Fantasy Story - Rudradev pariwar ka rakshak - Page 4 - SexBaba
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Fantasy Story - Rudradev pariwar ka rakshak

अपडेट .....20

कहते हुए सोनिया बे समय के मुँह ंव झाड़ जाती है आवर दोनों बहने अपने आप को संतुस्ट कर के चैन से सो जाती है नुदे हे

वही बहार जो साया इनकी रासलीला देख रहा था वो बे अंदर चला गया .....

कोण था वो साया जो समय सोनिया की रासलीला देख रहा था........

अब आगे ......


शालिनी देवी रूम के अंदर आते हे अपने रूम को लॉक कर के सबसे पहले बाथरूम में

जा कर के अपनी छूट को संत किया

आवर फिर नाहा के टॉवल लपेट कर बहार आ गई

शालिनी ...बीएड पे लेते हुए क्या जबरदस्त फिगर है सोनिया आवर समय भाबी का

संजय आवर राज की तो लोटरॉय निकल गई

साली ऐसे जवानी तो मुज पे बे नै आई

जो बे हो देख कर हे छूट में बाद आ गई थी मेरी तो

लगता है मुझे बे अपनी छूट की आग भणियो की साथ में हे बजानी होगी

वैसे बे भाई लोग तो ज्यादातर बहार हे रहते है कारोबार के चलते आवर मेरा वो पति बे तो साला उनके साथ हे रहता है

मन में सोचते हुए

अबे बात करना बेकार है भाबी जी जल्दी हे आप दोनों की छूट का सवाद चखने को मिलेगा

ऐसे सोचते हुए शालिनी बे सो जाती है

नेक्स्ट डे सब लोग कुल पंडित को बुला कर के कुंडली देखते है

जो की पंडित जो ने 3 दिन बाद का सगाई का सुबह मुहूर्त निकलते है

1 महीने बाद का विवाह की डेट राखी जाती है

ऐसे हे काम में हंसी मज़ाक करते हुए सगाई की डेट बे आ जाती है

कल हे राणा महल को बहुत हे खूबसूरत तरीके से सजा दिया गया था

आज सुबह से कुछ नै बहुत जयादा हे चहल पहल हो रहे थी महल में

महल के बहार जहा देखो सिक्योरिटी आवर पुराने ज़माने के राजा महाराजो के सैनिको के जो सैनिक होते है उन के जैसे ड्रेस फंस बहुत से सैनिक बे तैनात थे

राजस्थान के राजवंश के ज्यादार परिवारों से कोई न कोई आया हुवा था

क्या पुलिस अफसर हो या कोई विप हो या फिर राजस्थान के मंत्री से ले कर के संत्री तक मौजूद थे

सभी का स्वागत दिलावर सिंह आवर दिवान जी की देख रेख में हो रहा

था

तभी वह पे पुलिस की कुछ गाड़ियों के साथ में राजस्थान के

c.m ..मर .परताप चौहान अपने दाल बल के साथ पादरी

दिलावर सिंह आवर दीवान जी आगे बाद कर

दिलावर सिंह c.m के पेअर छूटे हुए

आशीर्वाद लिया

c.m ....आवर कैसे हो दिलावर बेटे सब खैरियत तो है न

दिलवर सिंह ...जी काका साहेब

सब खैरियत है

दीवान जी मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ कर c.m को परनाम करते है

c.m दिलावर को साइड में ले जाते हुए

C.m ....दिलावर ये मुंबई में क्या कांड कर दिया तुम लोगो ने

दिलावर सिंह आँखे फाड् के c.m को देखता है

c.m ...हँसते हुए अरे बीटा ऐसे क्या देख रहे हो मई राजनीती में हु नींद बे आँखे खुली रख कर लेता हु

मुझे सब पता है काम से काम बताना तो चाहे था

दिलावर सिंह ..काका साहेब आप इस बर्वे में राणा जी से हे बात करना

c.m ...चलो ठीक है भाबी सा से मिल लेता हु नै तो अपनी c.m की कुर्सी खतरे में पद जाएगी हँसते हुए अपनी सिक्योरिटी को बहार छोड़ राजमहल में अकेले हे चल दिया

ऐसे हे सगाई का समय हो गया

पंडित जी ने दोनों राजकुमारियों को बुलाया तो जितने बे मर्द थे सब की लूली कड़ी हो गई दोनों के देख कर

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राजकुमारी सोनिया

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राजकुमारी समय

दोनों हे राजकुमारिया बहुत हे ज्यादा खूबसूरत लग रहे खुल दूल्हे राजा आँखे फाडे देख रहे थे वही पास में

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शालिनी देवी बे आज झहर ध रहे रहे

किन्तु सोनिया आवर समय काम

शालिनी देवी की ढूढ की घाटी देख कर तो भूतो की लूली ने कुछ बुँदे पानी टपकने हे दिया होगा

जड़ली हे पंडित जी के मंत्रो उच्चारण के साथ में दोनों राजकुमारिया की सगाई का कार्यकर्म सम्पन हुवा

भोजन इत्यादि के बाद लगभग सभी मेहमान जा चुके थे कुछ खाद मेहमानो के अलावा

सब काम निपटने के बाद शालिनी की फॅमिली राणा जी के फॅमिली आवर c.m हे महल में बच्ची हुए थे

कुछ समाया बाद बैठक में राणा जी c.m आवर ठाकुर भानु सिंह को मुंबई में समय आवर सोनिया के साथ में जो कुछ बे हुवा सब बता दिया

ठाकुर भानु सिंह ...राणा जी ये बात आप अगर न बे बताते तो बे हम सोनिया आवर समय बेटी के चरित्र पे सक नै करते

है हमें दुःख क्रूर हुवा की हमारी बच्चियों के साथ ये सब हुवा

c.m ...आपने उचित किया रुद्रप्रताप जो कुछ बे आपने मुंबई में

हमें ये तो प्या था की मुंबई कांड से आप जुड़े हुए है किन्तु जो आपने बताया ऐसा करने वालो के साथ ऐसा हे होना छाए

ठाकुर भानु ...राणा जी आप देहली

में हे सिफत क्यों नै हो जाते हो

आपका कारोबार बे है आवर अब आपकी बहने बे वही पे होंगी बच्ची बे बड़े हो रहे है

राणा जी ..ठाकुर जी आप हमने बे अब दिल्ली हे रहने का मन बना लिया किन्तु समय आवर सोनिया के सदी के बाद हे सिफत होंगे सदी दोनों की यही पे होगी

आवर बाकि बच्चो की यही पे सदी होगी महल में हे

बिच बिच में खाद मोको पे या फेस्टिवल पे यहाँ याना जाना लगा रहेगा

25 डेज बाद ...

अबे राणा महल को नै नवेली दुल्हन के जैसे सजा दिया था चारो आवर रौशनी हे

महल के साथ साथ मांज पूरी उदयपुर सिटी को हे दुल्हन के जैसे सजा दिया था गरीबो के लिया सदी से कुछ दिन पहले हे

राणा जी ने अपनी राजकुमारियों के नाम पे भोजन की पूरी उदयपुर सिटी में मनो लंगड़ लगवा दिए हो

इस सदी से उदयपुर की जनता बे खुट खुश थी भाई खुस हो बे क्यों न

उनकी राजकुमारी की सदी जो है

डेरी डेरी राणा जी की फॅमिली से जुड़े हुए लोग

( राणा जी की ननिहाल से ससुराल से विनय आवर दिलावर के ससुराल से राजस्थान के बाकि सही परिवारों से बे बहुत से फॅमिली c.m फॅमिली )

हज़ारो की संख्या में लोग इस सदी में शामिल हो रहे थे

इस बिच समय आवर सोनिया के कहने पे एक बार राणा जी ने

भैरब आवर रॉकी से मिलने की इजाज़त दे दे

सोनिया आवर समय जब कारागृह में पहुंची तो दोनों के कुत्ते से बे बदतर हालत देख कर बहुत सुख हुवा

उनको दोनों भैरव आवर रॉकी पे गुस्सा तो बहुत था किन्तु लड़किया हे तो थे दिल पिगल गया आवर राणा जी से बोल कर दोनों को ख़तम करवा के इस नरक जैसे जिंदगी से ाजजी दिला दी

भैरव आवर रॉकी ने अपने किया पापो की मफ्फिए दोनों राजकुमारियों से मांग ली

भैरव ने मरते समय राणा जी को कुछ बाते अपने बाप के बर्वे में बताया जो आगे चल के आता चलेगा

राणा जी बे भैरव के बातो से कुछ परेशान नज़र आ रहे थे किन्तु जल्दी हे अपनी परेशानी छुपा ली

ऐसे हे सदी का दिन बे आ गया राणा जी के दूसरे महल जो ठाकुर भानु सिंह को दे दिया था बारात वही से टायरव हो कर आने के किया

जल्दी हे बारात राणा महल के दवार पे थी रानी माँ ने दूल्हे का स्वागत आरती की आवर चल दिए मंडप की आवर

गुरु जी ने मंत्रो उच्चारण में साथ दोनों राजकुमारी की जयमाला करवाई

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कुछ समाया पश्चाताप सुबह मुहरत पे

अग्नि वेदी पे समय आवर सोनिया की सक्या आवर राज के साथ विवाह वेदी पे आहुति तो के साथ फेरी कटवाया गए

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साथ फेरिओ आवर साथ वचनो के साथ में दोनों राजकुमारिया को मंगलसूत्र के पवित्र बंदन में बंद

मांग में सिंदूर संजय आवर राज के दवारा लगाने के बाद विवाह सम्पन हुवा

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विवाह के पश्चाताप सब बड़ो से आशीर्वाद ले कर के दोनों बहने की विदाई कर दी गई विदाई के वक़्त राणा परिवार की आँखों में आंसू थे कुछ खुसी के तो कुछ अपनी राजकुमारी के विदाई के

एक न एक दिन हर माँ बाप जिनकी बेटे होती है उनको ये आंसू बहाने हे पड़ते है

डेरी डेरी समय बैठने लगा आवर राणा परिवार ने दिल्ली में अपने हवेली पे अपने पुरे परिवार सहित अब वही पे रहने का फैसला कर लेता जिसको किसी को बे ेराज़ नै था

ऐसे हे 4 रो ( दिव्या .कोमल ..चंचल .शीतल ) राजकुमारिया का 4 जन्मदिन आ गया देव का 1स जन्मदिन था सभी ने बहुत दम दाम से सबका बर्थडे मनाया गई

बिरतीदे के कुछ दिन बाद बन्दिया ने सबको बताया की वो प्रेग्नेंट है

दिलवर सिंह एक बार फिर से खुसी से नाचने लगा था

दिलावर को बीटा हुवा इस बार साथ हे में समय ने एक प्यारी सी बछिबको जनम दिया आवर सोनिया ने एक बेटे को

(दिलावर के बेटे का नाम वीर रखा गया सोनिया के बेटे का नाम दीपक समय की बेटी का नाम .सोनालिका रखा )

बच्चे मस्ती करते हुए बड़े होने लगे थे

ऐसे हे समय बेट्टा गया बच्चे बड़े होने लगे आवर स्कूल में जाने लगे

रुद्रदेव दिव्या कोमल चंचल शीतल निधि ये सब एक हे स्कूल में आवर इनका एक अलग हे ग्रुप बन चूका था

1 ..रूद्र देव 8 क्लास

2 ...दिव्या 10 क्लास

3 ...कोमल ....10 क्लास

4 ...चंचल ......10 क्लास

5 ......निधि 10 क्लास

6 वीर 7 8 क्लास

अबे देव का 13 बर्थडे आने वाला था

रानी माँ में एक रूम मीटिंग लगा राखी थी सभी बच्ची स्कूल गए हुए थे

रानी माँ ...कुंवर जी ( राणा जी )

अब समय आ गया है देव का हम सब सब दूर जाने का

मोहिनी देवी ...नै माँ सा ऐसा नै हो सकता है हम देव के बिना नै जी सकते उसमे हम सब की जान बस्ती है ........

रीड एन्जॉय फ्रेंड

शेयर योर सुग्गेस्टियन्स

नेक्स्ट अपडेट स्टार्ट तो गुरदेव स्टार्ट रुद्रदेव ट्रैनिग
 
अपडेट ....21

अबे देव का 13 बर्थडे आने वाला था

रानी माँ में एक रूम मीटिंग लगा राखी थी सभी बच्ची स्कूल गए हुए थे

रानी माँ ...कुंवर जी ( राणा जी )

अब समय आ गया है देव का हम सब सब दूर जाने का

मोहिनी देवी ...नै माँ सा ऐसा नै हो सकता है हम देव के बिना नै जी सकते उसमे हम सब की जान बस्ती है ........

अब आगे

रानी माँ ...मोहिनी बीटा दुख तो नाम बे बहुत है किन्तु देव की शिक्षा बे बहुत जरूरी है

राणा जी ...माँ सा क्या यहाँ पे हम देव की सिख्सा पूरी नै करवा सकते क्या

जिस कारन हमारा बीटा हमारे साथ बे रहे आवर उसकक शिक्षा बे पूरी जो जाये

रानी माँ ...नै कुंवर जी हम बे ऐसा हे चाहते है किन्तु हे संभव नै गुरुदेव का आदेश है की देव 13 जनम दिवश में अगली सुबह हे गुरुदेव में पास जाना होगा

वही पे अबले पांच साल देव की शिक्षा होगी

मोहिनी देवी ..रेणुका आवर नंदिता ...तीनो रोने लगती है

आंसू तो सब की आँखों में थे किन्तु कोई मच कर नै सांता था

मोहिनी devi....nai माँ सा हमें माफ कीजियेगा किन्तु हम देव के बिना नै जी सकते

हम देव को खुद से दूर नै जाने देंगे

हमारी 5 बच्चियों के प्राण बास्ते है देव में उन्होंने कबे अकेले देव को अपने बुवा सा के पास तक नै जाने दिया

आप देव को उन सब से 5 साल तक दूर भेज रहे है हम अबे जा कर के 5 को बता ते है फिर देखते है आप कैसे देव को यहाँ से भेजती हो ( ये सब मोहिनी ने थोड़े गुस्से में बोलै था जो की रानी माँ ने पहले बार देखा था हमसे संत रहती थी मोहिनी देवी )

रेणुका देवी ...चलिए जीजी हम बे आपके साथ चलते है हम अबे दिव्या को बताते है

दिव्या का नाम सुनते हे वह मौजूद रैंक माँ .राणा जी .विजयप्रताप .दिलावर सींग .nandita...sabke चेहरों की हवाइयां उड़ने लगी

नंदिता थोड़ा मुस्कुरा रहे थी

राणा जी ...नै महोनी आप ऐसा कुछ नै करेगी आप सबको देव की सौगन्द है

मोहिनी आवर रेणुका जहा थी वही जैम गई दोनों के आँखों में राणा जी के गुस्सा था आवर देव से बिछने का गम आवर आंसू

रानी माँ आगे बाद कर दोनों को गले लगाती है रोटी हुए

रानी माँ के गले लगते हे दोनों फुट फुट कर रोने लगती है

रानी माँ ...दोनों संत हो जाओ आवर हमारी बात सुनो उसके बाद तुम दोनों हे फैसला करना देव के किया क्या उचित है आवर क्या अनुचित है

मोहिनी आवर रेणुका दोनों हे रानी माँ का मुँह देखने लगी

रानी माँ ....एक लम्बी साँस छोड़ने के बाद कौन स्टार्ट किया

रानी माँ .. आप सब जानते है या नै ये मुझे पता नै किन्तु देव कोई सदर ान इंसान नै है

देव एक दिव्या बालक है

( सबके चेहरे का रंग हे सफ़ेद पद गया सिवाय ..रेणुका मोहिनी आवर नंदिता के )

रानी माँ तीनो का चाहता देखते हुए

रानी माँ .. क्या आप तीनो जानती है देव के बारे में कुछ

तीनो ...है हमें पता है किन्तु ज्यादा नै जानते हम बे

रानी माँ ...तो हम कह रहे थे की देव कोई सदर ान बालक नै है उसमे बहुत सी सक्रिय है जो की अबे तक सुप्त ( सोई .बंदी हुयी ) अवस्था में है

उन्हें सक्थ्यो के कारन आगे चल कर देव के बहुत से दुसमन बे होंगे कुछ इस दुनिया के तो कुछ बजरी डिबिया से

देव को 21 वे जनम दिन से पहले खुद को त्यार करना होगा इन सब दुश्मनो के लिया

राणा जी ...बिच में हे ...जब हमारे पुत्र में एंटनी दिव्या सकतिया है तो फिर उसे किश बात की चिंता है

गुरुदेव उसको यहाँ बे तो शिक्षा दे सकते है

रानी माँ ...नै ऐसा संभव नै देव को अपनी सक्रिय पाने के लिया बहुत म्हणत आवर कठोर से कठोर युद्ध कला की शिक्षा लेनी होगी जो की खुद गुरुदेव देव को पर्दैन करेंगे

अबे अगर देव की सकतिया आमद हुए तो देव का सरीर उन सक्तियो को ग्रहण नै कर पायेगा आवर देव का सरीर नस्ट हो जायेगा

इसी लिया देव को इतना मजबूत बनना होगा की वो सब सक्तियो को दर्जन कर सके

जो यहाँ पे रह कर के वो सब संभव नै

इस से ज्यादा हम आपको अबे कुछ नै बता सकते है

समय आने पे गुरदेव या फिर मई गुरुदेव की आज्ञा से बता देंगे

सब के सब जहा पे थे वही मनो किसी ने उनको जमा दिया हो

ऐसे हे कुछ दिन बाद देव आवर बाकि बहनो का जनम दिन आ गया था

सब बहने इन्क्लूडिंग निधि वीर जैसे 14 फेब के रात के 12 बजे सबने एक साथ देव के रूम में गुस्स गए रूम में पूरा अंदर था जब सबने लाइट जलाई तो वह पे कोई नै मिला

देव को रूम में न देख कर सब उसको ढूंढ़ने लगे

वही एक बड़े से रूम में कोई बहुत हे तेज़ी से रूम को सजा रहा था चारो आवर गुब्बारे हे गुब्बारे थे रंग बिरंगी लाइट ेब बड़ा वाला केक जिसपे एक तरफ 16 no. का चंदेल लगा आवर 1 तरफ 13 no. का चंदेल लगा लगभग 10 मिन्ट्स में पूरा रूम सजा दिया

ये तो देव महाशय है जो अपनी बहनो के बर्थडे सेलिब्रेट के लिया रूम आवर केक को सजा रहा था

वही बहार

सब लोग देव को हर रूम में दंड कर बहार सिक्योरिटी से बे पता किया उनका बे जबाब बे वही उन्होने किसी को अंदर बहार जाते हुए नै देखा सब बंगले के हॉल में एकता हो गए तभी वीर बोलता है

वीर ..दिव्या दी हमने सब रूम चेक कर लिया किन्तु आप दीदियो का रूम तो चेक किया नै है

इतना सुनते हे 5 भेने ऊपर को भागी

पूरा रूम अंदर में घेरता था सेण्टर में एक बड़ा सा केक रखा था जिसपे 5 का नाम लेखा था

तभी रूम के लाइट जलाई जाती है आवर एक के बाद एक गुब्बारे बलास्ट होने लगते है

पिच्य से देव निकलता है

देव ....हैप्पी बर्थडे तो माय स्वीट स्वीट आल सिस्टर्स

5 भने दौड़ के देव के गले लग जाती है आवर जहा जग्गा मिलती है चूमने लगती है

साथ में हे हैप्पी बर्थडे माय प्रिंस

विश यू वैरी वैरी हैप्पी बर्थडे माय स्वीट बीआरओ

सभी बड़े आगे बाद कर देव को गले लगते हुए बर्थडे विश करते हुए आशीर्वाद देते है

फिर 5 राजकुमारियों को बे बर्थडे विश करते है आवर आशीर्वाद देते है

देव ...तो कैसे लगा सरप्राइज माय एंगेल्स

आपको क्या लगा हमें पता नै होगा आप सब हमें विश करने हमारे रूम में आने वाली है

सबने एक बार फिर से देव को गले लगा कर केक कटाई करते हुए सबसे पहले 5 देव को खोलती है फिर देव अपनी बहनो को आवर फिर सब बड़ो को आवर वीर को बे

दिव्या ...भाई अबे हम सब आपके रूम में आपके साथ में सोयेगी

बहुत नींद आ रहे है

देव ...ok जैसा आपको अच्छा लगे माय प्रिंसेस

सब लोग सो जाते है

सुबह को एक छोटा सा फॅमिली पार्टी होता है

रानी माँ ने बड़ी पार्टी करने के लिया मना कर दिया था ओनली फॅमिली मेंबर्स

सबको पता था आज देव को अपने साथ ले जाने के लिया गुरदेव आने वाले है

( बहनो आवर वीर को छोड़ कर )

दिनभर सब बच्ची अपनी मस्ती में मस्त थे बड़े बे सब घर पे हे थे

सब बहार से खुस थे किन्तु अंदर से सब देव को खुद से दूर करने का गम बे बहुत था

सोम्य आवर सोनिया को बे बता दिया गया था देव का जाने का

मोहिनी देवी को देख कर देख को कुछ सनका हुयी तो अपनी माँ सा के पास जा पूछा देव

देव ...माँ सा क्या बात है आप किसी बात को ले कर के परेशान नज़र आ रहे है

मोहिनी देवी ने झट से देव को गले लगा लिया आवर बिना आवाज़ के रोने लगी कुछ पल बाद देव को बेचैनी होने लगी तो उसने अपनी माँ को खुद से अलग करके चेहरा देखा जो पूरा आंसुओ से भरा था

देव ...माँ सा क्या हुवा है आपको

आप रो क्यों रही है देखिए हमारा दिल गहरा रहा है

बताओ हमें क्या बात है आपको किसी ने कीच बोलै क्या

मोहिनी देवी ...नै हमको किसी कुछ नै खा बस आप हमारे पास हे रहो

( बहार जो दोनों माँ बेटे को रेणुका .नंदिता .समय सोनिया देख रहे थी जब से दोनों अंदर आये थे)

आप हमसे दूर नै जाना हम आपके बिना नै रह लाएंगे

( देव गहरा जाता है आवर अपनी माँ को सीने से लगा लेता है )

देव ....नै माँ सा हम आपसे कबे बे दूर नै जायेंगे आप रोना नै आपको प्या है न हम किसी के आखो में आंसू नै देख सकते

आपको रोटा देख हमें बहुत दर्द होता है प्लीज संत हो जाये

सोनिया समय नंदिता रेणुका ....हम बे तो आपकी माँ सा देव क्या आप हमें अपने सीने से नै लगोगे

देव सबको देख कर

देव ....बड़ी माँ सा ( नंदिता ) छोटी माँ सा ( रेणुका ) बड़ी बुवा सा ( सोनिया ) छोटी बुवा सा ( समय ) बुवा सा आप सब यहाँ पे

देखिए न माँ सा को क्या हुवा है

कब सड़ बस रोये जा रहे है आवर आप सब की आँखों में बे आंसू है

कोई हमें बताएगा की यहाँ हो क्या रहा है ( डेरी डेरी देव को गुस्सा आने लगता किश से उसकी आँखे लाल होने लगती है )

आपको किसी ने कुछ बोलै है क्या या फिर कुछ हुवा हमें बताये

नंदिता ....नै देव बीटा हमें किसी ने कुछ नै कहा है बस आप हमारे साथ में रहो

देव सबको सवालिया नज़रो से देखते हुए

देव ....हम आये पानी ले कर के आप सब यही पे रुको

इतना बोलके देव सिदा रानी माँ के पास जाता है आवर उनको सब कुछ बता देता है

रानी माँ बे देव का कल सुबह गुरुदेव के साथ में 5 साल की शिक्षा बर्वे में बता देती है आवर

जाना कितना जरुरी है ये बे

देव ....नै नै हम आप सब से दूर नै जा रहे है

हम अपने बहनो को छोड़ कर कहि नै जायेंगे

रानी माँ . ..आपको जाना होगा देव वार्ना आप हम सब को हमेशा के लिया खो देंगे आवर अपनी राजकुमारियों को बे

आपको आपकी दिव्या की कसम है आप कल सुबह गुरुदेव के साथ में जायेंगे

देव दिव्या की कसम का सुनकर मौश हो जाता है आवर जाने के लिया है बोल देता है

देव अपनी माँ सा के पास आ कर उनकी घोड़ में सर रख कर सुबकने लगता है

अच्चानक देव को ऐसे रोटा देख सब रोने लगती है

कुछ देर में देव संत हो जाता है फिर सबको संत करता है

आवर सबको अपनी कसम दे कर के राज़ी खुसी गुरुदेव के साथ जाने के लिया मना लेट है

देव समाज चूका था आज उसकी आखिरी रात है इस घर में क्युकी रानी माँ ने दिव्या की कसम जो दे दी थी

सबके साथ समय बीटा कर सब रात के भोजन पे मिली

कुछ समय से उदाश देव अपनी बहनो आवर वीर को खुश देख कर अपने आपको संत कर बोमन करने लगता है

दिव्या ....क्या बात है माँ सा आज खाना आप सबने मिल कर बनाया है

आवर वो बे प्रिंस के पसंद का माज़रा क्या है

कहि पापा को छोड़ मेरे प्रिंस को तो इम्प्रेश नै कर रहे है आप

मोहिनी देवी को छोड़ कर एक बार तो सभी की हंसी निकल गई

मोहिनी देवी ....तो क्या हुवा हमने अगर आपके प्रिंस को इम्प्रेस किया वो हमारे बे तो प्रिंस है

दिव्या जल्दबाज़ी में

दिव्या ...नै नै प्रिंस हम 6 बहेनो के है ( समय की बेटी सोनालिका बे थी )

दिव्या जल्दी में क्या बोल गई उसको खुद समाज नै आये

तब तक समाज आया बहुत देर हो चुकी थे

सब तबके लगा के हसने लगे रानी माँ को छोड़ कर

ऐसे हे हंसी मज़ाक में सब अपने अपने गम को छुपा रहे थे सोने चले गए

देव अपनी बहनो के साथ में हे सोया था

तबे रानी माँ के रूम का गेट नोक होता है

रंज माँ दरवाजा खोलती है तो दिलावर सिंह सामने खड़े थे

रानी माँ ...क्या बात है दिलावर बीटा

दिलावर सिंह ....वो रानी माँ गुरुदेव लड़ते है

रानी माँ दिलावर के साथ में गुरुदेव से मिलती है

कुछ समाया बातचीत कर के गुरुदेव आराम करने चले जाते है

रानी माँ आज दिव्या आवर कोमल की बातो के बारे हे सोच रहे थी सोचे सोचते

ऐसे हे सुबह 4 बज गए

रानी माँ सुबह के काम निपटा कर सबको जल्दी हे जगा दिया

सब त्यार हो कर के गुरुदेव से मिले सबने आशीर्वाद लिया कुछ समय बात करके रानी माँ देव को जगह ने चली गयी देव त्यार हो कर के अपनी सोती हुयी बहने के माथे पे रोटी हुए किश किया

आवर एक चिति ( लेटर ) दिव्या के तकिया के निछ्ये रख दिया

दूसरे रूम में जा कर के वीर को जगा कर एक लेटर उसको दिया आवर निछ्ये आ गया

देव ...परनाम गुरुदेव हम चलने को त्यार है

गुरुदेव ने देव को आशीर्वाद दिया

फिर सबने रोटी हुए गले मिल कर देव को गुरदेव के साथ में विदा कर दिया

जैसे हे देव घर से कुछ दुरी पे गया देव का दिल जोरो से धड़कने लगा किसी हन्होनी को सोच कर

वही देव जब घर से सब से निकला उसके पच्ची से मोहिनी देवी बेहोश हो गयी

देव ...गुरुदेव हमें वापिस जाना होगा माँ सा को कुछ हो गया है

गुरुदेव .....रुको देव हम देखते है

( गुरुदेव ने आँखे बंद की देखा तो मोहिनी कोमा में जा चुकी थी ( देव का बिछड़ना बर्दास्त नै हुवा ) गुरुदेव ने मुस्कुराते हुए कुछ मंत्रो का उच्चारण किया तो मोहिनी देवी को होश आ गया

गुरुदेव ...देव पुत्र चलो अब आपकी माँ सा अच्छी है

उन्हें कुछ नै हुवा है

चलते चलते गुरुदेव ने देव का हाथ पकड़ा आवर हिमालय की पवन आवर पवित्र भूमि पे प्रकट हुए

देव अचानक से खुद को किसी आवर देख कर चौंका आवर गुरुदेव की आवर देखा गुरुदेव को मुस्कुराते देख कर सन्ति से खड़ा रहा .........

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अपडेट ....22

चलते चलते गुरुदेव ने देव का हाथ पकड़ा आवर हिमालय की पवन आवर पवित्र भूमि पे प्रकट हुए

देव अचानक से खुद को किसी आवर देख कर चौंका आवर गुरुदेव की आवर देखा गुरुदेव को मुस्कुराते देख कर सन्ति से खड़ा रहा .........

अब आगे .......

इंडिया से काफी दूर एक अंडकार भरे जंगल में में एक गुफा थी

जिसमे शैतान ( डेविल ) एक बहुत बड़ी मरती के सामने ब्लैक कपड़ो में इ इंसान किसी खूबसूरत लड़की की बलि दे रहा रहा

गुफा के बहार कुछ काळा कपडे पहने गुफा की रखवाली कर रहे थे

उस लड़की को चलने तक का मौका नहीं मिला

लड़की की बलि देते हे उस मूर्ति से एक काली रंग की रे निकल कर शैतान की उस पुजारी में संहा गई

( बलि चढ़ाने वाला काळा कपडे में जो आदमी था उसको डेविल पुजारी या d.pujari लिखूंगा बलियो को d.sevak 1 d.sevak 2 लिखूंगा )/

डेविल पुजारी ....खुश होते हुए अंदर की जाये हो अंदर की जय हो

कहते हुए बलि छड़ी लड़की के सरीर के साथ सेक्स करने लगा जैसे जैसे मुर्दा सरीर से सेक्स करता रहा वैसे वैसे सरीर सूखने लगा जैसे डेविल पुजारी संतुस्ट हुवा वो सरीर अपने आप हे गायब हो गया वह सिर्फ एक कंकाल बच्चा था

डेविल पुजारी ..डी .साया से अगली अमावश्या के लिया कुवारी कन्या की वय्वस्ता करो

आज हमने पहेली बलि दे कर डेविल को खुस कर दिया है हमें जो 101 बलि देनी है उसकी शुरुआत हो चुकी है

हमारी पूजा के लिया लड़कियों की वय्वस्ता तुम करोगे

d.saya 1 ...जैसा आपका आदेश डेविल पुजारी

इतना बोल कर वो d.saya 2 को ले कर के निकल जाता है

वही दूसरी आवर दिल्ली में ......

जब देव दिल्ली से निकल हिमालय पूछता है तो

5 लड़किया नींद में हे प्रिंस प्रिंस छीलते हुए रोने लगती है ( ये तक की बात है जब गुरुदेव टेलीपोर्ट हो कर हिमालय की डर्टी पे पहुंचे थे)

लड़किया रोरी हुए देव को खोजने लगती है उनको देव का अहसानष नै हो रहा था

सब घरवाले उनकी हालत को समाज रहे थे किन्तु किसी का सहस नै हो रहा था की इनको सचाई बताई जाये

आखिर में रानी माँ ने हे सचाई बताने की हिमत की

रानी maa...divya .कमल निधि चंचल शीतल सोनालिका ..आप हमारे पास आवो हम बताते है आपके प्रिंस कहा पे है

दिव्या ..दादी सा हमें हमारी प्रिंस के पास जाना है अबे के अबे

बाकि लड़किया हमें अबे के अबे प्रिंस मिलना है

आप हमें बताओ दादी सा हम अबे उनके पास जाते है

कोमल ..माँ सा खा है वो बे नै देख रहे है

(यहाँ पे मोहिनी देवी नै थे वो तो अपने बैडरूम में एक जिन्दा लाश के जैसे पड़ी आंसू भ रहे थी देव के किया )

रानी माँ कुछ सोचते हुए

रानी माँ ...आपकी माँ सा की तबियत ख़राब है कोमल बिटिया

दिव्या ...क्या हुवा है माँ सा को

रूम में अपनी माँ की हालत देख दिव्या अपनी गुस्से भरी बजरी से

राणा जी को देखा

राणा जी दिव्या की गुस्से में कल्टी आँखों को देख कर अंदर तक सहम गए

दिव्या की आँखों में देखने पे उनको ऐसे लगा मनो किसी ने उनको अंदर से सरीर को डेरी डेरी जला रहा हो

रानी माँ ये देख कर शीतल को दिव्या को संत करने का इसरत किया शीतल जा कर के दिव्या के गले लग गई

डेरी डेरी दिव्या संत होने लगी

रानी माँ ...दिव्या बीटा हमारी बात सुनो आपकी माँ सा को क्या हुवा है हम बाद में आपको बताते है

पहले देव के बारे में जान लो

देव का नाम सुनते हे उन्हें फिर से अपने प्रिंस की याद आती है

दिव्या ...दादी सा आप हमें इतना बता दो हमारे प्रिंस है खा हम अबे जाते है उनके पास

रानी माँ ...नै दिव्या आप वह नै जा सकते है

आप क्या वह पे कोई नै जा सकता है

कोमल ..दादी सा ऐसे जैसी जग्गा है झा वो है

रानी माँ ...कोमल बीटा आपके प्रिंस अबे यहाँ से बहुत दूर हिमालय के लिया चले गए हज गुरुदेव के साथ में

इतना सुनते हे सब लड़कियलादकिया रोने लगी

दिव्या तो मनो स्टेचू हे बन गई बस आँखों में बजते आंसू

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चंचल आवर शीतल दोनों बहने आपस में गले लग कर जोरो से रोने लगी

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रो तो बाकि सब परिवार वाले बे रहे थे

रानी माँ.. दिव्या बीटा देव का जाना ज्यूरी था

वो जल्द हे लौट आएंगे आपके पास

दिव्या रोरी हुए गुस्से में

दिव्या ...हम प्रिंस कबे बात नै करेंगे

वो हमें प्यार नै करते इसे लिया वो हमें छोड़ कर चले गए

गुस्से में प्रिंस ी हेट यू ी हेट यू प्रिंस बोल कर रोरी हुए अपने रूम में चली जाती है

साडी लड़कियों के आँखों से खून के आंसू निकल रहे थे

जो यहाँ से हज़ारी किलोमीटर दूर को बे मह्सुश हो रहे थे किन्तु वो बेबस था कुछ कर नै सकता था आंसू बहाने के सिवा

रानी माँ .कोमल आप सब लोग दिव्या को संभालो

देव का जाना ज्यूरी था क्युकी देव की जान को यहाँ पे खतरा था इसे लिया हम मज़बूर हो कर देव को यहाँ से भेजा था

सब लड़कियों को एक झटका लगा ये सुन कर की देव की जान खतरे में है

कोमल ...दादी सा ये आप क्या बोल रहे है हमारे प्रिंस को किश से खतरा है हमें बताओ हम उसको जिन्दा नै छोड़ेगे

रानी माँ ...नै अबे देव जहा वो सुरक्षित है आवर जल्द हे अपनी रक्षा करने योग्य हो कर लौर आएगा आप सबको 5 साल का इंतज़ार करना होगा

( सभी लड़किया 5 साल इंतजारवक सुन कर के अंदर से टूट जाती है

किन्तु उन्हें तसली बे थी की देव जहा है वह सुरक्षित है )

रानी माँ ...दिव्या को समझाओ बीटा देव जल्दी लौट आएगा

आवर आपकी माँ सा बे जल्दी हे ठीक हो जाएगी

सभी लड़किया दिव्या के पास जाती है जो बीएड पे पड़ी आंसू बहा रहे थी

कुछ देर सजाने पे दिव्या कुछ संत हो जाती है बूत देव के लिया अबे बे गुस्सा था

दिव्या उठ कर बाथरूम चली जाती है तबे दिव्या के तकिये के नीची कोमल को देव का लेटर मेल्या है

कोमल लेटर खोल कर पड़ने लगती है

कोमल ....

देव लेटर .....हमें माफ करना हमारी प्रिंसेस हम आपसे दूर जा रहे है

किन्तु दादी माँ सा ने हमें आपकी कसम में बंद दिया है

............... .......... ........... ........... .............

...................

..................... .......... ....

आपका गुनेहगार आपका प्रिंस देव ....

कोमल लेटर पद कर फ़ौरन रोरी हुए दिव्या के पास जाती है आवर लेटर दिव्या को दे देती है

देव्या ..लेटर पड़ते हुए आवर जोर जोर से रोने लगती है कुछ तो देव के दूर जाने से आवर कुछ वो अपने कहे सब्दो के लिया जो कुछ समय पहले देव के लिया उसे किये थे .....ी हेट यू प्रिंस .....ी हेट यू प्रिंस ....

वही दूर हिमालय में ......

गुरुदेव जब देव को ले कर के आश्रम में पहुंचे तो द्वार में गुरु माँ आरती का थल लिया हुए उनकी हे प्रतीक्षा कर रहे थी

गुरुदेव ...रुद्रदेव ये हमारी दरमपत्नी है आवर आपकी गुरु माँ

देव आगे बाद कर गुरु माँ को परनाम करता है चरण छू कर के

गुरु माँ देव को सीने से लगते हुए

गुरु माँ ......कल्याण हो देव पुत्र आपको बरसो बाद एक बार फिर से देख कर हमें बहुत खुसी हुयी आपका स्वागत है पुत्र

( देव सवालिए नज़रो से गुरुदेव को देखते है )

गुरु माँ समाज जाती है की देव ऐसे क्यों देख रहे है

गुरु माँ ...देव हम आपसे पहले बे मिल चुके है

गुरुदेव .....है देव आपकी गुरु माँ ने हे आपका जनम मरवाया था इनके हाथो से हे आपका जनम हुवा था

आपने जब आँखे खोली तो सबसे पहले इनको हे देखा था

ये सब जान कर के देव भावुक हो एक बार फिर गुरु माँ के गले लग जाता है

गुरु maa..ha ये सत्य है देव हमने हे आपका जनम करवाया था

गुरु माँ ने देव को आरती तिलक किया आवर सब आश्रम में आ गए

गुरुदेव ने देव को अपनी कुटिया ( घास आवर लकड़ी से बने हुए घर ) के निकट में जो कुटिया थी उसमे उसको विश्राम करने के लिया छोड़ दिया

आवर अपनी कुटिया में जा पहुंचे

गुरदेव ...गुरु माँ से ....देवी आपको देव का ख्याल रखना होगा एक माता से बाद कर के

गुरु माँ ...हम कुछ समझे नै माता से बाद कर के से क्या मतलब है आपका स्वामी

गुरुदेव ....देवी हम देव को यहाँ पे शिक्षा नै दे सकते है हमें यहाँ से देव को ले कर के जाना होगा

गुरु माँ ...स्वामी ये आप क्या कह रहे है देव की आश्रम में शिक्षा नै होगी तो खा पे होगी

गुरुदेव ....देव की शिक्षा उस दिव्या गुफा में होगी देवी

देव कोई सदर्न बालक नै है ये तो आपको बे पता है

तो उसकी शिक्षा बे सदर्न नै होगी

हमें देव को ले कर के गुफा में हे रहना होगा जहा पे देव की शिक्षा पूरी होगी हम

तब हे बहार आ लाएंगे जब देव की शिक्षा पूर्ण होगी आवर देव दिव्या तलवार को दर्जन कर लेगा

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( रूद्र की दिव्या तलवार )

गुरु माँ ...ऐसा क्यों स्वामी

गुरुदेव .....देवी जब देव की शिक्षा आगे बढ़ेगी तब डेरी डेरी देव की सकतिया बे जागृत होगी

जिसका समय से पहले किसी को पता नै चलना चाइये नै तो बहुत बड़ा संकट आ जायेगा जिसके लिया अबे देव पूर्ण रूप से त्यार नै है

जब तक देव उस दिव्या तलवार की सकतिया आपने में दर्जन नै करता दिव्या तलवार किसी को अंदर या बहार नै आने देगी

गुरु माँ ....देव अबे बालक है क्या वो अकेले रह पाएंगे

गुरुदेव ....थे तो हमारे साथ में आप चल रहे है इसे लिया हमने आपसे खा की आपको देव की माँ से बाद कर ख्याल रखना होगा

गुरुदेव ....आवर है देवी आपको अपने साथ में वो विशेष आयल ( तेल ) बे ले कर चलना होगा जो हमने देव के लिया बनाया था

आपको हे देव की कलुष करने होगी अब जब तक देव 18 बर्ष का नै हो जाता है

गुरुमा .....स्वामी हम कैसे कर सकते है आपको तो पता हे है

की उस तेल की मालिश किश प्रकार की जाती है ( स्वामी हम अपनी भवनों को नियंत्रित नै कर सकते है हमें सम्भोग की तीव्रता इच्छा होती है )

गुरुदेव ...हम जानते है है देवी

हम आपको क्या कहना चाहते है किन्तु आपको ये करना हे होगा

आप जो सोच रहे हज आपकी जो चिंता है हमारे पास उसका बे हल है

एक सीसी देते हुए आप जब बे देव की मालिश करे आप इस सीसी से कुछ दवा पि लेना न इस से आपके मन में ऐसा कोई विचार नै आएगा

वही पास में देव की कुटिया में देव उदासीन मन से अपने परिवार को याद कर रहा था

उसने सुबह से कुछ बोमन बे नै किया आवर न हे भोजन करने का मन था

ऐसे हे रात हो जाती है

गुरु माँ ने थोड़ा बहुत देव को किसी तरह खिला कर अपनी घोड़ में हे सुला लिया सुबह हुयी आवर

तीनो निकल चले गुफा की आवर

जैसे जैसे देव गुफा की आवर बाद रहा था दिव्या तलवार की चमक बाद रहे थी

जल्दी हे सब गुफा में थे

गुरुदेव ने अंदर पहुंच कर गुफा को मंत्रो से बंद कर अदृस्य कर दिया

गुफा के अंदर क्या है क्या हो रहा है किसी को ज्ञात नै था

अब तो जब देव शिक्षा पूरी कर के निकलेगा थे पता चलेगा

वही दिल्ली से काफी दूर रतन सहर में

रतन सिंह के हवेली में

एक बेहद खूबसूरत लड़की अपने आलिशान बीएड पे सो रहे थी उसके चेहरे पे एक दिलकश मुस्कान थी

जो सायद सपने में आपने सपनो के राज कुमार को हे देख रहे होगी सायद .........
 
अपडेट ..23

वही दिल्ली से काफी दूर रतन सहर में

रतन सिंह के हवेली में

एक बेहद खूबसूरत लड़की अपने आलिशान बीएड पे सो रहे थी उसके चेहरे पे एक दिलकश मुस्कान थी

जो सायद सपने में आपने सपनो के राज कुमार को हे देख रहे होगी सायद .........

अब आगे .....

तबे उस लड़की रूम में एक बहुत खूबसूरत से महिला आती है


आवर बहुत हे प्यार से सोई हुयी लड़की को पहले माथे पे फिर हलके से गाल पे किश करते हुए लड़की को जगती है

ोुरत .....गुड मॉर्निंग मेरी जान देखो उठ जाओ सुबह हो गयी है

लड़की एक जबरदस्त अंगड़ाई लेते हुए

लड़की ...गुड मॉर्निंग माय लव उम्मम्मम ाः

आपका चेहरा देखे बिना हमारी सुबह नै न होती माय लव माय स्वीट माँ

Mom....accha अच्छा हमें प्या है की आपकी सुबह कितनी अच्छी होती है

mom....aapki मुस्कान बता रहे है की आपने फिर से वही सपना देखा है

क्यों ठीक खा न हमने

लड़की ..जी माँ आपको तो आता है सब कुछ हम आपसे कुछ बे तो नै छुपाते है आप हमारी जान बे हो आवर स्वीट से माँ काम दोस्त ज्यादा हेहेहे

माँ ...अच्छा गुड़िया जल्दी त्यार हो जाओ सब आपका नास्ते पे वेट कर रहे है

लड़की ...ok माँ हम अबे आये आप चलिए

( गलो को कीच कर भाग गई बाथरूम में)

लड़की की माँ पूरी पागल है पर मेरी जान बे तो है

मेरी खुशियों की चाबी मेरी मुस्कान मेरी जान

( जी है लड़की का नाम मुस्कान है ..घर में आवर फ्रेंड्स प्यार से खुसी बुलाते है इनकी माँ के सिवाय कोई मुस्कान नै बुलाता है )

बहार खुसी की दादी ..माया देवी

एक बार फिर से इंट्रो हो जाये छोटा सा

रतन सिंह राठौर खुसी दादा जी

माया देवी खुसी दादी माँ

रघुवीर सिंह (वीर ) राठौर खुसी पापा

जानवी देवी खुसी माँ ( रूम में यही थी खुसी के साथ )

) रुपाली का विवाह हो चूका है जब उनका रोल आएगा तब इंट्रो दे दूंगा (

मुस्कान उर्फ़ खुसी जानवी राठौर ( रघुवीर आवर जंगी के बेटी )

माया देवी ....जानवी हमारी खुसी खा रह गई क्या अबे बे अपने सपने के राज कुमार में खोई हुयी है

जानवी ...नै माँ वो आ रहे त्यार हो कर के

माया देवी ....वीर बीटा आज आपको खुसी के साथ जाना है

वीर ...खा जा रहे है खुसी माँ सा

माया देवी ..वो अपनी किसी दोस्त से मिलने दूसरे सहर जा रहे है अब अकेली तो जाने नै दे सकती अपनी गुड़िया को

इस लेता तुम साथ में जाओ

वीर ...माँ सा आज जाना ज्यूरी है क्या मेरी मीटिंग है आज ऑफिस में जरूरी

रतन सिंह ...नै वीर आप जाओ मीटिंग हम देख लेंगे आवर वैसे बे अब हम दिल्ली सिफत हो रहे है तो लगे हाथ यहाँ के हेड ऑफिस के जो जरूरी मुलाजिम है उनको बे पहले हे वह भेज कर आगे का काम सँभालने को बोल देता है

वीर ...जैसा आपको ठीक लगे पापा

खुसी अपने दादा दादी के गले लगते हुए

खुसी ...गुड मॉर्निंग दादू गुड मॉर्निंग दादी जान

ीदार वीर झूठा मुँह फुला लेता है

Khusi....ummmm गुड मॉर्निंग ी लव यू डैड

वीर ....गुड मॉर्निंग माय एंगेल्स ी लव यू तू हम्म्म

जंगी देवी ..चलो मुस्कान नास्ता करो आपको अपनी दोस्त से मिलने जाना है न

आपके पापा जा रहे है आपके साथ

खुसी ...ok मां

इनको यही छोड़ते है आवर चलते है

दिल्ली राणा मेंशन ...

देव को गए हुए आज एक दिन हो चूका था

मोहिनी देवी ने तो मनो देव के बिना सांसे लेना बे मंज़ूर न था

देव से बिछड़ने का सदमा लगा था मोहिनी देवी को उन्होंने बे बिस्तर पकड़ लिया था

सबको लग रहा था मोहिनी देवी देवी ठीक जल्दी हे खुद को देव की जुदाई से बहार निकल लेगी

सभी राणा फॅमिली मेंबर डाइनिंग टेबुल पे थे मोहिनी को छोड़ कर किन्तु किसी का बे दिल नै था नास्ता करने का

रानी maa...aisa कब तक चलेगा रूद्र बीटा हमको सब को संबलना पड़ेगा

अगर आप सब उदासीन रहेंगे तो वह पे देव को बे अच्छा नै लगेगा

आप सबको पता है न देव को दूर से हे पता चल जाता है कोण उदासीन है आवर कोण खुस

दिव्या ...दादी माँ हम क्या करे हमें प्रिंस की बहुत याद आ रहे है

हम उनके बिना नै रह सकती है है


ये सब अबे बात कर हे रहे थे की बहार से गरुड़ ने गुरु जी के आने की सुचना दी

रानी माँ ने एक बार सबको देखा फिर चल पड़ी बहार सबके सात

divya...dadi माँ क्या हमारी प्रिंस वापिस आ गए है

कोमल .निधि चंचल शीतल सोनालिका वीर सब बहार की आवर दौड़ लगा देते है ( उनको लगा सायद देव वापिस आ गया है )

किन्तु सबको निराशा हे मिली

सब लोग गुरु जी को परनाम किया

दिव्या ..गुरु जी हमारे प्रिंस कहा है क्या वो वापिस आ गया है

गुरु जी ...नै दिव्या पुत्री आपके प्रिंस हमारे साथ नै आये है

वो गुरुदेव के साथ में शिक्षा गठन कर रहे है

उनको आना अबे संभव नै

रानी माँ ...गुरु जी कैसे आना संभव हुवा

गुरु जी ...महारानी जी गुरुदेव ने कुछ सामान भिजवाया था वही देने आये थे हम


रानी माँ ...कैसा समाज गुरु जी

गुरु जी ...महारानी जी आवर रुद्रप्रताप आप हमारे साथ में आवो

दोनों गुरु जी के साथ चल दिए बाकि सब अंदर

गुरु जी ...महारानी निकट भविस्य में आपकी दोनों पुत्रियों आवर आपकी 5 राजकुमारियों पे कुछ अनिष्ट होने का खतरा है

आपकी 5 पोतीय आवर वीर के लिया गुरुदेव ने ये ओषदि भेजवायी है जो आप उनको हर सुबह देंगी उतने के साथ में हे

( गुरुदेव ने कुछ ऐसिया रानी माँ को दी अपनी बगवा झोले से निकल कर )

गुरु जी ....आवर ये लीजिये स्वर्ण के कड़े आप इनको अपनी दोनों पुत्रियों आवर नाती नातिन के लिया

गुरु जी ....महारानी जी आप सवयं ये कड़े उन 4 को पहना दे एक बार पहनने के बाद ये केवल आवर केवल देव हे निकल सकता है उनके फेन ते हे ये अदृस्य हो जायेगे इस लिया आपको गबरना नै है

राणा जी ...गुरु जी क्या ये सब जरूरी है

गुरु जी ...है राणा जी ये जरूरी है गुरुदेव के पास दिव्यदृष्टि है वो भविस्य में होने वाले खतरे को ध्यान में रख कर हे सब किया है

फिर एक आवर सीसी निकल कर देते हुए

गुरु जी ...ये लीजिये ये आपकी बहु मोहिनी देवी के लिया है

इस ॉडी को आप अपनी बहु में माथे पे हाथो में आवर पावो में लगाना है हर रोज

रानी माँ ..क्यों गुरु जी मोहिनी बेटी को क्या हुवा है

गुरु जी ....वो अब तब हे ठीक हो पायेगी जब देव लौट आएगा अबे वो बिस्तर से नै उठ पायेगी देव की शय्या के बिना

रानी माँ राणा जी आवर एक आवर साक्ष सोक से

ये आप क्या कह रहे है गुरु जी

गुरु देव ...ये सत्य है महारानी आप चाहे तो किसी चिकित्सक से पता कर सकती है

वो देख आवर सुन पायेगी लईकिन कुछ बे करने में असमर्थ है

गुरु जी अब आघ्या दे

सब वापिस मेंशन में लौट आये रानी माँ मोहिनी के पास चली गई

दिलावर सिंह ने वीर की कराल आर्ट की ट्रेंनिग चालू करवा दी थी

इसी बिच सबको

( दिव्या कोमल चंचल शीतल निधि को रात में सपना आता था जिसमे में वो सब अलग अलग जगह युद्ध कला की शिक्षा लेती किन्तु सुबह को उनको कुछ याद नै रहता था सिवाय उन लोगो के बदन में हो रहे ताकवत आवर दर्द का )

रानी माँ रोज ऐसे हे सबको वो दवा जो गुरु जी ने दी थे पिलाती थी जिस से सब की दर्द आवर थकावट दूर हो जाती थी

समय अपनी रफ़्तार से चलता रहा वीर ने अपने पिता से ट्रेनिंग पूरी कर ली

सब बच्ची अबे कॉलेज जाने लगे थे

दिव्या m.b.a आवर शीतल कर रहे थी

कोमल मेडिकल स्किन्स

चंचल कंप्यूटर नेटवर्किग रिलेटेड

निधि पुलिस फाॅर्स के लिया तयारी करने लगी थे

ऐसे हे समय बोटा आवर देव का 18 व बर्थडे आने वाला था

देव अपनी ट्रेनिंग पूरी कर चूका था अबे उसको इन्तजार था अपने 18 वे जनम दिन का जब उसकी सभी सकतिया आ जड़ हो जाएगी आवर देव दिव्या तलवार को दर्जन कर पायेगा .

क्या देव दिव्या तलवार दर्जन कर पायेगा

क्या रूद्र की सम्पूर्ण सकती देव दर्जन कर पूर्ण रूप से रुद्रदेव बन पायेगा ......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स

शेयर यू सुग्गेस्टियन्स

कीप सपोर्ट
 
अब तक के किरदारों का इंट्रो एक बार फिर से

1 - जयदेव प्रताप राणा ..( दादा जी ( डेथ हो चुकी है )

2 - लक्समी देवी ..दादी जी

3 ..रुद्रप्रताप राणा ( पापा )

4 ..मोहिनी देवी ( माँ )

5 ...दिव्या राणा ...बड़ी दीदी

6 ..कोमल राणा ....बड़ी दीदी

7 ....रुद्रदेव राणा ..मई हीरो ऑफ़ थे स्टोरी

चाचा फॅमिली ....

1 ...विजयप्रताप राणा ..चाचा जी

2 ....रेणुका देवी ...चची जी

3 ....चंचल राणा ..बड़ी बेटी

4 ...शीतल राणा ...छोटी बेटी

बुवा सा फॅमिली

1...ठाकुर भानु सिंह

2 ...गीता देवी .भानु वाइफ

3 ..शालिनी देवी ...भानु डॉटर

4 ..संजय ठाकुर ..फूफा जी

5...सोनिया ठाकुर ...बुवा सा

6...दीपक ठाकुर ..बीटा

7 ..राज ठाकुर ...फूफा जी

8 ..समय देवी ..बुआ सा

9...सोनालिका ठाकुर ..समय की बेटी

चाचा फॅमिली ( दिलावर सिंह)

1 दिलावर सिंह ..सिक्योरिटी चीफ एंड फॅमिली मेंबर्स ( बड़े चाचा)

2...नंदिता सिंह ...चची

3 ...निधि सिंह ..बड़ी बेटी

4 ..वीर सिंह ...छोटा बीटा

मोहिनी एंड रेणुका फॅमिली ा ( माँ डैड सिस्टर बरोथेर )/

( रुद्रदेव नाना नानी )

1 ..रघुवीर सिंह ...नाना जी

2 ...आशा देवी ...नानी जी

3...रणजीत सिंह ..मां जी

4 ...कामिनी देवी ...ममी जी

( इनके बच्चो का कोई रोल नै है )

रेणुका माँ डैड इंट्रो

1 ...दुस्तर सींग ..नाना जी

2 ..लतिका देवी नानी जी

3 ..देवेंद्र सिंह ...मां जी

4 निहारिका देवी ...ममी जी

5..निकिता कुमारी ...मसि जी

रतन सिंह राठौर फॅमिली

1 ..रतन सिंह राठौर

2..माया देवी

3 ...रघुवीर सिंह ( वीर 2)/

4 ..जानवी देवी वीर वाइफ

5 ...रुपाली देवी ...रतन डॉटर

6 ...मुस्कान उर्फ़ खुसी जानवी डॉटर

राजस्थान c.m..and दिवान जी...

1. गुरुदेव ..

2. गुरुमा

3. गुरु जी

1...डॉन ...त्रिकाल सिंह

2...भैरव ..त्रिकाल सोन (डेड)

3..रॉकी सिंह ..त्रिकाल सोन ( डेड )

ये है अब तक के किरदारों का इंट्रो (

(3 -- किरदर्द आवर है जिनकी जलक मिली थी उनका इंट्रो बाद में आएगा ( डेविल गर्ल जिनि गर्ल्स एंड एंजेल गर्ल) )
 
अपडेट ....24

ऐसे हे समय बोटा आवर देव का 18 व बर्थडे आने वाला था

देव अपनी ट्रेनिंग पूरी कर चूका था अबे उसको इन्तजार था अपने 18 वे जनम दिन का जब उसकी सभी सकतिया आ जड़ हो जाएगी आवर देव दिव्या तलवार को दर्जन कर पायेगा .

क्या देव दिव्या तलवार दर्जन कर पायेगा

क्या रूद्र की सम्पूर्ण सकती देव दर्जन कर पूर्ण रूप से रुद्रदेव बन पायेगा ......

अब आगे ......

चलते है डेविल पुजारी की आवर ....

आज अमावस्या की रात है शैतान की मूर्ति

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के सामने d.pujari अपनी 100 वे बलि की तयारी कर रहा था

अब तक की 99 बलि दे कर के उसने शैतान से बहुत से सकतिया प्राप्त कर ली थी

किन्तु अबे बे उसकी सकतिया प्राप्त करने की जो भूख थे वो ख़तम नै हुयी थी

आज उसके पास इतनी सकतिया थी की उन सक्तियो के घमंड में उसने अपने गुरु की हे चल से हत्या कर दी थे

( गुरु हत्या फलसरूप d.pujari को सराफ मिला अपने गुरु से )

अपनी 100 वे बलि की तयारी पूर्ण होते हे अग्नि हवन कुंड में कच्चे मांस ( मीट ) आवर ताज़ा इंसानी कूँ के आहुति के साथ मंत्रो उच्चारण करने लगा

जैसे जैसे उसकी यज्ञ की अग्नि में आहुति बाद रहे थी वैसे वैसे सामने डेविल की मूर्ति कूँ से नाहा रहे थी मूर्ति की आँखों पूरी लाल हो चुकी थी

d.pujari अपने हवन पूरा करने में लगा हुवा था कुछ हे समाया में हवन से एक खंजर निकलता है अग्नि से दहकता हुवा

d.pujari खंजर ले कर के लड़की के पास जाता है जो की सम्मोहित थी d.pujari दवार

एक हे जटके में उस लड़की की गर्दन सरीर से अलग हो सिदा अग्नि खुंड में जा गिरी

लड़की को चीखने तक का समय न मिला

d.pujari लग गया उस छटपटाते हुए जिसम के साथ अपनी वहशियत भरी हवश मिटने को

जब लड़की का सरीर नस्ट हो कर के कंकाल बचा तक d.pujari उसे बाकि कंकालों में फांक दिया आवर

शैतान की मूर्ति के सामने परनाम करने लगा मूर्ति से एक लाल रंग की रौशनी डी .पुजारी में समां गई

d.pujari ....शैतान की जय हो महामहिम की जय हो

तबे मूर्ति से आवाज आई

s.murti.....trikal हम बहुत खुश हुए तुमने हमें खुश करने के लिया कुंवारी 100 कन्याओ की बलि चढाई है

तुम्हे 100 वे बलि का फल तो मिल चूका है हम चाहते है तुम कुछ आवर बे मानगो

( जी है डेविल पुजारी कोई आवर नै त्रिकाल सिंह हे है .अब से डेविल पुजारी को त्रिकाल सिंह लिखूंगा )

त्रिकाल ...मेरे महामहिम अगर आप मुज पे इतना हे खुस है तो मुझे मेरे गुरु के सराप से मुक्त कर दे

शैतान ...त्रिकाल ये हम नै कर सकते है हम आपको एसजी काट बता सकते है कितनी करना तुम्हे खुद से हो होगा

त्रिकाल ...उचित है महामहिम आप हमें मार्ग बताये

शैतान ..तो सुनो यहाँ से काफी दूर एक सहर है तुम्हे वह 5 तत्वा दरक कन्या मेलिंगे तुम्हे किसी बे तरह से

उन कुवारी कन्याओ के साथ सम्भोग करना होगा

कित्नु ये इतना बे आसान नै अब तक तुमने जितनी बे बलि दी है वो सदर्न लड़किया थी किन्तु ये 5 लड़किया दिव्या सकती दरक बे है

आवर तुम्हारी 101 वे बलि बे उसी सहर में मेलिगी

त्रिकाल ....जी महामहिम मई खुद से 101 वे बलि का इंतजाम क्रुगमैन आवर उन पाछो लड़कियों को बे मई हे लोग

शैतान ...ध्यान रहे तुम यहाँ पे लेन से पहले उनको सरीर को छू नै सकते हो

तुमने ऐसा किया तो तुम्हारी समस्त सिडिया उसी पल नस्ट हो जाएगी

त्रिकाल ...जो मेरे मालिक के आज्ञा

वही दूसरी आवर दिल्ली में रतन मेंशन में

एक कक्ष में रतन माया रघुवीर जानवी बैठे हुए थे आवर एक आसान लगा हुवा है जिस पे कोई ऋषिवर विराजमान है

अरे ये क्या ये तो रानी माँ के गुरु जी ( रणवेंद्र ) है

गुरु जी ...जानवी पुत्री समय आ गया है

आपकी पुत्री खुसी में सपनो के राजकुमार का लौटने का उसकी जिंदगी में आने का किन्तु ....

जानवी देवी ...किन्तु का गुरुवार

गुरु जी ..आपकी पुत्री पे एक बहुत बड़ा खतरा बे आ रहा है ....रतन सिंह की आवर देखते हुए ....किन्तु कोई है जो आपकी पुत्री को उस खतरे से बचा सकता है

जानवी देवी ...किस से खतरा है मेरी बच्ची को आवर कोण है जो मेरी बची को बिछा सकता है

गुरु जी ...आपकी पुत्री पे काली सक्थ्यो के सम्राट के एक सेवक को पता चल चूका है की आपकी पुत्री खुसी एक दिया कन्या है

वो उसकी सकती को पानी के लिया निकलने वाला है इस सहर के लिया

रतन सिंह ...गुरुवार आप हे मेरी बची की रक्षा कर सकते है

कोण है वो जो मेरी बच्ची की रक्षा कर सकता है

गुरु जी ....हम सिर्फ मार्ग बता सकते है मार्ग पे चलना या न चलना आप की इच्छा पे निर्भर करता है

माया देवी आवर जानवी ...गुरुवार आप मार्ग बताये हम कुछ बे करने को त्यार है

(गुरु जी सबकी आवर देख कर )

गुरु जी ..वो मार्ग है रतन सिंह

रतन सिंह ...क्या गुरुवार हम वो मार्ग है मगर कैसे

गुरु जी ....वो मार्ग तुम नै हो किन्तु तुम उस मार्ग पे चल कर अपनी बच्ची की रक्षा करने वाले तक पहुंच सकते हो

तुम्हे कुछ त्यागना होगा आवर अपनी बची की रक्षा करने के लिया मनाना होगा आवर उनसे माफी बे मांगनी होगी

जानवी आवर वीर ...गुरुवार आप हमें बताओ हम कुछ बे कर करके उनको मन लेंगे अपनी बची की रक्षा के लिया हम उनके पैरो में गिर कर मफ्फिए बे मांग लेंगे

गुरु जी ...नै किसी आवर के माफी मांगने से कुछ नै होगा जिन्होंने उनके साथ गलत किया वही माफी मांगे तो उचित हो

आवर हमें एक वचन बे छाए रतन सिंह आप से

रतन सिंह ...हम समझे नै गुरुवार आप किस बारे में बात कर रहे है हमने किस के साथ गलत किया है

गुरु जी ...क्या इतनी जल्दी हे अपने परम मित्र को भूल गए रतन सिंह

( रतन सिंह सोचते हुए हमारा तो एक हे मित्र हुवा करता था जो हमारा अब परम सत्रु है हमने तो उसको अपने हाथो से मारा था तो गुरु जी किश से माफी मांगने को कह रहे है

आवर हमने खुश बे गलत नै किया उसने हमारी जान से प्यारी भें को धोखा दिया था )

रतन singh...ham नै भूले है गुरुवार किन्तु वो हमारा मित्र नै परम सत्रु है

किन्तु हमने तो उसको मार डाला था इन्हे हाथो से फिर आप किश से माफी मांगने को कह रहे है

गुरु जी ...रतन सिंह तुम्हारे परम मित्र ने तो हमेशा हे अपनी दोस्ती निभाई किन्तु तुम अपनी दोस्ती नै निभा पाए

उसने मरते समय बे तुम्हे सचाई बतानी चाय किन्तु तुम करोड़ आवर अपनी भें के मोह में उसको अंतिम मौका बे नै दिया

..सब मुँह फाडे रतन सिंह को गुस्से से देख रहे थे यहाँ तक की माया देवी को बे नै पता था की इनको कोई दोस्त था जिसकी हत्या इन्होने की थी ...

माया देवी ...गुरुवार आप किसकी बात कर रहे है कोण थे इनके दोस्त

गुरु जी ...जयदेव पड़ताल राणा जी

उदयपुर के महाराज

रतन सिंह को छोड़ कर सब चौंक गए की उदयपुर के राजा इनके दोस्त थे

जानवी देवी ...गुरुवार हमें बताओ की अब वो कहा है मैंने सुना है उनका परिवार कहि आवर सिफत हो गया है

गुरु जी ...वो सब दिल्ली में है काफी समय से

रतन सिंह ...माफ़ी चाहता हु गुरुवार किन्तु मई उनसे माफी नै मांगूगा

उस परिवार के कारन मैंने अपनी बड़ी भें को खोया है

गुरु जी ...जैसा तुम्हे उचित लगे हमने मार्ग आपको बता दिया है चलना या न चलना आपकी मर्ज़ी

किन्तु आप अबे तक पूर्ण सत्य नै जानते है आवर न हे हम आपको अबे बता सकते है

पूर्ण सत्य केवल आपको महारानी लक्समी देवी हे बता सकती है

माफी बे आपको उनसे हे मांगनी होगी

गुरु जी ...हम 3 दिन बाद आएंगे आप फैसला कर लीजियेगा आपको अपनी बच्ची कृषि प्यारी है या झूटी दुश्मनी प्यारी है

आवर गुरु जी उनको राणा मेंशन का प्या बता कर निकल जाते है .........

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अपडेट ....25

गुरु जी ...हम 3 दिन बाद आएंगे आप फैसला कर लीजियेगा आपको अपनी बच्ची कृषि प्यारी है या झूटी दुश्मनी प्यारी है

आवर गुरु जी उनको राणा मेंशन का प्या बता कर निकल जाते है ........

आग आगे ......

माया देवी ....सुनिए जी हमें नै मालूम आपकी राणा जी से क्या दुश्मनी है

किन्तु हम आपकी दुश्मनी में लिया अपनी बच्ची no खतरे में नै दाल सकते है

रतन Singh...aap कहना क्या चाहती है हमें खुसी बेटी की कोई चिंता नै है

आप एक माँ है आपका प्रेम सबको दीखता है किन्तु

हम एक पिता होने में साथ में मर्द बे है हमें आपकी तरह भावुक हो प्यार दिखाना नै आता तो क्या हम पत्थर दिल हो गए

रघुवीर ...पापा माँ सा का ये मतलब नै था

रतन सिंह ....हम जानते है बीटा की आपकी माँ सा खुसी के लिया चिंतित है

( ये कह कर वो उठ के एक रूम में चले जाते है एक तस्वीर को देख कर रोने लगते है )

जानवी देवी ....वीर se....aap पता कीजिए न ये राणा के घर का हम उनसे मिलना चाहते है

माया देवी ....वीर बीटा आप जल्दी पता करो इनके दोस्त के बेटे का एड्रेस हम बे जानवी बेटी के साथ में जायेंगे

रघुवीर ...जी माँ सा हम अबे पता करते है

वही दिल्ली में दूसरी आवर राणा मेंशन में .....

रानी माँ सबको मेंशन को सजाने को बोल रहे थी जो की पहले से बहुत खूबसूरत था

कुछ ऐसा

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जब सब लड़किया आवर वीर कॉलेज से लौटे तो उन्होंने अपनी दादी सा से पूछा

दिव्या ...दादी माँ क्या बात है आज इतनी सजावट किश लिया कर रहे है

कोमल बिच में हे

कोमल ...दादी माँ क्या दीदी का रिश्ता आये क्या जो महल को सजाया जा रहा है

दिव्या ....कोमल को फिरते हुए ..तुम्हे बड़ी जल्दी है सदी की लगता है मुझसे पहले तेरी सदी के लिया लड़का देखना होगा

कोमल जल्दी जल्दी में बोल जाती है

कोमल ..मैंने तो कबका दंड लिया है मेरा प्रिंस

निधि ....क्या खा कोमल दी आपने कोण प्रिंस कहा का प्रिंस

कोमल ने फिर गलती कर

कोमल ..मेरा प्रिंस मेरा देव

देव का नाम सुनते हे सब उदासीन हो जाती है तब

दादी सा हस्ते हुए

( रंज माँ को दादी सा या दादी माँ कहुगा )

दादी सा ...क्या हुवा मेरी राजकुमारियों को तुम सब उदाश अच्छी नै लगती हो

आप सबका प्रिंस जल्द हे लौटने वाला है

दादी maa....aapko पता है न 5 दिन बाद आपके प्रिंस का 18 व आवर आपका 21 व बर्थडे है

अब देव कबे बे या पे आ सकता है

divya...kya आप सच कह रहे है हमारा प्रिंस आ रहा है

आप मज़ाक तो नै कर रहे है

( ये सब कहते हुए दिव्या के आँखों में आंसू आ गए थे )

दादी माँ ....न मेरी गुड़िया रोना नै अब तो खुसिये हे खुशिया होंगी तुम्हारी झोली में आपका प्रिंस जो आ रहा है

( दिव्या को गले लगते हुए कण में खा )

दादी maa...deree से कण में दिव्या ...अब तुम्हारा प्रिंस आ रहा है जितना दिल करे उस से प्यार करना मई नै रोकने वाणी नै किसी आवर को रकने दूंगी

मई जानती हु तुम देव से प्यार करती हो है

divya...ha दादी माँ हम प्रिंस बहुत प्यार करते है

दादी maa...deree से कोनसा वाला

दिव्या चौंकते हुए अलग हो कर अपनी दादी को देखने लगे

दादी ने बे डेरी से आँख मर दी दिव्या को दिव्या सरमने लगी

कोमल ...दादी माँ आपने ऐसा क्या खा दीदी से जो दीदी ऐसे शर्मा रहे है जैसे आज हे दीदी को देखने कोई लड़का आने वाला है

दादी माँ ....है ऐसा हे कुछ समाज लो तुम सब

केवल दिव्या के नै तुम 5 के लिया आ रहा है देखती हु किस किस को पसंद आता है लड़का

कोमल एंड chanchal.....dadi माँ हम प्रिंस के बिना नै करने वाली सदी

छाए कुछ बे हो जाये

( दादी अपने मन में ..मुझे इतनी जल्दी नै मरना जो उसकी बीबियो के लिया कोई आवर लड़का दुंदु .

एक लिंग जी जाने आगे क्या होगा कैसे होगा )

वीर ...दादी माँ क्या हुवा खा खो गई

आवर देव भाई कब आ रहे है

दिव्या घर के वीर के देखती है

वीर ....मेरा मतलब है दादा भाई कब आ रहे है

- -- वीर को डरते हुए देख वह खड़े सभी की हंसी छूटे जाती है -----

दादी माँ ...बहुत जल्द बीटा सायद अपने जनम दिन वाले दिन

अब तुम जाओ सब खाना ख़ाक आवर शॉपिंग नै करनी क्या तुम लोगो को देव के लिया गिफ्ट नै खरीदने क्या

सभी फ़ौरन वह से गायब हो जाती है जैसे घड़े के सर से सीइंग

लड़किया आवर वीर खाना खा के निकल जाते है शॉपिंग के लिया

आज वो सब बहुत खुद्द थी

वही जब वो लोग मॉल में पोहचे तो सिक्योरिटी वाले मॉल के बहार रुक कुछ उनका दूर से नज़र रख रहे थे

अब लड़किया शॉपिंग करे आवर टाइम न लगाए ऐसा हो सकता है क्या

वही कुछ रहीश बाप की बिग दी हुए ओलादे बे थी जब वो सब हर खूबसूरत लड़की ताड रहे थे तब उनकी नज़र वीर मण्डली पे पड़ी

या इनके लेदर को बॉस बाकियो को

g.1..g.2..g.3....likhunga

g1.....boss वो देखो क्या खूबसूरत परिया है इनको मसलने में मज़ा आएगा

बॉस ...क्या बात है जबरदस्त मॉल है ये सब तो

चलो रे सब थोड़ा इनका बे रास चख ले

सब गुंडे जो कुल 6 थे आवर इनका बॉस चल पड़े वीर ग्रुप की आवर

वीर ने इनको आते हुए देख लिया था तो वो सतर्क हो गया था

बॉस ...कोमल ko....haye जानेमन क्या जबरदस्त फिगर है तेरा चल

g4...boss सब एक से बाद कर एक मॉल है

G2...boss हम 7 लोग है आवर ये 6 है बस 1 की कमी रह गई बाकि तो रात का इंतज़ाम हो हे गया है

वीर जो कब से अपनी गुस्से को काबू कर रहा था दिव्या के इसरा करने के कारन मजबूर था जब तक दिया कुछ नै कहती तब तक वीर उनकी ढुलाई नै कर सकता था

दिव्या बॉस की आवर इसरा करते हुए

divya...sun बे घड़े की औलाद तुम 7 मिल कर मेरी 5 बहेनो को उठाना तो दूर है है

एक काम करो मुझे हरा कर इनको ले जाओ नै तो अबे चुपचाप सबके पैरो में गिर के नाक रगड़ कर माफी मानगो आवर निकलो यहाँ गन्दी नाली के कीड़े

बॉस ...सुन बे रनडीईई

चटकककक

दिव्या के एक हे थपड से बॉस के सामने के 4 दन्त सहीद हो के फर्श पे पड़े थे

फिर जो एक बार दिव्या ने अपना चंडी रूप दर्जन किया तो 7 को बस हड़िया टूटने आवर चलने की नवाज़ हे गूजती रहे मॉल में

वह पे काफी भेद जमा हो गई थी एक लड़की कैसे 7 '7 मुस्टंडो की हड़िया थोड़ रहे थी फ्री का शो था भाई क्यों नै देखेगा कोई

दिव्या ...क्यों बे गन्दी नाली के कीड़े चल अब माफी मांग

बॉस बेचारा चिमटा रहा अब वो माफी कैसे मांगे बिचारे के दोनों हाथ आवर पेअर जो थोड़ दिया चंडी देवी ने

कुछ हे मिनट में वह पुलिस आ गयी

जो सायद मॉल के हे किसी कर्मचारी ने बुलाऊ होगी

पुलिस inspector...kya हो रहा है यहाँ पे चलो हटो यहाँ से इतनी भीड़ क्यों लगा राखी है

inspector...kya हुवा इनकी ऐसे हालत किसने की मांगी लाल ( हवलदार) जल्दी फ़ोन कर आवर एम्बुलेंस मगवा कहि मर मारा गए तो एक आवर केश अपने माथे आ जायेगा

मॉल ओएमआर ...इंस्पेक्टर ये यहाँ के आस पास के लोकल गुंडे है ये यहाँ आये दिन किसी न किसी को परेशान करते है

इन्होने उनके ( वीर ग्रुप ) साथ जो लड़किया है सब के साथ बत्तमीज़ी कर रहे थे तो बच्ची ( दिव्या, ) ने ये हालत बना दी

इंस्पेक्टर... चलो रे डालो सालो को जो मरने वाला है उसको एम्बुलेंस में आवर बलियो को ले चले हवालात में

mangilal...saheb जी ये तो सब के सब मुर्दा घर वाले है लगता है 4" 6 महीनो की लग गई इनकी तो वात

सब जल्दी हे शॉपिंग कर के 8 बजे तक घर पहुंचे

वीर बेचारा शॉपिंग बेग के बिछे दभा हुवा था

उसकी हालत देख सब हंस रहे थे

वीर ...दादी माँ हम दीदियो के साथ अब कबे शॉपिंग पे नै जायेंगे

शॉपिंग करे दी लोग आवर बेग के लिया कुली मुझे बना दिया

दिव्या ..क्या खा आपने

वीर कुछ नै दी मई तो बस मज़ाक कर रहा था मुझे तो बहुत मज़ा आया

दिव्या ....ठीक है फिर हम कल सुबह फिर से शॉपिंग करने जा रहे है तुम बे हमारे साथ चल रहे हो

वीर .....क्याआ ....

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अपडेट .......26

दिव्या ..क्या खा आपने

वीर कुछ नै दी मई तो बस मज़ाक कर रहा था मुझे तो बहुत मज़ा आया

दिव्या ....ठीक है फिर हम कल सुबह फिर से शॉपिंग करने जा रहे है तुम बे हमारे साथ चल रहे हो

वीर .....क्याआ ....

अब आगे..........

वही त्रिकाल अपनी साथियो के साथ उन 5 तत्वा दरक लड़कियों के तलाश में निकल चूका था

त्रिकाल का एक खास सिस्य बे था जिसका नाम संबु था

वो बे उसके साथ में हे था

संबु ...गुरुदेव ( त्रिकाल ) आज आप बहुत हे परेशान नज़र आ रहे हो ऐसा आज आपको दूसरी बार देख रहा हु मई

trikal..sambu तुम मेरा सिस्य होने से पहले तुम मेरा साथी हुवा करता था तुम्हे तो सब पता हे है की कैसे मेरे बेटे रातो रात गायब हो गए थे

हमें आज तक पता नै चला है उनका की वो जिन्दा बे है या मर चुके है .

इतनी सकती इतनी सिडिया किश काम की जब हम ये हे पता नै कर पाए तो क्या फायदा ऐसे शक्तियों का

sambu....baat तो आपकी उचित है गुरुदेव अब तो सायद तबे पता चले जब आपका बलि यज्ञ पूरा हो जाये

त्रिकाल ....है सायद तब संभव हो पाए

Sambu.....baat कुछ आवर बे है गुरुदेव जो आपको परेशान कर रहे है

त्रिकाल ...है संबु पिछले कुछ समय से मुझे विचित्र सपने आते है आवर बार बार गुरुदेव का दिया हुवा सराप

जिस कारन ठीक से सो नै पते है

संबु ...जल्दी हे सब ठीक हो जायेगा गुरुदेव

त्रिकाल ...है सायद

राणा मेंशन ....

सभी लोग बड़ी हे खुसी के साथ अबे नास्ते से फारिग हुए हे थे की

बहार से एक सेवक ने आ कर के रानी माँ से खा

सेवक ...रानी माँ आपसे कोई मिलने आये है

रानी maa...thik है उन्हें आप बैठक में भेटओ

हम अबे आते है

कुछ समय बाद रानी माँ एक रूम में आती है तो 2 खूबसूरत महिला आवर एक 1 ..40 के उम्र के आदमी को अपने सामने चेयर पे भेट्ने का इसरत करती है

तीनो ने आगे बाद कर रानी माँ को चरण छू कर आशीर्वाद लिया

रानी maa...kalyan हो सदा सौभाग्य आती भाव

का आशीर्वाद तीनो को दिया

रानी maa...hamne आपको पहचाना नै खाइये कैसे आना हुवा आपका

2 महिलाओ में से जो ज्यादा खूबसूरत आवर जवान थी वो आगे बाद कर रानी माँ के पेअर पकड़ लेती है आवर अपना परिचय देती है

ोुरत ...रानी माँ हमारा नाम जानवी है ये हमारी माँ सा (माया देवी ) है ये हमारी पति ( रघुवीर) है

रानी maa...janvi बेटे आप पहले कड़ी हो जाओ

जानवी devi...aapne हमें बेटे खा है इस लिया नाते आप हमारी बे माँ सा हुयी

रानी maa...thik है ठीक है हम आपकी माँ सा हुयी किन्तु आप कड़ी तो हो जाएये

जानवी देवी ...माँ सा हम तबे खड़े होंगे जब आप पिता जी को माफ कर देंगी

रानी माँ ...बीटा हम जब जानते नै है आपके पिता को तो माफी किश बात की

हमें पता तो हो न की कोण है किश गलती की माफी मांग रहे है

माया देवी ...हम बताते है जीजा (दीदी ) हम यहाँ क्यों आये है

दरसल मई रतन सिंह राठौर की पत्नी माया देवी हु आवर ये हमारे पुत्र रघुवीर आवर उनकी पत्नी जानवी देवी है

माया देवी का पूरा परिचय जान कर रानी माँ को एक बार तो गुस्सा आया फिर अपने पति जयदेव राणा की बात याद आते हे संत हो गई

रानी माँ ....अच्छा तो आप रतन सिंह का परिवार हो

जिन्होंने गलत किया जिनको माफी मांगनी चैया जब वो हे नै मांग रहे तो आप क्यों मांग रहे है

माफ करना हमारी आप से कोई दुश्मनी नै है जिसने हमें अपना दुसमन मन आवर हमारा सुहाग उजाड़ दिया सिर्फ आवर सिर्फ वही हमारे दुसमन है

अगर रतन सिंह राणा जी के मित्र न रहे होते तो कब का हमारे पुत्र ने उनका सीस अलग कर दिया होता उनके सरीर से

उनकी एक गलतफहमी ने हमसे हमारा सुहाग चीन लिया

माया देवी ...हम जो हो चूका उसको तो नै बदल सकती है जीजा उनको माफ कर दीजिये

रानी माँ ...ठीक है माया देवी हम उनको माफ कर देंगे किन्तु ये माफी थे मेलिगी जब खुद रतन सिंह हमसे माफी मांगे गए आवर आप बे हमें पूरी बात बताओ थे है माफ करेंगी

क्युकी हम इतना तो समाज चुके है की इस माफी की वजह कुछ आवर है न की अपने ( रतन) किये गए पापो का प्रयाश्चित

तीनो एक दूसरे की आवर देख कर

जानवी देवी ...माँ सा हम बताते है आपको

मेरी खुसी की जान खतरे में है फिर गुरुसर ने कुछ बताया सब बता दिया

रानी माँ ...ओह्ह तो ये बात है हम समाज गए आपकी बात ( मेरे देव की एक आवर पत्नी के एक आवर पत्नी मिल गई )

रानी माँ ...जानवी बीटा आवर रघुवीर हम खुसी की रक्षा का आपको वचन देते है आपकी खुसी को कुछ बे नै होगा किन्तु बदले में आपको बे एक वचन देना होगा

माया देवी ...जीजा हम वचन देते है जैसा आप खोजी वैसा हे होगा

रानी maa...maya देवी हमने वचन आप से नै आपकी बहु जानवी आवर बेटे रघुवीर से चाइये

रघुवीर ...कैसा वचन रानी माँ

रानी माँ .....हमें आप दोनों से ये वचन चाइये की आपकी पुत्री खुसी का विवाह हमारे पुत्र रुद्रप्रताप राणा के पुत्र राजकुमार रुद्रदेव से करवाएगी

तीनो के तीनो मुँह फाडे रानी माँ को देखते है

फिर जानवी कुछ सोच के

जानवी देवी ...माँ सा किन्तु हमारी खुसी किसी आवर से प्रेम करती है आवर वो उसकी लाइफ में जल्दी हे आने वाला है फिर खुसी के सपने के बारे में गुरु जी के कहि बात सब बता देती है

रानी माँ ...हस्ते हुए ..जानवी अगर आपकी खुसी हमारे देव से प्रेम करने लगे आवर देव हे उनके सपनो का वो राजकुमार हो तब तो आपको वचन देने में कोई प्रॉब्लम नै होगी न

जानवी .maya..raghuveer ...तब हमें कोई परेशानी नै होगी विवाह के लिया

रानी माँ ...किन्तु एक सत्य है जो हम आपको अबे भ देना छात्र है की देव के एक से आदिक विवाह होगा जिस में आपको कोई आपत्ति नै होगी

माया देवी ...जीजा ये कैसे संभव है

रानी माँ ...संभव क्यों नै है वो भावी राणा जी है उसके लिया कुछ बे असंभव नै

आपको आवर देख जानना है तो आप गुरु जी राग्वेंद्र से इस विस्य पे कर लीजियेगा आपको सब समाज आ जायेगा

तीनो जी ठीक है

रानी माँ ...है एक आवर बात परसो ( तीसरे ) हमरे राजकुमार आवर राजकुमारियों का जनम दिन है तो आप जरूर आएगा

आवर कल यहाँ खुसी को चोर्ने के लिया गुरु जी के साथ रतन सिंह को बे भेज देना

उनसे कहना अपनी भें का सत्य जानना है तो गुरु जी के साथ चले आये यहाँ पे

ये उनकी माफी के लिया अंतिम मौका है एक बार अगर देव आ गए तो हम बे रतन सिंह की जान की रक्षा नै कर पेरंगे देव से

वही रतन सिंह घर में ....

एक रूम में रतन सिंह अपनी बड़ी भें की फोटो के सामने आंसू भ रहा था

जीजा आपने हमें अकेला क्यों छोड़ा आपको धोखा देने वाले की हमने अपने इन्हे हाथो से हत्या की किन्तु आप से दूर हो जाने का दुःख आज बे हमें चैन से जीने नै देता है अपनी पुराणी यादो में खोते हुए

एक सॉर्ट फ्लेशबैक .रतन आवर जयदेव राणा की दोस्ती ..दुश्मनी..

रतन सिंह आवर जयदेव राणा दोनों बचपन की मित्र हुवा करते थे जब जयदेव अपनी दादी सा के साथ में उनके अपने पिता के ननिहाल जाया करते थे

तबे रतन .सन्ति ..आवर जयदेव की दोस्ती हो गयी इनके बचपन में हे

इन तीनो की दोस्ती बहुत गाह्रो थी

सन्ति रतन सिंह की बड़ी भें थी

रतन सिंह की माँ रतन सिंह को जनम के समय बाद हे उनकी मरतु हो गयी थे

आया ने आवर सन्ति ने हे रतन का पालम पोषण किया

डेरी डेरी ये तीनो बड़े होने लगे तीनो जब बे मेले साथ में घुड़सवारी करना सीकर खेलने जाना खेलना खुदना नाचना गण

जब सन्ति पे जवानी आने लगी तब सन्ति जयदेव की आवर आकर्षित होने लगे

जयदेव था बे खूबसूरत पहलवान

किन्तु वो सन्ति को अपनी भें मंटा था

ऐसे समय गुजरता गया रतन को बे पता चल गया की सन्ति जयदेव से प्यार करती है

रतन ने काफी बार जयदेव से बात बे की किन्तु जय डेक का बस एक हे जबाब होता था

सन्ति मेरी बड़ी भें है दोस्त है मेरी

सन्ति आवर रतन ने काफी कोसिस के किन्तु नतीजा वही का वही रहा

सन्ति के लिया रिश्ते आने लगे

किन्तु सन्ति किसी तरह उनको जयदेव के लिया रिजेक्ट कर देती

ीदार उदयपुर में जयदेव की सगाई किसी ठाकुर खंडन की एक सुशिल लड़की ( लक्समी देवी ) से सगाई पाकी कर दी रतन सिंह बे सगाई में आया था

सन्ति ने आने से मन कर दिया था

कुछ समाया बाद जयदेव एक बार फिर से अपने पिता के ननिहाल गया अपने सदी का आमंत्रण ले कर के

सन्ति को बहुत दुख हुवा जयदेव के एक बार फिर से मन का देने पे

सन्ति का आक्रान्त कब प्यार में बदल गया प्यार जिद में पता बे नै चला

कुछ समय बाद जयदेव की सदी बे हो गयी आवर जनम हुवा रुद्रप्रताप का

जब विजयप्रताप लक्समी देवी के खोख में था तब

जयदेव को खबर मिली की सन्ति ने आत्महत्या कर ली है जयदेव अंदर तक टूट गया था

किन्तु फिर बे वो वह गया क्युकी सन्ति को उसने भें मन था

जयदेव को वह देख रतन को बहुत गुस्सा आया किन्तु कुछ खा नै उसने

ऐसे हे कुछ दिन वह बिकता कर जब जयदेव वापिस आये तब विजयप्रताप का जनम हुवा

रतन सिंह जयदेव को अपनी भें का कातिल मन चूका था अब उसको इंतज़ार था

अपनी भें की मौत का बदला लेने का

कुछ समय बाद जब समय आवर सोनिया गरब में थी तब

रतन सिंह को वो मौका मिल गया

किसी कारन से रतन सिंह उदयपुर आया था जब वो वापिस लौट रहा था तो बहुत रात्रि हो गई थी

वो अबे कुछ दूर हे गया था की कुछ लोगो की छिलने की आवाज़े आये तब

उस आवर गया तो देखा की जयदेव कुछ नकाबपोश डाकुओ से लड़ रहा है उदयपुर के ज्यादातर सैनिक मर चुके थे

यही ाचा यही ाचा मौका जान कर घायल जयदेव को पिच्य से तलवार का वॉर कर किया आवर फिर निकल गया वह से

आगे जो फ्लेक्बाक है जो रतन सिंह को पता नै है ....

कुछ समय में गगल अवस्ता में जयदेव राजमहल पहुचये आवर राजवेद से इलाज करवाते हुए लक्समी देवी को साडी घटना बता देते है की कैसे उनकी दोस्ती हुयी कैसे सन्ति प्यार करने लगी कैसे सन्ति ने आत्महत्या की आवर आज डाकुओ से लड़ते हे जयदेव पे कैसे पीछे से रतन सिंह ने वॉर किया

अंत में जयदेव ने लक्समी देवी से वचन लिया की वो रतन सिंह को माफ कर दे

मेरी मरतु का दोषी रतन सिंह को न मने ..

फ्लासेबाक एन्ड ....

वही रानी माँ बे अपनी अतीत में खोयी हुयी थे आज की घटना से उन्हें दुःख बे था आवर खुसी बे

दुःख अपने पति की हत्या में कहि न कहि रतन सिंह का हाथ होना

खुसी इस बात की थी के देव के जिंदगी में एक आवर दिव्या कन्या का आना.....

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स

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एंड कीप सपोर्ट माय स्टोरी

फ्लस्बैक में कुछ खास नै था तो सॉर्ट में निपटा दिया

कुछ गलत लिखा है तो सॉरी दोस्तों

कोसिस करुगा नेक्स्ट अपडेट आप सबकी उम्मीद अनुसार हो
 
अपनी अपनी सोच है भाई

मेरी फर्स्ट स्टोरी है भाई स्टार्टिंग में थोड़ा दर जरूर था की स्टोरी पूरी कर पाउगा या नै

किन्तु अब कॉन्फिडेंस से कह सकता हु की स्टोरी कम्पलीट कर के रहुगा

भाई फर्स्ट स्टोरी में राइटर को ये दर रहता हे है बलियो की तरह मुझे बे था

तो आपका इस तरह सोचना बे जायज़ है

खेर स्टोरी पड़िया आपको निराश नै क्रुगमैन

सुक्रिया आपके सपोर्ट के लिया
 
अपडेट ....27

वही रानी माँ बे अपनी अतीत में खोयी हुयी थे आज की घटना से उन्हें दुःख बे था आवर खुसी बे

दुःख अपने पति की हत्या में कहि न कहि रतन सिंह का हाथ होना

खुसी इस बात की थी के देव के जिंदगी में एक आवर दिव्या कन्या का आना.....


अब आगे.............

ऐसे हे मस्ती मज़ाक करते हुए सबने रात्रि भोजन किया आवर चल दिया अपने अपने रूम में

सोनिया के रूम में इस वक़्त दोनों भेने हे थी

समय आवर सोनिया ...

.समय ...दी एक बात पुछु आपसे

सोनिया ...है पूछ न गुड़िया मेरा लिया आज बे तू मेरी जान मेरी गुड़िया हे है हेहेहे बेसक हम दोनों के बच्ची अब बड़े हो गए है

समय ...दी सच बताना आपने जीजा सा के साथ में सेक्स किया कितना टाइम हो गया है

सोनिया ...तू क्यों पूछ रहे है गुड़िया क्या मेरी जान की छूट में खुजली हो रहे है

अब तो मई आवर शालिनी दी में से कोई न कोई तुम्हारी खुजली मेटा देते है

( जी है दोस्तों शालिनी ने बे समय सोनिया का ग्रुप ज्वाइन कर लिया था दोनों के बच्ची होने के बाद एंड शालिनी अबे तक माँ नै बानी है )

समय ...दी आपको तो पता हे है मेरा सेक्स हॉर्मोन्स आप से ज्यादा आवर शालिनी दे बराबर है

मुझे अब राज जी संतुस्ट नै कर पते है अब तो एक साल से ऊपर हो गया सेक्स किया हुए

सोनिया ....गुड़िया बात तो तुम्हारी ठीक है मेरा बे हल कुछ तेरे जैसा हे है

छूट से पानी तुम दोनों निकल देती हो फिर बे जो मज़ा एक तगड़े लैंड से छोड़ने में आता है वो कहा मिलता है

आवर अब तो सेक्स वीडियोस देख देख कर आवर ज्यादा लैंड से अपनी छूट की कुटाई करवाने का दिल करता है

समय ...वैसे दी आपको एक बात बताये क्या

सोनिया ...क्या गुड़िया बता न

समय ..दी हमें आज हे पता चला है की हमारी दोनों भाबी सा की हालत बे हम जैसे है

सोनिया ..मतलब क्या है तुम्हारा तुम उनके साथ बे करना है क्या लेस्बियन

समय ....नै नै दी हमारा वो मतलब नै था ( मायुश होठ हुए )

सोनिया ...गुड़िया तू हमें पूरी बात बता जो तुम्हे भाबी सा के बर्वे में पता चला

मंजलि भाबी सा ( मोहिनी देवी ) वो तो कहे बीएड से उठ हे नै सकती है

इसका मतलब ..रेणुका एंड नंदिता भाबी सा की बात कर रहे हो

समय ...है दी हम उनकी बात कर रहे है दरअसल हम आज दोपहर में आपके पास आ रहे थे हमें बहुत खुजली हो रहे

आप रूम में नै थी तो सोचा छोटी भाबी सा के पास होगी

सोनिया ...हम्म. आगे बताओ

समय ...जब आपको खोजते हुए रूम में गए तो हमें वह किसी बाटे करते आवाज आयी तो हमें लगा आप वही हो हमने नॉक किया बिना अंदर गुड्स गए

दोनों भाबी सा दीवार की आउट में चेयर्स पे भेटे थे उन्होंने हमें नै देखा हमने कुछ ऐसा सुना की हमारे कान खड़े हो गए आवर परदे के पीछे चिप कर बात सुनने लगे

सोनिया ...ऐसा क्या सुन लिया तुमने गुड़िया जल्दी बता हमें

सोनिया ...अरे दी साँस तो लेने दो हमें

Soniya....le पानी पि आवर आगे बता

समय ....दी हमने सुना दोनों भाबी सा जो कह रहे थी कुछ ऐसा था .....

रेणुका ....क्या बात है जीजा ( दीदी ) आपकी ढूढ तो अबे बे बहुत टाइट है

लगता है झट जी ( दिलावर ) आजकल आपके पहाड़ो की शेर नै करते है क्या जो ये दिन बा दिन आवर सख्त आवर ऊँचे हो रहे है जुलने की जग्गा पे

नंदिता ...छोटी ( रेणुका ) क्या बताये तुम्हे पूछो मत न हालत ख़राब रहती है अब तो

वैसे छोटी आप तो तेरे बे पहल जुलने की जगह आवर सर उठा रहे है

( हस्ते हुए ) देखना कहि कोई आवर न तुम्हारे पहाड़ो पे चढ़ जाये

रेणुका ...जीजा अब क्या फायदा ऐसे पहाड़ो का जिस में इनका मालिक हे न छाडे तो

नंदिता ....क्यों क्या हुवा छोटी सब ठीक तो है न

रेणुका ...पहले आप बताओ आपके पहाड़ो के मालिक तो दिन रात छाडे रहते होंगे इनपे सांड जैसा सरीर कैसे झेलती होगी आप झट जी का

Nandita...kya बताओ छोटी सरीर हे सांड जैसा रह गया है उनका ( दिलावर ) अब सांड जैसे ताकत नै रही उनके ांडो में हेहेहे...

रेणुका ...क्या दी आपकी बे हालत मेरी जैसे हे हो गई है क्या

मेरे वाले में बे डैम नै रहा आवर यहाँ दिन भर छूट में खुजली होती रहती है लैंड के लिया

nandita...ha छोटी अबे तो हमारी जवानी ठीक से सुरु बे नै हुए आवर इन मर्दो के लैंड की धार ख़तम हो गई

आवर एक ये निगोड़े छूट की आग भुजती हे नै

इन नॉइडियो की आग तो देव जैसा हे बजा सकता है फ्लो फ्लो में बोल तो गई

( वो कहते है न फिर कमान से निकल गया अब पिच्य दौड़ने से क्या फायदा )

रेणुका ...क्ययया ....खा आपने देव जैसा ...हम्म्म हमने ठीक सुना न जीजा आपने देव कुंवर जी का बिकता किया न

( देव का नाम आवर उसके लिया ऐसा सुन कर दी मेरी बे छूट में पानी निकल गया जो काफी टाइम रुका हुवा था देव के नाम जो पानी निकला बता नै सकती दी कितना मज़ा आया मुझे )

नंदिता ...सॉरी सॉरी छोटी वो गलती से निकल गया था मुँह से

रेणुका ...नै नै आपकी जुबान कुछ आवर कह रहे है आवर आपकी आँखे कुछ आवर सच बताओ जीजा

नंदिता ....ठीक है हम बताते है किन्तु आपको वडा करना होगा ये बात आप किसी नै खोजी आपके पति से बे नै

renuka...thik है छोटी हम नै कहेगे किसी से अब तो बताओ

nandita.....tumhe याद है छोटी मई मोहिनी जीजा आवर माँ सा तीनो में कोई न कोई एक देव की मालिश करते थे जब तक वो यहाँ पे थे

renuka....ha हमें पता है ये सब तो

नंदिता ...आप बिच में न बोलो छोटी जो पूछना है बाद में पूछना

रेणुका ...ठीक है दी बोलो आप आगे

नंदिता .....दरअसल जो तेल हम मालिश के लिया उस करते थे उसकी मालिश एक खास तरीके से करनी पड़ती थी हमें

( रेणुका बिच में हे )

रेणुका ...वो खास तरीका क्या था जीजा

नंदिता ....घर के तू फिर बोली छोटी

रेणुका ...सॉरी जीजा ..कंटिन्यू

nandita...dev की मालिश करने लिया देव को पूरा नंगा होना पड़ता था हमारे सामने उसका उस टाइम में हे काफी लम्बा लैंड था जब मालिश से देव का लड़ खड़ा हो जाता था तब देव का लैंड मेरे उनके खड़े लैंड से मोटा आवर बराबर लम्बा होता था ( हाथ से बताते हुए 6 से 7 इंच के बिच )

आवर देव लैंड इनके जैसे कला नै था एक डैम गौरा लैंड आवर ये बड़े बड़े ाँद ( अंडकोष .टेस्टिकल्स)

पूरी सरीर की मालिश करते टाइम एक बहुत हे जबरदस्त खुसबू निकलती थे तेल आवर देव के सरीर से जिस कारन मेरी छूट में आग लग जाती थे मई जब बे मालिश करती उस खुसबू के कारन 3से 4 बार पानी निकल जाता था उस के बाद काम से काम रोज आड़े गंगे तक दूसरे आवर से फिर उसके खड़े लैंड की मालिश करना पड़ता था तब बे उसका पानी नै निकल ( 11 "12 साल के लैंड से कैसे पानी निकलेगा )

अब तो आवर बे लम्बा हो गया होगा सायद आवर बे मोटा बी छोटी क्या लैंड है देव का

......... नंदिता यही देव की मालिश के में बता रहे थे आवर रेणुका अपनी छूट के रगड़ते हुए झाड़ गयी वही परदे के पिच्य 2 बार अपना पानी निकल के चुप चाप डेरी डेरी अपने कमरे में निकल गई इनको समय का पता नै चला था .......

समय ने जब सोनिया की आवर देखा तो वो फुल नंगी अपनी छूट में अपने एक हाथ के 2 अगली अंदर बहार कर रहे थी आवर दूसरे हाथ से अपनी 36 की चूचियों का मर्दन कर रहे थे 1 बार पानी निकल के बेडशीट को भिगो चूका था

समय ....क्या दी अकेली अकेली पानी निकल रहे हो मुझे बता दिया होता हेहेहे

सोनिया ....हेहेहे गुड़िया मेरी चोर अपनी पंतय देख

समय ने छूट को छुआ तो पूरी गीली थी

दोनों बहेनो ने एक राउंड एक दूसरे की छूट चूस कर पानी निकला पुर सो गई एक प्यार नींद .......

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