Fantasy इच्छाधारी देव - Page 40 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

ाववववव थैंक यू सो मच ी ऍम बलुशिंग नाउ.

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लेकिन आपने ध्यान दिया होगा के हमारी स्टोरी के ऊपर सबसे पहला कमेंट आपका hi था यू अरे माय फर्स्ट रीडर. और आपने कहा था स्टोरी कम्पलीट करना इसे बंद मत होने देना. सो इतस ों, लेकिन आपका गायब होना मतलब एक रीडर का नुकसान हमें ाचा नहीं लगा था. बूत फिनॉय यू अरे बैक ी म हैप्पी. वेलकम बैक. अब गायब मत हो जाना. नेक्स्ट अपडेट किंग सून.
 
अपडेट – 229

इधर जैसे hi सावित्री ये सब सुनती है वो अपने कदम पीछे कर लेती है. और वापस किचन में चली जाती है.

देवा – माआआआ जरा यहाँ आना तो.

अब आगे…..

सावित्री - अभी आयी बीटा

पद्मा - अरे क्या करता है अपनी माँ से हमारे बारे में बात करने जा रहा है क्या?

देवा – है तो आपने hi तो कहा न अब तो करुगा hi रुको जरा.

सावित्री मुस्कराते हुए - पद्मा बहन ये लो कॉफ़ी . तू भी ले देवा. और अब बता क्यों बुला रहा था.

देवा – माँ मुझे एक बात बताओ हम भूख लगने पर क्या करते है?

सावित्री - ये कैसा सवाल है?

देवा – बताओ तो.

सावित्री – अरे खाना कहते है, अपना पेट भरते है और क्या

देवा – मन लो काकी को भूख बहोत तेज लगी हो. लेकिन घर में जो खाना है वो पूनम के लिए रखा हो लेकिन पूनम उसे खाने के लिए अभी वह है hi नहीं या पूनम को अभी नहीं खाना तो काकी को क्या करना चाहिए? क्या काकी अगर वो खाना खा ले तो गलत हो जायेगा?

सावित्री और पद्मा दोनों hi देवा की बात समझ रही थी. और मन hi मन मुस्करा रही थी.

सावित्री - देखो बीटा अगर वो खाना पूनम का है तो एक माँ होने के नाते पद्मा को वो खाना पूनम के लिए बचा के रखना चाहिए. लेकिन भूख क्या होती है ये मए जानती हु. इसीलिए ये कह रही हु के भूख बर्दाश्त न हो तो पद्मा को वो खाना खा लेना चाहिए. आखिर पूनम भी तो नहीं चाहेगी न के उसकी माँ भूखी रहे. और वही खाना वो खुद भर पेट खाये. ये तो गलत होगा. इसीलिए पद्मा को खाना खा लेना चाहिए मुझे कोई बुराई नहीं लगती इसमें. अगर वो घर पे नहीं खायेगी तो उसे बहार से माँगना पड़ेगा और ये बात पूनम को और ज्यादा बुरी लगेगी.

देवा - और अगर मन लो वो खाने का थल आपके पास हो जो पूनम के लिए है और आपके सामने पद्मा काकी आ जाती है जो भूखी है बहोत समय से और आप उन्हें वो खाना कहते हुए देख लो तो क्या आप इनसे नाराज हो जाएगी? सिर्फ इस बात पर के खाना पूनम का था और खाया इन्होने?

सावित्री - नहीं . भला मए क्यों नाराज होगी इसमें. क्या पेट भरने का अधिकार सिर्फ पूनम को है? अरे जब उसका मन होगा वो खुद खा लेगी, फ़िलहाल तो खाना वैसे भी रखा hi हुआ है और जिसे भूख है वो वह मौजूद है तो उसे hi अपना पेट भरना चाहिए. अगर खाने की थल मेरे पास हुआ तो मए पद्मा के आगे जरूर परोस दूगी और उसे जबरदस्ती खिला दूगी. पूनम जब आएगी तब खायेगी. खाने की कोई कमी है क्या?

सावित्री की बात सुन कर पद्मा का चेहरा शर्म से लाल हो जाता है. क्युके उस के मुताबिक सावित्री ने खुद उसे अपने बेटे के नीचे सोने की इजाजत दे दी थी. वो भी परफेक्ट लॉजिक के साथ.

देवा – देखा काकी अब तो कोई परेशानी नहीं न मन में. मैने आपकी पहेली सुलझा दी.

सावित्री - अच्छा चल बड़ा आया भूखो को खाना खिलने वाला. लेकिन किसी का पेट इतना भी मत भर देना के उसका पेट निकल आये.

पद्मा तो सावित्री की बात सुन के शर्म से गाड़ी जा रही थी.

देवा – न माँ ऐसा नहीं है. काकी का पेट बहार नहीं आएगा निश्चिन्त रहो.

सावित्री है जानती हु. सिर्फ खाना खाने से पेट बहार नहीं आता. और पेट तो अब सिर्फ पूनम का बहार आएगा. क्यों पद्मा बहन?

पद्मा हंस कर - है सही कहा. लेकिन उसके लिए इन दोनों की शादी तो करवाओ.

सावित्री - मए भी यही कह रही थी इससे पर ये कहता है के बाबू जी आ जाये. तब करेंगे और तुम्हारी लाड़ली भी इसकी बात में है में है मिला रही थी.

पद्मा - चलो अच्छी बात है. बाद में सही वैसे इनकी ये बात भी सही है देवा के बाबू जी का होना तो बेहद जरुरी है .

सावित्री - लो अब तो तुम भी इसके रंग में रंग गयी बची मए अकेली.

देवा – अरे माँ क्यों चिंता करती है, तुझे भी तो अपने रंग में रंग hi लगा.

सावित्री - अच्छा ठीक है देखेंगे.

पद्मा - मए चलती हु बहोत देर हो गयी है

सावित्री - ठीक है कल मिलते है हम.

फिर पद्मा चली जाती है और सावित्री अपने कमरे में जाती है. और देवा अपने कमरे में.

अपने कमरे में आकर सावित्री सोचती है - क्या था ये सब क्या देवा और पद्मा के बीच कुछ है? क्या ये सब पद्मा अपनी मर्जी से कर रही है या सिर्फ देवा के नाराज हो जाने के दर से खामोश है? कही ऐसा तो नहीं के वो सोच रही हो के देवा का कहा नहीं मन तो देवा पूनम को छोड़ देगा और देवा भी इस बात का फायदा उठा कर पद्मा के साथ कुछ गलत कर रहा है?

सावित्री - नहीं नहीं मेरा देवा ऐसा नहीं है पद्मा hi गलत होगी. ……… लेकिन पद्मा भी कहा गलत है देवा ने मेरी आँखों के सामने hi उसे पकड़ा उसके दूध दबाये उसे अपने लुंड से रगड़ रहा था उसे चुम रहा था उसके होठो को चाट रहा था चुम रहा था काट रहा था और वो भी खुल कर उसका साथ दे रही थी भला कोई मज़बूरी में ऐसा साथ देता है क्या? लेकिन पद्मा ये सब क्यों कर रही है? उसके चेहरे पे नयी दुल्हन की तरह शर्म की लाली थी देव के लिए उसकी आँखों में प्यार था कोई नफरत या मज़बूरी नहीं.

………….शायद देवा की नजदीकियों की वजह से दोनों hi बहक गए है. देवा तो जवान खून है hi और पद्मा को भी मर्द का सुख मिले हुए जमाना बीत गया है मैने नहीं सुना के आज तक उसका किसी गैर मर्द के साथ कोई चक्कर चला हो. वो तो कितनी शरीफ है. कभी किसी की तरफ आँख उठा के नहीं देखती. पर जो भी हो दोनों को hi कितना मजा आ रहा था. शायद घर में अकेले होते तो आज hi उनके बीच सब कुछ हो जाता. और पद्मा की बातो से भी लगा के वो पूनम की खातिर hi रुकी हुई है कोई और होता तो अब तक पद्मा ने भी अपनी टंगे खोल दी होती . दोनों hi अब तक आगे नहीं बढे है शायद रिश्ते की दीवार और उसकी मर्यादा का अहसास है दोनों को पर अब ये दीवार कमजोर पड़ती जा रही है. और किसी भी दिन ये आगे बढ़ जायेगे मए देवा से तो कुछ कह नहीं पाउगी इस मामले में पर कल hi पद्मा से घुमा फिर के बात कर लगी. क्या करू उसे भी सीधा तो बोल नहीं सकती के इस लुंड का ख्याल अपने दिमाग से निकल दे. और भी अभी मैने hi उसे अनजाने में इजाजत दी है देखते है कल क्या होता hae.Fir सावित्री सो जाती है.

उधर देवा अपने कमरे में आ जाता है. और आंखे बंद कर के लेट जाता है तभी उसे अहसास होता है के जैसे कोई कमरे में आया हो देवा झटके से आंखे खोल देता है और चारो तरफ देखने लगता है. और उठकर बैठ जाता है. पर उसे कोई नजर नहीं आ रहा था .

देवा – तुम जो कोई भी हो मेरे सामने आ जाओ मुझे तुम्हारी गंध आ रही है तुम मुझसे बच के नहीं रह सकते सामने आओ. मैने पकड़ लिया तो यही चीयर दुगा.

……….इतने रूखे स्वर में मुझसे क्यों बात कर रहे हो देव हमारी तो कोई दुश्मनी नहीं.

देवा – दुश्मनी नहीं तो मेरे कमरे में चोरी से आने का क्या कारन है.

…………..तो क्या मए ये समझू के नागलोक का युराज देव सिंह मुझसे दर गया?

देवा – सामने आ जाओ अभी पता चल जायेगा के दर किसे लग रहा है. मेरे हिसाब से तो तुम hi दर रहे हो क्यों की अदृश्य तुम हो मए तो आराम से अपने बिस्तर पे बैठा हु.

तभी वह वो प्रकट होता है. कुछ भयानक सा खतरनाक सा लम्बा चौड़ा 7 फूटे कद का व्यक्तित्व था उसका. उसका चेहरा तो बेहद क्रूर और भयानक था, लेकिन उसके चेहरे पे एक मुस्कान थी. वो बहे खोल के देवा के सामने खड़ा हो गया.

………लो मए सामने आ गया. क्या मेरे चेहरे पे तुम्हे दर नजर आ रहा है युवराज देव सिंह?

देवा - कौन हो तुम? एक मिनट तुम. . . . . ? तुम तो . . . .
 
अपडेट – 230

………लो मए सामने आ गया. क्या मेरे चेहरे पे तुम्हे दर नजर आ रहा है युवराज देव सिंह?

देवा - कौन हो तुम? एक मिनट तुम. . . . . ? तुम तो . . . .

बिलकुल ठीक पहचाना युवराज मए हु ……….. जीन…….जीन…. बादशाह हु मए देव सिंह.

देव – ओह्ह्हो जीन बादशाह आप है. स्वागत है आपका मेरी इस कुटिया में. कही डायलाग न मर देना के “स्वागत नहीं करोगे हमारा” आइये पधारिये. तो आप यु इस तरह रात के अँधेरे में मुझे मरने आये है वो भी उस अघोरी के कहने पर? अश्व्हर्य है, आपसे ऐसी कायरता की उम्मीद नहीं थी जीन बादशाह. क्यों के जैसा अभी आपने hi कहा हमारी तो कोई आपसी दुश्मनी है नहीं.

जब मुस्कराते हुए - नहीं देव मए तुम्हे यहाँ मरने नहीं आया. बस मिलने चला आया. जब के तुम्हे शायद नहीं पता लेकिन मुझसे मिलने की ख्वाहिश लिए लोग क़तर में खड़े होते है. और मए स्वयं तुमसे मिलने आया हु.

देवा – अहो भाग्य मेरे जो आप स्वयं यहाँ आये. लेकिन माफ़ कीजियेगा मैने तो नहीं बुलाया आपको, न hi मेरी कोई ख्वाहिश थी आप के दर्शनों की न hi मए किसी क़तर में खड़ा आपका इंतजार कर रहा था. फिर आपने तकलीफ क्यों की ?

जब – मजाक अच्छा कर लेते है आप और किसी को जवाब देना भी खूब आता है आपको. क्या खड़े खड़े hi बाटे करोगे देव मए तुम्हारा मेहमान हु बिन बुलाया hi सही लेकिन फ़िलहाल तो दुश्मन नहीं हु. मुझे बैठने के लिए नहीं कहोगे.

देवा का स्वर भी थोड़ा सामान्य हो गया – है ये मेरी गलती जरूर है जिसके लिए मए क्षमा चाहता हु. आप एक बादशाह है और आपका सम्मान आपका हक़ है. आइये बैठिये और अपने आने का कारन बताइये.

जब और देवा वही रखे सोफे पे बैठ जाते है.

जब - जैसा के तुमने अभी अघोरी का नाम लिया उससे जाहिर है के तुम्हे मेरी और अघोरी की मुलाकात का पता तो चल hi गया है, जो की अच्छी बात भी है मुझे वैसे भी कुछ छुपाने की जरुरत नहीं . बल्कि अब बात करना आसान हो गया मेरे लिए. तो देवा मए अघोरी के गुरु के किसी अहसान टेल दबा हुआ हु. उसने मेरी सहायता ऐसे वक़्त पे की थी जब मुझे सहायता की सख्त जरुरत थी. कोई दुष्ट मुझे धोखे से कैद कर चूका था. यदि उस अघोरी का गुरु तब मेरी सहायता नहीं करता तो मए अपना पूरा जनम उस कैद में hi बीतता और मेरे राज्य पर, जीन लोक पर, उस दुष्ट का शासन हो जाता. पर मए गढ़ की सहायता से आज़ाद हो गया और मुझे कैद करने वाले को मैने मौत की सजा भी दे दी. जिससे मेरा राज्य भी सुरक्षित हो गया. तभी मैने गढ़ को वचन दिया के मए यदि उनके किसी काम आ सकू तो मुझे कभी भी यद् करे मए उनकी सहायता करुगा. और उसी वजह से अब मए अघोरी की सहायता कर रहा हु. क्यों के ये उसके गुरु की इच्छा है. और मए अपने hi वचन में बंधा हुआ हु. लेकिन उसके गुरु से ये गलती हो गयी के उसने अघोरी जैसे धूर्त की सहायता के लिए मुझे चुना और मैने अघोरी को साफ कह दिया है के मए तुम्हारे खिलाफ होने वाली लड़ाई में अघोरी की मदद बस एक बार hi करुगा फिर चाहे उस लड़ाई का अंजाम जो कुछ भी हो मए उसके बाद अपनी मर्जी का मालिक खुद रहुगा के मए किस का साथ दू. तुम्हे मालूम hi होगा देवा जीन लोक और नाग लोक के रिश्ते कभी भी बुरे नहीं रहे है. इसीलिए आगे भी हमारे राजकीय रिश्तो पे इस बात का असर नहीं होना चाहिए. वो भी सिर्फ इसीलिए के मए मजबूर हु तुम्हारे खिलाफ खड़ा होने को. इस लड़ाई में मुझे जीन बादशाह न समझ कर अघोरी का एक सैनिक hi साम्हना बस मए इससे ज्यादा कुछ भी नहीं. लेकिन इस लड़ाई के बाद जैसा के मैने कहा मए अपने वचन से आज़ाद हो जाउगा. और अपनी मर्जी का मालिक भी. बस ये लड़ाई किसी तरह निकल जाये. और यदि उसके बाद भी हम दोनों hi जीवित रह गए जो की थोड़ा मुश्किल है. लेकिन यदि हम दोनों बच गए और तुम्हारी ये लड़ाई आगे जारी रही तो फिर इस अघोरी के खिलाफ मए स्वयं तुम्हारे साथ खड़ा मिलुंगा. क्यों की मए जनता हु के धरम तुम्हारे पक्ष में है. सिर्फ इसीलिए.

देवा – धन्यवाद महाराज और आपने जो यहाँ आ कर अपनी स्थिति को साफ किया वो भी सराहनीय है. पर मन लीजिये यदि ये अंतिम लड़ाई साबित हुई तो फिर? यदि इस लड़ाई में मए यानि नागलोक का युवराज hi न रहा तो? फिर आप अपनी निष्ठां किसे दिखा पाएंगे? और मान लीजिये के मेरे द्वारा आप hi ख़तम हो गए उस लड़ाई में तो भी आप कैसे मेरा साथ दे पाएंगे?

जब - ऐसा कुछ नहीं होगा देव. क्यों के आप आज एक अलग देव है कोई मामूली अघोरी नहीं. न hi पहले की तरह कोई अनजान नवयुवक, जिसे अघोरी ने हराया था. और फिर जिसके पास इच्छाधारी शक्तिया हो, जो मणिधारी हो, जो स्वर्ण मणि धरी हो उसका कोई जीन या अघोरी क्या बिगड़ सकता है. नुकसान में वो मुर्ख अघोरी hi रहेगा. लेकिन मए आपका दुश्मन नहीं हु मुझे बस यही बताना था आपको. और जब मए आपका दुश्मन hi नहीं हु तो आप मुझे मौत क्यों देंगे. है हरा जरूर सकते है.

देवा – जीन बादशाह मन के मए इच्छाधारी हु स्वर्ण मणि भी मेरे पास है लेकिन धूर्त का वार कब चल जाये कह नहीं सकते.

जब – देव इन मायावी शक्तियों के आलावा आपके दोस्तों के भी कमी नहीं जो आपके लिए अपनी जान की बजी आपसे पूछे बिना लगाने को नींद में भी तैयार है. जैसे आपके सरे साथी. जैसे वनराज, वंशराज, और सबसे बड़ी आपकी ढल आपका परम मित्र रूद्र. इन सब के होने के बावजूद भी यदि अघोरी की जीत हुई तो ये दुनिया का आखरी अजूबा hi होगा. जो के संभव नहीं देव.

देवा – बहोत ज्यादा जानकारी है आपको मेरे दोस्तों और दुश्मनो की जीन बादशाह.

जब – क्या करे भाई रखनी पड़ती है. और फिर हम जीन है हर तरफ हमारी नजर होती hi है.

देवा – अच्छी बात है जीन बादशाह मए आपकी कही बाटे यद् रखुगा.

जब - तो फिर अब हमें आज्ञा दे देव सिंह यदि हमारे लायक कोई भी कार्य हो तो यद् कीजियेगा.

देवा – जरूर

फिर जीन बादशाह वह से गायब हो जाता है और देवा भी पलट कर बिस्तर पे आता है के तभी उसे अपने बगल में कोई खड़ा महसूस होता है.

देवा – आप कब आयी महारानी पूनम.

पूनम मुस्करा के देवा को देखती है और उसके गले में अपनी बहे दाल के गॉड में बैठ जाती है.

पूनम – बस आपसे मिलने आयी थी देव लेकिन आप यहाँ व्यस्त थे तो मए चली गयी और फिर जब आप फुर्सत हुए तो आ गयी. क्या कह रहे थे जीन बादशाह?

देवा ने सब कुछ पूनम को बताया.

पूनम - अच्छा hi हुआ उन्होंने आ कर आपके सामने असलियत रख दी कही यही बाटे वो लड़ाई के बाद बोलते तो उन पर यकीन करना मुश्किल होता.

देवा – है सही बात है. उन्होंने भी यही सोचा होगा इसीलिए वो कुछ भी होने से पहले आये. क्यों की इस तरह वो हम से कोई पर्सनल दूषणमणि शुरू होने से बचना भी चाहते है और साहिब hi है क्यों की यदि इनसे हमारी कोई पर्सनल दुश्मनी शुरू हो गयी तो इसका बुरा प्रभाव सिर्फ हम पर नहीं बल्कि उनकी और हमारी नगरी के रहने वाले नागरिको पर भी पड़ेगा ज की बहोत बुरा होगा क्यों की दोनों hi नगरी के नगरवासी तो मासूम hi है न उनका तो किसी लड़ाई से कोई मतलब नहीं है.

पूनम - चलो ये तो हुई लड़ाई की बाते. पर अब माँ का क्या सोचा है देव? आज तो आपने खूब चोक छक्के मरे है.

देव – पूनम मेरा जी नहीं छह रहा है पद्मा काकी और अपनी माँ के साथ शारीरिक रिश्ता बनाने में. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है मए क्या करू. आज जो कुछ मैने पद्मा काकी के साथ किया उससे वो भी बहकने लगी थी लेकिन मेरा दिल hi मेरा साथ नहीं दे रहा है. मए बहोत कंफ्यूज हो रहा हु यार.

पूनम - देव आप बहोत अचे है इसीलिए ऐसा फील कर रहे है आप. लेकिन ये भी तो सोचो के इसके आलावा कोई और चारा भी तो नहीं है न. जब तक आपका वीर्य माँ की कोख में नहीं गिरेगा तब तक बाबू जी के ऊपर खतरा मंडराता रहेगा. क्या आपको उनकी जान की परवाह नहीं है? आखिर एक hi बात कोई आपको कितनी बार समझाए?

देव – ये कैसी बाटे कर रही हो पूनम मए अपनी जान देकर भी अपनी बाबू जी की जनन बचाना चाहुगा. ये तो सिर्फ सम्भोग की बात है.
 
धन्यवाद अलोक भाई लेकिन अभी तो देव की उलझन hi नहीं सुलझ रही है. मन के हालात ऐसे बन गए है लेकिन देव भी कोई ठरकी बीटा तो है नहीं के एक डैम से चढ़ hi जाये अपनी माँ पर और न hi सावित्री ऐसी ठरकी है के बेटे के सामने टंगे खोल दे कुछ समय तो लगेगा hi उन्हें रस्ते पे आने me.aur आप भी इतने समय से स्टोरी को फॉलो कर रहे है तो आपको भी ये अच्छा नहीं लगता की ये दोनों एक डैम से बीएड पे क्यों आ गए देव से आप रीडर्स की जो उम्मीदे है वही उसे अब तक रोके हुए है क्यों के आप सबकी नजर में देव क्या है ये आप बेहतर जानते है. सो वेट एंड वाच आपके रिव्यु के लिए धन्यवाद.
 
सबसे पहले तो आपकी शिकायत बिलकुल सही है. और हम इन्हे दूर करने की कोशिश कर रह है. पर असल में ये आप सबका स्टोरी के लिए प्रेम hi है जो आपको अपडेट छोटा लग रहा है वार्ना तो ये मस वर्ड फाइल के 10 पेज का अपडेट है जिसे लिखने में म्हणत लगती है. पर फिर भी हम कोशिश करेंगे के इसे और बढ़ा सके. आपके रिव्यु के लिए धन्यवाद.
 
सुझाव अच्छा है ऐसा भी हो सकता है, चलो देखते है कहानी किस की तरफ मुड़ती है, सामने तीन टारगेट तो है hi और इनको निशाना भी बनना है. तो पहला no. किसका लगता है देखते है. हमारा विचार था सुधा का no. पहले लगे वो यंग है उसका एनकाउंटर अजीब नहीं लगेगा. , सावित्री एक डैम से जमेगा नहीं. लेकिन पद्मा....?

क्या ये सही लगेगा की सावित्री और सुधा उसे देख ले और वो भी रेडी हो जाये ? इसमें पद्मा की किरकिरी कुछ ज्यादा नहीं हो जाएगी? बहु और संधान उसे ऐसी हालत में देख ले क्या ये अच्छा होगा स्टोरी के लिए? क्यों की कहानी इन्सेस्ट तो है नहीं के सब ठरकी hi भरे हुए हो और सभी अपने कपडे उतर दे. हम्म्म्म. सोचना पड़ेगा और प्लाट को भी चेंज करना पड़ेगा. चलिए आगे देखते है क्या होता है. इसीलिए कहते है कुछ भी लिखने से पहले साला बहोत कुछ सोचना पड़ता है. पर आप लोग पढ़िए सोचने का काम हम कर लगे. मिलते है नेक्स्ट ुपड़तै में जल्द hi.
 
अपडेट – 231

देव – ये कैसी बाटे कर रही हो पूनम मए अपनी जान देकर भी अपनी बाबू जी की जान बचाना चाहुगा. ये तो सिर्फ सम्भोग की बात है.

अब आगे….

पूनम – तो फिर देर किस बात की आगे बढिये देव.

देव – लेकिन इन सब में पद्मा काकी को घसीटना अच्छा नहीं लग रहा है और उन्हें माँ की आँखों के सामने यु बेइज्जत करना भी सही नहीं लग रहा.

पूनम - ओह्ह्ह देव इसमें बेइज्जत होने वाली कोई बात नहीं. आप कुछ ज्यादा hi सोच रहे आहे. देखो एक औरत hi औरत को समझ सकती है और सावित्री माँ को कुछ देर तो मेरी माँ पे क्रोध आएगा लेकिन आखिर वो भी एक औरत है और एक औरत की फीलिंग को उसकी ख्वाहिशो को वो भी समझती है और फिर ये भी तो सोचो के आप दोनों को उस रूप में देखने के बाद hi माँ का संकोच भी काम होगा और वो पूरे मन से आपकी होना चाहेगी. यु तो आप उन्हें बेहोश कर के भी उनके साथ सम्भोग कर के उनकी कोख को अपने वीर्य से भर सकते है लेकिन उस से वो मक़सद पूरा नहीं होगा. उसके लिए उनका पूर्ण समर्पण चाहिए और वो यु hi तो अपने बेटे के सामने कपडे नहीं उतर देगी न.

देव – कह तो तुम सही रही हो पूनम लेकिन…….

पूनम - अब लेकिन वेकिन छोडो और ये सब सोचना बंद करो. आप अपने काम को आगे बढ़ाओ और मुझे बताओ की माँ को आगे कैसे बढ़ाओगे आप. क्यों की मेरी माँ के साथ आपने नजदीकी बना के सावित्री माँ को दिखा दी है. अब आगे क्या?

देव कुछ देर आँखे बंद कर के सोचता है और फिर मुस्कराते हुए आँखे खोल देता है और पूनम को देखने लगता है.

पूनम - मतलब शेर जग गया. अब बता भी दो.

देव – आज मए माँ को यहाँ बुलाऊंगा. और उन्हें अपना शेर दिखाऊगा.

पूनम - नीस जो अहेड. मए चलती हु आप अपना काम पूरा कीजिये बस ये यद् रखियेगा की आपकी ताक़त बहोत ज्यादा है और ये दोनों इस उम्र में आपकी पूरी ताक़त नहीं झेल पायेगी तो जरा आराम से. ok bye

देव पूनम का हाथ पकड़ के अपने ऊपर खिंच लेता है – अरे मेरी जान जाती कहा है तू भी तो मिलती जा इस शेर से . इतना कह कर देव पूनम का हाथ पकड़ के अपने खड़े लुंड पे रख देता है जो अभी अंडरवियर में hi था.

पूनम जोर से देव का लुंड मसल देती है – मुझे नहीं देखना इसे. क्यों की अगर ये मेरे सामने आया न कपडे उतर के तो इस शेर का शिकार मए कर दूगी फिर ये किसी का शिकार नहीं कर पायेगा. यद् रखना. अब मए चलती हु आप अपने नए शिकार की तरफ बढ़ाओ इसे. और कल मेरी माँ की तरफ. और है मेरी प्यारी सुधा भाभी को प्यासा मत छोड़ना उसे भी चाहिए ये. चलती हु.

देव पूनम के जाते hi अपने पूरे कपडे उतर देता है और एक चादर कमर तक ले के के लेट जाता है.

देव – maaaaaaaaaa………maaaaaaaaa…… सो गयी क्या? मेरे पास आओ माँ…… मुझे बहोत प्यास लगी है. बहोत प्यासा हु मए माँ……….. मेरे पास आओ. माआ………..

उधर सावित्री जो गहरी नींद में सो रही थी. उसे ये महसूस होता है के देव उसे पुकार रहा है. एक झटके से उसकी आंखे खुल जाती है.

सड़ मन में – देव….. क्या देव ने मुझे पुकारा? लेकिन देव तो यहाँ नहीं है. फिर मुझे ऐसा क्यों लगा के जैसे देव मुझे पुकार रहा है. शायद ये मेरा वहां hi होगा.

सावित्री फिर सोने की कोशिश करती है लेकिन उसका दिल नहीं मंटा तो वो फिर से उठकर बैठ जाती है.

सड़ मन में – नहीं नहीं मुझे देव को देखना चाहिए मुझे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे देव को बहोत प्यास लगी hae.lekin उसे प्यास लगी है तो पानी तो वही रखा है. वो मुझे क्यों बुलाएगा. चलो चल कर देखती हु.

सावित्री ऊपर को जाती है और देव के दरवाजे को हल्का सा दबती है तो देव का रूम खुला hi हुआ था. अंदर नाईट लैंप जल रहा था और देव सामने बिस्तर पे सो रहा था. गहरी नींद में.

सावित्री – मए भी पागल हु ये तो आराम से सो रहा है. लेकिन ये एक में भी बिना कपड़ो के क्यों सो रहा है. काम से काम चादर तो पूरी ओढ़ लेता कमर तक hi ओढ़ के लेता हुआ है.

सावित्री देव के पास जाती है और उसकी कमर के पास बैठ जाती है. उसके सर पे प्यार से हाथ फेरती है तभी उसकी नजर देव की चौड़े सीने पे जाती है पहलवानो की तरह उसका उभरा हुआ सीना देख के उसकी होठो पे मुस्कान आ जाती है.

सावित्री – वाह बीटा तेरा बदन तो बहोत मस्त बन गया है. एक वो दिन था जब बाला जैसे कुत्ते ने तुझे पीट दिया था उस दिन मए बहोत दर गयी थी. के शायद तू भी रघु की तरह कमजोर है लेकिन आज तुझे देख कर गर्व महसूस होता है के मेरे बेटे जैसा पूरे संसार में कोई नहीं आज किसी की हिम्मत नहीं इस घर की तरफ आँख उठा के देखने की. जीते रहो मेरे लाल. लेकिन पगले जल्दी से शादी कर ले और मेरी पूनम बहु को भी जिंदगी का सुख लेने दे. ये पठार सा शरीर बना के अकेला hi सो रहा है.

खुद से बाटे करते हुए hi सावित्री के हाथ न जाने कब देवा की मजबूत छाती पे चलने लगते है और उसकी साँसे भरी होने लगती है. तभी उसकी नजारा थोड़ा नीचे चादर में बने बहोत बड़े उभर पे जाती है तो सावित्री एक बार देवा के चेहरे की तरफ देखती है और फिर धीरे से चादर को देवा की कमर से हटा देती है सामने फ्रेंची अंडरवियर में देवा का विशाल लुंड समां नहीं प् रहा था. और एक बहोत बड़ा उभर वह बना हुआ था नींद में hi देवा का लुंड खड़ा हो चुक्का था और अंडरवियर में ऊपर तक एक लम्बा और मोटा रोड का शेप बना रहा था.

सावित्री की सिसकारी निकल जाती है ये सन देख कर वो किसी सम्मोहन में बंधी हुई सी देवा के जिस्म को ऊपर से नीचे तक निहार रही थिओ. और अब उसके हाथ देवा के पूरे जिसमे पे घूम रहे थे बस उसने देवा के लुंड को नहीं छुआ था अब तक. लेकिन सीने से कमर तक उसके हाथ बार बार घूम रहे थे.

सावित्री - ओह्ह्ह्हह्ह मा मुझे ये क्या हो रहा है ये मेरा बीटा है सागा बीटा लेकिन मए इसके बदन के साथ खेल रही हु मेरे हाथ रुक hi नहीं रहे है उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ कितना बड़ा है देवा का इसके बाबू जी से भी बड़ा…..

लेकिन मए ये क्यों कर रही हु. मेरे देवा पर पूनम का हक़ है.

……………लेकिन पद्मा भी तो कर रही थी न वो तो खुल के मजे ले रही थी अपने होने वाले दामाद से फिर ये तो मेरा बीटा hi है. और मए सिर्फ छू कर देख hi रही हु कुछ और तो नहीं करने वाली मए.

देवा का प्लान कामयाब हो रहा था सावित्री के मन से अब रिश्ते का बोझ उतरने लगा था. है अब वो एक बोझ hi तो बन कर रह गया था हालत hi ऐसे हो चुके थे. वो धीरे धीरे अपना हाथ देवा के लुंड के ऊपर रख देती है. अंडरवियर में होने के बावजूद भी सावित्री को देवा का लुंड फुल हार्ड और गरम महसूस होता है तो उसकी आंखे बंद हो जाती है और वो खुद भी गंगना जाती है. और देवा के लुंड को अपनी मुट्ठी में भरने की नाकाम कोशिश करती हुई उसे दबाने लगती है दूसरा हाथ उसका अपनी निघ्त्यि में छुपी रास बहती बुर पे पहुंच जाता है. और अब वो एक हाथ से अपनी बुर सहला रही थी और दूसरे हाथ से देवा का लुंड. उसकी आंखे बंद हो चुकी थी.

काफी देर यु hi देवा का लुंड सहलाने के बाद वो अचानक देवा का लुंड जोर से दबा देती है और हलकी सी चीख के साथ झाड़ जाती है. लेकिन देवा का लुंड तो अब तक वैसा का वैसा तन के खड़ा था.

थोड़ी देर के बाद सावित्री अपनी आंखे खोलती है और सीधा देवा को देखती है जो अब भी आंखे बंद किये आराम से सो रहा था उसके चेहरे पे कोई उत्तेजना या हड़बड़ी न देख कर सावित्री शांत हो जाती है.

सावित्री - ये मुझे क्या हो गया है मए अपने hi बेटे का लुंड सहलाते हुए आज पहली बार इतना झड़ी हु जितना कभी “इनका” अपने अंदर ले कर भी इतनी जल्दी नहीं झड़ती शायद बहोत दिनों से मेरा पानी नहीं निकला इस वजह से हो. पर ये देवा का लुंड कितना खतरनाक है मए कितनी जोर जोर से दबा रही थी लेकिन इसका तो एक बूँद पानी नहीं निकला अब तक. कोई और होता तो अब तक झाड़ जाता. अचानक सावित्री झुकती है और देवा के चेहरे पे चुम्बनों की बारिश कर देती है फिर उसकी छाती पे चूमती हुई नीचे आती है और दो चुम्बन देवा के खड़े लुंड पे दे देती है चूमते समय देवा के लुंड की खुशबू सावित्री के नक् में जाती है जिससे वो मदहोश हो जाती है तभी देवा हल्का सा हिलता है तो सावित्री देवा को छोड़ के कड़ी हो जाती है.

सावित्री कुछ देर वेट करती है और फिर मुस्कराती हुई देव टके गाल पे किश करने को झुकती है लेकिन तभी देव अपना चेहरा सावित्री की तरफ घुमा देता है जिससे सावित्री के होठ सीधे देव के होठो से मिल जाते है सावित्री वही रुक जरती है लेकिन देव अपने होठ हलके से खोल देता है जिससे सावित्री का निचला होठ देव के होठो के बीच पहुंच जाता है सावित्री की आंखे बंद हो जाती है और वो भी देव का होठो चूसने लगती है इधर देव भी सावित्री के होठ को चूसने लगता है 1-2 मिनट सावित्री होठ चूसने में गम रहती है लेकिन फिर अचानक सीढ़ी हो जाती है उसका चेहरा उत्तेजना में लाल हो चुक्का था अगर अभी देव उठकर सावित्री को पलंग पे खिंच लेता तो सावित्री शायद तुरतंत उसकी बहो में समां जाती . लेकिन ऐसा हुआ नहीं. सावित्री देव को देखती रही कुछ देर बाद खुद को संभल के मुस्करा देती है और उसकी चादर को सीने तक ओढ़ा के चली जाती है. सावित्री के कमरे से निकलते hi देवा आंखे खोल देता है. और मुस्करा के बंद दरवाजे को देखता है .

इधर सावित्री सीधा अपने कमरे में बने वाशरूम में जाती है और अपनी गीली छूट को देखती है फिर अपनी अपनी छूट को धोकर वही रखे टिश्यू पेपर से पांच लेती है और पानी पी कर अपने बिस्तर पर आ कर लेट जाती है.

सावित्री - आज क्या किया ये मैने? अपने hi बेटे के साथ? क्या ये सही है?

ये साली छूट hi हर मुसीबत की जड़ है इसी के बहकावे में आ कर आज मैने अपने hi बेटे का लुंड उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ क्या किया मैने. और फिर उसके होठ भी चूसे ……… पर देवा का लुंड है बहोत जबरदस्त अगर वो मेरा बीटा न होता तो शायद एक बार तो मए ले hi लेती. मैने आज तक अपने पति के आलावा किसी और को नहीं देखा. क्यों की कोई और मुझे इस लायक लगा hi नहीं लेकिन मेरा देवा तो करोडो में एक है. पर वो मेरा बीटा है मेरा पति नहीं चलो जो हुआ सो हुआ अब ऐसा नहीं होगा. मए खुद पे कण्ट्रोल रखूगी. हलाकि देव के बाबू जी ने बताया था के उनका रिश्ता उनके दोस्त सुन्दर लाल की बीवी के साथ है वो तीनो एक hi बिस्तर पे चुदाई करते है. अगर मए देव के साथ कर भी लू और इसके बाबू जी जान भी जाये तो मुझे कुछ कह नहीं पाएंगे. लेकिन मेरा मन hi नहीं मान रहा काश देवा मेरे लिए अजनबी होता तो कितना अच्छा होता. लेकिन देवा जैसे गबरू जवान मेरा बीटा है ये भी कोई काम खुशकिस्मती वाली बात नहीं. यही सब सोचते सोचते सावित्री को कब नींद आ गयी उसे पता hi नहीं चला.
 
अपडेट - 232

इधर सावित्री सो जाती है उधर देवा भी सो जाता है. कल पता नहीं क्या होने वाला है. जो भी होगा पर होगा इंट्रेस्टिंग.

दूसरे दिन सुबह नाश्ते की टेबल पर दिया देवा और सावित्री बैठे नाश्ता कर रहे थे तो देवा के मन में शरारत आती है.

देवा – क्या बात है आज कोई बेहद खूबसूरत लग रहा है.

दिया और सावित्री दोनों hi देवा को देखने लगती है. तो देवा दिया को इशारा कर के सावित्री के लिए कह देता है.

दिया - है मए भी यही सोच रही थी ऐसा लग रहा है जैसे कोई पूनम का चाँद हो जैसे कोई नयी नवेली दुल्हन हमारे घर में आयी हो. सावित्री देवा और दिया दोनों को देख रही थी.

दिया - क्या बात है माँ आज तो आप कुछ ज्यादा hi चमक रही है.

सावित्री का चेहरा शर्म से लाल हो जाता है.

देवा – अरे देखो तो गाल भी नयी दुल्हन की तरह शर्म से लाल हो रहे है. क्या बात है माँ. ये अचानक रातो रत क्या हुआ?

सावित्री मन में - बेशरम तेरा खम्बा देख लिया था उसी का असर है अब तक मेरे गलो पर.

देवा – अच्छा तो ये बात है?

सावित्री हड़बड़ा के? क्या कौन सी बात? कोई आवाज़ आयी क्या मेरे मुँह से?

दिया - अरे नहीं माँ आपने तो कुछ नहीं कहा.

सावित्री देवा को देख कर - तो फिर?

देवा – मतलब मए समझ गया क्या बात है?

सावित्री - अच्छा बहोत ज्ञानी बन गया है बिना बताये hi पता चल गया तुझे?

देवा – है पता चल गया.

सावित्री - अच्छा तो फिर बोल क्या बात है ?

देवा - मैने बोल दिया तो तुम्हारा क्या होगा मेरी प्यारी माँ ?

सावित्री - चल बाटे न बना बता क्या सोचा तूने?

देवा – मए ये समझा के आज आप जाएगी मंदिर वो भी बाबू जी के लिए और बाबू जी का जहा नाम हो वह आपका चेहरा ऐसे hi खिल जाता है. इसीलिए आज आप चमक रही है और बाबू जी से मिलने भी जाओगी न इसीलिए ऐसे बिजलिया गिरा रही हो है न?

सावित्री - हे राम क्या करू मए इसका अरे कुछ तो शर्म कर. ऐसा कुछ नहीं और तुम दोनों मुझे यु छेड़ना बंद करो अब. और सुन देवा चल तू hi ले चल हमें पहले मंदिर फिर हॉस्पिटल तेरे बाबू जी के पास.

दिया - क्या कोई और भी जा रहा है माँ?

सड़ – है बीटा वो कल पद्मा आयी थी न वो भी जाना चाहती है तो इसीलिए हम दोनों जा रही है.

दिया - ये तो बहोत अच्छी बात है माँ आप लोग हो आइये कल मए इनके (रघु) के साथ जोगी बाबू जी को देखने. ये भी कह रहे थे जाने को.

देवा अब दिया को छेड़ने लगता है - कभी हमें भी सेवा का मौका दो न भाभी क्या जब देखो भाई के साथ घूमती रहती हो.

दिया - मिलेगा देवर जी आपको hi तो सरे मौके मिलेंगे जिंदगी भर बस थोड़ा सबर कर लीजिये.

सावित्री - क्या हुआ है तुझे आज? पहले माँ को छेड़ने लगा और अब भाभी को. लगता है पूनम को जल्दी लाना पड़ेगा तेरा भी कोई भरोसा नहीं अब.

देवा – उसे जब आना होगा आएगी फ़िलहाल आप दोनों हो न मुझे सँभालने के लिए.

सड़ – अब मार खायेगा या चलेगा.

देवा – चलो डार्लिंग चलते है. Bye भाभी लव यू.

फिर देवा और सावित्री रर में बैठकर पद्मा के घर आ जाते है.

बहार hi पूनम कड़ी आंगन में कुछ काम कर रही थी. देवा को देखते hi पूनम आगे आती है और दरवाजा खोल कर सावित्री के पैर छू लेती है.

देव – कभी हमारे भी पैर छू लो तुम तो न खुद छूती हो न हमें छूने देती हो

देव की बात सुन कर पूनम शर्मा जाती है और नीचे सर कर के मुस्कराने लगती है.

सड़ – जग जग जियो बीटा. और तू आज कुछ अलग hi मूड में है तू बाज़ आजा बता रही हु वार्ना अच्छा नहीं होगा देवा. पूनम बीटा तुम्हरी माँ तैयार हुई या अब तक सज रही है?

पूनम हस्ते हुए – बस हो गयी है तैयार आप आइये न.

सड़ – नहीं रे तू अपनी माँ को hi भेज दे वार्ना यही समय लग जायेगा.

इतने में पद्मा बहार आ जाती है ब्लू कलर की साड़ी में उसका गोरा बदन चमक रहा था. वो भी एक बम लग रही थी.

देवा – हे भगवन अब मेरा क्या होगा. मुझे इन दोनों से बचाना.

सड़ – तू फिर शुरू हो गया?

पद्मा - क्या हुआ ?

सड़ – अरे कुछ नहीं, पता नहीं आज इसे क्या हुआ सुबह से पहले मुझे छेड़ रहा था फिर अपनी भाभी को छेड़ने लगा फिर यहाँ आकर पूनम को और अब तुम्हे भी छेड़ रहा है.

पद्मा - दामाद जी हम तो बुद्धि हो गयी है. पूनम को ले जाओ न ब्याह के हम तो तैयार बैठे है. शादी करने के लिए.

देवा – अरे नहीं सासु माँ जो मजा पुराणी शराब में है वो नयी में कहा?

पूनम – क्या कहा आपने पुराणी शराब हैं?

सड़ – पूनम बीटा तू hi इसे सुधर सकती है हमारे बस का नहीं ये सैंड.

देवा – अरे माँ अब चलो भी. वार्ना ये पूनम भी शुरू हो जाएगी.

फिर पद्मा और सावित्री गाडी में बैठ जाती है और देवा पूनम को bye बोल के गाडी बढ़ा देता है आगे.

तीनो बाते करते हुए मंदिर की तरफ आ जाते है सावित्री आज मन hi मन थान के बैठी थी के पद्मा से देवा के बारे में बात जरूर करेगी लेकिन उसे बस इंतजार था के पद्मा से अकेले में बात करने का मौका मिले क्यों की वो देवा के सामने बात नहीं करना चाहती थी . थोड़ी hi देर में मंदिर पहुंच जाते है जहा तीनो मिल कर पूजा करते है और फिर वापस आने लगते है तो पद्मा का पैर वही पे कीचड़ में चला जाता है.

पद्मा - ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ो अब ये क्या मुसीबत हो गयी.

सावित्री - क्या हुआ पद्मा ?

पद्मा - देखो न पैर कीचड़ में पद गया पूरी संदेल के साथ साथ पैर भी ख़राब हो गए.

सावित्री - कोई बात नहीं यही मंदिर के पीछे नदी है न वह से धो लो जा कर.

सावित्री गाडी की तरफ आती है जहा देवा बैठ चूका था.

देवा – क्या हुआ माँ पद्मा काकी कहा रह गयी.

सावित्री - अरे वो उसका पैर कीचड़ में पद गया तो मंदिर के पीछे गयी है नदी पे धोने अभी आ जाएगी.

देवा – क्या माँ आपने उन्हें अकेले hi भेज दिया कही नदी में पैर फिसल गया तो एक नयी मुसीबत बन जाएगी आप भी चली जाती न.

सावित्री - अरे ऐसा कुछ नहीं होगा. फिर भी अब मए तो नहीं जोगी तू hi चला जा इतनी फ़िक्र है अपनी सास की तो.

देवा गाड़ी से निकलता है और मंदिर के पीछे की तरफ चल पड़ता है. पीछे जाकर वो दूर से देखता है के पद्मा पैर धो चुकी है नदी में और अब झाड़ियों के पास जा रही थी जो एक तरफ हो कर लगी थी.

देवा चुपके से वह जाता है तब तक पद्मा अपनी साड़ी उठा कर पेंटी उतर चुकी थी शायद वो मूतने hi आयी थी. देवा उसे देखता hi रह जाता है ऐसी मस्त गोरी और भरी गांड देख कर देवा का लुंड खड़ा हो जाता है सुबह की धुप में पद्मा के गोर चूतड़ भी चमक रहे थे और उसका भूरा छेड़ भी.

देवा धीरे धीरे पद्मा के पीछे जाता है और चुप चाप खड़ा हो के देखने लगता है पद्मा को बिलकुल भी पता नहीं चलता के देवा उसके करीब खड़ा है. मूतने के बाद वो वैसे hi साड़ी उठा कर कड़ी होती है और पेंटी चढ़ा hi रही थी के देवा उसे अपनी बहो में भींच लेता है और पलटा के सीने से लगा लेता है पहले तो पद्मा घबरा जाती है लेकिन जब देखती है के देव hi है तो वो कुछ नहीं कहती देव भी पद्मा की नंगी गांड को अपने हाथ में भर के भींचने लगता है. और दूसरा हाथ सीधा पद्मा की झांटो से भरी छूट पे रख के मसलने लगता है इस दोहरे हमले से पद्मा जो कई बरसो से वैसे hi प्यासी थी वो सिसक उठती है. और हाथ पीछे ले जाकर देव के सर को सहलाने लगती है देव भी अपने गरम होठ पद्मा की गार्डन पे रख के गार्डन hi चूसने लगता है. पद्मा पागल हुई जा रही थी.

पद्मा सिहर उठती है. और घूम कर देव के गले पे किश करने लगती है देव भी पद्मा की गांड को दबाते हुए उसकी गार्डन को चूमे जा रहा था. उसने पद्मा की गांड को हल्का सा फैला कर अपनी ऊँगली गांड की दरार में चलनी चालू कर दी जिससे पद्मा ने और कास के देवा को जकड लिया अब उसकी नंगी झांटो से भरी छूट देवा के खड़े लुंड से एकदम चिपक गयी थी.

उधर सावित्री - क्या बात है बड़ी देर लगा दी अब तक तो इन लोगो को आ जाना था चलो देखती हु कहा रह गए……

दोस्तों अब तो सावित्री वो देखने वाली है जो उसे भी गरम करने के लिए काफी है. क्या सावित्री देख पायेगी ये सब???????
 
माय डिअर रीडर्स आप लोग परेशां न हो और ये भी न समझे के हम स्टोरी छोड़ कर चले गए है, ाक्टुअलय ये मंथ बहोत ज्यादा बिजी था अस आप सब जानते hi होंगे के ये मंथ ऑडिट का है. और अस ा का हम उसमे बहोत ज्यादा बिजी थे लिखे हेलल. इसीलिए मए न तो आप लोगो को यहाँ प्रॉपर रिस्पांस दे प् रहा अतः न hi कोई बेहतर अपडेट बूत नाउ ी ऍम ऑलमोस्ट फ्री . इसीलिए आज अपडेट आ जायेगा रत तक ी होप आप लोग समझेंगे.
 
अपडेट – 233

उधर सावित्री - क्या बात है बड़ी देर लगा दी अब तक तो इन लोगो को आ जाना था चलो देखती हु कहा रह गए……

अब आगे……

ये सोच कर सावित्री भी मंदिर के पीछे पहुँचती है तो उसे कोई नजर नहीं आता वो यहाँ वह ढूंढने लगती है तभी वो झाड़ियों के करीब पहुँचती है तो उसे सिसकियों की आवाज सुनाई पड़ती है. सावित्री के पैर वही रुक जाते है और वो झाड़ियों में झांक कर देखने लगती है तो सामने का नजारा देख कर उसकी आँखे फ़ैल जाती है सामने पद्मा की नंगी गांड थी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और देवा उसे खुद से लिपटाये हुए उसकी गांड को सहला रहा था देवा की एक ऊँगली पद्मा की गांड की दरार में चल रही थी. और वो अपनी छूट को देवा के लुंड पे घिस रही थी. दोनों के होठ एक दूजे में समाये हुए थे और दोनों hi उस अद्भुत किश का मजा ले रहे थे.

सावित्री को बहोत तेज गुस्सा आता है वो आगे बढ़ कर उन्हें चिल्लाने hi वाली थी के देवा पद्मा को छोड़ देता है. पद्मा भी होश में आती है और झट से पेंटी ऊपर कर के साड़ी नीचे कर लेती है.

पद्मा थोड़ा सख्ती से - देवा क्यों मुझे बहकता है रे मैने कल साफ साफ कहा था न तुझ पर पूनम का हक़ है तू क्यों मुझे उसकी नजर में गुनहगार बनाना चाहता है. तू मुझे कितना भी तर्क देकर समझा ले लेकिन सच्चाई नहीं बदल सकती समझ रहे हो न.

देवा - काकी जरूरते हर इंसान की होती है जिन्हे वो अपने hi बच्चो से पूरा नहीं करेगा तो क्या बहार जायेगा? और सोचो अगर आप यही सब बहार किसी के साथ करो तो पूनम को अच्छा लगेगा?

पद्मा - लेकिन मए कहा कर रही थी अब तक बहार भी? वो तो तूने hi मेरी आग भड़का दी है मए तुझे रोक hi नहीं पति हु. ऐसा मत कर देवा मए तेरे आगे हाथ जोड़ती हु, अपना प्यार मेरी पूनम के लिए बचा कर रख और अगर तुझसे रहा नहीं जाता तो मए कल hi तेरी साहड़ी करवा देती हु सावित्री बहन से कह कर. मए तो मन कर hi नहीं रही हु न शादी करवाने को. सभी तैयार है बस तू hi रोके हुए है सबको.

देवा – अरे काकी तुम क्या माँ को कहोगी वो तो खुद hi कह रही है बस हम hi अभी नहीं चाहते न मए न पूनम.

पद्मा - तो फिर ……….

देवा – अभी नहीं काकी ये सब बाटे बाद में कर लेना माँ इंतजार कर रही होगी.

पद्मा - लेकिन घर पे भी तो ये सब नहीं कह पति मए आखिर तुझसे कहा बात करू ये सब मुझे अजीब लग रहा है.

देवा - अच्छा एक काम करो. हॉस्पिटल में चलो वह मेरा अपना केबिन बना हुआ है वही आ जाना माँ तो बाबू जी के पास बैठेगी न तब कर लेना वह पे मुझसे बात अब चलो.

सावित्री भी ये सब सुनती है तो तेजी से पलट कर गाड़ी में आकर बैठ जाती है.

थोड़ी देर बाद hi देव और पद्मा भी आ जाते है तब तक सावित्री अपनी तेज दौड़ती साँसों पे काबू प् चुकी थी.

सावित्री - अरे बहोत देर लगा दी तुम दोनों ने कहा रह गए थे.

पद्मा - अरे वो मए जरा फ्रेश होने लगी थी.

सावित्री मजाक में - देव के सामने hi ?

पद्मा झेंपते हुए – अरे नहीं नहीं वो तो मए झाड़ियों में थी देव आया तो मुझे ढूंढने लगा फिर आवाज़ लगाई तो मैने झाड़ियों से आवाज़ दी और देव दूर रह कर मेरा इंतजार करने लगा. तो उसी में हम दोनों को देर हुई

सावित्री - ओह्ह्ह ऐसा क्या? मए तो कुछ और hi समझ बैठी थी .

पद्मा घबरा के - k..k… क्या समझी आप ?

तब तक देव भी मुस्कराते हुए गाड़ी चलने लगा था.

सावित्री - अरे कुछ नहीं तुम इतना घबरा क्यों रही हो जैसे कोई चोरी कर रही थी. मए तो यु hi कह रही हु.

बस इसी तरह की उलझती सुलझती बाटे करते हुए वो लोग हॉस्पिटल पहुंच जाते है दन को देखने लेकिन सावित्री का ध्यान अब देव और पद्मा में भटक चूका था. दिखावे के लिए वो दन के पास जाती है. साथ hi देव और पद्मा भी जाते है. जहा पे दन तो बेहोश hi पड़े थे. थोड़ी देर तक तीनो वही बैठे रहते है. और बाते करते है. फिर

देव – माँ आप लोग बैठिये मए जरा अपने केबिन में हु वह डीआरएस. से भी मिल लगा और बाबू जी के लिए बात कर लगा.

सावित्री - है ठीक है बीटा. अच्छा सुन न ये पद्मा को भी ले जा ये भी हॉस्पिटल में घूम लेगी यहाँ बैठे बैठे तो बोर hi होगी मए आ जोगी 1 घंटे बाद . वैसे भी मए कुछ समय इनके साथ अकेली रहना चाहती हु.

देव – ok माँ , आओ काकी चले.

पद्मा भी देव के साथ चल देती है. सावित्री उन्हें जाते हुए देखती है तो मुस्करा देती है. उनके जाने के बाद.

सावित्री - सुनिए जी अब आपका देव बड़ा हो गया है. बस आपका hi इंतजार है जल्दी से आप उठ जाइये तो देव को घोड़ी चढ़ाया जाये. आप नहीं जानते आप के बिना तो जैसे सब की दुनिया hi रुक गयी है. सरे काम रुक से गए है. मए भी आपके बिना आपके प्यार के बिना अधूरी hi हु खुद को कैसे काबू कर के रखा है बस मए hi जानती हु. वो रोज आपका मुझसे प्यार करना मुझे झिंझोड़ देना रोज रत दिन मेरे शरीर का अंग अंग हिला देना बहोत याद आता है जल्दी से उठ जाइये न मुझे आपकी जरुरत है अब ये जुदाई बर्दाश्त नहीं होती. आप के प्यार की प्यास मेरे दिल में मेरे जिस्म में आग की तरह भड़क रही है.

इतना कह कर सावित्री दन के सीने से चिपक जाती है और उसके चेहरे को चूमने लगती है. उसकी शर्ट के बटन खोल कर उसके बालो से भरी छाती को सहलाने लगती है. और फिर उसके होठो पे अपने होठ रख कर चूसने लगती है. साथ hi धीरे धीरे अपनी चूचियों को भी दन की छाती से रगड़ने लगती है.

सावित्री का ध्यान इस तरफ नहीं गया के उसके बदन की रगड़ से और उसकी गरम बातो से दन का लुंड भी खड़ा होता जा रहा है.

सावित्री अपनी hi धुन में दन के बदन से अपने बदन को रगड़े जा रही थी. उसके निप्पल ब्लाउज में तन चुके थे उसकी बुर भी पानी पानी हो चुकी थी जिसकी गंध शायद दन के नथुनों में पहुंच रही थी क्यों की उसके माथे पे पसीने आने लगे थे.

सावित्री थोड़ा उठ के दन के ऊपर आयी और अपनी साड़ी का पल्लू हटा कर ब्लाउज के दो बटन खोल दिए और दन का चेहरा पकड़ के अपनी चूचियों के बीच रगड़ने लगी और उसके बालो को सहलाने लगी मनो दन ने खुद अपना मुँह उसकी चूचियों से चिपका दिया हो.

सावित्री - उठो न जी देखो मए आपके बिना कितना तड़प रही हु उठो और मुझे रगड़ के छोड़ो अभी इसी वक़्त मेरी छूट में अपना लुंड दाल के इसे फाड़ डालो मए नहीं रह सकती आप के बिना, आप के लुंड के बिना, आपके प्यार के बिना मुझे पानी बहो में भींच के खूब जोर जोर से छोड़ो. mujhe.aaaaaaaaahhhhhhssssssssseeeeeee आह्ह्ह्ह

उठो न प्लीज मुझे आपकी जरुरत है. आपकी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता आप तो मेरी जान हो यु मत तड़पाओ मुझे उठ भी जाओ.

दन के पजामा में उसका लुंड पूरा तन चुक्का था. और अचानक उसके हाथ में हलकी सी हरकत हुई और हाथ धीरे धीरे उठने की कोशिश करने लगा लेकिन ऐसा लगा मनो किसी शक्ति ने उसके हाथो बांध रखा है.
 
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