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वह बड़ी दिलचस्पी से हिना को निहार रहा था ।फिर उसने अपना फन फर्श पर रखा और बड़ी तेजी से सरसराता हुआ एक तरफ चला और यही वक्त था जब उस सांप पर काबू पाया जा सकता था ।कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था, हिना...एक लड़की... ऐसा कर गुजरेगी। शायद इसका अंदाजा उस सांप को भी नहीं था कि हिना किसी चील की तरह उस पर झपटेगी और उसे दुम से पकड़ कर उठा लेगी और उसे इतना मौका भी नहीं देगी कि वो पलट कर उसके हाथ पर काट सके |हिना ने पलक झपकते ही उसकी दुम पकड़ कर उसे उठाया और एक खास अंदाज से झटका दिया। इस झटके ने उसका जोड़-तोड़ खोल दिया। वो पलट कर वार करने के काबिल ही न रहा। हिना ने बड़ी फुर्ती से सांप को फर्श पर पटका औ अपना जूता उसके फन पर रखकर उसे बड़ी बेदर्दी से रगड़ दिया ।सांप में 'जोड़-तोड़ टूटने के बाद जो रही-सही जान थी, वह फन कुचलने के साथ ही निकल गई। फिर हिना ने इस 'नर-सर्प' को दुम से पकड़ कर उठा लिया और बड़े इत्मीनान के साथ दरवाजे की तरफ बढ़ी |लड़कियां फटी-फटी आंखों से उसे देख रही थीं। हिना जब दरवाजे के निकट पहुंची तो लड़कियां चीखती हुई भागीं। इस बीच पूरा स्कूल ही खाली हो चुका था। लड़कियां क्लासें छोड़ मैदान में इकट्ठी हो चुकी थीं प्रिन्सिपल भी हांफती-कांपती पहुंच गई थी और जब उन्होंने हिना के हाथ में सांप देखा, जिसे वह रस्सी की तरह लहराती हुई ला रही थी..तो वह तो जैसे सकते में ही आ गई।
हिना के इस कारनामे पर उन्हें यकीन न आया...लेकिन जो कुछ था उनके सामने था। वह जो देख रही थी उसे झुठला भी तो नहीं सकती थी।हिना पहले ही पूरे कालेज में चाहे जाने वाली लड़की थी. इस घटना ने उसे प्रियता के शिखर पहुंचा दिया। साथ ही यह भी हुआ कि कुछ लड़कियां उससे डरने भी लगी कि कभी-कभी उन्हें हिना की आंखों में एक रहस्मयी-सी चमक देखने को मिल जाती थी।फिर एक और घटना घटी और यह हिना के जन्मदिन से कुछ ही दिन पहले की बात है-दिलदार और उसकी बीवी सरवारी इस बंगले के पुराने नौकर थे। उनकी एक बेटी थी सितारा...और भी बच्चे थे, लेकिन यह सितारा हिना की हमउम्र थी। सितारा एक शालीन स्वभाव व मधुर व्यवहार वाली लड़की थी। हिना उसे बहुत पसन्द करती थी। वह सितारा को नौकरानी कम, सहेली ज्यादा समझती थी।इस बंगले के पिछवाड़े, दीवार पर रात की रानी की बेल चढ़ी हुई थी। वह खासी घनी थी और रात को उसकी महक पूरे बंगले में फैल जाती थी। बंगले के पिछवाड़े एक खूबसूरत लॉन और उसमें चारों तरफ फूलों
के पौधे लगे हुए थे। लॉन में मखमली घास उगी हुई थी ।चांदनी रात में इस घास पर हिना को टहलने का बड़ा शौक था। उसके साथ सितारा भी होती थी। दोनों टहलती हुई दुनिया जहान की बामें किया करती थीं। सितारा आठवीं पास करके घर बैठ गई थी, जबकि हिना की पढ़ाई जारी थी। हिना चाहती थी कि सितारा भी आगे बढ़े, लेकिन उसके मां-बाप की सोच थी कि अगर वह ज्यादा पढ़-लिख गई तो फिर बिरादरी में उसके लिए वर ढूंढ पाना मुश्किल हो जाएगा ! सो सितारा की पढ़ाई छुड़ा दी गई और उसने हिना का काम-काज संभाल लिया |बहरहाल, इस शाम सितारा अपने क्वार्टर से निकल कर बंगले की तरफ बढ़ी तो अचानक उसकी नजर 'रात की रानी' पर पड़ी। उसकी जड़ में उसे एक सुनहरा चमकीला सांप नजर आया। वो सरसराता हुआ बेल पर चढ़ रहा था सांप देखकर वह सरपट भागी। उसकी मां सरवरी, किचन में चाय बना रही थी, भागकर किचन में पहुंची और मां को बताया-"अम्मा...अम्मा...रात की रानी पर सांप... ।'"
"हें, सांप...।" चूल्हे पर से केतली उतारती सरवरी का हाथ कांपा-"अरी, यह क्या कर रही है तू..।"
"सांप, अम्मा ! सांप... | मैंने खुद देखा है...।'
' ''अच्छा, चल आ..मेरे साथ...।” सरवरी चाय छोड़कर बाहर जाने लगी।"अम्मा..अब्बा को साथ ले चलो...मुझे डर लगता है।
''तू आ तो...तेरा बाप कौन-सा तीसमार खां है, उसे तो कुत्ते कीशक्ल देखकर कंपकंपी आती है।" सरवरी उसका हाथ पकड़ते हुए बोली-"आ तू मेरे साथ...।'
'जब मां-बेटी दोनों बाहर निकलकर पिछवाड़े गईं और उन्होंने 'रात की रानी' पर नजर दौड़ाई तो वहां उन्हें कोई सांप नजर नहीं आया...अलबत्ता एक अजीब-सी खुशबू जरूर फैली हुई थी ओर यह खुशबू ‘रात की रानी' की खुशबू से अलग थी ।पर फिर...वही सांप सरवरी को भी दिखाई दे गया। सुनहरे रंग का वह सांप अब 'रात की रानी' के पत्तों में सरसरा रहा था। सांप देख वह बंगले से किसी को बुलाने के लिए भागी। सामने ही अपना शौहर दिलदार नजर आया। सरवरी उसके साथ फौरन वापिस गई। लेकिन अब वो सांप वहां से गायब हो चुका था ।हां...वहां. वह अनूठी खुशबू अब भी फैली हुई थी।और फिर..यू वह सुनहरा सांप कभी एक नौकर को और कभी दूसरे नौकर को और विभिनन जगहों पर दिखाई देता रहा। ड्राइवर महमूद उसे देखकर अपने क्वार्टर से लाठी निकार कर लाया। लेकिन अब वहां सांप नहीं था। महमूद ने उस सांप को इधर-उधर तलाशा भी...पौधों और पत्तों में देखा, लेकिन वो कहीं नजर नहीं आया। अलबत्ता एक तेज खुशबू वहां जरूर फैली हुई थी।हिना का कमरा 'रात की रानी' के उस पौधे के ऐन सामने था। अगर उसके कमरे के पर्दे हटे हुए हों तो रात की रानी' को वहां से साफ-स्पष्ट देखा जा सकता था। सांप दिखाई देने की खबर अभी तक हिना को नहीं दी गई थी। कोई खास वजह नहीं, बस उसे एक लड़की । समझ कर ही उसे इस बारे में कुछ नहीं बताया गया था कि कहीं 'सांप निकलने की खबर सुनकर वह डर-वर न जाए। इन नौकर-चाकरों को भला यह बात कहां मालूम थी कि हिना सांपों से डरने वाली नहीं, बल्कि उन्हें डराने वाली थी।फिर एक शाम इस सुनहरे सांप पर समीर राय की भी नजर पड़ गई।उसने गेट पर मौजूद गार्डों को बुलवा भेजा...खुद इस सांप पर नजर रखी। पर फिर जैसे ही गार्ड पिछवाड़े पहुंचे और उन्हें सांप के बारे में बताने के लिए समीर राय की जरा जरन सांप पर से हटी और उसने दो बारा 'रात की रानी' की तरफ देखा तो सांप अपनी जगह से गायब था ।गार्डों ने दूसरे नौकरों के साथ मिलकर पूरा बगीचा छान मारा। एक-एक पत्ता टटोल लिया मगर वह सुनहरा सांप फिर कहीं नहीं मिला |सांप गायब था और एक अनूठी-सी मादक खुशबू मौजूद थी।
घर के हर प्राणी ने उस सुनहरे सांप को देखा था। अगर नहीं देखा था तो सिर्फ हिना ने नहीं देखा था ।सुनहरा सांप देखकर समीर राय का खौफजदा होने की हद तक चिन्तित हो उठना स्वाभाविक था। वह हिना के बचपन की कहानी से वाकिफ था। हिना ने वे तमाम बातें जो उसे अपने बारे में याद थीं...सब अपने अब्बू को सुना डाली थीं, हिना खूबसूरत थी तो जहीन भी बहुत थी। उसका दिमाग और उसकी याददाश्त बहुत तेज थी। वह एक ही नजर में बहुत-सी बातों को समझ लिया करती थी।समीर राय ने सोचा...और फिर जरूरी समझा कि सांप के बारे में हिना को बता दिया जाये। वो सांप दिन ढलने से कुछ पहले नजर आता था। शाम को हिना घर पर नहीं होती थी। उसने एक ट्यूशन-एकाडेमी ज्वाइन की हुई थी। वहां से वह शाम के बाद ही वापिस आती थी। शायद यही वजह थी कि रात की रानी' पर सरसराते उस सुनहरे सांप पर उसकी नजर नहीं पड़ी थी और किसी नौकर-नौकरानी में यह जुर्रत नहीं थी कि समीर राय की अनुमति के बिना हिना को कुछ बताये। सितारा को उसकी मां ने खास चेतावनी दे दी थी कि वह इस बारे में हिना बीवी से हर्गिज बात न के, और सितारा को यह बात पचाने में सचमुच ही बड़ी मुश्किल हुई थी इस सुनहरे सांप के निरन्तर दिखाई देने ने समीर राय को फिक्रमंद कर दिया था। उसने हिना को बताने का फैसला किया कि हिना को होशियार करना भी जरूरी हो गया था। फिर एक उत्कण्ठा भी अब समीर राय के जहन में उभर रही थी कि शायद हिना इस बारे में कुछ जानती हो कि आखिर उसका नाता 'सर्पलोक' के प्राणियों से रहा है। एक अविश्वसनीय बात होते हुए भी समीर राय अपनी बेटी की उस कहानी को अपने जहन से नहीं निकाल पाया था ।सो उस दिन रात का खाना खाने के बाद समीर राय ने हिना से कहा-"आओ बेटा ! ऊपर चलो, वहां बैठकर कॉफी पीएंगे।
"चलिये, अब्बू !" हिना फौरन राजी हो गई। फिर उसने एक नजर अपने बाप पर डाली, बाप के चेहरे पर कोई भाव न था। लेकिन ऊपर चलकर कॉफी पीने की ख्वाहिश अपने आपमें कई सवाल लिये हुए थी। इतना बड़ा बंगला था। नीचे कई कमरे थे। समीर राय का अपना बेडरूम भी था। ऊपर का बेडरूम भी समीर राय के प्रयोग में था।
"बाबा... । क्या कोई खास बात है..?" सीढ़ियां चढ़ते हुए हिना ने पूछ ही लिया था। इस बात का अहसास तुम्हें कैसे हुआ.?"
"आपने कभी ऊपर वाल कमरे में कॉफी पीने की बात नहीं की...।'
"भई, वाह ! मान गये तुम्हारी जहानत को... |
"इसका मतलब है कि वाकई कोई खास बात है...।" हिना ने अब्बू की तरफ शोखी से देखा ।
"अरे, नहीं बेटा ! तुम्हारा बर्थ-डे नजदीक है, सोचा प्रोग्राम फाइनल कर लिया जाये ! तुम किन-किन को बुलाना चाहोगी...ऊपर बैठकर गेस्ट्स की लिस्ट बना डालेंगे।" समीर ने बाता बनाई।
"बाबा...क्या सच में कोई और बात नहीं..?" हिना ने कमरे में प्रवेश करते फिर पूछा ।समीर राय हंस दिया-"सच कहूं तो बात है। आओ, तुम्हें सच बताऊ..।' समीर राय सोफे पर बैठते हुए बोला ।हिना धम्म से सोफे पर बैठ गई, वह खुश थी कि उसका अंदाजा सही निकला था। उसने पूछा-"हां, बताइये...क्या खास बात है ?"
"बेटा...! बंगले के पिछवाड़े की दीवार पर 'रात की रानी' की जो बेल चढ़ी हुई है।" समीर राय कहते-कहते रुक गया।
"हां, उसे क्या हुआ..?" हिना ने चौंककर अब्बू की तरफ देखा-"बड़ी फैली हुई बेल है। रात को मस्त कर देने वाली खुशबू फैलती है। मैं रात को अक्सर वहां टहलती हूं। अब्बू..चांदनी रात में तो खुशबू का लुत्फ ही कुछ और होता है....।
''मैं जानता हूं कि तुम वहां टहलती हो...।" समीर राय संजीदा हो गया-"इसीलिये यह सब तुम्हें बताना जरूरी हो गया है।“
क्या, अब्बू..?" वहां आपने क्या कोई जिन्न–विन्न देख लिया..?" हिना हंसी।जिन्न तो नहीं, लेकिन एक सांप जरूर देखा है...।''
"सांप..?" हिना जो सोफे पर नीमदराज हो गई थी, एकदम उठकर बैठ गई-"कैसा सांप ?"
"वह एकदम सुनहरा सांप है...चमकता हुआ। ऐसा सांप मैंने आज तक नहीं देखा...।" समीर ने बताया।
“बाबा...वह सांप आपने कब देखा ?" हिना अब संजीदा थी।"यह कल शाम की बात है...।"
"तो आपने मुझे बताया क्यों नही..?'
'"पहले सोचा था कि बताऊं..लेकिन वह सांप कई दिनों से बराबर नजर आ रहा है। घर के कई नौकर भी उसे देख चुके हैं, और
खतरनाक बात यह है कि वो सांप फौरन ही गायब हो जाता है, मैंने सोचा तुम्हें बता दू...कहीं हमरी बेटी डर न जाए... ।' समीर राय सहज बना रहा था।
"आप परेशान न हों, अब्बू । मैं सांपों से बिल्कुल नहीं डरती। आपको बता चुकी हूं कि मेरा बालपन सांपों से खेलते हुए गुजरा है। मैं अभी जाकर 'रात की रानी' का जायजा लेती हूं।" हिना ने इत्मीनान से कहा ।"अब वहां जाना बेकार है। वो सांप दिन ढलने से थोड़ा पहले मलगजे अन्धेरे में नजर आता है...।
"ओह, यानि कि उस वक्त जब मैं ट्यूशन ले रही होती हूं। ठीक है, कल छुट्टी है, मैं शाम को देखूगी।
"बेटा..पता नहीं क्यों मेरा दिल घबरा रहा है...।" समीर राय ने अपनी परेशानी जाहिर की। पर क्यों, अब्बू..?
" हिना अपने बाप का चेहरा देखते बोली।“मैं सोच रहा हूं कि इस 'रात की रानी' को कटवा दूं। न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी... |
"ओह, नो पापा ! ऐसी मस्त खुशबू बिखेरने वाले पौधे को मैं कभी न कटने दूंगी। आप बिल्कुल परेशान न हों। मैं जरा एक नजर उस सांप को देख लूं..फिर आपको बातऊंगी कि क्या करना है।" हिना ने तसल्ली देते लहजे में कहा-"मुझे कुछ नहीं होगा...आप बिल्कुल फिक्र न करें।"
"अल्लाह करे ऐसा ही हो...।"
समीर राय ने ठण्डी सांस ली।
हिना के इस कारनामे पर उन्हें यकीन न आया...लेकिन जो कुछ था उनके सामने था। वह जो देख रही थी उसे झुठला भी तो नहीं सकती थी।हिना पहले ही पूरे कालेज में चाहे जाने वाली लड़की थी. इस घटना ने उसे प्रियता के शिखर पहुंचा दिया। साथ ही यह भी हुआ कि कुछ लड़कियां उससे डरने भी लगी कि कभी-कभी उन्हें हिना की आंखों में एक रहस्मयी-सी चमक देखने को मिल जाती थी।फिर एक और घटना घटी और यह हिना के जन्मदिन से कुछ ही दिन पहले की बात है-दिलदार और उसकी बीवी सरवारी इस बंगले के पुराने नौकर थे। उनकी एक बेटी थी सितारा...और भी बच्चे थे, लेकिन यह सितारा हिना की हमउम्र थी। सितारा एक शालीन स्वभाव व मधुर व्यवहार वाली लड़की थी। हिना उसे बहुत पसन्द करती थी। वह सितारा को नौकरानी कम, सहेली ज्यादा समझती थी।इस बंगले के पिछवाड़े, दीवार पर रात की रानी की बेल चढ़ी हुई थी। वह खासी घनी थी और रात को उसकी महक पूरे बंगले में फैल जाती थी। बंगले के पिछवाड़े एक खूबसूरत लॉन और उसमें चारों तरफ फूलों
के पौधे लगे हुए थे। लॉन में मखमली घास उगी हुई थी ।चांदनी रात में इस घास पर हिना को टहलने का बड़ा शौक था। उसके साथ सितारा भी होती थी। दोनों टहलती हुई दुनिया जहान की बामें किया करती थीं। सितारा आठवीं पास करके घर बैठ गई थी, जबकि हिना की पढ़ाई जारी थी। हिना चाहती थी कि सितारा भी आगे बढ़े, लेकिन उसके मां-बाप की सोच थी कि अगर वह ज्यादा पढ़-लिख गई तो फिर बिरादरी में उसके लिए वर ढूंढ पाना मुश्किल हो जाएगा ! सो सितारा की पढ़ाई छुड़ा दी गई और उसने हिना का काम-काज संभाल लिया |बहरहाल, इस शाम सितारा अपने क्वार्टर से निकल कर बंगले की तरफ बढ़ी तो अचानक उसकी नजर 'रात की रानी' पर पड़ी। उसकी जड़ में उसे एक सुनहरा चमकीला सांप नजर आया। वो सरसराता हुआ बेल पर चढ़ रहा था सांप देखकर वह सरपट भागी। उसकी मां सरवरी, किचन में चाय बना रही थी, भागकर किचन में पहुंची और मां को बताया-"अम्मा...अम्मा...रात की रानी पर सांप... ।'"
"हें, सांप...।" चूल्हे पर से केतली उतारती सरवरी का हाथ कांपा-"अरी, यह क्या कर रही है तू..।"
"सांप, अम्मा ! सांप... | मैंने खुद देखा है...।'
' ''अच्छा, चल आ..मेरे साथ...।” सरवरी चाय छोड़कर बाहर जाने लगी।"अम्मा..अब्बा को साथ ले चलो...मुझे डर लगता है।
''तू आ तो...तेरा बाप कौन-सा तीसमार खां है, उसे तो कुत्ते कीशक्ल देखकर कंपकंपी आती है।" सरवरी उसका हाथ पकड़ते हुए बोली-"आ तू मेरे साथ...।'
'जब मां-बेटी दोनों बाहर निकलकर पिछवाड़े गईं और उन्होंने 'रात की रानी' पर नजर दौड़ाई तो वहां उन्हें कोई सांप नजर नहीं आया...अलबत्ता एक अजीब-सी खुशबू जरूर फैली हुई थी ओर यह खुशबू ‘रात की रानी' की खुशबू से अलग थी ।पर फिर...वही सांप सरवरी को भी दिखाई दे गया। सुनहरे रंग का वह सांप अब 'रात की रानी' के पत्तों में सरसरा रहा था। सांप देख वह बंगले से किसी को बुलाने के लिए भागी। सामने ही अपना शौहर दिलदार नजर आया। सरवरी उसके साथ फौरन वापिस गई। लेकिन अब वो सांप वहां से गायब हो चुका था ।हां...वहां. वह अनूठी खुशबू अब भी फैली हुई थी।और फिर..यू वह सुनहरा सांप कभी एक नौकर को और कभी दूसरे नौकर को और विभिनन जगहों पर दिखाई देता रहा। ड्राइवर महमूद उसे देखकर अपने क्वार्टर से लाठी निकार कर लाया। लेकिन अब वहां सांप नहीं था। महमूद ने उस सांप को इधर-उधर तलाशा भी...पौधों और पत्तों में देखा, लेकिन वो कहीं नजर नहीं आया। अलबत्ता एक तेज खुशबू वहां जरूर फैली हुई थी।हिना का कमरा 'रात की रानी' के उस पौधे के ऐन सामने था। अगर उसके कमरे के पर्दे हटे हुए हों तो रात की रानी' को वहां से साफ-स्पष्ट देखा जा सकता था। सांप दिखाई देने की खबर अभी तक हिना को नहीं दी गई थी। कोई खास वजह नहीं, बस उसे एक लड़की । समझ कर ही उसे इस बारे में कुछ नहीं बताया गया था कि कहीं 'सांप निकलने की खबर सुनकर वह डर-वर न जाए। इन नौकर-चाकरों को भला यह बात कहां मालूम थी कि हिना सांपों से डरने वाली नहीं, बल्कि उन्हें डराने वाली थी।फिर एक शाम इस सुनहरे सांप पर समीर राय की भी नजर पड़ गई।उसने गेट पर मौजूद गार्डों को बुलवा भेजा...खुद इस सांप पर नजर रखी। पर फिर जैसे ही गार्ड पिछवाड़े पहुंचे और उन्हें सांप के बारे में बताने के लिए समीर राय की जरा जरन सांप पर से हटी और उसने दो बारा 'रात की रानी' की तरफ देखा तो सांप अपनी जगह से गायब था ।गार्डों ने दूसरे नौकरों के साथ मिलकर पूरा बगीचा छान मारा। एक-एक पत्ता टटोल लिया मगर वह सुनहरा सांप फिर कहीं नहीं मिला |सांप गायब था और एक अनूठी-सी मादक खुशबू मौजूद थी।
घर के हर प्राणी ने उस सुनहरे सांप को देखा था। अगर नहीं देखा था तो सिर्फ हिना ने नहीं देखा था ।सुनहरा सांप देखकर समीर राय का खौफजदा होने की हद तक चिन्तित हो उठना स्वाभाविक था। वह हिना के बचपन की कहानी से वाकिफ था। हिना ने वे तमाम बातें जो उसे अपने बारे में याद थीं...सब अपने अब्बू को सुना डाली थीं, हिना खूबसूरत थी तो जहीन भी बहुत थी। उसका दिमाग और उसकी याददाश्त बहुत तेज थी। वह एक ही नजर में बहुत-सी बातों को समझ लिया करती थी।समीर राय ने सोचा...और फिर जरूरी समझा कि सांप के बारे में हिना को बता दिया जाये। वो सांप दिन ढलने से कुछ पहले नजर आता था। शाम को हिना घर पर नहीं होती थी। उसने एक ट्यूशन-एकाडेमी ज्वाइन की हुई थी। वहां से वह शाम के बाद ही वापिस आती थी। शायद यही वजह थी कि रात की रानी' पर सरसराते उस सुनहरे सांप पर उसकी नजर नहीं पड़ी थी और किसी नौकर-नौकरानी में यह जुर्रत नहीं थी कि समीर राय की अनुमति के बिना हिना को कुछ बताये। सितारा को उसकी मां ने खास चेतावनी दे दी थी कि वह इस बारे में हिना बीवी से हर्गिज बात न के, और सितारा को यह बात पचाने में सचमुच ही बड़ी मुश्किल हुई थी इस सुनहरे सांप के निरन्तर दिखाई देने ने समीर राय को फिक्रमंद कर दिया था। उसने हिना को बताने का फैसला किया कि हिना को होशियार करना भी जरूरी हो गया था। फिर एक उत्कण्ठा भी अब समीर राय के जहन में उभर रही थी कि शायद हिना इस बारे में कुछ जानती हो कि आखिर उसका नाता 'सर्पलोक' के प्राणियों से रहा है। एक अविश्वसनीय बात होते हुए भी समीर राय अपनी बेटी की उस कहानी को अपने जहन से नहीं निकाल पाया था ।सो उस दिन रात का खाना खाने के बाद समीर राय ने हिना से कहा-"आओ बेटा ! ऊपर चलो, वहां बैठकर कॉफी पीएंगे।
"चलिये, अब्बू !" हिना फौरन राजी हो गई। फिर उसने एक नजर अपने बाप पर डाली, बाप के चेहरे पर कोई भाव न था। लेकिन ऊपर चलकर कॉफी पीने की ख्वाहिश अपने आपमें कई सवाल लिये हुए थी। इतना बड़ा बंगला था। नीचे कई कमरे थे। समीर राय का अपना बेडरूम भी था। ऊपर का बेडरूम भी समीर राय के प्रयोग में था।
"बाबा... । क्या कोई खास बात है..?" सीढ़ियां चढ़ते हुए हिना ने पूछ ही लिया था। इस बात का अहसास तुम्हें कैसे हुआ.?"
"आपने कभी ऊपर वाल कमरे में कॉफी पीने की बात नहीं की...।'
"भई, वाह ! मान गये तुम्हारी जहानत को... |
"इसका मतलब है कि वाकई कोई खास बात है...।" हिना ने अब्बू की तरफ शोखी से देखा ।
"अरे, नहीं बेटा ! तुम्हारा बर्थ-डे नजदीक है, सोचा प्रोग्राम फाइनल कर लिया जाये ! तुम किन-किन को बुलाना चाहोगी...ऊपर बैठकर गेस्ट्स की लिस्ट बना डालेंगे।" समीर ने बाता बनाई।
"बाबा...क्या सच में कोई और बात नहीं..?" हिना ने कमरे में प्रवेश करते फिर पूछा ।समीर राय हंस दिया-"सच कहूं तो बात है। आओ, तुम्हें सच बताऊ..।' समीर राय सोफे पर बैठते हुए बोला ।हिना धम्म से सोफे पर बैठ गई, वह खुश थी कि उसका अंदाजा सही निकला था। उसने पूछा-"हां, बताइये...क्या खास बात है ?"
"बेटा...! बंगले के पिछवाड़े की दीवार पर 'रात की रानी' की जो बेल चढ़ी हुई है।" समीर राय कहते-कहते रुक गया।
"हां, उसे क्या हुआ..?" हिना ने चौंककर अब्बू की तरफ देखा-"बड़ी फैली हुई बेल है। रात को मस्त कर देने वाली खुशबू फैलती है। मैं रात को अक्सर वहां टहलती हूं। अब्बू..चांदनी रात में तो खुशबू का लुत्फ ही कुछ और होता है....।
''मैं जानता हूं कि तुम वहां टहलती हो...।" समीर राय संजीदा हो गया-"इसीलिये यह सब तुम्हें बताना जरूरी हो गया है।“
क्या, अब्बू..?" वहां आपने क्या कोई जिन्न–विन्न देख लिया..?" हिना हंसी।जिन्न तो नहीं, लेकिन एक सांप जरूर देखा है...।''
"सांप..?" हिना जो सोफे पर नीमदराज हो गई थी, एकदम उठकर बैठ गई-"कैसा सांप ?"
"वह एकदम सुनहरा सांप है...चमकता हुआ। ऐसा सांप मैंने आज तक नहीं देखा...।" समीर ने बताया।
“बाबा...वह सांप आपने कब देखा ?" हिना अब संजीदा थी।"यह कल शाम की बात है...।"
"तो आपने मुझे बताया क्यों नही..?'
'"पहले सोचा था कि बताऊं..लेकिन वह सांप कई दिनों से बराबर नजर आ रहा है। घर के कई नौकर भी उसे देख चुके हैं, और
खतरनाक बात यह है कि वो सांप फौरन ही गायब हो जाता है, मैंने सोचा तुम्हें बता दू...कहीं हमरी बेटी डर न जाए... ।' समीर राय सहज बना रहा था।
"आप परेशान न हों, अब्बू । मैं सांपों से बिल्कुल नहीं डरती। आपको बता चुकी हूं कि मेरा बालपन सांपों से खेलते हुए गुजरा है। मैं अभी जाकर 'रात की रानी' का जायजा लेती हूं।" हिना ने इत्मीनान से कहा ।"अब वहां जाना बेकार है। वो सांप दिन ढलने से थोड़ा पहले मलगजे अन्धेरे में नजर आता है...।
"ओह, यानि कि उस वक्त जब मैं ट्यूशन ले रही होती हूं। ठीक है, कल छुट्टी है, मैं शाम को देखूगी।
"बेटा..पता नहीं क्यों मेरा दिल घबरा रहा है...।" समीर राय ने अपनी परेशानी जाहिर की। पर क्यों, अब्बू..?
" हिना अपने बाप का चेहरा देखते बोली।“मैं सोच रहा हूं कि इस 'रात की रानी' को कटवा दूं। न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी... |
"ओह, नो पापा ! ऐसी मस्त खुशबू बिखेरने वाले पौधे को मैं कभी न कटने दूंगी। आप बिल्कुल परेशान न हों। मैं जरा एक नजर उस सांप को देख लूं..फिर आपको बातऊंगी कि क्या करना है।" हिना ने तसल्ली देते लहजे में कहा-"मुझे कुछ नहीं होगा...आप बिल्कुल फिक्र न करें।"
"अल्लाह करे ऐसा ही हो...।"
समीर राय ने ठण्डी सांस ली।