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- Dec 5, 2013
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अब तक आपने पढ़ा की विक्रम रोनित और अंजलि मिलकर नवीन और उसके आदमियों को सबक सिखाते हैं....
अब आगे:-
CHAPTER- 1
अपडेट -40
मई- aaahhhh.nanu....dukh रहा है......
सुबह का वक़्त hai.......hum सब जस्ट नाश्ता ख़त्म करके बहार आँगन में बैठे hi थे की अचानक नानाजी ने मेरे कान पकड़ लिए....
नानाजी- ाचा दुःख रहा hai...kal जो इतने लोगों को उठा उठा कर फेक रहा था तब दुःख नहीं रहा था.......
मई- इसीलिए आपने कान पकडे hain....!!!!ye कोई इतना बड़ा काम तोह है नहीं की आपको मेरे कान पकड़ने के लिए पूरा एक दिन वेट करना पड़ा...
जहाँ मेरी फॅमिली मेरी बात पर है दी वहीँ नानाजी ने मेरे सर पर एक तपली बजा दी....
नानाजी- बातें खूब बनता hai.kyun!!!
रोनित- वैसे नानू इसके कान मरोड़ते देख मज़ा तोह खूब आया पर ऐसा करने का रीज़न तोह बताइये?
?
मैंने घर के रोनित को देखा..
रोनित- घर क्या रहा hai,hamesha मेरे की कान पकडे जाते hain,tu तोह हमेशा खिसक लेता hai,aaj पहली बार कुछ उल्टा हो रहा है तोह मई ख़ुशी भी न मानों क्या?
?
AHHHHHHH......nanu,maine क्या किया.....
अभी रोनित खुश हो hi रहा tha,itne में नानाजी ने उसके कान भी पकड़ liye.....aur अब हसने की बारी मेरी थी.....
नानाजी- तुम तीनो ने हमे उल्लू बनाया hai.......kal क्या बोल रहा था tu,ki मुझे क्या देने के लिए तूने वो सब कहा की चले jao,papers मिल जाएंगे...
अंजलि- मोरल बूस्ट ननु....
मई मन में- कामिनी माँ के पास बैठी hai,isiliye इसके कान बचे हुए हैं.....
नानाजी- haan,moral boost....yahi बोलकर हमें उल्लू बनाया था ना.
मई- भगवन के किये को मुझपे क्यों थोपते हो nanu..kaun क्या बन कर पैदा hoga,ye तोह गॉड hi डीडे करते है ना.....
सभी मेरी बात सुनकर ज़ोर ज़ोर से हसने lage...nanaji को पहले तोह मेरी बात समझ में नहीं aayi,par जब आयी तोह मेरे सर पर उनके हाथों के द्वारा एक और तपली का दस्तक हुआ..
माँ- papa,aap इससे बातों में नहीं जीत sakte.....bohot चालाक है ye.sabko अपनी बातों में फसा लेता है.....
एक्सक्यूज़ में
हम अभी बात कर hi रहे थे की हमारे सामने कोई आया जिससे देखकर मई रोनित और अंजलि शॉकेड हो गए.....
वहीँ दूसरी तरफ:-
अननोन- क्या ये kaam,sach में इतना बड़ा है....
ी मैं ये ****************
अननोन 2- मई तुम्हारा सुरप्रीसेड होना समझ सकता hun.......par यकीं maano,ye तुम्हारी सोच से भी ज़्यादा खतरनाक है..
अननोन- इस पोजीशन में मई ऐसे hi नहीं पहुंचा हूँ *****.....यहाँ पहुँचने के लिए जितनी लाशें मैंने बिछाई hain,tumne उतने ज़िंदा इंसान नहीं देखे honge...par मेरे माफिआ किंग होने का सबसे बड़ा कारण है की मई किसीको भी काम नहीं aankta.......maza आता है मुझे चैलेंजेज फेस करने में.....
अगर तुमने जो भी कहा hai,wo सच hai,toh आगे चलकर ये हमारे लिए भी खतरा हो सकता hai....aur मैडोक्स हर खतरे को शुरू होने से पहले hi ख़त्म कर देता है....
(मैडोक्स HORAN----MAAFIA KING.....NAJANE कितने HI देशों के मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स की लिस्ट का टॉपमोस्ट NAAM.....KHASIYAT- ताकतवर होने के साथ साथ बेहद CHALAAK.....BY हुक और बी CROOK,KAISE भी मिले बस जीत मिलनी CHAHIYE,YE इसका स्लोगन है....)
अननोन- जो भी karna,kuch वक़्त के बाद karna.abhi वो अलर्ट होगा..
चटककककहहहहहह......
मैडोक्स- क्या करना hai,kaise करना hai,ye तू मुझे batayega......dobara अगर मैडोक्स के सामने अपनी बकवास राय राखी न तोह तेरी बीवी के पास तेरे इस सादे से सर का गिफ्ट पहुंचा dunga....samjha....chal निकल...
वो अनजान शक्श आँखों में दर और अपने गाल पर जिसमे मैडोक्स के उँगलियों के निशाँ छाप चुके the,wahan हाथ रखे बाहर निकल गया........
बैक 2 हीरो:-
अवंतिका- क्या मई तुमसे कुछ बात कर सकती हूँ......
मैडम की आवाज़ से हम होश में आये...
मई- bolo.....jo बोलना है?
एक- यहाँ nahi,bahar.....
मैंने डैड की तरफ dekha.dad ने आँखों से hi जाने की परमिशन दे दी..
मई- चलो.......
हम तीनो अवंतिका के पीछे पीछे बाहर चले गए......
ा स्माल फ्लैशबैक:-
अवंतिका- ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़.......
अवंतिका सामने सोफे पर बैठ कर मोबाइल में कुछ देख रही thi....juton की आहात सुन जब उसने सामने देखा तोह उसकी चीख निकल gayi.awaaz इतने ज़ोर की थी की सभी घर वाले बाहर आ gaye....aur नवीन की हालत देख सभी सकते में आ गए.....
नवीन की हालत थी भी ऐसी की कोई भी घबरा jaaye.ek हाथ कमर me,utha कर फेका जो था हमारे हीरो ne,jhatka लग गया hoga,ek हाथ गाल pe,joki एक तरफ से सूझ चूका tha,shirt पे खून के dhabbe...inshort नवीन इस वक़्त ऐसा लग रहा था जैसे कोई भिकारी ने किसी रहिस आदमी के कपडे पहने हो....
अवंतिका रट हुए- क्या हुआ dad.aapko इतनी चोट कैसे लग gayi.aur आपका chehra,itna सुजा हुआ क्यों है.....
?
अवंतिका की माँ और दादी तोह बस रो रहे the.....par दादाजी को कुछ शक हो गया था...
दादाजी- NAVEEN,jo सुबह में लड़का आया tha,kya तू उससे भिड़ने गया था.....
नवीन अपने डैड की बात सुन घबरा गया जो दादाजी ने नोट कर ली...
दादाजी- सच सच बता NAVEEN....ussi से मार खाकर आ रहा है न तू....
नवीन डरते डरते- जी पिताजी...
दादाजी- अगर तेरी हालत ठीक होती तोह मई तेरा जबड़ा तोड़ देता....
दादीजी- ये क्या कह रहे हैं aap...ek तोह उस लड़के ने मेरे बेटे को इतनी बुरी तरीके से मारा और उसके ऊपर आप भी दांत रहे hain......bade छोटे की तमीज़ भी नहीं है उस लड़के ko.apne बाप की उम्र के आदमी पर भी भला कोई हाथ उठता hai...lagta है उसके माँ बाप ने उससे संस्कार hi नहीं दिए....
(अब हमारी दादीजी को क्या pata,ki शराफत की गंगा का सबसे ज़्यादा शोर्तज उन्ही के घर पर है)
दादाजी- साड़ी गलती तुम्हारे इस लाडले की hai..jab मैंने मन किया था की उससे मत भिड़ना तोह गया hi kyun.ab भुगत.....
बहु डॉक्टर को फ़ोन lagao.usse तुरंत आने को कहो....
A/MOM- जी पिताजी....
ौनतीजी तुरंत भागी फ़ोन करने पर इधर अवंतिका की आँखों में आंसू और चेहरे पर बोहोत ज़्यादा ग़ुस्से के भाव आ चुके the.....sab नवीन को hi घेरे खड़े हुए the,AVANTIKA धीरे से उठी और बहार की तरफ चली गयी...
फ्लैशबैक एंड्स:-
हमारे बहार निकलने के बाद अंदर:-
नानाजी- ये तोह वो नवीन की बेटी है ना....!!!
डैड- जी पापा.
नानाजी- इससे मेरे पोतों से क्या बात करनी है....
डैड- पापा ये सब क्लास्स्मेटिस भी hain.hogi कोई बात उनके बीच की.....
नानाजी- हाँ पर कल hi मेरे बच्चों ने उसके बाप को मारा tha,aur आज ये यहाँ आ gayi...mujhe तोह इसमें भी इसके बाप की कोई साजिश लगती है.....
डैड- mummy,aapko अभी भी लगता है की आपके पोते को कोई बेवकूफ बना सकता hai.!!!!agar उन लोगों में ज़रा भी बुद्धि बची होगी तोह कोई भी नया ड्रामा करने से पहले हज़ार बार sochenge....aap टेंशन फ्री हो jaiye,kuch नहीं होगा......
वहीँ बहार:-
मई- boliye,aaj मैडम को हमसे क्या ख़ास काम पद गया....
पर अवंतिका कुछ बोल नहीं paayi....ghar से निकलने के बाद जो आंसू कण्ट्रोल करके रखे हुए the,ab वो तेज़ी से बहार निकलने लगे.....
मैंने उसकी आँखों में jhanka,ab मुझे पता चल गया था की उसके घर में क्या सन हुआ है और वो यहाँ क्यों आयी है......
अवंतिका- आखिर क्या बिगाड़ा है मैंने और मेरी फॅमिली ने tumhara....maine स्कूल में तोह तुमसे कह दिया था न की अब हम दोनों एक दूसरे के रास्ते में कभी नहीं aayenge....fir भी ये सब....
रोनित- अब्बे....
अभी रोनित आगे कुछ kehta,par मैंने हाथ दिखाकर उससे चुप रहने को kaha.mai चाहता था की पहले अवंतिका के दिल का पूरा गुब्बार निकल जाए.....
अवंतिका- चलो माना उस रात पार्टी में मामाजी ने तुम्हारे डैड के साथ बतमीज़ी की thi....isiliye तुमने उन्हें maara....fir मैंने भी दोस्ती का झूठा नाटक kiya,isiliye तुमने हमें पुनीश kiya,par अब मेरे डैड ने तुम्हारा क्या बिगड़ दिया जो तुमने उन्हें इतने बुरी तरीके से maara.unki उम्र भी तुम्हारे डैड जितनी hi hai.....apne डैड के उम्र के आदमी पे तुम्हे हाथ उठाते हुए शर्म नहीं aayi.....tumme थोड़े से भी मैनर्स है भी या नहीं.....
मई- हो गया या और कुछ भी बचा है.....
चलो अंदर...
मैंने उसका हाथ पकड़ा और उससे खींचते हुए अंदर ले gaya.usne छूटने की कोशिश की पर कामियाब नहीं हो पायी....
रोनित- ये gayi....ab जो शुद्ध वाणी का इसके कानो से संगम hoga,wo कभी भूल नहीं पाएगी ये...
ANJALI-abbe आराम se.haath न उखड जाए कहीं.......
मई अवंतिका को खींचते हुए आँगन में ले आया जहाँ सब अभी भी बैठे हुए the.mujhe इस तरह अवंतिका को खींच कर लाते हुए देख सभी शॉक होकर खड़े हो गए......
माँ- ये क्या तरीका है विक्की.. किसी लड़की को ऐसे खींचते है क्या....
?
आज पहली बार था जब माँ ने मुझसे इतनी तेज़ आवाज़ में बात की थी.......
मई- mom,ye मुझे उल्टा सीधा बोल रही थी...
माँ- तोह क्या इस्पे ज़ोर आज़माइएश karega....yahi सिखाया है मैंने tujhe!!!!!ek लड़की के ऊपर अपनी ताकत आज़माना...
मई- manners,haan.!!!!!tehzib,sanskar,isse कहते hain....aaj पहली बार मेरी माँ ने मुझसे चिल्ला कर बात ki,aur वो भी किसके liye,us लड़की के लिए जिसका बाप कल शाम मेरी पूरी फॅमिली को मारने आया था....
अवंतिका फटी आँखों से मेरी तरफ देख मेरी बात सुनाने लगी.....
मई- यू क्नोव what,abhi जो तुम जस्टिफिकेशन्स दे रही थी naa,ki चलो वो तुमने इसीलिए किया वगैरा वगैरा (अब साड़ी बात तोह नहीं बता सकता था naa.AVANTIKA की झूटी फ्रंशीप और उसके बाद के काण्ड के बारे में .घर पर किसीको पता नहीं था)
तुम सिर्फ अपने आप को सही दिखने के लिए कह रही thi.ki dekho,hum इतने भी बुरे नहीं hain.......agar मैंने कल तुम्हारे घर में घुसकर तुम्हारे पूज्यनीय डैड को धमकाया tha,toh सिर्फ इसीलिए क्यूंकि अगर मई ऐसा नहीं karta,toh मेरे ननु और डैड को वो पेपर्स कभी नहीं देते....
जाकर अपने डैड के रूम का लाकर kholo,aur dekho,najane कितने hi मासूम लोगों की म्हणत की कमाई से खरीदे हुए प्लॉट्स के पेपर्स मिलेंगे wahan....tumhara जो आलिशान बांग्ला है naa,usse बनाने के लिए सिर्फ आईटी और सीमेंट नहीं लगा hai,logon के आंसू और दर्द भी मिले हुए है उस ईमारत की दीवालों में....
और तुम मुझे मैनर्स का ज्ञान देने आ gayi......agar कोई तुम्हारे घर में घुसकर तुम्हारी फॅमिली को जान से मारने की कोशिश करे तोह क्या तुम चुप चाप बैठ कर देखती रहोगी.....
अपने बाप से जाकर बोल dena,ki अगर ऐसी ओछी हरकत दोबारा करने की कोशिश ki,toh कल जो धमकी मैंने सुबह तुम्हारे घर में घुस कर उससे दी thi,usse सच होने में वक़्त नहीं लगेगा....
और तुम तोह बोहोत अचे से जानती हो....
रोनित- V.J जो कहता है....
अंजलि- वो हो जाता है.....
अवंतिका के बॉडी में एक सार्ड लेहेर दौड़ गयी क्यूंकि वो अब तक मुझे इतना तोह जान hi चुकी थी की मई जो भी कहता hun,wo किसी भी हाल me,kar भी देता हूँ.....
वो मुड़ी और तेज़ी से बाहर निकल गयी...
मई- माँ sorry.wo मई...
माँ- उसकी ज़रुरत नहीं hai...i ऍम प्राउड ऑफ़ ु.....
सब- galat....we अरे प्राउड ऑफ़ ु...
माँ- तू jaa,thodi देर आराम कर ले.
माँ को पता था की इस वक़्त मेरा मूड थोड़ा ऑफ हो चूका है और मुझे कुछ वक़्त अकेले रहना hai...aakhir माँ जो थी....
मई भी चुपचाप अपने रूम चला गया....
वहीँ दूसरी तरफ:-
पुजारीजी- (मन में)- ये मिटटी इतनी शीतल कैसे हो gayi....!!!!iska अर्थ है की वो समय शिग्रह hi आने वाला hai.......aur इसका एक छोटा सा भाग बनाने का मौका मुझे मिला hai........hey prabhu,tera कोटि कोटि धन्यवाद की तूने मुझे इस लायक समझा.....
पुजारीजी जो की आँख बंद कर धवली झील की मिटटी को हाथ में पकड़ ये सब सोच रहे the,unhone आँखें खोल दी.....
1सत आदमी- क्या हुआ pujariji????bataiye naa,ye सिर्फ एक संजोग है या कोई चमत्कार....
पुजारीजी ने आस पास dekha,saikdon लोग उन्हें घेरे खड़े the....kal उनके साथ साथ आस पास के सभी लोगों को धवली झील की मिटटी के रंग में आये बदलाव के बारे में पता चल गया tha...ab ये कोई छोटी बात तोह थी nahi,ki छुप jaati......par शाम ढल जाने की वजह से पुजारीजी ने अगले दिन यहाँ आकर देखना सही समझा...
पुजारीजी- कोई चमत्कार नहीं हुआ hai.ye सब मात्रा एक संजोग hai....(JHOOTH)....najane कितने युगो से ये मिटटी यहाँ पर hai..rang में बदलाव आना कोई बड़ी बात नहीं..
पुजारीजी की बात सुनकर जो लोगों में एक एक्ससिटेमेंट जाग गयी thi,wo ख़त्म हो gayi...par कुछ की अब भी खुजली बची थी......
आदमी- पर pujariji,aaj तक तोह इस मिटटी ने रंग नहीं badla,yun अचानक कैसे इसका रंगा बदल गया...!!!!!
पुजारीजी- अब मई कोई शोधकर्ता तोह हूँ nahi,bhala इसका मई कैसे जवाब दे सकता hu.agar कोई चमत्कारिक प्रभु से जुडी बात hoti,toh मई अवश्य batata.par ऐसा तोह कुछ भी नहीं है.......
फिर किसीने कुछ भी नहीं कहा और धीरे धीरे वो जगह खाली होइ गयी और रह गए सिर्फ पुजारीजी....
पुजारीजी- मुझे अब अपना काम शुरू कर देना chahiye.vilamb करना ठीक नहीं.......
पुजारीजी उठे और तेज़ी से चलते हुए अपने मकान की तरफ बढ़ गए.......
बैक तो हीरो:-
रोनित- क्या सोच रहे हैं सर?
?
मई रूम में लेता कुछ सोच रहा था की इतने में रोनित और अंजलि रूम में आये..
मई- सोच रहा हूँ की क्या सोचूं!!!!
रोनित- hain,soch रहा है की क्या soche....matlab!!!!
मई- बिना मतलब के कोई बात का मतलब नहीं निकलता kya.soch रहा हूँ की अगर मई ऐसा सोचूं तोह मेरी सोच कुछ गलत न सोचने लग जाए.......
रोनित को लगा मैंने कोई सीरियस बात की है तोह मैंने क्या बोलै वो समझने की कोशिश करने लगा....
HAHAHAHAHA...HAHAHAHAHAHA.......
रोनित ने साइड में देखा जहाँ अंजलि पेट पकड़ कर है रही thi.....fir उसने मेरी तरफ dekha,mere चेहरे पर भी मुस्कराहट थी...
रोनित- कमाल hai...abhi तक ये समझ नहीं आया की ये साला आखिर बोलै क्या उसके ऊपर ये भी हसने लग gayi...abbe तू है क्यों रही है..
अंजलि- तेरे पोपट होने पे....
रोनित- मतलब?
अंजलि- अब्बे वो तुझे अपनी बातों में फसकर पोपट बना रहा है और तू सोच रहा है जैसे वो तुझसे पज़ल्स में बात कर रहा hai.....V.J ने जो भी बोलै उसका कोई मतलब नहीं है दुफर..............
रोनित- saale,tu मेरा पोपट कर रहा था और मई साला जितना गणित आता था सब लगा दिया तेरी बात का मतलब समझने में.....
अंजलि- तोह ये कौनसी नयी बात hai....wo सब छोड़ पहले जो बोलने आया tha,wo बोल लें
रोनित- अब्बे haan,iski गोल गोल बातों में मई असली बात तोह भूल hi gaya...wo मामाजी बोल रहे थे यहाँ एक होटल hai,wahan राबड़ी कमल की मिलती hai..chal न चलते हैं...
मैंने रोनित को घर कर dekha.wo इधर उधर देखने लगा....
अंजलि- अब्बे नहीं जाना है तोह मन कर देना......
मई- नहीं जाना hai...ho गया....
रोनित- साले फिटनेस freak.thode से मीठे से कुछ नहीं होता..
मई- जब कुछ नहीं होता तोह खाना hi क्यों hai....j
अंजलि- रहने de,ye नहीं maanega.chal हम दोनों hi चलते हैं....
दोनों निकल gaye....baat दरअसल ये है की मुझे मीठा पसंद नहीं hai....isiliye साले घुमा फिरकर बात कर रहे the......khair उनके जाने के बाद मई फिर कल रात के बारे में सोचने laga......chaliye इस बार आपको भी दिखता हूँ कल रात मेरे साथ क्या हुआ....
लास्ट नाईट:-
रोनित- जल्दी खोल yaar.dekhen toh,aakhir क्या क्या लिखा है उस झील के बारे में.....!!!!
नानाजी के धवली झील की हिस्ट्री बताने के बाद उसके बारे में जानने के लिए हम तीनो बोहोत एक्ससिटेड the.humne सबको g.n विश किया और मेरे रूम में आ गए....
अंजलि- क्या बात hai,somebody इस लुकिंग वैरी excited..haan!!!!!
रोनित- और नहीं तोह kya,kissa hi इतना इंटरेस्टिंग hai...aur जानना तोह बनता है न..
मैंने भी मुस्कुराते हुए फर्स्ट पेज खोला और......
हम तीनो- ओह शीट्ट्ट्ट्ट......
रोनित- ये किस लैंग्वेज में लिखा है यार..
अंजलि- रूक मई गूगल में चेक करती हूँ.
एक्चुअली वो किताब किसी अलग hi लैंग्वेज में लिखी गयी थी......
अंजलि- अरे यार इस लैंग्वेज का तोह कोई सोर्स hi नहीं है...
रोनित- मतलब???
मई- मतलब गूगल बाबा के हिसाब से ये कोई लैंग्वेज hi नहीं है.....
रोनित- तोह फिर ये सब लिखा क्या hai....kisine अपना क्रैकेड दिमाग चाप दिया है क्या?
मई- अब ये मई कैसे बताऊँ???
अंजलि- क्या yaar,pura मूड hi ऑफ हो gaya.chhodo,mai चली नावेल पढ़ने.....
रोनित- और मई चला लप्पी में मूवी देखने.......
दोनों बहार निकल गए और मई रह गया अकेला....
मैंने बुक साइड में राखी और वाशरूम चला gaya.wapas आकर मई क्या करूँ ये सोच hi रहा था की मई चौंक gaya.us बुक से हलकी हलकी रौशनी निकल रही thi..maine बुक उठायी और जैसे hi खोला......
मई- अरे ये पलाइन कैसे हो गया.....
??
दरअसल अब उस किताब में कुछ भी नहीं लिखा tha...wo खाली thi.maine तेज़ी से पैन पलटाये.
मई- अरे ये क्या लिखा है....!!!!!
मई पैन पलटा hi रहा था की मुझे बीच में कुछ लिखा हुआ सा दिखा.....
BOOK-MUJHE पढ़ा नहीं जा सकता........
उस पैन पर ये लिखा हुआ था....
MAI-ab साला इसका क्या मतलब हुआ.....
मैंने पैन को देखा तोह फिर चौंक gaya.jo लिखा था वो मिट रहा था और उसकी जगह कुछ नया लिखा आ रहा था....
बुक- पर देखा जा सकता है......!!!!!!!
मई- पर kaise..mere मुँह से अपने आप hi निकल गया.....
लिखी हुई लाइन फिर मिट गयी और उसके जगह कुछ नया लिखने लगा..
बुक- मुझे अपने माथे से लगाओ और कहो ''मस्तिष्क प्रविशति''.......
पहले मैंने उठकर अपना रूम बंद किया और वापस बीएड पर आकर बैठ गया...
मैंने बुक को अपने माथे पर लगाया और कहा....
मई- मस्तिष्क प्रविशति.....
मंत्र कहते hi मेरी आँखें अपने आप बंद हो गयीं.....
बुक से एक तेज़ रौशनी nikli....roshni इतनी ज़्यादा थी की अगर मैंने रूम बंद नहीं किया होता तोह रौशनी बहार भी सब कुछ रोशन कर deti.....kuch देर तक वो रौशनी लगातार बढ़ती रही और फिर एक झटके में बंद हो gayi...arre................mai कहाँ gaya........!!!!!!room में बस वो किताब hi thi,mai गायब था......
मई- अब्बे ये कौन सी जगह hai..aur ोये टेरिइइइइइइइ मई पानी के ऊपर खड़ा hun....saala हो क्या रहा है..
मैंने अपने चारो तरफ निगाह ghumai.......is वक़्त मई एक झील जैसी जगह के ठीक ऊपर खड़ा tha....matlab पानी मेरे पेअर से कुछ एक फ़ीट hi नीचे hoga....chaaro तरफ पानी hi पानी tha.maine अपनी नज़र तेज़ ki...mujhe उस झील के बाद के जंगल दिखने lage....jitni दूर भी मैंने देखने की कोशिश ki,mujhe या तोह पानी दिखा या जंगल.......
मई- ये आवाज़ कैसी...!!!!!
मैंने जैसे hi अपने राइट की तरफ dekha,meri आँखें बड़ी हो gayi....mere तरफ तेज़ी से एक आग का गोला आ रहा tha.....maine उससे रोकने के लिए अपने हाथ आगे kiye.par ये kya,wo गोला रूका नहीं और मेरे आर पार हो गया,
मई- ओह तेरी की अब ये क्या जादू hai.maine अपने पीछे पलट कर देखा तोह एक नया झटका laga.ye झटका कुछ ज़्यादा hi बड़ा tha.....mujhse थोड़ी hi दूर बोहोत साड़ी परछाइयां कड़ी thi......unke चेहरे पर सूर्य सा तेज tha.wo दो भाग में बाटे हुए थे.
एक भाग में जो परछाइयां thi,unhone लम्बे सफ़ेद कपडे पहने हुए the,aur दूसरे भाग की परछाइयों ने भी सफ़ेद कपडे hi पहने the,par उन कपड़ों के ऊपर ब्लैक स्ट्राइप्स यानी काली पत्तियां लगी हुई थी......
वो आग का गोला उनकी तरफ hi जा रहा tha....par उन्होंने उस गोले को बेकार कर diya.aur फिर उनकी तरफ से हुम्ला हुआ.
मुझे कुछ समझ नहीं आया क्यूंकि ये हमला भी मेरी तरफ हुआ था और इस बार भी उनका छोड़ा अस्त्र मेरे आर पार हो गया tha.maine दूसरी तरफ देखा जहाँ उनका अस्त्र जा रहा tha....mujhe दूर पुरे ब्लैक कपडे में एक साया खड़ा हुआ दिखा...
मई- साला इसका चेहरा धुंदला क्यों दिख रहा है..
मैंने अपनी इन्द्रियों को तेज़ किया ताकि उससे देख सकूँ पर कोई फायदा नहीं हुआ.
पर अब तक मई समझ चूका था की मई उस बुक की दुनिया में hun......yahan मुझे कोई देख नहीं सकता....
मई- ओह shit...matlab ये सब वो हौली स्पिरिट्स हैं और ये जिसका चेहरा नहीं दिख रहा है ये वही डेविल hai,jisne उन्हें मारा tha....iska मतलब मई जिसके ऊपर खड़ा hun,yahi धवली झील hai.....aur ये वक़्त भी मेरे वक़्त से लाखों साल पुराण है.....
मुझे एक झुरझुरी सी महसूस hui....ab आप hi sochiye,apne वक़्त से लाखों साल पहले पहुँच jana,jis वक़्त इंसान छोडो हमारा प्लेनेट भी नया नया बना tha,wo फीलिंग कैसी होगी!!!!!!
कुछ वक़्त लगा पर फिर मई नार्मल हो गया...
अब वो वक़्त आ गया था जिसके बारे में नानाजी ने बताया था.
उस डेविल ने अपने हज़ार रूप कर लिए थे और छल से उन स्पिरिट्स से लड़ रहा tha.mai उस डेविल के हर मूव ko,uski हर चाल को बड़े ध्यान से देख रहा tha.aur उसके हर हमले पर मेरे मुँह से वाह निकल जाता tha.wo था hi इतना tez..bhale hi उसने हज़ारों रूप ले लिए the,par दिमाग तोह एक hi का चल रहा था न इसके पीछे...
MAI-arre bacho...shittttt.gaye काम से....
डेविल ने धोके से एक स्पिरिट पर वो स्पीयर घुसा दिया था और देखते hi देखते सारे हौली स्पिरिट्स उस स्पीयर के अंदर जाने लगे..........
.............BOOOMMMMMMMMMMM...............
जैसे hi सभी हौली स्पिरिट्स उस स्पीयर में saamye,ek ज़ोर का ब्लास्ट hua.wo डेविल उड़ता हुआ दूर जा gira.uske सारे रूप भी गायब हो गए......
वो स्पीयर ऊपर आसमान की तरफ जाने लगा और एक ऊंचाई पर पहुंचकर वापस तेज़ी से नीचे झील की तरफ आने लगा...
उस डेविल को बोहोत चोट आयी thi.par अपनी चोट की परवाह न करके वो उड़ते हुए उस जगह जाने लगा जहाँ वो स्पीयर गिरने वाला tha.par उसके पहुँचने से पहले hi वो स्पीयर झील में समां gaya.SPEAR के पीछे पीछे वो डेविल भी झील के अंदर घुस गया.
BOOOMMMMMMMMMMMMMMMMMM
झील के बीच में जहाँ पर स्पीयर गिरा tha,ek ज़ोर का धमाका hua....kuch 10 सेकंड में hi उस झील का पूरा पानी सुख कर ज़मीन के नीचे चला gaya....aur उस झील की सतह जो सफ़ेद थी काली पद gayi.....wo डेविल वहीँ सतह पर खड़ा tha,apne घुटनो पर बैठ गया....
डेविल- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii......
इधर मई बुरी तरीके से चौंक गया क्यूंकि उस डेविल के मुँह से जो आवाज़ निकली thi,wo मेरी थी...............
मई उस डेविल के पास आगे बढ़ने को हुआ hi था की मेरे चारो तरफ तेज़ रौशनी फैले गयी और अगले hi पल मई अपने कमरे में था........
वहीँ हेवन में:-
ST.CECILIA-mujhe आज तक समझ नहीं आया, विक्रम और ास्मोडियस की आवाज़ एक सी क्यों?
??
सत सेबेस्टियन- एक hi पिता के
दो बेटे हैं......
बस करवट बदल
कर लेते हैं.....
आज के लिए इतना HI
आपका अपना V.J
अब आगे:-
CHAPTER- 1
अपडेट -40
मई- aaahhhh.nanu....dukh रहा है......
सुबह का वक़्त hai.......hum सब जस्ट नाश्ता ख़त्म करके बहार आँगन में बैठे hi थे की अचानक नानाजी ने मेरे कान पकड़ लिए....
नानाजी- ाचा दुःख रहा hai...kal जो इतने लोगों को उठा उठा कर फेक रहा था तब दुःख नहीं रहा था.......
मई- इसीलिए आपने कान पकडे hain....!!!!ye कोई इतना बड़ा काम तोह है नहीं की आपको मेरे कान पकड़ने के लिए पूरा एक दिन वेट करना पड़ा...
जहाँ मेरी फॅमिली मेरी बात पर है दी वहीँ नानाजी ने मेरे सर पर एक तपली बजा दी....
नानाजी- बातें खूब बनता hai.kyun!!!
रोनित- वैसे नानू इसके कान मरोड़ते देख मज़ा तोह खूब आया पर ऐसा करने का रीज़न तोह बताइये?
?
मैंने घर के रोनित को देखा..
रोनित- घर क्या रहा hai,hamesha मेरे की कान पकडे जाते hain,tu तोह हमेशा खिसक लेता hai,aaj पहली बार कुछ उल्टा हो रहा है तोह मई ख़ुशी भी न मानों क्या?
?
AHHHHHHH......nanu,maine क्या किया.....
अभी रोनित खुश हो hi रहा tha,itne में नानाजी ने उसके कान भी पकड़ liye.....aur अब हसने की बारी मेरी थी.....
नानाजी- तुम तीनो ने हमे उल्लू बनाया hai.......kal क्या बोल रहा था tu,ki मुझे क्या देने के लिए तूने वो सब कहा की चले jao,papers मिल जाएंगे...
अंजलि- मोरल बूस्ट ननु....
मई मन में- कामिनी माँ के पास बैठी hai,isiliye इसके कान बचे हुए हैं.....
नानाजी- haan,moral boost....yahi बोलकर हमें उल्लू बनाया था ना.
मई- भगवन के किये को मुझपे क्यों थोपते हो nanu..kaun क्या बन कर पैदा hoga,ye तोह गॉड hi डीडे करते है ना.....
सभी मेरी बात सुनकर ज़ोर ज़ोर से हसने lage...nanaji को पहले तोह मेरी बात समझ में नहीं aayi,par जब आयी तोह मेरे सर पर उनके हाथों के द्वारा एक और तपली का दस्तक हुआ..
माँ- papa,aap इससे बातों में नहीं जीत sakte.....bohot चालाक है ye.sabko अपनी बातों में फसा लेता है.....
एक्सक्यूज़ में
हम अभी बात कर hi रहे थे की हमारे सामने कोई आया जिससे देखकर मई रोनित और अंजलि शॉकेड हो गए.....
वहीँ दूसरी तरफ:-
अननोन- क्या ये kaam,sach में इतना बड़ा है....
ी मैं ये ****************
अननोन 2- मई तुम्हारा सुरप्रीसेड होना समझ सकता hun.......par यकीं maano,ye तुम्हारी सोच से भी ज़्यादा खतरनाक है..
अननोन- इस पोजीशन में मई ऐसे hi नहीं पहुंचा हूँ *****.....यहाँ पहुँचने के लिए जितनी लाशें मैंने बिछाई hain,tumne उतने ज़िंदा इंसान नहीं देखे honge...par मेरे माफिआ किंग होने का सबसे बड़ा कारण है की मई किसीको भी काम नहीं aankta.......maza आता है मुझे चैलेंजेज फेस करने में.....
अगर तुमने जो भी कहा hai,wo सच hai,toh आगे चलकर ये हमारे लिए भी खतरा हो सकता hai....aur मैडोक्स हर खतरे को शुरू होने से पहले hi ख़त्म कर देता है....
(मैडोक्स HORAN----MAAFIA KING.....NAJANE कितने HI देशों के मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स की लिस्ट का टॉपमोस्ट NAAM.....KHASIYAT- ताकतवर होने के साथ साथ बेहद CHALAAK.....BY हुक और बी CROOK,KAISE भी मिले बस जीत मिलनी CHAHIYE,YE इसका स्लोगन है....)
अननोन- जो भी karna,kuch वक़्त के बाद karna.abhi वो अलर्ट होगा..
चटककककहहहहहह......
मैडोक्स- क्या करना hai,kaise करना hai,ye तू मुझे batayega......dobara अगर मैडोक्स के सामने अपनी बकवास राय राखी न तोह तेरी बीवी के पास तेरे इस सादे से सर का गिफ्ट पहुंचा dunga....samjha....chal निकल...
वो अनजान शक्श आँखों में दर और अपने गाल पर जिसमे मैडोक्स के उँगलियों के निशाँ छाप चुके the,wahan हाथ रखे बाहर निकल गया........
बैक 2 हीरो:-
अवंतिका- क्या मई तुमसे कुछ बात कर सकती हूँ......
मैडम की आवाज़ से हम होश में आये...
मई- bolo.....jo बोलना है?
एक- यहाँ nahi,bahar.....
मैंने डैड की तरफ dekha.dad ने आँखों से hi जाने की परमिशन दे दी..
मई- चलो.......
हम तीनो अवंतिका के पीछे पीछे बाहर चले गए......
ा स्माल फ्लैशबैक:-
अवंतिका- ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़.......
अवंतिका सामने सोफे पर बैठ कर मोबाइल में कुछ देख रही thi....juton की आहात सुन जब उसने सामने देखा तोह उसकी चीख निकल gayi.awaaz इतने ज़ोर की थी की सभी घर वाले बाहर आ gaye....aur नवीन की हालत देख सभी सकते में आ गए.....
नवीन की हालत थी भी ऐसी की कोई भी घबरा jaaye.ek हाथ कमर me,utha कर फेका जो था हमारे हीरो ne,jhatka लग गया hoga,ek हाथ गाल pe,joki एक तरफ से सूझ चूका tha,shirt पे खून के dhabbe...inshort नवीन इस वक़्त ऐसा लग रहा था जैसे कोई भिकारी ने किसी रहिस आदमी के कपडे पहने हो....
अवंतिका रट हुए- क्या हुआ dad.aapko इतनी चोट कैसे लग gayi.aur आपका chehra,itna सुजा हुआ क्यों है.....
?
अवंतिका की माँ और दादी तोह बस रो रहे the.....par दादाजी को कुछ शक हो गया था...
दादाजी- NAVEEN,jo सुबह में लड़का आया tha,kya तू उससे भिड़ने गया था.....
नवीन अपने डैड की बात सुन घबरा गया जो दादाजी ने नोट कर ली...
दादाजी- सच सच बता NAVEEN....ussi से मार खाकर आ रहा है न तू....
नवीन डरते डरते- जी पिताजी...
दादाजी- अगर तेरी हालत ठीक होती तोह मई तेरा जबड़ा तोड़ देता....
दादीजी- ये क्या कह रहे हैं aap...ek तोह उस लड़के ने मेरे बेटे को इतनी बुरी तरीके से मारा और उसके ऊपर आप भी दांत रहे hain......bade छोटे की तमीज़ भी नहीं है उस लड़के ko.apne बाप की उम्र के आदमी पर भी भला कोई हाथ उठता hai...lagta है उसके माँ बाप ने उससे संस्कार hi नहीं दिए....
(अब हमारी दादीजी को क्या pata,ki शराफत की गंगा का सबसे ज़्यादा शोर्तज उन्ही के घर पर है)
दादाजी- साड़ी गलती तुम्हारे इस लाडले की hai..jab मैंने मन किया था की उससे मत भिड़ना तोह गया hi kyun.ab भुगत.....
बहु डॉक्टर को फ़ोन lagao.usse तुरंत आने को कहो....
A/MOM- जी पिताजी....
ौनतीजी तुरंत भागी फ़ोन करने पर इधर अवंतिका की आँखों में आंसू और चेहरे पर बोहोत ज़्यादा ग़ुस्से के भाव आ चुके the.....sab नवीन को hi घेरे खड़े हुए the,AVANTIKA धीरे से उठी और बहार की तरफ चली गयी...
फ्लैशबैक एंड्स:-
हमारे बहार निकलने के बाद अंदर:-
नानाजी- ये तोह वो नवीन की बेटी है ना....!!!
डैड- जी पापा.
नानाजी- इससे मेरे पोतों से क्या बात करनी है....
डैड- पापा ये सब क्लास्स्मेटिस भी hain.hogi कोई बात उनके बीच की.....
नानाजी- हाँ पर कल hi मेरे बच्चों ने उसके बाप को मारा tha,aur आज ये यहाँ आ gayi...mujhe तोह इसमें भी इसके बाप की कोई साजिश लगती है.....
डैड- mummy,aapko अभी भी लगता है की आपके पोते को कोई बेवकूफ बना सकता hai.!!!!agar उन लोगों में ज़रा भी बुद्धि बची होगी तोह कोई भी नया ड्रामा करने से पहले हज़ार बार sochenge....aap टेंशन फ्री हो jaiye,kuch नहीं होगा......
वहीँ बहार:-
मई- boliye,aaj मैडम को हमसे क्या ख़ास काम पद गया....
पर अवंतिका कुछ बोल नहीं paayi....ghar से निकलने के बाद जो आंसू कण्ट्रोल करके रखे हुए the,ab वो तेज़ी से बहार निकलने लगे.....
मैंने उसकी आँखों में jhanka,ab मुझे पता चल गया था की उसके घर में क्या सन हुआ है और वो यहाँ क्यों आयी है......
अवंतिका- आखिर क्या बिगाड़ा है मैंने और मेरी फॅमिली ने tumhara....maine स्कूल में तोह तुमसे कह दिया था न की अब हम दोनों एक दूसरे के रास्ते में कभी नहीं aayenge....fir भी ये सब....
रोनित- अब्बे....
अभी रोनित आगे कुछ kehta,par मैंने हाथ दिखाकर उससे चुप रहने को kaha.mai चाहता था की पहले अवंतिका के दिल का पूरा गुब्बार निकल जाए.....
अवंतिका- चलो माना उस रात पार्टी में मामाजी ने तुम्हारे डैड के साथ बतमीज़ी की thi....isiliye तुमने उन्हें maara....fir मैंने भी दोस्ती का झूठा नाटक kiya,isiliye तुमने हमें पुनीश kiya,par अब मेरे डैड ने तुम्हारा क्या बिगड़ दिया जो तुमने उन्हें इतने बुरी तरीके से maara.unki उम्र भी तुम्हारे डैड जितनी hi hai.....apne डैड के उम्र के आदमी पे तुम्हे हाथ उठाते हुए शर्म नहीं aayi.....tumme थोड़े से भी मैनर्स है भी या नहीं.....
मई- हो गया या और कुछ भी बचा है.....
चलो अंदर...
मैंने उसका हाथ पकड़ा और उससे खींचते हुए अंदर ले gaya.usne छूटने की कोशिश की पर कामियाब नहीं हो पायी....
रोनित- ये gayi....ab जो शुद्ध वाणी का इसके कानो से संगम hoga,wo कभी भूल नहीं पाएगी ये...
ANJALI-abbe आराम se.haath न उखड जाए कहीं.......
मई अवंतिका को खींचते हुए आँगन में ले आया जहाँ सब अभी भी बैठे हुए the.mujhe इस तरह अवंतिका को खींच कर लाते हुए देख सभी शॉक होकर खड़े हो गए......
माँ- ये क्या तरीका है विक्की.. किसी लड़की को ऐसे खींचते है क्या....
?
आज पहली बार था जब माँ ने मुझसे इतनी तेज़ आवाज़ में बात की थी.......
मई- mom,ye मुझे उल्टा सीधा बोल रही थी...
माँ- तोह क्या इस्पे ज़ोर आज़माइएश karega....yahi सिखाया है मैंने tujhe!!!!!ek लड़की के ऊपर अपनी ताकत आज़माना...
मई- manners,haan.!!!!!tehzib,sanskar,isse कहते hain....aaj पहली बार मेरी माँ ने मुझसे चिल्ला कर बात ki,aur वो भी किसके liye,us लड़की के लिए जिसका बाप कल शाम मेरी पूरी फॅमिली को मारने आया था....
अवंतिका फटी आँखों से मेरी तरफ देख मेरी बात सुनाने लगी.....
मई- यू क्नोव what,abhi जो तुम जस्टिफिकेशन्स दे रही थी naa,ki चलो वो तुमने इसीलिए किया वगैरा वगैरा (अब साड़ी बात तोह नहीं बता सकता था naa.AVANTIKA की झूटी फ्रंशीप और उसके बाद के काण्ड के बारे में .घर पर किसीको पता नहीं था)
तुम सिर्फ अपने आप को सही दिखने के लिए कह रही thi.ki dekho,hum इतने भी बुरे नहीं hain.......agar मैंने कल तुम्हारे घर में घुसकर तुम्हारे पूज्यनीय डैड को धमकाया tha,toh सिर्फ इसीलिए क्यूंकि अगर मई ऐसा नहीं karta,toh मेरे ननु और डैड को वो पेपर्स कभी नहीं देते....
जाकर अपने डैड के रूम का लाकर kholo,aur dekho,najane कितने hi मासूम लोगों की म्हणत की कमाई से खरीदे हुए प्लॉट्स के पेपर्स मिलेंगे wahan....tumhara जो आलिशान बांग्ला है naa,usse बनाने के लिए सिर्फ आईटी और सीमेंट नहीं लगा hai,logon के आंसू और दर्द भी मिले हुए है उस ईमारत की दीवालों में....
और तुम मुझे मैनर्स का ज्ञान देने आ gayi......agar कोई तुम्हारे घर में घुसकर तुम्हारी फॅमिली को जान से मारने की कोशिश करे तोह क्या तुम चुप चाप बैठ कर देखती रहोगी.....
अपने बाप से जाकर बोल dena,ki अगर ऐसी ओछी हरकत दोबारा करने की कोशिश ki,toh कल जो धमकी मैंने सुबह तुम्हारे घर में घुस कर उससे दी thi,usse सच होने में वक़्त नहीं लगेगा....
और तुम तोह बोहोत अचे से जानती हो....
रोनित- V.J जो कहता है....
अंजलि- वो हो जाता है.....
अवंतिका के बॉडी में एक सार्ड लेहेर दौड़ गयी क्यूंकि वो अब तक मुझे इतना तोह जान hi चुकी थी की मई जो भी कहता hun,wo किसी भी हाल me,kar भी देता हूँ.....
वो मुड़ी और तेज़ी से बाहर निकल गयी...
मई- माँ sorry.wo मई...
माँ- उसकी ज़रुरत नहीं hai...i ऍम प्राउड ऑफ़ ु.....
सब- galat....we अरे प्राउड ऑफ़ ु...
माँ- तू jaa,thodi देर आराम कर ले.
माँ को पता था की इस वक़्त मेरा मूड थोड़ा ऑफ हो चूका है और मुझे कुछ वक़्त अकेले रहना hai...aakhir माँ जो थी....
मई भी चुपचाप अपने रूम चला गया....
वहीँ दूसरी तरफ:-
पुजारीजी- (मन में)- ये मिटटी इतनी शीतल कैसे हो gayi....!!!!iska अर्थ है की वो समय शिग्रह hi आने वाला hai.......aur इसका एक छोटा सा भाग बनाने का मौका मुझे मिला hai........hey prabhu,tera कोटि कोटि धन्यवाद की तूने मुझे इस लायक समझा.....
पुजारीजी जो की आँख बंद कर धवली झील की मिटटी को हाथ में पकड़ ये सब सोच रहे the,unhone आँखें खोल दी.....
1सत आदमी- क्या हुआ pujariji????bataiye naa,ye सिर्फ एक संजोग है या कोई चमत्कार....
पुजारीजी ने आस पास dekha,saikdon लोग उन्हें घेरे खड़े the....kal उनके साथ साथ आस पास के सभी लोगों को धवली झील की मिटटी के रंग में आये बदलाव के बारे में पता चल गया tha...ab ये कोई छोटी बात तोह थी nahi,ki छुप jaati......par शाम ढल जाने की वजह से पुजारीजी ने अगले दिन यहाँ आकर देखना सही समझा...
पुजारीजी- कोई चमत्कार नहीं हुआ hai.ye सब मात्रा एक संजोग hai....(JHOOTH)....najane कितने युगो से ये मिटटी यहाँ पर hai..rang में बदलाव आना कोई बड़ी बात नहीं..
पुजारीजी की बात सुनकर जो लोगों में एक एक्ससिटेमेंट जाग गयी thi,wo ख़त्म हो gayi...par कुछ की अब भी खुजली बची थी......
आदमी- पर pujariji,aaj तक तोह इस मिटटी ने रंग नहीं badla,yun अचानक कैसे इसका रंगा बदल गया...!!!!!
पुजारीजी- अब मई कोई शोधकर्ता तोह हूँ nahi,bhala इसका मई कैसे जवाब दे सकता hu.agar कोई चमत्कारिक प्रभु से जुडी बात hoti,toh मई अवश्य batata.par ऐसा तोह कुछ भी नहीं है.......
फिर किसीने कुछ भी नहीं कहा और धीरे धीरे वो जगह खाली होइ गयी और रह गए सिर्फ पुजारीजी....
पुजारीजी- मुझे अब अपना काम शुरू कर देना chahiye.vilamb करना ठीक नहीं.......
पुजारीजी उठे और तेज़ी से चलते हुए अपने मकान की तरफ बढ़ गए.......
बैक तो हीरो:-
रोनित- क्या सोच रहे हैं सर?
?
मई रूम में लेता कुछ सोच रहा था की इतने में रोनित और अंजलि रूम में आये..
मई- सोच रहा हूँ की क्या सोचूं!!!!
रोनित- hain,soch रहा है की क्या soche....matlab!!!!
मई- बिना मतलब के कोई बात का मतलब नहीं निकलता kya.soch रहा हूँ की अगर मई ऐसा सोचूं तोह मेरी सोच कुछ गलत न सोचने लग जाए.......
रोनित को लगा मैंने कोई सीरियस बात की है तोह मैंने क्या बोलै वो समझने की कोशिश करने लगा....
HAHAHAHAHA...HAHAHAHAHAHA.......
रोनित ने साइड में देखा जहाँ अंजलि पेट पकड़ कर है रही thi.....fir उसने मेरी तरफ dekha,mere चेहरे पर भी मुस्कराहट थी...
रोनित- कमाल hai...abhi तक ये समझ नहीं आया की ये साला आखिर बोलै क्या उसके ऊपर ये भी हसने लग gayi...abbe तू है क्यों रही है..
अंजलि- तेरे पोपट होने पे....
रोनित- मतलब?
अंजलि- अब्बे वो तुझे अपनी बातों में फसकर पोपट बना रहा है और तू सोच रहा है जैसे वो तुझसे पज़ल्स में बात कर रहा hai.....V.J ने जो भी बोलै उसका कोई मतलब नहीं है दुफर..............
रोनित- saale,tu मेरा पोपट कर रहा था और मई साला जितना गणित आता था सब लगा दिया तेरी बात का मतलब समझने में.....
अंजलि- तोह ये कौनसी नयी बात hai....wo सब छोड़ पहले जो बोलने आया tha,wo बोल लें
रोनित- अब्बे haan,iski गोल गोल बातों में मई असली बात तोह भूल hi gaya...wo मामाजी बोल रहे थे यहाँ एक होटल hai,wahan राबड़ी कमल की मिलती hai..chal न चलते हैं...
मैंने रोनित को घर कर dekha.wo इधर उधर देखने लगा....
अंजलि- अब्बे नहीं जाना है तोह मन कर देना......
मई- नहीं जाना hai...ho गया....
रोनित- साले फिटनेस freak.thode से मीठे से कुछ नहीं होता..
मई- जब कुछ नहीं होता तोह खाना hi क्यों hai....j
अंजलि- रहने de,ye नहीं maanega.chal हम दोनों hi चलते हैं....
दोनों निकल gaye....baat दरअसल ये है की मुझे मीठा पसंद नहीं hai....isiliye साले घुमा फिरकर बात कर रहे the......khair उनके जाने के बाद मई फिर कल रात के बारे में सोचने laga......chaliye इस बार आपको भी दिखता हूँ कल रात मेरे साथ क्या हुआ....
लास्ट नाईट:-
रोनित- जल्दी खोल yaar.dekhen toh,aakhir क्या क्या लिखा है उस झील के बारे में.....!!!!
नानाजी के धवली झील की हिस्ट्री बताने के बाद उसके बारे में जानने के लिए हम तीनो बोहोत एक्ससिटेड the.humne सबको g.n विश किया और मेरे रूम में आ गए....
अंजलि- क्या बात hai,somebody इस लुकिंग वैरी excited..haan!!!!!
रोनित- और नहीं तोह kya,kissa hi इतना इंटरेस्टिंग hai...aur जानना तोह बनता है न..
मैंने भी मुस्कुराते हुए फर्स्ट पेज खोला और......
हम तीनो- ओह शीट्ट्ट्ट्ट......
रोनित- ये किस लैंग्वेज में लिखा है यार..
अंजलि- रूक मई गूगल में चेक करती हूँ.
एक्चुअली वो किताब किसी अलग hi लैंग्वेज में लिखी गयी थी......
अंजलि- अरे यार इस लैंग्वेज का तोह कोई सोर्स hi नहीं है...
रोनित- मतलब???
मई- मतलब गूगल बाबा के हिसाब से ये कोई लैंग्वेज hi नहीं है.....
रोनित- तोह फिर ये सब लिखा क्या hai....kisine अपना क्रैकेड दिमाग चाप दिया है क्या?
मई- अब ये मई कैसे बताऊँ???
अंजलि- क्या yaar,pura मूड hi ऑफ हो gaya.chhodo,mai चली नावेल पढ़ने.....
रोनित- और मई चला लप्पी में मूवी देखने.......
दोनों बहार निकल गए और मई रह गया अकेला....
मैंने बुक साइड में राखी और वाशरूम चला gaya.wapas आकर मई क्या करूँ ये सोच hi रहा था की मई चौंक gaya.us बुक से हलकी हलकी रौशनी निकल रही thi..maine बुक उठायी और जैसे hi खोला......
मई- अरे ये पलाइन कैसे हो गया.....
??
दरअसल अब उस किताब में कुछ भी नहीं लिखा tha...wo खाली thi.maine तेज़ी से पैन पलटाये.
मई- अरे ये क्या लिखा है....!!!!!
मई पैन पलटा hi रहा था की मुझे बीच में कुछ लिखा हुआ सा दिखा.....
BOOK-MUJHE पढ़ा नहीं जा सकता........
उस पैन पर ये लिखा हुआ था....
MAI-ab साला इसका क्या मतलब हुआ.....
मैंने पैन को देखा तोह फिर चौंक gaya.jo लिखा था वो मिट रहा था और उसकी जगह कुछ नया लिखा आ रहा था....
बुक- पर देखा जा सकता है......!!!!!!!
मई- पर kaise..mere मुँह से अपने आप hi निकल गया.....
लिखी हुई लाइन फिर मिट गयी और उसके जगह कुछ नया लिखने लगा..
बुक- मुझे अपने माथे से लगाओ और कहो ''मस्तिष्क प्रविशति''.......
पहले मैंने उठकर अपना रूम बंद किया और वापस बीएड पर आकर बैठ गया...
मैंने बुक को अपने माथे पर लगाया और कहा....
मई- मस्तिष्क प्रविशति.....
मंत्र कहते hi मेरी आँखें अपने आप बंद हो गयीं.....
बुक से एक तेज़ रौशनी nikli....roshni इतनी ज़्यादा थी की अगर मैंने रूम बंद नहीं किया होता तोह रौशनी बहार भी सब कुछ रोशन कर deti.....kuch देर तक वो रौशनी लगातार बढ़ती रही और फिर एक झटके में बंद हो gayi...arre................mai कहाँ gaya........!!!!!!room में बस वो किताब hi thi,mai गायब था......
मई- अब्बे ये कौन सी जगह hai..aur ोये टेरिइइइइइइइ मई पानी के ऊपर खड़ा hun....saala हो क्या रहा है..
मैंने अपने चारो तरफ निगाह ghumai.......is वक़्त मई एक झील जैसी जगह के ठीक ऊपर खड़ा tha....matlab पानी मेरे पेअर से कुछ एक फ़ीट hi नीचे hoga....chaaro तरफ पानी hi पानी tha.maine अपनी नज़र तेज़ ki...mujhe उस झील के बाद के जंगल दिखने lage....jitni दूर भी मैंने देखने की कोशिश ki,mujhe या तोह पानी दिखा या जंगल.......
मई- ये आवाज़ कैसी...!!!!!
मैंने जैसे hi अपने राइट की तरफ dekha,meri आँखें बड़ी हो gayi....mere तरफ तेज़ी से एक आग का गोला आ रहा tha.....maine उससे रोकने के लिए अपने हाथ आगे kiye.par ये kya,wo गोला रूका नहीं और मेरे आर पार हो गया,
मई- ओह तेरी की अब ये क्या जादू hai.maine अपने पीछे पलट कर देखा तोह एक नया झटका laga.ye झटका कुछ ज़्यादा hi बड़ा tha.....mujhse थोड़ी hi दूर बोहोत साड़ी परछाइयां कड़ी thi......unke चेहरे पर सूर्य सा तेज tha.wo दो भाग में बाटे हुए थे.
एक भाग में जो परछाइयां thi,unhone लम्बे सफ़ेद कपडे पहने हुए the,aur दूसरे भाग की परछाइयों ने भी सफ़ेद कपडे hi पहने the,par उन कपड़ों के ऊपर ब्लैक स्ट्राइप्स यानी काली पत्तियां लगी हुई थी......
वो आग का गोला उनकी तरफ hi जा रहा tha....par उन्होंने उस गोले को बेकार कर diya.aur फिर उनकी तरफ से हुम्ला हुआ.
मुझे कुछ समझ नहीं आया क्यूंकि ये हमला भी मेरी तरफ हुआ था और इस बार भी उनका छोड़ा अस्त्र मेरे आर पार हो गया tha.maine दूसरी तरफ देखा जहाँ उनका अस्त्र जा रहा tha....mujhe दूर पुरे ब्लैक कपडे में एक साया खड़ा हुआ दिखा...
मई- साला इसका चेहरा धुंदला क्यों दिख रहा है..
मैंने अपनी इन्द्रियों को तेज़ किया ताकि उससे देख सकूँ पर कोई फायदा नहीं हुआ.
पर अब तक मई समझ चूका था की मई उस बुक की दुनिया में hun......yahan मुझे कोई देख नहीं सकता....
मई- ओह shit...matlab ये सब वो हौली स्पिरिट्स हैं और ये जिसका चेहरा नहीं दिख रहा है ये वही डेविल hai,jisne उन्हें मारा tha....iska मतलब मई जिसके ऊपर खड़ा hun,yahi धवली झील hai.....aur ये वक़्त भी मेरे वक़्त से लाखों साल पुराण है.....
मुझे एक झुरझुरी सी महसूस hui....ab आप hi sochiye,apne वक़्त से लाखों साल पहले पहुँच jana,jis वक़्त इंसान छोडो हमारा प्लेनेट भी नया नया बना tha,wo फीलिंग कैसी होगी!!!!!!
कुछ वक़्त लगा पर फिर मई नार्मल हो गया...
अब वो वक़्त आ गया था जिसके बारे में नानाजी ने बताया था.
उस डेविल ने अपने हज़ार रूप कर लिए थे और छल से उन स्पिरिट्स से लड़ रहा tha.mai उस डेविल के हर मूव ko,uski हर चाल को बड़े ध्यान से देख रहा tha.aur उसके हर हमले पर मेरे मुँह से वाह निकल जाता tha.wo था hi इतना tez..bhale hi उसने हज़ारों रूप ले लिए the,par दिमाग तोह एक hi का चल रहा था न इसके पीछे...
MAI-arre bacho...shittttt.gaye काम से....
डेविल ने धोके से एक स्पिरिट पर वो स्पीयर घुसा दिया था और देखते hi देखते सारे हौली स्पिरिट्स उस स्पीयर के अंदर जाने लगे..........
.............BOOOMMMMMMMMMMM...............
जैसे hi सभी हौली स्पिरिट्स उस स्पीयर में saamye,ek ज़ोर का ब्लास्ट hua.wo डेविल उड़ता हुआ दूर जा gira.uske सारे रूप भी गायब हो गए......
वो स्पीयर ऊपर आसमान की तरफ जाने लगा और एक ऊंचाई पर पहुंचकर वापस तेज़ी से नीचे झील की तरफ आने लगा...
उस डेविल को बोहोत चोट आयी thi.par अपनी चोट की परवाह न करके वो उड़ते हुए उस जगह जाने लगा जहाँ वो स्पीयर गिरने वाला tha.par उसके पहुँचने से पहले hi वो स्पीयर झील में समां gaya.SPEAR के पीछे पीछे वो डेविल भी झील के अंदर घुस गया.
BOOOMMMMMMMMMMMMMMMMMM
झील के बीच में जहाँ पर स्पीयर गिरा tha,ek ज़ोर का धमाका hua....kuch 10 सेकंड में hi उस झील का पूरा पानी सुख कर ज़मीन के नीचे चला gaya....aur उस झील की सतह जो सफ़ेद थी काली पद gayi.....wo डेविल वहीँ सतह पर खड़ा tha,apne घुटनो पर बैठ गया....
डेविल- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii......
इधर मई बुरी तरीके से चौंक गया क्यूंकि उस डेविल के मुँह से जो आवाज़ निकली thi,wo मेरी थी...............
मई उस डेविल के पास आगे बढ़ने को हुआ hi था की मेरे चारो तरफ तेज़ रौशनी फैले गयी और अगले hi पल मई अपने कमरे में था........
वहीँ हेवन में:-
ST.CECILIA-mujhe आज तक समझ नहीं आया, विक्रम और ास्मोडियस की आवाज़ एक सी क्यों?
??
सत सेबेस्टियन- एक hi पिता के
दो बेटे हैं......
बस करवट बदल
कर लेते हैं.....
आज के लिए इतना HI
आपका अपना V.J