Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 55 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

तमाम हजरात और पाठक मंडली को इस कहानी के 1500 पेज और 1 करोड़ व्यूज होने की दिली मुबारक एवं बधाईयां






आप सभी भाइयों के प्रेम और समर्थन का तहे दिल से धन्यवाद

अपडेट 45

पोस्टेड ों पेज no. 1503
 
💥 अध्याय 02💥

UPDATE 045

MEGA


प्रतापपुर

लगातार एक बार खुली छत और दो बार अपनी लाडली बेटी की चूत में झड़ने के बाद बनवारी थोड़ा आराम फरमा रहा था

इस बात से बेखबर कि उसकी लाडली बेटी के चूत की गर्मी अभी तक कम नहीं हुई है और वो अपने बहनोई के साथ दो राउंड चुदने के बाद अगले राउंड की तैयारी में लग गई थी

बनवारी की आंखे खुली तो उसे बिस्तर पर अपने बगल में कुछ हलचल सी महसूस हुई

घूम कर देखा तो आंखे बड़ी हो गई

बगल में उसके रंगी बराबर में बिस्तर के हेडबोर्ड से टेक लेकर पैर खोलकर लेटा हुआ था और पैरों के दूसरी तरफ रज्जो पूरी नंगी होकर घुटने बल झुकी हुई रंगी का लंड चूस रही थी






बनवारी भी नंगा ही सोया था और ये नजारा देखते ही उसके लंड में हरकत होने लगी

: ओह्ह्ह्ह जीजी आपके होठों में तो जादू है , थोड़ा सा गिला करती है और ये तन जाता है सीई उफ्फफ

तभी रंगी की नजर बनवारी के तने हुए लंड पर गई और उसने घूम कर बनवारी की ओर देखा , जो एक टक रज्जो को उसका लंड चूसते निहार रहा था

: अरे बाउजी उठ गए आप ? लग रहा है अच्छी नीद आई आपको

: अह हा जमाई बाबू , नीद बहुत सुंदर थी ( बनवारी ने रज्जो को देखते हुए कहा)

: अब देखिए न जीजी को सच में इतना पसंद है लंड से खेलना कि वो छोड़ ही नहीं रही है

: खेलने दीजिए न जमाई बाबू , रज्जो को ऐसे देखना अच्छा लग रहा है ( बनवारी ने कहा और फिर अपना लंड पकड़ सहलाने लगा )

: नहीं नहीं ऐसे नहीं, बिना आपके इस खेल में मजा नहीं आएगा । जीजी आप बीच में आ जाइए

रंगी के इतना कहने की देरी थी कि रज्जो उठ कर बीच में आ गई और दोनों का लंड पकड़ सहलाने लगी

: ओह्ह्ह बेटी तेरे हाथ बड़े मुलायम है उम्ममम

: सच कहा बाउजी , जीजी तो पूरी मलाई है मलाई

रज्जो रंगी की बात पर मुस्कुराई और झुक कर बनवारी का सुपाड़ा मुंह में ले लिया और बनवारी आंखे बंद कर अपने टांगों को टाइट करने लगा, पूरे जिस्म में उसके अकड़न होने लगी

: उफ्फ मेरी लाडली बेटी सीईईई कितनी रसीली जुबान है तेरी एक पल में लंड टाइट कर देती है तू उफ्फ

: सिर्फ जुबान ही नहीं बाउजी , जीजी के छेद भी बड़े रसीले है उफ्फफ जीजी आराम से ओह्ह्ह्ह सीई बाउजी एक काम करेंगे ( रंगी ने सिसक कर कहा )

: हा जमाई बाबू कहिए न

: जीजी कबसे मुझसे कह रही है कि पीछे उनके कुलबुलाहट हो रही है जरा मदद करेंगे उनकी , आलस से बदन पूरा जम सा गया है बिस्तर में

रंगी का इशारा बनवारी समझ गया कि वो वापस से खेल शुरू कर रहा है और बनवारी उठ गया और रज्जो जो आगे झुक कर हवा में अपने चूतड़ों को लहराते हुए रंगी का लंड चूस रही थी पीछे से बनवारी उसकी दोनों छेद को देख कर ललच उठा

उसने अपना लंड सहलाया और मुंह में लार घुलाने लगा और थोड़ी लार जीभ से अपनी उंगलियों पर लेकर उन्हें सीधा रज्जो के गाड़ के छेद पर लीपने लगा

रज्जो मचल उठी , उसके कमर में हरकत हुई

: ज्यादा सूखा है क्या बाउजी पीछे

: अह हा जमाई बाबू , लगता है अंदर तक फैला कर गिला करना पड़ेगा

इतना बोलकर बनवारी ने रज्जो के चूतड़ों को फैलाते हुए उसके गाड़ के सुराख को जीभ से कुरेदने लगा और रज्जो मचल उठी

: अह्ह्ह्ह सीईईईईई बाउजी उम्ममम

: उफ्फ जीजी उनको उनका काम करने दो आप अपना करो , ओह्ह्ह्ह ऐसे ही हा चूसो मेरी चुदक्कड जीजी ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बहुत मस्त चुस्ती हो आप

: बाउजी कैसा लग रहा है अपनी बेटी के गाड़ का स्वाद ( रंगी ने सवाल दोहराया बनवारी से )

: बहुत ही रसीली गाड़ है मेरी लाडो के जमाई बाबू , इसको तो सारा दिन चूस चाट सकता हूं उम्मम

इतना बोलकर बनवारी वापस रज्जो की गाड़ में मुंह डाल दिया

: हा लेकिन बाउजी , गाड़ का असल स्वाद तो आपको लंड डाल कर ही मिलेगा

इतना सुनते ही बनवारी का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा और उसने खड़ा होकर मुस्कुरा कर रंगी को देखा और रंगी ने आंख मार कर उसे आगे बढ़ने को कहा

बनवारी ने फटाफट से अपना सुपाड़ा थूक से गिला किया और उसको रज्जो के गाड़ की सुराख पर टिका दिया

रज्जो भी खुद को तैयार करने लगी

बीती रात में खुशबू ने जो उसके गाड़ का हाल किया था और फिर आज रंगी ने भी उसकी गाड़ मार दी थी अब बनवारी का मोटा सुपाड़ा उसके गाड़ के दरवाजे पर दस्तक दे चुका था

: उफ्फ बाउजी आराम से बहुत मोटा है आपका उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह अम्मा हाय दैय्या कितना टाइट जा रहा है ओह्ह्ह्ह

: बस बेटा हो गया हो गया सीईईई ओह्ह्ह बेटी मेरी सोना तेरी गाड़ तो बड़ी टाइट है और कितनी गर्म है अंदर इसमें तो लोहा भी पिघल जाए






: रंडियों की गाड़ ऐसी ही होती है बाउजी ( रंगी मुस्कुरा कर बोला )

: ओह्ह्ह्ह जमाई बाबू सच कहा ,मेरी रज्जो की गाड़ , रंडियों की चूत सी गर्म है ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह लगता है कमल बाबू खूब पेलते है तेरी गाड़ को ,बोल न बेटी

: ओह्ह्ह्ह हा बाउजी रमन के पापा तो दीवाने है मेरी गाड़ के , उनका बस चले तो पूरा दिन मेरी गाड़ मारे ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बाउजी बहुत टाइट है आपका लंड ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह ऐसे ही पेलीये ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: ले मेरी चुदक्कड रानी ले और ले उम्मम तेरी गाड़ जितनी टाइट है उतनी लचीली भी उफ्फ कितना जल्दी सूख रही है ओह्ह्ह्ह लंड तो चिपक जा रहा है ओह्ह्ह्ह

: बाउजी अगर सूख रहा हो तो 2 3 बार जीजी के बुर में डिप करके वापस डालिए

रंगी के इतना कहते ही मानो बनवारी के अंदर नया रोमांच उठ गया हो और उसने अपना लंड गाड़ से बाहर निकाल कर रज्जो की बुर ने पेल दिया

: ओह्ह्ह्ह सीईईई बाउजी ये क्या कर रहे है आप उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई

रज्जो को जैसे ही बुर में लंड मिला वो पागल सी होने लगी और वही बनवारी ने 4 5 शॉट चूत में लगा कर रज्जो की बुर के रस से नहाए लंड को वापस उसकी गाड़ में पेल दिया






: ओह्ह्ह जमाई बाबू क्या मस्त आइडिया दिया है आपने , सच में गाड़ फिर से रसीली हो गई ओह्ह्ह्ह इतना मजा रहा है रज्जो की गाड़ में ओह्ह्ह्ह बेटी ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह ले मेरी चुदक्कड रानी आज तेरी गाड़ भी फाड़ दूंगा ओह्ह्ह्ह गाड़ क्या तेरी चूत भी फाडूंगा मेरी रंडी बिटिया ओह्ह्ह्ह

बनवारी ने वापस लंड गाड़ से निकाल कर रज्जो की बुर में डाल दिया और पेलने लगा

रज्जो अपने दोनों छेद में लंड अंदर बाहर महसूस कर रही थी और उसकी खुजली इतनी बढ़ने लगी कि जब वो झड़ने के पास होती बनवारी चूत से लंड निकाल कर गाड़ में घुसा देता था

: ओह्ह्ह्ह बाउजी किसी एक में करो न , मेरी बुर भी बहुत खुजा रही है

: फिर तो मै तेरी गाड़ ही चोदूंगा बेटी ओह्ह्ह्ह सीईईई कितना रस है इनके ओह्ह्ह लग रहा है कुंवारी चूत पेल रहा हूं अपनी लाडली बेटी की ओह्ह्ह्ह मेरी जान ओह्ह्ह

: और मेरी चूत का क्या ?

: मै हूं न जीजी ... बाउजी एक मिनट ( रंगी बोला और बनवारी थम गया )

: क्या हुआ जमाई बाबू

: मेरे पास एक आइडिया है इससे जीजी के बुर को भी राहत रहेगी और आप उनकी गाड़ भी चोद लेंगे

: वो कैसे जमाई बाबू ( बनवारी ने पूछा)

: हा !! कैसे ? ( रज्जो ने भी तड़प कर कहा )

: बताता हूं आप मेरे ऊपर आकर बैठ जाइए

रज्जो समझ गई कि अब उसे एक साथ दो लंड का मजा मिलने वाला है और वो रंगी के कहे अनुसार उसके लंड पर बैठ गई

: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई जमाई बाबू आपका लंड मेरी बच्चेदानी तक जा रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम ( रज्जो रंगी के लंड पर बैठे हुए उछलने लगी )

: ओह्ह्ह्ह जीजी रुकिए न थोड़ा अभी आपको दुगना मजा मिलेगा ( रंगी ने रज्जो के कूल्हे पकड़ कर उसे रोकने कहा और फिर उसे अपने ऊपर खींच लिया) देखिए बाउजी जीजी का छेद दिख रहा है क्या

बनवारी ने अपना लंड थाम कर रज्जो के फैले हुए चूतड़ों के दरारों में उसकी सुराख देखी

: हा जमाई दिख रहा है

: ठीक है फिर ऊपर आ जाइए और डालिए

: क्या एक साथ दो दो लंड , बेटी तुझे दिक्कत तो नहीं होगी

: बाउजी करिए न , दिक्कत होगी तो निकाल देना ओह्ह्ह्ह बस डाल दो उम्मम समझो ये भी मेरा एक सपना था दोनों छेद में एक साथ लंड लेने का

रज्जो की बात सुनकर बनवारी एक सिहर उठा और उसके वापस अपना सुपाड़ा गिला कर रज्जो की गाड़ पर लंड टिका कर चढ़ गया और गापुक कर रज्जो की गाड़ में उसका सुपाड़ा घुस गया

: ओह्ह्ह्ह बेटी तो और टाइट है ऐसे उफ्फ

: उम्मम हा बाउजी दोनो छेद में बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह सीई लेकिन बहुत अच्छा लग रहा है भरा भरा सा

: बाउजी अब शुरू कीजिए आप ऊपर से ( इतना बोलकर रंगी ने नीचे से अपना लंड रज्जो की बुर में पेलने लगा )

बनवारी को रंगी के लंड की हरकत अपने लंड की निचली नसों पर महसूस होने लगी और उसने भी लंड आगे पीछे करने लगा






: ओह्ह्ह्ह जमाई बाबू ये तो जन्नत का सुख है ओह्ह्ह्ह सीई उम्मम रज्जो की गाड़ बहुत कस गई है

: ओह्ह्ह्ह सीईईई हा बाबूजी ऐसे चोदो मुझे उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम जमाई बाबू की तरह कस कस के पेलो न उम्मम ओह्ह्ह्ह ( रज्जो सिसक कर बोली )

: उफ्फ मेरी लाडो तू तो सच में बड़ी चुक्कड़ औरत है रे ओह्ह्ह्ह सीईईई अब तुझे बताता हूं कि तुझ जैसी रांड को कैसे पेलते है ओह्ह्ह्ह ले और ले मेरी रंडी बिटिया ओह्ह्ह्ह और अंदर तक ले उम्मम( बनवारी रज्जो की गाड़ पकड़ कर खूब हुमुच हुमुच कर पेलने लगा

: ओह्ह्ह्ह हा बाउजी ऐसे ही ओह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है पेलो ऐसे ही और तेज ओह्ह्ह्ह सीई जमाई बाबू उम्मम आप भी अपनी स्पीड बढ़ाओ न आयेगा मेरा ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

रज्जो के कहने की देरी थी कि रंगी ने नीचे से अपने कूल्हे उठा कर तेजी से उसकी बुर में लंड पेलने लगा

: ले मेरी रंडी तुझे देता हूं लंड ओह्ह्ह्ह आज तेरी चूत की चटनी बना दूंगा ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

: अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह हा जमाई बाबू और तेज और और फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बाउजी आ रहा है मेरा ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह रुकना मत कोई पेलो राजा ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई

रज्जो तेजी से झड़ने लगी और उसने अपनी बुर और गाड़ दोनों के छल्ले कस लिए नतीजा दोनों ससुर दामाद के लंड पर जबजस्त जोर पड़ने लगा

: ओह्ह्ह्ह बेटी मै भी आने वाला हूं

: हा बाउजी मेरा भी होगा

: अंदर नहीं अंदर नहीं मुझे मुंह में चाहिए

: ओह्ह्ह मेरी रंडी बिटिया ऐसे मत बोल नहीं तो हो जाएगा मेरा , आजा जल्दी से

इतना कह कर बनवारी पीछे हो गया और अपना सुपाड़ा कस कर पकड़ लिया

रज्जो भी फौरन उठी और बिस्तर पर घुटने के बल बैठ गई , रंगी भी फुर्ती से उठ कर खड़ा हो गया

: ओह्ह्ह्ह मेरी सेक्सी जीजी लो मेरी रंडी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह हा बेटी ले मुंह खोल अपना उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह आज तो तुझे अपने बीज से नहला दूंगा






दोनों ससुर दामाद चिंघाड़ते हुए अपना सुपाड़े से पिचकारी रज्जो के मुंह और छातियों पर गिराने लगे और रज्जो का पूरा चेहरा रंगी और बनवारी के वीर्य से सन गया

झड़ने के बाद रज्जो ने दोनों के लंड को पकड़ कर अच्छे से चूस कर साफ किया

: उफ्फफ बाउजी जीजी के आगे तो रंडिया भी फेल है

: सच कहा जमाई बाबू आपने

थोड़ी देर बाद रज्जो उठी और बाहर जाने लगी

: क्या हुआ बेटी कहा जा रही है ?

: मुझे सुसु लगी है बाउजी

: पेशाब तो मुझे भी लगी है बेटा ( बनवारी बोला )

: हा बाउजी मुझे भी महसूस हो रही है कबसे , लेकिन चुदाई के नशे में सब शांत पड़ गया था , अब तनाव हो रहा है

: तो क्या कपड़े पहना जाए या ऐसे ही हाहाहा ( बनवारी हस कर बोला )

: बाउजी रुकिए मै बाहर देखती हूं , वैसे भी कोई है नहीं आ जाइए आप लोग भी ( रज्जो ने मुस्कुरा कर कहा )

फिर तीनों कमरे से बाहर निकल कर पूरे बरामदे में नंगे चलने लगे

रज्जो आगे आगे तेजी से अपने नंगे चूतड़ों को हिलाते हुए चल रही थी और उसके नंगे चूतड़ों की थिरकन देख कर दोनों का लंड वापस बड़ा होने लगा

दोनों ससुर दामाद में आपस में देख कर मुस्कुराया कि आखिरकार उन्होंने अपने सपने को हकीकत में बदल ही लिया

इधर रज्जो को प्रेशर तेज था और वो तेजी से पीछे से आंगन में जाकर खुले में ही जीने के पास बैठ गई

तेज मोटी धार और सिटी बजा कर जब उसने हाथ आगे बढ़ा कर टोटी चालू की तो पानी गायब

: क्या हुआ बेटी

: बाउजी लग रहा है पानी नहीं है ( रज्जो बोली )

: तो क्या हुआ हमारे पास तो है न ?( रंगी तपाक से बोला)

: मतलब ? ( बनवारी थोड़ा सोचा)

: जीजी आप थोड़ा हमारी ओर घूम जाइए

रज्जो वैसे ही हो गई और नीचे बैठी रही , वही बनवारी सोचने लगा कि आगे का होने वाला है

: बाउजी शुरू करिए एक साथ

इतना कहना था कि रंगी ने अपने लंड से धार छोड़ने लगा और पेशाब की तेज गर्म धार चटचटा कर सीधे रज्जो के मुंह पर गई ,






ये देख कर बनवारी चौक गया और रंगी के दुबारा इशारा करते ही उसने भी अपनी धार छोड़नी शुरू कर दी

: ओह्ह्ह्ह बाउजी जमाई बाबू ये सब उम्ममम रुकिए न ( रज्जो खुद को संभालने के लिए हाथ ऊपर किए लेकिन उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो पीछे गिर गई फर्श पर और अब दोनों ससुर दामाद का पेशाब उसके पूरे बदन पर जाने लगा )






: उफ्फफ जमाई बाबू आपकी हरकते लंड टाइट कर देती है ( बनवारी रज्जो के चूचों ऊपर हलका होता हुआ बोला )

: अरे बाउजी रंडियों को वीर्य और मूत दोनों से नहलाते है ओह्ह्ह्ह रज्जो जीजी का बदन देखो कैसे चमक रहा है ओह्ह्ह्ह

: सच कहा जमाई बाबू , रज्जो का देह पहले से ज्यादा खिल रहा है

रज्जो वैसे ही लेटी रही और अंत तक दोनों ससुर दामाद ने रज्जो के पूरे बदन को पेशाब से गिला करते रहे

आखिरकार दोनों ससुर दामाद ने रज्जो को अपने पेशाब से नहला दिया और जैसे ही उनका पेशाब खत्म हुआ एकदम से बिजली आई और पानी का मोटर चलने लगा ।

दोनों हस पड़े कि क्या संजोग था

अमर के घर

इधर नीचे ममता के कमरे में जब ये सब हो रहा था तो वही ऊपर मदन मौका पाकर मंजू को लेकर ऊपर पीछे वाली बाल्कनी में चला गया था, इस चालाकी में कि ममता अगर खोजती है आए भी तो मिले न

लेकिन इस बात से बेखबर था कि ऊपर अपने कमरे में कोई और भी बेचैन हो रहा था

सोनल फ्रेश होने के बाद अपने कमरे में मोबाइल चला रही थी और उसे अमन का ख्याल आया

दो से तीन बार उसने अमन को कॉल किया लेकिन अमन ने कॉल नहीं उठाया

तो उसने तो सोचा क्यों न खुद नीचे जाए और नीचे जाने से पहले सोचा क्यों अपनी नई चाची को भी साथ लिवा ले

उसने मंजू के कमरे का दरवाजा खटखटाया और आवाज दी लेकिन कोई रिस्पोंस नहीं मिला और दरवाजा भिड़का था तो खुल गया

सोनल ने अंदर झांका और बाथरूम में आवाज भी दी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला , उसे लगा कि शायद वो नीचे चली गई होगी तो वो भी जीने की ओर बढ़ने लगी कि तभी उसकी नजर छत की पीछे वाली बाल्कनी के खुले दरवाजे पर गई

" अरे ये कैसे खुला रह गया , बंद कर देती हूं नहीं तो बंदर आ जाएगा ", सोनल खुद से बड़बड़ाई और पीछे वाली बाल्कनी की ओर बढ़ गई उसका दरवाजा लगाने के लिए इस बात से बेखबर कि बालकनी में मदन और मंजू पहले से मौजूद है

करने को तो मदन बालकनी का दरवाजा बंद कर सकता था लेकिन बालकनी का दरवाजा बाहर से बंद करने का ऑप्शन नहीं था ,उसे सिर्फ घर के अंदर से ही बंद किया जा सकता था , इसीलिए मदन ने उसे भिड़का रखा था

सोनल तेजी से चलती हुई दरवाजे तक आई और तभी उसके कानो में कुछ बोल पड़े और वो सन्न रह गई

: सीईईई हा मेरी जान ओह्ह्ह सीई ऐसे ही उम्ममम तेरे होठ कितने रसीले है मंजू ओह्ह्ह्ह

" ये तो चाचा जी की आवाज है ,तो क्या बाहर चाची भी है , लग तो यही रहा है "

: सीई ओह मेरी जान , बाथरूम में जबसे तेरे चूतड़ों का रस चखा है तबसे ये बौखलाया हुआ था

" अरे यार तो क्या सच में ये दोनों पब्लिक बाथरूम में ये सब कर रहे थे हीही चाचा जी भी न , और करेंगे ही मम्मी जी कितना रोकती टोकती है इन्हें हीही"

तभी सोनल को कुछ आहट मिली जीने की ओर और वही दूसरी ओर से मुरारी मदन को आवाज देता हुआ ऊपर आ रहा था ।

सोनल एकदम से सहम गई और एकदम से मुरारी ने उसे बालकनी के दरवाजे के पास खड़ी देखा

: अरे बहु तू वहां

: जी , जी पापा जी वो ये दरवाजा खुला था , वही देखने आई थी

: मदन है क्या उधर ( मुरारी तेज आवाज में बोला )

सोनल का हलक सूखने लगा और इससे ज्यादा तो उन दोनों का जब मंजू और मदन ने मुरारी की तेज आवाज सुनी

: जी , जी नहीं पापा मैने तो नहीं देखा उन्हें ऊपर

: पता नहीं कहा गया ये आदमी ,अच्छा बेटा वो दरवाजा बंद करके तू भी नीचे आ जा । अमन की मां राह देख रही है वो नाउन आ गई है

: जी पापा ( सोनल ने मुरारी के सामने बालकनी का दरवाजा लगा दिया )

इधर मदन और मंजू बाहर लॉक हो गए और दोनों की हालत खराब होने लगी वही जैसे ही मुरारी जीने की ओर मुड़ा,सोनल ने फुर्ती से तेजी से दरवाजे की सिटकनी खोलकर बिना उस ओर देखे उल्टे पाव जीने से नीचे चली गई ।

वही मंजू और मदन वहां से निकलना ही सही समझे । मंजू अपने कमरे में और मदन नीचे चला गया ।

मंजू शर्म के मारे सोनल का सामना नहीं करना चाहती थी इसीलिए वो नीचे नहीं आई और वही नीचे हाल में ममता ,अमन मुरारी और सोनल बैठे हुए थे

थोड़ी देर में मदन नीचे आया तो मुरारी ने उसे डांट लगाई । लेकिन मदन बस नजरे चुराते हुए सोनल को देखा जो उससे नजरे फेरने की कोशिश कर रही थी ।

मदन के आते ही सोनल ने अपनी जगह से उठ गई और किचन में सबके लिए चाय बनाने लगी

शाम तक शादी की चर्चाएं और मदन ने कार्ड वाला काम निपटा लिया।

डिनर की तैयारियों के साथ अगले रोज कौन किसको कार्ड देने जाएगा इसकी तैयारी होने लगी

मेहमानों की संख्या सीमित होने वाली थी तो लिस्ट बनने लगी

मुरारी ने जंगीलाल के घर पर कार्ड पहुंचाने के लिए मदन को जिम्मेदारी दे दी , वही ममता ने कहा कि वो खुद सोनल के मायके यानी रंगी के यहां कार्ड लेकर जाएगी ।

चूंकि शादी को सीमित ही रखना था इसीलिए मुरारी ने तय कर रखा था ममता के मायके के तरफ से लोगों को न्योता नहीं दिया जाएगा ।

: लेकिन अमन के पापा , दुलारी बहु ने बहुत हाथ बटाया था अमन के ब्याह में

: अरे तो क्या हुआ , इस बार बहु है और फिर जंगी भाई भी तो सह परिवार आयेंगे । मुझे नहीं लगता कि कोई काम रुकेगा , क्यों बहु ( मुरारी ने सोनल को शामिल किया चर्चा में )

: अह अगर प्रोग्राम सीमित है तो जितने कम लोग रहेंगे काम भी कम ही रहेगा पापा जी , बाकी किसी को बुरा न लगे कि उन्हें बुलाया नहीं ।

: नहीं बुरा लगने वाली बात नहीं है बहु , अब तू कह रही है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है । ( ममता निश्चिंत होकर बोली ) आप उतने ही लोग रखिए

तो मुख्य मेहमानों , अब अमन की बुआ, सोनल और निशा की फैमिली आ रही थी । बाकी जो थे वो आस पास के मुरारी के खास लोगों की लिस्ट थी ।

धीरे धीरे ममता और मंजू किचन में चली गई

मदन थोड़ा दूसरे काम निपटा रहा था फोन पर बात करके , जिससे मुरारी को अपने बेटे के साथ प्राइवेसी नहीं मिल रही ।

तो उसने अमन को ममता के कमरे में चलने का इशारा किया और अमन बाथरूम के बहाने निकल गया

: अरे छोटे सुन ( मुरारी ने मदन को धीरे से अपने पास बुलाया )

: जी भइया ( मदन सोफे पर सरक कर उसके करीब हुआ )

: क्या हुआ वो वीडियो डाउनलोड की तूने ? ( मुरारी ने मुस्कुरा कर पूछा )

: कहा भइया? नेट इतना स्लो चल रहा है नीचे , ऊपर गया था तो आपने बुला लिया

: ओह सॉरी भाई ( मुरारी को याद आया कि उसने तो खामखां मदन को डांट दिया था ) अभी डिनर रेडी हो रहा है तो तू ऊपर ही चला जा और 3 4 वीडियो डाउनलोड कर ले

मुरारी आंखों में चमक लिए बोला और मदन मुस्कुरा कर ओके कहा और तेजी से सीढ़ियां फांदता हुआ टैरिस पर चला गया ।

इधर मुरारी भी मौका पाकर अमन के पास चला गया

दोनों के दुसरे को देख कर मुस्कुरा और फिर मुरारी ने हंसते हुए बाहें फैलाया और अमन ने भी खुश होकर उसे गले लगाया , दोनों उस मार्मेंट को सेलिब्रेट कर रहे थे जब उन्होंने मिल कर ममता की गाड़ को नहलाया था

: सच कहूं पापा बहुत मजा आ गया था , उम्मीद नहीं थी कि मम्मी की गाड़ छूने को और फिर उनसे लंड चुसवाने को मिलेगा सीईईई ओह्ह्ह फिर से मेरा टाइट हो रहा है हीही

: सच कहा बेटा , तेरी मां चीज ही ऐसी है जितनी बातें करो उसके बारे लंड उतना ही अकड़ता है ओह्ह्ह , अब आगे क्या सोचा है

: मै क्या सोचूं आप बताओ न , रात में फिर से मालिश कर दी जाए मम्मी की हीही ( अमन उत्साह में बोला )

: अरे नहीं पागल , अभी खाने के बाद तो तू बहु के पास चला जाएगा और तेरी मां , तेरी चाची को बुला लेगी ।

: तो फिर ?

: जो करना है डिनर से पहले करना पड़ेगा

इधर मुरारी और अमन अपनी योजना बना रहे थे तो वही किचन में सोनल ने ममता को चुपके से दिखाया कि अमन को मोबाइल उसके ले लिया है अपने पास

ये देख कर ममता का दिल खुश हो गया कि अब जरूर उसे दोनों बाप बेटे का असली खेल पता चलेगा

तभी अमन अचानक से आ जाता है और अपनी मां को आवाज देता है , ममता फौरन सोनल को मोबाइल छुपाने का इशारा करती है

: हा क्या हुआ ? ( ममता बोली और उसकी नजर सीधे अमन के लोअर में बने लंड के उभार पर गई )

: वो पापा आपको बुला रहे है ?

ममता को कुछ शंका हुई , कही ऐसा तो नहीं कि अमन और मुरारी में कुछ डील हुई हो और मुझे कमरे में बुला कर अमन सोनल के साथ ... फिर तो सोनल मोबाइल चेक नहीं कर पाएगी

: अच्छा क्या हुआ बोल न ( ममता उसके पास चल कर गई )

: आप जाओ न पापा बुला रहे है ( अमन मुस्कुरा कर बोला और ममता को अपने भीतर हुई आशंका सही लगने लगी )

: ठीक है तू भी चल मेरे साथ

इतना बोलकर ममता उसे भी अपने साथ ले कर चल दी

किचन में अब मंजू और सोनल थे

मंजू शांत थी सोनल के सामने , और सोनल भी असहज हो रही थी ,अमन का मोबाइल खोलने में , पता नहीं क्या खुल जाए

इसीलिए उसने बाथरूम जाने का बोलकर ऊपर अपने कमरे में चली गई

वही दूसरी ओर ममता कमरे में गई

: क्या हुआ जी क्या बात है ? क्यों बुलाया मुझे ?

: अरे अमन की मां तुम्हे जरा भी अपना ख्याल है या नहीं ... बेटा जरा दरवाजा लगा

उसने अमन को कहा और अमन ने दरवाजा बंद कर दिया

: क्या हुआ बात क्या है ?

: मैने क्या बोला था तुम्हे अमन की मां , की ठकुराइन से बात चित हो जाए तो तुम आराम करना और तुम किचन में काम कर रही हो

: अरे मै ठीक हूं आप लोग भी न ( ममता समझ गई कि दोनों बाप बेटे अब खेल खेलना चाहते है उसके साथ , उसने सोनल को जो काम सौंपा था उसके लिए अमन यही कमरे में उलझा रहे जो जरूरी था और सोनल को कितना टाइट मिले अमन के मोबाइल के साथ उतना ही अच्छा था )

: देखो अमन की मां , मै जानता हूं तू किसी को अपने लिए भी परेशान नहीं करना चाहती, लेकिन फिर भी हमारी तसल्ली के लिए हमे एक बार चेक कर लेने दे

: हीही आप लोग भी न , ठीक हैं देख लो , लेकिन आप नहीं , अमन तू ?

: क्या ? मै क्यों ? ( अमन ने चौक कर कहा )

: कितना भोला है तू , इतना कुछ हुआ तेरे सामने और तुझे पता नहीं क्यों मै तेरे पापा को रोक रही हूं , ये फिर से बहक जाएंगे ( ममता ने हस कर कहा )

: हा भाई जा तू ही देख ( मुरारी ने भी हस कर कहा )

इधर ममता ने झट से अपनी नाइटी ऊपर कर झुक गई और उसके बड़े बड़े भड़कीले हौद जैसे चूतड़ नंगे हो गई

ममता की दोनों टांगे आपस में सटी हुई थी और उसके बड़े से पहाड़ जैसे ऊंचे उठे चूतड़ों की दरार भी एकदम चिपकी हुई थी ।

जिन्हें देख कर दोनों बाप बेटे का लंड फिर से ठुमके लगाने लगा

: क्या हुआ बेटा दिखा , अब ठीक है न ( ममता झुके हुए बोली )

अमन करीब आया और अपने हाथों से उसके गुलगुले चूतड़ों को सहलाने लगा

: मम्मी आप पैर फोल्ड करके बिस्तर पर झुक जाओ , जब ये वाले जगह खुलेगी तो अच्छे से दिखेगा ( अमन ने उंगलियों से उसके चूतड़ों के दरारों को छूता हुआ बोला और ममता पूरी सिहर गई अपने बेटे के स्पर्श से )

फिर ममता आगे बढ़ कर बिस्तर के किनारे पर गई अपनी नाइटी उठा कर अपने घुटने फोल्ड एक आगे झुक गई और उसकी बड़ी ही गाड़ फेल गई , पहाड़ जैसे चूतड़ दोनों दरखतो में बट गए और उसकी गुलाबी सुराख फिर दिखने लगी , साथ में उसकी चूत की रसीली फांके भी ।






जिन्हें देख कर दोनों बाप बेटे में मुंह में पानी आने लगा

अमन चल कर ममता के पास गया और मुरारी उसके बगल के खड़ा हो गया दोनों बाप बेटे में एक दूसरे को देख कर मुस्कुराए

: क्या हुआ बेटा , सब ठीक है न अब

अमन ने अपनी मां के चूतड़ पर बेझिझक हाथ फिराया और उसके दरारों को फैलाया , ममता पूरी सिहर गई अमन की ठंडी उंगलियों के स्पर्श से

: सीईईई आह बेटा क्या कर रहा है

: बस चेक कर रहा हूं मम्मी ( अमन अपना चेहरा झुक कर अपनी मां के चूतड़ों के करीब ले जाकर बोला और नथुनों में एक लंबी गहरी भरी और उसके मा के चूतड़ों की मादक गंध उसके नथुने में भरने लगी ये देख कर मुरारी अपना लंड मिजने लगा )

: कैसा है अब बेटा , कुछ ठीक हुआ है

: हा मम्मी थोड़ा बहुत रह गया है अभी , थोड़ा रुखा रुखा सा लग रहा है यहां ( अमन ने उंगलियों से उसके दरारों के सिरों पर सहला कर बोला और उसकी जीभ ललचा कर लगातार लार छोड़ रही थी )

: सीईईई ओह तो क्या फिर से उस का लेप लगाना पड़ेगा बेटा उम्मम ( ममता अमन के उंगलियों को अपने गाड़ के सुराख के पास रेंगता महसूस कर बोली )

अमन कुछ और योजना गढ़ रहा था

: आह नहीं मम्मी अब ज्यादातर सही हो गया है ये तो इससे भी सही हो जाएगा मेरे ख्याल से

( इतना बोलकर अमन ने उंगली में लार लेकर ममता ने गाड़ के दरार के ऊपर लगाने लगा और वो ठंडा गीजगीजा सा अहसास पाकर ममता गिनगिना उठी )

: उम्मम क्या लगा रहा है बेटा

: एक बार थूक लगा कर देख रहा हूं मम्मी , मेरे ख्याल से सही जायेगा इससे ही

: उम्मम ठीक है बेटा जैसा तुझे सही लगे

ममता बस सिसक कर रह गई और वही मुरारी अपना लंड पकड़ कर पजामे के ऊपर से सहलाने लगा

अमन जान रहा था कि अब खेल खुला हुआ है तो अगर वो थोड़ी बहुत मनमानी करेगा तो उसके पापा है ही

उसने

2 3 बार उसने अपनी मां के दरारों पर थूक की लेप लगाई फिर ढेर सारी थूक जीभ पर लेकर उसके गाड़ के दरारों के जीभ फिराया और ये अहसास पाते ही ममता गिनगिना उठी






: ये क्या कर रहा है पागल सीईईई ओह्ह्ह जीभ से क्यों चाट रहा है उम्मम बेटा मत कर ऐसा

: करने दो न अमन की मां , अच्छे से थूक लग जाएगी , हा अच्छे से अंदर तक गिला कर दे

: उम्ममम सीई ओह्ह्ह्ह क्या आप भी उम्ममम ओह्ह्ह बेटा वहा नहीं उफ्फफ उम्ममम

: क्या हुआ अमन की मां ( मुरारी अपना मूसल मिजता हुआ बोला )

: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह अमन के पापा कैसे बताऊं उम्मम रुक जा बेटा मै ओह्ह्ह्ह सीईईई मत कर मुझे कुछ हो रहा है नीचे ओह्ह्ह्ह पागल जीभ से मेरी गाड़ के छेद को चाट रहा है ओह्ह्ह्ह रोकिए न उसे अमन के पापा

: क्या सच में अमन !!! बेटा क्या तू सच में

: उम्मम हा पापा वहा भी थोड़ा रुखा रुखा सा था तो , सॉरी मम्मी ( अमन अपना मुंह पीछे करता हुआ बोला )

: कोई बात नहीं बेटा , अच्छे से कर दिया न अंदर ( मुरारी हलक से थूक गटकता हुआ बोला )

: नहीं पापा जगह इतनी नीचे है जीभ अच्छे से पहुंच नहीं पा रही थी , मेरा तो जबड़ा दर्द होने लगा ( अमन अपने गालों की एक्सरसाइज करता है बोला )

: अच्छा हट मै देखता हूं

: सीईईई क्या नहीं रहने दो न अमन के पापा ओह्ह्ह ( ममता ने उसे रोकना चाहा लेकिन मुरारी तब तक झुक कर ममता के चूतड़ों में अपना मुंह दे चुका था ) ओह्ह्ह्ह सीईईई अमन के पापा आपकी जीभ उम्मम बड़ी खुरदरी सी ओह्ह्ह सीईईई मम्मीइई ओह्ह्ह्ह उम्ममम क्यों तंग कर रहे हो मेरे राजा सीईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम






ममता के सिसकियों का अंदाज बदलने लगा था , मुरारी पूरे जोश में उसकी सुराख को चाट रहा था

: उम्ममम सीईईई रुक जाओ न सीई ओह्ह्ह मत करो मेरे नीचे सीईईई कुलबुलाहट सी हो रही है अह्ह्ह्ह अमन के पापा मान जाइए न

: क्या हुआ मम्मी ( अमन अपना लंड लोअर के ऊपर से रगड़ता हुआ बोला )

: उफ्फ बेटा रोक इन्हें , मै खुद को सम्भाल नहीं पाऊंगी सीईईई ओह्ह्ह आगे भी खुजलाहट सी हो रही है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह नहींईई अमन के पापा नीचे नहीं ओह्ह्ह्ह सीईईई दैय्या ओह्ह्ह उम्ममम ufffff मेरे राजा ओह्ह्ह उम्ममम आपकी जीभ ओह्ह्ह

ममता की पीठ अकड़ गई और उसने बिस्तर अपने मुठियो में कस लिया, उसकी चूतड़ और हवा में उठने लगी , मुरारी भी जगह बड़ी होती देख अपनी थूथ को उसके भोसड़े पर रगड़ने लगा

: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा सीईईई मै पागल हो जाऊंगी उम्मम सीईईई चाट लो उम्मम खा जाओ मेरी चूत को उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह

ममता अब खुल कर मजे लेने लगी थी और अमन अपने पापा मम्मी का खेल देख कर अपना लंड मसल रहा था

: उफ्फ मेरी जान तेरी चूत कितना रस छोड़ रही है उम्मम

: तो पी जाओ न मेरे राजा ओह्ह्ह्ह सीई आपकी जीभ अंदर नाच रही है ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

मुरारी का जोश ममता के कहे अलफाजों के साथ और बढ़ने लगा और उसने ममता को एक तरफ धकेलते हुए घुमा दिया और उसकी जांघों को फैलाते हुए बिस्तर के किराने घुटनों के बल होकर अपनी थूथ उसके चूत पर खुलेआम अमन के सामने रख दिया

: सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह ( ममता की नजर सामने मुरारी के पीछे खड़े अमन पर गई जो लगातार ललचाई नजरो से उसकी चूत देख कर अपना लंड लोअर के ऊपर से सहला रहा था , ये देख कर ममता और सिहर उठी )






इधर मुरारी की मोटी जीभ ममता के रसीले फांकों में नाच रही थी और ममता उसका सर पकड़ कर अपने बुर पर रगड़ रही थी , उसके कूल्हे हवा में थे

: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा खा जाओ ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम ओह्ह्ह्ह डाल दो न घुसा दो अब ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम पेल दो न राजा मेरे ओह्ह्ह्ह

ममता की तेज सिसकियों और लंड की मांग पर मुरारी उसकी बुर को चूसते हुए ही अपना पजामा खोलने लगा और तेजी से खड़ा होकर फुर्ती से अपना लंड हिलाने लगा

दोनों ने तो जैसे अमन को भुला ही दिया था

ममता मुरारी को रुका हुआ देख कर गर्दन उठा कर बोली

: क्या हुआ

: मेरी जान लंड पूरा सूखा है

: तो खड़े क्या हो मेरे पास आओ न ( ममता ने उसे अपनी ओर बुलाया और कोहनी के बल एक तरफ होकर उसका लंड पकड़ कर मुंह में ले लिया )

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान उम्मम क्या जादू है तेरे होठों में उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ऐसे ही मेरी रानी चूस ले ओह्ह्ह्ह

मुरारी ममता के बालों को उसके चेहरे से हटा कर उसके सर को सहलाने लगा

ममता पूरी मूड में थी और वही सामने अमन अपना लंड हिला रहा था लोअर में

ममता में लंड की तलब बढ़ रही थी , वो बड़े चाव से मुरारी का लंड चूस रही थी साथ ही अपने चूचे सहला रही थी नाइटी के ऊपर से और कोशिश कर रही थी कि उसके हाथ उसके बड़े से उभरे हुए पेट के दूसरी तरफ उसकी फूली हुई चूत तक चले जाए

मुरारी की नजर पड़ी : क्या हुआ मेरी जान अब भी चूत खुजा रही है क्या

: हा मेरे राजा बहुत ( एक पल के लिए ममता ने लंड निकाला और मुंह में रख लिया)






: बस मेरी जान थोड़ा और चूस दे फिर मै ओह्ह्ह्ह सीईईई ऐसे ही ओह्ह्ह मेरी रानी उम्मम ( तभी मुरारी की नजर अमन की पर गई जो अपना लंड बाहर निकाल कर एक टक अपनी मां के बुर को बिहार रहा था और हिला रहा था ) बेटा अमन तब तू मेरी मां की बुर को देख लेगा , देख सूख तो नहीं रही

इतना बोल कर मुरारी ने ममता के सर को अपने लंड पर दबा दिया और लंड उसके गले में जाने लगा

ममता अमन को रोकने के लिए छटपटाई लेकिन अमन ये मौका नहीं छोड़ने वाला था और वो लपक कर घुटने के बल होकर अपने मा की विशाल गदराई जांघों को सहलाते हुए अपने नथुनों को उसके बुर की फांकों के पास ले गया और फिर जीभ फिराई

ममता मुरारी का लंड मुंह में लिए हुए ही अकड़ने लगी और अमन ने उसकी जांघों को पकड़ लिया और उसकी फांकों को चूसने लगा

ममता ने जोर देखकर मुरारी का लंड अपने मुंह से निकाला और तेज सिसकी लेते हुए बोली: सीई ओह्ह्ह्ह ये आप क्या करवा रहे है अपने बेटे से रोकिए उसे ओह्ह्ह्ह नहीं अमन बेटा रुक जा ओह्ह्ह तेजी जीभ अंदर ओह्ह्ह्ह नहीं .... रोकिए न आप उसे मै झड़ जाऊंगी उसके मुंह पर ओह्ह्ह बेटा ओह्ह्ह्ह नहीइ आह्ह्ह्ह मेरे राजा मेरा आ रहा है ओह्ह्ह्ह अमन मम्ममम ओह्ह्ह्ह

ममता ने अपने पैर अमन के दोनों कंधों पर रख कर जांघों में उसका सर कसने लगी और उसके चूतड़ हवा में उठने लगे और वो झटके खाने लगी






: ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह अमन के पापा आ रहा है मेरा ओह्ह्ह्ह बेटा मेरा तू ओह्ह्ह्ह पी जा उम्ममम अपनी मां की बुर का पानी ओह्ह्ह्ह सीईईह

अमन अपनी मां की बुर से पिघलते लावे का स्वाद लेने लगा और ममता सुस्त पड़ गई

वही अमन अच्छे से उसकी बुर को चाट चाट कर साफ कर रहा था

: थक गई क्या मेरी जान ( मुरारी ने उसके चेहरे के पास अपना लंड सहलाते हुए बोला )

ममता नीचे लेटे हुए मुस्कुराई और उसका लंड पकड़ लिया वही अमन उठ कर खड़े होने लगा और ममता की नजर उसके तने हुए लंड पर गई

: हे भगवान तेरा भी ( ममता मुस्कुरा कर बोली )

: क्या करु मम्मी , आप ऐसे गंदा गंदा बोलोगे तो बड़ा होगा न ये

: तुम दोनों बाप बेटे एक से हो हीही आ इधर पागल

अमन मुस्कुरा कर अपना लंड हिलाता हुए ममता के पास जाने लगा

वही दूसरी ओर छत की टैरिस पर मदन ने सोफिया रोज के 3 4 वीडियो डाउनलोड कर लिए और जीने से नीचे आने लगा कि उसकी नजर सोनल पर गई जो अपने कमरे से निकल रही थी

पोर्न वीडियो देख कर डाउनलोड करने से मदन का लंड अकड़ा हुआ था और वो भूल गया था कि उसका कुर्ता पजामे में सही से सेट नहीं है ।

जिससे एकाएक सोनल की नजर उसके अस्त व्यस्त हुए पजामे पर गई , जिसमें उसका बेलन जैसा नुकीला सुपाड़ा टैंट बनाए हुए था ।

जैसे ही मदन की नजर सोनल से मिली , उसने एक नजर उसके पजामे को वापस देखा और उसकी बेचैनी असहजता बढ़ने लगी वो थम गई

मदन भी एकदम से अपनी बहु को सामने देख कर असहज हो गया , एकदम से उसके जहन में वो ख्याल ताजा हो गए जब उसने सोनल को उसके बारे में कहते सुना था कि बालकनी में कोई नहीं है । कितनी समझदारी दिखाई थी उसने ।

: अरे बहु तू , अह नीचे जा रही है

: जी चाचा जी ( सोनल एक फीकी मुस्कुराहट से अपने साड़ी का पल्लू सही करती हुई बोली )

इतना बोल कर वो आगे बढ़ने को हुई कि मदन में भीतर से कुछ उठा और वो उसे बोल पड़ा

: बहु वो मै कह रहा था कि

: जी चाचा जी !!

मदन नजरे चुराने लगा

: वो शाम को जब भइया... वो मै बालकनी में आह हाअहा ( मदन जूठी फीकी मुस्कुराहट जबरन चेहरे पर लाने की कोशिश करने लगा और सोनल भी थोड़ी अटपटी सी स्थिति में मुस्कुराने लगी लेकिन वो अंदर से बड़ी बेचैन सी हो रही थी ) तूने बहुत समझदारी दिखाई , शुक्रिया बेटा

: छोड़िए न चाचा जी , मैने क्या किया ऐसा जो आप मुझे ( सोनल नजरे फेर कर शर्मा रही थी और मदन की नजर उसकी गुदाज गुलाबी कमर पर गई और उसका लंड सांस लेने लगा )

: अह अब तुझसे क्या कहूं , तू मेरी बेटी जैसी है ... लेकिन तू समझ सकती है कि ऐसी स्थितियों में बड़ा भाई सामने आ जाए तो ... (सोनल की बेचैनी बढ़ रही थी जब मदन ऐसी बातों को लंबा खींच रहा था ) .... और एक बात

: जी कहिए

: वो इस बारे में तू मंजू से कुछ बात मत करना , बड़ी शर्मीली है

" दो दिन आए हुए नहीं और लंड चूसने बैठ गई ... बोल रहे है शर्मीली है " , सोनल मन ही मन सोच कर मुस्कुराई और उसकी मुस्कुराहट देख कर मदन को लगा जरूर बहु के मन में कुछ चल रहा है

: अरे तू मुस्कुरा रही है ,सच में मैने ही जिद की थी ( सोनल एकदम से चुप सी हो गई ) तूने तो देखा ही है भाभी कितनी रोक टोक करती है मुझे ... कुछ भी अच्छे से हो नहीं पाता

मदन अपनी व्यथा गाने लगा और उसका लंड और अकड़ने लगा


वही सोनल को मदन की बातों से लगने लगा कि जरूर मदन कुछ उससे कहना चाहता है लेकिन असहज हो रहा है , और असल बात न करके बार बार समस्याओं पर घूम कर रह जा रहा है

: चाचा जी साफ साफ कहिए न ,सॉरी लेकिन आप वही बातें दोहरा रहे है ( सोनल ने साफ लहजे में कहा )

मदन को कुछ उम्मीद नजर आने लगी

: देख बहु तू मेरी बेटी जैसी है और मेरी व्यथा अच्छे से समझ रही है इसीलिए मुझे तो बस अब तुझसे ही थोड़ी उम्मीद है

: मै क्या कर कसती हूं आपके लिए ( एक पल को सोनल के मन में निशा की कही बात चलने लगी कि कही ठरकी बूढ़ा उसके चक्कर में तो नहीं है या निशा के बारे में कुछ बोलेगा )

: तू बस थोड़े समय के लिए अपना कमरा दे दिया कर

: क्या ?

: हा बहु , भाभी का नेचर जानती ही है तू , वो मंजू को मेरे कमरे और उसके कमरे में खोजेगी लेकिन तेरे कमरे में उनका ध्यान नहीं जाएगा और शायद फिर मेरा कुछ हो जाए । देख बहु मना मत करना ... एक दो दिनों के मेहमान आ जाएंगे और फिर मुश्किल बढ़ेगी ही मेरी

सोनल को मदन की कामोत्तेजना पर दया भी आ रही थी और हंसी भी , वही उसके लिए ये सब मैनेज करना बड़ा कठिन लग रहा है ,

: जी ठीक है ( सोनल सोचती हूं हल्के से बोली ) लेकिन ....

: अरे वाह फिर जा जल्दी से तेरी चाची को किचन से भेज दे ऊपर

: क्या ? ( सोनल चौकी और मदन की ओर मुड़ी ) मतलब अभी ?

: हा बहु, नीचे भैया और अमन भाभी के कमरे में व्यस्त है ( सोनल ने जैसे ही अमन की बात सुनी वो समझ गई कि उसकी सास ने जरूर अमन को अपने पास फंसा रखा होगा ताकि उसे समय मिले मोबाइल चेक करने का ) और डिनर के बाद मंजू भाभी के साथ सोने चली जाएगी

सोनल ने एक नजर मदन को देखा और फिर पजामे ने तने हुए उसके लंड को , वो मुस्कुराई : ठीक है आप मेरे कमरे में जाइए मै भेजती हूं चाची को

इतना बोलकर कर सोनल मुस्कुराने लगी और जीने से नीचे आ गई किचन में

किचन में मंजू अकेली थी और रोटियां बना रही थी और सोनल उसके पास गई , उसे समझ नहीं आ रहा था कैसे पहल करे ।

आखिर 2 मिनट की चुप्पी के पास उसने एक गहरी सास ली और मंजू के हाथ से बेलन ले लिया

: अरे बहु करने दे न

: उन्हूं रहने दीजिए मै करती हूं और आप ऊपर जाइए चाचा जी बुला रहे है ( सोनल ने मुस्कुरा कर कहा और मंजू शर्म से लाल हो गई )

: धत्त , क्या तू भी अब मजे ले रही है मेरा , दुपहर वाली बात का

: नहीं यार चाची सच में , जाओ न मम्मी जी और आपके बाबू और पापाजी सब लोग कमरे में बिजी है , जाओ न आप पहले ( सोनल ने मस्ती के उसको पकड़ कर किचन से बाहर करने लगी )

: क्या बहु ये तू ... अब मुझे शर्मिंदा मत कर ( मंजू का चेहरा उदास होने लगा ) छत पर जो हुआ , मै तो मना कर रही थी लेकिन वो ही नहीं मान रहे थे

: हा तो मना क्यों करना , आप दोनों प्यार करते हो ( सोनल ने उसे समझाया ) जल्दी करो ज्यादा देर तक मेरा रूम खाली नहीं होगा

: तेरे रूम में ? ( मंजू ने आंखे बड़ी कर सोनल को मुस्कुराते देखा )

: अब जाओ जल्दी हीही

सोनल ने जबरन उसे सीढ़ियों से ऊपर जाने के लिए धकेल दिया , मंजू थोड़ी असहज होकर ऊपर चली गई और वही सोनल की नजर किचन पर गई जहां तवे पर रखी रोटी जलने लगी थी

वो भागती हुई गई और रोटी बनाने लगी जल्द ही उसका काम खत्म हुआ और उसके भीतर बेचैनी बढ़ने लगी , कि उसके कमरे में क्या चल रहा होगा , तकरीबन 10 12 मिनट हो गए थे मंजू को गए ऊपर

सोनल के अंदर अजीब सी चूल मची थी लेकिन उसे अपनी सास और अमन का भी डर था

उसने सोचा क्यों न थोड़ा ऊपर का जायजा ले ही लिया जाए

वो तेजी से ऊपर गई और फिर दबे पाव बिना पायलों की खनक आए धीरे धीरे बिल्लियों वाली चाल से अपने कमरे के पास गई

कमरा अंदर से बंद और वो दरवाजे से कान लगाने लगी

शायद मदन दरवाजे के पास ही खड़ा होकर शुरू हो गया था इसीलिए उसकी और मंजू की सिसकिया साफ आ रही थी

: उफ्फफ सीईईई ओह्ह्ह आराम से मेरी जान ओह्ह्ह्ह उम्ममम कैसे भूखे शेर की तरह नोच रहे हो इन्हें उम्ममम

: सीईईई ओह मेरी रानी तेरे ये दूध कितने मुलायम और बड़े है उम्मम कितना रसीला लग रहा है इन्हें चूसना मसलना .... इनमें अभी भी सालों पहले वाला ही रस है उम्मम

सोनल मदन की बातें सुन कर आंखे बड़ी कर ली उसको हंसी आ रही थी कि शुरू से ही दोनों लैला मजनू इस खेल का मजा ले चुके है

: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा सीईईई ओह्ह्ह काटो मत उम्मम अह्ह्ह्ह्ह जल्दी करो न कही नीचे आपकी भाभी खोजने लगी तो

: उम्मम मेरी रानी कितनी गर्म हो गई है तू ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह निकाल इसे और बेड पर आजा

: नहीं नहीं बेड पर गई , पागल है आप बहु के बिस्तर पर करना पाप है , यहां आओ न मेरे राजा सोफे पर

: अच्छा लेकिन साड़ी

: उम्हू आप होश से भी काम लो न मेरे राजा ( मंजू ने उसका लंड पकड़ कर उसे अपने करीब किया ) ऐसे आओ न

इतना होकर मंजू अपनी साड़ी उठा कर सोफे पर झुक गई और उसकी गाड़ चूत के फांकों समेत मदन के आगे

: आओ न राजा डाल दो न उम्मम कबसे मेरी बुर बह रही है ओह्ह्ह्ह उम्ममम

" उफ्फ साला इतनी जल्दी इतनी खुल कर बातें , साला मै भी नहीं बोल पाती अपने बाबू से हीही , जाओ न चाचा जी डाल दो न ", सोनल मस्ती में खुद से बड़बड़ाई

वही अंदर मदन अपना सुपाड़ा थूक से गिला कर मंजू के बुर के फांकों पर सेट करता है एक तगड़े झटके से साथ उतार दिया

: अह्ह्ह्ह मम्मीइई मर गई हाय दैय्या कितना मोटा हो गया है आपका ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

मंजू की चीख सुनते ही सोनल की हसी छूट गई : लग रहा है चाची की सील फिर से तोड़ दी चाचा जी ने हीही






: बस बस मेरी रानी हो जाएगा ओह्ह्ह्ह कितनी कसी हुई चूत है तेरी उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह क्या भट्टी जैसी जल रही है अंदर ओह्ह्ह्ह मेरी रानी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह ले मेरी रानी अब तो जगह बना दी उम्ममम कैसा लग रहा है

: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा ओह्ह्ह्ह बहुत अच्छा उम्मम ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह

" फक्क मीईई!!!! इंग्लिश ?? चाची तो बड़ी एडवांस है यार हीही " , दरवाजे पर खड़ी सोनल मंजू के संवाद सुनकर चौकी

: हा मेरी रानी ले ओह्ह्ह और लेह उफ्फ तेरी बुर बड़ी लचीली है मंजू उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ( मदन उसके कूल्हे पकड़ कर तेज लंबे शॉट लगाने लगा )

: आपका लंड भी बहुत लंबा मोटा है मेरे राजा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई फक्क मीईई हार्ड प्लीज़ज्ज्ज फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स यशश्श उम्मम आयेगा मेरा ओह्ह्ह रुकना मत पेलो ओह्ह्ह्ह

मंजू का बढ़ता जोश देख कर मदन भी जोश में आ गया और वो मंजू के कूल्हे पकड़ कर ताबड़तोड़ पेलाई शुरू करने लगा

कमरे में मंजू की चीख यार जांघों के टकराने की आवाजे गूंजने लगी

: ले मेरी रानी और तेज ओह्ह्ह्ह झड़ जा , आजा मेरे लंड पर ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह

: हा मेरे राजा ओह्ह्ह आ रही हूं ओह्ह्ह गॉड फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मेरी जान झड़ रही हूं मै

इधर दोनों की तेज सिसकियों और थपथप की आवाज बाहर आने लगी थी और सोनल की बेचैनी बढ़ने लगी थी

कही कोई सुन न ले और वो दरवाजे से हट कर गलियारे में टहलने लगी

अंदर मंजू मदन के लंड को अपनी बुर में कस कर झड़ रही थी और मदन भी बहुत देर तक खुद को सम्भाल नहीं पाया और झड़ने लगा उसकी बुर में ।

थोड़ी देर बाद मदन ने कमरे का दरवाजा खोला और सामने गलियारे में सोनल को देखा

सोनल की नजर मदन से मिली और वो मुस्कुरा कर नजरे चुराने लगी ।मदन भी थोड़ा असहज हो रहा था

फिर सोनल मदन के सामने से ही बिना कुछ बोले मुस्कुरा कर अपने कमरे में चली गई, मदन चुपचाप नीचे चला गया

वही मंजू बाथरूम से बाहर निकली तो सामने सोनल थी

लाज से उसका चेहरा गुलाबी होने लगा और सोनल बस कमरे का मुआयना कर रही थी

: क्या हुआ?

: कुछ भी तो नहीं ( मंजू ने मुस्कुरा कर कहा )

: ये बिस्तर तो वैसा का वैसा पड़ा है

: हट बेशर्म है बड़ी तू , मै तेरी चाची सास हूं कुछ तो लिहाज कर पागल ( मंजू मुस्कुरा कर बोली )

: अब आप देखो , सहेली बनने में फायदा है या चाची सास बन कर रहने में हीही

मंजू एकदम शर्म से गाढ़ हो गई

: बोलो बोलो ( सोनल ने उसे खोदा )

: उम्मम मुझे मेरी सहेली ज्यादा पसंद है फिर तो हाहाहा

सोनल भी उसके साथ हंसने लगी

फिर सोनल ने एक नजर बाहर देखा और धीरे से उसके कान में बोली : कैसी रही शादी के पहले वाली सुहागरात उम्मम

: हट तू बड़ी बेशर्म है

: अरे सहेली से कैसी शर्म भला , बताओ न चाची

चाची सुनकर मंजू चौकी और फिर हसने लगी

: तू बता , तूने भी तो लव मैरिज की है ... तुझे भी अनुभव होगा ही ( मंजू ने तीर सोनल की ओर घुमाया )

सोनल इस पर खिलखिलाई

: उम्मम इतने भी लकी नहीं थे आपके बाबू , बस एक दो चुम्मीया फिर शादी हीही

: धत्त तू बड़ी नटखट है , वैसे अच्छा लगता है तुझे ऐसे खुश देखकर । घर की रौनक और बढ़ जाती है मेरी लाडो ( मंजू के उसको पास कर उसके गाल चूम लिए )

सोनल थोड़ी सहज होने लगी अपनी तारीफ सुन कर

: और थैंक्यू ( मंजू ने उसका हाथ पकड़ सोनल की आंखों में देखा )

: ये पहली बार था तो कुछ नहीं बोली , आगे से रूम चाहिए तो पैसा लगेगा हीही ( सोनल इतना बोलकर मंजू को छेड़ कर कमरे से भागी )

: क्या बोली, बदमाश लड़की रुक बताती हूं तुझे

मंजू भी हंसते हुए उसे पीछे भागी और दोनों जीने से तेजी से नीचे उतरने लगे और सामने हाल में मदन बैठा हुआ था , उसे देख कर सोनल शांत हो गई और मंजू उसके पीछे आ रही थी हंसती हुई वो भी मदन को देख कर थम सी गई

दोनों को बढ़ती दोस्ती देख कर मदन मन ही मन खुश हुआ


: वैसे ये लोग कमरे में क्या बात कर रहे है कबसे ( मंजू ने पूछा और सोनल थोड़ा हिचकी )

: चलो देख कर आते है हीही

फिर दोनों चल कर ममता के कमरे के दरवाजे पर दस्तक देते है और वही कमरे में घुटने के बल बैठी ममता के दोनों हाथों में उसके पति और बेटे का लंड था और अमन का सुपाड़ा उसने मुंह में भर रखा था






दरवाजे पर दस्तक आते ही तीनो सतर्क हो गए और कमरे में एक तेज हलचल हुई

सबने अपने कपड़े सही किए और ममता ने दरवाजा खोला

एक पल के लिए असहजता दिखी सब में फिर सोनल ने कहा कि खाना तैयार है आ जाए सब लोग

फिर सारे लोग खाने के लिए इकठ्ठा होने लगे ।

जारी रहेगी

( देर सबेर के लिए माफी चाहता हूं , यथा स्थिति से सभी अवगत है । इस कहानी ने अभी अभी एक नया कीर्तिमान छुआ है : 01 करोड़ व्यूज और 1500 पेज । आप सभी का धन्यवाद पढ़िए और इंजॉय कीजिए)
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 46



सांझ हो रही थी और राज अपने टिफिन वाले झोले में काजल भाभी का डिल्डो रखे हुए था

घर न जाकर सीधे उसने काजल भाभी के घर का दरवाजा खटखटाया

थोड़ी देर हुई कि शकुंतला ताई ने दरवाजा खोला और राज को देखते ही मुस्कुराई

: अरे लल्ला तू

: नमस्ते ताई कैसी हो उम्मम ( राज ने शरारती मुस्कराहट से बोला और हंसने लगा )

शकुन्तला मुस्करा कर

: तू तो भूल ही गया है अपनी ताई को , आ अंदर

शकुन्तला ने जगह दी फिर भी राज अपने बदन को उसके देह में रगड़ता हुआ पीछे खड़ा हो गया

: तो अभी यादें ताजा कर देता हूं उम्मम्म

एकदम से राज ने दबोच लिया शकुंतला को गलियारे में

: हट पागल है क्या ,बहु घर में ही है

: तो क्या हुआ , मै डरता थोड़ी हूं उनसे , कहो तो उनके सामने पकड़ लूं आपको ( राज बड़े आत्मविश्वास से बोला , क्योंकि वो जानता था कि दोनों सास पतोह के बीच की गुत्थी

को )

: धत् बदमाश, छोड़ मुझे और बता किस लिए आया है

: उम्हू आपके काम की चीज नहीं है, भाभी का समान है

: अरे क्या है मुझे नहीं दिखाएगा क्या ( वो भी अड़ गई , लेकिन राज अभी इतना जल्दीबाजी में नहीं था उसने वही गलियारे में शकुंतला को पकड़ लिया, नाइटी में उसके मुलायम पेट पर अपना पेट सटा कर उसको दिवाल से चिपका दिया और दोनों हाथ ऊपर कर दिए , नीचे उसका टाइट लण्ड पहले से ही उसकी जांघों के बीच जाने को तैयार था

: सीईईई आह्ह्ह कितनी ताकत रे तुझमें

: उफ्फ ताई तुमने आज ब्रा नहीं पहनी क्या ( राज ने नाइटी के अंदर उसके मोटे रसीले झूलते मम्मे को ऊपर से पकड़ लिया )

: धत् बदमाश इसके अंदर कुछ नहीं पहनते तुझे नहीं पता क्या आह्ह्ह सीईईई बेटा, बहु रसोई में है आज जाएगी उम्मम्म सीई

: कुछ नहीं होगा हम लोग यही खड़े खड़े निपटा लेते है ( राज अपना लण्ड उसकी चूत पर नाइटी के ऊपर से रगड़ने लगा

: उम्मम नहीं तू फिर जल्दी जल्दी अपना काम निपटा कर मुझे परेशान छोड़ जाएगा आह्ह्ह सीईईई

राज जानता था कि भले ना नुकुर कर रही है लेकिन चुद वाना तो चाहती ही है शकुंतला

: ओह्ह्ह्ह ताई आज करने दो मुझे मेरे मन की , किसी रोज तबियत से पेलूंगा तुम्हे उम्मम घूम जाओ

इतना बोलकर राज ने उसे पलट दिया और पीछे से नाइटी उठा दी

शकुन्तला उसके इशारे पर घूम गया , जल्दी ही उसके चूतड़ नंगे थे

: ओह्ह्ह्ह सीईईई ताई तुम्हारी गाड़ उम्मम ( राज ने थोड़ा फैलाया तो आंखे बड़ी , अंदर दरारों में उसने एक butt plug लगा रखा था जिसे राज ने शरारती ढंग से अंदर दबाते हुए उसके कान में बोला ) बड़ी चालाक हो ताई , आज पिछला गेट बंद किया है उम्मम, भाभी को भनक हुई तो उनका सामान इस्तेमाल कर रही हो






इतना बोलकर राज शकुन्तला के दरारों के उंगली करने लगा

: सीई धत् तुझे कैसे पता कि बहु ये सब उम्मम सीईईई ओह्ह्ह्ह बता न बेटा

: वो सब छोड़ो , मै तो ये सोच रहा हूं कि अगर तुम इसे पहन कर घूम रही हो तो भाभी की गाड़ तो खुली होगी

राज ने मस्ती के हंस कर जानबूझ कर शकुंतला को छेड़ा और वो भी चौकी कि राज के इस रूप को देख कर

: उम्मम्म धत् बदमाश है तू सीई क्या पता उसने बड़ा वाला डाल रखा हो उम्मम ओह्ह्ह्ह दबा मत उसे बेटा इससे अच्छा निकाल दे उम्मम सीईईई ओह्ह्ह्ह आराम से लल्ला सीईईई ओह्ह्ह्ह बहुत टाइट है उम्मम्म ओह्ह्ह्ह






राज ने उंगली से पकड़ कर वही गलियारे में शकुंतला के गाड़ से 6 इंच लंबा butt plug निकाला थूक से उंगली गीली कर सीधा उसकी गाड़ के सुराख को लीपने लगा

: वैसे बड़ा वाला तो तुमने ही लगा रखा था उम्मम्म हीही

: आह्ह्ह लल्ला बड़ा ठंडा है उम्मम्म आह बड़ा सुकून है उम्मम ( शकुंतला ने बजाय राज के सवाल का जवाब देने के चुप रहना सही समझा , वो नहीं चाहती थी कि बहु और उसकी कैमेस्ट्री की भनक हो राज को )

: अच्छा ऐसा क्या , फिर रुको और अच्छे से कर देता हूं

इतना बोलकर राज नीचे बैठ गया और उसने शकुन्तला की गाड़ की दरारे पंजों से फाड़ते हुए अपनी जीभ को उसके ढीली सुराख पर चलाने लगा






शकुन्तला मचल उठी और सिसकने लगी , राज बड़ी बेशर्मी से उसकी गाड़ चाट रहा । शकुन्तला की घूंटती मादक सिसकिया गलियारे से हाल में तेज होने लगी और रसोई में काजल को भनक हुई और भाग कर बाहर आई और आंखे फाड़ कर देखने लगी

उसके हलक से थूक सुखने लगा । झट से वो छिप गई और राज की हरकत देखने लगी , उसकी सास दिवाल से मुंह चिपकाए सिसक रही थी और राज लगातार उसके सास की गाड़ चाट रहा था

फिर राज उठा अपना लण्ङ लोअर से बाहर निकाला, ढेर सारा थूक अपने सुपाड़े पर लीपने लगा

काजल की आंखे चमक उठी उसके मोटे लंबे लण्ड को देखकर और देखते ही देखते राज ने अपना लण्ङ वापस से शकुन्तला की गाड़ में उतार दिया और करारे झटके देने ,बिना इस फिकर के घर में काजल भी है

उसने ताबड़तोड़ पिलाई शुरू की

शकुन्तला की मादक सिसकियां से तेज उसके गद्देदार चूतड़ों की थप थप पूरे गलियारे और घर में गूंज रही थी






: ओह्ह्ह्ह सीईईई लल्ला उम्मम सीईईई ओह्ह्ह्ह डाल और तेज उम्मम सीईईई ओह्ह्ह्ह मेरी बुर बह रही है और तेज

: उम्मम ताई तुम्हारी गाड़ बड़ी नरम है ओह्ह्ह्ह मजा आ रहा है ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह्ह कस क्यों रही हो

: मुझे तेरा माल अंदर चाहिए ओह्ह्ह्ह सीईईई बेटा उम्मम कितना फूल रहा है रे तेरा ओह्ह्ह्ह

: उफ्फ ताई तुम तो बड़ी चुक्कड हो , पापा को आने दो फिर तबीयत से चोदूंगा तुम्हे ( राज की मंशा थी कि वो अकेले अच्छे से शकुंतला को भोगेगा लेकिन शकुंतला अपनी वासना के जोश में कुछ और ही बोल गई)

: क्यों बेटा अपने पापा के साथ चोदेगा क्या उम्मम ओह्ह्ह्ह आ रहा है मेरा उम्मम फिर से ( इतना सुनते ही राज का लण्ङ एकदम अकड़ गया और नसे फूल गई, सुपाड़ा पूरा फूल कर लाल होने लगा )

: उम्मम सीईईई ताई तुम सच में रण्डी हो क्या ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह्ह मेरा आ रहा है ताई ओह्ह्ह्ह

लो भर दूंगा आज तुम्हारी गाड़ उम्मम ओह्ह्ह्ह






एक के बाद एक ताबड़तोड़ पिलाई के बाद राज का सुपाड़ा शकुंतला की गाड़ में फूटने लगा और गर्म गर्म वीर्य भरने लगा और राज उसके ऊपर सुस्त होने लगा और शकुन्तला भी हाफ रही थी , इधर झड़ने के बाद राज अपना लण्ङ निकालने को था कि शकुंतला ने उसे रोक दिया

: नहीं अभी नहीं

: क्यों ?

: वो डालने वाला कहा है?

: मेरी जेब में , क्यों ( राज बोला )

: तू लण्ड निकाल कर झट से उसे घुसा देना , नहीं तो सारा माल बाहर आ जाएगा । मुझे ऐसे ही सोना है आज ( शकुंतला ने बड़ी शरारती मुस्कराहट से बोली जिसे सुनकर राज का सुपाड़ा फिर से हरकत करने लगा और, उसने झट से अपना सुपाड़ा खींच कर वापस वो BUTT PLUG घुसेड़ दिया , इस चक्कर में राज के हाथ गंदे हो गए ।

फिर उसने अपना लोअर सही किया और जीने के नीचे बाथरूम में जाकर हाथ धुलने लगा और शकुन्तला अपनी बहु को आवाज देती हुई किचन में चली गई

: बहु !!

: जी मां जी ( काजल रसोई से बोली)

: राज आया है थोड़ी चाय बना दे

राजा बाथरूम में खड़ा होकर अपना हाथ धूल रहा था और उनकी आवाज आ रही थी।

: जी मां जी बनाती हूं

फिर एकदम से चुप्पी हो गई , राज को लगा जरूर उसके बारे में कुछ बात हो रही होगी । जल्दी जल्दी गिले हाथ अपने लोअर में पोंछ कर दबेपाव किचन के पास गया तो आंखे बड़ी हो गई और लण्ड वापस से फूलने लगा ।

सामने किचन स्लैब पर झुकी हुई शकुंतला की नाईटी ऊपर उठी थी और नीचे काजल भाभी बैठी हुई उसके चूतड़ों से बट plug निकाल कर हाथों में ले चुकी थी और दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को फैला कर शकुंतला के गाड़ के छेद से रसाते राज के वीर्य को चाट रही थी।






: कैसा टेस्ट है बहु इसका

: उम्मम्म मां जी बड़ा ही नमकीन है उम्मम सीईईई और अभी तक गर्म है

: मुझे पता था तुझे आह सीईईई पसंद आयेगा उम्मम्म ओह्ह्ह्ह बहु बस कर , वो आता होगा हट अब

शकुन्तला उसे दूर करने लगीं और काजल ने अंत ने उसके गाड़ के सुराख को जीभ से चाट कर उसके नंगे चूतड़ों को अपने पंजे जड़ते हुए खड़ी हो गई और शकुन्तला मुस्करा दी

: धत् तू भी कम नहीं है उससे

: आपकी गाड़ है ही इतनी सेक्सी मां जी हीही

मुंह साफ करते हुए काजल बोली और राज सरक कर बाथरूम की ओर चला गया और फिर उसने चाय पी । काजल भाभी को समान दिया और आंखों ही आंखों में दोनों मुस्कुराए

राज का लण्ङ वापस से तन गया था और झोला देते हुए उनसे इशारे से काजल भाभी को अपने लण्ङ की ओर दिखाया ,तो वो लजा कर मुस्कुराने लगी । शकुन्तला ने सामने होने से कुछ बात नहीं बनी और वो वापस घर लौट आया ।

एक ओर जहां सांझ के पलो में ये सब हो रहा था वही बाजार में राहुल अपने कहे वादे के अनुसार अनुज के लिए मोबाइल का जुगाड लगाने में लग गया , बेटी के घर आने की खुशी में उसका लण्ड उछल रहा था , उसने रोज से पहले दुकान की शटर गिरा दी , शालिनी ने भी निशा के साथ मिलकर जल्दी खाना तैयार कर लिया था

: मम्मी राहुल कहा गया है ?

: वो आ जाएगा बेटा जरा तुम लोग इधर तो आओ , मेरी जान तुम भी ( बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ जंगी अपना लण्ङ सहला कर उन्हें पुकार रहा था )

दोनों मां बेटियां ने मुस्कुरा कर एक दूसरे को देखा और अपने कंधे से नाइटी सरकाती हुई एकदम से नंगी हो गई , शालिनी के कूल्हे पर एक ब्लैक कलर की पैंटी थी और हंसती हुई बिस्तर पर आ गई ,जांगीलाल के पैरों के पास

: उफ्फ मेरी रानी तुम दोनों तो कहर ढा रहे हो आज सीईईई आह्ह्ह बेटा उम्मम तेरे हाथ बड़े ठंडे है उम्मम्म सीई

निशा ने झुक कर अपने पापा का मोटा लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी और शालिनी मुस्कुराती हुई आई और उसके सुपाड़े को जीभ से छेड़ने लगी ,जंगीलाल मचल उठा और उसकी आंखों में देखते हुए शालिनी उसके सुपाड़े पर जीभ नचा कर होठों से उसके टिप को चुभालाया तो जंगी सिसक पड़ा और निशा मुस्कुरा कर अपनी मां की शरारत देखने लगी और अपने पापा का लण्ङ पकड़ कर अपनी मां के मुंह में डालने लगी






शालिनी उसकी आंखों में देखते हुए लण्ड को मुंह में लेकर चूसने लगी

: ओह्ह्ह्ह सीईईई मेरी जान उफ्फ जितना चुसवा लूं तुझसे उतना कम है उम्मम्म ओह्ह्ह्ह सीईईई और लो न मेरी रानी सीईईई उम्मम ऐसे ही ओह्ह्ह्ह बेटी ओह्ह्ह्ह तू तो ऐसे झडा देगी उम्मम्म मुझे ( जंगी सिसकता हुआ निशा को बोला जो उसके लण्ङ की चमड़ी को आगे पीछे कर रही थी )

: मम्मी मुझे भी दो न , आप बॉल्स सक करो हीही

इतना बोलकर निशा ने बिना लण्ङ को हाथ लगाए जंगी के सुपाड़े को मुंह के लिए और और चुभलाने लगी और वही शालिनी अपने पति के अंडे बड़े अंडे जैसे आड़ को मुंह में लेने लगी






जंगी का जिस्म इस दोहरे हमले से अकड़ गया और जांघें तन गई

दोनों मां बेटी मिल कर उसके लण्ङ और आड़ को मुंह में लेकर खींच रही थी और जंगी की नसों में दोहरा दबाव पड़ने लगा था ।

इधर दोनों मां बेटी की बुर की बजबजाने लगी थी , जंगी के लण्ङ को चूसते और गिला करते हुए दोनों के हाथ अपनी अपनी बुर को तेजी से मसल रहे थे , उनके देह एक तेजी सी झलक रही थी

जंगी समझ गया और उठ कर दोनों को अगल बगल सुला कर सीधा शालिनी की झाट भरी बुर में अपना मुंह दे दिया ,






: ओह्ह्ह्ह सीईईई मां उम्मम सीईईई ओह्ह्ह्ह मेरे राजा उम्मम्म सीई चाट लोह खा जाओ उम्मम

जंगी तेजी से उसके बुर के फांकों में जीभ चला रहा था और बीच बीच में उसके फांकों के आस पास बालों की झुरमुट समेत बुर को चूस रहा , खींच रहा था अपने होठों से और शालिनी के चूतड़ टाइट होकर हवा में उठने लगे ,वो अपनी जांघें कसने लगी थी

वही उसके बगल में लेटी उसकी बेटी अपनी बुर तेजी से सहला रही थी और अपनी छातियों को मसल रही थी । उसकी मादक आह सुनकर जंगी ने उसक रुख किया और शालिनी की बुर ने उंगली पेलते हुए मुंह अपने बेटी के चिकनी फांकों पर रख दिया निशा मुंह खोल कर सिसकने लगी






: ओह्ह्ह्ह पापा उम्मम्म अपनी जीभ ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम फक्क मी ओह उम्मम्म चाटो ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम रुकना मत मेरा आयेगा उम्मम्म

जंगीलाल झड़ने का सुनकर और अच्छे से उसके गुलाबी फांकों को मुंह में रख कर चुभलाने लगा और चूसनेगा , जल्द ही उसका मुंह निशा के रस से लिभड़ाने लगा और उसने झटके से निशा की टांग पकड़ कर खींचते हुए उसे घोड़ी बना दिया और अपना सुपाड़ा उसकी चिकनी बुर में लगाते हुए पेलने

कमरे में निशा की सिसकिया उठने लगी और उसके चर्बीदार चूतड़ों पर जंगी के जांघ टकराने लगे।

सामने निशा की मां शालिनी अपनी झुरमुट वाले फांकों को सहला रही थी उसका बदन तप रहा था और बुर रसाने लगी थी , अपने सामने अपने पति से अपनी बेटी को चुदाते देख

: ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम्म ओह्ह्ह्ह पापा फक्कक मीई और तेज उम्मम बहुत मिस किया आपका मोटा लण्ड उम्मम्म ओह्ह्ह्ह पापा और अंदर डालो न सीई ओह्ह्ह्ह फक्क मीईई उम्मम्म मम्मीईई एस






फिर उसकी सिसकियां शालिनी के पेट में गूंजने लगी क्योंकि जंगी ने उसका सर शालिनी की बुर पर रख दिया और शालिनी मचल उठी ।

: ओह्ह्ह्ह पापा उम्मम आ रहा हैं मेरा। ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम फक्क मीईई हार्ड ओह्ह्ह्ह

: उम्मम ले मेरी रण्डी बिटिया उम्मम्म ले और ले ओह्ह्ह्ह तेरी बुर खूब पानी छोड़ रही है ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह्ह निशा की मां उम्मम्म आजा जल्दी तेरी चूत का रस भी निकाल दूं

शालिनी इतना सुनते ही निशा से जगह बदली कर ली और उसके चूत में जंगी का मोटा लण्ड सरकने लगा

कमरे में एक बार फिर से ताबड़तोड़ पिलाई शुरू हो गई ।

निशा अपनी मां के दूध पकड़ कर सहला रही थी और शालिनी झुक कर उसके निप्पल चाटने लगी, निशा फिर से मस्त होने लगी






इधर जंगी सामने का नजारा देख कर और करारे झटके देने लगा

: ओह्ह्ह्ह मेरी रंडियों उम्मम आज तुम्हारी बुर पेल पेल कर फाड़ दूंगा ओह्ह्ह्ह मेरी जान ओह्ह्ह्ह अब और नहीं रहा जाएगा उम्मम आजा नहला दु तुझे भी निशा के जैसे ओह्ह्ह्ह आजा लेट जा

इतना सुनते ही शालिनी झट से आगे आकर जंगी के नीचे लेट गई और जंगी उसकी चूचियों पर अपने लण्ड की पिचकारी मारने लगा








और मौका पाते ही निशा भी लपक कर ऊपर चढ़ गई और अपनी मां की वीर्य से सने चूचों को चाटने लगी

: ओह्ह्ह्ह सीईईई बेटी तू तो अपनी मां से भी बड़ी चुक्कड है ओह्ह्ह्ह ले मेरा लण्ड भी चूस ले ओह्ह्ह्ह

निशा ने लपक कर अपने पापा के सुपाड़े को सुरक ली और हंसते हुए बोली : आखिर बेटी उन्हीं की हूं न क्यों मम्मी हीही

शालिनी हंसने लगी और वही बाहर शटर उठने की आवाज आई

: लो अब तो आपका चोदूं बेटा भी आ गया हाहाहाहाहा

शालिनी हस कर बोली और सब हंसने लगे ।

वही चौराहे वाले घर पर किचन में कुकुर की सीटिया बज रही थी और रागिनी का ध्यान रह रह कर चूल्हे की ओर जा रहा था लेकिन वो खुद वहां तक नहीं पहुंच पा रही थी क्योंकि उसका छोटा बेटा अनुज उसको किचन स्लैब पर टिकाए हुए उसकी नंगी चूचियों को मुंह में लेकर चूस रहा था






: उम्मम बेटा सीई ओह्ह्ह्ह रुक जा बस ये गैस बंद करने दे

अनुज ने अपने मुंह पोंछ जल्दी जल्दी अपनी पेंट उतारने लगा और लगातार उसकी नजरे अपनी मां के गदराये उठे हुए चूतड़ों पर थी , जो पैंटी कहर ढा रही थी, उसका लण्ड उसके अंडरवियर में खूब फूल रहा था और वो उसे ऊपर से मसल कर अपनी मां को पीछे से पकड़ लिया ,

अपने लाडले के गर्म सुपाड़े की नोक अपने गुलगुले चूतड़ों में चुभता महसूस कर रागिनी मुस्कराई और एक सिहरन सी उसके बदन में हुई , अनुज ने पीछे से अपनी मां की नंगी झूलती पपीते जैसी छातियों को फिर से पकड़ लिया और अपना लण्ङ अंडरवियर के अंदर से अपनी मां की मोटी गाड़ पर रगड़ने लगा ।

रागिनी फिर से सिसकने लगी और अनुज उसके कंधे और नंगी पीठ चूमता हुआ नीचे आने लगा ।








नीचे बैठ कर वो अपनी मां के चर्बीदार चूतड़ों को पैंटी के ऊपर से ही जगह जगह चूमने लगा और दोनों पंजों से उसके चूतड़ों पर चट्ट से दोनों तरफ से मारा कि रागिनी पूरी झन्ना गई

: आह्ह्ह हट पागल है क्या सीईईई हीही ( रागिनी थोड़ी हंसी और अनुज उसकी पैंटी खींचते हुए अपना लण्ङ निकाल कर खड़ा हो गया )

और पीछे से देखते हुए अपनी के चिपके हुए दरारों को निहारता हुआ अपना लण्ड मसलने लगा

रागिनी ने कुछ देर तक उसकी कोई हरकत न पाकर मुस्कुरा कर मूड कर देखी तो अनुज उसकी ओर बढ़ने लगा और कूद कर किचन स्लैब पर बैठ गया

: मम्मी चूस दो न ( अनुज मुंह बना कर बोला और रागिनी मुस्कुराने लगी और आगे बढ़ कर उसने अपने बेटे का लण्ङ हाथों में पकड़ लिया )

: उम्मम्म ओह्ह्ह्ह मम्मीई आपके हाथ कितनी सॉफ्ट है ओह्ह्ह्ह सीईईई बहुत अच्छा लग रहा है

: तुझे थकान नहीं हो रही क्या आज उम्मम

: आपको देख कर कौन थकेगा भला हीही सीई ओह्ह्ह्ह उम्मम उफ्फ मम्मी ओह्ह्ह्ह ऐसे ही चूसो उम्मम्म ओह्ह्ह्ह सीईईई






रागिनी तेजी से उसका सुपाड़ा चूसने लगी , लेकिन किचन स्लैब पर जगह ऐसी थी कि अनुज के लिए बैठना बड़ा दुबर हो रहा था

उसकी नजर सामने डायनिंग टेबल पर गई और उसने अपनी मां को थपथपाया

: क्या हुआ ( मुंह से लण्ड निकाल कर रागिनी हिलाते हुए बोली )

: उधर चलो टेबल पर

इतना बोल कर अनुज फूर्ति से स्लैब से कूदा और उसे देख कर रागिनी हंसने लगी ,हंसने का भी अपना कारण था कि अनुज उसने सामने अपने सांवले चूतड़ों को छलकाता हुआ डायनिंग टेबल के पास एक कुर्सी पर खड़ा हो गया

: इससे अच्छा छत पर चढ़ गया होता हीही पागल

: अरे आओ न मम्मी , आप इसपर बैठ जाओ ( अनुज का इशारा डायनिंग टेबल पर था और रागिनी मुस्कुरा कर सहारा लेती हुई अनुज के सामने डायनिंग टेबल पर बैठ गई )

: हट रे बड़ा गल रहा है ये तो ( रागिनी उसका लण्ङ पकड़ कर ठंडे डायनिंग टेबल पर अपने चूतड टिकाती हुई बोली और अनुज मुस्कुराने लगा , उसका लण्ड सीधा अब उसकी मां के मुंह के पास जा रहा था )

रागिनी ने भी मुंह खोल कर सुपाड़ा मुंह में ले लिया और अनुज तो जैसे और ऊपर उठने लगा , उसका मुंह खुला हुआ था और रागिनी का सर पकड़ कर उसके मुंह में वो पेल रहा था






: ओह्ह्ह्ह मम्मी उम्मम सीईईई और लो ओह्ह्ह्ह उम्मम उफ्फ फक्क यू ओह सीई आप बहुत अच्छा चूसती हो उम्मम ओह्ह्ह्ह और और उम्मम

अनुज लगातार अपना लण्ङ ज्यादा से ज्यादा अपनी मां के गले में उतारना चाहता था और फिर उसने वही रागिनी को खाली टेबल पर लिटा दिया , रागिनी का सर दूसरी तरफ से लटक रहा था फिर भी उसे अपने बेटे के अतरंगी अंदाज पर उसकी फिकर थी कि कही कुर्सी फिसल कर वो गिर न जाए

अनुज ने वही कुर्सी पर खड़े खड़े सामने अपनी मां को टेबल पर लिटाए हुए उसकी चूत में लण्ड पेल दिया

: आह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह्ह बेटा कितना टाइट है तेरा उम्मम्म सीई ओह्ह्ह्ह अनुज ओह आराम से लाला गिरना मत मेरे बच्चे सीई ओह्ह्ह्ह

: हीही मुझे तो मजा आ रहा है मम्मी ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम

अनुज पूरी कोशिश कर रहा था कि अपने लण्ड को अपनी मां की चूत की गहराई में ले जाए लेकिन जैसे वो आगे झुकता नीचे कुर्सी के पैर सरकने लगते और उसका बैलेंस बिगड़ने लगता








लेकिन वो अपने जोश में खुद भी टेबल पर चढ़ आया और करारे झटके देते हुए अपनी मां की चूत में पेलने लगा

रागिनी हालात बिगड़ने लगी उसकी जांघों पर लगातार ठोकर मिल रही थी और उसका गर्दन नीचे लटक कर दर्द होने लगी थी , साथ ही अनुज का लण्ङ उसकी चूत की गहराई में जाने लगा था , वो इस मजे को छोड़ना नहीं चाहती थी ,लेकिन अब और ज्यादा खुद को संभाल नहीं सकती थी

: ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम बेटा आह गिर जाऊंगी मैं नीचे उतार मुझे उम्मम सीईईई ओह्ह्ह्ह

अनुज थम गया और अपनी मां को पकड़ कर नीचे उतार दिया और उसका हाथ पकड़ नंगे हाल में टहलाते हुए सोफे पर झुका दिया

रागिनी को भी अपनी गर्दन सामने झुका कर बड़ी राहत मिल रही थी और तभी एक तेज झटका , फिर अनुज का लण्ङ सांप की तरह सरकता हुआ उसकी चूत की गहराई में जा लगा

: आह्ह्ह दैय्या बड़ा जुल्मी है रे तू उम्मम ओह्ह्ह्ह

अनुज उसके चूतड़ों को फैला फैला कर अपना लण्ड अंदर बाहर होते हुए देखने लगा और फिर वापस से लण्ड को खूब गहराई में ले गया

रागिनी की सिसकिया अब चीखों में बदलने लगी , अनुज अपने मुंह भींच कर खूब कस कस के पेल रहा था , जितनी तेज वो अपनी जांघ और पेडू को अपने मम्मी के चूतड़ों पर धकेलता उससे दुगनी ताकत से रागिनी के चर्बीदार मोटे चूतड़ उसे वापस उछाल देते हुए , इस गद्देदार प्रतिक्रिया से अनुज की उत्तेजना और बढ़ रही थी , उसने लण्ङ को और गहराई में पेलने लगा , रागिनी उसके लण्ङ को कसने लगी






: उम्मम्म ओह्ह्ह्ह लल्ला सीईईई ओह्ह्ह्ह उम्मम उफ्फ आ रहा है मेरे सीई ओह्ह्ह्ह हा बेटा और तेज रुकना मत लल्ला सीईईई ओह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह मम्मीई उम्मम आपकी बुर टाइट कैसे हो गई एकदम से ओह ऐसे तो मेरा भी निकल जाएगा ओह्ह्ह्ह सीईईई फक्क यू मम्मी उम्मम्म ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह्ह आयेगा मेरा ओह्ह्ह्ह आ रहा आ रहा है मम्मी ओह्ह्ह्ह गॉड उफ्फफ फक्क यू फक्क यूऊऊऊ ओह्ह्ह्ह






अनुज अपना लण्ड निकाल कर अपनी मां के चूतड़ों के दरारों में झड़ने लगा और रागिनी हांफती हुई सुस्त होने लगी , उसे अपने नंगे चूतड़ों पर अपने लाडले के गर्म गर्म वीर्य का रिसना अच्छा लग रहा था , वही अनुज भी उसके पास सोफे पर पैर फैला कर फैल गया ।

थोड़ी देर बाद ही दरवाजे पर दस्तक हुई और रागिनी हांफती हुई हंस कर बोली

: जा तेरा भैया आ गया , खोल दे , मै नहाने जा रही हूं

इतना बोलकर रागिनी अपने कमरे में चली गई और अनुज वैसे ही नंगा हो गलियारे में बिना इस डर के कि दरवाजे पर उसका भैया होगा ,उसने डोर खोल दिया और राज ने सामने अनुज को देखा , नंगा और उसका आधा खड़ा लण्ङ

राज ने मुस्कुरा कर उसे देखा और आंखे बड़ी हो गई , वो समझ गया कि लौंडे ने बाजी मार ली उसके आने से पहले

: अबे ऐसे घूम रहा है कोई आया होता तो ( राज ने उसके नंगे चूतड़ों पर चट्ट से थप्पड़ लगाया )

: हीही मुझे तो पता ही था कि आप ही आओगे !! ( अनुज दरवाजा लगाते हुए बोला)

: मम्मी !!

: वो तो अभी अभी नहाने गई

: चलो ठीक है मैं भी नहा लेता हूं

अनुज को लगा कि राज मम्मी के साथ नहाएगा तो उसे ही उत्साह हुआ

: मै भी चलूं भैया हीही

राज ने आंखे बड़ी की और अजीब नजरों से देखा

: हट बे गांड़ू है क्या ,मै लड़कों के साथ नहीं नहाता ( राज उसका हाथ झटक कर बोला )

इतना बोलकर राज अपने कमरे में घुस गया और अनुज अपना सर पकड़ लिया कि उसे तो सफाई देने का मौका भी नहीं मिला ।

जारी रहेगी

( पढ़ कर लाइन कमेंट जरूर करें , लिखना जारी है अगला धमाकेदार अपडेट जल्द ही मिलेगा )
 
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