Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 14 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक यू नाइक जी:

विज्जु ने बड़ी म्हणत की है सबको लेजाने के लिए. वर्ण ये सबब ाकर्ण बोहत ी रिस्की था. प्रिय की पियास तो फिर पूरी होनी hi. आखिर एक hi था सबब का चाहता.

दन्न अबबितना भी नहीं सोच सकता क कोई इतना ज़बरदस्त प्लान बना कर सबब को hi लेकर फुर्रररररर हो जाएगा.... लेकिन कुछ तो करेगा hi वो.. देखते हाँ वो क्या करता है.

अब्ब दिल्ली का सफर hi सबब के लिए मुश्किल है..
 
अपडेट ::: 66

*************







प्रिय के किश करने से में लुंड खड़ा हो गया था. लेकिन प्रिय मेरे लुंड के खड़ा होने की परवा किये बिना मेरे होंठों का मज़ा लिए जा रही थी. अब्ब सबब सामने थे. तो मुझे सबब अजीब लग रहा था. लेकिन सबब hi तो सबब का सबब कुछ देख चुकी थीं..

मेरी प्रिय भी मेरे लिए सालों से तरस रही थी. मैं अब्ब प्रिय को नहीं रोक सकता था. प्रिय अपने दिल की कर रही थी. प्रिय अपने दिल की करे और मैं उसे रोकू ये कैसे हो सकता था. मुझे कोई मसला नहीं था. लेकिन मेरे लुंड को डिस्टर्बेंस ज़रूर शुरू हो गई थी. साला अपने मतलब की खुशबु जो पा गया था.

मैंने भी अपने हाथों को प्रिय के गालों पर चलना शुरू कर दिया. प्रिय के नरम गर्म गाल मैं फिर भी सैलून बाद महसूस करने लग. इस सबब के लिए hi तो मैं सालों तड़पा तो और मेरी माँ और मेरी तितलियाँ भी मेरे लिए और मुझे महसूस करने के लिए तदपि थीं.

प्रिय किश करते हुए अपने गालों पे मेरे हाथ महसूस करते hi मुस्कुराने लगी. प्रिय की ऑंखें चमकने लगी थीं.

जहान्वी ने आ कर प्रिय की गांड पर एक हलकी सी लगा दी.

जहान्वी:- कमीनी अकेली अकेली hi सबब मज़े लूट लेगी क्या. हमारे बिना hi तुमने सबब शुरू कर दिया.

श्रुति भी पीछे पीछे आ गई.

श्रुति:- हमारे भी उतना भी हक़ है विज्जु पर प्रिय, जितना तुम्हारा है. हमें याद किये बिना hi तू शुरू हो गई.

प्रिय:- अब्ब तुम दोनों थी नहीं तो मैंने अपना हक़ वसूल कर लिया. अब्ब तुम दोनों आ गई हो, तो करलो वसूल विज्जज्जुऊ से अपना haqqqqqqqqqqqq

जहान्वी:- वो तो हम कर hi लेंगी. लेकिन पहले सबब मिल कर ब्रेकफास्ट करलो. हमने रेडी कर दिया है.

प्रिय:- मैं तो विज्जू की गॉड में hi बीअत कर खाओगी.. तुम दोनों ले आओ. सच में मुझे बोहत भूक महसूस होने लगी है.

माँ:- जहान्वी बीटा ले आओ तुम दोनों, प्रिय को ऐसे hi रहने दो. अब्ब तो विज्जु आ hi गया है तो फिर झगड़ा कैसा, सबब मिल बाँट के वसूल कर लेना अपना अपना प्यार...

jhanvi.shruti:- माँ वो तो हमें भी पता है. हम तो बास प्रिय को इतना खुश देख कर ख़ुशी में hi प्रिय को थोड़ा तंग कर रही हाँ.

इतना कह कर दोनों चली गई और कुछ hi देर में सबब के लिए ब्रेकफास्ट ले आएं.

एक टेबल पर सबब रख दिया गया. हम सबब ऐसे hi सूफी पर बैठे रहे. और माँ मुझे अपने हाथों से खिलने लगी. माँ को देख कर प्रिय ने भी अपना मोहन आगे कर दिया. माँ प्रिय के नखरे देख कर दिल में ठंडक सी महसूस करने लगी. यही सबब तो देखने के लिए वो सैलून से तमन्ना कर रही थीं.

सबब मिल बाँट के एक दूसरे को खिलने लगे. मुझे सभी ने थोड़ा थोड़ा करके खिलाया. मैं तो प्रिय के नीचे फंसा हुआ था. बास खता hi रहा. किसी को खिला नहीं सका..

माँ प्रिय के पैरों को हाथ लगाती रही थी. लेकिन फिर भी माँ ने अपने हाथ नहीं धोये थे. मुझे और प्रिय को भी माँ के ऐसे करने से कोई परेशानी नहीं हुई. और माँ प्रिय के पैरों को लगे हुए हाथों से खुद भी कहती रही और हमें भी खिलाती रही.

माँ थी ना तो जो दिल करे वो कर सकती थी. और वैसे भी जैसी लाइफ सबब को मिल गई थी. वहां गंदगी hi इतनी थी क सोचना भी क्या उस गंदगी के बारे में. पूरी ज़िन्दगी के रूल्स hi ख़तम हो कर रह गए थे.

वीर्य और छूट के पानी से साणे हुए हाथों से na-jaane क्या कुछ किया होगा. और कैसे कैसे खाया पिया होगा. जब्ब इतना सबब कुछ हो सकता था. तो फिर प्रिय के पैरों को हाथ लगा क्र कुछ खिलाया जाए तो कोई क्यों कुछ सोचेगा..

और वैसे भी सबब दिली तौर पर इतने मरे हुए थे. क ऐसी बातें माँ और बाकी सब के लिए नार्मल सी हो गई थीं.

कभी छूट को धोने का टाइम मिला क नहीं मिला. खाना खाया और रात भर की चुदाई की थकन मिटने के लिए adh-mari हो के सो जाया करती थी.. साड़ी रात hi अपनी मर्ज़ी के बिना चुदती रहती थी. और फिर वहां ऐसा सफाई बारे सोचना.... किसका दिल मानेगा.... है ना अजीब बात .... दिल के तार हिला कर रख दे एक छोटी सी बात भी..

माँ के हाथ लगा खाना तो वैसे भी हर इक चीज़ से बढ़ कर होता है..

कुछ देर में हम खाना खा कर फ्री हुए. तो सबब के लिए कफ का अर्रंगे किया गया..

न तो प्रिय उठी मेरी गॉड से और न hi माँ ने अपनी गड से प्रिय के पेअर हटाए. ऐसे hi बैठे रहे सबब. मेरा लुंड अभी भी प्रिय की गांड में धंसा हुआ था.

प्रिय:- (मेरे कान में) विज्जु तुम्हारा लुंड तो बोहत बड़ा लग रहा है.

मैं प्रिय की बात सुन कर उसकी तरफ देखने लगा. मैंने प्रिय का चेहरा थामा और फिर प्रिय के होंठ पर किश करते हुए बोलै

विजय:- प्रिय मेरी जान. ये सबब तो हार्ड कसरत और मुझे मिलने वाली अच्छी खुराक का नतीजा है. मैंने तो ध्यान नहीं दिया लेकिन ये खुद hi पहले फूलने लगा.

माँ ने भी मेरी बात सुन ली थी. और वो मुझे देखते हुए मंद मंद मुस्कुराने लगी.

अब्ब मुझे या माँ को या किसी को क्या परेशानी हो सकती थी. बास कुछ झिझक सी ा गई थी इतने सालों में, इसलिए पहले मैं कुछ झिझक रहा ता. लेकिन अब्ब मैं पहले जैसा नार्मल हो गया था.. मेरी झिझक ख़तम हो चुकी थी.

विजय:- माँ आपने भी सुन लिया है.

माँ:- हाँ विज्जु बीटा मैंने भी सुन लिया है. और तुम्हारे पास बैठी हुई अपर्णा ने भी सुन लिया है..

ऊऊह्ह्हह्ह मेरे पास बैठी हुई लड़की का नाम अपर्णा है. मैंने अपर्णा की तरफ देखा तो वो भी मुस्कुरा रही थी.

विजय:- सॉरी अपर्णा, मुझे ध्यान रखना चाहिए था..

अपर्णा:- विज्जु भाई आप क्यों सॉरी बोल रहे हैं. ये सबब तो होता hi रहता है.. और वीएस भी जैसे माहौल में रह कर हम ए हाँ. वहां तो हर एक बहरी आदमी आ कर घटिया हरकतें अकर्ता रहता है. आप तो फिर भी हम अब्ब के हाँ. इसलिए आप सॉरी न बोलेन.

मैंने माँ की तरफ देखा और फिर माँ से बोलै.

विजय:- माँ एक बात पूछू आपसे .

माँ:- हाँ विज्जु बीटा पूछ क्या पूछना है.

विजय:- माँ जैसी लाइफ हम सबब को मिल चुकी है. वो तो हम सबब के hi सामने है... बात गन्दी है लेकिन है भी सही...... (मैंने एक बार सबब को देखा. सबब अपने hi थे) माँ मैंने आपको हर हालत में देखा है. आप समझ रही हाँ ना..

maa:-(maa साद होती हुई) हाँ बीटा.. ये मेरी बाद नसीबी है क मैं कुछ भी अपनी बेटी और अपने बेटे से नहीं छुपा सकीय... इज़्ज़त hi तो एक ज़ेवर होता है औरत का. सबब कुछ छीन जाए उसे से लेकिन इज़्ज़त सलामत रहे. वही मुझसे मेरा ज़ेवर चहहिं गया विज्जु बीटा. इज़्ज़त तो जा hi चुकी थी विज्जु बीटा, मेरी ममता भी मेरे बच्चो के सामने नंगी हो gai....main अपना कुछ भी अपने बच्चों से छुपा ना saki.(maa की आँखों में आंसू शुरू हो गए) ऐसा कभी होना तो नहीं चाहिए था मेरे साथ. पारर मैं कर भी क्या कर सकती थी. मैं तो दलदल में फँसी हुई थी .... अपनी इज़्ज़त तो हर रात hi लुटवाती रही. इज़्ज़त लूट तो गई hi थी. लेकिन मेरे बच्चों के सामने तो कुछ परदे रहना hi चाहिए था. लेकिन रेखा बाई ने मुझे वो नहीं रखने दिया... मैंने अपना सबब कुछ hi सबब के सामने शो करवा चुकी हूँ ...

मैंने माँ को नहीं रोका, जब्ब तक्क माँ खुल के हर बात न करले. माँ अंदर से हलकी नहीं हो सकती थी.... और मैं माँ से हर तरह की बात करके माँ को एक नयी ज़िन्दगी देना चाहता था... माँ को अपने मैं में छुपे हुए ग़ुबार को बहार निकलना था.

दुन्या का घटिया से घटिया काम भी इस काम से बढ़ कर नहीं हो सकता था.. किसी को मजबूर करके धंदे पर लगा देना एक अलग बात है. लेकिन काम से काम उसके बच्चों से तो सबब छुपाया जा सकता था ...

और यही वो चीज़ है, जो माँ को अंदर से ख़तम करती जा रही थी. इसी लिए तो मैं कहता हूँ क माँ ने बड़ी हिम्मत की थी. वर्ण माँ तो कब्ब की pagal-khane में पड़ी होती....

माँ:- विज्जु बीटा मैंने ज़िन्दगी में कभी भी किसी का भी दिल नहीं दुखाया था. मुझे मेरी कोई भी गलती न होने के बावजूद भी इतनी बड़ी सजा भुगतना पड़ी... विज्जु बीटा main.......main.........main..... माँ के चेहरे का रंग बदलने लग गया था.

मैंने जल्दी से प्रिय को साइड किया और माँ को पकड़ कर अपनी गॉड में बिठा लिया. माँ अपने दर्द को शुरू से याद करते हुए घाषि में जाने लगी थी. और मैं माँ को घाषि में जाने नहीं देना चाहता था. माँ को अब्ब कुछ हिम्मत और करनी थी. वर्ण माँ को अब्ब दलदल से निकल जाने की उम्मीद दिखी तो माँ ने हौसला छोड़ना शुरू कर दिया था... जितना माँ ने खुद को संभालना था. माँ ने संभल लिया था..

अब्ब माँ के अंदर का सिस्टम काम छोड़ना शुरू हो गया था..... अक्सर ऐसा hi होता है. जब्ब मंज़िल मिलती है तो मुसाफिर थक कर मंज़िल पर hi गिर जाता है. माँ भी मंज़िल पर पोहंच कर गिर रही thi.aur मैं माँ को गिरने नहीं देना चाहता था.....

सब hi माँ की बदलती हुई हालत को देख रहे थे.. priya,jhanvi और श्रुति समेत सबब hi रोने लगे थे..

विजय:- सबब चुप कर जाओ. मुझे माँ को देखने दो...

मैंने माँ के दिल पर हाथ रखा तो माँ के दिल की धड़कन कुछ सुस्त सी पद रही थी. और माँ को जिस्म भी मुझे ठंडा लगने लगा था. माँ के जिस्म ने ठंडा पसीना छोड़ना शुरू कर दिया था.

मैंने माँ को गॉड में अच्छे से बिठाया और माँ को अपने गले से लगा कर माँ के कान में धीरे धीरे बोलने आगा.....

विजय:- maa..dekho..jo कुछ भी बीत चूका अब्ब उसे भूलना मुमकिन तो नहीं है. ना आपके लिए और न hi हमारे liye....(main साथ साथ माँ की पीठ को भी सेहला रहा था) माँ मैंने कहा था ना क अब्ब मैं आ गया हूँ तो तो आप को चिंता की कोई ज़रूरत नहीं है.... माँ जितना दर्द आपने झेला है वो इतना है क सेह करना मुमकिन नहीं है. लेकिन जब्ब आपने इतने साल दर्द झेल लिया तो अब्ब भी आप हिम्मत नहीं हार सकती.... अभी भी हमें आपकी ज़रूरत है और हमें हमारी साड़ी खुशियां मिल बाँट के सेलिब्रेट करनी हाँ. लेकिन उससे पहले आपको अपने दुश्मन को तबाहो बर्बाद होते हुए देखना है..... माँ आपको हिम्मत जुटानी पड़ेगी. वर्ण वो दन्न आपको सोच कर hi हँसता रहेगा.... वो बोलेगा

""क्या करलेगी तू मेरा श्वेता .... जैसे तुझे बर्बाद किया है वैसे hi तेरी बाकी बेटियों को भी बर्बाद कर दूंगा. और तू बास मोहन देखती रह जायेगी. फिर तेरे hi बेटे को तेरी hi आँखों के सामने थोड़ा थोड़ा करके चिरुंगा. और उसके शरीर से अलग हो रहे छोटे छोटे मैं चील कण्वों को खिला दूंगा.... तू रोटी रहेगी. गिड़गिड़ाती रहेगी लेकिन कुछ कर नहीं पाएगी. श्वेता तू सिर्फ जिस्म बेचने लायक रह गई है. तू बास हर रात एक नया लुंड लेने लायक रह गई है. तू तो ख़तम हो hi चुकी है.. कुछ नहीं कर पाएगी तू. कुछ भी नहीं कर पाएगी तू. कुछ भी नहीं कर पायेगी तू. रेखा बाई न सही किसी और के पास तुझे और तेरी बेटियों को भेज दूंगा. फिर वो भी तेरी hi तरह से हर रात मर्द और लुंड बदल बदल कर अपना जिस्म बेचती रहेंगी और फिर अपने hi बच्चों के सामने नंगी हो कर चुदती रहेंगी. और तू कुछ भी नहीं कर पायेगी. तू कुछ भी नहीं कर पायेगी. तू कुछ भी नहीं कर पायेगी."""

फिर मैं यही अल्फ़ाज़ माँ के कान में रेगुलर hi उतरने laga""tu कुछ भी नहीं कर पायेगी""

कुछ देर तक्क मैं माँ के कान में ये सबब बोलता रहा. सबब मुझे hi देख रहे थे. और मैं किसी को भी खातिर में लाये बगैर माँ के कान में सच्चाई का ज़हर उंडेलता रहा..

कुछ hi देर मैं माँ मेरी गॉड से एक झटका कहते हुए उठी. और फिर मुझे थप्पड़ पे थप्पड़ मारने लगी..

मेरा मक़सद पूरा हो चूका था. मैं अंदर hi अंदर मुस्कुरा रहा था. लेकिन माँ को या किसी को शिऊ नहीं करवा रहा था.. माँ की ऑंखें आग उगलने लगीं और माँ मुझे थप्पड़ मरती रही. 14--15 थप्पड़ माँ ने मुझे मारे....

माँ:- (चीखती हुई) vijjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuu मुझे दन्न को बर्बाद होते देखना है. और भी कुछ ऐसे हैं जिन्हो ने मुझे इस हाल में ला खड़ा किया है. मुझे सबब को बर्बाद होते हुए देखना है. मुझे तब्ब तक्क कुछ नहीं होगा. जब्ब तक्क मैं उन् सभी से अपना बदला नहीं ले पाती.. और tuuuuuuuuuuuu वीजजजजजज्जजूउउउ

मेरा बीटा तू मेरा बदला लेगा........ इज़्ज़त मेरी उतारी गई है वो भी मेरे hi बच्चो के सामने, उस सबब की भी इज़्ज़त उतरे गई. किसी को मैट छोड़ना.

वीजजजज्जजूउउउउउ.. आग लगा दे सबब के hi साम्राज्य का. जिसको जितना घमंड है. अपनी पावर का. अपने अहंकार का, सबको चूड चूर कर देना, मुझे सभी के सर्र अपने आगे झुके हुए चाहिए......... मारना किसी को नहीं..... सिस्का सिस्का कर मारना. बोहत दर्द दिया है सबब ने मुझे..... एक नारी की इज़्ज़त को कोठे की ज़ीनत बनाया गया है. एक माँ की ममता को दाग़ दार किया है सबब ने.

विज्जु बीटा बड़ी hi खूबसूरत थी मेरी ज़िन्दगी, कितने hi अरमान थे मेरे. पल भर में hi मेरे सारे अरमान तहस नहस कर दिए गए..

मेरी साड़ी खुशियों को आग लगा दी गई. तू भी कुछ ऐसा hi करेगा... सबब को ऐसा दर्द देना क फिर कभी कोई किसी को इतना दर्द न दे सके. मैं महलों की रानी थी विजजूउ बीटा, एक नाम था मेरा, बड़ी इज़्ज़त थी मेरी, बड़ी खुशहाल ज़िन्दगी थी मेरी, मैं जो हर दुम्म hi अपनी जिन्दादि के अरमान पुरे करने के लिए हर वक़्त hi महकती रहती थी. ज़िन्दगी मेरे लिए प्यार और सिर्फ के लिए थी. हर एक की इज़्ज़त करना और एक से अच्छे से मिलना कोई छोटा हो या बड़ा सबब hi मुझे अपने पलकों पर बिठाया करते थे.

मुझसे मेरी ऐसी खुशियों भरी ज़िन्दगी छीन कर मुझे गटर में उतार दिया गया...... मेरा मान सम्मान सबब कुछ लूट लिया गया. मैं जो कभी किसी को नज़र भर कर नहीं देखा करती थी. वही मुझे सरे बाजार नंगा कर दिया गया. वो भी हर रात के लिए और मेरे hi बच्चों के सामने........ देख विज्जज्जुऊ बीटा तेरी माँ की ज़िन्दगी कैसी थी और कैसी बना दी गई........ अब्ब इस सबब को याद रख और आगे की तैयारी कर. मेरा बदला ले और अब्ब तू मेरी चिंता छोड़ मुझे अब्ब कुछ नहीं होगा. मेरा वडा है तुझसे. अपने दुश्मनो के बर्बाद होने से पहले मुझे कुछ नहीं होगा.. और सबसे पहले तू उसे कुत्ते दन्न की बर्बादी शुरू कर, और कुछ ऐसा कर क वो अपनी ज़िन्दगी की बाकी साँसें मेरे पैरों में रोका गिड़गिड़ाता हुआ पूरी करे. फिर तुझे मैं आगे का बताऊँगी. पहले दन्न और फिर बाकी दूसरे.. आएगा नंबर सब्बका hi आएगा, अब्ब मैं किसी को भी नहीं छोड़ोगी.

माँ की बात ख़तम हुई तो मैंने माँ को गले लगा लिया. लेकिन अब्ब माँ की आँखों से आंसू ख़तम हो गए थे. माँ की आँखों में जवाली मुखी तो था hi. लेकिन इक नयी ज़िन्दगी की चामल भी थी माँ की आँखों में. वही जो कुछ देर पहले माँ की हालत हुई थी. अब्ब नहीं रही थी. और मैं यही चाहता था क अब्ब हर बदलने वाली सिचुएशन में माँ कभी भी डगमगा न जाए.

मैं माँ को गले लगाए हुए hi पीछे सूफी पर जेक बैठ गया.

प्रिय और अपर्णा भी मेरी साइड में बैठ गईं. जहान्वी और श्रुति ने अपर्णा से कुछ नहीं बोलै.

माँ मेरी गॉड में बैठी थी. माँ के पेअर प्रिय ने अपनी गॉड में रख लिया, बैठने की सेटिंग वही थी, लेकिन अब्ब प्रिय की माँ ने और माँ की जगा प्रिय ने लेली थी. और प्रिय भी माँ के जैसे hi माँ के पैरों की उँगलियाँ दबा रही थी. और माँ अब्ब सकूँ में थी. मेरा लुंड तो माँ की हालत को बदलते देहक कर hi एक झटके में जा सोया था....

अब्ब टाइम काफी हो राह था तो मैंने मोबाइल निकल कर हर्ष अंकल को फोन लगा दिया.

हर्ष अंकल:- हाँ विजय बीटा तुम सबब कोठी पोहंच गए हो, मुझे मेरे आदमियों ने बता दिया था. अब्ब आगे क्या करने वाले हो.

विजय:- अंकल मैं सोच रहा हूँ, माँ के साथ कुछ और को भी प्लेन के ज़रिये दिल्ली शिफ्ट कर दिया जाए. मेरी एक बड़ी टेंशन भी ख़तम हो जायेगी.

हर्ष अंकल:- विजय बीटा ये तो तुम सही बोल रहे हो. अभी दन्न को कुछ नहीं पता चला है, लेकिन वो कही न कही से पता करवा hi लेगा. और सब से ज़यादा ज़रूरी है. दन्न की पोहंच से श्वेता बहन और बेटियों को दूर रखना.

विजय:- अंकल तो फिर आप इंतेज़ाम करदें. मैं चाहता हूँ क जो भी पहली फ्लाइट जो सूरत से दिल्ली के लिए निकलने वाली है. उसमे माँ और बहनो को भेज दिया जाए. आप पता करवाए कितनी सीट्स अवेलेबल हाँ. फिर मैं आपको बताता हूँ.

हर्ष अंकल:- ठीक है विजय बीटा, मैं करता हूँ कुछ.

विजय:- ok अंकल तो फिर मैं रखता हूँ. bye

हर्ष अंकल:- ok बीटा bye..

माँ और मेरी तितलियाँ मुझे hi देहक रही थीं. जहान्वी और श्रुति सामने बैठने की बजाये डोडो साइड सूजे के कार्नर पर बैठी हुई थीं.

माँ:- विज्जु बीटा ये तू क्या कर रहा हिअ. हम सबब साथ में hi जायेंगे.

priya.jhanvi.shruti.:- हाँ विज्जु हम सबब साथ में hi जायेंगे. अब्ब तुमसे दूर जाने को मैं नहीं मानेगा.

विजय:- देखो तुम सबब, अभी सब्बसे पहले तुम सबब को सेफ करना है. और दन्न को उसके मक़सद में कामियाब नहीं होने देना है. अभी वो अब्ब समझ नहीं पाया होगा. क हम सूरत में हाँ. इसलिए उसके कुछ करने से पहले तुमसबब का सेफ हो जाना ज़रूरी है. और मैं कोई और बात नहीं सुनुँगा. मैं भी तो सबब को ले कर आ hi रहा हूँ ना. वहां पोहंच के अपने दिल के सारे अरमान पुरे कर लेना.

माँ:- प्रिय. श्रुति. जहान्वी बीटा विजजू ठीक बोल रहा है. और अभी विज्जु को हमारी टेंशन से फ्री हो कर भी सबब करना है. वर्ण उसका ध्यान बता रहेगा.

तीनो:- हाँ माँ आप भी सही कह रही हाँ. (फिर मुझसे) विज्जू प्लीज जल्दी आना. अब्ब तुम बिन नहीं रहा जायेगा.

विजय:- तुम सबब मेरी जान हो और मैं भी तो तुम सबब के बीच hi रहना चाहता हूँ. बास थोड़ा सा वक़्त है बीच में. सब सेफ हो जाएँ और दन्न की पोहंच से दूर हो जाएँ. फिर कोई टेंशन नहीं रहेगी..

मैंने माँ का एक हाथ पकड़ा हुआ था. और माँ अपने दूसरे हाथ से मेरे सीने को टटोल रही थी.

माँ:- विज्जु बीटा तू कितना सख्त जान बन के लौटा है. तेरे सीना किसी चेतन से कम् सख्त नहीं है. तुझे काबिल बनने के लिए कितना कुछ झेलना पड़ा होगा. बड़ी पीडन भी झेली होंगी तुमने. इतना सख्त जिंस ऐसे hi तो बनने से रहा..

विजय:- माँ ये सबब आपके लिए तो बनाया गया है. वर्ण इतनी जल्दी मैं आप सब को कैसे निकल पता. और फिर आप सब के लिए तो मैं कुछ भी कर जाऊँगा.

अपर्णा और प्रिय भी मेरी छाती को दबा दबा कर देखने लगी. जहान्वी और श्रुति मंद मंद मुस्कुराने लगीं. वो समझदार थी और सोच रही थी क हमारा विज्जु हमसे दूर तो रहेगा नहीं. इसलिए आराम से चेक कर लेंगी.

विजय:- माँ जैसी लाइफ हम सबब को मिल चुकी. और जिस तरह से आप सबब की नेचर और मेरी नेचर भी चेंज हो चुकी है. उससे हम सबब में hi हर तरह की शर्म तो ख़तम हो hi गई है. कोई भी किसी से कुछ भी नहीं छुपा सका. लेकिन अब्ब वो अब्ब माहौल बदल गया है. तो क्या हम जैसे बन्न चुके हाँ वैसे hi रहेंगज... जैसे कुछ देर पहले प्रिय मुझे किश कर रही थी. और आपके सामने hi वो मुझसे पूछ रही क मेरा लुंड क्यों इतना बड़ा हो गया है. तो ऐसी बातें सबके सामने करना ज़रूरी हैं क्या..

मेरी बात सुन कर माँ के इलावा सबब hi हस्सन लगी.

सोनाक्षी आंटी:- विज्जु बीटा अब्ब जो कुछ हमारी लाइफ में आ चूका है, वो हम नहीं बदल सकते. हम दलदल से तो निकल गई हैं. लेकिन दलदल का असर तो जल्दी ख़तम नै होगा. या शायद कभी ख़तम hi न हो.

विजय:- मतलब आंटी. क जैसे मैंने माँ को सबब करते हुए देखा है. कृति और अनिल भी आपको देख चुके हाँ.

अनिल:- हाँ विज्जु भाई, मैं भी आपके hi जैसा हो गया हूँ, कोठे पर बिताये वक़्त ने माँ को भी मेरे सामने नंगा क्र दिया है. और कृति के सामने भी.

और कृति को भी मेरे सामने hi नंगा करके उसका मस्सगे किया जाता रहा है. कृति भी माँ के जैसे मुझसे पाना कुछ भी नहीं छुपा सकीय.

कृति:- हाँ विज्जु भाई, शुरू शुरू में तो मुझे बोहत शर्म आई थी. लेकि फिर मैं भी आदि बनने लगी. कोठे पर तो हर लड़की hi जल्दी नंगी कर दी जाती है. उसकी हो या उसका भाई, सबके सामने hi सब कुछ किया जाता hai.hum में अब्ब शर्म नहीं रही. और आंटी श्वेता के जैसे मैं भी माँ की छूट पर वही क्रीम लगाती रहती हूँ. जो आंटी श्वेता ने मुझे माँ के लिए दी थी.

मैं माँ और सोनाक्षी आंटी क देखने लगा. अनिल को भी बात करते हुए देखा था. कृति कैसे अपनी माँ की छूट पर क्रीम लगाने की बात क्र रही थी. ऐसे जैसे ये सब नार्मल हो. अजीब था सबब, दलदल से निकल जाने की ख़ुशी थी सबब को. लेकिन शर्मा हाय के मुआमले में सबब hi बदल से गए थे.

विजय:- अनिल अगर मैं अभी तुम्हारे सामने hi तुम्हारी माँ और बहन को नंगा देख लूँ तो तुम्हारा क्या रिएक्शन होगा.

मेरी बाज सुन कर सबब फिरसे हस्सन लगे.

माँ:- विज्जू तू कैसी बात कर रहा है. बता तो दिए था क हम में वो सबब ख़तम हो गया है. जो इक शरीफ खंडन में होना चाहिए .. इज़्ज़त सर इ बाजार लुटती रही है. तो अब्ब किसी से कोई पर्दा रख के करना भी क्या है हम सबब ने.

बेगाने मर्द से हम अपना कुछ भी नहीं छुपा सकीं. और तू जो पहले से hi सबब देख चूका है. फिर शर्म कैसी. कितनी hi बार तो तूने अपनी माँ को किसी गैर मर्द के नीचे लेते हुए देखा है. अब्ब ऐसी बात न किया कर... वक़्त ने हमें बेशरम बना hi दिया है. तो तू भी अब्ब वैसा hi बन्न जैसा वक़्त तुझे बना रहा है. और ऐसा hi बन्न कर तू अपने दुश्मनो पर टूट पद. शर्म करता रहेगा तो कुछ नहीं कर पायेगा.....

माँ की बातें सुन क्र मेरा लुंड ऑटोमैटिक मोड़ में आ गया था. वो अचानक से hi खड़ा होने लगा.

विजय:- माँ वहां दिल्ली में यही सबब कुछ हो रहा है मेरे साथ. लेकिन वो तो बास एक बंद कमरे में होता रहता है. लेकिन योन किसी के सामने कैसे करूँ. हमें दूसरों के सामने इस सबब से बचना है. और आगे चल कर खुद को बदलना भी तो है.

माँ:- देख विज्जु तेरी कोई भी बहन अब्ब किसी और के नीचे लेटने से रही. एक तो सबब को hi इस दुन्या के हर मर्द से नफरत हो चुकी है. और दूसरा शुरू से hi तीनो ने तुझे अपना सबब कुछ मान लिया था. इसलिए तू अब्ब ये चिंता करना छोड़ दे. जैसा होता है होने दो..

विजय:- और आपका क्या. अब्ब आपकी बातें सुनकर मेरा लुंड तो फिर से खड़ा हो गया है ना. और फिर क्या फर्क रहेगा मुझमे और कोठे पर आ कर तुझे छोड़ जाने वळून में...




maa:-vijjjjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuu.. छीकते हुए.. एक थप्पड़ मुझे मार दिए.




कहा ना अब्ब ऐसी बातें मैट कर. कोई ऐरा गैर आ क्र तेरे hi सामने तेरी माँ की छूट में अपना लुंड घुसा देता था.

और तू देख कर भी कुछ नहीं कर पाया था. अब्ब तू ऐसी बातें करने लगा.

मेरी शर्म तो तेरे दुन्या में आने से पहले गहि ख़तम करदी गई थी. कोठे पर आने वाले तो सबब hi जिस्म के भूके थे. लेकिन यहाँ हमारा प्यार जो तुझसे है वो हमारी आत्मा का मिलान है. अब्ब तू कुछ भी मैट सोच. हमारे लिए हमारे जिस्म की वैल्यू hi ख़तम हो चुकी है. अब्ब बचे खुचे कुछ अरमान अगर दिल में जागेंगे तो वो तुझसे hi पुरे करेंगे ना ....

विजय:- ठीक है maa.abb मैं आपके सामने कभी नहीं शरमाओगे.

सोनाक्षी आंटी:- विज्जु बीटा तू फालतू बातों को सोचना छोड़ दे. हमारी आत्मा तो दाग़दार हो hi चुकी hai.aur जिस्म बर्बाद. लेकिन ये कम्बख्त जिस्म भी अब्ब इस सबब का आदि हो गया है. सेक्स के बिना न मैं रह सकती हूँ. और hi तुम्हारी माँ.

विजय:- मतलब सब के लिए hi सोचना पड़ेगा.

सोनाक्षी आंटी:- वीजजू बीटा तू कुछ मैट सोच. वक़्त hi खुद कोई फैसला करलेगा.

मैं बारी बारी सबको देखने लगा. रेखा बाई के कोठे पर रहते हुए सबब कैसे हो गए थे. दलदल से निकल गए थे लेकिन सबका hi ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ बदल गया था. ये सही तो नहीं था. अब्ब मैं कहाँ से सबब के लिए लुंड धुंडु. मैं अकेला तो सब के लिए कुछ नहीं कर सकता था. और अगर मैं माँ और सोनास्खी आंटी को भी छोड़ दो तो वो सटिस्फी नहीं होने वाली. दोनों को hi रोज़ लुंड लेने की आदत पद चुकी थी. और मैं रोज़ दोनों को तो छोड़ने से रहा. अनिल और कृति भी बोहत बदल गए थे. अनिल शायद मुझसे भी ज़यादा बेशरम बन गया था. और अगर मैं उसके सामने hi उसकी माँ को छोड़ो, तो वो हंस कर कहेगा. विजजूउ भाई माँ को अच्छे से ठंडा ाकरण, कभी भी अपनी मर्ज़ी से और अपने मैं मताबिक लुंड से ठंडी नहीं हुई है... माँ की छूट को अच्छे से ठंडा करना.

मेरे लिए एक बड़ी समस्या कड़ी हो गई थी. सेक्स ड्रग्स का भी कोई न ोी इलाज होता है. लेकिन जो रेगुलर सालों से चुद रही हो. उसका मैं क्या इलाज करता. मेरा लुंड माँ की गांड में चुभ रहा था. और मेरे माथे पर चिंता की लकींरें उभरने लग गईथीं.





************************************************************************************




दिन 2 बजे तक मैंने और हर्ष अंकल ने सबब तैयारी करने के बाद.. माँ, बहनो, सोनाक्षी आंटी, kriti,anil,aparna, रेखा बाई और लाली को प्लेन से दिल्ली के लिए भेज दिया. किसी किसम की कोई टेंशन नहीं हुई थी मुझे. लाली को अभी भी होश में नहीं लाया गया था. वो दिल्ली पैलेस में पोहंच का रही होश में आती.

4 घंटे लग गए थे मुझे सबके hi चेहरे को चेंज करने में. ज़यादा तर तैयारी मैंने कल दिन के वक़्त hi कर ली थी. फेस मास्क चेंज किये बिना hi थोड़ा थोड़ा फेस चेंज किया था. फेस मास्क के लिए बोहत टाइम लगने वाला था. और मुझे जल्दी थी. तो जैसे तासिए करके मैंने सबका हुलिया बदल कर सबब को hi भेज दिया था. लाली के जैसे hi रेखा बाई भी (फेस चेंज) बेहोश में ले जाए गई थी. जब तक प्लेन हवा में नहीं उदा मुझे टेंशन रही. लेकिन हर्ष अंकल और ins-ranjeet ने कह दिया था क "वजिजय तुम टेंशन न लो"

और मैंने भी ज़यादा टेंशन नहीं ली थी. अब्ब दन्न कुछ समझ भी जाए तो सूरत तक सबब जानते जानते भी टाइम लग जाएगा.

अब्ब माँ, बेहणु और लाली, रेखा बाई के जाने से मेरी आधे से ज़यादा टेंशन ख़तम हो चुकी थी. बास अब्ब मुझे बाकी सबको लेकर था.




************************************************************************************




 
थैंक यू डिअर..!!

भाई आपने सही कहा पहले मैं 2 -3 उपट्स दे दिया अकर्ता था. लेकिन अब्ब भी जब्ब मुझे टाइम मिलता है तो मैं 2 उपदटेस एक hi दिन में दे देता हूँ. जब्ब स्टोरी शुरू हुई थी. तो मैंने कही लिखा था. क मैं कुछ दिनों के लिए टोटली फ्री हूँ. इसलिए मैं स्टोरी को स्पीड देने में सुसस्फुल रहा.. लेकिन आप चिंता न करें स्टोरी जल्द hi पूरी होगी.. न तो अधूरी रहेगी और न hi बोहत समय लेगी.. जितनी जल्दी हो सका मैं इसे पूरी करूँगा...

स्फोरम वळून का कहना है क स्फोरमेक नशा है.. तो मैं भी स्फोरम के नशे में हूँ, और एक लम्बे आरसे तक तो स्फोरम को छोड़ने से रहा.. इसलिए स्टोरी की चिंता न करें..

और ा hi उपदटेस को लेके परेशां हूँ.. वैसे भी अपडेट आती तो रेगुलर hi है ना.. मुझे भी आप सबब का पुर पूरा एहसास hai.isliye जितना हो सके जल्दी पोस्ट ाकरने की कोशिश करता हूँ....
 
अपडेट ::: 67

*************



लोकेशन पुणे


***************



टाइम :01:40:पं:


*****************



साड़ी रात गुज़र गई थी. लेकिन दन्न अभी तक्क सोया नहीं था. उसकी हालत देख के लगता था क वो बोहत hi ज़यादा टेंशन में है. दन्न के दोस्त साड़ी रात दन्न के लिए जागते रहे थे. लेकिन फिर सूबा होते hi वो सबब सो गए थे.

दन्न अभी तक्क जाग रहा था. और अपने आदमियों से मिलने वाली हर एक रिपोर्ट को सुन रहा रहा. लेकिन का कुछ भी पता नहीं चल प् रहा था. अगले दिन भी आधे से ज़यादा गुज़र चूका था. पारर अभी तक्क कोई भी कही से भी कोई भी क्लू नहीं मिल सका था.

दन्न वही उसी रूम में था. दन्न के घर वळून ने भी न्यूज़ देख ली थी. और नागराज दन्न के पास आया था. वो भी बोहत ग़ुस्से में था. नागराज कर भी क्या सकता था. वो दन्न के साथ दो घंटे बैठ क्र चला गया तह.

दन्न कभी बैठ जाता तो कभी काढ़ा हो कर टहलने लग जाता. दन्न को चैन नहीं मिल रहा था, वो कैसे भी करके सबब को ढूंढ लेना चाहता था.

दन्न ने अपने दमाग के सारे hi घोड़े दौड़ा लिए थे. लेकिन वो कुछ भी समझ पाने में नाकाम रहा था. इतना सीरियस मटर दन्न की लाइफ में कभी भी नहीं आया था. ये मटर दन्न के लिए सर्र दर्द बन्न गया था.. आज तक दन्न को किसी ने भी इतना स्टैमिना और चालाकी नहीं दिखे थी. दन्न हर बार hi अपने दुश्मनो पर भारी पड़ता रहा था. लेकिन इस बार उसे मोहन की खानी पद रही थी.

10 मिंट बाद दन्न के फोन की बेल्ल बजी, उसने नंबर को देख क्र कॉल को पिक की और

दन्न: हाँ क्या रिपोर्ट है.

उधर से:- सर एक रिपोर्ट मिली है..

दन्न:- (जोश में खड़ा हो गया) हाँ हाँ बोलो क्या रिपोर्ट मिली है.

उधर se:sir एक मोटर बोट को रात लेट गए गुजरात की तरफ जाते देखा गया है.. उस बोट को एक बड़े कपडे से ढाका हुआ था. लेकिन फिर भी उसमे कुछ औरतें और मर्द देखे गए हाँ.

दन्न;- शाबाश सुरिया.. मोटर बोट पर वो सबब hi हो सकते हाँ. वर्ण इतनी रात को कोई ऐसे क्यों जाएगा... अपने जितने भी आदमी हाँ गुजरात के आस पास के हर शहर में हर एक छोटे बड़े टाउन में पहला दो. मुझे वो सबब के सबब चाहिए. और अगर हमारे आदमी कम् पद जाएँ तो पैसे दे कर हिरे करलो लेकिन कोई भी बच के नहीं जाना चाहिए..

सुरिया:- सर आप टेंशन ने लें. मैं सबब देख लूंगा.

दन्न ने फोन काट दिया. दन्न के चेहरे पर दबा दबा जोश सा आने लगा था.

वो सोचने लगा क पुलिस को बताये या न बताये. लेकिन फिर उसके दमाग में आया क इस तरह से बात खुल सकती है. और छुपने वाले सावधान हो जायेंगे...

नहीं अब्ब सबब कुछ खामोश रह क्र hi करना padega...DNN ने सोचा क कुछ देर सो ले. लेकिन फिर वो फ़ौरन hi खुद की सोच को बदल गया. नहीं आज का दिन और रात भी वो नहीं सोयेगा. वर्ण साड़ी गेम hi न कही हाथ से निकल जाए....


************************************************************************************



Location:Mumbai


*******************



TIME:02:22:PM:


****************



महक एक मीटिंग अटेंड करके फ्री हुई तो अपने स्पेशल रूम में जा क्र एक चेयर पर सर्र को टिका करबैत गई. महक की गांड चेयर की सीट के कार्नर पर थी. महक इस स्टाइल में आधी चेयर पर लेती हुई दिखने लगी. आज उसकी बोहत hi टफ मीटिंग थी. वो कुछ थकन सी महसूस क्र रही थी.

महक सांस ले कर खुद को रिलैक्स करने लगी. सामने टेबल पर रखे महक के फोन की बेल्ल बजने लगी. महक ने एक तिरछी नज़र से फोन को देखा और जैसे hi उसकी नज़र ब्लिंक रो रहे नंबर पर पड़ी. वो एक जटके में उठ बैठी और कॉल को पिक कर लिया.

महक:- हाँ ज्योति क्या रिपोर्ट है.

ज्योति:- मैडम वो दन्न सर किसी से फोन पर बात कर रहे क किसी को बजट से गुजरात जाते हुए देखा गया है. आपने जैसे hi मुझे कहा था. क जो भी बात मुझे पता चले मैं आपको बता दूँ. मुझे लगा ये बात आपके काम की होगी...

महक:- शाबाश ज्योति तुमने ये बात मुझे बता कर बोहत hi अच्छा किया है. अब्ब तुम अपना ध्यान रखना. किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए.

ज्योति:- जी मैडम मैं ख्याल रखूंगी.. ाचा अब मैं रखती हूँ.

कॉल एंडेड.....

महक ने विजय के माँ और बहनो वाले मिशन के शुरू होते hi ज्योति को काम पे लगा दिया था. महक जानती थी उसका बाप दन्न क्या चीज़ है. इसलिए महक ने विजय को बचने के लिए दन्न के आस पास hi ज्योति की ड्यूटी लगा दी थी. ज्योति हवेली की पुराणी और महक की ख़ास थी.

महक ने विजय का नंबर मिला दिया...




***********************************************************************************




मैं सूरत के एयरपोर्ट से बहार खड़ा हुआ प्लेस को दिल्ली के लिए जाता हुआ देख रहा था.... दिल को एक तसल्ली मिल गई थी. अब्ब सिर्फ यहाँ की टेंशन रह गई thi.yahan मौजूद बाकी सबब लड़कियों और औरतों को भी सेफ लेकर जाना था. कुछ देर में मैं कोठी पर पोहंच गया. और सोचने लगा क अब्ब क्या करना चाहिए. ऐसे hi तो सबब को लेकर नहीं जा सकता. यहाँ से ट्रैन ले के निकल सो सकता हूँ. लेकिन अगर दन्न को कहीं से पता चला तो ट्रैन hi हमारे लिए बंदी खनन बन्न जाएगी. और फिर सबब एक hi झटके में पकडे जायेंगे. खैर पकडे तो हूँ नहीं जाते, लड़ाई ज़रूर होती और पुब्लिकल्ल्य लड़ाई में बेगुनाह लोगों के मरने का खदशा ज़यादा होता हिअ, सिलिये मैं सूरत से ट्रैन के रास्ते दिल्ही नहीं जा सकता tha.koi तो प्लान होना चाहिए मेरे पास.

इतनी लड़कियों और औरतों को देखकर किसी को भी शक हो सकता है. और पुलिस तो वैसे भी बोहत चौकस हो चुकी है कल रात से. और दन्न के आदमी भी तो हर एक जगा पर मौजूद होंगे.. मैं यही सबब सोच रहा था क मेरा फोन बजा.

मैंने बुनेर देखा तो महक का था. मैंने काल पिक की.

विजय:- हाँ महक क्या हाल है. एवरीथिंग इस फाइन ना.

महक:- नहीं विजय कुछ गड़बड़ हो गई है.

मैं महक की बात सुनकर सीधा हो कर बैठ गया.

विजय:- क्यों काया हुआ.

महक:- विजय दन्न को पता चल गया है क तुम सबब बोट में बैठ क्र किश रूट की तरफ गए थे.

विजय:- ओह्ह्ह्हह्हह.. महक मुझे भी अंदाज़ा था क दन्न से ये बात नहीं चुप सके गई. इसलिए मैंने माँ और बहनो को पहले hi बी एयर भेज दिया है.

mehak:-vijay ये तो तुमने बोहत अच्छा किया. तुम्हार िएक चिंता तो ख़तम हुई, पारर बात तो अब्ब भी वही है ना. और भी तो कई लड़कियां और औरतें हाँ तुम्हारे साथ. उनके लिए तो खतरा बढ़ गया है ना.

विजय:- हाँ महक मैं भी सब समझ रहा हूँ. और मैं पहले से hi इसी बात को सामने रख क्र सोच रहा हूँ. क कैसे सबब को यहाँ से लेजाया जाए.

महक:- तो फिर तुमने क्या सोचा है.

विजय:- अभी तो कुछ नहीं सोच पाया. लगा हुआ हूँ कोई प्लान बनाने में. कुछ तो आएगा hi दमाग में. मुझे जल्दी तो है. पारर सोच समझ क्र hi कोई स्टेप लूंगा.

विजय:- विजय टाइम काम है तुम्हारे पास, तुम एक hi जगा रुक कर सेफ नहीं हो, दन्न कोई आम इंसान नहीं है. वो बोहत hi शातिर इंसान है. अब तुम देखना उसे एक छोटा सा क्लू मिला हिअ, तो वो बोहत आगे तक सबब समझ जाएगा. और फिर उसे कुछ भी करने में देर नहीं लगेगी. इसलिए जितनी जल्दी हो सके तुम कुछ सोच लो. मैं भी सोचती हूँ. क्या करना बेस्ट रहेगा.

विजय:- ठीक है तुम भी सोचो और मैं भी सोचता हूँ. कोई न कोई हल तो निकल hi आएगा.

महक:- ok विजय तुम सोचो कोई बढ़िया सा प्लान. और अब्ब मैं कॉल डिसकनेक्ट करती हूँ. bye.

विजय:- bye महक.



कॉल एंडेड

***********



महक से बात करके मुझे अच्छा लगा था. महक जैसी लड़की भी मेरी दोस्त बन गई थी. और अब महक ने फोन पर दन्न बारे बता कर बोहत अच्छा काम भी किया था. महक के सबब बता देने से अब मुझमे खतरे का एहसास कुछ और भी जाग चूका था. और मैं बढ़िया से कुछ कर गुजरने में सफल भी हो सकता tha.warna दुशमन की नज़रों से दूर रह क्र इंसान कुछ कुछ लपवर्वा भी हो जाता है.

और में लापरवा नहीं होना चाहता था. यहाँ बात मेरी ज़िन्दगी की नहीं थी.

अपनी इज़्ज़त लुटवा देने के बावजूद भी इक नयी ज़िन्दगी की आस दिल में लिए कई महिलाओं की ज़िन्दगी खतरे में थी. और किसी की आस और सांस को टूटने नहीं दे सकता था. मैंने अपनी माँ और बहनो को तो सेफ कर hi लिया था. और मुझे अपनी माँ और बहनो के जैसी hi सबब की फ़िक्र करनी थी. सभी मेरे लिए एक सम्मान थीं. सबब को hi नयी ज़िन्दगी जीने का हक़ था. इज़तदारर तो नहीं बन्न सकती थीं सबब की सबब, पारर मुझसे इन सबब के लिए जो भी हो सका वो मैं करूँगा, चाहे मुझे किसी भी हद्द तक जाना पड़े, इस सबब को बहाऊंगा भी और इन सबब को एक नयी ज़िन्दगी दूंगा..... इन सबब के लिए मैंने दिल में बाहर कुछ सोच रखा था.. बास दलेही पोहचने की देर थी.

अंदाज़ा तो मुझे पहले से hi था, क दन्न ऐसे तो चुप रहने वाला नहीं है.

जितनी उसकी पावर है, और जैसे उनके कनेक्शंस हाँ वो कैसे भी करके सबब को खोज निकलेगा. और वो मेरी खोज में बोहत आगे बढ़ गया था, और उसकी खोज पूरी होने से पहले hi मुझे कुछ स्पेसेल कर दिखाना था.

अब मुझे कोई ऐसा प्लान बनाना था, जिस से मैं सबब को बचा कर ले भी जाओं. और दन्न और उसके आदमी सबब मोहन hi देखते रह जाएँ.

एक हिसाब से मेरी जुंग दन्न से से शुरू हो चुकी थी, और ये जुंग हम दोनों में अपनी क़ाबलियत को लेके हो रही थी. दन्न अपना दमाग चला रहा था, और मैं अपना, अब्ब देखना था, पहली बाज़ी किसके हाथ में आती है...

मेरे हाथ में या फिर दन्न के हाथ में.





*******************************************************************************




दन्न के आदमी सभी को ढूंढ़ने में लगे हुए थे. और इस बार दन्न के सख्ती से ऑर्डर्स थे क सबब के सबब hi बिलकुल ख़ामोशी से हर एक इलाके को छान मारें, किसी hi बाहरी आदमी को किसी किसम का एहसास तक्क न होने दिया जाए, वर्ण बात फेल जायेगी और रेखा बाई को उठा कर ले जाने वाले कहीं सावधान न no जाएँ. दन्न इस बार सब hi स्टेप्स बोहत बढ़िया से ले रहा था.. रात का घुसा तो ख़तम हो कहके था, बास टेंशन थी, लेकिन उसका दमाग अपनी सही रूठीने पर था, और थका उहा होने पर भी वो हरामी फुल चार्ज था, और दिमागी तौर पर पूरा पूरा एक्टिव.

जिस रूट की तरफ मोटर बोट जाते हुए दिखी थी. उसी रूट पर पाए जाने हर छोटे बड़े शहर, कसबे विलेज को चेक किया जाने लगा.

दन्न के सख्ती से ऑर्डर्स थे क किसी भी छोटी से छोटी बात को भी उससे न छुपाया जाए. अगर कोई चीज़ खटके उससे फ़ौरन hi पूछ लिया जाए. वो खुद hi समझ लेगा.

और फिर ऐसे hi भागते दौड़ते किसी न किसी तरह से दन्न के आदमी उस टूटी हुई बोट तक जा पोहंचे थे..

हर्ष चौहान के आदमियों ने बोट को बोहत hi अच्छे से तोडा था. बोट के टुकड़ों को देख के लग रहा था, जैसे बोट को टूटे हुए कई दिन हो चुके हैं. लेकिन दन्न के ऑर्डर्स की वजा से दन्न के आदमियों ने इस बात को बारीकी से लिया और दन्न को कॉल मिला दी...

दन्न:- शाबाश तुमने सही समझा है. जैसे रेखा बाई को चालाकी से ले जाय गया है. बोट को भी उसी चालाकी से तोडा गया होगा. तुम ऐसा करो जिस जगा से बोट मिली है. वहां के आस पास के साहिल को छान मारो. ज़रूर कोई न कोई क्लू मिलेगा. अब्ब जल्दी से काम पर लग जाओ.

बास फिर क्या था सबब लग गए काम पर कुछ साहिल की इक साइड तो कुछ आदमी दूसरी साइड में कोई भी सुराग़ ढूंढ़ने लगे. और फिर 1 घंटे बाद उन्हें वो जगा भी मि गई, जहाँ से विजय सबब को लेकर उतरा था. वहां पर पाए जाने वाले पैरों के निशान और फीमेल शूज के निशान से सबब hi समझ गए क यहाँ पर सभी को उतरा गया है. दन्न को रेप्रोट दी गई. वो और भी खुश हुआ. और

दन्न:- तुम सब अच्छे से काम पर लगे हुए हो. अब यहाँ पर तुम सबब सावधान हो जाओ और खबरियों से कह कर पुरे सूरत सिटी की छान बीन करो. देखो वो सबब यही हाँ या यहाँ से भी निकल कर कही और चले गए हाँ. सबब कुछ ख़ामोशी से hi करना. किसी को शक मैट होने देना. सबब का पता लगाओ, वो अभी तक यह हाँ सूरत महि हाँ या फिर सूरत से कहीं और निकल अपडे हाँ, अगर वो सबब कही और चले गए हाँ तो कहाँ गए हाँ. मुझे सबब रिपोर्ट दो.

दन्न अब्ब बोहत खुश था, उसे लग रहा था क वो अब्ब सबब के पास पोहंच गया है. और जल्द hi सबब उसके शिकंजे में हुओगे.




************************************************************************************




हर्ष chauhaan,uski पत्नी और पूजा विजय की माँ श्वेता को, बहनो को और बाकी सबब को रइवे करने के लिए ारिपोर्ट पर मौजूद थे. सबब के सबब बोहत hi एक्ससिटेड थे. लेकिन कोई भी एक्ससिटेमेंट में आ क्र कोई भी गलती नहीं करना चाहता था, इसलिए सबब ने hi बड़ी मुष्किल से hi सही, लेकिन खुद पर काबू पाया हुआ था. विजय ने सबब की hi पिक्स सेंड कर दी थीं, जिस वजा से किसी को भी पहचानने में दिक्कत नै होने वाली थी...

कुछ देर में hi प्लेन लैंड हुआ और फिर मज़ीद कुछ मिनट्स के बाद सबब बहार आयने लगे.. जैसे hi सबब ने श्वेता और बहनो के साथ सबब को देखा तो वो उनकी तरफ बढे, बड़े hi एहतराम और मोहब्बत से सबब का सवागत किया गया.

और फिर हालत को समझांते हुए ख़ामोशी से बहार आ कर सबब क hi गाड़ियों में बिठाया गया. रेखा बाई और लाली के लिए भी एक अम्बुलाबस टाइप वन का इंतेज़ाम था. सबब गाड़ियों में सवार हो कर पैलेस की तरफ निकल पड़े.

पुरे रस्ते hi ख़ामोशी छाई रही थी. एक तूफ़ान था सबब के hi दिल में. एक अंजना सा डर बह था, सबब के hi दिल में, कहीं यहाँ भी तो कुछ गड़बड़ नहीं होने वाली. लेकिन सबब सेफ hi रहा और आखिरकार वो सबब पैलेस में पोहंच गए.

पैलेस के अंदर गेट से कुछ hi दूर सबब के लिए अर्रंगे किया हुआ था. हर कोई इतना एक्ससिटेड था, क पूछो hi मैट.

जैसे hi श्वेता और बाकी सबब पैलेस के अंदर पोहंचे तो सबब ने hi अपना रात से रुका हुआ सांस बहार निकला. अब्ब जा के उनको यकीन आया क वो सेफ हो चुकी हाँ.

सबब की hi आँखों में आंसू ा गए थे. आज वो सबब सेफ हो गई थीं. वो एक भयानक दलदल से निकल कर इक ठंडी छाओं में आ गाइट हीं.

खतरे तो अभी भी थे. जब्ब तक्क दन्न न ख़तम हो जाए एक हिसाब से सबब hi यहाँ पर कैद hi थी. पैलेस से बहार जाना मुमकिन नहीं था, कोई भी पहचान सकता था. फ़िलहाल तो सबब के hi चेहरे कुछ कुछ चेंज थे. और हर वक़्त तो चेहरा चेंज करवाने से रही.. खैर ये सबब तो बाद में सोचने की बातें थीं.

अब्ब जब्ब वो सबब सेफ हो चुकी थी. सबब अपने विज्जु के पैलेस में सुरक्षित पोहंच गई थीं. सबब को hi बेपनाह थकन ने आ घेरा.

पैलेस में सवागत करने वाले पहले से hi ये सबब समझते थे. उन्हों श्वेता और बाकी सबब को hi संभाल लिया और हाथों में लिए हुए आगे बढ़ गईं.

भाभी भागी आइए ुर आ क्र श्वेता के गले लग गई. अब्ब गुज़रे हुए समय को छोड़ क्र ख़ुशी को याद रखते हुए रोना आ रहा था सब को.

प्रियजहांवी और श्रुति अपने विज्जु के पैलेस को बजती हुई आँखों से देखने लगी थी. रानी और दूसरी सबब आएं और priya,shuruti,jhanvi,kriti और अपर्णा को अपनी बहन में भर लिया. मलकियन, पद्मा आंटी और राजा एंड पार्टी की फॅमिली ने भी सबब को हाथों हाथ लिया..

किसी शाही खंडन से बर्ताव सबब से hi किया जा रहा था.. सबब के hi दिल में बिआह मोहब्बत और एस्पेक्ट थी सबब के लिए hi.... ऐसे hi सबब एक दूसरे से मिलने मिलाने लगे. सबब से आने वळून का दर्द बांटने अलगे. और उनको एक नयी ज़िन्दगी की मुबारकबाद भी देने लगे... धीरे धीरे करके सबब को पूरा पूरा यकीन होने लगा, क नयी ज़िन्दगी को पूरा पूरा प् लेने में सफल हो चुके हाँ..

आधे घंटे में सबब को hi अंदर ले जाय गया... फिर सबब की hi खातिरदारी शुरू करदी गई... सालों की लम्बी थकान थी. जल्द hi सबब को रेस्ट के लिए रोऊं में भेज दिया गया...

लाली कप पहले से hi एक पैलेस के अंदर शिफ्ट आकर दिया गया था. और रेखा बाई के लिए विजय hi कुछ आ आकर कर सकता था. तब्ब तक्क के लिए रेखा बाई को बेसमेंट में कैफ कर दिया गया....

ये पहले शंकर पैलेस था, जो विजय एंड पार्टी के लिए सर्र दर्द बन्न गया था, लेकिन विजय ने अपने दुम्म पर इसे हासिल कर लिया था. और अब्ब ये विजय पैलेस बन्न चूका था. और विजय की सपोर्ट पा क्र जूली ने बोहत hi तेज़ी से सबब कुछ और hi-tech बनाना शुरू कर दिया था. अब्ब ये पैलेस हर तरह से सुरक्षित था.

और रेखा बाई के लिए ये एक भयानक जेल भी बन्न गया था ये पैलेस..

रेखा बाई ने जो अपनी ज़िन्दगी में नहीं सोचा था, अब्ब वो सबब रेखा बाई के साथ होने वाला था. रेखा बाई अभी बेहोश थी. अब्ब वो बेसमेंट में फंसे हुए hi होश में आने वाली थी.





************************************************************************************




दन्न जितना खुश था, अब्ब उतना hi परेशां होने लगा था, वो जितना चिंतित था, उल्टा वो हैरान भी था, वो सोच रहा था, इस बार उसका दुष्काण उसकी hi तरह मेंटली पॉवरफुल है, एक क्लू मिला था फिर उसके बाद किसी किसम का कोई भी क्लू मिल hi नहीं पा रहा था, आखिर सबब गए कहाँ, ज़मीन निगल गई या आस्मां खा गया सबब को........... पुरे सूरत को छान मारा गया तह, कही से भी कोई रिपोर्ट ऐसी नहीं मिली, जिसे देख कर शक हो क यहाँ से कुछ आगे की राह मिल सकती है. रात के 10 बजने वाले ओह गए थे, लेकिन अभी तक्क कहीं से कुछ भी पता नहीं चला था....

कैसे पता चलता विजय सबब को hi अपने बेस्ट प्लान का उसे करते हुए सूरत से ले कर फुर्रर्रर्रर्र हो चूका था..

दन्न बूढ़ा हो चूका था, वो कहाँ अब्ब योंग्सटर्स से मेंटली कॉम्पिटिशन कर सकता था... और न hi दन्न के अंदर विजय जितनी आग थी. दन्न भी विजय की आगे में शातिर बन्न गया था, तो विजय तो फिर भी दन्न के से कही आगे था... आखिर विजय को त्रिनेड करने वळून ने ऐसे hi तो नहीं विजय के लिए अपना सबब कुछ निछावर कर दिया था... और दन्न के लिए अब्ब विजय का सामना करना आसान नहीं था. विजय एक आग था... जो जल्द hi दन्न को सन्न बनाने वाला था..




***********************************************************************************




 
अपडेट ::: 68

*************

स्पेशल अपडेट

******************



कहते हाँ जब्ब दिल में किसी के लिए be-matlab का एहसास और प्यार हो, किसी की ज़िन्दगी को बचने के लिए दिल और दिल में जज़्बात सच्चे हूँ, तो ऊपरवाला भी कभी उसका साथ नहीं छोड़ता. और फिर यहाँ सूरत वाली कोठी में तो जो भी लड़कियां और औरतें थीं, वो तो ाललरेअद्य एक भयानक ज़िन्दगी जी चुकी थीं, किसी की भी ज़िन्दगी में मुसलसल धुप नहीं रहती, खबि धुप तो कभी छाओं, कभी दर्द तो कभी रहत ... कभी ग़म तो कभी खुसी..

इसलिए अब्ब भगवन ने भी सबब को एक नयी ज़िन्दगी देने का सोच लिया था. और इन सबब इज़्ज़त गुणवा चुकी महिलाओं के लिए मुझे चुन लिया था.. मेरी मदद ऊपरवाला hi कर रहा था, अगर मैं कहूं क मैं कोई बोहत hi बड़ा मेंटली पॉवरफुल लड़का हूँ, तो ये सही नहीं होगा.. ये सबब उपरवाले hi की hi किरपा थी.. वर्ण मैं कहाँ इस काबिल.. जब्ब खतरा सर्र पर मंडळाने लगता है, तो सलूशन नहीं मिलते अक्सर गलतियां हो जाती हैं. लेकिन मेरे सोचने समझने की शक्ति बोहत hi ज़यादा बढ़ी गई थी. मुझे चिंता तो थी hi सबब की. लेकिन दिल में ऐसा कुछ नहीं था, क मैं उस सबब को बचा पाने में सफल नहीं रहूँगा..

मेरा हौसला किसी भी नाकाबिल इ शाकिस्त पहाड़ की छोटी को भी सर्र करने से भी ज़यादा बड़ा हुआ था.

आज मेरे लिए माउंट एवेरस्ट को सर्र करने जैसी hi सिचुएशन थी. लेकिन न तो मैं डगमगा रहा था और न hi मुझे बोहत ज़ायदा टेंशन थी. बास मेरा दमाग अपने अंदर hi अपने वर्क में लगा हुआ था, वो जल्द hi मुझे कोई बढ़िया का प्लान बना कर देने वाला था.

मेरे दोस्त पूरी कोठी में फेल कर कोठी की सुरक्षा में लगे हुए थे. रात गुज़र गई थी लेकिन मैंने अभी भी सही से किसी से बात नहीं की थी. और यहाँ अभी इतना टाइम भी नहीं था. बास हर कोई अपने अपने हिसाब से अपने काम को अंजाम देने में लगा हुआ था.

दन्न के आदमी भी हम सबब को ढूंढ़ने में लगे हुए थे. लेकिन अब्ब वो सबब इतने भी शर्लाक होल्म्स नहीं थे, जो हमें फ़ौरन hi ढूंढ लेते.

आखिर मेरे दमाग ने मुझे एक सुपर डुपेर प्लान बना कर दे hi दिया. मैंने हर्ष अंकल और ins-ranjeet से भी मश्वरा किया. उन्हों ने भी मुझे सबब "ok है" बोल है, और वो दोनों आगे की तैयारी में लग्ग गए.... अब्ब हमें इस कोठी से संभल कर बहार निकलना था.



************************************************************************************



आफ्टर 1 डे

************



Location:Palace

****************



पैलेस के मैं फ्लोर का हाल जो अब्ब हम सबब के लिए डाइनिंग हाल और सिटींग हाल बन्न चूका था.

हाल किसी होटल के जैसा था. बोहत hi बड़ा था. और सबके hi बैठने के लिए बोहत जगा थी यहाँ पर..

जूली ने अपने हिसाब से पुरे हाल को इक विप हाल बना दिया था. शंकर पैलेस को खुद के अंडर करने के लिए हमने शंकर पैलेस से मिलने वाले पैसे और ड्रग्स या वेपन को ज़यादा ध्यान में नहीं रखा था, हमारे लिए पैलेस ज़यादा इम्पोर्टेन्ट था. पैसा तो फार्महाउस से भी मिला था. शंकर पैलेस से भी 10 करोड़ के करीब हमारे हिस्से में आ गए थे. और ये हामरे लिए फिलहाल काफी था.

paisa,drugs और वेपन्स कमिश्नर के हवाले कर दिए गए थे. हमने वेपन की भी ज़रूरत नहीं थी. पहले से hi हमारे पास बोहत कुछ था. और वैसे भी अब्ब हमने दिल्ली साफ़ करना था. तो आगे चल के हमें बोहत कुछ मिलने वाला था.

पूरा दिल्ली सिटी hi साफ़ करना था, तो पैसों की चिंता भी नहीं थी. और जल्द hi ये पैलेस पासिओं से भरने वाला था... पुरे दिल्ली के गुंडों का पैसा मुझे खुद के अंडर में लेना था. और इन पैसों से मैं रेखा बाई के कोठे पर फँसी लड़कियों का फ्यूचर बनाना चाहता था. और भी इन जैसी na-jaane मुझे कहाँ कहाँ मिलेंगी. मैं इन सबब के लिए बोहत कुछ करना चाहता था.

इस वक़्त सिटींग हाल में हम सबब hi बैठे हुए थे. मुझे सबब को ले क्र पैलेस में ए हूँ 1 घंटा होने वाला था. मैं यहाँ अकेला hi था मेरे साथ आने वाले और वालियां सभी को अंदर फ्रेश होने के लिए भेज दिया गया था. राजा उदय जीतू और अनु सबब अपनी अपनी फॅमिली से मिलने चले गए थे....

हाल में मेरी दिल्ली वाली फॅमिली और कल जो माँ और मेरी बहनो के साथ ए थे वो सबब hi बैठे हुए थे.

आप सबब सोच रहे होंगे मैं किस रास्ते से सेफ पोहंच गया.. इतना आसान भी नहीं था सबब कर पाना. मेरे पुरे वजूद का अंजार बंजर ढीला हुआ पड़ा था और बाकी सबब का भी यही हाल था ...

मैंने बोहत सोचा था क कैसे सेफ निकला जा सकता है. तो फिर जो सबसे बेस्ट मेरे मंद में आया, वो ये था क 4 बजे के करीब सब को hi मज़दूरों वाले हुलिए में बिठा का यहाँ से निकला jaaye.aur उसके लिए एक बड़े खुले ट्रक की ज़रूरत थी, जो हर्ष अंकल ने अर्रंगे कर दिया था. छुप कर जाना खतरनाक था, लेकिन ओपनली जाना "सबब की और दन्न चूतिये की आंख में धुल झोंकने के बराबर था"

जैसा वो चुटिया था वैसे hi उसके आदमी भी चूतिये hi थे. हम उन के सामने से गुज़रे और वो हमें देख कर फिरसे कहीं और देखने लग गए थे.. मुझ समेत सबब hi दिल hi दिल में हंस रहे थे...

दन्न के आदमी भी क्या करते..... हम सब के hi कपडे गार्ड से ात्ते हुए थे और चेहरे जैसे उनको धोये हुए भी कई दिन हो चुके हूँ, लकड़ियों और औरतों ने किसी विलेज की स्टुपिड फैशनेबुल गर्ल्स के जैसे आँखों में काजल डाला हुआ था. देख के hi हंसी आ जाए. मिटटी से ात्ते हुए चेहरे पर से आँखों में लगे be-dhange काजल की वजा से किसी का भी ज़यादा देर तक देखने का मैं नहीं होता था...

खुले ट्रक में बैठे हम सबब सूरत से कडोदरा के लिए निकले. और फिर वही से संजलि में जा पोहंचे. सफर था तो बड़ा hi उलझन से भरा हुआ. शक्लों के बिगड़ने की वजा से बोहत कोफ़्त हो रही थी. लेकिन फिर भी ये सबब तो करना hi था.

संजलि पोहंचे तो हम सूरत से 50 किलोमीटर दूर आ गए थे. अब्ब खतरा कम् हो गया था. अभी इस तरफ कोई नहीं था.. सबब तरफ देख भाल की, कोई नहीं दिखा तो वहां पर खड़े हुए दो छोटे कंटेनर्स में सबब को बिठा दिया गया.

कंटेनर्स में हवा के लिए पहले से hi फंस का अर्रंगे की जा चूका था. छोटे छोटे किसी बुसस में लगे हुए एक फंस जितने फंस लगे हुए थे.. बात थी तो खतरनाक hi. कही किसी का दम न घुट जाए, ऐसे हादसे अक्सर hi होते रहते थे, ऊपर से हमने कई घंटे इन्ही कंटेनर्स में बैठ के उदयपुर जाना था.

कंटेनर्स का सफर बोहत hi दिल को दहलाने वाला सबत हुआ था. जब्ब किसी चौक पर कंटेनर्स को रोका जाता तो फंस बंद करने पड़ते थे. जिस वजा से घुटन अचानक से hi बढ़ जाती थी....

कैसे भी करके कंटेनर्स का 7 घंटे का सफर ख़तम हुआ. और हम उदयपुर पोहंच गए..

सबब को hi कंटेनर्स से बहार निकला गया. तब्ब जा के सभी को चैन मिला. फ्रेश हवा मिलते hi ऐसा लगा. जैसे लाइफ में पहली बार खुल के सांस ले रहे हूँ.

अब्ब हमारे लिए खतरा टोटली न सही लेकिन 90% ख़तम हो चूका था. कहीं से भी कोई छोटा सा भी क्लू नहीं छोड़ा था.

कोई किसी से कह सके क उसने एक hi जगा बोहत सी लड़कियों और औरतों को देखा है...

अब्ब हम सेफ जगा थे तो सबब ने hi कुछ देर रेस्ट की और फिर फ्रेश हो कर पहले जैसी शक्लो में आने लगे... यहाँ पहले से hi ट्रैन की दो hi क्लास बोगी हमारे लिए रिजर्व्ड थीं. और hi क्लास में चेकिंग का ऑप्शन नहीं tha.iska भी इंतेज़ाम कर लिया गया था. यहाँ से अब्ब दन्न की हकूमत ख़तम हो कर हर्ष चौहान के बिज़नेस की वैल्यू शुरू हो गई थी. और राजस्थान में हर्ष चौहान का एक नाम था और रिलेशन्स भी बोहत स्ट्रांग थे..

और यहाँ से सबब hi दिल्ली में किसी वेडिंग सेरेमनी के लिए निकलने वाले थे. हम किसी शादी में पहने जाने वाले ड्रेसेस में आने लगे. कुछ सामान भी इससे से रेलेटेड लिया गया था... हर हिसाब से फूलप्रूफ प्लानिंग कर ली गई थी. और यहाँ पर हर्ष चौहान के आदमी बोहत ज़यादा एक्टिव नज़र आने लगे थे. सही बात तो किसी को पता hi नहीं थी. इसलिए वो सबब hi हमें हर्ष अंकल के खास समझ बार ट्रीट क्र रहे थे.

उदयपुर से हमें दिल्ली के लिए कोई परेशानी नहीं हुई और हम सबब hi पैलेस सुरक्षित पोहंच गए.....

और मैं दन्न से एक बाज़ी भी जीत चूका था.....

चुटिया कही का. वो गैंगस्टर हो कर कंटेनर्स में drugs,weapons और लड़कियां सप्लाई कर सकता था. मैंने भी उसी के दमाग से सोचा था. साला सोच भी नहीं सकता था क मैं कंटैन्स भी उसे कर सकता हूँ...... अब्ब मुझे रहे और अपनी माँ छुड़ाता रहे.

अजित भाई कल सूबा यहाँ पोहचते hi बीमार हो गए थे, और वो तब्ब से hi रेस्ट में थे, वो भी सालों से अपनी फॅमिली से दूर रहने की वजा से मेंटली बोहत थक चुके थे. उनकी सेहत भी अब्ब पहले जैसे नहीं रही थी. इसलिए उन्हें कम्पलीट रेस्ट दे दिया गया था.... मैंने आते hi भाभी से पूछा था तो उन्हों मुझे सबब बताया था...

एक बड़े सूफी पर मैं बैठा हुआ था. मेरे राइट साइड माँ थी, लेफ्ट साइड प्रिय, माँ और प्रिय के साथ जुडी हुई जहान्वी और श्रुति बैठी थीं.. रानी और पूजा दीदी, षुरूति और जहान्वी से जुडी बैठी थीं....

यहाँ आते hi मैं अपनी असली सूरत में आ गया था, और माँ के साथ बाकी सबब भी इस वक़्त अपनी ओरिजिनल शक्लों में hi थीं.

माँ मुझे कंधे से पकडे मेरे गाल को चूम रही थी, उनकी आँखों में आंसू थे, और प्रिय भी माँ के जैसे hi मुझे कंधे से पकडे हुए चूम रही थी, श्रुति और जहान्वी दोनों का hi एक एक हाथ मेरे सर्र पर था. और वो दोनों hi अपनी उँगलियों से मेरे सर पर मस्सगे कर रही थी...

इस वक़्त हाल में बैठे सभी आंसू बहा रहे थे... और ये आंसू प्यार के थे, ख़ुशी के थे, सबब के एक साथ मिल बैठने के थे......

रानी और पूजा दीदी भी हमें hi देख कर आंसू बहा रही थीं.. आज पूजा दीदी ने भी अपने आंसूं को बहने से नहीं रोका था.. जिस मक़सद के लिए वो अपने आंसू रोका करती थी, आज वो पूरा हो चूका था... पूजा दीदी खुद के आंसू रोक कर मुझे जैसा बनाना चाहती थीं. मैं वैसा hi बन चूका था.

माँ और प्रिय का दिल नै भर रहा था मुझसे. अब्ब सही मानो में सबब सुरक्षित थे, और खुल कर अपनी भावनाओ का इज़हार किये जा रही थी. मेरा एक मक़सद पूरा हो चूका था और सबको सुरक्षित पा क्र मैं भी इमोशनल हो गया था..

इमोशनल तो मैं शुरू से hi था. लेकिन फिर वक़्त ने मुझे सख्त बनाना शुरू किया तो मेरे आंसू भी बहने रुक गए.. मैं जितना भी सख्त बन्न गया था. लेकिन था तो अंदर से नरम hi....

रेखा बाई के कोठे से भागते वक़्त जो मेरे दिल में दर्द था. वो मैं hi जानता था. वहां से भागते वक़्त मैं में था, क कभी किसी काबिल बन्न कर माँ और बहनो को वहां से निकाल लाऊँगा. ये सबब इतना भी आसान नहीं था. लेकिन ूअपरवाले की मदद से और दिल्ली में मिलने वाले सबब लोगों की वजा से ये सबब हुआ था.

वर्ण मैं अकेला कैसे ये सबब क्र पाटा. मुझे पूजा दीदी मिली, एक पूरा परिवार मिला, फिर raja,uday,jeetu और अनुपम जैसे दोस्त मिले, पहलवान जी जैसा उस्ताद मिला, ins-ranjeet के जैसा एक पुलिस अफसर मिला, जिनके जैसा कही चिराग़ ले के भी ढूंढो तो ना मिले.. फिर हर्ष चौहान की फॅमिली मिली... और देखते hi देखते सबब के प्यार और मिली भगत ने मुझे बदल कर रख दिया. इतनी ज़हानत और काबिलियत मुझमे कहाँ थी. अगर मैं अकेला hi रह जाता तो कैसे ये सबब कर पाटा.

भगवन ने सबब hi प्यारे और अच्छे लोग मेरी ज़िन्दगी से जोड़ दिए थे... और इन सबब के वजा से आज माँ और बहनो hi नहीं, कोठे पर फँसी हुई सबब hi यहाँ पैलेस में पोहंच क्र सुरक्षत हो चुकी थीं..

maa:-(rote हुए) मेरा विज्जु कितना खूबसूरत हो गया है. कितना गबरू जवान बन गया है. वो इतना बड़ा हो गया है, क (सबब्ब की तरफ देख कर) सबब के hi दिल भी जीत लिए और सबब की hi आँखों का तारा भी बन गया... मुझे तुझपे नाज़ है मेरे बेटे. आज मेरे दिल की एक तमन्ना पूरी हो गई विज्जु बीटा... वर्ण जब्ब से मेरी इज़्ज़त मेरा वक़ार मुझसे छीन गया था, उसी दिन hi मैं तो ख़तम हो गई थी. लेकिन इन सबब की आँखों में मुझे मेरे लिए वही रेस्पेक्ट दिखी है जो कभी मेरी ज़िन्दगी में हुआ करती थी. ये सबब तेरी वजा से हुआ है विज्जु बीटा. तू मुंबई से ना भागता, तो फिर न तो हम उस दलदल से निकल पाते और hi ये सबब प्यार करने वाले, रेस्पेक्ट देने वाले फिरसे मेरी ज़िन्दगी में आते.

माँ की बातें बोहत दर्द भरी थीं. माँ से खुशियां भी सहन नहीं हो पा रही थीं. खाने को ज़यादा मिल जाये तो वो भी हैं नहीं होता और यहाँ तो वो खुशियां मिली थीं जिस की उम्मीद तक्क नहीं थी....

मैंने एक एक करके सबब को देखा... सबब मुझे hi देख रहे थे. सबब की आँखों में आंसू थे, और सबब hi मुझे प्यार और गर्व से देख रहे थे. पूजा दीदी और रानी की आँखों की चमक बढ़ी हुई थी. वो भी इस सबब को अपनी ख़ुशी मानते हुए खुश थीं...

विजय:- माँ अब आपको यहाँ कैसा लग रहा है.....

माँ:- विज्जु बीटा, मुझे तो यहाँ सबब अच्छा hi लगेगा, अब्ब तो मैं अपने विज्जु के घर में आ गई हों. और फिर जो ये सबब बैठे हुए हाँ, ये भी तो अब्ब हमारी ज़िन्दगी का, हमारी फॅमिली का हिस्सा बन चुके हाँ, तो मुझे अब्ब सबब hi अच्छा लगेगा.

विजय:- माँ अब्ब कोई ग़म न करना. वो वक़्त गुज़र गया, उसे याद करके दुखी मैट होना, जो दर्द भरे साल आपकी और सबब की ज़िन्दगी में आये थे, वो अब जा चुके हाँ.

प्रिय:- विज्जु मरे भाई, अब्ब हमें कोई ग़म नहीं है... हम सबब अब्ब साथ में रहेंगे तो सबब ठीक हो जाएगा. थोड़ा वक़्त तो लगेगा hi ना.

जहान्वी:- विज्जु थोड़ा सा वक़्त तो लगेगा hi खुद को सबब समझने में. इतने साल जो कोठे पर गुज़र दिए. अब्ब सबब बदल तो गया है, लेकिन अभी भी be-yakeeni की सी कैफियत है.

श्रुति:- हाँ विज्जु, जहान्वी सही कह रही है, यहाँ आ क्र हम बोहत खुश हाँ, लेकिन अभी भी ऐसा लगता है, जैसे हम कोई खवाब देख रही हूँ.. और डर सा लगता है कहीं आंख खुले और खवाब टूट न जाए.

माँ:- विज्जु बीटा, सुन ली तीनो की बातें, यही हाल मेरा भी है. खुद को समझा भी लिया है, यकीन भी आ गया है, क अब्ब हम सबब सेफ हाँ, और अपने विज्जु के पैलेस में हाँ, लेकिन ये कैफियत जाते जाते भी कुछ समय लेगी...

सोनाक्षी aunty:-(ankhon में आंसू लिए हुए) विज्जु हमारा भी यही हाल है. अब्ब तक्क वहां जो कुछ देख चुकी हाँ हम, वो सबब इतना भयानक था, क अभी भी याद करते हुए रूह काँप उठती है.. रेखा बाई से टकराने वाला कभी सलामत नहीं रहा.

सोनाक्षी आंटी की बात सुन कर पास बैठी हुई भाभी ने सोनाक्षी आंटी को इक साइड से गले लगा लिया..

भाभी:- सोना बहन हम हाँ न. तुम सबब के साथ. अब्ब हम तुम सबब को कभी भी कुछ नहीं होने देंगे. ये पैलेस बोहत hi सुरक्षित है. यहाँ की सुरक्षा और हमारा प्यार तुम सबब को hi 2 दिन में be-yakeeni की कैफियत से बहार निकल देगा...

पूजा:- माँ जी हम सबब भी तो आपके हाँ, अब्ब आपको कोई ग़म नै करना चाहिए..

रानी:- माँ जी और आप देखना मैं कैसे आप सबब को इस सबब का यकीन दिलाती हूँ.. मेरा नाम भी रानी है. 2 दिन तो दूर की बात है. कल शाम होने से पहले hi देखना आप सबब कुछ भूल कर हमारे साथ हस्सन लगेंगी..

रानी के बोलने से सबब hi रानी को देखने लगे.

रानी सूफी से कड़ी हो कर दोनों हाथ कमर पर रखते हुए..

रानी:- ऐसे सबब मुझे घूर क्यों रहे हाँ. मैंने कोई जोके मारा है क्या.??

रानी की अंदाज़ देख क्र पूजा दीदी, shikha,rupa,raj,shetal और नताशा दीदी सबब समझ गईं.. क रानी सबब को सीरियस कंडीशन से निकालने के लिए इस रूप में आई है, और फिर सबब hi रानी के रंग में रंगने लगे.....

शीतल:- बड़ी आई, तुझसे कुछ नहीं होने वाला, देख लेना, मैं सबब कुछ यौन (चुटकी बजाते हुए) hi कर के दिखा दूंगी.....

नताशा:- वाह, मेरी शेरनी तो आज मूड में आई हुई है..

राज:- नहीं नताशा दीदी ये शेरनी नहीं है, ये तो बकरी है, दिखाओं अभी कैसे दरर्ति है...

shikha,rupa:- चल राज आज इसे भी सबक़ सीखा hi देते हाँ, खुद को बड़ी सियानी समझती है. आज इसे दिखा hi देते हाँ, हम भी कुछ हाँ..

रानी:- ोोोू हेलललललूऊओ.. ये सबब मैंने शुरू किया था. और आज मैं hi सबब करने वाली हूँ..

पूजा दीदी:- वेल दोने रानी, क्रीज़ पे डटे रहना, आज अगर हमारा इनसे जोड़ पद hi गया है, तो उनको भी दिखा देते हाँ. किस्मे कितना है दुम्म...

नताशा दीदी:- ruko,ruko, पहले तो बताओ, क मैच कितनी टीम्स खेल रही हाँ.

नताशा दीदी की बात सुनकर सबब hi हस्सन लगे. लेकिन अपर्णा माँ के लगे लग कर रोने लगी. अपर्णा को इतना प्यारा माहौल पहली बार मिल रहा था, वो ऐसे माहौल को देख इमोशनल हो गई थी.

माँ:- मेरी बच्ची क्या हुआ, तू क्यों रोने लगी..

अपर्णा:- (रट हुए) माँ जी ये सब कितना अच्छा लग रहा है ना.............

अपर्णा बड़ी मासूमियत से बोली..

माँ:- तो इसमें रोने वाली कौन सी बात है..

aparna:-maa ji....hitch...maa .... ये सबब देख के.... मुझे ... हिच.. मेरा घर याद आ गया है.... वहां bhi...hitch..sab...aise...hi खेला करते थे..

अपर्णा रट और हिचकियाँ लेते हुए माँ को बोली.

सबब अपर्णा की बात सुन के थोड़े से दुखी हो गए. लेकिन गर्ल्स मण्डली ने जैसे डीडे कर लिया था. क आज वो सबब को hi दुःख से बहार निकाल कर हस्सन पर मजबूर कर देंगी.. माँ ने अपर्णा को गले लगा लिया..

और फिर जो सबब का ड्रामा शुरू हुआ.. हस्स हस्स के सबब की आँखों में आंसू आने लगे... अपर्णा प्रिय, श्रुति, जहान्वी, कृति और अनिल भी सब में शामिल हो गए थे.

मेरी तितलियाँ तो जब्ब तक मैं कोठे पर था. इस सबब में नंबर 1 थें. लेकिन मेरे न रहने से सबब hi सबब कुछ भूल चाकी थीं. ज़िन्दगी इन सबब के लिए डेजर्ट में भटक रहे इंसान के जैसी हो गई थी. कही भी नखलिस्तान नहीं दिखा था.. अब्ब जब्ब मेरी तितलियों को सबब कुछ मिला तो वो अपने रंग में वापिस लौटने लगीं.

और फिर priya,jhanvi और श्रुति का मुक़ाबला कौन कर सकता था. कृति और अपरना भी पीछे नहीं रही. और अनिल राज के साथ मिल कर खुद को इस माहौल में जाम कर चूका था.

सभी को मस्ती करता देख कर सबब hi एक दुम्म से फ्रेश फ्रेश हो गए थे.....

हर्ष अंकल अभी यहाँ नहीं the...aur अजित भाई रेस्ट कर रहे थे.. बाकी सबब थे.. मालिकान. पद्मा आंटी, भाभी, दीक्षा आंटी, सोनाक्षी आंटी और माँ सबब को मस्ती करते हुए देख कर खिल उठी थीं..

रानी का मक़सद पूरा हुआ, जैसा उसने सोचा था, वो करने में कामियाब रही थी.

मैं माँ की गॉड में सर्र रखे हुए ये सबब देख रहा था. माँ मेरे सर्र के बालों में उँगलियाँ चला रही थी.

सबब बोहत hi ज़यादा मज़ेदार, और दिल के लिए khush-gawar था. सबब ने hi इस पैलेस में असली रौनक लगा दी थी..



जूली भी लास्ट टाइम में आ गई थी. वो भी इस सबब में शामिल हो गई. जब मैं यहाँ आया था तो जूली मार्किट गई हुई थी, कुछ सामान लेने के लिए..



************************************************************************************





डिनर के लिए सबब hi फ्रेश हो क्र डाइनिंग हॉल में आ गए थे..

हर्ष अंकल भी आ गए थे. उनसे कुछ देर बात चीत हुई. मुझे अपने गले लगा कर मुझे कॉंग्रट्स किया. और फिर फ्रेश होने के लिए अंदर चले गए.

डिनर के लिए पहलवान जी और ins-ranjeet को भी बुलाया गया था. उन्हें आने कुछ hi देर थी. एक एक करके सबब hi डाइनिंग हाल ने आने लगे..

मेरे साथ आने वाली लड़कियों और औरतों में से बोहत hi कम् डिनर के लिए आई थीं. ज़यादा तर हल्का फुल्का खा पि कर सो गईं थीं... सफर की थकान जो बोहत थी.

माँ और मेरी बहनो के साथ साथ सबब hi आ गए थे.. अब्ब बास पहलवान जी और ins-ranjeet का hi वेट करना था. अभी सबब डाइनिंग हाल के पास hi बने हुए सिटींग हाल में बैठे थे.

सबब किसी व्विप होटल के जैसा hi था. बास दोनों के सेण्टर के एक शीशे की वाल बना दी गई थी और जूली ने ये सबब सजावट िनी बढ़िया से की थी, क पुरे हाल का मंज़र hi बेपनाह अट्रैक्टिव लगने लगा था..

सबब बातों में बिजी थे, किसी ने आ के बताया क आईएनएस रणजीत और पहलवान जी पैलेस में अन्तर हो चुके हाँ..

सबब hi खड़े हो गए और उनका सवागत करने के लिए पैलेस से बहार को चल पड़े..

दोनों hi मेरी ज़िन्दगी के ख़ास तरीन मेंबर बन्न चुके थे. इन दोनों के बगैर मैं कुछ भी नहीं था.. मेरे अंदर आग थी, और उसे सही सिम्त देने के लिए पहलवान जी और ins-ranjeet ने अपना सबब एक्सपीरियंस और प्यार मुझपर लुटा दिया था. वो न होते तो मैं शायद मैं कुछ भी नहीं होता.... या अगर होता तो एक ऐसा दरिंदा होता, जिसके अंदर इंसानियत नाम को नहीं होती...

सबब hi बहार को चल दिए.. माँ और बहने बोहत खुश थीं. और होती भी क्यों ना, उस सबब को दलदल से बहार निकलने के लिए पहलवान जी और ins-ranjeet ने भी बोहत कुछ किया था.. माँ और बहनो की नज़रों में दोनों की hi बड़ी रेस्पेक्ट थी...

मुझे दोनों साइड में जहान्वी और श्रुति ने पकड़ा हुआ था. माँ और प्रिय की जोड़ी बानी थी, तो जहान्वी और श्रुति की जोड़ी बानी थी. कभी माँ और प्रिय मुझे थाम लेती, तो जब श्रुति और जहान्वी को मौका मिलता तो वो भी मुझे खुद में सामने का मौका अपने हाथ से जाने नहीं देती थीं...

हम पांचो hi इक साइड से लाइन में चल रहे थे. हम पांचो hi एक दसूरे से हुदे हुए the.hum धीरे धीरे चल रहे तो सब के पीछे हम hi रह गए थे.

मैंने माँ को बताने के लिए

""ये पहलवान जी हाँ और ये ins-ranjeet हाँ""

लेकिन माँ की बड़ी होती ऑंखें देख कर मैं हैरान रह गया मैंने माँ की नज़रों का पीछा किया तो माँ ins-ranjeet को hi देख रही थीं. मैं और भी हैरान रह गया.

माँ ins-ranjeet को देख रही थी पारर ins-ranjeet की नज़र अभी माँ पर नहीं पड़ी थी. ins-ranjeet हर्ष अंकल और बाकी सबब से मिल रहे थे, हम पीछे थे और बाकी सबब हमारे आगे the.isliye आगे वाले पहले मिल रहे थे..

मैं माँ को ऐसे देख कर हैरान तो हुआ था. लेकिन माँ के चेरे के रंग बदलते देख कर मैं परेशां होने लगा..

मैंने jhanvi,shruti को खुद से अलग किया और माँ को थाम कर खुद के गले लगा लिया... माँ की पीठ ins-ranjeeet की तरफ हो गई थी.

विजय:- माँ क्या हुआ. आप ins-ranjeet को ऐसे क्यों देख रही हाँ..

माँ का जिस्म ठंडा परदे लगा था.. माँ मेरी बात सुन कर बोलने लगी.

माँ- yyyyyy...ye.....vijj.....viijjuuuu..

विजय;- माँ बोलो ना क्या बात है..

ins-ranjeet भी अब्ब तक्क सबसे मिल चुके थे. वो मुझे देखने लगे मुझे माँ के गले लगे देखकर बोले..

ins-ranjeet:- कॉंग्रट्स विजय बीटा. तुमने बोहत हिम्मत दिखाई. वर्ण दन्न के चुगल से अपनी और बहनो को निकलना आसान काम नहीं था..

माँ की हालत और भी बिगड़ने लगी.. माँ मेरी बहन में झूलने लगी. माँ बेहोशी की हालत में जाने लगी थी और मेरे हाथों से स्लिप हो कर नीचे गिरने वाली हो गई थी. लेकिन मैंने माँ को गिरने नहीं दिया.

मैंने माँ का चेहरा खुद से अलग किया और

विजय:- (ऊंची आवाज़ me)maaaaaaaaaaa..kya..ho..raha..aapko..

सब का hi ध्यान मेरी और माँ की तरफ हो गया.

प्रिय भी रोने लगी ..

प्रिय:- विज्जु माँ को क्या हुआ...

मैंने प्रिय को जवाब नहीं दिया मैं ins-ranjet को देखने लगा. वो भी माँ को देख कर स्टेचू बन्न गए थे..

विजय:- सर आप माँ को कैसे जानते हाँ. आपको देख कर माँ की ऐसी हालत क्यों हो रही है..

ins-ranjeet ने मेरी बात नहीं सुनी और खुद के hi मोहन में बड़बड़ाने लगे..

सबब hi माँ की हालत और ins-ranjeet के बर्ताव को देख कर हैरान भी थे और चिंतित भी हो गए थे..

माँ ने किसी हद तक खुद को संभल लिया और

maa:-rrrrr......ran.....rannnn........ranjeeeeettttttt...

माँ के मोहन से ins-ranjeet का नाम सुन कर एक बार तो सबब hi शॉकेड हो गए थे..

माँ के लिए खुद के पैरों पर खड़ा रहना मुश्किल होने लगा था. माँ बोहत ज़यादा हलकाने लगी थी. और ऐसी hi कुछ हालत ins-ranjeet की भी थी..

ins-ranjeet :- sh....shshsh..shaww....shwetaaaaaaaa........

अब्ब बारी थी सबब के और भी ज़यादा शॉकेड में जाने की ... माँ और ins-ranjeet दोनों hi एक दूसरे को जानते थे...

माँ और ins-ranjeet दोनों की hi ऑंखें नम्म होने लगीं. और फिर देखते hi देखते दोनों की आँखों से आंसू किसी झरने की तरह बहने लगे...

माँ ने अपने एक हाथ से मेरे हाथ को खुद पार्स से अलग किया और दो क़दम चल कर ins-ranjeet के पास जाने के लिए आगे बढ़ी.. ins-ranjeet भी माँ के hi जैसे लड़खड़ाते हुए क़दमों से माँ की तरफ बढे....

ऐसी सिचुएशन में हममे से कोई किसी को कुछ कहने लायक रहा hi नहीं था....

सब के सब hi स्टेचू बने दोनों को देख रहे थे..

दोनों hi दो क़दम के फैसले पर जा के रुक गए और एक दूसरे की आँखों में देखने लगे. दोनों की hi ऑंखें झरने जैसी बह रही थी. लेकिन फिर भी एक दूसरे को देखने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे.....

2 मिंट तक्क दोनों hi एक दूसरे को देखते रहे और फिर ins-ranjeet ने अपनी बहन माँ एके लिए खोल दीं और माँ जैसे कब्ब की इस सबब के लिए तरस रही थी.

माँ तेज़ी से आगे बढ़ी और ins-ranjeet की बाहुन में समां गई........

दोनों ने hi एक दूसरे को कस के खुद में समाया हुआ था... और आंसू बहाये चुप चाप रोने लगे..

और हम सबब इस उन्होनी को देख रहे थे... मैं पहले भी कहा करता था. क वक़्त ने मुझे ऐसे ऐसे रंग दिखा दिए थे. हर रंग एक अलग hi झटके लिए हुए होता था..

पारर इस बार का झटका पहले मिलने वाले हर झटके से बढ़ कर था...




************************************************************************************




 
थैंक यू वैरी Much.........!!!!!!!!!!!:thanx:

देखते हाँ श्वेता और ins-ranjeet का क्या कनेक्शन निकलता है.. कभी कभी थोड़ा सा मज़ा भी ले लेना चाहिए.. और सस्पेंस की वजा न आने वाली भी नींद का भी अपना hi एक अलग मज़ा होता है... बीएड पर गिरते hi सो जाना. ये बार अच्छा तो नहीं होता.. दिल की धड़कन को भी कभी कभी रूटीन से हट के चलने देना चाहिए..

एंड थैंक्स भाई आपने मुझे और मेरी स्टोरी को इस कदर सराहा... एक हिसाब से आप सही भी हाँ.. अछि स्टोरीज के कम्पलीट न होने पर बड़ी परेशानी बन जाती है. लेकिन मैं आप सबब के साथ ऐसा नहीं ाकर्ण चाहता. मुझे स्फोरम पे लिखना अच्छा लग रहा है . और मैं बोहत hi स्पीड से अपनी स्टोरीज को कम्पलीट करना चाहता हूँ.. क्यों की और भी स्टोरीज लिखने का मेरा मैं है...
 
थैंक यू वैरी मच.........!!!!!!!!!!!:

हाँ अजित भाई ने विजय के लिए बोहत कुछ सहन किया है अब्ब अजित भी को रेस्ट मिलनी बनती hi है.. रानी समझदार भी हिअ. तो उसने बोहत सही भी किया सबब को hi खुश कर दिया.

हाँ एक बार तो मुझे भी लगा था क रीडर्स भी कुछ कुछ समझ जाएने लेकिन ऐसा नहीं हुआ.. मैंने भी फिर सोचा क आगे चल के पता तो चल hi जाना है. विजय ins-rajneet का आपस में क्या कनेक्शन है.

श्वेता और आईएनएस रणजीत का क्या कनेक्शन है. नेक्स्ट आने वाली अपडेट में पता चल जायेगा.. और अपडेट जल्द hi आएगी...
 
अपडेट ::: 69

*************



माँ और isn-ranjeet के मिलान की जितनी हैरानी मुझे और बाकी सबब को थी. उसकी कोई हद नहीं थी.

लेकिन इस हैरानी के इलावा मेरे अंदर इक ख़ुशी की लहर भी उतनी शुरू हो गई थी. ख़ुशी इस बात की थी. क माँ को कोई तो ऐसा मिला जो मेरे और प्रिय के इस दुन्या में आने से पहले hi माँ की ज़िन्दगी में मौजूद था. माँ के लिए पुराने रिश्ते बोहत अहमियत रखते थे. माँ के साथ जैसा हुआ था, माँ के लिए हम सबब के होते हुए भी, माँ खुद को एक तरह स अकेला hi समझती. कुछ दर्द ऐसे भी होते हाँ, जो औलाद होने पर भी कम् तो हो जाते हाँ. लेकिन ख़तम नहीं होते.

और माँ के लिए isn-ranjeet से रिश्ता होना माँ के लिए बोहत hi अच्छा था. माँ के ग़म को बांटने के लिए सिर्फ हम hi काफी नहीं थे.

माँ के लिए उसकी अर्ली लाइफ में मौजूद रिश्तों से में किसी का मिल जाना, माँ के दर्द को ख़तम करने का सबब बनने वाला था. ins-ranjeet का माँ की ज़िन्दगी से कैसा कनेक्शन था. वो तो हम सबब देख hi रहे थे..... मेरा दिल माँ को मिलने वाली ख़ुशी से झूमने लगा था.

माँ और ins-ranjeet दोनों खुद में समाये आंसू बहा रहे थे.

मैंने प्रिय को देखा. प्रिय की आँखों में भी आंसू थे. फिर मैंने जहान्वी और श्रुति को देखा तो वो भी आंसू बहा रही थीं.

मैंने प्रिय को पकड़ा और खेंच के अपने गले से लगा लिया.. प्रिय मेरे गले लगते hi और भी रोने लगी. सबब का रोना ख़ुशी का रोना था. मेरी भी ऑंखें नम्म होने लगी थीं. मिलने वाली ख़ुशी बोहत बड़ी थी, दिल को इतनी ख़ुशी सहन करने की आदत भी तो नहीं थी ना. दिल के झूमने से आँखों में पानी सा आने अलग था.

थोड़ी देर प्रिय को गले से लगाए रखा, हम दोनों hi एक दूसरे से इस ख़ुशी को बाँट रहे थे.

फिर प्रिय को खुद से अलग किया और प्रिय के साथ माँ के पास चला गया. माँ और ins-ranjeet अभी भी गले लगे हुए थे.

मैंने एक बार सबब को देखा, सभी महिला मण्डली भी आंसू बहाने में लगी हुई थी. पहले हैरानी बथि, फाई शॉक लगा और अब्ब ख़ुशी से आंसू बहाये जा रहे थे. िसाब्ब माँ को मिलने वाली ख़ुशी से खुश थे.

मैंने प्रिय को इशारा किया और फिर दोनों ने hi माँ और ins-ranjeet को गले से लगा लिया.

माँ और ins-ranjeet ने ऑंखें खोल क्र मुझे और प्रिय को देखा. लेकिन न तो कुछ बोले और न hi दोनों अलग हुए हुए.... मेरी और प्रिय के बहन माँ और ins-ranjeet के गिर्द लिपित गईं.

अब्ब हम चरों hi गले से मिले हुए थे. और चरों hi मिल कर इस नए रिश्ते को महसूस करने लगे.. कुछ तो रिश्ता था hi मेरा और प्रिय का ins-ranjeet से.

5 मिंट ऐसे hi गुज़रे और फिर ins-ranjeet की आवाज़ सुनाई दी..

ins-ranjeet:- श्वेता मुझे माफ़ कार्डो. मैं तो सोच भी नहीं सकता था. तुम किसी कोठे पर जा पोहंची हो. वर्ण मैं तो कब्ब का तुम्हे वहां से निकल कर ले जाता.

माँ:- रणजीत तुम मुझसे माफ़ी मैट मांगो. तुम्हे तो किसी बात का पता भी नहीं चला होगा. और फिर मैं किसी कोठे पर जा पोहंचु गई. ये न तो मैंने कभी सोचा था. और न hi तुम सोच सकते थे. मैंने बड़ी कोशिश की तुमसे राब्ता करने की. लेकिन मैं छह कर भी ऐसा नहीं कर पाई. मुझे हर वक़्त hi निगरानी में रखा जाता था. वाशरूम तक मुझे अकेला नहीं जाने दिया जाता था. रणजीत मैं बोहत रोई तुम्हरे लिए, बोहत तदपि हूँ मैं तुम्हारे लिए, तुम्हारे प्यार के लिए.

रणजीत:- मैं भी तुम्हरे लिए तड़पा हूँ श्वेता. मेरा तो कोई था hi नहीं तुम बिन श्वेता, इस पूरी दुन्या में एक तुम hi तो मेरी ज़िन्दगी थी, तुम भी नहीं रही, तो मेरा तो सबब कुछ hi ख़तम सा हो गया था. तुम क्या गई मेरी ज़िन्दगी से मैं तो जैसे जीना hi भूल गया था. बोहत वक़्त मेरी हालत पागलों जैसी रही.

श्वेता तुम्हरा मेरी ज़िन्दगी में आना, मेरे लिए जीने का मक़सद बन गया था, लेकिन फिर तुम भी कही खो गई. जीना मुमकिन नेह रहा था. लेकिन फिर भी जीना तो था hi. धीरे धीरे करके मैं ज़िन्दगी की तरफ वॉइस आया और पीर मेरी ज़िन्दगी में तुम्हारे बाद कोई नहीं आई.

माँ और ins-ranjeet धीरे धीरे बोल रहे थे. मेरे और प्रिय के सिवा किसी को दोनों की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी. मैं और प्रिय माँ और ins-ranjeet की बातें सुन कर हैरान हो रहे थे. लेकिन मैंने या प्रिय ने माँ और ins-ranjeet को दितुर्ब नहीं किया....

माँ:- रणजीत मैं भी तो पागल हो गई थी. मेरा तो सबब कुछ hi बर्बाद कर दिया गया था, मेरी इज़्ज़त दो कोड़ी की भी नहीं रह गई थी. ऐसी हालत हो गई थी, सुसाइड के ीालवा मेरे पास कोई चारा नहीं बचा था. लेकिन मैं तो मर्डर भी नहीं सकती थी रणजीत... क्यूंकि तुम्हारी निशानी जो मेरे पेट में आ गई थी. उसी की वजा से मैं मर्डर नहीं सकीय. वर्ण ज़िन्दगी तो मेरे लिए खतम हो hi चुकी थी.

माँ की बात सुनकर हम तीनो को hi झटका लगा. और हम तीनो hi माँ से अलग हो गए. और माँ को दीदे फहाद फहाद कर देखने लगे.

ins-ranjeet:- shsh...shweta kkk....kya.yy..ye..sach... है...

माँ:- हाँ रणजीत विज्जु तुम्हारा hi खून है.....

माँ ने ये बोल कर एक धमाका कर दिया.. और इस बार माँ की आवाज़ सबब ने hi सुन ली थी......

माँ की बात सुनते hi ins-ranjeet घुटनो के बॉल नीचे गिर गए... और आंसू बहाने लगे...

मैं माँ और ins-ranjeet(papa) को बारी बारी देखने लगा.. मतलब मैं कोठे की पैदाइश नहीं था. मैं जबरन इस दुन्या में नहीं लाया गया tha..me माँ और पापा के प्यार की निशानी था. ये मेरे लिए बोहत hi बड़ी खुशखबरी थी.. मुझे मेरे पापा का पता चल गया था...

सबब आस पास खड़े एक दूसरे का मोहन टेककन लगे. आज सबब को hi जटके पे झटके लग्ग रहे थे..

प्रिय माँ के गले लगकर रोने लगी.. और मैं ins-ranjeet यानी क अपने पापा के सामने hi घुटनो के बल बैठ गया.

इस बार मेरी भी हालत ख़राब होने लगी थी. ये ऐसा झटका था, जो सहन करना मुश्किल हो गया था..... पापा मोहन नीचे किये हुए hi आंसू बहाये जा रहे थे.

मैंने अपने कांपते हुए हाथों से अपने पापा के हाथों को पकड़ लिया. पापा ने मुझे देखा और फिर बैठे बैठे hi मुझे गले से लगा लिया.. हम दोनों की hi आँखों में आंसू लगातार बह रहे थे.

ऑंखें रो रही थीं और दिल झूम रहे थे.

मेरे अंदर नयी फीलिंग्स ने जनम लेना शुर कर दिया. मैं भी अपने पापा को अपने सीने से लगाए नयी जाग चुकी फीलिंग्स को जान्ने में लग्ग गया, मेरा दिल बेपनाह रफ़्तार से धड़क तो रहा था. मेरा दिल धड़क भी रहा थे और नयी फीलिंग्स जनम लेने की वजा से झूमने भी लगा था...

मुझे नहीं पता मेरे अस पास खड़े हुओं की क्या कंडीशन हो चुकी है. मैं तो बास आज उपरवाले की दी गई खुशियों को अपने अंदर उतार रहा था. मेरे पापा मेरे पीठ को अपने हाथों से सहलाने लगे और ins-ranjeet के हाथों का लम्स बदल कर मेरे पापा के हाथों का हो गया था...

एक कनेक्शन तो था hi हमारा शुरू से. मेरे दिल में उनके लिए रेस्पेक्ट तो शुरू से hi आ गई थी. लेकिन वो एक पुलिस वाले भी थे. तो मैं उनसे दूर दूर hi रहा था. लेकिन पापा मुझसे दूर नहीं रहे थे. शायद ये खून की कशिश थी. या वक़्त ने कोई अपना hi रंग दिखने का मैं बना लिया था.

खैर जो भी था. हम सबब के लिए खुशियों की बरसात उपरवाले ने कर दी थी.

पापा:- विजय तुम मेरे बेटे हो. आज मैं बोहत खुश हूँ विजय बीटा. भगवन ने तुम्हे मेरे खून से सेणचा है. शुरू से hi तुम्हे देख के मेरे दिल को कुछ कुछ होता था. लेकिन मुझे क्या पट्ठा तुम मेरा hi खून हो. तुम मेरे और श्वेता के प्यार की निशानी हो. अगर मुझे पहले पता होता तो मैं कब्ब का तुम्हे अपने सीने से लगा लेता. विजय बीटा तुम भी मुझे माफ़ कार्डो. मैं तुम्हरे लिए और तुम्हरी माँ के लिए कुछ भी नहीं कर सका.

विजय:- पापा

पापा:- एक बार फिर से bolna..vijay बीटा..

विजय:- papa..papa..papa..

पापा:- आज मुझे वो ख़ुशी मिली है, जिसकी तमन्ना मैं कभी किया करता था.

मैंने तो तुम्हारी माँ के बाद कभी किसी के बारे में सोचा भी नहीं था.. और देखो विजय बीटा, आज भगवन ने मुझे मेरे सबर का और तुम्हारी माँ से प्यार का कितना बड़ा इनाम दे दिया है ..... जो मुझे कभी भी नहीं मिल सकता था. वो मुझे मिला है. विजय बीटा मैं कैसे अपनी खुशियों को समेटो ... आज की खुशियां मेरा दिल सहन अनहि कर पा रहा है. उसे इतना खुश रहे की आदत भी तो नहीं है naa.............papa मेरे गालो को और मेरे माथे को चूमते हुए बोले..

पहलवान जी आये और पापा के कंधे पर हाथ रख दिया..

पापा ने अपने दोस्त को देखा और

पापा:- देखा जग्गू, उपरवाले ने मुझे कितना बड़ा इनाम दे दिया हिअ.. मैं कहता था ना. क मुझे विजय में किसी की खुशबु महसूस होती है . और देखो आज वही खुशबु भी मुझे मिल गई. और एक बीटा भी मिल गया...

माँ:- रणजीत प्रिय भी हमारी बेटी है..

हम अपनी ख़ुशी में प्रिय को तो भूल hi गए थे.... आज जहाँ इतनी बड़ी ख़ुशी का माहौल बन्न गया था. वही प्रिय के लिए ये एक बोहत hi बड़ी दर्द भरी बात थी. मुझे मेरे पापा मिल गया थे, लेकिन प्रिय के पापा कौन हाँ, ये तो माँ hi जानती थी. और प्रिय इस सबब को दिल में रख कर दुखी भी हो सकती थी.

पापा माँ की बात सुनकर सबब समझ गए और वो एक झटके में खड़े हो गए.

पापा:- श्वेता ये भी कोई कहने की बात है. मुझे तो आज भगवन सबब कुछ देने पर तुला हुआ है. मुझे तुम मिल गई श्वेता. एक बीटा मिला है. और एक बेटी भी तो मिली है... प्रिय बेटी क्या मैं तुम्हारा पापा नहीं हूँ...

प्रिय ने माँ को देखा और फिर मुझे देखा, जैसे मुझसे परमिशन मांग रही हो, मैंने सर्र हिला दिया....

प्रिय:- क्यों नहीं पापा आप hi मेरे पापा हाँ. और मुझे किसी ैरे गैर को अपना पापा कहने की ज़रूरत भी नहीं है..

प्रिय ये सबब हिचकियों में बोल रही थी. पापा ने अपनी बहन पेहलाई और प्रिय उड़ती हुई पापा की बहन में समां गई...... इस बार प्रिय का रोना दिल दहलाने वाला था.. प्रिय अपना पूरा ज़ोर लगा कर रो रही थी..... प्रिय खुश भी थी और किसी हद्द तक अधूरी भी थी.

जहान्वी और श्रुति भाग क्र आई और मेरे गले लग्ग कर वो भी ऊंची ऊंची रोने लगें.. उन्हें भी अपने घरवाले याद आ गए थे..... इतने साल बीत गए थे. मैंने कभी नहीं पूछा था दोनों का घर कहाँ है. और वो दोनों कहाँ से हाँ. पहले बचपन था और अब्ब मैं उन्हें भूले हुए दर्द को याद दिलाना नहीं चाहता था. इसलिए माँ प्रिय या मैंने कभी भी दोनों को पास्ट में जाने नहीं दिया था.

लेकिन आज बानी सिचुएशन की वजा से वो दोनों hi अपने पास्ट में चली गईं थी.

मेरे दोस्त थके हुए थे तो जा कर सो गए थे. इसलिलये डिनर के लिए नै ए थे. उन सबब की फॅमिली थी हमारे आस पास..

वो सबब ins-rajeet के सवागत के लिए तो आगे नहीं आये थे. लेकिन थे वो पैलेस के गेट के पास hi. अब्ब बदली सिचुएशन में सब ने hi मेरे दसौतों को जा कर उठा दिया था. और इस वक़्त पूरा पैलेस hi हमारे आस पास खड़ा हुआ था...

जो खास थे वो कुछ करीब खड़े थे. और जो हमने पैलेस में रहने के लिए बेसहारा खंडन बुलवाये हुए थे. वो भी कुछ फासले पर खड़े पल पल बदलते हुए हालात को देख रहे थे.

अजित भाई आगे बहे और मेरे पास आ कर मेरे सर्र के बालों में उँगलियाँ फेरने लगे. फिर अजित भाई की देखा देखि सब hi आगे बढे और अपना प्यार जताने लगे.

प्रिय पापा की बहन में अपना ग़म हल्का करके चुप हो गई थी. और माँ पास कड़ी हुए ऊपर आस्मां की तरफ देख रही थी....

माँ उपरवाले का शुक्रिया अदा कर रही थी. जो उन्हें इतने साल की ज़िल्लत भरी ज़िन्दगी के बाद खुशियों से भरपूर ज़िन्दगी मिल गई थी.

एक औरत के लिए उसके पति या प्रेमी से बढ़ कर भी कुछ होता है क्या .. माँ के अंदर के सारे दुःख पापा के आने से एक hi जहटके में ख़तम हो गए थे. अब बास माँ के दिल में सिर्फ एक आग hi बाकी रह गई थी.

बाकी माँ का दिल अब्ब हर दुःख दर्द से निजात प् चूका था...

तो फिर माँ भगवन को थैंक्स कुयं न बोले.

कुछ hi देर में सबब शांत हो गए. और फिर हर्ष अंकल, पहलवान जी, अजित भाई, राज, anil,karan भी पापा से मिले और पापा को बधाई दी.

लेडीज मण्डली ने भी माँ और को और पापा को बधाई दी. कुछ देर बाद सबब hi पैलेस के अंदर जा पोहंचे. डिनर क्या करना था. भूक hi सबब की उड़द गई थी. अभी भी किसी का डिनर के लिए मैं नहीं था. तो फिरसे सबब सिटींग हाल में आ गए थे.

मैं अभी तक अपनी दिल्ली वाली फॅमिली से सही से नहीं मिला था. सबब के hi दिल मचल रहे थे मुझे स्पेशल थैंक्स बोलने के लिए.

मेरे लिए बोहत बड़ी टेंशन बन्न गई थी. जबसे शंकर गैंग से पला पड़ा था. मैं किसी को भी सही से टाइम नहीं दे पाया था. हालात भी पल पल बदल रहे थे. पूजा दीदी, रानी, और बाकी सबब के साथ भी ज़यादती हो रही थी. सबब का hi दिल मेरे लिए मचल रहा था. और मैं इस सिचुएशन में किस किसको टाइम दूँ.

मुझसे नाराज़ तो किसी ने क्या होना था. हाँ दिल की भी भूक होती है, जो उनकी मिटत नहीं पा रही थी. और मेरे लिए इतनी लम्बी लाइन लगी हुई थी. क सोचते हुए hi पाईना आना शुरू हो जाता था.

मैं इन सबब को हैंडल कैसे करूँगा. मैं इन्ही सोचों में था. क मुझे हर्ष अंकल की बात सुनाई दी और मैं अपनी सोचो से बहार आ गया..

हर्ष अंकल पापा से कुछ पूछ रहे थे. और मैं.......

मैंने एक नज़र पुरे हाल में दौड़ाई, लड़कियां सबब मुझे hi देख रही थीं. शायद वो भी कुछ कुछ समझ रही थी, मैं क्या सोच रहा हूँ.

पुरे हाल में मेला लगा हुआ था.... राजा एंड फ्रेंड्स भी मुझे hi देख रहे थे और मैं कभी उन सबब को देखता और कभी पूजा दीदी और बाकी सबब को. अभी बड़ी महिलायें माँ और पापा में बिजी थीं...

मैं देखने लगा, हाल में कौन कौन है.....



raja,uday,jeetu,anupam, और उनकी फैमिलीज़.......................

karan,juhi, जूही माँ............................................................

अजित भाई, bhabhi,raj,shikha,rupa,padma आंटी, रानी.......

सोनाक्षी aunty,kriti,anil.....................................................

malikan,puja दीदी................................................................

हर्ष uncle,deeksha aunty,shetal,natasha दीदी...............

papa,maa,vijay,priya,jhanvi,shruti,aparna.......................

पहलवान जी............................................................................



कोठे से ले गई कुछ और भी लड़कियां और औरतें भी हाल में बैठी हुई थीं.

लाली अभी बीएड रेस्ट में hi थी.

इतने सबब थे और सबब के लिए टाइम निकलना पड़ेगा. वर्ण रोज़ hi किसी न किसी का शिकवा बढ़ता जाएगा.

वसीसे सबब को देख कर एक बार मेरी हालत पतली ज़रूर हो रही थी.

विजय:- माँ मैं कुछ देर पूजा दीदी और बाकी सबब से अकेले में बैठ लून. उन सबब...

maa:-(chehakte हुए) हाँ हाँ विज्जु बीटा. हम सबब बाद में फिरसे मिल लेंगे. अभी तुम बाकियों से अपनी ख़ुशी को बाँट लो..

माँ ने बात क्या की. मेरे ग्रुप की सभी गर्ल्स एंड बॉयज उठ खड़े हुए...

सबब बड़े अपने बातें छोड़ कर ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगे.. पूरा हाल hi सभी के kah-kahun से गुन्जे लगा....

चर्च:- लो रणजीत छोटी पार्टी तो अभी से hi हमारी बातों से फेड उप होने लगी.

पापा भी हस्सन लगे.

पापा:- हर्ष यार ये भी क्या करें. यहाँ मेला लगा हुआ है. और कोई भी किसी से सही से मिल नहीं पा रहा. इनको आपस में मिलने दो. हम अपना मिलान क्र लेते हाँ.

मा पापा के एक बाज़ो को थामे खुद को पापा से सत्ता क्र बैठी थीं. माँ का चेहरा बोहत चमक रहा था. कितना यकीन था माँ को अपने प्यार पे. वर्ण माँ कह सकती थी.

""रणजीत मैं अब्ब तुम्हारे लायक नहीं रही. मेरी इज़्ज़त मेरा मान सम्मान सबब कुछ मुझसे लूट लिया गया. मेरा वो सबब कुछ तो तुम्हारे लिए था. वो भी कोई मुझसे छे. कर ले गया. अब्ब मैं किश मोहन से तुम्हारा सामना करूँ""

क्या रंग था माँ और पापा के प्यार का. कितना स्टोरंग प्यार था माँ और पापा का.

पापा ने भी माँ से कुछ नहीं कहा. पापा तो ऐसे रियेक्ट कर रहे थे. जैसे माँ से उनकी शादी हो चुकी है और माँ के साथ जो भी बुरा हुआ है. वो शादी के बाद hi हुआ है. और कुछ भी हो जाए वो सबब दुःख, दर्द. तकलीफ मिल कर बांटेंगे.

कितना सच्चा प्यार था माँ और पापा का, जिस्मो की बात hi नहीं थी. माँ और पापा की आत्मा hi प्यार के अटूट बंधन से जुडी यही थी....

दोनों ने hi मिलते हुए बास अपने प्यार का इज़हार किया था. अपनी जुदाई का ज़िक्र किया था. एक दूसरे से दूर हो जाने के दर्द को याद किया था..

पापा ने माँ से माफ़ी मांगी थी. क वो माँ को बचा नै सके और माँ ने कहा था. क रणजीत तुम कुछ जानते भी तो नहीं थे.

मई अपने ग्रुप के साथ ऊपर वाले पोरशन के हाल में जा पोहंचा.

वहां पोहचते hi रानी और पूजा दीदी ने मुझे अपने गले से लगा लिया.. शिखा rupa,shetal और नताशा दीदी, भी हमारे गले लग गई.

अपर्णा और जूही ..priya.shruti.jhanvi के साथ कड़ी थी. अब्ब यहाँ भी ग्रुप बन गए थे. अपर्णा खुद hi हम से आत्ताच हो गई थी. वो कोठे से आने वाली दूसरी लड़कियों से अलग हो कर हमारे साथ hi शामिल हो गई थी. मतलब मेरे लिए एक और का ऑप्शन बन गया था..

हाय मेरी kismat......pata नै अच्छी है. yaaaaaaaaaaaaaa

पूजा दीदी:- मेरा विज्जु आज खुश है ना.

rani:-khush क्यों नै hoga.bethe बैठे इतना सबब जो मिल गया है...

शीतल:- सच में आज विज्जु की लाटरी निकल पड़ी है. कितनी खुशियों एक साथ hi मिल गई हाँ.

नताशा दीदी:- क्यों न मिलती आखिर हमारा भाई है भी इतना क्यूट सा. भगवन ने भी देने में देर नहीं की.

मैं पूजा दीदी को जवाब क्या देता. जवाब तो बाकी तीनो ने hi दे दिया था.

कुछ देर में हम अलग हुए और फिर एक एक करके मेरे दोस्त भी मुझसे मिलने लगे.

पैलेस से बाहर तो सर साडी सेसब hi मिल लिए थे. लेकिन अब सब hi मुझसे स्पेसेल मिल रहे थे. सबब hi मुझे दिल से बधाई दे रहे थे.

कारन और जूही ने भी मुझे गले से लगा कर बधाई दी. यहाँ आने के बाद मैं अब्ब दोनों से सही से मिल रहा था. कारन का ज़ख्म अब्ब कुछ बेहतर था.

कारन मेरे गले लगा तो..

कारन:- विजय भाई बोहत बोहत बधाई हो, आज भगवन ने भी तुम्हारे दर्द क्र ख़तम कर दिया है. खुश रहो मेरे भाई..

जूही भी पुरे दिल से मेरे गले लगी रही. जूही रोने लग गई थी. एक तो यहाँ इतनी साडी खुशियां सबब को hi मिल गई थीं. और दूसरा जूही का अधूरा पत्र ख़तम हो गया था..

जूही:- थैंक यू विजय भाई, हमें यहाँ लाने के लिए. वर्ण हम इतने प्यारे और खूबसूरत माहौल के कैसे देख पाते.

मैंने जूही के माथे को चूम लिया.

कीजै:- जूही तुम भी तो मेरी बहन हो. और देखो सब की hi तरह से तुम्हें भी अपनी ज़िन्दगी की खुशियां मिलनी चाहिए थीं. मैंने तो जितना मुझसे हुआ, वो किया था.

कुछ देर बाद सबब hi सोफ़ोन पर बैठ गए. पूजा दीदी मेरे और प्रिय के सेण्टर में बेथ गई थी. पूजा दीदी प्रिय को चूम रही थी. और प्रिय भी एक बड़ी बहन का प्यार प् कर निहाल हो गई थी. प्रिय का दर्द भी कम् हो शुका था. जो पापा से मिलने से पहले उसके दिल में जाएगा था.. प्रिय अब्ब शांत थी. प्रिय के दर्द का कोई इलाज तो था नहीं किसी क पास. इस लिए वो खुद को संभल गई थी.

ऐसे hi बातों में समय बीता और फिर 1 घंटे बाद डिनर के लिए सबब उठ खड़े हुए...

डिनर के बाद भी 1 घंटे तक सबब hi सिटींग हाल में बैठे.

और फिर माँ और पापा का ख्याल रखते हुए माँ और पापा को एक रूम में भेज दिया गया....

आज माँ की रात थी, रात तो पापा की भी थी. इतने सालों बाद दोनों मिल रहे थे. na-jaane कैसे इतनी देर से दोनों hi खुद को संभाले हुए थे. वर्ण जैसा उनका प्यार था. वो तो दिख hi रहा है. खुद पर काबू रखना आसान नै था..

अब्ब दोनों अंदर रूम में जा कर अपने पास्ट में खो जायेंगे और फिर गुज़रे हुए वक़्त को फिर याद करके खुश भी होंगे और दुखी.

वक़्त ने दोनों को hi बोहत भयंकर ज़ख्म दिए थे. वो ज़ख्म फिरसे हरे हो गए हे. और दोनों hi मिलकर एक दूसरे के ज़ख्मों को भरने की कोशिश करेंगे.

दोनों का मिलान भी होगा. और वही सब्बसे बसेत होगा दोनों के ज़ख्मो को भरने के लिए......

माँ की छूट तो पापा के लिए आज भी टाइट hi थी माँ ने इतने साल तक चुद चुद के भी अपनी छूट को बोहत अच्छे से असंभल कर रखा उहा था. और माँ की छूट का असली मालिक भी आ गया था..

अब्ब से पहले सालों तक्क माँ जबरन चुदती रही थी. पारर आज वो अपने प्रेमी से अपना पूरा पूरा प्यार वसूलते हुए छुड़ेगी.... और फिर यही चुदाई माँ के अंदर के बचे खुचे दर्द को भी उनकी छूट से निकाल बहार करेगी..


माँ की ये रात माँ के लिए और माँ की छूट के लिए एक स्पेशल रात टी...



******************************************************************************
 
थैंक्स ..!!

विजु श्वेता और रणजीत के प्यार की निशानी निकला .. ये रणजीत के लिए और कीजै के लिए बोहत खुशकुन हो गया. .. प्रिय दुखी तो होगी hi . क विजु को तो उसके पापा मिल गए लेकिन उसे नहीं मिले.. लेकिन प्रिय जल्द hi समझ जाएगी... क विज्जु माँ और पापा के प्यार की निशानी है. लेकिन वो तो बास ऐसे hi दुन्या में आई थी.. बात तो प्रिय के लिए बड़ी दर्द भरी है. लेकिन सब्बका प्यार भी तो प्रिय के लिए खास है. प्रिय समझ जाएगी. और खुद को संभल लेगी.

लाली ने ये सबब कुन क्या ये भी जल्द hi पता चल जायेगा.
 
थैंक्स फॉर थे सुग्गेस्टिव..!!

वो भी तो होता hi रहेगा... आपकी इमेजिनेशन भी सही हाँ.. विज्जु तो श्वेता के साथ रहेगा hi.. इसलिए आप टेंशन न लें.. आखिर श्वेता का एक पास्ट भी तो है. और अभी तो बोहत कुछ खुल कर सामने आना hai.priya का दुखी होना भी बनता है.. उसके विजु को उसके पापा मिल गए लेकिन प्रिय को नहीं मिले..

विज्जु रंजीत और श्वेता के प्यार के मेकिये गए सेक्स का नतीजा है तो प्रिय कोठे पर आने वाले किसी हवस परास्त के हवस का नतीजा .. प्रिय विजु को दिल से प्यार करती है. और अपनी माँ की ख़ुशी में खुश है. जल्द hi वो ये सबब समझ जाएगी.. सो इसमें टेनिओं या उल्जन की कोई बात नहीं है...

सुग्गेस्टिव के लिए मंद नहीं किया जाता.. सभी को hi अपनी राये देना का पूरा हक़ होता है.
 
Back
Top