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- Dec 5, 2013
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भोजन के बाद
वनराज – देव आप अभी आराम कर लीजिये कल प्रातः हम आपके जाने का इंतजाम कर देंगे और आपकी सहायता भी करेंगे जिससे आपको जानकारी मिल जाएगी के आपको वह जाकर क्या करना है. क्या हासिल करना है. किन्तु अभी आप विश्राम कर लीजिये.
देव – जो आज्ञा महाराज
फिर देव और रूद्र वह के अतिथि गृह में सोने चले जाते है. अंदर भवन में रूद्र और देव आस पास सो रहे थे
रूद्र – यार देव मुझे टेंशन हो रही है.
देव – किस बात की ?
रूद्र – यही के नील सागर में क्या होगा?
देव – जब हम कुछ जानते hi नहीं तो टेंशन कैसी?
रूद्र – यार तू हर बात को हलके में क्यों लेता है?
देव – भाई चिंता कर के भी हम क्या उखड लगे. जो होगा वही जा कर निपटेंगे. अभी से क्यों परेशां होना?
रूद्र – हम्म ये भी सही है. मए तो सोच रहा हु. जल्दी से ये निपट जाये तो मए नीलम से शादी कर के 2-3 महीने के लिए कही घूमने चला जाऊ.
देव – अरे है शादी के बाद हम लोग हनीमून पे चलेंगे.
रूद्र – रहने दे तेरे साथ नहीं जाउगा मए.
देव – क्यों बे मैने क्या किया?
रूद्र – भाई तेरे साथ हनीमून पे गया न तो वह भी तू उलझा के रखेगा अपने पंगो में पूरा हनीमून बर्बाद करेगा और कुछ नहीं होना.
देव – चल बे. मए क्या पंगे लेता फिरता हु? वो तो खुद hi पंगे गले पद जाते है तो क्या करू?
रूद्र – अबे वही कह रहा हु. जहा तू होगा वह पंगे होंगे hi.
देव – सोच ले अकेले जायेगा तो भी दौड़ता हुआ वापस आएगा.
रूद्र – अच्छा वो क्यों?
देव – क्यों की मए जनता हु मेरे बिना तो तेरा दिल हनीमून पे भी नहीं लगेगा इसीलिए कह रहा हु मेरे साथ चलना.
रूद्र – एक काम करे क्या? हम लोग हनीमून के लिए यहाँ आएंगे. इसी वन में कितना सुकून है. कोई पन्गा होगा भी नहीं और हुआ तो वन राज संभल लगे अपन लोग बस ऐश करेंगे.
देव – ख्याल बुरा नहीं . सोचेंगे. चल सो जा सुबह चलना है अपन को.
फिर दोनों सो जाते है .
सुबह उठकर अपने नित्य कर्म से निपट कर वो लोग तैयार होते है और अपने कक्ष में hi बैठ जाते है. कुछ देर बाद वह एक सेवक आकर उन्हें वनराज के पास ले जाता है. जहा वनराज उनका नाश्ते के लिए इंतजार कर रहे थे.
वनराज – आइये देव, रूद्र. उम्मीद है रात को नींद अच्छी आयी होगी आप लोगो को?
देव – जी महाराज. हमें यहाँ बहोत अच्छा लगा सब कुछ उम्मीद से बाद कर. खास कर के यहाँ का शुद्ध वातावरण. सब कुछ बहोत अद्भुत है.
वनराज – है युवराज. इस जगह की यही तो खासियत है. और यहाँ के अमन चैन का भी यही राज है के यहाँ आधुनिकता ने प्रवेश नहीं किया. या यु कह लीजिये हमने आधुनिकता को आने नहीं दिया. इसीलिए भी यहाँ के लोग एक लम्बी और खुशाल जिंदगी आज भी जीते है. आप जीतनेय दिन चाहे यहाँ विश्राम कर लीजिये.
देव – वनराज हम जिस कार्य पर निकले है. उसे समाप्त करने के बाद भी एक लम्बी लड़ाई लड़नी है हमें. कुछ दुष्ट लोग है जिनकी नजर हमारी जान पर भी है और हमारे नगरों पर भी. किन्तु ये वादा रहा की हम अपनी रानी और रूद्र भी अपनी पत्नी के साथ यहाँ जरूर आएंगे. हमारा विवाह उस युद्ध के बाद hi होगा. वैसे भी कल रत hi रूद्र कह रहा था के विवाह के बाद अपनी पत्नी के साथ कुछ समय बितान इसी वन में आये.
वनराज मुस्कराते हुए – ये तो हमारा सौभाग्य होगा के आप दोनों ने विवाह पश्चात् इस स्थान को अपने एकांत के लिए चुना है. आप का और आपकी रानियों का यहाँ स्वागत है. आप लोग जब आना चाहे जितने भी दिन के लिए आना चाहे आ सकते है. हमें ख़ुशी होगी. इसके साथ hi एक और बात देव
देव – कहिये महाराज,
वनराज – आजतक बहोत काम hi ऐसा हुआ है के हमें अपनी सेना बहार निकालनी पड़ी हो. किन्तु आप के युद्ध में आपको यदि हमारी आवश्यकता हो और आप हमें युद्ध में आपके साथ खड़े होने की अनुमति देंगे तो हमें ख़ुशी होगी आपका साथ देकर.
देव – ये तो आपका बड़प्पन है महाराज. और हम ये बात यद् रखेंगे. और जरुरत पड़ने पर आपको अवश्य hi यद् करेंगे.
वनराज – धन्यवाद् युराज. अब आपकी नील सागर की बात पर आते है. आप लोग स्वयं hi यहाँ से पश्चिम दिशा में जाये. अब आपकी शक्तियों पे कोई प्रतिबन्ध नहीं है. आप लोग अपनी शक्तिया यहाँ भी इस्तेमाल कर सकते है. पश्चिम में कोई 8-10 घंटे की उड़न के बाद आप नील सागर पहुचेगे. किन्तु वह पे आप यदि रात्रि में पहुंचते है तो बहार hi अपने विश्राम का इंतजाम आपको करना होगा. क्यों की रात्रि में सागर में प्रवेश उचित नहीं होता. प्रातः कल आप दोनों सागर में जाये उसकी अनत गहराई में उतरने के बाद आप को वह दो मगरमच्छ मिलेंगे. एक सफ़ेद चमकीला और एक सुनहरा. सुनहरे मगरमच्छ को मरे बिना उसके पेट के अंदर से आपको एक चीज निकालनी है जिस में एक मानचित्र बना हुआ मिलेगा उस मानचित्र की सहायता से आप स्वर्ण मणि तक पहुंच सकते है. किन्तु ये अवश्य याद रखियेगा की उन दोनों में से एक भी मगरमच्छ मरना नहीं चाहिए. यदि उनमे से एक भी मगरमच्छ आपके द्वारा मारा गया तो आप कभी भी स्वर्णमणि तक नहीं पहुंच पाएंगे. क्यों की वही एक मानचित्र है जिसके द्वारा मणि हासिल की जा सकती है. एक भी मगरमच्छ के मरते hi वह मानचित्र स्वयं hi नष्ट हो जायेगा.
रूद्र – किन्तु महाराज जिन्दा मगरमच्छ के पेट से उसे बिना मरे मानचित्र कैसे हासिल कर पाएंगे.
वनराज – आप सही कह रहे है. ये इतना आसान नहीं किन्तु आप ये मत भूलिए के आप कोई साधारण चीज़ पाने भी नहीं निकले.
देव – शै बात है महाराज. स्वर्णमणि कोई साधारण चीज़ नहीं है.
वनराज – युराज मए आप दोनों को एक अंगूठी देता हु. जिसकी सहायता से आप जब तक चाहे पानी के अंदर रह सकते है. एक दूजे से बात कर सकते है. पानी से आपको कोई तकलीफ नहीं होगी. आप लोग पानी के नीचे अनंत गहराई में भी ठीक ऐसे hi रहेंगे जैसे जमीन पे रहते है.
फिर वन राज देव और रूद्र को एक एक अंगूठी दे देते है.
वनराज इसे संभल के रखियेगा युराज क्यों की आप जब भी इस वन में आएंगे. इस अंगूठी की सहायता से बिना की रुकावट के आप को हम तक सम्मान सहित पंहुचा दिया जायेगा. और इसे छू कर यदि आप हमें यद् करेंगे तो हमसे बात कर पाएंगे. ये आपको हर वक़्त हमसे जोड़े रखेगी.
देव – धन्यवाद् महाराज. अब हमें आज्ञा दे.
वनराज - जाइये युराज आप दोनों को ईश्वर सफलता प्रदान करे.
फिर देव और रूद्र वह से उड़ कर पश्चिम दिशा में चले जाते है.
इधर. शहर में उस गैंग का बॉस एना बहोत खतरानक इंसान यही है वो जिसके आदमियों से देव और रूद्र का पन्गा हुआ. और इसी के कहने पे इसके आदमियों ने दिग की बेटी को उठाया था. वो बहार गया हुआ था और लौटकर जब उसे अपने आदमियों से पता चला की किसी ने उसका प्लान फ़ैल किया है तो क्रोध में आ गया.
एना – तुम लोग मादरचोद किसी काम के नहीं बस दारू पीना और लड़की छोड़ना आता है तुम लोगो को इतने लोग मिल कर भी दो लोंडो का मुकाबला नहीं कर पाए तुम लोग.
ा1 – बॉस वो दोनों बहोत खतरनाक थे. हमने हथियारों के साथ उन पर हमला किया फिर भी उन दोनों ने निहत्थे hi हमें धुल छठा दी.
एना ने चाताआक….. खिंच के छठा मारा अपने आदमी के गाल पर उसके मुँह से खून निकल आता है और एना का कला चेहरा और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है. सेल एक तो तू वह अपनी अम्मा छुड़वा के आया दोनों लोंडो से और अब बता भी रहा है के उन्होंने लुंड कैसे कैसे घुसेड़ा तेरी अम्मा की बुर में और कैसे गांड मरी. मादरचोद दुश्मन की तारीफ करता है .
भोजन के बाद
वनराज – देव आप अभी आराम कर लीजिये कल प्रातः हम आपके जाने का इंतजाम कर देंगे और आपकी सहायता भी करेंगे जिससे आपको जानकारी मिल जाएगी के आपको वह जाकर क्या करना है. क्या हासिल करना है. किन्तु अभी आप विश्राम कर लीजिये.
देव – जो आज्ञा महाराज
फिर देव और रूद्र वह के अतिथि गृह में सोने चले जाते है. अंदर भवन में रूद्र और देव आस पास सो रहे थे
रूद्र – यार देव मुझे टेंशन हो रही है.
देव – किस बात की ?
रूद्र – यही के नील सागर में क्या होगा?
देव – जब हम कुछ जानते hi नहीं तो टेंशन कैसी?
रूद्र – यार तू हर बात को हलके में क्यों लेता है?
देव – भाई चिंता कर के भी हम क्या उखड लगे. जो होगा वही जा कर निपटेंगे. अभी से क्यों परेशां होना?
रूद्र – हम्म ये भी सही है. मए तो सोच रहा हु. जल्दी से ये निपट जाये तो मए नीलम से शादी कर के 2-3 महीने के लिए कही घूमने चला जाऊ.
देव – अरे है शादी के बाद हम लोग हनीमून पे चलेंगे.
रूद्र – रहने दे तेरे साथ नहीं जाउगा मए.
देव – क्यों बे मैने क्या किया?
रूद्र – भाई तेरे साथ हनीमून पे गया न तो वह भी तू उलझा के रखेगा अपने पंगो में पूरा हनीमून बर्बाद करेगा और कुछ नहीं होना.
देव – चल बे. मए क्या पंगे लेता फिरता हु? वो तो खुद hi पंगे गले पद जाते है तो क्या करू?
रूद्र – अबे वही कह रहा हु. जहा तू होगा वह पंगे होंगे hi.
देव – सोच ले अकेले जायेगा तो भी दौड़ता हुआ वापस आएगा.
रूद्र – अच्छा वो क्यों?
देव – क्यों की मए जनता हु मेरे बिना तो तेरा दिल हनीमून पे भी नहीं लगेगा इसीलिए कह रहा हु मेरे साथ चलना.
रूद्र – एक काम करे क्या? हम लोग हनीमून के लिए यहाँ आएंगे. इसी वन में कितना सुकून है. कोई पन्गा होगा भी नहीं और हुआ तो वन राज संभल लगे अपन लोग बस ऐश करेंगे.
देव – ख्याल बुरा नहीं . सोचेंगे. चल सो जा सुबह चलना है अपन को.
फिर दोनों सो जाते है .
सुबह उठकर अपने नित्य कर्म से निपट कर वो लोग तैयार होते है और अपने कक्ष में hi बैठ जाते है. कुछ देर बाद वह एक सेवक आकर उन्हें वनराज के पास ले जाता है. जहा वनराज उनका नाश्ते के लिए इंतजार कर रहे थे.
वनराज – आइये देव, रूद्र. उम्मीद है रात को नींद अच्छी आयी होगी आप लोगो को?
देव – जी महाराज. हमें यहाँ बहोत अच्छा लगा सब कुछ उम्मीद से बाद कर. खास कर के यहाँ का शुद्ध वातावरण. सब कुछ बहोत अद्भुत है.
वनराज – है युवराज. इस जगह की यही तो खासियत है. और यहाँ के अमन चैन का भी यही राज है के यहाँ आधुनिकता ने प्रवेश नहीं किया. या यु कह लीजिये हमने आधुनिकता को आने नहीं दिया. इसीलिए भी यहाँ के लोग एक लम्बी और खुशाल जिंदगी आज भी जीते है. आप जीतनेय दिन चाहे यहाँ विश्राम कर लीजिये.
देव – वनराज हम जिस कार्य पर निकले है. उसे समाप्त करने के बाद भी एक लम्बी लड़ाई लड़नी है हमें. कुछ दुष्ट लोग है जिनकी नजर हमारी जान पर भी है और हमारे नगरों पर भी. किन्तु ये वादा रहा की हम अपनी रानी और रूद्र भी अपनी पत्नी के साथ यहाँ जरूर आएंगे. हमारा विवाह उस युद्ध के बाद hi होगा. वैसे भी कल रत hi रूद्र कह रहा था के विवाह के बाद अपनी पत्नी के साथ कुछ समय बितान इसी वन में आये.
वनराज मुस्कराते हुए – ये तो हमारा सौभाग्य होगा के आप दोनों ने विवाह पश्चात् इस स्थान को अपने एकांत के लिए चुना है. आप का और आपकी रानियों का यहाँ स्वागत है. आप लोग जब आना चाहे जितने भी दिन के लिए आना चाहे आ सकते है. हमें ख़ुशी होगी. इसके साथ hi एक और बात देव
देव – कहिये महाराज,
वनराज – आजतक बहोत काम hi ऐसा हुआ है के हमें अपनी सेना बहार निकालनी पड़ी हो. किन्तु आप के युद्ध में आपको यदि हमारी आवश्यकता हो और आप हमें युद्ध में आपके साथ खड़े होने की अनुमति देंगे तो हमें ख़ुशी होगी आपका साथ देकर.
देव – ये तो आपका बड़प्पन है महाराज. और हम ये बात यद् रखेंगे. और जरुरत पड़ने पर आपको अवश्य hi यद् करेंगे.
वनराज – धन्यवाद् युराज. अब आपकी नील सागर की बात पर आते है. आप लोग स्वयं hi यहाँ से पश्चिम दिशा में जाये. अब आपकी शक्तियों पे कोई प्रतिबन्ध नहीं है. आप लोग अपनी शक्तिया यहाँ भी इस्तेमाल कर सकते है. पश्चिम में कोई 8-10 घंटे की उड़न के बाद आप नील सागर पहुचेगे. किन्तु वह पे आप यदि रात्रि में पहुंचते है तो बहार hi अपने विश्राम का इंतजाम आपको करना होगा. क्यों की रात्रि में सागर में प्रवेश उचित नहीं होता. प्रातः कल आप दोनों सागर में जाये उसकी अनत गहराई में उतरने के बाद आप को वह दो मगरमच्छ मिलेंगे. एक सफ़ेद चमकीला और एक सुनहरा. सुनहरे मगरमच्छ को मरे बिना उसके पेट के अंदर से आपको एक चीज निकालनी है जिस में एक मानचित्र बना हुआ मिलेगा उस मानचित्र की सहायता से आप स्वर्ण मणि तक पहुंच सकते है. किन्तु ये अवश्य याद रखियेगा की उन दोनों में से एक भी मगरमच्छ मरना नहीं चाहिए. यदि उनमे से एक भी मगरमच्छ आपके द्वारा मारा गया तो आप कभी भी स्वर्णमणि तक नहीं पहुंच पाएंगे. क्यों की वही एक मानचित्र है जिसके द्वारा मणि हासिल की जा सकती है. एक भी मगरमच्छ के मरते hi वह मानचित्र स्वयं hi नष्ट हो जायेगा.
रूद्र – किन्तु महाराज जिन्दा मगरमच्छ के पेट से उसे बिना मरे मानचित्र कैसे हासिल कर पाएंगे.
वनराज – आप सही कह रहे है. ये इतना आसान नहीं किन्तु आप ये मत भूलिए के आप कोई साधारण चीज़ पाने भी नहीं निकले.
देव – शै बात है महाराज. स्वर्णमणि कोई साधारण चीज़ नहीं है.
वनराज – युराज मए आप दोनों को एक अंगूठी देता हु. जिसकी सहायता से आप जब तक चाहे पानी के अंदर रह सकते है. एक दूजे से बात कर सकते है. पानी से आपको कोई तकलीफ नहीं होगी. आप लोग पानी के नीचे अनंत गहराई में भी ठीक ऐसे hi रहेंगे जैसे जमीन पे रहते है.
फिर वन राज देव और रूद्र को एक एक अंगूठी दे देते है.
वनराज इसे संभल के रखियेगा युराज क्यों की आप जब भी इस वन में आएंगे. इस अंगूठी की सहायता से बिना की रुकावट के आप को हम तक सम्मान सहित पंहुचा दिया जायेगा. और इसे छू कर यदि आप हमें यद् करेंगे तो हमसे बात कर पाएंगे. ये आपको हर वक़्त हमसे जोड़े रखेगी.
देव – धन्यवाद् महाराज. अब हमें आज्ञा दे.
वनराज - जाइये युराज आप दोनों को ईश्वर सफलता प्रदान करे.
फिर देव और रूद्र वह से उड़ कर पश्चिम दिशा में चले जाते है.
इधर. शहर में उस गैंग का बॉस एना बहोत खतरानक इंसान यही है वो जिसके आदमियों से देव और रूद्र का पन्गा हुआ. और इसी के कहने पे इसके आदमियों ने दिग की बेटी को उठाया था. वो बहार गया हुआ था और लौटकर जब उसे अपने आदमियों से पता चला की किसी ने उसका प्लान फ़ैल किया है तो क्रोध में आ गया.
एना – तुम लोग मादरचोद किसी काम के नहीं बस दारू पीना और लड़की छोड़ना आता है तुम लोगो को इतने लोग मिल कर भी दो लोंडो का मुकाबला नहीं कर पाए तुम लोग.
ा1 – बॉस वो दोनों बहोत खतरनाक थे. हमने हथियारों के साथ उन पर हमला किया फिर भी उन दोनों ने निहत्थे hi हमें धुल छठा दी.
एना ने चाताआक….. खिंच के छठा मारा अपने आदमी के गाल पर उसके मुँह से खून निकल आता है और एना का कला चेहरा और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है. सेल एक तो तू वह अपनी अम्मा छुड़वा के आया दोनों लोंडो से और अब बता भी रहा है के उन्होंने लुंड कैसे कैसे घुसेड़ा तेरी अम्मा की बुर में और कैसे गांड मरी. मादरचोद दुश्मन की तारीफ करता है .