ATTITUDE.....( MAGIC + ROMANCE ) - Page 17 - SexBaba
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ATTITUDE.....( MAGIC + ROMANCE )

थैंक्स बरोथेर... brother,aap फर्स्ट chapter से फ्लोसान्टो को भूल रहे हैं....

उनके वरदान से कोई भी पजल या चुनौती तोडना V.J के लिए कोई बड़ी बात नहीं है..

और ख़ास कर तब जब वो चुनौती सामने से दी गयी हो...

जैसे v.j को अभी मिली thi..ASMODEUS ने जितनी भी बार v.j को फसाया hai,wo उसके पीठ पीछे कोई गए चल की वजह से पॉसिबल हो पाया है पर सामने से किया गया चल V.J के दिमाग को पार नहीं पा सकता...

असली चुनौती V.J की अब है जब उससे अपनी तलवार पाने के लिए अग्रसेन को मारना hoga..ussi तलवार से जिससे अग्रसेन जिसके रहते अग्रसेन मर नहीं सकता.....

पर ये चुनौती भी अगर V.J जल्दी सोल्वे करदे तोह बड़ी बात नहीं होगी क्यूंकि नैसा की बताया गया है की उसके जैसा दिमाग इस पुरे ब्रम्हांड में सिर्फ ास्मोडियस के पास है..

अब इतने तेज़ दिमाग की कैपेसिटी और कैपबिल्टी के आगे मई किसी डायरेक्ट चुनौती को लम्बा दिखाऊं तोह कहीं न कहीं अपने hi किरदार और उससे दिए गए पावर के साथ नाइंसाफी hogi.....saath बने रहिये
 
फिर वही बात. कहानी के किसी भी part को मई चेंज नहीं कर सकता...

और रही बात कमेंट देने की पर अपडेट नहीं तोह मई इस वक़्त अपने फैक्ट्री में बैठा हूँ...

यहाँ मई कमेंट तोह कर hi सकता हूँ पर अपडेट नहीं लिख सकता.....

और एक बार फिरसे बता dun,ye कहानी नाही अंजलि की है नाही भुविका ki,ye कहानी विक्रम और ास्मोडियस की hai...baaki सारे किरदार बस प्यादे हैं जिन्हे उनकी ज़रुरत के हिसाब से जीने दिया जा रहा है या फिर मारा जा रहा है....

इस साइट पे 250000 लाख व्यूज और हर व्यू की अपनी चॉइस बूत इम्पोर्टेन्ट है राइटर की चॉइस और डिशन्स जिससे बदला नहीं जा सकता....
 
फ़र्ज़ मुझे ना बताइये aap...pata है आपकी बात सुनकर मुझे उन लोगों की याद आ गयी जिन्हे बात तक पकड़ना नहीं आता फिर भी सचिन को क्रिकेट खेलने के टिप्स देते hain....ye कहानी मेरी है आपकी nahi...isme क्या होगा ये डीडे करने का हक़ आपका या फिर किसी का भी नहीं है..

आप डॉक्टर बाहरी वर्ल्ड में हैं पर यहाँ आप एक रीडर हैं जिससे सिर्फ 15 मिनट लगते हैं एक अपडेट पढ़ने में पर मई एक राइटर हूँ जिससे उसी अपडेट को लिखने में 5 घंटे लगते हैं...

और रही बात आपके स्टोरी को ना पढ़ने की तोह वो आपकी मर्ज़ी hai,padhna है तोह पढ़िए और नहीं तोह ना सही....
 
ओने वे ट्रैक मंद को आप तवो वे नहीं कर सकते बरोथेर इसीलिए कोशिश बेकार है.. ये कहानी आप जैसे रीडर्स के प्रोत्साहन और बिना अपना दिमाग लगाए एक्ससिटेमेंट के साथ स्टोरी रीड करने की कैपेबिलिटीज की वजह से hi यहाँ तक पहुंची है...

और आप टेंशन न lijiye,jo फालतू के कमैंट्स पर डिस्कुरागे हो जाए वो V.J nahi....agar आप जैसे मातुरे 10 रीडर्स भी हों तोह काफी hai...mera वादा था की कहानी अपने अंजाम तक पहुँच कर रहेगी और फर्स्ट chapter में कई बार मैंने लिखा है और आपको याद भी होगा की V.J जो कहता HAI,WO हो जाता HAI....saath बने रहिये....
 
Hahahahaha.....brother हम टेंशन लेते नहीं देते hain......aur भले hi आप सब ना बोले पर मुझे पता है की उपदटेस पढ़ने की एक्ससिटेमेंट और हर दिन उपदटेस ना मिलने पर फ़्रस्ट्रेटीओं आप सब को होती hi है पर अपने मातुरित्य के चलते आप सब शांत रहकर अपडेट आने तक वेट करते हैं और इसके लिए मई आप सब मातुरे रीडर्स को दिल से थैंक्स कहता हूँ....

अपडेट थोड़ा थोड़ा लिखना स्टार्ट कर दिया hai...agar कल मुझे 4 घंटे फ्री मिले तोह अपडेट कल hi लिख कर पोस्ट कर दूंगा पर अगर ऐसा नहीं हुआ तोह परसो तोह अपडेट आएगा hi....yunhi साथ बने रहिये......
 
थैंक्स बरोथेर.. विक्रम लार्ड ऑफ़ एंगेल्स hai..uske सामने कोई सीधी चुनौती रखना hi बड़ी बात है बरोथेर..

उसके बावजूद उसके चुनौती पर मैंने 1500 वर्ड्स लिखे जो ज़रुरत से ज़्यादा है... ये सब बस मंद गेम्स है बरोथेर जिणंव ये दोनों भाई सबसे आगे hain....jause hi पहै suljhi.chunouti ख़त्म करने में इन दोनों को hi ज़्यादा वक़्त नहीं lagta.....saath बने रहिये
 
FRNZZZZ,NEXT अपडेट मिर्रोर्स वर्ल्ड के एडवेंचर का लास्ट अपडेट है जिससे लिखने में 4500 से 5000 वर्ड्स के बीच उसे होगा....

अपडेट साइज बोहोत बड़ा है जिससे लिखने में टाइम भी बोहोत लग रहा HAI....AAJ कुछ 3 घंटे खाली मिले जिनमे मैंने 60 % लिख लिया HAI..BAAKI का कल लिख कर पोस्ट कर दूंगा...... फुल ों पैसा वसूल अपडेट होगा...
 
अब तक आपने पढ़ा की जहाँ एक तरफ रोनित एंड फ्रेंड्स मिरर वर्ल्ड की आखरी चुनौती तक पहुँच गए हैं वहीँ दूसरी तरफ विक्रम ने भी ास्मोडियस के मायाजाल को तोड़ दिया है और साथ HI उससे उसकी तलवार भी मिल गयी है

अब आगे:-

फाइनल CHAPTER

(एंगेल्स सैक्रिफाइस & डेविल्स डेमोलिशन)

मेगा अपडेट-108

फाइनल PART

PLANET-MIRRORS वर्ल्ड

फाइनल एडवेंचर्स

कुछ देर और सब्र कर LE,TUJHE तेरी मंज़िल तक ज़रूर पहुंचा दूंगा...

मैंने अपने सीने के ऊपर हल्का सहलाते हुए अपनी बात kahi....kyun???kuch देर में आपको पता चल जाएगा.....

khair,mai मैजिक दूर के दूसरी तरफ तोह आ गया tha,par अभी तक मैंने अपने कदम अपने सोर्ड की तरफ नहीं बढ़ाये थे....

सोर्ड इस वक़्त मुझसे कुछ दूर एक दीवाल पर तंगी हुई थी और मई जानता था की तलवार पर मेरे हाथों का स्पर्श होते hi क्या होने वाला है...

ास्मोडियस के बनायीं जिस मायावी दुनिया के सबुनौतियों को मैंने पार किया tha,wo उस चुनौती के सामने कुछ नहीं थी जिसका सामना मुझे अब करना था....

पर इस चुनौती को पार करने के अलावा मेरे पास और कुछ चारा भी नहीं था...

एक लम्बी सांस छोड़ते हुए मैंने अपने कदम आगे बढ़ाये और तभी.....

मेरे कदम आगे बढ़ाते hi तलवार तेज़ चमकने लगी और ठीक वैसा hi प्रकाश मेरे सीने के बीच भी होने लगा पर मैंने इन सब चीज़ों पर ध्यान ना देते हुए आगे बढ़ने लगा और चलते हुए ठीक मेरी सोर्ड के सामने पहुँच गया....

एक पल सोर्ड को देखने के बाद मेरे हाथ उससे स्पर्श करने के लिए आगे बढ़ गए और जैसे hi मेरे हाथों का स्पर्श सोर्ड से हुआ...........!!!!!

जो रौशनी सोर्ड से आ रही थी वो और तेज़ हो गयी और उसी रौशनी की आड़ लेते हुए सोर्ड गायब हो गयी....

सोर्ड का गायब होना hi वो बात थी जिसके बारे में मैंने कुछ देर पहले कहा tha..mai जानता था की मेरे स्पर्श करते hi सोर्ड गायब हो जायेगी.....

और जो बात नहीं पता thi,wo भी सोर्ड को स्पर्श करते hi पता चल गयी thi....kya??ye भी कुछ देर में आपको पता चल जाएगा...

पर मुझपर उस तेज़ रौशनी का कोई असर नहीं हुआ tha..maine सोर्ड को गायब होते हुए देखा था......

और सोर्ड के गायब होने के बाद भी उसकी एनर्जी मई महसूस कर पार रहा था इसीलिए सोर्ड के गायब होने के अगले hi पल मई भी उसकी एनर्जी को फॉलो करते हुए गायब हो गया......

काल PAASH.........wo बंधन जिससे अग्रसेन बंधे हुए the.....us बंधन में होने के बाद से आज पहली बार था जब अग्रसेन के चेहरे पर मुस्कान थी....

और उस मुस्कान की वजह थी उनकी सोर्ड जो इस वक़्त उनके सामने हवा में तैर रही थी...

कुछ देर तक हवा में तैरने के बाद वो सोर्ड अग्रसेन के ठीक सामने आकर कड़ी हो गयी और अगले hi पल.......

सोर्ड से एक तेज़ बीम निकली जिसके काल पाश के बंधन पर पड़ते hi वो बंधन एक झटके में टूट गया और ऐसा होते hi अग्रसेन आज़ाद हो गए...

आज़ाद होते hi अग्रसेन ने अपने हाथ आगे किये और अगले hi पल सोर्ड तेज़ी से आगे बढ़ी और अग्रसेन के हाथों में आ गयी..

सोर्ड को स्पर्श करते hi अग्रसेन की शक्ति 1000 गुना तक बढ़ गयी thi....unke चेहरे पर वही तेज लौट आया था जो बंधन में बांधने से पहले हुआ करता था....

बिल्जेबब ने अग्रसेन को छल से उनकी सोर्ड से अलग करके उन्हें हराया था पर अगर वो सोर्ड के साथ अग्रसेन से लड़ता तोह निश्चित hi एक शान भी नहीं लगता उससे अग्रसेन से हारने में.....

शक्ति के बढ़ने की वजह से कालपाश में बंधे रहने की वजह से जो कमज़ोरी अग्रसेन को महसूस हो रही thi,wo ख़त्म हो चुकी थी....

जहाँ एक तरफ सोर्ड को देखकर और वापस हासिल करकर अग्रसेन बेहद खुश थे वहीँ जैसे hi उन्होंने सोर्ड को स्पर्श किया तोह वो एक पल के लिए चौंक भी गए थे...

पर ये शॉक बस एक पल के लिए hi था क्यूंकि अगले hi पल अग्रसेन को जिस बात पर शॉक लगा tha,ab उसी बात पर उनके चेहरे पर एक मुस्कान नाच gayi....aur अगले hi पल......

अग्रसेन के सामने एक तेज़ रौशनी फ़ैल गयी और कुछ देर बाद जब वो रौशनी घाटी तोह उनके सामने मई खड़ा था......

यही वो बात थी जिससे जानकार अग्रसेन शॉकेड हुए the...SWORD के स्पर्श करते सोर्ड ने उन्हें मेरे आगमन के बारे में बता दिया था.....

AGRASENA-TOH आखिरकार परमेश्वर पुत्र लार्ड ऑफ़ एंगेल्स अपनी अमानत को लेने आ HI गए......

अपनी बात कह अग्रसेन अपने घुटनो पर झुकने को हुए पर मैंने आगे बढ़कर उन्हें ऐसा करने से रोक दिया....

MAI-PARMESHWAR के निर्माण किये सबसे अमूल्य रत्नो में से एक हैं aap....aapko मेरे आगे झुकने की कोई ज़रुरत नहीं है....

ये मेरा सौभाग्य है की मई आपके सामने खड़ा हूँ.....

मेरी बात सुन अग्रसेन के चेहरे पर आयी ख़ुशी डबल हो गयी.....

AGRASENA-aapne जो भी कहा वो आपका बड़प्पन दर्शाता है लार्ड.....

आपके सामने खड़ा होना hi किसी के लिए भी बोहोत बड़ी बात hai....aapse भेट करने के liye,aapko आपकी अमानत सौंपने के लिए मई नजाने कितनी सदियों से आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ....

मई- इसीलिए आपने इस सोर्ड को मुझे सौंपने के लिए ये शर्त रक्खी की इससे पाने के लिए मुझे इसीसे आपको मारना होगा????!!!!

मेरी बात सुन अग्रसेन का सर नीचे झुक gaya.....unhe लगा की मुझे उनका यूँ शर्त रखना वो भी मेरी hi जागीर को मुझे सौंपने के लिए ाचा नहीं लगा और इसीलिए.....

अग्रसेन- शमा कीजियेगा LORD......par ऐसा करना मेरे लिए अत्ति आवश्यक था...

आप hi की तरह किसी ज़माने में आपका भाई ास्मोडियस भी वाइट एनर्जी का वारिस था....

पर बदलते वक़्त के साथ वो भी बदल gaya...usne अपनी उसी वाइट शक्तियों का गलत फायदा उठाते हुए खुदमे ब्रम्हांड की समस्त काली ऊर्जा को समेटना शुरू किया....

और देखते hi देखते वो क्रेअटुरे ऑफ़ जजमेंट से डेविल्स लार्ड बन गया....

शक्ति के इस दुरुपयोग की वजह से hi मुझे ये कदम उठाना pada....ye सोर्ड भले hi परमेश्वर पुत्र के लिए जो की आप है बानी हो किन्तु गॉड ने इससे मुझे सौंपा था...

मुझे इस सोर्ड को सिर्फ गॉड के पुत्र को नहीं देना था बल्कि उससे देना था जो गॉड के पुत्र कहलाने के लायक हो.....

काली शक्ति की हलकी भी मिलावट उसके अंदर ना ho.....aur इसीलिए मैंने ये शर्त राखी.....

इस सोर्ड के मेरे पास रहते मुझे मारा नहीं जा sakta,iske बावजूद आपको इससे हासिल करने के लिए इसीसे मुझे मारना होगा....

और ऐसा करने के लिए.......

मई- मुझे प्रमाण देना होगा की मई hi वाइट एनर्जी का लायक और असली वारिस हूँ......

अग्रसेन की बात को मैंने पूरा किया जिससे सुनकर अग्रसेन ने मुस्कुराते हुए हाँ में अपना सर हिलाया....

मई- एक और बात भी है जो तुमने अभी तक नहीं बताई....

अग्रसेन- अब आपसे क्या छुपा है LORD....ek और काम भी है जो आपको इस सोर्ड को हासिल करने से पहले करना होगा और वो ये की आपको अपनी शक्ति से इस सोर्ड को नीचे ज़मीं पर गिरना होगा.....

इससे यकीं दिलाना होगा की

मई- मई इससे हासिल करने के काबिल हूँ.....

एक बार फिरसे मैंने अग्रसेन की बात को पूरा किया....

अग्रसेन- जी........

मई- तोह फिर इंतज़ार किस बात ka....?????shuru करें!!!!!!

AGRASENA-awashya.......

और अगले hi पल..............

बैक तो फ्रेंड्स:-

एक बार फिरसे तुम सब एक दूसरे से अलग होने वाले HO...US कमरे में क्या HAI,YE कोई नहीं जानता पर वहां जो भी HOGA,USKA सामना तुम सब को अकेले अकेले HI करना होगा..

जो गलतियां तुम सब ने बुद्धि मंथन

की चुनौती के वक़्त की THI,UNHE याद रखना ताकि वैसी कोई गलती इस चुनौती में ना दोहराओ.....

मेरे दोस्त जैसे hi अपने अपने नाम के रूम के सामने pahunche,thik तभी उनके कानो में धनुर की आवाज़ गूंज उठी.....

अपने अपने सर को हाँ में हिलाते हुए मेरे चारों दोस्तों ने एक दूसरे की तरफ देखा..

सभी ने आखों hi आखों में एक दूसरे को आल थे बेस्ट कहा और फिर सबने अपना अपना सर सामने रूम के बंद दरवाज़े की तरफ कर लिया.....

एक लम्बी सांस छोड़ते हुए उन चारों ने अपना हाथ आगे किया और जैसे hi उन सब के हाथ ने दरवाज़े को chua,sabhi दरवाज़े बिना कोई आवाज़ किये खुलते चले गए...

पर इस बार दरवाज़े के खुलने के बाद भी नाही कोई तेज़ रौशनी हुई और नाही मेरे दोस्तों को अंदर खींचा गया.....

सभी ने अपने अपने कदम अपने अपने रूम के रूम के अंदर बढ़ा दिए और जैसे hi मेरे चारों दोस्त अपने अपने रूम के अंदर pahunche,sabhi के आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा....

वहीँ मेरे दोस्तों के अपने अपने रूम के अंदर जाते hi धनुर के सामने का पर्दा चार भागों में बात गया जिससे वो अब एक साथ चारों रूम को देख पा रहे थे....

और जैसे hi धनुर की नज़र उन चारों रूम्स पर गयी......

अध्भुध...........

ये शब्द सिर्फ धनुर के मुँह से नहीं निकले the,balki मेरे चारों दोस्तों के मुँह से भी ये शब्द रूम के अंदर का माहौल देखकर hi निकल गया था......

reason......RONIT जिस रूम में घुसा tha,wo रूम असल में रूम नहीं tha,balki वो V.J के घर का लॉन था......

वहीँ अक्षांत और मोकलसर जिन दो रूम्स में घुसे the,wo भी कोई रूम ना होकर उन दोनों के बचपन का गाँव था...

शैला जिस रूम में घुसी थी वो उसके बचपन का घर था.....

मेरे चारों दोस्त अपने अपने सामने के दृश्य को आँखें फाड़े देख रहे थे और समझने की कोशिश कर रहे थे....

वहीँ धनुर को अंदाज़ा हो गया था की अंतिम चुनौती में ज़रूर कुछ मायावी और अनोखा होने वाला है.....

सभी अपनी अपनी सोच में मगन थे की तभी....

मेरे दोस्तों के सामने के नज़ारे में कुछ ऐड हुआ जिससे देखकर जहाँ एक तरफ अक्षांत और मोकलसर के चेहरे पर मुस्कान नाच गयी वहीँ दूसरी तरफ शैला और रोनित की आँखों में दर्द दिखने लगा....

reason.......AKSHAANT और मोकलसर के सामने इस वक़्त उनके बचपन के गावं का एक मैदान था जहाँ वो खेला करते the,aur इस वक़्त उसी मैदान में दो बच्चे प्रकट हुए थे...

ये बचे और कोई नहीं अक्षांत और मोकलसर hi थे.....

और इस वक़्त वो दोनों बच्चे एक कपडे की बनायीं गंध को पाने के लिए एक दूसरे से लड़ रहे थे......

अपने बाल्य काल और उसमे की गयी उनकी शरारतों को एक बार फिरसे अपने आखों के सामने देख उन दोनों के चेहरों पर मुस्कान नाच गयी.....

वहीँ शैला जिसके सामने इस वक़्त उसके बचपन का घर tha,achanak उस घर के दरवाज़े को खोलते हुए एक बच्ची बाहर निकली और उस बच्ची के पीछे पीछे एक आदमी भी उसका नाम पुकारते हुए बाहर आया..

ये बची और कोई नहीं शैला hi थी और जो आदमी उसके पीछे पीछे बाहर आये the,wo शैला के पितः..

अपने पितः को एक बार फिरसे अपने सामने देख शैला की आखें भर आयी थी.....

वहीँ चौथे रूम में जहाँ इस वक़्त रोनित tha,is वक़्त उसके सामने जो नज़ारा tha,usme भी नए किरदार जुड़ गए थे...

रोनित अपने सामने V.J के घर को देख सिटिवशं को समझने की कोशिश कर hi रहा था की इतने में उसके कानो में दो आवाज़ गुंजी...

आवाज़ मेरे घर के हॉल से आयी thi...aur उस आवाज़ के पीछे पीछे दो बच्चे भागते हुए मेरे घर के हॉल से बाहर लॉन की तरफ आये...

ये दो बचे और कोई नहीं बाबा रोनित और बेबी अंजलि थे जो अपने नन्हे नन्हे कदमो से भागते हुए रोनित के सामने आकर एक जगह बैठ गए...

बैठने के बाद जहाँ अंजलि उसके सामने रखे फूलों को छू चुकार देखने लगी वहीँ रोनित लॉन के घांस को उखड उखड कर अंजलि के ऊपर डालने लगा....

अपने बचपन की इस याद को जिससे अंजलि के जाने के बाद रोनित ने अपने मन के किसी कोने में दबा सा दिया tha,wo आज फिर से बाहर आ गया...

और ये सब देख शैला की hi तरह रोनित की आखें भी भर आयीं....

जहाँ एक तरफ मेरे चारों दोस्त इस वक़्त अपने अपने सामने के नज़ारे में खो से गए थे वही उनसे अलग धनुर मेरे दोस्तों के सामने के नज़ारे और उस नज़ारे से आये मेरे दोस्तों के चेहरे के एक्सप्रेशंस को देख ये समझने की कोशिश कर रहे थे की आखिर चुनौती है क्या???

रओनिट्स रूम:-

बेबी ANJALI-tu हमेशा मुझे तंग क्यों करता रहता है????

बाबा RONIT-aur तू जो मेरी शिकायत हर वक़्त मेरी मम्मी पापा से करती रहती hai,wo????

बेबी ANJALI-haan तोह तू हमेशा बदमाशी जो करता रहता है.....

बाबा RONIT-toh उससे तुझे kya???mai जो चाहे करूँ.....

बेबी अंजलि- फिर मई तोह बताउंगी.....

बाबा रोनित- तोह फिर मई भी ऐसा करूँगा...

ये बोल बाबा रोनित जिसने बेबी अंजलि से बात करते करते ढेर साड़ी घांस उखड ली thi,wo सब एक साथ अंजलि के ऊपर फेक दी और भाग निकला....

बाबा रोनित के इस हरकत से बेबी अंजलि ग़ुस्सा होकर उससे मारने के लिए उसके पीछे भागी.....

वहीँ ये सब नज़ारा देख रोनित तोह जैसे अपने पुराने वक़्त में कहीं खो सा गया tha.......ki तभी.......

अह्ह्ह्ह.................

अंजलि..................

तोह हुआ ये की बाबा रोनित के पीछे भागती बेबी अंजलि का पेअर अचानक मूड गया जिससे वो गिर गयी और गिरते hi उसके मुँह से अह्ह्ह.... की आवाज़ निकल गयी जिससे हमारे रोनित भाईसाहब के जोकि अंजलि के बचपन के रूप को hi देख रहा tha,uske मुँह से अंजलि के नाम की चीख निकल गयी........

रोनित दौड़ता हुआ आगे बढ़ा और जैसे hi उसने बेबी अंजलि को उठाने के लिए होना हाथ आगे badhaya,uska हाथ बेबी अंजलि के शरीर के आर पार हो गया...

पर तभी बाबा रोनित जोकि मेरे घर के अंदर चला गया tha,wo बाहर आया और उसने बेबी अंजलि को सहारा देकर उठाया....

वहीँ बेबी अंजलि को ना छुपाने से रोनित के चेहरे पर एक फीकी मुस्कान नाच गयी....

RONIT-mujhsa बदनसीब और कौन hoga?????asliyat में तोह मैंने तुझे खो hi दिया है पर इस मायावी चल में भी मई तुझे छू ना पाया......

ये बोल रोनित पीछे पलट गया पर तभी........

AKSHAANT'S रूम:-

AKSHAANT-ye दृश्य कैसे बदल gaya..arre ये तोह मेरे बाबा hain....aur इनके साथ ये दो bacche!!!!!arre ये तोह मई और मोकलसर हैं.....

अक्षांत के सामने जो माया थी जिसमे इस वक़्त उसका गाँव का मैदान दिख रहा tha,uska दरसिह्या चेंज हो चूका था...

जहाँ कुछ देर पहले तक अक्षांत और मोकलसर कपडे से बानी गंध से खेल रहे the,wo अचानक गायब हो गए और वहीँ अब अचानक अक्षांत को तीन लोग आते हुए दिखे.....

ये तीनो और कोई नहीं बल्कि अक्षांत के पिताजी और उनके दोनों तरफ से दोनों हाथ थामे बाबा मोकलसर और बाबा अक्षांत थे....

ये सन देखकर पहले तोह अक्षांत चौंक गया पर अगले hi पल उससे जैसे कुछ याद आया....

अक्षांत- ये तोह वही समय है जब मुझे और मोकलसर को बाबा ने युद्ध प्रशिक्षण देना आरम्भ किया था....

अक्षांत अपनी सोच में गुम hi था की तभी.....

A/FATHER- bachon,aaj से मई तुम दोनों को युद्ध कला सिखाऊंगा.....

अपने पितः की आवाज़ सुनकर अक्षांत अपनी सोच से बाहर आ गया.....

वहीँ बाबा अक्षांत और बाबा मोकलसर उसी बात को सुनकर ख़ुशी से उछालने लगे....

उन तीनो के सामने खड़े अक्षांत को भी वो दौर याद आ गया जब वो और मोकलसर लगातार अपने पितः से उन दोनों को युद्ध कला सीखने की ज़िद्द किया करते थे और फिर एक दिन अपने बच्चों की ज़िद्द के सामने हार मान कर उन्होंने दोनों को युद्ध कला सीखने के लिए हाँ कह दिया था...

अक्षांत को एहसास हो गया की सामने चल रहा सन उसी वक़्त का है जब पहली बार उसने और मोकलसर ने युद्ध कला की प्रैक्टिस की थी....

अक्षांत मुस्कुराते हुए उसी वक़्त को एक बार फिरसे अपने सामने देख खुश हो रहा था...

इस वक़्त उसके सामने उसके पितः उससे और मोकलसर को युद्ध कला के बेसिक्स के बारे में बता रहे थे पर अक्षांत और मोकलसर अपने पहले शाश्त्र प्रशिक्षण के लिए बेताब हो रहे थे......

फिर देखते hi देखते अक्षांत के सामने वो वक़्त भी आया जब उसने और मोकलसर ने पहली बार तलवार उठायी थी.....

अपनी उन बेहतरीन यादों को एक बार फिरसे देखकर अक्षांत के चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी थी की तभी......

अक्षांत- अरे ये तोह............

इससे ज़्यादा अक्षांत कुछ कह नहीं पाया पर उसकी आँखों ने उसके दिल की बात की गवाही दे दी....

थोड़ी देर पहले तक अक्षांत की जिन आखों में ख़ुशी की चमक thi,wahin अब उन्ही आखों में दर्द की लकीरे तैर रही थी....

reason....AKHSHAANT के आँखों एक सामने चल रहा सन बदल चूका tha.....aur अब जो सन उसके आँखों के सामने tha,wo सन या फिर ये कहूं की वो याद अक्षांत के बाल्य काल की सबसे कड़वी याद थी.....

इस वक़्त अक्षांत और मोक्सालसर एक पहाड़ की छोटी पर थे और तलवार बाज़ी की प्रशिक्षण कर रहे थे....

वैसे तोह ये सन कुछ बुरा नहीं था पर अक्षांत को मालुम था की इसके बाद क्या होने वाला है...

और जो होने वाला tha,usse hi एक बार फिरसे महसूस करके अक्षांत बेचैन हो गया था...

जो होने वाला था उससे रोकने के लिए अक्षांत आगे बढ़ा ताकि बाबा अक्षांत और बाबा मोकलसर को उस जगह से खींच कर दूर कर सके पर जैसे hi अक्षांत अपने और अपने दोस्त के बाल्य अवतार के पास पहुंचा और उन दोनों को पकड़ने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया.....

उसके साथ भी वही हुआ जो रोनित एक साथ हुआ tha....uska हाथ उसके और उसके दोस्त के बाल्य अवतारों के आर पार चला गया.....

और ठीक रोनित की hi तरह वो भी बेबस भरी आखों से उन दोनों को देखने लगा..

इस वक़्त बाबा अक्षांत और मोकलसर बड़ी तेज़ी से तलवारबाज़ी कर रहे थे...

मोकलसर तलवारबाज़ी के साथ साथ एक ञंञैस्ट की तरह छलांग लगा कर इधर से उधर कूदता जा रहा था और ऐसा करते करते वो कब पहाड़ के अंतिम छोर तक पहुँच gaya,ye ना तोह उससे पता चला और नाही उसके सामने खड़े बाबा अक्षांत को...

दोनों अपने में hi मगन होकर तलवार बाज़ी कर रहे थे...

तभी अचानक बाबा मोकलसर की hi तरह बाबा अक्षांत ने भी सामने की तरफ छलांग लगते हुए अपनी तलवार चलायी जिसके जवाब में मोकलसर ने भी अपनी पूरी ट्राकट लगते हुए एक बैक फ्लिप लिया पर यही उससे गलती हो गयी.....

बाबा मोकलसर वैसे भी माउंटेन के एज में खड़ा tha,back फ्लिप मारने की वजह से उसका पेअर उसी एज के लास्ट पॉइंट पर रखे एक पठार पर पड़ा जो हल्का चिकना था.....

पत्थर पर पेअर पड़ते hi मोकलसर का बैलेंस बिगड़ा और........

मोकलसर..............

मोकलसर..............

एक साथ दो छीकें निकली....

पहली चीख बाबा अक्षांत की थी और दूसरी ये सन देख रहे अक्षांत की....

पर सन देख रहे अक्षांत के हाथ में कुछ था नहीं इसीलिए आखों में आंसू लिए वो बस सामने देखता रहा वहीँ बाबा अक्षांत दौड़ते हुए पहाड़ी के लास्ट पॉइंट पर पहुंचा और धड़कते दिल से नीचे की तरफ देखने लगा......

और तभी.......

AKSHAANT.......mai यहाँ hun...mujhe बचा ले मेरे भाई..........

ये आवाज़ अक्षांत जहाँ खड़ा tha,usse कुछ नीचे सी आयी थी....

आवाज़ के कानो में गूंजते hi बाबा अक्षांत की आखें जिनमे आंसू भर गए the,wo दोबारा चमक उठे...

ध्यान से आवाज़ वाली जगह पर देखने पर बाबा अक्षांत को बाबा मोकलसर एक पेड़ की टहनी से लटका हुआ दिखा....

बाबा अक्षांत- तू चिंता मत कर मेरे bhai..mai आ रहा हूँ....

बाबा मोकलसर- जल्दी aa..mere हाथ फिसल रहे hain..mai ज़्यादा देर तक इस टहनी को पकड़ नहीं पाऊंगा....

पहाड़ी के लास्ट पॉइंट पर जहाँ इस वक़्त बाबा अक्षांत खड़ा tha,wahan से नीचे उतरने के लिए हलके हलके गधे बने हुए थे.........

अक्षांत उन्ही गधों में पेअर जमाते हुए नीचे उतरने laga..wahin बाबा मोकलसर बाबा अक्षांत को जल्दी से उससे बचने के लिए आवाज़ दिए जा रहा था...

बाबा अक्षांत भी जितनी जल्दी हो sake,utni जल्दी नीचे उतरता हुआ उस जगह पर पहुँच गया जो उस पेड़ के लेवल पर थी जिसपर बाबा मोकलसर लटका हुआ था...

अक्षांत उस पेड़ पर चढ़ गया और धीरे धीरे सरकते हुए आगे बढ़ने लगा....

पर प्रॉब्लम अब भी उतनी hi thi..kyunki बाबा मोकलसर जिस पेड़ की टहनी के सहारे झूल रहा tha,wo टहनी पेड़ से बोहोत ज़्यादा आगे तक निकली हुई थी....

इतना hi nahi,wo टहनी थोड़ी पतली thi..usne लेदेकर बाबा मोकलसर का भार संभाले हुए था और अगर बाबा अक्षांत भी उस टहनी पर अपना वज़न डालता तोह वो टहनी टूट जाती......

कुछ नयी युक्ति तलाशते हुए अचानक बाबा अक्षांत की नज़र उसके नीचे से गए एक बड़े से तेंहि पर पड़ी जो की थोड़ा पतला था....

वो उस टहनी को देख hi रहा था की....

बाबा मोकलसर- जल्दी कर AKSHAANT...mai और ज़्यादा इस टहनी को नहीं पकड़ पाऊंगा....

बाबा मोकलसर की आवाज़ से अक्षांत जो देख रहा tha,usse उसका फोकस हैट गया.

बाबा अक्षांत थोड़ा निचे हुए और उसने अपनी तलवार से जो उसने अभी भी अपने पास राखी हुई thi,usse निकला और टहनी के एक छोर पर वार किया जिससे टहनी आधी से ज़्यादा टूट गयी...

बाबा अक्षांत ने अपने हाथों को झटकते हुए टहनी को पूरा तोड़ दिया और उससे पकड़ कर वापस ऊपर उठा और अपने हाथ जिसमे टहनी थी आगे की तरफ बढ़ा दिए....

वो टहनी बाबा मोकलसर से कुछ एक फ़ीट दूर तक पहुँच गयी थी...

बाबा AKSHAANT-MOKALSAR,sharir को हल्का सा झटका दे और इस टहनी को पकड़ le...mai तुझे खींच लूंगा....

अपने दोस्त की बात सुन बाबा मोकलसर ने बीने एक बार भी उस टहनी को देखे अपने शरीर को एक हल्का सा झटका दिया और अगले hi पल.......

मोकलसर..........................

ये चीख बाबा अक्षांत के मुँह से निकली थी....

reason......tehni का वो सिरा जो मोकलसर के सामने tha,wo गिला tha...aur जैसे hi बाबा मोकलसर ने खुदको झटका देते हुए उस टहनी के आखरी सिरे को pakda,toh फिसलन की वजह से उसका हाथ स्लिप हो गया और अगले hi पल बाबा मोक्सालसर नीचे गिरता चला गया और बाबा अक्षांत के मुँह से चीख निकल गयी....

नीचे गिरता हुए बाबा मोकलसर की बॉडी एक के बाद एक 5,6 पेड़ों से टकराई और फिर एक पेड़ जिसके लटें निकले हुए the,usme जाकर फास गयी...

लगातार पेड़ों से टकराने की वजह से बाबा मोकलसर के पेअर और हाथ टूट गए थे और वो बेहोश हो गया था...

वहीँ बाबा मोकलसर के गिरने के बाद बाबा अक्षांत कुछ देर तक वहीँ पेड़ पर बैठा हुआ रोटा रहा पर फिर वहां से वापस ऊपर चढ़ अपने घर की तरफ निकल गया..

घर पहुँच उसने जो कुछ भी हुआ था वो सब अपने पितः को बता दिया.....

बाबा अक्षांत की बात सुन उसके पितः कुछ लोगों को लेकर उस जगह पर पहुंचे जहाँ बाबा मोकलसर गिरा हुआ था...

कुछ देर तक खोजने के बाद अक्षांत एक पितः को बाबा मोकलसर एक पेड़ पर पड़ा हुआ मिला....

जांच करने पर जब पता चला की बाबा मोकलसर मारा नहीं है तोह सभी ने चैन की सांस ली....

बाबा मोकलसर के मूर्छित शरीर को उठा अक्षांत के पितः घर वापस आ गए...

जहाँ एक तरफ ये देखकर की बाबा मोकलसर ज़िंदा hai,BABA अक्षांत खुश हुआ वहीँ दूसरी तरफ ये जानकार की उसके दोस्त के हाथ पेअर टूट गए hain,wo निराश हो गया....

बाबा अक्षांत को ये सब कहीं न अकहिं उसीकी गलती लग रही थी...

वो सोच रहा था की अगर उस टहनी को अपने दोस्त की तरफ बढ़ने से पहले एक बार उसने चेक कर लिया होता तोह ये सब नहीं होता...

ये सब सीन्स अक्षांत के आखों के आगे चल रहे थे जिन्हे देखकर उसका वो बरसो पुराण दुःख एक बार फिरसे ताज़ा हो गया...

भीगी पलकों के साथ अक्षांत पीछे पलट गया पर तभी..........

MOKALSAR'S रूम:-

MOKALSAR-ye तोह अक्षांत के बाबा hain....aur इनके साथ ये दो bacche!!!!!arre ये तोह मई और अक्षांत हैं.....

दरअसल मोकलसर के सामने भी वही सन चल रहा था जो अक्षांत के सामने चल रहा था......

और मोकलसर भी अपने और अपने दोस्त के बाल्य काल को और उस वक़्त को देखकर खुश हो गया था..

धीरे धीरे मोकलसर के आखों के सामने भी वही सब सीन्स चलने लगे जो ाखषांत के सामने चले थे.....

और फिर उसके आँखों के सामने वो सन भी चलने लगा जब वो उस पेड़ से लटका हुआ था और उससे बचने के लिए अक्षांत अपनी जान की परवाह न करते हुए खायी से निचे उतर गया...

मोकलसर देख रहा था की कैसे बाबा अक्षन्त ने उसी पेड़ की जिससे वो लटका हुआ था, एक पतली सी टहनी को तोडा और उससे पकड़ने के लिए मोकलसर को कहा...

कैसे उस टहनी को पकड़ते hi उसका हाथ फिसल गया और वो नीचे गिरने लगा...

वो देख रहा था की कैसे उसका शरीर कई सारे पेड़ों से टकराया और फिर आखिर में जाकर एक पेड़ में फास गया....

मोकलसर को खुदको खायी से गिरता देख इतना दुःख नहीं हो रहा था जितना बाबा अक्षांत को रोटा देख कर हो रहा था...

मोकलसर को बाबा अक्षांत का रोना देखा नहीं गया और उसकी आँखें चालक पड़ीं.....

भीगी पलकों के साथ मोकलसर पीछे पलट गया पर तभी..........

SHAILA'S रूम:-

बेबी SHAILA-baba,mujhe दूध पसंद nahi....mai नहीं पियूँगी.....

ये बोलकर बेबी शैला फिर से अपने घर के आँगन में इधर उधर भागने लगी.....

वहीँ शैला की बात सुनकर उसके बाबा हाथ में दूध का गिलास लिए एक जगह पर खड़े हो गए....

S/BABA-thik है fir...mat पी तू doodh..lekin आज से तेरा मिठाई खाना भी band....mai साड़ी मिठाई बहार लोगों को बाँट कर आता हूँ....

ये बोल शैला के बाबा पालते hi थे की बेबी शैला झट से उनके आगे आकर कड़ी हो गयी....

बेबी SHAILA-nahi baba....aap मेरी मिठाई किसी और को कैसे दे सकते हैं...???

बाबा- बिलकुल दे सकता हूँ और दूंगा bhi..jab तू मेरी बात नहीं सुनती तोह मई क्यों तेरी sunu...!!!mai तोह साड़ी मिठाई बाँट कर hi रहूँगा....

बाबा शैला- नहीं ना baba....aur मैंने कब दूध पिने से मन किया....

BABA-acha..toh क्या तेरे भूत ने मन किया था...????

शैला- किसी ने भी मन नहीं kiya...zaroor आपको कोई भ्रम हो गया hai...laayiye,dijiye मेरा दूध.....

ये बोल बेबी शैला ने झट से दूध का गिलास अपने पितः के हाथ से लिए और एक सांस में पि गयी..

पर दूध पिने के बाद उसका मुँह बन गया जिससे देखकर सके पितः हंस दिए...

अपने बाल रूप और पितः का ये दृश्य सामने कड़ी शैला देख रही thi..jahan कुछ देर पहले तक उसके चेहरे पर दर्द दिख रहा tha,wahin उस दृश्य को देख अब वो मुस्कुरा रही थी..

पर ये मुस्कराहट बस कुछ लम्हो की थी क्यूंकि अगले hi पल दृश्य बदल गया और जो दृश्य शैला के सामने आया उससे देख एक पल में hi उसकी आँखें झलक उठी.....

reason....is वक़्त जो नया दृश्य शैला के सामने था और वो और कुछ नहीं बल्कि उसी रात का था जिस रात निष्कलिका चुपके से उसके बाबा के शयन कक्ष में घुसी और उसके सोते हुए बाबा की नींद में hi हत्या कर दी........

जैसे hi निष्कलिका ने खंजर शैला के पिताजी के सीने में घुसाया.......

BABAAAAAAAAAAAAAAAAAA..................

दृश्य देख रही शैला के मुँह से अपने पितः के नाम की चीख निकल गयी.....

पर शैला जानती थी की वो पल तोह कब का बीत चूका था और जो चल रहा था वो एक माया थी...

भीगी पलकों के साथ शैला पीछे पलट गयी पर तभी..........

बैक तो हीरो:-

शक्तियम स्पर्शं

पावर टच

चुनौती शुरू हो चुकी thi...AGRASENA ने अपने सोर्ड को आगे कर अपना पहला स्पेल बोल दिया था.....

स्पेल के बोलते hi सोर्ड से उसकी ऊर्जा बाहर आयी और मेरे तरफ आने लगी...

मई जानता था की अग्रसेन के स्पेल की वजह से जो ये ऊर्जा बाहर आयी hai,isme भी लार्ड ऑफ़ एंगेल्स के गुण हैं और साथ hi ये एक चुम्बक भी है....

इसके मुझे छूटे hi ये मेरी ऊर्जा को खींचना शुरू कर देगी पर ये जानने के बावजूद मई अपनी जगह पर खड़ा रहा..

और जैसे hi वो ऊर्जा मुझतक pahunchi,maine खुदको एक शैडो में बदल लिया जिसकी वजह से वो ऊर्जा मेरे शरीर को ना चुकार मेरे आर पार होने लगी पर जैसे hi वो ऊर्जा मेरे शरीर के भीतरी अंगों से होकर दूसरी तरफ से निकलने को hui,mere शैडो ने वापस शरीर का रूप ले लिया....

ऐसा होने की वजह से वो ऊर्जा मेरे अंदर hi रह गयी...

वो ऊर्जा मुझे नुक्सान सिर्फ बाहर से hi कर सकती thi,andar से नहीं और इसीलिए hi मैंने ये युक्ति निकली थी...

बिना मुझे स्पर्श किये मेरे अंदर जाने और सीधे मेरी अंदरूनी ऊर्जा को चुने की वजह से वो ऊर्जा भी मेरी ऊर्जा के साथ मिल गयी....

अध्भुध.......

ये बात अग्रसेन के मुँह से निकली thi...wo भी मेरी युक्ति को समझ गए थे......

कुछ देर तक प्रशंसनीय भाव से मुझे देखने के बाद.......

AGRASENA-apni अमानत से दो दो हाथ हो जाए......

ये बोलकर बिना मेरा रिप्लाई सुने अग्रसेन ने सोर्ड को मेरी तरफ उछाल दिया.....

और अगले hi पल.........

हवा में तैरती हुई वो सोर्ड मुझसे कुछ फ़ीट दूर आकर रूक गयी और ऐसा होते hi सोर्ड के अंदर से एक के बाद एक 10 योद्धा बाहर आये और कमाल की बात ये थी की उन सब योद्धाओं के हाथ में मेरी hi सोर्ड थी.........

अपनी नयी चाल चल अग्रसेन मुस्कुरा उठे और अपने वैस्ट पर अपने दोनों हाथ टिका मेरी तरफ देखने लगे...

वैसे मुस्कान तोह मेरे चेहरे पर भी thi.....mai मुस्कुराते हुए मुझे घेरे उन 10 योद्धाओं को देख रहा था.....

मई जानता था की भले hi मेरे सामने खड़े वो 10 लोग योद्धा hain,par अब जो युद्ध वो मुझसे karenge,wo युद्ध असल में मुझसे वो लोग नहीं बल्कि मेरी तलवार करेगी...

उन योद्धाओं के हर प्रहार में मेरी सोर्ड की शक्ति और तेज़ी मिली होगी पर फिर भी मई आराम से खड़ा रहा....

वहीँ वो 10 योद्धा मुझे चारों तरफ से घेरे हुए कुछ देर तक गोल गोल घूमते रहे पर फिर अचानक......

मेरे पीछे खड़े 2 योद्धा तेज़ी से मेरी तरफ आगे बढे और अगले hi पल उनकी तलवार तेज़ी से मेरे दोनों शोल्डर्स को निशाना बनाकर चल पड़े और......

सुभहहहह.............

कड़क.......

पहली आवाज़ तलवार चलने की थी पर ये वार खाली गया क्यूंकि जैसे hi वो दोनों सोर्ड मेरे कंधे के पास pahunche,maine अपने आकर को 3 गुना तक पतला कर लिया जिसकी वजह से दोनों तलवार बस हवा को hi चिर सके....

पर उनके तलवार के निचे पहुँचने से पहले hi मई बिजली की तेज़ी से पीछे घुमा और मेरे दोनों हाथ उन दोनों योद्धाओं के एक एक साइड के शोल्डर पर पड़े जिससे उनकी शोल्डर की हड्डी टूट गयी.....

और जैसे hi ये hua,wo दोनों योद्धा एक रौशनी में बदल कर गायब हो गए और दोनों तलवार भी वापस मेरी ओरिजिनल सोर्ड जो की हवा में रुकी हुई thi,uske अंदर समां गए.....

वहीँ जैसे hi वो दोनों ओढ़ना गायब hue,baaki के बच्चे 8 योद्धा एक साथ मेरी तरफ लपके पर इससे पहले की वो सब 1 फ़ीट भी आगे आ पाते......

kadak,kadak,kadak,kadak,kadak,kadak,kadak,kadak........

कुल 8 बार कड़क की आवाज़ आयी और इसीके साथ वो 8 योद्धा रौशनी में बदल गायब हो गए और उन सब की तलवार वापस असली सोर्ड के अंदर समां गयी.....

तोह हुआ ये की जैसे hi वो 8 मुझे मारने के लिए आगे badhe,mai वक़्त को भी मात देता हुआ एक एक के पीछे पहुँचता गया और साथ hi एक एक झटके में उन सब के गर्दन तोड़ता चला गया...

सोर्ड के इस प्रहार के विफल होने के बाद वो तेज़ चमकी और आगे बढ़ ठीक मेरे सामने आकर कड़ी हो गयी.....

मई समझ गया था की अब ये खुद मुझे लड़ेगी ताकि मेरी योग्यता को परख सके....

मेरे सामने आते hi तलवार एक बार फिरसे चली और अगले hi पल.......

soobh....soobh.....soobh.....soobh.....

एक के बाद एक सोर्ड ने मुझपर लगातार हमले करना शुरू कर diya...SWORD की स्पीड इतनी ज़्यादा थी की हम दोनों से कुछ दूर खड़े अग्रसेन को तोह सोर्ड दिख hi नहीं रही थी...

वहीँ मई सोर्ड के हर वार को आराम से दोगड़े देता चला आ रहा tha....par मेरे लगातार दोगड़े देने की वजह से सोर्ड की स्पीड और बढ़ती जा रही थी और अचानक.....

थापपप........

ये आवाज़ मेरे हथेली के पीछे की तरफ सोर्ड के मूठ लगने की वजह से आयी थी......

तोह हुआ ये की सोर्ड लगातार मुझपर तेज़ी से वार कर रही थी और अचानक मेरे सीने को निशाना बनाकर सोर्ड मेरी तरफ तेज़ी से बढ़ी.....

मैंने ये देख लिया था इसीलिए इससे पहले की सोर्ड मेरे नज़दीक pahunchti,mai साइड हो गया....

पर ये सोर्ड की एक चाल thi..mere पास पहुँचने से पहले hi उसने अपना वार बदल दिया और एक झटके में उलटी हो गयी और घूमते हुए मेरी तरफ बढ़ी...

सोर्ड के इस अचानक बदले हुए वार से बचने के लिए मई भी दूसरी साइड होने को हुआ और मई कामियाब भी हो hi गया था पर आखरी समय में तलवार की मूठ मेरे हथेली के बैक साइड से टकरा गयी...

अब ये कोई मामूली तलवार की मूठ तोह थी nahi...uske टकराते hi मेरे हाथ को एक झटका laga....isse मुझे कुछ ख़ास फर्क तोह नहीं पड़ा पर haan,mai अब तक इससे बस एक खेल की तरह आराम से खेल रहा था पर अब मेरे चेहरे की मुस्कान गायब हो चुकी थी और मई एक तक सोर्ड को देखने लगा....

और जैसे hi अगले वार के नियत से सोर्ड तेज़ी से मेरी तरफ लपकी तोह सोर्ड की स्पीड से खुदको 100 गुना तेज़ करते हुए मई उसके पीछे पहुँच गया और उसके मूठ को पकड़ लिया....

मेरे मूठ को पकड़ते hi सोर्ड छटपटाने लगी पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ा...

कुछ देर तक सोर्ड को पकडे रहने के बाद उसके मूठ पर अपने मुठी की गिरफ्त और टाइट करते मैंने एक झटके में सोर्ड को ज़मीन में जड़ तक गदा दिया....

पर तभी.........

मेरे सोर्ड को ज़मीन में जड़ तक गाड़ने की वजह से मेरे आस पास की ज़मीन कुछ पलों के लिए हिल गयी थी.....

वहीँ ज़मीन में जड़ तक सोर्ड को गाड़ने के बाद जब मैंने अपना हाथ उसके मूठ से हटाया तोह सोर्ड फिरसे ऊपर आने लगी पर तभी मैंने अपना राइट पेअर सोर्ड के मूठ के ऊपर रखा और उससे वापस ज़मीं में धसता चला गया.....

सोर्ड एक बार फिर से पूरी ज़मीन में धस चुकी थी पर मैंने अपना पेअर अभी भी उसकी मूठ पर रखा हुआ था....

सोर्ड अपने आप को बाहर निकलने की पूरी कोशिश कर रही थी पर कामियाब नहीं हो पा रही थी...

सोर्ड तोह अपनी जगह पर hi थी पर उसके ज़मीं के अंदर छटपटाने की वजह से मेरे आस पास की ज़मीन एक बार फिरसे हिलने लगी और इस बार थोड़ा ज़ोर से....

अग्रसेन भी खड़े खड़े लड़खड़ाने लगे the....wahin कुछ देर तक लगातार बाहर आने की नाकाम कोशिश करने के बाद सरोद शांत हो गयी और ऐसा होते hi ज़मीन का हिला भी बंद हो गया......

अग्रसेन- प्रथम चुनौती पूर्ण hui....aapko तोह सिर्फ सोर्ड को नीचे गिरना था पर आपने तोह इससे ज़मीं के अंदर hi गाड़ diya.aapne सोर्ड को साबित कर दिया की आप इसके लायक हैं.....

अग्रसेन की बात सुन मई मुस्कुराया और अगले hi पल मैंने अपना पेअर सोर्ड की मूठ के ऊपर से हटा diya.....par मेरे पेअर के हटाने के बाद भी सोर्ड ज़मीं के अंदर hi रही......

मैंने अपना हाथ आगे किया और मेरे ऐसा करते hi सोर्ड एक झटके में ज़मीं से बाहर आयी और उसके बाहर आते hi मैंने उससे पकड़ लिया.....

पर अब भी सोर्ड में हलकी हलकी विब्रेशन्स हो रहे the...kyun???kuch देर में आपको पता चल जाएगा.....

AGRASENA-ab दूसरी एवम अंतिम chunouti....aapko इस सोर्ड से मुझे मारना होगा????

अग्रसेन की बात सुन मई मुस्कुराया और तभी.....

सुबह............

मेरी तलवार एक झटके में घूमी और अगले hi पल अग्रसेन का सर उसके धढ़ से अलग होकर ज़मीन में गिर चूका था......

पर ये क्या???????

सर के काटने के अगले hi पल अग्रसेन की सर जो ज़मीन में पड़ा हुआ tha,wo हवा में उठा और वापस जाकर अग्रसेन के धड़ से जाकर जुड़ गया......

अग्रसेन- ये इतना भी आसान..........

सुबह........

अग्रसेन इससे आगे नहीं बोल पाए क्यूंकि उनके वाक्य ख़त्म होने से पहले hi मेरी तलवार एक बार फिर चली और एक बार फिरसे अग्रसेन का सर उनके धड़ से अलग हो गया...

पर एक बार फिरसे वही घटना क्रम दोहराने laga....AGRASENA का सर वापस हवा में उठने लगा पर इससे पहले की वो सर अग्रसेन के धड़ से जुड़ता.....

मेरे हाथों से एक रे निकली और.....

बूम.............

मेरे हाथों से निकली रे अग्रसेन के धड़ से टकराई जिससे एक तेज़ धमाका हुआ और उस धमाके में अग्रसेन का धड़ नष्ट हो गया...

पर इससे अग्रसेन के सर पर कोई असर नहीं hua..wo हवा में आगे बढ़ी और कुछ पल पहले तक जहाँ पर अग्रसेन का धड़ tha,uske ऊपर वाली जगह पर आकर स्थिर हो गयी और अगले hi पल........

सर के स्थिर होते hi उसके नीचे एक रौशनी फैलने लगी और देखते hi देखते उस रौशनी ने एक आकर लेना शुरू कर दिया और कुछ hi देर में वो आकर अग्रसेन का धड़ बन गया और जैसे hi अग्रसेन का धड़ उसके सर से juda,AGRASENA ज़िंदा हो गए....

अग्रसेन- ये इतना भी आसान नहीं होने वाला है लार्ड.....

मई- मुझे पता hai...mai तोह बस टाइम पास कर रहा हूँ....

ये बोल मैंने अपनी आखें बंद की और कुछ देखने laga..jo देखना था देखने के बाद मैंने अपनी आखें खोली और......

मई- जल्दी करो doston.....jab तक तुम सब की चुनौती पूरी नहीं हो jaati,mai कुछ नहीं कर सकता.........

बैक तो फ्रेंड्स:-

RONIT'S रूम-

रोनित........

रोनित पीछे पलटा hi था की अचानक उसके कानो में ये आवाज़ गुंजी जिससे सुनकर उससे तेज़ झटका लगा और वो तुरंत वापस पीछे पलट गया...

पटलते hi एक बार फिरसे रोनित के आँखों से आंसू निकल पड़े पर इस बार ये आंसू गम के नहीं बल्कि ख़ुशी के थे.....

भरी आँखें पर चेहरे पर मुस्कान लिए रोनित अपने नाम पुकारने वाली को देख रहा था.....

RONIT-ANJALI.............

ANJALI,jo इस वक़्त रोनित के सामने कड़ी thi...wo सफ़ेद कपड़ों में एक पारी की तरह दिख रही thi..jiski आँखों में रोनित के लिए बेशुमार प्यार झलक रहा था.....

रोनित और अंजलि एक दूसरे के आँखों में एक तक देखे जा रहे थे....

RONIT-magic में िल्लुसिओं के झूठ से hi sahi,kamsekam मई तुम्हे सामने से देख तोह पाया.....

रोनित की बात सुनकर अंजलि के चेहरे पर मुस्कान आ गयी.....

अंजलि- हाँ ये सच है की मई इस मायावी दुनिया का िल्लुसिओं hun,par ये झूठ सच हो सकता है.....

अंजलि की बात रोनित को समझ में नहीं aayi...wo आँखों में सवाल लिए अंजलि को देखने लगा....

ANJALI-jis तालाब से तुम शक्तियां प्राप्त करने आये ho,usme सोल को लौटने की भी शक्ति है......

और इसीलिए hi उस तालाब के पानी ने मुझे यहाँ भेजा hai....agar तुम चाहो तोह वो पानी मेरी सोल को तुम्हे लौटा सकता है....

और शरीर का निर्माण तोह विक्रम कर hi देगा....

इसका सीधा सा मतलब ये है की तुम अपनी अंजलि को दोबारा पा सकते हो.....

अंजलि की बात सुन रोनित की ख़ुशी का ठिकाना ना रहा.....

रोनित- क्या ये हो सकता hai????kya तुम सच में वापस लौट सकती हो!!!!

ANJALI-tumse मैंने कभी झूठ बोलै है क्या रोनित????

रोनित अंजलि को गले लगाने के लिए झट से आगे बढ़ा पर फिर वही hua,RONIT का हाथ अंजलि के आर पार चला गया.....

ANJALI-ek बार मई वापस लौट aaun,fir हमेशा तुम्हारी बाहों में hi रहूंगी....

RONIT-tumhe वापस लाने के लिए क्या करना होगा???

अंजलि- वो देखो....

ये बोल अंजलि ने एक तरफ पॉइंट kiya..jahan अंजलि ने पॉइंट किया tha,us जगह पर एक दरवाज़ा बन गया और जैसे hi रोनित की नज़र उस दरवाज़े के दूसरी तरफ गयी......

रोनित- अरे वहां तोह!!!!

अंजलि- वही जगह है जहाँ से तुम इस चुनौती में उतरने के लिए अंदर आये थे....

अंजलि ने रोनित की बात को पूरा किया...

अंजलि- तू इस चुनौती को भूल जा और उस दरवाज़े से होते हुए वापस बाहर निकल जा.....

ऐसा करते hi ये जगह मेरी सोल को तुम्हारे हवाले कर देगी.....

RONIT-oh.....

रोनित कुछ सोचने में लगा hi था की....

अंजलि- क्या हुआ RONIT......????kya ये चुनौती और शक्तियां तुम्हारे लिए मुझसे भी ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट है......????

रोनित- नहीं ANJALI......tumse ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट तोह मई खुद भी नहीं हूँ....

अंजलि- तोह ज़्यादा सोच mat......aur चल मेरे saath...hum दोनों साथ साथ उस दरवाज़े को क्रॉस करते हैं....

रोनित ने हाँ में अपना सर हिलाया और अंजलि के साथ आगे बढ़ गया....

अंजलि और रोनित एक दूसरे के आँखों में आखें डाले आगे बढ़ रहे थे....

वो एग्जिट दरवाज़ा अब उन दोनों से कुछ hi कदम दूर tha.....RONIT अंजलि के साथ चलते हुए उस दरवाज़े के सामने पहुँच चूका था और उससे पार करने के लिए अपना राइट पेअर ऊपर हवा में उठा भी चूका था की तभी..........

AKSHAANT'S रूम:-

अक्षांत मेरे भाई......

अक्षांत पलटा hi था की एक दर्द भरी आवाज़ उसके कानो में गुंजी......

आवाज़ सुनकर अक्षांत वापस पलटा पर पलटने पर जो दृश्य उसके आँखों के सामने थे उससे देख कर उससे झटका लगा....

reason....jo दृश्य कुछ देर पहले चल रहा tha,wo वापस शुरू हो गया था पर इस बार दो फर्क थे....

पहला या की कुछ देर पहले बाबा अक्षांत जहाँ लेता हुआ tha,ussi टहनी पर इस वक़्त वो खुद लेता हुआ था और उससे थोड़ी दूर टहनी पर बाबा मोकलसर की जगह मोकलसर लटका हुआ था...

जो आवाज़ अक्षांत के कानो पर पड़ी थी वो भी मोकलसर की hi थी और वो अब भी अक्षांत की तरफ hi देख रहा था...

दूसरा ये की बाबा M0KALSAR के नीचे खायी नहीं थी बल्कि एक दरवाज़ा दिख रहा था जिसके दूसरी तरफ उसी तालाब का एग्जिट था जिससे होकर वो इस मायवी दुनिया में आये थे....

अक्षांत इन सब चीज़ों को समझने की कोशिश कर hi रहा था की....

MOKALSAR-AKSHAANT..mai जानता हूँ मुझे ना गिरने से ना बचा पाने का दोषी तू आज भी खुदको hi मानता है....

पर आज तू उस सोच को हमेशा के लिए बदल सकता है......

अक्षांत- matlab??kaise और ये सब क्या है????

मोकलसर- हमारे पराक्रम को देखते हुए इस मायावी ुनिया ने हमे पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है....

नीचे जो दरवाज़ा दिख रहा है naa,usme हम दोनों को एक साथ छलांग लगाना hoga...aisa करते hi हमारी बचपन की वो दुखद घटना वापस बदल जायेगी....

और तू मुझे ना बचा पाने के दोष से खुदको हमेशा के लिए मुक्त हो जाएगा....

अक्षांत- sach!!!!aisa हो सकता है????

मोकलसर- बिलकुल हो सकता hai..bas तू कुछ देर के लिए यहाँ की चुनौती को भूल जा...

तू बस वहां से मेरे ऊपर छलांग लगा दे....

हम दोनों एक साथ हमारे नीचे बने दरवाज़े कूद जाएंगे...

और जैसे hi हम दरवाज़े के उस पार pahunchenge,samay चक्र बदल जाएगा और हमारी वो बुरी याद भी मिट जायेगी....

मोकलसर की बात सुनकर अक्षांत खुश हो gaya.....usne मन hi मन मोक्सालसर के कहे अनुसार करने का निर्णय ले लिया..

अपना पूरा बैलेंस टहनी पर देकर अक्षांत ने मोकलसर के ऊपर छलांग लगाने की पोजीशन ले ली....

छलांग लगाने से पहले अक्षांत ने अपने बॉडी को हल्का पुल्ल किया hi था की तभी.......

मोकळसरस रूम:-

दर मत BHAI....TUJHE कुछ नहीं होगा........

मोकलसर पीछे पलटा hi था की तभी उसके कानो में ये आवाज़ गुंजी जिससे सुनकर वो चौंक गया...

मोकलसर के चौंकने की वजह सिर्फ वो आवाज़ नहीं थी बल्कि अभी का दृश्य भी था....

दरअसल मोकलसर जो एक सेकंड पहले अपने पैरों पर खड़ा tha,ab वो एक पेड़ की टहनी से लटका हुआ था.....

और ये टहनी वही थी जिसपर वो कुछ देर पहले दृश्य में लटका था....

और तोह और जो आवाज़ आयी थी वो उसके ऊपर से नहीं बल्कि नीचे से आयी थी जिससे सुन जैसे hi मोकलसर ने नीचे dekha,toh चौंक गया....

reason.....AKSHAANT जिससे ऊपर होना चाहिए था वो नीचे की एक टहनी जो पहले नहीं thi,uspar लटका हुआ था और उसके नीचे एक दरवाज़ा बना हुआ था जिसके दूसरी तरफ इस मायावी दुनिया का एग्जिट था....

मोकलसर इस नयी माया को समझने की कोशिश कर hi रहा था की.....

अक्षांत- ज़्यादा सोच मत मेरे bhai...yahi हम दोनों की चुनौती है.....

बचपन के इस कड़वी याद को हम दोनों को एक बार फिरसे जीना होगा......

पर अगर हम दोनों हमारे नीचे जो दरवाज़ा hai,usse एक साथ पार करने में कामियाब हुए तोह ना सिर्फ इस चुनौती को पार कर लेंगे बल्कि बचपन की उस कड़वी घटना को भी बदल पाएंगे......

मोकलसर- ये कैसे चुनौती है???

AKSHAANT-jitna आसान लग रहा है उतना है nahi...tune मेरी बात ध्यान से नहीं सुनी hai...hum दोनों को एक साथ एक hi समय पर उस दरवाज़े के पार जाना hoga..naa एक पल पहले और न एक पल बादमे...

और हमारे पास ज़्यादा वक़्त भी नहीं hai....agar हम जल्दी से नहीं कूड़े तोह दरवाज़ा बंद हो जाएगा और हम ये चुनौती हार जाएंगे....

तेरी हड़बड़ी की वजह से पिछली चुनौती हम हार hi गए थे और इस बार अगर तूने विलम्ब किया तोह हम निश्चित hi हार जाएंगे....

अक्षांत की बात सुन मोकलसर को अपने पिछले चुनौती के दौरान किया गया गलती याद आ गया..

उससे लगा की अक्षांत ठीक बोल रहा है और इसीलिए उसने नीचे कूदने का निर्णय कर लिया....

मोक्सालसर- तैयार reh..mai कूद रहा हूँ.....

अक्षांत- तू चिंता मत kar..aur चुनौती को भी भूल जा ताकि तेरा दिमाग खुल सके और कूद जा....

एक लम्बी सांस खींच मोकलसर ने अपने हाथ की गिरफ्त टहनी से कमज़ोर की hi थी की तभी.......

SHAILA'S रूम:-

गुड़िया.............

शैला जो पलटी hi thi,wo ये आवाज़ सुनकर चौंक गयी और जैसे hi वो palti,toh नुस्के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा....

इस वक़्त उसके पितः उसके सामने मुस्कुराते हुए खड़े उससे देख रहे थे...

शैला झट से आगे बढ़ी ताकि अपने पितः को गले लगा सके पर उसके साथ भी वही हुआ जो रोनित के साथ हुआ tha....uske हाथ उसके पितः के आर पार हो गए जिससे वो निराश हो गयी.......

S/DAD- निराश मत हो gudiya....tu अभी मुझे नहीं छू पा रही hai,par अगर तू चाहे तोह आगे चलकर ज़रूर छू पाएगी.....

शैला- मई समझी नहीं बाबा....

S/DAD-matlab मई पुराण जीवित हो सकता हूँ पर तभी जब तू चाहे....!!!!

अपने पिता की बात सुनकर शैला शॉकेड भी हुई और खुश भी...

SHAILA-kya आप सच कह रहे हैं pitaji??????agar ये संभव है तोह मई कुछ भी कर जाउंगी आपको पुनः जीवित करने के लिए.....

शैला की बात सुनकर उसके पितः मुस्कुरा दिए.....

S/DAD-iske लिए तुझे कोई बड़ा काम करने की ज़रुरत नहीं hai...bas तू इस चुनौती को भूल जा.....

शैला- मतलब????

S/DAD- वो देख...

ये कहकर शैला के डैड ने एक तरफ पॉइंट किया और जैसे hi शैला की नज़र उस तरफ गयी तोह वो शॉकेड हो गयी...

उसके डैड के पॉइंट किये हुए जगह पर एक दरवाज़ा बना हुआ था जिसके दूसरी तरफ इस मायावी जगह का एग्जिट था....

शैला- वो दरवाज़ा!!!!

S/DAD-mujhe वापस ज़िंदा करने की चाबी है....

शैला की बात को उसके डैड ने पूरा किया पर शैला को अब भी कुछ समझ नहीं आ रहा था और इसीलिए.......

S/DAD-tujhe उस दरवाज़े से होकर दूसरी तरफ जाना hoga...aisa करते hi ये मायावी जगह तुझे खुश हो जायेगी और बदले में मेरी आत्मा तुझे सौंप देगी जिससे मई फिर से जीवित हो सकूंगा....

शैला की बात सुनकर शैला की ख़ुशी का ठिकाना ना रहा....

SHAILA-kya ऐसा सच में हो सकता है पिताजी????

S/DAD-bilkul हो सकता hai...ab विलम्ब मत कर और चल....

ये कह शैला के पिताजी आगे आगे चलने लगे और उनके पीछे पीछे शैला चल पड़ी....

शैला चलते हुए दरवाज़े के नज़दीक पहुँच चुकी थी और उसने उससे पार करने के लिए अपना एक पेअर भी आगे बढ़ा दिया था पर तभी............

DHANUR'S रूम:-

इनमे से किसी को भी मेरी आवाज़ सुनाई नहीं दे रही है.......

जो सीन्स मेरे चारों दोस्तों के रूम में चल रहे the,wo धनुर देख रहे थे और लगातार कुछ न कुछ बोले भी जा रहे थे पर उनकी आवाज़ उन चारों को सुनाई नहीं दे रही थी जिससे धनुर समझ गए थे की इस मायावी जगह ने उनकी आवाज़ को ब्लॉक कर दिया है....

वो चुप चाप दृश्य देखने के अलावा और कुछ नहीं सकते थे......

आल फोर रूम्स:-

चुनौती को भूल जा................

रोनित और शैला जिन्होंने अपने अपने कदम हवा में उठा लिए थे दरवाज़े को क्रॉस करने के लिए....

अक्षांत जिसने अपने आप को पुल्ल किया हुआ था झटके से छलांग लगाने के लिए और मोकलसर जिसने अपने हाथ ढीले छोड़ने शुरू कर दिए थे अक्षांत के ऊपर गिरने के लिए........

ठीक उसी वक़्त मेरे चारों दोस्तों के दिमाग में ये शब्दों की माला जो उनके पार्टनर्स ने कही thi,strike हुई और अगले hi पल......

रोनित और शैला ने अपना पेअर वापस खींच liya..AKHSAANT वापस टहनी में नार्मल होकर बैठ गया और मोकलसर ने फिरसे टहनी को मज़बूती से पकड़ लिया....

उन चारों के ऐसा करते hi उनके सामने वाले कुछ कहने के लिए अपना मुँह खोलने hi वाले थे की.....

चारों DOST-ye बस एक भ्रम है और कुछ nahi.....hum अपनी चुनौती छोड़कर नहीं जाएंगे...

अंतिम चुनौती पूर्ण हुई.........

जैसे hi मेरे दोस्तों के मुँह से ये बात ये फिर ये कहूं की उनके फैसले nikle,tabhi ये आवाज़ उनके कानो में गूंज उठी और देखते hi देखते उनके सामने मौजूद माया गायब होने लगी और कुछ hi पलों में वो पूरा िल्लुसिओं ख़त्म हो गया और ऐसा होते hi.......

मेरे दोस्त वापस उसी मैजिकल डायमेंशन में आ गए जहाँ से उन्होंने अपने चुनौतियों की शुरुआत की थी.....

धनुर भी वहीँ खड़े थे.....

एक दूसरे को अपने समक्ष देख मेरे दोस्त खुश हो गए और चारों ने एक ग्रुप हुग किया.....

DHANUR-bohot खूब bacchon,bohot khub.....tum सबने जिस धैर्य से इस अंतिम चुनौती को पार किया है वो nissandeha,taarif के काबिल है......

दुश्मन से लड़ना तोह आसान होता है किन्तु जब मुकाबला अपनों से हो तोह कार्य असंभव जैसा कठिन हो जाता है....

पर तुम सब ने जिस तरह से इस भ्रम को समझा और उससे kaata,usse तुमने साबित कर दिया है की तुम सब अपार शक्तियों को पाने के काबिल हो.......

धनुर की बात सुनकर मेरे चारों दोस्तों ने उनके सामने अपने हाथ जोड़े और....

RONIT-aapke बिना सुझाव और सहायता के हम इन चुनौतियों को कभी पा नहीं कर पाते....

रोनित की बात का बाकी तीनो ने भी समर्थन किया.....

वहीँ धनुर बस मुस्कुरा दिए पर तभी....

शैला- अरे ये क्या हो रहा है????

रोनित- हाँ yaar..kahin कोई नया पन्गा तोह नहीं होने wala????arre ये प्रकाश कैसा????

तोह हुआ ये की अचानक वो जगह जहाँ मेरे दोस्त और धनुर खड़े the,wo हिलने लगी थी...

कुछ देर तक हिलने के बाद उस जगह पर एक तेज़ प्रकाश फ़ैल गया जिससे मेरे दोस्तों की आँखें बंद हो गयी...

कुछ देर तक ऐसा hi रहा पर फिर धीरे धीरे रौशनी काम होने lagi...roshni के काम होने के बाद जैसे hi मेरे दोस्तों ने अपनी आँखें खोली तोह शॉकेड रह गए.....

reason.....is वक़्त वो वहीँ खड़े थे जहाँ से उन्होंने शुरुआत की थी मतलब तालाब के सामने......

RONIT-oye तेरी......

ये शॉक अभी ख़त्म hi नहीं हुआ था की मेरे दोस्तों को दूसरा शॉक लगा.....

reason...mere दोस्तों के दूसरी तरफ इस वक़्त मिर्रोर्स वर्ड के तीनो मिर्रोर्स हवा में खड़े हुए थे.....

उन मिर्रोर्स को अपने सामने देख मेरे दोस्त हड़बड़ा गए थे और इससे पहले की वो कुछ कहते....

MIRRORS-tum सब ने अपनी सभी चुनौतियां सफलता पूर्वक पूरी ki.....isiliye.......

मिर्रोर्स ने आगे कुछ नहीं kaha......balki अगले hi pal,unke अंदर से तीन बीम्स एक साथ निकली और ठीक मेरे दोस्तों के सीने के बीच पड़ी....

ऐसा होते hi मेरे दोस्तों के शरीर हवा में उठने लगे पर तभी......

चार और बीम्स निकली पर ये बीम्स मिर्रोर्स से नहीं बल्कि तालाब से निकली थी...

वो बीम्स भी मेरे दोस्तों के पीठ पर पड़ी और ऐसा होते hi मेरे दोस्तों के शरीर वापस ज़मीं पर आने लगे.....

इस दौरान मेरे दोस्तों की आखें बंद हो गयी थी.....

कुछ देर तक ऐसा होता रहा उसके बाद तालाब की और मिर्रोर्स की बीम एक साथ गायब हो गयी.....

बीम्स की वजह से बोहोत तेज़ रौशनी हो गयी थी इसीलिए मेरे दोस्त दिख नहीं रहे थे पर बीम्स के गायब होते hi वो दिखने लगे और जब धनुर की नज़र मेरे दोस्तों पर गयी तोह उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी....

reason.....mere दोस्तों की आखें तोह इस वक़्त बंद थी पर उनके शरीर बोहोत तेज़ चमक रहे थे....

ये चमक उस ऊर्जा से आ रही थी जो अब मेरे दोस्तों के अंदर थी.....

मेरे दोस्तों के चेहरे की चमक भी अब पहले से 1000 गुना तक बढ़ गयी thi....kuch देर तक यूँही आँख बंद रखने के बाद मेरे दोस्तों की आखें खुल गयी...

अपने शरीर के तेज और अपने अंदर की ऊर्जा को मेरे दोस्त महसूस कर पा रहे थे....

उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे एक बोहोत बड़ी शक्ति का श्रोत उनके अंदर बह रहा है और अगर वो इशारा बस करें तोह वो शक्ति पुरे ब्रम्हांड को हिला सकती है....

अपने अंदर और शरीर में आये इस बदलाव से वो खुश भी थे और हैरान भी.....

कुछ देर तक खुदमे hi खोये रहने के बाद उन सब की नज़र पहले उनके सामने खड़े धनुर पर गयी और फिर मिर्रोर्स पर....

अपनी शक्तियों के बारे में जानने के लिए वो मिर्रोर्स से इसके बारे में पूछने hi वाले थे की........

अरे ये क्या हो रहा है?????

ये बात मेरे चारों दोस्तों के मुँह से एक साथ निकली थी....

reason????kuch hi देर में पता चल जाएगा......

बैक तो हीरो:-

क्या HUA????AAP और प्रयास क्यों नहीं कर रहे मुझे मारने की????

दो प्रयासों के बाद मई अग्रसेन के सामने आराम से खड़ा हो gaya..maine उनपर और कोई वार नहीं किया जिससे देख अग्रसेन ने मुझसे ये सवाल पूछा था....

मई- आप भी तोह ना मुझसे बचने का प्रयास कर रहे हैं और नाही सामने से आक्रमण.....?????!!!!!

AGRASENA-aakraman मई इसीलिए नहीं कर रहा क्यूंकि मई इस लायक nahi...aur खुद का बचाव मई इसीलिए नहीं कर रहा क्यूंकि मुझे इसकी ज़रुरत hi नहीं....

इस तलवार से मई मर नहीं सकता......

MAI-sirf तब तक जब तक मई आप पर इसी तलवार से अगला वार नहीं karta..mere अगले वार से आप बच नहीं पाएंगे.....

मेरी बात सुनकर अग्रसेन के चेहरे पर मुस्कान आ गयी....

अग्रसेन- और क्या मई जान सकता हूँ की ऐसा क्यों????

मई- थोड़ा rukiye..pata चल जाएगा...

ये बोल मैंने अपनी आखें एक बार फिरसे बंद कर li....AGRASENA ने भी इसके बाद मुझसे कुछ नहीं पूछा...

मेरी आँखें कुछ देर तक बंद रही पर तभी........

मेरे चेहरे पर एक मुस्कान नाच गयी और उसके अगले hi पल मेरी आँखें खुल गयी.....

मैंने एक बार अग्रसेन को देखा और.....

मैंने सोर्ड को एक दिशा में फेक diya....SWORD तेज़ी से एक दिशा की तरफ बढ़ gayi.....aage बढ़ते हुए कुछ hi पलों में मेरी सोर्ड अपने मंज़िल की तरफ पहुँच गयी और अगले hi पल.......

अपनी मंज़िल पर पहुँच सोर्ड एक तेज़ रौशनी के गोले में कन्वर्ट हो गयी और उस रौशनी के गोले से 4 तेज़ किरणे निकली और आगे बढ़ गयी और सीधे जाकर अपने अपने टार्गेट्स से टकराई.....

ये टार्गेट्स और कोई नहीं थे थ्री मिर्रोर्स और तालाब थे.......

और यही वो रीज़न था दोस्तों जिसकी वजह से मेरे दोस्त शॉकेड हुए the....MIRRORS और तालाब पर जैसे hi मेरे सोर्ड की रेज़ टच hui,MIRRORS के आकर चेंज होने लगे और साथ hi तालाब की भी.....

जहाँ एक तरफ मिर्रोर्स ऊर्जा में बदल गए वहीँ तालाब धुंए में बदलने लगा और देखते hi देखते वो धुआं मिर्रोर्स की ऊर्जा को खुदमे लपेटने लगा.....

जैसे hi उस धुंए ने ऊर्जा को lapeta,urja को समेटे वो धुआं सीधे मेरे सोर्ड से बानी रौशनी में समां गया और ऐसा होते hi वो रौशनी वापस मेरी सोर्ड में बदल गयी वापस मेरी तरफ तेज़ी से आने लगी.....

जब ये सब हो रहा tha,toh मिरर और तालाब की जगह पर इतनी रौशनी हो गयी थी की मेरे दोस्त और धनुर को अपनी आखें बंद करनी पड़ी थी और जब ये रौशनी घाटी और सभी ने अपनी आखें खोली तोह शॉकेड रह गए....

reason......taalab भी गायब हो चूका था और मिर्रोर्स भी.....

किसी को कुछ भी समझ में नहीं आया की आखिर हुआ तोह हुआ क्या????

वहीँ दूसरी तरफ सोर्ड तेज़ी से मेरी तरफ आ रही थी....

मई- तैयार हैं......

पर मेरी बात अग्रसेन को समझ में नहीं आयी पर इससे पहले की वो कुछ कहते........

खच...........................

मेरी सोर्ड मेरे हाथ में वापस आ चुकी थी और इसीलिए मेरा हाथ एक बार फिर घुमा और अगले hi पल अग्रसेन का सर उनके धड़ से अलग होकर गिर चूका था.....

पर सर के काटने के अगले पल hi वो सर वापस उसके धड़ से जुड़ने को हुआ पर इससे पहले की ऐसा हो पाटा....

मैंने अपनी सोर्ड आगे कर दी और.....

जुगनाती शक्तियम........

इजेक्ट पावर.......

मेरे स्पेल बोलते hi मेरी सोर्ड की नोक तेज़ चमकने लगी और अगले hi पल.....

उसी नोक से दो अलग अलग चीज़ें निकली...

pehli,dhuan जोकि असल में वही मायावी तालाब था और

dusri,white रे जोकि असल में थे थ्री मिर्रोर्स थे....

धुआं जाकर अग्रसेन के धड़ से लिपट गया और रे सीधे जाकर अग्रसेन के सर से जाकर टकराया और ऐसा होते hi.......

बूम

अग्रसेन का धड़ और सर विबरते होने लगे और देखते hi देखते दोनों ब्लास्ट हो गए पर इस बार ब्लास्ट होने के बाद कली परिवर्तन नहीं आया था जिसका मतलब अग्रसेन की शर्त पूरी हुई......

तोह असल बात ये थी दोस्तों की आपको याद होगा की मिर्रोर्स वर्ल्ड अग्रसेन ने सोर्ड की शक्ति से hi बनाया था.....

पर जब मिर्रोर्स वर्ल्ड की स्थापना की गयी थी तब अग्रसेन ने सोर्ड को खुदसे नहीं जोड़ा था......

इसीलिए थे थ्री मिर्रोर्स और तालाब भी अग्रसेन से नहीं जुड़े थे पर वो सोर्ड का hi एक हिस्सा थे....

और जैसे hi मैंने पहली बार सोर्ड का स्पर्श किया tha,toh मुझे उसके बाकी के भागों जोकि तालाब और मिर्रोर्स the,unke बारे में पता चल गया था.....

और साथ hi ये भी पता चल गया था की वो भाग अग्रसेन से नहीं जुड़े hain....kuch डॉ पहले जब मैंने अपनी आखें बंद की थी तोह वो इसीलिए की थी की मई देखना छह रहा था की मेरे दोस्तों की चुनौती कहाँ तक पहुंची थी...

क्यूंकि बिना मेरे दोस्तों की चुनौती पुरे किये मई तालाब और मिर्रोर्स को तलवार से नहीं जोड़ सकता था..

और जैसे hi मेरे दोस्तों की चुनौतियां ख़त्म हुईं और उन्हें शक्तियां mili,maine तालाब और मीरोरस का रूप बदल उनकी शक्तियों को वापस सोर्ड से मिला दिया....

और जैसे hi मैंने सोर्ड से अग्रसेन का सर kaata,maine तालाब और मिर्रोर्स की शक्तियों को उनके दोनों भागों पर छोड़ दिया जिससे उनके सर और शरीर का समूह नाश हो गया.....

जैसे hi अग्रसेन का शरीर ख़त्म hua,mere सामने एक तेज़ रौशनी हुई और उसी रौशनी के बीच एक एंजेल प्रकट हुए.....

MAI-apne पुराने और असली रूप में स्वागत है एंजेल अग्रसेन......

जी हाँ दोस्तों ये एंजेल और कोई नहीं अग्रसेन hi थे जो की इस वक़्त एक एंजेल के स्पिरिट फॉर्म में थे.....

अग्रसेन ने मेरे आगे हाथ जोड़े और....

AGRASENA-mujhe मेरी पहचान वापस दिलाने के लिए शुक्रिया LORD.....jo शरीर मुझे मिला tha,wo बस आपकी अमानत आप तक पहुँचाने के लिए hi था....

मेरे शरीर को ख़त्म कर आपने मुझे मेरे कर्त्तव्य से भी आज़ाद किया hai....ab मई वापस गॉड के पास जा सकता हूँ......

MAI-aapki लगन सराहनीय है AGRASENA....aapki निष्ठा अतुलनीय है....

मेरी बात सुन अग्रसेन ने अपना सर झुका लिया....

MAI-aap जा सकते हैं....

मेरे कहते hi एक बार अग्रसेन मेरे आगे फिरसे झुके और अगले hi पल वो गायब हो चुके the....par तभी.....

मेरे सामने एक तेज़ रौशनी हुई और जब वो रौशनी हटी तोह मेरे सामने ावनतिका कड़ी थी....

मुझे देख वो दौड़ते हुए मेरे पास आयी और मेरे गले लग गयी.....

मई- असली प्राइज तोह अब मिला......

मेरी बात सुन अवंतिका मुस्कुराते हुए मुझसे अलग हुई.....

अवंतिका- चलें....

MAI-ek आखरी काम बचा hai..wo karlen,fir चलते हैं.........

अवंतिका आँखों में सवाल लिए मुझे देखने lagi...maine कुछ कहा नहीं बस अवंतिका से थोड़ा दूर हैट गया और अगलेही पल........

MAI-baahar आओ........

मैंने अपने सीने पर हाथ रख कहा और मेरे ऐसा बोलते hi.....

मेरे सीने के बीच एक तेज़ रौशनी हुई और तभी....

मेरी बुक मेरे अंदर से बाहर आ gayi...baahar आकर बुक मेरे सामने रूक गयी और अगले hi पल उसने खुदको खोल दिया....

बुक के खुलते hi मेरी स्पीयर उससे निकलकर बाहर आ गयी जिससे मैंने पकड़ लिया....

पर मेरे हाथों में आते hi स्पीयर फिरसे वैसे hi विबरते होने लगी जैसे उस दिन हुई थी जब उसपर उसकी शक्ति का आधा हिस्सा मतलब डायमंड्स लगे the....(update 79)

ऐसी hi कुछ विब्रेशन्स मेरे दूसरे जात में पकडे सोर्ड से भी हो रहे थे जैसा की मैंने कुछ देर पहले बताया था....

पर मई जानता था की ऐसा क्यों हो रहा hai...SPEAR के विबरते होनी की वजह थी उसकी एक्सेस पावर इंस्ताबिलिटी..

डायमंड्स के स्पीयर से अलग होने से पहले जो उनमे सजाकियाँ थी वो अलग होने के बाद सारे सोरेरेर्स की शक्तियों को सोख सोख कर और बढ़ गयी थी और जब वो डायमंड्स नुमा शक्तियां वापस स्पीयर से जुड़े तोह उनकी शक्तियां पहले से कहीं ज़्यादा थी जिसकी वजह से स्पीयर उन्स्तब्ले हो गयी थी....

वहीँ दूसरी तरफ सोर्ड के विबरते होने की वजह लेस्स पावर कोन्सुम्प्शन था.....

जैसा की मैंने बताया था की सोर्ड की शक्ति का भाग मिर्रोर्स और तालाब में था पर उनके अलग होने की वजह से वो पावर बात गौए था और अब जब वो दोनों पावर्स पूरी तरह ख़त्म हो चुकी हैं तोह उन्ही पावर्स के आभाव की वजह से सोर्ड विबरते हो रही थी.....

पर मुझे इन दोनों की स्टेबिलिटी का इलाज मालुम था और इसीलिए......

शक्ति कजातं....

ज्वाइन पावर.....

मैंने सोर्ड और स्पीयर दोनों को हवा में उछाल दिया और इस स्पेल को उच्चारित किया और अगले hi पल....

स्पीयर और सोर्ड एक दुआरे से टकरा गए और ऐसा होते hi हर तरफ तेज़ रौशनी फैले गयी और जब रौशनी घाटी तोह स्पीयर गायब हो चुकी थी या फिर ये कहूं की उसने अपना रूप बदल लिया था....

स्पीयर के गायन होते hi सोर्ड नेरे हाथ में आ gayi...ab सोर्ड बिलकुल विबरते नहीं कर रही थी....

मैंने सोर्ड को देखा जिसके बीचो बीच मेरे स्पीयर का नोशन तेज़ चमक रहा था जिसका मतलब था की स्पीयर ने खुदको और खुदकी शक्तियों को सोर्ड को सौंप दिया था..

मैंने सोर्ड को आगे kiyq..mere ऐसा करते hi सोर्ड मेरी बुक में चली गयी और अगले hi पल मेरी बुक वापस मेरे अंदर जा चुकी थी....

अपना काम ख़त्म कर जब mai.palta तोह अवंतिका को मुझे मुस्कुराकर देखते पाया.....

मई- कोई सवाल है????

अवंतिका ने वैसे hi मुस्कुराते हुए ना में अपना सर हिला diya....uske ऐसा करने पर मई muskurays..aage बढ़ इसका माथा चुम....

MAI-ab चलें!!!!

ऐस बार भी अवंतिका ने कुछ कहा नहीं बस हाँ में अपना सर हिला दिया...

मैंने अवंतिका का हाथ थामा और अगले hi पल हम दोनों गायब हो चुके थे....

अवंतिका- अरे हम यहाँ kaise????aur ये तोह!!!!!

MAI-wahi दो तलवार है जो उस वक़्त भी तंगी हुई थी जब हम चक्रव्यूह में घुसने वाले थे...

अवंतिका की बात मैंने पूरी ki....darasal गायब होकर मई अवंतिका को लेकर उसी दीवाल के सामने पहुंचा जिसके आगे के दरवाज़े से होकर हम दोनों ास्मोडियस के चक्रव्यूह में ग़ुस्से थे...

अवंतिका- यहाँ तोह अभी भी दो दो सोर्ड हैं पर असली सोर्ड तोह तुम्हे मिल गयी naa.fir भी कैसे???

मई- वो इसीलिए क्यूंकि जो 2 स्वोर्ड्स तंगी hain,wo दोनों hi नकली हैं....

अवंतिका- व्हाट???

मई- hmmmm..isiliye मैंने कहा था की कोई भी दरवाज़ा चुन लो....

AVANTIKA-ohh......

मई- मैंने सोचा जब यहाँ के सभी सवालों के जवाब मिल चुके hain,toh इस माया के बारे में भी पता होना चाहिए इसीलिए तुम्हे पहले यहाँ लेकर आया...

अवंतिका मेरी बात सुनकर मुस्कुरा di....mai एक बार फिरसे अवंतिका को लेकर गायब हो गया.....

बैक तो फ्रेंड्स:-

RONIT-yaar ये मिर्रोर्स और तालाब कहाँ गए????

SHAILA-shayad उनके काम ख़त्म हो गए थे इसीलिए गायब हो गए.....

अक्षांत- हाँ ऐसा हो सकता है....!!!!

या फिर नहीं भी हो सकता है....

ये आवाज़ मेरे दोस्तों के पीछे से आयी thi..awaaz सुन जब सब पालते तोह सामने वालों को देख खुश हो गए....

RONIT-V.J,AVNI,humne कर दिखाया....

ये बोल रोनित और बाकी के तीनो आगे बढे और मुझे और अवंतिका के साथ मिलकर सभी ने एक ग्रुप हुग किया.....

सभी के बॉडी बोहोत ग्लो कर रहे थे जिससे देखकर.....

अवंतिका- ये तुम चारों की बॉडी इतनी चमक क्यों रही है????

AKSHAANT-shaayad शक्ति और ऊर्जा की वजह se..par ऐसा तोह हम सभी के सामने नहीं जा सकते ना....

रोनित- bhai,mujhe तोह कुछ ज़्यादा hi ऊर्जा और शक्ति महसूस हो रही hai...mai कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा हूँ....

मैंने कुछ नहीं कहा और बारी बारी सबके सर पर हाथ रखा.....

मेरे ऐसा करते hi सभी के बॉडी की चमक और उनके अंदर की ऊर्जा का प्रभाव काम हो गया...

देखते hi देखते चारों पहले की तरह नार्मल दिखने लगे...

मई- shakti,urja तोह तुम सब को मिल गयी पर उससे कण्ट्रोल करने का हुनर सीखना अभी बाकी hai....thoda वक़्त lagega,tab तक अपने दिमाग को सयामीत और कण्ट्रोल में रखो..

जितना ज़्यादा एक्ससिटेड और उत्तेजित hoge,utna ज़्यादा तुम्हारी ऊर्जा और शक्ति तुमपर हावी होगी....

मेरी बात सुन सभी ने हाँ में अपना सर हिलाया....

MAI-DHANUR,aapne मेरे दोस्तों का जो मार्गदर्शन kiya,uski लिए मई दिल से आपको धन्यवाद कहता हूँ.....

DHANUR-aisa बोलकर मुझे पाप का भागीदार मत बनाइये LORD...kisi भी तरह आपके काम aana,ye मेरे लिए सौभाग्य की बात है....

और वैसे भी मई आपके मित्रों के युद्ध कौशल से बोहोत प्रभावित हुआ हूँ और इसीलिए मई इन सब को कुछ देना चाहता hun..agar आपकी इजाज़त हो तोह....!!!!

मैंने हाँ में अपने सर को हलकी सी जुम्बिश दी.....

धनुर ने अपना हाथ आगे किया और अगले hi पल उनके हाथों में एक धनुष आ गया.....

उस धनुष को उन्होंने रोनित की तरफ बादः दिया जिससे रोनित ने ख़ुशी ख़ुशी ले लिया...

इसी तरह धनुर ने और तीन धनुष प्रकट किये और मेरे बाकी के तीन दोस्तों को दे दिए....

धनुर- ये कोई आम धनुष नहीं hai....isse चलने के लिए तीर की ज़रुरत नहीं पड़ती...

बस प्रत्यंचा चढ़ाओ और छोड़ do....teer अपने आप प्रकट होकर अपने मंज़िल की तरफ बढ़ जाएगा....

इस धनसह से निकला हुआ हर तीर काली और सफ़ेद शक्ति के हर अस्त्र को काट सकता hai....aur इससे साथ लेकर चलने की आवश्यकता भी नहीं है....

जब भी इससे स्मरण करोगे ये प्रकट हो जायेगी और इस्तेमाल के बाद गायब......

धनुर की बात सुन मेरे दोस्त बेहद खुश हो गए...

उन्होंने अपने अपने धनुष को देख मन में गायब होने को कहा और अगले hi पल धनुष गायब हो चुकी थी.....

DHANUR-LORD,mera यहाँ का कार्य समाप्त hua....aage के लिए अब आप hi मेरा मेरा मार्गदर्शन करें...

मैंने कुछ कहा नहीं बस अपना हाथ आगे कर diya.....mere हाथ से एक तेज़ रौशनी निकली और धनुर में समां गयी.....

अब धनुर को भी अपने अंदर बोहोत शकतोयों का आभास हो रहा था...

MAI-ye शक्तियां आपका इनाम भी हैं और आपका हक़ bhi...is ब्रम्हांड में जितने भी वाइट एनर्जी वाले गृह hain,wahan के हर jaadugar,har योद्धा को और निखारने की ज़िम्मेदारी आपकी है...

साथ hi उन ग्रहों पर वाइट एनर्जी का hi वास rahe,iska भी आप hi ध्यान रखेंगे...

और मई जानता हूँ की आप ये कर्त्तव्य बखूबी निभा सकते hain....aap इसी शान से अपनी यात्रा आरम्भ करें....

मेरी बात सुन धनुर अपने पहले अपने घुटनो पर आये और फिर अगले hi पल गायब हो गए.....

रोनित- तोह अब!!!!!

मई- अब कुछ दिन तक तुम सब अपनी अपनी शक्तियों को कण्ट्रोल karna,sayammit करना sikhoge.....aur उसके बाद......

शैला- उसके बाद?????

MAI-SHADOW वर्ल्ड........

आज के लिए इतना HI......

आपका अपना V...J......
 
थैंक्स 4 सुच लवली वर्ड्स ब्रोठेर्स... बरोथेर, जो भी नाम आप पढ़ रहे hain,unme.ae ज़्यादातर सच के नेगेटिव चरक्टेर्स से लिए गए हैं.

जैसे हमारे इंडिया में रावण और महिसासुर थे वैसे hi किसी दूसरे देश की धार्मिक मान्यताओं और उनके वहां के धार्मिक कथाओं के नेगेटिव किरदारों में से hi ास्मोडियस और बिल्जेबब नाम लिए गए hain...saath hi अलेसेन्द्र, क्रूसेडर, ASHLEY,SOLOMON,MADDOX,SEBASTIAN,ALFRICK,CECILIA,ye सारे नाम भी रोमन स्पिरिचुअल किताबों के पौराणिक कहानियों से लिए गए हैं...

वहीँ भुविका का नाम अन्सिएंट हिंदी से लिया गया hai...jisme भुविका का मतब स्वर्ग होता है...

मैंने पहले hi कहा था बरोथेर की कुछ भी यूँही नहीं hai...bhale hi कहानी काल्पनिक है पर इसमें उसे हुए हर चीज़ पर मैंने सर खपाया hai....saath बने रहिये.....
 
बरोथेर, मेरी हेल्थ को कुछ नहीं हुआ h,family में किसी की डेथ हो गयी ह....

Brother,ek रिक्वेस्ट ह की प्लीज कहानी के चरक्टेर्स पर या उन चरक्टेर्स के एक्सिस्टेंस ता नॉन एक्सिस्टेंस पर रिक्वेस्ट्स मत कीजियेगा क्यूंकि जो भी हुआ है और जो होगा, वो मैंने लिहते लिखते नहीं सोचा है...

स्टोरी के हर मोड़ को मैंने पहले से सोचा हुआ hai..kuch नया लिखकर मई उससे चेंज नहीं करूँगा..

फ्यूचर में अगर मैंने इस कहानी की एंडिंग नेगेटिव भी रखने की सोची hogi,aur ये किसी को पसंद नहीं भी होगी तोह भी मई अपने थॉट को चेंज नहीं करूंगा.....

आप सब को इस कहानी के किसी न किसी किरदार से लगाव ह. पर मैंने तोह इस कहानी के हर किरदार को बनाया ह और उनके साथ साथ उनके करैक्टर को जिया भी ह..

मेरे लिए हर करैक्टर एक्वाली इम्पोर्टेन्ट h..par हर किरदार का एक रोले ह और जब तक वो रोले ज़न्दा ,करैक्टर ज़िंदा h.jis सोच के साथ मैंने इस कहानी को लिखना शुरू किया hai,ussi सोच के साथ इससे ख़त्म भी करूँगा...

आप बस पढ़ें और मज़ा लें....
 
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