Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 9 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स..!!

मालती भी क्या करे.. जब्ब तक्क अजित के पास thi.uski छूट की खुजली मिट जाती थी. लेकिन अब्ब तो मालती की छूट ने पानी सही से न निकलने की वजा से रोना शुरू कर दिया है ..

रीना और तृषा के लिए ये लास्ट hi फंदा था.. अब्ब दोनों के लिए hi सही हो गया है..

शंकर इतना भी कम् कमीना नहीं है जो अपने दुश्मन को भूल जाये ...
 
थैंक्स फॉर हीरोइन..!!

विजय के लिए कुछ तो स्पेशल होना hi चाहिए था.. इतने दर्द जो सही हैं विजय ने तो ऐसी डेरिंग लड़की विजय के लिए तो स्टोरी में बनती hi थी....

अब्ब देखते हैं क महक विजय के काम आती है ..yaaaaaaaaaaa

विजय महक के काम आता है ...

दन्न के घर की साड़ी रंडियों के साथ विजय क्या करता है. वो स्टोरी में पता चलेगा
 
अपडेट :::: 44

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शाम को जब मैं घर आया तो....................

तो आज घर में बोहत कुछ बदला हुआ था ... पूजा दीदी और रानी ने जो कुछ तृषा के साथ किया था. उसकी वजा से दोनों hi कुछ खुश दिख रही थीं .....

और सब से ख़ास बात जो थी ... वो थी भाभी और पद्मा आंटी की सूबा के वक़्त छूट से छेड़ छड़ ... और फिर पूजा दीदी और रानी को भी सबब पता चल गया था . क मैंने उन दोनों के साथ क्या किया है ....

पद्मा आंटी और भाभी मुझसे नज़रें मिलाने की हिम्मत hi खो बैठी थी ... लेकिन आज उन दोनों की छूट ने धेरर सारा पानी भी उगलना शुरू कर दिया था .. शर्म के मारे सर्र नहीं उठा पा रही थीं .. लेकिन उन दोनों की छूट के किनारों पारर चुतरस उबाल उबाल कर बहार आने को बेचैन भी दिख रहा था .. अब्ब मैं उनकी छूट का रस कैसे निकालूँ.. वो तो दोनों खुद hi रात को एक दुसरे का निकाल सकती हैं ... लेकिन जो मज़ा लुंड से चुतरस के निकलने में है वो एक दुसरे की उँगलियों से या चाटने से तो नहीं आने वाला था ....

खाना शाना खा के मैं अपने रूम में गया .. आज के लिए भाभी और पद्मा आंटी के साथ इतना hi काफी था .. बाकी का फिर कभी कर लूंगा .. वो या उन दोनों की छूट और उन दोनों की छूट का पानी कौन सा कहीं भागे जा रहे हैं .. दोनों की खिंचाई फिर किसी वक़्त कर लूँगा ... अब्ब रानी और पूजा दीदी से पूछना ज़यादा ज़रूरी था क उन दोनों ने भाभी और पद्मा आंटी के साथ क्या किया है ...

जो भी किया होगा ... यकीनन बड़े hi मज़े का होगा सबब..

और मैं यही मज़ा लेने के लिए जल्द से जल्द कमरे में जा पोहंचा ....

जल्द hi दोनों भी कमरे में आ गई. और रानी कुण्डी लगते hi वही बेथ gai..aur फिरर पेट पकड़ कर हसने लगी............... रानी को हस्ता देख कर पूजा दीदी ने रानी को देखा क इसे अचानक से क्या हुआ है .......... लेकिन फिर जैसे hi सबब याद आया .... वो भी एक जम्प लगा कर बीएड पर कूदि .... और फिर वो भी पागलों के जैसे हसने लगी ..... मैं भी दोनों को हस्ता देख कर हसने लगा. मुझे पता चल गया क दोनों ने जो भी किया होगा .... बहत hi मज़े ले ले कर किया होगा ...

मैं बोहत hi एक्ससिटेड हो रहा था सबब जानने के लिए ... लेकिन हम तीनो का हंसना बंद hi नहीं हो रहा था ....

रानी अभी भी वही दूर के पास बैठे हंस रही थी ... रानी कमीनी को शर्म hi नहीं आ रही थी. अपनी hi माँ की छूट से मेरी छेड़ छड़ पर हंस रही थी और वो भी पागलों की तरह ........... रानी .... कमीनी कहीं की.........

10 मिंट बाद पूजा दीदी की हंसी थमी तो

waaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

पूजा दीदी की आँखों में हंसने की वजा से आंसू आ गए थे .... रानी का हाल भी कुछ ऐसा hi था.... दोनों हँसते हुए आंसू बहाये चेहरे के साथ अजीब सी दिख रही थीं ....

रानी :- विज्जु तुम तो मुझसे भी बड़े कमीने निकले ... मेरे kameene-pann का टाइटल hi तुमने मुझसे छिन्न लिया .......... इतना बोल कर फिरसे हसने लगी . और पूजा दीदी भी फिरसे हसने लगी ....

विजय :- अब्ब बस भी करो .. कितना हंसो गई .. तुम दोनों की hi आँखों से पानी निकलने लग्ग गया है ......

पूजा दीदी:- विजु तुमने देखा कैसे आज वो दोनों नज़रें झुकाये किसी मुजरिम की तरह बैठी हुई थीं ... विज्जु तुमने सच में आज बड़ा hi मज़ा करवाया है हम दोनों को .. क्या सन था वो .......... दोनों की hi छूट में छूट लेटर ... विज्जु तुम्हें लेटर बॉक्स नहीं मिला था क्याआआआ.

जो लेटर को उन दोनों की छूट में hi घुसा दिया .... ये बोल कर पूजा दीदी फिरसे पेट पकड़ कर हंसने लगी ......... मैं भी सूबा वाली इमेजिनेशन में चला गया ... मज़ा तो मुझे भी मिला था .. जब्ब मैंने दोनों की छूट में ऊँगली डाली थी ... लेकिन जो काम वो लेटर कर गया था. वो बड़ा hi अनोखा था .. सच में सोच सोच कर आज सारा दिन hi मैं दिल hi hi दिल में हँसता भी रहा था....

मैं बीएड पर बैठा तो रानी और पूजा दीदी ने मुझे पकड़ लिया और फिर दोनों hi मेरे कंधे पर अपना सर्र रख कर फिरसे हंसने लगीं ....

कुछ देर दोनों hi हंसती रहीं .. अचानक से पूजा दीदी खामोश हो गई. और मुझे बीएड पर लिटा कर मेरे लुंड पर बैठ गई .. और मुझे सीरियस हो कर देखने लगी.

पूजा दीदी:- विज्जु तुम हमेशा hi ऐसे रहना.. देख तेरे आज के एक hi काम ने हमारे अंदर के दर्द को कितना कम् कर दिया है. मुझे इतना हांसे हुए तो ज़माने hi बीत गए हैं... विज्जु आज तुमने जो भी किया वो बोहत अच्छा किया ... ऐसे hi घर में सबब को खुशियां baant'te रहना .. तुम्हारे ऐसा करने से सबब कुछ कितना अच्छा अच्छा लगता है. और ज़िन्दगी के भूल चुके रंग हमें भी मिलने लग्ग जाते हैं. वर्ण तो हमारी खुशियां को hi हमारे घर में ए साड़ियां बीत चुकी हैं..........

सूबा जैसे माँ और बहनो को याद करके मैं भी सीरियस हो गया था... अब्ब रानी और पूजा दीदी भी सीरियस हो गई थीं.

पुरे खुशियां जब्ब भी मिलती हैं तो दुःख को याद करना नहीं पड़ता .. दुःख खुद बा खुद hi याद आने लगते हैं . क काश हमारी खुशियों में वो भी शामिल hote.jo हमसे दूर हैं ....

विजय :- दीदी maa..priya..shuruti और जहान्वी भी अगर हमारी ऐसी hi खुशियों में शामिल होती तो कितना अच्छा होता ना ... आज वो सबब भी हमारे साथ ऐसे hi खुल कर और पेट भर हस्स लेतीं....

कभी दुःख में आंसू बहने लगते हैं तो कभी खुशियों में भी आंसू बहने लगते हैं ........................................... अज्ज फिर से बोहत दिनों बाद दूसरी बार मैं इमोशनल हो गया था ...... क्या करून दर्द है hi इतना क बर्दाश्त नहीं होता... लेकिन कैसी मजबूरी है मेरी ....... बर्दाश्त करने के शिव कोई रास्ता भी तो नहीं है मेरे paaaaaaaaaaaaassss.................'

मेरे दुखी रहने से माहौल अचानक से बदल गया. और पूजा दीदी और रानी ने मुझे चूम चूम कर हल्का करने की कोशिश शुरू कर दी ... लेकिन आज इतना भी आसान नहीं था ... आज बड़े दिनों बाद दर्द उठा था .. तो कुछ टाइम तो लगेगा hi.......

दोनों ने मुझे शांत करने के लिए वही पुराण हथकंडा उसे किया .. अपने कपडे उतार कर... मुझे गरम करने लगीं. जब्ब फ़र्क़ नहीं पड़ा तो मुझे भी नंगा कर दिया .. और फिर 30 मिंट तक्क चलने वाली गरमा गर्मी में सबब hi शांत हो गए थे ............ फिर मुझे सबब बताने लगीं क सूबा क्या हुआ था ....

रानी :- विज्जु तुमने जो किया था. सूबा हमारे ब्लाउज में जो चित डाली थी .. बी चांस आअज पूजा दीदी की आंख जल्दी खुल गई और फिर जब्ब उन्हों ने अपने दूध पर कुछ महसूस किया तो उसे निकल कर dekha..didid पेपर को देख कर समझ गई. क ये विज्जु ने hi डाला होगा .....

पूजा दीदी:- विज्जु मैंने जैसे hi लेटर पढ़ा तो एक बार तो मुझे सही से समझ नहीं आया लेकिन जैसे hi मेरी नींद का खूनर कुछ कम् हुआ तो मैंने लेटर को दोबारा से पढ़ा.. विज्जु बास फिर वही पेट में kah-kahe गूंजने लगे .. मैंने देरर न करते हुए झट्ट से रानी को उठाया.. और दोनों hi जल्दी से भाभी के कमरे की तरफ भागीं. वो दोनों अभी भी सो रही थीं. तो हमने दूर को थोड़ा सा बंद करके नॉक किया.. कुछ देरर में अंदर से उठने की आवाज़ आई. भाभी पहले उठी तो उसने खुद की हालत देखि और फिर जैसे hi उनको अपनी छूट में लेटर मिला. तो झट्ट से आंटी पद्मा को उठाया और भाभी की जैसे hi नज़र पद्मा आंटी की छूट में भी मौजूद लेटर पर पढ़ी .. तो दोनों hi एक दुसरे को देख कर हैरान हुई. क ये सबब क्या है.

हम दोनों hi दूर को थोड़ा सा खोल देख रही थीं.

जब्ब दोनों ने लेटर पढ़ा तो और भी ज़यादा परेशां हो गईं. मैं और रानी अचानक से कमरे में दाखिल हुई और उनके हाथ से दोनों लेटर छीन लिए....

विज्जु मैं तुम्हे कैसे बताओं क दोनों के चेहरे कैसे हो गए थे ... दोनों आधी नंगी सदमे की हालत में मुझे और रानी को देख रही थीं ... और कभी हमारे हाथ में पानी छूट से निकलने वाले लेटर को देखने लग जातीं..

रानी:- और विज्जु तब्ब बड़ा hi मज़ा आया मुझे उन दोनों के चेहरे देख कर ... मेरी माँ तो म्ररने वालों जैसी शकल बना कर अपनी छूट को छुपाये बैठी थी. उन दोनों को समझ hi नहीं आ रहा था क वो दोनों हमें क्या जवाब दें....

पूजा दीदी:- विज्जु दोनों की छूट और गांड की हवा hi बंद हो गई थी. दोनों हमारे सामने आधी नंगी बैठी थें. और दीदे पहाडे हमें देख रहीं थीं..

विज्जु फिर मैंने और रानी ने दोनों से सवाल किये ....

पूजा दीदी:- भाभी .. आंटी जी आप दोनों क्यों ऐसे नंगी लेती हुई थीं. और आप दोनों की शाल्वरें कहा हैं ...

रानी:- दीदी देखो तो सही माँ और भाभी की छूट पारर पानी कैसे खुश्क हो चूका है.. लगता है क रात भर दोनों hi एक दुसरे की छूट से खेलती रही हैं ...

पद्मा आंटी:- rrr.....raaa......rann.....raannnniiiii be.....bet....beti...y.ye.....t.tu...tum....ky..kyaaa बोल .. रही.. हो..

रानी:- माँ आप ऐसे हकला क्यों रही हैं. क्या आप दोनों ने एक दुसरे के साथ कुछ गलत किया है. मुझे सच बताओ माँ.... और भाभी आप क्यों इतनी परेशां हैं.. मैंने कुछ गलत बोलै क्या ...

भाभी बेचारी की छूट की हवा hi बंद थी तो कैसे बोलती.. मारे शर्म के उनकी बोलती बंद हुई पड़ी थी ... भाभी नंगी hi सकते की हालत में बैठी सभी को बारी बारी देख रही थी .. अभी तो लेटर की बात hi नहीं हुई थी. और वो इतना परेशां हो चुकी थीं ..

पूजा दीदी:- चलो वो सबब छोडो आप दोनों एक दूर के साथ जो मर्ज़ी करें हमें क्या .. आप दोनों की छूट है .. जैसे चाहें एक दुसरे को खेलने के लिए दे सकती हैं .. हमें तो बास ये बताओ क ये लेटर क्यों आप दोनों ने अपनी छूट में डाला हुआ था ....

रानी:- माँ आपकी छूट के अंदर से निकलने वाले लेटर पर भला क्या लिखा हुआ था .(रानी कमीनी सोचने का नाटक करते हुए)......... हाँ याद आया .. लिखा था क मेरी छूट का पानी मुझे चैन नहीं लेने लेता कोई तो इसे निकाल दे ...

माँ आप kis'se अपनी छूट का पानी निकलवाना चाहती हैं . अगर आप कहें तो मैं विज्जु से बोलों क वो आप की छूट से पानी निकाल दे ...

पद्मा:- na.....nahi...nahi...baw...bawli..hui..hai...kk...kyaaa.. mm.main....kyuun...vijju..se..apna..ppp...pppppp........pappppppp.. nahi...nahi.. ..mujhe.....kuch.......nahi..karwana.......

पूजा दीदी:- विज्जु तुम होते तो पद्मा आंटी की बोलती बंद होते देख कर तुम्हारे भी पेट में दर्द हो जाता. हमारा क्या हाल हुआ था . हम सही से नहीं बता सकतीं..

इस तरह से पूजा दीदी और रानी ने भाभी और पद्मा आंटी की बोहत ज़ियादा खिंचाई की...... भाभी की तो बोलने की हिम्मत hi नहीं रही थी.. और पद्मा आंटी तो बास नीचे बीएड की चादर को अपने पैरों की उँगलियों से hi कुरेदने में लगी हुई थीं ..

कुल मिला कर दोनों ने मेरे छूट लेटर से bhar-poor मज़े लिए थे.

रत देर तक्क हम इसी टॉपिक पर बात होती रही ...... फिर नींद आ गई तो सो गए ......

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बाद में जब्ब मुझे भाभी के बारे में पता चला था क वो क्यों मुझे देख कर हॉर्नी हो गई थीं.... आप सबब की सहूलत के लिए मैं आप सबब को बता देता हूँ..

जिस रात पूजा दीदी ने मुझे थप्पड़ मारे थे. और जिस रात हम तीनो ने खुद का पानी निकला था. उस रात की बात है.......... तो सुनिए

जैसे hi पूजा दीदी मैं और रानी कमरे में दाखिल हुए . तो भाभी ने shikha..roopa और राज को उनके कमरे में जाने को बोल दिया था......

और खुद हमारे कमरे के दूर के पास आ गई थीं. भाभी के साथ पद्मा आंटी और मालिकान भी थीं. वो बेचैन थीं क पूजा दीदी मेरे साथ क्या करने वाली हैं. क्यूंकि आज उनका ग़ुस्सा देख कर सबब की hi फटी हुई थी. मालिकान मेरे उनके घर में आने से पहले कभी भी अपनी बेटी से नहीं दर्री थी. लेकिन जैसे hi मेरे पेअर उनके घर में पधारे .. तो फिर जल्द hi मैं और पूजा दीदी एक दुसरे के ईंटे क्लोज हुए क पूजा दीदी इक नयी hi पूजा दीदी बन्न गई.. मालिकान पूजा दीदी के प्यार और ग़ुस्से वाला नया रूप देख कर हैरान तो बड़ी हुई लेकिन ग़ुस्से वाले रूप को देख कर खुद के कान लपेट कर साइड हो गई थीं............

मैंने पहले hi बताया था क पूजा दीदी का घर बास ावें hi है. जैसे कमरे के अंदर का हाल था. वैसे hi पूरे घर कर और फिर हर दूर का भी वही हाल था.

दूर से आंख लगा कर अंदर का सबब देखा जा सकता था...

जब्ब मुझे थप्पड़ पड़े तो तीनो hi डर गई लेकिन फिर जैसे hi मैंने अपना चोला बदला तो तीनो के hi होश उड़ने लगे. और तीनो की hi छूट ने टपकना शुरू कर दिया. मालिकान को ये तो पता था क साड़ी hi लड़कियां मेरे साथ बिना कपड़ों वाले खेल खेलती हैं. लेकिन मालिकान ने अपनी बेटी को कभी मेरे साथ इस रंग में नहीं देखा था. उनकी तो खुद की छूट को सूखे कई साल हो गए थे. लेकिन आज अपनी hi बेटी की छूट और मेरे लुंड को देख कर मालिकान की भी छूट ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.

तीनो की hi हालत अंदर के माहौल को देख कर ख़राब हो रही थी. मालिकान से रहा नहीं गया तो वो पद्मा आंटी और भाभी को ले कर अपने कमरे में चली गई.

वहां बैठ कर सबब ने अपनी तेज़ चल रही साँसों को काबू में करना शुरू कर दिया था...

मालिकान:- (तेज़ सांस लेते हुए और बेचैन होते हुए) हमने क्या सोचा था लेकिन वो तीनो तो बेशर्मो की तरह नंगे hi हो गए. इतनी जल्दी तीनो बदल भी गए. सारा ग़ुस्सा छोड़ कर raas-leela में लग गए वो.

भाभी जो मालिकान की हालत देख रही थी. उन्हों ने मालिकान की छूट को अपने हाथ से सहलाते हुए कहा

भाभी:- क्यों मालिकान आज तो आपकी भी सूखी हुई ज़मीन से हरा होना शुरू कर दिया. वाह क्या बात है. पूजा रानी और विज्जु की जो इस उम्र में भी आपका पानी निकाल दिया.....

अपनी छूट पर भाभी का हाथ पड़ते hi मालिकान siiiiiiiiiiii की सीस्की निकल गई.

पद्मा आंटी भी बोहत hi बेचैन हो गई थी. लेकिन वो अपनी छूट को दोनों के सामने सहलाने से परहेज़ hi कर रही थीं. लेकिन भाभी तो कई सालों से रेगुलर चुद रही थीं तो आज भाभी ने मालिकान और पद्मा आंटी के लिए कुछ प्लान बना लिया ...

और फिर भाभी ने दोनों से छेड़ छड़ शुरू कर दी .....

इस तरह से उस रात तीनो से hi लेस्बियन सेक्स किया... जो तीनो की hi लाइफ में पहली बार हुआ था. पद्मा आंटी और मालिकान छूट के ठंडा होते hi नंगी hi सो गई.

लेकिन भाभी के अंदर की गर्मी आज बोहत hi बढ़ चुकी थी. वो एक बार फिर से हमारे कमरे के दूर के पास आ गई.......

ये वो टाइम था जब्ब रानी मेरे लुंड के ऊपर किसी एक्सप्रेस ट्रैन के जैसी स्पीड से मेरे लुंड को घिस रहे थी. या अपनी छूट को घिसा रही थी. भाभी ने वहीँ अपने सारे कपडे उतारे और अपनी छूट से खेलने लगी.

भाभी एक शरीफ औरत थी .. लेकिन हमारा प्यार ऐसा था क सारे के सारे hi उस प्यार में बेशरम हो चुके थे. छूट और छूट का पानी इस घर के लिए स्पेसेल सोघाट बन गया था..... जब्ब शिखा और रूपा भी अपनी छूट को ले करके मुझसे खेलती रहती थीं. भाभी को सबब पता था लेकिन हमेशा से खुद पर काबू hi रखे हुई थीं . लेकिन आज उनका खुद par'se काबू ख़तम हो गया था. महीनो से खुल कर न छोड़ने की वजा से उनके अंदर की गर्मी बोहत बढ़ चुकी थी... हमारी raas-leela देखते देखते भाभी के अंदर का सारा पानी निकलने लगा. लेकिन भाभी के अंदर की गर्मी कम् होने की बजाये और भी बढ़ने लगी थी ..

अब्ब भाभी चूड़ी हुई औरत थी. लुंड लिए बगैर तो उनके अंदर की गर्मी काम होने से रही. पानी निकल जाने से कुछ सकूं तो मिलता hi है. लेकिन जब्ब तक लुंड को छूट के अंदर न महसूस किया जाए तब्ब तक्क कैसे भाभी की गर्मी ख़तम हो सकती थी............... भाभी हम तीनो को देखते हुए नंगी hi पानी बहा बहा कर थक गई. लेकिन उनकी छूट का geela-pann ख़तम नहीं हुआ........ और न hi उनकी छूट की गरमी ख़तम हुई .......

यही वजा है .. क भाभी मुझे देख कर हर वक़्त अपनी छूट को रिसने से रोक नहीं पाती थीं......

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सूबा जब्ब मैं उठा तो पद्मा आंटी और भाभी की hi याद पहले आई ...

मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई .. लेकिन फिर मैंने पूजा दीदी को अपने ऊपर से उठाया और रानी से साइड करके अपने कपडे ले कर बाथरूम में घुस गया ..

फ्रेश हो कर मैं अखाड़े के लिए निकल गया ..

मैंने सोच लिया था क जल्द hi भाभी और आंटी के लिए भी कुछ करूंगा .. भाभी की तो खैर थी .. लेकिन पद्मा आंटी सालों से अपनी छूट को ले के तरस रही थीं. उनको शांत करना ज़रूरी है .. आखिर वो भी तो हमारी hi फॅमिली का एक हिस्सा हैं ..

मैंने भाभी ..आंटी और मालिकान की छूट के बारे में सोचा था क उनको जल्द hi ठंडा कर दूंगा .. लेकिन हालत के बदल जाने से मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पाया................

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मुझे अचानक hi आगे की ट्रेनिंग के लिए राज सर .. sunil..abhay और आदित्य के साथ कहीं जाना पद गया ................. पहलवान जी के पास मेरी ट्रैनिग तक़रीबन काफी हद तक्क पूरी हो गई थी.....

अब्ब पहलवानी में जो कुछ सिखाया जाता है वो तो इतना कुछ है क मेरे कई साल लग जाएँ. लेकिन जितना मेरे लिए ज़रूरी था .... वो मुझे पहलवान जी ने सीखा दिया था .........

मेरी आगे की ट्रेनिंग के लिए ins-ranjeet और पहलवान जी ने मिल कर कुछ और hi सोचा हुआ tha...........abb देखते हैं मेरी आगे की ट्रेनिंग कैसे होती है और मेरी आगे वाली ज़िन्दगी में कितना बदलाव लाती है..

जब्ब मैंने घर वळून को ये बात बताई तो सबब खुश भी हुए थे.. लेकिन मेरी जुदाई से परेशां भी हो गे थे.... लेकिन मुझे जाना तो था ...

इसलिए घर वालों से अच्छे से मिल कर मैं अखाड़े की तरफ चल दिया .. मेरे पीछे पूजा दीदी की ऑंखें भी नम्म थीं.. कोई नहीं जानता था क मैं कितना समय लगा कर आऊँगा...

जब्ब मैं अखाड़े पोहंचा तो सबब hi तैयारी पूरी कर चुके थे ... मेरे पोहचते hi सबब जाने के लिए उठ खड़े हुए ... तो

ins-ranjeet:- विजय बीटा जाओ.. और मैं लगा कर अपना बेस्ट देकर और अपना बेस्ट लेकर hi आना... वापसी में एक सरप्राइज भी तुम्हारे लिए ंपजूद होगा .......

कुछ देर बाद हम सबब निकल पड़े मेरे नए ट्रेनिंग सेण्टर की तरफ ..

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आफ्टर 8 मंथ

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आज मैं 8 महीनो की ट्रेनिंग के बाद घर जा रहा था. मेरी हर किसम की ट्रेनिंग कम्पलीट हो गई थी ...... अब्ब मुझे किसी और किसम की ट्रेनिंग की ज़रुरत नहीं थी ... वैसे तो बोहत कुछ मेरे लिए सीखने लायक था .. लेकिन जो मेरे लिए ज़रूरी थी. वो मुझे सीखा दिया गया था. अब्ब मैं दुसरे लोगों के जैसे कई कई साल लगा कर तो ट्रेनिंग नहीं ले सकता था था .. जितना मेरे पास टाइम था .. उस टाइम में मैं जो कुछ सीख सकता था सीख गया था .. और जो सीखा था वो भी मेरे लिए इतना था ... क मुझे नहीं लगता था क मैं कभी किसी भी मैदान में मार खा जाऊँगा ..

मुझे लग्ग रहा था क अब्ब मैं अपने मिशन के लिए परफेट विजय बन्न गया हूँ ....

सबब ने hi मुझे बड़े अच्छे से और प्यार से अलविदा किया था. मेरे साथ वापिस आने के लिए कोई भी नहीं था .. मैं अकेला hi था ... ins-ranjeet इन 8 महीनो में मुझे मिलने नहीं ए थे. राज सर.. सुनील bhai..abhay और आदित्य थे जो मुझे पहले से जानते थे. लेकिन और भी कई लड़के थे जो वहीँ मुझे मिले थे...............

वापसी पर राज सर और तीनो मुझसे मिल कर कुछ इमोशनल हो गए थे . अब्ब 1 साल से हम साथ थे. ऐसे इमोशनल होना तो फिर बनता hi था. हम सबब एक दुसरे के आदि हो गए थे. लेकिन उनका अपना काम भी था .. और राज सर ने और भी लड़कों को ट्रेनिंग देनी थी ..

इसलिए हम सबब अलग हुए और फिर मैं घर वापसी के लिए निकल पड़ा.

अभी मुझे घर पोहचने में कई घंटे लगने वाले थे ...... तो मैं 8 महीनो की थकन को मिटने के लिए अपनी आंख बंद करके सो गया ...

मेरा पहला सफर दो घंटे का था जो मैंने एक बस में किया था. अब्ब इस वक़्त मैं ट्रैन के एक स्पेशल केबिन को बुक करवा कर सोया हुआ था. मुझे डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं थे.

एक लम्बी नींद के बाद जब मैं उठा जो मैंने बहार देखा तो अंदाज़ा हुआ क रात हो चुकी है. मैंने वृस्त वाच पर टाइम देखा तो

मैं सही टाइम पर उठा था. मेरा स्टेशन आने में बास 10 मिंट hi रहते थे.

ये जान कर मैं बोहत hi खुश हुआ क्यूंकि ये भी मेरी ट्रेनिंग का hi एक हिस्सा था. सोने से पहले टाइम को खुद के मंद में सेट करके सोया था. क इतने टाइम पे उठना है. हालांकि जितनी थकावट हो रही थी.... अगर मैं पहले जैसा होता तो शायद मेरी आंख न खुलती. लेकिन पहलवान जी की ट्रेनिंग और कसरत फिर खुराक ने मुझे बोहत hi बदल दिया था. लेकिन इन 8 महीनो की ट्रेनिंग ने मुझे वो कुछ दे दिया था. जो कम् hi लोगों के नसीब में होता है. सालों की ट्रेनिंग मैं 8 महीनो में पूरी करके घर जा रहा था .....

कुछ मिंट बाद ट्रैन ने मेरे स्टेशन पे मुझे उतार दिया . स्टेशन के बहार आ कर पहले मैंने एक अंगड़ाई ली और दिल्ली की हवा को खुद में सींचने लगा. आज महीनो बाद फिरसे वही हवा वही खुशबू.

जिस तरफ मुंबई था.. मैं उस तरफ चेहरा करके बोलै........




विजय:- maaaaaaaaaaaaaaa..priyaaaaaaaa..shurutiiiiiiiii..jhanviiiiiiiiii

अब्ब्ब मैं बोहत जल्द hi तुम सबब को लेने आ रहा हूँ. बोहत लेट हो गया हूँ naaaaaaaaaa.

क्या करता तब्ब आप सबब का विज्जु काबिल जो नहीं thaaa.tabb मैं आप सबब के लिए कुछ भी नहीं कर सकता था naaaaaaaaaa...... सॉरी मैं लेट हो गया हूँ. पारर अब्ब और नहीं ........ बास कुछ टाइम और फिर मैं आप सबब को लेने आऊँगा.

maa..priya..shuruti..jhanvi तुम दररना मैट ......... अब्ब तुम सबब को किसी से दररने की ज़रुरत नहीं है. रेखा बाई और दन्न उनको भी मैं देख लूँगा. बोहत रुलाया है उन सबब ने तुम लोगों को ................ बास कुछ दिन और रो लो ....

जिन लोगों ने आप सबब को और मुझे रुलाया है. कुछ दिनों में उन सबब के रोने के दिन शुरू होने वाले हैं ........

maaaaaaaaaaaa priyaaaaaaaaaaaaaaaaaa shurutiiiiiiiiiiiiiii jhanviiiiiiiiiiiiiiii

मेरा इंतज़ार करना. मैं आ रहा hooooooooooooooooooooooooonnnnnnnnnnnn.....

मेरा चेहरा अचानक से संजीदा हो गया...

बोहत वक़्त बीत चूका माँ और बहनो से मिले हुए...

दर्द को सहन करने का आदि हो गया था मैं...

लेकिन दर्द कभी भी कम् नहीं हुआ था..........

हर गुज़रते दिन के साथ बढ़ता hi जा रहा था......

लेकिन अब्ब तक्क मैं अपने दर्द के लिए कुछ भी नहीं कर पाया था....

लेकिन अब्ब मुझे मेरे दर्द को कम् नहीं करना था...

मुझे अपने दर्द को ख़तम करना था ..

और वैसी hi दर्द दूसरों को देना था ..

जिनको किसी को भी दर्द दे कर बड़ा मज़ा आता है..

अब्ब दर्द कैसे दिया जाता है वो मैं सबब को बताऊंगा..

और दर्द को ख़तम करने के लिए मुझे वही बनना था.

जो दिल्ली आते हुए ट्रैन में बना था.

और जो मैं पद्मा आंटी को बचते हुए बना था.......

बोहत वक़्त लग गया ट्रेनिंग में ......

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:-अब्ब वक़्त आ गया था दिल्ली शहर के हरामजादों के म्ररने का ...

:-अब्ब वक़्त आ गया था दिल्ली के कोठों के उजड़ने का ...

:-अब्ब वक़्त आ गया था मेरे पॉवरफुल बनने का ...

:-अब्ब वक़्त आ गया था इस शहर की गन्दगी साफ़ करने ...

:-अब्ब वक़्त आ गया था माँ और बहनो को रिहाई दिलाने का ...

:-अब्ब वक़्त आ गया था माँ मेरी बहनो और मुझे रुलाने वालों को रुलाने का ...

:-अब्ब वक़्त आ गया था दन्न से जुंग करने का ...

:-अब्ब वक़्त आ गया था खुद को सबत करने का ...

:-अब्ब वक़्त आ गया था मुझे मेरा नाम बदलने का ...

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मैं विजय और विज्जु सिर्फ अपनों के लिए hi रहुगा ....

दन्न और रेखा बाई के जैसों के लिए मैं बनूँ गए ..

S.S (समाज सेवक)




 
ha..ha..ha..ha..ha..ha..ha

sahi..hai..sahi..hai

विज्जु के दुम्म देखने का टाइम आ गया है .. मेरे साथ साथ आप सबब भी विज्जु का दुम्म देखने के लिए बोहत बेचैन थे....

अब्ब विज्जु के रंग देखने वाले होंगे..... अब्ब पूजा और रानी की जो हालत होने वाली है ... बड़ी मज़े वाली होगी ..........

रानी को भी पता चलेगा .. क कमीनी होने का फायदा है या नुकसान ..
 
थैंक्स..!!

कभी कभी से अचानक hi इंसान की लाइफ में कुछ डिफ़ेरेन्ट मोमेंट आ जाती हैं और फिर वो खुद को रोक नहीं पता .. विजय का भी सालों बाद कुछ मस्ती करने का मैं बना और फिर उनसे

अपने दिल की कर ली .. पूजा और रानी के मज़े हो गए ..

अब्ब विजय S.S बनने के लिए मैदान में आएगा...

देखते हैं विजय के लिए शंकर से सामन कितना आसान और कितना मुश्किल होता है ...
 
आपके कमैंट्स पढ़ कर मुझे बुरा नहीं लगा ..

लेकिन डिअर थिस इस स्फोरम और यहाँ पर स्टोरीज ऐसी hi रीडर्स लोग पसंद करते हैं .. और अगर विजय ने अपनी भाभी के साथ ऐसा किया है तो .. इसका मतलब ये नहीं क विजय ने गलत किया है ...

अब्ब तक्क स्टोरी में विजय ने स्पेशलय किसी के साथ भी कुछ बढ़ के नहीं किया ...

अब्ब सबब hi विजय को ले के खुद के दिल में प्यार और छूट की गर्मी बढ़ने लगें तो विजय क्या करे ..

वो तो पैदाइशी बेशरम है ,.... उसके अंदर वो वाली फीलिंग्स आ hi नहीं सकीं .. तो शरीफों में होती हैं ..

लेकिन फिर भी विजय कभी किसी ऐसे पर्सन के साथ बुरा नहीं करता जिस को विजय का ऐसा करना पसंद ना ए ..

जब्ब स्टोय hi इन्सेस्ट है और विजय की साड़ी बहने hi विजय के नीचे आना चाहती हैं तो विजय क्या कर सकता है ...

विजय दिल्ली मस्ती करने नहीं खुद को डिस्कवर करने आया था ... अगर विजय के साथ सबब hi सेक्स करना चाहती हैं .. तो विजय क्या कर सकता है ... और वैसी भी विजय ने मस्ती की है ..

चुदाई नहीं की ...

एंड थैंक्स फॉर थे सुग्गेस्टिव ..
 
अपडेट ::: 45

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मैं अब्ब बदल गया था..............




मैं अब्ब रेखा बाई के कोठे वाला विज्जु नहीं रहा था....

रेखा बाई के लिए मुझे पहचान लेना मुमकिन नहीं था....

अब्ब मेरा क़द काठ रंग रूप सबब कुछ बदल गया था....

अब्ब अगर माँ और बहने भी मुझे देखेंगी तो एक बार तो वो भी हैरान ज़रूर होंगी ""क ये कौन है. जो हमें अपना बोल रहा है""

मेरी आँखों से और मेरी खुशबू से मुझे मेरी माँ और बहने पहचान लेंगी. लेकिन शक्लो सूरत से पहचानना मुश्किल था.

जब्ब मैं रेखा बाई के कोठे था तो मैं सिर्फ सोच से बड़ा था .. लेकिन जिसमत से मैं एक बच्चा न सही लेकिन फिर भी बच्चो जैसा hi था ...

लेकिन अब्ब मैं किसी 22 साल के हट्टे काटते मर्द जैसा हो गया था... मेरा बदन भारी नहीं था. मैं एक bhar-poor फैंटेस लिए हुए था. मेरी कमर में लचक भी थी. और चीते के जैसी पतली भी थी. और मेरे मसल्स और दुसरे कट्स मुझे सबब से अलग बना देते थे..

मैंने कोई गयम ज्वाइन नहीं की थी क मेरे उनके जैसे पूरे पूरे कट्स बन्न jayen.lekin मेरी पर्सनालिटी शायद उन जैसों से भी अछि थी. मेरी कसरत और ट्रेनिंग ने hi मुझे

वो taqat..phurti..chusti..fighting स्किल्स.. दे दीं थी. क कम् hi कोई मेरे जैसा हो.... अब्ब ये तो वक़्त hi बताएगा.. क मैं क्या कुछ बन्न गया था...

अपनी ट्रेनिंग की डिटेल बाद में बताऊंगा ....




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जब्ब मैं मुंबई के रुख खड़ा हो कर खाला में hi देख कर अपनी माँ और बहनो से बात कर रहा था.. तो मुझसे कुछ फासले पर कड़ी हुई 2 लडकियां मुझे घूर रही थीं.

शायद वो हैरान हो गई थीं. क मैं kis'se बात कर रहा हूँ.

मैंने उन दोनों की तरफ देखा तो



आआआआह



दोनों hi क्यूट सी सूरत वाली दीदे बड़े बड़े किये मुझे देख रही थीं. मैंने उनको एक स्माइल पास की तो वो दोनों कुछ होश में आई. और फिर मुझे स्माइल देते देख कर वो भी स्माइल करने लगी.....

अगर क्यूट सा मुंडा किसी लड़की को स्माइल दे तो वो भी उसका साथ तो लाज़मी hi देंगी.

कभी कभी आँखों का मैगनेट सिस्टम भी काम कर जाता है. और हमें ये बता देता है क स्माइल पास करने वाला लड़का गन्दा नहीं है. तो लडकियां उसके साथ कुछ फ्री हो hi जाती है. ये भी एक अलग hi बात है. और अच्छी भी है. अगर सबब hi अनजान लड़कियों को दिल से स्माइल देने लगें. तो शायद सभी लड़कियां hi दिल से उस स्माइल का जवाब दे दें.....

दोनों लड़कियां सूरत से सहाईफ़ और सुलझी हुई लग रही थीं.

अब्ब मेरे पास टाइम तो था नहीं. तो मैंने एक टैक्सी को इशारा किया .. टैक्सी पास आई तो मैं उस में बैठ कर घर की तरफ हो लिया....

मैं अचानक जा रहा था तो किसी को नहीं पता था क मैं आज hi आ रहा हूँ..

अब्ब देखते हैं क घर वाले कैसा रियेक्ट करते हैं 8 महीनो के बाद मुझे बदला हुआ देख कर .............

मैं टैक्सी के बहार देखने लगा .. रात 10 से ऊपर टाइम हो चूका था ... मतलब अभी सबब सोये नहीं होंगे .. मैं बहार देखते हुए सबब को hi याद करने लगा..

टैक्सी ने मुझे 10:40:पं पर घर पोहंचा दिया ..

मेरे पास एक बैग था .. तो मैंने बेल्ल बजने की बजाये चोरों की तरह से घर में घुसने का सोचा ..

अब्ब मेरी ट्रेनिंग भी हुई थी . तो मेरे लिए ये सबब करना मुश्किल नहीं था .. और दूसरा मैं देखना चाहता था .. क हर्ष चौहान के गार्ड्स कैसी घर की निगरानी कर रहे हैं ..

मैंने पीछे से घर में घुसने का सोचा ... कोई आस पास नहीं था .. तो मैं घर के पीछे चल दिया ..

2ंद फ्लोर पर हमारी रिहायश थी .. इसलिए मैं 2ंद फ्लोर पर जाने के लिए घर के पीछे गया था ..

ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

माने कभी घोर hi नहीं किया था.. क पीछे से तो कोई रास्ता hi नहीं था ऊपर जाने का. मतलब 2ंद फ्लोर के कमरों में पीछे की तरफ खिड़कियाँ लगी हुई थीं. जबकि नीचे वाले कमरों में नहीं थीं. मतलब 14 फ़ीट तक्क मेरे लिए कोई रास्ता ऐसा नहीं था क मैं ऊपर जा सकूं ..

लेकिन अब्ब जब्ब सोच hi लिया था क पीछे से hi जाना hai.fir तो मैं ज़रूर इसी रास्ते hi अंदर जाऊँगा..... अब देखते हैं क कैसे जाय जा सकता है ..

मैं सोचने लगा .... अब्ब ऐसी सिचुएशन में ज़यादा सोचना भी गलत होता है. अगर मुझे अचानक से किसी के घर में घुसना पड़े तो क्या मैं सोचता hi रहूँगा...

अब्ब यहाँ मेरी ट्रेनिंग का काम शुरू होता था. मुझे अपनी स्किल्स उसे करनी थीं.

2ंद फ्लोर पर जाने के लिए... और मैंने सोच लिया था क मुझे क्या करना है ..

मैंने बताया था क पूजा दीदी का घर बास ावें hi था .. तो बहार से कुछ सीमेंट उखड़ा हुआ था .. और मेरी उँगलियाँ उस में घुस सकती थीं .. यहाँ मुझे अपना बैलेंस रखते हुए ऊपर जाना था ..

मैंने एक बार फिरसे सबब तरफ देखा.. अपने बैग को अपने पीछे बाँधा और दीवार के पास आ कर उखड़े हुए सीमेंट और ईंट की दरार में अपनी उंगलियां फंसा कर ऊपर चढ़ने लगा ..

मैंने कहाँ था क मुझमे फुर्ती बोहत आ गई थी. तो मुझे कोई परेशानी नहीं और मैं किसी छिपकली के जैसे hi ऊपर खिड़की पर पोहंच गया.. खिड़की की ग्रिल को पकड़ कर मैं अंदर की sunn-gunn लेने लगा.....

मुझे कोई आवाज़ नहीं आ रही थी .. मैंने एक हाथ से खिड़की के पत् को दबाया तो वो अंदर से बंद था... खिड़की के रास्ते अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं था .. मुझे छत पर से अंदर जाना पड़ेगा ..

ज़यादा न सोचते हुए मैंने खिड़की को भी क्रॉस करते हुए जल्द hi ऊपर छत पर पोहंच गया .. मुझे किसी किसम की थकन का एहसास तक्क नहीं हुआ .. मैं छत्त सबब तरफ देखने लगा ..

मैं हैरान हो रहा था क ये आज घर में इतनी शान्ति क्यों है.. मुझे ऐसा लग्ग रहहा था क जैसे घर में कोई हो hi ना...

मुझे किसी गड़बड़ का एहसास हुआ तो में देरर न करते हुए सीढ़ियों से नीचे आने लगा .. पूरा फ्लोर hi अँधेरे में डूबा हुआ था ..

ये सबब क्या है .. मेरे चेहरे पारर अचानक से संजीदगी आ गई .. और फिर मैंने देरर न करते हुए घर के सेहन की लाइट ों करदी ..

ohhhhhhhhhhhhh

पूरे घर का नक़्शा hi बदला हुआ था .. सबब कुछ डरहम बरहम किया हुआ था .. जैसे किसी ने बोहत hi ग़ुस्से में सबब कुछ तोड़ फोड़ दिया हो .. मैंने अपने बैग को अपनी कमर से उतारा और फिर उसमे से टोर्च निकाल कर फिरसे बैग को अपने पीछे बाँध लिया और सहन की लाइट भी बंद करदी......

मैं टोर्च की रौशनी में पूरे घर को चेक करने लगा .. तो मुझे हर कमरे की हालत बिगड़ी हुई hi मिली .. किसी भी कमरे में कम् hi चीज़ें सलामत थीं ..

वर्ण हर एक चीज़ को तोड़ फोड़ दिया गया था ..

घर की हालत देख कर लग्ग रहा था क जैसे ये सबब कुछ हुए कुछ दिन गुज़र चुके हैं .. कुछ तो बोहत hi गलत हुआ था .. और बास एक hi नाम मेरे अंदर गूँज रहा था .. shankar..shankar..shankar..

इस वक़्त मेरा दिल्ली में सिर्फ एक hi दुश्मन था और वो था शंकर .. ये सबब यक़ीननं उसने अज्जू के मर्डर को ले के किया होगा .. वर्ण धर्मेश में इतना दम्म कहाँ .. क वो हर्ष चौहान से टक्कर ले सके .... शंकर hi था जो अपने दमाग का उसे करते हुए वक़्त बलडने पर कुछ भी कर सकता था ..

मेरा ग़ुस्सा बढ़ने लगा.. लेकिन मैं आउट ऑफ़ कण्ट्रोल नहीं हुआ... मेरे चेहरे पारर सख्ती सी आ गई थी ..

शंकर और शंकर के जैसों को तो मैंने यहाँ आते hi मारने का मैं बना लिया था .. शंकर को भी बड़ी जल्दी पड़ी है म्ररने की ... कोई ना अगर वो जल्दी hi मार्र्ण चाहता है तो मैं उसे जल्दी hi ऊपर भेज दूंगा.....

मेरा ज़यादा फोकस इस बात पारर था .. क कहीं टार्चर या ज़बरदस्ती तो नहीं की गई थी किसी के साथ .. और मुझे कहीं से भी ऐसा नै लगा .. ऐसा लग्ग रहा था .. जैसे सबब को बड़े hi आराम से लेजाया गया था .. खेंचा तानी के निशान मुझे कहीं नहीं दिखी.. टूटी हुई छोडियों के टुकड़े भी मुझे कहीं नहीं दिखे. और ना hi मुझे कहीं से खून बहने का एहसास हो रहा था ..

ऊपर के सारे पोरशन को देखने के बाद मैं नीचे जाने लगा.. देखो तो सही नीचे कमरों के रहने वाले karaye-daar हैं भी या वो भी कहीं चले हाय हैं.

मैं धीमे क़दमों से चलता हुआ नीचे जाने लगा ... जब मैं नीचे पोहंचा तो

मुझे वहां भी सबब ऊपर जैसा hi दिखा .. कमाल है यहाँ भी सबब उजड़ा हुआ है... लेकिन नीचे वाले कामरान के बहार वाली लाइट जल रही थी .. मतलब सबब उजड़ा हुआ होने के बाद भी कोई यहाँ पारर है ..

कौन हो सकता है यहाँ ..

नीचे आते hi मैं सावधान हो गया था .. जैसा सबब कुछ उजड़ा हुआ दिख रहा था. कोई भी खतरा हो सकता था नीचे वाले कमरों में...

टाइम अब्ब 11:00:पं से ऊपर हो गया था .. तो जो भी होगा वो सो गया होगा या सोने के लिए लेट चूका हो गए.. लेकिन फिर भी मैं खुद को सेफ रखते हुए नीचे जिस कमरे में मुझे लाइट जलती दिखी थी उस तरफ जाने लगा ..

सभी कमरों पारर मेरा धयान था.

मैं धीमी चाल चलता हुआ उस कमरे तक्क पोहंचा .. और फिर उस कमरे के अंदर की sunn-gunn लेने लगा ... कमरे के अंदर कुछ मिक्स किसम की आवाज़ें आ रही थीं.

आवाज़ें बोहत धीमे थीं. इस लिए सही से समझ नहीं पा रहा था... मैंने उस कमरे के दूर को प्रेस किया तो अंदर से कुण्डी लगी हुई थी.. मैंने उस कमरे को छोड़ कर बाकी के कमरों को देखने का सोचा .. लेकिन पहले मैंने इस कमरे के दूर को बहार से कुण्डी लगा दी .. उसके बाद मैं चलता हुआ दुसरे कमरे के पास पोहंचा.. वो बहार से hi बंद था.. मैंने एक एक कर सरे कमरे देख लिए लेकिन उस कमरे के इलावा सारे hi कमरे बहार से बंद थे..

मैं वापिस से उसी कमरे के दूर तक्क पोहंचा तो पहले मैंने दूर की लगाईं गई कुण्डी खोल दी.. अब्ब मुझे सोचणा था क अंदर मौजूद पर्सन को बहार कैसे लाऊँ.

फिर कुछ सोच कर मैंने सेहन में बिखरे पड़े सामान में से एक गिलास उठाया और दूर के पास आ कर खुद को दीवार से सत्ता दिया... और फिर अचानक से अपने हाथ में मौजूद गिलास को कुछ फासले पारर ज़ोर से ज़मीन पारर दे मारा. गैस शीशे का था.. उसके टूटने की आवाज़ से अंदर कुछ हड़बड़ाहट सी हुई...

मैं सावधान तो पहले से hi था .. बास दूर के खुलने का hi वेट कर रहा था. अंदर से कुछ आवाज़ें शुरू हुई और एक मिंट बाद दूर ओपन हुआ ...

एक बाँदा बहार निकला तो मैंने उसको एक झटके में पकड़ कर उसका मोहन बंद कर दिया और फिर उसकी गर्दन की एक नस को दबा कर उसे नीचे लिटा दिया.. वो बेहोश हो चूका था.. ये सबब करते हुए मुझे कुछ सेकंड hi लगे ...

कमरे में रौशनी थी और मैं नहीं जानता था क अंदर कौन है और कितने हैं..

लेकिन जिस बन्दे को मैंने लम्बा किया था. वो साला एक लुंगी में था.. और पहले से मौजूद karaye-daaron में से नहीं था.. अंदर ज़रूर ये किसी को छोड़ रहा होगा..

अगर ये इस हालत में है तो ज़रूर अंदर सिर्फ एक लड़की या औरत hi हो सकती थी.

मैंने अपनी गन को नीचे आते hi हाथ में ले लिया था .. तो मैंने एक बार नीचे पड़े आदमी को देखा और फिर देर न करते हुए अंदर कमरे में घुस गया ..

ohhhhhhhhhhhhhh

अंदर एक 30 साल की औरत अपनी आँखों पर एक हाथ रखे खटिया पर लेती हुई थी वो पूरी तरह से नंगी थी .. मतलब मैं सही था .. दोनों hi चुदाई कर रहे थे .. उसकी नज़र अभी मुझपर नहीं पड़ी थी.. मैंने कमरे में देखा तो और कोई नहीं था कमरे में ..

मैं उस औरत के पास चल कर गया .. और खटिया के पास पोहंच कर उसका हाथ पकड़ कर उसके चेहरे पर से हटा दिया .. वो कुछ बोलने hi वाली थी क मुझे देख कर डर गई और

औरत:- तुम कौन हो .. और वो कहाँ गया ..

विजय:- (गन दिखते हुए) चुप कर के लेती रहो.. और जो मैं पूछो सिर्फ उसका जवाब दो..

औरत गन देख कर डर गई और हाँ में सर्र हिल दिया ...

विजय:- तुम कौन हो और jis'se तुम चुद रही थी .. वो कौन है ..

औरत:- मम मैं .. उसे नहीं जानती .. मैं तो बास एक रात के लिए उसके पास आई थी .. मैं इसी टाउन में रहती हूँ और (नज़रें चुराते हुए) और पासिओं के लिए ये सबब कार्ति हूँ .. आखरी बात रुक रुक कर बोली थी उसने .. अब्ब इतना तो मैं समझ hi गया था.. ये सच बोल रही है ..

विजय :- तुम्हारा घर कहाँ है ...

औरत :- यहाँ से कुछ दूर है ..मैंने तुम्हे देखा हुआ है .. लेकिन तुम मुझे नहीं जानते .. मैंने कई बार तुम्हे अखाड़े में जाते हुए भी देखा है ..

विजय :- बास बास अब्ब अपनी छूट को छुपा कर भाग लो अपने घर वर्ण ..मैंने गन को उसकी छूट की तरफ करते हुए कहा .. तो वो डर गई ...

विजय:- जाती हो या .....

औरत:- जाती हूँ .. इतना बोल कर वो अपने कपडे उठा कर पहनने लगी .. 2 मिंट के अंदर hi वो भाग गई.. मैं कमरे से बहार आया और दूर को बहार से कुण्डी लगा कर उस आदमी को अपने कंधे पारर उठा लिया और ऊपर वाले पोरशन की तरफ चल पड़ा ...

ऊपर पोहंच कर मैंने उस आदमी को नीचे पटक दिया .. और वापिस आ कर ऊपर वाले पोरशन को लॉक कर दिया .. अब्ब मुझे डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं था ..

सेहन में hi एक जगा पड़ी हुई रस्सी को उठा कर मैंने उस को बाँध दिया .. और एक कमरे में जा कर अपने मोबाइल को चार्जिंग पे लगा दिया.. मेरा मोब रास्ते में hi बंद हो गया था .. ये मेरा मोबाइल फोन नहीं था.. मैं अपना फोन घर पर hi छोड़ कर गया था .. क्यूंकि वहां इस की कोई ज़रुरत नहीं थी .. और ये मुझे सुनील भाई ने आते हुए दिया था .. अगर इस की बैटरी ख़तम नहीं होती .. तो मैं फोन कर के सबब जान सकता था क यहाँ क्या हुआ है .. लेकिन कोई बात नहीं ... अब्ब मुझे परेशानी तो थी लेकिन बेचैनी नहीं थी .. अंदर दिल से आवाज़ आ रही थी ..

क यहाँ जो दिख रहा है वो है नहीं ... चलो चल कर पता करते हैं ..

मैं उस आदमी के पास आया और उसे होश में लाने के लिए उसकी गर्दन की नस फिरसे दबा दी .. एक मिंट में hi वो होश में आ गया ..

वो हड़बड़ा कर खड़ा होने लगा.. लेकिन बंधा हुआ होने की वजा से एक साइड में लुढ़क गया.. फिर खुद को कुछ रिलैक्स करते हुए मुझे देखने लगा .. मुझपर नज़र पड़ते hi वो हैरान भी हुआ और परेशां भी .....

मैंने अपना चाकू अपने हाथ में लिया और फिर उसकी एक जांग को हल्का से चीरा दे दिया .. वो चीखने लगा ..

विजय:- यहाँ चीखने की इजाज़त नहीं है .. अगर तुम्हारी आवाज़ भी निकली तो फिर मैं तुम्हारी आवाज़ को हमेशा के लिए hi बंद कररर दूंगा .. इसलिए जो मैं पूछों उसका जवाब दो और चीखना तो बिलकुल भी मैट ....

मेरी आवाज़ के बदलाव और ठहराओ को समझ कर उसकी फ्हटने लेगी ....

इन 8 महीनो में मेरी आवाज़ और अंदाज़ बोहत hi बदल गया था .. मेरी आवाज़ को मेरे दर्द और फिर मेरे ग़ज़ब ने कुछ और hi रंग दे दिया था .. अब्ब वक़्त बदल गया था....

तो मुझे अपने इस रंग में hi दिखना था.. मुझे ऐसी hi आवाज़ और दरिंदगी चाहिए थी .. अभी जैसे इस की हालत पतली हो गई थी .. सभी की करूँगा.. कोई भी मादरचोद नहीं बचेगा मुझसे..

विजय:- कौन हो तुम और यहाँ क्या कर रहे थे ...

वो :- मम मैं यहां पास में hi रहता हूँ और बास घर को खाली देख कर रात रुक गया था ..

मुझे उसकी बात सुन कर हंसी आ गई .. वो मुझे ऊँगली करने की कोशिश कर रहा था .. साला अब्ब इसके सामने में बुद्धू बन्न जाऊं... मैंने चाकू से उसकी लुंगी का एक टुकड़ा काटा और फिर उस टुकड़े को उसके मोहन में दे कर उसका मोहन hi बंद कर दिया.. वो खुद को छुड़ाने के लिए ज़ोर लगाने लगा.. वो समझ गया था क मैं अब्ब उसका क्या करने वाला हूँ.. साला गुंडा है तो सबब पता तो होगा hi .. अपना हशर देख कर खुद को बचने के लिए ज़ोर तो लगाए गए hi.... आज पता चलेगा क दर्द क्या होता है..

साले इस जैसे टुच्चे किसम के लोग हाथ में चाकू और पिस्तौल ले कर खुद को हीरो समझने लगते हैं ....

ये सबब सोचते hi मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई .. वो मेरी मुस्कान देख कर और भी डर गया.. काँपा तो नहीं था वो लेकिन हालत बोहत hi ख़राब होने लगी थी.

मुझे कोई जल्दी नहीं थी .. मैं बोहत hi शांत था .. मैंने चाकू से उसकी लुंगी काट कार कर अलग करदी .. मेरा उसकी लुंगी काटने का स्टाइल कुछ अलग था ..

अपनी लुंगी को kat'ta देख कर hi उसके पसीने निकलने शुरू हो गए थे .. वो शायद समझ गया था क मैं क्या करने वाला हूँ ..

मैं चाकू को उसके लुंड पर लाया .. अभी कुछ किया नहीं था क वो

हूँ हूँ हूँ करने लगा ..

मैंने उसके मोहन से पकड़ा निकला तो वो तेज़ सांस लेते हुए बोलै

वो :- मैं सबब बता दूंगा.. मुझे कुछ मैट करो.....

विजय:- तो फिर बोलो .. और इस बार भी वैसे hi कोई और कहानी सुना देना ... मुझे कोई जल्दी नहीं है .. अगर तुमने मुझे फिरसे कोई कहानी सुनाई तो ...

इतना बोल कर मैं चाकू से उसके लुंड को हिलने लगा...

वो :- (जल्दी में) हम शंकर के आदमी हैं और उसी के कहने पे यहाँ हैं ..

विजय:- और भी हैं .. मतलब तुम यहाँ अकेले नहीं थे .. तो फिर बाकी सबब कहाँ हैं ..

वो :- वो सबब शहर में गए हैं. बास कुछ hi देर में आते होओगे.

विजय:- कब से हो तुम लोग यहाँ और यहाँ के घर वाले कहाँ हैं ..

वो मेरी बार सुन कर एक दुम्म से चुप हो गया .. मुझे उसका चुप रहना अच्छा नहीं लगा तो मैंने उसकी जांग पर कट लगा दिया .. वो चीखने लगा था क मैंने उसके मोहन में फिरसे कपडा ठूंस दिया .. और इस बार मैं उसे टाइम नहीं देने वाला था .. यहाँ उसके साथी भी आने वाले थे. तो मुझे जल्दी hi इसको ट्रीट करना पड़ेगा.

फिर मैं उसकी जांग पर जगा जगा कट लगाने लगा ..

कुत्ता कही का.. खुद के दर्द को सहन नहीं कर पा रहा था .. वो उछलने लगा.. अब्ब मेरे दिल में इन जैसों के लिए रेहम कैसे आ सकता था .. मेरे hi घर में घुस कर चुदाई कर रहा था हरामज़ादा ..

मैं उसकी जांग में चाकू उतारते हुए उसकी जांग से गोश्त के एक टुकड़े को अलग करने लगा ... वो बंद मोहन से hi चीखने लगा .. उसका चेहरा दर्द की वजा से लाल पड़ चूका था .. अगर मैं उसके मोहन से कपडे का पीेछे निकल देता तो पूरा इलाका hi इसकी चीखों से गूँज उठता..

वो बोहत हिल जल रहा था लेकिन में अपने काम में लगा रहा .. उसकी जांग से 2" का एक पीेछे अलग करने के बाद मैंने उसकी आँखों की तरफ देखा तो दर्द के मारे उसकी आँखों से पानी आने लगा था ...

thuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu ... साआला गुंडा हो के दर्द नहीं सहन कर सकता.

मैं उसका कुछ और करता क मुझे नीचे बाकी के गुंडों के आने के आवाज़ें आने लगीं .. मैं इसे तड़पते हुए छोड़ कर नीचे जाने लगा.. इससे पहले क वो कुछ समझ सकें .. मैं उनको भी एक्सपिरे कर देना चाहता था.. मैं जल्दी से नीचे जाने लगा ..

जैसे hi मैंने दूर ओपन करके नीचे देखा तो हरामी एक लड़की को उठा के लाये थे .. साले लड़की का रपे करने वाले थे और वो भी मेरे hi घर में...

बोहत वक़्त बीत चूका था मुझे किसी गुंडे के शरीर से खेलते हुए .. आज इनसे भी खेल लेते हैं ..

वो 4 थे और नशे में चन्नण थे .. सालों ने लड़की पता नहीं कैसे उठा ली थी .. सही से चल भी नहीं पा रहे थे ..

मैं भागता हुआ उनके पास गया और अपने चाकू को उन चारों पर तेज़ी से चलने लगा .. वो सबब असह्नाक हमले से बोखला गए..

मैंने भागते hi फुर्ती से एक को पकड़ कर उसके शोल्डर में चाकू घुसा दिया था. फिर दुसरे को पकड़ कर उसके शोल्डर में चाकू घुसा दिया .. अब्ब दो रह गए थे.

इतनी जल्दी को कैसे ये सबब समझ सकते थे. एक तो वो नशे में थे और दूसरा मेरी फुर्ती बोहत थी. बाकी दोनों के समझने से पहले hi मैंने एक के बाज़्ज़ो को अपने लेफ्ट हैंड में पकड़ कर घुमाया और फिर चाकू को उसकी एल्बो में घुसा दिया .. तीसरा भी गया काम से ..

इस बीच 4 गुंडा का नशा फुर्रर्रर्र करके उड़द चूका था .. लेकिन वो हैरान बोहत था और मुझे ऑंखें पहाडे देख रहा था .... लड़की उसके हाथ से गिर कर नीचे जा पड़ी थी .. मैंने उसकी आँखों में देखा तो वो मेरी आँखों में देख कर कांपने लगा ..

हेराट है रात के समय भी उसने मेरी आँखों में अपनी मौत को देख लिया था .. दिन होता तो समझ में भी आ सकता था ..

लेकिन रात के समय इतनी कम् रौशनी में भी उसने मेरी आँखों में अपनी मौत को देख लिया ... चलो खैर कोई बात नहीं .. देख लिया है तो फिर उसको मौत भी दे hi देते हैं .. जब्ब तक्क ज़िंदा रहेगा .. कुत्ता बना फिरता रहेगा .. चलो इस को अगले जनम में इंसान बनने के लिए इस जनम से आज़ाद करते हैं ..

लेकिन इतनी जल्दी काहे की अभी तो इनका post-martam तो करलूं पहले....

में धीमे क़दमों से उसकी तरफ जाने लगा तो वो मुझे अपनी तरफ आता देख कर थार थार कांपने लग्ग गया .. साला चुटिया कही का .. मैं तो समझ रहा था क ये सबब से ज़यादा बहादुर होगा ..लड़की जो उठाये हुए था.. लेकिन ये तो मुझे देख कर hi म्ररने वाला हो गया.

अच्छा है अच्छा है .. ऐसा hi सबब का हाल होना चाहिए ..

मैंने एक नज़र बाकी के तीनो को देखा वो भी मुझे ख़ौफ़ज़दा नज़रों से देख रहे थे...

फिर मैंने लड़की की तरफ देखा तो

ओह्ह्ह्हह्ह shittttttttttt

ये तो वही स्टेशन वाली लड़की थी .. तो दूसरी इसके साथ वाली कहाँ गई ..

विजय:- (मैं लड़की से bola)kyaa नाम है तुम्हारा ...

लड़की आद्र्री हुई मुझे देख रही थी ..

विजय:- दर्रो नहीं ये तुम्हारा अब्ब कुछ नहीं बिगाड़ सकते .. तुम्हारे साथ एक और भी तो थी .. वो कहाँ है ..

लड़की को अचानक से अपने साथ वाली लड़की का याद आया तो वो रोने लग्ग गई ..

मैंने अपने सामने वालों को देखा और फिर

विजय:- बोलो क्या किया है तुमने इस के साथ वाली लड़की का .. इतना बोलते hi मैंने एक के टूटे हुए बाज़ो को पकड़ लिया और फिर मरोड़ने लगा .. वो चीखने लगा..

उनमे से एक मुझे मारने आया तो मैंने साइड हट के अपने दुसरे हाथ से उसका भी टूटा हुआ हाथ पकड़ लिया और फिर मैंने अचानक से दोनों का हाथ पकडे हुए hi एक उल्टा जम्प लगाया तो दोनों के hi हाथ टूट गए ..

kaddaakkk..kaddakkk..ki आवाज़ आई और दोनों hi चीखने लगे ... मैंने दर्रे हुए गुंडे की तरफ देखा तो वो भागने की फ़िराक में था ..

विजय:- अगर भागे तो बोहत बुरी मौत मरोगे .. अगर यकीन नहीं है तो चलो भागो .. मेरी बात सुनके वो वहीँ डर के मारे कांपने हुए गिर गया .. और रोने लगा .. वो मुझसे ज़िन्दगी की भीक मांगना चाहता था .. लेकिन इतना डर गया था .. क ये भी नहीं बोल पाया क "मुझे छोड़ दो"

अभी दूसरी लड़की का मुआमला था तो मैंने इन चरों से खेलना बंद कर दिया . मैंने जल्द hi चारूं को एक्सपिरे करके एक एक करके ऊपर वाले पोरशन में लेजर कर फ़ेंक दिया .. फिर मैं घर की साडी लाइट्स ों करके रस्सी ढूंढ़ने लगा. वो मुझे 5तह कमरे में मिली मैंने अच्छी तरह से सबब को बांध दिया ..

वो लड़की भी मेरे साथ hi ऊपर आ गई थी .. नीचे उसे डर लग्ग राह था .. लेकिन ऊपर का हशर देख कर और भी डर गई क्यूंकि पूरा घर hi टूटा फूटा हुआ था. कोई चीज़ सलामत नहीं थी ..

विजय:- (लड़की से) डरो नहीं और अपना नाम बताओ पहले मुझे फिर दूसरी लड़की का भी जल्दी से बता दो. अगर उसके साथ भी कुछ गलत हुआ है .. तो तुम देर कर रही हो ..

लड़की दर्री हुई तो थी लेकिन फिर हिम्मत करके बोली..

लड़की:- मेरा नाम अनुष्का है और मेरे साथ मेरी दीदी थी. हम दोनों hi यहाँ हॉस्टल में रह कर पड़ती हैं .. ये बोल कर फिर से रोने लगी..

मैंने लड़की को हौसला देने के लिए उसे गले से लगा लिया और वो भी इक सहारा मिलने पर फूट फूट कर रोने लगी.. कुछ देर तक्क रोने से जब उसका मैं हल्का हो गया .. तो

अनुष्का:- प्लीज मेरी दीदी को बचा लो ...

विजय :- कहाँ है तुम्हरी दीदी.. मुझे बताओ मैं उसे कुचन नहीं होने दूंगा..

अनुष्का:- वो मैं नहीं जानती .. इन का hi एक साथी उसे ले कर कहीं गया है..

मतलब बात इतनी भी सीढ़ी नहीं थी ... फिर मैंने देर न करते हुए.. सबसे पहले वाले गुंडे की hi तरह एक का हशर करने लगा .. उसने जल्दी hi बक दिया क उनका वो साथी लड़की को ले कर कहाँ गया है ..

विजय :- तुम यहाँ कैसे आये हो .. टैक्सी में या

अनुष्का:- नहीं इनकी गाडी बहार hi कड़ी है..

मैंने उसी गुंडे की तरफ देखा जिसका अभी मैं इंटरव्यू ले रहा था...

उसने फ़ौरन hi एक दुसरे गुंडे की तरफ इशारा कर दिया.. मैंने दुसरे गुंडे की जेब से गाडी की चाबी निकली और लड़की को लेकर बहार जाने लगा.... लेकिन फिर याद आते hi मैंने अपना चार्जिंग पे लगा हुआ मोबाइल उठाया और उसे ों कर के पॉकेट में दाल लिया.. फिर लड़की को ले कर नीचे जाने लगा..

मोबाइल के ों होते hi अलर्टस की टोन्स बजने लगीं.. लेकिन मैंने उस पर धयान न दे कर लड़की के साथ गाडी में बैठ गया .. और उस तरफ को गाडी भगा दी जिस तरफ का मुझे बताया गया था ...

जब्ब गाडी मैं रोड पे आई तो मैंने मोबाइल को पॉकेट से निकाल कर देखा तो काफी साड़ी मिस्ड कॉल और संस थे. मैंने डिटेल चेक की तो

रणजीत sir..raja.. पूजा didi..harsh चौहान.. और कुछ दुसरे नंबर से कॉल आई थीं .. मोबाइल बंद होने की वजा से कोई भी मुझसे कांटेक्ट नहीं कर पाया.

जबबसे मुझे गोली लगी थी. उसके बाद से राजा और बाकी के तीनो से मेरा राब्ता नहीं हुआ था .. राजा का नंबर देख मुझे ख़ुशी हुई... मेरा ये नंबर तो किसी के पास नहीं था.. शायद मेरे निकलने बाद राज सर ने ins-ranjeet को बता दिया होगा. और फिर ins-ranjeet ने राजा को और राजा ने पूजा दीदी और पूजा दीदी ने हर्ष चौहान को.....


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अपडेट :::46

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मैंने सबब से पहले राजा का hi नंबर मिलाया .. कुछ देर बाद

राजा:- hello विजय यार कैसा है तू ..नंबर क्यों बंद रखा हुआ था तुमने..

विजय:- राजा मैं ठीक हूँ और अभी कुछ मैट बोलना पहले मेरी बात सुन लो..

राजा;- अच्छा ठीक है बोल.. क्या कहने वाला है..

विजय:- राजा तुम इस वक़्त कहाँ पर हो...

राजा :- क्यों ये क्यों पूछ रहे हो..

विजय:- राजा सवाल नहीं पहले मैं जो पॉऊच रहा हूँ वो बताओ..

राजा :- मैं हर्ष चौहान की दूसरी वाली कोठी में हूँ. जब्ब तुम्हे गोली लगी थी और जिस कोठी में तुमको लाया गया था.. हम सबब इस वक़्त उसी कोठी में हैं और पूजा जी के साथ साथ बाकी साब घर वाले भी यही हैं ..

विजय:- अच्छा वो सबब ठीक है .. पहले मेरी बात सुन ... एक एड्रेस नोट कर और सबब को ले कर वहीँ पोहंच. एक लड़की की इज़्ज़त का सवाल है. मैं भी वही जा रहा हूँ.. और कुछ मैट पूछना अभी टाइम नहीं है और मैं रास्ते में हूँ..

राजा:- अच्छा ठीक है .. मुझे पता बताओ.

मैंने राजा को एड्रेस बता कर कॉल कट करदी .. मोबाइल को अपनी पॉकेट में दाल कर मैंने अनुष्का की तरफ देखा तो अनुष्का मुझे hi देख रही थी...

विजय:- हाँ अब्ब बताओ क्या हुआ था. तुम दोनों स्टेशन पारर क्या कर रही थीं..

अनुष्का:- हम आज hi घर से आयी थीं. तो टैक्सी ले कर घर अपने हॉस्टल की तरफ जा रही थीं... बीच रास्ते में hi टैक्सी ख़राब हो गई.. वहां देर हो जाने की वजा से वो गुंडे आ गए और हमसे ज़बरदस्ती करने लगे. दीदी से बर्दाश्त नहीं हुआ तो दीदी ने एक गुंडे को थपप्पड़ मार दिया.. जिसे दीदी ने थप्पड़ मारा था वो गुस्से में आ गया और वो दीदी को उठा कर अपने साथ ले गया ... और मुझे वो चारों अपने साथ ज़बदरदस्ती उठा कर ले गए .. मेरी डीडीइइइइइ....

इतना बोल कर अनुष्का रोने लगी ....

मैं अब्ब अनुष्का को कैसे दिलासा देता .. पता नहीं अनुष्का की बेहेन सेफ होगी या नहीं.. बोहत लेट हो गया था .. कहीं उसके साथ कुछ गलत न हो गया हो ..

दोनों hi बहने कितनी क्यूट और पायरी सी थीं. मुझे अनुष्का का दुखी चेहरा बिलकुल भी अच्छा नहीं लग्ग रहा था.. स्टेशन पर कैसे ज़िन्दगी से भरपूर मुस्कान थी दोनों के चेहरे पर.. और अब्ब क्या हाल हो गया था इस मासूम से चेहरे का...

मैंने अपना एक हाथ अनुष्का के कंधे पर रख diya..anuksha ने मुझे देखा और फिर मेरी आँखों में देख कर उसने मेरा हाथ थाम लिया और नम्म आँखों से मुझे देखने लगी. और आँखों की जुबां में मुझे थैंक्स बोलने लगी ..

अनुष्का सच में hi बोहत पायरी और क्यूट सी लड़की थी ...

साले कमीने ऐसी मासूम लड़कियों को भी नहीं छोड़ते... जिनके खिले चेहरों की वजा से हर जगा रौनक सी लग्ग जाती है. उन्ही चेहरों को मुरझा देते हैं कमीने लोग ...

क्या हक़ पोहचता है किसी को इतनी मासूम सूरत वालियों को उजाड़ने का.. मुझे अनुष्का के मुरझाये हुए चेहरे को देख कर बोहत hi ग़ुस्सा आने लगा ..

मेरे हाथ को थाम कर अनुष्का कुछ सकूं से हो गई थी.. लेकिन जिसकी बेहेन hi किसी भेड़िये के चुंगल में फँसी हो .. उसे कैसे सकूं मिल सकता है .. बास अनुष्का अगर कुछ शांत थी तो मेरी वजा से ... अब्ब वो अकेली नहीं थी और न hi उसकी इज़्ज़त को कोई खतरा था ..

ऐसे hi मैं सोचो में गुम्म गाडी भागता रहा और अनुष्का मेरे हाथ को थाम कर अपने दिल को ढारस देती रही ..



और हम अपनी मंज़िल पर पोहंच गए ....

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राजा ..uday..jeetu और अनुपम एक hi रूम में बैठे हुए और मुझे hi डिसकस कर रहे थे.. जब्ब मेरी कॉल आई तो सबब राजा की hi तरफ देखने लगे ...

कॉल डिसकनेक्ट होते hi

उदय:- राजा क्या कह रहा विजय .. कुछ गड़बड़ है क्या ..?????

राजा उठते हुए ..

राजा:- चलो रास्ते में बताता हूँ .. तीनो देर न करते हुए राजा के साथ बहार हो लिए ..

ड्राइंग रूम में पूजा दीदी और रानी के साथ सभी बैठे हुए थे .. जैसे hi सबब को मेरे आने का पता चला था तो सभी मेरे इंतज़ार में एक साथ ड्राइंग रूम में बैठ गए थे...

राजा सीधा ड्राइंग रूम में hi गया था .. राजा को आते देख कर सभी महिला मण्डली कड़ी हो गई ..

पूजा दीदी:- राजा विजय की कॉल आई क्या???

राजा :- जी पूजा जी विजय कुछ hi देर में आ जायेगा.. अभी हम विजय के hi काम से जा रहे हैं..

पूजा दीदी:- काम से मतलब ?? .. विजय सीधा यहाँ क्यों नहीं आया ???

राजा......:- वो आ के बताऊंगा अभी देर हो जाएगी गई. बास विजय कह रहा था क किसी लड़की की इज़्ज़त का सवाल है.. इस लिए हम चरों वहीँ जा रहे हैं..

ये बोल कर राजा तीनो के साथ बहार निकल गया ... गेट पर खड़े गार्ड्स को चौकस रहने को बोल कर वो 4रओं गाडी ले कर मतलबा एड्रेस की तरफ निकल गए.. रास्ते में राजा ने "जितनी बायत विजय से हुई थी" वो तीनो को बता दी ..

जीतू:- ओह्ह्ह्ह .. चलो फिर आज विजय को सरप्राइज देते हैं..

उदय और अनुपम दोनों ने भी गाडी में hi मौजूद गन्स को अपने हाथों में ले लिया .. एक एक खंजर भी अपनी कमर पारर कस लिया ... राजा गाडी चला रहा था ..

ुआड़ी:- विजय हमारा ये रूप देख कर कैसे फील करेगा .. उसे तो कुछ भी नहीं पता हमारे बारे में .. क लास्ट 1.5 ईयर से हम क्या कर रहे हैं ...

अनुपम:- हाँ बोहत वक़्त निकल गया विजय से मिले हुए .. बोहत याद आ रही है साले की ..पहले तो चिकना दीखता था.. अब्ब पता नहीं कैसा दिखेगा .. हहहहहए

जीतू :- जो भी है उस चिकने की वजा से हमारी भी लाइफ बन्न गई यारो .. वर्ण हम तो साड़ी उम्र ऐसे hi टपोरी टाइप बने फिरते रहते .. 500..1000 के लिए राह चलते हुए को लूटना भी कोई लाइफ थी यारो .. सच में यारो विजय hi की वजा से साली ज़िनदगी के मज़े hi हो गए hain..warnaaaaaaaaaaaaaaaa

तीनो hi विजय को ले के बात कर रहे थे.. और राजा गाडी को भागते हुए तीनो की बातें सुन रहा था .. और राजा के होंठों पे हलकी मुस्कान आ गई थी तीनो की बातें सुन के...

अच्छा hi तो था .. विजय के उनकी लाइफ में आने से उन चरों की लाइफ का सबब कुछ hi तो बदल गया था .. ज़िन्दगी जीने का ढंग जो आ गया था सभी को ..

और मक़सद भी मिल गया था......

चरों जल्द hi अपनी मंज़िल पर पोहंच गए .. विजय को आने में अभी देरर थी ..

उदय:- चलो विजय के आने से पहले hi मैदान साफ़ करते हैं .. और विजय का एक गिला भी ख़तम हो jayega...(uday को विजय को गोली लगने वाला सन याद आ गया था.. कैसे वो बट बन्न के खड़े थे और विजय को गोली लग्ग गई थी.. अगर तीनो फोरि एक्शन लेते तो .. विजय को गोली न खानी पड़ती)

jetu..anupam:- हाँ चलो आज विजय की तरफ से हमारे दिल में जो एक गिल्ट है वो भी आज ख़तम करते हैं.. और लड़की की इज़्ज़त को भी सेफ करते हैं ..

उदय:- और आज कुत्तों का खून भी बहते हैं.. चलो सबब देर न करो..

राजा सबब की बातें सुन कर मुस्कुरा रहा था.. राजा सबब के बदल जाने से बड़ा खुश था और राजा का ग्रुप भी विजय की वजा से स्ट्रांग हो गया था.. राजा तो पहले hi डेरिंग में कम् नहीं था.. अब्ब तीनो भी कुछ राजा और विजय जैसे hi बन्न चुके थे..

चरों सामने देख रहे थे और उनके सामने एक स्माल बांग्ला था.

सबब ने अपनी गन्स और खंजर को टटोला और फिर राजा राजा की तरफ देखने लगा..

राजा:- उदय और जीतू तुम गेट की तरफ जाओ .. और हल्का सा नॉक करके देखो.. अंदर से कोई रिस्पांस मिलता है या नहीं .. उदय और जीतो राजा की बात सुन कर गेट की तरफ चल दिए .. दोनों ने hi अपनी गन को हाथ में ले लिया था ..

और raja..anupam के साथ साइड में गन को गेट की तरफ करके खड़ा हो गया..

उदय ने गेट को हल्का सा नॉक किया... लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला .. तो उदय के कहने पे जीतो ने अपने हाथों की उँगलियों को आपस में फंसा दिया..

उदय जीतू के हाथों पर पेअर रख कर खड़ा हो गया और फॉर गेट के ऊपर से अंदर कोठी में झाँकने लगा ... अंदर गेट के पास hi गार्ड केबिन बना हुआ था और अंदर केबिन में जल रही रौशनी में केबिन खली नज़र आ रहा था ..

उदय ने सर्र नीचे करके जीतू को इशारा किया तो जीतो ने उदय को गेट के ऊपर से अंदर कूदने के लिए सपोर्ट दे दिया .. कुछ सेकंड में hi उदय अंदर जा पोहंचा..

पहले उदय ने केबिन में देखा तो कोई नहीं दिखा .. फिर उदय की नज़र केबिन के आत्ताच बाथरूम पर गई तो उदय धीमी चल से चलता हुआ बाथरूम तक गया .. उसे अंदर से आवाज़ सुनाई दी .. उदय समझ गया क gate-keeper अंदर है..

उदय खंजर हाथ में लिए उसके बहार आने का वेट करने लगा ..

जैसे hi gate-keeper बहार आया .. तो उदय ने पीछे से hi लेफ्ट हैंड से उसका मोहन बंद किया और फिर खंजर को उसकी कमर में उतार दिया.. वो बेचारा चीख भी नहीं सका .. उदय ने देरर न करते हुए फिरसे खंजर का एक वार कर दिया .. gate-keeper खंजर के वार सेह नहीं पाया तो उदय उसे छोड़ कर पीछे हट गया .. gate-keeper नीचे गिरने से पहले hi बेहोश हो चूका था.. उदय ने उसके गले पर खंजर चला कर उसकी बेहोशी को हमेशा के लिए बढ़ा दिया....

उदय ने बहार आ कर पहले सबब तरफ देखा और जल्दी से गेट का स्माल दूर ओपन कर दिया .. जीतू ने गेट खुलते hi राजा और अनुपम को इशारा किया और खुद गेट से अंदर दाखिल हो गया ..

अनुपम सबब से पीछे था तो उसने दूर को अंदर से बंद कर दिया.. और फिर राजा की तरफ देखने लगा..

राजा:- यहाँ खंजर का काम नहीं है. जल्दी से अंदर चलो और जो भी दिखे

""शूट हिम""

सबब तेज़ी से अंदर की तरफ बढे ...

अंदर जाते hi राजा ने जीतू और उदय को जल्दी से सभी रूम्स चेक करने को बोलै ..

नीचे के रूम्स में उनको 3 गुंडे मिले जिनमे से 2 सो रहे थे और एक अभी सोने की तैयारी कर रहा था .. कुछ hi पल लगे ... सीलेंसर लगे पिस्तौल से वो तीनो गुंडे हमेशा की नींद सो गए.....

नीचे सबब क्लीन हो गया था तो राजा और बाकी तीनो ऊपर की तरफ जाने लगे..

ऊपर पोहचते hi उनको चीखों की आवाज़ें सुनाई देने लगीं.

राजा:- उदय तुम मेरे साथ आओ और जीतू तुम अनुपम के साथ हम दोनों को कवर देना ..

जीतू.. अनुपम:- ok .. (थम्ब्स उप करते हुए)

राजा और उदय जैसे hi रूम के पास पोहंचे तो राजा ने दूर को हलके से नॉक किया.

अंदर से:- क्या है बे भॉकडीके..... बोलै ना क आज ये सिर्फ मेरी है .. और बार बार दूर नॉक करके मेरा दमाग ख़राब मैट करो ...

राजा ने उसकी बात सुन कर दूर को थोड़ा और भी ज़ोर से नॉक किया तो पास वाले रूम का दूर ओपन होने की आवाज़ आई. उदय फुरण hi उस तरफ हो लिया. और एक झटके में hi दूर को अंदर की तरफ धक्का मार दिया ... दूर खोलने वाला झटका सेह नहीं पाया और धड़ाम से पीछे जा गिरा ... अंदर एक और भी गुंडा था वो कुछ समझता us'se पहले hi उदय ने उसे शूट कर दिया और फिर नीचे गिरे गुंडे को भी दुसरे hi लम्हे में शूट कर दिया .. दोनों कुछ भी समझने से पहले hi परलोक सुधार गए.. दोनों की आत्मा भी सोच रही होगी..

""इतनी अचानक मौत का तो हमने सोचा hi नहीं था""

जितनी देर में राजा वाला दूर ओपन होता तब्ब तक्क उदय भी फ्री हो कर आ गया था.. राजा ने उदय को मुस्कुरा कर देखा और फिर गेट न खुलते देख कर थोड़ा पीछे होते hi एक जोरर की लात मारी और दूर टूट कर अंदर जा गिरा....

दूर के toot'te hi

अंदर मौजूद गुंडा हड़बड़ा गया और लड़की को छोड़ कर दूर की तरफ देखने लगा.

राजा ने अंदर आते hi उस कुत्ते के पेअर में एक गोली मार दी ..

गुंडा अभी हैरान hi हुआ था क दुसरे hi पल में वो

ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh गोली लगते hi वो चीखता हुआ नीचे गिर गया...

दूर के टूटने की आवाज़ से बाकी के रूम्स में मौजूद गुंडे भी बहार निकले लेकिन जीतू और अनुपम ने उनके बहार आते hi उनको शूट कर दिया .. चरों hi गुंडों को कोई भी मौका दिए बगैर hi मार रहे थे .. विजय की तरह चारों भी खुनी बन्न चुके थे .. लड़की वाले गुंडे को छोड़ कर सबब hi मर्डर चुके थे .. अब्ब तक्क 8 गुंडे मारे गए थे..

मतलब टोटल 9 कुत्ते थे इस बंगले में .. जीतू और अनुपम ने सारे रूम चेक कर लिए लेकिन उनको और कोई नहीं मिला .. तो वो भी राजा वाले रूम में आ गए ..

राजा ने पिस्तौल को कमर पर बंधी हुई बेल्ट में फंसाया और खंजर को हाथ में ले कर गुंडे के पास गया ... गुंडे ने निक्कर पहनी हुई थी .. उसका लुंड गोली लगते hi एक झटके में सो गया था . जो दूर के टूटने से पहले खड़ा था...

लड़की बीएड पर दर्री हुई बैठी थी ..

राजा:- (लड़की से) दर्रो नहीं अब्ब तुम सेफ हो .. हम तुमको hi बचने ए हैं..

लड़की राजा की बात सुन कर हैरान तो हुई क उसे कौन बचने आ गया .. वो तो इन में किसी को भी नहीं जानती thi..lekin फिर खुद को सेफ जानते hi उसकी आँखों में आंसू आ गए और वो रोने लगी ....

लड़की के कपडे कुछ ज़यादा hi फहत चुके थे... उसका गोरा बदन जगा जगा से दिख रहा था..

राजा :- रोना बंद करो और बीएड की चादर से खुद को कवर करलो ..

राजा की बात सुन कर लड़की को खुद की हालत का एहसास हुआ .. तो एक झटके में hi बीएड से उतर कर खुद को bed-sheet से कवर कर लिया..

राजा गुंडे को देखने लगा तो

गुनद:- कौन हो तुम और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की..

तुम जानते नहीं .. ये शंकर का ख़ास अड्डा है .. तुमने शंकर के अड्डे में घुस कर अपनी मौत को आवाज़ दी है ..

गुंडे की बात सुन कर राजा मुस्कुरा दिया तो uday..jeetu और अनुपम हसने लगे..

उदय:- राजा इसने एक काम तो कर दिया हमारा.. ये बता कर क ये बांग्ला भी शंकर के लिए ख़ास है .. ज़रूर यहाँ हमारे काम का बोहत कुछ होगा .. और अब्ब तो विजय भी आ गया है तो हमें फिरसे अपना अड़हुआरा छोड़ा हुआ काम शुरू करना पड़ेगा लेकिन इस बार ज़रा हट के और स्टाइल बदल के ..

उदय की बात सुन कर राजा बोलै

राजा:- उदय तुम सही बोल रहे हो. चलो तुम तीनो बंगले की चेकिंग करो और मैं इसे ले कर नीचे जाता हूँ ..

ये बोल कर राजा से जुनेद को सर्र के बालों से पकड़ा और ghaseet'ta हुआ नीचे जाने लगा .. लड़की भी राजा के साथ hi नीचे जाने लगी ..

नीचे पोहंच कर राजा ने गुंडे को विजय के लिए छोड़ दिया .. बास उसके दुसरे पेअर को भी गोली मार कर एक्सपिरे कर दिया ..

लड़की एक सोफे पर बैठी राजा को देख कर डर भी रही थी और खुद को सेफ पा कर खुश भी थी ..

कुछ देर बाद बहार से गाडी की आवाज़ आई तो राजा गेट की तरफ बढ़ गया .. लड़की भी राजा के पीछे चल दी ....




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जब्ब मैं वहां पोहंचा तो वहां का नक़्शा hi बदल चूका था.. राजा uday.anupam और जीतू ने बाज़ी hi मार ली थी.

मेरी गाडी की आवाज़ सुनते hi राजा बहार आया और उसके साथ अनुष्का की दीदी भी थी. अनुष्का अपनी बेहेन की हालत देख कर रोने लगी और भागती हुई अपनी दीदी के गले लग गई ..

मैंने इसी लिए राजा को hi फोन किया था .. क्यूंकि मुझे देरर हो चुकी थी और राजा वहां से जल्दी पोहंच सकता था.

मैं और राजा एक दुसरे को देखने लगे .. इतने में बाकी के तीनो लफंगे भी बहार hi आ गए थे ......

राजा और बाकी के तीनो को देख कर मैं बड़ा हैरान हुआ .. उन चारों का तो हुलिया hi बदल चूका था..

साले टपोरी सी शकल वाले बड़े hi हट्टे काटते दिख रहे थे ... और उदय जो सबब से बढ़ कर डरपोक था .. उसके चेहरे को देख कर कहीं से नहीं लग रहा था क वो उदय hi है .. साला फुल कॉंफिडेंट दिख रहा था.

राजा तो पहले hi बोहत कुछ था. लेकिन जीतो उदय और अनुपम भी बदल गए थे. उनको ऐसे देख कर मुझे बोहत ख़ुशी हुई.. पहले राजा मेरे गले लगा.

राजा मुझसे ऐसे मिला जैसे कोई बिछड़ा हुआ भाई मिलता है.. हम दोनों hi एक दुसरे से एक लम्बे समय के बाद मिल रहे थे....

राजा से मिल कर मैं बाकी के तीनो कमीनो से मिला .. तीनो से भी मिलकर मुझे बोहत hi अच्छा लगा. वक़्त ने हमें फिरसे मिला दिया था ..

10 मिंट हम ऐसे hi एक दुसरे को महसूस करते रहे..

जब्ब सबब का मिलना हो गया तो

विजय:- राजा सबब अच्छे से हो गया था ना .. कुछ लोचा तो नहीं हुआ यहाँ पारर..

मेरी बात पारर राजा के इलावा तीनो हस्सन लगे ..

राजा:- अरे नहीं यार विजय .. अब्ब हम भी तेरी hi तरह के बन्न गए हैं.. अब्ब ऐसे मार धाड़ हमारे लिए मुश्किल नहीं रही...

विजय :- मतलब ???? मैं कुछ समझा नहीं और ये तुम सबब इतने बदल कैसे गए. तुम सबब को देख कर लगता है. जैसे तुम सबब ने भी ट्रेनिंग ली है..

वो फिर मुझे अचानक से याद आया क ins-ranjeet ने कहा था क ट्रेनिंग से वापसी के बाद मुझे सरप्राइज मिलेगा.. मतलब वो raja..uday..anupam..aur जीतू को भी त्रिनेड कर के मुझे सरप्राइज देने वाले थे.. ये तो ins-ranjeet ने बोहत hi बढ़िया काम किया था...

अब्ब हमारी एक टीम बन्न गई थी .. पहले मैं और राजा hi थे जो दररते नहीं थे और बाकी के तीनो की तो पटलों hi गीली हो जाइत थी ऐसी सिचुएशन में ... लेकिन अब्ब उन तीनो में भी मुझे वही डेरिंग देखने को मिली जो कभी मैं उनमे देखना चाहता था ..

मेरे फेस एक्सप्रेशन को देख कर राजा बोलै...

राजा:- अच्छा तो तुम मेरे बोलने से पहले hi सबब कुछ समझ गए .. वाह क्या बात है. इतनी जल्दी समझ गए .. बड़े तेज़्ज़ बन्न कर ए हो...

मैं राजा को देखने लगा .. राजा की भी टोन बदल गई थी. ऐसे खुश और मस्ती वाले अंदाज़ में राजा कम् hi बात किया करता था...

अनुष्का हमारे पास आई तो साथ में उसकी दीदी भी थी...

अनुष्कि दीदी:- मैं कैसे आप को थैंक्स कहूं. तुमने मेरी इज़्ज़त ..

विजय:- अनुष्का समझाओ अपनी बेहेन को क इसमें थैंक्स की कोई बात नहीं है.. और वैसे भी तुम दोनों के चेहरों पारर मुझे वही क्यूट सी स्माइल hi अछि लगती है.. बास खुश रहा करो .. ऐसे मोड़ तो ज़िन्दगी में आते hi रहते हैं.. खुद को मज़बूत बनाओ .. कब्ब तक्क खुद की इज़्ज़त बचाने के लिए हमारे जैसों की तरफ देखती रहूगी ..

नारी ज़ात तो बोहत स्टोरंग होती है.. अपने अंदर की वो नारी जगाओ और खुद की इज़्ज़त की रक्षा करना सीखो.. वर्ण आज तो तुम दोनों बच गई हो .. लेकिन हर्र बार कैसे बचूँगी .. ये साड़ी दुन्या hi तो जिस्म के भूके भेड़ियों से भरी पड़ी है.. इसलिए मुझे थैंक्स मैट बोलो और खुद को स्ट्रांग बनाओ..

राजा और सबब मुझे देखने लगे .. मैंने कभी भी ऐसी बात जो नहीं की थी ..

पता नहीं कैसे लेकिन दोनों बहनो को देख कर मेरे अंदर से ऐसी बातें निकल गई थीं. मैंने कभी भी ऐसी बातें किसी से नहीं की थीं ..

शायद ये बातें मेरे la-shaoor (unconsciousness)me छुपी हुई थीं जो आज बहार निकल गई थीं.. कितनी अच्छी बात थी ना क नारी ज़ात को स्ट्रांग होना चाहिए.. वर्ण कब्ब तक्क खुद की इज़्ज़त को लूटने से बचती बचती रहेंगी .......

मेरी माँ भी अगर स्ट्रांग होती तो शायद आज हमारा भी सबब कुछ बदल चूका होता.. माँ बर्बाद होने के बाद और मेरे दुन्या में आने के बाद hi स्ट्रांग बानी थीं..

नारी को कमज़ोर नहीं होना चाहिए .. नारी क्या कुछ नहीं कर कर सकती ...

जब्ब जब्ब नारी ने खुद को स्ट्रांग बनाया है .. तब्ब तब्ब हिस्ट्री बदल के रख दी थी नारी ने .. नारी कमज़ोर नहीं है .. बास खुद की इज़्ज़त को खतरे में देख कर डर जाती है ..

इज़्ज़त को खतरे में देख कर तो नारी को और भी ज़यादा स्ट्रांग बन्न जाना चाहिए .. नारी की इज़्ज़त hi तो उसके लिए सबब कुछ होती है .. लेकिन डर के मारे अपनी इज़्ज़त लुटवा बैठती हैं ..

मैं सोचो में आगे चला गया .. पास खड़े राजा ने मुझे हिलाया..

मैंने राजा और फिर अनुकशा और उसकी बेहेन की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी...

विजय:- ऐसे मुझे क्या देख रही हो..

अनुष्का सीस:- नहीं मैं तो बास तुम्हारी बातों पारर hi घोर कर रही थी. क तुमने कितना सही बोलै है. सच में hi नारी कमज़ोर नै है. बास ज़रुरत है तो अपने अंदर के डर को बहार निकलने की .. एंड थैंक्स क तुमने मुझे ये सबब बोलै .. मुझे भी आज एहसास हुआ है क मैं कितनी कमज़ोर हूँ .. जो खुद की hi इज़्ज़त नहीं बचा सकती .. (फिर अनुष्का से बोली) अनु हम दोनों खुद को बचा सकती थीं .. तुमने देखा नहीं था क वो कितने नशे में थे .. हम दोनों बास डर गई थी. और हमारा डर hi तो हमें इस मुक़ाम तक्क ले आया..

अनुषक:- हाँ दीदी मुझे भी ऐसा लग्ग रहा है..

मैं दोनों बहनो की बातें सुन रहा था.. और मुझे एक ख़ुशी मिल रही थी उनकी बातों से ........


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तहनक्स डिअर..!!

ins-ranjeet जनता है क विजय के फ्रेंड्स उसके लिए मुख्लिस हिजन और विजय को आने वाली लाइफ में इनकी ज़रुरत पड़ेगी.. इसलिए isn-ranjeet ने चरों को भी त्रिनेड कर दिया,,

अभी आगे बोहत कुछ होने वाला है.. कुछ भी पहल सोच लेना सही नहीं है .. जब्ब विजय के जाने का टाइम हुआ तो पता चलेगा..

जितना विजय ने सबब को तड़पाया है उतना तो विजय का सवगट होगा hi.....

और थैंक्स मेरे लास्ट के वर्ड्स को लिखे करने के लिए
 
ुपड़ते ::: 47

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बोहत देर हो गई थी .. सबब मेरे लिए बेचैन होंगे..

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विजय:- राजा अगर यहाँ का सबब हो गया है तो फिर कोठी पर चलते हैं . इन dono(anushka और उसकी बहन की तरफ इशारा करते हुए) को कोठी hi ले जाते हैं. अभी इनका हॉस्टल जाना ठीक नहीं है..

मेरी बार सुन कर राजा

uday.jeetu. और अनुपम की तरफ देखने लगा..

राजा:- (तीनो से) कुछ मिला क्या अंदर से ..

उदय:- हाँ बोहत कुछ है हमारे लिए बंगले में .. जो आगे हमारे काम आएगा.

मैं दोनों की बात सुन रहा था.. मुझे सबब समझ आ गई क राजा और उदय क्या बात कर रहे हैं.. राजा कुछ बोलता us'se पहले hi मैं बोल पड़ा..

विजय:- अभी टाइम भी कम् है तो जो भी अंदर हमारे काम का है .. उसे जल्दी से गाडी में ट्रांसफर करो ..

अनुपम:- नहीं वो बोहत ज़यादा है तो गाडी में सबब नहीं आएगा..

विजय.:- कोठी में कोई बड़ी गाडी कड़ी है क्या..

राजा..:- हाँ एक छोटा पिचकूप ट्रक है कोठी में ..

विजय:- तो फिर ऐसा करो .. राजा तुम दोनों लड़कियों को ले कर कोठी छोड़ आओ और गाडी वही छोड़ कर पिचकूप ट्रक ले आओ..

उदय:- मैं जाता हूँ.

मैं सोचने लगा क राजा के इलावा गाडी कोई तो चलता नै था.

फिर याद आया क अब्ब 1.5 साल भी तो गुज़र चूका है तो जब्ब इतना कुछ सीख लिया है तो गाडी चलना कौनसी बड़ी बात थी. मैं भी तो हर किसम की गाडी चलना सीख hi गया था.

विजय:- (अनुष्का से) तुम दोनों जाओ इसके साथ .. घर में सबब मौजूद हैं और तुम दोनों को वहां ाचा भी लगेगा ..

दोनों थोड़ा सा कंफ्यूज हुई लेकिन फिर उदय के साथ चली गईं...

बाकी हम चारों बंगले के अंदर चले गए ..

ड्राइंग रूम में 4 कार्टन पड़े थे.. और एक गुंडा ज़ख़्मी हालत में बेहोश पड़ा था.. मैं सबब की तरफ देखने लगा.. तो

राजा:- यही यहाँ का हेड लगता है. बड़ी कुट्टी चीज़ है. इसी लिए इसे मारा नहीं. कुछ डिटेल निकालेंगे is'se .. और बॉक्सेस में क्या है मुझे नहीं पता.. जीतू तू बता.......

जीतू:- दो कार्टन में ड्रग्स हैं और दो में ..... आगे जीतू कुछ नहीं बोलै बास उसने कार्टन को खोल दिया ..

दोनों hi कार्टन में वेपन थे. जीतू एक राइफल को हाथ में उठा कर मुझे दिखने लगा.. मैंने भी जीतू के हाथ से राइफल पकड़ ली...

राइफल लेटेस्ट मॉडल की थी.. और बड़ी महंगी भी थी. साले शंकर ने माल तो बोहत hi अच्छा रखा हुआ था..

विजय:- बास यही चार हैं या

जीतू:- नहीं नीचे बेसमेंट में कुछ और भी कार्टन पड़े हैं. अभी हमने वो खोल कर नहीं देखे ..

फिर हम अनुपम को वही छोड़ कर नीचे जाने लगे..

वहां पोहंच कर जीतू ने बॉक्सेस खोलने शुरू कर दिए.. ज़यादा बॉक्सेस में ड्रग्स थीं और कुछ में और डिफरेंट किंड्स ऑफ़ वेपन थे....

मैं बड़ा हैरान हुआ क यहाँ शंकर का इतना माल पड़ा है और कितनी आसानी से सबब गुंडे मारे गए थे.. शंकर ने यहाँ का सिक्योरिटी सिस्टम इतना वीक क्यों रखा हुआ था .....

बाद में उस बेहोश गुंडे से पूछ ताछ से पता चला था क यहाँ जो कार्टन पड़े थे. कल सूबा उनकी डिलीवरी होनी थी.. कभी कुछ हुआ नहीं था तो इसलिए सबब इजी hi थे... वर्ण हमारा यहाँ घुसना आसान नहीं था ... चलो कुछ तो काम बना..

ड्रग्स हमारे किसी काम का नहीं था ..

विजय:- बास यही है या और भी कुछ है..

जीतू:- बास कुछ कॅश मिला है.. ज़यादा नहीं है लेकन फिर भी हमारे लिए फ़िलहाल काफी है ...

विजय:- चलो जो भी hai..drugs और लाशूँ को एक साथ रख कर आग लगा दो ..

जीतू:- बम न लगा दें पूरा बांग्ला hi उदा देते हैं..

विजय:- नहीं .. शंकर को मारने के बाद ये हमारे काम आएगा.. बाद में देखेंगे जो डिस्ट्रॉय करने वाला होगा .. उसे डिस्ट्रॉय करदेंगे .. और जो हमारे काम का हुआ. उसे खुद के लिए सेफ कर लेंगे .... अब्ब इस शहर के सारे अड्डे हमारे होंगे.. और हमारे इलावा कोई भी गैंग्स अब्ब दिल्ली में नहीं रहेगा ..

मेरी बात सुन कर राजा मुस्कुराया तो जीतू और अनुपम शॉकेड हो गए ..

दोनों:- मतलब शंकर गैंग के इलावा के दो गैंग्स .. मतलब तुम तीनो गैंग्स को hi खतम कर देना चाहते हो.. यार विजय is'se शहर का माहौल बड़ा ख़राब हो सकता है..

विजय :- वो बाद में देखेंगे. पहले गुंडों की लाशें और ड्रग्स इकठा करते हैं.

बातें करते हुए हम ड्राइंग रूम में आ गए थे. जीतू और अनुपम ने लाशें इकठी करनी शुरू कर दीं. और मैं राजा के साथ कार्टन उठा के ड्राइंग रूम में रखने लगा .....

जब्ब तुम हम अपने काम से फ्री हुए तब्ब तक्क उदय भी आ गया था पिचकूप ले के..

फिर हमने अपने काम के कार्टन पिचकूप पर लोड किये और बाकी के कार्टन और लाशें बहार निकल कर आग लगा दी.

बेहोश पड़े गुंडे को मैंने जो अपने साथ गाडी लाया था. उसकी पिछली सीट पर लिटा दिया.. गाडी का स्टेरिंग राजा ने संभाला और मैं राज के साथ कोठी की तरफ चल पड़ा ... और बाकी के टीनू भी पिचकूप को लिए हमारे पीछे आने लगे..



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इन 8 महीनो में दिल्ली में क्या हुआ

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जैसे hi शंकर को पता चला क अज्जू को मारने वाले का पता चल गया है.. तो बोहत खुश हुआ लेकिन फिर जल्दी hi उसका आदमी धीरज ins-ranjeet के शिकंजे में आ गया...

शंकर जितना खुश हुआ था .. बाद में उतना hi पेरशान हो गया क ins.ranjeet का इस मुआमले से क्या लेना देना है.

शंकर को धीरज ने बता दिया था .. तो शंकर ने अपने कुछ आदमी लगा दिए विजय और पूजा की कुंडली निकलने के लिए .. लेकिन जैसे hi शंकर को पता चला क हर्ष चौहान के आदमी विजय और पूजा की फॅमिली की रक्षा कर रहे हैं. तो शंकर और भी बड़ा हैरान हुआ क ins.ranjeet और हर्ष चौहान क्यों इनसे मिले हुए हैं. लेकिन फिर जल्दी hi शंकर को पता चला क हर्ष के विजय और पूजा से फॅमिली रिलेशन हैं. तो शंकर सावधान हो गया .. विजय के बारे में भी डिटेल मिल गई क विजय अखाड़े में जाता है. और ins-ranjeet पहलवान जी की वजा से विजय का ख्याल रखता है. इसके इलावा शंकर को कुछ और पता नहीं चला.

शंकर स्टुपिड नहीं था वो सोच समझ कर चाल चलता था ..

तीनो पार्टनर्स एक दिन साथ बैठे हुए थे ..

धर्मेश:- शंकर तुमने कहा था क अब्ब जल्द hi अज्जू को मारने वाले मेरे पैरों में होंगे.. तो अब्ब इतना टाइम क्यों ले रहे ..

शंकर:- धर्मेश मैंने तुम्हें बताया ना क वहां हर्ष चौहान के आदमी और ins-ranjeet ने उस फॅमिली पर अपनी नज़र राखी हुई है. इस लिए अभी हम कुछ नहीं कर सकते ..

धर्मेश:- तो फिर क्या हुआ.. अगर हर्ष चौहान और ins-ranjeet बीच में आते हियँ तो दोनों को भी मार देते हैं. मुझसे अब्ब और इंतज़ार नहीं होता.. मेरा एक hi भाई था ..इतने महीने हो गए मेरे अज्जू को मरे हुए और अज्जू के कातिल अभी तक ज़िंदा घूम रहे हैं. शंकर अगर तुम कुछ नहीं कर सकते तो मैं खुद hi सबब कर लूँगा.. मैं भी देखता हूँ क ins-ranjeet और हर्ष चौहान कैसे उस हरामज़ादे को बचते हैं.

प्रेम:- धर्मेश इतना ग़ुस्सा मैट किया करो... वो लड़का तो मरेगा hi .. साथ में उसके घर वाले भी मरेंगे .. लेकिन अभी सही वक़्त नहीं है ..

शंकर ठीक hi तो कह रहा है. हर्ष च्वहाण भी कम् नहीं है. और फिर जितना हमने ins-ranjeet के बारे में सुना hai..utna तो तुम भी जानते हो.

जितनी आग तुम्हारे दिल में जल रही hai.utni hi हमारे दिल में भी जल रही hai..lekin जो भी हमने करना है .. सोच समझ कर और सही वक़्त आने पर...

शंकर:- मैं इस लिए भी jald-baazi नहीं कर raha.kyunki हमारी किसी भी गलती से हमारे मुखालिफ गैंग्स वाले इस बात का एडवांटेज न उठा लें .. बदले लेने के चक्कर में कहीं ये न हो .. क हराम गैंग hi बिखर जाए .. धर्मेश तुम चिंता मैट करो सबब होगा तुम्हारे हिसाब से hi होगा लेकिन सही वक़्त आने पारर ..

धर्मेश को भी शंकर और प्रेम की बातें सही लग्ग रही थीं लेकिन us'se वक़्त गुज़ारना मुष्किल हो रहा था.. पहले hi कई महीने गुज़र चुके थे...

धर्मेश:- ठीक है लेकिन अगर तुम दोनों ने ज़यादा समय लगाया तो फिर मैं अपने हिसास से अपना बदला ले लूंगा...

शंकर:- ok दोने..

प्रेम :- ये हुई न बात ..

उसके बाद shankar..dharmesh और प्रेम ने वक़्त का इंतज़ार करना शुरू कर दिया ..

ins-ranjeet और हर्ष चौहान सबब कुछ समझ रहे थे .. ये शंकर अब्ब चुप ज़रूर है लेकिन कभी न कभी वो कुछ ज़रूर कुछ करेगा .. इसलिए हर्ष चौहान और ins-ranjeet ने विजय के जाने के बाद बाकी सबब की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी बढ़ा di..shankar कुछ नहीं कर पाया .. वक़्त गुजरने लगा और फिर धर्मेश की बर्दाश्त तब्ब ख़तम हो गई जब्ब विजय ट्रेनिंग के लिए चला गया ..

विजय न सही बाकी तो हैं घर पारर.. उनसे बदला लिया जा सकता है.. ये सोच कर धर्मेश ने शंकर और प्रेम के इल्म में लाये बगैर hi अपने आदमी पूजा और बाकी घर वळून को उठाने क लिए भेज दिए लेकिन उनमे से कुछ मारे गए और कुछ ज़ख़्मी हो कर अरेस्ट हो गए ..ins-ranjeet और हर्ष चौहान ने सिक्योरिटी बढ़ा दी..

लेकिन धर्मेश फिर भी नहीं रुका .. वो बार बार कभी अपने आदमी तो कभी रेंट पे गुंडों को हिरे करके टाउन भेंजे लगा .. प्रेम और शंकर को भी पता चल गया था .. धर्मेश का ग़ुस्सा अपने बदले और नाकामी से बढ़ने लगा ..

प्रेम और शंकर ने धर्मेश का साथ नहीं छोड़ा और फिर शंकर ने धर्मेश को ठंडा करके फोरि एक्शन के लिए बोल दिया .. शंकर को भी इतना टाइम निकल जाने पर बड़ा ग़ुस्सा आ रहा था.. लेकिन वो ये भी जान गया था क अभी कुछ नहीं कर payega..lekin धर्मेश के लिए शंकर ने फिर भी हाँ करदी..

धर्मेश के हमले और शंकर के हमले में फ़र्क़ था.. धर्मेश ने सीधा सीधा अटैक करने के लिए गुंडे भेजे थे तो शंकर ने प्लान बनाना शुरू कर दिया..

शंकर ने प्लान बना कर टाउन में पूजा के घर पर हमला कर दिया लेकिन प्लान ज़बरदस्त होने के बावजूद भी शंकर फ़ैल हो गया ..

अब्ब शंकर भी बावला हो गया था और उसने डायरेक्ट हमले का सोच लिया.. जब्ब शंकर ने डायरेक्ट हमला किया तो घर खाली मिला ..

शंकर धर्मेश और प्रेम का ग़ुस्सा और भी बढ़ने लगा..

लेकिन पूजा एंड फॅमिली का कुछ भी पता नहीं चला.......



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लोकेशन कोठी

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जैसे hi उदय दोनों बहनो को लेकर कोठी पोहंचा तो सबब hi ये समझे क विजय आ गया है और सबब hi ड्राइंग रूम से भागते हुए बहार आये ..

सबब के सबब hi पागल hain..pyaar सबब को hi पागल का देता है..

सबब की आस तब्ब टूटी जब्ब उन्हें विजय नहीं दिखा.. बास उदय के साथ दो लड़कियों को देख कर वो समझ गईं.. अभी उनका इंतज़ार ख़तम नहीं हुआ..

लेकिन पूजा दीदी और रानी लड़कियों को देख कर सबब समझ गई..

अनुष्का और उसकी बेहेन तो एक बार सबब को ऐसे भागते देख कर डर गई लेकिन फिर जल्द hi वो खुद को संभल गईं.

सबब ने hi दोनों बहनो का अच्छे से वेलकम किया और दोनों लड़कियों को लेकर अंदर आ गई.

रानी अनुष्का की बेहेन को अपने साथ अपने रूम में ले गई. और उसे कपडे दिए बदलने को...

अनुष्का की बहिन पकडे बदल कर ड्राइंग रूम में आई और फिर सबब ने सवालात शुरू कर दिए..

अनुषक और उसकी बहन सबब का प्यार वाला अंदाज़ देख कर बोहत खुश हुई और फिर दोनों ने hi अपने अपने हिसाब से सबब बता दिया.. अनुष्का ने तो स्टेशन वाली विजय की हरकत भी बता दी. जिसे सुन्न कर अब hi ख्यालों की दुन्या में चले गए...

विजय की माँ और बहनो का दर्द इस सबब के इलावा और कौन जान सकता था.

फिर सबब hi विजय को ले के बातें करने लगीं. और दोनों बहने विजय के लिए

इतना प्यार देख कर हैरान हो गईं.

पूजा didi..rani..shika..roopa..khud को बातों में उलझाए हुए थीं..

लेकिन इंतज़ार करना असबब के लिए hi मुष्किल होने लगा था.. दोनों लकियों को आये काफी टाइम हो गया था लेकिन विजय अभी तक्क नहीं आया tha..jaise जैसे देर हो रही थी.. वैसे hi पूजा दीदी और रानी की बर्दाश्त ख़तम होने लगी.. बातें तो बोहत हीं करने के लिए लेकिन करने का मैं नहीं रहा था. दोनों hi बातें छोड़ कर उठ गईं और टहलने lagi..rani कभी पूजा दीदी को देखती तो कभी पूजा दीदी रानी को देखती.. दोनों के लिए hi टाइम निकलना मुष्किल होने लगा..

पूजा दीदी तंग आ कर बहार लॉन में चली गईं..

सबब दोनों को देख कर हस्सन लगी और अनुष्का और उसकी बेहेन भी मुस्कुरा दीं. वो भी ऐसे माहौल को एन्जॉय कर रही थीं.

फिर एक एक करके सभी hi बहार को चल दीं. शिका और रूपा ने दोनों को भी अपने साथ ले लिया और लॉन की तरफ निकल पड़ी...


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मुझे पता था क जितनी देर मुझे हुई है.. आज मेरी खैर नहीं.. बोहत बुरा हाल होने वाला था मेरा आज.. पूजा दीदी और रानी तो मुझे छोड़ने वाली नहीं.. पता नहीं कितने थप्पड़ पड़ने वाले थे..

जब्ब कोठी पर पोहंचे तो gate-keeper बदली हुई गाडी देख कर देख कर चौकस हो गया .. साथ hi गार्ड को बोल दिया क अनजान गाडी आई है ..

गार्ड ने अपनी गन का रुख सीधा गाडी की तरफ कर दिया.. लेकिन फिर राजा पर नज़र पड़ते hi गन नीचे की दी.. gate-keeper ने भी राजा को देख कर गेट खोल दिया..............

मैं पहली बार ये कोठी देख रहा था.. और यहाँ की सिक्योरिटी भी ज़बरदस्त थी.

गाडी अंदर जा कर रुकी और मैं नीचे उतर गया..

मेरी नज़र जैसे hi सामने पड़ी तो शिखा और रूपा भागती हुई ाएँ और मेरे गले लग्ग गई. मैं अभी हैरान hi हो रहा था क सामने hi लॉन में सभी मुझे खड़े नज़र आये और फिर सबब के बदले हुए चेहरे देख कर मैं सबब समझ गया.. क मैंने जो सोचा था वही सच है.. आज मेरी हालत ख़राब होने वाली थी..

रूपा और शिखा मेरे लगे लगते hi रोने लगीं theen..mujhe भी उसके दर्द का एहसास था.. मुझसे दूरी इन दोनों बहनो ने बड़ी मुश्किल से बर्दाश्त की होगी..

मैंने रूपा और शिखा को खुद से अलग किया.. वो दोनों मुझे देखने लगीं मैंने सामने कड़ी पूजा दीदी और रानी की तरफ इशारा किया .. दोनों ने जैसे hi रानी और पूजा दीदी को देखा तो उनको अपनी गलती का एहसास हुआ क अभी तो विजय से मिलने hi नहीं tha..jitna विजय ने हमें तड़पाया hai..pehle उसका बदला तो ले लेती..

मैं भी अचानक से उनके बदले हुए तेवर देख कर भाग लिया और सीधा जा कर पूजा दीदी को गले लगा लिया.. और पूजा दीदी




पूजा दीदी:- विज्जु छोडो मुझे ..मैंने कहा मुझे छदो..

विअज्य:- मेरा दमाग ख़राब है जो छोड़ doon..apna फेस ख़राब करने का मेरा मैं नहीं है..




मैंने पूजा दीदी को गले लगा कर खुद की बचत कर्ली थी लेकिन

रानी तो आज़ाद थी .. रानी ने मेरे चुत्तड़ पर कस के एक थप्पड़ लगाया और मैं

अचानक से हुए इस हमले की वजा मेरी पकड़ पूजा दीदी के गिर्द थोड़ी कमज़ोर हो गई

पूजा दीदी किसी चिकने मछली की तरह मेरी बहन से फिसल गई और फिर मेरे चेहरे पर उनकी उँगलियों के निशान बनने लगे.

8 महीने लगा कर इतना ज़बरदस्त फेस बनाया था .. यहाँ आते hi बिगड़ने लगा था.. अब्ब मुझे पड़ने वाले थप्पड़ों की गिनती कौन करता.. शिखा और रूपा से जो भूल हुई .. मुझे थप्पड़ मारे बगैर hi गले मिल गई थीं.. पूजा दीदी और रानी के साथ मिल कर अपनी भूल को सुधरने लग्ग गई.. चरों ने मिलकर मुझे नीचे गिरा दिया.. पूजा दीदी मेरे ऊपर बैठ गई और रानी भी पूजा दीदी को आगे धकेलते हुए मेरे मुन्ने पर बैठ गई.. शिखा और रूपा दोनों रानी और पूजा दीदी का मोहन देखने लगी..

लॉन में रौशनी कम् थी ..

पूजा दीदी ने मेरे सर्र के बलून को पकड़ लिया.. बाल छोटे थे लेकिन उनके हाथ में आ गए और वो मुझे बालों से पकड़ कर झंझोड़ने लगी.. वो मुझे ग़ुस्से से देख रही थी.

पूजा दीदी ने मेरे सर्र के बाल छोड़े और फिर अचानक से उनकी आँखों में नमी आने लगी और फिर वो मेरे चेहरे पर झुकती चली गईं और फिर अपने महीनों से तड़प रहे दिल को शांत करने के लिए बड़े hi प्यार से मेरे गालों को चूमने लगी..

पूजा दीदी को बदला हुआ रूप देख कर रानी उठ कड़ी हुई.. वो भी अभी मेरे और पूजा दीदी के बीच नहीं आने वाली थी.. ये मेरा और पूजा दीदी का टाइम था.. तो

""""no डिस्टर्बेंस""""""

पूजा दीदी अपने दिल को हल्का करने के लिए मेरे गालों का अपने होंठों से मस्सगे करने लग gai..maine भी अपने दोनों हाथ पूजा दीदी के गिर्द कस लिए और फिर मैं भी पूजा दीदी के प्यार में डूबने लगा.. पूजा दीदी को मैंने डिस्टर्ब नहीं किया और वो 8 महीनो की जुदाई का सारा दर्द मिटने lageen.mere गालों को चूम कर पूजा दीदी ने मेरे होंठों को अपने होंठों में क़ैद किया और प्यार से मुझे किश करने लगी.. कुछ सेकंड hi हुए थे क मुझे अचानक से याद आया क सभी यहाँ हैं .. तो कुछ ख्याल करना चाहिए और अनुष्का के साथ उसकी बेहेन भी है.. मैंने अपने होंठों को पूजा दीदी के होंठों से अलग किया तो पूजा दीदी मुझे देखने लगी .. मेरी आँखों में देखते hi पूजा दीदी भी समझ गई .. क वो कहाँ हैं और क्या कर रही हैं.. वो तो शुक्र था क रौशनी काम थी वर्ण सबब को hi दिख जाना था.. क आज हमारा किश कमरे में नहीं ओपन hi चल गया है..

पूजा दीदी मेरे ऊपर से उठी और..

पूजा दीदी:- पहले सबब से मिल लो .. मैं तुमसे बाद में मिल लूंगी अच्छे se(mujhe मारते हुए)

वाओ एक किश ने hi बाज़ी पलट दी थी.

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