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- Dec 5, 2013
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आज की रात पैलेस में खुशियां की रात थी. माँ और पापा एक रूम में बंद हो गए थे. और जो रूम मेरे हिस्से में आया था. उस रूम में एक बड़ा बीएड रखा हुआ था. और उस रूम में आज मेरे साथ सिर्फ मेरी तितलियाँ hi थीं. अब्ब कुछ दिनों तक्क मेरे साथ मेरी तितलियों के सीवे किसी और की गुंजाइश नहीं निकलने वाली थी. और सबब ने भी ok बोल दिया था. दिल तो सबब का hi था. लेकिन सबब एक साथ सोने से रहें. पहले पूजा दीदी के sath,kabhi रानी तो कभी सीखा और रूपा सो जाया करती थीं.
लेकिन अब्ब मेरी तितलियों के आ जाने से फ़िलहाल के लिए कोई चेंजिंग ऑप्शन नहीं रहा था. तीनो hi कुछ दिनों तक्क रेगुलर मेरे साथ सोने वाली थीं. अगर आज पापा न मिले होते तो माँ भी साथ में होती.
रूम के अंदर आते hi दूर को अंदर से लॉक क्र दिए गया. मैं बोहत थका हुआ था, लेकिन तीनो का ख्याल रखते हुए खुद पर काबू रखे हुए था.
तीनो को गुज़रे सालों का प्यार वसूलना था मुझसे.. और जैसा प्यार तीनो वसूलने वाली थीं. वो भी मैं जानता था. आज मई बोहत hi ज़यादा एक्ससिटेड था, पहली बार हम चरों hi खुल के मस्ती करने वाले थे.
अब्ब तीनो hi जवान हो गई थें. और छूट खुलवाने लायक भी हो गई थीं. मैं और मेरा लुंड भी कबसे किसी छूट में घुसने के लिए बेकरार थे.
मेरा लुंड भी मेरे मैं से कंटेक्टेड था. उसने भी कह दिया क माँ और बहनो को निकाल कर ले आओ. फिर हम दोनों hi मिल कर सबब की hi छूट में घुस जाएंगे..
एक मिशन माँ और बहनो वाला पूरा हुआ. तो दूसरा भी शुरू होने जा रहा था.
इस बार का मिशन मेरे लिए मेरे लुंड के लिए मेरे रीडर्स के मनोरंझण के लिए था. सील पैक छूट और गांड के साथ साथ, पहले से खुली हुई छूट एंड गांड में घुसने का मिशन था.. साथ साथ दिल्ली के गुंडों की भी माँ चुदती रहेगी.. लोगों का भला भी होता रहेगा. माँ और बहनो के साथ टाइम भी स्पेंड होता रहेगा. और दन्न से भी मेंटली जुंग जारी रहेगी....
दन्न से अभी डायरेक्ट जुंग का समय नै आया था.. टाइम अभी था सबब के साथ अच्छे से मिल कर रहने का.. अपने पैलेस में रह रहे लोगों को खुशियां बांटने का. और दिल्ली शहर में भी रह रहे अनगिनत मासूमों की ज़िन्दगियों को बदलने का समय आ गया था.
बदला तो मैं दन्न और दूसरे सभी से लूंगा... और उन सभी की माँ की छूट का भोसड़ा बना दूंगा. लेकिन अभी सभी के दिलों की तमन्नाएँ पूरी करने सा समय था. ये भी एक बोहत बड़ा मिशन था. किसी के दिल की आरज़ू पूरी किये बिना मैं कैसे यहाँ से जा सकता था.
दन्न से जुंग करने के लिए na-jaane मुझे कितने समय के लिए दिल्ली से दूर जाना पड़े और फिर कैसे कैसे हालातों का मुझे सामना करना पड़े. इस लिए पहले सभी को कुछ खुशियां hi बाँट दूँ.
हम रूम में ए और तीनो में से किसी ने दूर को लॉक कर दिया. मेरी नज़र बीएड की तरफ थी. इसलिए मुझे नहीं पता लॉक किसने लगाया था.
मैंने मुद के तीनो को देखा तो तीनो मुझे hi आँखों में आंसू लिए हुए निहार रही थीं.
लो जी, फिर से इमोशंस जाग पड़े..... होना तो चाहिए था कुछ ऐसा hi आखिर ये हम चरों के स्पेशल इमोशंस थे. क्या क्या नै सपने सजाये गए थे गुज़रे हुए वक़्त में, क्या क्या करने का मैं में सोच लिया था हम चरों ने hi. लेकिन फिर मुझे एक लम्बे समय के लिए तीनो से दूर हो जाना पड़ा. तीनो hi मुझसे दूर रहने की आदि नहीं थें. बड़ी हिम्मत जूता क्र तीनो ने ये सालों का सफर तय किया था...
मैंने अपनी बाहें तीनो के लिए खोल दीं और तीनो hi भाग क्र मुझसे लिपित गईं. रोइ तो नहीं थी बास सालों के इंतज़ार ने आँखों से बहार आने का रास्ता चुन लिया था. तीनो hi मुझे चूमने लगी थें. अपने दिल को ठंडक पोहंचा रही थें. कुछ देर में सबब हलकी हो गईं.
प्रिय:- विज्जु अब्ब दिल को पूरा चैन मिला है. वर्ण पहले तुझसे मिलके दिल की तालाब पूरी नहीं हुई थी.
जहान्वी:- प्रिय, हमारा विज्जु हमें वापिस मिल गया है, हम फिरसे वहीँ ज़िन्दगी जियेंगी. जो पहले हम जिया करती थीं.
श्रुति- हाँ बोहत इंतज़ार किया है विज्जु तेरा हमने, तुझ बिन नींद hi हमारी कही खो गई थी, जब भी अपनी ऑंखें बंद करती थीं, तेरा hi चेहरा सामने आ जाता था...
विजय:- अब्ब तो मैं सच में hi सब की आँखों के सामने हूँ ना. तो दिल की तालाब भी पूरी करलो, और आँखों को भी ठंडा करलो, जो सालों से मुझे देखना की तमन्ना में खुली रह गई थीं....
हाल मेरा भी तो कुछ ऐसा hi था.... लेकिन मुझे यहाँ तुम्हारी जैसी hi पूजा didi,rani,shikha,rupa,shetal और नताशा दीदी मिल गई थीं.. वर्ण मैं भी तुम सबब बिन यहाँ पागल सा होने लगता था. बड़ी मुश्किल से सबने hi मुझे अपना प्यार दे कर संभाला है... वर्ण तुम सबब की याद और तुम सबब की भयानक ज़िन्दगी मुझे हर दुम्म डराए रखती thi.kuch कर नहीं सकता था ना तुम सबब के लिए.. बड़ी मुश्किल से मैं अपने अंदर के डर पर काबू प् सका हूँ..... बास एक hi तमन्ना थी कैसे भी करके जल्दी से तुम सबब को वहां से निकल कर ले आऊं... बड़ी मुश्किल से ये वक़्त कटा है..
मैंने भी तुम सबब के जितना hi दर्द झेला है...
तीनो मेरी hi बात सुन रही थें.
सबब बातें करते हुए मुझे अपना गुज़रा हुआ समय और दर्द याद आने लगा. कैसा था मैं, कितने दर्द से गुज़रा था main.sabb इतना भी आसान नहीं था. ये जो कुछ भी हुआ था.. वो सबब इतना टफ था, क सोचते हुए भी दिल तड़पने लगता है..
तीनो की आंखे एक बार फिर से नम्म हुई लेकिन फिर तीनो ने hi खुद पर काबू पाया और मुझे बाज़ो से थामे हुए बीएड की जानिब बाद गईं..
तीनो hi बीएड को देख कर अपना मूड बदलने लगें... तीनो hi सालों पहले वाली मस्ती को याद करने लगी. तीनो ने मुझे बीएड पर धक्का दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई...
मैंने तीनो को देखा तो तीनो hi पल भर में बदल गई थीं. कैसी अंडरस्टैंडिंग थी तीनो की एक hi बार में तीनो ने अपना चोला hi बदल लिया था.. इस वक़्त तीनो hi पहले वाला सबब भूल कर मस्ती करने के मूड में आ आगे थें.
विजय:- ये सबब क्या है,
जानवी:- विज्जु क्या तुझे बताना पड़ेगा...
प्रिय:- जहान्वी इसे बताने की क्या ज़रूरत है. चल हम अपना गेम शुरू करते हाँ..
श्रुति प्रिय और जहान्वी की बात सुन कर अपने कपडे उतरने लगी..
अब कपडे उतरने में कौनसी झिझक... ये काम तो सबब hi मेरे सामने सालों पहले करती hi रही थीं. लेकिन अब्ब मैं और मेरा लुंड भी जवान हो चुके थे.
विजय:- श्रुति इतनी जल्दी क्या है. अभी आज hi तो आया हूँ.
शुरतुइ की देखा देखि प्रिय और जहान्वी भी अपने कपडे उतरने लगी.. जब तक प्रिय और जहान्वी नंगी होती. श्रुति मेरे ऊपर चढ़ दौड़ी. और मेरे होंठों पर टूट पड़ी. और main""arre अरे"" hi करता रह गया.
षुरूति मेरे होंठों को अपने होंठों में लिए नरमी से चूमने लगी. अभी श्रुति ने चूसना शुरू नहीं किया था. श्रुति बड़े प्यार से मेरे होंठों पर लगी नमी को चाट रही थी. जल्दी किसको थी. ये सबब करने की जल्दी तो थी, ये सबब जल्दी ख़तम करने के मूड में नहीं थी.
इतनी देर में जहान्वी और प्रिय भी नंगी हो चुकी थीं. तीनो के बदन पर ब्रा पेंटी तक भी नहीं थी. टोटली नंगी थीं. प्रिय ने श्रुति की छूट पर हाथ रख क्र श्रुति की छूट को थोड़ा ऊपर किया और मेरे ट्रॉउज़र की डोरी खोलने लगी.
जहान्वी ने श्रुति को किश करने से नै रोका वो श्रुति के फ्री होने का वेट करने लगी. और प्रिय को मेरे ट्रॉउज़र की डोरी खोलते हुए देखने लगी....
श्रुति खुद hi मेरे होंठों से अलग हुई..
श्रुति:- चलो विज्जु नंगे होने में हमारी मदद करो, वर्ण हम तुम्हारी ये शर्ट पहाड़ देंगी.
मैं कोई पागल था जो इस सबब में देर करता. एक तो मैं भी अपनी तितलियों के साथ ये सबब करने के लिए बेचैन था, दूसरा मुझे पूजा और रानी ने इस सबब का आदि भी तो बना दिया था...
और पिछले एक साल में मुझे बास एक बार पूजा दीदी और रानी साथ मस्ती की थी.. या फिर भाभी के साथ... अब्ब 2 बार लुंड से पानी निकाल क्र कैसे मुझे चैन मिल सकता था.. और वैसे भी तीन गरम तितलियाँ मेरे सामने नंगी थें और मैं वेट करूँ. मैं पागल तो नहीं था.
कुछ hi सेकण्ड्स लगे मैं भी तीनो के जैसा hi नंगा हो गया था. मेरा लुंड भी सब समझते हुए खड़ा हो चूका था. और फिर जैसे hi मेरी तितलिओं ने मेरे लुंड को देखा तो शॉकेड हो गईं..
प्रिय:- विज्जू मुझे लगा था तेरा लुंड कुछ बड़ा है, लेकिन ये तो बोहत बड़ा और मोटा भी है... विज्जु तूने तो सच में hi इक शेर पाल रखा है.
श्रुति:- प्रिय, तूने सच कहा, विज्जु ने तो एक शेर hi पाल रखा है. अब्ब तो ये हमारा hi है.. मैं तो इसे कच्चा hi खा जाऊँगी..
जहान्वी:- तो मैं कौनसा विज्जु के लुंड को माफ़ी देने वाली हूँ... बड़ा वेट करवाया है विज्जु तुमने... लेकिन तेरे लुंड को देख क्र तो तुझे सबब माफ़ किया जा सकता है....
विजय:- अच्छा तो फिर अब्ब क्या विचार हाँ तुम सबब के .....
तीनो:- विचार तो बोहत hi अच्छा हाँ हम सबब के... आज तो सालों की तड़प मिटाएंगी तुझसे....
प्रिय:- विज्जु तुम लेट जाओ. हम खुद hi सबब करलेंगी..
विजय:- क्या मतलब, अभी मेरा नंबर नहीं है क्या...
जहान्वी:- विज्जु तुम्हरा नंबर भी लगेगा. पहले हम अपने दिल की करलें, फिर जो तुम्हारा दिल करे कर लेना.. अभी हमने hi सबब अपनी मर्ज़ी से करने दो..
विजय:- ठीक है, तुम तीनो की hi मान लेता हूँ...
मैं लेट गया. मेरा लुंड छत की तरफ हो गया. प्रिय और जहान्वी मेरे लुंड के पास बैठी और फिर दोनों ने hi मेरे लुंड को पकड़ लिया. पहले उसे अच्छी तरह से दबा कर चेक करने लगी..
प्रिय:- देखा जहान्वी कितना हार्ड है. किसी लोहे के जैसा..
जहान्वी;- हाँ प्रिय, बोहत हार्ड है, एक बार तो हमारी चीखें hi निकाल देगा.
श्रुति:- मैडम लुंड छोटा भी हो तो पहली बार छूट में घुसते hi चीखें निकाल देता है.
प्रिय:- तू क्यों कड़ी है..
श्रुति:- तो क्या करूँ. तुम दोनों ने तो लुंड को पकड़ने लायक जगा hi नहीं छोड़ी.
जहान्वी:- तू अपनी छूट को विज्जु के मोहन पर रखदे. और मज़ा ले, मैं और प्रिय विज्जु का लुंड पहले अच्छे से चेक करलें. फिर कुछ और सोचेंगी.
शूरति:- ये तो बड़ी अच्छी बात बताई जहान्वी तुमने...
श्रुति देर किये बिना hi मेरे सर्र की गिर्द अपने पेअर रख कर अपनी छूट को मेरे मोहन पर रखके बैठ गई. शूरति का मोहन प्रिय और जहान्वी की तरफ था.
श्रुति ने अपने हाथ मेरी कमर की साइड में बीएड पर रखे और झुक क्र अपनी छूट को मेरे मोहनन पर सेट करने लगी...
मैंने भी अपने हाथों से श्रुति के चुत्तडों को पकड़ कर श्रुति की छूट को अपने मोहन के करीब किया और फिर अपनी जीब निकल क्र श्रुति की आज hi सफाई की गई चिकनी छूट को चाटने लगा....
तीनो ने पहले से hi मैं बना लिया था. इसलिए तीनो ने अपनी छूट और गांड को चमका लिया था. तीनो आज ग़ज़ब की सेक्सी लग रही थीं. तीनो ने अभी मुझे खुल के खुद को देखने नहीं दिया था. और मुझपर टूट पड़ी थीं...
मेरा मूड तो था पहले तीनो से hi खूब बातें करूँगा. मस्ती के लिए टाइम hi टाइम था. लेकिन वो तीनो hi कुछ और सोचे हुए थी..
मेरी तितलियाँ भी क्या करती.. कोठे पर रहते हुए, इतने सालो खुद पर काबू रखे हुए गुज़ार चुकी थीं. अब कैसे वो खुद को रोक पाती. रोज़ hi किसी न किसी की छूट में लुंड घुसा हुआ देखना, और फिर खुद पर कण्ट्रोल कर लेना बोहत बड़ी बात थी....
दलदल में फँसी हुई थीं. इस बात का डर भी था क कही उनके साथ कुछ गलत न हो जाए लेकिन फिर भी छूट की गर्मी परेशां किये रखती थी....
छूट के खुल जाने का डर भी था. तीनो को और छूट की गर्मी ख़तम न होने की टेंशन भी थी. कैसा अजीब सिस्टम था...
श्रुति अपनी छूट पर मेरी जीब की गर्मी से बेहाल होने लगी थी.. बोहत समय से रुकी हुई थी छूट की गर्मी. आज पहली रात थी, तो तीनो का hi जल्दी में पानी निकल जाना था.. तीनो की hi छूट का पानी तो कब्ब से निकलने के लिए बेकरार था. बास तीनो को hi छूट पर इशारा चाहिए था...
कुछ hi देर में श्रुति अपनी छूट को मेरे मोहन पर रगड़ने लगी. श्रुति की छूट ने पानी की बरसात शुरू करदी थी. श्रुति जल्दी hi झड़ने वाली हो गई थी..
मैंने भी श्रुति को जल्दी ठंडा करने का सोच लिया. मेरी जीब श्रुति की छूट से कुछ ऊपर हुई और श्रुति की उनतोच गांड के छेड़ के ऊपर जा कर लगी..
श्रुति को एक झटका लगा. और शूरति की सिसकियाँ निकालनी शुरू हो गयी
श्रुति:- ohhhhhhhhhhhhh..yessssss....vijjjjuuuuuuu...yessssssssssss... विज्जउ
विज्जु मेरी गांड को भी चाटो.... विज्जू मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है..
श्रुति की बात सुनकर प्रिय और जहान्वी जो मेरे लुंड को दबा दबा के चेक कर रही थीं.. दोनों hi श्रुति की बात सुनके हैरान रह गईं...
प्रिय:- श्रुति तेरी छूट इतनी जल्दी पानी निकलने वाली है..
श्रुति:- (अपनी छूट को मेरे मोहन अपर घिसते hue)kya बताओ प्रिय....... इतने समय बाद ये सबब करने में मज़ा भी बोहत ा रहा है. और फिर मेरी छूट ने सालों से पानी भी तो खुल के नहीं निकला बास विज्जु के चाटने से hi निकलने वाला हो गया...
शूरति हंप्टी हुई ये सबब बोल रही थी.. मैं शूरति की गांड के छेड़ पर अपनी जीब फेर रहा था. और श्रुति की हालत पतली होने लगी थी. श्रुति की गांड से बड़ी मस्त स्मेल आ रही थी. जो मेरे लुंड को और भी सख्त करने लगी थी.
जहान्वी:- प्रिय देखो विज्जु का लुंड और भी सख्त होने लगा.
प्रिय- हाँ ज़रूर विज्जु क श्रुति की छूट और गांड चाटने में मज़ा आ रहा होगा.
जहान्वी:- अब्ब क्या हम विज्जु के लुंड को दबती hi रहेंगी... इसे मोहन में नै लेना क्या..
प्रिय:- जल्दी क्या है जहान्वी पहले अच्छे से चेक तो करलूं.
जहान्वी:- और अपनी छूट में कब्ब लेगी इसे..
परिया:- आज नहीं जहान्वी, आज विज्जु थका हुआ है, खुल कर सबब मज़ा नहीं आने वाला, आज तो बास छूट का पानी निकाल कर सोते हाँ. अभी विज्जु से कुछ बातें भी करनी हाँ. ये सबब तो बाद में भी होता hi रहे. अगर छूट की आग का मसला न होता तो आज इतना सबब भी मैं नहीं करने वाली थी.
जहान्वी:- तू ठीक बोली प्रिय. आज जितना मिल रहा है उतना तो करेंगी hi..
मेरी जीब बड़ी महारत से श्रुति की छूट के अंदर तो कभी गांड के छेड़ पर रेगुलर hi चल रही थी. श्रुति की साँसे और सिसकियाँ तेज़ होने लगी..
षुरूति की छूट की आग ने श्रुति को कुछ ज़यादा hi जलाया हुआ था, श्रुति झटके पे झटके खाने लगी, और प्रिय और जहान्वी के हाथों में मौजूद लुंड पर गिरते हुए श्रुति झड़ने लगी...
प्रिय:- देख जहान्वी कितनी जल्दी हार मान गई श्रुति...
श्रुति मेरे लुंड पे hi हंप्टी हुई बोलने लगी
श्रुति:- बोहत बोले रही हो तुम दोनों. विज्जु से छूट चटवा के देखो . 2 hi मिंट में न झाड़ गई तो फिर बात करना.
जहान्वी:- तू पहले साँस ठीक करले फिर बोल लेना.
माने श्रुति को खुद पार्स हटा दिया.
विजय:- अब किसका मोड़ का मेरे मोहन पे छूट रखने का..
जहान्वी:- विज्जु तुम बास अपने होंटो पर लगे श्रुति के अमृत को hi chat'te रहो अभी हाम्रा मैं कुछ और है...
प्रिय:- चल जहान्वी विज्जु के लुंड को टास्ते कारण. बोहत दबा के देख लिया...
जहान्वी:- हाँ चल ठीक है..
विजय:- तुम दोनों में से एक अपनी छूट मुझसे चतवते हुए मेरे लुंड को अपने मोहन में ले सकती है. तुम दोनों का भी हो जाएगा और मेरा भी. क्या मैं तुम दोनों अपना लुंड चूसते हुए hi देखता रहूं..
श्रुति:- न न प्रिय, जहान्वी, अभी विज्जु से अपनी छूट न चटवाने वर्ण तुम दोनों भी जल्दी hi झाड़ जाओगी.
दोनों:- श्रुति तू सच कह रही है.
श्रुति:- चेक करके देख लो. पूछने की क्या ज़रूरत है. जब्ब छूट पानी छोड़ने लगेगी तू पता चल जाएगा.
मैंने श्रुति की बात सुन कर मुस्कुराने लगा..
विजय:- अब्ब जब्ब की छूट का पानी की आखरी स्टेज पे हो तो मैं क्या क्र सकता हूँ. मैं तो बास अपना काम hi करूँगा. पानी तो खुद बी खुद hi निकल जायगा..
प्रिय:- जहान्वी तू विज्जु से अपनी छूट चटवा के देख.
जहान्वी;- मैं क्यों चितवौ. तुम जाओ विज्जु में मोहन पे अपनी छूट रखो, मैं तो नहीं इतनी जल्दी झड़ने के मूड में. अभी तो मैं विज्जु के लुंड को अच्छे से चूसूंगी, बाकी का बाद में देखेंगी..
विजय:- ये क्या लगा रखा है. तुम तीनो ने, इस बात पे भी बहस होती है क्या.
प्रिय:- विज्जु आज तुम कुछ मैट बोलो, चल जाह्नवी न तू विज्जु के मोहन में बैठने वाली है और न मैं, पहले हम दोनों hi मिल के विज्जु के लुंड को chaat'ti चूसती हाँ.
मेरा लुंड कुछ ज़यादा hi पसंद आ गया था दोनों को और श्रुति की बात सुन के दोनों hi छूट चटवाने से डर गई थीं कहीं छूट जल्दी पानी छोड़ के मज़ा न ख़राब करदे..
छूट का पानी निकल जाने के बाद फिर नहीं आएगा क्या.??
दोनों hi मेरे लुंड पे झुक गईं और फिर प्रिय मेरे लुंड के सुपडे को चाटने लगी और जहान्वी नीचे से मेरे लुंड को चाटने लगी. दोनों मूड में आने अलगी तो मैंने श्रुति को देखा. तो वो भी रानी कमीनी के जैसे hi नदीदी बन कर दोनों को मेरे लुंड chaat'te हुए देख कर अपने होंठों पर जुबां फेरने लगी.
श्रुति ठंडी हो क्र फिर से गरम होने लगी थी. मुझे हंसी आने लगी.
विजय:- श्रुति क्या देख रही हो. अभी तो ठंडी है हो
श्रुति:- इतनी जल्दी नहीं मेरी आग बुझने वाली. सालों से जल रही है कुछ दिन तो लगेंगे hi.
विजय:- अच्छा चलो तब्ब तब तुम मुझे किश तो करती राहु.
श्रुति मेरी बायत सुन क्र मेरे पास ै और झुक क्र मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. श्रुति मेरे होंठों पर लगे अपनी छूट के पानी को चाटने लगी.
प्रिय मज़े से मेरे लुंड पर अपनी जीब फेरने में लगी हुई थी और जहान्वी मेरे लुंड को नीचे से ले क्र ऊपर तक चाट रही थी. बड़े लुंड का वो दोनों hi आज पहले बार मज़ा ले रही थें. और दोनों hi बड़े आराम से मेरे लुंड के मज़े लेने में लगी यही थीं. दोनों को कोई जल्दी नहीं थी. मेरा लुंड भी दोनों के प्यार को देख कर झूमने लगा.
श्रुति को किश करने में मज़ा आने लगा. प्रिय श्रुति जहान्वी तीनो hi किश करने में माहिर हीं हो चुकी थीं. तीनो hi लेस्बियन भी बन चुकी थीं.
पहले भी सबब मिलकर hi हम किया करते थे. श्रुति किश बड़े अच्छे से कर रही थी. श्रुति मेरे होंठों को कभी चूमती और कभी मेरी आँखों में देख कर मेरे होंठों को चाटने लगती..
शरती:- विज्जु अपना मोहन खोलो.
मैं भी समझ गया श्रुति अब्ब मेरे मोहन में अपनी जुबां डालने वाली है. मैंने अपना मोहन खोला तो श्रुति ने अपनी जीब मेरे मोहन के अंदर घुसा दी. मैं श्रुति की जॉब को छोस्ने लगा तो श्रुति ने अपनी जीब मेरे मोहन से निकल ली.
श्रुति- विज्जु अभी चूसो नहीं. मैं कुछ और करने वाली हूँ.
मैंने श्रुति की बात मान ली.
श्रुति फिरसे मेरे मोहन में अपनी जीब दाल कर मेरे मोहन के अंदर उसे घूमने लगी.
मुझे अजीब सा मज़ा आने लगा. थोड़ी सी गुदगुदी भी हुई. ये मैंने पहले कभी नहीं किया था. और न hi रानी या पूजा दीदी ने कभी ऐसा किया था. ये मेरे लिए नया था. कुछ देर श्रुति मेरे मोहन में अपनी जीब घूमती रही. शायद वो अपनी जीब से मेरे मोहन को अंदर से चेक कर रही थी.
फिर श्रुति ने मेरे मोहन से अपनी जीब निकल ली.
श्रुति;- विज्जु कैसा लगा.. मज़ा आया ना.
विजय:- हाँ श्रुति मज़ा तो आया लेकिन ये सबब तुमने कहाँ से सीखा.
श्रुति :- इसमें सीखने वाली कौनसी बात है. ये तो खुद hi मान में आए है और बास भी करने लगती हूँ. हम तीनो hi हर तरह से एक दूसरे के मज़े ले लिया करती हाँ..
प्रिय ने अब्ब मेरे लुंड को अपने मोहन में ले लिया. और मेरा लुंड 3" तक्क प्रिय के मोहन में जा चूका था. पूजा दीदी की तरह से प्रिय को भी कुछ कुछ परेशानी हुई. पहली बार था ना. थोड़ा टाइम लगेगा आदि होने में.
प्रिय मेरे लुंड को मोहन में लेकर चूस रही थी और कभी अपनी जीब से मेरे लुंड के सुराख़ को चाटने भी लगती थी. प्रिय के ऐसा करने से मेरे अंदर करंट सा दौड़ने लगता था.
मैं श्रुति को किश करने में लग गया और प्रिय जहान्वी मेरे लुंड को चूसने चाटने लगी. ऐसे hi 10 मिंट तक्क हम चरों hi धीरे धीरे सबब करते रहे. कभी प्रिय मेरे लुंड को अपने मोहन में लेती तो कभी जहान्वी.. दोनों hi मज़े से मेरे लुंड के मज़े लिए जा रही थीं.
लेकिन अब्ब मेरा लुंड बोहत सख्त हो गया था और मुझे बड़ी बेचैनी शुरू हो गई थी. खाली चूसने में मैं भरने वाला कहाँ था... पारर कोई आगे hi नहीं बढ़ रही थी. काफी देर से लेते लेते hi सबब हो रहा था...
प्रिय जहान्वी भी अब्ब लुंड को चूम चाट क्र अपना दिल भर चुकी थीं वो भी नेक्स्ट स्टेप के लिए रेडी होने लगीं.
प्रिय- जहान्वी क्या तुम्हे भी बेचैनी शुरू हो गई है या सिर्फ मेरा hi ऐसा हाल है.
जहान्वी:- हाँ प्रिय विज्जु का लुंड चाटने चूंसे से hi मेरी तो छूट पानी छोड़ने लगी है.
प्रिय:- तो फिर अब आगे क्या करें.
जहानीव:- मैं रो सोच रही हूँ. विज्जु को किश करते हुए अपनी छूट को विज्जु के लुंड पर रगड़ों.
प्रिय:- मैं तो मेरा भी अब्ब कुछ ऐसा hi हो रहा है.
मैं दोनों की बात सुन रहा था. मैं मेरा भी मचल रहा था. अब्ब मेरा मूड तो था. क पूजा दीदी के जैसे किसी को उल्टा करूँ और उसकी छूट और गांड के छेड़ पर अपना लुंड रगड़ों. लेकिन प्रिय ने कह दिया था क आज मैं कुछ न करूँ. वो खुद hi करेंगी....
दोनों ने hi आपस में कुछ डीडे किया. श्रुति को मेरे ऊपर से हटा दिया और जहान्वी मेरे लुंड पर बैठ गई. प्रिय उठी और अपनी छूट को मेरे मोहन पर रख कर बैठ गई.
दोनों ने hi खुद के चेहरे मिलाये और किश करने lageen.shuruti ने दोनों के hi बूब्स पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगी. प्रिय और जहान्वी आपस में किश करते hi मेरे मोहन और लुंड पर घिसाई शुरू करने लगी. मैंने प्रिय के चूतड़ों को पकड़ा और छोड़ा सा उठा कर प्रिय की छूट पर चमक रहे पानी को चाटने लगा.
प्रिय ने एक बार किश तोर कर मुझे देखा और फिरसे जहान्वी को किश करने लगी.
प्रिय की छूट भी श्रुति की तरह से शवेद थी. प्रिय अब्ब जवान हो गई थी. और एक नमकीन और रसीली छूट की मालिकान बन गई थी. तीनो hi हर किसम की
ट्रैंनिंग में कामयाब थीं. सबब स्टेप्स बड़े अच्छे से ले रही थी....
प्रिय का जिस्म जहान्वी को किश करते हुए बड़ा खूबसूरत दिख रहा था. प्रिय के चुत्तड़ बहार को निकले हुए थे. और रूम की रौशनी में बोहत hi ज़यादा चमक रहे थे..... प्रिय भी माँ की hi तरह से बेमिसाल हुसैन की मालिक थी. माँ के जैसी hi प्रिय की स्किन भी बोहत चमकदार थी. प्रिय के बदन की चमक ने मेरे लुंड को और भी टाइट कर दिया था. जो जहान्वी की छूट के नीचे दबा हुआ रगड़ खा रहा था.
जहान्वी की छूट का पानी मेरे लुंड को भिगो रहा था, जिससे मेरे लुंड पर जहान्वी की छूट की रगड़ और भी अच्छे से हो रही थी. जहान्वी तो मेरे लुंड को चाट चाट कर hi बोहत गरम हो गई थी. अब्ब वो भी श्रुति की तरह से झड़ने वाली थी. प्रिय की किश की वजा से जहान्वी की स्पीड बढ़ नहीं पा रही थी. लेकिन जितना उससे हो रहा था वो अपनी छूट को घिसने में लगी हुई थी.
अभी तीनो का टाइम था तो मैं चुप hi था. वर्ण मैं भी कुछ करता..
श्रुति दोनों के hi बूब्स और निप्पल को कस कस के दबाने और मरोड़ने में लगी हुई थी. 3 मिंट hi हुए थे. क प्रिय और जहान्वी ने किश तोड़ दिए. और सिसकियाँ लेने लगीं. अब्ब प्रिय अपनी छूट को मुझसे चटवा रही थी और श्रुति प्रिय के बूब्स को दबा रही थी. जहान्वी प्रिय से फ्री हुई तो उसने मेरे पेट पर हाथ रख दिए.
जहान्वी मेरे पुरे लुंड पर अपनी छूट को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी. जहान्वी का एंडिंग पॉइंट आ गया था. प्रिय भी झड़ने वाली थी. लेकिन जहान्वी पहले hi झटके खाने लगी. और फिर जहान्वी एक आखरी झांकता लेती यही झाड़ गई.
प्रिय ने जहान्वी को साइड किया कर फिर मेरे मोहन पार्स अपनी छूट को हटा कर पूरी तरह से मेरे ऊपर लेते गई.
प्रिय ने मुझे किश नहीं की. बास मेरे शोल्डर को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से मेरे लुंड पर अपनी छूट की रगड़ने लगी. प्रिय ने अपनी ऑंखें बंद कर ली थीं. प्रिय अपनी बंद किये हुए अपनी चूर का पानी जल्दी से निकाल लेना चाहती thi.priya भी झड़ने वाली थी. आज सबब का hi पानी जल्दी निकल रहा था.
प्रिय की चिकनी छूट मेरे लुंड पर ज़ोर से रगड़ खा रही थी. प्रिय की साँसें मेरे चेहरे से टकराने लगी. प्रिय तेज़ साँस लेते हुए सिसकियाँ लेने लगी.
प्रिय:- siiiiiiiiiiiiiii. hmmmmmmmmmmmm.ooooooooooo. ufffffffffffffffffffff..
प्रिय सिसकियाँ लेते हुए मेरे गले लग गई और ऐसे hi अपनी छूट को रगड़ने लगी.
प्रिय की स्पीड तेज़ हुई. प्रिय का जिस्म अकड़ने लगा और फिर प्रिय अपनी छूट का पानी मेरे लुंड पर गिरते हुए खुद भी मेरे सीने पर गिर गई..
तीनो hi पानी छोड़ गई थें और मेरा पानी निकलना बाकी था.
कुछ देर में प्रिय रिलैक्स हुई और फिर मेरी आंखें देखने लगी. फिर प्रिय ने मुझे किइस करना शुरू कर दिया. प्रिय मेरी तितली मुझे अपना प्यार देने लगी.
कुछ देर प्रिय ने मुझे किश किया और फिर मेरे लुंड का ख्याल करते हुए मुझे छोड़ दिया..
प्रिय:- विज्जु ज़यादा परेशां तो नहीं किया ना हमने...
विजय:- मेरी तो खैर है, असली परेहनी तो मेरे लुंड को हु थी.
जहान्वी:- विज्जु अब्ब्ब तुम लेलो मज़ा, जो तुम्हारा दिल कर रहा है वो करलो.
आज तो सबब ऐसे hi हो रहा है. जब्ब सबब पूरा पूरा करेंगे. तब्ब hi सबब सही से होगा...
प्रिय:- चल शूरति नीचे लेट जा. तू भी बोहत गरम हो गई है. चल बजा ले अपनी छूट की आग को.
षुरूति ख़ुशी ख़ुशी लेट गई. और मैं भी उठ कर शूरति के ऊपर hi चढ़ गया. मैं तो था क श्रुति के बूब्स को चूसो लेकिन अभी टाइम कम् था, अपने लुंड का पानी निकल कर तीनो से hi कुछ बातें करूँगा, फिर थकन भी तो मिटानी है. 3 दिन से ऐसे hi फिर रहा था..
मैं श्रुति के पैरों की तरफ आया तो श्रुति ने खुद hi अपने पेअर खोल दिए.. जैसे लुंड लेने वाली हो..
विजय:- श्रुति क्या अंदर लेने का मैं हो रहा यही.
श्रुति:- विजजू अंदर लेने का मैं तो कब्ब से है. लेकिन तुम अपना और मेरा पानी निकाल दो.. छूट के अंदर तो कल hi जायेगा.
विजय:- श्रुति तुम उलटी लेट जाओ.
श्रुति मेरी बात सुनते hi उलटी लेट गई. और मैं श्रुति के ऊपर आ गया. और अपने लुंड को श्रुति की छूट और गांड में घिसने लगा. इस तरह में मुझे मज़ा आता था. मैं पूरा hi श्रुति के ऊपर लेट गया और अपनी गांड को उठा कर श्रुति की छूट और गांड को अपने लुंड से घिसने लगा....
मैं ऐसे तब्ब तक्क करता रहा. जब्ब तब्ब मेरा लुंड एन्ड तक नहीं पोहंच गया. श्रुति इस बीच फिरसे झड़ने वाली हो गई thi.aur अपनी गांड को उठा उठा के अपनी छूट रगड़वा रही थी.
श्रुति:- विज्जु ये तुमने बड़ा सही तरीका ढूंढा है. ऐसे लग रहा है जैसे तुम मुझे छोड़ रहे हो.... siiiiiiiiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह विजजूउउउ और तेज़ ragdo..mai फिरसे झड़ने वाली हूँ..
जहान्वी और प्रिय हम दोनों को hi देख रही थी.
दोनों फिर से गरम होने लगी थीं. श्रुति कुछ hi देर में झटके लेते हुए झड़ने लगी. तो प्रिय खुद hi लेट गई...
प्रिय:- विज्जु अब तुम मेरी छूट पर अपने लुंड को रगड़ो.....
मैं भी अब्ब करीब था टी प्रिय के ऊपर छड्ड कर प्रिय के छूट पर अपने लुंड को रगड़ने लगा. मैं बोहत तेज़ी से कर रहा था. मेरा सारा लुंड प्रिय की छूट के लिप्स के अंदर से हो क्र गुज़र रहा था. मेरी स्पीड बढ़ी तो प्रिय थोड़ी सी हिली.
तब्ब मेरा लुंड प्रिय की छूट के छेड़ पर था. प्रिय के हिलने से मेरा लुंड सुपडे समेत प्रिय की छूट में घुस गया..
priya:-aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiii..
vijjjjuuuu..andar क्यों दाल दिया...
मैंने नीचे झुक के देखा तो मेरा लुंड का सुपड प्रिय की छूट में ग़ायब हो चूका था.... और प्रिय की टाइट छूट में फँस चूका था.....
जहान्वी:- प्रिय अब्ब थोड़ा सा गया है तो पूरा hi ले लो ना. विज्जु तुम भी दाल दो अंदर.
प्रिय:- नहीं विज्जउ अभी नहीं. कॉल मैं आराम से लुंगी.. अभी लिया तो फिर मज़ा नहीं आएगा.. और जहान्वी तुम, विज्जु अभी थका हुआ है... ऐसे सही से मज़ा नहीं आएगा.
श्रुति:- विज्जु सील तक्क तो अंदर बहार कर सकते हो. अब्ब प्रिय की छूट थोड़ी खुल गई है तो थोड़ा सा और भी दाल दो.
विजय:- बोलो प्रिय क्या कहती हो. थोड़ा सा और डालो या बहार निकल लूँ..
प्रिय:- विज्जु मेरा मैं मैट बदलो वर्ण मैं अभी क अभी सारा hi डालने को बोल दूंगी. और ये दोनों फिर मोहन देखती रहेंगी.. कॉल हम तीनो hi पूरा पूरा लेंगी.
इसलिए तुम अपने लुंड को बहार निकाल लू..
मैंने भी प्रिय की छूट में घुस चूका लुंड बहार निकला. और फिरसे घिसाई शुरू करदी...
अगले 5 मिंट में प्रिय झाड़ गई. और मैं भी अब्ब आखरी स्टेज पर था.
जहान्वी:- विज्जु मैं मोहन में दाल कर निकल देती हूँ..
श्रुति:- नहीं तुम दोनों पहले hi विज्जु का लुंड मोहन में ले चुकी हो. अब्ब मेरी बारी है..
मैं भी श्रुति की बात सुनके साइड में लेट गया और श्रुति फिर मेरे लुंड के मज़े लेने लगी.. कुछ hi देर में मेरा लुंड अपना पानी छोड़ने लगा. जो कुछ श्रुति के होंठों पर लगा और कुछ श्रुति के बूब्स पर गिरने लगा. मेरे लुंड का पानी तीनो hi अपनी उँगलियों से लपेट कर चाटने लगीं..
कुछ देर बाद हम सबब hi बाथरूम से फ्रेश होकर बीएड पर लेते थे...
प्रिय मेरे ऊपर आ गई और श्रुति और जहान्वी दोनों मेरी साइड में लेट आई..
विजय:- प्रिय तुझे आज दुःख लगा था ना.. जब्ब पापा मिले थे..
प्रिय:- हाँ विज्जु तब्ब बोहत दिल दुख था मेरा.. पारर फिर सबब ठीक हो गया..
विजय:- प्रिय तुझे ग़म नहीं करना चाहिए. तुम जिसका भी खून हो, वो था तो एक हवस का मारा hi ना. उसे तो पता भी नहीं होगा क उसके लुंड की वजा से तुम इस दुन्या में आ चुकी हो. और फिर ऐसे बाप का तुम करोगी भी क्या...
प्रिय:- विज्जु मैं भी सबब समझती हूँ. बास कुछ देर दिल दुख था. लेकिन फिर पापा ने मुझे भी अपनी बेटी बना लिया तो अब्ब मान ठीक हूँ..
जहान्वी:- प्रिय मुझे और जहान्वी को देखो, हम भी तो अपने असल से दूर हाँ. और अब्ब हम वापिस भी तो नै जा सकती.. जैसी हमारी ज़िन्दगी हो गई है. जैसे हमारी समाज में इज़्ज़त रह गई है. दुःख तो हमें भी बोहत है लेकिन हम कर भी क्या सकती हाँ..
श्रुति:- हाँ प्रिय हम विज्जउ से कह के घर भी जा सकती हाँ. लेकिन फिर कोठे पर रह के पूरा महाराष्ट hi तो हमें जानने लगा है. हम अपने घर में भी एक अछि ज़िन्दगी नहीं जी सकती.. हमारे लिए भी तो हमारे माँ बाप छूट चुके हाँ.. तुम क्यों ग़म करती हो.. रेखा बाई के कोठे से मिलें और भी तो कई हम जैसी हाँ, जिसके बाप का पता नै होता... विज्जू तो माँ और पापा ले प्यार की निशानी था.. और फिर पापा भी तो कुछ नहीं जानते थे... ये सबब तो भगवन ने किया है..... प्रिय और देखा नहीं तुमने माँ कैसे सबब hi दुःख दर्द को भूल गई है... तुम बास माँ और पापा के मिलान की ख़ुशी मनाओ. वर्ण जितना ज़ालम माँ के साथ हुआ है, माँ तो एक ज़िंदा लाश hi बानी रहती... और फिर हम सबब भी तो एक साथ हमेशा रहेंगे.. खुश रहेंगे. दुखी रह कर हमें मिलेगा भी क्या.... पहले hi तो साओन से ऐसे दही रहकर हमने गुज़र दिए अब्ब हम सिर्फ अपनी ज़िन्दगी की खुशियों को जियेंगी...... तुम अपने उस हवस परास्त पिता को कभी भी याद मैट करना..
विजय:- और जो खुशियां हमें मिल रही हाँ. अहम उन्हें सेलिब्रेट करेंगे.. जो बीत चूका उसे याद रख के क्या मिलेगा...
प्रिय:- तुम तीनो ठीक कह रहे हो. मुझे कोई ग़म नहीं है. बास वक़्ती तौर अपर हुआ था. और वैसे भी मैं उस हवस परास्त की बेटी हो भी कैसे सकती हूँ..
जो माँ के पास अपने लुलंद का पानी निकलने आया था.. ज़रूर उसे भी दन्न ने hi भेजा होगा.
हम तीनो ने hi प्रिय को चूमना शुरू कर दिया. प्रिय अब्ब ठीक हो गई थी. पैदा करना वाला hi तो पिता नहीं होता. पलने और सँभालने वाला भी तो पिता होता है. प्रिय हम सबब की जान थी, और हम सबब प्रिय की जान थे. माँ, पापा के लिए ख़ास थीं, पापा का प्यार थीं और फिर ये कैसे हो सकता था क पापा भी हम सबब को खुद के दिल में न परोयें... पापा तो पहले से hi एक ग्रेट इंसान थे. उनके जैसा होना आसान नहीं था..
कुछ देर ऐसे hi हम बातें करते रहे और फिर मुझे नींद आने लगी.. तीनो ने भी मुझे सोने दिया... प्रिय मेरे ऊपर hi सो गई..
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Location:Mumbai
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जिस रात रेखा बाई का कोठा उजड़ा था. पूरा मुंबई hi ये सब जान गया था. मीडिया की वजा से ये खबर पुरे इंडिया में फेल गई थी..
मुंबई की जेल में मौजूद बग्गा भी ये खबर सुन चूका था... वो पहले बोहत खुश हुआ. क रेखा बाई अगर मुझसे जीत गई है तो क्या हुआ. किसी ने उसे hi उसके कोठे से उठा लिया. बग्गा को रेखा बाई के अपहरण से बड़ी ख़ुशी हुई थी.
लेकिन फिर जैसे hi उसे पता चला क रेखा बाई के साथ साथ पूरा कोठा hi उजाड़ गया है... तो बग्गा का घुसा सातवें आसमान तक जा पोहंचा.
बग्गा श्वेता के निकल जाने से ग़ुस्से में आ गया था... पिछले कई सालों से बग्गा जेल की ज़िन्दगी काट रहा था.. वो रेखा बाई से बलदा तो लेना hi चाहता था. लेकिन बग्गा के लिए श्वेता एक चैलेंज बन चुकी थी. बग्गा ने आज तक जिस औरत या लड़की को अपने नीचे लाने का सोचा था. बग्गा को कभी भी कोई परेशानी नहीं हुई थी.. लेकिन श्वेता ने बग्गा को थप्पड़ मार कर बग्गा के दिल में श्वेता के लिए नए एहसास जगा दिए थे.. बग्गा ने कसम खा ली थी क कुछ भी हो जाए. वो श्वेता को हासिल करके hi रहेगा...
अगर देखा जाए तो बग्गा की बर्बादी hi श्वेता की वजा से हुई थी. अगर श्वेता बग्गा के दिल में न बस्ती.. या बग्गा ज़िद्दी न होता तो बग्गा बर्बाद न होता..
बग्गा कुछ भी सेह सकता था लेकिन श्वेता को अपने हाथ से निकलता हुआ नहीं देख सकता था.. बग्गा के लिए ये सबब सहन कर मुमकिन नहीं रहा था...
बग्गा पहले भी किसी से कम् नहीं था. अब्ब तो उसकी सज़ा भी कम् रह गई थी. लेकिन श्वेता क ग़ायब हो जाने की वजा से बग्गा के लिए जेल की ज़िन्दगी नर्ग बनने लगी... बग्गा के लिए जेल में रहा मुष्किल हुआ तो उसने अपने दोस्तों से बात की..
बग्गा ने जेल में रह क्र खुद को और भी स्टोरंग बना लिया था.. बग्गा को जेल में रह कर कई किसम के खतरनाक क्रिमिनल्स मिल चुके थे. बग्गा की उन सबहि से खूब जमने लगी थी....
बग्गा के 3 ख़ास दोस्त थे..
1..भीम singh..age:40
भीम सिंह एक खतरनाक डाकू था, जो किसी दौर में पहले कसाई था, शुरू से hi गलत लोगों में उठने बैठने की वजा से भीम सिंह हर बुरे धंदे में इन्वॉल्व होना शुरू हो गया. लड़कों को उठा आकर उनका रपे करना, रह चलती किसी लड़की को उठा कर ले जाना. और फिर उसका रपे करके कहीं पहनक देना भीम सिंह की आदत बन गई थी. भीम सिंह किसी बैल की इस ताक़त का मिल्क था. बड़ी बड़ी मूंछें थी उसकी.. भीम सिंह का hi एक दोस्त जो जेल में hi उसके साथ था.. डरा..
2..dara...age:38
डरा का अत पता खुद डरा को भी नहीं था. भीम सिंह के hi जैसा हत्ता कट्टा था, साड़ी घटिया आदतें भीम सिंह जैसी थीं. और मिल कर रहते थे..
भीम सिंह और डरा सिंह ने मिल कर एक गैंग था जो लोगों के घरों में डाका डाला करते थे. 4 साल तक दोनों ने hi खूब पैसा इकठा किया था. लेकिन वो लुटे हुए पैसे को अपने इस्तेमाल में नहीं ला सके थे. एक डाके में भीम संघ डरा सिंह पुलिस के हाथे चढ़ गए और भीम सिंह और डरा सिंह क शिव बाकी सबब hi मारे गए. दोनों को जेल हो गई, कहाँ उन्हे उम्र भर रहना था.
3..जसवंत एक sikh..age:42
दमाग नाम को नै था इसमें लकिन लड़ाई में ये सबब से hi आगे था, डर भी नहीं था जसवंत को किसी का.. ऐसे hi अपन hi गाओं में एक लड़ाई के दौरान पागल सा हुआ और कई लोगों को मार दिया.... इसे भी उम्र कैद हो गई...
बग्गा ने तीनो दोस्तों से hi मीटिंग की जेल से भागने की प्लानिंग करने लगे.
तीनो बड़े hi हैरान हुए..
भीम सिंह:- बग्गा तुम्हारी सजा की तो कुछ hi महीने रहते हाँ. तुम क्यों यहाँ से भागना चाहते हो...
बग्गा:- य्र्र सबब hi तो जानते हो. श्वेता मेरी ज़िद बन्न गई थी. अब्ब सुनने में आया है. वो कोठे से फरार है. मैं उसे ढूंढ कर hi रहूँगा... मुझे तब्ब तक चैन नहीं मिलेगा जब्ब तब्ब वो मेरे लुंड के नीचे नहीं आ जाती. बड़ा तड़पाया है उसने.
बग्गा की बात सुनके तीनो hi हस्सन लगा...
हहहहहहहहहहहहह
जसवंत:- वाह्ह बग्गा तुम एक औरत के लिए जेल तोड़ कर भागना चाहते हो.. कुछ महीने इंतज़ार भी नहीं कर सकते.
डरा- बग्गा तुम्हारे लिए कौन सी औरतों और लड़कियों की कमी हो सकती है..
बग्गा:- श्वेता मेरे लिए मेरी ज़िद्द है, मैं उसे नहीं छोड़ सकता.. चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े..
भीम सिंह:- बग्गा क्या वो तुम्हारे लिए hi रहेगी, या हमें भी कुछ हिस्सा मिलेगा..
बग्गा:- सॉरी यारो वो सिर्फ मेरे लिए है, बाकी जिस के लिए भी तुम तीनो कहोगे मैंने उसे तुम्हारे क़दमों में ढेर करदूंगा.
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विजय के लिए आने वाले वक़्त में कोई एक टेंशन नहीं थी. विजय अपने सामने मौजूद दुश्मनो पर फोकस किये हुए था. बग्गा को विजय समेत सबब hi भूले हुए थे. और भुला हुआ दुश्मन कुछ ज़यादा hi हानि पोहंचा देता है कभी कभी.
दन्न अपनी स्टेट पावर और मेंटली पॉवरफुल होने की वाज से स्ट्रांग था... लेकिन बग्गा और उसके दोस्त तो खुद में hi एक तूफ़ान थे... सब के सबब के दमाग से पैदल बास ज़िद्द के लिए अपनी मैं मर्ज़ी करने के लिए काट मरने वाले...
बग्गा किसी भी हिसाब से दन्न से ज़िद्द और ईगो में कम् नहीं था. श्वेता के लिए बग्गा ने अपना साम्राज्य hi ख़तम करवा दिया. वर्ण बग्गा इतना भी गया गुज़रा नहीं था.....
विजय का फोकस अपने घर वळून को खुशियां देने में था. और दन्न के साथ साथ अपने दूसरे दुश्मनो से बदला लेने पर वो अपना फोकस बनाये हुआ था...
बग्गा के जेल में जाने से सबब ने hi बग्गा को नज़र अंदाज़ करके अपने लिए ख़तरात को जनम दे दिया था..
अब्ब देखना ये था क दन्न या बग्गा श्वेता को केस ढूंढ़ते हाँ.. तब्ब hi असली जुंग शुरू होगी. और विजय के लिए ये जुंग कोई आसान कुंग नहीं थी.
औरत के लिए तो मुल्कों के मुल्क hi उजाड़ दिए गए थे. ये तो फिर भी कुछ hi लोग हाँ. श्वेता के लिए दन्न दो दिन और 2 रातें मुसलसल जाग सकता है. बग्गा अपना बनाया गया सेटअप ख़तम कर सकता है. और सालों के लिए जेल में जा सकता है..
श्वेता के लिए ये जुंग आसान तो नहीं थी.. और न hi विजय के लिए.
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आज की रात पैलेस में खुशियां की रात थी. माँ और पापा एक रूम में बंद हो गए थे. और जो रूम मेरे हिस्से में आया था. उस रूम में एक बड़ा बीएड रखा हुआ था. और उस रूम में आज मेरे साथ सिर्फ मेरी तितलियाँ hi थीं. अब्ब कुछ दिनों तक्क मेरे साथ मेरी तितलियों के सीवे किसी और की गुंजाइश नहीं निकलने वाली थी. और सबब ने भी ok बोल दिया था. दिल तो सबब का hi था. लेकिन सबब एक साथ सोने से रहें. पहले पूजा दीदी के sath,kabhi रानी तो कभी सीखा और रूपा सो जाया करती थीं.
लेकिन अब्ब मेरी तितलियों के आ जाने से फ़िलहाल के लिए कोई चेंजिंग ऑप्शन नहीं रहा था. तीनो hi कुछ दिनों तक्क रेगुलर मेरे साथ सोने वाली थीं. अगर आज पापा न मिले होते तो माँ भी साथ में होती.
रूम के अंदर आते hi दूर को अंदर से लॉक क्र दिए गया. मैं बोहत थका हुआ था, लेकिन तीनो का ख्याल रखते हुए खुद पर काबू रखे हुए था.
तीनो को गुज़रे सालों का प्यार वसूलना था मुझसे.. और जैसा प्यार तीनो वसूलने वाली थीं. वो भी मैं जानता था. आज मई बोहत hi ज़यादा एक्ससिटेड था, पहली बार हम चरों hi खुल के मस्ती करने वाले थे.
अब्ब तीनो hi जवान हो गई थें. और छूट खुलवाने लायक भी हो गई थीं. मैं और मेरा लुंड भी कबसे किसी छूट में घुसने के लिए बेकरार थे.
मेरा लुंड भी मेरे मैं से कंटेक्टेड था. उसने भी कह दिया क माँ और बहनो को निकाल कर ले आओ. फिर हम दोनों hi मिल कर सबब की hi छूट में घुस जाएंगे..
एक मिशन माँ और बहनो वाला पूरा हुआ. तो दूसरा भी शुरू होने जा रहा था.
इस बार का मिशन मेरे लिए मेरे लुंड के लिए मेरे रीडर्स के मनोरंझण के लिए था. सील पैक छूट और गांड के साथ साथ, पहले से खुली हुई छूट एंड गांड में घुसने का मिशन था.. साथ साथ दिल्ली के गुंडों की भी माँ चुदती रहेगी.. लोगों का भला भी होता रहेगा. माँ और बहनो के साथ टाइम भी स्पेंड होता रहेगा. और दन्न से भी मेंटली जुंग जारी रहेगी....
दन्न से अभी डायरेक्ट जुंग का समय नै आया था.. टाइम अभी था सबब के साथ अच्छे से मिल कर रहने का.. अपने पैलेस में रह रहे लोगों को खुशियां बांटने का. और दिल्ली शहर में भी रह रहे अनगिनत मासूमों की ज़िन्दगियों को बदलने का समय आ गया था.
बदला तो मैं दन्न और दूसरे सभी से लूंगा... और उन सभी की माँ की छूट का भोसड़ा बना दूंगा. लेकिन अभी सभी के दिलों की तमन्नाएँ पूरी करने सा समय था. ये भी एक बोहत बड़ा मिशन था. किसी के दिल की आरज़ू पूरी किये बिना मैं कैसे यहाँ से जा सकता था.
दन्न से जुंग करने के लिए na-jaane मुझे कितने समय के लिए दिल्ली से दूर जाना पड़े और फिर कैसे कैसे हालातों का मुझे सामना करना पड़े. इस लिए पहले सभी को कुछ खुशियां hi बाँट दूँ.
हम रूम में ए और तीनो में से किसी ने दूर को लॉक कर दिया. मेरी नज़र बीएड की तरफ थी. इसलिए मुझे नहीं पता लॉक किसने लगाया था.
मैंने मुद के तीनो को देखा तो तीनो मुझे hi आँखों में आंसू लिए हुए निहार रही थीं.
लो जी, फिर से इमोशंस जाग पड़े..... होना तो चाहिए था कुछ ऐसा hi आखिर ये हम चरों के स्पेशल इमोशंस थे. क्या क्या नै सपने सजाये गए थे गुज़रे हुए वक़्त में, क्या क्या करने का मैं में सोच लिया था हम चरों ने hi. लेकिन फिर मुझे एक लम्बे समय के लिए तीनो से दूर हो जाना पड़ा. तीनो hi मुझसे दूर रहने की आदि नहीं थें. बड़ी हिम्मत जूता क्र तीनो ने ये सालों का सफर तय किया था...
मैंने अपनी बाहें तीनो के लिए खोल दीं और तीनो hi भाग क्र मुझसे लिपित गईं. रोइ तो नहीं थी बास सालों के इंतज़ार ने आँखों से बहार आने का रास्ता चुन लिया था. तीनो hi मुझे चूमने लगी थें. अपने दिल को ठंडक पोहंचा रही थें. कुछ देर में सबब हलकी हो गईं.
प्रिय:- विज्जु अब्ब दिल को पूरा चैन मिला है. वर्ण पहले तुझसे मिलके दिल की तालाब पूरी नहीं हुई थी.
जहान्वी:- प्रिय, हमारा विज्जु हमें वापिस मिल गया है, हम फिरसे वहीँ ज़िन्दगी जियेंगी. जो पहले हम जिया करती थीं.
श्रुति- हाँ बोहत इंतज़ार किया है विज्जु तेरा हमने, तुझ बिन नींद hi हमारी कही खो गई थी, जब भी अपनी ऑंखें बंद करती थीं, तेरा hi चेहरा सामने आ जाता था...
विजय:- अब्ब तो मैं सच में hi सब की आँखों के सामने हूँ ना. तो दिल की तालाब भी पूरी करलो, और आँखों को भी ठंडा करलो, जो सालों से मुझे देखना की तमन्ना में खुली रह गई थीं....
हाल मेरा भी तो कुछ ऐसा hi था.... लेकिन मुझे यहाँ तुम्हारी जैसी hi पूजा didi,rani,shikha,rupa,shetal और नताशा दीदी मिल गई थीं.. वर्ण मैं भी तुम सबब बिन यहाँ पागल सा होने लगता था. बड़ी मुश्किल से सबने hi मुझे अपना प्यार दे कर संभाला है... वर्ण तुम सबब की याद और तुम सबब की भयानक ज़िन्दगी मुझे हर दुम्म डराए रखती thi.kuch कर नहीं सकता था ना तुम सबब के लिए.. बड़ी मुश्किल से मैं अपने अंदर के डर पर काबू प् सका हूँ..... बास एक hi तमन्ना थी कैसे भी करके जल्दी से तुम सबब को वहां से निकल कर ले आऊं... बड़ी मुश्किल से ये वक़्त कटा है..
मैंने भी तुम सबब के जितना hi दर्द झेला है...
तीनो मेरी hi बात सुन रही थें.
सबब बातें करते हुए मुझे अपना गुज़रा हुआ समय और दर्द याद आने लगा. कैसा था मैं, कितने दर्द से गुज़रा था main.sabb इतना भी आसान नहीं था. ये जो कुछ भी हुआ था.. वो सबब इतना टफ था, क सोचते हुए भी दिल तड़पने लगता है..
तीनो की आंखे एक बार फिर से नम्म हुई लेकिन फिर तीनो ने hi खुद पर काबू पाया और मुझे बाज़ो से थामे हुए बीएड की जानिब बाद गईं..
तीनो hi बीएड को देख कर अपना मूड बदलने लगें... तीनो hi सालों पहले वाली मस्ती को याद करने लगी. तीनो ने मुझे बीएड पर धक्का दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई...
मैंने तीनो को देखा तो तीनो hi पल भर में बदल गई थीं. कैसी अंडरस्टैंडिंग थी तीनो की एक hi बार में तीनो ने अपना चोला hi बदल लिया था.. इस वक़्त तीनो hi पहले वाला सबब भूल कर मस्ती करने के मूड में आ आगे थें.
विजय:- ये सबब क्या है,
जानवी:- विज्जु क्या तुझे बताना पड़ेगा...
प्रिय:- जहान्वी इसे बताने की क्या ज़रूरत है. चल हम अपना गेम शुरू करते हाँ..
श्रुति प्रिय और जहान्वी की बात सुन कर अपने कपडे उतरने लगी..
अब कपडे उतरने में कौनसी झिझक... ये काम तो सबब hi मेरे सामने सालों पहले करती hi रही थीं. लेकिन अब्ब मैं और मेरा लुंड भी जवान हो चुके थे.
विजय:- श्रुति इतनी जल्दी क्या है. अभी आज hi तो आया हूँ.
शुरतुइ की देखा देखि प्रिय और जहान्वी भी अपने कपडे उतरने लगी.. जब तक प्रिय और जहान्वी नंगी होती. श्रुति मेरे ऊपर चढ़ दौड़ी. और मेरे होंठों पर टूट पड़ी. और main""arre अरे"" hi करता रह गया.
षुरूति मेरे होंठों को अपने होंठों में लिए नरमी से चूमने लगी. अभी श्रुति ने चूसना शुरू नहीं किया था. श्रुति बड़े प्यार से मेरे होंठों पर लगी नमी को चाट रही थी. जल्दी किसको थी. ये सबब करने की जल्दी तो थी, ये सबब जल्दी ख़तम करने के मूड में नहीं थी.
इतनी देर में जहान्वी और प्रिय भी नंगी हो चुकी थीं. तीनो के बदन पर ब्रा पेंटी तक भी नहीं थी. टोटली नंगी थीं. प्रिय ने श्रुति की छूट पर हाथ रख क्र श्रुति की छूट को थोड़ा ऊपर किया और मेरे ट्रॉउज़र की डोरी खोलने लगी.
जहान्वी ने श्रुति को किश करने से नै रोका वो श्रुति के फ्री होने का वेट करने लगी. और प्रिय को मेरे ट्रॉउज़र की डोरी खोलते हुए देखने लगी....
श्रुति खुद hi मेरे होंठों से अलग हुई..
श्रुति:- चलो विज्जु नंगे होने में हमारी मदद करो, वर्ण हम तुम्हारी ये शर्ट पहाड़ देंगी.
मैं कोई पागल था जो इस सबब में देर करता. एक तो मैं भी अपनी तितलियों के साथ ये सबब करने के लिए बेचैन था, दूसरा मुझे पूजा और रानी ने इस सबब का आदि भी तो बना दिया था...
और पिछले एक साल में मुझे बास एक बार पूजा दीदी और रानी साथ मस्ती की थी.. या फिर भाभी के साथ... अब्ब 2 बार लुंड से पानी निकाल क्र कैसे मुझे चैन मिल सकता था.. और वैसे भी तीन गरम तितलियाँ मेरे सामने नंगी थें और मैं वेट करूँ. मैं पागल तो नहीं था.
कुछ hi सेकण्ड्स लगे मैं भी तीनो के जैसा hi नंगा हो गया था. मेरा लुंड भी सब समझते हुए खड़ा हो चूका था. और फिर जैसे hi मेरी तितलिओं ने मेरे लुंड को देखा तो शॉकेड हो गईं..
प्रिय:- विज्जू मुझे लगा था तेरा लुंड कुछ बड़ा है, लेकिन ये तो बोहत बड़ा और मोटा भी है... विज्जु तूने तो सच में hi इक शेर पाल रखा है.
श्रुति:- प्रिय, तूने सच कहा, विज्जु ने तो एक शेर hi पाल रखा है. अब्ब तो ये हमारा hi है.. मैं तो इसे कच्चा hi खा जाऊँगी..
जहान्वी:- तो मैं कौनसा विज्जु के लुंड को माफ़ी देने वाली हूँ... बड़ा वेट करवाया है विज्जु तुमने... लेकिन तेरे लुंड को देख क्र तो तुझे सबब माफ़ किया जा सकता है....
विजय:- अच्छा तो फिर अब्ब क्या विचार हाँ तुम सबब के .....
तीनो:- विचार तो बोहत hi अच्छा हाँ हम सबब के... आज तो सालों की तड़प मिटाएंगी तुझसे....
प्रिय:- विज्जु तुम लेट जाओ. हम खुद hi सबब करलेंगी..
विजय:- क्या मतलब, अभी मेरा नंबर नहीं है क्या...
जहान्वी:- विज्जु तुम्हरा नंबर भी लगेगा. पहले हम अपने दिल की करलें, फिर जो तुम्हारा दिल करे कर लेना.. अभी हमने hi सबब अपनी मर्ज़ी से करने दो..
विजय:- ठीक है, तुम तीनो की hi मान लेता हूँ...
मैं लेट गया. मेरा लुंड छत की तरफ हो गया. प्रिय और जहान्वी मेरे लुंड के पास बैठी और फिर दोनों ने hi मेरे लुंड को पकड़ लिया. पहले उसे अच्छी तरह से दबा कर चेक करने लगी..
प्रिय:- देखा जहान्वी कितना हार्ड है. किसी लोहे के जैसा..
जहान्वी;- हाँ प्रिय, बोहत हार्ड है, एक बार तो हमारी चीखें hi निकाल देगा.
श्रुति:- मैडम लुंड छोटा भी हो तो पहली बार छूट में घुसते hi चीखें निकाल देता है.
प्रिय:- तू क्यों कड़ी है..
श्रुति:- तो क्या करूँ. तुम दोनों ने तो लुंड को पकड़ने लायक जगा hi नहीं छोड़ी.
जहान्वी:- तू अपनी छूट को विज्जु के मोहन पर रखदे. और मज़ा ले, मैं और प्रिय विज्जु का लुंड पहले अच्छे से चेक करलें. फिर कुछ और सोचेंगी.
शूरति:- ये तो बड़ी अच्छी बात बताई जहान्वी तुमने...
श्रुति देर किये बिना hi मेरे सर्र की गिर्द अपने पेअर रख कर अपनी छूट को मेरे मोहन पर रखके बैठ गई. शूरति का मोहन प्रिय और जहान्वी की तरफ था.
श्रुति ने अपने हाथ मेरी कमर की साइड में बीएड पर रखे और झुक क्र अपनी छूट को मेरे मोहनन पर सेट करने लगी...
मैंने भी अपने हाथों से श्रुति के चुत्तडों को पकड़ कर श्रुति की छूट को अपने मोहन के करीब किया और फिर अपनी जीब निकल क्र श्रुति की आज hi सफाई की गई चिकनी छूट को चाटने लगा....
तीनो ने पहले से hi मैं बना लिया था. इसलिए तीनो ने अपनी छूट और गांड को चमका लिया था. तीनो आज ग़ज़ब की सेक्सी लग रही थीं. तीनो ने अभी मुझे खुल के खुद को देखने नहीं दिया था. और मुझपर टूट पड़ी थीं...
मेरा मूड तो था पहले तीनो से hi खूब बातें करूँगा. मस्ती के लिए टाइम hi टाइम था. लेकिन वो तीनो hi कुछ और सोचे हुए थी..
मेरी तितलियाँ भी क्या करती.. कोठे पर रहते हुए, इतने सालो खुद पर काबू रखे हुए गुज़ार चुकी थीं. अब कैसे वो खुद को रोक पाती. रोज़ hi किसी न किसी की छूट में लुंड घुसा हुआ देखना, और फिर खुद पर कण्ट्रोल कर लेना बोहत बड़ी बात थी....
दलदल में फँसी हुई थीं. इस बात का डर भी था क कही उनके साथ कुछ गलत न हो जाए लेकिन फिर भी छूट की गर्मी परेशां किये रखती थी....
छूट के खुल जाने का डर भी था. तीनो को और छूट की गर्मी ख़तम न होने की टेंशन भी थी. कैसा अजीब सिस्टम था...
श्रुति अपनी छूट पर मेरी जीब की गर्मी से बेहाल होने लगी थी.. बोहत समय से रुकी हुई थी छूट की गर्मी. आज पहली रात थी, तो तीनो का hi जल्दी में पानी निकल जाना था.. तीनो की hi छूट का पानी तो कब्ब से निकलने के लिए बेकरार था. बास तीनो को hi छूट पर इशारा चाहिए था...
कुछ hi देर में श्रुति अपनी छूट को मेरे मोहन पर रगड़ने लगी. श्रुति की छूट ने पानी की बरसात शुरू करदी थी. श्रुति जल्दी hi झड़ने वाली हो गई थी..
मैंने भी श्रुति को जल्दी ठंडा करने का सोच लिया. मेरी जीब श्रुति की छूट से कुछ ऊपर हुई और श्रुति की उनतोच गांड के छेड़ के ऊपर जा कर लगी..
श्रुति को एक झटका लगा. और शूरति की सिसकियाँ निकालनी शुरू हो गयी
श्रुति:- ohhhhhhhhhhhhh..yessssss....vijjjjuuuuuuu...yessssssssssss... विज्जउ
विज्जु मेरी गांड को भी चाटो.... विज्जू मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है..
श्रुति की बात सुनकर प्रिय और जहान्वी जो मेरे लुंड को दबा दबा के चेक कर रही थीं.. दोनों hi श्रुति की बात सुनके हैरान रह गईं...
प्रिय:- श्रुति तेरी छूट इतनी जल्दी पानी निकलने वाली है..
श्रुति:- (अपनी छूट को मेरे मोहन अपर घिसते hue)kya बताओ प्रिय....... इतने समय बाद ये सबब करने में मज़ा भी बोहत ा रहा है. और फिर मेरी छूट ने सालों से पानी भी तो खुल के नहीं निकला बास विज्जु के चाटने से hi निकलने वाला हो गया...
शूरति हंप्टी हुई ये सबब बोल रही थी.. मैं शूरति की गांड के छेड़ पर अपनी जीब फेर रहा था. और श्रुति की हालत पतली होने लगी थी. श्रुति की गांड से बड़ी मस्त स्मेल आ रही थी. जो मेरे लुंड को और भी सख्त करने लगी थी.
जहान्वी:- प्रिय देखो विज्जु का लुंड और भी सख्त होने लगा.
प्रिय- हाँ ज़रूर विज्जु क श्रुति की छूट और गांड चाटने में मज़ा आ रहा होगा.
जहान्वी:- अब्ब क्या हम विज्जु के लुंड को दबती hi रहेंगी... इसे मोहन में नै लेना क्या..
प्रिय:- जल्दी क्या है जहान्वी पहले अच्छे से चेक तो करलूं.
जहान्वी:- और अपनी छूट में कब्ब लेगी इसे..
परिया:- आज नहीं जहान्वी, आज विज्जु थका हुआ है, खुल कर सबब मज़ा नहीं आने वाला, आज तो बास छूट का पानी निकाल कर सोते हाँ. अभी विज्जु से कुछ बातें भी करनी हाँ. ये सबब तो बाद में भी होता hi रहे. अगर छूट की आग का मसला न होता तो आज इतना सबब भी मैं नहीं करने वाली थी.
जहान्वी:- तू ठीक बोली प्रिय. आज जितना मिल रहा है उतना तो करेंगी hi..
मेरी जीब बड़ी महारत से श्रुति की छूट के अंदर तो कभी गांड के छेड़ पर रेगुलर hi चल रही थी. श्रुति की साँसे और सिसकियाँ तेज़ होने लगी..
षुरूति की छूट की आग ने श्रुति को कुछ ज़यादा hi जलाया हुआ था, श्रुति झटके पे झटके खाने लगी, और प्रिय और जहान्वी के हाथों में मौजूद लुंड पर गिरते हुए श्रुति झड़ने लगी...
प्रिय:- देख जहान्वी कितनी जल्दी हार मान गई श्रुति...
श्रुति मेरे लुंड पे hi हंप्टी हुई बोलने लगी
श्रुति:- बोहत बोले रही हो तुम दोनों. विज्जु से छूट चटवा के देखो . 2 hi मिंट में न झाड़ गई तो फिर बात करना.
जहान्वी:- तू पहले साँस ठीक करले फिर बोल लेना.
माने श्रुति को खुद पार्स हटा दिया.
विजय:- अब किसका मोड़ का मेरे मोहन पे छूट रखने का..
जहान्वी:- विज्जु तुम बास अपने होंटो पर लगे श्रुति के अमृत को hi chat'te रहो अभी हाम्रा मैं कुछ और है...
प्रिय:- चल जहान्वी विज्जु के लुंड को टास्ते कारण. बोहत दबा के देख लिया...
जहान्वी:- हाँ चल ठीक है..
विजय:- तुम दोनों में से एक अपनी छूट मुझसे चतवते हुए मेरे लुंड को अपने मोहन में ले सकती है. तुम दोनों का भी हो जाएगा और मेरा भी. क्या मैं तुम दोनों अपना लुंड चूसते हुए hi देखता रहूं..
श्रुति:- न न प्रिय, जहान्वी, अभी विज्जु से अपनी छूट न चटवाने वर्ण तुम दोनों भी जल्दी hi झाड़ जाओगी.
दोनों:- श्रुति तू सच कह रही है.
श्रुति:- चेक करके देख लो. पूछने की क्या ज़रूरत है. जब्ब छूट पानी छोड़ने लगेगी तू पता चल जाएगा.
मैंने श्रुति की बात सुन कर मुस्कुराने लगा..
विजय:- अब्ब जब्ब की छूट का पानी की आखरी स्टेज पे हो तो मैं क्या क्र सकता हूँ. मैं तो बास अपना काम hi करूँगा. पानी तो खुद बी खुद hi निकल जायगा..
प्रिय:- जहान्वी तू विज्जु से अपनी छूट चटवा के देख.
जहान्वी;- मैं क्यों चितवौ. तुम जाओ विज्जु में मोहन पे अपनी छूट रखो, मैं तो नहीं इतनी जल्दी झड़ने के मूड में. अभी तो मैं विज्जु के लुंड को अच्छे से चूसूंगी, बाकी का बाद में देखेंगी..
विजय:- ये क्या लगा रखा है. तुम तीनो ने, इस बात पे भी बहस होती है क्या.
प्रिय:- विज्जु आज तुम कुछ मैट बोलो, चल जाह्नवी न तू विज्जु के मोहन में बैठने वाली है और न मैं, पहले हम दोनों hi मिल के विज्जु के लुंड को chaat'ti चूसती हाँ.
मेरा लुंड कुछ ज़यादा hi पसंद आ गया था दोनों को और श्रुति की बात सुन के दोनों hi छूट चटवाने से डर गई थीं कहीं छूट जल्दी पानी छोड़ के मज़ा न ख़राब करदे..
छूट का पानी निकल जाने के बाद फिर नहीं आएगा क्या.??
दोनों hi मेरे लुंड पे झुक गईं और फिर प्रिय मेरे लुंड के सुपडे को चाटने लगी और जहान्वी नीचे से मेरे लुंड को चाटने लगी. दोनों मूड में आने अलगी तो मैंने श्रुति को देखा. तो वो भी रानी कमीनी के जैसे hi नदीदी बन कर दोनों को मेरे लुंड chaat'te हुए देख कर अपने होंठों पर जुबां फेरने लगी.
श्रुति ठंडी हो क्र फिर से गरम होने लगी थी. मुझे हंसी आने लगी.
विजय:- श्रुति क्या देख रही हो. अभी तो ठंडी है हो
श्रुति:- इतनी जल्दी नहीं मेरी आग बुझने वाली. सालों से जल रही है कुछ दिन तो लगेंगे hi.
विजय:- अच्छा चलो तब्ब तब तुम मुझे किश तो करती राहु.
श्रुति मेरी बायत सुन क्र मेरे पास ै और झुक क्र मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. श्रुति मेरे होंठों पर लगे अपनी छूट के पानी को चाटने लगी.
प्रिय मज़े से मेरे लुंड पर अपनी जीब फेरने में लगी हुई थी और जहान्वी मेरे लुंड को नीचे से ले क्र ऊपर तक चाट रही थी. बड़े लुंड का वो दोनों hi आज पहले बार मज़ा ले रही थें. और दोनों hi बड़े आराम से मेरे लुंड के मज़े लेने में लगी यही थीं. दोनों को कोई जल्दी नहीं थी. मेरा लुंड भी दोनों के प्यार को देख कर झूमने लगा.
श्रुति को किश करने में मज़ा आने लगा. प्रिय श्रुति जहान्वी तीनो hi किश करने में माहिर हीं हो चुकी थीं. तीनो hi लेस्बियन भी बन चुकी थीं.
पहले भी सबब मिलकर hi हम किया करते थे. श्रुति किश बड़े अच्छे से कर रही थी. श्रुति मेरे होंठों को कभी चूमती और कभी मेरी आँखों में देख कर मेरे होंठों को चाटने लगती..
शरती:- विज्जु अपना मोहन खोलो.
मैं भी समझ गया श्रुति अब्ब मेरे मोहन में अपनी जुबां डालने वाली है. मैंने अपना मोहन खोला तो श्रुति ने अपनी जीब मेरे मोहन के अंदर घुसा दी. मैं श्रुति की जॉब को छोस्ने लगा तो श्रुति ने अपनी जीब मेरे मोहन से निकल ली.
श्रुति- विज्जु अभी चूसो नहीं. मैं कुछ और करने वाली हूँ.
मैंने श्रुति की बात मान ली.
श्रुति फिरसे मेरे मोहन में अपनी जीब दाल कर मेरे मोहन के अंदर उसे घूमने लगी.
मुझे अजीब सा मज़ा आने लगा. थोड़ी सी गुदगुदी भी हुई. ये मैंने पहले कभी नहीं किया था. और न hi रानी या पूजा दीदी ने कभी ऐसा किया था. ये मेरे लिए नया था. कुछ देर श्रुति मेरे मोहन में अपनी जीब घूमती रही. शायद वो अपनी जीब से मेरे मोहन को अंदर से चेक कर रही थी.
फिर श्रुति ने मेरे मोहन से अपनी जीब निकल ली.
श्रुति;- विज्जु कैसा लगा.. मज़ा आया ना.
विजय:- हाँ श्रुति मज़ा तो आया लेकिन ये सबब तुमने कहाँ से सीखा.
श्रुति :- इसमें सीखने वाली कौनसी बात है. ये तो खुद hi मान में आए है और बास भी करने लगती हूँ. हम तीनो hi हर तरह से एक दूसरे के मज़े ले लिया करती हाँ..
प्रिय ने अब्ब मेरे लुंड को अपने मोहन में ले लिया. और मेरा लुंड 3" तक्क प्रिय के मोहन में जा चूका था. पूजा दीदी की तरह से प्रिय को भी कुछ कुछ परेशानी हुई. पहली बार था ना. थोड़ा टाइम लगेगा आदि होने में.
प्रिय मेरे लुंड को मोहन में लेकर चूस रही थी और कभी अपनी जीब से मेरे लुंड के सुराख़ को चाटने भी लगती थी. प्रिय के ऐसा करने से मेरे अंदर करंट सा दौड़ने लगता था.
मैं श्रुति को किश करने में लग गया और प्रिय जहान्वी मेरे लुंड को चूसने चाटने लगी. ऐसे hi 10 मिंट तक्क हम चरों hi धीरे धीरे सबब करते रहे. कभी प्रिय मेरे लुंड को अपने मोहन में लेती तो कभी जहान्वी.. दोनों hi मज़े से मेरे लुंड के मज़े लिए जा रही थीं.
लेकिन अब्ब मेरा लुंड बोहत सख्त हो गया था और मुझे बड़ी बेचैनी शुरू हो गई थी. खाली चूसने में मैं भरने वाला कहाँ था... पारर कोई आगे hi नहीं बढ़ रही थी. काफी देर से लेते लेते hi सबब हो रहा था...
प्रिय जहान्वी भी अब्ब लुंड को चूम चाट क्र अपना दिल भर चुकी थीं वो भी नेक्स्ट स्टेप के लिए रेडी होने लगीं.
प्रिय- जहान्वी क्या तुम्हे भी बेचैनी शुरू हो गई है या सिर्फ मेरा hi ऐसा हाल है.
जहान्वी:- हाँ प्रिय विज्जु का लुंड चाटने चूंसे से hi मेरी तो छूट पानी छोड़ने लगी है.
प्रिय:- तो फिर अब आगे क्या करें.
जहानीव:- मैं रो सोच रही हूँ. विज्जु को किश करते हुए अपनी छूट को विज्जु के लुंड पर रगड़ों.
प्रिय:- मैं तो मेरा भी अब्ब कुछ ऐसा hi हो रहा है.
मैं दोनों की बात सुन रहा था. मैं मेरा भी मचल रहा था. अब्ब मेरा मूड तो था. क पूजा दीदी के जैसे किसी को उल्टा करूँ और उसकी छूट और गांड के छेड़ पर अपना लुंड रगड़ों. लेकिन प्रिय ने कह दिया था क आज मैं कुछ न करूँ. वो खुद hi करेंगी....
दोनों ने hi आपस में कुछ डीडे किया. श्रुति को मेरे ऊपर से हटा दिया और जहान्वी मेरे लुंड पर बैठ गई. प्रिय उठी और अपनी छूट को मेरे मोहन पर रख कर बैठ गई.
दोनों ने hi खुद के चेहरे मिलाये और किश करने lageen.shuruti ने दोनों के hi बूब्स पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगी. प्रिय और जहान्वी आपस में किश करते hi मेरे मोहन और लुंड पर घिसाई शुरू करने लगी. मैंने प्रिय के चूतड़ों को पकड़ा और छोड़ा सा उठा कर प्रिय की छूट पर चमक रहे पानी को चाटने लगा.
प्रिय ने एक बार किश तोर कर मुझे देखा और फिरसे जहान्वी को किश करने लगी.
प्रिय की छूट भी श्रुति की तरह से शवेद थी. प्रिय अब्ब जवान हो गई थी. और एक नमकीन और रसीली छूट की मालिकान बन गई थी. तीनो hi हर किसम की
ट्रैंनिंग में कामयाब थीं. सबब स्टेप्स बड़े अच्छे से ले रही थी....
प्रिय का जिस्म जहान्वी को किश करते हुए बड़ा खूबसूरत दिख रहा था. प्रिय के चुत्तड़ बहार को निकले हुए थे. और रूम की रौशनी में बोहत hi ज़यादा चमक रहे थे..... प्रिय भी माँ की hi तरह से बेमिसाल हुसैन की मालिक थी. माँ के जैसी hi प्रिय की स्किन भी बोहत चमकदार थी. प्रिय के बदन की चमक ने मेरे लुंड को और भी टाइट कर दिया था. जो जहान्वी की छूट के नीचे दबा हुआ रगड़ खा रहा था.
जहान्वी की छूट का पानी मेरे लुंड को भिगो रहा था, जिससे मेरे लुंड पर जहान्वी की छूट की रगड़ और भी अच्छे से हो रही थी. जहान्वी तो मेरे लुंड को चाट चाट कर hi बोहत गरम हो गई थी. अब्ब वो भी श्रुति की तरह से झड़ने वाली थी. प्रिय की किश की वजा से जहान्वी की स्पीड बढ़ नहीं पा रही थी. लेकिन जितना उससे हो रहा था वो अपनी छूट को घिसने में लगी हुई थी.
अभी तीनो का टाइम था तो मैं चुप hi था. वर्ण मैं भी कुछ करता..
श्रुति दोनों के hi बूब्स और निप्पल को कस कस के दबाने और मरोड़ने में लगी हुई थी. 3 मिंट hi हुए थे. क प्रिय और जहान्वी ने किश तोड़ दिए. और सिसकियाँ लेने लगीं. अब्ब प्रिय अपनी छूट को मुझसे चटवा रही थी और श्रुति प्रिय के बूब्स को दबा रही थी. जहान्वी प्रिय से फ्री हुई तो उसने मेरे पेट पर हाथ रख दिए.
जहान्वी मेरे पुरे लुंड पर अपनी छूट को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी. जहान्वी का एंडिंग पॉइंट आ गया था. प्रिय भी झड़ने वाली थी. लेकिन जहान्वी पहले hi झटके खाने लगी. और फिर जहान्वी एक आखरी झांकता लेती यही झाड़ गई.
प्रिय ने जहान्वी को साइड किया कर फिर मेरे मोहन पार्स अपनी छूट को हटा कर पूरी तरह से मेरे ऊपर लेते गई.
प्रिय ने मुझे किश नहीं की. बास मेरे शोल्डर को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से मेरे लुंड पर अपनी छूट की रगड़ने लगी. प्रिय ने अपनी ऑंखें बंद कर ली थीं. प्रिय अपनी बंद किये हुए अपनी चूर का पानी जल्दी से निकाल लेना चाहती thi.priya भी झड़ने वाली थी. आज सबब का hi पानी जल्दी निकल रहा था.
प्रिय की चिकनी छूट मेरे लुंड पर ज़ोर से रगड़ खा रही थी. प्रिय की साँसें मेरे चेहरे से टकराने लगी. प्रिय तेज़ साँस लेते हुए सिसकियाँ लेने लगी.
प्रिय:- siiiiiiiiiiiiiii. hmmmmmmmmmmmm.ooooooooooo. ufffffffffffffffffffff..
प्रिय सिसकियाँ लेते हुए मेरे गले लग गई और ऐसे hi अपनी छूट को रगड़ने लगी.
प्रिय की स्पीड तेज़ हुई. प्रिय का जिस्म अकड़ने लगा और फिर प्रिय अपनी छूट का पानी मेरे लुंड पर गिरते हुए खुद भी मेरे सीने पर गिर गई..
तीनो hi पानी छोड़ गई थें और मेरा पानी निकलना बाकी था.
कुछ देर में प्रिय रिलैक्स हुई और फिर मेरी आंखें देखने लगी. फिर प्रिय ने मुझे किइस करना शुरू कर दिया. प्रिय मेरी तितली मुझे अपना प्यार देने लगी.
कुछ देर प्रिय ने मुझे किश किया और फिर मेरे लुंड का ख्याल करते हुए मुझे छोड़ दिया..
प्रिय:- विज्जु ज़यादा परेशां तो नहीं किया ना हमने...
विजय:- मेरी तो खैर है, असली परेहनी तो मेरे लुंड को हु थी.
जहान्वी:- विज्जु अब्ब्ब तुम लेलो मज़ा, जो तुम्हारा दिल कर रहा है वो करलो.
आज तो सबब ऐसे hi हो रहा है. जब्ब सबब पूरा पूरा करेंगे. तब्ब hi सबब सही से होगा...
प्रिय:- चल शूरति नीचे लेट जा. तू भी बोहत गरम हो गई है. चल बजा ले अपनी छूट की आग को.
षुरूति ख़ुशी ख़ुशी लेट गई. और मैं भी उठ कर शूरति के ऊपर hi चढ़ गया. मैं तो था क श्रुति के बूब्स को चूसो लेकिन अभी टाइम कम् था, अपने लुंड का पानी निकल कर तीनो से hi कुछ बातें करूँगा, फिर थकन भी तो मिटानी है. 3 दिन से ऐसे hi फिर रहा था..
मैं श्रुति के पैरों की तरफ आया तो श्रुति ने खुद hi अपने पेअर खोल दिए.. जैसे लुंड लेने वाली हो..
विजय:- श्रुति क्या अंदर लेने का मैं हो रहा यही.
श्रुति:- विजजू अंदर लेने का मैं तो कब्ब से है. लेकिन तुम अपना और मेरा पानी निकाल दो.. छूट के अंदर तो कल hi जायेगा.
विजय:- श्रुति तुम उलटी लेट जाओ.
श्रुति मेरी बात सुनते hi उलटी लेट गई. और मैं श्रुति के ऊपर आ गया. और अपने लुंड को श्रुति की छूट और गांड में घिसने लगा. इस तरह में मुझे मज़ा आता था. मैं पूरा hi श्रुति के ऊपर लेट गया और अपनी गांड को उठा कर श्रुति की छूट और गांड को अपने लुंड से घिसने लगा....
मैं ऐसे तब्ब तक्क करता रहा. जब्ब तब्ब मेरा लुंड एन्ड तक नहीं पोहंच गया. श्रुति इस बीच फिरसे झड़ने वाली हो गई thi.aur अपनी गांड को उठा उठा के अपनी छूट रगड़वा रही थी.
श्रुति:- विज्जु ये तुमने बड़ा सही तरीका ढूंढा है. ऐसे लग रहा है जैसे तुम मुझे छोड़ रहे हो.... siiiiiiiiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह विजजूउउउ और तेज़ ragdo..mai फिरसे झड़ने वाली हूँ..
जहान्वी और प्रिय हम दोनों को hi देख रही थी.
दोनों फिर से गरम होने लगी थीं. श्रुति कुछ hi देर में झटके लेते हुए झड़ने लगी. तो प्रिय खुद hi लेट गई...
प्रिय:- विज्जु अब तुम मेरी छूट पर अपने लुंड को रगड़ो.....
मैं भी अब्ब करीब था टी प्रिय के ऊपर छड्ड कर प्रिय के छूट पर अपने लुंड को रगड़ने लगा. मैं बोहत तेज़ी से कर रहा था. मेरा सारा लुंड प्रिय की छूट के लिप्स के अंदर से हो क्र गुज़र रहा था. मेरी स्पीड बढ़ी तो प्रिय थोड़ी सी हिली.
तब्ब मेरा लुंड प्रिय की छूट के छेड़ पर था. प्रिय के हिलने से मेरा लुंड सुपडे समेत प्रिय की छूट में घुस गया..
priya:-aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiii..
vijjjjuuuu..andar क्यों दाल दिया...
मैंने नीचे झुक के देखा तो मेरा लुंड का सुपड प्रिय की छूट में ग़ायब हो चूका था.... और प्रिय की टाइट छूट में फँस चूका था.....
जहान्वी:- प्रिय अब्ब थोड़ा सा गया है तो पूरा hi ले लो ना. विज्जु तुम भी दाल दो अंदर.
प्रिय:- नहीं विज्जउ अभी नहीं. कॉल मैं आराम से लुंगी.. अभी लिया तो फिर मज़ा नहीं आएगा.. और जहान्वी तुम, विज्जु अभी थका हुआ है... ऐसे सही से मज़ा नहीं आएगा.
श्रुति:- विज्जु सील तक्क तो अंदर बहार कर सकते हो. अब्ब प्रिय की छूट थोड़ी खुल गई है तो थोड़ा सा और भी दाल दो.
विजय:- बोलो प्रिय क्या कहती हो. थोड़ा सा और डालो या बहार निकल लूँ..
प्रिय:- विज्जु मेरा मैं मैट बदलो वर्ण मैं अभी क अभी सारा hi डालने को बोल दूंगी. और ये दोनों फिर मोहन देखती रहेंगी.. कॉल हम तीनो hi पूरा पूरा लेंगी.
इसलिए तुम अपने लुंड को बहार निकाल लू..
मैंने भी प्रिय की छूट में घुस चूका लुंड बहार निकला. और फिरसे घिसाई शुरू करदी...
अगले 5 मिंट में प्रिय झाड़ गई. और मैं भी अब्ब आखरी स्टेज पर था.
जहान्वी:- विज्जु मैं मोहन में दाल कर निकल देती हूँ..
श्रुति:- नहीं तुम दोनों पहले hi विज्जु का लुंड मोहन में ले चुकी हो. अब्ब मेरी बारी है..
मैं भी श्रुति की बात सुनके साइड में लेट गया और श्रुति फिर मेरे लुंड के मज़े लेने लगी.. कुछ hi देर में मेरा लुंड अपना पानी छोड़ने लगा. जो कुछ श्रुति के होंठों पर लगा और कुछ श्रुति के बूब्स पर गिरने लगा. मेरे लुंड का पानी तीनो hi अपनी उँगलियों से लपेट कर चाटने लगीं..
कुछ देर बाद हम सबब hi बाथरूम से फ्रेश होकर बीएड पर लेते थे...
प्रिय मेरे ऊपर आ गई और श्रुति और जहान्वी दोनों मेरी साइड में लेट आई..
विजय:- प्रिय तुझे आज दुःख लगा था ना.. जब्ब पापा मिले थे..
प्रिय:- हाँ विज्जु तब्ब बोहत दिल दुख था मेरा.. पारर फिर सबब ठीक हो गया..
विजय:- प्रिय तुझे ग़म नहीं करना चाहिए. तुम जिसका भी खून हो, वो था तो एक हवस का मारा hi ना. उसे तो पता भी नहीं होगा क उसके लुंड की वजा से तुम इस दुन्या में आ चुकी हो. और फिर ऐसे बाप का तुम करोगी भी क्या...
प्रिय:- विज्जु मैं भी सबब समझती हूँ. बास कुछ देर दिल दुख था. लेकिन फिर पापा ने मुझे भी अपनी बेटी बना लिया तो अब्ब मान ठीक हूँ..
जहान्वी:- प्रिय मुझे और जहान्वी को देखो, हम भी तो अपने असल से दूर हाँ. और अब्ब हम वापिस भी तो नै जा सकती.. जैसी हमारी ज़िन्दगी हो गई है. जैसे हमारी समाज में इज़्ज़त रह गई है. दुःख तो हमें भी बोहत है लेकिन हम कर भी क्या सकती हाँ..
श्रुति:- हाँ प्रिय हम विज्जउ से कह के घर भी जा सकती हाँ. लेकिन फिर कोठे पर रह के पूरा महाराष्ट hi तो हमें जानने लगा है. हम अपने घर में भी एक अछि ज़िन्दगी नहीं जी सकती.. हमारे लिए भी तो हमारे माँ बाप छूट चुके हाँ.. तुम क्यों ग़म करती हो.. रेखा बाई के कोठे से मिलें और भी तो कई हम जैसी हाँ, जिसके बाप का पता नै होता... विज्जू तो माँ और पापा ले प्यार की निशानी था.. और फिर पापा भी तो कुछ नहीं जानते थे... ये सबब तो भगवन ने किया है..... प्रिय और देखा नहीं तुमने माँ कैसे सबब hi दुःख दर्द को भूल गई है... तुम बास माँ और पापा के मिलान की ख़ुशी मनाओ. वर्ण जितना ज़ालम माँ के साथ हुआ है, माँ तो एक ज़िंदा लाश hi बानी रहती... और फिर हम सबब भी तो एक साथ हमेशा रहेंगे.. खुश रहेंगे. दुखी रह कर हमें मिलेगा भी क्या.... पहले hi तो साओन से ऐसे दही रहकर हमने गुज़र दिए अब्ब हम सिर्फ अपनी ज़िन्दगी की खुशियों को जियेंगी...... तुम अपने उस हवस परास्त पिता को कभी भी याद मैट करना..
विजय:- और जो खुशियां हमें मिल रही हाँ. अहम उन्हें सेलिब्रेट करेंगे.. जो बीत चूका उसे याद रख के क्या मिलेगा...
प्रिय:- तुम तीनो ठीक कह रहे हो. मुझे कोई ग़म नहीं है. बास वक़्ती तौर अपर हुआ था. और वैसे भी मैं उस हवस परास्त की बेटी हो भी कैसे सकती हूँ..
जो माँ के पास अपने लुलंद का पानी निकलने आया था.. ज़रूर उसे भी दन्न ने hi भेजा होगा.
हम तीनो ने hi प्रिय को चूमना शुरू कर दिया. प्रिय अब्ब ठीक हो गई थी. पैदा करना वाला hi तो पिता नहीं होता. पलने और सँभालने वाला भी तो पिता होता है. प्रिय हम सबब की जान थी, और हम सबब प्रिय की जान थे. माँ, पापा के लिए ख़ास थीं, पापा का प्यार थीं और फिर ये कैसे हो सकता था क पापा भी हम सबब को खुद के दिल में न परोयें... पापा तो पहले से hi एक ग्रेट इंसान थे. उनके जैसा होना आसान नहीं था..
कुछ देर ऐसे hi हम बातें करते रहे और फिर मुझे नींद आने लगी.. तीनो ने भी मुझे सोने दिया... प्रिय मेरे ऊपर hi सो गई..
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Location:Mumbai
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जिस रात रेखा बाई का कोठा उजड़ा था. पूरा मुंबई hi ये सब जान गया था. मीडिया की वजा से ये खबर पुरे इंडिया में फेल गई थी..
मुंबई की जेल में मौजूद बग्गा भी ये खबर सुन चूका था... वो पहले बोहत खुश हुआ. क रेखा बाई अगर मुझसे जीत गई है तो क्या हुआ. किसी ने उसे hi उसके कोठे से उठा लिया. बग्गा को रेखा बाई के अपहरण से बड़ी ख़ुशी हुई थी.
लेकिन फिर जैसे hi उसे पता चला क रेखा बाई के साथ साथ पूरा कोठा hi उजाड़ गया है... तो बग्गा का घुसा सातवें आसमान तक जा पोहंचा.
बग्गा श्वेता के निकल जाने से ग़ुस्से में आ गया था... पिछले कई सालों से बग्गा जेल की ज़िन्दगी काट रहा था.. वो रेखा बाई से बलदा तो लेना hi चाहता था. लेकिन बग्गा के लिए श्वेता एक चैलेंज बन चुकी थी. बग्गा ने आज तक जिस औरत या लड़की को अपने नीचे लाने का सोचा था. बग्गा को कभी भी कोई परेशानी नहीं हुई थी.. लेकिन श्वेता ने बग्गा को थप्पड़ मार कर बग्गा के दिल में श्वेता के लिए नए एहसास जगा दिए थे.. बग्गा ने कसम खा ली थी क कुछ भी हो जाए. वो श्वेता को हासिल करके hi रहेगा...
अगर देखा जाए तो बग्गा की बर्बादी hi श्वेता की वजा से हुई थी. अगर श्वेता बग्गा के दिल में न बस्ती.. या बग्गा ज़िद्दी न होता तो बग्गा बर्बाद न होता..
बग्गा कुछ भी सेह सकता था लेकिन श्वेता को अपने हाथ से निकलता हुआ नहीं देख सकता था.. बग्गा के लिए ये सबब सहन कर मुमकिन नहीं रहा था...
बग्गा पहले भी किसी से कम् नहीं था. अब्ब तो उसकी सज़ा भी कम् रह गई थी. लेकिन श्वेता क ग़ायब हो जाने की वजा से बग्गा के लिए जेल की ज़िन्दगी नर्ग बनने लगी... बग्गा के लिए जेल में रहा मुष्किल हुआ तो उसने अपने दोस्तों से बात की..
बग्गा ने जेल में रह क्र खुद को और भी स्टोरंग बना लिया था.. बग्गा को जेल में रह कर कई किसम के खतरनाक क्रिमिनल्स मिल चुके थे. बग्गा की उन सबहि से खूब जमने लगी थी....
बग्गा के 3 ख़ास दोस्त थे..
1..भीम singh..age:40
भीम सिंह एक खतरनाक डाकू था, जो किसी दौर में पहले कसाई था, शुरू से hi गलत लोगों में उठने बैठने की वजा से भीम सिंह हर बुरे धंदे में इन्वॉल्व होना शुरू हो गया. लड़कों को उठा आकर उनका रपे करना, रह चलती किसी लड़की को उठा कर ले जाना. और फिर उसका रपे करके कहीं पहनक देना भीम सिंह की आदत बन गई थी. भीम सिंह किसी बैल की इस ताक़त का मिल्क था. बड़ी बड़ी मूंछें थी उसकी.. भीम सिंह का hi एक दोस्त जो जेल में hi उसके साथ था.. डरा..
2..dara...age:38
डरा का अत पता खुद डरा को भी नहीं था. भीम सिंह के hi जैसा हत्ता कट्टा था, साड़ी घटिया आदतें भीम सिंह जैसी थीं. और मिल कर रहते थे..
भीम सिंह और डरा सिंह ने मिल कर एक गैंग था जो लोगों के घरों में डाका डाला करते थे. 4 साल तक दोनों ने hi खूब पैसा इकठा किया था. लेकिन वो लुटे हुए पैसे को अपने इस्तेमाल में नहीं ला सके थे. एक डाके में भीम संघ डरा सिंह पुलिस के हाथे चढ़ गए और भीम सिंह और डरा सिंह क शिव बाकी सबब hi मारे गए. दोनों को जेल हो गई, कहाँ उन्हे उम्र भर रहना था.
3..जसवंत एक sikh..age:42
दमाग नाम को नै था इसमें लकिन लड़ाई में ये सबब से hi आगे था, डर भी नहीं था जसवंत को किसी का.. ऐसे hi अपन hi गाओं में एक लड़ाई के दौरान पागल सा हुआ और कई लोगों को मार दिया.... इसे भी उम्र कैद हो गई...
बग्गा ने तीनो दोस्तों से hi मीटिंग की जेल से भागने की प्लानिंग करने लगे.
तीनो बड़े hi हैरान हुए..
भीम सिंह:- बग्गा तुम्हारी सजा की तो कुछ hi महीने रहते हाँ. तुम क्यों यहाँ से भागना चाहते हो...
बग्गा:- य्र्र सबब hi तो जानते हो. श्वेता मेरी ज़िद बन्न गई थी. अब्ब सुनने में आया है. वो कोठे से फरार है. मैं उसे ढूंढ कर hi रहूँगा... मुझे तब्ब तक चैन नहीं मिलेगा जब्ब तब्ब वो मेरे लुंड के नीचे नहीं आ जाती. बड़ा तड़पाया है उसने.
बग्गा की बात सुनके तीनो hi हस्सन लगा...
हहहहहहहहहहहहह
जसवंत:- वाह्ह बग्गा तुम एक औरत के लिए जेल तोड़ कर भागना चाहते हो.. कुछ महीने इंतज़ार भी नहीं कर सकते.
डरा- बग्गा तुम्हारे लिए कौन सी औरतों और लड़कियों की कमी हो सकती है..
बग्गा:- श्वेता मेरे लिए मेरी ज़िद्द है, मैं उसे नहीं छोड़ सकता.. चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े..
भीम सिंह:- बग्गा क्या वो तुम्हारे लिए hi रहेगी, या हमें भी कुछ हिस्सा मिलेगा..
बग्गा:- सॉरी यारो वो सिर्फ मेरे लिए है, बाकी जिस के लिए भी तुम तीनो कहोगे मैंने उसे तुम्हारे क़दमों में ढेर करदूंगा.
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विजय के लिए आने वाले वक़्त में कोई एक टेंशन नहीं थी. विजय अपने सामने मौजूद दुश्मनो पर फोकस किये हुए था. बग्गा को विजय समेत सबब hi भूले हुए थे. और भुला हुआ दुश्मन कुछ ज़यादा hi हानि पोहंचा देता है कभी कभी.
दन्न अपनी स्टेट पावर और मेंटली पॉवरफुल होने की वाज से स्ट्रांग था... लेकिन बग्गा और उसके दोस्त तो खुद में hi एक तूफ़ान थे... सब के सबब के दमाग से पैदल बास ज़िद्द के लिए अपनी मैं मर्ज़ी करने के लिए काट मरने वाले...
बग्गा किसी भी हिसाब से दन्न से ज़िद्द और ईगो में कम् नहीं था. श्वेता के लिए बग्गा ने अपना साम्राज्य hi ख़तम करवा दिया. वर्ण बग्गा इतना भी गया गुज़रा नहीं था.....
विजय का फोकस अपने घर वळून को खुशियां देने में था. और दन्न के साथ साथ अपने दूसरे दुश्मनो से बदला लेने पर वो अपना फोकस बनाये हुआ था...
बग्गा के जेल में जाने से सबब ने hi बग्गा को नज़र अंदाज़ करके अपने लिए ख़तरात को जनम दे दिया था..
अब्ब देखना ये था क दन्न या बग्गा श्वेता को केस ढूंढ़ते हाँ.. तब्ब hi असली जुंग शुरू होगी. और विजय के लिए ये जुंग कोई आसान कुंग नहीं थी.
औरत के लिए तो मुल्कों के मुल्क hi उजाड़ दिए गए थे. ये तो फिर भी कुछ hi लोग हाँ. श्वेता के लिए दन्न दो दिन और 2 रातें मुसलसल जाग सकता है. बग्गा अपना बनाया गया सेटअप ख़तम कर सकता है. और सालों के लिए जेल में जा सकता है..
श्वेता के लिए ये जुंग आसान तो नहीं थी.. और न hi विजय के लिए.
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