Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 6 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट ::::: 32

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लोकेशन: पूजा दीदी हाउस


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रात के 12 बजने वाले थे और पूजा दीदी और रानी कमरे में टहल रही थी दोनों बेहद परेशां थी. पूजा दीदी ने विजय को मिशन पर भेज तो दिया था. लेकिन विजय उस मिशन में सक्सेस्फुल हो कर lot'ta है या फिर कहीं कुछ और गड़बड़ न हो jaye....yahi सोच रही थी..... जैसे hi कमरे में लगे एक सस्ते से क्लॉक ने 12 बजने का सिग्नल दिया तो रानी और पूजा दीदी के चेहरों पर पसीने की बूँदें चमकने लगीं.

पूजा दीदी जैसी भी थी लेकिन उनको मेरी परवा अपनी जान से भी बढ़ कर हो चुकी थी. पूजा दीदी और मेरे दिल भले hi दोनों के जिस्म में अलग अलग धड़क रहे हूँ. लेकिन थे दोनों के दिल hi एक दुसरे के जिस्म में. पूजा दीदी को बोहत hi चिंता सत्ता रही थी. हर गुज़रते इक इक लम्हे में पूजा दीदी अंदर hi अंदर खुद में कुछ kat'ta हुआ महसूस कर रही थी. जैसे वहां विजय को अगर कुछ हुआ तो यहाँ पूजा दीदी को भी कुछ हो जायेगा.

रानी भी सबब जानती थी लेकिन वो पूजा दीदी की तरह अंदर से इतनी स्ट्रांग नहीं थी. रानी से टहलना मुश्किल होने लगा उसे खुद के पैरों में जान hi नहीं महसूस हो रही थी. 12 बजे के बाद 4 hi मिंट में hi रानी उस टूटे फूटे बीएड पर बेथ गई और अपने सर्र को पकड़ कर खुद को शांत करने में लग गई. लेकिन शान्ति मिलेगी कैसे. उन सबब का एक hi तो सबसे चाहता विजय hi था. जो इक खुनी खेल खेलने के लिए गया हुआ था. कैसे वो खुद को शांत रख पाती.

पूजा दीदी अपने हाथों की उँगलियाँ मरोड़ते हुए कमरे में टहल रही थी. 12 से ऊपर कुछ मिंट गुज़र चुके थे. कभी वो सोचती 'कॉल करके पूछ hi ले'

""कुछ हुआ क्या" लेकिन फिर खुद को संभाल लेती क नहीं इस टाइम कॉल करना सही नहीं. पता नहीं वो किश सिचुएशन में हूँ और मेरे कॉल करने से उनका मंद डाइवर्ट न हो जाये और कुछ गड़बड़ न हो जाये. इसलिए पूजा दीदी ने कॉल करने से खुद को रोक hi लिया...... 12:25 पर पूजा दीदी की हालत बोहत hi ख़राब होने लगी. us'se रहा नहीं गया और फिरसे मोबाइल को हाथ में ले कर कॉल करने hi वाली थी. क पूजा दीदी के मोबाइल की घंटी बजने लगी. पूजा दीदी ने नंबर देखा तो हैरान रह गई. "दीक्षा आंटी इस टाइम क्यों कॉल कर रही है." "कहीं विजय से रिलेटेड कोई बात तो नहीं" यही सोच कर पूजा दीदी ने कॉल पिक की और मोबाइल को कान से लगा कर आंटी को hello bola.udhar से hello सुनते hi दीक्षा आंटी "पूजा दीदी को सबब बताने लगी" जो दीक्षा आंटी को हर्ष चौहान ने बताया tha.sabb सुन कर पूजा दीदी धड़ाम से वही गिर गई.

रानी पूजा दीदी को कॉल सुनते देख रही थी और फिर अचानक से पूजा दीदी को गिरते देख कर बीएड से उठ कर भागी और पूजा दीदी को पकड़ कर उठाया. 1 hi मिंट में पूजा दीदी ने खुद को संभाल लिया. पूजा दीदी की आंख से आंसू बहने लगे लेकिन पूजा दीदी ने खुद को काबू में करके अपनी आँखों से निकलने वाला पानी साफ़ किया और रानी को बोलै क सबब को उठाये. रानी ने पूछा क्या हुआ तो पूजा दीदी ने रानी घूर कर देखा और कहा




"जाआआअऊऊऊओ पहली सबब को उठाओ. फिररर बताती हूँ."




रानी भाग कर कुछ hi देर में सबब को उठा कर ले आई.

तब्ब तक्क पूजा दीदी ने खुद को संभल लिया था और फिर एक कॉल मिलाई और 2 टैक्सी भेजने को कहा.

सबब पूजा दीदी के कमरे में पोहंचे तो सबब पूजा से पूछने लगे क क्या हुआ है. तो पूजा दीदी ने बता दिया. क अभी दीक्षा आंटी का फोन आया था. विजय को चोट लगी है. तो हम सबब वही जा रहे हैं.

कुछ देर में 2 टैक्सी पूजा दीदी के घर के बहार आ कर रुकीं और फिर सबब उसमे बेथ कर हर्ष चौहान के घर की तरफ निकल गए......


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विजय को गोली लगी है..........


इस बात का पता हर्ष चौहान के इलावा किसी को नहीं था. कुछ hi मिनटों में हर्ष चौहान अपनी दूसरी कोठी पर पोहंच गया. उसके पोहचने से पहले hi राजा और बाकी सबब विजय को ले कर कोठी पर पोहंच चुके थे. gate-keeper ने गाडी देख कर hi गेट खोल दिया था. क्यूंकि हर्ष चौहान ने पता चलते hi अपनी इस कोठी पर कॉल करके राजा और बाकी सबका बता दिया था...

जब्ब raja,jeetu,uday और अनुपम कोठी पर पोहंचे तो सबब के होश उड़े होये. पहले तो विजय को एक रूम में ले जार कर लिटाया गया..... सबब एक दुसरे का मोहन hi देख रहे......... राजा "उदय जीतू और अनुपम" को घूर रहा था. ये सबब इन तीनो की गलती से hi हुआ था. लेकिन राजा ने तीनो को कुछ नहीं कहा. बास घूरता hi रहा.

कुछ hi देर में डॉक्टर भी पोहंच gaya.doctor के आने का पता चलते hi सभी ने फिरसे अपने चेहरे कवर कर लिए. अब्ब हर किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता था. अज्जू का मर्डर कोई मामूली बात नहीं थी. विजय का चेहरा पहले से hi कवर था.

राजा डॉक्टर को विजय के पास ले कर गया. विजय उल्टा लेता हुआ था. डॉक्टर ने कोई भी बात किये बगैर विजय का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया. सभी के कवर्ड चेहरों को देख कर डॉक्टर के मैं में सवाल तो बोहत आये लेकिन पूछने की हिम्मत नहीं कर पाया.

हर्ष चौहान से रिलेटेड जो थे ये सबब. इस लिए डॉक्टर छुप hi रहा. कुछ hi मिंट में हर्ष चौहान भी पोहंच गया.

हर्ष चौहान की ऑंखें मारे ग़ुस्से के उबाल रही थी. अभी साड़ी बात उसे पता नहीं थी.... लेकिन विजय की कंडीशन को देख कर वो बोहत hi ग़ुस्से में आ गया था...... हर्ष चौहान सभी लड़कों को घूर रहा था. विजय की तरह राजा के भी कपडे खून में रेंज हुए थे. राजा ने हर्ष चौहान को बहार चल कर कुछ बात करने को बोल दिया. हर्ष चुहान राजा को ले कर एक दुसरे रूम में चला गया...




रूम में एंटर होते hi हर्ष चौहान बोलै....

हर्ष :- ये सबब क्या है ?????????




राजा :- चौहान सर: ये सबब विजय और पूजा दीदी का hi एक मिशन था. वर्ण हमारा अभी ऐसा करने का कोई मैं नहीं था. लेकिन विजय नहीं माना और फिर ये सबब हो गया.........

हर्ष चौहान पूजा दीदी का नाम सुनते hi शांत हो गया.... वो भी ये जानता था क पूजा दीदी कुछ भी ऐसे hi तो नहीं करेगी. अभी विजय कुछ भी करने के काबिल नेह हुआ है. ज़रूर बात hi कुछ ऐसी होगी..... फिर वो बोलै

हर्ष :- मुझे पूरी बात बताओ शुरू से लेकर आखिर तक.

फिर राजा ने रीना और उसकी फ्रेंड से ले कर सबब बनता शुरू कर दिया. जिसे सुन कर हर्ष चौहान के चेहरे पर उतार चढ़ाओ आने लगे. राजा ने जब अपनी बात पूरी की....

तो हर्ष चौहान अपने माथे को उँगलियों से कुरेदने लगा. बात बोहत hi ज़यादा khatar-naak हद्द तक हो गई थी. धर्मेश का नाम सुन कर hi हर्ष चौहान को ग़ुस्सा भी आ रहा था. वो दर्रा तो नहीं था. लेकिन उसे ग़ुस्सा इस बात पर आ रहा था. जब्ब कोई ऐसी बात हुई थी तो us'se मश्वरा क्यों नहीं लिया गया.

पूजा दीदी पारर तो हर्ष चौहान ग़ुस्सा कर नहीं सकता था. पूजा दीदी और विजय ने जो भी किया था वो अपनी जगा सही भी है. लेकिन ऐसे थोड़ी न होता है.

ऐसे काम करने के कई तरीके होते हैं. खुद को खतरे में डालना ऐसी भी क्या टुक्क थी भला.

हर्ष चौहान का ग़ुस्सा तो पूजा दीदी का नाम सुन कर hi उड़द गया था. अब्ब विजय जितना भी किसी का चाहता हो पूजा दीदी से बढ़ कर तो हो नहीं सकता था. जब खुद पूजा दीदी इस सबब में इन्वॉल्व हो वहां हर्ष चौहान क्या कर सकता था....

लेकिन फिर भी एक काम तो अच्छा हुआ जो अज्जू मारा गया. कुछ तो शहर की गंदगी कम् होगी अज्जू के मरने से........

कुछ देर बाद हर्ष चौहान ने राजा को कपडे बदलने को बोल दिया. यहाँ पर कपडे तो थे लेकिन राजा के साइज से अलग थे लेकिन उन खून लगे कपड़ों से छुटकारा भी ज़रूरी था. इसलिए राजा ने वो कपडे पेहेन लिए.

हर्ष चौहान फिरसे विजय वाले रूम में गया तो डॉक्टर अपने काम में लगा हुआ था. हर्ष चौहान ने विजय को देखा. तो विजय उल्टा लेता हुआ था और उसकी शर्ट को डॉक्टर ने फहाद दिया था. विजय की पीठ से थोड़ा ऊपर कंधे के नीचे राइट साइड में गोली लगी थी. विजय के मज़बूत जिस्म की वजा से गोली ने खून तो काफी निकला था लेकिन खतरा की कोई बात नहीं थी. हर्ष ने विजय को देख कर एक लम्बी सांस ली और सोफे पर बेथ गया डॉक्टर ने गोली निकल दी थी. डॉक्टर अब्ब विजय के ज़ख़्म को एंटीसेप्टिक से क्लीन कर रहा था. कुछ देर बाद डॉक्टर विजय के ज़ख्म को अच्छे से साफ़ कर के स्टिचिंग करने लगा. डॉक्टर के माथे पार्स पसीने की बूँदें टपक टपक कर गिर रहीं थी. जिस से पता चलता था क वो अपने काम में कितना मगन है.

कुछ hi देर में स्टिचिंग करके डॉक्टर ने विजय के ज़ख़्म की ड्रेसिंग शुरू कर दी. कुछ दिक्कत हुई लेकिन jeetu,uday और अनुपम की हेल्प से डॉक्टर ने विजय की ड्रेसिंग करदी....

डॉक्टर अपने काम से फ्री हुआ तो हर्ष चौहान डॉक्टर के साथ बहार को चल दिया.

हर्ष :- "डॉक्टर इस बात को अपने तक्क hi रखना किसी को पता न चले."

फिर हर्ष चौहान ने डॉक्टर को नोतून के 2 बंडल दिए जिसे देख डॉक्टर खुश हो गया. और हर्ष चौहान से हाथ मिला कर चला गया.......... डॉक्टर की कोई टेंशन नहीं थी. ये हर्ष का बोहत hi पुराण जानने वाला था.......

हर्ष चौहान ने राजा एंड फ्रेंड्स को एक रूम में सोने को बोल दिया लेकिन किसी ने हर्ष चौहान की बात नहीं maani........raat ऐसे hi गुज़री सबब खामोश hi थे.

किसी ने एक दुसरे से बात नहीं की. सबब की नज़र सिर्फ विजय पर hi थी....

सूबा होते hi हर्ष चौहान ने अपने घर से एक बड़ी गाडी मंगवा ली थी. जिसमे विजय को अपने घर लेजाने में कोई परेशानी न ho........phir हर्ष ने राजा और बाकी तीनो को टाउन वापिस जाने को बोल दिया......

वो जाना तो नहीं चाहते थे लेकिन हर्ष चौहान ने उन सबब को भेज दिया क टाउन से सबब के ग़ायब रहने से किसी को कोई शक न हो जाये. हर्ष चौहान की ये बात भी सही थी इस लिए राजा ने हाँ बोल दिया. फिर विजय को गाडी में शिफ्ट किया गया. विजय अभी तक बेहोश hi था शायद डॉक्टर ने ुस्य नींद का इंजेक्शन भी लगा दिया tha.kuch देर बाद राजा भी तीनो को ले कर टाउन की तरफ निकल गया और हर्ष चौहान दीक्षा को बता कर विजय को ले कर अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ गया...


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जब्ब पूजा दीदी सब के साथ हर्ष चौहान के घर पोहंची. तो दीक्षा आंटी ने पूजा दीदी और बाकी सब को रइवे किया. सबब के आने की आवाज़ सुन कर दोनों बहने नताशा और शीतल भी उठ गई थी. वो जब्ब नीचे आएं तो इस टाइम पूजा दीदी और बाकी सबब को देख कर हैरान हुई. लेकिन जब्ब उन दोनों को विजय नहीं दिखा और बाकी सबब के चेहरे पर परेशानी देखि तो भाग कर पूजा दीदी के गले लग कर पूछने लगी. "क्या हुआ है जो आप सबब यहाँ और ऐसे परेशान हाल... सबब ठीक तो है न"

पूजा दीदी :- हाँ नताशा सबब ठीक भी है और नहीं भी ...

दोनों :- मतलब क्या है इस बात का और विजय भाई कहाँ हैं. आप सबब ए हैं तो वो क्यों नहीं ए. मुझे कुछ सही नहीं लग रहा...

पूजा दीदी :- देखो पहले आराम से बेथ जाओ फिर बात करते हैं......

दोनों बहने सबब के साथ मिलकर बेथ गई. दीक्षा आंटी बोली.

दीक्षा आंटी :- मैं सबब के लिए कुछ ले कर अति हूँ.

पद्मा आंटी :- रहने दो बहन इस वक़्त ज़रुरत नहीं है. जब्ब ज़रुरत होगी तो हम खुद hi कह देंगे. आप हमारे पास hi बेथ जाएँ.

नताशा :- पूजा अब्ब बताओ क्या हुआ hai.(sabb नताशा की बात सुन कर पूजा दीदी की तरफ देखने लगे... और पूजा डीड दीक्षा आंटी की तरफ देखने लगी.

नताशा :- पूजा क्या हुआ आप माँ की तरफ क्यों देख रही हैं....

पूजा दीदी:- मुझे आंटी ने hi फोन करके बताया था क विजय को चोट लगी hai.is लिए हम सबब यहाँ आ गए हैं.......

पूजा दीदी ने अपने घर वालों को घर में hi सबब बता दिया था" जिसे सुन कर सभी के होश उड़े हुए थे.

अब्ब सबब दीक्षा आंटी की तरफ देखने लगे...

दीक्षा आंटी :- मुझे भी हर्ष ने इतना hi बताया है क विजय बीटा को चोट लगी है. और पूजा बेटी को बताने का बोल कर चले गए. अब्ब वो आएंगे तो असल बात का पता चलेगा.

सबब टेंशन में गुम्म सोच में पद गए थे और विजय को ले के बातें करने लगे.

लेकिन पूजा दीदी ऊपर से खुद को शांत दिखा रही थी लेकिन उनके अंदर तूफ़ान आया हुआ था. अगर विजय कम् ज़ख़्मी होता तो टाउन आता यहाँ आने की क्या ज़रुरत थी. ज़रूर कुछ ज़यादा हुआ है विजय के साथ. और पूजा दीदी विजय को ले के ज़यादा सोचना भी नहीं चाहती थी. क्यूंकि वो अंदर से टूटना नहीं चाहती थी.

अगर वो खुद hi टूट गई तो बोहत कुछ बिखर जायेगा. इस लिए वो खुद को अंदर से मज़बूत बनाने में लगी हुई थी. सबब कुछ न कुछ बोल रहे थे लेकिन पूजा दीदी खुद से hi लड़ रही थी. अपने घर में hi जो ाआंसु उनकी आँखों से बहे थे. उनके बाद पूजा दीदी ने खुद पर बोहत कण्ट्रोल रखते हुए अपने आंसू नहीं बहने दिए थे. वर्ण उनका दिल कर रहा क वो दहाड़ें मार मार कर रोये. लेकिन is'se हासिल कुछ होने वाला था नहीं. आगे चल के विजय के साथ और भी पता नहीं क्या कुछ होगा. इस लिए ये सबब सोच पूजा दीदी कुछ को अंदर से जितना हो सके मज़बूत बना रही थी. और सोच रही थी क विजय के सामने भी अपने आंसू नहीं बहने देगी. वर्ण विजय कमज़ोर पद जायेगा. नहीं मैं विजय को कमज़ोर नहीं होने दूँगी. विजय को अभी बोहत कुछ बनना है . वर्ण माँ और बहनो को कैसे वहां से लाएगा....

ऐसे hi बातों में और पूजा दीदी की सोचों में वक़्त गुज़रता चला गया और सूबा की रौशनी फैलने लगी.

लेकिन अभी तक किसी ने कुछ भी नहीं खाया पिया था.......

दीक्षा आंटी के नंबर पर हर्ष चौहान की कॉल आई तो दीक्षा आंटी कॉल पिक कर हर्ष चौहान की बात सुनने लगी...

सबब दीक्षा आंटी को hi देख रहे the.......call एन्ड होने के बाद सबब ने पूछना शुरू कर दिया.... तो दीक्षा आंटी ने सबब को बता दिया क हर्ष और विजय आ रहे हैं कुछ देर में .........

25 मिंट बाद बहार से गाड़ी आने की आवाज़ सुन कर सबब भागते हुए बहार की तरफ जाने लगे. तो पूजा दीदी ने सबब को रोक दिया. और बोली...



पूजा दीदी :- ""सबब पहले मेरी बात सुन लें कोई भी विजय के सामने आंसू नहीं बहाये गए. वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. सबब के आंसू विजय को कमज़ोर न बना दें. विजय को अपना मक़सद हासिल करने के लिए चट्टान बनना है. अभी तो उसे कुछ भी नहीं हुआ hai..aise hi na-jaane और कितने hi घाव विजय की राह में आते रहेंगे. और क्या आप सबब हर्र बार विजय को ज़ख़्मी देख कर रट रहेंगे? """



सबब पूजा दीदी की बात सुन कर हैरान रह gaye.....sabb ऑंखें पहाडे पूजा दीदी को देख रहे थे.

पूजा दीदी ने पता नहीं कैसे खुद को संभल कर सबब को ये बोल दिया था. सबब तो यही समझ रहे थे. रोने वालों में सबसे ऊंची आवाज़ पूजा दीदी की hi होगी......

गाडी अंदर आ कर रुकी और फिर विजय को कोठी में मौजूद एक रूम में शिफ्ट किया गया.......... लेकिन काई चेहरे अभी भी आंसुओं से टर्र थे. वो तो ग़नीमत था क विजय अभी बेहोश था. वर्ण पता नहीं पूजा दीदी सबब का क्या हाल करती.............

सभी विजय वाले रूम में hi थे और उसकी हालत देख कर सभी के दिल में दर्द उठने लगा था. लेकिन पूजा दीदी के आर्डर ने सबब को रोका हुआ था वर्ग वो खुद को रोने से नहीं रोक पाती. औरतों का काम hi रोना होता है...........



पूजा दीदी उठ कर दुसरे कमरे में मौजूद बाथरूम में चली गई और खुद को सामने लगे हुए आईने में देखने लगी. फिर अपने सर्र से दुपट्टा उतार कर मोहन में ठूंसा और कब्ब के रुके हुए आंसू बहाने लगी. कुछ देर आंसू बहाने के बाद पूजा दीदी ने फिरसे खुद को आईने में देखा और फिर अपने चेहरे को अच्छी तरह से धूने के बाद फिरसे आईने में देखा. और एक ज़बरदस्ती की स्माइल अपने चेहरे पर ला कर देखने लगी.

अच्छा मज़ाक़ है खुद से आंसू बहा कर खुद के चेहरे पर स्माइल लाना....

पूजा दीदी ने खुद को शांत कर लिया था अब्ब वो आंसू नहीं बहाना चाहती थी.

अब्ब विजय की खैर नहीं थी. जो पूजा दीदी ने खुद को शांत कर लिया था और अब्ब पूजा दीदी ने तो पक्का विजय को उल्टा सीधा बोलना था.

"कहा था न जो भी करना अपना दमाग इस्तेमाल करके karna...agar इतना hi तुम्हारा दमाग काम करता है तो भूल जाओ अपनी माँ और बहनो"




मतलब एक बार तो विजय अपनी पूजा डीड की नज़रों में फ़ैल हो गया था. अब्ब देखते हैं. जब्ब विजय को होश आएगा. तो पूजा दीदी कैसे विजय की खबर लेती है.

पूजा दीदी फिरसे विजय वाले रूम में दाखिल हुई और विजय के होश में आने का इंतज़ार ाकरने लगी...... अब्ब तक्क सबब को hi पता चल गया था क विजय को गोली लगी है.




"विजय को गोली लगी है"




ये सुनते hi नरम दिल वालियों ने तो बिलकना hi शुरू कर दिया था. लेकिन पूजा दीदी के आर्डर की वजा से जिस का भी मैं होता रोने का. वो दुसरे कमरे में जा कर पूजा दीदी के जैसे आंसू बहा कर फिरसे विजय के कमरे में आ जाता था.


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आईएनएस रणजीत :- हाँ बोल गोटिया सूबा सूबा कैसे फोन किया है..

गोटिया :- सर वो विजय वाले मकान में कोई भी नहीं दिख रहा है.

आईएनएस रणजीत :- मतलब क्या है तुम्हारा. कहाँ चले गए सब के सबब. और तुम क्या झक्क मार रहे थे जो तुम्हे कुछ पता hi नहीं है..........

गोटिया :- सर मैंने कोई कसार नहीं छोड़ी थी. विजय के पीछे साये की तरह लगा हुआ था. अब्ब पिछले कई महीनो से जो जो हुआ मैंने सबब तो आपको बता दिया है. इस लिए थोड़ा सा सुस्त पद गया. अब्ब मुझे क्या पता था. क रात को सबब hi ग़ायब हो जायेंगे...

आईएनएस रणजीत :- तो नीचे कमरे में जो karaye-daar रहते हैं उनसे पोछना था न क वो कहाँ गए हैं....

गोटिया :- सर मैंने उनसे भी पूछा है लेकिन उनमे से किसी को भी नहीं पता. सबब यही कहते हैं क रात 10 बजे तक्क तो सभी यही पर थे..... उसके बाद वो कब्ब और कहाँ गए. उनको नहीं मालूम......

आईएनएस रणजीत :- गोटिया ये सबब तुम्हारी ग़फ़लत है. जल्द से जल्द पता लगाओ वो सबब कहाँ गए hain..........ye बोल कर रणजीत ने कॉल कट करदी.....

उसे ग़ुस्सा भी आ रहा था और विजय की चिंता भी सत्ता रही थी. इतने महीने हो गए थे. रणजीत को विजय का "bio-data" नहीं मिला था.




"""""""पता नहीं क्या था रणजीत के मैं में""""""""""




फिर कुछ सोच कर रणजीत अपने दोस्त पहलवान की तरफ को चल दिया...


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अपडेट ::::::: 33

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लोकेशन: अखाड़ा:

ins-ranjeet बैठा अपने दोस्त पहलवान को घूरे जा रहा था. लेकिन पहलवान के पास रणजीत की भी बात का कोई जवाब नहीं था..........

रणजीत ने आते hi pehlwan(jaggu) से पुछा था विजय के बारे में जो अभी तक आया नहीं था. पहलवान बेचारा हर्र बात से अनजान था वो कैसे रणजीत को कुछ बता पाटा क विजय आज क्यों नहीं आया.....

फिर रणजीत ने जो रात को अज्जू का मर्डर देखा था और फिर अपने दमाग में चल रहे सारे सवाल जग्गू के सामने रख दिए the.........reena का मूमल और अपने शक का इज़हार भी कर दिया कही विजय इस साब में तो नहीं शामिल हुआ है.....

और जग्गू बेचारा अपनी चीन को अपने राइट की उँगलियों से कुरेदता हुआ सोचे जा रहा था. वो क्या जवाब देता अपने दोस्त रणजीत को क विजय क्यों नहीं आया और अब्ब वो कहाँ है. और बाकी सारे घर वाले अचानक से कहाँ चले गए........ और ऐसा क्या हुआ होगा जो सबब के सबब अचानक से कहीं चले गए थे .......

रणजीत :- क्या हुआ जग्गू कोई जवाब नहीं है ना तुम्हारे पास..... लेकिन विजय का पता चलना बोहत hi ज़रूरी है. वर्ण .......... इसके आगे रणजीत क्या बोलता.. आगे का सबब hi तो जग्गू जानता था......

जग्गू के पास रणजीत को हौसला देने के इलावा कोई और ऑप्शन भी तो नहीं था. जग्गू ने अपने हाथ को रणजीत के कंधे पर रख दिया और दबाते हुए कहा बोलै.

"कुछ नहीं होगा विजय को और मैं उसे कुछ होने भी नहीं दूंगा "

"जितनी चिंता तुम्हें विजय को ले करके है उतनी मुझे न सही लेकिन है तो सही. विजय को कुछ हो मुझसे भी बर्दाश्त नहीं होगा. इतने महीनो से वो मेरे साथ है. अब तो वो मुझे भी अपने बेटे जैसा hi लगने लगा है. और उसके दर्द को मैं भी अपना hi दर्द समझता हूँ. अब्ब जल्द hi विजय के लिए कुछ और करना पड़ेगा. तुम चिंता मैट करो...."""

जग्गू रणजीत को हौसला दे रहा था लेकिन रणजीत को चैन नहीं आ रहा था....



पता नहीं ऐसा क्या था रणजीत के मनननननन में जो वो ऐसा रियेक्ट कर रहा था.

शायद आगे चल कर कुछ पता चल sakeeeeeeeeeeee..




अचानक से रणजीत के दमाग की बत्ती जाली और फिर वो जल्दी में जग्गू से मिलकर बहार निकला और किसी को फोन करने लगा...................


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लोकेशन: धर्मेश हाउस:

तीनो दोस्त मिल कर बैठे पीने में अपने ग़म गलत करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन ये ऐसा ग़म था जो किसी भी दारु से ख़तम होने वाला नहीं था....

सभी के सभी हरामज़ादे अज्जू के ग़म में बैठे थे. आज तक्क जिन जिनको इन तीनो ने मारा था. कभी उनके ग़म में बेथ कर दारु पि है क्या. अब्ब पता चल रहा है इन तीनो को जब्ब अपना भी कोई मारा जाता है तो कितना दर्द होता है......

धर्मेश के जैसी की हालत प्रेम और शंकर की तो हो नहीं सकती थी. उनका कौनसा भाई मर्रा था. भाई तो धर्मेश का मर्रा था. और धर्मेश के ऊपर ग़मों के पहाड़ टूटे हुए थे. पी पी कर जब्ब थक गया तो दारु से भरी हुई एक बोतल को उठा कर दीवार पारर दे मारी और खड़ा हो कर अपने दोनों दोस्तों को देख कर बोलने लगा..............

धर्मेह :- (धर्मेश नशे में लडखडे हुए बोलै) कैसे दोस्त हो तुम दोनों मेरे. अभी तक्क उस हरामी का पता hi नहीं चला सके. मेरे सीने में आग लगी हुई है. और अभी तक तुम दोनों के आदमियों में से कोई भी उस हरामी मादरचोद को ढून्ढ नहीं सका.

साड़ी रात तीनो दोस्त बेथ अपने आदमियों से राब्ते में रहे और शराब पीते रहे.

लेकिन कहीं से भी कोई सुराग़ नहीं मिल रहा था. शंकर लगा रहा साड़ी पीने में और अपने आदमियों को गालियां देने में....... लेकिन कहाँ से ढूँढ़ते वो अज्जू को मारने वाले को. अगर मिल जाता तो अब्ब तक्क उस की हड्डियां भी गल्ल चुकी होती.

शंकर और उसके आदमी इतने hi खतरनाक थे....

शंकर जैसा भी था लेकिन अपने दोस्तों के लिए कुछ भी कर जाता था. भले hi धर्मेश जितना दर्द उसे नहीं हुआ था. लेकिन उसे इस बात का ग़ुस्सा ज़यादा था क ऐसा कौन पैदा हो गया था. जिसने उसके पार्टनर के भाई और उसके दोस्तों को मार दिया. शंकर का ग़ुस्सा बढ़ने लगा लेकिन उसे खुद पर कण्ट्रोल प्रेम और धर्मेश से ज़यादा था. शंकर अक्सर शांत रहता था लेकिन अपने दुश्मन को ढून्ढ कर hi दम लेता था......

लेकिन अभी तक उसे कही से कोई भी क्लू नहीं मिल रहा था. उसके आदमी पागल कुत्तों की तरह पूरे दिल्ली शहर में पहले हुए थे.........

अब्ब विजय ने मिशन में चाहे कुछ भी न किया हो लेकिन गोली लगने के बाद भी उसने एक काम तो अच्छा कर hi दिया था. क किसी भी किसम का कोई निशान तक वहां नहीं रहने दिया था. साड़ी गेम 2 मिंट में hi ख़तम हो गई थी. और किसी का कुछ भी वहां नहीं रह गया था........ jis'se किसी को कोई भी इशारा मिल सकता.

हाँ अगर शंकर अपना दमाग लगा कर गाड़ी का रूट ढून्ढ ले तो कुछ हो सकता था.......

ऐसे hi कामों में माहिर था शंकर अब्ब देखते हैं शंकर आगे चल कर क्या करता है......... धर्मेश तो कब्ब का नशे और दुःख की एक्सट्रा दोसे की वजा से एक लम्बी नींद सो चूका था...... अब्ब बाकी बचे प्रेम और शंकर उनको क्या ज़रुरत थी जागने की......... वो भी धर्मेश की तरह नशे में तो थे hi वो भी लम्बी तान कर सो गए........... और तीनो के कुत्ते पूरे दिल्ली शहर में दनदनाते फिर रहे थे................... क्या ख़ाक इनके हाथ लगेगा..........

कभी कभी मास्टरमाइंड भी पकड़ा जाता है.......

तो कभी कभी अनादि भी बच निकलते हैं.......

शायद यहाँ भी कुछ ऐसा hi तुक्का लग जाये.....

अब्ब विजय, राजा एंड फ्रेंड्स बचते हैं या फिर फंसते हैं ये तो आने वाला वक़्त hi बताएगा.......... लेकिन sun'ne में आया है क किया हुआ कांड कभी छुपता नहीं..

अब्ब देखते हैं विजय, राजा एंड फ्रेंड्स का ये काण्ड कब तक्क छुपा रहेगा....

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लोकेशन: हर्ष चौहान हाउस:

08:00:ऍम


अभी तक विजय नींद में था हर्ष चौहान ने डॉक्टर से पूछ लिया था क विजय को कब्ब तक होश आ jayega.to डॉक्टर ने बता दिया था. क विजय को नींद का इंजेक्शन दिया गया था जिस की वजा से वो अभी तक नहीं उठा.... लेकिन अब्ब जल्द hi वो उठ जायेगा......

इसलिए सबब के दिलों की धड़कनें और माथे पर पसीने की बूँदें बढ़ती जा रही थी.

पूजा दीदी को छोड़ कर सभी गर्ल्स ने एक दुसरे के हाथ कपडे हुए थे लेकिन पूजा दीदी शांत थी. और सभी को घूर रही थी. मनो इस बात की सभी को आँखों hi आँखों में चितवनि दे रही हो क मुझसे बचना है तो मेरे आर्डर को फॉलो करना hi होगा वर्ण इस रूम का दूर उस तरफ है. जिसको जाना है वो जा सकता है. लेकिन गलती की कोई गुंजाइश नहीं है यहाँ पे. और अपने इमोशंस को बाथरूम में जा कर बहा आएं. यहाँ ऐसा कोई भी ऑप्शन नहीं है.

अब्ब कुछ hi टाइम रहता था विजय की नींद को टूटने में और सभी की ऑंखें बास विजय पर hi टिक्की हुई थी. और सोच रही थी क विजय के होश में आने के बाद क्या रिएक्शन देना चाहिए. अब्ब पूजा दीदी ने जो कहा था वो कैसे पॉसिबल हो सकता था. सभी गर्ल्स एंड वीमेन पूजा दीदी की तरह अंदर से स्ट्रांग तो नहीं बन्न सकती थी.

रूम में लगे वाल क्लॉक की सेकंड की सुई सभी के दिलों से जुडी हुई थी. और क्लॉक की टिक टिक के साथ साथ सभी के दिल में भी टिक टिक हो रही थी......

हर्ष चौहान और पूजा दीदी शांत थे. हर्ष चौहान को पूजा दीदी के होते कुछ और अभी सोचने की ज़रुरत hi नहीं थी.

और पूजा दीदी शांत दिख रही हैं. "कमाल है" पूजा दीदी अपने अंदर तूफ़ान छुपाये हुए thee..lekin चेहरे पारर से खुद को शो करवाने मेमाहिर लग्ग रही थी.. है ना कमाल की बात..........

और अब्ब जैसे hi पता चला क विजय के होश में आने का टाइम हो गया है. तो इसी के साथ hi पूजा दीदी की ऑंखें भी जलने लगीं. मतलब पूआज दीदी के मिशन में विजय कुछ नहीं कर पाया और विजय को इस का जवाब तो देना hi पड़ेगा. चाहे गोली एक लगे या दो..... मिशन फ़ैल नहीं हुआ तो क्या हुआ.



""तुम इस मिशन के हेड थे और तुम hi अपनी जान दो पर लगा ए.""


"यू अरे स्टुपिड विजय. तुम बोहत hi बड़े गधे हो जो लड़ते हुए भी नींद में चले गए थे. क्या ऐसे hi अपनी माँ और बहनो को बचाओगे. क्या ऐसे hi रेखा बाई के गुंडों से लड़ोगे तुम. तुम्हरी माँ और बहनो तुम्हरा वहाँ वेट कर रही हैं क na-jaane कब्ब तुम आओ गे और उन सबब को उस दलदल से निकाल कर ले jaaoge..aur तुम यहाँ रह कर गोली खा कर मरने जाए रहे हो... अगर मरना hi है तो पहले जा कर अपनी माँ और बहनो खुद hi अपने हाथो से मार do....us गन्दी दलदल में पल पल म्ररने से बेहतर है क तुम खुद hi उन्हें उसी दलदल में hi मारर दो.... अगर un-sabb को बचने का हौसला और हिम्मत अपने अंदर पैदा कर नहीं सकते......"

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जब्ब मेरी आंख खुली तो मैं लेफ्ट साइड के बॉल लेता हुआ था. और मेरे पीछे मुझे तक लगा कर रानी बैठी हुई थी. मेरी आंख खुलते देख सबब के मुरझाये हुए चेहरों पारर आशा भरी चमक दिखने लगी. मुझे पता चल गया था क मैं इस वक़्त कहाँ हूँ. इतना तो याद रहना hi था. अब्ब गोली मुझे ज़रूर लगी थी लेकिन मैं अंदर और बहार से इतना वीक नहीं रहा था. अभी सिर्फ 15 आगे का था न तो गोली का दर्द सहन नहीं हुआ और बेहोश हो गया...... अब्ब मुझे देख सबब खुश तो थे लेकिन सभी मेरी तरफ देख कर पूजा दीदी को देखने लगे, और मैंने भी पूजा दीदी की तरफ देखा तो मुझे उनकी आँखों में अपने लिए dukh,dard या तकलीफ की बजाये ग़ुस्सा दिखने laga.pooja दीदी की ऑंखें मारे ग़ुस्से के लाल हो रही थी.



और मैं समझ भी गया था. क पूजा दीदी का ग़ुस्सा करना बिलकुल जायज़ भी है. ये तो मुझे बेहोश होने से पहले hi रीलीज़ हो गया था. क मुझसे बोहत hi बड़ी गलती हो गई थी. अगर गलती से गोली पीठ में लगने की बजाये मेरे सर्र या दिल के आस पास कही लग जाती' तो मेरे साथ साथ और na-jaaane कितनी hi ज़िन्दगियों का कबाडा हो जाता. ये सोच आते hi मेरी ऑंखें मारे शर्म के झुकने लगीं.... लेकिन पूजा दीदी की जलती हुई ऑंखें फिर भी मैं अपने चेहरे पर महसूस कर पा रहा था.


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लोकेशन: कोठा रेखा बाई:

टाइम

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08:05:ऍम

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श्वेता को रात देरर से hi सही लेकिन ट्रीटमेंट मिल गई थी. रेखा बाई ने एक डॉक्टर को कॉल करके बुला लिया था. डॉक्टर ने श्वेता को चेक करके 2 इंजेक्शन लगा दिए थे. और कुछ टेबलेट्स भी दी थी और बता दिया था क जब्ब सूबा इनकी आंख खुले तो कुछ खिला पीला कर ये मेडिसिन दे देना.

श्वेता अब्ब कुछ बेहतर थी लेकिन अभी तक्क वो नींद में hi थी...

श्वेता के रूम में इस वक़्त priya,shuruti और जहान्वी के इलावा वो तीनो भी थे. जो कुछ महीने पहले hi कोठे पर लाये गए थे. और श्वेता ने उस aurat(sonakshi) को अपनी बेहेन बना लिया था. सोनाक्षी भी अपनी beti(kriti) और beta(anil) के साथ

श्वेता के रूम में hi मौजूद थी. रात रेखा बाई ने इन तीनो को श्वेता के रूम में जाने से रोक दिया था...

लेकिन दिन होते hi तीनो श्वेता के रूम में आ गए थे. वो सबब भी priya,shruti और जहान्वी की तरह hi दुखी थे. इन गुज़रे कुछ महीनो में इन नए आने वालों को श्वेता और तीनो लड़कियों से बोहत प्यार मिला था. जिस वजा से वो सबब एक हो गए थे. लेकिन श्वेता को इस हालत में पा कर कोई भी छह कर भी कुछ नहीं कर पा रहा tha......priya शुचि और जहान्वी की हालत अपनी माँ को देख कर बोहत hi ख़राब thi......jhanvi और षुरूति ने भी श्वेता को अपनी hi मन हुआ था...

अचानक से प्रिय को कुछ याद आया तो वो जल्दी से उठ कर दूर की तरफ गई और फिर अंदर से दूर की कुण्डी लगा कर सभी के पास आ कर बेथ गई.... सबब प्रिय को hi देख रही थीं. gham-zada तो सभी पहले से hi थे.. आंसू बहती गीली आँखों से वो प्रिय को ऐसा करते हुए हेरात से देखने लगे.



प्रिय चल कर सबब के पास बैठी और एक बार सबब की आँखों में देखा और फिर षुरूति और जहान्वी को देख कर बोली.

प्रिय :- षुरूति जहान्वी वो रात जो एक भेड़िया आया था वो कौन हो सकता है. हम ने पहले कभी उन कमीने को नहीं देखा और माँ कैसे उठ कर उस के कालर को पकड़ कर कह रही थी. मेरी कोई गलती नहीं है क्यों मुझे इतनी बड़ी सजा दे रहे हो.....

प्रिय की बात सुन कर षुरूति और जहान्वी को भी सबब याद आ गया लेकिन बाकी तीनो के कान खड़े हो गए....... षुरूति या झावनि कुछ बोलती उससे पहले hi सोनाक्षी बोल पड़ी.

सोनाक्षी :- (प्रिय का हाथ पकड़ कर) प्रिय बेटी मुझे बताओ, तुम किस की बात कर रही. कौन आया था रात में और हुआ क्या था.....

प्रिय ने षुरूति और जहान्वी की तरफ देखा तो दोनों ने हाँ में सर्र हिला कर प्रिय को बताने का इशारा कर दिया...

फिर प्रिय ने रात जो भी हुआ सबब बता दिया. जिसे सुन कर सोनाक्षी को भी ग़ुस्सा तो बड़ा आया लेकिन श्वेता के साथ ऐसा हुआ है. जान कर दुःख भी बोहत हुआ. अब्ब असल बात का पता तो किसी को था nahi.is लिए सबब hi एक दुसरे का मोहन देखने लगे.

सभी अपनी अपनी सोच में डूबे हुए the....soch रहे थे क ऐसी सिचुएशन में कोई क्या कर सकता है.............

अनिल बोलै:- माँ मैं अजित भैया को रात वाले आदमी का बता दूँ. वो विजय भाई को बता देंगे. शायद विजय भैया कुछ पता लगा सके........

अनिल की बात सुन कर सबब अनिल की तरफ hi देखने लगे. सभी को डर भी था क कही इस बात का रेखा बाई को भनक भी पड़ गई तो वो क्या करेगी.

और फिर पता नहीं माँ क्या कहेगी. माँ ने आज तक्क हम सबब को इस बात से अनजान क्यों रखा हुआ था.

प्रिय षुरूति और जहान्वी इस बात को ले के कुछ ज़यादा hi सोच रही थीं.

"माँ ने हमें क्यों नहीं बताया. अगर पहले hi बताया होता तो कुछ तो किया hi जा सकता था. और विज्जु को न बता कर माँ ने सही किया है या गलत......

अगर माँ ने पहले विज्जु को ये सबब नहीं बताया तो क्या अब्ब हम विजय तक्क ये बात पोहंचा कर सही करेंगे या गलत..... पता नहीं माँ को पता चलेगा तो फिर माँ का क्या रिएक्शन होगा. कही माँ हमसे नाराज़ ना हो जाए...... तीनो यही बात hi सोच रही थी.

सोनाक्षी ने तीनो को सोचते देखा.......... तो बोली.

सोनाक्षी:- प्रिय बेटी इतना क्यों सोच रही हो अनिल ठीक hi तो बोल रहा है...

जहान्वी :- आंटी हमें कोई परेशानी नहीं है बताने में, लेकिन माँ ने पहले हमें या विज्जु भाई को क्यों नहीं बताया. हम बास यही सोच रही हैं. अब्ब समझ नहीं आ रही क अजित भाई के थ्रू ये बात विज्जु भाई तक पोहंचायें या न पोहंचायें.

सोनाक्षी :- नहीं अगर विज्जु कुछ करने hi गया हुआ है तो उसे पता होना चाहिए उस आदमी के बारे में.



प्रिय :- नहीं हम ये विज्जु भाई को नहीं बता सकते. अगर विज्जु भाई को आदमी के बारे में पता चला तो ग़ुस्से में कोई गलती करदे गए. और भागता हुआ यहाँ न आ jaye....humen कुछ और सोचना पड़ेगा...................




कृति बोली:- प्रिय दीदी क्यों न हम अजित भाई से कह कर ये सबब विज्जु भाई को न बता कर पूजा दीदी को बता दें. जैसा उनके बारे में हम सबब ने सुना है. कुछ तो वो कर hi सकती हैं. ये सबब पूजा दीदी पारर छोड़ देना चाहिए, आगे वो खुद hi

सबब समझ लेंगी. विज्जु भाई को ये सबब बताना है या nahi.....mujhe ऐसा करना सही लगता है....




सबब मोहन पहाडे कृति को hi देख रहे थे, 10 साला कृति ने कितनी बड़ी बात बोल दी थी. बास फिर क्या था. सोनाक्षी ने कृति का मोहन चूमा और प्यार दिया.


फिर अपने बेटे अनिल को सबब समझा कर अजित भाई की तरफ भेज दिया. और ये भी कह दिया कह वो सावधान रहे कोई भी गलती न होने पाए...... अनिल ने हाँ में सर्र हिला दिया और बहार की तरफ चल दिया. सबब के दिलों की धड़कनें बोहत तेज़ चल रही थीं. ये इतनी बड़ी बात थी क अगर गलती से भी कोई चूक हो गई तो na-jaane क्या से क्या हो जाए........

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लोकेशन: हर्ष चौहान हाउस:




मेरी आँखें झुकी हुई थी और मुझे अपने चेहरे पर पूजा दीदी की जलती हुई अनखोह से निकलने वाली लपटें इतनी दूर से भी महसूस हो रही थीं. मैं तो अपना सर्र पहले hi शर्म से झुका hi चूका था. लेकिन फिर धीरे धीरे मेरे चेहरे के रंग भी बदलने लगे.......




मुझे एक बात याद आ गई थी.....


अपडेट::::26 में मैंने कहा था. क पूजा दीदी की वजा से अगर कोई भी मुझसे कॉम्पिटिशन रखे तो मैं जीत जाऊँगा. क्यूंकि मैं अगर इतना काबिल नहीं भी

था लेकिन कभी ऐसा हो सकता है क मैं अपनी पूजा दीदी को हारते हुए देखों.

कभी ऐसा हो hi नहीं सकता क मेरी वजा से पूजा दीदी हार जाये. मेरी हार मेरी नहीं थी वो तो असल में पूजा दीदी की हार थी. और आज मेरी वजा से पूजा दीदी को हारना पद गया था. कॉम्पिटिशन तो जीता जा चूका था. लेकिन विनर मैं नहीं बन्न पाया था. विनर का टाइटल तो राजा ले गया था. और मैं.....

मैं स्टुपिड लोगों के जैसे गोली खा कर आ गया था........



ये सबब सोचते hi मारे शर्मिंदगी के मेरे माथे पारर पसीने की बूँदें चमकने लगीं.

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थैंक्स बॉस:

पूजा जानती है क विजय प्रोफेशनल किलर नहीं है...

लेकिन ये भी सच है क विजय के पास टाइम नहीं है.....

किसी भी वक़्त विजय की माँ और बहनो के साथ कुछ हो सकता है.....

विजय अगर लफ़ङा नहीं जनता तो सीख जायेगा.......

लेकिन विजय के सामने जो टारगेट है उसके लिए विजय के पास किसी भी गलती का चांस नहीं है...

और जब्ब से दिल्ली आया है अक्सर गलतियां hi करता जा रहा है...

काम आगा का है तो क्या हुआ...........

अगर काम आगे का होने पर भी वो अपने घर वळून के लिए कुछ करना चाहता है,,

तो विजय को काम उमरी में hi बोहत जल्द एक स्ट्रांगमैन बनना होगा....

षुरूति और जहान्वी की आगे विजय ज़यादा है तो विजय के लिए जल्द से जल्द कुछ बन कर

षुरूति और जहान्वी को बचाना होगा

वर्ण विजय की माँ की तरह षुरूति और जहान्वी भी इसी दलदल में इतर जाएँगी...

या ये भी हो सकता है रेखा बाई षुरूति और जहान्वी को कहीं और बेच दे

तब्ब विजय क्या करेगा ...... विजय के कहने पे hi तो विजय की माँ ने दोनों को अपने पास

रखा हुआ है ..........
 
थैंक्स डिअर:

अपने सही कहा पूजा को इतना ग़ुस्सा नहीं करना चाहिए......

पूजा को विजय के 15 साल के होने से फ़र्क़ नहीं पड़ता....

क्यूंकि विजय के पास टाइम हो नहीं है........... जितनी जल्दी कोई एक स्ट्रांग मन बने

उतनी hi जल्दी बोहत अपनी माँ और बहनो को उस दलदल से निकल पायेगा......

आने वाले वक़्त में ज़रूरी तो नहीं अगर विजय को कुछ बनने में 3 साल लगते हैं..

तो अननोन इन 3 सालों में कुछ नहीं करेगा......

पुजा जो सोच रही है वो सही है.....

पूजा ने कुछ और भी सोच कर विजय को ये मिशन दिया है..

वर्ण वो पागल तो नहीं जो विजय को मरने भेज दे.....

विजय पूजा के लिए दिल्ही में रहने वाले सभी लोगों से बढ़ कर है
 
विजय इस ा स्त्रुग्ग्लिंग गाए इन थिस स्टोरी................

विजय को अभी टाइम है 18+ होने अभी उसकी लाइफ में बोहत से मरहले आने वाले हैं.....

लेकिन कुछ राडेस चाहते हैं क विजय जल्द से जल्द 18+ का हो जाये.....

लेकिन विजय 18+ होने से पहले hi बोहत से डिफरेंट किसम के हालत विजय की राह में हैं....

तो आप सबब रेडर्स क्या चाहते हैं..... विजय की राह में आने वाले सभी मरहलूं को हज़फ़ कर के विजय को 2 hi जम्प में 18+ बना doon...us'se स्टोरी का मज़ा भी नहीं आएगा.....

स्टोरी में विजय का रोमांस और सेक्स रिलेशन किसी के साथ भी अभी बोहत दूर दूर है......

प्ल्ज़ तेल्ल में व्हाट ी दो
 
अपडेट :::::: 34

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अब्ब्ब्ब टककककक

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मेरी आँखें झुकी हुई थी और मुझे अपने चेहरे पर पूजा दीदी की जलती हुई अनखोह से निकलने वाली लपटें इतनी दूर से भी महसूस हो रही थीं. मैं तो अपना सर्र पहले hi शर्म से झुका hi चूका था. लेकिन फिर धीरे धीरे मेरे चेहरे के रंग भी बदलने लगे.......



मुझे एक बात याद आ गई थी.....



अपडेट:26 में मैंने कहा था. क पूजा दीदी की वजा से अगर कोई भी मुझसे कॉम्पिटिशन रखे तो मैं जीत जाऊँगा. क्यूंकि मैं अगर इतना काबिल नहीं भी

था लेकिन कभी ऐसा हो सकता है क मैं अपनी पूजा दीदी को हारते हुए देखों.

कभी ऐसा हो hi नहीं सकता क मेरी वजा से पूजा दीदी हार जाये. मेरी हार असल में पूजा दीदी की हार थी. और आज मेरी वजा से पूजा दीदी को हार हो गई थी. कॉम्पिटिशन तो जीता जा चूका था. लेकिन विनर मैं नहीं बन्न पाया था. विनर का तितला तो राजा ले गया था. और मैं गोली खा कर आ गया था........

ये सबब सोचते hi मारे शर्मिंदगी के मेरे माथे पारर पसीने की बूँदें चमकने लगीं.


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अपडेट :::::::::34

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अब्बब्बब आआगगी

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लोकेशन: हर्ष चौहान हाउस:


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अब्ब पूजा दीदी मेरे साथ कुछ भी कर सकती थी.




मेरी माँ और बहने दलदल में फँसी हुई थी. लेकिन मुझसे भी ज़यादा फ़िक्र मेरी माँ और बहनो की पूजा दीदी को थी. और मैं हर्र बार कोई न कोई गलती कर hi देता था. आखिर कब्ब तक्क मैं ऐसी hi गलतियां करता रहूँगा..

काम उम्र हूँ तो क्या हुआ मेरे पास वक़्त भी तो नहीं है और मेरी रहेह भी तो बोहत hi कत्थन और काँटों से भरी पड़ी हैं. मुझे जल्द से जल्द अपनी साड़ी गलतियों को सुधारना होगा... वर्णा मेरी hi की गई गलतियों का Kham-yaazah मेरी माँ और बहनो को भुगतना पड़ सकता है.......... ये सबब सोचते सोचते मेरे अंदर इक लावा सा उबलने लगा और मैं सबब कुछ भूल कर उठ बैठा.

सबब का क्या रिएक्शन था मुझे नहीं पता था. पता था तो बास आज से कोई गलती मुझसे नै होनी चाहिए. इस बार की गलती में तो कुदरत ने मुझे बचा लिया था. लेकिन हर्र बार ऐसा हो ये मुमकिन नहीं था.



मैं चलता हुआ आगे पढ़ा और पूजा दीदी के पैरों में गिर कर माफ़ी मांगने लगा.

विजय :- पूजा दीदी मेरी वजा आज आप की हार हुई है. आप जो चाहें मुझे सजा दे सकती हैं. लेकिन मैं अपनी माँ और बहनो की कसम खा कर कहता हूँ क आज के बाद मैं कोई भी गलती नहीं करूंगा... मुझे बास एक बार माफ़ कार्डो. मैं फिर कभी भी आप का सर्र नहीं झुकने दूंगा...... आज आपका विज्जु आपके पैरों में बेथ कर कर कसम खता है.......................




मैं ऐसे hi सर्र झुकाये पूजा दीदी के पैरों में बैठा रहा. मुझे अपने ज़ख़्म की कोई परवा नहीं थी. हो भी कैसे सकती थी मेरी पूजा दीदी की ऑंखें मेरी हार की वजा से झुकें. ये कैसे हो सकता था.

पूजा दीदी इक अनजान हो कर मेरे लिए और मेरी माँ और बहनो के लिए इतना कुछ कर रही थी. अगर वो मुझे ऐसे ऑंखें दिखएंगी और शर्म्निडा करेंगी.

तो क्या हुआ वो ये सबब्ब मेरे लिए hi तो कररर रही थी.

उनका प्यार और हिम्मत hi मेरा सबब कुछ था.. मेरे अंदर की आग को अगर पूजा दीदी कण्ट्रोल न करती तो na-jaane मेरी की गई कितनी hi गलतियों की वजा से आज मेरा क्या हुआ होता................... पूजा दीदी जो भी करती मेरे साथ मुझे मंज़ूर था.

सबब मोहन पहाडे मुझे देख रहे थे. मेरे ऐसे झुकने से मेरे ज़ख्म पारर से पिरसे खून निकलने लगा था. लेकिन मुझे इस बात का न तो पता था. और hi कोई परवा.

मेरे अंदर जल रही आग. बरसों से सेह रही मेरी माँ का डरडडडडड और मेरी बहनो की ज़िन्दगी को लाहक़ खतरा जिस के लिए मैं अब्ब तक्क कुछ भी नहीं कर सका tha.....aur पूजा दीदी के सामने होने वाली शर्मिंदगी ने किसी और तरफ धयान देने लायक छोड़ा hi नहीं था..............

सबब कभी मुझे और कभी पूजा दीदी को देख रहे थे. मेरे ऐसा करने से पूजा दीदी की आँखों में चमक आने लगी. फिर पूजा दीदी ने एक बार सबब की तरफ देखा


और ख़ास कर हर्ष चौहान की तरफ देखा. हर्ष चौहान भी ऑंखें पहाडे पूजा दीदी को hi देख रहे थे. हर्ष चौहान पारर नज़र पड़ते hi पूजा दीदी के होंठों पर एक रेहसमाऐ मुस्कान आ गाइइइइ.



जिसे देख कर हर्ष चौहान जैसा घाग बाँदा भी एक बार हैरान रह गया. वो पूजा दीदी की मुस्कान का मतलब समझ गया था. और हैरान भी था. क पूजा दीदी ने कैसी गेम खेली है. एक hi तीर में कई शिकार कर दिए थे पूजा दीदी ने.....


अपनी फ्रेंड रीना का बदला भी ले लिया. दिल्ली शहरर से एक गंध के साथ उसके गंदे दोस्तों को भी मरवा दिया और वजिजय को भी ऐसे अपनी गलती का एहसाआस करवा दिया.......... और विजय ने अपनी मा और बहूओ की कसम खा कर आगे कोई भी गलती न करने का भी कह diyaaaaaaaaaa.........harsh चुहान पूजा दीदी को आँखें पहाडे देखने लगा..........



पूजा दीदी सबब को एक नज़र देख कर अपने हाथ को बढ़ा कर मेरे सर्र की तरफ लाने लगी. और फिर मुझे अपने सर्र पारर पूजा दीदी का हाथ महसूस होने लगा. तब्ब जा के मुझे कुछ रहत मिली वर्ण मैं बता नहीं सकता क मेरे अंदर क्या कुछ चलने लगा था. इक आग तो शुरू से hi थी मेरे अंदर और भी na-jaane क्या कुछ होने लगा था मेरे अंदर. लेकिन पूजा दीदी के हाथों के सुपर्ष ने मुझे कुछ कुछ शांत कर दिया. तब्ब अचानक से मुझे अपने ज़ख़्म में फिरसे दर्द होने लगा.



लेकिन अब्ब बससससस बोहत huaaaaaaaaaaaaaaaaa अब्ब और नहीं.........



दर्द तो साड़ी ज़िन्दगी मिलते hi rahege.jitne दर्द मेरी मा ने झेले हैं और जितने ज़ख़्म मेरी मा औरर बहनो के अंदर hi अंदर बनते जा रहे हैं......

मेरा दर्द और मेरा ज़ख़्म तो माँ और बहनो के ज़ख़्म के आगे कुछ भी नहीं....

क्या हर्र बार ऐसे hi खुद को bebas,lachar और दर्द में बिलबिलाता हुआ पाटा रहूँगा....... बस्सस बोहत हुआ आज से सबब कुछ बदल के hi रहूँगा...

पता नहीं आज मुझे क्या हुआ था. मेरे दर्द ने मुझसे हार मान ली थी ...

और मैं भी अपने दर्द को भूल कर पूजा दीदी के हाथों की उँगलियों को अपने सर्र के बलून में चलता हुआ महसूस करने लगा. एक सकूं तो मिल hi रहा था पूजा दीदी की उँगलियों के मेरे सर्र को छूने से. लेकिन एक ऐसा लावा भी मेरे अंदर hi अंदर कहीं जनम ले रहा था.




जो मुझे अंदर से कुछ और hi बनाए रहा था.




कुछ देर ऐसे hi मैं पूजा दीदी के पैरों में बैठा रहा और पूजा दीदी मेरे सर्र में अपनी ुंगियाँ चलाती रहीं. फिर पूजा दीदी ने मेरे कन्धों से पकड़ कर मुझे उठने का सिग्नल दिया तो मैं पूजा दीदी का इशारा समझ कर खड़ा हो गया......




पूजा दीदी मेरी आँखों में घोरसे देख रही थी. शायद वो jan'na चाहती थी

"जो मैंने बोलै है में कितना उस पारर साबित क़दम रह सकता हूँ. मैं भी पूजा दीदी की hi आँखों में देखता रहा. कई मिंट तक्क हम ऐसे hi एक दुसरे की आँखों में देखते रहे.



मुझे काफी देर ग़ौर से देखने के बाद बाद पूजा दीदी की आँखों में वही पहले वाली चमक आने लगी और फिर पूजा दीदी ने मुझे गले से लगा लिया. पूजा दीदी के हाथ मेरी पीठ में लगे ज़ख़्म की वजा से खून में रंगने लगे और मुझे भी इस बात का पता चल गया लेकिन यहाँ इस बात की परवा हम दोनों में से किसी को भी नहीं थी.



ऐसे na-jaane और कितने ज़ख़्म मेरी राह में आने वाले थे. पूजा दीदी की डेरिंग की वजा से आज मैंने एक नया जनम ले लिया था. ऐसा मुझे लग्ग रहा था. बाकी तो आगे चल कर hi पता चलेगा.....




हमारे मिलान में चाहे जितना भी टाइम लगे' किसी को इस बात की इजाज़त नहीं थी. क वो रंग में भांग डाले और हमारे मिलान को अधूरा बनाने वाला राज भी अब्ब इस बात को बड़े अच्छे से जान गया था. और बाकी सबब भी अब्ब शांत पद चुके थे.

मुझे ज़ख़्म तो आया था लेकिन अब्ब इस बदली हुई सिचुएशन में किसी को ग़मगीन होने की ज़रुरत hi नहीं रही थी. पद्मा आंटी, मालती भाभी और मालिकान के साथ बाकी सबब के चेहरों par'se दर्द की बजाये एक मुस्कान छलक रही थी.




ऐसे hi कई मिंट गुज़रे तो पूजा दीदी ने मुझे खुद से अलग किया. ऐसा पहली बार हुआ था क पूजा दीदी ने इतनी जल्दी मुझे छोड़ दिया था. शायद बाकी सबब की वजा से....................................




पूवजा दीदी ने मुझे khud'se अलग किया तो फिर सबब की तरफ देख कर एक मुस्कान के साथ सर्र के इशारे से बोली.........




"मिल लो इस गधे से जिसका भी मैं है मिलने का"




फिर क्या था जिस का मैं ज़यादा दुखी था वो मुझसे ज़ायदा देर मिला लेकिन akhir-kar मेरी जान छोट hi गई..... और फिर सबब को मेरे ज़ख़्म से बहने वाले खून की चिंता सताने lagi................pooja दीदी हंस कर बोली....

पूजा दीदी :- बास बास अब्ब शांत हो जाओ. अब्ब इस का फिरसे खून निकल रहा है. पहले उस का कुछ करो.. ये प्यार बाद के लिए बचा कर रख लो...........

सबब ने भी पूजा दीदी के ऐसे बोलने से दांत दिखने शुरू कर दिए...... फिरसे मेरी सेवा शुरू हो गई.................. पूजा दीदी फिरसे बोली

पूजा दीदी :- चलो अब्ब सबब कुछ खा hi लेट हैं रात से कुछ भी हुए हैं सबब के सबब कही विजय को ठीक करने के चक्कर में भूक की वजा से गिर न पड़ें. और विजय का बाद सबब की ट्रीटमेंट शुरू हो जाये............ शीतल चहकते हुए बोली.........

शीतल :- पूजा दीदी मुझे पता चल गया था अब्ब ऐसा hi कुछ होने वाला है. इस लिए मैंने पहले hi ब्रेकफास्ट बनाने को बोल दिया था...................

नताशा और दीक्षा आंटी के साथ हर्ष चौहान भी शीतल को देखने लगे....... क शीतल कब्ब ब्रेकफास्ट के लिए बोलने गई थी.....

असल में जब्ब पूजा दीदी ने मेरे सर्र पर हाथ रखा था तो कुछ hi देर में शीतल बहार जा आकर माइड को ब्रेकफास्ट रेडी रखने का बोल आई गई.........

नताशा और दीक्षा आंटी ने तो शीतल को गले लगा लिया और उसके गालों को चूमने लगी.........

नताशा :- वाह मेरी पारी इतनी समझदार कब से हो गई................




शीतल :- (शीतल चिढ़ते हुए) क्या मतलब है आपका. मैं आपको बच्ची लगती हूँ जो मुझे इस सबब की समझ नहीं hogi............(meri अतराफ़ देख कर) मैं भाई से भी एक साल बड़ी हूँ.. समझी आप




नताशा :- और नहीं तो क्या तुम अभी छोटी सी बच्ची hi तो हो......

बास फिर क्या tha(natasha ने भी माहौल का रंग बदलने के लिए शीतल को छेड़ दिया था) शीतल अपनी दीदी के पीछे पीछे भागने लगी. लेकिन नताशा कहाँ उसके हाथ आने वाली थी.

अचानक से पूजा दीदी ने नताशा का हाथ पकड़ कर शीतल के हाथ में दे दिया. सबब पूजा दीदी के ऐसा करने से हसने लगे और नताशा पूजा दीदी को घूरने लगी....

अब्ब माहौल क्या बदला था सबब के सबब mil'kar नौटंकी करने लगे थे.....

विजय तो अपनी पूजा दीदी को देख रहा था और सोच रहा तह. अगर मैं ये सबब न करता तो पूजा दीदी ऐसे खुश दिखाई देती क्याआ. नहीं पूजा दीदी हमेशा ऐसे hi हंसती मुस्कुराती रहे... और मैं अब्ब कभी भी पूजा दीदी को ग़मगीन नहीं होने दूंगा.

ऐसे hi कुछ देर सबब की मस्ती चलती रही....

1 घंटे बाद सबब ब्रेकफास्ट करके फ्री हुए तो पूजा दीदी ने हर्ष चौहान को अकेले में बात करने का इशारा कर दिया............................................




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पूजा दीदी और हर्ष चौहान दोनों एक hi रूम में बैठे थे और दूर को अंदर से कुण्डी लगी हुई थी. कोई डिस्टर्ब न करे.........



ऐसी क्या बात करने वाली थी पूजा दीदी हर्ष चौहान से.............




ब्रेकफास्ट अभी शुरू नहीं हुआ था. क पद्मा ौतन्य के मोबाइल की घंटी बजी. तो पद्मा आंटी ने मोबाइल को देखा तो अजित भाई का नंबर देख कर खुश हो गई. लेकिन पूजा दीदी की नज़र पद्मा आंटी पर चली गई. वो भी समझ गई क फोन किस का हो सकता है. इसलिलये पूजा दीदी ने पद्मा आंटी से मोबाइल ले कर पहले अजित भाई से बात करने लगी. पद्मा आंटी ने भी कोई ऐतराज़ नहीं किया था और मोबाइल पूजा दीदी को दे दिया था.......

पूजा दीदी :- अजित भाई मैं पूजा बोल रही हूँ.

अजित भाई :- कैसी हो पूजा beti.....(pooja दीदी अजित भाई को भाई बोलती थी लेकिन अजित भाई पूआज दीदी को बेटी hi बोलते थे)

पूजा दीदी :- भाई मैं ठीक हूँ आप सुनाएँ वहां सबब ठीक है...

अजित भाई :- कहाँ सबब ठीक है. कल से श्वेता बेहेन की तबियत बोहत hi खिताब है. तो

पूजा दीदी :- क्या हुआ माँ जी को' जो उसकी तबियत ख़राब हो गई......

अजित भाई :- पता नहीं जो मैंने सुना है. us'se पता चला है क काल रात होते hi श्वेता बेहेन को दिल में दर्द उठने लगा था. और विजय को बोहत hi याद कर रही थी.

"पूजा दीदी सबब समझ गई किसी भी माँ का दर्द ऐसे hi तो नहीं बढ़ jaata.yahan विजय के साथ जो भी होने वाला था. वहां माँ जी को भी उनके दिल ने बता दिया था"

पूजा दीदी :- अब्ब कैसी हैं माँ जी

अजित भाई :- सुना है कॉल से बेहतर हैं अब्ब. रात को रेखा बाई ने एक डॉरटर को बुला लिया था. तो अब्ब श्वेता बेहेन सो रही हैं . अब्ब रात से बेहतर हैं वो. एक बात और भी करनी thi.(akhir में अजित भाई की आवाज़ धीरे हो गई और वो दूकान के बहार इधर उधर देखने लगे)

पूजा दीदी के कान खड़े हो गए अजित भाई के धीरे बोलने से..

पूजा दीदी :- जी भाई बोलिये मैं सुन रही hoon.(pooja दीदी भी थोड़ा साइड हो गई थी)

अजित भाई ने फिर सबब बता दिया जो सोनाक्षी ने अपने बेटे अनिल के ज़रिये अजित भाई से बोलने को कहा था.............. सबब सुन्न कर पूजा दीदी की ऑंखें उबलने लगीं. सूबा के जैसे fir'se उनकी आँखों ने रंग बदल लिया था... जो सुना गया था वो बोहत hi भयंकर था..........................

पूजा दीदी :- अजित भाई आप प्ल्ज़ ये पद्मा आंटी को मैट बताना.. मैं खुद hi जब्ब मुझे सही लगा "तो सबब को बता दूँगी.." अभी आप किसी को कुछ मैट बताना...

ये बोल कर और कुछ देर और बात कर के पूजा दीदी ने मोबाइल पद्मा आंटी को दे दिया था....

लेकिन सबब के सामने पूजा दीदी फिर से नार्मल hi दिख रही थी...............




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पूजा दीदी ने हर्ष चौहान को भी साड़ी बात बता दी थी. हर्ष चौहान भी ये सबब जान कर सुन्नन रह गया क बात इतनी भी सीढ़ी नहीं है. जितनी मैं समझ रहा था. उस अननोन के बारे जान कर तो पता लगता है. कुछ तो बोहत hi बड़ा है जो परदे के पीछे छुआपा हुआ है.................




हर्ष :- तो पूजा बेटी तुम्हारा क्या कहना है विजय को ये सबब बता देना चाहिए.



पूजा दीदी:- नहीं अंकल अभी विजय को ये नहीं बताया जा सकता. विजय में जितनी भी बर्दाश्त है मैं बोहत अच्छे से जानती हूँ. मेरी hi वजा से विजय खुद को शांत रख पाटा है. वर्ण उसके अंदर का दर्द बार बार बहार निकल कर us'se गलतियां करवाता रहता hai.vijay हर पल हर लम्हा मेरे साथ रहता है. मैं विजय की राग राग को जान गई हूँ. विजय कहाँ कितना सहन कर सकता है ये भी मुझे पता है.

अभी तो सिर्फ रेखा बाई का hi हम सबब के मंद में था. क वो अकेली hi माँ जी के साथ ये सबब कर रही है. लेकिन बात कहीं बढ़ कर nikli...abhi तो सिर्फ एक अननोन का पता चला है और na-jaane कितने ऐसे होओगे जिन्हो ने मिलकर माँ जी को रेखा बाई तक्क पोहंचाया है. जब्ब तक्क साड़ी बात पता नहीं चलती. हम विजय को कुछ भी नहीं बता सकते. वर्ण वो स्टुपिड हमें बताये बगैर hi कही वापिस रेखा बाई के पास न चला जाये....... नहीं जब्ब तक्क विजय कुछ बन्न नहीं जाता मैं नहीं चाहती क विजय को इस सबब का पता चले.....

हर्ष चौहान :- पूजा बेटी तुमने बिलकुल सही कहा.... विजय के लिए जो भी ज़रूरी है वो tum'se बेटर कौन समझ सकता है..............




पूजा दीदी :- अंकल आप एक काम तो करवा hi सकते हैं..



हर्ष चौहान :- हाँ हाँ पूजा बेटी बताओ मुझे क्या करना है. मैंने तो पहले भी विजय से कहा था क मैं उसकी माँ और बहनो को वहां से निकलने की कोशिश कर सकता हूँ. लेकिन विजय नहीं माना... अब्ब तुम जो कहना चाहती हो कहो...

मुझे तो ख़ुशी होगी अगर मैं किसी काम आ सका..... वर्ण यकीन करो बेटी मुझे बेहद शर्मिंदगी होती है ये सोच कर क मैं इतना पॉवरफुल हो कर भी कुछ नहीं कर पा रहा हूँ ......

पूजा दीदी :- अंकल आप शर्मिंदा न हूँ.. विजय भी अपनी जगा सही है. आप के आदमियों की कोई भी चूक विजय का सबब कुछ उजाड़ कर रख degi..aur अब्ब तो हम सबब आगे की हकीकत भी जान गए हैं. कुछ भी करना हो हमें सोच समझ कर hi करना है.

हर्ष चौहान :- पूजा बेटी जैसा तुम मुनासिब समझो. मुझसे जो चाहती हो मुझे बता दो मैं कुछ भी करने से पीछे नहीं हटूंगा....... अब्ब वो बात बताओ जो बोलने वाली थी...........



पूजा दीदी :- उस अननोन का पता चलने से हमें ये तो अंदाज़ा हो hi गया है. क बात जो हमने सोची थी अब्ब वो नहीं रही. तो हमें भी अब्ब आगे का प्लान बदलना पड़ेगा...... अब्ब माँ जी और बहनो को बचाना hi नहीं है बल्कि माँ जी के साथ ऐसा करने वालों से बदला भी लेना पड़ेगा. और जब विजय को जब्ब इस बात का पता चलेगा तो क्या वो खुद को रोक पायेगा........ इस लिए मैं आपसे ये कहना चाहती हूँ क आप अपने सोर्स से साड़ी हकीकत का पता लगवाएं.... हमें शुरू से हर्र बात का पता होना चाहिए......... तब्ब hi हम आगे का सही से सोच सकते हैं... वर्ण हम कब तक्क माँ जी और विजय की बहनो को बचते रहेंगे.... एक बार बचाया और वो सबब फिरसे ढेर लिए गए. तो गड़बड़ हो सकती है... आप अपने आदमियों से असल में हुआ क्या है. वो पता करवाएं. तब्ब आगे का सोचेंगे..........



हर्ष चौहान :- पूजा बेटी पहले तो मैं तुमको थैंक्स बोलना चाहता हूँ.. हालांकि तुमसे बड़ा हूँ लेकिन फिर भी तुमने मुझसे कोई काम तो लिया है. मुझे बड़ी ख़ुशी हुई इस बात से. बास अब्ब मुझे कोई शर्मिंदगी नहीं रहेगी क मैं कुछ कर नहीं पाया. जैसा काम तुमने बोलै है वो तो मेरे लील्ये कोई मुश्किल hi नहीं है... मैं जल्द hi अपने आदमियों को इस काम में लगा देता हूँ. मुझे लगता है ये काम जल्दी hi हो जायेगा.. क्यूंकि सिर्फ अकेली रेखा बाई hi नहीं उस अननोन को जानती होगी... कोठे पर रहने वाले और भी कई होंगे जो ये जानते होंगे क वो कौन है कहाँ रहता है. ऐसे hi तो नहीं कई सालों से आ रहा है... ऐसा बाँदा कहाँ छुप सकता है किसी से. पता नहीं विजय से कैसे छुपा रह गया ........




पूजा दीदी :- थैंक्स अंकल आपने एक मुश्किल तो हॉल कर hi दी है....



हर्ष चौहान:- पूजा बेटी क्यों और शर्मिंदा कर रही हो... ये कोई इतना बड़ा काम भी नहीं है मेरे लिए और वैसे भी ये काम तो मैं अपने आदमियों से करवाऊंगा. अगर मेरी जान की भी ज़रुरत पड़े तो मैं हाज़िर हूँ.

पूजा दीदी :- नहीं अंकल मैं आप को शर्मिंदा नहीं कर रही....




हर्ष चौहान:- तुम तो जानती hi हो पूजा बेटी विजय मेरे लिए भी बेटे सम्मान hi है. और उसने नताशा की इज़्ज़त बचा कर मेरा सर्र भी सलामत रखा है तो फिर मुझे अपनी जान की क्या परवा हो सकती hai.....(ye बोल हर्ष चौहान की ऑंखें नम्म होने लगी. (इतना storng-man की ऑंखें भी आज नम्म हो hi गई थी.)




पूजा दीदी ने हर्ष चौहान के हाथ को पाकर लिया और बोली.

पूजा दीदी :- अंकल ऐसे तो न बोलेन प्लीज हम सबब एक hi तो फॅमिली हैं.



हर्ष चौहान:- नहीं पूजा बेटी तुम जो भी कहो. जब्ब मुझे दीक्षा ने बताया था क ट्रैन में क्या कुछ हो चूका है और फिर जब्ब मैंने विजय की हालत देखि थी.

तो सख्त शर्मिंदा हुआ था क एक छोटे से बच्चे ने मेरी बेटी को बचाया जो खुद भी शदीद ज़ख़्मी था. लेकिन विजय बीटा न अपनी जान की परवा न करते हुए भी मेरे घर की इज़्ज़त बचाई..... आज तक्क मैंने इस बात को दिल में छुपा कर रखा है. वर्ण जितना मैं बहार से स्ट्रांग नज़र आता हूँ. उतना हूँ नहीं. अपने दुश्मनो के लिए hi मैं खतरनाक हूँ... लेकिन विजय बेटे के लिए मेरे दिल में जो फीलिंग्स आ चुकी हैं. मई तो वो खुल कर ज़ाहिर भी नहीं कर सकता........




"पूजा दीदी आज हर्ष चौहान की बातें सुन्न कर हैरान थी. कहाँ हर्ष चौहान जैसा इंसान जो पूरे इंडिया में एक स्ट्रांग बुस्सिनेस्स्में है. अज्ज कैसे इमोशनल हो रहा है."

पूजा दीदी ने हर्ष चौहान को कुछ देर दिलसे दिए कुछ और भी बातें होती रहीं. फिर बात विजय को ले करके होने लगी. और ये सोचा जाने लगा क विजय के लिए क्या बेस्ट है. तब्ब पूजा दीदी बोली

पूजा दीदी :- अंकल अब्ब टाइम नहीं रहा हमारे paas.aap तो अपना काम अपने आदमियों से करवा hi lenge.lekin हमें अब्ब विजय को भी संजीदगी से लेना होगा.. जैसी जुंग विजय के लिए फ्यूचर में आने वाली hai..uspar सोच विचार करना हमारे लिए बेहद ज़रूरी hai..vijay अब्ब 15 साल का होगया है और अभी भी वो कुछ भी नहीं है.

बदन में ताक़त और सेहनन करने में विजय बोहत आगे बढ़ चूका है. लेकिन दमाग से और लड़ाई में विजय कुछ भी नहीं. यहाँ रह कर विजय वो नहीं बन्न सकता जो विजय को बनना चाहिए .. मैं सोच रही हूँ. विजय को एक स्पेशल ट्रेनर की ज़रुरत है ..... बात अगर सिर्फ रेखा बाई की होती तो शायद यहाँ रह कर कुछ किया जा सकता था. लेकिन विजय को आगे चल कर एक बोहत hi बड़ी जुंग लड़नी पद सकती hai......is के लिए विजय को nakaabil-e-taskhir इंसान बन्न कर उभारना होगा.. वर्ण विजय के लिए कुछ भी नहीं bachega.....aur हमेशा के लिए विजय की माँ और बहनो कभी उस दलदल तो कभी किसी और दलदल में फंसती hi रहेंगी.....

अगर को उस आदमी से टकराना है तो विजय को



"Himmat-Wala"



बनना होगा...

और दूसरी बात विजय में चालाकी और दमाग का इस्तेमाल करने की सही शक्ति भी नहीं hai..............is के लिए हमें कुछ करना पड़ेगा ..... विजय अकेला कुछ भी नहीं कर सकता.


na-jaane आगे चल कर और कितने अननोन आएंगे विजय की

रआआअह्ह में...""""""""""""




हर्ष चौहान पूजा दीदी की बात सुन कर गहरी सोच में डूब गया और सोचने लगा. क उसके ऐसे कौन से सोर्सेज हैं जो विजय के काम आ सकते हैं. वैसे तो वो कई लोगों को जानता था लेकिन विजय के लिए जो सबब से परफेक्ट हो "वो कौन हो सकता है"

हर्ष चौहान काफी देर सोचता रहा...

पूजा दीदी:- अंकल क्या सोचने लगे.....

हर्ष :- पूजा बेटी मैं सोच रहा हूँ क विजय के लिए सबसे परफेक्ट क्या होगा. वैसे तो मैं खुद काई लोगों को जानता हूँ. जो विजय को त्रिनेड कर सकते हैं. लेकिन मैं घोर कर रहा हूँ. ऐसा कौन है जो विजय को जल्द से जल्द और ज़यादा से ज़यादा त्रिनेड कर सके...




पूजा दीदी :- अंकल एक बात और भी है....?




हर्ष :- वो क्या पूजा बेटी?



पूजा दीदी :- पहले उस पहलवान जी से बात न करलें. क्यूंकि पहलवान जी की प्रिस्क्रिप्शन की वजा से विजय में बोहत से बदलाव ए hain...taqat के साथ साथ विजय की सहन शक्ति भी पहले से बोहत बढ़ गई है. विजय को सिर्फ ट्रेनिंग hi नहीं ताक़त की भी ज़रुरत है. और पहलवान जी के पास विजय कई महीनो से जा रहा है. और पहलवान जी के साथ मश्वरा न करना पहलवान जी के साथ na-insafi होगी. जितना उन्हों ने विजय के लिए किया है वो सबब दिल से किया है. वर्ण आज के ज़माने में ऐसा कम् hi लोग करते हैं. थोड़े से hi सम्मय में उन्हों ने विजय को बोहत कुछ दिया है ..... एक बार उनसे बात कर लेते हैं...



हर्ष चौहान :- ठीक है पूजा बेटी मुझे भी ये सही लगता है. और विजय के पहले गुरु भी वही हैं तो इतना हक़ तो उनका बनता hi है....




फिर कुछ देर और दोनों में कुछ बातें हुई इस के बाद दोनों विजय के पास चले गए..


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थैंक्स फॉर योर एव्री आउटस्टैंडिंग वर्ड..............

स्टोरी इन्सेस्ट बेस्ड है तो सब hi समझ में आता है. विजय से रिलेटेड और कौन कौन हो सकती है..........

और रही बात हीरोइन की तो मेरा ख्याल है अब्ब तक्क सबब को hi समझ जाना चाहिए था............

क पूजा से बेटर कोई हो सकती है................... विजय के लिए....

मैंने एक अपडेट में लिखा था. क दोनों के बीच में कुछ और भी है.............

जो ुन्देरगे की वजा से बता नहीं सका...............

विजय के इर्द गिर्द गर्ल्स की भरमार लगी हुई है........... और अभी विजय को पहले अपनी माँ और बहनो को बचाना है

फिर अपना रिवेंज भी लेना है........... इस बीच अगर कोई और लड़की भी विजय की लाइफ में आएगी तो आप सबब को पता चल जायेगा.

और फ़ास्ट फसवर्ड की बात की जाये तो मैंने पहले hi सुग्गेस्टिव के लिए बोल दिया था क विजय के लिए अभी बोहत से मरहले बाकि हैं

अगर उनको अधूरा छोड़ दिया तो स्टोरी का मज़ा hi ख़तम हो जाएगा............

थैंक्स अगेन................... और मैं आपकी किसी भी बात का मंद नहीं कर सकता है...

ी ऍम आल्सो ा रीडर................. राइटर तो आप सबके प्यार ने मुझे बना दिया........... वर्ण मैं कहाँ इस kaabil........bye..and टेक केयर
 
अपडेट ::::: 35

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अब्ब्ब आएगी

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लोकेशन: राजा हाउस:




राजा को सोये हुए अभी कुछ hi देर हुई थी क उसके घर का दूर खटकने से राजा की आंख खुल गई. राजा अभी कच्ची नींद में थी. लेकिन रात भर की थकन की वजा से राजा का उठने को मैं तो नहीं हुआ लेकिन उठना तो था hi...... मजबूरन राजा न चाहते हुए भी उठ कर दूर को ओपन करने के लिए चला गया..........

राजा ने जैसे hi दूर ओपन किया तो सामने खड़े हुए शख्स को देख कर राजा की साड़ी नींद की खुमारी एक झाकते में hi उतर गई........ बहार खड़े हुए शख्स ने राजा को कंधे से पकड़ कर साइड हटाया और अंदर चला गया... राजा हैरान परेशान दूर के पास खड़ा उस शख्स को देख रहा था. जब वो शख्स अंदर चला गया तो राजा को भी उस शख्स के पीछे hi अंदर जाना पड़ा ........

कुछ देर बाद दोनों एक hi रूम में बैठे थे. और आने वाला शख्स कोई भी बात किये बिना बास राजा को घूर रहा था ....

और राजा कभी उस आने को देखता तो फिर कुछ hi पलों में अपनी नज़रें फेर कर रूम में इधर उधर देखने लगता .... राजा को कुछ भी समझ नहीं आ रही थी ..... उस आयने वाले का यहाँ आना कैसे हुआ .. और क्यूँकर हुआ ..




शक्श :- विजय कहाँ है ???????????




राजा उस शक्श के मोहन से विजय का नाम सुन कर हैरान हो गया क विजय का hi क्यों पूछा उसने........

राजा :- इंस्पेक्टर साब विजय का मुझे क्या पता.... होगा अपने घर में ....




आने वाला ins-ranjeet था............




आईएनएस रणजीत:- राजा मुझे सबब पता चल चूका है. तुम सबब ने मिल कर रात भर जो भी किया है. मैं उस के बारे में नहीं पूछ रहा. मुझे सिर्फ विजय का बताओ .... कहाँ है wooooooooooooo?????




राजा ins-ranjeet की बात सुन कर हैरान रह गया. रणजीत सर को कैसे पता हो सकता है क रात भर पांचो ने क्या काण्ड किया है...... और रणजीत सर अज्जू के मर्डर की बात को छोड़ कर शरीफ विजय का hi क्यों पूछ रहे हैं.............

आईएनएस रणजीत:- माने क्या पूछा है राजा तुमसे. मुझे बताओ विजय कहाँ है. और उसके बाकी सबब घर वाले कहाँ चले गए हैं.

राजा क्या करता उसे कुछ समझ नहीं आ रही थी. कोई और होता उसके सामने तो राजा किसी को कुछ नहीं बताता लेकिन यहाँ ins-ranjeet था. और राजा अपनी बात पर ऐड जाये ऐसा तो हो hi नहीं सकता था. रणजीत जैसा इंसान राजा ने आज तक नहीं देखा था. पल भर में hi किसी भी बात की तेह तक्क पोहंच जाना रणजीत के लिए मुश्किल नहीं था.......... राजा ने भी रणजीत के बारे सुन रखा था. किस किसम का इंसान है और किश किसम के लोगों के लिए रणजीत कितना khatar-naak भी hai.......raja को कुछ समझ न आई तो रणजीत फिरसे बोलै...



िसँ रणजीत:- देखो राजा तुम और तुम्हारे दोस्त आज तक्क जो भी करते आये हो मुझे सबब पता है. लेकिन मैंने फिर भी तुम चरों को छूट दी हुई है. सिर्फ इस लिए क आज तक्क तुम सबब ने अपनी लिमिट क्रॉस नहीं की. और मैं तुम सबब की नेचर को भी जानता हूँ. और ये भी जानता हूँ क विजय के आने से तुम सबब में क्या कुछ बदलाव आया है. मुझसे किसी भी बात का छुपना मुमकिन नहीं है........ और रही बात विजय की तो जब्ब से मैंने विजय को देखा है. तब्ब से hi मेरी नज़र विजय पर है............. इस लिए बताओ इस वक़्त विजय कहाँ है.........

राजा को अब्ब बोलना hi था. कहाँ तक्क ins-ranjeet से बच सकता था....

राजा :- विजय हर्ष चौहान के घर में है.....

िसँ रणजीत:- क्यों वहां क्या कर रहा है.....

राजा...... :- सर जब्ब आप सबब कुछ जानते hi हैं तो फिर मुझसे क्यों पूछ रहे हैं.................




िसँ रणजीत:- इस का मतलब है अज्जू और उसके दोस्तों को तुम सबब ने मिल कर मारा hai........(ranjeet के चेहरे पर इक मुस्कान आ gai.fir विजय को सोचते hi रणजीत की मुस्कान ग़ायब हो गई) विजय के साथ ऐसा क्या हुआ है जो उसे हर्ष चौहान के घर जाना पड़ा. और फिर बाकी घर वाले भी यकीनन वही गए होंगे.

राजा ......:- सर वो वो विजय को गोली लग गई थी और

िसँ रणजीत:- क्या मतलब विजय को गोली लगी hai....(ranjeet अचानक से खड़ा हो गया)

राजा ......:- जी सर बास अचानक से अज्जू के एक दोस्त ने विजय पर गोली चला दी लेकिन विजय अब्ब ठीक है. कोई खतरे वाली बात नहीं hai......"ye सुन कर रणजीत फिरसे बेथ और बोलै.........

िसँ रणजीत:- मुझे पूरी बात डिटेल में बताओ जो कुछ भी तुम पांचो ने किया और वहां जो भी हुआ hai..mujhe सबब jan'na है.......

राजा ने फिर सबब डिटेल में बता दिया....

आईएनएस रणजीत:- तुम सबब ने अच्छा काम किया है. बास खुद को अब्ब से सेफ hi रखना और कुछ वक़्त के लिए सिटी में मैट जाना...... एक काम..........

खैर छोडो जो होना था हो गया.....................................

फिर भी सोच विचार करके ऐसा काम किया करो और विजय का ख़ास ख्याल रखना..

ये बोल रणजीत निकल लिया राजा के घर से. और राजा पीछे से रणजीत को जाते हुए देखने लगा........... राजा बोहत hi हैरान था क कैसा पुलिस वाला है जो अज्जू के क़ातिलों को छोड़ कर जा रहा है. बास विजय के लिए fikar-masd है....

क्यों िसँ. रणजीत विजय के लिए इतना बेचैन hai....kya वजा हो सकती है.......

ये सबब सोचना छोड़ कर राजा सोने के लिए लेट गया... बाद में सोचते हैं पहले रात भर की थाकण तो उतार ली जाए....




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धर्मेश शंकर और प्रेम अपने आदमियों के साथ मिल कर पूरे दिल्ली में अज्जू के कातिलों को ढून्ढ रहे थे लेकिन कुछ भी सुराग़ नहीं मिल रहा था..... धर्मेश को पीने से hi फुर्सत नहीं मिल रही थी और शंकर अपने दमाग के घोड़े दौड़ा रहा था.....................

और सिटी पुलिस भी कही से कोई भी सुराग़ नहीं ढून्ढ पा रही थी...... पुलिस के लिए टेंशन बानी हुई थे ... कमिश्नर ने किसी भी हाल में किलर को ढूंढ़ने के लिए बोल दिया था और पांडेय लगा हुआ था अपने साथियों के साथ मिल कर किलर को ढूंढ़ने में.. लेकिन रात भर से खुवार hi हो रहा था कही से कुछ भी हाथ नहीं आ रहा था...



विजय राजा एंड फ्रैंड्स फिलहाल के लिए तो बच गए थे.......................

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रणजीत ने पहलवान जी को भी सबब बता दिया था ... और पहलवान जी की पूजा दीदी से बात भी हो गई थी ....

पूजा दीदी ने 3 दिन बाद मिलने को बोल दिया था.......


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मुझे बीएड रेस्ट लेते हुए 3 दिन हो गए थे और आज हम सबब अपने घर जाने वाले थे....... और हमारे साथ हर्ष अंकल और उनकी फॅमिली भी जा रही थी...

इन 3 दिनों में सबब ने मिलकर मुझे बोहत hi प्यार दिया था. मेरे ज़ख्म तो था. दर्द भी था लेकिन अब्ब इस पारर से धयान हटा कर मैं भी सबब के साथ मिल कर टाइम स्पेंड कर रहा था ................

सभी गर्ल्स 3 दिन तक्क बोहत hi चहकती रहीं थी. जब्ब सबब hi मिल जाएँ....

तो इतनी लड़कियों में एक अकेला लड़का उसका तो फिर कबाड़ा तो होना hi है.........

मेरे आने वाले वक़्त में मुझे जो मिशन दरपेश था. वो तो था hi लेकिन इस वक़्त वो सबब भूल कर इन 3 दिनों में मुझे ऐसा सबब ने मिल कर तंग किया....... क मेरा मेरे दर्द से धयान hi हटने लगा..... ऐसे ऐसे चुटकले सुनाने लग्ग जाती क क्या bataaon...aur ऐसी ऐसी हरकतें करती क मुझे शर्म आने लगती लेकिन लड़कियों में से किसी को शर्म कयानी थी.. वो तो जैसे बेशरम हो गई थी... और मुझे पता नहीं सबब ने क्या समझ लिया हुआ था..........

और पूजा दीदी एक बार फिरसे सबब के साथ मिल कर वही मस्ती वाली दीदी बन्न गई थी...... ये भी पूजा दीदी का एक ऐसा रूप था..... जो मुझे अंदर से बदल कर रख देता था......... और मैं पूजा दीदी का ऐसा प्यार भरा रूप देख कर अंदर से और भी मज़बूत ban'ne लगता था.......... नताशा दीदी और शीतल भी मुझसे से चिपकी रहती थी. अब्ब गर्ल्स की bhar-maar hi गई थी.....

पूजा didi..rani..shikha..roopa..shetal और नताशा didi....ke साथ साथ राज..

और फिर पद्मा aunty...maalikan..maalti bhabhi.....aur दीक्षा आंटी........ यहाँ इतनी फ्रेमलेस थी..... और वहां मेरी माँ और पहले तीन मेरी तितलियाँ थी. अब्ब एक और आ गई thi...kriti... फिर अनिल और फिर सोनाक्षी आंटी........

इन सबब में अजित bhai.unka बीटा राज. हर्ष अंकल और अनिल hi मेल थे बाकी सबब के सबब मेरी लाइफ में फ्रेमलेस hi थीई........

इन 3 दिनों में hi यहाँ मौजूद लड़कियों ने मेरा वो हाल किया हुआ था..... क क्या बताओं और फिर जब्ब वहां से भी 4 और आ जाएँगी तब्ब मेरा क्या होगा...... और फिर इनके इलावा मेरी लाइफ में कौन कौन आने वाली थी. मुझे नहीं पता..........

अगर मेरी लाइफ में इतनी लड़कियां आ गई थी तो मेरा पता नहीं क्या ban'ne वाला था.

जब्ब ये सबब एक साथ होंगी तो मेरा तो दुम्म hi घुट jayega........hehehhehehehe

यहाँ के बदले हुए माहौल की वजा से किसी ने भी मेरे ज़ख्म की इतनी ज़यादा परवा नहीं की थी...... रूम में रोज़ रात को पूजा दीदी मुझसे वैसे hi लिपट कर सोती. जैसे वहां घर में सोती थी और रानी भी इस पारर मुझे कहाँ छोड़ने वाली थी.. सबब की सबब मिल गई थी मेरा हशर करने के लिए....

जब्ब हम अपने घर में थे तो पूजा दीदी के साथ कभी रानी तो कभी शिका और रूपा अपनी रूटीन के मुताबिक़ मुझसे चिपक कर खुद के गरम और नरम वजूद को मुझमे समां कर सोने की आदि थी..... लेकिन यहाँ दो और भी थी मतलब नताशा दीदी और शीतल...... पूजा दीदी के तो मज़े थे hi.... अब्ब बची वो पांचो.

उनके के लिए फैसला करना मुश्किल था क आज की रत पूजा दीदी के साथ मुझे कौन हीट देगी............... पहलवान जी से भी ज़यादा मुझे इन गर्ल्स की हीट ने hi ताक़त दी थी.................. पहले चार की हीट मुझमे समां रही थी.. अब्ब दो और भी थी मुझे heat-up करने के लिए.......... लेकिन फैसला करना मुश्किल था........

मेरे लिए कोई भी रात दोनों साइड्स से बिना हीट मिले तो गुजरने वाली थी नहीं.......... इस लिए मेरे तो मज़े थे और पूजा दीदी के भी..... मुझ अकेले को hi हीट नहीं मिलती थी पूजा दीदी भी मेरी हीट की आदि हो गई थी.....

यहाँ रहते हुए फैसला करना जब्ब मुश्किल हुआ तो रानी ने सैक्रिफाइस दे दिया...




रानी :- मैं तो वहां घर में hi अपने हिस्से का सबब वसूल कर hi लूंगी..... यहाँ कुछ दिन इन दोनों बहनो को hi विजय का प्यार ले लेने दो............




रानी की बात सुन कर नताशा दीदी ने रानी के होंठों को hi पीना शुरू कर दिया और रानी सबब के सामने मारे शर्म के hi "didi"didi"didi" कुछ तो शर्म करो.. सबब यही हैं.............. शीतल भी कहाँ पीछे रहने वाली थी...... वो तो सबब से hi अलग इक अनोखा पैसे थी हर्ष चौहान के घर में... narm-o-nazuk से बदन वाली थी. लेकिन मस्ती में तो ये किसी भी सूरत में पूजा दीदी और रानी से कम् नहीं थी......

अक्सर बुद्धू बन्न कर घर में रहती थी... लेकिन सबब के साथ मस्ती में किसी से भी कम् नहीं थी........ उसने भी रानी का satya-nash करना शुरू कर दिया..............

रानी को सैक्रिफाइस करना बोहत hi महंगा पद गया था............. अब्ब शिखा और रूपा सोचने लगी क वो सैक्रिफाइस करे या न करें. रानी की तरह सैक्रिफाइस करना तो बड़ी बात नहीं थी.. लेकिन रानी का जो हशर हुआ था. दोनों बहनो के लिए एक सबक़ बन गया.... और दोनों बहनो शिखा और रूपा ने इंकार कर दिया सैक्रिफाइस करने से क वो भी मेरे साथ hi सोयेंगी...........................

अब्ब नताशा दीदी और शीतल को अपनी गलती का अंदाज़ा हुआ क मस्ती में hi अपने हाथ लगने वाले लड्द्दू वो खो चुकी हैं...... मतलब मैं इन सबब के लिए एक लड्द्दू hi था...... जिस का मैं करता मेरे गालों को अपने डेंटन में लेकर काटना शुरू कर देती थी.. पता नहीं मेरे फेस में ऐसा क्या था. जो सब की सबब मेरी तितलियों की तरह के जैसे बन्न जाती थी..... मतलब जैसे मेरी तितलियाँ मेरे साथ मस्ती किया करती थी... सबब शर्म ो हाय को भूल कर वैसे hi यहां की भी साड़ी गर्ल्स भी मेरी तितलियों के naqsh-e-qadam पर चलने लग गई थी......

अब्ब पता नहीं कोई ऐसी वेव मैं वहां अपनी तितलियों के पास से ले कर आया था जो इन सबब में घुस कर सबब को hi मेरी तितलियों के जैसा बना देती थी.........

नताशा दीदी और शीतल का चेहरा देख कर शिका और रूपा को तरस आ गया....

क लड्ड़ूऊऊऊ (मैं) तो उनका है hi. यहाँ थोड़ा सा ये दोनों बहने भी अगर टास्ते कर लेंगी तो हर्ज hi क्या है......... मतलब नताशा दीदी और शीतल की भी चंडी हो गई............ और 3 दिनों में शीतल मेरे और पूजा दीदी के साथ दो बार सोइ और नताशा दीदी 1 बार ..... इन दोनों बहनो के नरम ो गरम जिस्म की हीट का भी मैंने टास्ते कर लिया था....... ी लिखे आईटी...... अब्ब पता नहीं फ्यूचर में मेरा क्या ban'ne वाला था............

रूम अंदर से सोने के टाइम लॉक कर दिया जाता था. और फिर पूजा दीदी की देखा देखि नताशा दीदी और शीतल ने भी पूजा दीदी के जैसे hi मेरे साथ अपना प्यार जाताना शुरू कर दिया............ अब्ब मैं पूजा दीदी को तो कुछ कह नहीं सकता था लेकिन दोनों बहनो को भी मैं क्या खाऊन. जब्ब कुछ कहता तो कहती अपनी पूजा दीदी को पहले रोको फिर हमसे कहना............

पूजा दीदी मुझे फ्यूचर में पता नहीं कौनसी जुंग की ट्रेनिंग दे रही थी. शायद वो भूल गई थी. मेरा जितना भी आयल बचेगा. वो मेरे दुश्मनो के hi काम आएगा. लेकिन यहाँ किसी को इस बात की परवा hi नहीं थी..... सबब मेरे दुश्मनो को भूल मुझे अपना लड्ड़ूऊ समझ अपनी भूक मिटने में लगीं हुई थीई.......

कुल मिला कर सबब की चांदी हुई thi.........to मेरे लिए तो सोने पे सुहागा hi हुआ था. मुझे क्यों टेंशन लेनी चाहिए......... अब्ब आप सबब hi बताएं इन सबब के रहते मुझे फ्यूचर में और स्टोरी के लिए हीरोइन कैसे मिलेगी..............


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हर्ष चौहान अपने बिज़नेस ने बिजी हो गए थे... और शाम को जल्दी hi घर आ जाते थे....... फिर वो भी सबब के साथ मिल कर खूब बातें करते. अक्सर मेरे एक कंधे पारर एक हाथ रख कर thap-thapate और मेरे आगे आने वाले समय को ले कर बोहत सी बातें करते रहते थे.......... वो मुझे एक अलग hi इंसान बना हुआ देखना चाहते थे...........




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कल शाम को पूजा दीदी और अंकल मेरे रूम में ए और आते hi रूम को लॉक करके मेरे पास hi चेयर्स पारर बेथ गए..............

में उन को देख कर बीएड से उठ बैठा और उन की तरफ देखने लग्ग गया..

पूजा दीदी :- ऐसे दीदे फहद कर क्या देख रहे हो.......

विजय :- कुछ नहीं दीदी बास आप दोनों को hi देख रहा हूँ. मेरा ख्याल है कुछ बात करने ए हैं.....

हर्ष चौहान:- विजय बीटा बात तो करनी hi है लेकिन पहले हम तुमसे ये जानना चाहते हैं के तुम आगे क्या करना चाहते हो.

विजय :- मतलब मैं कुछ समझा नहीं.

हर्ष :- विजय बीटा तुम पहलवान जी से जो ट्रेनिंग ले रहे हो वो सबब तुम्हारे लिए परफेक्ट नहीं है. इस लिए मैं और तुम्हारी दीदी कुछ और सोच रहे हैं.

विजय :- अंकल आप क्या सोच रहे हैं. पूजा दीदी और आप जो मेरे लिए सोचेंगे. मुझसे पूछने की क्या ज़रुरत hai.lekin मुझे नहीं लगता क पहलवान जी जो मेरे लिए कर रहे हैं वो किसी भी सूरत में परफेक्ट नहीं है.....

पूजा didi:-gadhe पहले सुन तो लो...........

हर्ष चौहान:- बीटा हम सोच रहे हैं क पहलवान जी से बात करके तुम्हारी आगे की ट्रेनिंग शुरू की जाये ... अब्ब तक्क पहलवान जी ने जो भी तुम्हारे लिए किया है..

वो बोहत hi बढ़िया है. लेकिन तुम्हारे लिए काफी नहीं है..... इस लिए कल हम जा कर पहलवान जी से तुम्हारे लिए बात करेंगे.... और उनसे आगे क्या करना है उस बारे में पूछेंगे......... फिर आगे का सोचेंगे...

विजय :- ठीक है अंकल मुझे क्या परेशानी हो सकती है. पूजा दीदी और आप जैसे सही समझें. मेरा ख्याल है क पहलवान जी ने भी मेरे लिए आगे का बोहत कुछ सोच रखा है. मुझे बताते तो नहीं लेकिन कुछ तो है पहलवान जी के मैं में... आप पूजा दीदी के साथ पहलवान जी से मिल कर बात करलें. शायद पहलवान जी आपसे खुल कर बात कर सकें............



पूजा दीदी:- तो फिर हम तीनो कल पहलवान जी से मिलते हैं. देखते हैं वो क्या कहते हैं ............................

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Location:Akhaada:




दिन के 3 बजे का टाइम था. और पहलवान जी के कमरे में इस वक़्त मैं पूजा दीदी और हर्ष अंकल बैठे हुए थे.

मैं इन सबब के सामने क्या बोलता. मैं चुप hi था जो भी बोलना था इन तीनो को hi बोलना था अगर मुझसे कुछ पूछा जाता तब्ब hi मैं बोलता....

हर्ष चौहान:- पहलवान जी आप भी सुन चुके हैं. जो भी विजय के साथ उस रात को हुआ था. इस लिए हम आये हैं. क विजय के लिए आगे आप ने क्या सोचा hai.hamare मैं में भी बोहत कुछ है विजय को ले करके' विजय की आगे की ट्रेनिंग के liye'vijay को आगे जैसे हालत का सामना करना पद सकता है. उसके के लिए विजय को जितना स्टोरंग और काबिल होना चाहिए. हमारा सबब करने का मैं है. और विजय kamm-umar भी है लेकिन विजय के लिए जल्द से जल्द कुछ ban'na भी ज़रूरी है लेकिन हम पहले आपसे hi jan'na चाहते हैं क्यूंकि आप hi विजय के पहले गुरु हैं और विजय के लिए आपने बोहत कुछ किया है.

पूजा दीदी:- चाचा जी आपने विजय को अपने बेटे के सम्मान समझ कर जो भी उसके लिए किया उसके लिए मैं आप को थैंक्स बोलती हूँ. विजय बोहत hi कम् समय में इतना ताक़तवर हो गया है. ये सबब आप hi की वजा से है. अब्ब आगे भी आप hi बातएंगे हमें क्या करना चाहिए. जैसा क आपने सुना क विजय को गोली भी लगी थी लेकिन विजय सहन तो कर गया लेकिन अभी भी विजय हर्र मैदान में लड़ने लायक नहीं हुआ है.. लेकिन हम विजय को जल्द से जल्द कुछ बना देखना चाहते हैं. वक़्त कब क्या रंग बदल दे. वक़्त का क्या भरोसा इस लिए आप जो भी करना चाहते हैं बास कुछ जल्दी hi होना चाहिए....

पहलवान जी हर्ष चौहान और पूजा दीदी की बातें सुन कर मुस्कुराने लगे....

पहलवान जी:- पूजा बेटी मैं तुमको तब्ब से जानता हूँ जब्ब तुम इत्ती सी thi(pehlwan जी हाथ से इशारा करते हुए बोले) मैं बोहत अच्छे से तुमको और तुम्हारी माँ को जनता हूँ. तुम बोहत hi पायरी बेटी हो मेरी. मेरे लिए कोई गैर भी नहीं हो इस लिए थैंक्स मैट बोलो और रही बात विजय की to(ek बार मेरी तरफ देखा फिर दोनों को देख कर आगे बोले) जितनी आगे विजय की है इस आगे में विजय जितना मज़बूत और ताक़तवर होना आसान नहीं है... ये सबब विजय की hi हिम्मत है जो ये सबब कर रहा है. इतनी सी उम्र में hi विजय बोहत hi मैं लगा कर मुझसे सबब सीख रहा है.......

हर्ष चौहान साब और पूजा बेटी तुम दोनों जो भी बोल रहे हो वो भी सही hai.....lekin विजय के लिए अभी सबब कुछ सीखना मुमकिन नहीं है... अगर आप के मैं में विजय के लिए किसी ट्रेनर को ले करके विचार हैं तो उसे अपने मैं में hi रहने दो. विजय के लिए मैंने जो सोचा है वो पहले करना ज़रूरी है. पूजा बेटी तुमने देखा विजय एक गोली लगने के बाद भी कैसे बैठा हुआ है. विजय की आगे का कोई भी लड़का गोली लगने के 2 या 3 हफ्ते बाद तक बीएड से नहीं उठता लेकिन विजय हमारे बीच में hi बैठा हुआ है. और ये सबब विजय ने यहीं रह कर hi किया है........

विजय को शरीफ लड़ना hi नहीं है. विजय को मैं अपने अंदर मैं से दिल लगा कर एक ऐसा इंसान बनाने में लगा हुआ हूँ. जो कम् hi कोई किसी के लिए करता है. और विजय जैसी लगन भी कम् hi किसी में देखने को मिलती है .......

विजय के लिए मेरे दिल में भी वही सबब कुछ है जो तुम सबब के दिलों में है. विजय के दर्द को मैं भी समझ सकता हूँ. लेकिन सबब कुछ एकदम से हो जाये ये मुमकिन नहीं होता. विजय अभी इतना भी बड़ा नहीं हुआ है.......

हर्ष चौहान:- लेकिन पहलवान जी विजय के लिए सबब कुछ जल्दी सीखना भी तो ज़रूरी है......

पहलवान जी:- मुझे सबब पता है हर्ष जी विजय के लिए सबब सीखना ज़रूरी है. लेकिन पहले मैं अपने हिसाब से विजय को सीखा रहा हूँ. शायद विजय ने आपको बताया नहीं है क विजय को कुछ दिनों से मैंने आगे की ट्रेनिंग देनी शुरू करदी है.




पूजा दीदी:- चाचा जी मुझे सबब पता है.




पहलवान जी:- पूजा बेटी मैं विजय को ऐसा बनाना चाहता हूँ क आगे चल कर विजय कुछ भी करे विजय के साथ कुछ भी हो जाए. लेकिन कभी भी मैदान ना छोड़े बाकी रही आज के हिसाब से विजय की ट्रेनिंग जो आप सबब के दिलों में है. वो भी मैं सबब समझता हूँ. उसके लिए भी आप दोनों परेशां ना हूँ. विजय को कहीं भी जाने की जरूआत नहीं है. अगर ज़रुरत पड़ी भी तो मैं तुम दोनों को बता दूंगा. अभी मैं विजय को जो सीखा रहा हूँ उसे वो सीखने दो..

बोहत hi जल्द विजय में आने वाले बालाओ आप सबब को भी नज़र आने lagenge....abb अगर कुछ और भी कहना चाहते हैं तो मैं हाज़िर हूँ.

पूजा दीदी और हर्ष चौहान दोनों एक दुसरे को देखने लगे... अब्ब जब्ब पहलवान जी ने कह hi दिया है तो फिर उनपर शक करना या यह सोचना क पहलवान जी विजय के लिए कुछ ख़ास नहीं कर पाएंगे. तो ये बोहत hi गलत होगा.......

पूजा दीदी:- नहीं चाचा जी आप हम दोनों से ज़यादा अच्छे से जानते हैं क विजय क लिए क्या सबब से ज़यादा और क्या सबब से पहले ज़रूरी है.... हमें आप के कहे हुए पर कोई भी परेशानी नहीं है......

पहलवान जी पूजा दीदी की बात से खुश हो गए........

यहाँ आते hi पहलवान जी ने सबब की अच्छे से सेवा की थी..... इस लिए जब्ब पूजा दीदी और हर्ष अंकल को लगा क अब्ब और कुछ नहीं रहा पूछने लायक तो उन्हों ने जाने की इजाज़त चाही............ पहलवान जी ने भी उठ कर हर्ष चौहान को गले से लगाया और पूजा दीदी के सर्र पर हाथ रख कर बोले....

पहलवान जी:- पूजा बेटी बिलकुल भी ऐसा वैसा मैट सोचना बास कुछ दिनों में hi तुम सबब देख लेना. मुझे यकीन है ख़ास तौर पर तुम्हे बोहत hi ख़ुशी होगी विजय को देख कर............

पूजा दीदी:- जी चाचा जी आप का शुक्रिया..........



फिर पहलवान जी ने मुझे भी अपने सीने से लगाया और कल आने को बोल diya....us के बाद हम सबब घर के लिए निकल गए.............

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Location:Akhaada:

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जब्ब सबब चले गए तो पहलवान जी ने रणजीत को कॉल मिला दिया. कुछ hi पळून में कॉल अटेंड हुई तो..........

आईएनएस रणजीत:- हाँ जग्गू बोल क्या बात है.....

जग्गू :- रणजीत यार अभी कुछ देर पहले विजय पूजा बेटी और हर्ष चौहान ए the...................ye सुनते hi रणजीत अपनी चेयर पर सीधे हो कर बेथ गया.

आईएनएस रणजीत:- अच्छा तो फिर क्या कह रहे थे वो सबब. ज़रूर विजय की hi बात होगी.

जग्गू :- हाँ और क्या बात हो सकती है. विजय को ले करके hi बात होनी थी.

आईएनएस रणजीत:- तो फिर क्या बात हुई. क्या कह रहे सबब वजिजय के बारे में...

पहलवान जी ने फिर जो भी बायत हुई थी सबब ins-ranjeet को बता दिया....

आईएनएस रणजीत:- पता नहीं क्या है इस लड़के में जो सबब के सबब hi उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हैं. मैं खुद भी खुद को रोक नहीं पा raha...uske लिए कुछ भी करने से .......... चल ठीक है जग्गू मिल कर करते हैं इसपर आगे की चर्चा, अब्ब रखता हूँ. यहाँ से फ्री हो कर मैं आता हूँ तेरे पास......... ok bye


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थैंक यू वेरु मच बॉस:

मैं भी कई महीनो से आप की तरह hi एक रीडर था...

बास शोक शोक में hi स्टोरी स्टार्ट कर बैठा.. और फिर लिखते hi लिखते मुझमे बदलाव आने लगा...

और मेरे लिखे हुए को आप सबब ने सराहना शुरू कर दिया.... ये सबब आप सबब का प्यार है मेरे लिए.....

ा बंडल ऑफ़ थैंक्स तो यू एंड आल माय रीडर्स
 
अपडेट ::: 36

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अब्ब्ब ाआगेए

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इंट्रोडुन्क्टिओं:

आईएनएस रणजीत: आगे:36




डैशिंग पर्सनालिटी के मालिक. दिल के बोहत hi अच्छे इंसान हैं.. कभी भी किसी को भी किसी भी किसम की मदद की ज़रुरत हो ये पीछे नहीं hat'te.....

रणजीत ने जब्ब होश संभाला तो खुद को एक anath-aashram में पाया......

रणजीत की अर्ली लाइफ में बोहत सी प्रोब्लेम्स आयीं लेकिन कभी भी हिम्मत नहीं हारी. जितनी तकलीफें और दर्द रणजीत ने खुद की लाइफ में देखे थे.......

उन हालातों ने रणजीत को ज़माने का दुश्मन बना दिया. और अपने जैसों के लिए दिल में ुनलिमटेड प्यार और मदद का जज़्बा था रणजीत के दिल में.....

यही वजह है जो ins-ranjeet विजय में इंट्रेस्टेड hai.....ranjeet को विजय के हालत खुद के जैसे hi दिखे ... रणजीत सेल्फमेड था और विजय को देख कर खुद को सोचने लग गया...... रणजीत भी कभी ऐसे hi हालातों से गुज़रा था. अकेला और ज़माना का ठुकराया हुआ था... विजय के दर्द को रणजीत ने अपना hi दर्द मान लिया और फिर खुद से इक वादा भी कर लिया. क विजय के लिए कुछ भी करना पड़े. रणजीत करेगा.................................................... ऐसे hi एक बार रणजीत ने पहलवान जी की भी मदद की थी.. तब्ब से दोनों बोहत hi अच्छे डांस बोन गए हैं....

और रणजीत की पर्सनालिटी से रिलेटेड अगर बात की जाए. तो रणजीत किसी ववे रेसलर से कम् नहीं है. खुद रणजीत को पुलिस की जॉब की ज़रुरत नहीं है. लेकिन लोगों के काम आने के लिए रणजीत ने इस फील्ड को hi चुना है... इसके इलावा रणजीत एक बेस्ट फाइटर भी हैं. और बहार से त्रिनेड भी हैं. बोहत से कनेक्शंस भी रणजीत ने बना रखे हैं. कई बार कुछ बड़े लोगों ने रणजीत का ट्रांसफर भी करवाने की कोशिश की लेकिन कोई भी रणजीत का ट्रांसफर नहीं करवा पाया........ रणजीत खुद में hi एक strong-man के इलावा भी बोहत कुछ हैं....


मेरा ख्याल है क आप के कुछ सवालों के जवाब भी आपको मिल गए होओगे.....

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Location:Pooja दीदी हाउस:



पहलवान जी के पास से आने के बाद जब्ब हम घर पोहंचे... तो मुझे तो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा tha...kyunki मैं पहले से hi पहलवान जी से सटिस्फी था. और आज पूजा दीदी और हर्ष अंकल भी उनसे सटिस्फी हुए थे या नहीं. पता चल जायेगा....

हमें देख कर सबब के चेहरे जोश की वजा से टिमटामाये हुए थे. क्या हुआ होगा' क्या कहा होगा पहलवान जी ने. आगे चल कर मेरे लिए क्या डीडे किया गया होगा.

हमारे आते hi सबब ने सवाल शुरू कर दिए... पूजा दीदी ने सबब को आँखें दिखाएं तो कुछ शांत हुए. और हर्ष अंकल और मैं हंस diye.....hum चल कर अंदर कमरे में पोहंचे. और हर्ष अंकल को एक चेयर पर बिठा कर मैं और पूजा दीदी बीएड पर बेथ गए......

काफी वक़्त गुज़र चूका था. घर के सभी कमरों को पेंट किये हुए. तो जगा जगा से उखड़े हुए पेंट की वजा से पूजा दीदी का रूम कुछ ज़यादा hi khub-soorat दिखाई दे रहा था. इन 3 दिनों के घर का भी satya-nash हो चूका था. कुछ कुछ सफाई वागिअर की गई थी. लेकिन हर्ष अंकल के जैसे इंसान की पर्सनालिटी से मैच नहीं कर पा रही थी.

लेकिन वो इन सबब बातों को नज़र अंदाज़ करते हुए पूजा दीदी को देख रहे थे...




पूजा दीदी:- जी अंकल जी अब्ब आप क्या कहते हैं. सबब तो सुन hi लिया है आपने.

जो भी पहलवान जी कहा है...




हर्ष अंकल:- पूजा बेटी मैं हैरान हूँ क वो पहलवान विजय को क्या सिखाएगा.

एक बात तो कन्फर्म है क पहलवान विजय को ताक़तवरर तो बना hi देगा. लेकिन आगे चल के आज के ज़माने के हिसाब से विजय को त्रिनेड कैसे करेगा. वो मुझे नहीं लगता क पहलवान ऐसा कुछ कर सकेंगे. लेकिन जिस तरह से वो बात कर रहे थे.

कही से भी ऐसा नहीं लग्ग रहा था क वो जो भी कह रहे हैं. वो कर नहीं पाएंगे. कुछ भी सही से हमें बताया तो नहीं है पहलवान ने . लेकिन जो भी कहा है. उनकी बातों में कुछ ऐसा था क मैं हैरान तो हुआ hi हूँ लेकिन ये भी मैं बोहत अच्छे से जान गया हूँ क उनके पास कोई न कोई सलूशन ज़रूर है विजय के लिए.

जैसे हम आज के हिसाब से विजय को ट्रेनिंग देना चाहते हैं. पहलवान के पास भी इसका कोई न कोई हॉल ज़रूर है..........................

खैर देखते हैं जैसा वो कह रहे थे क आने वाले दिनों में विजय में चेंज से hi हम सबब को पता चल जाएगा......... तो अब्ब देखते हैं पहलवान विजय के लिए अब्ब क्या करते हैं............

हर्ष अंकल की बात से मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई.... और पूजा दीदी और हर्ष अंकल किसी गहरी सोच में डूब गए......... दोनों सोच में ज़रूर थे लेकिन कही से भी मायूस नहीं दिख रहे थे............

2 घंटे तक्क हर्ष अंकल दीक्षा आंटी और नताशा दीदी के साथ शीतल भी चली गई........ जाते हुए किसी का भी मैं नहीं हो रहा था जाने का....

नट्सः दीदी और शीतल छिपकली तो मुझसे चिपक कर रोने लगीं थी. जैसे मैं कही बोहत दोर्र जाने वाला हूँ या फिर जल्द hi हमारी मुलाक़ात नहीं होगी.....

या पिछली 3 रातों की हीट ने दोनों बहनो को मुझसे कुछ और भी नज़दीक कर दिया था. अब्ब वो मुझसे दूर रहना नहीं चाहती थीं.......... लेकिन जाना तो था....

उनके जाने के बाद इसी घर की बची हुई तितलियों ने जो वहां हर्ष अंकल के घर में मुझसे जो न कर पाएं. मुझे पकड़ कर अपने हिस्सा वसूलने लगीं. लगता है जैसे अब्ब इन सबब से भी फासला बढ़ने वाला था.. पता नहीं मेरे लिए पहलवान जी ने आगे क्या कुछ सोच रखा था. और क्या कुछ मेरे साथ होने वाला था.........


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आफ्टर 3 मंथ

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इन 3 महीनो में पहलवान जी ने जो कहा था पूजा दीदी और हर्ष अंकल से वो कर दिखाया था...............................

इन 3 महीनो में मैं सिर्फ रात को 8 बजे hi घर आता tha..baaki सारा दिन वही पहलवान जी के hi पास गुज़रता था.. आते hi डिनर करके दो घंटे घर वालों के साथ गुज़ारता था फिर पूजा दीदी और मैं सो जाय करते थे. और फिर सूबा के 4 बजे मैं उठ कर उखाड़े की तरफ निकल जाता...........

पहलवान जी ने जो चैलेंज पूजा दीदी और हर्ष अंकल दिया था..... वो उसी काम में

लगे हुए थे. और मेरी हालत बोहत hi ख़राब हुयी शुरू के 10 दिनों में.

मेरा कोई भी जोड़ ऐसा नहीं था. जो अपनी जगा से हिल न गया हो. लेकिन पता नहीं पहलवान जी में कौनसा ऐसा जिन्न्न घुस गया था जो मुझसे ऐसी कसरत करवाने लगे थे. उन्हों ने मुझपर कोई भी रेहम नहीं किया और मेरे बखिये उधेड़ते रहे. जब्ब में बोहत hi ज़यादा थक जाता तो मुझे कुछ खाने के साथ साथ कुछ पीने के लिए भी दे देते थे. jis'se मुझे कुछ आराम मिलता. कुछ देर रेस्ट के बाद फिरसे मुझे मेरे काम पारर लगा देते.............

पहलवान जी ने मुझे पहले दो महीनो में कम् hi पहलवानी के गुर सिखाये. बास मुझसे जोरर आज़माई करवाते या हर्र रोज़ज मुझे कुछ अलग अलग चीज़ों को उठाने को बोलते थे. जिन का वज़न हर्र रोज़ज बढ़ता गया...

उस के साथ hi 1 घंटा रोज़ मुझसे ट्रेक्टर का बड़ा व्हील पलटने को बोलते एक दो बार तो मुझे कोई ख़ास परेशानी नहीं होती थी. लेकिन जब्ब बार बार मुझे वही काम करना पड़ता तो 10 मिंट में hi मेरी फ्हटने लगती थी. ट्रेक्टर का इतना बड़ा व्हील था. 2 या 4 बार उठाना हो तो कुछ नहीं होता लेकिन जब्ब 1 घंटा मुसलसल उठाना होता. तो मेरे नीचे से आवाज़ें आने लग जाती थीं...... पहले दिन तो मेरी मैट hi मारी गई थी. व्हील को पलटने में. लेकिन पहला दिन था तो 10 बार पलटने के बाद पहलवान जी ने मुझे आधे घंटे की रेस्ट दे दी थी...

3 hi दिनों में पहलवान जी मुझे 40 मिंट तक्क ले ए व्हील को पलटने में....

"अब्ब 40 मिंट" सोच कर hi दमघ ख़राब हो जाता है. पता नहीं पहलवान जी ऐसा क्यों कर रहे थे मेरे साथ...............

मेरी तितलियाँ मेरी हालत देख कर hi पेट पकड़ कार हंसने लग्ग जाती थी. जब्ब भी में घर पोहचता था..... मेरी हालत hi ऐसी हो गई थी. मेरी चाल hi ऐसी होती कोई भी मुझे देख कर हांसे न तो और क्या करे. मेरा एक हाथ कमर पारर और फिर गांड को पीछे बहार निकल चलते हुए घर आना. तो ये साड़ी लड़कियां हंसें न तो और क्या करें.... और बाकी की बड़ी ौंतियाँ भी अपने दांत मुझे दिखने का मौका नहीं छोड़ती थीं. लेकिन वो बड़ी थीं तो कुछ मेरा ख्याल कर लिया करती theen.......aur जल्दी hi अपने दांत वापिस छुपा भी लेती थीं..

1 महीना लगा मुझे' पहलवान जी जो भी मुझसे करवाते उसका आदि होने में. और एक महीना मेरा बोहत hi बुरा गुज़रा था.

लेकिन एक महीने में hi मैं बदल भी गया था.

मेरा वज़न कुछ कम् हुआ तो था लेकिन मेरी कमर में ऐसी लचक और मज़बूती मुझे महसूस होने लगी थी क क्या बताओं. अब्ब मेरी चाल भी ठीक थी और मेरे चलने का अंदाज़ भी बोहत hi दिलकश हो गया था. पूजा दीदी मुझमे आये हुए एक एक बदलाव को बड़ी hi बारीकी से नोटिस करती रहती थी. पूजा दीदी मुझे देख कर खुश रहने लगी. और पहलवान जी से भी खुश हो गई thi.pehlwan जी से खुद क्युन्ना होती. आखिर वो मेरे लिए इतना कुछ जो कर रहे थे. मुझे सिर्फ फाइट hi नहीं चाहिए थी. मुझे एक ऐसा strong-man बनना था क मुझ जैसा कोई ाएस पास दिखे hi ना. और अगर कोई दिखे भी तो मेरे सामने खड़ा रहने की हिम्मत न कर सके.

कुछ ऐसा hi पहलवान जी मुझे बना रहे थे .............. पहले कुछ मुझे सीखने लगे थे केकिन पूजा दीदी और हर्ष अंकल के आने के बाद से उन्हों पहलवानी गुर रोक कर मुझे स्ट्रांग बनाने में लगे हुए थे........

हार्ड कसरत और मुझे दी जाने वाली खुराक की वजा से मुझमे फुर्ती और चुस्ती भी

बोहत hi बढ़ गई thi.taqat तो मुझमे be-inteha आ hi गई थी.. अब्ब मैं थकता तो था लेकिन अब्ब मैं इस सबब का आदि होता जा रहा था.

इस एक महीने में मुझे व्हील को पलटने के इलावा और भी कई किसम की भारी चीज़ों को उठाने के लिए लगा दिया था पहलवान जी ने. पहले 15 दिन के बाद एक गोल पत्थर 40कग का था वो मुझे उठाने के लिए दिया गया था. मुझे कुछ परेशानी तो हुई लेकिन मैंने उसे उठा hi लिया. गोआल था न तो परेशानी तो होना hi थी. लेकिन फिर जब्ब पहलवान जी ने मुझे मुसलसल उठाने को बोलै तो एक बार तो मैं में आई क पहलवान जी से बोलूं क पहले hi बड़ी मुश्किल से उठाया है. लेकिन नहीं बोलै करना तो था hi जैसा भी वो बेलें. ये सबब मेरे लिए hi तो था.

बास फिर क्या था वो पत्थर था और मैं था और मेरी गांड थी पत्थर को उठाते हुए जैसे वो बहार को निकलती और जैसी वो आवाज़ें निकलती थी. शुक्र है मेरी तितलियों के पंडाल में से कोई यहाँ नहीं थी. वर्ण मेरा इतना मज़ाएक़ बनती क जान छुड़ाना hi मुमकिन ना रहता............

रोज़ रोज़ वेट बढ़ने लगा और मेरी गांड का साउंड भी वेट के साथ hi चेंज होने लगा. लेकिन फिर 1 महीने में सबब ठीक हो गया..................

ऐसे hi दो महीनो में मैं व्हील और पत्थर के जैसे और भी कई तरह के कामों में लगा रहा........... बड़ी परेशानी हुई लेकिन एक महीने की इस an-thak म्हणत ने मुझे मेरी म्हणत का पहल कुछ ऐसा दिया था क थकन तो काम हो hi गई थी.

मेरी टिटिलियों ने मुझे जितना भी टाइम उनको मिलता था. उसी टाइम में hi अपना सबब कुछ मुझसे सऊद समेत वसूलने लगीं. मेरी हार्ड कसरत की वजा से उन सबब ने खुद को लिमिट में राखह लिया हुआ था. लेकिन 1 महीने में आये मुझमे बदलाव की वजा से वो खुद par'se कण्ट्रोल खोने लगीं. लेकिन पूजा दीदी की आग बरसाती हुई आँखों की वजा से खुद को रोक लेती थीं. मतलब मेरा रंग तो कुछ कम् हो गया था. लेकिन कशिश बोहत hi बढ़ गई थी. पहले hi इतनी ज़यादा कशिश थी मुझमे अब्ब और भी हो गई थी. na-jaane मेरा क्या होने वला था. इतनी तितलियाँ जो थी मेरे लिए. और मैं एक अकेला. इस सबब के लिए..........

पता नहीं मेरा चेहरा सबब गर्ल्स को कैसा लगता था. उन सबब का बास नहीं चल रहा था क मुझे कच्चा hi खा जाएँ.

दो महीने के बाद मेरी कसरत का 70% कम्पलीट हो चूका था.

पहलवान जी कहते रहते थे. क जैसा तुम सबब कर रहे हो वो सबब करने के लिए भी कम् से कम् 1.5 साल लगता है. ये सबब करने में अगर मेरी मदद की थी तो पूजा दीदी और मेरे अंदर पल रही आग ने और सबब कुछ समझते हुए कम् रह जाने वाले समय की वजा से मैंने 2 hi महीनो में वो कर दिखाया था. जो तक़रीबन na-mumkin hi था...

लेकिन मैं सबब कुछ भूल कर बास अपने hi टारगेट को अचीव करने में लगा हुआ था. मुझे जल्द से जल्द और पहलवान जी के कहे पर पूरा उतरना था. यहाँ बात अब्ब सिर्फ मेरी hi नहीं थी. पहलवान जी ने जो पूजा दीदी और हर्ष अंकल से कह दिया था क मुझे कहीं भी जाने की ज़रुरत नहीं थी.........

इन सबब बातों की वजा से मैंने और पहलवान जी ने कोई भी कसार नहीं छोड़ी और दो महीनो के बाद कुछ एक्स्ट्रा होना मेरे लिए पहलवान जी के मैं में......

2 महीनो के बाद दिन के 3 बजे के बाद मतलब 3 बजे तक्क वो सबब किसम के वेट तो मैं उठता hi था व्हील को पलटना और पत्थर के इलावा जो भी था ुणसब्ब को 3 बजे तक्क का टाइम देना था........... 2 महीनो के एन्ड होने तक्क मुझमे थकन कम् hi रह गई थी. मतलब अगर मैं चाहता तो एक हाथ से किसी भी आदमी को आसानी से उठा सकता था.. और एक पंच में hi किसी की भी पसलियों का कचूमर बना सकता था. ये वो चीज़ थी जो शायद किसी भी ट्रेनिंग सेण्टर में मुझे नहीं मिल सकती थी. और वो इतनी जल्दी........ ये सबब सिर्फ पहलवान जी का hi कमाल था...

लड़ाई में आर्ट के साथ साथ अगर be-inteha ताक़त भी हो तो फिर बात hi अलग होती है............ शायद आने वाला वक़्त मेरे लिए कुछ स्पेशल होने वाला था......

70कग विगत उठाना वो भी एक हाथ से मेरे लिए मुश्किल नहीं रहा था....... एक आग तो थी hi मेरे अंदर और अब्ब तो मैं एक strong-man भी बन्न गया था ....

जब 2 महीने गुज़रे तो पहलवान जी ने मुझे एक आदमी से मिलवाया था. 3 बजे के बाद मैं उस आदमी के साथ चल पड़ा. पहलवान जी ने मुझे कह दिया था क जो भी ये तुमको सिखाये या जो भी बोले समझ लेना क मैंने hi कहा है. किसी भी बात को ले करके मुझे कम्प्लेन नहीं मिलनी चाहिए.....

मुझे क्या परेशानी होनी थी मैंने पहलवान जी को ok बोल दिया और उस आदमी के साथ चल दिया..... ये आदमी भी एक पहलवान जैसी hi जिसमत का मालिक था. लेकिन ट्रॉउज़र शर्ट पहने हुए था.... और मैं भी ट्रॉउज़र के साथ एक खुली शर्ट में था....

अभी पहलवान जी ने मुझे कहा हुआ था क कभी भी फिटिंग वाले ड्रेस मैट पहनना. मैंने कहा "ठीक है पहलवां जी" मेरी कमर किसी चीते के जैसी पतली और pur-kashish हो गई थी. और मसल्स की तो बात hi अलग थी.........

मैं अभी से किसी 19 -- 20 साल के लड़के की तरह से लगने लगा था... कम् उमरी इन 2 महीनो में hi ख़तम हो गई थी....... चेहरा तो पहले hi मस्सोमियत से ारी था. अब्ब और भी चेंज हो गया था. हलकी हलकी मूंछें उगने लगी थीं और मेरे चेहरे को और भी pu-kashish बा देती थी....

रास्ते में उस आदमी ने कोई भी बात नहीं की और मुझे ले कर उसी वीराने की तरफ निकल गया. जहाँ पहली बार मुझे राजा मिला था ............ एक बात बताना तो मैं भूल hi गया क इन 2 महीनो में मेरी किसी से मुलाक़ात नहीं हुई थी मेरा सचेडूले भी तो बोहत hi टफ हो गया था. इसलिए मेरा किसी से मिलना hi नहीं हो पा रहा था............... हर्ष चौहान और उनकी फॅमिली भी 2 बार आई थी लेकिन मुझसे बास थोड़ी hi देर मिल सके थे वो सबब. क्यूंकि फिर रात और मेरी टफ रूटीन की वजा से वो सबब भी खुद को संभाल गए थे. नताशा दीदी और शीतल तो मुझे देख कर hi वही स्टेचू बन्न गई थी. रानी शिखा और रूपा की तरह उनका भी बास नहीं चल रहा था. क अपने लड्डूउउ को खाना hi शुरू कर दें...... लेकिन पूजा दीदी के सख्त आर्डर वो भी जान चुकी थीं.......... क लड़ड़ूऊऊऊ को अब्ब पक्क कर और भी टेस्टी हो लेने दो फिर सबब hi मिल कर खाएंगे............... सबब hi नदीदों की तरह अपनी बढ़ती भूक को मिटने के लिए वक़्त का इंतज़ार कर रही थीं.

मैं उस आदमी के साथ चल रहा था. हम वीराने में बोहत hi आगे निकल गए थे. मैं यहाँ इस जगा पहली बार आया था..... 20 मिंट में hi हम यहाँ पोहंच गए तेह. वो आदमी रुक गया और एक तरफ देखने लगा... मैंने उस आदमी की नज़रों का पीछा किया तो मुझे एक जीप कड़ी हुई नज़र आई. उस जीप में 3 आदमी बैठे हुए थे. हमारे आते hi वो तीनो जीप से बहार आये और हमारी तरफ आने लगे.....

उनके हाथों में दो बड़े बड़े बैग थे. मैं उन तीनो को देखने लगा....

कुछ hi देर में वो सबब हम तक्क पोहंच गए................ आने वालों ने मेरे साथ में जो आदमी था उनको सलूट किया....... मैं हैरान रह गया. कहीं ये कोई अफसर तो नहीं. लेकिन मैंने पूछा नहीं जो भी होंगे खुद hi बताएं तो अच्छा है. वर्ण मेरा पूछना सही नहीं है...... फिर आने वालों ने मुझसे हैंड शेक किया. मैं भी उन तीनो से अच्छे से मिला....

आदमी का नाम जो मुझे बाद में मालूम हुआ था. बोहत hi अलग किसम का नाम था. लेकिन वो खुद भी एक अलग hi किसम के इंसान थे...... नाम पृथ्वीराज ठाकुर था लेकिन सबब उनको राज सर hi बुलाते थे........... और बाकी के तीनो के नाम भी मैं आप सबब की आसानी के लिए लिख देता हूँ..



पृथ्वीराज सर आगे:34

अभय आगे: 24

सुनील आगे: 23

आदित्य आगे: 26




राज सर:- अभय सुनील आदित्य तुम तीनो अपने अपने बैग खोल कर उनमे मौजूद जो कुछ है सबब कुछ निकल कर सेट कर दो..............

तीनो :- जी सर

तीनो ने बैग्स में जो कुछ भी था सबब बहार निकलने लगे.. मैं सबब देख रहा था मेरी हैरानगी का ठिकाना नहीं था..... सबब कुछ मेरा देखा हुआ नहीं था. गन्स तो थी लेकिन एक अलग hi किसम की थी जिन की सिर्फ मैंने फोटो hi देख राखी थी.

अभी मुझे उनके नाम नहीं आते थे. कुछ पिस्टल और गन्स थें.

सबब सामान निकलने के बाद सबब से पहले जो उन्हों ने किया उसे देख कर में बड़ा हैरान हुआ..... अभय और सुनील ने हाथों में कुछ पकड़ा हुआ था जो फोल्ड किया हुआ था लेकिन जब्ब उन्हों ने उसे खोला तो दो टेबल सी बन्न गई. फिर तीनो ने जो भी बैग्स से निकला था वो तीनो दोनों टेबल पर सजाने लगे.........

राज सर सबब को hi देख रहे थे और मेरे पास भी कोई और काम तो था नहीं मैं भी देखने लगा................ जब्ब सबब सेट हो गया..... तो राज सर मेरी तरफ देखने लगे मैं तो टेबल्स पर पड़े हुए हथियारों को hi देखने में मगन था.....

राज सर मुझे ऐसे देखते हुए पा कर मुस्कुराये और फिर मुझे शोल्डर से पकड़ कर खुद की तरफ मतवज्जु किया और बोले

राज सर:- विजय बीटा मेरा नाम पृथ्वीराज तेखुर है और ये सबब जो तुम देख रहे हो सबब तुम्हारे लिए hi hai.....bass तुम कोई सवाल और मैट पूछना क हम और क्या करते हैं और कौन हैं. यहाँ तुम्हारी ट्रेनिंग हो गई. हैंड तो हैंड और फिर इन गन्स के बारे तुम्हें बताया जायेगा.... और इन गन्स का उसे कैसे करना है वो सिखाया जायेगा....

मैं क्या बोलता बास सर hi हिला पाया..... मुझे देख राज सर फिरसे मुस्कुराये..

राज सर ने मुझे टेबल पर पड़े हुए एक पिस्टल को उठा कर दिखाया और बोले

राज सर:- विजय बीटा जो भी कहा जाए या बताया जाए उसे सिर्फ घोरसे सुन्ना hi नहीं hai(mere सर को ऊँगली से बजाते हुए) अपने दमाग में ऐसे फिट कर लेना है क कभी भूले नहीं तुमको... यहाँ सिर्फ ट्रेनिंग hi काफी नहीं होती. खुद की लगन और हाज़िर दमाग़ी भी ज़रूरी है वर्ण हमारा और तुम्हारा टाइम hi वास्ते होगा..

विजय :- राज सर आप बताएं मैं कुछ भी कभी भी नहीं भूलूंगा...

राज सर:- गुड यही yahi(meri आँखों की तरफ ऊँगली करते हुए) चमक मुझे हरदुम्म दिखनी चाहिए ........... मैं भी तो देखों जो भी तुम्हारे बारे में बताया गया है वो कहाँ तक सही है..........

विजय :- सर मैं आपको मायूस नहीं करूँगा........

राज सर:- गुड. तो फिर ये मेरे हाथ में जिस पिस्तौल तुम को देख रहे हो इसका नाम तो नहीं जानते hoge.....(maine इंकार में सर हिला दिया. फिर वो आगे बोले) इस का नाम ग्लोक मीन्स ग26 है..... इस के इलावा तुम्हरे लिए और कोई परफेक्ट नहीं हो सकता.. मेरे लिए is'se परपेक्ट कोई नहीं.. जैसे hi हाथ में आता है तो ऐसा लगता है क अब्ब मेरे सामने कोई भी टिक hi नहीं paayega.aur सभी मारे जायेंगे...... इसको चलने में मुझे बोहत hi मज़ा है... लेकिन तुमको जो सही लगे वो तुम अच्छे से उसे कर सकते हो........... फिर राज सर मुझे ग26 पिस्तौल के बारे में बताने लगे. कैसे वो लॉक होगा. कैसे उसकी मैगज़ीन को निकल कर दोबारा एडजस्ट करते हैं. मैं बोहत hi घोर से सबब देख और सुन रहा था .... फिर राज सर ने मुझे रिवाल्वर के बारे में बताया उसमे कितनी बुलेट्स होती हैं और कैसे डाली जाती हैं. फिर एक एक करके जो पहले छोटे वेपन्स थे उनके बारे में बताने लगे.

फिर सर राज ने मुझे राइफल के बारे में बताया. उसकी मैगज़ीन को निकाल कर दिखाया और उसमे मौजूद बुलेट्स के बारे बताया. कैसे एडजस्ट करना है. कैसे लॉक करना है वो बताया............ उसके इलावा कुछ और भी गन्स थी.

सर राज मुझे उसके बारे में बताने लगे. चाकू खंजर भी थे सबब मुझे बताया गया.

फिर उसके बाद सर ने मुझसे पूछना शुरू कर दिया. जो भी बताया था लेकिन मैं 3 गन्स के बारे थोड़ा सा भूल गया. अब्ब पहली बार था तो सबब तो नहीं याद रख सकता था. राज सर मुझे देख क्र मुस्कुराने लगे और बाकी तीनो मुझे हेरात से देख रहे थे....... मैं उनकी हेरात को समझ नहीं सका.......

राज सर:- wel-done विजय बीटा.... (मैं राज सर की तरफ देखने लगा क मैंने ऐसा क्या किया है जो मुझे ऐसे बोल रहे हैं) बोहत hi बढ़िया देखा boys(teeno अटेंशन हो गए और बोले यस सर: फिर राज सर मेरी तरफ देख कर बोले)

मैंने सबब जो भी बताया है ये भी तुम्हरा एक टेस्ट hi था. पहली hi बार में इतना सबब याद नहीं रहता जितना तुमने याद रखा है. मैं भी तुमको देखना चाहता था इसलिए सबब वेपन्स के बारे एक साथ hi बता दिया था. लेकिन तुमने बोहत hi अच्छे से सबब पारर धयान दिया और मैंने जो बोलै था सब अच्छे से समझा भी है.... बोहत hi कम् ऐसा होता है जब्ब किसी को कुछ भी पता नहीं होता इन सबब वेपन्स के बारे में वो पहली hi बार तुम्हारी तरह इतना नहीं समझ सकते..........

में राज सर की बात सुन क्र खुश हुआ लेकिन खुद पर कण्ट्रोल करके राज सर की तरफ देखने लगा.................

उसके बाद मुझे पहले पिस्तौल से ट्रैनिग दी गई. अब्ब टाइम कम् बचा था बातों में और वेपन्स के बारे डिस्कशन में hi बोहत टाइम लग गया था.... बाकी बचे हुए टाइम में राज सर ने मुझे पिस्तौल की ट्रेनिंग दी. शाम होते hi मुझे घर जाने का कह दिया राज सर ने. मैं उनसे और चाय आदित्य और सुनील से मिल के घर की तरफ हो लिया..........

आज टाउन का वेराना भी गोलियों की आवाज़ से गूँज उठा था....... मैं बोहत खुश था............ अज्ज वैसे भी घर जल्दी जा रहा था. और कुछ चेंज भी हुआ था मेरे लिए. मेरी आगे की ट्रेनिंग शुरू हो गई थी....

जब्ब मैं घर पोहंचा तो सबब ने hi मुझे नोटिस कर लिया और फिर सबब hi पूछने लगे तो मैंने जो आज हुआ सबब बता दिया.... पूजा दीदी ने मुझे गले लिया वो बोहत खुश थी. मेरे नेक्स्ट स्टेप के लिए......... बाकी सबब ने भी मुझे बधाई दी... लेकिन रात को पूजा दीदी का लेक्चर शुरू हुआ जो अक्सर hi होता रहता था. पूजा दीदी डेली मुझसे मेरी kaar-guzaari के बारे में पूछा करती थी. आज क्या क्या किया और कैसे किया. मैं सबब hi बता दिया करता था ......

आज भी मैंने सबब बताया तो पूजा दीदी ने सबब सुन कर मुझे लेक्चर देना शुरू कर दिया. क मैं खुद का पूरा फोकस इस ट्रेनिंग में लगा दूँ.....

नेक्स्ट डे पहले मैं अखाड़े में गया वहां का सबब करने के बाद फिर अपने टाइम पर 3 बजे खुद hi भागता हुआ अपने नए ट्रेनिंग सेण्टर जा पोंछा.....

मैं कैसे hi बोहत एक्ससिटेड था....

सबब वहीँ थे. मैंने राज सर को सलूट लिया वो और बाकी मुझे देख कर मुस्कुराये. और फिर मुझसे हाथ मिलाया सबब ने....

राज सर:- तो विजय बीटा आज बोहत hi एक्ससिटेड हो..

विजय :- जी सर ..

राज सर :- खुद को कूल रखो और मेरी बात पर धयान दो....

विजय :- जी सर

राफ सर:- आज पहले कुछ फाइटिंग स्किल्स के बारे में तुमको बताया जायेगा. लास्ट में गन्स की ट्रैनिग करना होगा..... तुम फिटनेस में तो हमसे भी आगे हो इसलिए कुछ स्टेप्स तो तुम ाललरेअद्य hi सीख चुके होंगे..... बाकी का तुम्हें आज बताया जायेगा.

राज सर के कहने पे तीनो सुनील अभय और आदित्य ने कुछ देर आपस में hi फाइट की और अलग तरह की थी उस तीनो की फाइट. मैं उन तीनो की तरफ देखने लगा तो राज सर मुझे बताने लगे.... जैसे जैसे वो तीनो अपनी फाइट कर रहे थे.

वो तीनो जैसे जैसे अपनी फिघ्टन स्टाइल को चेंज कर रहे थे. वैसे hi राज सर मुझे साथ साथ बताते भी जा रहे थे.

राज सर मुझे वैसे भी बता सकते थे लेकिन उन्हों मुझे प्रैक्टिकल कर के दिखाया.

चार किसम की फाइट की थी तीनो ने.

राज सर:- विजय बीटा तुमने सबब देख भी लिया और मैंने तुम्हे साथ साथ बता भी दिया. ये चार किसम की फाइट स्किल्स हैं पहले तुम ये सीखो गे. इसके बाद देखते हैं क्या करना होगा.......

आज यहाँ कुछ चंगेस भी थीं कल की निस्बत ..कल सिर्फ 2 टेबल्स थी तो आज राज सर के लिए एक चेयर भी थी. राज सर ने मुझे तीनो के हवाले कर दिया और खुद चेयर पर बैठ कर मुझे देखने लगे. मतलब अब्ब उनका जितना काम था वो राज सर ने कर दिया था. अब्ब मुझे बास वो देख रहे थे. क मैं क्या कुछ सीखता हूँ और किस हद्द तक्क सीखता हूँ.

सुनील ने मुझे पहले करते के बारे में इन्फो दीं. जो के राज सर पहले hi बता चुके थे लेकिन सुनील ने फिर से मुझे बताना शुरू कर दिया .... मैं सबब धयान से सुन रहा था ... बेसिक बातें थीं तो धीरे धीरे hi सबब मंद में फिट हो hi जातें............. उसके बाद 1सत स्टेप से रिलेटेड मुझे मूव्स बताएं गेन. और मुझे कहा गया क मैं कर के दिखाओं. माने करके दिखा दीं. सुनील खुश हुआ.

सुनील :- बोहत अच्छे विजय. मूव्स तो करना मुश्किल नहीं है लेकिन पहली hi बार में बॉडी लैंग्वेज को सही से उसे करना भी बड़ी बात है. और तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज बोहत hi बढ़िया है....

उसके बाद मैं 30 मिंट तक बताई गई मूव्स की प्रैक्टिस करता रहा. उसके बाद मुझे आगे का बताया जाने लगा ....

करते की प्रैक्टिस के बाद मैंने आज फिर से पिस्तौल की ट्रेनिंग ली और आज मेरा निशाना कल से बेहतर था. मैं जो भी सीख राह था. बोहत hi जल्दी सीख रहा था. फुर्ती और चुस्ती की तो मुझमे कमी थी नहीं. तो मैं अपने सारे सिखाये गए सबक़ को बड़े hi अच्छे से सीखने लगा.... ऐसा hi 1 महीना गुज़रा और मैं 2 किसम की फाइटिंग में बोहत hi अच्छा हो गया था. अभी एक्सपर्ट नहीं हुआ था.

अभी 1 hi तो महीना हुआ था. और मैं कोई सुपरमैन नहीं था जो पालक झपकत hi सबब सीख जाऊं........... अखाड़े में भी पहलवान जी ने मुझे पहलवानी से रिलेटेड फाइटिंग स्किल्स सीखनी शुरू की हुई थीं जो मैं जल्द hi सीख गया था.. ज़ायदा कुछ था नहीं. उसमे करते की वजा से मुझे सबब सीखने में कोई परेशानी नहीं हो रही थी.

और वैसे भी कई महीनो से सभी पहलवानों को देख देख कर सबब hi मूव्स मेरे मंद में फिट हो चुकी थीं..............




ये थी मेरी 3 महीने की प्रोग्रेस.. पूजा दीदी और हर्ष अंकल के जाने के बाद की.


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लोकेशन: पूजा दीदी हाउस:


मुझे गोली लगे तीन महीने गुज़र चुके थे......... और मैं पहलवान जी से और राज सर से बोहत कुछ सीख रहा था......................................

आज जब्ब मैं घर आया तो सबब से मिल कर खाना शाना खाया और फिर जब रात

को सोने का टाइम हुआ तो मैं पूजा दीदी और रानी के साथ कमरे में आ गया......

आज आते hi मैंने पूजा दीदी की आँखों में नमी और इक आग दी देखि थी. जो मुझसे सहन नहीं हो रही थी .... कुछ तो ऐसा हुआ है जो पूजा दीदी के लिए भी इस हद्द तक्क na-kaabil-e-bardasht था क पूजा दीदी की ऑंखें पानी को बहने से रोक नहीं पाई थीं..... और आज कैसी आग पूजा दीदी की आँखों में मुझे दिखाई दे रही थी. ऐसी आग तो आज तक्क मुझे कभी खुद में भी नहीं दिखी थी....

और पूजा दीदी तो खुद मुझसे भी ज़यादा अंदर से स्ट्रांग theen.mujhe कुछ भी हो जाए कभी डगमगाई नहीं थी और आअज ऐसा कुछ देखने को मुझे मिल रहा था....

मुझे हैरत तो थी' लेकिन आज बोहत hi दिनों बाद पूजा दीदी को ऐसी हालत में देख कर मेरे अंदर से दर्द और आग का लावा सा उबलने लगा था. रात तक्क का टाइम मैंने बोहत hi मुश्किल से गुज़ारा था.

मुझे पूजा दीदी को ऐसे देख बोहत hi बेचैनी हो रही थी........


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कमरे में आते hi पूजा दीदी ने दूर लॉक किया और मुझे ऐसे देखने लगी जैसे आज उनकी जो भी हालत हुई है वो सबब मेरी hi वजा से है. मुह्जे देखते hi पूजा दीदी की आँखों से आग की लपटें सी निकलने लगीं. रानी सेहमी हुई सी बीएड पर बेथ गई. मतलब पूजा दीदी को ऐसे देख कर hi रानी की नीचे से गीली होने लगी थी. और पीछे से पता नहीं क्या कुछ हुआ होगा रानी के साथ ये तो रानी hi जानती होगी...... वो वही बीएड पर बैठी पसीना बहाये जा रही थी ........

पूजा दीदी मेरी तरफ चल कर आएं और मेरे पास पोंछते hi पहले एक बार मुझे देखा और फिर मुझपर थप्पड़ों की बारिश शुरू कर दी ......................
 
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