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सपना मस्ती में तुनकते हुए सूर्य के चूचक को अपने दांतो में बिच कर खींच देती है
सूर्य .....ोुच्छ जंगली बिली कही की
सपना ....... आप किस जंगल से गरीब हो इतनी प्रेमिका है आपके पास बहार इतनी लम्बी लाइन लगी है
सूर्य ...... हाहाहा मतलब तुम्हारा अमृत नसीब नहीं होगा
सपना .......उम्मम्मम्हा वो भी आपका मैं भी आपकी अभी मुझे सोना है ऐसे हे
सूर्य .....हम्म्म वैसे भी 1 से ऊपर समय हो गया है सुबह जल्दी भी उठना है कल कोमल के साथ नागलोक भी जाना है
सपना ......मतलब सुबह जल्दी नहीं उठना होगा
सूर्य ......हाहाहाहा अभ्यास के बाद जाऊंगा आवर परषो सुबह जल्दी लौट आऊंगा उम्मम्मम्हा शुबरात्रि सपना
सपना .......शुबरात्रि उम्म्म्मः ............
अब आगे .........
सूर्यगढ़ .......... सभी ध्यान वह योध अभ्यास कर घर लौट आये थे किरण आवर सपना भी साथ में आये थे क्यों की सूर्य कोमल नागलोक के लिया निकल रहे थे
शालिनी जी ....... बीटा कोमल का ख्याल रखना आवर अपना भी
सूर्य ......क्या माँ कोमल का अपना घर है वो भले हे पिछले जनम का हे क्यों न हो आवर मुझे क्या होगा आप भी न अब मैं बड़ा हो गया हूँ
रेखा जी...... कितना भी बड़ा हो जाये बीटा पेट माँ बाप के लिया वो हमेशा बचा हे रहता है जैसा शालिनी कह रही है वैसा हे करना एक तो तुम दोनों को अचानक से वह जाने की क्या सूजी है
सूर्य .......don't वोर्री मम्मी वो आपकी बेटी है आवर हमेशा आपका उस पे पहला हक़ है आवर हमेशा रहेगा
आपकी चिंता मैं समझता हूँ पैर जो जायज नहीं है पैर ये जो आपके अंदर माँ का दिल है न वो डरता है
रेखा जी ........ तू तो बड़ा समझदार हो गया है 2 बीबियो के आते हे
सूर्य .......... आप कहो तो तीसरी भी ले औ साथ में हे वही सदी करके ोुछःह सॉरी मम्मी मजाक कर रहा था
रेखा जी मज़ाक करते हुए सूर्य का कण खींच देती है
सूर्य भी दर्द होने का नाटक करता है जिस से रेखा जी के चेहरे पे हलकी मुस्कान उभर आती है
शालिनी जी ....... दीदी जरा अच्छे से कण खिचाई करो इसकी मेरी तो आजकल सुनता हे नहीं है
रेखा जी ....... क्या ये सच है बीटा
सूर्य .......ुम्मम्हा आपको लगता है मैं कभी ऐसा कर सकता हु मम्मी आपको भी पता है आवर इनको भी की मैं सबसे ज्यादा किसने प्यार करता हूँ
रेखा जी ......आवर कोण होगी स्वीटी के अलावा
सूर्य ......नहीं मम्मी ये न आप अपनी शालू से हे पूछो जो सुबह सुबह मेरे कान खिचवाना चाहती है
दूसरे रूम में कोमल त्यार हो रही थी तभी वह किरण आती है
किरण ...... कोमल त्यार हो है क्या
कोमल .....बस हो गई संजो दीदी
किरण ........ तुम्हारे साथ मानसी दीदी भी जा रही है कल सुबह आना ताकि तुम भी अच्छे से समय बिता साकी अपने परिवार में आवर मानसी दीदी भी थोड़ा गम फिर लेगी
कोमल ............ दीदी अब यही मेरा परिवार है आत्मा भले हे नागलोक राजकुमारी कोमलांगी की है पैर सरीर कोमल का है उस परिवार का सम्बन्ध आत्मा आवर यादो से है पैर इस परिवार रकत आवर ढूढ के साथ साथ ढेरो सम्बन्ध है
किरण ......बस बस मेरी कोमल गुड़िया आज सुबह सुबह किसी सिद्ध योगिनी से प्रवचन तो नहीं सुन लिया है न या फिर कोई तपस्विनी साध्वी जी की आत्मा तो नहीं गुस्स गई है
कोमल ....... ऐसा कुछ नहीं है दीदी पैर माँ
किरण ........ देखो कोमल वैसे तो हम दोनों हम उम्र है आप मुझसे कुछ महीने बड़ी होंगी पैर जो हक़ मुझे आप सब लोगो ने दिया है बड़ी बहन का तो मेरी बात याद रखना
रेखा मम्मी तुम्हारे वह जाने से नाराज नहीं है बल्कि आपको खोने से एक माँ का दिल दर रहा है इस लिया वो उदाश है बस आप उनने ये अहसास करवा दीजिये की वह जाने के बाद भी उनकी हे बेटी कोमल रहेंगी न की राजकुमारी कोमलांगी बन जाएगी
कोमल ....... हम भी तो यही आंजना चाहते है
किरण .......... वो माँ है बस एक बार प्यार से उनके गले लग जाइये वो सब समाज जाएँगी कुछ भी सजाने की जरुरत नहीं होगी उन्होंने जनम दिया है आपको आपकी धड़कन से आपकी मनोयस्थिति समाज जाएँगी वो
कोमल किरण के गले लग उसके गाल चुम कर थैंक्स कहती है
किरण ......वैसे अच्छा मौका है कुंवर जी के साथ कुछ खूबसूरत लम्हे बिताने के लिया पैर ध्यान से गलत जगह हाथ मत डालना हहहहए वो बहुत खतरनाक है
कोमल .......... क्या मतलब आवर मुझे उनसे कैसा खतरा
किरण .........उनसे नहीं पैर उनका वो बहुत खतरनाक है कही जल्दी में हेहेहे
कोमल ......... कोई नहीं जब आप थम सकती है तो मैं क्यों नहीं मैं नाम से हे कोमल हूँ बाकि दिल आवर सरीर दोनों मजबूत है
सूर्य ....... क्या बाते हो रही है दोनों में
किरण ....... आपको क्यों बताये ये हमारी बहनो की आपस की बात है
सूर्य ........ स्वीटी वो मेरी सकतिया मुक्त कर दो न
किरण .......... सॉरी मैं तो भूल हे गई आप वादे से मुक्त है पैर घर में अभी भी आप किसी का मंद रीड नहीं करेंगे जब तक जरुरी न लगे
सूर्य ........ ये क्या बात हुई भला
किरण ......... आपकी कोमल त्यार है अब जाइये आवर कल सुबह आराम से आना ध्यान आवर अभयश हम कर लेंगे बस वो पुस्तक हमें सौंप दीजिये
सूर्य .....जो हुकुम मालकिन गुलाम आपके कहे अनुसार हे करेगा हाहाहाहा
सूर्य उस दिव्या पुस्तक को याद करता है कुछ हे पल में पुस्तक सूर्य के हठी में थी
सूर्य पुस्तक किरण को सौंप देता है साथ हे वो मंत्र भी जिस से पुस्तक को प्रयोग में लाया जा सके
किरण मंत्र का प्रयोग कर पुस्तक गायब कर देती
कोमल ........ आप लोग एकेले में बात कर लीजिये मैं मानसी दीदी को देखती हूँ त्यार हुई की नहीं
सूर्य ......वो किस लिया
किरण .......किस लिया क्या वो आपके साथ जा रही है नागलोक उसका हनीमून बाकि है अभी
कोमल के जाते हे किरण रूम को लॉक कर सूर्य की कमर में अपने टैंगो की कैंची लगा सूर्य को किश करने लगती है 4,5 मिनट्स के किस के बाद सूर्य किरण को वैसे हे सीने से लगाए रखा जब तक बहार गेट नॉक न हुआ
किरण तो गायब हो कर निकल गयी सूर्य ने जब दूर खोला तो सामने मेनका जी थी
जिन्होंने गेट बंद कर सूर्य को कीच कर बीएड पे गिरा कर उसपे चढ़ बैठी
मेनका जी ........ तुम्हे मेरा तो जरा भी ख्याल नहीं रहा नहीं.
कितने टाइम से मेरे नजदीक भी नहीं आये अब सदी हो गई तो ये बूढी बुआ तुम्हे पसंद नहीं क्या
सूर्य ......... आपको ऐसा लगता है क्या बुआ सा आप हे देखो टाइम कहा मिलता है
मेनका जी ......टाइम निकलना पड़ता है मिलता नहीं पैर तुम्हे क्या मेरी जो हालत है वो मैं हे समाज सकती हूँ
सूर्य मेनका जी को पलट कर अपने निचे लेता है आवर अपने होंठ उन फुले हुए होंठो से लगा कर घूमने लगता है
अपना एक हाथ मेनका जी की जंगो को सह लेट हुए हलके हलके बालो वाली उनकी फुल्ली हुई छूट पे हाथ रख सहलाने लगता है
सूर्य के सहलाने भर से मेनका जी की मुनिया आंसू बहाना सुरु कर देती है
सूर्य अपने बिच वाली ऊँगली को उस गरम पैर गीली गुफा में पहुंचा आगे पीछे करता है मुश्किल से 2 मिनट्स भी नहीं लगे की मेनका जी की योनि ने अपना चरमसुख प् लिया
सूर्य होंठो से अलग हो साड़ी को उठा अपना सर उनकी लहंगे में दाल सीधा वो चुतराश पिने लगता है
मेनका जी फिर से गरम होने लगी तो सूर्य ने अपने जीप खोल अपना गरम लोंदा सताते हुए मेनका जी के होंटो को अपने हों तो में कैद कर गरम सूपड़ा उस कशी हुई छूट में गुस्सा देता है एक पल को तो मेनका जी के चेते पे दर्द भरी लकीरे उभर आई
सूर्य ......उम्म्म्मः बुआ अभी ज्यादा टाइम नहीं है थोड़ा दर्द बर्दाश्त करना
मेनका जी है में गर्दन हिला बेडशीट को अपने मुँह में भर लेती है ताकि आवाज न हो
सूर्य थोड़ी तेजी से आधे मुसल से ओखली में कुटाई सुरु कर देता है
मेनका जी के सरीर की गर्मी कुछ ज्यादा हे बढ़ चुकी थी जो 5,6 मिनट्स तेज दामोदर देखो ने उन्हें फिर से वो सुख दे दिया जिसके लिया वो सूर्य को उलाहना दे रही थी
सूर्य मेनका जी के करते हे अपना लिंग बहार निकल लिया
सूर्य कोई ख़राब कपडा देख रहा था जिस से वो लिंग को साफ करने वाला था पैर मेनका जी ने उस मुसल को थम अपने मुँह में भर कर अपनी हे योनिरस को चाट चाट कर साफ कर दिया
सूर्य उनने एक किश कर वह से गायब हो गया ताकि किसी को पता न चले की इतने देर वो अंदर क्या कांड कर रहा था
नागलोक ...........
सूर्य कोमल आवर मानसी को ले जब नागलोक पहुंचा तो सूर्य महल में न जा कर नागलोक के उस हिज शी में पहुंचा जी हिस्सा तक्षक नागवंशी नागो के अधिकार में था
सूर्य के लागलोक में कदम रखते हे वाइट ड्रैगन को सूर्य का आने का पता चल गया
कोमल ......हम यहाँ क्यों आये है हमें तो महल में होना चाइये था ये तो तक्षक नाग्वंशियो का इलाका है
सूर्य ......मैं जनता हूँ कोमल ये तक्षक नागवंशी नागो का आदिकारिक क्षेत्र है
अपने वास्तविक रूप को ददन करो कोमल
कोमल .......पैर उसकी क्या आव्सय्कता है
सूर्य .........बाद में बताऊंगा अभी जैसा कहता हूँ वो करो
मानसी .......कोमल दीदी जरूर इन्होने कुछ सोचा होगा
कोमल ......... ठीक है
कोमल आँखे बंद कर अपना रूप बदल नागलोक राजकुमारी कोमलांगी का रूप धार लेती है
वाइट ड्रैगन इस वक़्त नागलोक के उस निर्जन क्षेत्र में था जहा केवल पहाड़ गुफा आवर जीवित ज्वालामुखी हे थे कुछ अन्य जानवर भी जो नागो का सीकर होने से बचने के लिया इस निर्जन स्थान पे सरन लेते थे
वाइट ड्रैगन एक ज्वालामुखी में इस वक़्त आराम कर रहा था जैसे हे सूर्य नागलो नागलोक में कदम रखा वाइट ड्रैगन बगलामुखी से निकल सूर्य की आवर बढ़ गया
कुछ हे पालो में वाइट ड्रैगन सूर्य के सामने था
सूर्य .......तो हमारे आने का पता चल गया आपको भी
w.dragon ....... आपकी ऊर्जा मुझसे जुडी है फिर आपके आने का मुझे कैसे न पता चलता मालिक
सूर्य ........चलो फिर चलते है महल की आवर
सूर्य कोमल मानसी को लिया w.dragon पे स्वर हो महल की आवर बढ़ गया
सूर्य ........w.dragon सामान्य गति से उड़न भोर कोई जल्दी नहीं है
w.dragon ........ जैसा आप कहे मालिक अगर ेजजय हो तो कुछ पूछ सकता हूँ
सूर्य ....... यही न की हम सीधा महल भी तो जा सकते थे न फिर यहाँ इस स्थान को हे क्यों चुना हमने
w.dragon ....... आपको कैसे पता
सूर्य .......भूलो नहीं तुम्हारी ऊर्जा मुझसे जुडी है तुम्हारी सोच आवर मन में होने वाले परतेक विचार मुझे पता होते है
दर्जों को देख तक्षक नागो में खलबली मच उठी
ऐसा नहीं था की उन्होंने दृगों नहीं देखा था पहले
पैर इस लोक में हजारो सालो पहले हे इस प्रजाति का अस्तित्व ख़तम हो चूका था
यहाँ जो पहले ड्रैगन पाए जाते थे वो नागदरोगों प्रजाति के होते थे
नागो की तरह विशाल पैर ड्रैगन की तरह उड़ने वाले उनके हे जैसा मिलता जुलता चेहरा
कोमल ....... आपको पता है ये तक्षक नागवंशी बहुत हे क्रूर संभव के होते है हम वासुकि नागवंशी को अपने से कमजोर वह निम्न ( नीची ) प्रजाति का समझते है
हमारे वासुकि वंश के नागो पे जुलम करना जैसे इनका जामसिद्ध अधिकार हो
सूर्य ........ वैसे एक सोच उनकी सच भी है कोमल वो बल में वासुकि नागो से आदिक बलवान होते है गुरुदेव ने बताया था मुझे नागलोक आवर तक्षक आवर वासुकि वंश के विषय में जब मैंने उनसे यशा आने की इजाजत ली थी
मानसी ........ वो देखो हमारी आवर कोई अस्त्र आ रहा है
सूर्य .......... आने दो उस से कोई फरक नहीं पड़ने वाला w.dragon थोड़ा आवर निचे से चलो
w.dragon ....... ऐसे में तो हम उनके अस्त्र सस्त्रो की सीमा में आ जायेंगे
सूर्य ......वही तो मैं चाहता हूँ मानसी खुद को गायब कर को आवर मैं भी खुद को गायब कर रहा हूँ कोमल उनने केवल तुम हे दिखाई देनी चाइये
कोमल .......पता नहीं आप ऐसा क्यों कर रहे है
सूर्य ........ कुछ सबर तो रखो मेरी जान सब पता चल जायेगा
सूर्य मानसी खुद अदृश्य कर लेते है जैसे जैसे ड्रैगन निचे गया अब सभी तक्षक नागवंशी ड्रैगन पे स्वर किसी कन्या को उनका दर काम हुआ पैर वह मौजूद बड़े बुजुर्ग तक्षक नागो की दर के मरे हालत ख़राब हो गई
क्युकी उन्होंने नागराजकुमारी कोमलांगी को पहचान लिया था
उनके से कुछ बुजुर्ग नागो के मुँह से वासुकि नागवंशी राजकुमारी कोमलांगी नाम सुन कर बाकि लोगो को भी पता चल गया की ये कोण है
कोमल ....... इन्हें ऐसा डरता देख पता नहीं क्यों हमें अच्छा नहीं लग रहा है
सूर्य ....... पैर ये जरुरी है कोमल भविष्य में होने वाले योध में नागलोक की सेना का नेतृत्व तुम्हे करना होगा समय आ चूका है की दोनों नागवश एक हो जाये
कोमल .......ये संभव नहीं है हजारो सालों से हमारे पूर्वजो ने न जाने कितने हे पर्यटन किये पैर वो सब वयर्थ रहा ये लोग कभी एक नहीं हो सकते है
कुछ देर बाद सूर्य आवर मानसी अपना अदृश्य रूप से सामान्य रूप में लौट आये अब तक्षक नागवंशी सीमा ख़तम हो चुकी थी आवर वासुकि नागो का क्षेत्र आराम हो चूका था
कुछ हे देर बाद ड्रैगन वासुकि नागवंशी नागराज महावीर के महल के सामने उतरता है
एक बार तो सभी नाग पहाड़ी आवर वह मौजूद नाग दर के मरे जोर से चिल्लाते हुए खुद को बचने के लिया भाग उठे
बहार हो रहे शोर सरबे की खबर महल के भीतर लगी तो सेनापति माणिक नागराज महावीर राजगुरु नागेश्वर नागराजकुमार इंद्रजीत
( दोस्तों मुझे नागराज महावीर के पुत्र का नाम याद नहीं है तो उसे इंद्रजीत नाम दे रहा हूँ ) कुछ सही नाग सेनिको के साथ हठी में तलवार लिया उस आवर तेजी से बढे जहा से बचाओ बचो आवर आक्रमण हहआ है ऐसी आवाजे आ रही थी
सेनापति माणिक .......किसका इतना दशांश जो हमारे होते हुए महल पे आक्रमण करने की गुस्ताख़ करे
सामने सूर्य को आवर मानसी को देख सेनापति माणिक अपनी तलवार लिया तेजी से सूर्य की आवर बढ़ा
आवर अपनी तलवार सूर्य की गर्दन पे लगाने हे वाला था की मानसी की गायक शेरनी से सेनापति माणिक को उठा के जमीं पे दे मरती है
कोमल .......दीदी रुक जाइये ये आप क्या कर रही है
मानसी .......तुम्हारी निकट कैसे हुई इन पे तलवार उठाने की
माणिक ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ था की मानसी के पेअर की जोरदार ठोकर सेनापति माणिक के सीने पे आ लगी
मानसी के गुस्से का अंदाजा इस से हे लगाया जा सकता था की सेनापति का भरी भरकम सरीर जमीं पे रगड़ कहते हुए मानसी से 10,12 फिट दूर जा रुका
नागराज महावीर आवर कोमल मानसी को रोकने के लिया आगे बढे तो सूर्य ने कोमल का हाथ पकड़ कर रोक लिया
नागराज महावीर के कदम वही रुक गए जब सूर्य द्वारा कोमल को रोकते हुए देखा
सेनापति माणिक ....... डस्ट कन्या तुम्हारा ये दशांश की तुमने मुझे पत्थर किया
सेनापति माणिक अपना रूप बदल विशाल नाग में परिवर्तित हो गया आवर मानसी को अपनी पंच में जकड लिया
कोमल ........दीदी खुद को बचाओ मुझे छोड़िये मुझे दीदी की मदद करने दीजिये
सूर्य ........ इन दोनों के बिच में नहीं कोई भी नहीं आएगा पीछे हाथो सब
नागराज महावीर ........ किन्तु पुत्र सूर्य
सूर्य ....... पिता श्री आप कुछ पल में रहे
मानसी बड़ी तेजी से सेनापति माणिक की मजबूत पकड़ से किसी रेट की तरह निकल कर पीछे से उसकी विशाल पंच को पकड़ कर झटका देती है
सेनापति माणिक को इसकी उम्मीद नहीं थी की उसके इस विशाल सरीर को कोई इस तरह से दल भी छठा सकता है
सेनापति माणिक ोुण्डे मुँह अपने हे वजन से जमीं पे आ गिरता है
मानसी ......ब्लैक दरोगों बहार निकलो
सूर्य ....... नहीं मनु ये मुझे जिन्दा चाइये जान से नहीं मरना है इसे
किसी को कुछ भी समाज नहीं आ रहा था की आखिर यहाँ हो क्या रहा है आवर इसके पीछे वजह क्या है
नाग सैनिक अपने नागराज को में देख खुद भी में हो इस विषम दृश्य को देख रहे थे जहा एक दुर्बल से किसिरि कोमल कन्या कैसे एक 30 ,35 फिट लम्बे नाग के साथ खेल रही थी
मानसी ........ तुमने उनपे तलवार उठा अपने जीवन की अंतिम गलती है जिन्दा तो रहोगे पैर जीने लायक नहीं
मानसी सेनापति की पूछ पकड़ कर हवा में ऊपर उठते हुए गुमा कर एक बार फिर से सेनापति को दल छठा देती है
इस बार वॉर कुछ ज्यादा हे भयानक था की सेनापति माणिक का नागरूप अपने आप गायब हो सामान्य इंसानी रूप में आ गया जगह जगह पे सरीर पे बने जाखल मुँह से उगलता खून सेनापति की दुर्दशा बयां कर रहा था
सूर्य ........ पिता श्री इस हे ऐसे हे बंदी गाढ़ा में दाल दीजिये
महानी पूर्वी पूर्वी भी शोर सराभा सुन इस आवर आ गई थी सामने का भयानक मंजर उन्हें भी डरा गया थस पैर अपनी पुत्री कोमलांगी को देख सब कुछ भू वो कोमल को अपने सीने से लगा लेती है
नागराज महावीर .......पैर पुत्र ये हमारे नागलोक के सेनापति है इनके साथ इस तरह का वैभार इस कन्या को दंड का पत्र बनता है
सूर्य ......... आपने सायद पहचाना नहीं पिता श्री वो मेरी भार्या ( पत्नी ) है मानसी सूर्य ठाकुर पिता श्री सोच समाज कर निर्णय कीजिये बिना किसी भी राजा को बिना पूर्ण सत्य ज्ञात किये नये नहीं करना चाइये पहले अपनी पुत्री से मिल लीजिये आवर आप लोग देख क्या रहे है इसे उठा कर काराग्रह में डालो सभा में इसका नये होगा
नागराज महावीर के इस अरे पे कुछ सैनिक सेनापति माणिक को उठा कर कारागृह की आवर ले गए
N.mahaveer ....... सभी अपने स्थान पे लौट जाओ
n.purvi ......... जमता आप नागलोक आ रहे है हमें सन्देश तो भेजा होया आपके स्वागत की तयारी के लिया हमें कुछ वक़्त मिल जाता
सूर्य ......... क्या एक पुत्र को अपनी माता से भेंट करने के लिया पहले से सन्देश भेजना पड़ता है ारीस्वाद दीजिये माता
सूर्य मसनसी को साथ लिए नागरानी पूर्वी के चरण स्पर्श करता है
नागरानी ...... चिरंजीवी भाव पुत्र साधा सौभाग्यवती भाव पुत्री मानसी
सूर्य ुशी तरह नागराज महावीर आवर नाग राजगुरु नागेश्वर के चरण स्पर्श कर उनसे आसिष लेता है
इंद्रजीत ....... परनाम जीजा श्री परनाम बड़ी दीदी
सूर्य ........ कैसे हो इंद्रजीत
मानसी ....... ईश्वर आपकी हर मनोकामना पूर्ण करे इंद्रजीत
इंद्रजीत ...... कोमलांगी दीदी आप हमें आशीर्वाद नहीं देंगी
कोमल ....... तुमने अपनी दीदी आवर जीजा श्री के चरण स्पर्श कर उनसे आसिष ली किन्तु क्या आपने हमारे चरण स्पर्श किये फिर हम बिना चरण स्पर्श किये आपको आसिष कैसे दे हुन्न
इंद्रजीत ....... हमें क्षमा करे दीदी
कोमल ......ुम्मम्हा कैसे हो इंद्रा
नागराज महावीर .......... महारानी जी अपनी दोनों पुत्रियों आवर जमता का तिलक कर महल में नहीं ले कर जाना क्या
नागरानी एक देशी से पूजा थल ले तीनो को तिलक आरती कर महल में चलने को कहती है
सूर्य ......... आप लोग बात कीजिये हम आते है माता श्री
कोमल को बहुत ख़ुशी हो रही थी सूर्य द्वारा नागरानी पूर्वी आवर नागराज महावीर को इतना सम्मान देता देख वही थोड़ी नाराज भी थी की सूर्य ने उसे कुछ भी नहीं बताया था
कोमल मानसी n.purvi इंद्रजीत चारो महल लौट गए
n..veer ....... पुत्र ये सब क्या है आवर आपने हमें भी बिच में आने से रोक दिया
सूर्य ....... पिता श्री पिछले कुछ समय से जो भी नागलोक में गठन गठित हो रही है इसके पीछे कोई आवर नहीं आपके प्रिय सेनापति माणिक हे है
राजगुरु ........ आपके विषय में महाराज से सुना था हमने किन्तु आपसे भेंट प्रथम बार हो रही है सच कहे तो हमें आपकी भार्या पे अत्यंत क्रोध आया किन्तु जब आपके साथ राजकुमारी कोमलांगी को देखा जब आप उन्हें इस योध में हस्तक्षेप करने से रोक रहे थे ुशी वक़्त महाराज को रुकता देखे तो हम समाज गए आप कोण है जरूर कुछ ऐसा जोगा जिसका भान हमें नहीं है
सूर्य ........ क्षमा चाहता हूँ राजगुरु जी किन्तु मानसी को मैंने हे आदेश दिया था सेनापति माणिक को दण्डित करने के लिया पैर उसने समय से पूर्व हे गलती कर दी जिसके चलते उसने हमारी गर्दन पे तलवार रख दी जिसे देखने के बाद मानसी स्वयं के क्रोध को रोक नहीं पाए हमने भी हस्तक्षेप करना उचित नहीं सामना पिता श्री अपने नहाय स्थान पे विराजिए आवर सेनापति को सभा में लेन का आदेश दीजिये
नागराज महावीर अपने सिंघासन पे विराजमान हो सेनिको को आदेश देते है वह कुछ आवर राजदरबारी भी मौजूद थे सूर्य सेनापति के सिंघासन पे विराजमान हो जट्स है क्यों की वही एक स्थान खली था इस वक़्त
कुछ हे देर में सैनिक दौड़ते हुए राजसभा में आते है
सैनिक ........ महाराज सेनापति माणिक काराग्रह से भाग गए
नागराज वीर ........ इस स्वस्थ में इना आंतरिक मदद के वो बंदी गाढ़ा से कैसे निकल सकते है
राजगुरु ........ महाराज इस से साबित होता है की सेनापति माणिक दोषी है वो ज्यादा दूर नहीं गए होंगे हमें सेनिको को आदेश देना चाइये सिगरा हे उसे गिरफ्तार कर सभा में पेश करे
नागराज वीर ...... सेनिका छापा छापा छान मारो किसी भी इस्थिति में माणिक हमारे समक्ष हो आवर जो बंदीग्रह में पहरे पे सैनिक मौजूद थे उन्हें ुशी बंदीग्रह में दाल दो
सूर्य ............ बंदीग्रह से गुप्त रूप से निकलने वाले दक्षिणी चोर के गुप्त मार्ग पे सेना को भेजिए क्यों की सेनापति माणिक के लिया फ़िलहाल तक्षक नाग्वंशियो की सरन में जाना हे सुरक्षित है आज्ञा दीजिये आवर जहा तक हो उसे जीवित हे गिरफ्तार कीजिये उसके खुलाशे पे बहुत से चुके भेजिए सामने आने वाले है जो आपके इस राजशृंगशान पे नजर गड़ाए बैठे है
उनके केवल एक मौका दे रहा हूँ अपना गुनाह सभी के समक्ष मन कर क्षमा याचना की तो कोई दंड नहीं मिलेगा किन्तु जिसने अपना पाप स्वीकार नहीं किया उसे दंड भोगना हे होगा संध्या काल तक का समय है उन सभी के पास
सूर्य राजगुरु आवर नागराज महावीर को परनाम कर कोमल की आवर निकल गया
नागराज ......... पुत्र सूर्य ने जो कहा ऐसा कोई भी व्यक्ति सभा में मौजूद है तो उसके पास अभी भी अपने किये पाप का प्रायश्चित करने का समय है उनके दिए हुए ॉडी के बाद हम भो किसी को नहीं बचा पाएंगे उनके हाथो दण्डित होने से अभी अपने पाप सभी के समक्ष उजागर किया तो दंड में नरमी बरती जाएगी आवर एक आवर मौका भी मिलेगा तैसा हम आप सभी पे छोड़ते है सभा समाप्त
( नागराज महावीर............ पुत्र सूर्य आपने तो आते हे भेड़िया के झुंड में खलबली मचा कर रख दी आपको कोटि कोटि नमन गुरुदेव जो आपने पुत्र सूर्य को यहाँ की परिस्थिति से पूर्व हे अवगत करवा दिया )
नागराज महावीर मुस्कुराते हुए मन में सोचते हुए रानी महल जा पहुंचने जहा सूर्य कोमल मानसी नागरानी पूर्वी आवर राजकुमार इंद्रजीत बंशी ठिठोली कर रहे थे
N.veer ........ आज कही हम किसी अन्य के महल में तो नहीं आ गए है महारानी जी
N.purvi ........ ये आपका हे महल है महाराज न की आप किसी आवर के महल में पहुंच गए आपकी पुत्री आपके जमता से रस्ट हो गयी है
n.veer ........ क्या हुआ पुत्री अपने पिता के हृद्या से नहीं लगेंगी आप
कोमल सोफे ( सोफे जैसे सिंघासन ) से उठ कर n.veer से गले मिलती है
कोमल .......हम आपसे भी रस्ट है पिता श्री क्या हम अब आपकी पुत्री नहीं रहे जो आपने इतना कुछ हमसे छुपा कर रखा
n.veer ........ पुत्री हम अपनी कोमलांगी को कैसे कास्ट दे सकते थे आप हमारी पुत्री थी है आवर सदैव रहेंगी आपका स्थान जो हमारे हृद्या में है वो कोई भी नहीं ले सकता आपका अनुज इंद्रजीत भी नहीं
सूर्य ........ ये तो अन्याय है पिता श्री यहाँ भी ये आपकी लाड़ली आवर वह भी सबकी लाड़ली इन्हें हम जरा गुस्से में कुछ बोल दे तो हमारी हे माता हमारे गाल लाल कर देती है
इंद्रजीत ........ क्या सच में जीजा श्री माता शालिनी जी आपकी पिटाई कर देती है पैर आप तो इतने बड़े है फिर भी
सूर्य .......पूछ को अपनी दीदी से कुछ दिन पहले हे पार्षद खा चूका हूँ इन पे गुस्सा होने की वजह से
इंदरजीत .......क्या जीजा श्री सत्य कह रहे है दीदी
कोमल ....... हम्म्म
इंद्रजीत ........ हमारी माता तो कभी हम पे क्रोधीय नहीं होती
सूर्य ........ जिस दिन सदी होगी तब देखना सेल साहब
इंद्रजीत ....... दीदी देखिये जीजा श्री कैसे अभद्र भाषा बोल रहे है
n.purvi ......हहहहए पुत्र इंद्रा आपके जीजा श्री ने आपको वही कहा जो आपके साथ इनका रिस्ता है
हमारे यहाँ बहन के पति को बहनोई कह कर सम्बोधित करते है पैर पृथ्वीलोक में बहनोई या फिर साला कहा जाता है
काफी देर सभी वह बे थे मजाक करते रहे आज महल की वो खामोश सही कक्ष हंशी के ठहाको से गूंज उठे थे
वही दरबारी महाराज के सभा से बहार निकलने बाद एक दूसरे का उतरे हुए डरे हुए चेहरे देख राजगुरु काफी खुश हो रहे थे जैसे उनकी मन की मुराद पूरी हो रही थी .....................
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .................
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......................
सपना मस्ती में तुनकते हुए सूर्य के चूचक को अपने दांतो में बिच कर खींच देती है
सूर्य .....ोुच्छ जंगली बिली कही की
सपना ....... आप किस जंगल से गरीब हो इतनी प्रेमिका है आपके पास बहार इतनी लम्बी लाइन लगी है
सूर्य ...... हाहाहा मतलब तुम्हारा अमृत नसीब नहीं होगा
सपना .......उम्मम्मम्हा वो भी आपका मैं भी आपकी अभी मुझे सोना है ऐसे हे
सूर्य .....हम्म्म वैसे भी 1 से ऊपर समय हो गया है सुबह जल्दी भी उठना है कल कोमल के साथ नागलोक भी जाना है
सपना ......मतलब सुबह जल्दी नहीं उठना होगा
सूर्य ......हाहाहाहा अभ्यास के बाद जाऊंगा आवर परषो सुबह जल्दी लौट आऊंगा उम्मम्मम्हा शुबरात्रि सपना
सपना .......शुबरात्रि उम्म्म्मः ............
अब आगे .........
सूर्यगढ़ .......... सभी ध्यान वह योध अभ्यास कर घर लौट आये थे किरण आवर सपना भी साथ में आये थे क्यों की सूर्य कोमल नागलोक के लिया निकल रहे थे
शालिनी जी ....... बीटा कोमल का ख्याल रखना आवर अपना भी
सूर्य ......क्या माँ कोमल का अपना घर है वो भले हे पिछले जनम का हे क्यों न हो आवर मुझे क्या होगा आप भी न अब मैं बड़ा हो गया हूँ
रेखा जी...... कितना भी बड़ा हो जाये बीटा पेट माँ बाप के लिया वो हमेशा बचा हे रहता है जैसा शालिनी कह रही है वैसा हे करना एक तो तुम दोनों को अचानक से वह जाने की क्या सूजी है
सूर्य .......don't वोर्री मम्मी वो आपकी बेटी है आवर हमेशा आपका उस पे पहला हक़ है आवर हमेशा रहेगा
आपकी चिंता मैं समझता हूँ पैर जो जायज नहीं है पैर ये जो आपके अंदर माँ का दिल है न वो डरता है
रेखा जी ........ तू तो बड़ा समझदार हो गया है 2 बीबियो के आते हे
सूर्य .......... आप कहो तो तीसरी भी ले औ साथ में हे वही सदी करके ोुछःह सॉरी मम्मी मजाक कर रहा था
रेखा जी मज़ाक करते हुए सूर्य का कण खींच देती है
सूर्य भी दर्द होने का नाटक करता है जिस से रेखा जी के चेहरे पे हलकी मुस्कान उभर आती है
शालिनी जी ....... दीदी जरा अच्छे से कण खिचाई करो इसकी मेरी तो आजकल सुनता हे नहीं है
रेखा जी ....... क्या ये सच है बीटा
सूर्य .......ुम्मम्हा आपको लगता है मैं कभी ऐसा कर सकता हु मम्मी आपको भी पता है आवर इनको भी की मैं सबसे ज्यादा किसने प्यार करता हूँ
रेखा जी ......आवर कोण होगी स्वीटी के अलावा
सूर्य ......नहीं मम्मी ये न आप अपनी शालू से हे पूछो जो सुबह सुबह मेरे कान खिचवाना चाहती है
दूसरे रूम में कोमल त्यार हो रही थी तभी वह किरण आती है
किरण ...... कोमल त्यार हो है क्या
कोमल .....बस हो गई संजो दीदी
किरण ........ तुम्हारे साथ मानसी दीदी भी जा रही है कल सुबह आना ताकि तुम भी अच्छे से समय बिता साकी अपने परिवार में आवर मानसी दीदी भी थोड़ा गम फिर लेगी
कोमल ............ दीदी अब यही मेरा परिवार है आत्मा भले हे नागलोक राजकुमारी कोमलांगी की है पैर सरीर कोमल का है उस परिवार का सम्बन्ध आत्मा आवर यादो से है पैर इस परिवार रकत आवर ढूढ के साथ साथ ढेरो सम्बन्ध है
किरण ......बस बस मेरी कोमल गुड़िया आज सुबह सुबह किसी सिद्ध योगिनी से प्रवचन तो नहीं सुन लिया है न या फिर कोई तपस्विनी साध्वी जी की आत्मा तो नहीं गुस्स गई है
कोमल ....... ऐसा कुछ नहीं है दीदी पैर माँ
किरण ........ देखो कोमल वैसे तो हम दोनों हम उम्र है आप मुझसे कुछ महीने बड़ी होंगी पैर जो हक़ मुझे आप सब लोगो ने दिया है बड़ी बहन का तो मेरी बात याद रखना
रेखा मम्मी तुम्हारे वह जाने से नाराज नहीं है बल्कि आपको खोने से एक माँ का दिल दर रहा है इस लिया वो उदाश है बस आप उनने ये अहसास करवा दीजिये की वह जाने के बाद भी उनकी हे बेटी कोमल रहेंगी न की राजकुमारी कोमलांगी बन जाएगी
कोमल ....... हम भी तो यही आंजना चाहते है
किरण .......... वो माँ है बस एक बार प्यार से उनके गले लग जाइये वो सब समाज जाएँगी कुछ भी सजाने की जरुरत नहीं होगी उन्होंने जनम दिया है आपको आपकी धड़कन से आपकी मनोयस्थिति समाज जाएँगी वो
कोमल किरण के गले लग उसके गाल चुम कर थैंक्स कहती है
किरण ......वैसे अच्छा मौका है कुंवर जी के साथ कुछ खूबसूरत लम्हे बिताने के लिया पैर ध्यान से गलत जगह हाथ मत डालना हहहहए वो बहुत खतरनाक है
कोमल .......... क्या मतलब आवर मुझे उनसे कैसा खतरा
किरण .........उनसे नहीं पैर उनका वो बहुत खतरनाक है कही जल्दी में हेहेहे
कोमल ......... कोई नहीं जब आप थम सकती है तो मैं क्यों नहीं मैं नाम से हे कोमल हूँ बाकि दिल आवर सरीर दोनों मजबूत है
सूर्य ....... क्या बाते हो रही है दोनों में
किरण ....... आपको क्यों बताये ये हमारी बहनो की आपस की बात है
सूर्य ........ स्वीटी वो मेरी सकतिया मुक्त कर दो न
किरण .......... सॉरी मैं तो भूल हे गई आप वादे से मुक्त है पैर घर में अभी भी आप किसी का मंद रीड नहीं करेंगे जब तक जरुरी न लगे
सूर्य ........ ये क्या बात हुई भला
किरण ......... आपकी कोमल त्यार है अब जाइये आवर कल सुबह आराम से आना ध्यान आवर अभयश हम कर लेंगे बस वो पुस्तक हमें सौंप दीजिये
सूर्य .....जो हुकुम मालकिन गुलाम आपके कहे अनुसार हे करेगा हाहाहाहा
सूर्य उस दिव्या पुस्तक को याद करता है कुछ हे पल में पुस्तक सूर्य के हठी में थी
सूर्य पुस्तक किरण को सौंप देता है साथ हे वो मंत्र भी जिस से पुस्तक को प्रयोग में लाया जा सके
किरण मंत्र का प्रयोग कर पुस्तक गायब कर देती
कोमल ........ आप लोग एकेले में बात कर लीजिये मैं मानसी दीदी को देखती हूँ त्यार हुई की नहीं
सूर्य ......वो किस लिया
किरण .......किस लिया क्या वो आपके साथ जा रही है नागलोक उसका हनीमून बाकि है अभी
कोमल के जाते हे किरण रूम को लॉक कर सूर्य की कमर में अपने टैंगो की कैंची लगा सूर्य को किश करने लगती है 4,5 मिनट्स के किस के बाद सूर्य किरण को वैसे हे सीने से लगाए रखा जब तक बहार गेट नॉक न हुआ
किरण तो गायब हो कर निकल गयी सूर्य ने जब दूर खोला तो सामने मेनका जी थी
जिन्होंने गेट बंद कर सूर्य को कीच कर बीएड पे गिरा कर उसपे चढ़ बैठी
मेनका जी ........ तुम्हे मेरा तो जरा भी ख्याल नहीं रहा नहीं.
कितने टाइम से मेरे नजदीक भी नहीं आये अब सदी हो गई तो ये बूढी बुआ तुम्हे पसंद नहीं क्या
सूर्य ......... आपको ऐसा लगता है क्या बुआ सा आप हे देखो टाइम कहा मिलता है
मेनका जी ......टाइम निकलना पड़ता है मिलता नहीं पैर तुम्हे क्या मेरी जो हालत है वो मैं हे समाज सकती हूँ
सूर्य मेनका जी को पलट कर अपने निचे लेता है आवर अपने होंठ उन फुले हुए होंठो से लगा कर घूमने लगता है
अपना एक हाथ मेनका जी की जंगो को सह लेट हुए हलके हलके बालो वाली उनकी फुल्ली हुई छूट पे हाथ रख सहलाने लगता है
सूर्य के सहलाने भर से मेनका जी की मुनिया आंसू बहाना सुरु कर देती है
सूर्य अपने बिच वाली ऊँगली को उस गरम पैर गीली गुफा में पहुंचा आगे पीछे करता है मुश्किल से 2 मिनट्स भी नहीं लगे की मेनका जी की योनि ने अपना चरमसुख प् लिया
सूर्य होंठो से अलग हो साड़ी को उठा अपना सर उनकी लहंगे में दाल सीधा वो चुतराश पिने लगता है
मेनका जी फिर से गरम होने लगी तो सूर्य ने अपने जीप खोल अपना गरम लोंदा सताते हुए मेनका जी के होंटो को अपने हों तो में कैद कर गरम सूपड़ा उस कशी हुई छूट में गुस्सा देता है एक पल को तो मेनका जी के चेते पे दर्द भरी लकीरे उभर आई
सूर्य ......उम्म्म्मः बुआ अभी ज्यादा टाइम नहीं है थोड़ा दर्द बर्दाश्त करना
मेनका जी है में गर्दन हिला बेडशीट को अपने मुँह में भर लेती है ताकि आवाज न हो
सूर्य थोड़ी तेजी से आधे मुसल से ओखली में कुटाई सुरु कर देता है
मेनका जी के सरीर की गर्मी कुछ ज्यादा हे बढ़ चुकी थी जो 5,6 मिनट्स तेज दामोदर देखो ने उन्हें फिर से वो सुख दे दिया जिसके लिया वो सूर्य को उलाहना दे रही थी
सूर्य मेनका जी के करते हे अपना लिंग बहार निकल लिया
सूर्य कोई ख़राब कपडा देख रहा था जिस से वो लिंग को साफ करने वाला था पैर मेनका जी ने उस मुसल को थम अपने मुँह में भर कर अपनी हे योनिरस को चाट चाट कर साफ कर दिया
सूर्य उनने एक किश कर वह से गायब हो गया ताकि किसी को पता न चले की इतने देर वो अंदर क्या कांड कर रहा था
नागलोक ...........
सूर्य कोमल आवर मानसी को ले जब नागलोक पहुंचा तो सूर्य महल में न जा कर नागलोक के उस हिज शी में पहुंचा जी हिस्सा तक्षक नागवंशी नागो के अधिकार में था
सूर्य के लागलोक में कदम रखते हे वाइट ड्रैगन को सूर्य का आने का पता चल गया
कोमल ......हम यहाँ क्यों आये है हमें तो महल में होना चाइये था ये तो तक्षक नाग्वंशियो का इलाका है
सूर्य ......मैं जनता हूँ कोमल ये तक्षक नागवंशी नागो का आदिकारिक क्षेत्र है
अपने वास्तविक रूप को ददन करो कोमल
कोमल .......पैर उसकी क्या आव्सय्कता है
सूर्य .........बाद में बताऊंगा अभी जैसा कहता हूँ वो करो
मानसी .......कोमल दीदी जरूर इन्होने कुछ सोचा होगा
कोमल ......... ठीक है
कोमल आँखे बंद कर अपना रूप बदल नागलोक राजकुमारी कोमलांगी का रूप धार लेती है
वाइट ड्रैगन इस वक़्त नागलोक के उस निर्जन क्षेत्र में था जहा केवल पहाड़ गुफा आवर जीवित ज्वालामुखी हे थे कुछ अन्य जानवर भी जो नागो का सीकर होने से बचने के लिया इस निर्जन स्थान पे सरन लेते थे
वाइट ड्रैगन एक ज्वालामुखी में इस वक़्त आराम कर रहा था जैसे हे सूर्य नागलो नागलोक में कदम रखा वाइट ड्रैगन बगलामुखी से निकल सूर्य की आवर बढ़ गया
कुछ हे पालो में वाइट ड्रैगन सूर्य के सामने था
सूर्य .......तो हमारे आने का पता चल गया आपको भी
w.dragon ....... आपकी ऊर्जा मुझसे जुडी है फिर आपके आने का मुझे कैसे न पता चलता मालिक
सूर्य ........चलो फिर चलते है महल की आवर
सूर्य कोमल मानसी को लिया w.dragon पे स्वर हो महल की आवर बढ़ गया
सूर्य ........w.dragon सामान्य गति से उड़न भोर कोई जल्दी नहीं है
w.dragon ........ जैसा आप कहे मालिक अगर ेजजय हो तो कुछ पूछ सकता हूँ
सूर्य ....... यही न की हम सीधा महल भी तो जा सकते थे न फिर यहाँ इस स्थान को हे क्यों चुना हमने
w.dragon ....... आपको कैसे पता
सूर्य .......भूलो नहीं तुम्हारी ऊर्जा मुझसे जुडी है तुम्हारी सोच आवर मन में होने वाले परतेक विचार मुझे पता होते है
दर्जों को देख तक्षक नागो में खलबली मच उठी
ऐसा नहीं था की उन्होंने दृगों नहीं देखा था पहले
पैर इस लोक में हजारो सालो पहले हे इस प्रजाति का अस्तित्व ख़तम हो चूका था
यहाँ जो पहले ड्रैगन पाए जाते थे वो नागदरोगों प्रजाति के होते थे
नागो की तरह विशाल पैर ड्रैगन की तरह उड़ने वाले उनके हे जैसा मिलता जुलता चेहरा
कोमल ....... आपको पता है ये तक्षक नागवंशी बहुत हे क्रूर संभव के होते है हम वासुकि नागवंशी को अपने से कमजोर वह निम्न ( नीची ) प्रजाति का समझते है
हमारे वासुकि वंश के नागो पे जुलम करना जैसे इनका जामसिद्ध अधिकार हो
सूर्य ........ वैसे एक सोच उनकी सच भी है कोमल वो बल में वासुकि नागो से आदिक बलवान होते है गुरुदेव ने बताया था मुझे नागलोक आवर तक्षक आवर वासुकि वंश के विषय में जब मैंने उनसे यशा आने की इजाजत ली थी
मानसी ........ वो देखो हमारी आवर कोई अस्त्र आ रहा है
सूर्य .......... आने दो उस से कोई फरक नहीं पड़ने वाला w.dragon थोड़ा आवर निचे से चलो
w.dragon ....... ऐसे में तो हम उनके अस्त्र सस्त्रो की सीमा में आ जायेंगे
सूर्य ......वही तो मैं चाहता हूँ मानसी खुद को गायब कर को आवर मैं भी खुद को गायब कर रहा हूँ कोमल उनने केवल तुम हे दिखाई देनी चाइये
कोमल .......पता नहीं आप ऐसा क्यों कर रहे है
सूर्य ........ कुछ सबर तो रखो मेरी जान सब पता चल जायेगा
सूर्य मानसी खुद अदृश्य कर लेते है जैसे जैसे ड्रैगन निचे गया अब सभी तक्षक नागवंशी ड्रैगन पे स्वर किसी कन्या को उनका दर काम हुआ पैर वह मौजूद बड़े बुजुर्ग तक्षक नागो की दर के मरे हालत ख़राब हो गई
क्युकी उन्होंने नागराजकुमारी कोमलांगी को पहचान लिया था
उनके से कुछ बुजुर्ग नागो के मुँह से वासुकि नागवंशी राजकुमारी कोमलांगी नाम सुन कर बाकि लोगो को भी पता चल गया की ये कोण है
कोमल ....... इन्हें ऐसा डरता देख पता नहीं क्यों हमें अच्छा नहीं लग रहा है
सूर्य ....... पैर ये जरुरी है कोमल भविष्य में होने वाले योध में नागलोक की सेना का नेतृत्व तुम्हे करना होगा समय आ चूका है की दोनों नागवश एक हो जाये
कोमल .......ये संभव नहीं है हजारो सालों से हमारे पूर्वजो ने न जाने कितने हे पर्यटन किये पैर वो सब वयर्थ रहा ये लोग कभी एक नहीं हो सकते है
कुछ देर बाद सूर्य आवर मानसी अपना अदृश्य रूप से सामान्य रूप में लौट आये अब तक्षक नागवंशी सीमा ख़तम हो चुकी थी आवर वासुकि नागो का क्षेत्र आराम हो चूका था
कुछ हे देर बाद ड्रैगन वासुकि नागवंशी नागराज महावीर के महल के सामने उतरता है
एक बार तो सभी नाग पहाड़ी आवर वह मौजूद नाग दर के मरे जोर से चिल्लाते हुए खुद को बचने के लिया भाग उठे
बहार हो रहे शोर सरबे की खबर महल के भीतर लगी तो सेनापति माणिक नागराज महावीर राजगुरु नागेश्वर नागराजकुमार इंद्रजीत
( दोस्तों मुझे नागराज महावीर के पुत्र का नाम याद नहीं है तो उसे इंद्रजीत नाम दे रहा हूँ ) कुछ सही नाग सेनिको के साथ हठी में तलवार लिया उस आवर तेजी से बढे जहा से बचाओ बचो आवर आक्रमण हहआ है ऐसी आवाजे आ रही थी
सेनापति माणिक .......किसका इतना दशांश जो हमारे होते हुए महल पे आक्रमण करने की गुस्ताख़ करे
सामने सूर्य को आवर मानसी को देख सेनापति माणिक अपनी तलवार लिया तेजी से सूर्य की आवर बढ़ा
आवर अपनी तलवार सूर्य की गर्दन पे लगाने हे वाला था की मानसी की गायक शेरनी से सेनापति माणिक को उठा के जमीं पे दे मरती है
कोमल .......दीदी रुक जाइये ये आप क्या कर रही है
मानसी .......तुम्हारी निकट कैसे हुई इन पे तलवार उठाने की
माणिक ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ था की मानसी के पेअर की जोरदार ठोकर सेनापति माणिक के सीने पे आ लगी
मानसी के गुस्से का अंदाजा इस से हे लगाया जा सकता था की सेनापति का भरी भरकम सरीर जमीं पे रगड़ कहते हुए मानसी से 10,12 फिट दूर जा रुका
नागराज महावीर आवर कोमल मानसी को रोकने के लिया आगे बढे तो सूर्य ने कोमल का हाथ पकड़ कर रोक लिया
नागराज महावीर के कदम वही रुक गए जब सूर्य द्वारा कोमल को रोकते हुए देखा
सेनापति माणिक ....... डस्ट कन्या तुम्हारा ये दशांश की तुमने मुझे पत्थर किया
सेनापति माणिक अपना रूप बदल विशाल नाग में परिवर्तित हो गया आवर मानसी को अपनी पंच में जकड लिया
कोमल ........दीदी खुद को बचाओ मुझे छोड़िये मुझे दीदी की मदद करने दीजिये
सूर्य ........ इन दोनों के बिच में नहीं कोई भी नहीं आएगा पीछे हाथो सब
नागराज महावीर ........ किन्तु पुत्र सूर्य
सूर्य ....... पिता श्री आप कुछ पल में रहे
मानसी बड़ी तेजी से सेनापति माणिक की मजबूत पकड़ से किसी रेट की तरह निकल कर पीछे से उसकी विशाल पंच को पकड़ कर झटका देती है
सेनापति माणिक को इसकी उम्मीद नहीं थी की उसके इस विशाल सरीर को कोई इस तरह से दल भी छठा सकता है
सेनापति माणिक ोुण्डे मुँह अपने हे वजन से जमीं पे आ गिरता है
मानसी ......ब्लैक दरोगों बहार निकलो
सूर्य ....... नहीं मनु ये मुझे जिन्दा चाइये जान से नहीं मरना है इसे
किसी को कुछ भी समाज नहीं आ रहा था की आखिर यहाँ हो क्या रहा है आवर इसके पीछे वजह क्या है
नाग सैनिक अपने नागराज को में देख खुद भी में हो इस विषम दृश्य को देख रहे थे जहा एक दुर्बल से किसिरि कोमल कन्या कैसे एक 30 ,35 फिट लम्बे नाग के साथ खेल रही थी
मानसी ........ तुमने उनपे तलवार उठा अपने जीवन की अंतिम गलती है जिन्दा तो रहोगे पैर जीने लायक नहीं
मानसी सेनापति की पूछ पकड़ कर हवा में ऊपर उठते हुए गुमा कर एक बार फिर से सेनापति को दल छठा देती है
इस बार वॉर कुछ ज्यादा हे भयानक था की सेनापति माणिक का नागरूप अपने आप गायब हो सामान्य इंसानी रूप में आ गया जगह जगह पे सरीर पे बने जाखल मुँह से उगलता खून सेनापति की दुर्दशा बयां कर रहा था
सूर्य ........ पिता श्री इस हे ऐसे हे बंदी गाढ़ा में दाल दीजिये
महानी पूर्वी पूर्वी भी शोर सराभा सुन इस आवर आ गई थी सामने का भयानक मंजर उन्हें भी डरा गया थस पैर अपनी पुत्री कोमलांगी को देख सब कुछ भू वो कोमल को अपने सीने से लगा लेती है
नागराज महावीर .......पैर पुत्र ये हमारे नागलोक के सेनापति है इनके साथ इस तरह का वैभार इस कन्या को दंड का पत्र बनता है
सूर्य ......... आपने सायद पहचाना नहीं पिता श्री वो मेरी भार्या ( पत्नी ) है मानसी सूर्य ठाकुर पिता श्री सोच समाज कर निर्णय कीजिये बिना किसी भी राजा को बिना पूर्ण सत्य ज्ञात किये नये नहीं करना चाइये पहले अपनी पुत्री से मिल लीजिये आवर आप लोग देख क्या रहे है इसे उठा कर काराग्रह में डालो सभा में इसका नये होगा
नागराज महावीर के इस अरे पे कुछ सैनिक सेनापति माणिक को उठा कर कारागृह की आवर ले गए
N.mahaveer ....... सभी अपने स्थान पे लौट जाओ
n.purvi ......... जमता आप नागलोक आ रहे है हमें सन्देश तो भेजा होया आपके स्वागत की तयारी के लिया हमें कुछ वक़्त मिल जाता
सूर्य ......... क्या एक पुत्र को अपनी माता से भेंट करने के लिया पहले से सन्देश भेजना पड़ता है ारीस्वाद दीजिये माता
सूर्य मसनसी को साथ लिए नागरानी पूर्वी के चरण स्पर्श करता है
नागरानी ...... चिरंजीवी भाव पुत्र साधा सौभाग्यवती भाव पुत्री मानसी
सूर्य ुशी तरह नागराज महावीर आवर नाग राजगुरु नागेश्वर के चरण स्पर्श कर उनसे आसिष लेता है
इंद्रजीत ....... परनाम जीजा श्री परनाम बड़ी दीदी
सूर्य ........ कैसे हो इंद्रजीत
मानसी ....... ईश्वर आपकी हर मनोकामना पूर्ण करे इंद्रजीत
इंद्रजीत ...... कोमलांगी दीदी आप हमें आशीर्वाद नहीं देंगी
कोमल ....... तुमने अपनी दीदी आवर जीजा श्री के चरण स्पर्श कर उनसे आसिष ली किन्तु क्या आपने हमारे चरण स्पर्श किये फिर हम बिना चरण स्पर्श किये आपको आसिष कैसे दे हुन्न
इंद्रजीत ....... हमें क्षमा करे दीदी
कोमल ......ुम्मम्हा कैसे हो इंद्रा
नागराज महावीर .......... महारानी जी अपनी दोनों पुत्रियों आवर जमता का तिलक कर महल में नहीं ले कर जाना क्या
नागरानी एक देशी से पूजा थल ले तीनो को तिलक आरती कर महल में चलने को कहती है
सूर्य ......... आप लोग बात कीजिये हम आते है माता श्री
कोमल को बहुत ख़ुशी हो रही थी सूर्य द्वारा नागरानी पूर्वी आवर नागराज महावीर को इतना सम्मान देता देख वही थोड़ी नाराज भी थी की सूर्य ने उसे कुछ भी नहीं बताया था
कोमल मानसी n.purvi इंद्रजीत चारो महल लौट गए
n..veer ....... पुत्र ये सब क्या है आवर आपने हमें भी बिच में आने से रोक दिया
सूर्य ....... पिता श्री पिछले कुछ समय से जो भी नागलोक में गठन गठित हो रही है इसके पीछे कोई आवर नहीं आपके प्रिय सेनापति माणिक हे है
राजगुरु ........ आपके विषय में महाराज से सुना था हमने किन्तु आपसे भेंट प्रथम बार हो रही है सच कहे तो हमें आपकी भार्या पे अत्यंत क्रोध आया किन्तु जब आपके साथ राजकुमारी कोमलांगी को देखा जब आप उन्हें इस योध में हस्तक्षेप करने से रोक रहे थे ुशी वक़्त महाराज को रुकता देखे तो हम समाज गए आप कोण है जरूर कुछ ऐसा जोगा जिसका भान हमें नहीं है
सूर्य ........ क्षमा चाहता हूँ राजगुरु जी किन्तु मानसी को मैंने हे आदेश दिया था सेनापति माणिक को दण्डित करने के लिया पैर उसने समय से पूर्व हे गलती कर दी जिसके चलते उसने हमारी गर्दन पे तलवार रख दी जिसे देखने के बाद मानसी स्वयं के क्रोध को रोक नहीं पाए हमने भी हस्तक्षेप करना उचित नहीं सामना पिता श्री अपने नहाय स्थान पे विराजिए आवर सेनापति को सभा में लेन का आदेश दीजिये
नागराज महावीर अपने सिंघासन पे विराजमान हो सेनिको को आदेश देते है वह कुछ आवर राजदरबारी भी मौजूद थे सूर्य सेनापति के सिंघासन पे विराजमान हो जट्स है क्यों की वही एक स्थान खली था इस वक़्त
कुछ हे देर में सैनिक दौड़ते हुए राजसभा में आते है
सैनिक ........ महाराज सेनापति माणिक काराग्रह से भाग गए
नागराज वीर ........ इस स्वस्थ में इना आंतरिक मदद के वो बंदी गाढ़ा से कैसे निकल सकते है
राजगुरु ........ महाराज इस से साबित होता है की सेनापति माणिक दोषी है वो ज्यादा दूर नहीं गए होंगे हमें सेनिको को आदेश देना चाइये सिगरा हे उसे गिरफ्तार कर सभा में पेश करे
नागराज वीर ...... सेनिका छापा छापा छान मारो किसी भी इस्थिति में माणिक हमारे समक्ष हो आवर जो बंदीग्रह में पहरे पे सैनिक मौजूद थे उन्हें ुशी बंदीग्रह में दाल दो
सूर्य ............ बंदीग्रह से गुप्त रूप से निकलने वाले दक्षिणी चोर के गुप्त मार्ग पे सेना को भेजिए क्यों की सेनापति माणिक के लिया फ़िलहाल तक्षक नाग्वंशियो की सरन में जाना हे सुरक्षित है आज्ञा दीजिये आवर जहा तक हो उसे जीवित हे गिरफ्तार कीजिये उसके खुलाशे पे बहुत से चुके भेजिए सामने आने वाले है जो आपके इस राजशृंगशान पे नजर गड़ाए बैठे है
उनके केवल एक मौका दे रहा हूँ अपना गुनाह सभी के समक्ष मन कर क्षमा याचना की तो कोई दंड नहीं मिलेगा किन्तु जिसने अपना पाप स्वीकार नहीं किया उसे दंड भोगना हे होगा संध्या काल तक का समय है उन सभी के पास
सूर्य राजगुरु आवर नागराज महावीर को परनाम कर कोमल की आवर निकल गया
नागराज ......... पुत्र सूर्य ने जो कहा ऐसा कोई भी व्यक्ति सभा में मौजूद है तो उसके पास अभी भी अपने किये पाप का प्रायश्चित करने का समय है उनके दिए हुए ॉडी के बाद हम भो किसी को नहीं बचा पाएंगे उनके हाथो दण्डित होने से अभी अपने पाप सभी के समक्ष उजागर किया तो दंड में नरमी बरती जाएगी आवर एक आवर मौका भी मिलेगा तैसा हम आप सभी पे छोड़ते है सभा समाप्त
( नागराज महावीर............ पुत्र सूर्य आपने तो आते हे भेड़िया के झुंड में खलबली मचा कर रख दी आपको कोटि कोटि नमन गुरुदेव जो आपने पुत्र सूर्य को यहाँ की परिस्थिति से पूर्व हे अवगत करवा दिया )
नागराज महावीर मुस्कुराते हुए मन में सोचते हुए रानी महल जा पहुंचने जहा सूर्य कोमल मानसी नागरानी पूर्वी आवर राजकुमार इंद्रजीत बंशी ठिठोली कर रहे थे
N.veer ........ आज कही हम किसी अन्य के महल में तो नहीं आ गए है महारानी जी
N.purvi ........ ये आपका हे महल है महाराज न की आप किसी आवर के महल में पहुंच गए आपकी पुत्री आपके जमता से रस्ट हो गयी है
n.veer ........ क्या हुआ पुत्री अपने पिता के हृद्या से नहीं लगेंगी आप
कोमल सोफे ( सोफे जैसे सिंघासन ) से उठ कर n.veer से गले मिलती है
कोमल .......हम आपसे भी रस्ट है पिता श्री क्या हम अब आपकी पुत्री नहीं रहे जो आपने इतना कुछ हमसे छुपा कर रखा
n.veer ........ पुत्री हम अपनी कोमलांगी को कैसे कास्ट दे सकते थे आप हमारी पुत्री थी है आवर सदैव रहेंगी आपका स्थान जो हमारे हृद्या में है वो कोई भी नहीं ले सकता आपका अनुज इंद्रजीत भी नहीं
सूर्य ........ ये तो अन्याय है पिता श्री यहाँ भी ये आपकी लाड़ली आवर वह भी सबकी लाड़ली इन्हें हम जरा गुस्से में कुछ बोल दे तो हमारी हे माता हमारे गाल लाल कर देती है
इंद्रजीत ........ क्या सच में जीजा श्री माता शालिनी जी आपकी पिटाई कर देती है पैर आप तो इतने बड़े है फिर भी
सूर्य .......पूछ को अपनी दीदी से कुछ दिन पहले हे पार्षद खा चूका हूँ इन पे गुस्सा होने की वजह से
इंदरजीत .......क्या जीजा श्री सत्य कह रहे है दीदी
कोमल ....... हम्म्म
इंद्रजीत ........ हमारी माता तो कभी हम पे क्रोधीय नहीं होती
सूर्य ........ जिस दिन सदी होगी तब देखना सेल साहब
इंद्रजीत ....... दीदी देखिये जीजा श्री कैसे अभद्र भाषा बोल रहे है
n.purvi ......हहहहए पुत्र इंद्रा आपके जीजा श्री ने आपको वही कहा जो आपके साथ इनका रिस्ता है
हमारे यहाँ बहन के पति को बहनोई कह कर सम्बोधित करते है पैर पृथ्वीलोक में बहनोई या फिर साला कहा जाता है
काफी देर सभी वह बे थे मजाक करते रहे आज महल की वो खामोश सही कक्ष हंशी के ठहाको से गूंज उठे थे
वही दरबारी महाराज के सभा से बहार निकलने बाद एक दूसरे का उतरे हुए डरे हुए चेहरे देख राजगुरु काफी खुश हो रहे थे जैसे उनकी मन की मुराद पूरी हो रही थी .....................
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .................
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......................

















































