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- Dec 5, 2013
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पर जैसे ही वो बाहर निकली
उसने अपनी मॉम को पापा के लॅंड के उपर झुके हुए पाया
उसे समझते देर नही लगी की वहां क्या चल रहा है
वो तो हैरान रह गयी ये देखकर की उसके जागते हुए वो ऐसा करने में लगे है
पापा ठरकी है ये तो वो जानती है, पर मॉम को आज क्या हो गया है
इसी बात की उसे ज्यादा हैरानी थी
उधर शमशेर ने भी उसे बाहर निकलते हुए देख लिया था
पर फिर भी जान बूझकर वो अपनी आँखे मूंद कर उस पल के मज़े लेता रहा
शायद वो चाहता था की उसकी बेटी वो सब देखे
और आने वाले समय के लिए अपनी माँ से कुछ सीखे भी
सलोनी की तो हालत खराब हो रही थी
अपनी माँ को एक रांड़ की तरह खुले में लॅंड चूसते देखकर
ऐसे ही वो दूसरी लड़की सलोनी भी पापा का लॅंड चूस रही थी
खुले में
उसमें और उसकी माँ में क्या फ़र्क रह गया फिर
वो वहीं छुपकर उनका खेल देखने लगी
उसे तो अंदाज़ा भी नही था की उसके पापा ने उसे बाहर निकलते हुए देख लिया है
वैसे तो उसकी माँ दिन भर ये ना कर, वो न कर के लेक्चर देती रहती है
अब क्या हुआ उन्हे
सैक्स की ऐसी भी क्या प्यास है उसकी माँ में
उस दिन पापा से इसी जगह पर चुदवा रही थी
और अभी कल ही धोभी के लड़के बबलू का लॅंड भी चूस रही थी वो
और अब पापा का
वहीं ड्रॉयिंग रूम में
शायद वो एग्ज़िबिशनिस्ट है
उन्हे ऐसे खुले में सैक्स करके अलग ही तरह की एक्साइमेंट मिलती है
वो देख रही थी की उसकी माँ के रसीले होंठ लॅंड पर किस तरह से जकड़ बनाए हुए है
और तभी उसकी नज़र मॉम के हाथ पर गयी, उनका खुद का हाथ अपनी चूत को गाउन के अंदर घुसकर रगड़ रहा था
ये देखकर सलोनी की जाँघो के बीच भी कुछ-2 होने लगा
उसका भी हाथ अपनी चूत पर जा चिपका और वो उसे शार्ट के उपर से ही रगड़ने लगी
एक घर में रहने वाले तीनों लोग, एक ही वक़्त में अपने-2 हिस्से का मज़ा ले रहे थे
मम्मी पापा के लॅंड को चूस्कर उन्हे मज़ा दे रही थी
और खुद भी अपनी चूत रगड़कर मज़ा ले रही थी
और सलोनी उन्हे देखकर
अब ज्योति से वेट नही किया जा रहा था
वो अपनी बेटी की परवाह किए बिना अपनी जगह से उठी और अपने गाउन को गांड के उपर तक चढ़ाया और अपनी टाँग घुमा कर शमशेर की टाँग के दूसरी तरफ कर ली
शमशेर ने अपने दोनो पैर सामने रखे स्टूल पर रख दिए और थोड़ा नीचे खिसक गया ताकि उसका लॅंड सीधा अंदर जा सके
इस वक़्त दोनो को ही अपनी जवान बेटी के बाहर आने की जैसे कोई चिंता ही नही थी
ज्योति ने उसके लॅंड को पकड़ा और अपनी चूत पर लगाकर सीसियाते हुए इंच-2 करके नीचे फिसलने लगी
उसकी दबी हुई सी सिसकारी पूरे कमरे में गूँज गयी
“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……………………………अहह……. म्म्म्मसमममममममममममम”
ऐसे में अगर सलोनी अपने रूम में भी होती तो ये आवाज़ सुनकर बाहर निकल आती
पर अब तो वो वही थी
दूर छिपकर कड़ी हुई अपने पापा के लॅंड को माँ की चूत में जाते हुए देख रही थी
ज्योति के पंजे ज़मीन पर आ लगे और वो उन्हे धक्का देकर फिर से उपर उछल जाती और अपने शरीर के भार से फिर से नीचे आ गिरती उस लॅंड पर
ऐसी रसीली चुदाई तो उन्होने आज तक नही की थी
जिसमें पकड़े जाने का रोमांच भी था
सैक्स की भरपूर एक्ससाइटमेंट भी
और
कड़क लॅंड का रसीली चूत के साथ मिलन भी
करीब 5 मिनट में ही ज्योति झड़ने के करीब पहुँच गयी और आख़िरी में झड़ते हुए उसने दो चार तेज तर्रार घस्से दिए शमशेर के लॅंड पर
बेचारा ना चाहते हुए भी झड़ने लगा
वो चाह रहा था की अभी इस खड़े लॅंड से उसे संतुष्ट कर दे
फिर रात को शायद अपनी बेटी के सामने फिर से झड़ पायेगा
पर उसकी बीबी ने सारा प्लान चोपट कर दिया
दोनो गहरी साँसे लेते हुए एक दूसरे से अलग हुए
ज्योति ने एक नेपकिन से सारा रायता समेटा और बाथरूम की तरफ भाग गयी
वो काफ़ी थक चुकी थी, इसलिए सीधा अपने बेड पर जाकर सो गयी
आज का काम हो चुका था उसका
शमशेर ने भी अपने शेर को, जो अब भीगी बिल्ली बनकर लटक चुका था, अपनी लूँगी में वापिस समेट लिया
सलोनी भी दबे पाँव अपने रूम में घुस गयी
उसकी चूत का पानी भी निकल चुका था
अंदर पहुँचकर उसने लाइट्स बंद की और अपने पापा के आने का वेट करने लगी
वो जानती थी अपने ठरकी पापा को
वो अंदर ज़रूर आएँगे 1 घंटे बाद
अपने हिस्से के 4 पेग पीकर
और आकर वो क्या करेंगे
यही सोच सोचकर वो फिर से उत्तेजित हो रही थी.
उसने अपनी मॉम को पापा के लॅंड के उपर झुके हुए पाया
उसे समझते देर नही लगी की वहां क्या चल रहा है
वो तो हैरान रह गयी ये देखकर की उसके जागते हुए वो ऐसा करने में लगे है
पापा ठरकी है ये तो वो जानती है, पर मॉम को आज क्या हो गया है
इसी बात की उसे ज्यादा हैरानी थी
उधर शमशेर ने भी उसे बाहर निकलते हुए देख लिया था
पर फिर भी जान बूझकर वो अपनी आँखे मूंद कर उस पल के मज़े लेता रहा
शायद वो चाहता था की उसकी बेटी वो सब देखे
और आने वाले समय के लिए अपनी माँ से कुछ सीखे भी
सलोनी की तो हालत खराब हो रही थी
अपनी माँ को एक रांड़ की तरह खुले में लॅंड चूसते देखकर
ऐसे ही वो दूसरी लड़की सलोनी भी पापा का लॅंड चूस रही थी
खुले में
उसमें और उसकी माँ में क्या फ़र्क रह गया फिर
वो वहीं छुपकर उनका खेल देखने लगी
उसे तो अंदाज़ा भी नही था की उसके पापा ने उसे बाहर निकलते हुए देख लिया है
वैसे तो उसकी माँ दिन भर ये ना कर, वो न कर के लेक्चर देती रहती है
अब क्या हुआ उन्हे
सैक्स की ऐसी भी क्या प्यास है उसकी माँ में
उस दिन पापा से इसी जगह पर चुदवा रही थी
और अभी कल ही धोभी के लड़के बबलू का लॅंड भी चूस रही थी वो
और अब पापा का
वहीं ड्रॉयिंग रूम में
शायद वो एग्ज़िबिशनिस्ट है
उन्हे ऐसे खुले में सैक्स करके अलग ही तरह की एक्साइमेंट मिलती है
वो देख रही थी की उसकी माँ के रसीले होंठ लॅंड पर किस तरह से जकड़ बनाए हुए है
और तभी उसकी नज़र मॉम के हाथ पर गयी, उनका खुद का हाथ अपनी चूत को गाउन के अंदर घुसकर रगड़ रहा था
ये देखकर सलोनी की जाँघो के बीच भी कुछ-2 होने लगा
उसका भी हाथ अपनी चूत पर जा चिपका और वो उसे शार्ट के उपर से ही रगड़ने लगी
एक घर में रहने वाले तीनों लोग, एक ही वक़्त में अपने-2 हिस्से का मज़ा ले रहे थे
मम्मी पापा के लॅंड को चूस्कर उन्हे मज़ा दे रही थी
और खुद भी अपनी चूत रगड़कर मज़ा ले रही थी
और सलोनी उन्हे देखकर
अब ज्योति से वेट नही किया जा रहा था
वो अपनी बेटी की परवाह किए बिना अपनी जगह से उठी और अपने गाउन को गांड के उपर तक चढ़ाया और अपनी टाँग घुमा कर शमशेर की टाँग के दूसरी तरफ कर ली
शमशेर ने अपने दोनो पैर सामने रखे स्टूल पर रख दिए और थोड़ा नीचे खिसक गया ताकि उसका लॅंड सीधा अंदर जा सके
इस वक़्त दोनो को ही अपनी जवान बेटी के बाहर आने की जैसे कोई चिंता ही नही थी
ज्योति ने उसके लॅंड को पकड़ा और अपनी चूत पर लगाकर सीसियाते हुए इंच-2 करके नीचे फिसलने लगी
उसकी दबी हुई सी सिसकारी पूरे कमरे में गूँज गयी
“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……………………………अहह……. म्म्म्मसमममममममममममम”
ऐसे में अगर सलोनी अपने रूम में भी होती तो ये आवाज़ सुनकर बाहर निकल आती
पर अब तो वो वही थी
दूर छिपकर कड़ी हुई अपने पापा के लॅंड को माँ की चूत में जाते हुए देख रही थी
ज्योति के पंजे ज़मीन पर आ लगे और वो उन्हे धक्का देकर फिर से उपर उछल जाती और अपने शरीर के भार से फिर से नीचे आ गिरती उस लॅंड पर
ऐसी रसीली चुदाई तो उन्होने आज तक नही की थी
जिसमें पकड़े जाने का रोमांच भी था
सैक्स की भरपूर एक्ससाइटमेंट भी
और
कड़क लॅंड का रसीली चूत के साथ मिलन भी
करीब 5 मिनट में ही ज्योति झड़ने के करीब पहुँच गयी और आख़िरी में झड़ते हुए उसने दो चार तेज तर्रार घस्से दिए शमशेर के लॅंड पर
बेचारा ना चाहते हुए भी झड़ने लगा
वो चाह रहा था की अभी इस खड़े लॅंड से उसे संतुष्ट कर दे
फिर रात को शायद अपनी बेटी के सामने फिर से झड़ पायेगा
पर उसकी बीबी ने सारा प्लान चोपट कर दिया
दोनो गहरी साँसे लेते हुए एक दूसरे से अलग हुए
ज्योति ने एक नेपकिन से सारा रायता समेटा और बाथरूम की तरफ भाग गयी
वो काफ़ी थक चुकी थी, इसलिए सीधा अपने बेड पर जाकर सो गयी
आज का काम हो चुका था उसका
शमशेर ने भी अपने शेर को, जो अब भीगी बिल्ली बनकर लटक चुका था, अपनी लूँगी में वापिस समेट लिया
सलोनी भी दबे पाँव अपने रूम में घुस गयी
उसकी चूत का पानी भी निकल चुका था
अंदर पहुँचकर उसने लाइट्स बंद की और अपने पापा के आने का वेट करने लगी
वो जानती थी अपने ठरकी पापा को
वो अंदर ज़रूर आएँगे 1 घंटे बाद
अपने हिस्से के 4 पेग पीकर
और आकर वो क्या करेंगे
यही सोच सोचकर वो फिर से उत्तेजित हो रही थी.







