- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,768
श्रुति ने नितिन को खड़ा किया और उसके कपड़े उतारने लगी
उसने भी जल्दी-2 अपनी जीन्स खोलकर नीचे गिरा दी और फिर अंडरवीयर भी
और फिर जो मैने देखा, उसे देखकर मुझे भी विश्वास नही हुआ
उसका लॅंड काफ़ी मोटा और लंबा था
पर मेरे पापा से बड़ा नही
उनका वो पोलिसिआ लॅंड तो हर मुक़ाबले में जीत जाए
अब लार टपकाने की बारी हम दोनो की थी
मेरा तो ये पहला मौका था
पर श्रुति पहले कई लॅंड चूस चुकी थी
इस नितिन का भी और ना जाने कितनों का
असली खेल तो अब शुरू होने वाला था
वो लपक कर आगे आई और घुटनो के बल नितिन के सामने बैठ गयी
मुझे भी इशारा करके उसने वहां बुलाया, मैं भी मोरनी बनकर उसके सामने अपनी गांड फेला कर बैठ गयी
अब उस खड़े लॅंड के पीछे हम दोनो का सैक्सी चेहरा था, जिसे देखकर उसका लॅंड फ़र्राटे मार रहा था हवा में
श्रुति ने उसे पकड़ा और सीधा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी
सडप -2 की आवाज़ों से पता चल रहा था की उसकी चूसाई में कितनी शिद्दत थी

मैं अपने होंठो पर जीभ फेरती हुई अपनी बारी का इंतजार कर रही थी
और साथ ही उसे देखकर सीख भी रही थी की कैसे करना है
वो अपने दांतो से बचा कर किसी कुलफी की तरह उसे चूस रही थी
बस मुझे अपने पैने दांतो से उसके लॅंड को बचा कर रखना था
बाकी मज़ा तो उसे आ ही जाना था
मज़ा तो उसे आ ही रहा था
क्योंकि जैसे ही श्रुति ने उसके लॅंड को चूसना शुरू किया उसकी आँखे बंद और सिर पीछे चला गया था
मुझे उसके गोल मटोल बॉल्स को देखकर बड़ा मज़ा आ रहा था
इन्हे तो मैं ज़रूर चूसूंगी
बस एक बार मेरी बारी आ जाए
और वो आ भी गयी
श्रुति ने अपने मुँह से उसका लॅंड निकाला और मेरी तरफ लहरा दिया
उसकी लार में भीगा मोटा लॅंड अब मेरे चेहरे के सामने था
मैने ढेर सारी लार अपने मुँह में इकट्ठा की और मुँह खुल कर उसके सुपाड़े को उस से नहला दिया और उपर से अपने होंठो की सील लगाती हुई नीचे तक आई
वो तो कब से मेरे मुँह मे जाने के लिए तड़प रहा था
मेरे गुलाबी होंठो को अपने लॅंड के चारों तरफ लिपटता देख वो उत्तेजना की हर सीमा पार करता चला गया और उसने मेरे सिर को पकड़ कर ज़ोर से अपने लॅंड पर दबा दिया
" आअह्हह्ह्ह्ह सालूूओऊऊनीईईई
नतीजन उसका पूरा लॅंड मेरे टॉन्सिल्स से जाकर टकराया और मुझे साँस तक लेने में दिक्कत होने लगी
मेरी छटपटाहट देखकर उसने अपनी पकड़ ढीली की और मैं खाँसती हुई अपने आँसू पोछने लगी
उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी
जैसे कोई जंग जीत ली हो मुझे लॅंड चुस्वाकार
शायद कई लड़कों का अरमान होगा मेरे कॉलेज में
पर पूरा हुआ इस कमीने का
श्रुति ने एक बार फिर से उसके लॅंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया
और अब मुझे वो करना था जिसके लिए मैं पहले सोच रही थी
मैने उसकी बॉल्स को सहलाया और नीचे मुँह करके उन्हे मुँह में भर लिया
ऐसे लगा जैसे कोई खुरदुरा और रसीला गुलाब जामुन मुँह में ले लिया हो
पर उसे चूसने में मज़ा बहुत आया
वो पहले से ही क्लीन शेव करके आया था नीचे की, इसलिए उसके चिकने जामुन को चूसने में एक अलग ही मज़ा मिल रहा था
कुछ ही देर में नितिन के मुँह से सिसकाटियां निकलने लगी जो इस बात का संकेत था की वो झड़ने वाला है
मैं नीचे से उसकी बाल्स चूस रही थी और उपर से श्रुति उसका लॅंड
इसलिए झड़ना तो बनता ही था
अगले ही पल उसके लॅंड से एक के बाद एक पिचकारियाँ निकलकर उसके मुँह में जाने लगी

उसने मुँह हटाया तो वो पिचकारियाँ हवा में उछलती हुई दिखाई दी
जो मेरे चेहरे पर भी गिरी और कुछ मेरे होंठो पर
मैने उन्हे चाटा तो कसेला सा स्वाद लगा पर बाद में मक्खन की तरह मेरे गले से उतरता चला गया
मैने उसके लॅंड को पकड़कर अपने मुँह से लगाया और बची खुचि बूंदे अपने मुँह में समेट कर उन्हे पी गयी
अब पहले से ज़्यादा स्वादिष्ट लगी वो
नितिन की हालत पस्त हो चुकी थी
वो निढाल सा होकर बिस्तर पर लेट गया
मैने श्रुति की तरफ हंसते हुए देखा
और वो मुझे लेकर बेड पर आकर लेट गयी
और हम दोनो एक दूसरे के चेहरे पर गिरी बूंदे चाटकर सॉफ करने लगे
असली आग तो अब लगी थी हम दोनो के जिस्मों में
जिसे हम एक दूसरे के होंठो से बुझाने का असफल प्रयास कर रहे थे

पर असली आग तो नीचे लगी थी
टांगो के बीच
चूत में
और हमारी ये गुहार नितिन ने सुन ली
जो कुछ देर सुस्ताने के बाद हमारी मेहनत का भुगतान अपने होंठो से करने को तैयार था
श्रुति और मैं एक दूसरे के होंठ और चेहरा चाटने में बिज़ी थे और तभी मुझे अपनी टांगो के बीच गर्म सांसो का एहसास हुआ
मेरी धड़कने एक बार फिर से तेज हो गयी
और अगले ही पल उसके होंठो ने मेरी छुई मुई सी पुस्सी को अपनी जकड़ में लेकर चूसना शुरू कर दिया
ये एहसास तो अभी तक के सभी एहसासों से पूरी तरह से अलग था
सूपर से भी उपर
वो मेरी चूत को मुँह में लेकर चॉकलेट की तरह चूस रहा था
जीभ से बीच की लकीर को फैलाकर अंदर घुस रहा था
मेरी क्लिट को जीभ और हल्के दांतो की पकड़ से चुभला रहा था
अच्छा ख़ासा एक्सपीरियेन्स था उसके पास चूत चूसने का

मैने उसके सिर को पकड़कर उसे गाईड करना शुरू कर दिया
की यहाँ चाट, यहाँ जीभ घुसा साले
और फिर यही काम उसने श्रुति के साथ भी किया
और जब वो तड़प रही थी जीभ अंदर लेकर तो मैं अपने होंठो से उसे सांत्वना दे रही थी, उसके नन्हे बूब्स चूस्कर
ये काम नितिन ने करीब आधे घंटे तक किया
और उस आधे घंटे में उसने हम दोनो का पानी अच्छे से निकाल कर रख दिया
आख़िर में हम तीनो हाँफते हुए एक दूसरे के नंगे जिस्मों से लिपटकर काफ़ी देर तक लेटे रहे
नंगी लड़कियों को देखकर उसके लॅंड ने फिर से अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी थी
यानी अब वो चुदाई के लिए तैयार था
पर मैं नही
एक तो मैं अभी अपनी फर्स्ट चुदाई के लिए तैयार नही थी
उपर से टाइम भी काफ़ी हो चूका था
मैं पापा को बिना किसी बात के नाराज़ भी नही करना चाहती थी
इसलिए उन दोनो को एंजाय करने के लिए छोड़कर मैं वहां से निकल आई
पर आज एक नया जोश भर चूका था मुझमें
सैक्स के पहले एनकाउंटर को महसूस करके मेरा शरीर फूला नही समा रहा था
जगह - 2 से रिस रहा था वो
उसे कुछ और भी चाहिए था
और मुझे पता था की वो कहाँ और कैसे मिलेगा
उसने भी जल्दी-2 अपनी जीन्स खोलकर नीचे गिरा दी और फिर अंडरवीयर भी
और फिर जो मैने देखा, उसे देखकर मुझे भी विश्वास नही हुआ
उसका लॅंड काफ़ी मोटा और लंबा था
पर मेरे पापा से बड़ा नही
उनका वो पोलिसिआ लॅंड तो हर मुक़ाबले में जीत जाए
अब लार टपकाने की बारी हम दोनो की थी
मेरा तो ये पहला मौका था
पर श्रुति पहले कई लॅंड चूस चुकी थी
इस नितिन का भी और ना जाने कितनों का
असली खेल तो अब शुरू होने वाला था
वो लपक कर आगे आई और घुटनो के बल नितिन के सामने बैठ गयी
मुझे भी इशारा करके उसने वहां बुलाया, मैं भी मोरनी बनकर उसके सामने अपनी गांड फेला कर बैठ गयी
अब उस खड़े लॅंड के पीछे हम दोनो का सैक्सी चेहरा था, जिसे देखकर उसका लॅंड फ़र्राटे मार रहा था हवा में
श्रुति ने उसे पकड़ा और सीधा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी
सडप -2 की आवाज़ों से पता चल रहा था की उसकी चूसाई में कितनी शिद्दत थी

मैं अपने होंठो पर जीभ फेरती हुई अपनी बारी का इंतजार कर रही थी
और साथ ही उसे देखकर सीख भी रही थी की कैसे करना है
वो अपने दांतो से बचा कर किसी कुलफी की तरह उसे चूस रही थी
बस मुझे अपने पैने दांतो से उसके लॅंड को बचा कर रखना था
बाकी मज़ा तो उसे आ ही जाना था
मज़ा तो उसे आ ही रहा था
क्योंकि जैसे ही श्रुति ने उसके लॅंड को चूसना शुरू किया उसकी आँखे बंद और सिर पीछे चला गया था
मुझे उसके गोल मटोल बॉल्स को देखकर बड़ा मज़ा आ रहा था
इन्हे तो मैं ज़रूर चूसूंगी
बस एक बार मेरी बारी आ जाए
और वो आ भी गयी
श्रुति ने अपने मुँह से उसका लॅंड निकाला और मेरी तरफ लहरा दिया
उसकी लार में भीगा मोटा लॅंड अब मेरे चेहरे के सामने था
मैने ढेर सारी लार अपने मुँह में इकट्ठा की और मुँह खुल कर उसके सुपाड़े को उस से नहला दिया और उपर से अपने होंठो की सील लगाती हुई नीचे तक आई
वो तो कब से मेरे मुँह मे जाने के लिए तड़प रहा था
मेरे गुलाबी होंठो को अपने लॅंड के चारों तरफ लिपटता देख वो उत्तेजना की हर सीमा पार करता चला गया और उसने मेरे सिर को पकड़ कर ज़ोर से अपने लॅंड पर दबा दिया
" आअह्हह्ह्ह्ह सालूूओऊऊनीईईई
नतीजन उसका पूरा लॅंड मेरे टॉन्सिल्स से जाकर टकराया और मुझे साँस तक लेने में दिक्कत होने लगी
मेरी छटपटाहट देखकर उसने अपनी पकड़ ढीली की और मैं खाँसती हुई अपने आँसू पोछने लगी
उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी
जैसे कोई जंग जीत ली हो मुझे लॅंड चुस्वाकार
शायद कई लड़कों का अरमान होगा मेरे कॉलेज में
पर पूरा हुआ इस कमीने का
श्रुति ने एक बार फिर से उसके लॅंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया
और अब मुझे वो करना था जिसके लिए मैं पहले सोच रही थी
मैने उसकी बॉल्स को सहलाया और नीचे मुँह करके उन्हे मुँह में भर लिया
ऐसे लगा जैसे कोई खुरदुरा और रसीला गुलाब जामुन मुँह में ले लिया हो
पर उसे चूसने में मज़ा बहुत आया
वो पहले से ही क्लीन शेव करके आया था नीचे की, इसलिए उसके चिकने जामुन को चूसने में एक अलग ही मज़ा मिल रहा था
कुछ ही देर में नितिन के मुँह से सिसकाटियां निकलने लगी जो इस बात का संकेत था की वो झड़ने वाला है
मैं नीचे से उसकी बाल्स चूस रही थी और उपर से श्रुति उसका लॅंड
इसलिए झड़ना तो बनता ही था
अगले ही पल उसके लॅंड से एक के बाद एक पिचकारियाँ निकलकर उसके मुँह में जाने लगी

उसने मुँह हटाया तो वो पिचकारियाँ हवा में उछलती हुई दिखाई दी
जो मेरे चेहरे पर भी गिरी और कुछ मेरे होंठो पर
मैने उन्हे चाटा तो कसेला सा स्वाद लगा पर बाद में मक्खन की तरह मेरे गले से उतरता चला गया
मैने उसके लॅंड को पकड़कर अपने मुँह से लगाया और बची खुचि बूंदे अपने मुँह में समेट कर उन्हे पी गयी
अब पहले से ज़्यादा स्वादिष्ट लगी वो
नितिन की हालत पस्त हो चुकी थी
वो निढाल सा होकर बिस्तर पर लेट गया
मैने श्रुति की तरफ हंसते हुए देखा
और वो मुझे लेकर बेड पर आकर लेट गयी
और हम दोनो एक दूसरे के चेहरे पर गिरी बूंदे चाटकर सॉफ करने लगे
असली आग तो अब लगी थी हम दोनो के जिस्मों में
जिसे हम एक दूसरे के होंठो से बुझाने का असफल प्रयास कर रहे थे

पर असली आग तो नीचे लगी थी
टांगो के बीच
चूत में
और हमारी ये गुहार नितिन ने सुन ली
जो कुछ देर सुस्ताने के बाद हमारी मेहनत का भुगतान अपने होंठो से करने को तैयार था
श्रुति और मैं एक दूसरे के होंठ और चेहरा चाटने में बिज़ी थे और तभी मुझे अपनी टांगो के बीच गर्म सांसो का एहसास हुआ
मेरी धड़कने एक बार फिर से तेज हो गयी
और अगले ही पल उसके होंठो ने मेरी छुई मुई सी पुस्सी को अपनी जकड़ में लेकर चूसना शुरू कर दिया
ये एहसास तो अभी तक के सभी एहसासों से पूरी तरह से अलग था
सूपर से भी उपर
वो मेरी चूत को मुँह में लेकर चॉकलेट की तरह चूस रहा था
जीभ से बीच की लकीर को फैलाकर अंदर घुस रहा था
मेरी क्लिट को जीभ और हल्के दांतो की पकड़ से चुभला रहा था
अच्छा ख़ासा एक्सपीरियेन्स था उसके पास चूत चूसने का

मैने उसके सिर को पकड़कर उसे गाईड करना शुरू कर दिया
की यहाँ चाट, यहाँ जीभ घुसा साले
और फिर यही काम उसने श्रुति के साथ भी किया
और जब वो तड़प रही थी जीभ अंदर लेकर तो मैं अपने होंठो से उसे सांत्वना दे रही थी, उसके नन्हे बूब्स चूस्कर
ये काम नितिन ने करीब आधे घंटे तक किया
और उस आधे घंटे में उसने हम दोनो का पानी अच्छे से निकाल कर रख दिया
आख़िर में हम तीनो हाँफते हुए एक दूसरे के नंगे जिस्मों से लिपटकर काफ़ी देर तक लेटे रहे
नंगी लड़कियों को देखकर उसके लॅंड ने फिर से अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी थी
यानी अब वो चुदाई के लिए तैयार था
पर मैं नही
एक तो मैं अभी अपनी फर्स्ट चुदाई के लिए तैयार नही थी
उपर से टाइम भी काफ़ी हो चूका था
मैं पापा को बिना किसी बात के नाराज़ भी नही करना चाहती थी
इसलिए उन दोनो को एंजाय करने के लिए छोड़कर मैं वहां से निकल आई
पर आज एक नया जोश भर चूका था मुझमें
सैक्स के पहले एनकाउंटर को महसूस करके मेरा शरीर फूला नही समा रहा था
जगह - 2 से रिस रहा था वो
उसे कुछ और भी चाहिए था
और मुझे पता था की वो कहाँ और कैसे मिलेगा
























