Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 12 - SexBaba
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Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

मेगा अपडेट

[Yes! One more! I think I'm getting too kind. Right?]

अपडेट - 75 ~ I'm किंग फॉर यू!!!

[Contains gore related scenes. Proceed accordingly!]

अब तक...

और रास्ता ऐसा था की चाह के भी वीर और कारन उसकी गाडी को ओवरटेक कर उससे रोक नहीं सकते थे.

पर वीर के होंठो पर मुस्कान थी. वो कॉंफिडेंट था.

कितना भी क्यों न भाग ले स्लोगन, आज उसका अंत निश्चित था. वो इसलिए क्युकी...

ऊपर हलके घने बदलो में जो चमक कर अपनी रौशनी बिखेर रहा था. वो था...

फुल मून!!!


अब आगे...

"नाहीई!!! नाहीईई!!! M-Mein... में यहाँ नहीं मर्डर सकता. हु कैन किल में? में स्लोगन हु. स्लोगन!!!! मुझे जल्द से जल्द उधर पहुचना होगा."

स्लोगन के हाथ इस वक़्त भय के मारे काँप रहे थे. आज क्या दिन आ गया था उसका. पीछे बैठे उसके दो चेले क्रॉस फायरिंग कर के उससे बचाने का प्रयास तोह ज़रूर कर रहे थे. पर उनकी गन्स की मैगज़ीन में बुलेट्स लिमिटेड hi थी. इसलिए हर्र बुलेट वो सोच समझ के hi फायर कर रहे थे. एक भी बुलेट बेकार न जानी पाए. वर्ण इसका नतीजा बोहत hi घातक हो सकता था उनके लिए.

रास्ता इधर थोड़ा सकरा था, और स्लोगन की कार के पीछे करीब करीब 20 से 25 गाड़िया लगी हुई थी.

*बायंगगगग*

*बायंगगग*

इसी चेस में बीच बीच में दोनों तरफ से फायरिंग चालु थी. बस दिक्कत ये थी, की कारन की hi कार की तरह स्लोगन की कार भी स्टर्डी थी. वर्ण अब तक तोह धमाका हो जाना था उसमे. ऑफ़ कोर्स, कार में डैमेज हो रहा था, पर उस हद्द तक नहीं की स्लोगन को रोका जा सके. नॉट तो मेंशन की स्लोगन के साथी भी फायरिंग कर रहे थे. इसलिए, कार को एकदम पास ले जाना खतरनाक था और जानलेवा भी.

वही, स्टीव की ये बदक़िस्मती थी जो उससे स्नाइपर का शिकार होना पड़ा. एक स्नाइपर की फायरिंग रेंज अथवा फायरिंग पावर, दोनों hi नार्मल गन्स से ज़्यादा होती है. यही कारण था की कार स्टर्डी होने के बावजूद, स्टीव के लिए वो स्नाइपर की बुलेट नहीं रोक पायी. और नतीजा!??

उसकी दर्दनाक मौत!!!

उसका सर्र किसी तरबूज के माफ़िक़ फटा था. हर्र जगह लाल लाल खून बिखर गया था अंदर कार में.

यहाँ तक की स्लोगन के खुद के चेहरे और उसके कपड़ो में स्टीव का खून अभी भी लगा हुआ था. उसके पास ज़रा भी समय नहीं था की वो ड्राइविंग सीट से हट के पैसेंजर सीट पर आ सके.

हे वास् गेटिंग चासेड!!!






आज ये दिन देखना पद रहा था उससे.

'शांत संजीव!!! शांत!!! अभी तेरा पूरा लक्ष्य बाकी है. आज तू यहाँ नहीं मर्डर सकता. वो भी इन् जैसो के हाथो? टच!!! बस... कैसे भी कर के एक बार वह तक सही सलामत पहुँच जाऊ. फिर दिखाता हु इनको. कौन है असली बॉस!!!'

उसने सोचते हुए कार की स्पीड और बढ़ा दी.

*वरूँऊऊऊम्मम्मम्म*

वही दूसरी ऑर्डर,






"सहित!!! ये रोड किसी है? ओवरटेक भी नहीं कर सकते. और ज़्यादा स्पीड में गए तोह उस से भीड़ जाएंगे. ोये! जस्सी!!! कुछ बोल!!!"

रघु ने यहाँ खीजते हुए जस्सी से बोलै, जो ड्राइव कर रहा था.

जस्सी : हम्म~ हमारे पास और कोई चारा भी तोह नहीं है. पीछे से हम फायर hi कर सकते है. पर हम अपनी बुलेट्स बर्बाद भी नहीं कर सकते ज़्यादा. मुझे यकीन है स्लोगन ने कुछ प्लान बना के रखा है. वो केयरलेस इंसान हरगिज़ नहीं है. ज़रूर वो हमे अपनी टेरिटरी के अंदर ले जाना चाहता है. उसने जाल बिछा के रखा होगा.

रघु : तोह ऐसे में तोह हम उसके बिछाये जाल में फस्सने जा रहे है. हमे कुछ करना होगा न?

जस्सी : क्या कर सकते है हम? क्या हमारे पास फॉलो करने के अलावा और कोई ऑप्शन है?

रघु : दमण ित्त्त!!!

रघु जानता था की वो इसके अलावा और कुछ नहीं कर सकते थे. लीड स्लोगन ने लेके राखी हुई थी और वो हरगिज़ भी किसी भी कार को अपने नज़दीक आने नहीं देने वाला था.

जस्सी (फ्रोंस) : पर...

रघु : पर क्या? बोल जस्सी!!

जस्सी : पर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है. मेरी गट फीलिंग कह रही है की कुछ बोहत hi खतरनाक प्लान कर के रखा है उस स्लोगन ने.

रघु : तोह हमे जल्द hi और हेल्प बुलानी चाहिए.

जस्सी : हम्म~ तुमने सही कहा. सिक्योरिटी टीम को मैसेज भेजो की हमे कोप्तेर और ज़्यादा से ज़्यादा आदमियों की ज़रुरत है. जितने ज़्यादा हो उतना बेहतर है. हम यहाँ रिस्क नहीं ले सकते. और... हमारी लोकेशन भी भेज दो. उनसे कहना ट्रैक करते रहे. जीपीएस ों है. वो कोप्तेर टीम को हमारी लोकेशन शेयर कर देंगे.

रघु (नॉड्स) : हम्म!

रघु ने वैसा hi किया जैसा जस्सी ने कहा.

वही इधर वीर और कारन एकदम सबसे पीछे थे अपनी कार में. जस्सी और टीम के आ जाने के बाद, उनकी कार मजबूरन सबसे पीछे रह गयी थी. और अब वो चाह कर भी आगे नहीं जा पा रहे थे.

कारन : व्हाट थे फ़क इस रॉंग विथ तहत गाए? आखिर वो हमे ले कहा जा रहा है??? ये रोड मुझे बिलकुल भी नहीं लगता की कार्स के लिए है. इतनी सुनसान और ऊपर से दूसरी साइड से एक गाडी तक नहीं आ रही है. बस अभी तक चुनिंदा 2 से 3 hi निकली है दूसरी ऑर्डर से.

कारन काफी देरर से अपना गुस्सा दिखाए जा रहा था. और उसका गुस्सा जायज़ भी था. वही दूसरी ऑर्डर इस बार वीर शांत था. और उसके होंठो पर मुस्कान थी.

ऊपर आसमान में फुल मून चमक रहा था. और, वीर से बेहतर भला उस संकेत को कौन पहचान सकता था?

वीर के मुस्कुराने के पीछे का एक hi कारण था.

BEOWULF'S ब्लेस्सिंग्स!!!!






क्वेस्ट हंट का लीजेंडरी कार्ड.

पर ये ख़ास बात नहीं थी. ख़ास बात थी, उसके डिस्क्रिप्शन में दी गयी आखिरी की दो लाइन्स.






परसेंटेज विल गेट डोउब्लेड.

डोउब्लेड!!!!

यानी की वीर जो स्लोगन से पिछली बार भिड़ा था. तब उसके सेंसेस 60% बढे हुए थे. और 50% बढ़ोत्तरी, अगिलिटी, हीलिंग, स्पीड, और रेफ्लेक्सेस में थी.

पर...!

इस बार? इस बार वही परसेंटेज डबल होने वाले थे. मतलब की...

120% इनक्रीस इन सेंसेस. 100% इनक्रीस इन अगिलिटी, स्पीड, हीलिंग, एंड रेफ्लेक्सेस.

और ये सब... ऊपर आसमान में चमक रहे उस फुल मून के कारण था. व्हाट ा फूकिंग लीजेंडरी कार्ड!!! आज Beowulf's ब्लेस्सिंग्स अपनी पूरी कपाबिलिटी दिखाने वाला था. दिखाने वाला था की वो ऐसे hi नहीं लीजेंडरी कार्ड था. वीर आज डर नहीं रहा था. नौपे! इंस्टेड, हे वास् एक्ससिटेड. उसके अंदर का एड्रेनालाईन उससे आज गार्डा मचाने के लिए उकसा रहा था.

न जाने कितने दिनों से उसने किसी से लड़ाई नहीं की थी. उसके हाथ कुलबुला रहे थे. वापस से उससे वही जोश और रश फील करना था. जब तक सामने वाला स्ट्रांग न हो, तोह मज़्ज़ा केसा?

अपने हाथ में वो नाइफ का शताब, कई सारे गुंडों से उसकी पिटाई, और करा का रोटा हुआ चेहरा. इन् सब का बदला भी तोह लेना था आज वीर को. चुन चुन के, एक एक पायी का हिसाब चुकता करना था आज उससे.

ान ऑय फॉर ान ऑय!

ा टूथ फॉर ा टूथ!

***

चेस अभी भी चालु थी. और मोड़ ऐसे ऐसे आ रहे थे की कार्स ड्रिफ्ट मारने और स्किड होने पर मजबूर हो रही थी.






कारन : ष्ठीीट्ट्ट्ट!!!!! यदि एक भी कार को बीच में कुछ हुआ. थें... तहत विल बे त्रौब्लेसोमे.

वीर के मैं में पल भर के लिए आया की वो यहाँ से hi गन से एक एआईएम लगाए और स्लोगन की कार के एसेंशियल part को उदा दे.

आखिर उसके पास वो भी तोह थी...

हव्कये!!!

एआईएम बिगड़ने का कोई सवाल hi नहीं था. बूत थें अगेन, उसके सामने 20 से 25 कार्स थी. और स्लोगन की कार तोह उससे दूर दूर तक ठीक से नज़र भी नहीं आ रही थी. काश, वो उसके जस्ट पीछे होता. यदि ऐसा होता, तोह स्लोगन तोह बस गया था फिर.

वीर ने अपनी कमर पर हाथ फेर्रा और उस चीज़ को महसूस किया.

ग्लोक 19!!!!






उससे अपनी कमर पर महसूस करते hi वीर को उस शख्स का ध्यान आया जिसने उससे ये गन दी थी.

"ये लो! तुम्हारे काम आएगी!!"

"हँ? Y-Ye!!?"

"ऐसे क्या देख रहे हो? क्या पहले कभी असली गन देखि नहीं? में तुम्हे ये सिर्फ एक रात के लिए hi दे रही हु. यू मस्ट रेतुर्न थिस आफ्टर योर हंट."

"ी सी~"

"ी won't गिव अन्य मैगजीन्स. It's आलरेडी लोडेड. सिर्फ सेल्फ डिफेन्स के लिए hi दे रही हु. और ध्यान रहे, भूल के भी ये तुम्हारे हाथो से घुमनी नहीं चाहिए. ी हैवे थे लाइसेंस. यू don't!! यदि ये सही सलामत कल मेरे हाथो में नहीं मिली न. तोह मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. यू गोत आईटी?"

" *स्माइल्स* गोत आईटी!!! थैंक्स!"

"जो नाउ!!! एंड..."

"हम्म?"

"B-Be सेफ..."

" *स्माइल्स* येह!!"

दो रात पहले हुए इस कन्वर्सेशन को याद कर, वीर के चेहरे पर मुस्कान अपने आप आ गयी.

ऑफ़ कोर्स, ये गन उसी ने तोह दी थी.

सुहाना!!!

हु ेल्स िफ़ नॉट फॉर हेर???

उसके अलावा और कौन हो सकता था? और अब वीर को पूरा यकीन हो चूका था. की, सुहाना है किल्ड समवन इन थे पास्ट. वर्ण उसके पास ये गन न होती. केवल सेल्फ डिफेन्स के लिए सुहाना गन रखती है?

ऑफ़ कोर्स, आईटी वास् ा लिए!

***

20 से 25 मिनट गुज़र चुके थे पर स्लोगन को वो सभी न रोक पाए. कारण था रूट. स्लोगन शायद इस रूट से फेमिलिअर था. उससे हर्र जगह पर कैसे गाडी को निकालना है और कितनी स्पीड में निकालना है, बखूबी राटा हुआ था जैसे.

'हाहाहाहाहा~ अपनी मौत को खुद अंजाम देने वाले हो तुमलोग आज. ख़ास कर तुम... वीएररर!!! तुझे तोह में अपने हाथो से मारूंगा आज. और आज वही पे... उसी जगह पर... तेरे हाथ से आज फिरसे करा मेरे चंगुल से निकल गयी. वर्ण आज तोह में.... शीत्तत्त!!!! बस... बस में पहुँच गया...!!'

स्लोगन ने अपने आप को मुश्किल से एडजस्ट कर जेब से फ़ोन निकाला और किसी को फ़ोन लगाया.

*ों कॉल*

स्लोगन : सब... तुम सब तैयार रहो. मेरे पीछे करीबन 20 से 25 गाड़िया लगी हुई है. एक एक को भून देना. सबसे आगे में हु. ध्यान रहे, मेरे निकल जाने के बाद hi फायरिंग स्टार्ट करना. पोसिशन्स ले लो. प्लान में चंगेस है.

रइविंग एन्ड से : जी दादा!!! अभी सचेत कर देता हु सभी को...

*कॉल एंड्स*

और स्लोगन की कार अचानक hi ऐसी जगह से गुज़री जहा घप्प अँधेरा था.

रोड के दायी तरफ जहा पूरा घाना जंगल था तोह वही बायीं तरफ हलकी हलकी ुचि चोटिया. ऐसे टाइम पर बस यही दुआ थी की इन् चोटियों पर लैंडस्लैड न होये.

जैसे hi स्लोगन की कार अँधेरे में गायब हुई. जस्सी के आगे चल रही कार भी पीछे पीछे गयी.

पर, इससे अब जस्सी का तजुर्बा कहे, या अंतर्ज्ञान!? उसने अगले hi पल अपने पीछे आ रही सभी कार्स को रोकने के लिए अपना हाथ बाहर निकाल के इशारा कर दिया. कुछ गड़बड़ थी.






*स्क्ररररीीीेस्क्कक्कछःह*

स्किड मारते हुए एक एक कार सभी कार्स रुकने लगी.

और तभी...

*Booooooooooooooommmmm*






जस्सी : हहहहह???

रघु : !!!!!!!!!!??

जो कार जस्सी के आगे चलते हुए स्लोगन को फॉलो करते हुए गयी थी वो अगले hi पल...

एक तेज़्ज़ धमाके में उड़द चुकी थी.

इतना जोरर का ब्लास्ट हुआ, की पीछे कार में मौजूद जस्सी और रघु समेत बाकी सभी की पल भर के लिए रूह काँप गयी.

रघु ने एक नज़र जस्सी पर डाली और मैं में hi उससे शुक्रिया अदा किया.

यदि जस्सी ने सभी को रोका न होता तोह? उनका भी शायद यही हश्र होता. सोच के उसके पूरे शरीर में गूसबम्प्स आ गए.

पर उनके दो साथी मारे गए.

रघु : तहत बास्टर्डड....

जस्सी और रघु और बाकी सब काफी पीछे थे. इसलिए उन्हें सुरती नहीं थी की ये ब्लास्ट फायरिंग से हुआ था या फिर...!?

जस्सी (फ्रोंस) : ये या तोह फायरिंग से हुआ होगा, या फिर...

रघु : हँ? ये मत कहना की... *गुलप्स*

जस्सी (नॉड्स) : लैंडमिने!!!

रघु : हाहहह???? P-Par... पर स्लोगन भी तोह वही से गुज़रा...

जस्सी : भूलो मत रघु की ये उसकी hi टेरिटरी है. वह यहाँ के पूरे ज्योग्राफिकल टेर्रिन से वाक़िफ़ है. हम नहीं!!! उसने जान बूझ के वो माइन सेट करवा के राखी होगी.

'टच!!! पहले राकेट लांचर! और अब लैंडमिने... स्लोगन को इन् वेपन्स की एक्सेस कहा से मिली??' जस्सी ने मैं में सोचा.

रघु : पर... पर कैसे!? रोड इतनी भी चौड़ी नहीं है की... उसने ये भी नहीं किया होगा की टायर्स के बीच में से होक वो माइन को पार कर जाए. इतना कॅल्क्युलेटेड रिस्क नहीं लेगा... फिर... कैसे...

तभी जस्सी की नज़र दायी तरफ मौजूद जंगल की ऑर्डर गयी. और उसके दिमाग में कुछ क्लिक हुआ.

जस्सी : तुम सही हो!

रघु : हँ?

जस्सी : वो उस अँधेरे का फायदा उठा के, सीधा नहीं गया... बल्कि...

रघु : !??

जस्सी : बल्कि उसने गाडी घुमा दी. अपनी दायी तरफ देखो...

रघु : इसका मतलब!???

जस्सी : हम्म~ जंगल के अंदर कार घुसेड़ दी उसने. और क्युकी, हमारे साथी ने अँधेरे में एकदम से कार सीढ़ी बधाई, बदक़िस्मती से उसकी कार का टायर माइन पर आ गया.

रघु : वो... हरामखोर.....!!!!! दमन ित्त्त!!!

जस्सी : कार से उतरो!!

रघु : हँ? पर...

जस्सी : I'm सूरे की वह जंगल की ऑर्डर धेरर सारे आदमी मौजूद है. यदि हम आगे जाते, तोह हो सकता था की और भी माइंस होती. और यदि नहीं भी होती तोह... हमे गोलियों से भून दिया जाता.

रघु : तोह हमे अब गैंग फाइट लेनी होगी. राइट? कार को कवर की तरह उसे करते हुए हमे आगे बढ़ना है. है न?

जस्सी : हम्म~ स्लोगन अंदर गया है जंगल में. I'm सूरे, यदि यहाँ आदमी है धेरर सारे, तोह उसने अंदर कैम्प्स भी बनाये होंगे. हमे एक पथ बनाना पड़ेगा. सेफ पथ! हम स्लोगन को आज किसी भी हालत में बच के जाने नहीं दे सकते.

रघु : ऑफ़ कोर्स~

जस्सी : टीम!!!! बाहर आओ! हमे यही से आगे बढ़ना है. ध्यान रहे. बिना कवर के फाइट नहीं लेनी है. हमारे दुश्मन उजाले में है और हम अँधेरे में. दूसरे शब्दों में... उन्हें हमारी पोस्टिव पता है. पर हमे उनके बारे में कुछ नहीं पता. क्या हथियार है उनके पास, कितने लोग है और कहा पर है. हम कुछ नहीं जानते... पर...

कार से उतरे सभी आदमी जस्सी की बात ध्यान से सुन्न रहे थे. पर उन्हें जस्सी पर भरोसा भी था. क्युकी, वो एक क़ाबिल गैंग लीडर था.

जस्सी : पर... जस्ट फॉलो में!

"एसससस सीयरररर!!!!" और सभी ने एकसाथ जवाब दिया.

जस्सी : Let's मूव!!!

***

वही वीर और कारन जैसे hi पीछे से सभी के पास पहुचे तोह उन्होंने पाया की साड़ी गाड़िया रुकी हुई थी. कारन ने कंफ्यूज होते हुए कार स्लो कर दी. पर वीर को आलरेडी सब पता था.

स्टीव मर्डर गया था तोह क्या? स्लोगन के पीछे बैठे वो दो हरामी तोह मौजूद थे न कार में?

वीर के चेहरे पर क़ातिलाना मुस्कान थी.

बेसिक एनिमी ट्रैकर!!!

*बीप* *बीप* *बीप* *बीप*

लाल बिंदु उसके मैं में मैप में चमकते हुए स्लोगन की पूरी लोकेशन बया कर रहा था. या यु कहे की स्लोगन की नहीं, उसके साथ पीछे बैठो उन् दो लफंगो की. पर, उलटिमटेली स्लोगन था तोह उन् दो चुतियो के साथ hi.

'सो हे वेंट इनसाइड तहत फारेस्ट हँ?'

[Yeah!!! Looks like it! Sambhal kar badhna!]

'हम्म~'

[There might be many inside.]

'येह!!!'

और तभी,

*बणणगगगगगग*

*बाहानगगगग* *बाआआआंगगग*

*बाहानगगग*

कारन : व्हाट थे~!? Don't तेल्ल में... रघु और जस्सी फाइट ले लिए...!

वीर : कारन!

कारन : हँ?

वीर : गाडी मुझे दो. तुम बाहर उतरो!

कारन : Wh-What??

वीर : हम्म~ मुझे अंदर जाना होगा. अंदर जंगल में. स्लोगन वही है.

कारन : व्हाटट? वेट वेट!! T-Tumhe कैसे पता? N-Nahi...! वो चोर्रो! में तुम्हे अकेले अंदर जाने कैसे दे सकता हु? It's तू रिस्की. हम मिलके यही रघु और जस्सी का वेट...

वीर : कारन!!!

कारन : हँ???

वीर (स्माइल्स) : ट्रस्ट में!!!

कारन : ....

वीर (स्माइल्स) : I'll के बैक!!!

कहते हुए वीर ने अपनी फिस्ट आगे कर दी!! 🤜

फिस्ट बुम्प के लिए.

कारन : ेहः? नाहीईई! Wh-What थे~!? तुम्हे इसकी पड़ी है? No वे! में ऐसे कैसे...? और ऐसे तुम किसी एक्शन फिल्म के हीरो की तरह मुझे क्यों देख रहे हो जो एंडिंग सन में अपनी जान देने जा रहा है? हाँ? फ़क! ी can't...

वीर : यू वांट उस तो बे फ्रेंड्स राइट?

कारन : I...I...

वीर : थें ट्रस्ट में... I'll के बैक! आफ्टर आल, ी प्रॉमिस्ड. Didn't ी? की मिस करा की हेल्प करूँगा.

कारन : तहत... *सिघ*

और हार मानते हुए कारन ने वीर की फिस्ट से अपनी फिस्ट बुम्प की. 🤜🤛

कारन : फाइन... पर... मेरी बेबी का ध्यान रखना.

वीर : हँ?

कारन ने अपनी ब्लू मुलसंने की ऑर्डर इशारा किया.

वीर : ओह्ह! यू मैं ये कार... ऑलराइट! Don't वोर्री! नाउ... ी नीड तो जो!

कारन (नॉड्स) : टेक केयर...!!!

*वररररररओओओओओओओओमममममम*

पर कारन का जवाब अब और देने के लिए वीर के पास समय नहीं था. उसने फौरन hi गाडी को रेस दिया और गाडी दायी और मोड़ते हुए घुमा दी और सीधा कार को अंदर उस जंगल में घुसेड़ दिया.

कारन को साथ न लाने के दो hi कारण थे. पहला तोह यही की वीर को उसकी जान की परवाह थी. वो फिरसे अपना नया दोस्त नहीं खोना चाहता था. और दूसरा यही की...

कारन किशोर का
एकमात्र बीटा था!!!

जो आदमी कोप्तेर से लेके, हथियार, और इतने आदमी भेज दे. जिसकी करा जैसी लड़की हो. उससे यदि पता चलेगा की उसका बीटा मारा गया तोह वह क्या करेगा? वीर सोचना भी नहीं चाहता था अभी.

और कार को उन् दो लाल बिन्दुओ की तरफ बढ़ा दिया उसने.

जंगल तोह जंगल था. जहा से घुस जाओ वह से अंदर जा सकता था आदमी. सामने रोड से लगे हुए hi रघु और जस्सी फाइट ले रहे थे. पर इधर वीर उन् सब की नज़रो से बच के पीछे से hi अंदर घुस चूका था.

इधर अंदर...

जगह जगह कैम्प्स लगे हुए थे. साफ़ ज़ाहिर था की स्लोगन ने आदमियों को इस रात के पहले hi यहाँ शिफ्ट करवा दिया था. काफी लम्बी प्लानिंग थी. यदि, बलहार ने वीर का साथ देके प्लान फ्लॉप नहीं करवाया होता तोह आज करा...

'टुडे!!! I'll टेक हिम डाउन!!!'

सोचते हुए वीर ने अपनी मुट्ठी कस ली.

स्लोगन और उसके दो चूतिये जैसे hi कार में कैम्प्स के नज़दीक पहुचे, उन्होंने देखा की,

चारो तरफ अँधेरा hi अँधेरा था. यदि कुछ दिखाई दे रहा था तोह बस चाँद की रौशनी में hi दे रहा था. कैंप के नज़दीक आग पहले से जल रही थी शायद. क्युकी, हल्का हल्का धुँआ अब भी उसमे से निकलता नज़र आ रहा था. शायद इसी जगह पर आदमियों ने खाना पका के भी खाया था.

पर अभी वो ज़रूरी नहीं था.

*थुड़*

कार का दूर गुस्से में बंद करते हुए स्लोगन कैंप के पास बैठे एक व्यक्ति के पास जाने लगा.

और पूरे कैंप में केवल यही एकमात्र व्यक्ति था जो यहाँ मौजूद था. वो था...

मैथ्यू!!!!

स्लोगन द्वारा बाहर से मंगाया गया तीसरा ास्सास्सिन!!!!

डेक्सटर और एक अन्य ास्सास्सिन को पहले hi स्लोगन टास्कस दे चूका था. मिरर गैलरी के वक़्त. जो की एक फेलियर था. पर अब तक मैथ्यू को नहीं. क्युकी, मैथ्यू उन् तीनो में से सबसे महंगा और सबसे स्किल्ड ास्सास्सिन था. यही कारण था, की मैथ्यू को स्लोगन बाहर नहीं भेजता था. अपनी सेफ्टी के लिए रखता था.

स्लोगन : *हफ़* *हफ़* *हफ़* प्लान्स... प्लान्स हैवे चेंज्ड.

मैथ्यू : व्हाट इस आईटी? यू अरे हेरे?

स्लोगन : यस!!! ठोस मोथेरफुकेरससस~!!!!

मैथ्यू : सो? फाइट है स्टार्टेड?

स्लोगन : आलरेडी!!!! F-For नाउ... I'll बे हेरे!!! It's... It's सेफ हेरे...!!!

और अभी उसने इतना hi बोलै था की...

*वरररररररओओओओओमममममममम*

स्लोगन : !!!!!?????

कुछ hi दुरी पर एक कार सीधा अंदर आके रुकी. जो किसकी थी, ये तोह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था. स्लोगन के लिए पर भलाई रहा हो.

कार में वीर की स्माइल डिस्टॉर्टेड हो चुकी थी. कितना hi क्यों न भाग ले स्लोगन. जब तक वो उन् दो नमूनों के साथ था...

हिज डेथ वास् फोल्लोविंग हिम!!

'हहहहए~ रन आल यू वांट!!! ी विल के फॉर यू!!!'

[Y-You sound scary!!! T-Tum theek toh ho na?]

पर पारी के प्रश्न का जवाब न मिला उससे. आज वीर अब्नोर्मल्ली एक्ससिटेड था. इसलिए पारी को चिंता हो रही थी. कही वीर को खून करने का नशा तोह नहीं चढ़ गया, आतिश को मारने के बाद से? ऐसा भी हो सकता है की अल्फा ट्रेट फंक्शन के कुछ असर हो?

पारी ने सोच लिया था की वो जल्द hi वीर से इस मटर पर बात करेगी. पर... वो जानती थी की बात करने का मौका शायद अभी लम्बे अंतराल के लिए नहीं आने वाला था. 120 ऍक्स्प मोरे तो जो. उससे याद था की बस इतनी hi ऍक्स्प और नीडेड थी. सिस्टम को लेवल उप होने के लिए. और शायद, आज के इस मिशन के बाद. ये कम्पलीट होने वाली थी.

और तभी वीर यहाँ कार से निकला...

*थुड़*

स्लोगन को अब यहाँ तक की उस कार के दूर बंद होने की आवाज़ भी सुनाई दी. पर...

कार की हेडलाइट्स बंद होते hi, स्लोगन की समझ में नहीं आ रहा था की कौन है वह इंसान.

उसके खतरे की घंटी बजी और वो फौरन चिल्लाया,

स्लोगन : गार्ड में!! गार्ड में नौवववव!!!

उसकी गुहार सुनते hi, मैथ्यू आगे आके सामने आ गया. उसने अचानक hi अपनी कमर पर टंगे नाईट विज़न गॉगल्स निकाले और अपनी आँखों पर चढ़ा लिए.

ास्सास्सिन था वह. हर्र समय तैयार रहता था. उसके सारे हथियार एकदम तैयार थे. और वो, कार से निकले दूर खड़े उस शख्स को hi देख रहा था अपने गूगल्स से, जो रात में देखने के लिए उसके काम में आ रहा था.

मैथ्यू : शो योरसेल्फ!!!!

*क्लिक*

बोलते हुए उसने अपनी हैंडगन भी कवर से बाहर निकाल के अपने हाथो में ले ली, जो की आलरेडी फुल्ली लोडेड थी. उसका एआईएम वीर के डायरेक्शन की ऑर्डर hi था. पर, वीर कही नज़र नहीं आ रहा था. किसी एक पेड़ के पीछे शायद छुपा हुआ था.

और मैथ्यू सही था. वीर कार से निकलते hi पेड़ के पीछे छिपा हुआ था. यदि फाइट लेनी है, तोह एरिया का जायज़ा लेना ज़रूरी था. पारी ने उससे अभी रास्ते में समझाया था.

वीर, एक स्कैनर की तरह एरिया स्कैन कर रहा था. कही ऐसा तोह नहीं कोई आदमी छुप के एआईएम लगा के बैठा हो? यदि ऐसा हुआ तोह ये डेडली हो सकता था. इसलिए, एरिया को स्कैन करना ज़रूरी था.

वीर को खुद अब देखने में तकलीफ हो रही थी. इसलिए...

'परीई!'

[Got it!!!!]

*डिंग*

[Beowulf's Blessings has been Turned On!]

और अगले hi पल, पहले के hi भाति, वीर की सासें तेज़्ज़ हो गयी. सीना ज़र्रों से ऊपर नीचे होने लगा. वो भारी मात्रा में सास अंदर बाहर खींचने लगा. आँखों में लाली छाने लगी.

दिल की धड़कन तेज़्ज़ हो गयी, पल्स बढ़ गयी और उससे आस पास का हर्र एक साउंड बोहत hi क्लेअर्ल्य सुनाई देने लगा. यहाँ तक की कैंप के पास भुजी वो आग... उसकी महक भी, वीर इतनी दूर से स्मेल कर पा रहा था.

उसके सेंसेस 120% बढ़ चुके थे.

इन्क्लूडिंग हिज विज़न!!!!

इस से पहले वीर को रात में इतना क्लियर नहीं दिखा था. ऐसा लग रहा था वो कोई उल्लू बन गया है. उससे सब कुछ इतना साफ़ नज़र आ रहा था.

और सबसे ख़ास बात. वीर एकदम फिट था. इसका मतलब इस बार...

वो Beowulf's ब्लेस्सिंग्स को आधे घंटे से भी ज़्यादा देरर तक मेन्टेन कर सकता था.

वो धीरे धीरे आगे बढ़ा... पेड़ो के सहारे खुद को छिपाते हुए.






उसका हाथ कमर पर अपनी गन पर गया. यदि ये पहली बार होता तोह वीर गन पर ध्यान hi नहीं देता. और सीधा रश मार देता. पर, वो इसके पहले hi एक बार Beowulf's ब्लेस्सिंग्स को उसे कर चूका था. इस बार इसलिए काफी हद्द तक वो कंट्रोल्ड था पहले के मुक़ाबले. पर, स्टिल... पूरा कंट्रोल्ड हरगिज़ नहीं.

*सक्रुङक्कछहः*

ज़मीन पर बिखरे पत्त्झड़ की सूखी पत्तियों पर जब वीर के कदम पड़े, तोह आवाज़ हुयी. और आवाज़ को फॉलो करते हुए जैसे hi मैथ्यू ने देखा तोह उसने पाया की वीर कमर से गन निकाल रहा था.

मैथ्यू (शॉट्स) : हे है थे गन!!! टेक कवर!!!

पर उससे बोलने में थोड़ी देरर हो गयी...

*डिंग*

हव्कये

*बाआआआंगगगगगगग*

*BAAAAAAAAAANGGGGG*

एक झटके में वीर के हाथ में मौजूद उस गन से दो शॉट्स निकले और...

*सप्लूओरत्त्त*

*सप्लूओरटटटटटट*

वो दो आदमी, जो ओपन में खड़े थे. उनका भेजा खुल चूका था. बुलेट सीधा जाके माथे के बीचो बीच स्किन को फाड़ते हुए घुस गयी!!!

और दोनों hi धड़ाम से ज़मीन पर अगले hi पल लाश बन गए.

स्लोगन जो मैथ्यू की बात सुन्न फौरन hi पेड़ के पीछे छुप गया था. उसके चेहरे से रंग उड़द चूका था.

पर वो दो आदमी, ओपन में थे. नतीजा? उनकी मौत!!!

यदि वीर इस स्टेट में न होता. तोह वो डेफिनिटेली उन्हें जान से नहीं मारता. पर...

इस स्टेट में तोह जैसे, वीर कोई अलग hi इंसान था. होंठो पर से उसके वो मुस्कान जा hi नहीं रही थी.

उन् दोनों को एक बार में उसने मार दिया. क्या गलती थी उनकी? ऑफ़ कोर्स, थी न गलती.

थे वेरे स्टैंडिंग बेसीडे स्लोगन!!!!!

मैथ्यू : रन अवे! गेट तो ा सेफ लोकेशन. हे सिम्स डेंजरस. I'll डील विथ हिम.

स्लोगन : A-Alright!!!!

और स्लोगन अगले hi पल कुछ सोच के जंगल के और अंदर भागने लगा. बाहर जाना तोह खतरे से खाली नहीं था. गोलियों की हलकी हलकी आती आवाज़ hi बता रही थी की वह जुंग चल रही थी.

फिर कहा जाय जाए? एक hi ऑप्शन था. अंदर की ऑर्डर!

वैसे भी वो इस जंगल से बोहत अच्छे से वाक़िफ़ था. इतना की उस से बेहतर शायद hi कोई इस एरिया को जानता हो. और हो सकता है, उसके अंदर जाने से, जो कोई भी उसका पीछा कर रहा था वो डर के मारे अंदर न आये. इसलिए यही बेस्ट चॉइस थी.

स्लोगन को भागता देख, वीर ने उससे मारने के लिए एआईएम किया. और,

*डिंग*

हव्कये

*बायअंगगगगगग*

और एक बुलेट जाके सीधा उसके हाथ पर लगी.

"ाअररघहहहह!!!!!" वो चिल्लाया पर रुका नहीं.

वीर ने फिरसे एआईएम लिया. पर इस बार मैथ्यू ने कवर फायर देते हुए वीर को ऐसा करने न दिया.

उसके बाद बस फायरिंग का सिलसिला शुरू हो गया. वीर यहाँ से फायर करता तोह जवाब में मैथ्यू वह से. और दोनों hi कवर लिए हुए थे.

बस इंतज़ार था दोनों को. किसकी मैगज़ीन पहले ख़तम होती है.

मैथ्यू के पास कुछ मैगजीन्स एक्स्ट्रा थी. पर वीर के पास नहीं. ग्लोक 19 में 15 बुलेट्स आती थी. और एक उसके चैम्बर में रहती थी. यानी की टोटल 16 बुलेट्स. जिसमे से 2 तोह पहले hi खाली हो चुकी थी. 1 स्लोगन को अभी मारी, और वीर ने अब 9 मैथ्यू पर फायर कर दी थी.

नाउ... हे वास् लेफ्ट विथ ओनली 4!!!

हव्कये के इस्तेमाल से अब तक मैथ्यू को बुलेट लग जानी चाहिए थी. बात ये नहीं थी की हव्कये में कुछ फाल्ट था. बात ये थी की जैसे hi बुलेट मुज़्ज़ले से निकलने वाली होती थी, मैथ्यू डक कर लेता था. और नतीजा... वो बुलेट वास्ते चली जाती थी.

वीर ने गन अंदर राखी. यदि ऐसे hi चलता रहा. तोह उसके Beowulf's ब्लेस्सिंग्स का समय ख़तम हो जाने वाला था.

आईटी वास् टाइम फॉर ा ब्लडी फिजिकल फाइट!!!

और अगले hi पल...

*स्वववऊऊऊऊस्सष्ठ्हह*

मैथ्यू : हँ???

वीर एक झटके में हवा के झोके की तरह अपनी पोजीशन से गायब हो गया.

वो सीधा साइड से मैथ्यू की ऑर्डर बढ़ा. और मैथ्यू को ये आभास होते hi उसके पूरे शरीर के रौंगटे खड़े हो गए.

समथिंग वास् किंग ात हिज वे!!!






*सछलीइंगगगग*

मैथ्यू ने अपनी नाइफ निकाली. और नाईट विज़न गॉगल्स के सहारे वो हर्र जगह देखने लगा. क्लोज कॉम्बैट में... नाइफ वास् बेटर थान ा गन!!!

और तभी...

अपने पीछे से उससे जोरर से किसी के आने की आवाज़ आयी. उन् बिखरे हुए पत्तो के कुचले जाने की...

वो पलटा और...

*बाआआआअम्म्मम्म्म्म*

एक किक सीधा आके उसके टोरसो पर लगी...

"गवाकककहहहहह...!!!" मुँह से थूक निकला उसके और वो हवा में उड़ते हुए पीछे जा गिरा.

वीर की अगिलिटी इतनी ज़्यादा थी की वो डिफेंड करने में लेट हो गया.

वो उठा उसने गन से एआईएम किया...

*वहुवुस्सशहठ*

"H-Huh!???"

पर एक बार फिर वीर अपनी जगह से गायब हो गया.

मैथ्यू हर्र तरफ देखता रहा. पर कही भी वीर का निशाँ न मिला. सब कुछ शांत सा हो गया जैसे.

मैथ्यू : शीट्ट्ट्ट!! शो योरसेल्फ!!!!

उसके चिल्लाते hi...

अचानक hi उससे जैसे एक कम्पन महसूस हुआ. और अगले hi पल उसने अपने ऊपर देखा. ऊपर देखते hi उसके चेहरे से उसका रंग उड़द चूका था.

वीर पेड़ की डाली पर उल्टा लटका हुआ था. और उससे hi घूर रहा था. उसकी ब्लूडशॉट आईज... मैथ्यू पर hi फोकस्ड थी. और होंठो पर वही मुस्कान सजी हुई थी.

मैथ्यू : Y-Youuuu!!!

*बायअंगगगगगग*

उसने फायर किया पर टारगेट मिस हो गया. वीर सीधा नीचे एक झटके में आया और एक तेज़्ज़ तर्रार लात मैथ्यू के फेस की ऑर्डर आयी.

मैथ्यू : यू थिंक ी don't क्नोव हाउ तो फाइट ा क्लोज कॉम्बैट??? हम्फ~

मैथ्यू ने ब्लॉक किया, वीर के परर को पकड़ा और उससे खींच उसने एक ज़ोरदार फाॅर्स से उसके चेहरे पर पंच लैंड करना चाहा.

पर ये देखते hi वीर का सर्र अपने आप उसके बढे हुए रेफ्लेक्सेस के चलते हवा में hi, झटके से नीचे हो गया.

*वहुवूसस्स्सह्ह्हह्ह*

मैथ्यू का घुसा, उसके फेस के जस्ट ऊपर से निकला और अपने दोनों हाथो से उसके हाथ को पकड़, वीर ने जो एक टांग नीचे ज़मीन पर टिकाई हुई थी उस पर फाॅर्स देके खुद को हवा में उछाल दिया.

और उसकी वही टांग सनसनाते हुए हवा को चीरते हुए मैथ्यू के बाए कान की ऑर्डर आयी.

'शीट्ट्ट्ट!!!'

उसने अपना बाय हाथ उठाते हुए फौरन hi अपने आप को बचाना चाहा पर ऐसा करना से, अपना बाय हाथ अपनी बायीं आँख की तरफ करने से उसका लेफ्ट साइड का फील्ड ऑफ़ विज़न पूरा ब्लॉक हो गया.

उससे पता था की उसकी ऑर्डर किक आ रही है इसलिए उसने अपना हाथ रेज किया बचने के लिए. पर ऐसा करने से अब उससे उस ऑर्डर का कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.

आईटी वास् ान ओपनिंग!!!

वीर के चेहरे की मुस्कान और फेल गयी. और एक झटके में जो परर उसका पहले हवा में मैथ्यू के कान की ऑर्डर बढ़ रहा था वो हवा में hi अपना डायरेक्शन बदला और सीधा नीचे चला गया.

*बाआआआंमममम*

"Aaaaaaaaaarrrgghhhhhhhh!!!" वो किक सीधा आके मैथ्यू की लेफ्ट पसली पर पड़ी. और एक तेज़्ज़ दर्द फेल गया उसके शरीर में.

वीर ने अगले hi पल कमर से गन निकाली...

मैथ्यू : !!!!????

और जैसे hi मैथ्यू के माथे पर रख उसने शूट किया.

*बायणगग*

मैथ्यू ने पीछे गिरते हुए डक कर लिया. अब वीर के पास केवल 3 बुलेट्स hi थी.

इधर मैथ्यू के हाथ तेज़्ज़ी से गन को उनहोल्स्टर किये और...

*बायअंगगगगगग*

उसने भी शूट किया पर वीर के रेफ्लेक्सेस जैसे उसके लिए आज भगवन की दें थे. 100% इनक्रीस इन रेफ्लेक्सेस.

खुद के शरीर को अपने राइट साइड करते हुए उसने डॉज किया और तेज़्ज़ रफ़्तार में भागते हुए मैथ्यू की ऑर्डर आया.

मैथ्यू के गिरते शरीर के पास आते hi उसने सीधा एक पंच मारा और वो पंच अपनी आँखों के सामने नज़दीक आते देख मैथ्यू ने अपनी दोनों हथेलियाँ ऊपर करि.

*बाआआआंमममम*

पंच रोक तोह भलाई लिया उसने पर वीर की स्ट्रेंथ और उस फाॅर्स के चलते फिर भी वो पंच पद गया.

"ऊघ्ह्ह्ह्ह!!!" ज़मीन पर उसका शरीर धड़ाम से गिरा.

तभी वीर ने उसका एक हाथ थामा और...

आईटी वास् टाइम फॉर...

लीम्बो!!!!

वीर ने जैसे hi उसका हाथ मरोड़ना चाहा, मैथ्यू ने एक झटके में खुद को उसकी पकड़ से चर्राया.

[Limbo won't work!!!! Limbo ki apni khaamiya hai. Last time tum Balhaar par isliye use kar paaye the kyuki wo guard par nahi tha apne. You caught him off guard. Tumne usse peeche se pehle hi grip bana ke pakad liya tha. Par yaha ye work nahi karega. Wo aadmi poora guard raise kiye hue hai tumhaare liye. Limbo is useless here!!!!]

पारी ने जैसे hi लीम्बो का डिसादवंतागे बताया, वीर ने मैथ्यू से फौरन hi डिस्टेंस ले लिया.

पारी ने एक राहत की सास ली. एटलीस्ट आज वीर इस स्टेट में होने के बावजूद भी उसकी बात तोह सुन्न रहा था.

[Don't waste more than one bullet on him now. Keval 3 hi bachi hai. Try to finish him in one bullet. Use distractions.]

वीर कुछ न बोलै, और फिर से वो पेड़ो का सहारा लेते हुए छुप छुप के आगे बढ़ने लगा.






मैथ्यू : दमंत्र ोुउउउउ!!!! ुघठ!!

और पालक झपकते hi वीर फिरसे कही गायब हो चूका था उस अँधेरे में.

*बायअंगगगग*

*बायअंगगगग*

*बायअंगगगग*

मैथ्यू अपना आप खोते हुए इस बार कई बुलेट्स गुस्से में फायर करने लगा.

*स्कृन्चछहहहह*

तभी उसके पीछे कुछ हलचल हुई, वो अचानक hi पलटा और उसने अगले hi पल....

*बाहानगगगगगगग*

फायर कर दिया. लेकिन...

पीछे कोई न था!!!!

मैथ्यू : H-Huhhh??

और तभी इस बार, इस बार पीछे से आवाज़ आयी. फिरसे... वो फिर मुदा...

पर उसके मुड़ते hi, अचानक hi कोई चीज़ आयी और उसके मुँह में घुस गयी.

मैथ्यू : ूउम्मंपहहहह~!??

वीर की ग्लोक 19!!!!

मैथ्यू ने अपनी गन सीधा वीर के माथे पर तानी और शूट किया.

*क्लिक*

*क्लिक*

*क्लिक*

मैथ्यू : !!!!?????

उसकी मैगज़ीन के राउंड्स ख़तम हो चुके थे. वही वीर के पास 3 बुलेट्स बाकी थी.

और तभी, मैथ्यू ने वीर के होंठो की वह हैवानो वाली मुस्कान देखि.

ऐसा लगा जैसे डेविल खुद हेलल से आके आज उसकी मौत bann'ne आया था.

और...

*बाआआआंणणगगगगगगगग*

बुलेट मैथ्यू के मुँह को चीरते हुए उसके पालते को फाड़ते हुए उसके सर्र के पीछे से निकल गयी.

*थुड़*

मैथ्यू का शरीर बेजान ज़मीन पर गिर पड़ा. जो आवाज़ मैथ्यू ने पहले सुनी थी और वो पीछे मुदा था, वो कुछ और नहीं था. वीर ने पत्थर फेका था पीछे. जिस कारण से मैथ्यू पीछे मुद गया और उसने अपनी आखिरी बुलेट हवा में वास्ते कर दी. ा फूकिंग डिस्ट्रक्शन. अस पारी साइड.

और वीर वह एक पल न रुका.

वो सीधा अंदर की ऑर्डर भागा. आईटी वास् टाइम फॉर हिज मैं एनिमी. स्लोगन!!!!

कही भी क्यों न भाग जाए स्लोगन. वीर उसका पता लगा लेने वाला था. क्युकी उससे पता था की उससे कैसे ढूढ़ना है स्लोगन को.

'I'm किंग फॉर यू... *स्माइल्स* "

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आज के लिए इतना hi गाइस!

ये अपडेट बोहत म्हणत से लिखा है. अपडेट का साइज मोरे थान 5.5क वर्ड्स है. रात में जागते हुए. सो, लिखे थोक के जाने का. और रेवोस रखने का. आल्सो, अस ी साइड की जैसे जैसे स्टोरी आगे बढ़ेगी, फाइट्स इंटेंस होती जाएंगी. आज आपने देख लिए होगा. वेल, फिलहाल इतना hi.


धन्यवाद! ✨
 
मेगा अपडेट

[Koi itna diler ho sakta hai? Batao?]

अपडेट - 76 ~ स्लोगन!!!

[This update contains gore as well as some disturbing scenes. Please, proceed accordingly.]

अब तक...

बुलेट मैथ्यू के मुँह को चीरते हुए उसके पालते को फाड़ते हुए उसके सर्र के पीछे से निकल गयी.

*थुड़*

मैथ्यू का शरीर बेजान ज़मीन पर गिर पड़ा. और वीर वह एक पल न रुका.

वो सीधा अंदर की ऑर्डर भागा. आईटी वास् टाइम फॉर हिज मैं एनिमी. स्लोगन!!!!

कही बुइ क्यों न भाग जाए स्लोगन. वीर उसका पता लगा लेने वाला था. क्युकी उससे पता था की उससे कैसे ढूढ़ना है स्लोगन को.

'I'm किंग फॉर यू... *स्माइल्स* "


अब आगे...

लाल....! लाल रंग...!

खून!!!

अपने कांपते हुए खून से साणे हाँथ पर रुमाल बांधते हुए स्लोगन जंगल के बीचो बीच अंदर आ चूका था. उसका लाल लाल खून, हाथ से रास्ते में बूँद बूँद टपकते जा रहा था.

और यहाँ आते hi उसके सामने गहरी खायी थी. बेहद गहरी खायी. जो जंगल को दो भागो में बाते हुए थी. पर बदक़िस्मती से, दुसरे चोरर पर जाने का कोई रास्ता नहीं था.

*हफ़* *हफ़* *हफ़*

हफ्ते हुए वो थकान के मारे एक बड़े से पत्थर पर टिक के बैठ गया जो ज़मीन में hi दहस्सा हुआ था. उसकी सासें बोहत तेज़्ज़ हो चुकी थी.

उन्हें दुरुस्त करने वो यही बैठा और सामने खायी की ऑर्डर देखने लगा.

पहले, यहाँ एक लकड़ी का पल हुआ करता था. एक ब्रिज. जो जंगल के दोनों भागो को जोड़ता था. पर अब उस पल का कोई naam-o-nishaan नहीं था. हर्र जगह बस घास, पेड़ और पौधों से hi भरा हुआ था जंगल. बड़ी बड़ी बेल जो काफी लम्बाई तक बिखरी हुई थी.

ये सब देख स्लोगन की आँखों में अचानक hi ासु आ गए. ये वही जगह थी. वही जगह!!!!

***

20 इयर्स एगो...

ये समय था वर्षा ऋतू के बाद के मौसम का. जुलाई, अगस्त के माह में जब ज़र्रों से बारिश होती थी, उसके बाद वातावरण में हलकी ठण्ड सी फेल जाती थी.

"आअह्ह्ह~" मिटटी पर जब भी बारिश की बूंदे पड़ती थी, तोह वह सौंधी सौंधी, महक पूरे वातावरण को सुगन्धित कर देती थी.

आज में एक तलाश में निकला था. किसी को ढूंढ़ने. बोहत सुना था इन् महान व्यक्ति के बारे में. और उसी सुना सुनी में में अपने मैं की जिज्ञासा को ख़तम करने के लिए आज रवाना हो रहा था.

"संभल कर जाइएगा! समझ गए?"

में जब अपनी पंत की बटन लगा रहा था तोह मेरी प्यारी पत्नी, सुधा ने आकर मुझसे कहा.

"अरे तुम चिंता क्यों करती हो? कल तक आ जाऊंगा! और कल नहीं आ पाया तोह परसो तोह किसी भी हाल में आ जाऊंगा."

"F-Fir भी, a-aap संभल कर जाना. और जितना जल्दी हो सके. घर लौट आना."

सुधा की चिंता देख मेने उससे अपने सीने से लगा लिया. मेरा परिवार एक माध्यम वर्गीय परिवार था. एक मिडिल क्लास फॅमिली. उस ज़माने में.

कपड़ो का व्यापार शुरू किया था नया नया. तोह सारा पैसा व्यापार में लगा दिया था. जिस कारण से घर की आर्थिक स्थिति थोड़ी तंग चल रही थी इस वक़्त. और दिक्कत यही थी की मेरा व्यापार सही नहीं चल रहा था.

उसी के निवारण के लिए में इस महान व्यक्ति से मिलने जा रहा था. और एक कारण और भी था.

मेने अपनी नज़रे फेरर, मेरी बच्ची की ऑर्डर देखा. मेरी एकमात्र बच्ची.

स्वाति!!! मेरी लाड़ली!!!

"स्वाति~ पिता जी जा रहे है तुम्हारे." सुधा मेरे सीने से अलग होते हुए स्वाति को देख बोली.

तोह स्वाति, जो कागज़ में चित्र बना रही थी वो लंगड़ाते लंगड़ाते मेरे पास आयी और मुझसे चिपक गयी.

"पिता जी~ जल्दी आना!!!" मेने स्वाति को मुस्कुरा के देखा और प्यार से अपनी बच्ची के सर्र पर हाथ फेरा.

काश मेरी बच्ची पहले जैसी होती. सड़क हादसे के बाद से उसका एक परर बिलकुल hi मुद चूका था. इसलिए, वो साधारण रूप से नहीं चल पाती थी. थोड़ा लंगड़ाती थी. मेरी फूल जैसी प्यारी बच्ची के लिए में कुछ भी करने को तैयार था.

फूल से याद आया, मेरी बच्ची चित्रकला में बोहत माहिर थी. उससे सबसे ज़्यादा फूल पसंद थे. अक्सर कागज़ में अलग अलग सुन्दर फूलो के चित्र बनाया करती थी. और में उससे अक्सर नए नए रंग लाके देता था.

उसके गालो को चूम कर में घर से बाहर निकला. कितने डॉक्टर्स को नहीं दिखाया था मेने स्वाति को. पर सब का जवाब यही रहता, की अब बच्ची के परर का कुछ नहीं हो सकता. साड़ी ज़िन्दगी वो ऐसी hi रहेगी.

पर में ऐसा नहीं होने देना चाहता था. मेरी बच्ची साड़ी ज़िन्दगी लंगड़ा के चलेगी? बिलकुल नहीं! कुछ भी हो जाए, में उससे उसका पुराना जीवन लौटा के रहूँगा.

और में निकल पड़ा...

शहर से दूर, काफी दूर आने के बाद, राह चलते लोगो से कई बार पूछने के बाद में उस जंगल में गया. थोड़ा भटका बीच बीच में, पर बाद में मुझे वो मिल hi गया.

लकड़ी का वो जर्जर पल. जो खायी के ऊपर बना हुआ था. और जंगल के दोनों भागो को जोड़ता था.





'ये पल तोह बोहत hi कमज़ोर प्रतीत होता है. कही गिर वीर गया तोह क्या होगा?'

सोचते हुए में सँभालते हुए आगे बढ़ा और पल की रस्सी को पकड़ पकड़ धीरे धीरे कदम बढाए मेने.

पर, कुछ भी नहीं हुआ. हाहाहा~

में तोह खामखा घबरा रहा था. ये पल तोह बोहत भार सेह सकता था. बिलकुल! यहाँ से लोग निकलते hi होंगे प्रायः तोह इसमें कोई शक hi नहीं की ये जर्जर होगा.

जंगल के दूसरे चोरर पर आते hi में निकल पड़ा अपनी तलाश में. पर आश्चर्य की बात थी की मुझे कोई तकलीफ नहीं गयी. जगह जगह लकड़ी के बोर्ड लगे हुए थे जो मुड़ने की दिशा बता रहे थे.

और जैसे hi में अंत तक पहुचा. मेने देखा की,

जगह जगह कुत्तिया बानी हुई थी रहने की. और ऐसा लग रहा था की जंगल में hi कई लोग बसने आ गए है.

"Y-Ye सब??" में तोह मंत्रमुग्ध होक रह गया था.

"क्या काम है बच्चा? में देख सकता हु. तुम मेरी hi तलाश में आये हो. है न?"

तभी, मेरे कानो में एक आदमी की आवाज़ पड़ी जिससे सुन्न के मेरे रौंगटे खड़े हो गए. सामने एक बड़े से पत्थर पर एक करीब 55-60 साल के बुज़ुर्ग आदमी बैठे हुए थे. बिलकुल, साफ़ सफ़ेद धोती कपडा पहने हुए.

"J-Jii! A-Aapko कैसे पता चला?" मेने पूछा.

उनके अगल बगल नीचे सब हाथ जोड़ के बैठे हुए थे. और कुत्तिया के पास, कुछ बच्चे थे जो आपस में खेल रहे थे. कुछ फल खा रहे थे, तोह कुछ अंदर hi सो रहे थे.

"मुझे हर्र बात का ज्ञान रहता है पुत्र! तुम बताओ! में जानता हु तुम समस्या में हो. पर फिर भी, में तुम्हारे मुँह से sunn'na चाहता हु."

मेरे तोह हर्र पल शरीर में रुए खड़े होते जा रहे थे. इन् सज्जन पुरुष को तोह सब पता था. इन्ही की तोह तलाश में में आया था यहाँ. आखिर मिल hi गए वो मुझे.

में हाथ जोड़ के उनके पेर्रो के पास आया,

"गुरु जी!!! आप से क्या छुपाना. और आप तोह सब जानते hi होंगे. आपको तोह ये भी पता था की में आपको ढूंढ़ने आया था. मेरी समस्या का निवारण बताइये गुरु जी! में आपके परर पड़ता हु. मेरी मदद करिये... मेरी मदद करिये..."

और में बेबस हो उठा.

"अरे बच्चा!!!" उन्होंने मुझे पकड़ के उठाया, "ये क्या करते हो? शांत! सब समस्या का हल बताऊंगा. पर पहले शांत. और अब विस्तार में बताओ."

"J-Jii!" में शांत हुआ और बोलना शुरू किया.

मेने जब अपनी पूरी बात गुरु जी को बतायी तोह वो कुछ देरर सोच में पद गए. में थोड़ा घबराने लगा. क्या वो मेरी मदद कर तोह पाएंगे न? मेने बोहत सुना था की गुरु जी ने बड़े से बड़े चमत्कार कर के दिखाए थे. तोह मेरी बच्ची की टांग तोह वो चुटकियो में सुधार देंगे. है न? और मेरे गिरते व्यापार का भी हल बता देंगे.

"हम्म~ में तोह जानता था ये होगा. बच्चा! तुम्हारे व्यापार में तुम्हारी गलती है."

"H-Huh?? M-Meri गलती? मेरी क्या गलती गुरु जी!?"

"तुम मैं से धंधा नहीं कर रहे हो. हर्र वक़्त चिंता में डूबे रेहतो हो. अपने ग्राहकों से नम्र व्यवहार में बातें करो. और हमेशा खुश रहो. फिर देखना तुम्हारे व्यवहार में कितनी तरक्की आती है."

कहते हुए उन्होंने मुझे एक फूल दे दिया. मेने बड़े hi संभाल कर उससे अपने रुमाल में रख लिया.

"और मेरी बच्ची, स्वाति का क्या गुरु जी?"

"हम्म! बच्ची को तुम्हे यहाँ लाना होगा. क्युकी में केवल कुदरत में hi रहता हु बच्चा! शहरी हवा मुझे पसंद नहीं. उससे यहाँ लेके आओ. उसका परर में सही कर दूंगा."

ये बात सुन्न जैसे में वही जम्म के रह गया. एक आस! एक आस जो मेरे अंदर अब तक बची हुई थी वो जैसे गुरु जी की बात सुन्न यकीन में बदल गयी.

मेरी स्वाति फिरसे ठीक हो सकती थी. जो काम डॉक्टर न कर सके वो गुरु जी करने वाले थे.

"गुरूउउ जीईईई!!!!!" में उनके पेर्रो पर गिर पड़ा.

में भावुक हो गया. और वही बैठे कुछ देरर बैठ गुरु जी के साथ समय गुज़ारा. जैसे जैसे में उनसे बातें करता जा रहा था. में जैसे नया ज्ञान प्राप्त कर रहा था.

उनकी बात मान में वह से निकला. और घर पहुचने में मुझे पूरा एक दिन बीत गया.

मेने उनकी दक्षिणा में जितना में दे सकता था उतना दे दिया. उनका कहना था की वो पैसो का एक रूपया नहीं लेते. जो की सच था. सारे पैसे उन् गरीब अनाथ बच्चो की देखभाल और खान पान में जाते थे. और उसी में वो सभी भी खाते थे और अपना जीवन जीते थे.

गुरु जी की बात मान, मेने वही किया. धंधे पर ध्यान दिया. और चमत्कार hi हो गया. मेरा धंधा जो ृक्क सा गया था वो एकदम से धड़ल्ले से ऊपर उठ गया. बिक्री चौगना हो गयी थी.

और तभी, एक दिन...

जब में अपनी गोदाम से शटर बंद कर बाहर निकला तभी एक इलो मेरे पास आकर रुकी.





में बस उससे hi देखता रहा. काम से काम 5-6 लाख की तोह होगी hi. और तभी शीशा नीचे हुआ और में अंदर क्या देखता हु??

"ाररीी???? K-Kishor??? तुम????"

किशोर! मेरे स्कूल में साथ में पढ़ा हुआ था. हम स्कूल ख़तम होने के बाद से बोहत hi काम मिलते थे. उसकी अपनी अलग दुनिया थी. उसका व्यापार इतना बड़ा था की कहने के किये मेरे पास शब्द नहीं थे.

अंदर सूट पहने बैठा हुआ था वह. कितना बड़ा आदमी बन्न चूका था वह. आज तक में उसके बंगले के अंदर भी नहीं गया था कभी. बस बाहर से देखा हुआ था.

"संजीव!!!" वो मुस्कुराया और बोलै, "काफी दिनों बाद मिल रहे है हम. कैसा चल रहा है धंधा?"

उसने अंदर से hi पूछा. मेने बुरा नहीं माना. वो मुझसे बात कर रहा था इतना सब होने के बावजूद, वही काफी था. काम से काम वो मुझे pehchaan'ne से कटरा तोह नहीं रहा था. वर्ण आज कल के रईस लोग अपने hi कल को भूल जाते थे.

"धंधे में एकदम से मुनाफा देखने को मिल रहा है. सब कुछ गुरु जी की दें है!" मेने कहा.

"गुरु जी?"

"हाँ! गुरु जी! बोहत hi सिद्ध पुरुष है. महान व्यक्ति. चमत्कार करते है वह. मेरा धंधा रुका हुआ था. उनके एक उपाय से सब कुछ जैसे बदल गया. ः~"

मेरी बात सुन्न मेने पल भर के लिए उसकी आँखों में चमक देखि.

"तोह... ये... ये कहा रहते है गुरु जी? कहा मिलेंगे? क्या नाम है इनका?"

"में बता नहीं सकता. तुम्हे खुद जाना पड़ेगा किशोर उनसे मिलने यदि मिलना है तोह. क्या बात है? क्या तुम्हे भी कोई समस्या है क्या? मुझे तोह नहीं लगता तुम किसी परेशानी में होंगे. भगवन का दिया सब कुछ है तुम्हारे पास."

"N-Nahii! मुझे... दरअसल! मुझे अपनी बेटी के बारे में... उसका भविष्य jaan'na था."

"ओह्ह्ह! मतलब करा बिटिया के बारे में? अरे ये काम तोह गुरु जी चुटकियो में करते है."

"सच में?"

"हाँ हाँ! मेने खुद आँखों से देखा है किशोर! तुम मेरे साथ पढ़े लिखे हो इसलिए तुमसे ये बात साझा कर दिया. वर्ण, गुरु जी के कारनामो की बातें बोहत hi काम लोग बताते है. क्युकी, गुरु जी ने मन कर के रखा हुआ है. उन्हें शहरी हवा पसंद नहीं. इसलिए वो इन् सब से दूर रहते है."

"ओह्ह्ह!" वो कुछ देरर सोचा और फिर बोलै, "क्या तुम मुझे इन् गुरु जी से मिलवाने ले चलोगे? बदले में मेरी तरफ से एक ऑफर है तुम्हारे लिए."

"हँ?"

"तुम मेरे दोस्त हो संजीव. हम दोनों पहले से एक दूसरे को जानते है. तुम्हारे मैं में भी आगे बढ़ने की इच्छा होगी. अपना व्यापार बड़ा करने की?"

उसने मुझसे पूछा. और फिरसे बोलै,

"में क्या कहता हु? मेने हाल hi में एक फैक्ट्री खरीदी है. वो फैक्ट्री क़र्ज़ के मारे बंद हो गयी थी. में अपना पैसा लगाऊंगा और कपडे के लिए मचिनेस लगवा दूंगा. तुम ये जो थोक में दुकानों में कपडे भेजते हो. इस से अच्छा ये नहीं की तुम खुद की एक पहचान बनाओ? एक ब्रांड!!! फिर तुम ऐसे में कुछ दुकानों में नहीं, बल्कि अलग अलग शहरों में अपने कपडे भेज पाओगे. क्या कहते हो? उसमे से 30% मेरा. बाकी पूरा 70% तुम्हारा रहेगा. और जो इन्वेस्टमेंट में अभी करूँगा. उससे तुम समय रहते धीरे धीरे चूका देना. कोई ब्याज नहीं लूंगा."

किशोर का दिया गया ऑफर सुन्न में तोह सन्न रह गया था. गुरु जी से एक बार मिल के hi आया था और करिश्मा देखो. किशोर खुद आके मुझे ऑफर दे रहा था.

"ाहः~ K-Kyu नहीं? B-Bilkul! मुझे मंज़ूर है किशोर! और तुम्हे गुरु जी से मिलना है न? तुम चलो मेरे साथ. में इसी शनिवार को निकलने वाला हु, अपनी बिटिया स्वाति को लेकर. बोलो? क्या तुम चलोगे?"

"तोह ठीक है. तोह मेरी बेटी करा... क्या उससे भी लेके चलना होगा?"

"बिलकुल! और चिंता मत करो. स्वाति भी रहेगी तोह करा बेटी बोर नहीं होएगी. ः~"

वो मुस्कुराया, मेरा हाथ मिलाया और उसने मुझे शनिवार को अपने घर पर बुलाया साथ चलने के लिए.

आज में ख़ुशी से फुला नहीं समां रहा था. एक के बाद एक खुशखबरी मुझे मिलती hi जा रही थी. और जल्द hi एक और मिलने वाली थी शायद. मेरी बच्ची स्वाति फिरसे सही ढंग से चलने वाली थी.

में घर पहुचा और जाते से hi मेने सुधा को पकड़ के उससे गोल गोल घुमाने लगा.

"हाहाहाहा~"

"अरे अरे?? ये... ये क्या कर रहे हो आप? में गिर जाउंगी. और क्या हुआ? कुछ बताइये तोह सही?"

जैसे hi मेने सुधा को साड़ी बात बतायी वो भी ख़ुशी में मेरे साथ झूमने लगी. हमारा परिवार अब से बस khush-haal जीवन जीने वाला था. में, सुधा और स्वाति!

सुधा मेरी सब कुछ थी. और स्वाति भी. ये दोनों hi मेरी जान थी. एक के बिना भी में जी नहीं सकता था.

देखते hi देखते, शनिवार आया और में स्वाति को लेके निकल गया. किशोर के घर पॅहुचते hi में तोह दांग रह गया. जितना बांग्ला बाहर से भव्य दीखता था. अंदर से तोह और hi गजब का था.

सोफे पर बैठे थे में और स्वाति. और फिर...

किशोर, एक शर्ट पंत में बाहर आया और उसकी बेटी करा एक प्यारी सी फ्रॉक पहने.

थोड़ी बोहत बातें हुई और फिर किशोर ने माधव, जो उसके घर में काम करता था उससे कुछ समझाया काम के बारे में और हम सभी निकल पड़े.

जंगल तक बाहरी रोड तक का सफर हमने किशोर की गाडी में किया. स्वाति इतना खुश थी कार में बैठने पर की मेने वादा कर लिया की में भी एक दिन कार लूंगा. उसमे सुधा और स्वाति को संग बैठा के यु घूमूँगा.

हम सभी जब उतरे तोह अंदर की ऑर्डर में उन्हें ले जाने लगा.





"संभल कर आना ठीक? वो दरअसल, गुरु जी रहते hi ऐसी जगह है की क्या करे." मेने कहा.

और आखिर हम उस पल पर पहुचे. धीरे धीरे आहिस्ता आहिस्ता हम आगे बढे. जैसा की मेने कहा था. पल मज़बूत था. बस दिखने में जर्जर लगता था. ः~

हम सही सलामत अंदर पहुँच गए. थोड़ी देरर आराम करने कुछ नीचे लगे पत्थरो पर बैठ गए. बीच बीच में में और किशोर अपनी अपनी बेटियों को गॉड में ले लेते थे.

"स्वाति दीदी? ये आप क्या बना रही हो?"

करा ने मेरी बच्ची से पूछा जो लकड़ी से ज़मीन पर कुछ बना रही थी.

"में? में ये फूल बना रही हु. केसा है?"

"बोहत सुन्दर है!!!" करा मुस्कुरायी तोह स्वाति भी खिलखिलाते हुए उसके संग और खुल के बात करने लगी.

और इधर किशोर...

*हफ़* *हफ़* *हफ़*

हाफ रहा था. तोह मेरी हस्सी चूत गयी, "हाहाहा~ क्यों बिजनेसमैन जी? इतने में hi थक गए? कहा गया वो स्कूल के ज़माने का जोश? इसलिए ज़्यादा कार में नहीं घूमना चाहिए. वर्ण शरीर को चलाने की आदत ख़तम हो जाती है." मेने कहा.

"ऐसा... ऐसा नहीं है! *हफ़* वो तोह बस... काफी दिन बाद... ऐसे... ऐसे आया हुआ न. इसलिए!"

"हाहाहा~" में फिर हिस्सा और सर्र हिलाते हुए हम सभी एक बार फिर उठे और अंदर जाने लगे.

जैसे hi हम वह पहुचे तोह वह कई लोग मौजूद थे.

"ये लीजिये पैसे! ये तोह आपको रखने hi होंगे में कुछ भी नहीं जानता. वर्ण में कभी दुबारा गुरु जी से मिलने नहीं आऊंगा."

कहते हुए एक आदमी ने नोटों की गद्दी से भरा एक छोटा सूटकेस गुरु जी के चेले के सामने कर दिया.

"पर... पर गुरु जी को पैसा नहीं चाहिए."

"अरे में जानता हु. पर यहाँ इन् बच्चो के लिए तोह में कुछ कर hi सकता हु न?"

और इतना बोल वो न जाने कितने पैसे थे उसमे पर पूरा सूटकेस वो गुरु जी के चेले रमन को थमा गया. और वह से हाथ जोड़ के निकल गया.

में तोह दांग रह गया था. इतना पैसा दे गया वह एक झटके में? जैसे पैसा नहीं, हाथ का मेल हो.

रमन ने हमे देखा और उसने फिर मायूसी भरा चेहरा बनाया और बोलै,

"माफ़ करियेगा! पर आज आप लोग गुरु जी से नहीं मिल सकते."

"हँ? N-Nahi मिल सकते से क्या मतलब है? हम बोहत दूर से आये है." मेने बोलै.

"बात वह नहीं है. गुरु जी किसी का इलाज कर रहे है. और ये बोहत hi गंभीर इलाज है. उन्हें आज पूरी रात लग जाएगी."

"H-Huhhh??? A-Aisa k-kya?? फिर..."

"माफ़ करना! आपको तकलीफ हुई. पर हर्र एक ज़िन्दगी ज़रूरी है."

उसकी बात सुन्न मुझे अंदाजा लगा की किसी की ज़िन्दगी का सवाल था. गुरु जी इलाज में व्यस्त थे. पर... पर मेरी स्वाति का क्या?

"तोह? तोह हम यही रुक जाते है. गुरु जी कल तोह स्वाति का इलाज कर पाएंगे न?"

"देखिये! आप खामखा तकलीफ ले रहे है. आप जाइये! ऐसा कीजिये, आज की रात जंगल के बाहर जाके किसी होटल या बाहर रोड में बूढी महिला के घर में गुज़ार लीजिये. और सुबह आ जाइएगा?"

मेरा मैं तोह नहीं था पर उसकी बात maan'ne के अलावा और कोई चारा नहीं था.

तभी अचानक hi कुत्तिया का दरवाज़ा खुला और गुरु जी ने अंदर से hi झाका.

"G-Guruuu जीई!!!" में अपनी जगह से चिल्लाया.

"ससष्ठ~" उन्होंने शांत रहने के लिए कहा. उन्होंने सिर्फ मुझे देखा और किशोर को.

क्युकी, करा और स्वाति दोनों hi दूसरी कुत्तिया के पास बैठी हुई थी.

"में जानता हु तुम बोहत बेसबर हो संजीव!! और में तुम्हे भी जानता हु. किशोर!!!"

एक बार फिर, किशोर के साथ साथ में दांग रह गया. गुरु जी को सब पता रहता था.

"पर स्थिति बोहत hi नाज़ुक है इधर. तुम दोनों अभी वापस लौट जाओ. किशोर!!!"

"गुरु जी! मेरी बेटी करा! उसका भविष्य... यदि आप आज नहीं बता सकते तोह क्या? मेरे घर पर... आप आएँगे? कभी बाद में?"

"हम्म! ठीक है! में आऊंगा. आज तुम दोनों मेरे यहाँ से खाली हाथ जा रहे हो इसलिए... में शहर आऊंगा. और संजीव, तुम्हारी बेटी का इलाज भी तभी करूँगा."

और इतना बोल वो अंदर चले गए. इधर रमन ने मेरी बेटी को बुला के उससे एक फूल थमाया और हम सभी बेमानन वापस लौटने लगे.

पर एक बात की ख़ुशी थी. वो ये की, गुरु जी शहर आने वाले थे.

हम देखते hi देखते पल के पास पहुचे. स्वाति काफी थक चुकी थी. करा भी.

"A-Arree?? P-Pita जीई!!!" वो चिल्लाई.

"क्या हुआए?"

"पिता जी! उनका दिया हुआ फूल!!! कही... कही गिर गया शायद. मेने फ्रॉक के जेब में hi रखा था."

"ओह्ह होऊ~ तुम भी न... तुम चलो. में देख के आता हु. नहीं मिला तोह उनसे एक दूसरा मांग लाऊंगा."

मेने किशोर को स्वाति को ले जाने दिया और में दौड़ता भागता हुआ उस फूल को रास्ते में ढूंढ़ने लगा.

और बेशक, कुछ hi दुरी पर मुझे वो ज़मीन पर पड़ा हुआ मिल गया. उसका अच्छे से साफ़ कर उसके परर पद मेने उससे हाथ में थामा और वापस आया.

वापस आया hi था की मेने देखा स्वाति और बाकी सभी पल के दूसरे साइड बस पहुचने hi वाले थे.

में आगे बढ़ा और तभी...

*Khaaaaaacchhhhhhhhhhh*

"H-Huhhh???"

"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa........!!!!!!"

"ीाआररररररग्ग्घहहहहहहहह......!!!!!!"

"N-Nahi!"

किशोर, करा और स्वाति जिस पल से जा रहे थे. वो...

उसका चोरर उनकी तरफ से जो कैसा हुआ था. वो टूट गया!!!!

किशोर सबसे आगे था. उसके साइड से करा और स्वाति पीछे.

पल एक झटके में नीचे गया और किशोर समेत करा और स्वाति भी...

"Swaaaaatiiiiiiiiiiiii!!!!!!" में चिल्लाया...

पेर्रो टेल ज़मीन खिसक गयी थी मेरे. कलेजा बाहर आने को हो रहा था. दिल ऐसे धड़क रहा था जैसे अभी पहात के बाहर आ जाएगा. सास अटक गयी थी पल भर के लिए मेरी...

पर...

पर शायद ये किस्मत थी.

क्युकी...

किशोर आगे था और गिरते वक़्त वो बच गया. पर करा और स्वाति नहीं. किशोर आधा हवा में नीचे लटका हुआ था. और उसने एक हाथ से करा को थामे हुए था. और दूसरे से... मेरी स्वाति को.

"Maaaaaaaaaaaaa..... पिताआआआ jiiiiiiiiii~" स्वाति चिल्लाई.

"स्वआआआआट्टीीीी!!!!!" में अपने घुटनो पर गिर पड़ा.

"P-Papaaaaaaa~" करा ासु बहाते हुए जैसे hi नीचे की ऑर्डर खायी में देखि. वो बेहोश हो गयी.

"ुग्ग्ग्ग्हःहःहः!!!!" किशोर बोलने की हालत में नहीं था. उसका पूरा चेहरा लाल हुआ जा रहा था.

उसके दोनों बाज़ुओ में इतनी ताक़त नहीं थी की वो एक बार में दोनों को ऊपर खींच सके. क्युकी, वो खुद भी आधा लटका हुआ था.

"N-Nahiiii~" मेरे शरीर में रौंगटे खड़े हो गए. मेरी बच्ची!!!

M-Mein में... क्या करू?? क्या करू?? क्या कर सकता था में? पल टूट चूका था. दूसरी ऑर्डर कैसे जाता?

नाहीईई!!!

"K-Kishoooorrrrrr!!!!! ऊपर... ऊपर खींचो... जल्दी... मेरी बच्ची को... करा को... जल्दीई!!!!" में बस चिल्ला hi सकता था.

अपना पूरा गाला पहाड़ के में चिल्लाता रहा. अपने आप ासु बहने लगे मेरी आँखों से. ऐसा लग रहा था किसी भी वक़्त बेहोश हो जाऊंगा. मेरी बच्ची!!! स्वाति!!!

समय, रेट की तरह फिसलता जा रहा था. और वैसे hi किशोर के हाथो से करा और स्वाति भी.

"N-Nahiiii!!! किशोररररर!!! उन् दोनों को ऊपर खींच हरामखोर.... क्या कर रहा है टूउउ????" में इस बार गुस्से में चिल्लाया.

और तभी...

"हँ??? ये किशोर क्या बोल रहा है? नहीं!!! N-Nahiii!!! Nahiiiiiiiiiiiiiiii"

दूसरी ऑर्डर से किशोर मेरी ऑर्डर देखा. उसकी आँखों में ासु थे. और वो कुछ बोल रहा था. बोहत धीरे.

पर जैसे में उसके चेहरे हाव भाव और उसकी हरकत से पढ़ पा रहा था की वो क्या कह रहा था.

"M-Mujhe माफ़ कर देना संजीव!!!"

'नहीं!!! ये नहीं हो सकता. ये किशोर ऐसे समय पर मज़ाक क्यों कर रहा है? ये पागल है क्या? इससे तोह दोनों बच्चियों को ऊपर खींचना चाहिए. Y-Ye मेरी तरफ देख के रो क्यों रहा है? Y-Ye पागल हो गया है.'

किशोर का तोह नहीं पता. पर में ज़रूर पागल हो रहा था. मेरा दिमाग काम करना बंद करने लगा था.

और तभी...

"Eaaaaaaarrrrrrrrrrggghhhhhhhhhhh.."

"हँ!!!!"

एक गूँज पूरे जंगल में फेल गयी. आस पास के पक्षी पेड़ो से उड़द के भाग गए. मेरे शरीर से जैसे प्राण निकल चुके थे.

ख़तम! सब कुछ ख़तम!!!

में अंदर से मर्डर चूका था. और में वही आँखें खोले बस घुटनो के बल बैठा रहा. किशोर क्या बोल रहा था मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था.

मेरी बच्ची स्वाति!!!!

किशोर ने अपना हाथ... जो उससे पकडे हुए था...

चोरर दिया था....

स्वाति की चींख... वो आखिरी चींख थी...

किशोर!!!! उसने अपने दूसरे हाथ से करा को पकड़ा और दोनों हाथ से पकड़ उससे ऊपर खींचा. अपनी पीठ पर लादा और वह से भागते हुए निकल गया.

में... मुझे पता नहीं, ये क्या अनुभूति थी. ऐसा लग रहा था में सब कुछ खो चूका हु. में ज़िंदा भी नहीं हु. मुर्दा लाश बन चूका था जैसे में.

स्वाति... स्वाति... मेरी बच्ची... गयी!!! K-Khaayi में...

"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrghhh~"

मेरी चींख जंगल में गूँज गयी. में वापस अंदर की ऑर्डर भागा. गुरु जी के पास. अंदर पहुचा तोह...

वह कोई नहीं था. एक शख्स का naam-o-nishaan नहीं था.

'Y-Ye क्या हो गया???? K-Kaha गए s-sab??? S-Sab तोह इधर... इधर hi थे...!! K-Kaha गए सब????'

"गुर्र्रूण जीईई!!!!" में चिल्लाता रहा. पर मुझे कोई न मिले. सब के सब गायब हो चुके थे.

में पागल हो रहा था. पसीने से पूरे कपडे भीगे हुए थे. किसी भी वक़्त मुझे दिल का दौरा भी आ सकता था.

मेरी बच्ची!!!! स्वाति के बारे में सोच में रास्ता ढूंढ़ने लगा. नीचे जाने के लिए.

कही न कही से तोह कोई रास्ता मिलेगा hi. रात होने को आ गयी थी.

में ढूंढ़ता रहा. गिरता रहा, भिड़ता रहा. खरोंचे मेरे शरीर पर बिखर गयी. पर में रुका नहीं. भागता रहा.

जैसे तैसे कर, में लटक लटक के, जानलेवा रास्तो से नीचे पहुचा. और स्वाति को ढूंढ़ने लगा. में जानता था की ऊपर इतनी उचाई से गिरने पर क्या होता था. फिर भी, में प्रार्थना करता रहा.

'हे भगवान्! मेरी बच्ची... मेरी बच्ची को बचा लेना. उससे कुछ न हुआ हो. उससे बचा लेना... उससे बचा लेना... उससे बचा लेना...'

इसकी ृत्त लगाए, में बढ़ता रहा. रात हो चुकी थी. ठीक से कुछ नज़र नहीं आ रहा था. और तभी... मुझे कुछ आवाज़ें सुनाई दी.

*क्रर्र्रणणछहहह*

*मुउउऊँणक्कछहः*

"H-Huhhhh??" मेने झांक के दूर देखा तोह...

मेरी रूह काँप गयी. और मेरा विश्वाश, उसी पल भगवान् पर से उठ गया.

में किसी मुर्दे के भाति वही जम्म गया था. मुझे इतना बड़ा झटका लगा था की मुझे ताजुब हो रहा था की में होश में कैसे था अब तक?

सामने... दूर...

लकड़बग्घे... W-Wo... वो... वो कुछ खा रहे थे.

M-Meri नज़रे जैसे hi नीचे गयी.

*बेदुम्प* *बेदुम्प*

मेरा दिल बाहर आने को हो गया. W-Wo...

स्वाति!!!

मेरी आँखों के सामने मेरी ज़िन्दगी उजाड़ चुकी थी. मेरी बच्ची!!!! उसकी इतनी दर्दनाक मौत देख में पागल हो चला.

मैं किया की उनके बीच जाऊ और उन् लकड़बग्घों से भीड़ उठु और मर्डर जाऊ साथ में.

M-Mujhse कुछ भी देखा न गया. मेरे परर कांपने लगे. पर में बेहोश नहीं हुआ. में जानता था यदि यहाँ में गिरा, तोह... तोह घर पर सुधा का क्या होगा?

में भागा!!! सुधा!!! उसको कौन संभालेगा? गिरते पड़ते चोट खाते में जैसे तैसे पहुचा. में हैरान था की अभी तक मेरा मानसिक स्वास्थ ठीक कैसे था?

मेने दरवाज़ा पीटा. पर सुधा ने नहीं खोला.

मेने फिर पीट पीट के दरवाज़ा तोड़ दिया. और तोड़ते hi झटके से में अंदर आया.

पर अंदर आते hi मेरा चेहरा किसी चीज़ से टकराया.

आँखें खोल मेने देखा तोह...

'हँ?? P-Perr???'

मेरी नज़रे ऊपर गयी और...

'N-Nahiiiiii! नाहीइ! नहीं नहीं नहीं नहीं... Nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii!!!!!!!!'

सुधा... वो...

वो ऊपर पंखे से लटक रही थी.

किशोर के घर से... किसी ने साड़ी बात उससे बता दी थी.

और बस... मेरा इंसानी शरीर इतना hi झेल सकता था. में उसी वक़्त बेहोश हो गया.

में महीनो तक अस्पताल में भर्ती रहा. इस हादसे को महीनो गुज़र चुके थे.

में न कुछ बोलता था न कुछ करता था. मेरी दो जान जा चुकी थी. सुधा स्वाति के जाने का ग़म सेह न पायी और मुझे चोरर चली गयी.

यहाँ में सपने सजाता था. कार में उन्हें घुमाने के. धंधा बढ़ाने के.

"क्यों सुधा?? क्यों चली गयी मुझे चोरर के??? क्यूँउउउ???" में सुबुक्त रहा.

वही दूसरी ऑर्डर... में क्यों ज़िंदा था?

हाँ! में भी मर्डर जाता हु. हाँ! यही सही रहेगा! में ज़हर खा लेता हु. नहीं नहीं! में फांसी लगा लेता हु. नहीं!!! खुद को जला लू? नहीं!!! हाँ! में भी उस पल से कूद के मर्डर जाता हु. हम्म~

पर तभी... मुझे उसका ख़याल आया.

किशोर!!!!

और कुछ hi हफ्तों के बाद, में उसके बंगले के बाहर मौजूद था.

सब कुछ इसी के कारण हुआ था. न वो मेरी बच्ची के हाथ को चोररटा न मेरी स्वाति मुझसे जुड़ा होती. और न hi मेरी प्यारी सुधा... मुझे चोरर कर जाती. बड़ी मुश्किल से अपनी हिम्मत बाँध पाया था में. अपना बदला लेने की. वर्ण में खुदखुशी कर चूका होता.

मेरे पास इतनी हैसियत नहीं थी अभी और न hi इतनी औकात थी की में किशोर को मार सकू. पर...

उससे एक झटका तोह दे hi सकता था.

में अंदर घुसा. उसके घर से में अब परिचित था. बाहर एक माली गमलो में रंग लगा रहा था.

अपने जेब में छुपी हुई छुरी को मेने निकाला और अपने पीछे कर लिया.

में दीवार फांद के अंदर आ गया. माली गाना गुनगुना रहा था. मेरी स्वाति... उससे फूल कितने पसंद थे. चली गयी वह. चली गयी...

'नहीं!!! में इस वक़्त भावुक नहीं हो सकता.'

सोच में आगे बढ़ा और उस माली के मुँह को थाम...

"मममपहहहह????"

मेने उसकी आवाज़ दबायी और...

*स्पलल्लूऊऊऊररर्त्तत्ततत्तत्त*

चुर्री उसके सीने में घुसेड़ दी.

फिरसे निकाली और फिर घुसेड़ दी. उससे एक पल न दिया मेने विरोध करने का.

रंग जो नीचे पड़ा था ब्रश के साथ. मेने उठाया और तभी मेरी नज़र वही पड़े एक अंग्रेजी नेवसपपेर पर पड़ी.

जिसकी हेडलाइंस में कुछ शब्द लिखे हुए थे.

"प्रोटेस्टर्स जैलेड देय तो िनप्प्रोप्रिएट स्लोगन्स."

और मुझे जैसे नाम मिल चूका था.

में बाहर निकला. और वही ृक्क गया. अंदर करा की चिल्लाने की आवाज़ मुझे कुछ देरर में hi सुनाई दे गयी.

मेने अपनी जगह बदली और दीवार के ऊपर चढ़ झांक के अंदर देखा तोह पाया की...

"हँ!???"

'गुरु जी?? W-Wo यहाँ क्या कर रहे थे? और उस दिन वो अचानक गायब कैसे हो गए थे सब के सब जंगल में.' मेरे मैं में सवाल मंडरा रहे थे. और मेने तय कर लिया, की में उनका पीछा करूँगा.

अंदर किशोर की हालत खराब थी. अंदर दीवार पर एक hi चीज़ लिखी हुई थी...

"किल्ड बी स्लोगन!!!"

और में वह से निकल एक मोड़ पे छिप गया.

ये मेरे बदले की पहली शुरुआत थी. जब तक में किशोर को वही दर्द, वही पीड़ा उससे नहीं दे दूंगा. तब तक मेरा गुस्सा शांत नहीं होगा.

कुछ देरर बाद गुरु जी और वो रमन बाहर निकले, में चेहरे पर गमछा बाँध उनका पीछा किया.

बस में वो चढ़े तोह में भी चढ़ गया. न जाने किधर जा रहे थे. पर शहर से थोड़ी दूर एक जगह बस आ कर रुकी.

में उनसे छिप कर उनका पीछा करता रहा और फिर एक जगह जा कर वो बैठ गए. दीवार से छिप कर में उनकी बातें sunn'ne लगा.

"गजब हो गया गुरु जी! मान गए आप को. उस करा के चक्कर में कितने पैसे ैथ लिए आपने हाहाहा~"

"हम्म!"

"पर उसका क्या हुआ गुरु जी?"

"किसका?"

"वो एक संजीव नाम का था न?"

"क्या पता? मुझे क्या करना? पैसे से मतलब है हमे."

"वो अपनी बेटी को लेके आया था न उस दिन!? गुरु जी?"

"हम्म! उससे वह से उस दिन भगाना ज़रूरी था. साला इतने पैसे आये थे उस दिन. में बैठ के अंदर जिन्न रहा था और ये नमूने उसी समय आ गए. हमे वो इलाका जल्द से जल्द खाली करना hi था. इसलिए उसको ये बोल दिया था मेने की में शहर आऊंगा. और वो तोह में आया hi... हाहाहा~ उस दिन मेने झांक के जब किशोर को देखा था. तब hi समझ गया था की ये रईस है. हाथो में महंगी घडी, महंगे जूते, पंत शर्ट. तोह उसको तोह लूटना बनता hi था न."

"हम्म! क्या बात है! उन् बच्चो का क्या?"

"बच्चो का क्या?"

"हम उनके नाम पे hi पैसे लेते है न..."

"हाँ तोह? वो तोह अनाथ वाले है. उन्हें कुछ देरर के लिए में अपने इलाके में ले आता हु. बस! बात ख़तम! उनको सारे दे बैठूंगा तोह मेरे पास क्या बचेगा? हाहाहाहा~"

"हाहाहाहा~"

'कह दो की ये झूठ है. कह दो कोई की ये झूठ था जो मेने सुना था.' में उन् दोनों की बात सुन्न के सन्न रह गया था.

न जाने कितने और झटके मुझे लगने बाकी थे.

मेरे हाथ परर काँप रहे थे. इस बार डर से नहीं. गुस्से से.

"अच्छा तुम सुनो! में अंदर घर में हु. ये कुछ पैसे लेके जाओ. वह वो अनाथ आश्रम का जो प्रधान है. उससे दे देना. ठीक है."

"ठीक है गुरु जी!"

रमन गया. और गुरु जी अंदर गए. और में...

में अपनी चुर्री निकाल के अंदर चल दिया गुरु जी के घर की ऑर्डर...

वो मेरी आहात से परे अपने काम में लगे हुए थे. और में धीरे धीरे बढ़ता रहा.

उन्हें झटके से दबोचा और...

"मार डालूंगा तुझे आज मेनन... हराम खोरररररर!!! आआआआआ~"

और...

*स्पलऊऊरररत्तत्ततत्तत*

*सप्लररररटटटटटटट*

*स्स्स्सस्प्प्प्पललुऊरररतत्तत्त*

चाक़ू पे चाक़ू मारता रहा में. गुस्से में उसके सीने में. ये कोई गुरु जी नहीं था. ये तोह ढोंगी था. इसने मेरा सब कुछ लूट लिया था.

तब तक मारता रहा में उससे जब तक मेरे चेहरे पर उसके सीने से उछले खून के दाग न चढ़ गए.

और में... अपने अंदर बदले की आग लिए. वह से फरार हो गया.

एक साल बाद जब में लौटा तोह मेरी मुलाक़ात उस से हुई.

"क्या नाम है तुम्हारा?"

"A-Aashu!!!"

में मुस्कुराया, "आज से तुम मेरे साथ काम करोगे."

"मुझे बदला लेना है."

"मुझे भी... तुम चिंता मत करो बच्चे. में तुम्हे तुम्हारा बदला दिलवाऊंगा."

और मेने एक बात सीखी अपने इस मुकाम को बनाते बनाते.

तुम खुद HI, खुद के भगवान् होते हो. कोई और नहीं!!!!!!

'किशोर!!!! जैसे तुमने मुझे दर्द दिया. मुझसे मेरा सब कुछ छीन लिया. वैसे hi... वैसे hi में भी तुम्हारे साथ वही करूँगा. वहीइ!!!'

***

20 इयर्स लेटर...

कुछ ऐसी थी स्लोगन की दास्ताँ...

हाथ को दबाये वो खून बंद करने की कोशिश कर रहा था पर कोई फायदा नहीं हो रहा था.

'मुझे यहाँ से जल्द से जल्द... हँ????'

वो सोच hi रहा था जब उससे पेड़ पौधों में कुछ हलचल सी होती नज़र आयी और उसकी आवाज़ आयी.

स्लोगन : K-Kaun है????

वो उठ के खड़ा हो गया. और अभी वो आगे बढ़ पाटा तभी...

*Poooooooooooooowwwww*

"अअअअअरररह्ह्ह्हह्ह्ह्ह"

एक पंच राइट साइड से अचानक hi आके उसके गाल पर पड़ा. और वो सीधा ज़मीन पर जा गिरा.

ऊपर उठ उसने देखा तोह...

वीर!!!!!!

स्लोगन : T-Tuuuuu????? तू इधर....!!!!!

वीर (स्माइल्स) : हाँ में!!!

स्लोगन ने अपना जेब टटोल रिवाल्वर निकाला और बिना कुछ कहे सीधे वीर को शूट कर दिया.

*बाजआनंणगगगगगगगग*

पर...

*वहूऊऊऊसस्शह्ह्ह्ह*

स्लोगन : हहहहहहह???????

वीर एक झटके में अपनी पोजीशन से हट गया.

स्लोगन (स्क्रीम्स) : कहा गया वीर??? साअम्ने आआ!!!!! आज में किसी से नहीं दररने वाला.... बाहर निकल!!!!

और उसकी ख्वाइश जैसे वीर ने सुन्न ली, पीछे से एक ज़ोरदार किक आयी और उसकी बैक पर पड़ी.

"ुग्ग्ग्ग्हःहःहनननन"

वो फिरसे गिरा.

वीर : आज तू... कुत्ते की मौत मरेगा!!!

स्लोगन (उठाते हुए) : एक बात याद रखना वीर!!!!!! अंडरवर्ल्ड में... इंसान की जान एक मच्चर की जान के सामान होती है. तू मेरा कुछ...

*बायअंगगगगगग*

स्लोगन : हाआआअह्ह्ह्ह??!? गवाकककककहहहहहह....

वो बोल रहा था पर...

वीर ने फायर कर दिया था. बुलेट स्लोगन के पेट को चीरते हुए अंदर समां गयी.

उसके हाथ से गन छिटक कर गिर गयी और वो खुद लड़खड़ाते हुए उस खायी की ऑर्डर जाने लगा.

*बायअंगगगगगग*

"हाआआअह्ह्ह्ह हूउउउउउ~"

पीछे से एक और बुलेट जो की वीर की आखिरी बुलेट थी वो आके उसके शरीर में घुस गयी.

वो लड़खड़ाते हुए फिर भी बढ़ता रहा. बिलकुल वैसे hi... जैसे उसकी प्यारी स्वाति लड़खड़ाया करती थी.

"स्वआटीई... हाहह हहहह हहह S-Sudhaaa..."

स्लोगन का प्लान करा को इसी तरह पल से गिराने का था. अपना बदला लेने के लिए. पर... ये उसकी बदक़िस्मती थी जो उसका पाला वीर से पद गया.

वो लम्बी लम्बी सास लेते हुए बढ़ता रहा. चोरर पर पॅहुचते hi उसने अपनी शर्ट की जेब से एक ब्रश निकाला.

ये वही ब्रश था, जिस से उसकी स्वाति चित्र बनाया करती थी. और यही कारण था की स्लोगन फ्लोरल शर्ट्स पहना करता था. फूलो वाली. क्युकी स्वाति को वो पसंद थे.

चोरर तक आते hi उसका परर फिसला...

वीर आगे बढ़ा पर तब तक...

"S-Swatiii~" स्लोगन का शरीर उसी गहरी खायी में गिर गया.

वीर दौड़ते हुए आके नीचे झाका. तोह उससे बस, स्लोगन का शरीर, गहरे अँधेरे में गायब होता हुआ नज़र आया.

*डिंग*

[Mission : Kill Slogan at all cost has been completed.]

[3000 points have been rewarded.]

*डिंग*

[System has reached level 6.]

*डिंग*

[System's layout has been upgraded]

[Shop prices and Quest hunt prices has been increased.]

*डिंग*

[Past illustration has been upgraded.


बायो - यू कैन नाउ सी थे पास्ट. No नीड तो रीड आईटी.]

[Past illustration function is invoked.]

[Do you want to see Slogan's past???]

बिना कोई देरर किये वीर ने यस को सेलेक्ट कर दिया.

और एक के बाद एक, स्लोगन की साड़ी मेमोरीज, उसका पास्ट सिस्टम ने सब दिखा दिया. वीर केवल मौन रहा. पर उसकी आँखों से ासु, अपने आप निकल रहे थे.

[It's been quite a bit time... Master!!!?]

वही दूसरी ऑर्डर... जंगल की रोड वाले इलाके पर. जहा हलकी ुचि चोटियां थी दूसरी साइड पर उसी के ऊपरी इलाके पर...

एक लड़की कड़ी हुई थी. हवा में लहराते बाल और अगले hi पल...

वो अँधेरे में वही मुड़ते हुए लुप्त हो गयी.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

ये 6क वर्ड्स के ऊपर था. और पूरा पास्ट दिखा दिया है. होप काफी चीज़े क्लियर हो गयी होंगी.

तोह, लिखे ठोकने का यारा और रेवोस रखने का. भूलने का नहीं. और यही पे समाप्त होता है स्लोगन अर्च. फेमिग्लिआ अर्च चलेगा अब. और कुछ उपदटेस के बाद हाउस ऑफ़ किलर्स अर्च शुरू होएगा.

बने रहिएगा.


धन्यवाद! ✨
 
इंडेक्स है बीन अपडेटेड.

गाइस! होपफ़ुल्ली, ये अपडेट आप सभी बोहत hi बारीकी से पढोगे. बिकॉज़ थिस अपडेट कनेक्ट्स मान्य पास्ट इवेंट्स. इससे पढ़के पुराने जो कुछ डॉब्टस है वो क्लियर हो जाएंगे. आराम से पढ़ना इसलिए. जल्दबाज़ी में नहीं!

अन्य्वयस, कीप सपोर्टिंग! ✨
 
अपडेट - 77 ~ प्रेपराशंस!

[Harr baar thodi mega update dunga bhai! :redface: ]

अब तक...

[Do you want to see Slogan's past???]

बिना कोई देरर किये वीर ने यस को सेलेक्ट कर दिया.

और एक के बाद एक, स्लोगन की साड़ी मेमोरीज, उसका पास्ट सिस्टम ने सब दिखा दिया.

[It's been quite a bit time... Master!!!?]

वही दूसरी ऑर्डर... जंगल की रोड वाले इलाके पर. जहा चूतिया थी दूसरी साइड पर उसी के ऊपरी इलाके पर...

एक लड़की कड़ी हुई थी. हवा में लहराते बाल और अगले hi पल...

वो अँधेरे में वही मुड़ते हुए लुप्त हो गयी.


अब आगे...

आखिर अंत हो गया. उस शख्स का, जिसने वीर को इतना परेशान कर के रखा था, जो उसकी जान के पीछे पड़ा हुआ था. वो, अब इस दुनिया से चल बसा.

और ये सब किसने किया? वीर ने, खुद ने.

इतनी मशक़्क़त के बाद, आखिर वो स्लोगन को ोटस्मार्ट करने में सफल हो hi गया. और उस से उसका पीछा चूत सका. क्या hi बात थी. स्लोगन की मौत बिलकुल उसी तरह हुई जिस तरह उसकी बेटी की हुई थी. दोनों hi उसी खायी में जा गिरे. शायद अब वो अफ्तेर्लिफे में एक दूसरे के साथ होंगे!?

इधर वीर एक उदासी में इस वक़्त अपने कमरे में लेता हुआ था.

उसका मैं बोहत hi मायूस था. स्लोगन को जंगल में ढूंढ के उसने उसका अंत तोह कर दिया था. पर सवाल था की वो स्लोगन को जंगल में ढूंढ कैसे पाया?

सिंपल सी बात थी. जब वीर ने स्लोगन को गोली मारी थी, तोह स्लोगन के हाथ से खून बहना शुरू हो चूका था. फिर जिधर जिधर वो भागते हुए गया. खून की एक ट्रेल बनाता गया.

भले hi वो खून अँधेरे में न नज़र आये. पर वातावरण में खून की गंध तोह फेल hi गयी थी. खून में आयरन की मात्रा तोह होती hi है. और उस गंध को हर्र कोई जानता है की वो किसी रहती है. वीर के सेंसेस आलरेडी 120% पर थे. इन्क्लूडिंग हिज सेंस ऑफ़ स्मेल. भला ऐसा कैसे हो सकता था की उससे खून की गंध न आये!?

यही कारण था की वीर ने बड़ी hi आसानी से स्लोगन को लोकेट कर लिया था. Beowulf's ब्लेस्सिंग्स के समय समाप्त होने से पहले hi.

उस रात वीर ने Beowulf's ब्लेस्सिंग्स का इस्तेमाल पूरे 35 मिनट्स के लिए किया था. चाहे वो मैथ्यू से लड़ाई हो, या चाहे स्लोगन से. सब कुछ इन्ही 35 मिनट्स के अंदर हुआ था.

भले hi उसने इस बार थोड़े कण्ट्रोल में फाइट की थी. पर फिर भी, उसके इस्तेमाल के बाद वीर पूरा ेक्सहॉस्टेड हो चूका था. वो काफी देरर तक उसी खायी के पास लेता रहा. जब जस्सी और उसकी टीम अंदर आयी तब जा के उन् लोगो ने वीर को उठाया था.

थैंक्स तो कारन, जिसने ये बता दिया था की वीर अकेले अंदर गया हुआ था. और वो फिर उससे ढूंढ़ने अंदर आ पाए.

जस्सी और बाकी सभी ने उस रात वीर को एक अलग hi नज़रिये से देखना शुरू कर दिया था. क्यों? आफ्टर आल, वीर ने स्लोगन जैसे व्यक्ति का अंत किया था. और ये कोई साधारण बात नहीं थी. उस रात हुई उनके बीच कन्वर्सेशन, वीर को अच्छे से याद थी.

जस्सी : तुम ठीक तोह हो?

जस्सी ने वीर को उठाया और उससे सहारा दिया.

वीर : हम्म! पर मुझसे चला नहीं जा रहा है. ी don't क्नोव व्हाई... शरीर की पूरी एनर्जी जैसे गायब सी हो गयी है.

जस्सी : Don't वोर्री! में तुम्हे कैर्री कर लूंगा. और स्लोगन? वो कहा है?

वीर : ी किल्ड हिम.

जस्सी : हहहहह???

रघु : K-Kyaaa??

वीर : ी किल्ड हिम! और... वो उस खायी में जाके गिर गया.

जस्सी : T-Tumne उससे मारा? तुमने?

वीर : हम्म!

जस्सी : Y-Ye...

वीर : व्हाट? यू गाइस... तुम सब मेरी कंप्लेंट तोह नहीं करने वाले न पुलिस में? हाँ?

जस्सी : ेहठ?? ऑफ़ कोर्स नॉट!!! बल्कि, हम तोह तुम्हारे शुक्रगुज़ार है. No! इनफैक्ट, यदि तुम्हारा ज़िक्र होता भी है किसी इन्वेस्टीगेशन में तोह हम तुम्हारा नाम आने hi नहीं देंगे.

वीर (शिघ्स) : थैंक्स!

जस्सी : तुम्हे रेस्ट की ज़रुरत है. टीम! वापस चलो! यहाँ से निकलने का टाइम आ गया.

जस्सी ने वीर को कारन को थमाया और उससे ले जाने के लिए कहा.

रघु : क्या बात है? तू कुछ परेशान लग रहा है?

जस्सी : हँ? N-Nahi! कुछ नहीं! चल!

'आखिर वो क्या था??? I'm सूरे मेने उचाई पर वो साया देखा था. क्या वो कोई जानवर था? समझ नहीं आ रहा.' जस्सी अपने मैं की गुत्थी मैं में hi लिए आगे बढ़ा.

और कुछ इसी प्रकार वीर अपने घर लौट पाया था. सवाल तोह कई पूछे थे रागिनी ने उस से घर में. पर कारन ने मटर संभाल लिया था. उसने न जाने कहा की कहानी बनायी ों थे स्पॉट और वीर को सवालों से बचा लिया था. पर फिर भी, कल बाल बाल बचा था वीर रागिनी के हाथो से. वर्ण पकड़ा जाता. उससे याद है कारन ने कैसे ऑलमोस्ट उसकी गांड मरवा hi दी थी.

कार से उतारते hi, कारन उससे संभाल के घर के अंदर लाया था और लाते hi रागिनी के सवाल शुरू हो चुके थे.

रागिनी : वीएररर??? कहा थे तुम? कब से फ़ोन लगा रही हु. और टाइम देखा है? रात के 2 बज रहे है वीर. तुम्हे पता है यहाँ सब कितनी चिंता में थे? एक फ़ोन तोह कर देते वीर? में थोड़ी तुम्हे मन कर देती. It's जस्ट... घबराहट होने लगती है इधर. और आप महाशय??? आप तोह कारन हो न? वीर के नए दोस्त? फिर आप ने वीर को क्यों नहीं समझाया? और एक मिनट? आप क्या कर रहे हो इधर? वीर तोह अकेले घर से निकला था. हँ??

कारन : अहःअहः~ भाभी जी! दरअसल... वो हुआ ये था की...

'फुसक्ककककक!!! क्या हुआ था?? क्या हुआ था? पूरा फुल स्केल अटैक हुआ था. बूत ी कन्नोत तेल्ल हेर तहत. फुकककक! कुछ सोच कारन!!!' कारन मैं में खुद से सोचा. बहाना तोह देना था कुछ न कुछ.

कारन : भाभी जी! में hi वीर को ले गया था एक्चुअली. एहम! मेरे फ्रेंड की पार्टी थी एक. तोह मेने सोचा अकेले क्या करूँगा? तोह में वीर को ले गया था. ाहः~

रागिनी : क्या? पर वीर तोह कह के गया था की बिज़नेस रिलेटेड मटर से जा रहा है वह.

कारन (वीर को देखते हुए) : हैं? तुम बिज़नेस की बात करने निकले थे?

वीर : :डोह:

[ :लाफिंग: ]

वीर ने अगले hi पल अपनी कोहनी कारन की पसली में दे मारी.

कारन : ग्वाखह!! अरे! ः! हाँ वो सही hi तोह कह रहा था भाभी जी! दरअसल जिस फ्रेंड की पार्टी में गए थे उसकी बिज़नेस में अच्छी पकड़ है. तोह... ऐसा...

रागिनी : अच्छा! एक मिनट! वीर? तुम ऐसे कारन का सहारा क्यों ले रहे हो? K-Kya हुआ वीर?

और वो आगे बढ़ के आयी और वीर को कारन के हाथो से पकड़ अपनी ऑर्डर खींची.

कारन : भाभी जी! आज तोह वीर ने कमाल hi कर दिया. पार्टी में थोड़ी लड़ाई हो गयी थी. एक आदमी एक लड़की को परेशान कर रहा था. बस! वीर कूद पड़े. लड़ाई बढ़ गयी. और दो इसने मारे तोह दो उसने मारे. इसलिए, वीर की अभी ये हालत है. हाहाहा~

रागिनी : V-Veeeerrr??? क्यों लड़ाई में पड़ते हो? तुम ठीक तोह हो न? कहा लगी तुम्हे बताओ?

वो कहते हुए वीर को चेक करने लगी और इधर वीर मुस्कुरा के कारन को देख रहा था. जैसे कहना चाह रहा हो की साले कल मिल, बताता हु तुझे.

कारन वीर की मुस्कान को भांप लिया और फौरन hi उसने वह से निकलने में hi भलाई समझी.

कारन : M-Mein चलता हु. भाभी जी! वीर का ख़याल रखना. आज काफी म्हणत करि है उसने. ाहः~ गुडबाय वीर! फिर मिलते है.

और बस, कल कुछ इस तरह hi वीर की रात गुज़री.

आज तोह उसने पूरे दिन आराम किया और वो अभी भी लेता hi हुआ था. उदासी में.

[You are sad master!!!] पारी की आवाज़ उसके मैं में गुंजी.

पारी!!! जो उस रात सीटें लेवेल्लिंग के तहत अपनी पर्सनालिटी एक बार फिर बदल चुकी थी. वीर कही न कही, इस पारी को मिस भी कर रहा था तोह वही उस पारी के जाने पर थोड़ा उदास भी था. पर मायूसी का केवल यही कारण नहीं था. कारण था...

[Swati!!! You are sad about her! Right?]

'हम्म! पारी!'

[This is how life is Master. Uss bechaari ka ant boht hi dardnaak hua. Kya galti thi uss bechaari ki? Still, she died a gruesome death. Ye kismat hoti hai Master. Fortune... Luck... Kab kiska kesa ho jaaye, koi nahi jaanta. That's the reason, you must strive to become strong.]

'हम्म~'

[You have such a kind heart Master!]

'हँ?'

[Aap baccho ke prati kitne sensitive ho. Ye mene dekh liya. Swati bhi ek bacchi hi thi uss waqt. You were seeing her as a kid. And seeing her in pain... You were so hurt. I could feel it.]

'ी...'

[Juhi ke prati bhi aap kitne sensitive ho Master. You love her so much. I can see that. Baccho ke prati aapka lagaav alag hi dikhta hai master. Even though aapne ek aadmi ki jaan lii, still... Aap ne ab tak apni sanity nahi khoyi. You are still just like before. That's why I said, you have such a kind heart Master.]

'में... Th-Thank यू पारी!'

[No! Thank you Master! I'm lucky to have you as my Master.]

'हम्म! अब ये सिस्टम के चंगेस सम्झओगि मुझे?'

[Right away Master!]

'जो ों थें!'

[Master~ You got a random skill yesterday. Let me show you...]

*डिंग*

[Skill 'Stock Master' has been rewarded.


बायो : ऑफर्स ा 70% चांस तो सक्सीड इन शरमार्केट.]

'हौली फुसक्कककककक!!!!' वीर जो अब तक लेता हुआ था वो झटके से उठ के बैठ गया. बात hi कुछ ऐसी थी.

'ी नीडेड थिस. इसके ज़रिये... ी कैन...'

[Still! It's not really that good Master. 30% chances hai ki paise doob bhi sakte hai.]

'पारी पर 70% सक्सेस चान्सेस भी तोह है. नोर्मल्ली लोगो के लिए 50-50 चान्सेस रहते है. स्टिल, लोग पैसे लगाते है न? बूत फॉर में... आईटी विल बे 70 - 30.]

[Hmm! Ye baat bhi hai master.]

'और क्या चंगेस है? ी सॉ की, सिस्टम लेआउट भी अपग्रेड हुआ था. व्हाट इस आईटी?'

[Bas, cheezo ke dikhaana ka tareeqa master. Just the layout has changed. Let me show you!]

*डिंग*


[Name : Veer | Age : 21 |

स्टेटस : स्टूडेंट / बिजनेसमैन

स्टैट्स :

स्ट्रेंथ - 96/100 | इंटेलिजेंस - 95/100

अगिलिटी - 65/100 | ेंदुराने - 65/100

अपीयरेंस - 75/100


स्किल्स :

सेक्स प्रोटेक्शन | इंटरमीडिएट मार्टिकल आर्ट्स स्किल |

हव्कये | लीम्बो | बेसिक एनिमी ट्रैकर |

अब्सोलुटे शेफ | बेसिक ड्राइविंग | स्टॉक मास्टर.

System's इंटरनल फीचर्स :

चेक | पथ ट्रैकर | पास्ट इलस्ट्रेशन |

क्वेस्ट हंट | स्लॉट | ट्रांसलेटर | अल्फा ट्रेट

फवौराबिलिटीज़ :

सुमन : 126 (स्लेव) | आभा : 90 (स्लेव)

सोनाली : 65 (फेमिलिअर) | रागिनी : 75 (क्लोज मात)

निधि : 40 (मात) | श्रेया : 67 (क्लोज मात)

जूही : 90 (बेस्ट मात) | सुहाना : 64 (क्लोज मात)

सोनिआ : 71 (क्लोज मात) | काव्य : 88 (बेस्ट मात)

श्वेता : 10 (फेमिलिअर) | भूमिका : 38 (फेमिलिअर)

करा : 75 (क्लोज मात) | आरोही : 70 (क्लोज मात)


कार्ड्स :

बोन रीपर | Beowulf's ब्लेस्सिंग्स

पॉइंट्स रमैनिंग : 3300

सिस्टम लेवल : लेवल 6


(600 ऍक्स्प मोरे तो रीच लेवल 7)]

[How is it Master? Layout change ho chuka hai. Do you like it?]

'अह्ह्ह! ी सी! वाक़ई! आईटी लुक्स गुड नाउ. काफी चीज़े ऐड हुई है. कॉम्पैक्ट डिज़ाइन. हम्म~ ी लिखे आईटी.'

[Thank you Master!!! I'm glad you liked it.]

'पारी!!!'

[Yes Master?]

'पॉइंट्स ऐड कर दो. सारे स्टैट्स में. मेक थम फुल. आल 100.'

[As you wish Master!]

*डिंग*

[All stats have reached 100.]

[Remaining Points : 3092]

[Changes kal...]

''कल सुबह देखने को मिलेंगे. ी क्नोव. थैंक्स पारी!'

[It's my job Master. Par, appearance ko aapne ekdum se full kar liya hai. Tomorrow! Things will be interesting. Fufufu~]

साड़ी चीज़ो को समझने के बाद, वीर उठा और हाथ मुँह धो के वह नीचे आया. नीचे आते hi उससे अलग hi माहौल नज़र आया.

सुमन, रागिनी, आभा, सोनाली सब ज़मीन पर चटाई बिछाये हुए बैठी थी और कुछ बना रही थी.

वीर : हम्म?

रागिनी : V-Veer? आओ न! उठ गए? अब केसा लग रहा है?

वीर : I'm गुड भाभी!

रागिनी (स्माइल्स) : अच्छी बात है. देखो! में तुम्हारे लिए गुलाब जामुन, नमकीन, और सलोनी बना रही हु. तुम्हे त्यौहार के पकवान पसंद है न?

वीर : हम्म?

रागिनी : आज होलिका देहें है. हम जहा रहते है, यहाँ आस पास कोई होलिका नहीं बैठी है. क्या तुम m-mujhe लेके... रात में... होलिका देहें देखने चलोगे? यही मैं रोड साइड?

वो एक आस लिए उससे देखि, वही साइड में बैठी सुमन भी उन् दोनों को hi देख रही थी. न जाने क्या सोच रही थी.

वीर (स्माइल्स) : क्यों नहीं भाभी? सूरे!

रागिनी (स्माइल्स) : अहह!! थैंक यू वीर! बस, ये तैयारियां कर लू, फिर हम डिनर कर के रात में चलते है. Okay?

वीर (स्माइल्स) : ऑलराइट!

***

Nidhi's अपार्टमेंट...

रागिनी के घर की hi तरह, निधि के फ्लैट में भी चहल पहल मची हुई थी. और इस चहल पहल का कारण कौन था? ऑफ़ कोर्स, नन्ही जूही! उसके अलावा कौन हो सकता था?

"दो न मम्माआ!!! दो दो दो... कंदीयीय दोऊ!!!"

वो निधि के गाउन को खींच खींच के ज़िद्द कर रही थी. तोह वही सोफे पर बैठी श्रेया उसकी ज़िद्द पे मुस्कुरा रही थी. अपने लैपटॉप में काम में लगी हुई थी वह.

निधि बड़ा सा एक पैकेट खोल रही थी और जूही के लिए कैंडी निकाल रही थी.

निधि : दे रही है न मां. और सुनो, रोज़ बस एक hi मिलेगी. Okay?

जूही : ममम~

निधि : ये लो~

जूही (परर पटकते हुए) : उम्म्म.... खोल के...

निधि : हां बाबा! ये लो...

जूही : ेहेहे~

और वो झटपट अपने मुँह में कैंडी दाल भाग गयी अपने खिलौनों से खेलने.

निधि (शिघ्स) : ये लड़की भी...

श्रेया : कल का क्या सन है दी?

निधि : हम्म? कल का क्या?

श्रेया : कल होली है. कुछ सोचा है आपने?

निधि : होली में क्या श्रेया? हर्र साल की तरह, थोड़े पकवान बनाये है. घर जा के मां पापा से मिल आउंगी. बस! और क्या?

श्रेया : बस? रियली? और जूही का क्या? वो होली कैसे खेलेगी?

निधि : सोसाइटी में जूही की उम्र के बच्चे बोहत काम है श्रेया. और जो है, उन्हें जूही नहीं जानती. कल उससे बस गुलाल लगवा लाऊंगी वही बच्चो से. और क्या?

श्रेया : व्हाट??? रियली दी? यदि आप होली सेलिब्रेट नहीं कर रही हो तोह काम से काम बेचारी जूही को तोह करने दो.

निधि : में...

श्रेया : वाक़ई आप भी न. और उस दुफर का क्या?

निधि : हँ?

श्रेया (स्माइल्स) : मेरा मतलब वो... वीर का क्या?

निधि : ी... भला मुझे कैसे पता होगा उसके बारे में?

श्रेया : हँ? क्या आपकी बात नहीं होती उस से? हाँ? आप hi ने तोह बताया था न की वो कॉलेज आया था टेस्ट्स देने. फिर? क्या बात नहीं हुई.

श्रेया के सवाल पर निधि को वही दिन याद आ गया. वो दिन जब वीर ने उस से अपने दिल की बात कह दी थी. 'ी लिखे यू ma'am!!!'

इससे सुन्न के निधि के सारे दिन इतनी मुश्किल से गुज़र रहे थे की हर्र थोड़ी देरर में उससे वीर के ख़याल आने लगते थे. और वो जैसे तैसे खुद को कोस के, समझा के वीर की चव्वी अपने मैं से हटा देती थी.

निधि : N-Nahi!! मेरी बात नहीं हुई. और तुम्हारा क्या? आये दिन तोह तुम उसके बारे में पूछती रहती थी. क्या हुआ? क्या तुम्हारी बात नहीं हुई उस से?

श्रेया (ब्लशेस) : अहह! Wh-Whaaattt? M-Mein... N-No ऑफ़ कोर्स नॉट!!! में तोह k-kaafi समय से बिजी हु काम में.

निधि : तोह बस फिर. हम दोनों को hi नहीं पता उसके बारे में.

श्रेया : ी... हे दी!? क्यों न हम उससे सरप्राइज दे? हाहाहाहा~ यस! ये बढ़िया रहेगा. व्हाट दो यू से?

निधि : N-Nahi! K-Koi ज़रुरत नहीं है जाने की. वो वह अपनी फॅमिली के साथ होली मनाएगा. आईटी विल बे ा डिस्टर्बेंस फॉर थम.

श्रेया : क्या दी? केसा डिस्टर्बेंस? हम तोह घर जैसे है न? और उसकी भाभी भी तोह कितना हमे इन्विते करती रहती है. वीर यहाँ रह के गया है कितने हफ्तों तक. तोह ये कोई बहाना नहीं हुआ.

निधि : N-Noooo हम वह...

वो कुछ बोलती की अंदर से जूही दौड़ती भागती हुई आके उसकी गॉड पर चढ़ गयी.

जूही : मआमऊ के घर... मामऊ के घर... में जाउंगी!!!! ममममा~ माससीई!!!

पता नहीं कैसे, पर अपने मामू का नाम सुनते hi जूही के कान खड़े हो गए और वो झटपट अंदर से भाग के आ गयी.

श्रेया : देखा!? काम से काम अब जूही के लिए तोह चलिए. उसकी भी होली कितनी अच्छी गुज़र जाएगी. वह लोगो से मिलेगी उससे अच्छा लगेगा. हो सकता है काव्य भी आये? आखिर जूही और उसकी बोहत बनती है. अब तोह चलेंगे न हम?

जूही : चलना है... चलना है... मामुउउउ के घर... चलना है...

निधि फिरसे मन करने hi वाली थी. पर जब उसने जूही की आँखों में देखा और ये आभास किया की जूही वैसे hi अपने छोटे भाई, ध्रुव से बिछड़ी हुई है. न उससे कोई खेलने वाला मिलता है और न कोई साथी. यदि प्रॉब्लम उसकी वीर से है तोह इसमें बेचारी जूही की खुशिया क्यों डाव पे लगाई जाए? ये एक पैरेंट होने का कर्त्तव्य था निधि का की वो जूही की खुशियों का ध्यान रखे.

और ये आभास होते hi, उसकी नज़रे ग्लानि से झुक गयी.

निधि : सॉरी बीटा! सॉरी श्रेया! हम कल चलेंगे.

जूही : याआआयययययय~

श्रेया (स्माइल्स) : It's ऑलराइट!!!

***

Kaera's विला...

मैंवहीले इधर करा अपने विला में कल के लिए प्लानिंग कर रही थी. जूलिया, उसकी माइड उसके मखमल गोर बदन से कपडे उतार रही थी और निघ्त्य पहनाने hi वाली थी जब करा ने उससे रोक दिया.

करा : No! नॉट थिस टुडे! जस्ट ा t-shirt एंड लेग्गिंग्स. That's आईटी.

जूलिया : अरे यू रियली सूरे मिस?

करा : यस!!!

और जूलिया उससे फिर वही पहनाने लगी.

करा को स्लोगन की मौत के बारे में पता लग चूका था. पर उस से काफी बातें छिपाई गयी थी.

जैसे की वो ये नहीं जानती थी की स्लोगन का खात्मा वीर ने किया था. उससे ये भी नहीं पता था की उसके hi रिसोर्ट में उस दिन स्टीव का सर्र उड़द गया था.

उससे बस इतना पता था की स्टीव की कार में फायरिंग हुई थी. पर इस से पहले की वो स्टीव के शरीर को कार से गिरता देख पाती, उसके अगल बगल सिक्योरिटी ने उससे सराउंड कर के अंदर कर दिया था. और वो इन् सभी बातो से अनिभिज्ञ थी.

पर चुकी, अब स्लोगन जा चूका था. वो काफी रिलैक्स्ड थी. और मैं में उसके प्लानिंग चल रही थी. वो लाइट मूड में बीएड पर बैठी और सोचने लगी,






'टुमारो! हम्म~ It's होली! ी नेवर प्लाएड थिस. I'll जो एंड विजिट हिम. ओनली हे कैन टीच में अबाउट थिस.'

करा : जूलिया!

जूलिया : यस मिस?

करा : W-What इस थिस फीलिंग? Wh-When यू don't वांट समवन तो गेट हर्ट. व्हेन यू don't वांट तो सी तहत समवन गेटिंग सुफ्फेर. व्हेन... व्हेन यू वांट तहत पर्सन ऑलवेज वीथिन योर सिघ्त?

जूलिया (स्माइल्स) : It's लव मिस!!

करा : L-Love?? व्हाट इस लव?

जूलिया (स्माइल्स) : Didn't यू आंसर में जस्ट नाउ?

करा : हँ?

जूलिया : व्हेन यू don't वांट तो सी तहत पर्सन गेटिंग हर्ट एंड सुफ्फेर. यू वांट तहत पर्सन तो बे अराउंड यू आल थे टाइम. It's लव मिस! तहत मीन्स यू लव थिस पर्सन.

करा : ी... ी सी!!

'I'll आस्क वीर. टुमारो!!!'

***

Ragini's होम...

"हम निकल रहे है सुमन जी! पर आप सब भी चलते तोह अच्छा होता."

रागिनी ने अपनी सैंडल्स पेहेनते हुए कहा.

लाल साड़ी में आज वो इतनी कमाल लग रही थी की वीर को बड़ी मुश्किल जा रही थी. वो नहीं चाह रहा था की अपनी hi भाभी को ताड़े. पर वो लग hi इतनी सुन्दर रही थी की न चाहते हुए भी उसकी नज़रे रागिनी पर चली जा रही थी.

और यहाँ रागिनी उसकी हर्र नज़र पकड़ ले रही थी. वो ऐसा दिखा रही थी जैसे उससे वीर की निगाहो के बारे में कुछ नहीं पता. वो तोह बल्कि जान बुझ के खुद को दिखाना चाह रही थी. आखिर उसके सजने के पीछे का मक़सद hi तोह यही था.

वो वीर के लिए hi तोह इतना सजी हुई थी.

'लिपस्टिक इस फाइन... उम्म्म~ नेलपॉलिश दोने. बाल साइड में है, थे अरे लुकिंग हॉट. बिंदी दोने, काजल दोने, make-up का हल्का टच भी हो गया. स्लीवलेस साड़ी भी पहन ली. व्हाट ेल्स? परफ्यूम भी लगा चुकी हु. ज्वेल्लेरी भी हो गयी. व्हाट ेल्स नाउ? एवरीथिंग इस okay ी गेस.'

उसके मैं में अभी यही बातें चल रही थी. वो नहीं चाहती थी की सुमन या कोई और भी उसके संग आये. वो केवल वीर के साथ अकेले जाना चाहती थी. और सुमन जैसे उसके मैं की बात समझ चुकी थी. उसने फौरन hi कह दिया की वो सभी घर पर रहेंगे.

सुमन : कोई बात नहीं! आप जाइये! हम सब है यहाँ. फ़ोन में फोटो ले आइयेगा रागिनी जी. हम यही देख लेंगे.

रागिनी (स्माइल्स) : बिलकुल! वीडियो बना लाऊंगी. चले वीर?

वीर : हम्म~

और वो दोनों hi कार में बैठे और निकल गए.

सोनाली (मुँह फुलाते हुए) : मुझे जाने क्यों नहीं दिया आपने? घर की देख रेख के लिए आप तोह थी न माँ? फिर यहाँ हम तीन तीन जनन को रुकने की ज़रुरत?

सुमन (स्माइल्स) : ज़रुरत है. उन्हें...

सोनाली : हम्म?

सुमन (स्माइल्स) : कुछ नहीं!!!

रास्ते भर रागिनी और वीर में ज़्यादा बातें नहीं हुई. बातें हुई तोह केवल नज़रो से. वीर side-eye करके रागिनी को देखता तोह कभी रागिनी उससे देखती और उससे अपनी ऑर्डर देखता हुआ पाती.

वो जब जब वीर को अपनी ऑर्डर देखता हुआ पकड़ती, उसका मैं और खिल उठता. यानी की वीर को भी उसमे इंटरेस्ट था. और वीर उसके सौंदर्य के आगे हार रहा था.

जब दोनों hi होलिका देहें के स्थान पर पहुचे तोह वही उतर के रागिनी ने साड़ी विधि से होलिका के चक्कर लगाए और दर्शन किये.

कल होली का त्यौहार था. ये त्यौहार उसके डाइवोर्स के बाद पहला त्यौहार होने वाला था. और वो इसमें कोई भी कमी नहीं होने देना चाहती थी.

वह खड़े लोग बस रागिनी और वीर को hi देखे जा रहे थे. इसलिए जल्दी से दर्शन कर रागिनी और वीर कार में आके बैठ गए. और कार से hi बाहर होलिका देहें को देखने लगे.

तभी अचानक वीर की नज़र रागिनी के गले पर गयी,

वीर : आपका... मंगलसूत्र...!?

रागिनी : अब जब पति को hi दूर कर दिया. तोह किस बात का मंगलसूत्र वीर?

वीर : No ी मैं... आपका गाला खाली खाली लग रहा था इसलिए... ी जस्ट...

वीर अपनी नज़रे फेर्रा hi था की रागिनी ने उसका हाथ थमा और उठा के अपने स्तनों के ठीक ऊपर सीने पर रखवा लिया.

वीर : B-Bhabhi!!!???

रागिनी (स्माइल्स) : खाली लग रहा है? T-Toh... तुम कुछ क्यों नहीं लाते अपनी इस भाभी के लिए? हाँ? एनीथिंग विल दो.

वीर : ी...

वीर इस सुद्दीन हरकत से यदि अंदर तक हिल के नहीं रह गया था तोह ये कहना गलत था. रागिनी के इस एक्शन की उससे ज़रा भी उम्मीद नहीं थी. उसके सीने पर हाथ रख वो रागिनी के दिल की धड़कन बखूबी महसूस कर पा रहा था. बस थोड़ा सा hi फासला था. बस थोड़ा सा... थोड़ा और नीचे यदि हाथ गलती से भी लग जाता तोह वीर को उन् रसीले ामो का एहसास मिल जाता.

रागिनी : कहो!? क्या अपनी इस नकार दी गयी भाभी के लिए लाओगे कुछ!?

वीर : ऐसा क्यों कह रही हो आप? किसी ने नहीं नकारा है आपको.

रागिनी (स्माइल्स) : तुमने भी नहीं न!? क्युकी किसी एक ने तोह अपने जीवन से नकार के फेक दिया मुझे.

वीर : आप उस बारे में मत सोचिये भाभी! हम सब आपके साथ तोह है न!?

रागिनी (स्माइल्स) : व्हाट अबाउट यू!?

वीर : ऑफ़ कोर्स! M-Mein भी आपके साथ हु.

रागिनी (स्माइल्स) : थें that's आल तहत मैटर्स. फुफु~♡

और अगले hi पल वो आगे बढ़ी और उसके लाल लाल रसीले होंठ वीर के गाल पर थे.

*छू~♡*

*बेदुम्प*

पल भर के लिए वीर की जैसे सांस hi अटक गयी. उसके गाल पर रागिनी के होंठो का ठप्पा जो लग चूका था. वो लाल लिपस्टिक पूरी तरीके से उसके गाल पर होंठ का निशाँ बन्न के चढ़ चुकी थी. क्या रागिनी ने इसी इरादे से आज फ़ीरी रेड लिपस्टिक लगाई थी. हु कनौस!?

***

Suhana's होम...

*थुड़*

जोरर से दूर बंद होने की आवाज़ आयी और सुहाना अपने बिज़नेस ऑउटफिट में घर के अंदर आयी. उसका मूड कुछ बोहत hi खराब लग रहा था.

'दमन इत्!!!!! ये बड़ी डील हाथ से निकल गयी. आल बिकॉज़ ऑफ़ तहत बास्टर्ड एडवाइजर. यदि वो बीच में टांग नहीं डाटा. तोह सब कुछ स्मूथली हो गया होता.'

मैं में बड़बड़ाते हुए वो अपने कपडे चेंज करि. आज उसका दिमाग बेहद खराब था.

*रिंग रिंग*

'हहहह? सोनू का फ़ोन?'

सुहाना : बोल सोनू!!!

सोनिआ : डीई! कल होली है.

सुहाना : हाँ तोह?

सोनिआ : दी! कल... कल में वीर के घर जाउंगी. तो सेलिब्रेट होली. अरे यू किंग?

सुहाना : में देख रही हु तुम काफी क्लोज होते जा रही हो उसके? क्या माजरा क्या है मैडम?

सोनिआ (ब्लशेस) : अह्ह्ह??? Y-Ye क्या बोल रही हो आप. I'm गोइंग तो गिव माय थैंक्स... T-That's आईटी.

सुहाना : तुम्हारी तरह यदि कोई लड़की ऐसे लड़को को थैंक्स देने लगी न हर्र बार तोह वो कुछ hi दिनों बाद बच्चे लेके घूमेगी.

सोनिआ (ब्लशेस) : W-Whaaat?? व्हाट अरे यू इवन सयिंग डीई? It's... It's नथिंग लिखे तहत. स्टॉप आईटी! अरे यू किंग अरे नॉट?

सुहाना : No वायीय! मेरा मूड अभी खराब है वैसे भी. I'll टॉक तो यू लेटर.

सोनिआ : हहहहह? D-Diii!!!?

*कॉल एंड्स*

सुहाना ने बिना सोनिआ के बात सुने hi फ़ोन कट कर दिया. और अपने अंगूठे को दातो टेल दबाये सोच में पद गयी.

'तहत इडियट... हे एक्चुअली किल्ड हिम... ी कनेव आईटी... कुछ गड़बड़ है... हे hasn't इवन रिटर्न्ड माय गन.'

वो सोच में थी जब अचानक hi दरवाज़ा खुला और एक सूट पहने आदमी अंदर प्रवेश किया.

"ओह्ह! तुम आ गयी? किसी रही डील?"

गौरव!!! सुहाना का पति. उसने सुहाना को देख पूछा. क्युकी, सुहाना उसकी hi कंपनी की तरफ से डील करने गयी थी.

सुहाना : डील फेल्ड. सब कुछ उस कंपनी के एडवाइजर के कारण.

गौरव : व्हाआआअत्तत्तत्त? डील फ़ैल हो गयी? क्या करती हो सुहाना? इतना छोटा सा काम नहीं हुआ? कैसे तुमने आज..!? सब तुम्हारी गलती है. मुझे ये डील नहीं देनी चाहिए थी तुम्हे.

सुहाना : मेरी गलती? मेरी गलती????? एक्सक्यूज़ में!!!!! मेरी कोई गलती नहीं थी समझे गौरव??? वो एडवाइजर पहले से hi प्लानिंग कर के आया था.

गौरव : स्टिल... अन्य्वयस! जो हुआ सो हुआ. जाओ अच्छा! जाके मेरे लिए आज कुछ स्पेशल बनाओ खाने के लिए.

सुहाना : व्हाटटटटट? समय देख रहे हो गौरव??? 12 बज रहे है रात के. पूरे टाइम ऑफिस में थी. वह से माथापच्ची कर के इतनी लेट लौटी हु. यहाँ तक की आज होलिका देहें था तोह कही गयी भी नहीं. और इतनी थकान के बाद तुम मुझसे खाना मांग रहे हो? शेफ भी है हमारे घर में. दो यू क्नोव???

गौरव : ी क्नोव! और में भी कोई पार्क में घूम के नहीं आ रहा हु मिस सुहाना! दिन भर म्हणत करता हु. मेरी एक पोस्ट है. C.E.O की. उनलीके यू... तुम घर में खाना नहीं बनाओगी तोह कौन बनाएगा? मेक में समथिंग गुड. में आता हु चेंज कर के.

और वो निकल गया ऊपर. इधर सुहाना की मुट्ठी कस्सी हुई थी गुस्से के मारे. शी हद एनफ!!! मैं तोह कर रहा था अभी घर से भाग जाए. दिन भर की भाग दौड़ के बाद अब वो खाना बनाये???

वो गुस्से में कपडे बदली और किचन में गयी कुछ बनाने बेमानन से.

उसने अगले hi पल सोनिआ को कॉल किया,

सोनिआ : Hello?? दी?

सुहाना : तुम कल वीर के यहाँ जा रही हो न?

सोनिआ : उम्.. हाँ! येह!!

सुहाना : काउंट में इन!!!!

सोनिआ : एहहहह?

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

ी टोल्ड यू गाइस की अपडेट 77 विल बे इंटरेस्टिंग. बूत सी, यही पे मॉडरेशन हो गया. 😁 और इस अपडेट में मेने लेफ्ट ओवर क़ुएस्तिओन्स के अंसवेरस दिए. अब, सभी वीर के घर पर जा रही है. मैंवहीले वीर इन् सब से अनिभिज्ञ है.






लिखे ठोकने का एंड रेवोस रखने का. 😁

धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 78 ~ इंडेंट होली

अब तक...

वो गुस्से में कपडे बदली और किचन में गयी कुछ बनाने बेमानन से.

उसने अगले hi पल सोनिआ को कॉल किया,

सोनिआ : Hello?? दी?

सुहाना : तुम कल वीर के यहाँ जा रही हो न?

सोनिआ : उम्.. हाँ! येह!!

सुहाना : काउंट में इन!!!!

सोनिआ : एहहहह?


अब आगे...

होली!!

रंगो का त्यौहार, और एक ऐसा त्यौहार जहा हस्सी ख़ुशी हर्र जगह बाटी जाती है. ये त्यौहार अहंकार पर आस्था और विस्वाश की जीत का प्रतीक माना जाता है.

कुछ इसी तरह, वीर के जीवन में भी हुआ हाल hi में. स्लोगन के अहंकार पर वीर का विस्वाश भारी पर उठा और अंत में जीत वीर की hi हुई.

खर्र, अब स्लोगन नाम का व्यक्ति तोह जा चूका था. वीर को अब प्रेपर होना था उसके आगे आने वाली मुश्किलों के लिए.

पर फिलहाल हमारे वीर भैया सो रहे थे गहरी नींद में.

बिस्तर पर लेते हुए, वो अपने सपनो की दुनिया में थे. पर वो अकेले नहीं थे. कोई और भी था जो इस वक़्त उसके ऊपर बैठा हुआ था.

और उसके चेहरे के एकदम क़रीब था. बेहद क़रीब!

वीर के मैं में काफी देरर से पारी आवाज़ लगा रही थी. आखिर कार, वीर की आँखें धीरे धीरे खुलने लगी.

[Wake up! Wake up master! It's morning already!]

'हम्म?'

आँखों से धुंदलापन्न हटा और वो उठा. उससे सामने का नज़ारा जैसे hi नज़र आया,

"आअह्ह्ह्हह!!!"

वो झटके से चौंकते हुए वापस बिस्तर पर गिर गया.

"हेहेहे~"

उसके ऊपर बैठी एक बेहद hi ख़ूबसूरत सी लड़की ये देख खिलखिला उठी.

"काव्या!???? तुम यहाँ!??"

वीर काव्य को देख होश hi खो बैठा था. क्युकी आज पता नहीं क्यों, पर आज वो इतनी ज़्यादा ख़ूबसूरत लग रही थी. आज कुछ अलग सी बात लग रही थी उसमे.

काव्य : हाँ तोह?? में और दी आधे घंटे से आये हुए है भैया!!! और आप यहाँ जब से घोड़े बेच कर सो रहे हो? नॉट गुड! नॉट गुड! :नाना:

वीर : वो सब तोह ठीक है पर तुम यहाँ मेरे ऊपर क्या कर रही थी?

काव्य : देख रही थी.

वीर : K-Kya?

वीर फिर उठा. अभी भी काव्य उसकी कमर के ऊपर hi बैठी हुई थी. वो एक सफ़ेद कुरता पयजामा डाले हुए थी. दोनों के चेहरे एकदम करीब थे.

तभी,

*चाहात्त्टटटटट*

वीर : एहहहह!!??

काव्य ने अपने दोनों हाथो से जोरर से वीर के गालो को थामा और उसके चेहरे को देखने लगी.

काव्य : क्या लगा रहे हो?

वीर : W-Whaaattt??

काव्य : कौन सी क्रीम है??? हम्म?? उस दिन बैंक्वेट में भी आप कितने हैंडसम लग रहे थे. और आज तोह...

अचानक hi उसके गालो पर लाली छ गयी. पर उसने अपनी नज़रे नहीं फ्री.

काव्य : उह्ह्हुउउउउ~ बताओ न!!!!!

वीर : तू भी न! पागल है! कुछ नहीं लगाया बाबा! बस...

काव्य : बस!!??

[Appearance me points add kiye. Right master? Fufu~ (✿^‿^) ]

'शांत पारी!! यू क्नोव ी कन्नोत तेल्ल हेर तहत.'

वीर : कुछ नहीं!!! गर्मी बढ़ रही है. बस पानी ज़्यादा पीने लगा हु. स्किन अच्छी हो रही है. और तू भी पिया कर. समझी?

काव्य : हम्म? पानी??

वीर : यस! चल अब उठने दे. तू भी बच्ची hi रहेगी.

"आआआआआ~" उसने अगले hi पल काव्य को कमर से पकड़ साइड में गिरा दिया.

काव्य : में बच्चीई नाहीई हूँ~

वीर : हाहाहा~ अच्छा!??

वीर ने काव्य को अपनी गॉड में लिया और उससे अपनी जांघो पर उसके पेट के बल लिटा लिया. जैसे एक बच्चे को लिटाते है.

काव्य : आअह्ह्ह!! भैयाआ!?? ये आप...!?

और फिर,

*चाताआआअआककककक*

"आआआआह्ह्ह्हहननन!!?????"

'N-Nooo!! दीद हे रियली!? N-No! भैया ऐसा नहीं कर सकते... हे won't...' वो मैं में सोची.

उसके गाल एकदम गुलाबी पड़ने लगे. और तभी एक बार फिर,

*चाताआआअआकककककक*

"आआआआह्ह्हंमममममम~ ♡"

वो गलत थी. वीर ने फिरसे एक चपत दे मारी.

'न्यूऊओ~ H-He... हे... एक्चुअली... हे सपनकेड में!?'

उसके जीवन में पहली बार कुछ ऐसा हुआ था. स्पैकिंग!?? वो भी अपने भाई के हाथो? मजाल है की किसी लड़के ने उससे कभी टच भी किया हो ऐसे? पर आज, किसी ने कर दिया था. और वो भी उसके अपने बड़े भाई ने. काव्य की हालत इस वक़्त ऐसी थी की वो किसी बिल में घुसकर अपना मुँह छुपाना चाहती थी जल्द से जल्द.

*फआयआयकककककक*

"ाःनननममम~ ♡"

तीन प्यार की थपकी अपने बबल बट ෆ पर खाने के बाद वीर ने हस्ते हुए उससे हटाया और खुद वाशरूम की ऑर्डर जाने लगा.

बेचारी काव्य की आँखों में ासु आ चुके थे. लग रहा था की कभी भी रो देगी वह. और गाल शर्म के मारे पूरे लाल पद चुके थे.

काव्य (मुँह फुलाते हुए) : भैया~ Y-You... यू... में अब आपसे कभी बात नहीं... ुमंम्हऊऊऊ~

पर वो अपनी बात पूरी कह पाती की उस से पहले hi काव्य के गाल को वीर ने अपने हाथ में लेकर नोच दिया.

'सो सॉफ्ट!!!'

[ :परफेक्ट: ]

काव्य : ुवाहा~ चोर्रो... चोर्रो मुझे... मेरे गाल....!!!

वीर : हाहाहा~

आखिर कार, वीर ने बेमानन से उससे चोर्रा और काव्य अपने लाल गाल को सहलाने लगी. मैं में वीर को कोस रही थी. कोई इतनी जोरर से गाल नोचता है क्या भला? वैसे वीर की भी कोई गलती नहीं थी, काव्य के गाल थे hi ऐसे. इतने सॉफ्ट की बस नोचने का hi मैं करता था.

वीर : अन्य्वयस, आरोही दी भी आयी है!?

काव्य (गाल सहलाते हुए) : हम्म~ अभी तोह बताया न मेने. हम्फ~

वीर : ी... ी सी!

आरोही का ज़िक्र होते hi वीर को उस दिन का इंसिडेंट याद आ गया. आरोही और उसके बीच हुई वो एक्सीडेंटल किश. उस दिन के बाद से आज मिलने वाले थे दोनों. न जाने केसा रिएक्शन होगा उसका!? यही सोच वीर थोड़ा दुविधा में था. कही आरोही उस से इस बात पर नाराज़ तोह नहीं हो गयी?

ये कुछ देरर में पता लग hi जाने वाला था.

वीर : तू चल में आता हु. नाहा धो के.

और वो इतना बोल वाशरूम में चला गया.

पर इधर बेचारी काव्य अपनी सासें दुरुस्त करने में लगी हुई थी. उसके दोनों परर आपस में जुड़े हुए थे. और एक सिहरन से दौड़ गयी उसके बदन में कुछ पल पहले के मोमेंट को याद करते hi.

'गंदे भैया~' मैं में वीर को कोसते हुए वो नीचे भाग गयी.

***

वीर जैसे hi नीचे आया तोह हॉल में hi उससे आभा और सोनाली नज़र आयी.

वीर : हम्म? भाभी और आरोही दी कहा है? और सुमन...!? मतलब सुमन जी!?

पर उससे देखते hi दोनों hi सोनाली और आभा सन्न रह गयी. उन् दोनों के गाल सुर्ख लाल पद रहे थे. 100 का अपीयरेंस बड़ी बात थी. और उसका असर दिख hi रहा था.

सोनाली (ब्लशेस) : वो... वो... वो तीनो अंदर है. पहले नाश्ता होएगा, उसके बाद होली खेली जाएगी.

इधर वीर की आवाज़ अंदर किचन से सुन्न, रागिनी वही से चिल्लाई, "वीएररर?? उठ गए?? चलो बैठो. बस नाश्ता लगा रही हु में."

और कुछ hi देरर में नाश्ता लग चूका था. तभी अंदर से आरोही आयी.

वीर और उसकी दोनों की आपस में नज़रे टकराई और ऑय कांटेक्ट होते hi, आरोही ने अपनी नज़रे फेरर ली. उसकी धड़कन ट्रैन के माफ़िक़ तेज़्ज़ थी. ये वीर इतना हैंडसम कैसे हो गया? उसके मैं में यही चल रहा था.

वो इधर उधर कुछ देरर देखि, और वापस से वीर की तरफ नज़रे करि पर जैसे hi उसने वीर को देखा तोह पाया की वीर उससे hi देख रहा था.

"!!!???" और शर्माते हुए उसने फिरसे अपना मुँह फेरर लिया.

वीर समझ चूका था की आरोही ने उस किश को सीरियसली ले लिया है. शायद उससे समझाने में काफी समय देना होगा.

शामे हाल, इस वक़्त रागिनी का भी था. वीर के अपीयरेंस को लेकर खुलकर तोह किसी ने नहीं बोलै पर अंदर hi अंदर उन् सब की धड़कने तेज़्ज़ हुई जा रही थी हर्र बार उससे देखते hi.

सुमन भी कोई एक्सेप्शन नहीं थी.

नाश्ता समाप्त हुआ. और रागिनी अंदर से एक बेहद hi प्यारी सी साड़ी पहने हुए निकली. सुमन भी एक हलके रंग की साड़ी में थी तोह, वही आभा, आरोही और सोनाली सलवार सूट में.

काव्य ने जैसे hi रागिनी को साड़ी में देखा तोह उसकी आँखों में चमक आ गयी.

काव्य : Bh-Bhabhiii!?? क्या में भी आपकी कोई साड़ी पेहेन सकती हु?

रागिनी : हम्म? पर क्यों? ये सूट तोह तुम पे कितना प्यारा लग रहा है मेरा बच्चा!

रागिनी प्यार से बोली, पर बच्चा शब्द सुनते hi काव्य एक बार फिर भड़क उठी.

काव्य : में बच्ची नाहीइ हुऊ~

रागिनी : हँ?? O-Okay काव्य! मेने तोह तुम्हे प्यार से कहा बीटा.

काव्य : नाहीईईई~ में बच्ची नहीं हुऊ!!! भाभी!! आप मुझे अपनी कोई साड़ी दीजिये. में भी साड़ी पहनूंगी.

रागिनी (स्माइल्स) : अच्छा बाबा! रुको! में तुम्हे तैयार करती हु.

काव्य : ी लव यू सो मच भाभी~♡ ेहेहे~

रागिनी (स्माइल्स) : नटखट कही की...!!

वैसे तोह होली में पुराने कपडे या सफ़ेद कपडे पेहेन कर hi लोग रंग से खेलते थे. पर रागिनी ने आज एक शानदार साड़ी पहनी हुई थी. ऑफ़ कोर्स, उसके पीछे एक hi कारण था.

वीर!!!

वो अपनी कमर, अपना यौवन, खुल के वीर को दिखाना चाहती थी. उससे लुभाना चाहती थी. उसके अंदर चार्म कितना था ये बात वो भली भाति जानती थी. और आज इस होली के अवसर पर, उसके मैं में न जाने क्या क्या तरकीबे उमड़ रही थी. वीर के संग कुछ करने की. कुछ ऐसा, जो केवल उन् दोनों तक hi सीमित हो.

***

इधर नीचे मैं गेट खुल चूका था. कार बाहर पार्क हो चुकी थी और वूफर्स सेट हो चुके थे. टेबल पर अलग अलग बड़ी बड़ी थाल में रंग गुलाल रखे हुए थे.

आरोही और सोनाली साड़ी तैयारियां कर चुकी थी. आज की होली शायद धमाल मचाने वाली थी.

काव्य सुमन आभा और रागिनी भी तब तक बाहर पोर्च में आ गयी. और फिर शुरू हुआ, इनकी होली का धमाल.

होली खेले रघुवीरा, तोह कही बालम पिचकारी जैसे गाने बजने लगे थे, और काव्य, आभा सोनाली आरोही एक दूसरे को रंग गुलाल लगा के खेल रही थी. हाथो में हाथ पकड़ नाच रही थी.

वही सुमन और रागिनी एक दूसरे को प्यार से गालो पर गुलाल मॉल रही थी.

"होली की शुभकामनाये रागिनी जी~"

"आपको भी सुमन जी~ हैप्पी होली!!!"

और बाकी सभी,

"ाहाःहाहा~"

"हैप्पी होली भाभीई~ यायययय!!!"

"हैप्पी होलीईई!!!!"

साड़ी लड़किया एक दूसरे के संग होली खेलने लगी. पर इधर वीर अभी तक नीचे नहीं आया था.

वो सफ़ेद कुरता और पयजामा पेहेन रहा था. कपडे पेहेन जब वो नीचे आया तोह उससे सबसे पहले काव्य नज़र आयी.

और उससे देखते hi...





वीर वही जम्म गया. शी वास् लुकिंग तू ब्यूटीफुल.

गालो पर गुलाल लगने के बावजूद उसका सौंदर्य अलग hi स्टारर पे था. ऊपर से वो अब साड़ी पहने हुए थी. इस भेष में वीर ने उससे पहले कभी नहीं देखा था. दिख तोह सभी अच्छी रही थी. पर आज जिसने वीर को सबसे ज़्यादा हैरान किया था. वो काव्य hi थी.

वो पलट के जैसे hi वीर को देखि तोह अपने गाल पर हाथ रख उसने स्माइल पास की.

काव्य (स्माइल्स) : हैप्पी होली! मेरे प्यारे भैयाआ~

यही बात तोह उसकी सबसे ज़्यादा लुभाती थी वीर को. पल भर पहले hi उसने काव्य को तीन चपत लगाई और उसके गाल नोचे थे. उसके बावजूद वो थोड़ा सा गुस्सा दिखा के वापस से अपनी प्यारी मुस्कान लिए उस से बात कर रही थी. कितनी प्यारी थी वह.

आज जैसे काव्य दिखाना चाह रही थी की वो अब बच्ची नहीं रही. बड़ी हो गयी है. और इस बात का एहसास वीर को तुरंत hi हो गया, जब काव्य अगले hi पल दौड़ के उसके पास आयी और उसकी छठी में जोरर आ के घुस गयी.

वीर : उग्गघहहह!!! काव्याआ!?

काव्य (स्माइल्स) : हैप्पी होली भैया~ मुआअह्ह्ह~ ♥

गालो पर एक गहरी पप्पी देके उसने वीर के गुलाल लगाया और झटपट भाग गयी.

वीर हैरान होते हुए आगे बढ़ा और एक बार फिर, उसके कदम वही जम्म गए.

कारण था...





रागिनी!!!

जो दीवार से ठीके उससे hi देख रही थी. जैसे मानो उसका hi बेसब्री से इंतज़ार कर रही हो.

धीरे धीरे क़दम आगे बढ़ाते हुए जब वीर उसके समीप आया तोह वो भी वीर के नज़दीक आयी.

रागिनी : कब से तुम्हे याद कर रही थी~ ♡

वीर : हँ?

रागिनी (स्माइल्स) : ी मैं... सब तुम्हारा वेट कर रहे थे वीर.

वीर : बस चेंज hi कर रहा था. अन्य्वयस... हैप्पी होली भाभी!!!

रागिनी मुस्कुरायी, उसने अपने दोनों हाथो से वीर के गाल पर गुलाल लगाया. गुलाल लगाते वक़्त, उसके हाथ ज़रुरत से ज़्यादा hi कुछ देरर वीर के गालो पर ठीके रहे. न जाने क्या सोच रही थी वो मैं में.

रागिनी : हैप्पी होली वीर~ ♡

और अचानक hi उसने वीर को अपनी ऑर्डर खींचा और उसके माथे पर एक प्यार भरा...

*छू~ ♡*

चुम्बन दे दिया.

वीर : भाभीई!??

रागिनी : हम्म? क्या हुआ?

वीर : अहह! N-Nothing!!!

थोड़ी तेज़्ज़ सासें लिए वीर आगे आया तोह उसने आभा और सोनाली को भी बारी बारी रंग लगाया.

और फिर जैसे hi वो सुमन को लगाने आगे बढ़ा. सुमन बेहद hi हसीं लग रही थी. खासकर उसका वो गदराया बदन.





उसने सुमन को पीछे से पकड़ उसके गालो पर हमला कर दिया.

"ाहः~ मालिक...!??? ाःह्ह्णण~"

सुमन ने विरोध न किया. वीर और सुमन सबसे आखिर में खड़े हुए थे. तोह उन्हें सामने से देखने वाला कोई नहीं था. और इसी बात का फायदा उठाते हुए अगले hi पल,

"आआह्ह्ह्हह्ह्णणणणणणण~ ♡"

वीर ने सुमन के ब्लाउज के ऊपर से hi उन् बड़े बड़े थानों को जोरर से भींच लिया. हाथ का पंजा पूरा उसके स्तनों पर लग चूका था. जल्दबाज़ी में वीर ने साड़ी का दुपट्टा नीचे किया, तोह तरबूज़ जैसे दूध वीर के सामने आ गए और ब्लाउज के अंदर जाके उसने...

"आआह्ह्ह्णण मा~"

सुमन के एक थान को जोरर से दबा दिया. पूरा निचोड़ दिया उसने एकदम से. वो गुलाबी निप्पल पहले से hi सख्त थे. यानी की सुमन को पता था की वीर उसके पास आके ऐसा कुछ करेगा.

"तुम्हे पता है? हमारी होली तोह रात में hi मानेगी अच्छे से.... राइट?" वीर ने अपनी गरम सासें उसके कान में छोड़ते हुए कहा.

सुमन (ब्लशेस) : बिलकुल मालिक! M-Mujhe इंतज़ार रहेगा~ ♡

वीर (स्माइल्स) : आखिर... मेरी पिचकारी तोह अंदर जाके hi रंग चोररटी है.

उसकी ये बात सुनते hi सुमन शर्म से लाल लाल हो गयी. वो जानती थी वीर किस पिचकारी की बात कर रहा था. वो पिचकारी जो उसके गर्भ में सफ़ेद रंग उड़ेलती थी रोज़ रात को.

सुमन : में तोह कब से आपके इंतज़ार में हु. की कब आप मुझे उस पिचकारी से नेरे अंदर रंग भर दे मालिक~ ♡

वीर : आज रात में! आज रात में सुमन! आभा को भी संग लाना. और हैप्पी होली~

सुमन : जी! होली की शुभकामनाये मालिक~

वीर ज़्यादा देरर इस क़दर सुमन के साथ खड़ा नहीं हो सकता था. क्युकी, सभी आस पास थे. मजबूरन उससे सुमन को अकेला चोरर्ण पड़ा.

और अब आखिरी बचा शख्स था~

आरोही!!!!

जो छुप छुप के नज़रे चुरा के वीर को देख रही थी. जब उसने देखा की वीर उसके hi नज़दीक आ रहा है तोह उसकी धड़कने तेज़्ज़ हो गयी.

वीर (स्माइल्स) : हैप्पी होली दी~

आरोही : H-Happy... हैप्पी होली वीर!

वीर (स्माइल्स) : क्या आप मुझे रंग नहीं लगाओगी?

आरोही : अहह? हाँ!! हाँ वो में...

आरोही ने वही थाल से गुलाबी रंग का गुलाल अपनी मुट्ठी में लिया. और धीरे धीरे वो वीर के गाल पर गुलाल लगाने लगी. उसकी आँखें वीर के चेहरे पर hi फोकस्ड थी. ख़ास कर उसके होंठो पर. और बार बार उसी रात का सन उसके मैं में मंडरा रहा था. उसकी वो पहली किश. वो भी अपने भाई के संग.

जल्द से जल्द वो वीर को रंग लगा के उस से दूर हटना चाहती थी. वर्ण ऐसा न हो की उसका दिल जोरर से धड़क धड़क के बाहर hi आ जाए.

और उसने करना भी यही चाहा. वीर को गुलाल लगाते hi वो झट से पलटी और जाने के लिए हुई की वीर ने उसकी कलाई पकड़ उससे मोड़ दिया.

वीर : किधर जा रही हो दी?? क्या मुझे रंग लगाने नहीं डौगी?

आरोही : ी... V-Veer....

वीर ने लाल रंग का गुलाल मुट्ठी में लिया और प्यार से आरोही के गोर गालो पर पूरा रंग लगा दिया.

हो गया. अब वो जा सकती थी. क्युकी, जैसे जैसे समय गुज़र रहा था, वीर के पास खड़े होना उसके लिए और भी मुश्किल होता जा रहा था.

पर इसके पहले की वो भाग पाती,

"हहहहहह!!!!???"

वो अगले hi पल, वीर की बाहो में थी.

और वीर की इस हरकत से जैसे वो मूर्ति की तरह वही जम्म के रह गयी.

वीर : आरोहीय!!!

एक कम्पन, एक सिहरन, आरोही के पूरा बदन में फेल गयी अपना नाम सुनते hi.

वीर : I'm सॉरी!!! उस दिन जो भी हुआ. वो मेरी गलती थी. मुझे ऐसे अचानक से नहीं पलटना चाहिए था. आपके लिए ये बोहत इम्पोर्टेन्ट होगा. मुझसे नाराज़ होगी आप. गुस्सा आया होगा मुझ पे. यू मिगहत इवन हेट में नाउ... पर... ट्रस्ट में! वो सब अनजाने में हुआ था मुझसे.

गलती किसी की भी नहीं थी. वीर की तोह बिलकुल भी नहीं. आखिर किश करने तोह आरोही खुद आगे बढ़ी थी उस रात. वीर ने तोह बस अपना चेहरा पलटाया था. वो भी अनजाने में. उसके बावजूद वो आज अपनी गलती मान रहा था. जो गलती उसकी थी hi नहीं.

ये देखते hi, आरोही का दिल इधर पिघल गया. जो भी ख़याल पहले आ रहे थे वीर से दूर हटने के. वो शान भर में गायब हो गए.

आरोही : N-Nahiiii!! नहीं वीर!!! इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी.

अभी भी वह, वीर की बाहो में थी.

वीर : तोह!? क्या अब आपकी बेरुखी ख़तम हुई?

आरोही : ऐसा बिलकुल भी नहीं था वीर. M-Mein तुमसे बिलकुल भी नाराज़ नहीं थी. ी वास् जस्ट... जस्ट...

वीर : !!??

आरोही : बस वो सब डाइजेस्ट करने के लिए मुझे... थोड़ा समय चाहिए था. और सच कहु तोह...

वीर : हम्म!?

आरोही (ब्लशेस) : ी वास् ग्लैड...

वीर : ...

आरोही (ब्लशेस) : ग्लैड तहत... यू... यू वेरे माय फर्स्ट... नॉट समवन ेल्स.

*बेदुम्प*

आरोही के बोल सुनते hi, वीर hairat-angez में उससे देखता रह गया.

'W-What दीद शी से?? दीद शी जस्ट!? हँ?'

[Ohhhh~ :shocked: ]

पर वीर उस से इस बात की पुष्टि नहीं कर पाया क्युकी आरोही झट्ट से उसकी बाहो से निकल भाग गयी.

वो पलटा और पीछे जाता तभी,

"माहामुउउउ~"

'हहहहह?'

एक आवाज़ ने उससे मुड़ने पर मजबूर कर दिया.

'वेट! एहहहहह??'

[Ohhh look who's here? Our little princess Fufu~]

गेट के सामने hi एक नन्ही सी बच्ची दौड़ते हुए आ रही थी. हाथो में उसके उस से भी बड़ी पिचकारी थी.

वीर : J-Juhiii???

जूही : माहामुउउउउ~

और आते hi उसने पिचकारी से पूरा रंग वीर की ऊपर उड़ेल दिया.

जूही : हहहहहए~ हैप्पी होलीई~

वीर ने हस्ते हुए उसने अपनी गॉड में उठाया और उसके मुलायम से गाल चूम लिए.

वीर : मेरी जूही यहाँ!??

जूही : ममम~ मासी और मम्मी के साथ आयी.

गेट पर फिरसे नज़रे दौड़ाई वीर ने तोह देखा श्रेया और निधि दोनों hi अंदर आ रही थी.

उनका सभी ने स्वागत किया. सभी गले मिले, एक दूसरे को रंग लगाए. वीर के चेहरे पर पहले से hi रंग लगा हुआ था. जिस कारण उसका अपीयरेंस सही से दिख न पाया वर्ण श्रेया और निधि का भी वही हाल होता जो बाकी सब का हुआ था.

श्रेया और निधि दोनों ने hi वीर को गुलाल लगाते हुए विश किया और वीर ने भी.

निधि ने जो थाना था वो वही कर रही थी. वीर से दुरी बनाये रखना. और वीर इससे भांप चूका था.

लेकिन अभी उसने निधि को एप्रोच नहीं किया. हे आलरेडी हद समथिंग इन हिज मंद.

*स्क्रेबीएईछःह*

*सक्रेईईच्ठ्ठ*

सब कुछ तोह सही चल रहा था. ये अचानक से दो लक्ज़री कार्स आके क्यों ृक्क गयी घर के सामने?

वीर के मैं में खतरे की घंटी बज्ज रही थी.

और वह रुकी एक कार का दरवाज़ा खुला और कोई बाहर आया,





करा!!!!

एक सिज़्ज़्लिंग रेड जैकेट में, अंदर वाइट टी पहने वो कार से बाहर आयी.

'व्हाट थे...!? मिस करा?? No! वेट!!! वियय? व्हाई इस शी हेरे???'

पर ये तोह कुछ भी नहीं था.

दूसरी कार का गेट खुला और एक और खूबसूरत लड़की उसमे से बाहर आयी.

सोनिआ!!!!





वीर की हालत इस वक़्त शब्दों में बया नहीं की जा सकती थी.

'Wh-What इस हप्पेनिंग??? मिस सोनिआ भी??? फुक्कककककक!!!! व्हाई इस शी हेरे??? वियय?? परीइइइइइ??? वियययययय????'

[ :लिविल्ज़: ]

'हँ? व्हाट थे फुसक्ककककक??? परीईई!!!'

[Best of luck master. I pray for your survival.]

[System has gone into the Sleep mode.]

'परीईई??? हैयययय वित्तत्त!!!! के बकककक!!!!! फूऊककककककक!!!!!!'

और वीर का डर और बढ़ गया जब एक और दूर खुला और दूसरे साइड से सुहाना बाहर निकल के आयी.

'इवन फूकिंग सुहाना!!!????? फुखखक्क मेई!!!!!! व्हाट इस शी इवन दोंग हेरे????'

इधर बाहर जैसे hi सोनिआ ने करा को देखा तोह उसका रिएक्शन भी वीर जैसा hi था.

सोनिआ : K-Kaeraaaa??? D-Diii!!! करा??? करा यहाँ क्या कर रही है?

सुहाना : हाउ वोउल्ड ी क्नोव सोनू? में भी तोह तुम्हारे साथ hi यहाँ आयी हु न?

करा : हम्म?

करा ने एक नज़र उन् दोनों को देखा पर फिर बिना उन्हें कोई भाव दिए वो अंदर आयी. और उसके अंदर आते hi, वह मौजूद सभी की निगाहें उसके ऊपर टिक गयी.

सब एकदम से शांत पद गए. बस वूफर में बज रहे गाने की hi आवाज़ आ रही थी.

ये थी उसकी प्रजेंस. जिधर भी वो जाती थी, सबका ध्यान खींच लेती थी. उसके सामने मौजूद लोग उसको रास्ता देने के लिए अपने आप हट जाते थे.

सोनाली (खुसपुसाते हुए) : होली के दिन, इतने महंगे कपडे पहनी हुई है ये? कही गंदे हो गए तोह!?

आभा : तुम्हे कपडे की पड़ी है? उनके पास बोहत पैसा है सोनाली. इतना की हम सोच भी नहीं सकते.

सोनाली : F-Fir भी... बेचारे कपडे...

वीर : M-Miss करा?

करा : यस! ी चामे तो प्ले विथ यू!

वीर : हैं? P-Play व्हाट?

करा : थिस... होली!!! व्हाट ेल्स?

वीर : होली??? मेरे साथ?

करा : ऑफ़ कोर्स~

इनकी बात हो रही थी तभी पीछे से सोनिआ भी आ गयी.

सोनिआ : V-Veeeeerrrr!!!

वीर : मिस सोनिआ!?? A-Aap भी?

सोनिआ : अहह! वे... वे चामे तो सेलिब्रेट विथ यू. कोई दिक्कत तोह नहीं है न?

वीर : No! It's... It's ऑलराइट!

सोनिआ (स्माइल्स) : थैंक यू~

पर सोनिआ और वीर की हो रही बातें शायद किसी को पसंद न आयी. करा आगे बढ़ी, उसने अपनी मुट्ठी में हर्रे रंग का गुलाल लिया और वीर के पास आके उसने पूरे एक गाल पर अपनी मुट्ठी रख के खोल दी.

आधा गुलाल तोह लगा, पर आधा गिर गया. पहली बार वो किसी को लगा रही थी. इतने सालो बाद. उस बेचारी से जैसा बना, वैसा उसने कर दिया.

और वो कड़ी हो गयी. वेट कर रही थी जैसे.

"आह्हः! राइट!" वीर को ध्यान आया.

उसने बदले में करा के गोर गोर नाज़ुक से गालो पर रंग लगाया. क्या hi सॉफ्ट त्वचा थी उसकी.

वीर : A-Aap इन् कपड़ो में होली खेलोगी?

करा : हम्म? दो थे लुक बाद?

वो घूमते हुए अपनी ड्रेस दिखाने लगी. उससे लगा था की फेस्टिवल है. तोह अच्छे कपडे पेहेन के जाय जाता है. जो की सच था. पर होली के लिए नहीं.

बेचारी...

'ी फील सो बाद फॉर हेर. शी चामे हेरे जस्ट तो प्ले विथ में.'

वीर मैं में सोच उससे देखा और बोलै,

वीर (स्माइल्स) : थे अरे फाइन. आप जैकेट उतार दो अपनी.

करा : Okay!

सोनिआ : कैराऑ~ तुम यहाँ?

करा : हम्म? यस!! हे इन्वितेद में.

'दफककककक????'

सोनिआ : वीररररर? T-Tumne करा को इन्विते भेजा और मुझे नहीं?

वीर : Wh-Whaaaattt?? No वायययययय!!

सोनिआ : तुम तोह कहते थे... मिस सोनिआ! यू अरे अस इक्वल अस मिस करा फॉर में. T-Toh क्या यही थी तुम्हारी इक्वलिटी?

करा : हम्म? :डकेस्टिव:

वीर : N-Nooo वैयय! ऐसा कुछ भी नहीं है. मेने किसी को इन्विते नहीं भेजा है. मेने तोह...

सोनिआ : मेने तुम पर पूरा यकीन किया वीर और तुमने ऐसा किया?

'फूऊकककककक! ात लीस्ट लिसेन तो में!!!!'

सोनिआ : तुम से ये उम्मीद नहीं थी वीर. बस एक इन्विते hi तोह भेजना था. तुमने...

वीर : मिस सोनिआआ~

सोनिआ : .....!?

वीर : लिसेन! में... में समझाता हु.

करा : व्हाट अरे यू इवन थिंकिंग? Didn't यू प्रॉमिस में? यू हैवे तवो चोइसस. ओने- प्ले विथ में एंड टीच में. तवो- गेट बीटन उप.

वीर : Wh-Whaaaattttttt????

सोनिआ : वीइररररर???

वीर : A-Aisa कुछ भी नहीं है. दमंत्र ित्तत्त!!!! मिस सोनिआ, ी didn't प्रॉमिस एनीथिंग.

करा : ी सी! सो, you've चूसें वायलेंस.

'फूऊऊऊक्कक्कककककककककक!!!!!!'

वीर : वेट! Let's... Let's कलम डाउन okay? मिस सोनिआ! मेने मिस करा को उन्हें लाइफ के बारे में टीचिंग्स देने का प्रॉमिस किया था. एंड no, मेने किसी को भी पर्सनली इन्विते नहीं किया है.

सोनिआ (शिघ्स) : I-I सी! That's गुड थें! अहह राइट! H-Happy होली वीर!

'ी... ी ऑलमोस्ट डीएड!!! फुकककक!!!'

आज उसकी समझ आया था. की सोनिआ और करा दोनों साथ में जब रहे तोह क्या होता था.

इस बार, सोनिआ ने गुलाल लिया और अच्छे से वीर को लगाया. वीर ने भी बदले में सोनिआ को अच्छे से गुलाल के रंग में रंग दिया.

दोनों hi करा और सोनिआ वीर के संग खेलने में लग गयी.

और इधर कड़ी बाकी औरते... एकदम जल भून गयी थी जैसे.

निधि के लिए तोह ये अच्छा hi था. फिर भी पता नहीं क्यों, उससे अंदर बोहत hi अजीब सा महसूस हो रहा था. श्रेया बेमानन से उनको इस तरह खेलते देख रही थी.

काव्य तोह सीधे जल रही थी. वो मुँह फुलाते हुए वीर को देख रही थी. और आरोही?

आरोही की नज़रे एकदम डेड थी. वीर ने जब आरोही को देखा तोह उसकी रूह hi काँप गयी.

'फुखखक्क! व्हाट... व्हाट हप्पेनेड तो हेर? व्हाई डस शी लुक्स सो स्केरी???'

और रागिनी...






उसकी नज़रो में क्या था? जेएलओसी? एंग्जायटी? या फियर???

फिर जो अब तक पीछे कड़ी हुई थी वो आयी.

सुहाना!!!

पास आते hi वीर ने उससे विश किया, "हैप्पी होली~"

पर...

सुहाना : हैप्पी होली? हैप्पी होली के बच्चे... इधर आओ तुम.

वीर : हहहह??

वो घसीटते हुए वीर को अंदर ले गयी.

सुहाना : WHERE'S माय दमन गन??

वीर : अहह! में देने आने वाला था. बूत कल बिजी था. वेट हेरे!

वो ऊपर गया और उसने अपने रूम से ग्लोक 19 उठायी और नीचे आया.

वो गन सुहाना को देने hi वाला था की इतने में नन्ही जूही दौड़ते हुए आयी और वीर के हाथ से गन छिना के ले गयी.

जूही : ेहेहेहे~ मामू मेरे लिए नई पिचकारी लाये.

'ओह्ह्ह्ह फुसक्कककककककक~'

सुहाना : आह्ह्ह्ह! N-Nahii... :शॉकिंग:

सुहाना बेचारी का तोह चेहरा hi सूख गया था. जूही इधर भागते हुए बाहर निकल गयी और...

*क्लिक*

*क्लिक*

*क्लिक*

वो ट्रिगर पे ट्रिगर दबाये जा रही थी. पर उसमे से कुछ नहीं निकला. गन खाली जो थी.

वीर और सुहाना के चेहरे इस वक़्त ऐसे थे जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो.

जूही : ये कैसी पिचकारी है? मां!!! इसमें से कुछ निकल hi नहीं रहा है.

निधि : हम्म? ये किसने दी जूही?

जूही : मामू लेके आये... मेरे लिए!

वो निधि को गन देने hi वाली थी जब वीर बीच में आ गया और उसके हाथ से गन छिना ली उसने.

वीर : अहःअहः~ वो क्या है न. ये गन खराब निकल गयी. जूही! मामू तुम्हे नई पिचकारी दिलाएंगे बाद में ठीक?

जूही : ोकाययययय~

'थैंक गॉड!!! ये मान गयी!!!'

चुपके से वीर ने गन सुहाना को थमाई तोह वो अपनी साड़ी में छिपाते हुए गन कार में जाके रख आयी.

और आते hi उसने सबसे पहले वीर के मुँह को पोता. गुस्से में एकदम.

सुहाना : हम्फ~ केयरलेस इंसान...

पर उसका हाथ गलती से जाके उसकी आँख में लग गया.

वीर : ोुछःह....!

सुहाना : अहह! सॉरी... वो गलती से...

रागिनी : वीइरररर??? क्या हुआए???

रागिनी जिसने वीर की आवाज़ सुनी वो अचानक hi भागते हुए आयी.

और वीर की आँख देख वो उससे अंदर वाशरूम में ले गयी.

रागिनी : ठीक तोह हो न? मुझे दिखाओ आँख अपनी.

वीर : ठीक हु भाभी. शायद रंग चला गया है. आँखों में ठन्डे पानी के चीते मारूंगा तोह सही हो जाएगा.

रागिनी : मेने कहा न दिखाओ इधर.

वीर : O-Okay!

और वीर वही स्टूल पर बैठ गया. रागिनी झुकी और उसके क़रीब आयी. और उसने अपने हाथो से वीर की आँखों में चीते मारे.

अब वीर की आँख पहले से काफी बेहतर थी.

वीर : अब सही है भाभी!

रागिनी : हम्म~

वीर : ...

रागिनी : ...

वीर : ????

रागिनी : ....

वीर : उम्...

रागिनी : तुम्हे पता है वीर?

वीर : हँ?

रागिनी (स्माइल्स) : पिछले त्यौहार में. दिवाली वाली रात. तुम किस अवस्था में मिले थे!? तुम... दिवाली तक नहीं मन पाए थे. कितना कष्ट सहा था तुमने.

वीर : ....

रागिनी : और आज तुम्हे... होली में हस्सी ख़ुशी खेलता देखा न. तोह...

अचानक hi रागिनी की आँखें नम्म हो गयी.

वीर : भाभी?? आप...!

रागिनी : हम्म~ तुम्हे खुश देख के. मैं खुश हो गया मेरा.

वीर : B-Bhabhi...!

दोनों के चेहरे बेहद क़रीब थे. झुकने की वजह से रागिनी का क्लीवेज साफ़ साफ़ झलक रहा था. न चाहते हुए भी, वीर उस दृश्य को देख, उसका छोटा भाई सलामी ठोकने लगा था.

जैसे hi रागिनी की नज़र उसके पयजामे के अंदर के उभार पर पड़ी तोह उसके अंदर hi अंदर एक ख़ुशी की लेहेर दौड़ गयी.

एक टेस्ट सक्सेसफुल हो चूका था उसका. यही की, वीर उसके प्रति सेक्सुअली अत्त्रक्टेड था. अब बारी थी दूसरे टेस्ट की.

पर उसके पहले... एक चीज़ करनी ज़रूरी थी.

वो वीर की आँखों में आँखें दाल आगे बढ़ी. उन् दोनों की सासें भी अब एक दूसरे को फील हो रही थी. दोनों के चेहरे पर गुलाल लगा हुआ था. पर होंठो पर नहीं...

और अगले hi पल जैसे hi वीर ने अपनी पलके झपकाई,

"ममम....!!??????"

रागिनी ने अपने होंठ वीर के होंठो से चिपका दिए. शान भर के लिए वीर को कुछ भी समझ नहीं आया. मंद जैसे ब्लेंक हो गया उसका.

रागिनी उस से बेल की तरह लिपट चुकी थी. पालक झपकते hi उसके दोनों हाथ वीर के सर्र के पीछे के बालो को भींच चुके थे. और उसके रसीले होंठ वीर के होंठो को अपनी गिरफ्त में लिए हुए थे.

"आआह्ह्हह्ह्ह्ह~"

जैसे hi वीर को सिचुएशन समझ आयी, वो हड़बड़ा के पीछे हटा.

दोनों तेज़्ज़ सासें लिए एक दूजे को देख रहे थे.

जहा वीर की आँखों में प्रश्न था की ये सब क्या था? तोह वही रागिनी की आँखों में एक नशा था. खुमारी!!!

पर... आज के लिए इतना बोहत था.

रागिनी : *हफ़* *हफ़* वीर...!!! *हफ़*

वीर : Y-Ye सब... *हफ़* ये सब क्या था भाभी? व्हाई दीद यू...!???

वो फिर आगे बढ़ी,

रागिनी : यू सी थी लिप्स?

वीर : *हफ़ हफ़* !!???

रागिनी : यू *हफ़* यू कैन स्टील थम... अन्य्तिमे!!!!

और बस, वीर को उसी हालत में चोरर वो बाहर निकल गयी. उसकी खुद की हालत जो खराब थी. भले hi आज उसने इतने बोल्ड मूव को अंजाम दिया. पर... पर करते वक़्त उसका खुद का दिल ज़र्रों से धड़क रहा था.

और इधर वीर बस हफ्ता hi रह गया. एकदम स्तब्ध!!!

'व्हाट... व्हाट काइंड ऑफ़ होली ऍम ी इवन प्लेइंग?'

***

कुछ इसी प्रकार से उसकी आज की ये होली बीती थी.

कार में वो इस वक़्त सुहाना के साथ बैठा हुआ था. बाकी सभी घर के अंदर थे.

सुहाना ने एक कागज़ का पैकेट उससे थमाया हुआ था.

वीर : What's थिस?

सुहाना : कुछ ऐसा जिसकी तलाश में तुम थे. It's इम्पोर्टेन्ट. ओपन आईटी. You'll क्नोव व्हाट आईटी इस.

वीर ने जैसे hi उससे खोला और देखा. तोह उसकी आँखें हैरानी और ख़ुशी के मारे फैलती चली गयी.

.

.

.

.

.

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.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

ये अपडेट मोरे थान 5.2क वर्ड्स का है. उसके बाद भी मेने इससे मेगा अपडेट में नहीं रखा है. देख रहे हो दिल मेरा? :रेडफास:


अन्य्वयस! लिखे ठोकने का. और रेवोस रखना का. नेक्स्ट अपडेट इस ा सरप्राइज फॉर यू आल. धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 79 ~ गोइंग अब्रॉड.

अब तक...

कार में वो इस वक़्त सुहाना के साथ बैठा हुआ था. बाकी सभी घर के अंदर थे.

सुहाना ने एक कागज़ का पैकेट उससे थमाया हुआ था.

वीर : What's थिस?

सुहाना : कुछ ऐसा जिसकी तलाश में तुम थे. It's इम्पोर्टेन्ट. ओपन आईटी. You'll क्नोव व्हाट आईटी इस.

वीर ने जैसे hi उससे खोला और देखा. तोह उसकी आँखें हैरानी और ख़ुशी के मारे फैलती चली गयी.


अब आगे...

इस साल के होली के पर्व का अंत हो चूका था. और इस प्रकार की होली आज तक वीर ने अपने पूरे जीवन में पहले कभी नहीं खेली थी. ये होली उससे जीवन भर याद रहने वाली थी. जहा इस होली में मज़ा था, तोह साथ hi एक सजा भी थी.

इतनी साड़ी लड़किया उसके इर्द गिर्द जब साथ में आ जाए, तोह इसका क्या परिणाम होता था? इसका वीर को अनुमान लग चूका था. खासकर, जब करा और सोनिआ जैसी लड़किया साथ में हो. वो दोनों तोह जगह को युद्धभूमि में बदल देती थी.

चाओस!!! हर्र जगह चाओस hi फेल जाता था फिर तोह.

कल उसके घर कारन भी आया था होली के लिए. वो बेचारा ये सोच के आया था की वीर की कोई गर्लफ्रेंड नहीं है तोह वो उसका मूड ठीक करने के लिए, अपनी पहचान की हाई क्लास लेडीज के बीच उससे होली खिलवाने ले जाएगा. इसी बहाने वीर का मूड भी ठीक हो जाएगा. एक दोस्त होने के फ़र्ज़ निभा रहा था वह.

पर जैसे hi वो वीर के घर पहुचा तोह, उसके चेहरे से उसका रंग उड़द चूका था. वीर के अगल बगल गोपिया hi गोपिया थी. ये सब क्या चल रहा था बहनचोद? ये वीर के पास तोह गफ hi नहीं थी. ये इतनी साड़ी लड़किया एकदम से कहा से टपक गयी?

और वो भी सब एक से एक सुन्दर, हुस्न की देवियाँ. ऊपर से उसकी खुद की बहिन करा? वो यहाँ क्या कर रही थी?

करा और वीर को आपस में होली खेलते देख के hi उसका दिमाग काम करना बंद कर चूका था. जैसे तैसे होश बनाये हुए था वह.

जिस बहिन के साथ आज तक वह खुद ठीक से होली नहीं खेल पाया था वो आज वीर के साथ होली खेल रही थी? कारन को पल भर के लिए लगा था वो किसी गलत घर में आ गया है. हां यही हुआ होगा. या कोई सपना देख रहा है. पर नहीं, ये सब तोह सच था.

करा, यहाँ तक की करा की बचपन की दोस्त सोनिआ, उसकी बड़ी बहिन सुहाना. और न जाने कितनी लड़किया. और बीच में बस एक वीर. कारन अपनी किस्मत को hi कोस सकता था. और वीर की किस्मत को भी.

खर्र! जो भी था. इसी बहाने कारन को कल अपनी बहिन का मुस्कुराता चेहरा तोह देखने मिल गया. साथ hi इतने बरसो बाद, उसकी बहिन ने खुद से पहल कर के उसके गालो पर रंग लगाया. इस से ज़्यादा ख़ुशी की बात क्या hi हो सकती थी उसके लिए.

मैं तोह कर रहा था उसका की उसी वक़्त वीर को गोपचे में ले जाके उसकी खबर ले. पर जब करा ने खुद आके उसके गाल पर गुलाल लगाया. तोह कारन जैसे अपना सारा गुस्सा भूल चूका था.

न केवल कारन, बल्कि मनोरथ और वीर की चची सुमित्रा भी आयी थी रागिनी से मिलने.

भले hi रागिनी ने तलाक दे दिया था विवेक को पर मनोरथ अभी भी उससे hi अपने पोते की पत्नी मानते थे. सुमित्रा शायद ग्लानि के चलते मिलने आयी थी. वो अपने बेटे की हरकत पर अभी भी शर्मिंदा थी.

ये सब तोह समाप्त हो चूका था. लेकिन, कल जो सुहाना ने उससे दिया था. वो पैकेज. उसमे राखी चीज़. वो थी असली चीज़.

इसका कब से वीर को इंतज़ार था. कब से इसकी तलाश थी उससे.

जी हाँ!! वीर की असली माँ की डिटेल्स.

कल उस दिए गए पैकेज में वीर की माँ से जुडी कुछ डिटेल्स थी. वो हाल hi में कहा गयी हुई थी, क्या खोज की, और अब किधर पे है? सब कुछ उस पैकेज में था. एक फाइल में.

असली सरप्राइज तोह सुहाना hi ने दिया था उससे कल ये देके. और वीर अब रेस्टलेस था. एकदम बेताब.

कैसे नहीं होगा? उसकी सगी माँ...

जिनके बारे में वो कुछ नहीं जानता था. कब से उनकी तलाश में था वह. कितने सवाल थे उसके मैं में. क्यों चोरर के गयी वो उससे इस हाल में? क्यों कभी नहीं मिलने आयी उस से? क्यों भूल गयी उसके बारे में? क्या वो अब भी उससे याद करती है? ये सारे सवालों का जवाब अब वो उनसे hi जान सकता था. उनकी अपनी जुबां से. अब जब उसकी माँ का पता लग चूका था, तोह वीर बिलकुल भी नहीं रुकने वाला था.

उसके पास रुकने का कोई रीज़न भी नहीं था. स्लोगन मर्डर चूका था. करा फिलहाल सेफ थी. उसका फ़ूड ट्रक सोनाली देख hi रही थी. और कॉलेज के एक्साम्स भी ख़तम हो चुके थे. कोई भी रीज़न ऐसा नहीं था जो वीर को जाने से रोक सके.

हाँ, एक मटर था. निधि का मटर. पर वीर ने ठान लिया था. जब वो वापस आएगा तब सबसे पहले निधि के मटर को hi सोल्वे करेगा.

और उसने तय कर लिया था की...

वो अपनी सगी माँ से मिलने जाएगा. आखिर उसकी एक बहिन भी तोह है साथ में उनके. उस से भी तोह मिलना है वीर को. न जाने किसी दिखती होगी? क्या नाम होगा उसका? क्या वो वीर को जानती भी होगी या नहीं? केसा रियेक्ट करेगी वह? वीर जैसे इतना डेस्पेरेट था उन् दोनों से मिलने के लिए.

और अपनी इसी ट्रिप को अंजाम देने के लिए वो आज सुहाना के पास उसके ऑफिस आया हुआ था.

सुहाना, उसके सामने एक बिज़नेस ऑउटफिट में बैठे उससे hi देख रही थी.

सुहाना : तोह तुम चाहते हो अब ये भी में hi करू?

वीर : यदि में खुद कर सकता तोह भला आपके पास क्यों आता?

सुहाना : नौपे! I'm सॉरी! ये काम इतनी जल्दी नहीं हो सकता. में कोई बोतल में से निकली जीन नहीं हु जो तुम्हारा हर्र काम कर दूंगी.

वीर : बूत it's रियली इम्पोर्टेन्ट.

सुहाना : देखो! तुम जो ये काम कह रहे हो न? नहीं! पहले तोह ये आईडिया hi वाहियात है. किसने दिया तुम्हे ये आईडिया? हाँ? कौन बेवक़ूफ़ है ये?

[Huh? What did she say? Master~ I didn't hear that wrong right? Isne mere idea ko waahiyat kaha? Where's my lance?]

और हमारी पारी भड़क उठी. क्यों न भड़के? सुहाना ने उसके आईडिया को वाहियात जो कह दिया था. पर देखा जाए तोह गलती सुहाना की भी नहीं थी. आईडिया hi ऐसा था.

जब पारी को पता लगा की वीर डायरेक्टली अपनी सगी माँ से मिलने जा रहा है तोह उससे वीर की ये एप्रोच पसंद नहीं आयी.

वीर डायरेक्टली जा के अपनी माँ से मिलने वाला था. उन्हें सब कुछ बताने वाला था. और उनसे सब कुछ पूछने वाला था. अपने सारे सवालों के जवाब मांगने वाला था वह. शायद वो अपनी माँ की खबर पाते hi, भावनाओ में बह गया था और उनसे जल्द से जल्द मिलना चाहता था सब कुछ jaan'ne के लिए.

पर पारी को ये एप्रोच ज़रा भी पसंद नहीं आयी. ये भी कोई तरीक़ा था? उसके हिसाब से ये सही ढंग नहीं था. और इसलिए उसने ये आईडिया दिया था~

ान आईडिया तो हाईड योर आइडेंटिटी व्हेन मीटिंग विथ योर मदर. हाईड आईटी अस मच अस यू कैन.

पारी का सुझाव था की वीर डायरेक्टली जा के अपनी आइडेंटिटी न बताये. उसने वीर को सारे पॉइंट्स रखते हुए अपनी बात समझायी. वीर समझदार था तोह पारी की बात सुनते hi वो एग्री हो गया.

ज़रा सोचिये की आपकी माँ आपको बचपन में चोरर के चली गयी. कभी आपसे मिलने नहीं आयी और उनके बारे में घर पर ऐसी कोई चीज़ नहीं है जो उजागर हो सके और उनके बारे में कुछ बता सके.

अब ऐसे में आप को उनकी जानकारी मिलती है और आप फौरन वह जाके सब कुछ बता देते हो. फिर आप उनसे अपने सवालों के जवाब मांगते हो.

क्या वो बताएंगी?

नाहीईई!!!!!! बिलकुल नहीं!!!

कोई न कोई बड़ा रीज़न ज़रूर था जो वीर की माँ उस से अब तक छिपा रही थी. तभी तोह वह उससे चोरर के गयी थी. और अब तक मिलने भी न आयी.

पारी ने यही समझाया था. अपनी माँ से मिलो, पर उन्हें बताओ नहीं कौन हो. ऐसे में वो उससे एक स्ट्रेंजर के रूप में देखेंगी.

उनसे मिलने के बाद उनसे दोस्ती करो और उनसे जानो की क्या कुछ हुआ था उनके पास्ट में. वीर की माँ वीर को ये सब नहीं बताएंगी, पर किसी और से तोह शेयर कर hi सकती थी!? और यही पे पारी का प्लान काम आने वाला था.

वीर का टास्क था~ एक स्ट्रेंजर बन्न के उनसे मिलना, उन्हें jaan'na और उनसे जितना हो सके, उनके अतीत की बातें उजागर करवाना.

पर वीर और पारी दोनों hi एक बात नहीं जानते थे. जिस भावना ने आज तक अपनी बेटी तक को सच नहीं बताया, वो एक स्ट्रेंजर के साथ अपनी बातें कैसे शेयर कर सकती थी?

यहाँ पर वीर और पारी दोनों hi अँधेरे में थे. और वो केवल अभी एक hi दिक्कत पर फोकस्ड थे.

वो दिक्कत थी की...

यदि वीर उनसे वह मिलने जाएगा. तोह कैसे मिलेगा?

क्युकी, भावना इस वक़्त अपने दिल्ली के घर में थी hi नहीं. वो तोह आलरेडी अपनी दूसरी ेष्कावतिओं साइट पर निकल चुकी थी. और वो भी विदेश.

यदि, वीर उनसे एक स्ट्रेंजर के रूप में मिलेगा, फिर भी कोई न कोई पड़ तोह उसके पास रहना चाहिए ताकि वो अपनी माँ को एप्रोच कर सके.

ऐसे में बस एक hi उपाय था.

फकिंग योरसेल्फ अस ा यंग अर्चेओलॉजिस्ट.

अब चुकी भावना भारत की अर्चेओलॉजिस्ट थी. वीर के पास भारत सरकार की तरफ से एक ईद होना ज़रूरी था. एक लीगल ईद जो उससे परमिट करे अर्चेओलॉजिकल साइट्स में रिसर्च और खोज बीन के लिए.

और कौन कर सकता था ये?

ओने एंड ओनली, सुहाना!

पर, इस बार वीर को निराशाजनक उत्तर मिला सुहाना से.

सुहाना (शिघ्स) : लिसेन! सबसे पहली बात ये इललीगल है. यदि गलती से भी किसी ने ईद पहचान ली या तुमसे डिटेल्स मांग ली तोह तुम क्या करोगे? वो रेट्रस करेंगे सब कुछ. और फिर बात मुझपे आएगी. में मटर संभाल लुंगी पर मुझे फ्री का हेडाचे नहीं चाहिए.

वीर : ...

सुहाना : और वैसे भी ये किस टाइप का आईडिया है तुम्हारा? की अपनी hi माँ को ये नहीं बताओगे की तुम उनके बेटे हो. Wtf? तोह मेने डिटेल्स hi क्यों दी तुम्हे? जाओ न अब! आस्क आल व्हाट यू वांट. ब्रिंग हेर बैक हेरे. ये फ़ालतू के ढ़ाकोचले क्यों कर रहे हो?

वीर : She's हिडिंग समथिंग. समथिंग बिग.

सुहाना : हँ?

वीर (स्तारेस) : में उन्हें डायरेक्टली ये नहीं बता सकता. ोथेरविसे, शी won't तेल्ल में. इसलिए... ी मस्ट हाईड माय आइडेंटिटी. अस मच अस ी कैन.

सुहाना (शिघ्स) : सॉरी, बूत में ये नहीं कर सकती. It's तू रिस्की.

वीर : वेल! ी अंडरस्टैंड! ऑलराइट! थैंक्स!

और वीर बिना कुछ आगे बोले, वह से मुदा और जाने लगा. ऐसा पहली बार था, की वीर ने सुहाना से ज़िद्द नहीं की. एक बार का जवाब सुनते hi वो जाने लगा.

सुहाना : तहत... ी...

सुहाना ने कुछ बोलना चाहा तोह वीर पलटा.

वीर : ??

सुहाना : ी... ी रियली कन्नोत टेक सुच रिस्क्स. ोथेरविसे, मेने...

वीर : It's okay! सी यू लेटर!

इतना बोल वीर वह से निकल गया. उसने पीछे मुद के देखा भी नहीं. सुहाना के मैं में न जाने क्या चल रहा था. वो बस वीर को जाता हुआ देखती रही. मैं में उलझन थी. वास् शी कंसर्नड? अबाउट वीर? हु कनौस!?

***

अब बस अभी एक काम और बचा था.

बलहार से मिलना.

वीर के प्लान को कामयाब करने में उसका hi तोह सबसे बड़ा हाथ था. ऐसा हाथ, जो फिलहाल टूटा हुआ था. ः!

लीम्बो के इस्तेमाल से, वीर ने बलहार की लिंब को मरोड़ के रख दिया था. अब बलहार चाह के भी उस हाथ को पहले जैसा नहीं कर सकता था. वीर hi था जो उससे इस मुश्किल से बाहर निकाल सकता था.

इसलिए, सुहाना के ऑफिस से सीधा वीर स्लोगन के मैं हिडौट की ऑर्डर गया.

अंदर पॅहुचते hi वह मौजूद धेरर सारे आदमी फौरन hi वीर को पहचान गए.

लास्ट टाइम, किसी ने वीर का मज़ाक उड़ाया था वह तोह बलहार ने क्या हालत करि थी ये उन् सब को याद था.

उनके मैं में ये बात तब से hi बैठ चुकी थी की यदि बलहार उनका बॉस था. तोह ये सामने खड़ा बाँदा उनके बॉस का भी बॉस था. इसलिए इस से बकचोदी नहीं.

वीर : बलहार कहा है?

आदमी 1 : वो... वो बस आ hi रहे है.

और अगले hi पल बलहार आ भी गया.

बलहार : A-Arre...!? अरे बॉस आप? हाहाहाहा~ आइये... आइये..

जब से बलहार को पता चला था की वीर ने स्लोगन को अकेले हंट किया. और तोह और मैथ्यू को भी अकेले निपटा डाला. तब से उसका ऐटिटूड वीर के प्रति पूरा 180° फ्लिप हो चूका था.

हे वेंट फ्रॉम ा डोमिनीरिंग ठग तो ा लिकिंग डॉग.

वीर : मेने तुम्हे जुबां दी थी. यदि स्लोगन को मारने का प्लान सफल हुआ तोह में तुम्हे उसके रिसोर्सेज की साड़ी एक्सेस दे दूंगा. सब कुछ तुम्हारा होगा.

बलहार (स्माइल्स) : बिलकुल! बिलकुल! बॉस! हाहाहाहा~

वीर : और में देख रहा हु तुमने आलरेडी अपने आदमियों से काफी कुछ अपने अंडर में करवा लिया है.

बलहार : बिलकुल बॉस!!! जो मेरा है वो तोह आपका hi है. पर... बस ये...

वीर : ी क्नोव! तुम्हारा हाथ. उसी के लिए तोह में यहाँ हु.

बलहार : S-Sach? हाहाहा~ तोह बॉस, M-Mera हाथ अब ठीक तोह हो जाएगा न?

वीर (स्माइल्स) : ऑफ़ कोर्स! पर उस से पहले...

बलहार : हँ?

वीर : मेने एक शर्त और राखी थी. याद है न?

बलहार : ....!?

वीर : यही की आज से... अब तुम मेरे अंडर में काम करोगे. मुझे जब जिधर भी तुम्हारी ज़रुरत पड़ेगी. तुम्हे आना होगा. याद है न?

बलहार : हँ?? B-Bilkul! ये भी कोई कहने की बात है बॉस? आज से ये बलहार और उसके आदमी बॉस के लिए hi काम करेंगे.

वीर (स्माइल्स) : गुड!

वीर फिर आगे बढ़ा, और बलहार का हाथ थामा.

और अगले hi शान...

*डिंग*

लीम्बो!!!

*कराआक्ककककक*

"ाआर्डरह्ह्ह्हह्ह!!!!!!!!"

बलहार दर्द से कराह. उससे एक तेज़्ज़ दर्द महसूस हुआ अपने हाथ में. पर उसके बाद hi, वो दर्द अचानक से काम होने लगा.

उसने अपना हाथ हिला के देखा और अचानक hi उसके चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ गयी.

बलहार : हाह... ः... हाहाहाहा~ मेरा हाथ... M-Mera हाथ... मेरा हाथ ठीक हो गया. मेरा हाथ पहले जैसा हो गया. देखा तुम लोगो ने... हाहाहा~ ये देखो... ये देखो हाथ मेरा...

वो खुश होते hi अपने हाथ को घुमा घुमा के दिखाने लगा.

बलहार : B-Boss!! इस बलहार के लिए कोई भी काम हो बेझिजक बता देना. काम हो जाएगा.

वीर (स्माइल्स) : ऑफ़ कोर्स! चलता हु.

और वीर वह से अपना घर आ गया.

***

उसके घर आते hi...

*डिंग*

[You have established a gang under your control.]

[You have now stepped into the underworld.]

*डिंग*

[Fame tab has been unlocked.]

*डिंग*

[You have received 200 Fame Points.]

[Fame


बायो : फेम इस थे पॉपुलैरिटी तब ऑफ़ थे होस्ट. मोरे थे फेम, मोरे आईटी विल बे बेटर. फेम रेप्रेसेंट्स थे सोशल स्टैंडिंग ऑफ़ थे होस्ट इन थे वर्ल्ड. फेम पॉइंट्स कैन बे अचीवेद बी वेरियस मीन्स. सेटिंग उप योर नाम इन थे आउटर वर्ल्ड और सेटिंग उप ा लार्ज बिज़नेस कैन अल्लोव होस्ट तो एस्टब्लिश नेवेर कनेक्शंस. हंस, इन्क्रेअसिंग थे फेम.]

[Current Fame : 600]

फेम तब अनलॉक हो चूका था. ये फेम तब वीर की समाज में क्या इमेज है उसको दर्शाने के लिए था.

वीर जितना ज़्यादा अपना नाम दुनिया में कमाएगा, फेम उतना hi बढ़ेगा और फायदा वीर का hi होएगा.

[Now Now master!! Mujhe aapko kuch important baatein bataani hai.]

'यदि ये फेम वाली बात है तोह don't वोर्री. में आलरेडी सब समझ चूका हु पढ़ने के बाद.'

[No! Not this...!]

'हम्म? फेम के बारे में नहीं बताना है तोह और क्या बताना चाहती हो पारी?'

[It's about your stats.]

'स्टैट्स!?'

[Yes! Aap already first limit reach kar chuke ho. Ek average person ki ideal limit.]

'हँ!? वेट! Don't तेल्ल में...!'

[Yes! Master! 100 points tak ki limit ek average person kii hai. Ek average person khud ko behtar banaate hue keval 100 tak hi reach kar sakta hai.]

'वेट!!! तुमने तोह मुझे काफी पहले बताया था न की... ब्रूस ली के स्टैट्स भी 90 के आस पास होंगे!? तोह ये एवरेज पर्सन के कैसे 100 की लिमिट है? दो यू मैं, ब्रूस ली वास् ान एवरेज पर्सन? हक no!!!'

[No Master! Ye kisne kaha tha aapse ki Bruce Lee ke stats 100 se neeche honge!?]

'हँ!?? व्हाट थे फ़क? तुमने hi तोह...'

[Ahh! That might be my other personality Master.]

'व्हाट थे...!?'

[Anyways!!! Mein aapko samjhaati hu. 100 stats tak ki limit ye darshaati hai ki ek average vyakti apne aap ko behtar banaate hue keval iss point tak hi pohuch sakta hai. Iske aage nahi jaa sakta.]

'यदि ऐसा है... थें जीनियस लोग...'

[Yes!! You are correct Master! Genius people ke stats above 100 rehte hai. For example, aapne abhi tak Kaera ke stats check nahi kiye. Right?]

'N-No ी didn't...'

[Kabhi kariyega. I can assure you ki uska intelligence above 100 hi hoga. A sign of a genius.]

'ी सी! हम्म! सो तुम्हारे कहने का मतलब है की में फर्स्ट लिमिट रीच कर चूका हु. और अब में इस लिमिट को क्रॉस भी कर सकता हु.'

[Exactly Master!!!]

'एंड लेट में गेस. ये इतनी आसानी तोह होने से रहा राइट? सो तेल्ल में! क्या कुछ करना होगा मुझे इस लिमिट को क्रॉस करने के लिए?'

[Hooo~ Master! You are getting sharp day be day. As expected from you Master!]

'तेल्ल में पारी...!'

[Hmm~ Baat simple hai Master. Yadi stat ki limit ko cross karna hai toh...]

'तोह...!?'

[Toh points spend karne honge.]

'बस!?'

[Baat itni hi nahi hai Master. It's...]

'हम्म? कहो में सुन्न रहा हु.'

[Okay~ So... Aisa hai ki... Harr ek stat ki aapko limit cross karni hogi. Aisa isliye kyuki, aap system ko bataana chaah rahe ho ki ab aap average vyakti ke max potential se aage badhna chaahte ho.]

'ी सी...! सो!?'

[So... Usse karne ke liye. Jis stats me aapko aage badhna hai. Unki limits cross karni hongi. And to do that, you'll have to pay a price. For example, yadi aap strength stat ki limit cross karna chaahte ho toh aapko ek amount pay karna hoga tab jaake wo 100 ki limit extend hoegi. Aur fir aap apni strength 100 ke aage badha paoge. Then, you'll belong into the genius category.]

'समझ गया. तोह? क्या है अमाउंट?'

[It's...]

'अब बता भी दो पारी!'

[It's 2000 points for a single stat.]

'हहहहहह? क्या कहा?'

[It's... It's 2000 points master. For a single stat.]

'फुसक्ककककक! ये सिस्टम मुझे लूटने के लिए बना है क्या? 2000 पॉइंट्स? ऐसे में मेरे 5 स्टैट्स है. तोह हर्र एक की लिमिट क्रॉस करने में. फुक्कक्कककककक!!! 10,000 पॉइंट्स लगेंगे.'

[And this is not the end. Abhi tak aapke 2 points 1 point ke baraabar hote the. Par ab aisa nahi hoega.]

'N-Nahi... मज़ाक मत करना okay!?'

[I'm sorry Master! But this is how it is. Ab se aapke 10 points ek point ke barabaar honge. In other words, yadi Strength Stat ko 100 se 101 par laana hai toh aapko 10 points add karne honge.]

'फूऊऊऊक्कक्ककककक थिस सितमम्म!!!! डमनणणन ोूउउ!!!!!'

***

4 डेज लेटर...

वीर इस वक़्त जल्दबाज़ी में अपना ज़रूरी सामान उठा उठा के एक बैग में दाल रहा था.

और उसके ठीक पीछे कड़ी रागिनी उससे हैरानी में देखे जा रही थी.






ये अचानक वीर को क्या हो गया था? अपना बैग क्यों पैक करने लगा? कहा जा रहा था वो इस वक़्त?

रागिनी : V-Veerrr!?? कहा जा रहे हो? ये बैग क्यों पैक कर रहे हो?

वीर : अभी सवाल मत पूछिए भाभी! बोहत अर्जेंट है. मुझे निकलना होगा.

रागिनी : व्हाट!?? बूत...

वीर तभी अपनी जगह से खड़ा हुआ और रागिनी के समीप आया. रागिनी की आँखें उसके चेहरे को hi देख रही थी.

वीर : मुझे मेरी असली माँ का पता लग चूका है भाभी.

और ये सुनते hi रागिनी आश्चर्य में रह गयी. वीर की माँ!??? सगी माँ???

रागिनी : K-Kyaaaaaa!?? T-Tumhari माँ? वेट यू मैं...?

वीर : जी हाँ भाभी! मेरी रियल माँ... सगी माँ...

रागिनी : व्हाट? कहा से? कैसे??? कहा है वह???

वो बेहद खुश थी. हैरान भी और थोड़ी उत्सुकता से भरी हुई भी.

वीर : में सब बाद में बताऊंगा. फिलहाल मुझे जल्द से जल्द निकलना होगा भाभी.

रागिनी : A-Arre ऐसे कैसे?? ऐसे अचानक? कहा जा रहे हो? कहा है पे है तुम्हारी मां? M-Mein भी चलती हु तुम्हारे साथ. तुम अकेले कहा भटकोगे? तुम्हारा ध्यान कौन रखेगा? हाँ? वेट!!! में आती हु...

कहते हुए वो हड़बड़ी में मुद के जाने के लिए हुई. पर उसके मुड़ते hi वीर ने उसकी कोमल कलाई थाम ली. और रागिनी वही जम्म के रह गयी.

वीर : भाभी! प्लीज! अभी मुझे जाने दीजिये. में फॉरेन जा रहा हु.

फॉरेन शब्द सुनते hi रागिनी पलट के वीर को असमंजस में देखने लगी.

वीर ने उसकी ये हालत देख उसके कंधे पर अपने दोनों हाथ रखे और उसकी ऑर्डर झुकते हुए बोलै,

वीर : ी क्नोव आपके मैं में धेरर सारे सवाल है. पर अभी में उन् सबके जवाब नहीं दे सकता. बस इतना समझ लीजिये की मुझे कही से इन्फो मिली है की मेरी माँ..

असली माँ.... वो ेगीपत में है इस समय. एक अर्चेओलॉजिस्ट है वह.

रागिनी : E-Egypt? अर्चेओलॉजिस्ट?

वीर (स्माइल्स) : जी! एक बार उनसे मिल लू. फिर वापस आके आपको सब कुछ बताऊंगा में.

रागिनी : अरे पर... वीसा का क्या? ट्रेवल में तोह लगेगा न? और पासपोर्ट तुम्हारा? सब रखा है न? और खाने के लिए मेने तोह कुछ बनाया hi नहीं... और तुम्हारा बैग रेडी हो गया?

वीर : हाहाहा~ चिल भाभी!!! चिल!!! साड़ी चीज़ो का इंतज़ाम हो चूका है. इतने दिनों से यही तोह कर रहा था.

रागिनी : और तुमने एक बार भी मुझे बताना ज़रूरी नहीं समझा?

वीर उसकी बात पर कुछ न बोलै. वह रागिनी को शीशे के सामने ले गया. और उसके पीछे जा के खड़ा हो गया.

दोनों hi रागिनी और वीर इस समय दर्पण में एक दूसरे को निहार रहे थे.

वीर : क्लोज योर आईज!!!

रागिनी : हहहह??

वीर : अपनी आँखें बंद करिये भाभी!!

वीर के कहने पर रागिनी में अपनी आँखें बंद कर ली.

और तभी कुछ पल बाद...

"अह्ह्ह्ह!!!"

हैरानी में उसकी आँखें झटके में खुल गयी.

'थिस... थिस...!!!' उसकी आँखें शीशे में खुद को देख आसुओ की नमी से टिमटिमा रही थी.

उसके गले में... एक पेंडंट था.

एक बेहद hi सुन्दर सा पेंडंट.

वीर के हाथ अभी भी उसके नंगे गले के पीछे उस पेंडंट को बाँधने में लगे हुए थे.

वीर : आपने पहली बार मुझसे कुछ माँगा था. में कैसे मन कर सकता था? वैसे ये हो सकता है आपको पसंद न आये. मुझे पसंद आया था इसलिए में इससे ले आया.

उसने इतना कहा hi था की रागिनी ने उस पेंडंट को अपने हाथो में कस के भींच लिया,

रागिनी : N-Nooooooo~ थिस... It's ब्यूटीफुल. थिस इस परफेक्ट!!! ी लिखे आईटी. न्यू~ ी लव आईटी!!! Th-Thank यू वीर!!!

रागिनी का रिएक्शन देख वीर के चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गयी.

वीर : ः~ आप बेहद क्यूट हो भाभी.

रागिनी (खुसपुसाते हुए) : मेरी तोह चाहत भी बेहद्द है वीर!

वीर : हम्म?

रागिनी : मेने कहा... थैंक यू वीर! थैंक यू सो मच. इससे में हमेशा संभाल के रखूंगी. ी लव थिस. थैंक यू~

और उसने पलट के वीर के गाल पर अपने लाल होंठ चिपका दिए. और उनकी छाप भी चोरर दी.

वीर : एहम... तहत...

रागिनी (स्माइल्स) : तोह... तुम अभी निकल रहे हो?

वीर : J-Jii!

रागिनी : वापस आके...

वीर : हाँ हाँ! साड़ी डिटेल्स देना है. ी क्नोव~

रागिनी (स्माइल्स) : यस!

***

और कुछ इस तरह वीर इन् मामलो से निपटा. वो तैयार था... मुंबई चौररने के लिए.

उसकी डेस्टिनेशन थी ~ ेगीपत!!!!

भावना भले hi ग़िज़ा पिरामिड्स की खोज से लौट आयी थी. पर ेगीपत में केवल यही पिरामिड्स नहीं थे. हाल hi में, रेसेअर्चेर्स ने एक और पिरामिड खोजै था. उसके अंदर की साड़ी छान बीन करने ढेर्रो रेसेअर्चेर्स और साइंटिस्ट्स आये हुए थे. भावना उनमे से एक थी.

ये एक बड़े स्केल का ेष्कावतिओं था.

और वीर रेडी था.

अपनी माँ से फाइनली मिलने के लिए. और अपनी उस बहिन से भी.

'में आ रहा हु... माँ~'

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!

लिखे ठोकने का और रेवोस रखने का.


कीप सपोर्टिंग! ✨
 
अपडेट - 80 ~ रीयूनियन एंड कांस्पीरेसी

अब तक...

उसकी डेस्टिनेशन थी ~ ेगीपत!!!!

भावना भले hi ग़िज़ा पिरामिड्स की खोज से कोट आयी थी. पर ेगीपत में केवल यही पिरामिड्स नहीं थे. हाल hi में, रेसेअर्चेर्स ने एक और पिरामिड खोजै था. उसके अंदर की साड़ी छान बीन करने ढेर्रो रेसेअर्चेर्स और साइंटिस्ट्स आये हुए थे. भावना उनमे से एक थी.

ये एक बड़े स्केल का ेष्कावतिओं था.

और वीर रेडी था.

अपनी माँ से फाइनली मिलने के लिए. और अपनी उस बहिन से भी.


अब आगे...

ेगीपत!!!

एक ऐसा देश, जो अक्सर चर्चा में बना रहता है, अपने कल्चर से जुड़े रहस्य और राज़ो को लेकर.

जी हाँ! आपने सही समझा. ेगीपत नाम सुनते hi इंसान के मैं में सबसे पहली चीज़ जो दिमाग में आती है, वो है ~ पिरामिड्स.

और मानो चाहे न मानो, पर पिरामिड्स ऑफ़ ग़िज़ा hi नहीं, बल्कि ऐसे ढेर्रो अन्य पिरामिड्स है जो कई सारे राज़ छुपाये हुए है.

ग़िज़ा पिरामिड, हमारे संसार के सेवन वंडर्स में से एक है. और सबसे पुराना है सारे 7 अजूबो में से.

पर, और क्या ख़ास बात थी?

इन् पिरामिड्स के अंदर होता क्या था? मम्मी? और? भला और क्या?

दरअसल, पुरातन काल के ेगीपतिअन का कल्चर काफी रिच था. माना जाता है की किसी फ़राओ की जब मृत्यु हो जाती थी. तब उसके लिए ये पिरामिड का निर्माण किया जाता था. जिसमे उसके शव को रहस्यमयी लिक्विड से कोट करके, उस पर पत्तिया बाँध उससे एक ताबूत में बंद कर दफन कर दिया जाता था. जिससे, हम आज मम्मी कह कर पुकारते है.

फ़राओ का मतलब था, एक रूलर. किंग! या एम्परर, जो कहना हो. यही था जो पूरे ेगीपतिएंस को रूल करता था. फ़राओ!!!!

इन् पिरामिड्स के एकदम अंदर फ़राओ का बुरियल चैम्बर रहता था. जो अक्सर, बेशक़ीमती ख़ज़ाने, और अन्य आइटम्स से हमेशा भरा जाता था ताकि, वो इन् सब का उपयोग अपनी अफ्तेर्लिफे यानी की पुनर जीवन या भविष्य जीवन में भी कर सके.

आस पास की दीवारों पर सर्विंग्स और विशेष पेंटिंग्स बनायी जाती थी. और, फ़राओ के चैम्बर के पास hi, अन्य कमरे रहते थे जिधर उसकी फॅमिली और सेवको को दफन किया जाता था.

चाहे ेगीपतिएंस हो, या चाहे चिनेसे, इनमे एक बात बोहत कॉमन होती थी. वो यह की इनके रुलर्स, इम्मोर्टलिटी को लेकर और अफ्तेर्लिफे को लेकर बोहत जिज्ञासु होते थे. बेताब रहते थे इनसे जुड़े उत्तर पाने के लिए. वो हर्र संभव प्रयास करते थे इम्मोर्टलिटी पाने का. अमर होना!!! पर जो दुनिया में आया है वो जाता तोह है hi.

इम्मोर्टलिटी का जवाब कोई न धुंध पाया फिलहाल.

अब इनमे भला ऐसा क्या ख़ास था जिसके पीछे साइंटिस्ट्स और रेसेअर्चेर्स पागल थे? क्या ऐसी बातें थी वैसे?

एक बात जो सबसे ज़्यादा साइंटिस्ट्स को आज भी चक्र देने पर मजबूर कर देती है वो ये है की, ऐसा कौन सा लिक्विड पदार्थ था ेगीपतिएंस के पास, जिससे वो शव पर लगाते थे?

इतने हज़ारो सालो के बाद भी, वो शव एकदम इन्टाक्ट रहता था. क्या मिला के उस लिक्विड को बनाया जाता था? वो गोल्डन कलर का पदार्थ. ऐसा लगता था की पिघला हुआ स्वर्ण हो. पर उसमे और कई साड़ी चीज़ें रहती थी. साइंटिस्ट्स आज भी इसका जवाब धुंध रहे है.

ेगीपत की रेट, ढेर्रो राज़ छुपाये हुए है. और हर्र एक खोज हमारी सोच को पुरातन दुनिया के बारे में एक नयी समझ प्रदान करती है.

और, ऐसे hi कुछ पिरामिड्स अभी हाल hi में डिस्कवर हुए थे फिरसे.

कैरो, ेगीपत की राजधानी में hi साइंटिस्ट्स ने 2 और पिरामिड्स धुंध निकाले थे. ये दफन हो गए थे. गहरी रेट की परत से.

हाल hi में इन्हे भी खोज लिया गया. पिरामिड्स नहीं कहेंगे, क्युकी वो त्रिअंगुलार शेप की जो बिल्डिंग थी, वो तोह आधी रेट में धस्सने से बर्बाद हो चुकी थी. बस अंदर का जो कुछ भी था, वो बचा हुआ था.

और ये तोह कुछ भी नहीं था. अभी न जाने कितने और डिस्कवर होने बाकी थे.

हर्र पिरामिड की ेष्कावतिओं साइट कंस्ट्रक्ट करने के लिए एक यूनिक साइट मैनेजमेंट प्लान बनाया जाता था. ये देपेंद करता था की पिरामिड, किसी लोकेशन पर है, आस पास क्या है, और कितने फाॅर्स को सेह सकता है.

यहाँ पर भी ऐसा hi कुछ हुआ था. साइट प्लान केवल दो चीज़ो पर फोकस्ड था. कन्सेर्वटिव और रेस्टोरेशन.

यानी की, सबसे पहला काम है की इस खोज, इस ख़ज़ाने को, जो कुछ भी मिला है उससे पहले संभाल के रखा जाए. और फिर इन्हे रिस्टोर किया जाए. यानी की यदि कोई अर्टिफैक्ट टूट चूका है तोह उससे जितना पहले जैसा बनाया जा सकता है. वो किया जाए.

उसके बाद साइट को ऐसा बनाना था की बाद में इससे टूरिज्म के रूप में भी ढाला जा सके. ऑफ़ कोर्स, जब इन्वेस्टीगेशन ख़तम होएगी तोह लोग टूरिज्म के रूप में इन् खोजो को आगे चल के देखने तोह आएँगे hi. तोह साइट ऐसी हो, की उस पर ज़्यादा म्हणत न करते हुए उससे एक टूरिज्म साइट में बदला जा सके.

थ्रेट ऑफ़ ुर्बानिज़शन. इस बात का भी ध्यान रखना था. आगे बढ़ती दुनिया कही इन्हे भूल न जाए, या इन्हे हानि न पोहुंचाये.

व्हीकल्स का डेंजर. ऑफ़ कोर्स! टूरिज्म के दौरान, पर्यटक व्हीकल्स से hi आएँगे जाएंगे. तोह इन्हे उन् से भी थोड़ा दूर रखना होगा.

और रही बात ेष्कावतिओं की, तोह उसमे एक सेंसिबल प्लान की रेक्विरेमेंट थी.

जो, सब कुछ कैरो के, मिनिस्ट्री ऑफ़ टूरिज्म एंड एंटीक्विटिस के वरिष्ठ मेंबर ~ सर जॉर्ज ने संभाली हुई थी.





दुनिया भर से अनेको साइंटिस्ट्स और रेसेअर्चेर्स इस खोज का हिस्सा थे.

और इन्ही में से एक थी~

भावना!!!

और उसी के संग उसकी बेटी, जो की एक ट्रेनी थी फिलहाल. वो सीख रही थी सब कुछ. अपनी माँ की गाइडेंस में. भावना की पोस्ट रेपुटेड पोस्ट थी. जिस कारण, उसकी बेटी को भी उसके साथ आने मिल जाता था.

और, यही इस वक़्त खोजे गए पिरामिड्स के hi अगल बगल एक बड़ा शेल्टर तैयार किया गया था. हवा और पानी से उससे बचाने के लिए.

इधर hi, रेसेअर्चेर्स सारे रात में रहते भी थे, सुबह रिसर्च करते थे. और ये इन्वेस्टीगेशन हफ्तों तोह कही महीनो तक चला करती थी.

शाम का वक़्त हो रहा था अभी और शायद शेल्टर में hi कुछ बहस हो रही थी.

"व्हाट?? थे didn't सेंड आईटी विथ यू? व्हाट थे हेलल अरे थे इवन दोंग?"

एक एज्ड आदमी थोड़ा गुस्से में सामने खड़े व्यक्ति से बोलै.

ये एज्ड आदमी कोई और नहीं, सर जॉर्ज hi थे.

आदमी : I'm सॉरी सर!!! बूत थे साइड आईटी विल टेक टाइम.

जॉर्ज : थे अरे जस्ट स्टॉलिंग उस. हम्फ~

सर जॉर्ज गुस्से में इतना बोल बाहर निकल गए. और वही से थोड़ी दूर भावना कड़ी हुई थी. आज की इन्वेस्टीगेशन समाप्त हो चुकी थी. वो अपनी बेटी के संग बस अपने कैंप एरिया में रेस्ट करने hi जा रही थी.

सक़्क़ारा प्लेटो के बीचो बीच थे इस वक़्त वह सब. चारो ऑर्डर रेट hi रेट थी बस. और साइट के अगल बगल उनका शेल्टर. वो समझ चुकी थी की ये बेहेस किस चीज़ को लेकर थी. आखिर उसका भी मूड ऑफ था इस बात को लेकर.

तभी उसकी बेटी उससे देख पूछी, "माँ! क्या सर जॉर्ज...!?"

भावना : यस बीटा!!! ेगीपतिअन गोवत. इस बार इस ेष्कावतिओं में हमारा साथ नहीं दे रही है पूरी तरह.

लड़की : पर क्यों माँ!? ग़िज़ा के पिरामिड्स में तोह कितना बेहतर इंतज़ाम था. फिर यहाँ...!?

भावना (शिघ्स) : बीटा!!! ेगीपत में सिमुलतानूसली कई जगह पर रिसर्च चल रही है. ऐसे में ये एक और... तुम तोह जानती हो की रिसर्च के लिए कितने रिसोर्सेज लगते है. यही कारण है की इस बार गोवत. ने यहाँ हमे परमिशन तोह दी है. पर रिसोर्सेज प्रोवाइड करवाने में वो... कटरा रहे है... ताल रहे है... सर जॉर्ज गुस्से में है क्युकी जनरेटर ऑलमोस्ट डेड होने वाला है. और नए गेनेटर्स आये नहीं है अभी तक.

लड़की : ी सी!

भावना : और ये हम जानते hi है की ेष्कावतिओं के दौरान, इलेक्ट्रिसिटी लगती hi है. नीचे अंडरग्राउंड में साड़ी जगह बल्ब्स लगे है. उसी के ज़रिये तोह हम रात में भी अंदर जा सकते है. इलेक्ट्रिक सप्लाई बोहत ज़रूरी है. इलेक्ट्रिसिटी नहीं होगी तोह इक्विपमेंट्स कैसे ऑपरेट करेंगे हम? और लगता है... जहा से गेनेटर्स मिलने वाले थे. उनलोगो ने ताल दिया है...

लड़की : पर क्यों माँ? ये सब तोह उनके hi देश का खज़ाना है. फिर ऐसा क्यों कर रहे है वह?

भावना : हम्म! मेने बताया न बीटा. पहले hi कई और इंवेस्टीगेशंस चल रही है. ऊपर से यहाँ अलग अलग देश से लोग आके उनके ख़ज़ाने को देख रहे है, उन्हें छू रहे है. तोह उन्हें इस बात से ख़ुशी थोड़ी होती है. वो ऐसा इसलिए कर रहे है की ये इन्वेस्टीगेशन ताली जा सके. रिसोर्सेज नहीं रहेंगे तोह उनके पास बहाना रहेगा. वो चाहते है की उनके hi इन्वेस्टिगेटर्स यहाँ की खोज जारी रखे. समझी?

लड़की : हम्म! बूत ऐसा नहीं होना चाहिए माँ...

अभी वो आगे कहती की तभी पीछे से उनके सर जॉर्ज की आवाज़ आयी.

सर जॉर्ज : मिस गीता~

भावना : यस सर!? इस समथिंग थे मटर?

यहाँ उससे गीता के नाम से सभी जानते थे. यही तोह उसकी अलियास थी. भावना नाम जैसे अब दफन होक रह गया था. बिलकुल, इस तुंब के पिरामिड की तरह.

सर जॉर्ज : अहह यस! ठोस रास्कल्स! Haven't सेंड अन्य गेनेटर्स. अस यू कैन सी, वे अरे इन धिरे नीड ऑफ़ ठोस. सो, ी हैवे ोरडेरेद सम ट्रैनीस तो जो तेरे एंड गेट बैक विथ आवर गेनेटर्स. उम्... िफ़ यू don't हैवे अन्य प्रॉब्लम. कैन वे सेंड योर डॉटर अस वेल. She's गुड एंड परसुआसीवे. She'll हैंडल थिस वेल.

सर जॉर्ज गेनेटर्स को मंगवाने के लिए भावना की बेटी को भी भेजना चाहते थे. और वो भावना के उत्तर का वेट कर रहे थे.

भावना : अहह! तहत...

वो थोड़ी उलझन में पड़ गयी.

लड़की : Don't वोर्री माँ!!! ी कैन हैंडल आईटी. We'll अर्रिवे वैरी सून. Don't वोर्री! अभी शाम hi है. रात तक आ जाएंगे हम सब वापस. इतना भी दूर नहीं है.

भावना को न चाहते हुए भी हाँ में सर्र हिलाना पड़ा. क्युकी, सर जॉर्ज को वो सालो से जानती थी. ग़िज़ा के दौरान भी वही थे उस जगह के जनरल.

भावना : जो साफल्य okay?

लड़की (स्माइल्स) : वेट फॉर में!!! I'll बे बैक सून!

सर जॉर्ज (स्माइल्स) : हेल्प इस ऑलवेज अप्प्रेसिएटेड यंग लेडी. यू अरे जस्ट लिखे योर मदर. एक्टिव एंड डेडिकेटेड.

लड़की (स्माइल्स) : थैंक यू~

और भावना की बेटी शेल्टर से बाहर निकल गयी. भावना चिंतित नज़रो से बस उससे जाते हुए देखती रही. ऊपर वाले से दुआ कर रही थी. सब कुछ सही hi रहे. माँ थी, चिंता तोह होती hi है अपनी संतान की.

और अगले hi पल अपनी बेटी के बारे में सोचने के बाद, उसका ध्यान कही और भटक गया. उसका हाथ अनायास hi अपने पेट पर चला गया. और मायूसी भरे भाव लिए वो अपने कैंप एरिया में चली गयी.

***


मुंबई...

नाईट टाइम ~ 9:17 पं


जहा ेगीपत में राइट चाँद की रौशनी में चमक रही थी, तोह यहाँ अपने मुंबई में सारा शहर सिटी लाइट्स और रास्तो पर दौड़ रही गाड़ियों की रौशनी से जगमगा रहा था.

उधर की हवा और इधर की हवा में कितना अंतर था. ये थी रुशैद लाइफ.

एक बेमिसाल आलिशान 5 स्टार होटल के सामने hi एंट्री पर एक गार्ड मौजूद था.





वह तभी एक कार का आगमनं हुआ और उसी गार्ड ने आगे बढ़ कार का दूर उन् अंदर बैठे व्यक्तियों के लिए खोला.

अंदर से एक अच्छे से सूट में एक लड़का बाहर निकला और दूसरे साइड से एक औरत, जो महंगी साड़ी और ज़ेवर पहने हुए थी.

उसकी आँखें थोड़ी नम्म थी. न जाने क्या सोच रही थी अपने मैं में.

"आइये तै जी! आइये...!!!"

उस लड़के ने हाथ से आगे चलने के लिए इशारा किया तोह महिला हाँ में सर्र हिलाते हुए आगे बढ़ी. एंट्रेंस का गिलास दूर उनके मोशन डिटेक्शन से खुला और वो अंदर प्रवेश किये.

और कुछ hi देरर में वो एक टेबल पर मौजूद थे. होटल का अम्बिएंस भी शानदार था. डिम लाइट्स और हल्का हल्का मधुर म्यूजिक. कोई गाना नहीं था, बस इंस्ट्रुमेंटल ध्वनि जो सभी को बेहद लुभा रही थी.

आस पास की टेबल्स पर हर्र जगह अमीर से अमीर लोग बैठे थे और खाने का लुत्फ़ ले रहे थे.

वो लड़का महिला को देखते हुए बोलै,

"तै जी! जो हुआ सो हुआ. में यहाँ आपका मैं हल्का करने लाया हु आपको. और आप हो की..."

उस औरत ने अपने ासु पोछे और खुद को संभाल वो इधर उधर देखने लगी.

कोई कह सकता था की ये औरत अपनी 40स में थी? बिलकुल नहीं! उससे देख के सब यही कहते की ये अपनी लेट 30स में है.

"क्या करू? मेरी तोह किस्मत hi ऐसी है."

वो रुआंसी सी आवाज़ में बोली.

"तै जी!! में आपका दुःख समझ सकता हु."

उस लड़के ने सांत्वना देते हुए कहा. महिला उससे देखि और वाक़ई, उसकी आँखों में चिंता थी.

"अब मुस्कुराइए तै जी! और पहले खाने का लुत्फ़ लीजिये...!"

कहते हुए उसने, वेटर को इशारा किया तोह वेटर ने स्टार्टर्स उन् दोनों को सर्वे किये.

जी हाँ! सामने बैठी वो महिला कोई और नहीं, वीर की hi सौतेली माँ थी ~

श्वेता!!!!

और उसके सामने सूट पहने बैठा हुआ लड़का कोई और नहीं, वही था!!!

वीर का शत्रु, उसका अपना भाई...

प्रांजल!!!!!!





वही प्रांजल... जिसका व्यक्तित्व वैसा था ~

ा हनी टंग, ा हार्ट ऑफ़ गल्ल.

यानी की, मुख में राम, बगल में छुरी.

भेद के भेस में भेड़िया.

घर में जब उसने श्वेता को रोटा देखा तोह वो उससे बेहला के आज यहाँ ले आया. न जाने उसके कपटी मैं में क्या षडियंत्र रचा जा रहा था.

चेहरे पर तोह प्यार भरी मुस्कान थी उसके, जिसके पीछे का मतलब श्वेता पहचान न पायी.

श्वेता (नम्म आँखों से) : क्या गलत करती हु में? अपनी बेटी की परवाह किस्से नहीं रहती प्रांजल? तुम्हारे पापा मम्मी भी तोह अपने बच्चो के लिए कितना कुछ करते hi है न? तुम्हारे लिए hi कितना कुछ करते है? तोह में अपनी भूमि के लिए जब भी कुछ करने को होती हु तोह... *स्निफ्फ* *स्निफ्फ* तोह भला सब गड़बड़ क्यों हो जाती है?

प्रांजल : टच टच टच...!! वाक़ई तै जी! में आपकी बात से सहमत हु. आप चिंता मत करिये, में आपके हर्र डिसिशन में आपके साथ हु. में कुछ करूँगा...!

श्वेता : S-Sach!!?

प्रांजल : हम्म~ अब आप एन्जॉय करिये.

श्वेता : ी... I'll तरय!!! थैंक्स! अपनी इस तै जी के बारे में सोचने के लिए. और मुझे यहाँ लाने के लिए. में वाक़ई बोहत डाउन फील कर रही थी.

प्रांजल (स्माइल्स) : No प्रॉब्लम! ये तोह मेरा फ़र्ज़ है तै जी!!!

उसने मुस्कुराते हुए कहा. उसकी मुस्कान देख, श्वेता मुस्कुरायी और नज़रे नीचे कर खाना खाने में लग गयी.

पर इधर...

जो मुस्कान प्रांजल के चेहरे पर थी. अगले hi पल उसकी वो मुस्कान एक हैवान की स्माइल में बदल गयी.





इस वक़्त यदि उससे कोई देख लेता तोह उसके चेहरे की वो शैतानी मुस्कराहट देख के hi डर जाता.

***


कैरो, ेगीपत...

नाईट टाइम ~ 10:13 पं


रात हो चुकी थी. और मिस्र की रेट पर वीर यहाँ अपने कदम रख चूका था.

वैसे तोह वह यहाँ दिन में hi पहुँच गया था. पर उसने दिन में आना अवॉयड किया.

क्यों? क्युकी, दिन में आता तोह वो ैसिलय स्पॉट हो जाता. स्पॉट तोह वो अभी भी हो जाता बूत स्टिल, नाईट वास् बेटर थान थे डे.

यहाँ आने में उसकी मदद सुहाना ने नहीं की थी इस बार. सो हे चोसे करा!!!

करा से hi वीर ने वीसा अर्रंगे करवाया था. पर, अपनी ईद वाले प्लान को उसने हटा दिया था.

तोह फिलहाल राइट नाउ, उसके पास कोई ईद नहीं थी. नथिंग ात आल.

और एक रीज़न और भी था. हे चामे हेरे...

... विथ NO प्लान ात आल.

जी हाँ! वीर के मैं में कोई प्लान नहीं था. सब कुछ वो ों थे स्पॉट hi करने वाला था.

ईद नहीं थी तोह भला घुसेगा कैसे? सर जॉर्ज जैसे अर्चयोलॉजिस्ट्स जब उसकी तहक़ीक़ात करेंगे तोह क्या जवाब देगा? वीर के पास प्लान न होक भी जैसे प्लान था.

बड़ी hi मुश्किल से उससे प्लेटो के अंदर आ कर ेष्कावतिओं साइट मिली. पर अब दिक्कत ये थी. शेल्टर के बाहर काफी सिक्योरिटी मौजूद थी.

और क्यों नहीं रहेगी? इतनी बड़ी खोज हो रही थी. हस्सी मज़ाक थोड़ी था. सिक्योरिटी तोह कड़क होनी hi थी.

यदि, एक दो गार्ड को चुटिया बनाने की बात होती तोह वीर कर भी लेता. पर यहाँ तोह सेवेरल गार्ड्स मौजूद थे.

[Master! They know ki kaun kaun andar waala vyakti waha kaam karta hai. So if you get caught by them. They will recognise ki aap yaha ke nahi ho. And not to mention, you don't have any ID.]

पारी ने समझाते हुए कहा. पर वीर शांत था. हे वास् इंस्पेक्टिंग.

अपने आस पास के एरिया को वो पूरा इंस्पेक्ट कर रहा था. किधर से अंदर जाना इजी रहेगा, किधर काम गार्ड्स मिलने के चान्सेस रहेंगे!?

उसने देखा की कैम्प्स धेरर सारे अंदर की ऑर्डर लगे हुए थे.





और बायीं ऑर्डर से रास्ता गया था अंदर की hi तरफ जहा पर फिर वो अंडरग्राउंड साइट मौजूद थी. उस तुंब की.

वीर की डेस्टिनेशन वो कैंप एरिया hi था. उससे भला क्या मतलब था साइट में हो रही खोज से? उससे तोह बस एक hi शख्स की तलाश थी. अपनी माँ की~

भावना!!!

स्टिल, वह तक पहुचने के लिए वीर को कुछ न कुछ तोह करना hi था.

वो जैसे hi आगे बढ़ा, तोह उसकी नज़र में और भी गार्ड्स आये जो उससे पहले अपनी पिछली पोजीशन से नज़र नहीं आ रहे थे.

[Damn it!!! Why are there so many!!!?]

सबसे पहली एंट्रेंस पर दो गार्ड्स थे. एक बाहर की तरफ था तोह एक अंदर की तरफ.

वीर ने देखा की बाहर वाला गार्ड हर्र थोड़ी देरर में राउंड ले रहा था. जैसे hi वो राउंड लेने गया, वीर आगे बढ़ा और सीधा उस दूसरे मौजूद गार्ड की तरफ जाने लगा.

[Ehhh? M-Masterrrr??? Y-You...!??]

पारी को अपने मास्टर का ये मूव पल्ले hi नहीं पड़ा. वीर भला डायरेक्टली गार्ड के पास क्यों जा रहा था?

और उसने फौरन hi वीर के मैं में झांक के देखा तोह उससे सारा माजरा पता लग गया.

[Ahhh! That's a nice move Master!]

वीर जैसे hi गार्ड के पास पहुचा तोह गार्ड अपनी जगह से उठ गया.

गार्ड : वेइततट!!! हु अरे यू???

और तभी,

'चेक!!!!'

*डिंग*

[Name : Bill


आगे : 29

बायो : ा नई रिक्रूट फॉर सिक्योरिटी. कर्रेंटली गोत हिरद तो वर्क हेरे अस ा सिक्योरिटी. हैवे ा नेवली वेद वाइफ नेम्ड, एमा. टॉक्स ा लोट अबाउट हेर. हे लव्स हेर ा लोट, ेस्पेशलय हेर पेनकेक्स. हैवे No किड्स फॉर नाउ.

रिलेशनशिप : स्ट्रॉन्गेर्स

फवौराबिलिटी : 0]

और उस गार्ड का स्टेटस पढ़ते hi वीर का मैं अंदर hi अंदर हस्स रहा था.

वीर : हम्म? मिस्टर बिल? Where's मिस्टर कार्टर???

बिल : हहहह??

वीर की बात सुन्न जैसे बिल झेप hi गया. क्युकी, कार्टर वही था...

वो पहला गार्ड जो राउंड मारने गया था.

वीर ने उससे पहले hi चेक कर लिया था.

बिल : C-Carter? तहत...

वीर : ओह के ों! मिस्टर बिल! यू आलरेडी फॉरगॉट अबाउट में? It's जस्ट बीन 2-3 डेज. I'm ा नई रिक्रूट.

बिल : एहहहह?

बिल की कुछ साला समझ में hi नहीं आ रहा था. ये कौन बाँदा था जो उससे जानता था पर वो इससे नहीं जानता था?

वीर : C'mon मिस्टर बिल! Weren't यू थे ओने हु टोल्ड उस अबाउट योर वाइफ, एमा? यू गोत मैरिड रिसेंटली राइट?

वीर ने अपना पांसा फेका. बिल की ये आदत थी. उसकी शादी नयी नयी हुई थी. वो अक्सर नए ट्रैनीस से अपनी वाइफ की तारीफ करता था. और उसने ये कल hi किया था. ट्रैनीस कई सारे थे. अब उनमे से वो सभी को कैसे जान सकता था भला? और इसी बात का वीर ने फायदा उठाया.

बिल : अह्ह्ह! येह... ः~ सॉरी! B-But हु वेरे य....

वीर : यू आलरेडी फॉरगॉट अबाउट में? I'm ओने ऑफ़ थे नई रेक्रुइट्स. मिस्टर कार्टर एंड यू अरे थे ओनेस फ्रॉम हेरे सीन्स डे 1 राइट?

बिल : अह्ह्ह! Y-Yesss...

वीर (उदास होते हुए) : It's सुच ा शेम मिस्टर बिल! ी रेमेम्बेर सो मच अबाउट यू. अबाउट योर वाइफ. शी मैक्स सुच नीस पेनकेक्स. यू टोल्ड उस तहत डे, didn't यू? एंड यू don't इवन रेमेम्बेर अबाउट में?

वीर ने अपना दूसरा पांसा फेका. इमोशनल डैमेज!!!

बिल जिससे उदास नहीं भी होना चाहिए था. वो वीर को देख खुद पे शर्मिंदगी महसूस करने लगा.

बिल : अहह! S-Sorry! ी रियली फॉरगॉट... बूत लेट में चेक थे लिस्ट. सुरेली, योर नाम मस्ट बे तेरे. लेट में जस्ट...

[Master stop him~]

वीर : There's no नीड तो मिस्टर बिल!!! Didn't ी टोल्ड यू माय नाम तहत डे? थे वैरी फर्स्ट डे? विथ आल ऑफ़ थे इतर ट्रैनीस.

बिल : हँ??

वीर (स्माइल्स) : I'm विक्रम!!!

बिल : V-Vikram?? तहत... ी don't सूपपोसे... तहत...

बिल को विक्रम नाम से घंटा कुछ याद आने वाला था. लुंड जब सुना hi नहीं था ये नाम पहले तोह कहा से याद आने वाला था? इसके पहले की वो सब कुछ भांपते, वीर ने उससे फिरसे टोक दिया.

वीर : यू don't हैवे तो चेक एनीथिंग मिस्टर. आफ्टर आल, I'll बे हेरे ओनली.

और इतना बोल वीर अंदर जाने लगा. सामान तोह वह अपना पहले hi होटल में रख आया था.

पर आगे बढ़ते hi बिल ने फिरसे एक सवाल पूछ लिया.

बिल : वेट! बूत वेयर वेरे यू? व्हेन दीद यू वेंट आउटसाइड?

वीर : ी वेंट आउटसाइड यस्टरडे सर. इमरजेंसी वर्क!!!

और इतना बोल वीर फिर अंदर जाने लगा. यदि कुछ देरर और यहाँ बिताया समय तोह पक्के से वो पकड़ा जाने वाला था.

पर सुर्प्रिसिंगलय, बिल ने उससे जाने दे दिया.

[Wow! Master~ That was so good!!!!!]

अब उससे चिंता करने की ज़रुरत नहीं थी. अंदर कई और गार्ड्स ज़रूर थे. पर जब मैं एंट्रेंस से hi उससे एंट्री मिल गयी थी तोह अंदर मौजूद गार्ड यही समझ रहे थे की इस बन्दे को अंदर आने दिया गया है. यदि वीर की किस्मत आज बोहत hi झंडू रही तोह hi कोई आज उसके पास आके उससे टोकने वाला था.

अंदर आते hi उसने जब नज़र दौड़ाई तोह देखा की वह तोह धेरर सारे टेंट्स लगे हुए थे. वीर की समझ में नहीं आ रहा था की इनमे से अब उसकी माँ का टेंट कौनसा था.

सिर्फ एक hi रास्ता था...

'चेक!!!'

हर्र एक टेंट चेक कर वीर ने हर्र तरफ चेक किया. कई लोग टेंट्स से निकल रहे थे तोह कई टेंट्स के अंदर जा रहे थे.

वो उससे घूर के और शक वाली नज़रो से ज़रूर देख रहे थे. पर किसी ने भी उससे एप्रोच नहीं किया. सबके मैं में यही बात थी, की यदि अंदर आया है तोह कोई होगा ये. ऐसे hi भला किसी को भी तोह अल्लोव कर नहीं देंगे अंदर आने.

पर वो नहीं जानते थे, की वीर उन्ही में से था. इललीगल एंट्री में से.

वीर ने अपनी ऊपर पद रही नज़रो को इग्नोर किया और टेंट्स पर फोकस किया... और बिलकुल...

*डिंग*

[Shelter Tent.


बायो : ा टेंट फॉर रेसिडिंग. कर्रेंटली ओक्कुपेद बी गीता.]

और बस... उससे पढ़ते hi वीर के होंठो पर मुस्कान फेल गयी.

वो सीधा उस टेंट की ऑर्डर बढ़ा.

टेंट की एंट्रेंस खुली हुई थी. शायद उसकी माँ गीता, उर्फ़ भावना जाग रही थी.

वीर का दिल ज़र्रों से धड़क रहा था. हे वास् फाइनली अबाउट तो मीट हिज ओन मदर. हिज रियल मदर.

क्या रिएक्शन होगा उनका? क्या होगा उसकी बहिन का रिएक्शन? हाउ थे विल सी हिम?

सारे सवालों से उसका मैं भरा हुआ था.

[Master... We don't have to tell our identity.... Yet...!!!]

'ी क्नोव पारी! ी क्नोव!'

और उसने टेंट के कपडे को अपने हाथो से हटाया और अंदर आया.

सामने एक ख़ूबसूरत सी औरत विराजमान थी. एक फोल्डेबल चेयर पर.

सामने राखी फोल्डेबल टेबल पर hi एक नाईट लैंप छोटा सा जल रहा था और....

उस टेबल पर कुछ रखा हुआ था. और वो औरत, अपने हाथो में एक छोटा सा ब्रश लिए उस राखी हुई चीज़ पर हलके हाथो से चला रही थी, ताकि जमी हुई धुल मिटटी की परत हटा सके.

उसके लम्बे घने काले बाल जो उसने इस वक़्त अपनी छोटी में बाँध के रखे हुए थे.

वीर की सासें उस औरत को देखते hi अटक गयी.

*बेदुम्प* दिल जोरर से धड़का...

'चेक!'

*डिंग*

[Alias name - Geeta


रियल नाम - भावना सिंह.

आगे : 47

बायो - भावना! एक बेहद hi स्ट्रांग वुमन है. बोहत पीड़ा में है जो कई सालो से वो बर्दाश्त करती आ रही है. लव्स हेर डॉटर तू मच. एक आस है उससे. और किसी की तलाश. पेशे से अर्चेओलॉजिस्ट है.

फवौराबिलिटी - 82

रिलेशनशिप - मदर.]

वीर के होंठ थार थाने लगे. It's हेर!!!

वो फटी आँखों से उन्हें hi देख रहा था. फाइनली!!! वो उसकी आँखों के सामने थी. कैसे बिछड़ गए थे दोनों इतने साल पहले. और कैसे उस ट्रैन में भी दोनों एक दूसरे के अलग अलग रास्ते जा चुके थे.

पर आज...

किस्मत ने उन्हें वापस से मिलवा दिया था. वीर का दिल रो रहा था. उसका मैं कर रहा था की अभी जाके अपनी माँ के गले लग जाए. और रट हुए ढेर्रो सवाल पूछे. क्यों चोरर के गयी उससे?

पर... देखो... चाह के भी वो अभी ऐसा नहीं कर सकता था. भावना, उसकी माँ उसके इतना क़रीब होक भी... कितना दूर थी उस से.

और जैसे किसी की आहात पाते hi यहाँ भावना ने अपना सर्र घुमाया और एंट्रेंस की ऑर्डर देखा, "हम्म्म????"

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

ेगीपत वाले उपदटेस में काफी म्हणत लगी है. क्युकी काफी रिसर्च करके में इन्हे लिख रहा हु. तोह म्हणत बर्बाद न जाने देना. लिखे ठोकने का और अपनी राय और रेवोस रखने का. Okay?

बाकी, मिलते है नेक्स्ट अपडेट में. 😁


धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 81 ~ ेष्कावतिओं साइट

अब तक...

किस्मत ने उन्हें वापस से मिलवा दिया था. वीर का दिल रो रहा था. उसका मैं कर रहा था की अभी जाके अपनी माँ के गले लग जाए. और रट हुए ढेर्रो सवाल पूछे. क्यों चोरर के गयी उससे?

पर... देखो... चाह के भी वो अभी ऐसा नहीं कर सकता था. भावना, उसकी माँ उसके इतना क़रीब होक भी... कितना दूर थी उस से.

और जैसे किसी की आहात पाते hi यहाँ भावना ने अपना सर्र घुमाया और एंट्रेंस की ऑर्डर देखा, "हम्म्म????"


अब आगे...

"हम्म्म?"

भावना, जो अब तक अपने सामने रखे एक खोजे गए अर्टिफैक्ट को उसकी धूल की परत से आज़ाद करने में लगी हुई थी. जैसे hi उसने टेंट की एंट्रेंस में कपडे के सरकने की आहात पायी, उसने फौरन hi मुद के उस ऑर्डर देखा.

और जैसे hi उसने वह देखा...

उसकी आँखें हैरानी, आश्चर्य, और उलझन के मारे फैलती चली गयी.

एक बेहद hi हैंडसम नौजवान उसके टेंट की एंट्रेंस पर खड़ा था. सफ़ेद शर्ट, ब्लू जीन्स, तलवार की धार जैसी शार्प एएब्रोस, हलकी हलकी बियर्ड और उसकी काली ज़ुल्फ़े जिनकी लातें उसकी बॉहे तक आके गिर रही थी. एक ऐसा चेहरा जो किसी भी औरत को पलट कर देखने के लिए मजबूर कर दे.

कौन है ये? इस से पहले तोह ेष्कावतिओं में कही नहीं देखा. क्या ये ट्रेनी है? नहीं! ट्रैनीस से तोह वो मिली थी. उनमे तोह ऐसा कोई भी नहीं था जहा तक उससे याद था. फिर कौन है ये? कोई नया रिक्रूट? नहीं! इस बीच कोई नया रिक्रूट क्यों आएगा? और यदि आएगा तोह सर जॉर्ज के ज़रिये hi लाया जाएगा. फिर??

भावना की कुछ समझ नहीं आ रहा था. वो अपनी जगह से कड़ी होक बस वीर को देखे जा रही थी. कुछ कह भी नहीं पा रही थी.

उससे ये तक नहीं पता था की उसके सामने खड़ा वो नौजवान कोई और नहीं, उसकी अपनी कोख से निकली वही संतान है जिससे वो 20 साल पहले चोरर आयी थी.

और इधर वीर...

खुद को पूरी तरह से कण्ट्रोल करने में लगा था. अपनी बिछड़ी माँ को आलिंगन में भरने को बेताब था वह. कितना मैं कर रहा था उसका की बस जाए और भावना को अपने सीने से लगा ले.

उसके कान जैसे sunn'ne के लिए तड़प रहे थे. की भावना उससे एक बार बस... बस एक बार, 'बीटा' कह के बुला दे. वीर का तोह जीवन hi धन्य हो जाता.

उसका हाल अभी ऐसा था जैसे रेगिस्तान में प्यासे के सामने पानी रखा हो, पर वो उससे न पीने के लिए मजबूर हो.

वो खुद को रोके हुए था. पल भर में न जाने कितने इमोशंस महसूस कर रहा था.

इमोशंस का वह बाँध उसके अंदर जैसे टूट गया था. रुलाई, मायूसी, गुस्सा, ख़ुशी, तड़प सब कुछ उसकी आँखों में कुछ पल के लिए आया पर उसने अपना दिल सख्त कर उन् इमोशंस को छुपा लिया.

नहीं! अभी ये सही समय नहीं था.

उसने सामने भावना को फिरसे देखा.

वो एक लाइट ब्लू शर्ट और नीचे एक ब्लैक कार्गो में थी. जो धूल से गन्दा था.

शायद उसने अभी तक कपडे नहीं बदले थे ेष्कावतिओं के बाद से. वीर तोह जैसे उस चेहरे को देख खो गया था.

कोई कह सकता था की ये महिला 49 उम्र की थी? बिलकुल नहीं! उससे देख के ऐसा लग रहा था की भावना अपनी उम्र में बढ़ने की बजाए घाट रही थी.





क्या हुआ था आखिर भावना के साथ? वीर सारे उत्तरो के जवाब लेके hi जाने वाला था यहाँ से. और हो सके तोह भावना और अपनी बहिन को भी.

"W-Who?? हु अरे यू?"

फाइनली, भावना ने सवाल पूछा. और वही फिर से मीठी सी आवाज़ सुन्न वीर कही खो गया.

स्टेशन में जब वो मिले थे तब भी यही आवाज़ थी. और शायद, भावना वीर को आज पहचान नहीं पायी.

कैसे पहचानती भला? वीर का अपीयरेंस 100 पर था अब. काफी चंगेस आ गए थे. उसके चेहरे में भी और बॉडी में भी.

भावना : हु अरे यू? अरे यू ा नई रिक्रूट? यू नीड समथिंग?

वीर की ख़ामोशी देख इस बार वो थोड़ा जोरर से पूछी. ऑफ़ कोर्स, उससे अच्छा नहीं लगा था की कोई अनजान लड़का ऐसे hi उसके टेंट में बिना पूछे आ गया.

वीर : ी... उम्... वेल...

[Say that you were sent here by your master!!!]

पारी ने खुसपुसाते हुए उसके मैं में कहा.

वीर : अहह! यस! ी वास् सेंत हेरे बी माय मास्टर.

भावना : मास्टर?? हु? हु इस आईटी?

[Master!!! You'll have to win her trust. Otherwise yaha ka jo bhi manage karne waala vyakti hai wo aapko yaha se sawaal jawaab kar bhaga dega. So, aapko apni Mom ka trust jeetna hi hoga.]

'ऑलराइट!!! ी गोत थिस...'

वीर मैं में अपना इरादा मज़बूत कर आगे बढ़ा.

एक कदम... दो कदम...

वो भावना के एकदम नज़दीक आया. भावना अपनी बॉहे सिकोड़े हुए कड़ी हुई थी. भला कौन अनजान लड़का था ये?

वीर ने उस टेबल पर रखे मिटटी से ढकी उस चीज़ को देखा.

'हम्म?'

और..

'चेक!!!!!'

*डिंग*

[Khopesh' scabbard.

Bio : Leftover scabbard of the sword Khopesh. The weapon once belonged to one of the warriors named ~ 'Asim'. The carvings written on it translates ~ 'Only the fiercest ones can hold it.']

और वो बायो पढ़ते hi वीर हैरान रह गया.

खोपश एक ेगीपतिअन सोर्ड थी.





असीम नाम के किसी वारियर की ये सोर्ड थी. सोर्ड तोह गायब थी. जो बचा था वो था उसका स्काब्बार्ड. यानी की उसका हैंडल.

और उस हैंडल में हीरोग्लिफ्स बने हुए थे. जो की एक कोड था.





हीरोग्लिफ्स ेगीपतिएंस लोग काफी उसे करते थे. यानी की चित्र के ज़रिये बातो को कहना.

और स्काब्बार्ड में जो चित्र बने थे. वो ये ट्रांसलेट कर रहे थे की ~ 'ओनली थे फिएरेस्ट ओनेस कैन होल्ड आईटी.'

मतलब की, केवल क्रूर या कट्टर लोग hi इससे अपने हाथ में ले सकते थे.

ऐर्रे जर्रो को ये हथियार नहीं दिया जाता था.

सब कुछ वीर को जैसे एक बार में समझ आ गया. वो मुस्कुराया और अपनी माँ भावना की ऑर्डर उसने देखा.

वीर (स्माइल्स) : कैन ी हैवे तहत? प्लीज?

वीर ने हाथ आगे कर भावना से ब्रश माँगा तोह भावना ने उससे थोड़ा संकोच में दे दिया.

और वीर झुक के उस सोर्ड के स्काब्बार्ड में से धुल की परत हटाने लगा.

वो बड़े hi आहिस्ता से, जेंटली ब्रश को फिर रहा था. भावना ने पहले hi काफी परत हटा दी थी बस कुछ hi परत बाकी थी.

भावना : करेफुल्ली...

और देखते hi देखते बची कुछ परत भी हट गयी.

वीर ने उससे आहिस्ता से उठाया और भावना को दिखाया.

वीर (स्माइल्स) : दो यू क्नोव व्हाट थिस इस!?

भावना ने उससे देखा और फिर उसके हाथ में उस अर्टिफैक्ट को. और ों थे स्पॉट भावना इतना कुछ समझ नहीं पा रही थी. पर उससे इतना ज़रूर समझ आ गया था की ये किसी सोर्ड का हैंडल था.

भावना : लुक्स लिखे ा हैंडल... ा हैंडल ऑफ़ ा वेपन.

वीर (स्माइल्स) : करेक्ट! It's ा स्काब्बार्ड!!! स्काब्बार्ड ऑफ़ ा सोर्ड नोन अस खोपश!!! और इस स्काब्बार्ड में जो हीरोग्लिफ्स है. उसका ट्रांसलेशन है ~ 'ओनली थे फिएरेस्ट ओनेस कैन होल्ड आईटी.'

भावना (शॉकेड) : व्हाटटटटट? H-Howww?? यू कैन रीड हीरोग्लिफ्स???? No वित्त्त!!! यू क्नोव हिंदी???

भावना को अब झटके पे झटके लग्न शुरू हो रहे थे. इस लड़के ने एक झलक में इतना कुछ बता दिया? और ये क्या? इससे हिंदी भी आती है? अरे वो चोर्रो इससे हीरोग्लिफ्स कैसे समझ आये?

वीर इधर अंदर hi अंदर अपनी माँ के ताजुब वाले एक्सप्रेशंस देख खुश हो रहा था.

'ः~ लुक्स लिखे थिस जर्नी विल बे फन'

[I can agree master!]

वीर (स्माइल्स) : क्या में आपको इंडियन नहीं लगता?

भावना : N-Nooo that's... में भी... में भी... इंडियन हु.

इस बार भावना के गाल थोड़े लाल थे. आज तोह जैसे चमत्कार हो गया था उसके लिए. एक इंडियन से उसकी मुलाक़ात हो गयी. ेगीपत में? और वो भी इस ेष्कावतिओं साइट में?

भावना : नहीं! पर तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया. कौन हो तुम? और यहाँ? ट्रेनी हो क्या? और ये सब कैसे पता है तुम्हे? किस मास्टर की बात कर रहे थे तुम?

वीर से वो सवालों पे सवाल पूछने लगी.

वीर तोह मैं hi मैं हस्स रहा था. काहे का मास्टर? कौन मास्टर? कहा का मास्टर? लुंड मास्टर!!! कोई था hi नहीं ऐसा.

अब कुछ न कुछ बहाना तोह देना hi था. वीर के पास इतना ज्ञान कैसे आया? यदि वीर उसका ओरिजिन नहीं बता सकता था तोह काम से काम उससे किसी और पे तोह घुमा hi सकता था.

अब किसपे घुमाया जाए? किसपे क्या, कोई नया इंसान hi बना दो. और नहीं तोह क्या. सबसे सही. ये सब लोग उस अननोन को वीर का गुरु समझ उसकी बात पे काम से काम विस्वाश तोह करते रहेंगे. और वीर ैसिलय यहाँ अपनी जगह बनाता रहेगा.

व्हाट हे नीडेड तो दो वास्... जस्ट विन थेइर ट्रस्ट.

व्हाट ा प्लान!!! वीर ने फौरन hi इस प्लान को अंजाम देने वाले को धन्यवाद दिया.

'थैंक्स पारी!!!'

[Anytime Master~ ♡]

भावना : बूत... हाउ कैन यू बे सो सूरे??

वीर (स्माइल्स) : यदि यकीन न हो तोह खुद रिसर्च कर लीजियेगा! एंड बी थे वे... में विक्रम!!!

उसने कहते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया.

भावना : नीस तो मीट यू! I'm गीता!!!

बदले में भावना ने भी उसका हाथ थाम लिया.

नरम!!! और साथ hi गर्म एहसास. ये पहला टच था वीर और भावना के बीच. उनके बिछड़ने के बाद से. वीर तोह जैसे हाथ चोरर्ण hi नहीं चाहता था.

पर वो उदास भी था. यहाँ भावना ने अपना अलियास नाम बताया. गीता!!!

वीर के चेहरे पर पल भर के लिए मायूसी आयी और फिर चली गयी.

शी वास् लाइंग!!!

जो की एक्सपेक्टेड था. वीर ने अपने सर्र को हिलाते हुए उन् थॉट्स को अपने मैं से निकाला. कितना झूठ बोलेंगी आखिर उसकी माँ? कब तक? कभी न कभी तोह सच सामने आएगा hi.

भावना : और सबसे पहली बात. Don't यू क्नोव? It's बाद मैनर्स. किसी के टेंट में यु बिन बताये घुसना... खासकर एक लेडी के टेंट में. *स्माइल्स*

वीर (स्माइल्स) : मेरा कोई गलत इरादा नहीं था. पर अहिंदा से याद रखूँगा.

भावना : वेल... That's गुड! अभी भी मुझे जवाब नहीं मिला है. नए रिक्रूट हो यहाँ या कुछ और? What's योर प्रोफाइल? सर जॉर्ज के थ्रू आये क्या यहाँ?

वीर : उम्... वेल...

वीर जवाब देता की तभी बाहर से एक ज़ोरदार आवाज़ आयी,

"हु थे हक ींवादद ईंटो थे साइट??? ेह्हह्ह्ह्ह????"

और बदक़िस्मती से, ये आवाज़ सर जॉर्ज की hi थी. वीर के अंदर जाने के बाद, बिल ने ट्रैनीस की लिस्ट चेक कर ली थी. और नतीजा!?

सब सामने था. वीर की पोल खुल चुकी थी.

'शीट्ट्ट्ट!!!'

[Master! Play it cool!!!!]

'Y-Yeahhhh!'

सर जॉर्ज की आवाज़ सुन्न, भावना जो अब तक शांत थी. उससे जैसे सारा मामला समझ आ गया. वो बेवक़ूफ़ नहीं थी. बोहत होशियार थी.

भावना (शॉकेड) : Y-You....

वीर : ी...

*फ्लैप* *फ्लैप*

और अगले hi पल भावना के टेंट की एंट्रेंस का कपडा खुल गया. बाहर गुस्से में सर जॉर्ज, बिल, और बाकी रेसेअर्चेर्स खड़े हुए थे. और कुछ ट्रैनीस पीछे खड़े झाँक झाँक के देख रहे थे.

बिल : That's हिम सर!!!

बिल ने वीर की तरफ ऊँगली करते हुए इशारा किया.

'वेल.... फ़क थिस....'

[Don't worry! Go!!!]

सर जॉर्ज : ोूउउ!!! के हेरे!!! हाउ डरे यू...!?

वीर के पास कोई चारा भी नहीं था. मजबूरन उससे बाहर जाना पड़ा.

और अभी वो सबके सामने खड़ा हुआ था. सब उससे ऐसे देख रहे थे जैसे की वो कोई मुजरिम हो.

भावना भी ये नहीं समझ पा रही थी की आखिर चल क्या रहा था?

और फिर शुरू हुआ बहस का सिलसिला.

बिल अपनी बात रखता और सर जॉर्ज वीर से उसकी डिटेल्स मांगते. वीर बातो में फसाता और यहाँ रुकने के लिए कहता तोह सर जॉर्ज और भड़क जाते.

और फाइनली, बात इस मोड़ पे आ गयी की सर जॉर्ज वीर को बाहर करवाने के लिए आर्डर दे दिए. पर तभी...

भावना : अहह! सर!!! W-Wait!

सर जॉर्ज : हम्म? व्हाट?

भावना सर जॉर्ज को साइड में लेके गयी और न जाने उनसे क्या बातें करने लगी. सब कन्फ्यूज्ड थे, सिवाए वीर के.

वो तोह बस मज़्ज़े ले रहा था. उससे आलरेडी पता था की उसकी प्यारी माँ, भावना उसके रेस्क्यू के लिए ज़रूर मैदान में कूड़ेंगी. और वही हुआ.

सर जॉर्ज के चेहरे पर कही कन्फूसिओं तोह कही सरप्राइज के भाव आ रहे थे.

उसके बाद वो अचानक hi दौड़ते हुए अपने टेंट में गए. और हाथ में कुछ लेकर बाहर आये.

वीर को घूरते हुए उन्होंने अपने हाथ से वो सामान दिखाया.

ये भी एक अर्टिफैक्ट था.

सर जॉर्ज : िफ़ यू कैन तेल्ल में what's थिस. थें I'll अल्लोव यू तो बे हेरे.

भला इस से ख़ुशी की बात क्या हो सकती थी वीर के लिए?

'चेक!!!!'

*डिंग*

[Dethroned King's Relic

Bio : Not supposed to be the King, Khons was finally dethroned and his luxury items were destroyed. This is just a part of his stone throne. Hieroglyphs translates to ~ '... Shall die alongside.']

वीर भी जैसे अब एक नयी दुनिया में कदम रख दिया था. उससे ऐसी ऐसी चीज़ो के बारे में पता चल रहा था, वो भी इतनी आसानी से की इनका उत्तर पाने के लिए उसके सामने लोग अपने जी जान लगा रहे थे. और इधर वो बस चेक करते हुए सब उत्तर पा ले रहा था.

'थिस सिम्स लिखे चीटिंग ः~'

[It is cheating master (. ❛ ᴗ ❛.) ]

वीर ने नाटक करते हुए उससे देखा. जैसे दिखाना चाह रहा हो की वो सब करेफुल्ली स्टडी कर रहा था. आस पास खड़े लोग सब उससे आस लगाए देख रहे थे.

वीर ने काफी समय लिया. वो उससे इधर से तोह कही उधर से देखता रहा. भाई, किसी को शक न होने पाए.

और अंत में उसने कहना शुरू किया...

वीर : ये एक र्एलिच है. और किसी स्टोन थ्रोन का टूटा हुआ हिस्सा है. अहह! फ़क! ी फॉरगॉट! ी हैवे तो स्पीक इन इंग्लिश.

सर जॉर्ज : हँ??

वीर : वेल!! थिस इस ा र्एलिच. ा part फ्रॉम ा स्टोन थ्रोन. आईटी लुक्स लिखे थे थ्रोन वास् डेस्ट्रोएड एंड ओनली थिस part सुविवेद. थे हीरोग्लिफ्स अरे नॉट मच हेरे. आईटी ट्रान्सलेट्स समथिंग लिखे ~ शॉल दिए अलोंग्सीदे.

सर जॉर्ज : अह्ह्ह्ह!!!!

बाकियो का तोह पता नहीं पर सर जॉर्ज की शकल इस वक़्त ऐसी थी जैसे मानो उन्हें ओर्गास्म आ रहा हो.

'व्हाट थे फुककक?? व्हाट इस हप्पेनिंग तो थिस ओल्ड फैट गाए?'

सर जॉर्ज : मर्वेलौस!!!!! थिस इस इंसाने!!!!! हाहाहाहाहा~

'फुसक्ककककककक!!!!'

फिर क्या था? सर जॉर्ज वीर को घसीट के अपने टेंट में ले गए. और देरर तक उससे पकाते रहे. उसके मास्टर के बारे में पूछते रहे. वीर की हालत ख़राब कर के रख दी थी.

कुछ समय बाद जैसे hi वीर बाहर आया तोह उसकी शकल देखने लायक थी.

और बाहर कड़ी भावना उसकी इस हालत पर हस्स रही थी.

सर जॉर्ज अपने काम के प्रति बोहत पैशनेट थे. तोह जब कोई ऐसा यंग मन उन्हें मिल जाए जो आसानी से इतनी पारखी नज़र रखते हुए सब बता दे तोह क्या होगा?

हे विल जो इंसाने!!! वही हुआ. सर जॉर्ज की नज़र में वीर लिस्ट में टॉप पर था. किसी लिस्ट? इंटरेस्टिंग कैंडिडेट्स की लिस्ट में.

भावना : फुफुफु~ (≧▽≦) शायद... सर जॉर्ज तुम्हारे फैन गए? हम्म?

वीर (स्माइल्स) : और आप हस्स रही हो? ी ऑलमोस्ट डीएड!!

भावना : ाहः~

वीर कुछ और आगे कहता की तभी,

"व्हाट हप्पेनेड???"

एक बेहद hi प्यारी सी आवाज़ उसके कानो में पड़ी.

वो मुदा...

और जैसे hi उसने देखा...

उस शख्स को देख जैसे वीर के लिए वक़्त थम सा गया.

एक बेहद ख़ूबसूरत लड़की उनके करीब चलते हुए आ रही थी.

वीर का दिल ज़र्रों से धड़क रहा था.

और वीर ने वही किया...

'चेक!'

*डिंग*

[Name : Tejal (Tej)]


आगे : 24

बायो : Bhavna's डॉटर!!! तेज अपने नाम की तरह hi है. She's ान अम्बिशयस लेडी. तेरे अरे ओनली तवो गोल्स इन हेर लाइफ. ओने ~ तो बिकम जस्ट लिखे हेर मदर इन अर्चयोलोग्य. तवो ~ तो फंड हेर लॉन्ग लॉस्ट बरोथेर. लव्स हेर मदर तू मच. She's डेस्पेरेट अबाउट हेर बरोथेर.

फवौराबिलिटी : 88

रिलेशनशिप : Sibling/Elder सिस्टर.]





*बोऊं*

और वीर के दिमाग में जैसे विस्फोट हुआ. उसका दिमाग सन्न रह गया.

तेजल!?? S-Sibling??? एल्डर सिस्टर????

व्हाट थे फ़क इस हप्पेनिंग हेरे????

'T-Tej!!!'

[It's quite a unique name! I must say.]

वीर के सेंसेस जैसे पल भर के लिए काम करना hi बंद कर दिए थे.

*टक* *टक* *टक*

और इधर तेज धीरे धीरे उनके नज़दीक आ रही थी. आँखों में hi तेज था इतना की एक नज़र किसी को देख ले तोह उनके पसीने चुर्रा दे.

वो पास आयी और अपनी माँ को मुस्कुराते हुए देख के बोली,

तेज (स्माइल्स) : आल दोने माँ!! गेनेटर्स आ गए है.

भावना : अह्ह्ह! गुड वर्क बीटा!!! एंड मीट थिस पर्सन... ये भी इंडिया से hi है. विक्रम!!! विक्रम... ये मेरी बेटी... तेजल!!! प्यार से... तेज!!!

तेज : हम्म्म?

वीर : N-Nice तो मीट यू!!!

वीर के हाथ इस वक़्त थोड़े स्टिफ थे. इतना बड़ा झटका जो लगा था उससे.

जैसे hi तेज ने वीर का हाथ थामा, दोनों hi तरफ जैसे दोनों एक झटका लगा.

तेज भी यहाँ वीर के लुक्स से सुरप्रीसेड थी. और साथ hi वीर.

88 की फवौराबिलिटी. साफ़ बया कर रही थी की वो अपने भाई की तलाश में थी.

यदि वीर ने बता दिया की वही उसका भाई है तोह क्या रिएक्शन देगी तेज?

तेज : नई रिक्रूट?

वीर : उम्... समथिंग लिखे तहत...

तेज (नॉड्स) : वेल! माँ... मुझे आपसे बात करनी है. इम्पोर्टेन्ट मटर!!

और तेज बिना कोई समय गवाए अपनी माँ भावना को लेके टेंट में ले गयी. भावना वीर को काम से काम bye कहना चाहती थी पर तेज ने उससे ऐसा करने का मौका hi नहीं दिया.

और इधर वीर का टेंट था... सर जॉर्ज वाला.

भले hi उससे परमिशन मिल गयी थी. पर निगरानी अब भी बरकरार थी उस पर.

उसके हाथ की मुट्ठी गुस्से में कस्सी हुई थी.

तेरे वास् समथिंग वैरी वैरी रॉंग!!!

आईटी doesn't मैक्स अन्य सेंस!!!

यदि, उसकी बहिन उस से बड़ी थी. 3 साल.

तोह ज़ाहिर है की उसका जन्म पहले हुए होगा. थें... उसका जन्म यदि पहले हुआ...

तोह घर में उसकी बहिन को लेकर कोई भी ज़िर्क क्यों नहीं था????? जस्ट लिखे हेर मदर!!???

ये गुत्थी जैसे और भी बांधती जा रही थी.

***

मुंबई...

मॉर्निंग 7:45 ऍम...

मुंबई में यहाँ मनोरथ के घर सुबह रोज़ की तरह hi थी.

सिवाए एक शख्स के.

आरोही!!!!

कल उसने जो देखा था, उससे लेकर वो बेहद चिंतित थी.

उसने देखा था की प्रांजल उसका भाई, उसकी तै जी के साथ लौटा था कल. दोनों hi एकदम तैयार थे.

भला वो क्या नयी खिचड़ी पका रहा था? आरोही को कुछ समझ नहीं आ रहा था.

कल hi उसने वीर को फ़ोन लगाने का तरय किया था. पर वीर के फ़ोन में कोई नेटवर्क hi नहीं था.

जिस कारण से वो बात कल ताल के रह गयी.

सुबह होते hi उसने फिर से वीर को फ़ोन लगाने का तरय किया. और बेशक, कुछ बेल्स के बाद hi...

वीर : Hello?

आरोही : V-Veeeeerrrr!!!

वीर : हम्म? आरोही दी? क्या हुआ?

आरोही : अहह!!! पहले ये बताओ तुम्हारा कॉल क्यों नहीं लग रहा था? कल मेने कितने कॉल्स किये.

वीर : में... वेल... थोड़ा आउटर एरिया में हु. कहिये!! क्या बात है?

आरोही : W-Wo... वो प्रांजल... वो प्रांजल है न... कल मेने..

इसके पहले की वो प्रांजल की बात बता पाती की तभी...

"आह्ह्ह्हह्ह!!!!!"

वीर के कानो में आरोही की एक तेज़्ज़ आवाज़ आयी.

वीर : Hello? Hello? आरोही दी??? Hello???

*कॉल एंड्स*

'व्हाट थे...!? व्हाट जस्ट हप्पेनेड?'

[Something is wrong master!!]

'मुझे भी यही लग रहा है पारी!!! प्रांजल के बारे में कुछ कह रही थी वह... वेट ा सेकंड...'

[Think...]

'शी साइड... वो प्रांजल... कल मेने... हम्म?? कही उन्होंने उसकी कोई नयी करतूत पकड़ ली क्या?? और उनकी वो चिल्लाने की आवाज़... आईटी सिम्स लिखे...'

[Ohhhh noooo~]

वीर की सब समझ में आ गया.

'दमंत्र ित्तत्त!!!!! तोह इसका मतलब वो प्रांजल.... उसने दी के हाथ से फ़ोन छिना लिया. ोथेरविसे दी ऐसे नहीं रियेक्ट करती... फ़ोन गिरा होता तोह ज़मीन पर उसके गिरने के इम्पैक्ट की आवाज़ मुझे सुनाई देती. शीट्ट्ट्ट!!!!!!'

[He's definitely planning something Master!!!]

'में यहाँ अपने अंसवेरस लिए बिना जा भी नहीं सकता. क्या क्या सँभालु एक बार में? दमंत्र ित्त्त!!!'

[I'm with you master!!! Hold on please!!!]

'तहत बास्टर्ड... प्रांजल... He's प्लॉटिंग समथिंग!!!!'

***

वीर के पास प्रांजल के लिए फिलहाल समय नहीं था.

उससे यहाँ से जल्द से जल्द अपने उत्तर लेके निकलना था. हे couldn't वास्ते एनीमोर टाइम.

कैंप के बाहर निकलते hi उससे ट्रैनीस नज़र आये जो काम में लगे हुए थे.

रात भर सर जॉर्ज की खर्राटों की आवाज़ ने उसका सोना हराम कर दिया था.

और आज वो रेडी था. इन् सभी के साथ अंदर तुंब में जाने के लिए.

उस पर अभी भी शक की नज़रे लोगो की बानी हुई थी.

खासकर उसकी अपनी hi बहिन, तेज की.

सुबह वो बड़ा hi बदला बदला सा बेहवे कर रही थी. शायद भावना ने साड़ी बात बतायी थी कल की...

और वो सब sunn'ne के बाद आज उसने वीर से कोई बात नहीं की.

खर्र जो भी था. वीर इतना ज़रूर जानता था की...

उससे यदि सच jaan'na है तोह तेज और भावना के मैं में एक अच्छा इम्प्रैशन बनाना होगा.

और वो काम वो करने वाला था आज.

ेष्कावतिओं के दौरान...

'ी होप थिस विल वर्क आउट!!!'

.

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आज के लिए इतना hi गाइस!!!

धन्यवाद!!!

लिखे ठोकना न भूले और रेवोस रखना भी. ेगीपत के उपदटेस बस एक या दो अपडेट hi और चलेंगे. सिमुलतानूसली मुंबई का ज़िक्र दिखाया जाएगा. प्रांजल के सीन्स.


तब तक के लिए :केओ:
 
अपडेट - 82 ~ Pranjal's फसाड एंड थे Tomb's एक्सप्लोरेशन

अब तक...

खर्र जो भी था. वीर इतना ज़रूर जानता था की...

उससे यदि सच jaan'na है तोह तेज और भावना के मैं में एक अच्छा इम्प्रैशन बनाना होगा.

और वो काम वो करने वाला था आज.

ेष्कावतिओं के दौरान...

'ी होप थिस विल वर्क आउट!!!'


अब आगे...

नया दिन, नयी परेशानी, नयी कोशिशे.

कल वही हुआ था जैसा की वीर ने ासुमे किया था. प्रांजल के बारे में. वही भेड़िया जो अक्सर मुँह में शहद रख के घूमता था.

कल जब आरोही प्रांजल की बात वीर को बताने hi जा रही थी. बदक़िस्मती थी उसकी, जो प्रांजल उसी वक़्त अपने रूम से बाहर निकल रहा था और आरोही को अपने बारे में बात करता सुन्न लिया.

आरोही के हाथो से उसने उसका फ़ोन छिनाय, वीर का नंबर डिलीट किया, और उसके हाथो में वापस थमा दिया. पर एक चेतावनी देते हुए,

"ध्यान रहे दी!!! में क्या कर रहा हु, किधर जा रहा हु, किस से बात कर रहा हु, इसकी खबर यदि आपको लगती भी है, तोह ये आप तक hi सीमित रेहनी चाहिए. यदि ये घर के बाहर गयी, तोह में समझ जाऊंगा की बात आपके इन् hi प्यारे होंठो से गुज़रते हुए बाहर गयी है. और फिर... अंजाम अच्छा नहीं होगा दी."

और बस, वो फिर अपनी झूठ से भरी वही प्यार भरी मुस्कान देते हुए वह से निकल गया.

वो जानता था की आरोही ने उससे कल देख लिया था. तोह अब प्रिटेंड करने का कोई फायदा hi नहीं था उसके सामने. और ये बात शायद वो वीर को बता रही थी. लेकिन तोह क्या? तोह क्या?

क्या कर लेगा वीर उसका? वो जानता था की वीर कही बाहर गया हुआ था इस वक़्त. क्युकी, रागिनी के घर के आस पास भी वो भटकता नहीं पाया गया था. इसका मतलब साफ़ था. वो घर पर नहीं था.

उसने तोह बस मज़्ज़े के लिए वीर का नंबर आरोही के फ़ोन से उड़ाया था. वो तोह ये भी जानता था की उसकी प्यारी बहना को वीर का नंबर दिल से याद होगा.

"हम्फ!!!"

आरोही को उसके हाल पर चोरर वो निकल गया. आज उसके प्लान का दूसरा स्टेप था. जो उससे संभाल के रखना था.

वर्ण यहाँ गड़बड़ हो सकती थी.

आज रात hi उससे अपने इस नए प्लान को अंजाम देना था. और उसकी मंज़िल थी,

श्वेता की होटल!!!

रात हो चुकी थी. गाडी से उतारते hi वो अंदर होटल में गया.

अंदर, वैट्रेस्सेस ने उससे देखते hi आदर के साथ उसका वेलकम किया. वो प्रांजल से फेमिलिअर थी. जानती थी सभी की ये ओनर की बेटी के भाई है.

और अंदर प्रांजल सीधा ओनर के केबिन की ऑर्डर चल दिया.

वह पॅहुचते hi उससे एक जाना माना परिचित चेहरा दिखाई दिया.

"हूँ~ हूँ~ िफ़ आईटी isn't माय लवली एल्डर सिस्टर!? हम्म?"

वो अपने दोनों हाथो को हवा में फैलाते हुए अंदर प्रवेश किया. यही तोह उसकी अदा थी. और उसके सामने, चेयर पर बैठी उसकी step-cousin भूमिका मौजूद थी.

भूमिका (ग्लान्सेस) : हम्म? प्रांजल? रात में इधर? क्या बात है?

प्रांजल : वेल? क्या में इधर नहीं आ सकता दी?? हम्म?

भूमिका : आ सकते हो. ऑफ़ कोर्स! पर बिना किसी बात के तोह आओगे नहीं. क्या बात है?

प्राणजल (स्माइल्स) : अस एक्सपेक्टेड फ्रॉम ा स्मार्ट लेडी. हर्र बात जानती हो आप. नहीं! वैसे, में बस तै जी के लिए आया था. दिखाई नहीं दे रही वह. कही बिजी है क्या?

भूमिका : माँ के लिए? वो मैनेजर से बात कर रही है. आती hi होंगी. एंड... ी हर्ड तुम कल माँ को लेके उन्हें डिनर करवाने ले गए थे??

प्रांजल : हम्म!! में काफी दिनों से नोटिस कर रहा था. वो बोहत परेशान नज़र आ रही थी. तोह उस दिन जब मेने उन्हें पूरा ेक्सहॉस्टेड देखा तोह सोचा क्यों न उनका मूड फ्रेश करवा लौ? आपको बुरा तोह नहीं लगा न?

भूमिका : अरे नहीं!!! व्हाई वोउल्ड ी फील बाद अबाउट आईटी? एक्चुअली, मेने भी नोटिस किया था. उनसे कहने hi वाली थी ब्रेक लेने के लिए. कही वेकेशन पे भेजने वाली थी में. बूत थैंक्स तो यू. अपने बिजी सचेडूले में जो में न कर पायी. वो तुमने किया. काफी खुश थी वो कल रात डिनर के बाद. उनका मूड फ्रेश था.





प्रांजल (स्माइल्स) : अपनों की केयर तोह अपने hi करेंगे न दी!?

और पल भर के लिए उसके चेहरे पर वही हैवानो वाली मुस्कराहट फेल गयी.

प्रांजल : चलिए में खुद धुंध लेता हु उन्हें...

भूमिका : अस यू विश~

प्रांजल भूमिका को चोरर बाहर निकल आया.

और बाहर आते hi उसके चेहरे से मुस्कान एक पल में गायब हो गयी. एक निर्दयी भाव उसके चेहरे पर आया...

'आईटी विल बे टफ!!! आरोही दी और काव्य... ी didn't एक्सपेक्ट थम तो... उन् दोनों ने अपनी साड़ी बेलोंगिंग्स वीर के नाम कर दी. तछः!!!! दमन इत्!!! ी वास् लेट... नाहीई!!! गलती मेरी hi है... में बाकी चीज़ो में इतना फोकस्ड था... मेने इन् मैटर्स पे ध्यान hi नहीं दिया....!!!'

'मेरे आँगन से दो चिड़िया भाग के निकल गयी... और वो दोनों hi वीर के आँगन में जाके बैठ गयी. ी वास् तू केयरलेस... समय समय पर मुझे उन्हें दुलार देके अपनी ऑर्डर बनाये रखना था... पर उस बैंक्वेट के इंसिडेंट ने जैसे सब कुछ.... तहत बास्टर्ड वीर!!!!'





***

"ठीक है! कल तक ये काम हो जाना चाहिए!! Okay?"

"यस Ma'am! Don't वोर्री! में सब संभाल लुंगी."

"गुड!"

श्वेता इस वक़्त अपने होटल की मैनेजर, नंदिनी को कुछ काम समझा रही थी जब अचानक hi,

"माय माय माय... जब देखो तब काम तै जी!! कभी अपने ऊपर भी ध्यान दीजिये!!!"

कहते हुए प्रांजल मैनेजर के रूम के अंदर आया.

श्वेता (सुरप्रीसेड) : प्रांजल?

प्रांजल (स्माइल्स) : हम्म~ क्या नहीं आ सकता में?

श्वेता : नहीं! ऐसा भला क्यों कह रहे हो? पहली बार थोड़ी hi आ रहे हो.

प्रांजल (स्माइल्स) : सो स्वीट ऑफ़ यू~ तोह चले हम?

श्वेता : K-Kaha??

प्रांजल (स्माइल्स) : घूमने... और कहा...!?

श्वेता : E-Ehhh? A-Aaj भी!? P-Par...

प्रांजल श्वेता को देखता रहा और कुछ न बोलै. सामने hi मैनेजर नंदिनी भी मौजूद थी. तोह वो धीरे से श्वेता के कान के पास आया और बोलै,

"कल आप से मेने कहा था न. कुछ बात करूँगा में... दादा जी से... तोह क्या आप नहीं jaan'na चाहती?"

उसने अपने हाथो की उंगलियों को मॉल के पैसो का इशारा किया. धन की बात!!! और श्वेता तुरंत समझ गयी.

श्वेता : अहह! तहत...

श्वेता ने नंदिनी को देखा और अपना सर्र हाँ में हिलाते हुए बोली,

श्वेता : नंदिनी! यू कैन जो! हम कल मिलते है!

नंदिनी (नॉड्स) : Okay ma'am!!!

और वो अपने hi रूम से निकल गयी. उन् दोनों को प्राइवेसी देने के लिए.

इधर श्वेता प्रांजल को अपनी आँखों में एक चमक लिए देख रही थी.

श्वेता : क्या तुमने...!?

प्रांजल (स्माइल्स) : पहले चलिए! एक नयी होटल खुली है कुछ हफ्ते पहले. इसी बहाने आप वह से अपनी होटल के लिए कुछ आइडियाज भी ले सकती हो. और में अपनी बात भी बता दूंगा. हाउ डस तहत साउंड्स?

श्वेता (स्माइल्स) : S-Sure!!!!

वो ख़ुशी ख़ुशी मान गयी. शायद जो आस वो अब तक अपने मैं में लिए हुए थी. वो अब भी कायम थी.

प्रांजल : पर उस से पहले....

श्वेता : हँ? क्या?

प्रांजल : ये लीजिये!!! पैकेज!

प्रांजल ने उससे एक पैकेज थमाया. अंदर शायद कुछ मौजूद था. कुछ कीमती.

श्वेता : क्या है इसमें???

प्रांजल : नहीं नहीं!!! इससे अभी मत खोलना!!!

श्वेता : हम्म? पर क्यों? तोह फिर मुझे क्यों दे रहो हो?

प्रांजल : आप रखिये तोह!!! आइये अब हम चलते है. आप समझ जाओगी की आपको ये कब खोलना है.

और दोनों hi वह से निकल गए.

***

*थुड़*

कार का दरवाज़ा बंद हुआ और एक बार फिर, श्वेता महंगे कपड़ो में प्रांजल के साथ एक नयी होटल में डिनर करने जा रही थी.

समां वही था. शाम भी वैसी hi थी. कल के जैसी. पर आज श्वेता कल की तरह उदास नहीं थी. आज उसमे एक उत्साह था. प्रांजल की बात jaan'ne का.

दोनों hi अपनी एक टेबल पर अपनी अपनी सीट पर बैठे हुए थे. श्वेता होटल के इंटीरियर पर ध्यान देते हुए साड़ी चीज़ें नोट कर रही थी. ऐसा क्या कुछ नया मिले उससे की वो अपनी होटल में उससे इम्प्लीमेंट कर सके.

दोनों के बीच डिनर हुआ और प्रांजल ने बस हलकी फुलकी इधर उधर की बातें करि, जिससे श्वेता सुनती रही.

आखिर में डिनर के बाद वही पर बार था, तोह प्रांजल श्वेता को लेके बार साइड आया और दोनों hi एक एक चेयर पकड़ बैठ गए.

श्वेता : तुमने अभी तक नहीं बताया मुझे की बात क्या हुई.

प्रांजल : बताता हु तै जी! पर पहले... खाने के बाद थोड़ी ड्रिंक तोह बनती hi है न?

श्वेता : W-Whaaattt? प्रांजल! तुम अपनी तै जी के साथ ड्रिंक करोगे?

प्रांजल : ओह c'mon तै जी! हाई सोसाइटी की पार्टीज में मेने देखा है आपको ड्रिंक करते हुए. और में बस मॉकटेल लूंगा. क्युकी ड्राइव तोह मुझे hi करना है न? ः~ आप कॉकटेल एन्जॉय कीजिये.

श्वेता : N-Nahi!! ी don't थिंक ये सही रहेगा, इसके बाद घर भी जाना है. ी don't...

प्रांजल : घर में जाके सिर्फ सोना hi तोह है तै जी! और बात भी अब ऐसी है. आप इमोशनल भी हो सकती हो. स्ट्रेस रिलीफ करेगी थोड़ा C'mon तै जी! मुझे मन करोगी आप?

श्वेता : ी...

श्वेता काफी विरोध करती रही. उसके हिसाब से अल्कोहल लेना सही नहीं था इस समय. क्युकी, घर भी लौटना था उससे. हलाकि प्रांजल की ये बात भी सही थी की अब घर में जाके सिर्फ उससे सोना hi था.

तोह भला किस्से पता लगने वाला था? सुबह तक तोह वो फ्रेश हो चुकी होगी. हैंगओवर उतर चूका होगा. काफी समय से उसने पी भी नहीं थी. और इन्ही सब उलझनों में आखिर कार वो मान hi गयी.

प्रांजल : I'll हैवे ा वाटरमैलों पंच प्लीज. और ma'am के लिए...

श्वेता : कबरनेट शीराज़ प्लीज...

वेट्रेस : राइट अवे Ma'am!!!

प्रांजल : वाह! ये हुई न बात! वाइन आर्डर की आपने. सही है. थोड़ा रिलैक्स किया करो तै जी. It's okay यू क्नोव!!!

श्वेता : हम्म!!! तोह अब बताओ. क्या बात हुई? कुछ... कुछ खबर है मेरे लिए? कुछ हो सकता है क्या?

प्रांजल : सब्र रखिये थोड़ा! हमारी ड्रिंक्स तोह आ जाने दीजिये तै जी! सब बताता हु.

श्वेता : अरे फिर में... आलरेडी हाई न हो जाऊ. जस्ट तेल्ल में राइट नाउ.

प्रांजल (मैं में) : यही तोह में चाहता हु.

जब दोनों की hi ड्रिंक्स आयी तोह दोनों hi अपनी अपनी ड्रिंक्स का लुत्फ़ लेने लगे.

और इधर प्रांजल ने फिर अपनी बात रखना शुरू किया,

प्रांजल : आप बोहत उंलख्य हो तै जी! मुझे आप पे बोहत दया आती है. नहीं! में जानता हु आप स्ट्रांग हो. पर... ी जस्ट... मुझे... मुझे दुःख होता है बोहत तै जी!!

श्वेता : H-Huhh??

प्रांजल : यू क्नोव... मेने दादा जी से बात की थी. प्रॉपर्टी को लेकर. की क्यों आपको कुछ भी दिया नहीं गया.

श्वेता : T-Tohhhh? K-Kya कहा... उन्होंने!??

प्रांजल ने अगले hi पल रोने जैसी सूरत बनायी और बोलै,

प्रांजल : *स्निफ्फ* क्या बताऊ आपको अब. दादा जी को पता नहीं क्या हो गया है. बोले की भूमिका दी और आप... उनकी जायदात हड़पना चाहते हो.

श्वेता : K-Kyaaaa???? क्या कहा?? में... और... हड़पना!?? Y-Ye तुम क्या...

प्रांजल : हाँ! *स्निफ्फ* में भी शॉकेड था इसी तरह. उन्हें लगता है की आप कही उन्हें hi घर से बाहर न निकाल दो सब कुछ हड़प के.

श्वेता : W-Whhaaattttt??? N-Nahiiiii! ऐसा... ऐसा बिलकुल नहीं है. ी... ी एडमिट की मुझे प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा चाहिए पर में उन्हें उनके घर से बाहर निकाल दू? N-Nahiii! बिलकुल नहीं!!! उन्होंने ऐसा सोच भी कैसे लिया मेरे बारे में?

प्रांजल : कल तोह उन्होंने यही कहा. क्या बताऊ आपको. *स्निफ्फ*

प्रांजल जैसे जैसे अपनी बात कह रहा था, श्वेता वैसे वैसे नशे में गिरती जा रही थी और उसकी आँखों से ासु बह बह के उसके चेहरे के make-up को खराब कर रहे थे.

प्रांजल : हाँ तै जी! यही सच है. उन्होंने बस एक hi शर्त पे आपको कुछ बची हुई प्रॉपर्टी देने का सोचा है. उसमे दादा जी की अलग से एक ज़मीन का हिस्सा है, एक फार्महाउस, एक कार और एक खुद का डुप्लेक्स है सोसाइटी में.

श्वेता (शॉकेड) : इतना... इतना सब!!? *हइच*

और शीराज़ ने अपना असर शुरू कर दिया था. नशा होता hi ऐसी चीज़ था. श्वेता को हिचकिया आना शुरू हो चुकी थी.

प्रांजल : ये क्या? आपका गिलास ख़तम? आपको एक और लेनी चाहिए.

श्वेता : N-Nahiii प्रांजल... में पहले hi बोहत...

प्रांजल : यही आपको हिम्मत देगी तै जी! ट्रस्ट में! यही आपको हिम्मत देगी. क्युकी, आप आगे sunn'ne के लिए रेडी नहीं हो.

श्वेता : Wh-Whattt?? ऐसा क्या कहा है उन्होंने??

प्रांजल : प्लीज!!!

श्वेता : ी... O-Okay!!! वेट्रेस!!! ओने मोरे पिंट!!!

और अगले hi शान, श्वेता का गिलास फिरसे शीराज़ से भरा हुआ था.

जिससे वो सिप सिप करके पीती जा रही थी. और नशे में धुत्त होती जा रही थी.

श्वेता : अब... *हइच* बोलो... बोलो भी... *हइच* में sunn'ne तैयार हु प्रांजल. इतना कुछ सहा है ज़िन्दगी में. बोलो... *हइच* ये भी सहलूंगी...

प्रांजल : वो... तै जी ये सब कुछ... आपका हो सकता है. उन्होंने ऐसा कहा है.

श्वेता : H-Huhhh? *हइच*

प्रांजल : पर शर्त ये है की...

श्वेता : K-Kaho भी... *हइच*

प्रांजल : मुझ से बोलै भी नहीं जा रहा है... शर्त ये है की... की आपको अपनी होटल उनके नाम करनी पड़ेगी.

ये सुनते hi श्वेता जो नशे में थी, उसकी आँखें आश्चर्य के मारे फेल गयी और वो बिना पलके झपकाए प्रांजल को देख रही थी.

प्रांजल : जो की मेरे हिसाब से आपके लिए रेवर्डिंग है.

श्वेता : W-Whattt?

प्रांजल : हम्म! ज़रा सोचिये!! एक फार्महाउस, ज़मीन भी, एक घर, और एक कार. आदमी पूरी तरह से सेटल हो जाए. फिर आपकी सिर्फ एक होटल क्या इन् सब के सामने? ी क्नोव तै जी... की आपने होटल में बोहत समय दिया है. पर ज़रा सोचिये... की यदि आप उस ज़मीन में अपनी एक नयी होटल खोल लो तोह आपके पास अभी से भी ज़्यादा वेल्थ होगी. है की नहीं?

प्रांजल की बात सुनते hi श्वेता सोचने पर मजबूर हो गयी. बात तोह सही थी.

थोड़ी म्हणत थी पर बाद में उसके पास पहले से भी ज़्यादा होगा.

उसके गालो पर ासु अब भी अपनी छाप चौररने में लगे हुए थे.

और जैसे जैसे समय बीत रहा था उसका होश में रहना मुश्किल होता जा रहा था.

प्रांजल : जो मेने आपको पैकेज दिया था न?

श्वेता : *हइच* !!!??

प्रांजल : उसमे... उसमे वही पेपर्स है. आपके नाम सब कुछ करने के और बदले में आप अपनी होटल उनके नाम करने के. वही पेपर्स...

श्वेता (शॉकेड) : S-Sach में...!? *हइच*

प्रांजल : यस!!! अब आप सोच लीजिये!!!

श्वेता और बैठी रही और नशा अपना खेल दिखाता रहा. वो अपना काम बखूबी कर रहा था.

और अगले hi पल, श्वेता ने अपने पर्स में से वो पैकेज निकाला. हड़बड़ा के उससे फायदा और खोला... अंदर वाक़ई...

कागज़ात थे...

श्वेता : Y-Ye... *हइच*

प्रांजल : फैसला आपका है. भूमिका दी के बारे में भी सोचिये!!!

श्वेता : B-Bhumi... मेरी भूमि... *हइच* मेरी बच्ची... *स्निफ्फ* मेरी बच्ची...

और वो फिरसे रोने लगी. हिचकियो और सिसकियों में hi उसकी आवाज़ कही गायब होती जा रही थी. और प्रांजल के कहने पर वो और ड्रिंक मंगाए जा रही थी.

श्वेता : हाँ! *हइच* यही सही रहेगा... *हइच*

और उसने अपने पर्स से एक पेन निकाला और...

उसके हाथ उन् कागज़ात पर चलने लगे.

प्रांजल : T-Taiii जीई??? ये आप!??

प्रांजल अगले hi पल... हैरानी के मारे चेयर से खड़ा हो गया.

श्वेता : K-Kya हुआ अब तुम्हे!? *हइच* हँ? *हइच*

प्रांजल : ये आप क्या कर रही हो???

श्वेता : क्या!?? नाम कर रही hi अपनी होटल... *हइच* समझे!!?? ये लो!!! और रखो!!!

प्रांजल ने श्वेता को हिलाते हुए उससे होश में लाना चाहा पर श्वेता तोह जैसे पूरी तरह टल्ली हो चुकी थी.

प्रांजल : M-Mujhe नहीं चाहिए... आप होश में नहीं हो तै जी!!!

श्वेता प्रांजल की बातो का मतलब तक ठीक से नहीं समझ पा रही थी, वो इस क़दर नशे में डूबी हुई थी. बस किसी भी पेल गिरने hi वाली थी वह.

श्वेता : व्हाट नहीं चाहिए? *हइच* लो ये...

प्रांजल : आप अपने नशे में कर रही हो तै जी! होश में नहीं!!!

श्वेता : चुप्प्प! एकदम चुप्प्प! शट उप!!! मेने कहा न में... *हइच* में ये होटल दे रही हु... एनफ!!! *हइच* अब... अब कोई सवाल नहीं... ममहहह ोकाययय!!?? *हइच* ेहेहेहे~

प्रांजल ने अपने हाथ से वो डाक्यूमेंट्स हटाने चाहे पर श्वेता ने जोरर से उन्हें थाम के वापस से उसके हाथो में पकड़ा दिए.

श्वेता : नाउ let's गऊओऊ~ *हइच* ेहेहेहे~ कोई किसी की परवाह नहीं करता... बूत... *हइच* ेहेहेहे~ I'll बे रिच सून... *हइच* मेरी बच्ची के साथ... वो मेरा बच्चा है... *हइच* माय भूमि... *हइच* हेहेहे~ वैटरेस्स्सस्स!!!! *हइच* तुमने बोहत अच्छे से सर्वे किया. *हइच* G-Good जॉब.... हेहेहे~

प्रांजल : A-Aap की हालत ठीक नहीं है.

और अचानक hi... श्वेता ने प्रांजल का हाथ पकड़ अपने सर्र पर रख लिया...

श्वेता : ेहेहेहे~ *हइच* तुम भी पियो प्रांजल... ऐसे क्या मुझे अकेले अकेले... *हइच*

प्रांजल न जाने क्या बोलता रहा उसके बाद पर श्वेता ने देखा की उसकी आँखों में ासु आ रहे थे.

और अगले hi पल उसकी आँखें नशे के चलते बंद हो गयी.

उसके बाद क्या हुआ...

ये तोह उससे बाद में पता लगने वाला था.

***

मैंवहीले इन कैरो, ेगीपत...

मुंबई में जो हुआ, वो तोह रात का खेल था. पर ेगीपत में यहाँ वीर के साथ नयी सुबह से क्या हुआ? ये नज़र डालने लायक था.

सुबह वीर और साइट पर मौजूद सभी रेसेअर्चेर्स रेडी थे एक बार फिरसे तुंब के अंदर जाने के लिए. फिरसे एक नयी नज़र से चीज़ो को परखने के लिए.

सब एक्ससिटेड थे. सिवाए वीर के. वो तेनसेद था. ऑफ़ कोर्स, क्यों नहीं रहेगा?

उससे ेगीपत की रेसर्चेस में कोई इंटरेस्ट नहीं था. वो तोह यहाँ बस अपनी माँ और बहिन के लिए आया था. और उसी को लेकर वो चिंता में था.

सुबह hi तेज उससे ऐसा लुक देके गयी थी जिससे देखने के बाद वीर पक्के से कह सकता था की कुछ तोह लोचा था.

खर्र! अब जैसे भी बात बढाए. पर बात बात बढ़नी चाहिए. और ये सब कुछ करना वीर के अपने हाथो में था.

सभी साइट की एंट्रेंस पर पहुँच चुके थे.

आहिस्ता आहिस्ता नीचे उस अंडरग्राउंड तुंब में प्रवेश कर रहे थे वह.

सकरी सी एंट्रेंस थी और सुखी मिटटी hi मिटटी. कुछ स्टेप्स बने थे नीचे जाने के लिए.

उसके आगे भावना यानी की उसकी माँ चल रही थी. और भावना के ठीक आगे तेज.

भावना : संभल के आना विक्रम...!! अभी एंट्रेंस पर इतना काम नहीं किया है हमने. तोह नीचे देख के चलना... तेरे मिगहत बे सम इंसेक्ट्स. इवन स्कॉर्पियंस...

वीर : हहह??

भावना उसका रिएक्शन देख खिखिलायी और आगे बढ़ती रही.

अंदर आते hi वीर के नज़रे चका चौंध हो चुकी थी. इतनी विविद ब्राइट पेंटिंग्स दीवारों में, गहरी और यूनिक सर्विंग्स और बीचो बीचो मौजूद वो डेथ बीएड.

जिसमे इस तुंब के मृतक के अंश मौजूद थे.

वीर ने ये भी देखा की...

कई जगह लाइमस्टोन का उपयोग किया गया था. चेक से सब पता लग गया था उससे.

वीर : लाइमस्टोन हँ!??

भावना जिसने उसके बोल सुने वो मुस्कुरायी और पीछे देखि,

भावना (स्माइल्स) : यस!! लाइमस्टोन!! अभी तोह हम देख रहे है अच्छे से बूत... यू क्नोव...

वीर : हम्म??

भावना : साड़ी रिसर्च के बाद ये एक टूरिस्ट साइट बन्न जाएगी...

वो उदास होते हुए बोली.

वीर : ये तोह होना hi है. मिस गीता!!!

भावना : ी क्नोव... और फिर... ये जो लाइमस्टोन तुम देख रहे हो न...

वीर : ...

भावना : जब टूरिस्ट्स आएँगे तोह भीड़ तोह रहेगी hi... हर्र इंसान अपने शरीर से किसी न किसी मात्रा में सेलाइन कंटेंट प्रोडूस करता है. तुम जानते हो न!?

वीर : ...

भावना : सेलाइन कंटेंट... यानी की खारा, नमकीन पदार्थ... हम इंसान की बॉडी से प्रोडूस होता hi है. फिर चाहे वो हमारे पसीने से हो या फिर हमारी ब्रेथ से...

वीर : हम्म्म~

भावना : और वही सेलाइन कंटेंट जब धीरे धीरे.... धीरे धीरे लाइमस्टोन के आस पास इखट्टा होने लगता है तोह लाइमस्टोन के साथ क्या होता है पता है!??

वीर : ...

भावना : वो उसपे और प्लास्टर पे चिपक जाता है और धीरे धीरे उससे... उस लाइमस्टोन को... पाउडर में परिवर्तित कर देता है. ख़ाक एकदम... कुछ नहीं बचता... एंड that's थे साद थिंग... की एक न एक दिन टूरिस्ट्स आएँगे यहाँ... और...

[That's really sad Master!!! But it can be cleaned too. Saline content Limestone ke upar se clean ho sakta hai master!]

पारी की बात सुन्न वीर ने ये मौका हाथ से नहीं जाने दिया.

वीर : तोह क्लीन भी तोह हो जाता है न? ये साल्ट?

भावना (स्माइल्स) : That's राइट!!! यू पास्ड थे टेस्ट. फुफु~

'W-Whaaattt? फुकककक! मेरी माँ मेरा टेस्ट ले रही थी? ओह्ह्ह! ऑफ़ कोर्स!!! शी वोउल्ड दो तहत...!!! इतनी आसानी से कहा भरोसा किया होगा मुझपे!?? I'll हैवे तो बे केयरफुल!!!'

[Yes master!! She's smart!!! So you have to be smart too!!!]

वीर : तोह यहाँ तोह 2 टोम्ब्स है न!?

भावना (स्माइल्स) : यस!

वीर (स्माइल्स) : थें तोह कोई बात hi नहीं!!! एक ईयर एक तुंब को ओपन रखा जाए और नेक्स्ट वाले तुंब में रेस्टोरेशन किया जाए. साल्ट रिमूवल. फिर नेक्स्ट ईयर अगले को खोला जाए और पहले वाले के साथ रेस्टोरेशन किया जाए. हाउ डस तहत साउंड्स!??

भावना (सुरप्रीसेड) : अहह!!! That's... That's...

वीर (स्माइल्स) : क्या हुआ?

भावना : N-No... एक्चुअली... थिस इस व्हाट ी वास् थिंकिंग... और यही ग़िज़ा में होता है. तीनो पिरामिड्स के साथ. तुम्हारी... सोच भी मेरे जैसे hi थी.

वीर : *समीरकस*

भावना : *स्माइल्स*

और दोनों hi आगे बढे. जहा भावना फिर सर जॉर्ज के साथ कुछ बातो में लग गयी और इधर वीर अपने अगले पेट्रो के बारे में सोचने लगा.

[That went well master!! Yadi aise hi chalta raha... Toh aapko boht hi jaldi kuch na kuch detail mil hi jayegi.]

'ी होप सो तू पारी!!!'

पर जैसे कोई एक इनकी बात से सहमत नहीं था.

"Y-Youuuuu!!!!"

एक आवाज़ ने वीर को मुड़ने पर विवश कर दिया.

सामने...

तेज कड़ी थी!!!!

'ओह्ह्ह न्यू!!! नॉट हेर...!!!'

[Master~ Aapko apni behan ko kese bhi karke favour me lena hoga.]

वो तेज़्ज़ कदमो के साथ उसके पास hi आ रही थी. जैसे मानो मौका hi ढूंढ रही थी की कब सब बिजी होये और वो अकेले उस से बात कर सके.

तेजल : Okay!! नाउ लिसेन मिस्टर!!! मुझे नहीं पता तुम कल कैसे अंदर आये, तुमने क्या क्या किया और कैसे उन् आर्टिफैक्ट्स के बारे में तुम बता पाए. ी don't क्नोव एनीथिंग अबाउट यू... बूत...

वीर : ेहः?

तेजल : बूत ी कैन तेल्ल... तहत you're लाइंग...!!!

वीर : Wh-Whattt?

तेजल : यस!!! मुझे नहीं पता तुम्हारा इरादा क्या है. मय्बे तुम यहाँ इनफार्मेशन चुराने आये हो, या इवन अर्टिफैक्ट, हु कनौस!? बूत don't यू डरे दो एनीथिंग स्टुपिड इन माय प्रजेंस. मेरी माँ बोहत hi पैशनेट है अपने वर्क को लेकर एंड सो ऍम ी. यू गोत तहत??? तोह बस देखो और चलते बनो. और हाँ! It'll बे बेटर िफ़ यू स्टे अवे फ्रॉम हेर. बिकॉज़ थी लुक्स won't गेट यू एनीवेयर. Okay??





वीर (नॉड्स) : O-Okay!!!

और वो पलटी और जाने लगी. वीर के तोते उड़ा के. ऐसे जैसे कुछ हुआ hi नहीं था.

'दफक!??? व्हाट थे हेलल?!??? P-Pariii?? व्हाई इस शी सो माध!??? ी थॉट उनके ऊपर मेरा कुछ अच्छा इम्प्रैशन होगा. बूत व्हाट थे फ़क वास् थिस!?? H-Huhhh???'

[*शिघ्स* म्हणत करनी होगी मास्टर!!!]

'ी सी थें... फाइन!!! तेजू दी!! यू आस्क फॉर आईटी!!! लेट में शो यू नाउ!'

वीर एक बार फिर...

वो आगे बढ़ा. इस बार नए जोश के साथ.

और अब वो थोड़ा और अंदर जाते जा रहे थे. और वीर ने मौके का फायदा उठाया और अपनी तेजू दी के बगल से से आके चलने लगा.

तेज ने एक झलक वीर को देखा और उससे इग्नोर कर आगे बढ़ती रही.

वीर के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी.

और...

*डिंग*

हव्कये!!!

वीर ने अपने परर के सामने से एक छोटा पत्थर लात से हल्का सा ठोकर मारते हुए एकदम निशाने पे गिराया.

और वो पत्थर सीधा जाके एक जगह जाके रुका.

तेज जो अपना परर आगे बढ़ा रही थी, उसका दाया परर सीधा उस छोटे पत्थर पे आया और...

"अह्ह्ह्हह्हह~"

वो अचानक hi आगे की ऑर्डर झुकते हुए गिरी पर इसके पहले की वो मुँह के बल गिर पाती.

तेज : हहहह!!??

वीर : *स्माइल्स*

एक मज़बूत हाथ उसके पेट पर आके लिपट गया.

और वो गिरते गिरते बच गयी.

वीर ने उससे गिरने से बचा लिया था. जहा वीर के होंठो पे मुस्कान थी तोह वही तेज के चेहरे पर हल्का गुस्सा.

तेज : Y-You.... लीव में!!! चोर्रो!!

वीर : चोरर्ण है!? Okay!!!

और वीर ने हाथ चोरर दिया.

तेज : अह्ह्ह्हह्हह!!!!

और तेज जो फिरसे गिर रही थी उससे एक बार फिर वीर ने पकड़ लिया.

वीर (स्माइल्स) : देखा!? चोरर देता तोह गिर जाती आप मिस! संभल कर चलिए!!

तेज : Y-Youuuu....

वीर ने उससे सीधा कर चोर्रा तोह तेज मुँह बनाते हुए आगे भाग गयी. कहा वो थोड़ी देरर पहले वीर को लेक्चर देके गयी थी. और कहा यहाँ उसकी hi इमेज खराब होने पर उतर आयी.

'हाहाहाहा` She's क्यूट तू!!!'

नीचे तोह उन्हें ज़्यादा कुछ मिला नहीं!! जितना भी था वो पहले hi निकाल लिया गया था. तोह अब बस तुंब की मैं चीज़ यानी की मम्मी का राज़ खुलना बाकी था.

सर जॉर्ज और अन्य ने ताबूत को खोल भी दिया था. और उनके सामने बेशक...

किसी के शेष बाकी थे.

पर सवाल थे किसके...!?

सर जॉर्ज : यू....!!!

वीर : हँ???

सर जॉर्ज : तेल्ल में! व्हाट दो यू थिंक अबाउट थिस?

वीर : वेल...

[Do it master~]

और...

*डिंग*

वीर के सामने उस मम्मी की साड़ी डिटेल्स आ गयी.

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

नेक्स्ट अपडेट में ेगीपत टूर समाप्त हो जाएगा. और बोहत बड़ा मुंबई का सन देखने को मिलेगा! 😁 बोहत कुछ इंटरेस्टिंग होने वाला है. सो, लिखे ठोकने का और रेवोस रखने का.


धन्यवाद!!!
 
इंडेक्स है बीन अपडेटेड!!

और ये िंगबब वाले हमेशा जब भी में अपडेट देने वाला रहता हु तब hi गांड क्यों मरवाते है!? :रेडफास:

साला साइट hi काम नहीं करती.

अन्य्वयस, अपनी अपनी रे रख के जाना गाइस. :डी नेक्स्ट अपडेट विल बे वैरी इंटरेस्टिंग. उसमे ेगीपत टूर ख़तम. :ईपी: आने वाला पूरा सीक्वेंस hi रोमांचक रहने वाला है.

सो, कीप सपोर्टिंग!! ✨
 
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