Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 16 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट ::: 74

*************





जहान्वी ने मेरा और प्रिय का पानी निकल दिया था, लेकिन वो खुद बोहत बेचैन हो गई थी, हालत तो श्रुति की सही नहीं थी, श्रुति से सबर नहीं हुआ और मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर मेरे लुंड पर झुक गई... जहान्वी के हिस्से का बचा कुछ वीर्य श्रुति मेरे लुंड पार्स चाट कर साफ़ करने लगी और अपनी पियास बुझाने लगी

प्रिय अब्ब रिलैक्स हो गई थी, तो जहान्वी अपनी छूट को ठंडा करने के लिए प्रिय के मोहन पर अपनी छूट रख क्र बैठ गई, प्रिय भी जहान्वी की छूट की तड़प को समझते हुए उसे ठंडा करने में लग गई

श्रुति मेरे लुंड को मोहन में लेकर चूस रही थी, श्रुति की स्पीड बढ़ने लगी थी, मैं भी श्रुति को मज़ा देने लगा, श्रुति की छूट जो पानी बहा रही थी वो मैं अपनी जीब से चाटने लगे. श्रुति की सिसकियाँ उसके मोहन में hi डब्बने लगीं.

अलग अलग छूट चाटने में मज़ा hi कुछ और होता है, और यहाँ तो मेरी तितलियों की चिकनी छूटें थी मज़ा तो आना hi था, आज ख़ास तीनो ने hi मापनी अपनी छूट को मेरे लिए चमकाया था.

मेरा अंदर आज खिला खिला था, अभी तो ये किसी की छूट में भी नहीं गया था और मैं मज़े की हसीं वादियों में खो गया था.

श्रुति मचलने लगी फिर वो एक हाथ से मेरे लुंड को मसलते हुए ज़ोर ज़ोर से मेरे लुंड को मोहन में लिए चूसने लगी, श्रुति की म्हणत से मेरा लुंड फिरसे कहद होने लगा, श्रुति की तड़प बढ़ती तो व ो मेरे लुंड को अपने मोहन से निकल आकर सिसकियाँ लेने लगती...

षुरूति अपनी छूट पर मरे जीब से तड़पने lagi.uski स्पीड मेरे लुंड पर बढ़ने लगी.

उधर प्रिय भी जहान्वी की छूट में अपनी जीब घुसए हुई थी, और जहान्वी अपने बूब्स को पकड़ कर दबा रही, जहान्वी की बर्दाश्त ख़तम होने लगी तो वो अपने निप्पल्स को मरोड़ने लगी. प्रिय की जीब बड़ी तेज़ी और महारत से जहान्वी की छूट में गर्दिश कर रही थी, और जहान्वी अपने सर्र पीछे किये अपने निप्पल को मरोड़ने में लगी हुई थी..

जहान्वी:- हम्मम्मम्मम्हा प्रिय मेरी जान, और तेज़ चाटो, अपनी जीब को मेरी छूट में पूरा hi घुसा दो, प्रिय तुम्हारी जीब बोहत गरम हममममममममः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सीईईई

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ प्रिय और तेज़ और तेज़.. मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है,

उफ्फ्फ आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह सीईईई हाय प्रिय तुम कितना मज़ा देती हो..

जहान्वी सिसकियाँ लेते हुए अंतिम सीमा तक जा पोंछी और प्रिय की छूट पर धप से गिर गई.

प्रिय:- कमीनी मेरी छूट का क्यों कचूमर निकल रही है..

जहान्वी सुनंने की हालत में hi कहाँ थी.

हालत तू श्रुति की भी सही नहीं थी. वो भी मेरे लुंड को थामे हुए अपनी छूट की चटाई का मज़ा ले रही थी. मेरे लुंड को खड़ा करने के बाद अब्ब शूरति उसे कस के पकडे हुए अपनी छूट में मेरी जीब को पूरी तरह से फील कर रही थी.

श्रुति की भी सिसकियाँ चरम पर थीं..

श्रुति:- विज्जज्जूऊऊऊ.. yesssssss..yesssssss.. हम्मम्मम्हा... ahhhhhhhh..ohhhhhh

विज्जु मेरे चुत्तडों को और खेंच क्र छतो.. पूरी जीब घुसा दो मेरी कब्ब से तड़प रही छूट में..... मेरी छूट भी रोने वाली है.. ओह्ह्ह

vijjjjjjuuuuuuuuuu मेरी जाएं तुम कितना मज़ा देते हो. सालों तक इंतज़ार किया तुम्हारे प्यार के लिए .. और तेज़ विजजूउउ ohhhhhhhhhh मैं gaiiiiiiiiiiiiii.

शूरति मेरे लुंड पर ागरम साँसे छोड़ते हुए झड़ने लगी.. शरई की छूट का पानी मेरे मोहन में जाने लगा और मैं अपनी तितली की छूट का पानी मज़े से पीने लगा......... जितनी देर में श्रुति शांत हुई तब तक उसकी छूट भी साफ़ हो चुकी थी..

प्रिय:- jhanvi,shruti पहले विज्जु का लुंड कौन लेगी...

जहान्वी:- इसमें पहले वाली कौनसी बात है, जो भी पहले लेले, मिलना तो सभी को hi hai.aaaj छूट तो सबब की hi फटेगी.. जितना मोटा और लम्बा लुंड है विज्जू का पहले घुसे किसी की छूट में या बाद में दर्द से जान तो सबब की hi निकलेगी..

श्रुति:- हाँ प्रिय छूट तो कुछ hi देर में सभी की फटने hi वाली है तो पहले और बाद में, वाला चक्कर तो है नहीं, और रही बात दररने की तो छूट पहले फटे या बाद में दर्द तो तीनो को hi होगा..

प्रिय;- तो विज्जु का लुंड पहले मैं ले लून..

jhanvi,shruti:- हाँ तुम लेलो तब्ब तक्क हम भी देख लेंगी क विज्जु कैसे पहली बार किसी की छूट में घुसता है....

प्रिय झट से बीएड पर सही पोजीशन में लेट गई अउ मुझे देख कर मुस्कुराने लगी..

विजय:- हाय मेरी तितली तो छूट खुलने के लिए बड़ी खुश दिख रही है.

प्रिय:- और नहीं तो क्या, कब्ब से इस सबब के लिए तो तरस रही थी.. लड़की से औरत बनने के लिए कब्ब से hi तो इंतज़ार कर रही थी हम तीनो, कोठे ार रहते हुए कितनी hi बार लुंड को छूट में घुसते हुए देखा है, और लास्ट के तो कुछ महीने तो हम तीनो की hi छूट तरस hi गई थी पानी निकलने के लिए.

बोहत आग हम तीनो की hi छूट के अंदर स्टॉक हो चुकी है.

अब्ब बातें छोड़ो और जल्दी से अपना लुंड मेरी छूट में घुसा क्र वो आग बहार निकालो... अभी पता नहीं मुझे कितना दर्द होने वाला है, आग बुझाने के चक्कर में आज बोहत बुरा हशर होने वाला है....

मुझे भी प्रिय की बात सही लगी, एक तो मेरा लुंड बोहत बड़ा था और दूसरा प्रिय की छूट पहली बार खुलने जा रही थी, ऊँगली लेने से तीनो की hi छूट कुछ खुल चुकी थी लेकिन ऊँगली और लुंड में फर्क होता है, और मेरा लुंड तो मोटा भी बोहत था, प्रिय के लिए और बाकी दोनों के लिए ये रात मज़े की तो थी hi लेकिन दर्द भरी चुदाई भी होनी कन्फर्म थी, एक बार तो तीनो की hi हालत पतली होने वाली थी..

मैंने जहान्वी और श्रुति को देखा.. और प्रिय को देख कर प्रिय की छूट के सामने जा कर बैठ गया.

प्रिय मुझे डिफ्रेंटेंट एक्सप्रेशन से देखने लगी, एक्ससिटेड तो वो थी hi लेकिन छूट खुलने की फीलिंग के साथ दर्द के भाव भी एडवांस में hi मेरी प्रिय के चेहरे पर दिख रहे थे., मैंने प्रिय को एक स्माइल दी और प्रिय के पैरों को पर साइड में पहला दिया.

जहान्वी:- चलो विजय अब्ब देर न करो दाल दो प्रिय की छूट में अपना लुंड...

इतना बोल कर जहान्वी प्रिय के बूब्स को पकड़ कर हल्का सा दबाने लगी, प्रिय एक्ससिटेड तो पहले से ह थी, और फिर मेरे खड़े लुंड को रूलर hi टुकर टुकर देख रही thi...priya की साँसों में थोड़ी सी हलचल होने लगी.. प्रिय के बूब्स जहान्वी के हाथ में मचलने लगी जहान्वी प्यार से प्रिय के बूब्स को अपनी उँगलियों से दबने लगी.

मैंने अपने हाथ से अपने लुंड को पकड़ कर प्रिय की छूट के लिप्स में घुसा दिया.

प्रिय की छूट के लिप्स मेरे लुंड के घुसते हे खुल गए. और मेरे लुंड प्रिय की छूट के छेड़ में फस्स गया, फिंगरिंग की वजा से प्रिय की छूट से कुछ कुछ खुली हुई थी जिस वजा से मेरे लुंड का सूपड़ा कुछ ज़ोर देने से प्रिय की छूट में फस्स चूका था.

मैंने प्रिय फिर प्रिय के पैरों को पकड़ कर एक ज़ोर का धक्का मार दिया. प्रिय की चीख निकल गई..

प्रिय:- aiiiiiiiiiiiiiiiiiii vijjjjjjjjuuuuuuuuuuuuu maarrrrrrrrrrrrrrrrr

gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii..

मैं अपनी तितली को ज़यादा दर्द नहीं देना चाहता था, इसलिए खुद देर रुके का सोचा, मेरा लुंड प्रिय की छूट की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुस चूका था, जो प्रिय के लिए सहन करना आसान नहीं था, मेरी प्रिय मारे दर्द के चीखने लगी.

श्रुति भी दूसरी साइड हो कर प्रिय के ढूढ़ को मोहन में लेकर चूसने लगी..

जहान्वी तो पहले से hi प्रिय के बूब्स को दबा रही थी. दोनों मिल कर प्रिय प्रिय के दर्द को कम् करने लगीं.

कुछ देर में प्रिय कुछ शांत हुई तो

जहान्वी:- विज्जू तुम्हरा लुंड कैसे प्रिय की छूट में फंसा हुआ है. प्रिय को तो बोहत दर्द हो रहा होगा.. देखो प्रिय की छूट कितनी हल गई है.

जहान्वी:- प्रिय तुम ठीक हो ना.

प्रिय ने आंख खोल कर जहान्वी को देखा और एक दर्द भरी मुस्कान देते हुए सर्र न में हिलने की कोशिश करने लगी..

जहान्वी:- विजजू मुझे लगता है प्रिय को दर्द नहीं हो रहा तुम ऐसा करो, क पुरे ज़ोर से एक धक्का और लगाओ.

प्रिय जहान्वी की बात सुनते hi ..

प्रिय:- जहान्वी कमीनी मेरी जान निकलवानी है क्या..... विजजू प्लीज अभी कुछ देर रुको, सच में मैं बता नहीं सकती मेरी क्या हालत हुई है... वैसे विज्जू तुम्हारा लुंड मेरी छूट में गया कितना है..

जहान्वी:- hehehehehe..vijjjuuu इसे सही मैट बताना वर्ण ये डर जाएगी...

विजय:- प्रिय मेरी जान तुम डरो नहीं मैं धीरे से hi करुगा. मैं भला क्यों तुम्हे दर्द देने लगा. ये तो जहान्वी तुम्हे परेशान कर रही है...

प्रिय:- विजजूउ धीरे से अपने लुंड को हिला कर चेक करना.

मैंने प्रिय की बात सुन कर अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा...

प्रिय:- aiiiiiiiiiiiiii विजजूउ अभी रुकू.. मुझे ऐसे लग रहा है जैसे मेरी छूट के अंदर का मॉस भी तुम्हारे लुंड से चिपक कर बहार निकल जाएगा..

विजय:- बहार निकाल कर क्रीम लगा लून..

प्रिय:- ओह्ह्ह्हह्ह विजजूउ पहले क्यों नहीं बताया था...

जहानीव;- नहीं विज्जू रहने दो.. ऐसे hi हम तीनो तुम्हरा लुंड अपनी छूट में लेंगी.. क्रीम लगाने से पूरा मज़ा नहीं आएगा..

प्रिय:- लेकिन जहान्वी इससे तो सच में बोहत दर्द होगा..

जहान्वी:- प्रिय इसी दर्द के लिए तो हम सालों से बेचैन हाँ. आज पूरा मज़ा और पूरा दर्द लेंगी..

श्रुति:- विज्जू क्या ऐसे hi बातों में रात काटनी है, एक जोर्का धक्का लगाओ और पूरा दाल दो.. अभी दो छूट और भी तो हाँ खुलने की इंतज़ार मेंफिर. कितना देर लगाओ गे..

जहान्वी:- हाँ विज्जु अब्ब देर न करो. अगर तुम हमारे दर्द को hi सोचते रहोगे तो कर ली हम चरों ने चुदाई. दर्द तो कुछ देर में खुद hi काम हो hi जायेगा...

प्रिय लाचारी से जहान्वी को देखने लगी.. एक्ससिटेमेंट में आ कर पहले छोड़ने का मैं तो बना लिया था प्रिय ने लेकिन अब्ब छूट के फटने से सोचने लगी क पहले क्यों लुंड ले लिया. बाद में भी तो लिया जा सकता था..

मेरा लुंड प्रिय की छूट में 3.5" जा चूका था और प्रिय की छूट का लॉक पूरी ातरः से चकनाचूर हो चूका था. प्रिय ऐसे hi तो नहीं तदपि थी. जब मैंने अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा तो प्रिय की टाइट छूट से छोड़ा से खून भी निकलना शुरू हो गया था.

मेरी प्रिय की छूट का उदघाटन हो चूका था, मेरी प्र्रिया मेरे hi लुंड से लड़की से औरत बन चुकी थी.

मैंने अपने बाकी लुंड को थोड़ा सा और हिलाया और प्रिय के पैरों को कस के पकड़ लिया.

मैंने प्रिय की छूट को और भी अच्छे से खोलने के लिए एक करारा शॉट मार दिया.

प्रिय पूरी जान से हिल गई...

प्रिय:- aiiiiiiiiiiiii विज्जज्जूऊऊऊ मैं marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiii... विज्जू ने मेरी छूट में चाकू इतर दिया.. हाय मा आपकी लाड़ली प्रिय की छूट पूरी खुल गई.. आपके hi बेटे ने अपनी बेहेन की छूट पहाड़ डाली...

प्रिय की बात सुन कर श्रुति और जहान्वी हस्सन लगीं

और अप्रिय हलकी आवाज़ से रोने लगी.

मेरा लुंड मेरी प्रिय की छूट की दीवारों को चीरा हुआ 6" तक्क अंदर चला गया था. जितना मोटा था मेरा लुंड प्रिय की छूट उतनी hi तंग थी. ऐसे चीख तो फिर निकालनी hi थी.

जहान्वी:- प्रिय रो तो रही है, लेकिन देखा नहीं वो सहन भी कर गई है. वर्ण उसकी चीख से रूम न गूँज उठता...

श्रुति और जहान्वी प्रिय के बूब्स को मोहन में लेते हुए चूसने लगी.

मैं प्रिय का चेहरा देखने लगा.

प्रिय क आंसू बहते हुए नीचे गिरने लगे, मुझे अपनी प्रिय पर बोहत प्यार आया.

लेकिन ये दर्द तो तीनो क नसीब में लिखा जा चूका था.....

मैं अपने लुंड किओ हिलाये बिना अपनी प्रिय को देखने लगा. और jhanvi,shrtui प्रिय के बूब्स और निप्पल को चूसने में लगी रहीं.

प्रिय के आंसू तो नहीं रुके लेकिन अब्ब वो शांत हो गई थी.. वो मुझे देखने लगी. प्रिय के दोनों hi बूब्स जहान्वी और श्रुति के मोहन में थे . जिस वजा से प्रिय कुछ शांत हो गई थी. मेरे रुके रहने से प्रिय का दर्द और भी कम् हुआ, तो प्रिय अब्ब मुझे बोहत hi प्यार से देख रही थी...

प्रिय:- विजजूउउ, ी लव यू.. विजजूउउ तुमने मुझे वो ख़ुशी दे hi दी, जिस की तमन्ना सालों से थी, मैं तुम्हे कैसे बताओ विज्जु मैं कितनी खुश हूँ, मेरा अंदर मैं आज झूमने लगा है..

विजय:- मुझे भी तो उतनी hi ख़ुशी मिल रही है प्रिय , जितनी तुम्हे हो रही है, आखिर हम हाँ तो एक hi.

प्रिय:- विज्जउ अब्ब तुम अपने लुंड को धीरे से पीछे खेंचो...

मैं प्रिय की आँखों में देखता हुआ अपने लुंड को पीछे खेंचने लगा, प्रिय की छूट ने मेरे लुंड को कस के पकड़ा हुआ था, खेंचने से प्रिय को दर्द होने लगा, तो प्रिय ने अपने होंटो को आपस में दबा कर मुझे मेरा काम जारी रखने को कह दिया... मैंने भी अपने लुंड को प्रिय की छूट से धीरे धीरे करके पीछे खेंचा, प्रिय की छूट से खून निकलने लगा, मेरा लुंड सुपडे तक बहार निकल आया तो मैंने ने फिरसे से उसे धीरे धीरे करके अंदर घुसा दिया. 2 - 3 बार ऐसा करने से hi लुंड को प्रिय की छूट में कुछ आसानी होने लगी और वो किसी हद तक आराम से जाने लगा.

प्रिय:- विज्जउ थोड़ा सा अपनी स्पीड बढ़ाओ.

मैंने अपने लुंड को थोड़ा सा स्पीड देते हुए प्रिय की छूट में अंदर बहार करने लगा, मेरा लुंड प्रिय की छूट को खोलता हुआ 5" तक अंदर बहार होने लगा..

प्रिय को शांत देख कर जहान्वी और श्रुति पीछे हैट गईं.

प्रिय:- विज्जू मेरे ऊपर आ जाओ. और मुझे किश करते हुए छोड़ो...

मैंने प्रिय की बात मानते हुए प्रिय के ऊपर झुक कर प्रिय के होंटो को अपने होंटो में ले लिया..

प्रिय अपने हाथो को मेरी पीठ पर चलते हुए मुझे किश करने लगी और मैं अपने लुंड को कुछ और भी स्पीड देते हुए प्रिय को छोड़ने लगा...

अब्ब मे लुंड 6" तक्क प्रिय को छूट में फिट जाने लगा था. सारा मैंने अंदर नहीं डाला था, प्रिय की छूट अब्ब खुल गई थी, अब्ब वो लड़की से औरत बन्न चुकी थी,. तो बाकी की छूट खुलाई भी किसी टाइम कर hi लूंगा. अब्ब प्रिय को मज़ा देना ज़रूररी था....

मैंने अपनी स्पीड बधाई तो प्रिय ने भी मुझे किश करने की स्पीड बढ़ा दी. प्रिय को दर्द तो अब्ब भी हो रहा था लेकिन प्रिय अब्ब दर्द को भूल कर मेरे लुंड के मज़े लेने लगी थी. प्रिय की छूट ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. जिस वजा से मेरा लुंड और भी अच्छे से प्रिय की छूट में अंदर बहार लगा और प्रिय भी अपनी छूट के पानी की वजा से रिलैक्स हो गई थी. मेरा लुंड अब्ब प्रिय को कम् दर्द दे रहा था, अब्ब प्रिय एमजे में आने लगी थी.

प्रिय की छूट जैसे जैसे रवा हो रही थी, मेरे धक्कों की भी स्पीड बढ़ती जा रही थी.

प्रिय ने अपने पैरों को मेरे चूतड़ों पर रख लिया और उसे अपनी छूट पर दबाने लगी. प्रिय की छूट पानी छोड़ने वाली थी. प्रिय ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरी आँखों में देखने लगी..

प्रिय:- vijjjuuuuuu....hmmmmmmm अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह और तेज़ करो.. विजजूउउ लुंड का मज़ा आखिर मुझे मिल hi गया.. विजजू मैं बता नै सकती तुम्हारे लुंड ने मुझे किस दुन्या में पोहंचा दिया है... ऐसा लग रहा हिअ जैसे मैं स्वर्ग में हूँ.

विजय:- मेरी जान मैं तो तुम्हरी कुंवारी छूट में अपना लुंड दाल के तुम्हारे साथ hi स्वर्ग में हूँ... हम दोनों का मज़ा भी तो एक जैसा hi है..

जहान्वी और श्रुति भी एक दूसरे की चुटु में मोहन घुसाए लगी हुई थीं. उनसे वेट नहीं हुआ तो एक दूसरे को शांत करने में लग गयी थी.

सच में आज पहली बार छुड़ाए से मज़ा hi आ रहा था. पहली चुदाई और वो भी अपनी छोटी बहन के साथ... मेरा बड़ा लुंड और उसकी छोटी सी छूट... मेरा लुंड फस फस के अंदर बहार हो रहा था... मेरे लुंड क सुपडे पर प्रिय की छूट की वजा से कुछ खुजली सी होने लगी थी, जिस वजा से मैं मज़े की इन्तहा तक जा पोहचता था..

priya:-ahhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह siiiiiiiiiiiii हममममममममः उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ विज्जज्जुऊ मेरी जांणण और तेज़्ज़ करूऊऊ मेरिइइइइइइइइ छूट पानी वगळणे वाली हैईईईई..

हाय विजजूउ कितना मज़ा आ रहा है.....

मेरा लुंड प्रिय की छूट में ताबड़ तोड़ ढके पर धक्के लगाने में लगा हुआ था. प्रिय के हाथ मेरी पीठ पर और दोनों पेअर मेरे चूतड़ों पर कस्सणे लगे. और प्रिय की साँसे तेज़ होने लगी. प्रिय पुरे ज़ोर से मेरे चूतड़ों को दबाये हुए थी जिस वजा से मेरा बाकी का बचा लुंड भी धीरे धीरे करके पूरा hi प्रिय की छूट में घुसता चला जा रहा था, लेकिन अब्ब प्रिय ौरे मज़े में थी, जिस वजा से उसने अपने दर्द को पीछे करके के मेरे पुरे लुंड को अपनी छूट में ले लिया था,

प्रिय को दर्द तो बोहत हुआ लेकिन वो रुकी नहीं और न hi मुझे रुकने को कहा, मेरा लुंड मेरी प्रिय की बच्चेदानी से टकराने लगा था, जिस वजा से दर्द के साथ प्रिय को मज़ा भी बोहत आने लगा था, प्रिय की छूट ने पानी की बौछाड़ शुरू कर दी थी,

और मेरा लुंड प्रिय की छूट पर लगते hi धप धप की आवाज़ पैदा कर रहा था.

प्रिय की निप्पल अकड़ के मेरे सीने से चुभने लगे. प्रिय अब्ब आखरी स्टेज पर थी.. तो मैंने अपने धक्को को तूफानी स्पीड देने शुरू कर दी. प्रिय बीएड पर उछाल रही थी. जिस वजा से प्रिय की गांड बीएड पर लगते hi आवाज़ देने लगती.

पूरा बीएड hi मेरे धक्को की वजा से कहल रहा था, जहान्वी और श्रुति अपनी मस्ती में लगी हुई थीं.

प्रिय मेरे धक्कों को सहन नहीं कर पाई और झाकते खाते हुए अपनी छूट का पानी खून के साथ hi बहाने लगी....

प्रिय के झड़ते hi मैंने जहान्वी और श्रुति को देखा, तो अभी भी लगी हुई थीं. एक दूसरे की छूट चाटने में ... मैंने प्रिय को रिलैक्स होने के लिए छोड़ दिया.

मैं प्रिय के ऊपर से उठा और और जहान्वी के पीछे आ गया.. श्रुति की नज़र मुझ पर पड़ी तो उसने जहान्वी की छूट से मोहन हटा कर प्रिय को देखा. और फिर मेरे लुंड को देखने लगी. जिस पर प्रिय की छूट का पानी और खून लगा हुआ था..

श्रुति ने मेरे लुंड को पकड़ा और जाह्नवी की छूट पर रगड़ने लगी..

जहान्वी:- विजजूउ तुम यहाँ हो तो प्रिय.??

विजय:- प्रिय की छूट एक बार ठंडी हो चुकी है. अब्ब बताओ किसकी छूट खोलो. वैसे इसी पोजीशन में hi क्यों न तुम्हारी छूट में लुंड घुसा दूँ..

जहान्वी:- मारना है क्या मुझे. ऐसे तो मेरी छूट का सत्य नाश हो जाएगा....

जहान्वी उठ कड़ी हुई..

श्रुति:- जहान्वी तुम पहले विज्जू का लुंड ले लो..

जहान्वी:- पहले या बाद की बात से क्या फर्क पड़ता है. कोई भी नीचे लेट कर विज्जु का लुंड लेले....

श्रुति:- चलो विज्जू फिर तुम मेरी hi छूट पहले खोल दो..

प्रिय बेसुध पारी हुई थी. उसकी छूट खून उगल उगल कर बीएड शीट को नेहला रही थी.

मैंने श्रुति के पैरों को खोला और श्रुति के ऊपर झुक कर उसे किश करने लगा. जहान्वी ने मेरे लुंड को पकड़ कर श्रुति की छूट पर सेट किया. मेरा लुंड तो पहले से hi प्रिय की छूट के पानी से गीला था. और श्रुति की छूट को जहान्वी ने बोहत अच्छे से hi चाट चाट क्र नरम और गरम कर दिया था.. श्रुति की गीली छूट ने मेरे लूणद का वेलकम किया और खुद में सामने के लिए रेडी हो गई...

जहान्वी ने अच्छे से श्रुति की छूट के लिप्स को खोल कर मेरे लुंड को सेट कर दिए था.. मैं श्रुति को किश करता हुआ अपने लुंड को थोड़ा सा षुरूति की छूट में पुश किया, मेरा लुंड शूरति की छूट में अच्छे से फिट हो गया तो मैंने अपनी गांड को उठा कर एक नार्मल ढाका मारा जिस से मेरे लुंड का सूपड़ा षुरूति की छूट के छेड़ में फस्स गया.. मैंने किश करते हुए श्रुति की आँखों में देखा टी वो ऑंखें बंद किये लुंड को अपनी छूट में घुसने का वेट कर रही थी..

मैंने देर न करते हुए और जोर्का धक्का मारा और मेरा लुंड श्रुति की छूट की सील को तोड़ता हुआ 4" तक्क अंदर घुसता चला गया. श्रुति उछाल padi.aur मेरे होंटो से अपने होंटो को अलग करने लगी. श्रुति की आँखों से गंगा जमना बहाना शुरू कर दया था.. मैंने श्रुति को चूमना छोड़ा..

श्रुति आंसू बहती आँखों से मुझे देखने लगी...

षुरूति की सांस अखाड गई थी. मैं रुका रहा तो श्रुति को कुछ चैन मिला.

मैं श्रुति की गर्दन मो चूमने लगा और अपने हाथो से श्रुति के बूब्स को पकड़ कर हलके से दबाना भी शुरू कर दिया.

षुरूति की गार्डन पर किश करते हुए मैं श्रुति के बूब्स को भी मसलने लगा.

श्रुति धीरे धीरे शांत होने लगी तो मैंने श्रुति की गर्दन को छोड़ कर श्रुति की आँखों में देखा तो श्रुति कुछ रिलैक्स थी. मैंने श्रुति के बूब्स पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चाटने लगा. श्रुति और भी शांत होने लगी. और अपने हथु को मेरे सर्र पर रख कर मेरे बालों में उँगलियाँ चलने लगी.

मेरा लुंड शूरति की छूट में फँस चूका था. प्रिय की तरह से श्रुति की छूट भी बोहत टाइट थी. मेरे श्रुति के बूब्स को चाटने से मेरा लुंड थोड़ा सा हिला तो दर्द की वजा से श्रुति की हलकी सी चीख निकल गई..

जहान्वी:- चलो अब कितना देर लगनी है.. दर्द तो होना hi है..... मैंने और श्रुति ने जहान्वी को देखा. तो वो ललचाई हुई नज़रों से हमें देखने लगी..

प्रिय की छुड़ाए और अब्ब शूरति की चुदाई देख क्र जहान्वी बोहत गरम हो चुकी थी. श्रुति ने जहान्वी की छूट चाट कर उसका पानी नहीं निकला था. जिस वजा से जहान्वी बोहत बेक़रार दिख रही थी..

अभी उसका मैं तो कुछ करने से रहा.

माने अपने लुंड को हिलाते हुए थोड़ा सा पीछे खेंचा. तो मेरा लुंड श्रुति की छूट के मॉस को खेंचने laga....shurti की चीख निकल गई.... लेकिन मैंने अब्ब श्रुति के दर्द पर धयान नहीं दिया और अपने लुंड को सुपडे तक बहार निकल कर उतने से hi शूरति को छोड़ने लगा. 4 बार लुंड अंदर बहार हुआ तो शूरति को दर्द काम हुआ...

श्रुति अब्ब कुछ मज़े में आ गई थी.

मैंने श्रुति के पैरों को पकड़ कर एक बड़ा धक्का लगा दिया जिस से मेरा लुंड 6" तक्क श्रुति की छूट की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुस गया.

श्रुति:- aiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrrrrrr गईइइइइइइ विज्जज्जूऊऊऊ थोड़ा धीरे से नहीं कर सकते थे क्या.....

जहान्वी- अगर धीरे से करेगा तो घुसेगा कैसे.??

जहान्वी श्रुति के बूब्स को अपने मोहन में लेकर चूसने लगी. मैंने अपना एक हाथ जहान्वी की छूट पर रख दिया. जहान्वी को कुछ चैन मिला और वो अच्छे से श्रुति के बूब्स को चाटने लगी.. जब तक श्रुति रिलैक्स होती मैं जहान्वी को शांत कर सकता था. मैंने अपनी एक ऊँगली को अच्छे से जहान्वी की छूट में घुसा दिया. ऊँगली जितनी जगा तो तीनो की पहले से hi बानी हुई थी, मेरी ऊँगली को भी जहान्वी की छूट में घुसते हुए कोई परेशानी नहीं हुई. मैंने अपनी ऊँगली को जहान्वी की सील तक अंदर डाला और अपनी ऊँगली को जहान्वी की छूट में घुअमाने लगा.....

जहानीव तो पहले सही झड़ने के करीब थी. जहान्वी की छूट ने भी पानी बहाने तेज़ कर दिया. मेरा लुंड श्रुति की छूट में फंसा हुआ था और मैं जहान्वी की छूट में उंगल करते हुए उसे ठंडा करने माँ लगा हुआ था..

जहानीव की बेकरारी बढ़ी तो उसने श्रुति के निप्पल को मोहन में ले कर ज़ोर से चुस्ने शुरू कर diya..jhanvi दूसरे हाथसे श्रुति के दूसरे निप्पल को भी कुरेद रही थी... जहान्वी के म्हणत से श्रुति का दर्द ग़ायब हुआ और वो मस्ती में आने लगी.. श्रुति अपनी गांड को उठा क्र मेरे लुंड को अंदर लेने की कोशिश करने लगी. अब्ब लुंड मेरी कोशिश किये बिना तो श्रुति की छूट में अंदर बहार होने से रहा....

मैं तब्ब तक्क जहानीव की छूट को मसलता रहा जब्ब तब्ब जहान्वी झाड़ नहीं गई.. जहान्वी ने श्रुति के निप्पल को अपने मोहन से निकल दिया था. अब्ब उसका मोहन श्रुति के बूब्स के ऊपर रखा हुआ था और वो गहरी सांस ले रही थी. जहान्वी का बदन अकड़ने लगा और वो अपनी गांड को कस्सणे लगी. जहान्वी ने श्रुति का एक बूब्स कस के पकड़ लिया था. जहान्वी झड़ने लगी तो श्रुति के बूब्स जहान्वी के हाथ में ज़ोर से डब्ब गया जिस वजा से श्रुति की चीख निकल गई..

लेकिन जहान्वी शूरति की चीख से बेनियाज़ अपनी छूट का पानी निकलने में लगी हुई थी.

जहान्वी के झड़ते hi मैं अपने लुंड को देखा तो श्रुति की छूट में 6" तक्क धंसा हुआ था.

मैं अपने लुंड को धीरे धीरे श्रुति की छूट से बहार खेंचने लगा. श्रुति को दर्द हुआ लेकिन मैंने श्रुति की छूट से अपने लुंड को सुपडे तक्क बहार निकला और फिरसे धीरे धीरे अंदर डालने लगा. श्रुति की छूट मेरे लुंड को कस्सणे लगी लेकिन मैं नहीं रुका, शूरति की छूट से निकलने वाला खून मेरे लुंड से होता हुआ बीएड पर गिर रहा था.

मेरा लुंड फिरसे श्रुति की छूट में 6" घुस गया तो मैंने उसे फिरसे बहार निकल कर अंदर पुश कर दिया. 4-5 बार ऐसे करने से षुरूति की छूट मेरे लुंड के लिए फिट हो गई तो मैंने जहान्वी को श्रुति के ऊपर से हटाया और श्रुति के ऊपर झुक कर श्रुति को किश करते हुए अपने लुंड को श्रुति की छूट में इन आउट करने लगा. शूरति को दर्द तो हो रहा तह. लेकिन अब्ब श्रुति जहान्वी की बूब्स चटाई की वजा से गरम भी हो गई थी. तो उसे अब्ब मज़ा बी आने लगा था..

धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ने लगी. और श्रुति मेरे होंटो को पीने लगी..

प्रिय अब्ब कुछ रिलैक्स थी. उसे दर्द तो होना hi था. वो अपने पैरों को खोले हमारी चुदाई देखने लगी..

मैं अपने लुंड से श्रुति को पेलने में लगा रहा. मेरा लुंड श्रुति की छूट से रगड़ रगड़ कर अंदर बहार हो रहा था.. श्रुति की किश वाइल्ड होने लगी.

मेरा लुंड षुरूति की छूट में अपनी स्पीड बढ़ने लगा. और मेरे हाथ फिसलते हुए श्रुति के बूब्स पर चलने लगे. श्रुति के बूब्स सख्त होना शुरू हो गए थे , मैंने श्रुति के निप्पल को पकड़ कर हल्का सा खेंच लिया. श्रुति को और भी मज़ा आया और वो अपनी गांड को उठा कर मेरा लुंड लेने लगी..

श्रुति की सांस फूलने लगी तो उसने मुझे किश करना छोड़ दिया.. शूरति के हाथ मेरी पीच पर कस्सणे लगे..

मेरा लुंड और शर्तइ की छूट का ताल मेल बढ़िया से होने लगा और फिर श्रुति के शरीर ने भी झाट्ने खाने शुरू कर दिए. श्रुति के दोनों पेअर मेरे चूतड़ों पर आये और शूरति ने मुझे अपने हथु और अपने पैरों से मुझे कस लिया..

श्रुति के पैरों के दबाओ से मेरे लुंड को एक झटका लगा और मेरा बचा हुआ पूरा लुंड एक ज़बर्दस्त धक्का मारते हुए श्रुति की बाकी बची हुई छूट को फाड़ते हुए श्रुति की बच्चेदानी से जा टकराया.

श्रुति:- aiiiiiiiiiiiiiiii वीजजजजूउउउ अभी भी तुम्हारा कुछ बाकी था क्या..

मैं तो मर hi गई थी, इतना दर्द हुआ ...siiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhh

मज़ा भी आ रहा है और दर्द भी हो रहा है.. दोनों मिल कर कैसे अलग सा एहसास दे रहे हाँ.. और तेज़ विजजूउउउ मेरी जान,, पूरा फहद दो अपनी श्रुति की छूट को....

मेरे ढक्कू में भी तूफानी स्पीड आणि शुरू हो गई थी. जिस वजा से बीएड एक बार फिरसे अपनी आवाज़ में गुनगुनाने लगा था. मेरा पूरा hi लुंड श्रुति की छूट में अंदर बहार हो रहा था.

श्रुति:--- विजजूउउउ और तेज़्ज़ अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह ह्म्म्मम्घा उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ विज्जज्जुऊ मेरी छूट बहने वाली है... और तेज़.. और tezzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz

श्रुति बलते बोलते सिसकियाँ लेने लगी...

कुछ hi देर में श्रुति की छूट और भी टाइट हुई और फिर शूरति ने एक बड़ा झटका खाया और श्रुति की छूट ने पानी छोड़ दिया...

श्रुति तो जहान्वी की म्हणत से hi आधी झड़ने वाली हो गई थी. वो तो मेरे लुंड के उसकी छूट में घुसते hi दर्द की वजा से उसकी छूट का पानी कुछ पीछे चला गया था. वर्ण वो तो कब्ब की पानी बहा चुकी होती.....

मैंने श्रुति को भी छोड़ दिया और बीएड पर प्रिय के पास hi लेट गया. प्रिय मेरे ऊपर आई और मुझे किश करने लगी... प्रिय बोहत धीरे से मुझे किश कर रही थी. मेरे हाथ प्रिय के चूतड़ों पर चलने लगे..

जहान्वी भी अभी ठंडी हो गई थी, अभी उसे पहले कुछ गरम करना पड़ेगा फिर उसकी छूट में लुंड जाएगा...

मुझे 40 मिंट हो चुके थे अभी तक मेरा लुंड नीचे नहीं हुआ था.. होता भी कैसे असूय अभी पुरे रिधम से चुदाई करने को मिली hi नहीं थी. आज तो बास छूट खोलने का काम hi था, जब्ब पूरी तरह से खुले गई तब्ब hi पूरा मज़ा आएगा... मुझे मज़ा तो बोहत आ रहा था लेकिन बार बार रुकने से वो मज़ा नहीं आया था, हाँ टाइट छूट में लुंड फस फस कर जाते हुए बड़ा मज़ा दे जाता था..

मेरे हाथ प्रिय की गांड की दरार में चलने लगे प्रिय मुझे किश करने में लगी रही. मेरी एक ऊँगली प्रिय की छूट पर गई तो प्रिय ने मुझे किश करना छोड़ दिया..

प्रिय:- विजजू अभी मेरी छूट में बोहत दर्द है, प्लीज अभी वहां ऊँगली मैट लगाओ...

जहान्वी:- विज्जउ मेरी छूट नहीं खोलनी क्या.?

विजय:- जहान्वी पहले तो अपनी छूट को फिर से गरम तो करले.

जहान्वी अपनी टांगों को खोल कर अपनी छूट दिखते हुए.

जहान्वी:- इसे नरम और गरम तो तुमने hi करना है...

मैंने प्रिय को देखा तो प्रिय मेरे ऊपर से हट गई और मैं जहान्वी की छूट पर टूट पड़ा. कुछ देर जहान्वी की छूट में अच्छे से अपनी जीब दाल कर जहान्वी की छूट को छोड़ता रहा. जब्ब जहान्वी की छूट ने पानी छोड़ना शुरू किया तो..

मैं उठ खड़ा हुआ और जहान्वी के पैरों में आ क्र बैठ गया..

विजय:- तो जहान्वी अब्ब तुम तैयार हो अपनी छूट खुलवाने के लिए..

जहान्वी:- विज्जू अब्ब भी पूछ रहे हो. मैं तो प्रिय और शर्तइ की वजा से रुकी हुई थी वर्ण मैं खुद hi तेरे लुंड पर अपनी छूट को रख कर एक झटके में नीचे बैठ जाती. और अपनी छूट की बेकरारी ख़तम करा लेती....

इतनी आग लगी है मेरी छूट में, अब्ब देर मैट कर और पहाड़ डालो मेरी छूट को.

सालों इंतज़ार किया है इस समय के लिए...

मैंने अपने लुंड को जहान्वी की छूट पर सेट किया और जहानीव की आँखों में देखते हुए अपने लुंड को जहान्वी की छूट में पुश करने लगा. तीनो ने hi एक दूसरे की उँगलियों से अपनी छूट को कुछ खुला किया हुआ था. जाह्नवी की छूट प्रिय और श्रुति की छूट से कुछ बड़ी थी. जहान्वी की छूट के लिप्स कुछ मोठे थे. और मेरा लुंड जहान्वी की छूट में अच्छे से फिट हो गया.

मैंने एक हल्का से धक्का मारा तो मेरे लुंड का सूपड़ा जहान्वी की छूट के लिप्स को खोलता हुआ अंदर जा घुसा. जहान्वी को एक हल्का का झटका लगा. लेकिन वो चीखी नहीं. अभी मेरा लुंड थोड़ा सा hi जहान्वी की छूट में गया था. जहान्वी की छूट खुल गई और मेरा लुंड उसकी छूट में फस्स gaya...maine जहान्वी के ऊपर झुकते हुए अपने हथु को साइड में बीएड पर टिकाया और जहान्वी की छूट में अपने लुंड को पुश करते हुए एक करारा धक्का मर्डर दिया.

जहान्वी:- aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii oiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.

meriiiiiiiiii chutttttttttttttttttttt phatttttttttttttt gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.

जहान्वी चीखती हुई अपनी छूट के पहटने का एलान करने लगी लेकिन फॉर जल्दी hi जहान्वी के अपनी आवाज़ को दबा लिया.

मेरा लुंड जाह्नवी की छूट की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुस गया. जहान्वी भी लड़की से औरत बन्न गई थी. मैंने जहान्वी के चेहरे को चूमना शुरू कर दिया...

जहान्वी बीएड की शीट को कस के पकड़ चुकी थी. जहान्वी के चुत्तड़ काँप रहे थे.

जहान्वी जितनी बहादुर दिख रही थी. उतनी थी नहीं. जहान्वी को बी बहुत दर्द हुआ. और जहान्वी के लिए उसे सहन करना आसान नै रहा था. लेकिन फिर भी उसने अपने होंटो को दबा कर अपनी चीख रोक ली थी.. झावनि की ऑंखें भी गंगा जमना बहाने लगीं...

कुछ देर मैं जहान्वी के गाल को चूमता रहा और फिर मैंने जानवी के होंटो को अपने होतनो में ले कर किश करना शुरू कर दिया. मैंने अपने हाथ बीएड से हटा कर जहान्वी के दोनों दूध पर रख दिया और उन्हें हलके हलके दबाने लगा. जहान्वी

शांत होने लगी. और वो मुझे किश में रिस्पांस देने लगी..

कुछ देर में जहान्वी मेरे होंटो अपने होंटो में लिए चूसने लगी और नीचे से अपने चुत्तडों को उठा कर मेरे लुंड को हिलने लगी.. मतलब अब्ब वो दर्द को भूल कर छूट के नशे में झूलने लगी थी.

मैंने जहान्वी को ज़ादा न तड़पते हुए अपने लुंड को धीरे से जहान्वी की छूट से बहार निकला और फिरसे धीरे धीरे अंदर पुश करने लगा. मेरा लुंड जहान्वी की तंग छूट में फस फस के जाने लगा. मैं इतने लुंड से hi जहान्वी को धीरे धीरे छोड़ने लगा..

जहान्वी के चुत्तड़ मज़े और दर्द से हिलने लगे. मैं बार बार अपने लुंड को जहान्वी की छूट में अंदर बहार करने लगे, जैसे hi मुझे लगा क जहान्वी की छूट अब्ब रवां होने लगी है और जानवी भी अब्ब कुछ शांत है तो मैंने अपने लुंड को सुपडे तक बहार निकला और फिरसे एक करके शॉट मार दिया..

जहान्वी इस बार फिरसे पूरी जी जान से हिल गई..

जहान्वी ने मेरे होंटो को काटा तो नहीं बास अपने होंटो में जकड लिया ज़रूर लिया था. जहान्वी की चीख निकल नै पाई. मेरे हाथ जहान्वी के बूब्स और निप्पल पर चलने लगे...

जहान्वी मेरे नीचे तड़प रही थी. उसका बास नहीं चल रहा था क वो उठ कर कही भाग जाए, छूट के फटने का दर्द कम् भी तो नहीं होता, और जब्ब मोटा तगड़ा लुंड कुंवारी छूट में धमाके से घुस जाए तो हशर बरपा हो होना hi था.

प्रिय:- विज्जू तुम जहान्वी के ऊपर से उठ जाओ. शर्तइ भी अब्ब रिलैक्स है तो हम दोनों hi जहान्वी को शांत करती हाँ..

मैं प्रिय की बात सुन कर जहान्वी के ऊपर से उठ गया. मेरा लुंड भी जहान्वी की छूट में हिला तो ..

jhanvi:-aiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa विज्जज्जूऊऊऊ छूट के खुलने से कितना दर्द होता है................. हाआईईए मेरी छूट का दर्द..........

aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.. प्रिय कुछ करो य्र्र मेरा दर्द मुझसे सहन नहीं हो रहा... ऐसा लगा विज्जउ ने लुंड नहीं झांजर उतर दिया है मेरी छूट में ... अंदर से जब्ब छिरर्र गया है.. प्लीज प्रिय जल्दी से कुछ karo.ya विज्जू का लुंड मेरी छूट से निकालो.. हायययययी माआआआ

आपकी जहान्वी मर न जाए कही विज्जउ के लुंड से ...

जहान्वी सर्र पटखनी लगी. तो प्रिय और श्रुति ने जहान्वी के बूब्स को आपस में बाँट लिया और उसे मोहन में लेकर चूसने लगी..

प्रिय साथ में जहान्वी के पेट कर अपना हाथ भी चलने लगी..

मैं तीनो को देखने लगा, तीनो की hi छूट खुल चुकी थी. मैंने एक नज़र प्रिय की छूट को देखा तो प्रिय की छूट सूजी हुई थी. और अभी तक्क प्रिय ने अपनी छूट को साफ़ भी नहीं किया था. वो काफी देर तक्क ऐसे hi लेती रही थी. तो खून प्रिय की छूट पर सूख लगा था.. प्रिय अपनी टांगें खोले घोड़ी बानी जहान्वी के बूब्स को चाटने चूसने में लगी हुई थी..

मैंने श्रुति की छूट को देखा वो भी प्रिय जैसे पोजीशन में थी उसकी छूट भी प्रिय की छूट के जैसे hi फूली हुई थी. श्रुति की छूट पर भी खून लगा हुआ था... दोनों जहान्वी को रिलैक्स करने में लगी हुई थीं और मैं प्रिय और श्रुति की छूट को देखने में मगन था... मैंने बीएड शीट की तरफ देखा प्रिय और श्रुति की छूट से निअक्लने वाला खून बीएड शीट को नेहला चूका था.. मैंने नीचे जहान्वी की छूट को देखा तो वो भी थोड़ थोड़ा करके खून रिस रही थी.

आज मेरे लुंड ने तीनो छूटों को खोल दिया tha....meri तितलियाँ लड़की से औरत बन्न गई थीं.

मैं तीनो खुल चुकी छूटों के नज़ारे में खोया हुआ था, क मुझे जहान्वी के हिलने का एहसास हुआ, मैंने देखा तो जहान्वी अब्ब गरम हो कर अपनी चूतड़ को हिला कर मेरे लुंड के लिए मचल रही थी, मतलब अब्ब उसका दर्द मज़े में बदल गया था.

अब्ब जहान्वी छूट के खुलने के बाद लुंड का मज़े लेने के मूड में आ गई थी, मैंने थोड़ा सा अपने लुंड को हिलाया तो मेरा लुंड आराम से पीछे होने लगा. प्रिय और श्रुति की म्हणत ने जहान्वी की छूट को अंदर से काफी गीला कर दिया था.

मैंने जहान्वी के बूब्स को देखा जो अकड़ चुके थे. प्रिय और श्रुति किसी बच्चे की तरह से जहान्वी के निप्पल्स को मोहन में लिए हुए चूस रही थी. मनो दूध निकलने वाली हूँ.

मैंने जहान्वी को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. उसकी ऑंखें लाल होने लगी थी. और वो मुझे बड़े प्यार से देख रही थी....

जहान्वी:- विजजूउउ तुम्हारी जहान्वी अब्ब औरत बन गई है.... इस सबब के लिए कितना तदपि है तुम्हारी जहान्वी.. विजजूउउ ी लव यू सो मच...... तुमने मुझे भी प्रिय और श्रुति के जैसी ख़ुशी दे दी है.. मैं बोहत खुश हूँ... आज मेरे दिल की हसरत पूरी हुई.. वर्ण सालो डर्र्र्टी hi रही कही कुछ गलत न हो जाए.. लेकिन भगवन ने हम सबब को बचा लिया....

विजय:- मेरी तितली पुराणी बातों को क्यों याद करती है. अब्ब अच्छे दिन आये हाँ तो बुरे दिनों को भूल कर अच्छे दिनों के मज़े लो..

जहान्वी:- वही तो कर रही हूँ. विज्जउ अब्ब मेरी छूट में दर्द नहीं है. तुम अपने लुंड को अंदर बहार करो.. अब्ब मुझसे सहन नहीं हो रहा है..

मैंने भी जहान्वी के दिल की हसरत को पूरा करने के लिए अपने लुंड को सुपडे तक बहार निकला और फिर से जहान्वी की छूट में डालने लगा. मेरा लुंड फस फस के जा रहा था. मैंने जाह्नवी की देखा तो उसके चेहरे पर कोई दर्द नहीं था..

मैंने फिर धीरे धीरे अपने लुंड को जहानीव की छूट में अंदर बहार करने लगा.

कुछ देर में जहान्वी की छूट और भी पानी छोड़ने की वजा से मेरे लुंड के लिए कन्फोर्ताब्ले हो गई. तो

विजय:- प्रिय श्रुति जहान्वी क बूब्स को सारा hi निचोड़ना है क्या. अब्ब उठो ऊपर से नेक्स्ट लेवल अब्ब शुरू होने वाला है...

प्रिय और श्रुति ने जहान्वी के बूब्स को छोड़ा तो दोनों की ऑंखें भी लाल होने लगी थी.. जहान्वी को शांत करने के चक्कर में अपनी छूट को फिरसे जेल कर चुकी थीं...

मैंने जहान्वी के ऊपर आ कर लेट गया और जहान्वी ने मेरे सर को पाकर कर मेरे होंटो को अपने होंटो में ले लिया, और पुरे मज़े से मेरे होंटो को पीने लगी.

जहान्वी की छूट बोहत फड़फड़ा रही थी. जहान्वी अब्ब चाहती थी क मैं फुल स्पीड से उसे छोड़ों. मेरा लुंड भी अब्ब पुरे मज़े के लिए मूड में आ गया था. जितनी देर इसके जहदने में लग्ग गई थी, वो भी बेचैन हो गया था..

मैं जहान्वी पर झुका हुआ जहान्वी की छूट को खोलने में लग गया...

कुछ देर में मेरा लुंड जहान्वी की छूट में अपनी तूफानी स्पीड से घुस रहा था. मेरा लुंड अब्ब सिर्फ 2" hi जहान्वी की छूट से बहार था..

5 मिंट में hi जहान्वी की साँसे उखाड़ने लगी तो उसने मुझे किश करना छोड़ा

और तेज़ सांस लेते हुए अपनी छूट में मेरे लुंड को फील करने लगी.... जहान्वी ने बी अपने पेअर मेरे चुत्तड़ पर रख लिए थे.

जहान्वी का चेहरा मज़े के कारन खिला पड़ा था..

जहान्वी चार्म के करीब पोहंची तो मेरा लुंड भी जहान्वी की छूट में पूरा घुसने माँ मैं बनाने लगा. और मैंने भी अपने लुंड की सुन्नते हुए एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरा लुंड जहान्वी की बच्चेदानी से जा टकराया.. जानवी पूरी जान से हिल गई.

लेकिन छूट के मज़े के कारन वो खुद पर काबू पा गई और मेरा लुंड जहान्वी की छूट की साड़ी hi दीवारों को चीरता हुआ रेगुलर पूरी स्पीड से जहान्वी की बच्चेदानी से टकरा आकर वापिस आता और फिरसे अंदर जा घुसता ....

बीएड का साउंड फिर से शुरू हुआ और जहान्वी के चुत्तड़ भी बीएड पर पटकने लगे..

मैं कुछ और भी जहान्वी पर झुक गया जिस वजा से जहान्वी की गांड कुछ हवा में उठ गई.

मेरा लुंड भी अब्ब पूरी तरह से फुल चूका था. मेरा लुंड भी अपने चार्म पर पोहचने वाला था, जिस वजा से मेरी स्पीड औरर भी तेज़ होने लगी... जहान्वी दोहरी हो गई थी लेकिन उसने कुछ कहा नहीं. बोली तो बास सिर्फ इतना hi

जहान्वी:- haaaaaaaaaaaaaaayeeeeeeeeeeeeeee vijjjjjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuu....

hmmmmmmmmmmmmhhhhhhhhh siiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhh

hayyyyyyyyyyeeeee ufffffffffffffffffff वीजजजजजूउउउउउउ मज़ा hi आ गया.....

और तेज़ एक्रो करों.. पहाड़ दो पूरा हजी अपनी जहान्वी की छूट को सालों तक बड़ा तंग किया हिअ इसने...............

मेरी भी सांस तेज़ हो गई थी. और मेरा खून मेरी पूरी बॉडी से निचोड़ कर मेरे लुंड में इकठा होने लगा था. मेरा लुंड और फूलने लगा जो जहान्वी की तंग छूट को और भी खुला कर रहा था.. मेरा इतना मोटा लुंड तीनो की hi तंग छत को खोल चूका था.....

जहान्वी:- vijjjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu मैं झाड़नीीीे वाली हुन्न्न्नन्न्न्नन ....... ohhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhh siiiiiiiiiiiiii

फ़ास्ट विज्जज्जुऊ फ़ास्ट और फ़ास्ट ..........

जहान्वी तेज़ सांस लेते हुए झड़ने लगी. लेकिन मैं नहीं रुका... जहान्वी के झड़ने से मेरे लुंड को जहान्वी की छूट में और भी आसानी होने लगी. और मेरी स्पीड बढ़ गई..

सच कहूँ तो आज मेरा सही मानो में टेल निकल गया था... इतना टाइम मैंने पहले कभी नहीं लगाया था, और न hi मेरा लुंड पहले कभी इतना तरसा था..

जानवी झड़ने के बाद मेरे धक्को को सहन नहीं कर पाई और मुझे खुद से अलग करने लगी. लेकिन मैं लास्ट स्टेज पर था, अब्ब तो मैंने रुकने वाला था था..'

जहान्वी:- विजजूउउउ हटो मेरे ऊपर से मेरी कहत में बोहत जलन होने लगी है.

प्रिय:- जहान्वी कुछ देर रुकू देख नहीं रही, विज्जू भी झड़ने वाला है. अगर अब्ब उसे रोका तो उसे परेशानी हो गई...

जहान्वी मेरे नीचे तड़प रही थी. लेकिन मेरा ख्याल करते हुए अपनी छूट में मेरे लुंड को शांत होने की परमिशन देने लगी..

जहान्वी को परेशानी तो थी, और मैं तो अब्ब खुद को भूल कर अपने लुंड के कब्ज़े में चला गया था. अब्ब साडी गेम hi मेरे लुंड के हाथ मेथी और मैं तूफानी ढ़ाके लगता हुआ जहान्वी की छूट में अपने लुंड को अंदर बहार ाकरने लगा..

ज़यादा समय नहीं लगा और मेरा लुंड जहान्वी की छूट में अपना लावा उंगलने लगा.

मैं जहान्वी के ऊपर से गिर गया मेरी सांस बोहत तेज़ चल रही थी. जहान्वी को बोहत परेशानी हुई थी. उसकी कमसिन छूट आज hi तो खुली थी और मैंने उसकी धज्जियां उदा दी थीं.

जहान्वी मेरे सर्र के बालों में उँगलियाँ फेरने लगी.. श्रुति मेरे चूतड़ों पर अपना हाथ रखे हुए घूमने लगी और प्रिय मेरी पीठ को सेहला रही थी.

और मैं, मैं जहान्वी के ऊपर गिरा हुआ अपनी सांस बहाल कर रहा था.




******************************************************************************




शंकर गैंग का एक hi दिन और रात में सफाया हो जाना दिल्ली सिटी के दो दूसरे गैंग्स के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था.

दोनों गैंग्स hi जानते थे क शनकर किसी भी तरह से उनसे कम् नहीं था. शंकर जितना चालक था उससे बढ़ कर वो कमीना और दरिंदा सिफत भी था. किसी को माफ़ करना उसकी आदत नहीं थी. इसलिए दूसरे गैंग्स वाले अगरचे शंकर गैस से दररते नहीं थे लेकिन पन्गा लेने से वो कटरे थे. कभी कभी एक दूसरे की डील के लिए कभी कोई पन्गा हो जाया करता था, लेकिन फेस 2 फेस कभी भी सहांरक गैंग से वो भिड़े नहीं थे.

अब्ब इतने पॉवरफुल गैंग को चाँद घंटों में hi साफा इ हस्ती से मिटा दिया गया था. ये बात दोनों गैंग्स के लिए भी खतरे की घंटी बन गई थी.

दिल्ली में बच रहे दोनों गैंग्स ने आपस में मीटिंग की और आने वाले खतरे को ले करके बोहत सी बातें भी हुई. दोनों का आपस में इत्तफ़ाक़ नहीं था. लेकिन कोई अगर उन दोनों के रहते दिल्ली पर कब्ज़ा जमाना चाहेगा तो वो दोनों गैंग्स कैसे ये बर्दाश्त कर सकते थे.

शंकर गैंग्स के ख़तम होने से उन्हें फायदा तो बोहत हुआ लेकिन, जिसने शंकर गैंग को ख़तम किया, उसके बारे में सोच कर दोनों गैंग्स भी परेशां थे..

कही शंकर गैंग के बाद उनका नंबर तो नहीं आने वाला..

सबब मिल बैठ कर उन्हें ढूंढ़ने के लिए प्लान बनाने लगे और अगर वो दोनों को खतम्म करने पर उतर आये तो कैसे उसका खत्म किया जा सकता है.. इसपर बातें होती रहीं



गैंग...1



किशन Arora:age:48

अलोक Nath:age:43

किशन अरोरा और अलोक नाथ में मिलकर गैंग खड़ा किया था, अलोक नाथ एक बिजनेसमैन था तो किशन अरोरा एक गुंडा, दोनों ने मिलकर अपनी गैंग बनाई तो अघा नाम का एक गुंडा भी इन दोनों में शामिल हो गया, जिसका नाम बोहत चल रहा था दिल्ली सिटी में, अघा के इस गैंग में शामिल होते hi गैंग बोहत अच्छे से खुद को मनवाने लगा. अघा एक अच्छा फाइटर था, और उसका इस दुन्या में कोई नहीं था.

किशन और अलोक ने अघा को अपने साथ मिला लिया. अघा को सबब कुछ मिलने लगा तो अघा ने भी दिल से दोनों का साथ देने लगा. अघा को गैंग में तीसरी पोजीशन मिल गई जिससे वो खुश हुआ.

agha.....age:37

अघा ने शादी नै की. गैंग में आने से पहले बुरा काम तो करता hi था लेकिन गैंग्स में पावर मिलने से वो एक घटिया इंसान बन कर रह गया. हर तरह के बुरे काम बड़े शोक से करने लगा... बाद करैक्टर और डेरिंग में ये किशना और अलोक से कहीं आगे निकल गया. लेकिन पैसों के लिए लालच इसके दिल में नहीं है, पैसा तो वैसे भी गैंग में रहते कही से भी हासिल किया जा सकता था.

गैंग्स को चलने के लिए अलोक ने पैसा दिया था, जो किशन ने अलोक से मिलकर गैंग कड़ी की लेकिन आने वाले वक़्त में अघा का नाम इस गैंग में सबब से बड़ा होने लगा. किशन और अलोक को अघा से कोई परेशानी नहीं थी. अघा अक्सर खुद में hi मगन रहता था. धोके करना उसकी फितरत में नहीं था..

अजीब करैक्टर था अघा का भी...

सिद्धार्त nath:age:21

अलोक नाथ का भाई है....

कॉलेज में लीडर तो नहीं है, लेकिन लीडर इसके आगे पीछे घुमते रहते हाँ. इसकी वजा से पुरे कॉलेज का माहौल ख़राब है, ड्रग्स स्टूडेंट में बेचता हाँ. और लड़कियों के लिए तो बोहत hi घटिया विचारों का मालिक है..



******************************************************************************

गैंग...2




महेंद्र singh:age:35

जितेंद्र singh:age:33

दोनों भाई हाँ और अपने बाप के बाद अपने गैंग को चला रहे हाँ. इनका गैंग दिल्ली का पहला ऐसा गैंग है, तो पिछले 20 साल से दिल्ली पर राज क्र रहा है. 20 सालों में कई गैंग्स ए और कई गए, लेकिन महेंद्र सिंह गैंग वही का वही खड़ा रहा......

इनके दो ख़ास दोस्त हाँ...

अनूप Kumar:age:34

dany:age:33

दोनों hi इंटेलगेट और ज़बरदस्त फाइटर हाँ. चरों hi कॉलेज फ्रेंड्स रहे हाँ किसी दौर में..... बाद में चरों hi मिलकर गैंग को चलने लगे...

महेंद्र सिंह का बाप कुछ साल पहले एक हमले में मारा गया था.. तब्ब से hi दोनों भाई इस गैंग को चला रहे हाँ..




********************************************************************************




भारत bhushan:age:50

दिल्ली के एक एरिया का मला है, और इसके साथ कुछ और बुसिनेस्स्में थे जो शंकर गैंग से कनेक्टेड थे. लेकिन शंकर गैंग के ख़तम होते hi खुद के लोस्स को भूल नहीं पा रहे हाँ.

मला का कनेक्शन भी दूसरे दोनों गैंग्स से है. एरिया का फर्क है. लेकिन धंदे एक hi हाँ...




********************************************************************************




दोनों गैंग्स और मला शंकर गैंग के ख़तम होने से रोज़ hi मीटिंग कर रहे थे. और खुद के लिए आने वाले खतरे को ले के hi बातें होती रहती थीं..

मला ने भी बड़ा ज़ोर लगाया था वो जान ले क शंकर गैंग को ख़तम करने में किसका हाथ है. लेकिन कमिश्नर ने किसी को भी हवा तक लगने नहीं दी...

सीक्रेट मिशन कह कर सबब को hi ताल दिया..

कम अच्छे इंसान थे. इन्हे भी सबब अभी तक सही से नहीं बताया गया था.

तो फिर किसी और को कैसे बताया जा सकता था..

पैलेस को ले के भी किसी किसम का कोई ऐसा क्लू नहीं छोड़ा गया था, जिस से किसी को शक हो क पैलेस को खुद के कब्ज़े में करने क लिए हर्ष चौहान ने कोई गेम तो नहीं प्लान किया था. लेकिन कही से भी इस बात का कोई िश्रा तक नहीं मिला...

हर्ष चौहान की पूरी लाइफ hi साफ़ थी.. कही भी हर्ष चौहान को ले के कुछ गलत सुनने में नहीं आया था..



सभी तमक तोइयाँ मरने में लगे हुए थे........



************************************************************************************




 
थैंक्स फॉर थे सुग्गेस्टिव भाई... बदलते हालत के साथ विचार भी बदलते रहते हाँ. अभी श्वेता की लाइफ में अचानक से रंजीत का आना एक अलग चेंज है. मैंने ये तो नहीं कहा क श्वेता रेगुलर hi विज्जू को नज़र अंदाज़ कारगी.. लास्ट 2 उपदटेस में अआपने पढ़ा क कैसे श्वेता ने विज्जू के लुंड से अपनी छूट को ठंडा किया .. श्वेता के मैं के विज्जू के लिए सभी फीलिंग्स सो जाती तो वो ऐसा कुछ न करती .. श्वेता तो विज्जू को तंग करने के लिए देर से गांड खुलवाने की बात रही थी..

एंड थैंक्स मुझसे और मेरी स्टोरी से जुड़ने के लिए... ये सबब आपका प्यार है..
 
थैंक यू वैरी मच..!!

हाँ अब्ब तो इतने साल बीत चुके हाँ इंतज़ार ाकरते हुए. अब्ब तो छूट खुलनी और खोलनी hi चाहिए थी...

विजय के लिए गैंग्स बोहत सी परेशानिया लाने वाले हाँ. सबब को hi खतम करना आसान नहीं होता..

अब्ब तब्ब तो विजय ने कोई क्लू नहीं छोड़ा, लेकिन गैंगस्टर भी किसी से कम् नहीं होते.. वो तो विजय की लक अच्छी थी तो शंकर फ़ौरन hi उसके शिकंजे में आ गया था.

वर्ण शनकर इतना भी आसान हरीफ़ नहीं था विजय के लिए.
 
अपडेट ::: 75

*************





जब्ब मैंने priya,shruti और जहान्वी को छोड़ छोड़ के उनकी छूट को अच्छे से खुला कर दिया तो.

विजय:- अब्ब तो तुम खुश हो ना. अब्ब तो तुम तीनो की छूट खुल चुकी है. दिल की मुराद पूरी हुई तुम तीनो की..

प्रिय:- ऐसे कैसे अभी तो सिर्फ छूट hi खुली है, दिल की मुराद अभी पूरी कहाँ हुई है.

श्रुति:- अभी तो पूरी रात पड़ी है. खुद की छूट को अच्छे से खुला करवाएंगी.

जहान्वी:- और नहीं तो क्या, एक बार की छुड़ाए से नहीं जाने वाली सालों की तड़प..

विजय:- अरे पर अभी तो तुम तीनो की hi छूट सूज चुकी है. अब्ब तो जब ये पहले वाली हालत में आएगी तो तब्ब hi सही से लुंड लेने लायक हो पायेगी..

तीनो:- हहहहहहहए... ये लुंड के घुसने से खुद hi ठीक हो जायेगी.. दर्द तो हिअ हम तीनो को hi. और वो भी बोहत ज़ायदा पारर आज दर्द को नहीं सोचना.

आज तो बास पूरी रात hi तुम्हरे लुंड को निचोड़ निचोड़ कर अपनी छूट को भरवाना है हम तीनो ने..

विजय:- अच्छा ऐसा है तो फिर मुझे भी कोई पैरहनि नहीं है. मैं भी आज की रात तुम तीनो की hi छूट में घुस के गुज़र दूंगा.

और फिर रात भर तीनो ने hi मेरे लुंड की धज्जियां उड़ाएं या मेरे लुंड ने तीनो की छूट की, ये तो नहीं पता, पारर ये रात हम चरों के लिए यादगार बन्न के रह गई थी... सूबा होने वाली हो गई थी, पारर सोया कोई नहीं था, तीनो की hi छूट का हशर ख़राब चूका था, पारर वो छोड़ने से खुद को रोक नहीं प् रही थीं.

पोजीशन बदल बदल कद छूट के दर्द को सहते हुए मेरे लुंड को अपनी छूट में लिए रही रात भर.....

4 बजे क करीब वो तीनो टंकण से चूर हो कर सो गयीं. पारर अब्ब मेरे सोने का टाइम नहीं रहा था. तो मैं तीनो को नंगा hi सोने के लिए छोड़ कर एक निक्कर पहनी, t-shirt हाथ में पकड़ी और ऐसे hi रूम से बहार चल पड़ा.

सभी सो रहे थे. और मैं किचन में जा कर खुद की एनर्जी पूरी करने लगा.

फिर सिटींग हाल में आ कर बैठ गया.

मेरा रउवा रउवा खिला हुआ था. चुदाई का नशा भी बेइंतेहा था, तीन तीन सील पैक छूट को खोल लिया था. मज़े में तो आना hi था..

मैं कुछ देर वहां बैठा रहा, t-shirt पहनी और फिर पैलेस से बहार आ गया.

पैलेस क पार्क में जा कर मैं बैठ गया.. और योग असिन में आ क्र फ्रेश एयर को खुद में सेंचने लगा.. चुदाई की थकावट तो थी, पारर चुदाई का नशा ज़यादा था, फ्रेश हवा मेरे अंदर गई, तो तीनो तितलिओं के नंगे बदन मेरी आँखों के सामने आने लगे. आज मेरा दिन ऐसे hi गुजरने वाला था. अपने लुंड को तीनो की छूट में जाते हुए नज़ारे को दिन भर मुझे इमेजिन hi करते रहना था... ये फीलिंग्स मेरे बास से बहार थीं. शायद पहली बार ऐसा hi होता है..

आधा घंटा योग पोज़ में बैठा रहा फिर जॉगिंग करने लगा. ऐसे मेरा टाइम अपने वर्कआउट में गुजरने लगा. पैलेस की छत पर भी गया वहां भी एक्सरसाइज और फाइटिंग प्रैक्टिस की.. सूरज निकलने लगा तो मैं नीचे आ गया..

मेरा पूरा बदन पसीना बहाने में लगा हुआ था, मेरी शर्ट मेरे सीने से चिपकी हुई तुई. तो मेरा लुंड भी सोया हुआ hi मेरी निक्कर से दिख रहा था.

अब्ब इसकी क्या टेंशन.. यहाँ लुंड और छूट का खेल तो आम बात बन्न गई थी.

मैं नीचे आया और जूस पि कर माँ के रूम की तरफ बढ़ गया....

माँ से अभी मुझे उनकी लव स्टोरी भी जाननी थी. मैं वहां पोहसंहा दूर को प्रेस किया तो वो खुल गया..

मैं अंदर गया तो रूम में कोई नहीं था. माँ शायद बाथरूम में थी. और पापा रूम में नहीं थे.

मैं बाथरूम की तरफ बढ़ गया. और माँ को देखने लगा क बाथरूम के अकेली हाँ या पापा भी उनके साथ hi हाँ. मैंने दूर को पुश किया तो खुल गया, थोड़ा सा दूर तो पहले से hi खुला हुआ था.

अंदर माँ अकेली थी और नाहा रही थी.

माँ मुझे सही हालत में अकेली hi मिल गई थी. मैं वही खड़े खड़े hi अपनी शर्ट और निक्कर उतार दी. और बाथरूम में घुस गया.

माँ को एहसास हुआ क कोई बाथरूम में घुसा है तो माँ ने मुद कर देखा और मुझे देखकर, वो भी नंगी हालत में, माँ मुस्कुराने लगी..

माँ:- विज्जू बीटा सूबा सूबा ऐसे hi नंगी हालत में. खैर तो है ना. कही माँ को छोड़ने का मैं तो नहीं बना लिया तुमने.

माँ मुस्कुराते हुए बोली..

vijay:-maa मैं की क्या बात करती हाँ आप, वो तो हर दुम्म hi आप को छोड़ने की करता hi रहता है, आप भी मेरी हाँ और आपकी छूट और गांड भी मेरी है.

मेरा लुंड तो माँ को नंगा देखते hi हरकत में आ गया था. माँ भी मुस्कुराते हुए मेरे लुंड को पदाद चुकी थी.

माँ:- तो तुम नहाने आये हो या (लुंड को खेंचते हुए) इसे ठंडा करने..

विजय:- माँ इसे कैसे ठंडा करोगी..

माँ:- कैसे करुँगी. जैसे किया जाता है. कोई एक तरीका तो है नहीं.

विजय:- माँ पापा कहाँ गए हाँ.

माँ:- वो तो जल्दी hi उठ कर चले गए थे. फोन आया था, कोई काण्ड हुआ है शहर में, वही देखने गए हाँ...

विजय:- काण्ड मतलब.??

माँ:- अभी सही से पता नहीं है, जब्ब वो आएंगे तो पता चलेगा पूरी बात का.

माँ बात करते हुए मेरे लुंड को भी मुठी में लिए हुए भींच रही थी.

माँ के चेहरे पर एक शान्ति थी, कोई हवस नहीं थी, बास प्यार hi प्यार था.

माँ मेरे लुंड को बड़े प्यार से दबाये जा रही थी...

विजय:- माँ

माँ:- हाँ विज्जू बीटा.

विजय:- माँ आपकी तीनो hi बेटियों की छूट मैंने रात को खोल दी है.

मा:- ओह्ह्ह वो तो मैं पूछना hi भूल गई. तो फिर कैसे रही रात तुम्हारी तीनो के साथ.

विजय:- माँ क्या बताओं. क्या मस्त मज़ा था माँ, पूरी रात hi उन्हें छोड़ते हुए गुज़र गई. 4 बजे तक वो तीनो hi मेरे लुंड अपनी छूट बदल बदल के लेती रही हाँ...

माँ:- विज्जू बीटा

विजय:- हाँ माँ

माँ:- विज्जउ बीटा....

विजय:- हाँ माँ बोलो ना क्या बात है..

माँ:- विज्जू बीटा (माँ ने कास के मेरे लुंड को पकड़ लिया) विज्जु बीटा, मुझे भी ये chahiye...(mere लुंड को खेंचते हुए)

विजय:- माँ ये तो है hi आपका..

माँ:- ऐसे नहीं विज्जू बीटा, इसे लेने की चाह तो सालों से मेरे अंदर मचल रही है.

विजय:- माँ ये भी तो आपकी छूट में जाने के लिए सालों से तड़प रहा है...

माँ:- विज्जू बीटा रात पता है क्या हुआ...

विजय:- क्या हुआ माँ...

माँ:- तेरे पापा एक और hi गुलित में आ गए हाँ..

विजय:- माँ मतलब मैं समझा नहीं..

माँ:- विज्जु बीटा. जैसे माहौल हम सबब को मिल चूका है ना. वहां रह कर इतने लुंड ले लिए हाँ. क शर्म तो साड़ी hi ख़तम हो चुकी है, और रंजीत भी ये सबब जानता है. पारर मेरा और रंजीत का रिलेशन जिस्मानी हो के भी जिस्मानी नहीं है.. तू समझ रहा है ना विज्जू बीटा...

विजय:- नहीं माँ, आप समझा दें..

माँ:- विजजूउ बीटा, सच तो ये है क मुझे..

विजय:- माँ अंदर बीएड कर लेट कर बातें करते हाँ, वहां सही से बातें होंगी, यहाँ ऐसे खड़े रह कर कुछ परेशानी न हो आपको..

माँ:- हाँ विज्जू बीटा, यहाँ परेशानी तो है, चल बीएड पर hi चलते हाँ.

माँ ने मेरे लुंड को नहीं छोड़ा और हम दोनों hi बाथरुम से निकल क्र बीएड की तरफ बढ़ने लगे...

माँ बीएड पर लेट गई और मैं माँ के ऊपर hi लेट गया, माँ ने अपने पेअर खोल दिए जिस से मेरा लुंड माँ की छूट के छेड़ से जा टकराया..

माँ:- विज्जू बीटा पहले अपने लुंड को मेरी छूट में थोड़ा थोड़ा करके सारा hi अंदर दाल दो. मैं तेरा लुंड अपनी छूट में लिए हुए अच्छे से महसूस करना चाहती हूँ, मेरे दिल की हसरत भी पूरी हो जाएगी. और ऐसे hi तुझसे बातें भी करती रहूंगी...

विजय:- ठीक है माँ.

मेरा लुंड तो priya,jhanvi और श्रुति की छूट में घुसने से अपनी झिझक भूल चूका था.

मैंने माँ की आँखों में देखा तो वो मुझे hi निहार रही थी. मैं माँ के ऊपर झुकते हुए उनके होंटो को अपने होंटो में ले क्र किश करने लगा. माँ ने एक हाथ नीचे ले जा क्र मेरे लुंड को और भी अपनी छूट के छेड़ पर सेट किया और..

मेरे चुत्तड़ पर हाथ रख कर मुझे मेरे लुंड को अपनी छूट के घुसाने की इजाज़त दे दी.

मैं माँ की परमिशन प् कर माँ को किश करते हुए माँ की छूट में अपने लुंड को धीरे धीरे करके उतारने लगा.

4" hi मेरा लुंड माँ की छूट में गया था. क माँ की छूट टाइट होने लगा.

माँ ने किश नहीं तोडा, मेरा चुत्तड़ पर अपने पेअर रख कर मेरे लुंड को अपना सफर जारी रखने का सिग्नल देने लगीं. यही दर्द hi तो दुःख को परे कर के सुख को लाता है. और फिर ये माँ की छूट के लिए स्पेशल लुंड था...

मेरा लुंड माँ की छूट में फास्ट हुआ अंदर जाने लगा.. मैं धीरे धीरे अपना ज़ोर बढ़ा रहा था. जिस वजा से मेरा लुंड माँ की छूट की तंगी को खतम करते हुए आगे और आगे जाने लगा...

जब्ब मुझे और माँ को लगा क अब्ब लुंड अपनी पूरी लेंथ में जा चूका है.

तो माँ ने अपने पैरों को मेरे छूटों पर ढीला छोड़ दिया और मुझे प्यार से किश करने लगी. मैं भी माँ की होंटो का अमृत पीने लगा. माँ को जल्दी थी न मुझे.

मेरा लुंड माँ की छूट में उतरा ज़रूर था, माँ के लिए या मेरे लिए ये लुंड और छूट का सफर नहीं था, ये तो लुंड और छूट के मेल से हम दोनों hi माँ और बीटा अपने दिलों का मिलान कर रहे थे... न मैंने अपने लुंड को हिलाया और न hi माँ ने अपने चूतड़ों को हिला कर लुंड को अंदर बहार होने का सिग्नल दिया..

कुछ देर माँ मुझे और मैं माँ को किश करते रहे. फिर माँ ने किश तोड़ने का इशारा दिया तो मैं माँ के होंटो से अलग हो गया.

माँ मेरी आँखों में देखती रही और फिर माँ की आँखों में नमी उतरने लगी. मैं भी समझ गया क माँ ख़ुशी से आंसू बहा रही है.. माँ को ख़ुशी मिली तो माँ को पिछले सारे दुःख भी याद आने लगे थे..

मैं माँ के आंसुओं को अपनी जीब से चाटने लगा. माँ भी मेरे प्यार को समेटने लगी, मेरा प्यार माँ को शांत करने लगा.

कुछ देर में माँ शांत हुई और फिर माँ ने मुझे गले से लगा लिया..

माँ:- विज्जू बीटा ऐसे hi मेरे गले से लगा रह. तेरा खुशबु मेरे अंदर उतर रही है... विज्जू बीटा खुशियां मिलती हाँ तो सहन नहीं होती.. जब कोई हुशि मिलती है तो दर्द पीछे चला जाता है, पारर ख़ुशी को गुज़रे कुछ दिन बीत जाएँ तो दर्द फिरसे वापिस भी आने लगते हाँ.

विजय:- माँ अब्ब कौन सा दर्द है आपके दिल में..

माँ:- बीटा बोहत कुछ ऐसा है, जो जब भी याद आया है, तो जीने की छह hi मिटने लगती है, कोठे की दलदल में धंसी तो मरने का मैं हुआ था. पारर तुम पहले से hi मेरे पेट में आ गए थे, वर्ण मैं कब्ब की मर्डर चुकी होती. तुम मेरे लिए ज़िन्दगी बन्न कर आये थे विज्जु बीटा, फिर प्रिय ै मेरी कूख में, पहले तो मुझे प्रिय से प्यार नहीं था, प्रिय थी तो जबर की hi ना, पर वो भी तो मेरी hi तरह से इस दुन्या में दुःख झेलने के लिए आई थी. उसके लिए मैं और तुम hi तो थे, प्रिय भले hi किसी की हवस का नतीजा थी, पर वो थी टोमेरी बेटी hi naa.pure 9 महीने मैंने उसे अपने खून से सेणचा है. एक माँ अपनी बेटी से कैसे खुद को प्यार करने से रोक सकती है, तुम्हारी hi तरह से प्रिय बी मेरे जिगर का टुकड़ा बन गई. फिर जहान्वी और श्रुति मेरी ज़िन्दगी में आ गई.. मेरे दुःख और भी कम् हो गए.

फिर तुम मुझसे दूर हुए तो मैं फिरसे टूट गई.. priya,shruti और जहान्वी ने मुझे बोहत सपोर्ट किया है विज्जू बीटा, वर्ण तेरे जाने से मेरी साँसे hi रुकने लगी थी.. तुझ बिन मुझसे जिया नहीं जाता. बोहत मुश्किल से वो साल मैंने तेरे बिना काटे हाँ.

फिर तुम वापिस आये और हमे कोठे की ज़िल्लत भरी ज़िन्दगी से निकल कर यहाँ ले आये..

यहाँ आ कर कुछ रहत मिली और फिर जब्ब तुम सब को लेकर वापिस ए तो मुझे मेरा सबब कुछ मिल गया. वर्ण हर दम धड़का लगा रहा था, क रास्ता में कुछ गलत न हो जाए और तुम मुझसे फिर कही दूर न हो जाओ. पहले hi तुमसे इतने साल दूर रह ली थी, अब्ब और तुमसे दूर रहने की शक्ति नहीं थी मुझमे.

तुम वापिस पैलेस में ए तो साथ hi तुम्हारे पापा भी फिरसे मेरी लाइफ में आ गए.

विज्जू बीटा मुझे 1% भी उम्मीद नहीं थी क रंजीत मेरी ज़िन्दगी में कभी लौट कर वापिस आएगा.

क्यूंकि वो तो इस पूरी दुन्या के अकेला इंसान था, वो कहाँ होगा, ये तो कोई जान hi नहीं सकता था, रंजीत के मेरी ज़िन्दगी में फिरसे आने से पहले मैंने तुम्हे hi अपना सबब कुछ मान लिया था.

मैं अपनी ज़िन्दगी की बाकी साड़ी hi खुशियां तुमसे hi पूरी करना चाहती थी, पर रंजीत भी तो मेरे लिए मेरा पहला प्यार था, रंजीत ने hi तो पहली बार मेरी छूट का उद्घाटन किया था, और जिस रात रंजीत ने ये सबब किया था. वो रात पूरी तरह से मेरी मैं मर्ज़ी के मुताबिक़ थी..

विज्जउ शायद ऐसे तुम्हे सबब समझ ना ए.. मैं तुम्हे अपनी और तुम्हारे पापा की लव स्टोरी के बारे में बताती हों. बाकी की बातें बाद में करेंगे..

मैंने माँ की गर्दन पर अपनी जीब से मस्सगे करना शुरू कर दिया और माँ मेरे सर्र के बालों में अपनी उँगलियाँ चलने लगी थी.

माँ चुप जो गई थी माँ वो अपने गुज़रे हुए कल की यादों को समेटने में लगी हुई थी.



********************************************************************************



शोर्टफ्लेशबैक

****************



पुणे सिटी के ......... कॉलेज में एक नई एडमिशन लेने वाली लड़की के हुसैन की धूम मची हुई थी.

जब से hi वो कॉलेज में आई थी. सबब hi उसे टिकटिकी बंधे लाइन में खड़े रह कर देखने लगते थे. लेकिन वो लड़की किसी को भी भाव नहीं देती थी. उसे किसी को देखने की आदत नहीं थी. और न hi फुर्सत..

उसे भी खुद की खूबसूरती का पूरा एहसास था. वो जानती थी क भगवन ने उसे कितनी फुर्सत ने बनाया है. उसके शरीर के एक एक अंग को कैसे कुदरत के पूरा पूरा नाप टोल क्र बनाया है.

वो अपने फिगर बारे भी सबब जानती थी. वो ये भी जानती थी क उसके जैसे जानलेवा फिगर वाली इस पुरे कॉलेज में नहीं है. वो ये भी जानती थी क उसके बदन के जैसी फ्लेक्सिबिलिटी कम् hi किसी में है. उसके फेस के जैसा ग्लो भी किसी में नै है. उसके बूब्स के जैसी शेप और कसावट भी किसी के बूब्स में नहीं है.

वो जानती थी क दिलों की धड़कनो को रोक देने वाले चुत्तड़ो की मालिक है वो..

जब वो चलती तो किसी के लिए उस लड़की की मार डालने वाली चाल को देखने से खुद को रोक पाना मुमकिन नहीं रहता था..

लेकिन लड़की सबब से hi बेनियाज़ खुद में और अपनी स्टडी में मगन रहती.. उसकी फ़िरेन्ड्स भी ज़यादा नहीं थी. लेकिन वो हर किसी को दोस्त बनाना भी नहीं चाहती थी. वो जानती थी क ऑस्कर लोग खुद के मतलब के लिए फ्रेंडशिप करते हाँ.

वो लड़कियां हों या लड़के मुफाद पहले सामने रखते हाँ..

पुरे कॉलेज में hi उसके हुसैन और ऐटिटूड के डंके थे. लेकिन कोई उसके साथ ज़बरदस्ती भी नहीं कर सकता था. वो कोई लोकल गर्ल तो थी नहीं. वो एक बोहत hi बड़े खानदान से थी, पुरे पुणे में उसके खानदान का एक नाम था. एक दबदबा था पुरे पुणे में hi उस लड़की के खानदान का..

लड़की के हुसैन के डंके अगर कॉलेज में थे, तो लड़की के खानदान के डंके भी पुरे पुणे सिटी में थे.. लड़की के खंडन से पन्गा लेने की हिम्मत किसी में नहीं थी..

लड़की को भी कॉलेज में किसी से फ्री होने की परमिशन नहीं थी घर वळून की तरफ से. उसके लिए घर के बड़े सख्त आर्डर थे क अगर स्टडी करनी है तो उन्हें किसी किसम की कोई कम्प्लेन नहीं मिलनी चाहिए वर्ण उसे घर में hi बिठा दिया जाएगा...

लेकिन जब्ब दिल अपने लिए किसी को चूसे करले तो बग़ावत का आना भी तय है.

दिल में कोई बास जाए तो दिल बग़ावत पर आमादा न हो ये होना भी पॉसिबल नहीं.

उस लड़की के साथ भी कुछ ऐसा hi होने जा रहा था..

जहाँ लड़की कॉलेज में फेमस थी, वहां एक लड़का भी था, जो अपने आप में मगन अपनी स्टडी जारी रखे हुए था..

दोनों hi अक्सर एक दूसरे को लाइब्रेरी में देखा करते थे. लड़का लड़की को कम् hi भाव दिया करता था.

पारर लड़की को उस लड़के की आँखों में खुद के लिए प्यार बेशुमार दिख गया था.

ऐसा hi वक़्त गुजरने लगा. और 1 साल बीत गया, पारर दोनों में से किसी ने भी एक दूसरे से बात तक नहीं की.

लड़का लड़की से प्यार करता था, लेकिन उसे लड़की के मान सम्मान की भी बड़ी परवा थी. वो लड़की से दिल hi दिल में प्यार करता था. पारर कभी भी लड़की के लिए परेशानी का कारण नहीं बना.. और न hi वो ऐसा कुछ करने वाले था. वो तो बास एक खामोश मोहब्बत करता था उस लड़की से.

लड़की ये सबब 1 साल से देख रही थी. लड़की के दिल में भी उस लड़के के लिए फीलिंग्स जागने लगी थी. जो धीरे धीरे बढ़ते हुए शिद्दत अख्तियार करने लगी थीं.

लड़का भी अपनी पर्सनालिटी में किसी में कम् नहीं था. लड़की अगर कतल करने देने वाले फिगर के मालिक थी, तो लड़का भी किसी हीरो से कम् नहीं था.

सिंपल ऐटिटूड हंस मुख, पारर फज़ुल बातें से खुद को दूर रखने वाला.

लड़की भी लड़के की तरफ आकर्षित होने लगी, दोनों hi एक दूसरे से दूर दूर hi रहे, पारर दोनों की बातें ऑंखें hi आँखों में होने लग्ग गई थीं. शुरू शुरू में दोनों की hi ऑंखें मुस्कुरा उठती थी. लेकिन फिर दोनों की ये मुस्कान ऑंखें से होती हुई होंटो की जानिब सरकने लगी और फिर धीरे धीरे दोनों hi एक दूसरे को देख कर अक्सर hi मुस्कुरा दिया करते थे.

अजीब चाहत थी दोनों की, ितं लम्बा समय निकल दिया था दोनों ने hi, पर अभी तक्क hello हाय तक नहीं हुई थी और न hi एक दूसरे से नाम तक्क पुछा था.

दोनों की चाहत मतलब के लिए तो थी नहीं...

ऐसे hi दोनों में नैन मटक्का होता रहा और वक़्त एक बार फिरसे बीतने लगा..

लड़की के लिए कॉलेज में किसी लड़के से रिलेशन बनाने पर सख्ती थी. और लड़का भी ये बात जानता था, क लड़की के लिए इतनी टफ सिचुएशन है, और वो किसी भी हाल में लड़की के लिए किसी किसम की भी परेशानी का कारण नहीं बनना चाहता था..

वो नहीं चाहता क उसकी वजा से लड़की की स्टडी में कोई दिक्कत हो...

लड़के को लड़की की घरवळून की चितना नहीं थी, वो अकेला था, और किसी से डरता भी नहीं था, फाइटिंग एक्सपर्ट नहीं था, पारर 4-5 लड़कों को अकेला hi धुल छठा दिया करता था.

ऐसे hi एक दिन लड़की को एक लड़का और उसकी गैंग ने तंग करना शुरू किया तो लड़के ने लड़की की मदद कर दी.

ये पहले दिन था जब दोनों में कुछ बात चीत होने वाली थी..

लड़की:- थैंक यू सो मच, ी ऍम श्वेता.

लड़का:- इतस ok, माइसेल्फ रंजीत, अनाथ हूँ और अनाथ आश्रम में रहा हूँ, अब्ब एक छोटे से रूम में रहता हूँ. part टाइम काम करके खुद का और अपनी स्टडी का खर्चा उठता हूँ.

श्वेता:- वूऊऊ. यू मीन्स, यू अरे सेल्फमेड पर्सन. ी लिखे आईटी. ये तो बोहत अच्छी बता है. अच्छा लगा जान के..

रंजीत;- मुझ जैसे na-jaane कितने हाँ इस देश में. ये तो एक कॉमन बात है.

श्वेता:- हम्मम्मम्मम्म ये भी सही है..

फिर दोनों की hi बातें अक्सर होने लगीं. ये सबब कॉलेज के दूसरे स्टूडेंट से छुपा हुआ था, वर्ण लड़की के घर वळून को असबब पता चल जाता और दोनों के लिए गड़बड़ हो जाती..

रंजीत के लिए कोई टेंशन नहीं थी, वो अकेला था कोई उसके पीछे रोने वाला नहीं था, वो चाहता तो डंके की चोट पर श्वेता से अपने प्यार का इज़हार भी कर सकता था, पारर रंजीत को खुद की फीलिंग्स से ज़यादा श्वेता की रेस्पेक्ट और आज़ाद लाइफ का एहसास था. इसलिए रंजीत ने खुद को आगे बढ़ने से रोक ाहुआ था.

पारर गुज़रते वक़्त ने श्वेता को कण्ट्रोल से बहार करना शुरू कर दिया, श्वेता के अंदर बग़ावत जनम लेने लगी.

वो बोहत दर्री हुई भी थी, अपने घर वालों को लेके. लेकिन खुद के अंदर उठ रही नयी फीलिंग्स पार्स भी उसका कण्ट्रोल टूटने लगा था..

प्यार ऐसा hi तो होता है.

श्वेता रंजीत से प्यार की इन्तहा तक्क पोहचने लगी थी, अगर रंजीत प्यार का इज़हार कर देता तो शायद श्वेता कुछ नार्मल रहती.

रंजीत तो श्वेता का हर मुआमले में ख्याल रखता था, प्यार तो वो भी श्वेता से बेइंतेहा करने लगा था. पारर श्वेता के लिए इससे प्रॉब्लम्स बन्न सकती थीं, इसलिए वो आगे नहीं बढ़ रहा था.

रंजीत समझता था क श्वेता महलों की रानी है, और वो एक अनाथ, रंजीत श्वेता से प्यार करना तो नहीं छोड़ सकता था, पारर वो श्वेता को अपना भी नहीं सकता था, श्वेता को अपनाने से वो श्वेता की लाइफ में भयंकर तूफ़ान नहीं लाना चाहता था....

कुछ वक़्त और गुज़रा तो श्वेता ने खुद hi रंजीत को अपनी फीलिंग बारे बोल दिया.

ये सबब श्वेता के लिए आसान नहीं था, वो जो पुरे कॉलेज में सबसे हसीं थी, श्वेता को पाने के लिए कोई भी मर्डर मिटने को भी तैयार था, श्वेता कभी भी किसी की जानिब राग़िब नहीं हुई थी, पारर रंजीत की खामोश मोहब्बत को वो सहन नहीं कर पाई और रंजीत से अपनी फीलिंग्स का इज़हार कर दिया.

आँखों से वो अपनी फीलिंग्स का इज़हार तो क्र hi दिया करते थे. पारर लफ़्ज़ों में इज़हार आज पहली बार हुआ था..

रंजीत:- श्वेता तुम्हे ये सबब कहने की कोई ज़रूरत नहीं है, हम दोनों के मैं में जो कुछ भी चल रहा है, वो लफ़्ज़ों का मोहताज नहीं है, हमारी ऑंखें और हमारे दिल की धड़कन सबब hi तो एक दूसरे से सबब बयां कर दिया करती है..

श्वेता:- रंजीत पारर अब्ब और सहा नहीं जा रहा. मैं करता है तुम्हारी बहन में समां जाऊं.

रंजीत:- श्वेता, तुम अपने भाइयों को और अपने पिता को तो जानती hi हो न. वो कैसी नेचर के हाँ, मुझे खुद की परवा नहीं है, मेरा आगे पीछे कोई रोने वाला भी नहीं है,

फिर भी मैं ये सबब नहीं करना चाहता. क्या पता हमारी एक गलती तुम्हारे लिए कितनी खतरनाक रूप धारण कर ले.. और जो सकूँ तुम्हारी लाइफ में है वो भी तुमसे छीन जाए...

श्वेता:- रंजीत मुझे भी ये सबब पता है, पारर अब्ब मेरा मेरे दिल पर करतोल खोने लगा है..

रंजीत:- खुद पर कण्ट्रोल करना सीखो श्वेता, अगर किस्मत में हमारा मिलान लिखा है तो हो जाएगा. पारर कही ऐसा न हो क मिलान भी होने से रह जाए और बाकी की लाइफ भी कठनाइयों में आ जाए.

श्वेता को भी रंजीत की बातें सही लग रही थीं. पारर श्वेता रंजीत के प्यार में ये सबब भूलने लग जाती थी. वो भी बोहत अच्छी तरह से सबब जानती थी, एक गलती और सब कुछ बर्बाद, सिर्फ उसकी hi नहीं रंजीत की ज़िन्दगी भी खतरे में आ सकती थी..

फिर कुछ दिन दोनों में इस टॉपिक पर कोई बात नहीं हुई. और सबब रूटीन पर चलने लगा, लेकिन श्वेता के दिल की हालत बोहत अब्तर रहने लगी थी. उसका दिल रंजीत के बिना रहने को तैयार hi नहीं था.

ऐसे hi एक महीने बाद श्वेता की एक फ्रेंड क घर में बर्थडे पार्टी थी, और श्वेता वहां अक्सर जाती भी रहती थी. श्वेता के घरवाले भी ये सबब जानते थे, इसलिए उन्हों ने श्वेता को नहीं रोका, और श्वेता ने अपनी माँ से कह कर रात वहां रुकने के लिए बोल दिया.

कुछ देर की बहस के बाद श्वेता को रात रुकने की परमिशन मिल गई, और श्वेता इस परमिशन से बोहत खुश हुई ...

रंजीत भी उस पार्टी में शामिल हुआ तो श्वेता ने रंजीत को रात रुकने का कह दिया, रंजीत ने श्वेता को फिर एक बार समझाया पारर श्वेता नहीं मानी.

रंजीत ने भी श्वेता को फिर ज़यादा फाॅर्स नहीं किया, वो भी तो श्वेता से उतना hi प्यार करता था जितना श्वेता रंजीत से करती थी.

पार्टी के ख़तम होते hi श्वेता को उसकी फ्रेंड ने एक सीक्रेट रूम में ला छोड़ा. और सभी की नज़रों से बचते हुए रंजीत को भी उसी रूम में छोड़ कर रूम को बहार से बंद करके चली गई, श्वेता और रंजीत एक दसूरे के गले लग गए.

दोनों पहले एक दूसरे के गले मिले फिर आगे बढे और एक दूसरे के गालों को चूमने लगे, लेकिन श्वेता जान गई थी, रंजीत आगे नहीं बढ़ेगा, इसलिए श्वेता ने पहल करते हुए रंजीत क होंटो को अपने होंटो में कैद कर लिया, रंजीत को एक झटका लगा..

रंजीत ने श्वेता को खुद से अलग किया और

रंजीत:- श्वेता ये सबब सही नहीं है. हमारा खुद पार्स कण्ट्रोल ख़तम भी हो सकता है.

श्वेता:- रंजीत यही तो मैं चाहती हूँ, आज मुझे न रोको, आज मुझे हर वो ख़ुशी दे दो, जो मेरी तालाब है, मेरा दिल बोहत समय से तड़प रहा है, मैं भी जानती हूँ, हम कभी मिल नहीं सकते, पारर हम एक दूसरे का प्यार तो अपना hi सकते हाँ, आगे लाइफ में हमारे लिए क्या कुछ लिखा हुआ है न तुम जानते हो और ा hi मैं जानती हों. पारर मैं एक बात जानती हों, तुम्हारे प्यार के बिना मैं अधूरी रहूंगी. जब तक हम कॉलेज में हाँ तब्ब तक्क तो मुझे तुम्हारा प्यार मिल सकता है, और अब्ब मुझसे तुममे समाये बिना रहा नहीं जायेगा... पिछले दो सालों से तुम भी देख रहे हो, कैसे में हमेशा अकेली hi रही हों. बास 2 फ्रेंड्स hi हाँ, किसी से ज़यादा बात करने की परमिशन भी नहीं है..

रंजीत:- श्वेता मेरा हाल भी कुछ ऐसा hi है, मेरी भी रातों की नींदें उड़द चुकी हाँ, तुम्हारा चेहरा हर दुम्म hi मेरी आँखों के सामने रहता है. तुम्हे देखे बिना चैन भी नहीं आता, जब्ब देख लेता हों तो साड़ी बेकरारी ख़तम हो जाती है, श्वेता तुम मेरे लिए मेरी पूरी दुन्या बन्न चुकी हो. पारर यहाँ बोहत से खतरे भी तो हाँ, क्या पता कौन हमारे hi फ्रेंड्स में से बात को लीक करदे तुम्हारे घर वळून तक पोंछा दे, फिर तुम खुद hi सोच लो, तब्ब क्या कुछ नहीं होगा तुम्हारे साथ. और मैं यही तो नहीं चाहता क तुम्हारी लाइफ में किसी किसम की कोई परेशानी आये. जितनी तुम सूंदर हो, जितना तुम्हारा चेहरा हर दुम्म चमकता रहता है, जितनी तुम खुश दिखती हो.

मैं ये हमेशा hi देखते रहना चाहता हूँ ..

ज़रा सोचो अगर हालात बिगड़ गए तो क्या तुम्हारा चेहरा ऐसे hi हमेशा शादाब रहेगा, नहीं न ये फूल सा चेहरा मुरझा जाएगा..

श्वेता:- रंजीत तुम बिन तो अब्ब वैसे भी ये जल्द hi मुरझा जाने वाला हिअ, इसकी तारो ताज़गी अब तुम्हारे प्यार की मोहताज बन कर रह गई है, तुम्हारा प्यार मिलेगा तो ये चेहरा और भी खिल उठेगा, इसका ग्लो मेरे दिल के जगमगाने से और

भी बढ़ने लगेगा, अब्ब तुम बातों में टाइम वास्ते मैट करो. पता नहीं फिर कभी मेरी लाइफ में ये रात आये या न आये, मुझे खुद में समां लो, और खुद भी मुझमे समां जाओ.. मैं अधूरी हों मुझे पूरा कार्डो..

रंजीत भी श्वेता को पाने के लिए अंदर hi अंदर मचल रहा था. बात श्वेता के पॉवेरदुल भाइयों की थी, उनकी नेचर की थी... पारर अब्ब दोनों काफी देर से एक hi रूम में एक दूसरे की बहन में थे, तो रंजीत भी श्वेता क प्यार में डूबने लगा.

और ऐसे hi पूरी रात दोनों hi एक दूसरे के प्यार में समाये रहे. श्वेता के लिए ये रात छूट खुलने की वजा से दर्द भरी, उतनी hi श्वेता के लिए खुशियों से भरपूर रात भी थी. श्वेता के दिल की अधूरी खुशियां आज उसे मिल गई थीं. श्वेता को उसका प्यार मिल गया था. पूरी रात श्वेता रंजीत के प्यार को खुद में उतारती रही. और रंजीत भी श्वेता के प्यार में बार बार डूब कर उभरने लगा.

ये रात दोनों के लिए प्यार की इन्तहा ले आई थी. दोनों ख़ुशी ख़ुशी एक दूसरे से अलग हुए और अपने अपने घर चले गए..

फिर दिन ऐसे hi हंसी ख़ुशी गुजरने लगे. श्वेता के चेहरे की चमक पहले से भी कई गुना बढ़ गई थी. और रंजीत का दिल भी खिल उठा था, कोई था hi नहीं उसकी लाइफ में श्वेता के बिना... दोनों फिरसे कॉलेज में खामोश लाइफ गुजरने लगे, बास एक दूसरे को देख कर आँखों hi आँखों में बातें कर लिया करते थे. जब कभी मौका मिलता तो आँखों की बातें जुबां से होने लगतीं..

रंजीत रोज़ hi सूबा जल्दी कॉलेज आ कर श्वेता का दीदार किया करता था. पारर एक दिन रंजीत का इंतज़ार, इंतज़ार hi बन कर रह गया, श्वेता कॉलेज नहीं आई, रंजीत काफी देर तक श्वेता का इंतज़ार करता रहा, श्वेता को न आना था और न hi वो आई.

रंजीत दुखी मैं लिए अपनी क्लास में चला गया.

अगले दिन भी रंजीत ने श्वेता का इंतज़ार किया, पारर श्वेता आज भी नहीं आई, रंजीत को टेंशन होने लगी, क श्वेता क्यों नहीं आ रही है, श्वेता की फ्रेंड भी कॉलेज नहीं आ रही थी. वर्ण रंजीत उसी से hi पूछ लेता क श्वेता ठीक तो है ना. उसे कोई मसला तो नहीं हो गया. पारर रंजीत को बताने वाला भी तो कोई नहीं था. घर तो रंजीत ने देखा hi हुआ था श्वेता का. पर वो घर जा कर तो श्वेता का पता कर नहीं सकता था.

कुछ दिन तक्क श्वेता नहीं आई, तो रंजीत की टेंशन अपनी सीमा लांगने लगी. 10 दिन बाद श्वेता की फ्रेंड आई, रंजीत ने उससे पुछा तो श्वेता की फ्रेंड ने रंजीत को ग़ुस्से से देखा और दफा होने को बोल दिया..

रंजीत हक्का बक्का रह गया क इसे क्या हुआ है, कही सच में hi श्वेता किसी बड़ी प्रॉब्लम में तो नहीं है..

रंजीत ने छुट्टी टाइम श्वेता की फ्रेंड से पूछने का सोचा.

पारर रंजीत ये नहीं जान पाया. श्वेता की फ्रेंड ने भी उसी दिन वो कॉलेज छोड़ दिया और किसी और सिटी में जा कर अपनी बाकी की स्टडी पूरी करने लगी..

रंजीत की बर्दाश्त ख़तम होने लगी तो वो श्वेता का पता लगाने की कोशिश में लग गया...... लेकिन 1 महीने तक्क रणजीत को कुछ पता नहीं चला..

रंजीत ने कॉलेज जाना छोड़ दिया. और श्वेता के लिए मसरूफ हो गया. वो ब्रिलियंट स्टूडेंट था, स्टडी रंजीत के लिए इशू नहीं थी, और वैसे भी रंजीत के लिए श्वेता उसकी स्टडी से बढ़ क्र थी, पैसे कमाने के लिए तो बोहत से धंदे दुन्या में बिखरे पड़े हाँ. .. और रंजीत तो फिर भी सेल्फमेड था..

रंजीत ने स्टडी छोड़ी और श्वेता बारे इन्फो निकलने के लिए खुद को सर्फ़ कर दिया. वो कैसे भी करके श्वेता बारे सबब जान लेना चाहता था. उसका दिल ये कह रहा था क श्वेता यहाँ नहीं है, वो कही दूर चली गई है, यही जाने के लिए रंजीत ने श्वेता के घर में घुसने का प्लान बना लिया.

श्वेता के घर में घुसने से सबब तो पता चलने वाला था नहीं.. इसलिए रंजीत ने श्वेता के घर में नौकरी करने का सोचा, शायद इससे अंदर की बात वो जान सके.

नौकरी तो रंजीत को नहीं मिली पारर एक नौकर से रंजीत ने अपनी दुआ सलाम बढ़ा ली, उसी से रंजीत को पता चला क श्वेता की तो शादी हो गई है, और श्वेता अब्ब इंडिया में नै है, वो अपने हस्बैंड के साथ बहार के किसी मुल्क में चली गई है..

श्वेता शादी करके चली गई है, ये सुन कर रंजीत का दिल टूट गया था, पारर रंजीत का प्यार श्वेता के लिए कम् नहीं हुआ.

श्वेता की जुदाई रंजीत के लिए सहन करना मुमकिन नहीं था, रंजीत ने खुद को रूम में बंद कर लिया और श्वेता की यादों में रहने लगा..

रंजीत को पता था क श्वेता उसकी कभी नहीं हो सकती, फिर भी रंजीत का दिल मानने के लिए तैयार नहीं था. रंजीत की स्टडी अधूरी रह गई, और वो 1 साल तक्क ऐसे hi रहा. रंजीत की हालत पागलों जैसी हो गई थी.

पर वक़्त भी तो अपना खेल खेलता है, एक दिन रंजीत काम से लौट रहा था तो कुछ आवारा लड़के किसी वेरने में एक लड़की का रपे करने की कोशिश रहे थे,

तो रंजीत ने अपना ग़ुस्सा उन आवारा लड़कों पर उतार दिया.

चार लड़कों में से 3 मौका पर hi मारे गए, लड़की तो बच गई पारर रंजीत के लिए वक़्त ने एक नया hi मक़सद चुन लिया था..

रंजीत ने खुद को ऐसे hi कामों के लिए मसरूफ करने का सोच लिया, वर्ण तो वो अकेला रह कर बिलकुल hi पागल हो जाएगा..

रंजीत ने अपने कॉलेज से डाक्यूमेंट्स लिए और पुणे छोड़ कर दिल्ली के लिए निकल गया, वहां रह कर स्टडी पूरी की और फिर पुलिस फाॅर्स ज्वाइन कर्ली. फिटनेस में नंबर 1 तो पहले hi था, सेल्फमेड भी था. टलेंडेड भी था.

और अब्ब तो रंजीत को एक मक़सद भी मिल चूका था. रंजीत के अंदर एक आग देहक चुकी थी. रंजीत के लिए हर आने वाली स्टेज hi उस के लिए कामयाबी लाने लगी... और देखते hi देखते रंजीत एक काबिल अफसर बन गया..




******************************************************************************




 
थैंक्स भाई..!!

आप सबब के लिए hi सबब लिखा जाता है, और जो रीडर्स को पसंद न हो उसे स्टोरी से हटा देना या चेंज कर देना चाहिए. इसलिए मैंने स्टोरी को मच स्पीड दी है. श्वेता तो शुरू से hi विज्जू की हो गई थी, ये तो बीच में रंजीत की एंट्री हुई है, जिस वजा से श्वेता और विज्जू का सेक्स थोड़ा सा लेट हो गया. अब्ब्ब रंजीत क आते hi तो रंजीत को टोटली hi साइड में तो नहीं किया जा सकता था...
 
थैंक्स डिअर..!!

आप का कहना भी सही था, श्वेता और विज्जू को एक होना चाहिए था, और मैं भी यही करना चाहता था, मैंने कहा था क कुछ टाइम लगेगा, अभी तो रंजीत नया नया आया है. जल्द hi कुछ न कुछ चेंज होगा... जब श्वेता ग़ायब हुई तो रंजीत के लिए विश्वास करना ज़रूरी था, क्यूंकि गार्ड ने भी रंजीत को सही बोलै था.... , तब्ब सिचुएशन hi ऐसी थी. कोई भी श्वेता का नाम तक लेना नहीं चाहता था. विजय ने जितजी स्ट्रगल की है, रंजीत उतनी नहीं कर पाया, और बाकी की बातें आने वाली अपडेट में आपक्लो पता चल जाएँगी.
 
थैंक्स डिअर..!!

सुग्गेस्टिव सबब सही hi होते हाँ, और हर किसी को खुद क मंद में चल रहे को सबके सामने लाने का पूरा हक़ होता है, आप सबब बोलेंगे नहीं तो सबब समझ में आएंगे भी नहीं, कही भी मुझसे मिस्टेक हो सकती है, इसलिए सुग्गेस्टिव के लिए बुरा मानने वाली कोई बता नहीं है ... ऑलवेज वेलकम फॉर योर अन्य काइंड ऑफ़ सुग्गेस्टिव.

अगर इमोशन की बात की जाये तो आपने खुद hi जवाब दे दिया है, क पैलेस में आ जाने से चरक्टेर्स बोहा hi ज़यादा हो गए हाँ. और फॅमिली टच जो एक एक से होता वो खाई पीछे चला गया है. मैं भी इस सबब को समझता हों,. यहाँन जितने चरक्टेर्स हाँ, उन सभी क साथ इंसाफ होना चाहिए.... पूजा दीदी पीछे हो गई हाँ तो इसका मतलब ये नहीं क वो स्टोरी से hi बहार हो गई हाँ. इनकी वैल्यू कम् नहीं हुई है......

एक और बात जो सबब से ख़ास होती है... जब्ब जुंग शुरू होती है तो बहुत सा चेंज आता है. अभी विजय के लिए सबबको पूरा पूरा टाइम देने की गुंजाइश नहीं है. अभी तो वो अपनी माँ और बहनो को ले आया है. तो दिल्ली को साफ़ करेगा. और जो उसके साथ सेक्स करना चाहती है, वो सेक्स करेगी.. सेक्स के लिए भी तो वो सालों से मचल रही थीं.. वो सबब भी ज़रूरी हो गया है सब के लिए..

बाकी स्टोरी में आप जो कुछ मिस कर रहे हाँ वो भी जल्द hi आप को दिखने को फिर से मिलने वाला है... ये एक लॉन्ग स्टोरी है. और अभी विजय की लाइफ में तूफ़ान आने शुरू हुए हाँ.. विजय अगर दन्न से सामना करने लायक बन गया है तो इसका मतलब ये नहीं है क वो दन्न को फ़ौरन hi मार देगा.... दन्न के जुंग विजय के लिए एक चैलेंज है.. दन्न पुरे महाराष्ट्र का बाप है. और भी कई दुश्मन बन्न चुके हाँ विजय के.. वजिजय जुंग के साथ सबब को साथ लेके चलेगा..

करैक्टर क्राउड को ले के जो परेशानी आपको है वो भी जल्द hi ख़तम होने वाली है. बास विजय कुछ ख़ास को एक बार छोड़ ले , फिर सबब ठीक हो जायेगा..

स्टोरी में आपका मज़ा खराब नहीं होने दूंगा..

थैंक फॉर थे सुग्गेस्टिव..
 
अपडेट ::: 76

*************

माँ की कहानी कितनी दर्द भरी थी, माँ ने क्या कुछ नहीं झेला था, माँ ने सबब तो नहीं बताया, सिर्फ अपनी और पापा की लव स्टोरी और जुदाई hi बताई थी. माँ की तरह से पापा ने भी अपनी लाइफ में बोहत से दुःख देखे थे...

माँ के साथ ऐसा क्यों हुआ, माँ शायद मुझे अभी बताना नहीं चाहती थी..

माँ:- विज्जू बीटा तुम मुझसे इस से ज़यादा अभी कुछ नहीं पूछोगे. तुम्हे अभी खुद को एक जगा कंसन्ट्रेट करना है, और जो कुछ मैं अभी तुमसे छुपाना चाहती हूँ, वो तुम्हारे लिए सहन करना मुमकिन नहीं है..

बास किसी तरह से में दन्न के चुंगल में जा फँसी और फिर उसने मुझे कोठे पर ला बिठाया.. ये भी एक लम्बी कहानी है, जिस पर हम बाद में चर्चा करेंगे...

अभी मेरा अपनी और रंजीत की लव स्टोरी बताने का मक़सद सिर्फ इतना है क तुम्हारे पापा को इस स्टेज पर लाने वाली भी मैं hi हों. वर्ण वो तो मुझे बास एक साइड में चुप बैठे मुझे देख लिया करते थे. तेरे पापा का प्यार मुझसे जिस्मानी नहीं था, वो तो मैं hi तुम्हारे पापा के लिए खुद को रोक नहीं पाई. जैसे हालात तब मेरी लाइफ में थे, तुम्हारे पापा और मैं एक नहीं हो सकते थे. इस लिए मैंने खुद का कुँवारापन्न तुम्हारे पापा के नाम कर दिया...

विजय:- माँ फिर पापा के साथ आपकी पहली चुदाई किसी रही थी..

माँ:- मैट पूछ विज्जू बीटा, जब्ब इंसान को लगे क उसे उम्र भर की खुशियां एक hi रात में समेटनी हाँ तो तुम खुद hi सोचो क मेरी और तुम्हारे पापा की क्या फीलिंग्स होंगी. मैं बोहत अच्छे से जानती थी क मेरा तुम्हारे पापा से बार बार मिलना सही नहीं है, एक हल्का सा इशारा मेरी और तुम्हारे पापा की लाइफ को ख़तम कर देगा.. इसलिए उस पार्टी वाली रात मैंने अपना सबब कुछ तेरे पापा के हवाले कर दिया था. और वो रात मेरे लिए आने वाली ज़िन्दगी में कई तूफ़ान लाने वाली थी. वही उस रात के मिलान ने तुम्हे मेरी कूख में उतार दिया, और फिर वक़्त के बेरहम पंजे में मुझे दन्न के चुंगल में फंसा दिया. अगर तुम पहले से hi मेरी कूख में न होते, तो क्या मैं रेखा बाई के कोठे से निकल पाने में कामयाब हो पाती..

कोठे पर तो मुझे बास एक प्रिय hi मिली थी. तुम मेरी कूख में रंजीत का अंश बन कर पलने लगे..

मैं अगर उस रात रंजीत से न चुदती, तो तुम मेरी कूख में कभी भी नहीं होते. और न hi मेरे लिए निजात का रास्ता खुलता, इसलिए रंजीत मेरे लिए बोहत ख़ास है. मेरा अब्ब भी रंजीत से जिस्मानी लगाओ नहीं है..

कोठे पर जितनी चुदाई मेरी हो चुकी. छूट में लुंड लेना अब्ब मेरे लिए दिलकशी का सबब नहीं है. बास छूट की गर्मी hi डिस्टर्ब करती है. वर्ण छोड़ने की चाह तो कब्ब की ख़तम हो चुकी है...

अगर किसी के लुंड के लिए मैं, जो मैं अपनी छूट और गांड में समां लेना चाहती हों तो वो मेरे विज्जू का लुंड है. रंजीत से जिस्मानी रिलेशन मेरी छूट की आग तो बुझा सकते हाँ. पर मेरे दिल की तड़प को ख़तम नहीं कर सकते..

हालांकि रंजीत ने मुझपर बोहत बड़ा एहसान किया है, तुम भी तो रंजीत के लुंड की hi वजा से मेरी कूख में उतरे हो.

बास अब्ब मेरी फीलिंग्स रंजीत क लिए तुम्हे से hi रिलेटेड हाँ...

विजय:- माँ आप बाथरूम में पापा के लिए क्या बोलने वाली थी..

माँ:- विज्जउ बीटा थोड़ा सा हिल के अपने लुंड को 2-4 बार अंदर बहार करो ना, अब्ब छूट में चुल्चल सी होने लगी है, बोहत देर हो गई है, तेरे लुंड को अपनी छूट में लिए हुए. अब्ब लगता है छूट की भी बर्दाश्त ख़तम होने वाली है.

मैं माँ के सीने से उठा और माँ की आँखों में देखने लगा.

माँ की आँखों में अज़ीम शान्ति दिख रही थी.. माँ की ऑंखें सकूँ की इन्तहा से चमकने लगी थे. मैं किया माँ की सागर जैसे आँखों में उतर कर होते लगाना शुरू कर डॉन. पर उसके के लिए माँ की छूट से निकलना पड़ेगा. और ये काम माँ की आँखों में टेरने से ज़यादा होशरुबा था. माँ की छूट से लुंड निकलना गलत था.

मैं तो वही समाया था.

जहाँ से मैं आया था..

और फिर यही आने के लिए तो मैंने सालों दिल्ली की ख़ाक छानी थी.

मैंने माँ की आँखों में देखा और माँ की आँखों को अपनी गीली जीब से चाटने लगा. माँ को और भी सकूँ मिला और माँ ने अपने चुत्तड़ को थोड़ा सा हिला कर मेरे लुंड को अपनी छूट में फील करने लगी, और मेरी जीब को अपनी आँखों से लगने का भी मज़ा लेने लगीं.

मैंने माँ की आँखों को चूमने के बाद अपने चुड़तों को उठाया. और अपने लुंड को थोड़ा सा माँ की छूट से निकला तो मेरा लुंड माँ की छूट के पानी से सना हुआ था, वो बोहत hi मज़े से माँ की छूट के लसदार से पानी से भीगता हुआ माँ की छूट से बहार आने लगा.

माँ बातों बातों में hi अंदर से बोहत गीली हो गई थी. मैंने अपने लुंड को सुपडे तक धीरे धीरे करके बहार खेंचा, मैं माँ की छूट का पूरा पूरा मज़ा लेना चाहता था. और माँ को भी अपने लुंड का पूरा पूरा मज़ा देना चाहता था. आखिर माँ भी तो ऐसे hi प्यार के लिए एक लम्बा सफर करके आई थी.

मेरा लुंड माँ की छूट की दीवारों को बोहत hi प्यार से चूमता हुआ माँ की बच्चेदानी तक्क जाने लग. वही मेरा पहली रिहायश थी. पुरे 9 महीने hi तो मैं माँ की बच्चेदानी में रहा था. मेरा लुंड वही जा के रुका, कुछ देर मैं अपनी पहली रिहायश का अच्छे से मज़ा लिया और अपने पहले घर को अच्छे से छूट कर माँ की छूट से बहार निकलने लगा.

ये सबब ीनता मज़ेदार था क मैं धीरे धीरे और बार बार माँ की छूट से गुज़र कर माँ किओ बच्चेदानी तक का सफर करने लगा...

माँ भी मेरे लुंड की रगड़ और मेरे अंदाज़ से सबब समझ गई, और माँ की दिल की हसरत पूरी होने लगी. यही तो माँ भी चाहतीओ थी, क उसका विज्जू और उसके विज्जु का लुंड उनकी छूट में अपने हक़ जीतते हुए और अपनी मनमानी करते हुए अंदर बहार होता रहे, ऐसे hi तो माँ को पूरी तरह से शान्ति मिलेगी..

माँ:- विज्जू बीटा तुम बोहत hi दिल से अपने लुंड को मेरी छूट में उतार रहे हो, मेरा दिल तुम्हरे लुंड की रगड़ को एक कक सेंटीमीटर तक महसूस कर रहा है. मेरा दिल तुम्हारे लुंड की ऐसी रगड़ से झूमने लगा है. और सालों दुःख की गार्ड जो मेरे दिल में बची रह गई है. अब्ब वो भी उतरने लगी है.... मेरा दिल तुम्हरे ऐसा करने पूरी तरह से खिल उठा है मेरी छूट में मालिक मेरे बेटे विजजूउउ.

ी लव यू मेरे बेटे, ऐसे hi पलों के लिए तो जी रही थी, दिल की साडी हसरतें तो ऐसे hi पूरी करते रहने मेरी गांड के मालिक मेरे बेटे ... बास अब्ब जो कसार रहती है चुदाई से पूरी हो जायेगी.... विज्जू बीटा अब्ब तुम मेरे निप्पल को भी बारी बारी अपने मोहन में ले के चूसे, मेरा दिल मेरे निप्पल के पास है, मैं कुछ और भी अच्छे से तेरे प्यार को खुद में उतार लेना चाहती हों मेरे बेटे, अपनी माँ के निप्पल्स से निकलने वाला दूध तुमने सालों तक पीया है, आज एक बार फिरसे अपना हक़ वसूल करो विज्जु बीटा... तुम मेरे एक एक अंग के मालिक हो विज्जू बीटा.... तुम मेरे निप्पल्स को पुरे मैं से पियो तब्ब तक्क मैं आगे की बात बताती हों.

मेरा लुंड माँ की छूट में अच्छे से रवा हो गया, तो मैंने माँ की बात मानते हुए माँ के एक निप्पल को अपने मोहन में ले लिया. और दूसरे हाथ से माँ के निप्पल को अपने अनघोटे और एक ऊँगली में पकड़ लिया, दबाया नहीं बास उसे फील करने लगा, और अपने मोहन में जिस निप्पल को लिए था, उसे हलके हलके चूसने लगा.

माँ मेरे सर्र के बालों में अपनी उँगलियाँ चलने लगी..

माँ:- विज्जू beta,main बाथरूम में तुम्हारे लुंड को पकड़ कर तुम्हारे पापा के बारे में जो बात करने वाली थी वो ... विज्जू बीटा मेरे निप्पल को ज़यादा ज़ोर से मत चूसो अभी मुझे जल्दी नहीं झड़ना है, जैसे तुम कर रहे हो, उससे मेरी छूट जल्दी पानी छोड़ दे गई. थोड़ा धीरे धीरे करो ना बीटा सबब तुम्हारा hi है, जब्ब टाइम लगे तो पुरे मैं से कर लेना, अभी बात अधूरी रह जायेगी.

हमे किस बात की जल्दी है. अब्ब तो ये सबब हमने पूरी ज़िन्दगी hi करना है, मेरी छूट तुम्हारी और तुम्हारा लुंड मेरा, सालों तक्क इसका hi वेट किया है तो सकूँ से लुंगी, जल्दी तो वो करता हाँ, जिन्हे कहीं जाना हो. आराम से करो बीटा.. देखो तुम्हारे मोहन में कितनी जल्दी अकड़ने लगे हाँ.. ऐसे तो छूट पानी छोड़ देगी और मैं शांत हो जाओगी, अभी मुझे शांत नहीं होना. वो तो मैं आज तुम्हारी धुआंदार चुदाई से hi झड़ना चाहती हों ... कोठे पर रह के बोहत से कुत्तों ने मुझे बेदर्दी से छोड़ा है, अब्ब वैसे hi चुदाई मैं आज तुम्हारे साथ करके हमारे बीच के सेक्स रिलेशन की ओपनिंग करना चाहती हों. इसलिए अभी धीरज रखो.. सबब मिलेगा तुम्हे तुम्ही तो इस सबब क असली मालिक हो..

मैं माँ की बात सुन कर माँ के निप्पल को धीरे से चूसने लगा..

माँ:- हाँ विज्जू बीटा अब्ब सही है. इसी स्पीड से लगे रहो... तो मैं कह रही थी क तुम्हारे पापा रात से hi एक गिल्ट में हाँ.. मैंने तुम्हे बताना न विज्जू बीटा क मैं अब्ब तुम्हारे पापा से जिस्मानी सम्बन्ध अपनी छूट की आग बुझाने के लिए नहीं बनाये हुए..... तुम भी तो उसका hi अंश हो न. पारर मैं सिर्फ तुम्हारे लुंड के लिए मचल रही हों.

रंजीत की hi वजा से तुम मेरे लाइफ में आये हो.

कोई भी लड़की हो. उसकी छूट जिस लुंड से खुलती है, उसे वो कभी भूल नै सकती, इसी लिए मैं तुम्हरे पापा के पास हों.. और एक बात विज्जू बीटा, तुम्हारे पापा के रहते hi तुम दुन्या में सर्र उठा कर रह सकते हो, दुन्या को पता चलेगा क तुम किसके खून हो, कोई तुम पर ऊँगली नहीं उठाएगा, कोई ये नहीं कहेगा क तुम कोठे की पैदाइश हो..

एक औरत को भी तो सोसाइटी में एक मर्द के सहारे की ज़रूरत होती है. मर्द से जुड़े एक नाम की ज़रूरत होती है. दुन्या जानना चाहती है क उसके पति का नाम क्या है. दुन्या जाना चाहती है क उसके बच्चो का बाप कौन है, इसलिए रंजीत का होना भी ज़रूररी है..

पर लुंड के लिए ये सबब मैं नहीं कर रही रही. लुंड तो मेरे लिए तुम्हारा hi

काफी है, अब्ब तो बास तुम्हारे hi लुंड को ले के दिल से छोड़ने की चाह है..

तुम्हरे पापा भी शायद मेरे दिल की बात समझ गए हाँ. वो भी सभी का तुमसे बर्ताव जान चुके हाँ. वो ये भी जानते हाँ क कोई छोटी हो या बड़ी वो तुम्हारे लुंड से छोड़ना चाहती है.. रात तुम priya,jhanvi और श्रुति को छोड़ने वाले हो, ये भी मैंने रात को तेरे पापा को बोल दिया था.

पहले तो बड़े हैरान हुए, फिर अचानक से hi कहने लगे.

रंजीत:- श्वेता इन गुज़रे सालों ने बोहत कुछ बदल दिया है. और जैसे मेरी और तुम सबब की ज़िन्दगी हो गई है मैं सबब समझता हूँ. मैं कितना गलत था क तुम्हारी शादी का सुन कर hi एक रूम में बंद हो कर रह गया. पारर मैं भी क्या करता हम कभी एक भी तो नहीं सकते थे, एक न एक दिन तो तुम्हे दूर होना hi था, और फिर वक़्त ने हमें दूर कर hi दिया. अगर मुझे पता होता क तुम्हारे लिए ऐसी लाइफ मुन्तख़ब क्र दी गई है, तो मैं इस पूरी दुन्या को hi आग लाग देता पारर तुम्हे वहां से निकाल लाता.. पारर मैं कुछ जानता भी तो नहीं था, कौन बताता मुझे क तुम कहाँ हो. बास इतना hi पता चला क तुम शादी करके बहार चली गई हो. और तुम कोई पहली लड़की तो थी नहीं जो प्यार की बलि देख कर शादी करके बहार चली गई थी.. ऐसा तो आम बात है और मैंने भी इसे सच मान लिया..

पारर बात अब्ब बदल गई है, जैसे क अब्ब तुमने बताया क आज विजय बीटा तीनो बहनो के साथ रात गुजरने वाला है. और बाकी भी सभी विजय बीटा के लिए मचल रही हाँ तो तुम भी तो उन्ही में से एक हो, जो विजय के लिए मचल रही हाँ. देखो श्वेता मेरा प्यार तब्ब भी तुम्हारे लिए मतलब का नहीं था, तब्ब भी तुमने खुद से hi सबब करने के लिए कहा था, और आज भी मैं तुम्हे वैसे hi प्यार करता हूँ, जैसा शुरू में करता था. तुम्हारे साथ गुज़री वो पहली रात या फिर ये दो रातें फिर लाइफ में आई हाँ, वर्ण तुम्हारे बाद मैंने किसी लड़की के लिए अपने मैं में कोई विचार नहीं आने दिए.. मुझे सेक्स की भूक नहीं है श्वेता, मुझे तुम मिल गई हो मेरे लिए ये भी बोहत है, पारर तुम अब्ब मुझसे दूर मैट जाना, मेरा है hi कौन इस दुन्या में, बास कुछ दोस्त हाँ, और अब विजय और तीन बेटियां मुझे तुमसे मिल गई हाँ.

श्वेता मैं तो इतना भी डेसेर्वे नहीं करता था, तुमने तो मुझे एक बीटा और तीन बेटियां दे दी हाँ, भले hi विजय अकेला मेरा खून है, पारर मेरे लिए प्रिय, जहान्वी और श्रुति भी विजय जैसी hi हाँ....... मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था क मैं कभी तुम्हे हासिल भी कर पाऊँगा. तुम मुझे हासिल भी हो गई और मुझे मेरा वारिस भी दे दिया, मुझे इससे बढ़ कर और कुछ नहीं चाहिए.

श्वेता तुम अपने दिल के सारे hi अरमान हमारे विजय बीटा से पुरे कर सकती हो.

मुझे कोई परेशानी नहीं होगी, मैं तो तुम्हे खुश देख कर hi खुश हों.

तुम्हरा तो सबब कुछ hi विजय बीटा के सामने खुल चूका है. तो कुछ भी एक पति अपनी पत्नी का देख सकता है. वो सबब कुछ hi तो विजय बीटा भी देख चूका है.

तुम सबब की ज़िन्दगी के सारे रंग hi चुके हाँ. और दिल के भी. मैं पहले भी कभी तुम्हारी खुशियों के बीच में नहीं आया था. अब भी नहीं आऊँगा.

मैंने कहा न क मुझे जिस्म की भूक नहीं है, अगर एक आदमी को उसकी औरत के जिस्म की भूक mit;ti नज़र नहीं आती तो वो बहार जा आकर मोहन मारता है, पारर मैंने आज तक्क कभी ऐसा किया ना कभी ऐसा सोचा. तुम अब्ब भी मेरे सामने हर दुम्म रहो. मुझे तुम्हारे जिस्म की भी भूक नै रहेगी.

अगर ये सबब माहौल तुम सबब की लाइफ में न आया होता तो शायद मैं ये सबब सहन नहीं क्र पता, पारर मुझे इन सबब बातों का पूरा पूरा अदरक है, मैं स्लेफ़िश नहीं हों श्वेता, जो खुद के मतलब के लिए तुम सबब की खुशियों की बलि चढ़ा डॉन.

माँ:- विजजूउउ बीटा तुम्हरे पापा का दिल बोहत बड़ा है, ऐसे hi तो नहीं मैं तुम्हरे पापा की लाइफ में आ गई थी, और अपना कुँवारापन्न तुम्हारे पापा को दे दिया था. तुम्हरे पापा एक ग्रेट इंसान हाँ.. कैसे हम सबब की ख़ुशी के लिए खुद को साइड में कर लिया.

मैं माँ के मोहन से पापा की बातें सुन रहा था, मेरा मोहन से माँ का निप्पल कब्ब का निकल गया था. माँ ने पापा के बारे में बताया भी बोहत अजीब था..

माँ बोहत खुश दिख रही थी.

विजय:- माँ फिर तो आप बोहत खुश हाँ ना.

माँ:- हाँ विज्जू बीटा अब्ब मैं अपने दिल से तुम्हारा लुंड अपनी छूट में ले सकती उन. अब्ब मुझे तुम्हारे पापा की कोई टेंशन नहीं है. टेंशन तो पहले भी नहीं थी, पारर अचानक से उनके मेरी ज़िन्दगी में वापिस लौट आने से दिल की हालत भी अजीब सी हो गई थी..

विजय:- माँ तो फिर अब और बातें भी करनी है या चुदाई का ओरिजिनल काम भी शुरू किया जाए.

माँ:- नहीं विज्जू बीटा, अब्ब सिर्फ चुदाई, बातें तो कभी ख़तम होंगी नहीं.. तुम अब्ब अपने लुंड से मुझे अंदर से निहाल कार्डो. आज मेरे लिए ख़ुशी की सूबा है. रात तेरे पापा ने सबब बोल दिया और फिर तुम भी सूबा सूबा मेरे लिए लुंड ले के आ गए.

विजय:- माँ कैसे चुदाई करूँ. धीरे धीरे से या

माँ:- विज्जू बीटा धीरे धीरे से चुदाई बोहत देर से हो रही है. अब्ब तुम मुझे अपने मैं से ताबड़ तोड़ छोड़ो. पहले तो अपने मैं के बिना hi चुदती रही हों. आज मेरा मैं है, तो मैं चाहती हों, क आज तुम पुरे जोश से मेरी छूट में अपना लुंड पेलो.. बोहत तरसी हों मैं विज्जू बीटा तेरे लुंड के लिए..

विजय:- माँ इससे तुम्हारी छूट का हशर न ख़राब हो जाए. मेरा लुंड भी तो आपकी छूट में फंसा हुआ है.

माँ:- कोई बात नहीं विज्जू बीटा, जब ख़ुशी ज़यादा होती है, तो धमाल भी जोश में hi डालनी पड़ती है, और जैसी ख़ुशी हमे आज मिली है, चुदाई भी उसी हिसाब से होनी चाहिए..

विजय:- माँ इसी पोजीशन में तो आप थक चुकी होंगी. आप उलटी लेट जाएँ और मैं आपकी गांड को देखते हुए आपकी छूट में लुंड उतरता हूँ.

माँ:- हाँ विज्जू बीटा, सच में hi मैं बोहत थक गई हों. और उलटी लेट कर मेरी छूट भी सही से चुद लेगी. और मुझे कुछ रहत भी मिल जाएगी.

मैं माँ के ऊपर से उठा तो मेरा लुंड माँ की छूट se"puck" की आवाज़ निकलता हुआ बहार निकल आया..

माँ:- देहका विज्जू बीटा कैसे तुम्हारा लुंड आवाज़ निकल रहा है, वो तो अभी से hi मारे ख़ुशी के सीटी बजने लगा.

विजय:- माँ सीटी भी तो आपकी छूट से निकलते वक़्त बजी है ना. अकेला तो ये भी कुछ नहीं कर सकता..

माँ हस्ती हुई उलटी लेट गई. और मैं माँ की मस्त गांड को निहारने लगा.

विजय:- माँ आपको पता है आपकी गांड मेरे लिए कितनी अहमियत रखती है.

माँ:- माँ हों मैं तेरी विज्जू बीटा. तेरी सबब नज़रें पहचानती हों.

विजय:- माँ आपकी गांड और चुत्तड़ बोहत hi ज़यादा आकर्षित करते हाँ. आपकी गांड पर नज़र पड़ते hi मेरा लुंड उछाल कूद मचने लगा है.

माँ:- विज्जू बीटा मेरी छूट और गांड भी तो अंदर से तेरे लुंड को लिए बिना hi खुजली बढ़ाने लगते हाँ. अब्ब जल्दी से अंदर दाल मुझसे और सबर नहीं होने वाला..

मैं माँ की जांघों के साइड में दोनों पेअर करके बैठ गया, मेरा लुंड माँ की गांड पर ऊपर धरा हुआ था. मैं ये मस्त नज़ारा देखने लगा.

विजय:- माँ अभी कुछ वेट कर लोगी क्या. मैं आपकी गांड को अच्छे से देख क्र इसे अपनी आँखों के रस्ते दिल में उतार लेना चाहता हों..

माँ:- ठीक है विज्जू बीटा. मैं तो अपनी गांड पर तेरे लुंड को अच्छे से फील कर रही हों. ये सबब भी तो लुंड को छूट या गांड के छेड़ में लेने से कम् नहीं है. ये भी एक अलग hi मज़ा दे रहा है.

मेरा लुंड माँ की गांड की दरार के ऊपर पड़ा हुआ था. और मैं माँ की गांड और चत्तड़ों को ग़ौर से देखने लगा. मेरी नज़र माँ की गांड से ऊपर उठने लगी. माँ की कमर की गहरी भी खतरनाक अहदद तक जानलेवा थी. माँ की आगे बढ़ गई थी, पारर माँ का शरीर वही का वही ठहर गया था.

माँ की बैक भी माँ के फोरन्त की तरह से बोहत hi फ्लेक्सिबल थी. माँ अपने दोनों हाथो को फोल्ड किये अपना चेहरा अपने हाथो पर रखे हुए थी. माँ का सर्र ऊंचा था. तो माँ की कमर किसी नागिन के जैसी दिख रही थी. मैं माँ की बैक का पूरा नज़ारा कर रहा था माँ की खूबसूरती की इन्तहा ने मेरे लुंड में करंट दौड़ना शुरू कर दिया. मेरा लुंड माँ की गांड पर उछलने लगा था. मेरे लुंड की सख्ती भी बढ़ती जा रही थी. और वो ख़ुशी से फूले नहीं समां रहा था. आज उसे उसका हक़ मिलने वाला था.

मैं ऐसे hi आगे झुका और माँ के पीठ पर अपनी जीब फेरने लगा.

माँ:- हैं विज्जू बीटा ऐसे hi अपनी माँ को सकूँ दो, सालों तरसी है तेरी माँ विज्जू बीटा. आज अपनी माँ के एक एक अंग को अपने प्यार से नेहला दो. इतना प्यार दो अपनी माँ को और अपनी माँ के शरीर को क अंदर से बहार से सबब चमकने लगे. मेरी दिल की तरह इस शरीर ने भी बोहत दर्द झेले हाँ. दिल का दर्द और शरीर का दर्द सबब निचोड़ लो अपनी जीब से और अपने लुंड से..

माँ की बात सुन कर मैंने माँ की पीठ पर अपनी जीब को चलना चूरू कर दिया. माँ की सिसकियाँ गूंजने लगीं..

maa:-siiiiiiiiiii.. ऐसे hi vijjuuuu..hmmmmmmhha.. अपनी माँ को प्यार दो.

मेरी जीब माँ की पीठ पार्स होती हुई माँ की गर्दन की तरफ जाने लगी. एक हाथ से मैंने माँ के बाल साइड किये और माँ की गर्दन को चाटने लगा. माँ की मस्ती बढ़नी लगी और सिसकियाँ भी ..

माँ अपनी गांड को थोड़ा सा उठाने लगी तो मैंने माँ के लिए अपने चूतड़ों को थोड़ा हवा में उठा लिया. मैं माँ की गर्दन पर अपनी जीब फेरने लगा और माँ मज़े से अपनी गांड को हलके हलके हिलने लगी..

माँ पूरा पूरा मज़े ले रही थी. और मैं भी माँ की खुशबु और टास्ते अपने अंदर उतार रहा था. माँ की गर्दन को चाटने के बाद मैंने माँ के कान पर अपनी जीब रख दी. siiiiiiiiiiiiii माँ की तेज़ सिसकी निकल गई..... माँ मदहोशी में जाने लगी. और माँ की गांड की मूवमेंट भी तेज़ हो गई.

ऐसे माँ के कान मेरे मोहन से सही से नहीं आने वाले थे. जितना हुआ मैंने माँ के कान को अपने मोहन में ले कर चूस लिया. माँ की बेकरी बढ़ने लगी. तो मैंने माँ के कान को छोड़ा और फिर नीचे आ कर माँ की पीठ और फिर कमर को चूमता चाटता हुआ और भी नीचे आने लगा.

मेरा लुंड माँ की गांड पार्स हैट गया था.

मई अपनी जीब से माँ की कमर की गहराई को अच्छे से नाप लेने के बाद माँ के चूतड़ों पर आ गया. मेरी जीब जैसे hi माँ क एक नरम मुलायम चुत्तड़ पर पोहंची तो माँ को एक बड़ा झटका लगा.

माँ:- siiiiiiiiiiiiiiiii hmmmmmmmmmmmmmha .. विजजू बीटा क्यों अपनी माँ की जान निकलना चाहते हो. मेरे चुत्तड़ मेरे लिए बोहत hi सेंसिटिव हाँ.

मैं माँ की बात सुन क्र खुश हुआ. क माँ के चुत्तड़ माँ के लिए सेंसिटिव हाँ. अब्ब तो माँ को मज़ा कुछ और भी देना पड़ेगा.

मैं माँ के चुत्तड़ पर अच्छे से अपनी जीब को फेरने लगा. मेरा लुंड नीचे माँ के एक पेअर से टकरा रहा था.

माँ अपने चूतड़ों पर मेरी जीब को सहन नहीं कर पा रही थी. माँ की गांड और माँ के चुत्तड़ मेरे लिए स्पेशल थे. और मेरा मैं नहीं भर रह था. पारर माँ को ज़यादा परेहन करना भी सही नहीं था.

मैंने माँ के चुत्तड़ अच्छे से खेंच कर साइड में किये तो मुझे माँ की un-khuli गांड दिखने लगी. मेरा लुंड झटके खाने लगा. माँ की गांड का छेड़ था hi इतना आकर्षित और पायरा क मेरा लुंड सहन नहीं कर प् रहा था. वो माँ की गांड में घसने के लिए मचलने लगा. पारर आज तो माँ की छूट का नंबर था, और आज टाइम भी कम् था. माँ की गांड छिरर्र जाती और माँ को परेशानी होती.. दिन भी निकल आया था. तो माँ को शर्मिंदगी से बचाना था..

पर मई माँ की गांड को माफ़ी तो देने वाला था नहीं. इसलिए मैं झुका और अपनी जीब को माँ की गांड के छेड़ में घुसा दिया..

माँ;- aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii marrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. विजजूउ बीटा कितनी आग लगाओगे अपनी माँ की छूट और गांड में. तुम्हारी जीब से उसकी सहन शक्ति ख़तम होने लगी है.

पारर मेरी जीब तो माँ की गांड के छेड़ में घुसी हुई थी, मैं माँ को क्या जवाब देता.

मैं माँ के चुत्तडों को और थोड़ा खेंच के खोला और माँ की गांड का छेड़ कुछ और भी मेरी जीब के लिए खुल गया. मेरी जीब कुछ और भी माँ की गांड के छेड़ में जा घुसी. माँ बिन पानी की मछली के जैसे तड़पने अलगी..

माँ:- haaaayeeeeeeeeeee विजजूउ बेताआआ ये कैसा मज़ाआआआ deeeeeeeeeee

diyaaaaaaaaaaa tumneeeeeeeeeeeeeeeee अपणीइइइइइइइ maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa कीई

ganddddddddddddd koooooooooooooo...

मेरी जीब अच्छे से माँ की गांड के छेड़ को टटोलने लगी. माँ अपने चुत्तड़ बार बार इधर उधर कर रही थी.

माँ की छूट पानी की नदियां बहाने लगी. मुझे माँ की छूट की स्मेल बोहत hi भली लगी. माँ की गांड सील पैक थी. पारर माँ अपनी छूट की तरह से अपनी गांड का भी बोहत अच्छे से ख़याल रखती थी.

माँ की गांड से मधुर खुशबु मेरे अंदर उतरने लगी. तो मेरा लुंड भयंकर हद्द तक अकड़ने लगा..

माँ की बेकरारी बढ़ी तो मुझे माँ का एहसास हुआ. अब्ब माँ की गांड भी मेरी थी और छूट भी. तो फिलवक्त के लिए इतना hi काफी था. मैंने माँ की गांड से मोहन हटाया तो मा ने रहत की सांस ली...

माँ के मोहन से ऐसे सांस निकली जैसे किसी घुबरी से हवा...

माँ:- विजजू बीटा तुमने तो मेरा दुम्म hi निकल दिया था. कोई इतने मज़े से भी किसी की गांड चाटता है क्या. तुमने अपनी जीब hi मेरी गांड में घुसा दी थी. पता है मेरी हालत कैसी हो गई थी. अगर तुम मेरी गांड को न छोड़ते तो पता नहीं मुझे कितने झटके और खाने पड़ते.. मेरी छूट तो बिना लुंड के hi पानी छोड़ देने वाली थी.

विजय:- माँ मज़ा आया ना..

माँ:- हैं विजजूउउ बेटा, इसी मज़े के लिए तो तरसी हों. अब्ब मेरे मैं को चैन मिलने लगा है. अब्ब देर मैट कर और दाल दे अपने लुंड को मेरी छूट में..

विजय:- माँ गांड में न दाल डॉन..

माँ:- वहां कोनसा तुमने मुझे माफ़ी दे देनी है. अभी टाइम कम् है और बास अभी मेरी छूट को शांत करो और अपने लुंड को भी टाइम बोहत हो चूका है. कोई भी आता होगा. और सबब कुछ बीच में hi न रह जाए..

विजय:- ठीक है मा. मुझे भी अब्ब बेचैनी हो रही है..

मैंने माँ के पैरों को थोड़ा सा खोला और अपने लुंड को माँ की छूट पर सेट करने लगा. माँ ने भी अपने गांड को ऊपर उठा कर अपनी छूट को लुंड के लिए जगा दी. मेरा लुंड माँ की छूट के छेड़ में घुसा.

माँ:- अब्ब एक बार धीरे धीरे करके अपना लुंड आधा अंदर डालो विज्जू बीटा. जब्ब चला जाए तो मेरे ऊपर आ कर बाकी का भी एक झटके में अंदर करना. मैं देखना चाहती हूँ. क इतने साल चुद के भी दर्द होता है क नहीं.

मैंने वैसे hi किया जैसे माँ ने कहा था, मैंने अपने लुंड को धीरे धीरे करके माँ की छूट में आधा उतर दिया. फिर माँ के ऊपर झुक गया..

विजय:- माँ अब्ब मारों एक ज़ोर का झटका..

माँ:- हाँ विजय बीटा, लगा दे अपना पूरा दुम्म, और निकाल मेरी भयंकर चीख, समझ ले आज मेरी मेरे बेटे के साथ सुहागरात है, और मैं अपना दर्द अपने बेटे को गिफ्ट करने वाली हूँ, भगवन करे मुझे वही दर्द हो जो मेरे दिल की इच्छा है. हम दोनों माँ बेटे की पहली चुदाई है ना विज्जउ बीटा, तो मैं चाहती हों क मेरी एक धमाकेदार चीख निकले, पारर वो ओरिजिनल होनी चाहिए.

बिना मर्ज़ी के मेरी कितनी hi चीखें हवस परस्तों ने निकाली हाँ विज्जू बीटा, अब्ब वही चीखें मैं अपने बेटे के लिए निकालना चाहती हों. कुछ दर्द दिल को बोहत चैन भी दे जातेहैं. बास यही दर्द मेरे दिल को भी चैन देने वाला है. और मेरे दिल की तमन्ना भी पूरी हो जायेगी.......

विजय:- माँ दर्द होगा आपको.

माँ:- कहा न विज्जउ बेताऑ वही दर्द मुझे भी चाहिए... मेरा दिल है ना तो अपनी माँ के दिल की मान ले, दर्द को छोड़ कर लगा अपने चुत्तडों का पूरा ज़ोर और फहाद दाल अगर मेरी छूट कुछ फटने से बढ़ी रह गई है तो..

मे आधा लुंड माँ की छूट में था. मेरा दिल तो नै किया क माँ को दर्द डॉन. पारर माँ की इच्छा भी तो थी.

मैंने खुद को एडजस्ट करते हुए अपना पूरा ज़ोर लगा कर माँ की छूट में अपना उतार दिया..

maa:-aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii marrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr

gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii vijjjjjjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu bettaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa


मैं रुक गया माँ की तो दिल दहला देने वाली चीख निकली थी. शायद रूम से बहार अगर कोई हुआ तो उसने सुन ली होगी.. मैंने दूर भी तो लॉक नहीं किया था.

विजय:- माँ ज़यादा दर्द हुआ क्या..

माँ तेज़ सांस लेते हुए.

माँ:- हाँ विज्जू बीटा बोहत दर्द हुआ है. बोहत समय बाद इतना बड़ा लुंड मिला है ना. और पोजीशन भी तो उलटी थी, दर्द तो होगा hi, पारर मुझे ऐसा hi दर्द तो चाहिए था.. चल रुक मैट और मुझे पुरे जोश से छोड़. दर्द सहने की तो आदत पद चुकी है. पूरा पूरा लुंड निकाल कर पूरी पावर से अंदर दाल..

आज मुझे इतना मज़ा दे क मैं निहाल hi हो जाऊं.

मेरा लुंड भी इतने समय से खड़ा रह रह कर थक चूका था, सिलिये अब्ब उसे रेस्ट देने का टाइम भी आ गया था. और रेस्ट उसे माँ की छूट में पानी उगलने से मिलने वाली थी.

और माँ की भी इच्छा पूरी करनी थी. माँ कुछ भी कहे मेर लिए तो माँ की हर बात मानना फ़र्ज़ है. और मई अपना फ़र्क़ पूरा करने लगा..

फिर मैंने माँ की मानते हुए अपने लुंड को माँ की छूट से बहार खेंचते हुए फिरसे में माँ की छूट के उतरने लगा. वो भी पूरी स्पीड से.

माँ की दर्द भरी सिसकियाँ रूम में गूंजने लगीं. मैं भी माँ की छूट से अपने लुंड को खेंच खेंच कर फिरसे अंदर पेलने लगा... मेरे धक्को में तूफानी स्पीड आने लगी. माँ की सिसकियाँ और हलकी चीखें कमरे में गूंजने लगीं.

पूरा बीएड hi हिलने लगा था. और माँ उछाल उछाल कर बीएड पर गिरने लगी.

माँ की छूट मज़े की हसीं वादियों में रहते हुए गुनगुनाने लगी. और गंगा जमना बहाने लगी.

माँ एक बार झाड़ चुकी थी लेकिन मैं नहीं रुका और न hi माँ ने मुझे रुकने को बोलै...

माँ की छूट की तंग दीवारों को मेरा लुंड बार बार खोलता हुआ अंदर बहार होने लगा..

कुछ देर में माँ फिरसे चार्म पर जा पोंछी..

माँ:- हाईए मेरा बीटा अपनी माँ को कितनी ख़ुशी दे रहा है.. ऐसा hi तो वो सपना देखा करती thi...aiiiiiiiiiiiiiiiiiiii siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii..oiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa और जोज़ से बीटा, आज अपनी माँ को पूरा hi शांत कर doooooooooooooooooooooooooooo..

आज अपने लुंड से अपनी माँ को साड़ी खुशियां दे दो... जो वो डेसेर्वे करती है.

मेरा लुंड भी पानी छोड़ने वाला था. और माँ दूसरी बार भी चीखते हुए झाड़ गई..

माँ:- बहुत अच्छे विज्जउ बीटा, ऐसे hi लगे रहो.. मेरी छूट अंदर से खुशियां मन रही है.... उसे ऐसे hi खुशियां देते रहना विज्जू बेताऑ..

मेरी सांस भी फूलने लगी थी और मेरा लुंड आखरी स्टेज पर जा पोहंचा.

वो इतना फुल गया क माँ की छूट से रगड़ रगड़ कर अंदर बहार होने लगा..

माँ की छूट ने पानी छोड़ दिया था. जिस वजा से मेरा लुंड फुल स्पीड में माँ की छूट से रगड़ खता हुआ अपने सफर को जारी रखे हुए था.

आखिर वो घडी भी आ गई जिस के चलते ये सबब किया जा रहा था. माँ तो नाहा hi चुकी थी. अब्ब मेरे लुंड की बारी थी.

मेरा लुंड माँ की छूट में अंदर अपना माल छोड़ने लगा. मेरा लुंड हल्का क्या हुआ मैं माँ के ऊपर hi गिर गया..

मेरी सांस फूल गई थी.

कुछ देर बाद मैं माँ के ऊपर से अलग हुआ तो माँ ने मुझे बीएड पर लिया और मेरे लुंड को पकड़ कर अपने मोहन में ले कर चूसने लगी.

मैं माँ को देखने लगा, माँ बड़े प्यार से मेरे लुंड को अपने मोहन में लिए हुए साफ़ कर रही थी.

माँ तो लुंड चूसने में एक्सपर्ट थी hi. माँ ने कुछ hi देर से मेरे लुंड पर लगे हुए मेरे वीर्य को और अपनी छूट के पानी को चाट कर अपने पेट में उतार लिया.

माँ मुझे देखते हुए अपने होंटो पर जीब फेरने लगी.. फिर माँ मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. और फिर माँ अचानक से मेरे ऊपर hi आ कर लेट गई और मेरे चेहरे को चूमने लगी.

माँ अपनी छूट की ख़ुशी के बाद अब्ब मुझसे अपने दिल की ख़ुशी का इज़हार कर रही थी.

कुछ देर माँ मुझे चूमती रही और फिर थोड़ा सा पीछे हैट कर मेरे सीने पर सर रख कर गहरी गहरी सांस लेने लगी..

माँ:- विज्जू बीटा थैंक यू मेरी ज़िन्दगी में आने के लिए. दुःख और दर्द तो ज़िन्दगी ने बेहिसाब दे hi दिए हाँ. पारर तेरे जैसे बीटा भी तो मुझे मिला है.

अब्ब मैं दुःख और दर्द को याद नहीं करना चाहती.. भगवन ने मुझे इतनी ख़ुशी दी hai..to मैं क्यों दुखी रहूं. विज्जू बीटा मुझे हमेशा ऐसे hi प्यार देते रहना.

मैं मी की नंगी पीठ को सहलाने अलग.

विजय:- मेरे पास अब्ब सबब हाँ, पारर असल में तो हम पांच hi हाँ ना..... ये सबब तो मुझे राह में मिले हाँ. इस सबब की वजा से मैं आप सबब को साहिल करने में सफल हुआ हों. उस सबब को भी मैं वही खुशियां दूंगा, जितनी वो सबब डेसेर्वे करते हाँ, पारर इस सबब में आप priya,jhanvi और श्रुति तो स्पेशल हाँ ना. आप कुछ भी ऐसा वैसा न सोचे, मैं आप सबब का हों, आप सबब के बिना तो मैं हों hi नहीं. मेरा वजूद भी तो आप के hi दुम्म से है.

माँ:- माँ मेरे सीने से उठती हुई बोली..

माँ:- चल विज्जू बीटा अब नाहा कर रेडी होते हाँ, सबब हमारा नीचे वेट क्र रहे होंगे.

माँ मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाथरूम में ले गई और फिर दोनों hi मिलकर नहाये. मस्ती के कारण मेरा लुंड फिर से खड़ा हुआ तो माँ हस्ते हुए बोली..

माँ:- विज्जु बीटा अभी इसे रोक लो, अभी इसके छूट में घुसने का समय नहीं है.

ऐसे hi मस्ती में हम नहाये. और फिर मैं वही निक्कर और t-shirt पहन कर अपने कमरे में चेंज करने चला गया. और माँ नीचे सिटींग हाल में सबके पास जाने लगी


************************************************************************************
 
अपडेट ::: 77

*************







मैं रूम में चेंज करने क लिए गया तो तीनो तितलियाँ अभी तक्क सोइ हुई थीं. मैंने उन्हें और उनकी छूट को रेस्ट देना सही समझा. और चेंज करके नीचे आ गया..

माँ चहक चहक कर सबब से बातें कर रही थी. मुझपर नज़र पड़ते hi माँ की चहकार और भी बढ़ गई. जिसे भाभी ने नोट कर दिया. भाभी मुझे ऑंखें दिखने लगी. भाभी ने कुछ कुछ जज कर लिया था, या शायद जब्ब मैं माँ को छोड़ रहा था तो भाभी माँ की चीखों से रूम में आई हो और दूर को थोड़ा सा खोल कर माँ की छूट में मेरा लुंड देख कर वापिस चली गई हो. क्यूंकि भाभी की ऑंखें भी कुछ कुछ लाल थी. जब्ब भाभी की छूट की खुली मेरे लुंड ने मिटा hi देनी थी, तो भाभी उतावली नहीं थी. वो भी सबर किये हुए सही समय का वेट कर रही थी. दीक्षा aunty,padma आंटी और मालिकान माँ से बातों में मगन थें. पद्मा आंटी और मालिकान की भी छूट मेरे लिए कुलबला रही थी, जल्द hi उनकी छूट की भी खुजली ख़तम करनी पड़ेगी, बहुत वेट कर लिए उन्हों ने और उनकी छूट ने, दीक्षा आंटी की आँखों में मुझे ऐसा कभी कुछ नै दिखा था. वो मेरे लिए दिल में दूसरों जैसे विचार नहीं रखती थी. शायद उनकी छूट की खुजली बढ़ने से पहले hi मिट जाती होगी..

सबने मिल कर ब्रेकफास्ट किया...

उसके बाद मैं अजित भाई और लाली से मिला. अजित भाई अब्ब काफी हद्द तक ठीक हो गए थे. मुझे उनसे मिल के बोहत ख़ुशी हुई... मैंने अजित भाई के प्रॉपर ठीक होने तक्क उन्हें रेस्ट लेने का कह दिया.. अब्ब उन्हें काम की ज़रूरत तो थी नहीं...

लाली को उसके हिस्से का प्यार दिया, लाली मेरे होंटो से अपने निप्पल्स पर होने वाली छेड़ छड़ और चूसै से बहुत मज़े में आ गई थी. लाली की छूट और ऑंखें चमकने अलगी थी. लाली की छूट तो हर टाइम नंगी hi रहती थी. मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी छूट में दाल कर निकली तो वो गीली थी. लाली जितनी ज़ख़्मी थी, मैं न तो सही से लाली की छूट में ऊँगली घुसा कर उसे शांत कर सकता था, और न hi लाली की छूट में अपनी जीब दाल कर लाली को शांत कर सकता था. लाली के ज़ख्म छील जाने का खतरा था.

लाली तो मेरे इतने से hi खुश हो गई थी. और मेरे होंटो को कुछ देर अपने होंटो में लिए अपना हक़ वसूलने लगी..

लाली की ख़ुशी बोहत बढ़ी हुई थी. लाली अब्ब जल्द hi ठीक हो कर मेरा पूरा प्यार लेना चाहती थी ... लुंड के लिए और एक धमाकेदार चुदाई के लिए वो भी तरस रही थी..




************************************************************************************




मैं karan,juhi और जूही माँ एक रूम में बैठे हुए थे..

विजय:- माँ जी आप यहाँ पैलेस में खुद को कैसा पा रही हाँ.

जूही माँ:- विजय बीटा सच कहूं तो बोहत कुछ अजीब है यहाँ पर, ऐसे माहौल में हम कभी रहे नहीं हाँ, इन 3 दिनों में बोहत कुछ देख लिया है मैंने, मैं भी एक जवान बेटी की माँ हों, अगर मैं उस हिसाब से देखो तो मुझे यहाँ नहीं रहना चाहिए, पारर यहाँ पर माहौल सारा hi ओपन है, कोई भी किसी से किसी किसम की बात करते हुए झिझकती नहीं है, अजीब भी लगता है, शर्म भी आती है, पारर सबब की बातों में बेशर्मी तो है, be-hayaai नहीं है, हमारे लिए सम्मान भी है, और प्यार भी. एक माँ के लिए ऐसे माहौल में रहना वो भी अपने बच्चों को लेकर आसान नहीं है.

पारर यहाँ ओपनली बातें, और बेशर्मी hi तो नहीं है ना, यहाँ हमारे लिए मान सम्मान की भी कमी नहीं है, प्यार की भी कमी नहीं है, मेरे बच्चो के बिगड़ जाने का खदशा भी मुझे नहीं है, इतना मुझे अपने बच्चो पर यकीन है, और मेरी परवरिश भी कोई मानी रखती है..

बास कुछ दिनों में इस सबब के आदि हो जायेंगे हम, और विजय बीटा मैं और मेरे बच्चे यहाँ बोहत खुश हाँ..

विजय:- थैंक यू माँ जी, मुझे इस सबब को लेके बोहत पेरशानी थी. और मुझे टाइम भी नहीं मिल पा रहा था, सही से आप सबब से बात करने के लिए..

जूही माँ:- विजय बीटा इसमें थैंक्स की कोई बात नहीं है. हम सबब समझते हाँ, यहाँ कितनी मसरूफियत है तुम्हे, और फिर हमें यहाँ कोई परेशानी भी नहीं है.

विजय:- कारन तुम और जूही क्या कहते हो..

कारन:- विजय भाई मुझे कोई परेशानी नहीं है..

जूही:- भाई मुझे भी यहाँ कोई दिक्कत नहीं है, बल्कि यहाँ तो मेरी कई फ्रेंड्स भी बन्न गई हाँ, मुझे मेरी मतलब की फ्रेंड्स और बहने भी मिल गई हाँ.

विजय:- ये तो बहुत अच्छी बात है... माँ जी मैं यहाँ आप को बिजी देखना चाहता हों. यहाँ महिलाओ के लिए आप क जैसी hi मुझे चाहिए थी.. मैं आपको यहाँ की सभी महिलाओं की हेड बनाना चाहता हों, इस तरह से आप बिजी भी हो जाएँगी, और अपने हिसाब से सबब सेट भी कर लेंगी.

मेरी फॅमिली में तो सभी बिजी hi हाँ, एक पूजा दीदी हाँ जो ये सबब कर सकती हाँ, अगर आपको कोई परेशानी हो तो आप उनसे बात सकती हाँ.

जूही:- सचहहहहहहह, भाई आपने माँ के लिए बोहत सही सोचा है, और माँ तो फिर भी अपने दौर में प्रोफेसर रही हाँ. माँ के लिए इस सबब को हैंडल करना मुश्किल भी नहीं है, और माँ भी मसरूफ हो जाएगी.. माँ अक्सर ेकेलि रह रह कर अंदर से बोहत खली खली हो गई हाँ.

कारन:- माँ मुझे भी आपके लिए ये सही लगता है. आप खुद को लेडीज क मसायल में मसरूफ रखेंगी तो ये आपके लिए अच्छा रहेगा..

जूही माँ:- ठीक है, सबब तुम सबब कह hi रहे हो तो, मई भी ये सबब कर लेती हों.

विजय;- कारन तुम जूली से मिल कर पैलेस में खुद का काम समझ लो. जूली को मैंने सबब समझा दिया है..

कारन:- ठीक है भाई, मैं मिल लूंगा जूली से....

ऐसे hi कुछ देर और बातें होती रहें. फिर हम अलग हो गए. अभी मुझे और भी बोहत से काम करने थे..




************************************************************************************




मैं पूजा दीदी क रूम में गया, वो रूम अकेली hi थी, और उलटी लेते हुई अपने पैरों को हवा में उठाये हुए कोई बुक पढ़ रही थीं.

मैं चुपके से गया और उनके पेअर एक झटके में सीधे किये और उनके ऊपर चढ़ कर लेट गया..

पूजा;- कौन है.? (मेरा लुंड दीदी को अपनी गांड पे चुभा तो) विज्जू तू है. डरा hi दिया तुमने तो, मैं भी सोचों ऐसे अचानक से कौन आ गया है रूम में..

मैंने दीदी पर ज़यादा वज़न नहीं डाला था. वो बहुत नाज़ुक सी थीं. कहीं मेरे वज़न देने से उनके दूध hi न फहत जाएँ. अभी मुझे उनके दूध को पहले अच्छे से खाली करना था..

विजय:- सॉरी दीदी जो आपको मैं सही से समय नहीं दे पाया..... मैंने दीदी के सर्र को चूमते हुए कहा.

पूजा:- विज्जू इसमें सॉरी की कोई बात नहीं है. सबब आये हाँ तो उन्हें भी टाइम चाहिए, और अभी तुम्हे आये 2 दिन hi तो हुए हाँ. अभी तो तुम इस पैलेस में सही से रहे भी तो नै हो. मुझे या किसी और को इस से क्यों परेशानी होने लगी.

विज्जू:- लव यू दीदी .

पूजा दीदी:- लव यू तू माय स्वीटू.... विज्जू अब्ब सबब कितना अच्छा हो गया है ना. सबब hi यहाँ आ कर सेफ हो गे हाँ, सबब एक साथ मिल बैठ कर बातें करते हाँ. ज़िन्दगी के सारे hi ग़म ख़तम हो गए हाँ ना विज्जउ. मई तो बहुत खुश हों.

विजय:- मैं भी तो बोहत खुश हों. माँ और बहने हाँ, पापा भी आ गए हाँ. आप सबब भी हाँ. और खुद और भी नई फॅमिली मेंबर मिल गए हाँ. सबब बोहत hi बढ़िया है. लाइफ में खुशियों की भरमार हो गई है...

पूजा दीदी:- हाँ विज्जउ खुशियों के अनगिनत समय भगवन ने हमारी लाइफ में लिख दिए हाँ. भगवन किसी की बुरी जाणार से बचाये..

मैं पूजा दीदी के साइड से दिख रहे गाल पर अपने गाल को रगड़ने लगा.

विजय:- दीदी आप खुश तो हाँ ना पूरी तरह से.

पूजा दीदी:- हाँ विज्जू मैं बहुत खुश हों.. मुझे असल ख़ुशी तो तब्ब hi मिल गई थी, जब्ब तुम मेरी लाइफ में आ गौए थे. वर्ण उससे से पहले मस्ती भी मेरी लाइफ में और ख़ुशी भी थी, पारर अंदर से मैं खाली थी, एक माँ थी, माँ hi मेरे लिए सबब कुछ थी, पारर दो फीमेल मिल कर एक खुशहाल लाइफ कैसे जी सकती हाँ. हमेशा hi ाहदुरा अधूरा सा रेहत था लाइफ में, पारर अब्ब सबब एक दुम्म से झक्कास हो गया है...

विजय:- वाह दीदी झक्कास.. मेरे आने से या मेरे साथ मस्ती के लम्हात गुजरने से लाइफ झक्कास हो गई है..

पूजा दीदी:- विज्जू मैं कोई ऐसे वैसी तो हों नहीं, जो सेक्स के नशे में दोब्ती रहूं. ये तो तुम्हारा प्यार है जो मुझे ये सबब करने देता है, वर्ण सेक्स की क्या अहमियत..

मैं और पूजा दीदी बोहत मज़े में थे और एक दूसरे की खुशबु खुद में समेटे हुए खुद में hi मगन थे, क रानी कमीनी से रंग में भांग दाल दी..

रानी पता नहीं कहा से आई और मेरे ऊपर कूद गई, और पूजा दीदी नीचे hi डब्ब गई.

aiiiiiiiiii माआआआआ मुझे मारना है क्याआ, विजजू ये पक्का रानी hi होगी.

रानी के कूदते hi मैंने अपने बाज़ुओं को बीएड पर रख के सारा वज़न उनपर दाल दिया... पूजा दीदी को ज़यादा परेहनी न हो..

रानी:- ये तो चीटिंग की सजा दी है मैंने आपको दीदी. मेरे बिना मज़ा लेने का आपने सोचा भी कैसे..... इतना बोल कर रानी अपने बूब्स को मेरी पीठ कर रगड़नेलगी..

विजय;- रानी अभी हम न तो मस्ती कर रहे हाँ, और न छूट और लुंड का सोच रहे हाँ. तुम अपने चुचु को रगड़ना बंद करो.

पूजा दीदी:- विज्जू जबसे तुमने रानी को बताया है क तुम रानी की wo..wo..tabb से रानी कमीनी ने नताशा का और मेरा जीना हराम किया हुआ है. हर्र वक़्त hi ऊँगली डाले रखती है अपनी छूट में, और हमें भी नहीं माफ़ी देती. नताशा तो रानी को देख कर hi भाग कड़ी होती है. वर्ण रानी बेचारी नताशा की छूट का हशर hi ख़राब कर देती..

पूजा दीदी की बात सुन कर मैं और रानी हस्सन लगे..

रानी:- सच में विज्जू पहले से hi ऐसी फीलिंग्स बहुत मज़ा देती हैं. सब तो जब होगा तब hi होगा, पारर पहले से hi सबब फील करके जो मज़ा आ रहा है, उसका क्या hi कहना, क्यों दीदी अवदानकेँ में hi हमारी छूट की खुजली जैसे बढ़ी हुई है, कितना मज़ा आने लगा है ना कल से hi.

पूजा दीदी:- हाँ रानी, ये तो तुमने सही कहा.

विजय:- पूजा दीदी तो फिर पूरा मज़ा डॉन काया अभी से hi..

पूजा didi:-(ghabrate हुए) नहीं नहीं.. विज्जू अभी नहीं..

rani:-(hasste हुए हाथ को नीचे ला कर साइड से पूजा दीदी का एक बूब्स पकड़ कर मसल दिया) दीदी विज्जू अभी आपको छेड़ रहा है, और आप हाँ क डर hi गयी.

पूजा दीदी:- रानी कमीनी मुझे भी सबब पता है, और तू मेरे दूध को निचोड़ना छोड़ दे, अभी इसे शांत hi रहने दे.

रानी या मैं कुछ बोलते क पूजा दीदी क फोन बजने लगा.

पूजा दीदी:- अभी तुम दोनों hi चुप रहो, और मुझे फोन सुनने दो...

दीदी ने फोन उठाया तो नंबर देख कर बोली.

पूजा दीदी:- ये अनुष्का क्यों इस टाइम कॉल आकर रही है, वो तो इस टाइम क्लास में होती है.

इतना बोल कर दीदी ने कॉल अटेंड की और मोबाइल को लाउड स्पीकर पर दाल दिया.

अनुष्का की घबराई हुई आवाज़ सुनाई दी..

अनुष्का:- पूजा दीदी विजय फोन नहीं उठा रहा, मुझे उससे बात करनी है,

पूजा दीदी:- अनुष्का तुम घबरा क्यों रही हो, विज्जु मेरे पास hi है, तुम बोलो क्या बात है. और तुम इतना घबराई हुई क्यों हो..

अनुष्का:- (घबराते हुए) दीदी हमारे हॉस्टल की दो लड़कियों का रात में गैंगरेप हुआ है, और जिन लड़को ने किया है, ुमने एक दिल्ली के डॉन का भाई भी है, मुझपर और मेरी दीदी पर भी उसकी गन्दी नज़र है, रात से hi पुरे हॉस्टल में hi थड़थली मची हुई है. मुझे बोहत डर लग्ग रहा है. कोई कुछ भी नहीं कर पा रहा, और उन दोनों लड़कियों की भी हालत सही नहीं है.

हम तीनो ह अनुष्का की बात सुन कर ग़ुस्से में आ गए, रानी मेरे ऊपर से उठी और मैं भी दीदी के ऊपर से उठ गया..

विजय:- अनुष्का इस वक़्त तुम्हे या तुम्हारी बहन को तो कोई खतरा तो नहीं है ना.

अनुष्का:- विजय खतरा बन गया है. दीदी उस डॉन के भाई के खिलाफ जाने वाली है, जब्ब से तुमने हमें खुद को मज़बूत बनने के लिए कहा था. तब्ब से hi हम दोनों बहने hi खुद को बदल रही हाँ. पारर विजय ये सबब इतनी जल्दी तो होने से रहा. वो पूरा एक गैंग है, और दीदी के लिए खतरा बहुत बढ़ जाएगा, प्लीज तुम करो. वर्ण मेरी didiiiiiiiiiiii..

पूजा दीदी:- अभी तुम्हारी बहन कहा है.

अनुष्का:- हमने बड़ी मुश्किल से रात भर से hi दीदी को एक रूम में बंद करके रखा हुआ है. वर्ण वो सबब के सामने hi पता नहीं क्या कुछ क्र जाती..

विजय:- तो तुमने मुझे रात को hi क्यों नहीं बताया..

अनुष्का:- कैसे बताती, किसी को कुछ होश hi कहा था, सबब hi तो ग़म में डूबी हुई थीं, सबब hi डर गई थीं. और फिर दीदी को भी संभालना था, सूबा तुम्हारा याद आया तो तुम्हारा फोन नहीं लगा तो पूजा दीदी को कॉल लगा दी.

पूजा दीदी:- अनुष्का तुम दूर के पास जा के अपनी दीदी से कह दो क विज्जू आ रहा है, जो भी वो करना चाहती है, वो विज्जू के साथ मिल कर कर सकती है. बास विज्जू के पोहचने तक्क शांत रहे...

अनुष्का:- ठीक है दीदी, विजय प्लीज तुम जल्दी पोहंच जाना..

विजय:- ठीक है अनुष्का मई जल्दी hi आता हों


कॉल एंडेड

***********




हम तीनो की hi ऑंखें खून अगुअलने लगी थें. फिरसे पावर का इस्तेमाल करके मासूम लड़कियों की इज़्ज़त को तार तार कर दिया गया था..

पूजा दीदी:- विजजूउ किसी को मैट छोड़ना.. दिल्ली के हरामी गैंग्स को तो तुमने ख़तम करना hi है. तो एक एक को चुन चुन कर मारना, और तड़पा तड़पा कर मारना. पारर कुत्तों को जल्दी मौत मैट आने देना..

रानी:- हाँ विजजूउ किसी को भी आसान मौत मैट देना. देखा नहीं था विज्जू, अनुष्का और उसकी बहन कितनी मासूम हाँ, उनके लिए फिरसे खतरा बढ़ गया है.

कितनी दूर से लड़कियां खुद की लाइफ को बनाने के लिए यहाँ आती है, और यहाँ के पावरफुल भेड़िये उनको बर्बाद कर देते हाँ, उनके देखे खवाब चकनाचूर कर देते हाँ. विज्जउ जब्ब खवाब toot'te हाँ तो बड़ा दर्द होता है. एक खुशहाल ज़िन्दगी ख़तम हो कर दुःख में बदल जाए तो कितनी पीडन होती हाँ, विज्जू तुमने भी ये सबब अपनी लाइफ में देखा hi है, तुम्हारे जैसे दर्द से वो दोनों लड़कियां भी गुज़र रही होंगी. उनके माँ बाप कैसे इस सबब को झेल रहे होंगे.

मेरी माँ भी कई बार ऐसे hi भेड़ियों के चुगल में फास्ट फास्ट बची है, माँ को तुमने बचा लिया विज्जू. पारर आज दो और मासूम लडकियां लूट गई हाँ. उन्हें कौन उनकी इज़्ज़त वापिस लौटाएगा ...

मैंने और पूजा दीदी ने रानी को गले से लगा लिया. रानी अपनी ज़िन्दगी के दुखों को याद करने लगी, ऐसे hi तो रानी की माँ भी बर्बाद होते होते बची थी. कितनी hi बार पद्मा आंटी ने खुद को बचते हुए कहाँ कहाँ की ख़ाक नै छनि थी.





************************************************************************************




जैसा गैंगरेप इन दोनों लड़कियों का हुआ था, मीडिया को भी ढेर सारा पैसा मिल मिल गया था, जिस वजा से इस मुद्दे को दबा दिया गया था. कुछ बड़े लोगों ने इस मुद्दे को उछलने चाहा तो उन्हें भी इस मटर से दूर रहने को बोल दिया गया.

कम कुछ कर पाने की हालत में नहीं रहे थे. एक तो बात दिल्ली के एक बड़े गैंग की थी, और दूसरा एक मला और कई बड़े बड़े बिजनेसमैन इस गैंग से कनेक्टेड थे.

कम एक्शन लेते तो कुछ हो भी सकता था, पर दो लड़कियों को इन्साफ दिलाने के लिए कई और लड़कियों को बलि पर चढ़ना पड़ता ...

ऐसी hi धमकी कम को मिली थी, और कम इस धमकी से ग़ुस्से में आ गया था, पारर वो कोई भी फैसला जल्दबाज़ी में नै लेने चाहता था.

पूरा गैंग hi अपने गैंग लीडर के भाई को बचने के लिए पुरे सिटी में अफरा तफरी मचा देने की धमकी देने लगा था. और ये धमकी कम को सिर्फ गैंग्स के लुच्चे hi नहीं दे रहे थे. दिल्ली शहर के कई बड़े बड़े बुसिनेस्स्में भी अलोक नाथ के भाई सिद्धार्त नाथ की सपोर्ट में खड़े हो गए थे.. वो भी कम को इस मटर से दूर रहने को बोल रहे थे...

कम ग़ुस्से से भरा हुआ इधर उधर टहल रहा था.

कम से कुछ hi फालसे पारर कमिश्नर और ins-ranjit बैठे हुए थे...

कम:- कमिश्नर तुमने बिलकुल सही कहा, अब्ब इस सिटी से गंदगी को ख़तम करने के लिए पैलेस जैसा hi कुछ करना पड़ेगा... मुझे तुम्हारी टीम की क़ाबलियत पर कोई शक नहीं है... जिस तरह की सिचुएशन पुरे सिटी की बना दी गई है. कुत्तों ने पुरे सिटी को hi गन्दा कर दिया हिअ. मासूम बढियों को बर्बाद करने पर उतर आये हाँ.. और मुझे मुझे धमकी दी जा रही है क मैं इस मटर से दूर रहूं वर्ण शेर्हर में और भी कई मासूम मारे जायेंगे, कई लडकियां बर्बाद कर दी जाएँगी...

कमिश्नर तुम्हे मेरी तरफ से पूरी छूट है, कुछ भी करो लेकिन मुझे अब्ब अपने शहर में गंदगी नहीं देखनी है. बोहत राज कर लिए इन गैंग्स वळून ने.

बोहत गंध पहला लिया इन हरामी लोगों ने..

अब्ब इनको ख़तम करना होगा... तुम अभी से hi काम पर लग जाओ. रंजीत तुम भी कमिश्नर के साथ सबब देखो, तुम्हारे जैसे ऑफिसर्स के होते हुए मुझे ज़यादा परेशानी नै है.. ी ऍम सो प्राउड ऑफ़ यू मर रंजीत. तुम्हारी आज तक्क की समाज सेवा काबिल इ तारीफ है. और अब्ब खुद पर मेरा गर्व और भी बढ़ा दो. मुझे तब hi शान्ति मिलेगी, जब्ब उन बच्चियों को इन्साफ मिलेगा. उनको बर्बाद करने वळून को भी बर्बाद कार्डो..




***********************************************************************************




मैं फेस चेंज करके हॉस्टल पोहंचा और सीधा hi अनुष्का के पास जा पोहंचा. अनुष्का मुझे मेरी आँखों से पहचान गई, मेरा नाम उसने नहीं लिया, और न hi अपनी बहन को मेरा नाम बताया था, बास उस रात के काण्ड का हवाला दिया था, जब मैंने उन्हें बचाया था, मेरा सबके सामने आना सही नहीं था.

अनुष्का मुझे अपनी बहन अनन्य के रूम में ले गई. अनन्य ने अनुष्का के साथ मुझे देखा, एक बार तो मुझे पहचान नहीं पाई, पर फिर वो भी जल्दी hi मुझे पहचानने में सफल हो गई. वो अपनी जगा से उठी और आ क्र मेरे हाथो को पकड़ लिया.

अनन्य:- देखा विजय, कितनी बेरहमी से दो लड़कियों का रपे क्र दिया गया. विजय मैं उनके खिलाफ कोर्ट में जाने वाली हूँ, पर मुझे कोई जाने नहीं दे रहा, मैं ऐसे hi तो तो चुप बैठने वाली नहीं हों. मर्द जाट ने हम लड़कियों को समझ क्या रखा है. पावर है तो क्या किसी को भी बर्बाद करदेंगे. किसी की भी इज़्ज़त उतार देंगे. नहीं विजय मैं पीछे नहीं हटने वाली. मैं लड़ेंगी ऐसे कुत्ते लोगों से, मैं सामना करुँगी हर किसम के हालत का,

मैं दिखा दूंगी इन सबब को नारी की पावर क्या होती है...

अनुष्का ने अपनी बहन का कन्धा पर हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगी..

हम दोनों hi एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे..

विजय:- अनन्य मुझपर भरोसा है ना.

अनन्य;- खुदसे भी ज़यादा, मेरे अंदर की पावर को भी तो तुमने hi जगाया है विजय.

विजय:- तो फिर तुम क्या चाहती हो, उन्हें कोर्ट से सजा दिलवा क्र 2-4 साल के लिए जेल में भेज दिया जाए, वो फिर से बहार आएं और आ क्र फिरसे किसी का रपे करदें..

अनन्य:- नहीं मैंने ये कब्ब कहा.

विजय:- तो फिर उन्हें कोर्ट से सजा दिलवाने से कुछ हासिल नहीं होने वाला. ऐसे लोगों को मैं कुत्ते की मौत मारूंगा. तुम खुद को शांत रखो, और मुझे इस सबब मटर को हैंडल करने दो. तुम खुद में चेंज लाती रहो, आगे चल के ये बलदाऊ तुम्हारे बोहत काम आएगा.

अनन्य मेरी बात सुन कर मेरी आँखों में घोरसे देखने लगी... कुछ देर देखती रही.

अनन्य:- विजय तुमने सही कहा क उन्हें कोर्ट में नहीं जाना चाहिए, ज़िन्दगी बर्बाद होना, और किसी लड़की की िज़ात को उतार देने की सजा 2-4 साल की हो नहीं बनती. उन्हें तो मौत hi मिलनी चाहिए. ठीक है, मैं शांत रहूंगी, अब्ब तुम hi इस सबब को खुद क अंडर में ले लो. तुम जो बी करोगे, वो सही hi होगा, इतना तो मुझे तुमपे विश्वास है...

कुछ देर और मैं दोनों को शांत करता रहा, जब्ब सबब ठीक हो गया तो मैंने पापा को फोन कर दिया. पापा ने मुझे एक जगा आने का बोल दिया. और मैं अनुष्का और अनन्य को bye बोल कर पापा के बताये हुए एड्रेस पर जाने लगा..




************************************************************************************




शहर में hi एक कोठी के एक रूम में मैं, पापा और कमिश्नर बैठे हुए थे.

और हम तीनो hi दोनों लड़कियों को hi ले के बातें क्र रहे थे. हम तीनो की hi आँखों में ग़ुस्सा था.

पापा ने मुझे कम साब की बातें भी बता दी थीं. और क्या करने के लिए कम ने बोलै है वो भी बता दिया.

विजय:- पापा वो तो मैं करने hi वाला था, और मैंने कल से hi अपना काम भी शुरू कर दिया है. गैंग्स को ख़तम किया तो और गैंग्स बन्न जायेगी. हम एक को मारेंगे तो इस शहर पारर अपना साम्राज्य खड़ा करने के लिए और कई लोग दिल्ली सेहर में दाखिल होने लगेंगे. वो आते जायेंगे और हम उन्हें मारते जायेंगे.

कम:- विजय तुम कहना क्या चाहते हो, खुल कर कहो..

विजय:- सर मैं ये कहना चाहता हूँ क पुलिस का डिपार्टमेंट ऐसे hi कामों के लिए बना है, ऐसे hi लोगों को शेरोन में घुसने से रोकने के लिए बना है, ऐसे hi लोगों को उनके मंसूबों में सफल होने रोकने के लिए बना है.

पारर उसे उसका काम करने नहीं दिया जाता. पुलिस का काम है शहरियों की जान ो माल की हिफाज़त करना और शान्ति बनाये रखना. पुलिस को उनका सही काम करने नहीं दिया जाता.

कई ऐसे लोग खुद पैसा कमाने के लिए पुलिस फाॅर्स ज्वाइन करते हाँ. और हमारे लिए किसी भी गैंग को हमेशा के लिए ख़तम करना मुमकिन नहीं है. पुरे शहर में शान्ति बनाने के लिए हमें खुद का एक गैंग बनाना पड़ेगा जो किसी और गैंग को इस शहर में घुसने न दे..

पापा:- विजय बीटा इसमें तो बोहत समय लग जायेगा.. गैंग को खड़ा करने में सालों लग जाते हाँ...

विजय:- पापा मैंने कुछ हट के सोचा है, मेरा सोचा हुआ है तो बोहत गलत, पारर करने के लिए बोहत hi सही है. अगर जैसा मैं सोच रहा हों. वैसा हुआ तो सबब प्रोब्लेम्स hi सोल्वे हो जाएँगी.

papa,comm:- क्या मतलब, ऐसा क्या है तुम्हारे मैं में...

विजय:- हमारे hi देश में और हमारे hi इस दिल्ली शहर में कई ऐसे लोग हाँ, जो बेगुनाह जेलों में उम्र कैद की सजा काट रहे हाँ.

कम:- हाँ तो इस बात से तुम्हारी गैंग का क्या कनेक्शन है.?

पापा:- मैं विजय बीटा की बात कुछ कुछ समझ रहा हों.

विजय;- पापा अगर आप समझ रहे हाँ तो फिर आप hi बताएं, उन लोगों को अगर ज़िन्दगी मिले और जीने का मक़सद भी, तो क्या वो हमारा साथ नहीं देंगे. वो भी तो ज़माने के सताए हुए हाँ. और फिर उनके अंदर की आग मुझे मेरा गैंग खड़ा करने में बड़ी मदद देगी.. और यहाँ ऐसे hi तो मैं लोगों को अपने गैंग में शामिल नहीं कर सकता. आगे चल कर कितने मुझसे ग़द्दारी कर्नेगे मैं नहीं जानता. लेकिन जेल से निकाले गए कैदी जो जबरन कैद किये गए हाँ. वो मेरा पूरा साथ देंगे. उनके परिवारों को भी सुरक्षित किया जाएगा. जिससे वो और भी खुश होंगे. और हमारे एहसान मंद भी हो जायेंगे.

और कई कैदी ऐसे भी होंगे जो पैसो के मुआमले में स्ट्रांग होंगे, उनके घर वाले पैसो के चलते टॉस स्ट्रांग honge.par दुश्मनी में वो फस गए होंगे.

ऐसे लोगों की भी एक पावर होगी, कई अमीर लोग किसी की साज़िश के चलते जेल भी जा फंसे होंगे, ऐसे लोग मुझे मेरे गैंग में चाहिए, सिर्फ लड़ने वाले hi नहीं, मुझे सोसाइटी में खुद की पावर को बनाये रखने के लिए कभी न टूटने वाली गैंग बनानी hai,aur मुझे हर किसम क लोगों की ज़रूरत पड़ने वाली है, आप तो सबके बारे में जानते hi होंगे, कौन किस करैक्टर का है. पापा अभी से hi ऐसे सारे कैदियों की डिटेल इकठा करें और मुझे दें. अगर आप की नज़र में और भी ऐसे hi करैक्टर के लोग हाँ तू मुझे बताएं. एक मिलेगा तो उससे किसी और का पता चलेगा, ऐसे hi करके मैं एक एक को चुन चुन कर अपनी गैंग में शामिल करना चाहता हूँ.

पापा और कमिश्नर मेरी बात सुनकर सन्नाटे में आ गए थे.. वो ऑंखें फाड़े मुझे देख रहे थे. फिर दोनों hi अचानक से खड़े हो गए. मैं भी उन्हें खड़े होते देख कर खड़ा हो गया.

पापा और कमिश्नर मुझे गले लगा कर अपनी ख़ुशी का इज़हार करने लगे..

पापा:- ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू माय सोन.. तुमने ये सबब सोच कर मेरा सर्र फखर से ऊंचा कर दिया है.

कम:- विजय बीटा मैं भी तुम्हारी इस बात से बोहत खुश हों. एक बार तो पुरे सिटी में hi तहलका मच जायेगा, सिटी क्या पुरे देश में हे क़यामत आ जायेगी.

जब्ब बहुत सारे कैदियों को जेल से निकला जायेगा. पुरे hi पुलिस डिपार्टमेंट की दौड़ें लग जाएंगी. पुरे hi पुलिस डिपार्टमेंट की मिटटी पलीद होगी. पारर मुझे इससे कोई फर्क नहीं परता. कइयों की ज़िन्दगी बनाने के लिए ऐसा करना गलत भी नहीं है. पहले भी तो कई कैदी जेल से भाग चुके हाँ. पहले भी तो पुलिस की जग हंसाई होती hi रही है. पहले भी पुलिस डिपार्टमेंट की कारकर्दगी पर सवालिया निशान बनता रहा है. एक बार और सही.

कई पुलिस वळून की नौकरियां भी जाएंगी.

जाने दो, अगर इससे पुरे शहर की गंदगी साफ़ होती है, तो कुछ लोगों को अगर परेशानी होती है तो होने दो.

पापा:- विजय बीटा ये सबब तुम करोगे कैसे. ये सबब करना इतना आसान भी नहीं है.

विजय:- नहीं पापा काम मुश्किल ज़रूर होता है, नामुमकिन नहीं. और जब्ब बात किसी के फ्यूचर को ले करके हो, किसी बेगुनाह की ज़िन्दगी की हो, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं रहता.. अब बास मुझे सबब डिटेल दे दें, और मुझे बेहोश करने वाली बुलेट्स की ज़रूरत होगी. मच स्मोक बम भी चाहिए होंगे मुझे. जिसके धुवें से जेल के सारे hi कैदी बेहोश हो जाएँ. अगर कोई उस स्मोक से बेहोश होने से बच जाए तो हम उसे बुलेट्स मार कर बेहोश कर देंगे..

पापा:- काम बहुत बड़ा है. एक बार तो पुरे देश की मीडिया hi तूफ़ान खड़े कर देगी. रॉ भी इस सबब में इन्वॉल्व हो जायेगी. इंटेलगेने डिपार्टमेंट भी पुरे दिल्ली को अपने अंडर में ले लेगा... जब तक वो इस सारे काण्ड के सुराग़ न ढूंढ लें वो दिल्ली से जाएंगे नहीं.

विजय:- उसके लिए भी एक प्लान है मेरे पास.

कम:- वो क्या.??

विजय:- हम जेल से खूंखार कैदी भी निकाल लेंगे और उन्हें यहाँ से दूर किसी सिटी के पास जंगल में छोड़ देंगे. और फिर कुछ hi देर में उनके बारे इन्फो लीक कर देंगे. जिस से सबब hi उनके पीछे पद जायेंगे. कोई समझ hi नहीं पायेगा क कुछ कैदी अभी भी दिल्ली में हाँ.

पापा:- विजय बीटा सबब को रखोगे कहाँ.

विजय:- फार्महाउस में पापा. वहां मैंने कुछ चेंजिंग भी करवानी शुरू कर दी है. बास आप किसी प्लास्टिक सर्जरी के माहिर डॉक्टर्स की एक टीम का इंतेज़ाम कर लें. उन सभी कैदियों का फेस चेंज किया जाएगा. उसके बाद उनके लिए ईद कार्ड बनाना भी मुश्किल नहीं रहेगा. इस तरह से वो सबब hi एक आज़ाद लाइफ जी सकेंगे.

कम:- विजय बीटा, समझ लो ये सबब काम हो गया. अब्ब इस अलोक नाथ गैंग का कुछ करो, कम साब बहुत ज़यादा परेशां हाँ..

विजय;- सर आपके पास जितनी इन्फो है वो आप पापा को दे दें. मैं आज से hi उस गैंग को ख़तम करने के मिशन पर निकलता हों... मुझे अलोक के भाई सिद्धार्थ की लोकेशन भी चाहिए होगी, आप तो जानते hi होंगे. वो और उसका भाई कहाँ रहते हाँ, और कहाँ कहाँ उनके सीक्रेट बेस हाँ.

कम:- हाँ ज़यादा डिटेल को मुझे मालूम है, और अगर कुछ अधूरा है तो मैं अपने आदमियों से कह कर सबब hi इन्फो कलेक्ट करता हों और रंजीत को दे देता हों..




************************************************************************************
 
xf192.png


अडुल्टेरी - Laa-Waaris .... एडल्ट + एक्शन +थ्रिल (कम्प्लेटेड)

HIMMAT-WALA Part 2 स्टार्ट कर दिए गया है..

favicon.ico


xforum.live
 
Back
Top