अपडेट ::: 58
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अब्ब बदल चुके हालत ने मुझमे तेज़ी सी भर दी थी, क्यूंकि मैं अब्ब समझ गया था, क शंकर 2 हमलों की वजा से बोहत hi ज़यादा ग़ुस्से में होगा और सबब हक़ीक़त जाने के लिए मेरे दोस्तों पर भयंकर टार्चर वो ज़रूर करेगा, और ये मैं होने नहीं देना चाहता था, मुझे जल्द से जल्द हालात का रुख बदलना था, और शंकर के बेस को ख़तम करने के साथ साथ मुझे अपने दोस्तों को भी बचाना था.
और इस सबब के लिए टाइम बंद मुठी में से फिसलने वाली रेट के बराबर था मेरे पास .....
मैं ऊपर पोहंचा.... अउ पैलेस के अंदर का व्यू देखने लगा... और जो मुझे दिखा, जो जितना दिल को बहाने वाला था, उससे बढ़ कर मेरे लिए खतरे की घंटी भी था, अंदर हर तरफ रौशनी थी और पैलेस तक्क पोंछने के लिए मुझे पैलेस में hi बने हुए एक छोटे से पार्क को पार करना था, और वो भी जल्द आज जल्द..
यही सोच कर मैंने इधर उधर देखा तो सर्वेंट क्वार्टर बने हुए थे.
पूरे पैलेस के अंदर दीवार के साथ साथ रूम्स बने हुए थे और पैलेस सेण्टर में था. अब्ब जब्ब जान हथेली पर थी hi, तो सोचना क्या.. वेपन्स की मेरे पास कमी नहीं थी, और मैं अब्ब वो पहले वाला विजय भी नहीं रहा था....
मैंने ज़यादा सोचने में टाइम वास्ते नहीं किया और वहीँ से राइफल को एक लाइट पर सीधा करते हुए ट्रिगर दबा दिया......
एक झणका हुआ और अँधेरा छा गया जब्ब तक कोई समझ पाटा, मैं चीते की सी फुर्ती से भागता हुआ पैलेस के पीछे वाली साइड में जा पोहंचा, मेरे पीछे अँधेरा हो जाने के बाद वो क्या करते हैं, ये देखने के लिए टाइम नहीं था.
मैं आगे बढ़ा और अंदर जाने के लिए रास्ता देखने लगा. सेकंड फ्लोर पर मुझे एक खिड़की खुली हुई दिखी, और उससे कुछ फासले पर एक पाइप नीचे से ऊपर जाता हुआ गुज़र रहा था, मैंने देर न करते हुए उस पाइप के रास्ते उस खिड़की तक घुसने के लिए चढ़ाई शुरू कर दी, 40 सेकंड में hi मैं उस खिड़की तक जा पोहंचा..
मैंने एक नज़र अंदर देखा और फिर अंदर घुस कर एकदम से नीचे बैठ गया.. कुछ नहीं हुआ तो मैं खड़े हो कर पूरे रूम को देखने लगा, रूम अंदर से खाली था...
मैं दूर के पास पोहंचा और फिर दूर को खोलने लगा, थोड़ा सा खोल कर मैंने बहार देखा, ये एक राहदारी थी, और इस राहदारी में कई रूम्स में दूर मुझे दिख रहे थे, जो सबब hi बंद थे.. मैं देखने लगा क यहाँ पर तो कमरे नहीं लगे हुए.. लेकिन यहाँ कोई कैमरा मुझे नहीं दिखा......
मैंने सर्र को और भी बहार निकाल कर दोनों साइड्स देखा, मुझे किस साइड जाना चाहिए, क्यूंकि दोनों साइड्स hi रास्ता था नीचे जाने का..
मैंने एक रास्ते का चुनाव किया और फिर उस तरफ जाने लगा...
मैं तेज़ चल रहा था, और अपने क़दमों की आवाज़ मैंने दबाई हुई थी.. अभी मैं राहदारी के मोड़ तक नहीं पोहंचा था, मुझे अपने दोस्तों के पास शंकर के आने का पता चला......
ओह्ह्ह्हह्ह शीट्ट्ट्ट .. कहीं मुझे देर न हो जाए....
मैंने अपने क़दमों की स्पीड तेज़ करदी और मोड़ के कार्नर तक पोहंच कर मैंने दूसरी तरफ देखा. तो एक रास्ता नीचे और एक ऊपर जा रहा था, यहाँ मुझे किस साइड जाना चाहिए, नीचे या ऊपर... टार्चर सेल अक्सर नीचे hi बने हुए होते हैं. तो मैंने नीचे hi जाने का फैसला किया.......
पैलेस की सुरक्षा के लिए गार्ड्स पैलेस न होक पैलेस के इर्द गिर्द मौजूद थे.
मुझे पैलेस के अंदर सुरक्षा के लिए कोई गार्ड अभी तक नहीं दिखा था.......
मैं नीचे आया तो मैं एक हाल में जा पोहंचा, हाल के सेण्टर में सूफी रखे हुए थे बैठने के लिए और इक साइड बार काउंटर बार बना हुआ था.....
मैंने चरों तरफ नज़र दौड़ाई..... फिर इक साइड चल पड़ा.. अभी तक्क मेरा सामना किसी से नहीं हुआ था.....
ये अच्छी बात भी थी और बुरी भी, अच्छी इस लिए क किसी से उलझने से मेरा टाइम hi बर्बाद होना था, और बुरी इस लिए क मुझे कोई तो गुंडा मिलना चाहिए था, उससे hi पता चलेगा क शंकर और मेरे दोस्त कहाँ हैं....
इस बीच शंकर मेरे दोस्तों से पूछ रहा था.. क वो कौन हैं और उन सबब का मक़सद क्या है, लेकिन अभी शंकर ग़ुस्से में नहीं लग्ग रहा था, शायद उसे कोई जल्दी नहीं थी..
शंकर को किसी किसम की टेंशन भी तो नहीं थी, यहाँ उसके पैलेस में घुसने वाले धार लिए गए थे, शंकर का सेंस ऑफ़ हुमूर बोहत तेज़ था, और उसने जुड़जी भी कर लिया था, क यही वो लोग हैं जिन्हो ने कल रात आर आज फार्महाउस पे हमला किया था..... लेकिन मेरे दोस्तों ने अभी तक्क शंकर की कभी भी बात को मानने से इंकार hi किया था ....
मैं चलता हुआ आगे बढ़ रहा था क मुझे एक बाँदा दिखा, मैं उसके पीछे हो लिया, लेकिन "ये क्या" वो भी मेरे hi जैसे क्यों छुपता हुआ जा रहा है, मैं उसे देख कर शॉकेड हो गया.
उसके हाथ में भी एक पिस्तौल था, और वो अपने पैरों की आवाज़ को दबाये हुए hi आगे बढ़ रहा था, उसके कपडे बोहत hi मेले लग रहे थे, सेहत में वो मुझसे काम नहीं था, मैंने सोचा इसे मारने से पहले कुछ पूछा जाए, कहीं मैं किसी अपने जैसे को hi ना मार दूँ... वो मुझ जैसा त्रिनेड नहीं था, इस लिए वो मुझे अपने पीछे आते हुए नहीं देख पाया.
वो चलता हुआ एक रूम के दूर के पास पोहंचा तो फिर दूर को खोल कर देखने लगा,
उसे अंदर से कुछ नहीं दिखा, उसने दूर बंद किया, वो पीछे मुद क्र देखना चाहता था, कोई उसके पीछे तो नहीं है.
उसके पीछे मुड़ने से पहले hi मैं छुप गया, वो अपने पीछे किसी को ना प् कर आगे बढ़ा और मैं भी उसके पीछे पीछे hi चल पड़ा, अब्ब मुझे अपने दोस्तों की टेंशन तो थी, लेकिन यहाँ कुछ और भी अजीब था, तो मुझसे रहा नहीं जा रहा था, इसलिए मैंने उस आदमी का पीछा करना नहीं छोड़ा..
वो एक और दूर तक पोहंचा उसे खोल क्र देखा. वो भी उसे खली hi मिला, वो वापिस दूर बंद करके मुड़ने hi वाला था, क मैं उसके पास पोहंच गया और उसके गन वाले हाथ को पकड़ कर एक झटका दिया तो गन उसके हाथ से गिर गई, वो तिलमिलाया खुद को मुझसे छुड़ाने के लिए ज़ोर लगाने लगा...
मैंने उसे ढाका दिया और वो मेरे साथ hi रूम में दाखिल हो गया, मैंने जल्दी से दूर बंद किया और
विजय:- देखो कुछ भी करने से या सोचने से पहले मेरी एक बात सुन लो...
वो:- देखो तुम चाहे तो मुझे मार दो, लेकिन मैं अपनी नेहा को लिए बिना नहीं जाऊँगा...
विजय:- ोोू तो तुम भी यहाँ किसी लिए आये हो दोस्त..
वो:- दोस्त.... क्या मतलब..??
विजय:- (जल्दी से) मेरा नाम विजय है और मैं यहाँ शंकर को मार कर अपने दोस्तों को छुड़ाने आया हूँ... क्या तुम जानते हो क शंकर इस वक़्त कहाँ होगा..
वो:- मेरा नाम अजय है और मैं जानता हूँ क शंकर इस टाइम कहाँ गया है, लेकिन तुम...
विजय:- देखो अजय अभी सबब बातों का टाइम नहीं है, और किसी भी वक़्त मेरे दोस्तों पर टार्चर शुरू हो सकता है, इसलिए सबब फ़ालतू की बातें छोड़ कर मुझे बताओ क शंकर कहाँ है.. और तुम्हरी नेहा को मैं कुछ नहीं होने दूंगा, भरोसा रखो मुझ पर...
मेरी इतनी बात सुनते hi उसने अपना कब्ब का रुका हुआ सांस बहार निकाला, मैंने उसे उसकी गन उठा कर वापिस उसके हाथ में थमा दी...
विजय:- अभी तुम किसी पर गोली मत चलना. वर्ण शोर होने से सब को hi पता चल जाएगा....
अजय:- ठीक hai....chalo मेरे साथ..
मैं अजय के साथ जाने लगा.. अजय वापिस उसी साइड जा रहा था, जहाँ से मैं आया था, फिर अजय ऊपर जाने लगा..
विजय:- क्या शंकर ऊपर है..
ajat:-(dheere से) हाँ. ऊपर hi वो गया है, और तुम्हारे दोस्त भी ऊपर hi हैं..
विजय:- तुम इतना सबब कैसे जानते हो..
अजय:- मैं 3 घंटे से पैलेस के अंदर घुसा हुआ हूँ..
विजय:- ऊह्ह्ह्ह... लेकिन तुम अंदर कैसे आये..
अजय:- एक ट्रक के नीचे छुप कर..
मैं अजय को देखने लगा, क उसके अंदर भी कितनी लगन है, अपनी नेहा को बचने के लिए.... मौत के मोहन में घुस गया था ... दुम्म था अजय में लेकिन त्रिनेड नहीं था.... मेरे hi जैसा था, अपनों के लिए मर मिटने वाला..
अजय मुझे 3रद फ्लोर पर ले गया...
मैंने अजय के चक्कर में आप को ये नहीं बताया क शंकर इस बीच ग़ुस्से में तो नहीं आया था, लेकिन उसने तीनो को hi अच्छे से बाँध क्र टार्चर के लिए बोल दिया था.. और अब्ब कुछ hi देर में तीनो की जिस्मों में ज़ख्मों का इज़ाफ़ा होने वाला था..
विजय:- अजय तुम किस हद तक लड़ लेते हो...
अजय:- विजय मैं कोई फाइटर नहीं हूँ, एक म्हणत मज़दूरी करने वाला एक आम इंसान हूँ, बास अपनी नेहा को बचने के लिए मैं इस हद्द तक्क जा पोहंचा...
विजय:- ठीक है तो फिर तुम सामने आ कर कुछ भी करने से परहेज़ करना, यहाँ एक प्रोफेशनल गैंगस्टर्स के साथ जुंग होने वाली है, कहीं अपनी नेहा को बचने के चक्कर में तुम मारे जाओ, और नेहा तुम्हारी जुदाई में मर जाए.....
अजय:- ठीक है.. जैसा तुम कहो..
जैसे hi हम थर्ड फ्लोर पर पोहंचे तो सामने एक 70 फ़ीट का हाल था, इक साइड राहदारी जा रही थी, जिस में रूम थे, और दो साइड में हाल से कनेक्टेड रूम थे, इक साइड खाली दीवार थी.....
अजय ने मुझे इक साइड बने हुए रूम्स में से इक रूम का बताया..
विजय:- अब्ब तुम सिर्फ खुद को सेफ रखो.. बाकी का मैं देख लूंगा....
मेरे पास इस वक़्त सीलेंसर लगा हुआ एक पिस्तौल, एक राइफल, एक चाकू, एक खंजर, बेल्ट में कुछ पिस्तौल और कुछ राइफल के मैगजीन्स थे, और पीछे बैग में दो गर्रेनादेस भी थे, लेकिन यहाँ ग्रेनेड का कोई काम नहीं था, तो मैंने ग्रेनेड्स वही नीचे बेसमेंट में hi छोड़ दिए थे....
कुछ और भी मैगज़ीन थे बैग में.........
मैंने राइफल को गले में लटकाया, कुछ इस तरह से, क अगर मुझे इमरजेंसी में उसे चलना पड़े तो मुझे देर न लगे, और पिस्तौल को हाथ में थाम क्र मैं आगे दूर
तक जा पोहंचा......... दूर थोड़ा सा खुला हुआ hi था....
मैंने अंदर झाँक कर देखा तो मुझे 4 गुंडे हाथों में लेटेस्ट गन लिए हुए एक दूर के पास दिखे.. मतलब इसके आगे भी कोई रूम था, और ये सबब बहार hi सिक्योरिटी के लिए खड़े थे .........
अब्ब इनको मारना था, और वो भी पालक झपकते हुए, लेकिन फिर इनके गिरने से कहीं अंदर किसी को कुछ पता न चल जाए ....
मुझे जीतू की आवाज़ सुनाई दी
जीतू:- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh हमने कहा ना, हम वो नहीं हैं, जो तुम समझ रहे हो, हम तो वैसे hi खड़े हुए थे वहां पर..... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
जीतू के साथ टार्चर शुरू हो गया था....
शंकर:- साले मुझे चुटिया समझता है, तुम जो बोल रहे हो, तुम्हारी ऑंखें उस बात से इंकार कर रही हैं, मैंने ऐसे hi नहीं ये पैलेस खड़ा किया है, तुम साले कल के लौंडे अहथियाँ से लेस हो के मुझे चीट करेंगे, कुछ ज़यादा hi दुम्म दिहने के आदि लग रहे हो. कोई नहीं मैं भी देखना हूँ कितना दुम्म है तम तीनो में......... और रही बात तुमसे कुछ उगलवाने ki(ek कमीनी अहंसी हसने लगा)
वो तो तुम खुद से भी छुपा नहीं सकोगे........
(शंकर अपने आदमियों से) चलो धीरे धीरे इन सबब की दोसे बढ़ाते जाओ, देखते हियँ कब्ब तक्क अपनी बात पर अड़े रहते हैं ..............
अब्ब मुझे और कुछ नहीं सोचना था, जो भी होगा देखा जाएगा...
मैंने थोड़ा सा दूर खोला और फिर 4 सेकंड में hi 4 गोलियां चलाई और अंदर मौजूद चारों गुंडों के hi सर खुल गए. मैं एक झटके में अंदर गया और उन गुंडों के गिरने को नज़र अंदाज़ करते हुए, दूर पर एक लात मारी, जिस दूर के पास वो खड़े थे....
दूर एक झटके में खुला और अंदर मौजूद सबब hi दूर के ऐसे खुलने से चौंक गए....
उनका चौंकना hi मेरे लिए काफी था.. अंदर शंकर के साथ 8 गुंडे the,aur तीन के हाथ इ गन्स थीं, और बाकि के मेरे दोस्तों को टार्चर करने की तैयारी में लगे हुए थे,
dhaayen...dhaayen...dhaayen.
तीनो गोलियां चलें और तीनो गुंड बरदार शनकर की अंकलहेन के सामने, शंकर के कुछ समझने से पहले hi मारे गए..........
साला शंकर इन कुछ सेकण्ड्स में कुछ भी नहीं कर पाया, बास ैजनक से सबब होने की वजा से लड़खड़ा गया........
मैंने एक झटके में hi शंकर को जा दबोचा.. और उसके सर्र पर गन रख कर गुंडों से बोलै ......
विजय:- चलो खोलो मेरे दोस्तों को, वर्ण तुम्हरा ये बॉस मारा जाएगा..
वो सबब शंकर की hi तरफ देखने लगे......
शंकर अचानक से इतना सबब होते देख कर हड़बड़ाया ज़रूर tha,lekin फिर उसने जल्द hi खुद पर काबू पाया, और
शंकर:- कौन हो तुम , और यहाँ कैसे आये..
मैंने शंकर के सर्र पर अपनी गन को दबाया और
विजय:- कुत्ते की तरह से भोकना बंद कर और अपने कुत्तों को बोल मेरे दोस्तों को खोल दे ...........
शंकर:- देखो तुम यहाँ आ तो गए हो लेकिन जा नहीं पाओगे.... ये मेरा पैलेस है. और यहाँ से बच कर निकल पाना मुमकिन नै है...
मैं गन को शंकर के सर्र पर लगाए हुए hi शंकर के गले पर अपने दुसरे हाथ को कस्सणे लगा.. वो कुत्ता भूँकने लग गया था.. साला सर्र पारर गन होने पारर भी अपने आदमियों को मेरे दोस्तों को खोलने के लिए नहीं बोल रहा था..
मेरे उसके गले को कसने की वजा से उसका दुम्म घुटने लगा. और फिर उसने मेरे बाज़ो पर अपने हाथ मार कर मुझे रुकने को कहा...
मेरे दोस्त मुझे आता हुआ देख कर खुश हो गए the..aur मुझे hi देख रहे थे..
मैंने शंकर को एक हाथ से कस के पकड़ा.. पिस्तौल को अपने पीछे कैसा और राइफल को गुंडों की तरफ सीधा करते हुए बोलै....
विजय:- अपने हरामी बॉस के चक्कर में कही तुम सबब न मरे जाओ. अब्ब एक भी सेकंड और लगाया तो मैं तुम सबब को एक hi राउंड में भून कर रख दूंगा. चलो खोलो मेरे दोस्तों को .........
सबब ने एक बार शंकर की तरफ देखा... शंकर ने अभी भी उनको नै कहा था, मेरे दोस्तों को खोलने के लिए............
बड़ी hi कुट्टी चीज़ था शंकर.. इतना सबब होने पर भी शंकर टास से मास्स नहीं हुआ था......
जैसे hi सबने मेरे दोस्तों को खोला तो सबब hi अपने ज़ख्मो को भूल कर पास पड़ी हुई गन्स को उठा कर गुंडों को एक साइड करने लगे....
मुझे शंकर पर बोहत ग़ुस्सा आ रहा था.. और फिर जब्ब मैंने देखा क अब्ब मेरे दोस्त फार्म में वापिस आ गए हैं, तो मैंने शंकर की गर्दन पर अपना दबाओ फिरसे बढ़ा दिया..... शंकर कुछ देर में hi बेहोश हो गया.... मैंने शनकर को नीचे फ़ेंक दिया.....
विजय:- शोर किये बिना hi इन सबब को मार दो....
गुंडे अपने मरने की बात सुन कर खुद को बचने के लिए मेरे दोस्तों से लड़ने लगे... अब्ब गुंडे गन चलने में माहिर थे, लड़ने में नहीं, 5 hi मिंट में मेरे दांतों ने सबब की hi गर्दन तोड़ दी............
फिर तीनो मेरे पास आये और मेरे गले लग्ग गए.....
उदय:- मुझे पता था, तू जल्द hi आने वाला है, मैं कब्ब से तुम्हारा hi वेट कर रहा था...
विजय:- सॉरी यार मेरे चक्कर में तुम सबब का ये हाल...
is'se आगे कुछ बोलता, क तीनो ने hi मुझे लातों और घोंसू से मारना शुरू कर दिया ........
उदय:- साले सॉरी बोलता है....
राजा:- विजय तूने खुद hi तो कहा था, क राजा तुम मेरे भाई है, और फिर अब्ब सॉरी क्यों बोल रहा है..
जीतू:- विजय आगे से ऐसा कभी मैट बोलना.. हम सबब एक हैं, और हमेशा एक hi रहेंगे...
विजय:- ठीक है मुझसे गलती हुई.. अच्छा एक बात और भी है...
उदय:- वो क्या???
फिर मैंने सबको hi अजय के बारे में बताया...
उदय:- ये तो बड़ी अच्छी बात है .अजय के कहने पे हमें पता चल गया वर्ण अपने चक्कर में हम अजय की नेहा को भूल hi जाते.. हमें ज़रूर उसकी मदद करनी है..
राजा:- हाँ चलो देर हो रही यही.. बहार पता नहीं उसका क्या हाल हो रहा होगा..
विजय:- इस शंकर को बी उठाओ.. कुत्ते ने बड़ा परेशां किया है मेरी दीदी को. पूजा दीदी के आंसू मुझे दिखने लगे थे. शंकर प्रेम और धर्मेश के कारण सबब hi घर में क़ैद हो कर रह गए थे......
मैंने शंकर कको उठाया और बहार निकले.. बहार पड़ी हुई लड़ों को देख क्र
विजय:- जीतू उदय के साथ मिल कर इन लाशों को भी अंदर फ़ेंक दो.... और दोनों दरवाज़े अच्छे से बंद कार्डो..
5 मिंट बाद हम अजय के पास खड़े थे..
और अजय सबब को देख कर खुश भी हुआ .... और सबब की हालत देख कर किसी हद तक्क काँप भी गया.. मेरे दोस्तों के कपडे खून से साणे हुए थे...
बहार अछि खासी मार पड़ी थी सबको, और अंदर अभी जीतू के साथ टार्चर शुरू hi हुआ था..... क मैं पोहंच गया, वर्ण शायद तीनो को hi उठा कर ले जाना पड़ता.
लेकिन ऊपर वाले ने हमारी मदद अजय की सूरत में करदी थी. वर्ण मैं तो नीचे hi सबको ढूंढ़ता रह जाता....
3रद पोरशन पर शंकर ने 3रद डिग्री टार्चर का पूरा पूरा सेटअप बनाया हुआ था...
सबने hi अजय को थैंक्स बोलै..
अजय:- आप सबब क्यों मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं....
विजय:- राजा हमें पहले यहाँ के कक्तव का कण्ट्रोल ढूंढ़ना होगा. वहां ज़रूर कुछ गार्ड्स होंगे और हमारी हर एक मूवमेंट को चेक भी कर सकते हैं...
अजय:- मुझे पता है, कण्ट्रोल रूम कहाँ है... वो नीचे ग्राउंड फ्लोर पे hi है.. लेकिन बाहरी तरफ..
उदय:- शंकर को कहाँ तक ले के जाना है, कहीं किसी सीएएम में कोई शंकर को इस हालत में देख कर अलार्म न बजा दे..
जीतू:- और अभी तक्क प्रेम और धर्मेश भी नहीं दिखे, वो शंकर के साथ क्यों नहीं हैं, होओगे तो इस पैलेस में hi...........
ये सबब बातें भी काबिल इ ग़ौर थीं..
विजय:- और कोई भी किसी भी वक़्त शंकर से राब्ता कर सकता है.. प्रेमा ुर धर्मेश शंकर के लिए सोच सकते हैं, उन दोनों को भी तो तुम तीनो के यहाँ होने की खबर होगी..........
विजय:- चलो पहले नीचे जाने हैं और शंकर को कहीं बाँध देते हैं, बास सीएएम से बचते हुए सबब को नीचे जाना है....
फिर मैं जिस राते से ऊपर आया था, सब को hi उसी रास्ते से नीचे लाने लगा,
ये एरिया कक्तव से बचा हुआ था..
चुटिया कहीं का. मुझे शंकर पारर हैरत भी होने लगी, क इतना टेढ़ा बाँदा हो के भी इसने अंदर हर जगा सीएएम नहीं लवाये थे, कुछ ज़यादा hi इसे अपने पैलेस की सुरक्षा पर गुमान था.. आज तो लग्ग hi गया ना लौड़े, लौड़ा कही का .......
वर्ण सच में hi ये हाथ आने वाला नहीं था.. अजय का इस सबब में बड़ा रोले था.. आज अजय की वजा से मेरा mission(friends बचाओ) पूरा हुआ था.... और अब्ब पल्स पर अपना कब्ज़ा करना आसान मिशन नहीं था, और अभी हमारे पास कोई भी ऐसा गुंडा नहीं था, जो हमें सबब बता सके..
मच hi मिंट में हम नीचे पोहंच गए... अजय के hi कहने पे हमने एक रूम का दूर खोला और फिर सबब hi अंदर घुस गए......
अंदर बीएड पर मौजुद बीएड शीट को फहद कर शंकर को एक चेयर पर बाँध दिया gaya.abb शंकर यहाँ से हिल भी नहीं सकता था.....
विजय:- राजा पहले हमें कक्तव कण्ट्रोल रूम में जाना है ...... कर उसे अपने अंडर लेना है..
raja:-theek है, तो फिर कौन कौन जाएगा..
विजय:- हम तीनो hi जायेंगे और जीतू के साथ यहाँ अजय रुकेगा.....
मैंने अपने बैग से तप निकल कर शंकर के मोहन पर चिक्पा दी..
विजय:- जीतू किसी भी हाल में शंकर से कुछ भी बात मैट करना.... तुमने अभी शंकर को सही से पहचाना नहीं होगा.. शंकर जैसे कुत्ते कभी कभी hi देखने को मिलते हैं... और ये किसी भी पल बाज़ी पलट कर हमारे लिए खतरा बन सकता है... जो कुछ करना होगा वो मेरे आने का बाद कर लेना.. लेकिन .....
मैं फिरसे कह रहा हूँ.. क किसी किसम के उबाल अपने अंदर मैट आने देना.. शंकर एक इन्तेहाई खतरनाक और बोहत बड़े स्टैमिना का मालिक है.. तुमने देखा hi होगा, कितनी बुरी हालत होगी थी इसकी, लेकिन फिर भी इसने तुम सबब को खोलने क लिए नै कहा..
राजा:- हाँ विजय तू सही कह रहा है, शंकर को देख के लगता है, क शंकर को किसी किसम की ढेल देना सही नहीं है....
उदय भी हमारी बातें सुन रहा था, वो शंकर के पास आया और शंकर के बंधे हुए एक पेअर के घुटने पर ज़ोर से गन का दस्ता मार दिया...
शंकर का घुटना चूर चूर हो गया.. और शंकर होश के गया.. शंकर के लिए ये चोट बोहत hi घातक थी, होश तो उसे फिर आना hi था..
उदय:- अब्ब सही है, अब कोई टेंशन नहीं बनेगी.. अब्ब्ब तो चाहो इसे खोल भी do,kahan तक्क भाग के जाएगा...
उदय के ऐसे hi स्टाइल हमें बोहत पसंद थे... उदय ने शंकर को एक पाऊँ से अपाहिज तो कर hi दिया था, लेकिन ये सबब करते हुए भी उदय बोलै बड़े स्टाइल में था.
खून से साणे हुए कपड़ों में उदय का स्टाइल एक अलग hi रूप धारण कर रहा था..
हम सबब के चेहरे पर फ्रेशनेस लौर आई.. अब्ब मेरे साथ साथ सबब hi रिलैक्स हो गए थे.. और शंकर बंधे हुए मोहन के साथ, सब को hi खुनी आँखों से देख रहा था..
उदय:- (शंकर से) तू टेंशन मैट ले, हम आते हैं तेरे पास वापिस, फिर तेरे से बात करेंगे ना, तू तब्ब तक्क वेट hi करता रह.. चलो विजय..
अजय भी सबब देख रहा था, लेकिन वो इस सबब के लिए त्रिनेड नहीं था, इसलिए चुप hi रहा, उसका चेहरा पसीने से टर्र हो गया था...
राजा उदय और मैं, जीतू और अजय को सावधान रहने को बोल कर बहार आये, और
अजय के बताये हुए रास्ते पर चल पड़े...
हम तीनो hi सामने और आस पास लगे कामर्स पर ध्यान दे रहे थे... बहार जाने वाले दूर के पास एक सीएएम लगा हुआ था, और उससे हमारा फासला कोई 20 फ़ीट था..
हम साइड में चल रहे तो कैमरा दूर पार्स हाल के सेण्टर की तरफ रुख किये लगा हुआ था...
अब्ब हम कुछ देर रुक कर देख रहे थे, क कैमरा एक hi जगा रुका हुआ है, या कही घुम तो नहीं रहा.. कैमरा घूम hi रहा था.. जब्ब वो हमारी तरफ आने लगा तो हमने जल्दी से खुद को पीछे हटाया, और कमरे की रेंज से दूर हो गए..
विजय:- राजा हमें कमरे के वापिस आने से पहले hi यहाँ से निकलना है..
raja..uday:- ok
फिर हमने कमरे के 2 चक्कर के बाद तेज़ी से भाग क्र दूर को क्रॉस किया, हम एक कमरे से बच गए थे, अब्ब यकीनन और भी यही आस पास कक्तव का जाल बिछा हुआ होगा, क्यूंकि अब्ब हम बहार आ गए थे, और बहार की सुरक्षा के लिए शंकर ने स्पेशल अर्रंगे तो किया hi होगा....
हमने चरों तरफ देखा, तो हम से कुछ hi फासले पर कण्ट्रोल रूम था, बहार लगी इक प्लेट पर लिखा है tha.."control रूम"
अब्ब हमसे आगे कण्ट्रोल रूम का फासला 15 फ़ीट था, और यहाँ पारर कमरे कुछ ज़यादा hi लगे हुए थे, शंकर ने कण्ट्रोल रूम की सुरक्षा के लिए बोहत बढ़िया से इंतेज़ाम किया हुआ था, कण्ट्रोल रूम में घुसना खतरनाक था...
उदय:- विजय अब्ब क्या करना है.. वो सामने ऊपर देखो, वहां पर हर तरफ रुख किये कमरों का जाल बिछा हुआ है...
मैंने अपना पिस्तौल राजा को दिया, और खुद सीलेंसर लगी राइफल को अपने हाथ में ले लिया......
विजय:- उदय तुम यही रुक कर हमें कवर देना अगर हमारे पीछे से कोई हमला करे तो फिर देर किये बिना hi उसे उदा देना...
उदय:- लेकिन विजय मेरी राइफल पर तो सीलेंसर नहीं लगा हुआ... इस तरह से तो पूरे पैलेस में hi सबब को पता चल जाएगा..
विजय:- अब्ब जो होगा देखा जाएगा... लेकिन कण्ट्रोल रूम में घुसना हमारे लिए ज़रूरी है, इससे हमें भी पता चलेगा, क इस पैलेस की सुरक्षा किस हद तक hai.aur कहाँ कितने गुंडे हैं, सबब की इन्फो हमें मिल जायेगी....
राजा:- ठीक है विजय अब ज़यादा क्या सोचना... अब हर पल hi तो रिस्की है यहाँ हमारे लिए, और अब्ब फ़ौरन hi कुछ करना हमारे लिए भी ज़रूरी हो गया है, प्रेम और धर्मेश अब्ब शंकर की तरार से देरी होने की वजा से us'se राब्ता भी करने hi वाले होंगे.. इससे पहले क कुछ गड़बड़ हो, हमें कुछ क्र लेना चाहिए...
उदय:- ठीक है तुम दोनों जाओ. मैं यही रुक कर तुम दोनों को कवर देता हूँ..
राजा और मैंने इक बार फिरसे चरों तरफ देखा और उदय को एक्टिव रहने को बोल कर कण्ट्रोल रूम की तरफ भागे ....
15 फ़ीट का फासला कुछ भी नहीं था, लेकिन हमारे लिए वो एक मौत का पल भी था, यहाँ सबब hi गैंगस्टर थे, और किसी भी साइड से आने वाली एक hi गोली हम तीनो में से किसी का भी काम तमाम कर सकती थी .....
कुछ hi सेकण्ड्स लगे हमें कण्ट्रोल रूम तक पोहचने में..
जैसे hi हम भाग कर कण्ट्रोल रूम में पोहंचे तो हमें बहार से देख लिया गया.
और फिर पैलेस की फ़िज़ा गोलियों की
tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..
से गूंजने लगी, पूरे का पूरा पैलेस और आस पास का सारा hi एरिया an-gint चलने वाली राइफल की गोलियों से गूँज उठा ...............
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