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अब तक आपने पढ़ा की बाबा विशाखत विक्रम के CLONE,AKSHAANT,SHAILA और मोकलसर के साथ नानाजी के के घर जाते हैं वहीँ विक्रम ने दोनों हौली स्पिरिट्स को आज़ाद कर दिया है और फाइनली वो अपनी मंज़िल धवली झील के सामने खड़ा है.....
अब आगे:-
CHAPTER-1
( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )
लास्ट अपडेट:-
फाइनल सीन्स:-
शैला- ये सब क्या है गुरुदेव!!!!!!
बाबा विशाखत- तुम में धीरज बिलकुल नहीं है putri.....us युद्ध में तुम्हारे हारने का ये भी एक कारण था.......
बाबा विशाखत की बात सुन शैला ने अपना सर झुका लिया......
बाबा विशाखत- शर्मिंदा होने की आवश्यकता नहीं है putri.......bas अपनी अधीरता को वश में करना सीखो.....
अगर तुम्हारे सामने कोई प्रश्न खड़े हो jaaye,toh उसके उत्तर को ढूंढ़ने की पहली सिद्दी सय्यम hi hai.sayyam से भरा दिमाग किसी भी प्रश्न का उत्तर खोज लेता है.....
और रही बात की मई क्या कर रहा hun,wo तोह मेरे करने के बाद तुम्हे अपने आप hi पता चल जाएगा.....
इस वक़्त बाबा VISHAKHT,MOKALSAR,AKSHAANT और शैला धवलगढ़ के सबसे ऊँचे और घने पहाड़ के बीच खड़े थे....
बाबा विशाखत ने अपनी पोटली में से वो सफ़ेद कपडा निकला जो जिसमे विक्रम के सारे घरवालों के बाल the,aur उससे नीचे ज़मीं पर bicha,uske सामने बैठ गए....
बाबा विशाखत अपने हाथ में भी एक कपडा बाँध लिया जिसके उँगलियों वाला भाग नुकीला tha....BABA विशाखत ने सारे बालों को एक एक कर के उठाया.
फिर बाबा ने अपनी आँखें बंद की और एक मंत्र कहा........
तात्विक विषमपाना
( रियल िल्लुसिओं )
बाबा विशाखत के मंत्र कहते वो सारे बाल चमकने lage...BABA ने उन बालों को अपने सामने हवा में उछाल दिया...
वो सारे बाल हवा में तैरते हुए नीचे ज़मीन की तरफ आने लगे और जैसे hi वो सारे बाल ज़मीं से takraye,ek तेज़ रौशनी हुई और जब वो रौशनी घाटी तोह अक्षांत शैला और मोकलसर शॉकेड हो गए...
मोकलसर- gurudev.ye सब!!!! इससे तोह आप **************************
बाबा विशाखत- इसका जवाब तुम्हे स्वयं विक्रम dega......AKSHAANT तुम्हे एक काम करना होगा....
अक्षांत- आदेश दे गुरुदेव...
बाबा VIHSAKHT-mai अभी ध्यान में बैठने वाला hun.tumhe अदृश्य अवशता में विक्रम के घर के पास रहना hai....wahan पहुंचकर तुम्हे अपने दिव्या दृष्टि से मुझे देखते रहना है........
जैसे hi मेरे मुख से अभी nikle,tumhe विक्रम के ****************** करना hai.....tum जानते हो इसके लिए तुम्हे किस मंत्र का प्रयोग करना है.......
तीनो में से किसीको भी बाबा द्वारा दिए गए निर्देश का मतलब और कारण समझ नहीं aaya,par वो जानते थे की गुरूजी कोई भी काम बिना किसी ख़ास उद्देश्य के नहीं करते...
अक्षांत ने बाबा को नमन किया और गायब होकर उसी अदृश्य हालत में विक्रम के नानाजी के घर के सामने खड़ा हो gaya.usne अपनी दिव्या दृष्टि को जगाया और बाबा पे फोकस किया.
अक्षांत को बाबा दिखने lage.....BABA विषकहत को भी पता चल गया की अक्षांत उन्हें देख रहा है इसीलिए उनके चेहरे पर संतुष्टि भरी स्माइल आ गयी....
बाबा विशाखत ने शैला और मोकलसर को कुछ निर्देश दिए और खुद ध्यान में बैठ गए.....
धवली दृष्टि दर्शनम करोति.....
ध्यान में बैठे बाबा विशाखत ने जैसे hi ये मंत्र bola,unhe विक्रम और झील दिखने लगी....
बाबा विशाखत के चेहरे पर ख़ुशी और घबराहट दोनों hi भाव एक साथ दिखने लगे...
ख़ुशी इसीलिए क्यूंकि बाब समझ गए की विक्रम ने शुरुआती सभी चुनौतियों को सफलता पूर्वक पार कर लिया है.....
घबराहट इसीलिए क्यूंकि बाबा विशाखत ये जान गए की अब विक्रम का सामना स्पीयर से होने वाला है.........
वहीँ दूसरी तरफ:-
ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़........
आवाज़ सुन जैसे hi बलबीर पीछे palta,apne सामने अपने दूसरे बेटे दिग्विजय को देख जल्दी से उठा और दिग्विजय के गले लग गया.......
कुछ देर तक गले लगने के बाद जब दोनों बाप बेटे अलग hue,toh दिग्विजय को एक झटका लगा......
क्यों उसके बाप के आँखों में आंसू the....kyunki वालेफ़ोर एक डेविल tha,uske आंसू काले कलर के थे.....
दिग्विजय- क्या हुआ dad.....mujhe पहले hi कुछ गलत होने का अंदेशा हो गया tha,isiliye मई यहाँ aaya...maine पहली बार आपके आँख में आंसू देखे hain,kahin माँ को तोह!!!!
बलबीर- नहीं bete.teri माँ बिलकुल ठीक hai.par !!!!!!!
दिग्विजय- पर क्या डैड!!!!!
फिर बलबीर ने दिग्विजय को जो कुछ भी हुआ tha,wo bataya.....ye जानकार की उसका कोई भाई भी hai,DIGVIJAY बोहोत खुश होंगे.
पर जब उससे पता चला की उसके भाई के साथ क्या क्या हुआ hai,DIGVIJAY का दिमाग घूम गया......
दिग्विजय- मई उस साले और उसके परिवार को ऐसी मौत दूंगा जो किसीने सोची भी नहीं होगी......
ये बोलकर जैसे hi दिग्विजय उठने को hua,BALBEER ने उसका हाथ पकड़ उससे वापस बैठा दिया...
बलबीर- जल्दबाज़ी में किया गया काम नुक्सान पहुंचता है bete.....ye बात मैंने तुम्हारे भाई को भी समझायी थी पर वो नहीं maana......tum ये गलती मत दोहराना...
दिग्विजय- dad,mujhe कुछ नहीं hoga...aap नहीं जानते की मेरे अंदर अब कितनी शक्ति hai.......mai उस विक्रम को चुटकी में मसल दूंगा......
बलबीर- beta,shakti तुम्हारे भाई में भी काम नहीं thi..uske अंदर हम चारों प्रमुख DEVIL'S का खून tha,phir भी वो उस विक्रम का कुछ बिगड़ न पाया......
दिग्विजय- पर dad,mere शक्ति का श्रोत अलग है और ज़्यादा ताकतवर bhi...bhai ने विक्रम को बराबर की टक्कर दी thi,iska मतब वो मेरे सामने ज़्यादा देर टिक नहीं पायेगा.....
बलबीर- उसका भी एक कारण है putra....VIKRAM ने कुछ देर के लिए अपने सुरक्षा कवच को खुद hi हटा दिया tha,warna उसपर एक भी वार नहीं किया जा सकता....
ruko,mai तुम्हे दिखता हूँ की मई तुम्हे क्यों रोक रहा हूँ....
बलबीर ने अपना हाथ सामने कर एक बार ghumaya,dono के सामने हवा में hi एक स्क्रीन बन गयी जिसमे उस दिन का दृश्य दिख रहा था जब बलबीर ने विक्रम के ऊपर प्राणघाती मंत्र से वार किया था...
जैसे जैसे वो दृश्य आगे बढ़ रहा tha,DIGVIJAY की आँखें हैरत से फैलती चली जा रही thiu...aur जैसे hi वो दृश्य आया जिसमे बलबीर का मंत्र विक्रम के सुरक्षा कवच से टकराकर एक झटके में टूट गया और जिसके वजह से बलबीर बेहोश हो gaya,DIGVIJAY को एक तेज़ झटका लगा..
दिग्विजय- ये कैसे हो सकता है?
कोई भी सुरक्षा कवच इतना शक्तिशाली कैसे हो सकता है!!!!!
बलबीर- इतने दिनों से मई भी यही सोच रहा हूँ और मैंने उस सुरक्षा कवच का श्रोत पता लगाने की भी कोशिश की पर नाकाम रहा......
और रही बात तुम्हारी ताकत ki,toh तुम्हारी अपार शक्ति को मैंने भी महसूस किया hai,par फिर भी उस लड़के पर अभी हुम्ला करना ठीक नहीं होगा...
दिग्विजय- एक कोशिश करने में क्या जाता है dad......aur वैसे bhi,mai जो भी karunga,yahin से करूँगा......
बलबीर- matlab!!!!!tu कहना क्या चाहता है?
?
दिग्विजय ने कुछ कहा नहीं और अपनी आखें बंद कर कुछ मंत्र kaha,DIGVIJAY के हाथ में एक रेड गोला दिखने लगा...
दिग्विजय- dad,aap इस गोले में आपका विध्वंसी मंत्र मिला दीजिये..
बलबीर ने अपनी आँखें बंद की और अपने हाथ आगे kiye....BALBEER के हाथों से काली रौशनी निकली और दिग्विजय के हाथ के ऊपर रखे रेड गोले में घुस गयी.....
दिग्विजय ने अपनी आँखें बंद की और विक्रम को खोजने laga......par ुए विक्रम कहीं नहीं दिखा.....
दिग्विजय चौंक गया और उसने अपनी आखें खोल दी...
दिग्विजय- dad,wo विक्रम नज़र क्यों नहीं आ रहा..
बलबीर- यही तोह मैं गुत्थी है bete..meri नज़र उसपे हर वक़्त रहती thi,par बीच बीच में वो दिखना बंद हो जाता tha.jitnei भी कोशिश karo,pata hi नहीं चलता था की वो कहाँ गया..
कहीं ये उसकी कोई नयी चाल तोह nahi,ye सोचकर मैंने उसपे नज़र रखना बंद कर दिया.....
दिग्विजय- कभी न कभी तोह सब पता चल hi jaayega...filhal के liye,wo नहीं तोह उसकी फॅमिली hi सही..
दिग्विजय ने फिर आँख बंद kiye,usse विक्रम की फॅमिली दिखने लगी जिससे देखकर दिग्विजय के चेहरे पर मुस्कान आ गयी..
दिग्विजय- अब कहाँ chupega......apni फॅमिली को मरता देख तोह ज़रूर सामने आएगा.
दिग्विजय ने अपने हाथ में रखे गोले को छोड़ diya.wo रेड & ब्लैक गोला तेज़ी से धवलगढ़ की तरफ आने लगा पर ये क्या.........!!!!!!
दिग्विजय और बलबीर की आँखें शॉक से फैले गयी....
हुआ ये की जैसे hi वो गोला धवलगढ़ की सरहद तक pahuncha,wo रूक गया और एक झटके के साथ नष्ट हो गया...........
दिग्विजय- impossible.......ye कैसे हो सकता है...!!!!!!
बलबीर- मैंने कहा था na,ye गुथी जितनी दिखती hai,usse ज़्यादा उलझी हुई hai......beta,hame जोश ने नहीं होश से काम लेना padega....jo भी करना hai,soch समझ कर ठन्डे दिमाग से करो......
दिग्विजय ने बलबीर से कुछ कहा जिससे सुनकर बलबीर ने पहले कुछ कहा पर फिर दिग्विजय को लेकर एक तरफ चल दिया पर कुछ hi देर में दोनों बाप बेटे वापस आ gaye.dono के hi चेहरे पर उदासी थी.....
बलबीर- beta,tum एक काम karo,kuch दिन के लिए कहीं ग्फ्ह्यम aao......tumhara मंद भी फ्रेश हो jaayega,uske बाद सोचेंगे की आगे क्या करना है.....
दिग्विजय- ठीक है dad..mai थोड़ा बहार से आता हूँ,2 साल हो गए अपने दोस्तों से मिले hue.....sabse मिलता हूँ और फिर उन्ही के साथ मिलकर कुछ पालन बनता हूँ की कहाँ घूमने जाय जाए....
बलबीर- ठीक है....
दिग्विजय अपने दोस्तों से मिलने निकल गया....
( इसी के साथ दिग्विजय का रोल 1सत CHAPTER के लिए ख़त्म hua...ab आपकी इनसे मुलाकात 2ंद chapter में hogi,aur वो भी कुछ इस अंदाज़ में जो आपने सोचा न होगा..... )
इन हेवन:-
सत सकिलिअ- आपका अनुमान सही nikla....agar आप समय रहते धवलगढ़ की सीमा को नहीं बांधते तोह अनर्थ हो जाता....
सत सेबेस्टियन- ऐसा कुछ hoga,ye अनुमान मेरा नहीं था.....
सत सकिलिअ- तोह फिर.....!!!!!
सत सेबेस्टियन- ये लार्ड ऑफ़ एंगेल्स का यकीं था की ऐसा कुछ हो सकता hai.GURU विशाखत को निर्देश देने के बाद उन्होंने मुझे भी कुछ निर्देश दिए थे.....
सत सकिलिअ- waah.LORD का प्रेडिक्शन पावर काफी बढ़ गया है...
सत सकिलिअ- haan,par अभी ये देखना बाकी है की बाबा विशाखत को जिस प्रेडिक्शन की वजह से लार्ड ने काम सौंपा hai,kya वो भी सच होता है.....
सत अल्फ़्रिक- haan,mai भी यह सब देखने के लिए अत्ति उत्सुक भी हूँ और चिंतित bhi.......najaane आगे क्या होगा!!!
सत सेबेस्टियन- कुछ hi देर में इस का जवाब हम सब को मिल जाएगा.......
बैक तो हीरो:-
AAAHHHHHHHHHHHH....UMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMM......
मई पानी की सतह के ऊपर पड़ा दर्द से चटपटा रहा था....
क्या हुआ bache????bas,itne में hi दम निकल गया......
मई मन में- saala,ek तोह ये dard,upar से ये nautanki....aur क्या कह रहा hai,bache,saala.itna भी नहीं पता की मुझे बचा बोल ये खुदको भी वही बोल रहा है...
दरअसल जो मेरे सामने खड़ा tha,wo मई hi tha....samajh नहीं आया na,chaliye आपको समझता हूँ.....
जैसा की आप सब को पता है की मई इस वक़्त धवली झील के असली स्वरुप के सामने खड़ा हूँ....
झील के बीचो बीच मुझे कुछ चमकता हुआ सा dikha,jo की असल में मेरी मंज़िल थी, स्पीयर.........
अब मई मैजिक का उसे तोह कर hi सकता था...
मैंने अपने दोनों हाथ फैलाये और हवा में उठ gaya....par जैसे जैसे मई पानी के ऊपर से आगे बढ़ रहा tha,mere शरीर में दर्द बढ़ता जा रहा tha....par लागबहग 2 सालों से पीड़ा AVLOKYATI.....mantra पढ़ने की वजह से मई उस दर्द को सेह पा रहा था....
कुछ hi पलों में मई स्पीयर के सामने था..
मई- saala,ye किस एंगल से स्पीयर दिख रहा hai....!!!!!ye तोह तलवार से भी बड़ा है......
मेरे सामने जो स्पीयर tha,wo करीब 4 फ़ीट बड़ा tha...golden कलर याने की सोने के परत में ढाका हुआ एक खूबसूरत सा स्पीयर...
स्पीयर को देख कर ये कोई भी नहीं कह सकता था की वो करोड़ों साल पुराण hai..aisa लग रहा था जैसे उससे अभी अभी बनाया गया hai........aur एक अजीब बात thi,us स्पीयर में एक नाम लिखा हुआ था जो समझ में नहीं आ रहा था...
ये बात मेरे लिए काफी चौकाने वाली thi,kyunki मुझे इस ब्रम्हांड में उसे किये गए सभी लैंग्वेज आते the..par ये लैंग्वेज उनमे से नहीं था....
Khair,jaise hi मैंने उस स्पीयर को चुने के लिए अपना हाथ आगे badhaya,SPEAR में से एक तेज़ बिजली निकल कर मुझपर padi,mai उड़ता हुआ पानी में जा गिरा,
अह्ह्ह्ह
आप सोच रहे होंगे की पानी में गिरने से दर्द kyun,wo इसीलिए क्यूंकि मई पानी में डूबा nahi,balki उसकी सतह से टकराकर पानी के ऊपर hi रह gaya.paani की सतह पत्थर जैसी मजबोईत thi...ek तोह स्पीयर द्वारा दिया गया dard,uske ऊपर मई काफी ज़ोर से उस सतह पर गिरा tha,dard तोह होगा ना.....
मई लट्टे पत्ते खड़ा हुआ और वापस दर्द को कण्ट्रोल करने का मंत्र बोलने लगा.......
कैसे हो विक्रम!!!!!!
??
अभी मई नार्मल हुआ hi था की आवाज़ सुन जैसे hi मैंने सामने dekha,mujhe एक नया झटका laga.....mere सामने जो खड़ा था वो और कोई नहीं मई hi था....
इसीलिए मैंने कहा था की मुझे बचा बोल ये खुदको भी वही बोल रहा है....
(सामने वाले को बहरूपिया लिखूंगा)
बहरूपिया- इतने हैरान क्यों हो?
??तुमने खुद hi मुझे जन्म दिया है?
?
मई- तोह नाम क्यों ले रहा है?
?पापा बोल naa......aur पापा से याद aaya,teri माँ कौन है.....
बहरूपिया- स्पीयर......
मई- मतलब कुछ भी ना......
बहरूपिया- जैसे hi तुमने स्पीयर को chua,usne तुम्हारे अक्स ko,tumhari ताकत को कॉपी कर liya,aur उसीसे मेरा जन्म hua...mujhme भी वही सब ताकतें hain,jo तुममे है....
MAI-toh अब!!!!!!
बहरूपिया ने बिना कुछ बोले मेरे उपकर इलेक्ट्रिक रेज़ छोड़े जिससे मैंने अपना हाथ आगे कर रोक diya..par तभी उसने कुछ नया सा kiya...usne अपने हाथ को जिससे रेज़ निकल रहे the,usse घूमने laga...uske हाथ घुमाते hi रेज़ भी गोल घूमते हुए मेरे सारे शरीर से लिपटती चली gayi.....mujhe असहनीय दर्द होने लगा
तभी वो बहरूपिया तेज़ी से आगे badha,aur उसने मेरे चेहरे पर 3,4 पंच जड़ diye....mera दर्द डबल हो गया...
उसने अपनी ऊँगली उलटी ghumayi,dekhte hi देखते मेरे शरीर से लिपटी साड़ी इलेक्ट्रिक रेज़ निकल gayi,rays के निकलर hi उसने मेरे पेट पे लगातार 2 पंचेस maare,mai दर्द से दोहराता हुआ नीचे गिर गया.....
बहरूपिया- क्या हुआ bache????bas,itne में hi दम निकल गया......
(फर्स्ट सन)
साले से लड़ना वाकई मुश्किल tha,kyunki स्पीयर ने उससे मेरी hi काबिलियत दे दी थी...
पर तभी मुझे कुछ याद आया जो मेरी बुक हमेशा मुझे कहा करती थी....
बुक- अपने दिमाग को अपने दिल से jodo....tumhe हर परेशानी से निकलने की युक्ति मिल जायेगी...
मुझे यकीं था की स्पीयर मेरे दिमाग ko,unme छुपी काबिलियत को तोह पढ़ सकती hai,par मेरे दिल को nahi,kyunki मेरा दिल मेरे बुक का घर है जहाँ स्पीयर नहीं पहुँच सकती........
मैंने अपनी आँखें बंद की और ध्यान lagaya...mujhe मेरे दिल की ढकने सुनाई देने लगी और अगले hi पल मेरे धड़कनो की आवाज़ का ठिकाना बदल gaya....ab ये आवाज़ मेरे दिमाग से आ रही थी...
मैंने अपनी आँखें kholi....dard तोह मुझे अब भी काफी हो रहा tha,par मेरे चेहरे पर मुस्कान thi.mujhe ुस्कराता देख बहरूपिये की मुस्कान गायब हो गयी......
पीड़ा प्रारभं...........
aaaahhhhhhhhhhhhhhhh..........................nahiiiiii.nahiii................
ये चीख मेरी नहीं मेरे बहरूपिया की थी, वो अपना सर पकड़ कर बैठ gaya.......darasal जो मंत्र मैंने अभी बोलै tha,wo बुक के द्वारा बताते गए मंत्र का काट tha........PIDA अवलोकयति मंत्र मेरे दिमाग पर असर कर रहा tha..aur जो बहरूपिया मेरे सामने खड़ा tha,usme भी मेरा hi दिमाग था..
मेरे मंत्र पलटने से मेरे दिमाग का दर्द उसके दिमाग ने महसूस करना शुरू कर diya.....aur रहा मेरा sawaal,toh मेरा दिमाग तोह मेरे दिल से जुड़ चूका tha,isiliye मुझे कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ा......
बहरूपिया का दर्द इतना बढ़ गया की वो बेहोश हो gaya.....abhi मई खुश हो hi रहा था की तभी........
स्पीयर में से एक काली गाढ़ी रौशनी निकली और उस बहरूपिया में समां gayi.........kuch hi पलों में उस बहरूपिये का कलर बदलकर काला हो गया.....
बहरूपिया एक झटके में खड़ा हो गया.....
उस बहरूपिये का रूप तोह मेरा hi tha,par उन काले रेज़ की वजह से उसका रूप भी काला हो गया.....
मई- थैंक्स बोल बे एहसान faramosh........mere रूप की वजह से काला डामर होने के बाद भी तू हैंडसम दिख रहा है........
पर वो बहरूपिया कुछ बोलै नहीं बस दहकती आँखों से मुझे घूरता गया...
उसने अपने हाथ uthaye....mere दोनों तरफ का पानी हवा में उठ gaya......BEHROOPIYE ने पानी की तरफ हाथ कर कुछ मंत्र कहा और फिर अपने हाथ मेरी तरफ कर diye...paani तेज़ी से मेरी और बढ़ी और मुझे अपने अंदर समां ले गयी......
जब मेरी जगह से पानी हटी तोह मई वहां नहीं tha,jisse देखकर बहरूपिया हसने लगा की तभी........
इधर देख ोये........
बहरूपिये ने जब आवाज़ की तरफ देखा तोह शॉकेड हो gaya..usse कुछ hi दूर मई पानी के बने मत के ऊपर खड़ा था....
बहरूपिये ने अपने दोनों हाथ से पानी को छू liya...............pure पानी में भूकंप आने laga.har जगह जो गोल भवर बनाने laga.mai हवा में जहाँ खड़ा tha,BEHROOPIYE ने ठीक उसी जगह के नीचे अपने हाथ किये और कुछ मंत्र बोलै....
सुबह की आवाज़ से ठीक मेरे नीचे से तेज़ी से मेरी तरफ पानी से बने त्रिशूल आने lage.....ye एक दो तरफ़ा हुम्ला tha...agar मई खड़ा रहता तोह त्रिशूल मुझे lagta....aur अगर कूदता तोह भवर की चपेट में आ जाता.....
मैंने एक लम्बी सांस ली और कूद गया...
मुझे गिरता देख बहरूपिये के काले चेहरे के बीच सफ़ेद दाथ चमकने lage.....par ये ख़ुशी सिर्फ एक पल की thi....BEHROOPIYE के ख़ुशी वाले चेहरे पर अब शॉकिंग एक्सप्रेशंस थे....
हुआ ये की नीच गिरते वक़्त मैंने अपने हाथ तेज़ी से घुमाने शुरू कर diye,jisse पानी के ठीक ऊपर हवा उठने lagi,jisne भवर को अपने अंदर समेटकर बर्फ बना diya....mai ठीक उस बर्फ के बड़े से गोले के ऊपर स्पिन करते हुए गिरा और खड़ा हो गया....
मई- बस बोहोत हुआ.......
अब समाया था बुक से सिखाये गए सबसे खतरनाक मंत्रो में से कुछ के इस्तेमाल करने का....
मैंने अपने हाथ आगे किये
प्रज्वलयति
(सेट ों फायर)
मेरे मंत्र बोलने से पुरे पानी में आग लग gayi.....aag लगने से बहरूपिये के टेल जल gaye,wo तुरंत हवा में उठ गया.....
श्यंदना विजासती....
( एयर डिस्ट्रॉय )
मेरे ये मंत्र बोलते hi बहरूपिये के आस पास मौजूद हवा ज़हरीली हो gayi......jab इस बात का एहसास बहरूपिये को हुआ तोह उसने नाक बंद कर ली पर तब तक वो ज़हरीली हवा उसके अंदर जा चुकी थी....
वज्राहता
( स्ट्राइकिंग ऑफ़ ा थंडरबोल्ट )
आसमान काले पद gaye,aur हर तरफ से बिजली निकलकर बहरूपिये के ऊपर पड़ने lagi......kuch hi पलों में बहरूपिये का शरीर राख हो गया....
मैंने अभी चैन की सांस भी नहीं ली थी की एक नयी चीज़ hui....SPEAR में से तेज़ रौशनी निकली और हर तरफ फैले gayi..kuch hi पलों में मेरा किया हर जादू ख़त्म हो गया...
मेरा जादू ख़त्म कर स्पीयर एक बार फिर chamki,par मेरे चेहरे पर भी हलकी स्माइल आ gayi...mujhe पता था की अब क्या होने वाला है....
स्पीयर की रौशनी से 4 बहरूपिये बाहर आये और मेरे सामने आकर खड़े हो gaye.......wo चारों एक तक मुझे देखने लगे.......
जो मैंने सोचा tha,wo तोह होने hi वाला tha,par साथ में कुछ और भी हुआ जो मैंने सोचा नहीं था.......
एक बहरूपिये ने बाकी तीनो को कुछ इशारा kiya,teeno गायब हो गए.....
वहीँ दूसरी तरफ:-
अभी..............
बाबा विशाखत ध्यान अवस्था में धवली झील का सन देख रहे the..wahan उस बहरूपिये ने अपने तीनो साथियों को जाने का इशारा kiya,yahan बाबा विशाखत के मुँह से अभी निकला जो अक्षांत ने सुन लिया और अपना तुरंत एक मंत्र पढ़ा और गायब होकर वापस बाबा विशाखत के पास पहुँच गया....
बाबा विशाखत की आँख खुल गयी....
बाबा विशाखत ने कुछ मंत्र bola..unke सामने एक बांग्ला बन गया..
बाबा विशाखत- जल्दी से इनको लेकर अंदर जाओ और तैयार रहना...
तीनो- जी गुरुदेव....
तीनो कुछ लोगों को लेकर उस बंगले के अंदर चले गए.....
बैक 2 हीरो:-
तीनो बहरूपियों के गायब होते hi स्पीयर एक बार फिर से चमकी और उससे एक बिजली से बानी रस्सी निकली और मुझे लपेटती चली गईइइइइइ.........
आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.................
तभी एक और चीज़ hui....mere अंदर से किताब निकली और गायब हो gayi.........mera दर्द इसीलिए hi कण्ट्रोल में था क्यूंकि वो किताब मेरे दिल से कनेक्टेड thi..uske जाते hi मेरे दिल का कनेक्शन मेरे दिमाग से टूट गया और मुझे असहनीय दर्द होने लगा...
बहरूपिया- waah,tera आखरी वक़्त आते hi वो बुक ने भी तेरा साथ छोड़ दिया......
अब यहाँ तू मरेगा और वहां तेरा PARIWAR......chal तेरे मरते मरते तुझे तेरे परिवार की मौत भी दिखता हूँ...
बहरूपिये ने अपने हाथ ghumaye,saamne हवा में एक बड़ी सी स्क्रीन बन गयी....
वहीँ दूसरी तरफ:-
मेरी किताब गायब होकर एक जगह pahunchi........us जगह पर कोई सोया हुआ था. बुक से एक रौशनी निकली और सामने वाले पर padi..book और वो साक्ष गायब हो गए....
बैक तो हीरो:-
बहरूपिया- kyun,maza आ रहा hai!!!arre तुझे कैसे मज़ा aayega....tu तोह खुद मरने वाला hai...haaaahaaaahaaaa..
मेरे सामने स्क्रीन पर मेरे तीनो GURU,MOKALSAR,SHAILA और अक्षांत तीनो बहरूपियों से लड़ रहे थे......
कुछ देर तक मेरे तीनो गुरु उन सब का सामना करते रहे पर वो बेहरुपीये ज़्यादा ताकतवर the..unhone मेरे तीनो गुरुओं के शास्त्र गिरा दिए..
शाश्त्र गिरते hi मेरे तीनो गुरु गायब हो गए.......
बहरूपिया- अरे yaar,tere घरवालों के बॉडी गार्ड्स तोह बोहोत फत्तू nikle..khair,apni जान किसको प्यारी नहीं hoti....tu आखरी बार अपने अपनों को देख ले..
उन तीनो बहरूपियों ने मेरे सारे परिवार वालों को एक झटके में मार दिया tha......unka काम ख़त्म हो चूका tha.wo वापस गायब होकर स्पीयर में समां गए...
इससे आगे मई देख नहीं पाया और बेहोश हो गया.....
बहरूपिया धीरे धीरे चलते हुए मेरे पास आ रहा था
की तभी:-
एक तेज़ रौशनी hui.jaise hi रौशनी बहरूपिये पर पड़ी वो उड़ते हुई पीछे जाकर गिरा...
उस रौशनी के बीच में से मेरी किताब निकली पर वो अकेली नहीं थी उसके साथ कोई था...
किताब जिससे लायी थी उससे ठीक मेरे बाजू में लिटा diya.book से एक और बार रौशनी nikli,us शख्श का हाथ अपने आप hi मेरे हाथों क ऊपर आ गया....
जैसे hi हम दोनों के हाथ mile,mere शरीर को तेज़ झटके लगने lage..wo बिजली की रस्सी जो मेरे शरीर को बांधे हुए thi,ek झटके में टूट गयी.....
कुछ देर तक मेरी बड़ी झटके खाती rahi,fir शांत पद गयी........
बहरूपिया जहाँ जाकर गिरा tha,wahin से आँख फाड़े ये सब देख रहा tha....jaise hi वो रस्सी टूटी और मेरे शरीर को झटके लगने बंद hue,wo उठकर मेरे पास aaya,aur जैसे hi उसने मेरे साथ वाले का चेहरा dekha,usse मुझसे भी ज़्यादा बड़ा झटका लगा....
बहरूपिया- अवन्तिकाआआआ...........
जी हाँ doston,BOOK और किसी को नहीं अवंतिका को लेकर आयी थी...
जैसा की मैंने बताया था की बहरूपिये ने मेरा दिमाग पढ़ा tha,isiliye मेरी लाइफ में आये हर शक्श को जानता था...
बहरूपिया- ये कैसे हो सकता hai...!!!!ek मामूली सी लड़की ये सब कैसे कर सकती है...
बुक- मई बताती hu..ye लड़की और कोई नहीं विक्रम यानी लार्ड ऑफ़ एंगेल्स की शक्ति hai..iske रहते कोई भी उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता......
इससे पहले की बहरूपिया कुछ kehta,BOOK अवंतिका को लेकर गायब हो गयी.....
बहरूपिया- इससे यहीं ख़त्म कर देता hun.......kissa hi ख़त्म...
मई अभी भी बेहोश hi पड़ा tha.BEHROOPIYE ने अपना हाथ आगे kiya,uske हाथ में एक तलवार आ gayi.....wo आगे बादः और उसने मेरे गर्दन को निशाना बनाकर तलवार चला दी...
aahhhhhhhhhh........
ये आवाज़ बहरूपिये की thi....hua ये की जैसे hi बहरूपिये ने अपना हाथ ऊपर uthaya,mujhe होश आ gaya.maine भी तुरंत एक तलवार का आवाहन kiya,aur इससे पहले की बहरूपिया तलवार chalaye,maine अपनी तलवार उसस्के पेट में घुसा दी....
और जैसे hi वो दर्द से तड़पता हुआ आगे jhuka,maine एक झटके में उसके पेट से तलवार nikali,aur उसकी गर्दन उदा दी....
मई तेज़ी से उठा और स्पीयर की तरफ चल diya.......mujhe आगे बढ़ने में काफी परेशानी हो रही thi.aisa लग रहा था जैसे कोई मुझे पीछे खींच रहा है पर मई रूका नहीं और आगे बढ़ता रहा..
वहीँ जैसे जैसे मई स्पीयर के करीब जा रहा tha,SPEAR तेज़ चमकने लगी थी.....
और फिर अचानक..........
मेरे शरीर पर एंगेल्स वाले वाइट कपडे आ गए THE..MAI हवा में उठने लगा THA.....AUR मेरे अंदर से कई रूहें एक एक बाद एक बाहर आने लगी थी........
हुआ ये की मई जब स्पीयर और मेरे बीच बस कुछ मेट्रेस का फासला भर बचा tha,toh वो स्पीयर एक झटके में आयी और मेरे अंदर समां gayi....ab मई अपने लार्ड ऑफ़ एंजेल के गेट उप में ज़रूर tha,par मुझे बोहोत ज़्यादा दर्द हो रहा था......
की तभी मेरे सामने एक और रौशनी हुई और मेरी बुक मेरे सामने प्रकट hui.....book के सामने आते hi वो स्पीयर मेरे अंदर से बाहर आ गयी...
मैंने उस स्पीयर को पकड़ा और उससे देखने laga.uspe जो नाम लिखा tha,wo मिट चूका tha,aur अब उसपे एक नया नाम लिखा रहा tha...........VIKRAM............
पर पुराने नाम के मिटने से पहले मैंने उससे पढ़ लिया tha.ab वो नाम साफ़ इंग्लिश में लिखा tha...................ASMODEUS.....................
मुझे इस नाम के मालिक के बारे में भी पता चल चूका था...
मई (मन में )- बोहोत जल्दी मुलाकात होगी मेरे भाई............
वहीँ मेरे सामने मेरी बुक अपने आप खुल गयी और वो स्पीयर उसके अंदर एक तस्वीर के रूप में छाप गयी.....
बुक- क्या मुझे आपके अंदर सामने की इजाज़त है...!!!!
स्पीयर की तस्वीर छापते hi बुक से आवाज़ आयी....
मई- इजाज़त है.......
मेरे हाँ बोलते hi वो बुक एक झटके में मेरे अंदर समां gayi.....mera पूरा शरीर ग्लो करने laga..meri आँखें भी पूरी सफ़ेद हो gayiiii.......maine ऊपर dekha,teeno GOD'S मैसेंजर HEAVEN'S गेट पर हाथ जोड़े खड़े थे....
मई धीरे धीरे नीचे आने laga..jab मई नीचे आया तोह मेरे सामने 1000 हौली स्पिरिट्स थे.. जिन्हे मैंने मुक्त कराया tha,wo भी मेरे सामने खड़े थे...
मेरे उनके सामने आते hi वो सब अपने घुटनो पर झुक गए.......
मई- खड़े हो जाइये...
ईस्ट हौली SPIRIT-hame मुक्ति दिलाने के लिए आपका कोई कोटि dhanyawaad...aur शमा kariyega,hum आपको अपनी ताकत नहीं दे पाएंगे....
मई- क्या मई इसकी वजह जान सकता हूँ!!!!
2ंद हौली स्पिरिट- हमारे बंदी बनते hi हमने अपनी ताकत को दूसरे गृह पर छुपा दिया tha......par बदकिस्मती से हमे ताकत भी दूषित हो गयी hai,isiliye हम उससे वापस बही बुला सकते....
मई- कौन से गृह पर आपकी शक्तियां है और वो दूषित कैसे हो गयीं...
1सत हौली स्पिरिट- हमारी शक्तियां ग्लूटो गृह के गुफा में डायमंड्स के रूप में हैं पर दो काली शक्तियों के भक्तों ने उन डायमंड्स से शक्ति हासिल कर उससे भी दूषित कर दिया है....
मई- आप फ़िक्र न karen,mai खुद जाकर उन शक्तियों को पुनः शुद्ध कर प्राप्त karunga..ab आप सब क्या करेंगे!!!!
1सत हौली स्पिरिट- हमारी आत्मा अब कहीं और नहीं रह sakti.hum सब वापस गॉड के शरण में चले जाएंगे.....
मई- ठीक hai..bas 1 मिनट रुकिए.....
बाबा विशाखत प्रकट हो.....
मेरे आवाज़ देते hi बाबा विशाखत AKSHAANT,MOKALSAR और शैला के साथ प्रकट हुए......
मई- guruji,mai आपको इस दुनिया के मायाजाल से मुक्त करता hun...ab आप गॉड के शरण में जा सकते हैं.......
मैंने अपना हाथ आगे kiya,mere हाथों से सफ़ेद रौशनी निकली और बाबा पे padi,unka शरीर परछाई में बदल गया.....
मैंने ऊपर dekha,ST सेबेस्टियन ने हेवन का दरवाज़ा खोल diya.....saare हौली स्पिरिट्स एक के बाद एक हवा में उठकर हेवन में जाने लगे....
बाबा विशाखत- तुम्हारा गुरु hona,yahi मेरे लिए मोक्ष से काम नहीं था पुत्र..
AKSHAANT,tum तीनो के मन में जो भी सवाल hai,wo विक्रम से पूछ lena...mere जाने का वक़्त हो गया है.....
बाबा विशाखत भी हौली स्पिरिट्स के साथ हवा में उठ हेवन चले गए......
गुरूजी को जाते देख मेरी आँख से दो बून्द आंसू निकल कर गिर गए आखिर गुरूजी मेरे पिता तुल्य tha...par मई खुश था की वो जो चाहते the,wo उन्हें मिल गया....
मई तीनो को ले गायब हो अपने घर के पीछे वाले जंगल में pahuncha...jo मायावी बंगला गुरूजी ने बनाया tha,wo गायब हो चूका था...
कुछ देर तक हमारे बीच शांति rahi..sabhi को गुरूजी के जाने का दुःख था..
मई- काफी ठण्ड है यहाँ!!!!
इस वक़्त सुबह के 7.45 हो रहे the...DHAWALGARH पहाड़ी इलाके में बसा शहर tha...aur उसके ऊपर हम पहाड़ में the....yahan ठण्ड कुछ ज़्यादा hi thi....mai तोह इस कड़कती ठण्ड में भी नार्मल hi tha,par बात शुरू करने के लिए कुछ तोह कहना hi था....
शैला- हमारे गृह में यह पुरे साल इससे ज़्यादा ठण्ड रहती है....
मोकलसर- सही kaha....yahan का मौसम तोह हमारे लिए नार्मल है...
अब माहौल कुछ नार्मल tha,toh मई सीधे मुद्दे पर आ गया.
मई- hmm.toh क्या सवाल हैं आप सब के....!!!
अक्षांत- यही की आपकी फॅमिली के क्लोन्स का भ्रम पैदा करने के लिए उनके बालों की क्या आवश्यकता thi....wo तोह सिर्फ स्पेल बोलके hi किया जा सकता था..
जी हाँ दोस्तों, उन बहरूपियों ने जिनको मारा tha,wo मेरे परिवार के क्लोन्स थे...
मई- ये मत भूलिए की मेरा सामना किस्से हुआ tha....mere परिवार वालों के बाल की वजह से जो क्लोन बनाये गए थे वो उनके ओरिगिनाल्स से काम असली नहीं the.agar मैंने या गुरूजी ने ऐसे hi क्लोन बना दिए होते तोह स्पीयर द्वारा भेजे गए बहरूपिये उन्हें पहचान जाते....
मोकलसर- अब हमारे लिए क्या आदेश है...!!!!
मई- आदेश नहीं निवेदन hai.wo भी मई तब hi बताऊंगा जब आप तीनो मुखसे पहले जैसा बर्ताव karenge.....aap तीनो की दी हुई शिक्षा से hi मई ये चुनौती पार कर पाया हूँ...
शैला- बोलो fir..tumhare लिए तोह हम जान भी दे देंगे...
मई- ऐसा कभी नहीं hoga.mai बस आपसे ये चाहता हूँ की *********************
अक्षांत- बस इतनी सी baat....ho जाएगा.
मई- तोह घर चलें!!!!!
तीनो ने जैसे hi हाँ kaha,wo चौंक गए...
क्यूंकि उनके मुंडी हाँ में हिलाते hi हमारी जगह बदल gayi.hum मेरे रूम में थे.....
आईएम माय रूम:-
रोनित- यार तू कैसा क्लोन hai.....tujhe पता hi नहीं की V.J ठीक है भी या नहीं....
पर जवाब में मेरा क्लोन बस मुस्कुराया और गायब हो गया...
रोनित- अब ये कहाँ गया?
अंजलि- कहीं V.J कोई मुसीबत में तोह नहीं है...!!!
मई- तुम्हारे जैसे दोस्तों के होते V.J को कुछ नहीं हो सकता......
आवाज़ सुन जब दोनों palte,mujhe सामने देख दोनों तुरंत बीएड से कूड़े और मेरे गले लग गए.....
रोनित- भाई तू ठीक तोह है ना....!!!
मई- तेरे सामने हूँ देख ले...
अंजलि- यार हम दोनों इतने टेंशन में थे.....
हम तीनो की कुछ देर तक यूँही इमोशनल बातें होती रही...
मई- बाकी बातें 2 महीने के बाद....
अंजलि- 2 महीने matlab...tu फिर कहीं जा रहा है...!!
मई- मई नहीं तुम दोनों जा रहे हो.......
दोनों- मतलब!!!!!
मई- मैंने तुम दोनों को कहा था न की वो टॉनिक मई किसी ख़ास वजह से तुम दोनों को पिलाता था...
दोनों- हाँ....
मई- वो टॉनिक मई तुम दोनों को इसी दिन के लिए पिलाता था..
उस टॉनिक की वजह से तुम दोनों के बॉडी के सेल्स बदल गए hain....ab तुम्हारे बॉडी की बनावट अलग hai....tum दोनों के अंदर 100 इंसानो से ज़्यादा तलत hai....par इतना काफी नहीं hai..tumhe और शक्तिशाली होना पड़ेगा....
उसके लिए तुम दोनों को इन तीनो के साथ इनके गृह जाना higa...wahan तुम्हारी ट्रेनिंग होगी......
रोनित- ये ज़रूरी है क्या!!!
मई- अगर मेरी आगे की चुनौतियों में तुम दोनों मेरे साथ रहना चाहते हो तोह फिर ये ट्रेनिंग ज़रूरी है...
रोनित- घरवालों को क्या कहेंगे!!!!!
मई- वो मई संभल लूंगा.....
अंजलि- तू भी साथ चल ना...
मई- फिर तुम दोनों ठीक से कंसन्ट्रेट नहीं कर पाओगे.....
अब और कोई सवाल नहीं.......
चलो सब बाहर.....
सारे घरवाले बहार hi बैठे थे.......
मई- hello एवरीवन....
सब- hello बचो..
माँ- नाश्ता लगाऊं!!!!!
मई- अभी nahi.abhi मुझे आप सब से कुछ इम्पोर्टेन्ट बात करनी है...
सब- हाँ बोलो.....
मई- रोनित और अंजलि को 2 मोनथस के लिए मेरी जैसी ट्रेनिंग लेने के लिए जाना होगा, वो भी अभी.....
मेरी बात सुन शॉकेड हो gaye....isse पहले की कोई कुछ कहता..
मई- ये गुरूजी के ऑर्डर्स hain....wo तोह किसी अर्जेंट काम से गए hain,unhone मुझे आप सब को बताने को कहा hai.aur ये भी कहा है की अगर ों दोनों ने ट्रेनिंग नहीं li,toh इनके साथ कुछ गलत हो सकता hai...(jhooth)
मेरी बात सुन सभी चौंक gaye..mom डैड दोनों जानन्ते थे की बाबा विशाखत की बात गलत नहीं हो सकती...
माँ डैड ने ये बात जैसे hi सबको batayi,sabhi खतरे की बात सुन दर गए और दोनों के जाने के लिए हाँ कह दिया...
और 1 घंटे में रोनित और अंजलि बैग्स पैक कर निकल गए..........
ात नाईट इन माय बैडरूम:-
मुझे ास्मोडियस के बारे में काफी कुछ पता चल गया tha....kamsekam इतना की वो क्या था और डेविल कैसे बन gaya.....mujhe ये भी पता चल गया था की मेरी सुपरगुप्त बुक गॉड के आंसुओं से कैसे बानी..
ास्मोडियस की गलत हरकतों की वजह से गॉड नेबससे खुद से दूर तोह कर दिया पर था तोह वो भी उनका ansh,unka बच्चा hi..ussi गम में गॉड के आँखों से आंसूं mikle,aur आंसू निकलते वक़्त जो भी ज्ञान गॉड के दिमाग में घूम रहा tha,wo सब भी आंसू में बदल gaya..un आंसुओं ने एक बुक का रूप ले लिया और सदियों से अपने उत्तराधिकारी का इंतज़ार कर रही थी......
मेरे रूप में उसका इंतज़ार ख़त्म हुआ.....
पर एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही thi...wo ये की भले hi ास्मोडियस नेगेटिव tha,par शक्ति तोह उसमे भी उस वक़्त मेरे जितनी hi thi...phir वो स्पीयर उसकी क्यों ना हो saki.....aur इस स्पीयर ने मुझे क्यों chuna...aakhir मुझमे और ास्मोडियस में क्या फर्क था....
जैसे hi ये ख्याल मेरे मन में aaya,mere अंदर से मेरे बुक की आवाज़ आयी...
आपमें और ास्मोडियस में सिरग एक HI फर्क है....
मई- वो क्या!!!!!!
??
बुक - नजरिया, ऐटिटूड........
फर्स्ट CHAPTER के लिए इतना HI......
आपका अपना V.J.....
अब आगे:-
CHAPTER-1
( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )
लास्ट अपडेट:-
फाइनल सीन्स:-
शैला- ये सब क्या है गुरुदेव!!!!!!
बाबा विशाखत- तुम में धीरज बिलकुल नहीं है putri.....us युद्ध में तुम्हारे हारने का ये भी एक कारण था.......
बाबा विशाखत की बात सुन शैला ने अपना सर झुका लिया......
बाबा विशाखत- शर्मिंदा होने की आवश्यकता नहीं है putri.......bas अपनी अधीरता को वश में करना सीखो.....
अगर तुम्हारे सामने कोई प्रश्न खड़े हो jaaye,toh उसके उत्तर को ढूंढ़ने की पहली सिद्दी सय्यम hi hai.sayyam से भरा दिमाग किसी भी प्रश्न का उत्तर खोज लेता है.....
और रही बात की मई क्या कर रहा hun,wo तोह मेरे करने के बाद तुम्हे अपने आप hi पता चल जाएगा.....
इस वक़्त बाबा VISHAKHT,MOKALSAR,AKSHAANT और शैला धवलगढ़ के सबसे ऊँचे और घने पहाड़ के बीच खड़े थे....
बाबा विशाखत ने अपनी पोटली में से वो सफ़ेद कपडा निकला जो जिसमे विक्रम के सारे घरवालों के बाल the,aur उससे नीचे ज़मीं पर bicha,uske सामने बैठ गए....
बाबा विशाखत अपने हाथ में भी एक कपडा बाँध लिया जिसके उँगलियों वाला भाग नुकीला tha....BABA विशाखत ने सारे बालों को एक एक कर के उठाया.
फिर बाबा ने अपनी आँखें बंद की और एक मंत्र कहा........
तात्विक विषमपाना
( रियल िल्लुसिओं )
बाबा विशाखत के मंत्र कहते वो सारे बाल चमकने lage...BABA ने उन बालों को अपने सामने हवा में उछाल दिया...
वो सारे बाल हवा में तैरते हुए नीचे ज़मीन की तरफ आने लगे और जैसे hi वो सारे बाल ज़मीं से takraye,ek तेज़ रौशनी हुई और जब वो रौशनी घाटी तोह अक्षांत शैला और मोकलसर शॉकेड हो गए...
मोकलसर- gurudev.ye सब!!!! इससे तोह आप **************************
बाबा विशाखत- इसका जवाब तुम्हे स्वयं विक्रम dega......AKSHAANT तुम्हे एक काम करना होगा....
अक्षांत- आदेश दे गुरुदेव...
बाबा VIHSAKHT-mai अभी ध्यान में बैठने वाला hun.tumhe अदृश्य अवशता में विक्रम के घर के पास रहना hai....wahan पहुंचकर तुम्हे अपने दिव्या दृष्टि से मुझे देखते रहना है........
जैसे hi मेरे मुख से अभी nikle,tumhe विक्रम के ****************** करना hai.....tum जानते हो इसके लिए तुम्हे किस मंत्र का प्रयोग करना है.......
तीनो में से किसीको भी बाबा द्वारा दिए गए निर्देश का मतलब और कारण समझ नहीं aaya,par वो जानते थे की गुरूजी कोई भी काम बिना किसी ख़ास उद्देश्य के नहीं करते...
अक्षांत ने बाबा को नमन किया और गायब होकर उसी अदृश्य हालत में विक्रम के नानाजी के घर के सामने खड़ा हो gaya.usne अपनी दिव्या दृष्टि को जगाया और बाबा पे फोकस किया.
अक्षांत को बाबा दिखने lage.....BABA विषकहत को भी पता चल गया की अक्षांत उन्हें देख रहा है इसीलिए उनके चेहरे पर संतुष्टि भरी स्माइल आ गयी....
बाबा विशाखत ने शैला और मोकलसर को कुछ निर्देश दिए और खुद ध्यान में बैठ गए.....
धवली दृष्टि दर्शनम करोति.....
ध्यान में बैठे बाबा विशाखत ने जैसे hi ये मंत्र bola,unhe विक्रम और झील दिखने लगी....
बाबा विशाखत के चेहरे पर ख़ुशी और घबराहट दोनों hi भाव एक साथ दिखने लगे...
ख़ुशी इसीलिए क्यूंकि बाब समझ गए की विक्रम ने शुरुआती सभी चुनौतियों को सफलता पूर्वक पार कर लिया है.....
घबराहट इसीलिए क्यूंकि बाबा विशाखत ये जान गए की अब विक्रम का सामना स्पीयर से होने वाला है.........
वहीँ दूसरी तरफ:-
ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़........
आवाज़ सुन जैसे hi बलबीर पीछे palta,apne सामने अपने दूसरे बेटे दिग्विजय को देख जल्दी से उठा और दिग्विजय के गले लग गया.......
कुछ देर तक गले लगने के बाद जब दोनों बाप बेटे अलग hue,toh दिग्विजय को एक झटका लगा......
क्यों उसके बाप के आँखों में आंसू the....kyunki वालेफ़ोर एक डेविल tha,uske आंसू काले कलर के थे.....
दिग्विजय- क्या हुआ dad.....mujhe पहले hi कुछ गलत होने का अंदेशा हो गया tha,isiliye मई यहाँ aaya...maine पहली बार आपके आँख में आंसू देखे hain,kahin माँ को तोह!!!!
बलबीर- नहीं bete.teri माँ बिलकुल ठीक hai.par !!!!!!!
दिग्विजय- पर क्या डैड!!!!!
फिर बलबीर ने दिग्विजय को जो कुछ भी हुआ tha,wo bataya.....ye जानकार की उसका कोई भाई भी hai,DIGVIJAY बोहोत खुश होंगे.
पर जब उससे पता चला की उसके भाई के साथ क्या क्या हुआ hai,DIGVIJAY का दिमाग घूम गया......
दिग्विजय- मई उस साले और उसके परिवार को ऐसी मौत दूंगा जो किसीने सोची भी नहीं होगी......
ये बोलकर जैसे hi दिग्विजय उठने को hua,BALBEER ने उसका हाथ पकड़ उससे वापस बैठा दिया...
बलबीर- जल्दबाज़ी में किया गया काम नुक्सान पहुंचता है bete.....ye बात मैंने तुम्हारे भाई को भी समझायी थी पर वो नहीं maana......tum ये गलती मत दोहराना...
दिग्विजय- dad,mujhe कुछ नहीं hoga...aap नहीं जानते की मेरे अंदर अब कितनी शक्ति hai.......mai उस विक्रम को चुटकी में मसल दूंगा......
बलबीर- beta,shakti तुम्हारे भाई में भी काम नहीं thi..uske अंदर हम चारों प्रमुख DEVIL'S का खून tha,phir भी वो उस विक्रम का कुछ बिगड़ न पाया......
दिग्विजय- पर dad,mere शक्ति का श्रोत अलग है और ज़्यादा ताकतवर bhi...bhai ने विक्रम को बराबर की टक्कर दी thi,iska मतब वो मेरे सामने ज़्यादा देर टिक नहीं पायेगा.....
बलबीर- उसका भी एक कारण है putra....VIKRAM ने कुछ देर के लिए अपने सुरक्षा कवच को खुद hi हटा दिया tha,warna उसपर एक भी वार नहीं किया जा सकता....
ruko,mai तुम्हे दिखता हूँ की मई तुम्हे क्यों रोक रहा हूँ....
बलबीर ने अपना हाथ सामने कर एक बार ghumaya,dono के सामने हवा में hi एक स्क्रीन बन गयी जिसमे उस दिन का दृश्य दिख रहा था जब बलबीर ने विक्रम के ऊपर प्राणघाती मंत्र से वार किया था...
जैसे जैसे वो दृश्य आगे बढ़ रहा tha,DIGVIJAY की आँखें हैरत से फैलती चली जा रही thiu...aur जैसे hi वो दृश्य आया जिसमे बलबीर का मंत्र विक्रम के सुरक्षा कवच से टकराकर एक झटके में टूट गया और जिसके वजह से बलबीर बेहोश हो gaya,DIGVIJAY को एक तेज़ झटका लगा..
दिग्विजय- ये कैसे हो सकता है?
कोई भी सुरक्षा कवच इतना शक्तिशाली कैसे हो सकता है!!!!!
बलबीर- इतने दिनों से मई भी यही सोच रहा हूँ और मैंने उस सुरक्षा कवच का श्रोत पता लगाने की भी कोशिश की पर नाकाम रहा......
और रही बात तुम्हारी ताकत ki,toh तुम्हारी अपार शक्ति को मैंने भी महसूस किया hai,par फिर भी उस लड़के पर अभी हुम्ला करना ठीक नहीं होगा...
दिग्विजय- एक कोशिश करने में क्या जाता है dad......aur वैसे bhi,mai जो भी karunga,yahin से करूँगा......
बलबीर- matlab!!!!!tu कहना क्या चाहता है?
?
दिग्विजय ने कुछ कहा नहीं और अपनी आखें बंद कर कुछ मंत्र kaha,DIGVIJAY के हाथ में एक रेड गोला दिखने लगा...
दिग्विजय- dad,aap इस गोले में आपका विध्वंसी मंत्र मिला दीजिये..
बलबीर ने अपनी आँखें बंद की और अपने हाथ आगे kiye....BALBEER के हाथों से काली रौशनी निकली और दिग्विजय के हाथ के ऊपर रखे रेड गोले में घुस गयी.....
दिग्विजय ने अपनी आँखें बंद की और विक्रम को खोजने laga......par ुए विक्रम कहीं नहीं दिखा.....
दिग्विजय चौंक गया और उसने अपनी आखें खोल दी...
दिग्विजय- dad,wo विक्रम नज़र क्यों नहीं आ रहा..
बलबीर- यही तोह मैं गुत्थी है bete..meri नज़र उसपे हर वक़्त रहती thi,par बीच बीच में वो दिखना बंद हो जाता tha.jitnei भी कोशिश karo,pata hi नहीं चलता था की वो कहाँ गया..
कहीं ये उसकी कोई नयी चाल तोह nahi,ye सोचकर मैंने उसपे नज़र रखना बंद कर दिया.....
दिग्विजय- कभी न कभी तोह सब पता चल hi jaayega...filhal के liye,wo नहीं तोह उसकी फॅमिली hi सही..
दिग्विजय ने फिर आँख बंद kiye,usse विक्रम की फॅमिली दिखने लगी जिससे देखकर दिग्विजय के चेहरे पर मुस्कान आ गयी..
दिग्विजय- अब कहाँ chupega......apni फॅमिली को मरता देख तोह ज़रूर सामने आएगा.
दिग्विजय ने अपने हाथ में रखे गोले को छोड़ diya.wo रेड & ब्लैक गोला तेज़ी से धवलगढ़ की तरफ आने लगा पर ये क्या.........!!!!!!
दिग्विजय और बलबीर की आँखें शॉक से फैले गयी....
हुआ ये की जैसे hi वो गोला धवलगढ़ की सरहद तक pahuncha,wo रूक गया और एक झटके के साथ नष्ट हो गया...........
दिग्विजय- impossible.......ye कैसे हो सकता है...!!!!!!
बलबीर- मैंने कहा था na,ye गुथी जितनी दिखती hai,usse ज़्यादा उलझी हुई hai......beta,hame जोश ने नहीं होश से काम लेना padega....jo भी करना hai,soch समझ कर ठन्डे दिमाग से करो......
दिग्विजय ने बलबीर से कुछ कहा जिससे सुनकर बलबीर ने पहले कुछ कहा पर फिर दिग्विजय को लेकर एक तरफ चल दिया पर कुछ hi देर में दोनों बाप बेटे वापस आ gaye.dono के hi चेहरे पर उदासी थी.....
बलबीर- beta,tum एक काम karo,kuch दिन के लिए कहीं ग्फ्ह्यम aao......tumhara मंद भी फ्रेश हो jaayega,uske बाद सोचेंगे की आगे क्या करना है.....
दिग्विजय- ठीक है dad..mai थोड़ा बहार से आता हूँ,2 साल हो गए अपने दोस्तों से मिले hue.....sabse मिलता हूँ और फिर उन्ही के साथ मिलकर कुछ पालन बनता हूँ की कहाँ घूमने जाय जाए....
बलबीर- ठीक है....
दिग्विजय अपने दोस्तों से मिलने निकल गया....
( इसी के साथ दिग्विजय का रोल 1सत CHAPTER के लिए ख़त्म hua...ab आपकी इनसे मुलाकात 2ंद chapter में hogi,aur वो भी कुछ इस अंदाज़ में जो आपने सोचा न होगा..... )
इन हेवन:-
सत सकिलिअ- आपका अनुमान सही nikla....agar आप समय रहते धवलगढ़ की सीमा को नहीं बांधते तोह अनर्थ हो जाता....
सत सेबेस्टियन- ऐसा कुछ hoga,ye अनुमान मेरा नहीं था.....
सत सकिलिअ- तोह फिर.....!!!!!
सत सेबेस्टियन- ये लार्ड ऑफ़ एंगेल्स का यकीं था की ऐसा कुछ हो सकता hai.GURU विशाखत को निर्देश देने के बाद उन्होंने मुझे भी कुछ निर्देश दिए थे.....
सत सकिलिअ- waah.LORD का प्रेडिक्शन पावर काफी बढ़ गया है...
सत सकिलिअ- haan,par अभी ये देखना बाकी है की बाबा विशाखत को जिस प्रेडिक्शन की वजह से लार्ड ने काम सौंपा hai,kya वो भी सच होता है.....
सत अल्फ़्रिक- haan,mai भी यह सब देखने के लिए अत्ति उत्सुक भी हूँ और चिंतित bhi.......najaane आगे क्या होगा!!!
सत सेबेस्टियन- कुछ hi देर में इस का जवाब हम सब को मिल जाएगा.......
बैक तो हीरो:-
AAAHHHHHHHHHHHH....UMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMM......
मई पानी की सतह के ऊपर पड़ा दर्द से चटपटा रहा था....
क्या हुआ bache????bas,itne में hi दम निकल गया......
मई मन में- saala,ek तोह ये dard,upar से ये nautanki....aur क्या कह रहा hai,bache,saala.itna भी नहीं पता की मुझे बचा बोल ये खुदको भी वही बोल रहा है...
दरअसल जो मेरे सामने खड़ा tha,wo मई hi tha....samajh नहीं आया na,chaliye आपको समझता हूँ.....
जैसा की आप सब को पता है की मई इस वक़्त धवली झील के असली स्वरुप के सामने खड़ा हूँ....
झील के बीचो बीच मुझे कुछ चमकता हुआ सा dikha,jo की असल में मेरी मंज़िल थी, स्पीयर.........
अब मई मैजिक का उसे तोह कर hi सकता था...
मैंने अपने दोनों हाथ फैलाये और हवा में उठ gaya....par जैसे जैसे मई पानी के ऊपर से आगे बढ़ रहा tha,mere शरीर में दर्द बढ़ता जा रहा tha....par लागबहग 2 सालों से पीड़ा AVLOKYATI.....mantra पढ़ने की वजह से मई उस दर्द को सेह पा रहा था....
कुछ hi पलों में मई स्पीयर के सामने था..
मई- saala,ye किस एंगल से स्पीयर दिख रहा hai....!!!!!ye तोह तलवार से भी बड़ा है......
मेरे सामने जो स्पीयर tha,wo करीब 4 फ़ीट बड़ा tha...golden कलर याने की सोने के परत में ढाका हुआ एक खूबसूरत सा स्पीयर...
स्पीयर को देख कर ये कोई भी नहीं कह सकता था की वो करोड़ों साल पुराण hai..aisa लग रहा था जैसे उससे अभी अभी बनाया गया hai........aur एक अजीब बात thi,us स्पीयर में एक नाम लिखा हुआ था जो समझ में नहीं आ रहा था...
ये बात मेरे लिए काफी चौकाने वाली thi,kyunki मुझे इस ब्रम्हांड में उसे किये गए सभी लैंग्वेज आते the..par ये लैंग्वेज उनमे से नहीं था....
Khair,jaise hi मैंने उस स्पीयर को चुने के लिए अपना हाथ आगे badhaya,SPEAR में से एक तेज़ बिजली निकल कर मुझपर padi,mai उड़ता हुआ पानी में जा गिरा,
अह्ह्ह्ह
आप सोच रहे होंगे की पानी में गिरने से दर्द kyun,wo इसीलिए क्यूंकि मई पानी में डूबा nahi,balki उसकी सतह से टकराकर पानी के ऊपर hi रह gaya.paani की सतह पत्थर जैसी मजबोईत thi...ek तोह स्पीयर द्वारा दिया गया dard,uske ऊपर मई काफी ज़ोर से उस सतह पर गिरा tha,dard तोह होगा ना.....
मई लट्टे पत्ते खड़ा हुआ और वापस दर्द को कण्ट्रोल करने का मंत्र बोलने लगा.......
कैसे हो विक्रम!!!!!!
??
अभी मई नार्मल हुआ hi था की आवाज़ सुन जैसे hi मैंने सामने dekha,mujhe एक नया झटका laga.....mere सामने जो खड़ा था वो और कोई नहीं मई hi था....
इसीलिए मैंने कहा था की मुझे बचा बोल ये खुदको भी वही बोल रहा है....
(सामने वाले को बहरूपिया लिखूंगा)
बहरूपिया- इतने हैरान क्यों हो?
??तुमने खुद hi मुझे जन्म दिया है?
?
मई- तोह नाम क्यों ले रहा है?
?पापा बोल naa......aur पापा से याद aaya,teri माँ कौन है.....
बहरूपिया- स्पीयर......
मई- मतलब कुछ भी ना......
बहरूपिया- जैसे hi तुमने स्पीयर को chua,usne तुम्हारे अक्स ko,tumhari ताकत को कॉपी कर liya,aur उसीसे मेरा जन्म hua...mujhme भी वही सब ताकतें hain,jo तुममे है....
MAI-toh अब!!!!!!
बहरूपिया ने बिना कुछ बोले मेरे उपकर इलेक्ट्रिक रेज़ छोड़े जिससे मैंने अपना हाथ आगे कर रोक diya..par तभी उसने कुछ नया सा kiya...usne अपने हाथ को जिससे रेज़ निकल रहे the,usse घूमने laga...uske हाथ घुमाते hi रेज़ भी गोल घूमते हुए मेरे सारे शरीर से लिपटती चली gayi.....mujhe असहनीय दर्द होने लगा
तभी वो बहरूपिया तेज़ी से आगे badha,aur उसने मेरे चेहरे पर 3,4 पंच जड़ diye....mera दर्द डबल हो गया...
उसने अपनी ऊँगली उलटी ghumayi,dekhte hi देखते मेरे शरीर से लिपटी साड़ी इलेक्ट्रिक रेज़ निकल gayi,rays के निकलर hi उसने मेरे पेट पे लगातार 2 पंचेस maare,mai दर्द से दोहराता हुआ नीचे गिर गया.....
बहरूपिया- क्या हुआ bache????bas,itne में hi दम निकल गया......
(फर्स्ट सन)
साले से लड़ना वाकई मुश्किल tha,kyunki स्पीयर ने उससे मेरी hi काबिलियत दे दी थी...
पर तभी मुझे कुछ याद आया जो मेरी बुक हमेशा मुझे कहा करती थी....
बुक- अपने दिमाग को अपने दिल से jodo....tumhe हर परेशानी से निकलने की युक्ति मिल जायेगी...
मुझे यकीं था की स्पीयर मेरे दिमाग ko,unme छुपी काबिलियत को तोह पढ़ सकती hai,par मेरे दिल को nahi,kyunki मेरा दिल मेरे बुक का घर है जहाँ स्पीयर नहीं पहुँच सकती........
मैंने अपनी आँखें बंद की और ध्यान lagaya...mujhe मेरे दिल की ढकने सुनाई देने लगी और अगले hi पल मेरे धड़कनो की आवाज़ का ठिकाना बदल gaya....ab ये आवाज़ मेरे दिमाग से आ रही थी...
मैंने अपनी आँखें kholi....dard तोह मुझे अब भी काफी हो रहा tha,par मेरे चेहरे पर मुस्कान thi.mujhe ुस्कराता देख बहरूपिये की मुस्कान गायब हो गयी......
पीड़ा प्रारभं...........
aaaahhhhhhhhhhhhhhhh..........................nahiiiiii.nahiii................
ये चीख मेरी नहीं मेरे बहरूपिया की थी, वो अपना सर पकड़ कर बैठ gaya.......darasal जो मंत्र मैंने अभी बोलै tha,wo बुक के द्वारा बताते गए मंत्र का काट tha........PIDA अवलोकयति मंत्र मेरे दिमाग पर असर कर रहा tha..aur जो बहरूपिया मेरे सामने खड़ा tha,usme भी मेरा hi दिमाग था..
मेरे मंत्र पलटने से मेरे दिमाग का दर्द उसके दिमाग ने महसूस करना शुरू कर diya.....aur रहा मेरा sawaal,toh मेरा दिमाग तोह मेरे दिल से जुड़ चूका tha,isiliye मुझे कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ा......
बहरूपिया का दर्द इतना बढ़ गया की वो बेहोश हो gaya.....abhi मई खुश हो hi रहा था की तभी........
स्पीयर में से एक काली गाढ़ी रौशनी निकली और उस बहरूपिया में समां gayi.........kuch hi पलों में उस बहरूपिये का कलर बदलकर काला हो गया.....
बहरूपिया एक झटके में खड़ा हो गया.....
उस बहरूपिये का रूप तोह मेरा hi tha,par उन काले रेज़ की वजह से उसका रूप भी काला हो गया.....
मई- थैंक्स बोल बे एहसान faramosh........mere रूप की वजह से काला डामर होने के बाद भी तू हैंडसम दिख रहा है........
पर वो बहरूपिया कुछ बोलै नहीं बस दहकती आँखों से मुझे घूरता गया...
उसने अपने हाथ uthaye....mere दोनों तरफ का पानी हवा में उठ gaya......BEHROOPIYE ने पानी की तरफ हाथ कर कुछ मंत्र कहा और फिर अपने हाथ मेरी तरफ कर diye...paani तेज़ी से मेरी और बढ़ी और मुझे अपने अंदर समां ले गयी......
जब मेरी जगह से पानी हटी तोह मई वहां नहीं tha,jisse देखकर बहरूपिया हसने लगा की तभी........
इधर देख ोये........
बहरूपिये ने जब आवाज़ की तरफ देखा तोह शॉकेड हो gaya..usse कुछ hi दूर मई पानी के बने मत के ऊपर खड़ा था....
बहरूपिये ने अपने दोनों हाथ से पानी को छू liya...............pure पानी में भूकंप आने laga.har जगह जो गोल भवर बनाने laga.mai हवा में जहाँ खड़ा tha,BEHROOPIYE ने ठीक उसी जगह के नीचे अपने हाथ किये और कुछ मंत्र बोलै....
सुबह की आवाज़ से ठीक मेरे नीचे से तेज़ी से मेरी तरफ पानी से बने त्रिशूल आने lage.....ye एक दो तरफ़ा हुम्ला tha...agar मई खड़ा रहता तोह त्रिशूल मुझे lagta....aur अगर कूदता तोह भवर की चपेट में आ जाता.....
मैंने एक लम्बी सांस ली और कूद गया...
मुझे गिरता देख बहरूपिये के काले चेहरे के बीच सफ़ेद दाथ चमकने lage.....par ये ख़ुशी सिर्फ एक पल की thi....BEHROOPIYE के ख़ुशी वाले चेहरे पर अब शॉकिंग एक्सप्रेशंस थे....
हुआ ये की नीच गिरते वक़्त मैंने अपने हाथ तेज़ी से घुमाने शुरू कर diye,jisse पानी के ठीक ऊपर हवा उठने lagi,jisne भवर को अपने अंदर समेटकर बर्फ बना diya....mai ठीक उस बर्फ के बड़े से गोले के ऊपर स्पिन करते हुए गिरा और खड़ा हो गया....
मई- बस बोहोत हुआ.......
अब समाया था बुक से सिखाये गए सबसे खतरनाक मंत्रो में से कुछ के इस्तेमाल करने का....
मैंने अपने हाथ आगे किये
प्रज्वलयति
(सेट ों फायर)
मेरे मंत्र बोलने से पुरे पानी में आग लग gayi.....aag लगने से बहरूपिये के टेल जल gaye,wo तुरंत हवा में उठ गया.....
श्यंदना विजासती....
( एयर डिस्ट्रॉय )
मेरे ये मंत्र बोलते hi बहरूपिये के आस पास मौजूद हवा ज़हरीली हो gayi......jab इस बात का एहसास बहरूपिये को हुआ तोह उसने नाक बंद कर ली पर तब तक वो ज़हरीली हवा उसके अंदर जा चुकी थी....
वज्राहता
( स्ट्राइकिंग ऑफ़ ा थंडरबोल्ट )
आसमान काले पद gaye,aur हर तरफ से बिजली निकलकर बहरूपिये के ऊपर पड़ने lagi......kuch hi पलों में बहरूपिये का शरीर राख हो गया....
मैंने अभी चैन की सांस भी नहीं ली थी की एक नयी चीज़ hui....SPEAR में से तेज़ रौशनी निकली और हर तरफ फैले gayi..kuch hi पलों में मेरा किया हर जादू ख़त्म हो गया...
मेरा जादू ख़त्म कर स्पीयर एक बार फिर chamki,par मेरे चेहरे पर भी हलकी स्माइल आ gayi...mujhe पता था की अब क्या होने वाला है....
स्पीयर की रौशनी से 4 बहरूपिये बाहर आये और मेरे सामने आकर खड़े हो gaye.......wo चारों एक तक मुझे देखने लगे.......
जो मैंने सोचा tha,wo तोह होने hi वाला tha,par साथ में कुछ और भी हुआ जो मैंने सोचा नहीं था.......
एक बहरूपिये ने बाकी तीनो को कुछ इशारा kiya,teeno गायब हो गए.....
वहीँ दूसरी तरफ:-
अभी..............
बाबा विशाखत ध्यान अवस्था में धवली झील का सन देख रहे the..wahan उस बहरूपिये ने अपने तीनो साथियों को जाने का इशारा kiya,yahan बाबा विशाखत के मुँह से अभी निकला जो अक्षांत ने सुन लिया और अपना तुरंत एक मंत्र पढ़ा और गायब होकर वापस बाबा विशाखत के पास पहुँच गया....
बाबा विशाखत की आँख खुल गयी....
बाबा विशाखत ने कुछ मंत्र bola..unke सामने एक बांग्ला बन गया..
बाबा विशाखत- जल्दी से इनको लेकर अंदर जाओ और तैयार रहना...
तीनो- जी गुरुदेव....
तीनो कुछ लोगों को लेकर उस बंगले के अंदर चले गए.....
बैक 2 हीरो:-
तीनो बहरूपियों के गायब होते hi स्पीयर एक बार फिर से चमकी और उससे एक बिजली से बानी रस्सी निकली और मुझे लपेटती चली गईइइइइइ.........
आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.................
तभी एक और चीज़ hui....mere अंदर से किताब निकली और गायब हो gayi.........mera दर्द इसीलिए hi कण्ट्रोल में था क्यूंकि वो किताब मेरे दिल से कनेक्टेड thi..uske जाते hi मेरे दिल का कनेक्शन मेरे दिमाग से टूट गया और मुझे असहनीय दर्द होने लगा...
बहरूपिया- waah,tera आखरी वक़्त आते hi वो बुक ने भी तेरा साथ छोड़ दिया......
अब यहाँ तू मरेगा और वहां तेरा PARIWAR......chal तेरे मरते मरते तुझे तेरे परिवार की मौत भी दिखता हूँ...
बहरूपिये ने अपने हाथ ghumaye,saamne हवा में एक बड़ी सी स्क्रीन बन गयी....
वहीँ दूसरी तरफ:-
मेरी किताब गायब होकर एक जगह pahunchi........us जगह पर कोई सोया हुआ था. बुक से एक रौशनी निकली और सामने वाले पर padi..book और वो साक्ष गायब हो गए....
बैक तो हीरो:-
बहरूपिया- kyun,maza आ रहा hai!!!arre तुझे कैसे मज़ा aayega....tu तोह खुद मरने वाला hai...haaaahaaaahaaaa..
मेरे सामने स्क्रीन पर मेरे तीनो GURU,MOKALSAR,SHAILA और अक्षांत तीनो बहरूपियों से लड़ रहे थे......
कुछ देर तक मेरे तीनो गुरु उन सब का सामना करते रहे पर वो बेहरुपीये ज़्यादा ताकतवर the..unhone मेरे तीनो गुरुओं के शास्त्र गिरा दिए..
शाश्त्र गिरते hi मेरे तीनो गुरु गायब हो गए.......
बहरूपिया- अरे yaar,tere घरवालों के बॉडी गार्ड्स तोह बोहोत फत्तू nikle..khair,apni जान किसको प्यारी नहीं hoti....tu आखरी बार अपने अपनों को देख ले..
उन तीनो बहरूपियों ने मेरे सारे परिवार वालों को एक झटके में मार दिया tha......unka काम ख़त्म हो चूका tha.wo वापस गायब होकर स्पीयर में समां गए...
इससे आगे मई देख नहीं पाया और बेहोश हो गया.....
बहरूपिया धीरे धीरे चलते हुए मेरे पास आ रहा था
की तभी:-
एक तेज़ रौशनी hui.jaise hi रौशनी बहरूपिये पर पड़ी वो उड़ते हुई पीछे जाकर गिरा...
उस रौशनी के बीच में से मेरी किताब निकली पर वो अकेली नहीं थी उसके साथ कोई था...
किताब जिससे लायी थी उससे ठीक मेरे बाजू में लिटा diya.book से एक और बार रौशनी nikli,us शख्श का हाथ अपने आप hi मेरे हाथों क ऊपर आ गया....
जैसे hi हम दोनों के हाथ mile,mere शरीर को तेज़ झटके लगने lage..wo बिजली की रस्सी जो मेरे शरीर को बांधे हुए thi,ek झटके में टूट गयी.....
कुछ देर तक मेरी बड़ी झटके खाती rahi,fir शांत पद गयी........
बहरूपिया जहाँ जाकर गिरा tha,wahin से आँख फाड़े ये सब देख रहा tha....jaise hi वो रस्सी टूटी और मेरे शरीर को झटके लगने बंद hue,wo उठकर मेरे पास aaya,aur जैसे hi उसने मेरे साथ वाले का चेहरा dekha,usse मुझसे भी ज़्यादा बड़ा झटका लगा....
बहरूपिया- अवन्तिकाआआआ...........
जी हाँ doston,BOOK और किसी को नहीं अवंतिका को लेकर आयी थी...
जैसा की मैंने बताया था की बहरूपिये ने मेरा दिमाग पढ़ा tha,isiliye मेरी लाइफ में आये हर शक्श को जानता था...
बहरूपिया- ये कैसे हो सकता hai...!!!!ek मामूली सी लड़की ये सब कैसे कर सकती है...
बुक- मई बताती hu..ye लड़की और कोई नहीं विक्रम यानी लार्ड ऑफ़ एंगेल्स की शक्ति hai..iske रहते कोई भी उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता......
इससे पहले की बहरूपिया कुछ kehta,BOOK अवंतिका को लेकर गायब हो गयी.....
बहरूपिया- इससे यहीं ख़त्म कर देता hun.......kissa hi ख़त्म...
मई अभी भी बेहोश hi पड़ा tha.BEHROOPIYE ने अपना हाथ आगे kiya,uske हाथ में एक तलवार आ gayi.....wo आगे बादः और उसने मेरे गर्दन को निशाना बनाकर तलवार चला दी...
aahhhhhhhhhh........
ये आवाज़ बहरूपिये की thi....hua ये की जैसे hi बहरूपिये ने अपना हाथ ऊपर uthaya,mujhe होश आ gaya.maine भी तुरंत एक तलवार का आवाहन kiya,aur इससे पहले की बहरूपिया तलवार chalaye,maine अपनी तलवार उसस्के पेट में घुसा दी....
और जैसे hi वो दर्द से तड़पता हुआ आगे jhuka,maine एक झटके में उसके पेट से तलवार nikali,aur उसकी गर्दन उदा दी....
मई तेज़ी से उठा और स्पीयर की तरफ चल diya.......mujhe आगे बढ़ने में काफी परेशानी हो रही thi.aisa लग रहा था जैसे कोई मुझे पीछे खींच रहा है पर मई रूका नहीं और आगे बढ़ता रहा..
वहीँ जैसे जैसे मई स्पीयर के करीब जा रहा tha,SPEAR तेज़ चमकने लगी थी.....
और फिर अचानक..........
मेरे शरीर पर एंगेल्स वाले वाइट कपडे आ गए THE..MAI हवा में उठने लगा THA.....AUR मेरे अंदर से कई रूहें एक एक बाद एक बाहर आने लगी थी........
हुआ ये की मई जब स्पीयर और मेरे बीच बस कुछ मेट्रेस का फासला भर बचा tha,toh वो स्पीयर एक झटके में आयी और मेरे अंदर समां gayi....ab मई अपने लार्ड ऑफ़ एंजेल के गेट उप में ज़रूर tha,par मुझे बोहोत ज़्यादा दर्द हो रहा था......
की तभी मेरे सामने एक और रौशनी हुई और मेरी बुक मेरे सामने प्रकट hui.....book के सामने आते hi वो स्पीयर मेरे अंदर से बाहर आ गयी...
मैंने उस स्पीयर को पकड़ा और उससे देखने laga.uspe जो नाम लिखा tha,wo मिट चूका tha,aur अब उसपे एक नया नाम लिखा रहा tha...........VIKRAM............
पर पुराने नाम के मिटने से पहले मैंने उससे पढ़ लिया tha.ab वो नाम साफ़ इंग्लिश में लिखा tha...................ASMODEUS.....................
मुझे इस नाम के मालिक के बारे में भी पता चल चूका था...
मई (मन में )- बोहोत जल्दी मुलाकात होगी मेरे भाई............
वहीँ मेरे सामने मेरी बुक अपने आप खुल गयी और वो स्पीयर उसके अंदर एक तस्वीर के रूप में छाप गयी.....
बुक- क्या मुझे आपके अंदर सामने की इजाज़त है...!!!!
स्पीयर की तस्वीर छापते hi बुक से आवाज़ आयी....
मई- इजाज़त है.......
मेरे हाँ बोलते hi वो बुक एक झटके में मेरे अंदर समां gayi.....mera पूरा शरीर ग्लो करने laga..meri आँखें भी पूरी सफ़ेद हो gayiiii.......maine ऊपर dekha,teeno GOD'S मैसेंजर HEAVEN'S गेट पर हाथ जोड़े खड़े थे....
मई धीरे धीरे नीचे आने laga..jab मई नीचे आया तोह मेरे सामने 1000 हौली स्पिरिट्स थे.. जिन्हे मैंने मुक्त कराया tha,wo भी मेरे सामने खड़े थे...
मेरे उनके सामने आते hi वो सब अपने घुटनो पर झुक गए.......
मई- खड़े हो जाइये...
ईस्ट हौली SPIRIT-hame मुक्ति दिलाने के लिए आपका कोई कोटि dhanyawaad...aur शमा kariyega,hum आपको अपनी ताकत नहीं दे पाएंगे....
मई- क्या मई इसकी वजह जान सकता हूँ!!!!
2ंद हौली स्पिरिट- हमारे बंदी बनते hi हमने अपनी ताकत को दूसरे गृह पर छुपा दिया tha......par बदकिस्मती से हमे ताकत भी दूषित हो गयी hai,isiliye हम उससे वापस बही बुला सकते....
मई- कौन से गृह पर आपकी शक्तियां है और वो दूषित कैसे हो गयीं...
1सत हौली स्पिरिट- हमारी शक्तियां ग्लूटो गृह के गुफा में डायमंड्स के रूप में हैं पर दो काली शक्तियों के भक्तों ने उन डायमंड्स से शक्ति हासिल कर उससे भी दूषित कर दिया है....
मई- आप फ़िक्र न karen,mai खुद जाकर उन शक्तियों को पुनः शुद्ध कर प्राप्त karunga..ab आप सब क्या करेंगे!!!!
1सत हौली स्पिरिट- हमारी आत्मा अब कहीं और नहीं रह sakti.hum सब वापस गॉड के शरण में चले जाएंगे.....
मई- ठीक hai..bas 1 मिनट रुकिए.....
बाबा विशाखत प्रकट हो.....
मेरे आवाज़ देते hi बाबा विशाखत AKSHAANT,MOKALSAR और शैला के साथ प्रकट हुए......
मई- guruji,mai आपको इस दुनिया के मायाजाल से मुक्त करता hun...ab आप गॉड के शरण में जा सकते हैं.......
मैंने अपना हाथ आगे kiya,mere हाथों से सफ़ेद रौशनी निकली और बाबा पे padi,unka शरीर परछाई में बदल गया.....
मैंने ऊपर dekha,ST सेबेस्टियन ने हेवन का दरवाज़ा खोल diya.....saare हौली स्पिरिट्स एक के बाद एक हवा में उठकर हेवन में जाने लगे....
बाबा विशाखत- तुम्हारा गुरु hona,yahi मेरे लिए मोक्ष से काम नहीं था पुत्र..
AKSHAANT,tum तीनो के मन में जो भी सवाल hai,wo विक्रम से पूछ lena...mere जाने का वक़्त हो गया है.....
बाबा विशाखत भी हौली स्पिरिट्स के साथ हवा में उठ हेवन चले गए......
गुरूजी को जाते देख मेरी आँख से दो बून्द आंसू निकल कर गिर गए आखिर गुरूजी मेरे पिता तुल्य tha...par मई खुश था की वो जो चाहते the,wo उन्हें मिल गया....
मई तीनो को ले गायब हो अपने घर के पीछे वाले जंगल में pahuncha...jo मायावी बंगला गुरूजी ने बनाया tha,wo गायब हो चूका था...
कुछ देर तक हमारे बीच शांति rahi..sabhi को गुरूजी के जाने का दुःख था..
मई- काफी ठण्ड है यहाँ!!!!
इस वक़्त सुबह के 7.45 हो रहे the...DHAWALGARH पहाड़ी इलाके में बसा शहर tha...aur उसके ऊपर हम पहाड़ में the....yahan ठण्ड कुछ ज़्यादा hi thi....mai तोह इस कड़कती ठण्ड में भी नार्मल hi tha,par बात शुरू करने के लिए कुछ तोह कहना hi था....
शैला- हमारे गृह में यह पुरे साल इससे ज़्यादा ठण्ड रहती है....
मोकलसर- सही kaha....yahan का मौसम तोह हमारे लिए नार्मल है...
अब माहौल कुछ नार्मल tha,toh मई सीधे मुद्दे पर आ गया.
मई- hmm.toh क्या सवाल हैं आप सब के....!!!
अक्षांत- यही की आपकी फॅमिली के क्लोन्स का भ्रम पैदा करने के लिए उनके बालों की क्या आवश्यकता thi....wo तोह सिर्फ स्पेल बोलके hi किया जा सकता था..
जी हाँ दोस्तों, उन बहरूपियों ने जिनको मारा tha,wo मेरे परिवार के क्लोन्स थे...
मई- ये मत भूलिए की मेरा सामना किस्से हुआ tha....mere परिवार वालों के बाल की वजह से जो क्लोन बनाये गए थे वो उनके ओरिगिनाल्स से काम असली नहीं the.agar मैंने या गुरूजी ने ऐसे hi क्लोन बना दिए होते तोह स्पीयर द्वारा भेजे गए बहरूपिये उन्हें पहचान जाते....
मोकलसर- अब हमारे लिए क्या आदेश है...!!!!
मई- आदेश नहीं निवेदन hai.wo भी मई तब hi बताऊंगा जब आप तीनो मुखसे पहले जैसा बर्ताव karenge.....aap तीनो की दी हुई शिक्षा से hi मई ये चुनौती पार कर पाया हूँ...
शैला- बोलो fir..tumhare लिए तोह हम जान भी दे देंगे...
मई- ऐसा कभी नहीं hoga.mai बस आपसे ये चाहता हूँ की *********************
अक्षांत- बस इतनी सी baat....ho जाएगा.
मई- तोह घर चलें!!!!!
तीनो ने जैसे hi हाँ kaha,wo चौंक गए...
क्यूंकि उनके मुंडी हाँ में हिलाते hi हमारी जगह बदल gayi.hum मेरे रूम में थे.....
आईएम माय रूम:-
रोनित- यार तू कैसा क्लोन hai.....tujhe पता hi नहीं की V.J ठीक है भी या नहीं....
पर जवाब में मेरा क्लोन बस मुस्कुराया और गायब हो गया...
रोनित- अब ये कहाँ गया?
अंजलि- कहीं V.J कोई मुसीबत में तोह नहीं है...!!!
मई- तुम्हारे जैसे दोस्तों के होते V.J को कुछ नहीं हो सकता......
आवाज़ सुन जब दोनों palte,mujhe सामने देख दोनों तुरंत बीएड से कूड़े और मेरे गले लग गए.....
रोनित- भाई तू ठीक तोह है ना....!!!
मई- तेरे सामने हूँ देख ले...
अंजलि- यार हम दोनों इतने टेंशन में थे.....
हम तीनो की कुछ देर तक यूँही इमोशनल बातें होती रही...
मई- बाकी बातें 2 महीने के बाद....
अंजलि- 2 महीने matlab...tu फिर कहीं जा रहा है...!!
मई- मई नहीं तुम दोनों जा रहे हो.......
दोनों- मतलब!!!!!
मई- मैंने तुम दोनों को कहा था न की वो टॉनिक मई किसी ख़ास वजह से तुम दोनों को पिलाता था...
दोनों- हाँ....
मई- वो टॉनिक मई तुम दोनों को इसी दिन के लिए पिलाता था..
उस टॉनिक की वजह से तुम दोनों के बॉडी के सेल्स बदल गए hain....ab तुम्हारे बॉडी की बनावट अलग hai....tum दोनों के अंदर 100 इंसानो से ज़्यादा तलत hai....par इतना काफी नहीं hai..tumhe और शक्तिशाली होना पड़ेगा....
उसके लिए तुम दोनों को इन तीनो के साथ इनके गृह जाना higa...wahan तुम्हारी ट्रेनिंग होगी......
रोनित- ये ज़रूरी है क्या!!!
मई- अगर मेरी आगे की चुनौतियों में तुम दोनों मेरे साथ रहना चाहते हो तोह फिर ये ट्रेनिंग ज़रूरी है...
रोनित- घरवालों को क्या कहेंगे!!!!!
मई- वो मई संभल लूंगा.....
अंजलि- तू भी साथ चल ना...
मई- फिर तुम दोनों ठीक से कंसन्ट्रेट नहीं कर पाओगे.....
अब और कोई सवाल नहीं.......
चलो सब बाहर.....
सारे घरवाले बहार hi बैठे थे.......
मई- hello एवरीवन....
सब- hello बचो..
माँ- नाश्ता लगाऊं!!!!!
मई- अभी nahi.abhi मुझे आप सब से कुछ इम्पोर्टेन्ट बात करनी है...
सब- हाँ बोलो.....
मई- रोनित और अंजलि को 2 मोनथस के लिए मेरी जैसी ट्रेनिंग लेने के लिए जाना होगा, वो भी अभी.....
मेरी बात सुन शॉकेड हो gaye....isse पहले की कोई कुछ कहता..
मई- ये गुरूजी के ऑर्डर्स hain....wo तोह किसी अर्जेंट काम से गए hain,unhone मुझे आप सब को बताने को कहा hai.aur ये भी कहा है की अगर ों दोनों ने ट्रेनिंग नहीं li,toh इनके साथ कुछ गलत हो सकता hai...(jhooth)
मेरी बात सुन सभी चौंक gaye..mom डैड दोनों जानन्ते थे की बाबा विशाखत की बात गलत नहीं हो सकती...
माँ डैड ने ये बात जैसे hi सबको batayi,sabhi खतरे की बात सुन दर गए और दोनों के जाने के लिए हाँ कह दिया...
और 1 घंटे में रोनित और अंजलि बैग्स पैक कर निकल गए..........
ात नाईट इन माय बैडरूम:-
मुझे ास्मोडियस के बारे में काफी कुछ पता चल गया tha....kamsekam इतना की वो क्या था और डेविल कैसे बन gaya.....mujhe ये भी पता चल गया था की मेरी सुपरगुप्त बुक गॉड के आंसुओं से कैसे बानी..
ास्मोडियस की गलत हरकतों की वजह से गॉड नेबससे खुद से दूर तोह कर दिया पर था तोह वो भी उनका ansh,unka बच्चा hi..ussi गम में गॉड के आँखों से आंसूं mikle,aur आंसू निकलते वक़्त जो भी ज्ञान गॉड के दिमाग में घूम रहा tha,wo सब भी आंसू में बदल gaya..un आंसुओं ने एक बुक का रूप ले लिया और सदियों से अपने उत्तराधिकारी का इंतज़ार कर रही थी......
मेरे रूप में उसका इंतज़ार ख़त्म हुआ.....
पर एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही thi...wo ये की भले hi ास्मोडियस नेगेटिव tha,par शक्ति तोह उसमे भी उस वक़्त मेरे जितनी hi thi...phir वो स्पीयर उसकी क्यों ना हो saki.....aur इस स्पीयर ने मुझे क्यों chuna...aakhir मुझमे और ास्मोडियस में क्या फर्क था....
जैसे hi ये ख्याल मेरे मन में aaya,mere अंदर से मेरे बुक की आवाज़ आयी...
आपमें और ास्मोडियस में सिरग एक HI फर्क है....
मई- वो क्या!!!!!!
??
बुक - नजरिया, ऐटिटूड........
फर्स्ट CHAPTER के लिए इतना HI......
आपका अपना V.J.....