Fantasy इच्छाधारी देव - Page 11 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट - 74

भोजन के बाद

वनराज – देव आप अभी आराम कर लीजिये कल प्रातः हम आपके जाने का इंतजाम कर देंगे और आपकी सहायता भी करेंगे जिससे आपको जानकारी मिल जाएगी के आपको वह जाकर क्या करना है. क्या हासिल करना है. किन्तु अभी आप विश्राम कर लीजिये.

देव – जो आज्ञा महाराज

फिर देव और रूद्र वह के अतिथि गृह में सोने चले जाते है. अंदर भवन में रूद्र और देव आस पास सो रहे थे

रूद्र – यार देव मुझे टेंशन हो रही है.

देव – किस बात की ?

रूद्र – यही के नील सागर में क्या होगा?

देव – जब हम कुछ जानते hi नहीं तो टेंशन कैसी?

रूद्र – यार तू हर बात को हलके में क्यों लेता है?

देव – भाई चिंता कर के भी हम क्या उखड लगे. जो होगा वही जा कर निपटेंगे. अभी से क्यों परेशां होना?

रूद्र – हम्म ये भी सही है. मए तो सोच रहा हु. जल्दी से ये निपट जाये तो मए नीलम से शादी कर के 2-3 महीने के लिए कही घूमने चला जाऊ.

देव – अरे है शादी के बाद हम लोग हनीमून पे चलेंगे.

रूद्र – रहने दे तेरे साथ नहीं जाउगा मए.

देव – क्यों बे मैने क्या किया?

रूद्र – भाई तेरे साथ हनीमून पे गया न तो वह भी तू उलझा के रखेगा अपने पंगो में पूरा हनीमून बर्बाद करेगा और कुछ नहीं होना.

देव – चल बे. मए क्या पंगे लेता फिरता हु? वो तो खुद hi पंगे गले पद जाते है तो क्या करू?

रूद्र – अबे वही कह रहा हु. जहा तू होगा वह पंगे होंगे hi.

देव – सोच ले अकेले जायेगा तो भी दौड़ता हुआ वापस आएगा.

रूद्र – अच्छा वो क्यों?

देव – क्यों की मए जनता हु मेरे बिना तो तेरा दिल हनीमून पे भी नहीं लगेगा इसीलिए कह रहा हु मेरे साथ चलना.

रूद्र – एक काम करे क्या? हम लोग हनीमून के लिए यहाँ आएंगे. इसी वन में कितना सुकून है. कोई पन्गा होगा भी नहीं और हुआ तो वन राज संभल लगे अपन लोग बस ऐश करेंगे.

देव – ख्याल बुरा नहीं . सोचेंगे. चल सो जा सुबह चलना है अपन को.

फिर दोनों सो जाते है .

सुबह उठकर अपने नित्य कर्म से निपट कर वो लोग तैयार होते है और अपने कक्ष में hi बैठ जाते है. कुछ देर बाद वह एक सेवक आकर उन्हें वनराज के पास ले जाता है. जहा वनराज उनका नाश्ते के लिए इंतजार कर रहे थे.

वनराज – आइये देव, रूद्र. उम्मीद है रात को नींद अच्छी आयी होगी आप लोगो को?

देव – जी महाराज. हमें यहाँ बहोत अच्छा लगा सब कुछ उम्मीद से बाद कर. खास कर के यहाँ का शुद्ध वातावरण. सब कुछ बहोत अद्भुत है.

वनराज – है युवराज. इस जगह की यही तो खासियत है. और यहाँ के अमन चैन का भी यही राज है के यहाँ आधुनिकता ने प्रवेश नहीं किया. या यु कह लीजिये हमने आधुनिकता को आने नहीं दिया. इसीलिए भी यहाँ के लोग एक लम्बी और खुशाल जिंदगी आज भी जीते है. आप जीतनेय दिन चाहे यहाँ विश्राम कर लीजिये.

देव – वनराज हम जिस कार्य पर निकले है. उसे समाप्त करने के बाद भी एक लम्बी लड़ाई लड़नी है हमें. कुछ दुष्ट लोग है जिनकी नजर हमारी जान पर भी है और हमारे नगरों पर भी. किन्तु ये वादा रहा की हम अपनी रानी और रूद्र भी अपनी पत्नी के साथ यहाँ जरूर आएंगे. हमारा विवाह उस युद्ध के बाद hi होगा. वैसे भी कल रत hi रूद्र कह रहा था के विवाह के बाद अपनी पत्नी के साथ कुछ समय बितान इसी वन में आये.

वनराज मुस्कराते हुए – ये तो हमारा सौभाग्य होगा के आप दोनों ने विवाह पश्चात् इस स्थान को अपने एकांत के लिए चुना है. आप का और आपकी रानियों का यहाँ स्वागत है. आप लोग जब आना चाहे जितने भी दिन के लिए आना चाहे आ सकते है. हमें ख़ुशी होगी. इसके साथ hi एक और बात देव

देव – कहिये महाराज,

वनराज – आजतक बहोत काम hi ऐसा हुआ है के हमें अपनी सेना बहार निकालनी पड़ी हो. किन्तु आप के युद्ध में आपको यदि हमारी आवश्यकता हो और आप हमें युद्ध में आपके साथ खड़े होने की अनुमति देंगे तो हमें ख़ुशी होगी आपका साथ देकर.

देव – ये तो आपका बड़प्पन है महाराज. और हम ये बात यद् रखेंगे. और जरुरत पड़ने पर आपको अवश्य hi यद् करेंगे.

वनराज – धन्यवाद् युराज. अब आपकी नील सागर की बात पर आते है. आप लोग स्वयं hi यहाँ से पश्चिम दिशा में जाये. अब आपकी शक्तियों पे कोई प्रतिबन्ध नहीं है. आप लोग अपनी शक्तिया यहाँ भी इस्तेमाल कर सकते है. पश्चिम में कोई 8-10 घंटे की उड़न के बाद आप नील सागर पहुचेगे. किन्तु वह पे आप यदि रात्रि में पहुंचते है तो बहार hi अपने विश्राम का इंतजाम आपको करना होगा. क्यों की रात्रि में सागर में प्रवेश उचित नहीं होता. प्रातः कल आप दोनों सागर में जाये उसकी अनत गहराई में उतरने के बाद आप को वह दो मगरमच्छ मिलेंगे. एक सफ़ेद चमकीला और एक सुनहरा. सुनहरे मगरमच्छ को मरे बिना उसके पेट के अंदर से आपको एक चीज निकालनी है जिस में एक मानचित्र बना हुआ मिलेगा उस मानचित्र की सहायता से आप स्वर्ण मणि तक पहुंच सकते है. किन्तु ये अवश्य याद रखियेगा की उन दोनों में से एक भी मगरमच्छ मरना नहीं चाहिए. यदि उनमे से एक भी मगरमच्छ आपके द्वारा मारा गया तो आप कभी भी स्वर्णमणि तक नहीं पहुंच पाएंगे. क्यों की वही एक मानचित्र है जिसके द्वारा मणि हासिल की जा सकती है. एक भी मगरमच्छ के मरते hi वह मानचित्र स्वयं hi नष्ट हो जायेगा.

रूद्र – किन्तु महाराज जिन्दा मगरमच्छ के पेट से उसे बिना मरे मानचित्र कैसे हासिल कर पाएंगे.

वनराज – आप सही कह रहे है. ये इतना आसान नहीं किन्तु आप ये मत भूलिए के आप कोई साधारण चीज़ पाने भी नहीं निकले.

देव – शै बात है महाराज. स्वर्णमणि कोई साधारण चीज़ नहीं है.

वनराज – युराज मए आप दोनों को एक अंगूठी देता हु. जिसकी सहायता से आप जब तक चाहे पानी के अंदर रह सकते है. एक दूजे से बात कर सकते है. पानी से आपको कोई तकलीफ नहीं होगी. आप लोग पानी के नीचे अनंत गहराई में भी ठीक ऐसे hi रहेंगे जैसे जमीन पे रहते है.

फिर वन राज देव और रूद्र को एक एक अंगूठी दे देते है.

वनराज इसे संभल के रखियेगा युराज क्यों की आप जब भी इस वन में आएंगे. इस अंगूठी की सहायता से बिना की रुकावट के आप को हम तक सम्मान सहित पंहुचा दिया जायेगा. और इसे छू कर यदि आप हमें यद् करेंगे तो हमसे बात कर पाएंगे. ये आपको हर वक़्त हमसे जोड़े रखेगी.

देव – धन्यवाद् महाराज. अब हमें आज्ञा दे.

वनराज - जाइये युराज आप दोनों को ईश्वर सफलता प्रदान करे.

फिर देव और रूद्र वह से उड़ कर पश्चिम दिशा में चले जाते है.

इधर. शहर में उस गैंग का बॉस एना बहोत खतरानक इंसान यही है वो जिसके आदमियों से देव और रूद्र का पन्गा हुआ. और इसी के कहने पे इसके आदमियों ने दिग की बेटी को उठाया था. वो बहार गया हुआ था और लौटकर जब उसे अपने आदमियों से पता चला की किसी ने उसका प्लान फ़ैल किया है तो क्रोध में आ गया.

एना – तुम लोग मादरचोद किसी काम के नहीं बस दारू पीना और लड़की छोड़ना आता है तुम लोगो को इतने लोग मिल कर भी दो लोंडो का मुकाबला नहीं कर पाए तुम लोग.

ा1 – बॉस वो दोनों बहोत खतरनाक थे. हमने हथियारों के साथ उन पर हमला किया फिर भी उन दोनों ने निहत्थे hi हमें धुल छठा दी.

एना ने चाताआक….. खिंच के छठा मारा अपने आदमी के गाल पर उसके मुँह से खून निकल आता है और एना का कला चेहरा और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है. सेल एक तो तू वह अपनी अम्मा छुड़वा के आया दोनों लोंडो से और अब बता भी रहा है के उन्होंने लुंड कैसे कैसे घुसेड़ा तेरी अम्मा की बुर में और कैसे गांड मरी. मादरचोद दुश्मन की तारीफ करता है .
 
थैंक्स फॉर योर सपोर्ट भाई लेकिन इतनी भी क्या जल्दी है अभी तो बस शुरुआत hi है. स्वर्ण मणि इतनी भी आसान नहीं होगी. जब तक आप लोगो को फुल मजा न मिल जाये तब तक इन्हे स्वर्ण मणि नहीं मिलेगी. बहोत कुछ समस्याए आएगी उस सफर में भी. अभी तो बस नक्शा hi लेने जा रहे है अभी स्वर्ण मणि वाला सफर तो शुरू hi नहीं हुआ है. सो इंतजार कीजिये और कहानी का मजा लीजिये.
 
अपडेट – 75

ा1 – सॉरी बॉस , और है उन्होंने बताया था के वो सूर्यगढ़ के रहने वाले है. नाम है उनके देवा और रूद्र.

एना – तो गधे की औलाद ये काम की बात सबसे आखरी में बताएगा. ओह्ह गॉड क्या करू मए अपने इन निकम्मे लोगो का. काम की बात सेल सूअर आखरी में बकते है. अब जाओ मुँह क्या देख रहे हो. पूरी फौज लेकर जाओ और उन्हें जिन्दा या मुर्दा लेकर आओ. फिर शायद तुम्हे मए अपनी रखैल भी दे दू जिसे मेरे आलावा किसी ने नहीं छोड़ा. रात भर उसकी छोड़ लेना. मए कुछ नहीं कहुगा. अब जाओ मुँह क्या देख रहे हो.

वह से करीब 20 आदमी निकलते है. सूर्यगढ़ की और देवा पे हमला करने इस बात से अनजान के देवा और रूद्र तो है hi नहीं गाँव में.

जब वो गाँव पहुंचते है तो रस्ते में उनकी मुलाकात पद्मा से हो जाती है जो अपने खेत से लौट रही थी.

ा1 – ा सुन इधर आ

पद्मा – तमीज नहीं है बात करने की. ऐसे कोई किसी को बुलाता है क्या?

ा – हमें तमीज का पथ मत पड़ा हमें तेरा दामाद नहीं बनना है. जो तमीज से बात करे.

पद्मा – हरामी सेल मेरा दामाद बनेगा तू? मेरे दामाद के सामने भी खड़ा हो गया न तू तो तेरा पिशाब निकल जायेगा.

ा – मतलब तेरी बेटी जवान है और तेरा दामाद भी है. हमें बी बना ले एक रत का दामाद?

पद्मा – शुक्र कर अभी किसी ने सुना नहीं वार्ना तुझे यही जमीन में गाड़ देते.

ा – मुह्चोड़ी मत कर इतना बता यहाँ देवा कर के कोई रहता आहे क्या इस गाँव में ?

पद्मा सतर्क हो जाती है और गौर से सबको देखती है. सभी उसे खतरनाक लग रहे थे. और उनके इरादे भी ठीक नहीं लग रहे थे.

ा – आरी सांप घुस गया क्या तेरी बुर में. बता न?

पद्मा – मुझे नहीं पता और तेरे जैसे नीच की किसी बात का जवाब मए क्यों दू. भाग यहाँ से वार्ना अंजाम अच्छा नहीं होगा? दिखना भी नहीं अब इस गाँव में.

ा पद्मा को बालो से पकड़ लेता है – साली बताती है के नहीं. बोल वार्ना यही पटक के हम सब तुझे छोड़ डालेंगे. 20 लुंड एक साथ देख के hi मर जाएगी तू. समझी.

पद्मा – छोड़ हरामी मुझे.

ा – लगता है ये ऐसे नहीं बताएगी.

तभी उसका साथी – अबे छोड़ उसे देख कोई आ रहा है गाँव के लोगो ने पकड़ के मरना शुरू किया तो यहाँ रुक भी नहीं सकेंगे. चल किसी और से पूछते है.

ा1 पद्मा को जमीन पे धक्का देकर – तुझे तो मए छोड़ के hi जाउगा इस गाँव से. बिना तेरी बुर और गांड फाड़े मए इस गाँव से नहीं जाउगा तुझे नहीं पता तूने किस से पन्गा ले लिया है.

सब लोग गाड़ी में बैठकर निकल जाते है. और आगे जाकर किसी से पूछते है तो उन्हें पता चलता है के देवा का बंगले कौन सा है. वो सभी लोग बंगले से दूर हो के बैठ जाते है और नजर रखने लगते है.

इधर पद्मा भी घर आती है तो उसकी हालत देख कर पूनम चौंक जाती है.

पूनम – माँ क्या हुआ तुम्हरे बाल क्यों बिखरे हुए है और ये इतनी धुल मिटटी कैसे लग गयी? कही गिर गयी थी क्या?

पद्मा – वो सब छोड़ ये बता देवा कहा है इस वक़्त?

पूनम – क्यों क्या हुआ माँ?

पद्मा चिल्ला के – तुझे अकाल है के नहीं जो पुछा वो बता देवा कहा है?

पूनम – माँ वो… है वो तो घर में hi होंगे न पर हुआ क्या?

पूनम - देवा को बुला जल्दी उस से कुछ काम है मुझे.

पूनम पानी का गिलास पद्मा को देती है पानी पीकर भी पद्मा का क्रोध शांत नहीं हुआ था.

पद्मा - बुला देवा को पूनम जल्दी.

पूनम – माँ बुला देती हु उन्हें पर मुझे भी तो बताओ हुआ क्या है.

फिर पद्मा पूनम को रस्ते में हुई साडी घटना बता देती है. के वो लोग क्या क्या कह कर गए है.

पूनम की आँखे बुरी तरह से लाल हो जाती है ये तो पद्मा ने उसकी आँखे नहीं देखि वार्ना शायद वो वही बेहोश हो जाती. पूनम क्रोध से कंपनी लगती है. तभी उसके कंधे पे पद्मा हाथ रखती है तो पूनम खुद को संभल कर मुस्क्रत हुई पद्मा को देख कर

पूनम – मए मए देव से बात करती हु. आप आर्म कीजिये और निश्चिन्त हो जाइये. कुछ नहीं होगा देव को. ऐसे लोग उनका कुछ नहीं बिगड़ सकते.

फिर पूनम वह से निकल कर देव के घर आती है बेसमेंट में. रस्ते में उसने कई लोगो को नोटिस किया के वो लोग कितने है कहा बैठे है. उन लोगो ने पूनम को नहीं देखा क्यों की पूनम ने ये सब अदृश्य हो कर किया था.

बेसमेंट में जैसे hi पूनम पहुंची. वह नागार्जुन, शलाका, गुरुम बैठे थे.

गुरुम – अरे आइये भाभी आप अचानक यहाँ?

पूनम – देव पे हमला करने के लिए शहर की एना गैंग के आदमी आ गए है.

शलाका – पूनम हम जानते है वो लोग आ चुके है और बहार घाट लगा के बैठे है. वो सब तो बहोत पहले हमारी नजर में आ चुके है.

पूनम – फिर भी अब तक वो लोग जिन्दा है?

गुरुम – भाभी हम नहीं चाहते थे की गाँव वाले परेशां हो इसीलिए हम सूरज ढलने का इंतजार कर रहे थे. रत को उनका काम हो जायेगा.

पूनम – मए चलुगी साथ में.

गुरुम – लेकिन भाभी आपको जाने की जरुरत hi नहीं ये लोग तो बहोत मामूली से है इन के लिए आप जाएगी?

पूनम – इन सब के लिए नहीं. उनमे से एक आदमी के लिए.

नागार्जुन बहोत गौर से पूनम के चेहरे को देख रहा था और चुप चाप उनकी बाते सुन रहा था.

गुरुम - एक आदमी के लिए? किस के लिए?

पूनम – उन में से एक आदमी ने दिन में मेरी माँ के साथ बदतमीजी की है और उन्हें गन्दी गालिया दी है. उन पर हाथ उठाया है. उसे मए खुद मृगी उसके टुकड़े मए करुँगी तुम में से कोई उसे नहीं छुएगा. उसने पूनम की माँ के साथ बदतमीजी की इसका अंजाम वो बहोत बुरा भुगतेगा.

पूनम की बात सुन कर तीनो एक झटके में खड़े हो जाते है.

गुरुम - किस की मौत ने पुकारा है जो पद्मा काकी से ऐसा सुलूक किया?

पूनम – वो मए नहीं बताऊगी जब मए उसे मृगी तो खुद समझ जाओगे तुम लोग.

शलाका – ठीक आहे पूनम हम रत को चलेंगे अभी शांत हो जाओ.

पूनम बिना कुछ कहे वह से निकल के अपने घर आ जाती है.

पद्मा – बात की देवा से?

पूनम - माँ मैने वह जा के बात कर ली है आज रत उनमे से उस नीच के आलावा कोई और जिन्दा नहीं बचेगा , और वो कुत्ता भी तुम्हरे सामने लाया जायेगा. जिसे तुम्हारा एक रत का दामाद बनने का शौक चढ़ा था. अभी आराम करो तुम.
 
अपडेट – 76

उधर देव और रूद्र भी नील सागर पहुंच जाते है लेकिन उन्हें वह पहुंचते पहुंचते सूरज ढल चूका था. रात ने अपना कला अंचल फैलाना चालू कर दिया था.

रूद्र – देव इस से ाचा तो हम अदृश्य होकर यहाँ तुरंत पहुंच जाते न? उड़न भर के आने में तो पूरा दिन निकल गया.

देव – नहीं रूद्र अगर वैसे आ सकते तो वनराज हमें उड़न भरने को नहीं कहते. वैसे यहाँ तक आ पाना संभव hi नहीं था. उस वन की शक्तियों की वजह से.

रूद्र – चलो ठीक है पर. अब यहाँ हम क्या करे. न कुछ खाने को न पीने को न रहने को

देव – अबे रोटा क्यों है. सेल हम लोगो की शक्तिया कब काम आएगी. यहाँ एक मस्त रूम बना लेते है. जिसमे सब कुछ होगा. और लहरों के किनारे ठंडी हवा का आनंद लेते है सुबह जायेगे अंदर.

रूद्र - चलो ठीक है मए बना देता हु.

फिर रूद्र अपनी शक्तियों से वह एक कॉटेज टाइप का बना देता है जिसमे दो मस्त बीएड लगा देता है और खाने का पूरा सामान भी इकठ्ठा कर देता है.

रूद्र – देव यार पहले नहाना है.

देव – है क्यों नहीं चल अब तो ये पूरा समंदर अपना है जो करना हो कर ले.

फिर देव और रूद्र पानी में छलांग लगा देते है और नहाने लगते है. काफी देर नहाने के बाद वो बहार आते है और खाना खा लेते है. और बहार आ कर बैठ जाते है. बीच पे. जहा समंदर की लहरे उनके पैरो से बार बार टकरा रही थी.

देव – रूद्र चल घूमने षाले है.

रूद्र – अबे सटक गयी है क्या यहाँ हम दोनों के आलावा कुछ नहीं. घूमने कैसे जायेगा और कहा घूमने जायेगा.

देव – रुक जा जरा

फिर देव अपनी शक्ति से वह एक छोटा सा यात बुलाता है. और रूद्र की तरफ देख कर मुस्करा देता है.

रूद्र – वाह भाई. ये सही है कही और जाने से अच्छा है समंदर की सैर पे hi चलते है.

देव – है चल तू चला इसे.

रूद्र – भाई मुझे चलनी नहीं आती.

देव – अबे यहाँ कौन है जिससे टकरा जायेगा. चला तू ज्यादा से ज्यादा इधर उधर लहराएगा और क्या उखड लेगा.

रूद्र – ये भी ठीक है. आ बैठ जा बाकि तू जाने तेरा काम मैने बोल दिया है मुझे चलनी नहीं आती.

देव – धीरे धीरे बढ़ाता जा एक डैम से स्पीड मत लेना

रूद्र स्टीयरिंग संभल के यात आगे बड़ा देता है तो वो स्पीड में भागने लगती है.

देव – अबे गधे यहाँ क्या रेस में भाग लेने आया है. आराम से चला न.

रूद्र भी घबरा गया स्पीड से फिर उसे समझ में आ गया के स्पीड कैसे कण्ट्रोल करनी है. उसने देव को देखा तो देव आसमान में घर रहा था और पल पल उसकी आँखे गुस्से में लाल हो रही थी.

रूद्र – क्या हुआ देव?

देव ने उसे इशारे से चुप रहने को कहा और फिर आसमान में घूरने लगा. और फिर उसी पल वो वही पालथी मार के बैठ गया कुछ 15-20 मिनट बाद उसने आँखे खोली उसके चेहरे पे काफी गुस्सा था.

रूद्र - अबे क्या हुआ? बोलेगा या मए कूद जाऊ समंदर में कर लू आत्महत्या?

देव – वो मुझे कुछ अंदेशा हुआ तो मए पूनम से बात करने लगा था. और उससे बात कर के पता चला के मेरा अंदेशा सही था.

रूद्र – क्या हुआ सब ठीक है न वह?

देव – नहीं, पर सब ठीक हो जायेगा चिंता की कोई बात नहीं.

रूद्र – किस की मौत आयी देव?

देव – वो शहर में जो एना गैंग है उसने अपने आदमी भेजे है गाँव में हम दोनों को मरने के लिए. हमारा पता पूछने के लिए इत्तेफ़ाक़ से वो पद्मा काकी से hi टकरा गए और जब काकी ने उन्हें कुछ नहीं बताया तो उन्होंने उनकी काफी बेइज्जती की. मेरे बारे में उल्टा सीधा बोलै, पूनम के बारे में गलत बात की.

रूद्र – और उस के बाद भी अब तक वो जिन्दा है ? उनकी माँ का भोसड़ा. ये शलाका, नागार्जुन , और गुरुम क्या कर रहे है.

देव – रात का इंतजार. बस कुछ hi देर में उन लोगो का काम हो जायेगा. तू ये सॉफ्ट ड्रिंक पि अभी. और चील मर.

रूद्र – अभी अगर मए वह जा सकता तो उनकी गांड मरता मए. और तू मुझे चील मरने को कह रहा है?

देव – अबे दुसरो को भी कुछ कर लेने दे. जीतनेय लोग वह है न अभी हमारे. उनमे से एक भी मैदान में चला गया तो वो सेल दो कौड़ी के गुंडे एक हाथ मुँह पे और दूसरा गांड पे रख के भागेंगे समझा. शलाका, पूनम, गुरुम और नागार्जुन कोई काम नहीं है. सब एक से बढ़कर एक है.

रूद्र – है बात तो सही है.

फिर देव और रूद्र दूर तक फैले समंदर में आगे बढ़ते चले गए. सिर्फ चाँद की रौशनी और चारो तरफ विशाल नीला समंदर जो रत के अँधेरे में कला दिख रहा था. इसके अंदर अपनी hi दुनिया बसी हुई थी. कुछ हद तक साधारण लेकिन कुछ इतनी रहस्यमयी के जिनके रहस्य की नहीं प् सका था अब तक. लेकिन बहार का नजारा hi कुछ अजीब था. ये दोनों दोस्त यु hi बतियाते हुए अब वापस आने लगे अपनी कॉटेज की तरफ.

उधर गाँव में

रत का अँधेरा फ़ैल चूका tha.tabhi पूनम बेसमेंट में पहुँचती है. वह लगी स्क्रीन पर बंगले के आस पास का सन चल रहा था और हद कमेरो की वजह से वो सरे लोग भी दिख रहे थे जो अपनी तरफ से तो छुप कर नजर रखे हुए थे.

पूनम – चलो तुम सब यहाँ से नजर रखो मए जाती हु उन सब को ठिकाने लगाने.

गुरुम – नहीं भाभी आप नहीं जाएगी हमारे होते. आप यहाँ से देखेगी वह मए जाउगा.

शलाका – तो मए जाती हु न तुम सब रुको

नागार्जुन - मैने कोई गलती की है क्या? कोई नहीं जायेगा. सब यही बैठो बंगले की और इस घर की जिम्मेदरी देव ने मुझे दी है. मए जाउगा. समझ गए सब लोग.

गुरुम – भाई मेरी बात सुन भाभी और शलाका तो जाएगी नहीं हम दोनों के होते. लेकिन यहाँ बात इतनी सी है के तुमने देव के साथ रह कर और उसके बिना भी उसके पक्ष में बहोत कुछ किया है. ये पहला मौका मिला है, मुझे जाने दे. प्लीज यार मन जा.

नागार्जुन – गुरुम तुम्हरी बात सही है. मए सहमत हु. चल तू कर ले. लेकिन फिर भी साथ तो मए भी चलुगा hi.

गुरुम – मंजूर है लेकिन तू कुछ नहीं करेगा. चाहे कुछ भी हो जाये.

नागार्जुन - ठीक है.

पूनम – हमें आप दोनों की बात सही लगी आप दोनों जाइये. लेकिन मुझे वो कुत्ता जिन्दा चाहिए जिसने दिन में माँ से बात की थी.

गुरुम - ठीक है भाभी मिल जायेगा वो आपको. नागार्जुन उसे निकल कर किनारे कर लेना और उसे अपने पास रखना जब मए सब को निपटा दू तो उसे लेकर हम आ जायेगा.

नागार्जुन - सही है भाई चल.

फिर गुरुम वह लगी. गन्स में से दो मोजर कुछ मग और दो चाकू अपनी बेल्ट में फसता है. और पूनम नागार्जुन को बता देती है ेके किसे लाना है.

नागार्जुन – ये सब क्यों ?

गुरुम एक मोजर विथ सीलेंसर और कुछ मग नागार्जुन को देते हुए. तुम उनकी गाड़िया पंक्चर कर देना. और मए ये फाइट बिना किसी जादुई शक्ति के लडूगा. यहाँ तक की मुझे कोई शील्ड कवर भी नहीं लेना है. उन सेल गली के गुंडों के लिए जादुई शक्ति no वे बॉस. आज मए तुझे बताता हु के इस दुनिया में हम लोग कैसे फाइट करते है प्लान कर के. नागार्जुन भी मुस्कराता हुआ उसके साथ चल पड़ता है.
 
अपडेट -77

गुरुम और नागार्जुन दोनों बहार निकलते है. और उन लोगो की तरफ hi बढ़ने लगते है. उन में से कुछ बंगले पे नजर रखे हुए थे और बाकि वह किनारे में बैठे दारू पी रहे थे.

ा1 – साला रात हो गयी वो गांडू और उसका दोस्त दिखे नहीं अब तक पता नहीं किस के पेटीकोट में जाकर छुपे है सेल इनकी माँ को छोड़ू.

ा2 – भाई उन्हें पता तो नहीं चल गया के हम लोग यहाँ छुप कर नजर रख रहे है. शायद इसीलिए वो बहार नहीं आ रहे है.

ा1 – जो भी हो 2 घंटे बाद हम लोग इन सेल दो चार गार्ड्स को गोली मर के बंगले में hi घुस कर मरेंगे मादरचोदो को. और इस घर में जितनी भी छूट होगी उन्हें पूरी रात छोड़ेगे भी .मजा आएगा आज रत तो. हाहाहाःहाहा

तभी गुरुम – अपनी सोच में भी इतना आगे नहीं जाना चाहिए के सीधा मौत से मुलाकात हो जाये. कोई हिलेगा नहीं अपनी जगह से. किसी ने अपनी गांड भी हिलायी तो गोली चल जाएगी.

सभी चौंक कर आवाज़ की तरफ देखते है तो गुरुम वह उनकी तरफ निशाना लगाए खड़ा था. तभी उन में से एक तेजी से अपनी गन निकलता है. लेकिन गुरुम की गोली उसके माथे में तीसरी आँख बना चुकी थी.

गुरुम – बेकार में मारा गया. मैने बोलै था कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा. अब ये बताओ शाम को उस औरत से रस्ते में बकचोदी किसने किट hi बे?

ा1 – तू कौन है बे? क्या तू hi है देवा? या रूद्र?

गुरुम – इधर देख बे लौड़े गन मेरे हाथ में है. यहाँ मए जवाब देने नहीं आया. इसीलिए सवाल सिर्फ मए hi karuga.Par है तेरा जवाब जरूर दुगा. देवा और रूद्र तो मौत का दूसरा नाम है यमदूत के परकाले कह सकते हो. क्यों अपनी मौत से मिलना चाहता है तू? अब बोलो तुम में से कौन था वो हराम का जाना जिसने उस औरत से बदतमीजी की थी.

ा1 – ओह्ह तो तुझे उस छिनाल ने भेजा है? क्या बात है उसकी बुर में खुजली बाद गयी है क्या रात होते hi. चल उसे जा कर बोल देवा और रूद्र को मरने के बाद उसकी छूट की आग भी ठंडी कर के hi जाउगा.

गुरुम हँसते हुए – तुझे लगेगा की मए तेरी बात पे भड़कने के बदले हंस क्यों रहा हु. तो सुन तू अपने हर लफ्ज़ से अपनी मौत को और ज्यादा भयानक बनता जा रहा है. इसीलिए हंस रहा हु. मतलब दिन में उनसे बात तूने की थी?

ा1 – है मैने की थी उखड लेगा मेरा?

गुरुम – बच्चे तेरा तो सब कुछ उखाड़ने hi वाला है लेकिन यहाँ नहीं.

इतना कह कर गुरुम अपनी ऊँगली से इशारा करता है के वह नागार्जुन हवा की तेजी से आ कर उस गुंडे को उठा ले जाता है और दूर खड़ा हो जाता है. अब वो गुंडा उस के कदमो में रस्सी से बुरी तरह जकड़ा हुआ पड़ा था. और चटपटा रहा था.

गुरुम – बॉयज योर गेम इस ओवर. धय.. धय.. धय.. धय.. धय.. गुरुम लगातार फायर करते हुए अपनी जगह से जम्प लगा देता है लेकिन उसकी हर बुलेट किसी न किसी को मौत देती हुई निकल रही थी. किसी के सर में किसी की छाती में. अब तक गुरुम ने 6 लोगो को मौत की नींद सुला दिया था. और जम्प कर के किनारे हो गया था क्यों की उन गुंडों ने भी अब तक अपनी पोजीशन ले कर गुरुम पे फायर करने शुरू कर दिए थे लेकिन उनमे से किसी की गोली गुरुम को टच भी नहीं कर पायी थी. गुरुम जिस पेड़ के पीछे था उसी पर वो तेजी से चढ़ गया और ऊपर से जब उसने देखा तो सरे गुंडे धीरे धीरे आड़ लेकर गुरुम वाले पेड़ की तरफ बढ़ रहे थे. गुरुम ने वही से उन पर अपना मोजर खली करना शुरू कर दिया जैसे hi मग खली होता गुरुम फुर्ती से उसे चेंज कर के फिर शुरू हो जाता.

अब वो लोग भी गुरुम पे ऊपर फिर करने लगे . गुरुम मग चेंज करने के लिए रुका तभी एक गोली गुरुम के कान को गरम हवा देती धाय……. कर के निकल गयी यदि एक इंच भी गुरुम आगे हुआ होता तो गोली उसकी कनपटी में घुस जाती. गुरुम ने तुरंत अपने पेड़ से लटकती एक बेल को पकड़ा और तेजी से दूसरे पेड़ पे चला गया. उसकी स्पीड इतनी तेज थी के नीचे वालो को कुछ समझ आता उससे पहले ह गुरुम ने वह से फायरिंग शुरू कर दी. नीचे अब 2-3 hi लोग बचे थे. गुरुम ने अपनी गन्स अपनी कमर में फसे और नीसह देखा तो एक गुंडा यहाँ वह देखता हुआ सतर्क हो कर उसी पेड़ की आड़ में खड़ा हो गया शायद वो नहीं जनता था की गुरुम इस पेड़ पर है.

गुरुम ने अब इस पेड़ की बेल को अपने पैर में बंधा और जमीन की तरफ सर कर के छलांग लगा दी. और अपनी कमर में फंसा खंजर निकल लिए जैसे hi वो उस गुंडे के करीब पंहुचा उसका मुँह दबा के अपना खंजर उसकी गार्डन पे फिर दिया.

तभी एक गुंडे ने उसे देख लिया तो गुरुम ने हाथ का खंजर तेजी से उसकी तरफ फेंका जो सीधा उसके दिल में जाकर घुसा. बाकि बचा एक जो अब गुरुम के ठीक सामने खड़ा काँप रहा था. उसने पेण्ट में hi मूट दिया.

ग – भाई मुझे माफ़ कर दो. मए मरना नहीं चाहता प्लीज मुझे माफ़ कर दो.

गुरुम – मादरचोद अभी अगर ये यहाँ किसी को उठा के लेट तो सबसे पहले तू hi पेण्ट नीचे करता ये कह कर के मुझे भी छूट चाहिए. है न? तो जब इनके साथ तू सुख में शामिल हो सकता है तो इनके साथ मौत भी बाँट . bye.dhaay… एक गोली और बचा हुआ गुंडा भी ख़तम

गुरुम बारीकी से सब की देख कर नागार्जुन के पास आता hae.nagarjun उसे देख कर हंस रहा था

गुरुम – क्या भाई हंस क्यों रहा है.

न – यार तू तो एक डैम वहशी लग रहा था. इन्हे मरते वक़्त

गुरुम - इन सालो ने काम hi ऐसे किये है. इन जैसो का मरना hi सही है. चल अब इसे भाभी के पास ले कर चलते है.

फिर वो लोग उसे उठाकर सीधा बेसमेंट में आते है. जहा शलाका और पूनम आराम से बैठी थी.

गुरुम – भाभी आपका मुजरिम हाजिर है. देख लो कोई खरोच भी नहीं है इसके बदन पर.

पूनम उस गुंडे को देखते हुए. – ये तो मेरी माँ का एक रत का दामाद है. भला इस के बदन पे खरोच मए कैसे बर्दाश्त कर सकती थी.

पूनम – कैसे हो मेरी माँ के दामाद जी ?

ग – आप……. आप कौन है बहन जी?

पूनम – अरे अरे बहन मत बनाओ यार तूने hi तो मेरी माँ से दिन में कहा था तू उनका एक रत का दामाद बनेगा यानि मेरा एक रत का पति. अब मेरा पति मुझे बहन कहे ये कैसे हो सकता है? क्या तू बहनचोद है?

ग – नहीं मुझसे गलती हो गयी मुझे माफ़ कर दो मुझे जाने दो.

पूनम – ऐसे कैसे जाने दू मेरे साथ सुहागरात तो मन ले मेरी जान.

ग – अरे मेरी माँ मुझसे गलती

पूनम ने sataaaaaaaaaaaaak कर के एक नुकीला बेल्ट उस के ऊपर चला दिया जिससे उसकी शर्त के साथ उसके सीने की चमड़ी भी नुचती हुई बेल्ट के साथ आ गयी.

ग – AAAAAAAAAAAAAAAAAHHHHHH मुझे माफ़ कर दो

पूनम ने बिना रुके उस पर उस नुकीले बेल्ट से अनगिनत वॉर किये और वो लहू लुहान हो गया उसके शरीर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं था जहा से कहौं न बाह रहा हो.

पूनम – हरामखोर मेरी माँ का दामाद बनेगा?, मेरे देवा को गली देगा?, मेरी माँ की इज्जत लूटेगा?, मेरे देवा और मेरे भाई जैसे रूद्र को जान से मरेगा. तेरी तो आज मए फाडूगी कुत्ते की औलाद इतना कह कर साताआयक, सत्ताआक, sataaaaaaaaaaaak पूनम उस पे बेल्ट चलती जा रही थी. इतनी मार खा कर वो वही बेहोश हो गया. शलाका ने बिना किसी के कहे उसकी तरफ हाथ बड़े एक हलकी सी रौशनी उस गुंडे के मुँह पे गिरी और वो होश में आ गया.

पूनम – नंगा करो इसे गुरुम.

गुरुम – लेकिन भाभी?

पूनम चिल्ला कर – दो अस ी से don’t थिंक.
 
दोस्तों हम लोग यहाँ एक दूसरे को सिर्फ स्टोरी के माध्यम से hi जानते है कोई किसी को पेर्सनली नहीं जनता. अपडेट करने के बाद आप लोगो से दो शब्द बात करना अच्छा लगता है. तो कृपया अपडेट पढ़ लेने के बाद अपने रेविएवस जरूर दीजिये इससे स्टोरी लाइन आगे ले जाने में भी मदद मिलती है और आप लोगो से बात करने का मौका भी मिलता है. सब के विचार जानने का भी अवसर मिलता है. वैसे अपने पाठको के रेविएवस से किसी राइटर को कुछ दूसरा फायदा नहीं मिलता न कोई पैसा न कुछ और बस आप लोगो से बाटे हो जाती है इससे ज्यादा कुछ नहीं. सो प्लीज आप लोग अपने रेविएवस जरूर दे. जो ोग रेविएवस देते है हम उनका शुक्रिया ऐडा करते है. आप लोग है पढ़ने के लिए तभी हमें लिखने में मजा भी आता है. अब पेश है आप सब के लिए नया अपडेट. कोई कमी हो तो भी जरूर बताये.
 
अपडेट - 78

गुरुम ने पूनम का क्रोध से लाल चेहरा देखते हुए उस गुंडे को पूरा नंगा कर दिया. तो पूनम ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और गुरुम की बेल्ट में फसा खंजर खिंच के निकल लिया.

पूनम – shalakaaaaaaaaaa……………………….

शलाका तेजी से नीचे बैठी और उस गुंडे का लुंड पकड़ के उठा दिया जो किसी मरियल चूहे जैसा hi था, शायद खड़ा होने पे भी 4 इंच से आगे न बढ़ता होगा. पूनम ने तेजी से अपना हाथ घुमाया और गुंडे का लुंड कट कर अलग हो गया और शलाका के हाथ में फाड् फाड़ने लगा. जिसे शलाका ने दूर फेंका. लुंड के कट जाने से वो गुंडा बहोत दर्दनाक चीखे मरने लगा. और लुंड की जगह पे बहोत तेजी से खून बहने लगा. वो फिर से बेहोश हो गया था.

पूनम – गुरुम इसकी पेण्ट पहना दो. और इसे ले के चलो मेरे घर. नागार्जुन इसे देवा ने भेजा है इसकी ये हालत कर के माँ से कहना

गुरुम ने उसे कपडे पहनाये और गुंडे को अपने कंधे पे उठा लिया सब एक साथ अदृश्य होकर पूनम के घर के बहार प्रकट हुए.

पूनम ने भी अपनी शक्ति से अपना हुलिया ठीक किया और तेजी से अपने माँ के कमरे में गयी जहा उसकी माँ सो रही थी.

पूनम – मायआ उठ जल्दी देखो तो बहार कौन है?

पद्मा घबरा गयी – तू….. तू,….. देवा को फ़ोन लगा कही वो गुंडे न आ गए हो. मए देखती हु. तू बहार मत आना बेटी वो बड़े खतरनाक है.

पूनम – ठीक है माँ मए उन्हें कॉल लगा देती हु.

पद्मा जैसे hi बहार निकली सामने नागार्जुन और गुरुम को देख कर एक ठंडी सांस भरी.

पद्मा – अरे बीटा तुम लोग इस वक़्त सब ठीक तो है न? और ये तुम्हरे कंधे पे कौन है बीटा?

नागार्जुन – काकी ये वही हरामी है जिसने दिन में आपसे बदतमीजी की थी. देवा ने सबको मार डाला और इसकी ये हालत कर के आप के पास भेजा है. इसे मौत आप देगी. देवा ने कहा है बाकि वो संभल लेगा. आप चिंता मत करो.

गुरुम उस गुंडे को जमीन पे लिटा चुका था. जो बेहोशी में भी तड़प रहा था लुंड कट जाने के दर्द की वजह से.

उधर पूनम भी बहार आ गयी और पद्मा की नजर बचा के उसने गुंडे पे अपनी किरणे फेंकी और उसे होश में ले आयी. गुंडा होश में आते hi चीखने लगा. और तड़पने लगा.

पद्मा – इतनी बुरी हालत की है देवा ने इसकी. इसका शरीर और चेहरा तो नजर hi नहीं आ रहा. पूरा कौन में डूबा के भेजा है . इतना क्यों मारा इसे.

पूनम – माँ इसने आपसे बदतमीजी की, मेरे खिलाफ बोलै, देव के परिवार की हर औरत के खिलाफ बोलै, और तो और ये हरामजादा देव और रूद्र को मरने आया भला इसकी ऐसी हालत न की जाये तो कोई क्या करे.

पद्मा – तू चुप कर बड़ी आयी फैसला करने वाली. बीटा इसे डॉ. के पास ले जाओ नहीं तो ये मर जायेगा.

पूनम - नहीं माँ देव ने इसे यहाँ मौत के लिए भेजा है ये तो मरेगा hi. तू नहीं मारेगी तो मए मृगी इसे.

पद्मा – नहीं बीटा छोड़ दे इसे.

पर तब तक पूनम ने तेजी से अपनी कमर में छुपाया हुआ खंजर निकला और और उसकी छाती पे बैठ के खचा खच, खचा खच 15 वार किये और उसको मौत की नींद सुला दिया.

पद्मा मुँह पर हाथ रखे पूनम की ऐसी दरिंदगी देखती रह गयी. उसे भी पूनम का ये रूप डरा रहा था. पूनम उस गुंडे के खून में नहायी हुई लग रही थी. और उसके बाल भी खुल चुके थे जिससे वो रणचंडी की तरह hi लग रही थी. उसकी उठती गिरती छतिया hi बता रही थी के कितना क्रोध भरा था पूनम के सीने में.

जब पूनम को ये अहसास हो गया के वो गुंडा मर चूका है. तो पूनम उस के ऊपर से उठी और फिर से पूरी ताक़त से हाथ में पकड़ा खंजर उसके गले में मुट्ठ तक घुसेड़ दिया और खंजर को वही छोड़ के सीढ़ी हो गयी.

पूनम – नागार्जुन, इसे ठिकाने लगा देना

इतना कह कर पूनम अंदर की तरफ जाने hi लगी थी की उस गुंडे की जीन्स में से मोबाइल फ़ोन बजने लगा.

गुरुम ने फुर्ती से मोबाइल निकला और स्पीकर पे लगा के चालू कर दिया तो उधर से एना की आवाज़ आयी

एना – क्यों रे बहनचोद मर गए हो क्या दिन भर में कोई खबर नहीं दी. उन दोनों को मार दिया या वह बैठ के गाँव की लड़किया छोड़ रहे हो?

इतनी बाते सुन के फिर से सब के चेहरों पे क्रोध नजर आने लगा. तो गुरुम ने हाथ के इशारे से सब को शांत रहने को कहा.

गुरुम – अबे ो तमीज से बात कर. तू जिस से बात करना चाहता है वो तो यमलोक पहुंच गया और उसके साथ hi तेरे बाकि के आदमी भी.

एना – तू कौन रे?

गुरुम – मए तेरा भी काल hi हु, मैने hi मार है तेरे सरे आदमियों को.

एना – तू है कौन तेरी माँ की………..

गुरुम – ा……….. गली दी तो अभी वही आकर फाडूगा तुझे मए. गुरुम….. गुरुम नाम है मेरा. तू चिंता मत कर. देव और रूद्र के साथ मए भी आउगा तुझे मरने तेरे hi शहर में तेरे hi अड्डे पे. तेरे hi घर में घुस कर मरेंगे तुझे.

एना – गुरुम? पर मए तो नहीं जनता तुझे तेरी मुझसे क्या दुश्मनी है बे?

गुरुम - बुरे काम करने वाला हर दरिंदा मेरा दुश्मन है एना. और तूने तो पेर्सनली मुझसे दुश्मनी मोल ले ली देव और रूद्र का बुरा सोचकर. तू तो गया अपने आखरी दिन गईं ले, और अगर भागना चाहे तो वो भी छूट दी तुझे. जितना दूर भागना चाहता है भाग ले. तू पटल में भी जा कर छुप जा वही आ कर मरेंगे हम तुझे.

इतना कह कर गुरुम काल काट देता है और पूनम अंदर चली जाती है. पद्मा तो जैसे किसी सदमे में थी. शलाका उसे अंदर ले कर जाती है गुरुम उस गुंडे को उठा लेता है तो नागार्जुन अपनी शक्ति से जमीन पे गिरा पूरा खून यु साफ़ कर देता है जैसे वह कुछ कभी हुआ hi नहीं. साडी जमीन एक डैम पहले की तरह hi थी अब.

नागार्जुन और गर्म सरे गुंडों को एक साथ कर के रक् में बदल देते है और बेसमेंट में जाकर सो जाते है. वह पद्मा की आँखों से नींद गायब थी लेकिन शलाका सो चुकी थी. पूनम भी ध्यान लगा कर देवा को सब बता रहा थी. उधर देवा और रूद्र जो अपने कॉटेज में थे दोनों hi ध्यान लगा के बैठे थे और पूनम से कनेक्टेड थे. साडी बात जानकर दोनों बेहद खुश हुए. फिर पूनम भी उठ कर पद्मा के कमरे में गयी

पूनम – माँ क्या हुआ तुम्हे नींद नहीं आ रही?

पद्मा – पूनम तेरा ये कौन सा रूप था तू तो चंडी लग रही थी. मुझे तो अब भी सोचकर दर लग रहा है और तू सोने की बात कर रही है?

पूनम – माँ जो हमारे या देव के परिवार का दुश्मन होगा उसका यही अंजाम होगा. अब तू सजा.

पूनम पद्मा का सर सहलाने लगती है और उसे अपनी शक्ति से सुला भी देती है. और उसके दिमाग से ये साडी बाते भी साफ़ कर देती है. अब सुबह पद्मा को कुछ भी यद् नहीं रहेगा के कल के दिन उसे किसी ने कोई बात की थी या रत को पूनम ने किसी को इतने बुरे तरीके से मारा भी था.

इधर नील सागर पे

रूद्र – भाई सच में सरे के सरे अपने साथी नगीने है सेल. सबने अपना काम बहोत सही किया और खास टूर पर भाभी ने तो मुझे भी हिला डाला. क्या बुरी मौत दी है उस एना के कुत्ते को.

देव – है रूद्र यही होती है एक सच्चे प्यार की निशानी. अपने परिवार की चिंता. ये सब उसी का कमल है. पर तूने सही कहा सब एक से बढ़कर एक नगीने hi है, और ये सब मेरे है, जिसमे कोहिनूर तो मेरे साथ बैठा है.

रूद्र – क्या भाई चढ़ा रहे हो?

देव – नहीं मेरे यार मए जनता हु. तू असल में क्या है. अगर आज तू गाँव में होता तो सालो की एक एक नस उनके शरीर से खिंच के निकलता. पूनम ने तो फिर भी कुछ रहम hi किया उन पर.

रूद्र – तो मेरे यार पर कोई मुसीबत बन के आएगा तो उसे छोड़ूगा क्या मए

देव – चल सो जा सुबह बहोत म्हणत करनी है.

फिर रूद्र और देव भी सो जाते है. एक सुकून भरी नींद में. सुबह होने वाले खतरों से बेखबर वो भी नहीं जानते थे के इस समंदर की गहराई में मौत उनका इंतजार कर रही है. दो दो जिन्दा मगरमच्छो के रूप में. जिन्हे वो मार भी नहीं सकते. अब इन दोनों में से कौन बहार आएगा. कोई नहीं जनता.
 
अपडेट - 79

सुबह को देव और रूद्र उठकर अपनी साधना से फ्री हो कर नाश्ता कर के तैयार हो जाते है .नए मुकाबले के लिए.

रूद्र – है भाई साब चले अपने छोटे भाई से मिलने?

देव – है क्यों नहीं आखिर कितना इंतजार करवाएंगे उसे चलो.

रूद्र और देव वनराज की अंगूठी पहने समंदर में आगे बाद जाते है. जैसे जैसे वो आगे बढ़ रहे थे वो पानी के अंदर होते जा रहे थे. आखिर एक वक़्त वो भी आया जब दोनों ने एक जम्प लेकर पानी में छलांग लगा दी और अब तैरते हुए वो हजारो लाखो फ़ीट नीचे समंदर की गहराई की और जाने लगे. काफी देर हो गयी थी उन्हें नीचे की तरफ जाते हुए लेकिन न तो समंदर का ताल नजर आ रहा था न hi उन्हें वैसे गोल्डन और सिल्वर मगरमच्छ नजर आ रहे थे.

तैरते हुए रूद्र – यार हम जा कहा रहे है क्या ये दिशा सही है?

देव – वनराज की अंगूठी पे यदि विश्वास करे तो वो हमें सही दिशा में hi ले जाएगी. और अभी तो समंदर का ताल भी नहीं आया.

रूद्र - लेकिन यार इतने में तो पटल लोक भी आ जाता ये साला समंदर का ताल क्यों नहीं आ रहा है?

देव – ये नील सागर है. इतना विशाल है की इसकी कोई सीमा नहीं. ये एक लोक से दूसरे लोक तक फैला है. तो क्या समुद्रतल इतनी जल्दी आ जायेगा?

रूद्र – लेकिन यार एक बात और है हम लोग इतनी देर से पानी में है हमें थकन नहीं हो रही

देव – हम्म्म्म शायद वनराज की अंगूठी का hi कमल है वार्ना अब तक तो हमने भी खुद को पानी के हवाले कर दिया होता. पर इसके विपरीत हम अभी भी तैर रहे है. चल स्पीड बढ़ा. अब ज्यादा देर नहीं लगनी चाहिए मिटटी की गंध आ रही है.

रूद्र और देव फिर से पूरी स्पीड में तीर की भांति तेज गति से नीचे की तरफ चल पड़ते है. और आखिर कोई आधे घंटे और तैरने के बाद उन्हें समंदर ताल नजर आ जाता है. जहा दूर से उन्हें कुछ चमकता हुआ भी नजर आ जाता है.

रूद्र – सावधान देव वह कुछ चमक रहा है शायद ये वही मगरमच्छ है.

देव – है सही कहा तूने चल आखिर हम अपने मेजबान के घर पहुंच hi गए पर सेल मरना मत उन्हें.

रूद्र – पता है बे. ज्ञान मत दे.

देव – और रूद्र ताल पे जा कर खड़े हो जाते है उनसे थोड़ी hi दूरी pe.unhe एक सोने की तरह चमकता हुआ मगरमच्छ नजर आया. जो अपनी जगह आराम से लेता हुआ था बिना किसी हरकत के जैसे कोई मादा अपने अंडो के ऊपर बैठती हो.

रूद्र ने देव को देखा तो देव ने उसका इशारा समझ कर हां में गार्डन हिलाई.

रूद्र आगे बड़ा मगरमच्छ की तरफ अभी वो उसके पास पंहुचा भी नहीं था के वो सिल्वर मगरमच्छ तेजी से आया और अपनी पूँछ का भरपूर वॉर रूद्र पे किया रूद्र ने भी उसे देख लिया था लेकिन पानी में होने की वजह से उतनी फुर्ती नहीं दिखा पाया. जिस वजह से रूद्र उस सिल्वर मगरमच्छ की पूँछ की रेंज में आ गया और भड़क….. कर के पूँछ रूद्र को लगी हमला इतना तेज था के रूद्र पानी में तैरता हुआ दूर जा गिरा लेकिन तुरंत hi संभल के खड़ा भी हुआ.

रूद्र – सेल हम क्या तेरी लुगाई भागने आये क्या जो हमें मर रहा है? हमारी चीज़ हमें दे दो हम चले जायेगे. पर तू क्या मेरी बात समझेगा तू तो मगरमच्छ है. रुक ईशर में समझाता हु.

सिल्वर मगरमच्छ (सम) – मए तुम्हरी भाषा समझ भी सकता हु, बोल भी सकता हु. इसीलिए इशारो की जरुरत नहीं है. कौन हो तुम दोनों और यहाँ क्यों आये हो.

रूद्र तैरता हुआ देव तक पहुंच गया था. और मगरमच्छ के मुँह से आवाज़ सुन के दोनों हैरान हो जाते है.

तभी देव हाथ जोड़ के - हे देव आप जो कोई भी है मए नाग लोक का युराज देव सिंह आपको प्रणाम करता हु. ये मेरा परम मित्र रूद्र है इसकी तरफ से हुई भूल के लिए मए आपसे क्षमा चाहता हु. के इसने आपको एक साधारण मगरमच्छ समझने की भूल की.

सम – आयुष्मान युराज, मए तुम्हरी नम्रता से प्रसन्न हुआ.

अब अपने यहाँ आने का कारन बताइये.

देव – कृपया अपना परिचय दीजिये.

सम – अभी आप दोनों के लिए हमारा इतना परिचय काफी है के हम यहाँ के प्रहरी है. और वो सुनहरी मगरमच्छ जो आप देख रहे है वो मेरी धर्म पत्नी है. यदि आप वापस लौट जाये तो हमारी तरफ से आपको कोई क्षति नहीं पहुंचेगी. किन्तु यदि आप नहीं गए तो आगे होने वाली किसी भी घटना के लिए हम उत्तरदायी नहीं होंगे.

रूद्र – देखिये महात्मा हम आप दोनों का आदर करते है. और मेरे मित्र ने मुझसे पहले hi आपसे क्षमा याचना भी कर दी. फिर भी मए स्वयं आपसे क्षमा चाहता हु अपनी गलती के लिए और आपने जो मुझ पर परहर किया उस के लिए भी मेरे मन में कोई बैर नहीं. किन्तु हम यहाँ इतनी दूर सिर्फ आपको प्रणाम कर के वापस जाने के लिए भी नहीं आये. इसीलिए वापस लौटने का तो कोई प्रश्न hi नहीं. हम यहाँ जिस कार्य से आये है उसे पूरा किये बिना नहीं जायेगे.

सम – जिद मत करो बालक वार्ना तुम नहीं जानते के तुम्हारा क्या अंजाम होगा

रूद्र – अंजाम से hi डरना होता तो इतनी दूर नहीं आते.

सम – तो अपने आने का करना hi स्पष्ट कर दो.

देव – आप कोई साधारण प्रहरी तो हो hi नहीं सकते. इसलिए हे देव मए आपकी पत्नी को भी प्रणाम करता हु. और उनके उदार (पेट) में जो मानचित्र है उसे पाना चाहता हु. कृपया आप वो हमें दे दीजिये उसी के लिए हम यहाँ आये है. उसे लेकर हम स्वयं चले जायेगे.

सम – तुम्हे उस मानचित्र की क्या आवश्यकता है युराज? क्या मणि का लोभ खिंच लाया तुमको? यदि ऐसा है तो फिर कहता हु लौट जाओ. क्यों की लोभ अच्छा नहीं होता, तुम युराज हो नागलोक के और नागलोक भी देखा है मैने वो तो बहोत सम्पन्न लोक है फिर क्यों लोभ करते हो?

देव – मेरे यहाँ आने का कारन मणि को पाने का लोभ नहीं है. बल्कि नाग लोक के साथ साथ तिलिस्म लोक की सुरक्ष के लिए और एक बहोत बड़े दुष्ट अघोरी को मरने के लिए भी उस मणि की आवश्यकता है मुझे. यदि उस के बाद आपको उचित लगे तो मए वो मणि स्वयं वही स्थापित कर दुगा और मानचित्र भी आपको वापस कर दुगा. किन्तु अभी मुझे मानचित्र हर हल में चाहिए.

सम – वो अस्थियो का ढेर देख रहे हो यूराज. सम ने एक तरफ इशारा किया.

देव और रूद्र ने उस तरफ देखा वह इंसानो और पता नहीं किस किस जीव और दानवो की हड्डियों का एक पहाड़ खड़ा था.

सम – ये सरे जीव, राक्षस, इंसाने , असुर, और भी कैयो की अस्थिया है. जो यहाँ तक तुम लोगो की तरह पहुंच तो गए किन्तु हम दोनों के हाथो मरे गए. सिर्फ अपनी ताक़त के घमंड में . हम नहीं चाहते के तुम जैसे काबिल युराज को नाग लोक खो बैठे. इसीलिए अब भी वक़्त है चले जाओ. क्यों की यदि तुम नहीं गए तो तुम्हारा मरना निश्चित है. वैसे तो मए hi तुम दोनों को मार दुगा. अकेला न मार पाया तो मेरी धर्म पत्नी के साथ मिलकर तुम दोनों को मर दुगा. और यदि मन लो तुम दोनों हम दोनों से अधिक ताक़तवर सिद्ध हुए और तुम लोगो ने हमें मर दिया तो भी हमारे मरते hi हमारे इन शरीरो में एक भयानक विस्फोट होगा. जिसमे वो मानचित्र भी नष्ट हो जायेगा सदा के लिए. और तुम दोनों भी उस विस्फोट में मरे जाओगे. यानि आगे बढ़ने पर तुम्हरे लिए सिर्फ मौत hi है. और कोई विकल्प नहीं. अब भी सोच लो.

इतनी बात सुन कर जहा देव मुस्करा रहा था वही रूद्र का क्रोध उसके सर चढ़ कर बोलने लगा.

रूद्र – हे प्रहरी तुमने दो गलतिया कर ली एक हमें धमकाने की दूसरी मेरे सामने देव को जान से मरने की बात कह कर. अब हम न तो वापस जायेगे न hi तुम दोनों को मरेंगे. बल्कि तुम्हारी आँखों के सामने hi हम वो मानचित्र हासिल करेंगे वो भी तुम दोनों को जीवित रखते हुए. और तुम्हारा ये अहंकार नष्ट करेंगे. क्या समझते हो? तुम बहोत बड़े शूर वीर हो? अरे इतने गहरे पानी में छुप कर बैठे हो. तुम से ज्यादा बहादुर तो ये सब है जिनकी हड्डिया तुमने हमें दिखाई. मए नहीं जनता ये कौन कौन थे लेकिन थे तुमसे बहादुर क्यों की इन सबने तुम्हरे घर आकर तुम्हे ललकारने की हिम्मत तो की. अपनी गली में हर कोई बहादुर होता है. लेकिन ये सरे और हम. सच्चे बहादुर है जो तेरे घर आ कर ललकार रहे है ………..

……………देव तुम इन्हे सम्भालो मए जा कर मानचित्र लता हु.

देव – नहीं रूद्र इन्हे तुम सम्भालो मए जाउगा मानचित्र लेने.

रूद्र देव के पास जा कर धीरे से – यार ये बड़ा खतरनाक है मुझे दर लग रहा है इससे तू संभल न

देव – अबे सेल नाटक मत कर मए जनता हु तू कोई नहीं दर रहा इससे तू ये सब इसीलिए hi कह रहा है न क्यों के मए उस मगरमछ के पेट से नक्शा लेन वाला हु और उसमे खतरा बहोत ज्यादा है. पर मेरे यार तू चिंता मत कर तू इसे उलझा इसे मेरे पास आने मत देना मेरे पास एक योजना है. बस तू उसे संभल. उसे उलझा. उसे गुस्सा दिला खुद पर. उसका ध्यान भटका दे. उसे यहाँ से दूर ले जा जिससे के वो मेरी तरफ न आ सके. इनकी ताक़त आधी हो जाएगी.

रूद्र - मतलब प्लान है न?

देव – है है.

रूद्र – तब तो देख मए इसकी पुंगी कैसे बजता हु. लेकिन तुझे एक खरोच भी आयी न फिर देखना भाड़ में जाये स्वर्ण मणि भाड़ में जाये मेरी जिंदगी मए इस नील सागर को लाल सागर बना दुगा इतना खून बहुगा यहाँ.

देव – शांत गदाधारी भीम शांत. ऐसा कुछ नहीं होगा. तू जा संभल उसे.

रूद्र चला जाता है सम के पास
 
अपडेट - 80

रूद्र – है भाई बोल कैसे लड़ेगा? मोजर वगैरह चाहिए तो मंगवा दू, तीर, भला, तलवार ? अरे कुछ तो बोल या ऐसे hi सरेंडर करेगा.

सम को गुस्सा आ जाता है वो रूद्र पे लपकता है और रूद्र फुर्ती से तैरता हुआ आगे बढ़ जाता है और उसके नीचे से होते हुए उसकी पूछ पे एक किक मरता है. जिससे सम काफी दूर तक रोल होता हुआ चला जाता है रूद्र भी वही जाता है उसके पीछे. और उसे अलग अलग तरीके से पीटने लगता है खुद का बचाव करते हुए. सम का ध्यान देव से हैट जाता है तो देव गोल्डन मगरमच्छ (गम) के पास जाता है.

देव – क्या आप स्वयं मुझे मानचित्र देगी या मए निकल लू?

गम – चले जाओ यहाँ से वार्ना अच्छा नहीं होगा?

देव तैरता हुआ जाता है गम के नीचे से और उसकी पूँछ पकड़ के गोल गोल घुमा के फेंकता है रूद्र के विपरीत दिशा में इससे उन दोनों के बीच दूरी बढ़ जाती है. लेकिन इस हमले से गम को गुस्सा आ जाता है वो तेजी से आकर देव पे पूँछ से प्रहार करती है जो के देव की कमर में बड़ी जोर से लगता है. देव भी लुढ़कता हुआ दूर जाकर गिरता है. उसे इस गम की ताक़त का अहसास हो जाता है.

देव फिर गम की तरर्फ आता है और एक भरपूर घुसा उसके जबड़े पे मर देता है जिससे गम सर के बल वह की मिटटी में ½ फुट तक धस जाती है किन्तु वो तेजी से उस कीचड़ से खुद को निकल के अपनी आंखे खोलती है तो उसकी आंखे एक डैम लाल हो चुकी थी. वो देव की तरफ देख कर फिर देव की और बढ़ती है. और अपने नुकीले जबड़े में देव की तंग दबाना hi चाहती है के आखरी पल में देव अपनी तंग वह से हटा देता है यदि उसे एक सेकंड की देर हुई होती तो गम के जबड़े में देव की टांग आ जाती. देव फिर पानी में नीचे की तरफ जम्प मर के गम के नीचे जाता है और उसे चिपक के गले लगा लेता है. और गम तेजी से रोल होने लगती है 8-10 बार रोल होने से देव की पकड़ छूट जाती है. और वो जाकर हड्डियों के पहाड़ पे गियरता है.

इधर रूद्र ने भी सम को अपने पंच और किक से मार मार के उसका ध्यान भटका रखा था. उसके दो तीन दन्त भी तोड़ चूका था. और अब सम के मुँह से हल्का खून निकल के पानी में मिक्स होने लगा था.

सम बिना जवाब दिए वापस नहीं आ सकता था. तो वो भी रूद्र पे आक्रमण करने की बार बार कोशिश में लगा हुआ था. और इसी चक्कर में उलझ कर वो गम से दूर होता जा रहा था.

देव जैसे hi उन अस्थियो के पहाड़ पे गिरा. तो उसे अपने जबड़े में दबा के काट देने के लिए अपना पूरा मुँह खोले गम उसकी तरफ लपकी उसी स्पीड बहोत तेज थी. और वो बेहद गुस्से में भी थी. उसने अपना इतना मुँह खोल दिया की जिसमे देव पूरा hi समां जाये और वो उसे अपने दांतो से काट डेल. बस वो देव को अपने जबड़े में लेने hi वाली थी के देव ने पास पड़ी हुई किसी के baah(ckag) की हड्डी उठा के गम के कुछ समझने से पहले hi उसके मुँह में फसा दी जिससे उसका मुँह खुला का खुला रह गया वो चाट पटाने लगी और अपनी hi जगह पे रोल होकर उस हड्डी को अपने मुँह से निकलने की कोशिश करने लगी. लेकिन थोड़ी देर के बाद hi वो थक कर शांत हो गयी.

उधर सम का ध्यान इस और था hi नहीं वो तो रूद्र से लड़ने में व्यस्त था. लेकिन रूद्र की नजर देव पे hi थी. और वो ये सब देख चूका था इसीलिए वो सम से इस तरह लड़ रहा था की जिससे उसकी पीठ गम की तरफ रहे. और वो उसकी सहायता के लिए न जा सके.

इधर देव ने जब देखा के अब गम कुछ नहीं कर प् रही है और एक डैम शांत हो चुकी है तो उसने वही अपनी इच्छाधारी शक्ति का प्रयोग कर के एक बड़ी मछली का रूप ले लिया और तेजी से गम के पेट के अंदर चला गया.

गम. पेट के अंदर थोड़ी देर तक इधर उधर ढूंढने के बाद देव (मछली) को एक लाल रंग का गोल और हाथ भर लम्बा डंडा नजर आया जो के अंदर से खोखला था जिसमे के सन्देश भेजे जाते है. लेकिन वो गम की आंतो से चिपका हुआ या उन में फसा हुआ था.

किन्तु देव इस वक़्त एक माश्ली के रूप में था वो तेजी से वह तक जाता है और उस लम्बे बॉक्स को अपने मुँह में लेकर खींचता है. जिससे गम. बहोत तेजी से हिलने लगती है शायद अपनी आते खींचने की वजह से. देव फिर कोशिश करता है. लेकिन अंजाम वही. आखिर 3-4 कोशिशों के बाद गम की आंतो को नुकसान पहुचाये बिना देव उस लम्बे बॉक्स को निकलने में कामयाब हो जाता है. और उसे अपने मुँह में दबाये तेजी से गम के पेट से बहार आ जाता है. और तुरंत अपने असली रूप में आ जाता है. और रूद्र की तरफ देखता है.

रूद्र भी देव की तरफ देख कर ख़ुशी से हाथ हिलता है. तो देव उसे लड़ाई बंद कर के अपने पास आने के लिए कहता है.

रूद्र – ो महाशय बस बंद करो ये लड़ाई वो देखो हमने अपना काम कर दिया वो भी तुम्हारी पत्नी को कोई नुकसान पहुचाये बिना. उधर देख.

जैसे hi सम रूद्र की ये बात सुन कर पीछे देखता है उसकी हालत hi ख़राब हो जाती है. वो तेजी से देव के पास आता है. उसके हाथ में मानचित्र वाला बॉक्स देख कर वो गम की तरफ देखता है जिसके मुँह में अभी भी हदी फांसी हुई थी.

सम – बहोत खूब युराज देव सिंह बहोत खूब . आपने वो कर दिखाया जो आज तक बड़ी से बड़ी सेना नहीं कर पायी. आपने ये मानचित्र hi हासिल नहीं किया हमें भी श्राप से मुक्ति दिला दी है .

देव – श्राप से? ये क्या कह रहे आहे आप?

सम – सब बता दुगा किन्तु कृपया पहले मेरी पत्नी के मुँह में फांसी हुई हड्डी निकल कर उसे इस तकलीफ से मुक्त कर दीजिये.

देव रूद्र को इशारा करता है तो रूद्र जा कर गम के मुँह में फांसी हदी निकल देता है. और आकर देव के पास खड़ा हो जाता है. उधर गम भी सम के साथ आकर कड़ी हो जाती है.

सम – युराज आप हमें नहीं जानते किन्तु आपके हाथ में ये अँगूठिया देख कर हम समझ गए है के आपको वन राज ने hi ये अँगूठिया दी है. जिस वजह से आप इतनी देर से यहाँ पानी में रह पाए है. हम दोनों भी वनराज से सम्बंधित hi है. मए वनराज का पुत्र हु और ये मेरी पत्नी. हमारा नया नया विवाह हुआ था और हम विवाह के पश्चात् इस नील सागर में घूमने आये थे. एक दिन हम पति पत्नी ने ये सोचा के पानी के अंदर प्रेम करेंगे और हम दोनों नग्न हो कर सम्भोग करने के लिए पानी में आये हमने पूरा दिन पानी में सम्भोग किया न जाने कितनी बार. और सम्भोग करते करते हम कब इस सागर के ताल में पहुंच गए हमें पता hi नहीं चला यहाँ कोई ऋषि बैठे तप कर रहे थे. हम अपने सम्भोग में इतने व्यस्त थे के मैने अपनी नग्न पत्नी को उनकी गॉड में hi लिटा दिया और सम्भोग करने लगा. हमारे सम्भोग करने की वजह से उस ऋषि की तपस्या टूट गयी. वो बहोत ज्यादा क्रोधित हुए हमें इस तरह सम्भोग करते देख कर. वो उठखड़े हुए. उनके उठने के बाद हमें पता चला के ये तो कोई ऋषि है. क्यों के वो लम्बे समय से यहाँ बैठे तप कर रहे थे. तो उन पर पानी के पोधो की भरमार हो गयी थी हमें तो पता hi नहीं था के ये कोई ऋषि है. हम तो उन्हें कोई पानी की चट्टान समझ के अपनी मस्ती में मस्त थे.
 
भाई प्लॉटिंग लगभग कम्पलीट हो चुकी है. इस कहानी की और अब कहानी मैं ट्रैक पे hi चलेगी. नए चाररेक्टर्स और आएंगे. जिनमे से कुछ इसी part के लिए होंगे तो कुछ 2ंद part के लिए. वो इस कहानी के 2ंद part में ज्यादा दिखेंगे. क्यों की ये कहानी अभी लम्बी चलेगी तो उनका रोले बस 2ंद part का बेस बनाने के लिए hi होगा . और 2ंद part के लिए कुछ बीज भी बोये जायेगे. सो एन्जॉय कीजिये और अपना प्यार इस कहानी को यु hi देते रहिये. धन्यवाद
 
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