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जहान्वी ने मेरा और प्रिय का पानी निकल दिया था, लेकिन वो खुद बोहत बेचैन हो गई थी, हालत तो श्रुति की सही नहीं थी, श्रुति से सबर नहीं हुआ और मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर मेरे लुंड पर झुक गई... जहान्वी के हिस्से का बचा कुछ वीर्य श्रुति मेरे लुंड पार्स चाट कर साफ़ करने लगी और अपनी पियास बुझाने लगी
प्रिय अब्ब रिलैक्स हो गई थी, तो जहान्वी अपनी छूट को ठंडा करने के लिए प्रिय के मोहन पर अपनी छूट रख क्र बैठ गई, प्रिय भी जहान्वी की छूट की तड़प को समझते हुए उसे ठंडा करने में लग गई
श्रुति मेरे लुंड को मोहन में लेकर चूस रही थी, श्रुति की स्पीड बढ़ने लगी थी, मैं भी श्रुति को मज़ा देने लगा, श्रुति की छूट जो पानी बहा रही थी वो मैं अपनी जीब से चाटने लगे. श्रुति की सिसकियाँ उसके मोहन में hi डब्बने लगीं.
अलग अलग छूट चाटने में मज़ा hi कुछ और होता है, और यहाँ तो मेरी तितलियों की चिकनी छूटें थी मज़ा तो आना hi था, आज ख़ास तीनो ने hi मापनी अपनी छूट को मेरे लिए चमकाया था.
मेरा अंदर आज खिला खिला था, अभी तो ये किसी की छूट में भी नहीं गया था और मैं मज़े की हसीं वादियों में खो गया था.
श्रुति मचलने लगी फिर वो एक हाथ से मेरे लुंड को मसलते हुए ज़ोर ज़ोर से मेरे लुंड को मोहन में लिए चूसने लगी, श्रुति की म्हणत से मेरा लुंड फिरसे कहद होने लगा, श्रुति की तड़प बढ़ती तो व ो मेरे लुंड को अपने मोहन से निकल आकर सिसकियाँ लेने लगती...
षुरूति अपनी छूट पर मरे जीब से तड़पने lagi.uski स्पीड मेरे लुंड पर बढ़ने लगी.
उधर प्रिय भी जहान्वी की छूट में अपनी जीब घुसए हुई थी, और जहान्वी अपने बूब्स को पकड़ कर दबा रही, जहान्वी की बर्दाश्त ख़तम होने लगी तो वो अपने निप्पल्स को मरोड़ने लगी. प्रिय की जीब बड़ी तेज़ी और महारत से जहान्वी की छूट में गर्दिश कर रही थी, और जहान्वी अपने सर्र पीछे किये अपने निप्पल को मरोड़ने में लगी हुई थी..
जहान्वी:- हम्मम्मम्मम्हा प्रिय मेरी जान, और तेज़ चाटो, अपनी जीब को मेरी छूट में पूरा hi घुसा दो, प्रिय तुम्हारी जीब बोहत गरम हममममममममः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सीईईई
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ प्रिय और तेज़ और तेज़.. मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है,
उफ्फ्फ आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह सीईईई हाय प्रिय तुम कितना मज़ा देती हो..
जहान्वी सिसकियाँ लेते हुए अंतिम सीमा तक जा पोंछी और प्रिय की छूट पर धप से गिर गई.
प्रिय:- कमीनी मेरी छूट का क्यों कचूमर निकल रही है..
जहान्वी सुनंने की हालत में hi कहाँ थी.
हालत तू श्रुति की भी सही नहीं थी. वो भी मेरे लुंड को थामे हुए अपनी छूट की चटाई का मज़ा ले रही थी. मेरे लुंड को खड़ा करने के बाद अब्ब शूरति उसे कस के पकडे हुए अपनी छूट में मेरी जीब को पूरी तरह से फील कर रही थी.
श्रुति की भी सिसकियाँ चरम पर थीं..
श्रुति:- विज्जज्जूऊऊऊ.. yesssssss..yesssssss.. हम्मम्मम्हा... ahhhhhhhh..ohhhhhh
विज्जु मेरे चुत्तडों को और खेंच क्र छतो.. पूरी जीब घुसा दो मेरी कब्ब से तड़प रही छूट में..... मेरी छूट भी रोने वाली है.. ओह्ह्ह
vijjjjjjuuuuuuuuuu मेरी जाएं तुम कितना मज़ा देते हो. सालों तक इंतज़ार किया तुम्हारे प्यार के लिए .. और तेज़ विजजूउउ ohhhhhhhhhh मैं gaiiiiiiiiiiiiii.
शूरति मेरे लुंड पर ागरम साँसे छोड़ते हुए झड़ने लगी.. शरई की छूट का पानी मेरे मोहन में जाने लगा और मैं अपनी तितली की छूट का पानी मज़े से पीने लगा......... जितनी देर में श्रुति शांत हुई तब तक उसकी छूट भी साफ़ हो चुकी थी..
प्रिय:- jhanvi,shruti पहले विज्जु का लुंड कौन लेगी...
जहान्वी:- इसमें पहले वाली कौनसी बात है, जो भी पहले लेले, मिलना तो सभी को hi hai.aaaj छूट तो सबब की hi फटेगी.. जितना मोटा और लम्बा लुंड है विज्जू का पहले घुसे किसी की छूट में या बाद में दर्द से जान तो सबब की hi निकलेगी..
श्रुति:- हाँ प्रिय छूट तो कुछ hi देर में सभी की फटने hi वाली है तो पहले और बाद में, वाला चक्कर तो है नहीं, और रही बात दररने की तो छूट पहले फटे या बाद में दर्द तो तीनो को hi होगा..
प्रिय;- तो विज्जु का लुंड पहले मैं ले लून..
jhanvi,shruti:- हाँ तुम लेलो तब्ब तक्क हम भी देख लेंगी क विज्जु कैसे पहली बार किसी की छूट में घुसता है....
प्रिय झट से बीएड पर सही पोजीशन में लेट गई अउ मुझे देख कर मुस्कुराने लगी..
विजय:- हाय मेरी तितली तो छूट खुलने के लिए बड़ी खुश दिख रही है.
प्रिय:- और नहीं तो क्या, कब्ब से इस सबब के लिए तो तरस रही थी.. लड़की से औरत बनने के लिए कब्ब से hi तो इंतज़ार कर रही थी हम तीनो, कोठे ार रहते हुए कितनी hi बार लुंड को छूट में घुसते हुए देखा है, और लास्ट के तो कुछ महीने तो हम तीनो की hi छूट तरस hi गई थी पानी निकलने के लिए.
बोहत आग हम तीनो की hi छूट के अंदर स्टॉक हो चुकी है.
अब्ब बातें छोड़ो और जल्दी से अपना लुंड मेरी छूट में घुसा क्र वो आग बहार निकालो... अभी पता नहीं मुझे कितना दर्द होने वाला है, आग बुझाने के चक्कर में आज बोहत बुरा हशर होने वाला है....
मुझे भी प्रिय की बात सही लगी, एक तो मेरा लुंड बोहत बड़ा था और दूसरा प्रिय की छूट पहली बार खुलने जा रही थी, ऊँगली लेने से तीनो की hi छूट कुछ खुल चुकी थी लेकिन ऊँगली और लुंड में फर्क होता है, और मेरा लुंड तो मोटा भी बोहत था, प्रिय के लिए और बाकी दोनों के लिए ये रात मज़े की तो थी hi लेकिन दर्द भरी चुदाई भी होनी कन्फर्म थी, एक बार तो तीनो की hi हालत पतली होने वाली थी..
मैंने जहान्वी और श्रुति को देखा.. और प्रिय को देख कर प्रिय की छूट के सामने जा कर बैठ गया.
प्रिय मुझे डिफ्रेंटेंट एक्सप्रेशन से देखने लगी, एक्ससिटेड तो वो थी hi लेकिन छूट खुलने की फीलिंग के साथ दर्द के भाव भी एडवांस में hi मेरी प्रिय के चेहरे पर दिख रहे थे., मैंने प्रिय को एक स्माइल दी और प्रिय के पैरों को पर साइड में पहला दिया.
जहान्वी:- चलो विजय अब्ब देर न करो दाल दो प्रिय की छूट में अपना लुंड...
इतना बोल कर जहान्वी प्रिय के बूब्स को पकड़ कर हल्का सा दबाने लगी, प्रिय एक्ससिटेड तो पहले से ह थी, और फिर मेरे खड़े लुंड को रूलर hi टुकर टुकर देख रही thi...priya की साँसों में थोड़ी सी हलचल होने लगी.. प्रिय के बूब्स जहान्वी के हाथ में मचलने लगी जहान्वी प्यार से प्रिय के बूब्स को अपनी उँगलियों से दबने लगी.
मैंने अपने हाथ से अपने लुंड को पकड़ कर प्रिय की छूट के लिप्स में घुसा दिया.
प्रिय की छूट के लिप्स मेरे लुंड के घुसते हे खुल गए. और मेरे लुंड प्रिय की छूट के छेड़ में फस्स गया, फिंगरिंग की वजा से प्रिय की छूट से कुछ कुछ खुली हुई थी जिस वजा से मेरे लुंड का सूपड़ा कुछ ज़ोर देने से प्रिय की छूट में फस्स चूका था.
मैंने प्रिय फिर प्रिय के पैरों को पकड़ कर एक ज़ोर का धक्का मार दिया. प्रिय की चीख निकल गई..
प्रिय:- aiiiiiiiiiiiiiiiiiii vijjjjjjjjuuuuuuuuuuuuu maarrrrrrrrrrrrrrrrr
gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii..
मैं अपनी तितली को ज़यादा दर्द नहीं देना चाहता था, इसलिए खुद देर रुके का सोचा, मेरा लुंड प्रिय की छूट की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुस चूका था, जो प्रिय के लिए सहन करना आसान नहीं था, मेरी प्रिय मारे दर्द के चीखने लगी.
श्रुति भी दूसरी साइड हो कर प्रिय के ढूढ़ को मोहन में लेकर चूसने लगी..
जहान्वी तो पहले से hi प्रिय के बूब्स को दबा रही थी. दोनों मिल कर प्रिय प्रिय के दर्द को कम् करने लगीं.
कुछ देर में प्रिय कुछ शांत हुई तो
जहान्वी:- विज्जू तुम्हरा लुंड कैसे प्रिय की छूट में फंसा हुआ है. प्रिय को तो बोहत दर्द हो रहा होगा.. देखो प्रिय की छूट कितनी हल गई है.
जहान्वी:- प्रिय तुम ठीक हो ना.
प्रिय ने आंख खोल कर जहान्वी को देखा और एक दर्द भरी मुस्कान देते हुए सर्र न में हिलने की कोशिश करने लगी..
जहान्वी:- विजजू मुझे लगता है प्रिय को दर्द नहीं हो रहा तुम ऐसा करो, क पुरे ज़ोर से एक धक्का और लगाओ.
प्रिय जहान्वी की बात सुनते hi ..
प्रिय:- जहान्वी कमीनी मेरी जान निकलवानी है क्या..... विजजू प्लीज अभी कुछ देर रुको, सच में मैं बता नहीं सकती मेरी क्या हालत हुई है... वैसे विज्जू तुम्हारा लुंड मेरी छूट में गया कितना है..
जहान्वी:- hehehehehe..vijjjuuu इसे सही मैट बताना वर्ण ये डर जाएगी...
विजय:- प्रिय मेरी जान तुम डरो नहीं मैं धीरे से hi करुगा. मैं भला क्यों तुम्हे दर्द देने लगा. ये तो जहान्वी तुम्हे परेशान कर रही है...
प्रिय:- विजजूउ धीरे से अपने लुंड को हिला कर चेक करना.
मैंने प्रिय की बात सुन कर अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा...
प्रिय:- aiiiiiiiiiiiiii विजजूउ अभी रुकू.. मुझे ऐसे लग रहा है जैसे मेरी छूट के अंदर का मॉस भी तुम्हारे लुंड से चिपक कर बहार निकल जाएगा..
विजय:- बहार निकाल कर क्रीम लगा लून..
प्रिय:- ओह्ह्ह्हह्ह विजजूउ पहले क्यों नहीं बताया था...
जहानीव;- नहीं विज्जू रहने दो.. ऐसे hi हम तीनो तुम्हरा लुंड अपनी छूट में लेंगी.. क्रीम लगाने से पूरा मज़ा नहीं आएगा..
प्रिय:- लेकिन जहान्वी इससे तो सच में बोहत दर्द होगा..
जहान्वी:- प्रिय इसी दर्द के लिए तो हम सालों से बेचैन हाँ. आज पूरा मज़ा और पूरा दर्द लेंगी..
श्रुति:- विज्जू क्या ऐसे hi बातों में रात काटनी है, एक जोर्का धक्का लगाओ और पूरा दाल दो.. अभी दो छूट और भी तो हाँ खुलने की इंतज़ार मेंफिर. कितना देर लगाओ गे..
जहान्वी:- हाँ विज्जु अब्ब देर न करो. अगर तुम हमारे दर्द को hi सोचते रहोगे तो कर ली हम चरों ने चुदाई. दर्द तो कुछ देर में खुद hi काम हो hi जायेगा...
प्रिय लाचारी से जहान्वी को देखने लगी.. एक्ससिटेमेंट में आ कर पहले छोड़ने का मैं तो बना लिया था प्रिय ने लेकिन अब्ब छूट के फटने से सोचने लगी क पहले क्यों लुंड ले लिया. बाद में भी तो लिया जा सकता था..
मेरा लुंड प्रिय की छूट में 3.5" जा चूका था और प्रिय की छूट का लॉक पूरी ातरः से चकनाचूर हो चूका था. प्रिय ऐसे hi तो नहीं तदपि थी. जब मैंने अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा तो प्रिय की टाइट छूट से छोड़ा से खून भी निकलना शुरू हो गया था.
मेरी प्रिय की छूट का उदघाटन हो चूका था, मेरी प्र्रिया मेरे hi लुंड से लड़की से औरत बन चुकी थी.
मैंने अपने बाकी लुंड को थोड़ा सा और हिलाया और प्रिय के पैरों को कस के पकड़ लिया.
मैंने प्रिय की छूट को और भी अच्छे से खोलने के लिए एक करारा शॉट मार दिया.
प्रिय पूरी जान से हिल गई...
प्रिय:- aiiiiiiiiiiiii विज्जज्जूऊऊऊ मैं marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiii... विज्जू ने मेरी छूट में चाकू इतर दिया.. हाय मा आपकी लाड़ली प्रिय की छूट पूरी खुल गई.. आपके hi बेटे ने अपनी बेहेन की छूट पहाड़ डाली...
प्रिय की बात सुन कर श्रुति और जहान्वी हस्सन लगीं
और अप्रिय हलकी आवाज़ से रोने लगी.
मेरा लुंड मेरी प्रिय की छूट की दीवारों को चीरा हुआ 6" तक्क अंदर चला गया था. जितना मोटा था मेरा लुंड प्रिय की छूट उतनी hi तंग थी. ऐसे चीख तो फिर निकालनी hi थी.
जहान्वी:- प्रिय रो तो रही है, लेकिन देखा नहीं वो सहन भी कर गई है. वर्ण उसकी चीख से रूम न गूँज उठता...
श्रुति और जहान्वी प्रिय के बूब्स को मोहन में लेते हुए चूसने लगी.
मैं प्रिय का चेहरा देखने लगा.
प्रिय क आंसू बहते हुए नीचे गिरने लगे, मुझे अपनी प्रिय पर बोहत प्यार आया.
लेकिन ये दर्द तो तीनो क नसीब में लिखा जा चूका था.....
मैं अपने लुंड किओ हिलाये बिना अपनी प्रिय को देखने लगा. और jhanvi,shrtui प्रिय के बूब्स और निप्पल को चूसने में लगी रहीं.
प्रिय के आंसू तो नहीं रुके लेकिन अब्ब वो शांत हो गई थी.. वो मुझे देखने लगी. प्रिय के दोनों hi बूब्स जहान्वी और श्रुति के मोहन में थे . जिस वजा से प्रिय कुछ शांत हो गई थी. मेरे रुके रहने से प्रिय का दर्द और भी कम् हुआ, तो प्रिय अब्ब मुझे बोहत hi प्यार से देख रही थी...
प्रिय:- विजजूउउ, ी लव यू.. विजजूउउ तुमने मुझे वो ख़ुशी दे hi दी, जिस की तमन्ना सालों से थी, मैं तुम्हे कैसे बताओ विज्जु मैं कितनी खुश हूँ, मेरा अंदर मैं आज झूमने लगा है..
विजय:- मुझे भी तो उतनी hi ख़ुशी मिल रही है प्रिय , जितनी तुम्हे हो रही है, आखिर हम हाँ तो एक hi.
प्रिय:- विज्जउ अब्ब तुम अपने लुंड को धीरे से पीछे खेंचो...
मैं प्रिय की आँखों में देखता हुआ अपने लुंड को पीछे खेंचने लगा, प्रिय की छूट ने मेरे लुंड को कस के पकड़ा हुआ था, खेंचने से प्रिय को दर्द होने लगा, तो प्रिय ने अपने होंटो को आपस में दबा कर मुझे मेरा काम जारी रखने को कह दिया... मैंने भी अपने लुंड को प्रिय की छूट से धीरे धीरे करके पीछे खेंचा, प्रिय की छूट से खून निकलने लगा, मेरा लुंड सुपडे तक बहार निकल आया तो मैंने ने फिरसे से उसे धीरे धीरे करके अंदर घुसा दिया. 2 - 3 बार ऐसा करने से hi लुंड को प्रिय की छूट में कुछ आसानी होने लगी और वो किसी हद तक आराम से जाने लगा.
प्रिय:- विज्जउ थोड़ा सा अपनी स्पीड बढ़ाओ.
मैंने अपने लुंड को थोड़ा सा स्पीड देते हुए प्रिय की छूट में अंदर बहार करने लगा, मेरा लुंड प्रिय की छूट को खोलता हुआ 5" तक अंदर बहार होने लगा..
प्रिय को शांत देख कर जहान्वी और श्रुति पीछे हैट गईं.
प्रिय:- विज्जू मेरे ऊपर आ जाओ. और मुझे किश करते हुए छोड़ो...
मैंने प्रिय की बात मानते हुए प्रिय के ऊपर झुक कर प्रिय के होंटो को अपने होंटो में ले लिया..
प्रिय अपने हाथो को मेरी पीठ पर चलते हुए मुझे किश करने लगी और मैं अपने लुंड को कुछ और भी स्पीड देते हुए प्रिय को छोड़ने लगा...
अब्ब मे लुंड 6" तक्क प्रिय को छूट में फिट जाने लगा था. सारा मैंने अंदर नहीं डाला था, प्रिय की छूट अब्ब खुल गई थी, अब्ब वो लड़की से औरत बन्न चुकी थी,. तो बाकी की छूट खुलाई भी किसी टाइम कर hi लूंगा. अब्ब प्रिय को मज़ा देना ज़रूररी था....
मैंने अपनी स्पीड बधाई तो प्रिय ने भी मुझे किश करने की स्पीड बढ़ा दी. प्रिय को दर्द तो अब्ब भी हो रहा था लेकिन प्रिय अब्ब दर्द को भूल कर मेरे लुंड के मज़े लेने लगी थी. प्रिय की छूट ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. जिस वजा से मेरा लुंड और भी अच्छे से प्रिय की छूट में अंदर बहार लगा और प्रिय भी अपनी छूट के पानी की वजा से रिलैक्स हो गई थी. मेरा लुंड अब्ब प्रिय को कम् दर्द दे रहा था, अब्ब प्रिय एमजे में आने लगी थी.
प्रिय की छूट जैसे जैसे रवा हो रही थी, मेरे धक्कों की भी स्पीड बढ़ती जा रही थी.
प्रिय ने अपने पैरों को मेरे चूतड़ों पर रख लिया और उसे अपनी छूट पर दबाने लगी. प्रिय की छूट पानी छोड़ने वाली थी. प्रिय ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरी आँखों में देखने लगी..
प्रिय:- vijjjuuuuuu....hmmmmmmm अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह और तेज़ करो.. विजजूउउ लुंड का मज़ा आखिर मुझे मिल hi गया.. विजजू मैं बता नै सकती तुम्हारे लुंड ने मुझे किस दुन्या में पोहंचा दिया है... ऐसा लग रहा हिअ जैसे मैं स्वर्ग में हूँ.
विजय:- मेरी जान मैं तो तुम्हरी कुंवारी छूट में अपना लुंड दाल के तुम्हारे साथ hi स्वर्ग में हूँ... हम दोनों का मज़ा भी तो एक जैसा hi है..
जहान्वी और श्रुति भी एक दूसरे की चुटु में मोहन घुसाए लगी हुई थीं. उनसे वेट नहीं हुआ तो एक दूसरे को शांत करने में लग गयी थी.
सच में आज पहली बार छुड़ाए से मज़ा hi आ रहा था. पहली चुदाई और वो भी अपनी छोटी बहन के साथ... मेरा बड़ा लुंड और उसकी छोटी सी छूट... मेरा लुंड फस फस के अंदर बहार हो रहा था... मेरे लुंड क सुपडे पर प्रिय की छूट की वजा से कुछ खुजली सी होने लगी थी, जिस वजा से मैं मज़े की इन्तहा तक जा पोहचता था..
priya:-ahhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह siiiiiiiiiiiii हममममममममः उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ विज्जज्जुऊ मेरी जांणण और तेज़्ज़ करूऊऊ मेरिइइइइइइइइ छूट पानी वगळणे वाली हैईईईई..
हाय विजजूउ कितना मज़ा आ रहा है.....
मेरा लुंड प्रिय की छूट में ताबड़ तोड़ ढके पर धक्के लगाने में लगा हुआ था. प्रिय के हाथ मेरी पीठ पर और दोनों पेअर मेरे चूतड़ों पर कस्सणे लगे. और प्रिय की साँसे तेज़ होने लगी. प्रिय पुरे ज़ोर से मेरे चूतड़ों को दबाये हुए थी जिस वजा से मेरा बाकी का बचा लुंड भी धीरे धीरे करके पूरा hi प्रिय की छूट में घुसता चला जा रहा था, लेकिन अब्ब प्रिय ौरे मज़े में थी, जिस वजा से उसने अपने दर्द को पीछे करके के मेरे पुरे लुंड को अपनी छूट में ले लिया था,
प्रिय को दर्द तो बोहत हुआ लेकिन वो रुकी नहीं और न hi मुझे रुकने को कहा, मेरा लुंड मेरी प्रिय की बच्चेदानी से टकराने लगा था, जिस वजा से दर्द के साथ प्रिय को मज़ा भी बोहत आने लगा था, प्रिय की छूट ने पानी की बौछाड़ शुरू कर दी थी,
और मेरा लुंड प्रिय की छूट पर लगते hi धप धप की आवाज़ पैदा कर रहा था.
प्रिय की निप्पल अकड़ के मेरे सीने से चुभने लगे. प्रिय अब्ब आखरी स्टेज पर थी.. तो मैंने अपने धक्को को तूफानी स्पीड देने शुरू कर दी. प्रिय बीएड पर उछाल रही थी. जिस वजा से प्रिय की गांड बीएड पर लगते hi आवाज़ देने लगती.
पूरा बीएड hi मेरे धक्को की वजा से कहल रहा था, जहान्वी और श्रुति अपनी मस्ती में लगी हुई थीं.
प्रिय मेरे धक्कों को सहन नहीं कर पाई और झाकते खाते हुए अपनी छूट का पानी खून के साथ hi बहाने लगी....
प्रिय के झड़ते hi मैंने जहान्वी और श्रुति को देखा, तो अभी भी लगी हुई थीं. एक दूसरे की छूट चाटने में ... मैंने प्रिय को रिलैक्स होने के लिए छोड़ दिया.
मैं प्रिय के ऊपर से उठा और और जहान्वी के पीछे आ गया.. श्रुति की नज़र मुझ पर पड़ी तो उसने जहान्वी की छूट से मोहन हटा कर प्रिय को देखा. और फिर मेरे लुंड को देखने लगी. जिस पर प्रिय की छूट का पानी और खून लगा हुआ था..
श्रुति ने मेरे लुंड को पकड़ा और जाह्नवी की छूट पर रगड़ने लगी..
जहान्वी:- विजजूउ तुम यहाँ हो तो प्रिय.??
विजय:- प्रिय की छूट एक बार ठंडी हो चुकी है. अब्ब बताओ किसकी छूट खोलो. वैसे इसी पोजीशन में hi क्यों न तुम्हारी छूट में लुंड घुसा दूँ..
जहान्वी:- मारना है क्या मुझे. ऐसे तो मेरी छूट का सत्य नाश हो जाएगा....
जहान्वी उठ कड़ी हुई..
श्रुति:- जहान्वी तुम पहले विज्जू का लुंड ले लो..
जहान्वी:- पहले या बाद की बात से क्या फर्क पड़ता है. कोई भी नीचे लेट कर विज्जु का लुंड लेले....
श्रुति:- चलो विज्जू फिर तुम मेरी hi छूट पहले खोल दो..
प्रिय बेसुध पारी हुई थी. उसकी छूट खून उगल उगल कर बीएड शीट को नेहला रही थी.
मैंने श्रुति के पैरों को खोला और श्रुति के ऊपर झुक कर उसे किश करने लगा. जहान्वी ने मेरे लुंड को पकड़ कर श्रुति की छूट पर सेट किया. मेरा लुंड तो पहले से hi प्रिय की छूट के पानी से गीला था. और श्रुति की छूट को जहान्वी ने बोहत अच्छे से hi चाट चाट क्र नरम और गरम कर दिया था.. श्रुति की गीली छूट ने मेरे लूणद का वेलकम किया और खुद में सामने के लिए रेडी हो गई...
जहान्वी ने अच्छे से श्रुति की छूट के लिप्स को खोल कर मेरे लुंड को सेट कर दिए था.. मैं श्रुति को किश करता हुआ अपने लुंड को थोड़ा सा षुरूति की छूट में पुश किया, मेरा लुंड शूरति की छूट में अच्छे से फिट हो गया तो मैंने अपनी गांड को उठा कर एक नार्मल ढाका मारा जिस से मेरे लुंड का सूपड़ा षुरूति की छूट के छेड़ में फस्स गया.. मैंने किश करते हुए श्रुति की आँखों में देखा टी वो ऑंखें बंद किये लुंड को अपनी छूट में घुसने का वेट कर रही थी..
मैंने देर न करते हुए और जोर्का धक्का मारा और मेरा लुंड श्रुति की छूट की सील को तोड़ता हुआ 4" तक्क अंदर घुसता चला गया. श्रुति उछाल padi.aur मेरे होंटो से अपने होंटो को अलग करने लगी. श्रुति की आँखों से गंगा जमना बहाना शुरू कर दया था.. मैंने श्रुति को चूमना छोड़ा..
श्रुति आंसू बहती आँखों से मुझे देखने लगी...
षुरूति की सांस अखाड गई थी. मैं रुका रहा तो श्रुति को कुछ चैन मिला.
मैं श्रुति की गर्दन मो चूमने लगा और अपने हाथो से श्रुति के बूब्स को पकड़ कर हलके से दबाना भी शुरू कर दिया.
षुरूति की गार्डन पर किश करते हुए मैं श्रुति के बूब्स को भी मसलने लगा.
श्रुति धीरे धीरे शांत होने लगी तो मैंने श्रुति की गर्दन को छोड़ कर श्रुति की आँखों में देखा तो श्रुति कुछ रिलैक्स थी. मैंने श्रुति के बूब्स पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चाटने लगा. श्रुति और भी शांत होने लगी. और अपने हथु को मेरे सर्र पर रख कर मेरे बालों में उँगलियाँ चलने लगी.
मेरा लुंड शूरति की छूट में फँस चूका था. प्रिय की तरह से श्रुति की छूट भी बोहत टाइट थी. मेरे श्रुति के बूब्स को चाटने से मेरा लुंड थोड़ा सा हिला तो दर्द की वजा से श्रुति की हलकी सी चीख निकल गई..
जहान्वी:- चलो अब कितना देर लगनी है.. दर्द तो होना hi है..... मैंने और श्रुति ने जहान्वी को देखा. तो वो ललचाई हुई नज़रों से हमें देखने लगी..
प्रिय की छुड़ाए और अब्ब शूरति की चुदाई देख क्र जहान्वी बोहत गरम हो चुकी थी. श्रुति ने जहान्वी की छूट चाट कर उसका पानी नहीं निकला था. जिस वजा से जहान्वी बोहत बेक़रार दिख रही थी..
अभी उसका मैं तो कुछ करने से रहा.
माने अपने लुंड को हिलाते हुए थोड़ा सा पीछे खेंचा. तो मेरा लुंड श्रुति की छूट के मॉस को खेंचने laga....shurti की चीख निकल गई.... लेकिन मैंने अब्ब श्रुति के दर्द पर धयान नहीं दिया और अपने लुंड को सुपडे तक बहार निकल कर उतने से hi शूरति को छोड़ने लगा. 4 बार लुंड अंदर बहार हुआ तो शूरति को दर्द काम हुआ...
श्रुति अब्ब कुछ मज़े में आ गई थी.
मैंने श्रुति के पैरों को पकड़ कर एक बड़ा धक्का लगा दिया जिस से मेरा लुंड 6" तक्क श्रुति की छूट की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुस गया.
श्रुति:- aiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrrrrrr गईइइइइइइ विज्जज्जूऊऊऊ थोड़ा धीरे से नहीं कर सकते थे क्या.....
जहान्वी- अगर धीरे से करेगा तो घुसेगा कैसे.??
जहान्वी श्रुति के बूब्स को अपने मोहन में लेकर चूसने लगी. मैंने अपना एक हाथ जहान्वी की छूट पर रख दिया. जहान्वी को कुछ चैन मिला और वो अच्छे से श्रुति के बूब्स को चाटने लगी.. जब तक श्रुति रिलैक्स होती मैं जहान्वी को शांत कर सकता था. मैंने अपनी एक ऊँगली को अच्छे से जहान्वी की छूट में घुसा दिया. ऊँगली जितनी जगा तो तीनो की पहले से hi बानी हुई थी, मेरी ऊँगली को भी जहान्वी की छूट में घुसते हुए कोई परेशानी नहीं हुई. मैंने अपनी ऊँगली को जहान्वी की सील तक अंदर डाला और अपनी ऊँगली को जहान्वी की छूट में घुअमाने लगा.....
जहानीव तो पहले सही झड़ने के करीब थी. जहान्वी की छूट ने भी पानी बहाने तेज़ कर दिया. मेरा लुंड श्रुति की छूट में फंसा हुआ था और मैं जहान्वी की छूट में उंगल करते हुए उसे ठंडा करने माँ लगा हुआ था..
जहानीव की बेकरारी बढ़ी तो उसने श्रुति के निप्पल को मोहन में ले कर ज़ोर से चुस्ने शुरू कर diya..jhanvi दूसरे हाथसे श्रुति के दूसरे निप्पल को भी कुरेद रही थी... जहान्वी के म्हणत से श्रुति का दर्द ग़ायब हुआ और वो मस्ती में आने लगी.. श्रुति अपनी गांड को उठा क्र मेरे लुंड को अंदर लेने की कोशिश करने लगी. अब्ब लुंड मेरी कोशिश किये बिना तो श्रुति की छूट में अंदर बहार होने से रहा....
मैं तब्ब तक्क जहानीव की छूट को मसलता रहा जब्ब तब्ब जहान्वी झाड़ नहीं गई.. जहान्वी ने श्रुति के निप्पल को अपने मोहन से निकल दिया था. अब्ब उसका मोहन श्रुति के बूब्स के ऊपर रखा हुआ था और वो गहरी सांस ले रही थी. जहान्वी का बदन अकड़ने लगा और वो अपनी गांड को कस्सणे लगी. जहान्वी ने श्रुति का एक बूब्स कस के पकड़ लिया था. जहान्वी झड़ने लगी तो श्रुति के बूब्स जहान्वी के हाथ में ज़ोर से डब्ब गया जिस वजा से श्रुति की चीख निकल गई..
लेकिन जहान्वी शूरति की चीख से बेनियाज़ अपनी छूट का पानी निकलने में लगी हुई थी.
जहान्वी के झड़ते hi मैं अपने लुंड को देखा तो श्रुति की छूट में 6" तक्क धंसा हुआ था.
मैं अपने लुंड को धीरे धीरे श्रुति की छूट से बहार खेंचने लगा. श्रुति को दर्द हुआ लेकिन मैंने श्रुति की छूट से अपने लुंड को सुपडे तक्क बहार निकला और फिरसे धीरे धीरे अंदर डालने लगा. श्रुति की छूट मेरे लुंड को कस्सणे लगी लेकिन मैं नहीं रुका, शूरति की छूट से निकलने वाला खून मेरे लुंड से होता हुआ बीएड पर गिर रहा था.
मेरा लुंड फिरसे श्रुति की छूट में 6" घुस गया तो मैंने उसे फिरसे बहार निकल कर अंदर पुश कर दिया. 4-5 बार ऐसे करने से षुरूति की छूट मेरे लुंड के लिए फिट हो गई तो मैंने जहान्वी को श्रुति के ऊपर से हटाया और श्रुति के ऊपर झुक कर श्रुति को किश करते हुए अपने लुंड को श्रुति की छूट में इन आउट करने लगा. शूरति को दर्द तो हो रहा तह. लेकिन अब्ब श्रुति जहान्वी की बूब्स चटाई की वजा से गरम भी हो गई थी. तो उसे अब्ब मज़ा बी आने लगा था..
धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ने लगी. और श्रुति मेरे होंटो को पीने लगी..
प्रिय अब्ब कुछ रिलैक्स थी. उसे दर्द तो होना hi था. वो अपने पैरों को खोले हमारी चुदाई देखने लगी..
मैं अपने लुंड से श्रुति को पेलने में लगा रहा. मेरा लुंड श्रुति की छूट से रगड़ रगड़ कर अंदर बहार हो रहा था.. श्रुति की किश वाइल्ड होने लगी.
मेरा लुंड षुरूति की छूट में अपनी स्पीड बढ़ने लगा. और मेरे हाथ फिसलते हुए श्रुति के बूब्स पर चलने लगे. श्रुति के बूब्स सख्त होना शुरू हो गए थे , मैंने श्रुति के निप्पल को पकड़ कर हल्का सा खेंच लिया. श्रुति को और भी मज़ा आया और वो अपनी गांड को उठा कर मेरा लुंड लेने लगी..
श्रुति की सांस फूलने लगी तो उसने मुझे किश करना छोड़ दिया.. शूरति के हाथ मेरी पीच पर कस्सणे लगे..
मेरा लुंड और शर्तइ की छूट का ताल मेल बढ़िया से होने लगा और फिर श्रुति के शरीर ने भी झाट्ने खाने शुरू कर दिए. श्रुति के दोनों पेअर मेरे चूतड़ों पर आये और शूरति ने मुझे अपने हथु और अपने पैरों से मुझे कस लिया..
श्रुति के पैरों के दबाओ से मेरे लुंड को एक झटका लगा और मेरा बचा हुआ पूरा लुंड एक ज़बर्दस्त धक्का मारते हुए श्रुति की बाकी बची हुई छूट को फाड़ते हुए श्रुति की बच्चेदानी से जा टकराया.
श्रुति:- aiiiiiiiiiiiiiiii वीजजजजूउउउ अभी भी तुम्हारा कुछ बाकी था क्या..
मैं तो मर hi गई थी, इतना दर्द हुआ ...siiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhh
मज़ा भी आ रहा है और दर्द भी हो रहा है.. दोनों मिल कर कैसे अलग सा एहसास दे रहे हाँ.. और तेज़ विजजूउउउ मेरी जान,, पूरा फहद दो अपनी श्रुति की छूट को....
मेरे ढक्कू में भी तूफानी स्पीड आणि शुरू हो गई थी. जिस वजा से बीएड एक बार फिरसे अपनी आवाज़ में गुनगुनाने लगा था. मेरा पूरा hi लुंड श्रुति की छूट में अंदर बहार हो रहा था.
श्रुति:--- विजजूउउउ और तेज़्ज़ अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह ह्म्म्मम्घा उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ विज्जज्जुऊ मेरी छूट बहने वाली है... और तेज़.. और tezzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz
श्रुति बलते बोलते सिसकियाँ लेने लगी...
कुछ hi देर में श्रुति की छूट और भी टाइट हुई और फिर शूरति ने एक बड़ा झटका खाया और श्रुति की छूट ने पानी छोड़ दिया...
श्रुति तो जहान्वी की म्हणत से hi आधी झड़ने वाली हो गई थी. वो तो मेरे लुंड के उसकी छूट में घुसते hi दर्द की वजा से उसकी छूट का पानी कुछ पीछे चला गया था. वर्ण वो तो कब्ब की पानी बहा चुकी होती.....
मैंने श्रुति को भी छोड़ दिया और बीएड पर प्रिय के पास hi लेट गया. प्रिय मेरे ऊपर आई और मुझे किश करने लगी... प्रिय बोहत धीरे से मुझे किश कर रही थी. मेरे हाथ प्रिय के चूतड़ों पर चलने लगे..
जहान्वी भी अभी ठंडी हो गई थी, अभी उसे पहले कुछ गरम करना पड़ेगा फिर उसकी छूट में लुंड जाएगा...
मुझे 40 मिंट हो चुके थे अभी तक मेरा लुंड नीचे नहीं हुआ था.. होता भी कैसे असूय अभी पुरे रिधम से चुदाई करने को मिली hi नहीं थी. आज तो बास छूट खोलने का काम hi था, जब्ब पूरी तरह से खुले गई तब्ब hi पूरा मज़ा आएगा... मुझे मज़ा तो बोहत आ रहा था लेकिन बार बार रुकने से वो मज़ा नहीं आया था, हाँ टाइट छूट में लुंड फस फस कर जाते हुए बड़ा मज़ा दे जाता था..
मेरे हाथ प्रिय की गांड की दरार में चलने लगे प्रिय मुझे किश करने में लगी रही. मेरी एक ऊँगली प्रिय की छूट पर गई तो प्रिय ने मुझे किश करना छोड़ दिया..
प्रिय:- विजजू अभी मेरी छूट में बोहत दर्द है, प्लीज अभी वहां ऊँगली मैट लगाओ...
जहान्वी:- विज्जउ मेरी छूट नहीं खोलनी क्या.?
विजय:- जहान्वी पहले तो अपनी छूट को फिर से गरम तो करले.
जहान्वी अपनी टांगों को खोल कर अपनी छूट दिखते हुए.
जहान्वी:- इसे नरम और गरम तो तुमने hi करना है...
मैंने प्रिय को देखा तो प्रिय मेरे ऊपर से हट गई और मैं जहान्वी की छूट पर टूट पड़ा. कुछ देर जहान्वी की छूट में अच्छे से अपनी जीब दाल कर जहान्वी की छूट को छोड़ता रहा. जब्ब जहान्वी की छूट ने पानी छोड़ना शुरू किया तो..
मैं उठ खड़ा हुआ और जहान्वी के पैरों में आ क्र बैठ गया..
विजय:- तो जहान्वी अब्ब तुम तैयार हो अपनी छूट खुलवाने के लिए..
जहान्वी:- विज्जू अब्ब भी पूछ रहे हो. मैं तो प्रिय और शर्तइ की वजा से रुकी हुई थी वर्ण मैं खुद hi तेरे लुंड पर अपनी छूट को रख कर एक झटके में नीचे बैठ जाती. और अपनी छूट की बेकरारी ख़तम करा लेती....
इतनी आग लगी है मेरी छूट में, अब्ब देर मैट कर और पहाड़ डालो मेरी छूट को.
सालों इंतज़ार किया है इस समय के लिए...
मैंने अपने लुंड को जहान्वी की छूट पर सेट किया और जहानीव की आँखों में देखते हुए अपने लुंड को जहान्वी की छूट में पुश करने लगा. तीनो ने hi एक दूसरे की उँगलियों से अपनी छूट को कुछ खुला किया हुआ था. जाह्नवी की छूट प्रिय और श्रुति की छूट से कुछ बड़ी थी. जहान्वी की छूट के लिप्स कुछ मोठे थे. और मेरा लुंड जहान्वी की छूट में अच्छे से फिट हो गया.
मैंने एक हल्का से धक्का मारा तो मेरे लुंड का सूपड़ा जहान्वी की छूट के लिप्स को खोलता हुआ अंदर जा घुसा. जहान्वी को एक हल्का का झटका लगा. लेकिन वो चीखी नहीं. अभी मेरा लुंड थोड़ा सा hi जहान्वी की छूट में गया था. जहान्वी की छूट खुल गई और मेरा लुंड उसकी छूट में फस्स gaya...maine जहान्वी के ऊपर झुकते हुए अपने हथु को साइड में बीएड पर टिकाया और जहान्वी की छूट में अपने लुंड को पुश करते हुए एक करारा धक्का मर्डर दिया.
जहान्वी:- aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii oiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.
meriiiiiiiiii chutttttttttttttttttttt phatttttttttttttt gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.
जहान्वी चीखती हुई अपनी छूट के पहटने का एलान करने लगी लेकिन फॉर जल्दी hi जहान्वी के अपनी आवाज़ को दबा लिया.
मेरा लुंड जाह्नवी की छूट की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुस गया. जहान्वी भी लड़की से औरत बन्न गई थी. मैंने जहान्वी के चेहरे को चूमना शुरू कर दिया...
जहान्वी बीएड की शीट को कस के पकड़ चुकी थी. जहान्वी के चुत्तड़ काँप रहे थे.
जहान्वी जितनी बहादुर दिख रही थी. उतनी थी नहीं. जहान्वी को बी बहुत दर्द हुआ. और जहान्वी के लिए उसे सहन करना आसान नै रहा था. लेकिन फिर भी उसने अपने होंटो को दबा कर अपनी चीख रोक ली थी.. झावनि की ऑंखें भी गंगा जमना बहाने लगीं...
कुछ देर मैं जहान्वी के गाल को चूमता रहा और फिर मैंने जानवी के होंटो को अपने होतनो में ले कर किश करना शुरू कर दिया. मैंने अपने हाथ बीएड से हटा कर जहान्वी के दोनों दूध पर रख दिया और उन्हें हलके हलके दबाने लगा. जहान्वी
शांत होने लगी. और वो मुझे किश में रिस्पांस देने लगी..
कुछ देर में जहान्वी मेरे होंटो अपने होंटो में लिए चूसने लगी और नीचे से अपने चुत्तडों को उठा कर मेरे लुंड को हिलने लगी.. मतलब अब्ब वो दर्द को भूल कर छूट के नशे में झूलने लगी थी.
मैंने जहान्वी को ज़ादा न तड़पते हुए अपने लुंड को धीरे से जहान्वी की छूट से बहार निकला और फिरसे धीरे धीरे अंदर पुश करने लगा. मेरा लुंड जहान्वी की तंग छूट में फस फस के जाने लगा. मैं इतने लुंड से hi जहान्वी को धीरे धीरे छोड़ने लगा..
जहान्वी के चुत्तड़ मज़े और दर्द से हिलने लगे. मैं बार बार अपने लुंड को जहान्वी की छूट में अंदर बहार करने लगे, जैसे hi मुझे लगा क जहान्वी की छूट अब्ब रवां होने लगी है और जानवी भी अब्ब कुछ शांत है तो मैंने अपने लुंड को सुपडे तक बहार निकला और फिरसे एक करके शॉट मार दिया..
जहान्वी इस बार फिरसे पूरी जी जान से हिल गई..
जहान्वी ने मेरे होंटो को काटा तो नहीं बास अपने होंटो में जकड लिया ज़रूर लिया था. जहान्वी की चीख निकल नै पाई. मेरे हाथ जहान्वी के बूब्स और निप्पल पर चलने लगे...
जहान्वी मेरे नीचे तड़प रही थी. उसका बास नहीं चल रहा था क वो उठ कर कही भाग जाए, छूट के फटने का दर्द कम् भी तो नहीं होता, और जब्ब मोटा तगड़ा लुंड कुंवारी छूट में धमाके से घुस जाए तो हशर बरपा हो होना hi था.
प्रिय:- विज्जू तुम जहान्वी के ऊपर से उठ जाओ. शर्तइ भी अब्ब रिलैक्स है तो हम दोनों hi जहान्वी को शांत करती हाँ..
मैं प्रिय की बात सुन कर जहान्वी के ऊपर से उठ गया. मेरा लुंड भी जहान्वी की छूट में हिला तो ..
jhanvi:-aiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa विज्जज्जूऊऊऊ छूट के खुलने से कितना दर्द होता है................. हाआईईए मेरी छूट का दर्द..........
aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.. प्रिय कुछ करो य्र्र मेरा दर्द मुझसे सहन नहीं हो रहा... ऐसा लगा विज्जउ ने लुंड नहीं झांजर उतर दिया है मेरी छूट में ... अंदर से जब्ब छिरर्र गया है.. प्लीज प्रिय जल्दी से कुछ karo.ya विज्जू का लुंड मेरी छूट से निकालो.. हायययययी माआआआ
आपकी जहान्वी मर न जाए कही विज्जउ के लुंड से ...
जहान्वी सर्र पटखनी लगी. तो प्रिय और श्रुति ने जहान्वी के बूब्स को आपस में बाँट लिया और उसे मोहन में लेकर चूसने लगी..
प्रिय साथ में जहान्वी के पेट कर अपना हाथ भी चलने लगी..
मैं तीनो को देखने लगा, तीनो की hi छूट खुल चुकी थी. मैंने एक नज़र प्रिय की छूट को देखा तो प्रिय की छूट सूजी हुई थी. और अभी तक्क प्रिय ने अपनी छूट को साफ़ भी नहीं किया था. वो काफी देर तक्क ऐसे hi लेती रही थी. तो खून प्रिय की छूट पर सूख लगा था.. प्रिय अपनी टांगें खोले घोड़ी बानी जहान्वी के बूब्स को चाटने चूसने में लगी हुई थी..
मैंने श्रुति की छूट को देखा वो भी प्रिय जैसे पोजीशन में थी उसकी छूट भी प्रिय की छूट के जैसे hi फूली हुई थी. श्रुति की छूट पर भी खून लगा हुआ था... दोनों जहान्वी को रिलैक्स करने में लगी हुई थीं और मैं प्रिय और श्रुति की छूट को देखने में मगन था... मैंने बीएड शीट की तरफ देखा प्रिय और श्रुति की छूट से निअक्लने वाला खून बीएड शीट को नेहला चूका था.. मैंने नीचे जहान्वी की छूट को देखा तो वो भी थोड़ थोड़ा करके खून रिस रही थी.
आज मेरे लुंड ने तीनो छूटों को खोल दिया tha....meri तितलियाँ लड़की से औरत बन्न गई थीं.
मैं तीनो खुल चुकी छूटों के नज़ारे में खोया हुआ था, क मुझे जहान्वी के हिलने का एहसास हुआ, मैंने देखा तो जहान्वी अब्ब गरम हो कर अपनी चूतड़ को हिला कर मेरे लुंड के लिए मचल रही थी, मतलब अब्ब उसका दर्द मज़े में बदल गया था.
अब्ब जहान्वी छूट के खुलने के बाद लुंड का मज़े लेने के मूड में आ गई थी, मैंने थोड़ा सा अपने लुंड को हिलाया तो मेरा लुंड आराम से पीछे होने लगा. प्रिय और श्रुति की म्हणत ने जहान्वी की छूट को अंदर से काफी गीला कर दिया था.
मैंने जहान्वी के बूब्स को देखा जो अकड़ चुके थे. प्रिय और श्रुति किसी बच्चे की तरह से जहान्वी के निप्पल्स को मोहन में लिए हुए चूस रही थी. मनो दूध निकलने वाली हूँ.
मैंने जहान्वी को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. उसकी ऑंखें लाल होने लगी थी. और वो मुझे बड़े प्यार से देख रही थी....
जहान्वी:- विजजूउउ तुम्हारी जहान्वी अब्ब औरत बन गई है.... इस सबब के लिए कितना तदपि है तुम्हारी जहान्वी.. विजजूउउ ी लव यू सो मच...... तुमने मुझे भी प्रिय और श्रुति के जैसी ख़ुशी दे दी है.. मैं बोहत खुश हूँ... आज मेरे दिल की हसरत पूरी हुई.. वर्ण सालो डर्र्र्टी hi रही कही कुछ गलत न हो जाए.. लेकिन भगवन ने हम सबब को बचा लिया....
विजय:- मेरी तितली पुराणी बातों को क्यों याद करती है. अब्ब अच्छे दिन आये हाँ तो बुरे दिनों को भूल कर अच्छे दिनों के मज़े लो..
जहान्वी:- वही तो कर रही हूँ. विज्जउ अब्ब मेरी छूट में दर्द नहीं है. तुम अपने लुंड को अंदर बहार करो.. अब्ब मुझसे सहन नहीं हो रहा है..
मैंने भी जहान्वी के दिल की हसरत को पूरा करने के लिए अपने लुंड को सुपडे तक बहार निकला और फिर से जहान्वी की छूट में डालने लगा. मेरा लुंड फस फस के जा रहा था. मैंने जाह्नवी की देखा तो उसके चेहरे पर कोई दर्द नहीं था..
मैंने फिर धीरे धीरे अपने लुंड को जहानीव की छूट में अंदर बहार करने लगा.
कुछ देर में जहान्वी की छूट और भी पानी छोड़ने की वजा से मेरे लुंड के लिए कन्फोर्ताब्ले हो गई. तो
विजय:- प्रिय श्रुति जहान्वी क बूब्स को सारा hi निचोड़ना है क्या. अब्ब उठो ऊपर से नेक्स्ट लेवल अब्ब शुरू होने वाला है...
प्रिय और श्रुति ने जहान्वी के बूब्स को छोड़ा तो दोनों की ऑंखें भी लाल होने लगी थी.. जहान्वी को शांत करने के चक्कर में अपनी छूट को फिरसे जेल कर चुकी थीं...
मैंने जहान्वी के ऊपर आ कर लेट गया और जहान्वी ने मेरे सर को पाकर कर मेरे होंटो को अपने होंटो में ले लिया, और पुरे मज़े से मेरे होंटो को पीने लगी.
जहान्वी की छूट बोहत फड़फड़ा रही थी. जहान्वी अब्ब चाहती थी क मैं फुल स्पीड से उसे छोड़ों. मेरा लुंड भी अब्ब पुरे मज़े के लिए मूड में आ गया था. जितनी देर इसके जहदने में लग्ग गई थी, वो भी बेचैन हो गया था..
मैं जहान्वी पर झुका हुआ जहान्वी की छूट को खोलने में लग गया...
कुछ देर में मेरा लुंड जहान्वी की छूट में अपनी तूफानी स्पीड से घुस रहा था. मेरा लुंड अब्ब सिर्फ 2" hi जहान्वी की छूट से बहार था..
5 मिंट में hi जहान्वी की साँसे उखाड़ने लगी तो उसने मुझे किश करना छोड़ा
और तेज़ सांस लेते हुए अपनी छूट में मेरे लुंड को फील करने लगी.... जहान्वी ने बी अपने पेअर मेरे चुत्तड़ पर रख लिए थे.
जहान्वी का चेहरा मज़े के कारन खिला पड़ा था..
जहान्वी चार्म के करीब पोहंची तो मेरा लुंड भी जहान्वी की छूट में पूरा घुसने माँ मैं बनाने लगा. और मैंने भी अपने लुंड की सुन्नते हुए एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरा लुंड जहान्वी की बच्चेदानी से जा टकराया.. जानवी पूरी जान से हिल गई.
लेकिन छूट के मज़े के कारन वो खुद पर काबू पा गई और मेरा लुंड जहान्वी की छूट की साड़ी hi दीवारों को चीरता हुआ रेगुलर पूरी स्पीड से जहान्वी की बच्चेदानी से टकरा आकर वापिस आता और फिरसे अंदर जा घुसता ....
बीएड का साउंड फिर से शुरू हुआ और जहान्वी के चुत्तड़ भी बीएड पर पटकने लगे..
मैं कुछ और भी जहान्वी पर झुक गया जिस वजा से जहान्वी की गांड कुछ हवा में उठ गई.
मेरा लुंड भी अब्ब पूरी तरह से फुल चूका था. मेरा लुंड भी अपने चार्म पर पोहचने वाला था, जिस वजा से मेरी स्पीड औरर भी तेज़ होने लगी... जहान्वी दोहरी हो गई थी लेकिन उसने कुछ कहा नहीं. बोली तो बास सिर्फ इतना hi
जहान्वी:- haaaaaaaaaaaaaaayeeeeeeeeeeeeeee vijjjjjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuu....
hmmmmmmmmmmmmhhhhhhhhh siiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhh
hayyyyyyyyyyeeeee ufffffffffffffffffff वीजजजजजूउउउउउउ मज़ा hi आ गया.....
और तेज़ एक्रो करों.. पहाड़ दो पूरा हजी अपनी जहान्वी की छूट को सालों तक बड़ा तंग किया हिअ इसने...............
मेरी भी सांस तेज़ हो गई थी. और मेरा खून मेरी पूरी बॉडी से निचोड़ कर मेरे लुंड में इकठा होने लगा था. मेरा लुंड और फूलने लगा जो जहान्वी की तंग छूट को और भी खुला कर रहा था.. मेरा इतना मोटा लुंड तीनो की hi तंग छत को खोल चूका था.....
जहान्वी:- vijjjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu मैं झाड़नीीीे वाली हुन्न्न्नन्न्न्नन ....... ohhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhh siiiiiiiiiiiiii
फ़ास्ट विज्जज्जुऊ फ़ास्ट और फ़ास्ट ..........
जहान्वी तेज़ सांस लेते हुए झड़ने लगी. लेकिन मैं नहीं रुका... जहान्वी के झड़ने से मेरे लुंड को जहान्वी की छूट में और भी आसानी होने लगी. और मेरी स्पीड बढ़ गई..
सच कहूँ तो आज मेरा सही मानो में टेल निकल गया था... इतना टाइम मैंने पहले कभी नहीं लगाया था, और न hi मेरा लुंड पहले कभी इतना तरसा था..
जानवी झड़ने के बाद मेरे धक्को को सहन नहीं कर पाई और मुझे खुद से अलग करने लगी. लेकिन मैं लास्ट स्टेज पर था, अब्ब तो मैंने रुकने वाला था था..'
जहान्वी:- विजजूउउउ हटो मेरे ऊपर से मेरी कहत में बोहत जलन होने लगी है.
प्रिय:- जहान्वी कुछ देर रुकू देख नहीं रही, विज्जू भी झड़ने वाला है. अगर अब्ब उसे रोका तो उसे परेशानी हो गई...
जहान्वी मेरे नीचे तड़प रही थी. लेकिन मेरा ख्याल करते हुए अपनी छूट में मेरे लुंड को शांत होने की परमिशन देने लगी..
जहान्वी को परेशानी तो थी, और मैं तो अब्ब खुद को भूल कर अपने लुंड के कब्ज़े में चला गया था. अब्ब साडी गेम hi मेरे लुंड के हाथ मेथी और मैं तूफानी ढ़ाके लगता हुआ जहान्वी की छूट में अपने लुंड को अंदर बहार ाकरने लगा..
ज़यादा समय नहीं लगा और मेरा लुंड जहान्वी की छूट में अपना लावा उंगलने लगा.
मैं जहान्वी के ऊपर से गिर गया मेरी सांस बोहत तेज़ चल रही थी. जहान्वी को बोहत परेशानी हुई थी. उसकी कमसिन छूट आज hi तो खुली थी और मैंने उसकी धज्जियां उदा दी थीं.
जहान्वी मेरे सर्र के बालों में उँगलियाँ फेरने लगी.. श्रुति मेरे चूतड़ों पर अपना हाथ रखे हुए घूमने लगी और प्रिय मेरी पीठ को सेहला रही थी.
और मैं, मैं जहान्वी के ऊपर गिरा हुआ अपनी सांस बहाल कर रहा था.
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शंकर गैंग का एक hi दिन और रात में सफाया हो जाना दिल्ली सिटी के दो दूसरे गैंग्स के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था.
दोनों गैंग्स hi जानते थे क शनकर किसी भी तरह से उनसे कम् नहीं था. शंकर जितना चालक था उससे बढ़ कर वो कमीना और दरिंदा सिफत भी था. किसी को माफ़ करना उसकी आदत नहीं थी. इसलिए दूसरे गैंग्स वाले अगरचे शंकर गैस से दररते नहीं थे लेकिन पन्गा लेने से वो कटरे थे. कभी कभी एक दूसरे की डील के लिए कभी कोई पन्गा हो जाया करता था, लेकिन फेस 2 फेस कभी भी सहांरक गैंग से वो भिड़े नहीं थे.
अब्ब इतने पॉवरफुल गैंग को चाँद घंटों में hi साफा इ हस्ती से मिटा दिया गया था. ये बात दोनों गैंग्स के लिए भी खतरे की घंटी बन गई थी.
दिल्ली में बच रहे दोनों गैंग्स ने आपस में मीटिंग की और आने वाले खतरे को ले करके बोहत सी बातें भी हुई. दोनों का आपस में इत्तफ़ाक़ नहीं था. लेकिन कोई अगर उन दोनों के रहते दिल्ली पर कब्ज़ा जमाना चाहेगा तो वो दोनों गैंग्स कैसे ये बर्दाश्त कर सकते थे.
शंकर गैंग्स के ख़तम होने से उन्हें फायदा तो बोहत हुआ लेकिन, जिसने शंकर गैंग को ख़तम किया, उसके बारे में सोच कर दोनों गैंग्स भी परेशां थे..
कही शंकर गैंग के बाद उनका नंबर तो नहीं आने वाला..
सबब मिल बैठ कर उन्हें ढूंढ़ने के लिए प्लान बनाने लगे और अगर वो दोनों को खतम्म करने पर उतर आये तो कैसे उसका खत्म किया जा सकता है.. इसपर बातें होती रहीं
गैंग...1
किशन Arora:age:48
अलोक Nath:age:43
किशन अरोरा और अलोक नाथ में मिलकर गैंग खड़ा किया था, अलोक नाथ एक बिजनेसमैन था तो किशन अरोरा एक गुंडा, दोनों ने मिलकर अपनी गैंग बनाई तो अघा नाम का एक गुंडा भी इन दोनों में शामिल हो गया, जिसका नाम बोहत चल रहा था दिल्ली सिटी में, अघा के इस गैंग में शामिल होते hi गैंग बोहत अच्छे से खुद को मनवाने लगा. अघा एक अच्छा फाइटर था, और उसका इस दुन्या में कोई नहीं था.
किशन और अलोक ने अघा को अपने साथ मिला लिया. अघा को सबब कुछ मिलने लगा तो अघा ने भी दिल से दोनों का साथ देने लगा. अघा को गैंग में तीसरी पोजीशन मिल गई जिससे वो खुश हुआ.
agha.....age:37
अघा ने शादी नै की. गैंग में आने से पहले बुरा काम तो करता hi था लेकिन गैंग्स में पावर मिलने से वो एक घटिया इंसान बन कर रह गया. हर तरह के बुरे काम बड़े शोक से करने लगा... बाद करैक्टर और डेरिंग में ये किशना और अलोक से कहीं आगे निकल गया. लेकिन पैसों के लिए लालच इसके दिल में नहीं है, पैसा तो वैसे भी गैंग में रहते कही से भी हासिल किया जा सकता था.
गैंग्स को चलने के लिए अलोक ने पैसा दिया था, जो किशन ने अलोक से मिलकर गैंग कड़ी की लेकिन आने वाले वक़्त में अघा का नाम इस गैंग में सबब से बड़ा होने लगा. किशन और अलोक को अघा से कोई परेशानी नहीं थी. अघा अक्सर खुद में hi मगन रहता था. धोके करना उसकी फितरत में नहीं था..
अजीब करैक्टर था अघा का भी...
सिद्धार्त nath:age:21
अलोक नाथ का भाई है....
कॉलेज में लीडर तो नहीं है, लेकिन लीडर इसके आगे पीछे घुमते रहते हाँ. इसकी वजा से पुरे कॉलेज का माहौल ख़राब है, ड्रग्स स्टूडेंट में बेचता हाँ. और लड़कियों के लिए तो बोहत hi घटिया विचारों का मालिक है..
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गैंग...2
महेंद्र singh:age:35
जितेंद्र singh:age:33
दोनों भाई हाँ और अपने बाप के बाद अपने गैंग को चला रहे हाँ. इनका गैंग दिल्ली का पहला ऐसा गैंग है, तो पिछले 20 साल से दिल्ली पर राज क्र रहा है. 20 सालों में कई गैंग्स ए और कई गए, लेकिन महेंद्र सिंह गैंग वही का वही खड़ा रहा......
इनके दो ख़ास दोस्त हाँ...
अनूप Kumar:age:34
dany:age:33
दोनों hi इंटेलगेट और ज़बरदस्त फाइटर हाँ. चरों hi कॉलेज फ्रेंड्स रहे हाँ किसी दौर में..... बाद में चरों hi मिलकर गैंग को चलने लगे...
महेंद्र सिंह का बाप कुछ साल पहले एक हमले में मारा गया था.. तब्ब से hi दोनों भाई इस गैंग को चला रहे हाँ..
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भारत bhushan:age:50
दिल्ली के एक एरिया का मला है, और इसके साथ कुछ और बुसिनेस्स्में थे जो शंकर गैंग से कनेक्टेड थे. लेकिन शंकर गैंग के ख़तम होते hi खुद के लोस्स को भूल नहीं पा रहे हाँ.
मला का कनेक्शन भी दूसरे दोनों गैंग्स से है. एरिया का फर्क है. लेकिन धंदे एक hi हाँ...
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दोनों गैंग्स और मला शंकर गैंग के ख़तम होने से रोज़ hi मीटिंग कर रहे थे. और खुद के लिए आने वाले खतरे को ले के hi बातें होती रहती थीं..
मला ने भी बड़ा ज़ोर लगाया था वो जान ले क शंकर गैंग को ख़तम करने में किसका हाथ है. लेकिन कमिश्नर ने किसी को भी हवा तक लगने नहीं दी...
सीक्रेट मिशन कह कर सबब को hi ताल दिया..
कम अच्छे इंसान थे. इन्हे भी सबब अभी तक सही से नहीं बताया गया था.
तो फिर किसी और को कैसे बताया जा सकता था..
पैलेस को ले के भी किसी किसम का कोई ऐसा क्लू नहीं छोड़ा गया था, जिस से किसी को शक हो क पैलेस को खुद के कब्ज़े में करने क लिए हर्ष चौहान ने कोई गेम तो नहीं प्लान किया था. लेकिन कही से भी इस बात का कोई िश्रा तक नहीं मिला...
हर्ष चौहान की पूरी लाइफ hi साफ़ थी.. कही भी हर्ष चौहान को ले के कुछ गलत सुनने में नहीं आया था..
सभी तमक तोइयाँ मरने में लगे हुए थे........
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जहान्वी ने मेरा और प्रिय का पानी निकल दिया था, लेकिन वो खुद बोहत बेचैन हो गई थी, हालत तो श्रुति की सही नहीं थी, श्रुति से सबर नहीं हुआ और मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर मेरे लुंड पर झुक गई... जहान्वी के हिस्से का बचा कुछ वीर्य श्रुति मेरे लुंड पार्स चाट कर साफ़ करने लगी और अपनी पियास बुझाने लगी
प्रिय अब्ब रिलैक्स हो गई थी, तो जहान्वी अपनी छूट को ठंडा करने के लिए प्रिय के मोहन पर अपनी छूट रख क्र बैठ गई, प्रिय भी जहान्वी की छूट की तड़प को समझते हुए उसे ठंडा करने में लग गई
श्रुति मेरे लुंड को मोहन में लेकर चूस रही थी, श्रुति की स्पीड बढ़ने लगी थी, मैं भी श्रुति को मज़ा देने लगा, श्रुति की छूट जो पानी बहा रही थी वो मैं अपनी जीब से चाटने लगे. श्रुति की सिसकियाँ उसके मोहन में hi डब्बने लगीं.
अलग अलग छूट चाटने में मज़ा hi कुछ और होता है, और यहाँ तो मेरी तितलियों की चिकनी छूटें थी मज़ा तो आना hi था, आज ख़ास तीनो ने hi मापनी अपनी छूट को मेरे लिए चमकाया था.
मेरा अंदर आज खिला खिला था, अभी तो ये किसी की छूट में भी नहीं गया था और मैं मज़े की हसीं वादियों में खो गया था.
श्रुति मचलने लगी फिर वो एक हाथ से मेरे लुंड को मसलते हुए ज़ोर ज़ोर से मेरे लुंड को मोहन में लिए चूसने लगी, श्रुति की म्हणत से मेरा लुंड फिरसे कहद होने लगा, श्रुति की तड़प बढ़ती तो व ो मेरे लुंड को अपने मोहन से निकल आकर सिसकियाँ लेने लगती...
षुरूति अपनी छूट पर मरे जीब से तड़पने lagi.uski स्पीड मेरे लुंड पर बढ़ने लगी.
उधर प्रिय भी जहान्वी की छूट में अपनी जीब घुसए हुई थी, और जहान्वी अपने बूब्स को पकड़ कर दबा रही, जहान्वी की बर्दाश्त ख़तम होने लगी तो वो अपने निप्पल्स को मरोड़ने लगी. प्रिय की जीब बड़ी तेज़ी और महारत से जहान्वी की छूट में गर्दिश कर रही थी, और जहान्वी अपने सर्र पीछे किये अपने निप्पल को मरोड़ने में लगी हुई थी..
जहान्वी:- हम्मम्मम्मम्हा प्रिय मेरी जान, और तेज़ चाटो, अपनी जीब को मेरी छूट में पूरा hi घुसा दो, प्रिय तुम्हारी जीब बोहत गरम हममममममममः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सीईईई
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ प्रिय और तेज़ और तेज़.. मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है,
उफ्फ्फ आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह सीईईई हाय प्रिय तुम कितना मज़ा देती हो..
जहान्वी सिसकियाँ लेते हुए अंतिम सीमा तक जा पोंछी और प्रिय की छूट पर धप से गिर गई.
प्रिय:- कमीनी मेरी छूट का क्यों कचूमर निकल रही है..
जहान्वी सुनंने की हालत में hi कहाँ थी.
हालत तू श्रुति की भी सही नहीं थी. वो भी मेरे लुंड को थामे हुए अपनी छूट की चटाई का मज़ा ले रही थी. मेरे लुंड को खड़ा करने के बाद अब्ब शूरति उसे कस के पकडे हुए अपनी छूट में मेरी जीब को पूरी तरह से फील कर रही थी.
श्रुति की भी सिसकियाँ चरम पर थीं..
श्रुति:- विज्जज्जूऊऊऊ.. yesssssss..yesssssss.. हम्मम्मम्हा... ahhhhhhhh..ohhhhhh
विज्जु मेरे चुत्तडों को और खेंच क्र छतो.. पूरी जीब घुसा दो मेरी कब्ब से तड़प रही छूट में..... मेरी छूट भी रोने वाली है.. ओह्ह्ह
vijjjjjjuuuuuuuuuu मेरी जाएं तुम कितना मज़ा देते हो. सालों तक इंतज़ार किया तुम्हारे प्यार के लिए .. और तेज़ विजजूउउ ohhhhhhhhhh मैं gaiiiiiiiiiiiiii.
शूरति मेरे लुंड पर ागरम साँसे छोड़ते हुए झड़ने लगी.. शरई की छूट का पानी मेरे मोहन में जाने लगा और मैं अपनी तितली की छूट का पानी मज़े से पीने लगा......... जितनी देर में श्रुति शांत हुई तब तक उसकी छूट भी साफ़ हो चुकी थी..
प्रिय:- jhanvi,shruti पहले विज्जु का लुंड कौन लेगी...
जहान्वी:- इसमें पहले वाली कौनसी बात है, जो भी पहले लेले, मिलना तो सभी को hi hai.aaaj छूट तो सबब की hi फटेगी.. जितना मोटा और लम्बा लुंड है विज्जू का पहले घुसे किसी की छूट में या बाद में दर्द से जान तो सबब की hi निकलेगी..
श्रुति:- हाँ प्रिय छूट तो कुछ hi देर में सभी की फटने hi वाली है तो पहले और बाद में, वाला चक्कर तो है नहीं, और रही बात दररने की तो छूट पहले फटे या बाद में दर्द तो तीनो को hi होगा..
प्रिय;- तो विज्जु का लुंड पहले मैं ले लून..
jhanvi,shruti:- हाँ तुम लेलो तब्ब तक्क हम भी देख लेंगी क विज्जु कैसे पहली बार किसी की छूट में घुसता है....
प्रिय झट से बीएड पर सही पोजीशन में लेट गई अउ मुझे देख कर मुस्कुराने लगी..
विजय:- हाय मेरी तितली तो छूट खुलने के लिए बड़ी खुश दिख रही है.
प्रिय:- और नहीं तो क्या, कब्ब से इस सबब के लिए तो तरस रही थी.. लड़की से औरत बनने के लिए कब्ब से hi तो इंतज़ार कर रही थी हम तीनो, कोठे ार रहते हुए कितनी hi बार लुंड को छूट में घुसते हुए देखा है, और लास्ट के तो कुछ महीने तो हम तीनो की hi छूट तरस hi गई थी पानी निकलने के लिए.
बोहत आग हम तीनो की hi छूट के अंदर स्टॉक हो चुकी है.
अब्ब बातें छोड़ो और जल्दी से अपना लुंड मेरी छूट में घुसा क्र वो आग बहार निकालो... अभी पता नहीं मुझे कितना दर्द होने वाला है, आग बुझाने के चक्कर में आज बोहत बुरा हशर होने वाला है....
मुझे भी प्रिय की बात सही लगी, एक तो मेरा लुंड बोहत बड़ा था और दूसरा प्रिय की छूट पहली बार खुलने जा रही थी, ऊँगली लेने से तीनो की hi छूट कुछ खुल चुकी थी लेकिन ऊँगली और लुंड में फर्क होता है, और मेरा लुंड तो मोटा भी बोहत था, प्रिय के लिए और बाकी दोनों के लिए ये रात मज़े की तो थी hi लेकिन दर्द भरी चुदाई भी होनी कन्फर्म थी, एक बार तो तीनो की hi हालत पतली होने वाली थी..
मैंने जहान्वी और श्रुति को देखा.. और प्रिय को देख कर प्रिय की छूट के सामने जा कर बैठ गया.
प्रिय मुझे डिफ्रेंटेंट एक्सप्रेशन से देखने लगी, एक्ससिटेड तो वो थी hi लेकिन छूट खुलने की फीलिंग के साथ दर्द के भाव भी एडवांस में hi मेरी प्रिय के चेहरे पर दिख रहे थे., मैंने प्रिय को एक स्माइल दी और प्रिय के पैरों को पर साइड में पहला दिया.
जहान्वी:- चलो विजय अब्ब देर न करो दाल दो प्रिय की छूट में अपना लुंड...
इतना बोल कर जहान्वी प्रिय के बूब्स को पकड़ कर हल्का सा दबाने लगी, प्रिय एक्ससिटेड तो पहले से ह थी, और फिर मेरे खड़े लुंड को रूलर hi टुकर टुकर देख रही thi...priya की साँसों में थोड़ी सी हलचल होने लगी.. प्रिय के बूब्स जहान्वी के हाथ में मचलने लगी जहान्वी प्यार से प्रिय के बूब्स को अपनी उँगलियों से दबने लगी.
मैंने अपने हाथ से अपने लुंड को पकड़ कर प्रिय की छूट के लिप्स में घुसा दिया.
प्रिय की छूट के लिप्स मेरे लुंड के घुसते हे खुल गए. और मेरे लुंड प्रिय की छूट के छेड़ में फस्स गया, फिंगरिंग की वजा से प्रिय की छूट से कुछ कुछ खुली हुई थी जिस वजा से मेरे लुंड का सूपड़ा कुछ ज़ोर देने से प्रिय की छूट में फस्स चूका था.
मैंने प्रिय फिर प्रिय के पैरों को पकड़ कर एक ज़ोर का धक्का मार दिया. प्रिय की चीख निकल गई..
प्रिय:- aiiiiiiiiiiiiiiiiiii vijjjjjjjjuuuuuuuuuuuuu maarrrrrrrrrrrrrrrrr
gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii..
मैं अपनी तितली को ज़यादा दर्द नहीं देना चाहता था, इसलिए खुद देर रुके का सोचा, मेरा लुंड प्रिय की छूट की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुस चूका था, जो प्रिय के लिए सहन करना आसान नहीं था, मेरी प्रिय मारे दर्द के चीखने लगी.
श्रुति भी दूसरी साइड हो कर प्रिय के ढूढ़ को मोहन में लेकर चूसने लगी..
जहान्वी तो पहले से hi प्रिय के बूब्स को दबा रही थी. दोनों मिल कर प्रिय प्रिय के दर्द को कम् करने लगीं.
कुछ देर में प्रिय कुछ शांत हुई तो
जहान्वी:- विज्जू तुम्हरा लुंड कैसे प्रिय की छूट में फंसा हुआ है. प्रिय को तो बोहत दर्द हो रहा होगा.. देखो प्रिय की छूट कितनी हल गई है.
जहान्वी:- प्रिय तुम ठीक हो ना.
प्रिय ने आंख खोल कर जहान्वी को देखा और एक दर्द भरी मुस्कान देते हुए सर्र न में हिलने की कोशिश करने लगी..
जहान्वी:- विजजू मुझे लगता है प्रिय को दर्द नहीं हो रहा तुम ऐसा करो, क पुरे ज़ोर से एक धक्का और लगाओ.
प्रिय जहान्वी की बात सुनते hi ..
प्रिय:- जहान्वी कमीनी मेरी जान निकलवानी है क्या..... विजजू प्लीज अभी कुछ देर रुको, सच में मैं बता नहीं सकती मेरी क्या हालत हुई है... वैसे विज्जू तुम्हारा लुंड मेरी छूट में गया कितना है..
जहान्वी:- hehehehehe..vijjjuuu इसे सही मैट बताना वर्ण ये डर जाएगी...
विजय:- प्रिय मेरी जान तुम डरो नहीं मैं धीरे से hi करुगा. मैं भला क्यों तुम्हे दर्द देने लगा. ये तो जहान्वी तुम्हे परेशान कर रही है...
प्रिय:- विजजूउ धीरे से अपने लुंड को हिला कर चेक करना.
मैंने प्रिय की बात सुन कर अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा...
प्रिय:- aiiiiiiiiiiiiii विजजूउ अभी रुकू.. मुझे ऐसे लग रहा है जैसे मेरी छूट के अंदर का मॉस भी तुम्हारे लुंड से चिपक कर बहार निकल जाएगा..
विजय:- बहार निकाल कर क्रीम लगा लून..
प्रिय:- ओह्ह्ह्हह्ह विजजूउ पहले क्यों नहीं बताया था...
जहानीव;- नहीं विज्जू रहने दो.. ऐसे hi हम तीनो तुम्हरा लुंड अपनी छूट में लेंगी.. क्रीम लगाने से पूरा मज़ा नहीं आएगा..
प्रिय:- लेकिन जहान्वी इससे तो सच में बोहत दर्द होगा..
जहान्वी:- प्रिय इसी दर्द के लिए तो हम सालों से बेचैन हाँ. आज पूरा मज़ा और पूरा दर्द लेंगी..
श्रुति:- विज्जू क्या ऐसे hi बातों में रात काटनी है, एक जोर्का धक्का लगाओ और पूरा दाल दो.. अभी दो छूट और भी तो हाँ खुलने की इंतज़ार मेंफिर. कितना देर लगाओ गे..
जहान्वी:- हाँ विज्जु अब्ब देर न करो. अगर तुम हमारे दर्द को hi सोचते रहोगे तो कर ली हम चरों ने चुदाई. दर्द तो कुछ देर में खुद hi काम हो hi जायेगा...
प्रिय लाचारी से जहान्वी को देखने लगी.. एक्ससिटेमेंट में आ कर पहले छोड़ने का मैं तो बना लिया था प्रिय ने लेकिन अब्ब छूट के फटने से सोचने लगी क पहले क्यों लुंड ले लिया. बाद में भी तो लिया जा सकता था..
मेरा लुंड प्रिय की छूट में 3.5" जा चूका था और प्रिय की छूट का लॉक पूरी ातरः से चकनाचूर हो चूका था. प्रिय ऐसे hi तो नहीं तदपि थी. जब मैंने अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा तो प्रिय की टाइट छूट से छोड़ा से खून भी निकलना शुरू हो गया था.
मेरी प्रिय की छूट का उदघाटन हो चूका था, मेरी प्र्रिया मेरे hi लुंड से लड़की से औरत बन चुकी थी.
मैंने अपने बाकी लुंड को थोड़ा सा और हिलाया और प्रिय के पैरों को कस के पकड़ लिया.
मैंने प्रिय की छूट को और भी अच्छे से खोलने के लिए एक करारा शॉट मार दिया.
प्रिय पूरी जान से हिल गई...
प्रिय:- aiiiiiiiiiiiii विज्जज्जूऊऊऊ मैं marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiii... विज्जू ने मेरी छूट में चाकू इतर दिया.. हाय मा आपकी लाड़ली प्रिय की छूट पूरी खुल गई.. आपके hi बेटे ने अपनी बेहेन की छूट पहाड़ डाली...
प्रिय की बात सुन कर श्रुति और जहान्वी हस्सन लगीं
और अप्रिय हलकी आवाज़ से रोने लगी.
मेरा लुंड मेरी प्रिय की छूट की दीवारों को चीरा हुआ 6" तक्क अंदर चला गया था. जितना मोटा था मेरा लुंड प्रिय की छूट उतनी hi तंग थी. ऐसे चीख तो फिर निकालनी hi थी.
जहान्वी:- प्रिय रो तो रही है, लेकिन देखा नहीं वो सहन भी कर गई है. वर्ण उसकी चीख से रूम न गूँज उठता...
श्रुति और जहान्वी प्रिय के बूब्स को मोहन में लेते हुए चूसने लगी.
मैं प्रिय का चेहरा देखने लगा.
प्रिय क आंसू बहते हुए नीचे गिरने लगे, मुझे अपनी प्रिय पर बोहत प्यार आया.
लेकिन ये दर्द तो तीनो क नसीब में लिखा जा चूका था.....
मैं अपने लुंड किओ हिलाये बिना अपनी प्रिय को देखने लगा. और jhanvi,shrtui प्रिय के बूब्स और निप्पल को चूसने में लगी रहीं.
प्रिय के आंसू तो नहीं रुके लेकिन अब्ब वो शांत हो गई थी.. वो मुझे देखने लगी. प्रिय के दोनों hi बूब्स जहान्वी और श्रुति के मोहन में थे . जिस वजा से प्रिय कुछ शांत हो गई थी. मेरे रुके रहने से प्रिय का दर्द और भी कम् हुआ, तो प्रिय अब्ब मुझे बोहत hi प्यार से देख रही थी...
प्रिय:- विजजूउउ, ी लव यू.. विजजूउउ तुमने मुझे वो ख़ुशी दे hi दी, जिस की तमन्ना सालों से थी, मैं तुम्हे कैसे बताओ विज्जु मैं कितनी खुश हूँ, मेरा अंदर मैं आज झूमने लगा है..
विजय:- मुझे भी तो उतनी hi ख़ुशी मिल रही है प्रिय , जितनी तुम्हे हो रही है, आखिर हम हाँ तो एक hi.
प्रिय:- विज्जउ अब्ब तुम अपने लुंड को धीरे से पीछे खेंचो...
मैं प्रिय की आँखों में देखता हुआ अपने लुंड को पीछे खेंचने लगा, प्रिय की छूट ने मेरे लुंड को कस के पकड़ा हुआ था, खेंचने से प्रिय को दर्द होने लगा, तो प्रिय ने अपने होंटो को आपस में दबा कर मुझे मेरा काम जारी रखने को कह दिया... मैंने भी अपने लुंड को प्रिय की छूट से धीरे धीरे करके पीछे खेंचा, प्रिय की छूट से खून निकलने लगा, मेरा लुंड सुपडे तक बहार निकल आया तो मैंने ने फिरसे से उसे धीरे धीरे करके अंदर घुसा दिया. 2 - 3 बार ऐसा करने से hi लुंड को प्रिय की छूट में कुछ आसानी होने लगी और वो किसी हद तक आराम से जाने लगा.
प्रिय:- विज्जउ थोड़ा सा अपनी स्पीड बढ़ाओ.
मैंने अपने लुंड को थोड़ा सा स्पीड देते हुए प्रिय की छूट में अंदर बहार करने लगा, मेरा लुंड प्रिय की छूट को खोलता हुआ 5" तक अंदर बहार होने लगा..
प्रिय को शांत देख कर जहान्वी और श्रुति पीछे हैट गईं.
प्रिय:- विज्जू मेरे ऊपर आ जाओ. और मुझे किश करते हुए छोड़ो...
मैंने प्रिय की बात मानते हुए प्रिय के ऊपर झुक कर प्रिय के होंटो को अपने होंटो में ले लिया..
प्रिय अपने हाथो को मेरी पीठ पर चलते हुए मुझे किश करने लगी और मैं अपने लुंड को कुछ और भी स्पीड देते हुए प्रिय को छोड़ने लगा...
अब्ब मे लुंड 6" तक्क प्रिय को छूट में फिट जाने लगा था. सारा मैंने अंदर नहीं डाला था, प्रिय की छूट अब्ब खुल गई थी, अब्ब वो लड़की से औरत बन्न चुकी थी,. तो बाकी की छूट खुलाई भी किसी टाइम कर hi लूंगा. अब्ब प्रिय को मज़ा देना ज़रूररी था....
मैंने अपनी स्पीड बधाई तो प्रिय ने भी मुझे किश करने की स्पीड बढ़ा दी. प्रिय को दर्द तो अब्ब भी हो रहा था लेकिन प्रिय अब्ब दर्द को भूल कर मेरे लुंड के मज़े लेने लगी थी. प्रिय की छूट ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. जिस वजा से मेरा लुंड और भी अच्छे से प्रिय की छूट में अंदर बहार लगा और प्रिय भी अपनी छूट के पानी की वजा से रिलैक्स हो गई थी. मेरा लुंड अब्ब प्रिय को कम् दर्द दे रहा था, अब्ब प्रिय एमजे में आने लगी थी.
प्रिय की छूट जैसे जैसे रवा हो रही थी, मेरे धक्कों की भी स्पीड बढ़ती जा रही थी.
प्रिय ने अपने पैरों को मेरे चूतड़ों पर रख लिया और उसे अपनी छूट पर दबाने लगी. प्रिय की छूट पानी छोड़ने वाली थी. प्रिय ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरी आँखों में देखने लगी..
प्रिय:- vijjjuuuuuu....hmmmmmmm अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह और तेज़ करो.. विजजूउउ लुंड का मज़ा आखिर मुझे मिल hi गया.. विजजू मैं बता नै सकती तुम्हारे लुंड ने मुझे किस दुन्या में पोहंचा दिया है... ऐसा लग रहा हिअ जैसे मैं स्वर्ग में हूँ.
विजय:- मेरी जान मैं तो तुम्हरी कुंवारी छूट में अपना लुंड दाल के तुम्हारे साथ hi स्वर्ग में हूँ... हम दोनों का मज़ा भी तो एक जैसा hi है..
जहान्वी और श्रुति भी एक दूसरे की चुटु में मोहन घुसाए लगी हुई थीं. उनसे वेट नहीं हुआ तो एक दूसरे को शांत करने में लग गयी थी.
सच में आज पहली बार छुड़ाए से मज़ा hi आ रहा था. पहली चुदाई और वो भी अपनी छोटी बहन के साथ... मेरा बड़ा लुंड और उसकी छोटी सी छूट... मेरा लुंड फस फस के अंदर बहार हो रहा था... मेरे लुंड क सुपडे पर प्रिय की छूट की वजा से कुछ खुजली सी होने लगी थी, जिस वजा से मैं मज़े की इन्तहा तक जा पोहचता था..
priya:-ahhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह siiiiiiiiiiiii हममममममममः उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ विज्जज्जुऊ मेरी जांणण और तेज़्ज़ करूऊऊ मेरिइइइइइइइइ छूट पानी वगळणे वाली हैईईईई..
हाय विजजूउ कितना मज़ा आ रहा है.....
मेरा लुंड प्रिय की छूट में ताबड़ तोड़ ढके पर धक्के लगाने में लगा हुआ था. प्रिय के हाथ मेरी पीठ पर और दोनों पेअर मेरे चूतड़ों पर कस्सणे लगे. और प्रिय की साँसे तेज़ होने लगी. प्रिय पुरे ज़ोर से मेरे चूतड़ों को दबाये हुए थी जिस वजा से मेरा बाकी का बचा लुंड भी धीरे धीरे करके पूरा hi प्रिय की छूट में घुसता चला जा रहा था, लेकिन अब्ब प्रिय ौरे मज़े में थी, जिस वजा से उसने अपने दर्द को पीछे करके के मेरे पुरे लुंड को अपनी छूट में ले लिया था,
प्रिय को दर्द तो बोहत हुआ लेकिन वो रुकी नहीं और न hi मुझे रुकने को कहा, मेरा लुंड मेरी प्रिय की बच्चेदानी से टकराने लगा था, जिस वजा से दर्द के साथ प्रिय को मज़ा भी बोहत आने लगा था, प्रिय की छूट ने पानी की बौछाड़ शुरू कर दी थी,
और मेरा लुंड प्रिय की छूट पर लगते hi धप धप की आवाज़ पैदा कर रहा था.
प्रिय की निप्पल अकड़ के मेरे सीने से चुभने लगे. प्रिय अब्ब आखरी स्टेज पर थी.. तो मैंने अपने धक्को को तूफानी स्पीड देने शुरू कर दी. प्रिय बीएड पर उछाल रही थी. जिस वजा से प्रिय की गांड बीएड पर लगते hi आवाज़ देने लगती.
पूरा बीएड hi मेरे धक्को की वजा से कहल रहा था, जहान्वी और श्रुति अपनी मस्ती में लगी हुई थीं.
प्रिय मेरे धक्कों को सहन नहीं कर पाई और झाकते खाते हुए अपनी छूट का पानी खून के साथ hi बहाने लगी....
प्रिय के झड़ते hi मैंने जहान्वी और श्रुति को देखा, तो अभी भी लगी हुई थीं. एक दूसरे की छूट चाटने में ... मैंने प्रिय को रिलैक्स होने के लिए छोड़ दिया.
मैं प्रिय के ऊपर से उठा और और जहान्वी के पीछे आ गया.. श्रुति की नज़र मुझ पर पड़ी तो उसने जहान्वी की छूट से मोहन हटा कर प्रिय को देखा. और फिर मेरे लुंड को देखने लगी. जिस पर प्रिय की छूट का पानी और खून लगा हुआ था..
श्रुति ने मेरे लुंड को पकड़ा और जाह्नवी की छूट पर रगड़ने लगी..
जहान्वी:- विजजूउ तुम यहाँ हो तो प्रिय.??
विजय:- प्रिय की छूट एक बार ठंडी हो चुकी है. अब्ब बताओ किसकी छूट खोलो. वैसे इसी पोजीशन में hi क्यों न तुम्हारी छूट में लुंड घुसा दूँ..
जहान्वी:- मारना है क्या मुझे. ऐसे तो मेरी छूट का सत्य नाश हो जाएगा....
जहान्वी उठ कड़ी हुई..
श्रुति:- जहान्वी तुम पहले विज्जू का लुंड ले लो..
जहान्वी:- पहले या बाद की बात से क्या फर्क पड़ता है. कोई भी नीचे लेट कर विज्जु का लुंड लेले....
श्रुति:- चलो विज्जू फिर तुम मेरी hi छूट पहले खोल दो..
प्रिय बेसुध पारी हुई थी. उसकी छूट खून उगल उगल कर बीएड शीट को नेहला रही थी.
मैंने श्रुति के पैरों को खोला और श्रुति के ऊपर झुक कर उसे किश करने लगा. जहान्वी ने मेरे लुंड को पकड़ कर श्रुति की छूट पर सेट किया. मेरा लुंड तो पहले से hi प्रिय की छूट के पानी से गीला था. और श्रुति की छूट को जहान्वी ने बोहत अच्छे से hi चाट चाट क्र नरम और गरम कर दिया था.. श्रुति की गीली छूट ने मेरे लूणद का वेलकम किया और खुद में सामने के लिए रेडी हो गई...
जहान्वी ने अच्छे से श्रुति की छूट के लिप्स को खोल कर मेरे लुंड को सेट कर दिए था.. मैं श्रुति को किश करता हुआ अपने लुंड को थोड़ा सा षुरूति की छूट में पुश किया, मेरा लुंड शूरति की छूट में अच्छे से फिट हो गया तो मैंने अपनी गांड को उठा कर एक नार्मल ढाका मारा जिस से मेरे लुंड का सूपड़ा षुरूति की छूट के छेड़ में फस्स गया.. मैंने किश करते हुए श्रुति की आँखों में देखा टी वो ऑंखें बंद किये लुंड को अपनी छूट में घुसने का वेट कर रही थी..
मैंने देर न करते हुए और जोर्का धक्का मारा और मेरा लुंड श्रुति की छूट की सील को तोड़ता हुआ 4" तक्क अंदर घुसता चला गया. श्रुति उछाल padi.aur मेरे होंटो से अपने होंटो को अलग करने लगी. श्रुति की आँखों से गंगा जमना बहाना शुरू कर दया था.. मैंने श्रुति को चूमना छोड़ा..
श्रुति आंसू बहती आँखों से मुझे देखने लगी...
षुरूति की सांस अखाड गई थी. मैं रुका रहा तो श्रुति को कुछ चैन मिला.
मैं श्रुति की गर्दन मो चूमने लगा और अपने हाथो से श्रुति के बूब्स को पकड़ कर हलके से दबाना भी शुरू कर दिया.
षुरूति की गार्डन पर किश करते हुए मैं श्रुति के बूब्स को भी मसलने लगा.
श्रुति धीरे धीरे शांत होने लगी तो मैंने श्रुति की गर्दन को छोड़ कर श्रुति की आँखों में देखा तो श्रुति कुछ रिलैक्स थी. मैंने श्रुति के बूब्स पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चाटने लगा. श्रुति और भी शांत होने लगी. और अपने हथु को मेरे सर्र पर रख कर मेरे बालों में उँगलियाँ चलने लगी.
मेरा लुंड शूरति की छूट में फँस चूका था. प्रिय की तरह से श्रुति की छूट भी बोहत टाइट थी. मेरे श्रुति के बूब्स को चाटने से मेरा लुंड थोड़ा सा हिला तो दर्द की वजा से श्रुति की हलकी सी चीख निकल गई..
जहान्वी:- चलो अब कितना देर लगनी है.. दर्द तो होना hi है..... मैंने और श्रुति ने जहान्वी को देखा. तो वो ललचाई हुई नज़रों से हमें देखने लगी..
प्रिय की छुड़ाए और अब्ब शूरति की चुदाई देख क्र जहान्वी बोहत गरम हो चुकी थी. श्रुति ने जहान्वी की छूट चाट कर उसका पानी नहीं निकला था. जिस वजा से जहान्वी बोहत बेक़रार दिख रही थी..
अभी उसका मैं तो कुछ करने से रहा.
माने अपने लुंड को हिलाते हुए थोड़ा सा पीछे खेंचा. तो मेरा लुंड श्रुति की छूट के मॉस को खेंचने laga....shurti की चीख निकल गई.... लेकिन मैंने अब्ब श्रुति के दर्द पर धयान नहीं दिया और अपने लुंड को सुपडे तक बहार निकल कर उतने से hi शूरति को छोड़ने लगा. 4 बार लुंड अंदर बहार हुआ तो शूरति को दर्द काम हुआ...
श्रुति अब्ब कुछ मज़े में आ गई थी.
मैंने श्रुति के पैरों को पकड़ कर एक बड़ा धक्का लगा दिया जिस से मेरा लुंड 6" तक्क श्रुति की छूट की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुस गया.
श्रुति:- aiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrrrrrr गईइइइइइइ विज्जज्जूऊऊऊ थोड़ा धीरे से नहीं कर सकते थे क्या.....
जहान्वी- अगर धीरे से करेगा तो घुसेगा कैसे.??
जहान्वी श्रुति के बूब्स को अपने मोहन में लेकर चूसने लगी. मैंने अपना एक हाथ जहान्वी की छूट पर रख दिया. जहान्वी को कुछ चैन मिला और वो अच्छे से श्रुति के बूब्स को चाटने लगी.. जब तक श्रुति रिलैक्स होती मैं जहान्वी को शांत कर सकता था. मैंने अपनी एक ऊँगली को अच्छे से जहान्वी की छूट में घुसा दिया. ऊँगली जितनी जगा तो तीनो की पहले से hi बानी हुई थी, मेरी ऊँगली को भी जहान्वी की छूट में घुसते हुए कोई परेशानी नहीं हुई. मैंने अपनी ऊँगली को जहान्वी की सील तक अंदर डाला और अपनी ऊँगली को जहान्वी की छूट में घुअमाने लगा.....
जहानीव तो पहले सही झड़ने के करीब थी. जहान्वी की छूट ने भी पानी बहाने तेज़ कर दिया. मेरा लुंड श्रुति की छूट में फंसा हुआ था और मैं जहान्वी की छूट में उंगल करते हुए उसे ठंडा करने माँ लगा हुआ था..
जहानीव की बेकरारी बढ़ी तो उसने श्रुति के निप्पल को मोहन में ले कर ज़ोर से चुस्ने शुरू कर diya..jhanvi दूसरे हाथसे श्रुति के दूसरे निप्पल को भी कुरेद रही थी... जहान्वी के म्हणत से श्रुति का दर्द ग़ायब हुआ और वो मस्ती में आने लगी.. श्रुति अपनी गांड को उठा क्र मेरे लुंड को अंदर लेने की कोशिश करने लगी. अब्ब लुंड मेरी कोशिश किये बिना तो श्रुति की छूट में अंदर बहार होने से रहा....
मैं तब्ब तक्क जहानीव की छूट को मसलता रहा जब्ब तब्ब जहान्वी झाड़ नहीं गई.. जहान्वी ने श्रुति के निप्पल को अपने मोहन से निकल दिया था. अब्ब उसका मोहन श्रुति के बूब्स के ऊपर रखा हुआ था और वो गहरी सांस ले रही थी. जहान्वी का बदन अकड़ने लगा और वो अपनी गांड को कस्सणे लगी. जहान्वी ने श्रुति का एक बूब्स कस के पकड़ लिया था. जहान्वी झड़ने लगी तो श्रुति के बूब्स जहान्वी के हाथ में ज़ोर से डब्ब गया जिस वजा से श्रुति की चीख निकल गई..
लेकिन जहान्वी शूरति की चीख से बेनियाज़ अपनी छूट का पानी निकलने में लगी हुई थी.
जहान्वी के झड़ते hi मैं अपने लुंड को देखा तो श्रुति की छूट में 6" तक्क धंसा हुआ था.
मैं अपने लुंड को धीरे धीरे श्रुति की छूट से बहार खेंचने लगा. श्रुति को दर्द हुआ लेकिन मैंने श्रुति की छूट से अपने लुंड को सुपडे तक्क बहार निकला और फिरसे धीरे धीरे अंदर डालने लगा. श्रुति की छूट मेरे लुंड को कस्सणे लगी लेकिन मैं नहीं रुका, शूरति की छूट से निकलने वाला खून मेरे लुंड से होता हुआ बीएड पर गिर रहा था.
मेरा लुंड फिरसे श्रुति की छूट में 6" घुस गया तो मैंने उसे फिरसे बहार निकल कर अंदर पुश कर दिया. 4-5 बार ऐसे करने से षुरूति की छूट मेरे लुंड के लिए फिट हो गई तो मैंने जहान्वी को श्रुति के ऊपर से हटाया और श्रुति के ऊपर झुक कर श्रुति को किश करते हुए अपने लुंड को श्रुति की छूट में इन आउट करने लगा. शूरति को दर्द तो हो रहा तह. लेकिन अब्ब श्रुति जहान्वी की बूब्स चटाई की वजा से गरम भी हो गई थी. तो उसे अब्ब मज़ा बी आने लगा था..
धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ने लगी. और श्रुति मेरे होंटो को पीने लगी..
प्रिय अब्ब कुछ रिलैक्स थी. उसे दर्द तो होना hi था. वो अपने पैरों को खोले हमारी चुदाई देखने लगी..
मैं अपने लुंड से श्रुति को पेलने में लगा रहा. मेरा लुंड श्रुति की छूट से रगड़ रगड़ कर अंदर बहार हो रहा था.. श्रुति की किश वाइल्ड होने लगी.
मेरा लुंड षुरूति की छूट में अपनी स्पीड बढ़ने लगा. और मेरे हाथ फिसलते हुए श्रुति के बूब्स पर चलने लगे. श्रुति के बूब्स सख्त होना शुरू हो गए थे , मैंने श्रुति के निप्पल को पकड़ कर हल्का सा खेंच लिया. श्रुति को और भी मज़ा आया और वो अपनी गांड को उठा कर मेरा लुंड लेने लगी..
श्रुति की सांस फूलने लगी तो उसने मुझे किश करना छोड़ दिया.. शूरति के हाथ मेरी पीच पर कस्सणे लगे..
मेरा लुंड और शर्तइ की छूट का ताल मेल बढ़िया से होने लगा और फिर श्रुति के शरीर ने भी झाट्ने खाने शुरू कर दिए. श्रुति के दोनों पेअर मेरे चूतड़ों पर आये और शूरति ने मुझे अपने हथु और अपने पैरों से मुझे कस लिया..
श्रुति के पैरों के दबाओ से मेरे लुंड को एक झटका लगा और मेरा बचा हुआ पूरा लुंड एक ज़बर्दस्त धक्का मारते हुए श्रुति की बाकी बची हुई छूट को फाड़ते हुए श्रुति की बच्चेदानी से जा टकराया.
श्रुति:- aiiiiiiiiiiiiiiii वीजजजजूउउउ अभी भी तुम्हारा कुछ बाकी था क्या..
मैं तो मर hi गई थी, इतना दर्द हुआ ...siiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhh
मज़ा भी आ रहा है और दर्द भी हो रहा है.. दोनों मिल कर कैसे अलग सा एहसास दे रहे हाँ.. और तेज़ विजजूउउउ मेरी जान,, पूरा फहद दो अपनी श्रुति की छूट को....
मेरे ढक्कू में भी तूफानी स्पीड आणि शुरू हो गई थी. जिस वजा से बीएड एक बार फिरसे अपनी आवाज़ में गुनगुनाने लगा था. मेरा पूरा hi लुंड श्रुति की छूट में अंदर बहार हो रहा था.
श्रुति:--- विजजूउउउ और तेज़्ज़ अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह ह्म्म्मम्घा उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ विज्जज्जुऊ मेरी छूट बहने वाली है... और तेज़.. और tezzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz
श्रुति बलते बोलते सिसकियाँ लेने लगी...
कुछ hi देर में श्रुति की छूट और भी टाइट हुई और फिर शूरति ने एक बड़ा झटका खाया और श्रुति की छूट ने पानी छोड़ दिया...
श्रुति तो जहान्वी की म्हणत से hi आधी झड़ने वाली हो गई थी. वो तो मेरे लुंड के उसकी छूट में घुसते hi दर्द की वजा से उसकी छूट का पानी कुछ पीछे चला गया था. वर्ण वो तो कब्ब की पानी बहा चुकी होती.....
मैंने श्रुति को भी छोड़ दिया और बीएड पर प्रिय के पास hi लेट गया. प्रिय मेरे ऊपर आई और मुझे किश करने लगी... प्रिय बोहत धीरे से मुझे किश कर रही थी. मेरे हाथ प्रिय के चूतड़ों पर चलने लगे..
जहान्वी भी अभी ठंडी हो गई थी, अभी उसे पहले कुछ गरम करना पड़ेगा फिर उसकी छूट में लुंड जाएगा...
मुझे 40 मिंट हो चुके थे अभी तक मेरा लुंड नीचे नहीं हुआ था.. होता भी कैसे असूय अभी पुरे रिधम से चुदाई करने को मिली hi नहीं थी. आज तो बास छूट खोलने का काम hi था, जब्ब पूरी तरह से खुले गई तब्ब hi पूरा मज़ा आएगा... मुझे मज़ा तो बोहत आ रहा था लेकिन बार बार रुकने से वो मज़ा नहीं आया था, हाँ टाइट छूट में लुंड फस फस कर जाते हुए बड़ा मज़ा दे जाता था..
मेरे हाथ प्रिय की गांड की दरार में चलने लगे प्रिय मुझे किश करने में लगी रही. मेरी एक ऊँगली प्रिय की छूट पर गई तो प्रिय ने मुझे किश करना छोड़ दिया..
प्रिय:- विजजू अभी मेरी छूट में बोहत दर्द है, प्लीज अभी वहां ऊँगली मैट लगाओ...
जहान्वी:- विज्जउ मेरी छूट नहीं खोलनी क्या.?
विजय:- जहान्वी पहले तो अपनी छूट को फिर से गरम तो करले.
जहान्वी अपनी टांगों को खोल कर अपनी छूट दिखते हुए.
जहान्वी:- इसे नरम और गरम तो तुमने hi करना है...
मैंने प्रिय को देखा तो प्रिय मेरे ऊपर से हट गई और मैं जहान्वी की छूट पर टूट पड़ा. कुछ देर जहान्वी की छूट में अच्छे से अपनी जीब दाल कर जहान्वी की छूट को छोड़ता रहा. जब्ब जहान्वी की छूट ने पानी छोड़ना शुरू किया तो..
मैं उठ खड़ा हुआ और जहान्वी के पैरों में आ क्र बैठ गया..
विजय:- तो जहान्वी अब्ब तुम तैयार हो अपनी छूट खुलवाने के लिए..
जहान्वी:- विज्जू अब्ब भी पूछ रहे हो. मैं तो प्रिय और शर्तइ की वजा से रुकी हुई थी वर्ण मैं खुद hi तेरे लुंड पर अपनी छूट को रख कर एक झटके में नीचे बैठ जाती. और अपनी छूट की बेकरारी ख़तम करा लेती....
इतनी आग लगी है मेरी छूट में, अब्ब देर मैट कर और पहाड़ डालो मेरी छूट को.
सालों इंतज़ार किया है इस समय के लिए...
मैंने अपने लुंड को जहान्वी की छूट पर सेट किया और जहानीव की आँखों में देखते हुए अपने लुंड को जहान्वी की छूट में पुश करने लगा. तीनो ने hi एक दूसरे की उँगलियों से अपनी छूट को कुछ खुला किया हुआ था. जाह्नवी की छूट प्रिय और श्रुति की छूट से कुछ बड़ी थी. जहान्वी की छूट के लिप्स कुछ मोठे थे. और मेरा लुंड जहान्वी की छूट में अच्छे से फिट हो गया.
मैंने एक हल्का से धक्का मारा तो मेरे लुंड का सूपड़ा जहान्वी की छूट के लिप्स को खोलता हुआ अंदर जा घुसा. जहान्वी को एक हल्का का झटका लगा. लेकिन वो चीखी नहीं. अभी मेरा लुंड थोड़ा सा hi जहान्वी की छूट में गया था. जहान्वी की छूट खुल गई और मेरा लुंड उसकी छूट में फस्स gaya...maine जहान्वी के ऊपर झुकते हुए अपने हथु को साइड में बीएड पर टिकाया और जहान्वी की छूट में अपने लुंड को पुश करते हुए एक करारा धक्का मर्डर दिया.
जहान्वी:- aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii oiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.
meriiiiiiiiii chutttttttttttttttttttt phatttttttttttttt gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.
जहान्वी चीखती हुई अपनी छूट के पहटने का एलान करने लगी लेकिन फॉर जल्दी hi जहान्वी के अपनी आवाज़ को दबा लिया.
मेरा लुंड जाह्नवी की छूट की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुस गया. जहान्वी भी लड़की से औरत बन्न गई थी. मैंने जहान्वी के चेहरे को चूमना शुरू कर दिया...
जहान्वी बीएड की शीट को कस के पकड़ चुकी थी. जहान्वी के चुत्तड़ काँप रहे थे.
जहान्वी जितनी बहादुर दिख रही थी. उतनी थी नहीं. जहान्वी को बी बहुत दर्द हुआ. और जहान्वी के लिए उसे सहन करना आसान नै रहा था. लेकिन फिर भी उसने अपने होंटो को दबा कर अपनी चीख रोक ली थी.. झावनि की ऑंखें भी गंगा जमना बहाने लगीं...
कुछ देर मैं जहान्वी के गाल को चूमता रहा और फिर मैंने जानवी के होंटो को अपने होतनो में ले कर किश करना शुरू कर दिया. मैंने अपने हाथ बीएड से हटा कर जहान्वी के दोनों दूध पर रख दिया और उन्हें हलके हलके दबाने लगा. जहान्वी
शांत होने लगी. और वो मुझे किश में रिस्पांस देने लगी..
कुछ देर में जहान्वी मेरे होंटो अपने होंटो में लिए चूसने लगी और नीचे से अपने चुत्तडों को उठा कर मेरे लुंड को हिलने लगी.. मतलब अब्ब वो दर्द को भूल कर छूट के नशे में झूलने लगी थी.
मैंने जहान्वी को ज़ादा न तड़पते हुए अपने लुंड को धीरे से जहान्वी की छूट से बहार निकला और फिरसे धीरे धीरे अंदर पुश करने लगा. मेरा लुंड जहान्वी की तंग छूट में फस फस के जाने लगा. मैं इतने लुंड से hi जहान्वी को धीरे धीरे छोड़ने लगा..
जहान्वी के चुत्तड़ मज़े और दर्द से हिलने लगे. मैं बार बार अपने लुंड को जहान्वी की छूट में अंदर बहार करने लगे, जैसे hi मुझे लगा क जहान्वी की छूट अब्ब रवां होने लगी है और जानवी भी अब्ब कुछ शांत है तो मैंने अपने लुंड को सुपडे तक बहार निकला और फिरसे एक करके शॉट मार दिया..
जहान्वी इस बार फिरसे पूरी जी जान से हिल गई..
जहान्वी ने मेरे होंटो को काटा तो नहीं बास अपने होंटो में जकड लिया ज़रूर लिया था. जहान्वी की चीख निकल नै पाई. मेरे हाथ जहान्वी के बूब्स और निप्पल पर चलने लगे...
जहान्वी मेरे नीचे तड़प रही थी. उसका बास नहीं चल रहा था क वो उठ कर कही भाग जाए, छूट के फटने का दर्द कम् भी तो नहीं होता, और जब्ब मोटा तगड़ा लुंड कुंवारी छूट में धमाके से घुस जाए तो हशर बरपा हो होना hi था.
प्रिय:- विज्जू तुम जहान्वी के ऊपर से उठ जाओ. शर्तइ भी अब्ब रिलैक्स है तो हम दोनों hi जहान्वी को शांत करती हाँ..
मैं प्रिय की बात सुन कर जहान्वी के ऊपर से उठ गया. मेरा लुंड भी जहान्वी की छूट में हिला तो ..
jhanvi:-aiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa विज्जज्जूऊऊऊ छूट के खुलने से कितना दर्द होता है................. हाआईईए मेरी छूट का दर्द..........
aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.. प्रिय कुछ करो य्र्र मेरा दर्द मुझसे सहन नहीं हो रहा... ऐसा लगा विज्जउ ने लुंड नहीं झांजर उतर दिया है मेरी छूट में ... अंदर से जब्ब छिरर्र गया है.. प्लीज प्रिय जल्दी से कुछ karo.ya विज्जू का लुंड मेरी छूट से निकालो.. हायययययी माआआआ
आपकी जहान्वी मर न जाए कही विज्जउ के लुंड से ...
जहान्वी सर्र पटखनी लगी. तो प्रिय और श्रुति ने जहान्वी के बूब्स को आपस में बाँट लिया और उसे मोहन में लेकर चूसने लगी..
प्रिय साथ में जहान्वी के पेट कर अपना हाथ भी चलने लगी..
मैं तीनो को देखने लगा, तीनो की hi छूट खुल चुकी थी. मैंने एक नज़र प्रिय की छूट को देखा तो प्रिय की छूट सूजी हुई थी. और अभी तक्क प्रिय ने अपनी छूट को साफ़ भी नहीं किया था. वो काफी देर तक्क ऐसे hi लेती रही थी. तो खून प्रिय की छूट पर सूख लगा था.. प्रिय अपनी टांगें खोले घोड़ी बानी जहान्वी के बूब्स को चाटने चूसने में लगी हुई थी..
मैंने श्रुति की छूट को देखा वो भी प्रिय जैसे पोजीशन में थी उसकी छूट भी प्रिय की छूट के जैसे hi फूली हुई थी. श्रुति की छूट पर भी खून लगा हुआ था... दोनों जहान्वी को रिलैक्स करने में लगी हुई थीं और मैं प्रिय और श्रुति की छूट को देखने में मगन था... मैंने बीएड शीट की तरफ देखा प्रिय और श्रुति की छूट से निअक्लने वाला खून बीएड शीट को नेहला चूका था.. मैंने नीचे जहान्वी की छूट को देखा तो वो भी थोड़ थोड़ा करके खून रिस रही थी.
आज मेरे लुंड ने तीनो छूटों को खोल दिया tha....meri तितलियाँ लड़की से औरत बन्न गई थीं.
मैं तीनो खुल चुकी छूटों के नज़ारे में खोया हुआ था, क मुझे जहान्वी के हिलने का एहसास हुआ, मैंने देखा तो जहान्वी अब्ब गरम हो कर अपनी चूतड़ को हिला कर मेरे लुंड के लिए मचल रही थी, मतलब अब्ब उसका दर्द मज़े में बदल गया था.
अब्ब जहान्वी छूट के खुलने के बाद लुंड का मज़े लेने के मूड में आ गई थी, मैंने थोड़ा सा अपने लुंड को हिलाया तो मेरा लुंड आराम से पीछे होने लगा. प्रिय और श्रुति की म्हणत ने जहान्वी की छूट को अंदर से काफी गीला कर दिया था.
मैंने जहान्वी के बूब्स को देखा जो अकड़ चुके थे. प्रिय और श्रुति किसी बच्चे की तरह से जहान्वी के निप्पल्स को मोहन में लिए हुए चूस रही थी. मनो दूध निकलने वाली हूँ.
मैंने जहान्वी को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. उसकी ऑंखें लाल होने लगी थी. और वो मुझे बड़े प्यार से देख रही थी....
जहान्वी:- विजजूउउ तुम्हारी जहान्वी अब्ब औरत बन गई है.... इस सबब के लिए कितना तदपि है तुम्हारी जहान्वी.. विजजूउउ ी लव यू सो मच...... तुमने मुझे भी प्रिय और श्रुति के जैसी ख़ुशी दे दी है.. मैं बोहत खुश हूँ... आज मेरे दिल की हसरत पूरी हुई.. वर्ण सालो डर्र्र्टी hi रही कही कुछ गलत न हो जाए.. लेकिन भगवन ने हम सबब को बचा लिया....
विजय:- मेरी तितली पुराणी बातों को क्यों याद करती है. अब्ब अच्छे दिन आये हाँ तो बुरे दिनों को भूल कर अच्छे दिनों के मज़े लो..
जहान्वी:- वही तो कर रही हूँ. विज्जउ अब्ब मेरी छूट में दर्द नहीं है. तुम अपने लुंड को अंदर बहार करो.. अब्ब मुझसे सहन नहीं हो रहा है..
मैंने भी जहान्वी के दिल की हसरत को पूरा करने के लिए अपने लुंड को सुपडे तक बहार निकला और फिर से जहान्वी की छूट में डालने लगा. मेरा लुंड फस फस के जा रहा था. मैंने जाह्नवी की देखा तो उसके चेहरे पर कोई दर्द नहीं था..
मैंने फिर धीरे धीरे अपने लुंड को जहानीव की छूट में अंदर बहार करने लगा.
कुछ देर में जहान्वी की छूट और भी पानी छोड़ने की वजा से मेरे लुंड के लिए कन्फोर्ताब्ले हो गई. तो
विजय:- प्रिय श्रुति जहान्वी क बूब्स को सारा hi निचोड़ना है क्या. अब्ब उठो ऊपर से नेक्स्ट लेवल अब्ब शुरू होने वाला है...
प्रिय और श्रुति ने जहान्वी के बूब्स को छोड़ा तो दोनों की ऑंखें भी लाल होने लगी थी.. जहान्वी को शांत करने के चक्कर में अपनी छूट को फिरसे जेल कर चुकी थीं...
मैंने जहान्वी के ऊपर आ कर लेट गया और जहान्वी ने मेरे सर को पाकर कर मेरे होंटो को अपने होंटो में ले लिया, और पुरे मज़े से मेरे होंटो को पीने लगी.
जहान्वी की छूट बोहत फड़फड़ा रही थी. जहान्वी अब्ब चाहती थी क मैं फुल स्पीड से उसे छोड़ों. मेरा लुंड भी अब्ब पुरे मज़े के लिए मूड में आ गया था. जितनी देर इसके जहदने में लग्ग गई थी, वो भी बेचैन हो गया था..
मैं जहान्वी पर झुका हुआ जहान्वी की छूट को खोलने में लग गया...
कुछ देर में मेरा लुंड जहान्वी की छूट में अपनी तूफानी स्पीड से घुस रहा था. मेरा लुंड अब्ब सिर्फ 2" hi जहान्वी की छूट से बहार था..
5 मिंट में hi जहान्वी की साँसे उखाड़ने लगी तो उसने मुझे किश करना छोड़ा
और तेज़ सांस लेते हुए अपनी छूट में मेरे लुंड को फील करने लगी.... जहान्वी ने बी अपने पेअर मेरे चुत्तड़ पर रख लिए थे.
जहान्वी का चेहरा मज़े के कारन खिला पड़ा था..
जहान्वी चार्म के करीब पोहंची तो मेरा लुंड भी जहान्वी की छूट में पूरा घुसने माँ मैं बनाने लगा. और मैंने भी अपने लुंड की सुन्नते हुए एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरा लुंड जहान्वी की बच्चेदानी से जा टकराया.. जानवी पूरी जान से हिल गई.
लेकिन छूट के मज़े के कारन वो खुद पर काबू पा गई और मेरा लुंड जहान्वी की छूट की साड़ी hi दीवारों को चीरता हुआ रेगुलर पूरी स्पीड से जहान्वी की बच्चेदानी से टकरा आकर वापिस आता और फिरसे अंदर जा घुसता ....
बीएड का साउंड फिर से शुरू हुआ और जहान्वी के चुत्तड़ भी बीएड पर पटकने लगे..
मैं कुछ और भी जहान्वी पर झुक गया जिस वजा से जहान्वी की गांड कुछ हवा में उठ गई.
मेरा लुंड भी अब्ब पूरी तरह से फुल चूका था. मेरा लुंड भी अपने चार्म पर पोहचने वाला था, जिस वजा से मेरी स्पीड औरर भी तेज़ होने लगी... जहान्वी दोहरी हो गई थी लेकिन उसने कुछ कहा नहीं. बोली तो बास सिर्फ इतना hi
जहान्वी:- haaaaaaaaaaaaaaayeeeeeeeeeeeeeee vijjjjjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuu....
hmmmmmmmmmmmmhhhhhhhhh siiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhh
hayyyyyyyyyyeeeee ufffffffffffffffffff वीजजजजजूउउउउउउ मज़ा hi आ गया.....
और तेज़ एक्रो करों.. पहाड़ दो पूरा हजी अपनी जहान्वी की छूट को सालों तक बड़ा तंग किया हिअ इसने...............
मेरी भी सांस तेज़ हो गई थी. और मेरा खून मेरी पूरी बॉडी से निचोड़ कर मेरे लुंड में इकठा होने लगा था. मेरा लुंड और फूलने लगा जो जहान्वी की तंग छूट को और भी खुला कर रहा था.. मेरा इतना मोटा लुंड तीनो की hi तंग छत को खोल चूका था.....
जहान्वी:- vijjjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu मैं झाड़नीीीे वाली हुन्न्न्नन्न्न्नन ....... ohhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhh siiiiiiiiiiiiii
फ़ास्ट विज्जज्जुऊ फ़ास्ट और फ़ास्ट ..........
जहान्वी तेज़ सांस लेते हुए झड़ने लगी. लेकिन मैं नहीं रुका... जहान्वी के झड़ने से मेरे लुंड को जहान्वी की छूट में और भी आसानी होने लगी. और मेरी स्पीड बढ़ गई..
सच कहूँ तो आज मेरा सही मानो में टेल निकल गया था... इतना टाइम मैंने पहले कभी नहीं लगाया था, और न hi मेरा लुंड पहले कभी इतना तरसा था..
जानवी झड़ने के बाद मेरे धक्को को सहन नहीं कर पाई और मुझे खुद से अलग करने लगी. लेकिन मैं लास्ट स्टेज पर था, अब्ब तो मैंने रुकने वाला था था..'
जहान्वी:- विजजूउउउ हटो मेरे ऊपर से मेरी कहत में बोहत जलन होने लगी है.
प्रिय:- जहान्वी कुछ देर रुकू देख नहीं रही, विज्जू भी झड़ने वाला है. अगर अब्ब उसे रोका तो उसे परेशानी हो गई...
जहान्वी मेरे नीचे तड़प रही थी. लेकिन मेरा ख्याल करते हुए अपनी छूट में मेरे लुंड को शांत होने की परमिशन देने लगी..
जहान्वी को परेशानी तो थी, और मैं तो अब्ब खुद को भूल कर अपने लुंड के कब्ज़े में चला गया था. अब्ब साडी गेम hi मेरे लुंड के हाथ मेथी और मैं तूफानी ढ़ाके लगता हुआ जहान्वी की छूट में अपने लुंड को अंदर बहार ाकरने लगा..
ज़यादा समय नहीं लगा और मेरा लुंड जहान्वी की छूट में अपना लावा उंगलने लगा.
मैं जहान्वी के ऊपर से गिर गया मेरी सांस बोहत तेज़ चल रही थी. जहान्वी को बोहत परेशानी हुई थी. उसकी कमसिन छूट आज hi तो खुली थी और मैंने उसकी धज्जियां उदा दी थीं.
जहान्वी मेरे सर्र के बालों में उँगलियाँ फेरने लगी.. श्रुति मेरे चूतड़ों पर अपना हाथ रखे हुए घूमने लगी और प्रिय मेरी पीठ को सेहला रही थी.
और मैं, मैं जहान्वी के ऊपर गिरा हुआ अपनी सांस बहाल कर रहा था.
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शंकर गैंग का एक hi दिन और रात में सफाया हो जाना दिल्ली सिटी के दो दूसरे गैंग्स के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था.
दोनों गैंग्स hi जानते थे क शनकर किसी भी तरह से उनसे कम् नहीं था. शंकर जितना चालक था उससे बढ़ कर वो कमीना और दरिंदा सिफत भी था. किसी को माफ़ करना उसकी आदत नहीं थी. इसलिए दूसरे गैंग्स वाले अगरचे शंकर गैस से दररते नहीं थे लेकिन पन्गा लेने से वो कटरे थे. कभी कभी एक दूसरे की डील के लिए कभी कोई पन्गा हो जाया करता था, लेकिन फेस 2 फेस कभी भी सहांरक गैंग से वो भिड़े नहीं थे.
अब्ब इतने पॉवरफुल गैंग को चाँद घंटों में hi साफा इ हस्ती से मिटा दिया गया था. ये बात दोनों गैंग्स के लिए भी खतरे की घंटी बन गई थी.
दिल्ली में बच रहे दोनों गैंग्स ने आपस में मीटिंग की और आने वाले खतरे को ले करके बोहत सी बातें भी हुई. दोनों का आपस में इत्तफ़ाक़ नहीं था. लेकिन कोई अगर उन दोनों के रहते दिल्ली पर कब्ज़ा जमाना चाहेगा तो वो दोनों गैंग्स कैसे ये बर्दाश्त कर सकते थे.
शंकर गैंग्स के ख़तम होने से उन्हें फायदा तो बोहत हुआ लेकिन, जिसने शंकर गैंग को ख़तम किया, उसके बारे में सोच कर दोनों गैंग्स भी परेशां थे..
कही शंकर गैंग के बाद उनका नंबर तो नहीं आने वाला..
सबब मिल बैठ कर उन्हें ढूंढ़ने के लिए प्लान बनाने लगे और अगर वो दोनों को खतम्म करने पर उतर आये तो कैसे उसका खत्म किया जा सकता है.. इसपर बातें होती रहीं
गैंग...1
किशन Arora:age:48
अलोक Nath:age:43
किशन अरोरा और अलोक नाथ में मिलकर गैंग खड़ा किया था, अलोक नाथ एक बिजनेसमैन था तो किशन अरोरा एक गुंडा, दोनों ने मिलकर अपनी गैंग बनाई तो अघा नाम का एक गुंडा भी इन दोनों में शामिल हो गया, जिसका नाम बोहत चल रहा था दिल्ली सिटी में, अघा के इस गैंग में शामिल होते hi गैंग बोहत अच्छे से खुद को मनवाने लगा. अघा एक अच्छा फाइटर था, और उसका इस दुन्या में कोई नहीं था.
किशन और अलोक ने अघा को अपने साथ मिला लिया. अघा को सबब कुछ मिलने लगा तो अघा ने भी दिल से दोनों का साथ देने लगा. अघा को गैंग में तीसरी पोजीशन मिल गई जिससे वो खुश हुआ.
agha.....age:37
अघा ने शादी नै की. गैंग में आने से पहले बुरा काम तो करता hi था लेकिन गैंग्स में पावर मिलने से वो एक घटिया इंसान बन कर रह गया. हर तरह के बुरे काम बड़े शोक से करने लगा... बाद करैक्टर और डेरिंग में ये किशना और अलोक से कहीं आगे निकल गया. लेकिन पैसों के लिए लालच इसके दिल में नहीं है, पैसा तो वैसे भी गैंग में रहते कही से भी हासिल किया जा सकता था.
गैंग्स को चलने के लिए अलोक ने पैसा दिया था, जो किशन ने अलोक से मिलकर गैंग कड़ी की लेकिन आने वाले वक़्त में अघा का नाम इस गैंग में सबब से बड़ा होने लगा. किशन और अलोक को अघा से कोई परेशानी नहीं थी. अघा अक्सर खुद में hi मगन रहता था. धोके करना उसकी फितरत में नहीं था..
अजीब करैक्टर था अघा का भी...
सिद्धार्त nath:age:21
अलोक नाथ का भाई है....
कॉलेज में लीडर तो नहीं है, लेकिन लीडर इसके आगे पीछे घुमते रहते हाँ. इसकी वजा से पुरे कॉलेज का माहौल ख़राब है, ड्रग्स स्टूडेंट में बेचता हाँ. और लड़कियों के लिए तो बोहत hi घटिया विचारों का मालिक है..
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गैंग...2
महेंद्र singh:age:35
जितेंद्र singh:age:33
दोनों भाई हाँ और अपने बाप के बाद अपने गैंग को चला रहे हाँ. इनका गैंग दिल्ली का पहला ऐसा गैंग है, तो पिछले 20 साल से दिल्ली पर राज क्र रहा है. 20 सालों में कई गैंग्स ए और कई गए, लेकिन महेंद्र सिंह गैंग वही का वही खड़ा रहा......
इनके दो ख़ास दोस्त हाँ...
अनूप Kumar:age:34
dany:age:33
दोनों hi इंटेलगेट और ज़बरदस्त फाइटर हाँ. चरों hi कॉलेज फ्रेंड्स रहे हाँ किसी दौर में..... बाद में चरों hi मिलकर गैंग को चलने लगे...
महेंद्र सिंह का बाप कुछ साल पहले एक हमले में मारा गया था.. तब्ब से hi दोनों भाई इस गैंग को चला रहे हाँ..
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भारत bhushan:age:50
दिल्ली के एक एरिया का मला है, और इसके साथ कुछ और बुसिनेस्स्में थे जो शंकर गैंग से कनेक्टेड थे. लेकिन शंकर गैंग के ख़तम होते hi खुद के लोस्स को भूल नहीं पा रहे हाँ.
मला का कनेक्शन भी दूसरे दोनों गैंग्स से है. एरिया का फर्क है. लेकिन धंदे एक hi हाँ...
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दोनों गैंग्स और मला शंकर गैंग के ख़तम होने से रोज़ hi मीटिंग कर रहे थे. और खुद के लिए आने वाले खतरे को ले के hi बातें होती रहती थीं..
मला ने भी बड़ा ज़ोर लगाया था वो जान ले क शंकर गैंग को ख़तम करने में किसका हाथ है. लेकिन कमिश्नर ने किसी को भी हवा तक लगने नहीं दी...
सीक्रेट मिशन कह कर सबब को hi ताल दिया..
कम अच्छे इंसान थे. इन्हे भी सबब अभी तक सही से नहीं बताया गया था.
तो फिर किसी और को कैसे बताया जा सकता था..
पैलेस को ले के भी किसी किसम का कोई ऐसा क्लू नहीं छोड़ा गया था, जिस से किसी को शक हो क पैलेस को खुद के कब्ज़े में करने क लिए हर्ष चौहान ने कोई गेम तो नहीं प्लान किया था. लेकिन कही से भी इस बात का कोई िश्रा तक नहीं मिला...
हर्ष चौहान की पूरी लाइफ hi साफ़ थी.. कही भी हर्ष चौहान को ले के कुछ गलत सुनने में नहीं आया था..
सभी तमक तोइयाँ मरने में लगे हुए थे........
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