Incest मटकनी गांड का कमाल - Page 3 - SexBaba
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Incest मटकनी गांड का कमाल

सुगंधा को ऐसा महसूस हो रहा था कि दूसरे लड़कों की तरह उसका बेटा भी औरतों के अंग वस्त्र को देखकर उत्तेजित हो रहा है क्योंकि बार-बार उसकी नजर अपने बेटे के अंडरवियर की तरफ जा रही थी जो की सहज रूप से अंडरवियर में इधर-उधर होने की वजह से उसमें थोड़ी सी हलचल होने लगी थी जिसकी वजह से उसके अंडरवियर का आकार थोड़ा सा बढ़ गया था जिसे देखकर सुगंधा का रोम रोम पुलकित होने लगा उत्तेजित होने लगा,,,, क्योंकि उसे ऐसा ही लगने लगा था कि दूसरे लड़कों की तरह उसका बेटा भी उसकी चड्डी को देखकर उत्तेजित हो रहा है और न जाने क्यों सफलता इस बात से अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रही थी,,,।

लेकिन अंकित के मन में ऐसा कुछ भी नहीं था यह बात को अच्छी तरह से जानते हुए कि उसके हाथ में जो गीला कपड़ा आया था उसकी मां किया उसकी बहन की चड्डी थी इसका एहसास होने पर भी उसके बदन में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं आया वह पूरी तरह से सहज था और उसी तरह से औपचारिक रूप से अपनी मां से बात करते हुए बाल्टी में वापस हाथ डालकर अपनी मां की ब्रा को हाथ में ले लिया और इतना तो उसे पता ही था कि यह उसके हाथ में जो कपड़ा आया है वह औरतों को पहनने वाला बना था जिसे पहनकर औरतें अपनी चूचियों को अपनी पकड़ में रखती हैं लेकिन उसे भी सहज रूप से अंकित अपने हाथ से निचोड़ कर उसका पानी बाहर निकाल कर उसे रस्सी पर डाल दिया था

लेकिन यह देखकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी क्योंकि जिस तरह से संजू ने उसकी ब्रा के दोनों कप को अपने दोनों हथेलियां में लेकर उसे दबा दबा कर उसमें से पानी निकला था यह देखकर उसके बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी थी वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी क्योंकि वह कल्पना करने लगी थी कि मानो जैसे उसका बेटा खुद उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथों में लेकर जोर-जोर से दबा रहा है,,, और इस तरह की कल्पना उसकी बुर से पानी की झड़ी बरसा रही थी,,,,।

अंकित ठीक उसी तरह से अपनी बहन की भी ब्रा और पैंटी को हाथों में लेकर उसमें से पानी निचोड़ कर रस्सी पर डाल दिया था सूखने के लिए,,,,, अंकित ने अपना काम कर दिया था लेकिन उसकी मां शून्य मनस्क होकर एकदम से मूर्ति बनी वहीं खड़ी की खड़ी रह गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कहां करें उसके बाद में उत्तेजना का एहसास साथ झलक रहा था लेकिन अंकित एक औरत के बदन में उत्तेजना के असर को उसके चिन्ह को पहचानने के लिए पूरी तरह से परीपकव नहीं था,,, या यूं कह लो की औरतों को समझने के लिए अभी वह पूरी तरह से नादान था,,,,

ठीक उसकी आंखों के सामने उसकी मां खड़ी थी जो की पूरी तरह से उत्तेजित होकर चुदवासी हो चुकी थी जिस तरह का हलचल उसके बदन में अपना असर दिख रहा था जवानी कर मार रही थी वह ऐसी हालत में बहकने के लिए पूरी तरह से तैयार थी,,,, वह केवल इंतजार कर रही थी कि कोई उसकी तरफ आगे बढ़े और उसने अपनी बाहों में रहकर उसकी जवानी से खेल यहां तक की पल भर में ही वह अपने बेटे के बारे में कल्पना करने लगी थी की खास उसका बेटा उसके अंतर मन को समझ पाता और आगे बढ़ाकर उसे अपनी बाहों में लेकर उसे जी भर कर प्यार करता तो शायद आज वह अपने बेटे के लिए अपनी जवानी के लिए अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी साड़ी उठाकर अपनी मदहोश जवानी को उसके सामने परोस देती,,,,

लेकिन यह केवल सुगंधा के मन का कपोल कल्पना थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसके बेहद करीब एक जवान लड़का तथा जो जवानी से भरा हुआ था और जिस तरह से जवान उसके चेहरे पर झलक रही थी सुगंधा को पूरा विश्वास था कि अगर ऐसी हालत में उसका बेटा उसके साथ संबंध बनाए तो बरसों की प्यास को बुझा सकता है,,,

लेकिन इस समय सब कुछ निरर्थक था क्योंकि उसके बेटे में औरत के प्रति बिल्कुल भी आकर्षण नहीं था,,,। यहां तक की उसकी आंखों के सामने पूरी तरह से जवानी से भरी हुई बेहद खूबसूरत औरत खड़ी थी लेकिन फिर भी उसके प्रति उसके मन में उसके तन-बदन में बिल्कुल भी एहसास या जिज्ञासा नहीं हो रही थी हालांकि उसके अंडरवियर का उभार कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था और इसी बात से सुगंधा काफी प्रभावित और प्रसन्न नजर आ रही थी,,, क्योंकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी पेंटिं और ब्रा को देखकर कभी उसके बेटे के लंड का उभार बढ़ने लगा है,,, और अपने बेटे के अंडरवियर में बढ़ते हुए लंड के ऊभार को वह अपने लिए आशा की किरण समझ रही थी,,,,।

अंकित अपना काम करने के बाद बाल्टी को अपने हाथ में उठा लिया और,,, अपनी मम्मी से बोला,,,

लो तुम्हारा काम मैंने कर दिया हूं,,,,( अंकित की बात सुनते ही सुगंधा की तंन्दा भंग हुई और वह एकदम से अंकित की तरफ तो नजर को हल्की सी नीचे की तरफ करके उसके अंदर बियर को देखने लगी जिसमें अच्छा खासा उभार बना हुआ था उसकी सांसे अभी भी ऊपर नीचे हो रही थी,,, वह अपने हाथ में लिया हुआ बाल्टी अपनी मां की तरफ बढ़ाते हुए बोला,,) लो इसे पकड़ो,,,,

( अंकित की इस बात को सुनकर सुगंधा को ऐसा एहसास होने लगा कि मानो जैसे उसका बेटा उसे बाल्टी नहीं बल्कि अपना लंड पकड़ने के लिए बोल रहा है फिर भी वह अपने जज्बात पर काबू करते हुए अपनी सांसों को दुरुस्त करने लगी थी और संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और जल्दी से जाकर नाश्ता तैयार करो मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं,,,।

(सुगंधा एकदम से अपने बेटे के आकर्षण में खो चुकी थी वह बिना कुछ बोले अपने बेटे के हाथ में से बाल्टी को ले ली और मुस्कुराते हुए छत से नीचे आ गई और अंकित वापस कसरत करने लगा,,, सुगंधा केवल अपने बेटे के अंडरवियर के हल्के से बढे हुए उभार को देखी थी जोकी शाहजिक रूप से था,,,

निश्चित रूप से अगर सुगंधा अपने बेटे के उत्तेजित टनटनाए हुए लंड को देख लेती तो जरूर उसे अपनी बुर में लेने के लिए उतावली हो जाती,,,, लेकिन फिर भी छत पर जो कुछ भी हुआ था उसके चलते सुगंधा के तन बदन में अजीब सी उलझन पैदा हो गई थी जिसके चलते बाहर सीधा बाथरूम में प्रवेश कर गई थी और वहां जाकर के अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी उंगली से अपनी बुर की गर्मी को शांत करने की नाकाम कोशिश कर रही थी,,,।

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सुगंधा जिस स्थिति से गुजर रही थी वह बेहद नाजुक स्थिति थी,,, ऐसे में किसी भी औरत का कदम जगमगा जाना लगभग निश्चित ही होता है,,,, और ऐसा कुछ होगा सुगंध को भी पक्का यकीन नहीं था वह भी पुरुष के प्रति आकर्षित हो रही थी,,, अपने बेटे के गति ले बदन को देखकर तो उसके मन में और भी ज्यादा हलचल होने लगी,,,,

वह अपने बेटे को ऐसे देख रही थी मानो जी से पहली बार अपने बेटे को देख रही हो लेकिन पहले जिस तरह से देखी थी और अब देखने में जमीन आसमान का फर्क हो चुका था पहले वह मां के रूप में अंकित को एक बेटी के रूप में देखी थी लेकिन अब वह एक औरत के रूप में एक औरत की तरह ही अपने बेटे को एक मर्द की तरह देख रही थी अपने बेटे में उसे एक जवान मार देना जरा रहा था जो किसी भी औरत की प्यास बुझाने में पूरी तरह से सक्षम था,,,।

अपने बेटे की गठीले बदन को प्यासी नजरों से देखने पर उसके मन में भी अभिलाषा जागने लगी थी,,, और औपचारिक रूप से अंकित के अंडरवियर में हो रही हलचल को उसके उभार को सुगंधा गलत नजरिया से देख कर उसका गलत ही अर्थ निकाल ली थी,,, सुगंधा को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी उपस्थिति में उसका बेटा उत्तेजित हो रहा है और इसी के चलते वह अपने मां पर काबू नहीं कर पाई और छत से नीचे आते ही तुरंत बाथरूम में घुसकर अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बुर में उंगली डालकर अपनी प्यासी बुर की प्यास बुझाने की भरपूर कोशिश करने लगी लेकिन अब यह प्यास पूरी तरह से भड़क चुकी थी,,, जोकी उंगली से बुझने वाली नहीं थी,,,,,

अब तो ऐसा लगता था कि जैसे सुगंधा को रात होने का ही बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता था,,, टीवी बंद होते ही वह अपने कमरे में चली जाती थी और कमरे में जाते ही अपने सारे वस्त्र उतार कर संपूर्ण रूप से नंगी हो जाती थी और बिस्तर पर अंगड़ाइयां लेते हुए अपने ही नाजुक अंगों से खेलती थी और अपनी बुर में एक उंगली नहीं बल्कि दो दो उंगली डालकर अपनी प्यास बुझाने की भरपूर कोशिश करती थी,,, लेकिन निरंतर यह प्यास बढ़ती जा रही थी इसका कोई हाल उसे नजर नहीं आ रहा था उसकी मन पुरुष संसर्ग के लिए तड़प रहा था,,,

लेकिन वह दूसरी औरतों की तरह नहीं थी उन औरतों में से नहीं थी जो अपनी प्यास बुझाने के लिए किसी भी मर्द का सहारा ले लेती थी पैशे से वह शिक्षिका थी,,, अपनी स्थिति को देखते हुए सुगंधा अपने मन में आए इस तरह के विचार को रफा-दफा करते थे लेकिन बार-बार उसका मन उसी तरफ आकर्षित होता था इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी भरी जवानी में वह पति के सुख से वंचित हो चुकी थी फिर भी जैसे तैसे करके वह इतने बरस निकाल ली थी लेकिन अब बरसों से दबी हुई आज भड़क चुकी थी उसके बदन की चिंगारी अब शोले का रूप ले रही थी वह ऐसे मर्द की तलाश में थी जो उसकी प्यास बुझा सके उसकी आग को शांत कर सके,,,

और जब इस तरह का ख्याल आता था तो न जाने क्यों उसकी आंखों के सामने उसका बेटा ही नजर आता था न जाने क्यों उसे ऐसा लगने लगा था कि उसकी जवानी कृपया बुझाने का सही हकदार उसका बेटा ही है,,,। लेकिन जब कभी भी उसके मन में इस तरह का ख्याल आता था तो उसके मन में बहुत ग्लानी होती थी उसे अपने आप पर ही बहुत गुस्सा आता था,,, वह अपने आप को धिक्कारने लगती थी वह अपने आप को कोसने लगती थी कि इस तरह का ख्याल भी उसके मन में क्यों आया,,, वासना उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से छा चुका था लेकिन फिर भी वह वासना में इस कदर अंधी भी नहीं हो चुकी थी कि वह अपनी प्यास बुझाने के लिए अपने बेटे का सहारा ले,,,

मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को वह तार तार नहीं करना चाहती थी,,,, इसलिए इस तरह के ख्याल पर वह‌ पुर्णविराम लगा देती थी और दोबारा इस तरह का ख्याल अपने मन में ना आए इसलिए कम भी खा लेती थी लेकिन फिर दूसरे दिन जब भी उसके दिलों दिमाग पर वासना का भूत सवार होता था तब उसकी आंखों के सामने फिर उसके बेटी का अर्धनग्न शरीर नजर आने लगता था उसके अंडरवियर का उभार नजर आने लगा है पर वह अपने मन में सोचने लगती थी कि उसके अंडरवियर में उसका लंड कैसा दिखता होगा कैसा होगा खड़ा होने के बाद उसकी स्थिति क्या होती होगी कितने इंच का होगा क्या वह किसी औरत की प्यास बुझाने में सक्षम होगा कि नहीं यही सब सोचकर वह अपनी बुर को पूरी तरह से गीली कर लेती थी और फिर अपनी प्यास बुझाने के लिए अपनी उंगलियों का सहारा लेती थी,,,,।

और यही स्थिति तृप्ति की भी थी वह भी अब बेचैन रहने लगी थी संदीप की हरकत से जहां एक तरफ वह परेशान थी वहीं दूसरी तरफ उसे उसकी हरकत आनंददायक भी लग रही थी हालांकि उसने संदीप से बातचीत करना बंद कर दी थी उसे अब डर लगने लगा था संदीप के सामने आने में,,,, और संदीप इस बात से पूरी तरह से परेशान था,,,,

वह किसी भी तरह से तृप्ति से बात करना चाहता था उससे माफी मांगना चाहता था,,, क्योंकि वह अपनी गलती की वजह से कीर्ति जैसी खूबसूरत लड़की को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था हालांकि उसका मकसद तृप्ति के खूबसूरत बदन को प्राप्त करना ही था लेकिन फिर भी वह दोस्ती दिनों के लिए अपने दिमाग से यह बात को निकाल दिया था और किसी भी तरह से वह तृप्ति से मिलकर माफी मांग कर उसे फिर से दोस्ती का रिश्ता आगे बढ़ना चाहता था क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि अगर एक बार फिर से तृप्ति उससे बातचीत करना शुरू कर देगी तो वह एक बार जरूर बातचीत के जरिए अपनी हरकतों की जरिए उसकी दोनों टांगों के बीच आराम से पहुंच जाएगा क्योंकि उसने भी तृप्ति की स्थिति को भांप लिया था ,,,

वह भी समझ गया था कि उसकी हरकत से तृप्ति को भी आनंद प्राप्त हो रहा था,,,, और तृप्ति से बातचीत करने का मौका उसे जल्द ही प्राप्त हो गया,,,, वह ट्यूशन से लौट रही थी और रास्ते में संदीप उसका इंतजार कर रहा था और जैसे ही तृप्ति उसके पास से गुजरने लगी वह ठीक उसके साथ चलना शुरू कर दिया अपने करीब संदीप को इस तरह से चलता हुआ देखकर वह पल भर के लिए घबरा गई,,,, और एकदम से चौंकते हुए बोली,,,।
 
संदीप तुम,,, अप किस लिए मेरा पीछा कर रहे हो मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है,,,

अरे तुम्हें मुझसे बात नहीं करनी लेकिन मुझे तो तुमसे बात करनी है ना,,,

किस लिए बात करनी है तुम्हारे मन में क्या है उस दिन मुझे पता चल गया,,,

अरे उसी बारे में तो मुझे बात करनी है,,,

क्या बात करनी है अब मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है,,,

अरे यार सुनो तो,,,(सड़क पर एक जगह घने पेड़ के नीचे एकांत पाकर वह तृप्ति का हाथ पड़कर उसे रोक लिया और तृप्ति संदीप की हरकत पर एकदम से चौंक गई और इधर-उधर देखने लगी उसे इस बात का डर था कि कहीं संदीप इस समय भी वही हरकत करना शुरू न कर दे इसलिए वह अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

देखो संदीप तुम्हारी यही बदतमीजी मुझे अच्छी नहीं लगती,,,

और इसीलिए तो मैं माफी मांगना चाहता हूं तुमसे,,,,(तृप्ति का हाथ उसी तरह से पकड़े हुए,,) मुझे मेरी गलती का एहसास है,,,, मुझे भी नहीं मालूम की वह सब कैसे हो गया इसलिए तो मैं तुमसे माफी मांगने के लिए तुम्हारी आगे पीछे घूम रहा हूं और तुम होगी मुझे नजर बचाकर हमेशा भाग जाती हो,,,

भाग ना जाऊं तो और क्या करूं,,,(संदीप के हाथ से अपना हाथ छुड़ाने हुए लेकिन वह संदीप से बिल्कुल भी दूर जाने की कोशिश नहीं की बल्कि वही खड़ी रही) तुम्हारी हरकत के बारे में सोच कर मुझे कितनी शर्म आती है तुम्हें पता है अगर हम दोनों को कोई ने देख लिया होता तो,,, तुम्हारा तो कुछ नहीं बिगड़ता संदीप लेकिन मेरी इज्जत मिट्टी में मिल जाती,,,,,,

मैं जानता हूं तृप्ति तुम जो कुछ भी कह रही हो उसमें सच्चाई है लेकिन इसमें भी सच्चाई है कि उसकी ना जाने मुझे क्या हो गया एकांत पाकर और तुम्हें अपने इतने नजदीक प्रकार मेरे होश उड़ गए थे मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया था,,, तुम्हारी खूबसूरती में मै पूरी तरह से डूब गया था,,,, तुम्हारा खूबसूरत चेहरा देखकर मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि मुझे क्या करना चाहिए और मैं भी वही किया जो प्रेमी प्रेमिका एकांत में करते हैं और सब कुछ अपने आप ही हो गया,,,,

अपने आप हो गया,,,, यह कहकर तुम अपनी गलती को छुपाने की कोशिश कर रहे हो संदीप,,,,

मैं अपनी गलती को छुपा नहीं रहा हूं बल्कि बता रहा हूं मेरी जगह कोई और लड़का होता तो वह भी वही करता जो मैंने किया हूं तृप्ति शायद तुम नहीं जानती कि तुम कितनी खूबसूरत हो तुम्हारी कद कट तुम्हारी बदन की बनावट किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने में पूरी तरह से सछम में और मैं बहक गया उसे समय मुझे सही गलत किसी भी चीज का अंदाजा नहीं था बस में तुम्हारी खुशबू को अपने अंदर महसूस करना चाहता था और मुझसे गलती हो गई,,,,, बस मुझे कहना चाहता हूं और मैं इसके लिए तुमसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं,,,(ऐसा कहते हुए संदीप सच में तृप्ति के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया,,,

(यह देखकर तृप्ति एकदम से हड़बड़ा गई वह अपने चारों तरफ नजर तोड़ा कर देखने लगी थी कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसे समय वहां से कोई गुजर नहीं रहा था इसलिए वह संदीप से बोली)

यह क्या कर रहे हो संदीप अगर कोई देख लेगा तो क्या समझेगा तुम फिर से मेरी बदनामी करने पर लगे हुए हो,,,,

नहीं मुझे माफी मांग लेने दो मुझसे गलती हुई है,,,(संदीप इस तरह से हाथ जोड़े हुए उसे विनती करते हुए बोला)

प्लीज संदीप अपना हाथ सही से करो,,,,।

(तृप्ति संदीप के भोले भाले चेहरे पर पूरी तरह से मोह गई थी,,,,,, उसके जाल साज बातों में पूरी तरह से आ चुकी थी,,, इसमें तृप्ति की गलती नहीं थी,,, क्योंकि वह थी भी तो एक औरत ही और औरत का स्वभाव होता है अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर प्रसन्न हो जाना और वह तारीफ भले ही कोई भी कर रहा हो कुछ देर पहले ही तृप्ति को अच्छी तरह से मालूम था कि संदीप ने उसके साथ जो कुछ भी किया था वह गलत था लेकिन उसकी चिकनी चुपड़ी बातों में आकर उसे लगने लगा था कि यह उसकी खूबसूरती का ही परिणाम था जो संदीप को,,,,,,, असली हरकत करने पर मजबूर कर दी थी तृप्ति को संदीप की बात सुनकर इस बात का एहसास हो रहा था कि वह वाकई में बहुत खूबसूरत है इसलिए मन ही मन संदीप की बातों से प्रसन्न भी हो रही थी और मन ही मन वह संदीप को माफ भी कर चुकी थी,,,,

तृप्ति की बात सुनने के बाद भी वह उसी तरह से हाथ जोड़े खड़ा था तो खुद तृप्ति उसके हाथ पैर हाथ रखते हुए उसे नीचे कर दी तृप्ति की हरकत पर संदीप को इस बात से संतुष्टि महसूस हुई की तृप्ति ने उसे माफ कर दि है,,, लेकिन फिर भी वह इस तरह से उदास चेहरा बनकर खड़ा रहा तो तृप्ति कुछ देर शांत रहने के बाद बोली,,,)

चलो ठीक है इस बार तो मैं तुम्हें माफ कर देती हूं लेकिन आइंदा इस तरह की गलती नहीं होनी चाहिए,,,

क्या सच में तुमने माफ कर दी,,,(संदीप एकदम खुश होता हुआ)

हां मैं तुम्हें माफ करती लेकिन यह तुम्हारी आखरी गलती होगी अगर इसके बाद कोई भी गलती करे तो फिर मुझे कोई भी वास्ता नहीं होगा,,,,

बिल्कुल नहीं होगा तृप्ति,,, एक बार जो गलती हो गई मैं उसे दोहराना नहीं चाहता क्योंकि मैं तुम जैसी दोस्त को खोना नहीं चाहता,,,,,,(इतना सुनकर तृप्ति के चेहरे पर मुस्कान पर मिलेगी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर संदीप अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान देखकर मुझे अब जाकर खुशी मिल रही है और खुशी इस बात की कि तुम मेरे से फिर से दोस्ती कायम रख रही हो आज जाकर भगवान के दर्शन करूंगा,,,।

भगवान के दर्शन लेकिन क्यों ,,?(तृप्ति मुस्कुराते हुए बोली)

मैं भगवान से प्रार्थना किया था कि तुम अगर मान जाओगी तो में भगवान के दर्शन करने मंदिर जाऊंगा,,,,

(तृप्ति उसकी बात सुनकर हंसने लगी,,,, संदीप पूरी तरह से अपनी चिकनी चुपड़ी बाद में तृप्ति को बहला लिया था और उसकी अश्लील हरकत के बावजूद भी अब तृप्ति एक बार फिर से उसके साथ दोस्ती का रिश्ता रखने के लिए तैयार हो चुकी थी फिर दोनों मुस्कुराते हुए अपने रास्ते पर चले गए,,,,,,,.
 
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रात को खाना बनाते समय सुगंधा के मन में अजीब सी हलचल हो रही थी और यह हलचल किसी और को लेकर नहीं बल्कि अपने ही बेटे को लेकर हो रही थी क्योंकि अब अपने बेटे को देखने की नजरिया उसकी पूरी तरह से बदल चुका था अब वह अंकित में अपना बेटा नहीं बल्कि एक मर्द तलाशती थी जो उसकी इच्छाओं की पूर्ति कर सके उसे संतुष्ट कर सके लेकिन इस बात से अंकित पूरी तरह से अनजान था उसे तो इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसकी मां किसी राह पर चल पड़ी है वह तो अपनी ही मस्ती में रहता था,,,, औरतों के प्रति उसने कभी भी अपना नजरिया गलत रखा ही नहीं वह औरतों को इज्जत की नजर से देखा था चाहे घर पर हो या चाहे घर के बाहर सिर्फ एक बार उसके मन में उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हुई थी जब किराणा की दुकान पर अनाज लेते समय एक औरत अपने पैसे उठाने के लिए नीचे झुकी थी और झुकता समय उसका पिछवाड़ा पूरी तरह से अंकित के लंड से जाकर स्पर्श हो गया था उसी समय अंकित के तन बदन में एक चिंगारी से फूटी थी और वह उस औरत को अजीब सी नजर से देखता रह गया था जब तक कि वह उसकी नजर से ओझल नहीं हो गई थी,,,, लेकिन फिर भी अंकित के मन में उसे औरत के प्रति जिस तरह का पल भर का आकर्षण था उसके परिणाम स्वरुप उसके मन में किसी भी प्रकार की वासना और दुषणता अपना घर नहीं कर गई थी जिसके चलते उसे अपनी वासना की पूर्ति के लिए अपने हाथ का सहारा लेकर मूठ मारना पड़ जाता वह इस दुष्परिणाम से पूरी तरह से बचा हुआ था अपनी मां की तरह बिल्कुल भी नहीं की रोज रात को,,, अपनी वासना की पूर्ति के लिए अपने हाथ का सहारा लेकर अपनी बुर से पानी निकाले,,,,।

सारे काम निपटाकर सुगंधा तैयार होकर स्कूल जाने के लिए निकली वह अपना पर्स लेकर घर से बाहर निकली और घर बंद करके दरवाजे पर ताला लगा दी आज उसे थोड़ा देर हो चुकी थी वह जल्दी-जल्दी सड़क पर चलते हुए बार-बार अपने हाथ में बंधी हुई घड़ी में समय देख रही थी आज वह पूरा 10 मिनट लेट हो चुकी थी,,,, आज उसे कोई रिक्शा भी नहीं मिल रहा था तो थक हार कर वह बस स्टैंड पर पहुंची ही थी कि वहां पर तुरंत बस आ गई और वह बस में ही चढ़ गई,,,।

बस में भीड़ कुछ ज्यादा ही थी जिसे तैसे करके वह आगे की तरफ चलते हुए बीच में जाकर खड़ी हो गई तभी बस एक जगह पर रुकी और वहां पर दो-तीन लड़के बस में चढ़ गए और कुछ लोग नीचे उतर गए वह तीनों लड़के अंकित के ही उम्र के थे अब तक सब कुछ ठीक-ठाक था लेकिन देखते ही देखते वह लड़की एकदम सुगंधा के करीब पहुंच गए,,,, सुगंधा आगे की तरफ मुंह करके बस का हैंडल पकड़ कर खड़ी थी और बस जिस तरह से चल रही थी मुझे नीचे खड़े आते थे तब उसकी भारी भरकम गांड अजीब सा उछाल लेती थी जिसकी वजह से उसकी गांड में हलचल होने लगती थी और वैसे भी सुगंधा कमर पर साड़ी को थोड़ा कस के ही बांधती थी जिसकी वजह से उसकी गोल-गोल गांड कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आती थी,,,,, और ऐसे माहौल में तीनों लड़कों की नजर सुगंधा की खूबसूरती पर पड़ गई कोई उसकी चिकनी पीठ को देख रहा था तो कोई उसकी गोल-गोल गांड के उभार को,,, देखते देखते वह तीनों लड़के भीड़भाड़ का फायदा उठाते हुए,,, वह तीनों लड़के सुगंधा की बेहद करीब पहुंच गए थे उनमें से आगे वाला लड़का कुछ ज्यादा ही उत्साहित हो जाता था जब उसकी आंखों के सामने बस में ऐसी खूबसूरत औरत नजर आती थी और ऐसे माहौल में वहां ऐसी खूबसूरत औरतों के अंगों को छूने का आनंद लेता था और खास करके इसी सुख को प्राप्त करने के लिए तीनों बस का सफर करते थे,,,,।

उन तीनों में से आगे वाला लड़का बस का हैंडल पकड़ कर देखते ही देखते सुगंधा के बेहद करीब पहुंच गया था और वह दोनों लड़के भी उसके ठीक पीछे खड़े थे,,,, तभी उनमें से एक लड़का आगे वाले लड़के से बोला,,,।

बाप रे देख रहा है कितनी खूबसूरत है आज तो अपनी चांदी ही चांदी है मैंने आज तक ऐसी खूबसूरत औरत नहीं देखा,,,

हां यार तू सच कह रहा है इसके बदन की खुशबू ही मेरे दिमाग में नशा सा घोल रही है,,,

(तभी पीछे वाला लड़का बोला)

यार इसकी गांड तो देख मेरी तो हालत खराब हो रही है,,,,

(पीछे वाले लड़के की बात सुनकर वह दोनों एकदम से उत्साहित होते हुए बोले,,)

कसम से ऐसी औरत मिल जाए ना तो दिन भर कपड़े पहनने ना दु्,,,,

(वह तीनों आपस में धीरे-धीरे बातें कर रहे थे लेकिन इन तीनों की बात सुगंधा को अच्छी तरह से सुनाई दे रही थी,,, वह तीनों की बातों को सुनकर एकदम से घबरा गई थी उसे इतना तो समझ में आ गया था कि वह तीनों उसी के बारे में बातें कर रहे थे,,, लेकिन फिर भी सब कुछ जानते हुए वह अनजान बनी खड़ी रही क्योंकि वह जानती थी कि जल्द ही उसका स्टॉप आ जाएगा और वह उतर जाएगी ऐसे में वह उन तीनों से उलझना नहीं चाहती थी उसने तो अभी तक तीनों की तरफ देखा भी नहीं था कि वह कैसे थे किस उम्र के थे,,,,,,, लेकिन तभी तीसरे नंबर वाला लड़का बोला,,,)

यार सुमित मुझे तो यह तेरी मां की तरह लग रही है तेरी मां की उम्र कि भी है,,, बस यह तेरी मां से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत है,,,

हां यार सुमित यह सच कह रहा है पीछे से बिल्कुल तेरी मां की तरह लगती है बस इसकी गांड कुछ ज्यादा बड़ी है,,,

(उन दोनों की बात सुनकर आगे वाला लड़का बोला,,,)

मादरचोद तुम लोग मेरी मा को देखते रहते हो क्या,,?

तू तो ऐसा कह रहा है जैसे कि तू हम लोगों की मां को नहीं देखता मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तु सुबह-सुबह क्यों मेरे घर आ जाता है,,,,,, मेरी मां बिना कपड़ों के नहाती है इसके लिए ना उसे नंगी देखने के लिए आता है,,,,

तो क्या करूं तेरी मां को देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,

तो यही तो बात है जैसे तेरा लंड खड़ा होता है वैसे हम लोगों का भी तेरी मां को देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,,

(तीनों को आपस में इस तरह से एक दूसरे की मां के बारे में गंदी बातें करता हुआ देखकर सुगंधा के तो होश उड़ गए उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि कोई इस तरह से अपनी मां के बारे में गंदी बातें सुन सकता है और कर भी सकता है,,,, वह हैरान थी की तीनों एक दूसरे की मां के बारे में गांधी से गंदी बातें कर रहे थे लेकिन फिर भी तीनों में से किसी को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी तीनों आराम से एक दूसरे की बातें सुन रहे थे,,,, उन तीनों की बातें सुनकर सुगंधा के मन में अजीब सी उलझन पैदा हो रही थी उसके तार बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी ना चाहते हुए भी उसका बदन उत्तेजित हो रहा था,,, तभी उसके कानों में उसके पास में जो लड़का खड़ा था उसकी बात सुनाई दी और उसकी बात को सुनकर उसके एकदम से होश उड़ गए,,,)

तुम दोनों बकवास बंद करो इस समय तो इस मक्खन मलाई की गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया,,,,, अभी अपने लंड को इसकी गांड से सटाता हूं,,,,।

(इतना सुनते ही सुगंधा के रीड की हड्डी एकदम सुनना पड़ गई उसके माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कोई इस तरह से बातें कर सकता है,,, और जो बात उसने कही थी उसके बारे में सोच कर ही उसकी हालत खराब हुए जा रही थी वह जाकर भी कुछ नहीं कर पा रही थी और मन ही मन मना रही थी कि जल्दी उसका स्टॉप आ जाए,,,, सुगंधा यही सब सो रही थी कि तभी बस वाले ने ब्रेक मारा और इसी का फायदा उठाते हुए उसके ठीक पीछे खड़ा लड़का एकदम से उसके बदन से सट गया और पेट में बना तंबू एकदम से उसके पिछवाड़े से सटा दिया और अपना एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया वह लड़का भीड़ बाढ़ का बराबर फायदा उठाते हुए सुगंधा के खूबसूरत है जिसमें पर अपना हाथ रख दिया था उसकी कमर पर हाथ रख दिया था उसकी चिकनी कमर जो की मक्खन की तरह एकदम फिसलन भरी थी उसे अपनी हथेली में रखकर दबा दिया था,,, और अपने लंड को एकदम से उसकी गांड से सटाकर हल्का सा धक्का दे दिया था,,,, उसे लड़के ने पल भर में ही अपना काम कर दिया था अगर उसे लड़के के मुंह से सुगंधा उसकी गंदी बात सुनी ना होती तो शायद उसे इस पर ब्रेक करने की वजह से एहसास भी ना होता,,, लेकिन वह अपनी कानों से उसे लड़के की हरकत के बारे में सुन ली थी इसलिए उसकी हरकत उसे एकदम साफ महसूस हुई थी उसे साफ महसूस हुआ था कि उसकी गांड के बीचो-बीच में पीछे खड़े लड़के का लंड एकदम से धंस गया था,,, और उसे लड़के की हथेली उसे अपनी कमर पर महसूस हुई थी जिसे उसे लड़के ने कमर पर रखकर हल्का सा मसल दिया था मानों जैसे किसी औरत को खुश करते हुए उसके साथ संभोग करते हुए उसकी कमर को दबोच लिया हो,,,,,,, उसे लड़के की हरकत से पल भर में ही सुगंधा की बुर पानी पानी हो गई थी,,, उसकी सांस एकदम से गहरी चलने लगी थी और वह एकदम से घबरा भी गई थी,,,, लेकिन फिर भी सुगंधा उस लड़के की हरकत से थोड़ा बहुत नाराज थी हालांकि इसकी हरकत से उन तीनों की बातों से उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उत्तेजना महसूस हो रही थी और इसके चलते ही उसे लड़के की हरकत की वजह से उसकी बुर पूरी तरह से पानी पानी हो गई थी,,,,वह वैसे तो बहुत शर्मीली किस्म की थी राह पर चलते समय किसी गैर मर्द से बात करना भी उसके लिए गवारा नहीं था,,,, लेकिन फिर भी हिम्मत दिखाते हुए वह धीरे से अपनी नजर को पीछे की तरफ घूमाकर वह अपने पीछे वाले लड़के से बोली,,,।

देख कर बेटा,,,,(वैसे तो सुगंधा उस लड़के से थोड़ा शख्ती से पेश आना चाहती थी लेकिन जैसे ही उसकी नजर उस लड़के पर पड़ी थी उसे अंकित याद आ गया था,,, वह लड़का एकदम उसके बेटे जैसा था अच्छे घर का लग रहा था और यही वजह थी कि सुगंधा के शब्दों में नर्मी आ गई थी और सुगंधा की बात सुनकर वह पीछे वाला लड़का भी बोला,,)

सॉरी आंटी वह कहने की एकाएक ड्राइवर ने ब्रेक लगा दिया इसके लिए,,,।

(वह लड़का भी अपने आप को शरीफ पेश करता हुआ एकदम शांति से जवाब देता हुआ बोला और आगे कुछ हो पता है इससे पहले ही सुगंधा का स्टॉप आ गया और सुगंधा भी मन ही मन भगवान को धन्यवाद देने लगी थी उसकी स्कूल आ गई थी और वह तुरंत बस में से नीचे उतर गई,, और वह तीनों लड़के हाथ मलते रह गए,,,)

...............................
 
बस से उतरने के बाद ही सुगंधा राहत की सांस ली थी,,, वह मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि अच्छा हुआ जल्दी से उसकी स्कूल आ गई थी,, वरना आज न जाने क्या होता उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे की उम्र के लड़के इस कदर गंदी हरकत करते होंगे क्योंकि उसने आज तक इस तरह की हरकत अपने बेटे की तरफ से तो नहीं देखी थी और ना ही कभी उसे उम्मीद थी कि उसका बेटा इस तरह की कोई हरकत करेगा,,,, बस में उसके पीछे तीन लड़के खड़े थे लेकिन वह अपने पीछे वाले लड़के को ही गौर से देख पाई थी जो की बिल्कुल उसके बेटे के ही उम्र का था,,,, उन तीनों की बातें सुनकर उसकी जो हालत हुई थी उसे बयां करना मुश्किल हुआ जा रहा था अभी पूरी तरह से जवान फूटी भी नहीं थी और उनके मन में इतनी गंदी-गंदी बातें चल रही थी किसी भी औरत को देखकर वह लोग गंदी हरकत करने के उतारू हो जाते थे जरा भी लाज शर्म डर नहीं था उन तीनों में वरना अगर ऐसा होता तो वह लड़का उसके बदन से सटने की कोशिश ना करता,,,,।

क्लास में पहुंच जाने के बावजूद भी उसके बदन में अजीब सी थरथराहट थी उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे अभी भी वह तीन लड़के उसके पीछे खड़े हो क्योंकि बार-बार वह पीछे मुड़कर देख ले रही थी,,,,,,, वैसे तो सुगंधा इससे पहले भी मर्दों की नजर को अपने बदन पर फिसलने की आदत से वाकिफ थी,,, और आते जाते कभी कबार अपने लिए मर्दों के द्वारा गंदी टिप्पणियों को भी सुन चुकी थी,,, लेकिन वह सब टिप्पणियां दबे श्वर में थी,,, जिसके कुछ शब्द ही उसके कानों तक पडते थे,,,, और सुगंधा उन शब्दों के हिसाब से अंदाज़ा लगती थी कि वह टिप्पणियां उसके बारे में ही थी,,,, लेकिन आज ऐसा पहली बार हुआ था कि कोई उसके बारे में खुलकर गंदे शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,, और वह भी कोई आदमी नहीं बल्कि उसके बेटे के उम्र का लड़का,,,,, इसीलिए तो वह एकदम हैरान थी,,,, जो कुछ भी हुआ था वह सब कुछ सुगंधा के सोच के परे था,,,, उसे इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि बस में उसके साथ इस तरह की हरकत हो जाएगी हालांकि वह इससे पहले भी कई बार बस का उपयोग कर चुकी थी,,, लेकिन इस तरह का अनुभव उसे कभी नहीं हुआ था हां इतना जरूर था कि बस में भीड़भाड़ की वजह से लोग एक दूसरे के स्पर्श होकर निकल जाते थे लेकिन इतनी गंदी हरकत आज तक उसके साथ किसी ने नहीं किया था,,,।

सुगंधा अपनी क्लास में कुर्सी पर बैठी हुई थी और अपने विद्यार्थियों को पाठ पूरा करने के लिए दे दी थी आज उसका पढ़ने का मन बिल्कुल भी नहीं था,,,, बार-बार उसका ध्यान बस वाले लड़कों की तरफ ही चला जा रहा था,,,,, उनकी हरकत के बारे में सोचकर उसके बदन में जहां एक प्रकार का डर फैल जाता था वहीं ना जाने क्यों उसकी दोनों टांगों के बीच की हलचल बढ़ जाती थी सुगंधा ने बस में भी महसूस की थी कि उसे लड़के की हरकत की वजह से उसकी पेंटिं पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,, और यही सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है जबकि जो कुछ भी हो रहा था वह सब कुछ उसकी इच्छा के विरुद्ध था अनजाने में हो रहा था फिर भी उसके बदन में उत्तेजना अपना असर क्यों दिख रही थी,,,,, यही सोच सोच कर वह हैरान हुए जा रही थी,,,।

जैसे तैसे करके रिशेष की घंटी बज गई,,, सुगंधा को अपनी दोनों टांगों की बीच की स्थिति से असहजयाता महसूस हो रही थी,,, उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी पेंटिं पूरी तरह से गीली हो चुकी थी गीली होने की वजह से उसमें चिपचिपाहट हो रही थी जिससे वह बहुत असहज महसूस कर रही थी,,,, इसीलिए घंटी बजते ही विद्यार्थियों से पहले सुगंधा अपनी जगह से खड़ी हुई और क्लास से बाहर निकल गई,,,, वह जल्दी-जल्दी बाथरूम के पास पहुंच गई और बाथरूम का दरवाजा खोलकर बाथरूम में प्रवेश कर गई,,,, बाथरूम का दरवाजा अच्छे से बंद कर लेने के बाद वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी कमर तक उठा दी और अपनी दोनों टांगों के बीच नजर नीचे करके देखी तो उसके होश उड़ गए,,, उसकी पैंटी आगे से पूरी तरह से भीग चुकी थी उसकी बुर ने कुछ ज्यादा ही पानी निकाल दिया था,,, ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे उस पर पानी गिरा हो,,,, वैसे तो उसकी इच्छा हो रही थी की पेंटिं निकाल कर अपने पर्स में रख ले क्योंकि पेंटी पहने हुए उसे बहुत ही ज्यादा असहजता महसूस हो रही थी,,,, लेकिन वह अपने घर पर नहीं बल्कि स्कूल के बाथरूम में थी इसलिए ऐसा करना उचित नहीं था वह धीरे से एक हाथ से अपने पेटी के आगे वाले इलास्टिक वाले रबड़ को पड़कर आगे की तरफ खींची और अंदर की तरफ देखने लगी उत्तेजना के मारे उसकी बुर कचोरी की तरह फुली हुई नजर आ रही थी,,,, अपनी बुर पर नजर पडते ही वह एक गहरी सांस ली और फिर पेटी के अंदर मुआयना करने लगी,,, बुर से निकला मदनरस पूरी तरह से चिपचिपाहट भरा हुआ था सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि यहां पर वह कुछ नहीं कर सकती अगर वह उसे धोने की कोशिश करती है तो उसकी पेंटिंग पूरी तरह से गिली हो जाएगी और फिर उसे और असहजता महसूस होगी,,,,,,।

अपनी गीली और कचोरी की तरह फुली हुई बुर को देखकर सुगंधा का मन अपनी बुर में उंगली करने को कर रहा था लेकिन इस समय उसके संस्कार और स्कूल की मर्यादा उसके हाथ को रोके हुए थे,,,, वह गहरी सांस लेते हुए अपनी पेंटी के छोर को दोनों हाथों से पकड़ कर,,, उसे घुटनों तक नीचे खींच दी और फिर बैठकर पेशाब करने लगी पल भर में ही उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद से सिटी की मधुर ध्वनि के साथ खारे पानी का फवारा निकाला और फिर सुगंधा राहत की सांस लेने लगी बस वाली हरकत की वजह से ही उसे आज बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह अपने आप को रोकी हुई थी पेसाब की तीव्रता इतनी तेज थी कि उसकी बुर से पेशाब की धार निकल कर सीधे बाथरूम के दरवाजे पर गिर रही थी,,, एक तरह से सुगंधा अपने पेशाब की धार से बाथरूम का दरवाजा भीगो रही थी,,,, ठीक से पेशाब कर लेने के बाद सुगंधा अपनी जगह पर खड़ी हुई और पैंटी को ऊपर कमर तक चढ़ा दी अभी तक वह उसके गीलेपन से परेशान थी लेकिन वह कुछ भी कर नहीं सकती थी इसलिए धीरे से नीचे साड़ी छोड़कर वहां अपने कपड़ों को दुरुस्त करके बाथरूम से बाहर निकली,,,, और अपना लंच बॉक्स लेकर स्टाफ रूम में चली गई,,, जहां पर पहले से ही नूपुर उसका इंतजार कर रही थी,,,, वैसे तो अगले साल ही नूपुर ने शिक्षिका के रूप में पद ग्रहण की थी और दो-तीन महीने ही हुए उसे सुगंधा से दोस्ती किए हुए हालांकि दोनों के बीच केवल स्टाफ रूम तक ही रिश्ता सीमित था,,, दोनों केवल लंच करते समय ही आपस में बातचीत किया करते थे और एक दूसरे को अपने लंच बॉक्स में से लाया हुआ खाना शेयर करते थे और दोनों के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं होती थी दोनों एक दूसरे के बारे में कुछ जानती भी नहीं थी बस एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा देती थी बस इतना ही रिश्ता दोनों में था और जैसे ही सुगंधा स्टाफ रूप में पहुंची नूपुर ने आवाज देकर सुगंधा को अपने पास बुला ली और फिर दोनों एक साथ लंच करने लगे,,,,।

सुगंधा को स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार था बहुत जल्दी से जल्दी घर पहुंच जाना चाहती थी क्योंकि उसके मन में अजीब सी हलचल हो रही थी और जैसे ही छुट्टी की घंटी बजी सुगंधा अपना पर्स लेकर स्कूल से बाहर निकल गई और ऑटो पकड़कर सीधा अपने घर पहुंच गई,,, घर पर पहुंचकर उसने जल्दी से दरवाजे पर लगा हुआ ताला खोला और फिर घर में प्रवेश करके दरवाजे को बंद कर दी और अपने पर्स को टेबल पर रखकर सीधा बाथरूम में घुस गई और बाथरूम का दरवाजा बंद भी नहीं की और अंदर घुसते ही अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर एकदम निर्वस्त्र हो गई एकदम नंगी,,,,, अपनी आखिरी वस्त्र अपनी पेंटिं को उतारते हुए वह पेंटी को ही घूर-घूर कर देख रही थी वह अभी तक पूरी तरह से गीली थी वह अपने हाथ में लेकर इधर-उधर घूमर पेटी को देखने के बाद उसे बाथरूम में नीचे फेंक दी और फिर अपनी दोनों टांगें हल्के से खोलकर अपनी नितंबों को आगे की तरफ ले जाकर वह अपनी बर को बड़े गौर से देखने लगी वह पूरी तरह से गुलाबी हो चुकी थी और,,,,, उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फूल भी गई थी सुगंधा अपनी हथेली को पूरी तरह से अपनी बर पर रखकर उसे अपनी हथेली में छुपा ली और उसे अपनी आंखों को बंद करके ऊपर नीचे करके रगड़ना शुरू कर दि,,,,।

अपनी हरकत से ही पल भर में उसके मुख से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,, वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी एक अद्भुत आनंद मिलता था उसे अपनी हरकत में वह अपनी हथेली को अपनी बर पर पूरी तरह से चिपक कर उसे पर दबाव बनाकर उसे ऊपर नीचे करके अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को रगड़ रही थी जिससे उसकी बुर पूरी तरह से गुलाबी हो चुकी थी और उसमें से मदन रस का बहाव निरंतर हो रहा था सुगंधा इतना तो समझ गई थी कि जिस तरह का खेल हुआ खेल रही है अब वापस कदम हटाना मुमकिन नहीं था क्योंकि उसकी जवानी की प्यास बुझ ही नहीं रही थी क्योंकि उसकी जवानी पूरी तरह से बेलगाम हो चुकी थी और यह लगाम किसी मर्दाना जोश से भरे हुए मर्द के हाथ में आने से ही उसकी प्यास बुझने वाली थी,,,,हांथ की उंगलियों से नही बल्कि टांगो के बीच लटक रहे मोटे मुसल से उसकी प्यास बुझने वाली थी और इस बात को भाभी अच्छी तरह से जानती थी लेकिन इस समय असहाय थी जवानी से भारी होने के बावजूद भी वह मोटे तगड़े लंड से वंचित थी वरना ऐसी जवानी प्रकार कोई भी औरतों मर्दों की लाइन लगाने में पूरी तरह से सक्षम थी,,, वैसे तो अपने लिए मर्दों की लाइन लगाना सुगंधा के लिए भी कोई बड़ी बात नहीं थी लेकिन संस्कार और मर्यादा भी कोई चीज होती है,,, वह अपने संस्कार और मर्यादा के विरुद्ध कोई कार्य करना नहीं चाहती इसीलिए तो वह अपनी जवानी की प्यास को अपनी उंगलियों का सहारा देकर बुझा रही थी,,,।

और इस समय भी वह एक साथ अपनी दो उंगलियों को अपनी कचोरी जैसी खुली हुई बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करना शुरू कर दी उसकी आंखें पूरी तरह से बंद थी टांगे दोनों खुली हुई थी और नितंबों का झुकाव आगे की तरफ था जिसे वह हल्के-हल्के आगे पीछे करते हुए अपनी उंगली को ही लंड समझकर मजा ले रही थी,,, इस समय घर में कोई नहीं था दरवाजा भी बंद था इसलिए वह अपनी आंखों को बंद करके गरमा गरम में शिसकारी की आवाज लेते हुए वह संभोग के सुख को महसूस करते हुए अपनी इच्छा की पूर्ति कर रही थी और देखते ही देखते उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और एक बार फिर से उसकी बुर से गरम लावा फूट पड़ा,,,।

एक तरफ जहां सुगंधा अपनी हरकत की वजह से शरीर में जिंदगी महसूस करती थी वही अपने मन में उठ रहे जवानी के तूफान से कहीं ना कहीं उसे भी आनंद प्राप्त हो रहा था,,, लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी जीवन और जवानी दोनों की डोर किस दिशा में जा रही है उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,, क्या करें क्या ना करें यह उसके समझ के पार था उसकी जवानी इस समय पानी की धार बन चुकी थी जो जहां जगह मिल रही थी उसी और खिंची चली जा रही थी,,, उसकी आंखों के सामने आने वाला जोशीला और घाटीला बदन का हर एक मर्द उसे अपने बिस्तर पर महसूस होने लगा था ना चाहते हुए भी वह चाहने लगी थी कि उसे भी बिस्तर पर एक मर्द की जरूरत है जो उसकी जवानी के रस को अपनी मर्दाना अंग से नीचोड सके,,,,।

उसके जीवन में सब कुछ बदल गया था रहन-सहन का तरीका देखने का तरीका यहां तक कि उसे अपने बेटे में भी एक मर्द नजर आने लगा था जो कि अंकित इस बात से पूरी तरह से अंजान था ,,,, वह तो अपने में ही मस्त रहता था उसे क्या पता कि उसकी मां के अंतर मन में किस तरह की हलचल मच रही है कई दिनों से वह किस तरह से अपने आप से ही जूझ रही है,,, और अगर शायद कोई जवान लड़का अपनी मां के अंतर्मन में हो रही हलचल को समझ लेता तो शायद बिस्तर पर वह कब का अपनी मां की दोनों टांगों के बीच होता ,,,

सुगंधा सब्जी काट रही थी,,,, शाम ढल चुकी थी और अंधेरा रोशनी को अपनी आगोश में लेकर चारों तरफ फैलने लगा था,,,, समय अपनी गति से चल रहा था लेकिन सुगंधा मानो स्थिर हो चुकी थी,,, अपने पति के गुजरने के बाद इस तरह से उसने अपनी जवानी को संभाल कर रखी थी और अपने अरमानों को दबाकर रखी थी एक गलती के चलते मन में दबी हुई जवानी की चिंगारी पूरी तरह से भड़क चुकी थी,,, निरंतर बार-बार अपने ही ख्यालों से वह अपनी पेंटिं को गीली कर ले रही थी,,,, वह अपनी बेटी के बारे में ही सोच रही थी कि तभी अंकित ठीक उसके सामने आकर बैठ गया और किताब खोलकर पढ़ने लगा अंकित को क्या पता था कि उसकी मां जवानी की लहरों में पूरी तरह से डूबती चली जा रही है वह अपने ख्यालों में खोया हुआ था और सुगंधा अपने ख्यालों में,,,, वह सब्जी काटते हुए अंकित को देख रही थी उसके भोले चेहरे को देख रही थी उसके गठीले बदन को देख रही थी,,,, उसका ध्यान और चित दोनों अंकित के ऊपर टिका हुआ था,,, अंकित इस बात से बेखबर था वह पढ़ाई कर रहा था और सुगंधा अपने मन की तपन को अपनी आंखों से सेंक रही थी,,, कि तभी हल्की सी दर्द है कि करहा की आवाज सुगंधा के मुंह से आई,,, अंकित की नजर तुरंत अपनी मां के ऊपर गई और उसने देखा तो दंग रह गया उसकी मां की उंगली और किसी कट गई थी वह तुरंत किताब एक तरफ रख कर अपनी जगह से खड़ा हुआ,,,

अरे यह क्या कर ली मम्मी तुमने,,,(इतना कहते हुए अंकित तुरंत अपनी मां के करीब आया और एकदम घुटनों के बल बैठकर अपनी मां का हाथ अपने हाथ में ले लिया और बिना कुछ सोचे समझे अपनी मां की कटी हुई उंगली को अपने मुंह में भर लिया,,,, और अपनी मां की उंगली से बह रहे खून को बंद करने की कोशिश करने लगा,,,, अंकित तो अपना काम कर रहा था वह पूरी तरह से परेशान हो चुका था वह जानता था कि उसकी मां को दर्द हो रहा होगा और एक बेटा होने के नाते अपना फर्ज निभा रहा था लेकिन सुगंधा जो उसकी मां थी अपने बेटे की यह हरकत पर पूरी तरह से रोमांचित हो उठी वह अपने बेटे की हरकत को एक मां के नजरिए से नहीं बल्कि एक औरत के नजरिए से देख रही थी,,,, अंकित की हरकत से वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी,,,,। जिस तरह से अंकित ने बिना कुछ सोचे समझे उसका हाथ पकड़ कर उसकी कटी हुई उंगली को अपने मुंह में डालकर चूस रहा था यह देखकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,, सुगंधा को इस समय अंकित में अपना बेटा नहीं बल्कि एक प्रेमी नजर आ रहा था जो उसका इतना ख्याल रखना था और यह ख्याल आते ही उसकी दोनों टांगों के बीच थरथराहट बढ़ने लगी वह मदहोश होने लगी सुगंधा की आंखों में खुमारी छाने लगी और वह मदहोश नजरों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी,,,,,,।

अब तक अंकित की नजर अपनी मां की खूबसूरत चेहरे की तरफ नहीं गई थी वह उसकी उंगली को मुंह में लेकर चूस रहा था उसका खून बंद करना चाहता था किसी भी तरीके से और उसे इस समय यही उपाय सबसे उचित लग रहा था,,,,, अंकित अपनी मां की उंगली को मुंह में लिए हुए तिरछी नजरों से अपनी मां की तरफ देखा तो देखा ही रह गया उसकी मां मंद मंद मुस्कुरा रही थी उसके होठों पर मादक मुस्कान थी और अंकित औरत की इस तरह की मुस्कान को समझने में सक्षम नहीं था वह अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर उसके चेहरे की रौनक देखकर ऐसा ही समझ रहा था कि मानो जैसे उसकी मां को उसकी हरकत से राहत मिल रही थी इसलिए वह भी अपनी मां की तरफ देखने लगा था अपने बेटे को अपनी तरफ देखा हुआ प्रकार सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी वह मदहोश होने लगी उसे ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा उसकी तरफ मदहोश नजरों से देख रहा है उसके बेटे की आंखों में उसे मदहोशी नजर आ रही थी वासना नजर आ रही थी जबकि उसका बेटा उसकी तरफ एक मर्द की तरह नहीं बल्कि एक बेटे की तरह ही देख रहा था,,,,।

अब कैसा लग रहा है,,,,(पल भर के लिए अंकित अपनी मां की उंगली को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर बोला और फिर वापस उसे अपने मुंह में डाल दिया इस दौरान वह अपनी नजरों को अपनी मां की खूबसूरत चेहरे से बिल्कुल भी नहीं हटाया था और यही अदा अंकित की सुगंधा के तन बदन में मदहोशी भर रही थी सुगंधा को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी बुर से पानी टपक रहा है उसकी पेंटि गीली हो रही थी,,, पल भर में ही सुगंधा की सांसे भारी होने लगी थी,,,, अपने बेटे के मुंह से आप कैसा लग रहा है सुनकर वह पूरी तरह से रोमांचित हो उठी थी उसके नस-नस में उत्तेजना पूरी तरह से असर दिख रही थी अगर इस समय उसका बेटा अपने होठों को आगे बढ़कर उसके होठों पर होंठ रखकर चुंबन करने लगता तो भी सुगंधा को ऐतराज ना होता,,,। सुगंधा मादक मुस्कान बिखरते हुए अपने बेटे को जवाब देते हुए बोली,,,)

बहुत अच्छा लग रहा है अंकित,,,,

तुम भी ना अपना बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखती,,,(अंकित फिर से अपनी मां की उंगली को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर बोला और फिर उसे अपने मुंह में डाल लिया)

तू भी कहां रखता है मेरा ख्याल,,,(सुगंधा इतराते हुए बोली)

ख्याल ना होता तो मैं अभी यह न कर रहा होता,,,,(अंकित फिर से अपने मुंह में से उंगली निकालते हुए बोला,,, लेकिन वह इस बार अपनी मां की उंगली को वापस मुंह में नहीं डाला बस उसे पकड़ कर उसे देख रहा था,,,)

इतनी फिक्र करता है तू मेरी,,,(सुगंधा आंखों को थोड़ी चोडी करते हुए बोली,,,, अंकित औरतों के इस तरह के नखरे को बिल्कुल भी नहीं समझता था अगर औरतों के बारे में उसे जरा भी समझदारी होती तो उसे समझते देर ना लगती कि उसकी मां के मां के अंदर क्या चल रहा है उसकी मां क्या चाहती है इसलिए वह अपनी मां का सवाल का जवाब देते हुए बोला,,,)

फिक्र भला कैसे न होगी तुम ही तो हो सब कुछ,,,

तेरे लिए मैं सब कुछ हूं,,,,

तो क्या यह भी कोई कहने की बात है,,,,

(सुगंधा को अपने बेटे की हर एक बात रोमांटिक लग रही थी अपने बेटे की बात सुनकर उसके सामने ध्यान में उसकी बुर बार-बार गीली हो रही थी बार-बार पानी छोड़ रही थी,,,)

इतना प्यार करता है तु मुझसे,,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंध अपना एक हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के गाल को सहलाने लगी और जवाब में अंकित भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां के खूबसूरत गोरे-गोरे गाल पर रखकर सहलाते हुए बोला)

बहुत प्यार करता हूं,,,,

(सुगंधा अपने बेटे के स्वाभाविक और औपचारिक बातों को रोमांटिक तरीके से ले रही थी उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी आंखों के सामने उसका बेटा नहीं बल्कि उसका प्रेमी बैठा है और उसे मीठी-मीठी बातें कर रहा है प्यार भरी बातें कर रहा है तभी सुगंधा की नजर अपनी उंगली पर गई जिस पर अभी भी हल्का सा खून निकल रहा था और वह इतराते हुए बोली,,,)

ऊममम अगर तू मुझसे प्यार करता तो मेरी उंगली को यूं ही ना छोड़ देता देख अभी भी खून निकल रहा है,,,।
 
कहां,,,?(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से अपनी मां की उंगली की तरफ देखने लगा जिसमें से अभी भी हल्का सा खून निकल रहा था और नटवह तुरंत फिर से अपने मुंह में अपनी मां की उंगली को डाल दिया और उसे चूसना शुरू कर दिया,,, अंकित जिस तरह से उसकी उंगली को चूस रहा था सुगंधा कल्पना कर रही थी कि जैसे उसकी बड़ी-बड़ी चूची उसके बेटे के मुंह में भरी हुई है और वह उसकी निप्पल को चूस रहा हो और यह एहसास करते ही उसे खुद की निप्पल कड़क होती हुई महसूस होने लगी और बुर से फिर से पानी निकलने लगा,,,,, यह बातचीत है थोड़ी और देर तक चलती है इससे पहले ही तृप्ति आ गई और तृप्ति दोनों को देखकर बोली,,,)

अरे यह क्या हो गया,,,?

मम्मी ने अपनी उंगली ही काट ली है,,,,(अपने मुंह से उंगली को बाहर निकलते हुए अंकित बोल तो यह देखकर तृप्ति हुआ भी थोड़ा सा घबराते हुए उन दोनों के पास बैठ गई और अंकित के हाथ में से अपनी मां का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोली,,,)

क्या मम्मी तुम भी बिल्कुल भी ध्यान नहीं देता ऐसे कैसे सब्जी काट रही थी की उंगली काट ली ज्यादा लग जाता तो,,,, रुको मैं अभी बैंड एड लगा देती हुं,,,,(इतना कहते हुए तृप्ति अपने कमरे में गई और एक छोटा सा बॉक्स खोलकर उसमें से बांडेड लेकर आई और उसे अपनी मां की उंगली पर लपेट दी और बोली)

अब आगे से संभाल कर काम करना वरना रहने देना मैं कर दूंगी,,,,।

(इसके बाद बाकी का खाना तृप्ति अपनी मां को नहीं बनाने दी खुद ही बनाई लेकिन तृप्ति का इस तरह से बीच में आ जाना सुगंधा को अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि उसके और उसके बेटे के बीच अच्छी खासी बातचीत चल रही थी जिसकी वजह से सुगंध काफी उत्तेजित हो चुकी थी,,,)

दूसरे दिन सुगंधा रसोई घर में काम कर रही थी की तभी वह पीछे की तरफ नजर घुमा कर देखी तो उसके ठीक पीछे अंकित खड़ा था और वह चोर नजरों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड की तरफ ही देख रहा था जो कि कई हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही कई हुई और उभरी हुई नजर आ रही थी यह देखते ही सुगंधा के तन-बड़ा अजीब सी हलचल होने लगी क्योंकि यह पहली मर्तबा था कि जब अंकित अपनी मां की गांड को घुर कर देख रहा था,,, पल भर में इस सुगंधा की सांस ऊपर नीचे होने लगी कुछ देर तक अंकित इस तरह से खड़ा रहा वह कुछ बोल नहीं रहा था बस पीछे खड़े होकर अपनी मां की गोल-गोल गांड को भी देख रहा था कुछ देर बाद जब सुगंधा से रहा नहीं गया तो वह पीछे नजर घुमा कर बोली,,,)

क्या हुआ वहां क्यों खड़ा है और ऐसे क्यों देख रहा है,,,

कुछ नहीं मम्मी मैं देख रहा था कि तुम खाना बना ली हो या नहीं मुझे बड़े जोरों की भूख लगी है,,,।

(अंकित की बात को सुनकर सुगंध मन ही मन बोल रही थी कि खाना खाने की भूख लगी है या कुछ और क्योंकि अपने बेटे की नजर को देखकर वह इतना तो समझ ही गई थी कि उसके बेटे के मन में क्या चल रहा है और वह थोड़ा सा घबरा भी गई थी क्योंकि इस तरह से वह अपने बेटे को कभी भी अपने आप को घूरते हुए नहीं देखी थी इसलिए वह बोली)

जा बाहर जाकर इंतजार कर में 5 मिनट में खाना लेकर आती हूं,,,,,

इंतजार ही तो नहीं होता मम्मी,,,(इतना कहते हुए अंकित अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगा और उसे आगे बढ़ता हुआ देखकर सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा उसे अजीब सा महसूस होने लगा था उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल सी बढ़ने लगी थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी और संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मुझे बड़े जोरों की भूख लगी है,,,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी मां के बेहद करीब पहुंच गया उसकी मां घबरा सी गई थी और घबराहट भरे श्वर में बोली,,,।

का तो रही हूं बाहर जाकर इंतजार कर मैं 5 मिनट में गरमा गरम खाना लेकर आती हूं,,,

मुझे आज खाना नहीं खाना है कुछ और खाना है,,,,

,,, क्या खाना है,,,?(घबराहट भरे शवर में वह बोली,,,)

तुम्हारी जवानी,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया अंकित की हरकत पर सुगंधा पूरी तरह से घबरा गई उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि अंकित इस तरह की हरकत करेगा क्योंकि आज तक वह अपने बेटे को सीधा-साधा लड़का ही समझते आ रही थी और वह अपने बेटे की बाहों में से छूटने की पूरी कोशिश करने लगी लेकिन अंकित पूरी तरह से जवान हो चुका था हट्टा कट्टा गठीले बदन का मालिक हो चुका था,,,, अंकित अपनी बाहों की कैद में से अपनी मां को जाने नहीं देना चाहता था इसलिए वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को एक हाथ से पकड़ कर दबाना शुरू,, कर दिया,,,)

Mana karne k bawjood Ankit apni ma ka blouse kholte huye

अरे अरे यह क्या कर रहा है तुझे जरा भी शर्म नहीं आ रही है,,,,

इसमें शरम कैसी मेरी जान तुम इतनी खूबसूरत हो कि मुझे रहा नहीं जाना है बहुत दिनों से मेरी नजर तुम्हारे ऊपर थी तुम्हारी जवानी का नशा मुझे पागल बना रहा है,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाना शुरू कर दिया और सुगंधा उसे रोकने की भरपूर कोशिश करते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं ऐसा मत कर हम दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता बिल्कुल भी नहीं है मैं तेरी मां हूं किसी को पता चल जाएगा तो गजब हो जाएगा,,,,

मैं जानता हूं कि तुम मेरी मां हो लेकिन मन से पहले तुम एक औरत हो खूबसूरत औरत जवानी से भरी हुई और तुम्हें एक मर्द की जरूरत है इस बात को तुम भी अच्छी तरह से जानती हो और रही बात दूसरे को जानने का तो सवाल ही नहीं उठता क्योंकि घर की चार दिवारी के अंदर क्या हो रहा है किसी को क्या पता,,,,

अंकित ऐसा मत कर मैं तेरे सामने हाथ जोड़ती हूं,,,

हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है मेरी रानी अपने हाथ को मेरे लंड पर रख दो मजा ही मजा आएगा,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी गांड पर जोर से चपत लग रहा था,,,, उसकी गांड को छुपाने के लिए उसकी छोटी सी चड्डी नाकाम साबित हो रही थी उसकी गांड का ज्यादातर भाग नजर आ रहा था जो कि एकदम मक्खन की तरह चमक रहा था जिस पर अंकित की नजर पडते ही उसकी आंखों में वासना की चिंगारी फुटने लगी और वह अपनी मां की गांड को हथेली में लेकर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से हैरान थी परेशान थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि पल भर में ही उसे क्या हो गया वह उसके साथ ही गंदा व्यवहार क्यों कर रहा है उसके समझ के बिल्कुल पड़े था अंकित का व्यवहार और अंकित था कि अपनी मां के बदन से खेले जा रहा था और सुगंधा उसे रोकने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन वह रुकने का तैयार ही नहीं था,,,,)

ऐसा मत कर अंकित यह पाप है ऐसा नहीं करना चाहिए मैं तेरी मां हूं तू मेरा बेटा है और मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता कभी भी संभव नहीं है,,,,
 
सब कुछ संभव है इस समय तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द तुम्हारे पास खूबसूरत बुर हैं और मेरे पास मोटा तगड़ा लंड जो तुम्हारी बुर में जाकर तुम्हारा पानी निकलेगा बस यही रिश्ता होता है मर्द और औरत में,,,

यह तो क्या कह रहा है कहां से यह सब सीख कर आया,,,(सुगंधा पूरी तरह से हैरान थी अपने बेटे की इस तरह की अश्लील बातें सुनकर उसने अभी आज तक अपने बेटे के मुंह से एक गली तक नहीं सुनी थी और आज उसका बेटा सारी हदें पार करके औरत और मर्द के बीच के रिश्ते की दुहाई दे रहा था,,,, और अपनी हरकतों से पूरी तरह से उसे मदहोश कर रहा था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें कैसे रोके अपने बेटे को अंकित पागलों की तरह अपनी मां की गोरी गोरी गांड पर चपत लगाते हुए उसे जोर-जोर से मसल दे रहा था ऐसा करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और कहीं ना कहीं अपने बेटे की हरकत से सुगंध को भी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था और वह परेशान थी कि आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है क्यों अपने बेटे को रोक रही है वह भी तो यही चाहती थी वह भी तो अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होना चाहती थी उसके मोटे लंड को अपनी बुर में लेकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने चाहती थी तो फिर आज वह क्यों रोक रही है उसे क्यों से आगे नहीं बढ़ने देना चाहती इसमें उसकी भी तो भलाई है जो सुख अंकित को मिलेगा उससे कहीं ज्यादा सुख उसे भी तो मिलेगा बरसों से उसने अपनी जवानी को जिम्मेदारी की बोझ तले दबा रखी थी आज उसे बोझ को हटाने का मौका मिल रहा है तो क्यों उसे रोक रही है,,,,।

सुगंधा को अपने बेटे को इस तरह की हरकत करने से रोकना उसकी मजबूरी नहीं उसका फर्ज था क्योंकि वह एक मां थी और एक बेटे को इस तरह की हरकत करने से रोकना ही उसका फर्ज था क्योंकि दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता था और वह इस मां बेटे के रिश्ते को कलंकित नहीं होने देना चाहती थी पहले ही वह मन ही मन में संजू के साथ हम बिस्तर होने का कल्पना करती थी लेकिन हकीकत में हुआ ऐसा करने से कतराती थी,,,, इसी लिए वह फिर से अपने बेटे का हाथ पकड़ कर उसे अपने से दूर करने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

नहीं मैं तुझे ऐसा नहीं करने दुंगी,,,।

(सुगंधा का ऐसा कहना था कि तभी संजू उसकी बांह पकड़कर उसे अपनी तरफ घुमा दिया और उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर पागलों की तरह उसके होठों का रस पीना शुरू कर दिया,,, ईतने में सुगंधा का धैर्य जवाब दे गया,,,, वह एकदम से मस्त हो गई मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को वह भी एकदम से भूल गई,,, और बोलती भी कैसे नहीं वह भी तो यही चाहती थी बरसों बाद किसी मर्द की बाहों में वह थी इसलिए उसकी जवानी पिघलने लगी थी,,,,। अंकित को एहसास हो रहा था कि उसकी मां ढीली पड़ रही थी और इसी मौके का फायदा उठाते हुए वह तुरंत अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया और देखते ही देखते हो अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलकर ब्लाउज को उतार फेंका और ब्रा भी उतार फेंका,,, अपनी मां की नंगी चूचियों को देखकर वह पूरी तरह से पागल हो गया और तुरंत अपने दोनों हाथों में उसके दोनों कबूतरों को पकड़ कर उसका गला घोटने शुरू कर दिया वह पागलों की तरह अपनी मां की चूचियों को दबा रहा था क्योंकि पहली बार वह किसी औरत की चूची को अपने हाथ में लिया था और वह कोई और औरत नहीं बल्कि उसकी खुद की मां थी इसलिए उसे कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का एहसास हो रहा था,,,,।

अंकित की हरकतों का सुगंधा भी मजा लेने लगी उसे मजा आने लगा था अपने बेटे के साथ जिस तरह से अंकित उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबा रहा था वह पागल हुए जा रही थी और देखते ही देखते अंकित बारी-बारी से अपनी मां की दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया था कुछ देर तक वह अपनी मां की जवानी से इसी तरह से खेलता रहा और एक हाथ से वह अपने पेंट को उतार कर नीचे जमीन पर गिरा दिया था वह पूरी तरह से नंगा हो चुका था हालांकि उसकी मां अभी भी कपड़ों में थी,,, अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था और पागल हुआ जा रहा था अपनी मां की बुर में जाने के लिए,,,,।

अपने लंड की स्थिति से भली भांति परिचित होते ही अंकित अपनी मां के दोनों कंधों पर हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ बैठाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते सुगंधा भी अपने घुटनों के बाल हो गई उसके चेहरे के सामने उसके बेटे का खड़ा लंड एकदम लहरा रहा था,,, जिस पर नजर पडते ही सुगंधा के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आ गया,,,, सुगंधा को मालूम था कि उसे क्या करना है वह तुरंत अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के लंड को पकड़कर उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दि,,, सुगंधा को भी मजा आने लगा था अपनी मां को लंड चूसता हुआ देखकर अंकित समझ गया था कि उसकी मां भी लाइन पर आ चुकी है इसलिए अपनी कमर को धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया था उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,

कुछ देर तक अंकित इसी तरह से अपनी मां को मस्त करता रहा और खुद भी आनंद लेता रहा,,, लेकिन अब वह समझ गया था कि लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका है या हथोड़ा मारना जरूरी हो चुका है इसलिए अपनी मां की बाहों को पकड़ कर उसे उपर की तरफ उठाया और रसोई घर में रसोई के पत्थर की तरफ घूमाकर उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया,,, और फिर एक बार फिर से मैं अपनी मां की साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर उठा कर कमर तक कर दिया एक बार फिर से सुगंधा की भारी भरकम गोल-गोल गांड अंकित की आंखों के सामने चमकने लगी और उसे पर से लाल रंग की चड्डी यह देखकर अंकित की जवानी पूरी तरह से जोड़ करने लगी वह तुरंत अपनी मां की चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे खींच दिया और उसे घुटने तक लाकर उसे घुटनों में फंसा दिया अब अंकित के लिए रास्ता साफ हो चुका था उसकी मां भी तैयार हो चुकी थी चुदवाने के लिए,,,,।

अंकित की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी उसका हल भी बुरा था अपनी मां की मदमस्त जवानी देखकर वह पूरी तरह से पसीने से तरबतर हो चुका था,,,, अंकित का यह पहली बार था वह पहली बार किसी औरत को चोदने जा रहा था,,, सुगंधा का दिल भी जोरों से धड़क रहा था,,, उसके माथे पर भी पसीना टपक रहा था वह एक तरफ है कि अंकित पहली बार कैसे उसकी चुदाई कर पाएगा और इस बात से उत्सुक थी की आज बरसों बाद उसकी बुर में लंड घुसने वाला था,,, अंकित ढेर सारा थुक अपने लंड के सुपाडे पर लगाया,,, और अपनी मां की बुर पर भी लगाकर जिला कर दिया वह तो पहले से ही पानी पानी से गीली हो चुकी थी और फिर अपने लंड को सुपाडे को जैसे ही अपनी मां की गुलाबी छेद पर रखा सुगंधा की बुर से सावन की फुहार बरसने लगी वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी और देखते ही देखते अंकित अपने लंड के सुपाडे को अपनी मां की बुर के अंदर डाल दिया,,, और फिर अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया,,,।

सुगंधा मदहोश हुए जा रही थी बरसों बाद उसकी बुर में लंड गया था और वह भी अपने ही बेटे का जो कि कुछ ज्यादा ही मोटा तगड़ा और लंबा था,,, सुगंधा एक तरफ पसीने से तरबतर हुए जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसकी बुर से बदन रस निकालकर पानी पानी हुए जा रही थी वह पूरी तरह से मस्त थी वह कभी सपने में भी नहीं सोचती थी कि वह अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होगी अंकित का हर एक धक्का उसे स्वर्ग का सुख दे रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी पलंग चरमरा रही थी,,, अंकित के हर एक धक्के पर सुगंध लहर उड़ाती थी और उसकी भारी भरकम चुचीया पानी भरे गुब्बारे की तरह छाती पर लौटने लगती थी,,, देखते ही देखते सुगंधा की सांस ऊपर नीचे होने लगी वह गहरी गहरी सांस लेने लगी उसके बदन में अकड़न पढ़ने लगे और फिर वह बिस्तर की चादर को दोनों हाथों से कस के पकड़ कर गरम लावा बाहर निकलने लगी,,,, वह चरम सुख पर पहुंच चुकी थी और झड़ना शुरू कर दी थी कि तभी उसकी आंख खुल गई,,,, आंख खुलते ही उसकी नजर छत पर गई पंखा चोरों से चल रहा था वह इधर-उधर देखने लगी उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह अपने बिस्तर पर अकेली ही थी और एकदम निर्वस्त्र पूरी तरह से नंगी और उसकी हाथ की दो ऊंगली उसकी बुर में अंदर बाहर हो रही थी,,,, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि वह सपना देख रही थी वह कल्पनाओं की दुनिया में इस कदर खो गई थी कि सपने में उसके बेटे ने उसकी चुदाई करके उसे तृप्त कर दिया था उसकी हाथ की उंगली अभी भी उसकी बुर के अंदर घुसी हुई थी उसे धीरे-धीरे याद आने लगा कि वह अपने कमरे में आई थी तो बिस्तर पर लेते ही वह धीरे-धीरे अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी और जिस तरह से अपने बेटे से बातचीत करके रोमांचित हुई थी उसी के चलते वह अपने बेटे की कल्पना करके अपने साथ संभोग रत कर ली थी,,, जिसके चलते वह सपनों की दुनिया में पूरी तरह से खो चुकी थी और सपने में अपने बेटे के साथ चुदाई का सुख भोग रही थी हकीकत का भान होते ही वह एकदम से बिस्तर से उठकर बैठ गई और अपनी उंगली को अपनी बुर में से बाहर निकाली तो बुर से मदन रस का फव्वारा फुट पड़ा,,,, वह पूरी तरह से मत हो चुकी थी कल्पनाओं की दुनिया में ही सही वह मदहोश हो चुकी थी उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था,,,,। वह धीरे से बिस्तर पर से अपने दोनों पैरों को पलंग से लटका कर बैठ गई और अपनी सांसों को दुरुस्त करने लगी टेबल पर बड़ा पानी का गिलास उठाकर वह एक सांस में गटक गई,,, इस समय उसे बहुत हल्का महसूस हो रहा था वह कुछ देर तक किसी तरह से बैठी रही दीवार पर टंगी घड़ी पर नजर गई तो रात के 2:00 बज रहे थे सुबह होने में अभी बहुत समय था इसलिए वह इस तरह से निर्वस्त्र रही बिस्तर पर लेट गई और फिर से उसकी आंख लग गई,,,।

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सुगंधा कभी सोची नहीं थी कि वह अपने बेटे के तरफ इस तरह आकर्षित होगी कि सपने में भी उसके दिलों दिमाग पर उसके बिस्तर पर उसका बेटा ही छाया रहेगा स्वप्न में ही सही सुगंधा ने अपने बेटे के साथ संभोग सुख का आनंद लूट चुकी थी और जिसके जरिए अपने बेटे से उसकी झिझक खत्म सी होने लगी थी वह अपने मन में कल्पना करती थी कि अगर जो सपने में हुआ वह वास्तविक जीवन में हो जाए तो कैसा हो,,,, उसका बेटा बिस्तर पर कैसा प्रदर्शन करेगा कहीं ऐसा तो नहीं उसकी भरी हुई जवान देखकर ही उसका पानी निकल जाएगा और ऐसा भी हो सकता है कि उसका पानी निकाले बिना वह खुद ना झड़े,,,, अपने बेटे की कायाकल्प को देखकर तो उसे ऐसा ही लगता था कि जैसे उसका बेटा बिस्तर पर उसे संपूर्ण रूप से संतुष्टि प्रदान करेगा,,,,।

इन सब के बारे में सोचकर जहां एक तरफ उसका मन उत्तेजित हो जाता तो वहीं दूसरी तरफ उसका मन भरी भी हो जाता था क्योंकि वह ऐसा ख्वाब की दुनिया ढूंढ रही थी जिसमें उसका हम बिस्तर उसका ही बेटा था जो की दुनिया की नजर में गलत था और इन सब के बारे में सोच कर उसे दुख भी होता था लेकिन इस बात से उसे इनकार भी नहीं था कि अपने बेटे की कल्पना करके इस अत्यधिक आनंद की प्राप्ति भी होती थी,,,, कभी-कभी तो वह इस तरह के खयालात के बारे में सोच कर दुखी भी हो जाती थी और अपने आप को कसम देकर इस तरह की कल्पना में ना खोने का वादा भी करती थी लेकिन दूसरे दिन फिर शुरू हो जाती थी ऐसा हुआ कई बार कर चुकी थी लेकिन उसका खुद के मन पर बिल्कुल भी काबू नहीं था जिसकी वजह से उसके ख्याल आते और उसकी जवानी पूरी तरह से बेलगांव होती जा रही थी उसकी जवानी में खूबसूरती में और ज्यादा निखार आते जा रहा था जिसका घर में जवान बेटे को तो बिल्कुल भी पता नहीं चलता था लेकिन घर के बाहर सभी लोग की नजरे सुगंधा पर ही टिकी रहती थी सुगंधा के आते-जाते हंसने बोलने सब पर कई लोगों की नजर रहती थी,,, लोग सुगंधा के बारे में अपने मन में ही अत्यधिक मादकता भरे कल्पना में खुद को उसकी दोनों टांगों के बीच कल्पना करके आनंद लिया करते थे,,, लोगों को सुगंधा की भारी छातिया और गद्देदार गांड कुछ ज्यादा ही उत्तेजित कर जाती थी,,,, लेकिन इन सबसे अनजान था तो वह था सुगंधा का खुद का जवान बेटा अंकित क्योंकि आज तक कुछ नहीं अपनी मां को किसी गलत नजरिए से देखा ही नहीं था अपनी मां को क्या हुआ किसी भी औरत को कभी भी गलत नजरिए से देखता ही नहीं था,,,, इसीलिए मां बेटे दोनों के बीच जैसा सुगंधा के विचार थे उसे तरह से अंकित के विचार मिलते ही नहीं थे वरना जो कुछ भी स्वप्न में हुआ था उसे हकीकत की शक्ल देने में देर ना लगती,,,।

समय के साथ धीरे-धीरे सब कुछ आगे बढ़ता चला जा रहा था सुगंधा अपने मन में यही सोचती थी कि वह किस तरह से अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करें क्योंकि कई बार सोने के बाद उसने अपने मन में फैसला कर दी थी कि अगर उसे शारीरिक संबंध बनाना ही पड़ा तो वह अपने बेटे के साथ बनाएगी क्योंकि इसमें बदनामी का डर बिल्कुल भी नहीं था,,, और ना ही किसी के द्वारा बदनाम करने के दर से बार-बार शोषण करने का डर था घर की बात घर में ही रह जाती और मजा का मजा मिल जाता लेकिन अपने बेटे के चाल चलन और उसके संस्कार देखकर सुगंधा को लगता नहीं था कि उसका बेटा किसी भी तरह से उसके तरफ आकर्षित होगा,,, लेकिन एक औरत होने के नाते उसे अपने आप पर विश्वास था,,, कि वह अपनी नशीली जवानी के चलते अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने में कामयाब हो जाएगी क्योंकि वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि एक स्वर्ग की अप्सरा ने एक संत की तपस्या को भंग कर दी थी और इस समय वह संत था उसका बेटा और अप्सरा थी वह खुद,,,, बस उसे मौका नहीं मिल रहा था अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए हालांकि वह अपने मन में ठान चुकी थी कि अब वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करके अपनी मनमानी करके रहेगी लेकिन इसकी शुरुआत करने में उसके मन में भी झिझक हो रही थी क्योंकि उसे इसह बात का डर था कि अगर उसका बेटा बुरा मान गया तब क्या होगा उसकी नजर में तो वह बदनाम हो जाएगी और उसका बेटा फिर कभी उसकी इज्जत भी नहीं करेगा यह ख्याल मन में आता था तो वह थोड़ा डगम जाती थी लेकिन फिर उसे वही सपना याद आने लगता था जब वह सपने में उसका बेटा उसके साथ जबरदस्त संभोग कर रहा था और फिर इस कल्पना के जरिए वह अपने आप को आगे बढ़ने का दृढ़ विश्वास कराती थी,,,।

धीरे-धीरे सुगंधा अपने जीवन में आगे बढ़ रही थी वह रोज सही समय पर स्कूल पहुंच जाती है और सही समय पर घर पर भी आ जाती थी,, घर के बाहर अगर कोई उसकी सहेली थी तो वह थी नूपुर जिससे वह ज्यादा बातचीत भी नहीं करती थी लेकिन उसे लगता था कि एक वही है जो उसकी सही मायने में सहेली है क्योंकि वह रोज रिशेष पडते ही अपना लंच बॉक्स लेकर उसके पास पहुंच जाती थी और दोनों आपस में मिलकर एक दूसरे का लंच बॉक्स खत्म करते थे,,,, वैसे तो सुगंध को नूपुर के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे सुगंधा को उसी के द्वारा पता चला कि वह शादीशुदा और दो बच्चों की मां ठीक उसकी ही तरह लेकिन उसके दोनों बच्चे अंकित और तृप्ति की तरह जवान नहीं थे,,,,।

सुगंधा वैसे तो खास कुछ अपने बारे में नूपुर को बताती नहीं थी लेकिन उसके बारे में जानने की उत्सुकता उसकी हमेशा बढ़ती ही रहती थी नूपुर सुगंधा जितनी खूबसूरत तो नहीं लेकिन सुगंधा से काम भी नहीं थी दो बच्चों की मां भाभी थी और अपने बदन की देखरेख अच्छी तरह से रख कर वहां भी पूरी तरह से जवान बनी हुई थी पूरी तरह से गदराई जवानी की मालकिन थी नुपुर,,,,,,, वह भी स्कूल अक्सर रिक्शा से या बस तो कभी उसके घर से कोई छोड़ने आ जाता था अधिकतर सुगंधा ने तो एक उम्र दराज आदमी को ही देखी थी जिसकी तोंद कुछ ज्यादा ही निकली हुई थी और देखने में कुछ खास नहीं था स्कूटर पर उसके पीछे बैठकर वह कभी-कभी स्कूल आतीनथी स्कूटर वाले आदमी को देखकर उसके बारे में जानने की उत्सुकता कुछ ज्यादा ही थी सुगंध को बचाना चाहती थी कि नूपुर जिसके साथ बैठकर आती है वह है कौन उसका पति है या कोई और या घर का कोई सदस्य,,,,,,।

और ऐसे ही एक दिन दोनों विशेष के समय लंच कर रहे थे तो बात ही बात में सुगंधा नूपुर से बोली,,।

नूपुर वह स्कूटर पर तुम जिसके साथ बैठ कर आती हो कौन है वो,,,,(नूपुर की तरफ देखे बिना ही सुगंधा उससे बोली,,, लेकिन नजर नीचे किए हुए भी वह नूपुर की तरफ कर नजरों से देख रही थी वह एक तरह से नूपुर के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही थी कि नूपुर क्या जवाब देती है,,,, सुगंधा के मुंह से इस बारे में बात की जिक्र छिड़ते ही नूपुर एकदम से शक पका गई नूपुर के चेहरे को देखकर ही लग रहा था कि वह जवाब देना नहीं चाह रही थी और उसके चेहरे पर आया यह भाव सुगंधा को अच्छी तरह से समझ में आ रहा था,,,, नूपुर यह सवाल सुनकर खामोश रही और लंच करने में ही अपने आप को व्यस्त करने की कोशिश में लगी रही तो सुगंधा अपने सवाल का जवाब न पाकर एक बार फिर से बोली,,,)

क्या हुआ,,, तुम बताई नहीं कौन है वो,,,,

वह मेरे पति हैं,,,( अपनी नजरों को नीचे करके अगल-बगल देखते हुए नूपुर ने यह जवाब दी और ऐसा लग रहा था कि जैसे नूपुर सुगंधा के सवाल का जवाब नहीं देना चाहती थी या अपने और उसके बीच के रिश्ते को बताना नहीं चाहती थी लेकिन एक बार तो सुगंधा को झटका सा लगा नूपुर के मुंह से यह सुनकर कि वह इंसान उसका पति है,,, जवाब देने के बाद अनूपपुर अपने आप को लंच करने में व्यस्त कर दी लेकिन पल भर में ही सुगंधा नूपुर के दर्द को अच्छी तरह से समझ गई,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि नूपुर बहुत खूबसूरत औरत है कदकाठी और रंग रखाव में भी एकदम गोरी चिट्टी,,, बदन का भराव एकदम मादकता लिए हुए था,,, और ऐसे खूबसूरत बदन की मालकिन होने के नाते किसी भी सूरत में वह उस इंसान की बीवी नहीं लगती थी,,, इसीलिए तो सुगंध अपने मन में ही सोचने लगी कि कहां राजा भोज और कहां गंगू तेली यह तो लंगूर के हाथ में अंगूर लग जाने जैसी बात थी लेकिन यह बात सुगंधा इस समय कहना नहीं चाहती थी लेकिन पल भर में ही भानपुर के दर्द को समझ गई थी कितनी खूबसूरत औरत भला उसे इंसान के साथ कैसी रहती होगी जो की उम्र में भी उससे बड़ा था और लगभग उसके ससुर की उम्र जैसा ही लगता था दोनों साथ में चलते समय किसी भी सूरत में पति-पत्नी लगते ही नहीं थे और यही प्रश्न सुगंधा के मन में भी था इसीलिए वह अपने मन की उत्सुकता को खत्म कर लेना चाहती थी इसीलिए सुगंधा ने नूपुर से यह सवाल पूछी थी,,,, सवाल जवाब के बाद कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही इस खामोशी को सुगंधा ही खत्म करते हुए बोली,,,)

नूपुर बुरा ना मानना लेकिन तुम्हें देखने के बाद किसी को यकीन ही नहीं होगा कि वह तुम्हारा पति है मुझे माफ करना मैं यह बात कहना नहीं चाहती थी लेकिन मुझे कहना पड़ रहा है क्योंकि तुम बहुत खूबसूरत हो मुझे लग रहा था कि शायद तुम्हारा पति तुम्हारी तरह ही होगा लेकिन सब किस्मत की बात है लेकिन यह सब हुआ कैसे वह तो उम्र में तुमसे भी ज्यादा बड़े हैं,,,,

मजबूरी,,,(कुछ देर खामोश रहने के बाद नूपुर बोली)

मजबूरी,,,, कैसी मजबूरी (आश्चर्य जताते हुए सुगंधा बोली,,)

गरीबों की और कैसी,,,(नूपुर थोड़ा सा चिढ़ते हुए बोली,,, उसकी बात से लग रहा था कि जैसे वह जवाब देना नहीं चाहती थी लेकिन फिर भी सुगंधा बोल पड़ी,,,)

गरीबी मैं कुछ समझी नहीं,,,

हम सात भाई बहन थे पांच बहन और दो भाई,,, मैं तीसरे नंबर की थी बहनों में दो बहनों की तो शादी जैसे तैसे करके मम्मी पापा ने कर दी है लेकिन उसके बाद पापा की नौकरी छूट गई कहीं नौकरी नहीं मिल रही थी पैसे का जुगाड़ नहीं हो रहा था और मेरी शादी की उम्र हो चुकी थी मेरे पिताजी और मेरी गरीबी का फायदा उठाकर मेरे पति के पिताजी मेरे पिताजी से मिलकर शादी में की कर दिए शादी का सहारा खर्चा गहना कपड़े लगते सब कुछ का खर्चा उन्हीं लोगों ने दिया,,, मेरे पिताजी मजबूर थे और शादी तय हो गई,,,,

क्या कह रही हो नूपुर इसमें तुम्हारी मर्जी थी,,,

तुम्हें क्या लगता है मेरी जैसी औरत की मर्जी होगी क्या भला लेकिन मैं मजबूर थी ना चाहते हुए पर मुझे हां कहना पड़ा और नतीजा तुम देख रही हो,,,,

(इतना कहते हुए उसकी आंखें छलक आई जिसे वह अपने रुमाल से पोछने की कोशिश कर रही थी,,, सुगंधा तुरंत हाथ बढ़ाकर उसकी हथेली को अपने हथेली में लेकर दबा दी यह एक तरह से उसकी तरफ सांत्वना का इशारा था उसे शांत कराते हुए सुगंधा बोली,,,)

इंसान अपने मन में तो बहुत कुछ सोच कर रखता है अपने सपनों की दुनिया अलग ही बसा कर रखता है लेकिन हकीकत कुछ और होती है क्योंकि किस्मत में जो कुछ भी लिखा होता है वह तो होना ही है तुम्हें देखकर कोई नहीं कहेगा कि तुम्हारी पसंद ही की शादी हुई है लेकिन कर भी क्या सकती है किस्मत को मंजूर भी यही था,,,,।,,,

मेरे बारे में तो जान गई लेकिन अपने बारे में कुछ तो बताओ,,,(नूपुर बहुत ही ज्यादा अपने आप को स्वस्थ करते हुए बोली,,,,, नूपुर की बात सुनकर सुगंधा के भी चेहरे पर उदासी छाने लगी,,, वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)

अपनी तो जिंदगी एकदम खुली किताब की तरह है मेरे दो बच्चे हैं और पति का देहांत हुए बरसों गुजर गए,,,,।

क्या,,,,?(सुगंधा के मुंह से इतना सुनते ही एकदम से आश्चर्य में नूपुर बोली क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था की सुगंधा जो कुछ भी कह रही है वह सही है,,,)

हा नुपुर यह सच है मेरे पति का देहांत हुए लगभग लगभग सात आठ साल गुजर चुके हैं मेरे दो बच्चे हैं बड़ी लड़की है छोटा लड़का है ,,,,

मुझे माफ करना सुगंधा मुझे मालूम नहीं था लेकिन तुम्हें देखकर कोई भी नहीं कह सकता कि तुम इतना बड़ा दुख हंसते-हंसते झेल रही हो,,,,

मैं तुमसे कहीं ना नुपुर कि इंसान सोचता कुछ और है होता कुछ और है,,,, मेरे पति भी इसी स्कूल में शिक्षक थे और यह अच्छा हुआ कि उन्होंने मुझे भी इस स्कूल में शिक्षिका के रूप में जोब दिल दिए थे वरना गुजारा करना मुश्किल हो जाता,,,

(सुगंधा के जीवन के बारे में सुनकर नूपुर को बहुत दुख हो रहा था क्योंकि नूपुर ने कभी सपने में नहीं सोची थी कि इतनी खूबसूरत और हंसते खेलते रहने वाली औरत इतना बड़ा दुख झेल रही है,,,, वह दोनों के बीच बातों का सिलसिला और बढ़ता इससे पहले ही रिशेष पूरी होने की घंटी बज गई और दोनों एक दूसरे की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर अपना लंच बॉक्स बैग में रखकर अपनी अपनी क्लास की तरफ जाने लगी,,,,।)
 
रात को खाना खाने के बाद अपने कमरे में बिस्तर पर पडते ही फिर से वही सिलसिला शुरू हो गया,,,, बिस्तर पर जाते ही अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई फिर वही अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपने जवानी की प्यास को बुझाने की कोशिश करने लगी,,,, और फिर गहरी निंद्रा में सो गई सुबह-सुबह जब दरवाजे पर दस्तक होने लगी तो उसकी आंख खुली और अपने आप को बिस्तर पर संपूर्ण रूप से नंगी देखकर वह जल्दी से उठकर बैठ गई वह जानती थी कि दरवाजे पर दूध वाला आया था वह अपने सारे कपड़े पहनने में असमर्थ थी इसलिए गाउन को जैसे तैसे करके पहन ले और फिर अपने कमरे से निकलकर और किचन में गई और एक पतीला लेकर मुख्य दरवाजे पर पहुंच गई और दरवाजा खोलकर दूध लेने लगी दूध वाला सुगंधा को देखकर रोज की तरह ही मुस्कुराया और बोला,,,)

बीबी जी थोड़ा जल्दी उठ जाया करो मुझे देर हो जाती है,,,,

माफ करना आंख लग गई थी,,,,(और इतना कहते हुए बात पतीला लेकर थोड़ा सा झुक गई दूधवाला साइकिल को स्टैंड पर लगाकर,,, दूध के कान में से नाप भरकर दूध निकाला और पतीला में डालने लगा,,, अभी तक तो वह केवल दूध की धार देख रहा था लेकिन उसकी नजर जैसे ही धार के ठीक सामने गई तो उसके होश उड़ गए,,, क्योंकि दूध लेने के लिए सुगंध झुकी हुई थी और झुकाने की वजह से उसके गांव में से उसकी मदमस्त कर देने वाली खरबूजे जैसी च एकदम साफ दिख रही थी और साथ ही उस चुचियों की शोभा बढ़ा रही उसकी कड़क निप्पल भी एकदम तनी हुई साफ दिख रही थी,,,, यह नजारा देख कर तो दूध वाले की हालत खराब हो गई और उसके पेट में तंबू बनना शुरू हो गया,,,। और इस बात से सुगंधा बिलकुल बेखबर थी क्योंकि अभी भी हल्की-हल्की नींद में ही थी ,, दूध वाला तो पहला नाप भरकर दूध पतीला में डाला,,, और उसके बाद उसे आधा ही नाप डालना था लेकिन इस बार भी वह पूरा नाप भर लिया था दूध से और पतीला में डालते हुए वह सुगंधा की गाउन में उसकी चूचियों को देखता रहा उसकी कड़क निप्पल को देखकर उसका लंड कड़क हो गया था,,, सुगंधा को अभी तक इस बात का अहसास तक नहीं हुआ था कि वह दूध वाला उसकी चूचियों को देख रहा था जो कि एकदम साफ नजर आ रही थी,,,,, उसका ध्यान तब गया जब पतीले में से दूध नीचे गिरने लगा हुआ एकदम से दूध वाले को बोली,,,।

अरे अरे भैया यह क्या कर रहे हो,,,,(इतना कहते हुए वह दूध वाले की तरफ देखी तो उसकी निगाहों की सिधान पर जब उसका ध्यान गया और वह नजर झुका कर अपनी छातियों की तरफ देखने लगी तो उसके होश उड़ गए वाकई में उसकी चूची एकदम साफ नजर आ रही थी उसे इस बात का एहसास हुआ कि उस गलती हो गई थी रात को वह नंगी ही सो गई थी वह सुबह उठते ही वह जल्दबाजी में केवल गाउन पहनकर बाहर आ गई थी जिसमें से उसका पूरा बदन एकदम साफ झलक रहा था,,,, अपनी गलती का अहसास होते ही सुगंधा तुरंत अपना एक हाथ अपने गाऊन के उपर सतह पर रखकर अपनी चूचियों के नजारे को छुपाने की कोशिश करने लगी,,,, सुगंधा की हरकत को देखकर दूध वाले को समझ में आ गया कि वह जान गई है इसलिए वह तुरंत बिना कुछ बोले साइकिल को स्टैंड पर से उतरा और तुरंत वहां से रवाना हो गया सुगंध को अपनी गलती का एहसास हो रहा था वह तुरंत दरवाजा बंद करके कमरे में आ गई और फिर रसोई घर में प्रवेश करते ही वह ट्यूबलाइट की स्वीच ऑन करके दूध के पतीले को किचन पर रखकर गहरी गहरी सांस लेने लगी शुरू शुरू में तो उसे एकदम से घबराहट महसूस होने लगी लेकिन जिस तरह से वह दूध वाला उसकी चूचियों को देख रहा था सुगंधा के बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वैसे तो सड़क पर आते जाते हर कोई उसके बदन को अपनी आंखों से नजर भर कर देखता ही रहता था लेकिन आज पहली बार था जब उसकी आंखों के सामने एक दूध वाला उसकी नंगी चूचियों को जी भर कर देख रहा था इस बात का एहसास उसके बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रहा था वह दूध वाले के बारे में सोचने लगी तभी उसके मन में युक्ति सोचने लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि जब दूध वाला उसकी चूची की झलक भर देख कर इस कदर पागल हो सकता है तो उसका बेटा क्यों नहीं,,,, और यही सोचकर उसके होठों पर मादक मुस्कान नाचने लगी,,,,।

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सुबह-सुबह जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर सुगंधा काफी रोमांचित थी उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह का हादसा उसके साथ हो जाएगा,,,, लेकिन जो कुछ भी हुआ उसके चलते उसके मन में एक अजीब सी युक्ति ने जन्म लिया जिस पर वह जल्द से जल्द अमल करना चाहती थी और वह भी अपने ही बेटे पर वह अच्छी तरह से जानती थी कि जब उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर दूध वाले का मन डोल गया तो उसके बेटे का क्यों नहीं डोलेगा,,, दूध वाला तो अधेड़ उम्र का था और उसका बेटा तो अभी जवानी की दहलीज पर कदम रखा था और उसके मन में और तो के अंगों को लेकर उत्सुकता और रोमांच दोनों होगा इसलिए उसे पूरा विश्वास था कि उसकी नंगी चूचियों को देखकर उसके बेटे की हालत जरूर खराब हो जाएगी,,,, जहां तक उसे ख्याल था उसके बेटे ने आज तक उसे अर्धनग्न अवस्था में कभी नहीं देखा था और वैसे भी एक मां और एक शिक्षिका होने के नाते वह अपनी मर्यादा को अच्छी तरह से जानती थी,,,, जैसे ही उसका बेटा जवान होने लगा वैसे ही वह अपने बेटे के सामने अपने अंगों को जहां तक हो सकता था छुपाने की कोशिश करने लगी थी लेकिन अब उसे लगने लगा था कि समय आ गया है जब उसके बेटे को उसके खूबसूरत अंगों का दर्शन कराना चाहिए,,,।

और यही सोचकर उसके तन-बाद में अजीब सी हलचल हो रही थी दूध वाले के जाने के बाद वह पतीला लेकर रसोई घर में रख दी थी और वही खड़ी-खड़ी जो कुछ देर पहले हुआ था उसके बारे में सोच रही थी उसे तो अंदाजा भी नहीं था कि झुकाने की वजह से उसकी चूचियां एकदम साफ दूध वाले को नजर आ रही होगी वह तो हल्की नींद में ही थी,,, उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि वह गाऊन के अंदर कुछ पहनी भी है कि नहीं,,,,,,, वह रसोई घर में खड़ी-खड़ी रात की घटना के बारे में सोचने लगी जब वह टीवी बंद करके अपने कमरे में सोने के लिए आई थी,,,, कमरे में आते ही वह बिस्तर पर लेटने से पहले अपने सारे वस्त्र उतार कर एकदम नंगी हो गई थी और बिस्तर पर लेट कर अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपनी हथेली को अपनी गरम बुर पर रखकर उसे जोर-जोर से रगड़ रही थी और अपने मन में अपने बेटे का ख्याल कर रही थी,,, एक बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था कि जब भी वह अपने बेटे का ख्याल अपने मन में लाती थी और अपने अंगों से खेलने की कोशिश करती थी उसे कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का एहसास होता था और मजा भी बहुत आता था,,,, और वह अपनी दोनों टांगें फैलाए अपनी गुलाबी बुर से खेल रही थी और अपने बेटे की कल्पना करते हुए अपने मन में यह सोच रही थी कि उसका बेटा उसकी दोनों टांगों के बीच झुक कर उसकी बुर को अपनी होठों से स्पर्श करके अपनी जीभ से चाट रहा है यह ख्याल उसके मन में आते ही वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी,,, और मदहोशी के आलम में अपनी दो उंगलियां अपनी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए अपने मन में कल्पना कर रही थी कि उसका बेटा उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर पर लपेटकर उसकी बुर में अपना लंड डालकर उसे चोद रहा है यह एहसास यह कल्पना उसे पूरी तरह से मदहोश कर दिया था और वह बहुत ही जल्द झड़ गई थी,,, और फिर संतुष्टि का एहसास लिए नरम नरम तकीए को अपनी बाहों में समेटे वह कब नींद की आगोश में चली गई उसे भी पता नहीं चला,,,,।

रात वाली घटना के बारे में याद करके उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह नग्न अवस्था में ही सो गई थी और सुबह दरवाजे पर दूध वाले की दस्तक की आवाज सुनकर जल्दबाजी में केवल गाउन पहनकर दूध लेने के लिए आ गई थी और उसकी मदमस्त चूचियों को देखकर दूध वाला पागल हो गया यह सब सोचने के बाद उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस होने लगी,,, उसे अपनी सांसे भी ऊपर नीचे होती हुई महसूस होने लगी वह दीवार पर टकली घड़ी की तरफ देखी तो 6:00 बजने में 20 मिनट की देरी थी इसलिए वह अपना ध्यान भर के काम में लगाकर झाड़ू लगाना शुरू कर दी और अपने मन में सोचने लगी कि किस तरह से अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करेगी हालांकि उसे दूध वाले से इशारा तो मिल ही गया था बस उसे पर अमल करने की देरी थी लेकिन अमल करने में भी इस घबराहट हो रही थी,,, मन में भले ही बड़े सहज रूप से इरादा बना ली थी कि वह अपने बेटे के सामने इस तरह से पैसा आएगी कि उसके बेटे को उसकी नंगी चूचियों का दर्शन हो जाएगा लेकिन हकीकत में उसे बहुत घबराहट हो रही थी अपने बेटे के सामने इस तरह की हरकत करने मे उसे शर्म भी महसूस हो रही थी,,,, लेकिन घर की सफाई करते हुए वह अपना इरादा बना ली थी वह अपने मन को पक्का कर रही थी कि आज वह किसी भी तरह से अपने बेटे को अपनी जवानी के दर्शन करा कर रहेगी,,,,

यही सब सोचते सोचते वह घर की सफाई कर ली थी पूरे घर में झाड़ू लगा लेने के बाद,,,,,,, वह दीवार के सहारे बैठ गई और अपने मन में सोचने लगी कि वह अपने बेटे के सामने जाए तो जाए कैसे और यह सोचती हो बार-बार अपने गांव के अंदर देख ले रही थी जिसमें से उसे खुद अपनी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और उसकी छुआरे जैसी निप्पल एकदम कैडबरी चॉकलेट की तरह कड़क नजर आ रही थी,,,, यह सब देखकर उसकी खुद की हालत खराब होती नजर आ रही थी घड़ी पर नजर गई तो 6:00 बज गए थे,,,, उसके बच्चों के उठने का समय हो गया था लेकिन फिर भी 15 मिनट जैसा समय रह गया था वह अपने मन में सोचने लगी की यही 15 मिनट में जो कुछ भी करना है उसे करना है यही सोच कर वह अपनी जगह से खड़ी हुई और अपने बेटे के कमरे के पास जाकर कुछ देर तक वहीं खड़ी होकर सोचने लगी आखिरकार वह एक मां थी और भला कैसे अपने ही बेटे को अपनी ही नंगी चूचियों के दर्शन जानबूझकर करा सकती थी,,, एक औरत होने के नाते औरत किस क्रियाकलाप को अच्छी तरह से जानती थी उसे इस बात का भी एहसास था कि इस क्रियाकलाप में कुछ भी उंच नीच हो सकती थी,,, लेकिन वह मन बना ली थी इसलिए दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही वह अपना हाथ उठाकर दरवाजे पर रखी तो दरवाजा खुद ब खुद खुल गया,,,,,।

कभी कभार अंकित अपने कमरे के दरवाजों को खुला ही छोड़ देता था वैसे भी छुपाने लायक उसके पास कुछ भी नहीं था,,, और अपने बेटे के कमरे के खुले हुए दरवाजे को अपनी किस्मत का द्वार समझ कर वह प्रसन्नता के साथ अंदर की तरफ देखने लगी उसका बेटा एकदम गहरी नींद में सो रहा था,,,, अंदर डिम लाइट जल रहा था इसके लिए उसकी रोशनी बहुत कम थी जिसमें उसे कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था वह धीरे से कमरे में प्रवेश की और हल्के से दरवाजे को बंद कर दी सुबह का समय हो चुका था इसलिए उसके पास एक बहाना था उसे जगाने का और कैमरा साफ करने का और वह अपने साथ में झाड़ू भी लेकर आई थी इसलिए वह ट्यूबलाइट की स्विच को ऑन कर दी और पूरे कमरे में दूधिया रोशनी फैल गई और अपने बेटे के बिस्तर की तरफ देखी तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न था उसका बेटा पीठ के बल लेटा हुआ था और चादर उसकी छाती हो तो खींची हुई थी लेकिन इस बीच उसकी दोनों टांगों के बीच का हिस्सा तंबू की शक्ल में ऊपर की तरफ उठा हुआ था जिसे देखकर सुगंधा की हालत खराब हो गई उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया क्योंकि जिस तरह का तंबू चादर में बना हुआ था उसे देखकर सुगंधा को एहसास हो गया था कि उसके बेटे का मर्दाना अंग कुछ ज्यादा ही ताकतवर है,,,,। ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा था वह आई तो थी अपनी जवानी का जलवा भी खेलने लेकिन अपने बेटे की जवानी देखकर उसका खुद का पानी छूट रहा था उसकी बुर पिघल रही थी,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह अभी भी अपने बेटे के बिस्तर से तीन-चार फीट की दूरी पर थी लेकिन फिर भी सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,, वह अपने बेटे के चेहरे की तरफ देखी जो की बहुत ही मासूम लग रहा था और वैसे भी उसका बेटा बहुत मासूम था लेकिन सोते समय वह और भी ज्यादा मासूम नजर आता था वह धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे बढ़ने लगी और अपने बेटे के बिस्तर के बेहद करीब जाकर खड़ी हो गई और बड़े ध्यान से अपने बेटे की दोनों टांगों के बीच चादर में बने तंबू को देखने लगी उसके सांस लेने के साथ-साथ उसके तंबू में हरकत होती थी जो की हल्का-हल्का हिल रहा था और उसे देखकर ना जाने क्यों सुगंधा के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आना शुरू हो गया था उसका मन तो कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के लंड को पकड़ ले लेकिन उसकी हिम्मत गवाही नहीं दे रही थी हालांकि उसकी सांसों पर नीचे हो रही थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर तोड़ने लगी थी वह गाऊन के अंदर पूरी तरह से नंगी थी,,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि अगर उसके बेटे की तरफ से दूसरे मर्दों की तरह प्रतिक्रिया मिली होती या उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित होता तो इस समय वह बेझिझक होकर अपने बेटे के ऊपर से चादर हटाकर उसके खड़े लंड पर अपनी गुलाबी बुर रख देती और उसके लंड पर कूदना शुरू कर देती,,, क्योंकि वह जानती थी कि उसके और उसके बेटे के बीच केवल शर्म की ही दूरी थी,,,, और इस दूरी को सुगंधा पूरी तरह से कम कर देना चाहती थी लेकिन कैसे उसे समझ में नहीं आ रहा था,,,,।

सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था उत्तेजना के मरी उसकी बुर फुल पिचक रही थी बार-बार उसका हाथ अपने आप ही उसकी बुर पर चला जा रहा था आई तो थी वह अपने बेटे को अपनी चूची दिखाने लेकिन अपने बेटे की मर्दाना अंग की झलक पाकर ही उसकी बुर की हालत खराब होती नजर आ रही थी,,,, बरसों गुजर गए थे उसकी बुर में लंड प्रवेश नहीं कर पाया था अपने पति के देहांत के बाद तो वह लंड की गर्मी को अपनी बुर में महसूस करना ही भूल गई थी,,, इसलिए तो उसकी बुर तड़प रही थी एक मोटे तगड़े लंड को लेने के लिए,,,, सुगंधा का मन व्याकुल हो रहा था और अंदर ही अंदर वह तड़प रही थी वह अपने बेटे के लंड को स्पर्श करना चाहती थी पकड़ना चाहती थी देखना चाहती थी उसकी मोटाई को उसकी लंबाई को उसके अंदर की गर्मी को वह अपनी आंखों से अपने बेटे के लंड को पिघलता हुआ देखना चाहती थी अपने बेटे के लंड से निकलने वाली पिचकारी की धार को देखना चाहती थी और उस धार को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी बहुत कुछ था सुगंधा के अंदर लेकिन शर्म की दीवार के पीछे सब कुछ छुपा हुआ था,,,,

सुगंधा अपने बेटे की तरफ बड़े ध्यान से देख रही थी वह पूरी तरह से गहरी नींद में सो रहा था इसलिए वह अपने बेटे के नींद में होने का फायदा उठा लेना चाहती थी इसलिए हिम्मत बांधकर वह अपने हाथ को आगे बढ़ने लगी चादर के ऊपर से ही सही वह बरसों के बाद लंड को पकड़ना चाहती थी,,, इसलिए धीरे-धीरे अपने हाथ को आगे बढ़ा रही थी अपने बेटे के लंड की तरफ बढ़ते अपने हाथ की तरफ वह बड़ी गौर से देख रही थी जिसमें डर और उत्तेजना का कंपन साफ महसूस हो रहा था,,,, और देखते ही देखते उसकी हथेली उसके बेटे के लंड के बेहद करीब पहुंच गई थी और इसी के साथ उसके दिल की धड़कन भी एकदम तेज चलने लगी थी,,, वह अपनी हथेली को कुछ देर तक अपने बेटे के लंड के करीब ही स्थिर कर दी थी और अपने मन में सोचने लगी थी कि अगर उसके बेटे की आंख खुल गई और उसने अपनी आंखों से अपनी मां को इस तरह की हरकत करता देखा तो अपने मन में क्या सोचेगा,,, फिर वह अपने ही मन में उठ रहे सवाल का खुद से ही जवाब देते हुए अपने मन में अपने मन की तसल्ली के लिए बोली,,,।

कुछ नहीं होगा उसका बेटा भी आखिरकार एक मर्द ही तो है उसके बीच जज्बात है उसका भी लंड खड़ा होता होगा जैसा कि इस समय खड़ा है अगर एक औरत का हाथ उसके लंड पर स्पर्श होगा तो वह पूरी तरह से मस्त हो जाएगा मचल उठेगा औरत के प्यार को पाने के लिए,,, और अगर एक औरत के स्पर्श से उसके लंड में जरा भी अंगड़ाई आएगी तो वह उसे औरत के सुख के लिए तड़प उठेगा भले ही उसके लंड का स्पर्श करने वाला उसकी मां ही क्यों ना हो,,,, यह सब सोच कर सुगंध का दिन बड़े जोरों से धड़क रहा था,,, अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर उसके मन में अपने बेटे को लेकर बड़ी जिज्ञासा हो रही थी वह अपनी मन में सोच रही थी कि उसका बेटा भी औरतों के बारे में जरुर सोचता है तभी तो उसका लंड खड़ा है,,,, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था अंकित का लंड प्राकृतिक रूप से सुबह-सुबह पेशाब लगने के कारण अपने आप ही खड़ा हो गया था जिसका अर्थ उसकी मां गलत तरीके से ले रही थी चाहे जैसा भी हो सुगंधा को अपना उल्लू ठीक करने से मतलब था,, ।

अंकित पूरी तरह से गहरी नींद में डूबा हुआ था वह गहरी-गहरी सांस ले रहा था और इसी का फायदा वह उठा लेना चाहती थी और यही हाल सुगंधा का भी था वह अपने मन में सोच रही थी कि जल्दी से वह अपने बेटे के लंड को पकड़ कर जल्दी से छोड़ देगी ताकि उसके बेटे को अहसास तक ना हो,,,, मुझे सोच कर अपनी हथेली को खोलकर वहां जल्दी से चादर में बने तंबू को अपनी हथेली में भरकर उसकी लंबाई उसकी मोटाई को अपने अंदर महसूस करके एकदम मस्त होते हुए जल्दी से छोड़ दी उत्तेजना के मारे और मदहोशी के आलम में उसकी आंख अपने आप बंद हो चुकी थी,,,, सुगंधा हिम्मत दिखा कर अपनी बेटी के लैंड को एक बार अपनी हथेली में दबाकर उसे छोड़ दी थी लेकिन इतने से वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि उसकी बुर से पानी फेंक दिया वह झड़ गई थी आखिर ऐसा होना संभव ही था क्योंकि बरसों बाद उसके हाथ में लंड जो आया था और वह भी अपने ही बेटे का एकदम मजबूत मोटा तगड़ा लंबा,,, वह गहरी गहरी सांस लेते हुए अपना पानी निकाल रही थी वह अपने बेटे की तरफ देखी थी उसका बेटा अभी भी बेसुध होकर सो रहा था,,,, सुगंधा की हरकत का उसके बेटे पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा था इसलिए सुगंधा की हिम्मत थोड़ा और बढ़ने लगी वह एक बार फिर से अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भरकर महसूस करना चाहती थी,,,,,।

एक बार अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भरकर उसके परिणाम को देख चुकी थी पहली बार में ही वह अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भरने पर ही झड़ चुकी थी और दूसरी बार वह फिर से यह गुस्ताखी करके देखना चाहती थी,,,, और वह फिर से अपना हाथ आगे बढ़ा कर एक बार फिर से अपने बेटे के तंबू को अपनी हथेली में भरकर हल्के से दबा दी और इस बार उसके बेटे के बदन में थोड़ी हरकत हुई और वह तुरंत अपनी हथेली को पीछे खींच ली,,,, इस बार सुगंधा की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बड़े जोर से भाग कर आई हो उत्तेजना के मारे उसकी चूचियों की निप्पल एकदम तन गई थी और उसकी बुर फूल पिचक रही थी,,,,, धड़कते दिल के साथ वह घड़ी की तरफ देखी तो 6:20 हो रहा था,,,,, समय हो गया था और उसे अपनी बेटी के कमरे से भी हल्की-हल्की आवाज आ रही थी इसका मतलब साफ था कि वह भी जाग गई थी अब अपनी युक्ति पर आगे बढ़ना उचित नहीं था,,, और जिस हालत में वह अपने बेटे के बिस्तर के बेहद करीब खड़ी थी उसे शर्म महसूस होने लगी थी वह धीरे से वापस दरवाजे की तरफ गई और ट्यूबलाइट बंद करके वापस दरवाजे को बाहर से ही दस्तक देते हुए अपने बेटे को उठने के लिए बोली दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज सुनकर अंकित की नींद खुल गई और वह भी उठकर बैठ गया लेकिन उसे जरा भी एहसास नहीं हुआ कि उसकी मां दो बार उसके लंड को अपने हाथ में लेकर छोड़ दी थी वह पूरी तरह से सहज था असहज थी तो सिर्फ सुगंधा,,,, जब सुगंधा ने देखी कि उसका बेटा उठकर बैठ गया है तो वह खुद-ब-खुद वहां से हट गई और अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए बाथरूम में घुस गई जहां पर वह अपना गाउन उतार कर एकदम नंगी हो गई और फिर अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपनी जवानी की आग को बुझाने की कोशिश करने लगी,,,।

सुगंधा ने दूध वाले की तरह ही अपने बेटे को अपनी चुचियों का जलवा दिखाने की युक्ति को स्थगित कर दी थी क्योंकि उसे अपनी जवानी का जलवा दिखाने जितना समय ही नहीं था वरना वह अपने मन में तय कर चुकी थी कि आज झाड़ू लगाते समय वह अपने बेटे को अपनी उभरती हुई जवानी का जलवा जरूर दिखाएगी,,, लेकिन अपने बेटे के कमरे में प्रवेश करते ही उसकी आंखों के सामने जो नजर नजर आया था उसे देखकर उसके तन बदन में आग लग चुकी थी और वह अपने मां पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई थी चादर ओढ़ कर सो रहे अंकित के खुंटे को अपनी आंखों से देख कर उसे पकड़ने की अपनी इच्छा को सुगंधा दबा नहीं पाई थी और इसी के चलते वहां चादर के ऊपर से ही सही अपने बेटे के लंड को छूने की कोशिश की थी और जिसमें वह कामयाब भी हो चुकी थी एक नहीं बल्कि दो दो बार,,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा को समझते देर नहीं लगी थी कि उसके बेटे के पास का हथियार बेहद दमदार है जो कि किसी भी औरत को पूरी तरह से तृप्त कर सकता है,,,

अपने बेटे के लंड को चादर के ऊपर से ही स्पर्श करने की खुशी में हो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी,,, जिसका असर उसे अपनी बुर में बराबर महसूस हो रहा था और वह अपनी बुर की गर्मी को शांत करने के लिए बाथरूम में प्रवेश करके अपनी उंगलियों का सहारा लेकर वह अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रही थी,,,।

सुगंधा का दिमाग पूरी तरह से उन्मादित हो चुका था उसमें अब सही गलत के सोचने की क्षमता नहीं रह गई थी पहले तो वह दूसरे लड़कों की दोनों टांगों के बीच की स्थिति का कल्पना में ही जायजा लिया करती थी लेकिन अब उसकी नजर अपने ही जवान बेटे पर थे जो की पूरी तरह से भला भला था उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं हुआ था की चोरी से उसकी मां उसके कमरे में जाकर उसके खड़े लंड को चादर के ऊपर से पकड़ ली थी,,,। सुगंधा ने अपने मां पर बिल्कुल भी काबू न करके जिस तरह की हरकत अपने बेटे के साथ की थी उसे देखते हुए वहां अपने बेटे को चाय पानी खाना देने पर भी उससे,, नजर नहीं पिला पा रही थी क्योंकि उसने हरकत ही ऐसी कर दी थी पहले ही एक औरत होने के नाते वह अपने बेटे को उसे समय मर्द समझकर उसके खड़े लंड को अपने हाथों से पकड़ ली थी लेकिन आखिरकार थी तो वह उसे मर्द की मा ही,,, इसलिए सुगंधा के साहजिक होने पर उसमें की औरत दूर हो जाती थी और उसमें एक मां नजर आने लगती थी इसलिए वह अपने बेटे से नजर नहीं मिल पा रही थी लेकिन अंकित को तो कुछ पता ही नहीं था कि उसके साथ क्या हुआ था वह तो पूरी तरह से सहज था,,,,।

कभी-कभी सुगंधा को अपनी हरकत पर शर्मिंदगी महसूस होती थी और वह इस झमेले से निकलने की कोशिश करती थी लेकिन वह जितना भी इस झमेले से निकलने की कोशिश करती थी उतनी ही उसके अंदर डूबती चली जाती थी,,,, आखिरकार वासना का दरिया ही होता है इतना गहरा की सब कुछ अपने अंदर डूबा ले जाता है और ऐसा ही सुगंधा के साथ भी हो रहा था,,,,।

जैसे तैसे करके दिन गुजरने लगे सुगंधा अपने मन में बहुत चाहती थी कि वह अपने बेटे को अपनी जवानी का जलवा दिखाएं लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से अपने आप को तैयार करें अपने बेटे के सामने प्रदर्शन करने के लिए,,,,, क्योंकि जब भी वह कोशिश करती थी उसके अंदर घबराहट और शर्म एकदम साफ नजर आती थी वह इस बात से घबरा जाती थी कि अगर उसके बेटे को जरा भी इस बात का एहसास हो गया कि उसकी मां,,, जानबूझकर अपने अंगों की नुमाइश उसके सामने कर रही है तब क्या होगा तब उसका बेटा कैसा बर्ताव करेगा उसके बारे में क्या सोचेगा यही सब सोच कर उसका मन बैठ जाता था,,,, लेकिन जो काम हो घर में नहीं कर पाती थी वह खुद के लिए अद्भुत कार्य को अपनी क्लास में कर जाती थी अपने विद्यार्थियों के सामने,,,।

एक दिन वह अपने विद्यार्थियों को पढ़ा रही थी,,, और ब्लैक बोर्ड पर कुछ लिख रही थी उसे इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसके लिए एकदम सहज क्रिया को उसके जवान विद्यार्थी वासना भरी नजरों से देख रहे थे क्योंकि जिस तरह से वह अपना हाथ ऊपर करके ब्लैक बोर्ड पर चौक से कुछ लिख रही थी उसकी इस क्रिया पर उसके नितंबों का आकार कुछ ज्यादा ही उभर कर सामने नजर आ रहा था,,, और वैसे भी सुगंधा की आदत थी वह साड़ी को कमर पर एकदम कसकर बांधती थी जिसकी वजह से उसके नितंबों का आकार साड़ी के ऊपर से भी झलकता रहता था,,, और उसकी यही आदत मर्दों की कमजोरी बन जाती थी,,, और इस समय सुगंधा का यह रूप क्लास के कुछ आवारा लड़कों की आंखें सेंकने का काम कर रही थी,,,, अपनी टीचर की खूबसूरती और उसके अंगों का कटाव उभारओर मरोड़ देखकर विद्यार्थियों के मुंह से गर्म आ निकल जाती थी,,, और वह आवारा लड़के दूसरी बेंच पर बैठकर यही सब देखा करते थे उन लोगों को सुगंधा क्या पड़ता है इससे कोई मतलब नहीं था उन लोगों को मतलब था सिर्फ सुगंधा की खूबसूरती को अपनी आंखों से देखने का उसके खूबसूरत बदन के रस को अपनी आंखों से पीने का जो कि वह बखूबी कर रहे थे,,,।

जिस तरह से सुगंधा चौक से ब्लैक बोर्ड पर एक-एक शब्द को लिख रही थी उसके हाथ के झटका के साथ-साथ उसके बदन में भी लहर उठ रही थी उसके नितंबों में एक अद्भुत तरीके की थिरकन हो रही थी मानो कि जैसे कोई शांत नदी में कंकड़ फेंकने पर लहर उठती है ठीक उसी तरह से सुगंधा के नितंबों में भी लहर उठ रही थी जिसे देखकर आगे बेंच पर बैठे लड़कों का लंड खड़ा हो चुका था,,,, उनमें से एक लड़का धीरे से दूसरे के कान में बोला,,,।

बाप रे मैडम की गांड तो देख मेरा तो लंड खड़ा हो गया है,,,

मेरा भी यही हाल है यार बस एक बार डालने का मौका मिल जाए तो समझ लो जिंदगी सफल हो गई,,,।

(दोनों आपस में इस तरह से बात कर रहे थे और आगे ब्लैकबोर्ड पर लिख रही सुगंध को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था बस उसे इतना ही एहसास हो रहा था कि कोई बातें कर रहा है लेकिन क्या बातें कर रहा है किसके बारे में बातें कर रहा है यह उसे नहीं मालूम था तो वह धीरे से नजर घुमा कर उन दोनों की तरफ देखी तो उसके होश उड़ गए पहले तो उसे पता नहीं चला लेकिन जैसे ही उन लड़कों की नजरों का पता चला सुगंधा के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी क्योंकि वह लड़के प्यासी नजरों से उसके नितंबों के उभार को ही देख रहे थे,,,, उन लड़कों की नजरों को देखकर सुगंधा कुछ बोल नहीं पाई और वापस ब्लैक बोर्ड पर सहज होकर लिखने का नाटक करने लगी लेकिन अब उसके कान खड़े हो चुके थे वह उन लड़कों की बातों को सुनना चाहती थी क्योंकि उन दोनों की नजरे उसकी गांड पर ही टिकी हुई थी और इतना तो वह समझता ही थी कि ऐसा जवान लड़के कब करते हैं वह ब्लैकबोर्ड पर लिख रही थी तभी वह बड़े गौर से सुनने लगी और उसे हल्का-हल्का सुनाई देने लगा,,,)

कसम से मैडम की गांड कितनी बड़ी-बड़ी है,,,,,

(उनमें से एक लड़का बोला और सुगंधा को केवल गांड कितनी बड़ी-बड़ी है इतना ही सुनाई दिया लेकिन उसे समझते देर नहीं लगी कि वह दोनों किसके बारे में बात कर रहे थे वह जान गई थी कि वह लड़के उसके बारे में ही बातें कर रहे थे एकदम खुलकर,,, इतना सुनकर सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा जहां एक तरफ उसे थोड़ा अजीब लग रहा था वहीं दूसरी तरफ लड़कों की बातें और उन दोनों की नजरों को देखकर उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,, वह धड़कते दिल के साथ हुआ ब्लैक बोर्ड पर इस तरह से लिखे जा रही थी और उन दोनों की बातें सुनी जा रही थी तभी उनमें से एक लड़का बोला,,,)

कसम से मुझे मिल जाए तो मैं तो मैडम की गांड दोनों हाथों से पकड़ कर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दुं,,,।

(उसे लड़के की पूरी बात एक-एक शब्द सुगंधा के कानों में एकदम साफ-साफ सुनाई दिया था और इसे सुनकर तो उसकी बुर का पूरा तालाब नमकीन खारे पानी से भर गया और उसमें से बहने भी लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सारे विद्यार्थी उसके बेटे की उम्र के थे उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था,,,उन, लड़कों की बात सुनकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी,,, तभी उसके मन में ख्याल आया कि क्यों ना वह जो युक्ति अपने बेटे पर आजमाना चाहती थी वही युक्ति अपने विद्यार्थियों पर आजमाए,,,, यह ख्याल उसके मन में आते ही उत्तेजना के मारे उसकी बुर फूलने पिचकने लगी और वह अपनी युक्ति को क्लास में ही आजमा लेना चाहती थी वह अपने विद्यार्थियों के चेहरे पर बदलते भाव को देखना चाहते कि वह देखना चाहती थी कि उसकी चूचियों को देखकर उसके विद्यार्थियों पर क्या प्रभाव पड़ता है और इसके लिए वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी इसलिए जैसे ही वह विद्यार्थियों की तरफ घूमी वह अपने हाथ से चौक के टुकड़े को नीचे गिरा दी,,,, और उसे उठाने के लिए नीचे झुक गई और झुकाने की वजह से जवानी से भरी हुई लबालब उसकी दोनों चूचियां ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने के लिए उतारू हो गई उसके साड़ी का पल्लू कंधे पर से नीचे गिर गया था जो की वह खुद ही जानबूझकर नीचे गिरती थी और कुछ सेकेंड के लिए वह चौक के टुकड़े को उठाने के लिए नीचे झुकी रह गई थी और इतना तो उन विद्यार्थियों के लिए बहुत था उन विद्यार्थियों की नजर से ही सुगंधा की जवानी से भरी हुई चूचियों पर गई उनके तो होश उड़ गए उनकी आंखें फटी के फटी रह गई और आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,,

सुगंधा उसे स्थिति में अपने आप को एक बार देखने लगी और नजर उठाकर उन विद्यार्थियों की तरफ देखने लगी जो कि वह विद्यार्थी उसी की तरफ देख रहे थे विद्यार्थियों की हालत को सुगंधा अच्छी तरह से समझ गई थी,,वह साफ तौर पर देख पा रही थी कि विद्यार्थियों के चेहरे का रंग उड़ चुका था उनकी आंखों में वासना की चमक एकदम साफ नजर आ रही थी वह एकदम भूल चुके थे कि जिसे देखकर वह इतना उत्तेजित हो रहे हैं वह सही मायने में उन लोगों की गुरु थी शिक्षिका थीं उन्हें शिक्षा देने वाली थी सही मार्गदर्शन करने वाली थी लेकिन जवानी से भरी हुई है खूबसूरत औरत अगर मर्दों की नजर में वासना भारी हो तो वह फिर किसी भी रिश्ते की रेखा में नहीं आती बल्कि वह केवल एक औरत ही बनकर रह जाती है और इस समय भी यहां भी यही हो रहा था वह एक शिकायत ही और क्लास में बैठे लड़के विद्यार्थी थे लेकिन शिक्षिका और विद्यार्थी के बीच का रिश्ता मानव खत्म हो चुका था वह लड़के वासना भरी नजरों से अपनी ही शिक्षिका की अपने ही मैडम की चूचियों को नजर भर कर देख रहे थे लेकिन इसका मलाल सुगंधा को बिल्कुल भी नहीं था बल्कि वह तो अंदर ही अंदर एकदम प्रसन्न नजर आ रही थी क्योंकि उसकी युक्ति एकदम सत प्रतिशत कम कर रही थी,,,, यह नजारा कुछ सेकंड का ही था हाथ में चौक लेकर वापस सुगंधा खड़ी हो गई और अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करने लगी और तिरछी नजर से उन लड़कों की तरफ देख भी रही थी चौकी अभी तक बदहवास नजरों से उसे ही देख रहे थे,,,, सुगंधा आगे कुछ बोल पाती या अपनी क्रियाकलाप का प्रदर्शन यहां पर कर पाती से पहले ही छुट्टी होने की घंटी बज गई,,,। और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा गिर चुका था,,,।
 
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