Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 4 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स डिअर:

सही कहा आपने विजय को स्ट्रांग बनना चाहिए. कब तक वो ऐसे hi गलतियां करता रहे गए.

लेकिन विजय की आगे 14 है तो इस आगे में ग़म और दर्द से छुटकारा इतना आसान नहीं होता.....

वक़्त काम है विजय के पास तो कब तक माँ और प्रिय को याद करके खुद पर से कण्ट्रोल खोता रहेगा.

ये विजय की गलती है.. और गलती से hi विजय को अपना पता चले गए क वो अंदर और बहार से कितना स्ट्रांग है..

नेक्स्ट आने वाली अपडेट में आपको अपने सवाल का जवाब भी मिल जायेगा.

थैंक्स अगेन
 
थैंक्स बॉस:

अभी विजय को अपने कोठे से निकले दिन hi कितने हुए हैं लेकिन फिर भी वो जल्द hi खुद को रएवोकेर

करने में लगा हुआ है. रानी और पूजा भी विजय की लाइफ में स्पेशल बन कर आ गए हैं जो विजय को टूटने नहीं देंगे. और विजय हर गलती से बाद स्ट्रॉन्ग भी होता जा रहा है.

बाकी का नेक्स्ट अपडेट में पता चल जायेगा अप्पको

अगेन थैंक्स
 
अपडेट :::: 23

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अब्ब तक्क

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कुछ देरर में मैं नाहा कर बाथरूम से बहार निकला तो आंटी मोबाइल कान से लगा कर कुछ सुन्न रही थी और उनके चेहरे के रंग बदल रहे थे...

मैं हैरान रह गया. मैं आंटी के पास पोहंचा तो आंटी ने मुझे देख कर मोबाइल मुझे दे दिया मैंने नंबर देखे बगैर hi मोबाइल कान से लगा लिया....

उधर से .... hello कौन हैं आप बात तो करें इतनी देर से बोल रहा हूँ...

(((मुझे लगा ये अजित भाई की आवाज़ है मैंने नंबर देखा तो सच में अजित भाई hi थे..... लेकिन आंटी को क्या हुआ.??? चलो बाद में आंटी से पूछते हैं....)))


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अपडेट :::: 23

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अब्ब ाआगेइए


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विजय .... अजित भाई मैं विजय बोल रहा hoon.(mere अजित भाई बोलते hi आंटी के कान खड़े हो गए थे)

अजित भाई ... अरे विजय तू है, इतनी देर से बोल क्यों नहीं रहा था..

विजय ....... अरे कुछ नहीं बस वैसे hi शायद कुछ नेटवर्क प्रॉब्लम हो गई होगी आप सुनाएँ सब ठीक है ना..

अजित भाई .... अभी तक तो सब ठीक hi लग रहा hai....lekin तेरे जाने से कोठे पर सख्ती बढ़ गई है और रेखा बाई ने कई और गार्ड्स भी मंगवा लिए हैं.

विजय ........ अजित भाई रेखा बाई को पता चल गया है क किस शहर हूँ.

अजित भाई .... क्या बात करते हो विजय. फिर तो तुम्हारे लिए खतरा हो सकता है.

तुम अपना ख्याल रखना.

विअज्य.......... हाँ मैं अपना ख्याल रख लूँगा ..आप चिंता न करें और अजित भाई मेरी माँ और मेरी बहनो का कुछ पता hai...kaisi हैं वो सबब

अजित भाई ..... हाँ बास इतना hi पता है क रेखा बाई को श्वेता बेहेन पारर शक नहीं हुआ ...... बहार तो वो निकलती नहीं है. बाकी का मुझे सही से पता नहीं अंदर और क्या चल रहा. वैसे अगर कोई बात हुई तो मैं तुमको बता दूंगा...

विजय........... चलो ये भी अछि बात हुई क रेखा बया का शक माँ पर नहीं हुआ.. वर्ण बड़ी मुसीबत हो जाती..

अजित भाई ये भी मेरी एक दीदी का नंबर है. मैं भी आज hi मोबाइल लेने वाला हूँ फिर अआप्को बता दूंगा.. इस नंबर को भी सेव कर लेना. लेकिन किसी और नाम से... ख्याल रखना अजित भाई कुछ गड़बड़ न हो जाये.....

अजित भाई ..... तू टेंशन न ले मैं सब देख लूँगा......

विजय ......... ाचा अजित भाई मैं फिर किसी वक़्त कॉल करूंगा अभी मुझे यहाँ बोहत से काम हैं. भाभी को मेरा नमस्ते कहना ये भी कहना क मुझे उनकी बोहत याद आ रही है...

अजित भाई .....ठीक है मैं बोल दूंगा चल अब्ब रखते हैं.. अपना ख्याल रखना.

इस के बाद कॉल एन्ड हो गई.... मैं काफी फ्रेश फील कर रहा था अजित भाई से बात करके...

फिर मेरी नज़र आंटी पारर गई..




अरररी ईईईई kyaaaaaaaaaa ?????




आंटी क्यों रो रही हैं. में आंटी के पास गया मैं आंटी से कुछ पूछने hi वाला था. पारर आंटी अचानक से मेरे गले लग कर रोने लगी. आंटी के रोने से रानी भी उठ gai.apni माँ को रट देख वो झट से उठ कर हमारे पास आई और boli......"bhai माँ क्यों रो रही है"

विवाय....... मुझे नहीं पता आंटी क्यों रो रही हैं..?????

रानी ....... (रट हुए) माँ क्यों रो रही हो "रानी अपनी माँ के आंसू साफ़ करते हुए बोली"

आंटी रट होये बोलना तो छह रही थी पारर उनसे बोलै नहीं जा रहा था.

मैं भी सोचने ऐसा क्या है जो आंटी रोने लगी. और फिर अचानक मुझे याद आया क अजित भाई का फ़ोन सुन्न कर आंटी की ये हालत हुई है. तू इस का मतलब




""मेरे दमाग की बत्ती जाली""



आंटी अजित भाई को कुछ बोली नहीं थी लेकिन उनकी आवाज़ सुन्न कर रोने जैसी हालत हो गई थी और फिर मेरे बार बार "अजित bhai""ajit भाई" कहने से आंटी की हालत और ख़राब हुई hai.....main अजित भाई की साड़ी दास्ताँ जनता था कितने साल लगा दिए थे उन्हों ने अपनी बेहेन को ढूंढ़ने में....

""कहीं पद्मा आंटी अजित भाई की बेहेन तो नहीं""

बास फिर क्या था. मेने अचानक से आंटी को गले लगा लिया और फिर मेरे भी आंसू निकल आये जब्ब अजित भाई को पता चले गए क उनकी बेहेन मेरे पास है तो वो कैसे खुद को संभालें gay..kahan कहाँ नहीं भटके वो अपनी बेहेन को ढूंढ़ने के liye..kitni तकलींफीन झीली थी अजित भ ने.

मैंने आंटी को गले लगाए hi रानी से कहा...

विअज्य ..... रानी मुबारक हो तुम्हारा मां मिल गया hai...(rani को आंटी ने सबब बताया हुआ था जो भी पद्मा आंटी के साथ पास्ट में हुआ tha'is लिए 'रानी' अपने मां के बारे सबब जानती थी)




रानी ...... """क्याआ मामऊ मिल गए"""




ये बोलते hi रानी नीचे बेथ गई और दहाड़ें मारर मारर कर रोने लगी ...

रानी को देख अब्ब आंटी ने भी ऊंची ऊंची आवाज़ में रोना शुरू कर दिया......

रोने की आवाज़ से मालिकान और पूजा दीदी भागते हुए हमारे कमरे में आई..

मुझसे पुछा तो मैंने सब बता दिया ये सुन वो दोनों भी आंसू बहाने लगीं.




""और फिरर मेरा सर्र चकराने लगा अभी दिनन hi कितने हुए थे.

{{ज़िन्दगी में हर्र पल एकक नया ही मदद आ रहा था}}



bahar-haal ख़ुशी की बात थी...

अभी ज़यादा टाइम नहीं हुआ था और शायद अजित भाई अभी दूकान पारर नहीं गए hoonge..abhi दोबारा से कॉल करता hoon..ye सोच कर मैंने फिरसे अजित भाई का नंबर मिला diya...ajit भाई ने कॉल पिक ki..aur बोले

अजित भाई ... हाँ विजय सबब ठीक तो है ना दोबारा कॉल क्यों की है??

विजय ........ अजित भाई आपके लिए एक khush-khabri है....

अजित भाई ... कमाल है अभी दो hi मिंट में khush-khabri भी आ गई..

विजय ....... हाँ अजित भाई आपकी पद्मा बेहेन मिल गई है...



"अजित भाई चुप"



मैं 2 मिंट तक्क hello hello करता रहा बास अजित भाई के सिसकने की आवाज़ hi सुनाई दे रही थी....

मैंने मोबाइल को लाउड स्पीकर पारर किया और मोबाइल पद्मा आंटी के पास ले कर चला gaya..ye देख पद्मा आंटी फिरसे रोने लगी. इस बार अजित से भी कण्ट्रोल न हुआ और उनकी आवाज़ भी आने आने लगी वो भी रो रहे the...."udhar से भाभी और अजित भाई की बेटियां भी भागती हुई आई".... अजित भाई ने भी मोबाइल को स्पीकर पारर दाल दिया बास बोल दोनों तरफ से कोई नहीं रहा था....

दोनों मोबाइल्स से रोने की hi आवाज़ें आ रही thi...pooja दीदी के मोबाइल का बैलेंस ख़तम हुआ तो अजित भाई का रोना सुनाई देना बंद हो गया.




""थैंक गॉड बलके ख़तम हुआ वर्ण इन दोनों ने रोने का रिकॉर्ड hi बना देना था"" (जॉकिंग)

(इमोशंस अरे नॉट आ जोके) " इमोशंस बन्दे की ज़िन्दगी को बदल देते हैं या फिर tahs-nehs कर देते हैं"




थोड़ी देर में hi अजित भाई के मोबाइल से कॉल आने लगी. इस बार अजित भाई ने खुद पर कण्ट्रोल कर लिया tha.maine कॉल पिक करके आंटी को मोबाइल पकड़ाया आंटी ने कांपते हाथो से मोबाइल थामा और कान से लगा लिया....




अजित भाई .... छोटी मेरी बेहेन तू मिल गई (फिरसे सिसकने लगे)

आंटी ........ h..ha...haan.....bh..bhaaai "फिरसे रोना शुरू"




""मुझे रोने से मन करने वाले देखो आज कैसे रो रहे हैं इतने बड़े हैं क बचे जवान हो गए लेकिन अपने hi बच्चों की तरह रो रहे हैं""

मैंने आंटी से मोबाइल ले कर अजित भाई से बात की

विजय ........ अजित भाई आंटी से बात नहीं हो पा रही है आप ऐसा करें कुछ दिन के लिए दूकान बंद करलें और सब को ले कर यहाँ आ जाएँ.....

अजित भाई .... लेकिन विजय तुम्हारी माँ और behen...unka kyaaa(ajit भाई का बास नहीं चल रहा था वो उड़द कर आ जाते अपनी gum-shuda बेहेन ke..lekin मेरी माँ और बहनो की वजा से बोतले हुए झिझक रहे थे)

विजय ........ वो सब देखा जायेगा दो चर्र दिन में कुछ नहीं होता...



अजित भाई .... ाचा जैसे तुम सही समझो ... (अजित भाई खुश हो गए थे मेरे ऐसा बोलने से)

अब्ब मैं इतना khud-gharz भी नहीं था जो इतने बरसों से तड़प रहे बेहेन भाई के मिलान को अपने मुफाद के लिए पेंडिंग कर दूँ... मुझे ये सही नहीं लगा.. एक बार डर तो लगा कही अजित भाई की गैर मौजूदगी में कोई लोचा न हो जाये.....




मुझे कुछ और भी bando-bast करना चाहिए. अजित भी हर्र वक़्त तो बाजार में नहीं रहते.... किसी और को इस काम पर लगाना पड़ेगा पर कैसे और किसे.

कौन हो सकता है ऐसा बाँदा. जो मुझे माँ के बारे साड़ी बातें बताये....

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा tha.sarr चकराने लगा ये सोच कर पारर फिर मेने सर्र को झटक कर सोचा "बाद में सोचेंगे" पहले इन बिछड़े हुए बेहेन भाई का सोचना है.. अपना बाद में सोच लेंगे.

फिर मैंने अजित भाई को पूजा दीदी का एड्रेस बता दिया और कॉल बंद हो गई..

अब्ब उनके आने का इंतज़ार था मैं कुछ देर आंटी से मिल कर उनको दिलासा देता raha.phir सबको इलाका घूमने जाने का बोल कर मैं घर से बहार निकल आया.

अब्ब मुझे आगी के प्लान पर अमल करना था मेरे पास वक़्त नहीं था जाया करने के लिए. इस लिए पहले मैंने पूरे टाउन का चाकर लगाने का फैसला किया...

मैं आज hi सारा इलाका तो नहीं देख सकता tha.paidal जो था..

चलो जितना हो सका उतना hi सही.

पारर मेरी नज़र हर्र इक चीज़ पारर थी कुछ भी अगर मेरे काम का हुआ तो मैं उस से फ़ायदा उठाऊँगा. मेरी नज़र हर्र तरफ थी मैं किसी भी चीज़ को nazar-andaz नहीं कर रहा था..

चलते चलते मैं एक ग्राउंड में पोहंचा वहां कुछ बचे खेल रहे थे..

मेरी लाइफ में ऐसा कोई चांस आया hi नहीं था क मैं भी कभी किसी ग्राउंड या पार्क जा कर खेल सकूं कुछ देर वहीँ खड़े रह कर सबब को देखता raha....aur खुद के गुज़रे वक़्त को याद करने लगा.

मैं कभी भी इन बच्चों के जैसा अपना वक़्त नहीं बिता सका था....

मेरे अंदर हलचल सी होने लगी एक अलग सी फीलिंग ने जनम लेना शुरू कर दिया...

लेकिन मेरी लाइफ में इन बच्चों के जैसी मस्ती करने का टाइम कहाँ.....

कुछ देर उनसब को खेलता देख कर मैं आगे बढ़ गया.

ग्राउंड से कुछ आगे बढ़ने पारर मुझे कुछ अपने मतलब का दिखने लगा मैं उस तरफ गया तो दिल खुश हो गया. मुझे एक अखाड़ा नज़र आया जहाँ कुछ पहलवान टाइप बन्दे कसरत कर रहे थे. कुछ देरर मैं उन सबब को देखता रहा फिर कुछ सोच कर आगे के बढ़ गया....

आगे टाउन का वेरआं इलाका शुरू हो gaya...wahin खड़े हो कर मैंने पीछे मदद कर पूरे टाउन पर नज़र डाली 'टाउन इतना छोटा भी नहीं था.....

फिर मेरी नज़र उसी वीराने में बैठे कुछ लड़कों पर पड़ी....




"मेरे चेहरे पारर मुस्कान आ गई"




ऐसी hi जगा पर मुझे मेरे मतलब के लड़के मिल सकते the...main चलता हुआ उनके पास पोहंच गया

वो 4 लड़के थे आगे कोई 19/20 के करीब होगी सभी की....

मैं उनके पास hi जा कर बेथ गया वो मेरी तरफ हेरात भरी नज़रों से देखने lage...aur मैं उनकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा वो और हैरान हो गए..

कुछ देर हम ऐसे hi एक दुसरे को देखते रहे फिर उनमे से एक लड़का बोलै....

ू बच्चे इधर काहे को आया रे

मैं मुस्कुराते हुए उसे देख कर bola...""pehle एक दुसरे को जान लें फिर आगे की बात करते हैं""

एक लड़का ....चल चल भाग यहाँ से हम बच्चू से बात नहीं karte....."lekin मेरा प्लान तो कुछ और hi था रात बोहत देर मेने सोचा था क मुझे क्या कुछ करना है इस लिए hi तो मैं आज टाउन में घूमने निकला था कुछ भी अगर मेरे काम का हुआ तो मैं उसे अपने काम में लाऊँगा. यही सोच कर मैं यहाँ आया था"

मैंने उसी लड़के को उसके गले से पकड़ liya'sab मुझे देख रहे थे वो मुझे एक बचा hi समझ रहे भला एक बचा उनका क्या बिगड़ सकता hai....baaki के तीनो आगे खड़े हो कर मुझसे लड़ने के लिए तैयार हुए तो मैंने दुसरे हाथ से उनको वही रुकने को बोलै. उनमे से एक मेरी आँखों में देख रहा था. शायद वो सबसे बड़ा था या सबसे समझदार भी. उसे किसी को पहचानने में मुश्किल नहीं होती होगी. उसने बाकी दोनों लड़को को वही रोक दिया. उस लड़के के ऐसा करने से मैंने जिस लड़के का गाला पकड़ा था उस लड़के को छोड़ दिया. फिर मैं बोलै....




विजय .....(जिसका गाला मैंने पकड़ा था उससे बोलै) मेरा नाम वजिजय है अब्ब तू बता तेरा नाम क्या है. और बच्चा मैट समझ मुझे ""तेरा बाप हूँ में""

चल बेथ कर बात करते हैं....




इस वक़्त वही ऐतमाद था मुझमे जो उन्दोनो गुंडों को मारते टाइम था....

रेखा बाई जब मेरा कुछ नै बिगाड़ सकीय और वो दोनों गुंडे मेरे हाथों मारे गए और फिर मैंने उन दोनों गुंडों के चेहरे भी जला दिए the.to इन लड़कों में मैं कैसे डर सकता हूँ.....

रात मैंने बोहत सोच विचार करके एक फैसला लिया था.

इन लड़कों के जैसे आवारा लड़कों को अपने साथ मिलाऊँगा..

साले पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं....

लेकिन पहले उन को परखों ga....wo कैसे हैं अब्ब दुन्या को समझना भी तो था mujhe.kabb का अधूरा हूँ खुद को पूरा करना पड़ेगा और जल्द से खुद को कुछ बनाने था. कुछ ऐसा के डर मेरे अंदर से हमेशा के लिए निकल जाये..

और ये लड़के अगर इनसे डर गया तो आगे आने वाले खतरों से कैसे मुक़ाबला karunga...saala अब्ब अगर इनसे भी में डर गया तो थू है खुद पारर जब्ब आग में hi कूदना है तो फिर दररना कैसा.....



""डर की माँ की छूट""



 
थैंक्स बॉस

विजय के लिए ये सच में hi बोहत बड़ी ख़ुशी की बात है

क अजित भाई और पद्मा आंटी एक दोनों के भाई बेहेन हैं...

अब्ब अजित के आने के बाद hi पारा चलेगा.

हालत कोनसा रुख अख्तियार करते हैं .........

और अब्ब विजय को अपने नए रूप में आना पद गया है

उस के अंदर की वीकन्स भी कवर हो रही है.........

नेक्स्ट अपडेट एक बड़ी अपडेट भी होगी और

कुछ चटपटी और मज़ेदार भी..............


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अपडेट :::::: 24

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अब्ब टकककककक

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इस वक़्त वही ऐतमाद था मुझमे जो उन्दोनो गुंडों को मारते टाइम था....

रेखा बाई जब मेरा कुछ नै बिगाड़ सकीय और वो दोनों गुंडे मेरे हाथों मारे गए और फिर मैंने उन दोनों गुंडों के चेहरे भी जला दिए the.to इन लड़कों में मैं कैसे डर सकता हूँ.....

रात मैंने बोहत सोच विचार करके एक फैसला लिया था.

इन लड़कों के जैसे आवारा लड़कों को अपने साथ मिलाऊँगा..

साले पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं....

लेकिन पहले उन को परखों ga....wo कैसे हैं अब्ब दुन्या को समझना भी तो था mujhe.kabb का अधूरा हूँ खुद को पूरा करना पड़ेगा और जल्द से खुद को कुछ बनाने था. कुछ ऐसा के डर मेरे अंदर से हमेशा के लिए निकल जाये..

और ये लड़के अगर इनसे डर गया तो आगे आने वाले खतरों से कैसे मुक़ाबला karunga...saala अब्ब अगर इनसे भी में डर गया तो थू है खुद पारर जब्ब आग में hi कूदना है तो फिर दररना कैसा.....

""डर की माँ की छूट""


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अपडेट :::::::::::::: 24

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अब्बब्बब्बब ाआगजगजीये

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वो चार लड़के थे शकल से आवारा लग रहे थे एक को छोड़ कर. इन लड़कों को देख कर ये भी अंदाज़ा हो रहा था. क घटिया करैक्टर के नहीं hai.matlab मेरा कुछ काम बन्न सकता था इस लड़कों से.

फिर सबब से पहले वो लड़का बोलै जो सबब से शांत था.

लड़का .... मेरा नाम राजा है और हम सब इसी टाउन में रहते हैं लेकिन तुमको पहले कभी इधर नहीं देखा.

विजय .... मैं कॉल hi यहाँ आया हूँ पहले सबके नाम पता जान लें फिर बात करते हैं....

फिर एक एक करके सबने अपना नाम और आगे बताई...


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राजा आगे:20

अनुपम आगे:19

उदय आगे:20

जीतो आगे:20


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मेरी इनसे काफी देर तक्क बात चीत hui.raja इन सबब में सीनियर था. राजा hi सबब से ज़यादा अपना दमाग लगता था और बाकी सबब ज़यादा टर्र राजा को hi अपना गुरु मानते te....matlab मैंने जो सोचा था ये वैसे hi लड़के थे. कुछ बातून को लेकर मुझे टेंशन थी लेकिन फिर राजा से बात करके मेरी साड़ी टेंशन दूर हो गई.

चरों लड़के अचे काम नहीं करते थे. मतलब छोटी मोती चोरियां करना इन की आदत थी कभी किसी दूर के इलाके में जा कर किसी राह चलते को लूट लेना. कुछ कुछ हिम्मत वाले थे.

पारर राजा सबसे अलग था. उसका इस दुन्या में कोई नहीं था. अपने माँ पिता का अकेला hi बीटा था. कुछ साल पहले राजा में पा पिता एक एक कर के दोनों hi गुज़र गए.

तो राजा ने खुद के दम पारर अपना गुज़ारा kiya.pehle किसी न किसी की दूकान पर काम करके. कभी किसी सर्विस स्तरिओं पर तो कभी टिया वाले के पास. अकेला होने से स्कूल भी छोड़ना पड़ा गया.

राजा की शुरू से hi अकेला होने की वजा से आदतें भी बिगड़ने लगी और फिर राजा को ये तीन लड़के मिले तीनो hi निकम्मे थे तो राजा के साथ मिल कर राजा को भी अपने जैसा बना लिया लेकिन राजा ने अपने कुछ असूल टूटने नहीं दिए. लड़की बाज़ी के मुआमले में राजा बोहत hi सख्त था राजा के इलावा बाकी के तीनो उलटी सीढ़ी हरकतें करते रहते थे लेकिन राजा ने सख्ती से उनको रोक diya....inki दोस्ती अछि थी तो राजा के कहने पारर तीनो ने अपनी लड़की बाज़ी वाली आदत को तारक कर दिया... हाँ पारर राजा ने कभी इनकी पैसों के बदले जिस्म बेचने वाली लड़कियों या औरतों के पास जाने से नहीं रोका... लेकिन राजा खुद इन कामों से दूर hi था. राजा की बदौलत तीनो औरतों और लड़कियों की इज़्ज़त भी करने लगे थे...

बास मुझे इस बात का डर था क इनको लड़कियों वाली गन्दी आदत न हो.

वो इन चरों में नहीं थी. तो ये 4 लड़के मेरे काम के लिए मुझे सही लगे..... फिर मेरी इन सबब से असल बात शुरू हुई....

विजय .... राजा तुम चरों ये सबब पैसों के लिए करते हो ना...

राजा .... हाँ ज़ाहिर है और किस लिए करेंगे. खतरे वाला काम हम ऐसे hi तो नहीं करते.....

विजय .... मैं भी तुम सबब के साथ मिल कर तुम्हारे जैसा hi काम करना चाहता hoon.((meri बात सुन सबब हैरान रह गए))

राजा ..... क्यों?? तुमको इस की क्या ज़रुरत है. तुम्हारी अभी उम्र भी काम है और ये काम तुम्हारे लिए ठीक भी नहीं. जान का खतरा हो सकता है...

विजय ..... क्यों जान का खतरा तुम सब को नहीं होता क्याआ??

चरों बोले.... हमारी बात अलग है

विअज्य ........ अलग कैसे जब्ब तुमने ये काम शुरू किया तब्ब तुम कितनी उम्र के थे....

राजा ...... मतलब तुम ये काम हर्र हाल में करना चाहते हो....

विजय ..... हाँ लेकिन इस काम में आना चाहता हूँ लेकिन काम मेरे हिसाब से होगा.

चरों मुझे देखने lage....meri उम्र देख कर hi वो हैरान थे. उस पर से मेरी बातें सुन और भी हैरान थे.

राजा ...... तुम्हारे हिसाब से मतलब...????

विजय ..... देखो मैं तुम सबब को अचे से समझाता हूँ क पैसा कैसे आये गए और मैं क्या करना चाहता hoon.(charon मुझे घोर से देखने लगे मैं फिर बोलै)

इस दिल्ली शहर में गुंडों की कमी नहीं है और उनके पास पैसा भी बोहत होता है मैं उन जैसों से hi पैसा निकलना चाहता हूँ.

राजा ...... पागल हो गए हो उनसे कौन लड़ेगा. मार्र्ण है क्या..

विजय ..... पैसों के लिए जो काम तुम करते हो उस में भी खतरा होता है कभी भी तुम पकडे जा सकते हो पुलिस का चक्कर भी हो सकता है. खतरा तो तुम्हारे काम में भी है.

जीतू ..... खतरा है पारर डायरेक्ट तो नहीं है ना. किसी गुंडे को मारने के लिए हम को सीधा सीधा उससे टकराना पड़ेगा. और हम में से कोई इतना भी phanne-khan नहीं है समझे tum....(mujhe हंसी आ गई..)

राजा ....... इसमें हंसने की क्या बात है???

विजय ...... तो और क्या करून तुम बातें hi ऐसे कर रहे हो. मैंने कब्ब कहा क हम सीधे गुंडों को मारने जायेंगे.

जीतू ....... तो फिर क्या मतलब है तुम्हारा.....

विजय ....... देखो हम में से कोई भी इतना स्ट्रांग नहीं है क हम गुंडों से लादेन लेकिन हम प्लान बना कर सोच विषर कर के सब करेंगे. कैसे करना है वो सब बाद की बात है पहले मुझे ये बताओ क तुम चरों में से लड़ना कौन जनता है.

उदय ....... राजा हम सब से ाचा लड़ता है..

अनुपम ..... हाँ राजा डरता नहीं है किसी से..

विजय ...... अभी हम लड़ने नहीं वाले. देखो पहले मुझे ये बताओ क तुम लोगों ने पूरा दिल्ली घूमा है या कुछ इलाके...

राजा ........ वैसे तो दिल्ली सारा hi देखा है लेकिन कुछ इलाकों में hi हमने सड़क पर से लोगों को लूटा है....

विअज्य ....... तो फिर तुम लोगों को इस शहर के सारे न सही कुछ तो गुंडों का पता होगा hi....

जीतू ....... हाँ हम जानते हैं न. बोहत से गुंडों को जानते हैं हम. कौन कहाँ रहता है और कोण कितना खतरनाक है....

विजय ....... हमें पहला काम ये करना है क शहर के जितने गुंडों की डिटेल निकाल सकते हैं पहले वो निकालेंगे. उसके बाद देखेंगे क पहले kis'se पैसे निकलने हैं. हम जो भी करेंगे सोच कर और प्लान बना कर करेंगे. लेकिन हम कभी भी अपने इलाके के आस पास के किसी भी गुंडे को कुछ नहीं कहेंगे. उन को हम बाद में देखेंगे. पहले हमें मज़बूत बनना है. और पैसे इकट्ठे करने हैं. अभी हम किसी से उलझेंगे नहीं क्यों राजा तुम क्या कहते हो...

एक राजा hi था जो मेरी बातों को ठीक ठीक समझ सकता था. और उस में हौसले की भी कमी नहीं थी.

राजा ........ मुझे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता वैसे भी मेरे पीछे रोने वाला कौन है.

विजय ....... ऐसी बात न करो मैं तुम सबब के साथ सिर्फ अपने मतलब के लिए hi नहीं हूँ. हम सबब जो भी करेंगे साथ करेंगे और हम सब एक दुसरे के दोस्त भी बन गए हैं.

राजा तुम मुझे अपना छोटा भाई hi समझो भूल जाओ इस दुन्या में तुम्हारा कोई नहीं है. मुझे भी अपने जैसा hi समझो.

हम पांच मिल कर ऐसे रहेंगे क टाउन के लोग हमें दोस्त काम और भाई ज़यादा कहेंगे. उस के लिए तुम सबब को टाउन में अचे से रहना होगा. लोग के अंदर से ये बात निकल जाये क तुम चरों आवारा हो. फिर हमें यहाँ आसानी हो जाएगी और हमारी इज़्ज़त भी बढ़ जाएगी.

चरों सोचने लगे फिर कुछ देर बाद अनुपम बोलै..

अनुपम ..... लेकिन हमें लड़ना भी सीखना चाहिए..

विजय ...... (कुछ सोचने के बाद) राजा यहाँ जो अखाड़ा है इस का मालिक कोण है.

राजा ....... एक पहलवान है "जग्गू बोलते है लोग उसे" क्यों तुम क्यों पूछ रहे हो.?????

विजय ...... किस तरह का बाँदा है मतलब ाचा है या गुंडों जैसी सोच रखने वाला. और कई पहलवान उलटी खोपड़ी के भी तो होते हैं.

राजा ....... कुछ लोगों से सुना तो है ाचा बाँदा है लेकिन ग़ुस्से का खतनाक hai.abb हमारा कभी us'se वास्ता hi पड़ा तो इससे से ज़यादा नहीं pata(phir जीतू से) क्यों जीतू तुम कुछ जानते हो.

जीतू ...... हहहहहए जिस तरह के हमारे काम हैं हम कभी यहाँ कम् hi लोगों से मिलते हैं वो क्या है न राजा तुम को पता है जिसके पास भी जाते हैं वो साला ऐसे बात करता है जैसे इस पूरे टाउन के सबसे आवारा हम hi hain.hehehehehe इस लिए मैं भी जग्गू पहलवान को ज़यादा नहीं जानता.....

हम सब भी जीतू के बात सुन हस्स दिए....

सबब के सबब साले एक नंबर के चूतिये थे... जिस जगा रहते हैं वहां के बारे में ज़यादा नहीं जानते थे....

विजय ....... अब्ब तुम लोग अपने काम पर लग जाओ और मैं पहले पहलवान का पता करता हूँ अगर काम बना तो इस के पास जा कर हम भी कसरत कर लिया karenge.abb कुछ करना है तो जान शान भी तो बनानी पड़ेगी न.

फिर कल यही मिलने का फाइनल करके मैं तो निकल पड़ा घर की तरफ अब्ब भूक भी लग्ग रही थी. सूबा जल्दी उठा था लेकिन फिर नाश्ता hi रह गया था.

पामणा आंटी की वजा से. चलो ाचा हुआ उस बेचारी की ज़िन्दगी में भी कुछ खुशियां आ hi जाएँगी.

कुछ देर में मैं घर पोहंचा. पूजा दीदी आज फिर नहीं गई thi.lagta है नौकरी से निकलने का इरादा रखती है. नई नौकरी और वो भी प्राइवेट चलो इनकी अपनी मर्ज़ी. मुझे देखते hi मुझपर चढ़ daudi.(kamre में पूजा दीदी और रानी थी आंटी और मालिकान शायद ऊपर वाले पोरशन में थी)

पूजा ..... इतनी देर क्यों लगा दी तुमने. नाश्ता भी नहीं करके गए थे. बताओ अब्ब चुप क्यों हो ...."बोलो न" टाइम देखा है कितना हुआ है .... तुम्हारी वजा से अभी तक किसी ने भी नाश्ता नहीं किया मारे भूक के सबब का बुरा हाल है और मेरी भी चटुटी भी करवा दी तुमने. अब्ब बोलो भी

रानी .... (हस्ते हुए) पूजा दीदी भाई को बोलने डौगी तो वो कुछ बोले गए न....

मैं बास पूजा दीदी को hi देख रहा tha."kaise पातर पातर बोल रही थी. कितना च लग रहा था पूजा दीदी का प्यार और केयर और उसपर से पूजा दीदी के बोलने का स्टाइल. (जैसे घर में लड़कियां अपनी कमर पर दुपट्टा बांध कर बाल का जुड़ा lapet'te हुए स्टाइल में बोलती हैं) कुछ ऐसा hi स्टाइल पूजा दीदी का भी था"

टाइम तो सच में hi ज़यादा हो गया था 10 बजने वाले थे. ये सब अभी तक भूके बैठे थे सिर्फ मेरी वजा से ....मुझे भी मज़ा आने लगा पूजा दीदी की बातून में तो में बोलै...

विजय ........ पूजा दीदी बोलके तो गया था क घूमने जा रहा हूँ. अब टाइम तो लग्न hi tha.....abb मुझे क्या पता था क आप सबब ने नाश्ता भी नहीं किया होगा.

पूजा ........ तो बता के जाना था न क लेट आओ गे.

और फिर हाम्रा मैं था सबब एक साथ मिलकर खाने का.. ऊपर से डायलाग मारता hai....'phir मेरे बाल पकड़ते हुए बोली'

अब्ब इसे भी छोटे करवा ले बिलकुल हमारे जितने हैं तेरे ये baal.."raani हसने लगी पूजा दीदी की ये बात सुनकर"

विजय ... अब इस में हसने की क्या बात है सारे काम एक hi बार में कैसे करून.

अब्ब नाश्ता करके निकलता हूँ.

पूजा ... कोई ज़रुरत नहीं है कही जाने की. मेरी फ्रेंड का पार्लर है उसी के पास जाते हैं और वैसे भी आज फिरसे मेरी छूती हो गई है. तो वही जाते हैं.

विजय.... क्या मतलब मुझे पार्लर में जाने की क्या ज़रुरत है. वहां तो लड़कियां जाती हैं. मेरा वहां क्या काम. मैं किसी हमाम वाले के पास चला जाऊँगा. मैंने नहीं बाल कटवाने किसी लड़की se...(raani बोली कुछ नहीं बस हमारी बातून के मज़े ले रही थी.)

पूजा .... बच्चे तो जा सकते हैं naa.(mujhe छेड़ते हुए)

विजय .... क्या मतलब मैं अभी बच्चा हूँ. कहाँ से दीखता हूँ मैं बच्चा आपको. आपसे तो लम्बा hi hoon.(ab मुझे और भी मज़ा आने लगा इस तरह की बातों में)

बड़े दिन हो गए थे अपनी तितलियों से मिले पूजा दीदी की बातों से मैं उसी माहौल में जाने लगा. जब मेरी तितलियाँ मुझे घेर लिया करती थी और फिर हमारी मस्ती शुरू हो जाया करती थी.

लेकिन इस बार मेरी फीलिंग्स खुद के कण्ट्रोल में थी. अब्ब मैं धीरे धीरे खुद पर काबू पाने में कामियाब हो रहा था. वैसे भी आज राजा एंड फ्रेंड्स से मिलने के बाद मैं खुद में बोहत कुछ बदला हुआ महसूस कर रहा था...

पद्मा आंटी कमरे में दाखिल हुई तो हमारी बात अधूरी रह gai....chalo फिर सही अब्ब तो ये मस्ती वाला सन तो चलते रहने वाला था. अब्ब तो एक hi घर में थे. और मुझे लड़कियों से कैसे शर्म आएगी. मैं तो रहता hi लड़कियों के बीच था.

हाँ लड़कों की आदत नहीं थी. अजित भाई के इलावा कोई दोस्त नहीं था.

आंटी boli.."chalo पहले चल कर नाश्ता कर lo"main पद्मा आंटी के चेहरे को देख रहा था सूबा के बाद कैसे लगता है अब्ब उनका चेहरा. पद्मा आंटी के चेहरे पर ख़ुशी भी थी लेकिन बेचैनी बोहत ज़यादा दिख रही. अपने भाई से बायत होने के बाद वक़्त काटना उन के लिए भारी पद रहा था. अब्ब आंटी बेचारी कल तक के लिए बेचैन hi रहेगी.

हम तीनो आंटी जे साथ पूजा दीदी के घर की तरफ चल दिए.

हम वहां पोहंचे तो पूजा दीदी अंदर किचन की तरफ चली गई. और हम तीनो (में रानी और aunty)table के गिर्द राखी चेयर्स पर बेथ गए. सिंपल सा माहौल था.

पूजा दीदी को थोड़ी देर लगी खाना गरम करने में फिर पूजा दीदी खाना ले कर आ गई. मालिकान भी साथ hi थी एक ट्रे उन्हों ने भी पकड़ी हुई थी.

फिर टेबल पर जो कुछ बनाया गया था उसे परोसा गया और उसके बाद हम सब ने मिलकर नाश्ता kiya..(pata ये नाश्ता था या कुछ और)

नाश्ता भी गया और लंच भी ये पता किस टाइम का खाना था. अब्ब तो शाम तक खाने की ज़रुरत hi नहीं थी.

खाने के बाद पूजा दीदी अपनी माँ को बोल कर रानी और मुझे साथ लेकर पार्लर के लिए चल दी.

विजय .... दीदी रानी को साथ किस लिए ले कर जा रही हो.?

पूजा .... क्यों सिर्फ तुम hi जा सकते हो इस को ज़रुरत नहीं है khub-soorat दिखने की. देख तो सही कैसे चेहरे का सारा रंग उदा हुआ hai...(mene रानी की तरफ देखा तो रानी शर्मा गई)

पूजा .... वहां से सीधे बज़ाएर जायेंगे पैसे तो ले कर जा रहे हो ना.?

विजय .... नहीं थोड़े हैं बाजार में कपडे खरीदने के लिए कम् पद जायेंगे. वही कमरे में hi रखे हैं.

पूजा .... बुद्धू हो पूरे क पूरे

विजय .... अब्ब मुझे क्या मालूम था क पार्लर से सीधे बज़ाएर भी जाना है.

पूजा .... चलो वापिस चलते हैं अभी हम ज़यादा दूर नहीं ए हैं.

फिर हम वापिस ए और पैसे ले कर फिरसे पार्लर की तरफ निकल पड़े. पार्लर टाउन में hi था लेकिन बाजार के दूसरी तरफ था. हम पैदल hi चल रहे थे तो टाइम कुछ ज़यादा लग गया.

मेरे ज़ख़्म अब्ब काफी बेहतर थे. दर्द था उनमे लेकिन जितना था उससे ज़यादा तो मैं सेह सकता था. इस लिए नार्मल hi लग रहा था. हाँ पिछवाड़े के ज़ख़्म की वजा से बैठने में प्रॉब्लम होती थी.....

जब हम पार्लर पोहंचे तो दोनों गर्ल्स थक चुकी थी. इतना चलना है मुझे पता होता तो रिक्शा hi करवा लेते लेकिन पूजा दीदी तो जानती थी. ावें hi हमें पैदल इतनी दूर ले आई. लेकिन लगता है उनको रेंट बचने की आदत पद चुकी thi.hehehehe

पार्लर में दाखिल हुए अंदर एक सूंदर सी लड़की एक और सूंदर सी लड़की को और सूंदर बना रही थी.

लड़की जितनी भी सूंदर दिखे उसकी तसल्ली नहीं hoti.inka बास चले तो दुन्या की सबसे khub-soorat लड़की बन्न जाएँ. साड़ी की साड़ी लड़कियां एक दुसरे से कॉम्पिटिशन बोहत रखती हैं. "शुक्र है मैं लड़की नहीं था."

पार्लर वाली लड़की की नज़र जैसे hi दूर ओपन हुआ पहले हम पर फिर पूजा दीदी पारर gai.to एक पायरी सी मुस्कान देते हुए बोली.

लड़की .... अरे पूजा आज तुम यहाँ कैसे "जॉब पर नहीं गई."

पूजा दीदी मेरी तरफ देखते हुए एक आंख अपनी सहेली को मारते हुए बोली.




पूजा .... एक दूल्हे को तैयार करना है आज इसी लिए छुट्टी करनी पड़ी वर्ण इसे तुम्हारे पास कैसे लेकर आयति.



(में झींप गया और रानी के साथ दोनों लड़कियां "पार्लर वाली और उससे के साथ दूसरी लड़की जो khub-soorat दिखने की कोशिश में लगी हुई थी" भी हसने लगीं.)

मैं पूजा दीदी को घूरने लगा लेकिन पूजा दीदी ने मुझे भी आंख मार्डी.

ये भी ना ""भगवन किसी की बुरी नज़र से बचाये"" यही तो स्टाइल था पूजा दीदी ka.mere अंदर से सारे ग़म को निचोड़े वाला अंदाज़ था पूजा दीदी ka......waqt ने मुझे खुशियां देनी शुरू करदी थीईन.

पूजा .... रीना कितना टाइम लगे गए फ्री होने में..

रीना ... तुम बैठो बास 15 मिंट और..

फिर हम बेथ gaye.aur रीना के फ्री होने का वेट करने lage.iske बाद पूजा ने मुझे तंग नहीं किया.

कुछ देर बाद रीना फ्री हो gai.aur मेरा नंबर आ गया.

मैं चेयर पर बैठा तो पूजा दीदी ने रीना को बताना शुरू कर दिया "क्या क्या करना है." और रीना भी पूजा दीदी के कहने पर अमल करती रही. में बैठा बैठा थक गया लेकिन वो दोनों नहीं थकी.

मैंने बोहत कहा क बास इतना काफी है. वो हंस देती और फिर मुझे इग्नोर करके मेरे बखिये उधेड़ने शुरू करवा deti.lag-bhag दो घंटे लगे मेरी तो कमर hi अकड़ गई और चुत्तड़ तो सुन्न hi हो गए थे. चेयर की सीट भी मेरे बैठने से गरम हो गई और पसीना आने से नीचे सारा chip-chipa हो गया tha.lekin मेरी किसी ने नहीं सुनी.

जब रीना अपने काम से फ्री हुई तो पूजा दीदी ने मुझपर हुम्ला कर दिया और मुझे चूमने लगी. और बेचारी रीना ने जो म्हणत मेरे चेहरे पर की थी उसका beda-gharak करने लगी.

मैंने शायद किसी भी अपडेट में अपना इंट्रो डिटेल में नहीं दिया है वैसे भी मुझे खुद को शो करवाने की आदत थी नहीं. कोठे पर रहते मुझे किस ने देखना था या किसने मेरी तारीफ करनी थी. हाँ माँ और बहने मेरी बोहत तारीफ किया करती थी. कहती थी मुझसे सूंदर कोई नहीं हो सकता. जिस दिन तू अच्छे कपडे पहनेगा और अपना सर्र बाल भी ठीक से कटवाएगा. उस दिन तुझसे सूंदर कोई नहीं दिखेगा.

पूजा दीदी की देखा देखि रानी भी मुझपर टूट पड़ी और चूमने लगी.

और मैं माँ और बहनो की यादों में खोने लगा. और मेरी ऑंखें नाम होती चली गई.

मेरे कपडे अभी खास नहीं थे लेकिन फिर भी में इन्तेहाई khub-soorat दिख रहा था.

आज माँ और बहने मुझे इस हालत में देखती तो कितनी खुश hoti.unki हसरत थी मुझे सबब से khub-soorat देखने की और पता नहीं के क्या मुझसे से वो चाहती थी इतना प्यार मुझसे करती थी..




""अगर वो किसी रियासत की मलिका होती तो शायद मुझपर वार देती.""




मुझसे बढ़कर कौन था उनकी लाइफ में और मेरे लिए पूजा दीदी और बाकी की साड़ी लेडीज भी ख़ास थी लेकिन माँ और बहनो के बगैर ये भी मुझे नहीं चाहिए.

वो चरों नहीं तो कोई भी nahi.meri आँखों से आंसू बहते देख पूजा दीदी ने मेरा सर अपनी छाती से लगा लिया शायद वो समझ गई थी क मैं इस वक़्त कहाँ चला गया हूँ.

मैंने खुद पर कण्ट्रोल कर पूजा दीदी को एक चुटकी काटी.

पूजा दीदी "ोीीीी माआ" करती मुझसे अलग हुई और मुझे घूरने लगी.

मेरी आँखों में आंसू थे लेकिन अब्ब दर्द इतना नहीं था.




पिछले 5 दिनों में मिलने वाले an-ginat झटके hi बोहत थे मुझे सँभालने के लिए.




पूआज दीदी और रानी ये दोनों भी तो मेरी तितलियों में शामिल हो गई थी.

जैसी वो वैसी hi ये दोनों भी बन चुकी thee....reena हम तीनो का प्यार देख हैरान भी थी और इमोशनल भी.

कभी कभी तो ऐसे सन क्रिएट होते sar-e-aam वर्ण घरों में आम होते हैं लेकिन हर घर में नहीं होते.

जिन घरों में भगवन ख़ुशी देता है वहां hi ऐसे सन देखने को मिलते hai.aur आज कल भगवन की नज़र हमारे ghar(pooja दीदी का ghar)par थी. तो खुश कैसे न होते हम.

कुछ देर तक हम तीनो hi एक दुसरे को प्यार करते रहे. रीना के चुटकी बजने से हम ने उस की तरफ देखा.

रीना .... बास करो तुम तीनो तो ऐसे लगे हो जैसे क गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड मिल रहे हैं. तौबा है कितनी देर हो गई है. बास करो कोई कस्टमर आ गया तो बात को कोई और रंग न दे दे बाकी का घर जा कर lena.(phir पूजा दीदी को आंख मरते huye)pooja तेरा दूल्हा तो तैयार हो गया. आ अब्ब तुझे भी दुल्हन बना दूँ चल बैठ चेयर पर. पूजा दीदी झींप गई और हल्का थप्पड़ रीना के पिछवाड़े पर दे मारा..

रीना ... क्या है ऐसे क्यों मार रही है...

पूजा दीदी रानी को चेयर पर बिठाते हुए बोली.

पूजा ... अब्ब इस को भी तैयार कर. देख इस का चेहरा कैसे मुरझा गया है.

फिर रानी पर भी डेढ़ घंटा लगा और रानी भी चमकने lagi.rani बोहत शर्मा रही thi.lekin अब्ब टाइम बोहत हो गया था. अभी तो बाजार भी जाना था और शॉपिंग भी करनी थी. पूजा दीदी ने रीना से पूछ कर मुझसे पैसे लिए और रीना को दे कर हम बज़ाएर के लिए निकल गए....

बाजार में हमें दो घंटे लगे. जितने पैसे थे उस हिसाब से लिए लेकिन अच्छे कपडे लिए. पूआज दीदी ने मेरी लिए आज के हिसाब से 2 जींस, 2 शर्ट, एक

t-shirt एक ट्रॉउज़र li.maine भी रानी और पूजा दीदी के लिए एक एक सूट ले liya.expensive कुछ भी नहीं लिया जा सकता था इस लिए नोडल लेकिन अछि क्वालिटी के ख़रीदे थे.

पैसे वक़्त से पहले न ख़तम हो जाएँ इस लिए बाकी का बाद में सही. अभी हमने कौनसा किसी की शादी पर जाना था. जो अपनी पॉकेट खली कर जाते. अपनी हैसियत में रह कर जो लिया जा सकता था लिया और ले कर घर की तरफ निकल पड़े. थक चुके थे तो इस लिए एक रिक्शा पर बेथ हम अपने घर pohnche.rikshaw वाले को कराया दे कर हम अपने कमरे में गए.

पूजा दीदी भी हमारे hi कमरे में रह गई. दौड़ने लड़कियां आते hi खटिया पे देह गए.

बेचारी रेशम के धागे जैसे नरम शरीर वाली लड़कियां थकती न तो और क्या karti...dono का hi मारे थकावट के बुरा हाल था.

पद्मा आंटी लगता है मालिकान के पास hi होंगी, वही रहना चाहिए आंटी को जब्ब तक अजित भैया नहीं ा जाते अब्ब उनके लिए अकेला रहना ाचा भी नहीं था, इमोशनल न जाएँ कही.

10 मिंट की रेस्ट के बाद रानी उठी और पानी लेकर आ gai."samajhdaar जो थी"

या पता नहीं खुद की पियास बुझाने के लिए वो सारा पानी खुद के लिए hi ले क्र आई हो. क्या पता

फिर रानी ने पहले पूजा दीदी को पानी दिया पूजा दीदी हम में बड़ी थी तो उनकी रेस्पेक्ट तो बनती hi है. उसके बाद मैंने पानी पिया फिर रानी ने खुद पानी पिया.

मतलब सबब को पीला कर आखिर में खुद पि रही hai.(good गर्ल)

तमाशा मेरा और रानी का बना था और थकावट पूजा दीदी को ज़यादा हो रही थी.

वो खटिया से उठने का नाम hi नहीं ले रही thi.paani पि कर फिर से लेट gai.shayad यही सोने का मैं हो.

11 बजे हम घर से निकले 4 घंटे पार्लर और फिर 2 घंटे बाजार में लग गए the.sach है फिर तो पूजा दीदी का थकना बनता hai.maine रानी की तरफ देखा वो बोहत hi सूंदर दिख रही thi.mujhe अपनी तरफ देखता हुआ पाया तो फिरसे शर्माने lagi.aur मैं हसने लगा.

विजय.... मुझसे क्यों शर्मा रही हो. (पागल लड़की)

पूजा दीदी सच में hi सो गई थी. और रानी की भी कुछ ऐसी hi हालत थी.

मैं उसे भी रेस्ट करने का बोल कर ऊपर वाले पोरशन में चला गया.

वहां आंटी और मालिकान अपनी बातों में लगी.

(उफ्फफ्फ्फ़ इतनी बातें कहाँ से आती इन औरतों के दमाग में)

मुझे देखते hi दोनों की दोनों अपनी बातें भूल गई और लगी मुझे चक्कर चक्कर dekhne.(saala मैं तो भूल hi गया था क मैं तो आज चिकना मुंडा दिख रहा था) अब्ब ये दोनों भी पता नहीं मेरा क्या करने वाली थी.

(भाग ले बीटा यहाँ से या चेहरे पर टेप चिपका ले)

वही हुआ जिस का डर tha.padma आंटी उठी इससे पहले क मालिकान अपना नंबर लगाए पद्मा आंटी जीत गयी और मुझे जकड कर मेरा वही हाल किया जो पार्लर में पूजा दीदी और रानी ने किया था. अब्ब रिपीट करने से क्या hasil.(imagination hi काफी हैं)

दोनों ने मेरा चेहरा और भी khub-soorat बना दिया पहले रीना ने क्रीम लगा कर मेरा चेहरा चमकाया था. फिर पूजा दीदी और रानी ने अपने रसीले लिप्स वाटर से मस्सगे किया और अब्ब इन दोनों सीनियर लेडीज ने भी अपने "लिप्स वाटर" से मेरे चेहरे पर मस्सगे किया अब्ब तो मेरा और भी सूंदर दिखना लाज़िम था.



क्यूंकि "ओल्ड इस गोल्ड" मतलब?

{{पुरे लिप्स वाटर}} तू फिर मेरा चेहरा पहले से khub-soorat हुआ ना.

कहाँ पूजा दीदी और रानी का मिला कर 35 साल का {लिप्स वाटर}

और कहाँ पद्मा और मालिकान 70 साला {लिप्स वाटर} इसलिए "ओल्ड इस गोल्ड"

अब्ब मुझसे बढ़ कर सूंदर और कौन हो सकता है.......




10 मिंट तक दोनों ने अपनी ममता मुझपर ऐसे निछावर की क मेरा दिल बाघ बाघ हो गया. अब्ब मेरी इमोशनल वीकनेस भी चली गई थी.

ये अच्छा हुआ अब्ब मुझे आगे का सोचना chahiye.phir मैंने मालिकान से अखाड़े वाले पहलवान के बारे पूछा तो मालिकान ने मुझे सब बता दिया. लेकिन वजा भी पूछी तो मैंने बता दिया क खुद को मज़बूत बनाना है अब्ब में जवान जो हो रहा था.

तो ज़रूरी था क मैं खुद को मज़बूत बनाने के लिए अखाड़े पारर जाऊं.

मालिकान के कहने के मुताबिक़ वो पहलवान कई साल से यही रहता है और उस की फॅमिली की बड़ी रेस्पेक्ट है यहाँ.



{फॅमिली रेस्पेक्ट} तो सिर्फ उस बन्दे की होती है. जो खुद भी बोहत ाचा हो.

मतलब मेरा काम बन्न सकता था. अब्ब मसला मेरी आगे का था. मेरी आगे के लड़के ऐसे अखाड़े में दिखाई नहीं देते अखाड़े का काम बोहत hi हार्ड होता है.
 
अपडेट ::::::: 25

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अब्ब्ब टकककककक

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अब्ब मुझसे बढ़ कर सूंदर और कौन हो सकता है.......

10 मिंट तक दोनों ने अपनी ममता मुझपर ऐसे निछावर की क मेरा दिल बाघ बाघ हो गया. अब्ब मेरी इमोशनल वीकनेस भी चली गई थी.

ये अच्छा हुआ अब्ब मुझे आगे का सोचना chahiye.phir मैंने मालिकान से अखाड़े वाले पहलवान के बारे पूछा तो मालिकान ने मुझे सब बता दिया. लेकिन वजा भी पूछी तो मैंने बता दिया क खुद को मज़बूत बनाना है अब्ब में जवान जो हो रहा था.

तो ज़रूरी था क मैं खुद को मज़बूत बनाने के लिए अखाड़े पारर जाऊं.

मालिकान के कहने के मुताबिक़ वो पहलवान कई साल से यही रहता है और उस की फॅमिली की बड़ी रेस्पेक्ट है यहाँ.

{फ़माइली रेस्पेक्ट} तो सिर्फ उस बन्दे की होती तो जो खुद भी बोहत ाचा हो.

मतलब मेरा काम बन्न गया था. अब्ब मसला मेरी आगे का था. मेरी आगे के लड़के ऐसे अखाड़े में दिखाई नहीं देते अखाड़े का काम बोहत hi हार्ड होता है.


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अपडेट :::::::: 25

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अब्ब आएगजी

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जैसे क मुझे बाद में पता चला जब मेरी जोइनिंग हुई थी. तो गांड सच में hi फट गई थी. पहलवान ने मुझसे बोहत hi हार्ड कसरत करवाई थी मेरी फरमाइश parr.akhir मुझे Himmat-Wala जो ban'na था....

शाम होने वाली थी तो मैं आंटी और मालिकान को बोल कर फिरसे बहार निकल पड़ा अब्ब मेरा इरादा अखाड़े पर जाने का था. एक तरय करने में क्या हर्ज है. इस लिए मैं चल पड़ा अखाड़े की तरफ.

जब में अखाड़े में एंटर हुआ तो मुझे काफी बन्दे दिखे सूबा की निस्बत अब्ब ज़यादा थे.

मैंने इक 22-23 साला लड़के से पुछा पहलवान जी के बारे में वो साला जवाब देने की बजाये मुझे ऊपर से नीचे तक घूरने लगा.



ओह्ह्ह्हह अब समझ आया अब्ब में चिककणा जो दिख रहा था. ये तो मैं भूल hi गया था.

अब्ब मेरी आगे इतनी भी नहीं थी. और ऊपर से मैंने अपने बाल भी कटवा कर काफी छोटे करवा लिए थे. और पूजा दीदी की फ्रेंड रीना ने मेरे चेहरे पर म्हणत करके मुझे और भी kam-umar बना दिया था...




अब्ब में एक kam-umar लड़का hi दिख रहा था. पहले तो बालों की वजा से कुछ बड़ा लगता था.

उस लड़के को छोड़ मैंने एक और बन्दे से पुछा जो 40 के aas-paas था उसने मुझे इशारे से एक कमरे की तरफ जाने को कहा, मैंने उस बन्दे को थैंक्स बोलै.

और फिर उस कमरे की तरफ चल दिया. कमरे का दूर ओपन hi था. अंदर पहलवान जी के साथ एक आदमी बैठा था तो मैं दूर पर hi खड़ा रहा, सोचा दूर नॉक करता हूँ लेकिन पहलवान ने मुझे देख अंदर बुला लिया एक साइड बेहतने को बोलै.

अंदर कमरे ने एक कालीन बिछा हुआ था. मैं उस पारर बेथ गया.

10 मिंट तक पहलवान जी उस बन्दे से बात करते rahe.phir वो बाँदा चला गया'

तो पहलवान ने मुझे अपने पास बैठने का इशारा किया.

पहलवान जी की बॉडी किसी ववे के रेसलर के जैसी थी.



पहलवान .... बोलो बीटा क्या काम hai"pehlwan बोहत hi अचे से बोलै"

विजय ...... पहलवान जी मुझे भी यहां पर कसरत करनी है. इस लिए आया हूँ.



पहलवान मुझे देख मुस्कुरा दिया लेकिन पहलवान की मुस्कान में बड़ों वाला प्यार था जो अपने नादान बच्चों के मोहन से कोई बड़ी बात सुन लेते हैं जो बचे कर नहीं paate.waisi hi मुस्कान thi.mujhe बुरा नहीं लगा. और लगता भी क्यों मैं तो आया hi अपने मतलब के लिए था. अब्ब तो जो भी हो जाए मुझे तो अपना निकालना था.

पहलवान ..... बीटा यहाँ पारर तुम जैसे लड़के कसरत नहीं कर सकते .

विजय ....... क्यों पहलवान जी क्यों नहीं कर सकते.

पहलवान ..... बीटा अभी तुम बोहत छोटे हो और ये सब बोहत hi दर्द और तकलीफ देने वाला काम होता है और वैसे भी तम्हारी आगे भी बोहत कम् है.

विजय ...... पहलवान जी मेरी आगे hi कम् है. पारर में इतना भी कमज़ोर नहीं हूँ क दर्द और तकलीफ बर्दाश्त न कर सकूं....

पहलवान .... नहीं बीटा ये तुम्हारे बास का नहीं और मेरा दिल कैसे मानेगा अगर तुम्हारा कोई jod-shod हिल गया तो में कैसे तुम्हारे घर वालों को जवाब दूंगा.

मैंने कोई बात नहीं की और अपनी कमीज उतार दी फिर अपनी शलवार भी लूसे कर के अपने पिछवाड़े तक नीचे कर के अपनी बैक पहलवान की तरफ करदी.




"पहलवान मुझे ये सब करते देख हैरान हो रहा था"




लेकिन फिर जैसे hi पहलवान की नज़र मेरे ज़ख्मो पारर गई. तो अपना सर्र पीट कर रह गया. मेरे ज़ख़्म hi इतने थे. चाहे हालत अब्ब कुछ बेहतर थी लेकिन ज़ख़्म थे ज़रूर. फिर मैंने अपनी शरवर ऊपर कर के बाँध ली. और कमीज भी पहन ली.

पहलवान सोच में डूब गए the.maine भी कुछ नहीं बोलै और अपनी जगा बेथ गया.

कुछ देर बाद पहलवान जी बोले.




पहलवान..... बीटा ये सबब क्या है इतने ज़ख़्म तुम्हारे मुझे तो देख कर यकीन hi नहीं हो रहा aaj-kal कोई ऐसा भी करता है क्या, और तुम्हारी आगे भी इतनी कम् hai.kaun तुम्हारे साथ ऐसा कर सकता hai.kaun इतना ज़ालिम हो सकता है..

और बीटा तुम यहाँ के लगते भी तो नहीं हो "कहाँ से आये हो."



विजय ...... पहलवान जी मैं इक सरए में रहता हूँ.. और यहाँ मेरा कोई नहीं है. मेरी फॅमिली मुंबई में रहती है.

पहलवान .... फिर तुम यहाँ किस लिए आये ho...aur नाम क्या है तुम्हारा??




विजय ...... पहलवान जी साड़ी बात तो मैं आपको बता नहीं सकता, बास इतना बता सकता हों क मेरी फॅमिली खतरे में है और मुझे इतना मज़बूत बनना है क मैं अपनी फॅमिली की रक्षा कर सकूं. और मेरा नाम विजय है...



"मेरी बात सुन पहलवान मुझे अजीब नज़रों से देखने लगे मैं भी पहलवान जी की आँखों दहकने laga"pata नहीं पहलवान जी को मेरी आँखों में क्या नज़र आया क उन्हों ने अपनी नज़रें hi फेर लीं.

कुछ देरर पहलवान जी खामोश रहे मैं भी नहीं bola...maine जो बोलना था मैंने बोल दिया tha.abb पहलवान जी ने बोलना tha...kuch देर की ख़ामोशी पहलवान जी की आवाज़ से टुटी..

पहलवान..... बीटा मुझे तुम्हारी बात पर यकीन आ गया है. तुम्हारी ऑंखें देख कर मैं समझ सकता hoon....baat कुछ ज़यादा hi घम्बिर है लेकिन अब्ब मैं तुम को यहाँ से जवाब भी नहीं दे सकता बाकी तुम यहाँ आ कर सबब सीख सकते हो पारर अगर तुम हिम्मत हार गए तो फिर मैं कुछ नहीं कर सकता.

विजय .... (खुश होते हुए) पहलवान जी मुझे कुछ भी करना पड़े मैं करूंगा बास आप अपना हाथ मेरे सर्र पारर रख दें. मैं कुछ भी करने के लिए तैयार hoon.(phir माँ और बहनो की याद आई तो दिल का दर्द एक बार फिर से आँखों में दिखने लगा) अगर मैं ये सबब ना कर पाया तो मेरी फॅमिली hi ख़तम हो jayegi....is'se अच्छा है मैं मर्डर hi जाऊं.. अगर मैं अपनी फॅमिली को बचने के काबिल hi ना बन्न सका. तू जी कर क्या करूंगा.

पहलवान ने मेरे अचानक से मेरे हाथ को थाम liya.(mere दर्द पहलवान को भी महसूस hua)acha आदमी जो था अगर कोई और होता तो कैसे समझ सकता था मेरा दर्द.

पहलवान...... बीटा मुझे बड़ी ख़ुशी हुई इतनी थोड़ी सी उम्र में भी तुमको अपनी फॅमिली की इतनी चिंता है. वर्ण आजकल कोण इतना सोचता है. साड़ी दुन्या तो मतलब परस्तों से भरी पड़ी है. बीटा मैं तुम्हें ट्रैन करूँगा. मुझे भी आज पहली बार अपने मतलब का कोई मिला है, कोई बात नहीं अगर तुम्हारी उम्र कम् है तो क्या हुआ, थोड़ी लेट सही पारर मैं तुम को बनाऊंगा. अब्ब हिम्मत तुमने करनी है, बाकी देखते हैं मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता hoon.beta अब्ब तुम जाओ और कल सूबा 5 बजे आ जाना.

विजय ..... जी पहलवान जी आपकी बड़ी मेहेरबानी.

पहलवान ... बीटा एक बात और है इस काम में तुम्हें खुराक की बड़ी ज़रुरत पड़ेगी. और इसके लिए पैसे भी खरच होंगे. कहाँ से लाओगे गे बीटा तुम इतने पैसे.

विजय ..... पहलवान जी मुझे नहीं पता कितने पैसे खर्च होंगे लेकिन आप फ़िक्र न करें मैं कुछ न कुछ ज़रूर करूँगा. आपका एक बार फिरसे शुक्रिया....

फिर मैं ख़ुशी ख़ुशी पहलवान जी पास से निकल कर घर की तरफ चल पड़ा.

अब्ब पैसों का भी जुगाड़ लगाना tha.kal राजा से मिल कर कुछ सोचता हूँ.

कुछ देर में मैं घर पोहंच gaya.kamre में रानी और आंटी थी मैं भी उनके पास जा कर बेथ gaya.pooja दीदी शायद जल्दी hi उठ कर ऊपर चली गई थी.

फिर हम ऐसे hi बातें करते रहे और आंटी की ज़यादा तर अपने गुज़रे हुए कॉल को ले कर थी कभी वो रोने लगती तो कभी भाई के मिलने की बात होते hi खुश होने lagti.....aise hi वक़्त गुज़रा फिर रानी और आंटी ने डिनर के लिए तैयारी शुरू करदी. आज पूजा दीदी और मालिकान हमारे कमरे में hi आ कर खाने वाली थी.

फिर ऐसे hi सबने डिनर किया. डिनर के बाद बातों में वक़्त गुजरने का पता hi नहीं चला और सोने का टाइम हो गया.

आज की रात हम तीनो के लिए बड़ी लम्बी थी. रानी और आंटी के लिए तो कुछ ज़यादा hi लम्बी थी उनका एक अपना जो कल उनसे मिलने के लिए आ रहा tha.aur मैं अपने कल के लिए सोच कर एक्ससिटेड था. अब्ब ये कल hi जा कर पता चलेगा.

अखाड़े में क्या होता है.

डोनर के बाद हमने अजित भाई को फ़ोन भी किया था. कुछ देर बार हुई ज़यादा नहीं कर सके वो रास्ते में थे और ट्रैन के शोर की वजा से और फिर कल वो यहाँ पोहचने hi वाले थे तो नार्मल सी बात चीत के बाद के कॉल डिसकनेक्ट करदी थी.



इक लम्बी रात के बाद मैं सूबा 5 बजे से कुछ पहले hi उठ गया था. हैरत है

सही टाइम पे कैसे उठ गया जब कह रात को बोहत लेट आँख लगी थी. चलो ाचा हुआ जो आंख खुल गई. साला मोबाइल कॉल फिर से रह गया था. पैसों की कमी की वजा से. वहां बाजार में कोई सस्ता मोबाइल नहीं मिला था इस लिए नहीं ले पाए.

आज राजा से कह कर कोई सस्ता सा फ़ोन लेते हैं शायद उसका कोई जानने वाला बेच रहा हो.

मोबाइल होता तो इतनी टेंशन नहीं होती. अलार्म लगा कर सोया जा सकता है. आज तो मेरी गुडलुक थी जो आँख खुल गई. वर्ण पहले hi दिन पहलवान जी से दांत पद सकती थी. ""अपना मक़सद ऐसे hi नहीं हासिल किया जा सकता जब्ब तक खुद की रूटीन न सही की जाये.""" ऐसे hi लेक्चर मिलने वाले थे आज पहलवान जी से लेकिन बच गया.




रात hi सबब को बता दिया था क मैं सूबा अखाड़े में जाने वाला हूँ इस लिए किसी को बताये बगैर hi अखाड़े की तरफ भाग निकला. ट्रॉउज़र टी शर्ट मैंने रात से hi पहनी हुई थी. जल्दी जाने के चककर में jaise-taise मोहन हाथ धोया और निकल लिया अखाड़े की तरफ.

मैं भाग कर जा रहा था था इस लिए सांस फूलने lagi.main जैसे hi अखाड़े में पोहंचा. वहां अभी कुछ hi बन्दे ए हुए थे. मैं रुक कर सांस लेने लगा और अखाड़े में चारों तरफ देखने लगा. कल मैंने सही से अखाड़े को नहीं देखा था.

1 एकर पर पहला हुआ अखाडा था जगा तो अछि खासी thi.ek साइड तीन कमरे बने हुए थे. लगता है पहलवान जी यहाँ नहीं रहते उनका घर टाउन में hi होगा.

मुझे एक आवाज़ सुनाई दी मैंने उस तरफ देखा तो पहलवान जी एक बन्दे के पास खड़े थे मुझे अपने पास आने का इशारा किया. मैं भी पहलवान जी की तरफ चल diya.jab वहां पोहंचा तो

पहलवान:- बीटा तुम तो अभी से थक गए हो. अभी तो बोहत कुछ करना है.




विजय :- पहलवान जी आज पहला दिन है ना. धीरे धीरे आदि हो जाऊँगा. आप बताएं मुझे काया करना है.




पहलवान:- मुझे देखने लगे फिर मुस्कुरा कर kaha"is पूरे अखाड़े के चक्कर लगाओ, जब तक तुममे दम है. जब थक जाओ तो मेरे पास आना."

मुझे पहलवान जी की आँखों में और आवाज़ में कुछ ऐसा लगा जैसे वो मुझे इतना थका हुआ देख कर ये समझ रहे हैं जैसे मैं एक दो चक्कर में hi थुश हो जाऊँगा.

"हो भी सकता है मैं कोनसा भागने का आदि था. साला मेरा एक भी काम ढंग का नहीं था. मतलब आज फटनी लाज़मी है.

फिर मैंने एक बार पहलवान जी की तरफ देखा वो अभी भी मुस्कुरा रहे थे लेकिन उनके पास का आदमी मुझे हैरत से देख रहा था. उसे क्या पता मैं क्यों आया hoon.""maine भागना शुरू किया अखाड़े के चरों तरफ अंदर hi अंदर. थका हुआ तो पहले से hi था. मेरे अंदर अपनी माँ और बहनो को ले के जल रही आग और ग़ुस्सा तो था. लेकिन इतना स्टैमिना कहाँ से लाता. मेरी फटनी लगी.

अभी दूसरा चक्कर था और मेरी बास होने लगी. लेकिन पहलवान जी को मेरी हिम्मत देखनी थी और मुझे मेरे मक़सद में हिम्मत के इलावा और चाहिए भी क्या था.

भागते भागते तीसरा चक्कर जब शुरू हुआ तो ऐसा लगा सांस थम जाएगी और मैं गिर पडूंगा.



जब्ब ऐसी surat-e-haal आई तो मुझे पहलवान जी की मुस्करात और मेरी माँ और बहनो की दलदल में फंसे होने की याद आने लगी.

मैं थकता गया और मेरे सारे जोड़ हितले चले गए लेकिन मैं भागता रहा. कितने चक्कर हुए मेरा उस तरफ धयान hi नहीं था. मैं ज़िद्दी तो था hi लेकिन बात माँ और बहनो की थी तो कॉल का माररता आज यही मर्डर जाओं लेकिन जितनी हिम्मत है. आज मुझे और पहलवान जी दोनों को पता चल जायेगा.

कितना भागा और कितनी देरर भागा कितने चक्कर लगाए मुझे नहीं पता.

बास अचानक hi मैं धड़ाम से नीचे गिर गया और फिर मुझे नहीं पता क्या hua.girte hi आंख जो बंद हो गई थी.




जब्ब मेरी आंख खुली तो मैं पहलवान जी के कमरे में था और पहलवान जी के साथ वो दूसरा बाँदा भी था. मैं उठने लगा लेकिन मेरे बदन पर कपडे भी नहीं थे बास एक लुंगी लपेटी हुई मेरे सामान को छुपाने के लिए.

मेरा पूरा बदन ऐसे दर्द करने लगा जैसे एक एक जोड़ अलग हो गया हो.

और khaas-kar मेरी टांगें तो ऐसे लग रही थी जैसे हूँ hi naa.sunn सी महसूस होने लगी.



पहलवान जी मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रहे थे. और दूसरा बाँदा मुझे हैरानी से देख रहा था.



पहलवान:- बोहत अच्छे विजय बीटा बोहत हिम्मत दिखाई है तुमने, मैं तुमसे बोहत खुश हूँ. लेकिन बीटा अभी तुम्हारा स्टैमिना बोहत थोड़ा है. धीरे धीरे तुम मज़बूत बनोगे. लेकिन शुरू शुरू में इतना तेज़ मैट भागा करो पहले आदत पद जाने दो फिर तेज़ भागना. आज तो तुम्हारी हिम्मत देखनी थी इस लिए मैंने तुमको नहीं रोका लेकिन kal'se धीरे धीरे भागना. और मैंने आज तुम्हारे शरीर की एक आयल से मालिश है कुछ देर में तुम चलने लगो गए, अभी लेते रहो.

मैं कुछ नहीं बोलै मैंने तो पहलवान जी से ये भी नहीं पूछ सका क मैंने कितने चक्कर लगाए हैं. दूसरा बाँदा अभी भी मुझे hi घुर रहा था. मैंने उसकी तरफ देखा फिर पहलवान जी की तरफ तो पहलवान जी से समझ लिया क मैं क्या सोच रहा हूँ.

पहलवान:- विजय बीटा ये मेरा बोहत ाचा दोस्त रणजीत है is'se घबराओ मैट.

मैंने मुंडी हिला di.aur क्या कहता मैं. जो पहलवान जी को ठीक लगे वैसे भी अभी दर्द की वजा से मुझसे बोलना भी मुष्किल था.

पहलवान:- देखा तुमने रणजीत इस बचे को ???




रणजीत:- हैं यार मैंने पहली बार इस उम्र के लड़के को ऐसे भागते देखा है. कमाल है.. है क्या ये सबब जग्गू....




पहलवान:- हाहाहाहा मैं भी कॉल हैरान रह गया था जब्ब इसने कहा था क इसे कसरत करनी है. लेकिन कुछ तो बात थी इसमें इसलिए मैंने भी इसको बोल दिया आज आने का.

रणजीत:- मेरी तरफ देखने लगा. कुछ बोलना चाहता था लेकिन बोल नहीं प् रहा था. शायद मुझसे मेरे बारे कुछ जानना चाहता हो. लेकिन अगर पहलवान जी ने बताना होता तो बता देते इन लिए खामोश hi रहे और कुछ न पुछा....

फिर वो अपनी बातों में लग गए कोई 15 मिंट बाद मुझे अपने पैरों में कुछ हलचल सी महसूस हुई. मैंने अपने पैरों को हरकत दी कुछ दर्द हुआ लेकिन ज़यादा नहीं.

कोई ख़ास hi आयल था जिसने दर्द को निचोड़ना शुरू कर दिया था.

पहलवान जी ने मुझे देख कर kaha"abhi 10 मिंट और लेते रहो फिर खड़े हो जाना"

मैं और क्या करता बास हाँ बोल दिया. कुछ देर बाद रणजीत जी चले गए तो मैंने पहलवान जी रणजीत के बारे पूछा तो

पहलवान:- दोस्त है मेरा और पुलिस इंस्पेक्टर है इसी टाउन के ठाणे का. कभी कभी आ जाता है जब टाइम हो इस के पास.

विजय :- लेकिन वो मुझे देख कर कुछ पूछना चाहता था जैसे उस के अंदर कुछ चल रहा हो.

पहलवान:- बीटा अब्ब तुम जैसे लड़के को देख कर कोई भी सोच सकता है क उसे इतना कुछ करने की क्या ज़रुरत है. अभी तुम्हारी उम्र इस काम के लिए ठीक नहीं है न इस लिए, उसके मैं में सवाल तो ए गए hi.lekin दिलका बोहत ाचा है.. तुमको डरने की कोई ज़रुरत नहीं है..

ऐसे hi कुछ मिंट बाद पहलवान जी ने मुझे खड़े होने को बोलै तो मैं दररते डरते खड़ा हुआ लेकिन मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हुई और दर्द अब्ब और भी काम हो गया था.

मैं खड़ा हुआ और फिर मुझे मेरी ट्रॉउज़र शर्ट दिहकी मैंने वो उठा कर पहन ली.

पहलवान:- अब्ब तुम जाओ और अब्ब से अपने खाने पीने का ख्याल रखना.

फिर पहलवान जी ने मुझे क्या खाना है और किस चीज़ को खाने से परहेज़ करना है. सब डिटेल में बताने लगे.

कुछ देर बाद में मैं अखाड़े से निकला अभी भी दर्द था तो तेज़ चलने की बजाये में धीरे धीरे चलता हुआ उसी जगा जाने लगा जहाँ कल राजा से मिला था.

टाइम 7 के आस पास था मतलब एक घंटा बेहोश रहा. शायद आयल का कोई चक्कर शक्कर होगा. धीरे धीरे चलते हुए मैं अपनी मतलूबा जगा पोहंचा.

चरों वेहले वहीँ थे. मैं भी वहीँ पोहंच कर उनके साथ hi बेथ गया.

hello हाय के बाद राजा ने hi मुझे मेरी हालत से देख कर hi अंदाज़ा लगा लिया था क कुछ गड़बड़ है. उसने पुछा तो मैंने जो कुछ आज अखाड़े में हुआ सब बता दिया.....




सुन कर वो सबब चूतिये हसने लगे.......




कभी गए हूँ अखाड़े में तो पता चले "इनकी भी माँ चुद जाएगी."

साला हस्ते हैं मुझपर.....

विजय :- चुप करो सालो इतना हंस क्यों रहे हो कभी जाओ तो सही फिर पता चले. चलो यही 10 मिंट भाग कर दिखाओ फिर पता chale.gaand कैसे phat'ti है.

सब फिरसे हसने अलगे. इस बार में भी हस्स दिया. बात hi ऐसी थी.

शेर बनना कौनसा आसान था. गांड तो phat'ti hi है.........

विजय :- राजा पहला काम तो ये है मुझे कोई सस्ता सा मोबाइल लेना है.

राजा :- लेने की क्या ज़रुरत है पहले से hi कुछ पड़े हुए हैं अभी बेचे नहीं हैं तो घर पर hi पड़े हैं..




विजय :- साला सब कुछ है तुम्हारे पास. कोई गड़बड़ तो नहीं होगी ना???



राजा :- अरे गड़बड़ कैसी उस जैसे मोबाइल तो आज कल हर किसी के पास हैं. और वैसे भी कौन हर्र मोबाइल की कम्प्लेन करवाता है. हम भी वही चला रहे हैं. आज तक तो कोई चक्कर नहीं हुआ.....

विजय :- चलो जाते हुए मुझे दे देना और दूसरी बात 2 या 3 दिन के अंदर पैसों का जुगाड़ करना पड़ेगा. पहलवान जी कह रहे थे क मुझे कसरत के साथ अपनी खुराक भी बदलनी पड़ेगी और कुछ बना कर भी देंगे मुझे जिस पर बोहत पैसे लगते हैं. इस लिए पासिओं का जुगाड़ जल्दी hi लगाना है. अगर कोई हो सकता है तो बताओ. वर्ण शहर के दूसरी तरफ के किसी गुंडे को देखते हैं.

जीतू :- तो मरवाये गए साले. ो हीरो पहले खुद चलने के काबिल तो हो जा. इस काम को कुछ दिन लेट कर लेते हैं. कुछ और सोचते हैं.

विजय :- तो ठीक है तुम लोग सोचो मैं चला. राजा तुम मुझे मोबाइल कब डोज.

राजा :- चलो अभी चल के देता हूँ. चलो रे सबब अब्ब यहाँ क्या काम है अपना.

फिर सब उठ गए. मैं धीरे धीरे चल रहा था तो सब भी मेरे साथ धीरे धीरे hi चल रहे थे. कुछ देर लगी लेकिन हम राजा के घर पोहंच गए.

छोटा सा दो कमरों का मकान था. नार्मल हालत थी. राजा ने जो कुछ लोगों से लूटा था लगता है घर पर नहीं लगाया, तो क्या करता है फिर.

मुझे क्या करता होगा कुछ. हम राजा के घर में गए तो राजा ने मुझे एक कीपैड मोबाइल दिया. मैंने राजा को थैंक्स बोल के मोबाइल लिया और सबसे हाथ मिला कर घर की तरफ चल पड़ा.

अब्ब बस सिम लेनी थी. वो भी लेलेंगे. चल घर चल कर कुछ आराम करते हैं आज तो गांड बच hi गई.




ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह टेररररीीी माआआ कूऊऊओ चोऊ.......




साला मैं भूल hi गया अब्ब याद आया वो पुलिस वाला मुझे क्यों घूर रहा था और क्यों मुझसे कुछ पूछना छटा था.

मेरे कपडे पहलवान जी ने ranjeet(police वाला) के सामने hi तो उतारे थे तो इस का मतलब उसने मेरे सारे ज़ख़्म देख लिए हैं. ये तो हो नहीं सकता क पहलवान ने उसे न बताया हो एक तो पहलवान का दोस्त और ऊपर से पलिस वाला.

मतलब वो सबब मेरे बारे जान गया होगा.




पहलवान जी ने ये भी बता दिया होगा क मेरी फॅमिली खतरे में है.

कही कुछ गड़बड़ न हो जाये. पता नहीं कैसा बाँदा है. पहलवान जी तो कह रहे थे क दिल का अच्छा है. पुलिस वाला कर दिल का ाचा ""अजीब बात है."""

साला मेरा दिल कैसे माने कोठे सारे के सारे भरे पड़े हैं पुलिस वालों की aamdo-raft से ............कुछ लोचा न हो जाये........

मैं डर भी रहा था और पहलवान जी की बातों से दिल को कुछ कुछ तसल्ली भी मिल रही थी.

अब्ब मैं जो काम करने वाला था वो उससे कैसे चुप सके गए. वो पोलिसवाले है तो उसकी नज़र रहे अब्ब मेरे ऊपर वो जान जो गया है मेरे बारे सबब कुछ.


आने वाली नेक्स्ट दो उपदटेस धमाकेदार Hongi............Bohat Hi मज़ा आने वाला है Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaap Sabbbbbbbbbbbbb Kooooooooooo

वेटिंग फॉर नेक्स्ट
 
अपडेट ::::::::: 26

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अब्ब्ब टकककककक

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ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह टेररररीीी माआआ कूऊऊओ चोऊ.......

साला मैं भूल hi गया अब्ब याद आया वो पुलिस वाला मुझे क्यों घूर रहा था और क्यों मुझसे कुछ पूछना छटा था.

मेरे कपडे पहलवान जी ने ranjeet(police वाला) के सामने hi तो उतारे थे तो इस का मतलब उसने मेरे सारे ज़ख़्म देख लिए हैं. ये तो हो नहीं सकता क पहलवान ने उसे न बताया हो एक तो पहलवान का दोस्त और ऊपर से पलिस वाला.

मतलब वो सबब मेरे बारे जान गया होगा.

पहलवान जी ने ये भी बता दिया होगा क मेरी फॅमिली खतरे में है.

कही कुछ गड़बड़ न हो जाये. पता नहीं कैसा बाँदा है. पहलवान जी तो कह रहे थे क दिल का अच्छा है. पुलिस वाला कर दिल का ाचा ""अजीब बात है."""

साला मेरा दिल कैसे माने कोठे सारे के सारे भरे पड़े हैं पुलिस वालों की aamdo-raft से ............कुछ लोचा न हो जाये........

मैं डर भी रहा था और पहलवान जी की बातों से दिल को कुछ कुछ तसल्ली भी मिल रही थी.

अब्ब मैं जो काम करने वाला था वो उससे कैसे चुप सके गए. वो पोलिसवाले है तो उसकी नज़र रहे अब्ब मेरे ऊपर वो जान जो गया है मेरे बारे सबब कुछ.

अपडेट :::: :26

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अब्ब ाजी

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स्पेशल अपडेट ********************

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कुछ देर में मैं घर पोहंच गया, तो पता चला अजित भाई आ चुके हैं.

लेकिन सबब ऊपर पूजा दीदी के घर में थे. यहाँ इक कमरा था और वो भी कुछ ख़ास नहीं था तो पूजा दीदी का घर hi सही था. मैं धीरे धीरे चलते हुए ऊपर पोहंचा. तो सबब मुझे देख कर खुश हुए.

ख़ास कर अजित भाई और उसकी family..wo मुझे पहली बार इस नए रूप में देख रहे थे. अजित भाई मुझसे बड़ी hi garam-joshi से मिले और मिलते भी क्यों न आखिर मेरा एक hi तो दोस्त था और वो मुझसे बोहत प्यार भी करता था. दूसरा मेरी hi वजा से आज वो अपनी gum-shuda बेहेन को पाने में कामियाब हुआ tha.ajit भाई की आँखों में आंसू तो आने hi the.saath में मल्टी भाभी, शिखा, रूपा और राज भी रोने लगे.

राज तो अक्सर दूकान पर मिल जाता था लेकिन भाभी से बोहत काम में मिले था. उनके घर तो एक दो बार hi गया हूँ, मैं वो भी छुप कर रेखा बाई के डर की वजा से.

और शिखा और रूपा जब छोटी थी तो हम बोहत मिलते रहते थे. वो भी दुकान पर आती रहती थी लेकिन उस के बाद मुलाक़ात काम hi रह गई थी. लेकिन हमारा प्यार कम् नहीं हुआ tha.dono बहने तो मुझे मेरे क्यूट से रूप में देख कर हैरान भी थी और खुश भी. इतने वक़्त के बाद जो मिले थे.

अजित भाई के बाद मालती भाभी ने मुझे गले लगाया और बोहत प्यार दिया. मातलि भाभी का भी तो इस दुनिया में हामरे इलावा कोई नहीं था. वो मुझे भी अपना बच्चा hi समझती थी.

शिका और रूपा ने तो मुझे छोड़ने से hi मन कर दिया और राज बेचारा मोहन देखता रह गया. कब उसकी बारी आएगी और वो मुझसे मिलेगा. सबसे छोटा था

ना वो.

जब्ब उसने देखा क उसका नंबर नहीं आ रहा रो वो भी भाग कर अपनी बहनो के साथ शामिल हो गया...... सबब उसकी be-karai देख कर हसने लगे.

आज यहाँ एक मेले जैसा माहौल था. हर एक चेहरे पर हज़ारूं कहकशाओं की सी चमक थी. दिल जब्ब रोशन हो और चेहरे par-se दिखाई न दे ये कैसे हो सकता है. सबब के सबब खुश थे भगवन किसी की बुरी नज़र से बचाये और मेरी माँ और मेरी बहनो को इन सबब में जल्द से जल्द शामिल करदे.

जब भी ख़ुशी का माहौल होता है तो रहा नहीं जाता और दिल मचलने लगता है अपनी माँ और बहनो को भी ऐसे hi माहौल में देखने के लिए.

हसरत है और na-jaane कब तक हसरत hi रहेगी.......................:

पूरी भी होगी na-jaane पूरी नहीं भी होगी...............................:

be-karari है na-jaane कब तक be-karaar रहूँगा..................:

ख़तम भी होगी या कभी भी ख़तम नहीं ख़तम होगी.......:

क्यों नहीं होगी जब तब मेरी सांस चल रही है तब तक तो मैं अपनी माँ और बहनो को ऐसा माहौल na-de-sakoon....

फिर मुंबई शहर में ख़ुशी hi नहीं रहेगी... अगर मेरी माँ और बहनो को खुशी न मिली तो किसी को भी खुश रहने का हक़ hi क्याआ है.......

खुद को बड़ी मुश्किल से काबू में करके फिरसे सबब की ख़ुशी में शामिल हो गया.

दिल मचल रहा था. लेकिन इन सबब की ख़ुशी भी तो अपनी hi थी. ये अगर मेरे खुनी रिश्ते से कुछ नहीं लगते तो क्या हुआ. दिल तो सबब के दिल चुके हैं ना. खून मिलना ज़रूरी तो nahi..................agar इनसब का प्यार न मिलता तो मेरा क्या होता.


कभी कभी ऐसी सोचें भी दिल दहला देती हैं. इतने प्यार ने hi तो मुझे संभाला हुआ था. वर्ण या तो मैं दरिंदा बन्न जाता या मारा जाता.

पता नहीं abb-takk क्या हो गया hota....jitni बार खुद पर से कण्ट्रोल खोया था मैंने अगर ये सबब न होते तो खुश तो गलत मैं काट hi बैठता....

पूजा दीदी काफी देर से मेरे चेहरे को hi देख रही थी. वो जितनी nat-khat thi,jitna वो मज़ाक़ करती थी, जितने उसके स्टाइल थे, उतना hi हर पल बदल जाने वाले माहौल में मुझपर नज़र रखती थी. ऐसे जैसे मैं उसके लिए खुद पूजा दीदी से भी ज़यादा स्पेशल हूँ. इतना वो खुद का ख्याल नहीं रखती थी जितना अब्ब मेरा पूजा दीदी ने रखना शुरू कर दिया था...

पता नहीं क्यों ऐसा हो गया था पूजा दीदी और मैं इतना आत्ताच हो गए थे. अभी हमने इतना वक़्त भी तो एक दुसरे के साथ नहीं बिताया था....


कहा कहूं पूजा दीदी के बारे me......bass इतना hi कह सकता हूँ क माँ और बहनो के इलावा अगर कोई है तो पूजा दीदी है.

अजित भाई और उस की फॅमिली भी इतने सालों में मेरे दिल के उस खाने तक्क नहीं पोहंच सकीय जहाँ तक रसाई पूजा दीदी ने हासिल कर्ली थी.

पूजा दीदी ने मुझे अपने साथ ले करके अपने रूम में चली गई. कमरे में दाखिल होते hi पूजा दीदी ने मुझे गले से लगा लिया. आज मेरी आँखों में आंसू नहीं थे जितना भी दर्द था मैंने खुद में समेटा है था. अजित भाई या किसी को वो नहीं दिखा जो पूजा दीदी ने देख लिया tha.kuch तो ख़ास था पूआज दीदी में....


पूजा दीदी ने बास मुझे अपने गले से लगाया और कुछ नहीं किया. पूजा दीदी के दिल की धड़कन और मेरे दिल की ढकन एक दुसरे से मिलान करने लगी. और हम कुछ मिंट तक ऐसे hi रहे. मेरी साड़ी बेचैनी ख़तम होने लगी. फिर भी पूजा दीदी ने मुझे नहीं छोड़ा. मैंने भी पूजा दीदी को अपने मैं की करने दी जितना सुकून मुझे मिल रहा था. उतना पूजा दीदी को भी चाहिए था. मेरे पसस तो माँ और तीनो बहनो के इलावा अजित भाई की फॅमिली फिर रानी और पद्मा आंटी भी थी.

पूजा दीदी के पास तो माँ के बाद "मैं hi मैं" था.


हमें नहीं पता था क बाकी सब भी दूर पर खड़े हुए हमें hi देख रहे हैं और हमरे प्यार को देख कर उनकी ऑंखें नम्म होने लगी थी. सभी इमोशनल हो चुके थे. खुशियां ने रंग बदल लिया था. ये भी ख़ुशी का hi माहौल था लेकिन रंग अलग था. 20 मिंट तक हम ऐसे hi रहे फिर पूजा दीदी ने मुझे छोड़ा और मेरी आँखों में देखने लगी और मैं भी पूजा दीदी की आँखों में देखने लगा. हमारी आँखों में प्यार hi प्यार दिख रहा था. सभी कुछ भी बोले बगैर हमें hi देख रहे थे. कोई बोले भी क्यों जहाँ इतनी मोहब्बत इतना apna-pann दिख रहा हो.

वहां रंग में भांग कौन डालता है..... आज मालिकान को भी खुद पर गर्व होने लगा क उसकी लाइफ में भी कुछ ऐसे आ गए हैं जिन की बदौलत बाकी की लाइफ ख़ुशी से गुज़रे गई वर्ण दो जाने कहाँ इतनी ख़ुशी ख़ुशी ज़िन्दगी गुज़ार सकते हैं.


हमारे इस प्यार भरे मिलान को राज ने ख़राब कर दिया. वो अभी बचा था उसे क्या पता क यहाँ बोलना कितना गलत है. लेकिन राज ने हमारी तंत्र तोड़ दी. वर्ण हमने तो सदा ऐसे hi रहना था शायद. हमे कुछ याद रहता तो ird-gird के माहौल के बारे में सोचते.



लेकिन beda-gharak राज का जिस ने हमारे मिलान का satya-naash कर दिया.

मैं और पूजा दीदी ने दूर की तरफ देखा तो सब की ऑंखें नम्म थी.

हम समझ गए. राज चहकने लगा मुझे भी दीदी से ऐसे hi मिलना है.

सबब की ऑंखें नम्म थी लेकिन राज की बात सुनकर वो सब हस्स दिए.

पूजा दीदी ने राज को भी अच्छे से गले lagaya.aur उस का चेही भूम लिया. जिससे राज बोहत खुश हुआ....

कुछ देर बाद नाश्ता हुआ और उस के बाद सब फिरसे बातों में लग gaye.rani और पद्मा आंटी अजित भाई को छोड़ hi नहीं रही थी. सारा दिन ऐसे hi गुज़रा.

खुशियों से भरपूर.

दिल को जगमगाता हुआ दिन ख़तम हुआ और फिर रात शुरू हुई. डिनर के बाद वही routine...baatein फिर सोने.....

वैसे hi 5 दिन गुज़र गए मैं रोज़ सूबा उठ कर अखाड़े जाने laga.wahan पहलवान के बताये हुए के मुताबिक़ मैंने अपनी कसरत शुरू करदी. अभी आगे काम थी और मैं नया भी था तो उस हिसाब से जो हो सकता था मैं करता रहा. अब्ब मैं आदि होता जा रह था रनिंग का.

इन 5 दिनों में मेरे ज़ख़्म बिलकुल ठीक हो गए थे. कुछ पूजा दीदी की वजा तो कुछ पहलवान के आयल मस्सगे की वजा से वो रोज़ मुझे आयल मसाज करते मेरी सेहत पहले से काफी बेहतर हो गई थी.

इन 5 दिनों में राजा एंड पार्टी से भी रोज़ hi मुलाक़ात होती लेकिन अजित भाई की वजा से मैंने राजा को कम् hi टाइम दिया था.

इन 5 दिनों में मेरे साड़ी कहानी सबब ने hi जान ली थी. उस वक़्त पूजा दीदी रानी पद्मा आंटी मालिकान ने इतने आंसू बाह्य थे के पकडे hi इतने गीले हो गए क सूखने का टाइम hi नहीं मिल रहा था mujhe....hehehehe

रात पूजा दीदी ने मुझे अपनी बहन में भर कर सुलाया. फिर तो पूजा दीदी को आदत hi पद गई वो मेरे बगैर अब्ब सोना hi नहीं चाहती थी. मैंने aana-kaani की.

लकिन मालिकान ने बड़े hi प्यार ने मुझे मना लिया, मुझे भी ख़ुशी थी पूजा के साथ सोने की बास मालिकान की वजा से मैंने खुल कर हामी नहीं भरी थी.

अब्ब सच कहूं तो मैं भी पूजा दीदी का इतना आदि हो गया था. अब्ब अगर मैं अकेला सोने लगाऊं तो मुझे नींद hi ना ए.


रानी ने इस बात को लेकर बोहत दुहाई मचाई क मुझे भी अपने साथ शामिल करलो. कभी कभी वो ज़यादा hi ज़िद करने लगती.

तो उस रात नीचे गद्दे बिछा कर तीनो साथ मिल कर सो जाते. और बेचारी शिखा और रूपा हमारे मोहन hi देखती रह जाती और फिर सबब की हंसी तब्ब निकलती जब्ब राज भी ज़िद्द करने lagta.....bade hi प्यार में ये 5 दिन निकले......

पद्मा आंटी को हमने जाने नहीं दिया और मालती भाभी और बच्चो को यहीं रख लिया.

मैंने अजित भाई से अकेले में बात की थी क अब्ब वहां उनके लिए रिस्क है आपने मेरी माँ और बहनो पर धयान देना है तो रेखा बाई को शक न हो जाए और मल्टी भाभी और बचो के लील्ये खतरा हो सकता है.

जब मैं माँ और बहनो को लेकर यहाँ दिल्ली आऊँगा तो अजित भाई भी दूकान छोड़ कर यहीं शिफ्ट हो जायेंगे.

अजित भाई अपनी फॅमिली से दूर रहना तो नहीं चाहते थे लेकिन मेरी बात भी सही थी. फिर अजित भाई ने मालती भाभी से मश्वरा किया तो मातलि भाभी ने हाँ बोल diya.abb मातलि भाभी को पूरा एक परिवार मिल रहा था. वो कैसे इस मोके को हाथ से जाने देइ..

फिर अजित भाई वापिस चले गए और लाइफ भी अपनी रूटीन पर चलने लगी.

अजित भाई ने वहां से फ़ोन करके बता दिया था क माँ और बहने ठीक हैं.

मैं अपने रूटीन वर्क में लग गया अखाड़े जाना. और पहलवान जी जैसे कहते मैं वैसे hi करता मुझे कुछ खाने को भी बना कर दिया था पहलवान जी ने वो खाने से मुझमे काफी चंगेस आने लगे. पहलवान जी भी मुझे अपन मैंने लगे थे..

पता क्या था मुझमे जो भी मेरी लाइफ में आ रहा था.. मुझे छोड़ना hi नहीं चाहता था.....

पैसों के लिए राजा ने कह दिया था क पहले तुम खुद अपने आप पर फोकस करो उसके बाद पहले से सोचे हुए प्लान पर अमल करेंगे.

राजा और बाकी के तीनो ने भी राजा hi हाँ में हाँ मिलाई और मुझे पैंसन की टेंशन न लेने को कहा. पैसों का जुगाड़ वो चरों कर दी लिया करते थे. तो मुझे भी पैसे देने लगे. जिससे मेरा काम आसान होने लगा और मैंने भी हामी भर दी अब्ब हम दोस्त जो बन्न गए थे. और मेरे hi कहने पारर चरों ने टाउन में अपनी वैल्यू को अपग्रेड करना भी शुरू कर दिया था. जिससे बोहत फ़र्क़ पड़ा.

राजा, जीतू अनुपम और उदय की घर में भी और अपने आस पास रहने वालों में भी इज़्ज़त बढ़ने लगी. वो भी is'se खुश थे मेरे उसके साथ शामिल होने से वो बोहत खुश थे. पहले उनको कोई ऐसी बातें नहीं बताता था. जैसी मैं करता था काम बुरे थे तो क्या हुआ सोच समझ कर करने चाहिए जब्ब छोड़े नहीं जा सकते तो उनकी वजा से उनके घर वालों की इज़्ज़त क्यों कम् हो.

बड़ी जल्दी सारे मेरी इस बात को समझ गए थे.

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और फिर देखते hi देखते 7 महीने गुज़र गए. इन साथ महीनो ने मेरी पूरी लाइफ को hi बदल कर रख दिया. मेरा सबब कुछ बदल गया गया था.

मेरा क़द काठ मेरे दोस्तों से भी ाचा हो gaya.aur मेरा रंग रूप देखते hi देखते पहले से ज़यादा बदलते लगा अब्ब मुझे देख कर कोई नहीं पेचान सकता था जिस ने मुझे दिल्ली आने से पहले देखा ho.rekha बाई का अब्ब डर ख़तम हो चूका था. क्यों मुझे pehchan'na अब्ब आसान नहीं tha...apne चेहरे की चामल के बारे फिर कभी काऊंगा इन 7 महीनो ने मुझे कितना khub-soorat बना tha......kuch तो पेंडिंग रहने दो yaar...........................kabhi कभी सस्पेंस भी ाचा होता है.....

मेरे मुस्कले भी बनने लगे ज़यादा नहीं क्यूंकि अभी पहलवान जी ने असल कसरत शुरू नहीं करवाई थी.

लेकिन पहलवान जी की दी हुई खुराख ने बोहत काम दिखाया. पता नहीं वो kis-kis चीज़ को मिक्स करके मुझे कई नुस्खे बदल बदल कर खिलने लगे. मैं हार्ड से हार्ड कसरत करने के काबिल हो गया था. लेकिन अभी भी मुझे पहलवान जी ने वो नहीं सिखाया था जिस की मुझे असल ज़रुरत थी.

मुझे पहलवानी के daao-pech सीखने थे लेकिन पहलवान जी ने "अभी nahi-abhi नहीं" कह कर मुझे रोका हुआ था. मैं भी वैसा hi कर रहा था जैसे के पहलवान जी कह रहे थे. वो मुझसे बेहतर समझते थे. मुझे पहले किस चीज़ की ज़यादा ज़रुरत है.

इस लिए मैंने सोचना छोड़ खुद पर धयान देना शुरू कर दिया.......

अजित भाई इस बीच 3 चक्कर लगा चुके थे. और मेरा एक काम भी कर ए थे.

कोठे पर हर लड़की शोक से नहीं rehti.jabb कुछ कर पाने में नाकाम रहें तो खुद को हालत के धारे पर ढोड़ देती hain.lekin कोई होती हैं माँ और मेरी बहनो के जैसी जो कभी भी मौका मिलने पर वहां से नीकल भागना चाहती है. लेकिन मौका मिलता नहीं हर्र किसी को...

रेखा बाई के कोठे पर आज से 4 महीने पहले एक औरत को कहीं से खरीद कर लाया गया वो बेचारी भी माँ की तरह hi बेबस और लाचार थी. khub-soorti में वो माँ के बराबर थी. इस लिए रेखा बाई ने उसे अपने पास hi रख लिया.

उस औरत की आगे 31-32 के करीब थी और उसके दो बच्चे भी थे. बड़ी बेटी 10 साल की और बीटा 9 साल का था. उसकी कहानी भी वैसी hi thi.jaisi अक्सर देखने सुनने को मिलती रहती है ....

कोई नहीं था उन औरत का दुनिया में अपने बचो के सिवा. तो माँ ने उसे अपनी बेहेन बना लिया और बास फिर क्या था वो षुरूति और जहान्वी की तरह भी माँ की हो गई. उस औरत के बचे भी अपनी माँ की तरह samajh-daar थे. लड़का मेरी hi तरह अंदर hi अंदर जल रहा था. शामे मेरा करैक्टर था. माँ के सोर्स से उस ladke(anil) का राब्ता अजित भाई से हुआ. इस तरह माँ को मेरा पता चलता रहता था और मुझे माँ और बहनो का...

अब्ब माँ और बहनो की डिटेल क्या बताओं मैं आप सबब को.............

दलदल में पहँसे जैसे लोग होते हैं माँ और बहने भी वैसी hi थी.

जैसी मैं छोड़ कर आया था........................................

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Pooja-Didi-Special



इन 7 महीनो की बात ए और पूजा दीदी की बात न हो ये कैसे हो सकता है.

जो सबसे स्पेशल हो वो काम भी सबसे स्पेशल hi करेगी.

अब्ब हम सब परमानेंट hi ऊपर शिफ्ट हो गए the.neeche के कमरे बुक थे पिछले 4 महीनो से. इस लिए पूजा दीदी और मालिकान को खर्चे को ले कर कोई ख़ास टेंशन नहीं थी.

पूजा दीदी ने अपने कमरे के लिए एक बीएड ले लिए था. बीएड सस्ता था लेकिन फिर भी पूजा दीदी ने उसे saja-saja कर बोहत hi khub-soorat बना दिया था. जैसे लड़कियों के शोक होते हैं.

बीएड कभी कभी साउंड देता. तो पूजा दीदी भी लग जाती बीएड की रिपेयरिंग में जैसे पूजा दीदी को बीएड से भी प्यार हो गया है. वो tab-tak चैन से न बैठती jab-tab बीएड का साउंड बंद नहीं हो जाता...

लेकिन बीएड बेचारा क्या करे उसपे सोने वाले तीन थे और बीएड में इतनी कैपेसिटी नहीं थी जो रेगुलर काम दे सके इस लिए हरररर कुछ दिनों बाद वही साउंड, लेकिन मजाल है जो पूजा दीदी के चेहरे पर कोई भाव ए वो लग जाती फिरसे अपने काम पे ऐसे hi थी मेरी पूजा दीदी............................

पूजा दीदी जिससे एक बार जुड़ जाये या जो चीज़ एक बार पूजा से जुड़ जाये......... वो सस्ती हो या महंगी उसे अपना maan'ne लगती थी.............

मेरी तरह बीएड से भी पूजा दीदी को प्यार हो गया था..........

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अब्ब असल बात भी बता दूँ. वो ये है क अगर कबि ऐसे हालत ए क मैं एक कोठी का मालिक भी बन्न जाऊं तब्ब भी पूजा दीदी इस बीएड को नहीं छोड़गी. उस कोठी के व्विप बैडरूम में भी यही बीएड hoga.....kyunki इस बीएड पारर हम दोनों के pyaar,aatma और शरीर के महक जो रच चुकी थी. इसी बीएड पर हम कई महीनो से मिल कर सो रहे थे.

पूजा दीदी और मैं तो रोज़ hi एक साथ सोते थे. लेकिन रानी शिखा और रूपा की बारी थी एक एक कर के वो भी हम दोनों के साथ मिलकर सोती थी.

मतलब हर्र वक़्त हामरे बीएड पर तीन जानो का वज़न रहता था तो बेचारा बीएड क्या करे.............

अब्ब आती है बात सबसे स्पेशल काम की जो पूजा दीदी ने किया.

अब्ब जब्ब मैं पूजा दीदी का tha.......to मेरी माँ और बहने भी हुई पूजा दीदी की. अब्ब जितनी बेचैनी मुझे थी अपनी माँ और बहनो को ले कर. उतनी hi बेचैनी पूजा दीदी को भी थी.....................

अब्ब पूजा दीदी ने हर्र वो काम करना था जिससे मैं जल्द से जल्द माँ और बहनो को लेकर आऊं उनके पास.

कभी कभी पूजा दीदी मुझे ठेंगा दिखा देती क जब्ब माँ और बहने आएँगी तब्ब मुझे उनके पास भी भटकने नहीं degi.................maa और बहने सिर्फ पूजा दीदी की हैं na-ke मेरी..............

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बोहत नौटंकी होती जा रही थी पूजा दीदी. पूजा दीदी को सर्र पारर चढ़ाने के लिए एक बात और भी थी. भाभी, पद्मा आंटी और मालिकान के बाद पूजा दीदी सबसे बड़ी थी. तो कभी कभी ऐसे मूड में आती जैसे वो इस घर की हाकिम hoon....aur हम सबब उसके ग़ुलाम और स्टाइलिश अंददज़ में सारा दिन आर्डर पे आर्डर जारी रहते और मजाल है किसी के क कोई छुऊँ भी कर jaye.......is सबब में राज भी बोहत खुश था पूजा दीदी के प्यार की वजा से......... राज को जो बात पूजा दीदी में दिखती वो अपनी बहनो में नहीं दिखती thi...jis की वजा से खूब शिका और रूपा अपने भाई राज को तंग karti...aaur बनावटी तस्वाय bahati..........pooja दीदी ने इस घर को एक जन्नत बना दिया tha................aisa मुझे लगता है....

सॉरी पूजा दीदी की तारीफ में असल बात तो भूल hi गया.... तो मैं कह रहा था क पूजा दीदी ने हर्र वो काम करना था जो मेरे लिए और मेरी फॅमिली के लिए बेस्ट हो..

पहलवान भी जो न सका इन सात महीनो में वो काम किया था पूजा दीदी ने.

पुजा दीदी ने मुझे इन 7 महीनो में मुझे पढ़ना लिखना सीखा दिया था.

अब्ब स्टूडेंट मेरे जैसा हो जिसकी हसरत रही हो पढ़ने की और दमाग का भी तेज़्ज़ हो और उसपर से टीचर पूजा दीदी जैसी हो और कमाल न हो ये तो पॉसिबल hi नहीं है.

मैं इन 7 महीनो में इंग्लिश में मास्टर हो गया था. कसरत के इलावा कोई काम भी नहीं था तो पूजा दीदी ने जॉब छोड़ दी सिर्फ मेरे लिए... ta-ke मैं जल्द से जल्द कुछ बन्न जाऊं और अपने मक़सद में कामियाब ठहरूं...

पूजा दीदी ने दिन रात एक करके मुझे इस काबिल बना दिया क मेरी आगे के लड़के अगर मुझसे कॉम्पिटिशन रखें तो मैं जीत jaaonga.bhale hi मैं डिग्री होल्डर न sahi.lekin काबिल तो था hi और उस पर से पूजा जैसी टीचर.....

इस में मेरी काबिलयत काम है और पूजा दीदी का प्यार ज़यादा अगर कॉम्पिटिशन हुआ तो ये मेरा नहीं पूजा दीदी के प्यार और म्हणत का कॉम्पिटिशन होगा.

फिर ये कैसे हो सकता है क मैं हार जाओं. मुझपर पूजा दीदी ने इतनी म्हणत की थी. अगर उनका सागा भाई भी होता तो इतनी म्हणत उसपर भी न करती पूजा दीदी.

और मेरी हॉरर मतलब पूजा दीदी की हॉरर और मेरे रहते पूजा दीदी हॉरर jaye..main शर्मा से hi मर्डर न जाओंन.......

अब्ब मेरा चेहरा हर्र दम शांत रहता था सिर्फ मेरी आँखों में दर्द दीखता था लेकिन अब्ब मेरा ग़ुस्सा मेरे कण्ट्रोल में था... ये पहलवान जी की दी हुई ट्रेनिंग या खुराक का असर नहीं tha....ye सिर्फ पूजा दीदी के प्यार का असर tha...aur प्यार रंग न लाये ये मुमकिन nahi........kuch प्यार खास होते hain......aur कुक प्यार करने वाले...................

ये था वो कमाल जो पूजा दीदी ने किया था. पूजा दीदी के जैसा कोई हो hi नहीं sakta.agar है तो बताओ............................

अभी भी कुछ सीक्रेट बातें हैं पूजा दीदी से रिलेटेड जो मैं 18+ के बाद बताऊंगा अभी मुमकिन नहीं..... सॉरी....

रानी ने भी शिखा और रूपा के साथ पढ़ना शुरू कर दिया था घर पर hi रह कर.

अजित भाई का काम ाचा था तो अचे पैसे भेज दिया करते थे. जिससे घर में कोई टेंशन नहीं थी.

शिखा रूपा और राज ने पास में hi एक स्कूल में दखल ले लिया था.........

मालिकान पद्मा आंटी और मालती भाभी के साथ भी मेरी बोहत hi अछि गुज़र रही थी. उनकी डिटेल नहीं बतौँगा आप सबब भी सोच रहे होंगे और पता नहीं क्या क्या बताऊंगा..................

मैं अभी तक राजा के साथ नहीं गया था किसी भी काण्ड me.wo मुझे छोड़ खुद hi जाते थे. लेकिन अब्ब मेरे जाने का टाइम आ गया था....

लाइफ में बोहत कुछ करने का टाइम आ गया tha....wo वक़्त किसी be-lagaam घोड़े की भागे hi जा रहा tha.......aur मेरा उस be-lagaam घोड़े से भी तेज़्ज़ रफ़्तार और न थकने वाला ban'na था..............................

अब्ब ये तो वक़्त hi बताये क मैं किस हद्द तक्क खुद को दिकवेर करने में माकियाब होता हूँ.................................................................

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पता नहीं मैंने तो इस अपडेट को स्पेशल hi समझा है आप सबब के लिए ..

अब्ब ये अपडेट स्पेशल है या नहीं आप hi बता सकता हैं......
 
अपडेट :::::::::27

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लोकेशन: दिल्ली सिटी

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स्पेशल अपडेट:02

एक khub-soorat और हसीं लड़का दिल्ली शहर की एक सड़क के किनारे खड़ा था...

उस लड़के ने एक अंगड़ाई ली और फिर मुस्कुरा कर आसमान की तरफ dekha....jaise आज वो बोहत खुश हो....... चलो देखते हैं वो खुश क्यों है थोड़ा टाइम लगे गए..

उस लड़के को कुछ फासले पर एक टैक्सी कड़ी नज़र आई. लड़का टैक्सी के पास गया और टैक्सी के ड्राइवर वाली साइड के मिरर को नॉक किया. ड्राइवर का चेहरा दूसरी तरफ था. ड्राइवर ने पलट कर देखा तो उसे एक लड़का खड़ा नज़र आया ड्राइवर ने मिरर को नीचे किया और लड़के से बोलै "जी बाबू जी कहिये....."

उस लड़के ने टैक्सी ड्राइवर को एक एड्रेस बताया .......टैक्सी वाले ने वो एड्रेसस देखा फिर उस लड़के से रेंट फिक्स कर के उसे मतलूबा एड्रेस पर उतारने की हामी भर ली.

एक घंटे बाद टैक्सी वाले उस लड़के को मतलूबा एड्रेस पर पोहंचा दिया. लड़के ने टैक्सी ड्राइवर का शुक्रिया अदा किया और रेंट पाय कर दिया.

टैक्सी ड्राइवर ने अपना रेंट लिया और निकल लिया.

लड़के के सामने एक aali-shaan कोठी thi.us कोठी को देख कर लड़के के चेहरे पर एक मुस्कान आ gaai...fir वो लड़का चल कर उस कोठी के गेट के पास पोहंचा और गेट पर लगी घंटी बजा दी...

घंटी बजते hi...

एक gate-keepaer ने गेट की खिड़की खोल कर देखा तो उसे इक क्यूट सा लड़का dikha.....gate-keeper ने पहले तो लड़के को घोरसे देखा लड़का था hi इतना khub-soorat के जो भी देखे बास देखता hi रहे लेकिन फिर gate-keeper ने खुद को संभल कर उस लड़के से poocha....."ji बीटा जी किस्से से मिलना hai"to उस लड़के ने बता दिया क उसे kis'se मिलना hai"gate-keeper ने लड़के से उसका नाम पुछा और अंदर इण्टरकॉम पे बात करके लड़के को अंदर जाने को बोल दिया........

लड़का अंदर गया तो "एक मुअलज़िम ने उस लड़के को ले जा कर ड्राइंग रूम में बिठा दिया..."

ड्राइंग रूम बोहत hi khub-soorat था. हर्र चीज़ में क्वालिटी और नफासत thi.harr चीज़ एक्सपेंसिव थी.

लेकिन लड़के की khub-soorti और क्यूटनेस ड्राइंग रूम में राखी चीज़ों से कही ज़यादा थी. कहाँ वो लड़का और कहाँ ये इंसानी हाथों और मचिनेस की बानी हुई चीज़ें......

लड़का हुसैन में किसी राजकुमार से कम् नहीं लग्ग रहा tha...us लड़के के कपडे उसकी बड़ी पारर ऐसे जांच रहे थे क जैसे इस कपड़ों में इस लड़के के इलावा और कोई ऐसा khub-surat दिख hi नहीं सकता जिस कदर वो लड़का दिख रहा tha......kapde एक्सपेंसिव नहीं थे लेकिन सस्ते भी नहीं thi...us लड़के की बेहेन ने उस लड़के को स्पेशल इस ड्रेस में इस कोठी पर भेजा tha.shayad उस लड़के की बेहेन को भी पता था क लड़का इस ड्रेस में किसी प्रिंस से कम् नहीं लगता......

कुछ hi देर में एक लेडी दूर से अंदर आती हुई नज़र आई.

अंदर आ कर उस लेडी ने poocha.""ji कहिये किस्से मिलना है"""" लड़का सर्र झुका कर बैठा था. लेडी की आवाज़ सुनी तो लड़के ने सर्र उठा कर उस लेडी को देखा....

और बस्स्स

वो लेडी उस लड़के की mann-mohni सूरत पारर नज़र पड़ते hi कही खो सी गई..

"वो ये भी भूल गई थी क लड़के से कुछ पूछा tha"kya करती वो लेडी भी....

उसने आज तक ऐसा लड़का कहाँ देखा था उस लेडी के दिल में इक आवाज़ गूंजी..

"काश मेरा भी बीटा होता और इस जैसा hi khub-soorat hota.....wo लेडी कुछ बोलना hi भूल गई थी और उस लड़के के चमकते चेहरे को hi देखने में खोई रही....

वो सोचने लगी कितना हसीं लड़का है. मैं करता है देखती hi rahun....phir उस लेडी ने सर्र को झटक कर फिरसे लड़के की तरफ देखा.. लड़का उस लेडी को देख कर एक पायरी सी मुस्कान दे रहा था. जैसे वो उस लेडी को जानता हो और वो लेडी भी इस लड़के को जानती है. लेकिन फिर वो लेडी उस लड़के को पहचान क्यों नहीं पा रही थी.... शायद बोहत वक़्त बाद वो लड़का यहाँ आया हो. इस लिए उस लेडी को पहचानने में मुष्किल हो रही थी... लड़के की मुस्कान ने फिर से लेडी को अपनी तरफ अत्त्रक्ट करना शुरू कर दिया..

उस लड़के की मुस्कान ने उस लेडी के दिल के तार हिल्ला डाले. उसके दिल की धड़कन तेज़ होने लगी आज बोहत समय बाद उसके दिल ने फिरसे धड़कना शुरू कर दिया था...

कुछ वक़्त पहले hi एक झटके खा चुकी थी वो lady....badi मुश्किल से खुद को संभल पाई thi...lekin आज फिरसे वही हालत होने वाली थी..........

उस लेडी से उस लड़के की मुस्कान बर्दाश्त करना मुश्किल हुआ तो फिर उस लेडी ने लड़के की मुस्कान ने नज़र हटा ली. मुश्किल तो बड़ी हुई लेकिन कैसे भी करके उस लेडी ने लड़के की मुस्कान par-se अपनी नज़रें हटा hi लीं...

फिर उस लेडी ने लड़के की आँखों में देखना शुरू किया. अब्ब वो लेडी फिरसे उस लड़के की आँखों में खोने लगी. कुछ देर उस लड़के की आँखों में खोने के बाद उस लेडी को लड़के की ऑंखें जानी पहचानी लगने लगी और फिर उस लेडी ने उस लड़के को ghor-se देखना शुरू कर दिया..

काए मिंट तक वो लेडी उस लड़के की आँखों में देखती रही.. वो लड़का बास उस लेडी को प्यार भरी मुस्कान से hi देखता रहा.

फिर अचानक से उस लेडी के चेहरे के भाव बदलने लगे.... और वो चीखती हुई लड़के की तरफ बढ़ी और फिर उस लड़के के करीब पोहंच कर एक बार रुकी फिरसे उस लड़के को ghor-se देखा........ और फिर



"chaattakkkk"chaattakkk"



2 थप्पड़ उस लड़के के हसीं चेहरे पर जड़ diye....lekin लड़का बास मुस्कुराता hi raha....ladke को थप्पड़ की क्या परवा हो सकती थी भला....



लेडी फिरसे उस लड़के की आँखों में देखती एकदम से फिरसे चीखती हुई उस लड़के के गले लग gai......aur जोरर जोरर से रोने लगी........




उस लड़के को यकीन था क कुछ ऐसे hi hoga......aaj संडे था....

इस लिए वो लड़का संडे वाले दिन hi आया था क्यूंकि सभी घर पर hi थे.....

उस लेडी के चीखने और फिर रोने के साउंड से सभी भागते हुए ड्राइंग रूम में ए और फिरर उस लेडी को इक अनजान लड़के के गले लग कर रट देख सभी हैरान रह गए. आने वालों में 1 मर्द और दो लड़कियां थी...

बड़ी लड़की को कुछ पल लगे उस लड़के के चेहरे को पहचानने में लेकिन फिरर वो भी अपनी माँ की तरह चीखती हुई...


"bhaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii" बोली और जा कर अपनी माँ और लड़के के मिलान में शामिल हो gai.....abb माहौल बोहत hi इमोशनल और सुर्प्रिसिंग हो गया था....



जो मिल रहे थे उनके लिए इमोशंस से bhar-poor था. तो जो इस सिचुएशन को नहीं समझ पा रहे थे.. उनके लिए सुर्प्रिसिंग था...



अब रह गए एक मर्द और एक छोटी ladki....jab बड़ी लड़की ने "bhaiiiiiiiiiiiii"

कहा तो छोटी लड़की के दिल की धड़कन be-kaabu होने लगी उसने देरर किये बगैर hi उस लड़के को पहचान लिया था ......... और फिर वो भी चीखती हुई उसी मिलान में शामिल हो gai......abb ड्राइंग रूम में लड़का खड़ा मुस्कुरा रहा था और वो लेडी और दोनों लडकियां ज़र्रों से रो रही थी......




और मर्द बेचारा हैरान परेशां सबब को paagal-pann के दौरे पड़ते देख रहा tha..........usay लग्ग रहा था क किसी डॉक्टर को फ़ोन कर के बुलाना padega.us की फॅमिली इक अनजान लड़के को देख कर खुद पर से कण्ट्रोल खो कर पागलों जैसी हरकतें करने लगी थी.....

कुछ देर बाद वो लेडी उस लड़के से अलग हुई तो दोनों लड़कियों ने भी उस लड़के को छोड़ दिया.... फिर अचानक से बड़ी लड़की ने भी उस लड़के को थप्पड़ पे थप्पड़ मारने चूरू कर दिए और साथ में छोटी भी अपना हिस्सा वसूल करने लगी.....

लेडी बोलने लगी...... इस उल्लू को छोड़ना नहीं सारा मोहन सुजा दो इस का .......

इसकी हिम्मत भी कैसे हुई ऐसा करना के. मारो इसको tab-tak jab-tak कान पकड़ कर सूर्य न bole......jitna दर्द इसने हमें दिया है उतना hi इसको भी होने chahiye....ladka बास सिर्फ मुस्कुराये hi जा रहा था.. उसे पड़ने वाले थप्पड़ों की कोई परवा नहीं थी... उसे तो सिर्फ इन सबब का प्यार दिख रहा tha.......aur उसे प्यार के इलावा कुछ और क्या चाहिए था इस लेडी और लड़कियों से....




मर्द जो अकेला स्टुपिड पीपल के जैसे ऑंखें फाड़े सभी को देख रहा था.. उससे रहा नहीं गया और वो बोल पड़ा.....


""तुम सबब पागल हो गए हो क्या.. कौन है ये लड़का?????

लेडी:::::--- आपने इस लड़के को पहचाना नहीं क्याआआआआ???



मर्द:- अपनी बीवी की बात सुन्न शॉकेड हो गया... क्या मतलब???

मैं कैसे इसको पहचानोगे.... कौन है ये लड़का और पहले मैं कब इस लड़के से मिला हूँ.............




लेडी :- "ये विजय है हर्ष" पहचाना नहीं क्या आपने इसे........??

(((((((((((((वो लड़का और कोई नहीं मैं hi था.... मैं जब्ब यहाँ से गया था.


तब्ब hi मैं बना लिया था के इन भले और प्यार करने वाले लोगों से दूर नहीं rahunga..is लिए आज मैं स्पेशल यहाँ in-sab से मिलने आया था. अब्ब लाइफ नेक्स्ट स्टेज में दाखिल होने वाली थी .. और पहलवान और हर्ष चौहान जैसे प्यार करने वाले मुझे मेरे मक़सद तक ले कर jayenge...jab पहले यहाँ से गया था तब्ब प्यार से डरता था और मुझे क्या कुछ करना है और कैसे करना है. मैं सही से नहीं जानता था.. लेकिन अब्ब मेरी लाइफ में मेरी गुरु मेरी पूजा दीदी आ गई थी... और उस के रहते मैं किसी भी मुआमले में वीक रहूँ ये मुमकिन nahi.....main तो पहले hi आने वाला था लेकिन पूजा दीदी ने कहा था. अभी कुछ वक़्त ठहर जाओ.. तुम में चंगेस आ रहे हैं.. और अभी तुमको पहले खुद को अच्छे से बदलना होगा. फिर हर्ष चौहान की फॅमिली से मिलना.. और पूजा दीदी जो कहे वो मैं ना करून ये कैसे हो सकता है... मेरे और पूजा दीदी में कोई भी बात छुपी हुई नहीं है. हर्ष चौहान के बारे मैंने जल्द hi पूजा दीदी को बता दिया था ......

हर मिशन अकेला नहीं लड़ा जा सकता कुछ में किसी की मदद ज़रूरी होती है... और मेरा मिशन अब्ब मुझसे बढ़ कर पूजा दीदी का मिशन tha.......is लिए अब्ब हर्ष चौहान से मिलना ज़रूरी हो गया tha....pooja दीदी ने जो हर्ष चौहान से मिलने का कहा था ... हर्ष चौहान मेरे लिए ज़रूरी हैं... मैंने भी कहा... जो आज्ञा मेरे गुरु की...)))))))))))

हर्ष चौहान ऑंखें पहाडे मुझे देख रहा था...............
 
थैंक्स डिअर:

मैंने पूजा के करैक्टर को आप सब के लिए स्पेशल बनाया है

क्यूंकि विजय के साथ एक स्पेशल करैक्टर का जुड़ना बनता था...

विजय kam.umar था और उसे सँभालने के लिए पूजा हो होना ज़रूरी था

और स्टोरी को भी मज़े की बनाने के लिए भी एक ऐसे hi करैक्टर की ज़रुरत थी

ऐसा मुझे लगा........ अब्ब आप को कैसा लगा..

ये आप hi बता सकते हैं..

अगेन थैंक्स
 
थैंक्स फॉर 50

मेरा ख्याल है मेरी परफॉरमेंस अच्छी जा रही है.......

जल्दी hi 100 भी कर लूँगा..........

क्रीज़ पर किसी दत्ता रहुगा ....

और आउट होने से बचता रहूँगा टेंशन नॉट......

टेस्ट मैच की तरह ये भी एक लॉन्ग स्टोरी hai.......but

खेलूंगा इसे मैं किसी टी20 मैच की तरह hi...........

हर्र अपडेट में छक्कों और चौकों की bhar-maar देने की कोशिश

ज़रूर करूँगा......................

टेक care...bye
 
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