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- Dec 5, 2013
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अपडेट 121
सुमित:- हाँ तो Kirti...Abb तुम्हारी बारी?
कीर्ति:- क्या?
सुमित:- अपनी कहानी सुनाने ki...Achanak से ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया?
कीर्ति:- प्रोफेसर डॉ. राहुल को जानते hi होंगे तुम?
सुमित:- उन्होंने कैसे तुम्हारा ह्रदय परिवर्तन कर diya...Wo तो उरोलोजिस्त है ना की कार्डियोलॉजिस्ट.
कीर्ति:- बकवास बंद करो.
एक तो कीर्ति पहले hi परेशान थी ये जान कर की सुमित उसका नहीं रहा ऊपर से सुमित का ये मजाक.
सुमित भी कीर्ति का परेशानी देख कर आराम से बोलै.
सुमित:- ओने ऑफ़ थे बेस्ट प्रोफेसर इन माय life...Ye बात तो तुम भी जानती हो की रेजीडेंसी (MD/MS) मब्ब्स से काफी मुश्किल होता है अपने पर्सनल लाइफ मैनेज करने के मामले में.
दिन और रात भर duty...Kaam किसी गधे से काम nahi...Personal लाइफ को तो घर में hi भूल jaao...Aur मैंने रेजीडेंसी किया भी तो उस वक्त जब मई काफी कमजोर महसूस करने लगा tha...Tum से अलग होने का दुःख ने मुझे इतना कमजोर कर दिया की खुद पर hi भरोषा नहीं raha...Megha का प्यार से hi डरने लगा था.
शायद दुःख को hi अपना जीवन मान लिया tha...Khush होने का सोचने पर hi दर जाता था.
उसी रेजीडेंसी में एक चीज जो अच्छा हुआ मेरे साथ वो था राहुल सर का saath...Wo सिर्फ मेरे थीसिस के लिए hi गाइड नहीं थे उन्होंने मुझे जिंदगी भर के लिए गाइड कर दिया.
प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य और कुछ हद्द तक पर्सनली जो भी हूँ उनका काफी योगदान है.
तुम उन्हें कैसे जानती हो?
कीर्ति:- मेरे पापा का दोस्त है.
सुमित:- अच्छा.
सुमित आगे सुनने का इंतजार कर hi रहा था की कीर्ति के एक सवाल ने सुमित को कुछ पल के लिए हैरान कर दिया.
कीर्ति:- पहले तो मेरा हमेशा पीछा करते थे? ये जान्ने के लिए की मई खुश हूँ की नहीं. लेकिन जब मुझे तुम्हारा सबसे ज्यादा जरुरत था तो तब क्यों नहीं आये?
ये कहते वक्त कीर्ति की आँखों में आंसू आ गए.
सुमित:- मतलब...
कीर्ति:- मेरा इंगेजमेंट अटेंड करने के बाद क्यों एक बार भी पीछे मुद कर नहीं देखा?
सुमित:- मेरा पोस्टिंग का डेट आ गया tha...Uss वक्त hi कह दिया था अब्ब पीछे मुद कर नहीं dekhunga...Tumhe तुम्हारे खुशियों के साथ hi छोड़ कर गया tha...Dukhi था तो मई जो टूटे हुए दिल के साथ वह से गया था जिसका फिलर सिर्फ मेघा को hi था.
क्यों तुम्हारी शादी....
कीर्ति:- नहीं हुई...
सुमित को कुछ ख़ास तो फर्क पड़ा नहीं लेकिन कीर्ति को दुखी देख थोड़ा अजीब जरूर लग रहा था.
कीर्ति:- इंगेजमेंट के बाद पता चला की विवेक वैसा नहीं है जैसा मई सोचती थी. उसका मेरे अलावा भी दो और लड़की के साथ अफेयर था उस वक्त.
शादी मुझसे करना चाहता था पैसो के लिए.
ये पता चलने के बाद मई पूरी तरह से टूट gayi...Uss के साथ सच में प्यार हो गया था तुमसे पीछा छुड़ाने की कोशिश कर कर के.
मुझे हमेशा से ऐसे लड़के पसंद थे जिस में सब कुछ ho...Look में हैंडसम, पढ़ाई में इंटेलीजेंट, बातों में हुमूर, मुझे स्पेशल फील करवाने वाला और हर एक क्वालिटी...
सुमित:- सच्चा प्यार के अलावा.
सुमित की इस बात पर कीर्ति कुछ देर चुप रही और फिर बोलना सुरु किया.
कीर्ति:- तुम्हारा पर्सनालिटी पर अत्त्रक्ट होने लगी thi...Lekin तुम्हारा ये हाल नहीं tha...Ye बात मुझे पसंद नहीं आयी जो धीरे धीरे मेरा ईगो हर्ट करने laga...Kaise भी तुम्हे पाना चाहती thi...Aur जब कामयाब हो गयी तो रीलीज़ हुआ की तुमसे भी अच्छे पर्सनालिटी के लोग है.
उम्र hi क्या थी उस vakt...Jindagi भर तुम्हे झेलना भी नहीं चाहती thi...Issi लिए उसी वक्त अलग कर दिया.
और बाद में तुम जब फिर टूर में mile...Tab तुम्हे लग रहा होगा की तुम मुझे इम्प्रेस कर रहे ho...Lekin मई तुमसे और इर्रिटेट होने lagi...Lekin पता नहीं विवेक से कैसे प्यार करने लगी? उसका पर्सनालिटी तो तुम्हारे सामने कुछ था hi nahi...Shayad बदलते वक्त के साथ सोच में भी परिवर्तन आ गया था.
मेघा:- और जब विवेक का असलियत पता चला तो सुमित की यार आ गयी?
बहुत देर से चुप मेघा अब्ब जा कर बोली.
कीर्ति:- Nahi...Sumit एक हारा हुआ आशिक़ था मेरे saamne...Zero hi नहीं बल्कि नेगेटिव personality...Mera 2ंद या फिर लास्ट choice...Jiske बारे में सोचना भी नहीं चाहती थी.
सुमित:- तो फिर तुम्हारा आज ये रूप क्यों और कैसे?
कीर्ति:- याद है मैंने डॉ. राहुल के बारे में पूछा था.
सुमित:- हाँ मेरा प्रोफेसर और तुम्हारे पापा के dost...Aage बताओ.
अब्ब शायद सुमित से भी और इंतजार नहीं हो रहा था वो राज जाने के लिए की कैसे एक लड़की जो उससे भाव तक नहीं देती thi...Pyaar तो दूर की बात उसके दर्द पर भी तरस नहीं आता था आज उसके प्यार में पागल खुद उसके पीछे आ गयी वो भी इतने देर होने के baad...Aur इस बार का प्यार जूनून और अट्रैक्शन भी नहीं tha...Shayad सच्चा.
मेघा कुछ याद करते हुए मुस्कुरा रही thi...Shayad उसका अंदाजा सही दिशा में जा रहा था.
(फ्रेंड्स जानता हु अपडेट छोटा है, इससे कमबैक अपडेट समझ lijiye...Aur बहुत लेट भी हो gaya...Picchle महीने एक ऐसी डिपार्टमेंट में पोस्टिंग था जहा का कुछ फैकल्टीज टॉक्सिक होने के साथ साथ एनवायरनमेंट भी टॉक्सिक tha...Mentally इतना ज्यादा थक जाता था की लिखने की हिम्मत तो दूर अच्छे से रिलैक्स भी नहीं हो पाटा tha...Uss डिपार्टमेंट का पोस्टिंग का असर वो पोस्टिंग ख़त्म होने के कुछ हफ्ते तक भी raha...Abb थोड़ा फ्री hun...Story भी 5-10 उपदटेस बाकी hai....Complete करके hi जाऊँगा.]
सुमित:- हाँ तो Kirti...Abb तुम्हारी बारी?
कीर्ति:- क्या?
सुमित:- अपनी कहानी सुनाने ki...Achanak से ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया?
कीर्ति:- प्रोफेसर डॉ. राहुल को जानते hi होंगे तुम?
सुमित:- उन्होंने कैसे तुम्हारा ह्रदय परिवर्तन कर diya...Wo तो उरोलोजिस्त है ना की कार्डियोलॉजिस्ट.
कीर्ति:- बकवास बंद करो.
एक तो कीर्ति पहले hi परेशान थी ये जान कर की सुमित उसका नहीं रहा ऊपर से सुमित का ये मजाक.
सुमित भी कीर्ति का परेशानी देख कर आराम से बोलै.
सुमित:- ओने ऑफ़ थे बेस्ट प्रोफेसर इन माय life...Ye बात तो तुम भी जानती हो की रेजीडेंसी (MD/MS) मब्ब्स से काफी मुश्किल होता है अपने पर्सनल लाइफ मैनेज करने के मामले में.
दिन और रात भर duty...Kaam किसी गधे से काम nahi...Personal लाइफ को तो घर में hi भूल jaao...Aur मैंने रेजीडेंसी किया भी तो उस वक्त जब मई काफी कमजोर महसूस करने लगा tha...Tum से अलग होने का दुःख ने मुझे इतना कमजोर कर दिया की खुद पर hi भरोषा नहीं raha...Megha का प्यार से hi डरने लगा था.
शायद दुःख को hi अपना जीवन मान लिया tha...Khush होने का सोचने पर hi दर जाता था.
उसी रेजीडेंसी में एक चीज जो अच्छा हुआ मेरे साथ वो था राहुल सर का saath...Wo सिर्फ मेरे थीसिस के लिए hi गाइड नहीं थे उन्होंने मुझे जिंदगी भर के लिए गाइड कर दिया.
प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य और कुछ हद्द तक पर्सनली जो भी हूँ उनका काफी योगदान है.
तुम उन्हें कैसे जानती हो?
कीर्ति:- मेरे पापा का दोस्त है.
सुमित:- अच्छा.
सुमित आगे सुनने का इंतजार कर hi रहा था की कीर्ति के एक सवाल ने सुमित को कुछ पल के लिए हैरान कर दिया.
कीर्ति:- पहले तो मेरा हमेशा पीछा करते थे? ये जान्ने के लिए की मई खुश हूँ की नहीं. लेकिन जब मुझे तुम्हारा सबसे ज्यादा जरुरत था तो तब क्यों नहीं आये?
ये कहते वक्त कीर्ति की आँखों में आंसू आ गए.
सुमित:- मतलब...
कीर्ति:- मेरा इंगेजमेंट अटेंड करने के बाद क्यों एक बार भी पीछे मुद कर नहीं देखा?
सुमित:- मेरा पोस्टिंग का डेट आ गया tha...Uss वक्त hi कह दिया था अब्ब पीछे मुद कर नहीं dekhunga...Tumhe तुम्हारे खुशियों के साथ hi छोड़ कर गया tha...Dukhi था तो मई जो टूटे हुए दिल के साथ वह से गया था जिसका फिलर सिर्फ मेघा को hi था.
क्यों तुम्हारी शादी....
कीर्ति:- नहीं हुई...
सुमित को कुछ ख़ास तो फर्क पड़ा नहीं लेकिन कीर्ति को दुखी देख थोड़ा अजीब जरूर लग रहा था.
कीर्ति:- इंगेजमेंट के बाद पता चला की विवेक वैसा नहीं है जैसा मई सोचती थी. उसका मेरे अलावा भी दो और लड़की के साथ अफेयर था उस वक्त.
शादी मुझसे करना चाहता था पैसो के लिए.
ये पता चलने के बाद मई पूरी तरह से टूट gayi...Uss के साथ सच में प्यार हो गया था तुमसे पीछा छुड़ाने की कोशिश कर कर के.
मुझे हमेशा से ऐसे लड़के पसंद थे जिस में सब कुछ ho...Look में हैंडसम, पढ़ाई में इंटेलीजेंट, बातों में हुमूर, मुझे स्पेशल फील करवाने वाला और हर एक क्वालिटी...
सुमित:- सच्चा प्यार के अलावा.
सुमित की इस बात पर कीर्ति कुछ देर चुप रही और फिर बोलना सुरु किया.
कीर्ति:- तुम्हारा पर्सनालिटी पर अत्त्रक्ट होने लगी thi...Lekin तुम्हारा ये हाल नहीं tha...Ye बात मुझे पसंद नहीं आयी जो धीरे धीरे मेरा ईगो हर्ट करने laga...Kaise भी तुम्हे पाना चाहती thi...Aur जब कामयाब हो गयी तो रीलीज़ हुआ की तुमसे भी अच्छे पर्सनालिटी के लोग है.
उम्र hi क्या थी उस vakt...Jindagi भर तुम्हे झेलना भी नहीं चाहती thi...Issi लिए उसी वक्त अलग कर दिया.
और बाद में तुम जब फिर टूर में mile...Tab तुम्हे लग रहा होगा की तुम मुझे इम्प्रेस कर रहे ho...Lekin मई तुमसे और इर्रिटेट होने lagi...Lekin पता नहीं विवेक से कैसे प्यार करने लगी? उसका पर्सनालिटी तो तुम्हारे सामने कुछ था hi nahi...Shayad बदलते वक्त के साथ सोच में भी परिवर्तन आ गया था.
मेघा:- और जब विवेक का असलियत पता चला तो सुमित की यार आ गयी?
बहुत देर से चुप मेघा अब्ब जा कर बोली.
कीर्ति:- Nahi...Sumit एक हारा हुआ आशिक़ था मेरे saamne...Zero hi नहीं बल्कि नेगेटिव personality...Mera 2ंद या फिर लास्ट choice...Jiske बारे में सोचना भी नहीं चाहती थी.
सुमित:- तो फिर तुम्हारा आज ये रूप क्यों और कैसे?
कीर्ति:- याद है मैंने डॉ. राहुल के बारे में पूछा था.
सुमित:- हाँ मेरा प्रोफेसर और तुम्हारे पापा के dost...Aage बताओ.
अब्ब शायद सुमित से भी और इंतजार नहीं हो रहा था वो राज जाने के लिए की कैसे एक लड़की जो उससे भाव तक नहीं देती thi...Pyaar तो दूर की बात उसके दर्द पर भी तरस नहीं आता था आज उसके प्यार में पागल खुद उसके पीछे आ गयी वो भी इतने देर होने के baad...Aur इस बार का प्यार जूनून और अट्रैक्शन भी नहीं tha...Shayad सच्चा.
मेघा कुछ याद करते हुए मुस्कुरा रही thi...Shayad उसका अंदाजा सही दिशा में जा रहा था.
(फ्रेंड्स जानता हु अपडेट छोटा है, इससे कमबैक अपडेट समझ lijiye...Aur बहुत लेट भी हो gaya...Picchle महीने एक ऐसी डिपार्टमेंट में पोस्टिंग था जहा का कुछ फैकल्टीज टॉक्सिक होने के साथ साथ एनवायरनमेंट भी टॉक्सिक tha...Mentally इतना ज्यादा थक जाता था की लिखने की हिम्मत तो दूर अच्छे से रिलैक्स भी नहीं हो पाटा tha...Uss डिपार्टमेंट का पोस्टिंग का असर वो पोस्टिंग ख़त्म होने के कुछ हफ्ते तक भी raha...Abb थोड़ा फ्री hun...Story भी 5-10 उपदटेस बाकी hai....Complete करके hi जाऊँगा.]