Fantasy इच्छाधारी देव - Page 39 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट - 222

देवा ने अपना हाथ आगे किया सामने नजर आती सावित्री देवी की तरफ किया जैसे जैसे देवा का हाथ ऊपर उठता जा रहा था वैसे वैसे सावित्री का पेटीकोट भी ऊपर होता जा रहा था ऐसा लग रहा था देवा उनकी टैंगो को सहला रहा है.

पूनम – क्या कर रहे हो जान क्यों उन्हें परेशां कर रहे हो सोने दो न उन्हें कितने सुकून से सो रही है.

देवा – माय लव वो जिंदगी भर ऐसे hi खुश रहे और सुकून से सोये इसके लिए उन्हें अब कुछ रेट ये सब करना होगा. देवा की नजरे अब भी सामने नजर आती सावत्री के ऊपर hi थी देवा के दोनों हाथ अब आगे को बढे हुए थे और सावत्री जो एक डैम चित्त लेती हुई थी उनका पेटीकोट उनकी जांघो तक आ गया था. देवा उनकी जंघे सहलाते हुए पेटीकोट को ऊपर की तरफ किये जा रहा था. और तभी सावित्री की आवाज वह गूँज उठी.

सावित्री – मत करो न देवा के बापू, क्या कर रहे हो सोने दो न. कितनी मीठी नींद आ रही है. मुझे गरम मत करोई मुझे कुछ हो रहा है.

ये आवाज सुन के देवा और पूनम मुस्करा उठते है.

पूनम - ये क्या उन्हें लग रहा है के ये शरारत बाबू जी कर रहे है.

देवा – है जी. उन्हें सपने में बाबू जी hi नजर आ रहे है.

तभी देवा के ऊपर होते हाथ रुक जाते है. ऊके माथे पे पसीना आ जाता है.

पूनम - क्या हुआ देवा?

देवा – wo…..wo…… उन्होंने …..

पूनम – अरे बोलो भी क्या हुआ?

देवा – वो उन्होंने pen…..penty नहीं पहनी है मेरा हाथ अभी अभी वह टच हुआ

पूनम खिलखिला के हंस पड़ी

पूनम – हहहहहहहहह अरे मेरे शोना अपनी माँ के प्राइवेट part को छूने भर से पसीना आ गया तो उनके साथ सम्भोग कैसे करोगे?

देव – शुतुप अभी इस काम पे ध्यान दो.

देव फिर सावित्री की जंघे सहलाने लगा पर अब वो हाथो को बस जांघो पे hi फिर रहा था. उसने अपनी काम शक्ति का उपयोग किया जिससे सावित्री देवी नींद में hi गरम होने लगी. और सिसकारियां भरने लगी पूनम भी उन्हें देख रही थी. कुछ कुछ गर्मी वो भी महसूस करने लगी थी अब.

पूनम – बस करो देवा बहोत हुआ.

देवा – हम्म्म ठीक है तो अब दूसरा part शुरू करते है. पूनम तू लेट जा मेरे सामने

पूनम ने देव को हैरानी से देखा – लेकिन मए क्यों ? तुम कोई शरत तो नहीं करोगे न मेरे साथ?

देवा – अरे तू लेट न मेरी रानी …. और देवा ें पूनम को कंधे से पकड़ कर अपने सामने लिटा दिया जिससे उसको भी साड़ी जांघो तक उठ गयी और उस कमरे में लाइट की रौशनी में पूनम की गोरी बेदाग टंगे चमक उठी जांघो तक जिसे देख के देवकी आंखे लाल हो गयी देव झुक कर पूनम की जांघो को सहलाते हुए चूमने लगा और वह सावित्री की हालत ख़राब होने लगी. देवा के ये चुम्बन उसे अपनी टैंगो पे और जांघो पे महसूस हो रहे थे.

सड़ – ohhhhhhhhhhhsssssseeeeeeeee देवा के बाबू क्या कर रहे हो. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हहस्ससस्सससीएएएएएउऊउउउउम्म्मम्म्म्म aaaahhhhhhhhhh अब बर्दाश्त नहीं हो रहा देवा के बाबू . आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरे ऊपर आओ जल्दी से अब मए आपको चूमना चाहती हु.

इधर देवा ये सुन कर धीरे धीरे अपना चेहरा उठता है और मुस्करा देता है. क्यों की पूनम का चेहरा भी उत्तेजना में तप रहा था वो खुद भी बेहद गरम हो चुकी थी और उसकी छूट से निकलते रास की खुशबू देव सूंघ प् रहा था देव के इस हमले से तीनो hi उत्तेजित हो चुके थे. देव पूनम की जांघ पे होठ रख के जोर से न सिर्फ चूमता है बल्कि जांघ के उस हिस्से को मोह में लेकर चूस लेता है और सीधा हो जाता है यही हमला सावित्री अपनी जाँघपए महसूस कर के हड़बड़ा जाती है. और अपने सामने देखती है तो उसे देव का मुस्क्रत चेहरा नजर आता है जो उसकी नंगी जांघो के पास था

एक झटके से सावित्री उठ के बैठ जाती है देवा ने अपने हाथ नार्मल कर दिए थे अब वह सावित्री को कुछ फील नहीं हो रहा था. न hi उसे कोई नजर आ रहा था. लेकिन थोड़ी देर पहले का स्पर्च्च और काम क्रीड़ा वो भूल भी नहीं प् रही थी. वो पसीने में भीगी हुई थी. उसने अपनी साड़ी में हाथ दाल के बहार निकला तो उसकी उंगलिया पूरी गीली थी मतलब उसकी छूट भी पूरी तरह बाह रही थी.

तभी वह सावित्री की आवाज़ गूँज उठी.

सड़ – ये क्या हुआ मए तो देवा के बापू का सपना देख रही थी वो मुझे प्यार दे रहे थे. मेरी साड़ी उठा के सहला रहे थे. उनकी उंगलियों ने मेरी छूट को भी एक बार छुआ था. फिर वो मेरी टैंगो और मेरी जांघो को चूमने लगे. है वो देवा के बापू hi थे. लेकिन जब मैने उन्हें अपने ऊपर आने को कहा और उन्होंने मेरी जांघो से चेहरा उठा के मेरी आँखों में देखा तो …….. नहीं नहीं ये नहीं हो सकता. लेकिन…….. हुआ तो यही… wo……wo….. देवा के बापू नहीं खुद देवा था. मेरा बीटा….

हाय राम ये कैसा पाप हुआ मुझसे नींद में? मए अपने बेटे के साथ वो सब कर रही थी. ये मुझे ऐसा क्यों नजर आया? देवा तो कभी मुझे इस नजर से नहीं देखता? न मैने कभी उसे इस नजर से देखा है फिर अचानक ऐसा सपना?

…………है यही हो सकता है आजकल देवा hi मेरी नजरो के सामने रहता है न सारा दिन इसीलिए मुझे उसका चेहरा नजर आया होगा. पर फिर भी वो सब करते हुए मए देवा के साथ ? कितना अजीब लग रहा है मुझे. अच्छा हुआ ये सपना hi था. और ये कभी हक़ीक़त नहीं हो सकती. वो मेरा बीटा है. …. पर उसका अहसास कितना अच्छा था अब तक मुझे मेरे बदन पे देवा के होठ महसूस हो रहे है.

……हाय राम ये मए क्या सोचने लगी. कही मेरी बहु को पता चला तो क्या सोचेगी मेरे बारे में. के मए कैसी माँ हु जो अपने बेटे के बारे में ऐसा सोच रही हु.

यही सब सोचते हुए वो पलंग से उत्तरी और अपने ब्लाउज के बटन लगा लिए और बाथरूम चली गयी.

पूनम – क्या नाटक है यार. अपनी माँ को hi गरम कर दिया. और साथ में मुझे भी. देखो उन्हें कितना गिल्ट फील हो रहा है. और ऐसे में भी वो मेरे बारे में सोच रही है कितनी स्वीट है न माँ जी.

देवा – क्या बोल रही हो पूनम ये हमारे गेम का 1सत स्टेप है ये सब नहीं करुगा तो वो सब कैसे करुगा ?

पूनम – एग्री . अब?

देवा – अब उन्हें लाइव शो देखना है यहाँ आकर.

पूनम – व्हाट? पागल हुए हो?

देवा – ओह्ह्ह के ों किते प्लीज मुझे मेरा काम करने दो.

तभी सावित्री जांघो तक पेटीकोट उठाये बाथरूम से बहार आयी. उनकी टैंगो पे पानी लगा था शायद पेशाब करने के बाद बुर धोयी थी उसी वजह से.

उन्होंने वही पड़े नैपकिन से पहले अपनी टंगे पोची फिर हाथ पेटीकोट में दाल के अचे से अपनी बुर को पोछा. और वो बिस्तर पे जा hi रही थी के देवा कह उठा,

देवा – माँ कैसा लगा मेरा प्यार? मेरे पास आओ न माँ मेरे कमरे में.

सावित्री – ये क्या हो रहा है मुझे? ऐसा लग रहा है मेरा देवा मुझे दिल से बुला रहा है. जाऊ ? या नहीं?

देवा – आओ न माँ
 
अपडेट – 223

अब तक आपने पढ़ा के देवा अपनी शक्तियों से अपनी माँ को अपने पास बुलाता है और सावित्री को एक खिचाव सा महसूस होने लगता है अब आगे…..

सावित्री – मेरा दिल मुझे देवा के कमरे की तरफ खिंच रहा है. मए खुद को रोक क्यों नहीं प् रही हु. ओफ्फोह ये आजकल मुझे क्या हो रहा आहे क्यों माँ डा की तरफ खींची चली जा रही हु . चलो देख के आती हु वो ठीक है के नहीं. पता नहीं क्यों आज अभी उसे देखने का मन हो रहा है.

इतना कह कर सावित्री ने वही पड़ी अपनी निघ्त्य उठायी और पहन ली और दरवाजे की तरफ बढ़ने लगी देवा ने अपने कमरे के दरवाजे को देख कर चुटकी बजायी तो दरवाजा आधा खुल गया.

देवा – नाउ प्लीज इनविजिबल हो जाओ डार्लिंग फ़ास्ट. माँ आ रही है यहाँ.

पूनम अदृश्य हो गयी. और देवा ने चुटकी बजायी तो देवा के बदन से अंडरवियर छोड़ कर सरे कपडे गायब हो गए. देवा अपने बिस्तर पे लेट गया. और आंखे बंद कर ली

पूनम जो अदृश्य हो कर वही कड़ी थी. देवा के सिरहाने बोल पड़ी – वाओ सुपर हैंडसम माय लव. तुम तो मेरी भी नियत ख़राब कर रहे हो.. जी कर रहा है अभी चढ़ जाऊ तुम पर और तुम्हरा रपे कर दू.

देवा – शुतुप पूनम वार्ना माँ का मूड बदल दुगा मए अभी और तुझे पकड़ के लिटा दुगा बिस्तर पे. प्लीज अब माँ आ रही है बात मत करना.

पूनम – ok माय लव कंटिन्यू.

वह सावित्री अपने रूम से निकली और ऊपर देखा तो देवा के कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला हुआ नजर आया. वो खुश भी हुई और हैरान भी क्यों के देवा तो दरवाजा बंद कर के सोता आहे.

सावित्री - आज ये क्या हो रहा है देवा के कमरे का दरवाजा कैसे खुला है? चलो देखती हु वैसे भी मए वही तो जा रही हु. और मए देवा को देखना भी चाहती थी. अच्छा है दरवाजा खुला है वार्ना मए बेचैन हो जाती.

सावित्री ऊपर जाने लगी. सरे घर में सन्नाटा था. सावित्री धीरे धीरे बिना आवाज किये देवा के कमरे के दरवाजे पे पहुँचती है और दरवाजे को थोड़ा सा और खोल कर देखती है . सामने hi बिस्तर पे देवा एक डैम सीधा चित्त पड़ा सो रहा था. उसे देख कर hi लग रहा था के वो गहरी नींद में है.

सावित्री बिना आवाज़ किये कमरे में आती है. और देवा के चेहरे को देखने लगती है. बहोत प्यार से. फिर वो देवा के बिस्तर पे बैठ जाती है और देवा के माथे पे चुम लेती है. और उसके बालो को प्यार से सहलाने लगती है.

सावित्री धीरे से – बहोत शैतान हो गया है रे तू. मुझे सपनो में आकर भी तंग करने लगा अब?, क्या कर रहा था मेरे साथ मेरे सपने में आ कर?

सावित्री देवा से बात करते हुए be-khayali में देवा के सीने को सहलाने लगी तभी उसकी नजर देवा के लुंड पे गयी तो उसकी आंखे फ़ैल गयी. देवा के फ्रेंची अंडरवियर में बहोत विशाल तम्बू बना हुआ था.

सावित्री - हाय राम ये इस लड़के को क्या हुआ है. इतना बड़ा तो देवा के बापू का भी नहीं है. और ये इस समय इतना खड़ा क्यों है? वो भी इतनी जोर से खड़ा है के अंडरवियर के इलास्टिक भी ऊपर खिंच गयी है. इतनी ताक़त है इसके लुंड में? तभी सावित्री के देखते hi देखते देवा का लुंड ऊपर से बहार निकलने लगता है. उसका सुपर और कुछ लुंड अंडरवियर से बहार निकल आया था ऊपर से.

सावित्री - ओह्ह्ह्हह माँ ये क्या हो रहा है? ये अंडरवियर से बहार ऐसे आ रहा है जैसे अजगर निकल रहा हो अपने बिल से . हाय दिया कितना बड़ा है देवा का. लगता है मेरी बहु के सपने देख रहा है. बहोत किस्मतवाली है मेरी पूनम बहु जिसे देवा जैसा जीवन साथी मिलने वाला है. भगवन करे उन दोनों का वैवाहिक जीवन आनंद से भरपूर हो मेरे बच्चो हमेशा खुश रहना. और एक दूजे को दुनिया की हर ख़ुशी देना.

सावित्री ममता के बहाव में सब कह रही थी लेकिन फिर अचानक उस पर हवस हावी होने लगी सावित्री का हाथ न चाहते हुए भी देवा की छाती से सरक कर नीचे आने लगता है. तभी उसे देवा की आवाज़ सुनाई देती है तो वो रुक जाती है.

देवा – ओह्ह्ह्हह्ह माँ तुम कितनी सुन्दर हो दुनिया की हर औरत से सुन्दर हो तुम. काश तुम मेरी होती मा मए तुम्हे बहोत प्यार करता मुझे छू लो न माँ मेरा अंग अंग तरस रहा है तुम्हरे स्पर्श के लिए. ी लव यू माँ.

सावित्री - ओह्ह्ह भगवन ये क्या ये तो पूनम के नहीं मेरे सपने देख रहा है मतलब इसके सपने में इस वक़्त मेरी बहु नहीं बल्कि मए खुद हु? यानि जैसे आज मुझे देवा का सपना आया वैसे hi मए इस वक़्त देवा के सपने में हु. आश्चर्य.

देवा – माँ मुझे कुछ हो रहा है माँ मुझे थम लो माँ.

सावित्री का हाथ भी देवा के लुंड की तरफ बढ़ने लगा पर अचानक hi वो उठ कड़ी हुई.

सावित्री - नहीं नहीं ये गलत है. देवा मेरा बीटा है. और इस पर इसके जिस्म पर इसकी हर चीज़ पर सिर्फ मेरी पूनम बहु का हक़ है और मए अपने hi बच्चो की दुश्मन नहीं बन सकती, वो बेचारी मुझे माँ बोलती है उसे पता चलेगा तो मुझसे घृणा करने लगेगी. वो भी मेरी बेटी है और उसके होने वाले सुहाग पे उसके हक़ पे मए डाका नहीं दाल सकती. न एक माँ होने के नाते, न सास होने के नाते, और न hi एक औरत होने के नाते. किसी भी तरह से ये वाजिब नहीं है. नहीं मेरे बच्चे, मेरे देव तुझ पर पूनम का हक़ है किसी और का नहीं. मए समझ सकती हु तेरी उम्र hi ऐसी है के अब तुझे एक साथी की जरुरत है मए कल पद्मा से बात करती हु और तुम्हे पूनम के रूप में एक जीवन साथी दिलवाती हु तब तक सबर कर ले फिर पूनम hi तुझे और तेरे इस अजगर को संभालेगी.

सावित्री के होठो पे मुस्कान आ जाती है. वो धीरे से देवा के गाल पे चपत मरती है - शैतान बदमाश.

इतना कह के सावित्री एक भरपूर नजर देवा के पूरे जिसमे पे डालती है और वह से निकल जाती है. सावित्री देवा के कमरे का दरवाजा अचे से बनंद कर के नीचे चली जाती है. सावित्री के निकलते hi देवा एक चुटकी बजता है उसके बदन पे पूरे कपडे आ जाते है. तभी वह पूनम भी सामने आ जाती है. पूनम की आँखों में आंसू थे लेकिन होठो पे मुस्कान थी.

पूनम - देव तुम समझते हो न के तुमसे कोई नहीं जीत सकता? लेकिन आज मेरी सासु माँ तुमसे जीत गयी. तुमने उन्हें वासना में अँधा कर दिया अपनी शक्तियों से फिर भी उन्होंने खुद को बहोत बेहतरीन तरीके से संभाला मए तो समझ रही थी आज hi अभी यही सब कुछ हो जायेगा लेकिन मुझे गर्व है इन पर जो मेरे यहाँ न होते हुए भी मेरा सोच रही थी जब के इस वक़्त वो तुम्हरी शक्तियों की वजह से वासना में तड़प रही थी उस के बावजूद उन्हें मेरा ख्याल था. किसी दर से नहीं बल्कि प्यार से. उन्हें मेरे हक़, मेरे अधिकारों, मेरी खुशियों का कितना ख्याल है. ऐसी सास किस्मत वालो को मिलती है देव. मए बहोत बहोत खुश हु आज सावित्री माँ के ये रूप देख कर. मुझे गर्व है इन पर. मेरा बस चले तो मए इन्हे इतना सुरक्षित कर दू के आप भी इन्हे न छू पाओ.

देवा – है पूनम मेरी माँ बहोत अच्छी है कोई दूसरी औरत होती तो अब तक इस बस्तर पे कपडे ुअत्तर के लेती होती. और अपनी वासना की पूर्ति कर रही होती अपने hi बेटे के साथ. वैसे मैडम गर्व तो मुझे भी है अपनी सास पर. क्यों की ऐसे hi विचार उनके भी है वो भी अब तक मुझसे दूर सिर्फ इसीलिए है क्यों की वो यही कहती है के मुझ पर उनका नहीं बल्कि तुम्हारा हक़ है और जो ख़ुशी मए चाहता हु वो तुम मुझे दो. और मए तुम्हे पाकर अपनी प्यास बुझाउ जिससे मुझे पूरी तृप्ति हो. पूनम, हम दोनों hi खुशकिस्मत है के हमें ऐसे पेरेंट्स मिले जिन्हे खुद से ज्यादा हमारी चिंता है, ख्याल है.

पूनम – सही कहा आपने देव लेकिन किस्मत देखो हमें किस मोड़ पे लायी है के हमें उन्ही के साथ ये पाप करना होगा.

देवा – पाप नहीं है पूनम ये हमारा फ़र्ज़ है उसका रास्ता कितना भी गलत क्यों न हो लेकिन उसके अंत में हमारे इन्ही बड़ो की भलाई है. जो एक न एक दिन हम खुद इन्हे बतायेगे तब शायद इन्हे भी हम पर नाज्ज़ होगा. मैने अपनी शक्तियों से कभी किसी को ऐसे वासना में अँधा कर के उसे हासिल नहीं किया ये मेरी शक्तियों का दुरूपयोग कहलाता लेकिन मुझे पानी hi माँ पर अपनी शक्ति उसे करनी पद रही है ये मेरी मज़बूरी है. देखो न शक्ति उसे करने के बाद भी उनकी नियत नहीं बदली सोचाइ अगर मए नॉर्मली उन्हें सिर्फ सडके कर के और सम्भोग करने की सोचु तो मुझे कितना समय लग जायेगा और उस पर भी ये निश्चित नहीं के वो मुझे अपना जिस्म सौपेगी hi. इसीसलिए उन्हें सम्मोहित करना मेरी मज़बूरी है कोई शौक नहीं. पर मुझे तो उन्होंने यहाँ भिओ फ़ैल कर दिया. पता नहीं ामे कैसे अपनी माँ और तुम्हरी माँ को हासिल कर पाउगा और बाबू जी को ठीक कर पाउगा. चलो अब तुम भी जाओ और जाकर सो जाओ वार्ना मेरा अजगर फिर से जग गया तो तुम्हारे बिल में घुस कर hi मानेगा.

पूनम तुनक कर – हँ.. बड़े आये अजगर वाले. शकल देखिये अपनी. अभी कोई बिल नहीं मिलने वाला. आपको. मेरे बिल की तो बात छोडो अभी तो आपको न मेरी माँ का बिल मिलना है न आपकी खुद की माँ का. खुद hi सुलाओ इसे. मए चली.

पूनम बिना कुछ सुने वह से अदृश्य हो जाती है. और देवा भी बिस्तर पे कूद के सो जाता है.
 
अपडेट - 224

इधर जब पूनम फब और देव के साथ बिजी थी तो पूनम के घर में सुधा और गोपाल चुदाई की तयारी कर रहे थे. गोपाल सुधा को चुम रहा था

गोपाल अरे मेरी जान आज बहोत मन हो रहा है तुम्हे प्यार करने का जल्दी से साड़ी उतरो न मुझे से रहा नहीं जा रहा

आप कहते हो तो उतारती हूँ वार्ना तो मुझे नींद आ रही थी (इतना कहने के साथ hi सुधा ने अपनी साड़ी खिंच के उतर दी और अपने हाथों से एक एक कर के अपने ब्लाउज़ के बटन खोलने लगी उत्तेजना के मारे उसकी साँसे भारी हो चली थी, उसका खुद का मन छुड़वाने के लिए कर रहा था क्योंकि शाम को रसोई में गोपाल ने अपनी हरकतों की वजह से उसको उत्तेजित कर दिया था, देखते ही देखते सुधा अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपने ब्लाऊज़ को उतार फेंकी गोपाल की नजर जैसे ही अपनी बीवी के भारी भरकम गोल गोल खरबूजे जैसे चूचियों पर पडी उसके मुंह के saath-saath उसके लैंड में भी पानी आ गया.

और वह अपनी धोती खोलने लगा, सुधा को अपने पति का खड़ा लैंड देखने की इच्छा हो रही थी वो अच्छी तरह से जानती थी की इतनी देर में उसके पति का लैंड खड़ा हो गया होगा. पर टिकेगा कितनी देर ये नहीं पता.,

अब वह अपने पति की आँखों के सामने केवल पेटीकोट में खड़ी थी, गोपाल पूरी तरह से मस्त हो चूका था सुधा को ऐसे खतरनाक रूप में देख कर वह अपनी धोती खोल चूका था उसका लैंड आसमान की तरफ मुंह उठाए खड़ा था, गोपाल अपना एक हाथ आगे बढ़के सुधा के चुकी मसलने लगा और दूसरे हाथ से पेटीकोट की डोरी को खिंच दिया जिससे सुधा को

बिलकुल भी संभालने का मौका नहीं मिला और उसका पेटीकोट उसकी कमर से निचे उसके पैरों में जाकर गिर गया, गोपाल के saath-saath सुधा भी पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी सुधा एकदम ख़ूबसूरत और गठीले बदन की मालकिन थी क्योंकि अभी भी जब से वो गाँव आयी थी तब से खेतों में सारा काम अकेले hi करती थी, और दूसरा गोपाल उस जैसी घोड़ी को जैसी चुदाई चाहिए वैसी दे नहीं प् रहा था.

सुधा के नंगे बदन को देख कर गोपाल के मुंह में पानी आ रहा था उससे रहा नहीं गया और वह खुद अपने हाथों को आगे बढ़ाकर सुधा के कमर को थाम लिया और उसे अपने ऊपर चारपाई पर खींच लिया

सुधा का मखमली ख़ूबसूरत बदन उत्तेजना से तप रहा था, गोपाल ने तुरंत उसे अपनी बाहों में भर लिया जैसे की कहीं वह भागी जा रही हो, सुधा भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी वह भी अपने पति को अपनी बाहों में लेकर चूमना शुरू कर दी. के शायद आज गोपाल उसे पूरा संतुष्ट कर hi दे. सुधा गोपाल का चेहरा पकड़ के उसके होठो को चूसने लगी और अपनी चूचिया उसकी छाती में रगड़ने लगी.

गोपाल अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए अपनी बीवी सुधा को तुरंत अपनी बाहों में लेते हुए ही पलटी मार दिया और उसे नीचे कर के खुद ऊपर आ गया, दोनों की साँसें बड़ी तेजी से चल रही थी, पल भर में hi मौसम की गर्मी और बदन की तपन से सुधा पसीने से तरबतर हो गयी पसीने में तर बतर सुधा का ख़ूबसूरत बदन और भी ज्यादा मादक और उत्तेजक लग रहा था, गोपाल पूरी तरह से बाजी अपने हाथों में ले लिया था, और सुधा के ऊपर लेट कर उसे चुम रहा था उसकी गोरी बड़ी बड़ी चूचियों को मसल रहा था.

सुधा भी अपनी कमर उठाकर अपनी नंगी झांटो से भरी छूट गोपाल के लुंड पे रगड़ रही थी जो के अब रिसने लगी थी.

दिन भर की थकान गोपाल अपनी बीवी की चुदाई कर के मिटाना चाहता था, पसीने से तरबतर चूचिया गोपाल के हाथों में ठीक से समां नहीं प् रही थी, baar-baar उसकी हथेली फिसल जा रही थी मानो किसी गीले बॉल को पकड़ रहा हो, फिर भी गोपाल बड़े जोर लगाकर सुधा की चूचियों को दबा रहा था और उसके ब्राउन निप्पल्स को भजि मसल रहा था कभी वो सुधा की छूछीयो चूस रहा था. जिससे उसके लुंड का तापमान भी बढ़ता जार अहा था. सुधा को बहुत मजा आ रहा था.

सुधा के लिए यही एक पल होता था जब वह पूरी तरह से खुल जाती है और अपनी जिंदगी का भरपूर आनंद लुटाती thi,poori दुनिया की लाज शर्म भूल कर . वैसे भी कहते है के बीवी वो hi अच्छी लगती है जो बिस्तर पे किसी रंडी की तरह खुल कर साथ दे शर्मा हाय तो पहली रत hi अच्छी लगती है उसके बाद जिस तरह छूट खुल जाती है बीवी को भी खुल जाना चाहिए तभी पति पत्नी दोनों hi मजे ले सकते है चुदाई के. ….गोपाल पागलों की तरह अपनी बीवी की चूचियों को मुंह में भर कर पी रहा था सुधा की सिसकारी कमरे में गूंजने लगी थी, गोपाल का खड़ा लैंड baar-baar सुधा की जाँघों से रगड़ खा जा रहा था, जिससे सुधा का आनंद और तड़प दोनों बढ़ते जा रहे थे.

अब दोनों से बिलकुल भी रहा नहीं जा रहा था इसलिए गोपाल अपनी बीवी की दोनों टांगों को फैला कर. अपनी खड़े लैंड को उसकी बुर पे लगा दिया.

सुधा - सुनो न मुझे आपका लुंड चूसना है.

गोपाल - अभी नहीं मेरी जान कल चूस लेना. अभी तो बस डालने दो मुझे मए रुक नहीं प् रहा हु बिना छूट के.

सुधा - अच्छा मेरी छूट तो चूस लो कितने दिनों से नहीं चूसी है तुमने. बहोत दिल कर रहा है .

गोपाल - तुम जानती हो सुधा मुझे ये पसंद नहीं है मुझे घिन आती है. अब तुम चुप करो और मुझे छोड़ने दो.

सुधा – कभी पूरे दिल से छूना तुम्हे घिन नहीं मजा आएगा जैसे मुझे आता है तुम्हरा लुंड चूस के. चलो अब दाल दो मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है इसके बैना

गोपाल ने अपना खड़ा लुंड एक hi बार में पूरा दाल दिया एक झटके से और अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया सुधा चुदाई से पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी, क्यों की काम से काम जो पहला झटका गोपाल ने मारा वो तो उसे मजा दे hi गया था. वह भी गर्म सिसकारी के साथ अपने पति का पूरा साथ दे रही थी, अपनी दोनों टंगे उठा के उसने पूरी फैला दी और गोपाल को गले से लगा लिया गोपाल कमर हिलाता हुआ अपनी सुधा को छोड़ रहा था. सुधा के मुंह से उसकी गरम सिसकारी बड़ी तेजी से निकल रही थी, सुधा इस बात से पूरी तरह से बेखबर थी की उसके बाजू वाले कमरे में लेती हुई उसकी सास पद्मा उसकी गरम सिसकारियों को सुन रही है

उसके हिसाब से पद्मा, शलाका और पूनम सो चुकी थी, लेकिन इधर पद्मा अच्छी तरह से जानती थी की आज रात क्या होने वाला है इसलिए उसकी आँखों में नींद नहीं थी उसने शाम को रसोई में गोपाल को देख लिया था सुधा की चूचिया दबाते और ये कहते हुए के आज रत तो उसकी फाड् के रहेगा. यह उसके लिए पहली बार नहीं था. आए दिन उसे उसके बेटे और बहु की गरम आवाजें सुनने को मिलती थी जिसे सुनकर वह गर्म हो जाट थी क्योंकि उसकी भी काम िछाये जग चुकी थी जो पति के जाने के बाद ख़तम हो गयी थी. अब फिर से उसके तन बदन में भी भावनाएं जोर मारने लगी थी उसकी जवानी बदन में चिकोटी काटने लगी थी.

इसलिए तो अपने बाईट और बहु की चुदाई की गरमा गरम आवाज सुनकर उसने भी अपने पेटीकोट की दूरी को खोल कर उसमे अपना हाथ दाल दी थी और अपनी उंगली को अपनी गुलाबी बुर के छेड़ में डालकर उसे छेड़ रही थी.

दूसरी तरफ गोपाल पूरा जोर लगा दिया था अपनी बीवी को छोड़ने में, सुधा को आज कुछ ज्यादा hi मजा आ रहा था कोई साल छे महीने में एक आध बार hi ऐसा होता था के गोपाल इस तरह सुधा को छोड़ पता था. और वो ऐसी hi चुदाई चाहती भी थी . सुधा पूरा मजा ले रही थी, अभी उसकी मंजिल बहोत दूर थी लेकिन तभी गोपाल हफ्ते हुए अपना पानी सुधा की बुर में छोड़ देता है और सुधा का पारा चढ़ जाता है. गोपाल उसके ऊपर गिर कर हाफने लगता है. दूसरी तरफ पद्मा का भी पानी अभी नहीं निकला था. गोपाल और सुधा नग्न अवस्था में hi एक दूसरे के साथ चिपके हुए थे. और सुधा जोर जोर से खुद hi अपनी कमर उठा कर गोपाल के लुंड को महसूस करने की कोशिश कर रही थी जो की हर पल सिकुड़ता जा रहा था. तभी पद्मा के कानो में सुधा की आवाज़ आती है.

सुधा – ये क्या किया आपने? आज इतने दिनों बाद आप अचे से कर रहे थे. और मुझे संतुष्ट करने से पहले hi आप आज फिर फ़ैल हो गए. कितनी बार कहा है के कोई इलाज करवाओ लेकिन नहीं आपको तो मेरी सुन्नी hi नहीं है. सिर्फ अपने से मतलब है जब मन हुआ मुझे गरम किया और फिर अपना छोटा सा चूहा मेरे अंदर दाल कर पानी झाड़ के सो गए .आपको क्या है ज़माने के ताने तो मुझे सुनने पड़ते है न के मए hi बाँझ हु जो एक बच्चा नहीं पैदा कर प् रही हु. अब किसी को क्या पता के बच्चा तो तब आये न जब बाप अचे से अपना काम करे.

पता नहीं किस्से पला पद गया. मेरा तो जीवन hi ख़तम कर दिया है आपने.

सुधा रो रही थी. और बोले भी जा रही थी इधर पद्मा भी सब सुन रही थी उसे बहोत गुस्सा आ रहा था गोपाल पर क्यों के आज गोपाल ने सुधा को hi नहीं बल्कि एक तरह से पद्मा को भी अधूरा छोड़ा था क्यों की उसका भी पानी अभी नहीं निकला था और वो भी उसी आग में जल रही थी जिसमे सुधा जल रही है इस तरह उसे सुधा की तकलीफ का पूरा अंदाजा हो रहा था इस वक़्त.

सुधा – आप न मेरे करीब मत आना आज के बाद कहे देती हु. जब आप अपना इलाज करवा लो और आपको लगे की आप कुछ कर सकते हो तभी आना और मेरी साड़ी उठाना वार्ना मुझे छुआ भी न तो मए अपनी जान दे दूगी यद् रखना. ये रोज रोज अपनी hi आग में झुलसने से अच्छा है के मए एक बार मर जाऊ. काम से काम ये दिन तो नहीं देखना पड़ेगा. या फिर मए किसी और के साथ hi छुड़वा लू. और इस घर को वारिस दे दू काम से काम ज़माने का मुँह तो बंद हो जायेगा. दूर हो के सो अब मुझसे.

सुधा की बाते पद्मा के कानो में गूंज रही थी. लेकिन वो कुछ कर नहीं सकती थी उसे इसमें सुधा की कही से गलती नजर hi नहीं आ रही थी . गलत उसका बीटा hi था. वार्ना कौन बहु ऐसे चिल्ला चिल्ला के किसी दूसरे का लुंड लेने की बात कर सकती है.

पद्मा मन में – सही बात है अगर सुधा किसी और से सम्बन्ध बना लेती है तो उसे ये हक़ है भी क्यों की उसकी जिंदगी हम लोगो ने ख़राब की है. इसीलिए हमें उस पे ऊँगली उठाने का अधिकार नहीं है. बस भगवन करे के सुधा या तो खुद hi शांत हो जाये या फिर किसी ऐसे इंसाने को अपने लिए चुने जो उसे बदनाम न होने दे. हे ईश्वर हमारे परिवार की रक्षा करना,
 
अपडेट - 225

(ख़ैर ये लोग तो यु hi लड़ झगड़ के सो गए उन्हें क्या पता भविष्य उनके लिए क्या तय कर चूका है.)

इसी तरह कुछ दिन निकल जाते है रोज देवा किसी न किसी बहाने सावित्री के नजदीक आता कभी उसे बहो में भर लेता कभी चुम लेता ाकभी अपने लुंड का अहसास करता. सावित्री भी धीरे धीरे देव की तरफ आकर्षित होती जा रही थी. लेकिन अपनी मर्यादा को छोड़ दे इतनी कमजोर वो नहीं हुई थी न hi वो देव को कमजोर होने का कोई मौका दे रही थी. ये तो देव hi था जिसे मज़बूरी में आगे बढ़ना पद रहा था वार्ना अगर कोई यु hi सावित्री पे तरय मर रहा होता तो अब तक उसकी तरफ से सिग्नल न मिलने पे उसे भूलना hi उचित समझता. मगर देव के पास एक लक्ष्य था जिसकी वजह से वो हर नहीं मान रहा था और अपनी कोशिशे जारी रख रहा था.

कुछ दिनों बाद ऐसे hi डेली रूटीन से देवा सुबह उठकर तैयार होता है और नीचे आता hae.to उसे सामने सावित्री दिखाई देती hae.deva उसे मरंग विश करता है गले लगा कर और उनका माथा चुम लेता आहे तो देवा को सावित्री के शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ती महसूस होती है. सावित्री भी देवा की आँखों में देख रही थी और जब उस रत की बात यद् आती है तो वो शर्मा जाती है.

लेकिन देवा तो एक डैम नार्मल बेहवे कर रहा था जैसे उसे कुछ पता hi नहीं.

सावित्री - कितना प्यार करता है मेरा बीटा मुझसे. बीटा कुछ प्यार मेरी बहु के लिए बचा के रख इस पर उसका हक़ है.

देवा – माँ ये क्या कह रही हो. मेरे प्यार पे सबसे पहला और सबसे ज्यादा हक़ सिर्फ तेरा है. बाकि सब तेरे बाद hi है.

सावित्री - चल पागल. बड़ा आया अपना प्यार बाटने वाला. ख़बरदार जो मेरी बहु के प्यार को काम किया तो. झाड़ू से पिटाई होगी तेरी यद् रखना.

देवा – अरे माँ वो तेरी बहु है उसे सब पता है मए तुमसे बहोत प्यार करता हु. इससे उसे भी कोई परेशानी नहीं . चलो अब नाश्ता दो.

सावित्री तो ये सुन के चौंक जाती है लेकिन फिर खुद hi मन में - मए भी क्या सोचने लगी. देवा तो माँ बेटे के प्यार की बात कर रहा है वार्ना इसे और पूनम को क्या मालूम मए किस प्यार की बात कर रही हु.

देवा अपनी माँ के मन की बात सुन कर मुस्करा रहा था.

सावित्री अच्छा देवा तुमसे कुछ बात करनी थी.

देवा - है बोलो न माँ

सावित्री - वो मए सोच रही थी के आज पद्मा से मिल लू और तुम दोनों की शादी की बात कर लू. तुम क्या कहते हो?

देवा – लेकिन माँ इतनी जल्दी क्या है? आराम से करेंगे न अभी बाबू जी की तबियत भी सही नहीं है.

सावित्री - मए शादी करने को नहीं कह रही सिर्फ शादी की बात करने को कह रही हु. पायल की भी शादी की तारिख निकलवा देते है .

देवा – अरे माँ तू कुछ ज्यादा hi सोचने लगी है . अभी कुछ hi दिन तो हुए है हमारी सगाई को थोड़ा रुक जा अभी. से क्यों मेरी आजादी छीनने की सोचने लगी. मुझे अभी शादी की कोई जरुरत नहीं है.

सावित्री - मुझे सब पता है के तुझे किस चीज की जरुरत है किस की नहीं और फिर मुझे लगता है के अब इस घर को और तुजे पूनम की जरुरत है इसीलिए मए चाहती हु ये शादी जल्दी हो जाये.

देवा – ऐसी भी कोई जरुरत नहीं आ पड़ी माँ इस घर को क्यों की यहाँ आपके पास और इस घर के पास पहले से एक बहोत सुन्दर , समझदार और नेक बहु है दिया भाभी के रूप में और फिर पूनम तो वैसे भी इस घर में आती hi रहती है न.

सावित्री - आते रहने में और इस घर की हो कर रहने में फरक है बुद्धू राम शादी होगी तो वो पूरी तरह तेरी होगी. अभी तो बस वो यु hi आती है न. मए उसे इस घर की बहु के रूप में जल्दी देखना चाहती हु. फिर हमारी उम्र का भी क्या भरोसा.

देवा – अरे वाह क्या हुआ है तुम्हारी उम्र को ? तुम पर तो आज भी लाखो फ़िदा हो जाये इतनी खूबसूरत हो तुम.

सावित्री अपनी तारीफ सुन के शर्मा जाती है और उसका चेहरा लाल पद जाता है.

सावित्री - चल रहने दे तीन तीन जवान बच्चो की माँ हु दादी बनने जा रही हु. और तू मुझे जवान कह रहा है?

देवा – अरे माँ तुझे क्या पता लोग तो पुराणी शराब के hi दीवाने होते है. और फिर तुम तो सर से पैर तक क़यामत हो आज भी. जो बात तुम में है वो भला आज कल की लड़कियों में कहा.

सावित्री – बस कर वार्ना मर खायेगा माँ पे डोरे दाल रहा है.

देवा – नहीं माँ कसम से आप खुद को देखो कही से भी बूढी नहीं लगती. वो तो हम लोग जल्दी जवान हो गए है बस. साडी गलती हमारी है. तुम खुद को बूढी मत समझो.

सावित्री - हे भगवन क्या करू मए इस लड़के का. देवा बस कर अब. और मए आज पद्मा से बात करुँगी hi.

तभी वह पूनम आ जाती है. और झुक कर सावित्री के पैर छू लेती है

पूनम - गुड़ मॉर्निंग माँ. कैसी हो आप?

सावित्री – एक डैम ठीक हु बेटी. अच्छा हुआ तू आ गयी. तू hi समझा न देवा को

पूनम - क्या हुआ माँ?

सावित्री - बीटा मए चाहती हु के अब तुम दोनों की शादी जल्दी हो जाये.

पूनम - लेकिन माँ इतनी जल्दी?

सावित्री - अरे बीटा जितनी जल्दी हो सके इस सैंड को अपने पल्लू से बांध ले कोई और न उदा ले जाये.

पूनम - नहीं माँ ऐसा कुछ नहीं होगा. मुझे इन पर पूरा भरोसा है. और फिर आपका साथ भी है न मुझे.

सावित्री - बीटा तुम समझ नहीं रही हो. इससे पहले की देर हो जाये तू इसे अपना बना ले.

पूनम - माँ इस दुनिया में कोई ऐसी लड़की या औरत नहीं जो मुझसे देव को छीन सके.

सावित्री पूनम की आँखों में देखते हुए – और मन लो किसी अपने ने hi तुम्हे धोखा दे दिया तो? जिस पर तू भरोसा करती हो वही तुझसे देवा को चीन ले तो?

पूनम समझ रही थी सावित्री क्या कह रही है

पूनम - माँ जो मेरे अपने है देवा तो उनका hi है मुझसे पहले देव पे उनका hi हक़ है इसमें छीनना कैसा और कोई बहार वाला इस दुनिया में ऐसा नहीं जिस के लिए देव मुझे छोड़ दे. इसीलिए आप निश्चिन्त रहो. जब बाबू जी की तबियत ठीक हो जाएगी तब बात कर लेना आप लोग शादी की. और मुझे तो बाबू जी hi डोली में बिठा के इस घर में लाएंगे. भला ऐसा कैसे हो सकता है के वो यु हॉस्पिटल में है और हम यहाँ अपनी शादी की बात करे.

सावित्री - लेकिन बीटा………

देवा – बस माँ अब कुछ नहीं. आप ने पूनम का फैसला सुन लिया न. अब हमारी शादी की बात नहीं करोगी आप. अच्छा मए चलता हु मुझे कुछ काम है तभी सामने रूद्र आ जाता है.

रूद्र - - क्या भाई बड़ा बन थान के घूम रहा है कहा जाने की तैयार है?

देवा – अरे अच्छा हुआ तू आ गया चल आ जा बेसमेंट में चलते है.

देवा और रूद्र बेसमेंट में पहुंचते है जहा नागार्जुन और गुरुम बैठे थे.

देवा – क्या हल है भाई लोग? नागार्जुन नागलोक की याद तो नहीं आ रही ?

नागार्जुन - जहा तुम हो वही हमारे लिए नागलोक है देवा. मए यहाँ हर तरह से खुश हु. और नागलोक कौन सा दूर है जब चाहे हो आउगा.

देवा – गुरुम एना तो निपट गया. अब उन सालो की बरी है. मन्नू ठाकुर और दुर्जन ठाकुर. तुम एक काम करो इनकी हिस्ट्री निकालो जल्द से जल्द और जितना हो सके उतना जल्दी करना है ये काम क्यों की हमें कभी भी फब का बुलावा आ सकता है कोई भरोसा नहीं कब वो बुलवा ले.

गुरुम - है देवा मए अपने तरीके से उनके पीछे लगा hi हुआ हु. वो लोग अभी मुंबई में अपने पैर जमा चुके है. क्यों की विट्ठल का काम उन्हें जमा जमाया hi मिल गया और मन्नू को वह पहले से सब जानते hi थे. विठल के मरने के बाद मन्नू ने वह सब संभल लिया है. जो कल तक जेल में आइडिया रगड़ रहा था आज बैःते बिठाये hi डॉन बन गया है मुंबई का. विठल की पूरी फौज उसके एक इशारे पे मरने मारने को तैयार रहती है. कई सरे गैर कानूनी काम वो करता है. बस उन सब की डिटेल में घुसना है और मए उसी में लगा हुआ हु.

देवा – वेल डॉन गुरुम बहोत अच्छा काम कर रहे हो इन पर. लेकिन उसकी जेड खोदनी है वो भी ऐसे की दुबारा जनम लेने के नाम से भी काँप जाये ये दोनों बाप बेटे.

गुरुम - भाई देखते जाओ इन सालो का हश्र बुरा होगा बहोत बुरा. क्यों की इनके गुनाहो की लिस्ट तो लम्बी है hi लेकिन इन्होने सबसे बड़ा गुनाह किया है हमारे इस घर में घुस कर और फिर बाबू जी की ये हालत कर के. ये तो आपने मन किया हुआ है वार्ना इन्हे निपटने में हमें कोई देर नहीं लगनी थी लेकिन बिना ताक़तों के सब करना है तो टाइम भी नार्मल इंसाने वाला hi लगेगा.

देवा - है गुरुम इसका हिसाब तो उन्हें देना hi होगा. और जल्द hi. चलो तुम लोग काम करो मए जरा आता हु.

फिर देवा और रूद्र निकल गए हॉस्पिटल की तरफ. जहा देवा सबसे पहल अपने बाबू जी के पास गया और उनसे मिला रूद्र देवा को बाबू जी के पास छोड़ के हॉस्पिटल का राउंड लगाने लगा.
 
अपडेट - 226

देवा अपने बेहोश पिता का हाथ पकड़ के उन्हें देखने लगा उसकी आँखों में इस वक़्त कुछ नमी सी थी. - बाबू जी ये जिंदगी ने किस मोड़ पे खड़ा कर दिया है. नियति क्या चाहती है ये समझ में नहीं आ रहा है. आप लोगो के लिए मए आपका एक साधारण सा बीटा हु. लेकिन मेरी हक़ीकत इससे कही ज्यादा बड़ी और अलग है. कुछ हैरान करने वाली तो कुछ डरने वाली. अब तक मए यही सोचता रहा के आपको ये सब कैसे बताउगा. लेकिन ये सब हो गया. और अब मेरी तक़दीर मुझसे वो करवाने वाली है जिसके लिए मए कभी तैयार नहीं हो सकता था. लेकिन अब मुझे वो खुद hi करना पड़ेगा वो भी एक प्लान बना के.

……… मुझे माँ के साथ…….. लेकिन बाबू जी मए ये नहीं करना चाहता. पर अगर मैने ये न किया तो हम सब आपको खो देंगे. और वो मए होने नहीं दुगा. इसका सिर्फ यही रास्ता है के आपके अंदर से उस जहर को ख़तम किया जाये पर उसके लिए मुझे माँ बेटे के रिश्ते को कलंकित करना होगा. मए ये कैसे करू बाबू जी मुझे समझ नहीं आ रहा मए क्या करू.

देवा अपने पिता जी का हाथ पकड़ के गर्दन झुका के रो रहा था. तभी वो एक झटके से अपने बाबू जी को देखने लगता है उसकी आंखे इस वक़्त रोने की वजह से एक डैम लाल हो चुकी थी. उसका पूरा चेहरा भीगा हुआ था अपने hi आंसुओ से लेकिन वो हैरत से अपने बाबू जी के चेहरे को देख रहा था. क्यों की जैसे hi उसकी बात ख़तम हुई थी उसने अपने बाबू जी के हाथ की पकड़ अपने हाथ पे मजबूत होती महसूस की थी. जैसे उसके बाबू जी कोमा की हालत में भी उसे दिलासा दे रहे है. देवा हैरानी से अपने बाबू जी की बंद आँखों को देख रहा था. और फिर उस हाथ को जो देवा ने खुद थम रखा था.

देवा - बाबू जी आप सुन रहे है मेरी आवाज़?? है बाबू जी आप सुन सकते है मुझे मए ये जान के बेहद खुश हु बाबू जी.

…….बाबू जी मए देवा आपका बीटा हु लेकिन मए इसके आलावा भी बहोत कुछ हु सही वक़्त आने पे आपको बताउगा. लेकिन इस समय आप एक बेहद गंभीर समस्या में है जिसे दुनिया का कोई डॉ. ठीक नहीं कर सकता और आपको ठीक करने के लिए मुझे कुछ कदम ऐसे उठाने पड़ेगे. जो समाज की नजर में आपकी नजर में गलत होंगे. खुद मेरी भी नजर में गलत hi है लेकिन आपकी जिंदगी बचने के लिए मुझे ये करना होगा. उसके बदले में आप जो चाहे मुझे सजा दे दे मुझे मंजूर होगी. लेकिन मए आपकी जिंदगी बचा के रहुगा. आप चाहे तो मुझे जान से मार दे मए उफ़ तक नहीं करुगा. लेकिन आपको सही सलामत घर जरूर ले जाउगा सबके बीच माँ के करीब. मए जो करने जा रहा हु वो माफ़ी के काबिल नहीं. इसीलिए मए आपसे उस काम के लिए माफ़ी नहीं मांगूगा. आप बस ठीक हो जाइये बाकि सब मए आपको तब बता दुगा. अब मए चलता हु बाबू जी. आप बहोत जल्द अचे हो जायेगे.

देवा बिना किसी से मिले वह से तेजी से निकल जाता है उसका मन थोड़ा भरी हो गया था. लेकिन वो जनता था ये सब जरूरी है. देव तेजी से गाडी चलता हुआ हवेली पहुँचता है.

देवा को हवेली में देखते hi वह के नौकर चाकर उसे झुक कर प्रणाम करते है. देवा भी उनका हल चल पूछता हुआ आगे बढ़ रहा था के सामने से ज्योति आती नजर आती है.

ज्योति - आइये आइये महाराज कहा से दिन निकला है आज जो आपके दर्शन मिले हमें

देवा – पका मत यार

ज्योति - अरे मए कहा पका रही हु मए तो आपका स्वागत कर रही हु. अब और किसी तरह के स्वागत के लायक तो छोड़ा नहीं आपने. देख लो पूरा पेट गुब्बारे की तरह फुला हुआ है.

देवा – ये तो अच्छी बात है न मेरी जान

ज्योति - है जी है, बहोत अच्छी बात है मेरी जान मैने कब कहा के अच्छी बात नहीं है लेकिन बहोत मन करता है आपकी बहो में आने का बस ये महाशय बहार आ जाये फिर मए इन सरे दिनों की कसार निकल लगी देख लेना. छोडूगी नहीं आपको

देवा – क्यों फिर से पेट फूलना है क्या?

ज्योति - है तो फूलता है तो फूल जाये पेट, मए डर्टी हु क्या किसी से. लेकिन मए तो भरपूर प्यार करुँगी आपसे. और एक के बाद एक आपके बच्चो की लाइन लगा दूगी. लेकिन………

देवा – लेकिन क्या?

ज्योति - लेकिन देवा शायद अब आपको मेरे साथ मजा न आये.

देवा – वो क्यों ?

ज्योति - अरे बुद्धू राम बच्चा होने के बाद मेरी ये (^)ढीली हो जाएगी न. मए पहले की तरह तो रहूगी नहीं तो शायद आपको मजा न आये.

देवा हस्ते हुए – ओह्ह्ह है ये बात तो है.

ज्योति - देखा मैने कहा था न अब आपको मए अच्छी नहीं लागगी.

देवा – अरे पगली मए तो तुम सबको चाहता हु तुम लोगो के शरीर को नहीं. इसीलिए तुम सब मुझे हमेशा hi पसंद आओगी. और ये सब फालतू बाटे मत सोचो. तुम्हारी ढीली हो जाएगी तो मए अपना और तगड़ा कर लगा. तुम्हे उसे लेने में उतना hi मजा आएगा.

ज्योति - न बाबा न जितना है उसी में फैट जाती है और तगड़ा कर डोज तो हम मर hi जायेगे. ऐसे hi सही है.

देवा – अच्छा ठीक है नहीं करुगा तगड़ा लेकिन तुम चिंता मत करो. मुझे जड़ी बूटियों का ज्ञान है डिलीवरी के बाद मए तुम सब को ऐसी दवाई दुगा जिससे तुम सबकी छूट कुवारी लड़की की तरह टाइट हो जाएगी. और मजा ऐसा आएगा जैसे पहली बार में आता है.

ज्योति - हाय…. क्या ऐसी भी जड़ी बुटिया होती है?

देवा – लेटेस्ट मेडिकल साइंस में तो नहीं पता लेकिन है हमारे प्राचीन आयुर्वेदिक शास्त्रों में ऐसी कई साडी चमत्कारी जड़ी बुटिया आज भी लिखी है जिनका इस्तेमाल इंसान को लगभग अमर और आजीवन निरोगी और स्वस्थ रख सकता है. बस उसके कुछ अपने नियम होते है और इंसान को ऐसी पाबंदिया पसंद नहीं वो अपनी आज़ादी की खत्री मौत की तरफ चल नहीं बाकि भाग रहा है अगर प्रकृति से हर इंसान जुड़ जाये तो न सिर्फ हर इंसान स्वस्थ रह सकता है बल्कि पूरी जिंदगी निरोगी और बलवान भी रह सकता है और लगभग हर इंसान अपनी आयु के 100 साल होने के बाद hi इस दुनिया को छोड़ने की तयारी करेगा. और जहा ये सब संभव है तो ये तुम्हरी छूट को टाइट करने का काम तो मामूली सा है. हो जायेगा मुझ पर यकीन रखो और स्वस्थ बच्चे को जनम दो. अपनी छूट की मत सोचो उसके लिए मए हु.

ज्योति - धत्त… बहोत ख़राब हो आप. वैसे मुझे ये जानकर हैरानी भी हुई और बहोत अच्छा भी लगा की आपको आयुर्वेद और प्राकृतिक चीज़ो के बारे में इतना नॉलेज है. आप सच में hi कमल हो. मए बेहद खुश हु.

देवा – हां वो तो हु hi. तभी तो तुम पेट से हो. अच्छा ये बताओ तुम्हारी माँ कहा है और तुम्हारी दोनों भाभियाँ?

ज्योति - सब की तो फाड़ के आपने उन्हें पेट से कर रखा है. सब अपने अपने कमरे में लेती हुई hi है.

देवा – अच्छा यानि तुम माँ भी बनोगी, बुआ भी, और बहन भी मजे है तेरे तो.

ज्योति - है सब आपकी मेहरबानियाँ है मुझे इतना कुछ बना दिया वो भी एक साथ.

देवा – अब रहने दो मए इतना भी तारीफ के काबिल नहीं. अच्छा मए जरा अपने बच्चो की सब माओ से मिल कर आता हु.

फिर देव माला के कमरे में जाता है उनका हल चल पूछता है और ऐसे hi उसके साथ लेट जाता है और काफी देर तक वो एक दूजे की बहो में लेते हुए बाटे करते रहते है और एक दूसरे को प्यार करते रहते है. फिर यही सब रति के साथ भी होता है. सबसे आखरी में कामिनी के कमरे में जब देवा पहुँचता है तो कामिनी अपने बाथरूम से नाहा के निकल रही थी. इस वक़्त वो पूरी नंगी hi थी. अचानक दरवाजा खुलने से वो घबरा जाती है और अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को अपने हाथो से छुपाने का असफल प्रयास करते हुए पलट जाती है और चीखती है

कामिनी - कौन है बद्तमीज़ ?

देवा बिना कोई जवाब दिए उसके करीब जाता है और उसके कंधो को पकड़ लेता है जिससे कामिनी समझ जाती है के देवा है. तो वो अपना सर देवा की छाती पे रख के अपने दोनों हाथो को देवा के गले में दाल देती है अभी देवा उसकी पीठ से पूरा चिपका हुआ था.

कामिनी - आ गए आप मए तो तरस गयी थी आपके अहसास को.

देवा कामिनी की दोनों चूचियों को अपने हाथो में भर लेता है. और उन्हें सहलाते हुए कामिनी के कंधे को चूमने लगता है.

देवा – है जी आ गया आपका बद्तमीज़ और आता कैसे नहीं आप तो हमारे बच्चे की माँ है आपसे दूर कैसे रहते हम?

कामिनी पलट के देवा के गले से लग जाती है और उसका चेहरा पकड़ के होठो को चूमने लगती है. थोड़ी देर के बाद देवा उसे उठा कर बिस्तर पे लिटा देता है. और कामिनी को प्यार देने लगता है.
 
दोस्तों,

सहमत है आपकी बात से की हम कई कई दिन लापता रहते है मए इस वक़्त अपनी समस्याओ की बात नहीं करुगा वो तो है hi. लेकिन इस बार कुछ ऐसा था की यहाँ पर रीडर्स के रपल्य आना काम हुए जो रेगुलर रीडर थे जो शुरू से फॉलो कर रहे थे वो भी आते है, पढ़ते है, और बिना दो शब्द लिखे चले जाते है. जो बुरा लगता है. इसीलिए मन नहीं हो रहा था आगे लिखने का हलाकि इस बीच हमें जब भी समय मिला हमने स्टोरी को अपने पास लिख कर रखा है और आगे बढ़ा चुके है बस पोस्ट नहीं किया. कारन ऊपर बता चूका हु. लइकन आज यु hi अपने पेज को चेक करने आये और आप सब के ंसग्स देखके लगा के कही हम कुछ लोगो के लिए बाकि सबका दिल तो नहीं तोड़ रहे है? इसीलिए मए आपसे और मेरे उन रीडर्स से जो कहानी का इंतजार कर रहे है उनसे इतना hi कहना चाहता हु के अपडेट नहीं रुकेंगे मए आज hi अपडेट देने की कोशिश करुगा बस ऑनलाइन आने की देर है. स्टोरी तो रेडी hi है. और आज का अपडेट या तो बड़ा होगा या फिर काम से काम 3 अपडेट का पेज होगा. इससे ज्यादा हो सकते है आज अपडेट पर काम नहीं ये प्रॉमिस है.
 
फरोग जी आप ने अपनी स्थिति स्पष्ट की जानकर अच्छा लागा लेकिन यहाँ बात समीक्षक या आलोचक की है ही नहीं हम तो बस आप लोगो के विचार ही जानना चाहते है जिससे हमें आपके सामने बेहतरीन स्टोरी पेश करने की प्रेरणा मिले तो उम्मीद है की आप दूसरी बाते न सोच कर बस स्टोरी के लिए अपनी विचार ही बता दिया करे चाहे स्टोरी किसी की भी हो. आप लोगो के विचार प्रेरणा दायक ही होते है चाहे वह अच्छे हो या बुरे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता
 
अपडेट - 227

थोड़ी देर के बाद देवा उसे उठा कर बिस्तर पे लिटा देता है. और कामिनी को प्यार देने लगता है.

कामिनी - seeeeeeeeeeee देवा प्लीज फ़क में देवा बहतुत मन कर रहा है बहोत दिन हो गए देवा.

देवा – नहीं कामिनी आज नहीं, मए नहीं चाहता के हमारे बच्चे को कोई तकलीफ हो क्यों के तुम तो जानती हो के डालने के बाद मुझे तुम भी नहीं रोक पाओगी और हम्हारे जोश से हमारे hi बच्चे का नुकसान हो सकता है इसीलिए बस अब कुछ दिन hi रह गए है. थोड़ा सा कण्ट्रोल करो.

कामिनी – कैसी बाटे करते हो हम संभल के करेंगे न. क्या प्रेग्नेंट लेडी चुदाई नहीं करती? सभी करती है साली कोई बिना छुड़वाए रह hi नहीं सकती. पेट से हुई तो क्या हुआ छुड़वा के hi तो पेट से होती है और पेट से होने पर चुदाई hi न मिले तो कोई औरत पेट से नहीं होना चाहेगी क्यों की छूट की खुजली तो सबको है hi बिना चूड़े कैसे रह सकती है कोई भी औरत. कई औरते तो आखरी महीने तक चुदवाती जिनकी छूट ज्यादा मचलती है. वो भी पूरे जोश के साथ ये लुंड चीज़ hi ऐसी है कोई औरत नहीं रह सकती इसे लिए बिना. और एक तुम हो जो मुझे इससे दूर रख रहे हो.

कामिनी मुँह फुला लेती है.

देव - है बाबा मैने कब कहा के पेट से होने पे औरत छुड़वा नहीं सकती लेकिन औरो में और हम में कुछ फरक है मए तुम्हे नहीं समझा सकता. बस ये मन लो इस हालत में तुम मेरा नहीं ले पाओगी और लिया तो बच्चे के लिए सही नहीं होगा. सो प्लीज मन जाओ वार्ना मन तो मेरा भी है. और फिर कुछ hi दिनों की तो बात है उसके बाद तो तुम खुद मुझे रुकगी तब भी नहीं रुकुंगा मए.

कामिनी - ठीक है देवा जैसे आप कहो मुझे मंजूर है लेकिन मए आज आपका रास पीना चाहती हु वही पीला दो न

देवा तुरंत नंगा हो जाता है तो कामिनी देवा से लिपट जाती है. उसके पूरे बदन को चूमने लगती है. देवा भी कमनी को चुम रहा था उसके चुके दबा रहा था प्यार से.

कामिनी – uuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhdevvvvvaaaaaaaaa कुछ करो मए जल रही हु देवा.

देवा कामिनी को बिस्तर पे करवट के बल लिटा देता है और खुद बी करवट के बल 69 के पोज़ में लेट जाता है और अपने होठ कामिनी के जलती बुर पे रख देता है कामिनी भी देवा का तगड़ा लुंड देख कर खुश हो जाती है और उसे पकड़ कर सूंघने लगती है लुंड की खुश्बू से वो मदहोश हुई जा रही थी. इधर देवा भी कामिनी की दूर को सिर्फ चुम रहा था. तभी कामिनी अपना पूरा मुँह खोल कर ज्यादा से ज्यादा लुंड को अपने मुँह में भर्ती है और देवा भी अपनी उंगलियों से कामिनी की बुर को खोल कर अपनी जीभ फेरने लगता है कामिनी सिसक रही थी और देवा का लुंड भी चूसे जा रही थी.

तभी देवा अपनी जीभ कामिनी की बुर में घुसेड़ देता है और अंदर तक चाटने लगता है कामिनी तेजी से अपनी कमर हिला रही थी मनो देवा उसे जीभ से hi छोड़ रहा हो और ऊपर से तेजी से अपने मुँह में देवा का लुंड दाल कर चूस रही थी. कोई 15-20 मिनट की चूसै के बाद कामिनी की बुर से गरम लावा निकल पड़ता है जिसे देवा पूरा चाट जाता है लेकिन देवा का लुंड झाड़ा नहीं था अभी तो कामिनी को सीधा लिटा के उसका मुँह छोड़ने लगता है तभी दरवाजा एक बार फिर से खुलता है रति और ज्योति अंदर आती है

रति - अरे वाह यहाँ तो दीदी ने बजी hi मर ली . देवा हमें सिर्फ किस्सेस और इन्हे असली मलाई ये तो नाइंसाफी है

ज्योति - सही कहा भाभी अभी तो हमें ज्ञान दे रहे थे के प्रेगनेंसी में ये सब सही नहीं और यहाँ देखो तो दोनों लगे हुए है.

कामिनी दोनों की बाटे सुन कर मुस्करा रही थी और देवा का लुंड चूस रही थी.

देवा – अरे यार कुछ नहीं ये तो बस इसका मन था इतना hi किया है बाकि और कुछ नहीं. सेक्स तो डिलीवरी के बाद hi होगा. सबके साथ.

तभी कामिनी देवा का लुंड मुँह से निकल देती है.

कामिनी - तुम लोग क्यों उदास होती हो. मेरा तो मुँह थक गया और इनका निकल hi नहीं रहा है आ जाओ तुम दोनों भी ले लो. मुँह में hi सही कुछ न से कुछ होना अच्छा.

कामिनी की बात सुनते hi रति और ज्योति भी अपनी अपनी निघ्त्य उतर के फेंक देती है. और बिस्तर पे लेट जाती है. कामिनी सरक जाती है अब देवा रति की बुर चाटने लगता है रति ज्योति की बुर को मुँह में भर के चूसने लगती है और और ज्योति देवा का लुंड चूसने लगती है. कमरे में सिसकारियां तेज होती जा रही थी. इनका त्रिकोण बार बार चेंज हो रहा था इस तरह दोनों बुर और देव का लुंड चूसे जा रहे थे काफी देर की चूसै के बाद रति और ज्योति की बुर भी अपना पानी निकल देती है देवा के मुँह में hi अब देवा भी किनारे पे hi था. तीनो लाइन से बैठ जाती है और रति देवा का लुंड हिलने लगती है तभी देवा रति के हाथ से लुंड छुड़ा लेता है. और एक पिचकारी पहले कामिनी के खुले मुँह में डालता है फिर रति के मुँह में फिर ज्योति के मुँह में. ऐसे hi दो तीन बार तीनो के मुँह में पिचकारियां छोड़ने के बाद जाकर देवा शांत होता है. तीनो का मुँह देवा के माल से भरा हुआ था. कामिनी अपना माल निगल जाती है ज्योति भी जितना हो सके निगल जाती है बाकि उसकी छतियो पे गिरता है तो वो ऊँगली से उठा के उसे चाटने लगती है. रति भी आधा मॉल निगल जाती है बाकि उसके मुँह में भरा हुआ था. रति तेजी से अपनी निघ्त्य उठा के अपने बदन पे दाल लेती है और अपना मुँह हाथ से दबा के तेजी से कमरे से बहार निकल जाती है.

इधर देवा के जाने के बाद माला नीचे अपने रूम में लेती हुई hi थी उसका रोम रोम अभी खिला हुआ था देवा के साथ बिताये लम्हो को यद् कर के वो भी गरम हो रही थी तभी भड़क से उसके रूम का दरवाजा खुलता है और रति वह आती है.

माला - अरे रति तुम यहाँ नीचे ऐसे भगति हुई क्यों आयी कुछ काम था क्या? नौकर से बुलवा दिया होता बीटा सिडिया मत उतरा करो कही कुछ अहोई न हो …………..

माला इतना hi बोल पायी थी के रति ने उनका चेहरा पकड़ के अपने होठ माला के होठो पे रख दिए और उसके मुँह में जो देवा का माल भरा हुआ वो माला के मुँह में ट्रांसफर कर दिया.

पहले तो माला छटपटाई लेकिन वो देवा के माल का स्वाद जानती थी. वो देवा का माल निगलने लगी जब माल ख़तम हो गया अपनी जीभ रति के मुँह में दाल के वह से भी देवा का मॉल चाटने लगी. थोड़ी देर के बाद माला और रति अलग हुई.

माला – रति थैंक यू देवा का अमृत पिलाने के लिए. लेकिन इस चक्कर में तेरा नुकसान हो गया सारा मैने hi खा लिया.

रति -अरे माँ कोई नुकसान नहीं आप को तो पता hi है उनका माल कितना निकलता आहे. अभी ऊपर हम तीनो का पेट भर दिया उन्होंने ये तो पूरे माल का चौथाई भी नहीं था. हम तीनो ने भर पेट खा लिया था. फिर मैने सोचा आप क्यों प्यासी रहो इसीलिए मए आप के लिए ले आयी.

माला ने रति को गले से लगा लिया. – वाह मेरी बच्ची तो बड़ी समझदार हो गयी है. माँ का इतना ख्याल रखती है.

तभी वह देवा आता है.

माला – आइये जनाब हमें hi प्यासा छोड़ दिया बाकि सबको भरपेट खिला दिया.

देवा – रहें दो माला. न तो तेरा पेट खली है न hi तू अब प्यासी है जब रति ऊपर से निकली तो मए समझ गया था ये कहा जा रही है . चलो अब सबका पेट भर गया न अब मए चलता हु बहोत देर हो गयी है. फिर आउगा सब लोग अपना ख्याल रखना अब ज्यादा समय नहीं रह गया डिलीवरी में.

माला – आप निश्चिन्त हो कर जाइये. आपके बच्चे सुरक्षित है हमारे पास.

फिर देवा वह से निकल कर सीधा घर आता है. और सीधा किचन में जाता है. जहा सावित्री कड़ी थी उसकी पीठ देवा की तरफ hi थी.
 
अपडेट – 228

टाइट गुलाबी साड़ी में लिपटी अपनी माँ की गांड देख कर देवा उसी के बारे में सोचने लगता है और उसे याद आता है के बाबू जी से कैसे ये नंगी हो कर चिपक कर चुदवाती है. कितनी प्यासी है ये. यही सब सोचते हुए देवा का लुंड फुल हार्ड हो जाता है तो देवा सावित्री के पास जाकर उसे पीछे से अपनी बहो में जकड लेता है. देवा का खड़ा लुंड सीधा सावित्री की गांड में चुभता है वो पहले तो घबरा जाती है लेकिन जब वो देखती है के देवा है तो मुस्करा देती है.

सावित्री - क्या हुआ आज माँ पे इतना प्यार क्यों?

देवा – लो जैसे की तुमसे प्यार hi नहीं करता?

सावित्री - कहा करता है रे प्यार. इतना कह कर सावित्री भी अनजाने में अपनी गांड देवा के लुंड पे दबा देती है. देवा का लुंड गांड की दरार में महसूस करके सावित्री की छूट गीली होने लगी थी. उसके निप्पल भी तन गए थे.

देवा – अरे मए तो आपको बहोत प्यार करता हु आप hi ध्यान नहीं देती.

देवा अपनी माँ की नंगी कमर पे अपनी भए लप्पेट कर गाल पे चुम लेता है और अपने हाथ सावित्री के नंगे पेट पे घूमने लगता है. सावित्री की साँसे भरी होने लगी थी. तभी बहार से दिया की आवाज़ आती है तो देवा थोड़ा दूर हो जाता है और सावित्री को देख कर मुस्करा देता है सावित्री भी देवा को देख कर मुस्करा रही थी. देवा बहार आ जाता है. और डाइनिंग टेबल पे बैठ जाता है.

दिया - अरे देवा आप कहा चले गए थे इतनी देर कर दी शाम होने को आयी है अभी तक आपने दोपहर का खाना नहीं खाया. अपनी सेहत का बिलकुल ध्यान नहीं रखते न आप.

देवा – अरे बस करो भाभी इतनी चिंता क्यों करती हो मेरी. वो तो मए हॉस्पिटल गया था और फिर हवेली चला गया था इसीलिए देर हो गयी.

तभी वह सावित्री खाना लेकर आ जाती है.

देवा – अरे माँ तुम क्यों लायी किसी नौकर से कह देती.

सावित्री - कोई बात नहीं बीटा कभी कभी तो लती हु. चल खा ले.

फिर देवा खाना खाने लगता है.

दिया - मए जरा अपने कमरे में आराम कर रही हु माँ जी कोई काम हो तो बुला लीजियेगा.

सावित्री - भला मुझे क्या काम होगा बीटा तू जा आराम कर. मए भी देवा को खाना खिला देती हु.

दिया वह से चली जाती है और सावित्री वही बैठ कर देवा को निहारने लगती है वो देवा में खो सी गई थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था के ये उसे क्या होता जा रहा है. तभी वह पद्मा आ जाती है. और उसकी आवाज़ सुनकर सावित्री का ध्यान टूटता है

पद्मा - नमस्ते सावित्री बहन

सावित्री - अरे नमस्ते पद्मा बहन तुम, आओ आओ.

पद्मा - वो सावित्री बहन मए यहाँ से निकल रही थी तो सोचा तुमसे मिलती चालू क्या हल है देवा के बाबू जी के?

सावित्री – पहले से कुछ ठीक है अब . और डॉ. ने कहा है के जल्दी hi एक डैम ठीक हो जायेगे.

पद्मा – ये तो बहोत अच्छी खबर सुनाई तुमने. कल जब तुम जाओ हॉस्पिटल तो मुझे बता देना मए भी चलुगी. उन्हें देखने.

सावित्री - है है क्यों नहीं. तुम बैठो मए अभी आती हु

सावित्री किचन में चली जाती है कॉफी लेने. देवा भी खाना ख़तम कर चुक्का था. तो उसका दिमाग चलने लगता है.

देवा मने me………achha मौका है पद्मा काकी से बात करने का. और फब के बताये अनुसार अपने काम को अंजाम देने का.

देवा – और सुनाओ काकी क्या हल है?

पद्मा - बस ठीक हु देवा. तुम्हारे होते कोई तकलीफ हो सकती है क्या भला.

देवा – अब मए क्या कहु काकी मुझे तो कभी कोई मौका देती नहीं हो तुम अपनी सेवा का, इसीलिए पूछ लिया. कोई काम हो तो बता डी मए तैयार हु कब से तुम तो जानती hi हो.

पद्मा - सब मौके मिलेंगे सेवा के तुम्हरी शादी तो हो जाये पहले पूनम से.

देवा उठ कर पद्मा की कुर्सी के पीछे आ जाता है और अपनी दोनों बहे पीछे से पद्मा के गले में दाल लेता है.

पद्मा धीरे से - क्या कर रहा है देवा सावित्री बहन कभी भी आ सख्त है और ये सब ठीक भी नहीं है मत कर.

देवा – अरे मए तो आपसे लाड कर रहा हु क्या मए नहीं कर सकता.

पद्मा देवा के गाल पे हाथ फेरते हुए – है कर सकता है लेकिन कोई देखेगी तो क्या कहेगा.

देवा एक झटके में पद्मा को उठा के खड़ा कर देता है.

देवा - मए तो करुगा जो मुझे करना है लाड भी प्यार भी जिसे जो सोचना है सोचे. अब मुझे आप भी नहीं रोक सकती बहोत रोक लिया आपने और बहोत रुक चूका मए.

इतना कह कर देवा पद्मा की कमर में हाथ दाल कर अपनी तरफ खिंच लेता है और उसकी गोरी चिकनी कमर को सहलाते हुए अपने होठ पद्मा के होठो पे रख देता है ये सब इतनी जल्दी हुआ के पद्मा कुछ समझ hi नहीं पति और देवा की बहो में कसमसाने लागत है. लेकिन फिर वो भी देवा के उस प्यार से भरे हुए चुम्बन में खो सी जाती है. और देवा को साथ देने लगती है. दोनों hi बड़े प्यार से एक दूजे के होठ चूस रहे थे देवा के हाथ अब कभी पद्मा की गांड सहलाते तो कभी उसकी ठोस चूचिया को दबा रहे थे.

तभी देवा के हाथ पद्मा की कमर से होते हुए उसकी भरी गांड पे आ जाते है. जिन्हे वो भींच के खुद से सताता है तो पद्मा की छूट जो गीली हो चुकी थी सीधे देवा के लुंड पे टकराती है. और पद्मा देवा से खुद hi लिपटती चली जाती है. देवा और पद्मा एक दूजे में खोये हुए थे और एक दूसरे के होठो को चूस रहे थे.

तभी किचन से निकलती हुई सावित्री सामने का नजारा देख कर ठिठक जाती है. वो हैरानी से देवा और पद्मा को इस तरह लिपटे हुए प्यार करते देख कर हैरान हुई जा रही थी. उसे गुस्सा भी बहोत आ रहा था लेकिन वो छह कर भी कुछ कह नहीं प् रही थी. कुछ देर तक उन दोनों को इस तरह देख कर सावित्री की भी हालत ख़राब होने लगती है.

इधर पद्मा खुद को देवा से छुड़ाती है – बस कर देवा ये सब ठीक नहीं है मए नहीं कर पाउगी ये सब जरा सोचो पूनम क्या कहेगी.

देवा – उसे मए संभल लगा तब तो ठीक है न. आप को मेरी जरुरत है काकी इसीलिए मुझे मत रोको.

पद्मा – ऐसी भी कोई जरुरत नहीं देवा के मए अपनी बेटी का घर टूटने का कारन बनु. भला कौन सी माँ ऐसी होगी जो अपनी बेटी के पति के साथ hi अपनी जरुरत को पूरा करे. . . . नहीं देवा ये सब सरासर गलत है मए माँ हु उसकी . कोई सहेली nahi.jiski बात को तुम बाद में पूनम के साथ संभल लोगे. वो टूट जाएगी मेरी बच्ची बिखर जाएगी देवा एक जरा सी गलती उसका जीवन बर्बाद कर देगी फिर भला क्या मए जी पाउगी उसे टूटा हुआ देख कर बोलो?

देवा – ऐसा कुछ नहीं होगा मुझ पर यकीन रखो मए जितना खुद पर विश्वास रखता हु उतना पूनम को भी जनता हु. अरे आप तो आप काकी अगर मए अपनी माँ के साथ भी कुछ करू और पूनम को पता चला तो भी वो अपने चेहरे पे एक शिकन नहीं आने देगी बल्कि उसे ख़ुशी hi होगी आप नहीं जानती पूनम के प्यार को उसके दिल को वो सब समझती है सबके दिल का हल जानती है. आपके दिल का भी और मेरी माँ के दिल का भी. इसीलिए अभी जो आपने कहा वो सब मत सोचो बस मए कह रहा हु न मुझ पर यकीन करो.

पद्मा – और अगर सावित्री बहन ने देख लिया तो?

देवा - तो क्या शायद वो भी आपकी हालत समझ जाएगी पहले शायद न समझती, लेकिन आज जब बाबू जी उनसे दूर है भले hi कुछ वक़्त के लिए. ऐसे में वो जरूर इस बात को समझेगी की एक औरत कितनी अधूरी होती है एक मर्द के बिना.

…… और फिर अगर कभी ऐसा हुआ तो माँ को भी अपने साथ शामिल कर लगे न फिर तो ठीक है.

पद्मा - धत्त. बेशरम अपनी मो को अपने नीचे लितायेगा.

देवा – अरे काकी मए नहीं लिताऊगा. लेकिन अगर माँ चाहेगी तो मए मन भी नहीं करुगा. आखिर वो भी एक औरत है उनकी भी कुछ िछाये है. तो भला मए क्यों रोकू उनको. और आप लोगो की िछाये ये इच्छाधारी पूरी नहीं करेगा तो और कौन करेगा.

पद्मा - चल चल रहने दे बड़ा आया इच्छाधारी. और अगर उन्होंने मुझे गलत समझ कर पूनम से तुम्हारा रिश्ता तोड़ दिया तो?

देवा – मेरी माँ को आपने समझ hi नहीं है फिर तो. क्यों की वो ऐसा कभी नहीं करेगी वो किसी एक की गलती की सजा किसी दूसरे को नहीं देती. दूसरी बात वो खुद एक औरत होने के नाते समझती है आपकी क्या जरुरत है. यकीन न हो तो माँ से hi पूछ लो मए माँ को बुला लेता हु.

इधर जैसे hi सावित्री ये सब सुनती है वो अपने कदम पीछे कर लेती है. और वापस किचन में चली जाती है.

देवा – माआआआ जरा यहाँ आना तो.
 
थैंक्स फॉर योर परफेक्ट रिव्यु भाई. बहोत दिनों बाद किसी ने अपडेट के ऊपर कोई सही कमेंट दिया है. देख कर अच्छा लगा. यही रिव्यु चाहिए अपने को . कोई स्टोरी की बात करे पूरे अपडेट के किसी पहलु का जिक्र करे उस से समझ में आता है के हम स्टोरी लाइन पे सही चल रहे है या बदलाव की जरुरत है. वैरी नीस. उम्मीद है आप आगे भी ऐसे hi रिव्यु देंगे. नेक्स्ट अपडेट जल्द hi दे देंगे.
 
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