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अब्ब्ब टकककककक
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अब्ब मुझसे बढ़ कर सूंदर और कौन हो सकता है.......
10 मिंट तक दोनों ने अपनी ममता मुझपर ऐसे निछावर की क मेरा दिल बाघ बाघ हो गया. अब्ब मेरी इमोशनल वीकनेस भी चली गई थी.
ये अच्छा हुआ अब्ब मुझे आगे का सोचना chahiye.phir मैंने मालिकान से अखाड़े वाले पहलवान के बारे पूछा तो मालिकान ने मुझे सब बता दिया. लेकिन वजा भी पूछी तो मैंने बता दिया क खुद को मज़बूत बनाना है अब्ब में जवान जो हो रहा था.
तो ज़रूरी था क मैं खुद को मज़बूत बनाने के लिए अखाड़े पारर जाऊं.
मालिकान के कहने के मुताबिक़ वो पहलवान कई साल से यही रहता है और उस की फॅमिली की बड़ी रेस्पेक्ट है यहाँ.
{फ़माइली रेस्पेक्ट} तो सिर्फ उस बन्दे की होती तो जो खुद भी बोहत ाचा हो.
मतलब मेरा काम बन्न गया था. अब्ब मसला मेरी आगे का था. मेरी आगे के लड़के ऐसे अखाड़े में दिखाई नहीं देते अखाड़े का काम बोहत hi हार्ड होता है.
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अब्ब आएगजी
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जैसे क मुझे बाद में पता चला जब मेरी जोइनिंग हुई थी. तो गांड सच में hi फट गई थी. पहलवान ने मुझसे बोहत hi हार्ड कसरत करवाई थी मेरी फरमाइश parr.akhir मुझे Himmat-Wala जो ban'na था....
शाम होने वाली थी तो मैं आंटी और मालिकान को बोल कर फिरसे बहार निकल पड़ा अब्ब मेरा इरादा अखाड़े पर जाने का था. एक तरय करने में क्या हर्ज है. इस लिए मैं चल पड़ा अखाड़े की तरफ.
जब में अखाड़े में एंटर हुआ तो मुझे काफी बन्दे दिखे सूबा की निस्बत अब्ब ज़यादा थे.
मैंने इक 22-23 साला लड़के से पुछा पहलवान जी के बारे में वो साला जवाब देने की बजाये मुझे ऊपर से नीचे तक घूरने लगा.
ओह्ह्ह्हह अब समझ आया अब्ब में चिककणा जो दिख रहा था. ये तो मैं भूल hi गया था.
अब्ब मेरी आगे इतनी भी नहीं थी. और ऊपर से मैंने अपने बाल भी कटवा कर काफी छोटे करवा लिए थे. और पूजा दीदी की फ्रेंड रीना ने मेरे चेहरे पर म्हणत करके मुझे और भी kam-umar बना दिया था...
अब्ब में एक kam-umar लड़का hi दिख रहा था. पहले तो बालों की वजा से कुछ बड़ा लगता था.
उस लड़के को छोड़ मैंने एक और बन्दे से पुछा जो 40 के aas-paas था उसने मुझे इशारे से एक कमरे की तरफ जाने को कहा, मैंने उस बन्दे को थैंक्स बोलै.
और फिर उस कमरे की तरफ चल दिया. कमरे का दूर ओपन hi था. अंदर पहलवान जी के साथ एक आदमी बैठा था तो मैं दूर पर hi खड़ा रहा, सोचा दूर नॉक करता हूँ लेकिन पहलवान ने मुझे देख अंदर बुला लिया एक साइड बेहतने को बोलै.
अंदर कमरे ने एक कालीन बिछा हुआ था. मैं उस पारर बेथ गया.
10 मिंट तक पहलवान जी उस बन्दे से बात करते rahe.phir वो बाँदा चला गया'
तो पहलवान ने मुझे अपने पास बैठने का इशारा किया.
पहलवान जी की बॉडी किसी ववे के रेसलर के जैसी थी.
पहलवान .... बोलो बीटा क्या काम hai"pehlwan बोहत hi अचे से बोलै"
विजय ...... पहलवान जी मुझे भी यहां पर कसरत करनी है. इस लिए आया हूँ.
पहलवान मुझे देख मुस्कुरा दिया लेकिन पहलवान की मुस्कान में बड़ों वाला प्यार था जो अपने नादान बच्चों के मोहन से कोई बड़ी बात सुन लेते हैं जो बचे कर नहीं paate.waisi hi मुस्कान thi.mujhe बुरा नहीं लगा. और लगता भी क्यों मैं तो आया hi अपने मतलब के लिए था. अब्ब तो जो भी हो जाए मुझे तो अपना निकालना था.
पहलवान ..... बीटा यहाँ पारर तुम जैसे लड़के कसरत नहीं कर सकते .
विजय ....... क्यों पहलवान जी क्यों नहीं कर सकते.
पहलवान ..... बीटा अभी तुम बोहत छोटे हो और ये सब बोहत hi दर्द और तकलीफ देने वाला काम होता है और वैसे भी तम्हारी आगे भी बोहत कम् है.
विजय ...... पहलवान जी मेरी आगे hi कम् है. पारर में इतना भी कमज़ोर नहीं हूँ क दर्द और तकलीफ बर्दाश्त न कर सकूं....
पहलवान .... नहीं बीटा ये तुम्हारे बास का नहीं और मेरा दिल कैसे मानेगा अगर तुम्हारा कोई jod-shod हिल गया तो में कैसे तुम्हारे घर वालों को जवाब दूंगा.
मैंने कोई बात नहीं की और अपनी कमीज उतार दी फिर अपनी शलवार भी लूसे कर के अपने पिछवाड़े तक नीचे कर के अपनी बैक पहलवान की तरफ करदी.
"पहलवान मुझे ये सब करते देख हैरान हो रहा था"
लेकिन फिर जैसे hi पहलवान की नज़र मेरे ज़ख्मो पारर गई. तो अपना सर्र पीट कर रह गया. मेरे ज़ख़्म hi इतने थे. चाहे हालत अब्ब कुछ बेहतर थी लेकिन ज़ख़्म थे ज़रूर. फिर मैंने अपनी शरवर ऊपर कर के बाँध ली. और कमीज भी पहन ली.
पहलवान सोच में डूब गए the.maine भी कुछ नहीं बोलै और अपनी जगा बेथ गया.
कुछ देर बाद पहलवान जी बोले.
पहलवान..... बीटा ये सबब क्या है इतने ज़ख़्म तुम्हारे मुझे तो देख कर यकीन hi नहीं हो रहा aaj-kal कोई ऐसा भी करता है क्या, और तुम्हारी आगे भी इतनी कम् hai.kaun तुम्हारे साथ ऐसा कर सकता hai.kaun इतना ज़ालिम हो सकता है..
और बीटा तुम यहाँ के लगते भी तो नहीं हो "कहाँ से आये हो."
विजय ...... पहलवान जी मैं इक सरए में रहता हूँ.. और यहाँ मेरा कोई नहीं है. मेरी फॅमिली मुंबई में रहती है.
पहलवान .... फिर तुम यहाँ किस लिए आये ho...aur नाम क्या है तुम्हारा??
विजय ...... पहलवान जी साड़ी बात तो मैं आपको बता नहीं सकता, बास इतना बता सकता हों क मेरी फॅमिली खतरे में है और मुझे इतना मज़बूत बनना है क मैं अपनी फॅमिली की रक्षा कर सकूं. और मेरा नाम विजय है...
"मेरी बात सुन पहलवान मुझे अजीब नज़रों से देखने लगे मैं भी पहलवान जी की आँखों दहकने laga"pata नहीं पहलवान जी को मेरी आँखों में क्या नज़र आया क उन्हों ने अपनी नज़रें hi फेर लीं.
कुछ देरर पहलवान जी खामोश रहे मैं भी नहीं bola...maine जो बोलना था मैंने बोल दिया tha.abb पहलवान जी ने बोलना tha...kuch देर की ख़ामोशी पहलवान जी की आवाज़ से टुटी..
पहलवान..... बीटा मुझे तुम्हारी बात पर यकीन आ गया है. तुम्हारी ऑंखें देख कर मैं समझ सकता hoon....baat कुछ ज़यादा hi घम्बिर है लेकिन अब्ब मैं तुम को यहाँ से जवाब भी नहीं दे सकता बाकी तुम यहाँ आ कर सबब सीख सकते हो पारर अगर तुम हिम्मत हार गए तो फिर मैं कुछ नहीं कर सकता.
विजय .... (खुश होते हुए) पहलवान जी मुझे कुछ भी करना पड़े मैं करूंगा बास आप अपना हाथ मेरे सर्र पारर रख दें. मैं कुछ भी करने के लिए तैयार hoon.(phir माँ और बहनो की याद आई तो दिल का दर्द एक बार फिर से आँखों में दिखने लगा) अगर मैं ये सबब ना कर पाया तो मेरी फॅमिली hi ख़तम हो jayegi....is'se अच्छा है मैं मर्डर hi जाऊं.. अगर मैं अपनी फॅमिली को बचने के काबिल hi ना बन्न सका. तू जी कर क्या करूंगा.
पहलवान ने मेरे अचानक से मेरे हाथ को थाम liya.(mere दर्द पहलवान को भी महसूस hua)acha आदमी जो था अगर कोई और होता तो कैसे समझ सकता था मेरा दर्द.
पहलवान...... बीटा मुझे बड़ी ख़ुशी हुई इतनी थोड़ी सी उम्र में भी तुमको अपनी फॅमिली की इतनी चिंता है. वर्ण आजकल कोण इतना सोचता है. साड़ी दुन्या तो मतलब परस्तों से भरी पड़ी है. बीटा मैं तुम्हें ट्रैन करूँगा. मुझे भी आज पहली बार अपने मतलब का कोई मिला है, कोई बात नहीं अगर तुम्हारी उम्र कम् है तो क्या हुआ, थोड़ी लेट सही पारर मैं तुम को बनाऊंगा. अब्ब हिम्मत तुमने करनी है, बाकी देखते हैं मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता hoon.beta अब्ब तुम जाओ और कल सूबा 5 बजे आ जाना.
विजय ..... जी पहलवान जी आपकी बड़ी मेहेरबानी.
पहलवान ... बीटा एक बात और है इस काम में तुम्हें खुराक की बड़ी ज़रुरत पड़ेगी. और इसके लिए पैसे भी खरच होंगे. कहाँ से लाओगे गे बीटा तुम इतने पैसे.
विजय ..... पहलवान जी मुझे नहीं पता कितने पैसे खर्च होंगे लेकिन आप फ़िक्र न करें मैं कुछ न कुछ ज़रूर करूँगा. आपका एक बार फिरसे शुक्रिया....
फिर मैं ख़ुशी ख़ुशी पहलवान जी पास से निकल कर घर की तरफ चल पड़ा.
अब्ब पैसों का भी जुगाड़ लगाना tha.kal राजा से मिल कर कुछ सोचता हूँ.
कुछ देर में मैं घर पोहंच gaya.kamre में रानी और आंटी थी मैं भी उनके पास जा कर बेथ gaya.pooja दीदी शायद जल्दी hi उठ कर ऊपर चली गई थी.
फिर हम ऐसे hi बातें करते रहे और आंटी की ज़यादा तर अपने गुज़रे हुए कॉल को ले कर थी कभी वो रोने लगती तो कभी भाई के मिलने की बात होते hi खुश होने lagti.....aise hi वक़्त गुज़रा फिर रानी और आंटी ने डिनर के लिए तैयारी शुरू करदी. आज पूजा दीदी और मालिकान हमारे कमरे में hi आ कर खाने वाली थी.
फिर ऐसे hi सबने डिनर किया. डिनर के बाद बातों में वक़्त गुजरने का पता hi नहीं चला और सोने का टाइम हो गया.
आज की रात हम तीनो के लिए बड़ी लम्बी थी. रानी और आंटी के लिए तो कुछ ज़यादा hi लम्बी थी उनका एक अपना जो कल उनसे मिलने के लिए आ रहा tha.aur मैं अपने कल के लिए सोच कर एक्ससिटेड था. अब्ब ये कल hi जा कर पता चलेगा.
अखाड़े में क्या होता है.
डोनर के बाद हमने अजित भाई को फ़ोन भी किया था. कुछ देर बार हुई ज़यादा नहीं कर सके वो रास्ते में थे और ट्रैन के शोर की वजा से और फिर कल वो यहाँ पोहचने hi वाले थे तो नार्मल सी बात चीत के बाद के कॉल डिसकनेक्ट करदी थी.
इक लम्बी रात के बाद मैं सूबा 5 बजे से कुछ पहले hi उठ गया था. हैरत है
सही टाइम पे कैसे उठ गया जब कह रात को बोहत लेट आँख लगी थी. चलो ाचा हुआ जो आंख खुल गई. साला मोबाइल कॉल फिर से रह गया था. पैसों की कमी की वजा से. वहां बाजार में कोई सस्ता मोबाइल नहीं मिला था इस लिए नहीं ले पाए.
आज राजा से कह कर कोई सस्ता सा फ़ोन लेते हैं शायद उसका कोई जानने वाला बेच रहा हो.
मोबाइल होता तो इतनी टेंशन नहीं होती. अलार्म लगा कर सोया जा सकता है. आज तो मेरी गुडलुक थी जो आँख खुल गई. वर्ण पहले hi दिन पहलवान जी से दांत पद सकती थी. ""अपना मक़सद ऐसे hi नहीं हासिल किया जा सकता जब्ब तक खुद की रूटीन न सही की जाये.""" ऐसे hi लेक्चर मिलने वाले थे आज पहलवान जी से लेकिन बच गया.
रात hi सबब को बता दिया था क मैं सूबा अखाड़े में जाने वाला हूँ इस लिए किसी को बताये बगैर hi अखाड़े की तरफ भाग निकला. ट्रॉउज़र टी शर्ट मैंने रात से hi पहनी हुई थी. जल्दी जाने के चककर में jaise-taise मोहन हाथ धोया और निकल लिया अखाड़े की तरफ.
मैं भाग कर जा रहा था था इस लिए सांस फूलने lagi.main जैसे hi अखाड़े में पोहंचा. वहां अभी कुछ hi बन्दे ए हुए थे. मैं रुक कर सांस लेने लगा और अखाड़े में चारों तरफ देखने लगा. कल मैंने सही से अखाड़े को नहीं देखा था.
1 एकर पर पहला हुआ अखाडा था जगा तो अछि खासी thi.ek साइड तीन कमरे बने हुए थे. लगता है पहलवान जी यहाँ नहीं रहते उनका घर टाउन में hi होगा.
मुझे एक आवाज़ सुनाई दी मैंने उस तरफ देखा तो पहलवान जी एक बन्दे के पास खड़े थे मुझे अपने पास आने का इशारा किया. मैं भी पहलवान जी की तरफ चल diya.jab वहां पोहंचा तो
पहलवान:- बीटा तुम तो अभी से थक गए हो. अभी तो बोहत कुछ करना है.
विजय :- पहलवान जी आज पहला दिन है ना. धीरे धीरे आदि हो जाऊँगा. आप बताएं मुझे काया करना है.
पहलवान:- मुझे देखने लगे फिर मुस्कुरा कर kaha"is पूरे अखाड़े के चक्कर लगाओ, जब तक तुममे दम है. जब थक जाओ तो मेरे पास आना."
मुझे पहलवान जी की आँखों में और आवाज़ में कुछ ऐसा लगा जैसे वो मुझे इतना थका हुआ देख कर ये समझ रहे हैं जैसे मैं एक दो चक्कर में hi थुश हो जाऊँगा.
"हो भी सकता है मैं कोनसा भागने का आदि था. साला मेरा एक भी काम ढंग का नहीं था. मतलब आज फटनी लाज़मी है.
फिर मैंने एक बार पहलवान जी की तरफ देखा वो अभी भी मुस्कुरा रहे थे लेकिन उनके पास का आदमी मुझे हैरत से देख रहा था. उसे क्या पता मैं क्यों आया hoon.""maine भागना शुरू किया अखाड़े के चरों तरफ अंदर hi अंदर. थका हुआ तो पहले से hi था. मेरे अंदर अपनी माँ और बहनो को ले के जल रही आग और ग़ुस्सा तो था. लेकिन इतना स्टैमिना कहाँ से लाता. मेरी फटनी लगी.
अभी दूसरा चक्कर था और मेरी बास होने लगी. लेकिन पहलवान जी को मेरी हिम्मत देखनी थी और मुझे मेरे मक़सद में हिम्मत के इलावा और चाहिए भी क्या था.
भागते भागते तीसरा चक्कर जब शुरू हुआ तो ऐसा लगा सांस थम जाएगी और मैं गिर पडूंगा.
जब्ब ऐसी surat-e-haal आई तो मुझे पहलवान जी की मुस्करात और मेरी माँ और बहनो की दलदल में फंसे होने की याद आने लगी.
मैं थकता गया और मेरे सारे जोड़ हितले चले गए लेकिन मैं भागता रहा. कितने चक्कर हुए मेरा उस तरफ धयान hi नहीं था. मैं ज़िद्दी तो था hi लेकिन बात माँ और बहनो की थी तो कॉल का माररता आज यही मर्डर जाओं लेकिन जितनी हिम्मत है. आज मुझे और पहलवान जी दोनों को पता चल जायेगा.
कितना भागा और कितनी देरर भागा कितने चक्कर लगाए मुझे नहीं पता.
बास अचानक hi मैं धड़ाम से नीचे गिर गया और फिर मुझे नहीं पता क्या hua.girte hi आंख जो बंद हो गई थी.
जब्ब मेरी आंख खुली तो मैं पहलवान जी के कमरे में था और पहलवान जी के साथ वो दूसरा बाँदा भी था. मैं उठने लगा लेकिन मेरे बदन पर कपडे भी नहीं थे बास एक लुंगी लपेटी हुई मेरे सामान को छुपाने के लिए.
मेरा पूरा बदन ऐसे दर्द करने लगा जैसे एक एक जोड़ अलग हो गया हो.
और khaas-kar मेरी टांगें तो ऐसे लग रही थी जैसे हूँ hi naa.sunn सी महसूस होने लगी.
पहलवान जी मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रहे थे. और दूसरा बाँदा मुझे हैरानी से देख रहा था.
पहलवान:- बोहत अच्छे विजय बीटा बोहत हिम्मत दिखाई है तुमने, मैं तुमसे बोहत खुश हूँ. लेकिन बीटा अभी तुम्हारा स्टैमिना बोहत थोड़ा है. धीरे धीरे तुम मज़बूत बनोगे. लेकिन शुरू शुरू में इतना तेज़ मैट भागा करो पहले आदत पद जाने दो फिर तेज़ भागना. आज तो तुम्हारी हिम्मत देखनी थी इस लिए मैंने तुमको नहीं रोका लेकिन kal'se धीरे धीरे भागना. और मैंने आज तुम्हारे शरीर की एक आयल से मालिश है कुछ देर में तुम चलने लगो गए, अभी लेते रहो.
मैं कुछ नहीं बोलै मैंने तो पहलवान जी से ये भी नहीं पूछ सका क मैंने कितने चक्कर लगाए हैं. दूसरा बाँदा अभी भी मुझे hi घुर रहा था. मैंने उसकी तरफ देखा फिर पहलवान जी की तरफ तो पहलवान जी से समझ लिया क मैं क्या सोच रहा हूँ.
पहलवान:- विजय बीटा ये मेरा बोहत ाचा दोस्त रणजीत है is'se घबराओ मैट.
मैंने मुंडी हिला di.aur क्या कहता मैं. जो पहलवान जी को ठीक लगे वैसे भी अभी दर्द की वजा से मुझसे बोलना भी मुष्किल था.
पहलवान:- देखा तुमने रणजीत इस बचे को ???
रणजीत:- हैं यार मैंने पहली बार इस उम्र के लड़के को ऐसे भागते देखा है. कमाल है.. है क्या ये सबब जग्गू....
पहलवान:- हाहाहाहा मैं भी कॉल हैरान रह गया था जब्ब इसने कहा था क इसे कसरत करनी है. लेकिन कुछ तो बात थी इसमें इसलिए मैंने भी इसको बोल दिया आज आने का.
रणजीत:- मेरी तरफ देखने लगा. कुछ बोलना चाहता था लेकिन बोल नहीं प् रहा था. शायद मुझसे मेरे बारे कुछ जानना चाहता हो. लेकिन अगर पहलवान जी ने बताना होता तो बता देते इन लिए खामोश hi रहे और कुछ न पुछा....
फिर वो अपनी बातों में लग गए कोई 15 मिंट बाद मुझे अपने पैरों में कुछ हलचल सी महसूस हुई. मैंने अपने पैरों को हरकत दी कुछ दर्द हुआ लेकिन ज़यादा नहीं.
कोई ख़ास hi आयल था जिसने दर्द को निचोड़ना शुरू कर दिया था.
पहलवान जी ने मुझे देख कर kaha"abhi 10 मिंट और लेते रहो फिर खड़े हो जाना"
मैं और क्या करता बास हाँ बोल दिया. कुछ देर बाद रणजीत जी चले गए तो मैंने पहलवान जी रणजीत के बारे पूछा तो
पहलवान:- दोस्त है मेरा और पुलिस इंस्पेक्टर है इसी टाउन के ठाणे का. कभी कभी आ जाता है जब टाइम हो इस के पास.
विजय :- लेकिन वो मुझे देख कर कुछ पूछना चाहता था जैसे उस के अंदर कुछ चल रहा हो.
पहलवान:- बीटा अब्ब तुम जैसे लड़के को देख कर कोई भी सोच सकता है क उसे इतना कुछ करने की क्या ज़रुरत है. अभी तुम्हारी उम्र इस काम के लिए ठीक नहीं है न इस लिए, उसके मैं में सवाल तो ए गए hi.lekin दिलका बोहत ाचा है.. तुमको डरने की कोई ज़रुरत नहीं है..
ऐसे hi कुछ मिंट बाद पहलवान जी ने मुझे खड़े होने को बोलै तो मैं दररते डरते खड़ा हुआ लेकिन मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हुई और दर्द अब्ब और भी काम हो गया था.
मैं खड़ा हुआ और फिर मुझे मेरी ट्रॉउज़र शर्ट दिहकी मैंने वो उठा कर पहन ली.
पहलवान:- अब्ब तुम जाओ और अब्ब से अपने खाने पीने का ख्याल रखना.
फिर पहलवान जी ने मुझे क्या खाना है और किस चीज़ को खाने से परहेज़ करना है. सब डिटेल में बताने लगे.
कुछ देर बाद में मैं अखाड़े से निकला अभी भी दर्द था तो तेज़ चलने की बजाये में धीरे धीरे चलता हुआ उसी जगा जाने लगा जहाँ कल राजा से मिला था.
टाइम 7 के आस पास था मतलब एक घंटा बेहोश रहा. शायद आयल का कोई चक्कर शक्कर होगा. धीरे धीरे चलते हुए मैं अपनी मतलूबा जगा पोहंचा.
चरों वेहले वहीँ थे. मैं भी वहीँ पोहंच कर उनके साथ hi बेथ गया.
hello हाय के बाद राजा ने hi मुझे मेरी हालत से देख कर hi अंदाज़ा लगा लिया था क कुछ गड़बड़ है. उसने पुछा तो मैंने जो कुछ आज अखाड़े में हुआ सब बता दिया.....
सुन कर वो सबब चूतिये हसने लगे.......
कभी गए हूँ अखाड़े में तो पता चले "इनकी भी माँ चुद जाएगी."
साला हस्ते हैं मुझपर.....
विजय :- चुप करो सालो इतना हंस क्यों रहे हो कभी जाओ तो सही फिर पता चले. चलो यही 10 मिंट भाग कर दिखाओ फिर पता chale.gaand कैसे phat'ti है.
सब फिरसे हसने अलगे. इस बार में भी हस्स दिया. बात hi ऐसी थी.
शेर बनना कौनसा आसान था. गांड तो phat'ti hi है.........
विजय :- राजा पहला काम तो ये है मुझे कोई सस्ता सा मोबाइल लेना है.
राजा :- लेने की क्या ज़रुरत है पहले से hi कुछ पड़े हुए हैं अभी बेचे नहीं हैं तो घर पर hi पड़े हैं..
विजय :- साला सब कुछ है तुम्हारे पास. कोई गड़बड़ तो नहीं होगी ना???
राजा :- अरे गड़बड़ कैसी उस जैसे मोबाइल तो आज कल हर किसी के पास हैं. और वैसे भी कौन हर्र मोबाइल की कम्प्लेन करवाता है. हम भी वही चला रहे हैं. आज तक तो कोई चक्कर नहीं हुआ.....
विजय :- चलो जाते हुए मुझे दे देना और दूसरी बात 2 या 3 दिन के अंदर पैसों का जुगाड़ करना पड़ेगा. पहलवान जी कह रहे थे क मुझे कसरत के साथ अपनी खुराक भी बदलनी पड़ेगी और कुछ बना कर भी देंगे मुझे जिस पर बोहत पैसे लगते हैं. इस लिए पासिओं का जुगाड़ जल्दी hi लगाना है. अगर कोई हो सकता है तो बताओ. वर्ण शहर के दूसरी तरफ के किसी गुंडे को देखते हैं.
जीतू :- तो मरवाये गए साले. ो हीरो पहले खुद चलने के काबिल तो हो जा. इस काम को कुछ दिन लेट कर लेते हैं. कुछ और सोचते हैं.
विजय :- तो ठीक है तुम लोग सोचो मैं चला. राजा तुम मुझे मोबाइल कब डोज.
राजा :- चलो अभी चल के देता हूँ. चलो रे सबब अब्ब यहाँ क्या काम है अपना.
फिर सब उठ गए. मैं धीरे धीरे चल रहा था तो सब भी मेरे साथ धीरे धीरे hi चल रहे थे. कुछ देर लगी लेकिन हम राजा के घर पोहंच गए.
छोटा सा दो कमरों का मकान था. नार्मल हालत थी. राजा ने जो कुछ लोगों से लूटा था लगता है घर पर नहीं लगाया, तो क्या करता है फिर.
मुझे क्या करता होगा कुछ. हम राजा के घर में गए तो राजा ने मुझे एक कीपैड मोबाइल दिया. मैंने राजा को थैंक्स बोल के मोबाइल लिया और सबसे हाथ मिला कर घर की तरफ चल पड़ा.
अब्ब बस सिम लेनी थी. वो भी लेलेंगे. चल घर चल कर कुछ आराम करते हैं आज तो गांड बच hi गई.
ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह टेररररीीी माआआ कूऊऊओ चोऊ.......
साला मैं भूल hi गया अब्ब याद आया वो पुलिस वाला मुझे क्यों घूर रहा था और क्यों मुझसे कुछ पूछना छटा था.
मेरे कपडे पहलवान जी ने ranjeet(police वाला) के सामने hi तो उतारे थे तो इस का मतलब उसने मेरे सारे ज़ख़्म देख लिए हैं. ये तो हो नहीं सकता क पहलवान ने उसे न बताया हो एक तो पहलवान का दोस्त और ऊपर से पलिस वाला.
मतलब वो सबब मेरे बारे जान गया होगा.
पहलवान जी ने ये भी बता दिया होगा क मेरी फॅमिली खतरे में है.
कही कुछ गड़बड़ न हो जाये. पता नहीं कैसा बाँदा है. पहलवान जी तो कह रहे थे क दिल का अच्छा है. पुलिस वाला कर दिल का ाचा ""अजीब बात है."""
साला मेरा दिल कैसे माने कोठे सारे के सारे भरे पड़े हैं पुलिस वालों की aamdo-raft से ............कुछ लोचा न हो जाये........
मैं डर भी रहा था और पहलवान जी की बातों से दिल को कुछ कुछ तसल्ली भी मिल रही थी.
अब्ब मैं जो काम करने वाला था वो उससे कैसे चुप सके गए. वो पोलिसवाले है तो उसकी नज़र रहे अब्ब मेरे ऊपर वो जान जो गया है मेरे बारे सबब कुछ.
आने वाली नेक्स्ट दो उपदटेस धमाकेदार Hongi............Bohat Hi मज़ा आने वाला है Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaap Sabbbbbbbbbbbbb Kooooooooooo
वेटिंग फॉर नेक्स्ट