Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 5 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट ::::28

हर्ष चौहान ऑंखें पहाडे मुझे देख रहा था

अब्ब अग्गिये

जब्ब हर्ष चौहान को पता चला क मैं वही विजय हूँ. जिसे ढूंढ़ने के लिए उसने na-jaane क्या क्या किया tha.deeksha आंटी ने हर्ष चौहान का chain-sakoon सबब हराम किया हुआ था. मेरे जाने के बाद हर्ष च्वहाण ने मुझे बोहत ढूंढा लेकिन मैं कहाँ उसे मिलता. मैं तो था hi दिल्ली शहर से बहार और जल्द hi मेरा हुलिया भी चेंज हो गया था .... और फिर जिसको हर्ष चौहान ने मुझे चूंडने को बोलै होगा. कैसे वो मुझे पहचान पाटा. मेरे लब्मे बाल hi मेरी पहचान थे. वो मैंने कटवा दिए थे.... और दूसरा मैं कभी अपने टाउन से कभी बहार निकला भी तो नहीं था......

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हर्ष चौहान मुझसे बड़े hi प्यार और garam-joshi से मिला. हर्ष चौहान तब बड़ा हैरान हुआ तब उसने मेरे मज़बूत जिस्म को गले लगते वक़्त मह्सूस किया था.

वो हैरान तो था मुझे स्ट्रांग महसूस करके लेकिन खुश बोहत हुआ...

हर्ष चौहान खुद भी एक मज़बूत जिस्म का मालिक इंसान था.

अगर कोई खुद मज़बूत हो. तो उसे अपने जैसों से मिल कर अच्छा तो लगे गए hi....

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कुछ देर बाद हम सबब सोफे पारर बैठे थे और मेरे दोनों साइड्स पारर शीतल और नताशा दीदी ने कब्ज़ा किया हुआ tha.....wo दोनों मुझे अपने साथ जकड कर बैठी हुई थी. आंटी और अंकल दोनों हमारे सामने बैठे the...kuch देर दोनों बहने मुझे अच्छे से फील करती रहीं. जब्ब दिल को कुछ सकूं हुआ और गुज़रे महीनों की तड़प ख़तम hui.............to तब्ब मुझसे पूछा गया.

मैं अब्ब तक्क कहाँ tha.....maine अपने बारे सबब बता दिया. हर्ष च्वहाण के घर से जाने के बाद जो जो हुआ.. गुंडों के क़तल वाली बात नहीं batai.........baaki सबब बता diya..............wo सबब ये जान बोहत खुश huye.........fir मैंने अपनी माँ और बहनो के बारे भी बता दिया जिसे सुन्न कर सबब ने बोहत आंसू बहाये.....

नताशा दीदी और शीतल की तो ये सुन्न कर hi जान निकलने लग गई थी. क मेरी माँ और बहने एक भयंकर दलदल में फँसी हुई हैं..........

आंटी और अंकल को तो मैंने पहले बता दिया था. क मैं कौन हूँ लेकिन सबब नहीं बताया था.

अब्ब वो सबब जान गए the.......to सभी बोहत hi दुखी थे....

हर्ष चौहान के बारे पता चला tha.......unka बुसिनेस्स पूरे देश में पहला हुआ hai...desh के हर बड़े सिटी में हर्ष चौहान का बुसिनेस्स पहला हुआ hai..aur कुछ बहार के कुछ कन्ट्रीज में भी tha...lekin अपने देश में इनका बुसिनेस्स बोहत hi बढ़िया अभी कुछ hi महीने पहले मुंबई से शिपिंग का भी बुसिनेस्स करना शुरू kiya..harsh चौहान एक जीनियस इंसान तो थे hi लेकिन एक स्ट्रांग मन होने के साथ साथ दिल के भी बोहत hi अच्छे .. मतलब क हर्ष चौहान सच में hi बोहत बड़े और कमाल के आदमी थे.... मुझे ये जान कर ख़ुशी भी हुई और हैरानी bhi......harsh चौहान एक अच्छे और ताक़वर इंसान the........isliye कम् hi कभी इनसे कोई उलझता था...

अब्ब इनकी पर्सनल लाइफ इनकी फॅमिली के दुसरे मेंबर के बारे अगर स्टोरी में कुछ हुआ मतलब स्टोरी का रुख अगर हर्ष चौहान की फॅमिली से कनेक्टेड हुआ तो इंट्रो करा doonga....abb यहाँ दिल्ली में जो हैं वो तो आप जानते hi हैं.. बाकी की अगर ज़रुरत पड़ी तो तब्ब देखि जाएगी...

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मेरी और पूजा दीदी की हर्र वक़्त अपने मिशन को ले कर hi बात होती रहती थी.....

पहलवान जी के पास रह कर मैं मज़बूत तो बन्न सकता था. लेकिन एक अच्छा फाइटर और आज के ज़माने के हिसाब का इंसान नहीं बन्न सकता था. इस लिए हमारा फोकस इस्पे hi ज़यादा था..... मेरा मैं नहीं था क मैं हर्ष चौहान से कह कर अपने लिए फाइटिंग ट्रेनर की बात करून. लेकिन पूजा दीदी ने कहा जब्ब वो तुमसे प्यार करते हैं और तुमको अपना बीटा भी मानते हैं तो हर्ज hi क्या है...... अब्ब जब्ब पूजा दीदी ने कहा था करने को तो मैं कैसे इंकार कर सकता था......... रही बायत मेरे ईगो की तो.......

एक "tawaif-zaade" की ईगो होती hi कहाँ hai.......aur दूसरी बात ये थी......

मेरा मिशन सिर्फ मेरे खुद के लिए नहीं था मेरा मिशन मेरी माँ और बहनो के लिए tha.......baat मेरी माँ और बहनो की उस दलदल से रिहाई की थी. मेरा कोई भी फैसला सिर्फ मेरा नहीं था....... मेरे पास गलती का ऑप्शन था hi नहीं.....

जान को खतरा हो तो लिया जा सकता है. लेकिन अगर बात बहनो की इज़्ज़त की हो तो कुछ भी किया जा सकता hai........isliye मैंने अपने बारे हर्ष चौहान और बाकी सबको सबब बता दिया tha........harsh चौहान ने मुझसे कहा था क वो कुछ करे.. मतलब मेरी माँ और बहनो को निकलने की तो मैंने मन कर diya......main कोई खतरा मोल लेने की हालत में नहीं था........ हाँ फ्यूचर में अगर कभी मुझे हर्ष चौहान की ज़रुरत पड़ी तो मैं उनसे कह doonga...........mujhe हर्ष चौहान से पैसों की ज़रुरत भी नहीं थी..



पैसे तो मैं अपनी खुद की हिम्मत से hi हासिल करना चाहता था........


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मेरा वक़्त हर्ष चौहान के घर ाचा guzra...natasha दीदी और शीतल ने मुझे नहीं छोड़ा मजबूरन अंकल और आंटी ने हम तीनो को अकेला छोड़ दिया था.....

शीतल मुझे अपने कमरे में ले गई थी और फिर हम तीनो ने खूब बातें की वो मुझसे सबब के बारे पूछती रहीं बातें बोहत थी करने ko...zayada तर पूजा दीदी के hi बारे में बातें हुई माँ और बहनो की कम् hi की क्यूंकि माहौल दुखी हो जाता था.....

दोनों बहने बोहत hi एक्ससिटेड थी पूजा दीदी से मिलने के लिए.....

मैं हर्ष चौहान के घरसे डिनर करने के बाद निकला. शीतल तो मुझे जाने hi नहीं देना चाहती थी लेकिन जाना तो था. अब्ब तो आना जाना लगा hi रहना था. इस लिए शीतल को मन्ना pada....mujhe पता था अब्ब तो सबब हमारी तरफ के चक्कर लगाने लग्ग jayengi.....unka भी यहाँ दिल्ली में और कोई नहीं tha......sabb से मिल कर मैं निकलने लगा तो एक बार फिरसे हर्ष चौहान को छोड़ बाकी सबकी ऑंखें में आंसू थे..... लेकिन जाना तो था इसलिए सबब को उनके हाल पर छोड़ता मैं निकल गया और टैक्सी करके अपने घर के लिए निकल gaya...............maine अपना मोब no और घर का एड्रेस उनको दे दिया tha.....mujhe पता था अब्ब वो जल्द hi हमारे घर आएंगे......

जब मैं घर पोहंचा तो 10 बज चुके थे. लेकिन सबब मेरा hi वेट कर रहे थे.

मेरे पोहचते hi सवालात शुरू हो gaye.........fir मैंने सबब बता diya......uske बाद पूजा दीदी मुझे लेकर हामरे कमरे में आ gai..peeche पीछे रानी भी आ gai.pooja दीदी ने फिर अपना इंटरव्यू शुरू कर दिया...... अब्ब फिर वही सबब अलग से बताना पड़ा पूजा दीदी ko.....ek एक बात डिटेल से बतानी padi.........jabb सबब सुन्न लिया तो दोनों मुझपर झपट padi.kuch मस्ती के बाद हम तीनो एक दुसरे को जकड के सो gaye.......abb तो मेरी आदत बन गई thi...dono तरफ से फँस कर सोने की. कुछ hi देर में नींद आ गई....................

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रात के 11:45 का टाइम था............

दिल्ली शहर के इक बड़े नाईट क्लब से कुछ दूर एक रोड के से थोड़ा हट कर 5 लड़के खड़े the.wo शायद किसी का इंतज़ार कर रहे थे. लेकिन अभी कुछ वक़्त रहता था "किसी के आयने में" जिसका वो 5 लड़के इंतज़ार कर रहे थे...... पांचो लड़कों के दिल की धड़कन बोहत तेज़ चल रही थी.... आने वाले वक़्त को लेकर उन पांचो में से 3 की फटने के करीब थी. और दो लड़को में एक बोहत शांत था लेकिन 5तह लड़का बोहत hi ज़यादा एक्ससिटेड था...... वो पहली बार किसी ऐसे काम में इन्वॉल्व होने आया tha....wo डर नहीं रहा था..

लेकिन जो कुछ वो आज करने वाले थे वो बोट hi ज़यादा रिस्की और

khatar-naak था. कुछ भी हो सकता था जान जाने का खतरा 90% था.

क्यूंकि वो सारे लड़के जो करने वाले थे. वो इस सबब में त्रिनेड नहीं थे... और आज यहाँ से गुजरने वाली एक कार को रोक कर उन में बैठे हुए गोंडों को मरना था....

और जान लेने वाला काम वो पहली बार कर रहे थे...... सिर्फ एक लड़का था जो पहले hi किसी की जान ले चूका था और वही लड़का एक्ससिटेड भी सबब से ज़यादा था.....

इस सबब लड़कों में मौजूद एक लड़का दररते हुए बोलै.......

लकड़ा :- विजय तू मरवाये गए आज... तुझे पता भी है. वो कितना khatar-naak गुंडा है और हम में से कोई भी us'se लड़ने के काबिल भी नहीं है.......

जी हाँ दोस्तों आज उस नाईट क्लब से कुछ फासले पर इक रोड से थोड़ा हट कर मैं hi अपने दोस्तों के साथ मौजूद tha.aaj हम यहाँ किसी का मर्डर करने आये थे.....

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ये मिशन मुझे पूजा दीदी ने दिया था. चाहे कुछ भी हो जाये. मुझे अपना मिशन पूरा करना है. आज हो सका तो ठीक वर्ण करना तो मुझे हर्र हाल में hi है....

पूजा दीदी का आर्डर बोहत hi kaan-leva था.....


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हर्ष चौहान के घर से ए 3 महीने बीत चुके the......aur मैं फिरसे अपनी रूटीन में मसरूफ हो गया था.... वही पूजा दीदी से स्टडी और पहलवान जी की ट्रेनिंग. अभी कुछ hi दिन हुए थे पहलवान जी ने आगे का कुछ मुझे सीखना शुरू किया था....... मतलब पहलवान बनने के लिए हार्ड कसरत के साथ साथ कुछ कुश्ती के जैसे daao-pech(Stake पैच) सीखा रहे थे.........

लेकिन कुछ ऐसा हुआ था क पूजा दीदी ने मुझे ये मिशन सोल्वे करने को बोल दिया था....... अब्ब कुछ भी हो जाता करना तो था... भले hi मैं त्रिनेड नहीं था............



दिल्ली शहर में तीन बड़े गैंग्स धंदा कर रहे the........un 3 गैंग्स में से एक गैंग का हेड था धर्मेश ....... धर्मेश के दो साथी शंकर और प्रेम the.......dharmesh अगर रेखा बाई जितना स्ट्रांग नहीं था लेकिन अपने दोनों पार्टनर्स की वजा से वो रेखा बाई से कम् भी नहीं था.........

और आज हम धर्मेश के भाई अजय उर्फ़ "अज्जू भाई" और उसके दोस्तों को टपकाने आये थे........
 
थैंक्स बीआरओ:

आपने सही कहा हर्ष चौहान से विजय का कन्वर्सेशन दिखाना चाहिए था......

लेकिन अभी स्टोरी को फ़ास्ट करने का टाइम आ गया था.... इस लिए कन्वर्सेशन छोड़ दिया....

आगे चल के विजय का हर्ष कहाँ से राब्ता रहेगा.........

दोनों की बॉन्डिंग का भी पता चल अजयेगा...

अभी स्टोरी को आगे भी ले कर जाना था तो इस लिए कुछ फ़ास्ट हो गया.....

हर्ष चौहान विजय के किस काम आता है वो भी पता चलेगा..........
 
अपडेट :::::: 29

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अब्बब्बब्ब टककककक

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ये मिशन मुझे पूजा दीदी ने दिया था. चाहे कुछ भी हो जाये. मुझे अपना मिशन पूरा करना है. आज हो सका तो ठीक वर्ण करना तो मुझे हर्र हाल में hi है....

पूजा दीदी का आर्डर बोहत hi kaan-leva था.....

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हर्ष चौहान के घर से ए***3 mahine***beet चुके the......aur मैं फिरसे अपनी रूटीन में मसरूफ हो गया था.... वही पूजा दीदी से स्टडी और पहलवान जी की ट्रेनिंग. अभी कुछ hi दिन हुए थे पहलवान जी ने आगे का कुछ मुझे सीखना शुरू किया था....... मतलब पहलवान बनने के लिए हार्ड कसरत के साथ साथ कुछ कुश्ती के जैसे daao-pech(Stake पैच) सीखा रहे थे.........

लेकिन कुछ ऐसा हुआ था क पूजा दीदी ने मुझे ये मिशन सोल्वे करने को बोल दिया था....... अब्ब कुछ भी हो जाता करना तो था... भले hi मैं त्रिनेड नहीं था............

दिल्ली शहर में तीन बड़े गैंग्स धंदा कर रहे the........un 3 गैंग्स में से एक गैंग का हेड था धर्मेश ....... धर्मेश के दो साथी शंकर और प्रेम the.......dharmesh अगर रेखा बाई जितना स्ट्रांग नहीं था लेकिन अपने दोनों पार्टनर्स की वजा से वो रेखा बाई से कम् भी नहीं था.........

और आज हम धर्मेश के भाई अजय उर्फ़ "अज्जू भाई" और उसके दोस्तों को टपकाने आये थे........


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अपडेट ::::::::::::::::::::::::::: 29

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अब्बब्बब Aaaaaagggeeeeeeeeeeeeee

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रीज़न ये Tha................pooja दीदी और मेरे मिशन का...





पूजा दीदी की फ्रेंड रीना अपनी एक दोस्त तृषा के साथ कुछ दिन पहले शहर किसी काम से गई थी. तो वहां अजय से इस दोनों का फड्डा हो गया था....

तृषा एक चालु लड़की थी अक्सर राह चलते लड़कों से छेड़ छड़ करना तृषा की आदत thi......reena भी किसी हद्द तक्क चालू थी ..... पारर ऐसे hi राह चलते किसी से छेड़ छड़ करना रीना को पसंद नहीं tha....bass अपनी फ्रेंड्स के साथ hi मिलकरर कभी कुछ मस्ती कर लिया करती थी.......

रीना और तृषा दोनों hi वर्जिन नहीं थी (ये मुझे बाद में पता चला था)... रीना टाउन में रह कर थोड़ी से ख़राब हो गई thi...parlour जो चलाती थी... तो रीना की कुछ फ्रेंड्स बन्न gai..jin की वजा से रीना भी उन जैसी बनती गई....... लेकिन किसी हद्द तक खुद को कण्ट्रोल में रखती थी......... रीना की एक फ्रेंड के थ्रू तृषा से पार्लर मुलाक़ात hui.....trisha को रीना अछि लगने लगी और फिर जल्द hi दोनों में दोस्ती हो गई.....

तृषा चालू तो थी कई लड़कों से रिलेशन भी बना रखे थे लेकिन घटिया नहीं thi...freinds से दग़ा नहीं करती thi..apni फ्रेंड्स के लिए दिल में बुरा कुछ नहीं rakhti...usay फ्रेंड्स बनाने का बड़ा शोक था... लेकिन कभी कभी गलती हो hi जाती है...

तृषा के कई लड़कों से रिलेशन की वजा से अक्सर वो किसी को भी राह चलते ऊँगली कर दिया करती थी....... तृषा की यही आदत अजय के साथ रीना और तृषा को महंगी पद गई...

अजय एक ऐसा गुंडा था जिसमे हर तरह की बुरी हैबिट्स थी.... अपने भाई की वजा से वो और भी खुल कर सबब कुछ करने लगा था ..... लेकिन उस दिन वो अकेला था..... तो तृषा ने उसे थप्पड़ मर दिया ...... तृषा की मस्ती में अजय भी दोनों से कुछ ज़यादा hi kameena-pann दिखने लगा........ तृषा तो किसी हद्द तक्क बर्दाश्त कर भी लेती लेकिन रीना इस सबब की आदि नहीं थी....... रीना से ये सबब बर्दाश्त नहीं हो रहा था...... तृषा ने जब्ब रीना को देखा क उस की ऐसी आदत की वजा से रीना को प्रॉब्लम होने लगी है... तो उसने अजय को लिमिट में रहने को बोलै. तृषा कमीनी को क्या पता था जिससे वो पन्गा ले चुकी है. वो खुद कितना कमीना है.

अजय अपनी घटिया हरकतों से बाज़ न आया तो तृषा को ग़ुस्सा आने लग और फिर उसने अजय को थप्पड़ मर दिया....... ये भी एक रूप था तृषा का तृषा किसी से कम् hi उलझती थी..... चालू तो थी मस्ती भी खूब करती थी लेकिन कई लड़कों से छोड़ने के बाद उसमे डेरिंग भी आ गई थी और वो खुद भी ग़ुस्से की तेज़्ज़ थी..... अब्ब अजय तृषा को भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था..... इसी लिए तृषा ने अजय को थप्पड़ मारा..... अजय ग़ुस्से से बावला हो गया लेकिन वहां पब्लिक में वो कुछ ज़यादा कर नहीं सकता था.... इसलिए उसने बर्दाश्त किया और अपने दोस्तों को कॉल करके आने को बोल दिया.......

रीना और तृषा वहां से आगे निकल पड़ीं. और अजय भी उनके पीछे चल पड़ा अब्ब अजय तो थप्पड़ को भूलनही सकता था.... कुछ भी करना पड़े अब्ब अजय तो इन दोनों लड़कियों को छोड़ने वाला था नहीं........

तृषा ने भी अजय को देख लिया था पीछा करते हुए...... अब्ब उसे अंदाज़ा हुआ क कुछ ज़यादा hi गलत हो गया है............. तृषा जैसी चालू लड़की से अजय के इरादे को jan'na मुश्किल नहीं था... तृषा खुद तो कैसे न कैसे बच जाती लेकिन रीना उसकी इज़्ज़त अब्ब तृषा की वजा से खतरे में आ गई थी...... ये सोचते hi तृषा ने भी अपने फ्रेंड्स को कॉल करके के आने को बोल दिया.............

जब्ब एक जगा अजय अपने फ्रेंड्स की मदद से दोनों को उठाने hi वाला था क तृषा के फ्रेंड्स भी आ पोहंचे.

तृषा फाइनल ईयर की स्टूडेंट थी तो उसके फ्रेंड्स भी उसके साथ hi पढ़ते the....sabb के सबब बिगड़े हुए raees-zaade the.....un लड़कों को देख कर अजय रुक गया. क्यूंकि वो un'me से कुछ लड़कों को जनता था..... और अजय के लिए उन लड़कों से पन्गा लेना आसान नहीं था ....... मतलब उसके भाई के लिए परेशानी हो सकती थी.....

अजय ने एक बार उन आये हुए लड़कों को देखा फिर दोनों लड़कियों को देख कर अपने दोस्तों के साथ निकल गया.........

अजय के जाते hi तृषा ने अपने फ्रैंड्स को थैंक्स बोलै और रीना को सॉरी........

लेकिन अब्ब सॉरी किस काम की................... कुछ देर बाद वो भी अपने घर के लिए निकल गई..........

लेकिन रीना के लिए प्रॉब्लम हो गई थी...... रीना एक मिडिल क्लास से थी.... और खुद को कैसे सेफ रख सकती thi.......dono लड़कियों को अभी भी अंदाज़ा नहीं था.......

क अजय के इरादे क्या होंगे...... तृषा ने इस बात को हल्का ले लिया .... उसने ये नहीं सोचा क अजय फिरसे कुछ और भी कर सकता है... अजय ने भी तृषा को छोड़ रीना को पहले अपने नीचे लाने का सोचना शुरू कर दिया..... आखिर वो भी एक घुंडा था और कुछ कुछ समझ सकता tha...trisha से पन्गा लेना आसान नहीं इस वक़्त सिर्फ रीना hi काबू में आ सकती है...

अजय ने दोनों का पीछा करते हुए दोनों की पिछ उतार ली थी......

अब्ब जिनका दिल्ली में राज चलता हो उनके लिए रीना को ढूंढ़ना कौनसा मुष्किल काम था...... तीसरे hi दिन अजय अपने दोस्तों के साथ रीना के पार्लर में जा पोहंचा और रीना को उठाने की कोशिश की लेकिन टाउन के लोगों की बरवक़्त मदद से रीना बच गई...... अब्ब अजय ने रीना को ढून्ढ लिया था तो रीना के लिए खुद को बचना मुमकिन नहीं था....... रीना दो बार बच गई थी लेकिन हर्र बार बच जाये ये मुमकिन नहीं था.................




पूजा दीदी को पता चला तो उसे भी बड़ा ग़ुस्सा aayaa...pehle तो पूजा दीदी ने रीना की बड़ी क्लास लगाई "तुझे क्या जाऊरत थी तृषा जैसी लड़की से दोस्ती करने की. हम उनके जैसे नहीं हैं. वो बिगड़ी हुई लड़की है उसे क्या फ़र्क़ पड़ता hai...kameeni कही की खुद की मस्ती के लिए तुझे दो पे लगा दिया.........


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रीना की वजा से hi पूजा दीदी ने मुझे ये मिशन दिया...... तृषा का भरोसा कब्ब तक्क वो करेगी....... तृषा के बॉयफ्रैंड्स तृषा के कहने पे रीना की मदद कर तो सकते हैं. लेकिन फिर रीना उनकी भी नज़रों में आ jayegi....aur वो बिगड़े हुए raees-zaade रीना के पीछे पद जायेंगे............... इस लिए पूजा दीदी ने तृषा को छोड़ मुझे ये मिशन दे दिया......................




जब्ब पूजा दीदी मुझे ये सबब करने को बोलै एक बार तो मैं hakka-bakka रह गया....... पूजा दीदी चंडी देवी कब्ब से बन्न गई.......... अभी मैं कहाँ इतना त्रिनेड हुआ था.... मुझे खतरे में कूदने को कह रही थी....




पहलवान जी ने मुझे आगे का कुछ सीखना तो शुरू कर दिया था. लेकिन मैं उस अजय और उसके दोस्तों से लड़ने के काबिल नहीं था....

जब्ब मैंने ये बात पूजा दीदी से कही तो पूजा दीदी ने do-tok जवाब दे दिया.......




"यू अरे ा किलर"




ek-baar तो मेरी ऑंखें hi बड़ी हो गए पूजा दीदी की बात सुन कर.....




पारर मैं सबब समझ गया था पूजा दीदी क्या कहना चाहती hain.matlab जब्ब मैं कुछ नहीं था तो मैंने दो गुंडों से खेलते खेलते उनके टुकड़े कर दिए थे.... अब्ब तो मैं पहले से बोहत बदल गया था... ताक़त के साथ साथ मुझमे हिम्मत भी बोहत बढ़ गई थी...

दोबारा कभी खुद को टेस्ट करने का वक़्त तो नहीं आया था.

लेकिन पूजा दीदी ने कह दिया. करना तो hai."agar अचानक से माँ और बहनो के लिए कुछ करना पड़े तो क्या तब्ब भी यही sochoge...................pooja दीदी अक्सर ऐसी hi बातें करती रहती थी जिनका जवाब मेरे पास नहीं होता था......... पता नहीं पूजा दीदी का मुझसे प्यार करने का ये कौनसा तरीका था.....




मेरी जान की भी कोई परवा नहीं थी. मुझे म्ररने जाने को बोल दिया...

"""""""पूजा दीदी भी कमाल है"""""""""




इसलिए आज हम सबब उस अजय को टपकने के लिए जा रहे the.pichhle दो दिन से राजा ने मेरे कहने पर jeetu,uday और अनुपम को काम पर लगा दिया था.

जो डिटेल मिली वो और भी मुझे ग़ुस्सा दिलाने के लिए काफी थी... साले लड़कियों को उठा कर उनका रपे करना इनकी रेगुलर आदत थी.....

और मैं तो पहले hi इज़्ज़त से खेलने वळून का दुश्मन था..... मेरे अंदर जल रही आग आज फिरसे बढ़ चुकी थी.... पूजा दीदी की फ्रेंड रीना अक्सर हमारे घर आती रहती थी मुझसे से भी उसकी अच्छी फ्रेंडशिप हो गई thi......abb पूजा दीदी की फ्रेंड हो और कोई उस के साथ ऐसा करे.... मैं उसकी जान ना ले लून...

साला जो भी गुंडा बनता है सब्बसे पहले लड़कियों की इज़्ज़त के साथ खेलना शुरू कर देता है.......................

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अजय की आगे 24-25 के करीब थी और धर्मेश की 30 के करीब..........

कन्फर्म नहीं था मुझे.... अब्ब जब्ब ये अपनी माँ की छूट से निकल रहे थे तब्ब मैं वहां नहीं था ना ..... इस लिए कन्फर्म नहीं हूँ.......

धर्मेश की पावर रेखा बाई के जैसी तो नहीं थी लेकिन अपने दोनों दोस्तों की वजा से बोहत स्ट्रांग गुंडा बन्न गया tha................pooja दीदी ने बड़े hi उलटे काम में लगा दिया था मुझे......... इतना बड़ा रिस्क और मैं अभी कुछ भी नहीं था.....

लेकिन पूजा दीदी ने कह दिया था क हर्र लड़ाई फेस 2 फेस करके लड़ना ज़रूरी तो नहीं अपना दमाग लगाओ कैसे करना है "तुम खुद सोचो" ... पूजा दीदी पता नहीं कैसे इतना जानती थी....




""पूजा दीदी कही पिछले जनम में घुंडी तो नहीं थी"""



अब्ब अज्ज मुझेअपनी हिम्मत के साथ साथ अपना दमाग भी देखना था..........

पूजा दीदी भी naaaaaaaaa...........pata नहीं मुझसे क्या क्या करवाएगी..

संसान इलाका हो और कोई गुंडा सामने आ जाये तो अलग बात है लेकिन खुद उसके पास जा कर उससे takrana...........chalo आज ये भी देख लेते हैं....

जीतू की इन्फो के मुताबिक़ वो रोज़ hi अपने दोस्तों के साथ अपने नाईट क्लब से रात 12 ले आस पास निकलता था.. घर जाने के लिए.......

अब्ब मैं अकेला तो ये कर नहीं सकता था इस लिए अपने दोस्तों को कहा राजा के इलावा सबब की गांड ने साउंड देना शुरू कर दिया tha........lekin जाना तो था.....


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मुझे इतना िद्या नहीं था जितना राजा को tha......is लिए कुछ तैयारी करके निकले थे.....

हम 11:30 पर hi क्लब के पास पोहंच गए the.....jis रास्ते से अज्जू और उसके दोस्तों ने गुज़ारना था. हम उस रास्ते पर थे...

टाइम रात का था तो ट्रैफिक की टेंशन कम् hi थी. अगर अज्जू इसी रास्ते आया to...........lekin अगर आज उसने रास्ता बदला लिया तो अलग बात है......

हम सभी में राजा सबसे ज़यादा रिलैक्स था....

मेरा ये पहला मिशन था चाहे दो गुंडों को मारा भी है.. लेकिन वो अचानक से हुआ काण्ड था..... और ये पहले से एक डीडेड मिशन था. मैं दर्रा हुआ नहीं था लेकिन सच कहूं तो बड़ी hi अजीब सी फीलिंग आ रही थी. और खतरा भी था तो ये सबब कुछ जो हो रहा था "

अंदर hi अंदर कुछ अलग hi एहसास पैदा कर रहा था"...... सांसें अजीब ढंग से चल रही थी. राजा के बाद में कुछ बेहतर हालत में था लेकिन बाकी सबकी गांड फटी हुई थी.............

दोस्ती थी तो आ गए वर्ण सच में जीतू उदय और अनुपम दर्रे हुए थे.....

राजा ने आज hi सब के लिए कुछ तैयारी की हुई थी..... राजा कुछ तो था जो मैं नहीं जनता tha....wo हमेशा शांत रहता था.... तो अक्सर उनके अंदर की बात का पता नहीं चलता था.....

हमने कोशिश की थी के क्लब के पास पोहंच कर किसी को दिखने न पाएं. वर्ण बाद में गड़बड़ हो सकती थी...




जैसे जैसे टाइम नज़दीक आ रहा था. हमारी हालत भी वैसे hi बदल रही थी.

जब घडी ने 12 बजाये. तो हमारे पसीना छूटने लगे. कुछ डर से तो कुछ एक्ससिटेमेंट की वजा से..... अब्ब हम इतने बड़े turram-khan भी नहीं थे. जो हमारी ऐसी हालत न होती..........




कुछ देर बाद एक गाडी हमारे वाले रोड पर मुड़ी तो जीतू ने कहा "यही है अज्जू की gaadi..."ye बोलते जीतू की आवाज़ काँप रही thi...humne कोई ढंग से प्लान नहीं बनाया था... बनाते की कैसे हमें कुछ सही से समझ hi नहीं आ रही थी.

लेकिन मैं निकल पड़ा था...... क टाइम तो टाइम कुछ देखेंगे अगर कुछ हो सका तो




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गाडी के हमारे तरफ आते hi हमने अपने चेहरे को मंकी कैप से कवर क्र liya..ye सबब राजा का hi बताया हुआ था....

जब्ब गाडी हामरे पास आने को थी. मैंने पहले से hi इक पत्थर अपने हाथ में ले रखा था. जैसे hi गाडी हमारे पास से गुजरने लगी मैंने फ्रंट शीशे पर वो पत्थर दे maara.maine ये पहले hi सोच लिया था क अगर इससे काम बना तो ठीक है वर्ण नेक्स्ट कुछ और सोचेंगे.

सबब आज hi हो ये ज़रूरी नहीं था. और मैंने ये सबब से कह भी रखा था. क गलती नहीं करनी वर्ण हमारे मरने के चांस ज़यादा हैं. ग़ुस्सा तो मुझे इतना था, क मैं कर रहा था क आज मैं नहीं या आजु नहीं लेकिन सिचुएशन को देख कर हम आगे बढ़ने वाले थे. वर्ण हमने मार्र्ण नहीं था उनके पास गन्स तो लाज़मी होंगी. और हमारे पास सिर्फ चाकू. इस लिए कोई भी किसी भी किसम का चांस नहीं lega.....agar बात बनती नज़र आई तो फिर ज़रूर कुछ करेंगे.




पत्थर के लगते hi गाडी ने एकदम से ब्रेक लगाई. गाडी ने झटका खाया और लहरा कर कुछ आगे जा कर रुक गई.




गाडी के ब्रेक लगते hi मैंने डूअड़ लगा दी. लेकिन मुझसे पहले hi राजा गाडी तक पोहंच गया. और एक जहटके में गाडी के फ्रंट दूर को खोल कर अज्जू को खेंच कर बाहिर निकला. एक लम्हे के लिए तो मैं भी हैरान हुआ लेकिन फिर फ़ौरन hi दुसरे दूर को खोला तो पीछे 2 गुंडे बैठे थे. एक का सर्र hi फहत गया था. शायद अगली सीट से टकरा गया था. मैंने उसे छोड़ दुसरे को पकड़ कर बहार खेंच लिया. अब्ब ताक़त मुझमे बोहत आ गई थी. मुझे कोई परेशानी नहीं. उसे पकड़ते hi मैंने नीचे फ़ेंक दिया और फिर उसके चेहरे पर एक लात मारी. फिर मैंने झुक कर उसे उठा कर फिरसे नीचे फेंका (ये दो मैंने अक्सर अखाड़े में देखा था लेकिन अभी मुझे ये नहीं सिखाया गया था बास अचानक hi हो गया mujhse)wo उठने hi वाला था क मैंने उसके मैं पॉइंट पारर अपनी पूरी ताक़त से किक मार दी.......




इस बीच राजा ने और बाकी तीनो ने क्या कुछ किया मेरा उस तरफ धयान नहीं था..........

और यही गलती हुई मुझसे....


मुझे उस गुंडे को मारते हुए धयान ज़रूर देना चाइये था. क दुसरे सबब क्या कर रहे हैं.... अभी एक गुंडा गाडी में tha...mera उस पार्स धयान हट गया tha......main नीचे गिरे हुए गुंडे को फिर से मारने hi वाला था क



""""धायेँनंन्न"""" एक गोली चली और

ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मेरी चीख निकल गई. मुझे ऐसे लगा जैसे किसी ने मेरी पीठ में पिघला हुआ लोहा उतार दिया हो.............




 
थैंक्स भाई:

यार जहाँ सत्य में कन्वर्सेशन चाहिए वहां ज़रूर होगा लेकिन ऐसे नजाने कितनी hi उपदटेस लग जाएँ

अभी बोहत कुछ बाकी हैं स्टोरी में और सोवेर्साशन की भर. मार होने वाली है.

कन्वर्सेशन तो असल अब्ब होगी

विजय को गोली लगी है ना तो कहानी में अब्ब काई लोगों के रिएक्शन और कन्वर्सेशन दिखने को मिलेंगे.......

मैंने 9 महीने स्टोरी को फ़ास्ट किया है वो भी आप जैसे hi रीडर्स की वजा से वर्ण 15 उपदटेस तो और लग्ग

hi जनि thi........................abb आप hi बताएं में क्या करून
 
थैंक्स बॉस:

आप जैसे hi तो राइटर को गलती से बचते हैं .... हाँ अलग बात है क राइटर ने भी कुछ रखा होता है....

अब्ब विजय की जितनी आगे है ..... उसकी राह में ऐसे बोहत से मरहले आएंगे अगर सब की डिटेल दूँ तो

150+ उपदटेस तो विजय वापिस मुंबई पोहचने में hi लग जाएँगी....

अभी विजय के लिए मुंबई अपनी माँ तक पोहचने में बोहा टाइम हैं....

और दूसरा विजय को अभी मुंबई से निकले 9 महीने hi हुए हैं....

लेकिन अभी उसकी फॅमिली के लिए और भी कई तूफ़ान बाकी हैं.........

ये समझ लेना क विजय के अपनी उसकी माँ और बहने तक पोहचने सबब कुछ ठीक रहेगा तो ये मुमकिन....

कुछ लोग श्वेता को एक पल भी सकूं में देखना नहीं चाहते....

अभी नेक्स्ट hi अपडेट में आपको पता चल अजयेगा
 
विजय को कोठे से भागे 10 मोनथस और कुछ दिन ऊपर बीत चुके हैं........

एक दिन हर्ष चौहान के घर

दुसरे दिन से पूजा के घर में रहने गया विजय

और एक हफ्ते बाद hi अजित की बेहेन अपने भाई से मिली

फिर 7 मंथ का गुज़रे और अब्ब 3 महीने गुज़र चुके हैं हर्ष चौहान के घर निकले

जब्ब विजय कोठे से भागा . 14 के करीब आगे हो चुकी थी

अब विजय 15 साल का होने वाला है
 
अपडेट:::::: 30

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अब्ब टककककक

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फिर मैंने झुक कर उसे उठा कर फिरसे नीचे फेंका वो उठने hi वाला था क मैंने उसके मैं पॉइंट पारर अपनी पूरी ताक़त से किक मार di.......is बीच राजा ने और बाकी तीनो ने क्या कुछ किया मेरा उस तरफ धयान नहीं था..........

और यही गलती हुई मुझसे.... मुझे उस गुंडे को मारते हुए धयान ज़रूर देना चाइये था. क दुसरे सबब क्या कर रहे हैं.... अभी एक गुंडा गाडी में tha...mera उस पार्स धयान हट गया tha......main नीचे गिरे हुए गुंडे को फिर से मारने hi वाला था क


""""धायेँनंन्न"""" एक गोली चली और

ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh


मेरी चीख निकल गई. मुझे ऐसे लगा जैसे किसी ने मेरी पीठ में पिघला हुआ लोहा उतार दिया गया हो.............

अपडेट ::::::30

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अब्ब्ब्ब ागीयी

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जिस गुंडे को मैंने पिछली सीट पर देखा था उसके सर्र से खून निकल रहा था.... राजा ने अज्जू को लॉकअप लिया था और मैंने भी एक गुंडे को पकड़ कर गाडी से बहार फ़ेंक दिया ....... दुसरे गुंडे के लिए मेरे बाकी के तीनो hi काफी थे....

लेकिन मेरे उसको नज़र अंदर करने के बाद मेरे बाकी बचे तीनो दोस्तों ने कुछ नहीं किया और सबब बट बने वही खड़े थे. सबब कुछ मैंने और राजा ने अचानक से किया था. तो अचानक से बदली सिचुएशन में तीनो कुछ समझ hi न सके वो दर्रे तो पहले से हुए थे....... उन्हें कुछ करने के लिए टाइम लग gaya....lekin

मेरी चीख सुन वो एकदम से जैसे होश आये और मेरी तरफ भागे मेरी मदद के लिए इस से पहल के वो कुछ करते....

जिसने मुझे गोली मारी गोली मारी थी. वो गुंडा दूसरी गोली चलता us'se पहले hi एक चाकू उड़ता हुआ आया और उसकी एक आँख में घुस गया और वो छेखता हुआ नीचे गिर पड़ा. और उसके हाथ से पिस्टल गिर gaya.us गुंडे के नीचे गिरते hi राजा पालक झपकते हुए उस गुंडे तक जा पोहंचा और उनकी आँख में लगे चाकू को निकल कर उसके पेट में वही चाकू बार बार उतारने laga......raja पागल हो गया था मेरी चीख सुन कर और फिर राजा ने उस गुंडे पर कोई रेहम नै किया. an-ginat लगने वाले घाव से दो घुंडा वही पल भर में hi मारा गया...

मैंने इतने दर्द सही थे. मैं तो आदि हो गया था दर्द सहने का लेकिन ये एक अलग hi दर्द था जो मुझे हो रहा था. मेरे पथ में गोली लगी थी पता नहीं कितना ज़ख़्म आया और कितना खून निकलने laga.dard के मारे मेरी जान निकलती हुई मुझे महसूस हो रही thi....lekin

बर्दाश्त करना मुश्किल तो था पारर सहन करना भी ज़रूरी था. ज़िद्दी तो मैं था hi और बर्दाश्त की आदत शुरू से थी और ये जगा भी मेरे बेहोश होने के लिए सही नहीं थी ..... अगर मैं यही हिम्मर हार जाता तो मारा जाता किसी भी वक़्त कोई भी आ सकता था. और अज्जू का क्लब भी यहाँ से ज़यादा दूर नहीं. इन की मदद के लिए कोई न पोहंच jaye.....agar ऐसा हुआ तो आज हम सबब मारे जायेंगे...

मैं बड़ी हिम्मत से खड़ा था खुद को गिरने नहीं दिया मेरे कपडे खून में रंगते जा रहे थे लेकिन मैंने अपने होश गम नहीं होने दिए.......... इस बीच राजा ने अज्जू और जिसने मुझे चाकू मारा था उसका खून करा दिया. नीचे गिरे हुए को मेरे दुसरे दोस्तों ने मार दिया था.

हमारा मिशन सक्सेस्फुल रहा. लेकिन मैंने कुछ भी नहीं किया सबब राजा ने कर दिया....... मैंने अपने होश गुम्म होने से पहले अपने दोस्तों को कन्फर्म करने के लिए बोल दिया..

कहीं बाद में पता चले क कोई ज़िंदा बच गया तो हम फँस सकते hain.lekin अज्जू अपने दांतो के साथ मारा गया था....

मैंने राजा की तरफ देखा तो उसके भी सारे कपडे खून में लत्थड़े हुए थे..........

राजा कुछ सोच रहा tha......fir अचानक से राजा ने गाडी के फ्रंट दूर को खोला और ड्राइविंग सीट पर बेथ गया और सबब को बैठने को बोलै. वो सही भी था हम इस हालत में टैक्सी ले कर नहीं जा सकते थे. hum'me एक राजा hi था जो गाडी चला लेता था......

फिर हम सबब जल्दी से गाडी में बैठे और राजा ने गाडी को भगा liya.....raja के खुद के पकडे खून से धुले हुए थे. रास्ते में गड़बड़ हो सकती थी. और गाडी का फ्रंट मिरर भी टूटा हुआ था....

वहां से हर्ष चौहान का घर हमारे घर से करीब था और इस वक़्त मुझे ट्रीटमेंट की भी ज़रुरत थी. तू मैंने अपने मोब से हर्ष चौहान का नंबर मिला कर जीतू को दे दिया.......

क्यूंकि मेरी बर्दाश्त खटमः होती जा रही थी. और हम टाउन में गाडी ले कर नहीं जा सकते the....mere दोस्तों ने गाडी में बैठते hi मेरे कमर पर कपडा रख कर दबा हुआ था.. कुछ तो खून बहने से बच जाए....

अब्ब मैं पिछली सीट पारर झुक कर टेढ़ा बैठा हुआ था. लेटने की जाग नहीं थी हम 5 थे. ऐसे hi बैठे बैठे मेरी आँख लगने लगी.

पता नहीं राजा पोहंचा या नहीं ... रास्ते में राजा को कोई प्रॉब्लम हुई या नहीं. कोई और लोचा तो नहीं हुआ ये सबब जान्ने से पहले hi मैं बेहोशी की नींद में गम हो चूका था....

(मैं स्टुपिड था जो पिह्चलि सीट पार्स गुंडे को उठा कर पीटने लगा था. इतना ाचा मौका था मुझे फ़ौरन hi चाकू का इस्तेमाल करना चाहिए था. लेकिन मैं ये नहीं कर सका. मुझसे तो राजा hi बेहतर निकला जिसने मुझे बचा भी लिया और मिशन भी कम्पलीट कर दिया. मुझसे बड़ा पहनने खान तो राजा था.)

मैं अभी कुछ भी नहीं था. आज दमाग और हिम्मत तो काम आ गई लेकिन {वर्त्तमान मस्तिष्क} अपने दमाग को एक्टिव नहीं रख पाया. मुझे हर तरफ धयान रखना चाहिए था.


सिर्फ मार्र्ण hi नहीं बछना भी ज़रूरी होता था. और लड़ते हुए जोश से नहीं होश से काम लिया जाता hai..meri एक्ससिटेमेंट hi मुझे ले डूबी मुझे राजा के जैसा इक शांत इंसान ban'na पड़ेगा...............

चलो आज एक सबक़ और सही..........


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लोकेशन: कोठा रेखा बाई:

आज रात होते hi श्वेता की हालत ख़राब होने लगी thi.......jis वजा से उसने आज धंदा करने से इंकार कर दिया tha...rekha बाई को भी अंदाज़ा हो गया क श्वेता सच में hi किसी तकलीफ में hai....isliye रेखा बाई ने भी श्वेता को छोड़ दूसरी लड़कियों और औरतों को श्वेता की जगा धंदे पर लगा diya.......lekin उसने एक काम पहले ज़रूर किया था और वो था "अननोन" से कॉल पर राब्ता करना..

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जब्ब रेखा बाई ने अननोन को शेवटा की ऐसी हालत के बारे में बताया तो

अननोन ...... हहहहहहहहहहहहहहहहहहह

लगातार कई मिंट तक पागलों के जैसे kah-kahe hi लगता raha.......fir वो बोलै

अननोन ......... आज बोहत दिनों बाद मुझे सकूं मिल रहा है श्वेता को जो तकलीफ में देना चाहता था.... आज वैसे hi वो तड़प रही है कितने महीनो से वो कुछ शांत सी दिख रही थी. जैसे उसे कोई ग़म hi न होऊ. मैं आ रहा हूँ वही मैं भी देखना चाहता हूँ उस हरामज़ादी रंडी को ऐसी hi हालत में. तुम बास उसका इलाज न करवाना मेरे आने तक मुझे उसे तड़पते हुए देखना है.......

अननोन फिरसे kah-kahe लगता रहा और कुछ देर बाद कॉल एन्ड हो गई....


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श्वेता के रूम में priya,shuruti ,जहान्वी मौजूद थी. सबब की आँखों में आंसू थे.

प्रिय अपनी माँ की हालत देख कर रो रही थी और श्वेता बास अपने दिल पर हाथ रखे "vijju"vijju"vijju"vijju"vijju" मुसलसल पुकारे जा रही thi........aaj रात होते hi श्वेता के दिल की धड़कन khatar-naak हद्द तेज़ हो गई थी. जैसे अभी श्वेता को हार्ट अटैक आ जायेगा.... श्वेता के ऐसे रियेक्ट करने से सबब की भी हालत ख़राब होने लगी थी..... सभी को hi किसी अनहोनी का डर सताने लगा था........


दिल को दिल से राह होती है..... और फिर विज्जु जहाँ कहीं भी रहे... अगर वो खुश रहता तो ये माँ बेटियां भी कुछ रिलैक्स hi रहती थी.......

आज जैसे इन सबब को विज्जु को ले करके बोहत hi चिंता सताए जा रही thi...koi बताने वाला भी तो नहीं था...... विज्जु कैसा hai.usay कुछ हुआ तो नहीं ..... सूबा अजित भाई के थ्रू hi पता चल सकता tha..abb तो वो भी दूकान बंद करके घर चला गया होगा......

सबब श्वेता और विज्जु के ग़म में रो रहे the..jo नए तीन माँ इक लड़की और लड़का थे उनको रेखा बाई ने श्वेता से दूर रहने बोल दिया tha...lekin अपने कमरे में वो भी रो रहे the....dono बचे अपनी से लिपित कर आंसू बहा रहे थे. रोने पर पाबन्दी जो थी. वर्ण सभी दहाड़ें मार मार रट....

श्वेता की हालत हर्र गुज़रते लम्हे bad-se-badtar होती जा रही थी.... उसे किसी पल चैन नहीं मिल रहा था..

जैसे जैसे रात बीत रही वैसे hi श्वेता की भी हालत बिगड़ती जा रही थी......

प्रिय षुरूति और जहान्वी ने रेखा बाई के पैरों में गिर कर अपनी माँ को हॉस्पिटल लेजाने को कहा था..... लेकिन रेखा बाई ने एक ठोकर मर्डर उनको धुत्कार दिया था..... अब बेचारियाँ कहाँ और किस के पास jayen...koi नहीं था इनका यहाँ जो इसको इस दर्दों भरी दलदल से निजात दिला सके......

जो एक था इनको इस दलदल से निकलने वाला वो तो खुद hi ज़िन्दगी और मौत की kash-makash में था................

ऐसे hi रट बिलकते रात गुजरने लगी और तीनो लड़कियां अपनी माँ के पास बैठी उसके हाथों और पैरों को रगड़ती रही शायद माँ को कुछ आराम मिले....

जब्ब रोग hi दिल को लग्ग गया हो तो ये तीनो क्या कर सकती थी....


श्वेता तो बास अपने बेटे की याद में hi गुम्म थी और अपने दिल को पड़के "vijju"vijju" बोल रही थी.............

रात किसी वक़्त उनके रूम का दूर खुला और अननोन पर्सन रेखा बाई के साथ अंदर एंटर हुआ..... ये पहला मौका था जब्ब अननोन श्वेता के साथ साथ priya"shuruti और जहान्वी के सामने आया था... वो जब्ब भी आता था अकेला hi श्वेता को एक रूम म बुलवा कर अपना घटिया खेल खेलता था.......

अननोन कमरे में आते hi जोरर जोरर से हसने लगा........


श्वेता की हालत जैसी भी थी लेकिन अननोन की आवाज़ तो उसकी आत्मा में रची हुई थी... इसी आवाज़ ने hi तो श्वेता का सबब कुछ उजाड़ के रख दिया था....

दुसरे hi पल श्वेता को अपने दिल का दर्द भूल गया और अचानक से उठते हुए अननोन के पास जा के पागलों के जैसे उसके कालर को पकड़ कर झंझोड़ डाला और चीखते हुए बोली ..........

श्वेता ..... क्यों इतना दर्द दे रहे हो मुझे. जो भी हुआ उसमे मेरी कोई गलती नहीं thi...fir क्यों तुम ये सबब कर रहे हो.... बर्बाद कर तो दिया है मुझे अब्ब और क्या चाहते हो तुम मुझसे............. श्वेता बोलते बोलते गिरने लगी......

लेकिन अननोन को कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था..... वो बास हंस रहा tha(like ा क्रेजी मन) श्वेता को इस हालत में देख कर वो हरामी बोहत खुश था......

प्रिय षुरूति और जहान्वी ये सबब देख हैरान परेशां थे. क कौन है ये घटिया इंसान और रेखा बाई इसके सामने कुछ भी बोल क्यों नहीं है...........

कुछ देर ऐसे hi वो श्वेता को इस हालत में देखता रहा फिर बोलै......

अभी तो कुछ भी nahi.......(teeno लड़कियों को देख कर) बास कुछ hi वक़्त रहता है फिर तुझे और भी तड़पने का मौका मिलेगा......... बास कुछ वक़्त aur.........ye बोल कर वो रेखा बाई के साथ निकल गया कमरे से......

अननोन के जाने के बाद जब तीनो लड़कियों ने अपनी माँ को देखा तो श्वेता नीचे गिरी बेहोश हो चुकी thi........koi नहीं था जो इन सबब पारर ृत्ति बराबर भी रेहम कर सके.........


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अननोन :- रेखा बाई श्वेता के लड़के का कुछ पता चला??

रेखा बाई:- नहीं सरकार उसका कोई पता नहीं चल सका मेरे आदमी लगे हुए उसको ढूंढ़ने में पता नहीं कहाँ चला गया है वो haram-zaada (रेखा बाई ने दररते हुए कहा)

अननोन :- कोई बात नहीं मिल जायेगा कभी न कभी. तुम बास श्वेता को कुछ होने न देना अब्ब किसी डॉक् को बुला इसका इलाज कराओ...

अगर वो लड़का मिला तो ठीक नहीं तो ये लड़कियां तो है hi ना विजय न सही उसकी बेहेन की बोली श्वेता के सामने hi लगाईं जाएगी.............

रेखा बाई :- पारर सर्कार एक बात और वो दूसरी दो लड़कियां जो हैं उनका क्या करना है...... आपके hi कहने पर मैंने उन दोनों को श्वेता के हवाले किया tha..lekin मैं समझी नहीं आपने ऐसा क्यों किया......

अननोन :- रेखा बाई तू धंदा करती है लेकिन तेरे पास दमाग नै है....

अरे बेवक़ूफ़ श्वेता उन दोनों लड़कियों को भी अपनी बेटियां मानती है, जैसे प्रिय उसकी बेटी है वैसे hi दो लड़कियां भी श्वेता को अपनी प्रिय जैसी hi लगती hai......dono लड़कियां बड़ी हैं तो इनका नंबर पहले आएगा ना........ पहले वो दोनों हमसे छुडवायेगी फिर दोनों को बेच


देंगे..... की और को....

हहहहहहहहहहहहहहह*

(अब्ब रेखा बाई तुझे हर बात तो नहीं बता सकते न)

रेखा baai(kameeni और हरामज़ादी थी लेकिन अननोन के बोलने से उसे भी अपनी गांड से हवा निकलती हुई महसूस होने लगी)

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इंस्पेक्टर रणजीत दिल्ली सिटी में मौजूद अपने एक फ्रेंड के घर पारर बैठा दारु पि रहा था रात के 12:25 का टाइम था. उसके दोस्त के नंबर पर एक कॉल आई जिसे सुन वो दारु पीना भूल गया और झट्ट से उठ कर जो कपडे उसने पहने थे. उन्ही कपड़ों पर hi उसने अपने हॉलीस्टर बेल्ट को जल्दी से अपनी कमर पारर बंधा तो रणजीत हैरान सा उसको देखता रह gaya....usne पुछा पांडेय साब खैरियत तो है ना. इतना बोखलाए हुए क्यों हो.....

रणजीत का फ्रेंड भी दिल्ली का एक पुलिस अफसर hi था. उसने जो सुना सबब बता दिया रणजीत को. फिर रणजीत भी झट से अपने दोस्त पांडेय के साथ चल दिया. कुछ hi देर में वो एक जगा पर पोहंचे. तो वहां भीड़ लगी हुई थी... और कुछ पुलिस कांस्टेबल के आदमी भीड़ को पीछे हटा रहे थे. पास में hi कुछ और भी गाड़ियां कड़ी हुई थी. जिन के पास कई गुंडे लेटेस्ट गन्स के साथ खड़े थे और धर्मेश इंसबब पर भड़क रहा था..... इतना भड़कना तो बनता hi था. धर्मेश का एक hi भाई था. वो भी आज मारा गया उसका बास नहीं चल रहा था. वो पूरे दिल्ली सिटी को hi आग लगा दे. लेकिन अभी पुलिस आई हुई थी. तू कुछ कुछ शांत था. ऐसे शांत लोग hi बाद में तबाही मचाते हैं. धर्मेश अपने भाई के क़ातिलों को छोड़ने वाला नहीं था. देखते हैं वो क्या करेगा बाद में....

रणजीत और पांडे जब वहां पोहंचे तो अज्जू और उसके दोस्तों की लाशें देख कर हैरान रह गए बोहत hi बुरी तरह से उनके जिस्मों को काटा गया था. तीनो के hi जिस्मों पर अनगिनत चाकू से लगे घाव थे.. एक गुंडे की आंख में से खून के साथ साथ उसकी आंख का गंध भी बहार निकल रहा tha.....ye सबब देख पांडे की तो फटने लगी लेकिन रणजीत को इससे कोई ज़यादा फ़र्क़ नहीं पड़ा था. ऐसे लोगों के मरने से तो रणजीत को ख़ुशी hi होती thi.jisne भी ये किया होगा रणजीत उससे बोहत hi खुश था.... लेकिन एक बात की रणजीत और पांडेय को टेंशन थी अब्ब दिल्ली में khauf-o-haraas फेल जायेगा..

तीनो गैंग्स एक दुसरे से उलझ padenge.jis'se आम पब्लिक को बोहत लोस्स उठाना पद सकता है......................

पांडेय अपने काम में लगा रहा.... जो भी उसने करना tha..lekin धर्मेश को देख उसकी फहत रही थी ....पांडे धर्मेश से मोबतलय जो लेता tha....ek हिसाब से वो धर्मेश का पालतू था........... लेकिन अभी तक्क धर्मेश ने खुद पारर काबू रखा हुआ था बास अपने hi आदमियों पर भड़का था... कुछ देर में धर्मेश के पार्टनर्स भी आ गए.

प्रेम ..... धर्मेश के गले लग्ग kar"tu चिंता मैट कर धर्मेश तेरा भाई मेरा भी भाई hi था और जिसने भी ये क्या है वो दुन्या के किसी भी कोने में छुप जाये में इसे ला कर तेरे क़दमों में फ़ेंक दूंगा"

शंकर :- धर्मेश के गले मिला. शंकर दोनों से ज़यादा कमीना था. बोलै

" धर्मेश खुद को ठंडा रख पहले ये तो पता चले क किश की मौत आई है जो हमसे टकराने की हिम्मत कर बैठा. अभी इन पुलिस वालों को इनका काम करने दो. मैंने यहाँ का सुनते hi अपने आदमियों को काम पर लगा दिया था. जल्द hi वो कुछ

न कुछ करेंगे वर्ण उनकी माँ न मैंने छोड़ के रख दूँ. अगर उन्हों दने अज्जू को मारने वालेको न ढूंढा. शंकर कमीना तो था hi संगदिल और खून बहाने का रसिया भी था. अपने दुश्मन को बोहत hi भयंकर मौत देता था. इसलिए आज तक इस के गैंग में किसी ने भी गड़बड़ी करनी की कभी सोची भी नहीं थी.

धर्मेश की ऑंखें खून उबाल रहीं थी लेकिन अज्जू को मारने वाला कौन था कहाँ से आया था और क्यों मारा उसने मेरे भाई को. कभी वो अपने रिवल्स गैंग्स वळून के बारे में सोचने लगा. कहीं अज्जू को मारने में उनका हाथ तो nahi......yahi सोचकर वो बोलै

धर्मेश:- शंकर हम जैसों के दुश्मन तो गिनती में hi नहीं आ सकते.... na-jaane कितने ऐसे हैं जो हमारे सताये हुए हैं.... उनमे से भी कोई हो सकता है ...

लेकिन वो इतने भी पॉवरफुल नहीं थे क अज्जू को मार सकते. यकीनन ये हमरे मुखालिफ गैंग्स वालों ने hi किया है.....

शंकर:- कुछ भी मैट सोच जल्द hi पता चल जायेगा कौन है वो जिसने ये सबब किया...... अभी हम अपने मुख़ालिफ़ों से कोई बात नहीं करेंगे. बात बिगड़ भी सकती है. तू टेंशन न ले. बास कल सूबा तक का वेट करते हैं. फिर देखते हैं.

कौन इस काण्ड में इन्वॉल्व है. ज़िंदा तो वो रहेगा nahi......(ye बोल के शंकर दरिंदो के जैसे हसने लगा...... शंकर के रहते धर्मेश को इतनी भी चिंता नहीं thi.....shankar hi था जो दोनों से ज़यादा चालक भी था और khatar-naak भी )


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पांडेय इस घटने में बिजी हो गया और रणजीत अपने घर के लिए निकल गया...

घर पोहचते-2 सूबा के 4 बजने लगे थे. अब्ब सोना का टाइम तो था नहीं.

इस लिए वो इक चेयर पर बैठ गया. और soch-vichaar में डूबने लगा. जो कुछ उसके मैं में चल रहा था. रणजीत ने पांडेय को नहीं बताया था. जब्ब अज्जू टाउन में आया था रीना को उठाने. तब्ब रणजीत को भी पता चल गया था वो लेट पोहंचा था. तब्ब तक अज्जू अपने फ्रेंड्स के साथ वहां से निकल गया था. रणजीत ने रीना से puchh-tachh की.

पहले तो रीना aana-kaani करने लगी लेकिन पुलिस से कुछ भी कैसे छुपाया जा सकता है. रणजीत ने सख्ती की तो रीना ने रट हुए सबब बता दिया था....

अब्ब रणजीत यही सबब सोच रहा था. कहीं अज्जू का मर्डर रीना से रिलेटेड तो nahi.agar ऐसा है तो कौन है ऐसा जो रीना की हेल्प कर सकता था........

रणजीत ने विजय को देख कर उसपर नज़र रखने के लिए एक बाँदा रेगुलर विजय के पीछे छोड़ा हुआ tha....lekin इन 9 महीनो में विजय ने कुछ भी ऐसा नहीं किया tha.jis वजा से रणजीत का धयान विजय पर गया तो था. लेकिन उसे इस में कुछ नज़र नहीं आया.

एक बार तो उसने सोचा था विजय के अंदर की आग और पूजा के रीना से रिलेशन और फिर रीना का विजय और पूजा से मिलने उनके घर जाना. कहीं इस पारर विजय कोई एक्शन तो नहीं ले रहा था. कही विजय ने hi तो नहीं अज्जू को मारा है.

लेकिन नहीं ये कैसे हो सकता है अगर विजय कही बहार जाता तो मुझे पता न चल जाता. गोटिया तो मुझे विजय की हर पल की खबर देता hi रहता hai.........vijay तो बास घर और पहलवान जी के साथ hi मसरूफ है या फिर हर्ष चौहान से

mel-jol है वहां से भी कुछ ऐसा वैसा sun'ne को नहीं mila........jo शक करने लायक हो..........

रणजीत ऐसे hi अपने दमाग के घोड़े दौड़ता रहा.........

6:ऍम के करीब रणजीत के मोबाइल की घंटी बजी......

रणजीत ने फ़ोन को उठा कर देखा तो गोटिया का नंबर देख और भी इतनी

सूबा सूबा रणजीत के कान खड़े हो gaye....usne कॉल अटेंड की और मोबाइल को कान से लिया और बोलने लगा.....


रणजीत :- अभी रणजीत कुछ बोलने hi वाला था. क उसे गोटिया ने कुछ बताना शुरू कर दिया जिसे सुन्न कर रणजीत के चेहरे का रंग बदलने लगे.......
 
थैंक्स डिअर:

मुझे अच्छा लगता है जब किसी को मेरी म्हणत बोहत hi पसंद आती है...

तो मैं करता है क इसी तरह से अच्छा लिखता जाऊं. और आप सब को पढ़ कर मज़ा भी ए. और किसी को ये भी न लगे क उनका टाइम वास्ते हो रहा है..

विजय के लिए अपने माँ और बहनो मिशन में गलती का कोई ऑप्शन नहीं है .......

और विजय के लिए हर हालत में एक्टिव रहना बोहत hi ज़रूरी है.....

अगर ऐसी hi सिचुएशन रेखा बाई के कोठे पर माँ और बहनो को अज़ाएद करते टाइम बनती तो विजय का तो सबब कुछ ख़तम हो जाता...

गलती का कोई ऑप्शन hi नहीं है विजय के पास...........

माँ कही भी हो उस के औलाद में से किसी को कही भी दर्द या तकलीफ हो तो माँ की ऐसी हालत बनती है...

लेकिन इस सन में अननोन से एक गलती हो gai.....wo ये क श्वेता ने कभी भी विजय को अननोन बारे नहीं बताया लेकिन प्रिय षुरूति और जहान्वी के

सामने आ कर उनसे अपनी पोल खोल दी अब्ब जल्द hi ये खबर अजित भाई के थ्रू विजय तक भी पोहंच जाएगी.....

ये है स्टोरी का एक चरणीं पॉइंट.........

वर्ण इस से पेहलेविजय सिर्फ रेखा बाई को hi मैं विलन समझ रहा था...........

अब्ब विजय को पता चले गए क जितना वो अपनी माँ और बहनो की रिहाई को इजी समझ रहा है उतना इजी नहीं.

और रही बात रंजीत की तो वो आपको नेक्स्ट अपडेट में पता चल hi अजयेगा क रंजीत ने क्या सुना जो उस के चेहरे का रंग बदल गया.....
 
थैंक्स डिअर:

जो आपने अपने कीमती टाइम को मेरी स्टोरी के लिए उसे किया और स्टोरी को बेहद सराहा ....

मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूँ जो आपने मेरी इस स्टोरी को एक (अछूती संदर अध्बुध कहानी) के टाइटल से नवाज़ा ....

मेरी कोशिश होगी क जैसा अब्ब तक्क आपने स्टोरी को अपने दिल में उतरता हुआ फील किया है... इसी तरह से साड़ी स्टोरी को आप सबब के

लिए hi स्पेशल बनाओ....

थैंक्स ढूढे: लव ु सो मच
 
अपडेट :::::: 31

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लोकेशन: हर्ष चौहान हाउस:




हर्ष चौहान जिंटा ताक़वर इंसान था. जितना मज़बूत बदन का मालिक tha.uska लुंड भी उसके मज़बूत बदन के जैसा कड़कदार भी था. शादी के इतने साल

गुज़र जाने के बाद भी वो वैसे का वैसा hi था. जब्ब कभी बहार जाना होता या कभी दीक्षा को कही जाना होता तब्ब hi इन दोनों के बीच कुछ दिनों का वक़्फ़ा आ जाता वर्ण हर्ष जितना अच्छा इंसान था us'se बढ़कर एक चुड़क्कड़ भी था. अच्छा इंसान था इस लिए वो कभी बहार किसी की छूट को ताड़ने का आदि नहीं था. उसे अपनी jaan_e_jigar अपनी दीक्षा hi में वो मज़ा मिल रहा था. तो उसे कही और जाने की ज़रुरत hi क्या थी.

दीक्षा कभी भी पयासी नहीं रही. हर्ष ने उसे कभी अधूरा रहने hi नहीं दिया था. जब्ब भी हर्ष घर में होता तो डेली hi वो दीक्षा की छूट को खोलने में लगा रहता. और दीक्षा भी अपनी टांगें उठाये हर्ष से कहती रहती थी....

""माय पुसी इस योर्स.......... यू अरे ऑलवेज permissioned....when यू वांट्स........ यू मई ओपन माय pussy's दूर"" और हर्ष चौहान अपने घोड़े पारर सवार हो कर एक स्माइल देता हुआ अपने घोड़े के साथ deeksha's pussy's दूर को धीरे धीरे खोलता हुआ अंदर दाखिल होने लगा. हर्ष चौहान की डेली की रूटीन बन्न चुकी दूर को खोल कर अंदर जाने की लेकिन हर्ष चौहान को हर रोज़ज hi दिक्कत होती दूर को खोल कर अंदर जाने में. वो कभी भी दीक्षा के pussy's दूर में अकेला दाखिल नहीं हुआ था. वो जब्ब भी pussy's दूर में दाखिल होता तो अपने घोड़े को साथ लेकर hi जाता. इस लिए अक्सर दोनों को hi परेशानी उठानी पड़ती जब्ब भी हर्ष चौहान के घोड़े का सर्र पुसी दूर में से गुजरने लगता.

दीक्षा अपने बैक दूर को भी उठा कर उछाल पड़ती और बोलती.... हर्ष रोज़ज hi तो गुज़रते हो हर्र बार मैं यही कहती हूँ के तुम्हारे घोड़े का सर्र बड़ा है और मेरा pussy's दूर दिन के वक़्त बंद रहने से और कुछ क्रीम के लगाने से टाइट हो जाता है. धीरे धीरे गुज़रा करो वर्ण आप के घोड़े का तो कुछ नहीं जाता मेरा कही pussy's दूर में hi न ब्रेक हो जाये...... या इतना लूसे हो जाये. के आप को भी गुजरने में मज़ा न ए.................

हर्ष दीक्षा की बात सुन कर हस्स दिया करता. और कहता दीक्षा मेरी जान तुम्हारा pussy's दूर है hi इतना क्यूट और प्यारा सा क दूर के और तुम्हरे साउंड को सुने बगैर और तुम्हरे बैक दूर के उछलने का मैंज़र hi इतना डिकलकाश होता है क मैं नहीं होता धीरे धीरे गुजरने का. क्या हुआ अगर थोड़ा सा दूर को रगड़ ज़यादा hi आ जाती है. लेकिन तुम डेली रिपेयरिंग भी तो करती हो ना. और वैसे भी अपना घर हो या किसी और का khat-khataye बगैर तो जाना hi नहीं चाहिए.......

चर्च चौहान धीरे धीरे अपने घोड़े पर सवार pussy's दूर में अंदर hi अंदर चला जा रहा था क अचानक से दीक्षा ने रुकने को बोलै....

हर्ष ...... क्या हुआ रुकने को क्यों बोलै.??

दीक्षा..... सारा दिन के थके हुए होते हो और मैं भी अपने pussy's दूर के खुलने का वेट करती रहती हूँ. अब्ब जब्ब तुम अंदर आ hi चुके हो तो रुक कर थोड़ा सा सांस लेने दो. पहले hi दूर का दर्द काम नहीं हुआ. और अभी तो आप ने अपने घोड़े के साथ आगी का सफर भी तो करना है न.. तो जल्दी किस लिए है.

जब्ब दीक्षा ने हर्ष चौहान को रुकने को बोलै तो हर्ष चौहान रुक तो गया लेकिन उसने अपने घोड़े की लगाम से हाथ हटा कर दीक्षा के ऊपरी पहडूं को पकड़ लिया.

दीक्षा का pussy's दूर hi कमाल का नहीं था. दीक्षा के मकान के ोप्पर बने हुए दो बड़े बड़े और khub-soorat से पहाड़ या लाइट बल्ब भी कमाल के थे. और दोनों बल्ब पर दो छोटे छोटे से डेकोरेशन किसम की दाने से बने हुए थे. जिनकी वजा से दीक्षा का मकान बोहत hi khub-soorat था. अब्ब दीक्षा का पुसी दूर तो हर्ष के घोड़े के लिए था लेकिन पूरा का पूरा मकान हर्ष ने अपने नाम करवाया हुआ था.

हर्ष को उन दो लाइट बल्ब से बड़ा hi प्यार था वो अक्सर बड़े hi प्यार से उन को चूमता रहता tha.kabhi प्यार से मसलता अहुर chaat'ta रहता था..

लेकिन आज पहले हर्ष ने उन दोनों बल्ब्स को पकड़ा फिर थोड़ा सा दबाया तो कमाल हो गया ये दोनों बल्ब hi इन्तेहाई सॉफ्ट और दिलकश थे. और उनके ऊपर के दो नन्हे नन्हे से डेकोरेशन पीसेज.... उन दो पीसेज के साइज में भी अकड़न आने लगी और दीक्षा के मोहन से इक सिसकारी नक़ल गई.

कमाल है दीक्षा को क्या हुआ. बल्ब के छोटे hi दीक्षा ने अपना बैक दूर कुछ ऊपर उठाया और कहने लगी "हर्ष प्लीज इन दोनों नन्हे नन्हे से डेकोरेशन पीेछे को अपने मोहन में ले कर चूसो न.".... हर्ष को और क्या चाहिए था. वो कैसे भला अपनी जान की बात से इंकार कर सकता था. दो काम एक साथ हुए एक तो हर्ष ने उन दो पीसेज को अपने मोहन में ले कर चूसना किया लेकिन हर्ष के घोड़े से भी रहा नहीं गया और उस ने भी अपने दो कदम आगे बढे दिए. दीक्षा के मज़ाए hi हो गए दोनों साइड्स से.... और दीक्षा की सिसकारियों और मस्ती के कारण एक मीठी मीठी आवाज़ बैडरूम के अंदर गूंजने लगीं.

हर्ष भी बोहत hi मज़े में था लेकिन चर्च का घोडा. उसके तो ज़यादा hi मज़े से. दूर के टाइट होने की वजा से उसे अंदर जाने में बड़ा मज़ा आ रहा था. धीरे धीरे हर्ष का घोडा आगे बढ़ता बढ़ता दीक्षा के अंदर पूरा hi उतर गया. हर्ष का घोड़ और दीक्षा दोनों के hi मज़े हो गए..... घोड़े को अपने अंदर इन्तेहाई हद्द तक्क फील करके दीक्षा की मदहोशी बढ़ने लगी और फिर उसी मदहोशी में दीक्षा अपने हाथ हर्ष के सर पर रख कर बालों में अपनी उंगलियां चलने लगी. हर रात hi दीक्षा की इक स्पेशल रात होती थी. और हर्ष के घोड़े की वजा से हर्ष बेचारे की भी इज़्ज़त दीक्षा की नज़रों में आखरी हदूँ तक पोहंची हुई थी. दोनों भरपूर तरीके से एन्जॉय किया करते थे.

हर्ष के घोड़े को रुकने से मज़ा ना आया तो उसने फिर से खुद को वापिस ले जाते हुए अपने सर्र को दूर तक ला कर एक झटके में फिरसे अंदर जा घुसा. घोड़े की स्पीड की वजा से दीक्षा फिरसे उछाल पड़ी और हर्ष का मोहन भी उन पीसेज से अलग हो गया. हर्ष ने एक बार तो दीक्षा की आँखों में देखा फिर दीक्षा के अमृत से भरे हुए होंठों की तरफ बढ़ गया दीक्षा की आंख्ने तो मदहोशी और नशे से रंग बदल hi चुकी थी. और अब्ब वो छह रही थी. हर्ष खुद जो चाहे करे लेकिन हर्ष का घोडा अब्ब अपना सफर जारी रखे और तब्ब तक न रुके जब्ब तक दीक्षा अपनी मंज़िल तक न पोहंच जाये. हर्ष तो समझ नहीं पाया दीक्षा की आँखों में देख कर. लेकिन हर्ष का घोडा नीचे होने और दीक्षा की आँखों में न देख पाने के बजूद भी उसने दीक्षा के मैं की बात जान ली और फिर वो अपनी दिन भर सी सुस्ती को ख़तम करने के लिए अपने काम पर लग्ग गया.

हर्ष का घोडा तो था hi स्टॉन्ग कक काठ में (7" एंड 3") था अपने स्ट्रांग मसल्स की वजा से उसे थकावट तो होनी नहीं थी और फिर वो घोडा hi क्या जो थक जाये.

घोड़े ने धीरे धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ानी शुरू की और दीक्षा के मोहन से निकलने वाली आवाज़ें हर्ष के मोहन में जाने लगीं फिर दीक्षा ने भी अपनी आवाज़ को रोक, हर्ष की hi तरह से अपने होंठों से हर्ष के होटों का अमृत पीने लगी. हर्ष की हर चीज़ hi स्पेशल थी.

""घोडा तो था hi एक युधा और वो भी कमाल का युधा"

आज तक्क कभी भी दीक्षा के साथ फाइट में नहीं हारा था. दीक्षा हर बार हार जाती थी लेकिन उसे कभी कोई ग़म नहीं हुआ उल्टा वो बेहद खुश और तारो ताज़ा हो जाय करती थी. हर्ष के घोड़े के लिक्विड ने दीक्षा को कभी भी वरगे होने नहीं दिया........ घोड़े के लिक्विड की वजा से दीक्षा अपनी बेटियों से कुछ hi बड़ी दिखती थी.......

कुछ देर बाद हर्ष ने दीक्षा के होंठों को छोड़ा और पीछे हट कर दीक्षा के पैरों को उठा कर अपने कंधे पर रख liya.....harsh को ऐसे करते देख दीक्षा ने एक सेक्सी स्माइल दी हर्ष को, क्यूंकि वो समझ गई थी अब्ब हर्ष का घोडा अपनी फुल रफ़्तार से अपने लिक्विड को मेरे दूर के इन्तेहाई अंदर फेंकने वाला है....

हर्ष ने दीक्षा के पैरों को पकड़ कर अपने कंधे पर रख कर दीक्षा के बैक दूर को 6" ऊपर उठा कर दीक्षा के बोहत ऊपर झुक गया. दीक्षा बोहत hi ज़यादा टेढ़ी हो गई थी. उसका जिस्म खतरनाक हद तक मुद गया था लेकिन दीक्षा को इस से कोई भी प्रॉब्लम नहीं हुई थी. होती भी कैसे ये तो डेली की रूटीन बन्न गई थी. दीक्षा ने अपने टेढ़े होते जिस्म पर धयान हटा कर हर्ष के घोड़े की रफ़्तार से होने वाली अपने अंदर hi अंदर सरसराहट को फील करने लगी. घोड़े की रफ़्तार जैसे जैसे बढ़ती जा रही थी.... वैसे hi दीक्षा के पसीने तो निकल hi रहे थे. लेकिन दीक्षा की तेज़ सिसकारियों से बैडरूम के daro-deewar भी चेककन लगे थे. वो भी इन दोनों की रोज़ रात में होने वाली प्रेम चुदाई के आदि हो चुके the.deeksha के हाथ अपने जिस्म पर चलने लगे और फिर देखते hi देखते दीक्षा पूरी की पूरी झटके खाने लगी और दीक्षा के pussy's दूर ने पानी उगलना शुरू कर दिया. jis'se हर्ष का घोडा खुश हो गया उसे अपनी म्हणत का पहल मिल गया और फिर घोड़े ने अपनी रफ़्तार तो काम नहीं की लेकिन बहने वाले पानी या ये कहना सही रहेगा क दीक्षा के अंदड़ से बरस रही बारिश के पानी में हर्ष का घोडा नहाने लगा.

कमाल का घोडा था हर्ष चौहान का पानी से होने वाली फिसलन की वजा से घोड़े को डगमगाना चाहिए था. ऐसे chi-chipi जगा पर चलना hi मुश्किल होता है. लेकिन हर्ष के घोड़े की तो रफ़्तार "दीक्षा के बहने वाले पानी से" और भी फ़ास्ट होती चली गई.

दीक्षा अब्ब कुछ शांत पद गई थी. और वो अपनी साँसों को बहाल करने में लगी लगी हुई थी. लेकिन घोड़े की रफ़्तार और दीक्षा की साँसों के ताल मेल से दीक्षा को बेहाल कर रखा था. सांस तो तब्ब बहाल होती है जब्ब सकूं से बैठने का टाइम मिले. हर्ष अपने काम में लगा हुआ tha,usay दीक्षा की परेशानी नहीं दिख रही लेकिन हर्ष के घोड़े ने दीक्षा का मैं पढ़ लिया. और वैसे भी वो एक hi मैदान में भाग भाग कर बोर हो गया था.

दीक्षा के pussy's दूर से तो पानी निकल hi गया था. अब्ब दुसरे दूर से भी अंदर घुसना चेहये...... यही सोच कर घोडा दीक्षा के pussy's दूर से बहार निकला तो दीक्षा ने लम्बी सांस ले कर खुद को रिलैक्स किया और अपने टेढ़े हो रहे शरीर को कुछ पल के लिए सीधा करने लगी...... वो जानती थी अभी हर्ष का घोडा कुछ और भी ज़रूर करेगा इस लिए दीक्षा ने खुद को जल्दी से रिलैक्स करने लगी. कुछ hi देर में दीक्षा ने अपनी साँसों पर काबू प् लिया.

हर्ष ने भी दीक्षा को कुछ देरर के लिए छोड़ दिया और प्यार से दीक्षा को देखने लगा...... दोनों hi एक दुसरे से बोहत प्यार करते थे..... जब हर्ष ने देखा क अब्ब दीक्षा थकी हुई नहीं लग रही.

तो हर्ष ने दीक्षा को पकड़ कर पलटना शुरू कर दिया. दीक्षा ने एक बार हर्ष को देखा और फिर एक मुस्कान दे कर उलटी लेट गई. घोड़ी नहीं बानी. जबकि घोड़े के लिए तो घोड़ी hi सही रहती है लेकिन दीक्षा पेट के बल लेट गई. जैसे आज घोड़ी बन कर घोड़े की सवारी करने का मैं न हो....

घोड़े को इस से क्या फ़र्क़ पड़ने वाला था उसे तो दीक्षा के बैक दूर से ग़रज़ थी. फ्रंट दूर की तो धज्जियां उसने उड़ा hi दीं थी. अब्ब 2नस दूर मीन्स बैक दूर से अंदर दाखिल हो कर देखना चाहिए था......

हर्ष चौहान के घोड़े को खुद पर बड़ा hi नाज़ है और शुरू से hi है....

लेकिन जब्ब हर्ष के घोड़े ने फर्स्ट टाइम दीक्षा के बैक दूर में दाखिल होने की कोशिश की थी तो दीक्षा की जो हालत होनी थी वो तो हुई hi लेकिन खुद हर्ष के घोड़े की भी मैट मारी गई थी.

अब्ब उसे सही से पता नहीं था के बैक दूर से गुज़रते वक़्त इतनी रगड़ें आएँगी. बेचारा हर्ष का घोडा जगा जगा से छील गया था. लेकिन था बोहत hi कमीना कहने laga"jabb इतना ज़ख़्मी हो hi गया हूँ तो वापिस किस लिए जाना इस लिए घोड़े ने उस दिन हिम्मत नहीं हारी"

यही वजा है बैक दूर जितना भी तंग सही लेकिन हर्ष के घोड़े के लिए वो एक ऐसा मैदान बन चूका था. वो फोरन्त दूर की तरह hi बैक दूर में भी डेली रनिंग किया करता था........ घोड़े की भाग दौड़ से शुरू शुरू में दीक्षा की चीखें निकल जाती थी लेकिन फिर बाद में वो खुद भी अपने बैक दूर को उठा उठा कर घोड़े पर मारती थी. और घोडा भी अपने काम में लग जाता था.

हर्ष चौहान ने दीक्षा को पलटा तो दीक्षा ने घोड़ी बने बगैर hi अपने बैक दूर को हर्ष के घोड़े के लिए "माय बैक दूर इस रेडी फॉर योर हॉर्स" कह दिया

हर्ष चौहान ने अपने घोड़े को एक बार अपने एक हाथ से मसला घोडा हर्ष के ऐसा करने से खुश हुआ और ऊपर को उठ कर एक सलामी दी. फिर हर्ष ने दीक्षा के चूतड़ों को थोड़ा सा पहला कर बैक दूर को थोड़ा सा खोला.

घोडा तो फ़ौरन hi अंदर जाना चाहता था लेकिन हर्ष ने ऐसा नहीं किया. हर्ष ने पहले अच्छे से अपनी जीब से बैक दूर को चाटना शुरू किया. लेकिन हर्ष का घोडा मंद कर गया और हवा में hi उछलने लगा. हर्ष ने अपने घोड़े पर से धयान हटा कर अपनी जीब को दीक्षा के बैक दूर को अच्छे से गीले करने लगा. दीक्षा एक बार तो एक्ज़ेमन्ट और डर से काँप गई. जब्ब भी हर्ष का घोडा दीक्षा के बैक दूर में दाखिल होता था. हर बार दीक्षा को पहले थोड़ा दर्द होता था. इस लिए दीक्षा मदहोशी और थोड़े डर से काँप रही थी. दीक्षा के बूब्स नीचे बीएड पर रगड़ खाने लगे जिस से दीक्षा और भी मस्त होने lagi.usne अपने होंठों को काटना शुरू कर दिया. मज़े से दीक्षा की हालत बुरी हो रही थी.

हर्ष ने दीक्षा के बैक दूर को अच्छे से चाट कर गीला करने के बाद हर्ष ने उठ कर अपने घोड़े को दीक्षा के बैक दूर पर रखा तो घोडा खुश हो गया उसकी नाराज़गी पल भर में hi ख़तम हो गई. पहले घोडा नाराज़गी से उछाल रहा था लेकिन अब्ब बैक दूर में एंट्री होते देख कर एक्ससिटेमेंट की वजा से उछलने लगा.

हर्ष ने अपने घोड़े को दीक्षा के बैक दूर पर रखा hi था क घोडा खुद को रोक नहीं पाया एक थोड़ा सा अंदर जाते hi अपनी रफ़्तार बढ़ा दी जिसकी वजा से हर्ष दीक्षा के ऊपर hi गिर गया और फिर बैडरूम में दीक्षा की ओरिजिनल चीखें गूंजने लगीं...

घोड़े के अंदर जाने से दर्द तो दीक्षा को गांड फहद hua(tight जो वो डेली क्रीम लगा कर किया करती थी) लेकिन हर्ष के दीक्षा के ऊपर गिरने से दीक्षा पर अचानक से बड़ा लोड पड़ा और दीक्षा खुद को चीखने से रोक न पाई. हर्ष खुद को संभाल कर जल्दी से दीक्षा के ऊपर से थोड़ा उठ कर अपने हाथों को दीक्षा के साइड में अच्छे से सेट किया और फिर अपने हाथों पर वज़न दाल के अपने घोड़े को एक बार घूरा साले ने उसकी प्रेमिका को इतना दर्द दे दिया. अब्ब इसी घोड़े की वजा से दीक्षा की नज़रों में हर्ष चौहान की बड़ी इज़्ज़त थी तो हर्ष बेचारा घूर hi सकता था. लेकिन उसका कुछ कर नहीं सकता tha.kuch करता तो नुकसान हर्ष का खुद का hi होता इस लिए हर्ष दिल मासूस कर रह गे.

हर्ष ने खुद को अच्छे से एडजस्ट किया और फिर अपने घोड़े को घूरना छोड़ कर अपने घोड़े के साथ मिल कर दीक्षा के बैक दूर में दाखिल होने लगा. दीक्षा अभी तक रिलैक्स नहीं हुई थी हर्ष चौहान चाहे जितनी भी मोहब्बत अपनी लाइफ पार्टनर से करता हो लेकिन इस पोजीशन में वो भूल जाता था क दीक्षा कितना चीख रही है. एक बार दीक्षा का पानी निकाल कर उसे खुश तो कर hi दिया था. अब्ब हर बार हर्ष दीक्षा का hi तो ख्याल नहीं कर सकता ना. खुद का भी तो सोचना पड़ता है. बल्कि खुद से भी बढ़कर अपने घोड़े का सोचना पड़ता है वो थकता तो नहीं था लेकिन पानी निकलने का टाइम तो घोड़े का भी अपना hi था.

हर्ष चौहान ने दीक्षा की चीखों की परवा किये बगैर hi धक्के पर धक्के लगता गया और हर्ष चौहान का घोडा भी दीक्षा के बैक दूर में उतनी hi तेज़ी से अंदर बहार होने लगा आज वो बोहत खुश था. दीक्षा की चीखों और बैक दूर के तंग होने की वजा से उसे बोहत hi ज़यादा मज़ा आ रहा था......

फिर हर्ष चौहान की स्पीड इतनी बढ़ी क बीएड का मैट्रेस्स फोम लचकदार होने की वजा से बोहत hi ज़यादा ऊपर नीचे होने लगा.

हर्ष और दीक्षा के जिस्म 1 फुट तक ऊपर नीचे उछाल रहे थे. दीक्षा की हालत बोहत hi ख़राब थी लेकिन अब्ब अपने बैक दूर में हर्ष के घोड़े को फील कर के वो बोहत hi मस्त होती जा रही थी. लगने वाले धक्के और मैट्रेस्स फोम पर होने वाली उछाल कूद की वजा से दीक्षा की मैट hi मारी गई थी. लेकिन वो इस सबब धक्कों और उछाल कूद को भूल कर घोड़े की वजा से अपने अंदर उठ रहे खुमार में डूबने लगी थी.......

दीक्षा का जिस्म किसी 30 साल की महिला के जैसा दीखता था. चर्बी से पाक जिस्म की वजा से दीक्षा आज भी हर्ष चौहान के लिए बोहत hi ज़यादा अट्रैक्टिव थी.

हर्ष के घोड़े की वजा से दीक्षा भी अपने आप को हर दम मेन्टेन रखती थी. रखना तो था hi वर्ण हर्ष का घोडा फिर us'se दूर हो जाता. हर्ष के घोड़े के बिना वो कैसे रह पाती. इस लिए ऊपर से ले कर नीचे तक बोहत hi म्हणत ने दीक्षा ने खुद को मेन्टेन किया हुआ था........ डाइल्यू रेगुलर अपने दोनों फ्रंट और बैक दूर की अच्छे से देख भाल किया करती थी..... दोबारा सर्विस के लिए.

बैडरूम में होने वाली काई किसम की आवाज़ों की वजा से साउंड hi बदल कर रह गया था. हर्ष चौहान के बढ़ते हुए धक्के फिर बीएड पर होने वाली उछाल कूद फिर दीक्षा के मोहन से निकलने वाली सिसकारियां और चीखें चर्ष चौहान की दीक्षा के चूतड़ों पर पड़ने वाली ज़ोरदार जांघों की आवाज़ से रूम का साउंड दुसरे सभी साउंड से मिल कर एक अलग hi माहौल क्रिएट कर रहा था.....

बैक दूर में घोड़े के रेगुलर अंदर बहार आने जाने से दीक्षा के फ्रंट दूर से पानी की यलग़र होने लगी.... दीक्षा का जिंस एक बार फिरसे अकड़ने लगा और एक ज़बरदस्त झटके के साथ दीक्षा एक बार फिरसे से झड़ने लगी.....

अब्ब हर्ष चौहान का घोडा भी थकने लगा था. या ये कहें तो ज़यादा बेहतर रहेगा क उलटी करने करने hi वाला था.....

हर्ष ने दीक्षा की पीठ को चूम कर पूछा ......

हर्ष :- दीक्षा मेरी जान कहाँ निकालों......

दीक्षा हंम्पटी हुए "अभी कहीं और की गुंजाइश hi नहीं है. बवक दूर में hi दाल दो....... "" ये सुनते hi हर्ष ने अपने धक्कों को आखरी हद्द तक्क बढ़ा दिया. दीक्षा बेचारी की फिर से चीखें निकलने लगीं. लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी जो हर्ष के घोड़े ने जल्द hi दीक्षा के बैक दूर के अंदर hi उलटी करनी शुरू करदी.

हर्ष के घोड़े ने उलटी की तो हर्ष को खुद में सकत ख़तम होती हुई मह्सूस होने लगी और वो एक बार फिरसे दीक्षा के ऊपर hi गिर गया..... लेकिन इस बार दीक्षा ने कुछ नहीं कहा. उसे पता था अब्ब 2 मिंट तक्क हर्ष ऐसे hi पड़ा रहेगा. फिर सबब नार्मल हो hi जाना है...

कुछ देर बाद हर्ष दीक्षा के ऊपर से उठा और साइड में लेट कर दीक्षा को प्यार से देखने लगा. दीक्षा की अभी तक्क ऑंखें बंद थी और वो अपनी तेज़्ज़ चल रही साँसों को बहाल कर रही थी. हर्ष बड़े hi प्यार से दीक्षा को देख रहा था.

जब्ब दीक्षा की सांस बहाल हुई तो दोनों hi एक दुसरे की आँखों में देख कर हसने lage.harsh ने दीक्षा को पकड़ कर अपने ऊपर लिया और दीक्षा के होंठों पर एक किश करदी. दीक्षा खुश भी थी लेकिन श्रम भी रही थी.

दीक्षा :- अब्ब तो हमारी बेटियां भी जवान हो गई हैं. कुछ तो ख्याल किया करो. इतनी आवाज़ें आने लगी हैं क अगर उन दोनों ने सुन लिया तो वो क्या सोचेंगी.????

हर्ष :- (दीक्षा के होंठों पर ऊँगली फेरते huye)"are मेरी जान तुम भूल रही हो मैंने अपने रूम को साउंड प्रूफ बनाया हुआ है. रूम से बहार आवाज़ नहीं जा सकती. तुम चिंता न किया करो. और अपनी प्रेमिका से प्यार करने में कैसे शर्म.." ये बोल कर हर्ष ने फिरसे दीक्षा के होंठों को चूम लिया और एक हाथ से दीक्षा के बूब्स को पकड़ कर मसल diya....deeksha एक झटके में उठ कड़ी हुई और बोली अब्ब टाइम बोहत हो गया है. मुझे बाथरूम जा के फ्रेश भी होना hai.....ye बोल एक नॉटी स्माइल देते हुए दीक्षा बाथरूम में घुस गई........




कुछ देर बाद हर्ष भी बाथरूम से फ्रेश हो कर आ गया और दोनों एक दुसरे की बहन में लिपटे सोने lage.......k अचानक से हर्ष चौहान के मोबाइल की रिंग बजने की आवाज़ सुनाई di........harsh ने मोबाइल उठा कर देखा तो वजिजय का नंबर देख कर एक झटके में उठ कर बेथ gaya.aur सोचने लगा "इस टाइम विजय ने क्यों कॉल की hogi"...deeksha भी हर्ष को ऐसे रियेक्ट करते देख कर हैरान हो गई लेकिन कुछ पूछने से पहले hi हर्ष ने कॉल को पिक करके कान से लगा लिया....

हर्ष :- हाल विजय बीटा इस टाइम कॉल क्यों की सबब ठीक तो है न.????

जीतू :- अंकल विजय को गोली लगी है और hum(bech में hi हर्ष बोल पड़ा)

हर्ष :- ये क्या बोल रहे हो, और तुम हो कौन ????

जीतू :- अंकल मैं विजय का दोस्त हूँ और इस वक़्त हम ........ जगा से गुज़र रहे हैं. विजय ने हम सबब को आपकी तरफ आने को बोलै है....

हर्ष :- क्याआ??? नहीं यहाँ आने में देर हो सकती है.... तुम ऐसा करो ..............इस जगा विजय को ले कर पोहंचो मैं डॉक्टर को कॉल करके खुद वही आता हूँ. तुम लोग जल्द से जल्द खुद को सेफ रखते हुए वहां पोहंचो...

जीतू :- जी अंकल ji(jeetu ने ये बोल कर राजा को वो एड्रेस बता दिया जो हर्ष चौहान ने दिया था)

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दीक्षा हर्ष को मोबाइल पर बात करते हुए सुन्न रही थी और विजय का नाम आते hi उसके दिल की ढकन तेज़ हो गई. उसे डर सताने लगा कहीं विजय को कुछ हो तो नहीं गया..... कॉल के एन्ड होते hi वो हर्ष की तरफ देखने लगी. इतनी hi देर में दीक्षा की आँखों में पानी आ गया था... प्यार ऐसे hi तो होता है.. अपना नहीं तो क्या हुआ ""था तो बेटे जैसा hi....""

दीक्षा :- (रट huye)kya हुआ विजय बीटा को????

हर्ष :- सबब जान कर खुद हर्ष की हालत भी अछि नहीं thi.lekin दीक्षा को हौसला तो देना hi tha."vijay अपने दोस्तों के साथ कहीं गया था तो कुछ गड़बड़ हो गई है इस लिए वो हमारी तरफ आ रहा था तो मैंने उसे अपने दूसरी कोठी का एड्रेस बता दिया. अब्ब टाइम नहीं है मैं वही जा रहा हूँ. तुम यहाँ का ख्याल रखना. मेरा ख्याल है पूजा बेटी को कॉल करके सबब बता do.wo यकीनन अभी सोइ नहीं होगी. क्यूंकि वो विजय के बगैर तो सोयेगी नहीं. इसलिए अभी जाएगी hi होगी तुम पूजा बेटी को कॉल करो मैं निकलता हूँ"

ये बोल कर हर्ष चौहान निकल गया और दीक्षा परेशानी में पूजा दीदी को कॉल करने लग gai.....call पर दीक्षा आंटी ने हर्ष ने जो कहा पूजा दीदी को "सबब बता दिया"


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