रात को खाना खाने के बाद अपने कमरे में बिस्तर पर पडते ही फिर से वही सिलसिला शुरू हो गया,,,, बिस्तर पर जाते ही अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई फिर वही अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपने जवानी की प्यास को बुझाने की कोशिश करने लगी,,,, और फिर गहरी निंद्रा में सो गई सुबह-सुबह जब दरवाजे पर दस्तक होने लगी तो उसकी आंख खुली और अपने आप को बिस्तर पर संपूर्ण रूप से नंगी देखकर वह जल्दी से उठकर बैठ गई वह जानती थी कि दरवाजे पर दूध वाला आया था वह अपने सारे कपड़े पहनने में असमर्थ थी इसलिए गाउन को जैसे तैसे करके पहन ले और फिर अपने कमरे से निकलकर और किचन में गई और एक पतीला लेकर मुख्य दरवाजे पर पहुंच गई और दरवाजा खोलकर दूध लेने लगी दूध वाला सुगंधा को देखकर रोज की तरह ही मुस्कुराया और बोला,,,)
बीबी जी थोड़ा जल्दी उठ जाया करो मुझे देर हो जाती है,,,,
माफ करना आंख लग गई थी,,,,(और इतना कहते हुए बात पतीला लेकर थोड़ा सा झुक गई दूधवाला साइकिल को स्टैंड पर लगाकर,,, दूध के कान में से नाप भरकर दूध निकाला और पतीला में डालने लगा,,, अभी तक तो वह केवल दूध की धार देख रहा था लेकिन उसकी नजर जैसे ही धार के ठीक सामने गई तो उसके होश उड़ गए,,, क्योंकि दूध लेने के लिए सुगंध झुकी हुई थी और झुकाने की वजह से उसके गांव में से उसकी मदमस्त कर देने वाली खरबूजे जैसी च एकदम साफ दिख रही थी और साथ ही उस चुचियों की शोभा बढ़ा रही उसकी कड़क निप्पल भी एकदम तनी हुई साफ दिख रही थी,,,, यह नजारा देख कर तो दूध वाले की हालत खराब हो गई और उसके पेट में तंबू बनना शुरू हो गया,,,। और इस बात से सुगंधा बिलकुल बेखबर थी क्योंकि अभी भी हल्की-हल्की नींद में ही थी ,, दूध वाला तो पहला नाप भरकर दूध पतीला में डाला,,, और उसके बाद उसे आधा ही नाप डालना था लेकिन इस बार भी वह पूरा नाप भर लिया था दूध से और पतीला में डालते हुए वह सुगंधा की गाउन में उसकी चूचियों को देखता रहा उसकी कड़क निप्पल को देखकर उसका लंड कड़क हो गया था,,, सुगंधा को अभी तक इस बात का अहसास तक नहीं हुआ था कि वह दूध वाला उसकी चूचियों को देख रहा था जो कि एकदम साफ नजर आ रही थी,,,,, उसका ध्यान तब गया जब पतीले में से दूध नीचे गिरने लगा हुआ एकदम से दूध वाले को बोली,,,।
अरे अरे भैया यह क्या कर रहे हो,,,,(इतना कहते हुए वह दूध वाले की तरफ देखी तो उसकी निगाहों की सिधान पर जब उसका ध्यान गया और वह नजर झुका कर अपनी छातियों की तरफ देखने लगी तो उसके होश उड़ गए वाकई में उसकी चूची एकदम साफ नजर आ रही थी उसे इस बात का एहसास हुआ कि उस गलती हो गई थी रात को वह नंगी ही सो गई थी वह सुबह उठते ही वह जल्दबाजी में केवल गाउन पहनकर बाहर आ गई थी जिसमें से उसका पूरा बदन एकदम साफ झलक रहा था,,,, अपनी गलती का अहसास होते ही सुगंधा तुरंत अपना एक हाथ अपने गाऊन के उपर सतह पर रखकर अपनी चूचियों के नजारे को छुपाने की कोशिश करने लगी,,,, सुगंधा की हरकत को देखकर दूध वाले को समझ में आ गया कि वह जान गई है इसलिए वह तुरंत बिना कुछ बोले साइकिल को स्टैंड पर से उतरा और तुरंत वहां से रवाना हो गया सुगंध को अपनी गलती का एहसास हो रहा था वह तुरंत दरवाजा बंद करके कमरे में आ गई और फिर रसोई घर में प्रवेश करते ही वह ट्यूबलाइट की स्वीच ऑन करके दूध के पतीले को किचन पर रखकर गहरी गहरी सांस लेने लगी शुरू शुरू में तो उसे एकदम से घबराहट महसूस होने लगी लेकिन जिस तरह से वह दूध वाला उसकी चूचियों को देख रहा था सुगंधा के बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वैसे तो सड़क पर आते जाते हर कोई उसके बदन को अपनी आंखों से नजर भर कर देखता ही रहता था लेकिन आज पहली बार था जब उसकी आंखों के सामने एक दूध वाला उसकी नंगी चूचियों को जी भर कर देख रहा था इस बात का एहसास उसके बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रहा था वह दूध वाले के बारे में सोचने लगी तभी उसके मन में युक्ति सोचने लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि जब दूध वाला उसकी चूची की झलक भर देख कर इस कदर पागल हो सकता है तो उसका बेटा क्यों नहीं,,,, और यही सोचकर उसके होठों पर मादक मुस्कान नाचने लगी,,,,।
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सुबह-सुबह जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर सुगंधा काफी रोमांचित थी उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह का हादसा उसके साथ हो जाएगा,,,, लेकिन जो कुछ भी हुआ उसके चलते उसके मन में एक अजीब सी युक्ति ने जन्म लिया जिस पर वह जल्द से जल्द अमल करना चाहती थी और वह भी अपने ही बेटे पर वह अच्छी तरह से जानती थी कि जब उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर दूध वाले का मन डोल गया तो उसके बेटे का क्यों नहीं डोलेगा,,, दूध वाला तो अधेड़ उम्र का था और उसका बेटा तो अभी जवानी की दहलीज पर कदम रखा था और उसके मन में और तो के अंगों को लेकर उत्सुकता और रोमांच दोनों होगा इसलिए उसे पूरा विश्वास था कि उसकी नंगी चूचियों को देखकर उसके बेटे की हालत जरूर खराब हो जाएगी,,,, जहां तक उसे ख्याल था उसके बेटे ने आज तक उसे अर्धनग्न अवस्था में कभी नहीं देखा था और वैसे भी एक मां और एक शिक्षिका होने के नाते वह अपनी मर्यादा को अच्छी तरह से जानती थी,,,, जैसे ही उसका बेटा जवान होने लगा वैसे ही वह अपने बेटे के सामने अपने अंगों को जहां तक हो सकता था छुपाने की कोशिश करने लगी थी लेकिन अब उसे लगने लगा था कि समय आ गया है जब उसके बेटे को उसके खूबसूरत अंगों का दर्शन कराना चाहिए,,,।
और यही सोचकर उसके तन-बाद में अजीब सी हलचल हो रही थी दूध वाले के जाने के बाद वह पतीला लेकर रसोई घर में रख दी थी और वही खड़ी-खड़ी जो कुछ देर पहले हुआ था उसके बारे में सोच रही थी उसे तो अंदाजा भी नहीं था कि झुकाने की वजह से उसकी चूचियां एकदम साफ दूध वाले को नजर आ रही होगी वह तो हल्की नींद में ही थी,,, उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि वह गाऊन के अंदर कुछ पहनी भी है कि नहीं,,,,,,, वह रसोई घर में खड़ी-खड़ी रात की घटना के बारे में सोचने लगी जब वह टीवी बंद करके अपने कमरे में सोने के लिए आई थी,,,, कमरे में आते ही वह बिस्तर पर लेटने से पहले अपने सारे वस्त्र उतार कर एकदम नंगी हो गई थी और बिस्तर पर लेट कर अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपनी हथेली को अपनी गरम बुर पर रखकर उसे जोर-जोर से रगड़ रही थी और अपने मन में अपने बेटे का ख्याल कर रही थी,,, एक बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था कि जब भी वह अपने बेटे का ख्याल अपने मन में लाती थी और अपने अंगों से खेलने की कोशिश करती थी उसे कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का एहसास होता था और मजा भी बहुत आता था,,,, और वह अपनी दोनों टांगें फैलाए अपनी गुलाबी बुर से खेल रही थी और अपने बेटे की कल्पना करते हुए अपने मन में यह सोच रही थी कि उसका बेटा उसकी दोनों टांगों के बीच झुक कर उसकी बुर को अपनी होठों से स्पर्श करके अपनी जीभ से चाट रहा है यह ख्याल उसके मन में आते ही वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी,,, और मदहोशी के आलम में अपनी दो उंगलियां अपनी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए अपने मन में कल्पना कर रही थी कि उसका बेटा उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर पर लपेटकर उसकी बुर में अपना लंड डालकर उसे चोद रहा है यह एहसास यह कल्पना उसे पूरी तरह से मदहोश कर दिया था और वह बहुत ही जल्द झड़ गई थी,,, और फिर संतुष्टि का एहसास लिए नरम नरम तकीए को अपनी बाहों में समेटे वह कब नींद की आगोश में चली गई उसे भी पता नहीं चला,,,,।
रात वाली घटना के बारे में याद करके उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह नग्न अवस्था में ही सो गई थी और सुबह दरवाजे पर दूध वाले की दस्तक की आवाज सुनकर जल्दबाजी में केवल गाउन पहनकर दूध लेने के लिए आ गई थी और उसकी मदमस्त चूचियों को देखकर दूध वाला पागल हो गया यह सब सोचने के बाद उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस होने लगी,,, उसे अपनी सांसे भी ऊपर नीचे होती हुई महसूस होने लगी वह दीवार पर टकली घड़ी की तरफ देखी तो 6:00 बजने में 20 मिनट की देरी थी इसलिए वह अपना ध्यान भर के काम में लगाकर झाड़ू लगाना शुरू कर दी और अपने मन में सोचने लगी कि किस तरह से अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करेगी हालांकि उसे दूध वाले से इशारा तो मिल ही गया था बस उसे पर अमल करने की देरी थी लेकिन अमल करने में भी इस घबराहट हो रही थी,,, मन में भले ही बड़े सहज रूप से इरादा बना ली थी कि वह अपने बेटे के सामने इस तरह से पैसा आएगी कि उसके बेटे को उसकी नंगी चूचियों का दर्शन हो जाएगा लेकिन हकीकत में उसे बहुत घबराहट हो रही थी अपने बेटे के सामने इस तरह की हरकत करने मे उसे शर्म भी महसूस हो रही थी,,,, लेकिन घर की सफाई करते हुए वह अपना इरादा बना ली थी वह अपने मन को पक्का कर रही थी कि आज वह किसी भी तरह से अपने बेटे को अपनी जवानी के दर्शन करा कर रहेगी,,,,
यही सब सोचते सोचते वह घर की सफाई कर ली थी पूरे घर में झाड़ू लगा लेने के बाद,,,,,,, वह दीवार के सहारे बैठ गई और अपने मन में सोचने लगी कि वह अपने बेटे के सामने जाए तो जाए कैसे और यह सोचती हो बार-बार अपने गांव के अंदर देख ले रही थी जिसमें से उसे खुद अपनी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और उसकी छुआरे जैसी निप्पल एकदम कैडबरी चॉकलेट की तरह कड़क नजर आ रही थी,,,, यह सब देखकर उसकी खुद की हालत खराब होती नजर आ रही थी घड़ी पर नजर गई तो 6:00 बज गए थे,,,, उसके बच्चों के उठने का समय हो गया था लेकिन फिर भी 15 मिनट जैसा समय रह गया था वह अपने मन में सोचने लगी की यही 15 मिनट में जो कुछ भी करना है उसे करना है यही सोच कर वह अपनी जगह से खड़ी हुई और अपने बेटे के कमरे के पास जाकर कुछ देर तक वहीं खड़ी होकर सोचने लगी आखिरकार वह एक मां थी और भला कैसे अपने ही बेटे को अपनी ही नंगी चूचियों के दर्शन जानबूझकर करा सकती थी,,, एक औरत होने के नाते औरत किस क्रियाकलाप को अच्छी तरह से जानती थी उसे इस बात का भी एहसास था कि इस क्रियाकलाप में कुछ भी उंच नीच हो सकती थी,,, लेकिन वह मन बना ली थी इसलिए दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही वह अपना हाथ उठाकर दरवाजे पर रखी तो दरवाजा खुद ब खुद खुल गया,,,,,।
कभी कभार अंकित अपने कमरे के दरवाजों को खुला ही छोड़ देता था वैसे भी छुपाने लायक उसके पास कुछ भी नहीं था,,, और अपने बेटे के कमरे के खुले हुए दरवाजे को अपनी किस्मत का द्वार समझ कर वह प्रसन्नता के साथ अंदर की तरफ देखने लगी उसका बेटा एकदम गहरी नींद में सो रहा था,,,, अंदर डिम लाइट जल रहा था इसके लिए उसकी रोशनी बहुत कम थी जिसमें उसे कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था वह धीरे से कमरे में प्रवेश की और हल्के से दरवाजे को बंद कर दी सुबह का समय हो चुका था इसलिए उसके पास एक बहाना था उसे जगाने का और कैमरा साफ करने का और वह अपने साथ में झाड़ू भी लेकर आई थी इसलिए वह ट्यूबलाइट की स्विच को ऑन कर दी और पूरे कमरे में दूधिया रोशनी फैल गई और अपने बेटे के बिस्तर की तरफ देखी तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न था उसका बेटा पीठ के बल लेटा हुआ था और चादर उसकी छाती हो तो खींची हुई थी लेकिन इस बीच उसकी दोनों टांगों के बीच का हिस्सा तंबू की शक्ल में ऊपर की तरफ उठा हुआ था जिसे देखकर सुगंधा की हालत खराब हो गई उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया क्योंकि जिस तरह का तंबू चादर में बना हुआ था उसे देखकर सुगंधा को एहसास हो गया था कि उसके बेटे का मर्दाना अंग कुछ ज्यादा ही ताकतवर है,,,,। ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा था वह आई तो थी अपनी जवानी का जलवा भी खेलने लेकिन अपने बेटे की जवानी देखकर उसका खुद का पानी छूट रहा था उसकी बुर पिघल रही थी,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह अभी भी अपने बेटे के बिस्तर से तीन-चार फीट की दूरी पर थी लेकिन फिर भी सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,, वह अपने बेटे के चेहरे की तरफ देखी जो की बहुत ही मासूम लग रहा था और वैसे भी उसका बेटा बहुत मासूम था लेकिन सोते समय वह और भी ज्यादा मासूम नजर आता था वह धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे बढ़ने लगी और अपने बेटे के बिस्तर के बेहद करीब जाकर खड़ी हो गई और बड़े ध्यान से अपने बेटे की दोनों टांगों के बीच चादर में बने तंबू को देखने लगी उसके सांस लेने के साथ-साथ उसके तंबू में हरकत होती थी जो की हल्का-हल्का हिल रहा था और उसे देखकर ना जाने क्यों सुगंधा के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आना शुरू हो गया था उसका मन तो कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के लंड को पकड़ ले लेकिन उसकी हिम्मत गवाही नहीं दे रही थी हालांकि उसकी सांसों पर नीचे हो रही थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर तोड़ने लगी थी वह गाऊन के अंदर पूरी तरह से नंगी थी,,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि अगर उसके बेटे की तरफ से दूसरे मर्दों की तरह प्रतिक्रिया मिली होती या उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित होता तो इस समय वह बेझिझक होकर अपने बेटे के ऊपर से चादर हटाकर उसके खड़े लंड पर अपनी गुलाबी बुर रख देती और उसके लंड पर कूदना शुरू कर देती,,, क्योंकि वह जानती थी कि उसके और उसके बेटे के बीच केवल शर्म की ही दूरी थी,,,, और इस दूरी को सुगंधा पूरी तरह से कम कर देना चाहती थी लेकिन कैसे उसे समझ में नहीं आ रहा था,,,,।
सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था उत्तेजना के मरी उसकी बुर फुल पिचक रही थी बार-बार उसका हाथ अपने आप ही उसकी बुर पर चला जा रहा था आई तो थी वह अपने बेटे को अपनी चूची दिखाने लेकिन अपने बेटे की मर्दाना अंग की झलक पाकर ही उसकी बुर की हालत खराब होती नजर आ रही थी,,,, बरसों गुजर गए थे उसकी बुर में लंड प्रवेश नहीं कर पाया था अपने पति के देहांत के बाद तो वह लंड की गर्मी को अपनी बुर में महसूस करना ही भूल गई थी,,, इसलिए तो उसकी बुर तड़प रही थी एक मोटे तगड़े लंड को लेने के लिए,,,, सुगंधा का मन व्याकुल हो रहा था और अंदर ही अंदर वह तड़प रही थी वह अपने बेटे के लंड को स्पर्श करना चाहती थी पकड़ना चाहती थी देखना चाहती थी उसकी मोटाई को उसकी लंबाई को उसके अंदर की गर्मी को वह अपनी आंखों से अपने बेटे के लंड को पिघलता हुआ देखना चाहती थी अपने बेटे के लंड से निकलने वाली पिचकारी की धार को देखना चाहती थी और उस धार को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी बहुत कुछ था सुगंधा के अंदर लेकिन शर्म की दीवार के पीछे सब कुछ छुपा हुआ था,,,,
सुगंधा अपने बेटे की तरफ बड़े ध्यान से देख रही थी वह पूरी तरह से गहरी नींद में सो रहा था इसलिए वह अपने बेटे के नींद में होने का फायदा उठा लेना चाहती थी इसलिए हिम्मत बांधकर वह अपने हाथ को आगे बढ़ने लगी चादर के ऊपर से ही सही वह बरसों के बाद लंड को पकड़ना चाहती थी,,, इसलिए धीरे-धीरे अपने हाथ को आगे बढ़ा रही थी अपने बेटे के लंड की तरफ बढ़ते अपने हाथ की तरफ वह बड़ी गौर से देख रही थी जिसमें डर और उत्तेजना का कंपन साफ महसूस हो रहा था,,,, और देखते ही देखते उसकी हथेली उसके बेटे के लंड के बेहद करीब पहुंच गई थी और इसी के साथ उसके दिल की धड़कन भी एकदम तेज चलने लगी थी,,, वह अपनी हथेली को कुछ देर तक अपने बेटे के लंड के करीब ही स्थिर कर दी थी और अपने मन में सोचने लगी थी कि अगर उसके बेटे की आंख खुल गई और उसने अपनी आंखों से अपनी मां को इस तरह की हरकत करता देखा तो अपने मन में क्या सोचेगा,,, फिर वह अपने ही मन में उठ रहे सवाल का खुद से ही जवाब देते हुए अपने मन में अपने मन की तसल्ली के लिए बोली,,,।
कुछ नहीं होगा उसका बेटा भी आखिरकार एक मर्द ही तो है उसके बीच जज्बात है उसका भी लंड खड़ा होता होगा जैसा कि इस समय खड़ा है अगर एक औरत का हाथ उसके लंड पर स्पर्श होगा तो वह पूरी तरह से मस्त हो जाएगा मचल उठेगा औरत के प्यार को पाने के लिए,,, और अगर एक औरत के स्पर्श से उसके लंड में जरा भी अंगड़ाई आएगी तो वह उसे औरत के सुख के लिए तड़प उठेगा भले ही उसके लंड का स्पर्श करने वाला उसकी मां ही क्यों ना हो,,,, यह सब सोच कर सुगंध का दिन बड़े जोरों से धड़क रहा था,,, अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर उसके मन में अपने बेटे को लेकर बड़ी जिज्ञासा हो रही थी वह अपनी मन में सोच रही थी कि उसका बेटा भी औरतों के बारे में जरुर सोचता है तभी तो उसका लंड खड़ा है,,,, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था अंकित का लंड प्राकृतिक रूप से सुबह-सुबह पेशाब लगने के कारण अपने आप ही खड़ा हो गया था जिसका अर्थ उसकी मां गलत तरीके से ले रही थी चाहे जैसा भी हो सुगंधा को अपना उल्लू ठीक करने से मतलब था,, ।
अंकित पूरी तरह से गहरी नींद में डूबा हुआ था वह गहरी-गहरी सांस ले रहा था और इसी का फायदा वह उठा लेना चाहती थी और यही हाल सुगंधा का भी था वह अपने मन में सोच रही थी कि जल्दी से वह अपने बेटे के लंड को पकड़ कर जल्दी से छोड़ देगी ताकि उसके बेटे को अहसास तक ना हो,,,, मुझे सोच कर अपनी हथेली को खोलकर वहां जल्दी से चादर में बने तंबू को अपनी हथेली में भरकर उसकी लंबाई उसकी मोटाई को अपने अंदर महसूस करके एकदम मस्त होते हुए जल्दी से छोड़ दी उत्तेजना के मारे और मदहोशी के आलम में उसकी आंख अपने आप बंद हो चुकी थी,,,, सुगंधा हिम्मत दिखा कर अपनी बेटी के लैंड को एक बार अपनी हथेली में दबाकर उसे छोड़ दी थी लेकिन इतने से वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि उसकी बुर से पानी फेंक दिया वह झड़ गई थी आखिर ऐसा होना संभव ही था क्योंकि बरसों बाद उसके हाथ में लंड जो आया था और वह भी अपने ही बेटे का एकदम मजबूत मोटा तगड़ा लंबा,,, वह गहरी गहरी सांस लेते हुए अपना पानी निकाल रही थी वह अपने बेटे की तरफ देखी थी उसका बेटा अभी भी बेसुध होकर सो रहा था,,,, सुगंधा की हरकत का उसके बेटे पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा था इसलिए सुगंधा की हिम्मत थोड़ा और बढ़ने लगी वह एक बार फिर से अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भरकर महसूस करना चाहती थी,,,,,।
एक बार अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भरकर उसके परिणाम को देख चुकी थी पहली बार में ही वह अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भरने पर ही झड़ चुकी थी और दूसरी बार वह फिर से यह गुस्ताखी करके देखना चाहती थी,,,, और वह फिर से अपना हाथ आगे बढ़ा कर एक बार फिर से अपने बेटे के तंबू को अपनी हथेली में भरकर हल्के से दबा दी और इस बार उसके बेटे के बदन में थोड़ी हरकत हुई और वह तुरंत अपनी हथेली को पीछे खींच ली,,,, इस बार सुगंधा की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बड़े जोर से भाग कर आई हो उत्तेजना के मारे उसकी चूचियों की निप्पल एकदम तन गई थी और उसकी बुर फूल पिचक रही थी,,,,, धड़कते दिल के साथ वह घड़ी की तरफ देखी तो 6:20 हो रहा था,,,,, समय हो गया था और उसे अपनी बेटी के कमरे से भी हल्की-हल्की आवाज आ रही थी इसका मतलब साफ था कि वह भी जाग गई थी अब अपनी युक्ति पर आगे बढ़ना उचित नहीं था,,, और जिस हालत में वह अपने बेटे के बिस्तर के बेहद करीब खड़ी थी उसे शर्म महसूस होने लगी थी वह धीरे से वापस दरवाजे की तरफ गई और ट्यूबलाइट बंद करके वापस दरवाजे को बाहर से ही दस्तक देते हुए अपने बेटे को उठने के लिए बोली दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज सुनकर अंकित की नींद खुल गई और वह भी उठकर बैठ गया लेकिन उसे जरा भी एहसास नहीं हुआ कि उसकी मां दो बार उसके लंड को अपने हाथ में लेकर छोड़ दी थी वह पूरी तरह से सहज था असहज थी तो सिर्फ सुगंधा,,,, जब सुगंधा ने देखी कि उसका बेटा उठकर बैठ गया है तो वह खुद-ब-खुद वहां से हट गई और अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए बाथरूम में घुस गई जहां पर वह अपना गाउन उतार कर एकदम नंगी हो गई और फिर अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपनी जवानी की आग को बुझाने की कोशिश करने लगी,,,।
सुगंधा ने दूध वाले की तरह ही अपने बेटे को अपनी चुचियों का जलवा दिखाने की युक्ति को स्थगित कर दी थी क्योंकि उसे अपनी जवानी का जलवा दिखाने जितना समय ही नहीं था वरना वह अपने मन में तय कर चुकी थी कि आज झाड़ू लगाते समय वह अपने बेटे को अपनी उभरती हुई जवानी का जलवा जरूर दिखाएगी,,, लेकिन अपने बेटे के कमरे में प्रवेश करते ही उसकी आंखों के सामने जो नजर नजर आया था उसे देखकर उसके तन बदन में आग लग चुकी थी और वह अपने मां पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई थी चादर ओढ़ कर सो रहे अंकित के खुंटे को अपनी आंखों से देख कर उसे पकड़ने की अपनी इच्छा को सुगंधा दबा नहीं पाई थी और इसी के चलते वहां चादर के ऊपर से ही सही अपने बेटे के लंड को छूने की कोशिश की थी और जिसमें वह कामयाब भी हो चुकी थी एक नहीं बल्कि दो दो बार,,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा को समझते देर नहीं लगी थी कि उसके बेटे के पास का हथियार बेहद दमदार है जो कि किसी भी औरत को पूरी तरह से तृप्त कर सकता है,,,
अपने बेटे के लंड को चादर के ऊपर से ही स्पर्श करने की खुशी में हो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी,,, जिसका असर उसे अपनी बुर में बराबर महसूस हो रहा था और वह अपनी बुर की गर्मी को शांत करने के लिए बाथरूम में प्रवेश करके अपनी उंगलियों का सहारा लेकर वह अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रही थी,,,।
सुगंधा का दिमाग पूरी तरह से उन्मादित हो चुका था उसमें अब सही गलत के सोचने की क्षमता नहीं रह गई थी पहले तो वह दूसरे लड़कों की दोनों टांगों के बीच की स्थिति का कल्पना में ही जायजा लिया करती थी लेकिन अब उसकी नजर अपने ही जवान बेटे पर थे जो की पूरी तरह से भला भला था उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं हुआ था की चोरी से उसकी मां उसके कमरे में जाकर उसके खड़े लंड को चादर के ऊपर से पकड़ ली थी,,,। सुगंधा ने अपने मां पर बिल्कुल भी काबू न करके जिस तरह की हरकत अपने बेटे के साथ की थी उसे देखते हुए वहां अपने बेटे को चाय पानी खाना देने पर भी उससे,, नजर नहीं पिला पा रही थी क्योंकि उसने हरकत ही ऐसी कर दी थी पहले ही एक औरत होने के नाते वह अपने बेटे को उसे समय मर्द समझकर उसके खड़े लंड को अपने हाथों से पकड़ ली थी लेकिन आखिरकार थी तो वह उसे मर्द की मा ही,,, इसलिए सुगंधा के साहजिक होने पर उसमें की औरत दूर हो जाती थी और उसमें एक मां नजर आने लगती थी इसलिए वह अपने बेटे से नजर नहीं मिल पा रही थी लेकिन अंकित को तो कुछ पता ही नहीं था कि उसके साथ क्या हुआ था वह तो पूरी तरह से सहज था,,,,।
कभी-कभी सुगंधा को अपनी हरकत पर शर्मिंदगी महसूस होती थी और वह इस झमेले से निकलने की कोशिश करती थी लेकिन वह जितना भी इस झमेले से निकलने की कोशिश करती थी उतनी ही उसके अंदर डूबती चली जाती थी,,,, आखिरकार वासना का दरिया ही होता है इतना गहरा की सब कुछ अपने अंदर डूबा ले जाता है और ऐसा ही सुगंधा के साथ भी हो रहा था,,,,।
जैसे तैसे करके दिन गुजरने लगे सुगंधा अपने मन में बहुत चाहती थी कि वह अपने बेटे को अपनी जवानी का जलवा दिखाएं लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से अपने आप को तैयार करें अपने बेटे के सामने प्रदर्शन करने के लिए,,,,, क्योंकि जब भी वह कोशिश करती थी उसके अंदर घबराहट और शर्म एकदम साफ नजर आती थी वह इस बात से घबरा जाती थी कि अगर उसके बेटे को जरा भी इस बात का एहसास हो गया कि उसकी मां,,, जानबूझकर अपने अंगों की नुमाइश उसके सामने कर रही है तब क्या होगा तब उसका बेटा कैसा बर्ताव करेगा उसके बारे में क्या सोचेगा यही सब सोच कर उसका मन बैठ जाता था,,,, लेकिन जो काम हो घर में नहीं कर पाती थी वह खुद के लिए अद्भुत कार्य को अपनी क्लास में कर जाती थी अपने विद्यार्थियों के सामने,,,।
एक दिन वह अपने विद्यार्थियों को पढ़ा रही थी,,, और ब्लैक बोर्ड पर कुछ लिख रही थी उसे इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसके लिए एकदम सहज क्रिया को उसके जवान विद्यार्थी वासना भरी नजरों से देख रहे थे क्योंकि जिस तरह से वह अपना हाथ ऊपर करके ब्लैक बोर्ड पर चौक से कुछ लिख रही थी उसकी इस क्रिया पर उसके नितंबों का आकार कुछ ज्यादा ही उभर कर सामने नजर आ रहा था,,, और वैसे भी सुगंधा की आदत थी वह साड़ी को कमर पर एकदम कसकर बांधती थी जिसकी वजह से उसके नितंबों का आकार साड़ी के ऊपर से भी झलकता रहता था,,, और उसकी यही आदत मर्दों की कमजोरी बन जाती थी,,, और इस समय सुगंधा का यह रूप क्लास के कुछ आवारा लड़कों की आंखें सेंकने का काम कर रही थी,,,, अपनी टीचर की खूबसूरती और उसके अंगों का कटाव उभारओर मरोड़ देखकर विद्यार्थियों के मुंह से गर्म आ निकल जाती थी,,, और वह आवारा लड़के दूसरी बेंच पर बैठकर यही सब देखा करते थे उन लोगों को सुगंधा क्या पड़ता है इससे कोई मतलब नहीं था उन लोगों को मतलब था सिर्फ सुगंधा की खूबसूरती को अपनी आंखों से देखने का उसके खूबसूरत बदन के रस को अपनी आंखों से पीने का जो कि वह बखूबी कर रहे थे,,,।
जिस तरह से सुगंधा चौक से ब्लैक बोर्ड पर एक-एक शब्द को लिख रही थी उसके हाथ के झटका के साथ-साथ उसके बदन में भी लहर उठ रही थी उसके नितंबों में एक अद्भुत तरीके की थिरकन हो रही थी मानो कि जैसे कोई शांत नदी में कंकड़ फेंकने पर लहर उठती है ठीक उसी तरह से सुगंधा के नितंबों में भी लहर उठ रही थी जिसे देखकर आगे बेंच पर बैठे लड़कों का लंड खड़ा हो चुका था,,,, उनमें से एक लड़का धीरे से दूसरे के कान में बोला,,,।
बाप रे मैडम की गांड तो देख मेरा तो लंड खड़ा हो गया है,,,
मेरा भी यही हाल है यार बस एक बार डालने का मौका मिल जाए तो समझ लो जिंदगी सफल हो गई,,,।
(दोनों आपस में इस तरह से बात कर रहे थे और आगे ब्लैकबोर्ड पर लिख रही सुगंध को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था बस उसे इतना ही एहसास हो रहा था कि कोई बातें कर रहा है लेकिन क्या बातें कर रहा है किसके बारे में बातें कर रहा है यह उसे नहीं मालूम था तो वह धीरे से नजर घुमा कर उन दोनों की तरफ देखी तो उसके होश उड़ गए पहले तो उसे पता नहीं चला लेकिन जैसे ही उन लड़कों की नजरों का पता चला सुगंधा के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी क्योंकि वह लड़के प्यासी नजरों से उसके नितंबों के उभार को ही देख रहे थे,,,, उन लड़कों की नजरों को देखकर सुगंधा कुछ बोल नहीं पाई और वापस ब्लैक बोर्ड पर सहज होकर लिखने का नाटक करने लगी लेकिन अब उसके कान खड़े हो चुके थे वह उन लड़कों की बातों को सुनना चाहती थी क्योंकि उन दोनों की नजरे उसकी गांड पर ही टिकी हुई थी और इतना तो वह समझता ही थी कि ऐसा जवान लड़के कब करते हैं वह ब्लैकबोर्ड पर लिख रही थी तभी वह बड़े गौर से सुनने लगी और उसे हल्का-हल्का सुनाई देने लगा,,,)
कसम से मैडम की गांड कितनी बड़ी-बड़ी है,,,,,
(उनमें से एक लड़का बोला और सुगंधा को केवल गांड कितनी बड़ी-बड़ी है इतना ही सुनाई दिया लेकिन उसे समझते देर नहीं लगी कि वह दोनों किसके बारे में बात कर रहे थे वह जान गई थी कि वह लड़के उसके बारे में ही बातें कर रहे थे एकदम खुलकर,,, इतना सुनकर सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा जहां एक तरफ उसे थोड़ा अजीब लग रहा था वहीं दूसरी तरफ लड़कों की बातें और उन दोनों की नजरों को देखकर उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,, वह धड़कते दिल के साथ हुआ ब्लैक बोर्ड पर इस तरह से लिखे जा रही थी और उन दोनों की बातें सुनी जा रही थी तभी उनमें से एक लड़का बोला,,,)
कसम से मुझे मिल जाए तो मैं तो मैडम की गांड दोनों हाथों से पकड़ कर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दुं,,,।
(उसे लड़के की पूरी बात एक-एक शब्द सुगंधा के कानों में एकदम साफ-साफ सुनाई दिया था और इसे सुनकर तो उसकी बुर का पूरा तालाब नमकीन खारे पानी से भर गया और उसमें से बहने भी लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सारे विद्यार्थी उसके बेटे की उम्र के थे उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था,,,उन, लड़कों की बात सुनकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी,,, तभी उसके मन में ख्याल आया कि क्यों ना वह जो युक्ति अपने बेटे पर आजमाना चाहती थी वही युक्ति अपने विद्यार्थियों पर आजमाए,,,, यह ख्याल उसके मन में आते ही उत्तेजना के मारे उसकी बुर फूलने पिचकने लगी और वह अपनी युक्ति को क्लास में ही आजमा लेना चाहती थी वह अपने विद्यार्थियों के चेहरे पर बदलते भाव को देखना चाहते कि वह देखना चाहती थी कि उसकी चूचियों को देखकर उसके विद्यार्थियों पर क्या प्रभाव पड़ता है और इसके लिए वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी इसलिए जैसे ही वह विद्यार्थियों की तरफ घूमी वह अपने हाथ से चौक के टुकड़े को नीचे गिरा दी,,,, और उसे उठाने के लिए नीचे झुक गई और झुकाने की वजह से जवानी से भरी हुई लबालब उसकी दोनों चूचियां ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने के लिए उतारू हो गई उसके साड़ी का पल्लू कंधे पर से नीचे गिर गया था जो की वह खुद ही जानबूझकर नीचे गिरती थी और कुछ सेकेंड के लिए वह चौक के टुकड़े को उठाने के लिए नीचे झुकी रह गई थी और इतना तो उन विद्यार्थियों के लिए बहुत था उन विद्यार्थियों की नजर से ही सुगंधा की जवानी से भरी हुई चूचियों पर गई उनके तो होश उड़ गए उनकी आंखें फटी के फटी रह गई और आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,,
सुगंधा उसे स्थिति में अपने आप को एक बार देखने लगी और नजर उठाकर उन विद्यार्थियों की तरफ देखने लगी जो कि वह विद्यार्थी उसी की तरफ देख रहे थे विद्यार्थियों की हालत को सुगंधा अच्छी तरह से समझ गई थी,,वह साफ तौर पर देख पा रही थी कि विद्यार्थियों के चेहरे का रंग उड़ चुका था उनकी आंखों में वासना की चमक एकदम साफ नजर आ रही थी वह एकदम भूल चुके थे कि जिसे देखकर वह इतना उत्तेजित हो रहे हैं वह सही मायने में उन लोगों की गुरु थी शिक्षिका थीं उन्हें शिक्षा देने वाली थी सही मार्गदर्शन करने वाली थी लेकिन जवानी से भरी हुई है खूबसूरत औरत अगर मर्दों की नजर में वासना भारी हो तो वह फिर किसी भी रिश्ते की रेखा में नहीं आती बल्कि वह केवल एक औरत ही बनकर रह जाती है और इस समय भी यहां भी यही हो रहा था वह एक शिकायत ही और क्लास में बैठे लड़के विद्यार्थी थे लेकिन शिक्षिका और विद्यार्थी के बीच का रिश्ता मानव खत्म हो चुका था वह लड़के वासना भरी नजरों से अपनी ही शिक्षिका की अपने ही मैडम की चूचियों को नजर भर कर देख रहे थे लेकिन इसका मलाल सुगंधा को बिल्कुल भी नहीं था बल्कि वह तो अंदर ही अंदर एकदम प्रसन्न नजर आ रही थी क्योंकि उसकी युक्ति एकदम सत प्रतिशत कम कर रही थी,,,, यह नजारा कुछ सेकंड का ही था हाथ में चौक लेकर वापस सुगंधा खड़ी हो गई और अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करने लगी और तिरछी नजर से उन लड़कों की तरफ देख भी रही थी चौकी अभी तक बदहवास नजरों से उसे ही देख रहे थे,,,, सुगंधा आगे कुछ बोल पाती या अपनी क्रियाकलाप का प्रदर्शन यहां पर कर पाती से पहले ही छुट्टी होने की घंटी बज गई,,,। और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा गिर चुका था,,,।