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अपडेट 106 सान्वी स्टिल विथ आरव
जब आरव वापस आया पेशाब करके तो, सान्वी उस्सको मुस्कुराते हुए देख रही थी और कहा, “क्यों? तुमको क्यों अचानक ज़ोर से सुसु आगया बोलो?”
तो आरव ने कुछ और hi कहा, “मैं ने सोचा के जब मैं सुसु कर रहा था तो तुम कहीं साडी नाह पहेँलो, थैंक यू के नहीं पहना”
सान्वी हंस पड़ी और कहा, “अरे हाँ मुझको पेहेन लेना चाहिए था नाह? चलो पेहेन लेती हूँ अब!” तो जल्दी से आरव बीएड पर चढ़ के साडी को अपने निचे दबा दिया यह कहते, “नहीं, अभी नहीं पेहेनना!” और अब सावी आईने के सामने अपने बाल में कंघी कर रही थी, तो आईने में आरव को देखते हुए कहा, “तुमने नहीं बताया के तुमको अचानक क्यों ज़ोर से सुसु आयी आरव?”
तब आरव ने अपने अंगूठे को मुंह में चबाते हुए कहा, “क्यों के तुम मुझको दांत रही थी!”
सान्वी मुड़कर उस्सको देखते हुए पूछा, “और तेरे पापा और भैया डांटे हैं तब भी ऐसा होता है?”
आरव ने कहा, “तब को कई बार पंत में hi सुसु कर दिया है मैं ने!”
सान्वी के ेंखें भर आयी और जल्दी से उसस्के पास आकर उस्सको अपने सीने से लगाते हुए कहा, “तू क्यों इतना डरता है अपने पापा और बड़े भाई से आरव? क्यों?”
जिस वक़्त सान्वी ने उस्सको सीने से लगाया आजर्व का चेहरे ठीक उस्सकी क्लीवेज पर दबे हुए थे और आरव को सान्वी की दिल की धड़कनें सुनाई दे रहे थे तो उसस्के जवाब में यह कहा, “धक् धक् धक् धक्” सान्वी ने उस्सको सीने से हटाते हुए और उसस्के चेहरे में देखते हुए पूछा, “किआ धक् धक्?” तो आरव बोलै, “तुम्हारे बूब्स के अंदर ऐसा सुना मैं ने!”
सान्वी रट ुए हंस पड़ी और उसस्के ेंखों से इनसो चालक पड़े हुए आरव से कहा, “अरे पागल यह मेरे दिल की ढकने हैं जो धक् धक् कर रहे हैं!” तो आरव अपने अंगूठे को मुंह में डालते हुए ुचा, “तुम्हारा दिल तुम्हारे बूब्स के अंदर है किआ?”
तो सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ अंदर है इस्सके पीछे है!” और आरव ने कहा, “बहोत खूबसूरत है!” सान्वी ने पूछा “किआ खूबसूरत है?” आरव बोलै, “तुम्हारे बूब्स”
सान्वी तब तक वापस आईने के पास चली गयी थी और बहोत हैरान होकर वापस मुड़कर आरव को देखते हुए कहा, “आरव ऐसा नहीं कहते, ऐसी बातें नहीं करते यह बुरी बात होती है ऐसे बातें प्राइवेट होते हैं और बुरा माना जाता है ऐसे बातें करना!”
तो अब आरव बीएड से उतर कर सान्वी के पास गया और उस्सको छूटे हुए कहा, “तो हम भी तो अभी प्राइवेट बातें कर रहे हैं नाह? कॉलेज में सिखाया गया है के प्राइवेट बात कमरे के अंदर दो लोगों के बीच होता है, और प्राइवेट बात किसी से शेयर नहीं किया जाता, मैं कॉलेज में बहोत होषिआई स्टूडेंट था सब एक्साम्स पास किया है मैं ने!”
सान्वी ने सोचा उस्सको इस बारे में समझाना बेकार है और तब सोचने लगी के हाँ स्टडीज में तो आरव ने बिल्कुल एक्सेल किया है हर सब्जेक्ट में और कभी भी फ़ैल नहीं हुआ मगर यह कैसे हो सकता है के सोशललय इतना अलग है और पागलों जैसे करता है!! सान्वी के समझ में नहीं ारः था के आरव की प्रॉब्लम किआ है.
आरव सान्वी के पीछे खड़ा उस्सकी पीठ को देख रहा था, ब्लाउज में क्लासेस बांधे हुए थे, उस्सकी पीठ, कमर सब साफ़ नज़र आरहे थे, बहोत hi गोरी चमड़ी, गुलाबी और सफ़ेद रंग का मिलावट थी, आरव का फिर से खड़ा हो गया सान्वी को उस तरह से निहारते हुए और उस्सने अपने एक हाथ को सान्वी के पीठ पर रख कर कहा, कितना कोमल है तुम्हारा स्किन ाचा लग रहा है इससे छूने को!”
सान्वी ने उसस्के हाथ को हटाया तो नहीं आईने में उस्सको देखते हुए बाल बनाते हुए सिर्फ कहा, “ऐसा भी नहीं कहते यह भी बुरी बात है आरव!” फिर आरव ने कहा, “वहां बहोत नरम है और मुलायम भी मुझे फिर से वह सत्ताओ नाह!”
सान्वी हैरानी से उस्सको देखते हुए पूछा, “व्हाट? कहाँ नरम है और कहाँ सत्ताओं तुझे?”
आरव ने आईने में उसस्के बूब को दिखते हुए इशारा किया! सान्वी ने अपनी सांस चोररटे हुए कहा, “तुम बहोत hi नॉटी होते जा रहे हो और मुझे तंग कर रहे हो अब आरव! मैं साडी पेहेन्ने जा रही हूँ अब!”
तो दौड़ते हुए आरव बीएड पर जाकर साडी हे ऊपर बैठ गया. सान्वी उस्सको आईने देखते हुए हंस रही थी. और सान्वी अपने बालों को कंघी करके बींधने जा रही तो आरव ने कहा, “नहीं वैसे hi खुले रहने दो नाह बालों को ज़्यादा खूबसूरत लगती हो वैसे खुले बालों में!!”
संजना ने फिर उस्सको आईने में देखते हुए मुस्कुरायी और कहा, “अरे वह तुमको तो बड़ा पता है के मैं कब और कैसे खूबसूरत दिखती हूँ हम्म?” और सान्वी ने तब पेर्फुमेस लगाए और डॉ लगगयी अपने बाज़ू के निचे फिर चल कर खुले बालों में hi आरव के पास गयी….
ीक जवान औरत को कोई भी कॉम्पलिमेंट करे, उस्सकी खूबसूरती का, उस्सकी कपड़ों की तो उस्सको बहोत अच्छा लगता है. सान्वी अलग नहीं थी, उस्सको बहोत अच्छा लग रहा था जब आरव उस्सकी तारीफ़ कर रहे थे उस्सकी खूबसूरती को लेकर, उसस्के बालों को लेकर उसस्के कपड़ों को लेकर जो भी तारीफ़ करता आरव वो सान्वी को बहोत पसंद आते थे. बात यह भी थी के विवान तारीफ़ करने वालों में से नहीं था. वो कभी भी सान्वी को कोई भी कॉम्पलिमेंट नहीं करते थे, तो सान्वी को आरव के मुंह से वो सब बातों सुन्ना ाचा लगता था.
तो जब सान्वी आरव के पास आगयी तो आरव समझा के वो अब साडी लेने आरही है तो जल्दी से साडी को उस्सने अपने पीछे छुपा दिया, और सान्वी ने उस हँस्ते हुए उस से कहा, “क्यों छुपा रहा है मैं नहीं लेने आरही हूँ मैं तो तुम्हारे पास आरही हूँ पगले!”
तब आरव मुस्कुराया और बीएड पर जगह किया सान्वी को बैठने के लिए और अपने हथेली को बीएड पर एक जगह थपथपाते हुए सान्वी को वहां बैठने को कहा. जैसे सान्वी बैठी तो आरव ने लम्बा संन्स लेते हुए सुंघा और कहा, “हम्म्म्म बहोत ाचा परफ्यूम लगायी है, कितना ाचा महक रही हो, देखूं तो और उस्सने सीधे सान्वी के क्लीवेज पर अपने नाक रख के सुंघा; उस्का नाक सान्वी के ऊपरी बूब वाले हिस्से को छह रहा था और सान्वी को पता था, वो अपने बालों को ाजूय से पीछे करते हुए आरव के बालों में अपने उँगलियाँ चला रही थी प्यार से जैसे उस्सको तस्सली दे रही है, और आरव के बाँहों ने सान्वी के काँधे से होते हुए उस्सको हलके से जकरा और आरव का चेहरे फिर से सान्वी के क्लीवेज पर था.
कुछ देर आरव उसी पोजीशन में रहा तो सान्वी ने कहा, “अब बुसस भी करो, कितना सूँघोगे परफ्यूम को?” तो आरव ने फिर से कहा, “धक् धक् धक्!” सान्वी मुस्कुरायी और कहा, “हाँ मेरे दिल की धड़कनों को सुन रहे हो अब, सुनों सुनों किआ कह रहा है मेरा दिल?” तो आरव ने कहा, “कह रहा है उस्सको प्यार करने को!”
तो सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “तुम बहोत होशियार हो और नासमझ बनने का ढोंग करते हो है नाह?” आरव ने हाँ में सर हिलाया, तो सान्वी और हंसी… फिर संवी की ब्लैक कलर की ब्रा की स्ट्राप उसस्के काँधे पर नज़र आरहे थे जिस्सको आरव ने छुवा, तो सान्वी ने देखा और कहा, “यह किआ कर रहे हो आरव?” आरव ने कुछ नहीं कहा बल्कि अपने ऊँगली को ब्रा की स्ट्राप के निचे डाला, सान्वी देखना चाहती थी के वो किआ करेगा… उस्सको करने दिया, मगर आरव ने स्ट्राप को ब्लाउज के निचे डाला और कहा, “अब ठीक है यह बाहर निकल गया था!” सान्वी को उसस्पी प्यार आया और उस्सको ज़ोर से सीने से लगाया. तो आरव ने भी अपने बाहों को सान्वी के ऊपर करके उस्सको ज़ोर से जकरा और उसस्के कान में कहा, “थोड़ी देर ऐसे मुझको बाहों में भरले लेट जाओ नाह?”
सान्वी को लगा के वो बचा है दिमाग़ से और उस्सको बहोत अफेक्शन की ज़रूरत है तो उस्सने आरव को ऐसे hi बाहों में भरे हुए बीएड पर लेट गयी और आरव ने अपने चेहरे को उसस्के बूब के ऊपर ज़्यादा अचे पोजीशन में करकेबेद पर लेट गया. सिर्फ आरव का चेहरे सान्वी के छाती पर थे बाकी जिस्म का हिस्सा बीएड पर था…..
कोई 5 मिनट्स तक दोनों वैसे उसी पोसितों में लेते रहे, सान्वी आरव के बालों में अपनी ऊँगली चला रही थी हौले हौले फरते हुए और जैसे उसस्के सर का मस्सगे कर रही थी… और कुछ देर बाद सान्वी ने फिर से फील किया आरव का इरेक्शन अपनी जाँघों पर और आरव ने एक तंग सान्वी के तंग के ऊपर किया तो झट से सान्वी बीएड से उतर गयी और सीरियस होकर आरव से कहा, “अगर तुम ऐसे करोगे तो मैं यहाँ से निअक्ल जाती हूँ! यह ग़लत है आरव ऐसा नहीं करते! तुम बुरा नहीं हो तो बुरा मत बाणों. मैं तुम्हारी भाबी हूँ, तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं, तुम्हारी वाइफ नहीं हूँ मैं यह सिर्फ तुम्हारे भैया का हक़ है ऐसे करना तुमको यह हक़ नहीं है समझे तुम!”
उस्सको डांटने के बाद सान्वी ने अपनी साडी उठायी और पहने लगी. आरव वहीँ बैठा रहा सर झुकाये कुसूरवार महसूस करते हुए अपने अंगूठे को मुंह में लेकर चूस्ते हुए, सान्वी ने देखा के वो अंगूठा चूस रहा है तो जल्दी से आकर उस्का हाथ उसस्के मुंह से खिंचा और कहा, “यह भी बुरी आदत है छोटे बचे ऐसे अंगूठा चूस्ते है खबरदार फिर कभी मुंह में अंगूठा डाला तो!!”
आरव जैसे ग़ुस्से में सान्वी को देख रहा था और बिना कुछ बोले कमरे से निकल गया… सान्वी पुकारती रही मगर उस्सने कोई जवाब नहीं दिया….
कुछ देर बाद सान्वी यह बड़बड़ाते हुए निकली, “ोफो अब पता नहीं किआ करेगा यह लड़का मुझे डर है कहीं कुछ उल्टा फूलता नाह कर बैठे दांत खाने से ये पागल!!”
तो बे कॉन्टिनोएड……………….
जब आरव वापस आया पेशाब करके तो, सान्वी उस्सको मुस्कुराते हुए देख रही थी और कहा, “क्यों? तुमको क्यों अचानक ज़ोर से सुसु आगया बोलो?”
तो आरव ने कुछ और hi कहा, “मैं ने सोचा के जब मैं सुसु कर रहा था तो तुम कहीं साडी नाह पहेँलो, थैंक यू के नहीं पहना”
सान्वी हंस पड़ी और कहा, “अरे हाँ मुझको पेहेन लेना चाहिए था नाह? चलो पेहेन लेती हूँ अब!” तो जल्दी से आरव बीएड पर चढ़ के साडी को अपने निचे दबा दिया यह कहते, “नहीं, अभी नहीं पेहेनना!” और अब सावी आईने के सामने अपने बाल में कंघी कर रही थी, तो आईने में आरव को देखते हुए कहा, “तुमने नहीं बताया के तुमको अचानक क्यों ज़ोर से सुसु आयी आरव?”
तब आरव ने अपने अंगूठे को मुंह में चबाते हुए कहा, “क्यों के तुम मुझको दांत रही थी!”
सान्वी मुड़कर उस्सको देखते हुए पूछा, “और तेरे पापा और भैया डांटे हैं तब भी ऐसा होता है?”
आरव ने कहा, “तब को कई बार पंत में hi सुसु कर दिया है मैं ने!”
सान्वी के ेंखें भर आयी और जल्दी से उसस्के पास आकर उस्सको अपने सीने से लगाते हुए कहा, “तू क्यों इतना डरता है अपने पापा और बड़े भाई से आरव? क्यों?”
जिस वक़्त सान्वी ने उस्सको सीने से लगाया आजर्व का चेहरे ठीक उस्सकी क्लीवेज पर दबे हुए थे और आरव को सान्वी की दिल की धड़कनें सुनाई दे रहे थे तो उसस्के जवाब में यह कहा, “धक् धक् धक् धक्” सान्वी ने उस्सको सीने से हटाते हुए और उसस्के चेहरे में देखते हुए पूछा, “किआ धक् धक्?” तो आरव बोलै, “तुम्हारे बूब्स के अंदर ऐसा सुना मैं ने!”
सान्वी रट ुए हंस पड़ी और उसस्के ेंखों से इनसो चालक पड़े हुए आरव से कहा, “अरे पागल यह मेरे दिल की ढकने हैं जो धक् धक् कर रहे हैं!” तो आरव अपने अंगूठे को मुंह में डालते हुए ुचा, “तुम्हारा दिल तुम्हारे बूब्स के अंदर है किआ?”
तो सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ अंदर है इस्सके पीछे है!” और आरव ने कहा, “बहोत खूबसूरत है!” सान्वी ने पूछा “किआ खूबसूरत है?” आरव बोलै, “तुम्हारे बूब्स”
सान्वी तब तक वापस आईने के पास चली गयी थी और बहोत हैरान होकर वापस मुड़कर आरव को देखते हुए कहा, “आरव ऐसा नहीं कहते, ऐसी बातें नहीं करते यह बुरी बात होती है ऐसे बातें प्राइवेट होते हैं और बुरा माना जाता है ऐसे बातें करना!”
तो अब आरव बीएड से उतर कर सान्वी के पास गया और उस्सको छूटे हुए कहा, “तो हम भी तो अभी प्राइवेट बातें कर रहे हैं नाह? कॉलेज में सिखाया गया है के प्राइवेट बात कमरे के अंदर दो लोगों के बीच होता है, और प्राइवेट बात किसी से शेयर नहीं किया जाता, मैं कॉलेज में बहोत होषिआई स्टूडेंट था सब एक्साम्स पास किया है मैं ने!”
सान्वी ने सोचा उस्सको इस बारे में समझाना बेकार है और तब सोचने लगी के हाँ स्टडीज में तो आरव ने बिल्कुल एक्सेल किया है हर सब्जेक्ट में और कभी भी फ़ैल नहीं हुआ मगर यह कैसे हो सकता है के सोशललय इतना अलग है और पागलों जैसे करता है!! सान्वी के समझ में नहीं ारः था के आरव की प्रॉब्लम किआ है.
आरव सान्वी के पीछे खड़ा उस्सकी पीठ को देख रहा था, ब्लाउज में क्लासेस बांधे हुए थे, उस्सकी पीठ, कमर सब साफ़ नज़र आरहे थे, बहोत hi गोरी चमड़ी, गुलाबी और सफ़ेद रंग का मिलावट थी, आरव का फिर से खड़ा हो गया सान्वी को उस तरह से निहारते हुए और उस्सने अपने एक हाथ को सान्वी के पीठ पर रख कर कहा, कितना कोमल है तुम्हारा स्किन ाचा लग रहा है इससे छूने को!”
सान्वी ने उसस्के हाथ को हटाया तो नहीं आईने में उस्सको देखते हुए बाल बनाते हुए सिर्फ कहा, “ऐसा भी नहीं कहते यह भी बुरी बात है आरव!” फिर आरव ने कहा, “वहां बहोत नरम है और मुलायम भी मुझे फिर से वह सत्ताओ नाह!”
सान्वी हैरानी से उस्सको देखते हुए पूछा, “व्हाट? कहाँ नरम है और कहाँ सत्ताओं तुझे?”
आरव ने आईने में उसस्के बूब को दिखते हुए इशारा किया! सान्वी ने अपनी सांस चोररटे हुए कहा, “तुम बहोत hi नॉटी होते जा रहे हो और मुझे तंग कर रहे हो अब आरव! मैं साडी पेहेन्ने जा रही हूँ अब!”
तो दौड़ते हुए आरव बीएड पर जाकर साडी हे ऊपर बैठ गया. सान्वी उस्सको आईने देखते हुए हंस रही थी. और सान्वी अपने बालों को कंघी करके बींधने जा रही तो आरव ने कहा, “नहीं वैसे hi खुले रहने दो नाह बालों को ज़्यादा खूबसूरत लगती हो वैसे खुले बालों में!!”
संजना ने फिर उस्सको आईने में देखते हुए मुस्कुरायी और कहा, “अरे वह तुमको तो बड़ा पता है के मैं कब और कैसे खूबसूरत दिखती हूँ हम्म?” और सान्वी ने तब पेर्फुमेस लगाए और डॉ लगगयी अपने बाज़ू के निचे फिर चल कर खुले बालों में hi आरव के पास गयी….
ीक जवान औरत को कोई भी कॉम्पलिमेंट करे, उस्सकी खूबसूरती का, उस्सकी कपड़ों की तो उस्सको बहोत अच्छा लगता है. सान्वी अलग नहीं थी, उस्सको बहोत अच्छा लग रहा था जब आरव उस्सकी तारीफ़ कर रहे थे उस्सकी खूबसूरती को लेकर, उसस्के बालों को लेकर उसस्के कपड़ों को लेकर जो भी तारीफ़ करता आरव वो सान्वी को बहोत पसंद आते थे. बात यह भी थी के विवान तारीफ़ करने वालों में से नहीं था. वो कभी भी सान्वी को कोई भी कॉम्पलिमेंट नहीं करते थे, तो सान्वी को आरव के मुंह से वो सब बातों सुन्ना ाचा लगता था.
तो जब सान्वी आरव के पास आगयी तो आरव समझा के वो अब साडी लेने आरही है तो जल्दी से साडी को उस्सने अपने पीछे छुपा दिया, और सान्वी ने उस हँस्ते हुए उस से कहा, “क्यों छुपा रहा है मैं नहीं लेने आरही हूँ मैं तो तुम्हारे पास आरही हूँ पगले!”
तब आरव मुस्कुराया और बीएड पर जगह किया सान्वी को बैठने के लिए और अपने हथेली को बीएड पर एक जगह थपथपाते हुए सान्वी को वहां बैठने को कहा. जैसे सान्वी बैठी तो आरव ने लम्बा संन्स लेते हुए सुंघा और कहा, “हम्म्म्म बहोत ाचा परफ्यूम लगायी है, कितना ाचा महक रही हो, देखूं तो और उस्सने सीधे सान्वी के क्लीवेज पर अपने नाक रख के सुंघा; उस्का नाक सान्वी के ऊपरी बूब वाले हिस्से को छह रहा था और सान्वी को पता था, वो अपने बालों को ाजूय से पीछे करते हुए आरव के बालों में अपने उँगलियाँ चला रही थी प्यार से जैसे उस्सको तस्सली दे रही है, और आरव के बाँहों ने सान्वी के काँधे से होते हुए उस्सको हलके से जकरा और आरव का चेहरे फिर से सान्वी के क्लीवेज पर था.
कुछ देर आरव उसी पोजीशन में रहा तो सान्वी ने कहा, “अब बुसस भी करो, कितना सूँघोगे परफ्यूम को?” तो आरव ने फिर से कहा, “धक् धक् धक्!” सान्वी मुस्कुरायी और कहा, “हाँ मेरे दिल की धड़कनों को सुन रहे हो अब, सुनों सुनों किआ कह रहा है मेरा दिल?” तो आरव ने कहा, “कह रहा है उस्सको प्यार करने को!”
तो सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “तुम बहोत होशियार हो और नासमझ बनने का ढोंग करते हो है नाह?” आरव ने हाँ में सर हिलाया, तो सान्वी और हंसी… फिर संवी की ब्लैक कलर की ब्रा की स्ट्राप उसस्के काँधे पर नज़र आरहे थे जिस्सको आरव ने छुवा, तो सान्वी ने देखा और कहा, “यह किआ कर रहे हो आरव?” आरव ने कुछ नहीं कहा बल्कि अपने ऊँगली को ब्रा की स्ट्राप के निचे डाला, सान्वी देखना चाहती थी के वो किआ करेगा… उस्सको करने दिया, मगर आरव ने स्ट्राप को ब्लाउज के निचे डाला और कहा, “अब ठीक है यह बाहर निकल गया था!” सान्वी को उसस्पी प्यार आया और उस्सको ज़ोर से सीने से लगाया. तो आरव ने भी अपने बाहों को सान्वी के ऊपर करके उस्सको ज़ोर से जकरा और उसस्के कान में कहा, “थोड़ी देर ऐसे मुझको बाहों में भरले लेट जाओ नाह?”
सान्वी को लगा के वो बचा है दिमाग़ से और उस्सको बहोत अफेक्शन की ज़रूरत है तो उस्सने आरव को ऐसे hi बाहों में भरे हुए बीएड पर लेट गयी और आरव ने अपने चेहरे को उसस्के बूब के ऊपर ज़्यादा अचे पोजीशन में करकेबेद पर लेट गया. सिर्फ आरव का चेहरे सान्वी के छाती पर थे बाकी जिस्म का हिस्सा बीएड पर था…..
कोई 5 मिनट्स तक दोनों वैसे उसी पोसितों में लेते रहे, सान्वी आरव के बालों में अपनी ऊँगली चला रही थी हौले हौले फरते हुए और जैसे उसस्के सर का मस्सगे कर रही थी… और कुछ देर बाद सान्वी ने फिर से फील किया आरव का इरेक्शन अपनी जाँघों पर और आरव ने एक तंग सान्वी के तंग के ऊपर किया तो झट से सान्वी बीएड से उतर गयी और सीरियस होकर आरव से कहा, “अगर तुम ऐसे करोगे तो मैं यहाँ से निअक्ल जाती हूँ! यह ग़लत है आरव ऐसा नहीं करते! तुम बुरा नहीं हो तो बुरा मत बाणों. मैं तुम्हारी भाबी हूँ, तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं, तुम्हारी वाइफ नहीं हूँ मैं यह सिर्फ तुम्हारे भैया का हक़ है ऐसे करना तुमको यह हक़ नहीं है समझे तुम!”
उस्सको डांटने के बाद सान्वी ने अपनी साडी उठायी और पहने लगी. आरव वहीँ बैठा रहा सर झुकाये कुसूरवार महसूस करते हुए अपने अंगूठे को मुंह में लेकर चूस्ते हुए, सान्वी ने देखा के वो अंगूठा चूस रहा है तो जल्दी से आकर उस्का हाथ उसस्के मुंह से खिंचा और कहा, “यह भी बुरी आदत है छोटे बचे ऐसे अंगूठा चूस्ते है खबरदार फिर कभी मुंह में अंगूठा डाला तो!!”
आरव जैसे ग़ुस्से में सान्वी को देख रहा था और बिना कुछ बोले कमरे से निकल गया… सान्वी पुकारती रही मगर उस्सने कोई जवाब नहीं दिया….
कुछ देर बाद सान्वी यह बड़बड़ाते हुए निकली, “ोफो अब पता नहीं किआ करेगा यह लड़का मुझे डर है कहीं कुछ उल्टा फूलता नाह कर बैठे दांत खाने से ये पागल!!”
तो बे कॉन्टिनोएड……………….