Incest इंस्पेक्टर की बेटी - SexBaba
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Incest इंस्पेक्टर की बेटी

hotaks

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दोस्तों

आज काफ़ी समय बाद आपके सामने फिर से एक नयी कहानी लेकर हाज़िर हूँ , कहानी का शीर्षक है इंस्पेक्टर की बेटी, आशा करता हूँ आपको ये पसंद आएगी.
 
INDEX

इंस्पेक्टर की बेटी


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इंस्पेक्टर की बेटी

मेरा नाम सलोनी है

शायद मेरे रंग रूप को देखकर ही मेरे माँ बाप ने मेरा ये नाम रखा था

सुन्दर तो मैं थी







मैं ही नहीं, मेरी क्लास ओर अड़ोस - पड़ोस के सभी लोग ये मानते थे

पापा पुलिस में थे इसलिए स्कूल में मुझे सभी इंस्पेक्टर की बेटी कहकर बुलाते थे

और अब तो मेरा कॉलेज भी स्टार्ट हो गया था

हालाँकि वहां ये नाम इतना पॉपुलर नही हुआ था पर मेरी स्कूल की फ्रेंड्स जो मेरे साथ ही कॉलेज में भी थी, वो मुझे उसी नाम से बुलाती थी

सब कुछ ठीक था

सिवाए मेरे घर के माहौल के

कारण था मेरे पापा का गुस्सा

पता नही वो खानदानी था या उनकी जॉब का असर

वो हमेशा गुस्से में ही रहते थे

उनके चेहरे पर शायद ही कभी हँसी आती थी

मैने तो आज तक उन्हे खुल कर हंसते हुए नही देखा

हां , गुस्से में लगभग रोज ही देखती थी

घर से निकलते हुए उनके कपड़े ढंग से इस्त्री नही हुए तो मम्मी पर गुस्सा

मैं टाइम से घर पर नही आई या बिना बताए कही फ्रेंड्स के साथ चली गयी तो मुझपर गुस्सा

रात को जब वो पुलिस स्टेशन से आकर ड्रिंक करने बैठते तो बर्फ या चखना कुछ भी मिस्सिंग हुआ तो हम दोनो माँ बेटी की तो खेर नही होती थी

माँ को तो वो गंदी गलियां भी देते थे

जो शायद मेरे पड़ोस वालों को भी सुनाई देती होगी

और उसी वजह से मेरा हंसता खेलता चेहरा बुझा-2 सा रहता था

जब से मुझे होश आया था यानी 14 साल के बाद से जब से मैं चीज़ों को समझने लगी थी, तब से मैं मायूस सी रहने लगी थी

जिसका असर मेरी पढ़ाई पर भी हुआ

कम नंबर आते पर पास हो जाया करती थी

इस वजह से भी पापा मुझसे और गुस्सा रहने लगे

कई बार तो रात को रोते -2 मैं उनको जी भरकर गालियां देती थी

उपर वाले को शिकायत करती की मेरी लाइफ में यही पापा क्यों लिखे

एक दिन तो बात हद से ज़्यादा बड़ गयी

मेरी फ्रेंड श्रुति का बर्थडे था, उसने एक दिन पहले ही बर्थडे का पूरा प्लान बनाकर मुझे बता दिया था

कॉलेज जाने से पहले मैंने माँ से कहा की कॉलेज के बाद मैं फ्रेंड्स के साथ मूवी जा रही हूँ और बाद में श्रुति की बर्थडे पार्टी के लिए एक क्लब में

माँ और मुझे दोनो को पता था की पापा इस बात की पर्मिशन नही देंगे

इसलिए ना तो मैने पापा से पूछा और ना ही मॉम ने उन्हे बताया की मुझे क्लब जाना है

पर इस बात की हिदायत दे दी की मैं उनके आने से पहले घर आ जाऊं

वो 9 बजे तक आते थे

कॉलेज मेरा 2 बजे ख़त्म होता था और मूवी 6 बजे तक निपट जानी थी

2 घंटे बहुत थे हमे क्लब में मस्ती करने के लिए

और इस तरह से प्लान बनाकर मैं एक सेक्सी सी ड्रेस अपने बेग मे छुपाकर कॉलेज के लिए निकल गयी

सब कुछ ठीक हुआ

कॉलेज में दिन अच्छा बीता

मूवी भी अच्छी थी

श्रुति का बाय्फ्रेंड भी आया हुआ था

वो मेरी बगल में बैठकर ही उसे किस्स करने में लगी हुई थी

हालाँकि मैं भी 21 साल की हो चुकी थी पर इन सब बातों की तरफ मेरी ख़ास रूचि नही थी

अब ये हालात की वजह से थी या पापा का डर पर इन बातों के बारे में सोचकर ही डर सा लगता था

पर आज श्रुति को अपने बाय्फ्रेंड के साथ गहरी स्मूच करते हुए देखकर मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था

उनकी गहरी साँसे मुझे सॉफ सुनाई दे रही थी







मेरी तिरछी नज़रों ने उनकी फिल्म बनाना शुरू कर दी

उन्हें ऐसा करते देखकर मेरे निप्पल्स एकदम कड़क हो गये

ये पहली बार हो रहा था मेरे साथ

ऐसा लग रहा था जैसे अंदर से मेरे बूब्स में कोई हवा भर गयी हो

श्रुति का बाय्फ्रेंड नितिन उसके बूब्स को दोनो हाथो से दबा रहा था

उफफफफफफफफफ्फ़…..

काश मेरी बगल में भी कोई बैठा होता

जो मेरे बूब्स को दबाता

ऐसा सोचते-2 मेरे खुद के हाथ अपने बूब्स पर जा लगे और मैने उन्हे धीरे से दबा दिया

हालाँकि ये पहली बार था जब ऐसे विचार मेरे जहन में आए थे

और ये भी पहली बार था की मेरे बूब्स को मैने इस अंदाज से छुआ था

आआआहहहहह……..

क्या एहसास था ये

मेरा हाथ तो जैसे सुन्न सा हो गया था

और वो मुझे मेरे शरीर का हिस्सा लग भी नही रहा था

बस ऐसा लग रहा था जैसे कोई और मेरे बूब्स को दबा रहा है

मेरी आँखे खुद ब खुद बंद होती चली गयी और मैने आवेश में आकर अपने निप्पल को च्यूंटी भरके ज़ोर से दबा दिया

“अअअअहह……सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…..”

मैं खुद ही चिल्ला पड़ी

और एकदम से हड़बड़ा कर इधर उधर देखने लगी

मेरी चीख़ सुनकर श्रुति का ध्यान भी मेरी तरफ गया और मेरी हालत देखकर वो समझ गयी की क्या चल रहा था यहाँ

वो मुस्कुरा दी

कुछ ही देर में मूवी भी ख़त्म हो गयी

हालाँकि मूवी अच्छी थी पर आख़िरी में आकर मैं उसका पूरा मज़ा नही ले पाई

कुछ ही देर में हम उसी माल के टॉप फ्लोर पर बने एक क्लब में पहुँच गये

अंदर जाने का रास्ता एक काली सुरंग जैसा था

और एक भारी भरकम दरवाजे को पार करते ही अंदर से आ रहे तेज म्यूज़िक के शोर ने हमारे मूड को एकदम से बदल का रख दिया

कपड़े तो मैने माल में आने के बाद ही चेंज कर लिए थे

मैने एक घुटनो तक की वन पीस ड्रेस पहनी हुई थी, जिसमे मेरा पूरा बदन काफ़ी सैक्सी लग रहा था







हमने एक कॉर्नर टेबल लिया और खाने पीने का सामान मंगवा कर एंजाय करने लगे

श्रुति और उसका बॉयफ्रेंड तो बियर भी पी रहे थे , पर मैंने उनका साथ देने से मना कर दिया

सामने ही डांस फ्लोर था

मेरी कुछ सहेलियां आने के साथ ही डांस फ्लोर पर कूद पड़ी और खुल कर एंजाय करने लगी

श्रुति भी नितिन के साथ एकदम चिपक कर डांस कर रही थी

मैं अभी तक सोफ़े पर बैठकर उन्हे देख रही थी और अपनी कोल्ड ड्रिंक एंजाय कर रही थी

कुछ देर बाद श्रुति मुझे ज़बरदस्ती उठाकर फ्लोर पर ले गयी और हम सब एकसाथ एन्जॉय करने लगे

कई बार डांस करते-2 नितिन के हाथ मेरे शरीर को छू रहे थे

पता नही जान बूझकर या फिर अंजाने में

पर मैने उसका कोई विरोध नही किया

ऐसा कुछ करके मैं उनका दिन खराब नही करना चाहती थी

हालाँकि मुझे भी अच्छा लग रहा था

पर मैं खुलकर उसे कुछ बोल भी तो नही सकती थी

इसलिए मैं उन पलों को एंजाय करते हुए खुलकर डांस करने लगी

आज कई सालो बाद मैंने इतना ख़ूलकर डांस किया था शायद

और इतना खुश भी बहुत टाइम बाद हुई थी

पर ये खुशी ज़्यादा देर तक कायम नही रह सकी

मैं नाच रही थी और अचानक मेरे सामने पापा आकर खड़े हो गये

वो भी पूरी यूनिफॉर्म में

मैं तो हक्की बक्की रह गयी

“प…प…पापा…..आअप य…यहां ……..ओह”

मैने खुद को संभाला, और फिर अपने कपड़ो को, जो शायद मेरे पापा ने आज पहली बार देखे होंगे

ऐसी ड्रेस मैं पहन सकती हूँ ऐसा उन्होने सपने में भी नही सोचा होगा

पापा की आग उगलती नज़रों से सॉफ पता चल रहा था की जो वो देख रहे है उन्हे बिल्कुल पसंद नही आया

उनके गुस्से को मैं जानती थी

आज तो मेरी खैर नही थी

क्लब का म्यूज़िक बंद हो चूका था,

पोलीस यूनिफॉर्म में कोई एकदम से डॅन्स फ्लोर पर आ जाए तो अच्छे अच्छों की हवा टाइट हो जाती है

क्लब के स्टाफ का भी यही हाल था

मैं जल्दी से श्रुति और दूसरी फ्रेंड्स के साथ बाहर निकल गयी

श्रुति जानती थी मेरे पापा और उनके गुस्से के बारे में

इसलिए उसे भी अब मेरी चिंता हो रही थी

मैने वॉशरूम में जाकर अपने कपड़े चेंज किए और कैब पकड़ कर जल्दी से घर की तरफ निकल गयी

आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन होने वाला था
 
क्लब का म्यूज़िक बंद हो चूका था,

पुलिस यूनिफॉर्म में कोई एकदम से डॅन्स फ्लोर पर आ जाए तो अच्छे अच्छों की हवा टाइट हो जाती है

क्लब के स्टाफ का भी यही हाल था

मैं जल्दी से श्रुति और दूसरी फ्रेंड्स के साथ बाहर निकल गयी

श्रुति जानती थी मेरे पापा और उनके गुस्से के बारे में

इसलिए उसे भी अब मेरी चिंता हो रही थी

मैने वॉशरूम में जाकर अपने कपड़े चेंज किए और कैब पकड़ कर जल्दी से घर की तरफ निकल गयी

आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन होने वाला था

*********

आगे

**********

घर पहुँची तो मामला कुछ और ही निकला

माँ ने दरवाजा खोला

उनके चेहरे पर पहले से बारह बज रहे थे, हवाइयाँ उड़ रही थी

मैं समझ गयी की उन्हे भी पता है की पापा ने मुझे क्लब में देख लिया है

मैं अंदर आई, मेरे मुँह से घबराहट के मारे कुछ नही निकल रहा था

माँ : “बेटा….वो ..... वो……आ ........ आज तेरे पापा घर जल्दी आ गये थे…..और तब तक तो तू भी कॉलेज से आ ही जाती है….घर पर तू नही मिली तो…तो..उन्होने मुझे बहुत डांटा और मजबूरन मुझे बताना ही पड़ा की तू कहाँ गयी है….आई एम् सॉरी मेरी बच्ची ….ये सब…ये सब…मेरी वजह से हुआ है….”

इतना कहकर वो फफक -2 कर रोने लगी….

मैने गोर से देखा तो उनके चेहरे पर उंगलियो के निशान थे…..

यानी पापा ने उन्हे मारा भी था…

ये वहशी इंसान…..

मन तो करता है उनपर एफ आई आर कर दूँ …

फिर सड़ते रहेंगे पूरी लाइफ जेल में

ऐसे और भी विचार मेरे दिमाग़ में पहले भी कई बार आ चुके थे

पर मैं कितनी डरपोक थी ये सब करने में, ये मुझे भी पता था

अब जैसे भी उन्हे पता चला, खैर तो मेरी नही थी इन सबमे..

सच कहूं तो आज जितना डर मुझे अपनी लाइफ में कभी नही लगा था

हालाँकि आज के जमाने में इतना तो चलता ही है

कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चे अपने दोस्तो के साथ मूवी और क्लब्बिंग के लिए जाते है

ये तो आम बात है

पर पता नही मेरे पापा को ही इसमें इतनी दिक्कत क्यों है

माँ भी तो मेरा साथ देती है, उन्हे तो ये सब बुरा नही लगता

उन्हे तो पता है की मैं अगर ये काम कर भी रही हूँ तो समझदारी से कर रही हूँ

पता नही पापा को ही क्यो दिक्कत है

मेरी आँखो से आँसू निकल आए ये सोचते-2

माँ ने लपककर मुझे अपने गले से लगा लिया और बोली

“मत रो सलोनी….तू अपने रूम में जा …और पापा के आने पर भी बाहर मत आना, मैं बोल दूँगी की तू सो रही है….बाकी मैं देख लूँगी….पर किसी भी हालत में बाहर मत आना”

माँ का यही प्यार मुझे एक सुरक्षा कवच का एहसास देता था

पर मुझे क्या पता था की मुझे तो सुरक्षा मिल रही है माँ से, माँ को कौन सुरक्षा देगा उस राक्षस से…

मैं अपने रूम में गयी और कपड़े बदल कर बेड पर लेट गयी

रह रहकर मुझे क्लब की बातें और पापा का गुस्से से भरा चेहरा नज़र आ रहा था

करीब 1 घंटे बाद बाहर की बेल बजी

मेरे दिल की धड़कन एकदम से बढ़ गयी

बाहर पापा ही थे

अंदर आते ही उनकी और माँ की तेज आवाज़ें आने लगी

पापा गुस्से में गालियां दिए जा रहे थे

और वो मेरे बारे में ही बोल रहे थे

ऐसे शब्द जो मैने आज से पहले अपने बारे में उनके मुँह से कभी नही सुने थे

“कहाँ है वो रंडी साली….क्लब में छोटे कपड़े पहन कर लड़को के साथ डांस कर रही थी…आज तो उसकी गांड मैं लाल करूँगा….बाहर निकाल उसे…आज उसे पता चलेगा की पुलिस वाले का डंडा जब चलता है तो कैसे फट जाती है….निकाल उस हरामजादी को बाहर…”

माँ : “कुछ तो शर्मा करो, जवान बेटी को ऐसे कौन गालियां देता है….मानती हूँ उस से ग़लती हो गयी, मैने समझा दिया है, आगे से वो ऐसा कुछ नही करेगी, तुमसे पूछ कर ही करेगी वो सब…”

चटाख की एक जोरदार आवाज़ से पापा ने माँ को चुप करा दिया और बोले : “साली…..ये तेरी सरपरस्ती में ही बिगड़ रही है….कॉलेज शुरू होते ही इसे चाचा जी के पास भेज देना था, वो इसका सही से इलाज करते…”

पापा के चाचा जी, यानी रंजीत अंकल, वो पंजाब में रहते है, आर्मी से रिटाइर्ड है और अपने घर को भी उन्होने आर्मी केंट की तरह अनुशासन में बाँध कर रखा हुआ है, उनके बच्चे, बहु, नाती पोते सब उनसे डरते है, कोई उनके खिलाफ जाने की जुर्रत नही करता

पापा ने अपने पिताजी के गुजर जाने के बाद उन्ही को अपना आदर्श माना था

और परिणामस्वरूप वो भी उन्ही की तरह बन गये थे

और उनके घर का माहौल अपने घर पर लागू करने की फिराक में हमेशा रहते थे

यही कारण था की मेरे उपर इतनी पाबंदिया थी, ये तो माँ थी वरना उन्होने मुझे सच में अपने चाचा के पास भेज देना था

और वहां की लाइफ सोचकर ही मैं काँप उठती थी

पापा गुस्से में गालियां देते हुए मेरे कमरे की तरफ आ ही रहे थे की अचानक पता नही क्या हुआ की उनकी आवाज़ निकलना ही बंद हो गयी

माँ की भी कोई आवाज़ नही आ रही थी

मैने कान लगाकर सुनने की कोशिश की पर कुछ सुनाई नही दिया…

थोड़ी देर बाद बहुत धीरे से पापा के कराहने की आवाज़ सुनाई दी

ओह्ह माय गॉड

कहीं माँ ने उनके सिर पर तो कुछ नही दे मारा…

मैं झट्ट से उठी और दरवाजे का हेंडल खोलने के लिए लपकी

पर हेंडल तक मेरा हाथ जाने से पहले ही मुझे पापा की एक आवाज़ सुनाई दी

ये एक लंबी सिसकारी थी

“आआआआआआहह………सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…….”

ये…..ये सिसकारी तो मैं पहचानती हूँ

ये ठीक वैसी ही थी जैसे श्रुति के मुंह से निकल रही थी जब उसका बाय्फ्रेंड किस्स कर रहा था और उसके बूब को दबा रहा था

यानी……यानी….मॉम इस वक़्त पापा के साथ

मेरा तो दिमाग़ ठनक सा गया

मैं दबे पाँव दरवाजे तक आई

और कान लगाकर सुना

मेरा अंदाज़ा सही था

ये वही सिसकारी थी

पिताजी के मुँह से निकल रही थी ये..

“ओह्ह साआआली…..अपनी बेटी को बचाने का सही तरीका ढूँढ निकाला है तूने भेंन की लोड़ी …..आआहह….चूस ज़ोर से मादरचोद ….और ज़ोर से चूस मेरा लॅंड”

पिताजी के मुँह से आख़िरी शब्द “लॅंड” सुनकर मेरा पूरा शरीर झनझना उठा

यानी इस वक़्त माँ मेरे रूम के बाहर बैठकर पिताजी का लॅंड चूस रही थी…

हे भगवान् …

पर अगले ही पल मेरे दिल में माँ के प्रति एकदम से प्यार उभर आया

मुझे बचाने के लिए उन्हे पिताजी के साथ….उनके…उनके….लॅंड की सकिंग करनी पड़ रही है…

मैं जानती थी की उनकी उम्र की औरतों में पहले शायद ये सब नही होता था

श्रुति ने भी मुझे कई बार ऐसी ज्ञान की बाते बताई थी की पहले की औरतों को डिक सकिंग करना अच्छा नही लगता था

ये तो आजकल के नोजवानों का कल्चर सा बन चूका है

पहले उपर के होंठ चूस्टे है और फिर दोनो एक दूसरे के नीचे के हिस्से को

पर माँ ऐसा कर रही थी तो सिर्फ़ मेरे लिए…हां, मुझे बचाने के लिए..

क्योंकि श्रुति ने बताया था की मर्द चाहे आज का हो या पहले का, उसे लॅंड चुसवाना बहुत पसंद आता है

पहले के जमाने में लॅंड चुसाई होती नही थी इसलिए अपनी बिबियो से उन्हे ये सुख मिल नही पाया मर्दों को

पर आजकल की एडल्ट मूवीस में ये सब देखकर उन्हे भी ये इच्छा होती है की उनका भी कोई चूसे…

और शायद इसी वजह से आज पिताजी को जब ये सुख मिला तो वो अपनी सुध बुध खोकर उस मज़े का लुत्फ़ ले रहे थे

मैं तो अंदर थी पर मेरे दिमाग़ ने पिक्चर बनानी शुरू कर दी की कैसे पिताजी जब गुस्से में अंदर आ रहे होंगे तो एकदम से माँ उनके सामने आकर बैठ गयी…उनकी जीप खोलकर उनका लॅंड बाहर निकाला और उसे चूसने लगी

ठीक मेरे रूम के बाहर

उफफफ्फ़





मेरे निप्पल्स एकदम से टाइट हो गये

बूब्स में थोड़ी और हवा भर गयी

ये वही एहसास था जो मैने मूवी हाल में महसूस किया था

जब श्रुति और नितिन एक दूसरे को स्मूच कर रहे थे
 
हााआआययययी

ये एक ही दिन में मेरे साथ क्या-2 हो रहा है

पहले वो देखा और अब ये…

पहले वाला सीन तो मेरी आँखो के सामने चल रहा था और वो ग़लत भी नही था

मेरी सहेली अपने बाय्फ्रेंड के साथ मज़े कर रही थी

पर ये….

ये तो मेरी नज़रों के सामने भी नही था

और मेरे खुद के माँ बाप मेरे रूम के बाहर वो सब कर रहे थे

जो सरासर ग़लत था

उनका मेरे रूम के बाहर इस तरह से खुलेआम सकिंग करना और मेरा इस तरह से उनकी आवाज़ें सुनना

ये दोनों गलत था

पर फिर भी मेरे अंदर पहले से ज़्यादा उत्तेना का संचार हो रहा था

एक ग़लत चीज़ के लिए मेरी बॉडी इस तरह से क्यो रिएक्ट कर रही थी

ये तो सरासर ग़लत है

मैने अपने कानो पर हाथ रखकर बाहर से आ रही आवाज़ों को दबा दिया और फिर से वापिस अपने बेड पर जाकर लेट गयी

मेरा सीना उपर नीचे हो रहा था

मेरी 36 साइज़ के बूब्स फूलकर 38 के हो चुके थे

मेरा हाथ फिर से उनकी तरफ सरक गया और मैने उन्हे ज़ोर से दबा दिया

और परिणाम स्वरूप फिर से वही मूवी हाल वाली सिसकारी मेरे मुँह से निकल गयी

“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…………….आआआआआआआआअहह”

मैं एकदम से चोंक कर बैठ गयी

कहीं मेरी आवाज़ बाहर ना चली जाए

कुछ देर तक तो मैं वैसे ही लेटी रही पर बाहर से आ रही आवाज़ों से पता चल रहा था की उन्हे कुछ सुनाई नही दिया है

या फिर वो अपने में कुछ ज़्यादा ही मस्त है इसलिए

अब मेरे अंदर की शैतान भी जाग रही थी

बाहर पिताजी मेरी माँ यानी अपनी बीबी के साथ जिस रासलीला में लगे हुए थे

वही जो कुछ देर पहले तक मेरी कुटाई करने को तैयार थे

ये सैक्स भी साला क्या बड़िया चीज़ है

इंसान को पत्थर से मोम बना देता है

मैने डरते-2 धीरे से दरवाजा खोलकर बाहर झाँका

और बाहर का सीन देखकर मेरे तो होश ही उड़ गये

बाहर पिताजी पूरे नंगे खड़े थे और सामने बैठी माँ उनका मोटा लॅंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी

उनके भी कपड़े कब उतर गये थे शायद इसका अंदाज़ा उन्हे भी नही था





]

पहली बार मैं किसी को ऐसे करता देख रही थी….

श्रुति ने ही मुझे एक-2 बार पॉर्न में ऐसे सीन दिखाए थे

जिसे देखकर मुझे तो घिन्न सी आ गयी थी की कोई कैसे किसी का पेनिस चूस सकता है….

पर यहाँ माँ को देखकर लग रहा था की जैसे इस से अच्छी कोई चीज़ ही नही है…

भले ही वो आजकल के जमाने की नही थी पर चुसाई में किसी पॉर्न स्टार को भी पीछे छोड़ रही थी…

और पिताजी की तो बात ही अलग थी…

ऊँचा और भारी भरकम शरीर

और करीब 9 इंच का लंबा और मोटा लॅंड…

एकदम काला भुसन्ड

जिसे देखकर पहली बार में तो उबकाई आ जाए,

पर माँ जिस तरह से उसे चूस रही थी उसे देखकर लग रहा था की उसमें से शहद निकल रहा है शायद

पिताजी अपनी आँखे बंद किए उपर मुँह करके धीरे-2 हुंकार भर रहे थे…

उनका हाथ माँ के सिर पर था,

जिसे वो आगे पीछे करके अपने पेनिस को अंदर स्लाइड कर रहे थे…

माँ के मुँह से ढेर सारी लार निकल कर उनके मोटे मुम्मो पर गिर रही थी..

जो उन्हे और भी सैक्सी बना रही थी

याआआर…..

माँ के बूब्स देखकर पता नही क्यों मेरे मुँह में पानी आ रहा था

मुझे याद है, मैं करीब 10 साल तक माँ के बूब्स चूसती रही थी,

ऐसी गंदी आदत बनी थी मेरी की मैं उन्हे बिना चूसे सो ही नही पाती थी

माँ ने बड़ी मुश्किल से उनपर लाल मिर्च लगा कर मेरी ये आदत छुड़वाई थी

आज फिर से उन्हे देखकर मेरा उन्हे चूसने का मन कर रहा था

पर इस वक़्त तो पिताजी के वश में थी माँ

पता नही आज से पहले भी माँ ने उनका पेनिस चूसा था के नही

या आज मुझे बचाने के लिए उन्होने ऐसा किया

पर जो भी था,

आज उन्होने मुझे पापा के प्रकोप से बचा लिया था

मेरा पूरा बदन जलने सा लगा था उन दोनो को नंगा देखकर

मन तो कर रहा था की मैं भी कूद जाऊं उनके बीच

जो होगा देखा जाएगा

पर सोचने और करने मे काफ़ी फ़र्क है

पर इस जिस्म की जलन का कुछ तो करना ही पड़ेगा ना

मैने आनन फानन में अपने सारे कपड़े निकाल फेंके

और पूरी नंगी हो गयी

मेरा कच्ची जवानी से भरा जिस्म अँधेरे कमरे में भी चमक रहा था





]

अब मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था

मैने अपनी 2 उंगलिया मुँह में डालकर ढेर सारी थूक में डुबोई और उसे लेजाकर सीधा अपनी चूत में घुसेड दिया

चर्र मर्र करती हुई मेरी दोनो उंगलिया उस संकरी सी गुफा में फिसलती चली गयी

और मेरे मुँह से एक धीमी सी हिसिसाहट निकल कर पूरे कमरे में फैल गयी

और साथ ही निकली लार

जो सीधा मेरे निप्पल को भिगोती हुई मेरे पेट पर आ गिरी

मेरी आँखे बंद होती चली गयी

और मेरी उंगलिया किसी पिस्टन की तरह अंदर बाहर होने लगी मेरी नन्ही सी पुसी के





मैने बाहर देखा

माँ अब और ज़ोर से पापा का लॅंड चूस रही थी

शायद वो ऑर्गॅज़म के निकट थे

क्योंकि वो अपने पंजो पर खड़े होकर धीरे-2 कुछ बुदबुदा रहे थे

पता नही क्या पर मैने सिर्फ़ चोद दूँगा…रंडी साली…ये शब्द ही सुने

और अगले ही पल उनके शरीर ने काँपते हुए अपना हिस्से के बच्चे माँ के मुँह में निकालने शुरू कर दिए

यही उनकी चूत में जाते तो मेरे 2-4 भाई बन जाते आने वाले समय में





और ये गाड़ी मलाई देखकर मेरे हाथ भी और तेज़ी से चलने लगे

और जल्द ही मैने अपने हिस्से के बच्चे अपनी चूत से निकालने शुरू कर दिए

अअअअअहह

एक शरारत भरी बात अचानक मेरे दिमाग़ में आई की पापा और मेरा कम अगर मिल जाता तो वो 2-4 बच्चे मैं ही पैदा कर देती

अपनी बात पर मुझे ही हँसी आ गयी

चल पागल, ऐसा थोड़े ही होता है





अब सब शांत हो चूका था

मैं भी

पापा भी

और माँ भी

पिताजी लड़खड़ाते कदमो से बाथरूम में जाकर नहाने लगे

पीछे-2 माँ ने भी अपने और पापा के कपड़े इकट्ठे किए और अपने बेडरूम की तरफ चल दी

उनकी चाल मे एक अलग ही लचक थी आज

शायद अपनी बेटी को बचाने का रोब था उनकी कमर में

आज तो बचा लिया था माँ ने मुझे पापा से,

पर अगले दिन जब मैं उनके सामने जाउंगी तो पता नही क्या होगा
 
और ये गाड़ी मलाई देखकर मेरे हाथ भी और तेज़ी से चलने लगे, और जल्द ही मैने अपने हिस्से के बच्चे अपनी चूत से निकालने शुरू कर दिए

अअअअअहह

एक शरारत भरी बात अचानक मेरे दिमाग़ में आई की पापा और मेरा कम अगर मिल जाता तो वो 2-4 बच्चे मैं ही पैदा कर देती

अपनी बात पर मुझे ही हँसी आ गयी, चल पागल, ऐसा थोड़े ही होता है , अब सब शांत हो चूका था, मैं भी, पापा भी , और माँ भी

पिताजी लड़खड़ाते कदमो से बाथरूम में जाकर नहाने लगे, पीछे-2 माँ ने भी अपने और पापा के कपड़े इकट्ठे किए और अपने बेडरूम की तरफ चल दी, उनकी चाल मे एक अलग ही लचक थी आज

शायद अपनी बेटी को बचाने का रोब था उनकी कमर में , आज तो बचा लिया था माँ ने मुझे पापा से, पर अगले दिन जब मैं उनके सामने जाउंगी तो पता नही क्या होगा

**********

अब आगे

**********

अगले दिन कॉलेज की छुट्टी थी, कोई जयंती थी शायद

सोचा तो यही था की आज देर तक सोऊंगी

पर मेरी नींद पापा और मम्मी की तेज आवाजों से खुली

अभी रात को ही तो दोनो ने एक दूसरे को मज़े दिए थे

सुबह होते ही वो सब भूल गये

फिर से लड़ाई करने लगे

ये शादीशुदा लोग भी ना

कसम से

इनका कुछ नही हो सकता

मैने मींची आँखो से घड़ी की तरफ देखा

अभी 9 बजे थे

ये पापा के स्टेशन जाने का टाइम था

मैने कान लगाकर सुना तो मेरी नींद एक ही पल में छू मंतर हो गयी

पापा फिर से वही रात वाला राग अलाप रहे थे

पापा : “मुझे सिर्फ़ एक बार बात करनी है उस से….तू मेरे बीच से हट जा ज्योति…रात को तो तूने उसे बचा लिया, अब नही बच पाएगी वो…उसे सबक सीखाना ज़रूरी है….”

इतना कहकर उनके कदमो की तेज आहट मेरे कमरे की तरफ आने लगी

बीच में शायद माँ ने फिर से उन्हें रोका पर एक धड़ाम की आवाज़ के साथ माँ के कराहने की आवाज़ आई

यानी पापा ने माँ को धक्का देकर बीच से हटा दिया था

अगले ही पल पापा धड़धड़ाते हुए मेरे कमरे में घुसते चले आए

मेरी हालत तो ऐसे हो गयी जैसे साँप ने काट लिया हो

एकदम जड़वत सी होकर रह गयी मैं…

और अंदर से उन्होने दरवाजे पर चटखनी लगा दी ताकि माँ अंदर ना आ सके

माँ बाहर खड़ी दरवाजा पीट रही थी और मुझे कुछ भी ना कहने की गुहार लगा रही थी पापा से

वो आगे बढ़े

पर अचानक वहीं ठिठक कर रुक गये

पता नही क्यों

मेरा सीना रेल के इंजन की तरह आवाज़े निकाल रहा था

शांत कमरे में सिर्फ़ मेरी धड़कन की आवाज़ें गूँज रही थी

पापा की तरफ से कुछ हलचल नही हुई

मैने मूंदी आँखो को हल्के से खोल कर देखा

वो मुझसे 2 फीट दूर खड़े थे और मेरी टांगो को देख रहे थे

पूरे कमरे में अंधेरा था पर खिड़की से आ रही मद्धम रोशनी मेरे चेहरे को छोड़कर पूरे शरीर पर थी

ओह्ह शीटssss

रात को मम्मी पापा का कार्यकर्म देखने और मास्टरबेट करने के बाद मैने शॉर्ट्स तो पहनी ही नही थी

सिर्फ़ पेंटी पहनी थी

ऊपर टी शर्ट थी जो मेरे पेट तक चड़कर मेरा नंगा पेट भी उजागर कर रही थी





ऐसा नही था की मैं पहले ऐसे नही सोती थी

अक्सर मैं शॉर्ट्स और टी शर्ट में ही सोती थी

या कभी शॉर्ट्स उतार कर भी

एक बार तो बिना शॉर्ट्स और पेंटी के भी सो गयी थी

माँ ही आती थी मुझे उठाने

उन्हे मेरे पहनावे से ज़्यादा फ़र्क नही पड़ता था

पर जिस दिन मैं नीचे से नंगी होकर सोई थी उस दिन उन्होने मुझे खूब डांटा था की अब तू जवान हो गयी है

ऐसे मत सोया कर

मैने मज़ाक में बोला था उस दिन, “क्यो रात को कोई भूत आकर चूस लेगा मुझे वहां से”

इस बात पर माँ भी मुस्कुराइ थी

यानी उन्हे और मुझे दोनो को इस चूसम चुसाई के बारे में पता था

पर शायद ऐसा कुछ दोनो ने अभी तक किया नही था

खैर, वो अलग बात थी, आई मीन माँ का मुझे इस तरह से देखना और पापा का मुझे इस हालत में सोते देखना

दोनो में काफ़ी अंतर था

एक तो पहले ही कल की बात से वो मुझसे नाराज़ थे

उपर से मुझे ऐसे बिना शॉर्ट्स या पायज़ामी के सोते देखने के बाद वो मुझे माँ की तरह गुस्सा भी करेंगे और अपना कल का गुस्सा भी उतारेंगे

पर एक मिनट

ये पापा के चेहरे पर गुस्सा तो नही दिख रहा

मैने अपनी आँख थोड़ी सी और खोल दी

क्योंकि उनकी नज़रें तो मेरे चेहरे पर थी ही नही

चेहरे पर नज़र होती भी तो अंधेरे की वजह से मेरी अधखुली आँखे दिख ही नही पाती शायद

वो तो मेरी नंगी टांगो और कसावट लिए पेट को देख रहे थे

और शायद मेरी नाभि को भी

और मेरे आश्चर्य की सीमा तब नही रही जब उनका हाथ अपने पेनिस की तरफ गया और वो उसे मसलने लगे

हैंssssss

अब ये क्या बकवास है

कोई पिता अपनी बेटी को देखकर ऐसे कैसे कर सकता है भला

मैने देखा उनकी पेंट के अंदर जैसे कोई नाग अपना सिर उठाकर बड़ा हो रहा हो

और वो उसका फन हाथ में लेकर उसे बिठाने का असफल प्रयास कर रहे थे

बाहर माँ का अपना ड्रामा चल रहा था

वो दरवाजा पीट रही थी और रो रोकर मुझे ना मारने की सलाह दे रही थी पापा को

पर उन्हे क्या पता था की अंदर आकर उनके पति को क्या हो गया है

मैं चाहती तो अभी उठकर जाती और झट्ट से दरवाजा खोलकर माँ से लिपट जाती

पर ना जाने कौनसे वशीकरण ने मुझे बाँध रखा था

मैं हिल भी नहीं पा रही थी

मेरे दिलो दिमाग़ में हैरानी और परेशानी के मिले जुले भाव थे

पर फिर मैने सोचा

है तो वो एक मर्द ही ना

एक औरत के जिस्म को देखकर यही इच्छा तो आती है अक्सर मर्दों में

उपर से 21 साल की जवान लड़की का ऐसा जिस्म

और वैसे भी

मैने भी तो रात को उन्हे देखा था

ये ग़लत है तो वो भी तो ग़लत ही था

उन्हें देखकर मैने जिस तरह मास्टरबेट किया था, उस जैसा मज़ा तो आजतक नही आया था मुझे

पर वो मैने जान बूझकर तो नही किया था ना

मैने खुद ही अपना बचाव किया

पर

पापा भी तो जान बूझकर ये नही का रहे ना

ना तो मई ऐसे अधनंगी होकर सोती और ना ही उनके मन में ऐसे विचार आते

पर मैं ऐसे नही सो रही होती तो अब तक वो मुझे नींद से उठाकर मेरी कुटाई कर रहे होते

बचपन में मैने उनके भारी भरकम हाथो से इतने चांटे खाए है की उनकी झंझनाहट मुझे आज तक फील होती है

पर झंझनाहट तो मुझे तब फील हुई जब पापा ने अचानक आगे बढ़कर मेरी जाँघो को छू लिया उन्ही भारी भरकम हाथो से

मेरा पूरा शरीर झनझना उठा उनके स्पर्श से

बदन पर सैंकड़ो चींटियां सी रेंगने लगी

मैं सिसकारी मारना चाहती थी पर अपने होंठो को मैने अपने दांतो तले दबा लिया

उन्होने एकदम से मेरे चेहरे की तरफ देखा की मैं जाग तो नही गयी उनके टच से

मैने बिल्ली की तेज़ी से अपनी आँखे मूँद ली
 
और मन में सोचा

की कर ले बापू

तू अपनी टचिंग वचिंग कर ले

मैं भी तो देखूं की थारे दिल में चाल क्या रया है

उसके बाद उन्होने अपने खुरदुरे हाथ मेरी मखमली टांगो पर चलाने शुरू कर दिए

उपर से नीचे तक

फिर मेरी बियर ग्लास की शेप वाली पिंडलियों को उन्होने अपने हाथ में पकड़ा और उसे सहलाने लगे

और फिर दूसरे हाथ से वो मेरी जाँघो को सहलाते हुए उपर की तरफ आने लगे

पापा शायद भूल गये थे की वो वहां किस काम से आए थे

बाहर माँ का भी चीखना चिल्लाना भी बंद हो चुका था

वो शायद कान लगाकर अंदर क्या हो रहा है उसे सुनने का प्रयास कर रही थी

पर अंदर से कोई आवाज़ ना आते देखकर वो भी परेशान थी की अचानक हुआ क्या है

अभी तो ये बड़े गुस्से में अंदर गये थे

और अब अंदर से कुछ भी आवाज़ नही आ रही

पापा का दूसरा हाथ मेरी पेंटी की सरहद पार करता हुआ मेरी पुस्सी की तरफ बढ़ने लगा

मेरी साँसे तेज़ी से चलने लगी

पता नही क्यों और कैसे मेरी पुस्सी से कुछ गीला गीला निकलने लगा

पापा का हाथ सीधा उस गीलेपन के उपर गया और उन्होने अपनी उंगलियों से उस जगह को यानी मेरे चीरे को रगड़ सा दिया

अब मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया

इस वजह से नही की वो मेरे साथ ये ग़लत काम कर रहे थे

बल्कि इस वजह से की मेरे मुंह में जो मैने सिसकारी इतनी देर से संभाल कर रखी थी

वो अब मुझसे और दबाई नहीं जा रही थी

मैने एकदम से चौंकने हुए उठने का नाटक किया

दबी आवाज़ में वो सिसकारी मारी

और पापा को अपने सामने देखकर डरने का नाटक करने लगी

“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……आआअहह………………ओह….. एयेए एयेए आआप्प्प …..यहाँ …. पापाssssss ……… ……”

मैने अपनी टी शर्ट नीचे की और अपनी टांगो को एकदम से चादर में धक लिया

पापा भी अपने आप को संभालते हुए उठे और मुझसे दूर जाकर खड़े हो गये

पर उठने से पहले उन्होने अपने उस हाथ में इकट्ठा की हुई मेरी सुगंध और गीलापन अपने होंठ और नाक पर पूरी तरह से मल डाली

जैसे मेरी उस गंध को वो अंदर तक महसूस करना चाहते हो

पुलिस की वर्दी में वो खड़े थे पर सैल्यूट मुझे उनका छोटा सिपाही मार रहा था

मेरी नज़र उसपर ही थी

पापा ने भी मुझे वहां देखते हुए पाया तो अपनी कैप से उन्होने उसे ढक लिया

और बनावटी गुस्से को अपने चेहरे पर लाते हुए मुझे ज़ोर से डांटना शुरू कर दिया

“खबरदार…जो आज के बाद मुझसे बिना पूछे कहीं गयी तो….ये क्लब शलब कहीं नही जाना, पढ़ाई पर ध्यान दो…परीक्षाएं आ रही है, कुछ बनना है की नही…”

पर वो जो बोल रहे थे और जिस अंदाज में बोल रहे थे उनका कोई मेल नही हो पा रहा था

ऐसा लग ही नही रहा था की वो मुझे डाँट रहे है

बस मुझे समझाते हुए लग रहे थे

कुछ देर तक ऐसे ही एक दो और बातें बोलकर वो दरवाजा खोलकर बाहर निकल गये

माँ बाहर ही बैठी थी

वो भागती हुई अंदर आई और मुझसे लिपट गयी

मेरे चेहरे और हाथों को देखने लगी की कहीं उन्होंने मारा तो नही

मुझसे पूछती रही पापा ने मारा तो नही ना मेरी बच्ची को

ज़्यादा डाँटा तो नही

पर मैं सिर्फ़ उनके गले से लिपटकर यही कहती रही की नही माँ

सब ठीक है

विश्वास तो उन्हे भी नही हो रहा था की पापा ने मुझे इतनी आसानी से कैसे छोड़ दिया

अब भला मैं माँ को क्या बताती

जिस चीज़ का इस्तेमाल उन्होने जान बूझकर किया था रात को मुझे बचाने के लिए

उसी चीज़ ने अनजाने में मुझे बचाया आज सुबह भी

यानी

जिस्म

रात को माँ का था

सुबह मेरा

अभी माँ मेरी टाँगो से ये चादर हटा कर देख लेती तो उन्हे पता चल जाता की पापा ने मुझे मारा क्यों नही

इस आदमी को शांत करना कितना आसान काम है

इतना तो मैं समझ चुकी थी

और आने वाले समय में

पापा के गुस्से और कहर से कैसे बचा जाएगा

इसका गणित मेरे दिमाग़ में अभी से चलने लगा था

माँ ने कुछ देर तक मुझे लाड प्यार किया और मुझे पूचकारने के बाद नहाने के लिए बोलकर खुद मेरे लिए नाश्ता बनाने चली गयी

पापा जा चुके थे

और माँ किचन में थी

मैने अपनी टांगो से वो चादर हटाई और दूर फेंक मारी

सुबह की रोशनी मेरी खिड़की से होती हुई अब सीधा मेरी पुस्सी वाले एरिया पर आ रही थी

और वहां से निकल रहे गाड़े पानी की चमक उसमें मिलकर और भी ज़्यादा तेज़ पैदा कर रही थी

मैने एक पल के लिए दरवाजे की तरफ देखा, दरवाजा पूरा खुला हुआ था

मैने हिम्मत दिखाते हुए अपनी पेंटी भी उतार फेंकी और उपर से टी शर्ट भी

अब मैं अपने बेड पर पूरी नंगी पड़ी थी

मेरे हाथ अपने आप मेरी पुस्सी पर चले गये और उसे रगड़ने लगे





बाहर से अचानक माँ वापिस अंदर आ जाती तो मुझे इस हालत में देखकर पापा से ज़्यादा गुस्सा करती और शायद मारती भी

और अगर पापा कुछ भूल गये हो और वापिस आ कर देखे की मैं अपने कमरे में नंगी लेटी हूँ तो उनका क्या हाल होगा

ये सब सोचते-2 मेरे अंदर एक अजीब सा रोमांच पैदा हो रहा था

सुबह की पहली धार का ताज़ा माल निकल रहा था वहां से

मेरी उंगलिया झुलस सी गयी अपनी चूत की गर्मी महसूस करके

“आआहह, ओह्ह्ह पापााअssss …….यू डर्टी डॉग…….आपको मेरा ये बदन पसंद आया ……आहह….. ओह्ह यएसस्स….पापा…..देखो फिर……छुओ अपने हाथो से…..चाटो ……अपनी जीभ से…. और ………और….अपने पे….पे…पेनिस अहह……लॅंड से………..टच करो…..ना….,.,मुझे….. यहाँ …..यहाँ ……और यहाँ …….”

मेरा दूसरा हाथ मेरे होंठो से होता हुआ, मेरे बूब्स पर गया और फिर मेरी पुस्सी पर…

उफफफफ्फ़…….

ये पापा का पेनिस मैं अपनी बॉडी पर क्यों फील करना चाहती हूँ …..

देखा जाए तो पापा वो इंसान है जिनसे मैं शायद सबसे ज़्यादा नफ़रत करती हूँ

ना तो मुझे चैन से रहने देते है ना कहीं जाने देते हैं

घूमना फिरना, सब उनके हिसाब से

उपर से मुझे और माँ को मारते भी है

ऐसे इंसान के लिए मैं इस वक़्त ऐसे तड़प रही थी जैसे जल बिन मछली

और ऐसा कुछ तो मैने आज तक किसी मूवी में भी नही देखा था..

और ना ही किसी ने मुझे ऐसा सिखाया था…

तो…तो क्या ये सब…..अपने आप सीखता है इंसान….

वो सब बाते….

जो उसके जहन में होती है

वो सब

जो उसे मज़ा दे

वो उसे अपने आप सीख जाता है

हां

यही होता होगा शायद

या फिर ये सिर्फ़ मेरे साथ हो रहा है

पर मेरे लिए तो यही सही है

जो मैं सोच रही हूँ

जो मैं चाह रही हूँ

पापा का लॅंड पकड़ कर

अपने पूरे जिस्म से टच करवा सकूँ तो कितना मज़ा आएगा

वही मोटा लॅंड जो मैने रात में देखा था

माँ कितने चाव से उसे चूस रही थी

दोनो हाथो से पकड़ कर





उफ़फ्फ़

वो सीन याद आते ही मुझे ना जाने क्या हुआ की मैने अपनी चूत में डूबा हाथ उपर किया और अपनी उंगलियो को एक साथ गोल करके एक लॅंड का आकार दिया और उस लिसड़े लॅंड को मुँह में लेकर चूसने लगी
 
ठीक वैसे ही जैसे रात को माँ मेरे पापा का लॅंड चूस रही थी

उतने ही प्यार से

उतने ही मज़े ले लेकर

वो उंगलिया मेरी जीभ पर अपना स्वाद छोड़ कर मछली की तरहा फिसल रही थी





आँखे बंद थी मेरी

पर बंद आँखो के पीछे एक पूरा एपिसोड चल रहा था

जो मेरी कल्पना ने अभी -२ बनाया था

मैं अपने पापा का लॅंड महसूस कर रही थी अपने मुँह में

पापा

जो मेरी माँ को धक्का देने के बाद मुझे नंगा करके बीच ड्रॉयिंग रूम में खड़े होकर मुझे अपना लॅंड चुस्वा रहे थे

और मेरे बालों को खींच कर मुझे इस बात का एहसास दिलवा रहे थे की उन्हे बताए बिना मुझे घर से कहीं नही जाना है

“बोल मादरचोद …..अब जाएगी किसी क्लब में ….मुझसे पूछे बिना…इन छोटे कपड़ो में …बोल रंडी…”





वो कपड़े जो मैं क्लब में पहन कर गयी थी

वो तार-2 होकर नीचे ज़मीन पर पड़े थे

भले ही ये मेरी एक कल्पना थी

एक डरावनी कल्पना

पर इसे महसूस करके इतना रोमांच और मज़ा क्यों आ रहा है

मेरे हाथ अपनी पुस्सी पर और तेज़ी से चलने लगे

और मैं और ज़ोर से अपनी चारों उंगलियां पापा का लॅंड समझकर चूसने लगी

“ओह…….पापा……..अहह……सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………आई एम् कमिंग ….”





इतना कहते-2 मैने इतने जबरदस्त झटके मारकर अपना कम निकाला चूत से की सामने पापा खड़े होते तो वो पूरा भीग जाते…

और मेरी ये आवाज़ सुनकर मेरी माँ भागती चली आई किचन से

उन्हे लगा की मैं गिर गयी हूँ

मैने उनके आने की आहट और आवाज़ सुनी और जल्दी से नंगी ही भागती हुई अपने अटैच बाथरूम में घुस गयी

वहां पहुँचकर माँ ने देखा की मेरे सारे कपड़े ज़मीन पर पड़े है…पेंटी…टी शर्ट…शॉर्ट्स.

माँ (झल्लाते हुए) “ये लड़की भी ना….कितनी बार बोला है अब तू जवान हो गयी है….फिर भी ये बच्चों की तरह कपड़े निकाल कर फेंक देती है….बदमाश कहीं की…”

और फिर वो ये सोचकर मुस्कुरा दी की मैं उन्हे उतारकर कैसे बाथरूम में नंगी गयी होउंगी …

ये तो शुक्र था की उन्होने मेरी पेंटी पर गीलापन महसूस नही किया

वरना वो भी मेरी क्लास लगा देती.

ठंडे पानी की बौछारें अपने जिस्म पर महसूस करके मैं ये सोचने की कोशिश कर रही थी की आज ये हुआ क्या है मेरे साथ सुबह -2

पापा का मुझे उस तरह से देखना

और बाद में मेरा उनके बारे में ग़लत सोचकर मास्टरबेट करना

ये सब मुझे कहाँ ले जाएगा





इन बातों का अभी के लिए मेरे पास कोई जवाब नही था

पर आने वाला वक़्त शायद मुझे इसका जवाब दे सके.
 
माँ (झल्लाते हुए) “ये लड़की भी ना….कितनी बार बोला है अब तू जवान हो गयी है….फिर भी ये बच्चों की तरह कपड़े निकाल कर फेंक देती है….बदमाश कहीं की…”

और फिर वो ये सोचकर मुस्कुरा दी की मैं उन्हे उतारकर कैसे बाथरूम में नंगी गयी होउंगी … ये तो शुक्र था की उन्होने मेरी पेंटी पर गीलापन महसूस नही किया वरना वो भी मेरी क्लास लगा देती.

ठंडे पानी की बौछारें अपने जिस्म पर महसूस करके मैं ये सोचने की कोशिश कर रही थी की आज ये हुआ क्या है मेरे साथ सुबह -2

पापा का मुझे उस तरह से देखना और बाद में मेरा उनके बारे में ग़लत सोचकर मास्टरबेट करना ये सब मुझे कहाँ ले जाएगा

इन बातों का अभी के लिए मेरे पास कोई जवाब नही था पर आने वाला वक़्त शायद मुझे इसका जवाब दे सके.

***********

अब आगे

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आज का पूरा दिन मैं फ्री थी इसलिए मैने फोन करके श्रुति को घर बुला लिया

वो अक्सर मेरे घर आने से डरती थी, पापा की वजह से

पर आज तो सुबह का टाइम था और वो ड्यूटी पर होते है, इसलिए वो बेझिझक आ गयी

दिन में माँ ने हम दोनो के लिए मटर पुलाव् बना दिया

और खुद सोने के लिए चली गयी, जो उनकी रोज की दिनचर्या थी दोपहर की

मैंने अपने रूम को अंदर से बंद किया और श्रुति के साथ पालती मारकर पलंग पर बैठ गयी

श्रुति मुझसे कल की सारी बाते पूछ रही थी

उसे भी यही लगा था की घर आकर पापा ने मुझे बहुत मारा होगा

क्योंकि वो भी उनका स्वाभाव जानती थी

पर जब मैने कहा की ऐसा कुछ नही हुआ तो वो भी हैरान रह गयी

काफ़ी कुरेदने के बाद भी मैने उसे कुछ नही बताया

मुझे डर था की वो मेरे या पापा के बारे में क्या सोचेगी

मैने बात बदलने के लिए उसके और नितिन के बारे में पूछना शुरू कर दिया

वो तो उसका फेवरेट टॉपिक था

कॉलेज में भी वो उसी के नाम की रट लगाए रखती थी

मेरे पूछते ही वो एकदम से शुरू हो गयी

श्रुति : “अच्छा सुन, तूने नितिन की बात छेड़ी ही है तो मैं तुझे कुछ बताना चाहती हूँ ”

मैं : “हाँ , बोल ना….”

श्रुति : “एक्चुअली …..कल क्लब के बाद….जब तू चली गयी थी तो….तो मैं और नितिन…आई मीन…मैं उसके साथ ….कहीं गयी थी….”

मैं (हरान होते हुए) : “गयी थी…मतलब…कहाँ ….जो काम तुम करते हो, वो तो तुम वहां भी कर ही रहे थे….पूरी मूवी के दौरान और क्लब के डांस फ्लोर पर भी तुम एक दूसरे को चूमने चाटने में लगे रहे…फिर तुम्हे कहीं और जाने की क्या ज़रूरत पड़ गयी ?”

श्रुति : “यार….तू समझ क्यों नही रही…..मैं ….मैं….उसके साथ….ओयो रूम गयी थी….”

उसने एक ही साँस में बोल दिया और मुझे आँख मारकर अपने दाँत निपोरने लगी..





मैं हरानी से उसके चेहरे को घूरे जा रही थी

जलन के भाव मेरे चेहरे पर सॉफ देखे जा सकते थे

मैने तो आज तक एक किस्स भी नही की थी किसी को

और ये

ये कमिनी अपने बाय्फ्रेंड के साथ ओयो भी हो आई

वहां जाने का मतलब

उन दोनो ने सैक्स किया

ओह्ह तेरी माँ की चूत

ये सोचते ही मेरे कान एकदम से गर्म हो गये

मेरी आँखो में गुलाबीपन उतर आया

और ना चाहते हुए भी मेरी खुली आँखो के सामने उनकी पिक्चर चलने लगी

जिसमे नितिन उसे पलंग पर घोड़ी बना कर बुरी तरह से चोद रहा था, बिलकुल पॉर्न मूवीज की तरह





मुझे पलकें तक ना झपकाता देख उसने मुझे झंझोड़ा

“ओ सलोनी….ओये….क्या हो गया तुझे….इतना क्यो शॉक हो गयी….”

उसके इतना कहते ही मैं उसपर टूट पड़ी…

मैने उसे बेड पर गिराया और उसके उपर चढ़ गयी और उसका गिरेबान पकड़ कर लगभग चिल्ला पड़ी

“साली….कमिनी….इतनी बड़ी बात हो गयी….और तू मुझे इतने कैजुअल तरीके से बता रही है….हमने डिसाईड किया था की कॉलेज लाइफ में ऐसा कुछ नही करेंगे…फिर ये प्रॉमिस क्यो तोड़ा तूने….बोल कमिनी….बोल…”

मेरा मारना एक तरह से मजाकिया लहजे में था

पर उसमे जो शिद्दत और जलन थी, वो असली थी

मुझे सच में उस से ईर्ष्या हो रही थी

श्रुति : “हाँ , किया था वादा …पर यार….पिछले कई दिनों से ना…मेरा खुद का बहुत मन कर रहा था ये सब करने का….और तूने तो देखा ही था, मूवी हॉल में भी उसने मुझे इतना गर्म कर दिया था की कुछ देर तक और मूवी चलती तो मैने वही बैठ जाना था उसके लॅंड पर….और बाद में डांस करते वक़्त भी जिस तरह से मैं उसके कड़कपन को फील कर रही थी, यार कसम से, कल ना करती तो पूरी लाइफ पछताती रहती की मौका था पर कुछ किया नही…इसलिए बाद में जब उसने किसी रूम में चलने के लिए पूछा तो मैने झत्ट से हां कर दी….”

मैं पलक झपकाए बिना उसकी बातें सुन रही थी…

मैने धीरे से पूछा : “ फिर…..?”

यानी मैं आगे जानना चाहती थी की वहां पहुँचकर हुआ क्या

और शायद उन पॅलो को याद करके वो भी एकदम से गर्म होने लगी थी

क्योंकि मैं जिस जगह बैठी थी , वो उसकी पुस्सी वाला हिस्सा था

वो मेरे नीचे थी और मैने उसके दोनो हाथो को पलँग पर दबा रखा था

उसकी कमर धीरे-2 हिलने लगी वो सब याद करके

श्रुति : “फिर…जब हम कमरे में गये तो…अंदर जाते ही हमने किस्स की और फिर बहुत एंजाय करके सैक्स किया…सच में बहुत मज़ा आया…”

मैने एक हल्की चपत लगाई उसके गाल पर और गुर्राई : “ऐसे नही….डीटेल में बता…क्या और कैसे हुआ….एन्ड कुछ भी मिस किया ना, आई विल किल यू …समझी…”

श्रुति (हंसते हुए) : “समझ गयी मेरी माँ ….देख रही हूँ आजकल तू इन बातो को कुछ ज़्यादा ही एंजाय कर रही है…मूवी हॉल में भी तू हम दोनो को किस्स करते हुए देख रही थी….है ना…”

मैने आँखे झुका ली

श्रुति : “इट्स ओक बैबी….होता है ये सब…और ये अभी नही करेंगे तो कब करेंगे…कॉलेज लाइफ में कुछ तो यादगार रहना चाहिए ना…”

मैं : “चल वो सब छोड़ , अब सब डीटेल में बता”

श्रुति ने गला सॉफ किया और बोलना शुरू : “तो कमरे में जाते ही नितिन ने मुझे कस के गले से लगाया और मुझे किस्स करने लगा…वो अपने हाथ से मेरे बूब्स को भी मसल रहा था….कमीने ने कल इतना मसला था की अभी तक लाल निशान पड़े है….”

इतना कहकर वो मुस्कुरा दी…

मैने उसकी टी शर्ट का गला खींचकर नीचे किया तो उसकी क्लिवेज सामने आ गयी

उसके बूब्स मुझसे थोड़े बड़े ही थे

और उनपर लगे लाल निशान मुझे वही से नज़र आ गये…

मैने हाथ अंदर खिसका कर उसके उस लाल हिस्से को छू लिया

वो कसमसा उठी

मुझे ऐसा फील हुआ जैसे मैने उसकी स्किन नही बल्कि नितिन के होंठो को छुआ है

क्योंकि कल वही तो थे जिन्होने ये चित्रकारी की थी उसकी बॉडी पर

श्रुति : “फिर पता ही नही चला की कब हमारे कपड़े उतर गये और हम दोनो एक दूसरे के नंगे बदन को चूमने लगे”

ओह्ह्ह गॉड

एक बिस्तर पर 2 नंगे जिस्म

आह्ह्ह्हह्ह

मेरे तो रोंगटे खड़े हो रहे थे
 
मैं तो बस इमेजन ही कर रही थी की कैसे हुआ होगा वो सब

अब कमर मटकाने की बारी मेरी थी

मेरी पुस्सी और उसकी पुस्सी एक दूसरे से घिस कर एक अजीब सा नशा उत्पन कर रही थी

श्रुति ने आगे बोलना शुरू किया : “और पता है…उसने….वहां नीचे जाकर….मेरी पुस्सी को…..वहां …उसने …..सक्क भी किया….”

मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी..

मुझे तो लगा था की सीधा साधा सैक्स ही हुआ होगा

पर ये साली तो पूरे मज़े लेकर आई है

श्रुति : “और बाद में …मैने भी उसे सक्क किया…..”

मेरा मुँह सूख चूका था

ये सोचकर की उन्होने ओरल सैक्स किया था पहले

मैं : “के….केसा लगा था…वो सब करते हुए…आई मीन….मज़ा आया क्या “

श्रुति : “और नही तो क्या….पता है…जब नितिन ने मुझे वहां सक्क किया ना…यार….कसम से…मेरी पूरी बॉडी शिवर कर रही थी….ही वाज़ सकिंग मी लाईक ए आइस्क्रीम….पूरा अंदर तक अपनी जीभ से…मेरे नीचे के लिप्स को मुँह में लेकर….और वहां जो वो एक दाना होता है ना…”

मैंने बीच में टोका :”वो क्लिट…”





श्रुति : “हाँ वही….तूने ये सब किया नही, पर पता सब है तुझे भी कमिनी…आई नो, जब तू किसी के साथ सैक्स करेगी ना, सामने वाले की शामत आ जानी है कसम से…”

मैं अपनी तारीफ सुनकर मुस्कुरा दी

मैं : “वो सब छोड़, आगे क्या हुआ, जब तूने सक्क किया तो कैसा फील हुआ…मज़ा आया…”

श्रुति : “उसे तो मैने पहले भी सक्क किया हुआ है, कई बार….कार में भी….गार्डेन में भी…और एक बार मूवी हॉल में भी…”

ये बात तो उसने मुझे पहले भी बताई थी

पर तब मैने उसे ज़्यादा तवज्जो नही दी थी

पर आज पता नही क्यो मुझे एक – एक बात जाननी थी

श्रुति : “उसने जिस गहराई में जाकर मेरी पुस्सी को चूसा था, उसका बदला तो उतारना ही था, इसलिए जब नितिन उठकर मेरे चेहरे के करीब आया तो मैने भी उसका पेनिस अपने मुँह में लेकर उसे डीप थ्रोट सकिंग दी, पता है वो अपना सिर उपर करके बस किसी सियार की तरह चिल्ला रहा था, कुछ बोल ही नही पाया बेचारा, इतना ज़ोर से चूसा था मैने उसे…”





वाउ यार….ही इस सो लक्की

लक्की तो वैसे ये कुतिया श्रुति भी है

एक कड़क लॅंड को चूसने में कितना मज़ा आया होगा ये तो बस मैं इमेजीन ही कर सकती हूँ …

असली मज़ा तो इसने ही लिया है

श्रुति : “और लास्ट में …उसने जब उसने वो गीला पेनिस मेरे अंदर डाला ना….पूरी दुनिया घूम गयी मेरी आँखो के सामने “

मैं : “दर्द हुआ था क्या ? “

श्रुति : “हाँ, थोड़ा सा….बट मैने मैनेज कर लिया था…इट वाज़ ओके …ब्लीडिंग नही हुई क्योंकि तुझे तो पता ही है मैं फुटबॉल क्लब में थी स्कूल टाइम में , वहां खेलते वक़्त ही शायद वो झिल्ली फट गयी थी…पर ओवरॉल, सैक्स करके मज़ा बहुत आया…”

उनकी चुदाई के बारे में सोचते-2 मेरी भी आँखे बंद हो गयी

मेरी कमर की गति भी उसी स्पीड से तेज हो रही थी , जिस गति मे शायद श्रुति ने अपनी कमर मटकाय होगी उस रूम में चुदवाते हुए

और मेरे हाथ उसके नर्म मुलायम बूब्स पर कब अपनी पकड़ बनाने लगे, ये मुझे भी पता नही चला

अब मैं इमेजीन कर रही थी की कैसे नितिन ने अपने हाथ में पकड़ कर अपना लॅंड उसके अंदर डाला होगा

और कैसे वो कसमसाई होगी उसे अंदर लेते हुए

दर्द भी हुआ होगा

और मज़ा भी मिला होगा





ये सोचते-2 मेरी कमर और तेज़ी से हिलने लगी

अब श्रुति भी गर्म हो चुकी थी उस रगड़ाई से

वो रोकना तो चाहती थी पर शायद मज़ा उसे भी आ रहा था

मैने उसकी टी शर्ट को लगभग खींचते हुए कहा : “दिखा मुझे, लव बाइट्स भी है क्या तेरी बॉडी पर….”

उसका चेहरा देखने लायक था, जैसे पूछा रही हो की

है भी तो तुझे क्या लेना देना ?

और ऐसे क्यों कर रही है तू

लेस्बियन -2 खेलना है क्या

आज से पहले तो ऐसा कोई इंडिकेशन नही दिया तूने

यहाँ मैं एक बात और शेयर करना चाहती हूँ आपसे

श्रुति और मेरी दोस्ती स्कूल टाइम से ही है

जब हम दोनो टीनेजर्स थे, उसने कई बार मुझे किस्स करने की कोशिश की थी

वो देखना चाहती थी की किस्स करने में कैसा फील होता है

एक दो बार तो मैने भी कोई रिएक्शन नही दिया, चुपचाप किस्स करवा ली

पर एक दिन जब उसने किस्स करते हुए मेरे मुँह में जीभ डाली और मेरे बूब्स को छेड़ना शुरू किया तो मैने उसे बहुत डांटा था

मेरे दिमाग़ में था की ऐसे काम तो सिर्फ़ लेस्बियन करते है और वो हम थे नही

इसलिए उस दिन के बाद उसने ऐसी कोई कोशिश नही की थी

पर आज, वो सब मैं कर रही थी, उसके साथ

उसे तो शुरू से ही ये सब पसंद था

उसकी आँखो के सवाल आँखो मे ही रह गये

वो कुछ बोल नही पाई

बल्कि उसने मेरा साथ दिया उस टी शर्ट को उतारने में

कुछ ही देर में वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा में थी

उसके निप्पल्स विसिबल थे

कारण था उसकी उत्तेजना





निप्पल्स तो मेरे भी विसिबल थे पर वो उन्हे अभी देख नही पा रही थी

मैने उसकी स्किन पर बाइट मार्क्स देखे….

ऐसा लगा जैसे नितिन ने उसे हर जगह पर बाइट और सक्क किया है…

कहीं गहरे निशान थे तो कहीं हल्के

पर निप्पल के करीब जाते-2 वो बढ़ते जा रहे थे…

मैने उसके दोनो ब्रा स्त्रेप्स को कंधे से नीचे गिरा दिया

एक पल के लिए तो उसकी भी आँखे चौड़ी हो गयी

पर वो कुछ नही बोली

अब वो मेरे सामने टॉपलेस होकर पड़ी थी





मैं हैरानी से उसके गोरे चिट्टे जिस्म और मोटे बूब्स को देखने लगी

वो बूब्स मुझे अपनी तरफ खींच रहे थे

उसकी आँखो में भी मौन स्वीकृति थी

मेरा सिर अपने आप उसके बूब्स पर झुकता चला गया

और मेरे लिप्स ने सीधा उसके तने हुए निप्पल को अपनी गिरफ़्त में लेकर चूसना शुरू कर दिया

“आआआआआआहह……… ओह…. मेरी ज़ाआाआआआन ……. उम्म्म्ममममम”

उसके हाथ मेरे सिर के पीछे आ लगे और वो मुझे अपनी छाती पर और ज़ोर से दबाने लगी

उसका फूला हुआ बूब मेरे पुर चेहरे को छुपा ले गया





मैं उसके पुर बूब्स को चूस भी रही थी और चाट भी रही थी

शायद मुझे आशा थी की नितिन ने जब अपनी जीभ से इसी जगह पर श्रुति को चाटा होगा तो उसका कुछ टैस्ट अभी तक उसकी स्किन पर होगा जो मैं अपनी जीभ से समेट लेना चाहती थी

वैसे एक बात तो है दोस्तों

एक लड़की को एक लड़की ही अच्छी तरह से चूम और चूस सकती है

क्योंकि वो जानती है की लड़कियो को किस अंदाज में चुसवाना और चटवाना पसंद है

ना कम ना ज़्यादा

लड़को का क्या है

वो तो भूखे भेड़िये की तरह टूट पड़ते है उनपे

उन्हे सिर्फ़ अपने मज़े से मतलब होता है

काश मैं ऐसी ट्यूशन शुरू कर पाती जिसमें मैं जवान लड़को को ये सब सिखाती की कैसे एक लड़की को खुश करना चाहिए
 
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