Incest मटकनी गांड का कमाल - Page 5 - SexBaba
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Incest मटकनी गांड का कमाल

पहली बार अंकित को अपने पड़ोस में कुछ देने पर बहुत ज्यादा खुशी महसूस हुई थी और इस खुशी को वह बयान नहीं कर सकता था खास करके शब्दों से तो बिल्कुल भी नहीं लेकिन दोनों टांगों के बीच के लटकते हुए हथियार उसकी खुशी को अच्छी तरह से बयां कर रहे थे जो कि अभी तक तना हुआ था,,,। अंकित ने कभी सपने कभी नहीं सोचा था कि पड़ोस के घर में उसे इस तरह का मदहोश कर देने वाला नजारा देखने को मिलेगा जो कि उसकी कल्पना की बिल्कुल परे था,,, अंकित को अभी भी अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी उसने देखा वह सब कुछ सही था उसे तो सब कुछ ख्वाब जैसा ही लग रहा था उसकी कल्पना नजर आ रही थी लेकिन इस बात को वह भी अच्छी तरह से जानता था कि जो कुछ भी उसकी आंखों ने देखा था वह बिल्कुल सही था क्योंकि आज तक तो उसने इस तरह का कामोत्तेजना से भरा हुआ स्वप्न भी नहीं देखा था,,,।

अंकित का मन सुमन के घर से वापस लौटने का बिल्कुल भी नहीं हो रहा था,,,। और होता भी कैसे पूरी तरह से जवान हो चुके अंकित जैसे जवान लड़के को अगर उसकी आंखों के सामने कोई जवान लड़की जवान से भरी हुई अर्धनग्न अवस्था में खासकर के अपने नितंबों को दिखाती हुई नजर आ जाए तो दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो इस तरह की खूबसूरत नजारे को छोड़कर जाना चाहेगा उसमें से अंकित भी,,, अलग नहीं था वह भी पूरी तरह से जवान हो चुका है एक जवान लड़का था हट्टा कट्टा बांका नौजवान था,,, और जीवन में पहली बार उसने इस तरह की खूबसूरत नजारे को अपनी आंखों से देखा था सुमन की गोल गोल नितंबों को देखकर उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी जिस तरह से उसके दोस्त ने सुमन के बारे में उसके चरित्र के बारे में बताया था उसे देखते हुए,,, अंकित के मन में भी कुछ-कुछ हो रहा था वैसे तो अंकित को सुमन के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं था पहले ही वह उसके पड़ोस में रहती थी कभी-कभार ही उससे मुलाकात होती थी लेकिन लेकिन यह इत्तेफाक ही था जो दोस्त के द्वारा सुमन का चरित्र बयां करने के बाद ही उसे सुमन का नंगा बदन भी देखने को मिल गया था उसकी बड़ी-बड़ी गोरी गोरी गोल गोल गांड देख कर अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,,, सुमन की खूबसूरत आकर्षण से वह अपने आप को बचाने के बारे में सोच भी नहीं सकता था कि तब भी सुमन की तरफ से उसकी एक हरकत नहीं अंकित के तन बदन में आग लगा दिया था,,, जब सुमन किचन का ड्रोवर खोलने के लिए नीचे झुकी थी,,, और उसकी गोलाकार गांड सीधे जाकर अंकित के जवान खड़े लंड से टकरा गई थी हालांकि सुमन की तरफ से यह हरकत जानबूझकर ही हुई थी लेकिन अंकित को नहीं मालूम था,,,। वह तो पल भर के लिए ही सही लेकिन स्वर्ग का सुख का अनुभव किया था उसे नहीं मालूम था कि स्वर्ग का सुख क्या होता है संभोग से जुड़ा सुख क्या होता है लेकिन सुमन के गोलाकार नितंबों का स्पर्श अपने लंड पर होते ही तो जो सुख जो हलचल उसे अपनी तन-बदन में महसूस हुई थी वह अंकित के लिए स्वर्ग की सुख से काम नहीं था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था,,, सुमन के मां के आ जाने की वजह से अंकित मां महसूस कर वहां से लौट कर अपने घर पर आ गया था लेकिन सुमन के घर से बेहद मादकता भरी यादें अपने जेहन में लेकर आया था जिसे याद करने पर कभी भी उसका लंड अपनी औकात में आ सकता था,,,।

घर में जैसे ही अंकित ने प्रवेश किया उसकी मां तुरंत उससे पूछी,,,।

अचार दे दिया ना,,,

हां मम्मी दे दिया,,,,(और इतना कहते हुए अंकित अपने कमरे में जाने लगा लेकिन सुगंधा की नजर,,, उसके पेंट में बने तंबू पर चली गई और उसे देखते ही सुगंध के तन-बदन में हलचल होने लगा उसके मन में सवालों का बवंडर उठने लगा,,, वह उस समय बर्तन धो रही थी सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार दिन में यु एकाएक अंकित का लंड क्यों खड़ा हो गया उसके मन में क्या चल रहा है क्या सोच रहा है कहीं कुछ देख तो नहीं लिया सड़क पर आते जाते किसी खूबसूरत औरत को तो नहीं देख कर मन में कल्पना करने लगा,,, वह बर्तन धो रही थी और इस तरह के सवाल अपने मन में सोच रही थी और उसका जवाब भी अपने मन में ही दे रही थी,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा पूरी तरह से जवान हो चुका है जो इस तरह से उसका लंड कभी भी खड़ा हो जा रहा है और इस बारे में सोचकर वह अंदर ही अंदर बहुत खुश भी हो रही थी क्योंकि अंकित के पेंट में बनी तंबू को देखकर बहुत उत्साहित भी हो रही थी क्योंकि यह सब उसके लिए ही अच्छा था,,,, क्योंकि इस बात को अच्छी तरह से जाती थी कि मर्दों का लंड कब खड़ा होता है जब औरतों के बारे में उनके मन में गलत विचार आते हैं जब वह औरत को चोदने के बारे में सोचते हैं या चोदने की तैयारी करते हैं तब उनका लंड हमेशा खड़ा हो जाता है,,, और यह विचार उसके मन में आते ही वह सोचने लगी कि उसके बेटे के मन में भी यही चल रहा है जरूर उसके मन में किसी को लेकर गंदे विचार आ रहे हैं या ऐसा भी हो सकता है कि,,, उसके ही बारे में सोचकर उसके बेटे का लंड खड़ा हो गया है जैसा कि उसे दिन जब वह अपने बाल को सही करने के लिए उसे बोली थी तब,, भी अंकित की हालत ऐसी ही हुई थी और यह ख्याल मन में आते ही उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ने लगी,,,,,, उसके मन में कुछ और भी चल रहा था वह इस मौके का फायदा उठाना चाहती थी लेकिन तृप्ति भी मौजूद थी इसलिए उसे थोड़ा तृप्ति पर गुस्सा भी आ रहा था थोड़ी देर में वह बर्तन साफ करके किचन पर रख दी थी,,, और देखी की तृप्ति हाथ में बैग लेकर कहीं जा रही थी इसलिए वह उत्सुकता बस पूछी,,,।

कहां जा रही हो ,,,?

मम्मी में सहेली के वहां पढ़ने जा रही हूं,,,

(इतना सुनते ही सुगंधा मन ही मन एकदम प्रसन्न होने लगी लेकिन फिर भी जानबूझकर थोड़ा सा तैस दिखाते हुए बोली,,,)

लेकिन आज तो रविवार है आज कहां जा रही हो,,,

वह क्या है ना मम्मी एग्जाम आने वाले हैं उसकी तैयारी करनी है,,।

ठीक है जाओ लेकिन जल्दी आ जाना,,,

ठीक है मम्मी मैं जल्दी आ जाऊंगी,,,(और इतना कहने के साथ ही वह कमरे से बाहर निकल गई और उसके जाते ही सुगंधा जल्दी से दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी,,, सुगंधा के मन में अरमान मचल रहे थे उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ रही थी खास करके उसकी बुर की हालत खराब होती जा रही थी उसकी बुर से मदन रस का रिशाव हो रहा था,,, वह कुछ देर दरवाजे पर ही खड़ी होकर कुछ सोचती रही और फिर तुरंत मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चली गई,,,, और थोड़ी ही देर में अलमारी में से झंडू बाम लेकर वह अपने बेटे के कमरे की तरफ आगे बढ़ गई और उसकी किस्मत अच्छी थी कि कमरा खुला ही था हल्का सा दरवाजा बंद था जिसमें से अंकित का बिस्तर और बिस्तर पर लेटा हुआ अंकित एकदम साफ नजर आ रहे थे लेकिन अंदर अंकित की हालत को देखकर सुगंधा के तन बदन में आग लग गई,,,। वह अंदर के नजारे को एकदम साफ तौर पर देख पा रही थी वह देख रही थी कि उसका बेटा पीठ के बाल दोनों टांगें बिस्तर पर फैलाए लेटा हुआ है और उसका हाथ पेट में बने तंबू पर घूम रहा था जिसे वह हल्के हल्के पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा रहा था इस नजारे को देखते ही सुगंधा की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,,,,, अंकित की हालत को देखकर सुगंधा समझ गई कि उसके मन में जरूर कुछ चल रहा है,,, क्योंकि इस समय भी उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था बस पेंट के अंदर था लेकिन उसके बेटे के मन में जरूर ऐसा कुछ चल रहा था जिसकी वजह से वह परेशान नजर आ रहा था लेकिन इस नजारे को देखकर सुगंधा के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नज़र आने लगे उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी,,,।

क्योंकि उसे लगने लगा था कि अपने बेटे की हालत को देखकर उसका काम बन सकता है,,,।

यह नजारा भी क्या खूब था दरवाजे पर खड़ी होकर एक मां अपने बेटे की कामुक हरकत को देख रही थी जो कि खुद अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होना चाहती थी लेकिन कैसे यह उसे नहीं मालूम था लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि एक न एक दिन जरूर वह अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने में कामयाब हो जाएगी,,, अंकित के मन में सुमन का ख्याल पूरी तरह से छाया हुआ था बार-बार उसकी आंखों के सामने सुमन की गोरी गोरी नंगी गांड नजर आ जाती थी तो कभी उसका एकाएक नीचे झुक जाना जिसकी वजह से उसकी गांड पर वह अपने लंड का स्पर्श महसूस कर पाया था,,, इन्हीं घटनाओं के बारे में सोचकर अंकित का बुरा हाल था,,, तभी उसे दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी वह एकदम से हड़बड़ा गया और अपनी दोनों टांगों को मोड़ लिया ताकि उसकी मां को उसके पेंट में बना तंबू दिखाई ना दे,,,। वह तुरंत जल्दी से उठकर बैठ गया था और दरवाजे की तरफ देखते हुए बोला,,,।

कककक,, क्या हुआ मम्मी कुछ काम था क्या,,,?

(सुगंध को अपने बेटे का इस तरह से हडबढ़ाना बहुत अच्छा लगा था,,, लेकिन वह अपने चेहरे पर दर्द के भाव लिए हुए अपने बेटे के कमरे में दाखिल होते हुए बोली,,,)

कुछ खास नहीं बेटा लेकिन मेरे सर में दर्द कर रहा था इसलिए बाम लेकर आई हूं अगर तुझे कोई काम ना हो तो मेरे सर पर लगा कर थोड़ी मालिश कर दे,,,

हां,, हां,,, क्यों नहीं वैसे भी मैं एकदम फ्री हूं,,, लाओ में बाम लगाकर मालिश कर देता हूं,,,

बहुत अच्छे बेटा बहुत देर से मेरा सर दर्द कर रहा है,,,,(इतना कहते हुए सुगंधा अपने बेटे के बिस्तर की तरफ आगे बड़ी और जाकर बिस्तर पर बैठ गई नरम नरम गद्दे पर सुगंधा की भारी भरकम गांड का दबाव एकदम साफ महसूस हो रहा था और अंकित ने इस नजारे को एकदम साफ-साफ देखा था कि जब उसकी मां गद्दे पर बैठ रही थी तो उसकी गांड के दबाव पर गद्दा भी पूरी तरह से दब गया था और उसकी मां की भारी भरकम गांड गद्दे में एकदम साफ तौर पर धरती हुई नजर आ रही थी इस नजारे को देखकर अंकित का हाल और भी बुरा होने लगा था,,, लेकिन वह अपनी मां के प्रति इस तरह के ख्याल बिलकुल भी नहीं अपने मन में लाता था लेकिन उसके मन में इस तरह का ख्याल इकाई एक ही आया था इसलिए वह अपने आप को संभालने की पूरी कोशिश कर रहा था क्योंकि ऐसा एक बार उसके साथ किचन में भी हो चुका था जब वह अपनी मां के बल के लटो को ठीक कर रहा था,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कि है कि बेटे के मन में उसकी मां के लिए इस तरह के गंदे विचार कभी नहीं आने चाहिए क्योंकि यह हर तरीके से गलत है इसलिए वह अपना मन दूसरी तरफ घूमाने की कोशिश करने लगा था,,,।

अच्छे से मालिश करके सर दबाना ताकि दर्द दूर हो जाए,,, मैं भी आज तेरे हाथों का जादू देखना चाहती हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही सुगंधा पीठ के बाल एकदम सीधी लेट गई और ऐसा लेटने की वजह से उसके साड़ी का पल्लू उसकी छाती पर से हटकर थोड़ा नीचे चला गया था जिससे उसकी भारी भरकम छाती एकदम साफ नजर आ रही थी और उसकी छतिया के बीच की पतली गहरी लकीर भी एकदम साफ नजर आ रही थी लेकिन अभी तक अंकित का ध्यान उसकी मां की चूचियों पर नहीं किया था अपनी मां के हाथ में से झंडू बाम किसी से लेकर उसके ढक्कन को खोलकर उसमें से थोड़ा सा बम निकाला और उसे अपनी मां के सर पर हल्के हल्के रगड़ने लगा और उसे दबाना शुरू कर दिया,,,,,,,

अपने बेटे का स्पर्श सुगंधा को बेहद रोमांचित कर रहा था,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से वहां लेटी हुई थी ऐसे में उसके बेटे का ध्यान उसकी भारी भरकम साथियों पर जरूर जाने वाली थी इसलिए तो वह अपनी छाती पर से साड़ी का पल्लू धीरे से एक बहाने से हटा दी थी,,,, कुछ देर तक सब कुछ ठीक चलता रहा अंकित इस तरह से अपनी मां के सर पर बम लगाकर उस पर मालिश कर रहा था,,, लेकिन अंकित की हालत तब खराब होने लगी जब उसकी बहाने अपने सर को उसकी गोद में रखने के लिए बोली,,,।)

बेटा ऐसे ठीक नहीं लग रहा है,,, मेरे सर को अपनी गोद में रख लो फिर मालिश करना तब मुझे अच्छा लगेगा,,,,

ठीक है मम्मी,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित जो कि अपनी मां के सिरहाने बैठा हुआ था वह पलाठी मार लिया,,, ताकि उसकी मां का सर उसकी गोद में ठीक से आ सके,,, और थोड़ी ही देर में सुगंधा अपने सर को अपने बेटे की गोद में रख ली लेकिन इस दौरान उसने बाकी का काम भी तमाम कर दिया था अपनी साड़ी के पल्लू को पूरी तरह से अपने ऊपर से हटा दी थी,,, ऐसे में सर से लेकर उसकी कमर तक सब कुछ एकदम साफ नजर आ रहा था उसकी गहरी नाभि भी किसी छोटी सी बुर से कम नजर नहीं आ रही थी,,,, और बिस्तर पर लेटने से पहले सुगंधा ने चला कि दिखाते हुए ऊपर का एक बटन खोल दी थी जिसकी वजह से उसकी दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह छाती पर ब्लाउज के अंदर लहरा रही थी,,,।,,

अब जाकर ठीक लग रहा है अच्छे से मालिश करना,,,

(अंकित अपनी मां की बात को सुन तो जरूर रहा था लेकिन उसकी आंखों के सामने जिस तरह का नजारा था उसे देखकर उसके होशो हवास गायब हो चुके थे,,, अभी तक उसकी नजर अपनी मां की छातियों पर नहीं गई थी लेकिन जैसे ही चला कि दिखाते हुए सुगंधा ने अपनी साड़ी के पल्लू को पूरी तरह से अपने बदन से दूर हटाई थी ऐसे में अंकित की नजर अपनी मां की गदराऊ चूचियों पर सीधे-सीधे चली गई थी,,, ब्लाउज के ऊपर का बटन खुला होने की वजह से उसकी मां की दोनों चूचियां ब्लाउज से बाहर आने के लिए आतुर नजर आ रही थी जिसका अच्छा खासा भाग अंकित को एकदम साफ नजर आ रहा था अंकित नजर भरकर कमर से ऊपर तक अपनी मां को प्यासी नजरों से देख रहा था हालांकि ऐसी नजर के चलते उसे अपने आप से ग्लानी भी हो रही थी लेकिन वह अपने आप को अपने मन को रोक नहीं पा रहा था,,,, अंकित की तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत ना होता देखकर सुगंधा समझ गई थी कि जो वह दिखाना चाह रही है उसका बेटा वही देख रहा है और इस बात को लेकर उसके मन में खुशी भी झलक रही थी,,, वह धीरे से बोली,,,)

क्या हुआ बेटा मालिश तो कर दर्द पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है,,,

हां,,,हां ,,,, अभी करता हूं,,,(अपनी मां की आवाज सुनते ही जैसे वह नींद से जागा हो और फिर से वह बाम की सीसी में से थोड़ा सा बाम अपनी उंगली में लगाकर वापस अपनी मां के सर पर लगाकर उसे पर धीरे-धीरे मालिश करने लगा,,, लेकिन उसका पूरा ध्यान अपनी मां की छातियों पर था जो की पूरी तरह से खीला हुआ नजर आ रहा था,,,, इस नजारे को देखकर पहले से ही अंकित का लंड खड़ा था अब उसमें और ज्यादा अकड़ बढ़ने लगी और उसमें अकड़ पढ़ने की वजह से वह सीधा पेट में खड़ा हुआ था जहां पर उसकी मां का कर रखा हुआ था लेकिन अनुभव से भरी हुई सुगंधा को अपने बेटे के खड़े लंड का एहसास अपने सर पर हो रहा था जिसकी वजह से उसके बाद में उत्तेजना की चीटियां रेंग रही थी,,, सुगंधा की हालत खराब होने लगी ठीक कर के ऊपर वाले भाग पर उसे अपने बेटे के लंड की गर्माहट साफ महसूस हो रही थी और उसका कड़कपन भी उसे महसूस हो रहा था,,, जिसके चलते उसकी सांसे उत्तेजना के मारे गहरी चलने लगी जिसकी वजह से उसकी छातियां ऊपर नीचे होने लगी और इस नजारे को देखकर तो अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी,,,।
 
सुगंधा निश्चिंत होकर अपने बेटे के गोद में लेटी हुई थी अपने सर की मालिश करवा रही थी और अपनी जवानी का जलवा अपने बेटे के ऊपर भी खेल रही थी जिसमें उसका बेटा पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था अपनी मां की चूचियों के बीच की पतली और गहरी लकीर को देखकर अंकित का मन उसमें डूबने को कर रहा था और वह अपनी मन में कल्पना कर रहा था कि ब्लाउज के अंदर जब उसकी मां की चूचियां ऐसी नजर आती है तो ब्लाउज उतारने के बाद नंगी चूचियां कैसी नज़र आती होगी इस बारे में सोच कर ही उसकी हालत खराब होती जा रही थी वह पसीने से टरपटर हो चुका था उत्तेजना पूरी तरह से उसके ऊपर कब्जा जमा चुका था अभी तक वह एक बेटे का फर्ज निभाते हुए अपनी मां के बारे में अपने मन में गंदे ख्याल लाने से कटरा रहा था लेकिन उसकी आंखों के सामने इस तरह के मदहोश कर देने वाले नजारे को देखकर उसकी आंखों ने भी अपने ऊपर से शर्म मर्यादा और रिश्ते के पर्दे को हटा दिया था और इस समय अंकित को अपनी गोद में लेटी हुई सुगंधा अपनी मां नहीं बल्कि एक औरत नजर आ रही थी जिसका बदन पूरी तरह से जवानी से भरा हुआ था जिनके अंग अंग से जवानी का रस टपक रहा था,,, जिसे पीने के लिए खुद अंकित बेकरार हुआ जा रहा था,,,,।

अंकित बिना कुछ बोले अपनी मां के सर की मालिश किया जा रहा था और आप उसे भी एहसास होने लगा था कि उसका खड़ा नहीं उसकी मां के सर पर स्पर्श हो रहा है और न जाने क्यों अंकित जानबूझकर अपने लंड को अपनी मां के सर पर रगड़ने की कोशिश कर रहा था और खुद सुगंधा भी एक दो बार अपने सर को ऊपर की तरफ ले जा करके अपने बेटे के खड़े लंड को पूरी तरह से उसके कड़कपन को महसूस करके मस्त हो चुकी थी,,, अंकित को अपने बदन में अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी ऐसा हलचल उसे पहले कभी महसूस नहीं हुआ था वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और उसके लंड की अकड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि उसे अपने लंड में दर्द महसूस हो रहा था,,,,।

अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,(उत्तेजना से भरी आवाज में अंकित बोला,,)

बहुत अच्छा लग रहा है बेटा एकदम आराम लगने लगा है तेरे हाथों में तो जादू है,,,, इससे पहले भी मेरा सर बहुत बार दर्द कर चुका है और मैं तृप्ति से मालिश करवाई हूं लेकिन ऐसा आराम मुझे तृप्ति के हाथों से बिल्कुल भी महसूस नहीं हुआ था जैसा कि तेरे हाथों से आराम लग रहा है,,,

यह तो अच्छी बात है मम्मी की मेरे हाथों से तुम्हें आराम मिल रहा है,,,(ऐसा कहते हुए अंकित कभी अपनी मां की चूचियों की तरफ तो कभी उसकी गहरी नाभि की तरफ देख रहा था इस समय अंकित को अपनी मां की गहरी मेरी बेहद आकर्षित कर देने वाली लग रही थी अंकित का मन अपनी मां की नाभि में उंगली घुमाने को कर रहा था लेकिन ऐसा करना उचित नहीं था,,,,,,,।

दूसरी तरफ सुगंधा की भी हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी उसकी चड्डी पूरी तरह से उसके मदन रस से भीग चुकी थी उसकी बुर लगातार पानी बाहर आई थी इतनी उत्तेजना उसने भी पहले महसूस नहीं की थी एक तो यह दूसरा मौका था जब उसने खुले तौर पर अपने अंग का प्रदर्शन अपने बेटे के बेहद करीब कर रही थी और साथ में अपने बेटे के लंड को अपने सर पर महसूस भी कर रही थी उसका मन तो कर रहा था कि इसी समय अपने बेटे के लंड को पकड़ ले और उसे चोदने के लिए बोले लेकिन वह अपनी मर्यादा को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि एकाएक आगे बढ़ना उचित नहीं है वह धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी,,, ताकि उसके बेटे को ऐसा ना लगे कि उसकी मां जानबूझकर यह सारा खेल उससे चुदवाने के लिए रच रही है,,, वह सारा माहौल ऐसा बनाना चाहते थे की दोनों के बीच चुदाई अपने आप हो जाए और दोनों एक साथ इसके जिम्मेदार हो,,, और इसके लिए सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि अपने बेटे को अपने काबू में करना बहुत जरूरी है और वह अपने बेटे को अपनी जवानी का जलवा दिखाकर ही काबू में कर सकती थी जिसकी शुरुआत उसने कर दी थी और जिसका असर उसके बेटे पर भी होना शुरू हो गया था,,,।

अब तो मैं जब मेरा बदन दर्द करेगा तो तेरे से ही अपने बदन की मालिश करवाऊंगी क्योंकि तेरे हाथों में जादू है और मैं जल्दी से ठीक हो जाऊंगी,,,।

(अपनी मां के बदन की मालिश के बारे में सोचकर ही अंकित की हालत खराब होने लगी और मन में प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और अपनी प्रसन्नता को अपने मन में दबाकर वह बोला,,,)

क्यों नहीं मम्मी मैं कहां भाग जा रहा हूं मैं भी तो यही हूं,,,(इतना कहते हुए अंकित सुमन वाली घटना के बारे में सोचने लगा और अपने मन में या कल्पना करने लगा कि अगर सुमन की जगह उसकी मां उसे अवस्था में दिखती तो कितना मजा आ जाता सुमन की गांड तो फिर भी छोटी-छोटी थी लेकिन उसकी मां की गांड भारी भरकम गोल गोल और बहुत मत कर देने वाली थी हालांकि अभी तक उसने अपनी मां की गांड को नंगी नहीं देखा था लेकिन फिर भी कल्पना करके पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था क्योंकि अब तो कल्पना करने के लिए उसके मन में रेखा चित्र भी था की गांड कैसी दिखती है,, और उसे पक्का विश्वास था कि सुमन से भी ज्यादा खूबसूरत और बेहतर हसीन उसकी मां की गांड नजर आएगी यह सब कल्पना उसके पसीने छुड़ा रहे थे और तभी उसके माथे से पसीना टपक कर सुगंधा के गाल पर गिर गया जिसे अपने गाल पर महसूस करके वह बोली,,)

तू पसीना पसीना क्यों हो गया है तबीयत तो तेरी ठीक है ना पंखा भी चल रहा है फिर भी तेरा पसीना छूट रहा है,,,

कककक,,, कुछ नहीं मम्मी यह तो नॉर्मल है कभी कबार मुझे ऐसा हो जाता है,,,

तब तो ठीक है मुझे लगा कि तेरी तबीयत खराब है,,,(सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे का पसीना क्यों छूट रहा है उसकी गदराई जवानी देखकर ही उसके बेटे का पसीना छूट रहा था,,,, और इस बात के लिए वह मन ही मन बहुत खुश हो रही थी उसने अपना जादू चला दी थी धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,)

बहुत अच्छा लग रहा है बेटा आप रहने दे तूने अच्छे से मालिश किया है,,,,(और ऐसा कहते हुए वह अपने बेटे के गोद से उठी और अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करने लगी क्योंकि अब बेहतरीन खूबसूरत मादकता भरे दृश्य पर पर्दा डालने का समय आ चुका था और वह अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए उठकर बैठ गई,,,,, लेकिन संजू की हालत खराब थी वह अपने साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए तिरछी नजर से संजू के पेट की तरफ देखी थी जो की पूरी तरह से बेल को बांधने वाले खुंटे की तरह नजर आ रहा था,,,, जिसे देख कर वह मन ही मन प्रसन्न होने लगी और बिस्तर पर से उठते हुए बोली,,,)

अब थोड़ा जाकर नहा लेती हूं तो मन हल्का हो जाएगा,,,,,(और ऐसा कहते हुए अपने बेटे के कमरे से बाहर निकल गई वह जानबूझकर नहाने की बात कही थी क्योंकि वह अपनी बुर में उंगली डालकर अपनी प्यास को बुझाना चाहती थी इसलिए वह सीधे बाथरूम में गई और अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई,,, और फिर अपने पैर को नल के ऊपर रखकर,,, एक साथ अपनी दो उंगली को अपनी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करके अपनी गर्मी को शांत करने लगी और थोड़ी देर बाद ही अपनी गर्मी को शांत करने के बाद ठंडे पानी से नहाकर वह बाथरुम से बाहर आ गई,,,)

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सुगंधा की जवानी बेलगाम होती जा रही थी सुगंधा का उसके मन पर और उसके तन पर,,, बिल्कुल भी काबू नहीं रह गया था तीन प्रतिदिन उसकी इच्छा अपने बेटे के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन करने की बढ़ती जा रही थी जिसके चलते वह दो बार इस तरह की हरकत को अंजाम दे चुकी थी और दोनों बार खुद तो पानी पानी हुई थी अपने बेटे को भी उत्तेजित कर चुकी थी एक तो किचन में बालों के लटो को ठीक करवाते समय और दूसरी बार सर दर्द का बहाना देकर सर की मालिश करवाते समय वह अपनी भारी भरकम खरबूजे जैसी चुचियों का प्रदर्शन कर चुकी थी जिसके चलते वह अपने बेटे की उत्तेजना को ठीक अपने सर पर महसूस कर चुकी थी,,, और यह एहसास कर चुकी थी कि उसके बेटे का लंड बेहद दमदार है,,, जिसके चलते हैं वहां मालिश करवाने के बाद तुरंत बाथरूम में नहाने के बहाने चली गई थी और वहां अपनी उंगली का सहारा लेकर अपनी मलाई को अपनी बुर में से बाहर निकाल दी थी,,,।

अपनी मां की मस्त-मस्त कर देने वाली चूचियों को देखकर और अपने लंड को उसके सर पर महसूस करके अंकित उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था वह इतना ज्यादा उत्तेजना अपने बदन में महसूस कर रहा था कि उसके लंड में दर्द होने लगा था हालांकि इस समस्या से निजात पाने के लिए उसे हस्तमैथुन करना नहीं आता था और ना ही इस बारे में वह जानता था अगर जानता तो अब तक न जाने कितनी बार अपने हाथ से हिलाकर वह अपने लंड के दर्द से छुटकारा पा लिया होता,,,।

अपनी मां की खूबसूरत चूचियों की प्रति उसका आकर्षण बढ़ता जा रहा था और उसे इस बात का एहसास भी होने लगा था कि वाकई में उसकी मां बहुत ज्यादा खूबसूरत है लेकिन फिर भी इस तरह के ख्याल बने आते ही वह अपनी भावनाओं को अपने मन में दबाकर इन खयालों से अपने ध्यान को दूसरी तरफ करने की कोशिश करता था लेकिन नाकाम हो जाता था,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां को किस नजरिए से देखें क्योंकि अब तो वह चोर नजरों से अपनी मां की तरफ देखने लगा था उसकी खूबसूरती के रस को अपनी आंखों से पीने लगा था उसके नितंबों के घेराव और कसावपन को देख कर अंदर ही अंदर मस्त होने लगा था,,,। इन सबके बावजूद भी वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि जो कुछ भी वह कर रहा है वह गलत है क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है वह अनजाने में हो रहा है उसकी मां जानबूझकर अपनी छाती पर से साड़ी के पल्लू को थोड़ी हटाई थी उसे यह थोड़ी मालूम था की छाती पर से साड़ी का पल्लू है जाने पर मैं उसे घूर-घूर कर देखूंगा या फिर बालों को ठीक करते समय मेरी नजर उसकी छाती पर चली जाएगी यह सब तो अनजाने में हो रहा था और इस बात का दोष वह अपने ही आपको दे रहा था कि उसकी नजर में ही गड़बड़ है,,,, उसके खुद के देखने का नजरिया बदल गया है जिससे वह निजात पाना जाता था,,,, और इस समस्या से निजात पाने के लिए वह अपने मन में अपनी ही मां की कसम खाकर आइंदा इस तरह से वह कभी अपनी मां को नहीं देखेगा,,,, ऐसा मन में कसम लेकर वह सहज होने की कोशिश करने लगा,,, और धीरे-धीरे इसमें कामयाब भी होने लगा,,,।

लेकिन दूसरी तरफ सुगंधा की बुर की खुजली बढ़ती जा रही थी,,,, उसकी हालत जल बिन मछली की तरह हो रही थी,,,, वह अपनी जवानी की आग बुझाने में नाकाम साबित हो रही थी अगर उसकी जगह कोई और औरत होती तो शायद अब तक किसी मर्द का सहारा लेकर अपनी बुर की प्यास को बुझा ली होती लेकिन सुगंधा दूसरी औरतों की तरह बिल्कुल भी नहीं थी एक औरत होने के साथ-साथ वह एक शिक्षिका भी थी और उसे अपनी इज्जत मान मर्यादा का अच्छी तरह से भान था,,,, इतना तो वह जानती ही थी कि उसकी प्यास बुझाने वाला उसके घर में ही मौजूद है लेकिन कैसे इस बात को वो भी नहीं जानती थी लेकिन इतना विश्वास था कि एक ना एक दिन लह जरुर कामयाबी हासिल करेगी,,, इसीलिए वह अपने प्रयास में लगी हुई थी,,,।

दूसरी तरफ सुमन अपने गोल-गोल नितंबों पर अंकित के मोटे तगड़े तंबू का चुभन महसूस करके मदहोश हो चुकी थी तृप्ति और सुमन की उम्र एक जैसी ही थी लेकिन जहां एक तरफ तृप्ति मर्यादा में रहती थी वहीं दूसरी तरफ सुमन अपनी जवानी की आग को संभाल नहीं पा रही थी इसीलिए वह दो-तीन लड़कों के साथ शारीरिक संबंध भी बन चुकी थी और उन लड़कों के साथ बनाए संबंध के अनुभव के जरिए ही उसे इस बात का एहसास हुआ था कि अंकित का लंड बेहद दमदार है,,,,,,, अंकित को ऐसा लगता था कि सुमन के कमरे के दरवाजे पर जब वह खड़ा था तो सुमन को इस बात का अहसास तक नहीं था बल्कि सुमन अलमारी के आईने में सब कुछ देख चुकी थी और इसीलिए जानबूझकर ही अपने तौलियों को नीचे गिराकर एकदम नग्न अवस्था में हो चुकी थी,,, अंकित के चेहरे के भाव को पढ़कर वह अंदर ही अंदर बहुत प्रसन्न भी हो रही थी और जिस तरह से रसोई में आकर वह नीचे झुकी थी और उसकी गांड पर अंकित का लंड एकदम से ठोकर खा गया था उसे अभी तक वह अपनी गांड पर महसूस कर पा रही थी जिसके चलते उसकी बुर से पानी निकल जाता था,,, वैसे तो सुमन भी अंकित से ज्यादा बातचीत नहीं करती थी कभी कभार ही आमने-सामने आ जाने पर बातचीत हो जाती थी लेकिन अब ऐसा लग रहा था कि सुमन के मन में कुछ और चलने लगा था,,,, वह भी मौका देखकर अंकित पर अपनी जवानी के डोरे डालने के लिए तैयार हो चुकी थी,,,।

ऐसे ही सभी लोग अपने-अपने तरीके से लगे हुए थे देखते ही देखते दिन गुजर रहे थे लेकिन कोई भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पा रहा था,,, तनख्वाह का दिन था,,, तनख्वाह लेकर शाम को लौटते समय सुगंधा सब्जी मार्केट में सब्जी और बच्चों के लिए नाश्ता लेने के लिए चली गई,,,, घर पर सब्जी बनाने के लिए करेला कद्दू और पटर खरीद चुकी थी,,, लेकिन तभी उसकी नजर बैगन पर गई जो की काफी लंबे और मोटे थे,,,, बैगन पर नजर पढ़ते ही और उसकी लंबाई और मोटाई को देखकर सबसे पहले सुगंधा के मन में अपने बेटे के दोनों टांगों के बीच लटकते हुए लंड का ख्याल आ गया,,,, और उसके बदन में सुरसुराहट सी दौड़ने लगी वैसे उसे बैगन नहीं खरीदना था लेकिन उसकी लंबाई और मोटाई उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी,,, और वह उसे ठेले के पास जाने से अपने आप को रोक नहीं पाई और हाथ में थैला लिए वह उस ठेले के पास पहुंच गई,,,।

ठेले पर पहुंचते ही उसने एक मोटे तगड़े लंबे बैगन को अपने हाथ में उठाकर उसे गोल-गोल घुमा कर देखने लगी और उसकी इस प्रक्रिया का उसके चेहरे पर अद्भुत प्रभाव पड़ रहा था ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे वहां बैगन को नहीं बल्कि अपने ही बेटे के लंड को अपने हाथ में लेकर खेल रही हो,,,,, वह उसे बैगन को लेकर कल्पना की दुनिया में इतना खो गई कि उसे इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि वह कब अपने एक हाथ की उंगली और अंगूठे को मिलकर उसका गोल छल्ला बना ली और उसे गोल छल्ले में से उसे बैगन को अंदर प्रवेश करा कर दो-तीन बार उसे अपने हाथ के गले में से अंदर बाहर करने लगी और उसकी यह हरकत ठेले वाले ने देख लिया और एकदम से मुस्कुराते हुए अपने चेहरे पर अश्लील भाव लाते हुए बोला,,,।

बहुत मोटा और लंबा है मैडम जी बहुत मजा आएगा,,,

(उसे ठेले वाले की बात सुनते ही सुगंधा को जैसे एकदम से होश आया हो वह एकदम से हड़बड़ा कर उस ठेले वाले की तरफ देखने लगी,,, और अपने दोनों हाथ की तरफ देखी तो एकदम शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि उसका एक हाथ में अभी भी उंगली और अंगूठे को सटकर गोल छल्ला बना हुआ था और उसके बीचो-बीच तक बैगन घुसा हुआ था मानों जैसे किसी औरत की बुर में लंड घुसा हो,,,, अपनी स्थिति का भान होते ही सुगंधा एकदम शर्म से पानी पानी होते हुए अपने चारों तरफ देखने लगी लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसे समय उस ठेले पर सिवाय ठेले वाले के ओर कोई नहीं था,,,,)

कककककक,,, कैसे दिए बैगन,,,,(हड़बड़ाहट और घबराहट भरे स्वर में सुगंधा बोली,,,)

अब आपसे क्या मेलजोल करना मैडम₹15 किलो है,,,, तुम 10 रुपया दे देना,,,,,,(कुटिल मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए वह ठेला वाला बोला,,, सुगंधा को अपने मन में उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन इस समय एकदम लाचार नजर आ रही थी क्योंकि उसकी हरकत को वह अपनी आंखों से देख लिया था,, इसलिए उसकी बात सुनकर वह धीरे से बोली,,,)

ठीक है 1 किलो कर दो,,,(और इतना कहने के साथ ही सुगंधा बैगन को अपने हाथों से बिन कर निकालने लगी तभी वह ठेला वाला खुद बैगन के देर में से नीचे से एक मोटा तगड़ा और लंबा बैगन निकाल कर सुगंधा की तरफ दिखाते हुए बोला,,,)

यह वाला दीजिए मैडम तुम्हारे लिए एकदम फिट बैठेगा ,,,,,

(उसे ठेले वाले की बात सुनकर सुगंधा गुस्से से लाल पीली हुई जा रही थी लेकिन उसे कुछ कहने की उसमें हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी,,, सुगंधा उसे ठेले वाले के खाने के मतलब को एकदम सीधा,, समझ रही थी वह जानती थी कि वह किस सुर में बात कर रहा है,,, इसलिए सुगंधा उसे ठेले वाले की बात काटते हुए बोली,,,,)

कोई जरूरत नहीं है मैं ले रही हूं ना,,,

मैं तो तुम्हारी मदद कर रहा था मैडम इसे ले लेती तो और अच्छा होता तुम्हारे लिए ही अच्छा होता है एकदम मेरी तरह है,,,

क्या मतलब,,,!(एकदम गुस्से से उस ठेले वाले को आंख दिखाते हुए बोली,,,)

कुछ नहीं मैडम जी मैं तो अच्छा देख कर दे रहा था,,,

कोई जरूरत नहीं है मैं ले लूंगी,,,

कोई बात नहीं मैडम जैसी आपकी मर्जी आपका समान है जैसा ठीक लगे वैसा ही लेना,,,(वह ठेले वाला एकदम धीमे स्वर में बोला तो सुगंधा फिर से गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए बोली क्योंकि भले ही वह धीरे से बोला था लेकिन सुगंधा ने उसकी बात को सुन ली थी,,,)

क्या बड़बड़ा रहे हो शांति से बैठ नहीं सकते क्या,,!

ठीक है मैडम मैं कुछ कहां बोल रहा हूं,,,, और जल्दी करिए दूसरे ग्राहक को भी आने दीजिए,,,।

मैं रोक कर रखी हूं क्या,,,,

(इतना कहते हुए सुगंधा बैगन को तराजू में रखने लगी जब थोड़ा बहुत बैगन किलो में कम पड़ने लगा तो वह ठेले वाला इस बेगन को वापस तराजू में डाल दिया जिसे वह खुद चुनकर निकाला था इस बार सुगंधा इनकार नहीं कर पाई क्योंकि सुगंधा की नजरों ने उसे बैंगन की मोटाई और लंबाई को भांप ली थी,,, और बैगन को अपने थैले में लेकर वह अपने पर्स में से 10 का नोट निकाल कर उस ठेले वालों को थमा दी,,, और वहां से चलने लगी लेकिन उसे ठेले वाले से रहा नहीं गया और अपने मन की बात अपने होठों पर लाते हुए धीरे से बोला,,,)

ससहहह हाय क्या मस्त गांड है इसकी मिल जाती तो उसकी बुर में बेगन नहीं मैं अपना लंड डालकर चोदता,,,, ।

(उसके धीरे से कहीं हुई बात को सुगंधा सुन ली थी और अंदर ही अंदर बहुत क्रोधी भी हो रही थी लेकिन मुड़कर जवाब देने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह जानती थी कि ऐसे लोग से मुंह लगने का मतलब है कि अपनी ही इज्जत खराब करना ,, लेकिन इस बात से उसके बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी कि वह खुले शब्दों में उसे चोदने की बात कर रहा था और उसे इस बात का मलाल था कि सड़क पर चलते हुए जितने भी मर्दों की नजर उसके खूबसूरत बदन पर उसकी चूचियों पर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर जाती थी वह लोग उसे चोदने का मन बना लेते थे और मन ही मन में उसके बारे में गंदे ख्याल भी करके मस्त हो जाते थे लेकिन एक उसका लड़का ही था जो घर में साथ होने के बावजूद भी उसके मन की बात को समझ नहीं पा रहा था,,,।

सुगंधा को उसे ठेले वाले की बात पर गुस्सा भी आ रहा था और हंसी भी आ रही थी साथ में उत्तेजना का अनुभव भी हो रहा था और अपने आप को वह दोषी भी ठहरा रही थी क्योंकि उसकी हरकत की वजह से ही उसे इतनी हिम्मत हुई थी बोलने की,,, सुगंधा अपने आप से ही बात करते हुए बोली मैं भी कितनी बुद्धू हूं कहीं भी कल्पना करने लगती हूं बैगन को देखते ही मुझे मेरे बेटे का लंड याद आने लगा भले ही मैं उसे देखी नहीं हूं लेकिन पेंट में जिस तरह का तंबू बना होता है उसे समझ में तो आता ही है कि कितना बड़ा और मोटा होगा,,,। बाप रे में कभी सोच भी नहीं सकती थी कि मैं इस तरह की हरकत करूंगी कैसे अपने हाथ का गोल छल्ला बनाकर उसमें बैगन डाल रही थी निकल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे बुर में लंड घुस रहा हो,,,, अपने आप से ही इस तरह की मन में बात करते हुए सुगंधा के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और उसकी बुर गीली होने लगी,,,,,।

अपनी उलझन में से बाहर निकलने की कोशिश करते हुए वह सब्जी मार्केट में ही स्थित एक समोसे और जलेबी नाश्ते की दुकान पर पहुंच गई और वहां पर गरमा गरम समोसे के साथ-साथ जलेबी भी पैक करवाने लगी कि तभी उसकी नजर उसे समोसे की दुकान के ठीक सामने ठेले पर गई,,, वहां पर एक औरत खड़ी थी जिसे पीछे से भी वह पहचान गई थी वह उसकी सा अध्यापिका नूपुर थी,,, वह कोई सब्जी खरीद रही थी,, नूपुर को देखते ही सुगंधा के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे वह उससे मिलना चाहती थी उसे वह आवाज देने ही वाली थी कि उसके पास में खड़ा एक जवान लड़का जो कि अंकित की उम्र का था उसकी हरकत से वह एकदम से चौंक गई उसे लड़के ने अपनी हथेली को नूपुर के गोलाकार नितंबों पर रखकर ऊपर से ही हौले हौले से सहलाने लगा,,, इस दृश्य को देखकर तो उसकी हालत खराब हो गई सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सब्जी मार्केट के अंदर वह जवान लड़का,,, बेफिक्र होकर नूपुर की गांड पर अपना हाथ रखकर मजे लेता था वह जल्दबाजी में उसकी तरफ जाना चाहती थी लेकिन तभी उसकी आंखों ने जो देखा उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,, उस जवान लड़के से नूपुर हंस हंस के बातें कर रही थी जबकि बातें करते समय भी उसे लड़के का हाथ नूपुर की गांड पर था,,,, यह नजारा सुगंधा को हैरान कर देने वाला था,,,।

जिस तरह से दोनों हंस हंस के बातें कर रहे थे उसे देखकर सुगंधा समझ गई थी कि दोनों एक दूसरे को जानते हैं लेकिन वह लड़का नूपुर का क्या लगता है यह नहीं मालूम पड़ रहा था,,,। उसे नजारे को देखकर सुगंधा के तन बदन में आग लगने लगी थी उत्तेजना के लहर रखने लगी थी उसकी बुर से पानी निकलना शुरू हो गया था क्योंकि जब वह लड़का नूपुर के साथ इस तरह की हरकत कर सकता है तो वह जरूर उसके साथ हम बिस्तर भी होता होगा उसे मजा देता होगा यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके पति का ख्याल आने लगा जो की नूपुर से कई ज्यादा उम्र का था और उसकी उम्र को देखते हुए और नूपुर की जवानी से भरी हुई किया को देखकर सुगंधा अपने मन में तर्क लग रही थी कि जरूर वह अपने पति से बिल्कुल भी खुश नहीं होती होगी इसीलिए तो जवान लड़के से मजा ले रही है,,,,।

सुगंधा का नाश्ता तैयार हो चुका था वह दुकानदार से समोसे और जलेबी या लेकर ठेले में डाल चुकी थी लेकिन वह उसी दुकान पर खड़ी होकर सबसे नजर बचाकर नूपुर की तरफ ही देख रही थी और उसके साथ जो लड़का था वह भी,, बहुत चालाक नजर आ रहा था और वैसे भी वह ठेला भी बड़े से घने पेड़ के नीचे था और शाम का वक्त होने पर धीरे-धीरे अंधेरा भी हो रहा था जब कोई उधर से गुजरता था तो वह लड़का नूपुर की गांड पर से अपने हाथ को हटा दे रहा था नूपुर को भी उस लड़के की हरकत से बहुत मजा आ रहा था और जैसे ही वहां कोई नहीं रहता था फिर से वह उसकी गांड को अपने हाथों से दबाना शुरू कर देता था यह सब अपनी आंखों से देख कर सुगंधा की बुर कचोरी की तरह फूल गई थी,,,,।

सुगंधा तब तक वहां खड़ी रही जब तक कि नूपुर वहां से चली नहीं गई उस जवान लड़के के साथ सुगंधा का मन तो बहुत हो रहा था कि वह जाकर नूपुर से पूछे कि वह लड़का कौन है लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी और वह अपने मन में ही तर्क लगाने लगी थी कि वह लड़का कौन होगा हो सकता है उसका प्रेमी हो या फिर भतीजा हो या फिर कोई रिश्तेदार हो जिसके साथ नुपुर इतना घुल मिल गई है,,,। लेकिन पल भर में ही वह इतना समझ गई कि भले ही वह अपने पति से खुश नहीं है लेकिन उसकी किस्मत से ज्यादा अच्छी है क्योंकि उसकी प्यास बुझाने वाला एक जवान लड़का उसके पास जो है ,, यहां तो हर रात करवट बदल कर ही गुजरती है,,,, नूपुर उसे लड़की के साथ जा चुकी थी और नूपुर उसे लड़के के साथ बहुत खुश भी नजर आ रही थी वरना उसके चेहरे पर हमेशा उदासी छाई रहती थी सुगंधा भी वहां से अपने घर की तरफ निकल गई,,,।

रात को सब काम से निपट करवा अपने कमरे में गई और ठेले में से लाए हुए उस मोटे तगड़े बैगन को जिसे वह अपने पलंग के नीचे छीपा दी थी उसे धीरे से निकाली और उसे हाथ में लेकर चारों तरफ घूम कर देखने लगी वाकई में उसका आकार एक मोटे तगड़े जानदार लंड से काम नहीं था जिसे देखकर ही उसकी बुर से पानी बहना शुरू हो गया,,,, देखते ही देखते सुगंधा अपने बदन पर से अपनी साड़ी कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई और अपनी दोनों टांगों को खोलकर वह उसे बैगन के गोल वाले मोटे भाग को अपनी बुर पर रखकर उसे अंदर डालने की कोशिश करने लगी और थोड़ी देर में उसे समझ में आ गया कि उसकी बुर के छेद से बैगन के आगे वाला भाग कुछ ज्यादा मोटा था इस बात को समझते ही वह और ज्यादा उत्तेजित हो गई और जल्दी से अपनी बिस्तर पर से उठकर वहां अलमारी के पास के टेबल के पास गई जहां पर सरसों के तेल की सीसी रखी हुई थी और वह उसमें से तेल को अपनी हथेली में गिराकर वापस सीसी को वही रखती और फिर उसे सरसों के तेल को बैगन पर अच्छी तरह से लगने लगी खास करके आगे वाले भाग पर ताकि चिकनाहट पाकर वह आराम से उसकी बुर में घुस सके,,,।

थोड़ी ही देर में सुगंध तैयार थी उसे बैंगन को अपनी बुर में डालने के लिए आज उसकी उत्तेजना कुछ ज्यादा ही बढ़ चुकी थी क्योंकि उसके मन में सब्जी मार्केट का वही दृश्य याद आ रहा था जब वह जवान लड़का नूपुर की गांड को जोर-जोर से दबा रहा था,,, लेकिन आज उसकी कल्पना में उसका जवान बेटा नहीं बल्कि नूपुर थी और वह जवान लड़का था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि वह जवान लड़का कैसे नूपुर के साथ हम बिस्तर होता होगा कैसे उसे चोदता होगा वह अपनी आंखों को बंद करके कल्पना कर रही थी कि वह जवान लड़का नूपुर को अपनी बाहों में लेकर उसके लाल लाल होठों को चुसता हुआ उसे बिस्तर पर लेटा देता होगा और फिर धीरे-धीरे उसके कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर देता होगा,,, और नूपुर भी उसे अपनी छाती से लगाकर उसे अपना दूध पिलाती होगी अपने हाथों से उसकी पेंट उतार कर उसके लंड को मुंह में लेकर चूस रही होगी,,,,।

और धीरे-धीरे वह जवान लड़का नूपुर की दोनों टांगों को खोलकर कुछ देर तक उसकी गुलाबी बुर को अपने होठों से लगाकर चाटता होगा और फिर दोनों टांगों को खोलकर अपने मोटे तगड़े लड को नूपुर की बुर में डालकर उसकी जा की चुदाई करता होगा,,, यही सब कल्पना करते हुए वह मोटा तगड़ा बैगन का उसकी बुर में घुस गया और अंदर बाहर होने लगा उसे खुद को नहीं पता चला लेकिन वह काफी उत्तेजित थी इसलिए जल्द ही उसकी बुर से मदन रस का तेज फवारा फूट पड़ा और वह शांत होकर नग्न अवस्था में ही सो गई,,,।

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अंकित एक सीधा साधा और सुलझा हुआ लड़का था,,, वह खुद से औरतों के आकर्षण में पडना नहीं चाहता था लेकिन उसे ऐसा लगने लगा था कि जैसे सब कुछ अपने आप ही होते जा रहा है,,, औरतों को देखने का नजरिया उसका बिल्कुल भी गलत नहीं था लेकिन कुछ दिनों से जिस तरह के हालात उसके सामने पैदा हो रहे थे उसे देखते हुए उसका आकर्षण औरतों की तरफ जवान लड़कियों की तरफ उनके उभरते हुए अंगों की तरफ बढ़ने लगे थे,,,। जिसकी शुरुआत अंकित के लिए अपनी खुद की सगी मां से ही हुई थी,,,,।

अंकित बेचैन रहने लगा था वह पहले की तरह बिंदास होकर गली मोहल्ले में सड़क पर नहीं घूम पता था क्योंकि अब उसकी नजर जाने अनजाने में राह चलती औरतों और जवान लड़कियों के अंगों पर चली ही जाती थी अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि औरतों के पास बड़ी-बड़ी चूचियां होती है जिसे देखकर उसके जैसे जवान लड़के पागल हो जाते हैं उनकी बड़ी-बड़ी गांड कैसी हुई साड़ी में और ज्यादा ऊपरी हुई नजर आती है जिसे देखने हर मर्द की चाहत होती है और उसे देखकर अपने मन में न जाने कैसे-कैसे कल्पना करते हैं जाने अनजाने में ही सही लेकिन अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि,,, क्यों उसके सभी दोस्त हमेशा लड़की और औरतों की ही बातें करते रहते हैं गली मोहल्ले की औरतों के बारे में गंदी-गंदी बातें कहते रहते हैं रोज उन लोगों के बातचीत का जरिया गली मोहल्ले की एक अलग ही औरत होती थी,,, पहले अंकित को अपने दोस्तों की तरह की बातें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थी इस तरह की बातें शुरू होने पर ही वह या तो वहां से उठकर चला जाता था या फिर उन्हें इस तरह की बातें ना करने के लिए बोलता था,,,, लेकिन आप हालात बदल चुके थे उसकी सोचने का रवैया बदल चुका था,,, और यह तब हुआ था जब सुमन के बारे में उसके दोस्त गंदी गंदी बातें कर रहे थे पहले तो उसे इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ था लेकिन अचार देने के लिए जब वह उसके घर गया था और जिस तरह का वाक्या उसकी आंखों के सामने पेश आया था उसे देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था हालांकि अभी भी अंकित को इस बात पर पूरा विश्वास नहीं हुआ था कि सुमन का तीन चार लड़कों के साथ शारीरिक संबंध है वह तो उसके साथ कुछ आनंददायक हादसा हो गया था जिसके बारे में सोच सोच कर ही उसका लंड कब खड़ा हो जाता था उसे पता ही नहीं चलता था,,,,,,,

ऐसे ही एक दिन अंकित नुक्कड़ पर अपने दोस्तों के साथ बैठकर चाय पी रहा था और तभी उनमें से एक लड़का जो कि उनके ही ग्रुप का था वह गाली देते हुए बोला,,,।

अरे यार रमेश एक नंबर का मादरचोद है,,,

(उसकी बात सुनकर दूसरा बोला)

क्यों क्या हुआ,,,?

अरे यार रमेश के घर उसकी बुआ आई है देखने पर एकदम पटाखा लगती है दो बच्चों की मां है लेकिन कम से उसका कसा हुआ पसंद देख कर तो मेरा खुद का लंड खड़ा हो गया था,,,।

क्या बात कर रहा है यार,,,,

हां मैं सच कह रहा हूं,,,,

(उन दोनों की बात सुनकर बाकी लोगों के साथ-साथ अंकित के भी कान खड़े हो गए थे वह भले ही चाय की चुस्की ले रहा था लेकिन उसका पूरा ध्यान उन दोनों की बातें सुनने में लगा हुआ था तभी वह पहले वाला बोला,,,)

कल मैं यार उसे बुलाने के लिए उसके घर गया था दोपहर के समय था उसके घर पहुंचा तो दरवाजा खिड़की संबंध जबकि गर्मी का दिन है लोग दरवाजा ना सही लेकिन खिड़की तो खोल कर ही रखते हैं बाहर से दरवाजा लॉक नहीं था इसलिए मैं समझ गया कि अंदर कोई ना कोई तो होगा ही मुझे लगा आवाज देने पर जरूर कोई बोलेगा लेकिन जब मैं दरवाजे पर दस्तक देने लगा तो अंदर से बिल्कुल भी आवाज नहीं आ रही थी,,,,

फिर क्या हुआ,,,?(दूसरे वाले ने आश्चर्यचक जताते हुए बोला,,,)

अरे फिर क्या मुझे उससे जरुरी किताबें लेनी थी होमवर्क पूरा करने के लिए इसलिए मैं पूरी कोशिश करने लगा कि कोई दरवाजा खोल दे या कोई अंदर से जवाब ही दे दे लेकिन कोई आवाज ही नहीं अंदर से आ रही थी इसलिए मैं दरवाजे को छोड़कर खिड़की के पास गया कि मुझे लगा कि शायद खिड़की तो पूरी होगी लेकिन देखा तो खिड़की भी बंद थी लेकिन अंदर इतना तो महसूस हो ही रहा था कि कोई ना कोई तो जरूर है और जब मैं खिड़की से जो की थोड़ी सी खिड़की में दरार थी उसमें से नजर गडाकर अंदर की तरफ देखा तो मेरा होश उड़ गया,,,

अरे ऐसा क्या देख लिया जो तेरा होश उड़ गया,,,(उनमें से तीसरे वाले ने बोला सबके कान खड़े थे उसकी बात सुनने के लिए सब अंदर से बेचैन हो रहे थे कि वह क्या बताता है और यही हाल अंकित का भी था हालांकि अभी पूरी बात वह सुन नहीं पाया था लेकिन फिर भी उत्सुकता के कारण उसका लंड हरकत में आना शुरू हो गया था,,,,)

अरे यार क्या बताऊं जब मैं खिड़की से अंदर देखने की कोशिश करने लगा तो अंदर तो ज्यादा उजाला नहीं था लेकिन फिर भी दोपहर का समय होने से इधर-उधर से अंदर उजाला थोड़ा बहुत नजर आ ही रहा था और मैंने देखा कि बिस्तर पर से एक औरत उठकर दूसरी तरफ जाने लगी या का को की अंदर बाथरूम की तरफ जाने लगी मुझे तो ज्यादा कुछ दिखाई नहीं दिया बस उसकी बड़ी-बड़ी गांड दिखाई दी एकदम नंगी वह पूरी तरह से नंगी थी मेरे तो होश उड़ गए और सही बताऊं तो मेरा तो लंड भी खड़ा हो गया सच कहूं तो पहली बार किसी औरत को मैं एकदम नंगी देख रहा था ,,,,,

(वह जिस तरह से बता रहा था बताते हुए उसकी हालत खराब हुई जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और सुनने वाले की तो हालात और ज्यादा खराब हो गई थी अंकित ने सभी दोस्तों के पेट की तरफ देखा तो वह हैरान हो गया क्योंकि सबकी पेट के आगे तंबू बना हुआ था उसकी बात सुनकर सब की हालत खराब थी सबका लंड खड़ा हो गया था उसकआ खुद का भी लंड खड़ा था,,, उसकी बात सुनकर एक आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)

क्या कह रहा है यार क्या सच में तूने इस तरह का नजारा देखा,,,

हां यार कसम खा कर कहता हूं मैं बिल्कुल भी झूठ नहीं कह रहा हूं मुझे तो ऐसा लगा कि शायद रमेश की मम्मी पापा है लेकिन जब मैं बिस्तर पर नजर दौड़ी तो मैं हैरान रह गया क्योंकि बिस्तर पर तो खुद रमेश भाई का नंगा उसका लंड पानी छोड़ चुका था,,,,।

क्या,,,,(एक साथ दो तीन लड़के बोल पड़े क्योंकि सबको हैरानी हुई थी)

हां यार बिस्तर पर रमेश था एकदम नंगा मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था और मुझे झटका तो इस बात का लगा की कहानी वह औरत उसकी मां तो नहीं थी मैं तो एकदम हैरान हो गया मैंने तो सिर्फ सुना था मुझे लगा कि मैं आज अपनी आंखों से देख लिया कि एक बेटा कैसे अपनी मां की चुदाई करता है,,,,,, (इस बात को सुनते ही अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों के सामने उसकी मां का खूबसूरत चेहरा नजर आने लगा,,, उसकी मां की साड़ी में कसी हुई गांड नजर आने लगी उसका भरा हुआ स्तन नजर आने लगा जिसे वह नजर भर कर कई बार देख चुका था वह लड़का अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

सच कह रहा हूं यार मेरी तो हालत खराब हो गई थी मेरा लंड सच में पानी छोड़ने वाला था किसी तरह से मैं अपने आप को संभाल कर रखा था,,, मैं तो खिड़की से नजर हटा ही नहीं रहा था मैं देख पा रहा था कि रमेश उसी औरत के पेटीकोट से अपने लंड को साफ कर रहा था,,, और अंदर से पानी गिरने की आवाज आ रही थी मैं समझ गया कि वह अपनी बुर धोने के लिए गई है,,,।

बाप रे क्या सच में रमेश अपनी मां को चोदता है और उसकी मां उससे चुदवा भी लेती है,,,

हां यार चुदवा लेती होगी देखा नहीं है उसका बाप कितना बीमार रहता है मरियल सा है और उसकी मां अभी भी पूरी जवानी से भरी हुई है बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूची मुझे मिल जाए तो मैं खुद ही रात भर उसकी बुर में लंड डालकर पड़ा रहुं,,,(उनमें से एक लड़के ने अपने मन की भड़ास निकलते हुए बोला,,,)

कसम से जैसा तू सोच रहा है मेरा भी ख्याल बिलकुल ऐसा ही है उसकी मां को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है काश मैं भी रमेश की जगह होता तो मजा आ जाता,,,(उनमें से दूसरे लड़के ने भी उसे लड़के के सुर में सुर मिलाते हुए बोला तो तभी उसकी बात सुनकर तीसरा लड़का बोला)

तो बन जाना तू भी रमेश तेरी मां कौन सी कम है लाली पाउडर लगाकर कितनी गजब लगती है,,, तेरी मां को भी देख कर मेरा खडा हो जाता है,,,।(इनमें से उसका ही दोस्त चुटकी लेते हुए बोला तो वह भी मजे लेते हुए बोला,,,)

लेकिन मुझे तो तेरी मां बहुत अच्छी लगती है,,,

तो कोई बात नहीं अदला बदली कर लेते हैं तो मेरी मां को मैं तेरी मां को,,,,।

(अंकित हैरान था क्योंकि पहले दूसरों की मां के बारे में बातें होती थी लेकिन आज यह दोनों अपनी ही मन के बारे में गंदी बातें कर रहे थे और वह भी एकदम खुश होकर दोनों के चेहरे पर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं था जहां पहले अंकित इस तरह की बातें शुरू होने पर वहां से चला जाता था या इस तरह की बातें करने से मना कर देता था वही आज अंकित वहीं बैठकर चाय की चुस्की के साथ-साथ उन लोगों की बातों का आनंद भी ले रहा था और उसे मजा भी आ रहा था वह अपने मन में उसे दिन की बात सोचने लगा जब क्रिकेट में हर जाने के बाद उसका दोस्त उसे गंदी-गंदी गालियां दे रहा था उसकी मां के बारे में उसकी मां को चोदने के लिए बोल रहा था ना जाने क्यों ना चाहते हुए भी उसकी आंखों के सामने उसे तरह का दृश्य अपने आप नजर आने लगा जैसा कि वह अंकित को गाली दे रहा था कि तेरी मां को चोद दूंगा,,, और उसकी आंखों के सामने कल्पना चित्र उभरने लगा कि कैसे उसका दोस्त उसकी मां की साड़ी उठाकर पीछे से उसकी चुदाई कर रहा है इस तरह की दृश्य के बारे में सोचते ही अंकित एकदम से अपने आप पर ही गुस्सा होने लगा कि यह क्या सोच रहा है मैं ना चोद दूं उसकी मां को,,,, सभी की बातों को सुनने के बाद वह लड़का बोला,,,,)

यार मैं भी यही सोच रहा था अगर बिस्तर पर से उठकर जो औरत बाथरूम की तरफ गई है अगर सच में उसकी मां होगी तो मैं भी ट्राई करूंगा उसकी मां को चोदने को क्योंकि मैं तो सब कुछ देख चुका था बड़े आराम से उसकी मां मुझे दे देती,,,, लेकिन अंदर कमरे में उसकी मां नहीं बल्कि उसकी बुआ थी जो कुछ दिनों के लिए उसके घर आई थी अगर मैं उसकी मां को सामने से आई हुई ना देखा तो मुझे ऐसा ही लगता कि रमेश अपनी मां को चोद रहा था,,,।

धत् ,,, सारा मजा किरकिरा कर दिया,,, मुझे तो लग रहा था कि रमेश अपनी मां को ही चोद रहा था,,,,(उनमें से एक लड़का थोड़ा सा निराशा दिखाकर के बोला,,,)

मुझे भी तो ऐसा ही लग रहा था लेकिन जरा यह तो सोचो हम लोग जहां देख भी नहीं पाते हैं बुर को वही रमेश अपनी बुआ की जमकर चुदाई कर रहा है सोचो अपने और रमेश में कितना फर्क है उसकी किस्मत कितनी बुलंदियों पर है और हम लोग अभी भी सिर्फ याद करके हिला के काम चलाते हैं,,,,

हां यार बात तो सही कह रहा है हम लोगों से अच्छा तो रमेश ही है जो बुर का आनंद उठा रहा है,,,।
 
(कुछ देर तक वहीं बैठने के बाद सभी लोग अपने-अपने घर की तरफ जाने लगे तो उन लोगों के जाने के बाद अंकित भी उठकर अपने घर की तरफ जाने लगा तभी उसे रास्ते में सुमन आगे आगे जाती दिखाई दी उसके हाथ में सब्जियों का खेला था ऐसा लग रहा था कि वह मार्केट से सब्जी खरीद के आ रही थी अंकित की नजर सुमन के थैले के साथ-साथ उसके पिछवाड़े पर भी चली गई थी जिसकी थिरकन देखकर उसकी टांगों के बीच हलचल होने लगी थी,,, क्योंकि यह वही पिछवाड़ा था जो अनजाने में ही उसके लंड से एकदम सच गया था जिसकी गर्मी उसे अभी तक अपने लंड पर महसूस होती थी,,,, वैसे तो अंकित किसी भी लड़की से बात करने में बहुत शर्माता था लेकिन न जाने उसमें कहां से हिम्मत आ गई और वह पीछे से आवाज लगाते हुए बोला,,,)

सुमन दीदी,,,,ओ सुमन दीदी,,,,,( सुमन को पीछे से आ रही आवाज जानी पहचानी लगी तो वहां अपनी जगह पर खड़ी होकर पीछे की तरफ देखने लगी और पीछे से आ रहे हैं अंकित को देख कर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह एकदम से खुश होते हुए बोली,,,)

अरे अंकित तुम यहां क्या कर रहे हो,,,?

कुछ नहीं दीदी बस दोस्तों के साथ थोड़ा घूम रहा था तुम्हें जाता हुआ देखा तो तुम्हारे पीछे आ गया,,,

ओहहहह तो यह बात है लड़कियों का पीछा किया जा रहा है,,,,(नजर को गोल-गोल घूमाते हुए वह बोली,,,)

नहीं दीदी मैं भला लड़कियों का पीछा क्यों करूंगा मैं यह सबसे दूर ही रहता हूं वह तो तुम थैला लाकर जा रही थी इसलिए आ गया,,, लाए में ले चलता हूं,,,

(इतना कहने के साथ ही अंकित तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके हाथ से थैला लेने लगा और सुमन भी उसे इनकार नहीं कर पाई,,, दोनों बातचीत करते हुए आगे आगे चलने लगे अंकित केलिए यह पहला मौका था जब वह किसी लड़की से इस तरह से बातें कर रहा था और बातचीत का केंद्र बिंदु केवल पढ़ाई पर ही था पैसे तो लड़कियों से बातचीत करने का अनुभव अंकित के पास बिल्कुल भीनहीं था,,,, लेकिन सुमन खेली खाई लड़की थी लड़कों को अपनी बातचीत के जाल में फसना उसे अच्छी तरह से आता था वह चाहती तो पहली बार में ही अंकित को अपनी बातों के जाल में फंसा कर अपनी जवानी का जलवा दिखा कर उसे बिस्तर पर ले आई लेकिन वह धीरे-धीरे अंकित के साथ आगे बढ़ना चाहती थी क्योंकि पहली बार में ही वह अंकित के मन को पढ़ चुकी थी अंकित सीधा-साधा था इस बात को अच्छी तरह से जानती थी और इसीलिए उसकी जवानी से जी भरकर खेलना चाहती थी बातों ही बातों में दोनों का घर आ चुका था और अंकित खेला उसके हाथ में पकडाते हुए मुस्कुरा कर अपने घर में आ चुका था और शाम ढलने की वजह से खाना बनाने की तैयारी हो रही थी,,,,।

अंकित हाथ में धोकर चाय पीकर पढ़ने के लिए अपने कमरे में चला गया था लेकिन उसका मन पढ़ने में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था क्योंकि शाम कुछ इस तरह से उसके दोस्त ने रमेश की बात ,,,, बताया था उसे सुनकर उसके होश उड़ गए थे बार-बार उसकी आंखों के सामने उसके दोस्त के बताए अनुसार कि उसे खिड़की से केवल उसे औरत की बड़ी-बड़ी गांड दिख रही थी वही नजर वह अपने मन में कल्पना कर रहा था कि कैसे रमेश बिस्तर पर नंगा लेट होगा और उसकी बुआ एकदम नंगी बिस्तर पर से उतरकर बाथरूम की तरफ जा रही होगी तब तक रमेश अपना काम खत्म कर चुका था इस बात को सोचकर ही उसके बदन में सुरसुराहट होने लगी और उसके दोस्त के बताएं अनुसार उसे एहसास होने लगा कि वाकई में रमेश की किस्मत उन लोगों से कुछ ज्यादा ही अच्छी थी जो इस उम्र में बुर चोदने के लिए मिल रहा था वह अपनी बुआ को चोद रहा था और उन लोगों को तो आज तक बुर के दर्शन भी नहीं हुए थे,,,,,, खैर जैसे तैसे करके रात गुजर गई,,,,।

सुबह उठकर कहां नहा कर बाथरूम से टावल लपेटकर अपने कमरे में चला गया और दरवाजे को बंद कर लिया,,,,, वह इस बात से निश्चिंत था,, की दरवाजा उसने बंद कर दिया है और कोई गीत गुनगुनाते हुआ वह निश्चित होकर अपने बदन से टावल निकाल कर बिस्तर पर फेंक दिया और एकदम नंगा हो गया,,,, नंगा होने के बाद सहज रूप से उसकी नजर अपने लंड की तरफ चली गई क्योंकि सुषुप्त अवस्था में भी गजब का लग रहा था,,,। और वह अनजाने में ही उसके तार को छेड़ते हुए उसे पर हाथ लगाकर थोड़ा सा ऊपर उठा दिया और वापस अपने हाथ को वहां से हटा लिया लेकिन इतना उसके लिए काफी था,,,, उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा,,,।

और वह अपने कमरे में खड़े होकर,,, अपने लंड की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था उसे यह नजारा अच्छा लग रहा था फिर वह,,, अलमारी के पास जाकर अपने कपड़े ढूंढने लगा,,,, लेकिन इस दौरान लंड खड़ा होने की वजह से ऊपर नीचे हिल रहा था जिसे देखकर वह आनंदित हो रहा था,,, वहीं दूसरी तरफ नाश्ता तैयार कर चुकी सुगंध देर होने की वजह से अपने बेटे को बुलाने के लिए उसके कमरे की तरफ आगे बढ़ गई,,,

वह पूरी तरह से सहज थी और औपचारिक रूप से वह अपने बेटे के कमरे के पास पहुंच गई लेकिन दरवाजा बंद होने की वजह से वह आवाज नहीं लगाई बल्कि अनजाने में ही खिड़की की तरफ आ गई,,, खिड़की का एक पट बंद था और एक पट खुला हुआ था,,,।

वह खिड़की पर खड़ी होकर अंदर आवाज लगाने ही वाली थी कि अंदर का नजारा उसकी आंखों सामने आ गया और अंदर का नजारा देखकर वह एकदम से मंत्र मुग्ध हो गई वह अंतर साफ तौर पर देख पा रही थी कि उसका बेटा कमरे के अंदर पूरी तरह से नंगा खड़ा था,,,, और उसके हाथ में उसका अंडरवियर था वह सामने की तरफ मुंह ना करके बगल की तरफ मुंह करके खड़ा उसके हाथों में उसकाअंडरवियर था जिसे वह पहनने की तैयारी में था सुगंधा की हालत एकदम खराब होने लगी अपने बेटे को नग्न अवस्था में देखकर बरसों बाद वह अपने बेटे को नंगा देख रही थी इन वर्षों में काफी कुछ उसके बदन में बदल चुका था उसके बदन में गठीलापन आ गया था कसरती बदन हो चुका था और जैसे ही उसकी नजर नीचे की तरफ गई तो वहां का नजारा देखकर तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि वह क्या देख रही है उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह कोई सपना देख रही है क्योंकि उसे साफ तौर पर दिख रहा था कि उसके बेटे का लंड एकदम अपनी औकात में आकर खड़ा था और कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा था अपने बेटे के लंड को देखकर उसे गधा का लंड याद आ गया,, । जिसे वह मार्केट जाते समय बहुत बार खुले मैदान पर देख चुकी थी लटकता हुआ,,,,।

सुगंधा को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि इतने मोटे और तगड़े लंबे लंड के बारे में उसने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी,,, एक बार इसी कमरे में वह अपने बेटे के तंबू को देखकर उसे पर हाथ लगाकर पकड़ने की कोशिश जरूर की थी लेकिन तब भी वह अंडरवियर में था लेकिन आज अंडरवियर के बाहर अपने बेटे के हथियार को देखकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल होने लगी थी और वह पानी छोड़ने लगी थी,,,,, सुगंधा का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था अपने हाथ में अंडरवियर लेकर खड़े अंकित की हरकत को वह देख रही थी और अंकित भी अनजाने में ही अपने लंड को बार-बार हाथ से पकड़ कर ऊपर नीचे करके दिला दे रहा था उसकी यह हरकत सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना भर रही थी अंकित को तो पता भी नहीं था की खिड़की पर उसकी मां खड़ी होकर सब कुछ देख रही है वरना वह कमरे में इस तरह से नंगा होने की हिम्मत ही ना करता,,,।

अपने बेटे के मोटे तगड़े लंबे और खड़े लंड को देखकर सुगंधा की बर पानी छोड़ रही थी अब तो उसकी इच्छा और बढ़ गई थी अपने बेटे के लैंड को अपनी बुर में लेने के लिए अपने बेटे के लैंड को देखते ही अपने स्वर्गवासी पति के लंड के बारे में उसे पूरा याद आ गया जिसके लंबाई चौड़ाई और मोटी सेवा अच्छी तरह से बाकी थी जिसे वह अपनी बुर में ले चुकी थी,,, और इसीलिए उसे समझते देर नहीं लगी कि उसके पति का लंड तो उसके बेटे के लंड के बच्चे के बराबर था और वह अपनी मन में कल्पना करने लगी कि वाकई में जब उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी कई हुई बुर में जाएगा तो कैसा धमाल मचाएगा इस बात से ही उसकी बुर पानी पानी हो गई थी,,,।

उसकी कल्पनाओं का घोड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा था सुगंध अपने बेटे को लेकर अपने मन में पल भर में ही बहुत सारी कल्पना कर चुकी थी लेकिन तभी यह खूबसूरत दृश्य पर पर्दा डालते हुए उसका बेटा अंडरवियर को अपनी दोनों टांगों में डालकर उसे ऊपर की तरफ खींचकर अपने खड़े लंड को हाथ से पड़कर अपनी अंडरवियर में छुपाने की कोशिश करने लगा जो की नाकामयाब साबित हो रहा था अंदर डालने पर भी उसमें गजब का तंबू बना हुआ था,, ।

वैसे तो सुगंध का मन खिड़की छोड़कर कहीं जाने को नहीं हो रहा था लेकिन अब वहां खड़ा रहना उचित नहीं था इसलिए वह मां महसूस कर उसे बिना आवाज लगाई वापस किचन में आ गई हो गहरी गहरी सांस लेने लगी आज उसकी मां पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था क्योंकि आज पहली बार उसने अपने बेटे के लंड के दर्शन जो किए थे,,, जो की बेहद अद्भुत अविस्मरणीय और अतुल्य था,,,,।

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सुगंधा के मन में मार्केट में नूपुर के साथ जो लड़का था उसे लेकर उसके मन में बड़ी द्विधा थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह लड़का था कौन रिश्ते में क्या लगता था जिस तरह की उसकी हरकत थी उसे देखते हुए सुगंधा अपने मन में ही तर्क लग रही थी कि हो ना हो नूपुर के पति की उम्र को देखकर जरूर नूपुर ने अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए कोई जवान लड़का तलाश रखी है वरना वह उसके साथ मार्केट में ही इस तरह की हरकत ना करता,,,। नूपुर के बारे में सोच-सोच कर उसका मन अजीब सी उलझन में फंसा हुआ था,,,।

जैसे तैसे करके दो-तीन दिन गुजर गए थे वह नूपुर से पूछ नहीं पाई थी,,,,, पूछने की तो सुगंधा ने बहुत कोशिश की थी लेकिन हर बार उसके सवाल उसके होठों पर आकर रुक जाते थे उसे हिम्मत नहीं हो रही थी उसे लड़के के बारे में पूछने की कि उस लड़के से उसका क्या रिश्ता है,,,, लेकिन अब सुगंध को नूपुर में बदलाव दिखाई दे रहा था जहां नूपुर कोई कोई सी रहती थी वहीं अब उसके चेहरे पर खुशहाली और प्रसन्नता के भाव साफ नजर आते थे,,,,। और यही बदलाव सुगंधा के शक के कारण को और ज्यादा मजबूत कर रहा था,,,,। हालांकि उसे लड़के को लेकर जिस तरह की उत्सुकता सुगंधा के मन में थी इस प्रकार की चाहत वह अपने बेटे से रखती थी वह चाहती थी कि उसका बेटा भी उसके साथ इस तरह की हरकत करें जैसा कि वह लड़का नूपुर के साथ कर रहा था,,,,। और कभी-कभी तो वह उस मार्केट वाले दृश्य की कल्पना अपने साथ करने लगती थी,,,, आंखों को बंद करके वह उस दृश्य के बारे में सोचने लगती थी,,,वह, एहसास करने लगती थी कि कैसे उसका लड़का ठीक उसके बगल में खड़ा होकर सब्जी खरीदते समय अपनी हथेली को उसकी ऊपरी हुई गांड पर रखकर लड़के-हल्के सहला रहा है,,, और उसकी इस हरकत पर वह पूरी तरह से उत्तेजित और रोमांचित हो उठती थी,,,,

उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगती थी मार्केट मैं इस तरह की हरकत करता देख वह अपने बेटे को ,, गुस्से से आंख दिखाती थी जो की उसका गुस्सा ऊपरी मन से था अंदर से वह अपने बेटे की हरकत का पूरा आनंद ले रही थी और कल्पना में भी अपनी मां की आंख दिखाने पर भी अंकित अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रहा था और नितंबों की गोलाई के निचले भाग पर अपनी हथेली रखकर वहां अपनी दो उंगली को साड़ी के ऊपर से ही उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर वाली जगह पर धंसाने की कोशिश करता था और अपनी मनसा में वह कामयाब भी हो जाता था उसकी हरकत से सुगंध अपने बदन में अद्भुत उत्तेजना का संचार महसूस करके पूरी तरह से पानी पानी हो जाती थी और अपने आप पर कबूल ना कर पाने की स्थिति में वह घर पर आते ही सब्जी के थेले को एक तरफ फेंक कर,,, वह खुद अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपने बेटे को बिस्तर पर गिरा कर खुद उसके लंड पर सवार हो जाती थी और फिर अपनी मनमानी करते हुए अपनी जवानी का लावा पूरी तरह से निकाल कर शांत हो जातीथी,,,, इस तरह की कल्पना करके उसके बाद में और ज्यादा रोमांच पैदा हो जाता था लेकिन उसकी उत्सुकता और बढ़ने लगी थी उस लड़के के बारे में जानने के लिए,,,,।

दूसरी तरफ जब से सुमन की सच्चाई अंकित को पता चली थी और अंकित का जिस तरह से उसके घर पर जाना हुआ था और जिस तरह से उसके जवानी के दर्शन उसे करने को मिले थे उसे देखते हुए उसका आकर्षण सुमन की तरफ और फिर दूसरी औरतों की भी तरफ बढ़ने लगा था एक तरह से औरतों को देखने का रवैया पूरी तरह से उसका बदल गया था अब वह आने जाने वाली औरतों को ताड़ता रहता था खास करके उसकी नजर उन औरतों की चूचियों पर रहती थी और उनके गोलाकार नितंबों पर और हर एक औरत के अंगों के बारे में वह उनकी नग्न अवस्था को लेकर कल्पना किया करता था,,,,।

ऐसे ही एक दिन वह चाय की दुकान पर अपने दोस्तों के साथ बैठा हुआ था तभी उसके दोस्त ने धीरे से उसके कान में बोला,,,।

तुझे एक चीज दिखाउं बहुत गजब की है,,,

क्या है बता,,,(अंकित उत्सुकता दिखाते हुए बोला)

लेकिन जाने दे तुझे दिखाने का कोई मतलब नहीं है तो बाद में गुस्सा करेगा तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा,,,

लेकिन यह तो बता चीज क्या है,,,(उसे चीज के बारे में उत्सुकता दिखाते हुए अंकित बोला जिस तरह से उसने बोला था कि तुझे दिखाने का कोई मतलब नहीं है तू नाराज हो जाएगा इतना तो उसे समझ में आ गया था कि वह जो कुछ भी चीज है वह गंदी है इसलिए तो उसकी उत्सुकता और ज्यादा बढ़ गई थी जब उसका आकर्षण औरतों की तरफ नहीं था तब अगर उसके दोस्त ने उसे कुछ दिखाने की बात करता तो शायद वह इनकार कर देता और इतना उस पर ध्यान भी नहीं देता लेकिन अब हालात बदल चुके थे धीरे-धीरे अंकित भी उन लड़कों की तरह ही होता जा रहा था,,,,)

एक गंदी किताब है लेकिन तुझे दिखाने का कोई फायदा नहीं है तू रहने दे मैं दूसरे को दिखा दूंगा,,,।

(अब तो अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई वह उसे उस किताब को देखने की उत्सुकता और ज्यादा बढ़ने लगी इसलिए वह बोला,,,)

दिखा तो सही में कुछ नहीं कहूंगा,,,,

नहीं यार तेरा कोई भरोसा नहीं है,,,, तू रहने दे,,,,

जब दिखाना ही नहीं था तो बताया क्यों,,,?(अंकित उस पर गुस्सा दिखाते हुए बोला,,,,) अब तु मुझसे बात मत करना,,,,(इतना कहकर वह उठने वाला था कि उसके दोस्त ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपने पास बैठाते हुए बोला,,,)

यार तू गुस्सा बहुत जल्दी हो जाता है और वैसे भी तू इस तरह की चीज देखना पसंद नहीं करता इसलिए मैं कह रहा था,,,, तू नाराज हो जाता है तो मजा नहीं आता,,,,(सूरज उसे समझाते हुए बोला,,,)

देख ऐसा नहीं है कि मैं उसे देखने के लिए तड़प रहा हूं लेकिन मुझे भी तो पता चले की लड़की किस तरह की चीजे देखते हैं,,,(अंदर से तो अंकित का मन बहुत कर रहा था उसके हिंदी चीज को देखने के लिए लेकिन वह ऊपर से सिर्फ सहज रूप से बता रहा था कि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता,,)

अरे सच कह रहा हूं अंकित तू देखेगा तो पागल हो जाएगा बहुत मजा आएगा मैं भी पहली बार ही देख रहा हूं,,,,

अच्छा दिखा,,,,,(अंकित उत्सुकता दिखाते हुए बोला,,,)

पागल हो गया है यहां नहीं चल दीवार के पीछे चलते हैं,,,

ठीक है,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी जगह से खड़ा हो गया और सूरज भी अपनी जगह से खड़ा होता हुआ बोला,,)

रुक जरा एक मीठा पान ले लेते हैं उसमें से आधा-आधा खा लेंगे,,,

ठीक है,,,,(और इतना कहने के साथ ही दोनों पास में पान की दुकान पर चले गए और पान की दुकान पर पहुंचते ही सूरज बोला,,)

और पांडे चाचा जरा एक मीठा पान लगाना तो,, (इतना कहने के साथ ही सूरज पान के गले पर टीका लेकर खड़ा हो गया और सड़क की तरफ देखने लगा,,,, तो वह पान वाला बोला,,,)

क्या हुआ बबुआ तुम्हारे पापा नजर नहीं आ रहे हैं,,,,

अरे वो कुछ दिनों के लिए गांव गए हैं इसलिए अगले सप्ताह आने ही वाले हैं,,,,

चलो ठीक है,,,, एक ही बनाना है ना,,,,

हां चाचा एक ही पान,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज की नजर सामने सड़क से गुजर रही है खूबसूरत औरत पर गई जो की लंबाई चौड़ाई में काफी मजबूत थी और उसकी चूचियां भी बड़ी-बड़ी थी और गांड भी तरबूज की तरह निकली हुई थी उसे सूरज घूरता ही रह गया तो यह देखकर उस पान वाले ने बोला,,,)

क्या देख रहे हो बबुआ,, अपने शर्मा जी की बड़ी साली है बंबई से आई है साली की गांड देखकर मेरी खुद की धोती तन जाती है,,,,

क्या बात कर रहे हो चाचा,,,,(सूरज एकदम से उत्सुकता दिखाते हुए बोला उस पान वाले की बात सुनकर अंकित भी हैरान था,,,, उस पान वाले की उम्र तकरीबन 45 से 50 के बीच में होगी,,, इस उम्र में भी उसका देखने का नजरिया बिल्कुल भी नहीं बदला था हर एक औरत को वह प्यासी नजरों से ही देखता होगा इतना तो अंकित समझ ही गया था और इस बात से हैरान भी था कि छोटे-बड़े सभी मर्द औरतों की ताकत झांकी में लगे रहते हैं एक वही पूरी दुनिया में शरीफ बनने चला था,,,,।)

अरे सही कह रहा हूं बबुआ हम तो दिन रात यहीं बैठकर यही करते रहते हैं,,,, देखो तो सही उसकी गांड कैसी निकली हुई है ऐसा लगता है कि जैसे साड़ी में तरबूज डाल दिया गया है,,,। देख कर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,।

सही बात कह रहे हो चाचा वैसे एकदम कमाल की औरत है तभी तो उसे पर नजर पड़ी तो उसे देखता ही रह गया,,,,।

अरे तुम तो आज देख रहे हो बबुआ,,, जिस दिन से आई है उसे दिन से देख रहा हूं सुबह-सुबह टहलने के लिए निकलती है तब देखो नजरा,,, सुबह में केवल मेक्सी पहनी रहती है और एकदम कसी हुई ,,, उसका हर एक अंग एकदम साफ-साफ उभरा हुआ नजर आता है ऐसा लगता है कि माने जैसे उसने कुछ पहनी ही ना हो,,,,(वह पान वाला सूरज को पान थमाते हुए बोला,,,, उसकी आंखों में औरतों के प्रति आकर्षण और हवस एकदम साफ नजर आ रही थी,,,)

चाचा तुम्हारी बातें सुनकर तो मेरी हालत खराब हो गई है लगता है सुबह-सुबह उठना पड़ेगा,,,,

अरे बबुआ वह कहावत सुने हो ना जो सोवत है वह खोवत है और जो जागत है वह पावत है,,,, बिल्कुल ऐसा ही है,,,,।

बिल्कुल सही कह रहे हो चाचा,,,,,(इतना कहकर सूरज उसे औरत को गली के किनारे तक देखता रह गया जब तक कि वह आंखों से ओझल नहीं हो गई,,,, ऐसा नहीं था कि केवल पान वाला और सूरज ही उसे औरत को देखकर मजे ले रहे थे आज अंकित को भी उसे औरत को देखने में मजा आ रहा था,,,, उसे औरत को देखकर अंकित अपनी मां ही मन में सोच रहा था कि वाकई में उस औरत की गांड और चूचियां दोनों बड़ी-बड़ी थी,,, और यहां तक की अंकित तो अपने मन में उसे औरत को नग्न अवस्था में कल्पना भी कर लिया था कि उसके अंग कैसे नजर आते होंगे,,,, हालांकि अंकित अभी तक औरतों के खूबसूरत अंगों से अच्छे से रूबरू नहीं हो पाया था इसलिए कल्पना करने में भी उसे थोड़ी दिक्कत महसूस होती थी लेकिन मजा बहुत आता था जाते-जाते सूरज ने उस पान वाले से बोला,,,)

चाचा यह सब बातें पापा से मत बताना,,,,

अरे बबुआ,,,, हमें हमारा धंधा थोड़ी ना खराब करना है यह सब अगर हम घर वालों को बताते रह गए तो फिर हमारे पान की दुकान पर आएगा कौन,,,,

हां चाचा यह बात तो है सही कहा तुमने अच्छा तो मैं चलता हूं,,,,

(ठीक है बबुआ और इतना कहकर वह हंसने लगा,, , अंकित को आज पूरा यकीन हो गया था कि दुनिया में ऐसा कोई भी मर्द नहीं है जो औरतों के प्रति गंदी नजर ना रखता हो छोटे बड़े सब औरतों को ताकने झांकने में ही लगे हुए थे,,,,, पान की दुकान बड़ी सी दीवार से सटी हुई थी जिसके पीछे उन दोनों को जाना था और दोनों तकरीबन 4 फीट की दीवार को लाख कर दूसरी और उतर गए थे जहां पर खेलने का मैदान था लेकिन इस समय वहां कोई नहीं था और वह दोनों एक बड़े से पेड़ की छाया में जाकर बैठ गई और फिर सूरज अपनी जेब में रखे हुए उस गंदी किताब को धीरे से निकाला,,,, उसे किताब के मुख्य पृष्ठ को देखकर ही अंकित का लंड अंगड़ाई लेने लगा,,,।

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शर्मा जी की बड़ी साली को ताड़ने के बाद ,, उसकी बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर वैसे ही अंकित उत्तेजित हो चुका था। सूरज का भी यही हाल था,,, सूरज और अंकित दोनों दीवाल लांघकर दूसरी और कूद गए थे,,, यहां पर क्रिकेट खेला जाता था जो कि हमेशा मोहल्ले के लड़कों से यह मैदान भरा रहता था,,, लेकिन दोपहर का समय होने की वजह से कोई भी नहीं था और यही दोनों के लिए अच्छा भी था दोनों ने एक बड़े से पेड़ के नीचे अच्छी सी जगह देखकर बैठ गए,,,।

सूरज अपनी जेब में से वह गंदी सी चीज निकालता है इससे पहले ही अंकित बोला।

यार सूरज अगर पान वाले पांडे जी ने तेरे पापा से सब कुछ बता दिया तो।!

क्या बता दिया तो,,(सूरज आश्चर्य से अंकित की तरफ देखते हुए बोला)

वही कि हम दोनों पान की दुकान पर खड़े होकर शर्मा जी की बड़ी साली को देख रहे थे।

अच्छा वो,,, तू चिंता मत कर पांडे चाचा किसी से भी नहीं बताएंगे क्योंकि दिन भर हम लोग वेट कर वहां से कुछ ना कुछ खरीद कर खाते ही रहते हैं अगर बता दिए तो उनकी बिक्री भी जाती रहेगी और वैसे भी तो वह भी तो देख कर मजा ले रहा था। वैसे सच में शर्मा जी की शादी थी एकदम कमाल अगर औरत मिले तो बिल्कुल उसकी तरह ही जो बिस्तर में एकदम धमाल मचा दे देख नहीं रहा था कितनी भरी हुई बदन की थी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां तरबूज जैसे बड़े-बड़े गांड कसम से चोदने में मजा ही आ जाए।

(सूरज की बातें सुनकर अंकित केतन बताने में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसे सूरज की कही बातें बड़ी अच्छी लग रही थी और वैसे भी सूरज जो कुछ भी कह रहा था अंकित के नजरिया सेवा बिल्कुल सच ही था अगर बीवी हो तो शर्माजी की बड़ी साली जैसी भरे बदन वाली क्योंकि उसका भी आकर्षण भरे बदन वाली औरत पर कुछ ज्यादा ही होता था अंकित को भी औरतों की बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूचियां अच्छी लगती थी और अपनी तरफ आकर्षित भी करती थी। चारों तरफ नजर घूमर तसल्ली कर लेने के बाद धीरे से सूरज अपनी जेब में हाथ डाला और जब में से छोटी सी डायरी नुमा रंगीन किताब निकाला,, अंकित का दील बड़े जोरों से धड़क रहा था। वह यह देखने के लिए कुछ ज्यादा ही उत्सुक था कि उसके जेब में ऐसी कौन सी गंदी चीज है जिसे देखने के लिए उसने एकांत में लेकर आया।)

अब आएगा असली मजा,,,,(सूरज उसे छोटी सी रंगीन डायरी का मुख्य पृष्ठ अपनी हथेली के पर्दे को हटाते हुए और अंकित को दिखाते हुए बोला... उसे रंगीन किताब के मुख्य पृष्ठ को देखकर अंकित के तो होश उड़ गए उसे अंदाजा नहीं था कि सूरज इस तरह की कोई चीज दिखाएगा वह तो आंख फाड़े उस मुख्य पृष्ठ को देखता ही रह गया,,,, अंकित को हक्का बक्का देख सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

क्यों बरखुदार हो गई ना हवा टाइट,,,,

बाप रे सूरज यह क्या लाया तू,,,(एकदम हैरान होते हुए अंकित बोला)

अरे यही तो है वह गंदी चीज जो मैं तुझे दिखाने के लिए लाया था,,,।

बाप रे इसमें तो सब खुला खुला है।

तभी तो मजा आएगा मेरे दोस्त,,, देख कैसे टांग उठा कर उसकी बुर में लंड डाल रहा है। (गहरी सांस लेते हुए सुरज बोला,,)

यह सब तो अंग्रेज लग रहे हैं।

तो क्या इन्हीं में तो दम है तुझे लगता है की हमारे देश की औरतें इस तरह का हुनर दिखा पाएंगी।

(सूरज की बात सुनकर अंकित बोल कुछ नहीं बस ना में सिर हिला दिया,,,, अंकित के पूरे बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसने आज तक इस तरह के दृश्य को कभी नहीं देखा था उसे नहीं मालूम था कि इस तरह की भी कोई किताब आती है जिसमें औरतों और मर्दों की गंदी तस्वीर होती है मुख्य पृष्ठ के चित्र को देखकर ही अंकित केतन बदन में आग लग गई थी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या देखें,,,, बार-बार उसकी नजर मुख्य पृष्ठ वाली हीरोइन की बड़ी-बड़ी चूचियों पर जा रही थी जो कि एकदम गोल कश्मीरी सेव की तरह लेकिन कुछ ज्यादा ही बड़े नजर आ रहे थे,,,, चूचियों से नजर हटती तो उसका ध्यान उसे औरत के दोनों टांगों के बीच फूली हुई बुर पर चली जाती थी जो की हीरो के मोटे तगड़े लंड को अंदर लेने के बाद उसकी बुर पूरी तरह से छल्ला नुमा गोल बन जा रही थी।

बस एक ही फोटो में तेरा यह हाल हो गया तेरे तो पसीने छूट रहे हैं,,, तू कहता है तो बंद कर दुं,(यह कहकर सूरज अंकित का मन टटोल रहा था लेकिन आप अंकित इनकार करने वाला नहीं था वह धीरे से बोला,,,)

आगे भी ऐसा ही है,,,

अरे यार पूरी किताब भरी हुई है,,,,

तो पन्ना पलट कर दिखा,,,

(अंकित का हाल देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न होने लगा,,,, वह तुरंत पन्ना पलट दिया और उसके बाद अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई क्योंकि इस पन्ने पर हीरोइन घुटनों के बाल बैठी हुई थी और उसके सामने दो हट्टे कट्टे आदमी अपने पेंट में से अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल कर उसे हीरोइन के सामने पकडकर खड़े थे और वह हीरोइन दोनों के लंड को पकड़कर अपने लाल लाल होठों कोखोलकर दोनों के सुपाड़े को चाटने की कोशिश कर रही थी यह देखकर करते हो अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई सूरज भी चुदवासा हुआ जा रहा था,,। वह बार-बार उस हीरोइन की चूची पर अपनी उंगली घूमा रहा था मानों जैसे उसकी आंखों के सामने सच में किसी औरत की नंगी चूचियां हो,,,।

यार अंकित काश ऐसी किस्मत अपनी होती तो मजा आ जाता देख नहीं रहा है कितने मजे से मुंह में लेने की कोशिश कर रही है।

(सूरज औरतों के संबंध के बारे में ढेर सारी जानकारियां रखता था हालांकि किसी भी औरत के साथ अभी तक संबंध नहीं बना पाया था लेकिन अंकित औरतों के मामले में बिलकुल नादान था उसे नहीं मालूम था जो कुछ भी गंदी किताब के चित्र में था वह सब कुछ उसके लिए नया और अनोखा था ,, इसलिए आश्चर्य जताते हुए वह बोला।)

यार सूरज क्या इतनी गंदी चीज को कोई औरत अपने मुंह में ले सकती है।

यार अंकित तू सच में बहुत पागल है तू नहीं जानता औरत क्या-क्या मुंह में ले सकती है और मर्द भी क्या-क्या औरत का मुंह में ले सकते हैं।

लेकिन मुझे तो विश्वास नहीं होता इससे तो पेशाब किया जाता है।

और ईसे बुर में भी डाला जाता है तुझे विश्वास नहीं आता तो रुक तुझे दिखाता हूं,,,( और इतना कहने के साथ ही सूरज उस गंदी किताब का अगला पन्ना पलटा तो अगले ही पन्ने पर एक हीरोइन एक मोटे तगड़े हट्टे-कटे इंसान के लंबे लंड को पूरी तरह से मुंह में लेकर चूस रही थी और अंकित को दिखाता हुआ सूरज बोला,,,)

देख और बता क्या लगता है तुझे,,,।

(अंकित क्या बोलता उसकी तो बोलती बंद हो गई थी सूरज ने उसके शंका का समाधान जो कर दिया था,,, अंकित तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था की औरतें इस तरह की हरकत करती हैं लेकिन उसे दृश्य को देखकर अंकित केतन बादल में आग लग गई उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और यही हाल सूरज का भी था जो की पेंट के ऊपर से ही वह उसे हल्के-हल्के दबा भी रहा था। अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी अंकित आंख फाड़े उसी दृश्य को देख रहा था,,, अंकित को इस तरह से देखता हुआ पाकर सूरज बोला,,,)

सो जरा अंकित इस आदमी की जगह तू होता या मैं होता और इस औरत की जगह शर्मा जी की बड़ी साली होती तो कितना मजा आता उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसका नंगा जिस्म उफफ,,, मेरा तो सोच कर ही लंड फटा जा रहा है,,,,।

(सूरज की बातें सुनकर अंकित की भी हालत खराब होती जा रही थी उसके भी लंड में हल्का-हल्का दर्द हो रहा था और वह भी उसे औरत की जगह शर्मा जी की बड़ी साली को रखकर और उस आदमी की जगह अपने आप को रखकर कल्पना करने लगा था जो की बेहद उत्तेजनात्मक था सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

कल्पना तो कर सकते हैं लेकिन इसकी तरह अपना लंड नहीं है क्योंकि हमारे देश में इतना मोटा और तगड़ा लंबा नहीं होता विदेशियों का इतना ही बड़ा होता है । काश मेरा भी इतना मोटा और लंबा होता तो मजा आ जाता किसी भी औरत को दिखा देता तो वह दीवानी हो जाती,,।

दिखाने से दीवानी हो जाती है मैं कुछ समझ नहीं,,,(अंकित शंका जताते हुए बोला,,,)

अरे पागल जिस तरह से हम लोग चोदने के लिए तड़पते हैं इस तरह से औरतें भी चुदवाने के लिए तड़पती है और औरतों को मोटा लंबा लंड कुछ ज्यादा ही पसंद आता है अगर किसी भी औरत को मोटा और लंबा लंड सही समय पर दिखाया जाए तो वह उसकी दीवानी हो जाती है उसे अपनी बुर में लेने के लिए।

क्या बात कर रहा है सूरज,,,, ऐसा भी कहीं होता है क्या,,,!

तू नादान है अंकित इसलिए तुझे नहीं मालूम है बहुत कुछ होता हैतू ही सिर्फ सीधा बनकर रहता है इसलिए तुझे कुछ नहीं मालूम है।(इतना कहते हुएसूरज उसे किताब का अगला पन्ना पलटा तो अगले पन्ने पर भी कामोत्तेजना से भरा हुआ दिल से था लेकिन अंकित के लिए बिल्कुल अनोखा था,, क्योंकि उसमें एक औरत बिल्कुल नंगी होकर एक मोटे तगड़े लंड पर बैठी हुई थी और उसकी मोती मोती गंद बाहर को निकली हुई थी और उसकी मोटी मोटी गांड पर उस आदमी की मजबूत हथेलियां थी,, जिससे वह उसे औरत की भारी भरकम गांड का वजन संभाला हुआ था,,,,।
 
अंकित बड़े से वृक्ष के शीतलछाव में बैठकर भी गरमा गरमदृश्य को देखकर पसीने से तरबतर हो चुका था उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी किताब का हर एक पन्ना अपनी उत्तेजना की नई कहानी कह रहा था,,, जिसे देखकर अंकित का सीधा-साधा मन बावला हुआ जा रहा था,,, तभी एक पन्ने पर ऐसा दृश्य था जो बाथरूम के अंदर एक लड़का बैठा हुआ था और उसके हाथ में एक गंदी किताब थी और वह अपनी आंखों को बंद करके चुदाई की कल्पना कर रहा था और अपने लंड को हिला रहा था और उसके लंड से तेज पिचकारी निकल रही थी यह देखकर अंकित हैरान हो गया क्योंकि उसके लंड से निकलने वाली पिचकारी एकदम सफेद घाडे रंग की थी,,, उसे लग रहा था कि वह लड़का पेशाब कर रहा है लेकिन सफेद गाड़ी द्रव्य को देखकर अंकित हैरान हो गया था इसलिए वह बोला।

यह क्या है सूरज यह पेशाब तो बिल्कुल भी नहीं है।

(अंकित की मूर्खता भरी बातों पर सूरज जोर-जोर से हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर अंकित बोला)

तू हंस क्यों रहा है,,?

अरे हंसो नहीं तो और क्या करूं तुझे इतना भी नहीं पता कि यह क्या कर रहा है।

हां मैं सच कह रहा हूं मुझे नहीं मालूम कि यह क्या कर रहा है और उसके लंड में से यह क्या निकल रहा है,,,(पहली बार अंकित के मुंह से लंड शब्द निकला था जिसके बारे में सोचकर इसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी)

तू सच में बुद्धू है अंकित,,, अरे पागल यह मुट्ठ मार रहा है,,,

मुट्ठ मार रहा है,,, मैं अभी भी कुछ नहीं समझा,,,।

(अंकित की बात सुनकर सूरज उसे आश्चर्य से देखने लगा उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि अंकित इस क्रिया के बारे में कुछ भी नहीं जानता उसे लग रहा था कि वह झूठ बोल रहा है लेकिन उसके चेहरे की तरफ देखकर सूरज समझ गया था कि यह बिलकुल नादान है इसलिए धीरे से मुस्कुराते हुए बोला।)

देख यार यह तो तूने मुझे बोल दिया लेकिन किसी और को मत कहना वरना तेरा मजाक उड़ाएंगे,,,(अंकित सूरज की बात को बड़े ध्यान से सुन रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी कौन सी बात हो गई जिसके बारे में सुनकर लोग उसका मजाक उड़ाएंगे सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) देखिए यह चित्र देख रहा है ना इसलिए लड़का कैसे अपना लंड को मुट्ठी में दबाकर पकड़ा हुआ है।

हां,,,,

इसे इसी तरह से पकड़ कर आगे पीछे करके हिलाते हैं इसमें बहुत मजा आता है और यही क्रिया लंड बुर में जाकर करती है बुरे में जब लंड डालते हैं तो अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाते हैं जिससे लंड बुर के अंदर बाहर होता है। और इस क्रिया करने में जितना हम लोगों को मजा आता है उतना ही मजा औरतों को भी आता है समझ में आया और जब इसी तरह से लंड को हिलाते हुए अपने मन में किसी भी औरत की कल्पना करते हैं तो अपनी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती है और इसके बाद इसी तरह से तेज पिचकारी निकलती है और ईतना मजा आता है कि पूछो मत,,,।

क्या कह रहा है तू,,,

मैं बिल्कुल सच कहारहा हूं अंकित अपने सारे दोस्त करते हैं मैं भी तो यही करता हूं क्योंकि हम लोगों के पास जुगाड़ नहीं है,,,

जुगाड़ मतलब,,,

जुगाड़ मतलब बुर औरत यह सब अपने पास नहीं है इसलिए हाथ से हिला कर काम चलाना पड़ता है अगर औरत होती खूबसूरत लड़की होती तो उसकी बुर में लंड डालकर चुदाई का मजा नहीं लुटते,,,,

जुगाड़,,,,(आश्चर्य से अंकित बोल तो उसकी बात सुनकर मुस्कुराता हुआ सूरज बोला,,)

अपनी मम्मी और अपनी बहन के बारे में सोच कर जुगाड़ मत बना लेना,,,

सूरज अभी बहुत मारूंगा,,,,

यार मैं तो मजाक कर रहा था,,,, लेकिन एक बात कहु बुरा मत मानना जब अकेले में कभी रहना तो अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे अपने हाथ में ले लेना और हिलाते अपनी आंखों को बंद कर लेना और फिर कल्पना करना अपनी मां के बारे में अपनी बहन के बारे में उसे चोदने के बारे में उनके कपड़े उतारने के बारे में तुझे इतना मजा आएगा कि तेरे लंड से इतनी तेज पिचकारी निकलेगी कि सामने की दीवार पर जाकर गिरेगी,,,।

तू भी ऐसा ही करता है क्या,,,?(अंकित थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोला इस बार उसके शब्दों में ज्यादा गुस्सा नहीं था क्योंकि ना जाने क्यों उसे भी सूरज की बातें अच्छी लग रही थी)

मैं तो ऐसा ही करता हूं अंकित मैं आज तक ऐसी बात किसी को बताया नहीं हूं लेकिन तुझे बता रहा हूं मैं भी मुठ मारता हूं और इन सबको देखने के बाद मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया है ,, अब घर पर जाकर मुझे मूठ मारना होगा,,।

अपनी मां के बारे में सोच कर,,,

बिल्कुल सही किसी और के बारे में सोच कर अगर मुठ मारता हूं तो इतना मजा नहीं आता लेकिन अपनी मां के बारे में सोच कर मुठ मारता हूं तो इतना मजा आता है कि पूछो मत ऐसा लगता है कि सच में मैं उसको चोदने जा रहा हूं,,,।

यह सब गलत नहीं है,,,

कैसे गलत है थोड़ी ना सच में करने जा रहा हूं मन में सिर्फ कल्पना कर रहा हूं और इस बारे में कहां किसी को पता चल रहा है इसके बारे में भी कल्पना कर सकते हो चाहूं तो मैं तेरी मां के बारे में भी कल्पना करके मुट्ठ मार सकता हूं वैसे भी मुझे बड़ी गांड वाली औरतें बहुत पसंद है,,,।

सूरज अब तु मुझे गुस्सा दिला रहा है,,,।

यार तू नाराज बहुत जल्दी हो जाता है मैं तो मजाक कर रहा हूं तू भी मेरी मां के बारे में बोल सकता है कि उसकी चूची बड़ी-बड़ी है,,,,।

(सूरज की बात सुनकर अंकित के बदन में सायरन सी दौड़ने लगी क्योंकि सूरज अपनी मां के बारे में एकदम खुली की बातें कर रहा था उसे बिल्कुल भी ऐतराज नहीं था अगर वह कुछ भी उसकी मां के बारे में बोलता तो,,, लेकिन फिर भी वह हिम्मत जुटा कर बोला,,)

मैं भी तेरी मां के बारे में सोच कर मुठ मारूंगा,,,

अच्छा बहुत जल्दी आ गया लाइन पर,,,(सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,)

तू बोलेगा तो मैं भी बोलूंगा ना,,,

चल अच्छा रहने दे मुझे रहा नहीं जा रहा है अब मैं जा रहा हूं घर।

क्या करने,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए अंकित बोला)

मुट्ठ मारने,,,,बदन की गर्मी तो शांत करना पड़ेगा,,,ना

किसके बारेमें सोच कर ,,,

तेरी मां के बारे में क्योंकि तेरी मां की गांड और चूची दोनों बड़ी-बड़ी है बहुत मजा आएगा,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपनी जगह से उठ गया और भागने लगा क्योंकि उसे मालूम था कि अंकित उसे मारेगा और उसके पीछे अंकित भी उठकर उसकी तरफ भागते हुए बोला)

मैं भी तेरी मां के बारे में सोच कर मुठ मरूंगा क्योंकि तेरी मां की भी गांड बड़ी-बड़ी है उसको चोदने में मजा आएगा,,,,,(सूरज दीवार को उतर भाग चुका था लेकिन अंकित दीवाल के पास खड़ा हो गया और जो शब्द उसने अभी-अभी अपने मुंह से कहा था उसके बारे में सोच कर उसके बदन में सियहरन सी दौड़ने लगी क्योंकि इस तरह के गंदे शब्द है उसकी जुबान पर पहली बार आए थे और उसे खाने में उसे इतना आनंद की प्राप्ति हुई थी कि पूछो मत उसका मन बिल्कुल भी लग नहीं रहा था। वह अपने घर भी नहीं किया क्योंकि सूरज की तरह मुठ मारने की हिम्मत अभी उसमें बिल्कुल भी नहीं थी,,,, लेकिन उसका भी लंड पूरी तरह से खड़ा था वह कुछ देर तक इस जगह पर आकर बैठ गया,,,। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें फिर अपनी जगह से उठकर इधर-उधर घूमने लगा जैसे तैसे करके शाम हो गई और वह शाम को अपने घर चला गया लेकिन दोपहर में जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखा था वह दृश्य उसकी आंखों से ओझल नहीं हो रहे थे बार-बार उसकी आंखों के सामने टेलीविजन के चलचित्र की तरह नाचने लगते थे जिसे वह काफी परेशान और उत्तेजित हो जा रहा था।

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सूरज ने अंकित को जो कुछ भी दिखाया था वह सब कुछ अंकित के लिए आप इस स्मरणीय था और अद्भुत था,,, इसके बारे में अंकित ने आज तक कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई इस तरह की भी किताब होती होगी जिसमें आदमी और औरत के संभोग के दृश्य एकदम साफ तौर पर चित्रित होंगे,,, अंकित के लिए वह रंगीन गंदी किताब भी पहली बार था,,और औरत और मर्दों के बीच क्या हुआ संबंध भी पहली बार था पहली बार अंकित इस तरह के दृश्य को देख रहा संभोग की दृष्टि को देख रहा था आम भाषा में कहें तो चुदाई को पहली बार अपनी आंखों से वह रंगीन पन्नों पर देख रहा था,,,, यह सब कुछ अंकित को अंदर तक हिला दिया था उसके कोमल मां पर जो की जवानी के दहलीज पर पहुंच चुके थे बहुत गहरा प्रभाव डाल रहे थे। वह कभी सोचा भी नहीं था कि वह इस तरह के दृश्य को इस तरह की रंगीन किताब को अपनी आंखों से देखेगा।

शाम को घर पहुंचने के बाद भी वह इस रंगीन किताब के ख्यालों में पूरी तरह से खोया रहा अपने कमरे में लेट कर वह उसी गंदे दृश्य के बारे में सोच रहा था जो की औरत और मर्द के बीच के रिश्ते को न जाने कितने आसन से चित्रित किया गया था औरत का मर्दों के लंड को मुंह में लेकर चूसना और वह भी पूरी मस्ती के साथ यह सब अंकित के लिए एक अद्भुत विषय था जो कि उसे बड़ी मुश्किल से यकीन हो पाया था क्योंकि इस बारे में सूरज ने उसे समझाया भी था और जैसा औरतें मर्दों के साथ क्रिया कर रही थी उसी तरह से मर्द भी औरत की बुर को अपने होठों से लगाकर चाट रहे थे,,, यह देख कर तो अंकित का दिमाग पूरी तरह से सन्न रह गया था,,,, वह पहली बार औरत के खूबसूरत अंग को इस रंगीन गंदी किताब में देख भी पाया था वरना औरत की दोनों टांगों के बीच के उसे खूबसूरत अंग के बारे में अंकित के लिए तो कल्पना करना भी मुश्किल था।

लेकिन सूरज के द्वारा लाई गई उस गंदी किताब में औरतों के बहुत से अंगो के बारे में पहली बार अंकित रूबरू हुआ था,,,। औरत की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को देखकर अंकित के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे लेकिन वह उन सवालों का जवाब सूरज से नहीं चाहता था क्योंकि सूरज की नजर में वह एक सीधा-साधा लड़का था और वह अपनी सादगी को अपने दोस्तों के नजरिए में गंदा नहीं करना चाहता था। किताब में वह औरत की बुर को बड़ी गौर से देख रहा था वह एकदम मक्खन की तरह चिकनी थी जिसे देखकर उसके मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ चुका था उसने बड़े करीब से गंदे किताब के उसे पढ़ने को देखा था जिसमें औरत की बुर में उसे अंग्रेज का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से घुसा हुआ था और जिसके घुसने की वजह से उसे औरत के चेहरे पर अजीब सी आभा नजर आ रही थी अंकित को उस औरत के चेहरे पर लंड प्रवेश के बाद दर्द और उन्माद दोनों का भाव एकदम साफ नजर आ रहा था लेकिन इतना तो अंकित समझ गया था कि दर्द से ज्यादा आनंद और उन्माद का असर कुछ ज्यादा ही होता है वरना औरतें इस तरह का काम क्यों करें,,,,।

तभी अपने कमरे में लेते-लेते उसे अपने दोस्त सूरज की बात याद आई जब वह करने किताब देखकर उसे अंग्रेज के लंड की तरफ उंगली रखकर कह रहा था कि काश उसका भी इतना बड़ा होता तो मजा आ जाता उसके कहने के मतलब को वह समझ नहीं पा रहा था क्योंकि अंकित इस बात को नहीं जानता था कि दुनिया में हर मर्दों के लंड का आकार और लंबाई अलग-अलग होती है,,, उसे ऐसा ही लगता था कि सभी मर्दों का लंड एक जैसा ही होता है,,, और इसीलिए उस गंदी किताब में उसे अंग्रेज के लंड को देखकर अंकित को बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं हुआ था क्योंकि उसका खुद का लंड अंग्रेज की तरह मोटा और लंबा था जो कि सूरज का बिल्कुल भी नहीं था इसीलिए सूरज ने यह बात कहा था लेकिन अंकित को कुछ समझ नहीं आया था।

खाना खाने के बाद तृप्ति संजू और सुगंधा टीवी देख रहे थे जिसमें धारावाहिक चल रही थी लेकिन तभी टीवी देखते देखते सुगंधा को जैसे कुछ ख्याल आया हो और वह अंकित से बोली,,,।

अरे अंकित टीवी बंद करने के बाद जरा पीछे वाला दरवाजा तो बंद कर देना खुला रह गया है वरना कुत्ते अंदर आ जाएंगे,,,

ठीक है मम्मी,,,,

(और इतना कहने के बाद दोनों फिर से टीवी देखने लगे ,,,, दोनों फिर से टीवी में मग्न हो चुके थे दोपहर वाली बात को बुलाकर अंकित भी टीवी में धारावाहिक देखने में मस्त हो चुका था,,, धारावाहिक के खत्म होने में 10 मिनट समय शेष रह गया था तभी सुगंधा को झपकी आने लगी,,, बहुत कम बार ही ऐसा होता था की सुगंधा को जल्दी नींद आ जाती थी वरना वह देर में ही सोती थी,,, लेकिन झपकी लगने की वजह से वह कुर्सी पर से उठकर खड़ी हो गई और अपने कमरे की तरफ जाने लगी और बोली,,,,।

तुम दोनों जल्दी से टीवी बंद करके सो जाना,,,

ठीक है मम्मी,,,(टीवी की तरफ देखते हुए तृप्ति बोली और सुगंधा अपने कमरे की तरफ जाने लगी लेकिन तभी उसे याद आया किपीछे वाला दरवाजा तो खुला हुआ है और वह बंद करने के लिए अंकित को बोली थी लेकिन सोची वह खुद ही जाकर बंद कर दे वरना वह भूल जाएगा तो रात भर दरवाजा खुला रह जाएगा इसीलिए वह घर के पीछे की तरफ जाने लगी जो की अंदर से ही जाना था,,,,।

घर के पीछे की तरफ आई तो सचमुच में दरवाजा खुला हुआ था। घर के पीछे कभी कबार जब ज्यादा कपड़े हो जाते थे तो सुगंधा यहीं पर कपड़े धोती थी। और यहां पर वह थोड़ी सी फुलवारी भी लगा कर रखी थी जिससे यहां का नजारा थोड़ा अच्छा लगता था,,, बाकी पीछे एकदम खुला मैदान था और चारों तरफ अंधेरा भी था लेकिन घर में जल रहे बल्ब की रोशनी वहां तक बड़े आराम से पहुंच रही थी। सुगंधा वहीं पर कुछ देर खड़ी होकर आसमान की तरफ देखने लगी आसमान में ढेर सारे तारे टिमटिमा रहे थे ,, वैसे भी सुगंधा को रात को बैठ कर आसमान में चांद और तारों को देखना बड़ा अच्छा लगता था। लेकिन कई वर्षों से उसकी यह आदत छूट सी गई थी। इसलिए आज आसमान पर नजर पड़ते ही पुरानी यादें उसकी ताजा हो गई थी उसे आज भी याद है कि इसी तरह से रात के 2:00 बजे वह और उसका पति चुदाई करने के बाद पेशाब करने के लिए दोनों इसी जगह पर आए थे और कुछ देर तक यही खड़े रहने के बाद आसमान की तरफ देखते हुए दोनों के तन बदन में एक बार फिर से कमाअग्नि भडक उठी और फिर वह दोनों इसी जगह पर खुले आसमान के नीचे चुदाई का अद्भुत सुख प्राप्त किए थे उसे पाल को याद करके अनायास ही सुगंधा की टांगों के बीच हलचल होने लगी,,, और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई लेकिन अपनी स्थिति का भान होते ही एक बार फिर से उसके चेहरे पर उदासी के बादल छाने लगे,,,,।

उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह तुरंत निश्चिंत होकर अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर वहीं बैठ गई थी,,,, लेकिन आज अंकित भी धारावाहिक के बंद होने के पहले ही अपने कमरे में जाने की तैयारी करने लग गया था अपनी मां के कुर्सी पर से उठकर जाने की तकरीबन 5 मिनट बाद ही वह भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया था और तभी उसे भी याद आया था कि पीछे वाला दरवाजा बंद करना है,,, उसे यही लग रहा था कि उसकी मां अपने कमरे में सोने के लिए चली गई है और वह दरवाजा बंद करने के लिए घर के पीछे की तरफ आ गया लेकिन घर के पीछे वाले दरवाजे की दहलीज पर पहुंचते ही उसकी आंखों के सामने जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर उसके होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसके पेट में हरकत होना शुरू हो गया उसकी आंखों के सामने ही उसकी मां कुछ दूरी पर कोने में अपनी साड़ी कमर तक उठाए हुए नीचे बैठी हुई थी और पेशाब कर रही थी,,,।

इस नजारे को देखते ही अंकित के तन बदन में आग लग गई दोपहर में वह गांधी किताब के हर एक पन्ने पर नंगी औरतों को देखा था उनकी गांड को देखा था उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखा था और यहां तक कि उनके बुरे के भी दर्शन किया था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि आज अपने ही घर में उसे अपनी मां की खूबसूरत गांड के दर्शन करने को मिलेंगे,, उसकी सांस पल भर में ही बड़ी तेजी से चलने लगी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वहां से चला जाए वहां रुका रहे,,,।

कोने में से आ रही आवाज एकदम जानी पहचानी थी इसी तरह की आवाज अंकित को तब आती थी जब उसकी मां बाथरूम में पेशाब करने के लिए जाती थी और उसकी आवाज को सुनकर उसकी उत्तेजना एकदम से बढ़ने लगी थी उसे अपने पजामे के अंदर अपने लंड का आकार बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था। सुगंधा पूरी तरह से अनजान थी उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा इस तरह से दरवाजे पर खड़ा होकर उसकी गांड देख रहा होगा उसे पेशाब करता हुआ देख रहा होगा वह तो अपनी ही धुन में थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकलकर सामने की दीवार से टकरा रही थी,,,।

चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,, आसमान में केवल तारे टिमटिमा रहे थे,,,, और ऐसे में सुगंधा घर के पीछे वाली जगह पर पेशाब करने के लिए बैठी हुई थी और वह भी एकदम बेखबर होकर एकदम अनजान बनकर उसे नहीं मालूम था कि इस जगह पर कोई भी आ सकता है,,,। और वाकई में इस जगह पर कोई आता भी नहीं था और वह भी रात के समय क्योंकि यहां कोई काम ही नहीं पड़ता था लेकिन इस बात को वह भूल चुकी थी कि कुछ देर पहले उसने अपने बेटे को ही पीछे वाला दरवाजा बंद करने की हिदायत देते हुए कैमरे से बाहर निकल गई थी,,,,। कोने में बैठकर पेशाब कर रहे सुगंधा को थोड़ी बहुत आहत महसूस होने लगी उसे ऐसा महसूस होने लगा कि उसके पीछे कोई खड़ा है,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा वह एकाएक पीछे मुड़कर देखने की गलती नहीं कर सकती थी क्योंकि जो कुछ भी वह करने जा रही थी पीछे खड़े शख्स को या वह कोई भी हो तृप्ति हो या अंकित उसे ऐसा ही लगना चाहिए कि सब कुछ अनजाने में हो रहा है इसलिए वह हल्का सा अपनी नजर को तिरछी करके देखी तो उसके होश उड़ गए।

सुगंधा को एहसास हो गया था कि ठीक उसके पीछे दरवाजे पर खड़ा होकर उसका बेटा उसी की तरफ देख रहा है वैसे तो यह सब उसके लिए सोने पर सुहागा था क्योंकि वैसे भी वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करती ही थी लेकिन आज तो वह अपनी जवानी पर से पूरा पर्दा उठा दी थी और वह भी अनजाने में ही इसलिए उसका दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा था,,, इस बात का अहसास होते हैं कि उसका जवान बेटा ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसे पेशाब करते हुए देख रहा है तो उसका दिल बड़े जोरों से धड़कने के साथ-साथ उसके बदन में उत्तेजना भारी कंपन भी होने लगी उसके पैरों में सुरसुराहट होने लगी खासकर के उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से जिसमें से अभी भी नमकीन पानी की धार निकल रही थी,,,।

ऐसी हालत में सुगंधा की सिट्टी -पिट्टी गुम हो गई थी,,, वैसे तो वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने के लिए तैयार थी लेकिन हम जाने में ही जो कुछ भी अपने आप हो रहा था उसे देखते हुए उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी वह एक तरफ शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी वहीं दूसरी तरफ वह काफी उत्तेजना का अनुभव भी कर रही थी,,, क्योंकि पहली बार उसने अपने बेटे की आंखों के सामने इस तरह की कामुक हरकत की थी और वह भी उसकी आंखों के सामने पेशाब करते हुए,,,, कंधे पर से साड़ी का पल्लू गिरा देना कोई और बात थी और उस हरकत करने में भी उसे एड़ी चोटी का जोर लगा देना पड़ता था,,,।

उत्तेजना और शर्म के मारे सुगंधा बहुत गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम छाती भी ऊपर नीचे हो रही थी,,, सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें खड़ी हो जाए या पीछे मुड़कर अपने बेटे की तरफ देख ले और बोल दे कि यहां क्या कर रहा है लेकिन ऐसे करने में भी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,, लेकिन वह ऐसा करना भी नहीं चाहती थी क्योंकि वह किसी भी तरह से अपने बेटे को इस तरह की हरकत उसे इस तरह से देखने में इस बात का एहसास नहीं कराना चाहती थी कि वह जो कुछ भी कर रहा है गलत है उसे अपमानित नहीं करना चाहती थी क्योंकि अगर वह ऐसा कह देती है उसे रोक देती है तो शायद उसे खुद ही अपने हाथों से अपने सपनों के पर को काटना पड़ जाए जो कि अभी-अभी लगे हुए थे जिससे वह अपनी जवानी के अरमान पूरा करना चाहती थी। और वह अपने मन में यही सोच भी रही थी कि यही सही मौका भी है यही सही अवसर है अपने बेटे को पूरी तरह से अपनी जवानी के जाल में फंसाने का,, क्योंकि वह जानती थी कि दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो औरत की नंगी गांड को देखकर उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित न हो जाए उसे पाने के लिए बेकरार ना हो जाए,,,,। और वह अपने मन में यही सोच भी रही थी कि ईस समय उसके बेटे के मन में भी यही चल रहा होगा वरना वह इस तरह से,,, अपनी ही मन को पेशाब करते हुए उसकी नंगी गांड को किस तरह से रात के समय खड़े होकर घुर ना रहा होता,, अपने बेटे की हरकत पर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी हालांकि अब उसके गुलाबी छेद में से पेशाब की धार एकदम कमजोर पड़ गई थी और उसमें से बूंद बूंद टपक रही थी लेकिन आज सुगंधा को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था की पेशाब करने में भी एक अलग मजा है जब कोई उसे इस क्रिया को करते हुए देखने वाला हो,,। और खास करके कोई अपना सगा बेटा तब तो यह क्रिया करने में आनंद ही आनंद है।

अंकित की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी यहां तक कि वह अपनी मां की गांड को देखते हुए अनजाने में ही उत्तेजना के चलते पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को मुट्ठी में पकड़ कर दबा दिया था,, वह पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूब चुका था उसे इस बात का भी डर नहीं था कि अगर उसकी मां उसे देख लेगी तो क्या सोचेगी वह पूरी तरह से इस पल के एहसास में अपने आप को डुबो दिया था क्योंकि इससे बेहतरीन और मदहोश कर देने वाला नजारा उसने आज तक कभी भी नहीं देखा था इसलिए तो उसका हल बेहाल हो चुका था,,,। अंकित की सांस इतनी तेजी से और गहरी चल रही थी कि इस सुनसान वातावरण में उसकी सांसों की गति और आवाज सुगंध को एकदम साफ सुनाई दे रही थी और अपने बेटे की सांसों की गति को सुनकर हीवह एकदम मस्त हो चुकी थी क्योंकि वह समझ चुकी थी कि उसकी नंगी गांड को देखकर उसका बेटा मदहोश हो रहा है उसकी तरफ आकर्षित हो रहा है उसे पाने के लिए लड़ाई हो रहा है और ऐसा ही तो वह चाहती ही थी आज अनजाने में ही इस खेल में उसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन देखते ही देखते पेशाब की बूंद भी गुलाबी छेद से टपकना बंद हो चुकी थी अब ज्यादा देर तक वहां बैठे रहने में भलाई बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि अंकित को शक हो सकता था कि वह जानबूझकर ऐसा कर रही है और वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटे को उसकी हर एक हरकत जो उसे अपनी तरफ आकर्षित करने वाली लगती हो उसे ऐसा एहसास हो कि उसकी मां जानबूझकर ऐसा कर रही है।

अपनी जगह से उठाना आप बेहद जरूरी हो चुका था इसलिए वह अपने बेटे को वहां से हट जाने के लिए चेतावनी देने हेतु वाहन पास में ही पलटी में से मग भरकर पानी निकाल ली और उसे पानी की मार को अपनी बुर पर मारने लगी ताकि उसकी बुर पेशाब करने के बाद साफ हो जाए,,, लेकिन देखने वाली बात यह थी कि अभी भी उसका बेटा वही डटकर खड़ा था ऐसा लग रहा था कि जैसे आज वह अपनी आंखों से ही उसकी जवानी के रस को निचोड़ कर पी जाएगा एक तरह से सुगंध को अपने बेटे की यह हरकत मदहोश करने वाली लग रही थी वहीं दूसरी तरफ वह थोड़ा घबरा भी रही थी कि कहीं उसका बेटा उतेजित अवस्था में कुछ गलत ना कर दे जिसके लिए वह तैयार भी थी लेकिन वह नहीं चाहती थी कि जो कुछ भी हो वह उसके बेटे की तरफ से जोर जबरदस्ती में हो वह चाहती थी कि जो कुछ भी हो वह दोनों की सहमति से और वह भी एकदम रंगीन तरीके से हो,,, जो जिंदगी भर दोनों के जेहन में बसा रहे,,,।

अंकित अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से उसकी मां पानी डालकर अपनी बुर को साफ कर रही है वह थोड़ी देर में उठकर खड़ी हो जाएगी,,, और ऐसे में उसकी मां की नजर उसे पर पडना लाजमी है,,, लेकिन फिर भी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कुछ और देखना चाह रहा हो,,, इसलिए मंत्र मुग्ध दिशा वह अपनी नजर हटाए बिना ही कोने वाली जगह पर अपनी मां को देख रहा था,, उसकी मां के बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी उठना जरूरी था इसलिए वह धीरे से अपनी जगह पर उठकर खड़ी हो गई अभी भी,,, उसकी साड़ी उसके दोनों हाथों में थी और वह कमर तक उठाकर खड़ी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अब अपने बेटे को पूरी तरह से अपनी आकर्षक की जाल में फसना चाहती हो इसलिए वहां अपने बेटे की हालत खराब करने के लिए वह एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी मानो की जैसे उसे खुजला रही हो,,, और अंकित को अपनी मां की यह हरकत बहुत अच्छी लग रही थी वह उत्तेजित हो जा रहा था और पेट के ऊपर से अपने लंड को जोर-जोर से दबा रहा था,,,, कुछ देर तक सुगंध इसी हरकत को अपने दोनों हाथों से बड़ी-बड़ी से करने लगी और फिर धीरे से एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा गिरते हुए अपनी साड़ी को कमर से ही अपने दोनों हाथों से छोड़ दिया और उसकी साड़ी नाटक के परदे की तरह उसके कदमों में जाकर गिर गई और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा पड़ गया,,,,।

सुगंधा जो अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहती थी उसे अपने पास बुलाना चाहती थी किसी भी तरह से उसके साथ संबंध बनाना चाहती थी इस समय वह शर्म के मारे एकदम लाल हो चुकी थी,, और वह चाहती थी कि समय उसका बेटा वहां से चला जाए क्योंकि वह ऐसे हालात में अपनी बेटी से नजर नहीं मिलना चाहती थी और ना ही उसे सवाल जवाब करना चाहती थी कि वह दरवाजे पर क्यों खड़ा है क्या देख रहा है,,,,। लेकिन अपनी मां के खड़े होते ही और साड़ी को पैरों में गिराते ही अंकित समझ गया था कि अब उसका भी वहां देर तक खड़े रहना उचित नहीं है इसलिए वह पेट के ऊपर से ही अपने लंड को जोर से दबे हुए ही वहां से दबे कदमों से अपने कमरे की तरफ चला गया और उसके जाते ही सुगंध राहत की सांस लेने लगी और फिर धीरे से दरवाजे को बंद करके,,,अपने कमरे में आ गई आज उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी लेकिन उससे भी ज्यादा हालत खराब थी अंकित की क्योंकि दोपहर का नजारा और इस समय का नजारा भले ही अलग-अलग था लेकिन इस समय का नजारा उसकी जिंदगी में बदलाव लाने के लिए काफी था और गांधी किताब में देखे गए गंदे चित्र के मुताबिक इस समय का नजारा कुछ ज्यादा ही उत्तेजनात्मक और मदहोश कर देने वाला था जिसका असर उसे अपने पेंट में बराबर दिख रहा था,,,।

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