अपडेट – 230
………लो मए सामने आ गया. क्या मेरे चेहरे पे तुम्हे दर नजर आ रहा है युवराज देव सिंह?
देवा - कौन हो तुम? एक मिनट तुम. . . . . ? तुम तो . . . .
बिलकुल ठीक पहचाना युवराज मए हु ……….. जीन…….जीन…. बादशाह हु मए देव सिंह.
देव – ओह्ह्हो जीन बादशाह आप है. स्वागत है आपका मेरी इस कुटिया में. कही डायलाग न मर देना के “स्वागत नहीं करोगे हमारा” आइये पधारिये. तो आप यु इस तरह रात के अँधेरे में मुझे मरने आये है वो भी उस अघोरी के कहने पर? अश्व्हर्य है, आपसे ऐसी कायरता की उम्मीद नहीं थी जीन बादशाह. क्यों के जैसा अभी आपने hi कहा हमारी तो कोई आपसी दुश्मनी है नहीं.
जब मुस्कराते हुए - नहीं देव मए तुम्हे यहाँ मरने नहीं आया. बस मिलने चला आया. जब के तुम्हे शायद नहीं पता लेकिन मुझसे मिलने की ख्वाहिश लिए लोग क़तर में खड़े होते है. और मए स्वयं तुमसे मिलने आया हु.
देवा – अहो भाग्य मेरे जो आप स्वयं यहाँ आये. लेकिन माफ़ कीजियेगा मैने तो नहीं बुलाया आपको, न hi मेरी कोई ख्वाहिश थी आप के दर्शनों की न hi मए किसी क़तर में खड़ा आपका इंतजार कर रहा था. फिर आपने तकलीफ क्यों की ?
जब – मजाक अच्छा कर लेते है आप और किसी को जवाब देना भी खूब आता है आपको. क्या खड़े खड़े hi बाटे करोगे देव मए तुम्हारा मेहमान हु बिन बुलाया hi सही लेकिन फ़िलहाल तो दुश्मन नहीं हु. मुझे बैठने के लिए नहीं कहोगे.
देवा का स्वर भी थोड़ा सामान्य हो गया – है ये मेरी गलती जरूर है जिसके लिए मए क्षमा चाहता हु. आप एक बादशाह है और आपका सम्मान आपका हक़ है. आइये बैठिये और अपने आने का कारन बताइये.
जब और देवा वही रखे सोफे पे बैठ जाते है.
जब - जैसा के तुमने अभी अघोरी का नाम लिया उससे जाहिर है के तुम्हे मेरी और अघोरी की मुलाकात का पता तो चल hi गया है, जो की अच्छी बात भी है मुझे वैसे भी कुछ छुपाने की जरुरत नहीं . बल्कि अब बात करना आसान हो गया मेरे लिए. तो देवा मए अघोरी के गुरु के किसी अहसान टेल दबा हुआ हु. उसने मेरी सहायता ऐसे वक़्त पे की थी जब मुझे सहायता की सख्त जरुरत थी. कोई दुष्ट मुझे धोखे से कैद कर चूका था. यदि उस अघोरी का गुरु तब मेरी सहायता नहीं करता तो मए अपना पूरा जनम उस कैद में hi बीतता और मेरे राज्य पर, जीन लोक पर, उस दुष्ट का शासन हो जाता. पर मए गढ़ की सहायता से आज़ाद हो गया और मुझे कैद करने वाले को मैने मौत की सजा भी दे दी. जिससे मेरा राज्य भी सुरक्षित हो गया. तभी मैने गढ़ को वचन दिया के मए यदि उनके किसी काम आ सकू तो मुझे कभी भी यद् करे मए उनकी सहायता करुगा. और उसी वजह से अब मए अघोरी की सहायता कर रहा हु. क्यों के ये उसके गुरु की इच्छा है. और मए अपने hi वचन में बंधा हुआ हु. लेकिन उसके गुरु से ये गलती हो गयी के उसने अघोरी जैसे धूर्त की सहायता के लिए मुझे चुना और मैने अघोरी को साफ कह दिया है के मए तुम्हारे खिलाफ होने वाली लड़ाई में अघोरी की मदद बस एक बार hi करुगा फिर चाहे उस लड़ाई का अंजाम जो कुछ भी हो मए उसके बाद अपनी मर्जी का मालिक खुद रहुगा के मए किस का साथ दू. तुम्हे मालूम hi होगा देवा जीन लोक और नाग लोक के रिश्ते कभी भी बुरे नहीं रहे है. इसीलिए आगे भी हमारे राजकीय रिश्तो पे इस बात का असर नहीं होना चाहिए. वो भी सिर्फ इसीलिए के मए मजबूर हु तुम्हारे खिलाफ खड़ा होने को. इस लड़ाई में मुझे जीन बादशाह न समझ कर अघोरी का एक सैनिक hi साम्हना बस मए इससे ज्यादा कुछ भी नहीं. लेकिन इस लड़ाई के बाद जैसा के मैने कहा मए अपने वचन से आज़ाद हो जाउगा. और अपनी मर्जी का मालिक भी. बस ये लड़ाई किसी तरह निकल जाये. और यदि उसके बाद भी हम दोनों hi जीवित रह गए जो की थोड़ा मुश्किल है. लेकिन यदि हम दोनों बच गए और तुम्हारी ये लड़ाई आगे जारी रही तो फिर इस अघोरी के खिलाफ मए स्वयं तुम्हारे साथ खड़ा मिलुंगा. क्यों की मए जनता हु के धरम तुम्हारे पक्ष में है. सिर्फ इसीलिए.
देवा – धन्यवाद महाराज और आपने जो यहाँ आ कर अपनी स्थिति को साफ किया वो भी सराहनीय है. पर मन लीजिये यदि ये अंतिम लड़ाई साबित हुई तो फिर? यदि इस लड़ाई में मए यानि नागलोक का युवराज hi न रहा तो? फिर आप अपनी निष्ठां किसे दिखा पाएंगे? और मान लीजिये के मेरे द्वारा आप hi ख़तम हो गए उस लड़ाई में तो भी आप कैसे मेरा साथ दे पाएंगे?
जब - ऐसा कुछ नहीं होगा देव. क्यों के आप आज एक अलग देव है कोई मामूली अघोरी नहीं. न hi पहले की तरह कोई अनजान नवयुवक, जिसे अघोरी ने हराया था. और फिर जिसके पास इच्छाधारी शक्तिया हो, जो मणिधारी हो, जो स्वर्ण मणि धरी हो उसका कोई जीन या अघोरी क्या बिगड़ सकता है. नुकसान में वो मुर्ख अघोरी hi रहेगा. लेकिन मए आपका दुश्मन नहीं हु मुझे बस यही बताना था आपको. और जब मए आपका दुश्मन hi नहीं हु तो आप मुझे मौत क्यों देंगे. है हरा जरूर सकते है.
देवा – जीन बादशाह मन के मए इच्छाधारी हु स्वर्ण मणि भी मेरे पास है लेकिन धूर्त का वार कब चल जाये कह नहीं सकते.
जब – देव इन मायावी शक्तियों के आलावा आपके दोस्तों के भी कमी नहीं जो आपके लिए अपनी जान की बजी आपसे पूछे बिना लगाने को नींद में भी तैयार है. जैसे आपके सरे साथी. जैसे वनराज, वंशराज, और सबसे बड़ी आपकी ढल आपका परम मित्र रूद्र. इन सब के होने के बावजूद भी यदि अघोरी की जीत हुई तो ये दुनिया का आखरी अजूबा hi होगा. जो के संभव नहीं देव.
देवा – बहोत ज्यादा जानकारी है आपको मेरे दोस्तों और दुश्मनो की जीन बादशाह.
जब – क्या करे भाई रखनी पड़ती है. और फिर हम जीन है हर तरफ हमारी नजर होती hi है.
देवा – अच्छी बात है जीन बादशाह मए आपकी कही बाटे यद् रखुगा.
जब - तो फिर अब हमें आज्ञा दे देव सिंह यदि हमारे लायक कोई भी कार्य हो तो यद् कीजियेगा.
देवा – जरूर
फिर जीन बादशाह वह से गायब हो जाता है और देवा भी पलट कर बिस्तर पे आता है के तभी उसे अपने बगल में कोई खड़ा महसूस होता है.
देवा – आप कब आयी महारानी पूनम.
पूनम मुस्करा के देवा को देखती है और उसके गले में अपनी बहे दाल के गॉड में बैठ जाती है.
पूनम – बस आपसे मिलने आयी थी देव लेकिन आप यहाँ व्यस्त थे तो मए चली गयी और फिर जब आप फुर्सत हुए तो आ गयी. क्या कह रहे थे जीन बादशाह?
देवा ने सब कुछ पूनम को बताया.
पूनम - अच्छा hi हुआ उन्होंने आ कर आपके सामने असलियत रख दी कही यही बाटे वो लड़ाई के बाद बोलते तो उन पर यकीन करना मुश्किल होता.
देवा – है सही बात है. उन्होंने भी यही सोचा होगा इसीलिए वो कुछ भी होने से पहले आये. क्यों की इस तरह वो हम से कोई पर्सनल दूषणमणि शुरू होने से बचना भी चाहते है और साहिब hi है क्यों की यदि इनसे हमारी कोई पर्सनल दुश्मनी शुरू हो गयी तो इसका बुरा प्रभाव सिर्फ हम पर नहीं बल्कि उनकी और हमारी नगरी के रहने वाले नागरिको पर भी पड़ेगा ज की बहोत बुरा होगा क्यों की दोनों hi नगरी के नगरवासी तो मासूम hi है न उनका तो किसी लड़ाई से कोई मतलब नहीं है.
पूनम - चलो ये तो हुई लड़ाई की बाते. पर अब माँ का क्या सोचा है देव? आज तो आपने खूब चोक छक्के मरे है.
देव – पूनम मेरा जी नहीं छह रहा है पद्मा काकी और अपनी माँ के साथ शारीरिक रिश्ता बनाने में. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है मए क्या करू. आज जो कुछ मैने पद्मा काकी के साथ किया उससे वो भी बहकने लगी थी लेकिन मेरा दिल hi मेरा साथ नहीं दे रहा है. मए बहोत कंफ्यूज हो रहा हु यार.
पूनम - देव आप बहोत अचे है इसीलिए ऐसा फील कर रहे है आप. लेकिन ये भी तो सोचो के इसके आलावा कोई और चारा भी तो नहीं है न. जब तक आपका वीर्य माँ की कोख में नहीं गिरेगा तब तक बाबू जी के ऊपर खतरा मंडराता रहेगा. क्या आपको उनकी जान की परवाह नहीं है? आखिर एक hi बात कोई आपको कितनी बार समझाए?
देव – ये कैसी बाटे कर रही हो पूनम मए अपनी जान देकर भी अपनी बाबू जी की जनन बचाना चाहुगा. ये तो सिर्फ सम्भोग की बात है.