- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,768
अंकित अपनी मां को पेशाब करके खड़ी होता देखकर दबे कदमों से पीछे अपने कमरे में आ गया था,,,, उसके दिल की धड़कन उसका साथ नहीं दे रही थी वह बड़े जोरों से चल रही थी उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने कुछ अद्भुत और अविस्मरणीय चीज देख लिया हो,,, और अंकित के लिए तो ऐसा ही था,,, अपने कमरे में आकर वह तुरंत अपना दरवाजा बंद करके बिस्तर पर बैठ गया था लेकिन उसकी आंखें अभी भी फटी की फटी थी उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था,,, उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसने जो कुछ भी देखा वह हकीकत था,,,।
और दूसरी तरफ सुगंधा मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, वह पेशाब करके खड़ी हो चुकी थी और अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर चुकी थी उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि आज वह अपने बेटे की आंखों के सामने बैठकर मुत रही थी,,,, इस बात से उसके तन बदन में अद्भुत एहसास हो रहा था उसके बाद में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,, उसे अपने आप पर भरोसा नहीं हो रहा था की बेटे की उपस्थिति में ही उसने पेशाब कि है,,,,, और यह सब कुछ अनजाने में ही हुआ था वह जानबूझकर अपनी गांड का प्रदर्शन अपने बेटे के सामने नहीं की थी हालांकि वह बहुत दिनों से अपने बेटे की आंखों के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन करती आ रही थी लेकिन इस हद तक वह नहीं गई थी कि अपने बेटे की आंखों के सामने ही साड़ी उठाकर पेशाब करने लगे,,,।
वह जानती थी कि जो कुछ भी हुआ था अनजाने में हुआ था लेकिन जो भी हुआ था वह उसके मन का हुआ था,,,, वैसे भी बड़े दिनों बाद वह घर के पीछे आई थी और वह भी खुला हुआ दरवाजा बंद करने के लिए जो कि वह खुद अंकित को बंद करने के लिए बोली थी लेकिन टीवी देख कर जल्दी आने की वजह से वह खुद ही दरवाजा बंद करने के लिए आ गई थी और ऐसे में उसे अपने जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह उसी जगह पर कोने में बैठकर पेशाब करने लगी उसे क्या मालूम था कि ठीक उसी समय उसका बेटा भी वहीं आ जाएगा,,,,।
सुगंधा उसी जगह पर खड़े होकर मंद मंद मुस्कुराते हुए जो कुछ भी हो उसके बारे में सोच रही थी क्योंकि हर किसी आहट मिलने पर वह अपनी नजर को धीरे से पीछे घूम कर देखी थी और दरवाजे पर अंकित खड़ा होकर उसी की तरफ देख रहा था यह नजारा बेहद मदहोश कर देने वाला और उन मादक स्थिति पैदा कर देने वाला था अंकित ने तो कभी सोचा भी नहीं होगा कि दरवाजा बंद करने के लिए वह जाएगा और उसे एक अकल्पनीय और अतुलनीय दृश्य देखने को मिल जाएगा और वह भी अपनी मां की ही तरफ से,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा,, मर्दों के नजरिए को अच्छी तरह से समझती थी और जानती भी थी जिस तरह से अंकित ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसकी नंगी बड़ी-बड़ी गांड को देख रहा था उसे देखकर सुगंध समझ गई थी कि उसके जवान बेटे में भी एक मर्द छुपा हुआ है जो किसी भी पर बाहर आ सकता है और इस समय वह वही देख रही थी क्योंकि अंकित उसका बेटा था और वह बेटा अपनी मां को पेशाब करते हुए प्यासी नजरों से देख रहा था उसकी नंगी गांड को देख रहा था उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज को सुनकर मदहोश हो रहा था और यह सब सुगंधा को भी मदहोश कर रहा था,,,,।
सुगंधा की तरफ से अनजाने में ही अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए यह कदम उठ चुका था जिसका जादू अंकित पर पूरी तरह से छा गया था अब तक सुगंधा केवल अपनी छातियों और नितंबों के उभार को ही ऊपर से ही बस अपने बेटे को दिखाती थी,,, जिसे देखकर उसका बेटा भी मदहोश हो जाता था और इसका एहसास सुगंधा को भी था लेकिन आज ऊपर से नहीं बल्कि अंदर से अपनी जवानी के दर्शन करा कर वह अपने बेटे को मदहोश कर दी थी,,,,।
सुगंधा पीछे के दरवाजों को अच्छी तरह से बंद कर दी थी लेकिन फिर भी उसे एक बार फिर से व्यवस्थित चेक करके वह अपने कमरे की तरफ जाने लगी और मन ही मन पीछे के दरवाजे को धन्यवाद देने लगी क्योंकि आज खुले दरवाजे की बदौलत ही वह अपने बेटे को अपनी जवानी के दर्शन करवाने में सफल हो पाई थी,,,,, देखते देखते वह अपने कमरे में पहुंच चुकी थी और जो कुछ भी घर के पीछे वाले भाग में हुआ था उसे याद करके वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी तो गई थी और देखते ही देखते वह अपने बदन पर से सारे वस्त्र को उतार कर पूरी तरह से नंगी हो गई थी और फिर अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी बेटी की कल्पना करते हुए अपनी बुर में दोनों की डालकर उसे अंदर बाहर करने लगी थी और अपनी आंखों को बंद करके उसे उंगली की जगह अपने बेटे के लंड की कल्पना करके मदहोश होने लगी थी,,,,।
दूसरी तरफ अभी भी अंकित का दिमाग पूरी तरह से काबू में नहीं था वह अपना होश खो बैठा था उसकी सांसे अभी भी बड़ी तेजी से चल रही थी अपने आप को दुरुस्त करने के लिए वह धीरे से उठा और टेबल पर पड़ा पानी का ग्लास को उठाया और उसे एक ही सांस में पी गया,,,, ठंडा पानी पीने से उसे बिल्कुल भी राहत नहीं मिल रही थी क्योंकि उसके तन बदन को उसकी मां की जवानी की गर्मी जो जला रही थी,,,।
उसका बदन पसीने से तर-बतर हो चुका था वह धीरे से अपने बिस्तर पर से उठा और,, सामने की दीवार की तरफ गया और पंखे की स्विच को ऑन कर दिया स्विच के ऑन होते ही पंख चलना शुरू हो गया,,,, अंकित अपनी जगह पर आकर बैठ गया और उसे दोपहर में देखी गई किताब के रंगीन पन्नों पर छपा हुआ रंगी में दृश्य नजर आने लगा बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूचियां लेकिन सब कुछ ऐसा लग रहा था कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड के आगे फीका पड़ गया था,,,, उन्हें रंगीन किताब के दृश्य को याद करके जितना मजा नहीं आ रहा था उससे ज्यादा मजा उसे अपनी मां की बड़ी गांड के बारे में सोच कर आ रहा था,,,,। गंदी रंगीन किताब के चित्र उसे बिल्कुल भी आनंद देने में समर्थ नहीं हो रहे थे क्योंकि इस समय उसकी जीवन में उसकी मां की नंगी गांड जो बस गई थी,,,,।
उसे सब कुछ अच्छे से याद था वह दरवाजा बंद करने के लिए घर के पीछे गया था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि उससे पहले उसकी मां वहां पहुंच चुकी थी और पेशाब कर रही थी,,, अंधेरी रात में वैसे तुम कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन कैमरे से आ रही रोशनी घर के पीछे के कोने में अच्छी तरह से पहुंच रही थी और इस कोने में वह अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा था उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और वहां लेकिन निश्चिंत होकर बैठकर पेशाब कर रही थी उसकी बुर से पेशाब की धार गिर रही थी और उस धार से उसकी गुलाबी बुर से मधुर मदहोश कर देने वाली सिटी की आवाज निकल रही थी जोकि उसके कानों तक बड़े आराम से पहुंच रही थी,,, और उस मधुर संगीत में वह अपने अस्तित्व को पूरी तरह से डुबो दिया था उसे बिल्कुल भी भान नहीं था कि वह कहां पर खड़ा होकर क्या देख रहा है,,,।
पंखा चालू करने के बाद भी उसका बदन पसीने से तारबदर हो चुका था इसलिए वह अपनी कमीज़ उतार कर बिस्तर पर रख दिया और अपने पेट की तरफ देखा तो उसके होश उड़ गए उसके पेट के आगे वाले भाग पर एक अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे वह बड़े गौर से देख रहा था और अपनी मां की नंगी गांड को याद करके अनजाने में ही उसका हाथ पेंट के ऊपर से ही लंड पर चला गया और वह इतना मदहोश और उत्तेजित हुआ कि पेट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा दिया,,,, उसे तुरंत अपने दोस्त की बात याद आ गई कि इतना बड़ा अगर उसका होता तो कितना मजा आता,,,, अंकित को कहां मालूम था कि वाकई में हर मर्द का लंड अलग आकार और साइज का होता है वह तो ऐसा ही सोचता था कि सबका एक जैसा ही होता है,,,, उसका तो खुद का लंड मोटा और लंबा तगड़ा था इसीलिए तो रंगीन किताब में देखने के बावजूद भी उसे बिल्कुल भी ताज्जुब नहीं हुआ था,,, और इस बात को याद करके उसके मन में उत्सुकता बढ़ने लगी अपने ही लंड को देखने की,,,।
यह बात थोड़ा ताज्जुब वाली थी लेकिन अंकित के मामले में बिल्कुल हकीकत थी वाकई में उसने अपने लंड को कभी दूसरे से देखा ही नहीं था उसे केवल वह पेशाब करने के लिए ही अपने पेट से बाहर निकालता था और उसके बारे में कभी भी सोचता ही नहीं था हालांकि कभी-कभी मन में अजीब सी हलचल होने पर उसमें तनाव होता था और वह इस महसूस भी होता था लेकिन आज की बात कुछ और थी वह अपने लंड को पूरी तरह से देखना चाहता था जी भर के वह देखना चाहता था कि वाकई में उसका लंड रंगीन किताब के मर्द के लंड की तरह मोटा और लंबा है अपनी इस लालच को अपनी उत्सुकता को वह दबाने में नाकामयाब साबित हो रहा था और धीरे से बिस्तर पर से उठा और पेट की बटन खोलने वाला और देखते ही देखते हो अपने पेट को उतार कर नीचे फेंक दिया और फिर केवल अंडरवियर में ही बिस्तर पर बैठ गया,,,
अंडरवियर के ऊपर से ही लंड पर हाथ पडते ही उसमें हलचल होने लगी,,, उसका दिन जोरों से धड़कने लगा उसकी उत्तेजना बिल्कुल भी काम नहीं हो रही थी क्योंकि उसके दिमाग के मानस पटल पर उसकी मां की गांड एक चलचित्र की तरह चल रही थी मानो कि जैसे वह टेलीविजन देख रहा हो,,,, अंडरवियर के ऊपर से ही उसे मजा आने लगा लेकिन वह इससे भी ज्यादा आगे बढ़ना चाहता था इसलिए अंडरवियर के छेद में से वह अपने मोटे-मोटे लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा,,,, वह पहले की ही तरह जैसे पेशाब करने के लिए अपने अंडरवियर के छेद में अपनी दो उंगली डालकर अपने लंड को पकड़ कर बाहर निकलता था उसी तरह से आज भी कोशिश करने लगा लेकिन नाकाम साबित हो रहा था क्योंकि इस समय उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था वह पूरा खड़ा था लोहे के रोड की तरह इसीलिए अंडरवियर की छेद में दो उंगली डालकर उसे केवल अपने लंड को पकड़ने भर का ही जगह मिल रहा था और वह उसमें से उस छेद में से अपने लंड को बाहर निकलने में असमर्थ साबित हो रहा था,,,,।
उसे बड़ा ताज्जुब हो रहा था और वह अपने अंडरवियर को निकाल कर नंगा होने की सोचने लगा ऐसा वह नहीं करता लेकिन उसकी आंखों के सामने वही दिल से बार-बार नजर आ रहा था कोने में बैठी हुई उसकी मां बड़ी-बड़ी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थी और इस दृश्य के बारे में सोचकर वह अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाए अगर धीरे से बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और अपने अंडरवियर को दोनों हाथों से पड़कर नीचे की तरफ सरकाना शुरू कर दिया उसका लंड इतना ज्यादा खड़ा था और मोटा और लंबा था की अंडरवियर सीधे से नीचे लाने में भी कठिनाई हो रही थी तो वहां अंडरवियर के आगे वाले भाग को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे आगे की तरफ खींचा और अपने खड़े लंड से मानो अंडरवियर का घूंघट उठा रहा हो,,, और इस तरह से वह अपने अंडरवियर को उतार कर एकदम नंगा हो गया वह बिस्तर के बगल में खड़ा था और अपने लंड की तरफ देख रहा था नजर नीचे झुकाकर,,,
अपनी जवानी की गर्मी को शांत करके सुगंधा तो चादर तानकर सो गई थी और वह आज बहुत खुश भी थी क्योंकि उसके मन की जो हो गई थी लेकिन दूसरी तरफ अंकित की आंखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी,,, उसे बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही थी बल्कि उसकी तड़प बढ़ती जा रही थी वह अपने ही कमरे में एकदम नंगा खड़ा होकर बड़े गौर से अपने लंड को देख रहा था मानो कि उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसकी टांगों के बीच लटकाने वाला लंड उसी का है,,, क्योंकि आज उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि गंदी रंगीन किताब के नायक के लंड से भी मोटा और तगड़ा लंड उसका था,,, और वह गरम आह भरते हुए,,, अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अनायास ही उसके मन में यह ख्याल आ गया कि अगर उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी मां की बुर में घुस गया तो उसकी मां की क्या हालत होगी क्योंकि वह रंगीन किताबों में देख चुका था कि जब भी नायक का मोटा लंड किसी हीरोइन की बुर में घुसा होता तो उसके चेहरे के हाफ-भाव पूरी तरह से बदला हुआ होता था,,,, और जैसे ही उसके मन में यह ख्याल आया वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया औरअपनी मुट्ठी में अपने मोटे तगड़े लंड को एकदम से कस लिया,,,और अपने लंड पर यह कसाव उसे और भी ज्यादा आनंददायक लगने लगा वह मदहोश होने लगा,,,।
और दूसरी तरफ सुगंधा मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, वह पेशाब करके खड़ी हो चुकी थी और अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर चुकी थी उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि आज वह अपने बेटे की आंखों के सामने बैठकर मुत रही थी,,,, इस बात से उसके तन बदन में अद्भुत एहसास हो रहा था उसके बाद में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,, उसे अपने आप पर भरोसा नहीं हो रहा था की बेटे की उपस्थिति में ही उसने पेशाब कि है,,,,, और यह सब कुछ अनजाने में ही हुआ था वह जानबूझकर अपनी गांड का प्रदर्शन अपने बेटे के सामने नहीं की थी हालांकि वह बहुत दिनों से अपने बेटे की आंखों के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन करती आ रही थी लेकिन इस हद तक वह नहीं गई थी कि अपने बेटे की आंखों के सामने ही साड़ी उठाकर पेशाब करने लगे,,,।
वह जानती थी कि जो कुछ भी हुआ था अनजाने में हुआ था लेकिन जो भी हुआ था वह उसके मन का हुआ था,,,, वैसे भी बड़े दिनों बाद वह घर के पीछे आई थी और वह भी खुला हुआ दरवाजा बंद करने के लिए जो कि वह खुद अंकित को बंद करने के लिए बोली थी लेकिन टीवी देख कर जल्दी आने की वजह से वह खुद ही दरवाजा बंद करने के लिए आ गई थी और ऐसे में उसे अपने जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह उसी जगह पर कोने में बैठकर पेशाब करने लगी उसे क्या मालूम था कि ठीक उसी समय उसका बेटा भी वहीं आ जाएगा,,,,।
सुगंधा उसी जगह पर खड़े होकर मंद मंद मुस्कुराते हुए जो कुछ भी हो उसके बारे में सोच रही थी क्योंकि हर किसी आहट मिलने पर वह अपनी नजर को धीरे से पीछे घूम कर देखी थी और दरवाजे पर अंकित खड़ा होकर उसी की तरफ देख रहा था यह नजारा बेहद मदहोश कर देने वाला और उन मादक स्थिति पैदा कर देने वाला था अंकित ने तो कभी सोचा भी नहीं होगा कि दरवाजा बंद करने के लिए वह जाएगा और उसे एक अकल्पनीय और अतुलनीय दृश्य देखने को मिल जाएगा और वह भी अपनी मां की ही तरफ से,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा,, मर्दों के नजरिए को अच्छी तरह से समझती थी और जानती भी थी जिस तरह से अंकित ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसकी नंगी बड़ी-बड़ी गांड को देख रहा था उसे देखकर सुगंध समझ गई थी कि उसके जवान बेटे में भी एक मर्द छुपा हुआ है जो किसी भी पर बाहर आ सकता है और इस समय वह वही देख रही थी क्योंकि अंकित उसका बेटा था और वह बेटा अपनी मां को पेशाब करते हुए प्यासी नजरों से देख रहा था उसकी नंगी गांड को देख रहा था उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज को सुनकर मदहोश हो रहा था और यह सब सुगंधा को भी मदहोश कर रहा था,,,,।
सुगंधा की तरफ से अनजाने में ही अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए यह कदम उठ चुका था जिसका जादू अंकित पर पूरी तरह से छा गया था अब तक सुगंधा केवल अपनी छातियों और नितंबों के उभार को ही ऊपर से ही बस अपने बेटे को दिखाती थी,,, जिसे देखकर उसका बेटा भी मदहोश हो जाता था और इसका एहसास सुगंधा को भी था लेकिन आज ऊपर से नहीं बल्कि अंदर से अपनी जवानी के दर्शन करा कर वह अपने बेटे को मदहोश कर दी थी,,,,।
सुगंधा पीछे के दरवाजों को अच्छी तरह से बंद कर दी थी लेकिन फिर भी उसे एक बार फिर से व्यवस्थित चेक करके वह अपने कमरे की तरफ जाने लगी और मन ही मन पीछे के दरवाजे को धन्यवाद देने लगी क्योंकि आज खुले दरवाजे की बदौलत ही वह अपने बेटे को अपनी जवानी के दर्शन करवाने में सफल हो पाई थी,,,,, देखते देखते वह अपने कमरे में पहुंच चुकी थी और जो कुछ भी घर के पीछे वाले भाग में हुआ था उसे याद करके वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी तो गई थी और देखते ही देखते वह अपने बदन पर से सारे वस्त्र को उतार कर पूरी तरह से नंगी हो गई थी और फिर अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी बेटी की कल्पना करते हुए अपनी बुर में दोनों की डालकर उसे अंदर बाहर करने लगी थी और अपनी आंखों को बंद करके उसे उंगली की जगह अपने बेटे के लंड की कल्पना करके मदहोश होने लगी थी,,,,।
दूसरी तरफ अभी भी अंकित का दिमाग पूरी तरह से काबू में नहीं था वह अपना होश खो बैठा था उसकी सांसे अभी भी बड़ी तेजी से चल रही थी अपने आप को दुरुस्त करने के लिए वह धीरे से उठा और टेबल पर पड़ा पानी का ग्लास को उठाया और उसे एक ही सांस में पी गया,,,, ठंडा पानी पीने से उसे बिल्कुल भी राहत नहीं मिल रही थी क्योंकि उसके तन बदन को उसकी मां की जवानी की गर्मी जो जला रही थी,,,।
उसका बदन पसीने से तर-बतर हो चुका था वह धीरे से अपने बिस्तर पर से उठा और,, सामने की दीवार की तरफ गया और पंखे की स्विच को ऑन कर दिया स्विच के ऑन होते ही पंख चलना शुरू हो गया,,,, अंकित अपनी जगह पर आकर बैठ गया और उसे दोपहर में देखी गई किताब के रंगीन पन्नों पर छपा हुआ रंगी में दृश्य नजर आने लगा बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूचियां लेकिन सब कुछ ऐसा लग रहा था कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड के आगे फीका पड़ गया था,,,, उन्हें रंगीन किताब के दृश्य को याद करके जितना मजा नहीं आ रहा था उससे ज्यादा मजा उसे अपनी मां की बड़ी गांड के बारे में सोच कर आ रहा था,,,,। गंदी रंगीन किताब के चित्र उसे बिल्कुल भी आनंद देने में समर्थ नहीं हो रहे थे क्योंकि इस समय उसकी जीवन में उसकी मां की नंगी गांड जो बस गई थी,,,,।
उसे सब कुछ अच्छे से याद था वह दरवाजा बंद करने के लिए घर के पीछे गया था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि उससे पहले उसकी मां वहां पहुंच चुकी थी और पेशाब कर रही थी,,, अंधेरी रात में वैसे तुम कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन कैमरे से आ रही रोशनी घर के पीछे के कोने में अच्छी तरह से पहुंच रही थी और इस कोने में वह अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा था उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और वहां लेकिन निश्चिंत होकर बैठकर पेशाब कर रही थी उसकी बुर से पेशाब की धार गिर रही थी और उस धार से उसकी गुलाबी बुर से मधुर मदहोश कर देने वाली सिटी की आवाज निकल रही थी जोकि उसके कानों तक बड़े आराम से पहुंच रही थी,,, और उस मधुर संगीत में वह अपने अस्तित्व को पूरी तरह से डुबो दिया था उसे बिल्कुल भी भान नहीं था कि वह कहां पर खड़ा होकर क्या देख रहा है,,,।
पंखा चालू करने के बाद भी उसका बदन पसीने से तारबदर हो चुका था इसलिए वह अपनी कमीज़ उतार कर बिस्तर पर रख दिया और अपने पेट की तरफ देखा तो उसके होश उड़ गए उसके पेट के आगे वाले भाग पर एक अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे वह बड़े गौर से देख रहा था और अपनी मां की नंगी गांड को याद करके अनजाने में ही उसका हाथ पेंट के ऊपर से ही लंड पर चला गया और वह इतना मदहोश और उत्तेजित हुआ कि पेट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा दिया,,,, उसे तुरंत अपने दोस्त की बात याद आ गई कि इतना बड़ा अगर उसका होता तो कितना मजा आता,,,, अंकित को कहां मालूम था कि वाकई में हर मर्द का लंड अलग आकार और साइज का होता है वह तो ऐसा ही सोचता था कि सबका एक जैसा ही होता है,,,, उसका तो खुद का लंड मोटा और लंबा तगड़ा था इसीलिए तो रंगीन किताब में देखने के बावजूद भी उसे बिल्कुल भी ताज्जुब नहीं हुआ था,,, और इस बात को याद करके उसके मन में उत्सुकता बढ़ने लगी अपने ही लंड को देखने की,,,।
यह बात थोड़ा ताज्जुब वाली थी लेकिन अंकित के मामले में बिल्कुल हकीकत थी वाकई में उसने अपने लंड को कभी दूसरे से देखा ही नहीं था उसे केवल वह पेशाब करने के लिए ही अपने पेट से बाहर निकालता था और उसके बारे में कभी भी सोचता ही नहीं था हालांकि कभी-कभी मन में अजीब सी हलचल होने पर उसमें तनाव होता था और वह इस महसूस भी होता था लेकिन आज की बात कुछ और थी वह अपने लंड को पूरी तरह से देखना चाहता था जी भर के वह देखना चाहता था कि वाकई में उसका लंड रंगीन किताब के मर्द के लंड की तरह मोटा और लंबा है अपनी इस लालच को अपनी उत्सुकता को वह दबाने में नाकामयाब साबित हो रहा था और धीरे से बिस्तर पर से उठा और पेट की बटन खोलने वाला और देखते ही देखते हो अपने पेट को उतार कर नीचे फेंक दिया और फिर केवल अंडरवियर में ही बिस्तर पर बैठ गया,,,
अंडरवियर के ऊपर से ही लंड पर हाथ पडते ही उसमें हलचल होने लगी,,, उसका दिन जोरों से धड़कने लगा उसकी उत्तेजना बिल्कुल भी काम नहीं हो रही थी क्योंकि उसके दिमाग के मानस पटल पर उसकी मां की गांड एक चलचित्र की तरह चल रही थी मानो कि जैसे वह टेलीविजन देख रहा हो,,,, अंडरवियर के ऊपर से ही उसे मजा आने लगा लेकिन वह इससे भी ज्यादा आगे बढ़ना चाहता था इसलिए अंडरवियर के छेद में से वह अपने मोटे-मोटे लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा,,,, वह पहले की ही तरह जैसे पेशाब करने के लिए अपने अंडरवियर के छेद में अपनी दो उंगली डालकर अपने लंड को पकड़ कर बाहर निकलता था उसी तरह से आज भी कोशिश करने लगा लेकिन नाकाम साबित हो रहा था क्योंकि इस समय उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था वह पूरा खड़ा था लोहे के रोड की तरह इसीलिए अंडरवियर की छेद में दो उंगली डालकर उसे केवल अपने लंड को पकड़ने भर का ही जगह मिल रहा था और वह उसमें से उस छेद में से अपने लंड को बाहर निकलने में असमर्थ साबित हो रहा था,,,,।
उसे बड़ा ताज्जुब हो रहा था और वह अपने अंडरवियर को निकाल कर नंगा होने की सोचने लगा ऐसा वह नहीं करता लेकिन उसकी आंखों के सामने वही दिल से बार-बार नजर आ रहा था कोने में बैठी हुई उसकी मां बड़ी-बड़ी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थी और इस दृश्य के बारे में सोचकर वह अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाए अगर धीरे से बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और अपने अंडरवियर को दोनों हाथों से पड़कर नीचे की तरफ सरकाना शुरू कर दिया उसका लंड इतना ज्यादा खड़ा था और मोटा और लंबा था की अंडरवियर सीधे से नीचे लाने में भी कठिनाई हो रही थी तो वहां अंडरवियर के आगे वाले भाग को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे आगे की तरफ खींचा और अपने खड़े लंड से मानो अंडरवियर का घूंघट उठा रहा हो,,, और इस तरह से वह अपने अंडरवियर को उतार कर एकदम नंगा हो गया वह बिस्तर के बगल में खड़ा था और अपने लंड की तरफ देख रहा था नजर नीचे झुकाकर,,,
अपनी जवानी की गर्मी को शांत करके सुगंधा तो चादर तानकर सो गई थी और वह आज बहुत खुश भी थी क्योंकि उसके मन की जो हो गई थी लेकिन दूसरी तरफ अंकित की आंखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी,,, उसे बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही थी बल्कि उसकी तड़प बढ़ती जा रही थी वह अपने ही कमरे में एकदम नंगा खड़ा होकर बड़े गौर से अपने लंड को देख रहा था मानो कि उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसकी टांगों के बीच लटकाने वाला लंड उसी का है,,, क्योंकि आज उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि गंदी रंगीन किताब के नायक के लंड से भी मोटा और तगड़ा लंड उसका था,,, और वह गरम आह भरते हुए,,, अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अनायास ही उसके मन में यह ख्याल आ गया कि अगर उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी मां की बुर में घुस गया तो उसकी मां की क्या हालत होगी क्योंकि वह रंगीन किताबों में देख चुका था कि जब भी नायक का मोटा लंड किसी हीरोइन की बुर में घुसा होता तो उसके चेहरे के हाफ-भाव पूरी तरह से बदला हुआ होता था,,,, और जैसे ही उसके मन में यह ख्याल आया वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया औरअपनी मुट्ठी में अपने मोटे तगड़े लंड को एकदम से कस लिया,,,और अपने लंड पर यह कसाव उसे और भी ज्यादा आनंददायक लगने लगा वह मदहोश होने लगा,,,।