Incest इंस्पेक्टर की बेटी - Page 4 - SexBaba
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Incest इंस्पेक्टर की बेटी

पापा भी मेरी सांसो की गर्मी सहन नही कर पाए, उनके लॅंड ने भी पिचकारियाँ मारकर मेरी जाँघ को एक स्विम्मिंग पूल में कनवर्ट कर दिया, जिसमें सफेद रंग का पानी भर चूका था

उस 50 ग्राम के रस को मैं अपनी जाँघ पर सॉफ महसूस कर पा रही थी, जो इधर उधर से रिसकरअंदरूनी दीवारों पर भी गिरने लगा

पापा ने जल्दी से अपनी लूँगी से ही उस पूरे पानी को सॉफ किया

इस पूरी क्लास में करीब 20 मिनट का समय लगा

मैं करीब 5 मिनट तक अपनी सांसो पर काबू करने की कोशिश करती रही, इस बीच मैने पापा की गर्दन को नही छोड़ा

मैं शर्म के मारे पापा से नज़रें नही मिला पा रही थी

पापा ने भी अपनी बाहों में मुझे भींच रखा था

मेरे बूब्स को भी वो सॉफ महसूस कर पा रहे थे

फिर पापा ने अपने गर्म होंठो से मेरे माथे को चूमा और धीरे से बोले : “देखा, ये सही तरीका होता है, इसे क्लिट कहते है, इसी पर रगड़ाई करने से औरत को मज़ा मिलता है और उसका पानी निकलता है, और जब मर्द का पेनिस अंदर जाता है तो इसी पर रगड़ महसूस करके औरत को मज़ा मिलता है….और जब औरत उत्तेजित हो जाती है तो अंदर से इसी तरह पानी निकलता है, जैसे अब निकला है तुम्हारा, इसमे कोई परेशानी नही है, पर सही तरीके से खुद ही निकाला जाए तो बिना बात के ये नही निकलेगा हर बार…समझे…”

मैने हाँ में सिर हिलाया

और अपनी आँखे उठा कर पापा को देखा

मेरी आँखे इस वक़्त पूरी गुलाबी हो चुकी थी

मैं मुस्कुरई और पापा की ठोडी पर अपने होंठो से किस्स कर दिया

और बोली : “थॅंक यू पापा…..मैं तो बेकार में इतना परेशान हो रही थी, आप सोच नही सकते की आपने मेरे दिल से कितना बड़ा बोझ कम कर दिया है, थेंक यू अगेन पापा”

पापा भी बड़े चालाक थे

एक ही दिन की पाठशाला से उन्हे कहा संतुष्टि मिलने वाली थी

वो बोले : “अभी से अपने थेंक्स वेस्ट मत करो, ये आख़िर में बोलना जब सब कुछ बता दूँगा, अभी तो 3-4 दिन का टाइम लगेगा सब कुछ बताने में …”

मैं हैरानी से उनकी तरफ देखती हुई बोली : “हैंssss …..अभी और भी कुछ बचा है क्या….तो आज ही बता दो ना…3-4 दिन तक क्यो खींचना…”

पापा अपनी जगह से उठ खड़े हुए, मैं अभी तक उनके सामने नीचे से नंगी होकर लेटी थी अपने बिस्तर पर

पापा : “हर बात को समझाने का एक तरीका और समय होता है, आज का समय पूरा हो चुका है, अब तुम्हारे अंदर भी हिम्मत नही होगी कुछ और करने की (उनका मतलब मेरे झड़ने से था), इसलिए अगली क्लास कल करेंगे, इसी समय…ओके , गुड नाइट”

इतना कहकर वो अपना लॅंड संभालते हुए वहां से निकल गये, जो अभी तक पूरी तरह से बैठा नही था

आख़िर पुलिस वाले का लॅंड था, इतनी आसानी से कैसे बैठता

पापा के जाने के बाद मैने अपनी टी शर्ट भी उतार फेंकी

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और नंगी ही अपनी चादर में घुस कर सो गयी

आज जैसी नींद मुझे कभी नही आई थी

पूरी रात मेरे सपनो में भी पापा मुझे कुछ ना कुछ सिखाते हुए नज़र आते रहे

अब तो अगले दिन का इंतजार था

और मुझे यकीन था की अगली क्लास कुछ अड्वान्स होने वाली है
 
पापा अपनी जगह से उठ खड़े हुए, मैं अभी तक उनके सामने नीचे से नंगी होकर लेटी थी अपने बिस्तर पर

पापा : “हर बात को समझाने का एक तरीका और समय होता है, आज का समय पूरा हो चुका है, अब तुम्हारे अंदर भी हिम्मत नही होगी कुछ और करने की (उनका मतलब मेरे झड़ने से था), इसलिए अगली क्लास कल करेंगे, इसी समय…ओके , गुड नाइट”

इतना कहकर वो अपना लॅंड संभालते हुए वहां से निकल गये, जो अभी तक पूरी तरह से बैठा नही था, आख़िर पुलिस वाले का लॅंड था, इतनी आसानी से कैसे बैठता

पापा के जाने के बाद मैने अपनी टी शर्ट भी उतार फेंकी , और नंगी ही अपनी चादर में घुस कर सो गयी, आज जैसी नींद मुझे कभी नही आई थी, पूरी रात मेरे सपनो में भी पापा मुझे कुछ ना कुछ सिखाते हुए नज़र आते रहे, अब तो अगले दिन का इंतजार था, और मुझे यकीन था की अगली क्लास कुछ अड्वान्स होने वाली है

*************

अब आगे

*************

अगले दिन शमशेर सिंह जब थाने के लिए निकला तो दरवाजे पर धोभी का लड़का बबलू ऊपर आता हुआ दिखाई दिया

उसे देखते ही शमशेर उस पर चढ़ गया

“अबे, मैं देख रहा हूँ आजकल तेरे रंग ढंग “

एक तो पुलिस वाला ऊपर से वो ज्योति भाभी का हसबेंड,

जिसने कल उसके लंड को अपने ड्राइंग रूम में चूसा था

दोनों बातों का डर उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था

कहीं उसकी पोल तो नहीं खुल गयी

कहीं उन्हे पता तो नहीं चल गया की उनकी बीबी ने कल मेरा लंड चूसा था

इसी डर से वो थर -2 कांपने लगा

शमशेर : “मेरी गाड़ी ढंग से साफ नहीं करता, रहता कहाँ है आजकल , तेरा ध्यान कहाँ है “

ओहह

गाड़ी की बात कर रहे दे ये तो

बबलू की तो पतलून गीली होते – 2 बची थी

बबलू हकलाकर बोला : “जी....जी सर....अब से ध्यान रखूँगा...”

शमशेर उसे घूरता हुआ लिफ्ट में चला गया

आज अपनी बेटी की वजह से उसका मूड अच्छा था , वरना इसे सीधा कर देता आज वो

उसने घर की बैल बजाई और ज्योति भाभी निकल कर सामने आई

वो उसे देखकर मुस्कुरा दी और अंदर आने का इशारा किया

अंदर जाने से पहले उसने फिर से लिफ्ट की तरफ देखा की कहीं साहब दोबारा न आ जाए फिर कुछ देर बाद वो अंदर दाखिल हुआ

ज्योति ने दरवाजा बंद किया और उसके करीब आकार खड़ी हो गयी और बोली : “क्या हुआ बबलू, तेरे चेहरे पर हवाइयाँ क्यो उड़ रही है”

बबलू ने डरते-2 सारी बात बताई

वो सुनते ही ज्योति ज़ोर से हंसने लगी और बोली : “तू भी एक नंबर का फटटू है , तुझे लगा होगा की तेरी कल वाली हरकत पकड़ी गयी “

बबलू : “मे...मेरी...मेरी कैसे....वो तो ...आपने “

“शी ....... इधर आ.....”

इतना कहकर बबलू को चुप करवाकर ज्योति उसेअंदर की तरफ ले गयी

फिर दबे पाँव वो सलोनी के रूम की तरफ गयी और दरवाजा होले से खोलकर अंदर झाँका ,वो अभी तक घोड़े बेचकर सो रही थी , 9 बज रहे दे, उसके कॉलेज जाने का समय 12 बजे का था आज , इसलिए अगले 2 घंटे वो उठने वाली नहीं थी

दरवाजा वापिस बंद करके वो बबलू के करीब आई और अपनी साड़ी का पल्लू कमर मे फँसाते हुए वो बड़े ही सैक्सी स्टाइल से उसे देखते हुए बोली : “मेरी मर्जी ही थी क्या, तुझे मजा नहीं आया उसमें ....बोल “

बेचारे की हालत खराब होने लगी

एक तो सैक्सी भाभी ऊपर से उनके मोटे-2 बूब्स जो ब्लाउस फाड़कर बाहर आने को व्याकुल दे

उस सैक्सी साड़ी में वो कमाल की लग रही थी





अब उसका डर भी जाने लगा था

कुछ देर पहले उनके पति ने जो डर बिठाया था उसके अंदर, वो अब नजर नहीं आ रहा था उसके चेहरे पर

अचानक ज्योति ने अपना हाथ उसके खड़े होते लंड पर रख दिया

जो लंड एक एक इंच करके खड़ा हो रहा था

उनका हाथ लगते ही एक ही झटके में पूरा खड़ा हो गया

उसके लंड की मोटाई को पेंट के ऊपर से ज्योति भाभी महसूस करके सिसिया उठी

“ससससस आअह्ह्ह्हहहह ......इतने मोटे लंड का करता क्या है तू , चल इसे काम पर लगाती हूँ आज “

इतना कहकर ज्योति ने उसके लंड को पकड़ा और अपने बेडरूम की तरफ चल दी

वो भी किसी रोबोट की तरह उसके इशारे पर चलता हुआ बेडरूम तक आ गया

दरवाजा बंद करते ही ज्योति बबलू पर टूट पड़ी

उसने बबलू की शर्ट पलक झपकते ही उतार फेंकी और उसके निप्पल्स को मुंह में लेकर चूसने लगी

ज्योति की लिपिस्टिक से उसकी छाती लाल होने लगी

और उसके हमले से उसकी हालत खराब

वो सिसकारियाँ मारने लगा

“आअहह भाभी जी..... ओफ़्फ़ ऐसे मत करो आआहह गुदगुदी होती है “

ज्योति की हंसी निकल गयी

उसने बबलू का हाथ अपने बूब्स पर रखा और उसे दबाते हुए बोली : “मुझे तो कोई गुदगुदी नहीं होती यहाँ, बल्कि मजा आता है, देखना चाहेगा “

इतना कहते-2 उसने अपने ब्लाऊस के बटन खोलने शुरू कर दिये

बबलू की तो आंखे चौड़ी होने लगी जैसे -2 उसके गोरे मुम्मे उसकी आंखो के सामने आने लगे

काले रंग की ब्रा में कैद उसके गोरे मुम्मे सच में कयामत ढा रहे दे

ज्योति ने ब्रा भी निकाल फेंकी

और अब वो उसके सामने टॉपलेस होकर खड़ी थी





गोरे मुम्मे और उनपर लगे ब्राउन कलर के निपपल्स देखते ही बबलू के मुंह से लार टपक पड़ी
 
ज्योति ने एक बार फिर से उसके हाथ पकड़ कर अपने मुम्मो पर रख दिये और बोली : “देख, तुझे हर बार मैं हाथ पकड़ कर नहीं बोलुंगी, तेरा मन है तो बता वरना तू जा सकता है “

ज्योति की बात सुनकर वो एकदम से घबरा गया

ऐसे मौके को भला कौन जाने देता

भले ही उसका घरवाला पुलिस में है पर जब बात लंड चूत की होती है तो सब डर धरे के धरे रह जाते हैं

वो तुरंत बोला : “नहीं भाभीजी, आप फिक्र मत करिए, मैं अब आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा “

उसकी बात सुनकर ज्योति मुस्कुरा दी और फिर जाकर बेड पर किसी मालकिन की तरहा बैठ गयी

सामने खड़े बबलू को पता था की अब क्या करना है

वो आगे आया और उसने ज्योति का पेटीकोट निकाल कर अलग कर दिया

अब वो सिर्फ एक पेंटी में थी, उसे भी बबलू ने निकाल फेंका

अपनी ज़िंदगी मे पहली बार वो किसी नंगी औरत को देख रहा था

वैसे तो घर पर भी उसने कई बार अपनी माँ को नहाते हुए छुपकर देखा था

पर कहाँ उनका काला शरीर और कहाँ ये संगमरमर जैसी गोरी मेम

ज्योति उत्तेजना में भरकर खुद ही अपने बूब्स को दबाने लगी और उसे लुभाने के लिए अपनी नंगी चूत में ऊँगली करके उसे गीला करने लगी





बबलू जैसे ही बेड के ऊपर चड़ने लगा तो ज्योति ने उसकी छाती पर पैर रखकर उसे अपने पास आने से रोका और बोली : “ऐसे नहीं....नीचे बैठो पहले ....नीचे से शुरू करो....”

ज्योति उसे डोमिनेट करके मजे लेना चाहती थी

वो चुपचाप जमीन पर पंजो के बल बैठ गया

ज्योति का नंगा पैर उसकी छाती से रगड़ खाता हुआ ऊपर की तरफ आया, और उसके चेहरे को अपनी पैरों की उँगलियों से सहलाने लगा

ज्योति के पैर बहुत ही खूबसूरत दे, उनपर लगी हुई नेलपॉलिश उन्हे और भी सैक्सी बना रही थी





बबलू ने पैर अपने हाथ मे थाम लिए और उसकी उँगलियों पर अपने गरम होंठ रख दिये

“यएसएसएसएसएसएसस्स्स्सस्स्स्स आअहहsssssss “

वो सिसक उठी

ज्योति के पूरे शरीर मे झंझनाहट सी दौड़ गयी जिसे बबलू ने भी महसूस किया

वो समझ गया की आगे क्या करना है

उसने एक-2 करके उसके पैरों की हर ऊँगली को किस्स करना शुरू कर दिया

ज्योति का बदन ऐंठने सा लगा

और फिर उसने उँगलियों को चूसना शुरू कर दिया





अब तो ज्योति अपना सर बेड पर इधर उधर मारने लगी

और उसके हाथ अपनी चूत से जा चिपके

पर बबलू ने उन्हे हटा दिया

ज्योति हैरानी से उसे देखने लगी

अब तक वो उसे डॉमिनेट कर रही थी पर अब बबलू कमांड मे आ चुका था

उसने आँख का इशारा करके उसे अपनी चूत ना मसलने का संकेत दिया

बेचारी की हालत खराब होने लगी

वैसे भी लड़कियों को डोमिनेट होने में ज्यादा मजा आता है बस खेल उनके हिसाब का होना चाहिए

और बबलू को अब इस खेल में मजा आ रहा था

इसी बीच दूसरे रूम में सो रही सलोनी की नींद खुली

पूरी नंगी ही थी वो इस वक़्त और रात की बाते सोचकर अपने अंग सहला रही थी बिस्तर पर पड़ी हुई

अचानक उसे दूर से कहीं अपनी माँ की वो सिसकारी सुनाई दी

ये सिसकारी तब की थी जब जब बबलू ने ज्योति के पैरों की उँगलियों को मुंह में लेकर चूसना शुरू किया था

सलोनी चोंक गयी

क्योंकि ऐसी सिसकारियों को वो अब अच्छे से पहचानने लगी थी

उसे लगा की आज पापा सुबह - 2 ही शुरू हो गए शायद मम्मी के साथ

वो बुदबुदा उठी ‘लगता है रात की ठरक निकाल रहे है मॉम पर वो ‘

"उम्मम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह "

फिर से वही सिसकारी सुनाई दी उसे

वो उठी और धीरे से दरवाजा खोल कर देखा

आवाजें मॉम के बेडरूम से आ रही थी

सलोनी ‘ये पापा भी न, थाने जाने का टाइम है और लगे पड़े है अपनी बीबी के साथ , ठरकी कहीं के ‘

फिर वो खुद ही मुस्कुरा दी

अचानक उसके मन मे उन्हे देखने की इच्छा हुई, दरवाजा आधा खुला हुआ था

वो दबे पाँव उस तरफ चल दी

हालांकि वो नंगी थी

पर उसने सोच लिया था की जब तक वो कपड़े पहनेंगे, वो भाग कर वापिस रूम में आ जाएगी

ये थोड़ा रिस्की तो था पर रोमांच से भरा भी

अपने माँ बाप की चुदाई देखना और वो भी खुद नंगे होकर

उसकी तो चूत गीली होने लगी उसी पल से



 
दरवाजे के पास पहुँचकर उसने पर्दे की ओट में खुद को छुपा लिया और अंदर झाँका

और अंदर पापा की जगह धोभी के लड़के बबलू को देखकर उसकी तो आंखे फेल गयी

उसके दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया

ये मोम को क्या हो गया है

अपने ठरकी पति के होते हुए अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ लगी हुई है

पर फिर उसने सोचा

पापा भी तो यही कर रहे है

अपनी बेटी के साथ और अपनी बेटी की उम्र की लड़की उस सलोनी के साथ

शायद इस उम्र में यही होता होगा

जवान जिस्म की प्यास

इसलिए वो चुपचाप होकर उनका खेल देखने लगी

हालाँकि अंदर से उसे अपनी माँ का ये रूप देखकर धक्का जरूर लगा था

पर सैक्स का खेल ही ऐसा होता है

गलत होते हुए भी सही लगता है

वैसे भी अंदर का खेल काफी मजेदार लग रहा था

जिस अंदाज से बबलू उसकी माँ के पैरों की उंगलिया चूस रहा था उसके बदन में भी चींटियां सी रेंगने लगी

पैर चूसने की कल्पना मात्र से ही उसका शरीर भी झनझना उठा

उसने भी सोच लिया की पापा से भी अपने पैर ऐसे ही चुसवाएगी वो

पर अभी तो वो मोम को मजे लेते हुए देखकर ही खुश हो रही थी क्योंकि उसे भी पता था की अपने पति से वो कितना दुखी थी

ऐसे मे इस तरह से मजे लेना तो बनता ही है

अंदर बबलू ने जब दोनों पैरों को अच्छे से चूसकर पूरा गीला कर दिया तो वो उसके पैरों की पिंडलियाँ चूमता हुआ धीरे-2 ऊपर आने लगा

बीचे-2 में वो अपने दाँतो से उनपर काट भी लेता था जिससे वो सिसक उठती

उसकी मोटी जांघों पर वो काट रहा था तो उसका मांस उसके मुंह में आ भी नहीं पा रहा था, इतनी टाइट जांघे थी उसकी

पर जांघों का अंदरूनी हिस्सा काफी मुलायम था

उसलिए दोनों हाथों से उनकी जाँघे पकड़कर उसने अंदरूनी जांघों को काटना और चाटना शुरू कर दिया

वो किसी पालतू कुत्ते की तरह अपनी मालकिन की टाँगे चाट रहा था

और फिर अचानक बिना किसी चेतावनी के बबलू ने अपने पैने दाँतो और गीले होंठो से उसकी चूत पर हमला कर दिया

हमला अचानक हुआ था

इसलिए वो एकदम से चोंक भी गयी और शरीर किसी कमान की तरह ऐंठ भी गया

बबलू ने पूरा ज़ोर लगाकर उस कमान जैसी कमर को सीधा जमीन पर लगाया और धीरे-2 उसकी चूत को अपनी जीभ और होंठो से मजा देने लगा





ये सब देखकर बाहर खड़ी हुई नंगी सलोनी की जांघों पर उसका रस बहकर गिरने लगा

हालांकि आज से पहले उसने बबलू को इस नजर से नहीं देखा था पर इस वक़्त तो वो भी उसके सामने बिछकर सब कुछ करवाने को तैयार थी

अगर उसकी माँ या बबलू उसे अपने साथ शामिल करने के लिए बुलाते तो शायद वो अंदर चली भी जाती

पर अभी के लिए तो उसे अपनी माँ की हरकतें देखनी थी की वो क्या-2 कर सकती है

इसलिए छुपकर उन्हे देखने और अपनी चूत को अपने हाथो से मसलने के सिवा उसके सामने कोई और चारा नहीं था





अंदर ज्योति ने बबलू से अपनी चूत को अच्छे से चुसवाने के बाद उसे ऊपर खींचा और अपने बूब्स चूसने को दे दिये

उन बूब्स के लिए तो वो लोंडा काफी देर से मचल रहा था

वो उन्हे अपने तेज दाँतो से कुरेदने लगा, उसके निप्पल्स को मुंह में लेकर चुभलाने लगा

ज्योति हीसहिसा सा उठी

“अहहमममममम साले .... ओह्ह्ह्हह चूस इन्हे ज़ोर से......अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दाँतो से काट कमीने ..... खा जा पूरा का पूरा उम्म “

बूब्स पर चुसाई का असर कैसा होता है ये तो सलोनी भी महसूस कर चुकी थी श्रुति से , पर पापा से अभी वो एहसास लेना बाकी था

अभी के लिए तो ये बबलू भी चलेगा

ये सोचते हुए सलोनी के हाथ अपने बूब्स को ज़ोरों से मसलने लगे

सलोनी ने सोचा भी नहीं था की ऐसे नंगी खड़ी होकर वो अपनी माँ की रंगरेलियाँ देखेगी

पर इसमे मजा भी बहुत आ रहा था, रोमांच तो था ही

उत्तेजना को उभारने का इस से अच्छा कोई तरीका हो ही नहीं सकता

नंगा शरीर अपने आप गंदा सोचने पर मजबूर कर देता है

पर अभी तो गंदा अंदर हो रहा था

क्योंकि उसकी माँ ने बबलू को घुमाकर नीचे लिटाया और खुद उसके चेहरे पर आ बैठी और अपना सर उसके लंड की तरफ झुका कर उसे चूसने लगी

69 के पोज़ में





ऐसा तो सलोनी भी फील करना चाहती थी

उसने पॉर्न मूवीस में जब भी ऐसा सीन देखा था, उसे दुगनी उत्तेजना का एहसास हुआ था

और तब भी उसने यही सोचा था की जब करेगी तो कैसा फील होगा

अभी तो वो अपनी माँ को अपने सामने वो करते हुए देख रही थी

जिससे उसे अंदाजा लग रहा था की इसमे सबसे ज्यादा मजा आने वाला है

क्योंकि जिस अंदाज से वो लंड चूस रही थी और अपनी चूत चुसवा रही थी , उसके चेहरे की खुशी देखते ही बनती थी

पर वो पोज़ उन्होने सिर्फ 3 मिनट के लिए ही अपनाया क्योंकि उसमे शायद झड़ने के चांसेस ज्यादा रहते है

और बिना चुदाई के झड़ जाये ऐसे तो नादान वो दोनों ही नहीं दे

इसलिए ज्योति वापिस बीएड पर लेती और उसे ऊपर खींचा

और फिर उसके लंड को अपनी फेली हुई जांघों के बीच हाथ से एडजस्ट करके एक ही झटके में उसके कुंवारे लंड को निगल गयी

लंड उसकी माँ की चूत में गया था पर एहसास सलोनी को हुआ था

क्योंकि उसने खुद की 4 उँगलियाँ एक साथ जोड़कर लंड जैसी शक्ल बनाकर उसे अंदर ठूस दिया था

और चारों उँगलियों का एक ही सेंटर पॉइंट था

उसकी क्लीट

जिसका एहसास कल रात उसके पापा ने करवाया था

उन चारों उँगलियों से बनी मुट्ठी की रगड़ उसकी क्लीट पर जब पड़ रही थी तो उसके मुंह से वही आवाजें निकाल रही थी जो अंदर लंड की रगड़ाई अपनी क्लीट पर करवाती हुई उसकी माँ के मुंह से निकल रही थी

‘’ओहह माय गॉड ...ओहह येस्स येस्स ज़ोर से कर बबलू अहह भेंन चोद ......ज़ोर से धक्के मार न .....हाँ ऐसे ही....शाबाश ......मेरे बच्चे .....शाबाश ......ज़ोर से चोद मुझे .......अहह ज़ोर से चोद , और तेज। ....... और तेज ...... और तेsssssss ज़ssssssss ....”





पता नहीं उसकी माँ के अंदर ये कौनसा अधूरापन था जो उस से ये सब करवा रहा था

पर अधूरापन न भी होता तो अपने पति के अलावा बाहर चुदाई करवानी तो बनती ही है

भई वो तो करवाएगी

ये तो सलोनी ने आज डिसाईड कर ही लिया था

एक ही लंड से बंधकर वो पूरी उम्र नहीं गुजरना चाहती

इसलिए लाइफ में शादी के बाद भी

कोई भी मिलेगा

जो भी मिलेगा

चाहे वो उसके पापा हो या ससुर

देवर या जेठ

वो सबके लंड का मजा लेगी

किसी एक लंड की बंधुआ मजदूर बनके वो नहीं रहने वाली थी

खुले विचारों वाली , आज की लड़की थी वो

फिर चाहे धोभी हो या वॉचमेन

कूरियर वाला हो या जेपटो वाला

सबको खुश रखेगी वो शादी के बाद

पर अभी तो उसकी माँ की खुशी उफान पर थी

क्योंकि वो झड़ने के करीब थी

और उसे उत्साहित करते-2 वो झड़ भी गयी

“ओहह बबलू.......आअह्हह्ह्ह्हहहह मैं तो गयी .....अहह......”

अपनी मालकिन की आवाज सुनकर बबलू भी झड गया

वहीं

उनकी चूत के अंदर ही उसने अपने लंड का सारा माल निकाल दिया

ये पहली बार था जब उसके लंड ने किसी औरत की चूत मारी थी

और वो ये जानता था की आगे भी ये सब होता रहेगा

बाद में जब उसने काम रस से भीगा लंड बाहर निकाला तो पीछे-2 ढेर सारा रस भी बाहर निकाला





अब वो किसी भी पल बाहर आ सकते दे

इसलिए सलोनी दबे पाँव फिर से जाकर अपने बिस्तर पर सो गयी

कुछ देर बाद बबलू भी कपड़े पहन कर बाहर निकल गया

ज्योति ने एक कॉटन का गाउन पहना, अंदर कुछ भी नहीं और कमरे की सफाई करने में जुट गयी

वो सैक्स की खुशु को पूरी तरह से मिटा देना चाहती थी क्योंकि उसे पता था की उसके पोलिसिआ पति की नाक कितनी तेज है

अंदर बेड पर लेती हुई सलोनी अपने अंगो को सहला रही थी

और अपनी माँ की चुदाई को सोच-2 मुस्कुराए जा रही थी

उसने सोच लिया था की आज वो उनसे पंगे जरूर लेगी बबलू का नाम लेकर

देखते है वो कैसे रिएक्ट करती है
 
अब वो किसी भी पल बाहर आ सकते दे, इसलिए सलोनी दबे पाँव फिर से जाकर अपने बिस्तर पर सो गयी , कुछ देर बाद बबलू भी कपड़े पहन कर बाहर निकल गया

ज्योति ने एक कॉटन का गाउन पहना, अंदर कुछ भी नहीं और कमरे की सफाई करने में जुट गयी,वो सैक्स की खुशु को पूरी तरह से मिटा देना चाहती थी क्योंकि उसे पता था की उसके पोलिसिआ पति की नाक कितनी तेज है

अंदर बेड पर लेती हुई सलोनी अपने अंगो को सहला रही थी ,और अपनी माँ की चुदाई को सोच-2 मुस्कुराए जा रही थी ,उसने सोच लिया था की आज वो उनसे पंगे जरूर लेगी बबलू का नाम लेकर,देखते है वो कैसे रिएक्ट करती है

**********

अब आगे

**********

कुछ देर बाद सलोनी के दरवाजे पर दस्तक हुई

वो समझ गयी की माँ ही होगी

वो अभी तक नंगी लेटी थी

जानबूझकर

क्योंकि आज उसने भी सोच लिया था की मॉम के साथ तो सब कुछ खुल ही जाना चाहिए

जैसे पापा के साथ खुल रहा है

उसके बदन पर चादर थी और अंदर वो नंगी

सीना ऊपर नीचे हो रहा था

मॉम के कदम पास आकर ठहर गए और वो अपनी बेटी को देखने लगी

मॉम : “सलोनी.... ओ सलोनी , आज कॉलेज नहीं जाना क्या, देख 10 बजने वाले है , उठ जा बेटी “

इतना कहते हुए उन्होने चादर को खींचा, सलोनी का नंगा सीना उनकी आंखो के सामने आ गया





एक पल के लिए तो वो पलकें झपकना भी भूल गयी

उसकी बेटी का योवन था ही इतना खूबसूरत की उसकी आंखे ही नहीं हट रही थी उनसे

वो भी तो ऐसी ही थी

अपनी जवानी के दिनों में

ऐसी ही योवन से लदी हुई

अल्हड़ सी

जब दूसरी लड़कियो के कच्चे निम्बू उगना शुरू हुए थे

उसके तो मौसम्मी बन चुके थे

अभी सलोनी के भी उसी आकार के थे

पर फिर उसे ध्यान आया की वो वहां क्यो आई है

और अपनी बेटी की इस नंगे सोने की आदत के लिए उसे डांटना भी तो है

किसी दिन इसके पापा ने ऐसे देख लिया तो क्या होगा

नहीं नहीं

ऐसा नहीं होना चाहिए

मुझपर ही बरसेंगे

इसलिए ज्योति ने सलोनी को हिलाया और ज़ोर से आवाज भी दी

“सलोनी....उठ जा....बेशरम ....मैंने मना किया था न, फिर से बिना कपड़ो के सो रही है तू , चल उठ जल्दी से , कोई आ गया तो “

सलोनी अंगड़ाई लेती हुई उठ कर बैठ गयी और घड़ी देखि

चादर उसके उरोजों से ढलक कर नीचे आ गिरि

वो बोली : “उममssss गुड मॉर्निंग मॉम , पापा तो चले गए न , अब कौन आएगा, आप ही तो हो घर पर “

अब वो उसे भला क्या बताती

पापा तो चले गए पर कुछ देर पहले बबलू भी तो आ ही गया था

ज्योति : “तू दिन ब दिन जवान हो रही है और उतनी ही बेशरम भी, मैंने पिछली बार भी कहा था न, की कपड़े पहन कर सोया कर, फिर से तू ऐसे ही...”

मॉम ने सलोनी के चमक रहे बूब्स की तरफ इशारा करते हुए कहा

सलोनी : “मॉम, इट्स ओके, आप और मैं ही तो है न घर पर, वैसे आपने भी तो अंदर कुछ नहीं पहना है, नहाने के बाद तो आप उंडेरगारमेंट्स पहनते ही हो न , आज ऐसे ही क्यो “

ज्योति झेंप गयी अपनी बेटी की बात सुनकर, बात तो वो सही कह रही थी

बस आज बबलू के जाने के बाद , जल्दबाज़ी मे उसने सिर्फ एक कॉटन का गाउन पहन लिया था और उसमे से उसके उभरे हुए निप्पल्स भी दिख रहे दे

उन्ही को देखकर सलोनी ने ये बात बोली थी

मॉम : “बड़ी तेज नजरें हो गयी है तेरी “

सलोनी : “नजरों के साथ-2 कान भी तेज है मेरे....कुछ देर पहले तक तो बहुत आवाजें आ रही थी बाहर से “

सलोनी के मुंह से इतना सुनते ही ज्योति का दिल धक् से रह गया

सलोनी ने उसकी और बबलू की चुदाई की आवाज़े सुन ली थी

है भगवान

कहीं उसने देख भी तो नहीं लिया

नहीं नहीं

ऐसा नहीं हो सकता

अगर ऐसा होता तो इतने इत्मीनान से वो ये सब बोल नहीं रही होती

अपनी माँ के चेहरे पर हवाइयाँ उढ़ते देखकर सलोनी को बहुत मजा आ रहा था

पर वो जानती थी की कितनी लिमिट में बात करनी है

सब कुछ बोलकर वो अपनी माँ को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी

सलोनी : “लगता है पापा ने रात का काम सुबह निपटाया है, वैसे भी उनके आने से पहले तो आप सो ही जाती हो , ऐसे में सिर्फ सुबह का टाइम ही मिल पाता होगा न...”

इतना कहकर सलोनी शरारत भरी मुस्कान के साथ अपनी मॉम को देखने लगी

ज्योति : “बड़ी शेतान हो रही है तू आजकल, रुक तुझे अभी बताती हूँ ....”

पर इस से पहले की वो सलोनी को पकड़ पाती, वो बिस्तर से उठकर नंगी ही भागती हुई बाथरूम मे घुस गयी

जैसा पहले हुआ था

ठीक वैसे ही

और पीछे रह गयी हैरानी से अपनी जवान बेटी को नंगी कुलांचे भरते देखती हुई ज्योति

फिर वो किचन मे आ गयी, सलोनी के लिए नाश्ता बनाने

पर उसका पूरा ध्यान उसी की बात पर था

इसलिए उसने सोच लिया की अब उसे सतर्क रहना होगा

वरना अपनी बेटी के सामने उसकी पोल खुल गयी तो वो कहीं की नहीं रहेगी

सलोनी ने भी उसके बाद कोई और पंगा नहीं लिया अपनी मॉम से

नाश्ता करके वो कॉलेज के लिए निकल गयी

आज उसे श्रुति के साथ मार्केट भी जाना था कॉलेज के बाद

अपने पापा को लुभाने के लिए कुछ सैक्सी कपड़े लेने

उधर शमशेर सिंह जब पुलिस स्टेशन पहुंचा तो उस दूसरी सलोनी को बाहर ही इंतजार करते हुए पाया

उसे देखते ही उसके लंड में तनाव आ गया

वो स्कूल ड्रेस में आई थी

उसे तो पता भी नहीं था की वो स्कूल जाती है

एक स्कर्ट और सफ़ेद शर्ट में वो बला की खूबसूरत लग रही थी





वो सीधा अंदर चला गया और अपने केबिन में जाकर बैठ गया

पीछे -2 सलोनी भी अंदर आ गयी

शमशेर ने उसे बैठने का इशारा किया

तभी एक हवलदार अंदर आया और रजिस्टर पर शमशेर को रात की रिपोर्ट्स दिखाने लगा

शमशेर : “बोलो, अब क्यों आई हो यहाँ , तेरे बापू को छोड़ तो दिया था”

सलोनी भी समझ गयी की हवलदार की वजह से इंस्पेक्टर साहब ऐसे बोल रहे है

कुछ सोचकर वो बोली : “मैं तो एक शिकायत लेकर आई थी साहब, मेरे मोहल्ले में एक लड़का है, जो मुझे आते जाते छेड़ता है, आज स्कूल जाते हुए भी उसने मुझे गंदी बाते बोली और टच भी किया “

शमशेर : “अच्छा ... क्या बोला “

सलोनी इस बात पर सकपका सी गयी

हालांकि वो इस शिकायत के साथ नहीं आई थी

पर ये बात भी सच थी की उसे एक लड़का दिन रात छेड़ता था

इसलिए कुछ न सुझा तो उसने शमशेर के पूछने पर वही बात बोल दी

सलोनी : “वो....वो ....मुझे ...साथ चलने को बोलता है और मुझे हाथ लगाता है ....”

इस बात पर शमशेर के साथ-2 हवलदार भी उसे देखने लगा

शमशेर : “कहाँ ?”

सलोनी : “जी .....जी वो....मेरे ....कूल्हे पर....”

शमशेर को अभी तक लग रहा था की वो ऐसे ही बोल रही है

पर जब उसने इतनी डीटेल में कहा तो उसके चेहरे की सच्चाई देखकर वो समझ गया की वो सच ही बोल रही है

उसके सामने हीरो बनने का ये मौका वो गंवाना नहीं चाहता था
 
इसलिए वो बोला : “चलो फिर, देखते है , कौन तीस मार खा है वो “

इतना कहकर वो उठ खड़ा हुआ और सामने खड़े हवलदार को भी साथ चलने को बोला

हालांकि सलोनी ये नहीं चाहती थी पर अब वो बोलकर खुद ही फंस चुकी थी

पर अंदर ही अंदर उसे खुशी भी हो रही थी की अगर वो लुच्चा पकड़ा गया तो रोज-2 की जिल्लत से तो छुटकारा मिलेगा

इसलिए वो उठी और उनके साथ चल दी

कहाँ तो वो सुबह -2 इंस्पेक्टर साहब से मिलकर उन्हे थेंक्स कहने आई थी कल की चुदाई के लिए और शाम को दोबारा मिलने के लिए

और कहाँ वो इस चक्कर में पड़ गयी

खैर, कुछ ही देर मे शमशेर की जीप उसके मोहल्ले के सामने जाकर रुकी

पुलिस की जीप देखते ही वहां का माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया

और जब शमशेर ने उतरकर वहां के लोगो से उस लड़के के बारे मे पूछा तो उन्होने उसके घर का एड्रैस बताया

जहा पहुँचकर शमशेर ने दरवाजा खुलवाते ही , सलोनी से उसकी पहचान कारवाई और फिर ताबड़तोड़ 8-10 थप्पड़ रसीद कर दिये उसे

और फिर अच्छे से हाथ साफ करने के बाद उसे हवलदार के हवाले करते हुए उसे जेल में डालने का हुक्म दिया

हवलदार उसे लेकर एक ऑटो से पुलिस स्टेशन की तरफ चल दिया क्योंकि शमशेर ने उसे कहा था की वो कुछ देर बाद आएगा पूरी रिपोर्ट लिखकर

उसके बाद वो सलोनी के साथ उसके घर की तरफ चल दिया

जो एक छोटा सा कवार्टर था, जिसमें वो अपने बापू के साथ रहती थी

वो अभी काम पर गया हुआ था

सलोनी और वो अंदर आए और सलोनी ने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया

उसका दिल धड़-2 करके बज रहा था

क्योंकि जो काम वो शाम के लिए सोच रही थी

वो अभी होने वाला था

ये उसने शमशेर सिंह की आंखो में तभी पढ़ लिया था जब उसने हवलदार को जाने के लिए बोला था

स्कर्ट के नीचे पहनी कच्ची पर गीलापन आ चुका था

अंदर से रिस रही चूत के रस ने पूरे कमरे में एक सोंधी सी सुगंध फेला दी थी

जिसे शमशेर ने भी महसूस किया

और जैसे ही वो उसके बेडरूम के अंदर पहुंचा, उसने झट्ट से उसे अपनी तरफ खींचा और उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर उसे चूसने लगा





दोनों अपनी-2 वर्दी में थे

एक स्कूल की और दूसरा पुलिस की

शमशेर : “साली रंडी.....शाम का भी इंतजार नहीं हुआ तुझसे, सुबह- 2 ही आ गयी थी आज थाने में अपनी चूत मरवाने “

बदले में सलोनी ने उसकी पेंट पर हाथ रखकर उसका मोटा लंड पकड़ा और उसे घिसने लगी और बोली : “सर जी ....कल शाम की चुदाई ने मेरे जिस्म को आपका गुलाम बना दिया है, पूरी रात आपके ही बारे में सोचती रही , अब तो दिन हो या रात, बस मुझे यही चाहिए....”

उसके मासूम से इकरारनामे को सुनकर शमशेर और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया और उसने एक ही झटके में उसकी शर्ट और ब्रा निकाल फेंकी

और फिर नीचे की स्कर्ट उसने खुद ही खोल दी , पेंटी को तो शमशेर ने फाड़ ही दिया

अगले ही पल वो उसके सामने जन्मजात नंगी होकर खड़ी थी





वो उसके बूब्स की तुलना अपनी बेटी सलोनी से करने लगा

इसके ज्याद बड़े थे

शायद एक-दो सालों में जो उसने मरवाई है अपने यारों से , उसका नतीजा था

और नीचे की चूत देखकर तो वो मचल सा उठा

वो उसकी बेटी की चूत से थोड़ी ज्यादा फेली हुई थी और उसकी बीबी ज्योति की चूत से बहुत कम

यानि बीच का माल था वो

उसके मुंह में पानी भर आया

आज वो उस कमसिन सी चूत का रस पीना चाहता था

उसके रस को निगलकर अपनी प्यास बुझाना चाहता था

शमशेर ने अपनी वर्दी को उतारकर सम्मान के साथ एक कील पर टांग दिया और बेड पर जा लेटा

और उसे ऊपर बुलाकर अपने चेहरे पर बैठा लिया

नीचे की गरम जीभ जब उसकी चूत में उतरी तो वो सिसिया उठी

शमशेर की लपलपाती जीभ उसकी चूत में कोहराम मचा रही थी

“अहह एसससससssssssss ओहह सर जी ........ अहह ऐसे ही .......उम्म .....आपकी तो जीभ भी मेरे लिए बहुत है .......इसमे भी आपके लंड जितनी गर्मी है .....ऐसे ही अहह करते रहे ....तोsssss ......मैंssssssss ......झड़ जाऊँगी .....अहहssssss ...ओहह मैं तो झड़ रही हूँ सरजी ...... उम्म ....मैं तो गयी ......मैं तो गयी “





और सिर्फ एक मिनट के अंदर ही शमशेर ने उसे निचोड़कर अधमरा सा कर दिया

उसका सारा पानी वो सडप -2 करके पी गया
 
लड़की को उत्तेजित करके काम करवाने का ये उसका पुराना तरीका था

पहले उसे मज़ा दो फिर वो उस से दुगना मज़ा देगी

इस सलोनी ने भी यही किया

वो उठी और शमशेर के लॅंड को अपने हाथ में लेकर उसे सहलाने लगी

उसने मुँह उपर करके उनकी आँखो में देखा और लॅंड के सिरे पर अपनी जीभ से धीरे से छू लिया और उसमें से निकल रही प्रिकम की बूँद को चाट गयी





शमशेर अपने पंजो पर खड़ा हो गया उसकी इस हरकत से

वो उसकी आँखों में देखकर बोली : “सर जी….आज से आप मुझे अपनी बेटी सलोनी समझकर चोदना ….मैं भी आपको पापा ही बोलूँगी…”

भेंन की लोड़ी , सारे हथकंडे जानती थी जबरदस्त चुदाई करवाने के

पिछली बार ही वो जान चुकी थी की सलोनी उनकी बेटी का नाम है, तभी तो इतनी रहमत बरसाकर इंस्पेक्टर साहब ने उसके बापू को जेल से छुड़वाया और उसे भी एक तगड़ी चुदाई का आनंद दिया

पर आज की डिमांड इस बात का प्रमाण था की उसे चुदाई का कितना बड़ा शोंक है

इसके लिए वो दूसरे की बेटी बनकर भी चुदने को तैयार है

शमशेर को भला इस बात से क्या परेशानी हो सकती थी

उसने उसके चेहरे को पकड़ा और अपना लॅंड एक ही बार में अपनी प्यारी मुंहबोली बेटी के मुँह में घुसेड़ कर जोरों से धक्के मारने लगा

सलोनी ने भी अपनी कला का पूरा प्रदर्शन किया और अपने एक्सपीरियन्स का इस्तेमाल करते हुए अपने प्यारे पापा का लॅंड उतनी ही शिद्दत से चूसने लगी जितना एक सग़ी बेटी चूसती





करीब 5 मिनट तक वो उसे चूसती रही और जब शमशेर को लगने लगा की वो झड़ जाएगा तो उसने अपना लॅंड उसके मुँह से निकाल लिया और उसे खड़ा करके अपने आगे सटा कर उसके जिस्म से खेलने लगा

सलोनी के नन्हे बूब्स शमशेर के बड़े हाथो में छुप कर रह जाते जब वो उन्हे निचोड़ता, सहलाता और मसलता…

साथ ही साथ वो पीछे से अपना खड़ा लॅंड उसकी गांड की दरारों में फँसा कर रगड़ भी रहा था

आज तक सलोनी ने अपनी गांड नहीं मरवाई थी किसी से

पर सोच लिया था की अपने इस पापा से ज़रूर उसका उद्घाटन करवाएगी

पर वो किसी और दिन

आज तो उसकी चूत फड़फड़ा रही थी

अपने पापा का लॅंड लेने के लिए

इसलिए जब नीचे झुककर शमशेर ने उसकी गर्दन पर अपने होंठ रखे और उसके निप्पल्स को अपनी उंगलियों से मसला तो वो तड़प उठी और ज़ोर से चिल्ला भी पड़ी

“ओह पापा……..उम्म्म्ममममममम कितना तड़पाते हो आप….अपनी बेटी को……मेरा तो हक बनता है ना पापा…..आपका ये मोटा लॅंड लेने का…अपनी चूत में ….सबसे पहला हक़ मेरा है इसपर पापा….मुझे ये चाहिए…..आपकी सलोनी को आपका ये मोटा लॅंड अपनी चूत में चाहिए पापा….प्लीज़ डाल दो ना…..मेरे प्यारे पापा….मेरे अच्छे पापा….प्लीज़ ना ….पपाााआआआआआआअ….”

आख़िरी का पापा तो उसकी हलक में ही अटका रह गया…

शमशेर ने नीचे से टटोल कर उसकी चूत ढूँढ निकाली थी और अपना खड़ा लॅंड एक ही बार में उसकी रस टपकाती चूत में पिरो कर उसे हवा में टाँग सा दिया

एक पल के लिए वो पूरी हवा में थी

शमशेर का लॅंड उसकी चूत में

और उसके लॅंड की ताक़त से वो हवा में लटक कर उसे अंदर तक महसूस कर पा रही थी

ये एक ऐसा एंगल था की उसकी चूत का आख़िरी धागा तक खुल चुका था इस से

8 इंच का मोटा लॅंड उसकी कमसिन चूत को पूरा भेद कर अंदर तक घुस गया था

एक पल के लिए तो जैसे समय ठहर सा गया

और फिर गहरी साँस छोड़ते हुए शमशेर की आवाज़ ठीक उसके कानो के पास आई :

“ओह मेरी बच्ची …..मेरी सलोनी…..मेरी जान……ले….पूरा फील कर अपने पापा का लॅंड ….अपनी चूत में मेरी रंडी बेटी ….”

इतना कहकर उसने सलोनी को ज़मीन पर उतारा और धीरे -2 मज़े ले-लेकर उसे चोदने लगा

खड़ा हुआ लॅंड पूरा अंदर तक जाता और दीवारों पर रगड़ लेकर वापिस बाहर निकलता

उसके हर धक्के से उसके नन्हे बूब्स झूल कर रह जाते

सच में ऐसी चुदाई की तो उसने कल्पना भी नही की थी

जो उसे ये इंस्पेक्टर साहब ओह्ह्ह सॉरी मुंहबोले पापा दे रहे थे





करीब 10 मिनट तक खड़े -2 से उसे चोदने के बाद शमशेर थक सा गया और सीधा जाकर सोफे पर लेट गया

सलोनी भी किसी खरगोश की तरह उछल कर उस भीगे लॅंड पर फिर से सवार हो गयी और एक बार फिर से उस लॅंड का मज़ा लेने लगी

ये उसकी फ़ेवरेट पोज़िशन थी

उपर बैठकर वो अपनी मर्ज़ी से पूरा उछल कूद कर सकती थी

पर शमशेर उसे ये सब करने दे तभी तो

उसने सलोनी के बूब्स को मुँह में भरा और उसे चूसते हुए उसे चोदने लगा

और इस बार चोदने की स्पीड भी 2x थी

इसलिए हर झटके से उसका मुम्मा उछल कर शमशेर के मुँह के और अंदर घुस जाता जिसे वो बड़े चाव से चूसता .चुभलता और निचोड़कर पी जाता



 
अब तक सलोनी 3 बार झड़ चुकी थी

पहले तो सिर्फ़ उनके मुँह से

दूसरी बार खड़े-2 पीछे से लॅंड अंदर लेने से

और तीसरी बार अब, सोफे पर

और शमशेर का लॅंड था की झड़ने का नाम ही नही ले रहा था

ऐसा क्या खाकर आता है ये शमशेर जो इतना सख़्त लॅंड है अभी तक इनका

ये वो एहसास होता है जब सामने वाले की उम्र , शक्ल, पर्सनॅलिटी कुछ भी मायने नही रखती

सिर्फ़ चूत में जाता हुआ लॅंड और उस से मिल रहा आनंद ही मायने रखता है

अब चुदाई अपने आख़िरी मुकाम पर पहुँच चुकी थी

इसलिए शमशेर ने उसे गोद में उठाए हुए ही लेजाकर बेड पर पटक दिया और उसे घोड़ी बना कर पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डालकर सलोनी के बाल पकड़कर उसे घोड़ी की तरह जोरों से चोदने लगा

“ऑहहहह पापा…..क्या कमाल का….अहहsssss ….चोदते हो आप……उम्म्म्मममम पापा……..और ज़ोर से चोदो ना…..पापा…..अगली बार प्रॉमिस करती हु पापा , अपनी गांड में डलवाऊँगी आपका ये लंड"





उसकी कसी हुई गांड और उसके भूरे से छेद को वो अपनी आँखों से देख भी सकता था और उसे अपनी उँगलियों से महसूस भी कर सकता था

उसने अपना अंगूठा गीला किया और उसे उसकी गांड के छेद पर लगाकर अंदर डाल दिया

वो एकदम से चिहुंक उठी

शमशेर का अंगूठा पिस्स सा गया उसकी गांड के ग्राइंडर में जब उसने उसे सिकोड़कर अंदर खींचा

पर साथ ही साथ उसकी उत्तेजना एक दूसरे ही शिखर पर पहुँच गयी

जहाँ तक आज से पहले नहीं गयी थी

"ओह्ह्ह्ह पापा स्स्सस्स्स्स , मजा आ रहा है ........ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पापा ऐसे ही। ....उ ह्ह्ह्हह्ह , मसलते रहो ...... आह्ह्हह्ह्ह्ह और चोदते रहो "

शमशेर बड़ा घाघ टाइप का इंसान था

उसने गांड के छेद को टटोल कर देख लिया था की यहाँ अभी तक लंड नहीं घुसा है किसी का , यानी सलोनी सही कह रही थी

वो चाहता तो अभी अपना लंड निकाल कर इसकी गांड में डाल देता

पर वो कहीं भागी तो नहीं जा रही

उसका उद्घाटन वो वो आराम से करेगा

और किसी ढंग की जगह पर

इस छोटे से कमरे में नहीं

इसलिए अभी के लिए वो उसकी चूत से ही काम चला लेगा

जो इस वक़्त काफी रस बरसा रही थी

एक बार फिर से पोजीशन चेंज करने का समय आ चूका था

और यही शमशेर को पसंद भी था

अलग-२ पोज़ में चुदाई करना

उसने सलोनी को बीएड पर लेटने को कहा और उसके लेटते ही वो उसकी जाँघे फैला कर उसके अंदर समां गया

अब वो भी झड़ने ही वाला था

इसलिए आखिरी के 10 -15 झटके वो जोरों से मारने लगा

जिसका अंदाजा सलोनी को भी हो गया

इस बार वो सारा रास अंदर तक फील करना चाहती थी

इसलिए स्पीड बढ़ते ही वो बोल उठी

"पापा। .........आआह्ह्ह्हह आप अंदर ही निकालना आज अपना रस....... अह्ह्ह्हह अपनी बेटी की चूत में पापा ...... आज मैं आपका गर्म रास अपनी चूत में महसूस करना चाहती हूँ "

अपनी मुंहबोली बिटिया की इस मासूम सी रिक्वेस्ट को भला वो कैसे टाल सकता था

उसने दुगने जोश से उसे चोदना शुरू कर दिया और जल्द ही वो झड़ने के करीब पहुँच गया

और टूटे-फूटे शब्दों का सहारा लेकर उसने अपने लॅंड से निकली बारिश उसकी चूत में करनी शुरू कर दी

“उम्म्म्महह बेटी……ये ले…….मेरा पूरा लॅंड और उसका पानी…..तेरी चूत में ..बन जा मेरे बच्चे की माँ …अहह”

अपने पापा के मुँह से निकले आख़िरी वाक़या ने तो उसे उत्तेजना के उस शिखर पर पहुँचा दिया

और उसी के साथ वो भी रिकार्ड चोथी बार झड़ने लगी

और आनंद के गोते खाती हुई, दोहरी होती हुई वो अपने पापा के लॅंड का पानी पूरा अंदर लेते हुए झड़ने लगी.





उसके बाद करीब 5 मिनट तक उसके उपर बेहोशी की अवस्था में पड़ा रहा

और जब उसे होश आया तो सलोनी उसे अपनी बाहों में लेकर चूम चाट रही थी

अपनी तरफ से थॅंक्स बोलने का उसके पास और कोई तरीका नही था

सिवाए अपने नंगे जिस्म के

इसलिए उसी को रगदकर वो उनके प्रति अपना मान प्रकट कर रही थी

कुछ देर बाद शमशेर अपनी वर्दी पहन कर पोलीस स्टेशन के लिए निकल गया

वो चाहता तो एक बार और उसे चोद सकता था

क्योंकि अपना जिस्म रगदकर सलोनी ने उसके लॅंड को फिर से खड़ा तो कर ही दिया था

पर वो अपनी एनर्जी रात के लिए बचा कर रखना चाहता था

अपनी सग़ी बेटी के लिए

उसका भी तो हक़ था उसपर

और वैसे भी आज जो अध्याय वो उसे पढ़ाने वाला था, उसमे उसे खुद भी झड़ना पड़ेगा और उसकी बेटी को भी

सारा प्लान पहले से उसके दिमाग़ में बन चुका था

इसलिए इस सलोनी से अगली बार जल्दी मिलने का वादा करके वो बाहर निकल गया

अब तो रात का इंतजार था उसे

अपनी बेटी के साथ मज़े लेने की प्रबलता और भी ज़्यादा गहरी होती जा रही थी उसकी.
 
कुछ देर बाद शमशेर अपनी वर्दी पहन कर पोलीस स्टेशन के लिए निकल गया,वो चाहता तो एक बार और उसे चोद सकता था,क्योंकि अपना जिस्म रगड़कर सलोनी ने उसके लॅंड को फिर से खड़ा तो कर ही दिया था,पर वो अपनी एनर्जी रात के लिए बचा कर रखना चाहता था,अपनी सग़ी बेटी के लिए,उसका भी तो हक़ था उसपर

और वैसे भी आज जो अध्याय वो उसे पढ़ाने वाला था, उसमे उसे खुद भी झड़ना पड़ेगा और उसकी बेटी को भी,सारा प्लान पहले से उसके दिमाग़ में बन चुका था

इसलिए इस सलोनी से अगली बार जल्दी मिलने का वादा करके वो बाहर निकल गया,अब तो रात का इंतजार था उसे ,अपनी बेटी के साथ मज़े लेने की प्रबलता और भी ज़्यादा गहरी होती जा रही थी उसकी.

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अब आगे

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वहां दूसरी तरफ सलोनी और श्रुति कॉलेज के बाद शॉपिंग के लिए निकल गये

श्रुति को सलोनी ने जब रास्ते मे कल रात वाली बाते बताई तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया

वो तो सिर्फ़ इमेजीन ही कर सकती थी की सलोनी को कितना मज़ा आया होगा

वो सब सुनाते हुए जिस तरह से चटखारे ले लेकर सलोनी वो सब बोल रही थी, उसके मुँह से लार निकल कर बाहर गिर रही थी

इतनी उत्तेजना का संचार हो रहा था उसमे वो सब बाते फिर से एक बार सोचकर

उसका ये हाल था तो सोचो श्रुति क्या हाल हो रहा होगा

उसकी तो चूत सुलगने लगी वो सब सुनकर

और ना चाहते हुए भी वो सलोनी के पापा के मोटे लॅंड को बंद आँखो से देखने लगी

जो एकदम खड़ा था, काला कलूटा, उसकी चूत में जाने को तैयार

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सलोनी अपनी शरारती आँखो से उसे कसमसाते हुए देख रही थी

और उसे ये देखकर मज़ा भी आ रहा था

और कहीं ना कहीं उसकी चूत पर भी चींटियां रेंगने लगी थी

इस वक़्त दोनो के चेहरे पर वासना टपक रही थी

मौका मिलता तो वो एक दूसरे को वहीँ चबा जाती

पर अभी ऐसा माहौल नही था

वो दोनो ऑटो में थी और ऑटो वाले की नज़रें उन दोनो के जवान जिस्मों पर ही थी

कुछ देर बाद वो दोनो एक माल में पहुँचे और सीधा वॉशरूम में घुस गए

मूतने से ज़्यादा उन्हे अपनी प्यास बुझाने की चिंता थी

दोनो लगभग भागते हुए एक ही केबिन में पहुँच गये

और अंदर जाते ही दोनो एक दूसरे पर टूट पड़े

जो लार उनके मुँह के अंदर थी वो एक दूसरे को सप्लाइ करने लगे वो

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आज श्रुति ज़्यादा उत्तेजित थी

होती भी क्यो नही

उसके जहन में सलोनी के पापा का लॅंड जो था

उसने कुछ देर तक सलोनी के रसीले होंठ चूसे

उसके बाद उसकी टी शर्ट उठा कर ब्रा को नीचे किया

फिर उसकी नारंगियो को बाहर निकाल कर उन्हे चूसने लगी

सलोनी : “आह्ह्ह्हहहह……….साली कमीनी…….थोड़ा धीरे कर…..पापा ने देख लिया तो मेरी पिटाई कर देंगे….”

श्रुति : “यानी आज तू अपने बूब्स भी उन्हे दिखाने वाली है….”

उसने कुछ जवाब नही दिया और उसके गीले होंठ फिर से अपने निप्पल्स पर लगा दिए और उसके रेशमी बालों को सहलाने लगी

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और दूसरे हाथ से उसके लटक रहे मुम्मे को अपने हाथ में लेकर दबाने लगी

तभी बाहर से एक लड़कियों का ग्रूप बाथरूम में आ गया

और सभी एक-2 करके अंदर के केबिन्स में जाने लगी

सब खाली थे सिवाए उनके केबिन के

बाहर लाइन लग चुकी थी

इसलिए उन्होने बाहर निकलना ही उचित समझा

पर एक के बाद एक जब दोनो बाहर निकली तो बाकी सभी के चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान आ गयी…

ये सब आजकल नॉर्मल जो होता जा रहा था, इसलिए किसी को हैरानी नही हुई..

बाहर निकलकर दोनो ने एक दूसरे को देखा और खिल खिलाकर हंस दिए

आज की शाम रंगीन होने वाली थी उनकी

उसके बाद दोनो एक गारमेंट स्टोर में घुस गये और अपने लिए ड्रेसेस देखने लगे

सलोनी जान बूझकर टाइट टी शर्ट्स, शॉर्ट्स और टेंक टॉप्स ले रही थी

क्योंकि उसे पता था जितना वो पापा को दिखाएगी,उतना ही वो उन्हे रिझाएगी

और वैसे भी ऐसे सैक्सी कपड़े पहनने का मौका उसे आज तक तो मिला नही था

पर अब जो लिबर्टी उसे मिली थी

पापा के उसके प्रति झुकाव की वजह से

वो उसका पूरा फायदा उठाना चाहती थी

हालाँकि अंदर से उसे डर भी लग रहा था की वो ऐसे रिवीलिंग कपड़े कैसे पहनेगी

मॉम भी तो होती है घर पर

लेकिन अब तो मॉम का एक राज उसके हाथ लग चुका था

उसने सोच लिया की मॉम ज़्यादा चूं चपड़ करेगी तो उन्हे सही से समझा देगी

की वो अपने मज़े करे और उसे खुद के मज़े करने दे

पर अभी तो उन सब कपड़ो को घर लेजाकर ट्राइ करने का समय था

इसलिए श्रुति से विदा लेकर वो घर की तरफ चल दी

हालाँकि श्रुति का मन अभी भरा नही था

उसकी प्यास जो जगा दी थी सलोनी ने

पर अभी के लिए कोई और चारा भी तो नही था

पर सलोनी ने मन ही मन में सोच लिया था की अपनी सहेली का भी जल्द कोई जुगाड़ करवाएगी वो पापा के साथ

वो घर पहुँची तो रात के 8 बजने वाले थे

वो पापा और मम्मी को पहले से बता कर गयी थी की आज कुछ शॉपिंग करनी है

जब वो बिल्डिंग के नीचे पहुँची तो पीछे-2 पापा की जीप भी पहुँच गयी

सलोनी ने उन्हे देखा और उनके गले लग गयी

हालाँकि ऐसा वो पहले नही करती थी

पर अब से उसने सोच लिया था की पापा को रोज ऐसे ही ग्रीट करेगी

इसी बहाने वो अपने नर्म बूब्स उनके कड़क जिस्म पर रगड़ भी तो सकती है

उन्हे तैयार करने के लिए

पापा ने उसके हाथ से शॉपिंग बैग्स ले लिए और दोनो उपर चल दिए

लिफ्ट में जब शमशेर उसके बैग में झाँककर देखने लगा तो सलोनी ने उनके हाथ पर हल्की चपत लगाई और बोली

“पापा, इट्स बेड मैनर्स, लड़कियो का सामान नही देखते ऐसे…”

पर तब तक उसके हाथ में सलोनी की ब्लैक कलर की पेंटी आ चुकी थी,

इंपॉर्टेंट कपड़े की

नर्म मुलायम सी

लेस लगी हुई वो ब्लैक पेंटी इतनी सैक्सी लग रही थी

वो उसकी बेटी के नंगे जिस्म पर कैसे लगेगी वो इमेजीन करने लगा

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सलोनी ने उन्हे डाँटते हुए वो पेंटी उनके हाथ से ली और अंदर रख दी

उसके बाद दोनो मुस्कुरा दिए
 
शमशेर : “वॉव ….ऐसे कपड़े तो बड़े अच्छे लगेंगे तुझ पर….”

सलोनी आवेश में बोल गयी : “हाँ ….देख लेना रात को…”

फिर अपनी ही बात पर वो शरमा कर रह गयी

शमशेर समझ गया की वो पहले से तैयार है रात के लिए

और वैसे भी आज का चैप्टर कुछ और एडवांस होने वाला था

उपर पहुँचकर सलोनी सीधा अपने रूम में गयी और दरवाजा बंद करके सारे कपड़े एक-2 करके पहन कर देखे

स्कर्ट्स, टी शर्ट्स, ब्रा और पेंटी

सब उसके उपर कयामत ढा रहे थे

अभी के लिए उसने एक टी शर्ट और शार्ट / निक्कर, जो उसके घुटनो से भी उपर आ रही थी, पहन ली

उसकी गठीली जाँघे उसमें दूर से ही चमक रही थी

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और जब वो कपड़े पहन कर बाहर गयी तो सबसे पहले उसे मॉम ने देखा

और उसे देखते ही वो एकदम से उसपर बरस ही पड़ी

“सलोनी….ये क्या पहन आई…तुझे पता है ना पापा को ये सब पसंद नही है….और ये…ये तो मुझे भी पसंद नही आ रहा , इतने छोटे कपड़े भी भला कोई पहनता है…चल जल्दी से इन्हे चेंज करके आ, और कल उन्हे वापिस करके आना मार्केट में …ऐसे कपड़े नही पहनेगी तू…समझी…”

बेचारी सलोनी का मुँह लटक कर रह गया

और तभी उसकी रक्षा के लिए पापा प्रकट हो गये

जो अपनी लूँगी की गाँठ बाँधते हुए कमरे से निकले और सलोनी को देखकर अपने होंठो पर जीभ फेरने लगे

और फिर ज्योति की तरफ घूमे और उसपर ही बरस पड़े वो

“क्यो, क्या दिक्कत है इन कपड़ो में ….इतनी प्यारी लग रही है हमारी बेटी इसमें , मैने ही परमिशन दी है इसे अपनी मर्ज़ी के कपड़े पहनने की, और तुम अपने काम से काम रखो, समझी…”

कुछ देर पहले जो मॉम मुझे डाँटकर चौड़ी हो रही थी , खुद डांट खा रही थी मेरे प्यारे पापा से

मैं मंद-2 मुस्कुरा रही थी

अपने पापा की मदद पाकर

और मॉम हैरान हो रही थी

की पापा एकदम से ऐसे क्यो बदल गये है

कल भी शायद उन्होने मेरी शॉर्ट देख ली थी

पर उतना नही बोल पाई

पर आज जब बोली तो डांट पड़ गयी

फिर उसने मन में सोचा की जब इसके पापा को ही ये सही लग रहा है तो मुझे भला क्या तकलीफ़ होगी

वैसे भी वो तो उसके भले के लिए ही बोल रही थी

ताकि उसके पापा उसे ऐसे कपड़ो में देखकर ना डांटे

इसलिए वो चुपचाप किचन में गयी और खाना बनाने की तैयारी करने लगी

तब तक शमशेर रोज की तरह अपनी लूँगी बनियान में अपनी सीट पर जाकर बैठ गया

और पेग बनाने लगा

आज सलोनी उसके लिए पानी और सलाद खुद लेकर आई

उसे दूर से अपनी तरफ मटक कर आते देखकर उसकी लूँगी में हलचल सी होने लगी और उसका लॅंड धीरे-2 उठकर उसके ग्लास को टच करने लगा जो अपनी नाभि के पास उसके हाथ में था

सलोनी उसके पास आई और झुक कर बोली : “पापा, कुछ और चाहिए…?”

जवाब मे शमशेर ने उसकी टी शर्ट से झांकते कबूतरों को देखा और मुस्कुरा दिया

सलोनी भी एक नशीली मुस्कान के साथ अपनी गांड मटकाती हुई अपने रूम में चली गयी

उसे अब इंतजार था अपनी माँ के सोने का

क्योंकि खाना बनाने के बाद उनसे खड़ा भी नही रहा जाता, वो सीधा जाकर सो जाती थी

पर आज उनका भी मूड कुछ और ही था

पिछले 2-3 दिनों से अपने पति की बेरूख़ी उसे भी दिखाई दे रही थी

उसे क्या पता था की बाहर एक दूसरी सलोनी की कसी हुई चूत उसके पति की प्यास बुझा रही है

और घर में उसकी खुद की बेटी उसकी वाइल्ड फैंटेसीज को पूरा कर रही है

हालाँकि वो खुद भी बबलू के साथ मज़े ले रही थी

पर अपने पति को अपनी चूत से बाँधे रखने का सपना हर औरत का होता है

ख़ासकर जब उसका पति ठरकी हो

और ठरकी होने के बाद भी वो उसकी तरफ ना देखे तो मन में सवाल तो उठते ही है

अब उसे दूसरी बातों का अंदाज़ा तो नही था

उसे अपनी ही ग़लती लग रही थी की शायद वो जल्दी सो जाती है इसलिए उसका पति चाहकर भी उसकी ले नही पा रहा है

पर आज वो ऐसा नही करेगी

अपने पति को खुश करके रहेगी

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उसने जल्दी से खाना बनाया और बाहर आकर शमशेर के साथ बैठकर टीवी देखने लगी

शमशेर भी हैरान था की वो वहाँ आकर क्यों बैठ गयी है

अब तक तो उसे खाना खाकर अपने रूम में चले जाना चाहिए था, सोने के लिए

पर वो कुछ ना बोला

ज्योति धीरे-2 उसके करीब खिसक आई और अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया और उसे सहलाने लगी

अब शमशेर को समझ आने लगा था की वो क्यों बैठी है उसके पास

वो फिर भी चुप रहा

क्योंकि वो भी देखना चाहता था की वो अपनी बेटी के जागते रहने के बावजूद किस हद तक जाती है

धीरे-2 ज्योति का हाथ उसके लॅंड पर पहुँच गया, जो पहले से ही अकड़ कर खड़ा हो चुका था

और वो उसे लुंगी के उपर से ही रगड़ने लगी

हाथ उपर नीचे करते हुए उसकी साँसे तेज़ी से चल रही थी

वो अपने बूब्स को शमशेर की बाजुओं पर रगड़ रही थी, उसके मोटे निप्पल्स शमशेर को किसी इंजेक्शन की तरह चुभ रहे थे

फिर अचानक ज्योति ने उसके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ किया और उसे एक रसीला चुम्बन दे डाला

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एक पल के लिए ही सही

उसके मुँह की सारी चाशनी शमशेर के मुँह में ट्रान्स्फर हो गयी

ये उसे बताने के लिए था की वो कितनी उत्तेजित है

अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार है

वो कसमसाते हुए बोली : “चलो ना जानू….रूम में ….मैं पूरी गीली हो चुकी हूँ ….”

शमशेर भी बड़ा घाघ इंसान था

वो बोला : “अभी रूको, थोड़ा सरूर तो बनने दो, फिर चलते है…”

बेचारी का दिल टूट सा गया

क्योंकि आज तक उसने अपनी तरफ से कभी पहल नही की थी

हमेशा शमशेर ही उसके जिस्म को रोंदकर चला जाता था

और आज जब उसने पहल की तो वो भाव खा रहा था

पर वो कर भी क्या सकती थी

सलोनी घर पर ही थी

उसके बाहर आने का डर भी था वरना अभी तक वहीं उसके लॅंड पर बैठ चुकी होती वो

वो अपने हाथ से उसके लंड को सहलाती रही ताकि उसकी और शमशेर की उत्तेजना कायम रहे

शमशेर के दिमाग़ मे कुछ और ही चल रहा था

उसने अपने खड़े हुए लॅंड को धीरे-2 लूँगी से बाहर निकल दिया और अपनी बीबी के हाथ में अपना नंगा लॅंड दे दिया

वो एकदम से घबरा गयी और सलोनी के रूम की तरफ देखने लगी

वो फिर से गिड़गिडाई : “प्लीज़ यहाँ नही….सलोनी घर पर ही है, कभी भी बाहर आ सकती है, वो देख लेगी तो क्या सोचेगी हमारे बारे में , अंदर चलो ना, आज आपको खुश कर दूँगी अच्छे से…”

वो अपने होंठो पर जीभ फेरकर बोल रही थी, यानी उसके लॅंड को खुद ही चूसने का न्योता दे रही थी वो

शमशेर : “देख लेगी तो देखने दे, उसकी वजह से मैं अपनी मर्ज़ी का काम छुपकर नही कर सकता, तू उसकी फ़िक्र ना कर, वो आएगी तो दूर से ही देख लूँगा मैं , तू अभी के लिए यहाँ आ”

इतना कहकर उसने ज्योति के सिर को पकड़ कर अपने लॅंड की तरफ झुका दिया और अपना लॅंड उसके रसीले होंठो में फँसा कर एक जोरदार झटका दिया

शमसेर का लंड सरसराता हुआ उसके मुंह में घुसता चला गया

बेचारी की हालत खराब हो गयी

पर अपने पति की बात वो टाल नही पाई

उसके गुस्से के बारे में वो अच्छे से जानती थी

अभी कुछ दिन पहले ही इसी ड्रॉयिंग रूम में उसे कुतिया बना कर चोदा था उन्होने

और जब वो कह रहे है की वो दूर से सलोनी को देख लेंगे तो ये उनकी प्राब्लम है अब

वैसे भी वो काफ़ी गीली हो चुकी थी

लॅंड की महक ने उसे और भी कमजोर कर दिया

और एक अलग सा रोमांच भी उत्पन हो गया था उसके शरीर में

अपनी बेटी के जागते हुए वो ऐसा पहली बार कर रही थी

एकदम रंडी वाला एहसास हो रहा था उसे

इसलिए उसने शमशेर के लॅंड को अपने हाथ में पकड़ा और उसे जोरों से चूसने लगी

आज तक इतनी ज़ोर से उसे कभी नही चूसा था उसने

इसलिए शमशेर भी बेचारा उसके सर को कंट्रोल करने का प्रयास करने लगा

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और इसी बीच सलोनी अपने रूम से बाहर आई

उसे तो अंदाज़ा भी नही था की बाहर उसके माँ बाप क्या गुल खिला रहे है
 
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