Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 12 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स..!!

दन्न के लिए महक और विजय का तांडव भी शुरू होगा.... लेकिन उससे पहले विजय का अपनी माँ और बहनो को बचा कर सबब छूट वालियों से एक मिशन रखा गया है..

जब्ब पूरा और रानी को लगेगा क विज्जु ने सबब की खोल ली है.. तो उसे आगे जाने दिया जायेगे.. वर्ण विज्जु के जाने के बाद सबब hi अपनी छूट में ऊँगली की स्पीड बढ़ा डेंगी..
 
थैंक्स..!!

विजय के लिए फार्महाउस का हमला गायदेमन्द रहा.. आने वाले वक़्त के लिए विजय एंड पार्टी को बोहत सी सहूलतें भी मिल जाएँगी.. महक के पास सबर ाकरने के शिव है hi क्या..

अब्ब महक के लिए विजय और उसका लुंड hi महक को ठंडा कर सकते हैं... और महक और विजय मेहक्क़े घरवालों के साथ क्या ाकरते हैं. वो भी पता चल hi जायेगा...

अक्सर ऐसा होता है.. जैसा सोचा जाता है.. वैसा कर पाना मुमकिन नहीं रहता.. और हालत बदल कर इक नया hi रंग ले लेते हैं.. दन्न के घर की औरतों के लिए विजय क्या सोचेगा...

और विजय की माँ श्वेता भी तो वापिस आएगी.. वो भी वजिजय को कोई नयी hi बात बता सकती है.. विजय के लिए पहले से hi कुछ सोच लेना काफी नहीं है.. विजय अकेला hi हर फैसला नहीं ले सकता .. पूजा का फैसला अलग है.. तो श्वेता और प्रिय .. जहान्वी.. षुरूति का फैसला भी कोई अहमियत रखता है.. और वक़्त बताएगा.. क दन्न और उसकी औरतों के साथ क्या सलूक किया जाए..
 
अपडेट ::: 57

*************



कहने को hi ये शंकर का बेस था.

***********************************




लेकिन देख कर hi लगता था. जैसे ये एक पैलेस हो.

साले ने बोहत hi बढ़िया से इस पैलेस को मेन्टेन कर रखा था.. आस पास थोड़े hi फासले पर कई कोठियां थीं. और ये एक व्विप एरिया था. यहाँ जुंग वगैरा का कोई रिस्क नहीं लिया जा सकता था.. आस पास वाले शंकर के बारे सबब hi जानते तेह. लेकिन कोई भी शंकर से उलझने की हमाक़त नहीं कर सकता था...

थे तो आस पास वाले सबब hi अमीर लोग. लेकिन शंकर जैसे गैंगस्टर से किसी ने उलझ कर खुद का hi उनकसान करना था.

अमीर थे तो इसका मतलब ये नहीं था क वो भी शंकर के जैसे मार धाड़ करते फिरें.

शंकर को इस एरिया का बोहत hi बड़ा बेनिफिट था. बहार से आ कर कोई भी आसानी से शंकर के पैलेस नुमा बेस पर हालमा नहीं कर सकता था.. शंकर ने सच में hi ये पैलेस जैसा बेस बना कर कमाल कर दिया था.....

कमाल इस लिए क मुझे ये पैलेस बोहत hi ज़यादा पसंद आ गया था.. अब्ब ये मेरा होने वाला था. और यहाँ रह के मैं और मेरी फॅमिली बोहत hi ज़यादा सुरक्षित हो सकती थीं.. ये इतना बड़ा था. क अंदर रह रहे मेरे घर वालों को बहार जाने की ज़रुरत hi नहीं थी...

और वैसे भी जब माँ और बहने यहाँ आ जाएँगी .. तो दन्न के खात्मे तक मैं किसी को भी बहार जाने नहीं दूंगा....

शंकर का ये पैलेस 4 एकर के एरिया पर पहला हुआ था..

और पूरे पैलेस के ird-gird 15 फ़ीट ऊंची देवर थी.

और पैलेस भी 4 मंज़िला था .....

साले शंकर ने ये बेस नहीं बनाया था.. देखने से लगता था.. जैसे कोई व्विप होटल नुमा पैलेस हो.. और यहाँ पर गुंडे नहीं.. बल्कि दूर दूर से रहने के लिए टूरिस्ट आते हैं यहाँ पारर ....

ऐसे पैलेस में शंकर को मारना मुमकिन नहीं था..

लेकिन मेरी लाइफ में na-mumkin जैसा कुछ भी नहीं था.. मुझे हर वो काम करना था. जो आगे चल के मुझे किसी भी तरह से मेरी फॅमिली को बचाने के काबिल बना सके.....

ट्रेनिंग तो मैं ले hi चूका tha..parr ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल में बड़ा फ़र्क़ था..

अब्ब तक्क शंकर पर 2 अटैक हम कर चुके थे... पहले मिशन हमें प्लेट में रखा हुआ मिला था. तो दूसरा मुश्किल भी था. लेकिन फिर भी फार्महाउस पर हमें इतनी दिक्कत नहीं हुई थी.... जितनी यहाँ होने वाली थी..

मैं पैलेस को कुछ फासले पर खड़ा हो कर देख रहा था.. और अब्ब मुझे समझ आ रही थी. क शंकर अभी सिर्फ 20% hi ख़तम हुआ है..

जबकि मैं समझ रहा तह. क शंकर के एक बेस और उसके कई गुंडों को मार के मैंने शंकर को 60% ख़तम कर दिया है.. लेकिन ऐसा नहीं था...

शंकर अभी भी बोहत कुछ था...

सही िद्या न होने की बिना पर मैं नहीं बता सकता था क अंदर कितने गुंडे होंगे.

मैं घूम कर पूरे पैलेस को देखने लगा. अंदर कैसे जाया जा सकता है...

15 फ़ीट ऊंची दीवार और यहाँ पर hi-tech सिक्योरिटी भी ज़रूर होगी.

और आज फार्महाउस के हमले को लेके शंकर ने कुछ भी नहीं किया था ...

ज़रूरी नहीं था क मैं शंकर को उसके इसी बेस पर hi मार सकूँ..

या उसके इस बेस को तबाह कर सकूँ .....

शंकर यहाँ बोहत hi ज़यादा स्टोरंग था.

पारर टाइम की कमी की वजा से मैंने शंकर का "kaam-tamaam" फ़ौरन hi करने का मैं बना लिया था.

अब्ब मेरे लिए ज़रूरी था.. पैलेस की सिक्योरिटी से बचते हुए अंदर जाना.

और मैं अंदर घुसने के लिए कोई पर्फेक्ट जगा देख रहा था.... जहा मैं आसानी से अंदर जा सकूँ.

लेकिन मुझे कुछ भी ऐसा नहीं दिख रहा था..... मैंने आस पास की बुलिडिंग्स पर नज़र दौड़ाई तो शंकर पैलेस से सब hi कुछ फैसले पर थीं. किसी भी कोठी से हो कर मैं शंकर पैलेस में नहीं घुस सकता था...

मैंने एक बार शंकर पैलेस के चरों पोरशंस पर नज़र डाली. और देखने लगा क वहां क्या सिक्योरिटी है.. लेकिन वहां बड़ी बड़ी लाइट्स की वजा से मुझे कुछ भी सही से नहीं दिखा... मतलब मैं यहाँ ऐसे hi नहीं घुस सकता था...

मैं पैलेस के पीछे कुछ फासले पर बैठ गया... और सोचने लगा क मैं अंदर कैसे जा सकता हूँ.

राजा की आवाज़ सुनाई दी...

राजा:- विजय कहाँ पोहंचे...

विजय:- राजा अभी मुझे कोई जगा भी अंदर जाने को नहीं दिख रही....

उदय:- तो फिर वापिस आ जाओ.. कुछ और प्लान करते हैं....

विजय:- नहीं मैं अभी यहीं रह क्र देखता हूँ. कोई न कोई रास्ता ज़रूर होगा.

और मई उसी रास्ता से अंदर घुसने की कोशिश करूँगा.. और जब तक मैं न कहूं कोई भी मेरे पीछे न आये.. ये फार्महाउस के जैसा मिशन नहीं है..

राजा:- लेकिन विजय.. तुम वापिस क्यों नहीं आ जाते.. हम सबब कोठी पर चल कर कोई अच्छा सा प्लान बनाते हैं..

जीतू:- हाँ विजय कोई अच्छा सा प्लान बना आकर सबब मिल कर अंदर घुसेंगे.

विजय:- मैं अभी अंदर नहीं जा रहा. अभी बास मैं देख रहा हूँ. और अगर कुछ न हो सका तो फिर वापिस तो आना hi है....

मैं अभी अपने दोस्तों से बात कर hi रहा था. क पैलेस की पीछे वाली दीवार से कुछ आवाज़ सी आने लगी.

विजय:- अभी सब एकदुम्म चुप राहु.. मुझे यहाँ ध्यान देना है.

सबब चुप हो गए.....

पैलेस के पीछे 5 एकर पर पहला हुआ एक ग्राउंड था. और पैलेस की बिल्डिंग के ऊपर लगी हुई बड़ी बड़ी लाइट्स की रौशनी कुछ कुछ उस ग्राउंड में भी आ रही थी.

मैं देखने लगा क आवाज़ किस तरफ से आ रही है.. मैंने सामने दीवार की hi तरफ देखा...

ohhhhhhhhhhhhhh.. यहाँ ऐसा भी कुछ हो सकता है.. मैंने सोचा नहीं था.

दीवार अपनी जगा से हट रही थी. और फिर कुछ hi देर में वहां एक रास्ता बन गया.

उस रास्ते से एक जीप बहार निकली और उसमे कुछ गुंडे बैठे हुए कहीं जा रहे थे.

साला शंकर भी ये क्या कर रहा है.. अगर उसके गुंडों ने जाना hi है. तो सीधे मैं गेट से क्यों नहीं निकले. ये क्या लोचा है.. मुझे कुछ समझ नहीं आई.

विजय:- राजा यहाँ दीवार के पास एक दरवाज़ा है.. और दीवार के हटने से वो ओपन होता है.. इतना बड़ा है क एक जीप तक उसमे से निकल सकती है.

राजा:- ये तो अच्छी बात hai.aur हमारे लिए अंदर जाने का वो सही रास्ता भी है.

उदय:- लगता है काम बन्न गया है... तो फिर विजय अब्ब तुम क्या कहते हो.

नहीं वो जीप के निकलते hi फिरसे बंद हो गया था. और अभी हम कोई भी डिसिशन

नहीं ले सकते.. अंदर की सिक्योरिटी काया है. हम नहीं जानते...

अभी हम बातें hi कर रहे थे. क

वो जीप अचानक से राजा उदय और जीतू के पास पोहंची और जीप में मौजूद सभी गुंडे अपनी गन्स को टीनू की तरफ सीधा करते हुए बहार निकल पड़े.

किसी को भी कुछ समझने का मौका नहीं मिला...

उदय:- कौन हो तुम और ये सबब क्या है..

एक गुंडा चलता हुआ आया और अपनी राइफल का दस्ता घुमा कर उदय के मोहन पर मार दिया. उदय के मोहन से खून निकलने लगा. उसके होंठ फहत गए थे..

राजा और जीतू कुछ करते क us'se पहले hi ...

वही गुंडा:- न न यहाँ हमारे hi एरिया में आ कर तुम हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकते. यहाँ तुम्हारे गन को सीधा करने से पहले hi तुम्हारे जिस्म को गोलियों से भून दिया जाएगा.....

सब इतना अचानक से हुआ था. किसी को कुछ करने का मौका hi नहीं मिला.

विजय:- (मैं धीरे से बोलै) फ़िलहाल कोई कुछ न करे.

और वैसे भी कोई कुछ कर भी नहीं एकता था.. यहाँ किसी का कुछ भी करना सब के लिए hi मौत था. और फिर ये तो शंकर का एरिया था.........

अब्ब मैं समझा क साला ये दीवार के पीछे से गाडी क्यों निकली है.

main-gate से अगर वो निकलते तो तीनो को hi नज़र आ जाते. लेकिन शंकर ने दमाग लड़ाया था. पता नहीं वो कब्ब से हम पर नज़र रखे रहा था....

जीप पर आने वाले गुंडों ने तीनो को hi मार मार कर adh-mara कर दिया था. उदय की hi तरह से तीनो भी खून में रंगने लगे थे.. और मैं यहाँ रह कर उनके लिए कुछ भी नहीं कर सकता था.. ...

आज सही से फंसे थे हम सबब. मैं अकेला फांसू या सबब hi बात एक hi थी.

उनकी बातों से कही से भी ऐसा नहीं लग रहा था क वो तीनो के इलावा मुझे भी ढून्ढ रहे हैं... मतलब क मैं जल्द hi तीनो के पास से अलग हो गया था. और यही बात मेरे लिए सही भी रही थी. अब्ब मैं अपने दोस्तों के लिए कुछ कर सकता था......

तीनो को hi अछि खासी मार पद चुकी थी. और तीनो hi खून में नाहा गए थे.

एक गुंडा:- उठाओ इनको और डालो जीप के andar.boss हमारा वेट कर रहे होंगे..

फिर सबने hi तीनो को उठाया और जीप में दाल क्र इस बार मैं गेट से पैलेस के अंदर जाने लगे..... और ये एक बोहत hi बड़ी गलत बात थी ....

अब्ब मेरे लिए अंदर जाना एक मसला था. फिर दूसरा सबसे बड़ा मसला अंदर अपने दोस्तों को ढूंढ़ना और फिर उन तीनो को hi बचाना....

अब्ब टाइम नहीं था मेरे पास सोचने के लिए. जो भी करना था वो फूरी hi करना था...

मैं ऊपर की लाइट्स से बचता हुआ दीवार के पास पोहंचा और उसी जगा खड़ा हो गया. जहाँ से जीप के लिए रास्ता बना था. मैं देखने लगा क बहार से भी रास्ता खोलने का कोई सिस्टम है या सिर्फ अंदर से hi खुलता है...

मुझे जैसी ट्रेनिंग दी गई थी. उस हिसाब से बहार से भी दूर को ओपन करने का कोई न कोई सलूशन ज़रूर होना चाहिए था. वर्ण एमेरगनेकी में शनकर और उसके गुंडे अंदर कैसे जाते...

मैं दीवार पर अपने दोनों हाथों को चलने लगा. साथ साथ मैं आस पास भी देख रहा था .. ये शंकर का पैलेस था और यहाँ उसकी सिक्योरिटी इतनी भी कम् नहीं थी. यहाँ अगर मेरे तीनो hi दोस्त फँस गए थे. तो मैं भी शंकर के हाथों लग सकता था. और ये होना सही नहीं था.

मैं दीवार पर हाथ चलता हुआ नीचे झुका और दीवार को टटोलने लगा.

लेकिन मुझे कहीं भी कुछ भी अजीब नहीं लगा..

फिर मैंने खड़ा हो कर अपने हाथों को ऊपर करके दीवार पर चलता लगा..

ऊपर मेरे राइट हैंड में मुझे कुछ बहार को उभरा हुआ महसूस हुआ.. तो मुझे लगा क यही वो चीज़ होगी जिसे दबाने से दीवार अपनी जगा से हटने लगेगी...

पहले मैंने अपने पास मौजूद सबब hi वेपन्स को चेक किया.. सबब hi था मेरे पास और फिर ऊपर वाले का नाम ले कर मैंने उसी जगा पर अपने हाथ का दबाओ बढ़ा दिया और दीवार कुछ आवाज़ करती हुई साइड में हटने लगी.

मैंने साइड हो के अपने सीलेंसर लगे हुए पिस्तौल को अपने हाथ में लिया और अंदर से गड़बड़ होने की सूरत में खुद को तैयार कर लिया....

कुछ hi देर में दीवार हटी और मैंने थोड़ा सा अपना सर अंदर घुसा कर तेज़ी से पीछे भी कर लिया. लेकिन इतनी hi देर में मैंने अंदर का सबब देख लिया था. और अंदर दूर तक एक सूरज जाती हुई मुझे नज़र आई थी. वहां कोई भी नहीं था.

मैं अंदर दाखिल हुआ और फिर दीवार को बंद करने के लिए वैसा hi कुछ देखने लगा. जैस बहार था.

अब मुझे अंदर से ज़यादा परेशानी नहीं हुई. वहां एक हुक लगी हुई थी. मैंने उसे खेंचा तो दीवार अपनी जगा पर वापिस आ गई........

सुरंग के अंदर 20 20 फ़ीट के फासले पर लाइट्स लगी हुई थी. और मैं अपने हाथ में गन लिए हुए आएगी बढ़ने लगा.

150 फ़ीट के फासले पर मुझे दो रास्ते दिखे. और मैं सोचने लगा क पहले किस रास्ता पर जाऊं.

जाना तो दोनों साइड hi था. इसलिए ज़यादा न सोचते हुए मैंने एक रास्ते का इंतेखाब किया और उस तरफ आगे बढ़ने लगा....

50 फ़ीट आगे जाने के बाद मुझे एक कनाल के बराबर एक हाल दिखा और उस हाल के साइड में रूम्स के दूर मुझे दिख रहे थे.

साले इतना कुछ बना लिया था. शंकर ने और मैं ऐसे hi शंकर को तबाह करने की फ़िराक में था.... शंकर एक बड़ा समुगलेर था. और उसने अपने लिए एक व्विप पैलेस भी बनाया हुआ था... शंकर कोई आसान शिकार नहीं था .... शंकर एक बड़ा हठी था ...

शंकर की दहशत तो थी hi दिल्ली में.. लेकिन वो अपने hi पैलेस में इतना स्टोरंग हो सकता है.. ये तो हर्ष चौहान और ins-ranjeet भी नहीं जानते थे....

शंकर का महल hi शंकर के लिए एक सुरखा गृह था. अगर शंकर यहाँ से बहार न निकले तो शंकर को maarna..mujh समेत किसी के लिए भी आसान नहीं था..

मैंने इन रूम्स में मौजूद किसी को भी डिस्टर्ब करना सही नहीं समझा और वापिस दुसरे रास्ते की खोज में निकलने का सोचा ......

दुसरे रास्ते पर चलता हुआ जब मैं आगे पोहंचा तो वहां भी एक बड़ा सा हाल था लेकिन यहाँ रूम के दूर काम थे और हाल में शंकर का माल पेटियों में बंद पड़ा हुआ था. उन पेटियों में क्या होगा.. ये सोचने का टाइम नहीं था मेरे पास.

मैं पेटियों क आड़ लेते हुआ आगे बढ़ने लगा..

इस हाल के आस पास 4 दूर थे और सभी दूर को देख कर लगता था क यहाँ सबब hi रूम्स बड़े बड़े हैं... मैं सोचने लगा क मुझे किसी दूर को खोल कर देखना चाहिए.. या नहीं.

लेकिन टाइम कम् था और फैसला फूरी करना था. दो मिंट मैं खड़े रह क्र पहले किसी के आने का वेट करने लगा. लेकिन कोई भी किसी भी दूर से बहार नहीं आया.. तो मैं एक दूर की तरफ बढ़ गया....

दूर के पास पोहचंते hi मैंने अपनी सांस को रोका. और दूर को धीरे से अंदर की तरफ पुश किया. दूर खुल गया.. रूम अंदर से खाली था. रूम सच में hi बोहत बड़ा था. और अंदर भी बोहत कुछ था... मैंने दूर को बंद किया और दुसरे दूर की तरफ बढ़ गया.. ऐसे hi मैंने तीनो 3 दूर खोले और तीनो hi रूम्स अंदर से खली थे.

मैं चलता हुआ 4तह दूर के पास पोहंचा तो अंदर से आवाज़ें आ रही थी.. अंदर कुछ गुंडे थे.. मैंने हल्का सा दूर खोल के देखा तो

अंदर 6 गुने थे और वो ताश खेल रहे रहे.... सबब का hi ध्यान अपने खेल की तरफ था.

मैंने एक झटके में दूर ओपन किया और फिर देर न करते हुए मैंने पांच गुंडों के सर्र में गोलियां उतार दीं. उनमे से किसी के पास भी गन नहीं थी. वो साइड में पड़ी हुई थी.. यहाँ उनके लिए खतरा तो था नहीं. इसलिए सबब hi अपने खेल में मगन थे.

किसी के समझने से पहले hi मैंने पांच मार गिराए थे.... 6तह गुंडा कुछ करता उससे पहले hi मैं उसके पास पोहंच गया ..

विजय:- ऊपर जाने का रास्ता कहाँ है. और इस वक़्त मैं टाइम जाया करने के मूड में बिलकुल भी नहीं हूँ. इसलिए सोच कर बोलना...

अपने पांच साथियों को इतना अचानक से मरता हुआ देख कर वो कांपने लगा था. और इतनी हिम्मत उमसे नहीं बची थी. क मेरे सवाल का जवाब न दे सके उसने मुझे ऊपर जाने का रास्ता बता दिया........

और मैं उसे खेंचता हुआ वही लेजाने लगा....

जब उसने मुझे ऊपर जाने वाला दूर खोल कर दिखाया तो..

विजय:- एक बात और मुझे सही सही बताओ.. वो जो दूसरी तरफ हाल के रूम हैं.. वहां रहने वाले यहाँ इस तरफ आते हैं या नहीं.. और अगर आते हैं तो उनकी टाइमिंग क्या है...

वो:- अब सबब के hi सोने का टाइम है तो सूबा से पहले वो नहीं आने वाले...

वो थार थार काँप रहा था.. और मैं उसकी आँखों में hi देख रहा था.........

वो सच hi बोल रहा था. अब्ब अगर कोई अचानक से आ जाए तो वो अलग बात थी.

मैं उसे फिरसे खेंचते हुए वापिस उसी रूम में लाया और फिर उसे भी शूट कर के दूर को बहार से लॉक कर दिया.....

अब्ब मुझे यहाँ किसी के डिस्टर्ब करने का ामकान नज़र तो नहीं आ रहा था..

इसलिए मैंने जल्दी में hi बहार राखी हुई 1 2 पेटियों को खोल कर देखने लगा...

एक पति में ड्रग्स थीं. और दूसरी को खोल कर देखा तो उसमे गन्स थीं...

फिर मैं जल्दी जल्दी कुछ और भी पेटियों को खोलने लगा....

एक में मुझे लॉन्ग रेंज वाली सीलेंसर लगी राइफल दिखे. मैंने एक राइफल उठाई और उसके कुछ मैगज़ीन उठाये और फिर जल्दी में सभी पेटियों को बंद किया.....

जितनी देर मुझे लगी थी.. उतनी देर में राजा और उदय और को होश आ गया था..

मैं जल्दी से ऊपर जाने वाले राते पर हो लिया...

मुझे ट्रांसमीटर पर गुंडों की अवैवेन आ रही थीं.. जो raja..uday और जीतू के कालर में लगे हुए थे... इक चिप की सूरत में.....




************************************************************************




शंकर जूली की छूट और गांड को पहाड़ पहाड़ के सुस्त पद गया था.. दो घंटे तक्क उसने जूली की छूट और गांड की धज्जियां उड़ा के राखी यही थीं.. जूली को पैन कम् और मज़ा ज़यादा आ रहा था.. और वो शंकर का पूरा पूरा साथ देते हुए अपनी छूट और गांड उठा उठा कर शंकर के लुंड को ले रही थी.....

दो घंटे की चुदाई ने जूली और शंकर दोनों को hi थका दिया था.. शंकर 2 घंटे की उनतक म्हणत के बाद सो गया tha.aur जूली भी नंगी hi 3 घंटे का अलार्म लगा क्र शंकर के पास से उठ कर अपने रूम की तरफ चली गई.....

3 घंटे बाद शंकर उठा.. और नाहा धू कर फ्रेश हुआ.. तो उसका दमाग अब्ब बिलकुल फ़्रेशः था........

और वो अपने दमाग के घोड़े दौड़ने में मसरूफ हो गया. वो दोनों hi हमलों को ले के सोच रहा था.. उसे कुछ समझ तो सही से नहीं आया .. लेकिन अब्ब आगे उसके साथ क्या हो सकता है.. वो सबब समझ रहा था......

उसने प्रेम और धर्मेश को बुलाया और

शंकर:- तो आ गए तुम दोनों डर के.. और अपने साथ अपने साथियों को मरवा के.

प्रेम:- शंकर हम ीमसे क्या क्र सकते थे..

धर्मेश:- शंकर सबब कुछ hi अचानक से हुआ था..... हमारे कुछ भी समझने से पहले hi हामरी दो गाड़ियां ब्लास्ट हो गईं..

शंकर ने फ्रेश होते hi आज की साड़ी डिटेल ले ली थी......'

शंकर:- तो वहां फार्महाउस में जाते हुए तुम दोनों ने अपने दमाग को अपनी गांड में लिया हुआ था... वहां हमला हुआ था.. और वो मोड़ पर भी रुक कर अटैक कर सकते हैं.. ये सबब तो तुम दोनों के भी दमाग में होना hi चाहिए था..

तुम दोनों कोई लोकल गुंडे तो हो नहीं क सबब समझ न सकू... खैर छोडो..

आगे वो क्या करने वाले हैं.. पहले ये सोचते हैं. लोस्स तो हुआ hi है.

लेकिन उसे भूल कर अब्ब और कुछ लोस्स न हो. ये सोचने पर धयान देते हैं...

प्रेम:- शंकर हम उन हमला करने वालों के बारे में कुछ नहीं जानते...

धर्मेश:- और आगे वो क्या करने वाले हैं. हम कैसे बता सकते हैं.....

शनकर:- इसी लिए तुम दोनों आज मार खा के आ गए जो.. वर्ण अगर तुममे इतनी सेंस होती तो आगे क्या होने वाला है वो सबब भी समझ जाते..

prem..dharmesh:- मतलब.. हम कुछ समझे नहीं शंकर.. वो आगे क्या करने वाले हैं...........

शंकर:- वो कौन है.. ये तो नहीं जानता.. लेकिन उसका मक़सद मैं समझ रहा हूँ.. वो हमारे गैंग को ख़तम करने में लगा हुआ है.. और आज या फिर कल नहीं तो जल्द hi कुछ hi दिनों में वो हमारे इस मैं बेस पारर हमला ज़रूर करेगा...

कल रात कोठी पर हमले करके पकिया को वो उठा कर ले गए थे... पहले मेरा ख्याल था क वो पकिया से कोई भी इन्फो नहीं ले पाएंगे.. लेकिन वो इतने शातिर और तेज़ दमाग हैं क उन्हों ने कुछ hi घंटों में पकिया से इन्फो निकाल कर फार्महाउस पर हमला भी कर दिया..... वो कौन हैं और कितने हैं.. इस बारे हमारे पास कोई भी इन्फो नहीं है. लेकिन जिस स्पीड से वो जा रहे हियँ.. वो ये सबत करने के लिए काफी है क वो टाइम वास्ते किये बिना hi सबब कुछ जल्द आज जल्द कर लेना चाहते हैं....

इसलिए यहाँ हमला होना कन्फर्म है.. सो तुम यहाँ की और आस पास की सिक्योरिटी बढ़ा दो.. मैं कुछ देर में चेक करता हूँ...



************************************************



ये था शंकर का जूली की छूट में अपने लुंड को डालने का नतीजा... साला अब्ब उसका दमाग फुल चार्ज हो गया था.. और विजय एंड पार्टी के लिए बोहत hi बुरा वक़्त आने वाला था..

अब्ब देखते हैं.. बुरा वक़्त किसके लिए आता hi........

शंकर के लिए या विजय एंड पार्टी के लिए............



*********************************************************************************



 
थैंक्स बादशाह खान:

सही कहा महक और विजय को एक होने में अभी टाइम .. लेकिन हालत का भी पता नहीं चलता .. कहाँ किसकी किस्से मुलाक़ात करवा दे.. अब देखते हैं क विजय और महक की मुलाक़ात कब और कहाँ होती है...

फर्स्ट ऑफ़ आल तो विजय के लिए शंकर के जाल में फंसे अपने दोस्तों को निकलना है. और शंकर का भी काम तमाम करना है.. अभी तो विजय के सामने दो गैंग्स और भी हैं.. और वो कितने खतरनाक हैं ये वजिजय एंड पार्टी नहीं जानती... फलहि की गैंग्स को ख़तम करना विजय एंड पार्टी के लिए आसान नहीं है..

आखिर वो भी तो सालों से दिल्ली पर हकूमत कर रहे हैं.... और विजय एंड पार्टी अभी अभी प्रैक्टिकल में एंटर हुए हैं............ देखते हैं आगे इन पांचो के लिए क्या कुछ है... सक्सेस और फेलियर..
 
थैंक्स..!!

सही कहा विजय के लिए जितना बुरा वक़्त आना था आ गया.. लेकिन वक़्त को पलटते देर भी तो नहीं लगती.. और कौन जाने आएगी आने वाली लाइफ में किसके के लिए कितनी कठिन रहें पड़ी हुई हैं........................ हर अच्छी सोच रखने वाले पर उपरवाले का हाथ तो होता hi है............ अब देखना ये है क विजय एंड पार्टी के सर्र पर ऊपर वाले का कितना हाथ है.......
 
थैंक्स..!!

हर बन्दे का अपना एक अलग hi सोचने का अंदाज़ होता है.. शंकर को पता था.. क इस वक़्त वो फार्महाउस की सुरक्षा के लिए कुछ ज़यादा नहीं कर सकता..

इसलिए आने वाले वक़्त में क्या होने वाला है उसके साथ.. वो सबब जूली की छूट के अंदर hi सेव था.. तो शंकर को वहां घुस के सबब निकलना तो था hi.......

बाकी राजा जीतू और उदय फँस गए हैं.. ये तो चलता hi रहता है.. कभी अपना हाथ भारी तो कभी दुश्मन का..........

फैसला तो जुंग ख़तम होने के बाद hi होता है. और जुंग अभी जारी है....
 
थैंक्स..!!

किसी की भी लाइफ में अगर उसके सब्बसे बढ़ कर कुछ है तो वो है फॅमिली.. और अगर वो किसी ट्रबल में है.. तो उसे निकलने के लिए जितना हो सके खुद के अंदर दुम्म पैदा करना चाहिए ........... और विजय यही कर रहा है.. उसके सच्चे मैं की वजा से ऊपर वाला भी उसकी लगन को देखते हुए उसके लिए राहें आसान बना रहा है....
 
अपडेट ::: 58

*************



अब्ब बदल चुके हालत ने मुझमे तेज़ी सी भर दी थी, क्यूंकि मैं अब्ब समझ गया था, क शंकर 2 हमलों की वजा से बोहत hi ज़यादा ग़ुस्से में होगा और सबब हक़ीक़त जाने के लिए मेरे दोस्तों पर भयंकर टार्चर वो ज़रूर करेगा, और ये मैं होने नहीं देना चाहता था, मुझे जल्द से जल्द हालात का रुख बदलना था, और शंकर के बेस को ख़तम करने के साथ साथ मुझे अपने दोस्तों को भी बचाना था.

और इस सबब के लिए टाइम बंद मुठी में से फिसलने वाली रेट के बराबर था मेरे पास .....

मैं ऊपर पोहंचा.... अउ पैलेस के अंदर का व्यू देखने लगा... और जो मुझे दिखा, जो जितना दिल को बहाने वाला था, उससे बढ़ कर मेरे लिए खतरे की घंटी भी था, अंदर हर तरफ रौशनी थी और पैलेस तक्क पोंछने के लिए मुझे पैलेस में hi बने हुए एक छोटे से पार्क को पार करना था, और वो भी जल्द आज जल्द..

यही सोच कर मैंने इधर उधर देखा तो सर्वेंट क्वार्टर बने हुए थे.

पूरे पैलेस के अंदर दीवार के साथ साथ रूम्स बने हुए थे और पैलेस सेण्टर में था. अब्ब जब्ब जान हथेली पर थी hi, तो सोचना क्या.. वेपन्स की मेरे पास कमी नहीं थी, और मैं अब्ब वो पहले वाला विजय भी नहीं रहा था....

मैंने ज़यादा सोचने में टाइम वास्ते नहीं किया और वहीँ से राइफल को एक लाइट पर सीधा करते हुए ट्रिगर दबा दिया......

एक झणका हुआ और अँधेरा छा गया जब्ब तक कोई समझ पाटा, मैं चीते की सी फुर्ती से भागता हुआ पैलेस के पीछे वाली साइड में जा पोहंचा, मेरे पीछे अँधेरा हो जाने के बाद वो क्या करते हैं, ये देखने के लिए टाइम नहीं था.

मैं आगे बढ़ा और अंदर जाने के लिए रास्ता देखने लगा. सेकंड फ्लोर पर मुझे एक खिड़की खुली हुई दिखी, और उससे कुछ फासले पर एक पाइप नीचे से ऊपर जाता हुआ गुज़र रहा था, मैंने देर न करते हुए उस पाइप के रास्ते उस खिड़की तक घुसने के लिए चढ़ाई शुरू कर दी, 40 सेकंड में hi मैं उस खिड़की तक जा पोहंचा..

मैंने एक नज़र अंदर देखा और फिर अंदर घुस कर एकदम से नीचे बैठ गया.. कुछ नहीं हुआ तो मैं खड़े हो कर पूरे रूम को देखने लगा, रूम अंदर से खाली था...

मैं दूर के पास पोहंचा और फिर दूर को खोलने लगा, थोड़ा सा खोल कर मैंने बहार देखा, ये एक राहदारी थी, और इस राहदारी में कई रूम्स में दूर मुझे दिख रहे थे, जो सबब hi बंद थे.. मैं देखने लगा क यहाँ पर तो कमरे नहीं लगे हुए.. लेकिन यहाँ कोई कैमरा मुझे नहीं दिखा......

मैंने सर्र को और भी बहार निकाल कर दोनों साइड्स देखा, मुझे किस साइड जाना चाहिए, क्यूंकि दोनों साइड्स hi रास्ता था नीचे जाने का..

मैंने एक रास्ते का चुनाव किया और फिर उस तरफ जाने लगा...

मैं तेज़ चल रहा था, और अपने क़दमों की आवाज़ मैंने दबाई हुई थी.. अभी मैं राहदारी के मोड़ तक नहीं पोहंचा था, मुझे अपने दोस्तों के पास शंकर के आने का पता चला......

ओह्ह्ह्हह्ह शीट्ट्ट्ट .. कहीं मुझे देर न हो जाए....

मैंने अपने क़दमों की स्पीड तेज़ करदी और मोड़ के कार्नर तक पोहंच कर मैंने दूसरी तरफ देखा. तो एक रास्ता नीचे और एक ऊपर जा रहा था, यहाँ मुझे किस साइड जाना चाहिए, नीचे या ऊपर... टार्चर सेल अक्सर नीचे hi बने हुए होते हैं. तो मैंने नीचे hi जाने का फैसला किया.......

पैलेस की सुरक्षा के लिए गार्ड्स पैलेस न होक पैलेस के इर्द गिर्द मौजूद थे.

मुझे पैलेस के अंदर सुरक्षा के लिए कोई गार्ड अभी तक नहीं दिखा था.......

मैं नीचे आया तो मैं एक हाल में जा पोहंचा, हाल के सेण्टर में सूफी रखे हुए थे बैठने के लिए और इक साइड बार काउंटर बार बना हुआ था.....

मैंने चरों तरफ नज़र दौड़ाई..... फिर इक साइड चल पड़ा.. अभी तक्क मेरा सामना किसी से नहीं हुआ था.....

ये अच्छी बात भी थी और बुरी भी, अच्छी इस लिए क किसी से उलझने से मेरा टाइम hi बर्बाद होना था, और बुरी इस लिए क मुझे कोई तो गुंडा मिलना चाहिए था, उससे hi पता चलेगा क शंकर और मेरे दोस्त कहाँ हैं....

इस बीच शंकर मेरे दोस्तों से पूछ रहा था.. क वो कौन हैं और उन सबब का मक़सद क्या है, लेकिन अभी शंकर ग़ुस्से में नहीं लग्ग रहा था, शायद उसे कोई जल्दी नहीं थी..

शंकर को किसी किसम की टेंशन भी तो नहीं थी, यहाँ उसके पैलेस में घुसने वाले धार लिए गए थे, शंकर का सेंस ऑफ़ हुमूर बोहत तेज़ था, और उसने जुड़जी भी कर लिया था, क यही वो लोग हैं जिन्हो ने कल रात आर आज फार्महाउस पे हमला किया था..... लेकिन मेरे दोस्तों ने अभी तक्क शंकर की कभी भी बात को मानने से इंकार hi किया था ....

मैं चलता हुआ आगे बढ़ रहा था क मुझे एक बाँदा दिखा, मैं उसके पीछे हो लिया, लेकिन "ये क्या" वो भी मेरे hi जैसे क्यों छुपता हुआ जा रहा है, मैं उसे देख कर शॉकेड हो गया.

उसके हाथ में भी एक पिस्तौल था, और वो अपने पैरों की आवाज़ को दबाये हुए hi आगे बढ़ रहा था, उसके कपडे बोहत hi मेले लग रहे थे, सेहत में वो मुझसे काम नहीं था, मैंने सोचा इसे मारने से पहले कुछ पूछा जाए, कहीं मैं किसी अपने जैसे को hi ना मार दूँ... वो मुझ जैसा त्रिनेड नहीं था, इस लिए वो मुझे अपने पीछे आते हुए नहीं देख पाया.

वो चलता हुआ एक रूम के दूर के पास पोहंचा तो फिर दूर को खोल कर देखने लगा,

उसे अंदर से कुछ नहीं दिखा, उसने दूर बंद किया, वो पीछे मुद क्र देखना चाहता था, कोई उसके पीछे तो नहीं है.

उसके पीछे मुड़ने से पहले hi मैं छुप गया, वो अपने पीछे किसी को ना प् कर आगे बढ़ा और मैं भी उसके पीछे पीछे hi चल पड़ा, अब्ब मुझे अपने दोस्तों की टेंशन तो थी, लेकिन यहाँ कुछ और भी अजीब था, तो मुझसे रहा नहीं जा रहा था, इसलिए मैंने उस आदमी का पीछा करना नहीं छोड़ा..

वो एक और दूर तक पोहंचा उसे खोल क्र देखा. वो भी उसे खली hi मिला, वो वापिस दूर बंद करके मुड़ने hi वाला था, क मैं उसके पास पोहंच गया और उसके गन वाले हाथ को पकड़ कर एक झटका दिया तो गन उसके हाथ से गिर गई, वो तिलमिलाया खुद को मुझसे छुड़ाने के लिए ज़ोर लगाने लगा...

मैंने उसे ढाका दिया और वो मेरे साथ hi रूम में दाखिल हो गया, मैंने जल्दी से दूर बंद किया और

विजय:- देखो कुछ भी करने से या सोचने से पहले मेरी एक बात सुन लो...

वो:- देखो तुम चाहे तो मुझे मार दो, लेकिन मैं अपनी नेहा को लिए बिना नहीं जाऊँगा...

विजय:- ोोू तो तुम भी यहाँ किसी लिए आये हो दोस्त..

वो:- दोस्त.... क्या मतलब..??

विजय:- (जल्दी से) मेरा नाम विजय है और मैं यहाँ शंकर को मार कर अपने दोस्तों को छुड़ाने आया हूँ... क्या तुम जानते हो क शंकर इस वक़्त कहाँ होगा..

वो:- मेरा नाम अजय है और मैं जानता हूँ क शंकर इस टाइम कहाँ गया है, लेकिन तुम...

विजय:- देखो अजय अभी सबब बातों का टाइम नहीं है, और किसी भी वक़्त मेरे दोस्तों पर टार्चर शुरू हो सकता है, इसलिए सबब फ़ालतू की बातें छोड़ कर मुझे बताओ क शंकर कहाँ है.. और तुम्हरी नेहा को मैं कुछ नहीं होने दूंगा, भरोसा रखो मुझ पर...

मेरी इतनी बात सुनते hi उसने अपना कब्ब का रुका हुआ सांस बहार निकाला, मैंने उसे उसकी गन उठा कर वापिस उसके हाथ में थमा दी...

विजय:- अभी तुम किसी पर गोली मत चलना. वर्ण शोर होने से सब को hi पता चल जाएगा....

अजय:- ठीक hai....chalo मेरे साथ..

मैं अजय के साथ जाने लगा.. अजय वापिस उसी साइड जा रहा था, जहाँ से मैं आया था, फिर अजय ऊपर जाने लगा..

विजय:- क्या शंकर ऊपर है..

ajat:-(dheere से) हाँ. ऊपर hi वो गया है, और तुम्हारे दोस्त भी ऊपर hi हैं..

विजय:- तुम इतना सबब कैसे जानते हो..

अजय:- मैं 3 घंटे से पैलेस के अंदर घुसा हुआ हूँ..

विजय:- ऊह्ह्ह्ह... लेकिन तुम अंदर कैसे आये..

अजय:- एक ट्रक के नीचे छुप कर..

मैं अजय को देखने लगा, क उसके अंदर भी कितनी लगन है, अपनी नेहा को बचने के लिए.... मौत के मोहन में घुस गया था ... दुम्म था अजय में लेकिन त्रिनेड नहीं था.... मेरे hi जैसा था, अपनों के लिए मर मिटने वाला..

अजय मुझे 3रद फ्लोर पर ले गया...

मैंने अजय के चक्कर में आप को ये नहीं बताया क शंकर इस बीच ग़ुस्से में तो नहीं आया था, लेकिन उसने तीनो को hi अच्छे से बाँध क्र टार्चर के लिए बोल दिया था.. और अब्ब कुछ hi देर में तीनो की जिस्मों में ज़ख्मों का इज़ाफ़ा होने वाला था..

विजय:- अजय तुम किस हद तक लड़ लेते हो...

अजय:- विजय मैं कोई फाइटर नहीं हूँ, एक म्हणत मज़दूरी करने वाला एक आम इंसान हूँ, बास अपनी नेहा को बचने के लिए मैं इस हद्द तक्क जा पोहंचा...

विजय:- ठीक है तो फिर तुम सामने आ कर कुछ भी करने से परहेज़ करना, यहाँ एक प्रोफेशनल गैंगस्टर्स के साथ जुंग होने वाली है, कहीं अपनी नेहा को बचने के चक्कर में तुम मारे जाओ, और नेहा तुम्हारी जुदाई में मर जाए.....

अजय:- ठीक है.. जैसा तुम कहो..

जैसे hi हम थर्ड फ्लोर पर पोहंचे तो सामने एक 70 फ़ीट का हाल था, इक साइड राहदारी जा रही थी, जिस में रूम थे, और दो साइड में हाल से कनेक्टेड रूम थे, इक साइड खाली दीवार थी.....

अजय ने मुझे इक साइड बने हुए रूम्स में से इक रूम का बताया..

विजय:- अब्ब तुम सिर्फ खुद को सेफ रखो.. बाकी का मैं देख लूंगा....

मेरे पास इस वक़्त सीलेंसर लगा हुआ एक पिस्तौल, एक राइफल, एक चाकू, एक खंजर, बेल्ट में कुछ पिस्तौल और कुछ राइफल के मैगजीन्स थे, और पीछे बैग में दो गर्रेनादेस भी थे, लेकिन यहाँ ग्रेनेड का कोई काम नहीं था, तो मैंने ग्रेनेड्स वही नीचे बेसमेंट में hi छोड़ दिए थे....

कुछ और भी मैगज़ीन थे बैग में.........

मैंने राइफल को गले में लटकाया, कुछ इस तरह से, क अगर मुझे इमरजेंसी में उसे चलना पड़े तो मुझे देर न लगे, और पिस्तौल को हाथ में थाम क्र मैं आगे दूर

तक जा पोहंचा......... दूर थोड़ा सा खुला हुआ hi था....

मैंने अंदर झाँक कर देखा तो मुझे 4 गुंडे हाथों में लेटेस्ट गन लिए हुए एक दूर के पास दिखे.. मतलब इसके आगे भी कोई रूम था, और ये सबब बहार hi सिक्योरिटी के लिए खड़े थे .........

अब्ब इनको मारना था, और वो भी पालक झपकते हुए, लेकिन फिर इनके गिरने से कहीं अंदर किसी को कुछ पता न चल जाए ....

मुझे जीतू की आवाज़ सुनाई दी

जीतू:- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh हमने कहा ना, हम वो नहीं हैं, जो तुम समझ रहे हो, हम तो वैसे hi खड़े हुए थे वहां पर..... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

जीतू के साथ टार्चर शुरू हो गया था....

शंकर:- साले मुझे चुटिया समझता है, तुम जो बोल रहे हो, तुम्हारी ऑंखें उस बात से इंकार कर रही हैं, मैंने ऐसे hi नहीं ये पैलेस खड़ा किया है, तुम साले कल के लौंडे अहथियाँ से लेस हो के मुझे चीट करेंगे, कुछ ज़यादा hi दुम्म दिहने के आदि लग रहे हो. कोई नहीं मैं भी देखना हूँ कितना दुम्म है तम तीनो में......... और रही बात तुमसे कुछ उगलवाने ki(ek कमीनी अहंसी हसने लगा)

वो तो तुम खुद से भी छुपा नहीं सकोगे........

(शंकर अपने आदमियों से) चलो धीरे धीरे इन सबब की दोसे बढ़ाते जाओ, देखते हियँ कब्ब तक्क अपनी बात पर अड़े रहते हैं ..............

अब्ब मुझे और कुछ नहीं सोचना था, जो भी होगा देखा जाएगा...

मैंने थोड़ा सा दूर खोला और फिर 4 सेकंड में hi 4 गोलियां चलाई और अंदर मौजूद चारों गुंडों के hi सर खुल गए. मैं एक झटके में अंदर गया और उन गुंडों के गिरने को नज़र अंदाज़ करते हुए, दूर पर एक लात मारी, जिस दूर के पास वो खड़े थे....

दूर एक झटके में खुला और अंदर मौजूद सबब hi दूर के ऐसे खुलने से चौंक गए....

उनका चौंकना hi मेरे लिए काफी था.. अंदर शंकर के साथ 8 गुंडे the,aur तीन के हाथ इ गन्स थीं, और बाकि के मेरे दोस्तों को टार्चर करने की तैयारी में लगे हुए थे,

dhaayen...dhaayen...dhaayen.

तीनो गोलियां चलें और तीनो गुंड बरदार शनकर की अंकलहेन के सामने, शंकर के कुछ समझने से पहले hi मारे गए..........

साला शंकर इन कुछ सेकण्ड्स में कुछ भी नहीं कर पाया, बास ैजनक से सबब होने की वजा से लड़खड़ा गया........

मैंने एक झटके में hi शंकर को जा दबोचा.. और उसके सर्र पर गन रख कर गुंडों से बोलै ......

विजय:- चलो खोलो मेरे दोस्तों को, वर्ण तुम्हरा ये बॉस मारा जाएगा..

वो सबब शंकर की hi तरफ देखने लगे......

शंकर अचानक से इतना सबब होते देख कर हड़बड़ाया ज़रूर tha,lekin फिर उसने जल्द hi खुद पर काबू पाया, और

शंकर:- कौन हो तुम , और यहाँ कैसे आये..

मैंने शंकर के सर्र पर अपनी गन को दबाया और

विजय:- कुत्ते की तरह से भोकना बंद कर और अपने कुत्तों को बोल मेरे दोस्तों को खोल दे ...........

शंकर:- देखो तुम यहाँ आ तो गए हो लेकिन जा नहीं पाओगे.... ये मेरा पैलेस है. और यहाँ से बच कर निकल पाना मुमकिन नै है...

मैं गन को शंकर के सर्र पर लगाए हुए hi शंकर के गले पर अपने दुसरे हाथ को कस्सणे लगा.. वो कुत्ता भूँकने लग गया था.. साला सर्र पारर गन होने पारर भी अपने आदमियों को मेरे दोस्तों को खोलने के लिए नहीं बोल रहा था..

मेरे उसके गले को कसने की वजा से उसका दुम्म घुटने लगा. और फिर उसने मेरे बाज़ो पर अपने हाथ मार कर मुझे रुकने को कहा...

मेरे दोस्त मुझे आता हुआ देख कर खुश हो गए the..aur मुझे hi देख रहे थे..

मैंने शंकर को एक हाथ से कस के पकड़ा.. पिस्तौल को अपने पीछे कैसा और राइफल को गुंडों की तरफ सीधा करते हुए बोलै....

विजय:- अपने हरामी बॉस के चक्कर में कही तुम सबब न मरे जाओ. अब्ब एक भी सेकंड और लगाया तो मैं तुम सबब को एक hi राउंड में भून कर रख दूंगा. चलो खोलो मेरे दोस्तों को .........

सबब ने एक बार शंकर की तरफ देखा... शंकर ने अभी भी उनको नै कहा था, मेरे दोस्तों को खोलने के लिए............

बड़ी hi कुट्टी चीज़ था शंकर.. इतना सबब होने पर भी शंकर टास से मास्स नहीं हुआ था......

जैसे hi सबने मेरे दोस्तों को खोला तो सबब hi अपने ज़ख्मो को भूल कर पास पड़ी हुई गन्स को उठा कर गुंडों को एक साइड करने लगे....

मुझे शंकर पर बोहत ग़ुस्सा आ रहा था.. और फिर जब्ब मैंने देखा क अब्ब मेरे दोस्त फार्म में वापिस आ गए हैं, तो मैंने शंकर की गर्दन पर अपना दबाओ फिरसे बढ़ा दिया..... शंकर कुछ देर में hi बेहोश हो गया.... मैंने शनकर को नीचे फ़ेंक दिया.....

विजय:- शोर किये बिना hi इन सबब को मार दो....

गुंडे अपने मरने की बात सुन कर खुद को बचने के लिए मेरे दोस्तों से लड़ने लगे... अब्ब गुंडे गन चलने में माहिर थे, लड़ने में नहीं, 5 hi मिंट में मेरे दांतों ने सबब की hi गर्दन तोड़ दी............

फिर तीनो मेरे पास आये और मेरे गले लग्ग गए.....

उदय:- मुझे पता था, तू जल्द hi आने वाला है, मैं कब्ब से तुम्हारा hi वेट कर रहा था...

विजय:- सॉरी यार मेरे चक्कर में तुम सबब का ये हाल...

is'se आगे कुछ बोलता, क तीनो ने hi मुझे लातों और घोंसू से मारना शुरू कर दिया ........

उदय:- साले सॉरी बोलता है....

राजा:- विजय तूने खुद hi तो कहा था, क राजा तुम मेरे भाई है, और फिर अब्ब सॉरी क्यों बोल रहा है..

जीतू:- विजय आगे से ऐसा कभी मैट बोलना.. हम सबब एक हैं, और हमेशा एक hi रहेंगे...

विजय:- ठीक है मुझसे गलती हुई.. अच्छा एक बात और भी है...

उदय:- वो क्या???

फिर मैंने सबको hi अजय के बारे में बताया...

उदय:- ये तो बड़ी अच्छी बात है .अजय के कहने पे हमें पता चल गया वर्ण अपने चक्कर में हम अजय की नेहा को भूल hi जाते.. हमें ज़रूर उसकी मदद करनी है..

राजा:- हाँ चलो देर हो रही यही.. बहार पता नहीं उसका क्या हाल हो रहा होगा..

विजय:- इस शंकर को बी उठाओ.. कुत्ते ने बड़ा परेशां किया है मेरी दीदी को. पूजा दीदी के आंसू मुझे दिखने लगे थे. शंकर प्रेम और धर्मेश के कारण सबब hi घर में क़ैद हो कर रह गए थे......

मैंने शंकर कको उठाया और बहार निकले.. बहार पड़ी हुई लड़ों को देख क्र

विजय:- जीतू उदय के साथ मिल कर इन लाशों को भी अंदर फ़ेंक दो.... और दोनों दरवाज़े अच्छे से बंद कार्डो..

5 मिंट बाद हम अजय के पास खड़े थे..

और अजय सबब को देख कर खुश भी हुआ .... और सबब की हालत देख कर किसी हद तक्क काँप भी गया.. मेरे दोस्तों के कपडे खून से साणे हुए थे...

बहार अछि खासी मार पड़ी थी सबको, और अंदर अभी जीतू के साथ टार्चर शुरू hi हुआ था..... क मैं पोहंच गया, वर्ण शायद तीनो को hi उठा कर ले जाना पड़ता.

लेकिन ऊपर वाले ने हमारी मदद अजय की सूरत में करदी थी. वर्ण मैं तो नीचे hi सबको ढूंढ़ता रह जाता....

3रद पोरशन पर शंकर ने 3रद डिग्री टार्चर का पूरा पूरा सेटअप बनाया हुआ था...

सबने hi अजय को थैंक्स बोलै..

अजय:- आप सबब क्यों मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं....

विजय:- राजा हमें पहले यहाँ के कक्तव का कण्ट्रोल ढूंढ़ना होगा. वहां ज़रूर कुछ गार्ड्स होंगे और हमारी हर एक मूवमेंट को चेक भी कर सकते हैं...

अजय:- मुझे पता है, कण्ट्रोल रूम कहाँ है... वो नीचे ग्राउंड फ्लोर पे hi है.. लेकिन बाहरी तरफ..

उदय:- शंकर को कहाँ तक ले के जाना है, कहीं किसी सीएएम में कोई शंकर को इस हालत में देख कर अलार्म न बजा दे..

जीतू:- और अभी तक्क प्रेम और धर्मेश भी नहीं दिखे, वो शंकर के साथ क्यों नहीं हैं, होओगे तो इस पैलेस में hi...........

ये सबब बातें भी काबिल इ ग़ौर थीं..

विजय:- और कोई भी किसी भी वक़्त शंकर से राब्ता कर सकता है.. प्रेमा ुर धर्मेश शंकर के लिए सोच सकते हैं, उन दोनों को भी तो तुम तीनो के यहाँ होने की खबर होगी..........

विजय:- चलो पहले नीचे जाने हैं और शंकर को कहीं बाँध देते हैं, बास सीएएम से बचते हुए सबब को नीचे जाना है....

फिर मैं जिस राते से ऊपर आया था, सब को hi उसी रास्ते से नीचे लाने लगा,

ये एरिया कक्तव से बचा हुआ था..

चुटिया कहीं का. मुझे शंकर पारर हैरत भी होने लगी, क इतना टेढ़ा बाँदा हो के भी इसने अंदर हर जगा सीएएम नहीं लवाये थे, कुछ ज़यादा hi इसे अपने पैलेस की सुरक्षा पर गुमान था.. आज तो लग्ग hi गया ना लौड़े, लौड़ा कही का .......

वर्ण सच में hi ये हाथ आने वाला नहीं था.. अजय का इस सबब में बड़ा रोले था.. आज अजय की वजा से मेरा mission(friends बचाओ) पूरा हुआ था.... और अब्ब पल्स पर अपना कब्ज़ा करना आसान मिशन नहीं था, और अभी हमारे पास कोई भी ऐसा गुंडा नहीं था, जो हमें सबब बता सके..

मच hi मिंट में हम नीचे पोहंच गए... अजय के hi कहने पे हमने एक रूम का दूर खोला और फिर सबब hi अंदर घुस गए......

अंदर बीएड पर मौजुद बीएड शीट को फहद कर शंकर को एक चेयर पर बाँध दिया gaya.abb शंकर यहाँ से हिल भी नहीं सकता था.....

विजय:- राजा पहले हमें कक्तव कण्ट्रोल रूम में जाना है ...... कर उसे अपने अंडर लेना है..

raja:-theek है, तो फिर कौन कौन जाएगा..

विजय:- हम तीनो hi जायेंगे और जीतू के साथ यहाँ अजय रुकेगा.....

मैंने अपने बैग से तप निकल कर शंकर के मोहन पर चिक्पा दी..

विजय:- जीतू किसी भी हाल में शंकर से कुछ भी बात मैट करना.... तुमने अभी शंकर को सही से पहचाना नहीं होगा.. शंकर जैसे कुत्ते कभी कभी hi देखने को मिलते हैं... और ये किसी भी पल बाज़ी पलट कर हमारे लिए खतरा बन सकता है... जो कुछ करना होगा वो मेरे आने का बाद कर लेना.. लेकिन .....

मैं फिरसे कह रहा हूँ.. क किसी किसम के उबाल अपने अंदर मैट आने देना.. शंकर एक इन्तेहाई खतरनाक और बोहत बड़े स्टैमिना का मालिक है.. तुमने देखा hi होगा, कितनी बुरी हालत होगी थी इसकी, लेकिन फिर भी इसने तुम सबब को खोलने क लिए नै कहा..

राजा:- हाँ विजय तू सही कह रहा है, शंकर को देख के लगता है, क शंकर को किसी किसम की ढेल देना सही नहीं है....

उदय भी हमारी बातें सुन रहा था, वो शंकर के पास आया और शंकर के बंधे हुए एक पेअर के घुटने पर ज़ोर से गन का दस्ता मार दिया...

शंकर का घुटना चूर चूर हो गया.. और शंकर होश के गया.. शंकर के लिए ये चोट बोहत hi घातक थी, होश तो उसे फिर आना hi था..

उदय:- अब्ब सही है, अब कोई टेंशन नहीं बनेगी.. अब्ब्ब तो चाहो इसे खोल भी do,kahan तक्क भाग के जाएगा...

उदय के ऐसे hi स्टाइल हमें बोहत पसंद थे... उदय ने शंकर को एक पाऊँ से अपाहिज तो कर hi दिया था, लेकिन ये सबब करते हुए भी उदय बोलै बड़े स्टाइल में था.

खून से साणे हुए कपड़ों में उदय का स्टाइल एक अलग hi रूप धारण कर रहा था..

हम सबब के चेहरे पर फ्रेशनेस लौर आई.. अब्ब मेरे साथ साथ सबब hi रिलैक्स हो गए थे.. और शंकर बंधे हुए मोहन के साथ, सब को hi खुनी आँखों से देख रहा था..

उदय:- (शंकर से) तू टेंशन मैट ले, हम आते हैं तेरे पास वापिस, फिर तेरे से बात करेंगे ना, तू तब्ब तक्क वेट hi करता रह.. चलो विजय..

अजय भी सबब देख रहा था, लेकिन वो इस सबब के लिए त्रिनेड नहीं था, इसलिए चुप hi रहा, उसका चेहरा पसीने से टर्र हो गया था...

राजा उदय और मैं, जीतू और अजय को सावधान रहने को बोल कर बहार आये, और

अजय के बताये हुए रास्ते पर चल पड़े...

हम तीनो hi सामने और आस पास लगे कामर्स पर ध्यान दे रहे थे... बहार जाने वाले दूर के पास एक सीएएम लगा हुआ था, और उससे हमारा फासला कोई 20 फ़ीट था..

हम साइड में चल रहे तो कैमरा दूर पार्स हाल के सेण्टर की तरफ रुख किये लगा हुआ था...

अब्ब हम कुछ देर रुक कर देख रहे थे, क कैमरा एक hi जगा रुका हुआ है, या कही घुम तो नहीं रहा.. कैमरा घूम hi रहा था.. जब्ब वो हमारी तरफ आने लगा तो हमने जल्दी से खुद को पीछे हटाया, और कमरे की रेंज से दूर हो गए..

विजय:- राजा हमें कमरे के वापिस आने से पहले hi यहाँ से निकलना है..

raja..uday:- ok

फिर हमने कमरे के 2 चक्कर के बाद तेज़ी से भाग क्र दूर को क्रॉस किया, हम एक कमरे से बच गए थे, अब्ब यकीनन और भी यही आस पास कक्तव का जाल बिछा हुआ होगा, क्यूंकि अब्ब हम बहार आ गए थे, और बहार की सुरक्षा के लिए शंकर ने स्पेशल अर्रंगे तो किया hi होगा....

हमने चरों तरफ देखा, तो हम से कुछ hi फासले पर कण्ट्रोल रूम था, बहार लगी इक प्लेट पर लिखा है tha.."control रूम"

अब्ब हमसे आगे कण्ट्रोल रूम का फासला 15 फ़ीट था, और यहाँ पारर कमरे कुछ ज़यादा hi लगे हुए थे, शंकर ने कण्ट्रोल रूम की सुरक्षा के लिए बोहत बढ़िया से इंतेज़ाम किया हुआ था, कण्ट्रोल रूम में घुसना खतरनाक था...

उदय:- विजय अब्ब क्या करना है.. वो सामने ऊपर देखो, वहां पर हर तरफ रुख किये कमरों का जाल बिछा हुआ है...

मैंने अपना पिस्तौल राजा को दिया, और खुद सीलेंसर लगी राइफल को अपने हाथ में ले लिया......

विजय:- उदय तुम यही रुक कर हमें कवर देना अगर हमारे पीछे से कोई हमला करे तो फिर देर किये बिना hi उसे उदा देना...

उदय:- लेकिन विजय मेरी राइफल पर तो सीलेंसर नहीं लगा हुआ... इस तरह से तो पूरे पैलेस में hi सबब को पता चल जाएगा..

विजय:- अब्ब जो होगा देखा जाएगा... लेकिन कण्ट्रोल रूम में घुसना हमारे लिए ज़रूरी है, इससे हमें भी पता चलेगा, क इस पैलेस की सुरक्षा किस हद तक hai.aur कहाँ कितने गुंडे हैं, सबब की इन्फो हमें मिल जायेगी....

राजा:- ठीक है विजय अब ज़यादा क्या सोचना... अब हर पल hi तो रिस्की है यहाँ हमारे लिए, और अब्ब फ़ौरन hi कुछ करना हमारे लिए भी ज़रूरी हो गया है, प्रेम और धर्मेश अब्ब शंकर की तरार से देरी होने की वजा से us'se राब्ता भी करने hi वाले होंगे.. इससे पहले क कुछ गड़बड़ हो, हमें कुछ क्र लेना चाहिए...

उदय:- ठीक है तुम दोनों जाओ. मैं यही रुक कर तुम दोनों को कवर देता हूँ..

राजा और मैंने इक बार फिरसे चरों तरफ देखा और उदय को एक्टिव रहने को बोल कर कण्ट्रोल रूम की तरफ भागे ....

15 फ़ीट का फासला कुछ भी नहीं था, लेकिन हमारे लिए वो एक मौत का पल भी था, यहाँ सबब hi गैंगस्टर थे, और किसी भी साइड से आने वाली एक hi गोली हम तीनो में से किसी का भी काम तमाम कर सकती थी .....

कुछ hi सेकण्ड्स लगे हमें कण्ट्रोल रूम तक पोहचने में..

जैसे hi हम भाग कर कण्ट्रोल रूम में पोहंचे तो हमें बहार से देख लिया गया.

और फिर पैलेस की फ़िज़ा गोलियों की

tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..

से गूंजने लगी, पूरे का पूरा पैलेस और आस पास का सारा hi एरिया an-gint चलने वाली राइफल की गोलियों से गूँज उठा ...............




************************************************************************




 
अपडेट ::: 59

*************



कण्ट्रोल रूम में घुसते hi हमने दूर को बंद किया और अंदर की तरफ भागने लगे.

अंदर कण्ट्रोल रूम में भी गोलियों की आवाज़ सुनाई दे गई थी और अंदर से 4 गुंडे भाग कर बहार निकले.. राजा और मेरी गोलियों का निशाना बन गए थे..

अब्ब वो ये नहीं जानते थे, क गोलियां क्यों चल रही हैं, वो तो गोलियों के चलने की आवाज़ सुन कर अचानक से दूर की तरफ भाग खड़े हुए थे..

हमने उनपर ध्यान दिए बिना hi अंदर एंट्री मारी और फिर अंदर का नज़ारा देख क्र हैरान रह गए...

कण्ट्रोल रूम 25 फ़ीट के बराबर था, वो एक साइड की पूरी दीवार hi छोटी छोटी स्क्रीन्स से पूरे पैलेस को hi दिखा रही थी....

अंदर 2 गार्ड्स और थे, और कक्तव को कण्ट्रोल करने के लिए 4 लड़के एक टेबल पर बैठे हुए थे ............

दोनों गुंडों ने हमें देख कर गन्स को सीधा कर लिया. लेकिन अब्ब वो इतने भी एक्सपर्ट नहीं थे, जो हमसे ज़यादा तेज़ी दिखा सकते....

2 सेकंड में hi दोनों के सर्र खुल गए.. और धड़म्म से नीचे गिर गए.. बाकी के चारों इस तरह से हमें अंदर घुस कर गुंडों को मारते हुए देख क्र डर के मारे कांपने लगे.......

विजय:- सबब इक साइड हो कर नीचे लेट जाओ, वर्ण मारे जाओगे....

ये चरों hi मुझे गुंडे नहीं लगे थे, और न hi राजा को तो हमने इन्हे मारने से परहेज़ hi किया और वैसे भी अभी हमें इनकी ज़रूरत थी..

विजय:- यहाँ से फर्स्ट फ्लोर पर जाने का रास्ता है या नहीं...

उनमे से एक ने एक तरफ इशारा किया....

विजय:- उदय क्या सूरत इ हाल है..

उदय:- विजय अब्ब मैं घेरे में आने वाला हूँ.. मैंने 10 के करीब गुदनों को मार गिराया है, लेकिन वो सबब hi अब्ब इस तरफ आने लगे हैं......

राजा:- उदय तुम वापिस आ क्र अंदर वाले दूर को बंद कार्डो.....

उदय ने जल्दी में वैसे hi किया.. तब्ब तक्क राजा बताये गए रास्ते से भाग क्र उदय को लेने चला गया.............

vijay:-(charon से) यहाँ के बारे में जितना जानते हो वो बताओ, यहाँ कितने गुंडे हैं, और प्रेम और धम्रेश इस वक़्त कहाँ हैं.....

वो सबब hi दीवार पर लगी स्क्रीन्स पर देखने लगे...

विजय:- चलो सबब अपनी चेयर्स पर बैठ जाओ, लेकिन कोई गलत हरकत मैट करना.

मेरा तुम में से किसी को मारने का मैं नहीं है, इसलिए मुझे मजबूर मैट करना..

सबब ने hi सर्र हिला दिए....

मैं सामने लगी स्क्रीन्स पर देखने लगा.....

पूरा पल्स hi नज़र आ रहा था .....

लेकिन मैं प्रेम और धर्मेश की सूरत से आशना नहीं था..

विजय:- इस सबब में धर्मेश ुर प्रेम कौन से हैं......

वो:- वो कुछ देर पहले यहाँ पर थे, लेकिन अब्ब दिखाई नहीं दे रहे हैं...

वो दोनों hi अपने किसी ख़ास रूम में होंगे... और वही से hi अपने आदमियों से राब्ता करेंगे....

ये गड़बड़ वाली बात थी.........

मैं फिरसे स्क्रीन्स के ज़रिये पूरे पैलेस को देखने लगा.......

उदय ने जिन को टारगेट किया था.. वो 11 गुंडे थे और पैलेस के ग्राउंड में hi मरे पड़े the.........wo अचानक से भाग कर पैलेस के अंदर आने लगे होंगे, और उदय ने सबब को hi लम्बा लिटा दिया था........

फिर मैं बाकी के पैलेस को देखने लगा...... और मुझे वो जगा दिखाई देने लगी, जहाँ से मैं ऊपर पैलेस के अंदर आया था... वहां से कुछ गुंडे अंदर पैलेस में घुस रहे थे..... अब्ब नीचे के मरे हुए गुंडों का भी पोल खुल चूका होगा...

विजय:- इस वक़्त पैलेस में टोटल कितने गुंडे हैं,

वो:- 150 के करीब होंगे.. ज़यादा तर नीचे बेसमेंट में छुपे रहते यहीं, वो मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स हैं, और शंकर ने उन्हें छुपा क्र रख हुआ है...........

मुझे मोबाइल विबरटीओ फील हुई, तो मैंने अपना मोब निकल कर देखा, तो उसपर ins-ranjeet का नाम शो हो रहा था..

आईएनएस रणजीत:- हाँ विजय बीटा, सुनाओ सबब ठीक है ना...

विजय:- सर सबब ठीक भी है और नहीं.. कक्तव कण्ट्रोल रूम हमारे अंडर में है, और जैसे यहाँ पर फायरिंग हो रही है, जल्द hi यहाँ पर पुलिस आ जाएगी....

आईएनएस रणजीत:- हाँ मैं जानता हूँ, और मैं भी इस वक़्त एरिया कमिश्नर से साथ वहीँ आ रहा हूँ... तुम अपना अंदर ध्यान रखना, बहार का मैं और कमिश्नर संभल लेंगे.........

विजय:- ठीक है सर....... तो फिर अब्ब मेरे लिए कुछ और सुनने लायक है तो मैं हाज़िर हूँ, वर्ण यहाँ अभी मुझे एक्टिव रहना है..

आईएनएस रणजीत:- ठीक यही विजय बीटा, तुम करो अपना काम, बास हम भी कुछ hi देर में पोहचते हैं......

विजय:- सर पैलेस के पीछे से दीवार ओपन होने से एक रास्ता बनता है, और आप के आने से यहाँ पर रह रहे मोस्ट वांटेड क्रिमिनल भाग सकते हियँ.. इसलिए आप वहां का कुछ कर लीजिये गए.

isn-ranjeet:- ये तुमने बता कर सही किया है, अब्ब बास तुम अपने काम पर ध्यान दो, मैं यहाँ सबब सेट कर दूंगा....

विजय:- ok सर तो फिर मैं रखता हूँ..

आईएनएस रणजीत:- ठीक है, अपना ख्याल रखना..

कॉल एंडेड

**********

िसँ रणजीत से बात करके मैं एक बार फिरसे स्क्रीन्स पर देखने लगा. पैलेस की बिल्डिंग्स के बहार मुझे गुंडों की एक फ़ौज दिखाई दे रही. और इन सबब से लड़ने के लिए डायरेक्ट एक्शन के साथ ब्रेन की भी ज़रूरत थी.

कुछ hi देर में राजा .. उदय को लेकर आ गया.

मैंने उन चरण लड़कों से पुछा....

vijay:-(jahan से मैं ऊपर आया था उस स्क्रीन की तरफ इशारा करके) ये जो जगा है निचे बेसमेंट में जाने की इसके इलावा कोई और भी जगा है बेसमेंट से बहार आने के लिए.

एक लड़का:- जी सर एक और भी जगा है. ऊपर आने के liye.(wo मुझे एक स्क्रीन दिखने लगा) सर यहाँ से नीचे जाने और आने का रास्ता है.

राजा:- विजय तुम क्या सोच रहे हो..

vijay:-(usi लड़के से) यहाँ इसी बुलिडोंग में और भी असला पड़ा हुआ होगा. वो कहाँ मिलेगा.

वो लड़का:- सर 2ंद फ्लोर पर रूम no 26 में वेपन पड़े हुए हैं.

विजय:- और यहाँ का जो दूर अभी हमने बंद किया है. उसके इलावा अंदर आने के और कितने रास्ते हैं.

वो लड़का:- सर इस बिल्डिंग में आने के लिए कई रस्ते हैं.

विजय:- तो अगर हम किसी को अंदर न आने दें तो. ऐसा हम कैसे कर सकते हाँ.

लड़का:- सर इस के लिए आटोमेटिक सिस्टम नै है यहाँ पर. उसके लिए आपको खुद hi कोई स्ट्रगल करनी पड़ेगी..

राजा और उदय मुझे इन्फो लेते देख क्र चुप हो गए..

विजय:- उदय तुम जल्दी से ऊपर जा के देखो जो भी लॉन्ग रेंज गन्स दिखें. ले आओ. और शंकर को भी घसीट क्र यही लेकर आओ. हमें एक पूरा फ्लोर अपनी कस्टडी में लेना होगा. पूरी बिल्दोंग को हम अपने अंडर नहीं कर सकते.

उदय के साथ राजा भी चला गया....

विजय:- फर्स्ट फ्लोर को तो हम टोटल अपने अंडर कर सकते हैं. अगर हम न चाहे तो कोई फर्स्ट फ्लोर पर नै आ सकता. मैं जो सोच रहा हूँ. वो सही है या गलत. तुम अपने हिसाब से बताओ.

लड़का:- सर ये आपने सही सोचा है..

विजय:- ok अब्ब एक बात और बताओ. आज यहाँ एक लड़की लाइ गई है, वो कहाँ है.

लड़का:- सर वो यहाँ से बेसमेंट में ले जाए गई थी.

विजय:- तो उसे लाने क लिए हमें वही दोनों रास्तों में से एक को चूसे करना पड़ेगा.

लड़का:- जी सर...

मैं सोचने लगा ये सिचुएशन नेहा के लिए खतरनाक है. कही कोई भागते हुए उसे कोई नुकसान न पोहंचा दे...

विजय:- यहाँ तुम्हारे पास प्रेम और धर्मेश की फोटो तो सेव होगी hi. वो मुझे दिखाओ.

एक लड़के ने मुझे फ़ौरन hi प्रेम और धर्मेश की फोटो दिखा दी. उनके साथ एक लड़की भी थी.

विजय:- ये लड़की कौन है..

लड़का:- सर इसका नाम जूली है. ये शंकर प्रेम और धर्मेश की पर्सनल रखैल है, और एक फाइटिंग स्पेशलिस्ट भी है.

इतनी देर में सबब hi आ गए.. शंकर को देख कर वो चरों लड़के डर गए.

उदय:- अरे इस से दररने की क्या ज़रूरत है. ये अब्ब किसी काम का नहीं रहा.

वजिजय:- उदय वेपन में क्या कुछ मिला है..

उदय ने मुझे एक बैग दिखाया. और मैं वो बैग देखने लगा..

उदय:- विजय और भी बोहत कुछ पड़ा हुआ था. सो मैं यही इस वक़्त उठा पाया...

मैंने बैग देखा तो उसमे एक स्नाइपर गन थी. और उसकी 100+ बुलेट्स भी थीं...

कुछ और भी गन्स थीं. लेकिन माइए स्नाइपर ले क्र बैग रख दिया...

तुममे से कोई ये स्नाइपर गन चला सकता हिअ..

तीनो hi:- नहीं. चला तो सकते हैं लेकिन ये हमसे कण्ट्रोल नहीं होगी..

vijay:-(shankar को देख कर) पहले इसे एक्सपिरे kardo.fir कुछ और करते हैं.

मेरी बात सुनकर उदय ने फ़ौरन hi शंकर के दूसरे पेअर का घुटना भी तोड़ दिया. अब्ब शंकर हमेशा के लिए एक्सपिरे हो गया था.

फिर उदय ने शंकर के सर्र पर मार कर उसे लम्बा सुला दिया....

विजय:- अजय नेहा यहाँ है. और उदय तुम जल्दी पहले वहां जा के नेहा के लिए कुछ करो. इससे पहले क प्रेम और धर्मेश कोई प्लान बना लें.

तब्ब तक्क किसी को तुम्हारे आस पास फटकने नहीं दूंगा... और इस काम के लिए तुम्हारे पास 10 मिंट हैं...

मैंने दूसरे रस्ते की तरफ इशारा कर diya.jo बेसमेंट में जाता था...

vijay:-(ladke से) इस बेसमेंट में कितने गुंडों के होने का ामकान है..

लड़का:- जिस हिसाब से यहाँ स्क्रीन पर जो दिख रहे हैं. उस हिसाब से सारा बेसमेंट hi खली होगा ........

विजय:- राजा तुम जीतू के साथ खिड़कियों से जितने मार सकते हो. एक एक करके मारते जाओ. और सीलेंसर लगी राइफल का उसे करना. इससे से किसी को कम् hi तुम्हारी लोकेशन का िद्या hoga.....(ladko से) और तुम किसी किसम की हुशियारी मैट करना..

जीतू:- विजय हम पास में hi हाँ... तुम टेंशन मत लो

मैंने स्नाइपर uthaai,bullet बैग भी साथ में लिया. और उसी फ्लोर के दूर की तरफ जाने लगा जहाँ से बेसमेंट की तरफ जाने का रास्ता कुछ करीब था..

अजय भी जाना चाहता था... लेकिन उसे मैंने रोक दिया..

बेसमेंट में जाना तो मैं चाहता था... लेकिन स्नाइपर किसी से नहीं चलने वाली थी.

मुझे कुछ याद आया..

विजय:- राजा उस लड़के से पूछो क जूली बेसमेंट में तो नहीं नै.

राजा:- जूली कौन है..

विजय:- है तीनो की मुश्तर्का रखैल.....

राजा ने लड़के से पुछा.......... और राजा ने मुझे बता दिया..

जूली इस वक़्त प्रेम और धर्मेश के साथ थी......

मुझे फिर कुछ याद आया और मैं उदय को लेकर वापिस आया...

विजय:- (चरों लड़कों से) तुम कह रहे थे. क बेसमेंट में जाने के दो hi रास्ते हाँ.

चरों:- जी सर..

विजय:- ये कैसे हो सकता है. क इसी पैलेस क अंदर से बेसमेंट में जाने का रास्ता न हो.... के शंकर बेसमेंट में जाने के लिए इतनी दूर जाता होगा..

वो चरों hi नज़रें चुराने लगे...........

उदय ने एक के मोहन में गन दाल दी.....

राजा:- इसका मतलब है ये हमारे पीछे प्रेम और धर्मेश को कोई संस भी भेज सकते हाँ..

विजय:- तुम सबब को ज़िंदा छोड़ क्र मैंने गलती की है. हम खुद hi सबब करलेंगे. तुम्हारा ज़िंदा रहना ज़रूरी नहीं है..

विजय:- उदय इनसे पूछो क नेहा कहा है. ये हमें उस रास्ते भेज कर किसी जाल में उलझना चाहता था... मैं तब्ब तक्क स्नाइपर का उसे करके जितने हो सके, उतना को मारते हूँ. अब्ब बोहत टाइम लग गया है.. तुम तीनो पहले इनके पास से जो कुछ भी है. वो निकल लू..

मैंने फिरसे स्नाइपर लिए हुए hi फ्लोर के मैं दूर के पास जाने लगा..

उदय और राजा ने आते हुए इस फ्लोर के सबब hi दूर बंद कर दिए थे.

और अब्ब कोई भी हमारे फ्लोर ार नहीं आ सकता था....

मैं दूर के पास पोहंचा और दूर खोल कर पीछे हट गया..... राइफल की गोलियों की आवाज़ फिरसे गूंजने लगीं. लेकिन मैंने पहले hi खुद को सेफ कर लिया था..

मैं पीछे हट कर हाल के एक पिलर के पीछे गया. और वही से दूर से बहार नज़र आने वाले गुंडे को निशाना बनाने लगा...

स्नाइपर गन छोटी थी और मज़गीने वाली थी. स्पेशल नहीं थी. लेकिन 500 मीटर तक्क के लिए बेस्ट थी. और यहाँ पूरे पैलेस में जहाँ चाहता किसी को भी उदा सकता था....

मैंने सामने दिखने वाले एक गुंडे के सर्र का निशाना लिया और फिर ट्रिगर दबा दिया.. स्नाइपर गन की आवाज़ hi बोहत होती है. और इसे चलने के लिए बोहत पावर भी चाहिए होती hai.aur इसे कण्ट्रोल भी करना इजी नहीं है..

लेकिन मेरे लिए ये एक पिस्तौल के बराबर थी.

स्नाइपर गन से निकलने वाली गोली सीधे जेक गुंडे के सर्र में लगी और उसका आधा सर्र hi उड़ गया......... उसके पास खड़े हुए गुंडे हैरान रह गए. वो सोच भी नहीं सकते थे, इतनी दूर से परफेक्ट निशाना भी लगाया जा सकता है. वो सोचते hi रहे और मैंने हर 2 सेक् के बाद एक के बाद एक करके 8 गुंडों के सर्र hi उदा दिए..

स्नाइपर की वजा से उड़ने वाले सर्र को देख कर गुंडों में हां हां कार मच गई.

सबब hi पागलों के जैसे छुपने के लिए जगा ढूंढ़ने लगे.. भागने वाले भी अपने

साथ एक एक गोली स्नाइपर की लेते गए...

दो मिंट में hi मैंने दो मैगज़ीन खली कर दिए.....

अब्ब सामने से कोई नहीं दिख रहा था..

विजय:- राजा. सामने लगे स्क्रीन्स पर देखो पैलेस के सामने कितने बाकी हाँ.

जीतू बोलै:- अब्ब जैसे तुम निशाने लगा रहे हो. किसी न माँ दुदानी है सामने खड़े रह के..

'

जीतू की बात सुन के हम टीनू hi हस्स दिए...

मैंने जा कर मैं दूर बंद किया... और फिरसे वापिस तीनो के पास गया..

उदय ने लड़के को दर्रा के रखा हुआ था.... वो लड़के गुंडे नहीं थे. लेकिन शंकर के डर से सबब hi हमें सही से नहीं बता पाए थे..

विजय:- अब्ब तक की तुम चरों की सभी बातें गलत निकली हाँ.. अब्ब एक बात और बताओ. क जिस फ्लोर पर हम हाँ. क्या ये हर लिहाज़ से सेफ है...

उदय:- हामरे पास टाइम नहीं है और अगर किसी ने सही नहीं बताया तो एक सेक् में एक मरेगा...

चारूं:- नहीं यहाँ इस पैलेस में कोई भी ऐसी जगा नहीं है. जहाँ तुम सेफ रह सको..

उदय:- तो फिर पहले क्यों नहीं सही बताया.......

विजय:- राजा जीतू तुम दोनों कट्रोल रूम में आने वाले सभी रास्ते अंदर से बंद करो...

दोनों ने hi जल्दी से सबब दूर बंद कर दिए........

विजय:- उदय इसने नेहा क बारे में क्या बताया....

uday:-wo वही है लेकिन प्रेम और धर्मेश भी वही हाँ. और जूली भी वही है..

मैं उदय की बात सुन कर स्क्रीन्स को देखने लगा...

अब्ब तक्क पैलेस के बहार पुलिस भी आ गई थी......

लेकिन वो चाह कर भी अंदर नहीं घुस सकती थी. और आईएनएस रणजीत ने पीछे के रास्ते पर भी अपना होल्ड जमा लिया था. अब्ब इस पैलेस से कोई भी जा नहीं सकता था.

विजय:- (लड़के से) अब्ब इस बिल्डिंग में तुम्हारे हिसाब में कितने गुंडे हैं. और ऊपर वाले फ्लोर पर अभी कोई आया या नहीं. अगर वहां कोई भी हिडन सीएएम लगे हुए हाँ तो उसे यहाँ स्क्रीन पर दिखाओ लेकिन अब्ब देर मैट करना......

मैं समझ गया था. क यहाँ कुछ तो ऐसा है. जो दिख नहीं रहा. और हिडन सीएएम को कभी कभी hi उसे में लाया जाता होगा... इसलिए हमें ये सबब देख नहीं पाए. वर्ण शनकर इतना भी चुटिया नहीं था. क अंदर की सुरक्षा के लिए कुछ न करता..............

ज़रूर बेसमेंट से निकल कर प्रेम और धर्मेश ऊपर के किसी फ्लोर में होंगे...

वो ऐसे hi तो नहीं यहाँ से भाग सकते ........

यहाँ उसके बहार जाने के लिए भी कोई ख़ास hi रास्ता होगा. जिस रास्ते से मैं अंदर आया था. वो था गुंडों के लिए था..

शंकर प्रेम और दाहरमेश बाहर जाने के लिए कोई और hi रास्ता उसे करते होंगे...

साला सबब सोचते हुए दमाग चकराने लगा था.......... शंकर के पैलेस में घुस कर उसे मरने का प्लान कितना टफ था..

इतने दमाग के घोड़े दौड़ने पद रहे थे.

एक हिसाब से ये शनकर प्रेम और धर्मेश की रियासत थी और यहाँ बोहत कुछ ऐसा होगा, जो आम गुंडे नहीं जानते. कण्ट्रोल रूम में जो लड़के थे. वो कई रास्ते जानते थे.

तो ज़ाहिर है, 2-4 रस्ते ऐसे भी होंगे जो तीनो पार्टनर्स के इलावा कोई नहीं जनता.

मतलब अगर प्रेम और धर्मेश ये जुंग हार गए तो यहाँ से भागना दोनों के लिए मुष्किल नहीं होगा .......

सबब सोचते हुए मैंने इधर उधर देखा और एक चेयर देख कर उसपर बैठ गया.

साला दमाग का दहीए बनने लगा था..........

विजय:- जीतू यार यहाँ पानी देख कर एक गैस मुझे पीला दो....




*********************************************************************************




 
थैंक्स..!!

सही कहा आपने.. शंकर प्रेम और फर्मेश ने सैलून लगा दिया अपने साम्राज्य को खड़ा करने में .. विजय एंड अपार्टय को बोहत hi ज़यादा म्हणत करनी पड़ेगी..

पुलिस भी आ गई.. लेकिन पुलिस के लिए भी अंदर घुस कर मदद करना मुमकिन नहीं है. पैलेस कोई भी हो. इक जाल hi होता है.. और वैसे भी इस पैलेस में गुंडों की इक फ़ौज भी है. और पुलिस वाले तो सालों गन्स को चलाये बिना उसे अपने गले में लटकाये फिरते रहते हाँ..........
 
Back
Top