Fantasy इच्छाधारी देव - Page 10 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट - 67

फिर सब लोग दिग के घर से निकल के मॉल में आ जाते है जहा वो लोग भरपूर शॉपिंग करते है. देवा वह पर पूनम को बोलकर चन्नो के लिए भी 8-10 लेटेस्ट ड्रेसेस ले लेता है और उस के लिए मेकउप भी और कुछ लेडीज आइटम्स. यहाँ रूद्र और नीलम भी दिल खोल कर शॉपिंग करते है. फिर वो लोग पूरा सामान गाड़ी में दाल कर एक खूबसूरत गार्डन में आ जाते है. और एक जगह पेड़ की छाँव में बैठ जाते है. हलाकि भीड़ भाड़ नहीं थी इस वक़्त इसलिए इन लोगो को खूब मजा आ रहा था.

रूद्र – देवा कितने समय बाद हम लोग ऐसे सुकून से बैठे है. यद् है हम तुम्हरे महल में भी ऐसे hi गार्डन में बैठा करते थे. जब तुम मेरी भाभी के सन्देश का इंतजार करते थे. उस कबूतर द्वारा.

देवा – है यार बहोत यद् आते है वो दिन.

पूनम - कहो तो मए फिर चली जाऊ तिलिस्म नगरी वह से कबूतर के द्वारा सन्देश भेजती रहूगी.

देवा – रहने दो अब वो मजा नहीं आएगा. उस समय हम दोनों अनजान थे एक दूजे के पास आना चाहते थे. अब वो बात नहीं मिलेगी.

नीलम - तो क्या भैया अब पास नहीं आना चाहते?

देवा – अरे अब पास नहीं आना हमें बल्कि अब तो पाना है एक दूजे को. और तुम दोनों को भी मिलाना है. क्यों रूद्र?

रूद्र – भाई बहोत हुआ यार चल न कब तक छूटे सैंड बने घूमते रहेंगे. चल शादी करते है. यार सब कह रहे है तुझे छोड़ के. एक तू hi रोके बैठा है. भाभी से पूछ तो वो अभी है कह दे.

पूनम - रूद्र सही कह रहा है देव अब किस बात का इंतजार है?

देव – तुम लोगो का बचपना कब जायेगा यार. शादी कर लो, शादी कर लो की रुत लगा राखी है. अबे रूद्र तू तो समझता है कितने काम बाकि है. और पूनम तुम भूल गयी फब ने क्या कहा था. अभी बहोत कुछ बाकि है. अभी दोनों नगर चारो तरफ से सुरक्षित नहीं है. अभी हमें मणि नहीं मिली, वो दुष्ट अघोरी जिन्दा है जिसकी वजह से हम लोग सब बिछड़ गए. क्या चाहते हो तुम लोग? हम लोग बैठ जाये शादी के मंडप में और वो साला आ कर हम पर हमला कर दे और इस बार भी हम में से किसी को कुछ हो जाये? और अगर ऐसा नाब hi हुआ तो भी क्या करेंगे हम लोग शादी कर के अपने अपने वैवाहिक जीवन में मस्त हो जाये और छोड़ दे उस चूतिये अघोरी को. करने दे उसे अपनी मनमानी? पूनम, नीलम तुम लोग बताओ कर पाओगी उसका मुक़ाबला शादी के बाद ऐसे hi जैसे अभी कर सकती हो? और रूद्र तू ….. क्यात ु शादी के बाद नीलम को उतरने देगा मैदान में? नहीं मेरे भाई ये सब तब hi मुमकिन है जब तक हम लोग आज़ाद है शादी के बंधन में बांध गए तो कमजोर हो जायेगे और हमारी कमजोरी उस अघोरी की ताक़त बन जाएगी. और मए ये होने नहीं दे सकता इस बार तो बिलकुल नहीं. और एक बात है जो मुझे फब ने बताई थी. जो बस मए और फब hi जानते है और वो बहतो ज्यादा खतरनाक है बहोत hi ज्यादा.

रूद्र के साथ साथ सब hi टेंशन में आ जाते है.

ऐसी कौन सी बात है देव मुझे बता मए भयानक चीज़ को तेरी जिंदगी से उखड फेंकूँगा चाहे अंजाम कुछ भी हो रूद्र के जबड़े भींच गए थे.

देव – सिर्फ उस खतरे की भनक ने तेरा मूड चेंज कर दिया न रूद्र. सोच वो बात जब सामने होगी तो क्या होगा. इसीलिए अभी मए कुछ नहीं बता सकता. वक़्त आने पे बताउगा. और बिना बताये काम भी नहीं चलेगा. पर अभी सब ठीक है और वो वक़्त बहोत दूर है तो अभी इस समय को जी लो. आगे की आगे देखेंगे और फिर जब हम चारो साथ है तो किसी मई के लाल में डैम नहीं के हमें चोट दे जाये और भूलो मत अब हमारे पास गुरुम जैसा एक दोस्त और है और क्या पता भविष्य में कौन किस रूप से निकल के हमारा हम सफर बन जाये तो अभी एन्जॉय करो चिंता छोड़ दो.

सब चुप हो कर देवा को देख रहे थे.

देवा – पूनम मेरी जान , रूद्र, नीलम तुम लोग जितना बेचैन हो मए भी उतना hi बेचैन हु लेकिन जब तक सरे काम नहीं हो जाते हम शादी नहीं कर सकते ये बहोत बड़ी रुकावट है. की थी न मैने पिछली बार सगाई उस अघोरी को हलके में ले कर. क्या हुआ अंजाम? सेल ने उसी दिन हमला किया जिस दिन हम लोग सबसे ज्यादा असावधान थे. इस बार मए उसे कोई मौका नहीं देना चाहता.

रूद्र – तू सही कह रहा है भाई. हमें माफ़ कर दे. हम ये सब बाटे भूल गए थे. लेकिन हम तेरे फैसले में तेरे साथ है हम सब एक है देव. और इस बार उस हरामखोर को जिन्दा नहीं छोड़ेगे.

देवा – हम्म्म सही बोलै. चल अब छोड़ उस सेल अघोरी की बाते तू नीलम के साथ बैठ हम दोनों गार्डन का चक्कर मर के आते है.

फिर देव और पूनम वह से उठकर आगे निकल जाते है और गार्डन में घूमने लगते है.

पूनम - देव ये चन्नो के लिए इतनी चीज़े कोई खास बात है क्या?

देवा – नहीं पूनम असल में आज hi उसके बारे में सब पता चला मुझे. उसकी हालत बहोत ख़राब थी. बहोत दर्द में थी दुखी थी bechari.hua यु के………………………………..

और देवा पूनम को सब बता देता है.

देवा – इसलिए मैने उसे बहन बनाया है अब बहन के लिए मेरा फ़र्ज़ बनता है न कुछ.

पूनम - है क्यों नहीं बिलकुल. पर ये तो बताओ के आपके मंद में चल क्या रहा है. चन्नो की शादी के लिए किसे चुना है.

देवा- - उसी बारे में बात करनी थी तुमसे. मेरे ख्याल से चन्नो …………………………..

पूनम साडी बात सुन कर अरे वह ये तो बहोत ख़ुशी की बात है देव बहोत सही सोच रहे हो आप. मैने भी देखा है उसे. शलाका ने hi दिखाया था. पहले मेरा ध्यान नहीं था के शलाका ये क्या कर रही है लेकिन जब बाद में उसने मुझे बताया तो मुझे भी लगा के ये सही है. आप एक डैम ठीक जा रहे है लेकिन अब उन दोनों को मिलवाएंगे कैसे?

देवा – कल तक कुछ मैसेज आ जायेगे और मेरे कंप्यूटर में. उस के बाद फैसला करेंगे और उन्हें मिलवा भी देंगे. क्यों कैसी रही?

पूनम – बहोत बढ़िया. पर देव हम दोनों का क्या?

देवा – फिर वही बात पूनम अभी मैने थोड़ी देर पहले क्या कहा था.

पूनम देव के सीने से लग गयी और उसकी आँखों से दो बूँद आंसू निकल आये.

देव – ा पूनम तू रो क्यों रही है?

पूनम – देव मए नहीं चाहती के इस बार भी हमारा मिलान अधूरा रह जाये. मए आपकी सुहागन बनना चाहती हु.

देव – तू मेरी सुहागन जरूर बनेगी और इसी जनम में बनेगी. रोया मत करो चुप हो जाओ न अब. अरे सरे आंसू अभी बहा डौगी तो सुहागरात में जब तुम्हे मए औरत बनने का दर्द दुगा तब क्या करेगी? थोड़े से आंसू हमारे उस मिलान के दर्द के लिए भी बचा कर रख लो मेरी जान

पूनम देवा की बात सुन कर बुरी तरह शर्मा जाती है.

पूनम – धत्त मए आपसे बात नहीं करती आप बड़े ख़राब हो .

देवा – ऐसा क्या गलत कह दिया मैने ये सब तो होगा hi न?

पूनम - मुझे नहीं पता और होगा भी तो ये कोई कहने की बात है kya?mae जा रही हु नीलम के पास

पूनम जैसे hi जाने लगती है तो देवा उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खिंच लेता है और उसके नरम नाजुक होठो पे अपने होठ रख देता है. जिससे पूनम सिहर उठती है.

फिर देवा पूनम का नीचे वाला होठ अपने होठो में ले के चूसने लगता है तो पूनम भी देवा का साथ देते हुए उसके होठ को चूमने लगती है. धीरे धीर कब ये लिप किश भयंकर रूप ले लेता है उन्हें भी पता नहीं चलता जो पहले वो धीरे धीरे किश कर रहे थे अब वो एक दूजे के होठो को लगभग चबाने लगे थे. दोनों hi इस किश में खो से गए थे. तभी पूनम की सांसे उखाड़ने लगती है तो वो देवा को हल्का सा धक्का दे के खुद को छुड़ा लेती है और गहरी सांसे लेने लगती है.

उधर रूद्र और नीलम भी कुछ इसी काम में व्यस्त हो चुके थे. वो तो ये भी भूल चुके थे के वो इस समय गार्डन में है. उनका किश भी बहोत तेज गति से चल रहा था. नीलम मखमली घांस पर चित्त लेती थी और रूद्र उसके सर की तरफ से आकर उसके ऊपर झुका हुआ था और उसके होठो को चूस रहा था नीलम भी रूद्र के बालो में ऊँगली घूमते हुए उसके होठो का रास पी रही थी. इधर रूद्र के हाथ सरकते हुए नीलम की उठी हुई बड़ी बड़ी चूचियों पे आ चुके थे और वो उन्हें धीरे धीरे मसल रहा था जिससे नीलम भी कण्ट्रोल खोटी जा रही थी और अपनी ेडिया घास में जोर से रगड़ रही थी और रूद्र के बालो को भी जोर जोर से सहला रही थी. साथ hi रूद्र के होठो का रसपान भी कर रही थी.

तभी पूनम जान बूझकर दूर से आवाज देती हुई आती है. जिससे ये लोग संभल के उठ जाते है

देवा रूद्र को छेड़ते हुए – अबे ये तेरे बालो को क्या हुआ ऐसा लग रहा है कही लोट पॉट के आ रहा है या किसी से कुश्ती कर के आया है. तेरे बाल देख कैसे बिखरे हुए है.

देवा की बात सुन कर पूनम और नीलम मुँह घुमा के हसने लगती है

रूद्र – है भाई मए भी वैसे hi कुश्ती कर के आया हु जैसी तू. अपने होठ देख इतने लाल हो गए है जैसे इन्हे किसी मशीन में डाला गया हो. और पीस दिया गया हो.

देवा झेंप जाता है – चल बे कुछ भी बोलता है. चल अब भूख लगी है.

रूद्र - है पर पहले ये कुश्ती वाली हालत तो सुधर ले.

देवा हंस कर – चल चल गाड़ी में सुधर लेना अभी भूख लगी है.

रूद्र – अब भी भूखे हो? मैने तो समझा पूरी भूख मिट गयी होगी तुम्हरी.

देवा – अबे चल मेरे बाप चलेगा या मर कहिएगा.

फिर सब लोग गाड़ी में बैठ कर अपनी अपनी हालत ठीक करते है और फिर होटल में जाकर मस्त खाना कहते है. उसके बाद ये लोग घर की तरफ आ जाते है. जिसमे इन्हे लगभग रत हो जाती है. देवा रूद्र और नीलम को घर छोड़ता है और फिर पूनम को ले कर हवेली जाता है.
 
भाई आप सब के कमैंट्स के बेस पे hi स्टोरी आगे बढ़ती है तो अपने कमैंट्स देने में कंजूसी मत कीजिये हमें सिर्फ आप लोगो के कपंमेंट्स का hi इंतजार रहता है आप लोग इतना समय निकल के स्टोरी पढ़ते है तो कमेंट करने में मुश्किल से 1 मिनट hi लगता है सो प्लीज कमेंट ों स्टोरी और आप लोगो के भी कुछ सुझाव हो तो दे सकते है.
 
जिस तरह रीडर्स को हर स्टोरी में नए उपदटेस की इच्छा और प्रतीक्षा रहती है उसी तरह हर राइटर को कमैंट्स का इंतजार इससे पता चलता है के उसने कहा गलती की. आगे कैसे बढ़ना है. ऐसे में ये कहना शायद पूरी तरह सही नहीं होगा के हम कमैंट्स के लिए स्टोरी लिख रहे है. है कमैंट्स का इंतजार है और रहेगा हर अपडेट के बाद. और आपकी बात का बुरा मैंने वाली कोई बात नहीं. क्यों की बात अच्छी हो या बुरी बात तो करो यार. साइलेंट रीडर्स वैसे भी हजारो होते है. कुछ hi बन्दे ऐसे मिलते है जो कमैंट्स करते है तो उनसे hi उम्मीद है और उनसे hi रिक्वेस्ट भी. तो हमारे कमैंट्स मांगने पे आप लोग बुरा न मने. इसी बहाने हम आप लोगो से डायरेक्ट बात तो करते है न. स्टोरी के साथ बने रहे.

धन्यवाद
 
अपडेट – 68

देवा और पूनम जैसे hi हवेली पहुँचता है. सामने माला बैठी थी.

माला – अरे आओ देवा इस समय कैसे रास्ता भूल गए यहाँ का.

देवा – बस ठकुराइन मए तो इस वक़्त अपनी बहन से मिलने आया हु.

माला अच्छी बात है. पर आते रहा करो और तो अब यहाँ कोई आता जाता नहीं . वैसे ये कौन है?

देवा – ये है मेरी जिंदगी. मेरी जान. मेरी होने वाली पत्नी. पूनम इन्ही के साथ मेरा रिश्ता तय हुआ

माला – बहोत सुन्दर है. भगवन तुम दोनों की जोड़ी सदा बनाये रखे.

तभी वह चन्नो आ जाती है.

चन्नो - अरे भैया आप?

देवा – है चन्नो आज मए तुम्हरे लिए दो सरप्राइज लाया हु.

चन्नो - अरे वह तो दीजिये

देवा – पहली सरप्राइज तो तुम्हारे सामने hi है इन्हे तुमसे खास मिलाने लाया हु. ये है तुम्हारी होनेवाली भाभी. और पूनम ये है मेरी बहन चन्नो

चन्नो और पूनम ख़ुशी से दौड़ कर एक दूजे के गले मिलती है.

चन्नो – भैया मेरी भाभी तो बहोत बहोत सूंदर है किसी राजकुमारी की जैसी.

देवा – है सही पहचाना ये राजकुमारी hi है मेरे दिल की नगरी की. बस अब इन्हे महारानी बनाना है.

सब देवा की बात पे हसने लगते है

चन्नो- भैया ये सरप्राइज तो इतना अच्छा था के अब कोई और सरप्राइज इनकी जगह ले hi नहीं सकता.

देवा – लेकिन दूसरा भी है

चन्नो - तो दीजिये

फिर देवा उसके लिए लाये हुए सामान के पैकेट्स दे देता है इतना सारा सामान कपडे देख के चन्नो की आँखों में आंसू आ जाते है और वो दौड़ कर देवा के सीने से लग के रोने लगती है.

देवा – क्या हुआ पगली रो क्यों रही है.

चन्नो - भैया इन सब की क्या जरुरत थी. मुझे आप मिल गए तो सब मिल गया मुझे ये सब नहीं चाहिए.

देवा – तो मुझे क्यों कह रही है अपनी होनेवाली भाभी से बोल दे ये सब वही लायी है. तू क्या समझती है मुझे ये सब लेना आता है? अरे ये तो पूनम hi लायी ये कह कर की पहली बार अपनी नन्द से खली हाथ कैसे मिलु.

चन्नो पलट के पूनम के गले लग जाती है. – भाभी आपने ये सब क्यों किया?

पूनम - अरे राजकुमारी की ननद ऐसे कैसे रह सकती है. वो भी तो राजकुमारियों के जैसे रहेगी न. इसलिए अब कोई सवाल जवाब नहीं बस ये सब तेरे लिए है इसे रखो. ये कोई खैरात नहीं बल्कि ये हक़ है तुम्हारा अपने भाई पर और भाभी पर.

चन्नो पूनम से गले लगी रो रही थी और पूनम उसे शांत करने लगती है. थोड़ी देर के बाद

देवा – ok चन्नो अब हमें चलना चाहिए बहोत देर हो गयी है तेरी भाभी को भी उनके घर छोड़ना है वार्ना मेरी होने वाली सासु माँ परेशां होगी न. फिर आउगा bye

फिर देवा और पूनम हवेली से निकल कर पूनम के घर आते है. और पूनम गाड़ी से उतरने लगती है तो देवा उसे पकड़ के फिर से गले लगा लेता है और उसके होठो को चुम लेता है फिर पूनम भी अंदर जाने लगती है

देवा – 12 बजे चलना है तिलिस्म नगरी तैयार रहना मेरी जान.

पूनम - ok लव मए तैयार रहूगी.

फिर देवा अपने घर आता है. और सीधा बेसमेंट में जाता है. जहा पे इस वक़्त कोई नहीं था. तो देवा आँखे बंद कर के शलाका से बात करता है.

देवा - कहा हो शलाका?

शलाका – गुरुम के साथ hi हु. थोड़ी देर हुई है टारगेट प्रैक्टिस ख़तम किये हुए.

देवा – कैसा लग रहा है.

शलाका - अच्छा लग रहा है. आप कहा है?

देवा – बेसमेंट में.

शलाका – हम सब अभी आते है.

देवा – ok आजाओ तुमसे कुछ जरूरी बाटे भी करनी है.

फिर देवा वापस नार्मल होकर बैठ जाता है. और अपना सिस्टम ों कर देता है. जिसमे सबसे पहले वो मेल्स चेक करता है. उसमे कावेरी ने गैंग की पूरी डिटेल भेज दी थी. फिर देवा मैरिज बेउरो की डिटेल चेक करता है जिसमे देवा ने जिन जिन को सेलेक्ट किया था सब के जवाब आ गए थे. देवा सब के रिप्लाई पढ़ रहा था तभी वह गुरुम , शलाका और नागार्जुन आ जाते है.

गुरुम – क्या हो रहा है. भाई.

देवा – आओ गुरुम. मैने तुम्हारा काम कर दिया है.

गुरुम - कौन सा काम देवा?
 
अपडेट - 69

देवा – बैठो बताता हु. अभी तो ये सुन लो की इस लिस्ट में जो लड़के मैने ज्योति के लिए सोचे थे सब का जवाब आ चूका है. और उस में से मुझे ये राजीव नाम का लड़का पसंद है. और इत्तेफ़ाक़ से ये भी ठाकुर hi है. साथ hi ये उस की पैदाइश है इसे इंडिया में नहीं रहना लेकिन शादी इंडियन लड़की से करना चाहता है. जिससे इसे भी िनिडा का वीसा आसानी से मिल सके. इससे मैने पुछा था. के यदि इसकी वाइफ शादी के बाद उस न जाना चाहे तो क्या वो उसे यही छोड़ के जा सकेगा? तो उसने कहा के मुझे शादी सिर्फ फ़ॉर्मेल्टी के लिए hi करनी है. बाकि मेरा उस लड़की से कोई मतलब नहीं होगा. वो जैसे, जहा, जिसके भी साथ चाहे रह सकती है. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी न उसकी जाती जिंदगी से कोई मतलब होगा., दूसरा एक ये है. आसिष नाम का लड़का, इसे पैसे चाहिए. जिस वजह से ये किसी भी कंट्री की लड़की से शादी कर सकता है. इसे भी ज्योति को यही छोड़ के जाने में कोई एतराज नहीं.

शलाका – मेरे हिसाब से राजीव ठीक है क्यों की ये आशीष तो आगे चल के ज्योति को पैसे के लिए परेशां कर सकता है.

देवा – बिलकुल ठीक सोचा. तो मए राजीव को बुलवा लेता हु. और उसे क्लियर सब बाटे यही हो जाएगी. अगर वो मन लेता है तो ज्योति की शादी करवा देंगे उसे.

नागार्जुन – सही सोचा है देवा लेकिन भविष्य में क्या? इस बच्चे को तो संभल लगे लेकिन आगे?

देवा – ज्योति राजीव को तलाक नहीं देगी. न hi राजीव देना चाहेगा. फ्यूचर में भी जब जब ज्योति प्रेग्नेंट होगी. उस समय राजीव को 10-15 दिन के लिए यहाँ बुलवा लगे या ज्योति hi ये कह कर गाँव से बहार चली जाएगी के वो पति के पास उस जा रही है. कोई दिक्कत नहीं होगी.

नागार्जुन – तुम्हे लगता है ऐसा पॉसिबल है तो फिर कोई दिक्कत नहीं लेकिन ज्योति की लाइफ ख़राब नहीं होनी चाहिए देवा.

देवा – नहीं होगी. और अब सुनो गुरुम तुम अपने काम की बात. हम लोग आज शहर गए थे. तो रस्ते में हुआ यु के…………..

फिर देवा सब को पूरी बात बता देता है.

गुरुम – क्या बात है देवा बहोत सही काम किया है तुमने. मुझे वो डिटेल्स दो.

देवा – साडी डिटेल्स कंप्यूटर में है. तुम आराम से चेक कर लेना. और तुम तीनो कल से hi इस काम पे लग जाना. लेकिन अभी एक्शन मत लेना. सिर्फ पूरी जानकारियों को वेरीफाई करना. और बाद में कुछ एक्शन.

गुरुम – ok देवा हम लोग देखते है. इस गैंग की तो पुंगी बजा दुगा मए.

शलाका – गुरुम में तुम्हारे साथ हु. और जो कुछ तुमसे सीखा है. उसे पूरा इस्तेमाल करुँगी. और इस गैंग को ख़तम करने में तुम्हरे साथ रहूगी.

देवा – वैरी गुड़ तो अभी तुम लोग भी रेस्ट कर लो. थोड़ी देर के बाद चलना है तिलिस्म नगरी वह जाकर देखते है के फ़कीर बाबा क्या आदेश देते है. मए भी रेस्ट कर लू थोड़ी देर.

फिर देवा घर के अंदर जाता है. जहा हॉल में सभी लोग बैठ थे. रूद्र और नीलम भी.

दन – आओ देवा बैठो.

देवा – जी बाबू जी., माँ वो देवकी काकी से बात हो गयी न?

सावित्री – है बीटा हो गयी है उनसे बात . आज रघु ने बात की थी. वो तैयार है. उन्हें और रामु को कोई एतराज नहीं है. और मैने आज पद्मा से भी बात कर ली है . वो भी सहमत है. बस अब तैयारियां शुरू कर दो तुम लोग.

देवा – है माँ जरूर. लेकिन यहाँ मए आप लोगो से कुछ कहना चाहता हु.

दन – क्या बात है देवा?

देवा – बाबू जी. ये जो मेरा दोस्त है न रूद्र इसने कसम खायी थी के मेरी और इसकी शादी एक hi मंडप में होगी वार्ना ये शादी नहीं करेगा. इसने अपने लिए लड़की तो पसंद कर ली लेकिन नीलम और रूद्र के घर वाले इस देश से बहार रहते है. तो इनका रिश्ता तो तय हुआ है लेकिन इन दोनों की भी सगाई तो हुई नहीं. तो मेरा ये विचार है के बाबू जी यदि आप आज्ञा दे तो क्यों न मेरी और पूनम की सगाई के साथ उसी मंडप में रूद्र और नीलम की भी सगाई हो जाये? आखिर मए भी तो इसकी सगाई मिस करता हु न.

ये बात सुन कर जहा रूद्र और नीलम की आँखों में नमी आ गयी वही बाकि घर वाले बहोत खुश हुए.

सावित्री – अरे वाह ये तो तुमने बहोत अच्छा सोचा है देवा, वैसे भी रूद्र के रूप में मुझे दूसरा बीटा hi मिला है और मए अपने बेटे के लिए नीलम को बहु बनाना hi वाली हु तो इनकी भी सगाई तो करनी hi पड़ेगी न. क्यों जी?

दन – है भाग्यवान बिलकुल सही बात की तुमने. नीलम भी हमारी होने वाली बहु है. तो रीती रिवाज़ो के साथ इनकी भी सगाई होनी चाहिए. तो तय रहा. एक hi मंडप में मेरे इन दोनों बेटो की सगाई होगी.

रूद्र उठ कर देवा के गले लग जाता है और उसकी आंखे बरस पड़ती hae.nilam भी देवा को गले लगा लेती है और रोने लगती है. देवा की भी आँखे नाम हो जाती है

देवा – अबे रोटा क्यों है पागल. नीलम से नहीं करनी सगाई तो अभी बता दे माँ को. वो कोई दूसरी धुंध लेगी तेरे लिए नीलम के लिए मए तुझसे भी अच्छा लड़का धुंध लगा.

रूद्र – चुप बे.

नीलम - भैया आप बहोत ख़राब हो छोडो मुझे और नीलम हंस कर दिया के गले लग जाती है.

सावित्री - अरे बच्चो रोने के नहीं ये तो हसने के दिन है.

रूद्र – आप नहीं जानती माँ. देवा ने मुझे आज क्या तोहफा दिया है. मए बहोत खुश हु.

देवा – चलो यार भूख लगी है. मए फ्रेश हो के आता हु. फिर खाना कहते है. बहोत काम बाकि है रूद्र. भूल गया क्या?

रूद्र – नहीं भाई सब याद है. तू आजा जल्दी से फिर खाना कहते है.

दन – कोई खास प्रोग्राम है क्या दोनों का ?

देवा – नहीं बाबू जी बस प्लानिंग कर लेते है सगाई के लिए क्या करना है. फिर उन की तैरै hi करने का सोचा है और कुछ नहीं.

दन – ठीक है बीटा

फिर देवा फ्रेश हो कर आता है और सब लोग खाना खाने बैठ जाते है. जिसमे की वो लोग सगाई की तैयारियों के बारे में बात कर रहे थे और साथ hi किसे किसे बुलाना है वो भी डीडे हो रहा था. जिसमे सरे रिश्तेदारों का आना तय था hi. और गांव के भी लगभग सरे hi लोग शामिल होने थे. जिसमे ठाकुर फॅमिली खास थी .

फिर सभी लोग अपने अपने कमरों की तरफ चले जाते है. रूद्र और नीलम भी चले जाते है. अपने अपने कमरों की तरफ. और देवा भी अपने कमरे में आ कर. अभी तो देवा भी सगाई की तैयारियों के बारे में hi सोच रहा था. करीब आधे घंटे तक देवा यही सब सोचता रहा फिर उसे अचानक यद् आया के किसे क्या लेना है ये भी तो जानना होगा. तभी देवा का ध्यान घडी पे जाता है. उनका तिलिस्म नगरी जाने का टाइम हो रहा था तो देवा अपनी आदत के मुताबिक उठकर सबसे पहले चल देता है सावित्री के कमरे की तरफ. और अदृश्य हो कर वो कमरे जाता है.
 
फुल्ली एग्री दोस्त लेकिन शुरू में हमारे उपदटेस इतने स्लो नहीं थे कहानी लोखड़ौन में शुरू हुई थी अब लोखड़ौन हैट गया है तो काम का प्रेशर भी दुगना है इसीलिए थोड़े स्लो उपदटेस है, क्यों की ऑफिस में तो हम लिख नहीं सकते फिर भी आप के ओपिनियन के लिए थैंक्स हम कोशिश करेंगे जल्दी उपदटेस देने के लिए . धन्यवाद
 
अपडेट – 70

देवा अदृश्य हो कर उस कमरे जाता है तो हर बार की तरह आज भी उसके बाबू जी उसकी माँ को नंगा कर के जकड़े हुए थे. उसकी माँ इस समय डोगग्य स्टाइल में झुकी हुई थी उसकी गोरी काया कमरे की दूधिया रौशनी में चमक रही थी देवा की तरफ उसकी गांड hi थी जिसे और ज्यादा उभर कर वो झुकी हुई थी और दन नीचे बैठ कर उसकी गांड को सहलाते हुए चाट रहे थे. और सावित्री जोर जोर से सिसकारियां भर रही थी. तभी दन उठ कर खड़े हुए और अपना लुंड सावित्री के मुँह के आगे कर दिया.

देवा ये सब देख कर जाना चाहता था पर जाने क्यों आज उसका मन ये सब देखने का हो रहा था अपने माँ बाबू जी को प्यार करते देख उसे अजीब उत्तेजना महसूस हो रही थी.

इधर सावित्री ने थोड़ी देर दन का लुंड पूरा मुँह में ले कर चूस के चिकना किया.

दन – सावित्री आज मए तुम्हरी गांड मरुँगा बहोत दिन हो गए तुम्हरी गांड मरे हुए.

सावित्री – sssssssssseeeeeeeeeeooohhhhhh देवा के बापू जो भी करना है कर लो पर जल्दी करो मुझे अब रहा नहीं जाता दाल भी दो न मेरी गांड में मए भी वैसे आज यही सोच कर तो नंगी हुई थी के आज गांड में hi लगी. दोपहर से पता नहीं क्यों आज आपसे अपनी गांड मरवाने का मन हो गया था. जल्दी से डालो और रगड़ के मारो मेरी गांड.

दन - हाहाहाहा जब तुम ऐसे खुल के बात करती हो न तो मेरा जोश दुगना हो जाता है. अब देखो मए कैसे तुम्हरी गांड मरता हु.

इतना कह कर दन ने सावित्री की गांड के खुले छेड़ पे अपना लुंड रखा और एक hi झटके में आधे से ज्यादा लुंड सावित्री की गांड में उतर दिया

सावित्री – ohoohhhhhhhhhhh माआआआआ आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ssssssssssseeeeeeeeeeeeee मजा आ गया और डालो अंदर तक इसके बिना तो मए जीने की कल्पना भी नहीं क्र सकती पूरा दाल दो न जी aaahhhhhhhhhhhhhhhhh उउउउउउउइइइइइइइ माआआआ

दन ने भी बिना देर किये सावित्री की नंगी गोरी गांड पे थप्पड़ मारा और उसकी गांड को दबोच कर एक और झटका मारा और अपना पूरा लुंड सावित्री की गांड में उतर दिया. सावित्री इस लुंड से तो चुदती रहती थी इसीलिए उसे अब दर्द नहीं होता था उसकी बुर और गांड इस लुंड की आदि हो चुकी थी. बस मजा hi आता था. वो भी अपनी गांड पीछे चिपका कर छोड़ने लगी. दन ने सावित्री की झूलती हुई बड़ी बड़ी चूचिया पकड़ ली और उसे दबाते हुए और निप्पल खुचटी हुए वो सावित्री की गांड मरने लगा . कुछ धक्के मरने के बाद उसने अपनी एक ऊँगली सावित्री की छूट में दाल दी अब सावित्री को डबल मजा मिल रहा था वो सिसकारियां भरते हुए अपने पति से चुद रही थी. और दन भी तेज धक्के मार रहा था.

इधर देवा का लुंड ये सब देख कर पूरा खड़ा हो चूका था. वो वही अपना लुंड मसलने लगा और फिर न चाहते हुए भी जल्दी से रूम से बहार आ गया और गहरी साँसे लेने लगा. फिर पानी पीकर वो दिया के रूम में गया जहा रघु और दिया सो चुके थे. फिर देवा रूद्र के पास गया और उसे ले कर पायल के रूम में गया जहा नीलम तो जग रही थी लेकिन पायल सो चुकी थी.

फिर रूद्र नीलम और देवा तीनो बेसमेंट में आ जाते है. जहा नागार्जुन, शलाका, गुरु, और पूनम बैठे थे.

देवा - नागार्जुन घर को शील्ड से कवर करो. पूनम अपना क्लोन सेट किया?

पूनम – है देव मैने कर दिया.

देवा – गुड़ यहाँ भी नीलम रूद्र और मेरा क्लोन सेट है. नागार्जुन शील्ड कवर इस बार पूनम के घर को भी देना है.

नागार्जुन - ठीक है देवा.

देवा – तो चले हम लोग सब रेडी है?

सब एक साथ – एस बॉस

देवा – थें लेटस जो गाइस.

सभी एक साथ वह से अदृश्य होते है और कुछ समय बाद वो लोग तिलिस्म नगरी में जा कर प्रकट होते है. सब कुछ सामान्य hi था वह. पूनम, देवा, शलाका और नागार्जुन के लिए. लेकिन रूद्र और नीलम के हिसाब से वह बहोत कुछ बदल गया था. वो दोनों तिलिस्म नगरी को देख कर. बेहद खुश हो रहे थे. वही गुरुम के लिए तो ये सब किसी अचम्भे से काम नहीं था. वो आँखे फाड़े चारो तरफ देख रहा था. के यहाँ के लोग तो सब धरती के लोगो की तरह hi है. बस उनके कपडे जरूर हमारे सेरिअल्स या फिल्मो की तरह थे. और खास टूर पर गुरुम वह की सुंदरता से प्रभावित हो रहा था. उसका तो जी hi नहीं भर रहा था वह के प्राकृतिक सौंदर्य से. उसकी इस हालत का मजा देवा और पूनम ले रहे थे.

देवा – कहो गुरुम कैसी लगी तुम्हे तिलिस्म नगरी?

गुरुम - अद्भुत है ये तो यार बहोत सुन्दर . इतनी सुन्दर की ऐसे हमारी धरती कभी हो hi नहीं सकती. इतनी हरियाली इतना स्वच्छ वातावरण. साला यहाँ की हवा hi बता रही है की यहाँ कोई गलत हो नहीं सकता

देवा – ऐसा नहीं है गुरुम. हर जगह सही और गलत लोग होते है. आखिर हमारे खिलाफ जो हुआ वो सब तो तुम जानते hi हो न. हम आज भी लड़ाई की तयारी कर रहे है तो किस के लिए यही के दुश्मनो के लिए. इसीलिए गुरुम ये कभी मत सोचना के कोई ऐसी जगह भी है जहा सिर्फ अच्छे hi है. काम, वासना, लोभ और अहंकार ये सब तो युगो से चला आ रहा hae.to यहाँ कैसे नहीं होगा. अब चलो हम लोग राजमहल चलते है. वह सब हमारी hi राह देख रहे है.

फिर सब लोग राजमहल में चले जाते है. जहा पे पूनम और नीलम के माता पिता मौजूद थे और साथ hi वह नाग लोक के कुल गुरु, और फ़कीर बाबा भी.

इन लोगो को देख कर सब बेहद खुश होते है. जब सब लोग मिल चुके तो आखरी में रूद्र और नीलम हाथ जोड़े आगे बड़े. उन्हें देख कर भैरव सिंह और महारानी नीलमणि की hi नहीं बल्कि महाराज सुमंत देवा और महारानी कौशल्या की आँखे भी रो पड़ी.

रूद्र और नीलम ने पहले आगे बाद के बीएस के फिर मन के पाँव छुए. बीएस ने उसे उठा के गले से लगा लिया.

बीएस - कैसे हो पुत्र, तुम्हे देखने के लिए तो ये आँखे तरस गयी थी. रूद्र मेरे बच्चे. तुम्हे यहाँ वापस देव के साथ देख कर आज मए बहोत खुश हु. और नीलम भी तुम्हरे साथ है. ये बहोत अच्छी बात है.

फिर रूद्र और नीलम मन और के पाँव छूटे है. तो वो भी इन्हे गले से लगा के रोने लगती है.

मन – रूद्र मेरे बच्चे. तू आ गया. देव के साथ. कहा चला गया था तू? काम से काम तू तो हमारे पास रहता हमें देव की कमी का अहसास काम होता. तुम दोनों भी चले गए देव और पूनम के जाने के बाद. तुम्हे पता है तुम्हरे ये माँ बाप कैसे जी रहे थे.

रूद्र – क्षमा कर दीजिये रानी माँ, किन्तु मेरा जाना आवश्यक था. देव और पूनम भाभी की खातिर.

फब – रूद्र सही कह रहा है. आप सब लोगो को मए बता hi चूका हु. के यदि रूद्र नहीं जाता साधना में तो देव को उतना hi समय और लगता वापस आने में जितना अभी रूद्र लगा चूका है यानि देव को दुगना समय लगता.

फिर रूद्र और नीलम सड़ और मक के पैर छूटे है और आशीर्वाद लेते है. फिर देव सब का परिचय गुरुम से करवाता है. तो गुरुम भी आगे बाद के सबका आशीर्वाद लेता है.

फब – बच्चो तुम सब यहाँ आये. बहोत अच्छा किया. हम सब को बेहद ख़ुशी हुई अब मए जो कहने जा रहा हु. उसे ध्यान से सुन्ना और समझना. ये तुम सब के और दोनों नगरों के लिए अति आवश्यक है.

तुम सब जानते हो के दोनों नगरों को सुरक्षा के लिए यु तो देव और पूनम की ताक़त और शक्तिया hi बहोत है और अगर उस के साथ रूद्र और नीलम भी खड़े है तब तो कोई चिंता hi नहीं. लेकिन ये कोई अनंत कल के लिए सही रास्ता नहीं है. उस के लिए दोनों नागरियो की प्रथम आवश्यकता है स्वर्ण मणि. और यही से तुम लोगो को अपने दुश्मनो के लिए मौत का वरदान भी मिल सकता है. स्वर्ण मणि अघोरी और उस के जैसे हर पापी का काल साबित होगी. लेकिन यदि वही स्वर्ण मणि अघोरी को मिल गयी तो शायद हम सब तो बच भी जाये लेकिन ये दोनों नगरीय नहीं बचेगी ऐसा विनाश होगा के वापस ऐसी नगरीय बनने में सादिया लग जाएगी. इसलिए स्वर्ण मणि तुम लोगो को हासिल करनी hi होगी.

देव – बाबा आप रास्ता बताइये हम प्रयास करेंगे अपनी अंतिम सांस तक.

रूद्र – है बाबा आप की कृपा से आज हम लोग बेहद शक्तिशाली है. वो स्वर्ण मणि हम यहाँ अवश्य लाएंगे चाहे उस के लिए हमारे प्राण hi क्यों न चले जाये.

फब – स्वर्ण मणि से पहले उस तक पहुंचने के लिए जो मार्ग है उसे जानना आवश्यक है रूद्र. और वो मए भी नहीं जनता.

फब की ये बात सुन कर सब के चेहरे पे गंभीरता आ जाती है. क्यों की ऐसा तो किसी ने सोचा hi नहीं था.

देव – बाबा यदि आप hi नहीं जानते मार्ग. तो फिर हम कैसे उस मणि को प् सकते है.

फब – स्वर्ण मणि तक पहुंचने का मार्ग बहोत जटिल है देव, उसे तुम तो क्या तुम चारो में से कोई भी अकेला नहीं ला सकता. उस के लिए सब को एक साथ कोशिश करनी होगी. लेकिन वो बाद की बात है. उससे पहले ये जान लो की स्वर्ण मणि का रास्ता कैसे मिलेगा.

रूद्र – तो बताइये बाबा.

फब – देव, रूद्र तुम दोनों को नील सागर की गहराई में जाना होगा. जिसका अंत आज तक किसी ने नहीं जाना. वह जा कर hi तुम्हे स्वर्ण मणि तक पहुंचने का मार्ग मिलेगा उसकी जानकारी लेकर जब तुम दोनों यहाँ आओगे तब आगे की योजना बन पायेगी.

देव – तो हम अभी वह चले जाते है.

फब – जब तुम चाहो तब जा सकते हो देव. किन्तु यहाँ से जब तुम जाओगे तो रस्ते में तुम्हे एक अनंत फैला हुआ जंगल मिलेगा. उस वन की जहा शुरुआत होती है वही तक तुम्हरी अदृश्य हो कर जाने की शक्ति काम करेगी उसके आगे नहीं.

रूद्र - तो फिर हम नील सागर तक क्या पैदल चल के जायेगे बाबा?

फब – नहीं रूद्र तुम्हे वह के वन राजा से सहायता लेनी होगी. यदि वो तुम पर प्रसन्न हो गए तो. क्यों की तुम्हरे वह कदम रखते hi तुम्हे उनके सैनिक बंदी बना लगे. आगे तुम दोनों की सूझ बुझ hi काम करेगी. यद् रखना तुम वह उनके दुश्मन बन के नहीं जा रहे हो. इसीलिए लड़ना नहीं है नम्रता दिखानी है. और नम्र इतना नहीं होना के वो तुम्हे hi कमजोर समझने लगे.

देव – मए समझ गया बाबा. हम वनराज को अपने पक्ष में करेंगे और आगे की यात्रा में सहायता उनसे hi लगे.

फब – बिलकुल सही सोचा है तुमने देव. लेकिन ये इतना आसान नहीं होगा.

देव – मए समझ सकता हु

फब – तो देव , रूद्र कब निकलना चाहोगे तुम लोग?

रूद्र – अभी .

देव – नहीं रूद्र हम अभी नहीं जायेगे.

रूद्र - क्या बात करते हो देव ज्यादा देर करना उचित नहीं. हमें अभी जाना होगा.

देव – नहीं रूद्र उससे भी जरुरी और एक काम है.

रूद्र – इससे जरुरी और भला क्या काम है तुझे यार?

देव – माँ बाबू जी से मिलना जो कई वर्षो से तुम्हरा और मेरा इंतजार कर रहे है. नीलम और पूनम का इंतजार कर रहे है. मए किस मुँह से जाता तेरे बिना उनके सामने. इसीलिए अब तक मए भी उनके आशीर्वाद से वंचित हु भाई. चल पहले नाग लोक जाते है फिर आगे सोचेंगे.

रूद्र – पर देव वो लोग हमारा इंतजार कर सकते है. समय हमारा इंतजार नहीं करेगा. वो अघोरी अगर पहले पहुंच गया तो अनर्थ होइ जायेगा. इसीलिए माँ बाबू जी से बाद में वापस आ कर मिल लगे.

देव – तुझे मेरी बात समझ में नहीं आयी क्या? बोलै न नहीं. मए कही नहीं जाउगा न hi तुझे जाने दुगा. पहले मुझे माँ बाबू जी से मिलना है. तुझे भी उनसे मिलाना है मेरे यार. बाकि सब उसके बाद. और रही बात उस अघोरी की. तो उसकी चिंता मत कर, उस के पास चाहे कितनी hi ताकते हो लेकिन उस के पास रूद्र नहीं है जो मुझसे पहले वाओ अहा पहुंच जाये. चल पहले नाग लोक षाले है.

सब लोग इन दोनों का ये प्यार भरा विवाद देख रहे थे और सब की hi आंखे नाम थी. लेकिन इन दोनों के बीच में बोलने की किसी की हिम्मत नहीं थी. इसीलिए सब चुप थे. फिर तय हुआ के पहले नाग लोक जायेगे. तो सभी नाग लोक चले पड़े.
 


अपडेट – 71


और नाग लोक में पहुंच कर. सभी एक साथ रूद्र के घर गए. जो की एक बहोत बड़ा भवन था. और उसमे रूद्र का परिवार रहता था. उसके भाई भाभियाँ उसके माँ बाप.

देव ने वह पहुंच कर दरवाजा खटखटाया. तो अंदर से रूद्र के बाबू जी की आवाज़ आयी - कौन है भाई?

देवा – मए हु बाबू जी देव दरवाजा खोलिये.

रूद्र के बाबू जी दौड़ते हुए आये और एक झटके में दरवाजा खोल दिया. सामने रूद्र और देव को ठीक वैसे hi पाकर उनकी भी आँखे बरस पड़ी. वो दोनों वैसे hi सामने खड़े थे जैसे पहले साथ रहते थे.

देव और रूद्र एक साथ झुक कर बाबू जी के पैर छूटे है. तो रूद्र के बाबू जी उन्हें उठा के गले लगा लेते है और जोर जोर से रोने लगते है.

रब – कहा चले गए थे मेरे बच्चो. ये आँखे तो तुम्हारा रास्ता देखते देखते थक गयी. कितना समय लगा दिया?

देवा – बाबू जी देर से आने के लिए माफ़ी चाहते है हम.

तभी रूद्र की माँ भी आ गयी और फिर रूद्र और देव ने उनके पैर छुए. तो रम ने भी उन्हें उठा के रट हुए गले से लगा लिया

मेरे बच्चो तुम लोग आ गए. मए जानती थी के मेरे रूद्र और देव जब भी आएंगे एक साथ आएंगे. कैसे हो मेरे बेटो?

रूद्र हम सब ठीक है माँ. आप सब कैसे है?

रम – हम तो बस जी रहे थे बीटा. तू उस दिन जो गया नीलम के साथ फिर वापस न आया. हम तो जीते जी मर गए थे. तुम्हारी और नीलम की चिंता हमें खाये जा रही थी.

रूद्र - माँ मैने कहा था न मए देव को ले के hi लौटूंगा तो उसमे समय लग गया लेकिन नीलम को अकेला नहीं छोड़ा. तुम्हारी बहु को साथ hi लाया हु.

तभी नीलम भी आगे बाद के बाबू जी और माँ के पैर छूती है.

रम – तू भी इस के साथ इतने सालो तक भटकती रही मेरी बच्ची? क्यों गयी तू? ये तो अपने दोस्त के लिए चला गया तू तो मेरे पास रह जाती

नीलम - माँ जब ये दोस्ती की खातिर जा सकते है तो मेरे साथ तो इनका रिश्ता बन चूका था. भला एक पत्नी अपने पति का साथ कैसे छोड़ सकती है वो भी ऐसे कठिन समय में. इसीलिए मए गयी माँ. लेकिन यदि आपको लगता है मैने कोई गलती की तो मए माफ़ी चाहती हु आप सब से

रम – नहीं पगली माफ़ी मत मांग. तूने तो मेरे बेटे का साथ दिया. तुझे चुन के इसने जिंदगी का दूसरा सही फैसला लिया था पता है.

नीलम - दूसरा?

रम – है पहला फैसला था इसका देव से दोस्ती. और दूर तुझे जीवन साथी बनाना.

सब हस्ते हुए अंदर जाते है. और रूद्र अपनी बाकि फॅमिली से मिलता है. सभी लोग रूद्र को देख के भावुक हो गए थे. और सब बेहद खुश भी थे. काफी देर वह बैठने के बाद

देव – रूद्र अब हमें नीलम के घर भी चलना चाहिए. उसे वह छोड़ के आते है चलो.

रूद्र – है बाबू जी हम लोग आते है थोड़ी देर में.

फिर सब लोग नीलम के घर जाते है. वह भी यही सब होता है. उन सब से काफी देर तक बाते करने के बाद जब देव और रूद्र वह से निकलने लगते है तो पीछे से नीलम रूद्र को रोक लेती है देव आगे बाद जाता है और बहार जाकर इंतजार करने लगता है.

नीलम - रूद्र रुको मए भी चलती हु.

रूद्र – नहीं नीलम आज तुम नहीं चलोगी. तुम अपने घर पे रहो. माँ और बाबू जी के साथ. वैसे भी तुम कहा जाओगी. फ़कीर बाबा के कहे अनुसार इस वक़्त तो सिर्फ मुझे और देव को जाना है न.

नीलम - लेकिन रूद्र मुझे दर लगता है

रूद्र – तुम घबराओ नहीं अब देव और रूद्र साथ है. कोई हमर बाल भी नहीं उखड सकता .

नीलम आगे बाद के रूद्र के सीने से लग जाती है और फिर अपने होठ रूद्र के होठो से मिला देती है. रूद्र भी नीलम को डीप किश करता है और जोर से उसकी गांड दबा देता है. जिससे नीलम की बुर रूद्र के लुंड से चिपक जाती है . नीलम भी रूद्र के होठ को काट लेती है और फिर दोनों इसी पोज़ में एक दूसरे के होठो को कोई 3-4 मिनट तक चूसते है. फिर रूद्र नीलम को छोड़ता है.

रूद्र – जानेमन अगर अभी मुझे जाना नहीं होता न तो अभी सुहागरात का इंतजाम कर देता इसीलिए मुझे अब जाने दो वार्ना और मूड बनता जायेगा. फिर मए नहीं रुकुंगा .

नीलम शर्मा जाती है. – अच्छा ठीक है जाओ अपना और देव भैया का ख्याल रखना.

रूद्र – ठीक है मेरी जान. जल्दी hi आता हु.

फिर रूद्र बहार आता है. और देव उसे देख कर मुस्करा देता है.

रूद्र – क्या है बे हंस क्यों रहा है?

देव – अबे गधे लिपिस्टिक तो साफ़ कर ले पूरा मुँह बन्दर की तरह लाल हो गया है.

रूद्र झेंप जाता है – है तो ठीक है न उसमे क्या है. चल अब ज्यादा दिमाग मत लगा.

फिर दोनों वह से निकल कर रूद्र के घर आ जाते है.

रूद्र – माँ बाबू जी मुझे अभी जाना है देव के साथ किसी काम से.

बाबू जी – ये क्या बीटा आज hi आये हो और आज hi जाने की बात कर रहे हो?

रूद्र – बाबू जी जाना बहोत जरुरी है. तिलिस्म नगरी और नाग लोक की सुरक्षा का सवाल है.

बाबू जी – लेकिन तुम दोनों जा कहा रहे हो?

रूद्र – वो मए अभी नहीं बता सकता. बस ये समझ लीजिये के हम इन दोनों नगरों की सुरक्षा लेने जा रहे है . हम दोनों hi जल्दी hi आएंगे. आप चिंता मत कीजिये

रम- क्या भौ भी जा रही है तुम्हरे साथ?

रूद्र – नहीं माँ कोई नहीं जायेगा कही नीलम अपने घर पे है. और पूनम भाभी अपने घर. हम दोनों hi जा रहे है बस इसीलिए आप लोग परेशां मत होना हम लोग जल्द hi लौटेंगे.

बाबू जी – ठीक है बच्चो जाओ लेकिन इस बार इंतजार मत करवाना ज्यादा. वार्ना हम लोग नहीं मिल पाएंगे.

देव – अरे बाबू जी आप भी कैसी बाटे करते है. मए हु न मए रूद्र का ध्यान रखुगा और हम जल्दी hi आएंगे. अभी तो आपको नीलम और रूद्र के बच्चो की भी शादी करवानी है. इसीलिए हम जब लौटेंगे तो आप इनकी शादी भी करवा देना जल्द hi.

रम – भगवन करे वो शुभ घडी जल्दी hi आये. जाओ बच्चो और कुशलता से लौटना वो भी सफल हो कर.
 
अपडेट - 72

फिर देव और रूद्र आते है अपने महल में. और देव वह से भी इजाजत ले कर सीधा तिलिस्म नगरी आता है. इसमें hi दूसरी आधी रात हो चुकी थी.

इस समय तिलिस्म नगरी में सभी एक साथ बैठे थे.

देव – देखिये अब रूद्र और मेरे जाने का समय हो गया है. हम लोग सुबह hi निकल जायेगे. और बाकि तुम लोगो में से नागार्जुन, गुरुम, और शलाका तुम तीनो वो गैंग को खंगाल डालो और मेरे आने तक सब जानकारी इकट्ठी कर लो. और है नागार्जुन तुम हमारे घर का तो ध्यान रखोगे hi. लेकिन यहाँ से कुछ सैनिक ले जाकर उन्हें हवेली पे भी लगवा लो. जिससे कोई खतरा वह न आने पाए. सरे सैनिक अदृश्य रहेंगे. सिक्योरिटी में कही कोई ढील नहीं होनी चाहिए. पूनम तुम्हरा क्या प्रोग्राम है?

पूनम – देव मए तो अपने घर पे hi रहूगी गाँव में. और बंगले पे भी जाती रहूगी. साथ hi इन दोनों जगहों का ध्यान रखूगी. आप कब तक लौटेंगे?

देव – कह नहीं सकता. लेकिन जल्दी आने की कोशिश करुगा. तुम लोग चिंता मत करना. चलो अभी सो जाते है.

फिर सब लोग तिलिस्म नगरी में hi सो जाते है और दो दिनों की भागदौड़ के बाद अब कही जाकर उन्हें थोड़ा सुकून मिला था.

सुबह होते hi शुरू हो जाती है देव और रूद्र की एक रोमांचक यात्रा जिसमे आगे क्या होने वाला है ये न तो दोनों को मालूम था न hi फ़कीर बाबा को जिसने इन्हे भेजा था. ये लोग वह से अदृश्य होकर नील सागर की और निकल पड़ते है. किन्तु कुछ hi समय बाद ये अपने आप न चाहते हुए भी अदृश्य अवस्था से सामान्य अवस्था में आ जाते है. ये लोग इस समय एक बहोत बड़े और अनंत फैले हुए जंगल के सामने खड़े थे. बस एक कदम और इनका प्रवेश उस जंगल में हो जाना था.

दोनों hi एक अजीब उत्तेजना महसूस कर रहे थे क्यों की इस यात्रा में फ़कीर बाबा की पहली बात सच निकली थी के इस वन के आगे उनकी शक्तिया काम नहीं करेगी. देव ने दृढ़ता से रूद्र की तरफ देखा आँखों hi आँखों में दोनों ने निश्चय किया और अपना कदम आगे बड़ा hi दिया. और उस जंगल में प्रवेश कर गए. ये लोग पैदल चले जा रहे थे. दोनों एक नजर देखने में hi महावीर नजर आ रहे थे. दोनों की पीठ पे क्ष आकर में तलवारे लगी हुई थी. और कमर में छोटी लेकिन बहोत तेज. स्टील टाइप की कुल्हड़िया. ये दोनों बहोत सावधानी से आगे बढ़ रहे थे. किन्तु बहोत देर चलने के बाद भी इनके सामने कोई खतरा नहीं आया था. लेकिन ये असावधान एक पल के लिए भी नहीं हुए थे. क्यों के दोनों hi जानते थे के यहाँ आस्वादनी का मतलब है दुर्घटना और ये हर मुश्किल के लिए तैयार थे. आगे रूद्र चल रहा था और पीछे देव. दोनों hi चारो तरफ नजर घूमते हुए आगे चले जा रहे थे.

तभी एक एक देव ने रूद्र को पकड़ के पीछे खिंच लिया. रूद्र का सिर्फ एक कदम उसे मौत की नींद सुला सकता था.

रूद्र – क्या हुआ भाई?

देव – पास पड़ी एक मोती दाल उठा के रूद्र के आगे फेंक दी. जहा रूद्र का कदम पड़ने वाला था. वह दाल के गिरते hi. तेजी से एक खंजरों की बानी दीवाल उठ के तेजी से कड़ी हुई. यदि वह रूद्र होता तो सरे खंजर रूद्र के शरीर के आरपार हो जाने थे.

देवा और रूद्र दोनों के चेहरे पे पसीना आ गया.

रूद्र – इसकी माँ का…….. ये क्या है यार.

देवा – ये उन लोगो का सुरक्षा का तरीका है. अब तक साधारण वन था शायद अब वन राज की सीमा है यहाँ से.

रूद्र – तो बहनचोद कोई सामने क्यों नहीं आता. हम कौन सा उनकी बीवी भागने आये है यहाँ?

देव – उत्तेजित मत हो इंतजार करो वो जरूर आएंगे सामने. आओ आगे चले लेकिन सावधान रहना.

दोनों फिर से थोड़ा दूरी से आगे बढे hi थे के कई सरे तीर उनके पैरो के पास आकर गिरे. और जहा तीर गिरे वह की जमीन काली हो गयी

रूद्र – साला जहर वाले तीर है ये तो. हरे पत्ते काळा पद गए देव.

देव – है देखा मैने. ……………

देव चिल्ला के - कौन है सामने आओ अगर मुकाबला करना चाहते हो तो.

……………………………….कोई आवाज़ नहीं

देव – छुपकर वार करना कायरता है. हम लड़ने से नहीं डरते न hi मरने से न मारने से. हिम्मत है तो सामने आओ.

…….. कौन हो तुम लोग यहाँ हमारे जंगल में क्यों आये हो?

देव – छिपकर बात क्यों करते हो हिम्मत है तो सामने आओ हम सीना तन के तुम्हारे जंगल में खड़े है और तुम अपने hi जंगल में चिप कर बैठे हो. ऐसे hi इसे अपना जंगल कहोगे क्या?

………इतना बोलने की आवश्यकता नहीं. हम चाहे तो अभी तुम दोनों को मौत की नींद सुला सकते है. अपना परिचय दो.

रूद्र – ाजी हां… हलवा है क्या कोई मौत की नींद सुला देंगे. अबे हैट…

………. तुम लोगो को बात करने का तरीका सही नहीं है.

रूद्र – और तेरा तरीका बड़ा सही है? बिना पूछे बिना मिले मौत की धमकी देता है कायर. हिम्मत है तो सामने आ न, डरता है क्या हमसे?

तभी चारो तरफ के पेड़ो से कई सरे लोग हथियारों के साथ कूद पड़ते है. और सामने से एक लम्बा तगड़ा शख्स जिसकी कमर पे घुटनो तक पत्तियों की चादर बंधी थी सामने आकर खड़ा हो जाता है.

………… मए हु इस सेना का सेनापति कुंगा और अब मए तुम्हरे सामने हु अब बोलो.

रूद्र – हम्म्म्म सेनापति कुंगा, हम दो लोगो को इतने सरे सैनिको से घेर कर बड़ा अकड़ रहे हो क्या तुम्हे अपनी ताक़त पर भरोसा नहीं? या तुम्हे ये पता चल गया है के तुम हमारा सामना नहीं कर पाओगे?

कुंगा – मुर्ख ये यहाँ के प्रहरी है. और मए इनका सरदार हु. हमारा काम है अजनबियों को यही पे रोकना.

देवा – तो क्या तुम्हरे महाराज ने तुम्हे ये आज्ञा भी दे राखी है के बिना बात किये बिना पूछे तुम किसी की भी हत्या तक कर डालो? तुमने हम से कोई भी बात किये बिना हम पर दो जान लेवा हमले किये क्या ये बात तुम्हरे महाराज की आज्ञा से हुई?

कुंगा – छोटी छोटी बातो की आज्ञा हम महाराज से नहीं लेते हम खुद संभल लेते है.

रूद्र – यही बात महाराज के सामने कह कर दिखा देना गुरु मन जाउगा मए तुम्हे.

कुंगा – तुम लोग बेकार में अपना और मेरा समय बर्बाद कर रहे हो. तुम लोगो की कोई औकात नहीं महारज के सामने खड़े होने की मुझसे बात करो.

रूद्र – अबे औकात की क्या बात करता है भैंसे? हमारी तो वो हैसियत है. के तेरे जैसे हमारे पैर दबाते है समझा.

कुंगा - लगता है तुम लोग ऐसे नहीं मानोगे तुम्हे अपनी जान प्यारी नहीं है.

रूद्र – अबे जान तो सबको प्यारी होती है. लेकिन है हमें तुमसे कोई प्यार नहीं आगे बड़ा तो तुझे यही सुला डालेंगे तमीज से बात कर ले.

देव जोर से चिल्ला के – हे वन राज यदि आपके सैनिको में से कोई मारा जाता है तो हम दोषी नहीं होंगे आक्रमण ये करने जा रहे है हम नहीं.

कुंगा देवा की आवाज़ सुन के हैरान रह जाता है और उसके भी माथे पे पसीना आ जाता है क्यों की देवा की आवाज पूरे जंगल में बहोत दूर तक गूँज गयी थी.

कुंगा - मारो इनको, दोनों में से कोई बचने न पाए.

कुंगा की आवाज़ से सभी सतर्क हो कर देव और रूद्र पे आक्रमण कर देते है लेकिन देव और रूद्र ने छलांग लगाकर खुद को पेड़ के पीछे कर दिया जिससे उन तक कोई तीर न आ पाए. तो सैनिको ने अपनी तलवारे खिंच ली और उन दोनों की तरफ लपके जैसे hi वो उन पेड़ो के पास पहुंचे वह न तो रूद्र था न देव. सैनिक हैरान हो गए और यहाँ वह देखने लगे तभी ऊपर से रूद्र कूड़ा पास खड़े चारो सैनिको के बीच कूद कर अपनी कुल्हाड़ी लिए हुए तेजी से घूम गया चारो सैनिको की टैंगो में लम्बे घाव बन गए. और चारो अपने पैर पकड़ के जमीन पे गिर पड़े. इधर देव भी ऊपर से कूड़ा और और जो सैनिक उस के पास खड़े थे उनमे से दो की पीठ पे तलवार से वार किया और दो की टैंगो पे उसके पास के भी चारो सैनिक जमीन पे तड़पने लगे तभी कुंगा ने अपने दोनों हाथो में तलवारे निकल ली और रूद्र और देव के बीच में खड़ा हो गया.

देव – रूद्र समझ ले इसके साथ लड़ना है जान से नहीं मरना

देव ने अपनी तलवार अपनी पीठ में वापस फंसा कर वही पड़े एक टूटे पेड़ पर बैठ गया.
 
अपडेट - 73

देव – शूरवीरो मुकाबला शुरू करो.

रूद्र और कुंगा आमने सामने थे. कुंगा ने भरपूर वार किया रूद्र पर लेकिन रूद्र एक चलावे की तररह अपनी जगह छोड़ चूका था. और कुंगा की पीठ की तरफ आकर अपनी छोटी कुल्हाड़ी से हल्का वार किया तो कुंगा की पीठ पे बंधा उसका कवच और उसमे लगी ढल काट के गिर गयी. कुंगा ऊपर से नंगा हो गया.

कुंगा ने गुस्से में पलटकर फिर रूद्र पे वार किया लेकिन रूद्र ने एक हाई जम्प लेकर कुंगा का वार निकल लिया और उसके सर पे वॉर किया अब कुंगा के सर पे जो मुकुट था वो भी जमीन पे था. कुंगा का गुस्सा बढ़ता जा रहा था. उसने गुस्से में दोनों तलवारे बिजली की तेजी से घुमानी चालू कर दी. लेकिन रूद्र अपनी फुर्ती से कुंगा का हर वॉर बचता रहा. तभी कुंगा ने एक जोरदार वार किया उस समय रूद्र एक पेड़ तक जा पंहुचा था अब उसके पास न तो ऊपर जम्प करने की जगह थी न पीछे सरकने की.

जैसे hi कुंगा ने वार किया रूद्र हल्का सा एक तरफ हुआ क्यों की ज्यादा जगह थी नहीं वह. कुंगा की तलवार पेड़ के तने में जाकर धंस गयी बस तभी रूद्र ने उस तलवार पे अपना पेअर रख कर एक जोरदार कोहनी का वॉर कुंगा के मुँह पे किया और कुंगा तलवार छोड़ दूर जा गिरा पर अब भी उसके हाथ में एक तलवार बाकि थी.

रूद्र ने बड़ी फुर्ती से कुंगा तक एक जम्प मरी और अपनी कुल्हाड़ी से हलके वार किये जो कुंगा के शरीर को हॉकी खरोच देते हुए निकल गए लेकिन फिर भी कुंगा के शरीर से खून तो बहने hi लगा उसके मुँह से भी खून बहने लगा था.

तभी कुंगा ने फिर अपना तलवार वाला हाथ लहराया तो रूद्र ने उसे अपनी कुल्हाड़ी से रोक कर एक लात उसकी छाती में मार दी. और अब रूद्र ने अपनी वो एक मात्रा कुल्हाड़ी भी वापस अपनी कमर में फंसा ली. और निहथा hi कुंगा की तरफ बड़ा लेकिन कुंगा फुर्ती से जम्प ले कर खड़ा हुआ और रूद्र पे तलवार का वार किया लेकिन रूद्र ने बड़ी फुर्ती से अपने हाथो को क्ष आकर में कर के कुंगा का तलवार वाला हाथ जकड कर ट्विस्ट कर दिया जिससे उसके कंधे से हलकी सी कड़क की आवा आयी और उसका कन्धा सरक गया. और हाथ से तलवार निकल गयी.

देव – बस कुंगा तेरी तमन्ना पूरी हुई हम यहाँ के दुश्मन नहीं लेकिन तुमने हमें लड़ने पे मजबूर किया इसीलिए हमें लड़ाई की. ये बात मैने तुम्हरे महाराज तक भी पंहुचा दी. अब हमारा कोई दोष नहीं. क्यों की आत्मा रक्षा का अधिकार सबके पास एक सामान होता है. पर जैसा की मइँ कहा हम तुम्हरे या वन राज के ये इस जंगल के दुश्मन नहीं इसलिए हम तुम्हे या इन सैनिको को मार नहीं रहे है. अब हमें महाराज के पास ले चलो.

कुंगा गार्डन झुकाये उठकर खड़ा हुआ और अपने जख्मी हाथ को दूसरे हाथ से पकड़ कर मुँह लटकाये आगे चलने लगा. थोड़ी देर तक चलने के बाद कुंगा बहोत घनी झाड़ियों इ पास जाकर रुक गया. और अपनी भाषा में कुछ कहा. उसकी बात पूरी होते hi. वो झाडिया अपनी जगह से यु सरक गयी जैसे रिमोट से खुलने वाला दरवाजा हो. सब लोगो ने अंदर प्रवेश किया. अंदर तो एक बहोत सुन्दर नगरी बसी हुई थी. जिसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता और बहार से देखने पे कोई कह नहीं सकता था की इन झाड़ियों के पीछे एक बहोत बड़ा नगर बसा हुआ है.

देव और रूद्र बड़ी बारीकी से सब कुछ देखते हुए आगे चले जा रहे थे. हर तरफ वह नागरिक थे जिनकी आँखों में कुंगा की हालत देख कर जहा आश्चर्य था वही दो अजनबियों को देख कर उत्सुकता.

एक लम्बे सफर के बाद ये लोग राजमहल के पास पहुंचते है. एक सैनिक बहार आता है.

सैनिक आप सब अंदर जाइये महाराज आप लोगो की hi राह देख रहे है.

आगे आगे कुंगा और पीछे देव और रूद्र राजदरबार में पहुंचते है. अंदर राजदरबार बहोत hi ख़ूबसूरती से सजा हुआ था. वह चारो तरफ हरियाली थी एक अजीब मनमोहक सुंगंध जो शायद वह लगे हुए फूलो से hi आ रहे थी. दो तीन झरने भी वह से दिख रहे थे. कुल मिलकर दृश्य बहोत खूबसूरत था.

सामने राजगद्दी पे वनराज बैठे थे. उनकी आँखों में इस समय क्रोध था.

वनराज – कुंगा बाकि बाते बाद में. लेकिन तुम इतने असभ्य कैसे हो गए. के अतिथि से पूछे बिना उस पर आक्रमण कर दिया?

कुंगा – महारज हमने इनसे पुछा था लेकिन ये hi दोनों जवाब नहीं दे रहे थे.

वनराज – नहीं कुंगा इनसे बात करने से पहले hi तुमने खंजर दीवार का आक्रमण इनपर किया वो गलत था. मन की इन्होने हमारे सैनिको पे हमला किया लेकिन शुरुआत तुमने की जो गलत है. तुम इनकी लाशे ले आते. लेकिन पहले इनसे पूछ तो लेते की ये कौन है यहाँ क्यों आये है. उसके बाद तुम्हरा हर कदम सही कहलाता. तुम्हरी गलती सिद्ध होती है. इसीलिए हम तुम्हे दंड देंगे. किन्तु तुम एक कर्तव्यनिष्ठ सेवक हो इसीलिए इस बार दंड मामूली hi देंगे. लेकिन आइंदा के लिए ऐसी गलती हुई तो मृत्यु की लावा कोई दंड सोचना भी मत. तो तुम्हे अगले आदेश तक सेनापति के पद से हटाया जाता है. और तुम्हरे सेवक मनका को नया सेनापति बनाया जाता है. लेकिन याद रहे कुंगा. ये तुम्हरी पहली गलती थी इसीलिए दंड कठोर नहीं था. आगे कभी ऐसा कुछ हुआ तो तुम्हे हम स्वयं मृत्यु दंड देंगे. ………

…………. हे युवक तुम्हरी आवाज़ हमारे कानो तक पहुंच गयी थी. लेकिन हमें हमारे उस सेनापति को भी जांचना था. इसीलिए हमने कोई हस्तक्षेप नहीं किया. अब तुम हमें अपना यहाँ आने का कारन बताओ. और साथ hi ये भी के तुम दोनों वीर कौन हो?

देव - प्रणाम वनराज. मेरा नाम देव सिंह है. मए नाग लोक का युवराज हु. और ये मेरा परम मित्र रूद्र है. हम एक विशेष कार्य से अपने गुरु की आज्ञा से नील सागर जा रहे थे किन्तु उन्होंने भी बताया था की आपसे भेंट किये बिना नील सागर तक जाना संभव नहीं. हम तो स्वयं आपसे मिलने के लिए व्याकुल थे. लेकिन उससे पहले ये सब हो गया. हम क्षमा चाहते है.

वनराज – नहीं देव सिंह आप क्षमा मत मांगिये गलती हमारी तरफ से हुई है. आप दोनों यहाँ हमारे निकट आसान ग्रहण कीजिये और बैठ कर विस्तार से सब बताइये.

फिर रूद्र और देव वनराज के पास राखी कुर्सियों पे बैठ जाते है.

देव – महारज हमें हमारी नगरी की सुरक्षा हेतु नील सागर से कुछ लाना है. और वह पहुंचने के लिए. हमें आपकी सहायता चाहिए.

वनराज - देव सिंह जी क्या मए जान सकता हु के नील सागर से आप क्या लेने जा रहे है?

देव – क्षमा महाराज किन्तु ये तो हम स्वयं नहीं जानते अन्यथा आपको बता देता मए.

वनराज – क्यों आपके गुरूजी ने आपको बताया नहीं ?

देव – उन्होंने बस ये कहा की हम यहाँ तक पहुंच जाये आगे आपसे सहायता के लिए प्राथना करे.

वन राज – चलो मन लिया किन्तु मए आपकी सहायता क्यों करू? आपने तो आते hi हमारे सैनिको को घायल किया है.

रूद्र – बीच में बोलने के लिए क्षमा चाहुगा महाराज किन्तु अभी आपने hi स्वीकार किया के गलती हमारी नहीं थी. और महारज हम तो एक दूजे को जानते भी नहीं. हमारी कोई शत्रुता भी नहीं. हम पर जानलेवा हमला हुआ उसके बदले में यदि हम उन सैनिको का वध भी कर देते तो भी हम निर्दोष hi कहलाते . किन्तु हमने सिर्फ उन्हें घायल कर के किनारे बैठा दिया वो भी कुछ समय के लिए उनमे से किसी की भी जान नहीं ली. क्या इससे ये सिद्ध नहीं होता के हमारे मन में आप लोगो के लिए कोई शत्रुता नहीं है.

वनराज – रूद्र आपका तर्क उपयुक्त है. इसी वजह से हमने अपने सेनापति को दंड भी दिया है. लेकिन सवाल फिर भी वही है के हम आपकी सहायता क्यों करे. ये आपकी समस्या है आप स्वयं इसे सुलझाइये. है जहा तक प्रश्न है यहाँ से नील सागर जाने का तो वो आप जब चाहे जा सकते है. आपको कोई भी आगे जाने से नहीं रोकेगा. न hi वापसी में कोई परेशानी होगी आपको . ये हमारा वादा है आपसे.

देव – वनराज यु तो हर जीव अपने लिए जीता है. लेकिन दुसरो की सहायता करने का अवसर किस्मत से मिलता है. भला आप कहा यहाँ वन में और हम कहा अपने लोक में. लेकिन नियति ने हमें मिलाया तो क्या ये इशारा नहीं के हमें भी समझदारी का परिचय देते हुए हाथ मिलाना चाहिए.

वनराज – लेकिन देव इसमें हमर क्या फायदा होगा?

देव – वनराज आप राजा है. ये पूरा वन आपके आधीन है. भला इस वक़्त मए आपको क्या दे सकता हु? और फिर क्या जिस सहायता में कोई फायदा न हो वह सहायता नहीं करनी चाहिए.

रूद्र – वनराज फायदा देख कर जो किया जाये उसे सहायता नहीं सौदा कहते है. और हम यहाँ आपसे सौदा करने नहीं सहायता लेने आये है. और विधि का विधान है के मांगने वाले से देने वाला हमेशा hi बड़ा कहलाता है. तो क्या आपको नहीं लगता के आपको भी अपने बड़प्पन का परिचय देना चाहिए.

वनराज – आप दोनों ने हमारा दिल जीत लिया देव, रूद्र हम आप दोनों से बेहद प्रसन्न है. हम आप दोनों की सहायता अवश्य करेंगे. आइये भोजन कर लिया जाये.

फिर सब लोग भोजन करते है. वह वनराज देवा से नागलोक के बारे में बहोत कुछ जनता है और खुश भी होता है
 
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