Incest इंस्पेक्टर की बेटी - Page 2 - SexBaba
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Incest इंस्पेक्टर की बेटी

पर वो बाद की बात है

अभी तो श्रुति को स्वर्ग का वो मज़ा मिल रहा था जो शायद उसने आज तक महसूस नही किया था

“ओह माआय गॉड ……..सााली इतना मज़ा देती है तू…..काश पहले पता होता…….अब तक सो बार चुस्वा चुकी होती तुझसे…..”

उसके हाथ अब मेरे बूब्स को भी टटोल रहे थे

मैने भी आनन फानन में अपनी टी शर्ट और ब्रा निकाल फेंकी

अब हम दोनो टॉपलेस होकर अपनी मुर्गिया एक दूसरे से लड़ा रहे थे





कभी वो अपने पैने निप्पल्स से मेरे बूब्स को भेदती कभी मैं

कभी वो मेरा दूध पीती कभी मैं

करीब 10 मिनट तक उसने सेम तो सेम वही निशान मेरी बॉडी पर भी बना दिए जो उसके उपर थे

इसे कहते है पक्की वाली दोस्ती

अब बारी नीचे की थी

गोडाउन में जाने की

क्योंकि असली देसी घी तो वहीं से निकल रहा था दोनो का

पहल मैने की

मैने उसकी जीन्स को खींचा और उतार दिया

साथ में उसकी कच्छी भी निकल आई

मैने भी अपनी शॉर्ट्स उतारी , मैने पेंटी नही पहनी थी आज

दोनो के मिठाई के डब्बे खुलते ही उनकी महक पूरे कमरे में फैल गयी

श्रुति ने मुझे इशारा किया और मैने अपनी टांगे उसके चेहरे से घुमा कर अपनी पुस्सी उसके चेहरे पर रख दी

और खुद अपने लिप्स को लेजाकर सीधा उसकी बहती हुई नशीली चूत पर

और वहां का नज़ारा देखकर मैं हैरान रह गयी

वो एकदम लाल सुर्ख हुई पड़ी थी

शायद कल की पहली चुदाई का असर था और नितिन की चुसाई का भी

श्रुति : “सलोनी….ज़रा आराम से करना…अभी कल का दर्द गया नही है…”

मैने कहा : “फिकर ना कर मेरी जान, तेरी चूत को अपनी समझ कर ही चूसूंगी …. दर्द तेरे आशिक ने दिया है, दवा मैं दूँगी”

मेरे फिल्मी अंदाज पर वो हंस पड़ी पर अगले ही पल उसकी हँसी एक सिसकारी में बदल कर रह गयी

क्योंकि मैने उसकी पूरी की पूरी चूत अपने मुँह में एक ही बार में लेकर उसे सिर्फ़ होंठो से चूसना शुरू कर दिया था

“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……अहह…….ओह यएसस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……ऐसे ही……”

और तभी वो एहसास जो उसे मिल रहा था , मुझे भी मिला

मेरी चूत को भी उसने अपने मुँह में लेकर जोर से चूस डाला

पर उसके चूसने में जंगलिपन ज़्यादा था

क्योंकि उसे पता था की मेरा ये पहली बार है, एकदम कुँवारी चूत है मेरी

कोई दर्द नही , कोई शिकन नही

उसके साथ वो कुछ भी कर सकती है

इसलिए वो बिना किसी रहम के अपने दांतो, जीभ और होंठो के प्रहार से मुझे अंदर तक भिगोने लगी

और सच कहूं दोस्तो, अपनी लाइफ की पहली चुसाई का एहसास पाकर मेरा पूरा शरीर हवा में उड़ रहा था

मुझे तो पता भी नही था की इतना मज़ा मिलेगा

वरना आज से 4 साल पहले जब उसने किस्स करने की शुरूवात करना चाही थी तो उसे आगे बढ़ने से मना नही करती

हम आज तक कितनी बार ऐसी चुसम चुसाई के मज़े ले चुके होते

और उस 69 के पोज़ में हम दोनो एक दूसरे की चूत की मलाई चूसने और चाटने में एक दूसरे की चूत में बुरी तरह से घुसते चले गये





पूरे कमरे में सिर्फ़ हम दोनो की चपर -2 की आवाज़ें और सिसकारियां तैर रही थी

कुछ ही देर में हम दोनो के शरीर उस मुकाम पर पहुँच गये जहाँ से झरने के गिरने जैसा एहसास होता है

और लगभग एक साथ ही हम दोनो का ऑर्गॅज़म आया

एक दूसरे के मुँह में

काफ़ी मस्त स्वाद था उसके जूस का

और शायद उसे भी मेरा जूस पसंद आया था क्योंकि उसने भी मेरे शेम्पेन के ग्लास को पूरा खाली करके छोड़ा

आख़िर तक चाट्ती रही वो उसे

फिर मैं उसकी तरफ सिर करके उसकी बाहों में लिपट गयी

और धीरे से उसके कान में फुसफुसाई

“थॅंक यू श्रुति….फॉर दिस “

वो मुस्कुराइ और बोली : “थेंक्स टू यू मेरी जान….इतना मज़ा तो मुझे नितिन ने भी नही दिया जितना तूने आज दे दिया है….थेंक यू एंड लव यू …”

इतना कहते हुए उसने अपने वो गीले होंठ मेरे होंठो पर रखे और उन्हे चूसने लगी

यार……

वो किस्स मैं कभी नही भूल सकती

मेरी ही चूत का रस उसके होंठो पर था

और साथ में उसके मुँह की मीठी लार भी

उन दोनो का किल्लर कॉंबिनेशन मुझे किसी और ही दुनिया में ले जा रहा था

और ये एहसास भी दिला रहा था की अब मुझे भी अपने इस जवान जिस्म को वो मज़े दिलवाने चाहिए जिसका ये हकदार है





पर कैसे मिलेंगे वो मज़े

ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा
 
फिर मैं उसकी तरफ सिर करके उसकी बाहों में लिपट गयी और धीरे से उसके कान में फुसफुसाई

“थॅंक यू श्रुति….फॉर दिस “

वो मुस्कुराइ और बोली : “थेंक्स टू यू मेरी जान….इतना मज़ा तो मुझे नितिन ने भी नही दिया जितना तूने आज दे दिया है….थेंक यू एंड लव यू …”

इतना कहते हुए उसने अपने वो गीले होंठ मेरे होंठो पर रखे और उन्हे चूसने लगी

यार……वो किस्स मैं कभी नही भूल सकती, मेरी ही चूत का रस उसके होंठो पर था, और साथ में उसके मुँह की मीठी लार भी, उन दोनो का किल्लर कॉंबिनेशन मुझे किसी और ही दुनिया में ले जा रहा था

और ये एहसास भी दिला रहा था की अब मुझे भी अपने इस जवान जिस्म को वो मज़े दिलवाने चाहिए जिसका ये हकदार है

पर कैसे मिलेंगे वो मज़े ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा

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अब आगे

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शाम को पापा के आने से पहले श्रुति अपने घर चली गयी, वो उन्हे फेस करना नही चाहती थी, क्योंकि वो भी तो थी क्लब में मेरे साथ

मैने भी एक बुक ले ली और ब्लैक कॉफी पीते-2 बाल्कनी में बैठकर उसका मज़ा लेने लगी

बाहर की बेल बजी तो मेरे दिल की धड़कन एकदम से ना जाने क्यों तेज हो गयी

पापा का यही ख़ौफ़ था बचपन से मेरे अंदर

जो उनके आने से मुझे अंदर तक हिला कर रख देता था

पर आज मेरे मन में कुछ और ही चल रहा था

आख़िर हैं तो वो मेरे पापा ही ना

एक औलाद अपने माँ -बाप से ऐसे डरकर रहेगी तो कैसे चलेगा

अभी तो मेरी शादी होने में भी 5-7 साल का टाइम था

और उसके बाद भी मुझे आते रहना पड़ेगा अपने घर

इसका मतलब ये तो नही हुआ की पूरी जिंदगी उनसे डर कर ही निकाल देनी है

पर मैं डर क्यों रही हूँ उनसे

आज इसी बात का मंथन चल रहा था मेरे दिलो दिमाग़ में

एक तो वो शुरू से ही पुराने विचारों वाले थे

उपर से पुलिस में रहते हुए उन्हे दुनिया भर के ग़लत काम करने वाले लोगों से मिलना पड़ता था, उनके केस देखने पड़ते थे

गुंडे मवालियों की नज़रों में कितना कमीनापन होता है ये शायद उनसे बेहतर कोई और नही जानता होगा

और शायद इसलिए ही वो मुझे उन सबसे बचा कर रखना चाहते थे

ना तो मुझे ऐसे कपड़े पहनने देते जिन्हे देखकर बाहर के लोगो के मुँह से लार टपक जाए

और ना ही मुझे ये क्लब या सिनेमा जाने की छूट देते थे, जहाँ जाकर मेरे दिलो दिमाग़ में आजकल की नारी होने का घमंड आ जाए

वैसे अपने हिसाब से वो सही थे, एक पापा को इतना प्रोटेक्टिव तो होना ही चाहिए

पर हम बच्चो का नज़रिया भी तो मायने रखता है

मैं उन सिनेमा को देखकर या क्लब में जाकर बिगड़ ही जाऊं, ये तो मेरे उपर भी है ना

मैं खुद अपने हितों से समझोता करके नही रह सकती थी

बस यही बात पापा को समझानी थी

और ये कैसे होगा इसका आइडिया भी मुझे आ चुका था

मुझे उनका नज़रिया बदलना पड़ेगा

और कुछ नया दिमाग़ में आते ही मैं झट से उठी और अपनी अलमारी में रखे कपड़े इधर उधर करके एक ख़ास ड्रेस ढूँढने लगी

पापा घर आने के बाद नहा धोकर गेस्ट रूम में जाकर अपनी बार के सामने बैठ जाते थे और देर रात तक टीवी देखते हुए पीते रहते थे

ये लगभग रोज का नियम था उनका

माँ शुरू में तो उन्हे खाना देने के लिए जागती रहती थी

पर फिर शायद उन दोनो की सहमति से वो 10 बजे सोने चली जाती और बाद मे पापा खुद से खाना खाकर सो जाय करते थे

मैने 10 बजने का इंतजार किया ताकि माँ सोने चली जाए, तब तक मैं भी खाना खा चुकी थी

अब मेरा असली काम शुरू होने वाला था

मैने अपनी अलमारी से वो कपड़े निकाले जो मैने शाम को ढूँढ कर रखे थे

ये एक नाइट सूट था, जिसमें एक टाइट सी शर्ट और शॉर्ट्स थी

शर्ट थोड़ी छोटी थी , जिसमें मेरी नाभि दिखती थी

और ये मैने आज ढूँढ कर इसलिए निकाली थी क्योकि आज से करीब 2 साल पहले जब मैं ये कपड़े मार्केट से लेकर आई थी वो पापा ने मुझे उनमे देखते ही बहुत डाँटा था, वही मोरल लैक्चर वगेरह -2

पर आज फिर से उन्ही कपड़ों को पहनने की हिम्मत पता नही कहाँ से आ गयी थी मुझमे





मैने शर्ट के नीचे ब्रा भी नही पहनी थी, और पिछले 2 सालो में मेरी ब्रेस्ट का साइज़ थोड़ा बढ़ भी गया था

इसलिए वो शर्ट मुझे काफ़ी टाइट आ रही थी

उसमे मेरे बूब्स पर लगे निप्पल्स और भी ज़्यादा चमक बिखेरते हुए उजागर हो रहे थे

और यही हाल मेरी शॉर्ट का भी था

मुझे अच्छे से याद है की वो थोड़ी ढीली थी मुझे

पर आज पहन कर पता चला की मेरे नितंब उसमे काफ़ी मुश्किल से समा पाए

वैसे मुझे अपने हिप्स पर काफ़ी गुमान था

पुछले कुछ महीनों में उनपे जो माँस की परतें चढ़ी थी, उसे महसूस करके मुझे काफ़ी खुशी मिलती थी

ख़ासकर तब जब लड़के मेरा पिछवाड़ा देखकर आहें भरते थे

अब मैं एकदम टाइट से नाईट सूट में खड़ी थी

एक पल के लिए तो मुझे काफ़ी डर भी लगा की कही मेरा प्लान बेकफायर ना कर जाए

पर आज सुबह जिस अंदाज से पापा ने मुझे सोते हुए देखकर अपना लॅंड रगड़ा था, उसके हिसाब से तो मुझे अपना प्लान सफल होता दिख रहा था

मैने लंबी साँस ली और हिम्मत करके अपने कमरे से निकल कर बाहर आ गयी

ड्रॉयिंग रूम में फ्रिज रखा हुआ था, मैने दरवाजा खोलकर पानी की बॉटल निकाली और उसे उपर मुँह करके पीने लगी

मेरे दायीं तरफ ही गेस्ट रूम था और पापा ने मुझे वहां से पानी पीते हुए देख लिया था

मेरे दिल की धड़कन तेज होने लगी

मैं तिरछी नज़रों से उन्हे देख रही थी, वो दम साधे मुझे ही घूर रहे थे

कभी मेरे पिछवाड़े को और कभी मेरे उभरी हुई छातियों को

मेरे निप्पल्स एरेक्ट हो चुके थे, इसलिए जाहिर था की वो अलग से दिख रहे थे उन्हे

और तभी मुझे ध्यान आया की फ्रिज से आती हुई रोशनी के सामने मैं खड़ी थी

और दूर बैठे पापा को उस ड्रेस की महीन परत के पीछे से आ रही रोशनी की वजह से मेरे पूरे शरीर का उतार चढ़ाव सॉफ दिखाई दे रहा होगा

मैं उन्हे देख रही थी तो मेरा ध्यान पानी की बॉटल से हट गया और एकदम से काफ़ी सारा पानी मेरे चेहरे को भिगोता हुआ मेरे बूब्स पर आ गिरा

ठंडा पानी और गर्म एहसास

मेरा गर्म बदन जल सा उठा उस ठंडे पानी के छोंक से

जैसे गर्म तवे पर पानी की बूंदे दे मारी हो

और तभी पापा की आवाज़ मुझे आई : “सलोनी, अभी तक सोई नही….”

मैने हड़बड़ा कर उन्हे देखा तो वो हाथ में दारु का ग्लास लेकर मेरे बूब्स को ही देख रहे थे, शायद पारदर्शी हो गयी थी मेरी शर्ट

मैं : “वो….पापा…प्यास लगी थी…”

पापा : “हम्म ….एक ठंडे पानी की बॉटल मुझे भी देना ज़रा “

मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी

शिकार ने चारा चुग लिया था

मैने वही बॉटल ली जिससे अभी पानी पिया था मैने और पापा की तरफ चल दी

पापा की भूखी नज़रें मुझे उपर से नीचे तक स्केन करने में लगी हुई थी

मैने उन्हे बॉटल दी और जाने लगी तो उन्होने मुझे रोका

“सुनो….ये कैसे कपड़े पहने है तुमने…”

उनकी नज़रें अभी भी मैं अपने बूब्स पर महसूस कर पा रही थी

मैने मासूमियत से भरा चेहरा बनाया और उनकी तरफ देखा

“क्यों , क्या परेशानी है इनमे पापा….”

पापा : “ये…..ये….इतने छोटे…मेरा मतलब है….देखो खुद ही…निक्कर कितनी छोटी है और ये शर्ट भी….त….तुम्हारी….तुम्हारी नाभि तक दिख रही है इसमे…”

उन्होने बोल तो दिया पर फिर खुद ही नज़रें चुराने लगे मुझसे

मैं : “पापा…ये तो मेरा नाइट सूट है…और वैसे भी ये सिर्फ़ घर पर ही तो पहना है….यहाँ आपके और माँ के सिवा कौन है जो मुझे देखेगा…आपके सामने तो ये पहन ही सकती हूँ ना…”

अब उनकी नज़रें मेरे चेहरे पर आ कर जम गयी

मेरे चेहरे पर मासूमियत भी थी और बचपना भी

और वो पिघल गये

“उम…हाँ ….. घर वालो के सामने ही ….मेरे सामने तो पहन ही सकती हो….”

मेरा चेहरा ये सुनते ही खिल सा गया

“थेंक यू पापा….मेरे अच्छे पापा”

और इतना कहते हुए मैं झट्ट से आगे गयी और उनकी गोद में बैठ गयी और उन्हे ज़ोर से हग कर लिया

ये मैने कैसे किया इसका तो मत ही पूछो

मुझे मेरी तो क्या , पापा के दिल की भी तेज धड़कनों की आवाज़ सॉफ सुनाई दे रही थी

उन्हे तो शायद उम्मीद भी नही थी की मैं ऐसी हरकत करूँगी

हाँ , बचपन मे मैं अक्सर उनकी गोद में चड़कर घंटो तक खेला करती थी

पर जवानी में ये मेरा पहली बार था
 
पापा ने एक लूँगी पहन रखी थी, अब पता नही अंदर कुछ पहना था या नही पर कुछ साँप जैसा मुझे अपने हिप्स के नीचे रेंगता हुआ सा महसूस हुआ

मैं जान बूझकर अपने बूब्स को पापा की चौड़ी छाती से सटा कर रखना चाहती थी

क्योंकि यही एक हथियार है जिसके सामने बड़े से बड़ा धुरंधर भी ढेर हो जाता है

पापा कुछ देर तक तो सकते में ही बैठे रह गये

फिर उनका हाथ मेरी पीठ पर आया और वो मुझे सहलाने लगे

“आज मुझपर इतना प्यार क्यों आ रहा है मेरी बिटिया को…”

ये सॉफ्ट और प्यार से भारी टोन थी

जिसे मैने ना जाने कितने सालो से नही सुना था

और वो सुनकर ना जाने क्यों मेरी आँखो में आँसू आ गये

ये भी भूल गयी की मेरा प्लान क्या था

मैं सुबक पड़ी

पापा : “अर्रे….ये क्या, रोने क्यो लगी तू….मैने ऐसा क्या बोल दिया अब मेरी पुच्ची को….”

पुच्ची

ये वो निकनेम था, जिस से पापा मुझे बचपन में बुलाया करते थे

शायद मुझे पुचकारते रहते थे वो, इसलिए..

अब इतने सालो बाद फिर से वही नाम उनके मुँह से सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा

और मैने मन ही मन अपने आप को शाबाशी दी की मेरे इस प्लान की वजह से ही सही, मेरा बचपन एक बार फिर से लौट आया था

मैने और ज़ोर से उनके गले को पकड़ा और लिपटी रही..

मेरे नीचे का साँप अब फुफकारने लगा था

पर मुझे उस से कोई फ़र्क नही पड़ रहा था

मैं अपने हिप्स से उसे मसलने में लगी थी

पता नही क्यो

पर इसमे मुझे मज़ा भी आ रहा था

एक तरफ बाप बेटी का प्यार चल रहा था और दूसरी तरफ ये साँप सपेरे का खेल

और मैं दोनो को एन्जॉय कर रही थी

पापा के हाथ मेरी पूरी पीठ का ट्रेवल कर रहे थे

अब तक वो ये तो जान ही चुके थे की मैने ब्रा नही पहनी है

और शायद इसलिए वो मेरी पानी से भीगी शर्ट के अंदर से मेरे पैने निप्पल्स को अपनी छाती पर महसूस कर पा रहे थे

मैं : “पापा, आप ऐसे ही रहा करो, गुस्सा मत किया करो…अब मैं बड़ी हो गयी हूँ , आप मुझे डाँटते हो तो अच्छा नही लगता…”

पापा के हाथ मेरी पीठ पर और ज़ोर से कस गये

और बोले : “ओके …अब से मैं ध्यान रखूँगा, पर तुम भी थोड़ा संभाल कर रहा करो …समझे”

इतना कहते-2 उनके हाथ नीचे तक आए और मेरे हिप्स वाले हिस्से को पकड़ कर सहलाने लगे

मैं : “मैं तो हमेशा संभल कर ही रहती हूँ पापा….पर कल आपने जो क्लब में आकर किया , वो मुझे अच्छा नही लगा…माना की मैने आपको बताया नही था, पर माँ को तो बता कर ही गयी थी मैं …वहां का माहौल ऐसा होता है इसका मतलब ये नही की मैं भी वही सब करने गयी थी, हमारा ग्रूप सिर्फ़ डांस कर रहा था और नोन एल्कोकोलिक ड्रिंक्स और फुड एंजाय कर रहा था, पर आपने आकर सब गड़बड़ कर दिया…”

जवाब में पापा ने मेरे चेहरे को पकड़ा और मेरे गाल पर एक गीला सा चुम्मा दे दिया

एक पल के लिए तो मुझे लगा की वो मेरे चेहरे को पकड़ कर नशे में मुझे लीप किस्स करने वाले है

और मैने उसके लिए आँखे भी मींच ली थी

पर उनके होंठो ने जब मेरे गालो को छुआ तो मैने आँखे खोली

जो वो नही करना चाह रहे थे, वो मैने एक्सपेक्ट कर लिया था

या शायद जो वो करना चाहते हो, ये उसका पहला कदम था

मेरे चेहरे पर स्माइल देखकर उनका भी होंसला बढ़ गया और उन्होने लगे हाथो मेरे दूसरे गाल पर भी एक चुम्मा दे मारा

इस बार उनके होंठ कुछ ज़्यादा देर तक मेरे गालों पर रहे

और शायद मैने उनकी जीभ को भी महसूस किया, जैसे वो मेरे चेहरे का शहद चाट रहे हो





फिर अचानक उन्होने टेबल पर रखा अपना ग्लास उठाया और एक ही साँस में पूरा पी गये

उनके होंठो के किनारों से शराब छलक कर नीचे गिर रही थी

मैने झट्ट से अपने नाइट सूट की शर्ट का किनारा उठाया और उस से उनके चेहरे मुँह से गिर रही शराब को पोंछने लगी जैसे कोई बच्चा खाना खाते हुए खाना अपने उपर गिरा लेता है, ठीक वैसे ही पापा का हाल था इस वक़्त

पर ऐसा करते हुए मुझसे एक ग़लती हो गयी

मैने लाड में आकर उनके चेहरे की शराब तो पोंछ डाली

पर जब मैने अपनी शर्ट का निचला सिरा उपर उठाया तो नीचे के दो बटन खुल गये

शर्ट तो पहले से ही मेरी नाभि से उपर थी और काफ़ी शॉर्ट थी

2 बटन और खुलते ही मेरे बूब्स जो उस शर्ट की पकड़ में थे वो हवा में झूलने लगे

और जब मैं आगे होकर उनका चेहरा सॉफ कर रही थी तो वो नंगे बूब्स उनकी छाती से टकरा रहे थे

उन्होने लूँगी के उपर बनियान पहनी हुई थी, जिसके एक तरफ से उनकी छाती भी बाहर निकली हुई थी

मेरा बूब सीधा जाकर उनकी नंगी छाती से टकराया

दोनो के निप्पल्स एक दूसरे के गले मिल लिए

चाहे कुछ ही पल के लिए सही

पर मेरे और उनके निप्पल्स का वो मिलन हम दोनो के शरीर मे पूरी तरह से एक तूफान ले आया था

मैने जल्दी से अपनी शर्ट नीचे की और बटन लगाए और उनकी गोद से उठ खड़ी हुई

पापा का भी बुरा हाल था

वो भी इधर उधर देखने लगे और हड़बड़ाहट में उन्होने एक पेग बना डाला और नीट ही पी गये

बाद में जब उन्हे एहसास हुआ तो उनका चेहरा देखने लायक था

मेरी तो हँसी ही निकल गयी उन्हे देखकर

जैसे कोई कड़वी दवाई पी ली हो

अब मेरा वहां रुकना खतरे से खाली नही था

मैं किसी हिरनी की तरह छलाँगे मारती हुई वहां से भाग खड़ी हुई और सीधा अपने रूम में जाकर अंदर से कुण्डी लगा ली

बिस्तर तक पहुँचने से पहले मेरी शॉर्ट्स और शर्ट दोनो ज़मीन पर थे

और मेरा एक हाथ सीधा अपनी चूत पर और दूसरा उस बूब पर था जो अभी पापा से मिल कर आया था

बिस्तर पर लेटने के साथ ही मैं एकदम से किसी नागिन की तरह फुफ्कार उठी

“उम्म्म्ममममममममममममममममममम……. पा.पाााआआआआआआआआ…… आआअहह”





मेरी दो उंगलिया मेरी चूत की वेल्वेट से भरी नदी में गोते लगा रही थी

मेरा दूसरा हाथ उस निप्पल को उमेठ कर उस से सवाल कर रहा था

की बोल कमीने, कैसा लगा पापा से मिलकर

मज़ा आया ना

अहह…… आया ना…….. बोल साले।।।।।।।।।।।।

मैने आवेश में आकर अपने निप्पल को पकड़ कर उपर की तरफ खींच दिया

कुछ देर और करती तो वो निप्पल मेरे हाथ में ही आ जाना था





और दूसरे हाथ की वो दोनो उंगलिया जड़ तक अंदर डाल चुकी थी मैं

आज जितनी गहराई तक तो मैं पहले कभी नही गयी थी

उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़

ये पापा का एहसास इतना मज़े क्यों दे रहा है

मेरे तो और भी दोस्त है

लड़के भी और लड़कियां भी

हालाँकि लड़कों के साथ ऐसा कुछ पहले नही किया था मैने

पर श्रुति के साथ तो आज ही पूरे मज़े लिए थे

पर ये जो पापा वाला एहसास था

वो अलग ही लेवल का था

उसका कोई मुकाबला नही था

मेरी उंगलिया अंदर बाहर होती रही और मेरी चूत का गुबार समेट कर ही बाहर निकली

अंत में पापा के नाम की दुहाई देते हुए मैने उन गीली उंगलियो को अपने मुँह में रखकर पूरा निगल लिया

और बाद में एक नया एहसास लेने के लिए फिर से उस गीली चूत में अपनी उंगलिया डालकर कुछ देर पहले हुए सीन को याद करके उसे सहलाने लगी





अपनी गीली चूत में उंगलियों का ये एहसास मुझे चाँद पर ले जा रहा था

अब शायद रोज रात को इस एहसास से निकलना पड़ेगा

और ये सोचते -2 कब मैं नींद के आगोश में चली गयी

मुझे भी पता नही चला
 
मेरी उंगलिया अंदर बाहर होती रही और मेरी चूत का गुबार समेट कर ही बाहर निकली, अंत में पापा के नाम की दुहाई देते हुए मैने उन गीली उंगलियो को अपने मुँह में रखकर पूरा निगल लिया

और बाद में एक नया एहसास लेने के लिए फिर से उस गीली चूत में अपनी उंगलिया डालकर कुछ देर पहले हुए सीन को याद करके उसे सहलाने लगी

अपनी गीली चूत में उंगलियों का ये एहसास मुझे चाँद पर ले जा रहा था, अब शायद रोज रात को इस एहसास से निकलना पड़ेगा, और ये सोचते -2 कब मैं नींद के आगोश में चली गयी

मुझे भी पता नही चला

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अब आगे

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दोस्तो , कहानी के किरदार के हिसाब से नज़रिए बदलते रहेंगे

अभी तक कहानी सलोनी के नज़रिए से चल रही थी

अब उसकी माँ ज्योति के नज़रिए से कहानी का ये हिस्सा पढ़ते हैं

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ज्योति

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अपने पति को ऑफीस भेजने के बाद करीब 1 घंटे का समय होता था ज्योति के पास

उसमें वो आराम से नहाती, मेकअप करती और फिर अपनी लाडली के लिए नाश्ता नाश्ता और फिर उसे उठाने जाती

आज फिर से वही रुटीन वाली जॉब करते हुए जब वो उसके कमरे में गयी तो एक बार फिर से ज़मीन पर पड़े उसके कपड़े देखकर वो बुदबुदाने लगी

“हे भगवान, फिर से सारे कपड़े निकाल कर सो गयी ये, कितनी बार बोला है अब तू जवान हो गयी है, ये बच्चों वाली हरकत करना छोड़ दे, पर फिर भी नही मानती ये तो…”

और कपड़े उठाते हुए अचानक से वो ठिठक कर रुक गयी

“अर्रे…ये कपड़े…ये तो सलोनी को मना किए थे इसके पापा ने, फिर ये क्यो पहने इसने…”

अपनी बेटी के प्रति उसका लाड ही था जो उसके लिए किसी अनहोनी की आशंका के साथ ही चिंता मे बदल जाता था

कहीं उसके पापा ने उसे इन कपड़ो में देख लिया तो क्या बोलेंगे, फिर से डांट पड़ेगी, पिटाई करेंगे

और अपनी जवान बेटी को वो ये सब सहन करते हुए वो नही देख सकती थी

वो उठी और उसकी तरफ गयी

पर एक बार फिर से ठिठक कर रुक गयी

उसका मुँह खुला का खुला रह गया

सलोनी अपनी चादर में से आधे से ज़्यादा बाहर निकली हुई थी और गहरी नींद में थी

उसने कुछ पहना तो नही था इसलिए उसके तने हुए बूब्स उसकी आँखो के सामने थे





एक पल के लिए तो उसे अपनी जवानी के दिन याद आ गये

ठीक ऐसे ही थे उसके बूब्स भी उस वक़्त

करीब 34 का साइज़ और गोरे चिट्टे

उसने गोर से देखा तो सलोनी के निप्पल के पास भी उसे अपनी तरह का एक काला तिल दिखाई दिया

वो मुस्कुरा दी

इसे कहते है मा की कार्बन कॉपी होना

कुछ देर पहले का गुस्सा अब प्यार में बदल चूका था

उसने आगे बढ़कर सलोनी के माथे को धीरे से सहलाया

और बोली : “सलोनी….ओ मेरी बच्ची …उठ जा लाडो….देख 9 बज गये है, कॉलेज भी तो जाना है ना…”

सलोनी ने माँ के हाथ को अपने हाथ में लिया और उसे अपने गाल के नीचे दबाकर फिर से सो गयी

वो उम्म्म्म की आवाज करके फिर से सो गयी

ज्योति ने उसके बालों पर हाथ फेरते हुए उसे प्यार से देखा और बोली : “ओके …सो जा कुछ देर और…फिर आ जाना..”

इतना कहकर उसने अपना हाथ खींच कर बाहर निकाला

और हाथ निकालते हुए वो उसके बूब से टकरा गया…

एक पल के लिए उसके पूरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गयी…

ये पहला अवसर था जब उसने अपनी बेटी के बूब को टच किया था

बड़ा ही मुलायम था वो…

एकदम किसी जेल्ली बॉल जैसा

उसके हाथ खुद ब खुद उसके निप्पल्स की तरफ खींचते चले गये

एक औरत का अपनी ही बेटी के शरीर को इस प्रकार से देखना और छूना कितना ग़लत था

ये वो भी अच्छी तरह से जानती थी

पर थी तो वो एक इंसान ही ना

नंगे शरीर को देखकर जो फ़ितरत अंदर से आती है

वो भला कहा जाएगी

उसने हल्की उंगलियों से उसके निप्पल पर अपनी पकड़ बना ली और उन्हे होले से दबा दिया..

सलोनी अभी आधी नींद में थी

पर उसे कुछ भी पता नही चल रहा था

उसने फिर से उसके निप्पल को अपनी उँगलियों में भींच सा दिया

इस बार उसके शरीर में हलचल सी हुई

मॉर्निंग इरेक्शन उसके निप्पल्स में पहले से था

ज्योति की इस हरकत ने उसे पूरे शबाब पर ला दिया

वो गहरी साँसे लेने लगी

शायद वो कोई सपना देख रही थी

जिसमें उसे ये लग रहा था की कोई उसके निप्पल्स को दबा रहा है या चूस रहा है

इस वक़्त ज्योति को भी होश नही रह गया था की वो अगर जाग गयी तो उसके बारे में क्या सोचेगी

उसे पता नही क्या मज़ा मिल रहा था

उसके गुलाबी निप्पल्स को सहलाने में

रगड़ने में

मसलने में

अचानक ज्योति के होंठ सूख से गये

उसने जीभ से उन्हे गीला किया पर कुछ नही हुआ

पर जब उसकी नज़रें उन रसीले निप्पल्स पर गयी तो अपने आप ढेर सारा पानी लार बनकर मुँह में आ गया

अब उसे पता था की क्या करना है

वो धीरे से अपनी बेटी की छाती पर झुकी और उसने सलोनी के निप्पल को मुँह में लेकर चूस लिया





और यही वो पल था जब एक जोरदार सिसकारी मारती हुई सलोनी नींद से जाग गयी

और हड़बड़ाते हुए जब उसने अपनी माँ को अपने सामने बैठे देखा तो सकपका सी गयी

चादर काफ़ी नीचे थी , इसलिए वो अपनी छातिया भी ढक नही सकती थी

उसने अपने हाथ बूब्स पर रखे पर उसका भी कोई फायदा नही था

ज्योति (मुस्कुराते हुए) : “जब नंगे सोने में कोई शर्म नही है तो अपनी माँ के सामने क्यो छुपा रही है…”

सलोनी भी मुस्कुरा दी और उसने अपने हाथ नीचे कर लिए

ये पहली बार था जब वो इतने खुलेपन से अपनी तनी हुई छातियाँ माँ के सामने लेकर बैठी थी

ज्योति ने उन्हे गोर से देखा, गोरे बूब्स पर नीले रंग की नसें दिखाई दे रही थी

इतना गोरा शरीर था उसका

सलोनी : “मोम …..आर यू ओके ….ऐसे क्या देख रहे हो….मुझे शर्म आ रही है…”

ज्योति अपनी जगह से उठते हुए : “अब शर्म आ रही है, कितनी बार बोला है रात को कपड़े पहन कर सोया कर…पर तुझे समझ ही नही आती, किसी दिन मेरी जगह पापा आ गये ना कमरे में , तब तो तेरी खैर ही नही है…”

ज्योति की बात सुनकर सलोनी मुस्कुरा दी और फिर बड़ी ही बेशर्मी से बोली : “आ जाए तो आ जाए, जिस दिन उन्होने मुझे ऐसे देख लिया ना तो अगले दिन से ही मुझे डांटना बंद कर देंगे…देखना”

ज्योति (आँखे चौड़ी करते हुए) “बेशरम…अपने बाप के लिए ऐसा बोलती है…ठहर तुझे अभी बताती हूँ …”

उसकी माँ के चेहरे पर गुस्सा नही बल्कि मुस्कान आई थी ये सुनकर…

इसलिए सलोनी भी खिलखिला कर हंस दी

और बोली : "माँ, आप भी करके देखना ऐसे किसी दिन, बड़ा मज़ा आता है "

और अपनी माँ से बचने के लिए वो किसी हिरनी की तरह छलांगे मारती हुई बाथरूम में घुस गयी

अब ज्योति को फिर से झटका लगा

उसके सामने ही उसकी 22 साल की जवान बेटी नंगी भागती हुई जा रही थी उसके सामने से

ज्योति कुछ देर तक तो वही खड़ी रही और फिर किचन की तरफ चल दी

उसके जहन में अभी तक अपनी जवान बेटी का नंगा जिस्म कौंध रहा था





करीब आधे घंटे बाद सलोनी अपने रूम से तैयार होकर निकली और नाश्ते का टिफ़िन लेकर कॉलेज के लिए निकल गयी

वो केंटीन में जाकर ब्रेकफास्ट करती थी

सलोनी के जाते ही ज्योति ने दरवाजा बंद किया और अपनी कुर्ती निकाल कर दूर ज़मीन पर फेंक दी

जिस बात की नसीहत वो बेटी को दे रही थी, वही ग़लत काम वो खुद कर रही थी

पर इसमे कितना रोमांच था ये उसे अब महसूस हुआ

सलोनी सही कह रही थी, मजा तो आ रहा था उसे भी

पूरे घर में वो अकेली थी इस वक़्त

उसने ब्रा भी निकाल दी और नीचे की सलवार और पेंटी भी

पूरे ड्राइंग रूम में उसके कपड़े बिखर कर रह गये

और उनके बीच वो खड़ी थी जैसे कोई कमल का फूल

पूरी नंगी





उसने शीशे मे अपने आप को देखा और खुद ही इतरा उठी

कुछ ज़्यादा फ़र्क नही था उसमें और सलोनी के जिस्म में

बस उम्र के साथ थोड़ी चर्बी चढ़ गयी थी उसके जिस्म पर

पर वो चर्बी उसे और सैक्सी बना रही था

एकदम चब्बी टाइप की औरत थी वो

जैसी आजकल के मर्दो को

ख़ासकर जवान लड़को को पसंद है
 
जवान लड़के का ध्यान आते ही उसके जहन में अपने धोभी का लड़का बबलू आ गया

जो रोज उसके घर से कपड़े लेने आता था

वो करीब 24 साल का था, उसकी नज़रों के सामने ही बड़ा हुआ था वो

सोसायटी के नीचे ही धोभि ने एक झोपड़ी डाली हुई थी, जिसमें वो अपनी पहाड़न बीबी और एक लड़के के साथ रहता था

घर से कपड़े लेने-देने का काम शुरू से ही ये बबलू करता था

उसे देखकर हमेशा उसे कुछ होता था अंदर से

कई बार तो वो अपने पति से सैक्स करते समय भी उसके बारे में सोचकर ही झड़ा करती थी

और आज जब वो इस तरह से उत्तेजना में भरकर नंगी खड़ी थी तो उसे बबलू ही याद आया

उसने अपने मुँह से ढेर सारी लार निकाल कर अपनी उंगलियो मे इकट्ठा की और सीधा लेजाकर अपनी चूत में घुसेड दिया उसे

और चिल्ला पड़ी

“आआआआआआआआआहह ओह बबल्ूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ उम्म्म्मममममममममम”





यहाँ उसने आवाज़ मारी और बाहर एकदम से बेल बज गयी

और बबलू की आवाज़ आई : “मेमसाब …..कपड़े…”

ज्योति तो एकदम से भोचक्की रह गयी उसकी आवाज़ सुनकर

और डर भी गयी की कहीं उसने कुछ सुन तो नही लिया

साले ने आकर अच्छे भले मूड की माँ बहन एक कर दी

अभी तो पहली डुबकी ही लगाई थी उसने अपनी चूत में उसके नाम की

एक तो उसका काम बीच मे रोक दिया

उपर से कपड़े -2 चिल्ला रहा है बाहर खड़ा होकर

अब कौनसे कपड़े दूँ इसे

ये ,जो ज़मीन पर पड़े है…

हे भगवान

इसे भी अभी आना था

उसने जल्दी से ज़मीन पर पड़े कपड़े उठाए और उन्हे बेड पर जाकर रख दिया

उसकी फिर से आवाज़ आई : “मेडम जी…..कपड़े…”

ज्योति चिल्लाई : “आ रही हूँ ……नहा रही थी….रुक जा..”

नहा रही थी

ये सुनते ही बाहर खड़े बबलू के मुँह से भी लार टपक गयी

वो भी साला एक नंबर का ठरकी था

सोसाइटी की ऐसी औरतों को ताड़ने में उसे भी काफ़ी मज़ा आता था

कुछ के साथ तो वो काफ़ी घुल मिल गया था और मज़ाक भी कर लेता था

पर ये इनस्पेक्टर का घर था

इसलिए उसे डर लगा रहता था की कही साहब को पता ना चल जाए

वरना उनकी बीबी तो एक नंबर की गोल बोटी वाला माल थी

वो उनके बारे मे सोच ही रहा था की अंदर का दरवाजा खुला और ज्योति की आवाज़ आई : “अंदर आ जा बबलू…कपड़े निकालती हूँ मैं ”

वो अंदर आया और उसने दरवाजा बंद कर दिया

और जैसे ही वो पलटा ज्योति भाभी को देखकर उसके कान लाल हो गये

वो एक टॉवल में खड़ी थी जिसे उसने अपनी छाती के चारों तरफ लपेट रखा था

जिसमें उसके मोटे बूब्स काफ़ी मुस्किल से समा पा रहे थे

आधे से ज़्यादा तो वो बाहर थे





एकदम गोरे चिट्टे

पहाड़ जैसे बड़े

ठीक उसकी माँ जैसे

उन्हे भी वो छुप -2 कर देखा करता था

पर ये मेमसाहब के तो और भी ज़्यादा गोरे और मोटे थे

और नीचे उनकी मोटी थाइ

उफफफ्फ़

उसका बस चलता तो यहीं लेटाकर उन्हे चूम लेता

नंगा करके

पर बाहर नेम प्लेट पर जो इनस्पेक्टर लिखा है

उसकी याद आते ही उसका जोश ठंडा हो गया

ज्योति : “रुका नही जाता तुझसे भी, कपड़े-2 चिल्ला कर सारा मूड खराब कर दिया….अच्छी भली मैं …”

कहते-2 वो रुक गयी

फिर बोली “नहा रही थी….बेकार में आकर टोक दिया…”

बबलू : “सॉरी मेडम जी….मैं बाद में आता हूँ …आप एंजाय कर लो…मेरा मतलब है…नहा लो…”

उसकी बात सुनकर वो मुस्कुराइ

और बोली : “अब आया है तो ले ही जा …वरना बाद में फिर से परेशान होगा इतना उपर आकर…”

इतना कहकर वो चल दी और अपने कमरे से प्रेस वाले कपड़े निकाल कर ले आई

कपड़े गिनकर बबलू ने एक गठरी बना ली और जैसे ही चलने को हुआ उसकी नज़र कुर्सी के नीचे गिरी पेंटी पर गयी

जिसे ज्योति उठाना भूल गयी थी

बबलू की नज़रों का पीछा करते हुए ज्योति ने जब वहां देखा तो वो खुद ही शर्मा गयी

और बोली : “इशhhhhhh….ये यहाँ पड़ी है, मैने नहाने के बाद पहननी थी, पता नही कब गिर गयी”

वो उसे उठाने के लिए जैसे ही झुकी, टावल ने उसका साथ छोड़ दिया

उसने टाइट करके उसे बाँधा था, झुकने की वजह से वो खुल गया और उसके हाथों पर आकर झूल गया

और वो उसके सामने नंगी खड़ी थी अब





बबलू की तो ज़ुबान ज़मीन पर आ लगी ये नज़ारा देखकर

और ज्योति का तो शर्म के मारे बुरा हाल था

हालाँकि अभी कुछ देर पहले वो उसकी के नाम का मास्टरबेट कर रही थी

पर ये स्थिति अलग थी

ज्योति के भी पैर जहाँ के तहाँ जमे रह गये

शर्म के मारे उसका बुरा हाल था, उसने आँखे बंद कर ली

सामने खड़े बबलू को अपनी किस्मत पर विश्वास ही नही हो रहा था

उसके ठीक सामने उसकी मनपसंद भाभी नंगी खड़ी थी

मोठे-२ मुम्मे और गोल मटोल गांड थी उनकी

लॅंड भी उसका एकदम टाइट हो चुका था

अभी थूक लगाकर अंदर पेल दे तो सरसरता हुआ पूरी गुफा नाप लेगा वो

क्योंकि भाभी की चूत भी तो पनिया रही थी

पर ये एकदम से स्टेचू क्यों हो गयी

कही ये उसके लिए कोई निमंत्रण तो नही है

उसने हिम्मत करते हुए कपड़ो की गठरी साइड मे रखी और उनके करीब आया

और भाभी का कंधा पकड़ कर उन्हे धीरे से सहलाया

फिर वो धीरे-२ उनके पीछे की तरफ आ खड़ा हुआ

“ओह्ह भाभी…आपको कही चोट तो नही लगी ना….”
 
ज्योति को उसका लॅंड अपनी गांड पर चुभता हुआ सॉफ महसूस हो रहा था

ये तो एकदम सपने जैसा था

बेशर्म तो वो बन ही चुकी थी, अपना जिस्म दिखाकर

अब उस से क्या छिपाना

इसलिए उसने खुद को हालत के भरोसे छोड़ दिया

की देखते है आज क्या होता है

बबलू के दोनो हाथ उसके कंधो पर थे

उसकी साँसे तेज़ी से चल रही थी, जिसकी वजह से उसका सीना उपर नीचे हो रहा था

बबलू का कद उस से लंबा था, इसलिए वो उसके पीछे से खड़ा होकर उसके उठते-गिरते सीने को देख पा रहा था

इतने विशाल मुम्मे उसने आज तक नही देखे थे

मन तो उसका कर रहा था की आगे हाथ बढ़ाकर उन्हे दबोच ले

पर वो जल्दबाज़ी में कोई गड़बड़ी नही करना चाहता था

पर धीरे-2 वो अपने हाथो से ज्योति के कंधो की मसाज करने लगा

कंधो पर सख़्त मर्द के हाथ लगते ही औरत पिघल सी जाती है

यही ज्योति के साथ भी हुआ

वो एक लंबी सांस लेकर उसके कंधे पर पीछे की तरफ झुकती चली गयी

ये एक मौन स्वीकृति थी उसके लिए

अब उसने अपना एक हाथ नीचे लेजाकर उसकी कमर को दबाना शुरू किया, और धीरे-2 उसे पेट की तरफ ले जाने लगा

ज्योति अब अपने पंजो पर खड़ी हो चुकी थी

और उपर नीचे होकर वो उसके लॅंड को अपनी गांड पर घिस्से मरवा रही थी

सब कुछ इतना जल्दी हो जाएगा ये तो दोनो ने नही सोचा था

बबलू ने अपनी पेंट की जीप खोल दी और अपने अटके हुए लॅंड को बाहर निकाल लिया

लॅंड बाहर निकलते ही वो सीधा ज्योति के नर्म कुल्हो से टकराया

एक बिजली सी कौंध गयी उसके पुर जिस्म में

ज्योति ने भी हिम्मत करते हुए हाथ पीछे करके उसके साँप को पकड़ लिया

और बबलू ने हिम्मत करके उसके मुम्मे को

उफफफफफ्फ़

कितना फुफकारता है ये

इसका तो जहर निकालना पड़ेगा

वो आँखे बंद किए-2 ही पलटी और सीधा उसके सामने बैठ कर उसके साँप को निगल गयी

और गपा गॅप करके निकालने लगी उसका सारा जहर

बबलू को तो यकीन ही नही हुआ की ये ये रसीली भाभी उसका लॅंड चूस रही है

आज से पहले उसने सिर्फ़ 2 औरतों के साथ ही सैक्स किया था

पर किसी ने भी उसका लॅंड नही चूसा था

ये तो कमाल हो गया

वो मन ही मन उस पल का धनयवाद कर रहा था जब वो आया और उसका भी जब वो टॉवल निकल गया उनके बदन से

औरत इतनी आसानी से हाथ आ जाती है ये तो उसे पता ही नही था

आजतक वो ना जाने कितनी औरतों को चोद चुका होता

पर अब इसी एक्सपीरियेन्स का इस्तेमाल करके वो आने वाले दिनों में तबाही मचाने वाला था

जितनी भी भाभियाँ , आंटियां और लड़कियां उस से हंस कर बात करती थी वो उनपर ट्राइ करने वाला था आज के बाद

आई तो आई वरना देखी जाएगी

पर अभी के लिए तो वो आसमान पर था

क्योंकि उसका लॅंड ज्योति भाभी किसी मंझी हुई रांड की तरह चूस रही थी





ज्योति को भी अपने आप पर विश्वास नही हो रहा था की वो इतनी बेशर्मी से एकदम से पिघल जाएगी और धोबी का लॅंड अपने मुँह में लेगी

एक इनस्पेक्टर की बीबी और वो भी धोभी के साथ

सोचकर की कितना अजीब लगता है

पर ये अनोखापन ही ज्योति को अंदर से उत्तेजित कर रहा था

वो चाहती थी की उसे इसी तरह के काम करने वाले लोग जैसे धोभी, ड्राइवर, चोकीदार , सब्जी वाला वो सब उसे चोदे

क्योंकि ये मेहनती इंसान जब अपनी रोज़ी रोटी के लिए जी जान लगा देते है तो सोचो चोदने के लिए क्या कारनामे करते होंगे

बस यही वो महसूस करना चाहती थी

यही फॅंटेसी थी उसकी

और आज अपनी फॅंटेसी का पहला एहसास पाकर उसे अंदर से बहुत खुशी हो रही थी

अब उसने आँखे खोली

एकदम मोटा और लंबा लॅंड था बबलू का

ब्राऊन कलर का

और उपर बबलू अपनी आँखे बंद किए उस लॅंड चुसाई का मज़ा ले रहा था





उसने और ज़ोर से उसके लॅंड को चूसना शुरू कर दिया

आज वो उसका सारा जहर पी जाना चाहती थी

और वही हुआ

जिसके लिए वो मेहनत कर रही थी

उसके नाग ने एक के बाद एक पिचकारी मारकर अपना सारा जहर उसके चेहरे और मुँह के अंदर जमा करवाना शुरू कर दिया





उफ़फ्फ़

ये गरमा गरम हलवा इतना स्वादिष्ट होगा, उसे भी पता नही था

वो चपर -2 करके सारा रस पी गई उसका

सब कुछ शांत होने के बाद दोनो की नज़रें मिली

ज्योति उसके सामने खड़ी हुई और अपने गीले मुँह से उसे एक जोरदार स्मूच कर दिया

बेचारे बबलू को ना चाहते हुए भी अपने रस का स्वाद खुद लेना पड़ा

ज्योति : “आज जो हुआ है, वो किसी को पता ना चले…वरना आगे कभी कोई मज़ा नही ले पाएगा…समझे…”

बबलू : “जी…”

ज्योति : “चल अब जा ….कल फिर आना इसी वक़्त….आगे का खेल भी तो खेलना है ना…”

वो अभी के लिए उसे जान बूझकर भगा रही थी

क्योंकि उसे अपने पति के लिए लंच भी तो बनाना था, कई बार वो लंच करने घर पर भी आ जाते थे, इसलिए वो किसी भी प्रकार का रिस्क नही लेना चाहती थी

गांड तो उसकी भी फटती थी अपने इंस्पेक्टर पति से

पर आने वाले दिन उसकी लाइफ बदलने वाले थे
 
सब कुछ शांत होने के बाद दोनो की नज़रें मिली, ज्योति उसके सामने खड़ी हुई और अपने गीले मुँह से उसे एक जोरदार स्मूच कर दिया

बेचारे बबलू को ना चाहते हुए भी अपने रस का स्वाद खुद लेना पड़ा

ज्योति : “आज जो हुआ है, वो किसी को पता ना चले…वरना आगे कभी कोई मज़ा नही ले पाएगा…समझे…”

बबलू : “जी…”

ज्योति : “चल अब जा ….कल फिर आना इसी वक़्त….आगे का खेल भी तो खेलना है ना…”

वो अभी के लिए उसे जान बूझकर भगा रही थी, क्योंकि उसे अपने पति के लिए लंच भी तो बनाना था, कई बार वो लंच करने घर पर भी आ जाते थे, इसलिए वो किसी भी प्रकार का रिस्क नही लेना चाहती थी

गांड तो उसकी भी फटती थी अपने इंस्पेक्टर पति से, पर आने वाले दिन उसकी लाइफ बदलने वाले थे

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अब आगे

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दोस्तो, जैसा पिछले अपडेट मे मैने कहा था की कहानी के पात्रों के हिसाब से नज़रिए बदलते रहेंगे

शुरू की कहानी आपने सलोनी के नज़रिए से पढ़ी और पिछला अपडेट आपने सलोनी की माँ ज्योति के नज़रिए से

आज का अपडेट आप सलोनी के इनस्पेक्टर बाप यानी शमशेर सिंह की नज़र से पढ़ेंगे

इनस्पेक्टर शमशेर सिंह

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सभी की लाइफ बदल रही थी

सलोनी की

उसकी माँ ज्योति की

सलोनी की सबसे करीबी दोस्त श्रुति की

और सबसे ज़्यादा तो सलोनी के पापा शमशेर की

जिसे जाने या अंजाने में ही सही

अपनी बेटी के रसीले शरीर को स्पर्श करने का सुखद एहसास मिल गया था

और जब से वो कल रात वाला वाक़या हुआ था, उसकी तो नींद ही उड़ चुकी थी

उसके दिल में एक अजीब सी कशमकश चल रही थी

आख़िर था तो वो एक बाप ही

अपनी ही बेटी के बारे में इस तरह से सोचना कितना अनैतिक है ये भी वो अच्छी तरह से जानता था

पर इसी अनैतिक कार्य को करने और सोचने में इतना आनंद क्यों मिल रहा है

इतनी उत्तेजना क्यों महसूस हो रही है

ऐसी उत्तेजना तो आज तक उसने कभी महसूस नही की थी

रात भर वो ढंग से सो भी नही पाया था

रह रहकर उसे अपनी बेटी का नर्म शरीर और उसका स्पर्श याद आ रहा था

ख़ासकर उसकी गर्म गांड का वो एहसास जब वो उसकी गोद में बैठी थी

ठीक उसके कड़क लॅंड के उपर

और सबसे ख़ास वो पल जब उसने अपनी शर्ट उपर करके उसके चेहरे को पोंछा था

उसके गुदाज स्तन का वो स्पर्श उसे अब तक झींझोड़ता हुआ सा महसूस हो रहा था

सुबह उठकर उसका मन तो हुआ की एक बार जाकर देखे उसके कमरे में

पर पता नही क्यों उसके चोर दिल ने हिम्मत ही नही की

(अगर चला जाता तो उसे नंगा सोते देखकर वहीं चोद देता शायद)

घर से निकलकर वो सीधा पुलिस स्टेशन पहुँचा

और वहां पहुँचते ही उसे वही लड़की फिर से बाहर ही मिल गयी जिसके बाप को उसने दो दिन पहले रेड लाइट एरिया की रेड में पकड़ा था

लड़की : “साहब…साहब…अब तो मेरे बापू को छोड़ दो….वो किसी का समान देने गया था, ये रही उसकी पर्ची, सेठ ने ही भेजा था उसे समान पहुँचाने, आपने बेकार में पकड़ लिया…वो निर्दोष है साहब….छोड़ दो उन्हे…”

मैने उस लड़की को उपर से नीचे तक गोर से देखा

घाघरा चोली पहन रखी थी उसने

काला रंग उपर से महीनो से नहाई भी नही थी शायद…

अब ऐसी जवान लड़कियां जो सड़क किनारे बने झोपडे में रहती है, कहाँ ही नहा पाती होंगी…

मैने पूछा : “तेरा नाम क्या है…क्या काम करती है तू…”

उसने झिझकते हुए नीचे नज़रें करके कहा : “जी….जी…सलोनी..”

सलोनी सुनते ही मेरे पूरे शरीर के रोंगटे खड़े हो गये

कहाँ तो मेरी फूल जैसी गोरी बेटी और कहाँ ये काली कलूटी , मैली कुचेली लड़की

पर उम्र दोनो की एक ही थी लगभग

और हां , इसकी आँखे कुछ ज़्यादा ही सुंदर थी





अब मैने गोर से देखना शुरू किया उसे

काले रंग की चोली में उसके स्तन बड़ी मुश्किल से दबा कर रखे थे उसने

शायद चोली छोटी हो गयी थी उसकी

जिसकी वजह से उसका यौवन उपर से बाहर निकल रहा था

गले में 2-4 मोटी माला पहन रखी थी उसने

जैसे बंजारे पहनते है, हाथों में भी कई सारी चूड़िया थी उसके

नीचे उसका सेक्सी सा पेट जिसमें नाभि अंदर तक धँसी थी

और नीचे उसका फेला हुआ नितंब जिसपर उसने गाँठ लगाकर लहँगा पहन रखा था

लहंगे में भी कई पेबंद लगे थे

एक जगह से फटा भी हुआ था पर गोर से देखने पर भी कुछ पता नही चल रहा था क्योंकि अंदर उसकी टांगे भी काली थी पूरी

कुल मिलाकर एक जवान सी लड़की को ग़रीबी का लिबास पहना कर खड़ा किया हुआ था उसकी किस्मत ने मेरे सामने

फिर वो बोली : “और मैं, चोराहों और रेड लाइट पर डांस करके अपने बापू का सहयोग देती हूँ …मेरी माँ भी मेरे साथ काम करती थी पहले, पर एक तेज रफ़्तार कार ने उसकी टांगे कुचल दी, तभी से मैं और बापू कमाते है और वो घर रहती है…”

ऐसे किस्से कहानियां तो मैं कई बार सुन चुका था

पर इस लड़की के सलोनी नाम की वजह से कुछ ख़ास दिलचस्पी होने लगी थी मुझे इसमें अब

मैने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोला : “चल अंदर…देखते है मैं क्या कर सकता हूँ …”

उसे लेजाकर मैं सीधा अपने केबिन में गया और 2 चाय लाने को बोला मैंने एक हवलदार को

अब मैं उसके साथ पूरे मज़े लेने के मूड में आ चूका था

मेरी बेटी का नाम लेकर घूमेगी तो ऐसे ही थोड़े जाने दूँगा इसे

मैं बोला : “देख, तेरे बापू को रेड में रंगे हाथो पकड़ा है एक धंधे वाली के साथ, भले ही वो सेठ के काम से गया था वहां, पर है तो वो इंसान ही ना, मचल गया होगा किसी को देखकर उसका दिल”

सलोनी : “नही साहब, मेरे बापू ऐसे नही है…”

मैने गुस्से से टेबल पर हाथ पटका और गुर्राया : “तो क्या मैं झूठ बोल रहा हूँ …मैने खुद उसे कोठा नंबर 7 से पकड़ा है, पूरा नंगा होकर गांड मार रहा था वो एक रंडी की, तेरी ही उम्र की थी वो भी….”

मेरे इतना कहने के बाद उसका चेहरा देखने लायक था

शायद मैं ऐसा कुछ बोल दूँगा इसकी उसे भी उम्मीद नही थी

पर मुझे तो उसके एक्सप्रेशन देखकर मज़ा आ रहा था

उसने सिर झुका लिया, शायद वो समझ चुकी थी की उसका बाप ही ठरकी है

मैं : “देख, ये सारे काम बरसो से होते आ रहे है…हमे भी पता है, हर इंसान की मजबूरी और ज़रूरत होती है, उसी को पूरा करने तेरा बाप गया था वहां …पर उसकी किस्मत खराब थी, उस दिन उपर आर्डर था रेड मारने का, वरना किसी को पता भी नही चलता , अब वो फँस गया है इसमें , निकलना मुश्किल है 3 महीने से पहले…”

वो रोने लगी ये सुनते ही

“नही साहब, ऐसा मत बोलो…घर पर मेरी अपाहिज माँ पड़ी है, बापू जैल में रहेंगे तो मुश्किल हो जाएगी हमारे लिए….कुछ करो ना आप….कुछ ले देकर…”

इतना कहकर वो चुप हो गयी

मैं सब समझता था ये ले देकर वाली बात

हम पुलिस वालो को तो जनता ने रिश्वतखोर बना कर रख दिया है

और ये सिस्टम की माँग भी है

मैं भी शुरू में कुछ नही लेता था

पर सिस्टम ही ऐसा बना हुआ था कि ना चाहते हुए भी सब करना पड़ता है

पर इस वक़्त मेरा दिमाग़ कुछ और ही माँगने के चक्कर में था

जो आज तक नही किया था मैने

मैं बोला : “तू क्या देगी मुझे….तेरे पास है ही क्या…”

उसने सकुचाते हुए अपने फटे हुए घाघरे के अंदर हाथ डालकर एक थैली निकाली और उसमें से 100-200 के 4-5 नोट, और एक 500 का नोट निकाल कर मेरे सामने रख दिया

मैने उसे डांटा :”ये क्या मंडी से घिया तोरई खरीदने आई है….पता भी है उसपर 372 धारा लगी है , कच्ची उम्र की लड़की का शोंक है उसे, कोई औरत के साथ कर रहा होता तो छोड़ भी देता, पर एक नाबालिग के साथ पकड़ा है उसे, अब बचना मुश्किल है”

उसका चेहरा रुंआसा सा हो गया, उसने वो मैले कुचेले नोट उठा कर फिर से अपनी जेब में रख लिए

अब शायद वो समझ चुकी थी की उसे उन पैसे से कुछ ज़्यादा देना पड़ेगा

और एक जवान लड़की इसे अच्छे से समझती है

ख़ासकर ऐसे काम धंधे करने वाली लड़कियां

जिनका हरामी टाइप के लोगो से रोजाना वास्ता पड़ता है

वो धीरे से बोली : “क..क्या करना होगा मुझे साहब….”

मैं मुस्कुराया और धीरे से बोला : “शाम को 8 बजे हाइवे के पास पुरानी पुलिया के नीचे मिल मुझे…”

उसने घूर कर मुझे देखा, क्योकि वो जगह वहां से काफ़ी दूर थी

पर मैं भी कोई रिस्क नही लेना चाहता था

पर आज उसे इस बात का एहसास होने वाला था की उसके माँ बाप ने उसका नाम सलोनी रखकर कितनी बड़ी भूल कर दी है

क्योंकि ना तो वो मुझे अपना वो नाम बताती और ना ही मेरे दिलो दिमाग़ में ये सब आता

उसके बाद वो चली गयी

और मैं अपने दूसरे कामो में व्यस्त हो गया

शाम को सारे काम ख़त्म करके मैने अपनी शर्ट चेंज की और अपनी कार लेकर निकल गया हाइवे की तरफ

वो पुलिआ पहले काफ़ी बिज़ी रहती थी पर जब से हाइवे बना है तब से उस तरफ लोगो ने जाना छोड़ दिया है

उस पुलिया के नीचे गाड़ी खड़ी करने और बैठने की अच्छी ख़ासी जगह थी

पहले भी कई बार मैने यहा लाकर आइटम लोगो के साथ मज़े लिए है

पर आज इस कच्चे अमरूद को खाना था मुझे

मैं उसका इंतजार करते हुए अपना मोबाइल निकाल कर देखने लगा और व्हाट्सएप पर जाकर मैने सलोनी की डीपी देखी

जिसमें वो बड़ी क्यूट सी लग रही थी





मैं उसे ज़ूम कर-करके उसकी आँखे और होंठ देख रहा था की तभी मोबाइल की घंटी बजी, वो सलोनी का ही कॉल था

मैं तो एकदम से घबरा सा गया

अभी उसी की डीपी देख रहा था और एकदम से उसका कॉल आ गया

मैं : “हेलो बेटा…क्या हुआ, सब ठीक तो है ना…”

सलोनी : “यस पापा…मैने तो बस इसलिए कॉल किया था की मैं अभी श्रुति के घर हूँ , थोड़ा लेट हो जाएगा आने में …”

मैं :”इट्स ओके बेटा…आराम से आना, कहो तो मैं लेने आ जाऊं .”

सलोनी : “नही पापा..मैं आ जाउंगी , सी यू एट होम….बाय ”

इतना कहकर उसने कॉल रख दिया

मैं मुस्कुरा दिया

क्योंकि आज वो बड़े ही प्यार से मुझसे बात कर रही थी

वैसे ग़लती तो मेरी ही थी, जिसका मुझे कल एहसास भी हो चूका था

मैने ही उसे डरा धमका कर रखा हुआ था

वरना इतनी प्यारी बेटी है मेरी….

उपर से जवान भी…

उफ़फ्फ़….

ये फिर से मेरा ट्रेक दूसरी तरफ क्यों घूम रहा है..

और तभी मुझे दूर से वो दूसरी सलोनी आती दिखाई दी
 
मैने नोट किया की वो नाहा धोकर आई थी अब

कपड़े भी बदल लिए थे उसने

एक टी शर्ट और नीचे एक लंबी सी स्कर्ट पहनी हुई थी

शायद उसे पता थे की मैने उसे वहां क्यों बुलाया है

वो चुपचाप आकर मेरे करीब खड़ी हो गयी और बोली : “साहब….आप कुछ भी कर लो, पर मेरे बापू को कल छोड़ देना…”

उसने आते ही आत्मसमर्पण कर दिया था , वैसे भी मैं जोर जबरदस्ती नहीं करना चाहता था, कंसेंट भी जरुरी होना चाहिए , तभी मजा आता है

मैने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी छाती से चिपका लिया और बोला : “कल क्यों , तू मुझे खुश कर देगी तो आज रात ही ले जा अपने बापू को…”

ये सुनते ही उसका चेहरा खिल सा उठा, जैसे मैने उसे मोटिवेट कर दिया हो

वो खुद ही मुझसे और ज्यादा चिपक कर खड़ी हो गयी

और अपने नन्हे मुन्ने मुम्मे मेरी छाती से रगड़ते हुए बोली : “साहब…आप तो बड़े लोग है, मुझमें ऐसा क्या देख लिया आपने जो ये सब…”

मैने उसके मोटे होंठो पर उंगली रखी और बोली : “तुझे ये जानने की ज़रूरत नही है, बस जिस काम के लिए बुलाया , उसके लिए राज़ी है तो कर , वरना भूल जा अपने बापू को…”

वो कसमसाते हुए बोली : “मैने कब मना किया है साहब…वो तो बस मैं यूँ ही….”

इतना कहते हुए उसने मेरी उस उंगली को मुँह में लेकर खुद ही चूसना शुरू कर दिया

उसके चूसने की शिद्दत बता रही थी की वो एक खेली खाई लड़की है…

और सैक्स के लिए पागल भी

मेरे हाथ सबसे पहले उसके नन्हे अमरूदों पर गये

दिन मे शायद चोली की वजह से ज़्यादा बड़े लग रहे थे पर इस वक़्त सिर्फ़ टी शर्ट थी

अंदर ब्रा भी नहीं थी

एकदम नर्म और छोटे मुममे थे उसके

शायद मेरी सलोनी से भी छोटे

मैने उन्हे ज़ोर से मसल दिया

वो मेरी उंगली चूसते हुए कराह उठी

उस वीराने में उसकी चीख दूर तक गूँज उठी

“उम्म्म्मममममममममममममममम…….अहह……साआआआआआअहब……धीईरेरएsssss …”

मैने उसके जबड़े को ज़ोर से पकड़ा और उसकी आँखो में देख कर गुर्राया : “साहब नही……पापा बोल…पापा”

उसकी आँखे चौड़ी हो गयी ये सुनते ही….

की ये कैसा इंसान है

एक लड़की को चोदने के चक्कर में है और उस से पापा कहलवा रहा है

पर अगले ही पल वो सब समझ गयी

और मुस्कुराइ : “समझ गयी…..साहब…श…मेरा मतलब है….पापा….”

मैं भी मुस्कुरा दिया उसके मुँह से वो सैक्सी स्टाइल में पापा सुनकर

मेरे हाथ उसकी टी शर्ट में दाखिल हो गये और मैने उसके अंगूर पकड़ कर अपनी उंगलियों में भींच दिए

“अहह……पापा…..धीरे……आपकी बेटी हूँ …कोई रंडी नही…..धीरे दबाओssss नाsssss ….पापाsssssss …”

अब वो मेरे खेल में पूरी डूबने लगी थी

और मुझे भी उसके रसीले होंठो से पापा सुनकर एक अलग सा नशा हो रहा था

मैने झट से उसके चेहरे को आगे किया और उसके सिसकते होंठो को मुँह में लेकर जोरों से चूसने लगा

“अहह…..मेरी जाअँन …….उम्म्म्ममम…..मेरी बच्चीची…..सलोनी…….अहह”





मेरे मुंह से सलोनी सुनकर वो ये भी समझ गयी की मेरी बेटी का नाम भी सलोनी है

अब उसे सब समझ आ चूका था की क्यों शाम को उसका नाम सुनते ही मेरा रवैय्या एकदम से बदल गया था उसके प्रति

वो मंद-२ मुस्कुराती रही और उस स्मूच का मजा लेती रही

करीब 1 मिनट तक मैं लगातार उसकी कच्ची जवानी का रस उसके होंठो से पीता रहा

फिर वो साँस लेने के लिए हांफती हुई सी अलग हुई और मुस्कुराते हुए बोली : “तो उसका नाम भी सलोनी है…..है ना पापा….”

मैने कोई जवाब नही दिया और उसे एक झटका देते हुए नीचे बिठाया और अपनी जीप खोलकर अपना लॅंड उसके सामने लहरा दिया

उसकी आँखे चौड़ी हो गयी इतना मोटा लॅंड देखकर

शायद किसी पुलिस वाले का पहली बार देखा था उसने

“वॉव ….पापा….आपका लॅंड कितना मोटा है…..शायद अपनी बेटी को देखकर ये कुछ ज़्यादा ही खुश है आज….”

मैने हुंकारते हुए उसके चेहरे को पकड़ा और अपने लॅंड पर दे मारा…

उसने बड़ी मुश्किल से मेरे मोटे लॅंड को मुँह मे लिया…

आख़िर थी तो वो एक छोटी लड़की ही ना….

मैने कुछ ज़्यादा ज़ोर लगाया तो वो वो कसमसाई और बोली “धीरे पापा….दर्द होता है….”

अब उसे क्या बताऊँ मैं

इसी दर्द में तो मुझे मज़ा मिलता है

ऐसे ही डोमिनेट करके सैक्स करना मुझे पसंद है

अपनी बीबी के साथ भी

किसी बाहरवाली के साथ भी

और अब इसके साथ भी

भले ही मेरी बेटी का चोला पहन कर खड़ी थी इस वक़्त ये मेरे सामने

पर अगर मेरी सग़ी बेटी भी होती ना

तब भी मैं ऐसे ही करता

तेज

और तेज

ऐसे ही जंगलिपन में औरतों को ज़्यादा मज़ा मिलता है

अभी कुछ देर मे यही मेरे सामने गिड़गिडाएगी

ऐसा ही करने को

मैने उसके बालों को पकड़ा और उसका मुँह जोरों से चोदने लगा अपने लंड से

गॅप गॅप की आवाज़ों से पूरी पुलिया थर्रा रही थी





कुछ देर तक मैने उसका मुँह चोदा और फिर उसे खड़ा करके एक ही झटके में उसकी टी शर्ट उतार दी

उसके नन्हे बूब्स देखते ही मैं उनपर टूट पड़ा

मेरे चेहरे को बड़ी मुश्किल से पीछे करती हुई वो चिल्लाई

“आअहह…..धीरे….करो ना……पापा……आप तो पूरे जंगली हो……”

हां , हूँ मैं जंगली…क्या कर लेगी

मैने उसके नन्हे निप्पल को मुँह में भरा और उपर की तरफ खींचा जैसे उखाड़ कर घर ही ले जाऊंगा

वो दर्द के मारे दोहरी हो गयी

मैने उसकी गांड में हाथ रखकर उसे अपनी गोद में उठा लिया

उसने अपनी टांगे मेरी कमर पर लपेट ली और मेरे सिर से उपर निकल गयी,

पर उसका बूब अब भी मेरे मुँह में था

हवा में झूलते हुए वो अपने नन्हे थनो से मुझे दूध पीला रही थी





मेरी बाजुओं की शक्ति देखकर ही उसे अंदाज़ा होने लगा था की आज की रात उसकी चूत का कीमा बनने वाला है

मैने उसके दोनो बूब्स को बारी-2 से चूसा और फिर उसे नीचे उतार दिया

उसने खुद ही अपनी स्कर्ट निकाल फेंकी और अब वो मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी

कमाल की लड़की थी वो





उसे देखकर मुझे अब भी सलोनी की याद आ रही थी, शायद किसी दिन उसे भी ऐसे देखने का मौका मिल जाए

मैने भी अपनी पेंट पूरी नीचे कर दी, अब मेरा मोटा लॅंड अपने दो दोस्तो के साथ झूलता हुआ उसकी आँखो के सामने था

वो आश्चर्यचकित होकर उसे देखने लगी

और आगे आकर अपने दुबले पतले शरीर को मेरे लॅंड वाले हिस्से के चारों तरफ लप्पेट कर अपना जिस्म घिसने लगी

वो मेरे लॅंड को अपने जवान जिस्म के हर हिस्से पर महसूस करना चाहती थी

अब मुझसे और उस से , दोनो से सब्र नही हो रहा था

मैने अपनी कार के बोनट पर उसे उल्टा लिटाया और पीछे से उसकी टाँग उठा कर अपना लॅंड सीधा उसकी चूत में पिरो दिया

“आआआहह…….. ओह…. पपाााआआआआआआ……. उम्म्म्ममममममममममम…….”





उसने जिस आसानी से मेरे लॅंड को अंदर ले लिया, वो सॉफ दर्शाता था की वो कितने लॅंड ले चुकी है

पर फिर भी उसमें काफ़ी कसाव था

ख़ासकर मेरे मोटे लॅंड के लिए

पर आज के बाद मुझसे पतले लॅंड वालो को दिक्कत होने वाली थी

क्योंकि आज से उसके मुंह मोठे लंड का लहू लगने वाला था

अब पतले लॅंड से उसकी प्यास बुझने ही नही वाली थी

वो दोनो टांगो को सीधा नीचे करके खड़ी हो गयी, और अपनी गांद पीछे निकाल दी, उसके नन्हे बूब कार के गर्म बोनट पर घिस्से लगा रहे थे जिसमे उसे एक अलग ही मज़ा मिल रहा था

और पीछे से मेरे धक्के उसे दुगना मज़ा दे रहा थे





मैने उसके चूतड़ों को पकड़कर जोरों से धक्के लगाने शुरू कर दिए

और करीब 10 मिनट बाद लगातार झटके देने के बाद जब मेरा देसी घी उसकी नन्ही सी चूत में निकला तो वो 4 बार झड़ चुकी थी

उसकी हालत नही थी की अपने पैरों पर खड़ी रह सके

वो तो मैने उसकी कमर को पकड़ा हुआ था वरना कब की झूल चुकी थी वो

और अंत में जब मेरा लॅंड सिकुड कर बाहर निकला तो मैने उसे छोड़ा, वो निढाल सी होकर नीचे गिर गयी

मैने उसके चेहरे के पास अपना लॅंड लहरा दिया

जिसे उसने अपने मुँह में लेकर सॉफ कर दिया

मैं चाहता तो कुछ देर बाद फिर से लॅंड खड़ा करके उसे दोबारा चोद सकता था

पर अभी के लिए मुझे घर जाना था

सलोनी अपनी सहेली के घर थी

लेट आई तो उसका भी तो हिसाब करना पड़ेगा

उसके बाद मैने पोलीस स्टेशन फोन करके उसके बाप को छोड़ने का ऑर्डर दे दिया

वो खुशी-2 अपने कपड़े पहन कर निकल गयी

पर जाने से पहले उसने मेरा नंबर ले लिया

शायद मेरे लॅंड से इंप्रेस हो गयी थी वो

आने वाले दिनों में और भी ज़्यादा मज़ा मिलने वाला था अब
 
और अंत में जब मेरा लॅंड सिकुड कर बाहर निकला तो मैने उसे छोड़ा, वो निढाल सी होकर नीचे गिर गयी

मैने उसके चेहरे के पास अपना लॅंड लहरा दिया

जिसे उसने अपने मुँह में लेकर सॉफ कर दिया

मैं चाहता तो कुछ देर बाद फिर से लॅंड खड़ा करके उसे दोबारा चोद सकता था

पर अभी के लिए मुझे घर जाना था

सलोनी अपनी सहेली के घर थी

लेट आई तो उसका भी तो हिसाब करना पड़ेगा

उसके बाद मैने पोलीस स्टेशन फोन करके उसके बाप को छोड़ने का ऑर्डर दे दिया

वो खुशी-2 अपने कपड़े पहन कर निकल गयी

पर जाने से पहले उसने मेरा नंबर ले लिया

शायद मेरे लॅंड से इंप्रेस हो गयी थी वो

आने वाले दिनों में और भी ज़्यादा मज़ा मिलने वाला था अब

*************

अब आगे

*************

सलोनी

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अपने पापा से पर्मिशन लेने के बाद सलोनी खुद से बात करती है

“पापा से काम निकलवाना अब इतना आसान हो चुका है की पहले जैसा डर ही नहीं लगता, अब तो ऐसा लगता है जैसे वो मेरे इशारों पर नाच रहे है…”

शाम से ही वो अपनी सहेली श्रुति के घर थी

कॉलेज से आने के बाद श्रुति ने जब एक ढीली सी टी शर्ट और शॉर्ट्स पहनी तो उसके लिए भी एक शॉर्ट और टी शर्ट निकाल दी

ताकि जब तक मैं यहाँ हूँ आराम से बैठूं

मुझे भी सुबह से जीन्स में परेशानी हो रही थी

ये जीन्स कुछ ज़्यादा ही टाइट थी

वो बकरी बनकर मेरी पुस्सी को खा रही थी…





और आज श्रुति के घर आने का एक ख़ास मकसद था

उसके मम्मी पापा घर पर नही थे, इसलिए हम दोनो मिलकर कुछ भी कर सकते थे

पिछली बार जो हमारे बीच हुआ था, उसे एक बार फिर से महसूस करना चाहती थी मैं

मैने अपने कपड़े उतारकर साइड में रख दिए और पंखे की हवा से अपने शरीर के पसीने को सुखाने लगी

तभी श्रुति कमरे में आई और कपड़े उतारते देखकर उसके हाव भाव ही बदल गये

वो मुझे उपर से नीचे तक निहारने लगी





मैं भी उसे अपना नशीला और पसीने से गीला बदन को दिखाकर मूड बना रही थी

वो मेरे करीब आई और मेरी कमर पर हाथ रखकर अपनी तरफ खींच लिया

और अगले ही पल हम दोनो एक गहरी स्मूच में डूब चुके थे

अब पता नही ऐसा क्यों हुआ

जैसे ही उसने मुझे चूमा, मेरी आँखे बंद हो गयी और मुझे ऐसा फील हुआ की मैं पापा को किस्स कर रही हूँ

ये एक ऐसा एहसास था जिसने उस किस्स को और ज़्यादा रोमांच से भर दिया

हम दोनो एक दूसरे के होंठो से गुत्थम गुत्था होकर किस्स कर रहे थे





मैने उसके बूब्स को पकड़कर उन्हे देबाया और उसकी टी शर्ट उतारनी चाही पर उसने रोक दिया

मैं हैरान होकर उसे देखने लगी क्योंकि मेरे हिसाब से ये एक अच्छा मौका था

बिना किसी परेशानी के मज़े लेने का

बिना किसी डर के

वो बोली : “सलोनी…आई एम् सॉरी बट अभी रुकना होगा हमे…मैने नितिन को भी बुलाया है घर पर…”

मैं : “नितिन….आज…पर क्यो…”

मैं तो सोच रही थी की उसके मम्मी पापा घर नही है, खुल कर मज़े करेंगे

पर इसने तो अपने यार को बुला रखा है..

साली कामिनी

और ये नितिन तो इस वक़्त मुझे अपनी सौतन जैसा लग रहा था

पर फिर अचानक मुझे वो मूवी हॉल का सीन याद आ गया जहाँ नितिन अपनी गर्लफ्रेंड श्रुति के बूब्स को प्रेस कर रहा था और उसे किस्स भी…

उस वक़्त मुझे ऐसा फील हुआ था की काश वो मेरे साथ भी ऐसा कुछ करे

तब तो मेरी हिम्मत नही हुई थी उस से कुछ ऐसा कहने की पर अब मेरे और श्रुति के बीच की परिस्थितिया बदल चुकी थी

शायद आज मैं उसके बाय्फ्रेंड के साथ कुछ मज़े ले पाऊं और वो मुझे मना ना करे..

ये सोचकर मैं चुप हो गयी

वरना आज जो इसने हरकत की थी, उसके बाद तो इससे 2 हफ्ते की लड़ाई बनती थी

मुझे गुस्से में आता देखकर वो मेरे नंगे बदन से लिपट गयी और बोली : “यार, नाराज़ मत हो…मुझे नितिन ने सब बताया था की उस दिन तू कैसे हम दोनो को देख कर एंजाय कर रही थी…तो मैने सोचा आज फिर से तेरे लिए वो सीन घर पर ही क्रियेट कर दूँ…और अगर तू चाहे तो , यू कैन आल्सो जॉइन अस ”

मैं जो कुछ पल पहले सोच रही थी

वो उसने खुलकर खुद ही बोल दिया

मेरी तो आँखे चौड़ी हो गयी

वो मेरे चेहरे के भाव देखकर समझी की मुझे बुरा लग गया

श्रुति : “देख यार…मेरे लिए तुझसे प्यारा इस दुनिया में कोई नही है…ये नितिन जैसे लड़के तो आते जाते रहते है, मुझे बस अपनी मस्ती से मतलब है और मेरी दोस्त की खुशी से…अगर तू इसमें खुश है तो ठीक वरना उसे अभी मना कर देती हूँ …फिर हम दोनो जो चाहे करेंगे"

अब मेरे चेहरे पर एकदम से गहरी सोच के भाव आ गये

जिसे पढ़कर वो भी समझ गयी की मैं भी अंदर से यही चाहती हूँ बस बोल नही पा रही

“देख सलोनी…उसको आने दे, तुझे जहाँ भी कोई इश्यू हुआ तो बता दियो , मैं वही ये सब रोक दूँगी….ओके ”

इतना कहकर उसने मेरे लिप्स को चूम लिया…

एक तो मैं नंगी ऊपर से उसकी बाते सुनकर मेरे निप्पल्स बिल्कुल कड़क हो चुके थे

शायद आने वाले पलों को सोचकर मैं अभी से उत्तेजित हो रही थी

खैर, मैने जल्दी से उसकी टी शर्ट और शॉर्ट्स पहन लिए

हम दोनो अब एक जैसी ही लग रहीं थी

जवान

बिना ब्रा और पेंटी के

हम दोनो के कड़क निप्पल्स और ताज महल जैसी चूत को दूर से ही देखा जा सकता था





हम दोनो एक दूसरे को निहार ही रहे थे की तभी बाहर की बेल बजी, नितिन आ चूका था

अंदर आते ही उसने हम दोनो को घूर का देखा मानो आँखो से ही खा जाएगा

श्रुति ने उसे अंदर आते ही अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसे एक जोरदार स्मूच कर दिया

मुझे तो लगा था की आने के बाद वो कुछ टाइम लेंगे पर ये आते ही शुरू हो गया

साला ठरकी नितिन





मेरी ही आँखो के सामने वो दोनो एक दूसरे के होंठो को भूखे कुत्ते की तरह नोच रहे थे

और मैं उनके सिर्फ़ 1 फुट दूर खड़ी हुई अपने पैरों के अंगूठे से ज़मीन कुरेद रही थी

नितिन की नज़रें मुझे ही देख रही थी किस्स करते -2 , हालाँकि श्रुति की आँखे पूरी बंद थी

वेलकम किस के बाद हम तीनो श्रुति के बेडरूम में चले गये

नितिन तो अंदर जाते ही उसके बेड पर ऐसे पसर गया मानो अपनी ससुराल आया हो

श्रुति हम तीनो के लिए जूस लेने किचन में चली गयी

नितिन : “सो सलोनी….तुम्हारा कोई बाय्फ्रेंड नही है क्या….”

मैं एकदम से चोंक गयी ये सवाल सुनकर : “मे….मेरा….नही तो…..अभी तो नही है…क्यों ? ”

क्यों मैने जानबूझकर बोला था आख़िर में में….

मुझे लगा की वो बोलेगा की मुझे भी अपना बाय्फ्रेंड ही समझो

नितिन : “नही…वो मुझे लगा की होता तो आज उसे भी बुला सकती थी यहाँ …हम सब मिलकर मज़े करते”

मैं : “वो तो अब भी कर सकते है…”

इतना कहकर मैने उसे एक आँख मार दी

यानी मेरी तरफ से मैंने उसे लाइन दे दी थी

मेरी इस हरकत से उसका चेहरा देखने लायक था

और तभी हँसती हुई श्रुति अंदर दाखिल हुई : “क्या कर सकते हो…”

मैने जल्दी से बात बदली : “कुछ नही….बस कहीं घूमने का प्लान बना रहे थे, हिल स्टेशन पर…”

श्रुति : “वाउ….मज़ा आ जाएगा कसम से…पर वो तेरे पुलिस पापा का क्या, वो जाने की परमिशन देंगे तुझे ?”

मैं मुस्कुराइ और बोली : “उन्हे हेंडल करना अब मुझे आ गया है…”

मेरी बात सुनकर वो भी मुस्कुरा दी

पर नितिन का चेहरा देखने लायक था,

वो अभी तक उसी बात को सोच रहा था जो मैने कही थी

वो सोच रहा था की क्या सच में ऐसा हो सकता है

ये तो तभी पता चलेगा जब खेल शुरू होगा

और इस खेल की शुरूवात उसी को करनी होगी
 
उसने जल्दी से जूस पिया और श्रुति को अपनी तरफ खींच लिया, वो भी बिना किसी नखरे के सीधा जाकर उसकी गोद में बैठ गयी और वो दोनो फिर से एक गहरी स्मूच में डूब गये

अब ये सिचुएशन बड़ी ओकवर्ड थी मेरे लिए…

वो दोनो मज़े कर रहे थे, मेरे ही सामने

ऐसे में मुझे वहां से चले जाना चाहिए था

पर मैने ऐसा नही किया

मैं जूस का सीप लेते हुए अपना मोबाइल देखने का नाटक करने लगी

हालाँकि मेरा सारा ध्यान उन्ही की तरफ था

नितिन का भी सारा ध्यान मेरी तरफ ही था

भले ही उसकी गोद में श्रुति बैठी थी, जो उसे पागलों की तरह किस्स कर रही थी

उसके हाथों को अपनी छाती पर रखकर उन्हे दबवा रही थी

पर नितिन रह रहकर मुझे ही घूर रहा था

अचानक श्रुति ज़ोर से सीसीया उठी

“आहह…….उम्म्म्ममममममममममममममम…..यससस्स…..बैबी…..”

मेरा ध्यान उस तरफ गया तो देखा की नितिन का हाथ श्रुति की शॉर्ट में था और वो उसकी पुस्सी में फिंगरिंग कर रहा था

ये एक ऐसा हमला होता है जिसमे लड़की पिघल कर रह जाती है

उसके बाद वो खुद को परोस कर रख देती है अपने यार के सामने

श्रुति ने भी वही किया

वहां उसकी चूत में उंगली घुसी

यहाँ उसने अपनी टी शर्ट खुद ब खुद उतार दी और नितिन के चेहरे को पकड़ कर अपना एक निप्पल उसके सुपुर्द कर दिया

नितिन भी किसी भूखे भेड़िए की तरह एक एक करके उसके दोनो बूब्स और उनपर लगी चेरियों को चूसने लगा





अब मैं भी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी

जूस का ग्लास मेरे हाथ से गिरते-2 बचा

मैने उसे टेबल पर रख दिया और अपना जूस से भरा मुम्मा पकड़ कर उसे सहलाने लगी

इतनी बेशर्मी से उन दोनो के सामने अपने अंगो को मैं इतनी आसानी से आज इसलिए सहला पा रही थी क्योंकि पिछले कुछ दिनों में मेरी लाइफ में सैक्स के प्रति जो चेंजस आए थे उनसे मुझे ऐसा करने का होसला मिला था

और ये एक संकेत था की यही समय है इस सैक्स को एक्सप्लोर करने का

फिर चाहे वो अपनी सहेली के साथ हो, उसके बाय्फ्रेंड के या फिर मेरे खुद के पापा के साथ

पापा का ध्यान आते ही मेरी आँखो के सामने उनका रोबीला चेहरा और कसरती बदन आ गया

ये नितिन तो उनके सामने चूज़ा था

पर इस वक़्त यही चूज़ा खुद भी मज़े ले रहा था और श्रुति को भी दे रहा था

मेरा मन तो कर रहा था की खुद ही कूद जाऊं उनके बीच

थ्रीसम हो जाएगा आज

पर अभी तक इतनी हिम्मत नही हुई थी मेरी

बस मैं अपने बूब्स को दबा कर अपनी पीड़ा थोड़ी कम ज़रूर कर रही थी

मैने आँखे बंद कर ली और पापा के लॅंड का ध्यान करते हुए अपने बूब्स को आराम से दबाने लगी

जब वो मेरे रूम में आए थे और मुझे सोता देखकर उन्होने अपना वो मोटा लॅंड वही खड़े होकर मसला था

उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़

कितनी उत्तेजना थी उस पल में

अचानक मुझे अपनी जाँघ पर कुछ महसूस हुआ

ये नितिन का हाथ था

उसका एक हाथ श्रुति की चूत में था, दूसरा मेरी जाँघ पर

और उसका मुँह उसके बूब्स के बीच

साले की कितनी सही किस्मत है

दो जवान और कुँवारी लड़कियाँ उसके सामने थी

वो मेरी जाँघो को अपने हाथ से सहलाने लगा

मैने भी मना नही किया

धीरे-2 उसका हाथ मेरी चूत की तरफ खिसकने लगा

मेरा दिल धाड़-2 करके बजने लगा

ये पहला मौका था जब कोई मर्द मेरी सबसे कीमती चीज़ को छूने की कोशिश कर रहा था

और उसने छू भी लिया

किसी बाज की तरह उसने अपना पूरा पँजा फेलाकर मेरी चूत को उसमें दबोच लिया

अब सीसीयाने की बारी मेरी थी

“अहह……सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स….. उम्म्म्मममममममममममममम…..”

मेरी आवाज़ सुनकर श्रुति का ध्यान भी उस तरफ गया और नितिन का हाथ मेरी चूत पर देखकर वो भी मुस्कुरा दी

नितिन ने बिना कहे ही अपना काम कर दिया था

पूरे कमरे में हम तीनो की सिसकारियाँ गूँज रही थी

श्रुति की तरफ से हरी झंडी मिलते ही नितिन ने मुझे भी अपनी गोद में खींच लिया

श्रुति ने मेरे लिए जगह बनाई और अब हम दोनो उसकी 1-1 टाँग पर बैठे थे

और वहां पहुचते ही उसने सीधा मेरे होंठो पर हमला किया और उन्हे चूसने लगा….

मैं भी

ये मेरी पहली किस्स नही थी

स्कूल टाइम में भी एक लड़के ने मुझे बहुत किस्स की थी

पर उस से आगे मैने उसे कभी जाने नही दिया

यहाँ तक की अपने बूब्स को भी टच नही करने देती थी मैं

पर आज मैं सब कुछ करने को तैयार थी

वो नही

पर बाकी सब कुछ…

नितिन इतना बुरा भी नही था

देखने में एकदम चिकना, दुबला पतला सा लड़का था वो

पर किस्स बड़े ही सैक्सी तरीके से कर रहा था

काफ़ी एक्सपीरियेन्स था उसे

करीब 5 मिनट तक उसने मेरे गुलाबी होंठो को चूस-चूस्कर लाल कर दिया

फिर श्रुति ने उसे अपनी तरफ खींच लिया

इस बीच मैने भी हिम्मत करके अपनी टी शर्ट उतार दी

उसे तो अपनी आँखो पर विश्वास नही हुआ जब उसने अपनी आँखो के सामने मेरे मोटे बूब्स लहराते देखे

एक तरफ ब्रॉन कलर के श्रुति के बूब और दूसरी तरफ मेरे गोरे बूब्स





दोनो की तुलना करते उसकी आँखे थक नही रही थी

और लार भी टपक रही थी उसकी

उसने उन लार टपकाते होंठो से सीधा मेरे बूब्स पर हमला कर दिया

वहां किसी मर्द का पहला स्पर्श था…पहली किस्स भी

वो तो पागल सा हो गया उन नर्म मलाई की कटोरियों को चाटकर

मेरा भी बुरा हाल था

होंठो से ज़्यादा यहाँ चुसवाने में ज़्यादा उत्तेजना हो रही थी मुझे





और अगर इसने मुझे वहां नीचे चूसा तो

हाएsssssss

मेरे तो पूरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी ये सोचते ही

कैसा फील होगा जब वो मेरी चूत को चूसेगा

उसमें अपनी जीभ डालेगा

मेरे दाने को, जिसे मैं आजतक अपनी उंगलियो से सहलाती आ रही थी, उसे अपनी जीभ से कुरेदेगा

मेरी तो डैथ ही हो जानी है बाइ गॉड

मेरी चूत किसी टूटी की तरह रिस रही थी उसकी जाँघो पर

और शायद उसकी दूसरी जाँघ का भी यही हाल था

दोनो टांगे हम दोनो सहेलियो ने अपने घी से चुपड़ दी थी उसकी

अब वो बारी-2 से कभी मेरे बूब्स और कभी श्रुति के बूब्स

कभी मेरे लिप्स तो कभी उसके लिप्स

चूसने में मगन था

और कसम से कहूं, मजा तो मुझे भी बहुत आ रहा था इसमें

बीच-२ में जब वो मेरे या श्रुति के बूब्स चूसता तो श्रुति और मैं एक दूसरे के होंठ चूसने लगते

आज तो ऐसा लग रहा था जैसे वो अपनी किस्मत सोने की कलम से लिखवा कर आया है

हम जैसी दो लड़कियों के कुंवारे जिस्म से खेलने का मौका इस बंदर जैसे नितिन को मिला था

श्रुति का तो पता नही पर मैं चाहती तो कॉलेज के सबसे स्मार्ट लड़के को अपनी अदाओं से दीवाना बनाकर उसके साथ ये सब कर सकती थी

पर कभी हिम्मत ही नही हुई

और आज ये सब हुआ तो कुछ सोचने समझने का मौका भी नही मिला

लंगूर के हाथ हूर लग चुकी थी

अब क्या ही हो सकता था

वैसे मज़ा तो मुझे भी आ रहा था इसमें

लड़का चाहे किसी भी तरह का हो

उन्हे मज़े देना बेख़ुबी आता है

इसलिए सब कुछ भूलकर मैं उस मज़े को लेने में लग गयी
 
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