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- Dec 5, 2013
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अपडेट ::::28
हर्ष चौहान ऑंखें पहाडे मुझे देख रहा था
अब्ब अग्गिये
जब्ब हर्ष चौहान को पता चला क मैं वही विजय हूँ. जिसे ढूंढ़ने के लिए उसने na-jaane क्या क्या किया tha.deeksha आंटी ने हर्ष चौहान का chain-sakoon सबब हराम किया हुआ था. मेरे जाने के बाद हर्ष च्वहाण ने मुझे बोहत ढूंढा लेकिन मैं कहाँ उसे मिलता. मैं तो था hi दिल्ली शहर से बहार और जल्द hi मेरा हुलिया भी चेंज हो गया था .... और फिर जिसको हर्ष चौहान ने मुझे चूंडने को बोलै होगा. कैसे वो मुझे पहचान पाटा. मेरे लब्मे बाल hi मेरी पहचान थे. वो मैंने कटवा दिए थे.... और दूसरा मैं कभी अपने टाउन से कभी बहार निकला भी तो नहीं था......
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हर्ष चौहान मुझसे बड़े hi प्यार और garam-joshi से मिला. हर्ष चौहान तब बड़ा हैरान हुआ तब उसने मेरे मज़बूत जिस्म को गले लगते वक़्त मह्सूस किया था.
वो हैरान तो था मुझे स्ट्रांग महसूस करके लेकिन खुश बोहत हुआ...
हर्ष चौहान खुद भी एक मज़बूत जिस्म का मालिक इंसान था.
अगर कोई खुद मज़बूत हो. तो उसे अपने जैसों से मिल कर अच्छा तो लगे गए hi....
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कुछ देर बाद हम सबब सोफे पारर बैठे थे और मेरे दोनों साइड्स पारर शीतल और नताशा दीदी ने कब्ज़ा किया हुआ tha.....wo दोनों मुझे अपने साथ जकड कर बैठी हुई थी. आंटी और अंकल दोनों हमारे सामने बैठे the...kuch देर दोनों बहने मुझे अच्छे से फील करती रहीं. जब्ब दिल को कुछ सकूं हुआ और गुज़रे महीनों की तड़प ख़तम hui.............to तब्ब मुझसे पूछा गया.
मैं अब्ब तक्क कहाँ tha.....maine अपने बारे सबब बता दिया. हर्ष च्वहाण के घर से जाने के बाद जो जो हुआ.. गुंडों के क़तल वाली बात नहीं batai.........baaki सबब बता diya..............wo सबब ये जान बोहत खुश huye.........fir मैंने अपनी माँ और बहनो के बारे भी बता दिया जिसे सुन्न कर सबब ने बोहत आंसू बहाये.....
नताशा दीदी और शीतल की तो ये सुन्न कर hi जान निकलने लग गई थी. क मेरी माँ और बहने एक भयंकर दलदल में फँसी हुई हैं..........
आंटी और अंकल को तो मैंने पहले बता दिया था. क मैं कौन हूँ लेकिन सबब नहीं बताया था.
अब्ब वो सबब जान गए the.......to सभी बोहत hi दुखी थे....
हर्ष चौहान के बारे पता चला tha.......unka बुसिनेस्स पूरे देश में पहला हुआ hai...desh के हर बड़े सिटी में हर्ष चौहान का बुसिनेस्स पहला हुआ hai..aur कुछ बहार के कुछ कन्ट्रीज में भी tha...lekin अपने देश में इनका बुसिनेस्स बोहत hi बढ़िया अभी कुछ hi महीने पहले मुंबई से शिपिंग का भी बुसिनेस्स करना शुरू kiya..harsh चौहान एक जीनियस इंसान तो थे hi लेकिन एक स्ट्रांग मन होने के साथ साथ दिल के भी बोहत hi अच्छे .. मतलब क हर्ष चौहान सच में hi बोहत बड़े और कमाल के आदमी थे.... मुझे ये जान कर ख़ुशी भी हुई और हैरानी bhi......harsh चौहान एक अच्छे और ताक़वर इंसान the........isliye कम् hi कभी इनसे कोई उलझता था...
अब्ब इनकी पर्सनल लाइफ इनकी फॅमिली के दुसरे मेंबर के बारे अगर स्टोरी में कुछ हुआ मतलब स्टोरी का रुख अगर हर्ष चौहान की फॅमिली से कनेक्टेड हुआ तो इंट्रो करा doonga....abb यहाँ दिल्ली में जो हैं वो तो आप जानते hi हैं.. बाकी की अगर ज़रुरत पड़ी तो तब्ब देखि जाएगी...
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मेरी और पूजा दीदी की हर्र वक़्त अपने मिशन को ले कर hi बात होती रहती थी.....
पहलवान जी के पास रह कर मैं मज़बूत तो बन्न सकता था. लेकिन एक अच्छा फाइटर और आज के ज़माने के हिसाब का इंसान नहीं बन्न सकता था. इस लिए हमारा फोकस इस्पे hi ज़यादा था..... मेरा मैं नहीं था क मैं हर्ष चौहान से कह कर अपने लिए फाइटिंग ट्रेनर की बात करून. लेकिन पूजा दीदी ने कहा जब्ब वो तुमसे प्यार करते हैं और तुमको अपना बीटा भी मानते हैं तो हर्ज hi क्या है...... अब्ब जब्ब पूजा दीदी ने कहा था करने को तो मैं कैसे इंकार कर सकता था......... रही बायत मेरे ईगो की तो.......
एक "tawaif-zaade" की ईगो होती hi कहाँ hai.......aur दूसरी बात ये थी......
मेरा मिशन सिर्फ मेरे खुद के लिए नहीं था मेरा मिशन मेरी माँ और बहनो के लिए tha.......baat मेरी माँ और बहनो की उस दलदल से रिहाई की थी. मेरा कोई भी फैसला सिर्फ मेरा नहीं था....... मेरे पास गलती का ऑप्शन था hi नहीं.....
जान को खतरा हो तो लिया जा सकता है. लेकिन अगर बात बहनो की इज़्ज़त की हो तो कुछ भी किया जा सकता hai........isliye मैंने अपने बारे हर्ष चौहान और बाकी सबको सबब बता दिया tha........harsh चौहान ने मुझसे कहा था क वो कुछ करे.. मतलब मेरी माँ और बहनो को निकलने की तो मैंने मन कर diya......main कोई खतरा मोल लेने की हालत में नहीं था........ हाँ फ्यूचर में अगर कभी मुझे हर्ष चौहान की ज़रुरत पड़ी तो मैं उनसे कह doonga...........mujhe हर्ष चौहान से पैसों की ज़रुरत भी नहीं थी..
पैसे तो मैं अपनी खुद की हिम्मत से hi हासिल करना चाहता था........
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मेरा वक़्त हर्ष चौहान के घर ाचा guzra...natasha दीदी और शीतल ने मुझे नहीं छोड़ा मजबूरन अंकल और आंटी ने हम तीनो को अकेला छोड़ दिया था.....
शीतल मुझे अपने कमरे में ले गई थी और फिर हम तीनो ने खूब बातें की वो मुझसे सबब के बारे पूछती रहीं बातें बोहत थी करने ko...zayada तर पूजा दीदी के hi बारे में बातें हुई माँ और बहनो की कम् hi की क्यूंकि माहौल दुखी हो जाता था.....
दोनों बहने बोहत hi एक्ससिटेड थी पूजा दीदी से मिलने के लिए.....
मैं हर्ष चौहान के घरसे डिनर करने के बाद निकला. शीतल तो मुझे जाने hi नहीं देना चाहती थी लेकिन जाना तो था. अब्ब तो आना जाना लगा hi रहना था. इस लिए शीतल को मन्ना pada....mujhe पता था अब्ब तो सबब हमारी तरफ के चक्कर लगाने लग्ग jayengi.....unka भी यहाँ दिल्ली में और कोई नहीं tha......sabb से मिल कर मैं निकलने लगा तो एक बार फिरसे हर्ष चौहान को छोड़ बाकी सबकी ऑंखें में आंसू थे..... लेकिन जाना तो था इसलिए सबब को उनके हाल पर छोड़ता मैं निकल गया और टैक्सी करके अपने घर के लिए निकल gaya...............maine अपना मोब no और घर का एड्रेस उनको दे दिया tha.....mujhe पता था अब्ब वो जल्द hi हमारे घर आएंगे......
जब मैं घर पोहंचा तो 10 बज चुके थे. लेकिन सबब मेरा hi वेट कर रहे थे.
मेरे पोहचते hi सवालात शुरू हो gaye.........fir मैंने सबब बता diya......uske बाद पूजा दीदी मुझे लेकर हामरे कमरे में आ gai..peeche पीछे रानी भी आ gai.pooja दीदी ने फिर अपना इंटरव्यू शुरू कर दिया...... अब्ब फिर वही सबब अलग से बताना पड़ा पूजा दीदी ko.....ek एक बात डिटेल से बतानी padi.........jabb सबब सुन्न लिया तो दोनों मुझपर झपट padi.kuch मस्ती के बाद हम तीनो एक दुसरे को जकड के सो gaye.......abb तो मेरी आदत बन गई thi...dono तरफ से फँस कर सोने की. कुछ hi देर में नींद आ गई....................
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रात के 11:45 का टाइम था............
दिल्ली शहर के इक बड़े नाईट क्लब से कुछ दूर एक रोड के से थोड़ा हट कर 5 लड़के खड़े the.wo शायद किसी का इंतज़ार कर रहे थे. लेकिन अभी कुछ वक़्त रहता था "किसी के आयने में" जिसका वो 5 लड़के इंतज़ार कर रहे थे...... पांचो लड़कों के दिल की धड़कन बोहत तेज़ चल रही थी.... आने वाले वक़्त को लेकर उन पांचो में से 3 की फटने के करीब थी. और दो लड़को में एक बोहत शांत था लेकिन 5तह लड़का बोहत hi ज़यादा एक्ससिटेड था...... वो पहली बार किसी ऐसे काम में इन्वॉल्व होने आया tha....wo डर नहीं रहा था..
लेकिन जो कुछ वो आज करने वाले थे वो बोट hi ज़यादा रिस्की और
khatar-naak था. कुछ भी हो सकता था जान जाने का खतरा 90% था.
क्यूंकि वो सारे लड़के जो करने वाले थे. वो इस सबब में त्रिनेड नहीं थे... और आज यहाँ से गुजरने वाली एक कार को रोक कर उन में बैठे हुए गोंडों को मरना था....
और जान लेने वाला काम वो पहली बार कर रहे थे...... सिर्फ एक लड़का था जो पहले hi किसी की जान ले चूका था और वही लड़का एक्ससिटेड भी सबब से ज़यादा था.....
इस सबब लड़कों में मौजूद एक लड़का दररते हुए बोलै.......
लकड़ा :- विजय तू मरवाये गए आज... तुझे पता भी है. वो कितना khatar-naak गुंडा है और हम में से कोई भी us'se लड़ने के काबिल भी नहीं है.......
जी हाँ दोस्तों आज उस नाईट क्लब से कुछ फासले पर इक रोड से थोड़ा हट कर मैं hi अपने दोस्तों के साथ मौजूद tha.aaj हम यहाँ किसी का मर्डर करने आये थे.....
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ये मिशन मुझे पूजा दीदी ने दिया था. चाहे कुछ भी हो जाये. मुझे अपना मिशन पूरा करना है. आज हो सका तो ठीक वर्ण करना तो मुझे हर्र हाल में hi है....
पूजा दीदी का आर्डर बोहत hi kaan-leva था.....
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हर्ष चौहान के घर से ए 3 महीने बीत चुके the......aur मैं फिरसे अपनी रूटीन में मसरूफ हो गया था.... वही पूजा दीदी से स्टडी और पहलवान जी की ट्रेनिंग. अभी कुछ hi दिन हुए थे पहलवान जी ने आगे का कुछ मुझे सीखना शुरू किया था....... मतलब पहलवान बनने के लिए हार्ड कसरत के साथ साथ कुछ कुश्ती के जैसे daao-pech(Stake पैच) सीखा रहे थे.........
लेकिन कुछ ऐसा हुआ था क पूजा दीदी ने मुझे ये मिशन सोल्वे करने को बोल दिया था....... अब्ब कुछ भी हो जाता करना तो था... भले hi मैं त्रिनेड नहीं था............
दिल्ली शहर में तीन बड़े गैंग्स धंदा कर रहे the........un 3 गैंग्स में से एक गैंग का हेड था धर्मेश ....... धर्मेश के दो साथी शंकर और प्रेम the.......dharmesh अगर रेखा बाई जितना स्ट्रांग नहीं था लेकिन अपने दोनों पार्टनर्स की वजा से वो रेखा बाई से कम् भी नहीं था.........
और आज हम धर्मेश के भाई अजय उर्फ़ "अज्जू भाई" और उसके दोस्तों को टपकाने आये थे........
हर्ष चौहान ऑंखें पहाडे मुझे देख रहा था
अब्ब अग्गिये
जब्ब हर्ष चौहान को पता चला क मैं वही विजय हूँ. जिसे ढूंढ़ने के लिए उसने na-jaane क्या क्या किया tha.deeksha आंटी ने हर्ष चौहान का chain-sakoon सबब हराम किया हुआ था. मेरे जाने के बाद हर्ष च्वहाण ने मुझे बोहत ढूंढा लेकिन मैं कहाँ उसे मिलता. मैं तो था hi दिल्ली शहर से बहार और जल्द hi मेरा हुलिया भी चेंज हो गया था .... और फिर जिसको हर्ष चौहान ने मुझे चूंडने को बोलै होगा. कैसे वो मुझे पहचान पाटा. मेरे लब्मे बाल hi मेरी पहचान थे. वो मैंने कटवा दिए थे.... और दूसरा मैं कभी अपने टाउन से कभी बहार निकला भी तो नहीं था......
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हर्ष चौहान मुझसे बड़े hi प्यार और garam-joshi से मिला. हर्ष चौहान तब बड़ा हैरान हुआ तब उसने मेरे मज़बूत जिस्म को गले लगते वक़्त मह्सूस किया था.
वो हैरान तो था मुझे स्ट्रांग महसूस करके लेकिन खुश बोहत हुआ...
हर्ष चौहान खुद भी एक मज़बूत जिस्म का मालिक इंसान था.
अगर कोई खुद मज़बूत हो. तो उसे अपने जैसों से मिल कर अच्छा तो लगे गए hi....
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कुछ देर बाद हम सबब सोफे पारर बैठे थे और मेरे दोनों साइड्स पारर शीतल और नताशा दीदी ने कब्ज़ा किया हुआ tha.....wo दोनों मुझे अपने साथ जकड कर बैठी हुई थी. आंटी और अंकल दोनों हमारे सामने बैठे the...kuch देर दोनों बहने मुझे अच्छे से फील करती रहीं. जब्ब दिल को कुछ सकूं हुआ और गुज़रे महीनों की तड़प ख़तम hui.............to तब्ब मुझसे पूछा गया.
मैं अब्ब तक्क कहाँ tha.....maine अपने बारे सबब बता दिया. हर्ष च्वहाण के घर से जाने के बाद जो जो हुआ.. गुंडों के क़तल वाली बात नहीं batai.........baaki सबब बता diya..............wo सबब ये जान बोहत खुश huye.........fir मैंने अपनी माँ और बहनो के बारे भी बता दिया जिसे सुन्न कर सबब ने बोहत आंसू बहाये.....
नताशा दीदी और शीतल की तो ये सुन्न कर hi जान निकलने लग गई थी. क मेरी माँ और बहने एक भयंकर दलदल में फँसी हुई हैं..........
आंटी और अंकल को तो मैंने पहले बता दिया था. क मैं कौन हूँ लेकिन सबब नहीं बताया था.
अब्ब वो सबब जान गए the.......to सभी बोहत hi दुखी थे....
हर्ष चौहान के बारे पता चला tha.......unka बुसिनेस्स पूरे देश में पहला हुआ hai...desh के हर बड़े सिटी में हर्ष चौहान का बुसिनेस्स पहला हुआ hai..aur कुछ बहार के कुछ कन्ट्रीज में भी tha...lekin अपने देश में इनका बुसिनेस्स बोहत hi बढ़िया अभी कुछ hi महीने पहले मुंबई से शिपिंग का भी बुसिनेस्स करना शुरू kiya..harsh चौहान एक जीनियस इंसान तो थे hi लेकिन एक स्ट्रांग मन होने के साथ साथ दिल के भी बोहत hi अच्छे .. मतलब क हर्ष चौहान सच में hi बोहत बड़े और कमाल के आदमी थे.... मुझे ये जान कर ख़ुशी भी हुई और हैरानी bhi......harsh चौहान एक अच्छे और ताक़वर इंसान the........isliye कम् hi कभी इनसे कोई उलझता था...
अब्ब इनकी पर्सनल लाइफ इनकी फॅमिली के दुसरे मेंबर के बारे अगर स्टोरी में कुछ हुआ मतलब स्टोरी का रुख अगर हर्ष चौहान की फॅमिली से कनेक्टेड हुआ तो इंट्रो करा doonga....abb यहाँ दिल्ली में जो हैं वो तो आप जानते hi हैं.. बाकी की अगर ज़रुरत पड़ी तो तब्ब देखि जाएगी...
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मेरी और पूजा दीदी की हर्र वक़्त अपने मिशन को ले कर hi बात होती रहती थी.....
पहलवान जी के पास रह कर मैं मज़बूत तो बन्न सकता था. लेकिन एक अच्छा फाइटर और आज के ज़माने के हिसाब का इंसान नहीं बन्न सकता था. इस लिए हमारा फोकस इस्पे hi ज़यादा था..... मेरा मैं नहीं था क मैं हर्ष चौहान से कह कर अपने लिए फाइटिंग ट्रेनर की बात करून. लेकिन पूजा दीदी ने कहा जब्ब वो तुमसे प्यार करते हैं और तुमको अपना बीटा भी मानते हैं तो हर्ज hi क्या है...... अब्ब जब्ब पूजा दीदी ने कहा था करने को तो मैं कैसे इंकार कर सकता था......... रही बायत मेरे ईगो की तो.......
एक "tawaif-zaade" की ईगो होती hi कहाँ hai.......aur दूसरी बात ये थी......
मेरा मिशन सिर्फ मेरे खुद के लिए नहीं था मेरा मिशन मेरी माँ और बहनो के लिए tha.......baat मेरी माँ और बहनो की उस दलदल से रिहाई की थी. मेरा कोई भी फैसला सिर्फ मेरा नहीं था....... मेरे पास गलती का ऑप्शन था hi नहीं.....
जान को खतरा हो तो लिया जा सकता है. लेकिन अगर बात बहनो की इज़्ज़त की हो तो कुछ भी किया जा सकता hai........isliye मैंने अपने बारे हर्ष चौहान और बाकी सबको सबब बता दिया tha........harsh चौहान ने मुझसे कहा था क वो कुछ करे.. मतलब मेरी माँ और बहनो को निकलने की तो मैंने मन कर diya......main कोई खतरा मोल लेने की हालत में नहीं था........ हाँ फ्यूचर में अगर कभी मुझे हर्ष चौहान की ज़रुरत पड़ी तो मैं उनसे कह doonga...........mujhe हर्ष चौहान से पैसों की ज़रुरत भी नहीं थी..
पैसे तो मैं अपनी खुद की हिम्मत से hi हासिल करना चाहता था........
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मेरा वक़्त हर्ष चौहान के घर ाचा guzra...natasha दीदी और शीतल ने मुझे नहीं छोड़ा मजबूरन अंकल और आंटी ने हम तीनो को अकेला छोड़ दिया था.....
शीतल मुझे अपने कमरे में ले गई थी और फिर हम तीनो ने खूब बातें की वो मुझसे सबब के बारे पूछती रहीं बातें बोहत थी करने ko...zayada तर पूजा दीदी के hi बारे में बातें हुई माँ और बहनो की कम् hi की क्यूंकि माहौल दुखी हो जाता था.....
दोनों बहने बोहत hi एक्ससिटेड थी पूजा दीदी से मिलने के लिए.....
मैं हर्ष चौहान के घरसे डिनर करने के बाद निकला. शीतल तो मुझे जाने hi नहीं देना चाहती थी लेकिन जाना तो था. अब्ब तो आना जाना लगा hi रहना था. इस लिए शीतल को मन्ना pada....mujhe पता था अब्ब तो सबब हमारी तरफ के चक्कर लगाने लग्ग jayengi.....unka भी यहाँ दिल्ली में और कोई नहीं tha......sabb से मिल कर मैं निकलने लगा तो एक बार फिरसे हर्ष चौहान को छोड़ बाकी सबकी ऑंखें में आंसू थे..... लेकिन जाना तो था इसलिए सबब को उनके हाल पर छोड़ता मैं निकल गया और टैक्सी करके अपने घर के लिए निकल gaya...............maine अपना मोब no और घर का एड्रेस उनको दे दिया tha.....mujhe पता था अब्ब वो जल्द hi हमारे घर आएंगे......
जब मैं घर पोहंचा तो 10 बज चुके थे. लेकिन सबब मेरा hi वेट कर रहे थे.
मेरे पोहचते hi सवालात शुरू हो gaye.........fir मैंने सबब बता diya......uske बाद पूजा दीदी मुझे लेकर हामरे कमरे में आ gai..peeche पीछे रानी भी आ gai.pooja दीदी ने फिर अपना इंटरव्यू शुरू कर दिया...... अब्ब फिर वही सबब अलग से बताना पड़ा पूजा दीदी ko.....ek एक बात डिटेल से बतानी padi.........jabb सबब सुन्न लिया तो दोनों मुझपर झपट padi.kuch मस्ती के बाद हम तीनो एक दुसरे को जकड के सो gaye.......abb तो मेरी आदत बन गई thi...dono तरफ से फँस कर सोने की. कुछ hi देर में नींद आ गई....................
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रात के 11:45 का टाइम था............
दिल्ली शहर के इक बड़े नाईट क्लब से कुछ दूर एक रोड के से थोड़ा हट कर 5 लड़के खड़े the.wo शायद किसी का इंतज़ार कर रहे थे. लेकिन अभी कुछ वक़्त रहता था "किसी के आयने में" जिसका वो 5 लड़के इंतज़ार कर रहे थे...... पांचो लड़कों के दिल की धड़कन बोहत तेज़ चल रही थी.... आने वाले वक़्त को लेकर उन पांचो में से 3 की फटने के करीब थी. और दो लड़को में एक बोहत शांत था लेकिन 5तह लड़का बोहत hi ज़यादा एक्ससिटेड था...... वो पहली बार किसी ऐसे काम में इन्वॉल्व होने आया tha....wo डर नहीं रहा था..
लेकिन जो कुछ वो आज करने वाले थे वो बोट hi ज़यादा रिस्की और
khatar-naak था. कुछ भी हो सकता था जान जाने का खतरा 90% था.
क्यूंकि वो सारे लड़के जो करने वाले थे. वो इस सबब में त्रिनेड नहीं थे... और आज यहाँ से गुजरने वाली एक कार को रोक कर उन में बैठे हुए गोंडों को मरना था....
और जान लेने वाला काम वो पहली बार कर रहे थे...... सिर्फ एक लड़का था जो पहले hi किसी की जान ले चूका था और वही लड़का एक्ससिटेड भी सबब से ज़यादा था.....
इस सबब लड़कों में मौजूद एक लड़का दररते हुए बोलै.......
लकड़ा :- विजय तू मरवाये गए आज... तुझे पता भी है. वो कितना khatar-naak गुंडा है और हम में से कोई भी us'se लड़ने के काबिल भी नहीं है.......
जी हाँ दोस्तों आज उस नाईट क्लब से कुछ फासले पर इक रोड से थोड़ा हट कर मैं hi अपने दोस्तों के साथ मौजूद tha.aaj हम यहाँ किसी का मर्डर करने आये थे.....
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ये मिशन मुझे पूजा दीदी ने दिया था. चाहे कुछ भी हो जाये. मुझे अपना मिशन पूरा करना है. आज हो सका तो ठीक वर्ण करना तो मुझे हर्र हाल में hi है....
पूजा दीदी का आर्डर बोहत hi kaan-leva था.....
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हर्ष चौहान के घर से ए 3 महीने बीत चुके the......aur मैं फिरसे अपनी रूटीन में मसरूफ हो गया था.... वही पूजा दीदी से स्टडी और पहलवान जी की ट्रेनिंग. अभी कुछ hi दिन हुए थे पहलवान जी ने आगे का कुछ मुझे सीखना शुरू किया था....... मतलब पहलवान बनने के लिए हार्ड कसरत के साथ साथ कुछ कुश्ती के जैसे daao-pech(Stake पैच) सीखा रहे थे.........
लेकिन कुछ ऐसा हुआ था क पूजा दीदी ने मुझे ये मिशन सोल्वे करने को बोल दिया था....... अब्ब कुछ भी हो जाता करना तो था... भले hi मैं त्रिनेड नहीं था............
दिल्ली शहर में तीन बड़े गैंग्स धंदा कर रहे the........un 3 गैंग्स में से एक गैंग का हेड था धर्मेश ....... धर्मेश के दो साथी शंकर और प्रेम the.......dharmesh अगर रेखा बाई जितना स्ट्रांग नहीं था लेकिन अपने दोनों पार्टनर्स की वजा से वो रेखा बाई से कम् भी नहीं था.........
और आज हम धर्मेश के भाई अजय उर्फ़ "अज्जू भाई" और उसके दोस्तों को टपकाने आये थे........