Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 10 - SexBaba
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Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

अपडेट - 61 ~ मिरर गैलरी (1)

अब तक...

फूऊक्कखकक तिसस्स शहिततटत दमंत्र यू फूकिंग सिस्टम्म....'

[Mujhe bhi tumhara secret pata chal gaya.]

'???'

[You are just like Suhana hehe~ Keep hitting the cushion.]

'फुक्कक्कककककक यू परीईई!!!!!!'


अब आगे...

संडे | 2:32 पं

आउटसाइड क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स होटल...

[She hasn't shown up.]

'शी विल!'

[Kuch zyaada hi confidence nahi hai tumhe?]

'ऑफ़ कोर्स! इतना तोह जान hi गया हु उनको.'

[Well! Let's see~]

आज वो दिन आ चूका था जिसका वीर को इंतज़ार था. आज शाम को मिरर गैलरी का शहर में उद्धगाथान होने वाला था और पहली 50 एंट्रीज एकदम फ्री थी लोगो के लिए. नए साल में जैसे ये नया तोहफा था पब्लिक के लिए.

वीर को नहीं पता था वह क्या होने वाला था पर जैसे उसने कुछ अपने मैं में पहले से hi सोच के रखा हुआ था.

और इस बार पारी को उसने अपने मैं की बात पढ़ने से मन कर के रखा था. खासकर पारी की इस पर्सनालिटी को. क्युकी, वीर की कुछ सही नहीं जमती थी इस पर्सनालिटी से. दोनों का hi जैसे 36 का आकड़ा रहता था. और din-ba-din उनके झगडे बढ़ते hi जा रहे थे.

आज वीर एक सिंपल वाइट शर्ट विथ स्लीव्स फोल्डेड और नेवी ब्लू डेनिम जीन्स डाले एक होटल के बाहर खड़ा हुआ था. और वो इंतज़ार कर रहा था करा का. यही उसका pick-up स्पॉट था.

अब वैसे तोह मिरर गैलरी की एंट्रीज शाम 7 बजे से शुरू होने वाली थी पर वीर शायद करा के साथ और समय बिताना चाहता था. खुद से वादा भी जो किया था उसने की चाहे जो भी हो जाए, वो पुरानी करा को वापस ला के रहेगा.

करा के खयालातों में वो डूबा hi हुआ था जब उसके सामने एक लुक्सुरिओउस कार आके रुकी और उसका दूर खुला.

अंदर से करा एक चमकती हुई ब्लैक ड्रेस में बाहर आयी.





वो बेहद कमाल की लग रही थी. और पिछली बार की तरह इस बार भी उसके चेहरे पर मास्क था.

वीर और करा दोनों hi एक दूसरे को देख आगे बढ़ के आपस में समीप आये.

वीर (स्माइल्स) : हर्र बार की तरह, आप बेहद ख़ूबसूरत लग रही हो.

करा : ऍम ी? थैंक यू! यू अरे लुकिंग हैंडसम अस वेल.

वीर : में? ः~ नाह!

करा : ी रियली मैं आईटी.

[Ab itna kya show off kar rahe ho. Yadi wo bol rahi hai toh kuch soch ke hi boli hogi na? Bhulo mat ki usne dherro tumse handsome handsome ladke dekhe honge. Uske baad bhi tum ho ki...]

'येह येह!'

[Ek toh aadmi tareef kar raha hai aur fir tum...]

'फ़क! ी गेट आईटी. Okay? चिल!'

वीर : उम्... वेल... थैंक्स!

करा : थें? शॉल वे?

वीर : सूरे!

और फिर दोनों hi करा और वीर कार में पीछे की ऑर्डर जाके बैठ गए. इस बार भी सामने की दो सीट्स पर रघु और जस्सी hi बैठे हुए थे.

वीर : आपको ठण्ड नहीं लग रही? ी मैं शाम तक ठण्ड बढ़ जाएगी.

करा : हम्म? ी हैवे ा ब्लेजर.

कहते वक़्त करा के होंठो पर एक अजीब सी मुस्कराहट थी जो वीर न देख सका. क्युकी करा ने मास्क जो पहना हुआ था.

वीर : Okay!

करा : व्हाट अबाउट यू? यू ओनली हैवे ा शर्ट.

वीर (स्माइल्स) : ये काफी है मेरे लिए.

करा : Okay! सो? कहा चल रहे है हम?

वीर : आपने लंच किया?

करा : No, ी didn't.

वीर : परफेक्ट! थें पहले हम लंच करेंगे.

करा : Okay! अस यू से! कहा चलना है फिर?

'ः~ यदि सुहाना मुझे हर्र बार की तरह वह ले जाती तोह शायद वाक़ई में मुँह बनाता. पर आज मिस करा के साथ वह जाने का जैसे खुद मेरा मैं कर रहा है.'

[Huh? Don't tell me you...]

'ओह! यस! यस! ः~ I'm टेकिंग हेर तेरे ओनली.'

वीर : आज हम क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स होटल चलेंगे. आपको पता है?

करा : हम्म? एक्चुअली! No! बूत ी विल तरय यदि तुम कहते हो तोह.

'शी doesn't इवन कनौस आईटी. ः~'

[Umm... Well...]

रघु ने वीर की बात सुन्न गाडी को सीधा बतायी गयी होटल के रास्ते मोड़ दिया. वो जानता था होटल के बारे में. करा केवल बड़ी बड़ी 5 स्टार्स होटल्स से hi फेमिलिअर थी. और इस कारण, उससे वीर की बतायी गयी होटल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

फिर भी, वीर की खातिर वो जैसे आज इस नए होटल में खाना तरय करना चाहती थी. वो जानती थी की यदि वीर ने चुनी है ये होटल तोह कुछ ख़ास बात hi होगी.

और कुछ देरर के अंतराल के बाद hi वो सभी एक होटल के बाहर खड़े हुए थे.

करा : हम्म? मेने इस होटल में कभी dine-in नहीं किया.

वीर (स्माइल्स) : तोह आज में आपको करवा दूंगा.

करा : हम्म~

करा, वीर और Raghu-Jassi सभी आगे बढ़ते हुए होटल में प्रवेश किये तोह वह रिसेप्शनिस्ट उन्हें देखते hi समझ गयी थी की पार्टी पैसे वाली है.

क्युकी सभी अच्छे कपडे पहने हुए थे. करा को hi देख कर रिसेप्शनिस्ट भांप गयी थी की ये लड़की कोई आम लड़की नहीं थी.

रिसेप्शनिस्ट : H-How कैन ी हेल्प यू ma'am?

करा (फ्रोंस) : हम्म? Shouldn't यू एड्रेस हिम फर्स्ट?

रिसेप्शनिस्ट : यह!??

रिसेप्शनिस्ट बेचारी तोह करा को देखते hi उससे hi लीडर समझ बैठी और उस से hi पूछने लगी. पर शायद ये बात करा को ज़रा भी पसंद नहीं आयी थी.

वीर उसके आगे खड़ा हुआ था पर उसके बावजूद उस रिसेप्शनिस्ट ने वीर को इग्नोर कर उस से सवाल पूछा. भला वो ऐसा कैसे बर्दाश्त कर सकती थी? आज वीर hi यहाँ पर उससे लाया था.

करा के चिढ़े हुए एक्सप्रेशन देख के बेचारी रिसेप्शनिस्ट डर गयी और उसने फौरन hi खुद के बेहेवियर को सही किया.

रिसेप्शनिस्ट : I-I ऍम सॉरी Ma'am! I'm सॉरी सर! एहम! सर? हाउ कैन ी हेल्प यू?

वीर : ा टेबल फॉर फोर प्लीज?

करा : तवो! ओनली तवो, वीर! रघु एंड जस्सी तोह अलग बैठेंगे. है न?

रघु : हैंण्ण्णन?

जस्सी (रघु को कोहनी मारते हुए) : J-Jii मिस बिलकुल!

रघु : ुघ्घ! J-Jii! मिस! ाहः~ A-Alag बैठेंगे हम लोग. हाहाहा~ कोई दिक्कत नहीं.

और करा ने उन् दोनों की बात सुनते hi अपने मास्क उतार दिया. जैसे hi उसका चेहरा सामने आया तोह सामने कड़ी रिसेप्शनिस्ट उससे देखते hi चिल्ला उठी.

रिसेप्शनिस्ट : मिस कैराहा!????

करा : मम?

रिसेप्शनिस्ट : A-A-Aap?? Y-Ya-Yaha??? H-Hamari होटल में?

करा : हम्म? कैन ी नॉट के हेरे?

रिसेप्शनिस्ट : No No No No!!!! हाँ! न्यू! ी मैं हाँ! सहित! क्या बोले जा रही हु में. M-Mera मतलब, यू अरे ऑलवेज वेलकम. A-Always!

करा : ओह्ह! थैंक यू!

रिसेप्शनिस्ट : P-Please! आइये न!

[She has a huge fan following.]

'येह!'

और वो रिसेप्शनिस्ट खुद आगे बढ़ के करा और बाकी सभी को राइट साइड की एंट्रेंस में ले गयी.

ये विप लोगो के लिए hi थी.

वीर केवल मंद मंद मुस्कुरा रहा था. वो यहाँ करा को केवल एक hi पर्पस से लाया था. और जैसे उससे अगले hi पल वो नज़र आ गया जिसकी वो तलाश में था.

या यु कहे की वो लोग नज़र आ गए.

श्वेता और भूमिका.

जी हाँ! वीर आज करा को उनकी hi होटल में लाया हुआ था.

दोनों माँ बेटी विप गेस्ट्स से बात कर रही थी जब रिसेप्शनिस्ट ने उन्हें आवाज़ लगा के अपनी ऑर्डर बुलाया.

और एंट्रेंस पे जैसे hi श्वेता और भूमिका ने देखा की कौन आया है. पहले तोह उनके चेहरे पर थोड़ा कन्फूसिओं नज़र आया, फिर जैसे आश्चर्य, फिर एकदम ख़ुशी से चेहरा भर गया पर उसके बाद hi उनकी बॉहे सिकुड़ गयी.

कारण? कारण था की उन्होंने पहले करा को देखा, उससे पहचानते hi दोनों hi माँ बेटी ख़ुशी से झूमने लगी मैं hi मैं. पर फिर उनकी नज़रे बगल में गयी, जिधर एक जाना माना चेहरा नज़र आया उन्हें.

वीर!

और बस, उससे देखते hi दोनों hi प्रश्नो से उलझ गयी और दुविधा में डूब गयी.

उनके मैं में यही चल रहा था की वीर यहाँ क्या कर रहा था? वो भी करा जैसी हस्ती के साथ? मानो सवालों से सर्र चकराने लगा था उनका.

दोनों hi आगे बढ़ के उन् के नज़दीक आयी.

श्वेता : It's सुच ा प्लेअसुरे तो हैवे मिस करा इन आवर टाइनी होटल. प्लीज वेलकम!

हर्र बार की तरह भी इस बार भी वैसा hi हुआ. श्वेता ने वीर को हवा की तरह hi ट्रीट किया.

पर शायद उसकी बेटी के इरादे कुछ और hi थे.

भूमिका : वेलकम! मिस करा! वेलकम, वीर!

वीर का नाम अपनी बेटी के मुँह से सुनते hi श्वेता एकदम अचरज में अपनी बेटी को देखि की जैसे पूछ रही हो आखिर तुम्हारा दिमाग सही तोह है न?

करा : हम्म? यू क्नोव हेर?

करा ने वीर को देखते हुए पूछा.

वीर (स्माइल्स) : यस!

करा : ओह्ह! अरे यू गाइस रिलेटेड?

भूमिका : I-I... ी ऍम हिज स्टेप सिस्टर.

भूमिका ने आखिर इस बार जवाब दे hi दिया. जहा वो पहले खुद को वीर से सम्बंधित होने पर नकार देती थी. आज वही खुद से ुपत के बता रही थी की वो वीर की स्टेप सिस्टर थी.

पर श्वेता को अपनी बेटी के आज के हाव भाव कुछ रास नहीं आ रहे थे. वो छुप छुप के भूमिका को आँख दिखा रही थी. भूमिका फिर भी बिना कुछ कहे अपने मैं की hi करती रही.

करा : ओह्ह! स्टेप सिस्टर. ी सी! अन्य्वयस, वीर के.

करा भूमिका और श्वेता को चोरर वीर को टेबल की तरफ ले गयी.

वही रघु और जस्सी थोड़ी दूर किसी और टेबल पर जा के बैठ गए.

श्वेता भूमिका को लेके साइड में आयी और उससे हैरानी से देखते हुए बोली.

श्वेता : ये सब क्या था? तुम कब से वीर से बातें करने लगी भूमि?

भूमिका : ी... मिस करा आयी है हमारी होटल में. तोह भला में उनसे झूठ कैसे बोलू? और झूठ बोलना सही भी तोह नहीं माँ.

श्वेता : अरे तोह ये बताने की ज़रुरत क्या था की वीर तुम्हारा भाई है. बस कह देती की हम जानते है एक दूसरे को. बात ख़तम!

भूमिका : आप भूल रही है की मिस करा वीर के साथ आयी है यहाँ. मतलब वो वीर को अच्छे से जानती है.

श्वेता : वही तोह मेरी समझ नहीं आ रहा की ये वीर भला करा के कांटेक्ट में कैसे आया? किस्मत तोह देखो उसकी. अन्य्वयस, में एक क्लाइंट से मिलने जा रही हु. तुम यहाँ देखना सब सही रहे. Okay?

भूमिका : हम्म!

और श्वेता जल्दबाज़ी में निकल गयी.

वही वीर और करा अपने अपने लंच में लगे हुए थे.

वीर : केसा है? खाना?

करा : नॉट थे बेस्ट बूत बुरा भी नहीं है. It's गुड! ी लिखे आईटी. ा लिटिल बिट ऑयली.

वीर (स्माइल्स) : बी थे वे, थैंक्स फॉर किंग. मुझे नहीं लगा था आप आओगी.

करा : उम्... यदि और कोई दिन होता तोह वाक़ई आना थोड़ा मुश्किल होता. It's संडे टुडे. सो, ी पोस्टपोनड माय Sunday's वर्क.

वीर : हँ? संडे वर्क से आपका क्या मतलब है? संडे भी वर्क करती हो आप?

करा : यस! एव्री डे! इन्क्लूडिंग संदेस.

करा की बात से वीर शॉकेड था. हर्र दिन काम करना तोह जैसे नामुमकिन था. उसके बावजूद करा ने इतनी आसानी से जवाब दे दिया. और दुखद बात तोह ये थी की करा को ये सब नार्मल लग रहा था. वीर चुप चाप करा को देख रहा था जो अपने खाने में बिजी थी. सच कहा जाए तोह इस वक़्त वीर को करा पर बड़ा hi तरस आ रहा था. इस लड़की के पास सब कुछ था भी और नहीं भी.

कोई देख के कहेगा की ये इतनी सुन्दर सी लड़की रोज़ काम करती है? किसी रोबोट की तरह? बिलकुल नहीं!

वीर : में पूछने वाला था आपसे पर भूल गया था. आप तोह दिल्ली में थी न? तोह आप यहाँ क्यों आयी? मुंबई में?

करा (खुसपुसाते हुए) : ी चामे फॉर यू.

वीर : हम्म? मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया.

करा : ी... ी हद सम वर्क. That's व्हाई...

वीर : Okay!

'ी थिंक ी कैन चेक हेर नाउ. राइट?'

[Yes! Of course!]

'ऑलराइट थें. चेक!!!'

[Name : Kaera


आगे : 26

बायो : करा, किशोर की एकलौती बेटी है. क्सक्सक्सक्सक्सक्स कंपनी में अस ा सीईओ वर्क करती है, जो की उसके hi पिता की कंपनी है और वर्ल्डवाइड फेमस है. आये दिन वो इस कंट्री से उस कंट्री ट्रेवल करती रहती है. कंपनी की बैकबोन करा hi है. She's लिखे ा क्वीन हु कनौस हाउ तो रूल. She's वेल वेरसेद इन लैंग्वेजेज, लिटरेचर, बिज़नेस, फैशन स्टाइलिंग, ेट्स. करा को फूल बेहद पसंद है. इन् सब के बावजूद, there's ा part ऑफ़ हेर व्हिच इस लॉस्ट समवेयर. कुछ इमोशंस है जिन्हे वो महसूस नहीं कर पाती ठीक से. जल्द से जल्द यदि इसका उपाय नहीं निकाला गया तोह करा को इस दलदल से निकालना बोहत मुश्किल हो जाएगा.

फवौराबिलिटी : 48

रिलेशनशिप : गुड फ्रेंड्स.]

करा का स्टेटस पढ़ने के बाद वीर के मुँह से बस यही निकला था.

वीर : वाओ!!

करा : हम्म?

वीर : No! नथिंग!

वीर बेचारा स्टेटस देख के hi बलों हो चूका था. जहा करा इतनी टैलेंटेड थी, वही दूसरी ऑर्डर उसके साथ कुछ गड़बड़ भी थी. जिसका समाधान वीर को जल्द से जल्द निकालना था, वर्ण दिक्कत हो जाने वाली थी.

करा : ी क्नोव नाउ.

वीर : हम्म?

करा : यू टोल्ड में सम थिंग्स तहत डे. राइट? उस रात. व्हेन वे वेरे इन क्लब. रेमेम्बेर?

वीर : यह... तहत...

करा : तुमने कहा था की... जितना इस ज़िन्दगी से दोस्ती करना चाहोगे, ये उतना hi दूर भागती है. कुछ लोगो के पास काबिलियत होती है तोह वो अपनी ज़िन्दगी बदल लेते है. कुछ के पास काबिलियत होती है पर हालात उन्हें अपनी ज़िन्दगी न बदलने पर मजबूर कर देते है. और जिनके पास काबिलियत नहीं होती वो बस किस्मत के लिए बैठे रहते है. की किसी न किसी दिन उनकी किस्मत चमकेगी.

'दीद ी से तहत? में कब से इतनी फलसफा भरी बातें करने लगा?'

[Tumne hi kaha tha, you idiot.]

'शट उप पारी! फाइन! ी रेमेम्बेर नाउ.'

[Hmph~]

वीर : जी! तोह?

करा : ी थिंक ी क्नोव नाउ. की क्यों मुझे वो रेलाताब्ले लगा था. क्युकी I'm थे शामे वीर.

वीर : ??

करा : I'm थे शामे. कुछ लोगो के पास काबिलियत होती है पर हालात उन्हें ज़िन्दगी न बदलने पर मजबूर कर देते है. ये में hi तोह हु न वीर? लुक! I'm... I'm स्किल्ड. बूत उसके बावजूद... ी don't क्नोव what's लाइफ? व्हाई दो पीपल लाइव लिखे थिस? प्यार करना, शादी करना, किड्स एंड थें ीर्ण करना और फिर इस वर्ल्ड से चले जाना. What's थे मीनिंग बिहाइंड आईटी?

वीर : तोह आपके हिसाब से क्या करना चाहिए?

करा : ी... ी don't क्नोव. बूत क्या यही है? इस थिस लाइफ? ी don't अंडरस्टैंड. ऐसे में तोह ी हैवे मनी, ी हैवे पावर, पर उसके बाद भी... व्हाई दो ी फील इन्कम्प्लीट?

वीर (स्माइल्स) : यू नीड तो फंड लव. फॅमिली लव तू.

करा : लव? व्हाट इस आईटी?

वीर : जब आप दिल से किसी के लिए केयर करो और उसके बिना न रह सको. थें तहत मीन्स की आप उस व्यक्ति से प्यार करने लगे हो.

करा : हम्म? Okay! तोह हाउ कैन ी फंड थिस लव?

वीर : उम्... ये तोह आपको खुद करना होगा. यू कैन डेट समवन.

करा : हम्म? No! मुझे प्रोपोज़ल्स आते है ों ा रेगुलर बेसिस. बूत ी don't लिखे अन्य ऑफ़ थम. सो, ी don't डेट.

वीर : उम्... थें, इंतज़ार करिये. कोई न कोई आपको वो खुशियां देने ज़रूर आएगा.

[Aur wo mein hi rahunga hahaha~]

'शट उप! तुम्हे लगता है शी विल फॉल फॉर में? कहा वो... और कहा में... It's इम्पॉसिबल.'

[Tum bhul rahe ho ki tumhaare paas mein hu.]

'ओह्ह! अरे यू हिटिंग ों में? ः~'

[W-Wh-What!? Y-You! That's... N-Nooo! Hmph! Stupid.]

पल भर के लिए वीर को ऐसा लगा जैसे पारी शर्मा रही थी.

'हे? अरे यू बलुशिंग? Don't तेल्ल में...'

[Ah?? W-Wh-What? N-No wayyyyy! Stupid! Idiot! I hate you! G-Go to hell. Hmph~]

'हे!! चिल!!'

करा : Okay! I'll सी. ी don't अंडरस्टैंड मच थौघ.

'इन्हे समझाना बोहत मुश्किल होने वाला है.'

करा (मैं में) : कोई ऐसा जिसकी मुझे परवाह हो? हम्म...

वीर का लेसन कुछ ख़ास तोह नहीं था पर करा के दिमाग में काम से काम एक बात तोह बैठ गयी थी. यही की उससे अपना प्यार खोजना पड़ेगा.

देखते hi देखते, आज का लंच का समय भी बीत गया और शाम होते hi वीर और करा मिरर गैलरी के स्थान पर पहुँच चुके थे.

ग्राउंड था बसीकली, जिसमे पूरा set-up किया गया था.

बिलकुल वैसे hi जैसे अक्सर शहर में सर्कस के टेंट्स लगा करते थे.

बड़ा सा होर्डिंग भी लगा हुआ था, कई सारे बैनर्स जो इन्विते करने और अद्वेर्तिसेमेन्ट्स के लिए लगाए गए थे.

और तोह और देखते hi देखते इतनी साड़ी भीड़ जमा होने लगी थी की लग रहा था आज का ये सिलसिला देरर रात तक चलेगा.

करा : तू मच क्राउड.

वीर : वेल! भीड़ तोह है. क्या आपने पहले कभी मिरर गैलरी देखि है?

करा : No!

वीर (सुरप्रीसेड) : वाक़ई? मुझे लगा आपने तोह देखि hi होगी. क्युकी ये फॉरेन में रहता hi है. और आप तोह फॉरेन जाती रहती हो न. सो ी थॉट...

करा : नहीं! ी haven't सीन आईटी.

वीर (स्माइल्स) : आज आपके सारे फर्स्ट तिमेर्स करवा रहा हु में.

[Sex bhi first timer karwa diya tha. Hahahaha~]

'फ़क यू!!!!'

[Hahahaha~]

करा : ी गेस सो.

ये सभी बातें कर रहे थे जब अनाउंसमेंट हुआ और लाइन लग्न शुरू हो गयी.

अंदर जाने के लिए एक बार में दो से ज़्यादा एंट्रीज अल्लोवेद नहीं थी. या तोह अकेले जाइये या तोह किसी एक जान के साथ. लउकीली, वीर और करा दो hi थे. और रघु और जस्सी भी.

वीर लाइन के सेकंड लास्ट में खड़ा हुआ था करा के साथ और रघु और जस्सी ठीक उसके पीछे.

वही लास्ट थे. उनके बाद दूसरी लाइन अलग से बन्न रही थी पर तभी वह का जो सब कुछ मैनेज कर रहा था वो आया और उसने अनाउंसमेंट किया.

"देखिये! बस! अब इसके बाद आज के लिए और कोई एंट्रीज नहीं होएंगी. यही 50 एंट्रीज भर जाएंगी. पेड वाली एंट्रीज कल से शुरू की जाएंगी. माफ़ी चाहता हु. धन्यवाद!"

और उसके इतना कहते hi, लोगो की गालिया शुरू हो गयी. जो अपना समय निकाल के आये थे, उनका माथा ठनका और वो मैनेजर से वह गाली गलोच करने लगे. पर जैसे तैसे ये मामला निपटा तोह थोड़ी शान्ति हुई.

धीरे धीरे लाइन आगे बढ़ती जा रही थी. और करा बस क्यूरियस सी निगाहो से सब कुछ देख रही थी. आस पास के लोग उससे hi ताड़ रहे थे. क्युकी, आम पब्लिक में वो किसी मॉडल की तरह लग रही थी वह.

यदि करा किले पीछे दो बड़े बड़े बोडीगार्ड्स न खड़े होते तोह पक्के से एक आड़ आदमी ने आ कर लाइन ज़रूर मारी होती उससे.

करा : It's टेकिंग तू लॉन्ग.

वीर : वो इसलिए, क्युकी एक बार में एक या दो hi लोग एंटर कर सकते है और जब तक वो बाहर नहीं निकल जाते तब तक बाकी लोग एंटर नहीं कर सकते.

करा : स्ट्रेंज!

वीर : येह!

कुछ समय के बाद जैसे hi वीर और करा का नंबर आया तोह वीर अंदर जाने से पहले बस एक बार पलटा और जस्सी को देख धीरे से बोलै,

"जैसे hi कॉल दू, अंदर आ जाना."

और इतना बोल वीर आगे बढ़ गया.

पर जस्सी जो वही खड़ा हुआ था, वो ये सुनते hi वही जम्म गया. और जैसे hi उससे समझ में आया,

जस्सी : रघु! सपोर्ट के लिए कॉल करो. अभी!

रघु : हँ? क्या हुआ?

जस्सी : जैसा कह रहा हु वैसा करो. सवाल मत पूछो.

रघु : एक मिनट! इसका मतलब...??

रघु कुछ सोचते hi आगे बढ़ने के लिए हुआ तोह जस्सी ने उससे पकड़ कर वही रोक लिया.

रघु : जस्सी?

जस्सी : उसने कहा है... कॉल करू तोह अंदर आ जाना. अभी में जो कह रहा हु वो करो.

रघु : O-Okay!!

इधर वीर जैसे hi करा के साथ अंदर जाने के लिए एंट्रेंस पर आया. उसने बगल में बैठे एक लड़के को देखा.

और उससे देखते hi वीर ने उससे चेक किया. चेक करते hi, वीर की आँखें फैलती चली गयी.

लड़का : जाइये अंदर!

अंदर जैसे hi वीर और करा आये. पीछे का गेट बंद हो गया.

और अंदर, एक लम्बा कॉरिडोर था जहा आगे जाके एक मोड़ था राइट में. पर पूरे कॉरिडोर के अगल बगल बस शीशे hi शीशे लगे हुए थे.

पूरी ज़मीन पर एक लाल कारपेट बिछा हुआ था और लाइट्स भी केवल लाल रंग की मध्हम मध्हम जल रही थी.

मानो जैसे मिरर गैलरी में नहीं, किसी हॉरर गैलरी में आ गए हो.

करा ने अपना परर आगे बढ़ाया बढ़ने के लिए पर तभी उसकी कलाई पीछे से किसी ने पकड़ ली.

पीछे मुद उसने देखा तोह पाया की वीर था. पर...

पर वीर के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे. उसके मुँह से बस एक hi वाक्य निकला और वो भी इतनी गंभीर आवाज़ में की करा कुछ बोल hi न पायी.

वीर : स्टे विथ में!

करा की नाज़ुक सी कलाई वीर के मज़बूत हाथ की गिरफ्त में थी.

क्युकी वीर जानता था. वो सही था.

इधर आने से कुछ दिन पहले hi...

जिस दिन उसने अपना धंधा शुरू किया था. उस दिन hi मिरर गैलरी का अद्वेर्तिसेमेन्ट करने के लिए ट्रक निकला था.

पहले तोह वीर ने उससे ऐसा hi समझा था पर उस रात उसने ट्रक को चेक भी किया था. और चेक करते hi उससे उस रात ये jaan'ne को मिला था.

[Mirro Gallery Advertising Truck.


बायो : फेक अनाउंसमेंट बी थे बुएर. मिरर गैलरी कर्रेंटली इस नॉट बीइंग हेल्ड बी थे ओनर.]

ये पढ़ते hi वीर को एक झटका लगा था. ओनर hi जब ये नहीं करवा रहा है तोह कौन करवा रहा है ये?

और उसके बाद hi उस दिन hi उससे कुछ और भी देखने को मिला था. क्युकी ट्रक के निकल जाने के बाद hi...

*डिंग*

[Mission : Take Kaera to Mirror Gallery.


रिवॉर्ड : ??? पॉइंट्स.

मिशन फेलियर पेनल्टी : 1000 पॉइंट्स डिडक्शन.]

यही तोह कारण था. की आज वीर यहाँ करा के साथ था. और उससे जैसे आभास था की कुछ गड़बड़ थी.

और उससे ये भी आभास हो गया था की शायद इन् सब के पीछे उस आदमी का हाथ था.

स्लोगन!!!!

केवल इतना hi नहीं, यहाँ आने से पहले hi वीर की बात सुबह सुहाना से भी हुई थी.

वीर : आज में फ्री नहीं रहूँगा. मय्बे शायद कई दिन नहीं राहु.

सुहाना : ओह्ह अच्छा! अब जब फ्री होक में और सोनू तुम्हारे पास आना चाह रहे है तोह नखरे तोह देखो ज़रा. इतने बड़े आदमी नहीं बन्न गए तुम अभी वीर की मुझे मन कर सको. समझ गए.

वीर : It's नॉट तहत... बात कुछ और है.

सुहाना : ओह्ह अच्छा!? क्या बात है भला?

वीर : स्लोगन!

*साइलेंस*

सुहाना : H-Huh??

वीर : शाम को यदि मेरी तरफ से स्पीड डायल आये. थें समझ जाना ी नीड हेल्प. पुलिस! I'll लीव थम तो यू. और यदि कोई और मदद कर सको तोह वो भी... सी या!

*कॉल एंड्स*

सुहाना : व्हाट? वेट! H-Hello??? V-Veer??

'दमन आईटी! कॉल कट कर दिया. दमन यू!!! तहत इडियट फुकेर...'

वो गुस्से में आते hi बगल में रखे टेडी को पीटने लगी.

'व्हाट डस हे थिंक he's दोंग? पागल है क्या? इडियट!!! दमन हिम! He'll गेट किल्ड. स्लोगन? इससे पता भी है कौन है वो? थिस फुकेर... उघ!!!'

सुबह वीर यही कह के आज अपने इस मिशन पर निकला था. और यही कारण था की वो पॉइंट्स इखट्टा करने की भरपूर कोशिश कर रहा था.

सडली, उसके 200 पॉइंट्स बर्बाद हो चुके थे. और बचे हुए 100 पॉइंट्स वो स्टैट्स में लगा सकता था पर... वो उन्हें क्वेस्ट के लिए बचा के रखा हुआ था.

और अभी अभी अंदर आने से पहले भी...

वीर ने जैसे hi उस लड़के को चेक किया तोह उससे ये देखने को मिला था.

[Name : Bhavesh


आगे : 28

बायो : जस्ट ा लोकल रेजिडेंट. टुडे वर्किंग अस ा फेक एम्प्लोयी. पैसे की तंगी है.

फवौराबिलिटी : 0

रिलेशनशिप : स्ट्रॉन्गेर्स]

'फेक एम्प्लोयी' शब्द पढ़ते hi वीर का शक यकीन में बदल चूका था.

करा का हाथ थामे वो पीछे hi था उसके. एकदम नज़दीक.

करा की कुछ समझ में नहीं आया. पर उसने वीर को अपना हाथ पकडे रहने दिया.

वो एक कदम चलती, रूकती और बगल में लगे शीशो में अपनी छवि देखती.

अलग अलग प्रकार के शीशे थे. कुछ में उनकी छवि लम्बी दिखाई देती तोह कुछ में छोटी. कुछ में वो मोठे प्रतीत होते तोह कुछ में पतले.

करा ने अपना मास्क निकाल वीर को थमा दिया जो उसने अपने जेब में रख लिया.

और काफी समय बाद वो मुस्कुरायी.

मिरर पर हौले से हाथ फेरर वो उसमे अपनी छवि को देख रही थी.

करा (स्माइल्स) : वे लुक थीं इन थिस ओने.

पर बेचारा वीर इस वक़्त मिरर गैलरी में लीस्ट इंटरेस्टेड था. उसका पूरा का पूरा ध्यान आस पास के वातावरण में था. उसकी नज़रे बाज की तरह जैसे कोई हरकत पकड़ने को ढूंढ रही थी.

और तभी...

अचानक से hi हर्र जगह धुआँ धुआँ सा होने लगा.

और वीर की पकड़ करा की कलाई पर और मज़बूत हो गयी.

उसने करा को और भी अपने समीप खींच लिया.

*Ssssssssss*

की आवाज़ से वह धुआँ hi धुआँ भरता जा रहा था.

'चेक!'

[Smoke.

Bio : Just the normal smoke, emitting from smoke machine.]

'It's नॉट पोइसोनोस.'

स्मोक तोह पोइसोनोस नहीं थी. पर जैसे वीर को किसी और बात की टेंशन लेने की ज़रुरत थी.

क्युकी तभी उस स्मोक में hi नीचे ज़मीन के साइड कुछ हरकत होती हुई नज़र आयी. मानो जैसे कई सारे परर चलते हुए आ रहे थे.

और ये देखते hi उसके शरीर के बाल खड़े हो गए.

करा को उसने फौरन hi अपने पीछे किया और उसके सामने उसकी शील्ड बन्न के खड़ा हो गया.

[Be prepared! Kuch gadbad hai. I think they are people.]

'लेट थम के...!'

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!

Don't फॉरगेट तो लिखे एंड कमेंट योर थॉट्स.


एंड सॉरी फॉर थे वेट. थोड़ा बाहर आया हुआ हु.
 
अपडेट : 62 ~ मिरर गैलरी (2)

अब तक...

क्युकी तभी उससे स्मोक में hi नीचे ज़मीन के साइड कुछ हरकत होती हुई नज़र आयी. मानो जैसे कई सारे परर चलते हुए आ रहे थे.

और ये देखते hi उसके शरीर के बाल खड़े हो गए.

करा को उसने फौरन hi अपने पीछे किया और उसके सामने उसकी शील्ड बन्न के खड़ा हो गया.

[Be prepared! Kuch gadbad hai. I think they are people.]

'लेट थम के...!'


अब आगे...

वीर करा को अपने पीछे किये उसकी हिफाज़त करने के लिए खड़ा हुआ था.

और, धुआँ था जो हटने का नाम hi नहीं ले रहा था.

करा कहना तोह हज़ार शब्द चाहती थी पर वीर की मज़बूत पकड़ अपनी कलाई पर महसूस कर और ये देख की वो कितना सीरियस था वो चुप रह गयी.

वीर इधर खामोश ज़रूर था पर उसका दिमाग निरंतर चले जा रहा था. करीब आते हुए पेर्रो को देख उसने फौरन hi उन्हें चेक किया.

'चेक!'

[Hired goons.


बायो : गूंस हिरद फ्रॉम लोकल एरिया. थे अरे हेरे फॉर करा.]

और बस, ये पढ़ अब उसे 100% विश्वास हो गया था की ये सब कुछ करा के लिए hi रचाया गया था.

[Kaera ko thoda sa peeche karo. Don't let her get involved in the fight.]

'येह!'

और, पारी की बात मान, वीर ने करा को थोड़ा अपने पीछे की ऑर्डर कर दिया. उसकी कलाई चोरर के वो और आगे आया.

बेशक, जैसे hi वो आगे बढ़ा सामने से आ रहे लोग और तेज़ी से उसकी ऑर्डर आगे बढे और...

[Here they come!]

सामने से सबसे पहले एक आदमी भागते हुए उस धुए में से आया और आते hi उसने एक तेज़्ज़ तर्रार घुसा सीधा वीर के मुँह पे मारने की कोशिश की
.

पर, वीर पहले की तरह नहीं था. एक पल में hi उसकी आँखें फेल गयी जैसे मानो वो फाइटिंग मोड में आ गया हो और उसने तुरंत hi अपना सर्र साइड कर लिया.

*वहूउस्सश्ह्ह*

उसके कान के बगल से वो घुसा निकला तोह वीर को उसकी हवा महसूस हुई. और वो ये बता सकता था की आदमी ने अपना हाथ कितनी जोरर से चलाया था.

पर, वीर आखिर वीर था. सँभालने का कोई समय नहीं देने वाला था वो अपनी एनएमईएस को.

अगले hi पल उसने अपने राइट हैंड से उस आदमी का वही हाथ थामा और अपने दूसरे हाथ की फिस्ट से सीधा उस आदमी के गाल पर पंच किया.

*पुव्ववववव*

"ुघ्हहह!!!" वो आदमी वीर के हाथो पंच खाते hi पीछे बगल में जा गिरा. वीर के रेफ्लेक्सेस फ़ास्ट थे. आदमी को समझ में hi नहीं आया की कब वीर ने उसका हाथ थाम उसे मार भी दिया.

उसके गिरते hi बाकी आदमी वीर के करीब आये. उनमे से दूसरे ने सबसे पहले दो बार अपने घुसो से वार किया.

*वहुवूसस्स्सह्ह्ह्ह*

*डॉज*

*वहूउस्सष्ठ्हह*

*डॉज*

हमले तोह तेज़
थे, पर वीर से तेज़ नहीं. दोनों hi घुसो को वीर ने लेफ्ट और राइट लेअन कर के उन्हें आसानी से डॉज कर लिया था. जब उस आदमी ने अपना तीसरा वार करना चाहा तोह...

"रॉंग चॉइस बडी!"

वीर ने उसे इस बार कोई मौका नहीं दिया. अचानक hi वो तेज़ी से उसके एकदम करीब आया और...

*पूंऊऊववववव*

एक कमाल की स्पीनहूक किक.

जो सीधा जाके उस दूसरे आदमी के जबड़े पर पड़ी और उसके पूरे शरीर को हवा में उछाल के किसी लट्टू की तरह घुमाते हुए पीछे फेक दी.

"दमन!!! ः~"

[That was a nice kick indeed.]

"बेसिक मार्टिकल आर्ट्स स्किल वाक़ई कमाल की है. कितना कुछ है इसमें."

[Yes! But trust me, ab samay aa gaya hai ki tum intermediate level waali martial arts skill purchase karlo. Kyuki, I think tumne basic waali kaafi hadd tak master karli hai.]

'येह!!! पॉइंट्स मिलने के बाद.'

[200 points hai tumhaare paas.]

'थे अरे फॉर क्वेस्ट.'

[Y-You!!! Okay! Enough talking! Teesra banda aa raha hai. Careful! Haath me weapon hai uske shayad.]

'येह!'

दो बन्दों को गिराने के बाद वीर पारी की बात सुन्न तीसरे पर फोकस्ड हो गया. और, पारी सही थी.

उस तीसरे बन्दे के हाथ में हथियार तोह नहीं पर हाँ, उसकी मुट्ठी पर खतरनाक कनखलेस ज़रूर थे. वो नुकीले कनखलेस पहने वीर को मारने आया.

यहाँ पर वीर ने समझदारी दिखते हुए उसके कुछ डेडली वार डॉज किये. क्युकी, एक भी बार अगर वो नुकीले कनखलेस उसके कांटेक्ट में आते तोह नतीजा फिर सामने होता.

चोटिल होना और खून का बहना. सा
वधानी बरतना बेहतर था यहाँ पर.

मगर, वीर डॉज कर नहीं पा रहा था क्युकी चौथा बाँदा भी उस पे उसी वक़्त टूट पड़ा.

ज़ाहिर था की वो यहाँ 1 वस 1 नहीं करने आये थे. जब इतनी तादाद में आये थे तोह साफ़ था की वो धावा बोलने hi आये थे वीर पे.

वीर जैसे तैसे डॉज कर रहा था और उनके अटैक्स को डेफ्लेक्ट कर रहा था. करा को उसने एकदम दरवाज़े के पास खड़ा कर दिया था जहा से वो दाखिल हुए थे. पर, palat-vaar करने का उसे सही मौका और जगह नहीं मिल रही थी.

[Use your surroundings.]

'यू मैं...!?'

[Yes! Mirrors! Use them!]

'ये मत कहना की...'

[Of course~ Slam them into it.]

'वेट! ऐसे में...'

[What? Nuksaan hoyega? Don't you know ki ye sab kuch owner nahi karwa raha hai? Yaha ye illegal use ke liye khola gaya hai. Ab isme kya mirror todne ke baare me soch rahe ho tum? Just fucking slam them. Destroy it!]

'ऑलराइट!!!'

पारी ने जैसे वीर की एक मुश्किल हल कर दी. आस पास लगे शीशो को तोड़ने में वीर थोड़ा संकोच दिखा रहा था. क्युकी, वो अभी पूरे नियंत्रण में फाइट कर रहा था. उसे अपने आस पास की सभी चीज़ों का ध्यान था. इसलिए, उसे थोड़ा सा संकोच हो रहा था.

लेकिन, पारी ने उसकी ये परेशानी भी दूर कर दी. जब ये सारा सामान ओनर की परमिशन के बिना उसे हो रहा था तोह क्यों नहीं?

और, मुस्कुराते हुए इस बार वीर ने उस कनखले वाले बन्दे के अटैक को जब डॉज किया तोह वो फिर रुका नहीं. उसने डॉज करते hi अपनी फिस्ट उसके पेट पर मारनी चाहि लेकिन...

*डॉज*

'हम्म?'

वो बाँदा वीर के घुसे को अपने दोनों हाथो से रोक पीछे हो गया.

[He dodged it.]

नीचे पड़े उन् दो बन्दों से अलग था शायद ये आदमी जो कनखलेस पहने हुए था. फाइटिंग में ये उनसे बेहतर था. वर्ण वीर की फिस्ट यु नहीं रोक पाटा.

'ी सी!'

सोचते हुए वीर नेक्स्ट अटैक के लिए खुद को प्रेपर कर रहा था जब चौथे बन्दे ने अचानक hi उसपे एक लकड़ी से वार किया.

*वऊवस्सशहठ*

*डॉज*

'व्हाट थे...!?'

डक करते हुए वीर उस हमले से बचा. धुए में से अचानक से वो लकड़ी उसके मुँह पर आयी थी सीधे. अगर, उसके रेफ्लेक्सेस तेज़ न होते तोह आज पक्के से उसका थोबड़ा गया था.

और, वो चौथा बाँदा मानो जैसे पागल हो गया था.

"हाआआआ~" गुस्से में चिल्लाते हुए वो वीर की तरफ दौड़ कही भी उस लकड़ी को चलाये जा रहा था.

*व्होऊशहठ*

*स्वोुस्सस्शह्ह्ह*

कुछ ऐसी आवाज़े आ रही थी उसके हर्र वार से. और, हवा में मौजूद धुआँ, उसके हर्र अटैक पर चिर जाता और उसकी छवि वीर को दिखाई दे जाती.

वीर मल्टीप्ल बैक हैंड स्प्रिंग मारते हुए पीछे की ऑर्डर गया और वो आदमी उसकी तरफ भागने लगा.

[Flick his toe.]

पारी की आवाज़ कान में पड़ते hi वीर ने उसी वक़्त जिस वक़्त वो बैक हैंड स्प्रिंग मार रहा था तभी अपने दोनों पेर्रो की बजाये इस बार एक परर hi ज़मीन पर गिराया और झुकते हुए दूसरे परर से उस सामने आते हुए आदमी के परर को फ्लिक कर दिया.


नतीजा सामने था. परर पर वीर की लात पड़ते hi वो आदमी अपना संतुलन खो बैठा और धड़ाम से नीचे गिरा. वो उठ पाटा की तभी वीर उसपे टूट पड़ा.

उसके हाथो को रेस्ट्रिक्ट करके वीर ने दो ज़ोरदार घुसे उसके गाल पर जेड. वीर उसे और धोता पर जो कनखलेस वाला बाँदा था वो अपने साथी को पीटते देख वीर की तरफ भागते हुए आया.

'थिस गाए... टच!'

[Isse jaldi thikaane lagao. He's a pain in the ass.]

'येह!!'

[Mirrors!]

'हम्म~ समझ गया!'

पारी की हिंट मिलते hi वीर लपक पड़ा उस बन्दे पर.

इस आदमी से भिड़ना थोड़ा थकन भरा था क्युकी वो भी डॉज करना जानता था मगर, फिर भी वीर से बेहतर नहीं.

जब आखिर में वो वीर की पकड़ में आया तोह उसी वक़्त उसका खेल ख़तम हो चूका था.

वीर के होंठो पर मुस्कान थी. क्युकी-

"ओने इंच पंच!"

*Pooooooooooowwwwww*

"ाअररघहहह!!!!!!"

और, वो कनखलेस पहना हुआ आदमी एक स्ट्रांग फाॅर्स के साथ उछाल के बायीं ऑर्डर पर लगे शीशो में से एक शीशे में जाके भीड़ गया.

*क्राआष्ठहहहहह*

हज़ारो टुकड़ो में वो शीशा टूटा और उस आदमी के साथ hi वो कांच के टुकड़े बिखरते हुए नीचे इधर उधर फेल गए.

करा एकदम स्तब्ध नज़रो से सब होता हुआ देख रही थी. वो थोड़ा सेहमी हुई भी थी क्युकी ये पहली बार था जब वो ऐसी लड़ाई आँखों के सामने घटित होते देख रही थी.

बेशक, उसने पहले भी कई दफा त्रिनेड लोगो को एक दूसरे के साथ लड़ते हुए देखा था लेकिन, ये कुछ अलग था. यहाँ लड़ाई जान लेने के लिए हो रही थी. और, हर वार एकदम असली और चोट पहुचने के इरादे से किया जा रहा था.

इस से पहले अगर करा ने कोई लाइव फाइट देखि थी तोह वह तब hi थी जब रघु उसे और वीर को बचाने आया था उस दिन.

आखिर कार, सारे आदमी नीचे थे. केवल 4 hi लोग से हाथ भिड़ा था अभी वीर का.

[I think there might be more.]

'हम्म!'

पारी का यहाँ ये सोचना गलत नहीं था. ऐसा बिलकुल मुमकिन था की और बन्दे भी हो. केवल 4 लोगो को तोह भेजेगा नहीं कोई करा जैसी लड़की को किडनैप करने के लिए.

वीर, पारी की बात पर ध्यान देते हुए सोच hi रहा था जब अचानक hi पारी जोरर से उसके मैं में चिल्लाई.

[Get dooooowwwnnnn!!!!!!]

*डक्स*

अपने आप hi वीर का शरीर झुक गया. मानो जैसे पारी उसकी कोई रिमोट कंट्रोलर थी. पारी के हर्र बोल पर वीर के रेफ्लेक्सेस इतने तेज़ थे की पारी कोई भी निर्देश जैसे hi देती तोह अगले hi गुज़रते पल वीर का शरीर उसे फॉलो कर देता.

*वहुवूसस्शह्ह्ह*

उसके झुकते hi कोई चीज़ तेज़्ज़ रफ़्तार से एकदम से गुज़री और पीछे जाके दिवार में खुस गयी.

वीर ने जैसे hi पलट के देखा तोह पल भर के लिए उसके रौंगटे खड़े हो गए.

पीछे एक बड़ी सी छुरी थी जो दीवार में खुसी हुई थी और वो भी करा के सर्र से बस कुछ इंच दूर.

'सहित!!!'

[Marrte marrte bachi hai wo. Pay attention!]

करा एकदम सेहमी हुई वही कड़ी थी. उसने अपनी जगह एक सेंटीमीटर भी नहीं बदली थी. मानो जैसे भय से वही जम्म गयी थी वह.

जिसने भी ये चाक़ू फेकि थी वो ज़ाहिर तौर पे कोई होनहार था.

क्युकी, अगर वीर झुका नहीं होता पारी के कहने पर तोह वो चाक़ू सीधा उसके माथे में जा कर घुसती.

और, उसका वही खात्मा हो जाता.

[Be careful!]

'हम्म!'

अब माहौल कुछ तंग सा हो गया था. वीर की बॉहे अब चिंता के मारे सिकुड़ रही थी. सामने धुए के पीछे जो कोई भी था वह नीचे पड़े हर आदमी से कही ज़्यादा अनुभवी था.

ये बात उसने अपनी चाक़ू फेक के hi साबित कर दी थी.

[Remember! Mirrors are your friends!]

'येह! गोत आईटी!'

अपनी शर्ट को वीर ने ek-ek बार और फोल्ड किया और आस्तीन को और ऊपर चढ़ाया.

उसके बाद उसने एक मार्टिकल आर्ट स्टान्स लिया. जैसे कहना चाह रहा हो की 'आओ, में तैयार हु.'

सामने धुए में खड़ा व्यक्ति भी शायद वीर की बात समझ चूका था.

और, बिना कोई समय गवाए वो तेज़ी से वीर की तरफ आया.

[He's fast!!!]

'हाँ!'

*वहूऊओऊस्सशहठ*

एक घुसा सीधा वीर की पसली की तरफ...

*डॉज*

लेकिन शानदार बदन को मरोड़ते हुए वीर उस हमले से बचा.

*वहूऊऊष्ष्हठ*

इस बार एक लात आयी उसकी छाती पर जो बहुत तेज़ थी.

'सहित!'

अपने दोनों हाथो को वीर ने 'क्ष' आकार बनाते हुए वो लात अपने हाथो पर ली और उसके फाॅर्स के चलते पीछे जा गिरा.

[He's coming!!!]

वीर के गिरते hi वो आदमी सीधा हवा में उड़ते हुए एक और किक मारते हुए आया.

*क्रआआष्ठहहह*

लेकिन, सही समय पर वीर ने नीचे ज़मीन पर रोल करते हुए खुद को बचाया और नतीजा?

वो आदमी वह लगे उन् कई सारे शीशो में से एक शीशे में घुस गया.

[G-Good! Attack him!]

यही सही मौका था. जहा वो आदमी अभी संभल कर उन् शीशो के टुकड़ो के बीच उठ रहा था तोह वीर आगे बढ़ा और उस आदमी की ऑर्डर आया.

पर, वीर का ये प्लान की वो उस आदमी को यु hi पकड़ के गिरा देगा अगले पल hi फ़ैल हो गया.

क्युकी, गिरने के तुरंत बाद hi वो अपनी चोट को चिंता किये बजर्र hi उठ के खड़ा हो चूका था.

वीर को अपने क़दम वही थामने पड़े.

[He's strong!]

पारी की बात से सहमत होते हुए वीर ने उससे चेक करना hi ठीक समझा.

'चेक!'

*डिंग*

[Name : Dexter


आगे : 34

बायो : डेक्सटर, एक त्रिनेड ास्सास्सिन. पैसो के लिए hi ये अपने साथियो के साथ ास्सास्सिनेशन मिशंस पर जाता है. यही उसका धंदा है. मिली कॉम्बैट में तेज़ है. अगिलिटी में अव्वल. नाइफ की फाइट्स में उसके दोस्त उसे इसका मास्टर बुलाते है.


फवौराबिलिटी : -60

रिलेशनशिप : एनएमईएस.]

'सहित!!!'

सब कुछ सामने था. सामने खड़े आदमी का नाम 'डेक्सटर' था और वो कोई लोकल आदमी नहीं बल्कि एक स्किल्ड और त्रिनेड ास्सास्सिन था. उसका स्टेटस hi सब कुछ उसकी खूबियों के बारे में बया कर रहा था.

ये तोह पक्के से मुसीबत से भरपूर होने वाला था वीर के लिए.

[Favourability! It's minus 60.]

'येह! एक ास्सास्सिन होने के नाते वो मुझे यहाँ मारने आया है. तोह, डेफिनिटेली इतनी तोह रहेगी hi.'

[Hmm! See! Wo knife me master hai according to his status. Aur, humne dekh hi liya ki usne kis tareeqe se wo knife tumhaari orr feki thi.]

'येह!'

[My point is... Melee combat me uske haath me knife mat aane do.]

'व्हाट िफ़ हे है ानोथेर ओने?'

[He has. Ek pocket knife zaroor hogi uske paas jese tumhare paas hai. Assassin hai woh. Now listen to me.]

'जो भी बोलना है जल्दी बोलो. वो आने hi वाला है.'

[Right! Dekho! Ek assassin ki kamzori kya hoti hai?]

'व्हाट?'

[Wo tez hote hai, nimble hote hai, raftar se bharpoor ekdum. Unki haath ki safayi ka koi muqabla nahi hota lekin...]

'लेकिन?'

[Lekin, wo utne taqatvar nahi hote.]

'यू मैं...!?'

[Yes! Tumhe bas do chaar tagde vaar karne hai uspe. Wo tez isliye rehte hai kyuki wo bodybuilder nahi hote. Jis kaaran se unka wazan kam hota hai ek bodybuilder ke muqable. Tabhi, toh assassin kehlate hai. Bas do se chaar strong hits weak region me maaro aur khel khatam. Trust me!]

'ऑलराइट! I'll तरय!'

जिस वक़्त वीर इधर अपने मैं में पारी से बात कर रहा था तब वो डेक्सटर उठ के अपने कपड़ो से शीशे के टुकड़ो झटकर रहा था. जैसे उसे विश्वास था की वो यहाँ से जीत के hi लौटेगा, इतने आराम से खड़ा हुआ था.

और, खुद के शरीर से कांच को हटाने के बाद hi वो एक बार फिर वीर की तरफ लपका.

*वहूउसस्शह्ह्ह*

*डॉज*


इस बार दोनों hi वीर और डेक्सटर पूरी तरह से भीड़ चुके थे. हाथो से हाथ टकरा रहे थे, आपस में मुट्ठिया कस्सी हुई थी, कोहनी से तोह कही पेर्रो से वार किये जा रहे थे.

और, हर्र गुज़रते पल दोनों hi कुछ न कुछ डैमेज अपने शरीर पर ले रहे थे.

पर, इसी बीच वो हुआ जिस से वीर हैरान भी था और चिंतित भी.

*स्क्राहाआटटटटछहहहह*

'ाररह्ह्ह्ह!!! शीट्ट्ट्ट!!!'

वो अपने सीने पर हाथ लगाए झुका. और...

*ड्रिप*

*ड्रिप*

*ड्रिप*

खून की लाल लाल बूँदें उसके सीने से गिर रही थी जहा कुछ देरर पहले hi डेक्सटर ने अपनी चुर्री से वार किया था.

'व्हेन दीद हे..!?'

[Uska strap...]

'हँ???'

वीर को समझ में नहीं आया था की हाथापाई के वक़्त आखिर अचानक से डेक्सटर के हाथो में छुरी कैसे आ गयी?

[Uski t-shirt par strap bandha hua hai.]

'सहित! इसका मतलब...'

[Yes! Ladte waqt hi usne apne seene par bandhe strap ko khola aur dhuye ka fayda utha ke tumhari nazar se bach ke wo knife haath me le kar tumhare chest par vaar kiya.]

'तहत बास्टर्ड....!'

[Maine kaha tha na. Inki haath ki safayi boht hi skilled hoti hai. Upar se ye dhua. I think ki ye dhua uske advantage ke liye hi kiya gaya tha. Aur... Shit!!! Dodge that...]

पारी बोलते बोलते अचानक hi घबरा गयी क्युकी डेक्सटर जो शांत खड़ा था वो एकदम से उस धुए में से दौड़ता हुआ उसकी तरफ आने लगा.

परन्तु, पारी की वार्निंग थोड़ी लेट थी.

'हँ?'

जब तक वीर ने सामने देखा तब तक डेक्सटर की लात उसकी छथि पर लग चुकी थी और...

*थुड़*

"उग्गघहहहह!!!"

कराहते हुए वीर हवा में पीछे की ऑर्डर गिरा.

और, जाके...

*थुड़*

*थुड़*

करा के बगल से एंट्रेंस वाली दीवार पर जा भिड़ा.

"वीईईएरररररर!!!!"

करा बेचारी घबराते हुए चींखी और उसने फौरन hi अपने घुटनो के बल बैठते हुए वीर को थामा.

पर, अगले पल hi वो जैसे झेप सी गयी. उसका शरीर कापने लगा.

वीर के सीने पर उस सफ़ेद शर्ट पर कुछ गीला गीला फैलता जा रहा था.

और, इस बात का पता लगते hi की वो क्या था, करा का बदन वही जाम सा हो गया. मानो जैसे सांप सूंघ गया हो उसे.

करा (कापते हुए) : V-Ve-Veer!???

वीर बस लम्बी लम्बी सांसें ले रहा था, कुछ कह नहीं रहा था और उसकी ख़ामोशी करा को और भी बेचैन कर रही थी.

वो वीर को जोरर से झंजोरी और उसे पुकारी तोह इस बार वीर ने जवाब दिया.

वीर : Don't.... Don't वोर्री! I'm फाइन!

करा (रट हुए) : न्यूऊऊओ!! यू अरे नॉट!!!!

वीर : लुक ात में!!! मैंने कहा न... I'm फाइन!

करा : Y-You अरे ब्लीडिंग!

करा को जैसे खून देख के कुछ हो गया था. शी वास् गेटिंग प्टसड.

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर. एक ऐसी हेल्थ कंडीशन जो तब ट्रिगर होती है जब आपने किसी खौफनाक दृश्य को देखा हो.

करा जब छोटी थी तब hi उसने उस दिन अपने घर के माली की खून से सनी हुई लाश देखि थी. तब से hi उसके अंदर खून को लेकर उस दर्दनाक घटना का एक्सपीरियंस, उसके मैं में बसा हुआ था.

आज वीर को भी उसी तरह छथि पर खून देख, उसके अंदर का वही प्टसड ट्रिगर हो गया. यही कारण था जो इतनी मज़बूत दिल लड़की आज यु इस तरह काँप रही थी.

वीर : ी क्नोव I'm ब्लीडिंग! Don't वोर्री! मुझे कुछ नहीं होगा.

घाव लम्बा तोह था पर किस्मत थी वीर की जो वह गहरा नहीं था. वर्ण यहाँ दिक्कत आ सकती थी उसके लिए.

वो उठा और उसने दीवार पर खुसी वही चाक़ू निकाली जो कुछ वक़्त पहले डेक्सटर ने उसकी ऑर्डर फेकि थी.

उसे निकालते हुए वीर ने उसे अपनी शर्ट के कंधो के हिस्से पर चलाई और अपनी पूरी स्लीव को पहाड़ के उसे लम्बा कर उसने वो आस्तीन अपने सीने पर बाँध ली.

घाव गहरा नहीं था पर लम्बा ज़रूर था. खून जितना जल्दी रुक सके उतना बेहतर था. और, अभी उसके पास यही उपाय था.

वीर ने तुरंत hi जेब में हाथ दाल फ़ोन निकाल रघु को कॉल लगाया.

*रिंग* *रिंग*

पर...

डेक्सटर वह खड़े खड़े उसे ये सब कुछ करने कहा देने वाला था.

एक बार फिर उसके क़दम वीर और करा के कानो में पड़े तोह करा फिरसे डर उठी.

लेकिन, वीर की नज़र इस बार एकदम केंद्रित थी. वो तैयार था.

'के!'

वो झुके हुए था इस बार.

'यदि मुझे धुएं में देखने में परेशानी हो रही है तोह डेफिनिटेली इसे भी हो रही होगी.'

और, वाक़ई वही हुआ. डेक्सटर ने अंदाज़े से वीर की जगह पर चाक़ू से वार किया...

*स्वूऊऊऊष्ष्हठ*

धुआँ हटा पर...

वीर वह नहीं था. शायद पहली बार डेक्सटर की आँखें डर के मारे फेल गयी.

क्युकी, वीर...


वह नहीं, बल्कि उसी जगह पर नीचे झुका हुआ था. वह मुस्कुराया.

और फिर...

*पूंऊऊवववववव*

एक कोहनी का वार सीधे डेक्सटर की पसली पर आया.

"ुघ्हहह!!!! गवाकककककहहहह!!!!"

उसके मुँह से थूक निकला और उसके बाद hi...

*पुऊववववववव*

कोहनी के बाद वीर की एक उलटी फिस्ट डेक्सटर की सीधा नाक पर आके लगी.

*क्रआआआस्स्शह्ह्हह्ह*

और, एक बार फिर वो इस बार दायी ऑर्डर लगे हुए शीशो में जाके घुस गया.

सारे शीशो के टुकड़े होते हुए वह गिर गए.

"H-Hello? हल्लूऊऊओ!!!"

इधर वीर ने अपने लिए समय निकाल लिया था. और, जैसे hi उसने फ़ोन कान में लगाया उधर से रघु की 'hello hello' की आवाज़ आ रही थी.

वीर (लम्बी सास लेते हुए) : जल्दी! अंदर आओ...


इतना बोल वीर ने फ़ोन काट दिया.

बाहर रघु ने जैसे hi ये सुना तोह रघु और जस्सी दोनों hi चिंता में आ गए.

वो भागते हुए अंदर जाने के लिए हुए पर जैसे hi एंट्री के पास पहुचे...

उनके सामने दो और त्रिनेड असैसिन्स खड़े हुए थे जो साइड से निकल कर आये थे. और, साथ hi साथ वो एंट्रेंस वाला बाँदा भी उनके hi साथ खड़ा हुआ था.

जस्सी : अच्छा हुआ सपोर्ट बुलवा लिए. इनसे निपटना पड़ेगा पहले हमे.

रघु : हम्म!

जस्सी (फ्रोंस) : बस तब तक वीर संभल ले अंदर...

रघु : मैंने कहा था तुझे गन रख लेनी चाहिए थी.

जस्सी : मैंने राखी थी इमरजेंसी के लिए. लेकिन, वो कार में है.

रघु : वाह! और, तेरे कहने पर में नहीं लाया आज. सही में यार... खर्र! इनसे पहले निपटाते है.

जस्सी : राइट! याद है न? No किलिंग!

रघु : हम्म!

इधर अंदर वीर ने रघु के बाद hi सुहाना को स्पीड डायल कर दिया था.

और, उधर उसका इशारा समझते hi सुहाना ने फौरन hi हेल्प भेज दी, साथ hi पुलिस और इन्वेस्टीगेशन का सारा मामला वही सँभालने वाली थी. पर, इस वक़्त वो भी वह अपने घर में गहरे चिंता में डूबी हुई थी.

'अगर तुमने स्लोगन को मार दिया न वीर थें ट्रस्ट में... में तुम्हे लैब में ले जाके तुम्हारे ऊपर 36 एक्सपेरिमेंट्स करने वाली हु. क्युकी, there's no वे यू कैन किल समवन लिखे हिम, विथाउट अन्य हेल्प. माय आईज विल बे ों यू!!!'

सुहाना के विचार से परे वीर इधर अपने फ़ोन को जेब में रख एक बार फिरसे रेडी था लड़ने के लिए.

दर्द तोह थोड़ा हो रहा था उसे सीने में पर जो दर्द वीर पहले लड़ाई में सेह चूका था ये चोट उसके मुक़ाबले कुछ भी नहीं थी.

करा तोह इतना घबरा गयी. वीर की हालत देख के की उसके मासूम से चेहरे पर पूरे आसुओं की बूँदें सजी हुई थी. जहर जहर कर के ासु बह रहे थे. आज पहली बार वीर ने उसे रट हुए देखा था. कहा वो स्ट्रांग विल्लेद पावरफुल करा और कहा ये करा जो रो रही थी और रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी.

[Bas ek aur hit! Aur wo gaya. You need to hit him one more time.]

'येह! इस बार में अग्ग्रेसिवे रहूँगा.'

करा (क्रिस) : V-Veer!! You're ब्लीडिंग!!

करा की पुकार पर इस बार वीर पलटा और उसके समीप आके उसने करा का माथा थामा और आगे बढ़ उसके माथे को चूम लिया.

अगर, कोई और लड़का ये इस वक़्त कर रहा होता तोह करा उसका क्या हश्र करती ये तोह कोई भी नहीं बता सकता था. पर, इस समय वीर की हरकत उसे ज़रा भी बुरी नहीं लगी. उल्टा, वो और जोरर जोरर से रोने लगी.

वीर : उनमे से एक को भी आपके पास आने नहीं दूंगा. ट्रस्ट में! I'll बे योर शील्ड. एंड, don't वोर्री, ये बस एक स्क्रैच है. नथिंग ेल्स!

इतना बोल वो फिरसे मुदा और डेक्सटर से भिड़ने के लिए पुनः तैयार था.

तभी...

*क्लिक*

एंट्रेंस का दरवाज़ा खुला और रघु अंदर आया.

"मिस्स्स्सस्स!!!!!"

करा : रघुउउउउउउ!!!!

उसने करा के हाथ को थामते हुए फौरन hi उसे ले जाने के लिए हुआ.

मगर अचानक...

धेरर सारे क़दमों की आवाज़ आने लगी.

और, एक बार फिर, वीर और उन् सब के सामने कई सारे लोग खड़े हुए थे. इस बार धुआँ थोड़ा काम था जिस कारण वीर उनकी तादाद देख सकता था. ता
करीबन 8 से 10 लोग.

रघु : सपोर्ट टीम से कुछ आदमी आ गए है जो बाहर जस्सी की हेल्प कर रहे है. वीर! जल्दी! वक़्त नहीं है. चलो निकले यहाँ से.

वीर : मिस करा को लेके जाओ.

करा : हँ!??

रघु : क्या??

वीर : ट्रस्ट में! जो नाउ! इन्हे में देख लूंगा.

करा (क्रिस) : Noooooooooooooo~

रघु (चिल्लाते हुए) : ोये दिमाग तोह ठीक है न? हीरो मत बनो वीर!!!

वीर : ी टोल्ड यू न... जो नाउ! वो आ रहे है. ी हैवे सम ुनफिनिशद बिज़नेस.

अपने दांत मीस्ते हुए रघु न चाहते हुए भी करा को वह से फोरस्फुल्ली ले जाने लगा.

करा (क्रिस) : W-Whaaat??? रघुउउउउउ!!! लीव मेई! वो वह अकेला है. वीएएएएएरररर!!! न्यूऊऊऊ~

करा जाते जाते वीर के चेहरे को hi देख रही थी. उसे अंदर से आज पहली बार इतनी तड़प और पीड़ा महसूस हो रही थी जिसे वो बता भी नहीं सकती थी.

वो चींखते जा रही थी पर कोई फायदा नहीं. रघु की पकड़ मज़बूत थी. जाते जाते करा ने वीर के चेहरे पर बस एक मुस्कान देखि.

जिसे देख वो और बेचैन हो उठी. ऐसा लगा जैसे मानो वो वीर की आखिरी मुस्कान देख रही थी.

और, उसके मैं में बस यही सवाल गूंज गए.

'व्हाई? व्हाई दीद यू सेव में??? तुमने अपनी जान जोखिम में दाल के मुझे क्यों बचाया? उस दिन भी ऐसा hi किया था तुमने. विययय???'

लेकिन, उसे इसका जवाब न मिला.

"में मदद भिजवाता हु!!!"


इतना कहते हुए रघु करा को लेकर बाहर निकल गया. और, दरवाज़ा एक बार फिर बंद हो गया.

वीर बस मुस्कुरा रहा था क्युकी...

*डिंग*

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उसे मजबूरन यहाँ रुकना पड़ा. क
ारन था...

*डिंग*

[Mission : Confront the gang!


रिवार्ड्स : ???? पॉइंट्स.]

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


Don't फॉरगेट तो लिखे एंड शेयर योर थॉट्स! ✨
 
सबसे पहले तोह थैंक्स ा लोट गाइस इतना वेट करने के लिए. नाउ तहत ी ऍम बैक तोह अब उपदटेस फिरसे अपनी स्पीड और तिमिंग्स से फिरसे शुरू हो जाएंगे.

यहाँ पे एक समरी दे रहा हु पिछले कुछ उपदटेस की ताकि रीडर्स को एक आईडिया लग जाए और उन्हें सब याद रहे की क्या कुछ हुआ था पिछले उपदटेस में.

अपडेट : 58 ~ शेफ ों व्हील्स.

इस अपडेट में आपने पढ़ा की वीर अपना नई रेड कोलोउरेड फ़ूड ट्रक खरीदता है और उसका नाम कारन करके उससे शेफ ों व्हील्स का नाम देता है. यहाँ हमने ये भी देखा की कैसे वीर ने सोनाली को अपने फ़ूड बिज़नेस में शामिल किया. उसके बाद सभी का आपस में मिलना और फ़ूड ट्रक का उद्धगाथान होना. इसी बीच मिरर गैलरी का अनाउंसमेंट भी हुआ था एक ट्रक द्वारा. रागिनी के हाथो से इनॉगरेशन, जूही, काव्य की क्यूटनेस, श्रेया का इंदिरेक्ट्ली फ़्लर्ट करना, निधि ma'am के साथ वीर की वही कॉम्प्लिकेटेड वाली गपशप और अंत में आरोही के द्वारा प्रांजल की साज़िश का खुलासा होना.

अपडेट : 59 ~ म्यूच्यूअल एक्सचैंजेस

इस अपडेट में आपने देखा था की वीर कैसे पारी को उसके सीक्रेट के बारे में डराता है. साथ hi उससे रागिनी के हस्बैंड विवेक की चैट्स भी देखने को मिलती जिसके चलते वो रागिनी से बात करता है और उनके बीच कुछ हलके इंटिमेट सीन्स भी देखने को मिलते है जिनमे दिखाया गया की रागिनी अब वीर पे कितना ट्रस्ट करने लगी है. उसके बाद शाम के वक़्त वीर सोनाली के साथ अपने बिज़नेस में बिजी रहता है जब करा एंट्री करती है. सोनाली उससे देख घबरा जाती है तोह वही करा वीर को लेके रघु के किसी फ्रेंड के ऑफिस जाती है उससे बिज़नेस के लिए एक स्टार्टिंग एडवाइस देने. इसी बीच करा वीर को डेमोंस्ट्रेटे करके बताती है और इंदिरेक्ट्ली वीर को अपनी सिग्नेचर डिशेस बनाने का उपाय मिल जाता है पर इसके बदले में करा उस से लाइफ के बारे में लेसंस की डिमांड रखती है. अपडेट के एन्ड में वीर पारी को ये बताता है की पारी की पर्सनालिटी स्विच का रीज़न उसका स्प्लिट पर्सनालिटी होना है, जिससे सुन्न पारी बस मौन रह जाती है.

अपडेट : 60 ~ प्लेअसुरे एंड पार्टीशन

यहाँ पर वीर को जो गिफ्ट सुमन द्वारा मिलने वाला रहता है वो कोई और नहीं बल्कि सुमन की hi बहु आभा रहती है जो वीर के संग अपनी रात रंगीन करती है वो भी सुमन के संग. साथ hi वीर के अपने घर में मनोरथ सभी पोते पोतियो की परीक्षा लेते हुए अपनी जाय्ज़ात के बटवारे के बारे में डीडे करते है. और यहाँ प्रांजल बड़ी hi चालाकी से अपनी जगह मनोरथ के दिल में बना लेता है. एन्ड में वीर अपने पॉइंट्स इन्वेस्ट कर क्वेस्ट हंट से कार्ड खरीदता है पर उससे लीजेंडरी कार्ड की जगह एक ट्रैश कार्ड प्राप्त होता है.

अपडेट : 61 ~ मिरर गैलरी (1)

ये अपडेट में हमने पढ़ा की वो दिन आ चूका था जब मिरर गैलरी की शुरुआत करि जाने वाली थी. वीर करा को लेके सबसे पहले अपनी hi सौतेली माँ की होटल में ले जाता है जहा दोनों hi श्वेता और भूमिका उन्हें नज़र आती है. इस बार भूमिका वीर को रेकग्निसे करने से पीछे नहीं हटती. साथ hi हमने देखा की कैसे करा और वीर के बीच फिरसे लाइफ के लेसंस चल रहे थे और उसके बाद वो कैसे मिरर गैलरी के वेन्यू पर पहुचे. जब वीर वह पोहचता है है उससे पता लगता है की ये सब कुछ रचाया गया था. न केवल वो ट्रक अनाउंसमेंट फेक था बल्कि मिरर गैलरी का ये सेटअप ओनर की परमिशन के बजर्र hi हो रहा था. अंत में वही हुआ, वीर और करा जब अंदर गए तोह धुआँ छ गया और उनके सामने कई आदमी मौजूद थे.

अपडेट : 62 ~ मिरर गैलरी (2)

लास्ट अपडेट में हमने देखा की कैसे वीर उन् गुंडों से लड़ता है. उसकी स्किल्स काम आ रही थी. पर डेक्सटर यानी की उस ास्सास्सिन के आने के बाद वीर को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. वो खुद इस बीच चोटिल हो गया जिससे देख करा सेहम के रह गयी. प्टसड का शिकार हो गयी वो. वीर ने करा को मिरर गैलरी तक लाने का मिशन तोह पूरा कर लिया था पर उससे अगला मिशन भी उसी दौरान मिल चूका था. और वो था उन् गैंग से निपटना. अंत में वीर रघु को कॉल कर हेल्प के लिए बुलाता है साथ hi वो सुहाना को भी स्पीड डायल कर देता है. रघु करा को ज़बरदस्ती बाहर ले जाता है और वीर यहाँ अकेला उन् सभी गैंग वालो से भिड़ने के लिए रेडी हो जाता है.


अब आगे के उपदटेस आज रात से... 🙏
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 63 ~ ताकें अवे


अब तक...

*डिंग*

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उसे मजबूरन यहाँ रुकना था. का
राण था...

*डिंग*

[Mission : Confront the gang!


रिवार्ड्स : ???? पॉइंट्स.]

अब आगे...

*बेदुम्प* *बेदुम्प*

कुछ ऐसी hi धड़कनो से आज करा का दिल बेहद बेचैन था. कुछ देरर पहले hi उसे रघु वह उस मिरर गैलरी से चुर्रा के ज़बरदस्ती अपने साथ कार में लेके आया था. वो अब उस मुश्किल, उस खतरे से बाहर थी.

लेकिन, फिर भी...

फिर भी उसका दिल ज़ोरो से धड़क रहा था. जब अपनी सुरक्षा निश्चित हो फिर काहे का घबराना? मगर, घबराहट तोह थी. मेहफ़ूज़ होने के बाद भी. और, वो घबराहट केवल एक शख्स के लिए थी उसके अंदर.

वीर!

वीर के खातिर आज वो बेहद hi चिंतित थी. और, ये उसके हाव भाव, उसके चेहरे पर साफ़ नज़र भी आ रहा था. इस से पहले आज तक करा कभी किसी के लिए इतना बेचैन नहीं हुई थी. शायद आखिरी बार तभी वो इस हालत से गुज़री थी जब उसे पता चला था की उसकी माँ इस दुनिया में नहीं थी.

मगर, तब वो छोटी थी. उतनी समझ नहीं थी. लेकिन, अब...

अब उसे हर्र चीज़ की समझ थी. फीलिंग्स उसके अंदर जैसे अपने आप जन्म ले रही थी.

वीर ने उसे दो बार बचाया था बिना अपनी जान की परवाह किये. और, उसे ये बात पल्ले नहीं पद रही थी. आज की इस दुनिया में, भला ऐसा व्यक्ति कौन होता है जो बिना किसी फायदे के आपकी मदद करे? और, ऊपर से अपनी जान भी डाव पे लगा दे?

शायद कोई नहीं!?

लेकिन, यहाँ तोह करा ने ऐसा शख्स देखा भी और उसने उसकी जान भी बचायी. ऐसा शख्स था - वीर. आखिर कोई इतना दयालु कैसे हो सकता था?

यही सवाल उसके मैं में चल रहे थे. और, इस वक़्त वो कार के अंदर अपनी उंगलियों से अपनी ड्रेस को कस के चिंतन के मारे भींचे हुए थी.

करा : R-Raghuuuu!!!

रघु : जी मिस!

करा : यू साइड... की तुम वीर के लिए मदद भिजवा रहे हो. Where's थे हेल्प??

रघु : वो रास्ते में hi है मिस. जल्द hi पहुँच जाएंगे.

करा (चिल्लाते हुए) : तेल्ल थम तो हुर्री!!!!!

रघु : J-Jii!

करा : He's ब्लीडिंग रघु... He's ब्लीडिंग... हे... *स्निफ्फ*

और बस, वो रो पड़ी.


इधर आगे बैठा रघु खुद इतना हैरान था आज करा को इस हालत में देख. इसके पहले उसने न जाने कब आखिरी बार अपनी मिस को ऐसे रट हुए देखा था.

एक ऐसी बोल्ड लड़की, एक लीडर, परफेक्शनिस्ट, ब्यूटी, रॉयल्टी, रिच और पावरफुल वुमन आज इस क़दर किसी एक मामूली से बन्दे के लिए रो रही थी.

कोई यकीन करेगा इस बात पे. शायद नहीं!?

पर, सच्चाई तोह यही थी.

रघु : मिस... A-Aap...!?

रघु के बुलाने पर करा कुछ नहीं बोली, उसने अपने ासु पोछे और फौरन hi किसी को फ़ोन लगाया.

करा : Hello!!! फादर!

किशोर : करा?

करा : फादर! ी नीड हेल्प! राइट नाउ.

किशोर : क्या हुआ?

करा : में आपको अभी नहीं बता सकती. प्लीज! जल्द से जल्द जितनी सिक्योरिटी आप भेज सकते हो भेजिए. क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स वेन्यू पर. प्लीज! अस सून अस पॉसिबल. यू मस्ट...

किशोर : क्या तुम किसी मुश्किल में हो?

करा : I-I वास्... बूत मुझे वीर ने बचाया. He's इन डेंजर नाउ फादर. प्लीज! सेंड थे हेल्प!

किशोर : रघु और जस्सी कहा है?

करा : R-Raghu मुझे ड्राइव कर के घर ले जा रहा है. जस्सी इस टेकिंग ा फाइट विथ थम.

किशोर : हम्म! तुम्हे कोई चोट तोह नहीं आयी?

करा : I'm... I'm फाइन! बूत वीर के लिए...

किशोर : कौन है ये वीर?

करा : वो... वो... फादर! अभी ये इम्पोर्टेन्ट नहीं है की वो कौन है. हे सेव्ड में ट्वाइस. और, उसकी जान अभी खतरे में है. अगर उसे कुछ हो गया तोह...

किशोर : हम्म?

करा : में अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगी. प्लीज! सेंड थे हेल्प.

किशोर अपनी बेटी की बात सुन्न कुछ देरर शांत रहा. उस
इ आश्चर्य हो रहा था की भला कैसे उसकी बेटी किसी अन्य के लिए इतना घबराई हुई थी.

ऐसा तोह पहले कभी नहीं हुआ था. किन्तु, वीर का नाम अब उसके दिमाग में चढ़ चूका था. और, ये भी की उसकी बेटी वीर से कुछ ज़्यादा hi अटैच्ड नज़र आ रही थी. कही दोनों के बीच कुछ चल तोह नहीं रहा था? भला उसकी बेटी कैसे एक लड़के के प्यार में पद सकती थी? ये बात किशोर जानता था की करा ने हज़ारो अमीर लड़के देखे थे पर उनमे से एक को भी आज तक उसने घास नहीं डाली थी.

तोह ये अचानक से किसी वीर के लिए उसकी तड़पन देख किशोर का दिमाग घूम गया.

किशोर : ठीक है! होल्ड पे रहो एक मिनट.

और, उसने करा का कॉल होल्ड पे रख, कही और फ़ोन लगाया.

किशोर : Hello? हम्म! टीम भेजना है. नहीं पूरी नहीं. जितनी तुम्हे सही लगे. हम्म! वेन्यू में मैसेज कर देता हु. हाँ, वीर नाम के एक लड़के को बचाना है. पर सुनो... वेन्यू जाना, जितना पीछे से लड़ाई ले सको ले लेना. पर... उसे
बचाना मत. क्यों? मुझसे सवाल मत करो. जितना कहा है उतना करो. जब खबर लग जाए की वो मर्डर चूका है तोह मेरे पास उदास मुँह लेके आना और कहना की तुम मिशन में ुणसुक्सेस्सफुल रहे. यही रुवासी आवाज़ मेरी बेटी के सामने भी निकालनी चाहिए. समझ गए? हम्म!

और कॉल कट हो गया. उसके बाद किशोर ने अपनी बेटी के कॉल को रिज्यूमे किया.

किशोर : मैंने बोल दिया है.

करा (इन रिलीफ) : Th-Thank यू! थैंक यू! फादर!!! थैंक यू सो मच!

किशोर : तुम्हारे लिए कुछ भी बीटा. जल्दी से घर आ जाओ अब.

करा : I'm... I'm ों माय वे!

*कॉल एंड्स*

करा ये खबर प्राप्त होते hi बेहद खुश थी और एक राहत की सांस ली थी उसने. उसके डैड की कहा तक पहुंच थी ये बात वो अच्छी तरह से जानती थी.

करा की खुद की एप्रोच सिक्योरिटी रिलेटेड मैटर्स में नहीं थी. केवल उसके डैड की थी, यही कारण था की आज उसे अपने डैड से मदद मांगनी पड़ी.

और, उसके डैड ने मदद भेज भी दी, पर बेचारी उसे क्या पता था की किशोर ने किस तरह की मदद भेजी थी.

वो खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी पर फिर भी मैं तोह चंचल था, न जाने कब कौन से ख्याल आ जाए. और, इस समय उसके मैं में एक अत्यंत hi खौफनाक सा ख्याल आया.

कही वीर मारा गया तोह?

ये सोचते hi उसके पूरे बदन के रौंगटे खड़े हो गए. शरीर कापने लगा और वो खुद से hi मैं में bad-badaane लगी.

'N-Nahi! नहीं! ऐसा नहीं होगा. डैड ने हेल्प भेज दी है. एवरीथिंग विल बे फाइन नाउ. ऑफ़ कोर्स~ He'll के बैक. थिस टाइम, ी विल सेव हिम. मैंने उसे उसकी सिग्नेचर डिशेस के आइडियाज भी तोह दिए न. अभी तोह उसने अपना बिज़नेस शुरू किया है. हे कन्नोत दिए लिखे तहत. He'll के... सुरेली... He'll के...!'

रात के 10 बज रहे थे और अब वीर के घर में यानी की रागिनी के घर में रागिनी समेत बाकी सभी चिंता में आ गए थे.

न hi वीर फ़ोन उठा रहा था, न hi अपनी तरफ से उसने कोई मैसेज किया था. वो दिन का निकला हुआ था और आज तोह उसने अपना धंधा भी नहीं खोला. फिर रात तक कहा था वो अभी?

सभी इसी सवाल में डूबे हुए थे पर कोई उत्तर न मिला उन्हें.

रागिनी : कहा चला गया है वीर? हर्र बार ऐसा hi करता है ये. में कितना कहती हु की जो भी करना है करो पर एक बार मुझे बता दिया करो. फिर भी ये...

सुमन : वीर जी हो सकता है किसी काम में फस्स गए हो रागिनी जी.

रागिनी : पर, ऐसा भी तोह हो सकता है न की वो किसी मुसीबत में फसा हो? हाँ? हे भगवान्! कही वो किसी परेशानी में फसा हुआ हो और उसके पास फ़ोन भी न हो अपना तोह? हाँ! यही हुआ होगा तभी तोह फ़ोन नहीं उठा रहा. कही कोई दुर्घटना तोह... नहीं!!! बिलकुल नहीं!

सुमन : शुभ शुभ सोचिये रागिनी जी!

रागिनी : कैसे सोचु शुभ शुभ सुमन जी? आप hi बताइये? जितनी बार ऐसा हुआ है उतनी बार वीर मुझे... मुझे चोटिल हालत में मिला है. उस दिन दिवाली वाली रात में... गेट के बाहर कैसे चोटिल हुआ नीचे ज़मीन पर मिला था. उसके बाद वो वीर के फ़ोन से उस आदमी ने कॉल कर के मुझे हॉस्पिटल का पता दिया था वह भी वो... वो... कितनी गंभीर हालत में मिला था. बेवक़ूफ़ है एक नंबर का... वो... वो...

सुमन ने देखा की कैसे रागिनी अपनी आँखों से हलके हलके ासु पोछने की कोशिश कर रही थी. असल में सुमन खुद भी बहुत ज़्यादा चिंतित थी पर वो अपने चेहरे पर दिखाना नहीं चाहती थी.

रागिनी इतनी अच्छी एक्ट्रेस नहीं थी शायद, उसके हाव भाव उसके इमोशंस सब साफ़ झलक रहे थे.

वो गुस्सा भी थी, उदास भी, चिंतित भी और थोड़ा घबराई हुई भी.

सुमन : मैं को शांत रखिये रागिनी जी! वीर जी को कुछ नहीं होगा. हो सकता है वो बस किसी काम में फस्स गए हो. आपने सिखाया था न मुझे... हमेशा पॉजिटिव सोचना चाहिए, बोले तोह सकारात्मक. और, आप hi अब नकारात्मक भाव ला रही हो?

रागिनी : हम्म! K-Kya करू? मैं है की मानता नहीं. उत् पटांग ख़याल आ hi जाते है. भगवान् न करे उसे कुछ भी हुआ हो. पहले hi दो बार उसे उस हालत में देख चुकी हु, अब और नहीं. वो पगला समझता hi नहीं है की... *स्निफ्फ* की मुझे कितनी तकलीफ होती है जब जब उसे उस हालत में देखती हु तोह... *स्निफ्फ*

कोई और समझे या न समझे पर सुमन इस समय रागिनी को देख के भौचक्की सी वही जम्म गयी थी.

'K-Kya में सही सोच रही हु? रागिनी जी... आपका व्यवहार साफ़ साफ़ झलक रहा है. कही आप मेरे मालिक से...!???'

सुमन (शांत होते हुए) : थोड़ा और इंतज़ार करते है और अगर वीर जी नहीं आते है तोह हम उन्हें ढूंढ़ने चलेंगे.

रागिनी उसकी बात सुन्न केवल हाँ में सर्र हिलायी. वही आभा और सोनाली भी कुछ टेंशन में थी, उनके मैं में भी यही सवाल उठ रहा था की वीर आखिर इतनी देरर तक कहा रह गया था?

***

मिरर गैलरी...

यहाँ मिरर गैलरी में हालात बिलकुल भी अच्छे नहीं थे. न hi वीर के लिए, और न hi जस्सी और उसके साथियो के लिए जो बाहर लड़ रहे थे.

करा के जाने के बाद hi वीर के सामने अब क़रीब क़रीब 10 बन्दे उसके सामने खड़े हुए थे. वीर उन्हें चेक कर लिया था और ये असैसिन्स नहीं थे इस बात की उसे ख़ुशी ज़रूर थी.

मगर...

वो इस वक़्त घायल था, साथ hi धुएं में 10 आदमियों से लड़ना काफी मुश्किल काम था. अगर जगह बड़ी होती तब तोह कोई बात hi नहीं थी. पर जगह थी एकदम सकरी. वो कॉरिडोर लम्बाई में बड़ा था, चौड़ाई में नहीं. बस यही पर दिक्कत आ रही थी और साथ में मौजूद वह ज़िद्दी धुआँ जो हटने का नाम नहीं ले रहा था.

वीर बस इंतज़ार कर रहा था उनके आने का. क्युकी, वो जानता था की यहाँ उसे खुद की एनर्जी और मूवमेंट्स को एकदम काम करके रखना होगा वर्ण वो उतनी hi जल्दी थकेगा, उसका ब्लड लोस्स फिरसे चालू होगा और अंत में नतीजा - बेहोशी.

[It will be very difficult. Tumhare reminder ke liye bata du, you have 1100 points now.]

'येह!'

वह लम्बी लम्बी सांसें ले रहा था और उसकी निगाहें एकदम सामने की ऑर्डर केंद्रित थी. मैं में hi वो पारी से भी बातें करता जा रहा था.

[You know... Tum mission abort kar ke bhaag sakte ho.]

'No! मिशन में इस बार कोई पेनल्टी नहीं दी गयी है. इसका मतलब है की... अगर, में ये मिशन चोररटा हु, थें ी विल लूज़ यू.'

[I know. Toh tum system ke liye ye karoge?]

'बात सिस्टम की नहीं है. यदि मेरी साड़ी स्किल्स सारे पॉइंट्स भी ले लिए जाए बदले में तोह भी में दे दूंगा बूत I'll नेवर लूज़ यू. नेवर!'

मानो पारी को इस बार एक झटका सा लगा था ये सुन्न के. वो इस वक़्त वीर के अंदर इतने स्ट्रांग इमोशंस को फील कर पा रही थी की उसकी बोलती hi बंद हो गयी थी. वो स्ट्रांग इमोशंस थे पारी को कभी भी न खोने के.

[Y-You... Idiot!!]

'येह! ी ऍम! स्टिल, ी won't लूज़ यू!'

[T-Tum... ]

और, पारी कुछ बोल hi न पायी.

'थे अरे किंग!'

[Huh!? Don't lose your focus, stay calm, apne movements ko kam se kam rakho, unke attacks unpe hi deflect karo, try karna ki unme se koi bhi tumhare chest par attack na kar paaye because you're wounded there. And... And...]

पारी एक के बाद एक अपनी अद्विसेस रखते जा रही थी, वीर के रेसोलुशन ने जैसे उसे इस बार मजबूर कर दिया था की वो उसकी हेल्प करे और वीर को कुछ भी होने न दे. कुछ भी नहीं.

वो सारे के सारे बन्दे एक साथ आये और इस बार उन् सब के हाथो में कोई न कोई हथियार था.

*वहुवुस्सशहठ*

एक सामने से आती रोड को वीर ने पीछे उचक के डॉज किया और फिर...

*वहूउसस्शह्ह्ह*

बायीं से आती एक स्टिक को...

*स्वूऊऊसस्सश्ह्ह*

दाए से आता एक बात...

उन् तीनो को डॉज उसने जैसे तैसे कर लिया और उसके बाद hi उसने पहले बन्दे को अटैक किया.

*पूंऊऊवववववव*

एक बैक फिस्ट पंच सीधा उसके गाल पे और वो आदमी घूमते हुए पीछे लगे मिरर में जा भिड़ा.

*क्राआष्ठह्ह्ह्ह*

शीशो के टुकड़े एक बार फिर ज़मीन पर बिखर गए.

वीर ने उस बन्दे को चोरर दूसरे को देखा और उसके करीब जाते hi...

डबल किक्स!!!

वीर ने हवा में hi उस बन्दे पर दो किक्स मारी सीधा उसकी छाती पर. पहली किक तोह उसकी छथि पर चढ़ने और उससे धकेलने के लिए थी पर दूसरी किक इतनी स्ट्रांग थी और इतने फाॅर्स के साथ जड़ी थी वीर ने की वो आदमी इतनी दूर पीछे जाके गिरा की पल भर के लिए उसके साथी भी वीर को थोड़ा डर के देखने लगे.

[Noooo!!! Noooooooo!!! I told you na... Apni movements kam rakho. You cannot lose your energy too much. Tumhara chest aur dukhne lagega.]

और वही हुआ, वीर के चेस्ट में दर्द बढ़ चूका था.

वो लम्बी लम्बी सासें लेते हुए वही खड़ा था पर अभी भी उसके मैं में दृढ़ता कायम थी.

हे विल नेवर लूज़ पारी!

और शायद उसका ये बेहेवियर कही न कही पारी को अंदर से टच कर गया.

[Run idiot! Just forget it! Tum aur chotil mat ho.]

'हाहाहा~ अरे यू केयरिंग फॉर में नाउ?'

[YOU IDIOT!!!! Ye samay nahi hai inn faaltu baato ka. Fucking run, yadi unhone tumhe pakda then wo tumhe zinda nahi chorrenge. It's a fucking trap! Run away you fucking idiot... You cannot lose your life just l...]

'हँ!?'

[Run you idiot!!!! I said run... Mauka hai abhi! You will live... Ek baar me tumhaare dimaag me kuch nahi ghusta kya???]

'शट उप!'

[Huh!?]

'ी साइड शट उप! मेने कह दिया न... चाहे कुछ भी हो जाए, ी won't लूज़ यू!'

[Y-YOU... DAMN YOUUUU!!!! FUCKING STUPID, IDIOT, YOU... YOU... CARELESS MORON!!!!]

पारी के चिल्लाने पर वो बस मुस्कुराया और वापस से लड़ने में बिजी हो गया. दर्द तोह हो रहा था क्युकी मूवमेंट्स की वजह से ब्लीडिंग फिरसे शुरू हो चुकी थी.

[You stupid fucking brat... Mene kaha na ki bhaago yaha se, samajh nahi aata kya?]

'जो तो स्लीप मोड!'

[Huh!?]

'ी साइड जो तो स्लीप मोड! नाउ!'

[N-Nooooooo! No you can't... Not at this time... Noooooo!!!!]

'जस्ट जो!'

[Damn youuuuuu!!! Fucking... Shit!!!!]

पारी वीर के आर्डर को नेग्लेक्ट नहीं कर सकती थी. यदि वीर ने कोई आर्डर दिया था इसका मतलब उससे करना hi था. बेशक, वो पिस्सेद ऑफ थी इस हरकत पर लेकिन वो कुछ नहीं कर सकती थी.

[System has entered into the sleep mode.]

वीर ने ये केवल इसलिए किया था क्युकी वो एनर्जी सेव करके रखना चाहता था. पारी के इंस्ट्रक्शंस काम के तोह थे पर इस वक़्त पारी खुद उसकी चिंता में bad-bada रही थी और ऐसे में वीर की एनर्जी और ज़्यादा लूज़ हो रही थी. इस कारण से वीर को ये रिस्क लेना पड़ा.

पर शायद ये उतना सही डिसिशन नहीं था क्युकी...

"मारो साले को..."

वो सारे उसपे टूट पड़े. वीर से जितना हो सकता था उसने उतना उनके अटैक्स डेफ्लेक्ट किये, पर फिर भी उस सकरी सी जगह में कोई न कोई उसपे पीछे से वार कर hi दे रहा था.

नतीजा - उसका और चोटिल होना. अब उसकी सासें उखड़ी उखड़ी चल रही थी. किसी भी वक़्त वो एग्जॉस्ट होक नीचे गिर सकता था. पर तभी जैसे सामने खड़े कुछ आदमी आपस में बात करने लगे.

"बॉस ने कहा था की उनके साइड से जो भी मिले उससे हम पकड़ के ले आये. वो करा नाम की लड़की तोह भाग चुकी है. बेहतर यही होगा की हम इस लड़के को ले चले."

"तुमने सही कहा. यहाँ ज़्यादा देरर रुकना सही नहीं. बाहर मौजूद उनको भी ये खबर देदो की हम इस लड़के को लेकर पीछे के रास्ते से निकल रहे है. और उन्हें भी यही कहना की वो भी चकमा देके पीछे के रास्ते से निकल आये. हमे अपने रास्ते का रूट नहीं पता लगने देना है उन्हें."

"ठीक है!"

और वो सभी वीर पर एक बार फिर टूट पड़े. वीर कोई रोबोट नहीं था. वो भी एक इंसान hi था. वो उतना hi लड़ सकता था जितनी उसकी लिमिट थी. और शायद आज वो अपनी लिमिट पर पहुँच चूका था.

जब एक वार उसके पीछे से उस स्टिक से उसके सर्र पर पड़ा तोह वीर की आँखें अपने आप बंद हो गयी. पर बेहोशी में जाने से पहले उससे ये ज़रूर सुनाई दिया था.

*डिंग*

[Mission - Confront the gang has been completed.]

[You have been rewarded 1000 points.]

और...

*थुड़*

वो फिर धड़ाम से नीचे की ऑर्डर गिर पड़ा जहा कुछ जगह कांच के टुकड़े पड़े हुए थे. कुछ कांच के टुकड़े तोह पक्के से उसकी स्किन में घुस गए होंगे.

"साला लड़का था की क्या था? पूरे लौंडो की वाट लगा के रखा हुआ था ये एक लड़का. मैं तोह कर रहा की साले का यही गेम बजा दू, पर बॉस ने कह के भेजा है की कोई भी मिले उससे उठा लाना. चलो, जल्दी से अब... उठाओ इससे और पीछे के रास्ते से वन से निकलो. में इन्फॉर्म करके आता हु बाहर से."

"Okay!"

और वीर का शरीर उन्होंने उठाया और पीछे के रास्ते से उसके हाथ परर बाँध के वन में घुसेड़ दिया.

उनके एक आदमी ने बाहर लड़ रहे बन्दों को इन्फॉर्म किया तोह सभी इशारा समझ गए की वक़्त आ चूका था यहाँ से रफू चक्कर होने का.

बाहर की दुनिया बिलकुल वैसे hi चल रही थी, किसी को कुछ नहीं पता था की अंदर उस वेन्यू में क्या हो रहा था.

जस्सी अपने साथियो के साथ लड़ रहा था और अपनी बाकी की टीम के आने का वेट कर रहा था. वो जानता था की वीर वह अकेला था और सच कहा जाए तोह वो भी थोड़ा वीर के लिए परेशां था. और जल्द से जल्द उसकी मदद के लिए अंदर जाना चाहता था. पर सामने खड़े दो असैसिन्स और कुछ आदमी उन् पर जैसे हावी पद रहे थे.

तभी अचानक hi धेरर साड़ी गाड़ियों की आवाज़ आयी और बाहर से अंदर की ऑर्डर कई सारे आदमी आने लगे.

ये जस्सी की बाकी की टीम थी और उनके साथ hi एक कोप्तेर भी आया हवा में उड़ते हुए, ये किशोर द्वारा भेजी गयी पूरी टीम थी. आदमी इतने थे की पल भर के लिए उन् असैसिन्स की भी गांड फट गयी थी.

ये तोह प्लान में नहीं था उनके. वो तोह यहाँ सरप्राइज अटैक करने के लिए आये थे न? फिर प्लान फ़ैल कैसे हो गया? लड़की भी भाग गयी, उनके आदमी भी चोटिल हो गए, और तोह और ॉपपोनेंट ने इतने सारे आदमी और अलग से भी बुलवा लिए? क्या चल रहा था ये सब?

पर वो नहीं जानते थे की इन् सब को अंजाम देने वाला एक hi लड़का था. वो था ~ वीर!

जस्सी : फाइनली... एक मिनट!? कोप्तेर? ये हेलीकाप्टर तोह... बॉस ने भेजा!?? कही मिस ने तोह!?? यदि ऐसा है तोह वीर को डेफिनिटेली बचाना होगा.

जस्सी ने देखा की वो असैसिन्स की टीम भागते हुए अंदर जा रही थी.

'सहित!'

वो अंदर जाने के लिए हुआ तभी दो आदमी उसके करीब आये.

"जस्सी सर!"

"ोये सुनो!"

जस्सी : हँ!?

पहला आदमी : जस्सी सर! बड़े सरकार ने भेजा है मुझे. आपकी हेल्प के लिए.

जस्सी : मुझे लगा hi था. में ठीक हु, तुम लोग जल्द से जल्द अंदर जाओ. अंदर किसी को मदद की ज़रुरत है.

पहला आदमी : जी!

और वो पहला आदमी अपनी टीम को लेके अंदर चला गया.

जस्सी : और तुम कौन हो?

दूसरा आदमी : वो सब का टाइम नहीं है. ये बताओ, ये वीर कहा है!?

जस्सी (फ्रोंस) : वीर से तुम्हारा क्या काम?

दूसरा आदमी : हम यहाँ उसकी मदद के लिए आये है. वो कहा है?

जस्सी : वो वही अंदर है. पर तुम लोगो को किसने भेजा?

दूसरा आदमी : ये बताना में ज़रूरी नहीं समझता. चलो रे!!!

और वो आदमी जस्सी को यु चोरर के अंदर अपने साथियो के साथ चला गया.

इसमें कोई शक नहीं था की ये आदमी किसी और के नहीं बल्कि सुहाना के भेजे गए आदमी थे.

सभी आस लिए अंदर तोह गए थे लेकिन जो खबर उन्हें वह मिली वो बिलकुल भी सुखद खबर नहीं थी.

वीर लापता था. उसका कोई ठिकाना नहीं मिल रहा था.

जैसे एकदम से गायब हो गया था वह. अंदर बस उन्हें नीचे पड़े कुछ बेहोश आदमी, जगह जगह बिखरे हुए टूटे हुए शीशे के टुकड़े, कुछ खून के निशाँ, कुछ हथियार hi नज़र आये बस.

'सहित!'

ये एक बाद न्यूज़ थी. ा वैरी बाद न्यूज़. जिस हालत में करा वापस गयी थी, यदि उससे अब इस बात का पता लगेगा की वीर को वो पकड़ के ले गए है तोह क्या होगा? जस्सी शायद कुछ कुछ जान चूका था.

'में अभी मिस को ये बात नहीं बता सकता. हरगिज़ नहीं!'

जस्सी : तुम सब... जाओ! ढूंढो आस पास. जितना दूर जा सकते हो जाओ और कोप्तेर को साथ लेके जाओ. छान मारो सब और वीर को ढूंढ के लाओ. कैसे भी. Okay? वो एक वाइट शर्ट पहने हुए था. तुम देख के पहचान जाओगे उससे. मिस के साथ देखा होगा तुम लोगो में से किसी ने उसने.

पहला आदमी : जी! में अभी सर्च शुरू करवाता हु.

और सभी वीर की तलाश में जुट गए.

इधर वो दूसरा आदमी भी साइड में आके किसी को फ़ोन लगाया.

आदमी : Hello?

तोह दूसरे साइड से किसी लेडी की आवाज़ आयी,

लेडी : हाँ बोलो!

आदमी : मैडम! यहाँ आने पर पता लगा है की वो वीर तोह गायब है. उससे उठा के शायद लोग ले गए है.

लेडी : सहित!!! तोह वह क्या चल रहा है अभी?

आदमी : कोई और भी लोग है जो उसकी तलाश में जुटे हुए है.

लेडी : अच्छा ठीक है, तुम आस पास उसी एरिया में रहो. वो वेन्यू चोरर दो पर रहना उसके आस पास hi. इन केस यदि मुझे तुम्हारी ज़रुरत पड़ी तोह में तुम्हे फौरन hi वही के वही भेज दूंगी.

आदमी : जी मैडम! में आदमियों को लेके यही आस पास फिलहाल ठहर जाता हु. फिर जैसा भी हो आप बता दीजियेगा!

लेडी : ऑलराइट!

*कॉल एंड्स*

और कॉल कट होते hi वो लेडी जो अपनी एक रोक्किंग चेयर पर बैठी हुई थी अपने घर में वो कड़ी हुई और खिड़की के नज़दीक आते हुए उसने अपनी सहेली को कॉल किया.

लेडी : Hello!

तोह दूसरी तरफ से उसकी सहेली की आवाज़ आयी जो और कोई नहीं बल्कि सुहाना hi थी.

सुहाना : हाँ दिव्या बोल!

और ये लेडी उसकी सहेली, दिव्या!

दिव्या : मुझे अभी अभी पता चला है की वो वीर जिसके लिए तुमने मुझे आदमी भेजने बोलै था वो गायब है. मतलब शायद लोग उससे उठा के ले गए है कही. और उसकी सर्च में कोई और लोग भी लगे हुए है जो मेरे आदमी नहीं है.

सुहाना : व्हाआआत्तत्त!!? वो... वो वीर को उठा के ले गए!??

दिव्या : यस!

सुहाना : दमन ित्तत्त!!! शित्त्त!! ी कनेव आईटी!!! वो स्लोगन है... क्या सोचा था उसने!? दमन आईटी!

दिव्या : क्या कहा तुमने? स्लोगन!? दीद यू रियली..!?

सुहाना : अहह! यस! सॉरी दिव्या! में तुम्हे बताना भूल गयी.

दिव्या : बताना भूल गयी? अरे यू इंसाने सुहाना? तुम्हे पता भी है वो कौन है? और मेने यहाँ अपनी नार्मल टीम hi भेजी है. नॉट थे एक्सपर्ट्स okay? It's लिखे में उन्हें मौत के मुँह में उतार रही हु.

सुहाना : I'm सॉरी यार! बूत उस टाइम में काफी कुछ सोच रही थी. बताना भूल गयी. बूत अभी वो इम्पोर्टेन्ट नहीं है. इम्पोर्टेन्ट ये है की हमे कैसे भी कर के वीर को ढूंढ़ना है. तहत इडियट... मेने कहा था... की अपनी कॉलेज लाइफ एन्जॉय करो, don't गेट ईंटो थिस... बूत ये है की... सहित!!! क्या करू में इस दुफर का... सारा मटर मुझपे चोरर देता है... इडियट!!!

दिव्या : सुहाना!?

सुहाना : हाँ!?

दिव्या : तुम... Aren't यू केयरिंग ा लिटिल तू मच फॉर हिम? कौन है आखिर ये वीर? जिसने मेरी सुहाना तक को इस क़दर वोर्री करने पर मजबूर कर दिया? और... इस समथिंग गोइंग ों बिटवीन यू एंड हिम? हाँ?

सुहाना मानो दिव्या की इस बात से थोड़ा झेप सी गयी.

सुहाना (ब्लशेस) : Wh-Whaattt!?? N-Nooo! He's जस्ट ा... जस्ट ा बिज़नेस पार्टनर. नथिंग ेल्स. और मज़ाक बंद करो. एंड अपने आदमियों को बोल के रखो की वो वही रुक के रहे.

दिव्या : हाहाहा~ लुक्स लिखे मुझे मिलना hi पड़ेगा उस से. एंड don't वोर्री, मेने पहले hi उन्हें बोल दिया है. कुछ भी हो, कॉल कर देना. िफ़ नीडेड, I'll सेंड मोरे पीपल.

सुहाना : थैंक्स ा लोट दिव्या!

दिव्या : हाँ हाँ चल चल! इसमें क्या थैंक्स. नाउ गुड नाईट! मुझे एक रिपोर्ट भी बनानी है अभी. विल टॉक तो यू लेटर.

सुहाना : हम्म~ गुड नाईट!

*कॉल एंड्स*

और इन् बातो के साथ सुहाना ने फ़ोन रख दिया. वो काफी टेंशन में लग रही थी. और मैं hi मैं न जाने कौन कौन सी गालिया वीर को दिए जा रही थी.

पर इतना ज़रूर जानती थी वो की यदि वीर स्लोगन के चंगुल से बाहर आया तोह इसका मतलब था की ज़रूर वीर कुछ उस से छिपा रहा था.

जिसका खुलासा वो कर के hi रहेगी.

***

SLOGAN'S हिडौट...

हुआ वही जो होना था. जस्सी और उनकी टीम, सुहा द्वारा भेजे गए आदमी वीर तक पहुचने में नाकाम थे. या यु कहे की वो थोड़ा लेट हो गए, जिस कारण से वीर को बंधी बना के वो सब स्लोगन के हिडौट पहुँच चुके थे.

और ये हिडौट वही पिछले वाला नहीं था. ये कोई नया हिडौट था उसका.

वीर इस वक़्त एक चेयर से बंधे हुए था. उसके हाथ परर सब कुछ बंधे हुए थे. और वो अभी भी बेहोशी की हालत में था.

जब अचानक से...

*सपलायआस्स्शह्ह्ह्ह*

"ुघठ!!!!"

धेरर सारा पानी उसके चेहरे पर आके पड़ा और उससे होश आया.

उसने अपनी पलके कई बार झपकाते हुए सामने देखा तोह सबसे पहले उसके मैं में आवाज़ पड़ी,

[You are awake! Thank God you are awake! I can feel it. Dard abhi bhi hai tumhe... Bleeding has stopped once again. But uska treatment bhi zaroori hai. Pulse theek hai, tumhaari breathing bhi sahi hai. Thode boht kaanch ke tukde skin me lage hue hai. These bastards... Tell me! How do you feel?]

वैसे तोह पारी सब कुछ फील कर सकती थी पर फिर भी वो शायद वीर के मुँह से sunn'na चाहती थी.

वीर का दर्द शायद बढ़ रहा था. और इसी कारण उसने अपनी आँखें दुबारा बंद कर ली.

[Heyyyy! T-Tell me... Tum sunn rahe ho na??]

'....'

[H-Heyyyy!!! Oye!!! Suno... Tell me... Tell me you are good!!! Veeeeerrr!!!]

आज पहली बार था जब इस पारी ने वीर को उसके नाम से पुकारा था. और इस बार पारी की आवाज़ में भी डेस्पेरशन साफ़ झलक रहा था. वो कितना बेचैन थी, उसकी आवाज़ में साफ़ मालुम पद रहा था.

[Veeeeerrr!! Are you listening...? Tell me!!!]

और तभी पारी को वो आवाज़ सुनाई दी जिससे sunn'ne के लिए वो तड़प रही थी.

'I'm फाइन!!!'

[Haaaashhh! Finally!! I-I see... Okay! Aur bol kyu nahi rahe the? Muh me dahi jama ke baithe tha kya?]

उसकी बात सुनते hi वीर के मुँह पर एक मुस्कान फेल गयी. पारी वापस से अपने रंग रूप में आ चुकी थी. पर ये बात भी झुटलाई नहीं जा सकती थी की उससे वीर की बोहत चिंता थी. वीर के लिए बस यही काफी था.

'Don't यू हेट में? अब केयर क्यों दिखा रही हो? हाँ!?'

[Wh-Whaaat!?? N-Nooo!! W-Who cares for you?? I-I don't hmph!!!! Wo toh mein aise hi... Ahem!! *Cough* And wait a minute, tumne mujhe sleep mode me daala kese? Are you insane? Tum jaante bhi ho wo kitna critical moment tha? Aur tumne kitna bura decision liya tha wo karke?]

'ी नीडेड एनर्जी...!'

[Huh!?]

'तुम बोहत बड़बड़ा रही थी. और मुझे एनर्जी की सख्त ज़रुरत थी. ी couldn't अफ़्फोर्ड तो वास्ते माय एनर्जी.'

[Ahem! Well that... Anyways! Wo sab baatein chorro... Aur saamne dekho. I think hum boht badi problem me phass chuke hai.]

पारी की बात सुन्न वीर ने जब अपना सर्र उठाते हुए सामने देखा तोह उसके सामने एक जाना पेच्चाना शख्स सामने आया.

स्लोगन!

वो पूरे सूट कोट पहने तैयार बैठा था. शरीर पे एक ब्लैक सूट और आँखों पर एक चश्मा.

उसने चश्मा उतारा और वीर को देखा.

स्लोगन : एक बार फिरसे वेलकम! एंड लुक ात यू... किसने एक बार फिरसे मेरा प्लान बर्बाद किया है? तुमने वीर... हाहाहाहाहा~ तोह? केसा लग रहा है वीर? मेरा प्लान फ़ैल करके? मेरा मतलब मेने तोह सरप्राइज अटैक रखा था करा को पाने के लिए पर मुझे पता चलता है की वह का तमाम इंतज़ाम खराब हो चूका है और मेरा टारगेट भी भाग चूका है. फिर मेरे आदमी तुम्हे यहाँ लाके परोसते है ये कहते हुए की तुम hi इस प्लान के फेलियर का मुख्या कारण हो. तोह? बताओ! केसा लग रहा है दो बार मेरा प्लान फ़ैल करते हुए? फीलिंग प्राउड? स्ट्रांग? कॉंफिडेंट? हम्म?

स्लोगन के सरकास्टिक क्वेश्चन का वीर ने कोई जवाब न दिया. वो बस उसकी ऑर्डर निडरता से देखता रहा. जैसे मानो स्लोगन से उससे कोई डर महसूस नहीं हो रहा था.

और कही न कही स्लोगन को ये बात इर्रिटेट कर गयी.

वो करीब आया और उसने वीर के गीले बालो को पकड़ के खींचते हुए उसका चेहरा उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै,

"तुम्हे पता है? ी हेट तहत स्तर! जब जब लोग मुझे ऐसे देखते है न? बिना मेरे खौफ के... में उनका बोहत hi बुरा हाल करता हु. बोहत बुरा! और तुम्हारा भी जल्द वही हाल होने वाला है. समझे? काउंटडाउन शुरू हो चूका है तुम्हारा वीर."

और स्लोगन ने फिर वीर के बाल चोर्रे और जोरर से एक घुसा उसके गाल पर ज्यादा.

*पूंऊऊववव*

घुसा बोहत तेज़्ज़ था. और क्युकी वीर स्थिर था तोह वो सीधा जाके एकदम सही स्पॉट पर पड़ा था, जिस कारण से वीर के मुँह से खून निकल आया.

[This bastard....!!!]

स्टिल, वो ज़रा भी नहीं घबराया और न hi डगमगाया. उसकी निगाहें अभी भी किसी बाज की तरह स्लोगन को घर रही थी जैसे मानो अभी शिकार करने के लिए प्लानिंग कर रही हो.

और स्लोगन वीर की आँखों को देख बार बार गुस्से में आ रहा था.

स्लोगन : तुम्हारी ये आँखें तोह में नुचवा के जंगली कुत्तो को खाने के लिए दूंगा वीर. बस देखते जाओ.

तभी पीछे खड़े एक आदमी ने स्लोगन की तरफ कदम बढाए और उसके कान में आके कुछ बातें बोली.

आदमी : बॉस! आपने मुझे पिछले दो सालो से उस करा लड़की के पीछे लगाया हुआ है. आज जब ये लड़का चोटिल हुआ था न, तोह आज मेने पहली बार उस करा को रट हुए देखा. आज तक मेने उससे कभी इस हाल में नहीं देखा है. इसका मतलब ये लड़का उसके लिए कोई ख़ास है.

स्लोगन : ओह्ह्ह!???

आदमी : जी बॉस! वो लड़की, अपने बॉडीगार्ड के साथ भी नहीं जा रही थी और इस लड़के के पास रुकने की ज़िद्द कर रही थी.

स्लोगन : ओह्ह्ह! समझा!! Maan'na पड़ेगा वीर! तुम में कुछ ख़ास बात तोह है. तभी तोह मेरा आतिश भी यु हार बैठा. करा जैसी लड़की तुम्हारी दीवानी बन्न बैठी, बताओ. वर्ण किशोर से ज़्यादा अच्छे से में उसकी बेटी को जानता हु. वो कभी भी किसी भी लड़को को घास नहीं डालती थी. और तुम्हारे लिए वो रो पड़ी...!? सरप्राइज!!! हाहाहा~ अब तुम hi मेरा काम आसान करोगे वीर!

वीर : ....

स्लोगन : यदि करा तुम्हारे लिए इतनी केयर दिखा रही है तोह में दावे के साथ कह सकता हु की वो तुम्हे बचाने के लिए ज़रूर आएगी. कैसे नहीं आएगी? जब तुम मेरे क़ब्ज़े में हो अब. हाहाहा~ स्टीव!!!!

स्टीव : जी दादा!

स्लोगन : ज़रा खातिरदारी तोह करो हमारे ख़ास मेहमान की.

स्टीव : जी दादा!

स्लोगन (जाते हुए) : ध्यान रहे! वो म्ररने न पाए. और बेहोश भी न हो पाए. समझे?

स्टीव : आप निश्चिन्त रहिये दादा!

और स्लोगन वह से चला गया.

स्टीव : लड़के लोग! आओ, ज़रा अपने हाथ साफ़ करलो. कौन कौन मार खाया था वह पे? आओ, अपना बदला लेलो.

वो आदमी तोह जैसे बैठे hi हुए थे, जो जो वीर के हाथो से मिरर गैलरी में पिता था वो पूरे नए जोश के साथ खड़े हुए और अपनी हथेलियों को मलते हुए उसकी तरफ नफरत भरी आँखों से आगे बढ़ने लगे.

[Damn you bastards....!!! Damn it! Damn it! Damn it!!!!!!!]

'पारी!'

[H-Huh!??]

'ओपन थे क्वेस्ट्स!'

[A-Are you sure!?]

'यस!'

वीर अपना सर्र झुकाये पारी से बात कर रहा था और आने वाले हमलो के लिए खुद को तैयार भी कर रहा था. पारी इतना चिंतित थी की उसकी आवाज़ भी लड़खड़ाने लगी थी अब.

[I'm... I'm opening...]

और वीर द्वारा दिए गए निर्देश पर पारी क्वेस्ट्स को ओपन करने लगी. वीर के पास इस मिशन के 1000, पिछले मिशन के 900 और पहले के 200 पॉइंट्स बचे हुए थे.

यानी की टोटल 2100. जिन्हे शायद वो अब क्वेस्ट्स पर लगाने वाला था.

और तभी वीर के गाल पर एक तेज़्ज़ घुसा आके लगा.

*पूंऊऊऊववववव*

"मादरचोद! मुझे मारा था हाँ? ले बहनचोद साले हरामखोर....!"

आदमी अपना गुस्सा बरसाते हुए उस पर टूट पड़े. वीर पहले से hi चोटिल था और एक बार और उससे इस कदर मारा जा रहा था.

[Damn you morons! You fuckers!!! I'll kill you.... Shitt!!]

*डिंग*

और तभी त्रैझ खुला और उसमे से एक कार्ड बाहर निकला.






[You have recieved a Trash Card.]

[Fuccccckkk!! Damn it! I told you not to take risk. Ab dekha na?]

पर वीर कुछ न बोलै, वो बस मार सेहत रहा और हर्र गुज़रते पल, पारी और ज़्यादा भावुक होती जा रही थी.

'कीप गोइंग ों!'

[Shitttt!!!]

*डिंग*






[You have received a Trash Card.]

[Fuckkkkk this.... Damn ittttt!!! 1700 points bache hai. You sure you want to keep going on?]

'जो ों!'

[B-But...!]

"ये ले मादरचोद! बोहत उचक रहा था न वह तोह, ले न साले. कहा गयी तेरी अब हेकड़ी? निकल गयी न हवा बहनचोद."

और अभी भी आदमी उससे पीटने में लगे हुए थे. पारी का गुस्सा सातवे आसमान पर था. लेकिन वो कुछ नहीं कर सकती थी. बस वीर को पीटते हुए देखने के अलावा उसके पास कोई उपाय नहीं था.

पारी की हालत ऐसी थी मानो उससे किसी जेल में बंद कर दिया हो और जेल के बाहर उसके किसी अपने को पीटा जा रहा हो. बिलकुल ऐसा hi महसूस कर रही थी अभी वह.

*डिंग*






[You have recieved a Trash Card.]

[Damn youuuu!!! I knew it! This is risky. 15% chances hai Legendary cards ke, of course ghanta kuch milega hume. Damn it!!]

'दो आईटी!'

[Lekin...!]

'ी साइड दो आईटी!'

[Ugh! Fine!]

*डिंग*






[You have received a Trash Card.]

*डिंग*

[You have recieved a Trash Card.]

[Fuck this shit!!!!]

*डिंग*

[You have received a Trash Card.]

[Fuck! Paagal hai kya ye? Is something wrong? 900 points hi bache hai. Are you really...]

'कीप गोइंग ों...!'

[Damn it! Fine!!!]

*डिंग*

[You have received a Trash Card.]

और उसके पास अब 700 पॉइंट्स hi बचे हुए थे जब...

*डिंग*






[You have received a Legendary Card.]

[This... Omg!?? No waayyyyyyy!!!]

और पारी के रिएक्शन की आवाज़ सुन्न, इस बार मार खाते हुए भी वीर के होंठो पर एक मुस्कान थी.

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आज के लिए इतना ही गाइस!

धन्यवाद!


लिखे थोक के जाने का और अपने कमैंट्स रखने का. 😌
 
अपडेट - 64 ~ हेल्प ों थे वे

अब तक...

*डिंग*

[You have received a Legendary Card.]

[This... Omg!?? No waayyyyyyy!!!]

और पारी के रिएक्शन की आवाज़ सुन्न, इस बार मार खाते हुए भी वीर के होंठो पर एक मुस्कान थी.


अब आगे...



Kishor's विला...

11:15 पं...


जहा वीर का कोई ठिकाना नहीं मिल रहा था ढूंढ़ने पर वही इस वक़्त, मुंबई में hi किशोर अपने खुद के आलिशान विला में इस वक़्त नाईट वियर वाले कपडे पहने अपनी एक चेयर पर बैठा हुआ बुक पढ़ रहा था. जैसे उससे कोई फिक्र hi नहीं थी.

काफी देरर से वो ऐसे बैठे हुए था जब उसके रूम का दरवाज़ा खुला और एक लड़का उस कमरे के अंदर दाखिल हुआ.

वो लड़का केवल एक फुल ब्लैक टी शर्ट और नीचे ब्लू कोलोउरेड जीन्स पहने हुए था. किशोर ने अपने पीछे से किसी के आने की आहात पाते hi बुक बंद कर दी और बिना उस लड़के को देखे hi पूछा, "कहा थे इतनी देरर तक?"

उसके सवाल पर लड़के ने जवाब दिया, "मेने आपको जताया था की मुझे आने में थोड़ा लेट हो जाएगा."

किशोर : हम्म! थोड़ा नहीं कुछ ज़्यादा hi लेट हो तुम.

किशोर ने साइड वाल में लगी घडी की ऑर्डर देखते हुए इशारा किया, जिसमे समय 11:15 हो रहा था.

लड़का (शिघ्स) : काम था. इसलिए... थोड़ा लेट हो गया.

किशोर : अच्छा!? ठीक है. पर अपने समय का ध्यान रखा करो कारन. मुझे पोके न करने पड़े तुम्हे बार बार.

कारन : जी!

लेट आया व्यक्ति कोई और नहीं, किशोर का अपना बीटा कारन hi था. और किशोर शायद उसके लेट आने से थोड़ा डिसअप्पोइंटेड था.

किशोर : जाओ अब.

कारन : मुझे कुछ बात करनी है आपसे.

किशोर : किसी बात!?

कारन : आपको पता है दी के बारे में? कुछ देरर पहले क्या हुआ?

किशोर : हम्म~

कारन : तोह? आपने क्या एक्शन लिया?

किशोर ने इस बार palat'te हुए अपने बेटे की ऑर्डर देखते हुए कहा, "तुम कब से मुझसे सवाल जवाब करने लगे?"

कारन (फ्रोंस) : बात मेरी दी की है. उनके ऊपर हमला हुआ था. वो तोह अच्छा हुआ वीर वह था ोथेरविसे...

किशोर : हम्म!? वीर... तुम कैसे जानते हो उससे? हँ?

कारन : में... में उस से मिल चूका हु.

किशोर : ओह्ह! और ये बात तुमने मुझे बताना ज़रूरी नहीं समझी?

कारन : वो... बस छोटी सी मुलाक़ात थी.

किशोर : हम्म~ तोह!? क्या पता चला उसके बारे में?

कारन : मतलब?

किशोर : मेरा मतलब तुम उस से मिले हो तोह इतनी देरर मिलने के बाद क्या कुछ जान पाए उसके बारे में?

कारन : वो... ी don't क्नोव मच. इतना पता है की वो एक अच्छा लड़का है. क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कॉलेज में पढता है. अभी अभी खुद का फ़ूड ट्रक शुरू किया है शायद उसने. ओवरआल, मुझे उसका फर्स्ट इम्प्रैशन अच्छा लगा. नॉट तो मेंशन की उसने दी को दो बार बचाया भी है.

किशोर : हम्म? दो बार?

कारन : आपको नहीं पता? उस टाइम जब दी पर क्लब में अटैक हुआ था? वीर ने hi दी को वह से साफल्य रघु एंड जस्सी सर के पास पहुचाया था.

किशोर : ओह्ह्ह!

कारन : हम्म! और मेरी अभी रघु से बात हुई है. उसने बताया मुझे कितना कुछ हो गया है. दी तोह वापस आ रही है उसके साथ पर वीर मुश्किल में है. क्या आपको नहीं लगता की आपको इस वक़्त कुछ करना चाहिए!?

किशोर : क्या चाहते हो तुम?

कारन : में... में चाहता हु की आप वीर को किसी भी हालत में वह से बचा के लाइए.

किशोर : बस!?

कारन : हँ!??

किशोर : तुम्हारे आने से पहले hi मुझे करा का फ़ोन आया था. एंड फॉर योर इनफार्मेशन मिस्टर कारन, मेने उस वीर के लिए हेल्प भेज दी है. कोप्तेर भी भेजा है साथ में.

कारन (सुरप्रीसेड) : तहत...

किशोर : यदि बात हो गयी हो, तोह तुम जा सकते हो.

कारन : J-Jii!

कारन सर्र झुकाते हुए वापस मुद जब जाने के लिए हुआ तभी एक बार फिर किशोर के रूम का दरवाज़ा खुला पर इस बार बोहत hi तेज़्ज़ झटके के साथ और अंदर जल्दबाज़ी में कोई दाखिल हुआ.

"F-Father!!!!"

कारन : डीई!!!!

करा, जो की रघु द्वारा मिरर गैलरी से साफल्य रेस्क्यू कर ली गयी थी वो अपने घर पॅहुचते hi सीधा अपने पिता के रूम में घुस आयी.

बगल में खड़े अपने छोटे भाई कारन को उसने एक झलक देखा और फिर वापस से अपने पिता को देख आगे बढ़ी.

करा : फादर! वो... वीर... He's इन ट्रबल.

किशोर अपनी बेटी के सवाल का जवाब नहीं दिया. वो बस करा को देख के कुछ परखने की कोशिश कर रहा था. शायद सोच रहा होगा की भला मेरी बेटी, जो इतनी बड़ी कंपनी की मालकिन है वो किसी ऐर्रे जर्रे नत्थू खर्रे के साथ कबसे दोस्ती करने लगी? शायद उसके मैं में खतरे की घंटी बज रही थी.

किशोर : मेने उसके लिए हेल्प भेजी है न बीटा?

किशोर कहते हुए उठा और अपनी बेटी के पास आया और उससे गले से लगा के धीरे धीरे उसके सर्र पर हाथ फरने लगा.

किशोर : तुम्हे कुछ हुआ तोह नहीं!?

करा बेचारी कुछ कह hi न पायी. ऐसा बोहत काम hi होता था जब उसके पिता उससे अपने गले से लगा के कुछ कहते थे.

करा : ी... M-Mein ठीक हु बूत वीर.

किशोर : Don't वोर्री! मेने हेल्प भेजी है न? सब ठीक हो जाएगा. Okay!?

करा : मम~

किशोर : चलो! जाओ अब तुम सब अपने अपने कमरे में और रेस्ट करो. Okay?

ये जैसे रिक्वेस्ट नहीं थी बल्कि एक आर्डर था. किशोर ने न फिर उन्हें देखा, वो सीधा पलटा और अपने जेब से एक सिगरेट निकाल के उससे लाइट किया और मुँह में रख कर एक काश लगाते हुए वो वापस से अपनी कुर्सी पर वही बुक लिए बैठ गया.

जैसे मानो उसकी तरफ से सब सही था और अब कुछ फ़ालतू बातें करने की कोई ज़रुरत नहीं थी.

करा समेत कारन दोनों hi बाहर निकले तोह करा बिना कुछ कहे अपने रूम में जाने लगी. उसकी हालत बोहत hi उन्स्तब्ले सी थी. उसके मैं में बस वही मंज़र बार बार चल रहा था जिसमे वीर की आखिरी मुस्कान दिखाई दे रही थी उससे और फिर बाद में उस गेट का बंद हो जाना. यही सब सोच सोच के करा इतनी घबराई हुई थी की उससे खुद नहीं पता था की उसकी हालत किसी हो गयी है.

कारन अपनी बड़ी बहिन को देख आज इतना तोह जान गया था की उसकी दीदी कोई रोबोट नहीं है. वो भी एक इंसान है जो सब कुछ फील कर सकती है. दुसरो की फिक्र कर सकती है, उनकी चिंता कर सकती थी. और कारन को तोह जैसे बस यही चाहिए था.

कारन : दी!?

उसने हौले से चलते चलते hi पीछे से बुलाया. करा उसकी पुकार सुन्न पलटी पर कुछ न बोली.

कारन : आप ठीक हो न?

एक बार फिर करा ने कोई जवाब न दिया. उसकी आँखों में ासु थे. उसने पलके झपकाते हुए कारन को नज़रे उठा कर कुछ पल के लिए देखा.





कारन ने उससे देख कुछ सोचा और फिर कहा, "क्या में आपका फ़ोन देख सकता हु?"

करा बिना कुछ कहे hi उसके हाथ में अपना फ़ोन थमा दी और फिर वो मुद के अपने कमरे में जाने लगी.

उसका ये रवैय्या देख कारन बस फीकी सी मुस्कान लिए वही दीवार से टिक के खड़ा हो गया और अपनी बड़ी बहिन को यु जाते हुए देखता रहा.

आज भी वही हुआ, हर्र बार की तरह. न जाने कब उन् दोनों के बीच का ये रिश्ता बदलेगा?

क्या हुआ था इन् दोनों के रिश्ते को? क्यों करा ने कारन के सवाल का जवाब नहीं दिया? इसकी कहानी इनके अतीत में hi छिपी हुई थी.

बचपन में, जब करा से उसकी आज़ादी छीनी जा रही थी यानी की जब करा को उसकी माँ के चले जाने के बाद से बंद बंगले में पढ़ाया लिखाया जा रहा था तब उम्र में बढ़ते हुए कारन के लिए ऐसा कुछ नहीं था. उसके लिए सब कुछ नार्मल hi था.

वो औरो की तरह घूमने फिररने जाता, वो खुल के कही भी जा सकता था, वो स्कूल जाता था, अपने दोस्तों के संग खेलने तोह कही उसके दोस्त उसके घर आके साथ में खेलते थे. और इसी बीच वो अपनी जब बड़ी बहिन को यु बस पढ़ते हुए देखता था तोह उससे ऐसा लगता था की कितनी बोरिंग है उसकी बहिन.

जब देखो तब पढ़ाई में लगी रहती थी. एक प्रकार से कारन ने करा को अपनी असली बहिन के रूप में देखा hi नहीं था. जब आपकी बात hi न हो किसी से तोह आप नैचुरली उनमे अपना रुझान खो बैठते हो. यही हुआ था कारन के साथ भी.

वो भूल चूका था की उसकी अपनी बहिन भी है. और वो बस अपने एन्जॉयमेंट में जीने लगा. पिता पैसा देते hi थे उससे. उससे बस एक hi कमी महसूस होती थी वो थी अपनी माँ की जिससे वो ठीक से जान भी न पाया. क्युकी उसके जन्म के कुछ साल बाद hi उसकी माँ ये दुनिया चोरर कर जा चुकी थी.

पर कारन को नहीं पता था, की जब जब वो खुले आसमान में अपने दोस्तों के संग अपनी आज़ादी मनाता था तब तब बंगले की ऊपरी मंज़िल की खिड़की से उसकी बड़ी बहिन उससे एक आस लिए देखती थी. एक आस की उससे भी काश बाहर जाने मिलता.

धीरे धीरे वही आस कब घृणा में तब्दील हो चुकी थी, ये बात स्वयं करा भी नहीं जानती थी. उसके भाई को साड़ी आज़ादी थी, फिर उससे क्यों नहीं? क्यों वो एक जेल में क़ैद मुजरिम के सामान का जीवन जी रही थी अपने hi घर में? सवाल तोह धेरर सारे आते थे उस वक़्त उसके मैं में.

पर उन् सवालों को लगातार पढ़ाई, शिष्टाचार, घर के प्रति ज़िम्मेदारियों के लेसंस ने जैसे दबा के रख दिया था. हर्र रोज़ज प्रोफेस्सोर्स आते और करा को ये समझाते की उससे क्या bann'na है. इस बीच जो घृणा उसके अंदर थी, वो थी ज़रूर पर जैसे वो अपना कारण या मक़सद भूल चुकी थी. बस कही छिपी हुई थी अंदर.

फिर वो दिन आया, जब किशोर ने कारन को बाहर भेजने के लिए पढ़ने भेजा. कारन अपनी बड़ी बहिन की बातो से परे पढ़ने के लिए विदेश गया. अपनी बहिन की hi तरह वो भी बिज़नेस के लिए hi स्टडीज करने गया था जब उससे घर से दूर रहके कई बातो के बारे में पता चला.

उससे ध्यान आया की उसकी बहिन भी तोह है और कितनी काम बातें होती थी उनके बीच. विदेश में जब उसने अपने दोस्तों की बहने देखि और उनके बीच रिलेशनशिप को. तोह उससे जैसे समझ आया की वो कितना गलत कर रहा था अपनी बहिन के साथ.

और फिर उसने छान बीन शुरू करि की आखिर क्यों उसकी बहिन बंद बंगले में रहा करती थी और क्यों उससे इतना पढ़ाया जाता था. जब कारन को बात समझ आयी तोह उससे बस ग्लानि hi महसूस हुई.

कितना नासमझ था वह. कितना कुछ कर सकता था वो अपनी बहिन की खुशियों के लिए पर उसने किया क्या? कुछ भी नहीं.

और तब से hi उसकी बहिन करा उससे ऐसे देखती थी जैसे मानो किसी अनजान आदमी को देख रही हो. वो जो घृणा थी करा के मैं में वो अभी भी थी पर करा अब ये नहीं जानती थी की क्यों वो ऐसा फील करती थी.

जैसे मानो वो भूल गयी थी. कारन को इस से पहले कभी किसी के लिए इतनी पीड़ा महसूस नहीं हुई थी. वो ये भी मानता था की शायद करा उस से एक और कारण से नाराज़ रहती थी वो ये की उसके जन्म के कुछ साल बाद hi उनकी माँ का देहांत हो चूका था.

अब क्या ये सच था की करा उससे इस बात को लेकर भी हेट करती थी? या नहीं? ये वो नहीं जानता था पर मानता ज़रूर था की एक ये कारण भी हो सकता था.

और तब से hi उसने रघु के कांटेक्ट में रहना शुरू किया. उससे समझ आया की उसके डैड ने उसकी बहिन को कैसे एक रोबोट बना के रख दिया था.

और इसलिए, उसने अपनी शुरूआती पढ़ाई पूरी कर वापस मुंबई आने का फैसला लिया. वह फैसला की वो अपनी बहिन को पहले जैसा कर के रहेगा. जो भी गलती उस से पास्ट में हुई, उसकी भरपाई कर वो अपनी बहिन को वो पुराना जीवन लौटा के रहेगा.

और कुछ समय बाद hi उससे पता चला वीर के बारे में. उससे पता चला की वीर नाम के किसी लड़के ने उसकी बहिन की जान बचाई थी.

यहाँ तक की उस से मिलने के बाद उसकी बहिन के चेहरे पर मुस्कान भी थी. मानो जैसे एक राह नज़र आयी थी कारन को. शायद वो अपनी दी को पहले जैसा बना सकता था!?

मुंबई आने के बाद इसलिए उसने सबसे पहले वीर से मिलने का फैसला लिया. वो देखना चाहता था उससे, परखना चाहता था, कही ये व्यक्ति उसकी बहिन के लिए कोई खतरा तोह नहीं था?

और मिलने के बाद hi जैसे उसके सारे डॉब्टस क्लियर हो चुके थे. वीर hi था वो इंसान जो उसकी बहिन को सही कर सकता था.

आज जब उससे पता चला की वीर ने एक बार फिर उसकी बहिन को बचाया अपनी जान जोखिम में दाल के तोह उसके मैं में जो वीर की जगह थी, उसका स्थान और ऊपर हो चूका था. अब तोह वह वाक़ई दिल से गेनुइनेली उसका दोस्त bann'na चाहता था.

क्युकी वो जानता था, की यदि उसकी बहिन में कोई बदलाव ला सकता था. तोह वह था ~ वीर!!!

वो सोच hi रहा था खड़े खड़े जब उसके बगल से आके रघु खड़ा हो गया.

रघु : बाद न्यूज़!

कारन : क्या हुआ?

रघु : जस्सी का कॉल आया अभी. वीर का कोई पता नहीं मिल रहा. वो लोग शायद उससे उठा के ले गए है.

कारन (शॉकेड) : क्या???

रघु : हाँ! उसने कहा है मिस को न बताने के लिए.

कारन : पर... ये तोह... शीट्ट्ट्ट!!

कारन खुद परेशान हो चूका था. जिस शख्स के बारे में वो अभी कुछ देरर पहले सोच रहा था की ये व्यक्ति hi उसकी बहिन की मदद कर सकता है अब तोह वही व्यक्ति गायब हो चूका था. झटका तोह लग्न hi था.

कारन : तोह अभी क्या?

रघु : अभी... जस्सी ने ऑर्डर्स दिए है इससे ढूढ़ने के. देखो, क्या होता है.

कारन : उससे कैसे भी करके ढूंढ़ना होगा. कैसे भी कर के. उससे कुछ होने नहीं दे सकते हम.

रघु : तुम कब से उसमे इतना इंटरेस्ट लेने लगे?

जब रघु ने ये सवाल पूछा तोह कारन अपनी नज़रे चुराते हुए पलट गया.

कारन : Don't आस्क में. बस इतना समझ लो की... वो इम्पोर्टेन्ट है.

रघु : वेल! जैसा तुम्हे सही लगे. और तुम मुझे भैया या सर कहके कब बुलाओगे हाँ? तुम्हे पता है में 29 का हु और तुम 20 के.

कारन : तुम्हे देख के सर बुलाने वाली फीलिंग hi नहीं आती.

रघु : व्हाट थे...!? और जस्सी को सर क्यों फिर?

कारन : वेल! उन्हें देख कर आती है. He's मोरे... उम्... प्रोफेशनल.

रघु : टच... केवल दो साल hi तोह बड़ा है वो मुझसे.

कारन : येह... येह!!!

रघु : अन्य्वयस! मुझे जाना होगा. जस्सी को हेल्प की ज़रुरत है.

कारन : रघु...

रघु : हम्म?

कारन : मुझे भी ले चलो. ी नीड तो फंड हिम.

रघु : हैं? ू भाई, तुम्हारा कोई काम नहीं है वह. वैसे भी यदि तुम्हे कुछ हुआ तोह बॉस मेरी खटिया कड़ी कर देंगे.

कहते हुए जब रघु जाने के लिए हुआ तोह इस बार कारन ने उसका हाथ पकड़ उसकी आँखों में देखा.

कारन : प्लीज!!!

आज पहली बार कारन ने उस से प्लीज बोलै था. भले hi कारन उससे भैया कहकर नहीं बुलाता था पर ये प्लीज अपने आप में स्पेशल था रघु के लिए.

रघु (शिघ्स) : ठीक है. पर एक शर्त...

कारन : ट्रेझर लक्ज़री ब्लैक!

रघु (स्माइल्स) : हाहाहा~ कितना अच्छी तरह समझते हो मुझे. देखा! में कितना इजी तो अंडरस्टैंड हु. कहा तुम लगे उस जस्सी की तरफदारी करने. चलो आओ. लेके चलता हु तुम्हे.

और रघु उसके कंधे में हाथ दाल उससे ले जाने लगा. कारन बस एक राहत भारी सास लिया और उसके साथ चल पड़ा.

रघु जब भी अपनी शर्त सामने रखता था, अक्सर उसकी शर्त यही होती थी. ट्रेझर लक्ज़री ब्लैक. ये एक सिगरेट थी.

और ये इम्पोर्ट होक कारन के पिता, किशोर के लिए आती थी. कितनी महंगी थी ये बताने की ज़रुरत भी नहीं थी. अब कारन का एक काम बढ़ गया था, वो ये की शर्त के मुताबिक़ उससे अब काम से काम एक डब्बा निकाल के रघु को देना पड़ेगा.

और एक और काम ये की उन्हें यहाँ से निकलने के लिए नीचे गार्ड्स को पटना पड़ेगा. वर्ण यदि उनमे से किसी ने भी ऊपर जाके किशोर को बताया तोह कारन की शामत आ जानी थी फिर.

***

Ragini's हाउस...

रागिनी के घर में माहौल खराब था. मतलब वाक़ई खराब. रागिनी चिंता के मारे इधर से उधर हो रही थी और ये फैसला नई ले पा रही थी की क्या करे?

क्या पुलिस को इन्फॉर्म कर दे? या नहीं?

वो आरोही को फ़ोन लगा के पूछ चुकी थी, वीर की ma'am निधि मैडम से भी उसकी बात हो चुकी थी पर दोनों hi जगहों पर वीर का कोई ठिकाना नहीं था.

अब ऐसे में hi एक hi ऑप्शन बचता था वो था पुलिस.

पर दिक्कत ये थी की रागिनी सूरे नहीं थी की वीर वाक़ई लापता हुआ है या नहीं? ऐसा न हो की वो पुलिस को बुलाने जाए और फिर वीर आ जाए. या ऐसा न हो की वो पुलिस को न बुलाये और वीर के साथ कोई अनहोनी हो जाए!?

दोनों hi सवालों में वो इस वक़्त फास्सी हुई थी. क्या करे? और क्या न करे?

तभी पीछे बैठी सुमन की आवाज़ उसके कानो में पड़ी, "आप शांत हो जाइये रागिनी जी!"

रागिनी : कैसे शांत हो जाऊ में सुमन जी? दिन का निकला हुआ है वह और कबसे कॉल कर रही हु, एक कॉल नहीं उठाया है उसने. न hi कोई जवाब दे रहा है. आरोही से पूछा उधर भी नहीं है वह, निधि Ma'am को लगाया कॉल मेने उधर भी उसका कोई अत पता नहीं है. कैसे शांत हो जाऊ ऐसे में में?

सुमन : आपकी बात सही है पर... टेंशन लेने से कुछ हासिल नहीं होगा है न?

आभा : माँ जी की बात सही है भाभी जी! आप अपने स्वास्थ पर भी ध्यान दीजिये.

रागिनी : ी जस्ट... नहीं! में बैठी नहीं रह सकती. में पुलिस में कंप्लेंट लिखवाने जा रही हु.

और रागिनी अचानक hi उठ कड़ी हुई, वो अपने कमरे में गयी और फटाफट उसने एक जीन्स और एक टॉप डाला और ऊपर से एक जैकेट और वो बाहर निकल कर जाने लगी तोह सुमन ने फौरन hi अपनी बेटी सोनाली को भी रागिनी के साथ भेज दिया.

सुमन : सोनाली को ले जाइये. दो लोग रहेंगे तोह अच्छा रहेगा. में और आभा यहाँ ृक्क के माली... मतलब वीर जी का इंतज़ार करते है तब तक.

रागिनी : हाँ!

और दोनों रागिनी और सोनाली वह से निकल पड़ी.

पर माहौल केवल यही तंग नहीं था. निधि जिससे इस बात की खबर लगी थी की वीर अब तक घर नहीं लौटा था वो फिरसे न चाहते हुए भी अब चिंता में डूबी हुई थी. वही हाल आरोही का भी था अपने घर में. शायद जल्द hi कई कॉल्स जाने वाले थे रागिनी के फ़ोन पर वीर के बारे में पूछने के लिए.

***

Slogan's हिडौट...

[Breathe slowly. Yes!!! Calm down!!!]

इधर वीर को पीटने के बाद वो लोग आराम फार्मा रहे थे. और पारी उसके मैं में उसकी साँसों को संतुलित करने के लिए उससे इंस्ट्रक्शंस दे रही थी.

कई जगह उसके अंग खून से साणे हुए थे. और इतनी मार के बाद ज़ाहिर था की वीर बेहोशी में चला जाएगा. पर वो आदमी उस पर पानी छिड़क छिड़क कर उससे होश में रखे हुए थे.

पारी से वीर की हालत देखि नहीं जा रही थी. मैं hi मैं वो उन् आदमियों को गालिया बक रही थी.

जब वीर कुछ शांत हुआ तोह पारी ने डिटेल्स भरना शुरू किया जो बेहद ज़रूरी थी.

[Okay! Toh sabse pehli baat. Hamaare paas ab keval 500 points bache hue hai. Baaki ke 1600 points kaha gaye? Quest me nipat gaye wo.]

वीर बस सास लेते हुए अपनी अधखुली आँखों से पारी की बातें सुनता जा रहा था.

[Ab baat karte hai card ki toh... WHAT THE LUCK???]

'...'

[I mean yeah... Kya luck hai tumhaara haan? Tumhe pata bhi hai ye kya hai? Beowulf's blessings!!! Ye legendary cards me bhi top tier card hai. Aur tumhe bas ye 1600 points ki gambling me mil gaya? Just how insane your luck is???]

'...'

[Let me tell you ki iske kya features hai. Sabse pehli baat... Tumhe isse ON karna padega. Matlab equip karne ke baad ye apne aap ON nahi hoega. Kyuki ye thoda alag type ka card hai. Thoda risky bhi hai aur time limited card hai ye.]

'???'

वीर कुछ कह नहीं पा रहा था मैं में पर जैसे पारी समझ चुकी थी की वो क्या कहना चाह रहा था.

[Hmm? Nahi nahi, Time limited ka matlab ye nahi hai ki kuch time ke baad ye card chala jaega. Ye card permanent hai. Time limit se mera matlab ye tha ki tum iss ON karne ke baad bas kuch derr ke liye hi use kar sakte ho aur fir ye waapas se OFF ho jaega. Jab tak ki cooldown period khatam nahi ho jaata.]

'...'

[Ugh! Somehow I'm missing your blabbering... Anyways, dhyaan rahe. Isse equip karne ke liye tumhe SLOT se Bone Reaper hataana padega. Aur tum jaante ho na? Bone Reaper hataane ke saath saath hi tumhari bones waapas se normal ho jaengi. Rib cage fir unbreakable nahi rahega.]

'...'

[Huh? You want to equip it?? Dhyaan rahe ki tum isse fir 24 ghante tak hata nahi sakte SLOT se. Yahi niyam hai SLOT ka. You still want to equip it?]

'....!'

[Ughh!!! Fine! Theek hai equip kar deti hai.]

*डिंग*

[Bone Reaper has been removed.]

*डिंग*

[Beowulf's Blessings has been equipped.]

[Ye lo. Ho gaya. Ab suno, iske features jaan lo. Dekho card me likha hi hai, 60% increase in senses. Matlab tumhaare senses abhi ke muqaable 60% aur badh jaenge. Chaahe wo sunn'ne kii shakti ho, ya sunghne ki, ya dekhne ki, ya twacha se feel karne ki. Okay? Ye 60% badh jaengi.]

'...'

[Uske baad likha hai +50% in reflexes, agility, speed and healing. This is insane. Tumhaari agility aur speed 50% badh jaegi. By the way agility aur speed ek hi cheez hai. Let's say ki tumhaari agility 100 hai toh wo 50% aur badh jaegi yaani ki 150 pohuch jaegi. This is madness. Tum pehle ke muqaable boht tezz ho jaoge. Upar se healing bhi 50% badh jaegi. Aur toh aur full moon me ye percentage double ho jaenge. A fucking legendary card you got there. Oye sunn rahe ho na?]

इस बार वीर ने बस हौले से हामी भरी.

'ममम~'

[Thank God! Ab main baat par aate hai. Wo hai iska ON/OFF system aur iska risk.]

'...'

[Dekho, tumne card equip toh kar liya hai lekin ye abhi ON nahi hua hai. ON karne ke liye wahi switch hai bagal me card ke bas usse mann me jaake toggle karna hai aur wo ON ho jaega. Par dhyaan rahe...]

'...!?'

[Dekho mene bhi iska usage nahi dekha hai toh kuch na kuch toh hoega. Matlab... ON karne ke baad tumhaari breathing boht tezz ho jaegi. Okay? Tumhaare senses badhenge toh unme ho raha blood flow bhi toh tezz hoega na? Nateeja? Tumhaari saasein tezz ho jaengi. Aur ho sakta hai tum... Ahem... Tum kuch agressive ho jao. Ya zyaada hi agressive ho jao.]

पारी अभी और कुछ बातें कहती वीर से जब अचानक hi...

*क्लिक*

*क्लिक*

*फ़्लैश*

*क्लिक*

वीर की आँखों के सामने बार बार रौशनी का फ़्लैश आने लगा. उसकी फोटोज निकाली जा रही थी.

सामने फिरसे आतिश बैठा हुआ था और वो स्टीव से बातें कर रहा था.

स्लोगन : साड़ी फोटोज निकल गयी?

स्टीव : जी दादा!

स्लोगन : डील्स का क्या हुआ?

स्टीव : भार्गव से पैसा मिल गया है. ला में भी माल एक्सचेंज की बात चल रही है. रही बात पुरानी पेमेंट्स की तोह वो मिल गयी है साड़ी. वो अंग्रेज़ज नहीं दे रहा था तोह उससे बत्ती दी है, कल पेमेंट कर देगा.

स्लोगन : हम्म~ गुड! अब यदि मुझे जो इनफार्मेशन मिली है की हमारी टारगेट इस वीर से प्रभावित है तोह ज़ाहिर है की इसकी ऐसी हालत देख वो यहाँ तोह ज़रूर आएगी हाहाहाहा~ स्टीव! भेजो ज़रा हमारी करा को इसकी ये फोटोज. और लिखो नीचे की इससे बचाना है तोह जल्द से जल्द बताये गए एड्रेस पर आ जाए. वो भी अकेली.

स्टीव : जी दादा!

और स्टीव ने वीर की फोटोज को करा के फ़ोन पर भेज दिया.

स्लोगन : ट्रैकिंग का लफड़ा नहीं चाहिए अपने को स्टीव. क्या है फिर पुलिस के लिए आदमियों को भेजना पड़ेगा ताकि वो उन्हें बिजी रख सके. वो कहते है न, शेर का शिकार करना हो तोह कुछ देरर बकरी को सामने रखना पड़ता है. समझा न?

स्टीव : जी दादा!

एयर मुस्कुराते हुए स्लोगन वीर के पास आया और उसका चेहरा उठाते हुए देखते हुए बोलै,

"अब में नहीं... तू खुद लाएगा उससे यहाँ. हाहाहाहा~"

पर उससे क्या पता था की जिस बात के लिए वो खुश हो रहा था. वीर को यहाँ कुछ अलग hi प्राप्त हो चूका था. कुछ ऐसा जिस से शायद स्लोगन की खुद की धज्जिया उड़द सकती थी.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

नेक्स्ट अपडेट इस फुल ऑफ़ एक्शन.

अपना अपना काम कर के जाने का तब तक. 😁


धन्यवाद!
 
अपडेट - 65 ~ रश ऑवर!

अब तक...

स्टीव : जी दादा!

और मुस्कुराते हुए स्लोगन वीर के पास आया और उसका चेहरा उठाते हुए देखते हुए बोलै,

"अब में नहीं... तू खुद लाएगा उससे यहाँ. हाहाहाहा~"

पर उससे क्या पता था की जिस बात के लिए वो खुश हो रहा था. वीर को यहाँ कुछ अलग hi प्राप्त हो चूका था. कुछ ऐसा जिस से शायद स्लोगन की खुद की धज्जिया उड़द सकती थी.


अब आगे...

*स्लैम*

"मेने कहा न में यहाँ रुक सकती हु."

ये आवाज़ थी रागिनी की जो जोरर से टेबल पर हाथ पटक कर सामने बैठे पुलिस अफसर से बात कर रही थी.

सोनाली के साथ रागिनी वीर को ढूंढ़ने निकल चुकी थी और वीर के बारे में साड़ी डिटेल्स भी अफसर को साझा कर दी थी उसने. पर जैसा की हर्र पुलिस अफसर इस वक़्त सुग्गेस्ट करता, वही काम इस पुलिस अफसर ने भी किया, वो था की रागिनी को घर भेजना और पुलिस टीम के साथ खुद सर्च पर निकलना.

रात के 12 बज रहे थे और ऐसे में एक औरत का पुलिस स्टेशन में होना सही नहीं बैठ रहा था. हलाकि वो यहाँ सेफ थी परन्तु उसकी यहाँ कोई ज़रुरत hi नहीं थी. वीर को ढूंढ़ना पुलिस का काम था, इसलिए रागिनी से डिटेल्स लेने के बाद और कंप्लेंट लिखने के बाद उन्होंने रागिनी को घर जाने के लिए सुग्गेस्ट कर दिया.

अफसर : देखिये मैडम! आपकी यहाँ फिलहाल कोई ज़रुरत नहीं है. हमने डिटेल्स लिख ली है. हम सर्च जारी करते है. यदि कुछ पता चलता है, या आपकी ज़रुरत पड़ती है तोह हम आपको कांटेक्ट करेंगे. अभी आप जा सकती है.

रागिनी : P-Par...

सोनाली : भाभी जी! पुलिस अंकल कह रहे है तोह सही hi कह रहे है. हमारे यहाँ रहने से कुछ बदलेगा नहीं.

रागिनी : पर सोनाली...

अफसर : देखिये, बच्ची ठीक कह रही है. आप जाइये और थोड़ा आराम करिये. क्युकी हो सकता है हमे आपकी किसी भी वक़्त मदद की ज़रुरत पड़े.

रागिनी : हम्म...

न चाहते हुए भी मैं मार्के रागिनी आखिर मान hi गयी. उसका मैं यही ृक्क कर वीर के बारे में कुछ खबर sunn'ne का था. काश उसके बारे में बस कुछ पता चल जाए. क्युकी अब रागिनी को अंदर से वाक़ई घबराहट होने लगी थी. रात काफी हो चुकी थी अब. न जाने क्या हुआ होगा वीर के साथ? ठीक भी है या नहीं? कुछ इन्ही सवालों की बीच घिरी हुई थी वह.

सोनाली के साथ लौटते हुए रागिनी दुबारा से अपने घर चली गयी. आरोही और निधि के फ़ोन निरंतर आ रहे थे उस से वीर की खबर jaan'ne के लिए, यहाँ तक की दोनों hi घर आने भी तैयार थी लेकिन रागिनी ने खुद उन् दोनों को hi मन कर दिया था. इतनी रात में उन्हें बुलाना ठीक नहीं था. और वैसे भी रागिनी के साथ सुमन समेत बाकी सभी थी.

तोह कोई चिंता वाली बात नहीं थी. बस आस थी तोह वीर की कुछ खबर jaan'ne की.

वही दूसरी ऑर्डर, करा अपने कमरे में बंद होक बिस्तर पर लेती हुई आज की वारदात के बारे में सोच रही थी. और उसके हाथो में एक जानी पहचानी सी चीज़ थी.

वीर का दिया हो वही छोटा सा टेडी.

'हे कन्नोत दिए! हे विल के बैक!'

'व्हाई दीद हे दो तहत फॉर में? सेविंग में? विथ हिज ओन लाइफ?'

करा को आज से पहले किसी के लिए ऐसी फीलिंग्स कभी नहीं आयी थी. वो वीर को पोटेंशियल डेंजर में देखने से डर रही थी. कैसे भी कर के वो वीर को सही सलामत वापस देखना चाहती थी.

***

*Vroooooooooooommmm*

यहाँ अपनी कार को रेप्ट हुए इस समय कारन रघु की कार को फॉलो कर रहा था. दोनों hi कार के पहिये तेज़्ज़ रफ़्तार में घुमते हुए अपनी मंज़िल तक आगे बढ़ रहे थे. आधी रात में जहा लोग सोने लगते है वही दुनिया में बाहर न जाने क्या क्या चलता रहता है इसकी खबर उन् अंदर रह रहे लोगो को नहीं रहती. कुछ ऐसा hi हाल यहाँ अभी था.

कारन अभी अपनी मेरसेदेज़ ड्राइव कर hi रहा था जब अचानक hi कार की फ्रंट डेस्क पर रखा करा का फ़ोन बज उठा.

*बीप* *बीप*

'हँ!?'

उसने अपने लेफ्ट हैंड से करा का फ़ोन चेक कर जैसे hi देखा तोह पाया की किसी अननोन नंबर से उससे मैसेज आया हुआ था.

'मैसेज!?'

कुछ सोच के उसने वो मैसेज खोल दिया, और उसके ऐसा करते hi उससे एक फोटो नज़र आयी. पर वो डौन्लोडेड नहीं थी.

जैसे hi उसने डाउनलोड कर उस फोटो को देखा तोह मानो पेर्रो टेल ज़मीन खिसक गयी थी उसके.

उस फोटो में वीर एक चेयर से खून से लथपत बंधा हुआ था. आधी फटी हुई उसकी वाइट शर्ट, बिखरे हुए बाल, त्वचा में कट्स और कई जगह गहरे घाव. और खासकर उसके चेस्ट का वो खून से सना हुआ वोँड जो शर्ट के अंदर था.

'सीईट्टट्ट्ट्ट!!!!'

फोटो देखते hi कारन को जिस बात का डर था वही हुआ. वीर कब्ज़े में था और उन् लोगो ने कोई कसार नहीं छोर्री थी वीर की खातिरदारी करने में.

और उस फोटो के ठीक नीचे ये भी लिखा हुआ था की वीर को बचाना है तोह अकेली आ जाओ. ध्यान रहे कोई पुलिस या होशियारी नहीं, अकेली मतलब अकेली.

'फ़क! ी कनेव आईटी!'

*स्लैम*

खीजते हुए कारन ने अपने स्टीयरिंग पे जोरर से हाथ पटका.

उसने करा से उसका फ़ोन केवल इसलिए माँगा था क्युकी उससे लगा था की शायद...

शायद उसकी बहिन को थ्रेट्स पहुचाने वाला आदमी, यानी की स्लोगन कहो फिरसे कोई थ्रेट उसकी बहिन को भेजे. बस इसी को सोच के उसने करा से उसका फ़ोन माँगा था.

और वही हुआ, थ्रेट तोह आया hi था पर उस से भी टेंशन वाली बात ये थी की उनके पास वीर था. यानी की अभी पलड़ा उनका भारी था.

'मुझे प्रिटेंड करना होगा की में दी हु.'

उसने सोचते हुए करा के ह फ़ोन से उसी नंबर पर मैसेज लिखे के भेजा, "K-Kaha!? कहा आना है मुझे?"

और जैसे उसकी ये तरकीब काम कर गयी. क्युकी वह से अगले hi पल एक एड्रेस लिख के आ चूका था.

'बिंगो!'

बिना फिर कोई पल गवाते हुए कारन ने आगे चल रहे रघु को फ़ोन लगाया और उससे साड़ी बात बता दी.

रघु : बहुत बढ़िया! कुछ नहीं से तोह काम से काम ये अच्छा है की हमे उनके हिडौट के बारे में पता लग गया. अब बस हमे एप्रोच बहुत hi सावधानी से करना होगा.

कारन : हाँ!

और कुछ hi शान में वो दोनों मिरर गैलरी के स्थान पर पहुँच चुके थे. दोनों रघु और कारन की मुलाक़ात जस्सी से हुई जो वही ठहरे अपनी टीम के आने का वेट कर रहा था. की शायद किसी को वीर के बारे में कुछ पता चला होगा.

पर कोई फायदा नहीं, न hi जस्सी की टीम और न hi किशोर की टीम को कुछ पता लगा था. किशोर की टीम तोह बस टाइमपास करने के लिए गयी थी शायद. क्युकी किशोर ने खुद कह के रखा था, दूर दूर से बस वही बने रहो, बाकी वीर को बचाने की ज़रुरत नहीं है.

पर कारन की खबर ने जैसे एक नयी आस जगा दी थी उनमे.

जस्सी : बहुत अच्छे! पर तुम यहाँ क्यों आ गए?

कारन : वो अभी इम्पोर्टेन्ट नहीं है. इम्पोर्टेन्ट ये है की... अब हम आगे कैसे बढे?

जस्सी : हम्म~ फॉलो में! एवरीवन!!!! में आगे आगे चलूँगा... और तुम सब... मेरे पीछे पीछे आओगे. क्लियर है?

"हाआनंनं!" सभी के एक साथ चिल्लाने की आवाज़ आयी तोह जैसे एक नया जोश सा भर गया था वह उन् आदमियों में.

जस्सी : हमे किसी भी हालत में वीर को बचाना है. ोकाययय??

"हांण!!!" एक बार फिर, ुचि आवाज़ में उनका शोरर वह गूँज गया.

यदि आज वीर ने करा को न बचाया होता तोह जस्सी शायद इतना तत्पर नहीं रहता अपने काम में. पर वीर दो बार करा की मदद कर चूका था. इंसानियत नाम की भी कोई चीज़ होती है जिससे जस्सी भली भाति जानता था. आज वीर को बचाना ज़रूरी था.

और इसलिए, ये सभी जस्सी को फॉलो करते हुए निकल पड़े. पर इसी बीच सुहाना के जो आदमी थे, यानी के दिव्या द्वारा भेजे गए आदमी. जब उन्होंने देखा की जस्सी और बाकी सभी कही जा रहे है तोह वो भी उनके पीछे पीछे चल दिए.

स्लोगन को यहाँ नहीं पता था की न जाने कितने लोग उसके अड्डे की तरफ बढ़ रहे थे.

Slogan's हिडौट...

इधर स्लोगन ने अपने हिडौट पर वीर की चाँद तस्वीरें खींच कर उन्हें करा के फ़ोन पर भेज तोह दिया था पर...

पर करा का फ़ोन इस वक़्त करा के नहीं बल्कि उसके छोटे भाई के पास था. और इस बात से स्लोगन बेखबर था.

वो सभी वीर को अकेला चोरर थोड़ी देरर वीर से दूर बैठ अपनी बातो में लगे हुए थे.

और इधर वीर किसी और hi स्टेट में जाने की तैयारी कर रहा था.

[Mein... Mein ON kar rahi hu. Okay!?]

पारी Beowulf's ब्लेस्सिंग्स को ों करने की बोल रही थी. वीर ने बस एक बेहद hi हलकी सी नोद दी.

और...

स्विच टॉगल हुआ और Beowulf's ब्लेस्सिंग्स ों हो गया.

उसके ों होते hi, वीर की सासें और तेज़्ज़ हो गयी, एकदम से उसका शरीर गरमाने लगा और आँखें लाल सी होने लगी. मानो जैसे वो कई दिनों से सोया न हो.

[Your breathing has increased drastically... Blood flow is increased too, Body heat ho rahi hai boht tezz, Redness in eyes... Bas thodi derr... Dekho, timer chal raha hai. Tum ye state keval 25 minutes ke liye maintain kar sakte ho. Uske baad ye cooldown hone lagega.]

पर वीर तोह अब जैसे रिस्पांस देने की हालत में भी नहीं था. उसका सीने जल्दी जल्दी इतनी जोरर जोरर से ऊपर नीचे हो रहा था जैसे मानो वो कोई अस्पताल में आया मरीज़ हो.

जब वही खड़े एक आदमी ने वीर को देखा तोह बॉहे सिकोड़ के वो वीर के नज़दीक आया और हाथ से उसके शरीर को धकेल के उस से बोलै,

"ए? क्या कर रहा है ये? हँ? लम्बी लम्बी सासें क्यों ले रहा है?"

फिर जैसे उससे कुछ सूझा तोह वीर के शरीर पर हाथ लगा के उसने देखा और इतना गरम शरीर का तापमान पाते hi उसके हाथ झटके से पीछे हो गए.

वो अपने साथियो की ऑर्डर मुड़ते हुए चिल्लाया,

"अबे इसका तोह पूरा शरीर जल रहा है!"

"जलने दे!! साले को बत्ती दी है न तोह पिट पिट के उसका शरीर गरमा गया है. हाहाहाहा~"

"हहहहहह~"

और वो ठहाके लगा के हस्सन लगे.

[These bastards...]

एक बार और उस आदमी ने वीर को धकेला, पर जस बार उसके चेहरे को ऊपर उठाया तोह वीर की एकदम खून के सामान लाल आँखें देख उसकी गांड hi पहात गयी. वो फिरसे पलट के बोलै,

"अबे! अबे इसकी आँखें तोह एकदम लाल हो राखी है."

"हाँ तोह बने रहने दे. साले को सोने नहीं दे रहे है न तोह लाल तोह होएंगी hi. और अभी कुछ देरर में कुछ पीला भी होने वाला है उसका. हाहाहाहा~"

"हाहाहाःहाहा~"

और वो सभी एक बार फिर जोरर जोरर से हस्सन लगे. पर तभी...

*खाआछःहःहःह*

आदमी : !???

*Whoooooooooooooooshhhhhh*

*थूऊऊऊडड़डडडडडड*

"हँ!??"

अचानक कुछ हुआ. कुछ ऐसा जिससे बस उस आदमी ने देखा होते हुए और उसके बाद वो कुछ करने की स्थिति में hi नहीं बच पाया था.

पीछे मौजूद लोगो को तोह बस सुनाई दिया. अचानक से आयी आवाज़ पर ध्यान देते हुए जैसे hi उन्होंने मुद के देखा तोह अब उनकी रीढ़ की हड्डी तक बदन में रौंगटे खड़े हो चुके थे.

जिधर वीर पहले कुर्सी में बंधा हुआ था. उधर अब केवल वो कुर्सी ज़मीन पर पड़ी हुई थी. ऊपर वायर से जो लेद बल्ब लटक रहा था वो जोरर जोरर से वायर के संग इधर से उधर हो रहा था.

और जो आदमी वीर के पास उससे चेक करने गया था. वो ज़मीन पर पड़े इधर से उधर हो रहा था. और उसके हाथ उसके गले पर थे.

ध्यान देने पर पता चला की..

उसके गले में वही रस्सी बंधी हुई थी जिसने वीर को बाँध रखा था. पर...

वीर गायब था.

ये दृश्य देख के उन्हें पल भर के लिए ऐसा लगा जैसे मानो उन् सभी ने किसी भूत को देख लिया हो.

पल भर पहले hi उनका दुश्मन वह कुर्सी में बंधे हुए था और पल भर बाद hi...

वो गायब था, और वह पर उनका साथी जो अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा था केवल वही दिखाई दिया उन्हें. रौंगटे तोह खड़े होने hi थे.

ऐसा लगा जैसे मानो एक हवा का झोका आया और सब कुछ बदल दिया. अब उन्हें क्या पता था की ये हवा का झोका नहीं था बल्कि आंधी थी...

जो खुद वीर था!

"अबीबीयीय!!!"

उनमे से एक चिल्लाया और उसके साथी सभी भागते हुए अपना सारा काम चोरर उस गिरे हुए आदमी के पास आये.

एक ने आके सबसे पहले हवा में झूल रहे बल्ब को रोका और उसके बाद उन् सभी ने उसके गले में टाइट बंधी रस्सी को लूसे किया.

"ोईए! क्या हुआ? कहा गया वो बहनचोद? आईए!!! तुम सब ढूंढो रे, यही कही लुका होगा. सामानो के पीछे चेक करो! हराम खोर भागने न पाए!"

उनमे से एक ने कहा. जो गिरा हुआ था वो रस्सी खुलते hi जोरर जोरर से सासें लेने लगा. पल भर में मौत दिखाई दे गयी थी उससे अपनी.

आदमी : क्या हुआ बेटीचोद कुछ बोल!!!

पर वो आदमी तोह कुछ बोल hi नहीं रहा था. उसने जैसे भूत देख लिया था. उससे याद था की वो वीर के चेहरे को उठा के उसकी लाल आँखों के बारे में मज़ाक सुन्न हस्स रहा था और तभी...

तभी न जाने क्या हुआ था...

पर वीर उस पर एकदम से उचकते हुए झपटा और सीधा उसकी पीठ पर चढ़ उसके गले में वही रस्सी कस्सी और यु अगले hi शान उससे धकेल के कही छुप गया.

उससे क्या पता था की जब सब वीर का मज़ाक उड़ा रहे थे तब वीर अपने हाथो को एडजस्ट करके उन् रस्सियों के लूप्स को एक एक करके बाहर निकाल रहा था.

और जब बस आखिरी लूप बचा हुआ था तोह उसने वो निकाला नहीं, बल्कि अपने शेयर फाॅर्स के साथ झटके से उस रस्सी को hi घच्च से चीयर के तोड़ दिया था.

ये सब कुछ इतनी तेज़्ज़ हुआ था की वो आदमी कुछ कह hi नहीं पाया था. और अब तोह मानो जैसे वो सदमे में जा चूका था. वो दृश्य उसके लिए बोहत hi भयंकर था. लाल आँख लिए एक बाँदा आपके ऊपर उचक के झपट जाए तोह आदमी डर hi जाएगा.

यहाँ उनके एक लीडर ने सभी को वीर को ढूंढ़ने के आदेश दे दिए थे.

हिडौट बड़ा था. और जगह जगह कुछ न कुछ सामान रखा हुआ था. कही धेरर सारे बड़े बड़े कंटेनर्स तोह कही खुले में कुछ बोरिया राखी हुई थी. कही बड़ी बड़ी कुछ मचिनेस तोह कही लकड़ियों की सिल्लियां. कुल मिलाके छुपने के लिए कई जगह थी.

और वो अपने अपने हथियार निकाल वीर को उन् जगहों में ढूंढ़ने लगे. पर अब तोह जैसे गेम पलट चूका था.

यहाँ एक अकेला बाँदा रश कर रहा था उनपे. और वो भी स्ट्रैट ों नहीं बल्कि दिमाग से.

भले hi वीर दिमाग से रश मार रहा था पर...

उसका दिमाग जैसे कुछ सुन्न hi नहीं रहा था इस वक़्त. क्युकी पारी काफी देरर से उससे चिल्लाये जा रही थी की यही सही मौका है भागने का. भागो!

पर वीर के इरादे कुछ और hi लग रहे थे. न hi वो कुछ बोल रहा था, न hi कुछ सुन्न रहा था.

और पारी बेचारी बस किस्मत को hi दोष दे सकती थी.

[Damn ittt!!! Yadi Card me +50% healing nahi hoti toh tum behosh ho gaye hote pakke se. Ussi ke kaaran tumhaari bleeding ruki hui hai. Wo balance kiye hue hai. Par Card ke OFF hote hi... Noooo! You have to run Veer!!!!!!]

लेकिन वीर पर पारी की कोई भी बात का असर नहीं हो रहा था.

[Shiiiittt!!! He's not listening to me!]

और उसके बाद...

*थूऊऊऊडड़ड़*

"हहहह!?"

एक और आवाज़ आयी और जैसे hi आदमियों ने उस आवाज़ की ऑर्डर देखा तोह पाया की उनका एक और साथी नीचे पड़ा हुआ था और अपना सर्र पकड़ इधर से उधर चिल्ला रहा था.

"Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh"

इस बार फिर, वीर का कोई अत पता नहीं था. वो तोह जैसे अँधेरे में से निकल निकल के एक एक को गिरा रहा था.

और नतीजा, उनके लीडर का गुस्सा बढ़ना.

"मादरचोद! बाहर निकल हरामी! कहा छुपा है?? तुम सब में से कोई एक... बॉस और स्टीव भाई को जल्दी बता के आओ."

"H-Haan भाई!!!"

और एक बाहर निकल गया. क्युकी स्टीव और स्लोगन बाहर के एरिया में थे. इस बात से बेखबर की अंदर किस टाइप का रश चल रहा था.

पर जैसे अभी तोह उन्हें और भी कुछ देखना बाकी था.

*क्लिक*

"हहहहह?"

न जाने वह कौन सी मचिनेस राखी हुई थी. पर उनके साइड में बोहत बड़े बड़े फंस लगे हुए थे.

और जैसे hi वो ों हुई, उनके साइड में लगे फंस घूमने लगे. एक नहीं, ऐसी कई मचिनेस थी वह जो बारी बारी ों हो चुकी थी.

वो इस क़दर से राखी हुई थी की बीच में टेबल पर जो खुले ताज़ा ताज़ा नोटों की गड्डिया राखी हुई थी ginn'ne के लिए. एक बार में तेज़्ज़ तर्रार हवा का झोका उन् फंस में से आया और टेबल पर रखे सारे पैसे या पैन जो भी कागज़ का था सब हवा में उड़द चले.

मचिनेस इस क़दर जमी हुई थी की वो उड़ते हुए पैसे एक hi जगह पर गोल गोल घूमने लगे.

जैसे मानो कोई बवंडर सा आ गया हो.

"अबीबीएयैयययय!!!"

उनका लीडर चिल्लाया और सभी के सामने हवा में बस उड़ते हुए पैसे hi दिखाई दे रहे थे.

जैसे मानो वो पैसे नहीं, मधुमक्खी थी जो उनके आस पास मंडरा रही थी.

अपने हाथो से व्यर्थ hi प्रयास करते हुए वो पैसे हटाने लगे. पर वीर के लिए जैसे काम आसान हो चूका था.

वो एक के पास जाता और...

*पूंऊऊऊववववव*

*थुड़*

*पूंऊऊऊववव*

एक बैक फिस्ट पंच सीधा आदमी की नाभि पर...

"गुहहहह!!!!"

180° डिग्री टर्न लेते हुए दूसरा बैक फिस्ट पंच उसके निचले जबड़े पर...

"गवाकककहहह"

और फिर एक शानदार इनसाइड क्रिसेंट किक जिसमे उसका दाया परर घूमता हुआ आया और उसी जबड़े पर फिरसे वार किया.

"आआआआघठ्ठ"

तीन कॉम्बो में hi वो बाँदा धेरर था. इस बार वीर कोम्बोस डिलीवरी कर रहा था. हे वांटेड तो मेक सूरे की उनमे से एक भी उठने न पाए.

वीर पर जैसे कोई भूत सवार हो गया था. वो एक जगह से दूसरी जगह इतनी तेज़्ज़ी से स्विच कर रहा था. ऊपर से कोई भी वेस्टेड मूव नहीं था. सभी एकदम सटीक और पोटेनटिअल्ली हार्मफुल थे.

"तेरी बहनचोद...."

*बंग*

*बंग*

*बंग*

जिनके पास गन्स थी वो रुके नहीं, और उसी पैसो के बवंडर में उन्होंने वीर को जहा देखा वह फायर कर दिया. पर...

वीर की अगिलिटी 50% बढ़ चुकी थी. उनके रिएक्शन टाइम से, वीर की खुद की स्पीड ज़्यादा था.

फायर करने का कोई फायदा नहीं था. वीर स्थिर नहीं था. वो तोह जैसे एक बन्दे से दूसरे बन्दे पर अपने हाथ साफ़ कर रहा था. और ज़्यादा देरर वो एक बन्दे के पास रह hi नहीं रहा था.

"मादरचोदो... ुघठ!!! ये... ये मचिनेस बंद करो चुतियो...."

चलो, किसी को तोह ध्यान आया.

इधर बाहर स्लोगन और स्टीव कुछ बात कर रहे थे जब अंदर से एक दौड़ते हुए आया...

आदमी : दादा... दादा... वो... वो...

पर इसके पहले की वो कुछ कह पाटा स्लोगन ने उससे इशारे से शांत रहने को कह दिया.

स्लोगन : तुमने सुना स्टीव?

स्टीव : जी दादा!

स्लोगन : गाडी की आवाज़.... रुकने की...

स्टीव : जी! में देखता हु, आप अंदर जाइये.

स्लोगन : पुलिस!?

स्टीव : नहीं दादा! पुलिस यहाँ नहीं आएगी. आने hi नहीं देंगे हमारे आदमी उन्हें. में देखता हु...

आदमी : दादा वो... वो...

स्लोगन (खीजते हुए) : क्या हुआए!??

आदमी : वो लड़का हमारे चंगुल से चूत गया.

बस! स्लोगन का इतना sunn'na था की उसने सामने राखी टेबल पर इतनी जोरर से गुस्से में लात मारी की वो पूरी टेबल hi पलट गयी.

स्लोगन : मादरचोदो!!!! कर क्या रहे थे तुम सब अंदर??? कहा गया वो?????

आदमी : W-Wo... दादा... वो... वो मार रहा है.

स्लोगन : हँ!??

ऐसा लगा जैसे स्लोगन ने कोई चुटकुला सुना था.

स्लोगन : क्या कहा?

आदमी (दररते हुए) : वो... वो... वो एक लड़का हम सब पर भारी पद रहा है दादा. पता नहीं क्या हुआ... पर अचानक से hi उसकी रस्सी खुल गयी और वो हम सब पर झपट पड़ा. और वो पैसे अचानक से हवा में...

स्लोगन (गुस्से में) : क्या बड़बड़ा रहा है...!?

पर अभी वो अपना वाक्य पूरा रखता तभी उसके कानो में वो आवाज़ पड़ी...

कोप्तेर की आवाज़...

और स्लोगन का मुँह गुस्से में और भी भयानक हो चला.

स्लोगन : किशोररररर!!!!!!

उसकी समझ में नहीं आ रहा था की जब करा को एड्रेस भेजा गया था तोह भला किशोर का कोप्तेर यहाँ कैसे आ गया? वो करा को भली भाता जानता था. वो जानता था की करा किसी को भी नहीं बताएगी और अकेली hi आ जाएगी.

क्या गड़बड़ हो गयी? कहा गलत रह गया वो? क्या उससे दी गयी इनफार्मेशन गलत थी? की करा वीर के प्रति अत्त्रक्टेड है? या करा ने hi सभी को बता दिया था?

उससे कोई भी बात समझ नहीं आ रही थी. आती भी कैसे? करा का फ़ोन तोह कारन के पास था, जिस से स्लोगन का पूरा प्लान पलट चूका था बिना उसके पता लगे hi.

पर ये समय उन् व्यर्थ प्रश्नो पर अब जूझने का नहीं था. समय था एक्शन लेने का.

'इस बार में तुम्हे बताता हु किशोर. एक झटका लगेगा आज तुम्हे.'

स्लोगन ने बस एक कॉल किया और फिर उस आदमी के साथ अंदर चला गया.

स्टीव बाहर आया तोह उससे जिस बात का डर था वही हुआ. धेरर साड़ी गाड़िया आके लगती जा रही थी. और उनमे से धेरर सारे बन्दे निकलते जा रहे थे.

उसकी हवा तोह जब टाइट हुई जब कोप्तेर को हवा में उड़ते हुए देखा उसने.

"इसकी... दादा को यहाँ से ले जाना पड़ेगा. जल्द hi..."

इधर जस्सी ने फुल ों अटैक करने बोल दिया था. उससे पता था की ये मूव बोहत hi राश था पर शायद आज उसकी किस्मत उसके साथ थी.

क्युकी...

क्युकी वीर इस वक़्त उनके क़ब्ज़े में नहीं था. वो तोह अलग hi धूम मचाये हुए था अंदर.

और ऐसे टाइम पर बाहर से रश मारना अंदर की ऑर्डर... ये जैसे परफेक्ट स्ट्रेटेजी बन्न गयी थी अपने आप.

ऑफ गार्ड कैच कर लिया था स्लोगन और उनके साथियो को उन् सभी ने. स्लोगन की पूरी टीम इस अचानक हमले के लिए रेडी नहीं थी. ना hi वीर के हमले के लिए.

पर...

*Whooooooooooooossssshhhhh*

अनहोनी होना जैसे लिखा हुआ था. हवा में जो कोप्तेर उड़द रहा था वो...

*Kaboooooooooooooommmmm*

एक तेज़्ज़ धमाका हुआ और उस कोप्तेर के चीथड़े उड़ते हुए पालक झपकते hi ज़मीन पर गिरने लगे.

रघु : नाहीईई!!!!

जस्सी : डमनणणन ित्त्त!!! इनके पास ये कहा से...!?? शीट! इललीगल वेपन.... दमन यू स्लोगन!!!

कारन : शीट्ट्ट्ट!!! वो लोग अंदर...

रघु : वो... वो गए कारन.

कारन : दमन आईटी!!! डैड... डैड बोहत गुस्सा होने वाले है. फिर भी... प्लीज! कोई वह जाओ... संभल के... शायद वो ज़िंदा हो...

हवा में जो कोप्तेर उड़द रहा था. उसके लिए स्लोगन ने शायद यही प्रबंध किया हुआ था.

राकेट लांचर!

जी हाँ, अभी अभी कोप्तेर को जिसने उड़ाया था वो एक राकेट लांचर की मिसाइल hi थी. मिसाइल हिडौट के ऊपरी चोरर से लांच की गयी थी. और ये मिसाइल...

हेलीकाप्टर के पास जैसे hi आयी, उसके अंदर से निकलती हीट की तरफ अत्त्रक्ट होते हुए सीधा हेलीकाप्टर से जा भिड़ी.

और फिर धमाका....

जैसे मानो आतिशबाज़ी सी हो रही थी आसमान में. ये कहना तोह मुश्किल hi था की अंदर मौजूद पायलट बचे भी होंगे या नहीं? ऑब्वियस्ली, वो शायद मर्डर चुके थे.

ये वेपन इललीगल था. और स्लोगन के पास इसकी एक्सेस थी, ये बात खुद बता रही थी की उसकी पहुँच कहा कहा थी. ये बताने की भी ज़रुरत नहीं की उसका मैं बेस तोह फॉरेन में था. और यहाँ वो सालो बाद लौट के आया था. उसके बावजूद वो इतनी दम रखता था की किशोर जैसे पावरफुल आदमी को भी हिला के रख दे.

यदि यही लड़ाई स्लोगन के अपने अड्डे जो की विदेश में था उसमे हो रही होती तोह किशोर के जीतने का सवाल hi नहीं था.

जस्सी क्या, वह मौजूद सभी ये बात जानते थे की राकेट लांचर किस किस्म का वेपन था. वो तोह अच्छा हुआ की स्लोगन का हिडौट ऐसी जगह था जहा दूर दूर तक किसी को ये खबर भी नहीं थी की एक उड़ता हुआ हेलीकाप्टर यु तेहेस महेस हो चूका था.

जस्सी : यदि इसके पास और मिसाइल्स हुई तोह हम दिक्कत में पद जाएंगी. और यदि इसने एक भी हम पे एआईएम करि... तोह...

रघु (गुलप्स) : तोह अब!?

जस्सी : हम वैसे hi आगे बढ़ेंगे. सभी लोग... फॉलो में!!! रिस्क है बूत... देखा जाएगा...

और एक बार फिर जस्सी का आर्डर सुन्न आगे बढे. दोनों hi तरफ से आदमी भीड़ पड़े. जिनके पास गन्स थी वो गन्स से फायरिंग शुरू कर दिए. एक फुल स्केल रश था ये.

और उनकी लड़ाई के बीच, रघु, जस्सी और कारन अंदर की ऑर्डर जाते जा रहे थे.

जस्सी : तुम्हे पता है न?

रघु : हाँ!

जस्सी ने कुछ पूछा तोह रघु उसका इशारा समझ गया और कारन के समीप होक चलने लगा. कारन के पास कोई वेपन नहीं था. प्लस वीर से भी ज़्यादा ज़रूरी अभी उसकी सेफ्टी थी.

***

इधर अंदर वीर अपने काम में लगे हुए था जब मचिनेस बंद हुई और हवा में उड़ते पैसे, कागज़ ज़मीन पर गिरे तोह वीर सबसे पहले उनके लीडर पर झपटा.

और उससे पकड़ के 360° टर्न लेते हुए फुल फाॅर्स के साथ उस आदमी को सामने की दीवार में भेद दिया.

*कराआआआस्स्स्सस्शह्ह्ह्ह*

वो आदमी दीवार में लगे हुए कुछ रैक्स में जा के भिड़ा और लोहे की वो पत्तिया सीधे उसकी नाक में जाकर लगी तोह पूरे रूम में उसकी दर्द भरी चींख गूँज उठी.

"अअअअअअअअरररररग्घहहहहहहहह..."

सब कुछ अस्त व्यस्त कर के रख दिया था वीर ने. वो एक जगह ठहर hi नहीं रहा था जिस कारण से उस पर एआईएम करना फ़ालतू hi था.

जैसे hi स्लोगन अंदर आया, अंदर की हालत देख उससे बड़ा झटका लगा पर उस से पहले की वो इस हालत पर अपने विचार रख पाटा तभी...

तभी साइड से उसके ऊपर कोई कूड़ा और उससे ज़मीन पर रोल करवाते हुए उसके ऊपर बैठ गया.

और अब...

स्लोगन के सामने वीर का चेहरा था. वो भयंकर चेहरा जिस पर एक बड़ी hi खौफनाक सी शैतानो वाली मुस्कान थी. आँखें एकदम खून के माफ़िक़ लाल, जैसे किसी का खून होते हुए देखने का इंतज़ार कर रही हो.

[Found him... This bastard!!! Don't kill him! Tumhe koi mission nahi mila hai. So...]

पर पारी की बात वीर कहा सुन्न रहा था?

वीर ने स्लोगन के गले को जोरर से भींचा जैसे उससे वही डैम घोट के उससे मार देगा.

और स्लोगन अचानक से इस स्थिति से बचने के लिए अपने हाथो से वीर के हाथ चुर्राने लगा.

"ुघठ...'"

[Noooooooo!!! D-Don't..... Don't.....]

वो चिल्लाई...

और शायद उसकी पुकार किसी ने सुन्न ली.

क्युकी अगले hi पल वीर के ऊपर पीछे से स्टीव कूड़ा और दोनों hi ज़मीन पर रोल करते हुए एक दूसरे को जकड के एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश करने लगी.

हड़बड़ी में स्लोगन उठा और जेब से रिवाल्वर निकाला उसने...

स्लोगन : स्टीवेई!! पकड़ के रख मादरजात को... साला एक छछूंदर में इतनी हिम्मत आ गयी आज? आज तोह ये यही मररेगा... पकड़ के रख हराम खोर को...

स्टीव कोशिश तोह पूरी कर रहा था लेकिन...

वीर जैसे उसके सारे त्रिएस फ़ैल करता जा रहा था.

और तभी...

*डिंग*

[2 minutes left before turn OFF.]

जिस बात का डर था वही हुआ. केवल 2 मिनट hi बचे हुए थे कार्ड को टर्न ऑफ होने में.

[Noooooo.... Shitttt!!! Aise me... No no noooooo!!! Jaldi se... Jaldi se isse hata ke Slogan pe focus karo. He has the gun.]

स्लोगन इधर इंतज़ार कर रहा था स्टीव का. की स्टीव वीर को ऐसी पोजीशन में लाये जिस से गोली मारने में आसानी हो. कही स्टीव को गोली न लग जाए.

और स्टीव शायद कामयाब हो रहा था.

वो वीर के नीचे थे और पीछे से उसके गले में डेडलॉक मारे हुए था. आस पास के बन्दे दर्द से कराह के उठे और मदद के लिए आगे बढ़ रहे थे.

स्लोगन के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ चुकी थी, क्युकी वीर की वही चोटिल छाती अब उसकी नज़रो के ठीक सामने थी.

बस ट्रिगर दबाने की देरर थी.

स्लोगन : गुडबाय वीईएएररररर!!!

और ट्रिगर डाब गया...

*बाआआआंणगगगगगगग*

"अअअअअअअअअरग्घहहहहहहह"

खून निकलना शुरू हो गया.

स्लोगन : T-Tummmm.... !!!?

"हाँ में!!!" और तभी वही से आवाज़ आयी जस्सी की.

जिसके हाथ में रिवाल्वर था. और वो खून वीर का नहीं बल्कि स्लोगन के हाथ से बह रहा था क्युकी जस्सी ने एंटर होते hi स्लोगन को देख उस पर निशाना लगा के गन चला दी थी. पर निशाना थोड़ा चूका और वो बुलेट जाके स्लोगन की ब्याह में जा घुसी.

कारन : वीईएएररर!!!

अब स्लोगन का खेल ख़तम था ये सोच जस्सी और रघु पूरी टीम समेत आगे बढे पर...

*शूऊउत्तत्तत*

"हहहहहह!?"

अचानक hi घप्प अँधेरा हो गया. किसी ने लीवर गिरा के पूरी इलेक्ट्रिक सप्लाई hi बंद कर दी थी.

और जैसे स्लोगन को अपना रास्ता मिल गया था. वो चिल्लाया...

"सटीईवीएएए!!!"

स्टीव कुछ नहीं बोलै. उससे पता था क्या करना है.

वीर को वही चोरर वो भागा. उन्हें तोह जैसे अँधेरे में भी रास्ता राटा हुआ था.

और इधर अँधेरे में जस्सी समेत बाकी सभी वीर के पास पहुचे.

कारन : वीएएएएएरररर!

*डिंग*

[Beowulf's Blessings Turning OFF.]

*डिंग*

[Beowulf's Blessings has been turned OFF.]

*डिंग*

[You cannot activate Beowulf's Blessings for the next 24 hours.]

और इसी के साथ वीर की आँखों में से वो लाली हटने लगी. सासें थमने लगी...

और...

उसकी आँखें बंद होने लगी. ज़ाहिर था की उसका बेहोश होना बनता hi था.

आखिरी शब्द उससे जो सुणाई दिए वो थे...

कारन की आवाज़, "वीईईएरररररर!!!"

और पारी की आवाज़, "लिस्टेन्नन्न... Don't जो ईंटो थे..."

पर उन् बातो को पूरी sunn'ne से पहले hi वो गहरी बेहोशी में चला गया.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

रात में जाग जाग के काफी कुछ चंगेस करते हुए लिखा है. लिखे थोक के जाने का और अपने व्यूज रखने का. फेमिग्लिआ अर्च की शुरुआत हो चुकी है. पैरेलल में स्लोगन अर्च चलेगा और साथ hi ख़तम भी होएगा.


धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 66~ ग्रीटिंग्स!

अब तक...

उसकी आँखें बंद होने लगी. ज़ाहिर था की उसका बेहोश होना बनता hi था.

आखिर शब्द उससे जो सुणाई दिए वो थे...

कारन की आवाज़, "वीईईएरररररर!!!"

और पारी की आवाज़, "लिस्टेन्नन्न... Don't जो ईंटो थे..."

पर उन् बातो को पूरी sunn'ne से पहले hi वो गहरी बेहोशी में चला गया.


अब आगे...

"तोह ये सब हुआ हाँ!?"

ये आवाज़ थी किशोर की, जिससे सब कुछ रघु और जस्सी वह खड़े होकर बता रहे थे.

दरवाज़े के बाहर hi कारन छुप के खड़ा हुआ था और उनकी बातें सुन्न रहा था.

उन्हें स्लोगन के हिडौट से लौटे कुछ hi देरर हुई थी अभी और रघु और जस्सी पूरी रिपोर्ट दे रहे थे किशोर को.

रही बात वीर की तोह कारन ने उससे सही जगह पहुँचा दिया था फिलहाल के लिए.

जस्सी : जी!

किशोर : बेवक़ूफ़ कही के...

जस्सी : हँ!??

रघु : !??

किशोर : नहीं! तुमसे नहीं! कुछ नहीं! तोह? और क्या हुआ? कुछ और बात?

जस्सी : नहीं सर! बस वही कोप्तेर hi बस...

किशोर : हम्म~ ठीक है! तुम लोग जा सकते हो.

और रघु जस्सी हाँ में सर्र हिलाते हुए वह से निकल गए. रूम के बाहर आते hi उन्हें कारन खड़ा हुआ दिखाई दिया.

रघु : मेरी...

कारन (खुसपुसाते हुए) : हाँ हाँ, मिल जाएगी तुम्हे तुम्हारी सिगरेट.

रघु (स्माइल्स) : बस!!!! यही sunn'na था. चल जस्सी!

जस्सी : हम्म~

और वो दोनों वह से निकल गए. किशोर के रूम की लाइट्स भी बंद हो चुकी थी. पर कारन वही खड़ा हुआ था, और कुछ सोच रहा था.

'डैड की भेजी गयी हेल्प. तेरे वास् समथिंग रॉंग. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. मुझे ऐसा क्यों लग रहा था की वो सारे आदमी पीछे पीछे खड़े हुए थे. और केवल मेरी रघु और जस्सी की हेल्प कर रहे थे. खुद से अग्ग्रेसिवे होक आगे बढ़ उन् ने एक्शन नहीं लिया. व्हिच इस स्ट्रेंज... कुछ बात है...'

***

नेक्स्ट डे...


8:26 पं...

'हम्म!?'

'ागरगठ! किधर हु में!?'

'हँ? ये... ये हाथ पर...!?'

अपनी आँखों को झपकाते हुए जब वीर ने अपने आस पास का जायज़ा लिया तोह उससे कुछ समझ नहीं आया ठीक से.

वो लेता हुआ था और उसके सीने पर पट्टी बंधी हुई थी. जगह जगह ड्रेसिंग बंधी थी उसके. थोड़ा दर्द अभी भी था पर रही बात वो कहा था इस वक़्त तोह...

कहना मुश्किल था. क्युकी ये हॉस्पिटल तोह कही से भी नहीं लग रहा था. हाँ, हॉस्पिटल में इस्तेमाल होने वाले इक्विपमेंट्स ज़रूर लगे हुए थे जगह जगह पर लेकिन फिर भी वीर को ऐसा लगा की ये हॉस्पिटल नहीं था.

उसने अपने आप को एडजस्ट कर जब सर्र झुकाते हुए अपने हाथ की ऑर्डर देखा तोह पाया की...

उसकी हथेली पर किसी लड़की का सर्र था. तोह यही भारीपन उससे अपने हाथ पर महसूस हो रहा था.

'हँ!?'

वो थोड़ा चकित था. वो तोह स्लोगन और उसकी पार्टी से भीड़ रहा था. फिर उसके बाद क्या हुआ था? उससे कुछ याद नहीं आ रहा था ठीक से. इतना hi याद था उससे की वो स्लोगन को मारने जा रहा था और फिर वो स्टीव अचानक से उसके ऊपर कूद पड़ा. फिर उस से छीना झपटी होने लगी और उसके बाद उससे जैसे कुछ याद नहीं आ रहा था की क्या हुआ.

पर उस से भी ज़्यादा अभी ये ज़रूरी था की ये उसकी हथेली पर सर्र रख के कौन लेती हुई थी?

जब वीर ने अपना हाथ निकाला तोह उसके हाथो की हलचल से उस लड़की का चेहरा सामने आया.

'A-Arohi दी!???'

मालुम पड़ा की आरोही उसकी हथेली पर सर्र रखे हुए थी इतनी देरर से.

और शायद पारी भी इस वक़्त स्लीप मोड में थी. वर्ण उसके मैं में सोचते hi वो तोह पहले hi अपनी चपर चपर शुरू कर चुकी होती.

वीर के अपने हाथ खींचते hi आरोही की बॉहे सिकुड़ी और उसकी पलके झपकी. वो उठी और वीर की तरफ देखि तोह...

उसने पाया की वीर होश में था और उससे hi देख रहा था.

आरोही : वीईईएररररर!!!

वो हैरत में आगे बढ़ी. और आगे आते हुए फिर अचानक hi ृक्क गयी.

वीर : आरोही दी!?

आरोही : फाइनली! तुम्हे होश आ गया. T-Tumhe केसा महसूस हो रहा है? कही दर्द है? और... और तुमने घर में क्यों नहीं बताया था? हाँ?

वीर : कलम डाउन! कलम डाउन! एक साथ इतने सवाल? में... में ठीक हु अब.

आरोही : हम सब कितनी टेंशन में थे तुम्हे पता भी है?

वीर : सॉरी दी! उम्... वैसे, में कहा पर हु?

वीर ने जब ये पूछा तब hi उसके साइड में लगा पर्दा खुला और एक महिला की आवाज़ आयी,

"तुम मेरे घर में हो."

वीर के सामने एक महिला कड़ी हुई थी. होंठो पे मुस्कान, भूरे खुले बाल, और वो अपने टॉप के ऊपर hi एक डॉक्टर वाली वाइट कोट पहनी हुई थी.

वीर : हँ? आप कौन?

आरोही : ये है मृणाल Ma'am! इन्होने hi तुम्हारा ट्रीटमेंट किया है.

वीर ने फिर ज़्यादा कुछ नहीं सोचा. मृणाल ma'am के बारे में jaan'na hi था तोह उसमे पूछने की क्या ज़रुरत थी भला?

'चेक!'

[Name : Mrinal.

Age : 37

Bio : Mrinal ek kaabil doctor hai. Apne pati aur ek bacche ke saath rehti hai. Pati navy me hai. Aur bacche ki dekh baal ke liye inhone apni job as a doctor chorr dii. Ab keval ghar pe hi clinic khol ke rakhi hui hai.

Favourability : 11

Relationship : Strangers.]

'ओह्ह्ह!'

मृणाल Ma'am को चेक करने के बाद, वीर को कुछ न कुछ आईडिया तोह लग hi गया था उनके बारे में.

वीर : आप!?

मृणाल (स्माइल्स) : में मृणाल! पर उस से पहले ये बताओ की केसा महसूस कर रहे हो?

वीर : थोड़ा दर्द है सीने में. बाकी I'm फाइन!

मृणाल : वाओ! मेने इस से पहले कभी किसी की इतनी स्पीडी रिकवरी नहीं देखि. वोँड को देख के लगा था की 12 घंटे से भी ज़्यादा पहले का घाव है. पर जब बताया गया की ये कुछ देरर पहले का hi था तोह मेरी बोलती hi बंद हो गयी थी. तुम्हारी इम्युनिटी बोहत तेज़्ज़ है. इतनी की... I'm हैविंग डॉब्टस.

मृणाल अपनी आँखें सिकोड़े वीर को कुछ सोचते हुए देखि तोह वीर चिंता में पद गया. कही ऐसा न हो की ये मृणाल ma'am उस से उसकी इतनी तेज़्ज़ हीलिंग के बारे में पूछने लगे. अब वो ये थोड़ी कह सकता था की Beowulf's ब्लेस्सिंग्स ने उसकी हीलिंग 50% बढ़ा दी थी.

उसने खासते हुए थोड़ा नाटक किया और फिर पूछा,

वीर : वैसे... क्या टाइम हो गया? और में यहाँ कैसे आया?

मृणाल (स्माइल्स) : टाइम? तुम कल देरर रात में यहाँ लाये गए थे. और आज नेक्स्ट डे की रात के 8:30 बज रहे है.

वीर : क्याआ?

मृणाल (स्माइल्स) : जी हाँ! यू हैवे ा स्ट्रांग बिल्ड!!

बोलते हुए मृणाल ने उसके नंगे सीने पर अपनी ऊँगली फिराई जहा पट्टी बंधी हुई थी और उसके गाल thap-thapaate हुए फिरसे बोली, "में बाकियो को इन्फॉर्म कर देती हु. थे वांट तो मीट यू!"

और बस वो मुस्कुराते हुए चली गयी.

इधर जब वीर ने पलट के आरोही को देखा तोह आरोही मृणाल को जाते हुए घर के देख रही थी.

वीर : क्या हुआ?

आरोही : कुछ नहीं!

वीर : अब आप बताएंगी की क्या हुआ था? में यहाँ कैसे?

आरोही : हम्म~

वीर : कहिये!

आरोही : कल रात में... करीब 1:45 बजे थे तब रागिनी भाभी को तुम्हारे फ्रेंड कारन ने फ़ोन लगाया था और उन्हें सब कुछ बताया. फिर रागिनी भाभी सभी के साथ यहाँ आयी. वो कारन hi तुम्हे यहाँ लेके आया था. तुम्हारी हालत देख सब चिंतित में थे. भाभी रो रही थी. फिर सुबह जब हो गयी तोह उन्होंने मुझे और तुम्हारी निधि ma'am को बताया. हम सुबह hi आये थे तुमसे मिलने पर तुम बेहोश थे. फिर अभी शाम को आये है सभी.

वीर : वेट! कारन? मेरा दोस्त? सभी? कौन कौन आया है?

आरोही : में, काव्य, दादा जी, प्रांजल, भाभी, सुमन आंटी, उनकी बहु आभा और बेटी सोनाली, वो निधि ma'am और उनकी बेटी जूही और कुछ देरर में वो कारन भी आने वाला है.

जैसे जैसे आरोही नाम गिनाते जा रही थी, वीर का मुँह हैरत के मारे खुलता जा रहा था और आँखें भी फैलती जा रही थी.

'प्रांजल!? व्हाट थे हेलल he's दोंग हेरे?'

वीर : इतने लोग आये है!?

आरोही (नॉड्स) : हम्म~

'गया में! भाभी... शित्त्त! निधि ma'am भी... क्या जवाब दूंगा उन्हें? ज़रूर गुस्सा करेंगी वह.'

वो अपनी सोच में डूबा हुआ था जब उससे अपनी हथेली अपर फिरसे कुछ महसूस हुआ.

आरोही का हाथ!

निगाहें ऊपर कर उसने आरोही को देखा जिसकी आँखें थोड़ी नम्म थी.

आरोही : में... में...

'!??'

बेचारी से शायद कुछ बोलै नहीं जा रही थी. गाला भी रूंध गया था उसका.

आरोही : हमेशा ऐसा क्यों?

वीर समझ चूका था आरोही किस बारे में बात करना चाह रही थी. पर उसके पास इस वक़्त sunn'ne के अलावा कोई और चारा नहीं था. वो ये नहीं कह सकता था की वो कभी दुबारा मुश्किल में नहीं पड़ेगा. और बेशक, आरोही उस से यही चाहती थी की वीर दुबारा इन् मसलो में न पड़े. पर ऐसा तोह नामुमकिन था. वीर अब उस डगर पर था जहा से लौटना नामुमकिन था.

वीर : ी...

आरोही : यू ऑलवेज मेक में साद!

वो सर्र झुकाये खुद की आँखें छुपाते हुए अपने ासु पोछने लगी. पर...

वीर : आरोहियी!

आरोही : !???

बस! बस, एक बार उसका नाम डायरेक्ट अपने मुँह से पुकारने पर आरोही के पूरे बदन में रौंगटे खड़े हो गए. पता नहीं क्या था ऐसा की हर्र बार जब भी वीर उसका नाम पुकारता था तोह बेचारी आरोही के शरीर में कम्पन सा फेल जाता था.

वीर आगे बढ़ा और अपने माथे को उसके माथे से टिका दिया.

वीर : I'm सॉरी! ी कन्नोत प्रॉमिस की में मुश्किलों में नहीं पडूंगा. बूत ी प्रॉमिस की में अपनी और आप सब की केयर करूँगा. अच्छे से!

शायद, अभी के लिए इतने से शब्द hi काफी थे. आरोही ने हाँ में सर्र हिलाया और वीर की हथेली को एक बार फिरसे जोरर से दबाते हुए वो उठी और बाहर जाने लगी.

वो निकली hi थी जब बाहर से दौड़ते हुए अंदर जल्दबाज़ी में रागिनी आयी.

उसकी आँखें लाल थी जो साफ़ दर्शा रही थी की वो रात में सोई नहीं थी.

वीर : भ..!??

पर वीर अपने शब्द पूरे कह पाटा की उस से पहले hi रागिनी आगे आयी और उसको अपने गले से लगा लिया.

उसकी नज़रे जगह जगह वीर के चेहरे तोह कही उसके शरीर की जांच करने में लगी हुई थी.

वीर : M-Mein ठीक हु. भाभी!

वो बैठी और वीर के हाथ को कस के थाम ली.

कुछ देरर तक तोह वो कुछ न बोली, बस लम्बी लम्बी सासें लिए खुद को दुरुस्त कर रही थी. और इस बीच दोनों hi वीर और रागिनी एक दूसरे को hi देख रहे थे.

वीर : में... !???

जब उसकी सासें थमी तोह एक बार फिर वो वीर के गले लग गयी. वीर, बस आश्चर्य में अपनी भाभी को होल्ड किये हुए था.

और तभी, उसके कानो में रागिनी की बड़ी hi धीमी सी आवाज़ पड़ी, "You'll बे पुनिशद लेटर. अभी रेस्ट करो!"

और बस, वीर रागिनी की बात सुन्न मुस्कुराया और अपनी भाभी को एक बार जोरर से फिरसे अपनी बाहो में कस लिया.

रागिनी, न जाने कितनी टेंशन में थी. कल शाम से hi. फिर रात में वो पुलिस के पास गयी, जहा से उससे वीर का कोई पता नहीं चला, फिर रात भर टेंशन के मारे उस बेचारी की नींद उड़द चुकी थी. और जब कारन का फ़ोन उसके पास आया और फिरसे वीर को उस हालत में पाया तोह जैसे वो अंदर से टूट hi गयी थी. कितनी बार और उससे वीर को ऐसे देखना पड़ेगा? बस! इस से ज़्यादा बार के लिए अब वो तैयार नहीं थी शायद.

पहली बार तोह उससे उतना कष्ट नहीं हुआ था पर हर्र गुज़रते दिन, वीर और उसके बीच का रिश्ता मज़बूत हो रहा था. और आज जब उसने वीर को पुनः उस हालत में देखा तोह अंदर इतनी पीड़ा हुई थी उससे की वो कई बार रोई थी छुप छुप के.

अब वीर को होश में देख, इस से बड़ी ख़ुशी की बात अभी रागिनी के लिए कोई नहीं थी. कहना तोह हज़ार बातें चाहती थी वो. वीर को खरी खोटी सुनाना भी चाहती थी. पर वो सब बाद के लिए जैसे उसने बचा के रखा था. अभी, वो सिर्फ इस बात को जीना चाहती थी की वीर उसके सामने था. पूरे होश में और उसकी अपनी बाहो में था.

वीर और रागिनी, दोनों को hi इस बात का पता नहीं चला था की देखते hi देखते कितने करीब आ चुके थे वह.

वीर (स्माइल्स) : भाभी का हुकुम सर्र आँखों पर.

रागिनी भी उसकी बात पर मुस्कुरायी और उठ के जाते हुए बोली,

"बाकी लोग भी बाहर खड़े है. में उन्हें अंदर भेजती हु. और हमारी अधूरी बात, घर पर करेंगे हम."

वीर (स्माइल्स) : जी!

रागिनी बाहर गयी और इस बार उसके दादा जी और प्रांजल अंदर आये. प्रांजल को देखते hi वीर ने अपना गार्ड रेज कर लिया था. ऐसे बनावटी इंसान के सामने बेहतर है की आप एकदम चौकन्ने रहो.

और वही हुआ,

"ओह्ह्ह मेरे भाआईई!!!"

बनावटी रोने की सूरत बनाते हुए प्रांजल आगे बढ़ा और वीर के गले लग गया.

प्रांजल : ये क्या हालत करवा ली तुमने अपनी मेरे भाई? तुम ठीक तोह हो न?

वो अलग हुआ तोह मनोरथ भी वीर के पास आये.

मनोरथ : वीएररर!!

वीर : दादा जी! आप!?

मनोरथ : सुबह आरोही बिटिया ने बताया सब कुछ तोह हम चले आये. मेरे बच्चे ये सब क्या करवा लिया? बाहर रागिनी बिटिया ने बताया सब कुछ. तुम किसी लड़की को चुर्राने गए थे? बीटा!!! में... में जानता हु दुसरो की जान बचाना अच्छी बात है. पर ज़रा अपनी जान का भी तोह ध्यान रखो. हाँ?

वीर : माफ़ करना दादा जी! में आगे से ध्यान रखूँगा.

मनोरथ : रखना hi पड़ेगा तुम्हे...

प्रांजल : दादा जी! सबसे अच्छी बात ये है की वीर सही सलामत है अब हमारे पास है न?

'हाँ बे गीदड़! तेरे मैं में क्या चल रहा है प्रांजल! में अच्छी तरह से जानता हु.'

वीर प्रांजल की साड़ी चिकनी चुपड़ी बातें समझ रहा था.

मनोरथ : बिलकुल!

वीर : अब आपकी सेहत कैसी है दादा जी? आप तोह बढ़िया चलते हुए अंदर आये. अब परर ठीक है न?

मनोरथ : हाहाहा~ अरे में भी जवान हु. कौन कहता है में बूढ़ा हु?

वीर : हाहाहा~ बिलकुल!

मनोरथ : वैसे... बच्चो! मेने फैसला ले लिया है. वीर! तुम जल्द से ठीक हो जाओ. उसके बाद में वो फैसला सुनाने वाला हु.

वीर : कैसा फैसला?

मनोरथ (स्माइल्स) : समय आने पर पता लग जाएगा.

और इतना बोल मनोरथ वीर की ब्याह thap-thapaate हुए जाने लगे. वही प्रांजल भी एक आखिरी लुक वीर को देके जाने लगा.

और उन् दोनों के जाने के बाद hi उसके कमरे में आभा, सुमन और सोनाली, तीनो की पल्टन आ गयी.

सुमन तोह अपने मालिक को वापस देख इतना खुश थी की उस से कुछ कहा hi नहीं जा रहा था. उसकी जैसे साड़ी चिंता गायब हो गयी थी वापस से वीर को देख.

सुमन : अब... अब आप केसा महसूस कर रहे है वीर जी?

वीर (स्माइल्स) : पहले से बेहतर!

सुमन (स्माइल्स) : ....

आभा (ब्लशेस) : आप को... आप को दुबारा से देख हम सब बेहद खुश है. सब चिंता में थे... पहले...

वीर (स्माइल्स) : ी क्नोव! उसके लिए माफ़ करना. सब को इतनी चिंता में दाल दिया मेने.

सुमन और आभा जब जाने के लिए हुई तोह सुमन को ध्यान आया की उसकी ये निकम्मी सोनाली ने तोह कुछ कहा hi नहीं. तोह उससे अपनी कोहनी से टटोलते हुए उसने सोनाली को इशारा किया और खुद आभा के संग बाहर चली गयी.

अब तोह उससे कहना hi था. आखिर उसकी माँ ने जो कह के रखा था.

वो मुँह फेर्रे फेर्रे hi वीर से बोली, "खाने का व्यापार शुरू किया और... और बीच में hi व्यापार चोरर गायब हो गए. हम्फ~"

वीर : हहहहह!?

वीर को जैसे विस्वाश hi नहीं हुआ था की सोनाली ने ये कहा था. बाद में उससे खुद हस्सी आ गयी इस बात पर.

'इस शी माध!? ः~'

वीर (स्माइल्स) : जल्द hi वापस से फ़ूड ट्रक फिर से शुरू करेंगे. तुम साथ डौगी न?

सोनाली : हहह!?? में?? में... ममम~

वीर के सवाल इस क़दर पूछे जाने पर बेचारी सोनाली थोड़ा झेप गयी. साथ डौगी मेरा? ये ऐसा सुनाई पद रहा था उससे जैसे वीर उस से जन्मो जनम का साथ मांग रहा था. और शर्माते हुए वो पीछे मुद गयी.

फिर उठी और जाने से पहले एक बार उससे देखि और बोली, "भगवान् तुम्हे जल्द hi ठीक कर दे."

और फिरसे मुद के वो सरपट कमरे के बाहर निकल गयी.

उसके जाते hi वीर ने एक लम्बी गहरी सांस ली.

जब कमरा एक बार फिर धड़ल्ले से खुला और दो चेह चाहती आवाज़ उसके कानो में पड़ी.

"चलो चलो चलो... भैया से मिलने..."

"माहामुउउउउउ~"

और उसके सामने दो प्यारी प्यारी फुलझड़िया थी.

एक काव्य तोह दूसरी नटखट जूही.

वीर : काव्य? जूही!??

"मामुउउउउउ~"

जूही को तोह अपनी गद्दी चाहिए थी. वो सीधा वीर के बीएड पर चढ़ी और उसकी गॉड में आके बैठ गयी. उसकी हाथ में जगह जगह बंधी पत्तियों को वो बड़ी hi कोमलता से टच कर रही थी. जैसे देख रही हो की उसके मामू को टच करने से कही दर्द तोह नहीं हो रहा?

"भैय्याहा!!!"

काव्य भी आयी और उसके गले से लग गयी. और काफी देरर तक दोनों hi एक दूसरे के आलिंगन में बने रहे.

फिर अलग होते hi काव्य ने अपने सवाल शुरू कर दिए.

काव्य : क्यों गए थे आप वह हाँ? वही करा के लिए न? जो अक्सर नेवसपपेर और टीवी में आती है? जिसके साथ आपकी एक पिछ भी आयी थी नेवसपपेर में? उसके लिए? विययययय???? भैयाआ! आप जानते है न की आपके आस पास भी आपकी केयर करने वाले लोग है. तोह फिर खुद को ऐसी परेशानी में क्यों डालते हो?

वीर : मेरी प्यारी काव्य! उस रात मेने तुम्हे और आरोही दी को भी तोह बचाया था न? तोह यदि में किसी और लड़की को उस हालात में देखता हु तोह क्या में उससे इग्नोर कर दूंगा? की नहीं ये मेरी बहिन नहीं है तोह होने दो उसके साथ जो होना है. बताओ बहना? हम्म?

वीर के ऐसे पूछने पर काव्य शांत पद गयी. और मुँह फुलाते हुए अपना सर्र झुका ली.

काव्य : ी... सॉरी!!!

वीर (स्माइल्स) : कोई बात नहीं!

और वीर ने अपनी प्यारी बहना को गले से लगा लिया. तोह इस बार...

*छू~*

'हहहहह!?'

काव्य ने उसके गाल को हौले से चूम लिया और फिरसे उस से चिपक गयी.

"गेट वेल सून भैया!!"

वीर (स्माइल्स) : हम्म~

जूही : में भी... में भी मामू को किसी दूंगी.

वीर : हाहाहाहाहा~

जूही कड़ी हुई और अपने मामू के गालो को गीला कर उस से लिपट गयी. वीर धीरे से जूही के कान के करीब आया और पूछा, "तुम्हारी मम्मी कहा है जूही?"

तोह जूही भी शातिर थी. उसने भी धीरे से वीर के कान में hi जवाब दिया.

जूही : मम्मी बाहर है. आज मम्मी कॉलेज से भी जल्दी आ गयी थी.

वीर : ओह्ह्ह!

काव्य : भैया! में जूही को लेके बाहर जाती हु. आपकी ma'am को भी मिलना है आपसे.

वीर : सूरे!!!

काव्य जूही को अपनी गॉड में उठायी और बाहर निकल गयी. अब शायद निधि ma'am hi बाहर बची थी जिनसे वीर का मिलना बाकी था.

कुछ मिनट यु hi गुज़र गए पर अभी तक दरवाज़ा खुलने की कोई भी आवाज़ नहीं आयी थी वीर को.

'शायद वो मुझसे नाराज़ है.'

एक गहरी सास लेते हुए वीर लेटने hi जा रहा था जब फिरसे दरवाज़ा खुला और कोई अंदर आया.

और साड़ी की हरकत, पायलो की छम छम, उस परिचित सी आहात पाते hi वीर जैसे समझ गया था की कौन आया था.

उसकी निधि ma'am!

वीर की निगाहें परदे के छोर्र पर hi थी. जैसे hi परदे को पार करते हुए उसकी निधि ma'am अंदर आयी.

दोनों की आँखें आपस में जा जुडी.

पल भर के लिए निधि के कदम वही थम गए और वो पर्दा पकडे वीर को hi देखती रही.

फिर आहिस्ता आहिस्ता वो आयी और वीर के पास बैठ गयी.

'व्हाई डस आईटी फीलस लिखे डेजा वो? फुककक! डेजा वो नहीं ये पहले भी हुआ है. लास्ट टाइम भी... ी कैन तेल्ल she's माध.'

माहौल ावक्वार्ड सा हो रहा था अब. दोनों में से कोई कुछ बोल hi नहीं रहा था.

'Ma'am? एहम! आपको पूछना होता है की में कैसा हु? फुसक्ककककक!!!! She's नॉट इवन सयिंग एनीथिंग. क्या मुझे hi कनवो स्टार्ट करना पड़ेगा? ी होप वो चिल्लाये न बस.'

वीर : उम्...

पर वीर के कुछ बोलने से पहले hi...

निधि : केसा फील कर रहे हो अब?

निधि ने आखिर पूछ hi लिया उस से.

वीर : में... I'm... I'm बेटर!

निधि : हम्म~

और एक बार फिर ख़ामोशी छा गयी.

'मेरे और ma'am के बीच हमेशा ऐसे hi कंवर्सशन्स क्यों होते है!?'

उसने सोचा और तभी...

*डिंग*

[System has been activated.]

[Kyuki tumhe aurto se theek se baat karna nahi aata. Wahahahahaha~]

जिसकी कमी थी, वो भी हाज़िर हो चुकी थी अब.

'आओ महारानी साहिबा. तुम्हारी hi तोह कमी थी. और एक बात बोलू!?'

[Of course! Haha~]

'शट थे फ़क उप!!!'

[What the!? Heyyyyy!!!!]

'एकदम शांत! मुझे ma'am से बात करने दो.'

[Hmph~]

निधि : में... में चलती हु. तुम रेस्ट करो.

वो उठी तोह वीर बोल पड़ा, "बस!? जा रही हो आप?"

निधि : H-Haan! तुम्हे देखने आयी थी. तुम ठीक हो तोह... यू नीड रेस्ट सो, m-mein चलती हु.

वीर : ी सी! और श्रेया जी!?

निधि : मुझे जब खबर मिली थी तोह वह ऑफिस जा चुकी थी. और तबसे मेने उससे नहीं बताया है. जा कर उससे बताउंगी. सुबह आएगी वो मिलने तुमसे फिर.

वीर : ओह्ह्ह! तोह आप!?

निधि : में चलती हु.

और वो उठकर जाने के लिए हुई...

वीर : आप नाराज़ हो. है न?

निधि : M-Mein क्यों नाराज़ होउंगी भला? किस बात के लिए? कोई रीज़न hi नहीं मेरे लिए नाराज़ होने को. जिस स्टूडेंट को मेने इतना कहा की इन् सब में न पदों वो मेरी बात सुनता hi कहा है? कई बार समझा चुकी हु उससे. कई बार कहा की भविष्य पर ध्यान दे. पर वो केवल अपने मैं की hi करता है. अब मेने बोलना चोरर दिया है. तोह भला... भला किस बात से नाराज़ होना?

वीर ने निधि की बात सुन्न एक आह भरी.

'और ये कह रही है की ये नाराज़ नहीं है.'

[Ye hum ladkiyo ki baatein tum nahi samjhoge. She's mad and sad too!]

वीर : Ma'am!!

निधि : M-Mein चलती हु.

वो आगे बढ़ी hi थी जब वीर ने उसकी कलाई थाम ली.

वीर : Ma'am! रुकिए प्लीज! मत बात करिये बूत प्लीज. थोड़ी देरर रुकिए.

वीर बस निधि के साथ कुछ शान्ति के पल गुज़ारना चाहता था. पर उसकी किस्मत तोह खराब थी. आखिर ऐसे कैसे?

"Veeeeeeeeeerrrrr!!!"

दरवाज़ा खुला और एक बेहद hi हसीं सा चेहरा उसके सामने आया.

"M-Miss करा!?????"

करा दौड़ते हुए आयी और वीर को होश में देख आगे बढ़ उसके गले से लग गयी.

'डमनणणन आईटी!!!'

पहली बार, करा ने उससे ऐसे हुग किया था अपने आप से. आज जैसे वीर अपने आप को बेहद hi इम्पोर्टेन्ट समझ रहा था. करा जैसी लड़की उसकी बाहो में जो थी. जब ऐसी लड़की आपके गले से लगी हो तोह अंदर एक स्ट्रांग फीलिंग आती hi है.

करा : ी कनेव आईटी! ी कनेव यू वोउल्ड के. ी वास् राइट~

निधि अपने सर्र को पलट के उन् दोनों को बाहो में बाहे डाले देख रही थी. और जो कलाई उसकी वीर के हाथ में थी. उससे निधि ने धीरे धीरे चुर्राटे हुए आज़ाद कर ली.

वीर : Ma'am!?

निधि बिना कुछ कहे अपने साड़ी के चोरर को जोरर से भींचे हुए बाहर निकली जब अचानक दरवाज़े पर hi उससे एक और हुस्न की देवी के दर्शन हो गए.

उन् दोनों की नज़रे कुछ पल एक दूसरे के ऊपर रही और उसके बाद निधि सर्र झुकाते हुए रूम के बाहर निकल गयी.

इधर अंदर आ रही लड़की कोई और नहीं सोनिआ थी. जो अपनी ट्रिप से वापस आयी थी. काफी समय से वो वीर से नहीं मिल पायी थी. रीसेंट में hi उससे बाहर जाना पद गया था. और वीर के बारे में अब jaan'ne के बाद उसने तय किया की वो विजिट करने जाएगी.

और वही उस से जी भर के अच्छे से मिलेगी. उससे फ़ूड ट्रक की बधाई भी देगी.

उसके संग hi सुहाना भी कड़ी हुई थी पीछे. वो भी आयी हुई थी.

और दोनों hi बहने जब अंदर आयी तोह उन्हें नज़र आया की...

करा जोरर से वीर को अपनी बाहो में लिए हुई थी.

सोनिआ ने जैसे hi ये देखा तोह उसके कदम वही ृक्क गए.

सुहाना (मैं में) : ओह no! नॉट अगेन...

वीर ने जब दोनों बहनो को देखा तोह वो उन्हें बुलाने hi वाला था की...

*सलाआआआंमम्मम्म्म्म*

सोनिआ को पता नहीं क्या हुआ पर वो अचानक hi जोरर से दरवाज़ा बंद कर बाहर निकल गयी.

'हम्म?'

[Something happened...!]

वो बाहर निकली और निकलते hi उसने सबसे पहले मृणाल ma'am को देखते हुए पूछा, "Where's थे वाशरूम!?"

"यहाँ आगे से लेफ्ट!" मृणाल ma'am ने बताया तोह सोनिआ बस तेज़्ज़ कदमो के साथ अंदर घुस गयी और एक बार फिर...

*सलाआममम*

जोरर से उसने दरवाज़ा अंदर से hi बंद कर लिया.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


लिखे ठोकने का और रेवोस रखने का. ✨
 
अपडेट - 67 ~ No ओने केयर्स अबाउट यू बीइंग सेकंड.

अब तक...

सोनिआ को पता नहीं क्या हुआ पर वो अचानक hi जोरर से दरवाज़ा बंद कर बाहर निकल गयी.

'हम्म?'

[Something happened...!]

वो बाहर निकली और निकलते hi उसने सबसे पहले मृणाल ma'am को देखते हुए पूछा, "Where's थे वाशरूम!?"

"यहाँ आगे से लेफ्ट!" मृणाल ma'am ने बताया तोह सोनिआ बस तेज़्ज़ कदमो के साथ अंदर घुस गयी और एक बार फिर...

*सलाआममम*

जोरर से उसने दरवाज़ा अंदर से hi बंद कर लिया.


अब आगे...



सोनिआ इस वक़्त शीशे के सामने कड़ी हुई थी.

आँखें लाल, पलकों पर सजे हुए हलके हलके ासु जो बस ज़मीन पर टपकने hi वाले थे.

थोड़ी तेज़्ज़ सासें और दर्पण में वो अपनी खुद की इस हालत को देख रही थी.

वो तोह बस कुछ hi दिनों के लिए बाहर गयी थी ज़रूरी काम से. केवल कुछ hi दिनों से वीर से नहीं मिली थी. तोह फिर...

तोह फिर उसके कुछ दिन अपने शहर से दूर रहने पर इतना बड़ा बदलाव कैसे आ गया? वो करा जो लोगो को भाव तक नहीं देती थी, वो करा जिससे हर्र एक चीज़ बोरिंग सी प्रतीत होती थी. वो करा जिससे लड़को में कोई इंटरेस्ट नहीं था. वो करा जो कभी इमोशंस नहीं दिखाती थी.

तोह वो करा आज यहाँ इस क़दर वीर से क्यों लिपटी हुई थी भला? क्यूँउउउ???

ऐसा क्या हो गया था इन् कुछ दिनों में की करा जैसी लड़की वीर के आलिंगन में गिरी हुई थी?

सोनिआ की कुछ समझ नहीं आ रहा था. आज तोह वो यहाँ वीर की हालत देखने और उससे बिलेटेड कोंग्रटुलतिओन्स कहने आयी थी उसके अपने नए फ़ूड ट्रक की शुरुआत के लिए.

पर... पर यहाँ का नज़ारा तोह कुछ और hi था. उसकी पुरानी दोस्त, जो उस से ठीक से बात तक नहीं करती थी. उस से क्या, जो किसी से भी ढंग से बात नहीं करती थी, हमेशा लड़के उसके पीछे रहते थे. आज वो...

आज वो यहाँ एक लड़के, वीर से लिपट के चिपकी हुई थी. झटका तोह लगा था सोनिआ को. पर उस से भी ज़्यादा उससे ये बात सत्ता रही थी की...

वो वीर से पहले मिली थी. वो गयी थी सुहाना और प्रकाश अंकल के साथ वीर के कॉलेज उस से पहले मिलने. उसने पहले वीर की साड़ी डिटेल्स निकलवाई थी. वीर ने पहले उससे बचाया था. वो वीर को पहले से जानती थी. फिर...

फिर क्यूँउउउउउ!??!

क्यों करा और वीर के बीच उससे वो नज़र आ रहा था? वो रिश्ता जो अभी तक उसके और वीर के खुद के बीच नहीं बन्न पाया था. क्यूँउउ??

ज़रा सोचिये की आप किसी नए दोस्त से मिले. सब कुछ बढ़िया चल रहा है. आप कुछ दिन के लिए बाहर गए और जब आप वापस आये तोह आप क्या देखते हो?

की आपका एक पुराना मित्र जो आपसे अब रूठा हुआ है वो आपके उस नए दोस्त के साथ हस्स कर घुल मिलकर बातें कर रहा है. तोह केसा लगेगा आपको? ऐसा लगेगा न की आपसे वो चीज़ छीन ली गयी हो? की आपको किसी मक्खी के सामान निकाल कर थाल में से फेक दिया हो!? लगेगा न!?

कुछ ऐसा hi हो रहा था अभी, सोनिआ के साथ.

और तेज़्ज़ सासें लेते हुए उसने अपनी आँखें बंद कर ली...

*20 इयर्स एगो*

"ला ला ला ला उम्म्म्म ला ला ला हन्नन~"

आज वेकेशन का आखिरी दिन था. अब में 1सत क्लास में जाने वाली थी. और कल, मेरी 1सत क्लास का पहला दिन था.

अपने बालो में रिबन बांधते हुए मेने शीशे में देखा और मां की make-up किट से ब्रश उठा के अपने चेहरे पर फाउंडेशन पोतने लगी. में सुन्दर थी. मां जैसी. ऐसा सोच के में मां की नक़ल करने लगी.

तभी पीछे से मेरी मां आयी और मुझे देखते hi हस्सन लगी.

"हाहाहाहा~ सोनू?? ये क्या कर रही है मेरी बच्ची?"

"मां का मेकअप लगा रही हु~"

"अच्छा जी? और क्यों भला? बच्चे कबसे मेकअप लगाने लगे?"

"मां लगाती है तोह सोनू भी लगाएगी~"

मेने मां की बात पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया. मुझे तोह make-up से मतलब था. और पोत कर कर के में अपने पूरे चेहरे पर मेकअप पॉट रही थी. बनता सांता कुछ नहीं था पर मुझे तोह करना था.

क्युकी कल मेरा फर्स्ट क्लास का पहला दिन था. मेरे फ्रेंड्स को भी तोह पता लग्न चाहिए न की में कितनी ख़ूबसूरत हो गयी हु वेकेशन के बाद. सब मुझे देख के क्यूट बुलाएंगे फिर.

और हर्र बार की तरह में 1सत क्लास में भी फर्स्ट आउंगी. फिर सेकंड में भी, गिर थर्ड में भी और फिर हमेशा. मां पापा मेरी फिरसे तारीफ करेंगे. मुझे फिरसे गिफ्ट्स देंगे. B'day पार्टी में भी सभी मेरी तारीफ करेंगे. में दीदी को चिढ़ाऊंगी की फिरसे मेरे मार्क्स ज़्यादा आये हहै~

और इन्ही बातो के बारे में सोच सोच कर में सो गयी.

नया दिन हुआ, नयी शुरुआत.

"अरे नमृता!?? जल्दी करो बाबा! सोनू को स्कूल भी चोरर्ण है."

"आयी बाबा! कर तोह रही हु. सुहाना को टिफ़िन दिया अभी अभी. वन में बैठा के hi आ रही हु उससे."

"हाँ थोड़ा जल्दी करना."

पापा ने मां को जल्दी करने को कहा तोह मां फटाफट मेरा टिफ़िन भी रेडी कर के लायी और मेरे बैग में रख दी.

और फिर मेरे चेहरे को पकड़ी और मेरे माथे को चूमते हुए बोली, "मेरी बच्ची का आज पहला दिन है न? नयी क्लास का? एन्जॉय करना हाँ? नई फ्रेंड्स बनाना!"

में मुस्कुरायी और मां के गाल पर पप्पी देते हुए बाहर निकल कर कार में बैठ गयी. मुझे कार बेहद पसंद थी. हर्र किसी के पास नहीं होती थी कार. इसलिए में वन में जाने से मन कर देती थी मां को. मुझे अच्छा लगता था अपने दोस्तों को ये दिखाना की हमारे पास कार थी.

"शैलेन्द्र! आपका टिफ़िन भी रख दिया है. ठीक है न?"

"हम्म~"

"आपको पता है न? कुछ दिन पहले हमारे बगल में नए पडोसी शिफ्ट हुए है."

"पता है नमृता! पता है! और में मिल भी आया हु उनसे. काफी बड़ी कंपनी के मालिक है वो किशोर साहब. मेरे जितनी hi उम्र के होंगे. शायद हमारी कंपनी से भी बड़ी है उनकी कंपनी."

"हम्म~ इसलिए आपको उनसे अच्छे सम्बन्ध बना के चलना चाहिए."

"तुम तोह ऐसे कह रही हो जैसे में जाके उनसे झगड़ के आ जाऊंगा. हाहाहाहा~"

"बस कह रही हु. आप तोह जानते hi है की आदमी कान भरने में कितना आगे रहता है. पडोसी है अब वो हमारे. सम्बन्ध बना के चलिएगा!"

"जी मोहतरमा!! वैसे... आज तोह क़यामत लग रही हो इस नीली साड़ी में. हाँ!?"

"धत्त्त! आप भी न..."

"पापा चलो जल्दी!! में लेट हो रही हुऊ~" में चिल्लाई. न जाने क्या खुसुर पुसुर कर रहे थे मां और पापा.

और मेरी बात सुन्न पापा फौरन hi आये. कार स्टार्ट होते hi हम निकल पड़े मेरे स्कूल की ऑर्डर.

पापा ने मुझे छोरा और bye किया. और में भी उन्हें bye बोल के अपनी क्लास में घुस गयी.

मेरा बैग नया था. नयी ड्रेस, नए शूज मेरे, नए चमकीले रिब्बोन्स. सारे बच्चे बस मुझे hi देख रहे थे. हहै~

में अपनी सीट पर जाके बैठी, अपनी बेस्ट फ्रेंड के बगल से.

मेरी बेस्ट फ्रेंड ~ अवा!!

वो दिखने में मेरी hi तरह ख़ूबसूरत थी. बस अंतर ये था की उसकी स्किन थोड़ी और ज़्यादा सफ़ेद थी और उसके बाल पीले थे. जैसे विदेशी लड़कियों के होते थे. मुझे ये बाद में पता लगा था की ऐसी लड़कियों को ब्लोंड कहते थे.

"ावा~"

"सोनू~ तू आ गयी! वववव! रिबन बोहत अच्छे है~"

"हहै~ थैंक यू!"

पर हमारी बातें ज़्यादा नहीं हो पायी क्युकी मैडम आयी और उन्होंने सबको बैठा दिया.

"बच्चो! आज आपकी क्लास में एक नयी स्टूडेंट का एडमिशन हुआ है. और आज से वो आप लोगो के साथ hi पड़ेगी. Okay? स्टूडेंट! प्लीज के इन! अंदर आओ बीटा~"

Ma'am ने अंदर आते hi एक न्यूज़ फेकि थी हमारी तरफ. क्लास में कोई नया स्टूडेंट आया था. या यु कहे की आयी थी.

हम सभी अपनी नज़रे गड़ाए दरवाज़े की एंट्रेंस पर देखने लगे.

और ma'am के बुलाने पर एक बेहद hi सुन्दर सी लड़की अंदर आयी. हम सबके मुँह खुले हुए थे उससे देख के. उसके बाल मेरी और अवा की तरह उतने लम्बे नहीं थे, केवल कंधे तक hi थे. और इसलिए वो रिबन की जहह सर्र पर रेड बंद लगायी हुई थी.

आज उसका पहला दिन था तोह स्कूल ड्रेस में नहीं बल्कि वो प्रिंसेस वाली रेड फ्रॉक पहने हुए थी.

मेरे पास भी प्रिंसेस फ्रॉक थी पर इतनी ख़ूबसूरत नहीं.

"बच्चो! ये है करा! आज से ये आपके साथ hi पड़ेगी. ठीक है? वेलकम करो सभी. से वेलकम करा!"

"वेलकम करा~" हम सभी चिल्लाये और उसके बाद उसने हमे थैंक यू कहा.

कितना अजीब नाम था? करा!? पहली बार मेने ऐसा कोई नाम सुना था.

खर्र! फिर ma'am ने हमारी बेंच के आगे वाली बेंच जिस पर एक hi लड़की बैठी हुई थी उधर करा को बैठने कह दिया.

वो आयी और मेरे सामने वाली बेंच पर बैठ गयी.

अवा हर्र बार की तरह अपनी बातें शुरू कर उस से बात करने लगी और बातो hi बातो में मुझे पता लगा की वो अवा की hi तरह मेरी पडोसी थी.

में भी खुश थी. मुझे शायद एक और फ्रेंड मिल गया था. पर...

पर आज सब मुझे चोरर उसके बारे में बात कर रहे थे. मेने अपने इर्द गिर्द देखा और...

और वाक़ई...

सभी उसकी ड्रेस को देख के उसकी तारीफ कर रहे थे.

और उनकी हर्र बातें मेरे कानो में पद रही थी. में भी तोह सज के आयी थी. फिर मेरे... मेरे बारे में कोई बात क्यों नहीं कर रहा था?

मेने उससे पीछे से टटोला, वो पलटी और मुझे देखि.

"तुम्हे पता है. ऐसी शामे फ्रॉक मेरे पास भी है. में कई बार p-pehen चुकी हु उसको. I-Iss से भी अच्छी है वो..." मेने उस से कहा.

"हम्म!?" पर उसने मुझे देखने के बाद इग्नोर कर दिया और अपना ध्यान पढ़ाई पर देने लगी.

'हहहहहहह????'

मुझे गुस्सा आया. इस लड़की ने मेरी बात sunn'ne के बाद कुछ कहा क्यों नहीं? मेरे पास इस से भी अच्छी ड्रेस है. इससे सुनकर तोह उससे कुछ कहना चाहिए था न?

'ुघठ!!!'

मेने फिरसे उससे टटोला और उससे बुलाया.

"T-Tumhe पता है? मेरे पास भी इस से अच्छा हैरबंद है. मां लायी थी. पर मेरे बाल t-tumhaari तरह छोटे नहीं है न इसलिए... इसलिए में नहीं पहनती."

"Okay!" वो बस इतना बोल वापस से मुद के अपनी कॉपी में लिखने लगी.

'ुग्ग्ग्ग्ग्हःहःहःहःहज!!!!'

मुझे इतना गुस्सा आ रहा था.

"करा तुम्हारी फ्रॉक बोहत अच्छी है."

"तुम्हारे ऊपर रेड फ्रॉक अच्छी लग रही है."

"गुड मॉर्निंग स्टूडेंट्स! अरे वाह! नई स्टूडेंट? सो प्रीटी? What's योर नाम? करा? कितना प्यारा नाम है. और ये फ्रॉक तुम पर बोहत प्यारी लग रही है. अरे वाह! तुम्हारी तोह हैंडराइटिंग भी सुन्दर है. ये लो~ मेरी तरफ से स्टार. फुफु~"

बच्चे, यहाँ तक की टीचर भी उसकी तारीफ कर रही थी. अवा भी... अवा भी उनके साथ मिलके खेल रही थी.

मेरी कॉपी का पेज कब मेरे हाथो में रहके मरुद गया मुझे पता hi नहीं चला.

छुट्टी का टाइम हो गया था. और अब...

अब मेरे चेहरे पर मुस्कान थी. अब में इससे बताने वाली थी की में भी काम नहीं थी.

में लाइन में लग कर क्लास से बाहर आयी और उसके बगल से कड़ी हो गयी.

"अरे मेरे पापा आ गए!" मेने जान बुझ के उसके पास रहके जोरर से बोलै ताकि वो मुझे देखे. देखे की मेरे पास कार थी...

और में दौड़ के गयी अपने पापा के पास और कार में घुस के विंडो से उससे देखने लगी.

हहै~ अब बोल न? बोलती बंद हो गयी? मेरे पास भी ऐसा कुछ था जिस में शो ऑफ कर सकती थी.

पर...

तभी एक ब्लैक कलर की कार आयी. हमारी कार से भी अच्छी दिखने वाली कार. उसमे से एक अंकल जैसा कोई बाहर निकला और झुक के करा को वेलकम कर रहा था कार में अंदर बैठने के लिए.

"आइये मिस!"

और वो करा उस कार में अंदर जा के बैठ गयी.

मेरा मुँह खुला का खुला था. मेने गुस्से में आके अपनी स्कर्ट को मुँह में भर लिया और जोरर से काटने लगी.

"पाआपआआ~" में चिल्लाई.

"हाँ क्या हुआ?"

"वो... वो करा के पास भी कार है. क्यूँउउउ?? उसके पास क्यों है कार??? वो अंकल कौन है???"

"अच्छा वो? ः~ क्या वो भी तुम्हारे स्कूल में आ गयी? चलो अच्छी बात है. वो हमारे पडोसी है. और वो जो अंकल थे वो उनके यहाँ काम करते है. माधव नाम है उनका."

"तोह हमारे घर में कोई काम करने वाला क्यों नहीं है?"

"हँ? हमारे यहाँ भी तोह आते है न काम करने वाले सोनू!?"

"नाहीईई!!! उन् अंकल की तरह मुझे भी एक अंकल चाहिए जो कार में मुझे रोज़ बैठाये. उग्गगहःहःहः~"

और में रोने लगी. आज जैसे मुँह की खायी थी मेने. मुझे वो लड़की बिलकुल भी पसंद नहीं आ रही थी. अवा भी उस से जाके मिल चुकी थी. मेरा कोई नहीं था. सब दोगले थे.

और में रट रट hi घर गयी.

अगला दिन हुआ...

अगले दिन आज वो करा सबसे लेफ्ट की रौ में फर्स्ट सीट पर बैठी हुई थी. वो पूरी रौ लड़को की थी.

उसके पीछे की बेंच खाली थी. तोह में और अवा उसके पीछे जाके बैठ गए. आज में उससे सबक सिखाने वाली थी. हहै~

पर इस से पहले की में उससे सबक सीखा पाती. में पीछे बैठे लड़को की शैतानियों का टारगेट बन्न चुकी थी.

वो मेरी छोटी खींचते, हमारी डेस्क पर कागज़ फेकते, बोतल से पानी छिड़कते और में और अवा ma'am से कंप्लेंट करते. Ma'am उन्हें डाटती पर थोड़ी देरर बाद फिर वही शुरू हो जाता.

और में रोने लगी. मेरी सूरत पूरे रोने वाली हो चुकी थी. नाक बहने लगी थी, आँखों से बड़े बड़े ासु और मेरा चेहरा पूरा लाल हो चूका था. मुझे रोटा देख अवा भी सुबुकने लगी थी.

तभी...

सामने से करा कड़ी हुई और पीछे आयी और उन् लड़को को गुस्से से देखते हुए बोली,

"मेने सब देखा है. और अब में प्रिंसिपल ma'am के पास जा रही हु तुम लोगो की कंप्लेंट लिखवाने. देखना अब! तुम दोनों की कैसे शामत आती है. सीधा रेस्टीकेट होइगे अब तुम."

करा ने उनको इतना बस कहा था की उनके पूरे चेहरे का रंग उड़द चूका था. क्यों??

क्युकी हम में से कोई नहीं जानता था की ये रेस्टीकेट किस बाला का नाम था? क्या होता था इसका मतलब? हम बस मैं में सवाल hi लिए थे.

वही करा मुस्कुरा के बस उन्हें चिढ़ा के जाने का कह कह के दर्रा रही थी उन्हें. जो कुछ भी था, करा को देख के हम सब यही समझ रहे थे की रेस्टीकेट कोई बोहत बुरी चीज़ का नाम था.

"अब तोह गए तुम सब बच्चू! रेस्टीकेट सीधा! अब पिटाई लगेगी तुम्हारी."

"नहीं! नहीं!! मत जाओ करा. सरररररयययय! सररररययय! माफ़ कार्डो. अब हम ृत्तिकाते नहीं होना चाहते."

"ृत्तिकाते नहीं रेस्टीकेट!"

"हाँ वोई woi...ab हमे रेटिकटे नहीं होना."

"हम्फ~ तोह सॉरी कहो इनसे. और कहो की ऐसा कभी नहीं करोगे."

"सॉरी! सॉरी अवा! सॉरी सोनू! सॉरी! सॉरी~"

में तोह बस आश्चर्य के मारे सब होता देख रही थी. आज मुझे पता चला था की...

की इतनी बुरी भी नहीं थी ये लड़की ~ करा!

और फिर डिपार्चर हुआ...

हम सब निकले. आज मेने कोई शो ऑफ करने की कोशिश नहीं की. पर आज...

आज उसकी ब्लैक कार जब आयी तोह उसमे से एक ख़ूबसूरत सी आंटी बाहर निकली.

"करा~ ♡"

वो उससे पुकारती हुई हमारी तरफ आयी और उसके हाथ को थाम ली.

"चलो बीटा! और तुम्हारी फ्रेंड सोनू कहा है?"

"सोनू ये है माँ!"

'हँ? में? फ्रेंड? करा की? क्या उसने घर में ये बताया था?'

उन् आंटी ने मुझे देखा और मुझसे बोली,

"अच्छा तोह तुम हो नमृता जी की बेटी हाँ? कितनी प्यारी हो तुम. आज तुम्हारे पापा को काम है. तोह आज उन्होंने ने मुझे आपको आपके घर भेजने को कहा है. तोह चले बीटा?"

"हम्म~"

में करा की कार में उसकी मां के साथ सवार हो गयी. मेने देखा की करा की मां का पेट फुला हुआ था.

घर पॅहुचते hi मां ने गेट खोला, में उनके परर से जा चिपकी और मां और वो आंटी बात करने लगी.

तभी मेने मां को खींच के नीचे झुकाया और कहा~

"मां! वो आंटी का पेट फुला हुआ है. अंदर बेबी है न???"

"हाय्यये! इससे इतना सब कुछ पता है? आपकी बेटी तोह बोहत होशियार है ः~"

"हाँ बीटा!"

मां ने मेरी बात पर सर्र हिलाया तोह वही आंटी ने मेरी तारीफ की. हहै~

अगले दिन में अवा और करा, अपनी दो पगली सखा सहेलियों को वो पाठ पढ़ा रही थी जिसके बारे में मुझे खुद कुछ नहीं पता था.

"देखो~ मां लोगो का पेट फूलता है इसका मतलब उनके अंदर बेबी है. करा, तुम्हे नयी बहिन या भाई मिलेगा जल्दी से. हहै~"

"पर बेबी आता कहा से?" अवा पूछी.

"मुझे नहीं पता. नानी कहती थी की भगवन के आशीर्वाद से होता है सब कुछ."

और ऐसे hi समय गुज़रता गया. हम तीनो की दोस्ती और गहरी होती गयी. हम तीनो hi घर से बाहर निकल एक दूसरे के घर जाते और खेलते.

कभी कभी तोह देरर रात तक एक दूसरे के घर में बने रहता थे. हम तीनो के बीच एक गहरा बांड बनता जा रहा था. और में, करा को अब उतना हेट नहीं करती थी.

फिर एक्साम्स आये और हम सभी ने दिल लगा के एक्साम्स दिए.

रिजल्ट आया तोह पता चला की...

में सेकंड आयी थी. ऐसा कभी नहीं हुआ था की में फर्स्ट न औ. भला किसने मेरी जगह छीन ली?

पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग के वक़्त में मां पापा के साथ टीचर के सामने कड़ी हुई थी जब टीचर ने खुद बताया की...

"इस बार फर्स्ट तुम्हारी फ्रेंड आयी है सोनिआ. मतलब... करा!"

ये वाक्य जैसे मेरे दिल पे लगा था.

उस दिन में बोहत रोई. बोहत!!

सेकंड क्लास आयी. मेने बोहत म्हणत की. पर...

फर्स्ट प्लेस पर मेरा नाम नहीं लिखा था. इस बार भी में सेकंड थी. में फिरसे खूब रोई.

और फिर एक दिन...

मेने देखा की करा के घर के बाहर बेहद भीड़ लगी हुई थी. आंटी सफ़ेद कपडे पहने हुए लेती हुई थी. मेरी मां ने मुझे अंदर खींच लिया और बीएड पर लिटा के मुझे सुलाने लगी.

तभी घंटी बजी घर की और बाहर करा के पापा थे. वो करा को घर पर चोरर के कही जा रहे थे.

"क्या आप इसका थोड़ी देरर ध्यान रखेंगी?"

"ये भी कोई कहने की बात है? करा को यहाँ चोरर जाइये! में इनको टेलीफोन कर दिया है. ये आते hi होंगे. बिलकुल भी अच्छा नहीं हुआ..."

"J-Jii! D-Dhanyavaad!"

वो हाथ जोड़ के चले गए.

करा एकदम मासूम चेहरा लिया मेरे संग बैठी हुई थी. में जानती थी क्या हुआ था.

उसकी मां मर्डर चुकी थी.

में उठी और अपनी मां के पास गयी.

"मां!!!"

"हम्म?"

"करा... K-Kaera की मां... जा चुकी है न?"

में नहीं जानती थी की माररता कैसे है आदमी, क्यों माररता है. पर इतना जानती थी की एक बार इंसान मर्डर जाता था तोह फिर वो कभी वापस नहीं आता था.

"हां बीटा!"

"अब वो वापस नहीं आएंगी न?"

मां ने मेरी बात पर धीरे से सर्र हिलाया.

"मम्मा~" और पता नहीं क्यों, पर में रो पड़ी.

मुझे देख मां भी रो पड़ी और उन् ने मुझे और करा को अपने गले से लगा लिया.

"तुम दोनों बहने हो समझी? अपनी बहिन करा का ध्यान रखोगी न सोनू?"

"हम्म~"

"अच्छी बच्ची!"

उसके बाद से hi मेरे अंदर जो घृणा थी वो काम हो गयी करा के लिए.

में उसके साथ और खेलना चाहती थी. और समय बिताना चाहती थी. पर उसके बाद से hi जैसे...

जैसे उसका खेलना कूदना बंद हो चूका था. उससे घर मियाउ क़ैद कर दिया गया था. में उसके घर जाती तोह मुझे बस 5-10 मिनट मिलने के बाद वापस भेज दिया जाता था.

समय गुज़रा और वो सिलसिला अभी भी जारी रहा.

में सेकंड आती थी और करा फर्स्ट. ये एक रूटीन बन चूका था. हर्र गाथेरिंग्स में, मुझे बस यही sunn'ne को मिलता...

"करा इस बार भी फर्स्ट आयी."

"बड़ी hi होशियार बच्ची है"

"माँ के न होने के बावजूद कितनी समझदार है ये."

सब तारीफों के पल बांधते थे.

"P-Papa में भी तोह सेकंड आयी न?" में बस यही कह पाती.

"हम्म~"

और मुझे हाँ में सर्र हिला के हर्र इंसान इग्नोर कर देता था. वैल्यू थी तोह केवल पहले स्थान की.

ी रेअलीसेड की...

NO ओने केयर्स अबाउट यू बीइंग सेकंड!!!!

कितना hi दूसरा स्थान क्यों न पा लो. कभी भी पहले की बराबर नहीं कहलाओगे.

इधर करा को घर से निकलने hi नहीं देते थे. में उसके घर के बाहर अपनी साइकिल में बैठे उसके घर पर लगे ऊपर विंडो में उससे देखा करती थी.

वो रोटी थी. अब तोह अवा भी जा चुकी थी यहाँ से.

और अब करा को भी बंद करके रखने लगे थे.

में उनके घर जाती और उसके पापा से लड़के भाग के घर आ जाती. कैसे अंकल थे? गंदे एकदम! में उन्हें जीभ दिखा के कभी कभी चिढ़ा भी दिया करती थी.

फिर मुझे समझ आया...

की उससे घर पर hi साड़ी एजुकेशन दी जा रही थी. अभी भी वही होता था, में सेकंड और करा फर्स्ट.

स्पोर्ट्स के दौरान वो मुझे दिखाई देती. में उस से बात करने जाती तोह वो कुछ नहीं कहती थी.

बस अपना काम करती और वापस लौट जाती.

ी हॉटेड आईटी!!!

ी हॉटेड एवरीथिंग!!!

में ये सब नहीं चाहती थी. कहा गया हमारा वो सुनेहरा पल? वो सुनेहरा बचपन?

फिर एक दिन...

एक बार एस्से कम्पटीशन हुआ. मुझे याद है उस कम्पटीशन में किसी दूसरे स्कूल की एक लड़की फर्स्ट आयी थी. और करा सेकंड थी.

पहली बार उस दिन मुझे कुछ नया देखने को मिला था. करा उस फर्स्ट आने वाली लड़की से जा के मिली थी. हाथ मिलाई थी उस से.

और मेरे दिमाग में एक बात बैठ गयी थी. यदि मुझे उसका रिकग्निशन चाहिए था. तोह मुझे उससे हराना था.

मेरे दिमाग में अपनी मां की कही बात फिर गूँज गयी. "अपनी बहिन करा का ध्यान रखोगी न सोनू?"

और बस...

मेने अपना मक़सद बना लिया था.

ी विल डेफ़ेअट हेर!

और उस दिन से hi मेने जी जान लगा दी अपनी. की में करा को हरा के hi रहूंगी. सफल तोह नहीं हो पा रही थी पर मेने हार नहीं मानी थी.

वो जिस कॉलेज में एडमिशन ली, मेने भी उसी में लिया. वो जिस कम्पटीशन में भाग लेती, में भी उसी में लेती.

मुझे याद है. कॉलेज का फाइनल ईयर था. और मेने अपनी जी जान लगा दी थी. रातो की नींद उड़ा दी थी करा को हारने के लिए.

और शायद भगवान् ने मेरी सुन्न ली थी.

"कोंग्रटुलतिओन्स सोनिआ! यू अरे थे टॉप स्कोरर! 98.9% ववववव!"

ये न्यूज़ जैसे sunn'ne के लिए में कबसे तड़प रही थी.

"A-And who's थे सेकंड? Ma'am?"

"सेकंड? सेकंड इस करा. विथ 98.5%. शी हद ा सीवियर कोल्ड फ्यू वीक्स एगो. ी होप she'll के टुडे तो गठर हेर रिपोर्ट कार्ड्स."

'H-Huhhh!? करा को... कोल्ड था!??'

और जैसे फिरसे मुझे अपने मुँह में हार का स्वाद चखने को मिला.

इवन थौघ मेने उससे हरा दिया था. पर मेने उससे इस हालत में हराया था. वो बुखार में थी और अपने एक्साम्स दी. और यहाँ में समझ रही थी की मेने उससे हरा दिया.

अपने निचले होंठ को दातो टेल दबाते हुए मेने ma'am को देखा और कहा, "कैन यू... कैन यू प्लीज हाईड थिस? कैन यू तेल्ल हेर तहत she's थे फर्स्ट ओने. She's थे टॉप स्कोरर."

"हँ?? N-Noo! व्हाई वोउल्ड ी दो तहत? एंड व्हीय???"

"P-Please! Don't वोर्री! I'll मैनेज एवरीथिंग. जस्ट तेल्ल हेर. प्लीज! It's ा रिक्वेस्ट!"

"That's...."

"P-Pleaaaaseeeee!!!"

"O-Okay! F-Fine!"

और कुछ देरर बाद hi दरवाज़ा खुला. वो अंदर आयी. करा!!

उसने अपना रिपोर्ट कार्ड लिया. और उससे जब पता चला की वो टॉप स्कोरर थी तोह उसने बस सर्र हिलाया और मुझे देख के वापस चली गयी.

में एक बार फिर... रोटी रही...

***

और हर्र बार की तरह आज भी, सोनिआ के चेहरे पर ासु बिखरे हुए थे.

'थे अरे वेटिंग आउटसाइड...!'

जल्दबाज़ी में ासु पॉच उसने एक बनावटी स्माइल मिरर में देखते हुए अपने होंठो पर बिखेरी.





और वो निकल गयी बाहर. वापस से वीर के रूम की तरफ.

"S-Sonuuu!?"

उसकी बहिन सुहाना ने उससे देखा तोह पुकारा पर...

सोनिआ सुहाना को इग्नोर कर वापस से वीर की ऑर्डर गयी.

वीर : हँ!?? A-Aap ठीक तोह हो न?

सोनिआ (स्माइल्स) : एसससस!!! मुझे क्या हुआ भला?

पर वीर को अभी भी कुछ शक हो रहा था.

'समथिंग इस रॉंग!'

[She was crying.]

'हँ!??'

[Uske gaalo ko dekho. Aasuo ke nishaan! She was crying inside the bathroom.]

'P-Par क्योऊ? अचानक से ऐसे?'

[I think she doesn't likes Kaera.]

'No वैयय! मिस करा और वो आपस में दोस्त है बचपन के. ी क्नोव अभी उनके बीच उतना अच्छा रिलेशनशिप नहीं है. पर वो हेट नहीं करती करा को. शी हरसेल्फ़ टोल्ड में तहत.'

[Hmm~ Toh kuch toh baat hai!]

'Y-Yeah!!!'

वही दूसरी ऑर्डर करा जो वीर से बस कुछ देरर पहले अलग होक उससे निहार रही थी, उसने सोनिआ की तरफ देखा भी नहीं था अभी तक. उसका पूरा फोकस वीर पर था.

तभी सोनिआ को एक और झटका लगा.

"T-That... तहत..." वो ऊँगली दिखा के करा के हाथ की ऑर्डर इशारा कर रही थी.

वीर और सुहाना ने जैसे hi देखा तोह पाया की करा के हाथ में एक ब्लेजर था.

"That's... It's थे ओने ी बौह्त फॉर वीर!!!!!"

वो तेज़्ज़ आवाज़ में बोली तोह सुहाना को भी ध्यान आया. ये तोह वही ब्लेजर था जो सुहाना और सोनिआ ने मिलके वीर को दिलाया था जब वो दिल्ली ट्रिप पर गए थे साथ में. ये भला करा के पास क्या कर रहा था!?

सोनिआ : हौववव!??? हाउ के यू हैवे थिस!??

करा : ममम?

सोनिआ : ये... ये तुम्हारे पास कैसे!?? हुवव्व!???

करा (स्माइल्स) : It's ा सीक्रेट!

उसने बड़ी hi आसानी से कहा. पर करा की छोटी सी बात सोनिआ को शायद दिल पर जा कर लगी थी.

सुहाना : होओओओ~ येह येह! That's थे शामे.

वीर : ये...!?

'वेट! ये तोह मेने... िफ़ ी रेमेम्बेर करेक्टली. तोह ये मेने... येह! तहत नाईट... मेने उस लड़की को दिया था ये ब्लेजर. हाउ के...!? मिस करा के पास ये..!?'

[Hmmmmmm~ :huh: ]

करा : ी हैवे थिस तू~

और तभी करा ने अपने पर्स से एक ब्रह्मास्त्र निकाला.

हाथो में एक छोटा सा टेडी लिए उसने वो सभी को दिखाया.

करा (स्माइल्स) : हे गावे आईटी तो में! राइट वीर?





वीर : हँ!? M-Mein...!?

सोनिआ : V-Veeeeerrr???

सुहाना : हूऊऊ~ इंटरेस्टिंग~

[ :रिप: ]

'फ़क! शट उप!!!!'

सोनिआ जैसे वही खड़े खड़े शांत सी पद गयी. उसके एक्सप्रेशन किसी को नज़र नहीं आ रहे थे. क्युकी वो सर्र झुकाये हुए थी और उसके बालो से आधा चेहरा उसका धक् चूका था. शरीर में कम्पन हो रहा था उसके...

सुहाना : ओह no!! सोनू!?

वीर बेवक़ूफ़ नहीं था. वो देख पा रहा था की सोनिआ को कुछ न कुछ बीच बीच में हो रहा था. और तभी उससे जैसे याद आया. जो बातें खुद सुहाना और सोनिआ ने उससे बतायी हुई थी.

की सोनिआ हमेशा करा को हराना चाहती है. बस उस से एक बार आगे निकलना चाहती है ताकि करा उससे रेकग्निसे करे.

और अब शायद वीर को साड़ी बात समझ आ चुकी थी.

[Aah! So that's why~ ]

वीर : मिस सोनिआ~

पर सोनिआ ने कोई जवाब न दिया.

वीर (शिघ्स) : मिस सोनिआ! आपको किसी से खुद को कपड़े करने की ज़रुरत नहीं. आप अपने आप में बेस्ट हो. यू don't नीड पीपल हु रेज क़ुएस्तिओन्स ात यू! यू अरे यू, मिस सोनिआ!!

*बेदुम्प*

सोनिआ का दिल जोरर से धड़का.

सोनिआ : H-Huhhh!?

इस बार उसने सर्र उठाते हुए वीर को देखा.

वीर : ी don't केयर अबाउट एनीथिंग. चाहे आदमी फर्स्ट आये या सेकंड... ी don't केयर... इंसान की काबिलियत की पहचान इन् पन्नो में लिखे मार्क्स से नहीं होती मिस सोनिआ. फॉर में, यू एंड मिस करा अरे इक्वल. यू बोथ अरे वैरी डिफरेंट येत वैरी शामे.

*बेदुम्प*

सोनिआ : S-Say तहत अगेन!

वीर : हँ!? W-what? ी don't केयर अबाउट एनीथिंग?

सोनिआ : N-Nahi! सेकंड लास्ट में j-jo तुमने कहा.

वीर : !??? F-For में, यू एंड मिस करा अरे इक्वल!

बस! वीर का इतना कहना hi था की फिर वो हुआ जिससे देख वह मौजूद सभी दांग रह गए.

सोनिआ आगे बढ़ी और वो वीर को छथि में जा के घुस गयी.

"हँ!??? W-Wha!?? ुघियउ...."

वीर : M-Miss सोनिआए???

और इस से पहले की वो विरोध कर पाटा.

*छू~♡*

'!!???'

सोनिआ के होंठ उसके गालो पर थे.

सुहाना : सोनुउउउउउ!???????

करा : ??????

और तभी...

*डिंग*

[Mission : Take Sonia on a date.

Rewards : ??? Points.

Time Limit : 2 weeks.]

'हँ? W-Waitttt!!!!'

[Rest in peace! 🙏 ]

'शूटटटटटट उपपपपप परीइइइइइ~'

.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


लिखे ठोकने का और कमैंट्स रखने का. ✨
 
मेगा अपडेट

होली स्पेशल

अपडेट - 68 ~ प्लानिंग अहेड!

अब तक...

सोनिआ के होंठ उसके गालो पर थे.

सुहाना : सोनुउउउउउ!???????

करा : ??????

और तभी...

*डिंग*

[Mission : Take Sonia on a date.


रिवार्ड्स : ??? पॉइंट्स.

टाइम लिमिट : 2 वीक्स.]

'हँ? W-Waitttt!!!!'

[Rest in peace!]

'शूटटटटटट उपपपपप परीइइइइइ~'


अब आगे...

कुछ दिन गुज़र चुके थे और वीर वापस से अपने घर यानी की रागिनी के घर लौट चूका था. सोनिआ को डेट पे ले जाने के लिए अभी एक हफ्ते बाकी थे उसके पास. उस मिशन को साइड रखते हुए वीर कुछ सोच रहा था. जब वो डॉक्टर मृणाल के घर में मौजूद था, तोह कई सारे लोग उस से मिलने आये थे.

आरोही से जब उसकी मुलाक़ात हुई थी तोह शुरुआत में तोह आरोही के साथ उसकी नार्मल बातें hi हुई. पर बाद में अगले दिन आरोही ने कुछ और बातें बतायी थी वीर को. जैसे की...

आरोही : वो... मेरी मम्मी, पापा और ताऊ जी भी आये थे यहाँ.

ये सुन्न के वीर थोड़ा चकित था. उसकी चची चाचा का आना फिर भी स्वाभाविक लगा उससे पर उसके पिता, बृजेश? वो भला कब से उसकी चिंता करने लगे? क्यों आये थे वो यहाँ पर भला?

वीर : चची चाचा? और... डैड?

[Don't call him a Dad! He's a STUPID and SELFISH person! Hmph~]

पारी उसके मैं में गुर्राते हुए बोली. शायद बृजेश को कोई भी पसंद नहीं करता था. सिस्टम में मौजूद पारी भी नहीं.

आरोही : हम्म~

वीर : क्यों?

आरोही : वो आये थे. और पूछे की कितना क्या खर्चा आया है मेडिकल फी में. फिर तुम्हे एक बार देख निकल गए. माँ भी आयी थी डैड के साथ. तुम होश में नहीं थे पर तब.

वीर : ी सी!

इस बात को jaan'ne के बाद वीर खुद थोड़ी सोच में पद चूका था. आखिर उसके पिता बृजेश उससे देखने क्यों आये थे?

'कही दादा जी के कहने पर तोह नहीं!??'

केवल इतना hi नहीं, वीर की बात सुहाना से भी हुई थी. और सुहाना ने भी उससे एक बड़ा झटका दिया था ये बातें कहते हुए...

सुहाना : I'm सॉरी!

वीर : हूऊऊह्ह्ह्ह???

सुहाना : मेने कहा I'm सॉरी!

वीर : नई... वो सुना मेने. B-But किसलिए? ये सॉरी?

सुहाना (शिघ्स) : देखो! तुमने मुझसे हेल्प मांगी थी. पर में अपनी फ्रेंड को ये बताना भूल गयी थी की तुम स्लोगन से भिड़ने जा रहे हो. और उसने अपने बेस्ट आदमी नहीं भेजे थे. आल्सो, पुलिस वास् आल्सो इन्वोल्वेद. मेने पुलिस को रोकने के सारे प्रबंध किये थे बूत तुम्हारी भाभी. शी वेंट तो थे पुलिस. सो, पुलिस इन्वोल्वेद हो गयी. अब उन्हें शांत करने के लिए थोड़ा समय लगेगा. बूत वो इस मटर से जल्द hi दूर हो जाएंगे. सो इसलिए, सॉरी!

सुहाना के मुँह से सॉरी sunn'na अपने आप में एक बड़ी बात थी. वो औरत जिसपे इतना गुरूर सवार रहता था, यदि वो सॉरी कहे तोह कुछ तोह बात थी.

वीर ने भी सुहाना को आसानी से माफ़ कर दिया. देखा जाए तोह इसमें सुहाना की कोई गलती नहीं थी. वीर अपनी तरफ से लड़ रहा था और यहाँ उससे खुद प्रेपर होना चाहिए था. वो दुसरो की मदद के लिए नहीं बैठ सकता था.

साथ hi इनके अलावा उसकी बात कारन से हुई थी. जो अगले दिन वीर से मिलने आया था. दोनों की मुलाक़ात शुरुआत में तोह थोड़ा अजीब तरीके से आगे बढ़ी पर अंत बड़ा hi निराला था. वो इसलिए क्युकी...

कारन : तोह अब केसा महसूस कर रहे हो?

वीर : काफी बेहतर!

कारन : हम्म! वो...

वीर : ???

कारन : थैंक यू! तुमने दी को एक बार फिर... ी मैं... उनकी हेल्प की बिना अपनी परवाह करते हुए. तोह उसके लिए... थैंक यू!

वीर : ी आलरेडी प्रॉमिस्ड!

कारन : येह! तोह... एहम... अब हम फ्रेंड्स!?

उसने एक बार फिर दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया. वीर जो कुछ देरर मौन था उसने अंत में फाइनली अपना हाथ आगे बढ़ाया और कारन का हाथ थाम लिया.

वीर (स्माइल्स) : फ्रेंड्स!!!

कारन (शिघ्स) : फेव! मुझे लगा था कहु तुम फिरसे ये न कह दो, 'में दोस्त नहीं बनता!' हाहाहाहा~

***

वीर ठीक होने के बाद जब घर में आया कुछ दिन बाद तोह वो अपने कमरे को बंद कर, अपनी आँखें बंद कर किसी गहरे चिंतन में था.

उसके पिता का यु अस्पताल आना, प्रांजल की प्लानिंग, निधि ma'am और उनके पति का मटर, रागिनी भाभी और उसके बड़े भाई विवेक के बीच का सम्बन्ध, दादा जी की प्रॉपर्टी वाली बात, स्लोगन और उसके साथी, करा और उसका रिश्ता, उसकी बिछड़ी माँ भावना, सुहाना को वाडे में दिए गए फवोर्स, उसका फ़ूड ट्रक का बिज़नेस...

इन् सब के बारे में वीर बड़ी hi गहराई से सोच रहा था. और उससे एक बात समझ आ चुकी थी.

की उससे पहले से प्लान करके चलना पड़ेगा. हे विल हैवे तो बिकम अग्रेसिव.

'थिस टाइम... I'll प्लान अहेड! स्लोगन!!! इस बार तुम मुझे नहीं पकड़ोगे. इंस्टेड, I'll के फॉर यू!'

और उसने फिर अगले hi पल जोरर से पारी को मैं में आवाज़ लगायी,

'परीईई!!!!'

[W-What!??]

'कितने पॉइंट्स अवेलेबल है?'

[500 points for now!]

'गुड! शॉप में से... मुझे कुछ ऐसा ढूंढ के दो. जिस से में किसी को अपने अंडर कण्ट्रोल कर सकू. पर ध्यान रहे की वो विरोध न करे.'

[Ohhhh~ You mean tumhe kuch aisa chaahiye jis se koi tumhe restrict na kare aur tumhari baat bhi maane.]

'यस! कुछ ऐसा hi...'

[Okay then there you go...]

और पारी ने एक स्किल ढूंढ के निकाली वीर के लिए शॉप में से.

*डिंग*

[Skill : Limbo

Bio : User can break any limb of any person in an odd fashion. Limb once broken by the user won't be able to get repaired by any means. Only the user himself can repair the broken limb.]

स्किल का डिस्क्रिप्शन पढ़ते hi वीर के होंठो पर एक कातिल सी मुस्कान थी.

'यही तोह चाहिए था~'

'परीइ!!!!'

[H-Huh!?? Now whattt?]

'बुय थिस ओने!'

[Iski cost 300 points hai. A-Are you sure?]

'यस!!!!'

[Okay toh ye lo~]

*डिंग*

[Limbo is now available.]

'गुड! नाउ सर्च फॉर समथिंग व्हिच कैन ट्रैक एनएमईएस.'

[Enemies tracker!?]

'हम्म~'

और वीर की बात सुन्न पारी ने फिरसे कुछ ढूंढ के दिया.

[Ye lo! This one is basic. Dhyaan rahe ki tumhaare paas keval ab 200 points hi bache hai. Toh mene isliye yahi dhund ke dii. Because iss se sasti aur koi enemies ko track karne waali skill nahi hai.]

'शो में थे डिटेल्स!'

[Alright!]

*डिंग*

[Skill : Basic Enemy Tracker.


बायो : यूजर कैन ट्रैक थे बेसिक एनएमईएस. थे स्किल won't वर्क फॉर थे बॉस एनिमी.]

स्किल सिंपल थी. ये वीर की एनएमईएस को ट्रैक करने के लिए थी. पर इसका एक hi दोनफळ था. वो ये की इस स्किल से आप केवल अपने बॉस एनिमी के चूज़ों को hi ट्रैक कर पाओगे. यानी की वीर स्लोगन के अंडर काम कर रहे लोगो को तोह ट्रैक कर पाएगा. पर स्लोगन को नहीं.

पर फिलहाल वीर को जैसे यही चाहिए था.

वो मुस्कुराते हुए अपने कपडे बदल जैसे hi बाहर आया तोह रूम के बाहर hi उससे सुमन नज़र आ गयी जो शायद उसके hi रूम में आ रही थी.

वीर : हम्म?

सुमन : मालिक!?

वीर ने अगले hi पल उससे खींचा और अपने होंठ सुमन के होंठ से भिड़ा दिए.

सुमन : मममपहहह!??

उसने एक hi झटके में सुमन के ब्लाउज से उसकी एक भारी भरकम छुच्छी निकाली और उससे जोरर से मिस दिया.

"आआअह्ह्ह्हहम्म्म्म~"

तभी सुमन के कमरे का दरवाज़ा खुला और आभा बाहर निकली. और जैसे hi उसने वीर और अपनी सासु माँ को देखा वो वही जम्म के रह गयी.

वीर ने जैसे hi अपनी आँख के कोने से आभा को देखा तोह उससे फौरन hi ऊँगली से इशारे करते हुए अपनी ऑर्डर बुलाया.

आभा आँखें फाड़े, लम्बी सासें लेते हुए धीरे धीरे आयी. वीर के होंठ अभी भी सुमन के होंठो को hi चूस रहे थे.

और आभा जब एकदम नज़दीक आ गयी तोह वीर ने सुमन को चोरर आभा को अपनी बाहो में खींचा और उसके कोमल गुलाबी होंठ अपने मुँह के गिरफ्त में ले लिए.

"ममममम~"

कुछ देरर की होंठ चुसाई और दूध दबाने के बाद वीर ने बस इतना hi कहा उन् दोनों से,

"में काम से कही जा रहा हु. रात को तुम दोनों... तैयार रहना!"

और बस, इतना बोल वो बाहर निकल गया.

दोनों hi माँ और बहु लम्बी लम्बी सासें लेट्वे हुए वीर को जाते हुए देखती रही. उन्हें जैसे रात का बेसब्री से इंतज़ार था.

*वररूऊऊऊम्म्मम्म*

वीर गाडी को रेप्ट हुए बस भागे जा रहा था.

उसकी डेस्टिनेशन साफ़ थी.

बेसिक एनिमी ट्रैकर के चलते उससे स्लोगन के एक आदमी का पता लग चूका था जो उसके सबसे नज़दीक था.

और उसके मैं में hi एक मैप खुला हुआ था जो एनिमी की पोजीशन दिखा रहा था लाल बिंदु बन्न के. जैसे मानो उसके मैं में hi अलग से किसी ने जीपीएस फिट कर दिया हो.

***

क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स क्लब...

अक आतिश' हिडौट 3...

किसी क्लब में इस वक़्त महफ़िल सी जमी हुई थी. और ये आतिश का तीसरा हिडौट था जो अक्सर काम hi उसे हुआ करता था. क्युकी यहाँ डील्स और प्लानिंग काम, लड़कियों के साथ रंगरेलिया और मौज मस्ती ज़्यादा करि जाती थी.

इस वक़्त भी यही हो रहा था. एक लक्ज़री बड़े से सोफे पर विराजमान एक बड़ी तौंद वाला आदमी बैठ हुआ था.

उसके अगल बगल दो प्रोस्टीटूटे लड़किया बैठी हुई थी जो उसके गले में मुँह घुसाए उससे चाट रही थी.

"हाहाहाहा~ ऐसे hi मेरी प्यारी सुंदरियों... हाहाहा~"

अश्लील गाने बज रहे थे और दारु के नशे में सब टुल्ल होक मौज मस्ती कर रहे थे.

*गुड़गुड़गुड़*

तभी अचानक उस आदमी के पेट में गुड़गुड़ हुई. अब दारु पी थी तोह पेशाब तोह आणि hi थी.

"मौज मस्ती जारी रखो रे. में बाथरूम से आया हाहाहाहा~"

वो पेटू आदमी उठा और बाहर निकल क्लब के hi वाशरूम में गया.

*सूउऊउउउ*

वो चेन्न से मूट hi रहा था. और अभी अपनी ज़िप बंद hi किया था जब उसके कंधे पर एक हाथ पीछे से आकर किसी ने रखा.

'हँ?'

वो पलटा और तभी उससे अपने कानो में एक आवाज़ सुनाई दी.

"I'll बे दमागिंग थिस...!"

और अगले hi पल...

*क्राएसकककक!!!!*

"आआह्ह्हम्मम्मम्मम~!!??"

उससे कुछ समझ आता उसके पहले hi उसकी चींख को रोकने के लिए किसी ने उसके मुँह में रुमाल घुसेड़ दिया था.

उसके सामने खड़ा वो व्यक्ति कोई और नहीं वीर hi था.

उसके पीछे से आते hi वीर ने उससे पलटाया और उसका हाथ पकड़ मरोड़ दिया.

लीम्बो!!!

अभी अभी वीर के द्वारा खरीदी गयी स्किल.

इस स्किल की यही खासियत थी. लीम्बो एक ऐसी स्किल थी जो लिंब ब्रेक करती थी. और अच्छे से कहा जाए तोह...

वीर ने जो अभी किया था. उस से उस आदमी की हड्डी तोह टूटी hi हाथ की पर साथ hi साथ उसने ऐसी पोजीशन में मोड़ते हुए किया ये की अब उस आदमी का हाथ कोई नहीं रिपेयर कर सकता था. महान से महान डॉक्टर भी नहीं.

सिवाए वीर के.

और यही लीम्बो की खासियत थी. किसी का कोई भी अंग ऐसा मोड़ दो की वो कभी रिपेयर hi न हो पाए.

वीर ने भी अभी इस आदमी के हाथ को यही किया.

इस आदमी की लोकेशन वीर को पहले hi मिल गयी थी एनिमी ट्रैकर से. वीर बस यही सोच रहा था की इस आदमी को बाहर कैसे लाया जाए.

पर इस आदमी ने तोह जैसे खुद hi वीर का काम आसान कर दिया था. वो खुद hi बाहर चला आया.

मौका देखते hi वीर ने सीधा लीम्बो उसे किया और उसका हाथ मरोड़ दिया.

हाथ इतना बुरी तरह मुदा हुआ था की वो आदमी दर्द से कराह रहा था और उसकी आँखों से ासु बह रहे थे. वो चींख पाटा की उसके पहले hi वीर ने उसके मुँह में रुमाल ठूस दिया था.

दर्द से तड़पते हुए उसने मुँह से वो रुमाल निकालनी की कोशिश की तोह...

*थुड़*

"उउउउउउउउउ~"

वीर ने अपनी लात उठाते हुए सीधा उसके मुँह पे मारी और उसके मुँह पे hi रख दी. जिस कारण उस आदमी का सर्र बाथरूम की साइड की दीवार से जा भिड़ा.

"एक शब्द नहीं!!! समझा न!???"

वीर ने उससे गुस्से में देखते हुए कहा.

'चेक!!!'

[Name : Balhaar.


आगे : 36

बायो : जस्ट ा नार्मल गुण ऑफ़ आतिश. नाउ हे सेर्वेस फॉर स्लोगन. No फॅमिली, no बैकग्राउंड. कॅश, बियर एंड गर्ल्स अरे हिज फवौरीते थिंग्स.

फवौराबिलिटी : -5

रिलेशनशिप : एनएमईएस.]

और उसके बारे में पढ़ते hi वीर को और भी गुस्सा आने लगा.

उससे पकड़ के वीर ने उठाया और उससे देखते हुए कहा,

"क्यों बी बलहार? मौज हो रही है हाँ? क्या हुआ चौंक गया? यही की मुझे तेरा नाम कैसे पता? में तेरे बारे में सब जानता हु समझा? स्लोगन अभी अंडरग्राउंड हो गया होगा. है न? खबर तोह मिली hi होगी तुझे?"

वीर का इतना कहना hi था की बलहार के चेहरे से रंग उड़द चूका था.

वीर को उसका नाम कैसे पता था भला? ऊपर से स्लोगन के बारे में वीर कैसे जानता था? वो सोचना तोह चाहता था पर जैसे अपने हाथ का दर्द उससे कुछ सोचने नहीं दे रहा था.

"उउउउउउ~ उउउउउ~"

"चुप्प! एकदम चुप! कोई आवाज़ नहीं समझा? तुझे पता है स्लोगन क्यों अंडरग्राउंड हुआ? मेरे कारण!"

कहते हुए वीर मुस्कुराया तोह बलहार की गांड hi फट गयी. और क्यों न फटती? स्लोगन जैसा क्राइम बॉस इस लड़के के कारण अंडरग्राउंड हो चूका था.

"तुमने सही अंदेशा लगाया. में वही हु. वही लड़का जिसके लिए अक्सर वो स्टीव तुम जैसे चूज़ों को आर्डर देता है. वीर!!!!!"

और एक बार फिर, बलहार की आँखें फटी की फटी रह गयी.

"बोल? क्या करू तेरे साथ? यही उदा दू या...!?"

वीर ने धमकाते हुए उसके मुँह से जैसे hi कपडा हटाया तोह वो वीर के परर पर गिर पड़ा.

"M-Mujhe जाने दो... M-Mujhe मत मारो... M-Mein कुछ भी करूँगा... में तुम्हारे हाथ जोड़ता हु. ुहु ुहु ुहु...."

एक बार फिर वीर ने उसकी कल्लोर पकड़ उससे उठाया और दीवार में भेद दिया.

वीर : मेरी एक hi शर्त है.

बलहार : K-Kesi शर्त!?

वीर (स्माइल्स) : तुझे सिर्फ मुझे स्लोगन के हर्र मूवमेंट के बारे में खबर देनी है.

बलहार : हँ!?? B-Bas???

वीर (स्माइल्स) : हम्म~ बस!!!

बलहार : में करने तैयार हु. M-Mein तुम्हे हर्र इनफार्मेशन दूंगा. M-Mujhe चोरर दो.

बलहार ने कह तोह दिया था. पर उसके मैं में यही चल रहा था की ...

एक बार बस तू मुझे चोरर मादरचोद. फिर में पूरी गैंग लेके आऊंगा और तेरी धज्जिया उदा दूंगा.

पर वीर कौन था? वीर के पास सिस्टम था. और वो खुद भी होशियार था. वो जानता था इस गांडू के मैं में क्या चल रहा था.

वीर धीरे से मुस्कुराते हुए उसके कान के नज़दीक आया और बड़े hi हौले से बोलै.

"में जानता हु तू क्या सोच रहा है. यही न? की में जैसे hi तुझे चोरडूंगा तू अगले दिन मुझे मारना आएगा? हाहाहाःहाहा~ सो नैवे!!!!"

वीर के हस्सी सुन्न एक बार फिर बलहार डर गया.

"सुन्न गांडू! तेरा जो ये हाथ है न. तू दुनिया के किसी भी डॉक्टर के पास hi क्यों न चला जाए. चाहे उससे कितने भी पैसे क्यों न दे दे. तेरा ये हाथ दुनिया में कोई रिपेयर नहीं कर सकता. सिवाए मेरे..."

और एक बार फिर, बलहार को एक बड़ा झटका लगा. क्या बोल रहा था ये लड़का?

"यदि विस्वाश न हो तोह तरय कर लेना. और यदि तूने गलती से भी किसी को मेरे बारे में खबर दी. तोह समझ लेना तू गया. आखिर कभी न कभी तोह तू अकेला रहेगा hi न? वो पल तेरा आखिरी पल होएगा."

बलहार : H-Huhhhh!??

वीर : क्युकी तूने देखा न? मेने तुझे यु ढूंढ लिया. तू कही भी क्यों न छुप जाए. में तुझे ढूंढ लूंगा. बेहतर यही होगा, की मेरी बात मान, मेरा काम कर और काम के बाद... में तेरा ये हाथ फिक्स कर दूंगा.

वीर ने पॉलिटेली कहते हुए स्माइल पास की. जो स्माइल तोह कही से भी नहीं लग रही थी. ऐसा लग रहा था की कोई डेविल मुस्कुरा रहा हो.

बलहार : M-Mujhe बस इन्फो देना है न?

वीर : हाँ हाँ! बस तुझे सतर्क रहके साड़ी इन्फो मुझे देना है. मेरा नंबर ये ले...

कहते हुए वीर ने अपना नंबर एक कागज़ के टुकड़े में पहले से लिखा हुआ निकाल के उसकी ब्रैस्ट पॉकेट में घुसेड़ दिया.

वीर : छोटा सा hi काम है. तू मुझे इन्फो दे... और में तेरी इस गद्दारी के बारे में किसी को पता लगने नहीं दूंगा. काम के बाद में तेरा ये हाथ भी फिक्स कर दूंगा. और ये भी हो सकता है की... स्लोगन के बाद... में तुझे उसकी जगह सौप दू?

वीर की आखिरी बात सुनते hi बलहार के कान खड़े हो गए.

बलहार : Th-Thik है. M-Mein वैसा hi करूँगा. A-Abhi मुझे जाने दो.

वीर : इतनी जल्दी क्या है? तुम्हारे आदमियों को तोह देख लू.

वीर और बलहार फिर दोनों hi जब क्लब में वापस से एंटर किये तोह वह का मौजूद हाल देख वीर बस चुप रहा.

एक लड़का उसके नज़दीक आया शराब के नशे में धुत्त होक,

"हहै~ B-Boss! ये बच्चे को भी आपने गैंग में भर लिया? हइच.... हेहेहे~"

वीर ने कुछ न कहा. क्युकी उससे कहने की कोई ज़रुरत hi नहीं पड़ी.

*चाताआआअआककककक*

एक ज़ोरदार तमाचा उस लड़के के गाल पर पड़ा और उसकी पूरी दारु जैसे वही उतर गयी.

"मादरचोद गांडू... लवडे!!! एक रहेपता दूंगा न खींच के जहातु इंसान. इसकी माँ का भोसड़ा... ाहः~ S-Sir!!! ये मेरे आदमी ज़्यादा पढ़े लिखे समझदार नहीं है. इन्हे माफ़ कर दीजियेगा!"

अपने बॉस की बात सुन्न जैसे वह मौजूद आदमियों के सर्र के ऊपर एक बेम सा फटा.

उनके बॉस इस नौजवान लड़के को सर कहके बुला रहे थे? और ऊपर से अपने hi आदमी को मारने लगे वो?

केवल एक hi ख़याल आया उनके मैं में फिर.

'इस आदमी से पन्गा नहीं लेने का. और बिना बॉस की इजाज़त के इस लड़के से कोई बकचोदी नहीं करने का.'

उन्हें नहीं पता था की उनका बॉस इस वक़्त अपना हाथ पीछे छुपाये अंदर hi अंदर दर्द से तड़प रहा था.

वीर (स्माइल्स) : इन्हे पाठ पढ़ाओ...

बलहार : J-Jiii! बिलकुल!! जैसा आप कहे...

और इतना बोल वीर बस वह से निकल गया.

[Well! That went smooth!!!]

***

जब वीर घर पहुचा तभी उसके फ़ोन पर एक मैसेज आया.

"क्या तुम फ्री हो वीर? ी वांट तो टॉक तो यू! I'll ट्रीट यू तो ा मील."

सोनिआ की तरफ से आये इस मैसेज को पढ़, वीर की मानो जैसे एक टेंशन hi ख़तम हो गयी थी. सोनिआ को डेट पर ले जाने का मिशन जो मिला था. लग रहा था की शायद आज hi उसका ये मिशन भी पूरा हो जाएगा. और फाइनली वो उन् पॉइंट्स को बाकी स्किल्स और अपने स्टैट्स पर जल्द से जल्द इन्वेस्ट कर पायेगा.

वीर ने "Okay!" लिखते हुए सोनिआ को मैसेज भेज दिया और बेशक, अगले hi पल उससे मेसस्साज आया की सोनिआ खुद उससे पिक उप करने आएगी. पर वीर ने मन कर दिया. लड़की उससे पिक उप करने आये? ये वीर का स्टाइल नहीं था.

भले hi अभी उसके पास कार नहीं थी खुद की. तोह क्या? उसके पास बाइक तोह थी. और सोनिआ ने राज़ी होते हुए उसको एक होटल का एड्रेस और मीटिंग टाइम मैसेज कर दिया.

सोनिआ जो इधर अपने घर में थी वो अपने फ़ोन से वीर को मैसेज करने के बाद अपने वार्डरॉब में से ड्रेस चूसे करने में लग गयी.

उससे नहीं पता क्यों, पर आज वो काफी चिंतित थी.

"ये वाला... नहीं, ये वाला... ुघ्घ! व्हाट शुड ी वियर?"

सोनिआ एक के बाद एक अपनी ड्रेस को अपने सामने लगाती और मिरर के सामने खड़े होक खुद को देखती. आज उसके लिए ये बोहत ज़रूरी निर्णय था.

आम तौर पर चाहे वो मीटिंग्स में जाए या किसी कंपनी रिलेटेड काम से तोह सोनिआ बस प्रोफेशनल लुक में खुद को ढालती थी. पार्टीज में थोड़ा सा एक्सोटिक लुक और कसुआलय राइड करते टाइम एक डेन्ट लुक अपनाती थी वह.

पर आज, वो थोड़ी बेचैन थी. क्या पहने? और किसी लगेगी वो वीर के सामने? उसके मैं में यही चल रहा था. वीर से उस दिन की मुलाक़ात के बाद से hi, सोनिआ का वीर में इंटरेस्ट कई गुना बढ़ चूका था. ऐसे तोह वह कभी किसी लड़के पर इतना ध्यान नहीं देती थी. पर वीर ने जैसे उसका नजरिया बदल दिया था. एक कारण और था वीर के पीछे जाने का.

करा!!

करा जैसी लड़की वीर के पीछे लगी हुई थी. तोह इस बार तोह जैसे सोनिआ ये बाज़ी हर्र हाल में जीतना चाहती थी.

***

ात नाईट...

8:35 पं...

वीर बतायी गयी होटल में पहुँच चूका था. साला होटल भी 5 स्टार थी. आलिशान एकदम.

अंदर वीर जैसे hi दाखिल हुआ, उससे सोनिआ अलग hi नज़र आ गयी. क्युकी आज वो इतनी ज़्यादा ख़ूबसूरत जो लग रही थी.

ये होटल शहर में बोहत प्रचिलित थी. तोह वह सभी हाई क्लास वाले लोग मौजूद थे. इन्क्लूडिंग थे रिच एंड ग्रेसफुल लेडीज.

हाई सोसाइटी की लेडीज वह सभी महंगी महंगी ज्वेल्लेरी पहने और महंगे कपडे पहने हुए बैठी हुई थी.

भले hi वो कितनी भी सुन्दर क्यों न हो, उन् सबकी सुंदरता जैसे आज सोनिआ ने अपने हुस्न से धाक के रख दी थी.

वो बस चुपचाप बैठी वीर का इंतज़ार कर रही थी. और उसके चुप रहने के बावजूद वो वह बैठे आदमियों को सर्र बार बार घुमाने पर मजबूर कर रही थी.

'शी लुक्स सो ब्यूटीफुल!'

अपने मैं में सोच वीर आगे बढ़ा.

होटल का अम्बिएंस इतना प्यारा था और हलकी हलकी रौशनी सोनिआ के ठीक ऊपर पद रही थी जो उसकी मखमली गोरी त्वचा को और भी निखार के दर्शा रही थी. आज वो शानदार रेड ड्रेस पहने हुए थी.

आँखों में बेहद चमक थी, उसकी भरी भरी काली पलके बार बार झपकती, उसकी बॉहे भी आँखों की हरकत के हिसाब से ऊपर नीचे होती. पर...

पर उसके दिल में अभी भी वही बेचैनी मौजूद थी.

वीर आया और आके सीधा सोनिआ के सामने वाली सीट पर बैठ गया. और उसके ऐसा करते hi, वह मौजूद आदमी जो सोनिआ पर नज़रे गड़ाए थे उनका जैसे दिल टूट गया. मैं में बस गाली hi निकली वीर के लिए.

वीर एक सिंपल ब्लैक शर्ट और ब्लू जीन्स में था. नाइके के शूज और हाथ पर एक कासुअल सी वाच. उसका अपीयरेंस अच्छा था पर उस होटल में वीर से भी कई गुना अमीर और कई गुना अच्छे दिखने वाले बन्दे बैठे हुए थे.

और वीर को देख उनके मैं में यही चल रहा था की...

'ये गांडू में ऐसी क्या ख़ास बात है?'

'ये लड़का तोह एकदम सिंपल है!'

'इस लड़के ने भला ऐसी ख़ूबसूरत लेडी कहा से पता ली?'

कुछ ऐसी hi बातें उनके दिमाग में आ रही थी.

[Hmph~ Look at those assholes! Getting Jealous...]

वीर ने उन् जलन खोरी लोगो की नज़रो को इग्नोर किया और मुस्कुराते हुए सोनिआ को देख बोलै,

"क्या में ज़्यादा लेट था मिस सोनिआ? ी सी यू वेरे वेटिंग!'"

अचानक से वीर को अपने सामने देख सोनिआ की बेचैनी और भी बढ़ गयी.

सोनिआ : अहह! N-Nahi! में भी अभी आयी बस वीर!

भले hi सोनिआ ने मुस्कुराते हुए ये बातें कही थी. पर वीर अच्छी तरह से परखना और देखना जानता था.

Make-up से हर्र चीज़ नहीं छुपाई जा सकती थी. या यु कहे की ज़्यादा make-up से, कुछ चीज़े अपने आप उजागर हो जाती थी. वीर देख पा रहा था की आज सोनिआ ने आँखों के नीचे उसुअल से कुछ ज़्यादा hi make-up किया हुआ था.

'शी वास् क्राइंग!'

[H-Huh? Par kyu?]

पारी के सवाल को वीर ने इग्नोर कर दिया. पारी और वीर दोनों hi ये नहीं जानते थे की आज सोनिआ यहाँ आने से पहले रोई तोह ज़रूर थी. पर ये ख़ुशी के ासु थे.

उस दिन जो वीर ने बात कही थी.

"यू एंड मिस करा, अरे बोथ इक्वल तो में!'"

ये वाक्य जैसे सोनिआ के कानो में मंडरा रहा था उस दिन से. न जाने कबसे उससे किसी के मुँह से ये sunn'ne का इंतज़ार था. वर्ण अक्सर हर्र कोई उससे और करा को कपड़े करता और फिर उससे चोरर करा की तरफदारी करने लगता. पर वीर ने तोह जैसे एक नयी आस दे देती थी सोनिआ को.

अंत में वीर ने अपने सवाल रखा, "आप ने सडनली आज मुझे बुलाया!? क्या कुछ काम था?"

सोनिआ : हाआअह!? N-Nahi! क्या में... क्या में तुम्हे डिनर के लिए नहीं पूछ सकती?

वीर (स्माइल्स) : क्यों नहीं पूछ सकती? ऑफ़ कोर्स यू कैन! मुझे बस लगा की शायद आपको कोई ज़रूरी काम था.

वीर की बात सुन्न, सोनिआ ने अपनी नज़रे नीचे कर ली और बड़ी hi धीमी आवाज़ में बोली,

सोनिआ : एक्चुअली... उस दिन... उस दिन जो तुमने मुझसे कहा था. ट्रस्ट में वीर! आज तक मुझसे वो बातें किसी ने नहीं कही. I'm वैरी थैंकफुल तो यू. थैंक यू! थैंक यू वैरी मच. तुम जानते नहीं हो, बूत आईटी मीन्स ा लोट तो में.

वीर सोनिआ को भावनाओ को समझ पा रहा था इसलिए उसने भी मुस्कुराते हुए अपनी बात राखी.

वीर : मेने वही कहा जो मेरे लिए सच था. और हमेशा सच रहेगा.

सोनिआ (ब्लशेस) : अहह!?

उस दिन न जाने सोनिआ में इतनी हिम्मत कहा से आ गयी थी की वो वीर को गालो पर किश दे बैठी. पर असल में, सोनिआ बड़ी hi शर्मीली किस्म की लड़की थी. क्युकी उसने कभी मन के साथ उतना इंटरैक्ट किया hi नहीं था. खासकर इस जवानी के समय. बस वीर hi एक था.

सोनिआ (ब्लशेस) : उम्...

वीर : हम्म?

सोनिआ : तहत...

वीर : !??

वीर ने नोटिस किया की सोनिआ कुछ कहना चाह रही थी पर कह नहीं पा रही थी. शायद शर्मा रही थी.

वीर : कुछ बात है क्या मिस सोनिआ?

सोनिआ (ब्लशेस) : ी...

बेचारी सोनिआ इतना शर्मा रही थी. पर जैसे तैसे उसने हिम्मत करके पूछ hi लिया.

सोनिआ (ब्लशेस) : W-What इस थे रिलेशनशिप बिटवीन यू एंड करा?

वीर : *कुघ* *कुघ*

वीर जो इस वक़्त पानी पी रहा था, ये सवाल सुनते hi उससे फन्दा लग गया.

[Ohhhhhh~ Hahahahahaha! Explain karo ab.]

सोनिआ : आह! A-Araam से... बे केयरफुल!

सोनिआ ने उसके हाथो से गिलास लिया और वापस टेबल पर रख दिया.

पर वीर इतना हैरान क्यों रह गया था? क्युकी जैसे hi सोनिआ ने ये सवाल पूछा था. वीर को करा के संग बितायी पहली रात याद आ गयी, जिस कारण से उससे फन्दा लग गया था.

वीर : एहम... तहत...

सोनिआ : हनन!?

वीर : एक्चुअली! वे बोथ जस्ट क्नोव एच इतर. वो मेरी हेल्प करती है कभी, तोह कभी में उनकी.

सोनिआ : K-Kis...? किस तरह की हेल्प?

वीर : लिखे, लास्ट टाइम उन्होंने मुझे मेरी सिग्नेचर डिशेस को ढूंढ़ने में हेल्प की थी. शी गावे में सम बिज़नेस रिलेटेड अद्विसेस. और मेने उनकी मदद उस दिन उन्हें उस मिरर गैलरी में हो रहे हमले से बचा के की थी. यू क्नोव... म्यूच्यूअल एक्सचेंज!

सोनिआ (मायूस होते हुए) : म्यूच्यूअल एक्सचेंज हँ? बूत... केवल अद्विसेस के बदले में, खुद की जान डाव पर लगाना!? That's किते ान एक्सचेंज.

सोनिआ मायूस थी. बेशक! इसमें कोई डाउट नहीं था. उसका कहना बस सिंपल था. भला चाँद अद्विसेस के लिए वीर ने करा की जान बचाने के लिए खुद की जान जोखिम में क्यों डाली? पर जैसे सोनिआ को इसका उत्तर अगले hi पल मिल गया.

वीर (स्माइल्स) : यदि मिस करा की जगह आप वह होती, ी वोउल्ड हैवे दोने थे शामे फॉर यू!

*बेदुम्प*

सोनिआ : आह्ह्ह्ह!???

सोनिआ का दिल पल भर के लिए इतनी जोरर से धड़का की वो आँखें फाड़े वीर को देखने लगी.

सोनिआ (ब्लशेस) : T-T-Th-That...

बेचारी की जुबां hi लड़खड़ा गयी.

सोनिआ (खुसपुसाते हुए) : W-Why फॉर में...!? व्हाई वोउल्ड यू?

वीर (स्माइल्स) : Didn't ी से बिफोर? फॉर में... मिस करा एंड मिस सोनिआ अरे बोथ इक्वल!

*बेदुम्प*

सोनिआ बेचारी इस बार वीर के हमले को न सेह पायी और उसने शर्माते हुए अपनी नज़रे नीचे कर ली.

उसके बाद उन् दोनों ने hi खाना खाया और जब बिल देने के बारी आयी तोह वीर ने बिल पाय करने को कहा.

सोनिआ : No वाय! मेने तुम्हे बुलाया था वीर. सो, मुझे hi बिल पाय करना चाहिए!

वीर : बिलकुल भी नहीं! आपने पहली बार मुझे बुलाया है. इस बार तोह बिल में hi पाय करूँगा. अगली बार भले आप कर देना.

सोनिआ (ब्लशेस) : तहत... F-Fine!

और दोनों hi होटल से बाहर निकल आये.

सोनिआ : उम्... सो? क्या में तुम्हे फिरसे ऐसे डिनर पर बुला सकती हु न?

वीर : ऑफ़ कोर्स! बूत नेक्स्ट टाइम आप नहीं, में आपको लेके चलूँगा.

सोनिआ (स्माइल्स) : R-Really?

वीर (स्माइल्स) : रियली!

सोनिआ : Th-Thanks!

वीर नोद करते हुए जैसे hi जाने के लिए हुआ तोह...

सोनिआ (ब्लशेस) : वो...

सोनिआ की आवाज़ सुन्न वो पलटा और तभी...

उससे दो नरम और बेहद hi गर्म चीज़ का एहसास अपनी छथि पर हुआ.

सोनिआ उसके गले से लग चुकी थी. पर जब तक वीर इस एहसास को और अच्छे से महसूस कर पाटा वो फौरन hi शर्माते हुए पीछे हट गयी,

"I'll... I'll तेल्ल यू बेफोरेहंद में कब फ्री रहूँगा. B-Bye! टेक केयर~"

और इतना बोल वो बस तेज़्ज़ कदमो के साथ अपनी गाडी की ऑर्डर भाग गयी.

आज वो बेहद खुश थी.

वीर बस मुस्कुराया और अपनी गाडी उठा के चल दिया घर की ऑर्डर...

और तभी,

*डिंग*

['मिशन : टेक सोनिआ ों ा डेट' है बीन कम्प्लेटेड.]

[You have been rewarded 600 Points.]

***

रात में सुमन और आभा जैसा की बात तय हुई थी दोनों hi उसके अगल बगल लेती हुई थी. और दोनों hi...

जैसा की आपने सही समझा. दोनों hi एकदम नग्न हालत में थी. वीर आज उन् पर टूट पड़ा था.

वो लेता हुआ अभी अपने अगल बगल से चिपके दोनों आभा और सुमन के दूध को एन्जॉय कर रहा था और धीरे धीरे दोनों के चूतड़ों को मॉल रहा था.

जब अचानक hi उससे आरोही का कॉल आया,

वीर : आरोही दी?

आरोही : कल! सुबह! शार्प 11 बजे... घर आ जाना वीर. दादा जी! वो अपना डिसिशन सुनाने वाले है.

और थोड़ी देरर आरोही से बात कर वीर बिस्तर पर उठ के बैठ गया. कल पक्के से कुछ सन bann'ne वाला था घर में.

पारी तोह स्लीप मोड में थी. इसलिए वीर ने खुद hi अपने मैं में शॉप खोली और सीधा शॉप में सर्च मारा.

इंटरमीडिएट मार्टिकल आर्ट स्किल!!!

नीचे प्राइस लिखा hi था~

400 पॉइंट्स!

और वीर ने एक बार में hi परचेस के ऑप्शन पे क्लिक किया और...

*डिंग*

[Intermediate Martial Art Skill is now available.]

और ये नोटिफिकेशन सुनते hi वीर मुस्कुराते हुए वापस से अपनी दोनों सेविकाओं के बीच लेत गया.

'प्रांजल! I'm प्रेपरिंग ा सरप्राइज फॉर यू!!!'

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!

लिखे थोक के जाने का. होली में बैठ कर लिखा है अपडेट. और कमैंट्स ज़रूर रखने का. 😁
 
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