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दादा जी .......वक़्त मुठी में बंद रेट की तरह कब हाथो से निकल जाता है पता हे नहीं चलता ठकुराइन कब बड़े हुए कब सदी लायक हुइमे जैसे कल की हे बात हो
रेखा जी .....दीदी आप खाना .....
रेखा जी मेनका को दादी जी के साथ खता देख बिना कुछ बोले लौट जाती है आवर कुछ देर बाद एक थल में कुछ सब जिया आवर चपाती रख जाती है
ीदार बहार महेंद्र जी सूर्य रेखा जी मेर्री जी शालिनी जी के साथ खाना खा कर कुछ देर अपने रूम में चला जाता है
सूर्य को अकेला देख मेर्री जी भी उसके रूम में जा पहुँचती है .......
अब आगे ........
सूर्य अभी अभी बाथरूम से फ्रेश हो कर बहार निकला हे था की उसकी नजर सामने बीएड पे बैठी मेर्री जी पे पड़ी जो सूर्य के निर्वस्त्र चोदे सीने पे जा अटकती है
सूर्य ....... ममी जी ऐसे क्या देख रही है आप जैसे आज से पहले मुझे ऐसे नंगा देखा हे नहीं हो आपने
मेर्री जी बीएड से उठ कर साढ़े हुए कदमो से सूर्य के बिलकुल सामने आ खड़ी होती है आवर बिना कुछ बोले सूर्य के चोदे सीने पे गीले बालो से गिरती पानी की बूंदो को अपने कोमल मदभरे होंटो से पिने लगती है
मेर्री जी ........ तुम पहले से काफी हैंडसम हो गए हो सूर्य या ये मेरा कोई भ्रम है
सूर्य ....... हाहाहा वैसे आप भी पहले से खूबसूरत आवर मजबूत हो गयी है
सूर्य मेर्री जी को पकड़ वह से गायब हो सीधा छठ वाले रूम में जा पहुंचा
मेर्री जी सूर्य को किश करते हुए सूर्य के बदन पे बाँदा आखरी वस्त्र टॉवल सूर्य की कमर से हटा कर बीएड पे सूर्य को देखा दे सूर्य के सीने पे आने मखमली उभर टिकते हुए उसकी आँखों में देखने लगती है
सूर्य मेर्री जी की आँखों में अपने लिया बेशुमार प्यार पुर चाहत देखता है जिसके चलते उसे खुद हे मेर्री जी की नजरो से नजर हटानी पड़ती है
मेर्री जी ........ तुम्हे नजरे चुराने की जरुरत नहीं है सूर्य मैं जानती हूँ तुम क्या सोच रहे हो पैर मैं इतने में भी खुश हूँ की मुझे तुमसे प्यार पुर परिवार दोनों हे मिले मुझे आवर कुछ नहीं चाइये बस जब कभी कुक्ड को कमजोर आवर अकेला समझने लागु तो तुम हमेशा मेरे साथ खड़े रहे पुर मुझे कुछ नहीं चाइये
सूर्य ........ मैं कुछ देने वाला कोण होता हूँ रही बात प्यार आवर परिवार की तो वो आपने खुद अर्जित किया है आवर आप खुदको कभी भी अकेला आवर कमजोर समझने की भूल मत करना मुझसे कहा ठीक है पर दादी जी आवर माँ के सामने फिर कभी ऐसा न बोलना उन्हें बहुत टेश पहुंचेगी आपकी इन बातो से
सूर्य डेरी डेरी इस हलके गंभीर हो चुके माहौल को बदलते हुए मेर्री जी के खिले हुए महकते अंगो को एक एक कर
be-parda करने लगता है
सूर्य पौने एक घंटे तक मेर्री जी के साथ प्यार भरा मिलान कर मेर्री जी के एक एक अंग को संतुष्ट कर चूका था
मेर्री जी ........ उम्मम्मम्हा थैंक यू सूर्य एंड ी लव यू ुम्मम्हा
सूर्य ......ी लव यू तू ममी जी अब आप यहाँ आराम करना चाहे तो यहाँ आराम करलो नहीं तो कुछ टाइम बाद निचे चली जाना
मेर्री जी ....... क्या मेरे साथ शावर लेना पसंद करोगे सूर्य
सूर्य एक बार मेर्री जी के पसीने से भीगे जिसम को निहारता है जिसपे सूर्य आवर मेर्री जी के प्रेम मिलान के चीन अंकित थे आवर आगे भाड़ बीएड पे बैठी मेर्री जी को गॉड में उठा ुशी रूम में बने बाथरूम की आवर भाड़ जाता है .
कुक्सह देर बाद सूर्य किरण से मिल सीधा शालिनी जी के रूम में पहुँचता है .
जहा शालिनी जी लेम्प की हलकी रौशनी में खूबसूरत निघ्त्य में अदलती स्थिति में बीएड से तक लगाए कोई बुक पढ़ रही थी
शालिनी जी एक बार नजर उठा कर सूर्य को देखती है .
आवर अपने हाथ में पकड़ी बूब्स का पेट मूड कर बंद करते हुए साइड टेबिल पे रख देती है .
सूर्य रूम का दूर लॉक करते हुए शालिनी जी के पास पहुते हे अपने t-shirts निकल शालिनी जी के बगल में लेट जाता है
जैसे हे सूर्य शालिनी जी के बगल में जा कर लेता शालिनी जी के चेहरे पे चमक उभर आती है आवर वो थड़ा सूर्य के पास खिसकते हुए करवट के बल सूर्य से चिपक जाती है
सूर्य शालिनी जी के प्यारे से चेहरे को कुछ पल निहारने के बाद उनके लरजते होंठो पे प्यार से अपने होंठ रख उन्हें चूमने लगता है
एक प्रेम भरे चुम्बन के बाद शालिनी जी अपने सांसो को नियंत्रित करते हुए सूर्य के सीने पे किसी मखमली चादर के जैसे लिपट जाती है
सूर्य ...... माँ कल मां जी नाना जी आ रहे है न
शालिनी जी ....... हम्म्म आवर अभी तुम्हारी माँ नहीं है यहाँ तुम्हारी शालू है
शालिनी जी की बात सुन सूर्य उन्हें पलट देता है आवर खुद उनके ऊपर आ जाता है
सूर्य ......... ुम्मम्हा तो मेरे पास इस वक़्त मेरी शालू है फिर आपको कल एक काम आवर करना होगा कल जब नाना जी मां जी आये तो आप उनसे मेर्री जी आवर विजय मां जी के रिश्ते की बात भी करना ताकि उनका विवाह भी जल्दी हो जाये आवर दूसरी बात मुझे मानसी स्वीटी आवर जो लिया के साथ कुछ वक़्त के लिया बहार जाना होगा
शालिनी जी ....... सदी की बात मैं कर लुंगी पैर तुम चारो कहा जा रहे हो आवर तुमने पहले क्यों नहीं बताया मुझे
सूर्य ....... मुझे पहले स्वीटी आवर मनु के साथ असुरगुरु शुक्राचार्य से भेंट करने सुक्रलोक जाना होगा उसके बाद ड्रैगन लोक जाना होगा शालू स्वीटी को ड्रैगन लोक का राजसिंहासन संभालना होगा जब तक जुली इस के लिया पूरी तरह से त्यार नहीं हो जाती तब तक स्वीटी को हे वह की क्वीन बन सब संभालना होगा
दोनों बात सुन शालिनी जी के चेहरे पे कुछ चिंता के भाव उभर आये
शालिनी जी ....... क्या गुरुदेव को पता है सुक्रलोक के विषय में
सूर्य ....... आपकी चिंता समाज रहा की आपको किस बात का दर सत्ता रहा है पैर मैं वह किसी युद्ध के लिया नहीं जा रहा हूँ बल्कि उनके निवेदन पे उनसे भेंट करने जा रहा हूँ फिर मेरे साथ बाबा व्योमासुर जी भी तो जा रहे है
शालिनी जी ........ फिर भी मेरा मन घबरा रहा है सूर्य कही कुछ गलत हुआ तो
सूर्य ........ उम्म्म्मः आप घबरा बहुत जल्दी जाती ऐसा कुछ नहीं होगा फिर भी कुछ ऐसा वैसे हुआ तो निर्भयासुर का तांडव सुक्रलोक पे कहर बन कर टूटेगा भले हे असुरगुरु शुक्र के समुख निर्भयासुर कमजोर है पैर इतना भी नहीं की ऐसा कुछ करने की वो सोचे भी आप सब चिंता भूल जाइये
निर्भयासुर का याद आते हे शालिनी जी का मन कुछ हद तक संत हो जाता है
सूर्य शालिनी जी के सीने से निघ्त्य हुक खोल उन अद्भुत ुनात बड़े बड़े विलक्षण उभर को उस रेशमी ब्रा नुमा वस्त्र से अनावृत कर अपने होंठ में शालिनी जी के गुलाबी निप्पल्स को कैद कर चूसने लगता है
आवर दूसरे हाथ से दूसरे बूब्स को अपने मरदाना हठी में पकड़ कर सहलाने लगता है
डेरी डेरी जहा पहले शालिनी जी के चेहरे पे हलकी हलकी चिंता की लकीरे थी वो गायब हो जाती है
सूर्य शालिनी जी के दोनों बूब्स को चूसने लगता है जैसे आज भी उन्हें वो मधुर दुगड़ भरा हो जिसे पिने को सूर्य लालायित हो
डेरी डेरी शालिनी जी के सरीर में एक नयी ऊर्जा का संचार होने लगता जो रह रह कर उनके कंदवार पे दस्तक दे रहा था
शालिनी जी खुद से हे सूर्य का शार्ट निकल कर उसे सूर्य के घुटनो से निचे कर देती है
सूर्य शालिनी के जिसम से उनके पुरे कपडे गायब कर शालिनी जी के पेट को चूमते हुए नाभि में अपनी जुबान दाल चाटने लगता है
शालिनी जी ........उम्मम्माह्ह सूर्य मुझे गुदगुदी हो रही है
सूर्य दशहरा शालिनी जी की नाभि को चाटने आवर चूमने से शालिनी जी के पेट में कसाव आने लगता है साथ हे रह रह कर उनका सरीर भी इस क्रिया से कम्पन करने लगता है
जैसे हे सूर्य के नाक में किसी जनि पहचानी गंध ( खुसबू ) का अनुभव होता है वो डेरी से खिसकता हुआ शालिनी जी के कंदवार पे उभरी उन ोंश की बूंदो को देख खुद को रोक नहीं पाया आवर अपने तपते होंठ उस द्वार से पे टिका देता है आवर उन अमृत सामान कमरष की बूंदो का सेवन करने लगता है

शालिनी जी ......... उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह सूर्य आवर तेज चुसो मैं करने वाली हूँ
शालिनी जी सूर्य के सर को अपने खिले हुए कमल पे दबाते हुए अपने भीतर संगृहीत कमरष का बांड खोल देती है

सूर्य बिना किसी हिचक के शालिनी जी के अमृत कुंड से छलका अमृत अपने गले से से निचे उतर लेता है
कुछ पल शालिनी जी करके कहती रही उन्हें देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उन्होंने मिलो का सफर दौड़ कर पूरा किया हो
शालिनी जी कुछ मिनट्स बाद जब नार्मल हुई तो सूर्य उनकी बगल में लेता हुआ उनके अद्भुत उभारो को सहला रहा था आवर उनके चेहरे को बड़े प्यार से निहार रहा था
शालिनी जी अपने खुले बालो को बांड कर सूर्य के होंठो पे एक छोटा सा किश कर बीएड पे बेथ जाती है
सूर्य बीएड से उतर शालिनी जी के सामने खड़ा हो जाता है
शालिनी जी सूर्य के जुलते हुए अंग को थम उस उभरे हुए लाल गुलाबी सुपडे पे किश कर अपने मुँह में सूर्य के लैंड अंदर बहार करने लगती है
सूर्य शालिनी जी के सर को थम हलकी हलकी कमर हिलाते हुए बिना शालिनी जी को तकलीफ पहुचाये अपना लैंड को शालिनी के मुँह में आगे पीछे करने लगा

शालिनी जी सूर्य के लैंड का 3,से 4 इंच तक का भाग बड़ी आसानी से चूस प् रही थी थी
हलाकि सूर्य के सूपड़ा पे हलके हलके शालिनी जी के दांतो के रगड़ भी लग रही थी जिस से सूर्य का लिंगमुण्ड आवर आदिक मात्रा में फूलने लगता है
कुछ देर बाद सूर्य शालिनी जी के मुँह से अपना लैंड निकल कर बीएड पे लेट जाता है
शालिनी जी सूर्य को देखती है पैर उसे कुछ समाज नहीं आता
सूर्य शालिनी जी को किसी नाजुक सी लड़की के जैसे उठा कर गुमा देता है
सूर्य शालिनी जी दोनों एक दूसरे के विपरीत चेहरा किये हुए थे
सूर्य शालिनी जी की कमर पकड़ कर अपना सर एक बार फिर से शालिनी जी की राश भाटी छूट पे अपना मुँह टिका देता है
शालिनी जी को समाज आते हे उनके चेहरे पे बड़ी सी मुस्कान थी एक बार फिर से सूर्य के लैंड को बड़ी हे मादक अड्डा से शालिनी जी चूसने लगती है जैसे वो सूर्य ोा लैंड न हो कर शालिनी जी की मनपसं आइस क्रीम हो

सूर्य शालिनी जी के गुड्डाद्धार को सह लेट हुए शालिनी जी की योनि की होंठो को हल्का हल्का अपने दांतो से कुरेदने लगता है जिस से शालिनी जी की कंझावला आवर आदिक बदलने लगती है
जैसे जैसे सूर्य अपनी मनमर्जी कर रहा था वैसे वैसे शालिनी जी का सबर जबाब दे रहा था
जैसे हे सूर्य को आभाष हुआ की अब शालिनी जी किसी भी वक़्त अपने चरम सुख को प्राप्त कर सकती है
सूर्य शालिनी जी को पलट देता है
शालिनी जी को अपने चरम पे पहुंचने से पहले सूर्य का इस तरह दौरे में छोड़ना उन्हें पसंद नहीं आया पैर जैसे हे सूर्य ने उन्हें पलट कर बीएड पे डोगग्य स्टाइल में उनके गोल गोल नितम्बों पे हलकी हलकी चपेट लगाई
शालिनी जी के चेहरे पे जहा गुस्सा था वही अब एक गहरी मुस्कान थी
सूर्य दोनों कूल्हों को चुम कर शालिनी जी के काम सवार पे अपना दहकता हुआ लिंग मुंड लगा देता है
शालिनी जी ........ उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह अब आवर नहीं रुका जाता सूर्य उम्म्म्म जल्दी से अपनी शालू को अपने प्रेम वर्षा से तृप्ति कर दो
सूर्य बिना किसी परवाह के शालिनी जी के संकरी गुफा में अपने बेलगाम घोड़े को खुला चढ़ देता है अपनी मनमर्जिया करने को

शालिनी जी के चेहरे पे कुछ पल के लिया पीड़ा उभारो पैर जल्दी हे सम्भलते हुए
अपनी गरम योनि को सहलाते हुए उस पीड़ा से बहार निकल सूर्य के साथ सवरग में गोते लगाने लगी
सूर्य ......... उफ्फ्फ्फ़ शालू तुम्हारी गर्मी कुछ ज्यादा हे भाड़ गई है
शालिनी जी ........ जिसे इस गर्मी का ख्याल रखना चाइये वही अब ध्यान नहीं देगा तो ऐसा तो होगा हे
सूर्य ..... उमंमाहहह बहुत जल्द आपकी साडी शिकायते दूर कर दूंगा शालू बस कुछ वक़्त दो मुझे आपकी हर हिच्छा पूरी होगी
ीदार शालिनी जी सूर्य के लम्बे पथरो ज्यादा देर सहन नहीं कर पायी आवर अपने चरम का आनद लेते हुए आँखे मुंड ली

सूर्य शालिनी को झड़े देख अपनी गति कुछ काम कर देता है
पैर माध्यम गति से अभी भी शालिनी जी की चुदाई में लगा हुआ था
कुछ देर बाद फिर से शालिनी जी सूर्य का साथ देने लगी
सूर्य भी पूरी सीडट से शालिनी जी को तृप्ति करने में लगा हुआ था कुछ देर बाद फिर से शालिनी जी झाड़ गई
सूर्य शालिनी जी को सीधा लुटाते हुआ आना लैंड शालिनी जी के कमरष से पूरी तरह भीगी योनि में भिड़ा देता है

शालिनी जी ....... अह्हह्ह्ह्ह दीदी सच कहती है तुम सच मच के अरबी घोड़े हो अह्हह्ह्ह्ह आवर जोर से
सूर्य ........ मैं कोई अरबी घोडा नहीं हूँ शालू वैसे बड़ी मम्मी ऐसे नहीं बोल सकती
शालिनी जी ....... उम्म्म्म है रेखा दीदी सायद मुझसे भी ज्यादा तुम्हे प्यार करती सभी करते है पैर रेखा दीदी का प्यार पवित्र है उन्हें न तुम में परीलोक का राजा सिकता है न सूर्य शिव ठाकुर उन्हें बस अपना बीटा नजर आता है वो तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचती ये सब तो मेनका दीदी ने कहा था
सूर्य ........ उम्म्म अह्हह्ह्ह्ह शालू मैं आने वाला हूँ अह्हह्ह्ह्ह
सूर्य के तेजी हर पल के साथ आवर ज्यादा तेज हो रही थी अगले एक मिनट्स में शालिनी जी ने अपना सबसे तीव्र चरम सुख प्राप्त किया उसके अगले हे पल सूर्य अपने पूरी कोशिश के बाद भी खुद को झड़ने से नहीं रोक पाया
शालिनी की योनि को ओवर फ्लो करते हुए बाकि बचा राश शालिनी के पेट पे गिरा दिया
शालिनी जी ......उम्मम्मम्हा मुझे ये टेस्ट करना है जैसे तुमने मेरा किया
सूर्य मुस्कुरा कर अपनी ऊँगली पे वीर्य ले शालिनी जी को आना वीर्य टेस्ट कराया है

कोई 10 मिनट्स रेस्ट कर सूर्य आवर शालिनी जी दोनों कहा कर एक दूसरे की बहो में लेते थे
शालिनी जी ........ सूर्य रेखा दीदी तुमसे सच में बहुत प्रेम करती है एक बेटे के रूप में भले हे तुम एक बार मेरी किसी बात को नजर अंदाज कर देना पैर रेखा दीदी का मान सम्मान तुम हमेशा एक अच्छे बेटे की तरह करना
सूर्य ...... आ चिंता न करे माँ मेरे लिया सभी एक बराबर है जैसे आप है माँ सा है वैसे हे बड़ी मम्मी मेनका बुआ आवर दोनों मालिया है बस आप से थोड़ा ज्यादा प्यार करता हूँ हाहाहा
शालिनी जी ........ हैट बदमाश अभी भी सरीर दुःख रहा है तुम्हारे इस प्यार से
शालिनी जी की बात सुन कर सूर्य के चेहरे पे एक नॉटी स्माइल आ जाती है
सूर्य ........ आपने हे तो परमिशन दी थे शालू डार्लिंग अब आपका कहा तो मैं ताल नहीं सकता हाहाहा
आवर डेरी से शालिनी जी की योनि को सहला देता है
आवर एक निप्पल्स को मुँह में भर कर चुस्त हुआ आँखे बंद कर लेता है
जल्दी हे सूर्य कब निप्पल्स चुस्त हुआ नींद के आगोश में चला जाता है उसे भी पता नहीं चला
वही शालिनी जी काफी देर तक सोचती रही फिर उनकी भी आँख लग जाती है
सुबह जब शालिनी जी की आँख अपनी योनि इ कुछ गीलेपन की वजह से खुली जहा सूर्य अपना सर गुसाई लगा हुआ था पौने घंटे में सूर्य ने शालिनी जी एक हर हाईड को अपने प्यार से एक नयी ऊर्जा में भर दिया
शालिनी जी की जब घडी पे नजर पड़ी तो 05:30 ऍम से ऊपर टाइम हो चूका था
सूर्य एक बार फिर से लेट गया आवर शालिनी जी अपने ब्रा पेंटी निघ्त्य लिया बाथरूम की आवर भाड़ गयी
उनकी चल कुछ बदली हुई थी शालिनी जी 6 बजे के करीब त्यार हो कर सूर्य को सोया हुआ चढ़ उसपे पतली से चादर दाल कर रूम को खोल बहार निकल गई पैर जाते हुए गेट फिर से बंद कर गई ताकि सूर्य की नींद डिस्टर्ब न हो
आज कोई भी लड़की ध्यान या योध अभ्यास के लिया भी नहीं गयी थी
दादी जी ....... क्या हुआ शालिनी बेटी तुम्हे
शालिनी जी ......कुछ नहीं माँ सा मैं तो बिलकुल ठीक हूँ
किचन की आवर जाते हुए सबसे पहले शालिनी जी पे नजर माँ सा की पड़ी तो उन्हें शालिनी जी की चाल में कुछ बदलाव नजर आया
दादी जी ......पैर तुम इस तरह क्यों चल रही हो बेटी
शालिनी जी .......माँ सा वो सूर्य रात में मेरे पास हे सोया था काफी रात तक बाते करते रहा तो सुबह नींद पूरी नहीं हुई आवर बाथरूम में नहाते वक़्त बेखयाली में नाश खिंच गई थी मेरी आवर कुछ नहीं माँ सा
दादी जी ...... बेटी फिर आराम करना चाइये था तुम्हे जाओ जा कर रेस्ट करो किचन रेखा आवर मेनका संभल लेंगी मैं डॉक्टर को बुलवाती हम
शालिनी जी ........ माँ सा मुझे दर्द नहीं है आप चिंता न करो डॉक्टर की जरुरत नहीं है मुझे
( अब आपको तो नहीं बता सकती न की रात आवर सुबह आपके पोते ने पूरा सरीर हिला कर रख दिया मेरा ) वैसे भी मुझे आपसे जरुरी बात करनी है माँ सा
दादी जी ...... बोलो शालिनी बेटी क्या बात है
शालिनी जी ....... माँ सा वो मेर्री विजय भाई से प्यार करती है अब आपको हे पापा से इनके रिश्ते की बात करनी होगी मेर्री से सूर्य बात कर चूका है विजय भी त्यार है बस आपको इनका तीस्ता पका करना होगा आवर आपको हे सब देखना होगा विजय भाई के माता पिता नहीं है तो उदार से पापा हे सब देखेंगे
दादी जी ....... ये तो बहुत ख़ुशी की बात है बेटी विजय अच्छा लड़का है आवर जब दोनों एक दूसरे को इतना पसंद करते है तो मैं आज हे इनके रिश्ते की बात करती हूँ आवर जल्दी हे सदी फिक्स करती हूँ मेर्री भी इस परिवार का हिस्सा है आवर मेरी बेटी भी मैं तुम्हारे बाउजी से बात करती हम इस बारे में ते सूर्य अभी भी सो रहा है क्या
शालिनी जी .....जी माँ सा वो भी लेट तक जगा हुआ था आवर उसे कुछ दिन के लिया काम से बहार भी जाना होगा तो वो फ़िलहाल जयादा से ज्यादा घर पे हे रहना चाहता है
दादी जी ........ ये तो अच्छी हाट है बेटी आवर उसकी सदी भी नजदीक है फिर परीलोक भो जाना होगा सभी को तुम आराम करो मैं तुम्हारे बाउजी आवर महेंद्र से बात करती हूँ
शालिनी जी ........ जी माँ सा जैसा आप ठीक समजे
दादी जी बहार लोने की तरफ चल देती है जहा दादा जी आवर महेंद्र जी कुछ बाते कर रहे थे
ीदार किरण भी त्यार हो कर निचे आ गयी शालिनी जी उसे कुछ काम समजा कर रूम की आवर निकल गई
आवर किरण वह से मुस्कुराते हुए गायब हो जाती है .............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................
अपडेट उम्मीद से थोड़ा छोड़ा है थोड़ा एडजस्ट कर लीजियेगा
जल्दी हे पहले की तरह अपडेट आने लगेंगे अभी एक मंथ से ऊपर का गेप है थोड़ा समय लगेगा पहले की तरह रेगुलर होने में आवर स्टोरी को समझने में बस आना साथ बनाये रखो थैंक यू एवरीवन ..............





दादा जी .......वक़्त मुठी में बंद रेट की तरह कब हाथो से निकल जाता है पता हे नहीं चलता ठकुराइन कब बड़े हुए कब सदी लायक हुइमे जैसे कल की हे बात हो
रेखा जी .....दीदी आप खाना .....
रेखा जी मेनका को दादी जी के साथ खता देख बिना कुछ बोले लौट जाती है आवर कुछ देर बाद एक थल में कुछ सब जिया आवर चपाती रख जाती है
ीदार बहार महेंद्र जी सूर्य रेखा जी मेर्री जी शालिनी जी के साथ खाना खा कर कुछ देर अपने रूम में चला जाता है
सूर्य को अकेला देख मेर्री जी भी उसके रूम में जा पहुँचती है .......
अब आगे ........
सूर्य अभी अभी बाथरूम से फ्रेश हो कर बहार निकला हे था की उसकी नजर सामने बीएड पे बैठी मेर्री जी पे पड़ी जो सूर्य के निर्वस्त्र चोदे सीने पे जा अटकती है
सूर्य ....... ममी जी ऐसे क्या देख रही है आप जैसे आज से पहले मुझे ऐसे नंगा देखा हे नहीं हो आपने
मेर्री जी बीएड से उठ कर साढ़े हुए कदमो से सूर्य के बिलकुल सामने आ खड़ी होती है आवर बिना कुछ बोले सूर्य के चोदे सीने पे गीले बालो से गिरती पानी की बूंदो को अपने कोमल मदभरे होंटो से पिने लगती है
मेर्री जी ........ तुम पहले से काफी हैंडसम हो गए हो सूर्य या ये मेरा कोई भ्रम है
सूर्य ....... हाहाहा वैसे आप भी पहले से खूबसूरत आवर मजबूत हो गयी है
सूर्य मेर्री जी को पकड़ वह से गायब हो सीधा छठ वाले रूम में जा पहुंचा
मेर्री जी सूर्य को किश करते हुए सूर्य के बदन पे बाँदा आखरी वस्त्र टॉवल सूर्य की कमर से हटा कर बीएड पे सूर्य को देखा दे सूर्य के सीने पे आने मखमली उभर टिकते हुए उसकी आँखों में देखने लगती है
सूर्य मेर्री जी की आँखों में अपने लिया बेशुमार प्यार पुर चाहत देखता है जिसके चलते उसे खुद हे मेर्री जी की नजरो से नजर हटानी पड़ती है
मेर्री जी ........ तुम्हे नजरे चुराने की जरुरत नहीं है सूर्य मैं जानती हूँ तुम क्या सोच रहे हो पैर मैं इतने में भी खुश हूँ की मुझे तुमसे प्यार पुर परिवार दोनों हे मिले मुझे आवर कुछ नहीं चाइये बस जब कभी कुक्ड को कमजोर आवर अकेला समझने लागु तो तुम हमेशा मेरे साथ खड़े रहे पुर मुझे कुछ नहीं चाइये
सूर्य ........ मैं कुछ देने वाला कोण होता हूँ रही बात प्यार आवर परिवार की तो वो आपने खुद अर्जित किया है आवर आप खुदको कभी भी अकेला आवर कमजोर समझने की भूल मत करना मुझसे कहा ठीक है पर दादी जी आवर माँ के सामने फिर कभी ऐसा न बोलना उन्हें बहुत टेश पहुंचेगी आपकी इन बातो से
सूर्य डेरी डेरी इस हलके गंभीर हो चुके माहौल को बदलते हुए मेर्री जी के खिले हुए महकते अंगो को एक एक कर
be-parda करने लगता है
सूर्य पौने एक घंटे तक मेर्री जी के साथ प्यार भरा मिलान कर मेर्री जी के एक एक अंग को संतुष्ट कर चूका था
मेर्री जी ........ उम्मम्मम्हा थैंक यू सूर्य एंड ी लव यू ुम्मम्हा
सूर्य ......ी लव यू तू ममी जी अब आप यहाँ आराम करना चाहे तो यहाँ आराम करलो नहीं तो कुछ टाइम बाद निचे चली जाना
मेर्री जी ....... क्या मेरे साथ शावर लेना पसंद करोगे सूर्य
सूर्य एक बार मेर्री जी के पसीने से भीगे जिसम को निहारता है जिसपे सूर्य आवर मेर्री जी के प्रेम मिलान के चीन अंकित थे आवर आगे भाड़ बीएड पे बैठी मेर्री जी को गॉड में उठा ुशी रूम में बने बाथरूम की आवर भाड़ जाता है .
कुक्सह देर बाद सूर्य किरण से मिल सीधा शालिनी जी के रूम में पहुँचता है .
जहा शालिनी जी लेम्प की हलकी रौशनी में खूबसूरत निघ्त्य में अदलती स्थिति में बीएड से तक लगाए कोई बुक पढ़ रही थी
शालिनी जी एक बार नजर उठा कर सूर्य को देखती है .
आवर अपने हाथ में पकड़ी बूब्स का पेट मूड कर बंद करते हुए साइड टेबिल पे रख देती है .
सूर्य रूम का दूर लॉक करते हुए शालिनी जी के पास पहुते हे अपने t-shirts निकल शालिनी जी के बगल में लेट जाता है
जैसे हे सूर्य शालिनी जी के बगल में जा कर लेता शालिनी जी के चेहरे पे चमक उभर आती है आवर वो थड़ा सूर्य के पास खिसकते हुए करवट के बल सूर्य से चिपक जाती है
सूर्य शालिनी जी के प्यारे से चेहरे को कुछ पल निहारने के बाद उनके लरजते होंठो पे प्यार से अपने होंठ रख उन्हें चूमने लगता है
एक प्रेम भरे चुम्बन के बाद शालिनी जी अपने सांसो को नियंत्रित करते हुए सूर्य के सीने पे किसी मखमली चादर के जैसे लिपट जाती है
सूर्य ...... माँ कल मां जी नाना जी आ रहे है न
शालिनी जी ....... हम्म्म आवर अभी तुम्हारी माँ नहीं है यहाँ तुम्हारी शालू है
शालिनी जी की बात सुन सूर्य उन्हें पलट देता है आवर खुद उनके ऊपर आ जाता है
सूर्य ......... ुम्मम्हा तो मेरे पास इस वक़्त मेरी शालू है फिर आपको कल एक काम आवर करना होगा कल जब नाना जी मां जी आये तो आप उनसे मेर्री जी आवर विजय मां जी के रिश्ते की बात भी करना ताकि उनका विवाह भी जल्दी हो जाये आवर दूसरी बात मुझे मानसी स्वीटी आवर जो लिया के साथ कुछ वक़्त के लिया बहार जाना होगा
शालिनी जी ....... सदी की बात मैं कर लुंगी पैर तुम चारो कहा जा रहे हो आवर तुमने पहले क्यों नहीं बताया मुझे
सूर्य ....... मुझे पहले स्वीटी आवर मनु के साथ असुरगुरु शुक्राचार्य से भेंट करने सुक्रलोक जाना होगा उसके बाद ड्रैगन लोक जाना होगा शालू स्वीटी को ड्रैगन लोक का राजसिंहासन संभालना होगा जब तक जुली इस के लिया पूरी तरह से त्यार नहीं हो जाती तब तक स्वीटी को हे वह की क्वीन बन सब संभालना होगा
दोनों बात सुन शालिनी जी के चेहरे पे कुछ चिंता के भाव उभर आये
शालिनी जी ....... क्या गुरुदेव को पता है सुक्रलोक के विषय में
सूर्य ....... आपकी चिंता समाज रहा की आपको किस बात का दर सत्ता रहा है पैर मैं वह किसी युद्ध के लिया नहीं जा रहा हूँ बल्कि उनके निवेदन पे उनसे भेंट करने जा रहा हूँ फिर मेरे साथ बाबा व्योमासुर जी भी तो जा रहे है
शालिनी जी ........ फिर भी मेरा मन घबरा रहा है सूर्य कही कुछ गलत हुआ तो
सूर्य ........ उम्म्म्मः आप घबरा बहुत जल्दी जाती ऐसा कुछ नहीं होगा फिर भी कुछ ऐसा वैसे हुआ तो निर्भयासुर का तांडव सुक्रलोक पे कहर बन कर टूटेगा भले हे असुरगुरु शुक्र के समुख निर्भयासुर कमजोर है पैर इतना भी नहीं की ऐसा कुछ करने की वो सोचे भी आप सब चिंता भूल जाइये
निर्भयासुर का याद आते हे शालिनी जी का मन कुछ हद तक संत हो जाता है
सूर्य शालिनी जी के सीने से निघ्त्य हुक खोल उन अद्भुत ुनात बड़े बड़े विलक्षण उभर को उस रेशमी ब्रा नुमा वस्त्र से अनावृत कर अपने होंठ में शालिनी जी के गुलाबी निप्पल्स को कैद कर चूसने लगता है
आवर दूसरे हाथ से दूसरे बूब्स को अपने मरदाना हठी में पकड़ कर सहलाने लगता है
डेरी डेरी जहा पहले शालिनी जी के चेहरे पे हलकी हलकी चिंता की लकीरे थी वो गायब हो जाती है
सूर्य शालिनी जी के दोनों बूब्स को चूसने लगता है जैसे आज भी उन्हें वो मधुर दुगड़ भरा हो जिसे पिने को सूर्य लालायित हो
डेरी डेरी शालिनी जी के सरीर में एक नयी ऊर्जा का संचार होने लगता जो रह रह कर उनके कंदवार पे दस्तक दे रहा था
शालिनी जी खुद से हे सूर्य का शार्ट निकल कर उसे सूर्य के घुटनो से निचे कर देती है
सूर्य शालिनी के जिसम से उनके पुरे कपडे गायब कर शालिनी जी के पेट को चूमते हुए नाभि में अपनी जुबान दाल चाटने लगता है
शालिनी जी ........उम्मम्माह्ह सूर्य मुझे गुदगुदी हो रही है
सूर्य दशहरा शालिनी जी की नाभि को चाटने आवर चूमने से शालिनी जी के पेट में कसाव आने लगता है साथ हे रह रह कर उनका सरीर भी इस क्रिया से कम्पन करने लगता है
जैसे हे सूर्य के नाक में किसी जनि पहचानी गंध ( खुसबू ) का अनुभव होता है वो डेरी से खिसकता हुआ शालिनी जी के कंदवार पे उभरी उन ोंश की बूंदो को देख खुद को रोक नहीं पाया आवर अपने तपते होंठ उस द्वार से पे टिका देता है आवर उन अमृत सामान कमरष की बूंदो का सेवन करने लगता है

शालिनी जी ......... उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह सूर्य आवर तेज चुसो मैं करने वाली हूँ
शालिनी जी सूर्य के सर को अपने खिले हुए कमल पे दबाते हुए अपने भीतर संगृहीत कमरष का बांड खोल देती है

सूर्य बिना किसी हिचक के शालिनी जी के अमृत कुंड से छलका अमृत अपने गले से से निचे उतर लेता है
कुछ पल शालिनी जी करके कहती रही उन्हें देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उन्होंने मिलो का सफर दौड़ कर पूरा किया हो
शालिनी जी कुछ मिनट्स बाद जब नार्मल हुई तो सूर्य उनकी बगल में लेता हुआ उनके अद्भुत उभारो को सहला रहा था आवर उनके चेहरे को बड़े प्यार से निहार रहा था
शालिनी जी अपने खुले बालो को बांड कर सूर्य के होंठो पे एक छोटा सा किश कर बीएड पे बेथ जाती है
सूर्य बीएड से उतर शालिनी जी के सामने खड़ा हो जाता है
शालिनी जी सूर्य के जुलते हुए अंग को थम उस उभरे हुए लाल गुलाबी सुपडे पे किश कर अपने मुँह में सूर्य के लैंड अंदर बहार करने लगती है
सूर्य शालिनी जी के सर को थम हलकी हलकी कमर हिलाते हुए बिना शालिनी जी को तकलीफ पहुचाये अपना लैंड को शालिनी के मुँह में आगे पीछे करने लगा

शालिनी जी सूर्य के लैंड का 3,से 4 इंच तक का भाग बड़ी आसानी से चूस प् रही थी थी
हलाकि सूर्य के सूपड़ा पे हलके हलके शालिनी जी के दांतो के रगड़ भी लग रही थी जिस से सूर्य का लिंगमुण्ड आवर आदिक मात्रा में फूलने लगता है
कुछ देर बाद सूर्य शालिनी जी के मुँह से अपना लैंड निकल कर बीएड पे लेट जाता है
शालिनी जी सूर्य को देखती है पैर उसे कुछ समाज नहीं आता
सूर्य शालिनी जी को किसी नाजुक सी लड़की के जैसे उठा कर गुमा देता है
सूर्य शालिनी जी दोनों एक दूसरे के विपरीत चेहरा किये हुए थे
सूर्य शालिनी जी की कमर पकड़ कर अपना सर एक बार फिर से शालिनी जी की राश भाटी छूट पे अपना मुँह टिका देता है
शालिनी जी को समाज आते हे उनके चेहरे पे बड़ी सी मुस्कान थी एक बार फिर से सूर्य के लैंड को बड़ी हे मादक अड्डा से शालिनी जी चूसने लगती है जैसे वो सूर्य ोा लैंड न हो कर शालिनी जी की मनपसं आइस क्रीम हो

सूर्य शालिनी जी के गुड्डाद्धार को सह लेट हुए शालिनी जी की योनि की होंठो को हल्का हल्का अपने दांतो से कुरेदने लगता है जिस से शालिनी जी की कंझावला आवर आदिक बदलने लगती है
जैसे जैसे सूर्य अपनी मनमर्जी कर रहा था वैसे वैसे शालिनी जी का सबर जबाब दे रहा था
जैसे हे सूर्य को आभाष हुआ की अब शालिनी जी किसी भी वक़्त अपने चरम सुख को प्राप्त कर सकती है
सूर्य शालिनी जी को पलट देता है
शालिनी जी को अपने चरम पे पहुंचने से पहले सूर्य का इस तरह दौरे में छोड़ना उन्हें पसंद नहीं आया पैर जैसे हे सूर्य ने उन्हें पलट कर बीएड पे डोगग्य स्टाइल में उनके गोल गोल नितम्बों पे हलकी हलकी चपेट लगाई
शालिनी जी के चेहरे पे जहा गुस्सा था वही अब एक गहरी मुस्कान थी
सूर्य दोनों कूल्हों को चुम कर शालिनी जी के काम सवार पे अपना दहकता हुआ लिंग मुंड लगा देता है
शालिनी जी ........ उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह अब आवर नहीं रुका जाता सूर्य उम्म्म्म जल्दी से अपनी शालू को अपने प्रेम वर्षा से तृप्ति कर दो
सूर्य बिना किसी परवाह के शालिनी जी के संकरी गुफा में अपने बेलगाम घोड़े को खुला चढ़ देता है अपनी मनमर्जिया करने को

शालिनी जी के चेहरे पे कुछ पल के लिया पीड़ा उभारो पैर जल्दी हे सम्भलते हुए
अपनी गरम योनि को सहलाते हुए उस पीड़ा से बहार निकल सूर्य के साथ सवरग में गोते लगाने लगी
सूर्य ......... उफ्फ्फ्फ़ शालू तुम्हारी गर्मी कुछ ज्यादा हे भाड़ गई है
शालिनी जी ........ जिसे इस गर्मी का ख्याल रखना चाइये वही अब ध्यान नहीं देगा तो ऐसा तो होगा हे
सूर्य ..... उमंमाहहह बहुत जल्द आपकी साडी शिकायते दूर कर दूंगा शालू बस कुछ वक़्त दो मुझे आपकी हर हिच्छा पूरी होगी
ीदार शालिनी जी सूर्य के लम्बे पथरो ज्यादा देर सहन नहीं कर पायी आवर अपने चरम का आनद लेते हुए आँखे मुंड ली

सूर्य शालिनी को झड़े देख अपनी गति कुछ काम कर देता है
पैर माध्यम गति से अभी भी शालिनी जी की चुदाई में लगा हुआ था
कुछ देर बाद फिर से शालिनी जी सूर्य का साथ देने लगी
सूर्य भी पूरी सीडट से शालिनी जी को तृप्ति करने में लगा हुआ था कुछ देर बाद फिर से शालिनी जी झाड़ गई
सूर्य शालिनी जी को सीधा लुटाते हुआ आना लैंड शालिनी जी के कमरष से पूरी तरह भीगी योनि में भिड़ा देता है

शालिनी जी ....... अह्हह्ह्ह्ह दीदी सच कहती है तुम सच मच के अरबी घोड़े हो अह्हह्ह्ह्ह आवर जोर से
सूर्य ........ मैं कोई अरबी घोडा नहीं हूँ शालू वैसे बड़ी मम्मी ऐसे नहीं बोल सकती
शालिनी जी ....... उम्म्म्म है रेखा दीदी सायद मुझसे भी ज्यादा तुम्हे प्यार करती सभी करते है पैर रेखा दीदी का प्यार पवित्र है उन्हें न तुम में परीलोक का राजा सिकता है न सूर्य शिव ठाकुर उन्हें बस अपना बीटा नजर आता है वो तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचती ये सब तो मेनका दीदी ने कहा था
सूर्य ........ उम्म्म अह्हह्ह्ह्ह शालू मैं आने वाला हूँ अह्हह्ह्ह्ह
सूर्य के तेजी हर पल के साथ आवर ज्यादा तेज हो रही थी अगले एक मिनट्स में शालिनी जी ने अपना सबसे तीव्र चरम सुख प्राप्त किया उसके अगले हे पल सूर्य अपने पूरी कोशिश के बाद भी खुद को झड़ने से नहीं रोक पाया
शालिनी की योनि को ओवर फ्लो करते हुए बाकि बचा राश शालिनी के पेट पे गिरा दिया
शालिनी जी ......उम्मम्मम्हा मुझे ये टेस्ट करना है जैसे तुमने मेरा किया
सूर्य मुस्कुरा कर अपनी ऊँगली पे वीर्य ले शालिनी जी को आना वीर्य टेस्ट कराया है

कोई 10 मिनट्स रेस्ट कर सूर्य आवर शालिनी जी दोनों कहा कर एक दूसरे की बहो में लेते थे
शालिनी जी ........ सूर्य रेखा दीदी तुमसे सच में बहुत प्रेम करती है एक बेटे के रूप में भले हे तुम एक बार मेरी किसी बात को नजर अंदाज कर देना पैर रेखा दीदी का मान सम्मान तुम हमेशा एक अच्छे बेटे की तरह करना
सूर्य ...... आ चिंता न करे माँ मेरे लिया सभी एक बराबर है जैसे आप है माँ सा है वैसे हे बड़ी मम्मी मेनका बुआ आवर दोनों मालिया है बस आप से थोड़ा ज्यादा प्यार करता हूँ हाहाहा
शालिनी जी ........ हैट बदमाश अभी भी सरीर दुःख रहा है तुम्हारे इस प्यार से
शालिनी जी की बात सुन कर सूर्य के चेहरे पे एक नॉटी स्माइल आ जाती है
सूर्य ........ आपने हे तो परमिशन दी थे शालू डार्लिंग अब आपका कहा तो मैं ताल नहीं सकता हाहाहा
आवर डेरी से शालिनी जी की योनि को सहला देता है
आवर एक निप्पल्स को मुँह में भर कर चुस्त हुआ आँखे बंद कर लेता है
जल्दी हे सूर्य कब निप्पल्स चुस्त हुआ नींद के आगोश में चला जाता है उसे भी पता नहीं चला
वही शालिनी जी काफी देर तक सोचती रही फिर उनकी भी आँख लग जाती है
सुबह जब शालिनी जी की आँख अपनी योनि इ कुछ गीलेपन की वजह से खुली जहा सूर्य अपना सर गुसाई लगा हुआ था पौने घंटे में सूर्य ने शालिनी जी एक हर हाईड को अपने प्यार से एक नयी ऊर्जा में भर दिया
शालिनी जी की जब घडी पे नजर पड़ी तो 05:30 ऍम से ऊपर टाइम हो चूका था
सूर्य एक बार फिर से लेट गया आवर शालिनी जी अपने ब्रा पेंटी निघ्त्य लिया बाथरूम की आवर भाड़ गयी
उनकी चल कुछ बदली हुई थी शालिनी जी 6 बजे के करीब त्यार हो कर सूर्य को सोया हुआ चढ़ उसपे पतली से चादर दाल कर रूम को खोल बहार निकल गई पैर जाते हुए गेट फिर से बंद कर गई ताकि सूर्य की नींद डिस्टर्ब न हो
आज कोई भी लड़की ध्यान या योध अभ्यास के लिया भी नहीं गयी थी
दादी जी ....... क्या हुआ शालिनी बेटी तुम्हे
शालिनी जी ......कुछ नहीं माँ सा मैं तो बिलकुल ठीक हूँ
किचन की आवर जाते हुए सबसे पहले शालिनी जी पे नजर माँ सा की पड़ी तो उन्हें शालिनी जी की चाल में कुछ बदलाव नजर आया
दादी जी ......पैर तुम इस तरह क्यों चल रही हो बेटी
शालिनी जी .......माँ सा वो सूर्य रात में मेरे पास हे सोया था काफी रात तक बाते करते रहा तो सुबह नींद पूरी नहीं हुई आवर बाथरूम में नहाते वक़्त बेखयाली में नाश खिंच गई थी मेरी आवर कुछ नहीं माँ सा
दादी जी ...... बेटी फिर आराम करना चाइये था तुम्हे जाओ जा कर रेस्ट करो किचन रेखा आवर मेनका संभल लेंगी मैं डॉक्टर को बुलवाती हम
शालिनी जी ........ माँ सा मुझे दर्द नहीं है आप चिंता न करो डॉक्टर की जरुरत नहीं है मुझे
( अब आपको तो नहीं बता सकती न की रात आवर सुबह आपके पोते ने पूरा सरीर हिला कर रख दिया मेरा ) वैसे भी मुझे आपसे जरुरी बात करनी है माँ सा
दादी जी ...... बोलो शालिनी बेटी क्या बात है
शालिनी जी ....... माँ सा वो मेर्री विजय भाई से प्यार करती है अब आपको हे पापा से इनके रिश्ते की बात करनी होगी मेर्री से सूर्य बात कर चूका है विजय भी त्यार है बस आपको इनका तीस्ता पका करना होगा आवर आपको हे सब देखना होगा विजय भाई के माता पिता नहीं है तो उदार से पापा हे सब देखेंगे
दादी जी ....... ये तो बहुत ख़ुशी की बात है बेटी विजय अच्छा लड़का है आवर जब दोनों एक दूसरे को इतना पसंद करते है तो मैं आज हे इनके रिश्ते की बात करती हूँ आवर जल्दी हे सदी फिक्स करती हूँ मेर्री भी इस परिवार का हिस्सा है आवर मेरी बेटी भी मैं तुम्हारे बाउजी से बात करती हम इस बारे में ते सूर्य अभी भी सो रहा है क्या
शालिनी जी .....जी माँ सा वो भी लेट तक जगा हुआ था आवर उसे कुछ दिन के लिया काम से बहार भी जाना होगा तो वो फ़िलहाल जयादा से ज्यादा घर पे हे रहना चाहता है
दादी जी ........ ये तो अच्छी हाट है बेटी आवर उसकी सदी भी नजदीक है फिर परीलोक भो जाना होगा सभी को तुम आराम करो मैं तुम्हारे बाउजी आवर महेंद्र से बात करती हूँ
शालिनी जी ........ जी माँ सा जैसा आप ठीक समजे
दादी जी बहार लोने की तरफ चल देती है जहा दादा जी आवर महेंद्र जी कुछ बाते कर रहे थे
ीदार किरण भी त्यार हो कर निचे आ गयी शालिनी जी उसे कुछ काम समजा कर रूम की आवर निकल गई
आवर किरण वह से मुस्कुराते हुए गायब हो जाती है .............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................
अपडेट उम्मीद से थोड़ा छोड़ा है थोड़ा एडजस्ट कर लीजियेगा
जल्दी हे पहले की तरह अपडेट आने लगेंगे अभी एक मंथ से ऊपर का गेप है थोड़ा समय लगेगा पहले की तरह रेगुलर होने में आवर स्टोरी को समझने में बस आना साथ बनाये रखो थैंक यू एवरीवन ..............