Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 7 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

जब्ब माँ को किसी पर ग़ुस्सा होता है ना. तो वो अक्सर खुद के hi बचूं कॉपीटना शुरू कर देती है............

यहाँ भी कुछ ऐसा hi हुआ है............ बास सन मैंने मज़े वाला देना thaaaaaaaaaa...

सन ज़रा हट के और स्टाइल में हो तो मज़ा दोबाला हो जाता है..............

जब्ब मर पड़ती है ..... तो फिर उसके बाद का प्यार भी अनोखा hi होता है.............

अगली अपडेट रोमांस से bhar-poor होगी...............
 
अपडेट ::::: 37

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अब्ब्ब्ब तक

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कमरे में आते hi पूजा दीदी ने दूर लॉक किया और मुझे ऐसे देखने लगी जैसे आज उनकी जो भी हालत हुई है वो सबब मेरी hi वजा से है. मुह्जे देखते hi पूजा दीदी की आँखों से आग की लपटें सी निकलने लगीं. रानी सेहमी हुई सी बीएड पर बेथ गई. मतलब पूजा दीदी को ऐसे देख कर hi रानी की नीचे से गीली होने लगी थी. और पीछे से पता नहीं क्या कुछ हुआ होगा रानी के साथ ये तो रानी hi जानती होगी...... वो वही बीएड पर बैठी पसीना बहाये जा रही थी ........

पूजा दीदी मेरी तरफ चल कर आएं और मेरे पास पोंछते hi मुझे पहले देखा और फिर मुझपर थप्पड़ों की बारिश शुरू कर दी......................


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अपडेट ::::: 37

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अब्ब्ब्ब आएगजी

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पूजा दीदी मेरी तरफ चल कर आएं और मेरे पास पोंछते hi मुझे पहले देखा और फिर मुझपर थप्पड़ों की बारिश शुरू कर दी......................

रानी अपनी जगा बैठी थार थार काँप रही थी. और मैं पूजा दीदी को ऐसा करते देख कर हक्का बक्का रह गया था. पूजा दीदी मुझे 8--9 थप्पड़ मारने के बाद मेरे गले लग्ग गई थी...................

पूजा दीदी का मैं तो बोहत हो रहा था रोने का. लेकिन उन्हों ने खुद को रोने नहीं दिया. बड़ी hi शक्ति थी पूजा दीदी में जो उन्हों ने खुद को कण्ट्रोल कर लिया था. वर्ण आज na-jaane क्या से क्या हो jaata.kuch तो ऐसा था जो पूजा दीदी के खुद के भी बास नहीं रहा था.. लेकिन फिर भी खुद को आउट ऑफ़ कण्ट्रोल नहीं होने दिया.. पूजा दीदी के स्ट्रांग रहने से hi सबब के सबब काबू में रहते थे. वर्ण कोई भी ऐसा नहीं था. जो बदली हुई सिचुएशन में खुद पर काबू रख सके ..सबब के सबब मेरी hi तरह अंदर से टूटे हुए और अकेले थे... हर किसी को कोई न कोई ग़म था.. लेकिन सबब के एक दुसरे से प्यार ने सबब के hi ग़मों को किसी हद्द तक्क ख़ुशी में बदला हुआ था ..........

मैंने पूजा दीदी को कस के अपनी बाहु में भेंचा हुआ था. और पूजा दीदी का सबब कुछ hi मुझमे समाया हुआ था' ऊपर से ले नीचे तक. और बीच में से लेकर पीछे तक्क ............... मैं पूजा दीदी के पीठ को मुसलसल सहलाये जा रहा था. मुझे पता था पूजा दीदी को कैसे शांत करना है. जो भी उनके अंदर मैं में चल रहा tha.wo तो पता चल hi जायेगा. आज जो भी कुछ रूटीन से हट कर हुआ था. उस बात के दर्द ने पूजा दीदी को रुला दिया था. और पूजा दीदी की आँखों में जो आग देहक रही थी. कोई तो ख़ास वजा होगी इस सबब की.....

जो कुछ भी हुआ था आज पूजा दीदी के साथ वो सबब बाद में पूछ लूँगा..

पहले मुझे पूजा दीदी को शांत करना होगा. उसके बाद तो साड़ी रात हमारी hi है. सकूं से पूछ लूँगा. अब्ब मुझे इतनी बेचैनी नहीं होती थी. इन गुज़रे 3 महीनो ने मुझे बोहत कुछ दिया था. अब्ब मैं बदल चूका था... मेरी हार्ड कसरत ने मुझे अंदर और बहार से इतना स्टोरंग बना दिया था. क अब्ब मुझे खुद पर बोहत कण्ट्रोल हो गया था. वर्ण जिस हालत में मैंने आज पूजा दीदी को देखा था. मैं कैसे खुद पर काबू रख सकता था ...... आज मैं पूजा दीदी से भी ज़यादा खुद पर काबू पा गाय था. लेकिन शायद आज कुछ ज़यादा hi हुआ होगा वर्ण पूजा दीदी जैसी इतनी स्ट्रांग पर्सन भी ऐसा रियेक्ट न करती..................

अब्ब मेरा पहले बास एक hi काम था पूजा दीदी को शांत करना और कैसे करना था वो मुझसे बेहतर और कौन जान सकता था ..... 3 महीनो हो गए थे हम तीनो को कुछ मस्ती किये हुए.... और आज वही सबब सोच कर मैंने भी मैं बना लिया..

क चलो आज पूजा दीदी और रानी को फिरसे वही 3 महीने पहले वाला विजय बना कर ट्रीट करता हूँ......


बास फिर क्या था ............. मैंने अपना काम शुरू कर दिया .....

हम दोनों hi एक दुसरे में समाये हुए थे. और हम दोनों ने hi एक दुसरे को कस के पकड़ा हुआ था.... पूजा दीदी को नहीं पता था. क अब्ब मैं क्या करने वाला हूँ... अब देखते हैं 3 महीने बाद होने वाली मस्ती के कारण वो कैसा रियेक्ट करती हैं.

क्यूंकि उन्हों ने कहा हुआ था. क जब्ब तक्क ट्रेनिंग पूरी नहीं होती सबब कुछ बंद.


पहले सबब लड़कियां मिल कर मेरा हशर कर दिया करती थीं और आज मेरा मैं बन्न रहा था.... जबबसे दिल्ली आया था. मेरा मेरी तितलियों के जैसा मैं नहीं रहा था. लेकिन फिर भी सबब को ख़ुशी देने के लिए मैं सबब के साथ मिलकर सबब का hi साथ दिया करता था................ मुझे तो मेरी तितलियों ने कोठे पर रह कर hi सबब सीखा दिया था. और फिर यहाँ की गर्ल्स पंडाल ने रहा सहा भी सीखा दिया था मुझे. आज वही सबब मैं करने वाला था पूजा दीदी के साथ....

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मैंने अपने हाथों को पूजा दीदी के पीठ पर चलना शुरू कर दिया. मेरे हाथों की गर्दिश से पूजा दीदी ने अपनी बहन को मेरे गिर्द और भी ज़ोर से कस्सणा शुरू कर दिया.

3 महीने हो गए थे मुझे हर्ष अंकल के घर से ए हुए. तब्ब से hi मेरी हार्ड कसरत शुरू हो गई थी. जिस वजा से पूजा दीदी और रानी समेत सबब hi लड़कियों ने

पूजा दीदी के कहने पे मुझसे से कुछ फैसला बढ़ना शुरू कर दिया था. क्यूंकि पूजा दीदी मेरी ट्रेनिंग का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी.

तब्ब से hi सभी गरम जवानियाँ मुझसे कुछ दूर थीं. और पूजा दीदी और रानी से रात को सोते हुए मस्ती भी बंद हो गई थी.

लेकिन आज जो कंडीशन पूजा दीदी की थी. मुझे फिरसे वैसा hi बनना था जैसे मैं 3 महीने पहले था..... ये सबब सोचते हुए मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई. मैंने पूजा दीदी की पीठ पर अपने हाथों को चलते हुए hi रानी को देखा. रानी जो थोड़ी देर पहले hi पूजा दीदी को "चंडी देवी" के रूप में देख कर थार थार काँप रही थी. मेरे बदले हुए मूड को देख कर रानी का कांपना झट्ट से hi बंद हो गया था. और अब्ब वो मुझे इस रूप में देख कर एक्ससिटेड होना शुरू हो गई थी.


रानी कमीनी ने कितनी जल्दी अपना चोला बदल लिया था. इतनी जल्दी खुद par'se डर को ख़तम करके रानी कमीनी के अंदर की गर्मी जो पिछले 3 महीने से कही जा सोइ थी "वो जागने लगी थी" और रानी की आँखों ने भी मुझे बदला हुआ देख कर अपना रंग बदलना शुरू कर दिया था....

मैंने रानी को देखना छोड़ कर पूजा दीदी पर अपना फोकस बढ़ाना शुरू कर दिया. इस वक़्त रानी से ज़यादा पूजा दीदी को इस सबब की ज़रुरत थी. मैंने अपने एक हाथ से पूजा दीदी की कमीज को पीछे से ऊपर करना शुरू कर दिया. पूजा दीदी को जैसे hi मेरी इस हरकत का पता चला.. वो मुझसे छोटे लगी. लेकिन मैंने दीदी को कस के पदक हुआ था...

पूजा दीदी:- विज्जु ये क्या कर रहे. ये ठीक नहीं है. अभी ये सबब करने का समय नहीं है... छोडो मुझे..........

विजय :- दीदी मैं तो कुछ भी नहीं कर रहा. मैं तो बास आपको शांत कर रहा हूँ. आज आप दुखी हैं नाआ.....

पूजा दीदी:- n..na..nai..nahi.. मैं ठीक हूँ .. मुझे क्या हुआ है.... कुछ भी तो नहीं हुआ मुझे...

विजय :- अच्छा आज आपको कुछ भी नहीं हुआ.....

पूजा दीदी:- न... nahi.t...to

विजय :- अछ्हा तो फिर ये सबब क्या tha.mere गाल क्यों सुजा कर रख दिए.. और आप कह रही हैं कुछ भी नहीं हुआ..... पूजा दीदी चुप हो gai.....kya बोलती अब्ब चुप तो रहना hi था ... मेरे हाथों ने गलत हरकत जो शुरू कर दी थी ...

मैंने अपने हाथ को पूजा दीदी की एलास्टिक वाली शलवार में दाल कर पूजा दीदी के बहार को निकल रहे एक चुत्तड़ पर रख दिया... पूजा दीदी मेरे सख्त हाथ को अपने नंगे चुत्तड़ पर महसूस करते hi काँप सी गई....

पूजा दीदी:- vij....vijju n...na ka...karo. please..."tez सांस लेते हुए" देखो आज मेरा मूड सही नहीं है ...(मुझे खुद में सामने लगी) आज ऐसा न करो. और वैसे भी अभी तुम्हारी ट्रेनिंग अधूरी है (मेरे हाथों के चलने से हिलने lagi)pehle वो पूरी करलो फिर जो मैं में आये कर लेना मैं कही भागी तो नहीं जा रही....


"पूजा दीदी बोल तो गई लेकिन अपनी बहन से मुझे कस्सणा भी शुरू कर दिया था... आखिर कब्ब तक्क खुद को रोक paati.bolte हुए बेचैन भी होने लगी.. उनको तो मेरी बहन में आने और ऐसे रहने में hi तो शान्ति मिलती थी. और फिर वो भी तो सबब hi की तरह 3 महीनो से मेरे लिए मेरे प्यार के लिए और अपने अंदर की गर्मी को लेके तड़प रही थीं.

जब्ब तक्क मुझसे प्यार न मिले कैसे शानि मिल सकती है .... जब्ब तक्क मेरे जिस्म की गर्मी को खुद में जज़ब न कर लें कैसे शांत हो सकती हैं. जब्ब तक्क खुद का पानी न निकाल लें कैसे शांत हो सकती हैं ..... आज तो मैं हर तरह से पूजा दीदी को शांत कर के hi रहूँगा ....

मैंने अपने हाथ को पूजा दीदी के चुत्तड़ पर रख कर अपनी उँगलियों को घूमने लगा. मेरी उंगलियां पूजा दीदी के गुप्त अंग को जैसे hi खोजने लगीं. पूजा दीदी की साँसों ने अपनी रूटीन को भी बदलना शुरू कर दिया. मुझे पूजा दीदी की गरम गरम तेज़ चलने वाली साँसें अपनी गर्दन पर महसूस होने लगीं. मतलब पूजा दीदी के अंदर का सिस्टम उबलने लगा था. महीनो से सो रही गर्मी ने अंगड़ाई लेनी शुरू करदी थी...... कितनी जल्दी खुद पर से काबू खोने लग्ग जाती हैं ये लडकियां भी. और ऊपर से कहती हैं अभी रहने दो बाद में कर लेना .... ये सोचते hi मैं मैं hi मान में मुस्कुराने लगा...

लेकिन वो भी क्या करें" एक तो मुझमे सबब की जान थी. दूसरा मैं सबब को hi बोहत ज़यादा अत्त्रक्ट करता था. तीसरा मेरे मज़बूत और सख्त हाथों के छूने से एक अलग hi कररनेट लग्ग जाता था सबब को. उतनी जल्दी तो लाइट पूरे इलाके में नहीं पोहंच पाती' जितनी जल्दी मेरे हाथों के सुपर्ष से सबब लड़कियों अपने अंदर से पानी निकलना शुरू कर देती हैं.

पूजा दीदी की मुनिया ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. मेरी उँगलियाँ ने पूजा दीदी की गांड की दरार की सैर करनी शुरू कर दी थी. और फिर मैं दुसरे हाथ से पूजा दीदी की कमर को भी कमीज के अंदर से सेहला भी रहा था. पूजा दीदी का ऐसा हाल तो फिर होना hi था...... मैंने अपने हाथ को बहार निकल कर अपने दोनों हाथों से पूजा दीदी की एलास्टिक वाली शलवार को पकड़ कर पंतय समेत hi नीचे सरका दिया. पूजा दीदी इस बार तो ऐसी उछली क अगर मेरी पकड़ सख्त न होती तो अब्ब तक्क मुझसे अलग हो चुकी होती.....


पूजा दीदी:- (सांस तेज़. शरमति हुई. नज़रें झाकए boli)vijju ये मैट करो. अब्ब प्लीज इस से आगे मैट जाओ. जो पहले कर रहे थे... उतना hi काफी है नाआ आज .. काफी फिर कभी कर लेना ... (आखरी बार अपनी दोनों टांगो को थोड़ा सा खोलते हुए बोली)

मैंने अब्ब कहाँ पूजा दीदी की सुनने वाला था. मैंने पूजा दीदी की कमीज को पीछे से कमर तक्क ऊपर कर दिया.... फिर आगे से भी कमीज को कुछ ऊपर कर दिया. पूजा दीदी सेण्टर में से नंगी हो गई. पूजा दीदी ने मेरी आँखों में देखा. मैंने भी उसी वक़्त उनको देखा. इस वक़्त दो तरह की आग पूजा दीदी की आँखों में मुझे नज़र आई. एक जो मुझे शाम से hi उनकी आँखों में जेटली हुई नज़र आई थी. और दूसरी तो उसके अंदर बरसों से जनम ले hi चुकी थी. और पिछले 3 महीने से सो रही थी ... अब्ब वो भी उनकी आँखों में सिमट आई थी. दोनों आग ने मिल कर पूजा दीदी की आँखों को कुछ और hi रंग दे दिया था. मेरे देखते एक बार पूजा दीदी मुझे ग़ुस्से से देखा लेकिन फिर याद आते hi क मैंने उनको नीचे से नंगा किया हुआ है. वो शर्मा गई और पीठ पर अपने नाख़ून गाड़ कर मुझपर अपने ग़ुस्से और शर्म का इज़हार करने लगी...

मुझे तो मेरी तितलियों ने बेशरम बना hi दिया था. अब्ब वो अलग बात है क जब्ब से मैं दिल्ली आया था. मेरा मंद डाइवर्ट था. इस लिए मैं कम् hi अपने असली रंग में आता था. लेकिन अब्ब मैं बोहत बदल गया था. अब्ब पूजा दीदी मुझसे बच कर कहाँ जाएँगी.. बड़ा hi पूजा दीदी, रानी और सबब ने मिल कर मुझे तंग किया हुआ था......... और आज तो वैसे भी पूजा दीदी की हालत ने बदल कर मुझे मेरे पहले वाले रंग में आने कर मजबूर कर दिया था...

आगे से पूजा दीदी की कमीज हम दोनों के जिस्मो के आपस में उलझे हुए होने की वजा से नीचे नहीं हो रही थी. तो पीछे से मैंने अपने एक हाथसे पकड़ा हुआ था.... मैंने अपने होंठों को पूजा दीदी की गर्दन पर लाते hi अपने हाथों को पूजा दीदी के चुत्तडों पर ला कर चलने लगा. पूजा दीदी की एक तेज़ सिसकी निकल गई......


siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

विजय :- क्यों दीदी अब्ब अच्छा लग्ग रहा है ना....

पूजा दीदी:- विज्जु तुम बोहत hi बेशरम हो गए हो...

हहहहहहहहह मैं हसने लगा

विजय:- दीदी मैं तो शुरू से hi बेशरम था. वो अलग बात है क मैंने आप सबब को कुछ कहा नहीं. वर्ण मेरे असल रंग की तो आप ताब hi नहीं ला सकती थीं...


पूजा दीदी ने मेरी कमर पारर चुटकी काट ली. अब्ब मुझे चुटकी से क्या फ़र्क़ पड़ने वाला था. मेरा सोया हुआ छोटा विज्जु भी कब्ब का जाग चूका था और पूजा दीदी की सामने से नंगी जाएंगे के बीच पानी बहा रही मुनिया से छेड़ छड़ कर रहा था. मेरे हाथों की पूजा दीदी के चूतड़ों पर गर्दिश ने पूजा दीदी की मुनिया को मेरे छोटे विज्जु पर दबाने पर मजबूर कर दिया..... पूजा दीदी की मुनिया गरम गरम लावा उबाल रही थी. लेकिन पूजा दीदी ऐसे रियेक्ट कर रही थी. जैसे वो इस सबब से अनजान हो. और उनको मज़ा नहीं आ रहा .. बास मुझे hi खुश कर रही हैं... वाह क्या अंदाज़ज है पूजा दीदी kaaaaaaaaaa..

मैंने अपने हाथों से पूजा दीदी को चूतड़ों पार्स पकड़ कर उठा लिया. मेरे ऐसा करते hi पूजा दीदी ने मुझे कस के पकड़ लिया कही मैं उसे गिरा न दूँ.

मैं ऐसे hi उठाये हुए पूजा दीदी को बीएड की तरफ लाने लगा.....


काफी देर से मेरा धयान रानी पर नहीं था........... मेरी जैसे hi नज़र रानी पर पड़ी तो रानी कमीनी जो मुझसे भी ज़यादा बेशरम हो गई थी. इतनी hi देर में खुद को कपड़ों से अज़ाएद चुकी थी...... रानी सच में hi बड़ी कमीनी थी. मैंने रानी की आँखों में देखा तो कमीनी मुझे एक नशीली स्माइल देने लगी.

विजय :- रानी तू बड़ी कमीनी है. आज मैं सिर्फ पूजा दीदी के साथ hi सबब करने वाला हूँ. तुम्हारे साथ अज्ज कुछ नहीं होगा समझी तुम........

रानी को मेरी बात से फ़र्क़ नहीं पड़ा वो मेरी बात सुन कर हहहहहहहहहए

रानी :- विज्जु रानी को किसी के कहने पर चलने की आदत नहीं है. वो खुद hi अपना हिस्सा वसूल कर लेती है.......... तुम बीएड पर तो आओ सही ....... फिर देख भी लेते हैं. कैसे तुम मुझे मेरे लड़ड़ूऊऊऊ से दूर रखते हूँ.......


पूजा दीदी भी ये सबब सुन रही थी. लेकिन मारे शर्म के कुछ भी बोल नहीं रही थी...... आज काफी दिन हो गए थे. तो इसलिए पूजा दीदी अभी खुल नहीं रही थी. और वैसे भी वो रानी की तरह बेशरम नहीं थी.

लेकिन एक कमाल की बार है. पूजा दीदी खुद इतनी बेशरम नहीं है ..लेकिन सबब को hi बेशरम बनाने में पूजा दीदी का hi हाथ था....... वो खुद मुझे सबब के सामने choomne'chaatne, और किश करने से नहीं कतराती थी .... मेरे गाल मेरे होंठ तो जैसे सबब के लिए hi मैं पसंद फ्रूट थे....... ऐसे टूट पड़ती थीं सबब की सबब क तौबा hi भली........ ये सबब पूजा दीदी की वजा से हुआ था. वर्ण रानी शुरू में hi बोहत सीढ़ी थी... लेकिन जितनी सीढ़ी थी.... पूजा दीदी की तरफ से छूट मिलते hi ऐसी कमीनी बानी. क पूजा दीदी भी मारे शर्म क सर्र को घुमा लिया करती थी...


अगर पूजा दीदी एक hi पीेछे है हमारे घर में ...... तो रानी भी अपने आप में एक अलग hi पीेछे है......... कमीनी कही kiiiiiiiiiiiiii......

विजय:- देखा दीदी ये सबब रानी आप hi की वजा से बोल रही है. वर्ण रानी ऐसी तो नहीं थी....

पूजा दीदी क्या बोलती... बेचारी आधी नंगी मेरी बहन में क़ैद थी. मारे शर्म और गर्मी के उनसे बोलै नहीं गया.... बास अपनी बहन को मेरी गर्दन में लपेटे हुए गरम गरम साँसों से मेरी गर्दन पर मस्सगे करती रहीं...


रानी :- विज्जु आज दीदी कुछ नहीं बोलेंगी.... दीदी को बीएड पर लिटाओ... इतनी देर क्यों कर रहे हो.... देखो न दीदी के चूतड़ों पर तुम्हारे हाथों से निशान से बन्न गए हैं... दीदी की स्पेशल स्किन कही ख़राब न हो जाये....

ये बोल कर रानी हसने लगी...... वहीँ रानी की बात सुन कर पूजा दीदी और भी शर्मा गई लेकिन अपना सर्र उठा कर एक रानी को घूरा ज़रूर.


जब्ब भी ऐसी सिचुएशन होती थी. मतलब मस्ती का टाइम होता था. तो मेरे और पूजा दीदी के साथ जो भी hota.""matlab रूपा शिका"" वो उस वक़्त कम् hi पूजा दीदी को भाव देता था.

रानी तो सबब से बढ़ कर कमीनी थी. उसे क्या फ़र्क़ पड़ने वाला था.... पूजा दीदी घूरे या जो भी करे.....

लेकिन रानी को घूरते hi पूजा दीदी को रीलीज़ हुआ क रानी तो फुल नुदे है....


पूजा दीदी:- रानी कमीनी तूने कपडे क्यों निकले हैं. शर्म नहीं आती ऐसे नंगे बीएड पर let'te हुए....

रानी :- हहहहहहए दीदी आप भी तो आधी नंगी hi हैं. और मैं कौनसा आज पहली बार नंगी हुई हूँ. अप्प ने और विज्जु ने तो सबब कुछ देखा और छुआ हुआ है.

ये बोल कर फिर से हांसे लगी और अपनी एक ऊँगली को अपनी मुनिया के पानी से गीला करके पूजा दीदी के चेहरे की तरफ लाते हुए boli.....(itni देर में मैंने दीदी को बीएड पर लिटा दिया था)


रानी :- दीदी देखो तो सही कैसे पानी से मेरी ऊँगली गीली हो गई है. आप की भी हुई है क्या. मैं देखती हूँ आपकी मुनिया कितना पानी छोड़ रही है.......

ये बोल कर रानी अपने हाथ को पूजा दीदी की मुनिया की तरफ लाने लगी. लेकिन पूजा दीदी ने रानी के हाथ पर एक थप्पड़ मार दिया. रानी खिलखिलाने लगी और पूजा दीदी मुझे देख कर फिर से शर्मा लगी.

मैं अभी बीएड से नीचे hi था. मैंने भी खुद का ट्रॉउज़र और शर्ट निकल दिए थे. लेकिन फिर पूजा दीदी मेरे जिस्म पर सही से नज़र पड़ते hi मुझे घूरने लगी और रानी की भी बोलती बंद हो गई. पूजा दीदी तो मेरे जिस्म में ए बदलाव को अच्छे से देखती रहती थी लेकिन रानी आज 3 महीनो बाद मुझे फुल नंगा देख रही थी. रानी की हालत और भी पतली होने लगी थी मुझे देख कर. उसका बास नहीं चल रहा था क वो उड़द कर मुझपर झपट पड़े. लेकिन आज की सिचुएशन को समझती थी. आज पहला नंबर पूजा दीदी का था.

पूजा दीदी कुछ देर मुझ ताड़ती रही लेकिन अचानक फिरसे शर्मा कर अपने एक हाथ को अपनी आँखों पर सजा दिया.

रानी और मैं पूजा दीदी को ऐसे करते देख हसने लगे. हमारे हस्ते hi पूजा दीदी ने अपने दुसरे हाथ से अपनी कमीज से अपनी मुनिया को ढकने लगी. रानी ने दीदी का हाथ पकड़ लिया और बोली...


रानी :- दीदी क्या करती हो हवा लगने दो पहले hi 3 महीने से इस का दुम्म घुट रहा है. आज अगर इस की सुनी जा रही है. तो क्यों फिरसे बेचारी का दम घुटने पर तुली हुई हैं.....

मैंने कहा था रानी बोहत hi कमीनी है. आम हालत में पूजा दीदी से ऐसे बात करने की हिम्मत नहीं थी रानी में लेकिन यहाँ ऐसे महुअल में रानी की हकूमत शुरू हो जाती थी. रानी सबब भूल कर पूजा दीदी और मेरे साथ ऐसे खुल कर हर बात कर जाती थी. क कभी कभी तो हम दोनों hi अपने दांतों में ऊँगली दाल कर रानी को hi द्केहते रहते थे. और रानी खिलखिलती रहती.................

सच में रानी ऐसे बोहत hi सूंदर दिखती थी. और हम भी रानी के ऐसे रूप को देख कर अंदर से बोहत hi खुश होते थे. रानी कमीनी तो बन्न गई थी. लेकिन बेचारी की साड़ी लाइफ hi तो दुखों में गुज़री थी. अब्ब अगर हमारे साथ रह कर वो अपनी लाइफ के कुछ पल अपनी मर्ज़ी और ख़ुशी से गुज़र रही है. तो हमें क्या ज़रुरत है रानी की ख़ुशी को रोकने की या कम् करने की.. वो जैसे भी खुश रहती है रहे ..... हमें भी तो उसे खुश देख कर ख़ुशी मिलती है....

रानी की बात से पूजा दीदी खुद में hi सिमटने लगी. आज कुछ ज़यादा hi पूजा दीदी को शर्म आ रही थी. रानी ने पूजा दीदी की आधी उतर चुकी शलवार को एक झाकते में खेंच कर नीचे कर दिया. तो पूजा दीदी ने भी अपनी आँखों पर से हाथ को हटा कर एक झटके में उठ कर रानी को ऐसा करने से रोक दिया. लेकिन तब्ब तक्क दीदी की शलवार उनकी पोहंच से दूर हो चुकी थी. पूजा दीदी ने लाचारी से रानी को देखा. जैसे कह रही हो क रानी कमीनी प्लीज आज मुझे बख्श दो....

इस हालत में मेरी तरफ देखने की हिम्मत नहीं थी पूजा दीदी में. वो फिरसे लेट गई.

रानी की नज़र असह्नाक से बीएड पर गई. वहां पूजा दीदी की मुनिया से टपकने वाला

पानी गिरा था तो बीएड कुछ गीला हो गया था. रानी ने मुझे देख कर एक आंख मारी मैं काफी देर से खड़ा दोनों को hi देख रहा था. अब्ब कुछ आगे बढ़ने का सोच कर मैं पूजा दीदी के ऊपर आ गया और मेरा मुन्ना दीदी की मुनिया को चूमने लगा.

पूजा दीदी ने एक झटका खाया और फिर अपनी आँखों से हाथ हतः कर एक बार मुझे देखा. पूजा दीदी की आँखों में लाल लाल डोरे नज़र आने लगे मुझे. मतलब पूजा दीदी बोहत hi ज़यादा गरम हो चुकी थीं. अब्ब कुछ भी किया जाए,. तो दीदी कुछ नहीं कहेंगी.... मैंने पूजा दीदी के चेहरे पर झुक कर उनके हाथ को पकड़ कर साइड कर दिया. लेकिन पूजा दीदी ने अपना चेहरा घुमा लिया. मैंने पूजा दीदी के एक गाल को अपने होंठों में क़ैद कर लिया. दीदी की मुनिया और गाल ये झटका बर्दाश्त न कर सके...... पूजा दीदी की एक सिसकी निकली और साथ hi उनका पूरा बदन काँप गया......

रानी इस बीच बास मेरी कमर से ले कर जहाँ तक्क उसका मैं करता अपने हाथ चला रही थी...... मैंने रानी को छोड़ अपना धयान पूजा दीदी पर लगा दिया ......... मैंने अपने होंठों की एक किश पूजा दीदी के नरम गरम गालों पर की. और फिर अपनी जीब से पूजा दीदी के गाल को चाटने लगा. मेरा मुन्ना दीदी की मुनिया पर रगड़ खा रहा था. पूजा दीदी ने भी अपनी मुनिया को मेरे मुन्ना से रगड़ना शुरू कर दिया. कुछ hi पळून में पूजा दीदी ने अपने चेहरे को मेरे चेहरे की तरफ मोड़ा और अपने हाथों से मेरा चेहरा पकड़ कर अपने होंठों को मेरे होंठों से मिला कर किश करने लगी. और नीचे से अपनी मुनिया को मेरे मुन्ना से रगड़ते हुए आगे पीछे होने लगी. दीदी के किश करते hi मैंने अपने हाथों को दीदी के चुचु कर ला कर रख दिया और धीरे धीरे दबाने लगा... पूजा दीदी के लिए इतने मिलने वाले झटके बोहत hi खतरनाक थे. इन झटकों ने पूजा दीदी का खुद पार्स कण्ट्रोल ख़तम कर दिया. और दीदी किश करते हुए मेरे होटों को काटने लगी ... पूजा दीदी हॉर्नी हो गई थीं. अब्ब बास कुछ hi पळून में बीएड पर एक सैलाब आने वाला था.

मैंने पूजा दीदी के बूब्स को दबाना छोड़ कर उनके निप्पल को अपनी उनलगिओं में ले कर हलके हलके मरोड़ने laga.kabhi कभी खेंचने लग जाता.... रानी के भी हाथों में तेज़ी आने लगी. अचनाक से रानी ने अपने हाथ को नीचे ला कर मेरे मुन्ने को पकड़ने की कोशिश की लेकिन वो मेरे और पूजा दीदी के बीच में फंसा हुआ था. जैसी हालत इस वक़्त पूजा दीदी की हो रही थी. मैं थोड़ा सा ऊपर उठ कर रानी की हेल्प कर सकता था. लेकिन पूजा दीदी को परेशानी होती. और फिर उनका ग़ुस्सा आना कन्फर्म था. मैंने रानी की हेल्प नहीं की बास पूजा दीदी को hi शांत करने में लगा रहा. रानी ने अचानक से मुझपर से पाना हाथ हटा लिया.. मैं देख तो नहीं सकता था. लेकिन अंदाज़ा था.... रानी का भी अब्ब खुद पर से काबू ख़तम हो गया था ..... शायद वो अपनी मुनिया को अपनी hi किसी ऊँगली से ठंडा करने में लगी होगी. पूजा दीदी की किश तेज़्ज़ होती जा रही थी. और मेरे हूँटों का satya-nash होने लगा. नीचे से पूजा दीदी के झटके बढ़ने लगे तो मैंने अपने हाथों से पूजा दीदी के निप्पल को जोरर से मरोड़ने लगा कभी बूब्स को कस के दबाने लगता..... पूजा दीदी ने अचानक से मुझे किश करना बंद किया और मुझे बहन में जोरर से कस्सणा शुरू किया साथ hi अपनी टांगों को खोल कर मेरे चूतड़ों पर लपेटा और एक झटका कहते huye.....aur siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii करती हुई नीचे गिर गई. आज 3 महीनो की गर्मी पूजा दीदी के अंदर से निकली थी. बोहत hi बुरी हालत थी पूजा दीदी की... लेकिन अब्ब शांत हो गई थी. ऐसी ज़ोरों शोर से सांस ले रही थी. जैसे na-jaane कितनी दूर से भाग कर आई हो.

मैंने रानी की तरफ देखा तो वो अपनी ऊँगली को अपनी मुनिया पारर तेज़ तेज़ चला रही थी. मतलब वो भी अपनी मंज़िल के करीब थी. मुझे खुद की तरफ देखते हुए पाया तो मुह्जे रानी की आँखों में रिक्वेस्ट दिखी. कुछ हेल्प hi कार्डो . कैसे खुद से सबब karon..maine रानी की हेल्प के लिए अपने एक हाथ बढ़ा कर रानी के बूब्स को पकड़ कर थोड़ा कस के दबाने लगा. रानी ने मुझे आँखों hi आँखों में थैंक्स बोलै. और फिर अपनी ऊँगली से खेलने लगी. मैंने रानी को भी जल्दी hi शांत करने के लिए रानी के निप्पल को मरोड़ने लगा. और थोड़ा ज़ोर भी लगा दिया. रानी को दर्द तो हुआ लेकिन मज़े से रानी की एक तेज़ सिसकारी siiiiiiiiiii उम्मम्मम्मम्ममा निकल गई. कुछ देर में रानी के बदन ने भी कांपना शुरू कर दिया. मेरी रानी के निप्पल पर गर्दिश तेज़ हो गई. और रानी ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी कुछ hi देर में रानी भी झटके लेते हुए ठंडी हो गई. मैंने रानी के निप्पल को छोड़ कर रानी की मुनिया को छेड़ा लेकिन रानी ने आंख नहीं खोली. अब्ब रानी अपनी तेज़ चल रही साँसों को काबू करने में लगी हुई थी... इतनी देर में मेरा पूजा दीदी की तरफ से धयान हट गया था.. मुझे याद आया तो मैंने पूजा दीदी की तरफ देखा. वो मुझे hi देख रही थी. अब्ब वो शांत थी. मैंने उनको देखा तो वो शर्मा gai.maine पूजा दीदी को किश की लेकिन वो फिर भी शर्माती रही.

इन दोनों का तो हो गया था लेकिन अभी मेरा कहाँ हुआ था. मेरा मुन्ना अभी भी पूजा दीदी की मुनिया से बह रहे पानी में सना हुआ वही अपनी मंज़िल पर खड़ा था. मैंने पूजा दीदी को किश करते हुए अपने मुन्ने को दीदी की मुनिया पर रगड़ने लगा.

पूजा दीदी ने मुझे देखा अब्ब वो समझ गई थी. क अभी सिर्फ वो दोनों hi शांत हुई हैं. मेरा अभी नहीं हुआ है... ये सोचते hi दीदी फिरसे शर्मा गई. लेकिन मैं पुजा दीदी को किश करते हुए अपने मुन्ना को दीदी की चुतरस छोड़ती मुनिया पर घिसने लगा .... हर्र बार मेरा मुन्ना पूजा दीदी की मुनिया को छोटे हुए आगे पीछे होने लगा ...........

जब्ब मुनिया को भी अंदाज़ा हो क उस के दर्शन करने वाला अभी रेस्ट में है. और वो जल्द hi उसे देखने नहीं आएगा तो मुनिया की मालिकान कुछ लापरवा सी हो जाती है. जिस वजा से मुनिया के ird-gird झाड़ियाँ से उगने लगती हैं.


पूजा दीदी गन्दी बची मेरे लिए अपनी मुनिया को चिकना नहीं रख सकती... मैंने रानी की तरफ देखा तो उस कमीनी की भी मुनिया पर बाल उगाय हुए थे. मतलब 3 महीने अगर मैं इन सबब से मस्ती नहीं करूंगा तो ये अपनी मुनिया को साफ़ नहीं रखेंगी.......... मैंने एक हाथ बढ़ा कर रानी की मुनिया के बालों को पकड़ कर खेंचा.

aiiiiiiiiiiiiii


रानी की दर्द से चीख निकल गई. पूजा दीदी ने भी अचानक से रानी के चीखने पर रानी की तरफ देखा तो मेरे हाथों में रानी की मुनिया के बाल देख कर पूजा दीदी सबब समझ गई...

फ़ौरन hi पूजा दीदी को रीलीज़ हुआ क मैंने ऐसा क्यों किया है.... तो सबब समझते hi मेरी कमर पर एक चुटकी काट ली. और बेहद शर्माने लगी.....

मैंने रानी की मुनिया के बाल छोड़ दिए... और फिरसे अपने मुन्ने को दीदी की मुनिया पर घिसने लगा. घिसते घिसते मेरा मुन्ना पीछे hat'te hi थोड़ा सा स्लिप हुआ और दीदी की मुनिया के छेड़ से जा टकराया.


aiiiiiiiiiii.........maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.......marrrrrrrrrrrrrrr........gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

पूजा दीदी की भी एक चीख निकल गई और वो चिल्लाते हुए एक झटके में मुझे अपने ऊपर से हटा दिया.... अब्ब रानी और मेरे हसने की बारी थी.... हम दोनों हस्स रहे थे.. लेकिन दीदी अपनी मुनिया को हाथ से सेहला रही थी. लगता है क झटका कुछ ज़यादा hi लग गया था. दर्द हो रहा होगा......

रानी कभी भी ऐसा मौका नहीं छोड़ती थी.....


रानी :- दीदी आखिर कब्ब तक्क आप इस को बचा कर रखेंगी. एक दिन तो खुलवाना hi है. तो आज hi खुलवा लो ना.... सच्ची देख कर बड़ा मज़ा आएगा.... मैं हंस दिया. लेकिन पूजा दीदी ने रानी के निप्पल को पकड़ कर ज़ोर से खेंच दिया रानी की चीटीएख निकल गई..... निप्पल कुछ ज़यादा hi खिंच गया था ..... रानी अपनी एक ऊँगली को अपने मोहन दाल कर गीले कर के अपने निप्पल पर मस्सगे करने लगी.

पूजा दीदी:- रानी कमीनी तुझे बड़ी जल्दी है खुलवाने की.. जब्ब तेरी खुलेगी तब्ब मैं भी देखों गई तेरा क्या हाल होता है.... अब्ब जो दांत निकल रहे हैं. तब्ब निकाल कर दिखाना मुझे.. रोटी हुई कहेगी दीदी इसे बोलो बहार निकाल ले वर्ण मैं मर्डर जाऊँगी....


पूजा दीदी के अचानक उठ कर रानी के खेंचने से दीदी का पिछवाड़ा ऊंचा हो गया. मुझे ये देख कर बोहत hi मज़ा आया और मेरा मैं कुछ शरारत करने को हुआ. मैंने दीदी को चूतड़ों से पकड़ कर उल्टा hi बीएड पर लिटा दिया. पूजा दीदी सटपटाने लगी. लेकिन मैं दीदी के ऊपर आ कर अपने मुन्ने को दीदी की गांड की दरार में फंसा कर बेथ गया..... रानी के हसने की आवाज़ आई....

रानी:- अब बच कर कहाँ जाओगी दीदी... विज्जु दीदी को छोड़ना नहीं..... आज काबू में आई है. लगा ज़ोर और निकाल दीदी की चीखें.........

पूजा दीदी को अपनी गांड और गांड की दरार में रगड़े बर्दाश्त नहीं होती थी. मुनिया से भी ज़यादा दीदी की गांड की गर्मी उनसे बर्दाश्त नहीं होती थी...... मुनिया की रगड़ाई से वो मुझे किश करके खुद को काबू में कर hi लेती थीं. लेकिन गांड पर मुन्ने को घिसने से वो खुद पर से जल्दी hi कण्ट्रोल खो बैठती थीं. और फिर दीदी की जो सिसकियाँ निकलती. वो सुनने लायक होती....

मैंने दीदी को कमर से कपड़ कर अपने मुन्ने को दरार में फंसा कर कुछ देर ऐसे hi बैठा रहा. इस बीच दीदी ने वो ुकूहल कूद मचाई. अगर मेरी जगा कोई और होता तो अब्ब तक्क नीचे से निकल चुकी होती. लेकिन मुझसे बच निकलना अब्ब आसान नहीं tha.maine रानी को देखा वो भी सबब समझ गई. रानी ने मेरे मुन्ने को पकड़ लिया.

मैं पूजा दीदी के ऊपर लेट गया. अब्ब दीदी मेरे नीचे से नहीं निकला सकती थी. मैंने अपनी कमर को अपने मुन्ने के साइज के मुताबिक़ उठाया. रानी ने मेरे मुन्ने को अपने हाथ में पकड़ कर दीदी की मुनिया के लिप्स में घुसा कर रगड़ते हुए ऊपर लाने लगी. पूजा दीदी ने अपनी मुठी से बीएड शीट को पकड़ लिया था.... अभी तो कुछ किया भी नहीं था. क दीदी ने बीएड शीट को कस के पकड़ लिया tha.....abhi तो कुछ देर रानी ने मेरे मुन्ने को ले करके दीदी की मुनिया और गांड के छेड़ और दरार में घिसने था. आज पूजा दीदी बोहत hi बुरी पहन्सि थीं ...


पूजा दीदी:- विज्जु छोड़ दे मुझे.. देख तू सही नहीं कर raha........(fir रानी से) रानी की बची तुझे तो मैं छोडूंगी नहीं. मैं कहती हट जा और छोड़ दे विज्जु के मुन्ने को. (लेकिन रानी ने पूजा दीदी के बोलते hi मेरे मुन्ने का दबाओ भी बढ़ना शुरू कर दिया था) siiiiiiiiiii hmmmmmmmmmm iiiiiiiiii रानी कुत्तिया रुक जाआ ... ahhhhhhhhhh raniiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii vijjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuuu chhhhhhhooooooooddddddddddd dddddddeeeeeeeeeeeeeeeeeee आआपणणणणनईईईईई

diiiiiiiiiiddddddddddiiiiiiiiiiiii kkkooooooooooooooooooooooooooooooooooooooo

ahhhhhhhhhhhhh ...........


पूजा दीदी इतनी hi देर में अपने चूतड़ों को साइड में हिला कर इस सबब से बचना चाहती थीं. लेकिन आज बचना na-mumkin thaaaaaaaaaa.

आज रानी और मैं पूजा दीदी को वो सबब दे रहे थे. जिसको पा कर पूजा दीदी का आज का सारा ग़म ख़तम न सही लेकिन कुछ तो ख़तम हो hi जाएगा........

मुनिया के पानी बहने से दीदी को इतनी शान्ति नहीं मिलती थी. जितनी गांड घिसाई से मिलती थी. लेकिन ये सबब्ब जब्ब तक्क होता था. उनकी हालत किसी बिन पानी के मछली जैसी रहती थी..............


रानी :- क्यों दीदी अब्ब आ रहा है मज़ाहा विज्जु के मुन्ने से .......

पूजा दीदी की तो बास कमरे में सिसकारियां hi गूँज रही theen.jitna बोलना था वो बोल चुकी अब वो कुछ भी bolne'sunne की हालत में कहाँ. वो अपनी एक अलग hi दुन्या में जा पोहंची थी....

ऐसे करने से मुझे भी बड़ा मज़ा आता था. लेकिन पूजा दीदी के जितना नहीं.... पूजा दीदी की मुनिया के जैसे उनकी गांड छेड़' गांड की दरार और चुत्तड़ भी बोहत hi कमाल के थे. चुत्तड़ कुछ कुछ बहार को निकले हुए बोहत hi अट्रैक्टिव लगते थे.....

और मैं भी पूजा दीदी के चूतड़ों का दीवाना था.... रानी ने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू कार्डी थी... जिस की वजा से पूजा दीदी की सिसकियों में तेज़ी आती जा रही थी. वो साड़ी शर्म को भूलने लग गई थीं............


पूजा दीदी........ raaaaaaaaniiiiiiiiiiiiiiii aurrrrrrrrrrrrrrr zoorrrrrrrrrrrrrr

seeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee ragdoooooooooooooooooooo meraaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

honeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee waaaaaaalllaaaaaaaaaaaaaaaa haaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiii

hmmmmmmmmmmma siiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhh


पूजा दीदी ने अपनी गांड को हिलना शुरू कर दिया tha.kbhi गोल गोल तो कभी ऊपर नीचे तो मभी आगे पीछे... जिस से पूजा दीदी की मस्ती की इन्तहा का पता चलता था.. उनके ऐसा करने से नीचे से उनके बूब्स और मुनिया वेद पर बोहत ज़ि जोरर से रगड़ खा रहे थे .... मेरा तो अभी लेट hi था. मैंने कौनसा अंदर डाला था जो जल्दी hi निकल जाता. लेकिन पूजा दीदी एक बार फिरसे अपने चार्म पर जा pohnchiiiiiiiiiiiiiiiiii

पूजा दीदी एक झटके में अपनी गांड को उठाया फिर दुसरे hi झटके में नीचे गिर गई................ पूजा दीदी की मुनिया ने फिरसे पानी छोड़ दिया था....... इस बार के पूजा दीदी की मुनिया से निकलने वाले पानी ने बीएड की सहित को नेहला कर hi रख दिया था. इतना पानी तो पहली बार छूटने पर भी नहीं निकला था ...

मतलब मैंने जो बी किया था पूजा दीदी के साथ. पूजा दीदी की 3 महीनो की बची कुछ गर्मी अब्ब की बार सही से निकली थी ..... इस सबब को पूजा दीदी ने बोहत hi ज़यादा एन्जॉय करता हुए अपना चार्म प्राप्त किया था ......

मैं पूजा दीदी के ऊपर से उठ गया और नीचे आ कर पहले अच्छे से उनकी मुनिया के लिप्स को खोल कर बह रहे पानी को देखा . अपनी एक ऊँगली से उस पानी को जो नीचे बीएड शीट पर टपक रहा था फिरसे दीदी की मुनिया पार्स लाते हुए ऊपर आने लगा. दीदी इस बार थोड़ी सी हिली. अभी तक्क वो अपनी आउट ऑफ़ कन्ट्रो साँसों को hi बहाल करने में लगी हुई थें.. इस लिए मेरी ऊँगली को सहन कर गई... फिर मैंने एक किश पूजा दीदी की पानी बहती मुनिया पर की.

किश और अपनी जीब से दीदी की मुनिया से निकल रहे पानी को chaat'ta हुआ अपनी जीब को दीदी की गांड की तरफ लाने लगा....... पूजा दीदी इस कुछ और भी ज़ोर से हिली......

वो पास्ट हो चुकी थीं बास उनकी पीठ तेज़्ज़ चल रही साँसों की वजा से ऊपर नीचे हो रही थी... मैं बीएड पर लेट गया तो मेरा मुन्ना छत को सलामी देने लगा. रानी ने इस मौका का bhar-poor फाइदा उठाया. और मेरे ऊपर बेथ कर अपनी मुनिया को मेरे मुन्ने पर घिसने लगी मैं भी रानी की कमर को पकड़ कर अपने मुन्ने पर आगे पीछे करने लगा.. अब्ब बोहत टाइम हो गया था... अब्ब मुझे भी फ्री होना था तो मैंने रानी को अपनी स्पीड बढ़ने के लिए इशारा किया...

रानी ने झुक कर मुझे किश करनी शुरू करदी और नीचे से अपनी गांड को ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी. रानी बोहत hi एक्सपर्ट और बेशरम हो कुकुई थी. वो बड़ी जल्दी इस सबब में एक्सपर्ट हो गई थी. और वो ये भी जानती थी क मुझे कैसे मेरे चार्म तक पोहंचना है.... रानी मुझे किश करते करते अपनी गांड को बड़े hi स्टाइल में हिलने लगी..... कुछ hi देर में मैं भी नज़दीक पोहंच गया तो मैंने रानी की कमर पर अपने हाथों को कस्सणा शुरू कर दिया. रानी की किश तेज़ होने लगी.

रानी मुझसे पहले hi अपनी मुनिया का पानी मेरे मुन्ने पर छूने लगी. साली कमीनी मुझसे पहले hi थक गई...... चलो हेयर है.

रानी के सुस्त पड़ते hi मैंने रानी को पलटा कर नीचे लिटाया और रानी के ऊपर आ कर रानी की पानी छोड़ रही मुनिया पर अपने मुन्ने को घिसने लगा.... मेरी स्पीड बढ़ने लगी और पूरा बीएड रानी और पूजा दीदी समेत हिलने लगा और बीएड की हालत बिगड़ने लगी...... यही वजा थी जो बीएड अक्सर ख़राब हो जाया करता था.............

रानी के उछलने और मेरे ढाकून के साथ साथ बीएड की भी आवाज़ें आने लगी.... कुछ hi पलों में मेरे अंदर का जम्म चूका मटेरियल इक लावा में बदल कर रानी के ऊपर से हो कर कुछ रानी के बूब्स कर तो कुछ रानी के चेहरे पर गिरने लगा... मेरा जमा हुआ गाढ़ा पानी रुक रुक कर पिछरियाँ की सूर्य में निकला.

और फिर मैं भी दोनों hi की तरह रिलैक्स हो गया.

मैं रानी पर से उठ कर बीएड की साइड में लेट गया...... मेरी भी साँसें अब्ब तेज़ चल रही थी.. रानी और पूजा दीदी तो कुछ नार्मल हो hi गई थीं.......

पता नहीं आज मैंने इन दोनों की गर्मी को ज़यादा शांत किया था या खुद की गर्मी को ज़यादा ..... क्यूंकि ये सबब करने से पहले मेरा ऐसा उच्च भी मंद नहीं था.. लेकिन जैसे hi मेरा मैं बदला था. और पूजा दीदी के चुत्तडों को छुआ था. तो मेरी भी 3 महीनो से सो रही आग भड़कने लगी थी....

देखा जाए तो इन दोनों से ज़यादा मैं hi खुद को हल्का फुल्का महसूस कर रहा था ... क्यूंकि इन 3 महीनो में हार्ड कसरत और खुराक की वजा से जो मुझसे में चेंज आया था. उनसे मुझे heat-up और दमाग को कुछ बोझल भी कर दिया था....

अब्ब इस सबब से फ्री होते hi मुझे ऐसा लगने लगा जैसे अंदर और मेरे दमाग पर चढ़ी हुई गार्ड साफ़ हो गई हो........... आज मैं खुद को बोहत hi शांत महसूस कर रहा था .................

हम तीनो की साँसों के काबू में आते hi बीएड की आवाज़ भी थम गई थी ....... बीएड की आवाज़ के थमते hi पूजा दीदी को कुछ होश आया .... मैं भी उनकी तरफ hi देख रहा tha.pooja दीदी मेरी आँखों में देखते hi बनावटी ग़ुस्सा दिखने लगी और उठ कर ऐसे hi मेरे सो चुके मुन्ने के ऊपर आ आकर बेथ गई. और फिर मेरे चेहरे पर झुक कर किश करने की बजाये मेरे सर्र के बालों को पकड़ कर मुझे झंझोड़ना शुरू कर दिया ....... और रानी कमीनी भी अब्ब शांत हो गई.... जैसे hi पूजा दीदी ने मेरे ऊपर झुक कर मेरे बालों को पकड़ा. तो पूजा दीदी की उठी हुई गांड की दरार में रानी ने अपनी ऊँगली चलनी शुरू करदी......

पूजा दीदी ने रानी को घूरना शुरू कर दिया. रानी ने एक कमीनी स्माइल दी लेकिन रानी की स्माइल फ़ौरन hi सिमट गई. क्यूंकि इस बार की पूजा दीदी का घूरना अलग hi था... रानी भी सिर्फ कमीनी hi नहीं थी. समाजधर भी बोहत थी. रानी ने अपनी ऊँगली नहायत hi शराफत से पूजा दीदी के गुप्त अंग से हटाया और


रानी :- सॉरी दीदी (बोलते hi रानी ने अपने कान पकड़ लिए और एक आंख को थोड़ा सा भेंगा करते हुए आगे बोली) अब्ब मुझे क्या पता था क शो ख़तम हो गया था...

3 महीनो बाद बास इतना hi देखने को मिलेगा.


पूजा दीदी और मैं रानी कमीनी के ऐसे अंदाज़ पर हंस दिए और पूजा दीदी ने मुझे छोड़ कर ऐसा hi मेरे ऊपर बैठी रही.....

अब्ब मूड चेंज हो गया था. हम जिस हालत में भी थे हमारे मूड्स के बदलते hi मजाल है जो मेरा मुन्ना दीदी की मुनिया की गर्मी से फिरसे जग जाये... और दीदी की मुनिया की गर्मी अब्ब सिमट गई थी.. पूजा दीदी के अंदर की गर्मी भी उनके ग़ुस्से से डर्टी थी...

कही गलती करदी तो पूजा दीदी की मुनिया से निकलने का रास्ता hi बंद न हो जाये.


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रानी बीएड पर बैठी अपनी मुनिया को साफ़ करने लगी. उसे अब्ब पता था क आगे क्या होने वाला है. इसलिए वो अपने काम में मसरूफ हो गई थी.

मैं भी पूजा दीदी को देख रहा था और पूजा दीदी मेरे सीने पर ऊंगलीला चलते हुए सोच में डूबी हुई थी. क्या सोच रही हूँगी वो. आज के बारे में hi और मुझे थप्पड़ क्यों मारे यही सोच रही हूँगी या ये सोच रही होंगी अब्ब मुझे क्या बताना है...


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पूजा की यादों में आज का दिन आने लगा.... और गुज़रे दिन क्या कुछ हहआ सबब सोचने में लगी हुई थी...........

दिन के 12 बजे हर्ष चौहान अचानक से पूजा के घर ए..... सबब ने उनका अच्छे से सवागत किया .. लेकिन उनके चेहरे पर संजीदगी तारी थी.. पूजा दीदी ने ये सबब भांप लिया...

पूजा दीदी:- अंकल सबब ठीक तो है ना....

हर्ष :- हाँ पूजा बेटी सबब ठीक भी है और नहीं भी .....

सबब हर्ष चौहान की बात सुन कर सबब चौंक गए ..........


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थैंक्स इतनी डिटेल में बताने के लिए....



लेकिन सबब कुछ एक साथ hi तो नहीं बयां कर सकता ...

धीरे धीरे आगे बढ़ना hi अच्छा होता है.. और वैसे भी अपडेट आप ने देखि hi होगी...

कितनी लम्बी चली गई थी... अगर सबब कुछ और भी डिटेल में देता तो अपडेट 2 दिन और भी लेट हो सकती थी............

इस लिए कुछ शार्ट कर दिया ...... अभी तो शुरुआत है bossssssssssssssssssss..

आगे तो बोहत कुछ बाकी है अभी ...........
 
ी लिखे आईटी.

श्वेता की लाइफ बारे सबब सामने आता hi रहेगा..........

और रही हीरोइन की बात तो साफ़ दिल तो वो होगी लेकिन इनोसेंट नहीं ..........

आज तक्क कभी भी स्फोरम पर मौजूद किसी भी स्टोरी में किसी भी हीरोइन का ऐसा इंट्रो नहीं हुआ होगा...

जैसा मैं देने वाला हूँ..... लेकिन 2 उपदटेस के बाद आपक सबब को विजय और स्टोरी के लिए हीरोइन मिल जाएगी.......
 
मैं स्फोरम पर नई राइटर हूँ ...

जैसा क मैंने लिखा क जैसा मैं हीरोइन का ईंटो देने वाला हूँ. वैसा कभी किसी ने नहीं दिया होगा. तो मेरा ये लिखते हुए ऐसा कुछ भी इरादा नहीं है .. स्फोरम पर मौजूद बड़े बड़े वरिटेरस के सामने मेरी कोई हैसियत नहीं है ...... बास हर किसी की अपनी अपनी िमागिनाशंस होती है .. इस लिए मैंने ये लिखा क ऐसी हीरोइन कभी किसी ने किसी भी स्टोरी में नहीं शो की होगी ............ कोई भी राइटर मेरे लिखे हुए का बुरा ना माने ....

अगर किसी को बुरा लगे तो sorrrrrrrrrrryyyyyyyyyyy बोलता हूँ
 
विजय के साथ रहने वाली सभी गर्ल्स hi कमाल की हैं .. पूजा और रानी तो विजय के लिए ख़ास नहीं hi .. वो आने वाली अपडेट में hi पता चल जायेगा .......

प्रिय जहान्वी और षुरूति भी आने वाली हैं .. वो अब्ब कैसा रंग ले कर आएँगी विजय की लाइफ में .. वो देखा जायेगा ................

लेकिन विजय के लिए एक स्पेशल हीरोइन बनती hi है.........
 
ये भी सही कहा आपने .... लेकिन विजय का आपस में सामना करने से पहले अगर हीरोइन का इंट्रो दे दिया जाए तो कैसा रहेगा......

जो सब्बसे ख़ास बात है... हीरो का अभी हीरोइन से सामना होना बोहत hi लेट है...... लेकिन स्टोरी के हिसाब से अब्ब हीरोइन का इंट्रो होना बनता है ....

जब्ब विजय का सामना हीरोइन से होगा .... तब की तब देखि जाएगी ............
 
अपडेट ::::: 38

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पूजा की यादों में आज का दिन आने लगा.... और गुज़रे दिन क्या कुछ हहआ सबब सोचने में लगी हुई थी...........

दिन के 12 बजे हर्ष चौहान अचानक से पूजा के घर ए..... सबब ने उनका अच्छे से सवागत किया .. लेकिन उनके चेहरे पर संजीदगी तारी थी.. पूजा दीदी ने ये सबब भांप लिया...

पूजा दीदी:- अंकल सबब ठीक तो है ना....

हर्ष :- हाँ पूजा बेटी सबब ठीक भी है और नहीं भी .....



सबब हर्ष चौहान की बात सुन कर सबब चौंक गए ..........

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अपडेट:::38

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अब्ब आएगी

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घर पर विजय और राज, शिखा और रूपा के इलावा सबब hi थे .....

पूजा दीदी:- रानी तुम अंकल के लिए कुछ पीने को ले कर आओ पहले...

हर्ष :- नहीं पूजा बेटी इसकी कोई ज़रुरत नहीं है.. रानी बेटी एक ग्लास पानी का ले आओ. बास इस के इलावा कुछ भी पीने को मेरा मैं नहीं है अभी ....

रानी पानी ले कर आई. हर्ष चौहान ने रानी से पानी का गिलास लेकर अपने होंठों को लगाया और एक घूँट पीते हुए किसी गहरी सोच में डूबने लगे.

सभी आज हर्ष चौहान को ऐसे देख कर बोहत hi हैरान थे.... आज इनको क्या हुआ, ऐसी कौनसी बात है, जो ऐसा रियेक्ट कर रहे. और इतनी गहरी सोच में गम हैं ... क पानी भी ढंग से नहीं पी पा रहे...

हर्ष चौहान धीरे धीरे करके आधे गिलास पानी का खाली कर गए. फिर गिलास को टेबल पर रख कर सबब को देखने लगे....

सबब hi हर्ष चौहान को देख रहे थे.... मालिकान पद्मा आंटी मातलि भाभी और रानी...... सबब hi हर्ष चौहान और पूजा दीदी को देख रहीं थीं...



पूजा दीदी:- अंकल अब्ब बताएं क्या बात है?????

हर्ष :- पूजा बेटी उस अननोन का पता चल गया है....

पूजा दीदी:- सच अंकल ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है......

हर्ष :- (एक फीकी स्माइल देते हुए) नहीं पूजा बेटी इसमें ख़ुशी बोहत hi कम् है लेकिन और बोहत कुछ ऐसा भी है. जो सबब के जान्ने लायक है....




हर्ष चौहान की ये बात सुन कर एक बार तो पूजा दीदी भी हिल गई. लेकिन बाकी सबब हर्ष चौहान की इस बात से बोहत hi परेशां हो गए थे..... पूजा दीदी ने खुद को संभाला.......... एक दो लम्बी साँसें लीं और

पूजा दीदी:- अंकल जो भी आप कहने वाले हैं. सबब बता दें. आखिर jaan'na तो है hi. तो फिर आप बता hi den.jo भी कुछ ऐसा वैसा है सबब कुछ बता दें..........




हर्ष :- पूजा बेटी वो अननोन कोई आम इंसान नहीं है. वो अननोन और उसकी फॅमिली सिर्फ मुंबई में hi नहीं. पूरे महाराष्ट्र पर हकूमत करती है ..




पूजा दीदी और बाकी सबब ये सुनते में सकते में आ गए. क विजय के लिए आगे आने वाली जुंग इतनी बड़ी भी हो सकती है ....



हर्ष :- अननोन जिसका नाम दयानन्द नागराज है. दन्न (daya-nand-nagraag) के नाम से जाना जाता है. और उसका नाम मैं खुद कई सालों से सुन रहा हूँ. (इतना बोलते hi हर्ष चौहान कुछ देर के लिए रुक गए और बाकी सबब की साँसें इतना सुनते hi थम गई थीं. एक बार हर्ष चौहान ने सबब की तरफ देखा और फिर पूजा को देख कर आगे बोले) दन्न ऐ टकराना कोई बच्चों का खेल नहीं है.

पुणे सिटी के 70% हिस्से पारर दन्न के मर्ज़ी के बिना कोई सांस भी नहीं ले सकता.... और जिस इलाके में वो रहता है. वहां के 10 किलोमीटर के एरिया में कोई भी अनजान बाँदा घुस नहीं सकता ... दन्न हर वक़्त अपनी स्पेशल फाॅर्स साथ रखता hai.wo अकेला कहीं bhi,kabhi भी नहीं जाता ..जितना घटिया और शातिर hai.utna hi खुद को मेहफ़ूज़ भी करके रखा हुआ है उसने. जिस तरह की नेचर दन्न की है. उसके दुश्मनो की तादाद भी उसी हिसाब से है ... विजय अकेला hi दन्न का दसा हुआ नहीं है और भी कई ऐसे हैं जो दन्न के खून के पियासे हैं... लेकिन आज तक कोई भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाया ..... विजय के लिए दन्न से सामना करना आसान नहीं होगा ....




इतना बोलते hi हर्ष चौहान खामोश हो गए ...

और कमरे में किसी के भी सांस तक्क लेने की आवाज़ नहीं आ रही थी .... सबब की ऑंखें उनके ओरिजिनल साइज से डबल हो चुकी थीं. और रानी कभी अपनी माँ को दीदे पहाडे देखती. तो कभी पूजा दीदी को तो कभी हर्ष चौहान को .....

सबब की हवा टाइट हो चुकी थी लेकिन रानी की हवा तो कम्पलीट बंद hi हो गई थी ये सबब सुन कर .....

एक पूजा hi थी जो कुछ शांत थी लेकिन उनके माथे पर un-ginat शिकनें पद चुकी थीं. हर्ष चौहान और पूजा दीदी दोनों hi किसी और hi दुन्या में जा चुके थे ... कई मिंट तक्क सबब hi चुप रहे .......... इस ख़ामोशी को पूजा दीदी ने तोडा .........

पूजा दीदी :- अंकल दन्न का बैकग्राउंड इतना स्ट्रांग कैसे है......

हर्ष :- पूजा बेटी दन्न का बैकग्राउंड इतना स्ट्रांग भी नहीं है... जितना ...(हर्ष चौहान की बात को kaat'te हुए)

पूजा दीदी :- क्या मतलब??? अगर दन्न का बैकग्राउंड इतना स्ट्रांग नहीं है तो फिर वो इतना पावरफुल कैसे हो गया .....

हर्ष :- (थोड़ा मुस्कुराये) दन्न का बाप नागराज किसी दौर में एक लुच्चा हुआ करता था. gunda-gardi करते हुए और लोगों से लूट मार करके बड़ा आदमी बन्न गया.... लेकिन ये जो कुछ भी है... इस में नागराज का कोई हाथ नहीं है ...

है तो नागराज भी दन्न की तरह का घटिया और छिछोरा ... लेकिन नागराज वो नहीं बन पाया जो दन्न बन गया ...

दन्न के अंडरवर्ल्ड से बोहत hi ऊंचे लेवल के कनेक्शंस हैं .... दन्न को इंडिया में कोई भी चीट नहीं कर सकता ... अंडरवर्ल्ड की वजा से दन्न ने बोहत hi कम् समय में खुद की एक फ़ौज कड़ी कर ली थी ... और फिर देखते hi देखते दन्न इंडिया में छ गया .... कोई गुंडा हो या डॉन या फिर कोई कितना hi बड़ा अफसर हो या कोई कितना hi बड़ा पॉलिटिशियन क्यों ना हो दन्न से सबब की hi phhat'ti है ... क्यूंकि दन्न कब क्या कुछ करदे "कोई नहीं जानता" .... दन्न ने अब्ब तक्क जो भी किया डंके की चोट पर किया है .. लेकिन कोई उसका कुछ भी उखाड़ नहीं पाया .....

इतना बोल कर हर्ष चौहान ने टेबल पर पड़ा आधा पानी का गिलास उठाया ुर पीने लगे ..... सबब की नज़रें खला में देख रही थीं लेकिन वो किसी और hi दुन्या में पोहंचे हुए थे ....

पहली बार की तरह इस बार भी पूजा दीदी ने hi खुद को सबब से पहले संभाला.

पूजा दीदी:- खैर दन्न का क्या करना वो बाद में देखेंगे. लेकिन एक काम तो हुआ ना. उसके के बारे सबब पता चल गया अब्ब आगे क्या करना है और कैसे करना वो बाद में सोचेंगे ..... ये जुंग विजय की है .. विजय खुद hi देख लेगा ..... अब हम दन्न को जान गए हैं. उसकी पावर भी समाज चुके हैं ... अब्ब दन्न को भी और जान लेंगे और उसकी पावर को भी देख लेंगे....

लेकिन पहले हमारा और विजय का एक hi काम है. माँ जी और बहनो को उस दलदल से निकलना और उनको सेफ रखना ... दन्न से उन सबब को सेफ रखना भी एक बोहत बड़ा काम होगा हम सबब के लिए और ख़ास कर विजय के लिए ..............

इस बीच रानी भी चुप नहीं रह सकीय




रानी :- अंकल दन्न की फॅमिली में और भी तो लोग होंगे...




सबब रानी को देखने लगे क उनसे ये क्यों पूछा है....




पूजा दीदी :- रानी तुम्हारा सवाल मुझे अच्छा लगा .... दन्न की साड़ी फॅमिली को जानना विजय के लिए भी ज़रूरी है..... इतना बोल कर पूजा दीदी हर्ष चौहान की तरफ देखने लगी .....




हर्ष चौहान :- बास अभी इतना hi पता लगा है क नागराज के पांच बेटे थे एक मर्डर चूका है और 4 अभी भी ज़िंदा हैं..... बाकी की डिटेल के लिए मेरे आदमी लगे हुए हैं .... जैसे hi सबब पता चलेगा मैं तुमको बता दूंगा.....

मातलि भाभी बोली:- भाई साब तो फिर उस दन्न की श्वेता बेहेन से क्या दुश्मनी है. जो उनके साथ ये सब कर रहा है .....

ये बात सुन कर सबने एक बार मातलि भाभी को देखा फिर सब की नज़रों हर्ष चौहान की तरफ मुद गईं....

मातलि भाभी का ये सवाल सुन कर हर्ष चौहान दुखी हो गए ........

हर्ष :- सिर्फ दन्न hi नहीं है श्वेता बेहेन को रेखा बाई के कोठे तक पुहंचने में. कुछ और लोगों की भी गलती की वजा से श्वेता बेहेन रेखा बाई के कोठे तक्क जा पोहंचीं ......

इतना बोल कर हर्ष चौहान एक बार फिरसे चुप हो गए. लेकिन किसी ने भी उनको टोकने की कोशिश नहीं की कुछ देर खामोश रह कर हर्ष चौहान फिरसे आगे का बताने लगे.....

हर्ष :- ये उन दिनों की बात है जब्ब श्वेता ........ कॉलेज में पढ़ती थी............................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................... जैसे जैसे हर्ष चौहान

बोलते जा रहे थे. शुरू में सबब को बड़ा मज़ा आया...

लेकिन फिर जैसे hi हर्ष चौहान ने आगे का बताया . क क्या और कैसे हुआ सबब कुछ श्वेता के साथ... उसे सुन कर एक बार तो सबब hi हिल कर रह गए ....

किसी को भी यकीन hi नहीं आ रहा था. क ऐसा भी कोई कर सकता है...

पूजा दीदी का सारा खुद पर से कण्ट्रोल ख़तम होगा और वो बेहद ग़ुस्से में आ गई..... उनकी मुठियाँ कस्सणे लगीं.... चेहरा और ऑंखें मारे ग़ुस्से के लाल गहरी होने लगीं.... फिर उनकी आँखों से आंसू टिप टिप करके नीचे गिरने लगे ....... ये तो थी पूजा दीदी की हालत.. लेकिन बाकी सबब ने तो ज़ोर ज़ोर से रोना शुरू कर दिया ... रानी अपनी माँ से गले मिल कर रोने लगी ..




रानी :-(रट हुए) माँ कितना ज़ुल्म हुआ है ना माँ जी के साथ.... इतना सबब उन्हों ने कैसे बर्दाश्त किया होगा...........



मालिकान पद्मा आंटी और मालती भाभी भी रो रही थीं. हर्ष चौहान की भी ऑंखें ग़ुस्से और दुःख से लाल हो रही थीं. आज एक बार फिरसे उनकी आँखों में नमी आ गई थी.......

कुछ देर पूजा दीदी रोटी रहीं .... फिर वो उठी और कमरे से बहार जा कर इधर देखने लगी उसे एक लकड़ी का डंडा नज़र आया. उन्हों वो उठाया और कमरे में आ कर

सबब को देख कर ग़ुस्से से बोलीं....




पूजा दीदी:- चुपपपपपपप karrrrrrrrrrr jaaaaaaaaoooooooooooo sabbbbbbbbbb केईएएएएए sabbbbbbbbbbbbbbbbb ............


सब पूजा दीदी को इतने ग़ुस्से में देख कर डर गए और फ़ौरन hi चुप हो गए लेकिन उनके आंसू बहने नहीं रुके .....

पूजा दीदी ने उसी डंडे को हाथ में लिए हुए दीवार के पास आई और डंडे को दीवार पर मार कर अपने घुस्ससे को कम् करने लगी............. डंडा टूटा तो उनका ग़ुस्सा भी कुछ कम् हुआ .............. वो एक बार फिरसे बेथ गई. और किसी गहरी सोच में डूब गई........ कुछ मिंट बाद



पूजा दीदी:- किसी को भी चैन से नहीं रहने दूँगी मैं .... किसी को भी म्ररने नहीं दूंगी मैं. .... विजय और मैं सबब के लिए hi वो केहर बन्न कर टूटेंगे. क सबब को अपने किये गए पारर अफ़सोस हो या न हो लेकिन अपने जनम लेने पर जाऊरर वो रोयेंगे .... क्यूंकि मैं उनको मौत नहीं आने दूंगी ...........



सबब श्वेता की ज़िन्दगी केहलत जान कर रो रहे थे तो पूजा दीदी के ऐसे रूप को देख कर डर भी रहे थे .... कुछ देर बाद हर्ष चौहान चले गए ......


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थैंक्स भाई:

कुछ में कुछ भी कर लेना इतना आसान नहीं होता ... और ये कोई फंतासी या सुपर हीरो टाइम स्टोरी तो है नहीं .. इसलिए मेरी कोशिश है क जैसे इक इंसान किओ रियल लाइफ में प्रॉब्लम होती हैं कुछ को डिस्कवर करने में वैसे hi विजय भी स्टेप बी स्टेप आगे बढे .. किसी भी मक़सद को पा लेना इतना हासन नहीं होता .......
 
अपडेट :::: 39

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मैं पूजा दीदी को hi देख रहा था. वो बड़ी देर से hi यादों में खोई हुई थी. और यादों में गम रहते hi एक बार फिरसे उनकी आँखों में मुझे वही आग और नमी दिखने लगी थी.

क्या सन था. पूजा दीदी नंगी मेरे मुन्ने पर अपनी मुनिया को रख कर बैठी थी. और मुनिया के गरम होने की बजाये उनकी ऑंखें दहकने लगी थीं. उनकी मुनिया के पानी की बजाये उनकी आंख्ने पानी बहा रही थी ....मतलब दीदी की मुनिया के रोने एक टाइम अब्ब ख़त्म हो गया था ......

मैंने रानी को देखा तो मेरी सीटी hi बज्ज गई...... रानी कमीनी के अंदर की आग बुझते hi आँखों में आंसू दिखने लगे थे ..... मतलब रानी भी सबब याद करके रो रही थी. ऐसा क्या हो गया था जो पूजा दीदी और रानी से बर्दाश्त करना hi मुमकिन नहीं रहा था .... मैं रानी को छोड़ पूजा दीदी की तरफ अपना धयान देने लगा.. मैं दीदी की कमीज को पकड़ कर उनके बदन से अलग करने लगा. मेरे ऐसा करते hi पूजा दीदी अपनी यादों से बहार आने लगी. मुझे खुद की कमीज निकलते देख कर मेरी आँखों में देखने लगी. कुछ देर मेरी आँखों में देखने के पूजा दीदी ने खुद के दोनों बाज़ो उठा कर मुझे अपनी कमीज निकलने की परमिशन दे दी....

मैंने पूजा दीदी की कमीज को निकल दिया और फिर अपने हाथों को उनकी पीठ पारर लाते हुए ब्रा का हुक भी खोल दिया. पूजा दीदी ने कोई रियेक्ट नहीं किया. जब्ब पूजा दीदी फूल नुदे हो गई तो मैंने पूजा दीदी को कमर से पकड़ कर बीएड पर लिटा दिया.

पूजा दीदी मुझे hi देख रही थी. लेकिन मुझे कुछ भी करने से नहीं रोक रही थीं. मैंने एक बार रानी को देखा वो अभी भी आंसू बहा रही थी. मैंने रानी को पकड़ कर पूजा दीदी के साथ hi लिटा दिया.

हम तीनो hi बीएड पर नंगे थे ... मेरा मुन्ना अभी भी सो रहा था. दोनों मुझे hi देख रही थीं. क अब्ब मैं क्या करने वाला हूँ....

मैं पूजा दीदी के ऊपर आया और अपने चेहरे को उनके चेहरे के पास ला कर अपने होंठों को उनके होंठों के करीब करने लगा.... पूजा दीदी बास मेरी आँखों में hi देख रही थी और मैं भी पूजा दीदी की आँखों में hi देख रहा था. कोई हवस या सेक्स का खुमार नहीं था. बास प्यार hi प्यार था......

इस बीच मैंने एक हाथ को रानी के एक दूध पर रख दिया था. लेकिन दबाया नहीं. रानी ने भी कुछ और नहीं किया.

मेरे होंठ पूजा दीदी के होंठों के पास थे और हम दोनों hi एक दुसरे की आँखों में देख रहे थे ......... हमारी ऑंखें ऐसे hi मिली रहीं. मेरे होंठों ने पूजा दीदी के होंठों को छूना शुरू कर दिया. मैं पूजा दीदी की आँखों में देखते hi अपनी जीब निकल कर पूजा दीदी के होंठों पर फेरने लगा. पूजा दीदी ने भी मेरे ऐसा करते hi अपने होंठ खोल दिए तो मेरी जीब ने आगे कर सफर करना शुरू कर दिया ..... मेरा मुन्ना पूजा दीदी की दो बार पानी छोड़ चुकी मुनिया के ऊपर सर्र रख कर सो रहा था .... पूजा दीदी की मुनिया भी थक कर आराम कर रही थी. और हम दोनों भी अंदर की ागर्मी के कम् होते hi अपने प्यार में डूबने लगे.

मेरी जीब पूजा दीदी के मोहन के अंदर घूम फिर रही थी. मैं अपने दुसरे हाथ को पूजा दीदी के एक दूध पर रख कर थोड़ा सा दबाने लगा ... ये सबब प्यार भरी फीलिंग्स थीं.. अपने मुन्ने या दीदी की मुनिया को जगाने के लिए ये सबब नहीं हो रहा था ... मेरा मुन्ना और दीदी की मुनिया भी सबब समझती थी ... क इस प्यार में उन दोनों की अभी कोई गुंजाइश नहीं है ... इसलिए दोनों hi शांत थे .... मैं रानी के भी दूध को हल्का सा दबाने लगा ... लेकिन रानी ने कोई भी सिसकी नहीं ली .. वो भी अभी पूजा दीदी की तरह दुखी हो गई थी .. पूजा दीदी की तरह मैं रानी को भी ग़म से बहार निकलने की कोशिश में लग गया था....

कुछ देर मैं पूजा दीदी को माउथ किश करता रहा. फिर मैंने अपनी जीब को पूजा दीदी के मोहन से निकल कर अपने होंठों को पूजा दीदी की ऑंखें की तरफ लाने लगा. जैसे hi मेरे होंठों ने पूजा दीदी की आँखों को चूमा. पुजा दीदी शांत होने लगीं. उनका ग़ुस्सा कम् होने लगा.

पूजा दीदी:- विज्जु आज बोहत कुछ हुआ है. जो बर्दाश्त करने लायक नहीं है.

मैं पूजा दीदी के ऊपर से उठ कर रानी को साइड हटाया और फिर दोनों के बीच में hi लेट गया. let'te hi मैंने पूजा दीदी को खुद के ऊपर आने को कहा. तो पूजा दीदी एक लम्हे में hi मेरे ऊपर आ कर लेट गई.

पूजा दीदी ने मेरे ऊपर आते hi एक बार मेरी आँखों में देखा... मुझे शांत देख कर कुछ हैरान तो थी. लेकिन आज तो हमारा सबब कुछ hi बदला हुआ था. हमारा अगर आज का ग़म बड़ा था तो हमारा प्यार भी तो किसी भी ग़म से कम् नहीं था.

मुझे शांत देख कर मेरे सीने पर अपना सर रख कर लेट gai.maine रानी की तरफ देखा तो वो भी बड़े hi प्यार से मुझे hi देख रही थी. रानी भी मुझसे लिपटी हुई थी. मैंने अपने एक बाज़ो को खोल कर रानी को खुद में समां लिया. रानी और भी खुश हो गई. आज हमें किसी भी तरह की कोई जल्दी नहीं थी.

पूजा दीदी अपने हाथ की उँगलियों से मेरे पेट को सहलाने लगी ..... कुछ देर ऐसे hi हम तीनो एक दुसरे को महसूस करने लगे .... पूजा दीदी ने एक बार सर्र उठा कर मेरी आँखों में देखा. उसके बाद फिरसे मेरे सीने पर सर्र रख दिया और

पूजा दीदी:- विज्जु हमारे बीच कभी भी कुछ छुपा हुआ नहीं है. मेरा सबब कुछ तुम जानते हो और तुम्हारा भी सबब कुछ मैं जानती हूँ. और रानी भी हम दोनों के बारे सबब जानती है. एक बात ऐसी थी जो मैंने तुमसे छुपाई थी. उस वक़्त वो सबब ज़रूरी था तुमसे छुपाना इस लिए मैंने तुम्हे नहीं बताया था.... तो अब्ब तुम बोलो मैंने गलत किया या सही किया वो सबब तुमसे छुपा कर....

मैं पूजा दीदी की बात सुन कर उनके सर्र में उँगलियाँ चलने लगा. क आज वो ऐसी बात क्यों कर रही हैं. और वो भी ऐसे अंदाज़ में ......

विजय :- दीदी आप जो भी करेंगे मेरे लिए वो सही hi होगा. अगर आपको लगता है क वो मुझे तब्ब नहीं जाना चाहिए था. तो ये शायद मेरे लिए ज़रूरी hi होगा.

मेरे लिए आप कभी भी कुछ गलत सोच सकती हैं क्या.....

रानी भी मुझमे समाई हुई थी और उसके ठन्डे पद चुके दूध के मटके और उनके छोटे छोटे dhakkan(nipple) भी ठन्डे हो कर मेरे जिस्म के साथ hi लगे हुए थे.... रानी मेरे कंधे पर अपनी उँगलियाँ चला रही थी. कभी मेरे गालों पर तो कभी मेरी गर्दन पर किश करने लग जाती लेकिन हलकी सी .... सिर्फ प्यार भरी किश. कोई मुनिया की आग या उसके अंदर की कमीनगी नहीं थी .... रानी की आग और कमीनगी दोनों hi सोइ हुई थीं.

पूजा दीदी:- विजय जब्ब तुम्हें गोली लगी थी. तो एक बात ऐसी हुई थी जो मैंने तुमको नहीं बताई थी.... लेकिन अब्ब मुझे लग्ग रहा hai..k वो सबब बताना चाहिए. क्यूंकि अब्ब तुम्हारे सामने सिर्फ माँ और बहनो को बचने का hi मिशन नहीं है..

एक बोहत hi बड़ी जुंग है जो तुमको लड़नी है. अकेली रेखा बाई hi नहीं है तुम्हारी राह में और भी कुछ लोग हैं. जो ये नहीं चाहते क तुम' तुम्हारी माँ और तुम्हारी बहने khush-haal ज़िन्दगी गुज़र पाएं.......... तुम माँ जी और बहनो को अगर रेखा बाई के पास से लेकर आते भी हो तो फिर भी उन सबब के लिए खतरा हमेशा hi रहेगा. हमारा सबसे बड़ा दुश्मन दन्न नाम का एक आदमी है ....

फिर पूजा दीदी मुझे दन्न के बारे में सबब बताने लगी... मैं भी ये सबब सुन कर बड़ा हैरान हुआ क इतने बड़े आदमी से मुझे जुंग लड़नी थी ....

लेकिन अगर वक़्त ने मुझे उसके सामने ला कर खाद कर hi दिया था ... तो फिर सोचना क्याआ. और डर तो था hi नहीं मुझमे. दर्रिंग और ziddi-pann में तो मैं शुरू से hi सबब से आगे था. और अब्ब तो मैं बोहत कुछ हासिल कर चूका था. दन्न को भी देख लूंगा.

पूजा दीदी आगे बोली....

पूजा दीदी :- और दूसरी बात तुम्हें एक काम और भी करना है और वो है दन्न से बदला लेना. मुझे माँ जी के साथ ये सबब करने वालों से तुम्हें बदला लेते हुए देखना है.... दन्न और जिन लोगों की वजा से माँ जी रेखा बाई के कोठे पारर जा पोहंचीं. मुझे उन सबब से बदला लेना hi. और इज़्ज़त का बदला इज़्ज़त है .. किसी की इज़्ज़त सलामत नहीं रेहनी चाहिए.... कोई मर्द हो या औरत या फिर लड़की ... सभी को ऐसा सबक़ सीखना है ... क पूरा महाराष्र देखता रह जाए ....

वक़्त आने पर मैं तुम्हें कुछ नाम बताऊँगी.... उनके साथ तुम जो मर्ज़ी करना.. लेकिन बाकी किसी के भी साथ रपे मैट करना . किसी के साथ कुछ भी करो मेरी तरफ से तुमको पूरी पूरी छूट है ...

सबब से पहले तुमको उस दन्न से लड़ना होगा.. लेकिन विज्जु ये लड़ाई सिर्फ हाथ और हथियारों की नहीं है ... दन्न के जैसे hi तुमको पावरफुल बनना होगा... और उसकी hi तरह तेज़ दमाग... स्टुपिड लोगों के जैसे लड़ाई मैट करना.. बदला कुछ लेट हो जाये वो मैं बर्दाश्त लार लुंगी.

लेकिन तुम्हें कुछ हो जाए या कोई भी दुश्मन अगर बच कर निकल जाए तो मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा .... विज्जु तुम्हे ताक़त मिल गई है. लड़ना तुम सीख रहे हो लेकिन इन् सबब के इलावा भी तुम्हें बोहत कुछ बनना है. दन्न को आसान दुश्मन मत समझ लेना .. वो बोहत hi khatar-naak है. सबब कुछ सोच समझ कर करना.... खुद को अपनी माँ और बहनो के लिए और हमारे लिए सलामत भी रखना.........

इतना बोल कर दीदी कुछ देर शांत रही ... फिर आगे बोलने लगी...

विज्जु इस थोड़े से hi वक़्त में तुम मेरी ज़िन्दगी बन गए हो..... अब्ब तुम्हरे बिना ज़िन्दगी में कोई रंग नहीं रहेगा .... जो भी करना हम सबब को ज़रूर याद रखना. क जुंग जीत कर सबब के लिए वापिस भी आना है .... मेरी ऑंखें हमेशा तेरा रास्ता देखती रहेंगी... मेरे पास माँ और रानी समेत सबब हैं लेकिन अगर तू नहीं तो इन सबब की भी मुझे उतनी ज़रुरत नहीं है ..... (ये बोलते hi दीदी बोहत इमोशनल हुई लेकिन फिर जल्द hi खुद पर काबू पा कर आगे बोली)

और इस सबब बातों के इलावा कुछ ऐसा भी है जो अभी मैं तुमको नहीं बता सकती. पहले तुम अपनी साड़ी ट्रेनिंग पूरी करलो. उसके बाद मैं तुम्हे सबब कुछ बता दूँगी ............

मैं पूजा दीदी की साड़ी बातें सुन्न रहा था. उनके बोलने का अंदाज़ आज बदला हुआ था. बोहत hi धीरे धीरे और लफ़्ज़ों को चबाते हुए बोल रही थी. जैसे पता नहीं वो अंदर से कितनी देहक रही हैं. उनका बास नहीं चल रहा था.

क वो na-jaane क्या कुछ कर जाएँ. लेकिन खुद पर कण्ट्रोल करके वो बास इतना hi बोल पायी थीं.

मैंने रानी की तरफ देखा तो रानी एक बार फिरसे िम्प्शनल हो गई थी... जिस हाथ पर रानी लेती हुई थी. मैंने उस हाथ को थोड़ा सा हिलाया तो रानी ने मुझे देखा. फिर थोड़ा सा उठी मैंने अपने हाथ को सही से एडजस्ट किया.. रानी फिरसे मेरे हाथ पारर सर्र रख कर लेट गई. मैंने अपने उसी हाथ से रानी के दूध को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया.. रानी ने फिरसे मुझे देखा. रानी की आँखों में नमी थी.. लेकिन प्यार की इंतेहा भी थी.... मैं रानी के दूध और निप्पल को अपने हाथ से सहलाने लगा. रानी मेरे गालों पर हलके हलके अपने होंठों को टच करने लगी... रानी और मेरा हाथ अपने काम में लगे रहे...

मैं अपना दूसरा हाथ जो दीदी के सर्र पर था... उसे दीदी के सर्र से हटा कर दीदी के दूध पर रख कर दीदी के दूध को हल्का सा दबा लिया दीदी ने सर्र उठा कर एक बार फिरसे मुझे देखा मेरी आँखों में देखते hi दीदी ने फिरसे अपना सर्र मेरे सीने पर रख दिया और अपने एक हाथ से मेरे मुन्ने को पकड़ कर हल्का सा हिलने लगी ..... ये सबब जो भी हो रहा था.. न hi मेरे मुन्ने के लिए और न hi रानी या पूजा दीदी की मुनिया के लिए हो रहा था .. ये सिर्फ हमारा प्यार और कुछ मस्ती थी .... दोनों इस वक़्त थोड़ा इमोशनल जो हो गई थी. मैं पूजा दीदी के दूध और निप्पल को थोड़ा थोड़ा अपनी उँगलियों से कुरेद रहा था ..... हम तीनो ये सबब करते हुए सोचों में भी गम थे और एक दुसरे के साथ भी लगे हुए थे ....

कुछ hi देर में मेरा मुन्ना पूजा दीदी के हाथों में अकड़ने लगा ... पूजा दीदी मेरे मुन्ने के मोहन को अपनी ऊँगली के एक नाख़ून से कुरेद रही थी .... मेरा मुन्ना दीदी के हाथों की म्हणत से जाग उठा. फिर जब्ब मेरे मुन्ने की नज़र दीदी पारर पड़ी तो एक स्माइल दे कर नाचने लगा.... दीदी भी उसे अपनी मुठी में लेकर नाचने लगी .... मैं ये सबब देख रहा था लेकिन मेरा ज़यादा फोकस दीदी की बातों पर था .... मैंने एक बार फिरसे रानी को देखा तो रानी अब्ब

शांत हो गई थी .....

मैंने रानी के दूध पार्स हाथ को हटा कर रानी के पेट और फिर दूध पर ऊपर नीचे लाने लगा ... पूजा दीदी और रानी का मंद अब्ब डाइवर्ट हो चूका था .... तो मैं बोलै

विजय:- दीदी आप की बातून से मुझे सबब समझ आ रहा है.. और जो आपने मुझे अब्ब बताया है क रेखा बाई के इलावा भी कुछ और लोग हैं जो हम सबब के लिए खतरा बने हुए हैं. मतलब क कुछ तो बोहत hi बड़ा है. जो आप जान गई हैं. लेकिन मुझे अभी नहीं बताना चाहती.

दीदी मैं अब्ब वो पहले वाला विजय नहीं रहा. जो गोली खा कर ढेर हो गया था. लेकिन फिर भी अगर आप अभी मुझे नहीं बताना चाहती तो आप सही hi हूँगी...

मैं भी ये बात अब्ब जान गया हूँ क जब्ब तक्क मैं कुछ करने लायक नहीं होता. मेरा सबब जान कर फायदा भी क्या है. क्यूंकि मेरी मंज़िल अभी दूर है. शायद मुझमे अभी भी वो सहन शक्ति नहीं आई है. जो आप मुझमे देखना चाहती हैं. लेकिन आपने एक बात बता कर अच्छा किया है. क मेरे सामने अकेली रेखा बाई hi नहीं है. और भी ऐसे मेरे दुश्मन हैं जिन की वजा से मेरी माँ की ज़िन्दगी और इज़्ज़त बर्बाद हुई.....

पूजा दीदी मैंने आप के सामने कसम खाई थी ना क मैं अब्ब कभी भी आप का सर्र झुकने नहीं दूंगा. तो जो भी आप मुझसे चाहती हैं वो मैं करूंगा.

जो भी आप के दिल में है आप वो सबब रखें अपने दिल में. बास मुझे इस वक़्त अपनी माँ और बहनो के लिए खुद को मज़बूत बनाने दो....... बाकी की बातें बाद में सही .....

अभी तो मेरा पहला काम माँ और बहनो को वहां से निकलना है. उसके बाद जो भी करना होगा मैं आपसे पूछ लूँगा ....... माँ और बहने एक बार सेफ हो जाएँ. फिर कुछ भी करना khatar-naak और jaan-leva सही लेकिन na-mumkin तो नहीं होगा.

और रही बात दन्न और अपने दुसरे दुश्मनो से बदले की ...तो वो आप मुझ पर छोड़ दें. मैंने कहा ना "मैं अब्ब वो पहले वाला विजय नहीं रहा." मेरी माँ को रुलाने और बर्बाद करने वाले कहाँ तक्क मुझसे बचके रहेंगे...

उनके पास बास उतने hi दिन हैं जितने मुझे मेरी ट्रेनिंग को पूरा करने में लगेंगे.

और अगर आपको लगता है क दन्न कोई बोहत hi बड़ी कुट्टी चीज़ है "तो मैं us'se भी बड़ा डारणीदा और पावरफुल बन्न कर दिखा दूंगा आप सबब को.

फिर दन्न और मेरे दुसरे जो दुश्मन हैं वो सबब आपके पैरों में होओगे ...

रानी मेरी बहन में थी और मुझे बोलते हुए देख रही थी .... उसकी आँखों में हैरत थी. क आज मैं इतना सुन कर इमोशनल क्यों नहीं हुआ .... और इतनी बड़ी और हैरान कर देने वाली बातें कैसे कर रहा हूँ .....

और पूजा दीदी मेरे मुन्ने को पकडे मेरे सीने पार्स अपने सर्र को उठाये मुझे देखने लग्ग गई थी.

जब्ब मेरी बात ख़तम हुई तो पूजा दीदी मेरे मुन्ने को छोड़ कर मेरे मुन्ने के ऊपर बेथ बैठ गई.... दीदी की मुनिया की वजा से मेरा मुन्ना मेरे पेट की तरफ आ गया... दीदी ने अपनी मुनिया की एक घिसाई मेरे मुन्ने पार्स ोूपर नीचे अच्छे से की... दीदी अपनी ख़ुशी कर इज़हार कर रही थी .... फिर दीदी मेरी आँखों में देखने लगी.. उनकी ऑंखें ख़ुशी से चमक रही thi.unki आँखों में मौजूद चमक आज कुछ और भी बढ़ गई थी ... वो मुझे हमेशा से ऐसा hi देखना चाहती थी. जैसा मैं अब्ब उनको दिख रहा था.

फिर दीदी ने एक बार रानी को देखा रानी को जितनी हैरत थी मेरी बातों से उतनी hi ख़ुशी भी हो रही थी.. दीदी ने रानी को देख कर रानी की मुनिया को बड़े hi प्यार से अपनी एक ऊँगली से अच्छे से छुआ रानी भी पूजा दीदी को अपनी मुनिया से छेड़ छड़ करते देख कर बोहत hi खुश thi.(kameeni कही की) जब्ब भी दीदी रानी की मुनिया को ऐसे प्यार करती थी. तब्ब रानी और मैं समझ जाते थे क दीदी कितनी खुश है... दीदी बड़े hi प्यार से रानी की मुनिया के लिप्स में अपनी ऊँगली को चला रही थी ..... रानी और रानी की मुनिया दोनों hi झूमने लगी थीं ... दीदी रानी को और मेरे मुन्ने को खुश करने के बाद मेरी तरफ देखने लगी ............

पूजा दीदी:- विज्जु तू इन 3 महीनो में इतना बदल गया है. मुझे पता hi नहीं चला' ऐसा hi तो विज्जु मुझे चाहिए था ...

पूजा दीदी को जो ख़ुशी मेरी बातों से मिली थी. उसकी सेलिब्रेशन के लिए पूजा दीदी मेरे मुन्ने पारर अपनी मुनिया को घिसते हुए मेरे होंठों पर टूट पड़ीं. मेरा मुन्ना तो इस सबब में बोहत hi खुश था उसने अपना सर्र उठा उठा कर दीदी की मुनिया के लिप्स को चूमना शुरू कर दिया.. अब्ब दीदी और दीदी की मुनिया को कोई भी ग़म नै रहा था. दीदी अपने होंठों से मेरे होंठों को पहले तो वाइल्ड लगी रहीं. ख़ुशी जो बोहत thi.lekin कुछ hi देर में दीदी धीरे धीरे मेरे होंठों पर अपना प्यार लुटाने लगीं.

दीदी ने किश तोड़े बगैर hi रानी को तिरछी आंख से देखा . मैंने भी रानी को देखा तो रानी स्माइल देते हुए बोली ..

रानी :- आप दोनों लगे रहो जैसे hi मुझे लगा अब्ब मेरी एंट्री बनती है तो फिर मुझे कौन रोक पायेगा .... हहहहहहहए मुझे खुद का हिस्सा वसूल करना बोहत hi अच्छे से आता है ... हहहहहहए दीदी आप लगी राहु विज्जु के साथ ... कहीं विज्जु का मुन्ना सुस्त न पद जाये ... और आपकी मुनिया की म्हणत धरी की धरी रह जाए ..... हहहहहए

रानी कमीनी की बातोंसे हंसी तो ज़रूर आती लेकिन हमारे मोहन बंद थे .. और इस वक़्त हमारे काम में हसने की कोई गुंजाइश नहीं थी.

पूजा दीदी ने मेरे होंठों को नहीं छोड़ा अपना एक हाथ बढ़ा कर रानी की मुनिया को फिरसे टटोलने लगी. रानी तो इस सबब के लिए सबब से आगे थी....

रानी खुश हुई ... पूजा दीदी मुझे किश करते हुए मेरे मुन्ने को बड़े hi प्यार से अपनी मुनिया के लिप्स के बीच में से गुज़ार रही थे. दीदी की मुनिया बोहत hi गीली हो गई थी... जिस वजा से मुन्ना बिना दीदी की झाड़ियों से रगड़ खाये ख़ुशी ख़ुशी नाचते हए गुज़र रहा था....

मुन्ना तो अपनी जगा पर hi टिका हुआ था लेकिन मुनिया को मेरे मुन्ने से बोहत प्यार था. जिस वजा से दीदी की मुनिया ने मुन्ने को एक hi जगा रहते हुए अपना सारा प्यार देने लगी. मुन्ना ख़ुशी में फहुलने लगा. और उसकी अकड़ बढ़ने लगी. मेरी तरह मेरा मुन्ना भी पहलवान जी की मिलने वाली खुराक से बोहत hi बड़ा और सख्त जान हो गया था...... मेरी तरह वो भी थकना नहीं जानता था. अभी रानी या दीदी को मेरे मुन्ने की असल kaar-kardgi का कहाँ पता था. जॉब टाइम आएगा तब्ब दोनों की hi फहाद कर रख देगा ......

मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी के दोनों दूध को पकड़ लिया और थोड़ा कस के दबाने लगा.... दीदी को लगे कुछ मिंट हो गए थे. अब्ब दीदी की मुनिया से बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था. दूसरा जब मेरे हाथों ने दीदी के दूध और निप्पल को भी टटोलना शुरू किया तो दीदी मुझे किश छोड़ कर मेरी आँखों में देखने लगी ..दीदी की ऑंखें bhayan-kar हद्द तक्क चुतरस के उबलने की वह से लाल हो चुकी थीं.

कमाल है 2 बार दीदी और रानी कर पानी निकल तो दिया है.. फिरसे बढ़ गई गर्मी.... दीदी मुझे लाचारी से देखने लगी. जैसे कह रही ho"vijju अब्ब बर्दाश्त नहीं होता. कुछ करो.. लेकिन अभी वो सबब कहाँ. अभी तो उस के लिए टाइम था"

मैंने दीदी को कमर से पकड़ कर बीएड पर लिटा दिया. रानी भी अलग हो गई. मैंने रानी को देखा तो रानी भी पागल होने लगी थी.

लगता है दीदी ने रानी की मुनिया में कुछ ज़यादा hi देर तक्क ऊँगली चलाई है. जिस की वजा से रानी भी be-kaabu हो गई थी.

मैं पूजा दीदी के पैरों में आ कर बैठ गया .. मैंने दीदी की लेग्स को पकड़ को पहले उठाया फिर खोल दिया. दीदी ने एक बार मुझे देखा लेकिन कुछ कहा नहीं वो भी अब्ब जल्द से जल्द ठंडा होना चाहती थी........ मैंने दीदी की मुनिया को देखा .. बालों की वजा से कुछ और भी प्यारी दिख रही थी.... दीदी की मुनिया बालों में ढकी हुई थी. कुछ कुछ दिख रही थी.

पहले मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी के दोनों दूध कर पकड़ कर अच्छे से दबाया...

siiiiiiiiiiiii hmmmmmmmmmmmmha दीदी की सिसकी निकल गई. दीदी की नशे के कारण ऑंखें बंद हो गई थीं. दीदी के दुध को अच्छे से दबाने के बाद मैंने दीदी के दोनों निप्पल को अपने अंघूठे और एक ऊँगली में दबा कर मरोड़ने लगा. दीदी ने अपनी गांड एक झटके में उठा दी.. दीदी के लिए अचानक से निप्पल को मरोड़ना बर्दाश्त नहीं हुआ. और वो उछाल पड़ी. मैंने रानी को देखा ....

विजय :- रानी अपने काम पे लग जाओ.

रानी मेरी बात समझ गई. और पूजा दीदी के दूध को पकड़ कर पहले अच्छे से बढ़ाने लगी कुछ देर दबा कर अपनी जीब को निकाल कर दीदी के दूध और निप्पल को चाटने लगी...... दीदी मचलने लगी... रानी दीदी के दूध को चाटने और पीने में माहिर हो चुकी थी.....

मैं दीदी की मुनिया की तरफ आया और फिर दीदी की मुनिया पर झुक कर अपने एक हाथ को दीदी की गांड के नीचे ला कर थोड़ा सा उठाया और अपनी जीब को दीदी की गांड के छेड़ पर ला कर रख दिया......

aiiiiiiiiiii siiiiiiiiiii hmmmmmmmmmmmmma पूजा दीदी की सिसकियाँ निकलने लगीं.

दीदी की गांड का छेड़ उनके लिए बोहत hi खतरनाक है. दीदी अपनी गांड के लिए बोहत hi सेंसिटिव हैं.. पता नहीं जब्ब मैं इसे खोलूँगा तब्ब क्या करेंगी.... मैंने दीदी की गांड के छेड़ को चाट कर अपनी जीब को दीदी की पानी छोड़ती मुनिया पर लाया. बालों भरी दीदी की मुनिया से एक अलग hi स्मेल आ रही थी. मेरा मुन्ना उन स्मेल से और भी अकड़ने लगा.

मैंने दुसरे हाथ से दीदी की मुनिया के लिप को खोल कर अपनी जीब के लिए रास्ता खुला किया. दीदी की सिसकियों से कमरा गूंजने लगा था... दीदी पागल होने लगी थी. एक तो रानी ने दीदी के दूध को निचोड़ना शुरू किया हुआ था.. दूसरा मैंने दीदी की गांड के छेड़ को छू कर उनकी हालत पतली करदी थी. और अब्ब मेरे जीब ने दीदी की मुनिया को चूम चूम कर और चाट चाट कर हिला डाला था.

दीदी इन सबब हमलो से कैसे बच सकती थी. दीदी की गांड को पहले hi मेरे हाथ की वजा से कुछ उठी हुई थी. लेकिन इन हमलों की वजा से दीदी की गांड ने ज़ोर ज़ोर से हिलना शुरू कर दिया .... दीदी की सिसकियों के साथ साथ दीदी की गांड का हिलना भी तेज़ हो गया. और फिर दीदी एक चीख मारते हुए मेरे मोहन में अपनी मुनिया का पानी बहते हुए बीएड पर ढेर हो गई.

दीदी के पास्ट होते hi मैंने और रानी ने दीदी को छोड़ दिया. दीदी की दूध उनकी तेज़ ढल रही साँसों की वजा से बोहत hi प्यारे लग्ग रहे थे .. अगर दीदी के दूध से 1" ऊपर हलके लोहे की कोई प्लेट रख दी जाए तो दीदी के सांस लेने से उनके ऊपर को उठ रहे दूध उस प्लेट को लगते hi एक अलग hi साउंड ज़रूर देंगे.. इतनी ज़ोर से वो सांस लेते हुए अपने दुध को ऊपर नीचे कर रही थी....

मैंने दीदी को सांस बहाल करने के लिए छोड़ दिया और रानी की तरफ देखने लगा...

रानी भी खुद की आग को बर्दाश्त करते हुए दीदी की हेल्प कर रही थी. लेकिन रानी की आग और भी be-kaabu हो गई थी. रानी ने मेरे होंठों पर लगे दीदी की मुनिया के पानी को देख कर मुझे बीएड पर लिटाया और और अपनी गीली मुनिया को मेरे मुन्ने पर रख कर घिसते हुए मेरे होंठों पर लगे दीदी की मुनिया के पानी को पीने लगी.

रानी अब्ब बर्दाश्त से बहार होने लगी थी. जल्द hi रानी ने मेरे होंठों पर लगे दीदी के पानी को चाट कर अपने पेट में उतारा. इस बीच उसने मेरे मुन्ने को घिसना नहीं छोड़ा था.

फिर रानी उठ कर मेरे चेहरे की तरफ आई और 90 की पोजीशन को सेट करते हुए मेरे मुन्ने पर झुक ..... रानी की मुनिया का पानी भी दीदी की hi तरह ज़ोरों शूर से निकलने के लिए रानी की मुनिया के अंदर hi अंदर मचल रहा था..... मेरी जीब जैसे hi रानी की मुनिया पर लगी . रानी ने मेरे मुन्ने को हाथ में कस कर अपने होंठों पर लगाया और मुन्ने के पूरे शरीर को ऊपर से ले कर नीचे चाटने लगी. मेरे शरीर में भी अब्ब मस्ती और नशा बढ़ चूका था. और सनसनाहट सी होने लग्ग गई थी... '

मेने रानी को उसका काम करने दिया और खुद रानी की सेवा में लग्ग लगा. रानी अपनी मुनिया पर मेरी जीब से बेचैन होने लगी और फिर उसने जल्द hi मेरे मुन्ने को चाटना छोड़ कर उसे मोहन में ले लिया. आधा hi फस कर जा सका.. आखिर वो भी अब्ब मेरी तरह से एक पहलवान बन्न गया था..

रानी भी आखरी स्टेज पर थी इसलिए जल्द hi मेरे होंठों पर अपनी मुनिया को घिसने लगी .... रानी मेरे मुन्ने को लॉलीपॉप के जैसे खाने और चाटने लगी....

रानी अचानक से कड़ी हुई और मेरे मुन्ने पर बैठ कर' मेरे सीने पर हाथ रख कर अपनी मुनिया को किसी एक्सप्रेस ट्रैन की स्पीड के जैसे आगे पीछे करने लगी.. रानी के स्पीड की वजा से बीएड एक बार फिरसे चीखने लगी.............

और रानी aiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaa ahhhhhhhhhhhhhhh siiiiiiiiiiiiiiii उम्म्म्मममः hayyyyyyyyyyyyyyye vijjjjjjjjjjuuuuuuuuuu ttuuuuuuuuuuuuuuuu kiitttttttttttnnnnnnnnnnaaaaaaaaaaa maaaaaaaaazzzzzzzaaaaaaaaaaaa deeeeeeeeeettttaaaaaaaaaa haaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiii....

सिसकियाँ लेते हुए बोलने भी लगी. रानी ने अपनी आँखों को कस के बंद किया हुआ था. मेरा मुन्ना भी रानी की ऐसी स्पीड को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था. वो भी रानी की तरह अंदर से उबलने लगा. मेरे अंदर उबाल रहे लावे का लॉक भी an-kareeb टूटने hi वाला था.... क रानी ने एक झांकता खाया और ब्रेक लगते हुए मेरे ऊपर गिर गई और लम्बी लम्बी साँसें मुझपर छोड़ने लगी ..... रानी की मुनिया ने moosla-dhaar मरसिह शुरू करदी.... साली कमीनी खुद का काम ख़तम होती hi देह गई... और मुझे गलत टाइम पर बीच राह में hi छोड़ दिया. चलो कोई ना अब्ब दूसरी मुनिया वाली भी तो साथ hi लेती है.

मैंने दीदी की तरफ देखा. वो अब्ब तक्क शांत पद चुकी थी. वो भी रानी और मेरी तरफ hi देख रही थी.

पूजा दीदी को देख कर मैंने रानी को बीएड पर लुढ़काया.. पूजा दीदी की नज़र मेरे तरस रहे मुन्ने पर गई तो मुझे एक क्यूट सी स्माइल देने लगी.

विजय:- दीदी मुझे इस वक़्त आप की स्माइल की ज़रुरत नहीं है. मेरे मुन्ने को है.

पूजा दीदी:- मेरा तो हो गया . अब तुम अपने मुन्ने को खुद hi शांत करो.. मुझसे अब्ब कुछ नहीं होगा.

दीदी 3 बार पानी छोड़ कर कुछ ज़यादा hi शांत हो गई थी. और अब्ब मुझे छेड़ भी रही थी. मैंने दीदी को पकड़ कर खुद पर लिटाया और दीदी की गांड की दरार में ऊँगली घुसा कर बोलै

विजय :- दीदी आपकी शरारत आपको hi महंगी पद सकती है...

दीदी अपनी दरार में मेरी ऊँगली को महसूस करते hi कांप सी गई और

पूजा दीदी:- ठीक है ठीक है. लेकिन तुम मुझे ऐसे धमकी मैट दिया करो.

इतना बोल कर पूजा दीदी मेरे मुन्ने की तरफ आई और उसे पकड़ कर एक बार मुझे देखा और फिर मेरे मुन्ने को तेज़ तेज़्ज़ हिलने लगी.

पूजा दीदी:- विज्जु तेरा मुन्ना कितनी जल्दी इतना बड़ा हो गया है.. पहले hi ये कुछ कम् नहीं था. लेकिन इस 3 महीनो में तो ये और भी बोहत बड़ा और khatar-naak हो गया है....'

विजय :- दीदी इसके बारे में बातें बाद में कर लेना. प्लीज पहले उसे अपना प्यार दो. कबसे तरस रहा है आप के प्यार के लिए. और आप हैं क बातें hi किये जा रही हैं. मेरा तो ख्याल कर लिया आपने' अब्ब मेरे मुन्ने को क्यों तरसा रही हैं .......

पूजा दीदी मेरी आँखों में देख कर हसने लगीं. फिर अचानक से शर्मा कर एक बार फिर से मेरी आँखों में देखा और शरमाते हुए hi अपना मोहन खोल कर मेरे मुन्ने को उस में सामने लगी.......... दीदी के मोहन के अंदर की गर्मी को फील करते hi मेरा मुन्ना दीदी के मोहन के अंदर hi नाचने लगा. आज 3 महीनो के बाद उसे फिरसे दीदी के मोहन की गर्मी मिली थी ........ दीदी ने जितना हो सका मेरे मुन्ने को अपने मोहन में लिया और लेकर अंदर बहार करने की बजाये वहीँ दबा लिया... और फिर अपने दोनों हाथों को भी इस्तेमाल में लाते हुए मेरे मुन्ने की सर्विस करने लगी ...

दीदी ने भी मुझपर तीन तरफ़ा हमला कर दिया.... अपने एक हाथ से मेरे अण्डों को सहलाने लगी और दुसरे हाथ से बाकी के बचे मुन्ने के शरीर को सहलाने लगी.

मेरा मुन्ना तो दीदी के मोहन की हीट से hi be-kaabu हो रहा था. लेकिन दीदी के दोनों हाथों की वजा से मुन्ना में करंट सा दौड़ने लगा. मेरा मुन्ना जो दीदी के मोहन में फंसा हुआ था. और भी फूलने लगा. दीदी को मेरे मुन्ने को अपने मोहन में ले कर परेशानी होने लगी थी. क्यूंकि मेरा मुन्ना पहला hi बोहत फूला हुआ था. दीदी ने मेरे मुन्ने को अपने मोहन से निकला और सिर्फ मुन्ने कर सर्र hi अपने मोहन में रहने दिया... अपने हाथों से वो मेरे मुन्ने को सेहला रही thi.didi ने एक हाथ की मुठी बना कर मुन्ने के पूरे बदन को ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी.

लेकिन अब्ब अपनी जीव से मेरे मुन्ने के सर्र पर मास्स्सागे करने लगी .दीदी की जीब की नोक जब्ब मेरे मुन्ने के सुराख़ पर लगी .. तो मेरा पूरा बदन hi कांप उठा.. पूजा दीदी फुल फार्म में थी .. दीदी ने अपने हाथों और जीब से मेरे मुन्ने को इतना बेचैन कर दिया क वो और भी पहूल कर अपना लावा उगलने hi वाला था क दीदी ने झट्ट से उसे अपने मोहन से निकल कर अपने हाथों से मेरे मुन्ने की ज़ोरदार मालिश करने लगी. और मेरे मुन्ने के अंदर से एक तेज़ प्रेशर के साथ लावा बहार निकला और कई फ़ीट ऊपर छत की तरफ उड़ता हुआ गाय फिर नीचे आने लगा.

रानी और पूजा दीदी दोनों hi लावे को इतनी ऊँचाई पर जाते हुए देखने लगी. जैसे hi लावा नीचे आया रानी ने दोनों हाथ बढ़ा कर उसे गिरने से बचा लिया वर्ण बीएड का satya-nash हो जाता ....

मेरे मुन्ना के शांत होते hi मेरी सांस तेज़ होगी और मैं हांपने लगा. पूजा दीदी ने आज बोहत hi khatar-naak अंदाज़ में मुझे शांत किया था... ऐसा कभी कभी hi होता था. जब्ब पूजा दीदी इतनी गरम और मूड भी होती थी ....

अब्ब तीनो के अंदर की गर्मी आज के लिए ख़तम हो चुकी थी.

तीनो hi थक चुके थे और रात भी बोहत हो गई थी. तो ऐसे hi तीनो मिलकर गंदे बच्चों की तरह नंगे hi सो गए........... रानी मेरी बहन में तो पूजा दीदी मेरे ऊपर सो गई थीं...........

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