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- Dec 5, 2013
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शमशेर : “वॉव ….ऐसे कपड़े तो बड़े अच्छे लगेंगे तुझ पर….”
सलोनी आवेश में बोल गयी : “हाँ ….देख लेना रात को…”
फिर अपनी ही बात पर वो शरमा कर रह गयी
शमशेर समझ गया की वो पहले से तैयार है रात के लिए
और वैसे भी आज का चैप्टर कुछ और एडवांस होने वाला था
उपर पहुँचकर सलोनी सीधा अपने रूम में गयी और दरवाजा बंद करके सारे कपड़े एक-2 करके पहन कर देखे
स्कर्ट्स, टी शर्ट्स, ब्रा और पेंटी
सब उसके उपर कयामत ढा रहे थे
अभी के लिए उसने एक टी शर्ट और शार्ट / निक्कर, जो उसके घुटनो से भी उपर आ रही थी, पहन ली
उसकी गठीली जाँघे उसमें दूर से ही चमक रही थी
और जब वो कपड़े पहन कर बाहर गयी तो सबसे पहले उसे मॉम ने देखा
और उसे देखते ही वो एकदम से उसपर बरस ही पड़ी
“सलोनी….ये क्या पहन आई…तुझे पता है ना पापा को ये सब पसंद नही है….और ये…ये तो मुझे भी पसंद नही आ रहा , इतने छोटे कपड़े भी भला कोई पहनता है…चल जल्दी से इन्हे चेंज करके आ, और कल उन्हे वापिस करके आना मार्केट में …ऐसे कपड़े नही पहनेगी तू…समझी…”
बेचारी सलोनी का मुँह लटक कर रह गया
और तभी उसकी रक्षा के लिए पापा प्रकट हो गये
जो अपनी लूँगी की गाँठ बाँधते हुए कमरे से निकले और सलोनी को देखकर अपने होंठो पर जीभ फेरने लगे
और फिर ज्योति की तरफ घूमे और उसपर ही बरस पड़े वो
“क्यो, क्या दिक्कत है इन कपड़ो में ….इतनी प्यारी लग रही है हमारी बेटी इसमें , मैने ही परमिशन दी है इसे अपनी मर्ज़ी के कपड़े पहनने की, और तुम अपने काम से काम रखो, समझी…”
कुछ देर पहले जो मॉम मुझे डाँटकर चौड़ी हो रही थी , खुद डांट खा रही थी मेरे प्यारे पापा से
मैं मंद-2 मुस्कुरा रही थी
अपने पापा की मदद पाकर
और मॉम हैरान हो रही थी
की पापा एकदम से ऐसे क्यो बदल गये है
कल भी शायद उन्होने मेरी शॉर्ट देख ली थी
पर उतना नही बोल पाई
पर आज जब बोली तो डांट पड़ गयी
फिर उसने मन में सोचा की जब इसके पापा को ही ये सही लग रहा है तो मुझे भला क्या तकलीफ़ होगी
वैसे भी वो तो उसके भले के लिए ही बोल रही थी
ताकि उसके पापा उसे ऐसे कपड़ो में देखकर ना डांटे
इसलिए वो चुपचाप किचन में गयी और खाना बनाने की तैयारी करने लगी
तब तक शमशेर रोज की तरह अपनी लूँगी बनियान में अपनी सीट पर जाकर बैठ गया
और पेग बनाने लगा
आज सलोनी उसके लिए पानी और सलाद खुद लेकर आई
उसे दूर से अपनी तरफ मटक कर आते देखकर उसकी लूँगी में हलचल सी होने लगी और उसका लॅंड धीरे-2 उठकर उसके ग्लास को टच करने लगा जो अपनी नाभि के पास उसके हाथ में था
सलोनी उसके पास आई और झुक कर बोली : “पापा, कुछ और चाहिए…?”
जवाब मे शमशेर ने उसकी टी शर्ट से झांकते कबूतरों को देखा और मुस्कुरा दिया
सलोनी भी एक नशीली मुस्कान के साथ अपनी गांड मटकाती हुई अपने रूम में चली गयी
उसे अब इंतजार था अपनी माँ के सोने का
क्योंकि खाना बनाने के बाद उनसे खड़ा भी नही रहा जाता, वो सीधा जाकर सो जाती थी
पर आज उनका भी मूड कुछ और ही था
पिछले 2-3 दिनों से अपने पति की बेरूख़ी उसे भी दिखाई दे रही थी
उसे क्या पता था की बाहर एक दूसरी सलोनी की कसी हुई चूत उसके पति की प्यास बुझा रही है
और घर में उसकी खुद की बेटी उसकी वाइल्ड फैंटेसीज को पूरा कर रही है
हालाँकि वो खुद भी बबलू के साथ मज़े ले रही थी
पर अपने पति को अपनी चूत से बाँधे रखने का सपना हर औरत का होता है
ख़ासकर जब उसका पति ठरकी हो
और ठरकी होने के बाद भी वो उसकी तरफ ना देखे तो मन में सवाल तो उठते ही है
अब उसे दूसरी बातों का अंदाज़ा तो नही था
उसे अपनी ही ग़लती लग रही थी की शायद वो जल्दी सो जाती है इसलिए उसका पति चाहकर भी उसकी ले नही पा रहा है
पर आज वो ऐसा नही करेगी
अपने पति को खुश करके रहेगी
उसने जल्दी से खाना बनाया और बाहर आकर शमशेर के साथ बैठकर टीवी देखने लगी
शमशेर भी हैरान था की वो वहाँ आकर क्यों बैठ गयी है
अब तक तो उसे खाना खाकर अपने रूम में चले जाना चाहिए था, सोने के लिए
पर वो कुछ ना बोला
ज्योति धीरे-2 उसके करीब खिसक आई और अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया और उसे सहलाने लगी
अब शमशेर को समझ आने लगा था की वो क्यों बैठी है उसके पास
वो फिर भी चुप रहा
क्योंकि वो भी देखना चाहता था की वो अपनी बेटी के जागते रहने के बावजूद किस हद तक जाती है
धीरे-2 ज्योति का हाथ उसके लॅंड पर पहुँच गया, जो पहले से ही अकड़ कर खड़ा हो चुका था
और वो उसे लुंगी के उपर से ही रगड़ने लगी
हाथ उपर नीचे करते हुए उसकी साँसे तेज़ी से चल रही थी
वो अपने बूब्स को शमशेर की बाजुओं पर रगड़ रही थी, उसके मोटे निप्पल्स शमशेर को किसी इंजेक्शन की तरह चुभ रहे थे
फिर अचानक ज्योति ने उसके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ किया और उसे एक रसीला चुम्बन दे डाला
एक पल के लिए ही सही
उसके मुँह की सारी चाशनी शमशेर के मुँह में ट्रान्स्फर हो गयी
ये उसे बताने के लिए था की वो कितनी उत्तेजित है
अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार है
वो कसमसाते हुए बोली : “चलो ना जानू….रूम में ….मैं पूरी गीली हो चुकी हूँ ….”
शमशेर भी बड़ा घाघ इंसान था
वो बोला : “अभी रूको, थोड़ा सरूर तो बनने दो, फिर चलते है…”
बेचारी का दिल टूट सा गया
क्योंकि आज तक उसने अपनी तरफ से कभी पहल नही की थी
हमेशा शमशेर ही उसके जिस्म को रोंदकर चला जाता था
और आज जब उसने पहल की तो वो भाव खा रहा था
पर वो कर भी क्या सकती थी
सलोनी घर पर ही थी
उसके बाहर आने का डर भी था वरना अभी तक वहीं उसके लॅंड पर बैठ चुकी होती वो
वो अपने हाथ से उसके लंड को सहलाती रही ताकि उसकी और शमशेर की उत्तेजना कायम रहे
शमशेर के दिमाग़ मे कुछ और ही चल रहा था
उसने अपने खड़े हुए लॅंड को धीरे-2 लूँगी से बाहर निकल दिया और अपनी बीबी के हाथ में अपना नंगा लॅंड दे दिया
वो एकदम से घबरा गयी और सलोनी के रूम की तरफ देखने लगी
वो फिर से गिड़गिडाई : “प्लीज़ यहाँ नही….सलोनी घर पर ही है, कभी भी बाहर आ सकती है, वो देख लेगी तो क्या सोचेगी हमारे बारे में , अंदर चलो ना, आज आपको खुश कर दूँगी अच्छे से…”
वो अपने होंठो पर जीभ फेरकर बोल रही थी, यानी उसके लॅंड को खुद ही चूसने का न्योता दे रही थी वो
शमशेर : “देख लेगी तो देखने दे, उसकी वजह से मैं अपनी मर्ज़ी का काम छुपकर नही कर सकता, तू उसकी फ़िक्र ना कर, वो आएगी तो दूर से ही देख लूँगा मैं , तू अभी के लिए यहाँ आ”
इतना कहकर उसने ज्योति के सिर को पकड़ कर अपने लॅंड की तरफ झुका दिया और अपना लॅंड उसके रसीले होंठो में फँसा कर एक जोरदार झटका दिया
शमसेर का लंड सरसराता हुआ उसके मुंह में घुसता चला गया
बेचारी की हालत खराब हो गयी
पर अपने पति की बात वो टाल नही पाई
उसके गुस्से के बारे में वो अच्छे से जानती थी
अभी कुछ दिन पहले ही इसी ड्रॉयिंग रूम में उसे कुतिया बना कर चोदा था उन्होने
और जब वो कह रहे है की वो दूर से सलोनी को देख लेंगे तो ये उनकी प्राब्लम है अब
वैसे भी वो काफ़ी गीली हो चुकी थी
लॅंड की महक ने उसे और भी कमजोर कर दिया
और एक अलग सा रोमांच भी उत्पन हो गया था उसके शरीर में
अपनी बेटी के जागते हुए वो ऐसा पहली बार कर रही थी
एकदम रंडी वाला एहसास हो रहा था उसे
इसलिए उसने शमशेर के लॅंड को अपने हाथ में पकड़ा और उसे जोरों से चूसने लगी
आज तक इतनी ज़ोर से उसे कभी नही चूसा था उसने
इसलिए शमशेर भी बेचारा उसके सर को कंट्रोल करने का प्रयास करने लगा
और इसी बीच सलोनी अपने रूम से बाहर आई
उसे तो अंदाज़ा भी नही था की बाहर उसके माँ बाप क्या गुल खिला रहे है
सलोनी आवेश में बोल गयी : “हाँ ….देख लेना रात को…”
फिर अपनी ही बात पर वो शरमा कर रह गयी
शमशेर समझ गया की वो पहले से तैयार है रात के लिए
और वैसे भी आज का चैप्टर कुछ और एडवांस होने वाला था
उपर पहुँचकर सलोनी सीधा अपने रूम में गयी और दरवाजा बंद करके सारे कपड़े एक-2 करके पहन कर देखे
स्कर्ट्स, टी शर्ट्स, ब्रा और पेंटी
सब उसके उपर कयामत ढा रहे थे
अभी के लिए उसने एक टी शर्ट और शार्ट / निक्कर, जो उसके घुटनो से भी उपर आ रही थी, पहन ली
उसकी गठीली जाँघे उसमें दूर से ही चमक रही थी
और जब वो कपड़े पहन कर बाहर गयी तो सबसे पहले उसे मॉम ने देखा
और उसे देखते ही वो एकदम से उसपर बरस ही पड़ी
“सलोनी….ये क्या पहन आई…तुझे पता है ना पापा को ये सब पसंद नही है….और ये…ये तो मुझे भी पसंद नही आ रहा , इतने छोटे कपड़े भी भला कोई पहनता है…चल जल्दी से इन्हे चेंज करके आ, और कल उन्हे वापिस करके आना मार्केट में …ऐसे कपड़े नही पहनेगी तू…समझी…”
बेचारी सलोनी का मुँह लटक कर रह गया
और तभी उसकी रक्षा के लिए पापा प्रकट हो गये
जो अपनी लूँगी की गाँठ बाँधते हुए कमरे से निकले और सलोनी को देखकर अपने होंठो पर जीभ फेरने लगे
और फिर ज्योति की तरफ घूमे और उसपर ही बरस पड़े वो
“क्यो, क्या दिक्कत है इन कपड़ो में ….इतनी प्यारी लग रही है हमारी बेटी इसमें , मैने ही परमिशन दी है इसे अपनी मर्ज़ी के कपड़े पहनने की, और तुम अपने काम से काम रखो, समझी…”
कुछ देर पहले जो मॉम मुझे डाँटकर चौड़ी हो रही थी , खुद डांट खा रही थी मेरे प्यारे पापा से
मैं मंद-2 मुस्कुरा रही थी
अपने पापा की मदद पाकर
और मॉम हैरान हो रही थी
की पापा एकदम से ऐसे क्यो बदल गये है
कल भी शायद उन्होने मेरी शॉर्ट देख ली थी
पर उतना नही बोल पाई
पर आज जब बोली तो डांट पड़ गयी
फिर उसने मन में सोचा की जब इसके पापा को ही ये सही लग रहा है तो मुझे भला क्या तकलीफ़ होगी
वैसे भी वो तो उसके भले के लिए ही बोल रही थी
ताकि उसके पापा उसे ऐसे कपड़ो में देखकर ना डांटे
इसलिए वो चुपचाप किचन में गयी और खाना बनाने की तैयारी करने लगी
तब तक शमशेर रोज की तरह अपनी लूँगी बनियान में अपनी सीट पर जाकर बैठ गया
और पेग बनाने लगा
आज सलोनी उसके लिए पानी और सलाद खुद लेकर आई
उसे दूर से अपनी तरफ मटक कर आते देखकर उसकी लूँगी में हलचल सी होने लगी और उसका लॅंड धीरे-2 उठकर उसके ग्लास को टच करने लगा जो अपनी नाभि के पास उसके हाथ में था
सलोनी उसके पास आई और झुक कर बोली : “पापा, कुछ और चाहिए…?”
जवाब मे शमशेर ने उसकी टी शर्ट से झांकते कबूतरों को देखा और मुस्कुरा दिया
सलोनी भी एक नशीली मुस्कान के साथ अपनी गांड मटकाती हुई अपने रूम में चली गयी
उसे अब इंतजार था अपनी माँ के सोने का
क्योंकि खाना बनाने के बाद उनसे खड़ा भी नही रहा जाता, वो सीधा जाकर सो जाती थी
पर आज उनका भी मूड कुछ और ही था
पिछले 2-3 दिनों से अपने पति की बेरूख़ी उसे भी दिखाई दे रही थी
उसे क्या पता था की बाहर एक दूसरी सलोनी की कसी हुई चूत उसके पति की प्यास बुझा रही है
और घर में उसकी खुद की बेटी उसकी वाइल्ड फैंटेसीज को पूरा कर रही है
हालाँकि वो खुद भी बबलू के साथ मज़े ले रही थी
पर अपने पति को अपनी चूत से बाँधे रखने का सपना हर औरत का होता है
ख़ासकर जब उसका पति ठरकी हो
और ठरकी होने के बाद भी वो उसकी तरफ ना देखे तो मन में सवाल तो उठते ही है
अब उसे दूसरी बातों का अंदाज़ा तो नही था
उसे अपनी ही ग़लती लग रही थी की शायद वो जल्दी सो जाती है इसलिए उसका पति चाहकर भी उसकी ले नही पा रहा है
पर आज वो ऐसा नही करेगी
अपने पति को खुश करके रहेगी
उसने जल्दी से खाना बनाया और बाहर आकर शमशेर के साथ बैठकर टीवी देखने लगी
शमशेर भी हैरान था की वो वहाँ आकर क्यों बैठ गयी है
अब तक तो उसे खाना खाकर अपने रूम में चले जाना चाहिए था, सोने के लिए
पर वो कुछ ना बोला
ज्योति धीरे-2 उसके करीब खिसक आई और अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया और उसे सहलाने लगी
अब शमशेर को समझ आने लगा था की वो क्यों बैठी है उसके पास
वो फिर भी चुप रहा
क्योंकि वो भी देखना चाहता था की वो अपनी बेटी के जागते रहने के बावजूद किस हद तक जाती है
धीरे-2 ज्योति का हाथ उसके लॅंड पर पहुँच गया, जो पहले से ही अकड़ कर खड़ा हो चुका था
और वो उसे लुंगी के उपर से ही रगड़ने लगी
हाथ उपर नीचे करते हुए उसकी साँसे तेज़ी से चल रही थी
वो अपने बूब्स को शमशेर की बाजुओं पर रगड़ रही थी, उसके मोटे निप्पल्स शमशेर को किसी इंजेक्शन की तरह चुभ रहे थे
फिर अचानक ज्योति ने उसके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ किया और उसे एक रसीला चुम्बन दे डाला
एक पल के लिए ही सही
उसके मुँह की सारी चाशनी शमशेर के मुँह में ट्रान्स्फर हो गयी
ये उसे बताने के लिए था की वो कितनी उत्तेजित है
अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार है
वो कसमसाते हुए बोली : “चलो ना जानू….रूम में ….मैं पूरी गीली हो चुकी हूँ ….”
शमशेर भी बड़ा घाघ इंसान था
वो बोला : “अभी रूको, थोड़ा सरूर तो बनने दो, फिर चलते है…”
बेचारी का दिल टूट सा गया
क्योंकि आज तक उसने अपनी तरफ से कभी पहल नही की थी
हमेशा शमशेर ही उसके जिस्म को रोंदकर चला जाता था
और आज जब उसने पहल की तो वो भाव खा रहा था
पर वो कर भी क्या सकती थी
सलोनी घर पर ही थी
उसके बाहर आने का डर भी था वरना अभी तक वहीं उसके लॅंड पर बैठ चुकी होती वो
वो अपने हाथ से उसके लंड को सहलाती रही ताकि उसकी और शमशेर की उत्तेजना कायम रहे
शमशेर के दिमाग़ मे कुछ और ही चल रहा था
उसने अपने खड़े हुए लॅंड को धीरे-2 लूँगी से बाहर निकल दिया और अपनी बीबी के हाथ में अपना नंगा लॅंड दे दिया
वो एकदम से घबरा गयी और सलोनी के रूम की तरफ देखने लगी
वो फिर से गिड़गिडाई : “प्लीज़ यहाँ नही….सलोनी घर पर ही है, कभी भी बाहर आ सकती है, वो देख लेगी तो क्या सोचेगी हमारे बारे में , अंदर चलो ना, आज आपको खुश कर दूँगी अच्छे से…”
वो अपने होंठो पर जीभ फेरकर बोल रही थी, यानी उसके लॅंड को खुद ही चूसने का न्योता दे रही थी वो
शमशेर : “देख लेगी तो देखने दे, उसकी वजह से मैं अपनी मर्ज़ी का काम छुपकर नही कर सकता, तू उसकी फ़िक्र ना कर, वो आएगी तो दूर से ही देख लूँगा मैं , तू अभी के लिए यहाँ आ”
इतना कहकर उसने ज्योति के सिर को पकड़ कर अपने लॅंड की तरफ झुका दिया और अपना लॅंड उसके रसीले होंठो में फँसा कर एक जोरदार झटका दिया
शमसेर का लंड सरसराता हुआ उसके मुंह में घुसता चला गया
बेचारी की हालत खराब हो गयी
पर अपने पति की बात वो टाल नही पाई
उसके गुस्से के बारे में वो अच्छे से जानती थी
अभी कुछ दिन पहले ही इसी ड्रॉयिंग रूम में उसे कुतिया बना कर चोदा था उन्होने
और जब वो कह रहे है की वो दूर से सलोनी को देख लेंगे तो ये उनकी प्राब्लम है अब
वैसे भी वो काफ़ी गीली हो चुकी थी
लॅंड की महक ने उसे और भी कमजोर कर दिया
और एक अलग सा रोमांच भी उत्पन हो गया था उसके शरीर में
अपनी बेटी के जागते हुए वो ऐसा पहली बार कर रही थी
एकदम रंडी वाला एहसास हो रहा था उसे
इसलिए उसने शमशेर के लॅंड को अपने हाथ में पकड़ा और उसे जोरों से चूसने लगी
आज तक इतनी ज़ोर से उसे कभी नही चूसा था उसने
इसलिए शमशेर भी बेचारा उसके सर को कंट्रोल करने का प्रयास करने लगा
और इसी बीच सलोनी अपने रूम से बाहर आई
उसे तो अंदाज़ा भी नही था की बाहर उसके माँ बाप क्या गुल खिला रहे है

