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जीतू ने मुझे पानी पिलाया, मैं कुछ रिलैक्स हुआ, रिलैक्स तो मैं पहले भी था, यहाँ कदम कदम पर मौत थी, और एक एक सांस एक्टिव रह कर निकलना हमारे लिए ज़रूरी भी था और हमारे लिए मज़बूरी भी, इसलिए हम सभी एक्टिव थे.
लेकिन जितने घोड़े मैंने दमाग के दौड़े लिए थे. अब्ब मुझे इस पैलेस में फैलाये गए शंकर के जाल से भी बढ़ के अपने दमाग को एक्टिव रखना था.
बहार पुलिस ा गई थी और पुलिस के लिए ाडणार घुस क्र शनकर गैंग को खतम करना मुमकिन नहीं था. हम दोस्तों को hi करना था. जो भी करना था.
इस पैलेस में कौन सा जाल किस एरिया में था. हम नहीं जानते थे. अब्ब हमें पूरी तरह से खुद को बचते हुए शंकर गैंग को ख़तम करना था.
ये एक आसान मिशन नहीं था. जितना खतरनाक ये मिशन था. उतना hi हम सबब के लिए मौत का खतरा भी था. और मैं यहाँ न तो खुद मरने आया था और न hi अपने दसौतों में से किसी को मरने देने चाहता था..
अब्ब डायरेक्ट एक्शन लेना था और वो भी बोहत hi तेज़ी से. पर इस के लिए ज़रूरी था क हमें किसी भी जाल में न फंसें. और इस पैलेस की बिल्डिंग में रहते हुए हमारे लिए हर एक फ्लोर पर कई कई जाल हो सकते थे.
बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर के दूर से बहार मैंने जितने भी गुंडों को स्नाइपर गन से उदय था उस जजा पर एक छोटा सा दो मंज़िला गार्टर मकान था. अब्ब हमारे लिए वही सेफ थी और इस के इलावा कोई भी जगा सेफ नहीं थी....
ये भी हो सकता है क इस कण्ट्रोल रूम को कही और से कण्ट्रोल की जा सकता हो और हम यही कण्ट्रोल रूम में खुद को सेफ समझते रहे और प्रेम धर्मेश इसी कण्ट्रोल रूम को हमारे लिए क़ैद खाना बना दें...
हमे इस बिल्डिंग से दूर जाना था. और वो भी जल्द स जल्द..
मैं कण्ट्रोल रूम में सबब जगा देखने लगा. कण्ट्रोल रूम में काम क्र रहे लड़के सबब नहीं जान सकते थे. किसी भी ैरे गैर को तीनो पार्टनर्स सब सीक्रेट नहीं बता सकते थे... ये लड़के भी सभी सीक्रेट्स से jaan-kaari नहीं रखते थे...
मैं कण्ट्रोल रूम को देखने लगा और मेरे दोस्त मुझे देखने लगे....
विजय:- राजा उदय जीतू जितनी जल्दी हो सके इन चरों लड़कों को बेहोश करके के बाँध दो..
सब को hi लग गया था. क जितना उन्हों से इस पैलेस को आसान समझा है. उतना है नहीं. और मेरे कहते hi 3 मिंट में hi चरों लड़के बेहोश होक बंधे पड़े थे..
मैं राजा के पास गया और उसके कान में कुछ कहा. राजा एक बार तो हैरान हुआ. लेकिन फिर राजा ने उदय और जीतू के कान में वही बात बोल दी... और अजय को भी उस के कान में hi सबब बताया गया....
शंकर को ज़िंदा रखना अभी ज़रूरी था. लेकिन यहाँ जैसे हालत हमें फेस करने को मिल रहे थे. हम शंकर के लिए कोई भी चांस नहीं ले सकते थे.
हम कहाँ कहाँ शंकर को उठाये हुए फिरते रहेंगे.. इसलिए शंकर को मरना ज़रूरी था.. लेकिन यहाँ नहीं.
हो सकता है शंकर की वजा से hi अभी हम पर डायरेक्ट हमला न किया जा रहा हो.
प्रेम और धर्मेश शंकर को बचने के लिए कुछ वेट कर रहे होंगे. और फिर शंकर के सेफ होते hi सभी गुंडे मिल कर हमें घेर लेंगे...
मेरे कहने पे hi उदय राजा और जीतू ने पूरे कण्ट्रोल रूम में लगी हुए स्क्रीन्स को गोलियों से उड़ाना शुरू कर दिया. कुछ hi देर में पूरा कण्ट्रोल रूम hi तबाह हो गया. अब्ब इस कण्ट्रोल रूम के ज़रिये हमें इस पैलेस में कही नहीं देखा जा सकता था..
अगर प्रेम और धर्मेश कही बैठे हुए हमें देख रहे थे. तो सिर्फ हमें इसी बिल्डिंग के अंदर hi कही कही देख सकते थे. और हम पर्म और धर्मेश की नज़रें से ओझल हो जाना चाहते थे....
जैसे hi कण्ट्रोल रूम तबाह हुआ. मेरा सोचा हुआ सही सबत हुआ. प्रेम और धर्मेश की आवाज़ पूरे कण्ट्रोल रूम में गूंजने लगी.. अब्ब पता नहीं कौनसी सी आवाज़ किसकी थी.
उधर से:- ये तुम सबब ने क्या कर दिया.. सबब कुछ hi बर्बाद क्र दिया. अब्ब तुम्हारी मौत और भी खतरनाक होगी.. तुम नहीं जानते इस कण्ट्रोल रूम के लिए शंकर और हम वो ने कितनी म्हणत की थी.
मैंने राजा उदय जीतू और अजय को देखा.. वो सबब मेरे ामकान को सही सबत होते देख कर बड़े हैरान थे.... लेकिन बोले कुछ नहीं..
विजय:- प्रेम और धर्मेश तुम क्या समझते हो क हम तुम्हारे जाल में फँस जायेंगे.
शायद फँस भी जाएँ. लेकिन अभी हमारे पास शंकर है ना. यही हमें
बचाएगा और शनकर के बिना तुम सबब भी दिल्ली पर राज नहीं कर सकते. इसलिए शंकर तुम दोनों के लिए भी ज़रूरी है. और हमारे लिए भी...
तुम दोनों अपना काम करो और हम अपना काम करते हैं....
मैंने उदय और राजा को इशारा किया . तो वो शंकर को उठा कर बहार जाने लगे. जीतू और अजय ने वो वेपन वाला बैग उठाया. इसी कण्ट्रोल रूम में मरे हुए गुंडों की गन्स और मैगज़ीन भी थे. जो जो उठाया जा सकता था वो उठाया. और वापिस उसी दूर की तरफ जाने लगे. जहाँ से मैंने बहार गुंडों को स्नाइपर गन से टारगेट किया था.....
दूर को खोल कर जब्ब देखा तो सामने दूर दूर तक कोई नहीं था. और 200 मीटर के फैसले पर इक साइड में वो मकान था जहाँ हमें जाना था. वहां जाते hi हम सबब इस पैलेस के गुंडों से सेफ रह सकते थे .....
विजय:- बैग में से मौजूद ऊपर से लाये गए टाइम बम निकल कर हाल में लगा दो. और इस पैलेस को जितना हो सके. उतना धमाके से उड़ा दो. हमें prem,dharmesh और शंकर के इस पैलेस से क्या लेना देना है.
उसी हाल में लगे हुए एक लोड स्पीकर से आवाज़ आने लगी...
उतर से:- ye..ye.. ttt..tumm सबब पागल हो गए हो. पैलेस को क्यों उड़ाना चाहते हो. तुम खुद भी यहाँ से बच कर नहीं जा सकते. इसलिए अपनी मौत को अगर आसान बनाना चाहते हो तो पैलेस को कोई भी नकसान न पोहनचाओ . और शंकर को हमारे हवाले कार्डो. वर्ण तुम में से किसी को ज़िंदा नहीं रहने दिया जाएगा..
विजय:- जीतू जल्दी करो और इन कुत्तों पर ध्यान देना छोडो. हमें जितनी जल्दी हो सके इस पैलेस को तबाह करके यहाँ से जाना भी है....
उतर से:- मैं ने जो कहा वो सुनाई नहीं दिया क्या.. इस पैलेस को तबाह मैट करो. वर्ण तुम सबब भी कुत्ते की मौत मारे जाओगे...
बोलने वाले की आवाज़ से देरर साफ़ दिखाई पद रहा था. और यही चीज़ मेरे लिए फायदेमंद थी...
इतनी देर में जीतू और राजा ने 2 बम लगा दिया.....
विजय:- लग गए बम...
दोनों hi:- हाँ विजय लग गए बास 5 मिंट में hi ये पैलेस उड़ जाएगा...
विजय:- चलो ठीक है... अब हम ज़िंदा बचें या न बचें. ये पैलेस तो ज़रूर udega......(uday से) शंकर को उसकी नयी दुन्या में भेज दो.. वही जा कर हमसे अपना रिवेंज लेता रहेगा...
उदय ने खंजर से जो उसे 2ंद फ्लोर से मिला था. उसी खंजर की मदद से शंकर का गाला काटना शुरू कर दिया.........
उतर से:- ये ये tu...tum.. शान.. शंकर का गाला क्यों काट रहे हो....
विजय:- अब्ब क्या हम तुम्हारे हिसाब से चलते रहें.. तुम टेंशन मैट लो कुछ hi देर में बम फटेगा और तुम दोनों भी शंकर के पास पोहंच जाओगे...
अब्ब उधर से आवाज़ आणि बंद हो गई.....
अब्ब तक्क मुझे लड़की की आवाज़ नहीं सुनाई दी थी.... शंकर की स्पेशल राखिल थी तो उसे कुछ न कुछ तो बोलना hi चेहये था. लेकिन वो नहीं बोली..
कुछ hi देर में शंकर का आधा गाला काट गया और शंकर मर गया.. शंकर बेहोशी में hi ये दुन्या छोड़ गया था....
मुझे शंकर के ऐसे मरने से मज़ा नै आया था. शंकर के लिए मैंने कुछ और सोचा था. लेकिन यहाँ की पल पल बदलती हुई सिचुएशन ने शंकर को मारने पर मजबूर कर दिया था. हम कोई भी चांस नहीं ले सकते थे. जितना शंकर यहाँ इस पैलेस में हमारे लिए खतरनाक हो सकता था. उतना प्रेम और धर्मेश नहीं.
और हम शंकर को ज़िंदा छोड़ कर कोई चांस नहीं लेना चाहते थे.. जितना बड़ा कमीना शंकर था. वो खुद के लिए ऐसी मौत अफ़्फोर्ड नहीं करता था......
शेर नहीं था. लेकिन शेरोन जैसा जिगरा तो था hi शंकर में और शंकर को ऐसे लाचारों की तरह से मरता हुआ देख कर इक पल के लिए मुझे भी अफ़सोस हुआ. लेकिन फिर मैंने अपने सर्र को झटक दिया... इनसे भी तो कई ऐसे hi लाचारों को मारा होगा.
पैलेस में लगने वाला बम की वजा से पूरे पैलेस में शोर सा सुनाई दिया था. और हम इसी का फायदा उठा कर अपने मतलूबा मकान की तरफ भाग निकले. इस तरफ से हमें किसी किसम की मुज़हमत का अंदेशा नहीं था. इस लिए हम सेफ hi उस मकान तक जा पोहंचे.
अभी प्रेम और धर्मेश के लिए खुद को सेफ रखना ज़यादा ज़रूरी था. और उनके लिए इस बिल्डिंग से जितनी जल्दी हो सके फरार होना था. और दोनों के साथ गुंडों ने भी भाग कर अपनी जान बचानी थी...
वह पोहनहते hi
विजय:- अब्ब तुम सबब तब तक के लिए यहाँ सेफ हो. जब तक यहाँ पर गुंडे नहीं आ जाते. यहाँ पहले इस मकान में पहले चेक करो क ये किस लिए बनाया गया था.
जहाँ तक्क मुझे लगता है. ये सिक्योरिटी के लिए बनाया गया है..
सबब मकान को देखने लगे और मैं जहाँ तक्क नज़र जाती पैलेस को और पैलेस के आस पास देखने लगा.
पल्स के दूसरी तरफ दूर मुझे कुछ गुंडों की मूवमेंट नज़र आई... लेकिन अभी मैंने किसी को कुछ कहा नहीं . बस सब को hi देखता रहा.....
फिर अपने पास मौजूद नाईट विज़न दूरबीन निकल कर पैलेस की बिल्डिंग को देखने लगा. लेकिन वहां मुझे कुछ नहीं दिखा....
सब hi ने बुलिडिंग खली कर दी थी...
दो hi मिंट में सबब आ गए..
उदय:- विजय ये सिक्योरिटी रूम hi है...
विजय:- तो फिर यहाँ भी वेपन्स पड़े होंगे.
राजा:- यहाँ गन्स और मैगजीन्स पड़े हैं...
विजय:- यहाँ इस मकान से कोई रास्ता कही और आता जाता तो नहीं ना..
उदय:- हमें कोई ऐसा रास्ता दिखा तो नहीं..
vijay:-thek है.. अब्ब तुम सबब यहीं रह कर खुद को सेफ रखो. जब्ब ज़रूरत पड़े तो फायर कर देना. लेकिन किसी को भी अपने पास मैट आने देना... दीवार के साथ मौजूद रूम्स से होता हुआ दूर जाता हूँ और वही से गोंडों को स्नाइपर से टारगेट करता हूँ.....
अब्ब बोहत देर हो चुकी है. और प्रेम और धर्मेश भी अब्ब सोचने लगे होंगे क अब्ब तक्क बम फटे क्यों नहीं....
इससे पहले क दोनों कुछ समझते.. उससे पहले hi मुझे बोहत कुछ करना था. टेक उनका ध्यान टूट जाए और वो खुद को कहीं भी सेफ न समझ सकें....
मैंने तीनो को सेफ रह कर लड़ने के लिए बल दिया और रूम्स से होता हुआ दूसरी साइड जाने लगा.... जहाँ से मेरे लिए तो किसी को निशाना बनाना आसान हो लेकिन कोई मुझे टारगेट न कर सके .......
मैं जल्द hi छुपते हुए अपनी जगा पर जा पोहंचा.... मैं एक रूम की चाट पर जा कर लेट गया और स्नाइपर गन सेट करके अपने पास में मौजूद बैग में से स्नाइपर गन क मैगज़ीन निकल कर इक लाइन में रख लिए...
मुझे इस साइड 50 के करीब गुंडे दिख रहे थे. जो बिल्डिंग की hi तरफ देख रहे थे.... उनके पास गन्स की गोली का मुझ तक पोहंच पाना मुमकिन नहीं था. वो दूर मार गन्स नहीं थीं. और ये मेरे लिए बेस्ट भी था..
साले शंकर ने स्नाइपर बेचने के लिए राखी हुई थी. अपने किसी कुत्ते को चलना hi सीखा देता. तो आज बाज़ी hi पलट कर उसके हाथ में होती....... सबब गुंडे hi चूतिये होते हैं. गोली चला क्र देंगें हांकने लगते हैं..
मैंने एक मैगज़ीन स्नाइपर में लोड किया और 2 मैगज़ीन को फूरी उसे के लिए पास hi रख लिया.
मैंने सबब को देखा और फिर मेरे होंठों पर एक खुनी स्माइल आई और मेरी ऊँगली हर 2 सेक् के बाद ट्रिगर पर डब्बने लगी. जितनी बार मेरी ऊँगली दबती उतनी hi बार किसी न किसी गुंडे का सर्र उड़द जाता....
अचानक से होने वाली मौत सभी के लिए शॉकिंग hi होती है. कोई आम इंसान हो या फिर कोई गुंडा. 2 मिंट तो लगते hi हाँ सबब समझने में.. और 2 मिंट मेरे लिए बोहत थे.
2 hi मिंट में 40 क करीब गुंडे मारे जा चुके थे
और बच जाने वाले गुंडे पागलों की तरह से अपनी गन्स को चलने लगे और खुद hi एक दूसरे को मारने लगे...
मैंने उनके पागलपण का पूरा पूरा फायदा उठाया और एक एक आकरके उन्हें भी ख़तम कर दिया..
एक और जगा साफ़ हो गई थी.... और अब्ब मेरे लिए ये जगा छोड़ना भी ज़रूरी था... मैंने जल्दी से सबब समेटा और नीचे उतर के इक साइड चुप कर उधर hi देखने लगा... मुझे कोई नहीं दिखा तो मैंने फिरसे पैलेस की बिल्डिंग की तरफ देखा तो मुझे वहां 3रह फ्लोर पे कुछ गुंडे दिखे. जो अपने गुंडे भाइयों को मारने वाले को hi ढून्ढ रहे थे. और उनके हाथों में भी अच्छी गन्स थी.
अगर कोई उन्हें सही से चलना जानता था तो मुझे टारगेट कर भी सकता था...
अब्ब तक्क यकीनन प्रेम और धर्मेश भी सबब समझ गए होंगे..... क मैंने उन्हें उलझने के लिए नकलील बम प्लान किये थे.. और दोनों hi एक दूसरे को चूतिये बने नज़रें चुरा कर देख रहे होंगे.
अब्ब तक्क 80 से भी ज़यादा गुंडे मारे जा चुके थे.. और अब्ब आधे से भी कम् रह गए थे.... मैंने एक नज़र बुलिडिंग की तरफ देखा और फिर बेसमेंट की तरफ जाने वाले रस्ते को देखने लगा. वो खाली था. और वहां पर ऊपर जाने वाले गुंडों की नज़रें नै थीं. मैंने तीसरी साइड देखा तो मुझे वहां भी सभी गुंडे छुपे हुए hi दिखे.. अब्ब मैं उस सबब से छुपा हुआ था और मुझे इस टाइम बेसमेंट से होकर बुलिडिंग में घुसना था..... उसकी चाल उनके लिए घातक बनाने का टाइम आ गया था..
मैंने ऊपर देख कर खुद को छुपाते हुए बेसमेंट के रस्ते की तरफ दौड़ लगा दी.
और मैं सेफ hi पोहंच गया.. मैं एक बार फिर से वही पोहंच गया था जहाँ से मैं आया था...
मैंने जल्दी में पूरा बेसमेंट छान मारा पर मुझे कोई नहीं दिखा...
मैंने isn-ranjeet को कॉल मिला दी..
ins-ranjeet:- हाँ विजय बीटा बड़ी देर लग रही है..
विजय:- हाँ सर यहाँ बोहत से जाल भी हाँ. इसलिए देर हो रही है..
ins-ranjeet:- तो अब्ब क्या करने का सोच यही तुमने..
विजय:- सर मैं एक बार फिरसे बेसमेंट में ा गया हूँ.. अगर आप चाहें तो मैं बसेमेटन का रास्ता खोल सकता हूँ..
ins-ranjeet के पास hi कमिश्नर खड़ा था..
कम:- हाँ विजय बीटा क्यों है.. अगर हमारी पुलिस यहाँ से छुपते हुए अंदर घुस जाए तो हम पूरे पैलेस पर अपना होल्ड जमा सकते हाँ..
vijay:-(ins रणजीत से) सर आप क्या कहते हाँ.
ins-ranjeet:- वजिजय ये हमारे लिए और तुम सबब के लिए भी सही है. और वैसे भी तुम कह रहे हो क बोहत से गुंडे और जाल हाँ अभी भी इस पैलेस में . तो तुम्हारे लिए सबब आसान नहीं होगा. तुम हमें अंदर लेने के लिए वो दीवार वाला दूर ओपन कर दो.. मिल कर सबब करते हाँ..
विजय:- ok सर मैं अभी खोलता हूँ....
मैं भागता हुआ गया और सुरंग वाला दीवारी दूर खोल दिया. isn-ranjeet के साथ कम भी अपनी फाॅर्स के साथ hi अंदर आने लगे..
isn-ranjeet और कमिश्नर में मुझे गले लगा कर बधाई दी.
ins-ranjeet:- विजय बीटा चलो बाकि की बातें ऊपर hi करते हाँ.
विजय:- चलें सर...
मैं सब को hi ले कर अंदर जाने लगा. और फिर मैंने आईएनएस रणजीत को ऊपर वाला दूर दिखाया और अपने दोस्तों की लोकशन भी बता दी... बेसमेंट में पड़े हुए वेपन्स सब ने hi देख लिए थे.. और कम के कहने पे सबब hi बेसमेंट में बने हुए दोनों पोरशन 'जो मैंने पहले देखे थे' वो देखने लगा..
मैंने isn-ranjet से बेसमेंट में से रास्ता ढूंढ कर बुलिडिंग में घुसने के लिए कह दिया.
ins-ranjet:- ठीक है विजय बीटा. खुद का ध्यान रखते हुए जाओ और जल्दी से सबब ख़तम करो. मैं भी यहाँ की चेकिंग के बाद ऊपर जाता हूँ. और देखता हों क क्या किया जा सकता है.
मैं ins-ranjeet को bye बोल कर बामसेमेन्ट में रास्ता ढूंढ़ने लगा..
प्लीसेवालों की चेकिंग से hi उनको वो रास्ता मिल गया. तो isn-ranjeet ने मुझे बता दिया क रास्ता इस तरफ से जाता है. मैं उसी रस्ते से अंदर दाखिल हुआ और मेरे पीछे रास्ता बंद कर दिया gaya..kyunki पुलिस के शामिल रहने से मेरे लिए दिक्कत बढ़ सकती थी. और मैं कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता था ..... इसलिए मैं अकेला hi आगे बढ़ गया था...
अभी इस तरफ किसी का भी धयान नहीं था. आधे से ज़यादा गन्ने मारे गए थे. और नीचे बेसमेंट में छुपे रहने से कुछ हासिल नहीं होने वाला था.... सब गुंडों के लिए hi हमारा मारा जाना ज़रूरी था..
मैं तेज़ी से आगे बढ़ रहा था. और ये रास्ता बिल्डिंग की तरफ hi जा रहा था. जहा जगा लाइट्स लगी हुई थीं. मुझे कोई परेशानी नहीं हुई...
आगे बढ़ते हुए मुझे राहरदी के कार्नर पर एक गुंडा दिखा जो कहीं जा रहा था. वो बोहत hi तेज़ी में था. मैंने सीलेंसर लगी गन ने उसके पेअर को शूट कर दिया और भाग कर उसके पास पोहंचा. वो चिल्लाता उससे पहले hi मैंने उसका मोहन बंद कर दिया. वो अभी भी सुरप्रीसेड था.. मैं उसे खेंचता हुआ इक साइड ले गया और
विजय:- तुम इतनी तेज़ी से कहाँ भाग क्र जा रहे हो.....
वो कुछ नहीं बोलै तो मैंने राइफल को उसके माथे पर लगा दिया
विजय:- मेरे पास टाइम नहीं है और तुम कुछ भी बोल नै रहे.
मेरी आवाज़ में दरिंदगी देख कर वो बोल पड़ा..
wo:-raghu उस लड़की के साथ ज़बरदस्ती करने वाला है. मुझे बॉस को बताना पड़ेगा. वर्ण बॉस मुझे नहीं छोड़ेगा...
विजय:- चलो मुझे वहां ले चलो.
और मैं यस्य खेंचता हुआ उस तरफ ले जाने लगा जहाँ उसने कहा था. लड़की इस रूम में है और रघु नाम का एक वांटेड क्रिमिनल भी वही है.. जो लड़की का रपे करने की कोशिश में था..
लड़की नेहा के इलावा और कौन हो सकती थी...
जब हम दूर पर पोहंचे तो मैंने उसे शूट कर दिया....
और दूर को एक लात मार कर अंदर जा घुसा. अंदर नेहा के कपडे पहात चुके थे और वो चीख चीख कर खुद को रघु से दूर हटने के लिए बोल रही थी. लेकिन रघु पागल हो गया था. वो नेहा की कुछ भी सुने बिना hi उसके साथ ज़बरदस्ती करने में लगा हुआ था..
दूर के एकदुम्म से खुलते hi वो मेरी तरफ पलटा और
रघु:- कौन हो तुम... कही तुम वही तो नहीं जो इस पैलेस पर हमला कारण..
वो कुछ बोलता मैंने टाइम न वास्ते करते हुए उसे शूट क्र दिया. वो खून उगलता हुआ नेहा के ऊपर hi गिर गया.. और नेहा की चीखें फिरसे गूंजने लगी..
विजय:- नेहा दर्रो नहीं. मैं तुम्हारे अजय का दोस्त हों. और वो भी इस टाइम इसी पैलेस में मेरे साथियों के साथ है. वो भी तुम्हे यहाँ बचने के लिया मौजूद है. इसलिए प्ल्ज़ तुम दररना और चीखना बंद करो..
मेरे नेहा के कमरे में घुसते hi मेरे ट्रांसमीटर लगी चिप से सबब को hi पता चल गया. और फिर मेरे कालर से अजय की आवाज़ गूंजने लगी.. मैं नेहा के पास गया. नेहा डर गई..
मैंने नेहा कुछ भी कहे बिना hi उसका सर्र पकड़ कर अपने कालर के पास कर दिया. वो और भी ज़यादा डर गई. लेकिन फिर अजय की आवाज़ सुन कर चुप हो गई. और इधर उधर देखने लगी. मैंने उसका चेहरा पकड़ कर फिरसे अपने कालर की तरफ झुकाया तो उसे कुछ समझ आया.. वो अजय की आवाज़ मेरे कालर से सुन के हैरान तो हुई लेकिन फिर अजय अजय बोलते हुए मेरे कालर को पकड़ कर रोने लगी.... और अजय भी रोने लगा.
मैंने नेहा को खुद से अलग किया और बोलै
विजय:- अभी रोने के लिए भी टाइम नहीं है. चलो मेरे साथ मन तुम्हे सेफ जगा पोहंचा दूँ.
मैं नेहा को लेकर ins-ranjeet के पास पोहंचा और उन्हें सबब बता क्र फर से वापिस बेसमेंट से बिल्डिंग में घुसने वाले रस्ते की तरफ हो लिया. इस बार मेरी स्पीड ज़यादा थी. और राइफल मेरे हाथ में तैयार थी. किसी को भी मारने के लिए...
थोड़ी hi देर में मैं एक मोड़ तक जा पोहंचा. उस मोड़ से ऊपर इक रास्ता सीढ़ियों की शकल में ऊपर जा रहा था. मैंने आस पास देखा और फर ऊपर जाने लगा.
ऊपर पोहंच कर मैं देखा तो मुझे कोई नहीं दिखा.. अब्ब मुझे अपने सामने दिखने वाले हर एक को मरना था और जल्द स जल्द सबब का काम तमाम करके इस बिल्डिंग को गुंडों से पाक करना था...
मुझे नीचे वाले फ्लोर में कोई नहीं दिखा तो मैं 2ंद फ्लोर पर चढ़ने लगा. जैसे hi ऊपर पोहंचा तो मुझे 15 के करीब गुंडे दिखे जो इधर उधर टहल कर खिड़कियों से बहार झांक रहे थे..
मेरा ख्याल है अब्ब उन्हें बामेसमेंट में पुलिस के घुसने का पता चल गया था. सबब के चेहरे पर खौफ भी था. और दरिंदगी भी..
सभी मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स थे. मर तो जाते लेकिन पुलिस के हाथे नहीं चढ़ना चाहते थे.......... मैंने उनको देखते hi राइफल को सिंगल मोड़ से हटा कर ऑटो मोड़ पर कर दिया और फिर राइफल को गुंडों की तरफ करके ट्रिगर दबा दिया. राइफल ने सभी को भूनना शुरू कर दिया. लेकिन सबब hi ेमदुमं से तो मरने से रहे. अब्ब वो भी एक्टिव हो चुके थे..
उन्हों ने भी मुझे देख लिया था. लेकिन उनके कुछ करने से पहले hi मैंने उसी फ्लोर के एक पिलर के पीछे खुद को सेफ किया और राइफल का मैगज़ीन चेंज करके
उन पर फायर करने लगा.
उनमे से 3 बच गए थे और वो भी छुपने के लिए जगा ढून्ढ रहे थे. लेकिन मुझे इनको मारने में देर नहीं करनी थी. सिलिये मैंने पिलर की साइड से निकल कर फर्श पर गिर कर खुद लुढ़काया और फिर उन बच गए गुंडों को भी उनके साथियों के पास पोहंचा दिया..
अब्ब बिल्डिंग में सबब को hi पता चल गया था, क कोई अंदर घुस चूका है. अब्ब देर करना सही नहीं था....
इस फ्लोर पर मुझे कोई और नहीं मिला था. तो मैं ऊपर गया. और ऊपर वाले सबब hi तैयार थे, किसी के ऊपर आने के लिए.....
तैयार तो मैं भी था, और वो भी कई घंटों से.. ऊपर पोहनस्ते hi मैंने सही से देखे बिना hi खुद को फर्श पर गिराया और फिरसे ऑटो मोड़ पर सेट राइफल के ट्रिगर को तब्ब तक्क दबाये रखा जब्ब तक्क मैगज़ीन खली नहीं हो गया... जैसे hi मगज़नी खली हुआ, मैं लेते लेते hi लुढ़कता हुआ खुद को कुछ दूर ले गया और इसी बीचे मैंने राइफल का मैगज़ीन भी चेंज कर लिया था...
लेकिन मुझपर गोली चलने वाले ज़यादा टर्र तो गिर चुके थे और बाकी भी खुद को सेफ रखें के लिए नीचे गिरे पड़े थे.
मैं जल्दी से बच रहे गुंडों पर फिरसे वो नया लोड किया हुआ मागज़ीने भी खाली कर दिया.....
उनमे कोई ज़िंदा है या नहीं. ये देखने के लिए मैं वहां रुका नहीं.
इस फ्लोर पर अब तक मारे गए जुड़े 20 से ऊपर hi थे...
मतलब 120 के करीब मरे गए थे..... अब्ब मैं भी थकने लगा था.....
इतनी इंसानी जानो के मेरे हाथों जाया होने से मुझे अपने मसल्स कुछ थके थके से लगने लगे थे.. गुंडे थे पर थे तो इंसान hi...
फिर मैं अपने सर्र को झटक कर राइफल का मैगज़ीन चेंज किया आगे बढ़ा गया.
आगे एक हाल था और हाल में मुझे 5 गुंडों के साथ प्रेम धर्मेश और जूली बैठे हुए दिखे........
जूली मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. लेकिन प्रेम और धर्मेश के साथ साथ खड़े हुए गुंडे मुझे खुनी आँखों से देख रहे थे..
मुझे अपने पीछे से आवाज़ सुनाई दी. मैंने गर्दन मोड़ कर देखा तो मेरे पीछे दो गुंडे गन्स लिए हुए खड़े थे...
प्रेम:- जितनी हीरोगिरी तुमने करनी थी कर्ली.. अब्ब चुप चाप अपनी गन्स को हमारे आदमियों के हवाले कार्डो. वर्ण तुम्हारे कुछ भी करने से पहले hi तुम्हारे शरीर के चीथड़े उड़ते हुए दिखेंगे तुमको......
अब्ब सिचुएशन मेरे खिलाफ हो गई थी. तो मुझे उसकी बात माननी hi थी.... मैं समझ गया था. क अब्ब मैं यहाँ सभी को भी एक साथ शूट नहीं कर सकता. वर्ण खुद को उसके हवाले मैं करना नहीं चाहता था.....
इसलिए मजबूरन मुझे खुद को सरे वेपन्स से अलग करना पड़ा.....
मेरे जिस्म से सारे वेपन के अलग होते hi मेरी पीठ कर पीछे से किसी ने अपनी गन के दस्ते से हमला किया और मैं दर्द से कराहता हुआ आगे झुक गया.....
कोई कितना भी ताकतवर हो गन के डेट की मार सहना आसान नहीं है. एक बार तू बंद अहिल hi जाता है. और मन भी हिल गया था...
अब्ब मन उनके शिकंजे में था....... अब्ब देखना था क मैं ऐसी सिचुएशन में कैसे खुद के लिए सर्वाइव कर सकता हूँ...........
मुश्किल था.. या मुश्किल तरीन.. लेकिन na-mumkin तो नहीं था........
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जीतू ने मुझे पानी पिलाया, मैं कुछ रिलैक्स हुआ, रिलैक्स तो मैं पहले भी था, यहाँ कदम कदम पर मौत थी, और एक एक सांस एक्टिव रह कर निकलना हमारे लिए ज़रूरी भी था और हमारे लिए मज़बूरी भी, इसलिए हम सभी एक्टिव थे.
लेकिन जितने घोड़े मैंने दमाग के दौड़े लिए थे. अब्ब मुझे इस पैलेस में फैलाये गए शंकर के जाल से भी बढ़ के अपने दमाग को एक्टिव रखना था.
बहार पुलिस ा गई थी और पुलिस के लिए ाडणार घुस क्र शनकर गैंग को खतम करना मुमकिन नहीं था. हम दोस्तों को hi करना था. जो भी करना था.
इस पैलेस में कौन सा जाल किस एरिया में था. हम नहीं जानते थे. अब्ब हमें पूरी तरह से खुद को बचते हुए शंकर गैंग को ख़तम करना था.
ये एक आसान मिशन नहीं था. जितना खतरनाक ये मिशन था. उतना hi हम सबब के लिए मौत का खतरा भी था. और मैं यहाँ न तो खुद मरने आया था और न hi अपने दसौतों में से किसी को मरने देने चाहता था..
अब्ब डायरेक्ट एक्शन लेना था और वो भी बोहत hi तेज़ी से. पर इस के लिए ज़रूरी था क हमें किसी भी जाल में न फंसें. और इस पैलेस की बिल्डिंग में रहते हुए हमारे लिए हर एक फ्लोर पर कई कई जाल हो सकते थे.
बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर के दूर से बहार मैंने जितने भी गुंडों को स्नाइपर गन से उदय था उस जजा पर एक छोटा सा दो मंज़िला गार्टर मकान था. अब्ब हमारे लिए वही सेफ थी और इस के इलावा कोई भी जगा सेफ नहीं थी....
ये भी हो सकता है क इस कण्ट्रोल रूम को कही और से कण्ट्रोल की जा सकता हो और हम यही कण्ट्रोल रूम में खुद को सेफ समझते रहे और प्रेम धर्मेश इसी कण्ट्रोल रूम को हमारे लिए क़ैद खाना बना दें...
हमे इस बिल्डिंग से दूर जाना था. और वो भी जल्द स जल्द..
मैं कण्ट्रोल रूम में सबब जगा देखने लगा. कण्ट्रोल रूम में काम क्र रहे लड़के सबब नहीं जान सकते थे. किसी भी ैरे गैर को तीनो पार्टनर्स सब सीक्रेट नहीं बता सकते थे... ये लड़के भी सभी सीक्रेट्स से jaan-kaari नहीं रखते थे...
मैं कण्ट्रोल रूम को देखने लगा और मेरे दोस्त मुझे देखने लगे....
विजय:- राजा उदय जीतू जितनी जल्दी हो सके इन चरों लड़कों को बेहोश करके के बाँध दो..
सब को hi लग गया था. क जितना उन्हों से इस पैलेस को आसान समझा है. उतना है नहीं. और मेरे कहते hi 3 मिंट में hi चरों लड़के बेहोश होक बंधे पड़े थे..
मैं राजा के पास गया और उसके कान में कुछ कहा. राजा एक बार तो हैरान हुआ. लेकिन फिर राजा ने उदय और जीतू के कान में वही बात बोल दी... और अजय को भी उस के कान में hi सबब बताया गया....
शंकर को ज़िंदा रखना अभी ज़रूरी था. लेकिन यहाँ जैसे हालत हमें फेस करने को मिल रहे थे. हम शंकर के लिए कोई भी चांस नहीं ले सकते थे.
हम कहाँ कहाँ शंकर को उठाये हुए फिरते रहेंगे.. इसलिए शंकर को मरना ज़रूरी था.. लेकिन यहाँ नहीं.
हो सकता है शंकर की वजा से hi अभी हम पर डायरेक्ट हमला न किया जा रहा हो.
प्रेम और धर्मेश शंकर को बचने के लिए कुछ वेट कर रहे होंगे. और फिर शंकर के सेफ होते hi सभी गुंडे मिल कर हमें घेर लेंगे...
मेरे कहने पे hi उदय राजा और जीतू ने पूरे कण्ट्रोल रूम में लगी हुए स्क्रीन्स को गोलियों से उड़ाना शुरू कर दिया. कुछ hi देर में पूरा कण्ट्रोल रूम hi तबाह हो गया. अब्ब इस कण्ट्रोल रूम के ज़रिये हमें इस पैलेस में कही नहीं देखा जा सकता था..
अगर प्रेम और धर्मेश कही बैठे हुए हमें देख रहे थे. तो सिर्फ हमें इसी बिल्डिंग के अंदर hi कही कही देख सकते थे. और हम पर्म और धर्मेश की नज़रें से ओझल हो जाना चाहते थे....
जैसे hi कण्ट्रोल रूम तबाह हुआ. मेरा सोचा हुआ सही सबत हुआ. प्रेम और धर्मेश की आवाज़ पूरे कण्ट्रोल रूम में गूंजने लगी.. अब्ब पता नहीं कौनसी सी आवाज़ किसकी थी.
उधर से:- ये तुम सबब ने क्या कर दिया.. सबब कुछ hi बर्बाद क्र दिया. अब्ब तुम्हारी मौत और भी खतरनाक होगी.. तुम नहीं जानते इस कण्ट्रोल रूम के लिए शंकर और हम वो ने कितनी म्हणत की थी.
मैंने राजा उदय जीतू और अजय को देखा.. वो सबब मेरे ामकान को सही सबत होते देख कर बड़े हैरान थे.... लेकिन बोले कुछ नहीं..
विजय:- प्रेम और धर्मेश तुम क्या समझते हो क हम तुम्हारे जाल में फँस जायेंगे.
शायद फँस भी जाएँ. लेकिन अभी हमारे पास शंकर है ना. यही हमें
बचाएगा और शनकर के बिना तुम सबब भी दिल्ली पर राज नहीं कर सकते. इसलिए शंकर तुम दोनों के लिए भी ज़रूरी है. और हमारे लिए भी...
तुम दोनों अपना काम करो और हम अपना काम करते हैं....
मैंने उदय और राजा को इशारा किया . तो वो शंकर को उठा कर बहार जाने लगे. जीतू और अजय ने वो वेपन वाला बैग उठाया. इसी कण्ट्रोल रूम में मरे हुए गुंडों की गन्स और मैगज़ीन भी थे. जो जो उठाया जा सकता था वो उठाया. और वापिस उसी दूर की तरफ जाने लगे. जहाँ से मैंने बहार गुंडों को स्नाइपर गन से टारगेट किया था.....
दूर को खोल कर जब्ब देखा तो सामने दूर दूर तक कोई नहीं था. और 200 मीटर के फैसले पर इक साइड में वो मकान था जहाँ हमें जाना था. वहां जाते hi हम सबब इस पैलेस के गुंडों से सेफ रह सकते थे .....
विजय:- बैग में से मौजूद ऊपर से लाये गए टाइम बम निकल कर हाल में लगा दो. और इस पैलेस को जितना हो सके. उतना धमाके से उड़ा दो. हमें prem,dharmesh और शंकर के इस पैलेस से क्या लेना देना है.
उसी हाल में लगे हुए एक लोड स्पीकर से आवाज़ आने लगी...
उतर से:- ye..ye.. ttt..tumm सबब पागल हो गए हो. पैलेस को क्यों उड़ाना चाहते हो. तुम खुद भी यहाँ से बच कर नहीं जा सकते. इसलिए अपनी मौत को अगर आसान बनाना चाहते हो तो पैलेस को कोई भी नकसान न पोहनचाओ . और शंकर को हमारे हवाले कार्डो. वर्ण तुम में से किसी को ज़िंदा नहीं रहने दिया जाएगा..
विजय:- जीतू जल्दी करो और इन कुत्तों पर ध्यान देना छोडो. हमें जितनी जल्दी हो सके इस पैलेस को तबाह करके यहाँ से जाना भी है....
उतर से:- मैं ने जो कहा वो सुनाई नहीं दिया क्या.. इस पैलेस को तबाह मैट करो. वर्ण तुम सबब भी कुत्ते की मौत मारे जाओगे...
बोलने वाले की आवाज़ से देरर साफ़ दिखाई पद रहा था. और यही चीज़ मेरे लिए फायदेमंद थी...
इतनी देर में जीतू और राजा ने 2 बम लगा दिया.....
विजय:- लग गए बम...
दोनों hi:- हाँ विजय लग गए बास 5 मिंट में hi ये पैलेस उड़ जाएगा...
विजय:- चलो ठीक है... अब हम ज़िंदा बचें या न बचें. ये पैलेस तो ज़रूर udega......(uday से) शंकर को उसकी नयी दुन्या में भेज दो.. वही जा कर हमसे अपना रिवेंज लेता रहेगा...
उदय ने खंजर से जो उसे 2ंद फ्लोर से मिला था. उसी खंजर की मदद से शंकर का गाला काटना शुरू कर दिया.........
उतर से:- ये ये tu...tum.. शान.. शंकर का गाला क्यों काट रहे हो....
विजय:- अब्ब क्या हम तुम्हारे हिसाब से चलते रहें.. तुम टेंशन मैट लो कुछ hi देर में बम फटेगा और तुम दोनों भी शंकर के पास पोहंच जाओगे...
अब्ब उधर से आवाज़ आणि बंद हो गई.....
अब्ब तक्क मुझे लड़की की आवाज़ नहीं सुनाई दी थी.... शंकर की स्पेशल राखिल थी तो उसे कुछ न कुछ तो बोलना hi चेहये था. लेकिन वो नहीं बोली..
कुछ hi देर में शंकर का आधा गाला काट गया और शंकर मर गया.. शंकर बेहोशी में hi ये दुन्या छोड़ गया था....
मुझे शंकर के ऐसे मरने से मज़ा नै आया था. शंकर के लिए मैंने कुछ और सोचा था. लेकिन यहाँ की पल पल बदलती हुई सिचुएशन ने शंकर को मारने पर मजबूर कर दिया था. हम कोई भी चांस नहीं ले सकते थे. जितना शंकर यहाँ इस पैलेस में हमारे लिए खतरनाक हो सकता था. उतना प्रेम और धर्मेश नहीं.
और हम शंकर को ज़िंदा छोड़ कर कोई चांस नहीं लेना चाहते थे.. जितना बड़ा कमीना शंकर था. वो खुद के लिए ऐसी मौत अफ़्फोर्ड नहीं करता था......
शेर नहीं था. लेकिन शेरोन जैसा जिगरा तो था hi शंकर में और शंकर को ऐसे लाचारों की तरह से मरता हुआ देख कर इक पल के लिए मुझे भी अफ़सोस हुआ. लेकिन फिर मैंने अपने सर्र को झटक दिया... इनसे भी तो कई ऐसे hi लाचारों को मारा होगा.
पैलेस में लगने वाला बम की वजा से पूरे पैलेस में शोर सा सुनाई दिया था. और हम इसी का फायदा उठा कर अपने मतलूबा मकान की तरफ भाग निकले. इस तरफ से हमें किसी किसम की मुज़हमत का अंदेशा नहीं था. इस लिए हम सेफ hi उस मकान तक जा पोहंचे.
अभी प्रेम और धर्मेश के लिए खुद को सेफ रखना ज़यादा ज़रूरी था. और उनके लिए इस बिल्डिंग से जितनी जल्दी हो सके फरार होना था. और दोनों के साथ गुंडों ने भी भाग कर अपनी जान बचानी थी...
वह पोहनहते hi
विजय:- अब्ब तुम सबब तब तक के लिए यहाँ सेफ हो. जब तक यहाँ पर गुंडे नहीं आ जाते. यहाँ पहले इस मकान में पहले चेक करो क ये किस लिए बनाया गया था.
जहाँ तक्क मुझे लगता है. ये सिक्योरिटी के लिए बनाया गया है..
सबब मकान को देखने लगे और मैं जहाँ तक्क नज़र जाती पैलेस को और पैलेस के आस पास देखने लगा.
पल्स के दूसरी तरफ दूर मुझे कुछ गुंडों की मूवमेंट नज़र आई... लेकिन अभी मैंने किसी को कुछ कहा नहीं . बस सब को hi देखता रहा.....
फिर अपने पास मौजूद नाईट विज़न दूरबीन निकल कर पैलेस की बिल्डिंग को देखने लगा. लेकिन वहां मुझे कुछ नहीं दिखा....
सब hi ने बुलिडिंग खली कर दी थी...
दो hi मिंट में सबब आ गए..
उदय:- विजय ये सिक्योरिटी रूम hi है...
विजय:- तो फिर यहाँ भी वेपन्स पड़े होंगे.
राजा:- यहाँ गन्स और मैगजीन्स पड़े हैं...
विजय:- यहाँ इस मकान से कोई रास्ता कही और आता जाता तो नहीं ना..
उदय:- हमें कोई ऐसा रास्ता दिखा तो नहीं..
vijay:-thek है.. अब्ब तुम सबब यहीं रह कर खुद को सेफ रखो. जब्ब ज़रूरत पड़े तो फायर कर देना. लेकिन किसी को भी अपने पास मैट आने देना... दीवार के साथ मौजूद रूम्स से होता हुआ दूर जाता हूँ और वही से गोंडों को स्नाइपर से टारगेट करता हूँ.....
अब्ब बोहत देर हो चुकी है. और प्रेम और धर्मेश भी अब्ब सोचने लगे होंगे क अब्ब तक्क बम फटे क्यों नहीं....
इससे पहले क दोनों कुछ समझते.. उससे पहले hi मुझे बोहत कुछ करना था. टेक उनका ध्यान टूट जाए और वो खुद को कहीं भी सेफ न समझ सकें....
मैंने तीनो को सेफ रह कर लड़ने के लिए बल दिया और रूम्स से होता हुआ दूसरी साइड जाने लगा.... जहाँ से मेरे लिए तो किसी को निशाना बनाना आसान हो लेकिन कोई मुझे टारगेट न कर सके .......
मैं जल्द hi छुपते हुए अपनी जगा पर जा पोहंचा.... मैं एक रूम की चाट पर जा कर लेट गया और स्नाइपर गन सेट करके अपने पास में मौजूद बैग में से स्नाइपर गन क मैगज़ीन निकल कर इक लाइन में रख लिए...
मुझे इस साइड 50 के करीब गुंडे दिख रहे थे. जो बिल्डिंग की hi तरफ देख रहे थे.... उनके पास गन्स की गोली का मुझ तक पोहंच पाना मुमकिन नहीं था. वो दूर मार गन्स नहीं थीं. और ये मेरे लिए बेस्ट भी था..
साले शंकर ने स्नाइपर बेचने के लिए राखी हुई थी. अपने किसी कुत्ते को चलना hi सीखा देता. तो आज बाज़ी hi पलट कर उसके हाथ में होती....... सबब गुंडे hi चूतिये होते हैं. गोली चला क्र देंगें हांकने लगते हैं..
मैंने एक मैगज़ीन स्नाइपर में लोड किया और 2 मैगज़ीन को फूरी उसे के लिए पास hi रख लिया.
मैंने सबब को देखा और फिर मेरे होंठों पर एक खुनी स्माइल आई और मेरी ऊँगली हर 2 सेक् के बाद ट्रिगर पर डब्बने लगी. जितनी बार मेरी ऊँगली दबती उतनी hi बार किसी न किसी गुंडे का सर्र उड़द जाता....
अचानक से होने वाली मौत सभी के लिए शॉकिंग hi होती है. कोई आम इंसान हो या फिर कोई गुंडा. 2 मिंट तो लगते hi हाँ सबब समझने में.. और 2 मिंट मेरे लिए बोहत थे.
2 hi मिंट में 40 क करीब गुंडे मारे जा चुके थे
और बच जाने वाले गुंडे पागलों की तरह से अपनी गन्स को चलने लगे और खुद hi एक दूसरे को मारने लगे...
मैंने उनके पागलपण का पूरा पूरा फायदा उठाया और एक एक आकरके उन्हें भी ख़तम कर दिया..
एक और जगा साफ़ हो गई थी.... और अब्ब मेरे लिए ये जगा छोड़ना भी ज़रूरी था... मैंने जल्दी से सबब समेटा और नीचे उतर के इक साइड चुप कर उधर hi देखने लगा... मुझे कोई नहीं दिखा तो मैंने फिरसे पैलेस की बिल्डिंग की तरफ देखा तो मुझे वहां 3रह फ्लोर पे कुछ गुंडे दिखे. जो अपने गुंडे भाइयों को मारने वाले को hi ढून्ढ रहे थे. और उनके हाथों में भी अच्छी गन्स थी.
अगर कोई उन्हें सही से चलना जानता था तो मुझे टारगेट कर भी सकता था...
अब्ब तक्क यकीनन प्रेम और धर्मेश भी सबब समझ गए होंगे..... क मैंने उन्हें उलझने के लिए नकलील बम प्लान किये थे.. और दोनों hi एक दूसरे को चूतिये बने नज़रें चुरा कर देख रहे होंगे.
अब्ब तक्क 80 से भी ज़यादा गुंडे मारे जा चुके थे.. और अब्ब आधे से भी कम् रह गए थे.... मैंने एक नज़र बुलिडिंग की तरफ देखा और फिर बेसमेंट की तरफ जाने वाले रस्ते को देखने लगा. वो खाली था. और वहां पर ऊपर जाने वाले गुंडों की नज़रें नै थीं. मैंने तीसरी साइड देखा तो मुझे वहां भी सभी गुंडे छुपे हुए hi दिखे.. अब्ब मैं उस सबब से छुपा हुआ था और मुझे इस टाइम बेसमेंट से होकर बुलिडिंग में घुसना था..... उसकी चाल उनके लिए घातक बनाने का टाइम आ गया था..
मैंने ऊपर देख कर खुद को छुपाते हुए बेसमेंट के रस्ते की तरफ दौड़ लगा दी.
और मैं सेफ hi पोहंच गया.. मैं एक बार फिर से वही पोहंच गया था जहाँ से मैं आया था...
मैंने जल्दी में पूरा बेसमेंट छान मारा पर मुझे कोई नहीं दिखा...
मैंने isn-ranjeet को कॉल मिला दी..
ins-ranjeet:- हाँ विजय बीटा बड़ी देर लग रही है..
विजय:- हाँ सर यहाँ बोहत से जाल भी हाँ. इसलिए देर हो रही है..
ins-ranjeet:- तो अब्ब क्या करने का सोच यही तुमने..
विजय:- सर मैं एक बार फिरसे बेसमेंट में ा गया हूँ.. अगर आप चाहें तो मैं बसेमेटन का रास्ता खोल सकता हूँ..
ins-ranjeet के पास hi कमिश्नर खड़ा था..
कम:- हाँ विजय बीटा क्यों है.. अगर हमारी पुलिस यहाँ से छुपते हुए अंदर घुस जाए तो हम पूरे पैलेस पर अपना होल्ड जमा सकते हाँ..
vijay:-(ins रणजीत से) सर आप क्या कहते हाँ.
ins-ranjeet:- वजिजय ये हमारे लिए और तुम सबब के लिए भी सही है. और वैसे भी तुम कह रहे हो क बोहत से गुंडे और जाल हाँ अभी भी इस पैलेस में . तो तुम्हारे लिए सबब आसान नहीं होगा. तुम हमें अंदर लेने के लिए वो दीवार वाला दूर ओपन कर दो.. मिल कर सबब करते हाँ..
विजय:- ok सर मैं अभी खोलता हूँ....
मैं भागता हुआ गया और सुरंग वाला दीवारी दूर खोल दिया. isn-ranjeet के साथ कम भी अपनी फाॅर्स के साथ hi अंदर आने लगे..
isn-ranjeet और कमिश्नर में मुझे गले लगा कर बधाई दी.
ins-ranjeet:- विजय बीटा चलो बाकि की बातें ऊपर hi करते हाँ.
विजय:- चलें सर...
मैं सब को hi ले कर अंदर जाने लगा. और फिर मैंने आईएनएस रणजीत को ऊपर वाला दूर दिखाया और अपने दोस्तों की लोकशन भी बता दी... बेसमेंट में पड़े हुए वेपन्स सब ने hi देख लिए थे.. और कम के कहने पे सबब hi बेसमेंट में बने हुए दोनों पोरशन 'जो मैंने पहले देखे थे' वो देखने लगा..
मैंने isn-ranjet से बेसमेंट में से रास्ता ढूंढ कर बुलिडिंग में घुसने के लिए कह दिया.
ins-ranjet:- ठीक है विजय बीटा. खुद का ध्यान रखते हुए जाओ और जल्दी से सबब ख़तम करो. मैं भी यहाँ की चेकिंग के बाद ऊपर जाता हूँ. और देखता हों क क्या किया जा सकता है.
मैं ins-ranjeet को bye बोल कर बामसेमेन्ट में रास्ता ढूंढ़ने लगा..
प्लीसेवालों की चेकिंग से hi उनको वो रास्ता मिल गया. तो isn-ranjeet ने मुझे बता दिया क रास्ता इस तरफ से जाता है. मैं उसी रस्ते से अंदर दाखिल हुआ और मेरे पीछे रास्ता बंद कर दिया gaya..kyunki पुलिस के शामिल रहने से मेरे लिए दिक्कत बढ़ सकती थी. और मैं कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता था ..... इसलिए मैं अकेला hi आगे बढ़ गया था...
अभी इस तरफ किसी का भी धयान नहीं था. आधे से ज़यादा गन्ने मारे गए थे. और नीचे बेसमेंट में छुपे रहने से कुछ हासिल नहीं होने वाला था.... सब गुंडों के लिए hi हमारा मारा जाना ज़रूरी था..
मैं तेज़ी से आगे बढ़ रहा था. और ये रास्ता बिल्डिंग की तरफ hi जा रहा था. जहा जगा लाइट्स लगी हुई थीं. मुझे कोई परेशानी नहीं हुई...
आगे बढ़ते हुए मुझे राहरदी के कार्नर पर एक गुंडा दिखा जो कहीं जा रहा था. वो बोहत hi तेज़ी में था. मैंने सीलेंसर लगी गन ने उसके पेअर को शूट कर दिया और भाग कर उसके पास पोहंचा. वो चिल्लाता उससे पहले hi मैंने उसका मोहन बंद कर दिया. वो अभी भी सुरप्रीसेड था.. मैं उसे खेंचता हुआ इक साइड ले गया और
विजय:- तुम इतनी तेज़ी से कहाँ भाग क्र जा रहे हो.....
वो कुछ नहीं बोलै तो मैंने राइफल को उसके माथे पर लगा दिया
विजय:- मेरे पास टाइम नहीं है और तुम कुछ भी बोल नै रहे.
मेरी आवाज़ में दरिंदगी देख कर वो बोल पड़ा..
wo:-raghu उस लड़की के साथ ज़बरदस्ती करने वाला है. मुझे बॉस को बताना पड़ेगा. वर्ण बॉस मुझे नहीं छोड़ेगा...
विजय:- चलो मुझे वहां ले चलो.
और मैं यस्य खेंचता हुआ उस तरफ ले जाने लगा जहाँ उसने कहा था. लड़की इस रूम में है और रघु नाम का एक वांटेड क्रिमिनल भी वही है.. जो लड़की का रपे करने की कोशिश में था..
लड़की नेहा के इलावा और कौन हो सकती थी...
जब हम दूर पर पोहंचे तो मैंने उसे शूट कर दिया....
और दूर को एक लात मार कर अंदर जा घुसा. अंदर नेहा के कपडे पहात चुके थे और वो चीख चीख कर खुद को रघु से दूर हटने के लिए बोल रही थी. लेकिन रघु पागल हो गया था. वो नेहा की कुछ भी सुने बिना hi उसके साथ ज़बरदस्ती करने में लगा हुआ था..
दूर के एकदुम्म से खुलते hi वो मेरी तरफ पलटा और
रघु:- कौन हो तुम... कही तुम वही तो नहीं जो इस पैलेस पर हमला कारण..
वो कुछ बोलता मैंने टाइम न वास्ते करते हुए उसे शूट क्र दिया. वो खून उगलता हुआ नेहा के ऊपर hi गिर गया.. और नेहा की चीखें फिरसे गूंजने लगी..
विजय:- नेहा दर्रो नहीं. मैं तुम्हारे अजय का दोस्त हों. और वो भी इस टाइम इसी पैलेस में मेरे साथियों के साथ है. वो भी तुम्हे यहाँ बचने के लिया मौजूद है. इसलिए प्ल्ज़ तुम दररना और चीखना बंद करो..
मेरे नेहा के कमरे में घुसते hi मेरे ट्रांसमीटर लगी चिप से सबब को hi पता चल गया. और फिर मेरे कालर से अजय की आवाज़ गूंजने लगी.. मैं नेहा के पास गया. नेहा डर गई..
मैंने नेहा कुछ भी कहे बिना hi उसका सर्र पकड़ कर अपने कालर के पास कर दिया. वो और भी ज़यादा डर गई. लेकिन फिर अजय की आवाज़ सुन कर चुप हो गई. और इधर उधर देखने लगी. मैंने उसका चेहरा पकड़ कर फिरसे अपने कालर की तरफ झुकाया तो उसे कुछ समझ आया.. वो अजय की आवाज़ मेरे कालर से सुन के हैरान तो हुई लेकिन फिर अजय अजय बोलते हुए मेरे कालर को पकड़ कर रोने लगी.... और अजय भी रोने लगा.
मैंने नेहा को खुद से अलग किया और बोलै
विजय:- अभी रोने के लिए भी टाइम नहीं है. चलो मेरे साथ मन तुम्हे सेफ जगा पोहंचा दूँ.
मैं नेहा को लेकर ins-ranjeet के पास पोहंचा और उन्हें सबब बता क्र फर से वापिस बेसमेंट से बिल्डिंग में घुसने वाले रस्ते की तरफ हो लिया. इस बार मेरी स्पीड ज़यादा थी. और राइफल मेरे हाथ में तैयार थी. किसी को भी मारने के लिए...
थोड़ी hi देर में मैं एक मोड़ तक जा पोहंचा. उस मोड़ से ऊपर इक रास्ता सीढ़ियों की शकल में ऊपर जा रहा था. मैंने आस पास देखा और फर ऊपर जाने लगा.
ऊपर पोहंच कर मैं देखा तो मुझे कोई नहीं दिखा.. अब्ब मुझे अपने सामने दिखने वाले हर एक को मरना था और जल्द स जल्द सबब का काम तमाम करके इस बिल्डिंग को गुंडों से पाक करना था...
मुझे नीचे वाले फ्लोर में कोई नहीं दिखा तो मैं 2ंद फ्लोर पर चढ़ने लगा. जैसे hi ऊपर पोहंचा तो मुझे 15 के करीब गुंडे दिखे जो इधर उधर टहल कर खिड़कियों से बहार झांक रहे थे..
मेरा ख्याल है अब्ब उन्हें बामेसमेंट में पुलिस के घुसने का पता चल गया था. सबब के चेहरे पर खौफ भी था. और दरिंदगी भी..
सभी मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स थे. मर तो जाते लेकिन पुलिस के हाथे नहीं चढ़ना चाहते थे.......... मैंने उनको देखते hi राइफल को सिंगल मोड़ से हटा कर ऑटो मोड़ पर कर दिया और फिर राइफल को गुंडों की तरफ करके ट्रिगर दबा दिया. राइफल ने सभी को भूनना शुरू कर दिया. लेकिन सबब hi ेमदुमं से तो मरने से रहे. अब्ब वो भी एक्टिव हो चुके थे..
उन्हों ने भी मुझे देख लिया था. लेकिन उनके कुछ करने से पहले hi मैंने उसी फ्लोर के एक पिलर के पीछे खुद को सेफ किया और राइफल का मैगज़ीन चेंज करके
उन पर फायर करने लगा.
उनमे से 3 बच गए थे और वो भी छुपने के लिए जगा ढून्ढ रहे थे. लेकिन मुझे इनको मारने में देर नहीं करनी थी. सिलिये मैंने पिलर की साइड से निकल कर फर्श पर गिर कर खुद लुढ़काया और फिर उन बच गए गुंडों को भी उनके साथियों के पास पोहंचा दिया..
अब्ब बिल्डिंग में सबब को hi पता चल गया था, क कोई अंदर घुस चूका है. अब्ब देर करना सही नहीं था....
इस फ्लोर पर मुझे कोई और नहीं मिला था. तो मैं ऊपर गया. और ऊपर वाले सबब hi तैयार थे, किसी के ऊपर आने के लिए.....
तैयार तो मैं भी था, और वो भी कई घंटों से.. ऊपर पोहनस्ते hi मैंने सही से देखे बिना hi खुद को फर्श पर गिराया और फिरसे ऑटो मोड़ पर सेट राइफल के ट्रिगर को तब्ब तक्क दबाये रखा जब्ब तक्क मैगज़ीन खली नहीं हो गया... जैसे hi मगज़नी खली हुआ, मैं लेते लेते hi लुढ़कता हुआ खुद को कुछ दूर ले गया और इसी बीचे मैंने राइफल का मैगज़ीन भी चेंज कर लिया था...
लेकिन मुझपर गोली चलने वाले ज़यादा टर्र तो गिर चुके थे और बाकी भी खुद को सेफ रखें के लिए नीचे गिरे पड़े थे.
मैं जल्दी से बच रहे गुंडों पर फिरसे वो नया लोड किया हुआ मागज़ीने भी खाली कर दिया.....
उनमे कोई ज़िंदा है या नहीं. ये देखने के लिए मैं वहां रुका नहीं.
इस फ्लोर पर अब तक मारे गए जुड़े 20 से ऊपर hi थे...
मतलब 120 के करीब मरे गए थे..... अब्ब मैं भी थकने लगा था.....
इतनी इंसानी जानो के मेरे हाथों जाया होने से मुझे अपने मसल्स कुछ थके थके से लगने लगे थे.. गुंडे थे पर थे तो इंसान hi...
फिर मैं अपने सर्र को झटक कर राइफल का मैगज़ीन चेंज किया आगे बढ़ा गया.
आगे एक हाल था और हाल में मुझे 5 गुंडों के साथ प्रेम धर्मेश और जूली बैठे हुए दिखे........
जूली मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. लेकिन प्रेम और धर्मेश के साथ साथ खड़े हुए गुंडे मुझे खुनी आँखों से देख रहे थे..
मुझे अपने पीछे से आवाज़ सुनाई दी. मैंने गर्दन मोड़ कर देखा तो मेरे पीछे दो गुंडे गन्स लिए हुए खड़े थे...
प्रेम:- जितनी हीरोगिरी तुमने करनी थी कर्ली.. अब्ब चुप चाप अपनी गन्स को हमारे आदमियों के हवाले कार्डो. वर्ण तुम्हारे कुछ भी करने से पहले hi तुम्हारे शरीर के चीथड़े उड़ते हुए दिखेंगे तुमको......
अब्ब सिचुएशन मेरे खिलाफ हो गई थी. तो मुझे उसकी बात माननी hi थी.... मैं समझ गया था. क अब्ब मैं यहाँ सभी को भी एक साथ शूट नहीं कर सकता. वर्ण खुद को उसके हवाले मैं करना नहीं चाहता था.....
इसलिए मजबूरन मुझे खुद को सरे वेपन्स से अलग करना पड़ा.....
मेरे जिस्म से सारे वेपन के अलग होते hi मेरी पीठ कर पीछे से किसी ने अपनी गन के दस्ते से हमला किया और मैं दर्द से कराहता हुआ आगे झुक गया.....
कोई कितना भी ताकतवर हो गन के डेट की मार सहना आसान नहीं है. एक बार तू बंद अहिल hi जाता है. और मन भी हिल गया था...
अब्ब मन उनके शिकंजे में था....... अब्ब देखना था क मैं ऐसी सिचुएशन में कैसे खुद के लिए सर्वाइव कर सकता हूँ...........
मुश्किल था.. या मुश्किल तरीन.. लेकिन na-mumkin तो नहीं था........
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