Fantasy इच्छाधारी देव - Page 41 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट – 234

सावित्री - सुनो न मेरे बदन का हर अंग आपको पुकार रहा है. जब भी किसी जोड़े को देखती हु तो मुझे आपकी यद् आ जाती है. और अब तो अपना देव भी शादी के लिए राजी हो गया है बस आप उठ जाइये तो उसकी शादी अपने हाथो से करवा दीजिये फिर तो बस हम दोनों और हमारा बैडरूम होगा जब तक आप नहीं कहोगे मए कमरे से बहार hi नहीं जोगी बस नंगी आपसे यु hi लिपटी रहूगी और आपका लुंड अपनी बुर में डेल रखूगी बस आप उठ जाइये.

तभी उसे देव का ध्यान आता है उसका बदन तो दन के बदन से भी कही ज्यादा मजबूत और आकर्षक हो गया है और ये सब सोचते hi वो दन से अलग हो जाती है ये सोच कर के देव और पद्मा क्या कर रहे होंगे.

वो तुरंत सीढ़ी होती है और अपने ब्लाउज के बटन लगा कर अपने आपको सही करती है और कमरे का दरवाजा खोल देती है. उसने एक पल के लिए भी दन की तरफ नहीं देखा अगर देख लेती तो चीख पड़ती क्यों की दन का लुंड एक डैम तना हुआ था पजामा में.

तभी वह एक नर्स आती है.

सावित्री - सुनिए क्या देवा अपने केबिन में hi है?

नर्स – जी मैडम सर अभी अभी अपने केबिन में hi गए.

सावित्री - अभी अभी मतलब?

नर्स – सर बहार hi थे डॉ. साब के साथ उनसे बाटे कर रहे थे बस अभी hi गए है अपने केबिन में.

सावित्री - ok थैंक यू मए जरा आती हु

सावित्री रूम का दूर बंद कर की आगे बढ़ जाती है दन की हालत की तरफ न सावित्री किन अजर गयी न hi उस नर्स की. सावित्री वह से निकलती है और देव के केबिन में जाती है वैसे तो कोई भी दूर नॉक किये बिना वह नहीं जा सकता था लेकिन वो देव की माँ है तो जाहिर है उसे कोई रोक तो सकता नहीं है कही भी जाने से.

सावित्री देव के केबिन में जाती है तो केबिन में कोई नहीं था. वो केबिन का दरवाजा बंद कर के आगे बढ़ती है तो सामने एक और दरवाजा था जो की थोड़ा खुला हुआ था. सावित्री धीरे धीरे आगे बढ़ती है तो सामने hi उसे देव और पद्मा नजर आ जाते है दोनों एक सोफे पे बैठे थे.

देवा – है तो अब बोलो काकी यहाँ हम दोनों की लावा कोई नहीं है. जो भी कहना हो कह सकती हो क्यों की ये आपके लिए आखरी मौका है बाद में मत कहना के मैने कुछ कहने hi नहीं दिया और………

पद्मा मुस्कराते हुए - और??????

देवा – यही के मैने आपको बोलने का कोई मौका hi नहीं दिया और आप को अपना बना लिया.

पद्मा - नहीं देवा ये सही नहीं है. मए यही सब तो कहना चाहती हु. के जो तू चाहता है वो सही नहीं है. न समाज के नजरिये से न hi रिश्तो के नजरिये से.

देवा – समाज ने आपकी कदर कब की है जो आप समाज की बात कर रही हो. काका के जाने के बाद इतने सालो आप तड़पती रही. क्या समाज ने आप के लिए कुछ करने की सोची?

पद्मा - क्या करता समाज मेरे लिए? क्या दूसरी शादी करवाते?

देवा – क्यों नहीं? क्या आप में कोई कमी थी? क्या इस गाँव में या आसपास के गाँव में कोई ऐसा मर्द नहीं था जिसकी बीवी ने उसे छोड़ दिया हो या मर गयी हो. जो आपके बच्चो को संभल सके आपकी इस जवानी को संभल सके. लेकिन समाज ने कभी ऐसा नहीं सोचा यहाँ तक की आप अकेली hi अपने बच्चो की परवरिश करती रही किसी ने आपका हाथ नहीं बताया. क्या समाज का ये कर्त्तव्य नहीं था के एक बेसहारा दो बच्चो की माँ के लिए एक ऐसा मर्द ढूंढते जो आपके और आपके बच्चो के सर पे हाथ रख सकता? ये तो भोलेनाथ की कृपा रही वार्ना आप जो खुद की हिफाजत नहीं कर पति हो? वो अपनी जवान होती बेटी को बहतकनए से भला रोक पति अगर कुछ ऊंच नीच पूनम के साथ हो जाती तो क्या कर लेता ये समाज? तो ऐसे समाज के लिए क्या और क्यों सोचना है आपको अब. जबकि उसी समाज ने आपके और आपके परिवार के लिए कभी नहीं सोचा ? क्या समाज सिर्फ ऊँगली उठाने के लिए है मदद का हाथ बढ़ाने के लिए नहीं?

बहार कड़ी सावित्री भी ये सब सुन कर सोच में पद गयी की देवा कह तो सही रहा है. वो बस डैम साढ़े देवा की बाटे सुन रही थी.

देवा - रही बात हमारे रिश्ते की तो आपकी जरूरतों का ध्यान पूनम को भी है और आपकी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए अगर उसका बस चले तो वो अपनी शादी से पहले आपकी शादी करवा देती. और मुझे उस पर पूरा भरोसा है मैने घुमा फिर के पूनम से इस बारे में बात की है. उसे कोई एतराज नहीं है अगर आपकी जरूरते पुअर होती है तो. आखिर हम सब का hi तो फ़र्ज़ है आपकी जरूरतों को पूरा करने का. और एक बात आप अपनी उम्र की बात को छोड़िये अगर आपको मए पसंद नहीं अगर आपको कोई दूसरा मर्द पसंद हो तो खुल कर कहो हम लोग आपकी शादी करवाएंगे. वो भी आज hi बोलो कोई है?

पद्मा - क्या बकता है देव “ पद्मा की आंखे आंसू और गुस्से से लाल हो गयी.

देव - अगर आप गोपाल के साथ भी ये सब कर लेती न तो भी पूनम को कोई एतराज नहीं होता. फिर मए तो गोपाल की जगह भी नहीं. यानि आपका सागा बीटा तो नहीं हु न मए.

पद्मा - क्या बकवास है भला क्या एक माँ अपने hi बेटे के साथ सो सकती है?

देवा – काकी ये सब छोडो अगर जरुरत हो तो क्यों नहीं सो सकती? बुराई क्या है बहार किसी के साथ सोने से अच्छा तो बीटा hi है न. उससे बदनामी का दर तो नहीं रहेगा . और जरुरत भी पूरी हो जाएगी.

पद्मा - अच्छा तो जहा तक मए जानती हु तेरी सगी माँ भी रोज hi जवानी का सुख भोगती थी तुम्हारे बाबू जी के साथ, लेकिन जब से तेरे बाबूजी की तबियत ख़राब हुई है वो भी तड़प hi रही है न तो क्या तू उसकी आग भी बजायेगा.

वह थोड़ी देर के लिए शांति छ गयी. जहा पद्मा को अपने जवाब का इंतजार था वही सावित्री भी अचानक ये जानने के लिए उत्सुक हो उठी के देव क्या जवाब देता है. और देव जो की जान hi गया था की सावित्री छुप कर उनकी बाटे सुन रही है. तो उसने कहा

देवा – काकी अगर बात नार्मल होती तो माँ को शायद परेशानी नहीं होती बाबूजी के ठीक होने का इंतजार वो कर लेती लेकिन मए भी जनता हु के बाबू जी और माँ के बीच ये सब रोज hi होता था किसी नवजवान जोड़े की तरह . और मए ये भी जनता हु के ऐसे में एक औरत होने के नाते माँ ज्यादा दिन ये दूरी बर्दाश्त नहीं कर सकती. और डीआरएस. ने भी कहा है के रोज सेक्स करने वाला यदि अचानक से सेक्स करना बंद कर दे तो उसकी सेहत पे असर होने लगता है वो चिड़चिड़ा हो जाता है. उसका बप हाई रहने लगता है और उसे हार्ट अटैक तक आ सकता है. और भी कई परेशानिया हो सकती है कई तरह की बीमारिया हो सकती है यहाँ तक की कैंसर भी. और मए माँ को खोना नहीं चाहता. ऐसे में अगर मुझे जरुरी लगा तो मए माँ के साथ भी ये सब करुगा और जरूर करुगा. और दूसरी बात मेरे लिए आप और माँ एक जैसी हो. तो है मए आप दोनों के साथ सेक्स करना चाहता हु. आपसे इसीलिए बोल दिया क्यों की ये सब हमारे बीच पहले से चल रहा था तो आज बोलै है लेकिन माँ को मए अभी अभी hi इस नजर से देख रहा हु तो उन्हें मए नहीं बोल पाउगा पर उन्होंने कोई कोशिश की तो मए उन्हें निराश नहीं करुगा.

देवा की पूरी बात सुन कर जहा पद्मा मुस्कराने लगी वही. सावित्री को कभी गुस्सा आया तो कभी बहोत ज्यादा शर्म ये जान कर की उसका बीटा जनता है के वो आज भी रोज चुदाई करती है . कभी आश्चर्य हुआ ये जान कर के उसका बीटा भी उसकी तरफ आकर्षित है. और सावित्री ने मन hi मन फैसला कर लिया के उसे देवा से क्या बात करनी है.
 
अपडेट – 235

इधर देवा ने अपनी बात ख़तम कर के एक डैम से पद्मा काकी को हाथ से पकड़ के खींचा और उसे अपनी छाती पे लिटा दिया और उसका चेहरा पकड़ के अपने होठ उसके होठो पे रख दिए. पद्मा पहले तो छटपटाई फिर उसने खुद को ढीला छोड़ दिया.

देवा भी पद्मा की बड़ी बड़ी ठोस चूचियों को अपने हाथो में लेकर दबाने लगा और उसके होठो का रास पीने लगा. थोड़ी देर बाद पद्मा भी देवा का साथ देने लगी.

ये सब देख कर और देवा की पूरी बात सुन कर अब सावित्री के मन में कोई शंका तो बची नहीं थी. इसीलिए वो भी अब एन्जॉय करने लगी अंदर का इतना गरम सन देख कर सावित्री का चेहरा भी तपने लगा. और इधर देवा ने अपने हाथ से पद्मा का हाथ पकड़ा और उसे अपने लुंड पे रख दिया जिसे अब पद्मा सहलाने लगी. कुछ देर बाद जब उससे सांस लेना मुश्किल होने लगा तो उसने खुद को देवा से छुड़ाया और अपनी छाती पे हाथ रख कर गहरी सांसे लेने लगी लेकिन उसका दूसरा हाथ अब भी पेण्ट के ऊपर से देवा के लैंड पे hi था जब उसे ये अहसास हुआ तो उसने पहले अपने हाथ को देखा और फिर देवा की आँखों में देख कर बोली

पद्मा - बहोत बड़ा है देवा ये मए नहीं ले पाउगी .

देवा - बड़ा है तो मजा भी बड़ा hi देगा न और रही इसे लेने की बात तो मुझ पर भरोसा रखो सब ले लोगी मए हु न.

पद्मा ने देवा के लुंड को इतनी कास के दबाया के पेण्ट में उसका पूरा शेप दिखने लगा जिसे सावित्री ने भी देखा और जोर से अपनी छूट को साड़ी के ऊपर से दबाने लगी. उसकी भी पूरी पेंटी गीली हो गयी थी.

देवा फिर पद्मा की तरफ बढ़ने लगा तो पद्मा बोली

पद्मा - नहीं देवा यहाँ नहीं, अभी नहीं.

देवा - क्यों क्या हुआ ?

पद्मा - मैने अगर अभी इसे लिया तो घर नहीं जा पाउगी. और तुम्हरी माँ को शक हो जायेगा. हम दोनों पर

देवा - मुस्करा के . उन्हें तो सब पता hi है.

पद्मा और सावित्री दोनों hi देवा की बात सुन कर चौंक गयी

पद्मा - क्या लेकिन कैसे पता उन्हें, अब क्या होगा? मेरी तो इज्जत खाक में मिल जाएगी .

देवा – अरे यार कितना घबराती हो न. अरे मए तो मजाक कर रहा था. पर आप घबराओ मत उन्हें पता चलेगा भी तो वो आप पर नाराज नहीं होगी न hi आपकी कोई इज्जत जाएगी उनके सामने. क्यों के मए अपनी माँ को अचे से जनता हु वो बहोत अच्छी है.

सावित्री ये सुन कर खुश हो गयी और पद्मा निश्चिन्त.

पद्मा - देख लो देवा अगर कभी कुछ उल्टा हुआ तो मए अपनी जान दे दूगी बता देती हु. दूसरा रास्ता ये है के मुझे मेरे हाल पे छोड़ दे जहा इतनी जिंदगी काट गयी आगे भी काट hi लगी. एक मर्द का साथ न मिला तो न सही तू दामाद के रूप में तो मेरे साथ है hi न.

देवा - प्लीज यार अब फिर से वही सब शुरू मत करो अब मए पीछे नहीं हटने वाला और रही बात आपको प्यार करने की तो अब मए भी आपके साथ ऐसे प्यार नहीं करुगा बल्कि पूरी निश्चिंतता से करुगा. जहा आप निश्चिन्त हो कर अपना सब कुछ खुले दिल से मुझे दे सके.

तभी देवा के फ़ोन की घंटी बजती है

देवा – लो जी इन्ही की कमी थी. आ गया आपकी लाड़ली का फ़ोन अब सुनो वो क्या कहती है.

देवा कॉल उठा कर स्पीकर पे लगा देता है ( पूनम ये सब जानती है) – hello डार्लिंग कैसे यद् किया?

पूनम – क्या बात है स्वीट हार्ट अकेले हो क्या जो ऐसी रोमांटिक बाटे कर रहे हो, माँ और मेरी सासु माँ कहा आहे?

देवा – पद्मा को देख कर मुस्करा देता है जो उसकी बहो में थी. और अपने होठो पे ऊँगली रख के शांत रहने का इशारा कर देता है .

देवा – वो दोनों बाबू जी के रूम में है मए अपने केबिन में हु. तुम बोलो कैसे यद् किया?

पूनम – देव मए आपसे कुछ कहना चाहती हु. अच्छा हुआ सही मौके पे कॉल लगाया मैने अभी आप अकेले भी हो तो मेरी बात को ध्यान से सुनो.

देव – ऐसी क्या बात है जानेमन क्या परेशानी है बोलो.

पूनम – देवा असल में बात ये है के सुधा भाभी को मैने अभी रट हुए देखा. वो बहोत परेशां है और उसका कारन है गोपाल भैया. जो उन्हें न तो खुश रख प् रहे है न hi उन्हें कोई बच्चा दे प् रहे है. तुम कुछ करते क्यों नहीं मैने पहले भी तुमसे कहा है हमारे परिवार को टूटने से बचा लो. पर तुमने मेरी बात नहीं मणि.

देवा पद्मा को देख कर – यार मए क्या कर सकता हु. एक काम करते है भाभी का िवफ करवा लेते है. उन्हें अबछा हो जायेगा.

पूनम - भाभी इसके लिए कभी नहीं मानेगी क्यों के उस हालत में वीर्य किसका होगा वो बच्चा कैसा होगा ये कोई नहीं जनता.

देवा – तुम क्या चाहती हो?

पूनम – मेरी भाभी को संभल लो देवा. उन्हें माँ होने का सुख दो.

पद्मा पूनम की बात सुनकर हैरान हुई जा रही थी वही सावित्री का भी यही हल था .

देवा – लेकिन पपौणम क्या ये सही होगा? तुम्हारी माँ मेरी माँ और बाकि लोग क्या सोचेंगे मए इतना गिरा हुआ हु के अपनी सलहज के साथ hi हम बिस्तर होता रहा हु?

पूनम – कोई कुछ नहीं सोचेगा. Be-aulad होने से अच्छा है आप उन्हें औलाद का सुख दो. और समाज की परवाह आप कबसे करने लगे.

देवा – अच्छा पूनम - मन लो मैने ये किया भी तो तुम्हारी माँ को कौन समझायेगा वो कभी नहीं मानेगी ये बात और मुझे hi गलत कहेगी. हो सकता है हमारा रिश्ता hi तोड़ दे वो?

पूनम – मए एक बीवी हो कर आपको खुद कह रही हु न फिर आप क्यों सोच रहे हो और रही बात मेरी माँ की वो कुछ नहीं कहेगी क्यों की एक औरत को जो सुख चाहिए वो खुद उससे दूर है और वो समझती है इस दर्द को. बल्कि मैने तो पहले भी आपको इशारे में कहा था आज खुल कर कह रही हु. के अगर आप मेरी माँ को समझा लो तो उन्हें भी वो सुख दे दो. मुझे ख़ुशी होगी.

देवा – अरे मए क्या यहाँ इसी काम के लिए बैठा हु?

पूनम – नहीं मेरी जान लेकिन ये जिम्मेदारी भी तो आपको निभानी है न किसी और का वीर्य भाभी की कोख में जाये वो किसी और के बच्चे की माँ बने इससे अच्छा आप hi बना दो. रही बात माँ की तो मए मानती हु वो बहोत हिम्मत वाली है आज तक उन्होंने खुद को संभाला है लेकिन क्या उन्हें इस ख़ुशी का हक़ नहीं अगर आप उन्हें कुछ पल की ख़ुशी दे डोज तो क्या घाट जायेगा?

देवा – घटेगा कुछ नहीं तुम्हारा प्यार बाँट जायेगा.

पूनम - नहीं बंटेगा मेरा प्यार. और बंटेगा भी तो मेरे परिवार में hi न? मेरी एक बात मन लो देव सुधा भाभी , मेरी माँ और आपकी माँ. अभी इन तीनो को आपकी जरुरत है उन्हें सम्भालो जब बाबू जी ठीक हो जायेगे तो आपकी एक जिम्मेदारी पूरी हो जाएगी. बच्चा होने के बाद सुधा भाभी की जिम्मेदारी पूरी हो जाएग. वो उसमे बिजी हो जाएगी. और रही मेरी माँ की बात तो वो कौन सा आपको रोज झेल पायेगी. अपनी उम्र देखो और उनकी देखो. है जब जब उन्हें आपकी जरुरत हो उन्हें कुछ पल दे देना. वो भी जल्दी hi आपको छोड़ देगी कोई उम्र भर आपसे नहीं चिपकेगी वो. प्लीज देवा मन लो मेरी बाटे.

देवा ने कनखियों से सावित्री को देखा जिसके माथे पे पसीना था और वो सोच में थी और फिर देव ने पद्मा को देखा जो गर्दन झुकाये अपनी बेटी की बाटे सुन कर सोच में थी.

देवा – ठीक है पूनम आज से ये तीनो मेरी जिम्मेदारी हुई मए सम्भलूँगा तीनो को प्रॉमिस.
 
अपडेट - 236

देवा की बाटे सुन कर सावित्री और पद्मा ने एक झटके से देवा को देखा और गर्दन झुका ली.

देवा – पूनम अभी फ़ोन रखता हु. बाद में बात करुगा. Bye.

कॉल रखने के बाद

देवा – है तो काकी अब कुछ और सोचना है.

पद्मा ने देवा को देखा और खुद आगे बढ़ कर देवा की गॉड में बैठी और उसका चेहरा पकड़ के अपने होठ देवा के होठो पे लगा दिए और चूसने लगी. देवा भी पद्मा के स्मूच में उसका साथ देने लगा. और उसकी चूचियों को दबाने लगा. थोड़ी देर के बाद पद्मा ने देवा को छोड़ा.

पद्मा – मिल गया जवाब? आज से मए और सुधा तेरी जिम्मेदारी है. अब कोई बात नहीं करनी इस बारे में और है मए कहती हु अपनी माँ को भी अपना साथ जल्दी hi दे दे. ज्यादा मत तरसना उसे. वो भी मेरी बहन पहले है. संधान बाद में.

सावित्री पद्मा की बाटे सुन कर मुस्कराने लगी उसकी आँखों में हलकी सी नाम आ गयी थी और चेहरे पे शर्म की लाली भी.

देवा - अब चलो माँ हमारा इंतजार कर रही होगी. और है अपना ब्लाउज और साड़ी ठीक कर लो .

पद्मा ये सुन कर शर्माने लगी और सावित्री तेजी से वह से निकल गयी उसके जाते hi देवा ने उसी तरफ देखा जहा कुछ सेकंड पहले सावित्री कड़ी थी देवा के होठो पे गहरी मुस्कान आ गयी.

पद्मा - क्या हुआ यु अकेले अकेले क्यों हंस रहे हो?

देवा - कुछ नहीं मए सोच रहा था काश हमारी ये बाटे माँ ने सुनी होती तो कितना अच्छा होता.

पद्मा - अच्छा जी एक मेरी बेटी को अपने प्यार में पागल किया. मुझे किया अब मेरी बहु का सोच लिया अब अपनी hi माँ भी चाहिए.

देवा - है क्यों नहीं जरूर लगा अगर माँ दे दे तो.

पद्मा - अच्छा ले लेना और मेरी जरुरत पड़े तो बता देना मए भी तेरा साथ दूगी. अब चलो

कुछ hi मिंटो में देवा और पद्मा दन के रूम में आ जाते है जहा सावित्री बैठी थी. देवा और पद्मा को देख कर सावित्री के होठो पे मुस्कान आ गयी देवा भी मुस्करा उठा लेकिन जाने क्यों पद्मा शर्माने लगी जैसे नयी दुल्हन शर्माती है.

सावित्री - क्या हुआ पद्मा तू शर्मा क्यों रही है नयी दुल्हन की तरह कुछ हुआ क्या?

पद्मा झेंप गयी तो देवा - अरे माँ कुछ नहीं ये तो बस ऐसे hi करती रहती है मए भी यही कह रहा था पर ये मन hi नहीं रही है.

सावित्री - तू रहने दे मए जानती हु तू क्या क्या कहता रहता है इसे और ये क्या क्या नहीं मानती. ……….

……………पर पद्मा जैसे ये मेरे लिए है वैसे hi तेरे लिए इसकी बात मन लिया कर इसी में तेरी भलाई है और मेरी भी.

पद्मा ने न समझने वाले अंदाज में सावित्री को देखा तो सावित्री मुस्करा उठी.

पद्मा - मए समझी नहीं

सावित्री - अब भी समझना बाकि है क्या? अरे मए तो नॉर्मली बोल रही हु इसमें समझने का क्या आखिर ये तेरा होने वाला दामाद है भाई.

फिर तीनो वही बैठ के बाते करते रहते है. देवा भी हॉस्पिटल में जाकर सबसे मिल के हाल चल जनता है इसी में पूरा दिन निकल जाता है. फिर देवा सावित्री के पास आ कर

देवा - माँ अब चलो मुझे और भी कुछ काम है. आप लोगो को घर छोड़ देता हु.

सावित्री - ok चलो.

फिर तीनो वह से निकल पड़ते है.

थोड़ी देर के बाद देवा पद्मा काकी के घर आ जाता है उसे छोड़ने तो सामने hi सुधा नजर आ जाती है.

देवा सुधा को देख के मुस्करा रहा था और सुधा देवा को देख कर शर्मा रही थी.

पद्मा - देवा आओ न अंदर.

सुधा - अरे कहा माँ ये हम गरीबो के घर क्यों आने लगे भला.

देवा - अरे कैसी बात करती हो भाभी भला आपसे ज्यादा कोई आमिर है क्या आप तो खूबसूरती की दौलत से भरी हुई हो.

सावित्री देव को पीठ पे मरते हुए – किसी को तो छोड़ दिया कर पहले मुझे छेड़ रहा था फिर पद्मा को और अब सुधा को भी छेड़ने लगा.

सुधा - कोई बात नहीं माँ जी देवर का हक़ बनता है भाभी से छेड़छाड़ का ऐसी कोई बात नहीं.

देवा सुधा की आँखों में देखते हुए – बस छेड़छाड़ का ??

सुधा शर्मा जाती है और उधर पद्मा और सावित्री हसने लगती है.

सावित्री - अब चल भी देर नहीं हो रही तुझे अब रत होने को आयी है चल जल्दी.

देवा – अच्छा भाभी अभी चलता हु बाद में आउगा जब भीड़भाड़ नहीं होगी. इतना कह कर देवा सुधा को आँख मर देता है.

सुधा – भीड़भाड़ का कोई दर नहीं देवर जी आप जब चाहो तब आ जाओ हम तो यहाँ आपकी सेवा के लिए है hi आखिर आप देवर भी हो और इस घर के दामाद भी. सेवा तो आपकी करनी hi पड़ेगी न हमें.

देवा – ये सही कहा. चलो फिर मिलता हु आपसे बाद में.

इतना कह कर देवा गाडी बड़ा देता है. और अपने बंगले पे आ कर गाड़ी रोकता है. सावित्री उतर जाती है और अंदर चली जाती है उसके दिमाग में अभी बहोत कुछ चल रहा था और वो इस समय अकेले रहना चाहती थी.

देवा भी सीधा अंडरग्राउंड रूम में जाता है जहा इस समय नागार्जुन और रूद्र बैठे थे. गुरुम शायद कही गया हुआ था.

देवा – क्या भाई लोग क्या हो रहा है.

रूद्र - आओ महारथी आ गए हॉस्पिटल से?

देवा – चुप बे.

नागार्जुन - अरे देवा यार कुछ खास नहीं बस यु hi टाइम पास कर रहे थे.

देवा – कोई खबर नयी है क्या मन्नू की और ठाकुर की ? . . . . . .
 
माय डिअर लवली फ्रेंड्स आज बाहत से काम एक साथ हुए है एक आप लोगो का इंतजार कहातम हुआ , दूसरा जो टॉपिक कुछ समय से चल रहा था उसका एन्ड हुआ तीसरा आपने अभी लास्ट अपडेट में कहानी का रुख थोड़ा सा मुड़ता हुआ भी महसूस कर लिया होगा. और 4तह. अब हम कुछ दिन आराम से स्टोरी पे वर्क कर के आगे बढ़ पाएंगे क्यों की एक साथ 4 अपडेट हो गए तो आप लोगो की शिकायत भी दूर हो गयी. लेकिन है अब मिलेंगे जल्दी hi. कुछ नए धमाकों के साथ . बस धमाकेदार रेविएवस आ जाये तो मजा आये. अपनी डील ों hi है. सो फ़ास्ट फ़ास्ट.....
 
माय डिअर रीडर्स आप लोगो के कहे बगैर हमने 4 अपडेट बैक तो बैक दिए लेकिन आप hi देख लो क्या फायदा हुआ कॉन्टिनसे उपदटेस का कितने लोगो ने रपल्य देने का कष्ट किया ? और यही अगर अपडेट टाइम से न आये तो वही लोग जनहोने अभी "नीस" तक लिखने की जरुरत नहीं समझी है वही लोग शिकायत करने जरूर आते है. या जो शिकायत करता है उन्हें लिखे देने से भी पीछे नहीं हट्टे पर यहाँ राइटर की तारीफ करने में पता नहीं उनके शायद कुछ पैसे खर्च होते होंगे. एनीवे आप सब लोगो का धन्यवाद् जिन्होंने हमें रिव्यु दिए. मए आप लोगो के लिए तो लिख hi सकता हु. नया अपडेट बस थोड़ी hi देर में आ जायेगा.
 
अपडेट – 237

देवा – कोई खबर नयी है क्या मन्नू की और ठाकुर की?.....

नागार्जुन - ऐसी कोई खास खबर तो नहीं लेकिन वो लोग अपने पैर मजबूती से ज़माने में लगे हुए है. मुंबई में.

देवा – ज़माने दो जब उखाड़ने पे आएंगे न हम तो सालो के पैर क्या जेड भी उखड फेकेंगे.

रूद्र - कितना काम सोचते हो बे तुम लोग. तुम लोग जेड उखाड़ने की बात कर रहे हो . महादेव की सौगंध मए तो जेड उखाड़ने के बाद उसमे माथा भी भर दुगा के फिर वह कोई बीज न पनप पाए.

रूद्र का चेहरा क्रोध से लाल हो गया था एक hi पल में.

देवा – शांत गदाधारी भीम शांत. जो करना है कर लेना लेकिन उसमे अभी समय है.

रूद्र - यहाँ टाइम पास कर रहे हो बे तुम लोग. चलो न चल के छीलते है उन्हें. देर किस बात की है.

देवा – देर है. उन्होंने जो जखम हमें दिया है हम बस उसके भरने का इंतजार कर रहे है. उन्होंने बाबू जी की जो हालत की है उसमे सुधर आने का इंतजार है बस. फिर बाबू जी के कदमो में उनकी लाशे डालेंगे हम. इसीलिए थोड़ा सा साबरा रखना पद रहा है.

रूद्र – तेरा विचार तो ठीक है लेकिन ये मत भूलो के अभी बहोत कुछ बाकि है. दोनों नगरीय भी अभी तक सुरक्षित नहीं है. मन के अब हम सब है जो पल में वह की हालत को अपने कण्ट्रोल में ले सकते है लेकिन फिर भी सुरक्षा कवच के बिना एक दर सा लगा रहता है देवा.

नागार्जुन - रूद्र सही कह रहा है देव. यहाँ के मामले जल्दी से निपटा लेने में भलाई है ये सब जो शांति नजर आ रही है कही किसी बड़े तूफ़ान का संकेत तो नहीं है न?

देव – देखो तुम दोनों मुझ पर भरोसा रखो कुछ बाटे ऐसी भी है जो मए तुम लोगो के सामने अभी नहीं ला सकता सबसे पहले मेरे बाबूजी का जिन्दा रहना जरूरी है और उनके ठीक होने के लिए मुझे जो करना है मए उसी में लगा हुआ हु. और ये काम मेरे लिए सबसे जरुरी है ये सेल मन्नू और उसके बाप दुर्जन ठाकुर जैसो को ठोकने के चक्कर में मए अपने पिता की जिंदगी डाव पे नहीं लगा सकता ये तुम लोग भी समझ hi सकते हो.

रूद्र - तो बाबू जी के बचने का क्या रास्ता है हमें भी बताओ. हमसे क्या छुपा रहे हो तुम?

देव मुस्करा के – नहीं मेरे यार मए नहीं बता सकता फब ने मन किया है. बस ये समझ लो एक अनुष्ठान करना है कुछ आहुति देनी है. एक बार ये काम हो जाये बाबू जी को खतरे से बहार निकल लू फिर तो उन सब पे हम कहर बन के टूटेंगे.

रूद्र - ठीक है देवा अगर ऐसी बात है तो हम तुझ पर जोर नहीं देंगे. जब फ़कीर बाबा तेरे साथ है तो फिर मए भी निश्चिन्त हु. लेकिन कभी कोई खतरा हो तो एक आवाज़ लगाना.

देव – जनता हु मए. मेरे कहने से पहले तुम लोग मेरी ढल बन के सामने खड़े हो जाओगे. ये बाकि सब कहा है.

नागार्जुन - गुरुम तो चन्नो भाभी के साथ शहर गया है शलाका, रजनी ,पूनम भाभी और नीलम भाभी भी कही गयी है साथ में .

देव – और तुम दोनों यहाँ बोर हो रहे हो अबे गधे हो तुम लोग. सीखो कुछ गुरुम से चन्नो के साथ घूम फिर रहा है और तुम लोग अकेले यहाँ बैठे हो.

रूद्र – अबे ो हम उसके जैसे नाले नहीं है जो शादी से पहले hi बीवी के सामने दम हिलाते फायर. या जोरू के गुलाम बन जाये हम भी फ़िलहाल आज़ाद देश में रह रहे है. यानि भारत में तो हम अपनी मर्जी करने के लिए आज़ाद है ये बीवी की गुलामी उसे hi मुबारक.

देव – वाह मेरे शेर यही बात नीलम के सामने कहना तुझे हिमालय hi गिफ्ट करुगा मए.

रूद्र – है तो गलत क्या कहा मैने.

तभी वह शलाका, रजनी, नीलम, पूनम आ जाती है.

देव – ओह्ह्ह्हह ववववव मजा hi आ गया क्या टाइमिंग है आप सब की.

नीलम - क्या हुआ भैया आज बड़े चहक रहे हो?

देव – अरे नहीं नीलम यहाँ कोई बड़ा शेर बन रहा था.

नीलम ने घर के रूद्र को देखा जो कंप्यूटर में देखने का नाटक करने लगा.

नीलम – देव भैया आप किस की बात कर रहे हो.

देव – देखो नीलम मेरे जीवन में ऐसा दो hi लोग है जिनकी बाटे मए कर सकता हु एक तो मेरी जान पूनम जो तुम लोगो के साथ है दूसरा मेरे जिगर का चला ये महाबली रूद्र देव लेकिन ये लोग कभी गलत नहीं बोलते. तो क्या हुआ कभी कभी औकात से ज्यादा बोल दिया तो. इतस ok यार हो जाता है जोश जोश में.

रूद्र ने खा जाने वाली नजर से देव को घुरा नागार्जुन हंस रहा था और बाकि सब भी मजे ले रहे थे.

नीलम - क्या कहा इन्होने आपसे.

देव – नहीं तो ऐसा तो कुछ भी नहीं कहा बस…… तभी बीच में रूद्र चिल्ला पड़ा

रूद्र - है है बोल दे सेल आने दे मेरा टाइम मए छोड़ूगा नहीं तुझे.

नीलम - तो देव भैया को छोड़िये आप hi बता दीजिये न क्या कह रहे थे आप.

रूद्र - अरे कुछ नहीं कह रहा था यार. छोड़ न

देव – है नीलम ये कुछ नहीं कह रहा था मए मजाक कर रहा था हम लोग बस आपस में बाटे hi कर रहे थे अच्छा हुआ आप सब लोग आ गए आओ बैठो सब लोग मुझे तुम लोगो से जरूरी बात करनी है.

रूद्र ने गहरी सांस ली के चलो जान बची वही सब लोग पड़ी कुर्सियों पे बैठ गए.

पूनम - है तो आप क्या बता रहे थे हमें.
 
थैंक्स फॉर थे रिव्यु भाई. आपकी बात सही है स्टोरी में लॉन्ग गैप स्टोरी के रिथम को बिगड़ता है जो लोग इंट्रेस्ट लेते है उन्हें भी वो मजा नहीं आता और धीरे धीर उनका भी मन हत्ता है लेकिन भाई कुछ मजबूरियों के चलते ऐसा होता है. घर परिवार भी देखना है और अपना काम भी पिछले 2 महीने से हम बिजी hi थे हर चीज़ की लास्ट डेट सामने आ रही थी. तो उस वजह से थोड़ा गैप ज्यादा हो गया था बूत हम ध्यान रखेंगे के ऐसा न हो और होता भी है तो छोटा hi सही स्टोरी का अपडेट दे कर कंटिन्यू रखे. वैसे भी 4 उपदटेस देने का भी कोई खास फायदा तो होता नहीं है. तो छोटे छोटे 8 सही. :lol1:
 
अपडेट – 238

पूनम - है तो आप क्या बता रहे थे हमें.

अब आगे. . . .

देव – अभी हम लोग यहाँ ठाकुर और मन्नू की बाटे कर रहे थे के कैसे उन्हें निपटाया जाये तो वो वक़्त नजदीक आ रहा है. हलाकि उसमे थोड़ा समय है लेकिन हमें अपनी तरफ से तयारी करनी है. और इस काम में मैजिक जितना उसे न हो उतना अच्छा क्यों की मैजिक इस दुनिया के लोगो के लिए है भी नहीं. आखिर हमारे इन दुश्मनो के पास कोई मैजिक तो नहीं लेकिन ये लोग सब के लिए मुसीबत बने हुए है बिना मैजिक के. तो हमें भी इन्हे बिना मैजिक के hi हराना है यानि इस गेम में हम सब लोग बिना मैजिक के उतरेंगे. है मैजिक तब चलेगा जब उसके बिना आगे बढ़ना hi नामुमकिन हो जाये या किसी की जान पे hi बात आजाये क्यों के मेरे लिए तुम सब मेरी फॅमिली हो और मेरी फॅमिली सबसे पहले है हर उसूल से पहले. फिर चाहे बात कुछ भी हो. लेकिन यदि बिना मैजिक के hi इन्हे निपटाया तो मजा hi आ जायेगा.

लेकिन ये बात लागु होगी जब हमारा मुकाबला होगा उन लोगो से. उससे पहले हमें अपनी तयारी करनी है और वो ये के जैसे के पहले मए शलाका से कह चूका था मन्नू के आस पास कोई ठिकाना ढूंढने को शायद आप लोगो को याद hi होगा.

शलाका - है देव मैने एक ठिकाना ढूंढा है लेकिन वो सच में भूतिया है. ये मए बता hi चुकी हु.

देव – एक्साक्ट्ली वही जगह चाहिए मुझे. क्यों की वही एक जगह है जो मन्नू के ठिकाने पे नजर रखने के लिए सही है.

शलाका - मन्नू के ठिकाने से वो जगह ज्यादा दूर भी नहीं है और वह कोई आता जाता भी नहीं इवन इसी बात का फायदा विठल गैंग ने उठाना चाहा था लेकिन वो ठिकाना या पुराण महल भूतिया है इस बात को उन लोगो ने भी मन hi है क्यों के उन लोगो के कई साथी उस महल के अंदर तक भी नहीं पहुंच पाए अंदर जाने की कोशिश में hi वो मरे गए. कोई अदृश्य शक्ति है वह जो किसी को महल के पास भी नहीं आने देती इसीलिए उसे कोई तोड़ नहीं पाया आज तक. विठल ने तो गुस्से में आकर राकेट लांचर से उस महल को उदा देना चाहा था एक बार क्यों की उसका बेहद ख़ास साथी जो शुरू से उसके साथ था. उसने अंदर जाने का फैसला किया था और मारा गया था. कैसे मारा ये कोई नहीं जान पाया उस महल से बहोत दूर उसकी लाश पायी गयी लाश की हालत ऐसी थी जैसे उसका पूरा खून निचोड़ लिया गया हो. एक डैम सफ़ेद. तो विठल ने राकेट लांचर का उसे किया था लेकिन वो हमला भी फ़ैल हो गया विठल की आँखों के सामने hi राकेट महल से 10 फुट दूर hi रुक गया और ब्लास्ट हो गया. ये बात अपनी आँखों से देखने के बाद विठल या उसके आदमियों की हिम्मत नहीं हुई के उस जगह पे दुबारा जाये. ये सब बाटे मन्नू को भी मालूम है इसीलिए उसने भी कभी कोई कोशिश नहीं की.

देव – इतनी इफॉर्मेशन काफी है शलाका तुमने बहोत सही काम किया है. और तुम्हारी रिसर्च भी एक डैम सही है उस महल के बारे में. अब ये बताओ वो महल है किस के नाम पे.

शलाका जैसे के मैने बताया था वो महल एक पहाड़ी पे है एक डैम ऊंचाई पर उसके नीचे यानि महल से पहले hi एक रास्ता जाता है उसी तरफ को विठल की हवेली है जहा से वो अपने सरे इल्लिगले कामो को अंजाम देता है. यानि विठल का ठिकाना. और वो महल सेकड़ो साल पुराण है. राजा महाराजा के ज़माने का. लेकिन पीड़ी दर पीड़ी उसके वारिस बदलते रहे है. आज की तारिख में उसका एक इकलौता वारिस जिन्दा है जो बेहद hi गरीब है और मुंबई में hi कचरा बीनने का काम करता है और एक बेहद hi नर्क जैसी झोपड़ पट्टी में रहता है अपनी बीवी और बेटी के साथ. कभी कभी वो मज़बूरी में रत को चोरी का काम भी करता है. जैसा मैने बताया उसकी बीवी है और एक बच्ची है. बीवी आस पास के जो सही घर आहे वह झाड़ू पोछे का काम करती है और बेटी का भविष्य भगवन जाने क्या होगा आप सब हालातो से अंदाज़ा लगा hi सकते आहे क्यों की एजुकेशन के मामले में उसे कुछ नहीं मिल प् रहा है तो . . . सो पूरी तरह से ख़तम hi है उसकी जिंदगी. कहने को वो उस महल का मालिक है लेकिन उसकी हालत देख कर कोई यकीन नहीं करेगा. उसका कारन है महल का भूतिया होना. उसने कई बार कोशिश की है उसे बेचने की लेकिन उसे कोई और तो छोडो सर्कार भी हाथ नहीं लगा रही. अगर वो महल सही होता तो आज वो शख्स रईसों की जिंदगी जी रहा होता. लेकिन इन सब बातो में एक बात बहोत hi अजीब है और वो ये के ऐसी घुटन भरी जिंदगी बिताते हुए भी उस शख्स ने कभी महल बेचने के लिए किसी से झूठ नहीं बोलै जबकि अपनी रुकी हुई प्रॉपर्टी बेचने के लिए लोग झूठ का सहारा लेते hi है इसमें कोई नयी बात नहीं है. पर इस गरीब इंसान ने कभी ऐसा नहीं किया जब भी महल बेचने की कोशिश की है पूरी ईमानदारी से सब कुछ सामने वाले को बताया hi है एक ये भी वजह है की आज तक वो अपने महल को बेचने में कामयाब नहीं हो पाया. वार्ना शायद कोई उसके झांसे में आकर महल ले hi लेता. अब तुम बोलो देव करना क्या है.

देव - कल मए रूद्र और तुम हम तीनो जायेगे मुंबई वो महल खरीदने.

देव की इस बात ने जैसे वह धमाका सा किया.

रूद्र - अरे क्या बोल रहा है भाई , जरुरत क्या है महल की हमें. ये सेल मन्नू और उसके खंडन को तो हम लोग यु hi थोक डालेंगे. ये एना को hi ले लो हमने क्या किया सब आराम से हो गया न फिर ये मन्नू क्या चीज़ है. तुझे हम लोगो पर भरोसा नहीं क्या? न भाई रहने दे ये महल वहॉ न लेना अपने को. करेंगे क्या उसका बेकार में टाइम ख़राब करेगा यार. तू जब कहेगा बिना मैजिक के hi मए अकेला जा कर उस मन्नू की माँ बहन एक कर दुगा.

देव – रूद्र मेरे भाई तुम सब लोग मेरे शरीर का अंग हो भला मए तुम लोगो पर भरोसा नहीं करुगा तो किस पर करुगा लेकिन ये जरूरी है. एना की बात अलग थी और मन्नू अलग चीज़ है मन की हम लोग मन्नू की बंद बजा सकते है लेकिन ये सोच के उसमे खतरा कितना है उसकी पूरी फौज है एना की नहीं थी इतनी. दूसरी बात हमें मन्नू को बिना मैजिक के हराना है तो प्लानिंग और सेटअप चाहिए के नहीं तीसरी बात एना यही था हम लोग ने प्लान किया और यहाँ से निकल के उसे थोक दिया लेकिन मन्नू मुंबई में है हम सबको वह जाना है तो वह सब ाररेंग्मेंट चाहिए के नहीं. और फिर उसके आलावा भी बहोत कुछ है इस जिंदगी में हर एक बात किसी दूसरी बात से जुडी होती है इसमें भी कई राज है जो वक़्त वक़्त पे खुलेंगे. इसीलिए जो हो रहा है होने दे तू बस चल पड़ना मेरे साथ.

रूद्र – अरे यार लेकिन वो भूतिया महल hi क्यों चाहिए तुझे.

देव – अबे डरता है क्या भूतो से.

रूद्र – हहह अरे उन भूत का बाप हु मए. मुझे क्या डराएंगे वो भूत. सालो को निगल जाउगा और उन्हें पता भी नहीं चलेगा. और वैसे भी उन के सामने तो अपनी शक्तियों का उसे कर hi सकते है क्यों की वो भी जरुरत पड़ने पे हमला अपनी शक्तियों से करेंगे. तो फ़िक्र नॉट ी ऍम हेरे.

देव – ये हुई न शेरो वाली बात बस तैयार रहना. कल से महल अपना होगा.

रजनी - देव मन के वो महल तुमने ले लिए उसके बाद क्या?

देव – रजनी सब बताउगा लेकिन सब अभी नहीं थोड़ा इंतजार करो तुम्हे तो अभी बहोत कुछ जानना है.

रजनी - ऐसा भी नहीं है देवा हो सकता है बहोत कुछ तुम्हे जानना हो जो मए जानती हु. ( रजनी की आंखे चमक उठी)

देव – वक़्त बताएगा रजनी कौन जनता है और कौन अनजान है भविष्य से या भूतकाल से.

पूनम इन दोनों को ध्यान से देख आरही थी और सुन रही थी उसने इन दोनों की बातो में एक तपिश का अहसास पाया जो अक्सर देव की बातो में नहीं होता चाहे वो गुस्से में हो तब भी नहीं. उसे कुछ अनहोनी की आशंका होने लगी किसी बहोत बड़ी अंधी को उसने महसूस किया और घबरा के देव को देखा तो देव भी पूनम को देख कर है में गार्डन हिलने लगा और मुस्करा दिया. पूनम के माथे पे पसीने आ गए. और पूनम तेजी से उठ कर बहार आ गयी. तो उसके पीछे शलाका भी आ गयी.

शलाका – क्या हुआ पूनम तेरे माथे पे पसीना क्यों आ गया.

पूनम - नहीं ऐसे hi कुछ खास नहीं

शलाका - नहीं पूनम ये कोई खास hi बात है बोल न.

पूनम एक कोने में जाकर बैठ गयी और अपनी आंखे बंद कर ली शलाका उसे गौर से देखने लगी लेकिन उसने पूनम को डिस्टर्ब नहीं किया कोई 10 मिनट बाद पूनम ने अपनी आंखे खोली तो उसके चेहरे पे पसीना तेजी से बाद गया और आँखे गुस्से में लाल होने लगी.

पूनम - धोखा……….. देव के साथ dhokha…….mere देव के साथ धोखा करने का सोचा कैसे उसने.
 
ी ऍम वैरी सॉरी फ्रेंड्स के मेरी वो "आज रात" वाली बात पूरी नहीं हुई. और उसके बाद भी काफी दोनों तक कोई अपडेट नहीं दे पाए. रिसेंटली ी ऍम इन श्रीनगर. और इस वक़्त भी मोबाइल पे hi मैने a/c लॉगिन किया हुआ है जल्द hi वापस घर पहुंच कर मए एक मेगा अपडेट दे दुगा. अभी यहाँ की वादियों का और स्नोफॉल का मजा ले रहा हु और यहाँ का वेअथेर देखकर अपनी स्टोरी के चरक्टेर्स को इमेजिन भी कर रहा हु के ऐसे माहौल में वो लोग क्या गुल खिलते सो ी होप के नेक्स्ट उपदटेस में से किसी में मए अपने इमेजिनेशन चरक्टेर्स को ऐसी वादियों में पंहुचा दू. बहोत जल्द मिलुंगा आप सबसे. bye एंड टेक केयर फ्रेंड्स
 
वक़्त सरे जख्म भर देता है भाई आपके साथ शायद कुछ बहोत बुरा हुआ होगा. और ये अच्छी बात है के आप उस हालत से निकल आये है या निकल रहे है. और आप हमें सॉरी मत कहिये ये जो स्टोरी वगेरा है ये सब तो बस टाइम पास hi है. अगर मन अच्छा हो तब hi ये सब अच्छा लगता है वार्ना नहीं. चलिए आप वापस आ गए है ये जानकर अच्छा लगा. वेलकम बैक
 
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