य की धनि है आवर सिगरा क्रोधित होने वाली स्त्री भी वो अपने पिता की हे तरह जल्दी हे क्रेडिट हो जाती है आवर क्रोध में किसी को भी श्राप दे सकती है

सूर्य ....... जी गुरुदेव क्या आप मुझे देवी देवयानी की जीवन काल के विषय में कुछ बताने की कृपा करेंगे गुरुदेव

गुरीदेव ....... अवश्य पुत्र

फिर गुरुदेव. सूर्य को देवयानी के प्रेम आवर फिर राजा ययाति से किस तरह विवाह हुआ सभी घटनाओ के विषय में सूर्य को बताया

सूर्य ....... ये तो देवी देवयानी के साथ घोर अनर्थ हुआ गुरु देव जिस से प्रेम कर अपने पिता को हे विवश कर जीवन दान दिलवाया वही अंत में देवी देवयानी का भाई बन गया आवर जब देवयानी को स्वीकार नहीं कर पाया तो देवयानी क्रोधवश उसे श्राप दे दिया जो की अनुचित भी नहीं था क्यों की देवयानी के प्रेमी ने मृत संजीवनी ज्ञान प्राप्त करने के लिया देवी देवयानी आवर अपने प्रेम जाल में फसाया जब कार्य पूर्ण हुआ तो ुशी देवी देवयानी का त्याग कर चल दिया जब देवी देवयानी से क्रोध में उसने श्राप दिया तो उसने पलट वॉर करते हुए देवी देवयानी को हे श्राप दे दिया

जब राजा ययाति से विवाह हुआ तो जो कुछ खुशियां उन्हें प्राप्त हुई तो उनकी हे शाखी शर्मिस्ता ने राजा ययाति से सम्बन्ध स्थापित कर एक बार फिर देवी देवयानी के साथ चाल किया ऐसे में उनका सवभाव क्रोधित होना सव्भाविक है गुरुदेव

गुरुदेव ....... कोई भी घटना अकारण नहीं घाटी होती कोई न कोई कारन अवश्य होता है परतेक क्रिया के पीछे प्रतिक्रिया अवश्य होती है

देवी देवयानी के विषय में हमने बहुत कुछ बता दिया है तुम्हे किन्तु फिर भी साधन रहना आवर है पुत्र नरकासुर के गुप्तचर आवर असुर योद्धा तुमपे घाट लगा कर हमला करने की प्रतीक्षा में एक सुअवसर की तलाश में है क्युकी वो असुरलोक सन्देश नहीं पहुंचा प् रहे है तुमने जो कवच सुक्रलोक पे लगाया है उसके चलते कोई भी असुर सुक्रलोक से बहार नहीं निकल सकता है

सूर्य ...... मैं पहले से जनता था भले हे उन्हें मेरी वास्तविकता का ज्ञान न हो गुरुदेव किन्तु नरकासुर को जब ये ज्ञात होता की कोई इंसान सुक्रलोक असुरगुरु शुक्राचार्य से भेंट करने आया है तो नरकासुर अवश्य कुछ हद तक मेरी वास्तविकता पहचान जाता

गुरुदेव ...... अब क्या सोचा है पुत्र तुमने इस बारी में

सूर्य ....... सोचना क्या है गुरुदेव उन्हें ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करूँगा वैसे भी मेरे तीनो ड्रैगन्स भूखे है हाहाहा

गुरुदेव .......हाहाहा उचित है पुत्र किन्तु संभल कर असुरगुरु शुक्राचार्य उन्हें पुनः जीवित न कर पाए

सूर्य ........इसके लिया देवी देवयानी है न गुरुदेव आवर जीवित तो वो तब करेंगे न जब उन्हें उन असुरो का अंश मिलेगा

गुरुदेव ........ अब तुम अपने आगे के कार्य पे ध्यान दो

सूर्य .....जी गुरुदेव परनाम गुरुदेव

सूर्य जैसे हे गुरुदेव से बात कर आँखे खोलता है तो अपने से कुछ दुरी पे देवयानी कड़ी उसे हे देख रही थी

किरण ......कुंवर जी हम नगर में पहुंच गए है

सूर्य .......... देवी देवयानी यहाँ वयापार के लिया किस मुद्रा का चलन है

देवयानी ...... आपको कुछ चाइये का

सूर्य ...... अब जब सुक्रलोक आये है तो कुछ तो सुक्रलोक के यादो के रूप में अपने साथ ले कर जाना चाइये न इस लिया क्या पता कोई ऐसी वास्तु हो जो हमें आकर्षित कर सके तो हम भी कुछ खरीदी कर ले

देवयानी ........... यहाँ सवर्ण मुद्रा ( गोल्ड कॉइन ) आवर राज़ मुद्रा ( सिल्वर कॉइन ) से आदिक कार्य विक्रय होता है आप किसी भी भी मुद्रा का प्रयोग कर सकते है या चाहे तो माणिक रातर या हेरे जवराहट से भी

सूर्य .....जी आपका धन्यवाद् आप हमारी सहायता करेंगी न

देवयानी ......जी हमें ख़ुशी होगी आपकी सहायता करके

देवयानी ने मुस्कुराते हुए कहा जिस से सूर्य भी मुस्कुरा दिया इतनी उम्र के बाद भी देवी देवयानी की खूबसूरती किसी जवान नवयौवना के जैसे हे थी

उदार आसाराम में असुरगुरु शुक्राचार्य की पूजा काफी लम्भी चली आवर आंत में करीब 4 हर की पूजा के बाद अंतिम आहुति से एक ऊर्जा पुंज हवन कुंड से निकल कर असुरगुरु शुक्र में समाहित हो गया

असुरगुरु शुक्राचार्य पूजा कर अपने कुटिया में लौट आये जहा व्योमासुर जी आवर उनका प .शिष्य हे मौजूद थे

असुरगुरु ....... क्या पुत्री देवयानी अभी तक नहीं लौटी आसाराम में

p.shishya ......एक ताम्बा पत्र उनकी आवर बढ़ा देते है

असुगुरु ताम्बा पत्र पद कर संत हो गए

असुरगुरु ....... पुत्री देवयानी आज रात्रि मेहमानो के साथ बहार हे रुकना चाहती है

व्योमासुर जी ......गुरुदेव चिंता की बात नहीं है पुत्र सूर्य है उनके साथ उनकी चिंता करने की आव्सय्कता नहीं है

असुरगुरु ....... हम इस लिया चिंतित नहीं है पुत्र व्योमासुर हमें चिंता निर्भयासुर की है अगर सूर्य या उनके से किसी पे कोई संकट आया तो उसका क्रोध जो उसने अपने भीतर दफ़न कर रखा है वो उसे आवर नहीं रोक पायेगा

p.shishya ......मुझे आज्ञा दीजिये गुरुदेव मैं अभी उनकी सुरक्षा के लिया जाता हूँ

असुरगुरु ...... नहीं पुत्र उसकी आव्सय्कता नहीं है पुत्री देवयानी है वह क्या उसके क्रोध को भूल गए तुम

उदार चारो साम तक नगर में भर्मण करने के बाद कुछ लोगो की मदद से देवयानी ने नदी किनारे खूबसूरत सा खेमा लगवा लिया रात में सभी वही जो ठहरने वाले थे

सूर्य किरण मानसी अभी नाड़ी किनारे बैठे थे आवर खूबसूरत नाड़ी के सावच जल में तैरती मचिलियो को के साथ खेल रहे थे

मछिलया खूबसूरत होने के साथ साथ खतरनाक भी थी किन्तु सूर्य किरण मानसी से किसी भी तरह के खतरे का आभाष न होता देख वो सभी मछलिया भी सामान्य मछिलयों की तरह हे इनके साथ खेल रही थी

सूर्य ...... मेरा तो मन कर रहा है थोड़ी देर मैं भी इन मछलियों के साथ नाड़ी में मज़े कृ

किरण ........ आपको किसने रोका है कुंवर जी पैर ध्यान से ये सभी मचिलिया जितनी खूबसूरत नजर आ रही है उस से कही ज्यादा खतरनाक भी है

मानसी ........ दीदी ये सब मायावी जलचर है जब तक आप से इन्हे किसी तरह का कोई खतरा नहीं तब तक ये आपको नुकसान नहीं पहुचायेंगी

तभी पीछे देवयानी जी अपनी तीन दसियो के साथ आती है जिनके हाथो में बड़े बड़े थाल थे जो लाल वस्त्र से देखे हुए थे

देवयानी जी ....... मानसी आपने सही कहा ये मायावी मत्स्य ( मछली ) है जब तक इन्हे किसी खतरे का आभाष नहीं होता ये किसी पे प्रहार नहीं करती किन्तु फिर भी नाड़ी में उतारते समय सचेत अवश्य रहना चाइये

सूर्य ......... जी देवी आपने उचित कहा

देवयानी जी ......... हम कोई देव कन्या नहीं जो आप हमें देवी कह कर सम्बोधित करे हमें हमारे नाम से सम्बोधित करे सूर्य

सूर्य ....... क्या ये उचित होगा आप मुझसे काफी बड़ी है उम्र में भी आवर ज्ञान में भी

देवयानी जी .......हेहेहे आपको पता नहीं किसी स्त्री से उसकी उम्र के विषय में बात नहीं करना चाइये

सूर्य ...... हाहाहा माफ कीजिये मुझे लगा ये नियम सायद पृथ्वीलोक तक हे सिमित है हाहाहा

देवयानी जी ......... लोक चाहे कोई भी हो स्त्री की भावनाये एक जैसे हे होती है फिर चाहे वो देव कन्या हो या असुर कन्या जिस तरह पार्थिव लोक की कन्याये श्रृंगार करती है खूबसूरत दिखने के लिया वैसा हे असुर लोक या देव लोक में भी होता है कुछ अलग है तो वह है अलग अलग लोक की अलग खासियतें

सूर्य ........ हम्म्म सायद आपका कथन उचित है देवयानी जी

किरण ........ आपको सनान करना था न कर लीजिये मैं आपके लिया कपडे ले कर आती हूँ

देवयानी जी ....... उसकी आव्सय्कता नहीं है हमने अपने मेहमानो के लिया वस्त्रो की वय्वस्ता पहले हे कर दी है आवर अपने मेहमानो के लिया नृत्य मनोरंजन की वय्वस्ता भी आप दोनों भी जल्दी त्यार हो कर आ जाइये हम भी त्यार हो जाते है

एक दासी को आगे आने का इशारा देते हुए थाल पे लगा वस्त्र हटा देती है जिसके निचे सूर्य के लिया खूबसूरत रेशमी वस्त्र थे

दो थाल से कपडा हटाने पे वह किरण आवर मानसी के लिया भी रेशमी वस्त्र थे

सूर्य..... जी इनकी क्या आव्सय्कता थी खेर जब आपने ख़ुशी से ये सब कर हे दिया है तो इंकार कर आपको निराश नहीं करेंगे

देवयानी जी ....... जी सुक्रिया हमें आपसे यही उम्मीद थी

सूर्य ........ किरण मानसी आप भी कक्ष में त्यार हो जाइये आवर आप हमारे वस्त्र यही रख दीजिये

सूर्य की बात सुन कर किरण आवर मानसी खेमे की आवर भाड़ जाती है साथ हे उनके पीछे पीछे दोनों दसिया

जो दासी सूर्य के वस्त्र लिया कड़ी थी वो देवयानी जी को देख रही थी आवर उनके आदेश की प्रतीक्षा कर रही थी

देवयानी जी ....... आप सनान कर लीजिये सेविका आपके वस्त्र लिया यही इन्तजार करेगी हम चलते है

सूर्य कुछ आवर कहता उस से पहले हे देवयानी जी वह से जा चुकी थी

सेविका ....... हमें क्षमा करे हम राजकुमारी जी की आज्ञा की अवहेलना नहीं कर सकते श्रेष्ठ

सूर्य ....... ठीक है पैर हम कोई श्रेष्ठ नहीं है आप हमें सूर्य ठाकुर कह सकती है

सेविका न में गर्दन हिला देती है सूर्य समाज गया की इनके मन में देवयानी जज का दर है

सूर्य ...... ठीक है पैर क्या आप हम से कुछ दुरी बनाये रखेंगे हम नहीं चाहते की कोई स्त्री हमें उस रूप में देखे जिसका हमें हमारी पत्नी को है

सेविका ....... जी श्रेष्ठ

सूर्य वह से कुछ दुरी जा कर एक एक कर अपने कपडे उतरता है आवर नाड़ी के ठन्डे सावच जल में उतर जाता है

कुछ देर बाद अचानक से सूर्य को अपनी हडियो में कुछ बदलाव मह्सुश होता है जैसे की ुशी सरीर की तव्चा आवर भी सख्त हो रही हो आवर सरीर से हलकी हलकी रौशनी फुट रही है

सूर्य जैसे हे बहार निकला अँधेरे में भी उसका सरीर चमक रहा था

दुरी कड़ी दासी की नजर भी इस रौशनी की आवर अपने आप हे उठ गयी सामने सूर्य कमर में सफ़ेद रेशमी कपडे का टॉवल लपेटे सूर्य खड़ा

सेविका की कुछ पल तो नजरे सूर्य के सरीर पे अटकी रही पैर जैसे सूर्य के सरीर से आती रौशनी गायब हुई सेविका की नजरे जुख गयी

सूर्य ...... हमने आपको मन किया था न हमारी आवर देखने से

सेविका ...... हमें क्षमा करे श्रेष्ट हमसे भूल हुई

सूर्य ज्यादा कुछ न बोल कर कपडे बदलता है जिस से उसका सरीर ठीक से चुप भी नहीं रहा था

बिना बाजु के पुराणी टाइप के शर्ट जो उसकी कमर से कुछ ऊपर तक था निचे दोती नुमा रेशमी दोती जो कमर में किसी पाते से बंदी हुई थी

सूर्य को लगा जैसे कपडे बदलने के बाद भी कुछ पौने हे नहीं बिलकुल हलके आवर रेशमी मुलायम वस्त्रो से उसे बहुत अच्छा लग रहा था पैर साथ हे उसका ज्यादातर सरीर निर्वस्त्र लग रहा था छोड़ा सीना खुली बाजु से सूर्य का देव सवरूप आकर्षण सरीर

सूर्य चुपचाप खेमे की आवर भाड़ गया जहा का माहौल किसी सही महल जैसा था बहार से जो सदर्न खेमा नजर आ रहा था अंदर से किसी भव्य महल के भव्य कक्ष सामान था

सूर्य ....... हम्म्म मायावी सही कक्ष

सेविका ...... आप आसान ग्रहण करे श्रेष्ठ ृजकुमारिया आती हे होंगी

कुछ देर बाद देवयानी किरण मानसी तीनो अलग अलग कक्ष से त्यार हो कर बहार निकल तीनो हे बाला की खूबसूरत लग रही थी सूर्य की नजरे तो किरण से हैट हे नहीं रही थी

तीनो के अंग अंग उन परदासश्री रेशमी वस्त्रो से जनक रहे थी किरण का सीना सामान्य हे लग रहा था क्यों की उसके सीने का साइज दोनों से काम था पैर मानसी काफी हॉट लग रही थी

वही देवयानी जी का सीना आवर बैक इन सब से भरी होने से कुछ अदीख हे आकर्षित लग रहे थे

किरण एक बार मुस्कुरा कर सूर्य को देखती है फिर देवयानी जी आवर मानसी को

देवयानी जी ........ आप सभी का नृत्य साला में स्वागत है आसान ग्रहण कीजिये आवर सुक्रलोक की मायावी नित्य कलाकारों की कला का आनंद लीजिये

सूर्य किरण मानसी को अपने साथ लिया जमीं पे लगे गद्देदार आसान पे बेथ जाता है पास वाले पे देवयानी जी

तभी देवयानी जी के इशारा पते हे 5 महावी कन्या वह उपस्थित होती है जो सभी को हाथ जोड़ अभिनन्दन करती है उसके बाद दो मायावी कन्याओं को चढ़ 3 वह से दूसरे कक्ष की आवर भाड़ गयी

ीदार वही सेविका जो सूर्य की सेवा में थी वो देवयानी जी को उनके कान में कुछ कह कहती है

देवयानी जी के चेहरे पे उसकी बातो से कुछ मुस्कान उभर आती है देवयानी जी उसे कुछ कहती है सेविका वह से चली जाती है

कुछ देर बाद 4 चार सवर्ण गिलाश में कुछ लिया वह पहुँचती है

देवयानी जी ......... नृत्य का आनंद बिना सूरा के दौरा मन जाता है असुरो में उम्मीद है आप भी हमारा साथ देंगे

सूर्य ......... जी अवश्य किन्तु किरण वह मानसी सूरा पैन नहीं करती उम्मीद है इस से आपको आपत्ति नहीं होगी

देवयानी जी ...... बिलकुल नहीं हमें कोई आपत्ति नहीं है है ये बात आवर है की असुरो में ये सब सामान्य होता है सेविका इनके लिया सात्विक पेय का पारबन्द कर देंगी आप निश्चित रहे

सूर्य भी सूरा का पत्र उठा देवयानी जी की आवर इशारा करता है जैसे की वो देवयानी को चियर्स कर रहा हो

डेरी डेरी सभी नृत्य का आनंद लेने लगते है

सूर्य किरण आवर मानसी को मानसिक संपर्क से एक सन्देश देता है जिस से दोनों हे सतर्क हो जाती है

डेरी डेरी मदिरा आवर खूबसूरत नृत्य से देवयानी जी आवर सूर्य दोनों हे हलके हलके जुमने लगे थे

एक के बाद एक मायवी कन्या नृत्य करती रही साथ हे मदिरा का डोर भी चलता रहा

देवयानी जी ...... अगर आपकी इच्छा है तो आप नृत्य कर सकते है हमें भी पृथ्वीलोक का नृत्य देख कर पर्शान्ता होगी

सूर्य ...... इच्छा तो है किन्तु हमें इस तरह के संगीत पे नृत्य करना नहीं आता

देवयानी जी ...... आप अपनी इच्छा के संगीत पे नृत्य कर सकते है

सूर्य किरण का हाथ थम आगे बढ़ता है आवर अपने फ़ोन से एक गण प्ले कर अपनी सकती का प्रयोग कर उसकी आवाज बड़ा कर डांस करने लगता है

देवयानी जी सूर्य आवर किरण के डांस को बड़े गौर से देख रही थी क्यों की दोनों के सरीर डांस करते हुए लगभग चिपके हुए थे सूर्य के सीने पे उभरती मासपीसियो को देख देवयानी जी अपने होंठ काटने लगी क्युकी उनपे मदिरा का असर जो हो रहा था

कुछ देर बाद देवयानी उठी आवर सूर्य के सामने आ पहुंची

देवयानी जी .......... हमने इस तरह का नृत्य पहले कभी नहीं देखा क्या आप हमें ये नृत्य शिखा सकते है

सूर्य ....... आपने तो देखा हे था ये किस तरह का नृत्य है फिर भी आप शिकन चाहती है

देवयानी जी ....... जी हमने सब देखा है

किरण ........ कुंवर जी हम मेहमान है तो ये मेजबान है हमें भी इनकी इच्छाओ का मान रखना चाइये

सूर्य ....... जी ठीक है फिर चलिए

सूर्य एक बार फिर से गाना प्ले करता है

देवयानी जी सूर्य का हाथ थम उसके इसारे पे डांस करने लगती हाउ

जैसे हे सूर्य देवयानी जी को हलके हाथ से अपनी आवर कीचता है देवयानी जी का भरी भरकम खूबसूरत सरीर सूर्य के सीने जा लगता है

एक पल दोनों के नजरे टकराई दोनों के आँखों में मदिरा का सुरूर नहर आ रहा था

मानसी ........ दीदी मुझे ऐसा क्यों लग रहा की देवयानी जी कुंवर जी को किसी आवर नजर से देख रही है

किरण ....... चुप मानसी वो नशे में है आवर इतनी देर से कुंवर जी के साथ है कुछ तो असर होगा हे उनका मन साफ नहीं होता तो अभी तक तो सायद

मानसी. ...... ची दीदी आप भी न

किरण. ........ तुम्हे तो बाद में देखती हूँ मैं

ीदार सूर्य के सरीर में भी चिंगारी या उठने लगती थी पहले किरण के टाइम तो वो नियंत्रण में था पैर अब डेरी डेरी सूर्य की गर्मी भड़ने लगी थी जिसका असर देवयानी जी पे भी हो रहा था क्यों की बार बार सूर्य का अंग उन्हें अपने नितम्बों पे मह्सुश हो रहा था

सांसे उनकी भी भरी हो रही थी जिनसे उनका सीना कुछ ज्यादा हे ऊपर निचे होने लगा वो तो शुक्र है गाना पूरा हो गया

आवर सूर्य आवर देवयानी जी ने रहत की साँस ली

देवयानी जी ......... आपका सुक्रिया सूर्य अब हमें भोजन कर विश्राम करना चाइये

सूर्य ....... जी बिलकुल सही रात्रि भी हो गयी है

देवयानी जी ....... सेविका हम सभी का सात्विक भोजन लगा दो

देवयानी जी उन मायावी कन्याओं को कुछ सोने के सीके देती है उनके नृत्य से खुश हो कर सूर्य भी उन्हें कुछ सोने के सीके उपहार में देता है

कुछ हे देर में चारो सात्विक भोजन करते है जिनमे खीर पूरी हलवा फल आदि मुजूद थे

देवयानी जी ......... आप अब सब विश्राम करे हम सुबह मिलते है

सूर्य की हालत ख़राब थी तो किरण ने सूर्य को मानसी के साथ जाने को कहा

मानसी ........ थैंक यू दीदी

किरण ......... थैंक यू की बच्ची जा कर मज़े कर

सूर्य ........ थैंक्स किरण बाकि नजर रखना सब तरफ

किरण ....... आप चिंता न करे अगर कोई हमारी आवर बढ़ा तो मैं देख लुंगी

सूर्य मानसी के साथ उसके कक्ष में आते हे मानसी को उठा चूमने लगता

मानसी आवर सूर्य के सरीर से एक के बाद एक वस्त्र अलग होते गए सूर्य कुछ ज्यादा हे उत्तेजित हो रहा था

मानसी को भी यही चाइये जल्दी हे मानसी के सरीर पे जगह जगह सूर्य अपने नीसाण बनता हुआ मानसी के महकते गुलाब के घूमने लगता है

मानसी ........ उम्म्म्म अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कुंवर जी आप मुझे हर बार इसी तरह बेहरहमी से प्यार किया कीजिये

सूर्य आज जैसे अपने कण्ट्रोल में नहीं था उसने मानसी की योनि के दोनों होंठ चूसते हुए हलके हलके जख्मी भी कर दिए थे

पैर मानसी को दर्द की जगह आवर उत्तेजना बड़ा रहे थे वो हलके जखम

सूर्य उठा आवर अपना बुरी तरह से अकड़ा हुआ लिंग मानसी के मुँह के सामने कर दिया बिना पल गयावट मानसी पूरी सीडट से उसे चूसने लगती

सूर्य मानसी के निपल अपनी उंगलियों में उमेठता हुए कर्स बूब्स को चूस चूस कर लाल करने लगा जगह जगह काटने के दांतो के हलके नीसाण भी

10 मिनट्स में मानसी के दोनों बूब्स बुरी तरह से लाल हो गए

मानसी सूर्य को बीएड पे लिटा कर सूर्य के विकराल लैंड को अपनी छूट पे रगड़ते हुए एक झटका निचे की आवर देती है

मानसी ........ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कुंवर जी मेरी योनि

जल्दी जल्दी में प्रहार कुछ तेज हे हो गया जिस से मानसी की भी दर्द भरी हलकी चीख निकल गए

ककुछ हे देखो में मानसी सामान्य हो गयी सूर्य बिना रुके लगातार मानसी को पुरे कक्ष के कोने कोने में चुदाई करता है

पौने 2 घंटे में सूर्य ने मानसी की योनि 2 बार अपने वीर्य से भरने के बाद उसकी उत्तेजना संत हुई मानसी की भी हालत कुछ ख़राब हो गयी कोई सामान्य स्त्री तो सायद इस वक़्त आखरी सांसे गईं रही होती

मानसी ....... आपने तो मेरी हालत हे ख़राब कर दी अब सामजी क्यों दीदी ने आपको मेरे साथ सोने को कहा

सूर्य ......सॉरी मनु सायद मदिरा के चलते मैं कुछ ज्यादा उत्तेजित हो गया था आवर सरीर उत्तेजना तुम पे निकल दी

मानसी ........ कोई बात नहीं कुंवर जी मैं आपकी बीबी हे आपका ख्याल रखना मेरा करम है वैसे मुझे भी आपका ऐसा रूप बहुत अच्छा लगता है आप जब भी मुझे इस तरह से खुश करते है मुझे बहुत सुकून मिलता है

सूर्य ......... हम्म्म जनता हूँ मनु तुम्हारे असुर अंश को इस तरह से संतुष्टि प्राप्त होती जिस से तुम्हारी उग्र ऊर्जा संत हो जाती है जिस से तुम्हारा मांस भी संत रहता है

अभी मानसी कुछ बोलने हे वाली थी की सूर्य ने उसे चुप कराया आवर फ़ौरन अपने पे आवर मानसी पे जादू कर उसे वस्त्र पहनाये

सूर्य ........ स्वीटी

अगले हे पल किरण वह उनके सामने थी

किरण ........ उनमे से कुछ लोग हमारी आवर भाड़ रहे है

सूर्य ....... तुम दोनों आराम करो इन्हें मैं देखता हूँ

किरण ....मैं भी आपके साथ चालू

सूर्य ....... नहीं स्वीटी उन्हें मैं देख लूंगा आवर निर्भय असुर के क्रोध को भी निकलना है पैर पहले उन्हें हमला करने देना है तभी हम कुछ कर सकते है

अनयथा बात बिगड़ सकती है

किरण ........ जी कुंवर जी कैसा आप ठीक समजे वैसा कीजिये ......................

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अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........................
 
थैंक यू दोस्तों आप सब के प्यार आवर सपोर्ट के लिया दिल से धन्यवाद दोस्तों

आप सभी के सहयोग आवर सपोर्ट की वजह से हे मैं स्टोरी लिख प् रहा हूँ आपके कमैंट्स का रिप्लाई न कर पाने के लिया माफ़ी चाहता हूँ दोस्तों

सच तो ये है की अभी कोई न कोई हर समय साथ रहता है कभी कोई परिवार से तो कभी कोई बहार से मिलने आता रहता है ऐसे में फ़ोन से ज्यादातर दुरी बनाये रखनी पड़ती है

अपडेट भी 2,से 3 बार में कम्पलीट कर पता हूँ इस लिया फ़िलहाल कुछ दिन आपके कमैंट्स का रिप्लाई करना संभव नहीं है

उम्मीद है आप सब इस से नाराज नहीं होंगे आवर पहले के तरह हे हे आपका पूरा सपोर्ट रहेगा

थैंक यू एवरीवन ...........🌹🌹🌹🌹🌹
 
अपडेट 261

अभी मानसी कुछ बोलने हे वाली थी की सूर्य ने उसे चुप कराया आवर फ़ौरन अपने पे आवर मानसी पे जादू कर उसे वस्त्र पहनाये

सूर्य ........ स्वीटी

अगले हे पल किरण वह उनके सामने थी

किरण ........ उनमे से कुछ लोग हमारी आवर भाड़ रहे है

सूर्य ....... तुम दोनों आराम करो इन्हें मैं देखता हूँ

किरण ....मैं भी आपके साथ चालू

सूर्य ....... नहीं स्वीटी उन्हें मैं देख लूंगा आवर निर्भय असुर के क्रोध को भी निकलना है पैर पहले उन्हें हमला करने देना है तभी हम कुछ कर सकते है

अनयथा बात बिगड़ सकती है

किरण ........ जी कुंवर जी कैसा आप ठीक समजे वैसा कीजिये ................

अब आगे ...........


दिल्ली ........ आज सूर्यकांत जी के घर में किसी त्यौहार के जैसा माहौल था आवर हो भी क्यों न सभी की मंचाई मुराद जो पूरी हो गयी हो भले हे इस सब के पीछे की वजह सूर्य हे क्यों न हो यहाँ केवल 2 हे इंसान थे जिन्हे इन खुशियों की असली हक़दार का पता था जिसकिले सहयोग के बिना ये सब संभव नहीं था एक थी दीप्ती दूसरी राधिका की माँ मरस .मधु जी

दीप्ती राधिका सानिया माया चारो राधिका के रूम में थी राधिका को घेरे हुए उनकी खिचड़ी करने में लगी हुई थी

सानिया ....... भाबी एक बात बताइये आप अभी एक मंथ की प्रेग्नेंट है

क्या ऐसे में आप बच्चे को मह्सुश कर प् रही है

या उसके होने अहसास कर प् रही है

माया ........ सोना ये कैसी बात कर रही हो तुम ये तुम डॉक्टर की पढाई कर रही हो फिर भी तुम्हे पता नहीं है क्या

सानिया .......... डार्लिंग ऐसी बात नहीं है मन की हम दोनों मेडिकल स्टूडेंट्स है हमें इस बारे में काफी जानकारी है पैर वो सब थ्योरी है प्रक्टिकली हमने ये मह्सुश नहीं किया है

दीप्ती ........ओह्ह्ह हो तो तुम्हे इतनी जल्दी प्रैक्टिकल करके देखना है पहले अपनी पड़े पूरी करो फिर ऐसे ख्याल लाना अपने मन में

सानिया ........ दीदी आप भी न कुछ भी बोलती हो मैंने कब कहा की मुझे ये सब प्रैक्टिकल करके देखना है

भाबी आप बताओ क्या आपको बच्चे को ले कर कुछ खाश आभाष होता है

राधिका ......... मैं मैं क्या बताऊ

दीप्ती ..... अब बता भी दो राधिका वर्ण ये पीछा नहीं छोड़ने वाली

दीप्ती ....... मुझे नहीं पता दीदी सच में की माँ बनने पे कैसा मह्सुश होता है

ये मेरा भरम है या सच पता नहीं पैर जब से पता चला है के मैं माँ बनने वाली हूँ मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है जैसे आज मैं पूरी हो गई हूँ मेरे सरीर में एक नया जीवन पल रहा है ये जान कर मैं कितनी खुश हूँ मैं नहीं जानती उसे सांडो में कैसे बताना चाइये मुझे सायद ठीक से बता भी नहीं पौन

दीप्ती ....... ये तुमने सच कहा राधिका हम लड़किया सदी के बाद भी तब तक ादुरि रहती है जब तक माँ नहीं बन जाती हम क्या कोई भी स्त्री जब तक मातृत्व के ये क्षण मह्सुश नहीं करती वो पूर्ण स्त्रीत्व को प्राप्त नहीं कर पति मुझे ख़ुशी की आज तुम्हे उस सुख की उन खुशियों को मह्सुश कर पाने की तुम्हारी इच्छा पूरी हुई

अभी दीप्ती कुछ आवर बोलती उस से पहले हे रूम का दूर नॉक होता है

सानिया रूम को डोर ओपन करती है तो सामने मधु जी थी

मधु जी ........ बच्ची चलो निचे चल कर डिनर कर लो

दीप्ती ...... क्या बात है आंटी जी आज आपने पापा आवर अंकल के साथ ड्रिंक नहीं की क्या आज तो ख़ुशी का मौका है

मधु जी ....... बीटा जरुरी नहीं की ड्रिंक करके हे ख़ुशी का इजहार करे आज अपने नाती की आने की ख़ुशी में मैंने ड्रिंक नहीं की आवर आगे भी अब बहुत काम हे ड्रिंक करुँगी

क्या पता मेरा नाती मुझे बेबड़ी समझने लगे हेहेहे

माया ....... क्या आप सच में इतनी ड्रिंक करती है आंटी जी

मधु जी ...... नहीं बीटा कभी कभी पैर अब सोच लिया है की वो भी काम कर दूंगी आवर आज तो मुझे अपनी बेटी के साथ सोना है तो इसके साथ ड्रिंक करके यो नहीं सो सकती न

दीप्ती ....... चलो फ्रेश हो जाओ हम सब डिनर करते है

माया . ....... दीदी हम क्यों न सूर्य के घर में रुके रात में वैसे भी घर पूरा खली हे है

दीप्ती ...... ठीक है पैर मैं तुम्हारे साथ बीएड शेयर नहीं करुँगी तुम दोनों की आदत बहुत ख़राब है

राधिका ......हेहेहे क्या सच में दीदी इनकी आदत इतनी ख़राब है

सानिया ......ऐसा कुछ नहीं है भाबी वो अकेले सोने की आदत है न तो ऐसे में रात में हम दोनों हे कभी कभी पेअर चलने लगती है

( अब सानिया ये तो कह नहीं सकती की माया आवर ुसकुसको रात में किस तरह नुदे हो कर सोने की आदत दाल दी है माया ने आवर कब वो नींद में एक दूसरे के अंगो के साथ खेलने लगती है )

दीप्ती ..... हेहेहे है कुछ ज्यादा हे पेअर चलती है ये दोनों

चारो एक एक करके बाथरूम से हाथ मुँह धो कर निचे चल देती है

मधु जी आवर दीप्ती दोनों हे सभी के लिया खाना लगाती है सूर्यकांत जी आवर गोविन्द जी भी ड्रिंक कर खाने के लिया आ गए थे

केवल दीप्ती माँ ( आंटी जी ) वह मौजूद नहीं थी

दीप्ती ...... पापा माँ कहा है दिखाई नहीं दे रही है

सूर्यकांत जी ..... बीटा तुम्हारी माँ रूम में है वो सूर्यगढ़ बात कर रही है सूर्य की माँ आवर दादी जी से बस कुछ देर में आती हे होंगी

कुछ देर बाद आंटी जी भी वही आ पहुंची

सूर्यकांत जी ......... क्या कहा तै जी ( ठकुराइन जी ) ने कब हम वह आ सकते है

आंटी जी ......... उन्होंने तो कल हे आने को कहा है जी वो कह रही थी की उन्हें भी कुछ दिन बाद की पूजा राखी है तो दोनों बचो की साथ में हे पूजा रखते है

सूर्यकांत जी .....दोनों बचो की पूजा मतलब

आंटी जी ...... मतलब की आपका दूसरा बीटा भी बाप बनने वाला है उदार भी आप दादा बनने वाले है कल सुबह हे किरण ने बताया है उन्हें की वो भी माँ बनने वाली है वो तो सूर्य किरण आवर मानसी को अचानक से जरुरी काम आ गया इस लिया जाना पड़ा नहीं तो वो भी कल की हे पूजा रख रहे थे

सूर्यकांत जी ....... ये लड़का तो बड़ा फ़ास्ट निकला हर मामले में हाहाहा

गोविन्द जी ...... किसकी बात कर रहे है आप भाई साहब

मधु जी ..... आपके छोटे जमाई की आवर किसकी

गोविन्द जी ..... भाई हमारी तो एक हे बेटी है जो हमारे सामने है दूसरी बेटी कब पैदा हुई हमें तो पता भी नहीं

मधु जी ....... तो अब समाज लीजिये की सूर्य ठाकुर आपका दामाद है आवर किरण बिटिया आपकी बेटी क्यों भाई साहब

सूर्यकांत जी ....... दामाद बनाना आवर बेटी बनाना तो ठीक है संदंन जी पैर हमें तो भाई साहब न कहो हाहाहा

सूर्यकांत जी की बात सुन कर मधु जी जहा शर्मा गयी वही दीप्ती राधिका माया सानिया गोविन्द जी आवर आंटी जी की बंशी गूंज उठी

आंटी जी ..... इनका बस चले तो मधु तुम्हे अभी बाघा ले जाये ये अपने साथ

गोविन्द जी ..... ऐसा गजब न करना भाई साहब एकलौती बीबी है मेरी बुढ़ापे में दूसरी की उम्मीद भी नहीं है आवर न कोई छोटी बड़ी साली है मेरी

आंटी जी ..... बस कीजिये क्यों मेरी बहन को सत्ता रहे है आप खाना ठंडा हो रहा है

अब सभी हलके फुल्के मजाक के साथ खाना फिनिश करते है

दीप्ती ...... माँ हम स्वीटी वाले घर में सोने जा रहे है

आंटी जी ...... ठीक है बेटी पैर टाइम से उठ जाना आवर याद से कल छुट्टी की एप्लीकेशन दाल देना परषो सुबह सूरतगढ़ जाना है आवर आप भी जी

सूर्यकांत जी ...... ठीक है जी हम भला आपकी बात ताल सकते है क्या जी मैं गेस्ट रूम में सो रहा हूँ गोविंद जी के साथ

सानिया दीप्ती माया तीनो चाबी ले सूर्य के घर की आवर निकल गयी जो बस एक दिवार के उस पार हे था

ीदार राधिका जी भी अपने रूम में आ कर अपनी निघ्त्य दाल कर अपने बिस्तर पे आ लेती आवर बीएड लेम्प के निचे की दर्ज से एक 4क्ष6 की तस्वीर निकल कर उसे देखने लगती है

राधिका ......... मैं सबसे पहले ये खुसखबरी आपको देना चाहती थी पैर आप तो यहाँ है हे नहीं हमारे वह आने तक आप लौट आना प्लेसेस मैं सबसे पहले आपको हे देखना चाहती हूँ

दरशल वो तस्वीर सूर्य आवर राधिका की थी जो सूर्य ने राधिका के साथ ली थी जब सूर्य किरण राधिका रोहन u.s.a हनीमून पे थे इस 4क्ष6 की तस्वीर में किरण सूर्य राधिका इशू करम में एक दूसरे का हाथ पकडे हुए थे दोनों लड़किया सूर्य से सटी हुई थी

मधु जी कब रूम में आई राधिका को इस बात का पता भी नहीं चला वो रो तस्वीर में इस कदर खोटी थी की कब मधु जी बीएड किनारे कड़ी अपनी बेटी को सूर्य की तसवीर से बात करते देख रही थी

मधु जी ......... हम्म्म हम्म

राधिका ......... माँ आप आप कब आई

मधु जी ....... जब मेरी बेटी अपने सपनो के राजकुमार की तस्वीर से बात कर रही थी तब आई

राधिका ..... वो... वो ... माँ

मधु जी ...... हेहेहे कुछ भी कहने की जरुरत नहीं बेटी तुम्हारी जगह कोई आवर भी होती तो सायद इस पल अपनी माँ को नहीं अपने प्यार को अपने सामने देखना चाहती इसमें कुछ गलत भी नहीं है

राधिका ...... पैर आप मेरी माँ भी तो है मुझे इसका ख्याल.......

मधु जी ....... हेहेहे मैं तुम्हारी माँ भी हूँ आवर राजदार सहेली भी अब ठीक से लेटो मुझे भी केतना है बूढी होने लगी हूँ तो जल्दी थक जाती हूँ

राधिका ......आप तो अभी भी जवान है माँ जैसे की मेरी बड़ी बहन हो

मधु जी आज सायद अलग हे मूड में थी जो राधिका के हर सवाल के जवाब के साथ एक सवाल या ये कहो एक मस्ती भरा मजाक भी कर रही थी जैसे वो सच में माँ बेटी न हो कर खाश शी लिया थी

मधु जी ....... न बाबा न मैं तुम्हारी माँ हे सही क्या पता बड़ी बहन बनने के बड़े नुकसान उठाने पड़े

राधिका ....... सच में माँ आप अभी भी काफी जवान लगती है आपकी आगे में बहुत से औरतो के पेट बहार निकल आते है आवर

मधु जी ......... आवर क्या हेहेहे

राधिका थोड़ी आसाराम आवर हिचक के साथ बोलती है

राधिका ...... आवर उनके ब्रैस्ट भी भरी आवर ढेले होने लगते है पैर आप को देख ऐसा नहीं लगता

मधु जी ...... हेहेहे बीटा ये सब उचित खान पान आवर योग का असर है वर्ण चर्बी तो मेरे पेट पे भाड़ जाती है रही बात सीने की तो है अभी भी मेरे सीने में थोड़ी कठोरता है तुमने ज्यादा टाइम ढूढ जो नहीं पिया था हेहेहे वैसे तुम्हारा सरीर बह बहुत खूबसूरत है राधिका कही न कही मेरी जवानी के दिनों से भी बेहतर पैर अब जब तुम प्रेग्नेंट हो तो तुम्हारा सरीर आवर भी निखार जायेगा आवर कुछ भर भी जायेगा

आवर इस बिच एक दो बार दामाद जी ने म्हणत की तो आवर भी खूबसूरती भाड़ जाएगी

राधिका ...... उनसे कुछ नहीं उन वाला माँ

मधु जी ...... हेहेहे मैं रोहन की बात नहीं कर रही सूर्य की बात कर रही हूँ राधिका जिसने एक साथ दो दो लड़कियों को घराब से कर दिया कुछ हे दिनों में

राधिका ........ वो तो हम माँ वो सरीर से हे नहीं वह से भी पुरे मर्द है

मधु .......क्या कहा

राधिका को अब समाज आया की वो क्या बोल गई है आवर किसके सामने यहाँ उसकी कोई शैली या दीप्ती नहीं बल्कि उसकी खुद की माँ है सामने

राधिका ........ सो सॉरी माँ मुझे ख्याल हे नहीं रहा दीप्ती दीदी समाज कर.......

मधु जी ...... हेहेहे चलो ये तो पता चला की मेरा दूसरा दामाद पूरा मर्द है जो मेरी दोनों बेटियों को पूरा खुश रख सकता है मुझे आवर क्या चाइये .वैसे ये दीप्ती का क्या चाकर है कही वो भी तो

राधिका ...... नहीं माँ वो उनसे प्यार करती है पैर साथ ये भी समझती है की वो उनके कभी नहीं हो सकते जैसे मेरे नहीं हो सकते है उनका प्यार हमारे जीवन में बारिश की तरह है माँ

मधु जी ........ देख बेटी तेरी ये माँ हमेशा तेरे हर सुख दुःख में साथ है पैर कभी भी ऐसा कुछ मत करना जिस से इस घर या उस परिवार के दोष लगे

सूर्य बहुत अच्छा लड़का है तुमने खुद सूर्य के सामने पहल की आवर जहा तक दीप्ती की बात है वो समझदार बच्ची है भले हे उसके दिल में सूर्य के अलावा कोई नहीं हो आवर आगे भी सायद हे कोई उस जगह पहुंचने पात्र जहा सूर्य ने जगह बनाई है पैर वो समझदार बची है इस लिया उसका दर नहीं है मुझे

दर है तो तुम्हारा क्यों की तुम कभी कभी बेफखूफी कर जाती हो

राधिका जी ...... माँ मैं ऐसा कुछ नहीं करुँगी जिसका आपको दर हो मेरी ख़ुशी से ज्यादा मुझे उनकी इज्जत पहाड़ी है आवर फिर उन्होंने मुझसे प्यार करने का वादा किया है मेरे लिया यही बहुत है

मधु जी. ....... अच्छी बात है जल्दी हे मिलने वाले हो तो अपनी सभी इच्छा पूरी कर लेना हेहेहे मैं इंतजाम कर दूंगी तब तक खुद पे कभी रखना

राधिका .....आप भी न माँ कुछ भी बोलती हो मैं आपकी बेटी हूँ

मधु. ...... आवर दोस्त भी चलो गुड नाईट बीटा 12 से ऊपर टाइम हो गया है

राधिका ...... Ok माँ गुड नाईट माँ

उदार सूर्य वाले घर में कुछ आवर हे चल रहा था

दीप्ती ....... इन दोनों का कुछ नहीं हो सकता है पता नहीं कितनी गर्मी है दोनों में डॉन एक दूसरे के वह कहा चाट रही थी ची इनके चाकर में मेरी मुनिया भी रो रही है अब तो कुछ करना पड़ेगा नहीं तो नींद आने से रही

दीप्ती जो एक पतली सी निघ्त्य पहने हुए थे बिना ब्रा के वो उतर कर पेंटी में बाथरूम में जाती आवर पेंटी उतर कर वही रखे बॉडी लोशन निकल कर अपनी छूट पे लगा कर एक ऊँगली अंदर बहार करने लगती है

दीप्ती ...... उफ्फ्फ्फ़ ये खुजली आज इन दोनों के चाकर में ऊँगली करनी पद रही है अब तक किसी तरह से खुद पे काबू रखा था पता होता ये दोनों इस हद तक इंटिमेंट होती है तो इनके बगल वाले रूम में सोती हे नहीं

अब दीप्ती को अपनी गलती का आभाष हो रहा था की क्यों उनकी आवाज सुन कर उसने दोनों के लेस्बियन सेक्स देखा

न वो ऐसा करती आवर न उसकी मुनिया में इतनी जोरो की खुजली उठी होती

दीप्ती शावर ों कर भीगते हए तेजी से अपनी बिच वाली ऊँगली तेजी से अंदर बहार करने लगती है साथ अपने अकड़े हुए निप्पल्स को रगड़ते हुए

हफनते हुए झड़ने लगती है

दीप्ती की सांसे बहुत जोरो से चल रही थी उसके पेअर बुरी तरह से कैंप रहे थे कुछ देर शावर के निचे वक़्त गुजरने के बाद वही रखे टॉवल से सरीर पांच कर किसी तरह बीएड तक पहुंची आवर ुशी तरह लेट गयी कब बोजिल आँखे बंद हुए दीप्ती को सुध तक न हुई

सुक्रलोक ...........

सूर्य खेमे से निकल कर कुछ दुरी पे पहुंचा तो सामने करीब 60 असुर थे हथियारों के साथ जभी एक असुर उन सबसे आगे था जिसके एक हाथ में बड़ी सी तलवार थी आवर दूसरे में सूरा से भरी सुराही थी

सूर्य निर्भयासुर को स्वयं से अलग कर उसे असुरो का अंत करने का बोल देता है निर्भयासुर उनकी आवर भाड़ रहा था ठीक उनके सामने जा कर खड़ा हुआ उसका चेहरा पहले से उसके नकाब जैसे चोगे से देखा हुआ था आवर ऊपर से रात का अँधेरा

निर्भयासुर ........ कोण हो तुम लोग आवर तुम्हारी निकट कैसे हुई इस आवर आने की जानते नहीं की इस आवर कोण है

तभी उनके आगे जो उनका लीडर खड़ा था वो आगे बढ़ा आवर निर्भयासुर से कुछ दुरी पे उसके सामने आ खड़ा हुआ

लीडर होने हाथ में पकड़ी सुराही में बची सूरा ( मदिरा ) अगले हे पल गाठ गाठ करके अपने गले से निचे उतर लेता है आवर उस सूरा के पत्र को बहती हुई नदी में फेंक देता है

लीडर ....... तुम कोण हो दिखने में तो हम में से हे एक असुर्योधा लगते है

निर्भयासुर ........ मैं कोण हूँ उस से कोई फरक नहीं पड़ने वाला अपने जीवन को सुरक्षित रखना चाहते हो तो अभी इसी वक़्त लौट जाओ अन्यथा मुझे कैद है की कल का सूर्यौदय तुम सब के नसीब में नहीं होगा अभी भी वक़्त है

लीडर ........ तुम एक असुर हो कर हमें रोक रहे हो क्या तुम्हे लगता है तुम हम सब का सामना कर पाओगे

लीडर आगे कुछ बोलता तभी निर्भयासुर आवर असुरो के कानो में एक खनकती हुई आवाज पड़ती है जो की किसी स्त्री की थी

निर्भयासुर उस आवाज को ायचे से पहचानता था वो कोई आवर नहीं देवयानी थी

देवयानी ........... तुम सब का इतना दशांश जो हमारे खेमे पे आकर्मण करने की हिमत करो क्या तुम्हारे मन में हमारे क्रोध का कोई भय नहीं है

लीडर सहित सभी असुर दर के मरे कंपनी लगे क्युकी वो बहुत अच्छे से जानते थे की देवी देवयानी का क्रोध कैसा है

देवयानी ...... हमने बहुत समय से कोई योध नहीं देखा हम भी तो देखे नरकासुर के राज में असुर्योधा कितने सक्षम है

लीडर ......हमें क्षमा करे हम आप से योध नहीं कर सकते राजकुमारी जी

देवयानी जी ...... हम भी तुम्हारे जैसे तूच असुरो पे अपना क्रोध व्यर्थ नहीं करना चाहते हम केवल योध देखना चाहते है

निर्भयासुर ........ क्या इन्हें आपका सहयोग है देवयानी जी

देवयानी जी ......... नहीं हम किसी के पक्ष में नहीं है हम केवल दर्शक मात्रा है आवर योध का परिणाम जो भी हो इस से आगे कोई भी असुर हमारे खेमे की आवर एक भी कदम बढ़ाया तो उसे नरकलोक हम स्वयं भेजेंगे

तभी वह सूर्य भी पहुँचता है जिसने देख देवयानी जी छिनक जाती है

देवयानी जी ......आप यहाँ हमें तो लगा आप विश्राम कर रहे है

सूर्य ...... हमें पहले हे इनके विषय में ज्ञात हो गया था हम बस इनकी प्रतीक्षा कर रहे थे हम नहीं चाहते थे की हम स्वयं इस योध की पहल कर असुरगुरु सुक्राचाया का किसी भी तरह अपमान करे अगर ये लोग अभी बुइ लौटने को त्यार रहते है तो हम इन्हें बिना कोई हानि पहुचाये जाने देंगे आवर अगर फिर भी ये योध चाहते है तो इनके लिया हमारा असुर अंश हे पर्याप्त है हम भी आपकी तरह केवल दर्शक मात्रा हे है

देवयानी जी ...... तुम लोगो ने सुन लिया न अगर अभी भी जीवित रहना चाहते हो तो क्षमा मांग कर लौट जाओ आवर योध चाहते हो तो योद्धा तुम्हारे सामने खड़ा तुम सब में इतनी तो मर्दानगी बची होगी जो सब मिल कर एक यौद्धा का मुकाबला कर सको चाहो तो अपने बाकि असुर साथियो को भी बुला सकते हो

( सूर्य ...... हमें ऐसा क्यों लग रहा की जैसे देवयानी जी चाहती है की ये योध हो उन्हें देख कर लग रहा है जैसे वो हमारे पक्ष में होते हुए भी असुरो को बड़का रही है योध के लिया हम्म्म तो ये मतलब है अच्छा है इसे भने निर्भयासुर को हाथ खोलने का मौका भी मिल जायेगा आवर निर्भयासुर का दर भी बना रहेगा )

निर्भयासुर ........ अपने बाकि असुर साथियो को भी बुला लो सायद कुछ देर तो योध कर पाओगे मेरा साथ

कुछ हे देर में बाकि बचे करीब 200 के आस पास आवर असुर वह आ पहुंचे

सूर्य ....... देवयानी जी इन सभी योद्धाओ के बहार एक कवच का निर्माण कर दीजिये ताकि कोई भी योद्धा न भाग पेज फिर चाहे वो निर्भयासुर हो या बाकि कोई योद्धा

तभी ब्लैक ड्रैगन निर्भयासुर के पीछे आ खड़ा होता है

देवयानी जी ....... ये तो ब्लैक ड्रैगन है

सूर्य ......... है ये ब्लैक ड्रैगन मानसी का वहां है आवर निर्भयासुर मानसी संग मिलान से प्राप्त असुर अंश है समाज लीजिये दोनों हे मानसी से जुड़े है

देवयानी जी एक आसुरी माया का प्रयोग कर काफी दूर तक एक घेरे का निर्माण करती है जिस से अब कोई भी बहार नहीं निकल सकता था जब तक की योध का अंत न हो जाये

सूर्य ने भी एक जादू का प्रयोग किया जिस के चलते किसी भी असुर का रकत भूमि पे गिरने से पहले हे गायब हो जायेगा सरीर तो वैसे भी ब्लैक ड्रैगन की भूख मिटने के लिया था

देवयानी जी ........ किसकी प्रतीक्षा है असुर वीरो सत्रु तुम सबके समक्ष खड़ा है

देवयानी की बात सुन 20 के करीब असुर सैनिक निर्भयासुर की आवर भले तलवार मुग्दल आदि के साथ भाड़े

( सूर्य ...... निर्भयासुर अपने क्रोध से मुक्त होने का इस से अच्छा मौका नहीं मिलेगा तुम्हे केवल इनका अंत हे नहीं करना है बल्कि इनकी दूषित आत्मा तक कैंप उठे इस तरह इनका अंत करना है असुरो में तुम्हारा भय भरने का स से उत्तम मौका नहीं मिलेगा साथ हे समाज लो तुम्हारे सामने असुर सैनिक नहीं बल्कि तुम्हारा हत्यारा नरकासुर है इनका भयानक अंत नरकासुर के तुम्हारा एक सन्देश होगा )

निर्भयासुर अपना एक पांव गुस्से में जमीं पे मरता है अगले हे पल जैसे वो अंतरिक्ष में जा पहुंचा हो निचे चारो तरफ दल हे दल थी

तभी निर्भयासुर किसी शातिर बाज़ की तरह निचे आता है आवर असुर दूर से हे तलवार के एक हे वॉर से अपने सामने कुछ दुरी पे खड़े 10 से ज्यादा सेनिको के सर पके तरबूज की तरह उनके सरीर से निचे गिरने लगते

जबकि निर्भयासुर तो अभी भी अपनी जगह सेनिको से करीब 30 फीड दूर खड़ा था

देवयानी जी ........ ये किस तरह की माया है निर्भयासुर तो अपने स्थान पे है फिर ये संभव कैसे हो सकता है

सूर्य ......... सामान्य आँखे नहीं देख सकती इस वॉर को देवयानी जी अपने मन को संत आवर एकाग्रचित करके के दिखिए सायद आप सफल रहे

सूर्य ने जिस तरह कहा उसमे एक तंज भी था देवयानी की लिया

सूर्य को भी कल्पना नहीं थी की निर्भयासुर तलवार बजी में इस स्टार का योद्धा होगा

देवयानी जी बड़े गौर से निर्भयासुर के परतेक प्रहार को देख रही थी

जैसे हे देवयानी को निर्भयासुर का वॉर समाज आया तो उनका मुँह खुला का खुला रह गया आँखे विषमय से फटी हुई थी

देवयानी जी ........ ये तो प्राचीन महा मायावी असुर विद्या जैसी प्रतीत हो रही है इस विद्या का प्रयोग बहुत काम हे योद्धा कर सकते है

निर्भयासुर आगे भड़ता जा रहा था आवर पीछे लाशो का अम्बर लगने लगा जिसे ब्लैक ड्रैगन बड़े हे चौ से उन असुर सेनिको के सहवो को निगल रहा था

जिदर भी तलवार चलती उदार केवल कटे फाटे अंग नजर आ रहे थे

लीडर ......... कोण है ये योद्धा किस योध विद्या का प्रयोग कर रहा है इसके अस्त्र के समक्ष असुर वीर तिनको के सामान भिखर रहे है

निर्भयासुर ......... मैं अवसर दिया था अपने जीवन की रक्षा करने के लिया किन्तु तुम सभी की नियति यही थी तो अपनी नियति का सामना करो

देवयानी जी ......... निर्भयासुर जी असाधारण योद्धा है उनका योध कोसल उच्च स्तरीय है इसमें कोई संदेह नहीं

सूर्य ....... है किन्तु आपके समक्ष निर्भयासुर आदिक समय तक टिक नहीं सकता बेसक आप खुद निर्भयासुर के योध कोसल की प्रशंशा कर रही है पैर आपने गुरुदेव शुक्राचार्य से जो ज्ञान प्राप्त किया है उसके समक्ष तो सायद मैं भी ज्यादा समय आपका सामना नहीं कर सकता

तभी लीडर की एक दर्दनाक आवाज सूर्य आवर देवयानी जी को सुनाई देती है

उसका एक हाथ निर्भयासुर के वॉर से उसके सरीर से अलग हो चूका था

लीडर ......... सभी असुर योद्धा आने असुर स्वरुप में एक साथ मिल कर वॉर करो उसपे

लीडर की बात सुन जो असुर योद्धा सामान्य रूप में अभी तक योध कर रहे थे वो सभी अपने असुर ( राक्षस ) रूप में आने लगते है देखते हे देखते उनके सरीर का आकर भढने लगता है को 12 फिट से ऊपर तो कोई 15 फिट से ऊपर अपने डरावने रूप में सामने आने लगे

देवयानी जी ......... हहहहए इस लिया असुरो को मंद बूढी कहा जाता है

सूर्य ......... क्या मतलब देवयानी जी मैं कुछ समजा नहीं

देवयानी जी .......... इन्हें जो कार्य योध के सुरुहत में करने चाइये था वो अब अंत समय में कर रहे है

अगर योध के आरम्भ में इस तरह की रणनीति से कार्य आरम्भ किया होता तो इन्हें अपने इतने आदिक असुर साथियो का अंत नहीं देखना पड़ता आवर विजय इनके पक्ष में होती खेर हम केवल दर्शक मात्रा है

सूर्य भी देवयानी जी की बात को समाज गया था पैर वो सायद उनकी बात से सहमत नहीं था इस लिया न में गर्दन हिला देता है जिसे देवयानी जी भी देख रही थी

देवयानी जी ...... आप हमद कथन से सहमत नहीं है क्या आपकी पर्तिकिर्या देखते हुए तो ऐसा हे परतीत हो रहा है हमें

सूर्य ........... आपका कथन पूर्णतया सत्य नहीं है देवयानी जी अभी आने केवल अश्रु का पूर्ण रूप देखा है एक बार निर्भयासुर का दंड नायक स्वरुप भी देख लीजिये उसके पश्चात आपको ज्ञात हो जायेगा की क्यों हम आपके कथन से पूर्णतया सहमत नहीं है

निर्भयासुर अभी तक़रीबन 40 के आसपास राक्षशो के बिच में था

सभी राक्षश निर्भयासुर को घेर कर उसपे हमला कर रहे थे तभी निर्भयासुर को अपनी पीठ से किसी चीज़ के टकराने का आभाष होता है

जब निर्भय असुर उस आवर देखता है तो पता है की एक असुर आने एक हाथ में बड़ा सा मुग्दल ( गधा टाइप का अस्त्र ) लिया था तहत दूसरे हाथ से निर्भयासुर पे अग्नि का वॉर उसके पीठ पे किया था

सूर्य ......... हाहाहाहा

देवयानी जी ....... आप इस तरह से अथश ( हैश ) क्यों रहे है

सूर्य ....... हाहाहा इस असुर योद्धा ने सबसे बड़ी गलती कर दी है निर्भयासुर पे जब कोई पीछे से वॉर करता है तब वो अपने आप में नहीं रहता है ऐसा जब भी कोई करता है निर्भयासुर को नरकासुर का चाल याद आ जाता है आवर वो अपना नियंत्रण खो देता है

जैसा सूर्य कहा ठीक वैसा हे हुआ अगले हे पल उस असुर योद्धा के सरीर के अनगिनत छोटे छोटे टुकड़े हो कर गिरने लगे

साथ निर्भयासुर का सरीर भी डेरी डेरी भढने लगता है

सूर्य .......... निर्भयासुर अब तक बहुत मनोरंजन कर लिया सिगरा करो विश्राम भी करना है हमें

निर्भयासुर अपनी तलवार को माथे से लगता है आवर कोई मंत्र बुदबुदाने लगता है जिसके प्रभाव से वो अंदरि रात आवर भी अँधेरी हो जाती है देखते हे देखते किसी को कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया बा लाल नीली आँखों के सिवाय

तभी एक के बाद एक चीख गूंजने लगती है आवर धड़ाम धड़ाम करके कुछ गिरने की आवाज आती है

अगले हे पेल एक नीली रौशनी की लकीर सी उभरी आवर एक तेज दमके के साथ देवयानी जी का बनाया हुआ कवच टूट जाता है जिस से एक तेज आवाज होती है

निर्भयासुर सभी असुरो का अंत कर घेरे को नस्ट कर बहार आता है उसका पूरा सरीर लहू से लथपथ था एक बार सूर्य को देख मुस्कुराता है आवर नदी में उतर जाता है कुछ पल बाद बहार निकलता है आवर सीधा ऊर्जा पुंज में बदल कर सूर्य के सरीर में प्रवेश कर जाता है

देवयानी जी विषमय से भरी आँखों से उसे देख रहे थी

सूर्य .......देवयानी जी योध समाप्त हुआ अब हमें चलना चाइये रात्रि का अंतिम पहर आरम्भ होने वाला है विश्राम भी आवशयक है

देवयानी जी ..... हम्म्म ये अचानक से कैसे

सूर्य ........ इस बारे में हम सुबह बात करे देवयानी जी

देवयानी जी ..... हम्म्म आवर आपके ते ड्रैगन

सूर्य ........ ब्लैक ड्रैगन अपना कार्य पूरा कर अपनी मालकिन के पास पहुंच जायेगा आप इसकी चिंता न करे देवी

सूर्य देवयानी जी खेमे में पहुंच चुके थे सूर्य सुभ्रातृ बोल किरण के कक्ष की आवर भाड़ गया जहा किरण आवर मानसी दोनों अभी भी जाग रही थी वैसे भी सूर्य को वह से गए हुए आधा घंटा हे तो हुआ था

किरण ......... आप तो जल्दी हे आ गए

सूर्य ....... तुम दोनों अभी भी जग रही हो तुम लोगो को आराम करना चाइये था

किरण ....... हम भी देख रहे थे की निर्भयासुर इनके साथ कैसे खेलता है बस इस लिया नहीं सोये

सूर्य कोई बात नहीं चलो साथ में सो जाते है तीनो

किरण ...... क्या साथ में

सूर्य ....... क्यों क्या हुआ साथ में नहीं सो सकते क्या वैसे भी बहुत नींद आ रही है मुझे

किरण .......ठीक है पैर कुछ भी ऐसा वैसा नहीं करना पहले बता देती हूँ

सूर्य ......... उम्म्म्मः don't वोर्री स्वीटी डार्लिंग आपके आदेश का अक्षर श अक्षर पालन होगा

सूर्य अपना ऊपर शर्ट नुमा वाटर उतर कर किरण मानसी के बिच आ लेता दोनों को एक एक प्यार भरा किश कर दोनों को अपने दोनों तरफ से सीने से लगाया जल्दी हे नींद की वादियों में पहुंच गया किरण मानसी सूर्य को सोया देख अपना हाथ गुमा कर कुछ करती है आवर चैन के नींद सो जाती है

देवयानी जी अपने कक्ष में आ कर अपने बत्रा बदल कर बीएड पे लेट जाती है

पैर उन्हें देख कर लग नहीं रहा था की उनकी आँखे में लेश मात्रा भी नींद हो

देवयानी जी ......... क्या पिता श्री को सूर्य के विषय में पहले से हे ज्ञात है

या वो वाकई में सूर्य की सकती को जांचना चाहते है

बाहरी रूप से ये इस स्टार के योद्धा नहीं लगते पैर निर्भयासुर केवल एक अंश है जिनके योध कोसल से अभी भी हम पूरी तरह से अनभिज्ञ है

हमें लगा था की इस योध से हम निर्भयासुर की पूर्ण सकती अच्छे से जान पाएंगे पैर हम असफल रहे ऐसे में उसके स्वामी सूर्य की ऊर्जा सकती का अनुमान लगाना भी संभव नहीं हम अपने इस एक अवसर में विफल रहे अब हमें स्वयं सूर्य से किसी अन्य मार्ग से जानना होगा की सूर्य की वास्तविक सकती क्या है .................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........................
 
दोस्तों लास्ट अपडेट के बाद एक दो जगह सवाल उठा था की क्या देवयानी जी नरकासुर के साथ मिली हुई है या जो असुर दैनिक सूर्य देवयानी के खेमे की आवर भाड़ रहे थे आकर मन के लिया क्या वो देवयानी जी की कोई योजना थी तो इसका जबाब यही है की न तो देवयानी जी नरकासुर के साथ मिली हुई है आवर न हे असुरो द्वारा सूर्य के कहे में पे किये जाने वाले आक्रमण में देवयानी जी का हाथ था .

असुरगुरु शुक्राचार्य को सूर्य किरण की वास्तविक सकती पे संदेह हो चूका था की सूर्य किरण अपनी वास्तविक सकती को गुप्त रखे हुए है इसी सकती की परख के चलते असुरगुरु ने देवयानी को सूर्य की वास्तविक सकती का आकलन करने को कहा था किन्तु देवयानी जी किसी योजना के अंतर्गत अपनी सोच को आकर देती उस से पूर्व असुरो ने कहे में पे चढाई कर दी जिस के चलते देवयानी जो को बिना किसी प्रयाश के एक सुअवसर प्राप्त हुआ सूर्य की सकती जानने का किन्तु वह निर्भयासुर के चलते ऐसा कुछ हो नहीं पाया जिसके चलते देवयानी जी सूर्य की वास्तविक सकती का आकलन कर अपने पिता को सूर्य की सकती की जानकारी दे पाए .
 
अपडेट. 262

देवयानी जी अपने कक्ष में आ कर अपने बत्रा बदल कर बीएड पे लेट जाती है

पैर उन्हें देख कर लग नहीं रहा था की उनकी आँखे में लेश मात्रा भी नींद हो

देवयानी जी ......... क्या पिता श्री को सूर्य के विषय में पहले से हे ज्ञात है

या वो वाकई में सूर्य की सकती को जांचना चाहते है

बाहरी रूप से ये इस स्टार के योद्धा नहीं लगते पैर निर्भयासुर केवल एक अंश है जिनके योध कोसल से अभी भी हम पूरी तरह से अनभिज्ञ है

हमें लगा था की इस योध से हम निर्भयासुर की पूर्ण सकती अच्छे से जान पाएंगे पैर हम असफल रहे ऐसे में उसके स्वामी सूर्य की ऊर्जा सकती का अनुमान लगाना भी संभव नहीं हम अपने इस एक अवसर में विफल रहे अब हमें स्वयं सूर्य से किसी अन्य मार्ग से जानना होगा की सूर्य की वास्तविक सकती क्या है .................

अब आगे ..........

सूर्यौदय से पूर्व हे सूर्य की आँखे नियमित समय यथार्थ भ्रम मुहूर्त में खुल जाती है

जब सूर्य ने किसी को अपने सीने पे आवर पीठ की तरफ चिपका हुआ मह्सुश किया तो सामने से किरण पूरी तरह से सूर्य के आग़ोश में बड़े हे सुकून से सोये हुए थी किरण का कुछ चेहरा सूर्य के सीने में छुपे होने के कारन दिख नहीं रहा था तो कुछ चेहरे पे भिखरे किरण के रेशमी लम्बे बालो से छुपा हुआ था

सूर्य ने बड़ी आहिस्ता से किरण के चेहरे से घने रेशमी बालो को उसके सर के पीछे किया आवर निहारते हुए हलके से किरण के कोमल मखमली गाल पे हलके से चुम्बन कर दिया

एक पल के लिया किरण का हाथ अपने गलो पे जहा सूर्य ने चुम्बन किया वह आया आवर फिर हलके से उसने अपनी आँखे खोलते हुए मुस्कुराते सूर्य के चेहरे पे जा पड़ी पैर अगले हे पल किरण ने आँखे बंद करते हुए अपना चेहरा ऊपर उठा सूर्य के होंठो को अपने होंठो में कैद कर लिया

किरण ....... सुभप्रभात कुंवर जी

सूर्य ....... सुभप्रभात स्वीटी चलो उठो आवर त्यार हो जाओ आज हम तीनो जल नाड़ी में ध्यान लगाएंगे

किरण ......क्या नाड़ी में पैर वह क्यों

सूर्य ....... जब ध्यान लगोगी तब समाज जाओगी अब फटा फैट त्यार हो जाओ

सूर्य जैसे हे बोल कर उठने लगा तो पीछे से मानसी ने सूर्य को आवर थोड़ा सख्ती से जकड लिया हलाकि अभी भी मानसी नींद में हे थी आवर सायद रात के प्यार भरे वाइल्ड मिलान को सपने में फिर दोहरा रही थी

किरण ........ हेहेहे ये पका आपको ले कर कोई सपना देख रही है इस हे मैं देखती हूँ

कहते हुए किरण ने थोड़ा हॉल सख्ती से किरण के निघ्त्य से बहार को निचले गोल नितम्भ पैर हलके से चपेट लगाई

मानसी बड़ी फुर्ती से अपने नितम्भ को सह लेट हुए उठी

मानसी ...... क्या हुआ

किरण ....... सुबह हो गयी अब तो रात के सपने देखना बंद करो मनु

मानसी ........ दीदी कितना अच्छा सपना देख रही थी आपने खामखा हे जगह दिया मुझे

किरण ....... घर पे चल कर देखना सपने जितने मर्ज़ी कोई नहीं रोकेगा चलो उठो आवर त्यार हो जाओ

सूर्य ...... मानसी फटाफट त्यार हो जाओ आज के ध्यान से तुम्हे बहुत लाभ होगा सायद तुम्हारी सकतिया आवर सरीर दोनों हे आवर भी मजबूत हो जाये

किरण मानसी को उठा कर अपने कपडे लिया कपडे के बने संअंगहर में जा कर अपने कपडे बदल लिया नहाना तो वैसे भी इन्हें नाड़ी में था हे

मानसी किरण को जाते हे उदाश हो कर सीधा सूर्य के सीने से आ लगती है

सूर्य ...... क्या हुआ मनु कोई बात है क्या तुम अचानक से उदाश क्यों हो गई

मानसी ......... कुंवर जी मुझे यहाँ अच्छा नहीं लग रहा है हम घर कब चलेंगे मुझे मम्मी की आवर बाकि सब की बहुत याद आ रही है

सूर्य ........ कोई बात नहीं वैसे तो मैं यहाँ कल तक रुकने वाला था पैर तुम कहती हो तो हम आज साम को हे चलते है ुम्मम्हा अब मुस्कुराओ सुबह सुबह मुरझाया हुआ चेहरा अच्छा नहीं लगता है मेरी मनु का

किरण ....... क्या हुआ मानसी

सूर्य ....... इसको घर की कुछ ज्यादा हे याद आ रही है स्वीटी

किरण ........ सुक्रलोक वैसे तो हरा भरा आवर खूबसूरत है पैर अपने घर संसार जैसा कुछ भी नहीं है यहाँ कुंवर जी

सूर्य ....... हम्म्म ठीक है फिर हम आज साम को हे घर के लिया निकलते है वैसे भी ड्रैगन लोक भी जाना है फिर आवर फिर परीलोक भी

किरण ....... हेहेहे आपको बड़ी जल्दी है परीलोक जाने की

मानसी .....हेहेहे दीदी कुंवर जी को बड़ी जल्दी है पारी को बीबी बनाने की

सूर्य ....... हो गया तुम दोनों का मनु जाओ आवर कपडे बदल कर आओ

मानसी अपने कपडे ले कर बदलने चल देती है

किरण ....... क्या हम सच में आ हे जा रहे है

सूर्य ...... है स्वीटी यहाँ वैसे भी कोई काम नहीं है ऊपर से जितना हम यहाँ रुकेंगे हमारी वास्तविक सकतिया किसी न किसी के सामने आने की उतनी हे ज्यादा सम्भावना होगी

मानसी सूर्य किरण तीनो हे एक साथ नाड़ी में उतारते है आवर नाड़ी के ताल की आवर भढने लगते है

अपनी सक्तियो के चलते इन्हें पानी के भीतर साँस लेने में कोई दिकत नहीं हो रही थी

सूर्य व्योमासुर जी द्वारा दी असुर मयाबी पुस्तक का आह्वान करता है जो अगले हे पल सूर्य के हाथ में थी

यहाँ तीनो जो भी बात करेंगे वो एक दूसरे से मानसिक सम्पर्क के माध्यम से करेंगे

किरण ........ ये तो बाबा की दी हुई पुस्तक है न कुंवर जी

सूर्य ........ है स्वीटी ये बाबा की दी हुई असुर मायावी विद्या आवर गुप्त रहश्यो की पुस्तक है

जैसे हे सूर्य पुस्तक खोलता है आने आप हे कुछ पाने पलटने लगते फिर एक जगह पे रुक जाते है सामने कोई मायावी यन्त्र बना हुआ था

सूर्य ध्यान से निचे लिखे मंत्रो का अध्यन करता है

फिर मानसी को एक मंत्र बताते हुए उस यन्त्र को जागृत करने को कहता है जो कुछ देर बाद पानी के ताल में जमीं से कुछ ऊपर बन जाता है

सूर्य ...... मानसी इस यन्त्र में बेथ कर ध्यान लगाओ कुछ भी हो जाये जब तक मैं न कहु ध्यान भांग मत करना

मानसी .......जी कुंवर जी

सूर्य ुशी मंत्र का सुधाकरन कर कुछ बदलाव के बाद किरण को बताता है किरण के एक बार मंत्र दोहराने से हे वह वो यन्त्र त्यार हो जाता है पैर ये यन्त्र मानसी के यन्त्र से अलग था

किरण भी यन्त्र में बेथ कर ध्यान करने लगती है

सूर्य अपने लिया मंत्र दोहरा कर उसमे ध्यान मुद्रा में बेथ जाता है

जैसे हे तीनो गहन ध्यान में जा रहे थे तीनो यन्त्र चक्रो से अलग अलग ऊर्जा निकल कर तीनो के सरीर को घेर लेती है

कुछ हे देर में जल में कुछ हल चल होने लगती है

जहा किरण के सरीर की तरफ वाइट ऊर्जा भाड़ रही थी

वही मानसी आवर सूर्य की तरफ लाल पैर दोनों में काफी अंतर था

वो ऊर्जा सूर्य किरण मानसी तीनो के सरीर में प्रवेश करने लगती है

करीब 2 घंटे बाद किरण आवर सूर्य की आँखे एक साथ खुली

दोनों की नजर एक दूसरे से मिली फिर दोनों को हे नहर मानसी की आवर पड़ी जो अभी भी ध्यान में थी आवर उसके चारो आवर लाल ऊर्जा का बवंडर जैसा बना हुआ था

किरण ......... मानसी की महावीर ऊर्जा बहुत भाड़ गयी है आवर सायद मानसी को भी इस ऊर्जा से बहुत अच्छा लग रहा तभी वो अब तक ध्यान में है

सूर्य ....... तुम्हारा सोचना सही है स्वीटी इस जल में मायावी सक्तियो के साथ साथ शुक्र लोक की ऊर्जा भी है इसका सबसे आदिलक लाभ मानसी को हुआ है पैर हमें भी इस ऊर्जा से भविष्य में काफी लाभ होगा खाश कर सरीर को मजबूत बनाने में आवर मायावी सक्तियो को समझने में

कुछ देर बाद मानसी जिस यन्त्र में बैठी थी उसमे कम्पन होने लगा जैसे ऊर्जा उसके नियंत्रण से बहार हो रही हो

सूर्य आगे भाड़ कर मानसी के मस्तिष्क के मध्य भाग पे अपना अंगूठा रखता है आवर उसे के साथ मानसी डेरे से अपनी लाल आँखे खिलती है

जैसे वो मानसी की आँखों को न देख कर वह 2 लाल रूबी को देख रहा था

कुछ देर आवर सूर्य अपना हाथ ुशी मुद्रा में रखता है डेरी डेरी मानसी सामान्य होने लगती है

मानसी ....... मुझे क्या हुआ था कुंवर जी

सूर्य ......... ज्यादा कुछ नहीं तुमने कुछ आदिक मात्रा में मायावी ऊर्जा अपने भीतर समाहित कर ली है एक साथ जो अभी तुम कण्ट्रोल नहीं कर सकती है भविष्य में तुम्हे एक बार फिर से आना चाइये यहाँ ताकि तुम इस आसुरी मायावी ऊर्जा को और आदिक मात्रा में ग्रहण कर उसका प्रयोग कर सको अभी के लिया मैंने इस ऊर्जा को तुम्हारे सरीर में बंद दिया है

किरण ........ सुबह हो गई है हमें भी चलना चाइये

सूर्य किरण मानसी तीनो ऊपर जाने लगते है पैर किरण की नजर एक आवर पड़ती है जहा किसी तरह का लाल रतन चमक रहा था मानसी खुद को उसकी आवर आकर्षित होने से रोक नहीं पायी आवर उसकी आवर भाड़ गई

जैसे हे मानसी उसे चुने के लिया हाथ बाध्य एक दूसरे हाथ ने मानसी के हाथ को रोक दिया

सूर्य ....... ये सामान्य रतन नहीं लगता है इस हे इस तरह से चुना गलत हो सकता है

सूर्य एक लाल कपडे को जादू से प्रकार करता है आवर उस से वो रतन उठा कर एक बॉक्स में रख कर सील कर देता मंत्र से

सूर्य ....... इसे पहले बाबा या गुरुदेव को जाँच करने देना उचित होगा उसके बाद मनु तुम इसे दर्जन कर सकती हो अगर इस से तुम्हे या किसी आवर को कोई हानि न हो तो

सूर्य किरण मानसी तीनो नाड़ी से बहार निकले

तीनो के गेले कपडे उनकी बॉडी के हर कटाव को अच्छे से नुमाया कर रहे थे खाश कर मानसी के खूबसूरत सरीर को

सूर्य ने अपने जादू के प्रयोग से तीनो के वस्त्र बड़ा दिए थे क्यों की वो नहीं चाहता था की कोई उनके सरीर को इस तरह देखे

देवयानी जी ........ आप लोग आ गए हमें तो आप सब की चिंता हो रही थी आप लोग सुबह सुबह बिना बताये कहा निकल गए थे

सूर्य ........ जी वो कुछ समय ध्यान लगाने के बाद नाड़ी के ठन्डे सावच जल में सनान कर रहे थे हम तीनो

देवयानी जी ........ ओह्ह अच्छा हमें लगा कही आप सुबह सुबह कही बिहार ( घूमने ) करने तो नहीं निकल गए

(देवयानी जी ........ पैर हमने तो नाड़ी पे भी निरिक्षण किया था ये लोग वह तो मौजूद नहीं थे फिर हमसे असत्य क्यों कहेंगे )

सूर्य ........ देवयानी जी ऐसा कुछ नहीं है वो हम टीन्स हे नाड़ी के काफी भीतर चले गए थे

देवयानी जी ....... कोई बात नहीं सूर्य चलिए चल कर अल्पहार ( नास्ता ) कर लीजिये फिर हम आगे के लिया निकालेंगे अभी भी बहुत कुछ है जो आपकी देखना चाइये

सूर्य .......... माफ कीजिये देवयानी जी हमें तपिश आसाराम लौटना होगा संध्याकाळ से पूर्व पृथ्वीलोक के लिया निकलना होगा ऐसे में हम आगे नहीं जा सकते है

देवयानी जी ....... इतनी सिगरा आप लोग लौट रहे है अपने लोक ( अभी तो मुझे आपकी सकती जांचने का अवसर तक नहीं मिला है अगर आप लोग लौट गए तो नहीं नहीं मुझे कुछ करना होगा ) क्या हमारा लोक आपको पसंद नहीं आया

किरण ........ देवयानी जी ऐसा नहीं है आपका लोक सच में बहुत खूबसूरत है

पैर हमें वापिस लौटना होगा हम तो कल हे गुरुदेव से मिलने के बाद लौट जाते किन्तु आपने जब सुक्रलोक घूमने का आग्रह किया तो भला आपके आग्रह को कैसे ताल सकते थे

सूर्य. ........ और वैसे भी हम आगे भी आपके इस खूबसूरत लोक में आते रहेंगे पैर उस से पहले आप पृथ्वीलोक आइये ताकि हमें भी आपकी सेवा भाव का अवसर प्राप्त हो

देवयानी जी ...... हम्म्म उचित कहा आपने किन्तु हम तभी आएंगे जब आप हमारे साथ खडग योध ाभाष्य ( तलवारबाज़ी ) करेंगे

सूर्य ........ क्या पैर आप स्त्री है कोई भी शूरवीर योद्धा स्त्री पे अपने अस्त्र से प्रहार नहीं करता

देवयानी जी ...... फिर हम पृथ्वीलोक नहीं आ सकते है आवर आप एक योद्धा है तो ऐसे बहुत से अवसर आपके जीवन में आएंगे जहा स्त्री से भी आपको योध करना पद सकता है योध में या तो आप धरम के साथ हो या उसके खिलाफ हो

देवयानी जी ऐसे मोके को कैसे अपने हाथ से जाने दे सकती थी भले हे तलवारबाज़ी से सूर्य की वास्तविकता सकती का स्टिक अनुमान नहीं लगाया जा सकता था किन्तु कुछ हद तक तो आभाष देवयानी जी को हो हे जाता

किरण ....... आपने बिलकुल उचित कहा देवयानी जी एक योधा को अपनी इस्तिति अनुसार निर्णय लेना चाइये यौद्धा के लिया आवशयक है की वो किस मार्ग का चयन करता है अगर आपका मार्ग धरम के पक्ष में है आवर आपका सत्रु एक स्त्री है जो धरम के खिलाफ है ऐसे में योद्धा को मैदान नहीं छोड़ना चाइये नहीं अपने अस्त्र शास्त्र का त्याग करना चाइये

सूर्य ........ उचित है देवयानी जी अगर आपकी यही शर्त है तो मुझे मंजूर है किन्तु मुझसे योध करने से पूर्व आपको किरण के साथ योध कर तलवारबाज़ी में पराजित करना होगा तभी हम आपके साथ योध करेंगे

देवयानी जी ............ हमें स्वीकार है

सूर्य किरण आवर देवयानी जी पे एक एक सुरक्षा घेरा त्यार करता है जिस से कोई भी जख्मी न हो जाये एक दूसरे के वॉर से

देवयानी जी ........ इसकी क्या आव्सय्कता थी हम किरण को कोई हानि वैसे भी नहीं पहुंचते

सूर्य ........ फिर भी एक दूसरे की सुरक्षा जरुरी है देवयानी जी आवर एक आवर कारन भी है इस सुरक्षा कवच पे 5 जानलेवा प्रहार होते हे ये नस्ट हो जायेगा जिसका सुरक्षा कवच पहले नस्ट हुआ वो तलवारबाज़ी में पराजित मन जायेगा

देवयानी जी आवर किरण दोनों अपनी अपनी तलवार का आह्वान करते है आवर एक दूसरे के सामने खड़े हो जाते है

जहा देवयानी जी की तलवार लाल रौशनी से चमक रही थी जैसे की इस खुनी तलवार ने बहुत से लोगो के खून से अपनी प्यास भुजाइ हो

वही किरण की तलवार से सुनहरी रौशनी निकल रही थी

( देवयानी जी ....... क्या किरण की खडग दिव्या खडग है इसकी ऊर्जा कितनी सकारात्मक ऊर्जा है आवर इसकी अद्भुत चमक इस हे दिव्यास्त्र बनती है हमें सावधानी से किरण से योध कर इस हे प्रस्थ करना होगा )

सूर्य का इशारा मिलते हे दोनों की तलवार एक दूसरे के तलवार से जा टकराई .तन .तन. की आवाज पुरे खेमे में गूंजने लगी बाकि दसिया भी एक एक कर दोनों का योध देखने लगी

मानसी ....... कुंवर जी दीदी ने आज से पहले तो कभी योध नहीं किया आवर देवयानी जी असुरगुरु शुक्राचार्य की पुत्री होने के साथ साथ उनकी शिष्य भी है कही दीदी

सूर्य ........ तुमने अभी वास्तविक किरण देखि नहीं है मानसी आज सायद देखने को मिल जाये

अब तक तुम सबने जो प्राचीन पुस्तक से योध अभ्यास किया है समाजो आज उसकी परीक्षा है की तुम सब कितनी सफल हुई हो

सामान्य आँखों से देखने पे सामने केवल दो परछाईया हे उड़ती हुई नजर आ रही थी जो बार बार एक दूसरे से तक रति आवर विपरीत दिशा में निकल जाती

( सूर्य ........ देवयानी जी वास्तव में बहुत माहिर तलवारबाज़ है पैर स्वीटी भी काम नहीं है कभी स्वीटी भरी पड़ती है तो कभी देवयानी जी अभी से बता पाना संभव नहीं है )

अभी सूर्य ये देख हे रहा था की देवयानी जी उछलते हुए किरण के सीने की आवर बहुत हे तेजी से वॉर करती है किरण अपनी तलवार से वॉर को रोकती है दोनों की तलवारो से चिंगारिया निकलने लगते है एक दूसरे से टकराने से इस वॉर से किरण थोड़ा लड़खड़ा जाती है

देवयानी जी ........ हेहेहे संभल कर किरण

किरण एक बार सूर्य की तरफ देखती है जिसकी आँखे हलकी हलकी लाल होना सुरु हो गई थी सूर्य किरण को न में सर हिला कर जबाब देता है

देवयानी जी भी सूर्य को देखती है जो न में सर हिला रहा था

( देवयानी जी ...... हेहेहे किरण तुम मुझे पराजित नहीं कर सकती ये बात सूर्य भी जनता है )

देवयानी जी के चेहरे पे एक कुटिल मुस्कान थी पैर अगले हे पल अपनी आवर आते किरण के वॉर को देख एक पल में हे साडी कुटिलता साडी मुस्कान गायब हो गयी देवयानी जी की आवर जैसे हे दोनों तलवार टकराई देवयानी जी की तलवार उनके हाथ से दूर जा गिरी

देवयानी जी को उम्मीद भी नहीं थी की किरण का वॉर इतना बलसाली होगा की उसका हाथ भी सुन होने लग जायेगा

देवयानी जी को अपने हाथ को हिलता देख किरण आवर सूर्य जल्दी से दोनी देवयानी जी के पास पहुंचने

सूर्य ...... देवयानी जी आप ठीक है न आपकी चौथ तो नहीं लगी न

किरण .......मुझे माफ कीजिये सायद मैंने ज्यादा हे जोर से वॉर कर दिया आप पे

देवयानी जी ...... किरण सच बताना क्या ये अंतिम वॉर तुमने अपनी पूरी ताकत से किया था

सूर्य ....... देवयानी जी उस से क्या फरक पड़ता है

देवयानी जी ....... आपकी भले न पड़े पैर मुझे जानना है

किरण कभी सूर्य को कभी देवयानी को देखती है

देवयानी जी ....... आपने बताया नहीं की आपने अपनी पूरी ताकत से वॉर किया था

किरण ...... न में सर हिला देती है

देवयानी जी का चेहरा हल्का पीला पड़ने लगा था

देवयानी जी ...... मैं अपनी हर मानती हूँ किरण तुम वाकई असाधारण स्त्री हो

सूर्य ...... पैर अभी अभी आपका कवच सुरक्षित है देवयानी जी

देवयानी जी ...... उस से कुछ बदल तो नहीं जायेगा एक यौद्धा का अपने प्रतिद्वंदी का अस्त्र गिरवा देना भी एक तरह से पराजित करना हे है

आपसे भविष्य में अवश्य योध करने का मौका मिलेगा हमें

सूर्य ....... हम भी उस वक़्त का इन्तजार करेंगे जब हमारे बिच मित्रवत योध अभ्यास होगा चलिए हमें भोजन करना चाइये अब फिर आसाराम के लिया भी निकलना है

सूर्य किरण मानसी देवयानी जी चारो सुबह का भोजन कर रथ में सवार हो चुके थे

जाने से पहले सूर्य ने निर्भयासुर को आजाद कर दिया निर्भयासुर की ऊर्जा वह से गायब हो गई

सूर्यगढ़ ............

हवेली में अभी सभी लोग दोपहर का भोजन कर हे रहे थे

की तभी हवेली का बड़ा सा गेट खुलने की आवाज होती है

दादा जी दादी जी जो दोपहर आवर रात का भोजन ज्यादातर अपने कक्ष में हे करते थे उन्हें खाना परोसती मेनका जी को ये आवाज सुनाई पद जाती है

मेनका जी ........ इस वक़्त कोण आया होगा हवेली में वो भी दोपहर के वक़्त

दादा जी ....... सायद जमाई सा जी आये होंगे बेटी सुबह उनका फ़ोन आया था की वो दोपहर तक आ जायेंगे

मेनका जी अपने पापा की थाल में चपाती रखती है

तभी वह विजय जी आवर शिव दोनों एक साथ रूम में आते है

विजय जी ........ परनाम माँ सा परनाम पापा जी

दादा जी ....... जीते रहो बीटा आप दोनों एक साथ कैसे

शिव अपने पापा के पेअर छू कर उनका ासुरवाद लेता है आवर अपनी माँ से गले लग कर मिलता है

शिव दोनों से मिल कर उनके हे कक्ष के बाथरूम में चला गया

विजय जी ...... पापा जी मुझे भी शिव के आने की खबर नहीं थी वो तो मैं जब जयपुर से फ्लाइट ले कर उदार आ रहा था तभी दिल्ली तो जयपुर फ्लाइट से मुझे शिव मिल गया तो हम दोनों साथ में हे आ गए

इतने में शिव हाथ मुँह धो कर आता है आवर अपनी माँ सा के साथ हे उनकी थाल से भोजन करने लगता है

शिव ......उम्म्म बहार का खाना खा खा कर मुँह का सवाद हे बिगड़ गया अब जा कर अच्छा लग रहा है

दादा जी ....... मेनका बेटी तुम जाओ आवर जमाई सा का भोजन परोक्ष दो

मेनका जी .....जी माँ सा

दादा जी ........ विजय बीटा भोजन कर कुछ देर आराम कर लो साम को आप दोनों से कुछ काम है तो अभी आराम कर लो

विजय जी ...... जी पापा जी जैसा आप कहे

मेनका जी ...... आप दोनों का सामान कहा है

शिव ....... अरे मैं तो भूल हे गया सभी के सामान तो कार में हे रह गया मैं अभी लता हूँ

दादा जी ........ सामान कही भगा नहीं जा रहा बेटे पहले आराम से भोजन करो अन्न देवता का अपमान करना ठीक नहीं बाकि सभी भी भोजन कर रहे है कोई जल्दी नहीं आराम से दे देना

शिव ....... जी पापा वैसे भी अभी सभी का सामान नहीं आया है बाकि सामान कल दिल्ली की फ्लाइट्स से आएगा तो सभी बच्चों को एक साथ देना हे ठीक रहेगा

मेनका जी विजय जी के साथ अपने रूम चली जाती है आवर उनके लिया अलमारी से उनके कपडे निकल कर उन्हें देती है

विजय जी ........ क्या बात है आज हवेली में इतनी ख़ामोशी क्यों है मेनका

मेनका जी ....... क्या मतलब सभी तो है यहाँ बहार सब भोजन तो कर रहे है

विजय जी ........ न तो सूर्य नजर आया न हे किरण या मानसी

मेनका जी ...... ओह्ह्ह तो ऐसा कहो न आप वो तीनो बहार गए है सायद कल रात तक आ जायेंगे

विजय जी ...... क्या बात मेनका आज बड़ी खूबसूरत लग रही हो

मेनका जी ....... बुढ़ापे में आँखे ख़राब हो गयी है आपकी

मेनका जी कहने को तो ऐसे हे कह दिया था पैर अंदर हे अंदर वो भी स्माइल करने लगी आखिर करे भी क्यों न एक तो वो खूबसूरत है ऊपर से पति से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन्ना ऐसा तो हर पत्नी चाहती है भले हे विजय जी अब पूरी तरह से मेनका जी को सरीर सुख देने में सक्षम नहीं पैर उनकी एक कमजोरी के चलते उनकी अपने परिवार के पार्टी प्यार आवर म्हणत को तो नहीं नकार सकती थी मेनका जी उन्हें भी पता था दिन रात विजय जी जो म्हणत करते है वो किसके लिया करते है उनके लिया आवर अपने बच्चों के लिया हे न

मेनका जी ........ क्या बात है आज बड़े रोमांटिक बन रहे है आप

विजय जी .......... अब वाइफ इतनी सुपर हॉट हो तो बाँदा कब तक हॉटनेस वाइफ से बच सकता है

कहते हुए विजय जी मेनका जी को अपनी आवर खींच लेते है

मेनका जी उनके सीने पे हाथ रख उनके होंठो पे एक किश करती है

मेनका जी ......... अभी इतने हे खुश हो लीजिये बाकि इच्छाएं रात में पूरी कर लेना

विजय जी ...... क्या सच में

मेनका जी ....... मैंने कभी आपको रोका है है ये बात जरूर है की अब आपके सरीर पे उम्र का असर होने लगा है

विजय जी ........ हम्म्म मैं जनता हूँ मेनका ऐसा नहीं है की मुझे तुम्हारा ख्याल नहीं रहता पैर ये भी सच है की अब मैं तुम्हे संतुष्ट नहीं कर पता हूँ इस लिया खुद को तुम्हारे साथ हमबिस्तर होने से दूर रखता हूँ

मेनका जी ....... आप इतना न सोचा करो विजय अब जा कर फ्रेश हो जाइये मैं आपका खाना यही ले आती हूँ फिर आराम कीजिये साम को भी काम है आवर...

विजय .......आवर

मेनका जी ........ आवर बाद में जाइये आप

विजय जी मुस्कुराते हुए बाथरूम गुस्स जाते है

ीदार निचे सभी लोग अपना अपना खाना ख़तम कर चुके थे राधा आवर मेर्री जी किचन में जूते बर्तन साफ कर रही थी वही बाकि लड़किया अपने अपने रूम की आवर निकल गई

शिव भी अपनी माँ सा के साथ भोजन करने के बाद कुछ देर उनसे बात काट शालिनी जी के रूम में पहुंचा जाहस जूलिया आवर शालिनी जी लेते हुए बात कर रहे थे

शिव को देख शालिनी जी बीएड से उठ कर अपनी साड़ी ठीक करती है

शालिनी जी ........ शिव आप कब आये u.s.a से आपने तो कोई खबर भी नहीं की आप बैठिये मैं आपके कपडे निकल कर देती हूँ आप फ्रेश हो जाइये फिर आपका खाना लगा देती हूँ

शिव ....... शालू मैंने माँ सा के साथ भोजन कर लिया है बस तुमसे कुछ देर बात करनी थी आवर कुछ नहीं

जूलिया ....... Ok मम्मी मैं चलती हूँ आप लोग बात कीजिये

शिव ....... उसकी जरुरत नहीं बेटी तुम भी बैठो यहाँ

जूलिया ....... जी

शिव ....... कोंग्रटुलतिओन्स जुली बीटा

शिव की बात सुन जुली शालिनी जी की आवर देखने लगी

शालिनी जी ....... शिव

शिव ....... ओह्ह्ह सॉरी बीटा सायद मैंने जल्दबाज़ी कर दी हाहाहा

जूलिया ....... हम अब भी नहीं समजे क्या हम आपको पापा जी कह कर बुला सकते है

शिव ...... क्या यही बात तुमने शालू से पूछी थी बीटा उसे मम्मी कहने से पहले

जूलिया न में अपनी गर्दन. हिला देती है

शिव ........ फिर हमसे भी पूछने की जरुरत नहीं है बेटी आज नहीं तो कल सदी के बाद भी कहना हे है जैसे कोमल है स्वीटी है या बाकि सब वैसे तुम भी मेरे लिया बेटी हे हो जुली बीटा बस अपना ख्याल रखना

जूलिया ...... जी पापा जी

शिव ....... वैसे हमारे नबाब साहब कब लौट रहे है शालू

शालिनी जी ....... सूर्य ने तो कल रात तक लौट आने को कहा था बाकि वही जाने

शिव ...... हम्म्म चलो ाची बात है

शालिनी जी ...... शिव वो दिल्ली से कल सुबह राधिका बेटी का परिवार भी पूजा में शामिल होने को आ रहा है सूर्य तो है नहीं तो सायद आपको हे उन्हें लेने जाना पड़े

शिव ....... कोई बात नहीं वैसे भी मुझे सुबह एयरपोर्ट जाना हे है कुछ सामान बच्चों की शॉपिंग का ज्यादा हे हो गया था तो कार्गो से भेजना पड़ा वो भी कल सुबह या दोपहर तक आ जायेगा इशू बहाने उन्हें भी लेता आऊंगा

शालिनी जी ........ वह का आपका काम कैसा रहा शिव

शिव ....... फ़िलहाल के लिया तो सब सेट कर दिया है बस कुछ फॉर्मेलिटी पूरी करनी है जिसके लिया सूर्य को एक बार वह जाना होगा ये भी पता नहीं कहा कहा क्या क्या करता रहता है पैर जो भी कर रहा है अच्छा है वैसे सूर्यकांत जी पूरी फॅमिली के साथ आ रहे है क्या

शालिनी जी ........ जी उनका पूरा परिवार आ रहा है आवर साथ में राधिका के मम्मी पापा भी

शिव ...... सब एक साथ अचानक से पूजा में शामिल होने आ रहे है

शालिनी जी ...... वो राधिका बेटी भी माँ बनने वाली है उसने मन्नत मांगी थी अब जब उसकी मन्नत पूरी हो गई है तो वो सब भी अपनी ख़ुशी हमारे साथ बरना चाहते है

शिव ....... ये तो अच्छी बात है पैर तुमने ये सोचा की उनके सामने जुली बेटी आवर किरण बेटी सूर्य के साथ पूजा में बैठी तो वो लोग क्या सोचेंगे इस बारे में किरण का पता है पैर जुली बेटी का तीस्ता अभी सभी के सामने नहीं आया है

शालिनी जी ......... आपकी बात सही है जी पैर माँ सा ने इसके बारे में पहले हे सोच लिया है

शिव ........क्या मतलब

शालिनी जी ....... राधिका बेटी जूलिया किरण तीनो एक साथ पूजा में बैठेंगे सूर्य के साथ

शिव .......क्या तुम्हारा दिमाग तो ठीक है इस पूजा में बचे की माँ के साथ केवल उस बचे का पिता बेथ सकता है

शालिनी जी ....... मुझे पता है पैर माँ सा ने पहले हे उन्हें बता दिया था रोहन को चुटी नहीं मिल रही है ऐसे में राधिका अकेली पूजा थोड़ी करेगी सूर्यकांत जी ने सूर्य को अपना दूसरा बीटा मन है तो रिश्ते में वो बच्चे का चाचा लगा क्या चाचा पिता के सामान नहीं होता

शिव को शालिनी जी का तर्क थोड़ा अटपटा जरूर लगा पैर उसमे भी लॉजिक था देखा जाये तो जो स्थान बच्चे के पिता का होता है उतना हे बच्चे के चाचा का भी होता पैर वो खून के रिस्तो में होता है

शिव ........ तुम्हारी बात सही है पैर रोहन आवर सूर्य का तो कोई खून का रिस्ता नहीं है

शालिनी जी ....... खून के रिस्तो से भाड़ कर होता है प्रेम का प्यार का रिस्ता रोहन की माँ से माँ ने बात कर ली है उन्हें कोई एतराज नहीं है इसमें उन्होंने तो कहा है की भले हे सूर्य को उन्होंने जनम नहीं दिया पैर वो उनका उतना हे बीटा है जितना रोहन

शिव ...... चलो मान लिया पैर जुली बेटी के पूजा में बैठने पे उन्होंने सवाल किया तब क्या जबाब होगा उनके सवाल का

शालिनी जी ......... कोई कुछ नहीं पूछेगा वैसे भी ये पूजा मंदिर के गर्भ गाढ़ा में होगी जहा पुजारी जी के अलावा पुरुष केवल सूर्य होगा आवर उनके साथ मैं या माँ सा हे होंगी अंदर तो आपको इसकी चिंता नहीं करनी चाइये

शिव ........ ठीक जब तुमने आवर माँ सा ने सब सोच हे लिया है तो मुझे चिंता क्यों

शालिनी जी ....... शिव वो पापा ने इस पूजा पे गरीब परिवार से 101 कन्याओं के विवाह की जिम्मेदारी ली है

शालिनी जी आगे कुछ बोलती उस से पहले हे शिव बिच में बोल उठा

शिव ....... ये तो बहुत अच्छी बात है पापा ने बिलकुल सही फैसला किया है इसका पूरा खरच मैं उठाऊंगा अब 2.2 बचो का दादा बन रहा हूँ तो मेरा भी फ़राज़ बनता है कुछ

शालिनी जी ...... आप पूरी बात तो सुन लीजिये पहले पहली बात 2 नहीं 3 पोते या पोतियो के दादा बनने वाले है राधिका की संतान के भी आप दादा जी हे लगोगे आवर दूसरी बात पूजा के बाद आस पास वाले गाँवो की भोजन की व्यवस्ता भी की तो मैं चाहती हूँ आप सभी को भोजन के बाद सभी बच्चो के हाथ से वस्त्र आदि दे कर उन्हें विदा करे

शिव ........ कोई बात नहीं बच्चो के लिया ये भी सही है

शालिनी जी अपने बीएड के साइड से टेबिल लेम्प के निचे की दर्ज से एक कॉपी निकल कर शिव की आवर करती है

शिव बड़े गौर से उसमे लिखी लिस्ट देखता है

शिव ....... ठीक है कल सुबह तक सारा सामान आ जायेगा यहाँ तो मिलना संभव नहीं आवर सायद न जैसलमेर में मिले मैं अभी जयपुर से सदियों आवर बड़े बुजुर्गो के लिया कपडे का आर्डर दे देता हूँ जो कल तक आ जायेंगे

शालिनी जी ........ एक बार महेंद्र भाई साहब से बात कर लीजिये इस बारे में उन्हें पता होगा की कहा से इतने कपडे लेने चाइये ताकि कोई दिकत न हो उनके मॉल के चलते उन्हें इस बारे में अच्छे से पता होगा ज्यादा होने पे हमारे किसी काम के तो होंगे नहीं ऐसे में उन्हें वापिस भी करना पद सकता है तो वो ुशी हिसाब से अपने वाटपारी दोस्तों से बात कर लेंगे

शिव ...... हम्म्म थी है मैं उनके साथ साथ पापा से भी इस बारे में बात करता हु क्या पता उन्होंने पहले से ऐसा कुछ सोच रखा हो तो

शालिनी जी ....... जी ठीक है

शिव ....... तुम आराम करो मैं भी कुछ देर रेस्ट करता हम

शिव वो कॉपी लिया वह से दूसरे रूम में चले गए आवर फ्रेश हो कर कुछ देर हिसाब किताब लगा कर लेट गए .......

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......................
 
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