Incest इंस्पेक्टर की बेटी - Page 3 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest इंस्पेक्टर की बेटी

श्रुति ने नितिन को खड़ा किया और उसके कपड़े उतारने लगी

उसने भी जल्दी-2 अपनी जीन्स खोलकर नीचे गिरा दी और फिर अंडरवीयर भी

और फिर जो मैने देखा, उसे देखकर मुझे भी विश्वास नही हुआ

उसका लॅंड काफ़ी मोटा और लंबा था

पर मेरे पापा से बड़ा नही

उनका वो पोलिसिआ लॅंड तो हर मुक़ाबले में जीत जाए

अब लार टपकाने की बारी हम दोनो की थी

मेरा तो ये पहला मौका था

पर श्रुति पहले कई लॅंड चूस चुकी थी

इस नितिन का भी और ना जाने कितनों का

असली खेल तो अब शुरू होने वाला था

वो लपक कर आगे आई और घुटनो के बल नितिन के सामने बैठ गयी

मुझे भी इशारा करके उसने वहां बुलाया, मैं भी मोरनी बनकर उसके सामने अपनी गांड फेला कर बैठ गयी

अब उस खड़े लॅंड के पीछे हम दोनो का सैक्सी चेहरा था, जिसे देखकर उसका लॅंड फ़र्राटे मार रहा था हवा में

श्रुति ने उसे पकड़ा और सीधा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी

सडप -2 की आवाज़ों से पता चल रहा था की उसकी चूसाई में कितनी शिद्दत थी





मैं अपने होंठो पर जीभ फेरती हुई अपनी बारी का इंतजार कर रही थी

और साथ ही उसे देखकर सीख भी रही थी की कैसे करना है

वो अपने दांतो से बचा कर किसी कुलफी की तरह उसे चूस रही थी

बस मुझे अपने पैने दांतो से उसके लॅंड को बचा कर रखना था

बाकी मज़ा तो उसे आ ही जाना था

मज़ा तो उसे आ ही रहा था

क्योंकि जैसे ही श्रुति ने उसके लॅंड को चूसना शुरू किया उसकी आँखे बंद और सिर पीछे चला गया था

मुझे उसके गोल मटोल बॉल्स को देखकर बड़ा मज़ा आ रहा था

इन्हे तो मैं ज़रूर चूसूंगी

बस एक बार मेरी बारी आ जाए

और वो आ भी गयी

श्रुति ने अपने मुँह से उसका लॅंड निकाला और मेरी तरफ लहरा दिया

उसकी लार में भीगा मोटा लॅंड अब मेरे चेहरे के सामने था

मैने ढेर सारी लार अपने मुँह में इकट्ठा की और मुँह खुल कर उसके सुपाड़े को उस से नहला दिया और उपर से अपने होंठो की सील लगाती हुई नीचे तक आई

वो तो कब से मेरे मुँह मे जाने के लिए तड़प रहा था

मेरे गुलाबी होंठो को अपने लॅंड के चारों तरफ लिपटता देख वो उत्तेजना की हर सीमा पार करता चला गया और उसने मेरे सिर को पकड़ कर ज़ोर से अपने लॅंड पर दबा दिया

" आअह्हह्ह्ह्ह सालूूओऊऊनीईईई

नतीजन उसका पूरा लॅंड मेरे टॉन्सिल्स से जाकर टकराया और मुझे साँस तक लेने में दिक्कत होने लगी

मेरी छटपटाहट देखकर उसने अपनी पकड़ ढीली की और मैं खाँसती हुई अपने आँसू पोछने लगी

उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी

जैसे कोई जंग जीत ली हो मुझे लॅंड चुस्वाकार

शायद कई लड़कों का अरमान होगा मेरे कॉलेज में

पर पूरा हुआ इस कमीने का

श्रुति ने एक बार फिर से उसके लॅंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया

और अब मुझे वो करना था जिसके लिए मैं पहले सोच रही थी

मैने उसकी बॉल्स को सहलाया और नीचे मुँह करके उन्हे मुँह में भर लिया

ऐसे लगा जैसे कोई खुरदुरा और रसीला गुलाब जामुन मुँह में ले लिया हो

पर उसे चूसने में मज़ा बहुत आया

वो पहले से ही क्लीन शेव करके आया था नीचे की, इसलिए उसके चिकने जामुन को चूसने में एक अलग ही मज़ा मिल रहा था

कुछ ही देर में नितिन के मुँह से सिसकाटियां निकलने लगी जो इस बात का संकेत था की वो झड़ने वाला है

मैं नीचे से उसकी बाल्स चूस रही थी और उपर से श्रुति उसका लॅंड

इसलिए झड़ना तो बनता ही था

अगले ही पल उसके लॅंड से एक के बाद एक पिचकारियाँ निकलकर उसके मुँह में जाने लगी





उसने मुँह हटाया तो वो पिचकारियाँ हवा में उछलती हुई दिखाई दी

जो मेरे चेहरे पर भी गिरी और कुछ मेरे होंठो पर

मैने उन्हे चाटा तो कसेला सा स्वाद लगा पर बाद में मक्खन की तरह मेरे गले से उतरता चला गया

मैने उसके लॅंड को पकड़कर अपने मुँह से लगाया और बची खुचि बूंदे अपने मुँह में समेट कर उन्हे पी गयी

अब पहले से ज़्यादा स्वादिष्ट लगी वो

नितिन की हालत पस्त हो चुकी थी

वो निढाल सा होकर बिस्तर पर लेट गया

मैने श्रुति की तरफ हंसते हुए देखा

और वो मुझे लेकर बेड पर आकर लेट गयी

और हम दोनो एक दूसरे के चेहरे पर गिरी बूंदे चाटकर सॉफ करने लगे

असली आग तो अब लगी थी हम दोनो के जिस्मों में

जिसे हम एक दूसरे के होंठो से बुझाने का असफल प्रयास कर रहे थे





पर असली आग तो नीचे लगी थी

टांगो के बीच

चूत में

और हमारी ये गुहार नितिन ने सुन ली

जो कुछ देर सुस्ताने के बाद हमारी मेहनत का भुगतान अपने होंठो से करने को तैयार था

श्रुति और मैं एक दूसरे के होंठ और चेहरा चाटने में बिज़ी थे और तभी मुझे अपनी टांगो के बीच गर्म सांसो का एहसास हुआ

मेरी धड़कने एक बार फिर से तेज हो गयी

और अगले ही पल उसके होंठो ने मेरी छुई मुई सी पुस्सी को अपनी जकड़ में लेकर चूसना शुरू कर दिया

ये एहसास तो अभी तक के सभी एहसासों से पूरी तरह से अलग था

सूपर से भी उपर

वो मेरी चूत को मुँह में लेकर चॉकलेट की तरह चूस रहा था

जीभ से बीच की लकीर को फैलाकर अंदर घुस रहा था

मेरी क्लिट को जीभ और हल्के दांतो की पकड़ से चुभला रहा था

अच्छा ख़ासा एक्सपीरियेन्स था उसके पास चूत चूसने का





मैने उसके सिर को पकड़कर उसे गाईड करना शुरू कर दिया

की यहाँ चाट, यहाँ जीभ घुसा साले

और फिर यही काम उसने श्रुति के साथ भी किया

और जब वो तड़प रही थी जीभ अंदर लेकर तो मैं अपने होंठो से उसे सांत्वना दे रही थी, उसके नन्हे बूब्स चूस्कर

ये काम नितिन ने करीब आधे घंटे तक किया

और उस आधे घंटे में उसने हम दोनो का पानी अच्छे से निकाल कर रख दिया

आख़िर में हम तीनो हाँफते हुए एक दूसरे के नंगे जिस्मों से लिपटकर काफ़ी देर तक लेटे रहे

नंगी लड़कियों को देखकर उसके लॅंड ने फिर से अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी थी

यानी अब वो चुदाई के लिए तैयार था

पर मैं नही

एक तो मैं अभी अपनी फर्स्ट चुदाई के लिए तैयार नही थी

उपर से टाइम भी काफ़ी हो चूका था

मैं पापा को बिना किसी बात के नाराज़ भी नही करना चाहती थी

इसलिए उन दोनो को एंजाय करने के लिए छोड़कर मैं वहां से निकल आई

पर आज एक नया जोश भर चूका था मुझमें

सैक्स के पहले एनकाउंटर को महसूस करके मेरा शरीर फूला नही समा रहा था

जगह - 2 से रिस रहा था वो

उसे कुछ और भी चाहिए था

और मुझे पता था की वो कहाँ और कैसे मिलेगा
 
आख़िर में हम तीनो हाँफते हुए एक दूसरे के नंगे जिस्मों से लिपटकर काफ़ी देर तक लेटे रहे, नंगी लड़कियों को देखकर उसके लॅंड ने फिर से अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी थी यानी अब वो चुदाई के लिए तैयार था,

पर मैं नही

एक तो मैं अभी अपनी फर्स्ट चुदाई के लिए तैयार नही थी, उपर से टाइम भी काफ़ी हो चूका था, मैं पापा को बिना किसी बात के नाराज़ भी नही करना चाहती थी, इसलिए उन दोनो को एंजाय करने के लिए छोड़कर मैं वहां से निकल आई, पर आज एक नया जोश भर चूका था मुझमें , सैक्स के पहले एनकाउंटर को महसूस करके मेरा शरीर फूला नही समा रहा था, जगह - 2 से रिस रहा था वो, उसे कुछ और भी चाहिए था

और मुझे पता था की वो कहाँ और कैसे मिलेगा

***********

अब आगे

************

जब मैं घर पहुँची तो रात के 9.30 बज रहे थे

ये तो अच्छा हुआ की मैने पापा से पहले ही परमिशन ले ली थी वरना इस वक़्त बिना बताए मैं घर से बाहर रहती तो अंदर जाने से पहले मेरी फट्ट कर हाथ में आ रही होती

माँ ने दरवाजा खोला और मुझे सवालिया नज़रों से देखा की आज एकदम से कैसे प्रोग्राम बन गया

पर उन्होने कुछ कहा नही क्योंकि माँ को पापा आने के बाद बता ही चुके थे की मैं आज देर से आने वाली हूँ

पापा रोज की तरह ड्रॉयिंग रूम में बैठकर पेग मार रहे थे

मैने उन्हे हाय हेलो किया और अपने रूम की तरफ चल दी

अंदर जाते हुए मैं उनकी नज़रें अपने कुल्हो पर महसूस कर पा रही थी

इसलिए मेरी चाल भी अपने आप थोड़ी नशीली हो गयी

रूम में जाकर मैने कमरा बंद किया और अपने सारे कपड़े निकाल डाले

माँ घर पर ना होती तो शायद दरवाजा अंदर से बंद भी ना करती

पापा को तो मैं दिखाना चाहती थी अपने जिस्म का हर हिस्सा

ताकि वो समझ सके की उनकी लड़की अब पूरी तरह से जवान हो गयी है

पर अपने रूम में नंगी होकर रहने में मुझे रोमांच बहुत मिलता है

अपने जिस्म पर ठंडी हवा का एहसास मुझमें एक गुदगुदी सी भर देता है

मैं बेड पर लेट गयी और अपने अंगो को सहलाते हुए आज शाम को श्रुति के घर पर हुई सारी बाते याद करके मज़े लेने लगी





उन लम्हो को याद करते-2 मैं फिर से उत्तेजित होने लगी

मेरी चूत से फिर से वही गाड़े रस की बूंदे रिसने लगी

मैने आज तक अपनी चूत का रस चखा नही था

और वो मैं आज करने वाली थी

ताकि जान सकूँ की मेरी दुकान की मिठाई कितनी मीठी है

और सामने वाले को कितनी पसंद आएगी वो

मैने अपनी दो उंगलियाँ चूत में डुबोई और उसमें ढेर सारा शहद इकट्ठा करके उन्हे धीरे से चूस लिया

उम्म्म्मममममममम….

ये तो सच में काफ़ी मजेदार है

एकदम फ्रेशनेस के साथ

अन्नानास के जूस जैसा

जिसमें मीठापन और खट्टापन एकसाथ होता है

शायद इसलिए ऐसा स्वाद था क्योंकि मुझे फ्रूट्स बहुत पसंद थे

ख़ासकर संतरा , अमरूद और सेब

इन सबका स्वाद मैं महसूस कर पा रही थी अपनी चूत के रस में

शून्य से दस के पैमाने पर मैं इसे 9.5 अंक दूँगी





तभी माँ ने दरवाजा खटकाया

“सलोनी…..ओ बेटा…..चल खाना खा ले, फिर मुझे सोना भी है, इस वक़्त तक तो मुझे नींद के झोंके आने लगते है….जल्दी आजा मेरी बच्ची ”

माँ भी अपनी जगह सही थी

बेचारी सुबह 7 बजे से जाग कर सारा खाना बनाती है और फिर पूरा दिन साफ़ सफाई, धुलाई और खाना बनाने में निकल जाता है

ऐसे में तो 10 बजने तक नींद आना स्वाभाविक है

मैं नमने मन से उठी और बाथरूम में जाकर शावर ऑन करके खड़ी हो गयी और रगड़ -2 कर नहाने लगी

और नहाते हुए मुझे अपनी पुस्सी को साबुन लगाकर रगड़ने का बहुत शौंक है





घर आकर ये मेरा रोज का नीयम था

इसी बहाने मास्टरबेट भी कर लिया करती थी

पर आज उसका टाइम नही था

आज लेट भी तो आई थी घर पर

मैने जल्दी-2 नहाकर एक टी शर्ट और शॉर्ट्स पहन ली और रोज की तरह अंदर कुछ भी नही

शीशे में मैं अपनी टी शर्ट के अंदर खड़े निप्पल्स सॉफ देख पा रही थी

माँ हमेशा मुझे डाँट्ती थी ऐसे घर पर बिना ब्रा के रहने के

पर अभी वो शायद देख नही पाएगी

मैं सीधा जाकर बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी

सामने पापा बैठे थे

जो मुझे अपने नन्हे स्तनो को हिलाकर चलते देखकर लार टपका रहे थे

उनकी पुलिसिआ नज़रों ने मेरे बिन ब्रा के निप्पलों को दूर से ही ताड़ लिया था

इसलिए उन्हे देखकर वो एक ही बार में मोटा घूंठ पीकर अपने होंठो को दांतो तले रगड़ने लगे

माँ जब खाना लेकर आई तो मैं नीचे झुक गयी ताकि वो मेरी छाती की तरफ ना देख सके

थाली रखकर वो हम दोनो बाप बेटी को गुड नाइट बोलकर सोने चली गयी

और मुझे हिदायत देकर गयी की पापा को खाना गर्म करके देने के लिए

मैने हां में सिर हिला दिया और पापा को देखने लगी

उनके चेहरे पर भी मेरी तरह एक स्माइल थी

दोनो माँ के जाने से खुश थे

उनके जाते ही मैं छाती चौड़ी करके बैठ गयी

अपनी छातियाँ निकालकर

अब मुझे कोई डर नही था

बल्कि उन्हे तो मैं दिखाना चाहती थी





पापा भी मेरी रस भरी थैलियों को देखकर अपनी लार टपकाने लगे

मैं मंद-2 मुस्कुरा रही थी और आराम से खाना खा रही थी

बीच-2 में पापा मुझसे इधर उधर की बाते करते जा रहे थे

पर उनका ध्यान सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी छातियों पर ही था

इन मर्दों को सिर्फ़ अपनी छातियाँ दिखाकर अपने इशारों पर नचाया जा सकता है इतना तो मैं जान ही चुकी थी

कल रात की ही तो बात है

कैसे मैने अपनी इन ब्रेस्ट्स को पापा की सख़्त छातियों से रगड़ाई करवाई थी

उम्म्म्मम

उन पलों को याद करके मेरे निप्पल्स फिर से सख़्त हो चुके थे

और पापा उन्हे आराम से देख पा रहे थे

आज पापा के पेग थोड़े मोटे बन रहे थे

शायद मेरे हुस्न का असर था

वो अपनी तरफ से पहल करना नही चाहते थे, बाप बेटी का जो रिश्ता था

और मैं चाहे पापा से ना डरने की लाख बाते कर लूँ , पर उनका पुराना डर अंदर से मुझे कुछ भी ग़लत करने से रोक रहा था

इसलिए मैने सब वक़्त पे छोड़ दिया था

और ये भी सोच लिया था की पापा ने अगर पहल की तो मैं भी पीछे नही रहूंगी

ये सोचकर ही मैं मुस्कुरा दी
 
इसी बीच बातों -२ में पापा ने आधी से ज्यादा बोतल ख़त्म कर दी

अब वो पूरे टल्ली हो चुके थे

उनसे सही ढंग से बैठा भी नही जा रहा था

वो लड़खड़ाते हुए उठे और अपने रूम की तरफ चल दिए

मैं नही चाहती थी की वो अभी यहाँ से चले जाएं और मॉम के पास जाकर खर्राटे मारने लगे

इसलिए मैने उठकर उन्हे संभाला और स्टडी रूम की तरफ ले गयी और उन्हे वहां के सोफे पर लिटा दिया

और उनसे पूछा :”पापा, खाना ले आऊं क्या ? ”

अब तक पापा को दारू पूरी तरह से चढ़ चुकी थी

वो अपने आप कुछ बुदबुदा रहे थे

“सलोनी….भेंन की लोड़ी …..तेरी चूत इतनी गर्म है…आज तो मज़ा आ गया….और तेरे ये मुम्मे ….आ…..डा ….डाल दे इन्हे मेरे मुँह में ….”

ये सुनते ही मेरे तो कानो से धुंवा निकलने लगा

ये क्या बोल रहे है पापा मेरे बारे में

अब ये भला मुझे कैसे पता होता की आज पापा मेरी हमनाम सलोनी की चूत मारकर आए है और इस वक़्त नशे में वो उसे ही याद करके बड़बड़ा रहे थे

शुरूवात तो उन्होने मुझे देखकर ही की थी

मेरे मोटे मुम्मे और कड़क निप्पल देखकर जब वो दारू पी रहे थे तो उनकी सोच उन्हे फिर से एक बार शाम को हुई वो शानदार चुदाई की तरफ ले गयी

और पीते-2 कब वो नशे की हालत में उस सलोनी का नाम लेने लगे, ये शायद उन्हे भी पता नही होगा

पर मेरे लिए तो सलोनी मैं ही थी ना

इसलिए वो सब सुनकर मेरा दिल धाड़-2 करके बज रहा था

अच्छा भी लग रहा था और डर भी

अच्छा ये सुनकर की मेरे पापा मेरे बारे में ये सब सोच रहे थे

और डर इसलिए की कहीं मॉम ना सुन ले ये सब

इसलिए मैने स्टडी रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया ताकि आवाज़ बाहर ना जाए

और फिर उनके करीब आकर बैठ गयी

नशे में वो अब भी बड़बड़ा रहे थे

“चल साली…चूस मेरे लॅंड को….भेंन चोद …देख क्या रही है….चूस इसे….”

भले ही वो नशे में और अपने होशो हवास में नहीं थे

पर पापा का हुक्म तो पापा का ही होता है ना

मैं किसी आज्ञाकारी बेटी की तरह उनके पैरों की तरफ गयी और ज़मीन पर घुटने लगाकर बैठ गयी

धड़कते दिल से मैने उनकी पेंट की जीप खोली और अंदर हाथ डालकर बड़ी मुश्किल से उस फुफकारते हुए नाग को बाहर निकाला

उफफफफफ्फ़

इतना मोटा लॅंड

नितिन का तो इसके सामने कुछ भी नही था

मैने अपना मुँह गोल करके अंदर तीन उंगलियां डाली तो मेरा मुँह पूरा भर सा गया

और फिर उन तीन उंगलियों को लॅंड के सामने रखा तो पाया की वो लॅंड उनसे भी डबल था

ये मेरे खुले मुँह में नही आएगा तो भला नीचे मेरी तंग सी चूत में कैसे जाएगा

जहाँ एक उंगली जाने भर से मैं सीसीया उठती थी

पर वो जब होगा तब होगा

अभी के लिए तो पापा का हुक्म मानना था मुझे

इसलिए मैने गर्म साँसे उस लॅंड पर छोड़ते हुए उस मोटे लॅंड पर अपनी जीभ फिराई और उसे अपने मुँह में लेने का प्रयास किया

पर वो आया ही नही





आगे का सुपाड़ा मेरे मुँह में आकर फँस गया

उसपर लगी प्रीकम की बूँद जब मेरे मुँह में गयी तो एक अजीब सा नशा महसूस हुआ मुझे

ऐसा लगा जैसे शराब की बूँद चख ली हो मैने

उम्म्म्मममममम

ऐसी नशीली बूँद है तो पूरा माल निकलेगा तो बॉटल जितना नशा देगा

यही सोचकर मैने अपने बूब्स को खुद ही मसल दिया और खुद ही सिसकार उठी

“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……आह्हःहह……… ओह पापा……..”

मेरी इस सीत्कार को सुनकर पापा एकदम से चोंक गये

और मेरी तरफ देखने लगे

अभी कुछ देर पहले तक जो मुझे लॅंड चूसने के लिए बोल रहे थे वो मुझे लॅंड चूसता देखकर ऐसे हैरान हो रहे थे जैसे कोई भूत देख लिया हो

पर मैं रुकी नही

अपनी नन्ही जीभ और छोटे मुँह से उनके मोटे लॅंड को धीरे-2 चूसती और चाट्ती रही

अब शायद वो नशे से बाहर आ चुके थे

पर मैं वहां कैसे और क्यों उनका लॅंड चूस रही थी ये सवाल उनके चेहरे पर सॉफ दिखाई दे रहा था

हालाँकि चाहते तो शायद वो भी यही थे अंदर से पर ऐसे उनकी इच्छा पूरी हो जाएगी ये मैने सोचा भी नही था

इस से पहले की पापा मुझे डांटे या उनका इरादा बदले मैने अपना पूरा मुँह खोलकर जितना हो सकता था उतना लॅंड अपने मुँह में भरा और उसे चूसने लगी

अब धीरे-2 उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी थी





मेरे बूब्स उनके घुटनों से टकरा रहे थे और उनका गुदाजपन वो सॉफ महसूस कर पा रहे थे

पर इस वक़्त मेरा पूरा ध्यान उनके लॅंड पर था

जैसे नितिन का लॅंड चूसकर उसे मज़ा दिया था

वैसे ही मैं आज पापा को मज़ा देना चाहती थी

ये सब इतना जल्दी हो जाएगा मुझे भी आशा नही थी

पर अच्छा हुआ जो ये हो गया

अब आगे के लिए हम दोनो के बीच सब खुल जाएगा

यही सोचकर मेरी चूसने की स्पीड और ज़्यादा तेज हो गयी

पापा के हाथ मेरे सिर के पीछे आ लगे और वो अपनी गांड उठाकर अपना लॅंड मेरे मुँह में डालने की कोशिश करने लगे

यानी पापा भी अब उस खेल में पूरी तरह से शामिल हो चुके थे जो उन्होने नशे की हालत में शुरू किया था

मज़ा तो उन्हे भी बहुत आ रहा था और मुझे भी

पर शायद पहली बार अपनी जवान बेटी से लॅंड चुसवाने का रोमांच था की उन्होने बिना किसी चेतावनी के अपना ढेर सारा कम मेरे मुँह में निकाल दिया





इतनी सारी शराब के नशे जैसा कम पीकर तो मैं भी मदहोश ही हो गयी

पापा तो हाँफते रह गये

और इस से पहले की वो कुछ और बोलते मैं भागकर अपने रूम की तरफ चल दी

आज के लिए इतना बहुत था

उपर से मुझे ये डर भी था की कहीं पापा अब नशे से निकलने के बाद मुझे ही ना डाँटने लग जाए

अंदर जाकर मैने दरवाजा बंद किया और अपने कपड़े एक बार फिर से निकाल फेंके

और वहीं ज़मीन पर लेटकर रगड़ -2 कर अपनी चूत का पानी निकालने लगी

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ पापा……..कितना रस था आपके लॅंड में …….इतना मोटा था वो…….”





यार….ये कैसा ऑब्सेशन होता जा रहा है मुझे अपने पापा से

उनके लॅंड को याद करने मात्र से ही मेरी चूत बहे जा रही थी

ऐसा चलता रहा तो मेरा कमरे से निकलना मुश्किल हो जाएगा

या फिर पूरे दिन पेड लगाकर घूमना पड़ेगा

मेरी पिंक उंगलियां अपनी पिंक चूत में रेती की तरह रगड़ मार रही थी

और फिर वहां से भी एक जोरदार फव्वारा निकला

जिसे मैने अपनी उंगलियो में समेट कर पी लिया

पहले पापा का कम और बाद में मेरा

दोनो मेरे पेट में जा चुके थे

बचपना होता तो यही सोचती की अब मैं माँ बन जाउंगी

और ये सोचकर ही मैं मुस्कुरा दी

पर सच में , कितना मज़ा आएगा अगर किसी दिन मैं पापा के कम से प्रेगनेंट हो जाऊं

अपनी शादी के बाद एक बार कोशिश तो ज़रूर करूँगी इसके लिए..

ये सोचकर ही मेरे पूरे जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ गयी

मैं उठी और अपने कपड़े पहन कर बेड पर लेट गयी

अगले दिन पापा मुझे किस नज़र से देखेंगे और क्या बोलेंगे ये तो सुबह ही पता चलेगा..
 
यार….ये कैसा ऑब्सेशन होता जा रहा है मुझे अपने पापा से, उनके लॅंड को याद करने मात्र से ही मेरी चूत बहे जा रही थी, ऐसा चलता रहा तो मेरा कमरे से निकलना मुश्किल हो जाएगा

या फिर पूरे दिन पेड लगाकर घूमना पड़ेगा

मेरी पिंक उंगलियां अपनी पिंक चूत में रेती की तरह रगड़ मार रही थी, और फिर वहां से भी एक जोरदार फव्वारा निकला, जिसे मैने अपनी उंगलियो में समेट कर पी लिया

पहले पापा का कम और बाद में मेरा , दोनो मेरे पेट में जा चुके थे, बचपना होता तो यही सोचती की अब मैं माँ बन जाउंगी , और ये सोचकर ही मैं मुस्कुरा दी

मैं उठी और अपने कपड़े पहन कर बेड पर लेट गयी, अगले दिन पापा मुझे किस नज़र से देखेंगे और क्या बोलेंगे ये तो सुबह ही पता चलेगा..

**********

अब आगे

**********

अगले दिन मैं उठी तो पहले से ज़्यादा तरो-ताज़ा महसूस कर रही थी

करती भी क्यों नहीं, आख़िर कल रात मैने पापा के लॅंड से निकला च्यवनप्राश जो खाया था

उम्म्म्मssssssss

सुबह होते ही उस टेस्टी से कॅम का स्वाद फिर से याद आ गया

काश वो रात भर यहीं सो रहे होते मेरे करीब

अभी उठकर मैं फिर से वो शहद पी पाती

मेरा नंगा बदन पूरा जगमगा रहा था सुबह की रोशनी में

शायद इसलिए इस उम्र में लोग कहते है की जवानी का निखार आ रहा है इसपे

क्योंकि इस वक़्त मेरा पूरा जिस्म निखर कर एक नये रूप में आ चूका था





पिछले कुछ दिनों से मैं रोज नोट कर रही थी

दिन ब दिन मैं और भी ज़्यादा सैक्सी होती जा रही थी

अपनी इस चढ़ती जवानी का पूरा मज़ा मैं लेना चाहती थी

और वो कैसे लेना है, ये भी मेरी समझ में आ चूका था

पर अभी तो मुझे पापा के एक्शप्रेशंस देखने थे

रात को उनके लॅंड को चूसा था मैने, अब वो मुझे किस नज़र से देखेंगे और क्या बात करेंगे इसे देखने के लिए मैं काफ़ी उत्सुक थी

मैं जल्दी से बाहर निकली और नहा धोकर कॉलेज के लिए तैयार हो गयी

पापा अभी गये नही थे, मैं सीधा नाश्ते की टेबल पर जाकर बैठ गयी

मॉम भी मुझे देखकर हैरान रह गयी की आज बिना उठाए ये कैसे उठ गयी और तैयार भी हो गयी

कुछ ही देर में पापा भी अपनी यूनिफॉर्म पहन कर आ बैठे

मैने मुस्कुरा कर उन्हे देखा और उन्होने मुझे

पर उनके चेहरे से मुस्कुराहट गायब थी

बल्कि चिंता के भाव थे

और वो किसलिए

ये जानते है उनकी नज़र से

शमशेर सिंह

=========

सुबह जब मैं उठा तो खुद को स्टडी रूम के सोफे पर पाया

मैं यहां कैसे आ गया ?

मैं तो वहां ड्रॉयिंग रूम की चेयर पर बैठकर दारू पी रहा था

और फिर

फिर शायद सलोनी आई थी

पर

उसके बाद क्या हुआ

सही से कुछ याद नही आ रहा

मैं उठकर बैठ गया

मेरे पायजामे का नाड़ा खुला हुआ था

यानी कुछ हुआ था

यहाँ आकर क्या मैने खुद उसे खोला और…

नही नही..

ऐसा होता तो मुझे कुछ तो याद रहता

भेन चोद

मेरी उमर हो गयी है क्या जो याद नही आ रहा रात का

लॅंड को पकड़ा तो वो पूरा निढाल सा था

हल्का दर्द भी था जो इस बात का सबूत था की रात को उसका पानी निकला है

तो इसका मतलब सच में रात को कुछ हुआ था

काफ़ी ज़ोर देने के बाद कुछ-2 याद आने लगा था

वो सलोनी

मेरी बेटी नही

वो साली रंडी सलोनी

उसे ही तो याद कर रहा था मैं दारु पीते हुए

जब मेरी बेटी सामने बैठी थी तब भी तो उसे ही याद करके मैं अपने लॅंड को रगड़ रहा था

पर फिर उसके बाद का कुछ और याद नही

धुँधला-2 सा याद है की वो रंडी सलोनी मेरा लॅंड चूस रही थी

शायद अंदर जाकर लेट गया था मैं

उसके बाद उसी का ख्याल आया होगा की वो मेरा लॅंड चूस रही है

इसलिए मैने अपना पयज़ामा खोलकर मूठ मार ली होगी

मैं खुद पर भी हैरान था

क्योंकि शादी के बाद करीब 20 सालों तक मैने ऐसा कुछ नही किया था

ना तो किसी के बारे में ऐसा सोचा था और ना ही खुद कभी मूठ मारी थी

फिर रात को ऐसा कैसे कर दिया मैने

मुझे अपनी हरकत पर खुद ही शर्म आ रही थी

मेरी बेटी ने अगर ऐसा वैसा कुछ देख लिया होता तो क्या होता भला

यही सोचते-2 मैं नहाकर तैयार हुआ और नाश्ते की टेबल पर आ बैठा

वहां सलोनी पहले से बैठी थी

उसके चेहरे पर मुस्कान थी

ये देखकर मैने चैन की साँस ली

शुक्र है, मैने रात को ऐसी कोई हरकत नही की उसके साथ वरना ये मुझे ऐसे मुस्कुरा कर नही देख रही होती

पर रात की पहेली अभी तक मेरे दिमाग़ में चल रही थी, वो सुलझी नही थी

पर अभी के लिए मेरे दिलो दिमाग़ से बोझ उतर चुका था

इसलिए मैने नाश्ता किया

अब आते है सलोनी के पास दोबारा

सलोनी

=====

पापा थोड़े कन्फ्यूज़्ड से दिख रहे थे

पर अपनी तरफ से उन्होने रात वाली कोई बात नही की

मैं भी हैरान थी, मुझे तो लगा था की अब पापा के साथ मेरा रास्ता खुल चुका है

पर लगता है उन्हे रात के नशे में कुछ याद ही नही रहा की उन्होने अपनी बेटी से लॅंड चुस्वाया है अपना

वो बोल भी तो रहे थे रात को मुझे गंदा-2 सा

जब दिल मे मेरे लिए इतना कुछ है तो ज़ुबान पर क्यो नही लाते

गंदे पापा

मेरा मूड भी ऑफ सा हो गया

पर फिर कुछ ऐसा हुआ की सारी पिक्चर ही क्लियर हो गयी

हुआ ये की नाश्ता करने के बाद पापा अपने रूम में गये अपने जूते पहनने

इसी बीच उनके फोन की रिंग बजी, मैने उसे उठाया और उन्हे देने ही जा रही थी की मैने उसपर नाम लिखा देखा

"रंडी सलोनी"

वो नाम देखकर ही मैं हैरान रह गयी

ये कौन है

मेरे नाम वाली 'सलोनी'

और वो भी रंडी नाम से सेव किया है पापा ने

क्या सच में कोई रंडी है , जिसे पापा जानते है और उसका नाम सलोनी है

ये कैसा इत्तेफ़ाक़ है, रंडी और बेटी का एक ही नाम

2-3 रिंग के बाद ही फोन कट कर दिया उसने

फिर एक वट्सएप मेसेज आया उसी नाम से, जो स्क्रीन पर फ्लेश करके दिखाई दिया

“कहा बिज़ी हो सर”

फिर अगला मेसेज फ्लैश हुआ

“कल तो आपने कमाल कर दिया”

फिर एक और

“आज फिर से मिल सकते हो क्या, उसी जगह , हाइवे के पास, पुल के नीचे, 8 बजे…”

और फिर एक के बाद एक किस्स के इमोंजी भेजे उसने

मेरे तो माथे पर पसीने आने लगे

तभी पापा रूम से निकले

मैने झट्ट से उनका मोबाइल वही वापिस रख दिया

वहां आकर उन्होने पूछा : “मेरा मोबाइल बज रहा था क्या, कौन था…”

मैने लापरवाही से अपने नाश्ते पर पूरा ध्यान देते हुए कहा : “पता नही पापा…मैने नही देखा…..2-3 बेल के बाद बंद हो गया….”

उन्होने मोबाइल उठाया और नंबर देखते ही वो सकपका से गये

और फिर उन्होने व्हटसएप मेसेज देखा शायद, जिसे देखकर उनके चेहरे पर एक कुटिल सी मुस्कान आ गयी

और वो अपनी मूँछो पर ताव देते हुए घर से निकल गये

जाते हुए वो माँ को बोलते गये की शायद आज आने में लेट होगा

उनके जाते ही मैने अपना सिर पकड़ लिया

ओह्ह

तो ये सलोनी कोई और है

जिसे सोचकर वो रात को गालियाँ दे रहे थे

यानी वो सच में नशे में थे कल रात

उन्हे पता भी नही चल पाया की वो दूसरी सलोनी नही बल्कि उनकी खुद की कुँवारी बेटी सलोनी है जो उनका लॅंड चूस रही है

मैं तो बेकार में अपना नाम सुनकर खुश हो रही थी की पापा मेरे बारे में कितने "अच्छे" विचार रखते है

पर ये दूसरी सलोनी, साली पूरा क्रेडिट तो ये ले गयी

मेरी मेहनत पर पानी फेर दिया साली कुतिया ने

मुझे गुस्से में बुदबुदाता देखकर माँ ने पूछा : “हेलो….ओ सलोनी….क्या हुआ….क्या बड़बड़ा रही है तू…नाश्ता ख़त्म कर जल्दी…कॉलेज नही जाना क्या…”

मैने टाइम देखा, सच में लेट हो रहा था मुझे

मैने जल्दी से नाश्ता निपटाया और बेग उठाकर कॉलेज के लिए भागी

बड़ी मुश्किल से बस पकड़ी मैने

पूरे रास्ते मैं उसी सलोनी के बारे में सोचती रही

और तभी मेरी बस उसी हाइवे से निकली , जिसके सामने की तरफ वो पुरानी पुलिया थी

इसी लोकेशन की तो वो बात कर रही थी

यानी वो आज यही मिलेगी पापा से एक बार फिर

वो मैं मिस नही करना चाहती थी

इसलिए मैने भी रात को यहाँ आने का प्लान बना लिया

पर ये जगह तो काफ़ी दूर है मेरे घर से

और सुनसान भी

इसलिए किसी को साथ लेना पड़ेगा

और ऐसे में अपनी बेस्ट फ्रेंड श्रुति से अच्छा कोई और नाम नही सूझा मुझे

मैने कॉलेज पहुँचकर सबसे पहले उसे कल रात की पूरी बात बताई

पहले तो वो हैरान हुई मेरे और पापा के बीच की ऐसी बात सुनकर

पर हमारे बीच अब इतना कुछ हो चूका था की ऐसी बात उसके साथ शेर करने में मुझे कोई शर्म महसूस नही हुई

और फिर मैने उसे वो दूसरी सलोनी के मेसेज वाली बात भी बताई

और उसे अपने साथ वहां जाने के लिए भी कहा

उसके पास एक्टिवा स्कूटी थी, वो मेरे साथ वहां जा भी सकती थी और बाद में मुझे घर भी ड्रॉप कर सकती थी

मेरा प्लान सुनते ही उसकी भी आँखे चकमक उठी

शायद रात को कुछ अच्छा देखने को मिलेगा ये सोचकर ही वो खुश हो रही थी

खुश तो मैं भी थी

पर खुशी के साथ -2 जैलिस भी थी मैं

मेरे होते हुए पापा ऐसे किसी रंडी के चक्कर में पड़े, ये मैं नही चाहती थी

पता नही क्या सोचकर मैं वहां जा रही थी

पर अब तो फ़ैसला कर ही लिया था, जो होगा देखा जाएगा

पूरा दिन बड़ी बेचैनी मे निकला

शाम को हम दोनो थोड़ी शॉपिंग पर चले गये, मैने पापा को कॉल करके पैसे भी ले लिए और उन्हे ये भी बता दिया की मार्किट से आने में लेट हो जाउंगी

वो भला मना कैसे करते

वो तो खुद ही सांतवे आसमान पर थे

रात को वो दूसरी वाली से मिलना जो था

मुझे तो उस कमिनी पर सच में बड़ा गुस्सा आ रहा था

पर मैं कर भी क्या सकती थी इसके अलावा

खैर, शॉपिंग करने के बाद मैं उसके घर गयी और वो अपना समान रखने के बाद मुझे अपनी स्कूटी पर लेकर उस जगह के लिए निकल पड़ी जहाँ उस कलमूहि ने पापा को बुलाया था
 
वहां काफ़ी अंधेरा था

दूर -2 तक कोई भी नही था

श्रुति ने अपनी स्कूटी एक बड़े से पेड़ के पीछे छुपा दी और हम भी वही छुपकर खड़े हो गये

करीब 10 मिनट बाद ही पापा की जीप वहां आती हुई दिखाई दी, वो आकर पुल के नीचे खड़े हो गये और उसका इंतजार करने लगे

अगले 5 मिनट में वो भी आ गयी

वो मुझसे सिर्फ़ 10 फीट की दूरी से निकली, मैने गोर से उसे देखा

उपर से नीचे तक

एक मैला सा सूट पहना हुआ था उसने, पर शरीर पूरा भरा हुआ था उसका

मोटे-2 बूब्स और बाहर निकली हुई गांड

पर ये तो किसी भी एंगल से मुझे रंडी नहीं लग रही थी, उम्र भी मेरे जितनी ही थी लगभग

पर उसके शरीर के उभार बता रहे थे की इतनी सी उम्र में उसने काफी एक्सपीरियंस ले लिया है

सॉफ पता चल रहा था की अपनी जवानी के पूरे मज़े ले चुकी है वो

अभी भी तो वही लेने आई है

पापा के करीब पहुँचते ही वो उनसे ऐसे लिपटी जैसे बरसो पुरानी प्रेमिका हो उनकी

मेरी तो झांटे सुलग उठी उसे अपने पापा से लिपटते देखकर

श्रुति भी मुझे देखकर समझ गयी थी की उस लड़की से मुझे कितनी जेलीसी हो रही है

पर हम कर भी क्या सकते थे

पापा ने भी उसे हवा मे उठाकर फिल्मी हीरो की तरहा घुमा दिया हवा में , उसके मोटे मुम्मे पापा की छाती से पीसकर रह गये

और हवा ही हवा में पापा ने उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया, वो भी अपनी पकड़ उनकी कमर पर बनाए हुए उन्हे पूरा सहयोग दे रही थी

उन दोनो को ही जल्दी थी इसलिए सिर्फ़ 1 मिनट की ही स्मूच ली उन्होने और फिर सीधा मुद्दे की बात पर आ गये

पापा ने धक्का देकर सलोनी को ज़मीन पर बिताया और अपनी पेंट की जीप खोलकर अपना फौलादी लॅंड बाहर निकाला और उसके चेहरे के सामने लहरा दिया

ये तो कल से भी ज़्यादा उत्तेजित था , कल से भी बड़ा और मोटा लग रहा था वो लॅंड

वो एक ही बार मे उसे मुँह में डालकर निगल गयी और जोरों से चूसने लगी





मैने तो कल ही उसे देख लिया था पर श्रुति के लिए तो ये पहला अवसर था

मेरे पापा का लॅंड देखने का

वो तो चिल्लाने ही वाली थी उसे देखकर

की हाय, इतना मोटा लॅंड …वाउssssssss

पर मैने उसके मुँह पर हाथ रखकर उसकी चीख अंदर ही दबा दी

पर उसकी आँखो की चमक और खड़े निप्पल बता रहे थे की वो कितनी इंप्रेस हुई है उस पुलिसिआ लॅंड से

शायद मन ही मन वो उसे लेने के ख्वाब भी देख रही थी

इसलिए वो अपनी चूत को जीन्स के उपर से ही सहला रही थी…रगड़ रही थी

अंदर से कुछ -2 तो मुझे भी हो रहा था

क्योंकि पापा का लॅंड लगातार दूसरे दिन देख रही थी मैं

कल रात मेरे हाथ में था

अब दूसरी सलोनी के हाथ में है वो

वैसे देखा जाए तो एक मर्द को और क्या चाहिए

हर दिन नया चेहरा, नयी चूत

पर कल रात की बात तो पापा याद भी नही रख पाए नशे में

अगर याद रहता तो शायद आज भी मेरे पास होते वो

ग़लती तो मेरी ही है ना

मैने ही उन्हे अपनी तरफ आकर्षित नही किया

पर अब करूँगी

इसी निश्चय के साथ मैने भी आँखे बंद करके कसम खाई और अपनी उंगली अपनी चूत पर दे मारी

उम्म्म्ममममममम

कितना सैक्सी एहसास था ये

मेरे आगे खड़ी श्रुति अलग ही सुर में सीसीया रही थी और पापा के सामने बैठी सलोनी उनकी बिन बजाती हुई अलग सुर मे

देखा जाए तो वहां 3-3 जवान लड़किया मोजूद थी

और मर्द सिर्फ़ एक

मेरे प्यारे पापा

अगर मैं इसी वक़्त श्रुति को लेकर उनके सामने पहुँच जाऊं तो क्या पापा हम तीनो को एकसाथ चोदेगे ?

ये वाइल्ड सा एहसास ही पूरे शरीर जो सुलगा सा गया मेरे





मैने श्रुति का दूसरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी पायजामी के अंदर डलवा लिया

और मैने अपना हाथ आगे करके उसकी जीन्स के बटन खोले, उसे थोड़ा सा ढीला किया और उसकी कच्छी में उंगलिया घुसेड कर उसकी गीली चूत में अपनी उंगलियो की पतवार से नाव चलाने लगी





श्रुति मेरी तरफ घूम गयी और मेरे होंठो पर किस्स करते हुए मुझे घिस्से देने लगी

मैं भी अपनी उंगलिया उसकी चूत में जोरों से चला रही थी

इसी बीच पापा ने उस लड़की को खड़ा किया और उसे कार के बोनट पर झुका कर पीछे से उसकी चूत में अपना लॅंड घुसेड़ दिया

उस वीराने में उसकी कराहती हुई सी सिसकारी गूँज उठी

“ओह…………उम्म्म्मममममममममममम…….पपाााआआआआ……”

उसके मुँह से पापा शब्द सुनते ही मेरी आँखे हैरत से फेल गई

यानी उसे अपनी बेटी बनाकर चोद रहे थे पापा

और ये बात वो भी जानती थी

अब मुझे पता नही ये मेरे पापा से कब से चुदवा रही है

पर इतना तो मुझे पता चल गया था की पापा जो काम मेरे साथ करने में शरमा रहे थे वो उसके साथ मुझे सोचकर वो खुल्ले मे कर रहे थे





इतनी भी क्या नाराज़गी पापा

मैं भी तो रेडी हूँ ना

आपने कभी पूछा ही नही मुझसे

पर कोई ना पापा

अब देखना

ऐसे-2 काम करूँगी ना की आप खुद ही मुझे नंगा करके चोदोगे

ये वादा रहा आपकी बेटी का

एक इंस्पेक्टर की बेटी का वादा

इतना सोचते-2 मेरी उत्तेजना को ऐसे पर लगे की मैं हवा में उड़ने लगी

वो तो श्रुति ने मेरी चूत में उंगलिया फँसाकर मुझे पकड़ रखे था

वरना मैं तो उड़ गयी होती उस आनंदमयी एहसास को महसूस करते हुए

हम दोनो की चूत की खीर एक साथ निकली

जिसे हमने एक दूसरे की आँखो में देखते हुए खाया

मेरा पाईनएप्पल जूस उसने पिया और उसका नारंगी का पानी मैने

इसी बीच पापा ने उस सलोनी की चूत के सारे दरवाजे ढीले कर दिए थे अपने धक्को से

उसके बदन के सारे कपड़े कब निकल गये मैं देख ही नही पाई

अब पापा उसे नंगा करके चोद रहे थे

चाँद की रोशनी में उसका नंगा शरीर लश्कारे मार रहा था





और अंत में जब पापा हुंकारने लगे तो अपना लैंड उन्होंने बाहर निकाला

और उसमे से निकल रही बूंदों से उस रंडी सलोनी को नहला दिया

उसने नीचे बैठकर उस रसीले पानी को अपने चेहरे और छाती पर छीड़कवाया

पूरे समय उसके मुँह से सिर्फ़ ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह पापाsssssss ही निकल रहा था

शायद उसके मुँह से ये पापा शब्द का एहसास ही था जो मेरे पापा को यहाँ तक ले आया था

यही सच मैने उन्हे घर पर ही दे दिया होता तो उन्हे ऐसे खुले मे चुदाई नही करनी पड़ रही होती

खैर

अब ये भूल मैं जल्द सुधारने वाली थी

कुछ देर बाद उन दोनो ने अपने -2 कपड़े पहने और वहां से निकल गये

मैने और श्रुति ने भी अपना हुलिया ठीक किया और वहां से निकलकर उसने मुझे मेरे घर छोड़ा ओर वो वापिस चली गयी

पापा अभी घर नही आए थे

पर जब आएगे तो उन्हे एक अच्छा सा सर्प्राइज़ देने का मन बना चुकी थी मैं
 
और अगले ही पल पापा के लॅंड से पानी निकलना शुरू हो गया, जिसे उसने नीचे बैठकर अपने चेहरे और छाती पर छिड़कवाया ,पूरे समय उसके मुँह से सिर्फ़ ओह्ह्ह अहह पापा ही निकल रहा था, शायद उसके मुँह से ये पापा शब्द का एहसास ही था जो मेरे पापा को यहाँ तक ले आया था, यही सब मैने उन्हे घर पर ही दे दिया होता तो उन्हे ऐसे खुले मे चुदाई नही करनी पड़ रही होती,खैर, अब ये भूल मैं जल्द सुधारने वाली थी

कुछ देर बाद उन दोनो ने अपने -2 कपड़े पहने और वहां से निकल गये, मैने और श्रुति ने भी अपना हुलिया ठीक किया और उसने मुझे मेरे घर छोड़ा ओर वो वापिस चली गयी,पापा अभी घर नही आए थे, पर जब आएगे तो उन्हें एक अच्छा सा सरप्राइज देने का मन बना चुकी थी मैं.

------------

अब आगे

------------

पूरे रास्ते मैं वही सब देखकर बार - 2 उत्तेजित हो रही थी

मेरी तो चूत का पानी थमने का नाम ही नही ले रहा था

अपने रूम तक मैं कैसे पहुँची ये मैं ही जानती हूँ

मॉम भी मेरी बदहवास सी हालत देखकर मुझसे सवाल पूछती रह गयी की ये क्या हाल बना रखा है….क्या हुआ है….तबीयत तो ठीक है ना

पर मैं बिना कुछ बोले अपने रूम में घुस गयी और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया

अब उन्हे क्या बोलती

पापा को चुदाई करते देखकर आई हूँ मैं

और उसे देखकर जो खुशी महसूस हुई है वो अभी तक मेरी चूत से पानी बनकर रिस रही है

मॉम मेरा मूड अच्छे से जानती थी, इसलिए उसके बाद ज़्यादा पूछताछ नहीं की

मैने हमेशा की तरह अंदर आते ही अपने सारे कपड़े निकाल फेंके और फिर से नंगी होकर फर्श पर लेट गयी

मेरी चिपचिपी चूत मेरे हाथो को चीख-2 कर बुला रही थी

और उसकी पुकार मैं कैसे अनसुना कर सकती थी

मेरी पतली-2 उंगलिया दौड़ पड़ी उस तरफ और उस प्यारी सी चूत को अपने कब्ज़े में लेकर उसमें से रिस रहा रस उसी के चेहरे पर रगड़कर उसे चुप करवाने की असफल कोशिश करने लगी

“अहह…….. ओह पपाााआआआआ……. क्या मस्त लॅंड है आपका……. प्लीज़ पापा…….डाल दो ना उसे अपनी प्यारी बेटी की इस रसीली चूत में …….. बोलो ना पापा……… कब डालोगे…….डालो ना पापा…..”





मुझे बंद आँखो के अंदर वही मंज़र फिर से दिखा

पर इस बार वो दूसरी सलोनी नहीं बल्कि मैं थी उसकी जगह

उसी पुलिया के नीचे पापा मुझे नंगा करके चोद रहे थे

पापा मुझे अपनी कार पर झुका कर , पीछे से मेरी चुदाई कर रहे थे

और उनका दनदनाता हुआ लोढ़ा मेरी नन्ही सी चूत के परखच्चे उड़ाता हुआ अंदर बाहर हो रहा था





अभी कुछ देर पहले ही श्रुति के साथ मेरी चूत ने पानी बेहिसाब निकला था, पर अभी के लिए मैं इसे संभाल कर रखना चाहती थी

क्योंकि मुझे पापा को कुछ ऐसा सर्प्राइज़ देना था की उन्हे मज़ा भी आए और मेरा आगे का रास्ता भी खुल जाए

इसलिए अभी के लिए मैने उसे रोक दिया और अपनी चूत का सारा पानी इकट्ठा करके पी लिया

ये पानी मुझे एक दिन पापा को भी पिलाना था

अपनी उंगलियो से

या फिर सीधा उनके मुँह को वहां लगवाके

उम्म्म्ममम

ऐसी बाते सोचते ही मेरी चूत खुद ब खुद गीली होने लगती है

ऐसे ही चलता रहा तो मैं रोक नही पाऊँगी खुद को फिर से एक बार मास्टरबेट करने से

इसलिए मैने सारी बाते अपने दिमाग़ से निकाल फेंकी और नंगी ही भागती हुई बाथरूम में जाकर अपने तपते हुए शरीर को ठंडे पानी से शांत करने लगी

53839995.gif


माँ ने डिनर के लिए दरवाजा खड़काया पर मैने तबीयत का बहाना करके बोल दिया की अभी मन नही है

माँ : “ओके ,मैने खाना बना कर रख दिया है, मन हो तो खा लेना…पापा का भी खाना बना दिया है, वो तो आने के बाद ड्रिंक करेंगे अभी, और मुझे नींद आ रही है, ओके बेटा, गुड नाइट”

इतना कहकर वो चली गयी

मैं जानती थी वो ऐसा ही करेंगी

क्योंकि नींद के आगे वो किसी की नही सुनती

अभी 9 बज चुके थे, पापा भी आने ही वाले थे

मैने जल्दी से एक छोटी सी स्कर्ट और टी शर्ट पहन ली, अंदर कुछ भी नही था

उस ड्रेस में मैं सच में बहुत सैक्सी लग रही थी





आज मैं पापा के कानो से धुंवा निकालने वाली थी

मॉम सोने जा चुकी थी, करीब आधे घंटे बाद पापा भी आ गये

मैने जब दरवाजा खोला तो उनका मुँह खुला का खुला रह गया

ऐसी ड्रेस मैने आज तक नही पहनी थी उनके सामने

ये भी उन्ही कपड़ो में से एक थे जिन्हे मैं चाव-2 में ले तो आई थी पर मॉम के मना करने के बाद और पापा के गुस्से के डर से मैं उन्हे पहन ही नही पाई

पर अब माहौल बदल चुका था

मैं अपनी नन्ही सी गांड मटकाते हुए वापिस अपने रूम की तरफ चल दी

और पीछे से पापा की जलती हुई भूखी नज़रें मैं अपने हिप्स पर सॉफ महसूस कर पा रही थी

ऐसे पापा को तरसाने में कितना मज़ा आने वाला था इसका अंदाज़ा लगाकर ही मेरे निप्पल्स अपनी बेंच पर खड़े होकर हाहाकार मचा रहे थे

पर उन्हे इस वक़्त पापा नही देख पाए, उनका तो पूरा ध्यान मेरे पिछवाड़े पर था

जिसे देखकर वो अपने लॅंड को सहला रहे थे

आज फिर से मोटे पेग बनने वाले थे उनके



 
अपने रूम में जाकर उन्होने चेंज किया और अपनी लूँगी बनियान में वो आराम से बोतल लेकर अपनी सीट पर आ बैठे

मैं दरवाजे के पीछे से चुप कर उन्हे ही देख रही थी

वो लूँगी में बंद अपने बुर्ज खलीफा पर हाथ रखकर उसे सहला रहे थे और धीरे-2 ग्लास से सीप ले रहे थे

मैं अंतर्यामी तो नही थी पर इस वक़्त उनके मन में क्या चल रहा था मैं ये जरूर बता सकती थी

मेरी ड्रेस और सैक्सी बदन को देखकर वो मुझे किस तरह दबोचे यही उनके दिलो दिमाग़ में चल रहा था इस वक़्त

कभी वो मेरे रूम की तरफ देखते और कभी वो मोबाइल उठा कर कुछ देखने लगते

शायद कोई पॉर्न वीडियो देख रहे थे

ऐसे ही करते- 2 उन्होने 2 पेग निपटा दिए दिए

और वो पल भी आने वाला था जिसका इंतजार मैं कब से कर रही थी

तीसरा पेग उन्होने बनाया और उसे लेकर उठ खड़े हुए और मेरे कमरे की तरफ आने लगे

अब उन्हे सर्प्राइज़ देने का टाइम आ चूका था

जिसके लिए मुझे बहुत हिम्मत की ज़रूरत थी

पर आगे कुछ करना था तो हिम्मत तो करनी ही पड़ेगी ना

वरना कब तक उनके नशे में जाने का वेट करू और उनके लॅंड से अकेली ही खेलती रहूं

उनका भी तो हक बनता है ना

मैं जल्दी से अपनी पोज़िशन लेकर बेड पर लेट गयी

और जैसे ही धीरे से दरवाजा खुलने की आवाज़ आई , मैने अपने हाथ में पकड़ा मोबाइल अपने कान से लगाया और उसपर बात करने का नाटक करने लगी

मैं : “यार श्रुति…..ये कैसे होगा….मुझे तो अभी तक समझ नही आ रहा है….यार….ऐसे मैं कैसे कर सकती हूँ ….मेरी चूत का पानी निकले ही जा रहा है…”

मेरे मुँह से चूत शब्द सुनते ही पापा के कान खड़े हो गये और वो वहीं छुपकर मेरी बाते सुनने लगे

बस यही तो मैं चाहती थी

मैने कमरे की लाइट बुझा रखी थी और सिर्फ़ एक नाइट बल्ब जल रहा था

उस रौशनी में उन्हे तो मेरा जिस्म आँखो पर ज़ोर लगाने से

पर मुझे वो दरवाजे के बाहर खड़े सॉफ दिखाई पड़ रहे थे..

मैं आगे बोली : “तू पागल हो गयी है क्या…..वहां उंगली डालूंगी तो मेरा कुँवारापन चला जाएगा….याद है ना स्कूल में मेडम ने एक बार चैप्टर में पढ़ाया था ये की हमारी हाइमन की परत फटने से वी आर नो लोंगर वर्जिन”

अब पापा भी शायद समझने लगे थे की मैं और मेरी सहेली के बीच क्या बातचीत हो रही है

और इस वक़्त मैं मोरनी बनकर बैठी थी अपने बेड पर

अपनी नन्ही सी गांड दरवाजे की तरफ फेलाए हुए

पेट पर तकिया लगाकर

घुटने मोड़कर

अपनी स्कर्ट को नीचे खिसकाकर

और इस पोज़ में पापा मेरी नंगी गांड सॉफ देख पा रहे थे

मैने पीछे की तरफ चेहरा करके उन्हे देखा, उन्हे तो अपनी आँखो पर विश्वास ही नही हो पा रहा था की वो क्या देख रहे है, अपनी जवान बेटी की नंगी गांड

और वो भी इतने करीब से

सिर्फ़ 5 फीट का ही तो फासला था बीच में

2 कदम आगे आकर वो सीधा मेरी गांड सूंघ सकते थे

इतने करीब थे वो





और शायद वो भी यही चाह रहे थे इस वक़्त

पर अपनी जवान बेटी की जवानी की इस हरकत को वो छुप कर पूरा देखने का मन बना चुके थे

उन्हे भी पता था शायद की इस उम्र में हर किसी का ये मन करता है

अपने अंगो को छूने का

उन्हे मसलने का

मास्टरबेट करने का

जो की इस उम्र मे नॉर्मल है

उन्होने भी किया होगा शायद

हर कोई करता है इस उम्र में

पर ऐसे किसी का बाप शायद ही देख पाता होगा अपनी बेटी को ये सब करते हुए

वो तो अपने आप को भाग्यशाली समझ रहे थे की उन्हे ये देखने का अवसर मिला

इसलिए किसी बागड़ बिल्ले की तरह

बिना कोई आहत किए वो दम साधे मेरे इस खेल को देख रहे थे

और अपने हाथ में पकड़े ग्लास से सीप-2 करके दारू पी रहे थे

और दूसरे हाथ से अपनी लुंगी के सांप का फ़न मसल रहे थे

शराब और शबाब का संगम जब होता है तो मज़ा वैसे ही दुगना हो जाता है

उन्हे तो शायद ऐसा फील हो रहा था जैसे वो किसी क्लब में बैठकर कमसिन लड़की को नंगा देख रहे है दारू पीते हुए

और मैं इस वक़्त जो बोल रही थी उस से मैं पापा को ये दिखना चाहती थी की मुझे तो इन सबके बारे में कुछ भी पता नही है

उंगली डालने से क्या होगा

मास्टरबेट क्या होता है

कैसा मज़ा मिलेगा

ये इम्प्रेशन मैं देना चाहती थी पापा को अपनी तरफ से की मुझे इन सबके बारे में कुछ नही पता

मैं फिर बोली : “अच्छा रुक….डालती हूँ …..उम्म्म्मम……यार वहां तो बिल्कुल चिपचिपा सा कुछ निकल रहा है…..हाँ, पहले भी निकलता था पर मैने ज़्यादा ध्यान नही दिया…..ओके …..उम्म्म्म….हां …डाल दी…उफफफफ्फ़……..”

और ये काम मैं सच में कर रही थी

बातें भले ही झूठी थी फोन पर

लेकिन फीलिंग्स सच्ची थी कसम से

अपनी उंगली को मैं अपनी चूत में धकेल कर धीरे-2 अंदर बाहर कर रही थी

जिसे पीछे खड़े पापा भी सॉफ देख पा रहे थे

कम रोशनी की वजह से वो शायद मेरी चूत को सॉफ-2 नही देख पा रहे थे

पर चिकने घड़े के नीचे मेरे हाथ को अंदर बाहर होते हुए वो सॉफ देख पा रहे थे





मेरी तो आँखे खुद ब खुद बंद होने लगी और जैसा की आजकल मैं मास्टरबेट करते हुए पापा का नाम लेती हूँ अक्सर

वहां भी मेरे मुँह से अचानक उन्ही का नाम निकलने लगा

“उम्म्म्मममममममममममममम…….ओह पााअ………”

पर पा बोलते ही मेरी चूत के बाल एकदम से खड़े हो गये

मैने जल्दी से बात संभाली

“पानी ssssss यार…..श्रुति……पानी बहुत निकल रहा है……..अहह….इतना पानी पीकर तो किसी की भी प्यास बुझ जाएगी…..हीही”

फिर कुछ देर बाद मैं बोली

“पागल है क्या…..लड़के भला क्यो पिएँगे वहां का पानी….गंदा होता है ना…..”

फिर कुछ देर तक फोन सुनने का नाटक करने के बाद

“अच्छा …सच में ….रुक मैं टेस्ट करती हूँ तू कहती है तो……उम्म्म्मममम…..अहह….ये तो सच में काफ़ी टेस्टी है………उम्म्म्ममम……सड़प-२ ”

इतना कहते-2 मैने अपनी सारी उंगलिया पापा को दिखाते हुए अपने मुँह में लेकर चूस डाली

मैने कनखियो से देखा तो पापा ये सब देखकर बावले से हो चुके थे

वो भी अपनी उंगलिया शराब के ग्लास में डुबोकर उन्हे चूस रहे थे

ठीक मेरी तरह

मानो वो शराब नही मेरी चूत का रस चाट रहे है अपनी उंगलियो से

ओले ओले

मेले प्यारे पापा

उन्हे इस हालत में देखकर मेरा तो दिल ही पसीज गया

एक बार तो मन किया की उन्हे अंदर बुलवा कर आज ही सब कुछ करवा लूँ

पर ये सब करने मे जो रोमांच महसूस हो रहा था उसका कोई मुकाबला नही था

और मैं ये भी जानती थी की वो जितना तड़पेंगे, बाद में मुझे उतनी ही शिद्दत से तड़पा - कर चोदेगे भी

इसलिए अभी के लिए ऐसे ही चलते रहने देती हूँ

मैने फिर से अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में खोंसि और जोरों से उसे मसलने लगी

कुछ देर पहले तक मैं अंजान बनने का जो नाटक कर रही थी

उसके बाद मैं एकदम से कैसे परफेक्शन के साथ मास्टरबेट करने लगी, ये शायद पापा भी नही जान पाए

वरना मेरी चालाकी वहीं पकड़ी जाती

वो तो उन्हे शराब और मेरे नंगे जिस्म का सरूर चढ़ चूका था वरना पॉलिसिआ नज़र से मैं कैसे बचती भला

मेरी चूत से फुव्वारे निकल रहे थे आनंदमयी बूँदो के

और उन्हे हवा में उछलता देखकर पापा की जीभ लपलपा रही थी

मैने एक गहरी साँस लेते हुए अपने जिस्म को निढाल छोड़ दिया

और फिर से अपनी उंगलियो को चाटते हुए फोन पर बात करने लगी

“यार….तू सही कह रही थी….इस खेल में तो सच में बहुत मज़ा आता है….काश कोई होता जिसके साथ मैं ये सब कर पाती…”

कुछ देर रुक कर

“पागल है क्या….तू पापा को जानती है ना, मैं किसी लड़के से बात भी करूँगी तो उन्हे पता चल जाएगा… ना बाबा ना….मैं ऐसा कुछ भी नही करने वाली…दोस्ती अलग चीज़ है, ये काम तो मैं शादी के बाद अपने हस्बैंड के साथ ही करूँगी बस….या फिर ऐसे अकेले में खुद के साथ ही ही, चल अब तू सो जा…मुझे भी पापा को खाना गर्म करके देना है….गुड नाइट…”

फ़ोन रखने के बाद मैंने पास पड़े कपडे से अपनी चूत को अच्छे से साफ़ किया और उन कड़क लिप्स को एक आखिरी बार अपनी उँगलियों से थिरकाते हुए पापा को दिखाया ताकि उनकी आँखों को भी चैन आ जाए



 
फिर मैं उठकर बाथरूम की तरफ चल दी, पापा भी समझ गये की कुछ ही देर में मैं बाहर निकलने वाली हूँ , इसलिए वो भी दरवाजा वापिस बंद करके दबे पाँव अपनी सीट पर जाकर बैठ गये और एक ही बार में अपना पेग खींच डाला और अपनी मूँछो पर ताव देते हुए वो मेरे आने की प्रतीक्षा करने लगे

मैं फ्रेश होकर बाहर आई और पापा से बोली : “पापा , आपका हो गया हो तो मैं खाना लगा दूँ आपका…”

पापा अब थोड़ी मस्ती के मूड में आ चुके थे

शायद औरत के जिस्म में जो हलचल होती है, उसका असर कितनी देर तक रहता है , वो अच्छे से जानते थे

इसलिए उन्होने मुझे अभी के लिए रोक दिया और अपने पास बुलाया और बड़े ही प्यार से मुझे अपनी गोद में बिठा लिया

हे भगवान……ये क्या है….

मुझे तो ऐसा लगा जैसे मैं किसी पाइप्लाइन के उपर बैठ गयी हूँ

मेरी गांड के नीचे उनका खड़ा लॅंड था

उनका हाथ मेरे पेट पर था और वो मुझसे इधर उधर की बाते पूछने में लगे थे

सॉफ जाहिर था की उन बातों से उन्हे कोई मतलब नही था

वो तो बस ताज़ा झड़ी चूत की खुश्बू करीब से लेना चाहते थे बस

बीच -२ में वो मेरे हाथों को प्यार से सेहला देते और बातों- २ में उन्हें चूम भी लेते

कोई और मौका होता तो ये बाप बेटी का प्यार ही समझती मैं

पर इस वक़्त तो डेड़ु ठरकी मेरी उन उँगलियों को सूंघ रहे थे जो कुछ देर पहले तक मेरी चूत में थी

मेरे पेट पर उनका दूसरा हाथ किसी नाग की तरह रेंग रहा था

मैं तो मदहोश सी होने लगी थी

पिछले कुछ दिनों से जितना कुछ मैने अपने पापा के बारे में सोचा था

उनके लॅंड को मुँह में लेकर चूसा था

उन्हे चुदाई करते हुए देखा था

उसके बाद ऐसी मदहोशी का आना तो स्वाभाविक ही था

मैं अपनी उम्र के किसी भी लड़के से मज़े ले सकती थी

पर पता नही ये कैसा नशा था की मैं पापा की तरफ आकर्षित होती जा रही थी

और उसी का परिणाम था की उन्हे रिझाने के लिए मैने आज अपने रूम में वो फोन पर बात करने और मास्टरबेट करने का स्वांग रचा

और उसी का असर था की पापा मुझे इस वक़्त अपनी बेटी से ज़्यादा एक जवान लड़की के रूप में देख रहे थे

एक ऐसी जवान हो चुकी लड़की , जिसे अपने जवान शरीर के बारे में कुछ नही पता था

कैसे मज़े लेने है उसका भी अंदाज़ा नही था इस लड़की को

और शायद पापा को ये बात समझ आ चुकी थी

इसलिए आज उनके अंदर का पापा एक अध्यापक बनकर मुझे सैक्स का पाठ सिखाने वाले थे

इधर उधर की बातों के बाद पापा बोले : “देखो बेटा…अब तुम जवान हो रही हो, तुम्हारे अंदर काफ़ी चेंजेस आ रहे होंगे…जिनके बारे में तुम खुलकर मुझसे बात कर सकती हो…या पूछ सकती हो….”

मैने हैरानी से उन्हे देखने लगी, किसी मासूम की तरह

हालाँकि मुझे पता था की ऐसा काम अक्सर माँ करती है अपनी बेटियों के साथ , पर पापा को तो अपनी मस्ती से मतलब था

मैने भी हिम्मत जुटाने का नाटक किया और बोली : “वो…वो पापा….आजकल ना….रात को पता नही क्यों ….मेरी सूसू वाली जगह से…कुछ -2 निकलता है…..चिपचिपा सा….”

पापा एकदम से परेशानी वाले मोड में आ गये, जैसे पता नही क्या बीमारी हो गयी हो मुझे

“अर्रे अर्रे….ये कब से हो रहा है….”

मैं : “काफ़ी दिन हो गये पापा…आज तो मैने श्रुति से भी पूछा था….तो उसने ….उसने…”

मैं शर्मा सी गयी

पापा : “हाँ हाँ बोलो….क्या बोला उसने…”

मैं : “उसने कहा की ये तो आम बात है इस उम्र में …मुझे अंदर फिंगर डालने को कहा….और जब मैने डाली तो ….तो…बहुत सारा पानी निकला….और …और मुझे मज़ा भी आया…”

पापा : “यही तो नासमझ बच्चो की परेशानी है….उसने जो कहा तुमने मान लिया….”

मैं : “तो क्या पापा….उसने ग़लत कहा था….मुझे तो सही लगा…. ”

पापा भी मेरी बात पर मंद-२ मुस्कुरा दिए

पापा : “देखो, हर चीज़ का एक तरीका होता है…..तुमने जो खुद से किया, सही किया या ग़लत, ये कैसे पता…ये तो किसी समझदार इंसान की देख रेख में करना था तुम्हे…”

मैं : “पर पापा…मैं कैसे कहूं किसी को….मम्मी को भी मैने बताने की कोशिश की पर उन्होने मुझे डांट दिया…तभी मैने श्रुति से पूछा था आज….अब मैं क्या करू पापा…किसी लेडी डॉक्टर को दिखाऊं क्या ? ”

पापा : “तुम्हारी माँ तो निरि नासमझ है….उसे कैसे पता की बच्चों को कैसे हॅंडल करते है…पर तुम फ़िक्र मत करो मेरी बच्ची , मेरे होते हुए तुम्हे कोई फ़िक्र करने की ज़रूरत नही है….”

मैं : “पापा…..आप…..पर….आप कैसे…..आई मीन….आप तो ….एक मर्द…हो”

पापा : “मर्द हूँ , पर उस से पहले तुम्हारा पापा हूँ ….मेरी बच्ची को इतनी बड़ी तकलीफ़ हो और मैं कुछ ना करू, ये नही हो सकता, तुम फ़िक्र मत करो, ये बात हम दोनो के बीच ही रहेगी, किसी डॉक्टर के पास जाने की भी ज़रूरत नही है, ये काम कैसे करना है , मैं अच्छे से जानता हूँ ….तुम बस मुझपर भरोसा रखो और ये बात मम्मी को भी नही बताना…समझे…”

पापा का हाथ अब मेरी जाँघो पर रेंग रहा था

चालू तो वो बहुत थे

मेरे वीक पॉइंट के उपर अपने सख़्त हाथों से मसाज करके वो मुझसे हाँ करवाना चाहते थे

और वो समझ रहे थे की उन्होने मुझे अपनी चिकनी चुपड़ी बातों मे फँसा लिया है

जबकि, ऐसा मैने किया था

अपनी शानदार एक्टिंग से उन्हे अपनी बॉटल में उतार लिया था

अब पापा वो सब करने वाले थे

जैसा मैं चाहती थी

जो मैं उनसे चाहती थी

मैं और इंतजार नही कर सकती थी

इसलिए मैने धीरे से उनके कान में गर्म साँसे छोड़ते हुए कहा : “ओके पापा…जैसा आपको ठीक लगे…”





ऐसा करते हुए मैने जान बूझकर अपने गीले होंठो से उनके कानो को छू लिया

जिसकी तरंगे उनके पूरे शरीर में दौड़ती हुई महसूस की मैने….उनके लॅंड तक

आवेश में आकर उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया

मेरे नंगे बूब्स उनकी चौड़ी छाती में पीसकर आमलेट बनकर रह गए

अब पापा की पाठशाला शुरू होने वाली थी

जिसके लिए मैने ये सब जतन किए थे
 
अब पापा वो सब करने वाले थे , जैसा मैं चाहती थी, जो मैं उनसे चाहती थी, मैं और इंतजार नही कर सकती थी

इसलिए मैने धीरे से उनके कान में गर्म साँसे छोड़ते हुए कहा : “ओके पापा…जैसा आपको ठीक लगे…”

ऐसा करते हुए मैने जान बूझकर अपने गीले होंठो से उनके कानो को छू लिया , जिसकी तरंगे उनके पूरे शरीर में दौड़ती हुई महसूस की मैने….उनके लॅंड तक

आवेश में आकर उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया , मेरे नंगे बूब्स उनकी चौड़ी छाती में पीसकर आमलेट बनकर रह गए , अब पापा की पाठशाला शुरू होने वाली थी, जिसके लिए मैने ये सब जतन किए थे

************

अब आगे

************

पापा का चेहरा देखने लायक था

उनको तो जैसे मुँह मांगी मुराद मिल गयी थी

मुझे नासमझ समझकर उनके मन में लड्डू फुट रहे थे

और वो मेरे साथ वो क्या-2 कर सकते है उसका एहसास मैं उनकी आँखो की चमक से लगा पा रही थी

उन्होने मुझे अपने रूम में जाने को कहा और बोले की मैं थोड़ी देर में आता हूँ

मैं रूम में चल दी और पापा अपने रूम की तरफ

वो शायद ये सुनिश्चित करना चाहते थे की मॉम गहरी नींद सो रही है

वो किसी भी प्रकार का रिस्क नही लेना चाहते थे

मैं अपने बेड पर बैठी थी

जैसे कोई नयी नवेली दुल्हन

मेरा दिल धाड़ -2 करके धड़क रहा था

काश श्रुति मेरे पास होती

ऐसे मुश्किल वक़्त में उसका साथ होता तो मुझे ये सब करने में इतना डर नही लगता जितना लग रहा है अभी





ऐसा तो मैने सोचा भी नही था

ये सब इतना जल्दी-2 हुआ की मुझे सोचने का मौका भी नही मिला

वैसे देखा जाए तो इन सब में पापा का ही हाथ था

जिन्हे देखकर मैं ये सब करने का मन बना चुकी थी

ना तो वो मॉम के साथ ड्रॉयिंग रूम में चुदाई करते और ना ही वो दूसरी सलोनी की

सब कुछ अपने आप होता चला गया

मैं वो सब देखती गयी और उनकी तरफ झुकती चली गयी

मैं ये सोच ही रही थी की पापा कमरे में आए और उन्होने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया

मेरे चेहरे पर थोड़ा डर था, जिसे देखकर वो मुस्कुराए और मेरे पास आकर बोले

“डरने की कोई ज़रूरत नही है, मैं कोई ग़लत काम थोड़े ही कर रहा हूँ अपनी बेटी के साथ, तुझे कुछ सीखा रहा हूँ , ताकि शादी के बाद कोई परेशानी ना हो…”

शादी का नाम सुनते ही मेरे चेहरे पर लाली छा गयी

मैं किसी छोटी बच्ची की तरह लाड लड़ाते हुए बोली : “मुझे नही करनी कोई शादी वादी, अभी मेरी उम्र ही क्या है “

पापा मेरे करीब बैठते हुए बोले : “मैं कौनसा अभी करवा रहा हूँ तेरी शादी, मेरा मतलब है की जब भी होगी, तुझे सब पता तो होना चाहिए ना अपने शरीर के बारे में , और ये बात हम दोनो के बीच ही रहेगी, याद है ना…”

मैने अपनी छोटी उंगली को उनकी उंगली में फँसा कर कहा : “जी पापा….पिंकी प्रोमिस”

ऐसा करके हम दोनो हंस दिए

अब सीरियस होने का टाइम आ चूका था

मेरा मतलब है मज़े लेने का

इसलिए पापा थोड़े गंभीर होते हुए बोले : “देखो बीटा , जो मैं तुम्हे बताने और सीखाने वाला हूँ उसके लिए तुम्हे अपनी शर्म छोड़कर ….अपने कपड़े….निकालने होंगे….”

मैने सिर झुका लिया, जैसे मैं पहले से जानती थी की ये सब तो करना होगा

मैने धीरे से कहा : “जी पापा…”

पापा : “और कभी भी, कोई भी डॉउट हो तो उसी वक़्त पूछ लेना…ओके ”

मैने हां में सिर हिलाया

पापा : “चलो फिर….उतारो….”

उनके चेहरे की चमक भी बढ़ती जा रही थी

जैसे जो सपने वो पिछले कई दिनों से देख रहे थे, वो सच होने का समय आ चुका था

मैं उठी और अपनी टी शर्ट उतारने लगी

तो पापा ने रोक दिया

और बोले : “ये नही….नीचे का उतरो बस….”

जैसे वो सिर्फ़ पॉइंट तो पॉइंट उसी बात को सिखाना चाहते थे जिसके लिए हमारी बात हुई थी

ये दिखाकर वो अपने पॉइंट बना रहे थे शायद

की एक पापा होने के नाते वो सिर्फ़ मुझे वही बताएँगे जिसके बारे में मैं श्रुति से फोन पर बाते करके परेशान हो रही थी

यानी चूत का चिपचिपापन

हालाँकि हर मर्द की पहली पसंद तो लड़की का यौवन ही होता है, उसके बूब्स

जिन्हे वो अपने जिन्न जैसे हाथो में पकड़कर मसल सके

मैं उनकी चाल समझ कर मुस्कुरा दी, वो शुरू में अपना विश्वास बनाना चाहते थे

इसलिए मैने अपनी स्कर्ट उतारी और उसे एक कोने में फेंक दिया

अब मैं सिर्फ़ अपनी पेंटी में थी नीचे से

मेरी मोटी जाँघे देखकर ही उनकी जीभ निकल आई और उन्होने अपने सूखे होंठो को चाट कर एक गहरी साँस ली

और बोले : “ये….ये कच्छी भी उतारो सलोनी …”

उनका हाथ अपने खड़े लॅंड को छुपाने में भी लग गया

शायद वो नही दिखाना चाहते थे की एक बाप का लॅंड अपनी बेटी को देखकर खड़ा हो रहा है

मैने झिझकते-2 अपनी पेंटी भी उतार दी

मैने 2 दिन पहले ही अपनी पुस्सी को क्लीन किया था, एक भी बाल नही था उसपर

एकदम चिकनी, और बीच में चीरा और उसमें से झाँकता गुलाबीपन

और गुलाबीपन में से रिसता हुआ ताज़ा शहद





वो बिना पलके झपकाए मेरी पुसी को देखे जा रहे थे

कुछ बोल ही नही रहे थे

मैं धीरे से बोली : “प….पापा…… अब क्या करू….”

पापा हड़बड़ाए और अपनी आवाज़ में संतुलन बनाते हुए बोले : “उम्म…हाँ..हाआंन्न्….अब…अब तुम करो वही….जैसे करते हो….मैं बताता हूँ फिर की तुम क्या गलत करते हो “

वो किसी टीचर की तरह मुझे प्रेक्टिकल करने के निर्देश दे रहे थे, जिनकी स्टूडेंट इस वक़्त आधी नंगी बैठी थी

मैं धीरे से अपने बेड पर पीठ के बल लेट गयी और अपनी कांपती हुई उंगलियाँ अपनी चूत के होंठो पर लगाई और उन्हे धीरे-2 रगड़ने लगी

ऐसा करते ही मेरी आँखे खुद ब खुद बंद हो गयी जो अक्सर हो जाया करती है जब मैं मास्टरबेट करती हूँ

और मेरे होंठो से एक दबी हुई सी सिसकारी निकल गयी

“उम्म्म्मममम……सस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स….”
 
Back
Top