अपडेट - 49 ~ थे लास्ट डे ऑफ़ थे ईयर
अब तक...
बेचारा वीर जवाब के तौर पर कुछ भी नहीं सुन्न पाया.
पर...
निधि न जाने क्या सोच रही थी. पर उसकी नज़रे एक जगह hi तिकी हुई थी. सासें पहले से थोड़ी तेज़्ज़. और उन् आँखों के सामने उसके बाल थे जो उसके एक्सप्रेशन को छुपाये हुए थे.
क्या होने वाला था कल!? इनके इस प्लान में!? तोह वही प्रांजल और विवेक के प्लान में!? और साथ hi साथ... स्लोगन!!!! जिसकी एक्टिविटीज वीर के पल्ले नहीं पद रही थी.
अब आगे...
31सत दिसंबर...
ात मॉर्निंग...
कल श्रेया से जब वीर की फ़ोन पर बात हुई थी तोह वीर की हामी लिए बजर्र hi श्रेया ने उससे अपने प्लान में शामिल कर लिया था. और तय हुआ था की आज की रात वीर, श्रेया, निधि और जूही सभी साथ में एन्जॉय करने जाएंगे और लेट नाईट तक नए साल का स्वागत कर थोड़ा सेलिब्रेशन कर के hi घर लौटेंगे.
वीर को उस मिशन के 200 पॉइंट्स मिल चुके थे पर अभी तक उसने उन् पॉइंट्स को स्पेंड नहीं किया था सिवाए 10 पॉइंट्स के. उसने अपीयरेंस में 10 पॉइंट्स कल रात में hi इन्वेस्ट कर दिए थे. और अब उसके स्टैट्स कुछ इस प्रकार से थे.
[ स्टैट्स :
स्ट्रेंथ - 56/100
इंटेलिजेंस - 70/100
अगिलिटी - 50/100
ेंदुराने - 50/100
अपीयरेंस - 50/100]
वीर शायद अपने बचे हुए पॉइंट्स को एकदम एफ्फेक्टिवेली उसे करना चाहता था. शायद शॉप में ऐसी किसी अनोखी स्किल की तलाश थी उससे जो उसके बेहद काम आ सके.
'शो में माय फुल स्टेटस पारी!'
[Sure thing, Master!]
[Name : Veer
आगे : 21
स्टेटस : स्टूडेंट
स्टैट्स :
स्ट्रेंथ - 56/100
इंटेलिजेंस - 70/100
अगिलिटी - 50/100
ेंदुराने - 50/100
अपीयरेंस - 50/100
स्किल्स :
1) सेक्स प्रोटेक्शन : ों (सिल्वर टियर स्किल)
2) बेसिक मार्टिकल आर्ट्स स्किल (ब्रोंज टियर स्किल)
3) हव्कये (डायमंड टियर स्किल)
System's इंटरनल फीचर्स :
Check-I, Check-II, पथ ट्रैकर, पास्ट इलस्ट्रेशन.
रिलेशनशिप्स :
1) सुमन : लॉयल स्लेव (फवौराबिलिटी : 84)
2) आभा : फेमिलिअर (फवौराबिलिटी : 58)
3) सोनाली : फेमिलिअर (फवौराबिलिटी : 30)
4) रागिनी : क्लोज फ्रेंड (फवौराबिलिटी : 60)
5) निधि : क्लोज फ्रेंड (फवौराबिलिटी : 52)
6) श्रेया : क्लोज फ्रेंड (फवौराबिलिटी : 64)
7) जूही : बेस्ट फ्रेंड (फवौराबिलिटी : 85)
8) सुहाना : क्लोज फ्रेंड (फवौराबिलिटी : 59)
9) सोनिआ : गुड फ्रेंड (फवौराबिलिटी : 50)
10) काव्य : वैरी क्लोज फ्रेंड (फवौराबिलिटी : 80)
11) आरोही : गुड फ्रेंड (फवौराबिलिटी : 55)
12) भूमिका : फेमिलिअर (फवौराबिलिटी : 20)
13) श्वेता : फेमिलिअर (फवौराबिलिटी : 8)
सिस्टम लेवल : लेवल 4
(56 ऍक्स्प मोरे तो रीच लेवल 5)]
'हम्म!! ी नीड तो ीर्ण मनी एंड नीड मोरे पॉइंट्स. मेरी प्रायोरिटी यही है अभी.'
[Right master!]
'सो!? उम्... मिस करा की फवौराबिलिटी नहीं देख सकता क्या में!?'
[Dekh sakte ho but not now. Yadi kisi ka status nahi dekh sakte toh aap uski Favourability bhi nahi dekh paoge.]
'हम्म! ी सी! ऑलराइट! Let's जो...'
आज वीर के 2 जगह प्लान्स थे. एक तोह वही श्रेया और बाकी सभी के साथ रात का प्लान था और दूसरा रागिनी और बाकी सभी के साथ.
जब वीर ने ये बात बतायी थी की वो रात में फ्री नहीं रहेगा, ये सुन्न के रागिनी काफी उदास हो गयी थी. पर उसने बेहला फुसला के रागिनी को जैसे तैसे मन लिया और दिन में घूमने चलने को कह दिया. यहाँ वीर को एक और बात jaan'ne को मिली की काव्य और बाकी सभी परिवार के साथ कुल देवी के मंदिर के लिए सुबह निकल चुके थे.
बेशक! वीर इस अचानक ट्रिप से उनकी थोड़ा आश्चर्य चकित था पर उसने ज़्यादा नहीं सोचा. काव्य का कहना था की उसके दादा जी ने वीर को साथ ले चलने के लिए भी बोलै था पर विवेक ने बीच में कूद कर दादा जी के कान भर दिए और वो बात वही ताल के रह गयी.
खर्र! आइये, तोह वही चल के देखते है की वह क्या चल रहा था इस वक़्त...
इस समय सुबह के 8 बज रहे थे और सभी घर वाले दो बड़ी बड़ी गाड़ियों में बैठे हुए थे अपनी और अपने गांव की ऑर्डर जा रहे थे.
वीर के परिवार के पूर्वज सालो से उस देवी माता की पूजा करते आये थे और उस मंदिर की स्थापना भी उनके पूर्वजो ने hi की थी पर जैसे जैसे समय गुज़रता गया और आने वाली पीढ़ी शहर से जुड़ती गयी, वो मंदिर धीरे धीरे वह के ट्रस्ट में समर्पित कर दिया गया.
कारण!? कारण था की अब वीर का परिवार शहर में पनप रहा था और घर का कोई सदस्य रोज़ रोज़ मंदिर की देख भाल या चक्कर लगाने के लिए किसी के पास इतना समय नहीं था. तोह उस मंदिर को वही के ट्रस्ट में समर्पित कर दिया गया. अब उस मंदिर की पूरी ज़िम्मेदारी उन् ट्रस्ट वाले लोगो की थी.
पर आज भी, जब भी वीर का परिवार, ख़ास कर मनोरथ जी जब भी वह जाते थे, गांव के सभी लोग उन्हें बड़े hi आदर और सत्कार के साथ उनका स्वागत करते थे. यहाँ तक की वो ये भी कहते थे की अब भी की वो मंदिर उन्ही का है और हमेशा उन्ही का रहेगा. शायद आज भी उनकी अच्छी खातिरदारी होने वाली थी.
उन् दो कार्स में से, एक कार में बृजेश संग भूमिका, श्वेता, काव्य और मनोरथ विराजमान थे.
तोह वही दूसरी में करुणेश संग सुमित्रा, विवेक, आरोही और प्रांजल.
दोनों hi कार में दो ड्राइवर्स थे. शहर से कुछ घंटो की दुरी पर hi उनका गांव था.
काव्य : दादा जी आपने... वीर भैया को नहीं बुलाया!?
मनोरथ : बीटा मेने कहा था पर विवेक बोलै की आज वीर शायद कही और जा रहा है... मेरी तोह कोई सुनता hi नहीं है. जैसे जैसे बूढ़ा होता जा रहा हु, मेरी बातो को अब लोग हवा में उड़ाते जा रहे है.
बृजेश : पापा जी... ऐसी बात क्यों कह रहे हो आप!? हम सब आपकी बात मानते है. अब उस बारे में चर्चा मत करिये आप. मंदिर जा रहे है, अच्छा मूड रख के चलिए.
बृजेश की इस बात पे सभी शांत पद गए. वो आगे ड्राइवर के संग बैठा हुआ था. तोह वही पीछे साइड की सीट पर मनोरथ और उनके बगल से काव्य, फिर भूमिका और फिर श्वेता.
भूमिका : आज साड़ी रिस्पांसिबिलिटी नंदिनी को देके आयी हु माँ.
नंदिनी उनके होटल की मैनेजर थी. जो सब कुछ बड़ी hi अच्छी तरीके से मैनेज कर लेती थी.
श्वेता : हम्म! चिंता की कोई बात नहीं है. वो अच्छे से देख लेगी.
भूमिका : हम्म! बस कोई बड़ा क्लाइंट या गेस्ट न आ जाए. और ऐसा न हो की कुछ प्रॉब्लम हो जाए.
श्वेता : Don't वर्थिंक! जस्ट एन्जॉय थे डे मेरा बच्चा...!
भूमिका (स्माइल्स) : हम्म!
और कुछ घंटो की दूरी तय करने के बाद hi वो पहुँच चुके थे अपने कुलदेवी के मंदिर.
सभी का वह हर्र बात की तरह बड़े hi आदर के साथ स्वागत किया गया. साथ hi साथ वह उनके रुकने और खाने की भी व्यवस्था की गयी.
दर्शन कर लेने के बाद सभी खाना खाने में लगे हुए थे जब विवेक और प्रांजल आपस में बैठ न जाने क्या बातें कर रहे थे.
प्रांजल : सारा प्लान रेडी है भैया... बस देरर है तोह उससे अंजाम देने की...
विवेक : नहीं छोटे... आज नहीं...! हमे वैसे भी कल निकलना है. आज रिस्की है. कल करना... वैसे भी यहाँ से नाश्ता करने के बाद hi निकलेंगे हम.
प्रांजल : ठीक है भैया! कल सही फिर...
न जाने दोनों किस प्लान को अंजाम देने की बात कर रहे थे.
***
इधर वीर दिन में अपने परिवार के साथ हो रही बातो से अनिभिज्ञ रागिनी और बाकी सभी के साथ आज घूमने निकला हुआ था.
पर अचानक hi रास्ते में उससे नज़र आया की कुछ लेडीज किसी कपडे की सेल पर हंगामा कर रही थी.
वीर : क्या हो रहा है उधर!?
रागिनी : विरोध!
वीर : विरोध!? केसा विरोध!?
रागिनी : उम्... वो देखो न... महिला मंडल जमा हो गया पूरा उधर. किसी सेल की पीछे लड़ाई हो गयी है. शायद कुछ घपला किया है सेल वाले ने. इसलिए औरते इतनी आवाज़ें लगा रही है.
और वाक़ई! जब वीर ने ध्यान से देखा तोह उससे समझ आया की नए साल की सेल के बहाने कपड़ो का बिज़नेस करने वाला आदमी कुछ फटे और बेकार पीसेज को निकालने के लिए ये सेल रखा हुआ था. और वो कपड़ो की रैपिंग को खोलने नहीं दे रहा था.
जब कुछ औरतो ने खोल के कपड़ो की जांच की तोह उन्होंने धावा बोल दिया. इत्तेफ़ाक़ से महिला मंडल वही से कही और जा रही थी और ये विरोध देख वो भी उनके साथ जुड़ गयी और पूरी तरह से वात लगा दी उस दूकान दार की.
रागिनी (शिघ्स) : हर्र सेल में कुछ न कुछ होता hi है.
वीर बड़े hi ध्यान से सब कुछ देख रहा था और अचानक hi जैसे उसके दिमाग की घंटी बजी और अगले hi पल उसके होंठो पर एक मुस्कान बिखर गयी.
वीर : भाभी!
रागिनी : हम्म!?
वीर : मेरी आप से एक रिक्वेस्ट है. आप पूरी करोगी!?
रागिनी : हम्म? Okay! क्या बात है!?
वीर : क्या आप... क्या आप सुमन जी को शहर के पूरे तौर तरीके सीखा सकती हो? मेरा मतलब है सारे नियम कायदे, khareed-daari से लेके देवीकेस को ऑपरेट करना सब कुछ. एक मॉडर्न व्यक्ति का पूरा नॉलेज जितना आप दे सकती हो... क्या आप कर सकती हो?
रागिनी (सुरप्रीसेड) : हँ!? P-Par ये एकदम से ऐसे क्यों!?
वीर : सुमन जी ने मुझसे hi खुद कहा था. क्यों है न!? सुमन जी!?
सुमन : E-Ehhh!? ओह्ह्ह! हां हां! मेने कहा था...
सुमन बात को समझ फौरन hi हां में सर्र हिलायी और अपनी रज़ामंदी दी. पर उसकी समझ में नहीं आ रहा था की उसके मालिक के दिमाग में आखिर चल क्या रहा था.
रागिनी : O-Okay! में अपनी पूरी कोशिश करुँगी इन्हे सब कुछ बताने में...
वीर (स्माइल्स) : थैंक यू भाभी!
रागिनी : उम्... It's okay!
लंच के समय, रागिनी और वीर अगल बगल hi बैठे थे जब वीर ने रागिनी के चेहरे पर मायूसी को तुरंत hi भांप लिया...
वीर : आप परेशान लग रही हो भाभी!
रागिनी : हँ!? N-Nahi तोह!? में भला क्यों परेशान होने लगी!?
वीर : झूठ मत बोलिये! मुझसे तोह बिलकुल भी नहीं! विवेक भैया का कॉल आया था न!?
वीर की बात सुन्न रागिनी इस बार धीरे से हां में सर्र हिलायी और अपने निगाहें नीचे कर बैठ गयी.
वीर : क्या कहा उन्होंने!?
रागिनी : वो... वो सभी आज हमारी कुलदेवी के मंदिर गए है.
वीर : उन्होंने आप को भी बुलाया होगा!?
रागिनी (नॉड्स) : उम्...
वीर : तोह!??
रागिनी ने अपनी निगाहें ऊपर कर एक पल के लिए उससे देखा... उन् आँखों में नमी जो पनप रही थी वो वीर आसानी से देख पा रहा था.
रागिनी : ी... में... में कभी भी मंदिर के नाम पर देवी का तिरस्कार नहीं करती मन कर के... पर...
वीर : ....
रागिनी : पर...
वीर : आपका मैं नहीं किया ज़रा भी...
ये वाक्य सुन्न रागिनी चौंकी और वीर को घूरने लगी.
भला उसके मैं की बात वीर ने कैसे भांप ली थी!?
वीर : इतने दिनों से आप के साथ रह रहा हु. थोड़ा बोहत तोह में भी आपको समझने लगा हु.
कहते हुए उसने जैसे hi अपना हाथ रागिनी के हाथ के ऊपर रखा तोह बेचारी रागिनी की इधर हालत hi बिगड़ने लगी. वो फटी आँखों से वीर को घूरे जा रही थी.
उसके गुलाबी होंठ खुले... पर केवल हलकी सी हवा hi बाहर निकली, कोई शब्द नहीं.
और आँखें जो की त्यों वीर पर तिकी थी.
वीर : ी don't क्नोव की आप क्या डिसिशन लोगी. बूत आप जो भी डिसिशन लोगी. हम सब आपके साथ है. बूत िफ़... यदि आपने विवेक भैया से सच में अलग होने का डिसिशन लिया थें... ी वास् वॉन्डरिंग की... क्या हम ऐसे hi रह पाएंगे!? ी मैं... फिर आप उस घर की सदस्य नहीं रहोगी और मेरा और सुमन जी का आपके घर रुकना...
वो अपनी बात आगे रख पाटा की उसके पहले hi रागिनी ने अपना हाथ उसके होठो पर रख उससे रोक दिया.
रागिनी : वीर! में उस परिवार की सदस्य राहु या न राहु. तुम और सुमन जी मेरे अपने सदस्य हो. वो घर मेरा अकेले का नहीं है. तुम सभी का भी है. और क्या करुँगी में इतने बड़े घर में अकेले रह के!? भूलो मत वीर... तुम भी... उस परिवार से अलग हो चुके हो. तोह ऐसे में यदि में भी होती हु... तोह... Aren't वे थे शामे!?
उसने मुस्कुराते हुए कहा पर वीर जानता था. की उस स्माइल के पीछे काफी कुछ छिपा हुआ था. जिससे शायद व्यक्त करना अभी रागिनी के बस में नहीं था.
और बिलकुल वैसा hi हुआ... भावुक होते हुए रागिनी ने फौरन hi अपना चेहरा फेरर लिया और जब उसने देखा की सुमन समेत सभी काउंटर से वापस उसकी और वीर की तरफ आ रही है तोह फौरन hi अपनी आँखें मॉल सीढ़ी होकर बैठ गयी.
अंत में उन् सभी ने थोड़ा एन्जॉय किया जिसके चलते रागिनी का मूड काफी हद्द तक ठीक हो चूका था.
पर अब समस्या थी रात की...
वीर को निधि को जो फेस करना था. वैसे तोह निधि ने उससे माफ़ कर दिया था. पर...
प्रातकयष आमने सामने मिलना एक अलग बात थी.
और ज़ाहिर है की दोनों के बीच ावकवर्डनेस्स बरकरार रहने वाली थी.
***
31सत दिसंबर...
ात नाईट...
वीर अपनी बाइक पर था और वो ठीक निधि की सोसाइटी में hi नीचे खड़ा हुआ था जब निधि समेत जूही और श्रेया नीचे उतरती हुई आयी.
श्रेया : अरे क्या कोई मेहमान हो तुम हाँ!? जो एक मिनट के लिए भी ऊपर नहीं आ...
पर उसके बोल वही थम गए जब उसने पास आते हुए वीर को देखा.
अपीयरेंस में 10 पॉइंट्स डालने का असर था ये!?
श्रेया (ब्लशेस) : यू... यू लुक गुड!
वीर (स्माइल्स) : थैंक्स!
श्रेया (ब्लशेस) : ऐसा... ऐसा क्या लगा रहे हो आजकल हँ!? हमे भी बता दो...
वीर (स्माइल्स) : It's ा सीक्रेट!
"माहाअमूउऊउउउउ!!!"
और बेशक! वीर को देखते hi उसकी प्यारी फुलझड़ी बोले तोह जूही सरपट दौड़ती hi आयी और उसके परर से लिपट गयी. वीर ने फौरन hi उससे गोदी में उठाय और उसका गाल चूम लिया.
वीर : आ गयी जूही!? क्या पहनी हो आप!? ओह्ह्ह्ह! नई जैकेट!??
जूही : हम्म! मासी ने दिलाई!
वीर : क्या बात है!? बोहत खर्चे हो रहे है!?
श्रेया : क्यों न होंगे!? अब में कमाने जो लगी हु.
वीर (स्माइल्स) : हम्म!
श्रेया (ब्लशेस) : वैसे भी... सब तुम्हारी hi वजह से तोह है.
वीर आगे कुछ कह पता की तभी...
*टक* *टक* *टक*
उससे हील्स की आवाज़ सुनाई दी और उसने देखा की निधि एक ख़ूबसूरत सी साड़ी पहने और एक शाल ऊपर डाले नीचे आ रही थी.
आज वो इतनी ख़ूबसूरत दिख रही थी की वीर खुद अपने आप को कुछ देरर यु टकटकी लगाए उससे देखने से न रोक सका.
दोनों की hi नज़रे मिली और पल भर के लिए दोनों hi जैसे भूल गए की वो दोनों अकेले नहीं है. आस पास भी लोग है.
श्रेया : तोह चले!?
वीर : यह! Y-Yeah! राइट!
जूही : में मामू के साथ बैठूंगी... आगे बाइक पे...
श्रेया : हँ!?
निधि : नहीं जूही! मेरे साथ बैठो चलो. मासी को बैठने दो उनके साथ. हम अपनी स्कूटी में चलते है.
वैसे तोह इस बात से श्रेया बोहत खुश थी की उससे वीर के साथ बैठने का मौका मिल रहा था पर फिर भी... वो अपनी बहिन से भी उतना hi प्यार जो करती थी. और उसकी फिक्र भी.
निधि साड़ी में थी. और ऐसे में स्कूटी चलना वो भी जूही को लेकर, रात के वक़्त. ये कितना कठिन था वो जानती थी. और खतरनाक भी हो सकता था.
इसलिए...
श्रेया : नहीं दी! आप और जूही वीर के साथ बैठिये! आपने साड़ी पहनी हुई है दी. दिक्कत जाएगी. और मेरा क्या है? में तोह जीन्स में हु. में स्कूटी से चलती हु.
निधि ने एक पल वीर को देखा जो बिना कुछ कहे hi उसके निर्णय का इंतज़ार कर रहा था और फिर आखिर कार निधि ने फाइनली धीरे से हां में सर्र हिलाया और वीर के ठीक पीछे जाके वो बैठ गयी.
ये पल...
वीर के होंठो पर अपने आप hi मुस्कान ला दिया. ऐसे hi तोह एक साथ बैठ के कॉलेज से लौटा करते थे वो. ऐसे hi तोह निधि उसके पीछे यु बैठा करती थी. आज इतने दिनों बाद उसी अनुभूति को फिरसे महसूस कर पा रहा था वीर. पर सबसे अहम् बात ये थी की इस वक़्त चाँद भी अपने पूरे रंग ढाया हुआ था. पूरा चमक रहा था और अपनी रौशनी बखूबी बिखेरे हुए था.
और फाइनली वीर और बाकी सभी सोसाइटी से निकले.
रात का प्लान सिंपल था. कोई अच्छी सी जगह जाके पहले थोड़ा एंटरटेनमेंट. फिर डिनर और अंत में नई ईयर सेलिब्रेशन के फिरवर्क्स देखने का प्लान.
सबसे पहली जगह वीर और बाकी सभी एम्यूजमेंट पार्क में गए थे. ामसँ पार्क तोह नहीं था, एक प्रदर्शनी लगी हुई थी. भले hi एम्यूजमेंट पार्क से थोड़ा छोटा था पर राइड्स इधर भी थी.
जूही बच्चो वाली राइड्स एन्जॉय कर रही रही, तोह वही श्रेया उसकी फोटोज उतार रही थी. और वही वीर और निधि साइड में खड़े उन्हें देख रहे थे.
जूही : मम्मीयियय! मुझे वो बड़े वाले में बैठना.
उसने इशारा करते हुए कहा. उसका इशारा जायंट व्हील की ऑर्डर था.
निधि : हँ? नहीं जूही! बिलकुल भी नहीं! डर जाओगी बाद में तुम hi. देख रही हो कितनी ऊपर तक जाता है.
श्रेया : जूही! वो देखो! वो ट्रैन वाली में बैठे अपन!? में भी बैठा सकती हु उसमे तोह.
जूही : हां चलो चलो मासी... जल्दी...!
और वो खींच के श्रेया को ले गयी.
अब बचे थे तोह केवल वीर और निधि.
वीर : उम्... क्या आप चलना चाहोगी!? Ma'am!? जायंट व्हील में!?
निधि : हँ? M-Mein!? N-Nahi... में नहीं...
वीर : O-Okay!
वो जवाब देते हुए अपनी नज़रे झुका लिया. पर जैसे निधि ने उसका एक्सप्रेशन देख लिया था तोह वो पूछी,
निधि : उम्... क्या तुम्हे राइड करना है!?
वीर : हम्म? Y-Yeah! में कभी बैठा नहीं हु इन् राइड्स में. कभी कोई लाया hi नहीं...
उसने एक फीकी स्माइल देते हुए कहा तोह निधि को जैसे याद आया की वीर का बचपन कैसे गुज़रा था. और ये याद करते hi वो बॉहे सिकोड़े उससे देखने लगी और एक दुविधा में फस्स गयी.
निधि : O-Okay! िफ़... िफ़ यू वांट थें... हम चल सकते है!
बस फिर क्या था कुछ hi देरर में वीर और निधि दोनों hi जायंट व्हील पर सवार थे. पर...
*डिंग*
[Mission : Hug Nidhi! Let her know you are her support.
Rewards : ?? Points
Time limit : Before 12 A.M
Mission Failure Penalty : 50 Points Deduction.]
'व्हाट थे फुककककककककक!?'
[Hahaha~]
'मज़ाक चल रही है? No सीरियसली!? मज़ाक है? फुकककक! उस दिन hi मेने उनके हाथे से थप्पड़ खाया था और अब ये? झूठे पढ़वाने की प्लानिंग है क्या? Wtf इस थिस मिशन?'
[I cannot help it master! Execute this mission properly. Aur... Haa~ iss Mission ke complete hote hi mein level up ho jaungi. But I'll be in sleep mode for loading your new resources. Toh pehle se hi wish kar deti hu. Happy new year master! Enjoy your time! Hehe~]
'W-Wait व्हाट!??? Wtf??? स्लीप मोड अचानक क्यों?'
[I told you kuch surprise hai right? So wait for it!]
निधि : उम्म्म...
निधि ने उसका ध्यान खींचा तोह वीर होश में आया. जायंट व्हील घुमते हुए ऊपर जा रहा था.
और निधि और वीर अगल बगल बैठे हुए ऊपर से पूरा नज़ारा देख रहे थे.
निधि : It's सो ब्यूटीफुल...
वीर : बिलकुल आप की तरह...
*बेदुम्प*
निधि (गैप्स) H-Huhhhh!?
वीर : मेने कभी इस राइड पे सवारी नहीं की थी. आज आप आयी तोह ये भी हो गया... थैंक्स फॉर अग्रेंज.
निधि : It's... It's फाइन!
निधि : वीर!
वीर : हम्म?
निधि : सच कहु... तोह I'm रियली माध ात यू.
वीर : ??
निधि : कितना कहती रहती हु तुम से. कितना कह चुकी हु पहले भी. Don't लीव योर स्टडीज. पर तुम हो की सुनते hi नहीं. क्या करना चाहते हो आगे!? क्या करोगे!? कुछ प्लान है की नहीं? में तुम्हे दांत नहीं रही हु. तुम्हारी टीचर भी हु. तुम्हारे करियर की चिंता मुझे लगी रहती है. और तुम तोह मेरे ख़ास स्टूडेंट हो. एक तरह से परिवार का हिस्सा भी बन गए थे तुम हाल hi में. तोह किधर जाना चाहते हो, कोई लक्ष्य है की नहीं? क्या कर रहे हो अभी? स्टडी नहीं करते तोह क्या करते हो दिन भर? कुछ सोचा है फ्यूचर के बारे में? क्यों नहीं आते हो कॉलेज!? ये सारे सवालों के जवाब तुम्हे अच्छे से पता होने चाहिए वीर.
वो लगातार बोले जा रही थी. पर वीर चाँद की उस रौशनी में केवल निधि के हुस्न को hi देखता रहा और बस मुस्कुराता रहा.
अभी भी निधि को वीर के भविष्य को लेकर चिंता थी.
वीर (स्माइल्स) : आपकी यही बातें तोह मेरा दिल जीत लेती है.
निधि : हहहहह!??
वीर : M-Mera मतलब है... आपको मेरी इतनी चिंता है?
निधि : क्यों नहीं होएगी? आखिर तुम...
कहते हुए वो रुक गयी.
वीर : आखिर तुम!?? आखिर तुम क्या ma'am!?
व्हील एकदम ऊपर आ चूका था जब निधि ने वीर के चेहरे को देखा और उसका चेहरा अपने एकदम समीप पाया तोह उसके बोल वही थम गए.
निधि : कुछ... कुछ नहीं...!
'फुककक! I'm दोंग आईटी. जो होगा देखा जाएगा. एक थप्पड़ और खा लूंगा.'
और अगले hi पल वीर ने निधि को जोरर से अपनी बाहो में खींच लिया.
इस अचानक हमले की उम्मीद निधि को बिलकुल भी न थी. वो अपनी आँखें फाड़े अभी अभी जो कुछ हुए उससे डाइजेस्ट करने की कोशिश कर रही थी. और जैसे hi उससे आभास हुआ की इस वक़्त वो वीर की बाहो में थी और वीर उससे जोरर से भींचा हुआ था, निधि की सासें तेज़ हो गयी.
उसने अपना हाथ ऊपर ले जाके वीर के सीने पर रखा और उससे धकेलने hi वाली थी जब वीर के शब्द उसके कानो में पड़े,
"सबसे पहले तोह थैंक यू ma'am. मुझे उस दलदल से निकालने के लिए. फिर अपने साथ रखने के लिए, मेरा इतना सपोर्ट करने के लिए ये जानते हुए भी की आप खुद इतनी परेशानी में हो. उसके बाद थैंक यू की आपने हर्र हार्डशिप में मेरा साथ दिया. आज भी आपको मेरी परवाह है, थैंक यू की आप आज आने के लिए तैयार हुई, मेरे साथ राइड में बैठने के लिए तैयार हुई. रही बात मेरे एआईएम की... I'm लीविंग थे कॉलेज ma'am. बिकॉज़ ी क्नोव की मुझे क्या करना है. थैंक यू सो मच! आप हमेशा hi मेरी ma'am रहोगी, चाहे में कॉलेज जाऊ या नहीं. एंड लास्तलय... जैसे आपने मेरा साथ दिया वैसे hi में भी आपका साथ दूंगा. I'm हेरे फॉर यू. ऑलवेज!"
उन् बातो को सुनते hi निधि का हाथ जो वीर को धकेलने के लिए थे वो एकदम से ढीला पद गया.
दोनों के hi चेहरे आपस में बेहद क़रीब थे. दोनों hi एक दूसरे की गरम सासो को बखूबी महसूस कर पा रहे थे.
और न जाने ऐसे क्या हुआ की वीर अपने आप hi निधि की ऑर्डर झुकने लगा.
निधि का अट्रैक्शन जैसे उससे खींच रहा था.
पास आते hi उससे सुनाई दी... निधि के तेज़्ज़ धड़कते हुए दिल की हार्टबीट. कितनी ज़र्रों से धड़क रहा था उसका दिल.
वो बस लम्बी लम्बी सासें लिए जा रही थी.
पर जैसे hi वीर उसके एकदम करीब आ गया, जब वो उसके होंठो से बस कुछ hi केन्टीमेट्रेस की दुरी पर था, निधि ने जोरर से धक्का देके उससे पीछे धकेल दिया.
निधि : N-Nooooooooooo!!!!!!!!
और एक बार फिर दोनों के बीच में वही ावकवर्डनेस्स का माहौल छ गया.
उसके बाद तोह जैसे दोनों में hi कोई बात नहीं हुई.
डिनर के बाद भी वो दोनों एक दूसरे से बात नहीं किये. 12 बजते hi जब फिरवर्क्स का शो शुरू हुआ तोह दोनों hi बैठे ज़रूर थे पर दोनों के बीच में जूही बैठी हुई थी.
और दोनों hi पल दो पल अपनी नज़रो को एक दूसरे से मिलाते पर नतीजा वही, कोई भी कुछ कहने की हालत में नहीं होता.
और तभी...
*डिंग*
[System has reached Level 5.]
*डिंग*
[In-built feature ~ Translator has been unlocked.]
*डिंग*
[In-built feature ~ Slot has been unlocked.]
*डिंग*
[Quest hunt is now accessible.]
'हँ!??!'
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद!