Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 13 - SexBaba
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Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

ी गोत ईंटो ान एक्सीडेंट. I'll अपडेट यू गाइस फुरदर इन थे इवनिंग.
 
यस! सो अबाउट व्हाट हप्पेनेड यस्टरडे!?

कल शाम 7-8 बजे हुआ ये. में मार्किट से घर लौट रहा था. ी वास् ों माय बाइक. 40-45 की स्पीड थी. और में मैं रोड के जो साइड में अल्टेरनाते रोड्स रहती है, उसमे था. अचानक hi सामने चल रहे एक एज्ड अंकल ने अपनी स्कूटी ों थे स्पॉट रोक दी थी. हे वास् विथ हिज लिटिल ग्रांडडॉह्टर. सब कुछ सडनली हुआ. सो, ी एप्लाइड ब्रेक्स बूत माय बाइक स्लइड ऑफ. में गिरा और हाथ परर में काफी चोट आयी. छील गए हाथ और परर.

ात तहत टाइम, मेरा लेफ्ट एआरएम स्ट्रैट नहीं हो रहा था. ी थॉट की शायद दर्द की वजह से ऐसा था. सो, में जैसे तैसे घर आया. बूत लिखे 1-1:30 घंटे और गुज़र गए बूत एआरएम स्ट्रैट hi नहीं हो रहा था. तब मेरी थोड़ी फटी. और लगा की एल्बो की बोन शायद टूट चुकी है. काम से काम फ्रैक्चर तोह हुआ hi होगा. रात को इम्मेडिएटली में हॉस्पिटल गया. थे दीद थे x-ray और फोर्टनेटेली, नथिंग वास् तेरे. कोई फ्रैक्चर नहीं था.

हे गावे में सम पैन किलर्स, जिन्हे में रात में लेके सोया और सुबह आज थोड़ा बाय हाथ स्ट्रैट हो रहा है.

नाउ, अबाउट अपडेट...! अपडेट 83 हाफ कम्प्लेटेड था. अभी भी उतना hi लिखा पड़ा हुआ है. सीन्स, में फ़ोन से hi टाइप करता हु. I'll तरय विथ माय राइट हैंड. ऐसे hi बैठे बैठे. ी होप प्रॉबब्ली में 12 के पहले hi अपडेट डिलीवर कर दूंगा. अन्य्वयस, सॉरी फॉर थे वेट गाइस.

थिंग्स हप्पेनेड सडनली. 2 दिन के गैप लिया हु जॉब से भी. वुंड्स माइनर है. स्क्रैचेस वगैरह. पत्तिया है हलकी फुलकी जो 2-3 दिन में खुल जाएंगी.



कीप सपोर्टिंग!!! ✨✨✨
 
अपडेट - 83 ~ होमकमिंग!

अब तक...

सर जॉर्ज : यू....!!!

वीर : हँ???

सर जॉर्ज : तेल्ल में! व्हाट दो यू थिंक अबाउट थिस?

वीर : वेल...

[Do it master~]

और...

*डिंग*

वीर के सामने उस मम्मी की साड़ी डिटेल्स आ गयी.


अब आगे...

2 दिन गुज़र चुके थे.

और इन् बीते 2 दिनों में, वीर ने कोई कसार नहीं छोर्री थी अपनी माँ से एक गहरा रिश्ता जोड़ने में.

पर सडली, उससे कुछ ज़्यादा सफलता नहीं मिली.

भावना, बात तोह खुल के करती थी. पर जब भी सवाल उसके अतीत से जुड़ा हुआ आता था तोह वो उन् सवालों से खुद को बचा लेती थी. और कन्वर्सेशन को कही और शिफ्ट कर देती थी.

इन् बीते दिनों आरोही से वीर की फिरसे बात हुई. और जो खबर आरोही ने उससे वह मुंबई की सुनाई, उससे सुन्न वीर के होश hi उड़द चुके थे.

वीर को यकीन hi नहीं हो रहा था की वो हरामी प्रांजल इतनी जल्दी सब कुछ कर देगा.

वीर, चाहता तोह था की उसी वक़्त वो मुंबई लौट जाए. पर उसने ऐसा केवल एक hi कारण से नहीं किया.

सबसे बड़ा कारण ये था की, प्रांजल जो भी कर रहा था, वो श्वेता के साथ कर रहा था. श्वेता! यानी की उसकी स्टेपमॉम. वो स्टेपमॉम जिसने वीर को कभी एक बेटे के रूप में एक्सेप्ट किया hi नहीं था.

वही स्टेपमॉम जो प्रांजल, विवेक के षडियन्त्रों में शामिल रहती थी. तोह भला वीर वापस लौट के क्यों जाए?

अस लॉन्ग अस, काव्य, आरोही और उसके दादा जी किसी पोटेंशियल डेंजर में नहीं थे, वीर का लौटने का सवाल hi नहीं बनता था.

सो, हे डीडेड तो स्टे फॉर 2-3 डेज मोरे.

प्रांजल का पत्ता तोह वो लौट के साफ़ करने hi वाला था. बस यहाँ से घर पॅहुचते hi.

और आज hi उसका यहाँ आखिरी दिन था. उसने मम्मी की ज़्यादा कुछ डिटेल्स नहीं दी थी सर जॉर्ज को. ज़रुरत से ज़्यादा यदि वीर बताने लगता तोह लोगो को शक हो सकता था. की एक बन्दे को इतना सब कुछ कैसे पता है? और वो भी इतनी जल्दी उत्तर कैसे दे पा रहा है?

इसलिए वीर ने वग अंसवेरस दिए. जिस कारण से उन्हें भी यकीन हो गया की वीर भी एक इंसान hi है और ऐसी भी चीज़ें है जिनके बारे में उससे कुछ नहीं पता.

वीर ने यहाँ कुछ बोहत hi अच्छे पल गुज़ारे अपनी माँ और बहिन के संग.

बूत ुंफोरटूनटेली, अब समय आ गया था की यहाँ से वापस जाय जाए.

पर...

उसके पहले...

वीर को एक काम करना था. वो भावना के मुँह से कुछ बातें तोह नहीं निकलवा पाया. इसलिए, अब उसके पास आखिरी उपाय यही बचा हुआ था.

कैरो के एयरपोर्ट में जब वीर अपने देश के लिए रवाना होने वाला था.

तोह उससे चौररने केवल भावना hi आयी हुई थी. बाकी सभी अभी भी साइट पर थे.


भावना~





भावना : थोड़े दिन और ृक्क जाते विक्रम!?

वीर : जी नहीं! अब लौटना होगा मुझे.

भावना : वो... तोह वह M-Mumbai में कौन कौन रहता है तुम्हारे साथ!?

भावना ने पूछा. क्युकी, वीर ने अपने घर से रिलेटेड कोई भी इन्फो भावना को नहीं बतायी थी सिवाए ये की वो मुंबई में रहता था.

मुंबई शब्द सुन्न के hi तब भावना का रिएक्शन देखने लायक था. लेकिन, यहाँ जब उसकी माँ उस से अपने अतीत को छिपा के मिस्ट्री रखना चाहती थी तोह वीर ने भी वही किया फिर. मिस्ट्री hi सही. उसने आगे कुछ नहीं बताया.

पर अब सही मौका था. कुछ ऐसी डिटेल्स चौररने का जिस से भावना हिल के रह जाए.

वीर (स्माइल्स) : घर!? ः~ मुझे तोह घर से hi निकाल दिया गया था.

भावना : !!!???

और भावना को ये सुन्न थोड़ा झटका सा लगा.

विक्रम की बात का मतलब क्या था?

भावना : K-Kya मतलब?

वीर : मतलब की ये मिस गीता... ी... मुझे मेरे घर वालो ने अपने घर से निकाल दिया है.

भावना : K-Kyaaaaa!!???

वो आँखें फाड़े वीर को देखती रही.

वीर : जी हाँ!

भावना : P-Par क्यूँउउ??

वीर : हाहाहा~ वेल! इन् बातो का रहस्य तब hi पता लगेगा जब आप अपनी कुछ बातें बताओगी. दोस्त होने के बावजूद आपने मुझसे अब तक कुछ भी शेयर न किया. तोह बदले में आप मुझसे कैसे एक्सपेक्ट कर सकती हो की में अपने बारे में सब कुछ आपको यु hi बता दूंगा? हम्म?

भावना : ी... ी...

और भावना की नज़रे गिल्ट के मारे नीचे झुक गयी.

भावना (लुक्स अवे) : M-Mein मजबूर हु.

वीर (स्माइल्स) : एंड सो ऍम ी... अन्य्वयस! चलता हु... फिर मिलेंगे...

भावना : अहह! वो...

वीर : हम्म?

भावना : M-Mein... ी मैं... हाउ कैन वे के ईंटो कांटेक्ट अगेन?

वीर अपनी माँ को देख मुस्कुराया और उसने अपने जेब से कोई पुरानी रिसीप्ट निकली और उसमे अपना नंबर लिख के दे दिया.

वीर : That's माय नंबर!!!

भावना : थैंक यू~ ी होप हम फिरसे कही मिल पाएंगे. यू हैवे ा वैरी कीं ऑय. कभी इंडिया में जब एक्सप्लोरेशन पे में जाउंगी थें वे कैन जो तेरे. हाउ अबाउट आईटी?

वीर (स्माइल्स) : सूरे! ऑलराइट! ी शुड लीव नाउ!

भावना (नॉड्स) : Y-Yes!!!

[Time for the last move Master~]

'यूप!!! हेरे वो जो नाउ...!'

वीर फिर अपना सामान उठाने के लिए नीवू झुका. वो जैसे hi नीचे को हुआ...

'ओह्ह्ह फुक्ककककक!!! अटक गया क्या?'

[Arre jhuko na master!!! Acche se. Baahar aaega. Aur jhuko, thoda hilao dilao. It will come out!!!]

'Wh-What??? पारी!!? वॉर्डिंग्स सही रखो अपनी.'

[Ahhh!!! Y-You... You are so mean master! What were you even thinking...!? 😊 ]

और अगले hi पल...

वीर की शर्ट से अंदर से उसका पेंडंट...

झुकने के कारण बाहर आ निकला.

भावना जो अब तक उससे hi देख रही थी. उसकी नज़रे अचानक से hi उस पेंडंट पर पड़ी. पहले तोह उससे कुछ भी अलग नहीं लगा. वो कुछ देरर और देखि...

और शान भर बाद hi, उसका जैसे दिमाग hi घूम गया.

अंदर मैं में hi जैसे एक विस्फोट हुआ. सोचने समझने की शक्ति वो कुछ देरर के लिए खो चुकी थी. उसकी आँखें फटी की फटी उस पेंडंट पर तिकी हुई थी.

वीर सामान लेके उठा और उसने अपनी माँ को देखा. देखा की पल भर में उसकी माँ का चेहरा कैसे हैरानी के मारे बदल गया.

पर अब यहाँ रुकने का समय नहीं था. जल्द से जल्द यहाँ से निकलना था. भावना की कोई भी बात सुने बिना hi.

वो मुदा और जाने लगा. भावना अभी भी स्तब्ध वही कड़ी होक वीर की पीठ को देख रही थी. जैसे जैसे वो दूर जाता जा रहा था भावना की धड़कने तेज़्ज़ होती जा रही थी.

वो इतना शॉकेड थी की उसके मुँह से एक शब्द न निकला और न hi वो कोई हरकत कर पायी.

बस... वीर को जाता हुआ देखती रही. जब तक की वो उसकी नज़रो से ओझल नहीं हो गया.

और फिर उससे होश आया. सासें तेज़्ज़ लिए वो हाफ कर आगे बढ़ी पर एक कदम आगे रखते hi उसके परर वही कमज़ोर पद गए और जवाब दे गए.

"हहहहह!!!"

पेर्रो में कम्पन हुआ और हफ्ते हुए वो वही गिर पड़ी.

'N-Nahiiiii!!!!!! Y-Ye कैसे...!?????'

उससे गिरता हुआ देखते hi, वह मौजूद सिक्योरिटी उसके पास आयी.

"सिक्योरिटी!!!! यस!!! Ma'am अरे यू okay??"

एक नौजवान उसके क़रीब आया और उससे उठवा के सिक्योरिटी के पास ले गया.

भावना वही कुछ देरर बैठी रही. वो किसी भी बात का कोई रिस्पांस hi नहीं दे रही थी. जिस कारण से सिक्योरिटी ने उससे अपने पास hi बैठा लिया.

वो तोह जैसे अलग hi दुनिया में जा चुकी थी.

'N-Nahiiiii!!! वो... वो लॉकेट...!!!! W-Wo तोह वही लॉकेट है... H-Haan!!! में गलत नहीं हो सकती. W-Wo तोह वही था. P-Par... उस विक्रम के पास वो लॉकेट कैसे आया!?? हँ?'

लॉकेट तोह वही था जो भावना ने अपने बेटे को पहनाया था. 20 साल पहले. और इस वक़्त वो अपने आप में जूझ रही थी की वो लॉकेट इस विक्रम के पास कैसे आया. और अगले hi पल...

एक बोहत hi hairat-angez पॉसिबिलिटी उसके दिमाग से होक गुज़री. जिस कारण वो वही जम्म के रह गयी.

'N-Nahi!!! T-Toh जो... विक्रम मेरे साथ इतने दिन रहा, मुझसे बातें किया... W-Wo... कही वो... वो मेरा अपना... N-Nahiiiii!!!!'

सोचते hi उसके रौंगटे खड़े हो गए.

और उसकी आँखों से ासु जहर जहर कर के बहने लगे. वो अपने दोनों हाथो से अपने खुले मुँह को धक् सिसकते हुए रोने लगी.

जिस बेटे से वो इतने सालो से दूर थी. वो यहाँ इतना दिनों तक उसके पास था??? उसके इतने क़रीब?? और उससे पता तक नहीं चला????

ग्लानि, दुःख, दर्द, पीड़ा, मायूसी, बेचैनी, सब कुछ भावना इस वक़्त एक hi साथ महसूस कर रही थी.

एक बार वो अपने गले तक से नहीं लगा पायी उससे. अपने कलेजे को. केसा महसूस होता है एक माँ को जब उसका अपना लाल सालो से बिछड़ने के बाद उसके इतने पास हो और वह एक बार भी उससे अपने सीने से न लगा पाए!?

भावना अभी उसी पीड़ा से गुज़र रही थी.

स्टिल, ये एक पॉसिबिलिटी hi थी. इसका मतलब अभी 100% ये नहीं था की विक्रम hi उसका बीटा था. चान्सेस 50-50% थे.

ऐसा भी हो सकता था की विक्रम को वह लॉकेट कही से मिला हो? हो सकता है उसके बेटे के गले से वो लॉकेट घूम गया हो और विक्रम को मिला हो!? ये भी एक पॉसिबिलिटी थी.

हो न हो, पर भावना के मैं में जैसे एक नयी उमंग जाग चुकी थी. पता लगाने की...

की वह लॉकेट पहना व्यक्ति... क्या!??

क्या उसका अपना... वही खून था? उसका अपना बच्चा? उसका अपना लाल?

और एक ख़याल और आया उसके मैं में,

"मतलब की ये मिस गीता... ी... मुझे मेरे घर वालो ने अपने घर से निकाल दिया है."

उसके मैं में वीर की आवाज़ गुंजी.

'M-Mera बच्चा!??? U-Usse घर से बाहर निकाल दिया है?? N-Nahiii! पहले मुझे... पहले मुझे ये पता करना होगा की वो मेरा hi बीटा है या नहीं!? P-Par यदि वो मेरा hi बीटा निकला... T-Toh...!!!!'

और एक बार फिर, वीर के साथ इतने बीते हुए दिन, गुज़ारे गए पल, वो सारे लम्हे उसके दिमाग में मंडराने लगे. उनकी पहली मुलाक़ात.

और उसके दिल पर पुनः एक पहाड़ सा टूट पड़ा.

आँखें फिर भीग चली. अंदर hi अंदर ग्लानि उससे कचोटने लगी.

इतना पास रह के भी... वो एक बार भी...

एक बार भी अपने कलेजे को पहचान न पायी. काश उससे पहले hi वो पेंडंट दिख जाता. बहाने से hi सही...

पर काम से काम... काम से काम अपने बच्चे को बस एक बार सीने से लगा के उससे अच्छे से महसूस तोह कर सकती थी. लेकिन अब तोह वीर जा चूका था.

'नूवो~ हाँ!!! I'll... I'll फंड आउट!!! मेरे पास ये है अभी!!! I'll फंड आउट!!!!'

उसने अपने हाथो में उस सिकुड़ी हुई रेसेप्ट को देखा जिसमे वीर का नंबर था. और फौरन hi उसने वो नंबर सेव कर लिया.

और सेव में नाम रख दिया ~ विक्रम!!!!

***


मुंबई...

वीर वापस से अपने शहर में आ चूका था.

और दरवाज़े पर आते hi...

"वीईईइरररररर!!!!!"

रागिनी भागते हुए आयी और उसकी बाहो में समां गयी. उसके उभरे हुए स्तन उसकी छथि में समाने की पूरी कोशिश कर रहे थे. वीर को वो निप्पल्स साफ़ साफ़ महसूस हुए.

'व्हाट थे...!?'

[Looks like she missed you. Haha~]

पारी की बात सच थी. ऐसा एक दिन भी नहीं गया था जिस दिन रागिनी ने उससे कॉल न किया हो. हर्र एक दिन वो उससे फ़ोन लगा के काफी देरर तक बात करती थी.

पीछे कड़ी सुमन और बाकी सभी इस दृश्य को हैरानी से देख रही थी.

वीर : उम्... एहम... Bh-Bhabhi?

रागिनी : ी मिस्ड यू ा लोट~ ♡

वीर : M-Mein बस कुछ hi दिनों के लिए तोह गया था. Bh-Bhabhi!!! सब देख रहे है!!!

रागिनी : तोह क्या? क्या तुम्हे पसंद नहीं वीर? क्या तुम्हे अच्छा नहीं लगा मेरा यु तुम्हे हुग करना?

वीर : यह! नहीं! बात वह नहीं है... लीजिये!!!

कहते हुए वीर ने अपने हाथ आगे बढाए और रागिनी को फिरसे अपने सीने से चिपका लिया. इस बार वीर उसकी नंगी कमर पर हाथ रख दबाव बनाने में पीछे नहीं हटा.

और उसके इस एक्शन से रागिनी के होंठो पर फौरन hi मुस्कान फेल गयी. जैसे मानो वो जिस काम के लिए आयी थी, उसमे वो जीत गयी हो.

रागिनी : चलो अंदर~ ♡

अंदर आते hi उससे अच्छा अच्छा खाना परोसा गया, जिससे वो वाक़ई बोहत मिस कर रहा था. और उसके बाद वीर ने अपनी माँ से मिलने की काफी कुछ डिटेल्स रागिनी से शेयर की, जिन्हे सुन्न वो बेहद ख़ुशी में एक बार फिर इसी बहाने वीर से चिपक गयी.

पर वीर की सबसे बड़ी समस्या थी अभी...

प्रांजल!!!!

'तहत बीच इस गेटिंग आउट ऑफ़ हैंड्स हँ!?'

[Well! Aapko hi ab interfere karna hoga Master.]

'ी थॉट सिस्टम मुझे इसके लिए कोई मिशन देगा. इसलिए भी में रुका हुआ था अब तक. व्हाट दो यू थिंक पारी? क्या में उस हरामी प्रांजल पे अपने हाथ साफ़ करू? या फिर सिस्टम के मिशन के लिए रुका राहु?'

[I don't think aapko ab aur wait karna chahiye Master. Khaaskar ki jab itna kuch usne kar diya ho. Aapke puraane ghar me abhi kya haalat hogi waha logo ki ye mein bata bhi nahi sakti.]

'येह!!!! थें, फाइन!!! पारी!!! लिमिट ब्रेक करो.'

[Kis stat ki Master?]

'इंटेलिजेंस!!!'

[Alright Master!]

*डिंग*

[2000 Points have been used to break the limit of Intelligence.]

*डिंग*

[Intelligence limit has now reached 200.]

*डिंग*

[Intelligence : 100/200]

'गुड!!! कितने पॉइंट्स बचे है अब पारी?'

[You are now left with 1092 Points Master!]

'हम्म~ और तुमने कहा था की...'

[10 points 1 point ke baraabar hoga Master. (・_・;)]

'फुककक! आईटी हुर्ट्स!!! सुनते हुए hi... दिल में दर्द हो रहा है पारी! 10 पॉइंट्स 1 के बराबर!? ऐसे तोह में लूट जाऊंगा पारी. मेरे दिल का कुछ तोह ख़याल रखो.'

[I know Master. (。•́︿•̀。) But I cannot help it. Do you want to...!?]

'अहह! यस! इंटेलिजेंस को 120 पर ले आओ.'

[As you wish Master~ ]

*डिंग*

[200 Points have been invested into Intelligence.]

*डिंग*

[Intelligence : 120/200]

[Points Remaining : 892]

'आईटी फूकिंग हुर्ट्स. बूत कोई नहीं! I'll ीर्ण मोरे पॉइंट्स सून. ऑलराइट थें!!!!'

***

डे बिफोर यस्टरडे...

बीते दिनों कुछ गड़बड़ हुई थी. यहाँ वीर के पुराने घर में. ये कहना गलत नहीं था की पूरे घर में उथल पुथल मची हुई थी.

जिस रात श्वेता नशे में वापस घर आयी थी. अगली सुबह उठने के बाद, उससे फिलहाल तोह कुछ भी गड़बड़ महसूस नहीं हुई थी.

उससे याद hi नहीं था की कल रात उसने किन्न पेपर्स पर सिग्न किये थे. वो तोह यही सोच रही थी की प्रांजल के साथ उसने अच्छे से डिनर किया और फिर वो घर आ गयी.

अच्छे मैं के साथ वो सुबह अपनी होटल गयी.

सब कुछ नार्मल hi था. पर कुछ समय बाद hi...

प्रांजल उसकी होटल में एंटर हुआ...

और जाके सीधा ओनर की सीट पर बैठ गया.

श्वेता ने मज़ाक समझ उस से जब बात की तोह उससे अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा झटका प्राप्त हुआ.

श्वेता : तुम यहाँ फिरसे?

प्रांजल : हम्म? क्यों नहीं? ये मेरी hi तोह होटल है न?

श्वेता : ः~ ऑफ़ कोर्स! ये तुम्हारी भी होटल है.

प्रांजल (स्माइल्स) : न न न न~ करेक्शन! तै जी, करेक्शन! मेरी भी होटल नहीं... सिर्फ मेरी होटल है.

श्वेता (बॉहे सिकोड़ते हुए) : में... कुछ समझी नहीं!?

प्रांजल ने अपने बैग से फिर कुछ निकाला. ये वही कागज़ात थे. और उन्हें टेबल पर श्वेता के सामने पटक दिया.

जैसे hi श्वेता ने उन् पेपर्स को पढ़ा. उसके पेर्रो टेल ज़मीन खिसक चुकी थी.

श्वेता : Y-Ye.... ये... ये सब क्या है!??? ये केसा मज़ाक है? हाँ? Wh-What इस थिस?

प्रांजल : ओह्ह~ नथिंग! बस... स्टार्टिंग फ्रॉम टुडे... I'll बे थे ओनर ऑफ़ थिस होटल. ः~ जाइये घर जाइये तै जी! आराम कीजिये!!!

श्वेता (चीखते हुए) : व्हाट दो यू मैं बी थिस्सस??? हाआनं??? में कुछ तुमसे पूछ रही हु. Y-Ye पेपर्स!!! ये कहा से आये तुम्हारे पास??

उससे बोहत बड़ा झटका लगा था. ये पेपर्स तोह उसकी होटल की ओनरशिप के hi थे. रियल एकदम. ये प्रांजल के हाथ कैसे लगे भला? और सिग्न? सिग्न भी उसी के थे. उसका सर्र चक्र गया था.

ये सब क्या हो रहा था!?

पेपर्स में साफ़ साफ़ ये बात लिखी थी. की श्वेता ये होटल काफी समय से घर के किसी कैंडिडेट को सौपना चाहती थी. और प्रांजल से बेहतर उसके लिए कोई नहीं था. उसमे लिखा था की वो अपनी पूरी इच्छा से ये होटल प्रांजल के नाम कर रही है.

शी वास् बफफलेड तो थे कोर.

और फिर शुरू हुआ बहस का सिलसिला.

बात इतनी बढ़ गयी थी की श्वेता हाथापाई पर उतर आयी थी.

और प्रांजल भी एग्रेसिव हो चूका था.

प्रांजल ने ये धमकी दे दी की यदि श्वेता शांत नहीं हुई तोह वो पुलिस को बुलाएगा सीधा.

आखिर हिम्मत कैसे हुई इस प्रांजल की उसके साथ ऐसा करने की? वो सोची.

और फिर जैसे कल की धुंधली बातें उसके दिमाग में साफ़ होने लगी. जैसे hi उससे माजरा समझ आया. वो ठिठुर कर ज़मीन पर गिर पड़ी.

और प्रांजल उसकी इस दशा पर बस हस्ता रहा.

"हाहाहाहा~ जाइये अब!!! There's नथिंग यू कैन दो."

लेकिन श्वेता फिर भड़की...

उठाते हुए वो चीख कर अपनी बातें जोरर से कहने लगी,

"हराम खोर!!!! निर्लज!!! तू इतना कपटी इंसान निकलेगा, मेने कभी सोचा तक नहीं था!!!! क्यों किया तुमने मेरे साथ ऐसा??? नहीं!! तुम्हारी हिम्मत भी कैसे हुई मेरे साथ ऐसा करने की? हाँ!!! M-Mein... में अभी घर में तेरी ये घिनौनी हरकतों के बारे में बताती हु. तू बचेगा नहीं... तेरा सारा सच में सामने खोल के रखूंगी. ृक्क तू बस...!"

उसने धमकाते हुए कहा. पर प्रांजल कौन था? क्या उससे इन् धमकियों से कोई फ़र्क़ पड़ने वाला था? घंटा!!!

प्रांजल : हाहाहाहा~ ओह्ह तै जी!!! तोह जाइये! बताइये!!! बताइये! हाहाहाहा~ कौन विश्वाश करेगा आपका? हाँ? बोलिये? कौन करेगा यकीन? और भूलिए मत...

श्वेता : !!!???

प्रांजल (स्माइल्स) : की... वीर को घर से बाहर करवाने में आप विवेक भैया के साथ थी.

*बोओओओओओमममम*

एक और धमाका श्वेता के मैं में हुआ.

प्रांजल ने अपनी एक और घिनौनी चाल चल दी.

श्वेता सिर्फ यही जानती थी की वीर को भगाने का प्लान विवेक ने बनाया था. उससे ये नहीं पता था की उस प्लान के पीछे प्रांजल का हाथ था. और अपना नाम आते hi, श्वेता के चेहरे से उसका रंग उड़द चूका था.

श्वेता : Y-YOUUU!!!! यू!!! यू विल रॉट इन हेलल!!!! I'LL सूए यू!!! हराम खोर कही के....

और वो भाग के निकल गयी.

यदि वो परिवार वालो को कन्विंस नहीं कर सकती थी तोह...

कुछ और तोह कर hi सकती थी न?

और श्वेता ने वही किया. श्वेता ने डेस्पेरशन में आ कर. सीधा कोर्ट केस hi थोक दिया प्रांजल पर.

जैसा की एक्सपेक्टेड था, घरवालों को ये बात पता लग hi गयी, ऑब्वियस्ली.

और श्वेता की इमेज जो पहले hi बटवारे के समय खराब हो चुकी थी वो और भी खराब हो गयी.

श्वेता!? उसने अपने hi घर के सदस्य पर केस किया? और वो भी तब जब उसने hi होटल प्रांजल के नाम की हो? क्या चल रहा था ये सब?? साड़ी बात का पता उन्हें कोर्ट में लगा अच्छे से.

श्वेता ने एक अच्छा सा वकील हिरे किया हुआ था. कुछ भी हो जाए, ये होटल उसके हाथो से नहीं जानी चाहिए थी.

और यहाँ प्रांजल ने भी एक जाने माने वकील को हिरे किया था.

एंड गेस हु आईटी वास्??

कौन हो सकता था??? ऑफ़ कोर्स... नोने इतर थान...

रजत!!!! Nidhi's हस्बैंड!!!!

वो कहते है न, बर्ड्स ऑफ़ थे शामे फीदर फ्लॉक टुगेदर.

दोनों hi कपटी इंसान थे. तोह दोनों की hi पत्नी थी आपस में. इत्तेफ़ाक़ भी देखो.

रजत : टेंशन नॉट! में ये केस आसानी से तुम्हे जितवा दूंगा...

प्रांजल (स्माइल्स) : ऑफ़ कोर्स~

और फिर शुरू हुई, कोर्ट में प्रांजल की अवार्ड विनिंग परफॉरमेंस.

जिसने पूरा पास hi पलट के रख दिया था.

श्वेता की हालत इतनी खराब थी की उससे देख के hi तरस आ रहा था.

श्वेता (स्क्रीम्स) : HE'S ा लिएर्!!!! ये झूठ बोल रहा है!! इसने छल से मेरी होटल अपने नाम की. मुझसे नशे में सिग्न करवाए है!!!!

रजत : योर ऑनर!!! मेरे पास उस होटल की कक्तव रिकॉर्डिंग है. जिससे में सब के सामने प्रस्तुत करना चाहूंगा.

जज (नॉड्स) : परमिशन ग्रांटेड.

और अगले hi पल, एक रिकॉर्डिंग प्ले की गयी.

जी हाँ! होटल की वही रिकॉर्डिंग. जिस वक़्त, प्रांजल और श्वेता बार में बैठे हुए थे.

रजत : देखिये माय लार्ड!!! ये रिकॉर्डिंग उस वक़्त की है जब मेरे क्लाइंट मिस श्वेता को उनके मेन्टल स्टेट को थोड़ा रिलैक्स करवाने उन्हें डिनर करवाने के लिए लेके गए हुए थे.

श्वेता (स्क्रीम्स) : That's ा फूकिंग लिए...!!!!

जज : अपनी भाषा का सही प्रयोग कीजिये मिस. प्लीज, रिज्यूमे थे रिकॉर्डिंग.

मजबूरन, श्वेता को शांत होना hi पड़ा.

रिकॉर्डिंग फिर प्ले हुई. ये कक्तव फुटेज थी. इसमें ऑडियो नहीं था पर वीडियो क्वालिटी अच्छी थी.

और अगले hi पल एक सन आया.

श्वेता ने अपना आर्डर दिया, ा पिंट ऑफ़ शीराज़.

रजत : ये देखिये! माय लार्ड! मिस श्वेता वाइन का आर्डर देते हुए.

फिर एक सन आया जहा श्वेता ने उसके बाद अपनी hi तरफ से कई बार ग्लासेज भरवाई.

और ये देखते hi श्वेता का दिमाग काम करना बंद हो चूका था.

'आईटी वास् हिमम!!!! थिस बास्टर्ड!!! सब कुछ इसने करवाया था मुझसे... *सबस*'

यही कारण था की प्रांजल ने उस से कहा था~

"यही आपको हिम्मत देगी तै जी! ट्रस्ट में! यही आपको हिम्मत देगी. क्युकी, आप आगे sunn'ne के लिए रेडी नहीं हो."

यही शब्द तोह कहे थे प्रांजल ने. जब वो उससे और वाइन मंगवाने के लिए कह रहा था. सब कुछ पहले से hi कॅल्क्युलेटेड था. श्वेता अपनी hi क़ब्र खोद रही थी उस वक़्त.

रजत : देखा न आपने? कैसे मिस श्वेता एक के बाद एक वाइन के ग्लासेज लेती जा रही है.

और फिर एक और सन आया, जिसमे श्वेता ने अपने पर्स से वो कागज़ात निकाले.

रजत : ये देखिये माय लार्ड!!! मिस श्वेता के पास वो पेपर्स पहले से hi मौजूद थे. यानी की साफ़ है, वो पहले से hi मैं बना के आयी थी मेरे क्लाइंट को होटल सौपने का.

श्वेता (स्क्रीम्स) : व्हाई वोउल्ड ी???? क्यों अपनी HI होटल में किसी और के हवाले करुँगी? HE'S लाइंग!!? ये पेपर्स इसी ने मुझे रखने को दिए थे!! मेरी HI होटल में!!!

पर कौन बिलीव करने वाला था उसका? कोर्ट केवल एविडेंस देखता था. लोगो की भावनाये नहीं.

श्वेता के पास कोई एविडेंस नहीं था की वो ये बात सच साबित कर सके.

और रिकॉर्डिंग में फिर वो सन भी आया जिधर श्वेता ने सिग्न किये. और प्रांजल उससे मन करने लगा.

रजत : ये देखिये!! माय लार्ड! आप देख रहे है न?? ये वही समय था जब मिस श्वेता ने सिग्न किये पेपर्स पर. अपनी मर्ज़ी से. और आप देख hi सकते है, कैसे मेरे क्लाइंट इस बात का विरोध कर रहे है. आप ने देखा न? मेरे क्लाइंट जानते है इसलिए उनका विरोध कर रहे थे. और नेक्स्ट सेगमेंट में सब साफ़ हो गया है माय लार्ड.

और फिर आया रिकॉर्डिंग का आखिरी सन. जिधर श्वेता प्रांजल को ज़बरदस्ती पेपर्स थमा रही थी. और अंत में उसने उसका हाथ पकड़ अपने सर्र पर रखवा लिया.

रजत : मिस्टर प्रांजल... प्लीज बताइये इस कॉन्टेक्स्ट के बारे में.

प्रणाल (बनावटी आसुओ से) : Y-Ye... *स्निफ्फ* ये वही टाइम था... जब... *स्निफ्फ* जब तै जी ने मुझे अपने सर्र पर रख कसम खिलवाई की में उनकी होटल अपने नाम करने के लिए राज़ी हो जाऊ. *स्निफ्फ* बदले में वो दादा जी की... मुझसे कुछ प्रॉपर्टी मांगने की मांग राखी थी. कह रही थी की... *स्निफ्फ* में अपनी साड़ी प्रॉपर्टी उनके हवाले कर दू. *स्निफ्फ* मुझे नहीं पता था की वो ऐसा कुछ कर dengi...*sniff*

*बुऊममममम*

एक और बेम फटा श्वेता के लिए इस स्टेटमेंट के बाद.

सब कुछ बिखर रहा था. उसकी स्थिति इस वक़्त, ऐसी थी की वो जैसे खायी में एक रस्सी से लटकी हुई थी जो हर्र गुज़रते पल टूटती जा रही थी.

श्वेता (स्क्रीम्स) : यू फूकिंग बास्टर्ड!!!!!!

जज : सिलेंसी!!!!

रजत : क्या वो सिग्न आपके है पेपर्स में?

श्वेता (गुस्से में) : थे... थे अरे!!!

रजत : क्या आप पिछले कुछ समय से मेंटली ेक्सहॉस्टेड थी!?

श्वेता : ी... ी वास्...

रजत : क्या आप बटवारे में कुछ हिस्सा पाना चाहती थी?

श्वेता : ी... Y-YESSS!!!

रजत : तेरे यू हैवे आईटी माय लार्ड! मिस श्वेता, एक मेंटली उन्स्तब्ले स्टेट में थी प्रॉपर्टी को हथियाने के लिए. मेरे क्लाइंट जिन्हे इन् सब के बारे में कुछ नहीं पता था वो एक गुड इंटेंशन के साथ मिस, श्वेता को रिलैक्स करवाने उन्हें डिनर पर लेके गए, जिसकी टेस्टीमोनी उनकी खुद की बेटी मिस भूमिका ने हमे दी कुछ देरर पहले, साथ hi उनकी होटल की मैनेजर ने भी दी.

जज : *नॉड्स*

रजत : पर मेरे क्लाइंट को कोई भी आईडिया नहीं था. मिस श्वेता चामे प्रेपरेड़. उन्होंने अपनी साड़ी होटल मेरे क्लाइंट के नाम करि. और बदले में उनका हक़ उनसे chhen'na चाह रही थी. इन इतर वर्ड्स, मेरे क्लाइंट की प्रॉपर्टी. हमे ये भी पता चला की घर में प्रॉपर्टी को लेकर पहले भी विवाद हो चूका है. सो, डेस्पेरशन में आकर मिस श्वेता इस हद्द पर उतर आयी.

जज : *नॉड्स*

रजत : और फिर उन्होंने अपनी कसम भी खिलवाई की मेरे क्लाइंट वो होटल अपने पास hi रखे. पर बदले में साड़ी प्रॉपर्टी उनके नाम कर दे? ये सरासर एक चाल है. न केवल उन्होंने मेरे क्लाइंट के गुड विल को नज़र अंदाज़ किया. बल्कि, उनसे उनका हक़ chheen'ne का प्रयास भी किया. और साथ hi साथ इतना बड़ा आरोप लगा के, उनके अपने परिवार और दोस्तों में उनकी छवि पर लांछन लगाया है. प्लीज! मेरी आप से दरखास्त है की आप इसकी जड़ तक जा के फैसला ले.

श्वेता (स्क्रीम्स) : ी फूकिंग didn't!!!!

रजत : सी!? शी आल्सो है सम एंगर इश्यूज. ी रेस्ट माय केस माय लार्ड!

और ख़तम! सब कुछ ख़तम हो चूका था.

बोहत देरर तक... ये सब चलता रहा. पर...

श्वेता के पास कोई एविडेंस hi नहीं था सिवाए कहने के. न hi कोई विटनेस.

वही प्रांजल के लिए सभी ने अच्छी बातें hi कही थी.

थैंक्स तो रागिनी, जो वो अब इस परिवार का हिस्सा नहीं थी. वर्ण प्रांजल के खिलाफ hi बोलती वह. और उसके लिए एक मुश्किल कड़ी कर देती.

विवेक इन् मामलो से दूर रहना चाहता था तोह वो चुप रहा. आरोही कहने वाली थी पर वीर ने उससे फ़ोन पर मन कर के रखा हुआ था. सो उसने कुछ न कहा.

बाकी सभी ने प्रांजल के लिए अच्छे शब्द कहे थे.

इतने दिनों से वो अपनी इमेज जो बनाने में लगा था. आईटी पेड ऑफ वैरी वेल. सब कुछ उसने इतना प्रेसिसेली कैलकुलेट कर के किया था.

घर पे मनोरथ अपने रूम में रहते थे. आरोही और काव्य अपने कामो में. विवेक अपनी कंपनी में. करुणेश और बृजेश अपने बिज़नेस में. भूमिका और श्वेता होटल में. और उसकी माँ सुमित्रा अक्सर किचन में.

श्वेता के रूम में घुसकर अलमारी से उन् पेपर्स को ढूंढ़ना उसके लिए कोई बोहत बड़ी बात नहीं थी.

श्वेता के लिए सब कुछ उजाड़ चूका था.

क्युकी, जब फैसला आया.

तोह उसकी वो आखिरी उम्मीद भी टूट चुकी थी.

होटल...

प्रांजल के नाम हो चुकी थी.

केस डिस्मिस्सड!!!

उसके अंदर से जैसे उसकी आत्मा ने डैम तोड़ दिया था.

भूमिका बेचारी से अपनी माँ की ये हालत देखि hi नहीं जा रही थी.

और घर आते hi, श्वेता फौरन hi कार में बैठी, कार स्टार्ट की...

और कही जाने के लिए हुई ...

"M-Maaaaaa~"

पर जब तक भूमिका अपनी माँ को कही जाने से रोक पाती, श्वेता निकल चुकी थी.

***

इधर वीर जो अगली रात आरोही से मिलके विस्तार से बात jaan'ne के लिए उस से जब मिलने के लिए रेडी हो रहा था. तब hi...

*डिंग*

[Mission : Rescue Shweta before she dies.


रिवार्ड्स : ???? पॉइंट्स.

टाइम लिमिट : 30 मिनट्स.

मिशन फेलियर पेनल्टी : 20,000 पॉइंट्स डिडक्शन.]

'अह्ह्ह! शित्त्त!!! हेरे वो जो अगेन~'

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

थैंक्स ा लोट! इतना सब्र रखने के लिए. I'm दोंग वेल. माइनर वुंड्स है. ी वास् लकी ः~ अन्य्वयस, लिखे ठोकने का और रेवोस रखने का यारा.

कीप सपोर्टिंग! ✨


धन्यवाद! ✨
 
इंडेक्स है बीन अपडेटेड!

एंड सॉरी गाइस, फॉर थे वेट. आल्सो, कमैंट्स के रिलीज भी नहीं दिए है. I'll गिव थम इन थे इवनिंग. अब तोह बिस्तर पे hi रहना है एक दो दिन. :लाफिंग: बैठे बैठे वही करूँगा.


आल्सो, इस अपडेट में सब समझ आया होगा अब आपको. क्यों, प्रांजल ने पेपर्स पहले दिए थे. क्यों, उसने श्वेता को खुद अपनी तरफ से ड्रिंक्स मंगवाने कहा था. क्यों वो पेपर्स पर सिग्न होने के बाद उसका विरोध कर रहा था. क्युकी, एवरीथिंग वास्... कॅल्क्युलेटेड!!! :डेविल:
 
अपडेट - 84 ~ लाइट्स! कैमरा! एक्शन!

अब तक...

इधर वीर जो अगली रात आरोही से मिलके विस्तार से बात jaan'ne के लिए उस से जब मिलने के लिए रेडी हो रहा था. तब hi...

*डिंग*

[Mission : Rescue Shweta before she dies.


रिवार्ड्स : ???? पॉइंट्स.

टाइम लिमिट : 30 मिनट्स.

मिशन फेलियर पेनल्टी : 20,000 पॉइंट्स डिडक्शन.]

'अह्ह्ह! शित्त्त!!! हेरे वो जो अगेन~'


अब आगे...

ा फ्यू हॉर्स एगो...


'में hi तोह गलत हु न? हाँ! में hi गलत रहती हु. ऑलवेज! It's ऑलवेज में.'

आसुओ की बड़ी बड़ी बूंदे अपने गोर गालो पर सजाये, श्वेता कार में बैठे स्पीड में कार को दौड़ाती जा रही थी. उससे जैसे कोई होश hi नहीं था.

'क्या कुछ नहीं किया मेने? कितना कुछ नहीं किया? *स्निफ्फ* ात थे एन्ड, it's ऑलवेज में. ी कनेव आईटी!!! *स्निफ्फ* '

'श्वेता!!! तुझे तोह पहले से hi अंदेशा हो जाना चाहिए था न? *सबस* थें तू, यू... *स्निफ्फ* यू स्टिल होपेड फॉर आईटी!? और अब? क्या रह गया? यू अरे ा डिस्ग्रेस!!! सब को बस धोका देना आता है. और तुम धोका खाती हो. यू don't डेसेर्वे तो लाइव ात आल!! *स्निफ्फ* '

कार को तीसरे गियर में दाल, श्वेता स्पीड में बस जाती जा रही थी. उससे कोई ख़याल नहीं था की वो कहा जा रही है, कौन सा रास्ता ले रही है. वो तोह बस जैसे अपने आप hi, कार चलाये जा रही थी जहा जहा उससे रास्ता दीखता जा रहा था.

एक अलग hi दुनिया में जा चुकी थी वह.

उससे हर्र एक बातें जैसे अब याद आ रही थी. और उसकी रुलाई रोके नहीं रुक रही थी.

कितनी hi आसानी से वो उस गीदड़ प्रांजल की बातो में आ गयी थी. क्यों वो उस कमीने के मीठे बोलो में फस्स गयी?

इतने सालो से न जाने कितना समय दिया था उसने अपनी उस होटल को. होटल तोह जैसे उसकी दुनिया थी जिसमे वह रह रही थी. छोटे रूप से बढ़ते देखा था उसने अपनी होटल को.

कितनी यादें भी जुडी थी उस होटल से. और अब? क्या बचा?

अब जैसे सब गायब हो चूका था. सब कुछ उसके हाथो से छीन चूका था.

उससे वो पल याद आ रहा था. कोर्ट में जब वो कड़ी हुई थी.

कैसे... कैसे उसके परिवार वाले उससे देख रहे थे. जैसे दोषी वही थी. जैसे उसने hi सारा घिनौना काम किया था.

'ी हेट आईटी!!!! ी हेट आईटी सो मच! हाउ डरे थे??? हाउ डरे...!!!'

वो चिल्लाई. और स्पीड... और बढ़ा दी उसने...

हिम्मत कैसे हुई उन् सब की उससे उन् नज़रो से देखने की? जब हर्र करतूतों के पीछे प्रांजल था तोह भला उसका नाम क्यों आया?

गुस्सा और रुलाई! बस यही दो इमोशन उसके चेहरे पर थे.

और वो बिना रुके बस जाती जा रही थी.

'ी शुड हैवे जस्ट डीएड...!! ी शुड हैवे...!!'

उसने बिना जाने hi, एक सुनसान रोड पकड़ ली थी.

***

*वरूँऊऊऊम्मम्मम्म*

इधर वीर अपनी बाइक पर सवार अपने मिशन पर मजबूरन निकल चूका था.

ऑफ़ कोर्स, मजबूरन!!!

वर्ण वो थोड़ी श्वेता की मदद के लिए आता. उससे आना पड़ा क्युकी...

सबसे पहली बात, मिशन में पेनल्टी बोहत ज़्यादा थी. 20,000 पॉइंट्स डिडक्शन.

और दूसरी बात थी, थे मिशन इटसेल्फ.

मिशन था~ रेस्क्यू श्वेता बिफोर शी डीएस.

इसका मतलब था की श्वेता की जान खतरे में थी.

श्वेता किसी भी थी, वीर उससे माररता हुआ तोह नहीं देखना चाहता था.

बेशक, इसका ये मतलब भी नहीं था की वो लेनिएंट रहेगा उसके प्रति. उससे बस एक hi बात पता था की...

हे नीडेड तो कम्पलीट थिस मिशन. That's आईटी!!!

तभी...

*डिंग*

[Mission and rewards have been updated.]

*डिंग*

[Mission : Rescue Shweta before she dies.


रिवार्ड्स : 1) ???? पॉइंट्स.

2) ओने रैंडम स्किल.


वेन्यू : क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स रोड.

मिशन फेलियर पेनल्टी : 20,000 पॉइंट्स

डिडक्शन.

टाइम लिमिट : 30 मिनट्स (22 मिनट्स रमैनिंग)]

मिशन अपडेट हो चूका था.

'हम्म?? ओह्ह! ी सी! वेन्यू भी पता लग गया. और... रिवार्ड्स में... ओह्ह्ह~ I'm गेटिंग ा नई स्किल अस वेल?'

[Yes master~ ♡]

वेन्यू पता लग चूका था. तोह वीर ने ज़्यादा टाइम वास्ते नहीं किया और बाइक को रेस देते हुए उसी दिशा में रफ़्तार में चल दिया.

*वरररररओओओओओओमममम*

'जस्ट व्हाट इस शी दोंग!? ऐसे किन हालात में फस्स गयी की उनकी जान पर बन्न आयी? वेट!!! यदि... यस!!! परीई!!!!!!'

[Yes master! I got it~]

*डिंग*

[Basic Enemy Tracker has been activated.]

*डिंग*

[Enemies have been spotted.]

और वीर ने जैसे hi एनिमी ट्रैकर को ट्रैक कर वेन्यू देखा...

'फुककक! ी कनेव आईटी!!! She's इन ट्रबल!!! दमन ित्त्त!!!'

उसने अगले hi पल गाडी और तेज़्ज़ रफ़्तार में भगाणी शुरू कर दी.

***

इधर वीर के पुराने घर पे भी हालात कुछ सही नहीं थे. अफरा तफरी सी मची हुई थी पूरे घर में.

"अहह! M-Mom!!! वो एक भी कॉल नहीं उठा रही है. I-I मस्ट जो...! में जा रही हु उन्हें ढूंढने."

रट हुए भूमिका फौरन hi बाहर भागने को हुई तोह उससे आरोही ने रोक लिया.

आरोही : D-Didi!?? ऐसे अकेले जाना सही नहीं! किसी के साथ जाइये!!!

मनोरथ : आरोही बिटिया ठीक कह रही है भूमिका बीटा. बहु जिस हालत में गयी है यहाँ से, वो ज़ाहिर है की कही दूर जा सकती है. ऐसे में अकेले जाना सही नहीं. रात का समय है ऊपर से. करुणेश, विवेक!!!!??? खड़े खड़े मुँह क्या देख रहे हो, जाओ तुम सब. बहु सही सलामत होनी चाहिए. उससे जल्द से जल्द घर लाओ.

मनोरथ की बात सुन्न दोनों बाप बेटे, करुणेश और विवेक अपनी अपनी गाडी उठा के फौरन hi श्वेता की तलाश में निकल पड़े.

बृजेश तोह पहले hi निकल गया था.

और यहाँ भूमिका बेचारी की हालत खराब हुई जा रही थी. अपनी माँ को इस हालत में कभी नहीं देखा था उसने. इतना टूटे हुए. और इसलिए एक अनजान डर उससे अंदर hi अंदर सताये जा रहा था.

काव्य : D-Didi!!! दीदी रोइये मत! मिल जाएंगी तै जी! ट्रस्ट में!!

आरोही : काव्य ठीक कह रही है दीदी! आप भरोसा रखिये! सभी गए है ढूंढ़ने. ज़्यादा दूर नहीं गयी होंगी वह.

भूमिका : ी... *स्निफ्फ* व्हाई ऍम ी सो... उसेलेस? *स्निफ्फ* M-Mom!!! प्लीज पिक उप थे फ़ोन!!!

उससे इस वक़्त, केवल आस्वाशन hi दे सकती थी काव्य और आरोही.

क्युकी उस से ज़्यादा कहना सही नहीं था. जिस हिसाब से घर के लोगो ने कोर्ट में श्वेता पर नज़रे गड़ाई थी. तोह भला अब भूमिका के सामने कैसे भोले बन्न सकते थे वह?

आरोही और काव्य hi थी केवल जो भूमिका के संग थी. शुरू से अंत तक. और उसका विश्वाश कर रही थी. क्युकी वो दोनों hi जानती थी की प्रांजल कही से भी दूध का धुला नहीं था. खासकर आरोही!!!

***

क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स रोड में श्वेता की कार साये साये भाग रही थी. अँधेरी राह पर केवल उसकी गाडी से आती रौशनी hi उस रोड में जगमगा रही थी.

उसकी वो अधखुली आँखें केंद्रित तोह रास्ते पर hi थी पर...

उसका मैं कही और hi केंद्रित था.

उससे कोई ध्यान नहीं था रास्ते में दचकके आ रहे है या कोई वाहन. वो बस खाली जगह से अपनी गाडी गुज़ारती जा रही थी.

जब इंसान इस मनोस्थिति में रहता है, तोह वह खुद के साथ साथ औरो के लिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है.

क्युकी, यदि उसके साथ कुछ हो जाए तोह केवल वही नहीं, उसके इर्द गिर्द मौजूद लोग भी उस परिणाम को भुगतते है फिर.

श्वेता भी इसी हालत में थी. वो कार को स्पीड में भगा hi रही थी.

और तभी...

*ठ्हूस्स्स्सस्स्स्स*

अचानक hi उसकी कार का टायर किसी चीज़ के ऊपर आया और सीधा पंक्चर हो गया.

एक नहीं!!! सारे!!!

तब जाके कही, उससे कुछ होश आया.

'!!!???'

उसने गाडी एक जगह धीमे करते हुए रोकी.

और वो कार से बाहर उत्तरी. टायर्स का हाल बेहाल था.

वो उतर तोह गयी, पर उससे नहीं पता था, की ये उसकी सबसे बड़ी भूल होने वाली थी.

*ृस्टल* *ृस्टल*

रोड के साइड में पत्तो के हिलने की आवाज़ आयी और दो अनजान लड़के अचानक hi हाथ में बेसबॉल बात लिए आगे बढे.

श्वेता की नज़रे अपने कार के टायर्स पर थी जो पूरी तरह से फुस्स हो चुके थे. और उससे इस बात की भनक तक नहीं थी की उसके पीछे कौन आ रहा था.

"अबे!!! बहनचोद क्या गदराया माल है."

"हाँ बी!!! में तोह सोचा था कोई सेठ होगा कार में. तोह अब हम...!?"

"और नहीं तोह क्या! पर्स में पैसे मिले चाहे न मिले. ये गदराया माल बहनचोद हाथ से नहीं जाना चाहिए. मसल मसल के बारी बारी छोड़ेंगे आज इससे."

"जल्दी कर जल्दी कर, पलटने वाली है. कही गाडी में घुस गयी तोह दिक्कत होगी."

वो दोनों hi लड़के आपस में बात करते हुए तेज़्ज़ भाग कर श्वेता के नज़दीक आये.

और...

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह!!!!!"

बिना श्वेता को कोई मौका दिए hi, उसके दोनों हाथ उन् दोनों ने अपने ज़ब्त में कर लिए.

श्वेता : !!!??? K-Kaun!?? कौन हो तुम लोग? अह्ह्ह!! Ch-Chorro मुझे... में कहती हु चोर्रो!!!!

वो घबराई.

और उनके हाथो में बात देख उससे सारा माजरा समझ आ गया.

आईटी वास् ा रॉबरी एटेम्पट.

लेकिन वो गलत थी थोड़ी. केवल रॉबरी hi एटेम्पट नहीं था ये.

जैसे hi उसने उन् लड़को की नज़रो का पीछा किया, उससे समझ आ चूका था की...

ये रॉबरी से भी बत्तर होने वाला था.

और आज ज़िन्दगी में इतने सालो के बाद, श्वेता की रूह काँप गयी.

इतने सालो बाद उससे एक डर महसूस हुआ. इतना डर तोह उससे अपना होटल खोने पर भी नहीं महसूस हुआ था. कुछ देरर पहले hi वो अपनी जान को मामूली समझ रही थी. और सोच रही थी की काश वो मर्डर hi जाती. पर अब!?

अब अपनी स्थिति देख, वो ख़याल hi उसके मैं से उड़द चूका था.

'N-Nahiii! M-Mujhe कुछ हो गया तोह मेरी भूमि का क्या होगा?'

डर उसपे हावी होने लगा. और उससे समझ आया की वो कितनी भयानक स्थिति में फस्स चुकी थी.

"N-Nahiii!!! मुझे छोर्रो!!! चोर्रो वर्ण अंजाम अच्छा नहीं होगा. आआह्ह्ह्हह्ह!!"

क्या सोच के वो निकली थी? यदि उसके साथ आज कुछ हुआ तोह वह क्या मुँह दिखाएगी? वह तोह जीने लायक hi नहीं बचेगी समाज में.

जब तक इंसान को मौत न आये तब तक वो मौत को हलके में hi लेता है.

श्वेता ने भी यही किया था. और अब, उससे अपनी ज़िन्दगी की अहमियत समझ आ रही थी.

"साली चिनार!!! चल!!! चल जल्दी!!! चल!!!! हाहाहाहा~"

"पर्स भी उठा इसका. अबे! फ़ोन छिना इसके हाथ से... फ़ोन चिन्ना..."

"अह्हह्ह्ह्ह!!! Ch-Chorro... ी साइड लीव में!!!!"

ये रॉबरी पहले से hi प्लांड थी. रास्ते पर hi स्पीक्स बच्चे हुए थे. श्वेता अपने होश में न होने के कारण, उन् स्पीक्स के ऊपर से निकल गयी. और नतीजा?

उसकी कार के टायर्स पंक्चर हो बैठे.

उसकी कलाई पर सजी चूडिया खनक खनक कर शोर कर रही थी, मुँह से छूटती धीमी गुहार की आवाज़ें, और साड़ी का अस्त व्यस्त होना.

सब कुछ एक hi बात की ऑर्डर इशारा था. उसकी इज़्ज़त लूटने वाली थी.

उससे एक कार के अंदर डाला जा रहा था. और श्वेता की उम्मीद टूटती जा रही थी.

"N-Noo~ ी can't....!!"

दूसरा लड़का उससे कार में अंदर दाल अभी दूर बंद करने hi वाला था जब...

"हाहाहाहा~ अंदर रह मेरी जान अभी तोह तुझे...."

*पूंऊऊऊऊववववव*

"ग्वाखहहह....." वो कहते कहते hi बीच में ृक्क गया और उसके मुँह से धेरर सारा थूक बाहर निकल आया.

श्वेता अचंभित होते हुए सामने का नज़ारा देखि.

कोई था...

कोई था जो इस वक़्त उसके और उन् लड़को के बीच अचानक से hi आ गया.

और उस लड़के के पेट में एक ज़ोरदार घुसा दे मारा.

"H-Huh!??"

श्वेता अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर उस शख्स को देखि.

"लेट में टीच यू सम गुड मैनर्स! Okay?"

श्वेता : Y-Ye आवाज़...!???

और उससे और बड़ा झटका लगा जब उसने उस शख्स का चेहरा देखा.

श्वेता : V-Veeeerrr!!???

उसके और उन् लड़को के बीच वीर एक कवच बन्न के खड़ा हुआ था.

'N-Nahi! W-Whyyy??? V-Veer k-kyu!?? W-Wo...'

लड़का 1 : टच!!! कौन है बी तू? पतली गली से निकल ले समझा न? वर्ण अच्छा नहीं होगा तेरे लिए.

वीर : रियली नाउ? दो चूतिये मुझे धमका रहे है?

लड़का 2 : ुघ्घ! K-Kya बोलै साले? अबे! चोरर्ण नहीं इसको. मारो साले को.

वीर : यू जस्ट दिग योर ओन ग्रेव.

लड़का 1 : !!!???

और फिर वीर ने कुछ नहीं बोलै. उनके बच्चो जैसे प्रहारों से वीर आसानी से बचा और...

दे घुसे पे घुसे. दो चार वार में hi उनकी हालत पतली हो चुकी थी. वीर मैथ्यू, स्लोगन, आतिश, डेक्सटर जैसे लोगो से लड़ चूका था.

तोह ये दो लड़के तोह किसी बच्चे के सामान थे उसके लिए. तू ामतीउर!! कोई कपरिसों hi नहीं था.

यदि ये चाक़ू भी लिए होते तोह भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला था वीर को.

इतना पीटने के बाद उनकी हालत पतली हो चुकी थी. उन्हें नहीं पता था की एक लड़का उनका ये हाल कर देगा.

दोनों की अच्छी तरह से कुटाई करने के बाद, वीर ने उन्हें जैसे hi चोर्रा वो दोनों hi ज़मीन पर बेहोश होते हुए गिर पड़े.

और इधर श्वेता स्तब्ध निगाहो से सब कुछ होता देख रही थी.

वो केवल उसकी पीठ hi देख पा रही थी और उसका दिल ज़र्रों से धड़क रहा था.

वो वेट कर रही थी की वीर उससे देख उस से कुछ कहेगा पर वीर ने कुछ भी नहीं कहा.

उसने अगले hi पल अपना फ़ोन निकाला और कॉल लगाया.

वीर : Hello? हम्म~ क्सक्सक्सक्सक्सक्स रोड पे हु में. कुछ नहीं! आदमियों को भेजो और यहाँ दो लफंगे पड़े हुए है. हम्म~ इनके दिमाग में ये बात बैठा देना की आगे से रॉबरी के बारे में सोचे भी न. और यहाँ कार है एक. हम्म~ वाइट डस्टर है. टायर्स पंक्चर है. रिपेयर होक घर पर पहुँच जानी चाहिए. हम्म! नहीं और कुछ नहीं! रखता हु...

*कॉल एंड्स*

और फ़ोन कट करते hi वीर आगे बढ़ अपनी बाइक पर बैठ गया.

श्वेता अभी भी वही मूर्ति बने कड़ी हुई थी जब वीर की आवाज़ उसके कानो में पड़ी,

"गेट ों!!! या वही खड़े रहना का इरादा है आपका?"

"H-Huhhh??"

अचरज से बाहर आते हुए वो घबराई घबराई वीर की बाइक के पास जैसे तैसे आयी और उसकी बाइक पर उसके पीछे बैठ गयी.

वीर ने बाइक स्टार्ट की और दोनों hi वह से निकल गए.

रास्ते भर श्वेता रोटी रही. जब उसने साड़ी उम्मीदें चोरर दी थी तोह कौन आया बचाने उससे?

वीर! वही वीर जिसके खिलाफ वो विवेक और प्रांजल की साज़िशों में शामिल हुआ करती थी.

जिसको उसने आज तक कभी एक माँ का प्यार नहीं दिया था. कितना कुछ बुरा किया था उसके साथ उसने अब तक.

और जब सारे परिवार ने उसका साथ चोरर दिया, जब वो सबसे ज़्यादा मुसीबत में थी, उसकी जान पर बन्न आयी थी, तोह कौन आया उससे बचाअण?

वही वीर!!!

ग्लानि के दलदल में वो डूबती जा रही थी.

उसके हाथ अपने आप वीर की कमर पर बांध गए और उसका चेहरा उसकी पीठ पर टिक गया. आसुओ से वीर की शर्ट गीली होती जा रही थी. पर वो कुछ न बोलै. एकदम शांत रहा.

और तभी पहली बार श्वेता वीर के कानो में कुछ बोली,

"P-Please!!! उस घर नहीं... V-Veer... उधर नहीं....!!!"

वीर फिर से खामोश रहा. और सीधा रागिनी के घर hi चल दिया.

जैसे hi वो घर पहुचा, रागिनी समेत बाकी सब भी उससे और श्वेता को देख हैरान रह गयी.

और जब साड़ी बात का पता चला उन्हें तोह वह सभी श्वेता को हौसला देने में जुट गयी.

श्वेता रो रो के माफ़ी मांगती जा रही थी.

वीर को कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था. वो ऊपर गया, हाथ मुँह धोया और फिर नीचे आया.

श्वेता अभी भी सोफे पर बैठी हुई थी और रागिनी और बाकी सब उससे चुप करवाने में लगी हुई थी.

पर वीर के अगले शब्दों ने जैसे उन् सभी को अचंभव में दाल दिया.

वीर : ी दीद ा फवौर एंड सेव्ड यू... नाउ दो में ा फवौर एंड...

श्वेता : !???

वीर : गेट लॉस्ट!!!!

*साइलेंस*

पूरे कमरे में एक ख़ामोशी छ गयी. उन्हें यकीन hi नहीं हुआ की वीर ने ऐसा कुछ कहा.

वीर : Didn't यू हेअर में? दो में ा फवौर एंड गेट लॉस्ट!!!

और श्वेता जो ग्लानि में पहले से hi डूबी हुई थी उसके अंदर का वो भार और बढ़ गया. वीर के शब्द किसी खंजर के सामान उसके दिल को घोप रहे थे.

वीर : आप मेरी माँ नहीं! न hi कुछ लगती हो. ी don't हैवे अन्य रिलेशन विथ यू. सो... लीव नाउ!!!

श्वेता को आज तक कभी कोई बात का इतना बुरा नहीं लगा था जितना आज इस बात का लगा था.

'आप मेरी माँ नहीं!!!'

ये वाक्य सीधा जाके उसके दिल पर वार किया.

श्वेता : N-Nahiii!!! ऐसा मत बोलो वीर... ऐसा मत बोलो प्लीज!!! मेरे बच्चे... में गलत थी. तुम मुझे कभी माफ़ नहीं करोगे... में जानती हु... P-Par भगवान् के लिए... भगवान् के लिए ऐसा न कहो. आज जाके मेरी आँखें खुली है. मुझसे ये हक़ न छीनो... प्लीज!!! में तुम्हारे हाथ जोड़ती हु...

वीर : ी साइड गेट आउट!!!

रागिनी : वीएररर!!! Y-Ye तुम क्या कह रहे हो??? हालत तोह देखो तै जी की वीर.

वीर : मुझे कुछ नहीं sunn'na है भाभी!

रागिनी फौरन hi उठ के वीर के क़रीब आयी और उसका हाथ थाम ली,

रागिनी : वीररर!!! बेचारी उनकी हालत तोह देखो वीर. इस हालत में वो कैसे जा सकती है? में जानती हु तुम उन्हें पसंद नहीं करते पर... पर क्या ये सही है?

वीर : उनका अपना घर है भाभी! शी कैन लाइव तेरे. जैसे अब तक रह रही थी.

रागिनी : उनके साथ क्या क्या हुआ उसके बाद उनकी स्थिति इस वक़्त वापस से उस घर में जाने की नहीं है वीर समझो. तै जी!! A-Aap... आप यही रुकेंगी...

वीर : नौपे! ये यहाँ नहीं रुकेंगी.

रागिनी : मेने कहा न वीर वो यही रुकेंगी!!!!

वीर : आप भोली हो भाभी! जल्द hi दुसरो को बातो में आ जाती हो. लेट में हैंडल थिस.

और वीर उठ के श्वेता को पकड़ जब बाहर ले जाने hi वाला था.

श्वेता : वीर!!! प्लीज!!! प्लीज!! में हाथ जोड़ती हु... ऐसा मत करो वीर...

की तभी,

रागिनी : वीईईएरररररर!!!!

*चाताआआककककककक*

वीर : !!!????

एक ज़ोरदार तमाचा आके उसके गाल पर पड़ा.

हाथ किसी और का नहीं रागिनी का था. और सब खामोश पद गए.

रागिनी : तै जी! A-Aap मेरे घर में यही ृक्क सकती हो. जब तक आपका मैं चाहे...

रागिनी के बोल सुनते hi वीर अपने आप hi खामोश हो गया. बिलकुल! सही तोह कहा था रागिनी ने.

उसका घर...

वीर : ः~ R-Right!!! आपका घर... और में सोचा... नीस!!!

वो पलटा और ऊपर जाने लगा.

रागिनी : अह्ह्ह!! वीरररर~

पर वो नहीं रुका. तेज़्ज़ कदमो के साथ वो ऊपर की ऑर्डर गया.

रागिनी : वीइरररर रुको~ मेरी बात सुनो...

वो अंदर कमरे में जाने hi वाला था जब रागिनी आके उसकी पीठ से लिपट गयी. और उसके ूरोज़ वीर की पीठ में जाके धस्स गए.

रागिनी : I'm सॉरी!!! I'm सो सॉरी!!! T-Tum गलत समझ रहे हो. मेरा ऐसा कुछ भी मतलब नहीं था.

वीर : गलत नहीं समझ रहा हु भाभी. इन फैक्ट, अब सही समझ पाया हु.

वीर के हर्र वाक्य से hi रागिनी को बेहद पीड़ा हो रही थी. ये क्या हो गया उस से अचानक!?

वो ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहती थी. पर श्वेता को उस हालत में देख जैसे उससे अपना अतीत याद आ गया. वो भी तोह ऐसी hi थी न? वीर के खिलाफ. श्वेता को देख कर रागिनी जैसे खुद को उसमे देख पा रही थी.

और बस, हमदर्दी के चलते वो वीर पे भड़क उठी, और उसपे हाथ उठा दिया.

हाथ भी तोह अपनों पे hi उठाया जाता है न? पर दिक्कत वह नहीं थी. दिक्कत थी की वीर ने उसके वाक्य का अर्थ गलत समझ लिया था.

रागिनी : ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो वीर. ये घर तुम्हारा hi है... P-Please ी बेग यू... D-Don't मिसुन्दरस्तंड... में बस... में बस उनकी व्यथा देख इमोशनल हो उठी. आफ्टर आल, समथिंग सिमिलर हप्पेनेड विथ में... प्लीज!! मेरी तरफ देखो...

उसने वीर को मोड़ा और उसके गाल को सहलाने लगी. जो उसके तमाचे से लाल जो गया था. अगले hi शान उसकी आँखों में ासु आ गए.

रागिनी : देखो तोह... मेने क्या कर दिया. M-Mein तुम्हे अपना मानती हु वीर. इसलिए... मेरा हाथ तुम पर उठ गया. B-But ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो. Ch-Chaahe तोह... चाहे तोह तुम मुझे मार लो. Y-You कैन हिट में...

उसने वीर का हाथ पकड़ अपने गाल पर रख दिया. और वीर ने झटके से अपना हाथ पीछे कर लिया.

वीर : N-Nevermind! में चलता हु...

वो फिर मुदा अंदर जाने के लिए पर तभी...

रागिनी ने उससे मोड़ा और...

*छू~ ♡*

वीर के होंठ उसने अपने होंठो की गिरफ्त में ले लिए.

बस 3 से 4 सेकंड की इस किश ने उन् दोनों के बीच जो भी तनाव था, वो जैसे गायब कर दिया.

जैसे hi दोनों के होंठ एक दूसरे से अलग हुए, रागिनी के चेहरे पर खुमारी छाने लगी.






रागिनी : वन्स अगेन... I'm सॉरी वीर!!! एंड ट्रस्ट में प्लीज... वैसा कुछ भी नहीं था. Y-You कैन रेस्ट नाउ! में तुम्हे डिस्टर्ब नहीं करुँगी.

पर तभी नीचे से आभा की आवाज़ आयी तोह दोनों hi थोड़ा झेप गए.

एक अंतिम बार वो फिर आगे बढ़ी और उसने वीर के उस लाल हुए गाल को चूमा और पीछे हट गयी.

बिना कुछ कहे hi वीर अपने कमरे में चला गया. और रागिनी पलके झुकाये वापस नीचे आ गयी.

श्वेता : अब वो मुझसे और भी नफरत करेगा... *स्निफ्फ* रागिनी... तुमने ऐसा क्यों किया? क्यों किया ऐसा??? उस बेचारे ने मुझे बचाया और उससे ये सिला मिला? *स्निफ्फ*

रागिनी : आप चिंता मत करिये तै जी! वीर को में समझा दूंगी. हमारे बीच इतना नाज़ुक रिश्ता नहीं है, जो वो इस बात से मुझसे नाराज़ हो जाएगा. में उससे अच्छे से जानती हु. और आप चिंता मत कीजिये. आप यहाँ रुक सकती हो.

श्वेता : में तुम्हारी जीवन भर आभारी रहूंगी रागिनी ... *स्निफ्फ* जीवन भर... मेरा तोह सब कुछ लूट चूका है. और ऐसे समय में तुमने मुझे सहारा दिया. *स्निफ्फ* में ये कभी नहीं भूलूंगी...

कहते हुए वो रागिनी के पेर्रो पर गिर पड़ी तोह रागिनी ने उससे उसकी ब्याह पकड़ उठाया और अपने गले से लगा लिया.

रागिनी : अरररी!!!??? Y-Ye क्या कर रही हो आप? M-Mein आपका दुःख दर्द समझ सकती हु. प्लीज! ऐसा मत करिये. और... और... भूमिका को भी बता दीजिये. घर में सब परेशान हो रहे होंगे.

रागिनी की बात मान, श्वेता ने भूमिका को सब कुछ बताया और श्वेता के बारे में जान भूमिका खुद रात में उनके घर आ गयी थी.

दोनों माँ बेटी को एक अलग से कमरा दे दिया था रागिनी ने तोह दोनों वही सो गयी.

इधर ऊपर देरर रात में वीर का दिमाग खराब था.

*डिंग*

[Mission : Rescue Shweta before she dies has been completed.]

*डिंग*

[5,000 Points have been rewarded.]

*डिंग*

[Skill 'Detoxification' has been granted.]

'परीइ!!!'

[Yes master?]

'जो तो स्लीप मोड!!!'

[As you wish master~]

*डिंग*

[System has entered into the sleep mode.]

और एक गहरी सास चोररटे हुए वीर बिस्तर पर लेत गया.

'थे फ़क... ाररग्गहह!! मूड hi ऑफ हो गया बस. शी... उन्हें में माफ़ नहीं कर सकता... शी नेवर गावे अन्य अटेंशन तो में. और अब में माफ़ कर दू? हम्फ~ लॉघबले!!! प्लस भाभी मुझ पे भड़क उठी. वेल, ी कैन अंडरस्टैंड की उनके मैं में क्या चल रहा था उस वक़्त. और रिफ्लेक्स के चलते उन्होंने मुझे तमाचा मार दिया... स्टिल!!! ी कन्नोत फॉरगिव तहत वुमन!!!'

*नॉक* *नॉक*

वो सोच hi रहा था की दरवाज़ा खत खटाने की आवाज़ आयी.

'हम्म?'

और वीर ने उठ के दूर खोला.

तोह...

वीर : हम्म? तुम?

सामने आभा कड़ी हुई थी.

आभा : H-Hmm!!!

वीर : क्या हुआ?

आभा : आप... आप ठीक हो न?

वीर : हम्म? मुझे क्या हुआ?

आभा : उम्... वो... रागिनी जी ने आपको...

वीर : हम्म~ में ठीक हु.

आभा : O-Ohhh! M-Mein बस यही पूछने आयी थी. Ch-Chalti हु...

और वो मुड़ी लेकिन...

आभा : अह्ह्ह्हह~

वीर ने उससे जाने से पहले hi अंदर खींच लिया और दरवाज़ा बंद कर बिस्तर पर पटक दिया.

वीर : मेरी चिंता कर रही थी?

आभा (ब्लशेस) : H-Haan! M-Mein...

वीर (स्माइल्स) : फिर तोह तुम्हे गिफ्ट मिलना hi चाहिए.

आभा : !!??? म्पप्फ्ठ्हहह~!???

और अगले hi पल वीर ने आभा के गुलाबी रसीले होंठ मुँह में भर लिए.

'सो वार्म... मॉइस्ट... ी नीड थिस...'

*स्लुर्प* *स्मूच* *स्लुर्प*

आभा : मम्प्फह~ अह्ह्ह~ हाहहह ुननंग्घहहहह~ सससस~

देखते hi देखते आभा के कपडे हवा में उचक चुके थे. वीर ने उससे पूरा नंगा कर दिया था.

वो हाथ में आराम से पकड़ने लायक स्तन, पतली कमर, और उसकी हलके बालो वाली छूट...

वीर को आज फ़्रस्ट्रेशन से मुक्त करने के लिए सब कुछ थी.

बदन के हर्र एक हिस्से को चूम चूम कर वीर ने आभा को दो बार झरा दिया.

और अपना पेण्ट उप फ़्रस्ट्रेशन उसने आभा की कोमल सी छूट में धक्के मार मार के कई बार निकाल दिया.

आभा की साफ़ सुथरी छूट अब एक कंटेनर के सामान लग रही थी जिसमे से सफ़ेद सा दही जैसा पदार्थ बाहर गिर के उसकी पूरी जांघ को भिगो रहा था.

'फ़क ी नीडेड थिस...'

वीर : चलो!! साफ़ करे इससे...

और वीर वाशरूम में चल दिया. आभा एकदम नंगी उसके पीछे बैठ लोफा से वीर का बदन घिस के साफ़ करने में लगी हुई थी. और वीर इधर आँखें बंद कर किसी गहरी सोच में डूबा हुआ था.

वो अपने नंगे सतांन वीर की पीठ पर लगाती और ऊपर नीचे होते हुए सारा फोम पीठ पर अपने छूछीयो से फैलाती.

और इस अध्भुत एहसास में वीर खोया हुआ था.

कभी वो उससे सामने खींच कर किश करता तोह कभी उसके दूध को निचोड़ने लगता.

आखिर सब उसका hi तोह था. आभा कोई विरोध hi नहीं करती थी.

वीर : तुम्हे... बुरा तोह नहीं लगता न जब में तुम्हारे साथ...!?

आभा : अहह! N-Nahi!!!

वीर : और ऐसा क्यों?

वो वीर का बिना जवाब दिए उसके छाती से चिपक गयी. उसका शरीर छोटा था. तोह वीर को ऐसा लगा जैसे कोई बच्ची जैसा उसके गले से लग गया हो.

आभा : मुझे बुरा नहीं लगता... गांव में... मुझे केवल पीड़ा hi मिली वह... पर... पर इधर आपके साथ...

सर्र ऊपर कर वो वीर को देखि और इस बार खुद... आगे बढ़... उसने वीर के होंठ चूम लिए.

यही उसका जवाब था. जिससे वीर समझ गया.

*रिंग* *रिंग*

आभा (किश तोड़ते हुए) : अहह~ A-Aapka फ़ोन बज रहा है.

वीर : दमन आईटी! अच्छा मोमेंट बिगाड़ दिया. आभा! ज़रा फ़ोन लेके आओ इधर.

आभा : हम्म~

वो बाहर गयी और ऐसे hi नंगी हालत में फ़ोन लेकर वाशरूम में वापस आयी. रात के 1 बज रहे थे पर इस वक़्त इन् दोनों के लिए जैसे समय नाम की कोई चीज़ hi नहीं थी अभी.

वीर : किसका है?

आभा : उम्... किसी बलहार का है.

वीर : ओह्ह~ कॉल उठाओ और लाउडस्पीकर पर करो.

आभा : H-Hmmm~

और दूसरी तरफ से फिर बलहार की आवाज़ आयी.

बलहार : B-Bossss!!!!!

वीर : हम्म?

बलहार : काम हो गया है! मेने अपने आदमियों से उन् दो लफंगो को अच्छा सबक सीखा दिया है. और आपकी कार लेके आपके घर के बाहर आदमी मौजूद है. उस से के ले लीजियेगा. और आगे से बॉस... इन् छोटे छोटे कामो के लिए आपको खुद जाने की कोई ज़रुरत नहीं है. बस मुझे एक कॉल कर दिया करिये... सब सेटल हो जाय करेगा.

वीर : हम्म! गुड! रखता हु! तुम से बाद में मिलके एक काम की बात करनी है.

बलहार : ाहः~ बिलकुल बिलकुल!

*कॉल एंड्स*

और इसी प्रकार आज का ये दिन कुछ इस तरह समाप्त हुआ.

***


ा डे आफ्टर टुमारो...

Veer's ओल्ड हाउस...

नाईट टाइम ~ 8:36 पं

मनोरथ : बीटा क्या चल रहा है कोई बताएगा?

करुणेश : V-Veer? ये सब क्या है? कुछ तोह बताओ!!!

सुमित्रा : वीर??? कुछ कहो बीटा?

काव्य : भैया!??? क्या कर रहे हो आप बताओ न!???

वीर इस समय अपने पुराने घर में मौजूद था.

उसके परिवार वाले सवालों पे सवाल किये जा रहे थे पर वो कुछ नहीं बोल रहा था.

सभी के लिए सामने सीट्स मौजूद थी.

और सभी को उसने बैठाया हुआ था.

T.V से एक पेण्ड्रीवे कनेक्टेड थी.

उसके लेफ्ट में काव्य बैठी हुई थी और राइट में आरोही. वो दोनों भी कन्फ्यूज्ड थी.

आरोही : V-Veer??? तेल्ल में! क्या है ये सब?

वीर फिर भी कुछ न बोलै. उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी. यहाँ तक की श्वेता और भूमिका भी मौजूद थी. विवेक भी. पर रागिनी नहीं.

वीर : सशह्ह्ह्ह!!! जस्ट कीप वाचिंग!!!

उसने उठ के साइड में राखी पॉपकॉर्न्स उठायी और सबके हाथो में थमा दी.

वो वापस से अपनी जगह जाके बैठा और उसने पेण्ड्रीवे में एक फोल्डर ओपन किया और उसमे एक वीडियो प्ले कर दी.

वीडियो के शुरू में कुछ टेक्स्ट लिख के आये...


लाइट्स! कैमरा! एक्शन!!!!

और फिर वो वीडियो क्लिप प्ले होना शुरू हो गयी.

.

.

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.

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.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

और जो भी बकचोदी अभी पेली गयी है अपडेट को लेकर. सो, कीप तहत इन मंद की राइटर पहले अपनी हेल्थ को देखेगा. न की स्टोरी को. बाकी, लीव ा लिखे एंड योर थॉट्स अस वेल. मिलते है नेक्स्ट अपडेट में.


धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 85 ~ ब्रिंगिंग डाउन थे बास्टर्ड.

अब तक...

वीर : सशह्ह्ह्ह!!! जस्ट कीप वाचिंग!!!

उसने उठ के साइड में राखी पॉपकॉर्न्स उठायी और सबके हाथो में थमा दी.

वो वापस से अपनी जगह जाके बैठा और उसने पेण्ड्रीवे में एक फोल्डर ओपन किया और उसमे एक वीडियो प्ले कर दी.

वीडियो के शुरू में कुछ टेक्स्ट लिख के आये...


लाइट्स! कैमरा! एक्शन!!!!

और फिर वो वीडियो क्लिप प्ले होना शुरू हो गयी.

अब आगे...

रात का समय था और वीर के पुराने घर में सभी मौजूद थे. हॉल में hi लगी बड़ी लेद टीवी पर वीर ने एक वीडियो क्लिप प्ले की हुई थी.

पूरे मैं हॉल में अँधेरा था. ऐसा लग रहा था जैसे किसी थिएटर में आके बैठ गए हो. टीवी की स्क्रीन भी बेहद बड़ी थी, करीबन 55 इंच, तोह बिलकुल सिनेमा वाली फीलिंग आ रही थी सभी को.

उन् सब के हाथो में वीर ने एक एक पॉपकॉर्न के पैकेट थमाए हुए थे. वीर के लिए जैसे ये किसी मूवी से काम नहीं था.

काव्य जो उसके बायीं तरफ बैठी हुई थी उससे क्यूरोसिटी से देखे जा रही थी.

काव्य : बताइये न भैया!!! ये सब क्या चल रहा है?

वीर : मेने कहा न बस देखती जाओ.

काव्य : पर... मममपहहहह!!!?? (´⊙ω⊙`)!

इस से पहले की वो बेचारी कुछ कह पाती वीर ने उसकी गॉड में रखे पॉपकॉर्न के पैकेट से हाथ में कुछ पॉपकॉर्न ली और सीधे उसके मुँह में ठूस दी.

काव्य : ुघियउ~ *नाम* *नाम* ुममुआवा.... *नाम*

वीर (स्माइल्स) : एन्जॉय एंड जस्ट वाच.

सवाल तोह आरोही के मैं में भी था. पर जिस तरह से वीर ने काव्य के मुँह में पॉपकॉर्न ठूसे, उससे देखने के बाद आरोही ने अपना मुँह बंद रखना hi बेहतर समझा.

और फिर सभी की नज़रे टीवी स्क्रीन पर जम्म गयी.

वीडियो जैसे hi शुरू हुआ, वीर एक गज़ब के ब्लैक टुक्सेडो में था, अंदर वाइट शर्ट के साथ, वो खड़ा हुआ था एक मिरर के सामने.

वो अपने बाल बना रहा था. अपनी काली घनी ज़ुल्फो को सेट कर वो शीशे में खुद को तैयार कर रहा था.

और इधर काव्य ने जैसे hi उससे स्क्रीन में इस क़दर देखा वो कही खो गयी.

काव्य : होओओओ~ Bh-Bhaiya~ सो हैंडसम... (๑♡⌓♡๑)

फिर अचानक hi उससे जैसे ध्यान आया.

काव्य : अह्ह्ह!!?? वेट! भैया? अरे यू वेअरिंग तहत शामे शर्ट नाउ? ुवु~ इसका मतलब ये वीडियो आज की है. है न? है न?
✧\(>ो<)ノ✧

आरोही (सर्र पर तपली मारते हुए) : वीडियो पर ध्यान दो. E-Even थौघ...

आरोही (खुसपुसाते हुए) : हे डस लुक्स हैंडसम... *ब्लशेस*

काव्य : आउच~ (。•́︿•̀。) क्या दी? वीडियो hi तोह देख रही हु न? मारा क्यों आपने मुझे?

वीर : तुम दोनों...! सस्शह्ह्ह! शांत!

काव्य : ुघठ!!

आरोही : ....

विवेक : वीर? ये सब क्या मज़ाक है? क्या तुमने यहाँ हमे अपना व्लॉग दिखाने के लिए इखट्टा किया है क्या?

वीर : बिलकुल नहीं! जब वीडियो देखेंगे तब hi तोह पता चलेगा न?

विवेक (मैं में) : आखिर करना क्या चाहता है ये वीर.

और उसके बाद अचानक hi सन चेंज हो गया.

वीर के सामने भूमिका मौजूद थी. सन था रागिनी के घर का.

ये सन आते hi भूमिका की बॉहे सिकुड़ गयी. और वो सोच में पड़ गयी.

'ये... ये तोह... ये तोह कल की बात है. V-Veer ने मुझे रिकॉर्ड किया था??? P-Par क्योऊ???'

वीर पर उसने नज़रे डाली पर वीर तोह जैसे पूरा का पूरा टीवी पर फोकस्ड था.

और इधर भूमिका समेत श्वेता की चिंता बढ़ती जा रही थी.

फिर सन में हुई बात शुरू हुई.

~~~


वीर : तोह क्या हुआ था? आप बताएंगी मुझे?

भूमिका : अब में क्या कहु वीर? क्या बोलू? किस मुँह से बोलू? अब तोह कुछ बचा hi नहीं है. में और माँ दोनों hi... गिल्ट के इस सागर में डूबे हुए है.

वीर : ...

भूमिका : सब कुछ *स्निफ्फ* सब कुछ उस प्रांजल ने किया है वीर. सब कुछ उसका hi किया धरा है. *स्निफ्फ* वो hi उस दिन होटल आया था. माँ को डिनर पे लेके गया ये कह के की... *स्निफ्फ* की वो माँ को रिलैक्स करवाना चाहता है. नेक्स्ट डे भी आया वह. एंड ी थॉट, हे वास् दोंग आल थिस फॉर माँ. *स्निफ्फ*

वीर : ...

भूमिका : और फिर... उस रात जब माँ आयी उसके नेक्स्ट दिन hi ये पता लगता है की उसने माँ से सिग्न करवा के पूरी की पूरी होटल hi अपने नाम कर ली है.

वीर : हाउ??

भूमिका (रट हुए) : ी don't क्नोव! ी don't क्नोव वीर!!! उसके पास पता नहीं होटल के ओरिजिनल पेपर्स कहा से आ गए. हे इवन मॉडिफाइड थे टर्म्स एंड कंडीशंस. पेपर्स में उसने चंगेस करवाए की वो होटल अब उसका होने जा रहा है.

वीर : ऑलराइट!!!

वीर उठा और भूमिका को वही चोरर वो बाहर निकल गया. वो बेचारी बस रोटी रही.


~~~

और इधर हॉल में सभी लोग शान्ति से सब कुछ वीडियो में होता देख रहे थे. श्वेता और भूमिका पल पल वीर की तरफ बेचैन होक नज़रे घुमाती पर केवल निराशा hi उन्हें मिलती, क्युकी वीर उन् दोनों की तरफ देख hi नहीं रहा था.

अगले hi पल एक बार फिर सन चेंज हुआ. इस सन में वीर बाइक ड्राइव कर रहा था. शायद उसने अपनी ब्रैस्ट पॉकेट में कैमरा सेट करके रखा हुआ था. जिसके ज़रिये वो सब कुछ रिकॉर्ड कर के एक वीडियो के रूप में सब कुछ प्रस्तुत कर रहा था.

~~~


वो उतरा और किसी जगह पे गया. अंदर तीन चार लफंगे बैठे हुए थे. और वीर ने घुसते hi उन्हें चौकन्ना कर दिया.

वीर : प्रांजल कहा है?

लड़का 1 : कौन है बी तू? और बिना पूछे अंदर कैसे आया?

वीर बिना कुछ कहे आगे बढ़ा और उस लड़के के सोफे पर सीधे अपनी लात दे मारी. वीर की टांग उस लड़के के चेहरे के बगल से होक तेज़्ज़ी से निकली और पीछे सोफे पर जाके लगी.

*बाआआआंमम्मम्म्म्म*

लड़का 1 : S-Saale तेरी तोह...

पर वो बोलने लायक न बचा. क्युकी अगले hi शान वीर ने उसका हाथ पकड़ा और...

*डिंग*

लीम्बो!!!

*क्रैकककककक*

लड़का 1 : अअअअअअररररग्घहहह!!!! M-Maaro साले को... आआह्ह्ह्ह मेरा हाथ...

और उसके बाद तोह...

कुछ बताने की ज़रुरत hi नहीं की उनके साथ क्या हुआ था. पालक झपकते hi वो सारे दर्द से कराहते हुए नीचे डेल हुए थे.

लड़का 1 : H-Haaahhhh!! M-Mujhe चोरर दो... ाआर्डरह्ह्ह्ह!! M-Mera हाथ... मेरा हाथ...

वीर (स्माइल्स) : चोरर दूंगा!! बस ये बता दो, प्रांजल किधर है??

लड़का 1 : M-Mein... में नहीं...

वीर : ओह्ह्ह्ह~ तोह शायद मुझे दर्द और बढ़ाना पड़ेगा.

लड़का 1 : N-Nahiiii!!! नहीं!!!! में... में बताता हु.

वीर (स्माइल्स) : गुड~

लड़का 1 : W-Wo... वो सिल्वर...

वीर : हम्म??

लड़का 1 : सिल्वर क्लब!! वो क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स रोड वाला पब.

वीर (स्माइल्स) : नीस!!

*डिंग*

लीम्बो!!!

*क्राआँकककक*

लड़का 1 : आईईईई ाआर्गग्गघहहह!!!

वो लड़का किसी कुटिया की तरह एक बार फिर बिलबिला उठा. और सन एक और बार बदल गया.


~~~

इधर हॉल में सभी जिज्ञासा लिए सब कुछ होता देख रहे थे. काव्य की आँखों में तोह सबसे ज़्यादा चमक थी.

काव्य (ब्लशेस) : W-Wowwww!!! S-So कूल!!! भैया~

आरोही : K-Kahi वीर ये सब...??

उसने वीर को देख पूछा. तभी एक सनसनी मचा देने वाला ख़याल उसके मस्तिष्क से होते हुए गुज़रा जिस से आरोही का पूरा बदन सिहर उठा.

आरोही : वीर!! K-Kahi तुम...!?

उसके सवाल पर वीर की मुस्कान और फेल गयी. आरोही ने जब उससे मुद के देखा तोह वीर की वो ईविल स्माइल देख उस के पूरे बदन में रुए खड़े हो गए.

वो सही सोच रही थी मतलब. वीर प्रांजल के साथ कुछ करने वाला था.

और बेशक, वीडियो में सन आया फिर... सिल्वर क्लब का.

~~~


वीर सिल्वर क्लब में एंटर हुआ और... वह का नज़ारा एकदम hi उत्तेजित कर देने वाला था.

सिल्वर क्लब एक हाई क्लास पब था. घुसते से hi वीर को अंदाजा लग चूका था. सामने की स्टेज पर लड़किया छोटे छोटे कपड़ो में थिरकती हुई, अपनी सेक्सीनेस शोकेस कर रही थी. हर्र रदम, हर्र बीट पे उनकी पतली कमर हिल रही थी.

और नीचे कपल्स तोह कही स्ट्रॉन्गेर्स एक दूसरे के साथ अपनी कमर हिलाने में लगे हुए थे. एक दूसरे के बदन से बदन मिलाने में लगे हुए थे.

सेक्सी उत्तेजित कर देने वाले गाने लॉडली बज रहे थे. डिस्को लाइट्स से पूरा क्लब जगमगा रहा था.






और उन् थिरकते हुए लोगो के बीच से वीर अपना रास्ता बना के गुज़रता जा रहा था. जहा बाकी सभी की आँखों में नशा था, खुमारी छायी हुई थी. वीर की आँखें किसी बाज की तरह किसी को धुंध रही थी.

अपने अगल बगल मौजूद नशे में नाचते हुए लोगो को नज़र अंदाज़ कर वो आगे बढ़ता रहा.






और कुछ hi पालो में, उससे जिसकी तलाश थी, वो उसकी आँखों के सामने था.

प्रांजल!!!

उस से थोड़ी hi दुरी पर वो कुछ लड़को और लड़कियों के साथ नाचता हुआ पाया गया. वीर ने जैसे hi उससे देखा तोह उसके चेहरे पर एक मुस्कान फेल गयी. और, वो आगे बढ़ा.

प्रांजल इधर अपने ख़ास दोस्तों को होटल मिलने की पार्टी दे रहा था. दारु से लेकर, नाच गाने के इंतज़ाम के लिए वो सभी को यहाँ आज सिल्वर क्लब में लेके आया हुआ था.


~~~

इधर वीर के घर में बैठे जैसे hi प्रांजल को लड़कियों के साथ नाचते हुए देखा वो भी ऐसे क्लब में तोह सबके होश hi उड़द गए.


काव्य (ब्लशेस) : अह्ह्ह!! Y-Ye सब??

मनोरथ : करूनेस्सशःह्ह्ह!!!! ये सब क्या हीी???? ये क्या देख रहा हु में???? क्या कर रहा है तुम्हारा लड़का ये???

करुणेश : P-Papa जी...

मनोरथ एकदम से बहकते हुए बोल उठे. उन्हें अपनी आँखों पर विस्वाश hi नहीं हो रहा था. जिस प्रांजल को वो दूध का धुला समझ रहे थे वो ऐसा निकला? पर ये तोह कुछ भी नहीं था. आगे जैसे उन्हें और भी झटके लगने वाले थे.

~~~


इधर वापस से वीडियो में... वूफर्स में गाने इतनी लाउड बज रहे थे की उसका बास इतना ज़्यादा था, वीर अपनी छाती में उन् विब्रेशन्स को भली भाति महसूस कर पा रहा था. क्लब की विबे hi अलग थी.

और प्रांजल जो हलके नशे में नाच रहा था वो जब मुदा तोह सामने उससे वीर नज़र आ गया.

पहले वो चौंका, फिर मुस्कुराते हुए वो वीर के नज़दीक आया.

प्रांजल : हाहाहाहाहा~ िफ़ आईटी ीसन्त यू माय बास्टर्ड बरोथेर!!?

वीर : ...

प्रांजल : आओ आओ... तुम भी आओ... हाहाहाहा~

और वीर को खींचते हुए वो अपने दोस्तों के पास ले गया. आज जैसे वो बेहद ख़ुशी में था.

दोस्तों से पहचान करा के, फिर वीर को वो बार साइड लाया जहा लोग शॉट्स और ड्रिंक्स ले रहे थे.

प्रांजल : तुम यहाँ क्या कर रहे हो? हाँ? किसी लड़की ने छूट नहीं दी क्या आज? हाहाहाहाहा~ लग तोह यही रहा है. एकदम सूट वूट में हाँ? दिल तोड़ के भाग गयी लगता. हाहाहाहाहा~

वीर : ...

प्रांजल : वैसे आज में खुश हु. हाहाहाहा~ बोहत खुश. तोह आज तुम्हे जो पीना हो पियो. बिल मेरे ऊपर. अपने दुश्मन के प्रति इतना दिलदार तोह हो hi सकता हु में. हाहाहाःहाहा~

और वेटर को बोल के प्रांजल ने अपने और वीर के लिए ड्रिंक्स मंगवा ली.

वो पी रहा था और यहाँ वीर भी पी रहा था.

पर जहा प्रांजल को नशा चढ़ता जा रहा था. वीर एकदम टिप टॉप और सोबर कंडीशन में था. उससे कोई नशा hi नहीं चढ़ रहा था. उसके होंठो पर बस एक क़ातिलाना मुस्कान सजी हुई थी.

इन् सब का कारण था...

डेटोक्सिफिकेशन!!!

उसकी नयी स्किल. उससे पारी के बोल अपने मैं में याद आने लगे.

[Master! This skill is different. Naam se lag raha hoga ki ye poison detoxify karegi but no. Aisa nahi hai. It detoxifies the damage done by liquor and cigarettes. Dusre shabdo me, yadi aap sharaab ya smoke karte ho toh Detoxification skill usme maujood nasheele padaartho ko detox kar degi. Na hi aapki body me koi harm hoega aur na hi aapko nasha chadhega. So, now you are immune to drunken-ness.]

यही रीज़न था जो वीर मज़्ज़े में प्रांजल के साथ ड्रिंक कर रहा था. हे हद नथिंग तो लूज़.

सबसे बेहतर बात थी की ये स्किल ों या ऑफ करि जा सकती थी. तोह वीर उससे ऑफ कर अल्कोहल के नशे में डूब भी सकता था यदि चाहे तोह.

पर फिलहाल, वो ों थी.

चतुराई से वीर ने ड्रिंक्स पर ड्रिंक्स मंगवाई और प्रांजल के साथ वो पीटा गया. नशे में धुत्त होने का वो नाटक करने लगा.

इधर प्रांजल उससे नशे में डूबते देख खुद भी नशे में घूम होने लगा.

और फिर, वीर ने अपनी चाल चलना शुरू की. शतरंज का पहला प्यादा उसने बढ़ा दिया.

वीर : ऐसा क्यों किया तुमने!?

प्रांजल : *हइच* क्या कहा? मेने ऐसा क्यों किया? *हइच* S-Saale मादरचोद!!! सब तेरे कारण!! सब तेरे कारण!! यदि तू न होता... *हइच* तोह आज सब कुछ मेरा होता... पर चू....

वीर : ...

प्रांजल : तेरे कारण मेरा सारा प्लान चौपट हो गया. *हइच* तेरे कारण... *हइच* M-Mein भुला नहीं हु. बैंक्वेट में जो तूने मेरे साथ किया... मेरी इतनी बेइज़्ज़ती... सब याद है मुझे...

वीर : और तुमने जो मेरे साथ किया उसका क्या?

प्रांजल : H-Huh!?? *हइच* हरामी वो सब तू... तू डेसेर्वे करता है. साले... तू डेसेर्वे करता है...

वीर : ओह्ह्ह्ह! तुम्ही थे न!? जिसने मुझे घर से बाहर निकलवाया!??

प्रांजल : *हइच* हाहाहाहा~ तुझे अब मालुम पद रहा है!??? हाहाहाहाहा~ कोई इतना बेवक़ूफ़ कैसे हो सकता है बस? *हइच*

वीर (स्माइल्स) : कैसे निकलवाया और तुमने मुझे?

प्रांजल : हहहहहहहह~ अबे तू अब तक नहीं समझ पाया? *हइच* सब कुछ मेरा प्लान था गांडू... *हइच* मेरा प्लान... विवेक भैया की कंपनी से वो स्पेशल स्लिपरी आयल... *हइच* मेने hi तोह डाला था... तेरे पेर्रो के नीचे... हाहाहा~ जब तू गिरा था न... मेरे दिल को इतनी ज़्यादा ख़ुशी कभी महसूस नहीं हुई थी. सारा प्रसाद... *हइच* नीचे... और तू बाहर... हाहाहाहा~

वीर : नीस!! और!!? इससे देख के कुछ याद आया?

वीर ने अपने ब्लेजर की इनर पॉकेट से फिर कुछ निकाला और टेबल पर रख दिया.

ये वही था.

मनोरथ की व्हीलचेयर का वो मॉडिफाइड पहिया. और उससे देखते hi प्रांजल थोड़ा चौंका और फिर उससे अपने हाथो में खींच लिया.

प्रांजल : S-Saale!!!! *हइच* Y-Ye तेरे पास कैसे आया हरामखोर? हाँ?

वीर : तूने hi दादा जी के साथ वो सब करवाया था न? बोल!!!

प्रांजल : हाहाहाःहाहा~ तुझे पता चल गया!? *हइच* हाँ साले!!! उस बुढऊ को इतनी बार समझाया मेने... *हइच* की मेरे हवाले कर दे ज़मीन... *हइच* मादरचोद समझता hi नहीं रहा... *हइच* हाहाहाहाहा~ फिर क्या? टपकवा दिया! खर्र मनाओ मेरा दिल... *हइच* अरे मेरा दिल बड़ा है. हेहेहे~ जान से नहीं टपकाया उसको... बोलो? *हइच* हु न में बेस्ट!? *हइच* इस पहिये को मेने बोहत पैसे देके बनवाया था हाहाहा~

वीर : और फिर ये होटल?

प्रांजल : हाँ गांडू हाँ! हाहाहाहाहा~ *हइच* मेरी hi चाल थी. अरे अपुन ने hi किया रे. आरोही दी और वो पगली काव्य... साला *हइच* पहले hi तेरे नाम सब कर के बैठ गयी. *हइच* में क्या करता? लुंड हिलाता? *हइच* T-Toh अपुन ने भी... *हइच* अपुन ने भी ठान ली... अपुन साला *हइच* b-badi मछली को पकड़ेगा सीधे
. T-Toh इसलिए?

वीर : ...

प्रांजल : इसलिए अपुन वो तेरी... *हइच* अरे वो क्या कहते है? *हइच* अरे... W-Wo.. हाँ!!! तेरी सौतेली माँ~ हाहाहाहाहा~ *हइच* तोह अपुन... अपुन उसके पास गया. उस पगली को भी उल्लू बनाना इतना आसान निकला... *हइच* साला सब चूतिये है. हेहेहे~ दुनिया hi चुटिया है. अपुन जो चाहता है... *हइच* उससे पा के रहता है...!!!

वीर : ...

प्रांजल : और... और.. *हइच* और एक राज़ की बात बताऊ?

वीर : !!!?

प्रांजल : अपुन ने... *हइच* मेने न... वो होटल पूरी की पूरी आज hi एक बोहत बड़े इस शेजेर के डॉन को बेच दी है. हहहहए~ अब अपने पास रोकड़ा hi रोकड़ा है... करोडो रूपया... हहहहए~ *हइच* लड़की छोड़ो... दारु पियो... मस्ती करो *हइच*... और अब में उस डॉन से जुड़ चूका हु. साले!!! *हइच* अब तेरी खैर नहीं... अगले नंबर तेरा hi वीर!!!

वीर : ओह्ह!? बूत स्टिल... क्यों किया तुमने ये? और क्या मिला?

प्रांजल (चीखते हुए) : क्या मिला???? हरमखोरररर!!!! *हइच* तेरा कारण... वो चली गयी... *हइच* इंडिया चोरर के... *हइच* मुझसे दूर... सब तेरे कारण!!!

और इतनी हो रही बातो में पहली बार वीर को एक झटका लगा.

वीर : हँ??? K-Kaun???

प्रांजल : *हइच* वो चली गयी... वो चली गयी... *हइच* में तुझे ज़िन्दगी भर माफ़ नहीं करूँगा... तेरी दुनिया *हइच* नर्क बना दूंगा... *हइच*

वीर : H-Heyyy कौन... किस... किस की बात कर रहे हो.

वीर ने उससे झंझोरा पर... प्रांजल नशे में चूर चूर हो चूका था तोह वह टल्ली होक वही टेबल पर hi धेरर हो गया.

'दमन आईटी!!!! हु वास् हे रेफरिंग तो??? K-Kaun भला!!???'

और इतना सब कुछ हो जाने के बाद. वीडियो बंद हो गयी.


~~~

जैसे hi वीडियो ख़तम हुई. पूरे हॉल में एक घनघोर सन्नाटा छाया हुआ था.

सब के होश उड़े हुए थे. ऑफ़ कोर्स, सिवाए वीर के. वो तोह पॉपकॉर्न खाने में लगा हुआ था.

'हम्म? थिस बटर फ्लेवर इस इनडीड गुड.'

[ :पॉपकॉर्न: ]

और फिर,

"करुनेससससससहहहहहहह!!!!!!"

मनोरथ की एक ज़ोरदार दहाड़ पूरे हॉल में गूँज गयी. सब अपनी अपनी जगह से खड़े हो गए.

मनोरथ का शरीर गुस्से से काँप रहा था. आँखें एकदम गुस्से से आग बबूला हो चुकी थी. और आज सभी उन्हें इस रूप में देख दांग रह गए. थोड़ा डर भी गए.

आरोही सब कुछ भौचक्की सी देखि थी अभी. उसका मंद काम करना बंद कर चूका था जैसे. काव्य बेचारी को इतना बड़ा झटका लगा था की वह कुछ ग्रस्प hi नहीं कर पा रही थी.

वो जानती थी की प्रांजल भैया उसके मतलबी थे और सही नहीं थे पर ये सब? वो इतना गिर चुके थे और ऐसे थे इसकी उसने आज तक कभी कल्पना भी नहीं की हुई थी. शी वास् टोटली शॉकेड.

पर सबसे बड़ा झटका तोह सुमित्रा को लगा था जो अपने बेटे की असली सच्चाई सेहेन hi न कर पायी और इस खबर से बेहोश हो गयी.

आरोही : M-Maaaaa~

काव्य : मम्मीयियय!!!!!!

आरोही और काव्य दोनों hi अपनी माँ को संभालने के लिए आगे बढ़ी और उन्हें साइड में लिटाते हुए उन्हें होश में लाने लगी.

पर यहाँ मामला बेहद गरम था.

भूमिका और श्वेता एक दूसरे को बाहो में लिए रोटी जा रही थी. वो भावुक हो चुकी थी. उनकी सच्चाई के लिए आखिर कुछ तोह हाथ आया. और वो भी वीर ने किया ये सब. जिसके प्रति ग्लानि के भाव में वो डूबी हुई थी.

बृजेश भी पूरा स्तब्ध था. और अब उससे श्वेता और भूमिका के प्रति ग्लानि महसूस हो रही थी. पर अब क्या फायदा जब चिड़िया चुग गयी खेत? वो अब लेट हो चूका था.

मनोरथ इस से पहले की बरसते की तभी बाहर गाडी के रुकने की आवाज़ आयी. और फिर...

*हॉंक* *हॉंक*

हॉर्न मारते हुए कोई उन्हें बाहर बुलाने लगा.

जैसे hi वो सभी बाहर पहुचे. तोह दो आदमी प्रांजल को सहारा देके उठाते हुए उससे ला रहे थे.

प्रांजल अभी भी नशे में था. इसका मतलब...

आरोही और काव्य वीर को आँखें फाड़े देखने लगी. इसका मतलब ये वीडियो जस्ट कुछ देरर पहले की थी. तोह इसलिए वीर उसी शर्ट में था. तहत एक्सप्लाइन्स आईटी आल.

प्रांजल लड़खड़ाते हुए आगे आया और फिसलती जुबां से गाने गाते हुए मनोरथ के पास गया.

प्रांजल : छू लेने दो नाज़ुक होंठो को... *हइच* कुछ और नहीं बस... जाम है ये 🎵 छू लेने दो नाज़ुक होंठो को... *हइच*

वीर जहा मैं hi मैं जश्न मन रहा था तोह वही मनोरथ गुस्से से लाल हुए जा रहे थे. और बस ज्वालामुखी फटा और...

मनोरथ ने अपनी लाठी उठायी और प्रांजल पर बरसाना शुरू कर दी..

*ठुड्ड़* *ठुड्ड़*

"अअअअअररररह्हह्ह्ह्ह!!! ेयीईइइइइइइइ... मार डाला रे.. aaaaaaaaaaaaaaa"

प्रांजल की दर्द भरी कराहे गूंजने लगी.

मनोरथ : हरामखोर!!! निर्लज!!! कपटी शैतान साले.... आज में तुझे चोरडूंगा नहीं... आज में तुझे जान से मार दूंगा!!!!!

और उनकी लाठी प्रांजल के पूरे शरीर पर बरसना शुरू हो गयी. करुणेश भी पीछे नहीं हटा. उसने अपना बेल्ट निकाला और किसी कुत्ते की तरह अपने बेटे को मारने लगा.

इधर विवेक की हालत पतली हो चुकी थी. वो मैं hi मैं खुद को hi धन्यवाद दे रहा था. अच्छा हुआ जो वो प्रांजल के साथ से हट चूका था. वर्ण आज...!?

सोचते हुए hi उसका शरीर ठंडा पद गया और उसने मुँह में अटका अपना थूक निगल लिया.

"एईई दद्दाआ.... बुड्ढे ने मार दिया रे... बुढऊ ने मार डाला... ाआर्डरह्ह्हह्ह पापा~.... ाआर्डरह्ह्हह्ह ेयीईइ मआईई.... मर्डर गया....."

पानी के छीटे भी मारते जा रहे थे उसके चेहरे पर जिस से उससे होश भी बना रहे और उसकी ठुकाई भी चालु थी.

तभी बाहर आयी कार से एक और आदमी निकला. ा
ुर चलते हुए सीधा वीर के पास आया.

उसने एक पैकेज वीर को थमाया और बोलै,

"बॉस! सारा काम हो गया. जैसा आपने कहा था."

वीर (स्माइल्स) : गुड! तुम जा सकते हो अब.

ये और कोई नहीं, बलहार hi था.

बलहार : J-Jii बॉस! और कोई भी काम हो तोह बस be-jhijhak बता देने का मुझे.

और वो निकल गया अपने आदमियों के साथ.

इधर प्रांजल का हाल बेहाल था. गालियों और लाठियों से उसका सम्मान हो रहा था.

वीर आहिस्ता आहिस्ता चल के श्वेता के पास आया. वो आँखों में ासु लिए उससे hi देख रही थी. और कुछ कह नहीं पा रही थी सिवाए सिसकने के.

भूमिका का भी यही हाल था. अपनी माँ से लगे हुए वो भी बस वीर के कुछ कहने का वेट कर रही थी. पर वीर ने कुछ न कहा.

बस वो पैकेज हलके हाथो से फेका जो जाके सीधा श्वेता की गॉड में जा गिरा.

श्वेता की हिम्मत न हुई उससे छीने की, तोह भूमिका ने उस पैकेज को खोला और जैसे hi उसने अंदर मौजूद चीज़ को देखा तोह...

उसकी आँखों से जहर जहर कर के आसुओ की मोती मोती बूंदे बहने लगी. पैकेज में वही था.

होटल के पेपर्स. और वो भी प्रांजल के नाम नहीं. उसके और श्वेता के नाम थे.

उसकी कुछ समझ नहीं आ रहा था की वीर ने ऐसा क्यों और कैसे किया? वो बस उससे थैंक यू कहना चाहती थी पर बेचारी के मुँह से वो भी न निकला. इस वक़्त उससे जैसे थैंक यू शब्द भी बेहद छोटा लग रहा था वीर के प्रति ग्रटीटुडे एक्सप्रेस करने के लिए. अंत में वो बस बिलखती रही. कुछ कह न पायी.

वीर उठा और अगले hi पल वो घर के अंदर गया. अपने रूम की छवि ढूंढ़ने लगा. के मिलते hi वो अपने रूम में गया और उसने अपनी अलमारी खोली...

'आईटी शुड बे हेरे!!!'

वो कुछ धुंध रहा था. और जैसे अगले hi शान उससे वो मिल गया.

वो उससे लेकर बाहर आया जिधर सभी मौजूद थे. प्रांजल मार खा खा के बेहोश हो चूका था. और माहौल बेहद hi तंग हो चूका था.

वीर आगे बढ़ा और उसने अपने हाथ में मौजूद वो चीज़ अपने दादा जी के हाथो में रख दी.

वीर : जब घर से बाहर निकाला गया था. तब सोचा नहीं था की मेरे साथ ऐसा कुछ होगा. इसलिए आपके जन्मदिन पर ये खरीदा था. आपको देने के लिए. पर बदक़िस्मती मेरी... जो में इससे आपको दे नहीं पाया था. इसलिए... आज दे रहा हु.

जैसे hi मनोरथ ने उस चीज़ को देखा, उनकी आँखें पानी पानी हो गयी.

उनके हाथो में एक फ्लावर वैसे था. ये वही वैसे था जिससे वीर ने अपने दादा जी के जन्मदिन के लिए खरीदा हुआ था. पर उस दिन उसके हाथो से लाखो का वो वैसे टूटने पर वीर को कभी मौका hi नहीं मिल पाया था की वीर उससे अपने दादा जी को दे सके.

मनोरथ (रट हुए) : V-Veeeerrr!!!

वीर : चलता हु...

मनोरथ : ृक्क जा .. ृक्क जा मेरे बच्चे...

पर वीर न रुका...

वो निकला बाहर और अपनी बाइक की ऑर्डर जाने लगा जब पीछे से अचानक hi काव्य आके उस से लिपट गयी.

काव्य (रट हुए) : भैयाआ!!!!

वीर : ....

काव्य (क्रिस) : Y-Ye सब क्या हो गया भैया!!?? प्रांजल भैया ऐसा कैसे कर सकते है? आपके साथ ऐसा...!? ी हेट हिम!!!! ी हेट हिम सो मच... हाउ कैन हे!?? भैया मत जाओ न...! मत जाओ!!!

वीर : काव्य चोरर! जाने दे!!

काव्य : नाहीईईई!!!! नहीं जाने दूंगी!!! कही नहीं जाने दूंगी... *स्निफ्फ*

वीर : काव्य...!

काव्य : हाउ कैन हे...!? दो तहत तो यू...!? दादा जी के साथ भी...!?? *स्निफ्फ* ी won't लेट यू गोऊ~

वीर : काव्य चोरर! मुझे जाना है. ी मस्ट...

काव्य : P-Par... पर...

वीर : चोरर जल्दी...!

काव्य : थें... थें प्रॉमिस में... प्रॉमिस में... 3 दिन बाद... You'll के तो कॉलेज. तो सी में...!!!

वीर : ी...

काव्य : प्रॉमिस मई!!!!!

वीर : फाइन...

और न चाहते हुए भी काव्य को अपनी पकड़ ढीली करनी hi पड़ी.

वीर आगे बढ़ अपनी बाइक पर सवार हुआ और उसने एक अंतिम बार पीछे मुद के देखा.

पीछे... आरोही अपने आसुओ से भीगे गाल लिए उससे hi देख रही थी. एकदम चुप चाप. दोनों की नज़रे एक दूसरे से भिड़ी हुई थी. वीर जैसे ये व्यक्त करना चाह रहा था की ये सब होना hi था. और शायद वो थोड़ा चिंतित भी था. प्रांजल आरोही का सागा भाई था. और उसके साथ वीर ने आज ये सब किया था.

पर उसकी साड़ी चिंता मिट गयी जब अगले hi पल आरोही ने हौले से हाँ में सर्र हिलाया.

जैसे स्वीकृति दे रही थी की वो समझ सकती थी सब.

बस!!! वीर के लिए ये काफी था.

*Vrrrrrrrrrrroooooooommm*

और वो फौरन hi वह से निकल गया.

उसके जाते hi श्वेता को भी जैसे होश आया. व
ो उठी और भूमिका के साथ जाने लगी.

मनोरथ : B-Bahuuu!? कहा जा रही हो?

पर श्वेता ने कोई जवाब न दिया. वो अपनी जिस गाडी से आयी थी उसी में जाके बैठ गयी.

भूमिका भी उसके पीछे पीछे जा रही थी जब, बृजेश ने उससे पीछे से टोका.

बृजेश : भूमिका!!! K-Kaha जा रही हो!??

भूमिका (पलट के नम्म आँखों से) : जिधर मेरी माँ की कोई इज़्ज़त नहीं, उधर में एक पल भी नहीं रह सकती.

और वो भी बिना कुछ कहे वह से श्वेता के संग निकल गयी.

उनकी मंज़िल भी वही थी. रागिनी का घर. उसके सिवा कहा जा सकती थी भला वह!?

***

इतने बड़े काण्ड के बाद वीर यहाँ अभी भी चेन्न में थोड़ी hi था.

'थिस वास् जस्ट थे ट्रेलर फॉर हिम. ी विल टर्न हिज लाइफ हेलल!!!'

[He deserves it Master~ And now you should take rest too.]

'येह!!!'

वो अपने कमरे में मौजूद, अपनी शर्ट उतार के वो अभी पंत उतारने hi वाला था जब,

"अह्ह्ह!!? V-Veeer!??"

कमरे की देहलीज़ पर रागिनी आ गयी. और उससे इस हालत में देख थोड़ा शर्मा के नज़रे फेरर ली.

चोरी चोरी उसकी आँखें वीर के बदन पर पड़ी और उससे देखते hi रागिनी के चेहरे पर खुमारी सी छाने लगी. वीर का बदन ऐसा लग रहा था जैसे उपरवाले ने सालो साल म्हणत कर के तराशा हो.

आज तक रागिनी ने कभी किसी मर्द की ऐसी बॉडी असल ज़िन्दगी में नहीं देखि थी.

रागिनी : K-Kya में अंदर आ सकती हु?

वीर : उम्... S-Sure!

वो बिस्तर पर बैठते हुए बोलै. उससे कोई शर्म नहीं आ रही थी. एक अल्फा मेल भला खुद की बॉडी शोकेस होने पर शर्माता थोड़ी था.

रागिनी आयी और उसके बगल से बैठ गयी. कुछ देरर तक दोनों में से कोई न बोलै. फिर जैसे तभी वो साइड में झुकी और वीर के नग्न कंधो पर अपना सर्र रखते हुए बोली,

"T-Tum मुझसे नाराज़ तोह नहीं हो न?"

वीर : Umm-Hmm... नहीं!

रागिनी : पक्का?

वीर : हम्म~

रागिनी : पक्का वाला पक्का??

वीर (स्माइल्स) : हम्म!

रागिनी (स्माइल्स) : that's गुड थें... और...

वीर : हम्म??

रागिनी आहिस्ता आहिस्ता अपने चेहरे को उठाते हुए उसकी आँखों में देखि. दोनों एक दूसरे की गरम सासें फील कर पा रहे थे.

कमरे की मद्धम लाइट में वीर के होंठ रागिनी भली भाति देख पा रही थी. बस कुछ hi दुरी का फासला था.

वो अपना धड़कता दिल लिए आगे बढ़ी... आहिस्ता आहिस्ता... हौले हौले...

और...

*डिंग डाँग*

दरवाज़े की घंटी ने सब कुछ चौपट कर के रख दिया.

रागिनी : अह्ह्ह!! ी...

वीर (लुक्स अवे) ....

रागिनी : आज क्या हुआ वह सब... वो... और... वो बात... We'll टॉक अबाउट आईटी लेटर. गुड नाईट! वीर!!!

*छू~ ♡*

और बस गालो पर एक मीठी पप्पी देते हुए वो निकल गयी.

***

देरर रात हो चुकी थी. पर कोई था... जो इस वक़्त जाग रहा था.

वो उठी और वीर के कमरे की ऑर्डर बढ़ी. जो की खुला हुआ था. हलके हलके कदम रख वो दबे पाँव उसके नज़दीक आयी.

और उसके सोते हुए चेहरे को निहारने लगी. आँखों से ासु टपक टपक कर गिर रहे थे.

अपने कोमल हाथो से उसने वीर के के गाल को सहलाया. और आगे झुकी...

*पूछ~ ♡*

उसके गाल को चूमते हुए उसके बाल सहलाने लगी और बस जैसे उसके चेहरे में खो गयी वह कही.

फिर उन् थार ठहराते होंठो से बस दो hi शब्द निकले उसके,

"मेरा बच्चा~ !!!!"

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!!!


हाउस ऑफ़ थे किलर्स अर्च नज़दीक आता जा रहा है. बने रहिएगा! बाकी, लिखे ठोके का और रेवोस रखने का. 😉

धन्यवाद!!!
 
गिफ्स हैवे बीन फिक्स्ड. चेक आईटी आउट!!!
 
अपडेट 86 विल के टुनाइट.

I'm बिजी थी डेज. सॉर्टिंग आउट सम पेंडिंग वर्क.
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 86 ~ वीक पॉइंट

अब तक...

अपने कोमल हाथो से उसने वीर के के गाल को सहलाया. और आगे झुकी...

*पूछ~ ♡*

उसके गाल को चूमते हुए उसके बाल सहलाने लगी और बस जैसे उसके चेहरे में खो गयी वह कही.

फिर उन् थार ठहराते होंठो से बस दो hi शब्द निकले उसके,

"मेरा बच्चा~ !!!!"


अब आगे...

प्रांजल की ब्लॉकबस्टर मूवी देखे 3 दिन गुज़र चुके थे. पर सवाल था की वीर के वह से जाने के बाद प्रांजल के साथ क्या हुआ? वेल, एक hi चीज़ हुई. प्रांजल को घर से बाहर निकाल दिया गया था.

मनोरथ को जब वीडियो की साड़ी बातें पता चली तोह उन्हें इतना बड़ा झटका लगा था की वो एक पल भी प्रांजल की शकल नहीं देखना चाहते थे. प्रांजल ने अपने hi दादा जी को मंदिर में गिरा के उन्हें चोटिल किया. क्या भरोसा था की आगे वह किसी की जान hi न लेले?

पहले तोह ये भी सोचा गया था की उससे एक मेन्टल हॉस्पिटल में ले जाके उसकी जांच करवाई जाए. भला कौन अपने घरवालों के साथ ऐसा कर सकता है? पर बाद में यही निर्णय लिया गया की उससे घर से निकाला जाए.

न केवल उस से उसकी साड़ी प्रॉपर्टी छीन ली गयी थी बल्कि जो पैसे उससे बलहार के ज़रिये होटल बेचने पर मिले थे वो भी प्रांजल को बलहार को वापस लौटाने पड़े.

सब कुछ अपने दादा जी और पिता जी के कहने पर प्रांजल को मजबूरन अपना सब कुछ गवाना पड़ा. और कैसे नहीं देता? अगले hi दिन बलहार के आदमी मनोरथ के घर पर आके खड़े हो गए थे. गुंडों के डर से करुणेश और मनोरथ ने सारे के सारे पैसे प्रांजल से निकलवा के बलहार को वापस कर दिए.

और फिर उससे घर से ऐसे hi बाहर निकाल दिया गया था. मनोरथ ने उसके जाते समय भी उससे खरी खोटी सुनाई थी.

"जाने दो इससे ऐसे hi. जब दो वक़्त की रोटी खुद कमाएगा तब समझ आएगा की पैसा कितनी म्हणत से कमाया जाता है. निकल जा! निकल जा तू मेरी नज़रो के सामने से."

और बस, प्रांजल वह से खाली हाथ चल पड़ा.

सुमित्रा ये सब देखते hi पूरी तरह टूट चुकी थी. उसकी तबियत बिगड़ने लगी थी. आरोही और काव्य दोनों hi उससे संभालने में लगी हुई थी.

पर किसी ने भी दादा जी की बात का विरोध नहीं किया. क्युकी, वो जानते थे की प्रांजल माफ़ी के लायक नहीं था. और उससे घर में रखना एक सांप को पालने जैसा था जो कभी भी, किसी भी वक़्त अपने hi लोगो को दस् सकता था.

ात थे एन्ड, डिसिशन वास् ताकें.

प्रांजल का पत्ता उसके अपने hi घर से साफ़ हो गया. और वो इंसिडेंट समाप्त हो गया.

***

आज एक नया दिन था. सुबह सुबह वीर अपनी नींद से जब जाएगा तोह उससे अपने पेर्रो में कुछ महसूस हुआ.

'हम्म?'

जैसे hi उसकी आँखें खुली उसकी नज़र नीचे अपने पेर्रो की ऑर्डर गयी. देखा तोह पाया की... सुमन, उसके परर दबा रही थी.

'व्हाट थे...!?'

वीर : सुमन!???

सुमन : अहह! मालिक~ ♡ आप उठ गए?

वीर : हम्म~ पर तुम ये क्या कर रही हो?

सुमन (स्माइल्स) : आपकी सेवा...!

*डिंग*

[Suman's Favourability : 144]

सुमन की बात सुन्न, वीर धड़ल्ले से उठा और अपने परर पीछे खींच पालथी मार के बैठ गया. और साथ hi फवौराबिलिटी देख उससे हर्र बार की तरह फिरसे हैरानी hi हुई.

वीर : S-Suman...!?

सुमन : K-Kya हुआ मालिक? क्या आपको अच्छा नहीं लगा?

वीर : नहीं वो बात नहीं है. पर सुमन, तुम्हे ये सब करने की कोई ज़रुरत नहीं है.

सुमन (आगे आते हुए) : पर में करना चाहती हु. मुझे अच्छा लगता है मालिक. आपकी सेवा करना.

वीर : में जानता हु. लेकिन, मेरे परर दबाने की तुम्हे ज़रुरत नहीं है सुमन.

वीर की बात सुन्न सुमन एक उदासी भरा चेहरा बनायी तोह वीर ने उससे अपनी बाहो में खींच लिया.

वीर (स्माइल्स) : पगली~ सेवा तोह तुम कर hi रही हो. और परर दबाने की ज़रुरत नहीं है.

सुमन : तोह क्या आप मुझे अपनी दासी नहीं समझते?

वीर (स्माइल्स) : तुम मेरी दासी hi नहीं हो. उस से भी बढ़कर हो. हर्र एक भूमिका निभाती हो तुम. और तुम्हे अभी मेरे लिए बोहत से अहम् काम करने है.

सुमन : में तोह आपके लिए कुछ भी करने को तैयार हु.

वीर (स्माइल्स) : गुड! तोह ये सब करने की ज़रुरत नहीं. वैसे भी, तुम्हारे मालिक बोहत स्ट्रांग है. मेरे पेर्रो में दर्द नहीं होता. हाहाहा~

सुमन (मुँह फुलाते हुए) : P-Par में तोह आपको खुश करना चाहती थी.

वीर (स्माइल्स) : और भी तरीके है खुश करने के मुझे... यू क्नोव... हहै~

कहते हुए वीर ने सुमन को लिटाया और करीब 15 मं तक उससे पूरा निचोड़ के रख दिया. होंठो को बेरहमी से चूस, उसके बड़े बड़े थानों को ब्लाउज से नंगा कर वीर ने उन् तरबूज़ों को मसल मसल के लाल कर दिया.

वो इतनी जोरर से उसके निप्पल को मुँह में भर के चूसता की सुमन का पूरा शरीर ऊपर उठ जाता. अंत में सुमन के मुँह को छोड़ छोड़ कर वीर ने अपना पानी निकाला और सुमन ने ख़ुशी ख़ुशी सारा वीर्य गले के नीचे उतार लिया. ये तोह अब आदत में था उसकी.

वीर ने केवल अपने hi ऊपर ध्यान नहीं दिया. सुमन को भी उसने ऊँगली कर के उससे झराय और दोनों hi जब रिलैक्स हो गए तोह वीर वाशरूम में जा कर फ्रेश उप हुआ और नाहा के बाहर आया.

क्युकी, आज उससे अपने कॉलेज जाना था. काव्य को उसने वादा किया था की वो तीन दिन के बाद कॉलेज ज़रूर आएगा उस से मिलने. और आज इसलिए वो रेडी होक नीचे आया था.

रागिनी सुमन के संग डाइनिंग टेबल पर नाश्ता सर्वे करने में लगी हुई थी. और सोनाली आभा और वीर तीनो hi डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे.

हैरानी वाली बात ये थी की श्वेता भी खाने बनवाने में मदद करवा रही थी और वीर और बाकी सभी को नाश्ता सर्वे कर रही थी. भूमिका भी कमरे से निकल डाइनिंग टेबल पर आ के बैठ चुकी थी.

तीन दिन से यही रूटीन चल रहा था. श्वेता वीर के मैं पसंद का खाना बनाती और उससे अपने हाथो से सर्वे करती. पर वीर की तरफ से उससे कोई रिएक्शन न मिलता.

वो बस चुप चाप खाना खाता और बिना कुछ भूमिका और श्वेता से बोले निकल जाता. पर एक बात ये भी थी की, वीर को खाना बेहद पसंद आ रहा था.

श्वेता एक बोहत hi माहिर शेफ थी. होटल मैनेजमेंट ऐसे hi नहीं आता था उससे. वो क़ाबिल थी हर्र फील्ड में. खासकर कुकिंग में. उस से बेहतर वीर के पूरे घर में कोई भी खाना नहीं बना पाटा था. हाथो में जादू था उसके. शायद वीर की अब्सोलुटे शेफ से भी ुचि स्किल थी श्वेता के हाथो में.

और आज उसने वीर के लिए अपने हाथो से आलू के पराठे, चटनी के साथ और एक फॉरेन स्टाइल की सलाद बनायी हुई थी.

आभा और सोनाली अपनी उंगलिया चाट चाट कर खाने में लगी हुई थी. पर वीर चुप चाप अपना मुँह चला रहा था. लेकिन मैं में उसके ख़याल कुछ और hi थे.

'दमन! ी मस्ट एडमिट. थिस इस तू गुड...'

श्वेता नज़रे चुरा चुरा के वीर को देखती पर वीर जब उससे एक बार भी नहीं देखता तोह उसका मैं उदास हो उठता.

भूमिका का रवैय्या भी बदल चूका था. वो वीर से बात करने के लिए हर्र बार हिम्मत करती पर ग्लानि के चलते कुछ कह hi न पाती.

अभी श्वेता आभा को एक पराठा प्लेट में रख hi रही थी की उसकी साड़ी का पल्लू सरका और नीचे गिर गया. उसके मोठे मोठे गोर खरबूजे अधनंगे बाहर को आ गए.






उसने तोह इस बात पर ध्यान नहीं दिया पर जैसे hi वो ऊपर होने को हुई तोह उसकी नज़रे वीर की नज़रो से जा टकराई.

वीर ने अगले hi पल अपनी नज़रे फेरर ली पर श्वेता को कुछ पल के लिए कुछ समझ नहीं आया. तभी उसके बाद उसने झुक के अपनी हालत पर गौर किया और...

'अह्ह्ह्हह!!!' वो मैं में hi चीखी और अंदर ऐसी hi हालत में किचन की ऑर्डर भाग गयी.

उसकी सासें तेज़्ज़ हो चुकी थी. और वो अपने मैं में एक गहरे चिंतन में डूब गयी.

'V-Veer!?? K-Kya वो मेरी... क्या वो मेरी छाती देख रहा था? M-My ब्रेअस्ट्स!?'






उसका हाथ अनायास hi ये सब सोच अपने उस मैरून साड़ी के ब्लाउज में क़ैद एक दूध पर चला गया.

"हाह... हहहहह...."

'N-Nahi!!! वो तोह मुझे देखता तक नहीं. और मुझे उन् नज़रो से तोह कभी भी नहीं देखेगा. P-Par... मेने देखा था उससे अपनी नज़रे मेरे ऊपर से हटाते हुए... K-Kya वो इन्हे hi...!?'

एक बार फिर उस बारे में सोच उसका हाथ अपनी छुच्छी पर चला गया. वो अपनी उस छुच्छी को देखने लगी और हलके हाथ से उससे दबायी. और न चाहते हुए भी एक हलकी सी सिसकी उसके मुँह से निकल hi गयी.

"अह्ह्ह~"

'नहीं! ये सब में क्या सोचने लगी? W-Wo केवल मुझे ऐसे hi देख रहा होगा और उस वक़्त hi मेरा पल्लू नीचे गिर गया होगा. हाँ! यही हुआ होगा. और उसने फिर मेरी वो हालत देख जब मुझे देखा तोह वो थोड़ा ेम्बरसेद हो गया होगा. हाँ! फिर मेरे देखते hi उससे समझ आया होगा की क्या देख रहा था वह. और उसने नज़रे हटा ली. हाँ! डेफिनिटेली! यही हुआ होगा. ोथेरविसे वो ऐसा नहीं करेगा. और... और... इस उम्र में जवान लड़को में तोह जोश रहता hi है. जान के नहीं हुआ होगा उस से. हाँ!'

खुद से सोच वो एक बार फिर किचन के दरवाज़े के पास आके बर्तनो के रैक में बर्तन जमाने लगी. तोह कुछ सोचते हुए एक बार फिर उससे वीर को देखने का मैं हुआ.






जैसे hi उसने बाहर डाइनिंग टेबल पर नज़रे डाली तोह उससे फिरसे एक झटका लगा.

'अह्ह्ह!??'

वीर तोह नज़रे गड़ाए उससे hi देख रहा था. और पुनः जब उनकी आँखें एक दूसरे से टकराई तोह वीर ने एक और बार निगाहें फेरर ली.

श्वेता लम्बी लम्बी सासें लिए किचन में और अंदर घुस गयी और फौरन hi अपना पल्लू सही करने लगी.






'Y-Ye सब!!? वो मुझे hi देख रहा था. पर क्यों??? क्या... क्या फिरसे मेरी छाती को वह?? पर मुझे देख के क्या मिलेगा...!? इन् 3 दिनों में तोह उसने मुझे देखने तक का प्रयास नहीं किया. पर आज... I-Iska मतलब... मुझमे... मुझमे अब भी वो बात है!?'

सोचते सोचते अचानक hi उसके होंठो पर एक मुस्कान सज्ज गयी. कौन सी ऐसी औरत होगी जिससे ये जान के अच्छा न लगे की 40 के ऊपर की उम्र में भी जवान लड़के उसके हुस्न के क़ायल है!? श्वेता भी शामे hi थी. वीर के देखने पर जहा वो थोड़ी शर्मायी हुई थी तोह वही खुश भी थी. वीर ने जिधर भी देखा हो उससे, काम से काम उससे देखा तोह. इस बात की hi ख़ुशी थी उससे.

'T-Toh क्या वीर को बड़ी छाती पसंद है? फुफु~ वैसे... वो अब बड़ा हो रहा है. M-Mera बच्चा!!! तोह... इस उम्र में कण्ट्रोल करना मुश्किल होता hi होगा. है न?'

श्वेता अपने hi मैं के खयालातों में डूब गयी. पर इधर वीर खुद से hi मैं में लड़ रहा था.

'व्हाट थे हेलल!??? व्हाई दीद ी...!? उघ!!! व्हाटएवर!!! मुझे निकलना चाहिए!!!'

वीर : निकल रहा हु भाभी!!!

रागिनी : अरे? पर पराठे तोह खा के जाओ वीर.

वीर : खा तोह लिए 2.

रागिनी : अरे बाबा 2 में क्या होगा? वैसे hi टिफ़िन नहीं ले जा रहे हो. पता नहीं कब आओगे. हैवी ब्रेकफास्ट कर के जाओ वीर. क्या पराठे अच्छे नहीं बने क्या? आज तै जी ने बनाया है सब.

रागिनी का प्रश्न सुन्न वीर वही ृक्क गया. उत्तर देने जैसे hi वो मुदा तोह उसने देखा की किचन के दरवाज़े की देहलीज़ पर hi कड़ी श्वेता कान लगा के उसके उत्तर sunn'ne का इंतज़ार कर रही थी.

वीर : W-Wo...

रागिनी : हम्म?

वीर : नहीं! ऐसा नहीं है. पराठे अच्छे बने है.

और ये सुनते hi श्वेता का चेहरा अगले hi पल खिलखिला उठा. आँखें नम्म हो चली. जैसे उसके कान तरस गए थे वीर के मुँह से अपनी तारीफ sunn'ne के लिए. और आज उससे जिसकी तलाश थी वो उससे मिल गया.

रागिनी : तोह फिर?

वीर : में आके खा लूंगा न भाभी! अभी इतनी ज़्यादा भूक नहीं है.

रागिनी : अच्छा बाबा ठीक है. जाओ!

वीर : ऑलराइट!!!

वो जाने लगा पर तभी...

रागिनी : हेय्य!

वीर : हम्म?

रागिनी : तुम कुछ भूल नहीं रहे वीर?

वीर : हम्म? वॉलेट है, ी... उम्... रुमाल भी है... व्हाट ेल्स?

रागिनी धीरे धीरे उसके नज़दीक आयी और उससे हॉल के बाहर लेके आयी. और फिर...

*छू~ ♡*

वीर : !!!??

रागिनी ने वीर के गाल पर एक प्यार भरा चुम्बन दे दिया.

रागिनी (ब्लशेस) : मुझे हर्र बार याद दिलाना पड़ेगा क्या वीर?

वीर : अहह! N-No... ी वास् जस्ट... एहम...

रागिनी (स्माइल्स) : नेक्स्ट टाइम से... याद रखना...

I'll फॉरगिव यू थिस टाइम. ( ◜‿◝ )♡

और वीर बस हाँ में गर्दन हिलाते हुए वह से निकल पड़ा.

***

आज कॉलेज में शायद कुछ ख़ास था. इसके अलावा और क्या रीज़न हो सकता था काव्य के पास वीर को बुलाने के लिए?

वीर यहाँ दो hi रीज़न से आया था. पहला तोह ऑब्वियस्ली काव्य का प्रॉमिस पूरा करने के लिए. और दूसरा...!?

दूसरा उसका थर्ड सेमेस्टर समाप्त हो चूका था. यानी की बृजेश के द्वारा जो फीस पाय की गयी थी वो केवल वीर के 3रद सेमेस्टर तक के लिए hi थी. और अब 4तह सेम के लिए वीर अपनी फी पाय करने आया था.

उसके पास अब पैसे थे. काफी पैसे. तोह निधि ma'am को दिया हुआ वादा वो पूरा करने hi वाला था.

इधर कॉलेज में काव्य अपनी दोस्त के साथ hi पार्किंग एरिया में वेट कर रही थी. दोस्त कोई और नहीं वही थी. कृतिका.

कृतिका : ोये तेरे भैया कहा रह गए? आ भी रहे है या नहीं?

काव्य : कैसे नहीं आएँगे? हे प्रॉमिस्ड में!!! हे विल के!!! अह्हह्हंन्न~ वो देखो!! आ गए... हँ!?? W-Whatttt??? वो... वो कार...!??

कृतिका : ओह्ह्ह माय गोड्ढ!!!! (✿☉。☉) व्हाट कार इस तहत??? हँ??? वेट!!! फ़क तहत कार... ओह मीय गॉडडडड!!!! H-He... तुम्हारे भैया!?? व्हाट थे हेलल??? हे गोत मोरे हैंडसम!!!?

दोनों hi लड़किया अपने मुँह फाड़े वीर की ऑर्डर देख रही थी. और देखे भी क्यों न? वो अकेली नहीं थी. कैंपस में मौजूद हर्र लड़के लड़किया वीर की तरफ hi देख रही थी.

वीर के साथ एक और जान था. कारन!!! जो अपनी मेरसेदेज़ का एक लिमिटेड एडिशन मॉडल लाया हुआ था.

वीर और वो दोनों hi इतने डैशिंग लग रहे थे की लड़किया उन्हें hi देखे जा रही थी. खासकर वीर को. जहा उनकी आँखों में प्यार था तोह वही लौंडे लपाड़े लोग सभी जलन से उन्हें देख रहे थे.

कारन : में फ्री था इसका मतलब ये नहीं की में ऐसे कही भी जाऊंगा वीर. C'mon! मुझे और भी काम होते है. अब बताओ हम यहाँ किस लिए आये है?

वीर : वेल! मेरी छोटी बहिन ने बुलाया है. ी कैन डेफिनिटेली से की ये कोई लड़कियों वाला कार्यक्रम है. तोह अब अकेले कौन बोर होये? साथ में एक कंपनी का होना ज़रूरी है न!?

कारन : थे फुककककक...!??? (⑉⊙ȏ⊙)

वीर : लुक! तेरे अरे सो मान्य गर्ल्स... अपनी आँखें hi सेक लो. ः~

कारन : व्हाट थे...!? H-Hey... वैसे... ओह्ह्ह~ दमन! एहम... F-Fine... थोड़ी बोहत वैसे अच्छी है यहाँ पर...

"भैयाआआआआ~"

काव्य उन्हें देख वही से दौड़ते हुए आयी और आते hi वो वीर की बाहो में कूद गयी.

काव्य : भैयाआआआ~

वीर (स्माइल्स) : अब तोह खुश न? आ गया में.

काव्य (नॉड्स) : हम्म्म~ हम्म~

(つ≧▽≦)つ

कृतिका (ब्लशेस) : Oh-Ohhh~ A-Aap...

वीर : हम्म? ओह येह! कृतिका राइट?

कृतिका : अह्ह्ह! यस!! यस!!! (灬º‿º灬)

वीर : ग्लैड तो सी यू~

कृतिका : अह्ह्ह्णण~ (ºᴗº✿) S-Same हेरे!!!

वीर ने कारन को फिर कृतिका से इंट्रोडस कराया और फिर सभी ऑडिटोरियम के लिए जाने लगे.

वीर : तोह तुमने डांस कम्पटीशन में पार्टिसिपेट किया है हाँ? डांस आता भी है मेरी काव्य से? हाँ? ः~

काव्य : व्हाट दो यू मैं डांस आता है? अभी देखना आप. केसा डांस दिखाती हु. हम्फ~

वीर : आरोही दी कही दिखाई नहीं दे रही. वेयर इस शी?

काव्य : उनका चैस का कम्पटीशन है. वो उसी में गयी है. वो प्रे मैचेस खेल रही है ताकि प्रेपर कर सके.

वीर : ओह्ह ी सी! तुम्हारा डांस देखते है थें we'll जो सी हेर.

काव्य : ोकायययय (◕ᴗ◕✿)

ऑडिटोरियम पॅहुचते hi अंदर काफी चहल पहल थी. पूरे हॉल में धेरर साड़ी सीट्स लगी हुई थी. सामने जजस बैठे हुए थे और स्टेज पर पर्फॉर्मन्सेस चल रही थी.

वीर और कारन एक जगह जाके बैठ गए. पूरे समय लड़किया वीर को hi ताड़ने में लगी हुई थी. पर वीर ने एक लड़की को भी घास नहीं डाली. और कहा वो पहले इन् hi लड़कियों को देख शर्मा जाता था.

जब करा, सोनिआ जैसी ब्यूटी सामने हो, तोह बाकी सब एवरेज hi लगती थी अब उससे.

पहले वो कहा उस प्रज्ञा नाम की लड़की को देख पिट गया था. और अब? आज वीर को उस किस्से को याद कर खुद के ऊपर hi हस्सी आ रही थी.

अब चाहे इससे इत्तेफ़ाक़ कहे या किस्मत पर प्रज्ञा के बारे में सोचते hi वीर की नज़र साइड की तरफ गयी और...

वह प्रज्ञा बैठी हुई थी. और... वो उससे hi देख रही थी. नज़रे मिलते hi वो शर्मायी और अपनी सहेलियों से बाते करने में लग गयी.

काव्य और कृतिका का जब डांस आया तोह काव्य के डांस ने वाक़ई वीर को सरप्राइज कर दिया.

उससे नहीं पता था ये भोली सी चुलबुली दिखने वाली लड़की डांस करने में इतनी माहिर थी.

डांस के रिजल्ट्स आज नहीं कल डिक्लेअर किये जाने वाले थे तोह काव्य कृतिका के संग वीर के साथ hi ऑडिटोरियम से निकल आयी.

काव्य : अब बोलो? केसा था मेरा डांस? हम्म?

वीर : वाक़ई! ी वास् सुरप्रीसेड!!?

काव्य : ेहेहेहे~ बोलै था न!? (◕ᴗ◕✿)

वीर ने एक बात और नोटिस करि की कृतिका उसको देख के बेहद शर्मा रही थी और वो ज़्यादातर बातें काव्य और कारन से hi कर रही थी.

खर्र! जब बारी आयी आरोही के चैस कम्पटीशन को देखने की तोह सभी चैस कम्पटीशन की क्लास की ऑर्डर चल दिए.

अलग अलग खाली क्लासेज में hi इन्हे कराया जा रहा था. वीर जैसे hi एंटर हुआ, आरोही एकदम फोकस्ड थी और उसके ॉपपोनेंट में कोई लड़का बैठा हुआ था.

'लुक ात हेर. She's ऑलवेज थे वित्तय ओने.'

जैसी पर्सनालिटी वैसे शौक. जहा नटखट काव्य को डांस पसंद था, तोह वही आरोही शतरंज में अपनी क़ाबिलियत दिखा रही थी.

और वीर को देखते hi उसके होंठो पर स्माइल आ गयी.

पर शतरंज का गेम लम्बा चलता था. वीर वाशरूम के बहाने बाहर निकला, थोड़ी हवा खाने के लिए और उसके बाहर निकलते hi...

वो पल जैसे धीमा पद गया, जब उसकी नज़रे कॉरिडोर से आते उस शख्स पर पड़ी.

हलके पीले रंग की साड़ी में वो आ रही थी. ज़ुल्फ़े हर्र क़दम पर लहराती, उसकी उस अदा पर hi न जाने कितने कायल हो जाए.






न चाहते हुए भी, वीर जैसे उससे देखते hi कही खो गया.

"M-Ma'am!!!"

अपनी निधि ma'am को देख हर्र बार यही अनुभूति महसूस होती थी उससे.

आते जाते स्टूडेंट्स निधि को 'गुड डे' विश कर रहे थे और वो भी मुस्कुरा के उन्हें 'शामे तो यू' या 'थैंक यू' कह के विश करती जा रही थी.

पर चलते चलते hi...

उसके क़दम अचानक hi थम गए जब उसने अपने सामने कुछ hi दूरी पर खड़े शख्स को देखा.

वो मुस्कराहट उसके होंठो से पालक झपकते hi कही छूमंतर हो गयी. चिंतन और हैरानी के मारे उसकी बॉहे सिकुड़ उठी.

वो तुरंत हड़बड़ाते हुए पलटी और हाथो में ली हुई एक लॉगबुक उसने अपने सीने से कस के लगा ली. और बस, तेज़्ज़ क़दमों के साथ वो जहा से आयी थी वही जाने लगी.

ये हरकत देखते hi वीर को अपने दिल में एक अत्यंत hi अजीब सी पीड़ा महसूस हुई. क्या मतलब था इसका? क्या उसकी निधि ma'am इस क़दर उस से नाराज़ थी या गुस्सा थी की अब अपनी राह भी बदलने को आ गयी? केवल इसलिए की वीर उनकी राह पर खड़ा था? केवल इसलिए अपना रुख बदल लिया? क्या इतना नफरत करती थी वह उस से जो अब बात भी नहीं करती थी?

'व्हाट दीद ी दो रॉंग Ma'am!?'

वो भी रुका नहीं. आगे बढ़ा. निधि के पीछे पीछे वो गया. उसकी चाल भी तेज़्ज़ थी.

"वेइतततत!!!!" वीर ने पुकारा. पर निधि तेज़्ज़ सासें लिए और रफ़्तार में चलने लगी.

"माआम!!!!!" वीर के चिल्लाने का भी कोई असर नहीं हो रहा था.

"ी क्नोव यू अरे रनिंग अवे...!!!" वो निधि को फॉलो करता रहा.

कॉरिडोर की इतनी भीड़ में उनके ऊपर किसी ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया. और निधि बस बिना कुछ सुने अपने केबिन की ऑर्डर भागने लगी.

वो झटपट अपने केबिन के अंदर आयी और अभी दूर अंदर से बंद करने hi वाली थी की वीर ने आके दूर पकड़ लिया.

तेज़्ज़ तेज़्ज़ लम्बी सासें लिए निधि का सीना ज़र्रों से ऊपर नीचे हो रहा था. पसीने से बाल भी उसके चेहरे पर चिपके हुए थे.

दोनों बस एक दूसरे को hi देख रहे थे.

और वीर निधि के हाथ से दरवाज़े को चुर्रा के अंदर आ गया. और अंदर से hi उसने फिर दूर बंद कर दिया.

अब भी निधि शांत थी. वो पलट के कड़ी हो गयी. जैसे मानो कहना चाह रही हो की मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी. चले जाओ यहाँ से.

उसकी मखमली दूध जैसी गोरी पीठ ब्लाउज में क़ैद वीर के समक्ष थी.

वीर : क्यों कर रही हो आप ये सब? कब तक चलता रहेगा ऐसा ma'am?

पर निधि अब भी कुछ न बोली. अपनी सासें दुरुस्त करने में लगी हुई थी.

वीर : I'm आस्किंग यू समथिंग Ma'am!!! जवाब दीजिये!!! व्हाई अरे यू दोंग थिस? दो यू हेट में तहत मच?

निधि : जो...

वीर : !!??

निधि : जो अवे...

उसने एक लड़खड़ाती हुई आवाज़ में कहा.

वीर : इस थिस योर आंसर??

निधि : M-Mujhe काम है वीर. ी हैवे तो वर्क नाउ. फिर कभी मिलना... G-Go नाउ.

वीर : स्टाफ रूम की तरफ जाते हुए अचानक hi आपको काम याद आ गया? मुझे देखते hi आपके चेहरे से मुस्कान अचानक hi गायब हो गयी!? मेरे फॉलो करते hi आप अपने केबिन के अंदर जाने लगी? और अब काम का बहाना कर मुझे भगाना चाह रही हो? क्या आपको में इतना बेवक़ूफ़ लगता हु ma'am!?

निधि : ...

वीर : कह क्यों नहीं देती आप अपने मैं की बात. क्या चाहती है आप?

निधि (फ्रोंस) : M-Mujhe नहीं पता.

वीर : पर मुझे पता है.

वीर का जवाब सुन्न, निधि हैरत में मुद के उससे देखने लगी. आहिस्ता आहिस्ता वीर भी उसके नज़दीक आया. निधि उसके आते hi पीछे को जाने लगी जब तक की वह खुद अपनी टेबल से न भीड़ गयी. मजबूरन उससे वही रुकना पड़ा जब तक की वीर उसके एकदम नज़दीक आके खड़ा नहीं हो गया.

अपने चेहरे को ऊपर कर वो वीर को देख रही थी. और वीर उससे.

वीर : यू लिखे में!!!

एक और झटका...

निधि (झेपते हुए) : Wh-Whaaattt??

वीर : यू लिखे में. राइट?

निधि (गुस्से में) : Wh-What नॉनसेंस??? तुम्हे पता भी है वीर तुम क्या बोल रहे हो??

वीर : यस! ी क्नोव एवरीथिंग! यू लिखे में. It's थे ट्रुथ!!!

निधि : Y-YOUUU!!! रब्बिश!!! T-Tummm... पागल हो वीर...

वीर : I'm जस्ट स्टाटिंग थे ट्रुथ.

निधि (अपनी अंगूठी दिखाते हुए) : I'm ा मैरिड वुमन वीर!!! हाउ डरे यू...!?

निधि अपनी अंगूठी दिखाते हुए जब बोली तोह वीर ने जोरर से उसका हाथ थाम लिया,

"अह्ह्ह्ह...."

उसकी पकड़ इतनी मज़बूत थी की निधि की हलकी दर्द भी कराह मुँह से निकल गयी.

वीर : हम्फ~ व्हाट नॉनसेंस? थिस रिंग? आपने तोह ये पहले hi उतार दी थी न? यू नेवर करेड़ अबाउट थिस वॉर्टलेस रिंग. यू जस्ट स्टार्टेड वेअरिंग थिस तो कीप डिस्टेंस फ्रॉम में. राइट!? होली वाले दिन hi मेने नोटिस कर ली थी ये रिंग आपके हाथ में. जिस तरह से आप मुझसे दूरिया बना रही हो, बस उसमे hi ये अंगूठी आपकी मदद कर रही है. ोथेरविसे, थिस रिंग मीन्स नथिंग तो यू. ऍम ी राइट और रॉंग?

निधि : Y-YOUUU!!! यू अरे रॉंग!!!! I-IT'S नॉट लिखे थाटत....

वीर : कितना झूठ बोलोगी आप? तेल्ल में क्लेअर्ल्य. यू दो केयर फॉर में. राइट?

निधि : नूवो! ी don't... जस्ट जो अवे... में एक शादी शुदा औरत हु और तुम्हे कोई हक़ नहीं है वीर... मेरी पर्सनल लाइफ में बीच में आने का...

वीर : थें व्हाई दीद यू चामे ईंटो माय पर्सनल लाइफ?

निधि (झेपते हुए) : H-Huhhhh????

वीर : हॉस्पिटल में... व्हेन ी वास् एडमिट... तब आप hi तोह मेरी पर्सनल लाइफ में आयी थी न? बीच में? मेरे घर पर जाके झगड़ा करना, मुझे अपने घर पर रखना, खाना पीना, कपडे लट्टे, रहना घूमना... क्यों किया सब? मेरे लिए? हाँ? बोलिये!!! क्या इससे पर्सनल लाइफ में आना नहीं कहते?

निधि : ी... N-Nooo... वो सिर्फ... सिर्फ एक टीचर होने का फ़र्ज़ निभाया था मेने. That's आईटी... N-Nothing ेल्स...

वीर : ओह्ह रियली? व्हिच टीचर ब्रिंग्स अंडरवियर एंड क्लोथ्स फॉर हेर स्टूडेंट?

निधि : !!???

वीर : जवाब दीजिये? अपने घर में कौन सी टीचर रखती है किसी मेल स्टूडेंट को? शॉपिंग पर जाना, साथ में खाना बनाना, साथ में घूमने जाना... कौन सा टीचर करता है? हाँ?

निधि : न्यूऊऊओ!!!!! G-Go अवे!!!

और एक बार फिर वो मुद के कड़ी हो गयी.

वीर : यू दो केयर...! आंसर में!!!

निधि : न्यू!!! ी don't...

वीर : यू केयर फॉर में! बस कह दीजिये...

निधि (जोरर से) : ी फूकिंग DON'T सारी!!!!!

*साइलेंस*

*हाह* *हाह*

एक गहरा सन्नाटा छ गया पूरे केबिन में. केवल निधि की सासें लेने की आवाज़ hi आ रही थी.

फिर अचानक hi केबिन के दरवाज़े खुलने की आवाज़ आयी. वीर शायद जा रहा था.

निधि पलटना तोह चाहती थी पर दिल पर पत्थर रख वो नहीं पलटी.

और फिर वीर के कुछ चाँद शब्द उसके कानो में पड़े जिससे सुन्न उसका पूरा शरीर काँप उठा.

"िफ़ ओने डे... ी दिए... विल यू केयर???"

निधि : V-Ve... हँ!!???

वो अचानक hi पलटी पर...

*थुड़*

तब तक दूर बंद हो चूका था. वीर, जा चूका था. निधि अपनी कुर्सी पर गिरते हुए आँखों से आसुओ की मोती मोती बूंदे बहाने लगी. और हर्र बार की तरह hi, खुद को कॉसने लगी.

***

केबिन से बाहर आते hi वीर टेरेस की ऑर्डर जा पहुचा. मूड टोटली ऑफ हो चूका था उसका. अब उसका आरोही का मैच देखने का भी मैं नहीं कर रहा था.

[It didn't went well. Well, Nidhi jii se yahi expectation thi. Don't worry master! She will understand in the future.]

'येह!!! पारी...'

[Hmm?]

'ी गेट आईटी नाउ...!'

[!!??]

वीर जैसे इस वक़्त किसी और hi दुनिया में खोया हुआ था.

'तो एन्ड थे ईविल... सोमेतिमेस यू हैवे तो बिकम ईविल योरसेल्फ...'

[...]

और सोचते हुए वो वापस नीचे आ गया जब...

*चाताआयककककक*

'हँ!???'

उसके बूम पे किसी ने जोरर से थप्पड़ मारा.

पलट के देखा तोह... काव्य थी.

काव्य (ब्लशेस) : उम्... वो... यू क्नोव... थिस इस माय रिवेंज! ेहेहेहे~ A-Aapne भी मुझे होली के दिन मारा था न i-isliye... E-Ehhh!?? B-Bhaiyaa? W-Why अरे यू लुकिंग ात में लिखे तहत? H-Huhhhh? Wh-What?

वीर : :ेविलग्रीन:

"यू लिटिल ट्वेरप....!!!!!!"

"आआआआआ~ भैया न्यूऊओ~"

बेचारी काव्य अपनी क्लास की ऑर्डर भागी और वीर उसका पीछा करता रहा. जैसे hi वो क्लास में घुसी, क्लास एकदम खाली थी. बेचारी काव्य फस्स चुकी थी.

वो मासूम चेहरा बनाये वीर को अपनी पप्पी आईज दिखाते हुए विनती करने लगी.

पर वीर का चेहरा इस वक़्त डेविल से काम नहीं था. अगले hi पल वीर ने उससे कमर से पकड़ के अपने कंधो में hi उठा लिया,

"Aaaaaaaaaaaaa~"

और बेंच पर बैठते हुए, वीर ने काव्य को अपनी गॉड में लिटाया.

वीर : मुवाहहहहह~

काव्य : एहहहह?? N-Noooo! B-Bhaiyaaa!!

*Chataaaaaaaaaaaakkkkkkkkk*

"आआआह्ह्ह्हह्हह्ह्णणणण~"

*चाताआआअआककककककककक*

"Eeeeeeeekkkkkkkkkk~"

*Chataaaaaaaaakkkkkkkkkkk*

"ममममममममपपपपपहहहह~"

*Chataaaaaaaaakkkkkkkkkk*

"नंनंगगगगगगगगठ्हहहहह~"

उसके बाद, काव्य क्लास में काव्य की अजीब सी चीखें उन् बंद दीवारों में फेल गयी.

'हम्म्म!? She's गोटें बिग...!'

*स्क्वैश* *स्क्वैश*

वीर के हाथ उसकी नरम गांड के गालो को मसलने में लगे हुए थे. और इधर बेचारी काव्य का हाल बेहाल था. चारो गाल लाल थे उसके. चेहरे के भी और... एहम...!!

सासें तेज़्ज़ और चेहरे पर लाली...

काव्य (ब्लशेस) : *हाह* ाहहननन~ *हाह* B-Bhaiya... *हाह* ुग्घूऊ.... *स्निफ्फ* आप बोहत गंदे हो... *स्निफ्फ*

वीर : अहिंदा से अपने भैया को बूम में मारने से पहले 100 बार सोचना. रेमेम्बेर!!! ओनली ी कैन बुली यू. No ओने ेल्स!!!

वीर की आखिरी बात सुनते hi काव्य का पूरा चेहरा शर्म से लाल हो गया और वो बेचारी लेते लेते अपने भैया के पेर्रो में hi अपना मुँह छुपाने लगी.

***

कुछ देरर बाद...

वीर उसी क्लास में बैठा हुआ था. सुबह से दिन भर की भाग दौड़ से वो बोर भी हो गया था. तोह क्लास में मस्त दुक्ट्स की हवा में उससे कब झपकी लग गयी उससे पता hi न चला.

*क्लिक*

दरवाज़ा खुला और कोई अंदर आया. वीर तोह सोया हुआ था. क्लास में और कोई नहीं था.

कोई शख्स उसके बेहद नज़दीक आया और उसके ऊपर बैठ उसके चेहरे को निहारने लगा.

"लुक! अब बैठने में भी दर्द हो रहा है. आल बिकॉज़ ऑफ़ यू..."

जी हाँ! ये काव्य hi थी. अच्छी खासी स्पैकिंग के बाद वो हिम्मत जूता के एक बार फिर वीर के पास आयी थी.

"तेल्ल में! क्या मज़ा आता है आपको अपनी इतनी क्यूट सी छोटी बहिन को तंग कर के हम्म?"

अपने दोनों हाथो से वो वीर के चेहरे को थामे हुए थी.

"बोहत गंदे हो आप... यू क्नोव? B-But... बूत ी स्टिल लव यू..."

उसके होंठ हलके से खुले और वो वीर के चेहरे की तरफ झुकने लगी.

"K-Kritika ने कहा था... आईटी फीलस वार्म... एंड सॉफ्ट... ( ˘ ³˘) " वो और झुकती गयी और अंत में...

*पूछ*

उसके प्यारे कोमल गुलाबी होंठ वीर के होंठो से जाके मिल गए.

"अह्ह्ह्हहननन~ ♡"

झटके से वो पीछे हुई. एक नया अध्भुत एहसास प्राप्त हुआ था आज उससे.

"आईटी... आईटी वास् सू गुड़!!! लुक!!! ी... ी टूक योर फर्स्ट किश भैया... हहै~ ी क्नोव आपकी कोई गफ hi नहीं है. थिस मस्ट बे योर फर्स्ट टाइम... हहै~ यू शुड चेरिश आईटी. Okay? I'll गिव यू लॉट्स एंड लॉट्स लेटर...."

"हम्म्म!??" इधर वीर जैसे hi उठने के लिए हुआ तोह बेचारी काव्य डर के मारे hi उठाते हुए फुदकते फुदकते बाहर निकल गयी.

***

मुंबई...

xxxxxxxxxxxx कंपनी...

डेटाइम ~ 3:14 पं

एक बड़ी सी कॉर्पोरेट की बिल्डिंग में एम्प्लाइज अपने अपने कामो में लगे हुए थे.

और इसी बिल्डिंग के लेडीज वाशरूम में, एक वाशरूम से अजीब अजीब आवाज़ें आ रही थी.

"क्लीन आईटी बीचेस.... यू व्होर्स... फूकिंग लीक आईटी.... एसससससस~ सूचक आईटी.... रंडियोओओओ सूचक माय ासशोले... लीक माय पुसी... तुम दोनों रंडियो को अपनी जगह मालुम होनी चाहिए... फूकिंग क्लीन माय अस्स... !!!! तस्स्स्स... आह्ह्ह्णण!!! That's राइट...!!! थिस इस वेयर यू बिलोंग...!!! ऑफिस हॉर्स में कितना पसीना जमा होता है यू क्नोव न? फूकिंग लीक आईटी... क्लीन आईटी नाउ विथ योर सलोत्तय टाँगेस....!!! अहहह्ण एस्सस"

एक बेहद hi ख़ूबसूरत औरत, के नीचे दो अन्य लड़किया उसकी छूट और गांड के छेड़ को एक साथ चाटने में लगी हुई थी.






ये जैसे उनके लिए रोज़ का काम था. कोई भी किसी भी बात का विरोध नहीं कर रहा था.

'हम्फ~ लुक ात थम बीचेस!!! लिकिंग माय डर्टी अस्स एंड पुसी. इनके वीक पॉइंट्स मेरे पास है... थे can't दो एनीथिंग ात आल!!!'

"क्लीन माय होल्स बीचेस!!!!!"

"ाहहननन यस ma'am!!!"

"How's थे स्मेल? यू स्मेल आईटी? बताओ?"

"It's... It's गुड ma'am!!!"

"हाउ डस माय होल्स टेस्ट्स???"

"It's डिलीशियस ma'am!!! It's डिलीशियस!!!"

"That's राइट बीचेस!!! क्लीन माय होल्स!!! ताकि में साफ़ सुथरी होक अपने केबिन में जा सकू."

"Y-Yesss ma'am!"

*स्लुर्प* *स्लुर्प* *किश* *लीक*

"गुड जॉब स्लोट्स. जाओ अपने अपने क्यूबिकल में. फ़क ऑफ!!!"

"Y-Yesss!!!"

और वो दोनों hi लड़किया वह से अपनी हालत सही कर निकल गयी.

"व्हाट ा बोरिंग डे!!! हम्फ~ बूत आज इन् दो रंडियो ने अच्छी सर्विस दी!! येह! में अरे ऑलवेज ट्रैश!!!"

वो उठी और खुद की हालत सही कर बाहर आयी.

इधर बाहर...

एक क्यूबिकल में बैठे दो लड़किया आपस में बात कर रही थी.

"W-Whaaaattt? क्या ऐसा हो जाता है?"

"ऑफ़ कोर्स! क्यों नहीं होएगा? इतनी बड़ी कंपनी है यार हमारी."

ये दो लड़किया कोई और नहीं बल्कि, श्रेया और उसकी hi ऑफिस की कलेग आयुषी थी.

श्रेया : तोह... कंपनी पैसे ऑफर करती है. मेडिकल नीड में राइट?

आयुषी : बिलकुल!!! अब मेरा hi केस लेलो. मेरी इंगेजमेंट हो गयी थी. तोह बर्फ का जब एक्सीडेंट हुआ था अभी रिसेंटली तोह कंपनी ने मुझे मेडिकल फी दी थी थोड़ी.

श्रेया : ओह्ह्ह! That's सो गुड... हे मुझे भी पैसो की ज़रुरत है.

आयुषी : ओह्ह! दीदी के लिए क्या?

श्रेया : उम्... हाँ! उनके hi लिए. क्या में ऐसा कर सकती हु?

आयुषी : व्हाट?

श्रेया : मेरी माँ को हार्ट अटैक आया था रीसेंट में. तोह में एक फेक तरीके से यू क्नोव... उन्हें यदि फॅमिली डॉक्टर के यहाँ एडमिट करवा के...!?

आयुषी : ओह्ह्ह्ह!!! बूत रिस्की नहीं होगा?

श्रेया : वो सब में देख लुंगी... तुम बताओ न, फिर मिल जाएगा न पैसा?

आयुषी : उम्... येह ी गेस...!? ः!?

श्रेया (स्माइल्स) : थैंक्स!!! M-Mein तरय करुँगी... 2-3 लाख भी मिलेंगे तोह चलेगा.

श्रेया (मैं में) : िफ़ ी कैन पुल्ल 4 तो 5 लक्ष फ्रॉम हेरे... तोह दी ने भी 7 लाख जमा कर लिए है. फड़ भी तुड़वा ली थी उन्होंने एक. थें टोटल 12-13 हो hi जाएगा. बूत 50 लाख... बाद की बाद में देखि जाएगी... कही न कही से... हो जाएगा... I'll बोर्रोव सम फ्रॉम फ्रेंड्स... टुमारो थें!!!!

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आज के लिए इतना hi गाइस!


थिस अपडेट कंसिस्ट्स अराउंड 5.5 - 5.6क वर्ड्स. लाइक्स ठोकने का और रेवोस रखने का. धन्यवाद!!! ✨
 
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