Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 15 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 121

सुमित:- हाँ तो Kirti...Abb तुम्हारी बारी?

कीर्ति:- क्या?

सुमित:- अपनी कहानी सुनाने ki...Achanak से ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया?

कीर्ति:- प्रोफेसर डॉ. राहुल को जानते hi होंगे तुम?

सुमित:- उन्होंने कैसे तुम्हारा ह्रदय परिवर्तन कर diya...Wo तो उरोलोजिस्त है ना की कार्डियोलॉजिस्ट.

कीर्ति:- बकवास बंद करो.

एक तो कीर्ति पहले hi परेशान थी ये जान कर की सुमित उसका नहीं रहा ऊपर से सुमित का ये मजाक.

सुमित भी कीर्ति का परेशानी देख कर आराम से बोलै.

सुमित:- ओने ऑफ़ थे बेस्ट प्रोफेसर इन माय life...Ye बात तो तुम भी जानती हो की रेजीडेंसी (MD/MS) मब्ब्स से काफी मुश्किल होता है अपने पर्सनल लाइफ मैनेज करने के मामले में.

दिन और रात भर duty...Kaam किसी गधे से काम nahi...Personal लाइफ को तो घर में hi भूल jaao...Aur मैंने रेजीडेंसी किया भी तो उस वक्त जब मई काफी कमजोर महसूस करने लगा tha...Tum से अलग होने का दुःख ने मुझे इतना कमजोर कर दिया की खुद पर hi भरोषा नहीं raha...Megha का प्यार से hi डरने लगा था.

शायद दुःख को hi अपना जीवन मान लिया tha...Khush होने का सोचने पर hi दर जाता था.

उसी रेजीडेंसी में एक चीज जो अच्छा हुआ मेरे साथ वो था राहुल सर का saath...Wo सिर्फ मेरे थीसिस के लिए hi गाइड नहीं थे उन्होंने मुझे जिंदगी भर के लिए गाइड कर दिया.

प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य और कुछ हद्द तक पर्सनली जो भी हूँ उनका काफी योगदान है.

तुम उन्हें कैसे जानती हो?

कीर्ति:- मेरे पापा का दोस्त है.

सुमित:- अच्छा.

सुमित आगे सुनने का इंतजार कर hi रहा था की कीर्ति के एक सवाल ने सुमित को कुछ पल के लिए हैरान कर दिया.

कीर्ति:- पहले तो मेरा हमेशा पीछा करते थे? ये जान्ने के लिए की मई खुश हूँ की नहीं. लेकिन जब मुझे तुम्हारा सबसे ज्यादा जरुरत था तो तब क्यों नहीं आये?

ये कहते वक्त कीर्ति की आँखों में आंसू आ गए.

सुमित:- मतलब...

कीर्ति:- मेरा इंगेजमेंट अटेंड करने के बाद क्यों एक बार भी पीछे मुद कर नहीं देखा?

सुमित:- मेरा पोस्टिंग का डेट आ गया tha...Uss वक्त hi कह दिया था अब्ब पीछे मुद कर नहीं dekhunga...Tumhe तुम्हारे खुशियों के साथ hi छोड़ कर गया tha...Dukhi था तो मई जो टूटे हुए दिल के साथ वह से गया था जिसका फिलर सिर्फ मेघा को hi था.

क्यों तुम्हारी शादी....

कीर्ति:- नहीं हुई...

सुमित को कुछ ख़ास तो फर्क पड़ा नहीं लेकिन कीर्ति को दुखी देख थोड़ा अजीब जरूर लग रहा था.

कीर्ति:- इंगेजमेंट के बाद पता चला की विवेक वैसा नहीं है जैसा मई सोचती थी. उसका मेरे अलावा भी दो और लड़की के साथ अफेयर था उस वक्त.

शादी मुझसे करना चाहता था पैसो के लिए.

ये पता चलने के बाद मई पूरी तरह से टूट gayi...Uss के साथ सच में प्यार हो गया था तुमसे पीछा छुड़ाने की कोशिश कर कर के.

मुझे हमेशा से ऐसे लड़के पसंद थे जिस में सब कुछ ho...Look में हैंडसम, पढ़ाई में इंटेलीजेंट, बातों में हुमूर, मुझे स्पेशल फील करवाने वाला और हर एक क्वालिटी...

सुमित:- सच्चा प्यार के अलावा.

सुमित की इस बात पर कीर्ति कुछ देर चुप रही और फिर बोलना सुरु किया.

कीर्ति:- तुम्हारा पर्सनालिटी पर अत्त्रक्ट होने लगी thi...Lekin तुम्हारा ये हाल नहीं tha...Ye बात मुझे पसंद नहीं आयी जो धीरे धीरे मेरा ईगो हर्ट करने laga...Kaise भी तुम्हे पाना चाहती thi...Aur जब कामयाब हो गयी तो रीलीज़ हुआ की तुमसे भी अच्छे पर्सनालिटी के लोग है.

उम्र hi क्या थी उस vakt...Jindagi भर तुम्हे झेलना भी नहीं चाहती thi...Issi लिए उसी वक्त अलग कर दिया.

और बाद में तुम जब फिर टूर में mile...Tab तुम्हे लग रहा होगा की तुम मुझे इम्प्रेस कर रहे ho...Lekin मई तुमसे और इर्रिटेट होने lagi...Lekin पता नहीं विवेक से कैसे प्यार करने लगी? उसका पर्सनालिटी तो तुम्हारे सामने कुछ था hi nahi...Shayad बदलते वक्त के साथ सोच में भी परिवर्तन आ गया था.

मेघा:- और जब विवेक का असलियत पता चला तो सुमित की यार आ गयी?

बहुत देर से चुप मेघा अब्ब जा कर बोली.

कीर्ति:- Nahi...Sumit एक हारा हुआ आशिक़ था मेरे saamne...Zero hi नहीं बल्कि नेगेटिव personality...Mera 2ंद या फिर लास्ट choice...Jiske बारे में सोचना भी नहीं चाहती थी.

सुमित:- तो फिर तुम्हारा आज ये रूप क्यों और कैसे?

कीर्ति:- याद है मैंने डॉ. राहुल के बारे में पूछा था.

सुमित:- हाँ मेरा प्रोफेसर और तुम्हारे पापा के dost...Aage बताओ.

अब्ब शायद सुमित से भी और इंतजार नहीं हो रहा था वो राज जाने के लिए की कैसे एक लड़की जो उससे भाव तक नहीं देती thi...Pyaar तो दूर की बात उसके दर्द पर भी तरस नहीं आता था आज उसके प्यार में पागल खुद उसके पीछे आ गयी वो भी इतने देर होने के baad...Aur इस बार का प्यार जूनून और अट्रैक्शन भी नहीं tha...Shayad सच्चा.

मेघा कुछ याद करते हुए मुस्कुरा रही thi...Shayad उसका अंदाजा सही दिशा में जा रहा था.

(फ्रेंड्स जानता हु अपडेट छोटा है, इससे कमबैक अपडेट समझ lijiye...Aur बहुत लेट भी हो gaya...Picchle महीने एक ऐसी डिपार्टमेंट में पोस्टिंग था जहा का कुछ फैकल्टीज टॉक्सिक होने के साथ साथ एनवायरनमेंट भी टॉक्सिक tha...Mentally इतना ज्यादा थक जाता था की लिखने की हिम्मत तो दूर अच्छे से रिलैक्स भी नहीं हो पाटा tha...Uss डिपार्टमेंट का पोस्टिंग का असर वो पोस्टिंग ख़त्म होने के कुछ हफ्ते तक भी raha...Abb थोड़ा फ्री hun...Story भी 5-10 उपदटेस बाकी hai....Complete करके hi जाऊँगा.]
 
अपडेट 122

विवेक से अलग होने के बाद मई बिलकुल टूट gayi...Pyaar तो था उससे लेकिन उससे ज्यादा ये बात बर्दास्त नहीं हो रहा था की उसने मुझे धोखा दिया.

न जाने कितने लड़को को रिजेक्ट कर चुकी thi...Tumhe bhi...Aisa कभी नहीं हुआ की मुझे कभी कोई प्रॉपर अटेंशन न मिला ho...Alag hi ख़ुशी अलग hi कॉन्फिडेंस मिलता था इससे मुझे.

बचपन से ले कर जो भी चाहा था सब पूरा hua...Aisa कुछ नहीं था जिससे मैंने चाहा हो और वो ना मिला ho...Lekin एकदम से किसी ने मेरे साथ चीट किया बर्दास्त नहीं हुआ.

बहुत दिन लगा इस सदमा से उभरने me...Vishwash hi नहीं हो रहा था की मेरे साथ भी ऐसा हो सकता था.

जब इससे उभरने लगी तो सोचा अब्ब और nahi....Bahut टाइम वास्ते कर liya...Abb आगे बढ़ना hai...Jitna बुरा होना था हो चूका hai...Abb इससे nahi...Lekin क्या पता था ये बस सुरुवात hai...Dhire धीरे बाकी दोस्तों का साथ छूटने laga...Apne पराये होने lage...Uss वक्त तो मुझे परवाह नहीं tha...Lekin धीरे धीरे ये सभी बातें एक साथ मिल कर परेशान करने लगे.

माँ और पापा तो साथ थे लेकिन मन एकदम अशांत tha...Kisi चीज मई मन नहीं लगता tha...Iska असर पढ़ाई में भी दिखने लगा.

मब्ब्स तो टॉप कॉलेज से किया था वो भी स्कालरशिप mein...Uss वक़्त तुम्हारा याद aaya...Tumne जब पढ़ाया था और टिप्स दिया उसका बहुत योगदान था मेरा पढ़ाई mein...Lekin मेरी hi घमंड ने ये बात मानने नहीं diya...Sochti थी की कुछ पल का पढ़ाई में तुम्हारा क्या क्रेडिट? म्हणत meri...Talent meri...Fir तुम्हारा क्या credit?...Gyaan तो हर कोई देता है आज कल भले hi उसने जिंदगी में कुछ उखाड़ा भी है या नहीं... लेकिन ये भूल गयी थी की रास्ता दिखाने का काम तो तुम्हारा hi tha...Jo बहुत देर से समझ में आयी.

उस वक्त भी तुम मेरे लिए नाकारा निकम्मा इंसान थे जिसका जिंदगी में कोई मकशद nahi...Jo सिर्फ मेरे पीछे hi घूमता फिरता tha...Aur वो खुद मब्ब्स पढ़ रहा है तो उस कॉलेज में जिसका लेवल मेरे कॉलेज से काफी निचे hai...Hamaara कोई मेल था hi नहीं.

जो परेशानी मेरे जीवन में विवेक से सुरु हुआ था उसका असर मेरे पढ़ाई में ऐसे पड़ा की 3 बार पग एंट्रेंस में फ़ैल हो gayi...Donation में भी पढ़ नहीं सकती थी कोई सब्जेक्ट.

कहा सपना था की टोपर की तरह रेडियोलोजी पढूंगी और क्या हाल हो गया...3 साल के डिप्रेशन के बाद किसी तरह से पढ़ाई में थोड़ा जोर लगा कर थोड़ा बहुत मार्क्स ला पायी और डर्मेटोलॉजी का सीट मिला.

इस बिच जिंदगी बहुत बुरे दौर से beeta....Maa और पापा ने हर तरीके से साथ दिया लेकिन अशांत और भटका हुआ मन का कोई क्या hi कुछ करे?

रेजीडेंसी भी कुछ ख़ास नहीं beeta...Jindagi में शान्ति तो पता नहीं कहा खो सी गयी thi..Koi दोस्त नहीं bana...Shayad अब्ब किसी को मेरा व्यबहार पसंद नहीं tha...Har कोई मुझसे दूर hi रहता.

बात कुछ महीने पहले की है.

प्रोफेसर डॉ. राहुल मिश्रा जो मेरे पापा के दोस्त थे हमारे घर आये ekdin...Papa से बात करने... मई भी वही बहती थी.

क. डैड:- क्या बात है Professor...Bahut दिन बाद टाइम मिला.

डॉ. राहुल:- वक्त hi कहा मिलता hai...Abb थोड़ा फ्री हु तो सोचा मिल लू.

क. डैड:- इसी लिए कहता था डॉक्टर ी छोड़ de...Mil कर बिज़नेस करते hai...Koi स्ट्रेस नहीं और टाइम hi टाइम होगा तेरे पास.

इस बात का डॉ. राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया.

क. डैड:- अभी तो इतना पैसा कमा hi लिया होगा तूने की सही जगह पर इन्वेस्ट कर सके?

डॉ. राहुल:- पैसा की कमी तो कभी नहीं tha...Abhi भी अच्छा ख़ासा hai...Business से कोई प्रॉब्लम nahi...Lekin अभी अपना काम छोड़ने का कुछ सोचा नहीं hai...Kuch साल और काम करूँगा जब तक शरीर साथ ना छोड़ दे.

क. डैड:- बुढ़ापे में भी डॉक्टरी हद्द है. :lol1:

डॉ. राहुल :- डॉक्टरी तो आखिरी सांस तक rahega...Bas सर्जरी के लिए hi कुछ साल बाकी है.

क. डैड:- कितना काम करेगा yaar...Pata नहीं इतना काम कैसे कर लेता है? और क्या मजा आता hai...Mujhe तो सोचते hi अजीब लगता है.

डॉ. राहुल:- मजा आता है इसी लिए hi करता hu...Hajaaron सर्जरी किया है आज tak...Lekin कुछ सर्जरी ऐसे भी किया है जिससे सच में खुद पर गर्व ho...Mushkil से मुश्किल सर्जरी को सक्सेस्स्फुल्ली किया है और कुछ केस तो ऐसे जिसमें खुद पेशेंट का रिलेटिव्स ने भी उम्मीद छोड़ दिया था.

जिंदगी में ख़ुशी भी मिलती है और दुःख bhi...Dukh चाहे कितना भी हो लेकिन किसी को मौत के मुंह से बचने का या फिर किसी की दर्द दुःख को काम कर पाने की संतुआहटि हमेशा साथ रहता है.

क. डैड:- सोच तो बहुत अच्छा है tera...Lekin इसी सोच की वजह से सिर्फ यही तक hai...Tere साथ वाले विदेश में मस्ती से जी रहे hai...Paise चाप रहे hai...Mauj मस्ती कर रहे hai...Aur तू है की सिर्फ यही पर...

डॉ. राहुल ने बिच में hi बात काट कर बोलै.

डॉ. राहुल:- किसने कहा मई खुश नहीं hun...Bhagya अच्छा है की पैसे की कभी कोई कमी नहीं hai...Paisa इतना तो कमाया है की सभी की इच्छा पूरा कर saku...Bacche सेटल्ड hai...Accha ख़ासा कमाते hai...Aur मई भी इतना कमाता हूँ की जिससे मेरा ख़ुशी का सब कुछ अच्छे से मिल जाता है.

अभी भी बैंक में कुछ करोड़ पैसे डिपाजिट hai...Agar जरुरत पड़ा भी तो कोई समस्या नहीं.

क. डैड:- बस?

डॉ. राहुल:- मतलब?

क. डैड:- मेरा hi बैंक बैलेंस 15 करोड़ hai...Tu तो फेमस सर्जन hai...Din रात काम करता hai...Mujhse तो ज्यादा hi होना चाहिए था.

डॉ. राहुल:- एक बात bataa...Tu खुश है?

क. डैड:- Bahut...Paise से आखिर क्या ख़ुशी नहीं मिलता?

डॉ. राहुल:- बुरा मत मन्ना dost...Jo भी आगे कहु उससे शायद तुझे बुरा लग सकता है.

क. डैड:- तेरी बात का क्या बुरा मानना? बोल.

डॉ. राहुल:- पैसे से hi सभी ख़ुशी मिल सकती है तो तेरी बेटी का डिप्रेशन क्यों ठीक नहीं हुआ? सभी दवाई खरीद सकता hai...Aur डिप्रेशन में मेडिकल थेरेपी के अलावा और भी थेरेपी मोडलीटीएस hai....Wo भी अफ़्फोर्ड कर सकता है.

उनके इस बात पर कीर्ति उन्हें हैरानी से देखती है और उड़के पापा एकदम से चुप हो जाते है.

डॉ. राहुल:- कहा था maine...Bura लग सकता hai...Lekin तुझे चोट पहुंचाने के लिए नहीं कहा hai...Samajh नहीं रहा था इसी किये ये कहना पड़ा.

मानता हूँ वैसा बहुत जरुरी hai...Paagal hi होगा वो जो कहेगा पैसा की कोई महत्वा नहीं hai...Paise से ख़ुशी मिलती है लेकिन एक हद्द तक.

तुझे hi देख le...Paisa कमाने की चक्कर में hai...Lekin उसी पैसे से कभी अपना जिंदगी जी पाया hai...Sochta है की कल बहुत पैसा होगा तो जिंदगी एन्जॉय karega...Lekin कब....1 करोड़ से 15 करोड़ हो गया...15 से कितना? मान ले पैसा कमाते कमाते फुनिया का सबसे धनि इंसान बन gaya...Uske बाद क्या? उसके बाद फिर अलग टारगेट होगा.

अगर पैसा खर्च नहीं हुआ तो बस वो कागज़ का टुकड़ा hai...Paisa कमाते जा लेकिन साथ hi उसका इस्तेमाल भी kar...Jo जिंदगी जीना चाहता है मौका रहते hi jee...Apne परिवार के साथ हंसी ख़ुशी जिंदगी bitaa...Kahi ऐसा ना हो की जो तेरा ये सोच है बस अच्छा ख़ासा पैसा हो जाए फिर मौज करूँगा.

जिंदगी का कोई भरोषा nahi...Agle पल क्या हो जाए कुछ नहीं pata...Aise ऐसे शरीर के अंग है जिनका तुझे नाम भी पता नहीं अगर उनमे कैंसर हो गया तो? पैसा तो रहेगा लेकिन कुछ कर नहीं पायेगा.

पैसा आता रहेगा जाता रहेगा लेकिन अभी जो पल है हंसी ख़ुशी जीने का वो नहीं milega...Aur खुश रहने का कोई उम्र होता है क्या? जो सोच रहा है बुढ़ापे में मौज करेंगे.

एक बच्चा को hi देख le....Kitna खुश रहता है wo....Jab बड़ा होता है तो कुछ ज्यादा hi सोचने लगता hai...Aur सोच इतना बड़ा हो जाता है की वर्थिंकिंग के चक्कर में जिंदगी जीना hi भूल जाता है.

पैसा कमा मेरे दोस्त लेकिन उस पैसे के चक्कर में अपना वर्त्तमान को तो खराब मत कर.

कीर्ति और उसके पापा के पास कोई जवाब नहीं था इस बात की.

कुछ देर बाद.

क. डैड:- थोड़ा अजीब जरूर लग रहा है की एक डॉक्टर ये कह रहा hai...Baaki को तो मई पैसा कमाने के लिए ओवरडय तक करते देखा है.

डॉ. राहुल:- फिर गलत baat...Paisa तो मई भी कमाता हु लेकिन इतना भी ज्यादा नहीं की मेरा जिंदगी पर असर करने लगे.

डॉक्टर भी इंसान hi है ... और हर इंसान अलग होता hai...Paiso की जरुरत अपनी जगह पर hai...Aur इसी के साथ कुछ डॉक्टर्स ऐसे भी होते है जिन्हे सच में पेशेंट की तकलीफ समझ में आते hai...Wo पेशेंट की सिर्फ लेबोरेटरी वैल्यूज और सिम्पटम्स को hi ट्रीट नहीं करता बल्कि पेशेंट को hi ट्रीट करता hai...Apne नॉलेज के साथ साथ व्यबहार से भी सही मायने में डॉक्टर होते है.

और एक प्रोफेसर के रूप में मई अपने रेसिडेंट्स में यही चीज धुंध रहा हु अभी के liye...Mera समय तो काम है लेकिन जो भी अच्छा काम करना चाहते है उन्हें सही दिशा दिखाना चाहता hun...Jo भी मुझे आता है और जो जरुरी है एक अच्छे डॉक्टर बनने में यही उन्हें सीखा रहा hun...Mere बाद वही तो सर्जन hai...Maine जितना किया है मई चाहता हु मेरे स्टूडेंट्स मुझसे भी अच्छा kare...Yahi मेरे लिए गुरु दक्षिणा hoga...Issi लिए पिछले कुछ साल से प्रैक्टिस के साथ साथ पढ़ाने में भी एक्टिव हु.

क. डैड:- और तुझे मिल जाता है ऐसे स्टूडेंट्स?

डॉ. राहुल:- Bilkul...Kabhi कभी सोने की खोज में हीरा भी मिल जाता hai...Ek ऐसा स्टूडेंट भी था जो उम्मीद से भी कही आगे का tha...Aur अभी भी उसके बारे में अच्छे चीज hi सुनने को मिल रहा है.

क. डैड:- नाम क्या है उसका? अगर इतना hi अच्छा है तो क्या पता कभी जरुरत पद jaaye...Acche डॉक्टर्स का भी साथ रहना जरुरी hi है.

डॉ. राहुल:- सुमित दत्ता

ये सुनते hi कीर्ति और उसके पापा हैरान रह gaye...Kirti कुछ बोलती उससे पहले उसके पापा जो सुमित को जानते थे उसके बारे में डॉ. राहुल से पूछने लगे.

डॉ. राहुल:- हाँ वही hai...Tu भी जानता है?

कीर्ति:- Impossible...Wo तो एकदम नालायक tha...Padhaai से ले कर सब चीज़ में.

बिच में कीर्ति एकदम से बोली.

डॉ. राहुल:- सब चीज में ना laayak...Kaise?

कीर्ति:- उसका बोलने का तरीका, रहने का तरीका फ़ालतू की herogiri...Sabkuch बेकार है.

डॉ. राहुल:- कैसे? मुझे तो कुछ बुरा नहीं laga...Baat करने का तरीका तो सबसे अच्छा क्वालिटी कहूंगा मई uska...Pehle फिन जब उससे मिला था उससे ससपेंड करने वाला था कॉलेज se...Lekin इसकी बातों की जादू hi था जिसने उससे बचा लिया.

किसी को भी अपनी बातें मनवा लेता hai...Patient से भी ोपड में अच्छे से बातें करते देखा hai...Aur सर्जरी के वक़्त भी पेशेंट रिलेटिव को सर्जरी के लिए मना लेता था सही जानकारी दे कर.

अब्ब कीर्ति को समझ में नहीं आ रहा था की क्या जवाब de...Ekdum से जोश में न जाने क्या क्या बोल दिया था सुमित के बारे में.

कीर्ति:- मुझे अच्छा नहीं लगता है उसकी बातें.

डॉ. राहुल:- बस इस वजह से तो बुरा नहीं बन जाता है wo...Aur पढ़ाई में क्या कमी है?

कीर्ति:- मब्ब्स एंट्रेंस मई मुझसे काफी लौ रैंकिंग था uska...College रैंक भी बहुत लौ tha...Aur उसके एक्साम्स में performance...Mushkil से पास होता tha...Pata नहीं सर्जरी कैसे मिल गया उससे पग मई?

इस बात पर डॉ. राहुल हसने लगे.

डॉ. राहुल:- नॉलेज का रिफ्लेक्शन हमेशा मार्क्स नहीं होता hai...Specially सुमित के केस में तो बिलकुल नहीं.

चलो सुरु से सुनाता हूँ.

मैंने सुमित से बात किया tha...MBBS एंट्रेंस में जिस रैंक की बात कर रही हो वो उसने सिर्फ 4 महीने की पढ़ाई करके लाया tha...Wo मब्ब्स से पहले बी फार्मेसी की पढ़ाई कर रहा tha...Ek लड़की के लिए उसने अपना फील्ड hi बदल लिया.

एकदम से नया कोर्स और काम समय उस में भी नशे की lat...Kitna मार्क्स एक्सपेक्ट कर सकती हो?

और रही बात उसके कॉलेज एक्साम्स परफॉरमेंस ki...Suruwaat में तो इसी प्यार के चक्कर में पढ़ाई बिगाड़ liya...Baad में एग्जाम मार्क्स उसके लिए कोई मायने नहीं रखता tha...Bas पास मार्क्स सोल्वे कर लेता था.

मार्क्स देखना है तो उसका पग एंट्रेंस की कर्कस dekho...Radiology मिल सकता था उससे लेकिन उसने सर्जरी चूसे kiya...Aur पग में भी मार्क्स जान बुझ कर छोड़ देता tha...Sabse टोगेस्ट क्वेश्चन सोल्वे करता था और इजी छोड़ देता tha...Mai खुद उसका मार्क्स काटने की जगह ढूंढ़ता था लेकिन जो भी क्वेश्चन सोल्वे करता था वो उससे फुल मार्क्स दिए बिना नहीं रह पाटा था.

मैंने पहले भी कहा था मार्क्स नॉलेज का 100% रिफ्लेक्शन नहीं hota...Jab मई पहले क्लास मई उससे ससपेंड करने वाला था उसने मुझे कॉन्फिडेंटली कहा की उससे सब कुछ आता है इसी लिए थ्योरी क्लास अटेंड करने की जरुरत नहीं hai...Socha दो चार टफ क्वेश्चन पूछ के ससपेंड कर दूंगा.

लेकिन उसका आंसर करने का तरीका और नॉलेज ऐसा था जो आधे से ज्यादा फाइनल ईयर रेजिडेंट नहीं कर पाते थे.

ये है उसका नॉलेज का लेवल.

डॉ. राहुल की हर एक शब्द में सुमित के लिए तारीफ़ था और यही बात कीर्ति और उसके पापा को विश्वाश नहीं हो रहा था.

क. डैड:- लेकिन घमंड बहुत है usmein...Ye बात भी सही नहीं है.

डॉ. राहुल:- घमंड से ज्यादा कॉन्फिडेंस कहूंगा उससे मई...3 साल मेरे साथ रहा है wo...Knowledge के साथ स्किल्स भी सही tha...Final ईयर में आने के बाद मई खुद उससे सर्जरी करने देता और साइड में खड़ा हो कर असिस्ट करता ताकि कोई गलती न हो जाए.

लेकिन उसकी जरुरत कभी नहीं pada...Mushkil से मुश्किल सर्जरी वो खुद हैंडल कर लेता बस साइड में थोड़ा असिस्ट करने के लिए कोई होना चाहिए.

इतना टैलेंटेड और स्किलफुल होने के बाद थोड़ा तो ऐटिटूड आ hi जाता hai...Lekin उतना ज्यादा भी नहीं था उस mein...Haan उसका कॉन्फिडेंस को कोई घमंड समझ सकता है अगर अच्छे से ना जानता हो तो.

कीर्ति तो बिलकुल चुप हो gayi...Wo सुमित के बारे में जो भी सोचती थी सुमित उससे बिलकुल hi अलग nikla...Jisse वो निकम्मा सोचती थी आज उसकी काबिलियत पर विश्वाश नहीं हो रहा tha...Jis सुमित को पढ़ाई के मामले में अपने से बहुत पीछे सोचती थी आज वो उसके आस पास भी खुद को नहीं देख पा रही थी.

डॉ. राहुल:- अभी वो जहा काम कर रहा था वह से भी उसके टैलेंट और स्किल की पॉजिटिव बातें सुनने को मिल रहा है.

बस ऐसे hi और स्टूडेंट्स chaahiye...Talented और स्किलफुल्ल होने के साथ hi बिहेवियर और ऐटिटूड से भी सही डॉक्टर बन sake...Aise hi स्टूडेंट्स को गाइड करना है कुछ साल और.

अब्ब कीर्ति से रहा नहीं gaya...Wo वह से अपने रूम चली gayi...Uske पापा और डॉ. राहुल की बात जारी रही.

कुछ दिन बाद जब मैंने अपने बुक रैक में से एक बुक उठाया तो उसके पेजेज के बिच में बहुत से पेपर्स थे.

पेपर उल्टा कर देखा तो विश्वास नहीं हुआ.

इतना कह कर कीर्ति सुमित को देखने लगी.

सुमित:- क्या था उस मैं?

कीर्ति:- अच्छा तुम नहीं jaante...Tumne बहुत गलत किया सुमित.

इस बार कीर्ति की आवाज में गुस्सा के साथ साथ दर्द tha...Aur साइड में बैठी मेघा मुस्कुरा रही थी.
 
फ्रेंड्स काफी टाइम हो गया अपडेट पोस्ट kiye...Iss बीच इतना उलझा हुआ था की फोरम में भी नहीं आ पा रहा tha...Waise तो 3 उपदटेस बाकी है स्टोरी ke...Unn 3 उपदटेस को मर्ज कर के एक मेगा अपडेट के साथ स्टोरी का लास्ट अपडेट पोस्ट कर दू.

लेकिन 2 हफ्ता टाइम और lagega...Final एक्साम्स चल रहे hai...Khatm होते hi लास्ट अपडेट पोस्ट कर के स्टोरी कम्पलीट कर दूंगा और उसके बाद बहुत लम्बा ब्रेक lunga...Next स्टोरी के बारे में सोचा नहीं hai...Tab hi सोचूंगा जब लगेगा स्टोरी के लिए काफी टाइम hai...Warna यही तक है स्टोरी राइटिंग.

बस 2 हफ्ता और झेल लीजिये.
 
अपडेट 123 [FINAL]

सुमित:- मुझे क्या पता होगा तुम्हारे बुक्स में कौनसा पेपर्स है?

कीर्ति:- तुम्हारा लव लेटर tha...Suru से ले कर अंत tak...Kya सोच कर रखा तुमने?

कीर्ति की आवाज में अभी भी गुस्सा था.

सुमित:- मैंने नहीं रखा.

कीर्ति:- अब्ब तो झूठ मत बोलो.

सुमित:- कोई जरुरत नहीं है मुझे झूठ बोलने ki...Aur ऐसा मई करूँगा भी क्यों?

प्यार की बात तुम्हारे सामने की है hamesha...Aisa पीठ पीछे कोई भी चीज करने की जरुरत नहीं है मुझे.

वो लव लेटर तो बस अपने दिल बहलाने के लिए लिखता tha...Aur अपने पास hi रखता था.

सुमित की बात ख़त्म होते hi.

मेघा:- मैंने रखा था वो लव लेटर तेरे इंगेजमेंट की दिन.

मेघा की इस बात पर सुमित उससे हैरानी से और कीर्ति गुस्से से देखती है.

मेघा:- तुम दोनों hi नेरे दोस्त thhe...Kirti...Tujhe तो अपना बेस्ट फ्रेंड मानती thi...Tour में भी तुझे hi सही मानती थी.

लेकिन धीरे धीरे सब कुछ साफ़ दिखने laga...Sumit कितना सही है और तू कितनी galat...Sumit को ना बोलना तेरा फैसला tha...Sahi भी tha...Lekin गलत भी तू कर रही thi...Sumit को जान बुझ कर तड़पा कर.

प्यार नहीं करती तो साफ़ कहती की तू उससे प्यार नहीं करती और हमेशा के लिए तेरा पीछा छोड़ दे.

लेकिन तू इतनी अच्छी भी नहीं है जितना दिखाती thi...Sirf मई जानती हूँ की तू हर बार सुमित को एक झूठी इशारा देती थी इंदिरेक्ट्ली की अभी भी शायद सुमित के पास मौका hai...Aur ये खिंचा चला आता था तेरे पीछे.

बहुत बार समझाया tujhe...Lekin तुझे सुमित को तड़पाने में hi मजा आ रहा था.

जब बहुत हुआ तो मैंने ये लव लेटर्स तेरे बुक में रख दिया.

एक बात तो मुझे पता है की वक्त हर इंसान के लिए अच्छा नहीं rehta...Jab तुझे अपने बुरे वक्त में ये लव लेटर मिलेंगे तब तुझे पता चलेगा तूने क्या गलती की है? तूने सुमित को नहीं बल्कि खुद को तड़पाया hai...Jo तू सुमित पर हंस रही थी वो अनजाने में खुद की भविस्य पर हंस रही है.

और आज ये दिख भी रहा hai...Aur माफ़ करना Kirti...Tujhe देख कर बिलकुल भी बुरा नहीं लग रहा hai...Hamesha अपना hi फायदा देखती thi...Dusro की भावना की तो कोई कदर hi नहीं tha...Aur आज तेरे साथ ये हो रहा है तो तेरी परवाह भी किसी को नहीं है.

मेघा की बात सुन कर कीर्ति कुछ देर चुप रहती hai...Fir कुछ देर बाद.

कीर्ति:- डॉ. राहुल की बात सुन कर सुमित के प्रति मेरा बिचार बदल गया tha...Aur जब वो साड़ी लेटर पढ़ा तो समझ आया सुमित मुझसे कितना प्यार करता hai...Har एक शब्द अब्ब जा कर मेरे दिल को छू रहा tha...Usne जो शब्द मेरे तारीफ़ में लिखे थे उससे एक बार फिर अपने आप को समझने लगी.

एक बार फिर पुराने दिन याद आ gaye...Mai क्या हु और क्या कर सकती हूँ ये साड़ी बातें समझ में आ gayi...Jo इतने वक्त डिप्रेशन में थी एक दम से एक नयी ऊर्जा का अनुभव hua...Fir से तैयार हो गयी पुराने वक्त को वापस लाने के लिए और अपना पुराना सुमित भी.

हर एक जोर लगा दिया पढ़ाई में और फिर पढ़ाई में पहले की तरह काफी अच्छा kiya...Puraana कीर्ति तो बन गयी पर पुराना सुमित ना मिल saka...Abb वो बदल चूका है.

शायद मैंने hi देर कर di...Padhaai के चक्कर में और खुद को पहले की तरह बदलने में इतना देर कर दी की अब्ब तुम (सुमित) किसी और के हो गए.

कीर्ति की बात सुन कर सुमित कुछ बोलने hi वाला था की.

कीर्ति:- सुमित तुम्हारा वो लेटर hi था मेरे बदलाव के kaaran...Shayad उस वक्त मई लेटर पढ़ने के सही हालात में थी वर्ण कोई और वक्त होता तो लेटर देखते hi फाड़ का फेंक देती.

जब से तुम्हारे लेटर को पढ़ा है खुद को दोबारा से स्पेशल फील करने लगी thi...Pyaar क्या होता है ये समझने लगी thi...Mera सुबह तुम्हारे लेटर पढ़ कर सुरु होता और शाम का अंत भी.

तुमसे बहुत प्यार करने लगी thi...Issi एहसास को जीने में इतना वक्त लग गया की पता hi नहीं चला बहुत देर हो चुकी hai...Tumse कितना प्यार करता hun...Kaash एक मौका मिलता ये बताने के लिए.

काश थोड़ा जल्दी किया होता तो आज तुम मेरे होते.

ये कहते हुए कीर्ति की आँखों में आंसू आ गए.

सुमित जो बहुत देर से कुछ कहने के लिए तैयार था मौका मिलते hi कहना चालु किया.

सुमित:- Kirti...Tumhari फीलिंग्स का रेस्पेक्ट करता hu...Ye सच है की मैंने तुमसे प्यार किया tha...Bahut प्यार किया tha...Tumhare पीछे पागल tha...Lekin एक सच्चाई और भी है.

(तो मेघा) याद है एक बार तुमने मुझसे एक सवाल पूछा tha...Mai तुमसे ज्यादा प्यार करता हु की कीर्ति से करता था?

सवाल का जवाब बहुत आसान tha...Lekin जवाब देने का सही समय नहीं था.

कीर्ति तुम्हे एक तुम्हारी hi कहानी सुनाता हूँ.

बाद में मैंने तुम्हारा चेहरा देख लिया tha...Ek बात तो कन्फर्म tha...Tum मुझे मिल जाती और मेघा मुझसे बहुत नाराज thi...Usse मनाने के लिए मुझे बहुत म्हणत करना पड़ता और उसका न मानने का दर अलग से.

लेकिन मई अब्ब अपने मन से पूरी तरह से मेघा का बन चूका tha...Tumhara chapter वही ख़त्म कर दिया ये सोच कर की आगे कभी मुलाकात भी नहीं hoga...Aaj की बात और है.

तुम्हे उस वक्त 2ंद ऑप्शन भी नहीं रखा tha...Yaa तो मेघा का या फिट किसी से कोई प्यार hi nahi...Bas घरवालों की फैसला से कोई अरेंज्ड मैरिज और कोशिश करता की एक अच्छा हस्बैंड बन पाउ.

Megha...Abb तुम hi बताओ मई किस्से ज्यादा प्यार करता हूँ.

मेघा ख़ुशी में कोई जवाब hi नहीं दे पायी.

कीर्ति:- क्या मेरा गलती इतना बड़ा था?

सुमित:- गलती देखा जाए तो तुम्हारा कुछ ख़ास नहीं tha...Faisla तुम्हे करना tha...Aur तुमने ना कहा.

बहुत वक्त लगा ये जान्ने में की प्यार में विश्वाश भी उतना hi जरुरी tha...Hamaare बिच विश्वाश तो कभी था hi नहीं.

मेघा को dekho...Jab मई कुछ नहीं था यहाँ तक की मई खुद बर्बादी की तरफ जा रहा था उस वक्त मेघा ने मुझ पर विश्वाश kiya...Aur आज तक करती hai...Megha से प्यार करने का तो बहुत वजह hai...Bas इतना hi बता दो जिस लड़की ने मेरा साथ दिया जब मई बर्बाद था, जीने का कोई वजह नहीं था, भविस्य अंधकार था उस लड़की को कैसे छोड़ सकता hun...Itna भी बेवकूफ नहीं हूँ.

मैंने कभी प्यार का कपड़े नहीं kiya...Lekin मेघा की केस hi अलग hai...Megha को इतना चाहता हु मई जीता खुद को भी नहीं.

सुमित की इस बात पर मेघा उससे गर्व के साथ देखती है तो कीर्ति कुछ बोल नहीं paati...Kuch देर बाद हिम्मत कर के.

कीर्ति:- इस जन्म में तो तुम मेरे नहीं हो सके? क्या अगली जन्म में?

सुमित:- 7 जन्म तक मेघा का होने का कसम खा चूका हूँ.

कीर्ति:- उसके बाद?

सुमित:- अगर उससे भी ज्यादा जन्म ले लिया तो बोर हो के किसी हिमालय पर्वत पर चला जाऊँगा मोक्ष के लिए.

कीर्ति अब्ब कुछ नहीं बोली.

सुमित:- इतना आगे का क्यों सोच रही ho...Enjoy karo...Issi जिंदगी ko...Aage का किसने देखा है?

कीर्ति:- लेकिन कैसे?

सुमित:- मई चाहता तो तुम्हारे हालत पर खुश हो सकता tha...Ye समझ सकता था की जो तुम्हारे साथ होना चाहिए था वो हो रहा है.

लेकिन मई मेघा के साथ पा कर इतना खुश हूँ की किसी के लिए कोई गलत सोच भी नहीं रखना चाहता.

तुम्हारा हालत अभी ऐसा है जो मेरा उस वक्त था जब तुम मुझे छोड़ कर गयी thi...Lekin जिंदगी यहाँ ख़त्म नहीं होती.

ऐसे में हम ये मानने की हालात में नहीं होते की आगे हमारा भविस्य उज्जवल भी हो सकता hai...Mai भी नहीं मानता tha...Lekin बुरा वक्त ज्यादा नहीं टिकता hai...Ek उम्मीद मिल hi जाता hai...Jaise मेरे लिए मेघा.

तुम्हे भी मिलेगा बस जरुरी है तो विश्वाश और सही वक्त का.

इस बात पर कीर्ति चुप hi रही.

सुमित:- फैसला तुम्हारा hai...Jindagi को आगे ले जाना चाहती हो या पीछे वही डिप्रेशन में जाना चाहती हो.

काम से काम मेरा वही लेटर को याद कर lo...Kitni स्ट्रांग हो तुम?

इस बात पर कीर्ति कुछ देर के बाद बोली.

कीर्ति:- खुश रहो तुम.

सुमित:- तुम भी.

कीर्ति अब्ब उदास चेहरा मई एक मुस्कान के साथ जाने lagi...Aaj उससे पता चल गया था जिंदगी मई उसने क्या खोया है.

गेट में जा कर उसने सुमित से फिर पूछा.

कीर्ति:- क्या हम दोस्त बन सकते है?

सुमित:- सर दोस्त.

ात नाईट

सोने की साड़ी तैयारी करने के बाद सुमित और मेघा बीएड पर थे.

सुमित मेघा की पेट पर हाथ फेरता है और मेघा सिर्फ मुस्कुराती है.

सुमित:- अब्ब तो बस यही इंतजार है.

बस फिर दोनों अपने अपने ख्यालों के साथ सू जाते है.

मेघा सोचती है की कहा से सुरु हुआ प्यार कहा तक चला आया और अभी भी उसके साथ hi आगे चल रहा है.

वही सुमित सोच रहा था की इतने भूल करने के बाद भी खुश किस्मत है वो की अभी भी इतना हंसी ख़ुशी अपने जिंदगी जी रहा hai...Megha की उसकी जिंदगी में आना उसके जिंदगी का सबसे बड़ा उपहार था.


थे एन्ड
 
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