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- Dec 5, 2013
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लोकेशन: पूजा दीदी हाउस
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रात के 12 बजने वाले थे और पूजा दीदी और रानी कमरे में टहल रही थी दोनों बेहद परेशां थी. पूजा दीदी ने विजय को मिशन पर भेज तो दिया था. लेकिन विजय उस मिशन में सक्सेस्फुल हो कर lot'ta है या फिर कहीं कुछ और गड़बड़ न हो jaye....yahi सोच रही थी..... जैसे hi कमरे में लगे एक सस्ते से क्लॉक ने 12 बजने का सिग्नल दिया तो रानी और पूजा दीदी के चेहरों पर पसीने की बूँदें चमकने लगीं.
पूजा दीदी जैसी भी थी लेकिन उनको मेरी परवा अपनी जान से भी बढ़ कर हो चुकी थी. पूजा दीदी और मेरे दिल भले hi दोनों के जिस्म में अलग अलग धड़क रहे हूँ. लेकिन थे दोनों के दिल hi एक दुसरे के जिस्म में. पूजा दीदी को बोहत hi चिंता सत्ता रही थी. हर गुज़रते इक इक लम्हे में पूजा दीदी अंदर hi अंदर खुद में कुछ kat'ta हुआ महसूस कर रही थी. जैसे वहां विजय को अगर कुछ हुआ तो यहाँ पूजा दीदी को भी कुछ हो जायेगा.
रानी भी सबब जानती थी लेकिन वो पूजा दीदी की तरह अंदर से इतनी स्ट्रांग नहीं थी. रानी से टहलना मुश्किल होने लगा उसे खुद के पैरों में जान hi नहीं महसूस हो रही थी. 12 बजे के बाद 4 hi मिंट में hi रानी उस टूटे फूटे बीएड पर बेथ गई और अपने सर्र को पकड़ कर खुद को शांत करने में लग गई. लेकिन शान्ति मिलेगी कैसे. उन सबब का एक hi तो सबसे चाहता विजय hi था. जो इक खुनी खेल खेलने के लिए गया हुआ था. कैसे वो खुद को शांत रख पाती.
पूजा दीदी अपने हाथों की उँगलियाँ मरोड़ते हुए कमरे में टहल रही थी. 12 से ऊपर कुछ मिंट गुज़र चुके थे. कभी वो सोचती 'कॉल करके पूछ hi ले'
""कुछ हुआ क्या" लेकिन फिर खुद को संभाल लेती क नहीं इस टाइम कॉल करना सही नहीं. पता नहीं वो किश सिचुएशन में हूँ और मेरे कॉल करने से उनका मंद डाइवर्ट न हो जाये और कुछ गड़बड़ न हो जाये. इसलिए पूजा दीदी ने कॉल करने से खुद को रोक hi लिया...... 12:25 पर पूजा दीदी की हालत बोहत hi ख़राब होने लगी. us'se रहा नहीं गया और फिरसे मोबाइल को हाथ में ले कर कॉल करने hi वाली थी. क पूजा दीदी के मोबाइल की घंटी बजने लगी. पूजा दीदी ने नंबर देखा तो हैरान रह गई. "दीक्षा आंटी इस टाइम क्यों कॉल कर रही है." "कहीं विजय से रिलेटेड कोई बात तो नहीं" यही सोच कर पूजा दीदी ने कॉल पिक की और मोबाइल को कान से लगा कर आंटी को hello bola.udhar से hello सुनते hi दीक्षा आंटी "पूजा दीदी को सबब बताने लगी" जो दीक्षा आंटी को हर्ष चौहान ने बताया tha.sabb सुन कर पूजा दीदी धड़ाम से वही गिर गई.
रानी पूजा दीदी को कॉल सुनते देख रही थी और फिर अचानक से पूजा दीदी को गिरते देख कर बीएड से उठ कर भागी और पूजा दीदी को पकड़ कर उठाया. 1 hi मिंट में पूजा दीदी ने खुद को संभाल लिया. पूजा दीदी की आंख से आंसू बहने लगे लेकिन पूजा दीदी ने खुद को काबू में करके अपनी आँखों से निकलने वाला पानी साफ़ किया और रानी को बोलै क सबब को उठाये. रानी ने पूछा क्या हुआ तो पूजा दीदी ने रानी घूर कर देखा और कहा
"जाआआअऊऊऊओ पहली सबब को उठाओ. फिररर बताती हूँ."
रानी भाग कर कुछ hi देर में सबब को उठा कर ले आई.
तब्ब तक्क पूजा दीदी ने खुद को संभल लिया था और फिर एक कॉल मिलाई और 2 टैक्सी भेजने को कहा.
सबब पूजा दीदी के कमरे में पोहंचे तो सबब पूजा से पूछने लगे क क्या हुआ है. तो पूजा दीदी ने बता दिया. क अभी दीक्षा आंटी का फोन आया था. विजय को चोट लगी है. तो हम सबब वही जा रहे हैं.
कुछ देर में 2 टैक्सी पूजा दीदी के घर के बहार आ कर रुकीं और फिर सबब उसमे बेथ कर हर्ष चौहान के घर की तरफ निकल गए......
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विजय को गोली लगी है..........
इस बात का पता हर्ष चौहान के इलावा किसी को नहीं था. कुछ hi मिनटों में हर्ष चौहान अपनी दूसरी कोठी पर पोहंच गया. उसके पोहचने से पहले hi राजा और बाकी सबब विजय को ले कर कोठी पर पोहंच चुके थे. gate-keeper ने गाडी देख कर hi गेट खोल दिया था. क्यूंकि हर्ष चौहान ने पता चलते hi अपनी इस कोठी पर कॉल करके राजा और बाकी सबका बता दिया था...
जब्ब raja,jeetu,uday और अनुपम कोठी पर पोहंचे तो सबब के होश उड़े होये. पहले तो विजय को एक रूम में ले जार कर लिटाया गया..... सबब एक दुसरे का मोहन hi देख रहे......... राजा "उदय जीतू और अनुपम" को घूर रहा था. ये सबब इन तीनो की गलती से hi हुआ था. लेकिन राजा ने तीनो को कुछ नहीं कहा. बास घूरता hi रहा.
कुछ hi देर में डॉक्टर भी पोहंच gaya.doctor के आने का पता चलते hi सभी ने फिरसे अपने चेहरे कवर कर लिए. अब्ब हर किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता था. अज्जू का मर्डर कोई मामूली बात नहीं थी. विजय का चेहरा पहले से hi कवर था.
राजा डॉक्टर को विजय के पास ले कर गया. विजय उल्टा लेता हुआ था. डॉक्टर ने कोई भी बात किये बगैर विजय का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया. सभी के कवर्ड चेहरों को देख कर डॉक्टर के मैं में सवाल तो बोहत आये लेकिन पूछने की हिम्मत नहीं कर पाया.
हर्ष चौहान से रिलेटेड जो थे ये सबब. इस लिए डॉक्टर छुप hi रहा. कुछ hi मिंट में हर्ष चौहान भी पोहंच गया.
हर्ष चौहान की ऑंखें मारे ग़ुस्से के उबाल रही थी. अभी साड़ी बात उसे पता नहीं थी.... लेकिन विजय की कंडीशन को देख कर वो बोहत hi ग़ुस्से में आ गया था...... हर्ष चौहान सभी लड़कों को घूर रहा था. विजय की तरह राजा के भी कपडे खून में रेंज हुए थे. राजा ने हर्ष चौहान को बहार चल कर कुछ बात करने को बोल दिया. हर्ष चुहान राजा को ले कर एक दुसरे रूम में चला गया...
रूम में एंटर होते hi हर्ष चौहान बोलै....
हर्ष :- ये सबब क्या है ?????????
राजा :- चौहान सर: ये सबब विजय और पूजा दीदी का hi एक मिशन था. वर्ण हमारा अभी ऐसा करने का कोई मैं नहीं था. लेकिन विजय नहीं माना और फिर ये सबब हो गया.........
हर्ष चौहान पूजा दीदी का नाम सुनते hi शांत हो गया.... वो भी ये जानता था क पूजा दीदी कुछ भी ऐसे hi तो नहीं करेगी. अभी विजय कुछ भी करने के काबिल नेह हुआ है. ज़रूर बात hi कुछ ऐसी होगी..... फिर वो बोलै
हर्ष :- मुझे पूरी बात बताओ शुरू से लेकर आखिर तक.
फिर राजा ने रीना और उसकी फ्रेंड से ले कर सबब बनता शुरू कर दिया. जिसे सुन कर हर्ष चौहान के चेहरे पर उतार चढ़ाओ आने लगे. राजा ने जब अपनी बात पूरी की....
तो हर्ष चौहान अपने माथे को उँगलियों से कुरेदने लगा. बात बोहत hi ज़यादा khatar-naak हद्द तक हो गई थी. धर्मेश का नाम सुन कर hi हर्ष चौहान को ग़ुस्सा भी आ रहा था. वो दर्रा तो नहीं था. लेकिन उसे ग़ुस्सा इस बात पर आ रहा था. जब्ब कोई ऐसी बात हुई थी तो us'se मश्वरा क्यों नहीं लिया गया.
पूजा दीदी पारर तो हर्ष चौहान ग़ुस्सा कर नहीं सकता था. पूजा दीदी और विजय ने जो भी किया था वो अपनी जगा सही भी है. लेकिन ऐसे थोड़ी न होता है.
ऐसे काम करने के कई तरीके होते हैं. खुद को खतरे में डालना ऐसी भी क्या टुक्क थी भला.
हर्ष चौहान का ग़ुस्सा तो पूजा दीदी का नाम सुन कर hi उड़द गया था. अब्ब विजय जितना भी किसी का चाहता हो पूजा दीदी से बढ़ कर तो हो नहीं सकता था. जब खुद पूजा दीदी इस सबब में इन्वॉल्व हो वहां हर्ष चौहान क्या कर सकता था....
लेकिन फिर भी एक काम तो अच्छा हुआ जो अज्जू मारा गया. कुछ तो शहर की गंदगी कम् होगी अज्जू के मरने से........
कुछ देर बाद हर्ष चौहान ने राजा को कपडे बदलने को बोल दिया. यहाँ पर कपडे तो थे लेकिन राजा के साइज से अलग थे लेकिन उन खून लगे कपड़ों से छुटकारा भी ज़रूरी था. इसलिए राजा ने वो कपडे पेहेन लिए.
हर्ष चौहान फिरसे विजय वाले रूम में गया तो डॉक्टर अपने काम में लगा हुआ था. हर्ष चौहान ने विजय को देखा. तो विजय उल्टा लेता हुआ था और उसकी शर्ट को डॉक्टर ने फहाद दिया था. विजय की पीठ से थोड़ा ऊपर कंधे के नीचे राइट साइड में गोली लगी थी. विजय के मज़बूत जिस्म की वजा से गोली ने खून तो काफी निकला था लेकिन खतरा की कोई बात नहीं थी. हर्ष ने विजय को देख कर एक लम्बी सांस ली और सोफे पर बेथ गया डॉक्टर ने गोली निकल दी थी. डॉक्टर अब्ब विजय के ज़ख़्म को एंटीसेप्टिक से क्लीन कर रहा था. कुछ देर बाद डॉक्टर विजय के ज़ख्म को अच्छे से साफ़ कर के स्टिचिंग करने लगा. डॉक्टर के माथे पार्स पसीने की बूँदें टपक टपक कर गिर रहीं थी. जिस से पता चलता था क वो अपने काम में कितना मगन है.
कुछ hi देर में स्टिचिंग करके डॉक्टर ने विजय के ज़ख़्म की ड्रेसिंग शुरू कर दी. कुछ दिक्कत हुई लेकिन jeetu,uday और अनुपम की हेल्प से डॉक्टर ने विजय की ड्रेसिंग करदी....
डॉक्टर अपने काम से फ्री हुआ तो हर्ष चौहान डॉक्टर के साथ बहार को चल दिया.
हर्ष :- "डॉक्टर इस बात को अपने तक्क hi रखना किसी को पता न चले."
फिर हर्ष चौहान ने डॉक्टर को नोतून के 2 बंडल दिए जिसे देख डॉक्टर खुश हो गया. और हर्ष चौहान से हाथ मिला कर चला गया.......... डॉक्टर की कोई टेंशन नहीं थी. ये हर्ष का बोहत hi पुराण जानने वाला था.......
हर्ष चौहान ने राजा एंड फ्रेंड्स को एक रूम में सोने को बोल दिया लेकिन किसी ने हर्ष चौहान की बात नहीं maani........raat ऐसे hi गुज़री सबब खामोश hi थे.
किसी ने एक दुसरे से बात नहीं की. सबब की नज़र सिर्फ विजय पर hi थी....
सूबा होते hi हर्ष चौहान ने अपने घर से एक बड़ी गाडी मंगवा ली थी. जिसमे विजय को अपने घर लेजाने में कोई परेशानी न ho........phir हर्ष ने राजा और बाकी तीनो को टाउन वापिस जाने को बोल दिया......
वो जाना तो नहीं चाहते थे लेकिन हर्ष चौहान ने उन सबब को भेज दिया क टाउन से सबब के ग़ायब रहने से किसी को कोई शक न हो जाये. हर्ष चौहान की ये बात भी सही थी इस लिए राजा ने हाँ बोल दिया. फिर विजय को गाडी में शिफ्ट किया गया. विजय अभी तक बेहोश hi था शायद डॉक्टर ने ुस्य नींद का इंजेक्शन भी लगा दिया tha.kuch देर बाद राजा भी तीनो को ले कर टाउन की तरफ निकल गया और हर्ष चौहान दीक्षा को बता कर विजय को ले कर अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ गया...
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जब्ब पूजा दीदी सब के साथ हर्ष चौहान के घर पोहंची. तो दीक्षा आंटी ने पूजा दीदी और बाकी सब को रइवे किया. सबब के आने की आवाज़ सुन कर दोनों बहने नताशा और शीतल भी उठ गई थी. वो जब्ब नीचे आएं तो इस टाइम पूजा दीदी और बाकी सबब को देख कर हैरान हुई. लेकिन जब्ब उन दोनों को विजय नहीं दिखा और बाकी सबब के चेहरे पर परेशानी देखि तो भाग कर पूजा दीदी के गले लग कर पूछने लगी. "क्या हुआ है जो आप सबब यहाँ और ऐसे परेशान हाल... सबब ठीक तो है न"
पूजा दीदी :- हाँ नताशा सबब ठीक भी है और नहीं भी ...
दोनों :- मतलब क्या है इस बात का और विजय भाई कहाँ हैं. आप सबब ए हैं तो वो क्यों नहीं ए. मुझे कुछ सही नहीं लग रहा...
पूजा दीदी :- देखो पहले आराम से बेथ जाओ फिर बात करते हैं......
दोनों बहने सबब के साथ मिलकर बेथ गई. दीक्षा आंटी बोली.
दीक्षा आंटी :- मैं सबब के लिए कुछ ले कर अति हूँ.
पद्मा आंटी :- रहने दो बहन इस वक़्त ज़रुरत नहीं है. जब्ब ज़रुरत होगी तो हम खुद hi कह देंगे. आप हमारे पास hi बेथ जाएँ.
नताशा :- पूजा अब्ब बताओ क्या हुआ hai.(sabb नताशा की बात सुन कर पूजा दीदी की तरफ देखने लगे... और पूजा डीड दीक्षा आंटी की तरफ देखने लगी.
नताशा :- पूजा क्या हुआ आप माँ की तरफ क्यों देख रही हैं....
पूजा दीदी:- मुझे आंटी ने hi फोन करके बताया था क विजय को चोट लगी hai.is लिए हम सबब यहाँ आ गए हैं.......
पूजा दीदी ने अपने घर वालों को घर में hi सबब बता दिया था" जिसे सुन कर सभी के होश उड़े हुए थे.
अब्ब सबब दीक्षा आंटी की तरफ देखने लगे...
दीक्षा आंटी :- मुझे भी हर्ष ने इतना hi बताया है क विजय बीटा को चोट लगी है. और पूजा बेटी को बताने का बोल कर चले गए. अब्ब वो आएंगे तो असल बात का पता चलेगा.
सबब टेंशन में गुम्म सोच में पद गए थे और विजय को ले के बातें करने लगे.
लेकिन पूजा दीदी ऊपर से खुद को शांत दिखा रही थी लेकिन उनके अंदर तूफ़ान आया हुआ था. अगर विजय कम् ज़ख़्मी होता तो टाउन आता यहाँ आने की क्या ज़रुरत थी. ज़रूर कुछ ज़यादा हुआ है विजय के साथ. और पूजा दीदी विजय को ले के ज़यादा सोचना भी नहीं चाहती थी. क्यूंकि वो अंदर से टूटना नहीं चाहती थी.
अगर वो खुद hi टूट गई तो बोहत कुछ बिखर जायेगा. इस लिए वो खुद को अंदर से मज़बूत बनाने में लगी हुई थी. सबब कुछ न कुछ बोल रहे थे लेकिन पूजा दीदी खुद से hi लड़ रही थी. अपने घर में hi जो ाआंसु उनकी आँखों से बहे थे. उनके बाद पूजा दीदी ने खुद पर बोहत कण्ट्रोल रखते हुए अपने आंसू नहीं बहने दिए थे. वर्ण उनका दिल कर रहा क वो दहाड़ें मार मार कर रोये. लेकिन is'se हासिल कुछ होने वाला था नहीं. आगे चल के विजय के साथ और भी पता नहीं क्या कुछ होगा. इस लिए ये सबब सोच पूजा दीदी कुछ को अंदर से जितना हो सके मज़बूत बना रही थी. और सोच रही थी क विजय के सामने भी अपने आंसू नहीं बहने देगी. वर्ण विजय कमज़ोर पद जायेगा. नहीं मैं विजय को कमज़ोर नहीं होने दूँगी. विजय को अभी बोहत कुछ बनना है . वर्ण माँ और बहनो को कैसे वहां से लाएगा....
ऐसे hi बातों में और पूजा दीदी की सोचों में वक़्त गुज़रता चला गया और सूबा की रौशनी फैलने लगी.
लेकिन अभी तक किसी ने कुछ भी नहीं खाया पिया था.......
दीक्षा आंटी के नंबर पर हर्ष चौहान की कॉल आई तो दीक्षा आंटी कॉल पिक कर हर्ष चौहान की बात सुनने लगी...
सबब दीक्षा आंटी को hi देख रहे the.......call एन्ड होने के बाद सबब ने पूछना शुरू कर दिया.... तो दीक्षा आंटी ने सबब को बता दिया क हर्ष और विजय आ रहे हैं कुछ देर में .........
25 मिंट बाद बहार से गाड़ी आने की आवाज़ सुन कर सबब भागते हुए बहार की तरफ जाने लगे. तो पूजा दीदी ने सबब को रोक दिया. और बोली...
पूजा दीदी :- ""सबब पहले मेरी बात सुन लें कोई भी विजय के सामने आंसू नहीं बहाये गए. वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. सबब के आंसू विजय को कमज़ोर न बना दें. विजय को अपना मक़सद हासिल करने के लिए चट्टान बनना है. अभी तो उसे कुछ भी नहीं हुआ hai..aise hi na-jaane और कितने hi घाव विजय की राह में आते रहेंगे. और क्या आप सबब हर्र बार विजय को ज़ख़्मी देख कर रट रहेंगे? """
सबब पूजा दीदी की बात सुन कर हैरान रह gaye.....sabb ऑंखें पहाडे पूजा दीदी को देख रहे थे.
पूजा दीदी ने पता नहीं कैसे खुद को संभल कर सबब को ये बोल दिया था. सबब तो यही समझ रहे थे. रोने वालों में सबसे ऊंची आवाज़ पूजा दीदी की hi होगी......
गाडी अंदर आ कर रुकी और फिर विजय को कोठी में मौजूद एक रूम में शिफ्ट किया गया.......... लेकिन काई चेहरे अभी भी आंसुओं से टर्र थे. वो तो ग़नीमत था क विजय अभी बेहोश था. वर्ण पता नहीं पूजा दीदी सबब का क्या हाल करती.............
सभी विजय वाले रूम में hi थे और उसकी हालत देख कर सभी के दिल में दर्द उठने लगा था. लेकिन पूजा दीदी के आर्डर ने सबब को रोका हुआ था वर्ग वो खुद को रोने से नहीं रोक पाती. औरतों का काम hi रोना होता है...........
पूजा दीदी उठ कर दुसरे कमरे में मौजूद बाथरूम में चली गई और खुद को सामने लगे हुए आईने में देखने लगी. फिर अपने सर्र से दुपट्टा उतार कर मोहन में ठूंसा और कब्ब के रुके हुए आंसू बहाने लगी. कुछ देर आंसू बहाने के बाद पूजा दीदी ने फिरसे खुद को आईने में देखा और फिर अपने चेहरे को अच्छी तरह से धूने के बाद फिरसे आईने में देखा. और एक ज़बरदस्ती की स्माइल अपने चेहरे पर ला कर देखने लगी.
अच्छा मज़ाक़ है खुद से आंसू बहा कर खुद के चेहरे पर स्माइल लाना....
पूजा दीदी ने खुद को शांत कर लिया था अब्ब वो आंसू नहीं बहाना चाहती थी.
अब्ब विजय की खैर नहीं थी. जो पूजा दीदी ने खुद को शांत कर लिया था और अब्ब पूजा दीदी ने तो पक्का विजय को उल्टा सीधा बोलना था.
"कहा था न जो भी करना अपना दमाग इस्तेमाल करके karna...agar इतना hi तुम्हारा दमाग काम करता है तो भूल जाओ अपनी माँ और बहनो"
मतलब एक बार तो विजय अपनी पूजा डीड की नज़रों में फ़ैल हो गया था. अब्ब देखते हैं. जब्ब विजय को होश आएगा. तो पूजा दीदी कैसे विजय की खबर लेती है.
पूजा दीदी फिरसे विजय वाले रूम में दाखिल हुई और विजय के होश में आने का इंतज़ार ाकरने लगी...... अब्ब तक्क सबब को hi पता चल गया था क विजय को गोली लगी है.
"विजय को गोली लगी है"
ये सुनते hi नरम दिल वालियों ने तो बिलकना hi शुरू कर दिया था. लेकिन पूजा दीदी के आर्डर की वजा से जिस का भी मैं होता रोने का. वो दुसरे कमरे में जा कर पूजा दीदी के जैसे आंसू बहा कर फिरसे विजय के कमरे में आ जाता था.
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आईएनएस रणजीत :- हाँ बोल गोटिया सूबा सूबा कैसे फोन किया है..
गोटिया :- सर वो विजय वाले मकान में कोई भी नहीं दिख रहा है.
आईएनएस रणजीत :- मतलब क्या है तुम्हारा. कहाँ चले गए सब के सबब. और तुम क्या झक्क मार रहे थे जो तुम्हे कुछ पता hi नहीं है..........
गोटिया :- सर मैंने कोई कसार नहीं छोड़ी थी. विजय के पीछे साये की तरह लगा हुआ था. अब्ब पिछले कई महीनो से जो जो हुआ मैंने सबब तो आपको बता दिया है. इस लिए थोड़ा सा सुस्त पद गया. अब्ब मुझे क्या पता था. क रात को सबब hi ग़ायब हो जायेंगे...
आईएनएस रणजीत :- तो नीचे कमरे में जो karaye-daar रहते हैं उनसे पोछना था न क वो कहाँ गए हैं....
गोटिया :- सर मैंने उनसे भी पूछा है लेकिन उनमे से किसी को भी नहीं पता. सबब यही कहते हैं क रात 10 बजे तक्क तो सभी यही पर थे..... उसके बाद वो कब्ब और कहाँ गए. उनको नहीं मालूम......
आईएनएस रणजीत :- गोटिया ये सबब तुम्हारी ग़फ़लत है. जल्द से जल्द पता लगाओ वो सबब कहाँ गए hain..........ye बोल कर रणजीत ने कॉल कट करदी.....
उसे ग़ुस्सा भी आ रहा था और विजय की चिंता भी सत्ता रही थी. इतने महीने हो गए थे. रणजीत को विजय का "bio-data" नहीं मिला था.
"""""""पता नहीं क्या था रणजीत के मैं में""""""""""
फिर कुछ सोच कर रणजीत अपने दोस्त पहलवान की तरफ को चल दिया...
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लोकेशन: पूजा दीदी हाउस
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रात के 12 बजने वाले थे और पूजा दीदी और रानी कमरे में टहल रही थी दोनों बेहद परेशां थी. पूजा दीदी ने विजय को मिशन पर भेज तो दिया था. लेकिन विजय उस मिशन में सक्सेस्फुल हो कर lot'ta है या फिर कहीं कुछ और गड़बड़ न हो jaye....yahi सोच रही थी..... जैसे hi कमरे में लगे एक सस्ते से क्लॉक ने 12 बजने का सिग्नल दिया तो रानी और पूजा दीदी के चेहरों पर पसीने की बूँदें चमकने लगीं.
पूजा दीदी जैसी भी थी लेकिन उनको मेरी परवा अपनी जान से भी बढ़ कर हो चुकी थी. पूजा दीदी और मेरे दिल भले hi दोनों के जिस्म में अलग अलग धड़क रहे हूँ. लेकिन थे दोनों के दिल hi एक दुसरे के जिस्म में. पूजा दीदी को बोहत hi चिंता सत्ता रही थी. हर गुज़रते इक इक लम्हे में पूजा दीदी अंदर hi अंदर खुद में कुछ kat'ta हुआ महसूस कर रही थी. जैसे वहां विजय को अगर कुछ हुआ तो यहाँ पूजा दीदी को भी कुछ हो जायेगा.
रानी भी सबब जानती थी लेकिन वो पूजा दीदी की तरह अंदर से इतनी स्ट्रांग नहीं थी. रानी से टहलना मुश्किल होने लगा उसे खुद के पैरों में जान hi नहीं महसूस हो रही थी. 12 बजे के बाद 4 hi मिंट में hi रानी उस टूटे फूटे बीएड पर बेथ गई और अपने सर्र को पकड़ कर खुद को शांत करने में लग गई. लेकिन शान्ति मिलेगी कैसे. उन सबब का एक hi तो सबसे चाहता विजय hi था. जो इक खुनी खेल खेलने के लिए गया हुआ था. कैसे वो खुद को शांत रख पाती.
पूजा दीदी अपने हाथों की उँगलियाँ मरोड़ते हुए कमरे में टहल रही थी. 12 से ऊपर कुछ मिंट गुज़र चुके थे. कभी वो सोचती 'कॉल करके पूछ hi ले'
""कुछ हुआ क्या" लेकिन फिर खुद को संभाल लेती क नहीं इस टाइम कॉल करना सही नहीं. पता नहीं वो किश सिचुएशन में हूँ और मेरे कॉल करने से उनका मंद डाइवर्ट न हो जाये और कुछ गड़बड़ न हो जाये. इसलिए पूजा दीदी ने कॉल करने से खुद को रोक hi लिया...... 12:25 पर पूजा दीदी की हालत बोहत hi ख़राब होने लगी. us'se रहा नहीं गया और फिरसे मोबाइल को हाथ में ले कर कॉल करने hi वाली थी. क पूजा दीदी के मोबाइल की घंटी बजने लगी. पूजा दीदी ने नंबर देखा तो हैरान रह गई. "दीक्षा आंटी इस टाइम क्यों कॉल कर रही है." "कहीं विजय से रिलेटेड कोई बात तो नहीं" यही सोच कर पूजा दीदी ने कॉल पिक की और मोबाइल को कान से लगा कर आंटी को hello bola.udhar से hello सुनते hi दीक्षा आंटी "पूजा दीदी को सबब बताने लगी" जो दीक्षा आंटी को हर्ष चौहान ने बताया tha.sabb सुन कर पूजा दीदी धड़ाम से वही गिर गई.
रानी पूजा दीदी को कॉल सुनते देख रही थी और फिर अचानक से पूजा दीदी को गिरते देख कर बीएड से उठ कर भागी और पूजा दीदी को पकड़ कर उठाया. 1 hi मिंट में पूजा दीदी ने खुद को संभाल लिया. पूजा दीदी की आंख से आंसू बहने लगे लेकिन पूजा दीदी ने खुद को काबू में करके अपनी आँखों से निकलने वाला पानी साफ़ किया और रानी को बोलै क सबब को उठाये. रानी ने पूछा क्या हुआ तो पूजा दीदी ने रानी घूर कर देखा और कहा
"जाआआअऊऊऊओ पहली सबब को उठाओ. फिररर बताती हूँ."
रानी भाग कर कुछ hi देर में सबब को उठा कर ले आई.
तब्ब तक्क पूजा दीदी ने खुद को संभल लिया था और फिर एक कॉल मिलाई और 2 टैक्सी भेजने को कहा.
सबब पूजा दीदी के कमरे में पोहंचे तो सबब पूजा से पूछने लगे क क्या हुआ है. तो पूजा दीदी ने बता दिया. क अभी दीक्षा आंटी का फोन आया था. विजय को चोट लगी है. तो हम सबब वही जा रहे हैं.
कुछ देर में 2 टैक्सी पूजा दीदी के घर के बहार आ कर रुकीं और फिर सबब उसमे बेथ कर हर्ष चौहान के घर की तरफ निकल गए......
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विजय को गोली लगी है..........
इस बात का पता हर्ष चौहान के इलावा किसी को नहीं था. कुछ hi मिनटों में हर्ष चौहान अपनी दूसरी कोठी पर पोहंच गया. उसके पोहचने से पहले hi राजा और बाकी सबब विजय को ले कर कोठी पर पोहंच चुके थे. gate-keeper ने गाडी देख कर hi गेट खोल दिया था. क्यूंकि हर्ष चौहान ने पता चलते hi अपनी इस कोठी पर कॉल करके राजा और बाकी सबका बता दिया था...
जब्ब raja,jeetu,uday और अनुपम कोठी पर पोहंचे तो सबब के होश उड़े होये. पहले तो विजय को एक रूम में ले जार कर लिटाया गया..... सबब एक दुसरे का मोहन hi देख रहे......... राजा "उदय जीतू और अनुपम" को घूर रहा था. ये सबब इन तीनो की गलती से hi हुआ था. लेकिन राजा ने तीनो को कुछ नहीं कहा. बास घूरता hi रहा.
कुछ hi देर में डॉक्टर भी पोहंच gaya.doctor के आने का पता चलते hi सभी ने फिरसे अपने चेहरे कवर कर लिए. अब्ब हर किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता था. अज्जू का मर्डर कोई मामूली बात नहीं थी. विजय का चेहरा पहले से hi कवर था.
राजा डॉक्टर को विजय के पास ले कर गया. विजय उल्टा लेता हुआ था. डॉक्टर ने कोई भी बात किये बगैर विजय का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया. सभी के कवर्ड चेहरों को देख कर डॉक्टर के मैं में सवाल तो बोहत आये लेकिन पूछने की हिम्मत नहीं कर पाया.
हर्ष चौहान से रिलेटेड जो थे ये सबब. इस लिए डॉक्टर छुप hi रहा. कुछ hi मिंट में हर्ष चौहान भी पोहंच गया.
हर्ष चौहान की ऑंखें मारे ग़ुस्से के उबाल रही थी. अभी साड़ी बात उसे पता नहीं थी.... लेकिन विजय की कंडीशन को देख कर वो बोहत hi ग़ुस्से में आ गया था...... हर्ष चौहान सभी लड़कों को घूर रहा था. विजय की तरह राजा के भी कपडे खून में रेंज हुए थे. राजा ने हर्ष चौहान को बहार चल कर कुछ बात करने को बोल दिया. हर्ष चुहान राजा को ले कर एक दुसरे रूम में चला गया...
रूम में एंटर होते hi हर्ष चौहान बोलै....
हर्ष :- ये सबब क्या है ?????????
राजा :- चौहान सर: ये सबब विजय और पूजा दीदी का hi एक मिशन था. वर्ण हमारा अभी ऐसा करने का कोई मैं नहीं था. लेकिन विजय नहीं माना और फिर ये सबब हो गया.........
हर्ष चौहान पूजा दीदी का नाम सुनते hi शांत हो गया.... वो भी ये जानता था क पूजा दीदी कुछ भी ऐसे hi तो नहीं करेगी. अभी विजय कुछ भी करने के काबिल नेह हुआ है. ज़रूर बात hi कुछ ऐसी होगी..... फिर वो बोलै
हर्ष :- मुझे पूरी बात बताओ शुरू से लेकर आखिर तक.
फिर राजा ने रीना और उसकी फ्रेंड से ले कर सबब बनता शुरू कर दिया. जिसे सुन कर हर्ष चौहान के चेहरे पर उतार चढ़ाओ आने लगे. राजा ने जब अपनी बात पूरी की....
तो हर्ष चौहान अपने माथे को उँगलियों से कुरेदने लगा. बात बोहत hi ज़यादा khatar-naak हद्द तक हो गई थी. धर्मेश का नाम सुन कर hi हर्ष चौहान को ग़ुस्सा भी आ रहा था. वो दर्रा तो नहीं था. लेकिन उसे ग़ुस्सा इस बात पर आ रहा था. जब्ब कोई ऐसी बात हुई थी तो us'se मश्वरा क्यों नहीं लिया गया.
पूजा दीदी पारर तो हर्ष चौहान ग़ुस्सा कर नहीं सकता था. पूजा दीदी और विजय ने जो भी किया था वो अपनी जगा सही भी है. लेकिन ऐसे थोड़ी न होता है.
ऐसे काम करने के कई तरीके होते हैं. खुद को खतरे में डालना ऐसी भी क्या टुक्क थी भला.
हर्ष चौहान का ग़ुस्सा तो पूजा दीदी का नाम सुन कर hi उड़द गया था. अब्ब विजय जितना भी किसी का चाहता हो पूजा दीदी से बढ़ कर तो हो नहीं सकता था. जब खुद पूजा दीदी इस सबब में इन्वॉल्व हो वहां हर्ष चौहान क्या कर सकता था....
लेकिन फिर भी एक काम तो अच्छा हुआ जो अज्जू मारा गया. कुछ तो शहर की गंदगी कम् होगी अज्जू के मरने से........
कुछ देर बाद हर्ष चौहान ने राजा को कपडे बदलने को बोल दिया. यहाँ पर कपडे तो थे लेकिन राजा के साइज से अलग थे लेकिन उन खून लगे कपड़ों से छुटकारा भी ज़रूरी था. इसलिए राजा ने वो कपडे पेहेन लिए.
हर्ष चौहान फिरसे विजय वाले रूम में गया तो डॉक्टर अपने काम में लगा हुआ था. हर्ष चौहान ने विजय को देखा. तो विजय उल्टा लेता हुआ था और उसकी शर्ट को डॉक्टर ने फहाद दिया था. विजय की पीठ से थोड़ा ऊपर कंधे के नीचे राइट साइड में गोली लगी थी. विजय के मज़बूत जिस्म की वजा से गोली ने खून तो काफी निकला था लेकिन खतरा की कोई बात नहीं थी. हर्ष ने विजय को देख कर एक लम्बी सांस ली और सोफे पर बेथ गया डॉक्टर ने गोली निकल दी थी. डॉक्टर अब्ब विजय के ज़ख़्म को एंटीसेप्टिक से क्लीन कर रहा था. कुछ देर बाद डॉक्टर विजय के ज़ख्म को अच्छे से साफ़ कर के स्टिचिंग करने लगा. डॉक्टर के माथे पार्स पसीने की बूँदें टपक टपक कर गिर रहीं थी. जिस से पता चलता था क वो अपने काम में कितना मगन है.
कुछ hi देर में स्टिचिंग करके डॉक्टर ने विजय के ज़ख़्म की ड्रेसिंग शुरू कर दी. कुछ दिक्कत हुई लेकिन jeetu,uday और अनुपम की हेल्प से डॉक्टर ने विजय की ड्रेसिंग करदी....
डॉक्टर अपने काम से फ्री हुआ तो हर्ष चौहान डॉक्टर के साथ बहार को चल दिया.
हर्ष :- "डॉक्टर इस बात को अपने तक्क hi रखना किसी को पता न चले."
फिर हर्ष चौहान ने डॉक्टर को नोतून के 2 बंडल दिए जिसे देख डॉक्टर खुश हो गया. और हर्ष चौहान से हाथ मिला कर चला गया.......... डॉक्टर की कोई टेंशन नहीं थी. ये हर्ष का बोहत hi पुराण जानने वाला था.......
हर्ष चौहान ने राजा एंड फ्रेंड्स को एक रूम में सोने को बोल दिया लेकिन किसी ने हर्ष चौहान की बात नहीं maani........raat ऐसे hi गुज़री सबब खामोश hi थे.
किसी ने एक दुसरे से बात नहीं की. सबब की नज़र सिर्फ विजय पर hi थी....
सूबा होते hi हर्ष चौहान ने अपने घर से एक बड़ी गाडी मंगवा ली थी. जिसमे विजय को अपने घर लेजाने में कोई परेशानी न ho........phir हर्ष ने राजा और बाकी तीनो को टाउन वापिस जाने को बोल दिया......
वो जाना तो नहीं चाहते थे लेकिन हर्ष चौहान ने उन सबब को भेज दिया क टाउन से सबब के ग़ायब रहने से किसी को कोई शक न हो जाये. हर्ष चौहान की ये बात भी सही थी इस लिए राजा ने हाँ बोल दिया. फिर विजय को गाडी में शिफ्ट किया गया. विजय अभी तक बेहोश hi था शायद डॉक्टर ने ुस्य नींद का इंजेक्शन भी लगा दिया tha.kuch देर बाद राजा भी तीनो को ले कर टाउन की तरफ निकल गया और हर्ष चौहान दीक्षा को बता कर विजय को ले कर अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ गया...
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जब्ब पूजा दीदी सब के साथ हर्ष चौहान के घर पोहंची. तो दीक्षा आंटी ने पूजा दीदी और बाकी सब को रइवे किया. सबब के आने की आवाज़ सुन कर दोनों बहने नताशा और शीतल भी उठ गई थी. वो जब्ब नीचे आएं तो इस टाइम पूजा दीदी और बाकी सबब को देख कर हैरान हुई. लेकिन जब्ब उन दोनों को विजय नहीं दिखा और बाकी सबब के चेहरे पर परेशानी देखि तो भाग कर पूजा दीदी के गले लग कर पूछने लगी. "क्या हुआ है जो आप सबब यहाँ और ऐसे परेशान हाल... सबब ठीक तो है न"
पूजा दीदी :- हाँ नताशा सबब ठीक भी है और नहीं भी ...
दोनों :- मतलब क्या है इस बात का और विजय भाई कहाँ हैं. आप सबब ए हैं तो वो क्यों नहीं ए. मुझे कुछ सही नहीं लग रहा...
पूजा दीदी :- देखो पहले आराम से बेथ जाओ फिर बात करते हैं......
दोनों बहने सबब के साथ मिलकर बेथ गई. दीक्षा आंटी बोली.
दीक्षा आंटी :- मैं सबब के लिए कुछ ले कर अति हूँ.
पद्मा आंटी :- रहने दो बहन इस वक़्त ज़रुरत नहीं है. जब्ब ज़रुरत होगी तो हम खुद hi कह देंगे. आप हमारे पास hi बेथ जाएँ.
नताशा :- पूजा अब्ब बताओ क्या हुआ hai.(sabb नताशा की बात सुन कर पूजा दीदी की तरफ देखने लगे... और पूजा डीड दीक्षा आंटी की तरफ देखने लगी.
नताशा :- पूजा क्या हुआ आप माँ की तरफ क्यों देख रही हैं....
पूजा दीदी:- मुझे आंटी ने hi फोन करके बताया था क विजय को चोट लगी hai.is लिए हम सबब यहाँ आ गए हैं.......
पूजा दीदी ने अपने घर वालों को घर में hi सबब बता दिया था" जिसे सुन कर सभी के होश उड़े हुए थे.
अब्ब सबब दीक्षा आंटी की तरफ देखने लगे...
दीक्षा आंटी :- मुझे भी हर्ष ने इतना hi बताया है क विजय बीटा को चोट लगी है. और पूजा बेटी को बताने का बोल कर चले गए. अब्ब वो आएंगे तो असल बात का पता चलेगा.
सबब टेंशन में गुम्म सोच में पद गए थे और विजय को ले के बातें करने लगे.
लेकिन पूजा दीदी ऊपर से खुद को शांत दिखा रही थी लेकिन उनके अंदर तूफ़ान आया हुआ था. अगर विजय कम् ज़ख़्मी होता तो टाउन आता यहाँ आने की क्या ज़रुरत थी. ज़रूर कुछ ज़यादा हुआ है विजय के साथ. और पूजा दीदी विजय को ले के ज़यादा सोचना भी नहीं चाहती थी. क्यूंकि वो अंदर से टूटना नहीं चाहती थी.
अगर वो खुद hi टूट गई तो बोहत कुछ बिखर जायेगा. इस लिए वो खुद को अंदर से मज़बूत बनाने में लगी हुई थी. सबब कुछ न कुछ बोल रहे थे लेकिन पूजा दीदी खुद से hi लड़ रही थी. अपने घर में hi जो ाआंसु उनकी आँखों से बहे थे. उनके बाद पूजा दीदी ने खुद पर बोहत कण्ट्रोल रखते हुए अपने आंसू नहीं बहने दिए थे. वर्ण उनका दिल कर रहा क वो दहाड़ें मार मार कर रोये. लेकिन is'se हासिल कुछ होने वाला था नहीं. आगे चल के विजय के साथ और भी पता नहीं क्या कुछ होगा. इस लिए ये सबब सोच पूजा दीदी कुछ को अंदर से जितना हो सके मज़बूत बना रही थी. और सोच रही थी क विजय के सामने भी अपने आंसू नहीं बहने देगी. वर्ण विजय कमज़ोर पद जायेगा. नहीं मैं विजय को कमज़ोर नहीं होने दूँगी. विजय को अभी बोहत कुछ बनना है . वर्ण माँ और बहनो को कैसे वहां से लाएगा....
ऐसे hi बातों में और पूजा दीदी की सोचों में वक़्त गुज़रता चला गया और सूबा की रौशनी फैलने लगी.
लेकिन अभी तक किसी ने कुछ भी नहीं खाया पिया था.......
दीक्षा आंटी के नंबर पर हर्ष चौहान की कॉल आई तो दीक्षा आंटी कॉल पिक कर हर्ष चौहान की बात सुनने लगी...
सबब दीक्षा आंटी को hi देख रहे the.......call एन्ड होने के बाद सबब ने पूछना शुरू कर दिया.... तो दीक्षा आंटी ने सबब को बता दिया क हर्ष और विजय आ रहे हैं कुछ देर में .........
25 मिंट बाद बहार से गाड़ी आने की आवाज़ सुन कर सबब भागते हुए बहार की तरफ जाने लगे. तो पूजा दीदी ने सबब को रोक दिया. और बोली...
पूजा दीदी :- ""सबब पहले मेरी बात सुन लें कोई भी विजय के सामने आंसू नहीं बहाये गए. वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. सबब के आंसू विजय को कमज़ोर न बना दें. विजय को अपना मक़सद हासिल करने के लिए चट्टान बनना है. अभी तो उसे कुछ भी नहीं हुआ hai..aise hi na-jaane और कितने hi घाव विजय की राह में आते रहेंगे. और क्या आप सबब हर्र बार विजय को ज़ख़्मी देख कर रट रहेंगे? """
सबब पूजा दीदी की बात सुन कर हैरान रह gaye.....sabb ऑंखें पहाडे पूजा दीदी को देख रहे थे.
पूजा दीदी ने पता नहीं कैसे खुद को संभल कर सबब को ये बोल दिया था. सबब तो यही समझ रहे थे. रोने वालों में सबसे ऊंची आवाज़ पूजा दीदी की hi होगी......
गाडी अंदर आ कर रुकी और फिर विजय को कोठी में मौजूद एक रूम में शिफ्ट किया गया.......... लेकिन काई चेहरे अभी भी आंसुओं से टर्र थे. वो तो ग़नीमत था क विजय अभी बेहोश था. वर्ण पता नहीं पूजा दीदी सबब का क्या हाल करती.............
सभी विजय वाले रूम में hi थे और उसकी हालत देख कर सभी के दिल में दर्द उठने लगा था. लेकिन पूजा दीदी के आर्डर ने सबब को रोका हुआ था वर्ग वो खुद को रोने से नहीं रोक पाती. औरतों का काम hi रोना होता है...........
पूजा दीदी उठ कर दुसरे कमरे में मौजूद बाथरूम में चली गई और खुद को सामने लगे हुए आईने में देखने लगी. फिर अपने सर्र से दुपट्टा उतार कर मोहन में ठूंसा और कब्ब के रुके हुए आंसू बहाने लगी. कुछ देर आंसू बहाने के बाद पूजा दीदी ने फिरसे खुद को आईने में देखा और फिर अपने चेहरे को अच्छी तरह से धूने के बाद फिरसे आईने में देखा. और एक ज़बरदस्ती की स्माइल अपने चेहरे पर ला कर देखने लगी.
अच्छा मज़ाक़ है खुद से आंसू बहा कर खुद के चेहरे पर स्माइल लाना....
पूजा दीदी ने खुद को शांत कर लिया था अब्ब वो आंसू नहीं बहाना चाहती थी.
अब्ब विजय की खैर नहीं थी. जो पूजा दीदी ने खुद को शांत कर लिया था और अब्ब पूजा दीदी ने तो पक्का विजय को उल्टा सीधा बोलना था.
"कहा था न जो भी करना अपना दमाग इस्तेमाल करके karna...agar इतना hi तुम्हारा दमाग काम करता है तो भूल जाओ अपनी माँ और बहनो"
मतलब एक बार तो विजय अपनी पूजा डीड की नज़रों में फ़ैल हो गया था. अब्ब देखते हैं. जब्ब विजय को होश आएगा. तो पूजा दीदी कैसे विजय की खबर लेती है.
पूजा दीदी फिरसे विजय वाले रूम में दाखिल हुई और विजय के होश में आने का इंतज़ार ाकरने लगी...... अब्ब तक्क सबब को hi पता चल गया था क विजय को गोली लगी है.
"विजय को गोली लगी है"
ये सुनते hi नरम दिल वालियों ने तो बिलकना hi शुरू कर दिया था. लेकिन पूजा दीदी के आर्डर की वजा से जिस का भी मैं होता रोने का. वो दुसरे कमरे में जा कर पूजा दीदी के जैसे आंसू बहा कर फिरसे विजय के कमरे में आ जाता था.
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आईएनएस रणजीत :- हाँ बोल गोटिया सूबा सूबा कैसे फोन किया है..
गोटिया :- सर वो विजय वाले मकान में कोई भी नहीं दिख रहा है.
आईएनएस रणजीत :- मतलब क्या है तुम्हारा. कहाँ चले गए सब के सबब. और तुम क्या झक्क मार रहे थे जो तुम्हे कुछ पता hi नहीं है..........
गोटिया :- सर मैंने कोई कसार नहीं छोड़ी थी. विजय के पीछे साये की तरह लगा हुआ था. अब्ब पिछले कई महीनो से जो जो हुआ मैंने सबब तो आपको बता दिया है. इस लिए थोड़ा सा सुस्त पद गया. अब्ब मुझे क्या पता था. क रात को सबब hi ग़ायब हो जायेंगे...
आईएनएस रणजीत :- तो नीचे कमरे में जो karaye-daar रहते हैं उनसे पोछना था न क वो कहाँ गए हैं....
गोटिया :- सर मैंने उनसे भी पूछा है लेकिन उनमे से किसी को भी नहीं पता. सबब यही कहते हैं क रात 10 बजे तक्क तो सभी यही पर थे..... उसके बाद वो कब्ब और कहाँ गए. उनको नहीं मालूम......
आईएनएस रणजीत :- गोटिया ये सबब तुम्हारी ग़फ़लत है. जल्द से जल्द पता लगाओ वो सबब कहाँ गए hain..........ye बोल कर रणजीत ने कॉल कट करदी.....
उसे ग़ुस्सा भी आ रहा था और विजय की चिंता भी सत्ता रही थी. इतने महीने हो गए थे. रणजीत को विजय का "bio-data" नहीं मिला था.
"""""""पता नहीं क्या था रणजीत के मैं में""""""""""
फिर कुछ सोच कर रणजीत अपने दोस्त पहलवान की तरफ को चल दिया...
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